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डॉ. संगीता शुक्ला जीवाजी विश्वविद्यालय की कुलपति नियुक्त
Our Correspondent :26 October 2017

कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्री ओम प्रकाश कोहली ने डॉ. संगीता शुक्ला कुलपति जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर को उनका वर्तमान कुलपति पद का कार्यकाल समाप्त होने के पश्चात कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से चार वर्ष की कालावधि के लिए पुन: जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर का कुलपति नियुक्त किया है।



aaम.प्र. निजी विवि विनियामक आयोग के स्थापना दिवस कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री श्री पवैया


25 October 2017

च्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया ने कहा है कि निजी विश्वविद्यालयों का बहु-आयामी दायित्व होता है। निजी विश्वविद्यालयों को प्रतिस्पर्धा के इस युग में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देना होगा। साथ ही, कुछ गाँव अथवा बस्तियों को गोद लेकर वहाँ रोजगार के अवसर प्रदान करने होंगे। श्री पवैया आज मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के 9वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर 'शिक्षा की गुणवत्ता में मानक संस्थाओं की भूमिका एवं दायित्व'' विषय पर परिचर्चा भी आयोजित की गई। श्री पवैया ने कहा कि कई संस्थानों के बच्चे शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ अन्य रचनात्मक गतिविधियों में शामिल होने से ही उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करते हैं। इससे बच्चों के ललाट पर व्यक्तित्व विकास भी झलकता है और वे आत्म-विश्वास से ओत-प्रोत होते हैं। उन्होंने कहा कि आबादी की दृष्टि से निजी विश्वविद्यालयों की अभी भी आवश्यकता है। मध्यप्रदेश को ऐसे प्रतिष्ठित संस्थानों की जरूरत है, जो अच्छा काम करें। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री बी.आर. नायडू ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता के साथ विस्तार की आवश्यकता है। कार्यशाला के जरिये जो सुझाव प्राप्त होंगे, उसे अमल में लाने का प्रयास किया जाएगा। जागरण लेक सिटी के कुलपति डॉ. अनूप स्वरूप ने कहा कि प्रदेश में 70 प्रतिशत बच्चे निजी विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में पढ़ रहे हैं। मध्यप्रदेश आने वाले समय में एजुकेशनल हब बन सकता है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार पाण्डेय ने आयोग की गतिविधियों के बारे में बताया। इस मौके पर आयोग के सदस्य डॉ. स्वराज पुरी भी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन सुश्री अंजलि दुबे और श्री संदीप दुबे ने किया। कार्यक्रम की शुरूआत में माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर सरस्वती वंदना और वंदे-मातरम् का गायन हुआ। पुष्प-गुच्छ और शॉल-श्रीफल से अतिथियों का सम्मान किया गया। अंत में स्मृति-चिन्ह भी दिए गये।



जम्मू-कश्मीर की वास्तविक तस्वीर सामने लाने की आवश्यकता
Our Correspondent :26 October 2017

भोपाल, 26 अक्टूबर। जम्मू-कश्मीर के संबंध में जब विचार किया जाता है तब आतंकवाद, अलगाववाद, उपद्रव से घिरे राज्य की तस्वीर सामने आती है। जबकि यह जम्मू-कश्मीर की वास्तविक तस्वीर नहीं है। पिछले 6-7 दशक में भारत के तथाकथित बुद्धिजीवियों ने जम्मू-कश्मीर के संबंध में अनेक भ्रम उत्पन्न किए हैं। उन भ्रमों के कारण ही जम्मू-कश्मीर के संबंध में ठीक जानकारी लोगों को नहीं है। समय की आवश्यकता है कि भ्रमों को हटा कर जम्मू-कश्मीर की वास्तविक तस्वीर को सामने लेकर आया जाए। यह विचार बाल संरक्षण आयोग, मध्यप्रदेश के अध्यक्ष डॉ. राघवेन्द्र शर्मा ने व्यक्त किए। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय और जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में 26 अक्टूबर को 'जम्मू-कश्मीर विलय दिवस' के अवसर पर आयोजित विशेष व्याख्यान में डॉ. शर्मा मुख्य वक्ता थे। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर ज्ञान की भूमि रही है। जम्मू-कश्मीर राज्य शैव दर्शन का केंद्र था। ज्ञान की पूर्णता के लिए जम्मू-कश्मीर जाना आवश्यक होता था। आक्रांताओं ने भारत पर शासन करने के लिए ज्ञान के प्रवाह को अवरुद्ध करना आवश्यक समझा और इसके लिए जम्मू-कश्मीर को अपना निशाना बनाया। उन्होंने बताया कि दुनिया में अपना प्रभुत्व कायम करने के लिए चीन की नजर जम्मू-कश्मीर के ही हिस्से गिलगित-बाल्टिस्तान पर है। यह हिस्सा राजनीतिक, सामरिक और व्यापारिक महत्त्व का है। इसलिए हम कह सकते हैं कि भारत के लिए अपनी इस भूमि का बहुत महत्त्व है। भारत को दुनिया का सिरमौर बनाने में देश के मुकुट जम्मू-कश्मीर का बड़ा योगदान होगा। डॉ. शर्मा ने बताया कि आज देश में धारा-370 पर बात करना राजनीति समझा जाता है। यह कैसी विडम्बना है कि संविधान के एक कानून पर बात करना राजनीतिक मामला हो गया है। तथाकथित बुद्धिजीवियों और राजनीतिक दलों ने यह भ्रम उत्पन्न किया है। जम्मू-कश्मीर के संबंध में फैले इस प्रकार के भ्रम दूर करने के लिए धारा-370 एवं अनुच्छेद-35 ए की जानकारी समाज में पहुँचाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा ने जम्मू-कश्मीर के विलय की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महाराजा हरि सिंह ने उसी विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर जम्मू-कश्मीर का विलय भारत में किया, जिस प्रपत्र पर बाकी के राज्यों ने हस्ताक्षर किए थे। इसलिए जम्मू-कश्मीर के विलय और शेष राज्यों के विलय की प्रक्रिया में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने बताया कि अंग्रेज भारत को आजाद करके नहीं, अपितु 550 से अधिक रियासतों में बाँट कर गए थे। सरदार पटेल ने इस देश को एक किया था, जिसमें उनके सहयोगी वीपी मेनन की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम का संचालन जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र के डॉ. विश्वास चौहान ने किया और विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. संजय द्विवेदी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी एवं विद्यार्थियों के साथ नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


एम.सी.यू. के विद्यार्थियों का दल इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल -2017 में भाग लेगा Our Correspondent :10 October 2017

भोपाल, अक्टूबर 10| माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का दल चेन्नई में 13 से 16 अक्टूबर को आयोजित इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल-2017 में भाग लेगा| इस दल में विश्वविद्यालय के संचार शोध विभाग के एम. फिल. के विद्यार्थी आकांशा माहेश्वरी, स्वेता रानी, दीक्षिता अरोरा, व्योमकेश पाण्डेय, ललितांक जैन और साक्षी द्विवेदी शामिल हैं, जो फेस्टिवल के दौरान मास मीडिया पर होने वाली राउंड टेबल मीट में भाग लेंगे| यह मीट दो दिनों तक चलेगी, जिसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेट्रीज, मीडिया उद्योग और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से जुड़े विशेषज्ञ भाग लेंगे| यह मीट विज्ञान संचार फोरम पर केन्द्रित रहेगी, जिसमें विज्ञान की उपलब्धियों, नीतियों और योजनाओं के प्रचार प्रसार और उनके बारे में जन जागरूकता बढ़ाने के तौर-तरीकों पर भी विमर्श होगा| विज्ञान भारती, तमिलनाडु राज्य सरकार, केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई द्वारा यह फेस्टिवल आयोजित किया जा रहा है|


मीठीबाई कॉलेज के 'क्षितिज' टीम द्वारा ग्रीन एंड क्लीन इंडिया के तहत मैराथन
Our Correspondent :2 October 2017

मुंबई। मीठीबाई कॉलेज के वार्षिक फेस्टिवल 'क्षितिज' का भव्य और विशाल आयोजन एसवीकेएम के तहत ७ दिसम्बर से १० दिसम्बर २०१७ को मीठीबाई कॉलेज,विलेपार्ले (वेस्ट), मुंबई में किया गया है। यह फेस्टिवल का ११ वां वर्ष है।जिसके तहत विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक और सामाजिक कार्य 'क्षितिज' टीम द्वारा किया जाता है।जिसके तहत हाल में कैंसर के खिलाफ बहादुर लड़ाई लड़ने वालों की आशा के लिए प्रेरित करने के प्रयास में मीठीबाई कॉलेज ने लाइफ विंस फाउंडेशन के साथ में मिलकर टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल,परेल में कैंसर के रोगियों के लिए एक इंटरैक्टिव प्रोग्राम का आयोजन किया था,जोकि काफी सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। अब 'क्षितिज' टीम द्वारा ग्रीन एंड क्लीन इंडिया के तहत एक ७ किलोमीटर के मैराथन का आयोजन जुहू में १० दिसंबर २०१७ को किया गया है।जिसका रजिस्ट्रेशन ७ अक्टूबर से शुरू होगा।जिसकी अधिक जानकारी के लिए ९७७३९९७१५७ पर सम्पर्क किया जा सकता है। मिथिबाई के प्रिंसिपल डॉ.राजपाल श्रीपाद हंडे ने कहा,"एक सामाजिक कार्यों की भावना पैदा करना और टीम की भावना को बढ़ावा देना वास्तव में मीठीबाई के फेस्टिवल 'क्षितिज' का मुख्य मकसद है। मैं सभी विद्यार्थिओं को भविष्य की योजनाओं के लिए उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।"


विद्यार्थियों टीमें द्वारा बनाई गई गो कार्ट्स हिस्सा ले रही हैं। इन टीमों में भोपाल की 4 तथा मध्यप्रदेश की 16 टीमें भाग ले रही हैं।
Our Correspondent :2 October 2017

भोपाल। राधारमण ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूट्स परिसर में चल रही नेशनल गो कार्ट चैम्पियनशिप का ग्राण्ड फिनाले मंगलवार को आरपीएम रेसिंग ट्रेक पर होगा जहां देशभर के युवा इंजीनियरिंग विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई गो कार्ट्स रेस में प्रथम आने के लिए अपना दमखम दिखाएंगी। इस चैम्पियनशिप में देश के विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों की 150 टीमें हिस्सा ले रही हैं। इन टीमों में भोपाल की 4 तथा मध्यप्रदेश की 16 टीमें भाग ले रही हैं। प्रतियोगिता में आज डिजाइन इवाल्युशन, बिजनेस प्लान, ब्रेक टेस्ट, एक्सीलरेशन टेस्ट, स्किड टेस्ट, ऑटोक्रॉस और ट्रेक्शन टेस्ट जैसे महत्वपूर्ण राउण्ड पूरे किये गए। इन राउण्ड्स को सफलतापूर्वक पार करने वाली सभी गो कार्ट मंगलवार सुबह आरपीएम रेसिंग ट्रेक पर चैम्पियनशिप के लिए दौड़ लगाएंगी। इस चैम्पियनशिप में विभिन्न कैटेगरी के 10 विजेताओं का चयन किया जाएगा जिन्हें शाम 7 बजे राधारमण परिसर में आयोजित किये जा रहे पुरस्कार वितरण समारोह में पुरस्कृत किया जायेगा। राधारमण समूह के चेयरमेन आर आर सक्सेना ने अंतिम रूप से चयनित टीमों को फिनाले में अपना अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करने तथा प्रतियोगिता के दौरान सुरक्षा नियमों के पालन की सलाह दी है।


दो दिवसीय कार्यशाला ‘सक्षम’ का आयोजन
Our Correspondent :28 September 2017

भोपाल, सितम्बर 28। अध्यापकों को नई टेक्नोलॉजी से अवगत कराने के उद्देश्य से माइक्रोसॉफ्ट कारपोरेशन द्वारा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में दो दिवसीय कार्यशाला 'सक्षम' आयोजित की गई। नवीन मीडिया विभाग ने इस कार्यशाला को आयोजित किया। देश में उच्च शिक्षा संस्थानों के अन्दर और परस्पर जुड़ाव और ज्ञान नेटवर्क के निर्माण के संयुक्त उद्देश्य के साथ मानव संसाधन मंत्रालय के शिक्षा के राष्ट्रीय मिशन को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से माइक्रोसॉफ्ट ने 'सक्षम' कार्यक्रम की शुरुआत की है। माइक्रोसॉफ्ट के क्षेत्रीय प्रबंधक किशोर गर्ग और विभागाध्यक्ष डॉ. पी. शशिकला ने कार्यशाला का शुभारम्भ किया। श्री गर्ग ने संवादात्मक शिक्षण और सीखने की विधियों, माइक्रोसॉफ्ट अज्युर, ऑफिस 365, वर्ड-2016, पॉवर पॉइंट 2016, यामेर और वेब एप्प्स के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत कराया। सभी प्रतिभागियों ने कंप्यूटर पर सभी सॉफ्टवेर पर प्रायोगिक रूप से काम भी किया। कार्यशाला के दूसरे दिन थीसिस में नक़ल को जांचने वाले सॉफ्टवेयर के बारे में जानकारी दी गई। पॉवर पॉइंट, ऑफिस मिक्स, क्लाउड पर आधारित कंप्यूटर टूल्स 'स्वे' और एक्सेल-2016 पर वीडियो ट्युटोरियल के माध्यम से जानकारी भी दी गई। माइक्रोसॉफ्ट प्रोग्राम मैनेजर (सक्षम) अतानु सुर ने 'इमेजिन अकादमी' के बारे में जानकारी दी, जिसके माध्यम से शिक्षण और सीखने को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। कार्यशाला में 30 प्रतिभागियों ने भाग किया। उन्होंने सूचना तकनीक एवं सॉफ्ट स्किल्स ट्रेनिंग सत्र में थ्योरी और प्रैक्टिकल किये। इसके साथ ही सभी प्रतिभागियों ने समूह चर्चा में भाग लिया। प्रतिभागियों ने पढ़ाने और सीखने में तकनीक के उपयोग पर महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा ने समापन वक्तव्य दिया। कुलसचिव प्रो. संजय द्विवेदी, निदेशक, सम्बद्ध अध्ययन संस्थान दीपक शर्मा, डीन अकादमिक डॉ. पवित्र श्रीवास्तव, प्रो. अविनाश वाजपेयी, डॉ मोनिका वर्मा, डॉ. राजेश पाठक समापन समारोह में उपस्थित थे। कार्यशाला की नोडल ऑफिसर प्रो. पी. शशिकला ने कार्यशाला की रिपोर्ट प्रस्तुत की और आभार व्यक्त किया।


शोध के कारण ही विकासवादी युग आया: श्री शर्मा
Our Correspondent :27 September 2017

भोपाल, 27 सितम्बर| शोध का हमारे जीवन में व्यापक प्रभाव होता है| पूर्व में हुए शोध के कारण ही समाज में परिवर्तन होता है| वास्तव में शोध के कारण ही विकासवादी युग आया है| यह बात माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की सम्बद्ध अध्ययन संस्थान के निदेशक श्री दीपक शर्मा ने संचार शोध विभाग द्वारा आयोजित तीन-दिवसीय रिसर्च सिम्पोजियम-2017 के समापन सत्र में विद्यार्थियों और शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कही| उन्होंने कहा कि शोध के लिए 'एटीट्युट' होना आवश्यक है| मात्र प्रक्रिया जानने से ही रिसर्च नहीं होता| शोधार्थी समाज में उत्प्रेरक का काम करता है| वह समाज में परिवर्तन लाता है और दूसरों को भी प्रोत्साहित करता है| इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि एक शोधार्थी के मन में हमेशा जिज्ञासा होना चाहिए| बच्चे प्राकृतिक रूप से शोधार्थी होते है, वे बार-बार सवाल पूछते है| लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते है, हमारी जिज्ञासा का स्तर कम होता जाता है| समापन सत्र का संचालन और आभार प्रदर्शन संचार शोध विभाग की अध्यक्ष एवम रिसर्च सिम्पोजियम की संयोजक डॉ. मोनिका वर्मा ने किया| अंत में विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किये गए|
तकनीक सत्रों में हुए विशेष व्याख्यान :
इसके पूर्व सत्र में एनआईटीटीटीआर,भोपाल के प्रो. प्रभाकर सिंह ने मीडिया में प्रायोगिक रिसर्च पर व्याख्यान दिया| उन्होंने बताया कि प्रायोगिक शोध में निदर्शन, ट्रीटमेंट और रिसर्च डिजाईन का बहुत ज्यादा महत्व है| मीडिया में प्रायोगिक शोध बहुत कम होती है| उन्होंने प्रायोगिक शोध के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तृत रूप से बताया| द्वितीय सत्र में सामाजिक विकास परिषद् के पूर्व शोध निर्देशक डॉ. बी. एस. नागी ने शोध में सांख्यिकीय उपकरणों के प्रयोग और उनसे प्राप्त परिणाम का विश्लेषण में उपयोग पर व्याख्यान दिया| रिसर्च सिम्पोजियम में संचार शोध विभाग, विज्ञापन एवम जनसंपर्क और पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों ने भाग लिया| तीन दिनों के दौरान जनजातीय शोध संस्कृति, सरकार की योजनाओं के निर्माण और मूल्यांकन में शोध का उपयोग और महत्व, और अन्य विषयों पर विद्यार्थियों ने जानकारी प्राप्त की|


शोधार्थी को सूचना खोजी होना चाहिए : डॉ. नागी
Our Correspondent :27 September 2017

भोपाल २६ सितम्बर| शोधार्थी को शोध के दौरान स्थानीय परिवेश, भाषा का ध्यान रखना चाहिये, ताकि वह उत्तरदाता से सही और सटीक जानकारी प्राप्त कर सके| उसे सूचना खोजी होना चाहिए| शोध की प्रश्नावली को स्थानीय भाषा में तैयार कर उसका पूर्व परीक्षण अवश्य करना चाहिए| यह बात सामाजिक विकास परिषद् के पूर्व शोध निदेशक डॉ. बी. एस. नागी ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के संचार शोध विभाग में चल रहे तीन-दिवसीय रिसर्च सिम्पोजियम-2017 के दूसरे दिन विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कही| डॉ नागी ने रिसर्च के लिए उपकरण निर्माण, कोडिंग और कोड बुक में बरती जाने वाली सावधानियां को विस्तृत रूप से बताया| इसके पूर्व द्वितीय सत्र में राज्य योजना आयोग के डिप्टी टीम लीडर डॉ. योगेश माहौर ने सरकार की योजनायों के निर्माण में शोध के महत्व को रेखांकित किया| उन्होंने बताया कि पिछले ३ वर्षो के दौरान किस तरह से सरकार की नीतियों और योजनाएँ बनाने में शोध किया जा रहा है| योजनायों के मूल्यांकन में भी शोध बहुत मददगार होता है| इसके माध्यम से योजनायों को और अधिक जन्नोमुखी और लाभकारी बनाया जा सकता है| इस सत्र की अध्यक्षता पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष डॉ. राखी तिवारी ने की| मंच पर संचार शोध विभाग की अध्यक्ष डॉ. मोनिका वर्मा भी उपस्थित थी| सत्रों का संचालन स्वेता रानी और क्षितिज जायसवाल ने किया|


राधारमण में होगी नेशनल गो कार्ट चैम्पियनशिप
26 September 2017

भोपाल। राधारमण ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूट्स परिसर में देश के 150 इंजीनियरिंग कॉलेजों के ऑटोमोबाइल इंजीनियरों द्वारा विकसित की गई गो कार्ट्स का जमावड़ा लगेगा। ये गो कार्ट्स राधारमण समूह की रातीबड़ परिसर में 29 सितम्बर से आयोजित होने जा रही चौथी नेशनल गो कार्ट चैम्पियनशिप में अपना दमखम दिखाएंगी। स्पीड, रोमांच और युवा इंजीनियरों के इनोवेशन से भरी इस पांच दिवसीय रेस का आयोजन वर्चूलिस मोटरस्पोर्ट्स, इन्दौर द्वारा किया जा रहा है। रेस में भाग ले रही गो कार्ट्स को टेक्नीकल इन्स्पेक्शन, डिजाइन इवाल्यूशन, डायनामिक टेस्ट, बिजनेस प्लान तथा एंड्योरेंस टेस्ट आदि से गुजारा जाएगा। विजेताओं को आयोजक संस्था द्वारा 20 लाख रूपए तक के नकद पुरस्कार प्रदान किये जाएंगे। राधारमण समूह के चेयरमेन आर आर सक्सेना ने कहा कि गो कार्ट चैम्पियनशिप ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की शिक्षा ले रहे विद्यार्थियों को उनकी कल्पनाशीलता, तकनीकी ज्ञान तथा कुछ हटकर करने की इच्छा को आजमाने का अवसर प्रदान करेगी।


भ्रम, प्रमाद और लोभ से दूर रहें : स्वामी रामनरेशाचार्य
Our Correspondent :21 September 2017

भोपाल, 21 सितंबर। 'मीडिया और उसका धर्म' विषय पर जगद्गुरु रामानंदाचार्य पद प्रतिष्ठित स्वामी श्री रामनरेशाचार्य ने अपने व्याख्यान में कहा कि वेदों में चार प्रकार के दोष बताए गए हैं, भ्रम (विपरीत ज्ञान), प्रमाद (आलस्य), इंद्रियों में दोष और लोभ। पत्रकारिता अपना धर्म अच्छे से तभी निभा सकती है, जब पत्रकार इन चार दोषों से दूर रहें। पत्रकार और नेताओं को सभी विषयों के साथ दर्शन भी पढ़ाया जाना चाहिए। इस अवसर पर डॉ. देवेन्द्र दीपक की पुस्तक 'गौ-उवाच' का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित किया गया। स्वामी श्री रामनेशाचार्य ने कहा कि गाय पशु मात्र नहीं है, वह भारतीय संस्कृति की धुरी है। गाय को लेकर अनेक लौकिक व्याख्यान दिए जा रहे हैं, उसके आर्थिक पक्ष को उजागर किया जा रहा है, लेकिन इससे गौ-पालन नहीं होगा। उन्होंने गौ-मांस खाने का विरोध करते हुए कहा कि गौ-मांस खाने से राक्षसी प्रवृत्ति बढ़ती है। हजारों वर्षों की भारतीय परंपरा गाय के महत्त्व की गवाह है। समाज में पहले लोगों ने गाय छोड़ी और उसके बाद माता-पिता को वृद्धाश्रम में भेजा जा रहा है। इसके बावजूद भी आज माता-पिता और गाय का सम्मान भारत में है, उतना सम्मान पूरी दुनिया में नहीं है। यह पूरी तरह खत्म न हो, इसके लिए हमें सचेत होना होगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा ने कहा कि जहाँ दुनिया में समाचार-पत्र सिकुड़ रहे हैं, वहीं भारत में समाचार-पत्रों की संख्या बढ़ रही है। मीडिया में बदलाव का दौर है। उसकी दिशा और दशा पर चिंतन आवश्यक है। इस अवसर पर पुस्तक के लेखक एवं साहित्य अकादमी की निराला सृजनपीठ के अध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र दीपक ने कहा कि कवि गाय और समाज के बीच खड़ा है। उसका प्रयास गाय को लेकर समाज की सरस्वती को जगाना है। यह कविताएं आज के जन और तंत्र दोनों से सीधा संवाद करती हैं। गौ-उवाच में गाय पर केंद्रित तीस कविताएं शामिल हैं। डॉ. दीपक की पुस्तक का प्रकाशन इंद्रा पब्लिशिंग ने किया है। इस अवसर पर पुस्तक की समीक्षा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रेम भारती, डॉ. कृष्ण गोपाल मिश्र, लक्ष्मीनारायण पयोधि, डॉ. विनय राजाराम, डॉ. मयंक चतुर्वेदी, डॉ. उदय प्रताप और घनश्याम मैथिल ने प्रस्तुत की। प्रकाशक मनीष गुप्ता ने स्वागत भाषण दिया। श्रीमती ऊषा मेहता ने स्वामीजी को स्मृति चिह्न भेंट किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. साधना बलवटे ने किया।


राधारमण ग्रुप में देश जानी मानी संतूर वादिका श्रुति अधिकारी के संतूर ने किया मंत्रमुग्ध
Our Correspondent :18 September 2017

भोपाल। संतूर को साधने के लिए बहुत रियाज, संगीत की दृष्टि, कठिन मेहनत और सबसे बड़ी बात गुरू के आशीर्वाद की जरूरत होती है। यह मेरे गुरू का ही आशीर्वाद है कि मैं इस अत्यंत कठिन माने जाने वाले इस वाद्य को सीख सकी। यह कहना था भोपाल में पली बढ़ीं देश की पहली व प्रख्यात संतूर वादिका श्रुति अधिकारी का। वे आज राधारमण ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूट परिसर के सेमीनार हाल में संतूर वादन हेतु आईं थीं। संगीत और संस्कृति के क्षेत्र में कार्यरत संस्था स्पिक मैके के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कश्मीर के इस अनूठे म्यूजिक इन्स्ट्रूमेंट - संतूर - के जरिए विभिन्न रागों पर आधारित अपनी शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों से श्रोताओं का दिल जीत लिया। उनकी प्रस्तुतियों में उनकी कठिन सुर साधना से निखर के आईं स्वर लहरियों को श्रोताओं की प्रशंसा के रूप में भरपूर तालियां मिलीं। कार्यक्रम में समूह के सभी महाविद्यालयों के विद्यार्थी, फैकल्टी मेम्बर्स तथा डायरेक्टर मौजूद थे इस अवसर पर राधारमण ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूट्स के चेयरमेन आर आर सक्सेना ने कहा कि संगीत मनुष्य के दिलो दिमाग को बदलने की ताकत रखता है। हमारी सृष्टि की शुरूआत भी ओम् के नाद के साथ हुई थी। अच्छा संगीत मन को शांत और एकाग्रचित होने में मदद करता है जिसका उपयोग विद्यार्थी अपनी पढ़ाई और व्यक्तित्व को बेहतर बनाने में कर सकते हैं। इस अवसर पर श्री सक्सेना ने सुश्री श्रुति को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।


जब तक मजबूरी न हो, देवनागरी में ही लिखें भाषा संस्कृति की वाहक : डॉ. नरेन्द्र कोहली
Our Correspondent :13 September 2017

भोपाल, 13 सितंबर। प्रख्यात साहित्यकार डॉ. नरेन्द्र कोहली ने कहा कि मातृभाषा हिंदी के प्रति हीनता का भाव होने के कारण हम प्राचीन ज्ञान विरासत से अलग हो गए, भारतीयता से विमुख हो गए। हमें अपनी भाषा को सम्मान देना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को संकल्प दिलाया कि जब तक कोई मजबूरी न हो, तब तक देवनागरी लिपि में ही हिंदी लिखें और अपनी भाषा को विकृत न होने दें। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस प्रसंग पर विशेष व्याख्यान में डॉ. कोहली ने हिंदी भाषा के प्रति भारतीयों के व्यवहार को लेकर चिंता जताई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने की। हिंदी साहित्य के प्रख्यात उपन्यासकार डॉ. कोहली ने कहा कि तुर्क, अरबी और अफगानी हमलावरों ने भारत में सबसे पहले संस्कृत पाठशालाएं बंद कीं और फिर तक्षशिला एवं नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों को जलाकर भोजन पकाया। पुस्तकों के नष्ट होने से हमारा ज्ञान राख में मिल गया। सोच-विचार कर हमारे ज्ञान और भाषा को समाप्त करने के लिए किया गया था। संस्कृत भाषा हमसे छीन ली गई, जिसके कारण संस्कृत में रचा गया ज्ञान-विज्ञान भी हमसे छिन गया। उन्होंने कहा कि संस्कृत में रचा गया साहित्य और ज्ञान हमारे सामने नहीं है। हमें यह तो पढ़ाया जाता है कि शून्य का आविष्कार आर्यभट्ट ने किया, लेकिन हमारे पाठ्यक्रम में आर्यभट्ट के गणित को नहीं पढ़ाया जाता, क्योंकि वह संस्कृत में है।
270 वर्ष में दो प्रतिशत सीख पाए अंग्रेजी :
डॉ. कोहली ने कहा कि अंग्रेजों के 200 वर्ष के शासनकाल और स्वतंत्रता के बाद 70 वर्षों में हमें अंग्रेजी पढ़ाई गई। इसके बावजूद भारत में दो प्रतिशत से अधिक लोग अंग्रेजी नहीं जानते। हमने यह मान लिया है कि भारत में कुछ है ही नहीं या फिर जो कुछ है, वह निम्न कोटि का है। इस मानसिकता के कारण हम अपनी भाषा से ही नहीं, वरन भारतीयता से भी विमुख हो गए। जब कमाल पाशा ने सत्ता संभाली तो उसने सबसे पहले तुर्की भाषा को अनिवार्य किया। माओ त्से तुंग ने चीन में चीनी भाषा को लागू किया और इसी तरह इजरायल ने लगभग समाप्त हो चुकी अपनी भाषा हिब्रू को जीवित किया। उन्होंने कहा कि हम सभी प्रकार के पत्र हिंदी में ही लिखें, इसके लिए सरकारी आदेश की प्रतीक्षा क्यों करें? आज दुनिया में हिंदी भाषा-भाषियों की संख्या करोड़ों में है, लेकिन यह लोग अपनी भाषा में लिखते-पढ़ते नहीं है। जब हम हिंदी में लिखेंगे-पढ़ेंगे नहीं, तब वह समृद्ध कैसे होगी? उन्होंने कहा कि हमें संकल्प करना चाहिए कि अपनी भाषा से प्रेम करेंगे, सम्मान करेंगे और उसे विकृत नहीं होने देंगे। उन्होंने हिंदी के संदर्भ में विद्यार्थियों की जिज्ञासा का समाधान किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रायोगिक तौर पर प्रकाशित समाचार पत्र 'पहल' के हिंदी दिवस विशेषांक का भी विमोचन किया गया।
श्रेष्ठ भाषा का चुनाव करें :
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि यदि हम हिंदी का वैभव लाने का संकल्प लें, तब धीरे-धीरे पत्रकारिता भी बदल जाएगी। हमें शुद्ध हिंदी का प्रयोग करना चाहिए। उसे संवारना और समृद्ध करना चाहिए। नये शब्द गढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनसंचार माध्यमों को समाज का अनुकरण नहीं, बल्कि नेतृत्व करना चाहिए। भाषा और विचार के क्षेत्र में भी जनसंचार माध्यमों को समाज को दिशा देनी चाहिए। हम श्रेष्ठता को चुनते हैं। इसलिए बोलचाल के नाम पर हिंदी को बिगड़े नहीं, बल्कि शुद्ध हिंदी शब्दों का उपयोग करें। दुनिया में सबसे अधिक श्रेष्ठ भाषा संस्कृत हैं और उसके निकट है हिंदी। प्रो. कुठियाला ने कहा कि जनमानस यदि तय कर ले कि हिंदी को बढ़ाना है, तब राजनीति स्वत: उसका अनुकरण करेगी। उन्होंने कहा कि देश हित में अंग्रेजी और अंग्रेजियत से छुटकारा पाना है, उसके लिए हिंदी और हिंदीपन को लाना होगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव दीपक शर्मा, समस्त शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।


सेंट्रल लाइब्रेरी में "हिन्दी उत्सव -2017"
Our Correspondent :13 September 2017

युवाओं में हिन्दी की समझ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शासकीय मौलाना आज़ाद केन्द्रीय पुस्तकालय भोपाल आगामी शुक्रवार और शनिवार को दो दिवसीय हिन्दी उत्सव का आयोजन करने का जा रहा है । इस उत्सव में शहर के सही लोगों के लिए ओपन तीन प्रतियोगिताओं का आयोजन किता जाएगा । इन प्रतियोगिताओं में बाग लेने के लिए कोई भी व्यक्ति लाइब्रेरी आ सकता है ।
कार्यक्रम का विवरण
आयोजन का नाम - हिन्दी उत्सव -2017
दिनांक - 15 एवं 16 सितंबर 2017
स्थान - सेंट्रल लाइब्रेरी भोपाल
तीन ओपन प्रतियोगिताएं
हिन्दी निबंध प्रतियोगिता
दिनांक - 15 सितंबर (शुक्रवार )
समय - सुबह 10 बजे
पुरुसकार - 6000/ - रुपये नगद
भाग लेने के लिए - सुबह 9.30 बजे लाइब्रेरी पहुँचें
हिन्दी क्विज़
दिनांक - 15 सितंबर 2017 (शुक्रवार )
समय - सुबह 11.30 बजे
पुरुस्कार - 6000/- रुपये नगद
भाग लेने के लिए - दो लोगों की टीम बनाकर सुबह 11 बजे तक सेंट्रल लाइब्रेरी पहुँचें
तात्कालिक भाषण
दिनांक - 16 सितंबर 2017 (शनिवार )
समय - सुबह 11 बजे
कितने लोग भाग ले सकते हैं - केवल 20
पुरुस्कार - 6000/- रुपये नगद
भाग लेने के लिए - सुबह 10 बजे लाइब्रेरी पहुँचकर सबसे पहले अपना नाम नोट करा दें
कुल नगद पुरुस्कार - रुपये 18000/-


राजधानी में प्रारंभ होगा मीडिया उद्यमिता केन्द्र
Our Correspondent :11 September 2017

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के अंतर्गत राजधानी में एक मीडिया उद्यमिता केन्द्र की स्थापना की जाएगी। यह केन्द्र नीति आयोग की पहल के अनुरूप कार्य करेगा। मीडिया में उद्यमशीलता के प्रशिक्षण, मीडिया प्रबंधन और एक से अधिक माध्यमों में दक्षता के उद्देश्य से इस केन्द्र को महत्वपूर्ण माना गया है। जनसंपर्क मंत्री और विश्वविद्यालय की प्रबंध उप समिति के अध्यक्ष डॉ. नरोत्तम मिश्र की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में प्रबंध उप समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में केन्द्र की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा करते हुए केन्द्र प्रारंभ करने का अनुमोदन किया गया। बैठक में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला, कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा, संचालक जनसंपर्क श्री अनिल माथुर उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि देश में अपनी तरह के इस प्रथम केन्द्र में मीडिया के वर्तमान परिदृश्य के अनुसार प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। विश्वविद्यालय की विद्या परिषद द्वारा भी बीते माह इस केन्द्र को प्रारंभ करने का अनुमोदन दिया जा चुका है। केन्द्र के लिए विशेषज्ञों और सहयोगियों संस्थाओं के चुने जाने की कार्यवाही शीघ्र की जाएगी। आज की बैठक में सोशल मीडिया के क्षेत्र में गहन शोध की जरूरत को देखते हुए विश्वविद्यालय के अंतर्गत एक शोध केन्द्र स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश की प्रत्येक तहसील में विश्वविद्यालय से सम्बद्ध केन्द्र संचालित किया जाएगा, जो विभिन्न पाठ्यक्रम से विद्यार्थियों को जोड़ेगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने के संबंध में भी निर्णय लिया गया। बैठक में विश्वविद्यालय के रीवा परिसर के निर्माण, नई अध्ययन संस्थाओं को विश्वविद्यालय से प्रदान की गई सम्बद्धता और अनुमोदन से संबंधित चर्चा हुई।


मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना में मेडिकल के लिए 276 और इंजीनियरिंग के लिए 1298 आवेदन
Our Correspondent :7 September 2017

मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना में कुल 24179 आवेदन प्राप्त हुए है। मेडिकल कोर्स के लिए 276, इंजीनियरिंग के लिए 1298, विधि के लिए 45, एसपीए और आईआईएम इंदौर में संचालित पाठ्यक्रमों के लिए 31, पॉलीटेक्निक कोर्स के लिए 125 और प्रदेश में संचालित स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए 22 हजार 404 आवेदन प्राप्त हुए हैं। तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दीपक जोशी ने बताया है कि विभिन्न संस्थाओं द्वारा अभी तक 11608 आवेदनों का सत्यापन किया जा चुका है। इनकी फीस की स्वीकृति की कार्यवाही जारी है। इसी के साथ, 1216 विद्यार्थियों के प्रकरण स्वीकृत किये जा चुके है। योजना में माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा आयोजित 12वीं की परीक्षा में 75 प्रतिशत और सी.बी.एस.ई. और आई.सी.एस.ई. की परीक्षा में 85 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है। विद्यार्थी के पालक की वार्षिक आय 6 लाख रूपये से कम होना अनिवार्य है।


यूजीसी की कमेटी के अध्यक्ष बने प्रो. बृज किशोर कुठियाला
Our Correspondent :27 Aug 2017

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने हाल में गठित एक समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह समिति दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देने के लिए विचार करेगी। प्रो. कुठियाला की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय समिति आईआईएमसी को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देने के प्रस्ताव का अध्ययन करेगी और उसके बाद यूजीसी को अपनी अनुशंसा सौंपेगी। उल्लेखनीय है कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला को अप्रैल, 2017 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक ने अपने 16वें दीक्षांत समारोह में डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया है। कुलपति प्रो. कुठियाला को यूजीसी की समिति का अध्यक्ष नियुक्त किये जाने पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं अधिकारियों ने प्रसन्नता जाहिर की है।


विश्वविद्यालय को राजनीति का अड्डा बना रहे हैं वामपंथी
Our Correspondent :24 Aug 2017

भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की पहचान देश-दुनिया में एक प्रतिष्ठित संस्थान के रूप में है। देश के विभिन्न राज्यों के विद्यार्थी पत्रकारिता एवं संचार की पढ़ाई के लिए यहाँ आते हैं। विश्वविद्यालय को अनेक प्रतिष्ठित पत्रकार, संपादक एवं संचारक दिए हैं। किंतु, कुछ लोग अपनी राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा एवं वैचारिक स्वार्थ पूर्ति के लिए विश्वविद्यालय को बदनाम करने का प्रयास समय-समय पर करते हैं। पिछले दो-तीन दिन से कुछ बाहरी तत्वों ने अपने मीडिया संपर्कों का उपयोग कर विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया है। विश्वविद्यालय के नये परिसर में 'गौशाला' प्रस्तावित है। हम सब विद्यार्थी गौशाला खोलने के निर्णय का स्वागत करते हैं। हम मानते हैं कि गौशाला से हमारी पढ़ाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। जो लोग गौशाला का विरोध कर रहे हैं, उनकी सक्रियता राजनीतिक दलों में है। वामपंथी विचारधारा से पोषित और वामपंथी पार्टियों के कार्यकर्ता इस गैर-जरूरी मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं। कुछ वामपंथी पत्रकार इस मुद्दे पर भ्रामक रिपोर्टिंग कर उसे विवादित बनाने का प्रयास कर रहे हैं। जैसा कि वामपंथियों की नीति-रीति है कि शैक्षणिक संस्थाओं को राजनीति और वैचारिक संघर्ष का अड्डा बना देते हैं। वैसा ही कुछ प्रयास एमसीयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ करने का षड्यंत्र किया जा रहा है। हम सब विद्यार्थी इस बात से आहत हैं कि हमारे विश्वविद्यालय को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। हम नहीं चाहते कि यह विश्वविद्यालय समाज, संस्कृति और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का अड्डा बने। संस्थान की प्रतिष्ठा विद्यार्थियों की प्रतिष्ठा है। विश्वविद्यालय की छवि धूमिल होने से हम सब विद्यार्थियों के भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए हम सब विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला एवं विश्वविद्यालय प्रशासन से माँग की है कि भ्रामक, झूठी और तथ्यहीन बातों के माध्यम से सोशल मीडिया एवं जनसंचार माध्यमों के जरिये विश्वविद्यालय की छवि को ख़राब करने वाले लोगों को कानूनी नोटिस भेजने की कार्रवाई की जाए। गौशाला के समर्थन में विश्वविद्यालय के लगभग 200 विद्यार्थियों ने कुलपति को सौंपे गए ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं। विद्यार्थियों के हित में विश्वविद्यालय के नये परिसर में अत्याधुनिक सुविधा से युक्त 8 विभागीय और एक केंद्रीय स्टूडियो स्थापित हो रहा है। इसी तरह 8 विभागीय पुस्तकालय और एक समृद्ध केंद्रीय पुस्तकालय भी स्थापित किया जा रहा है। विद्यार्थियों के हित में अन्य जरूरी सुविधाएं जैसे- चिकित्सालय, बैंक, पोस्ट ऑफिस, मेडिटेशन एवं योग केंद्र, कैंटीन सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।


राष्ट्रीय-स्तर के संस्थान में प्रवेश के लिये 800 अजा विद्यार्थियों को कोचिंग होगी उपलब्ध
Our Correspondent :24 Aug 2017

प्रदेश में अनुसूचित-जाति के प्रतिभावान विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी, चिकित्सा, विधि महाविद्यालयों में प्रवेश सुनिश्चित करवाने और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की प्रवेश परीक्षा में उनकी सफलता सुनिश्चित करने के लिये कोचिंग उपलब्ध कराने की योजना इस वर्ष से शुरू की जा रही है। इसमें प्रदेश के 4 महानगरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में प्रतिवर्ष 800 विद्यार्थियों को प्रवेश परीक्षाओं की कोचिंग उपलब्ध करवायी जायेगी।
मुख्यमंत्री स्व-रोजगार और आर्थिक कल्याण योजना के जरिये 11 हजार से ज्यादा लाभान्वित अनुसूचित-जाति कल्याण विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना में वर्ष 2016-17 में 7 हजार से अधिक हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। योजना में अधिकतम 10 लाख रुपये का ऋण तथा अधिकतम 2 लाख रुपये की अनुदान राशि का प्रावधान है। इस वित्तीय वर्ष में 7 हजार हितग्राहियों को विभिन्न व्यवसायों की स्थापना के लिये 70 करोड़ की सहायता राशि उपलब्ध करवायी जायेगी। मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना में पिछले वर्ष नवीन उद्यमों की स्थापना के लिये 4106 अनुसूचित-जाति के हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। इसके लिये 5 करोड़ 47 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवायी गयी। इस वर्ष भी 4 हजार हितग्राहियों को 8 करोड़ की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवायी जायेगी। मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन प्रशिक्षण योजना में 5135 अनुसूचित-जाति के युवाओं को प्रशिक्षित कर 3115 युवाओं को विभिन्न उद्योगों में रोजगार और 182 युवाओं को स्व-रोजगार उपलब्ध करवाया गया।
सावित्री बाई फुले एसएचजी योजना में 152 समूह लाभान्वित अनुसूचित-जाति की महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को व्यवसायों में स्थापित करने के लिये सावित्री बाई फुले स्व-सहायता समूह योजना में 152 समूह को लाभान्वित किया गया। इन समूहों के 1028 हितग्राहियों को 3 करोड़ 18 लाख का ऋण और 128 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया। अनुसूचित-जाति वर्ग के विद्यार्थियों को शैक्षणिक एवं आवासीय सुविधा उपलब्ध करवाने के लिये 1945 छात्रावास संचालित किये जा रहे हैं। इसके जरिये 97 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा का लाभ प्राप्त हो रहा है।
छात्रावास भवनों की नई डिजाइन निर्धारित छात्रावास भवनों की नई डिजाइन निर्धारित की गयी है। अब छात्रावास के हर कमरे में 8 से 10 विद्यार्थियों के स्थान पर 2 से 3 विद्यार्थियों को रखा जायेगा। प्रत्येक छात्रावास में वाटर फिल्टर, टी.व्ही., कम्प्यूटर, इंटरनेट सुविधा, डायनिंग टेबल, स्टडी टेबल, फिक्स फर्नीचर की सुविधा उपलब्ध करवायी जायेगी। इस वर्ष ऐसे 55 नये छात्रावास भवनों का निर्माण किया जायेगा। संभागीय मुख्यालयों में संचालित ज्ञानोदय विद्यालयों में 360 सीट के छात्रावास भवन, 21 अतिरिक्त क्लास-रूम और 7 स्पोर्टस कॉम्पलेक्स का निर्माण किया जायेगा। विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति का लाभ प्राप्त करते हुए वर्तमान में 15 अनुसूचित-जाति के विद्यार्थी विदेशों में अध्ययनरत हैं।


विद्यार्थियों ने बनाईं पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं
Our Correspondent :21 Aug 2017

भोपाल, 20 अगस्त। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नवीन मीडिया विभाग की ओर से 'मिट्टी के गणेश निर्माण कार्यशाला' का आयोजन किया गया। कार्यशाला में पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली सामाजिक संस्था 'नर्मदा समग्र' से जुड़े नवीन बोडख़े ने विद्यार्थियों को मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाने का प्रशिक्षण दिया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि पीओपी से बनने वाली गणेश प्रतिमाएं पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती हैं। पर्यावरण बचाने के लिए गणेश उत्सव के दौरान मिट्टी की प्रतिमाओं का पूजन करना चाहिए। मिट्टी से बनी प्रतिमाएं ईको-फ्रेंडली (पर्यावरण-अनुकूल) होती हैं। मिट्टी से मूर्ति बनाना बहुत आसान है। प्रशिक्षण के बाद हर कोई अपने घर पर ही प्रतिमा बना सकता है। नवीन मीडिया विभाग के विद्यार्थियों ने कार्यशाला में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और भगवान गणेश की सुंदर प्रतिमाओं का निर्माण किया। इस अवसर पर प्रशिक्षक नवीन बोडख़े ने कहा कि प्रतिमाओं के निर्माण में उपयोग किए जाने वाले रंग एवं अन्य वस्तुएं भी पर्यावरण के अनुकूल होनी चाहिए। कार्यशाला का उद्घाटन नवीन मीडिया विभाग की अध्यक्ष डॉ. पी. शशिकला ने किया।
प्रतिमाओं को सजाएंगे आज : कार्यशाला में जिन विद्यार्थियों ने मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं बनाई हैं, वे सोमवार को उनको रंगों से सजाएंगे। प्रतिमाओं पर किया जाने वाला रंग भी पर्यावरण के अनुकूल होगा। इसके बाद कलात्मक एवं मोहक गणेश प्रतिमाओं के विक्रय एवं प्रदर्शन के लिए विद्यार्थी स्टॉल भी लगाएंगे।


पढ़ाई के खर्च की चिंता हुई अब दूर : योजना में चयनित विद्यार्थी
Our Correspondent :20 Aug 2017

मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के प्रमाण-पत्र वितरण समारोह में विभिन्न जिलों से आये विद्यार्थियों ने कहा कि 'हमारी पढ़ाई के खर्च की चिंता दूर हो गयी है। हमारे माता-पिता को अब पढ़ाई के लिये जरूरी पैसों की व्यवस्था के लिये भटकना नहीं पड़ेगा।' सोचा भी नहीं था कि बिना पैसों के बनेंगे डॉक्टर जिला खरगोन के श्री पवन मंडलोई का प्रवेश नीट के माध्यम से श्री अरविंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस इंदौर में हुआ है। इनके पिताजी का निधन जब वे कक्षा दस में थे तभी हो गया था। उन्होंने बताया कि सपने में भी नहीं सोचा था कि इस हालत में वे डॉक्टर बन पायेंगे। सरकार ने हमारी फीस भरने की जिम्मेदारी लेकर हम जैसे अनेक मध्यमवर्गीय एवं गरीब परिवार से आने वाले बच्चों पर बहुत बड़ा उपकार किया है। इसे जिंदगीभर याद रखेंगे। भविष्य हुआ सुरक्षित जिला भोपाल की कुमारी शुभांगी बागरे ने बताया कि हमारे पापा श्री राधेश्याम बागरे की छोटी सी दुकान है। मुख्यमंत्री ने यह योजना लागू कर हमारी और हमारे पापा की चिंता दूर कर दी है। अब हमें भविष्य की चिंता नहीं है। हम बेहतर शिक्षा प्राप्त कर अपना भविष्य सँवार सकेंगे। अब इसमें हमारी आर्थिक स्थिति बाधा नहीं बनेगी। कुमारी बागरे ने स्कूल ऑफ प्लानिंग एण्ड आर्किटेक्चर, भोपाल में प्रवेश लिया है। इसकी सालाना फीस एक लाख पचास हजार रूपये है। यह फीस अब पूरे पाँच साल सरकार देगी। इतना तो कोई मामा नहीं करता जिला इंदौर की कुमारी अनुज्ञा मुकाती ने भावुक होते हुए कहा कि इतना तो अपने भांजों के लिये मामा नहीं करते हैं, जितना कि मुँहबोले मामा मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किया है। मामा की कथनी और करनी में अंतर नहीं है। कुमारी मुकाती का प्रवेश क्लेट के माध्यम से एनएलआईयू, भोपाल में हुआ है। इनके पापा पत्रकार हैं। अब गरीब बच्चा भी ले सकेगा उच्च शिक्षा जिला राजगढ़ के श्री दीपक कुमार ने कहा कि अब गरीबी शिक्षा में आड़े नहीं आयेगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने हम गरीबों की पीड़ा को समझा और यह योजना लागू कर हमें ऐसी सौगात दी है कि अब हम उच्च शिक्षा से वंचित नहीं रहेंगे। कुछ इसी तरह के विचार आईआईटी इंदौर में प्रवेश ले चुके सिवनी जिले के छात्र श्री श्रेयांस ठाकुर, ग्वालियर के श्री शांतनु शर्मा, जबलपुर के श्री केशव राठौर और इंदौर के श्री जुबिन नागपाल ने भी व्यक्त किये। मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के प्रमाण-पत्र वितरण समारोह में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने एमबीबीएस के लिए चयनित रीवा की कुमारी जसमिन पटेल, इन्दौर के श्री स्वप्निल कुन्हारे, इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश लेने वाली इन्दौर की कुमारी आस्था डोंगरे, बैतूल की कुमारी किरण जपाटे, आईआईएम इंदौर में प्रवेश लेने वाली बुरहानपुर की कुमारी मानसी संजय तरकस और उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने वाले भोपाल के श्री दीपक कुमार, बैतूल की कुमारी मोनिका सोनी और भोपाल की कुमारी आकृति मेहरा को भी प्रमाण-पत्र प्रदान किये।


एक योजना ने बदला हजारों का जीवन
Our Correspondent :20 Aug 2017

प्रदेश के गरीब प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा का सपना मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की मेधावी विद्यार्थी योजना ने साकार कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना से देश-प्रदेश के शिक्षण संस्थाओं में 32,185 छात्र-छात्राओं को प्रवेश मिल गया है। अब वे धन के अभाव की चिंता से मुक्त होकर मेहनत से उच्च शिक्षा के अपने सपनों को पूरा कर सकेंगे। योजना में मध्यप्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों द्वारा देश के कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों जैसे आई.आई.टी. मुम्बई, दिल्ली, कानपुर, इन्दौर, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी और दिल्ली विश्वविद्यालय सहित देश के 18 आई.आई.टी., 14 एन.आई.टी., 10 राष्ट्रीय विधि संस्थान (नेशनल लॉ इन्स्टीट्यूट), 14 आई.आई.टी. संस्थान एवं 14 अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में 250 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों द्वारा प्रवेश लेकर इस योजना का लाभ लिया जा रहा है। उल्लेखनीय है विगत वर्षों में उच्च शिक्षा के लिये पात्र विद्यार्थियों के उत्तीर्ण होने का औसत प्रतिशत 46 रहा है। इनमें से 27 प्रतिशत ड्राप आउट हो जाते हैं। इनमें अधिकांश विद्यार्थी धनाभाव के कारण उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में प्रवेश नहीं ले पाते थे। मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रदेश के सभी मेधावी विद्यार्थियों को उनकी विशेष योग्यता और प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिये वर्ष 2017 से मुख्यमंत्री मेधावी योजना प्रारंभ की गयी है। यह योजना मध्यप्रदेश के मूल निवासी मेधावी विद्यार्थियों के लिये है, जिनके पालकों की वार्षिक आय 6 लाख रूपये तक है। उन्होंने 12वीं की माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षा में 75 प्रतिशत अथवा सी.बी.एस.सी./आई.सी.एस.ई की परीक्षा में 85 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किये हैं। योजना सभी इंजीनियरिंग, मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेदिक, विधि एवं अन्य समस्त स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले मेधावी विद्यार्थियों के लिये लागू की गयी है, जिन्होंने मध्यप्रदेश एवं भारत सरकार के उच्च संस्थानों में प्रवेश लिया है। योजना के प्रथम चरण में हमारे प्रदेश के 150 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों ने प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कालेजों में प्रवेश लिया है। इसी तरह प्रदेश के इंजीनियरिंग कालेजों के 762 विद्यार्थी, पोलिटेक्निक महाविद्यालयों के 83 विद्यार्थी एवं उच्च शिक्षा के महाविद्यालयों के 20 हजार से अधिक विद्यार्थी इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट में 20 से अधिक विद्यार्थियों ने प्रवेश ले लिया है। आई.आई.एम. इन्दौर एवं स्कूल ऑफ प्लानिंग एवं आर्किटेक्चर जैसे राष्ट्रीय संस्थानों में 17 से अधिक विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है।


मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना प्रमाण-पत्र वितरण
Our Correspondent :20 Aug 2017

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह ने युवाओं का आव्हान किया है कि प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ और भारत को विश्व गुरु बनाने के लिये आगे आयें। समाज सेवा के लिए संकल्पित हो। सरकार युवाओं की प्रतिभा को कुंठित नहीं होने देगी, उनके सपनों को साकार करने में हरसंभव सहयोग करेगी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद श्री अमित शाह ने कहा है कि नये भारत का निर्माण युवाओं की जिम्मेदारी है। युवाओं को अवसर देने का कार्य सरकार पूरी जवाबदारी से कर रही है। वे आज यहाँ मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के लाभान्वितों को प्रमाण पत्र वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। विद्यार्थी कल्याण कोष बनेगा कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रतिभाओं को पंख देने का संकल्प आज पूरा हो रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों में प्रतिभा, क्षमता और योग्यता होने बावजूद आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वे उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर पाते थे। इन बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिये मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना शुरू की गई है। इसका लाभ लेकर बच्चे अनंत आकाश में उड़ान भरें और अपने परिवार, प्रदेश व देश का नाम रोशन करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक स्थिति से कमजोर विद्यार्थियों की मदद के लिये विद्यार्थी कल्याण कोष बनाया जायेगा। इस कोष में मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना का लाभ लेने वाले जो विद्यार्थी रोजगार से लग जाते हैं, वे मदद करेंगे। इसी तरह जिनका मेडिकल कॉलेज में प्रवेश हो जाता है वे पढ़ाई पूरी करने के बाद तीन वर्ष तक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवायें देंगे। इनके साथ ही इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर ईमानदारी से कार्य करने का संकल्प भी मुख्यमंत्री ने दिलवाया। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का मान, सम्मान और स्वाभिमान पूरी दुनिया में बढ़ा है। उनका सम्मान सभी भारतीयों का सम्मान है। उन्होंने पॉलिसी पैरालिसिस की स्थिति खत्म की। उन्होंने युवाओं की बेहतरी के लिये अनेक कदम उठाये हैं। इससे भारत गौरवशाली बन रहा है। उन्होंने कहा कि श्री मोदी के नेतृत्व में भारत भौतिकता की अग्नि में दग्ध विश्व को शाश्वत शांति के पथ का दिग्दर्शन करवाने में विश्व गुरु की भूमिका में आ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिये युवाओं के जीवन को बेहतर बनाना है। इसके लिये मध्यप्रदेश सरकार ने बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें, साईकिल एवं गणवेश उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। साथ ही कमजोर वर्गों के साथ-साथ सामान्य वर्ग के निर्धन विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्ति मुहैया करवायी जा रही है। छात्राओं को गाँव की बेटी एवं प्रतिभा किरण योजना का लाभ तथा बारहवीं में 85 प्रतिशत अंक लाने वाले विद्यार्थियों को लेपटॉप और कालेज में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को स्मार्ट फोन उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि केवल सरकारी नौकरी ही रोजगार का रास्ता नहीं है। स्व-रोजगार में मदद देने के लिये प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई स्किल इंडिया, स्टार्टअप, स्टैंडअप इंडिया एवं मध्यप्रदेश शासन की मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार और कांट्रेक्टर योजना का लाभ लेकर युवा दूसरों को रोजगार देने के काबिल बन रहे हैं। प्रदेश सरकार कौशल उन्नयन में सहयोग के लिये अभूतपूर्व कार्य कर रही है। सिंगापुर के सहयोग से ग्लोबल स्किल पार्क का विकास किया जा रहा है, जिसमें एक साथ दस हजार युवाओं को प्रशिक्षण मिलेगा। आई.टी.आई. का उन्यनयन किया जा रहा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के लिये पौधे लगाने, नशा मुक्त समाज बनाने एवं बेटा-बेटी को समान मानने का संकल्प भी दिलाया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री श्री मोदी के सपनों को साकार किया जायेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जॉब सीकर को जॉब क्रिएटर बनाया सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने कहा कि न्यू इंडिया के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विभिन्न नवाचारी योजनाओं के द्वारा युवाओं को नये विचारों को क्रियान्वित और नई संभावनाओं को तलाशने का अवसर दिया है। उन्होंने युवाओं से कहा कि सरकार से विकास का मंच, उन्हें मिला है, उन्हें भी गरीबों की सेवा के लिये संकल्पित होना चाहिए। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने युवाओं के विकास से देश प्रदेश का विकास होगा, इस अवधारणा के साथ युवाओं के सपनों को साकार करने में सहयोग किया है। डिजिटल इंडिया, मुद्राबैंक, स्टार्टअप, स्टैंडअप और स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रम ने युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनाया है। उनकी सरकार ने पिछले तीन साल में विकास की गति बदलने का कार्य किया है। पूर्व सरकार के कार्यकाल में जो अर्थव्यवस्था लकवाग्रस्त थी उसे आज दुनिया की सबसे तेज प्रगति करने वाली अर्थव्यवस्था का सम्मान मिल रहा है। दुनियाभर में हो रही प्रदेश के विकास की चर्चा श्री शाह ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद सरकार का दायित्व है। आर्थिक अभाव में प्रतिभाओं के कुंठन से समाज में अन्याय का भाव पनपता है। सामाजिक न्याय के प्रयासों में मेधावी विद्यार्थी योजना में बहुत बड़ी संभावना दिख रही हैं। योजना से लाभान्वित होने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के जीवन में एक नई शुरूआत हुई है, जो उन्हें नई ऊँचाई पर ले जायेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान जैसा संवेदनशील व्यक्तित्व ही इस तरह की पहल कर सकता है। उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश के विकास की दुनियाभर में चर्चा हो रही है। उन्होंने सर्वांगीण विकास पर विचार करने, योजना निर्माण करने और बेहतर क्रियान्वयन कर, उनका लाभ अंतिम छोर तक पहुँचाया है। बीमारु राज्य कहा जाने वाला मध्यप्रदेश आज देश के सर्वश्रेष्ठ राज्यों की सूची में शामिल है। स्वागत उदबोधन में तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री श्री दीपक जोशी ने कहा कि प्रदेश सरकार सबको शिक्षा के लक्ष्य प्राप्ति के प्रयास कर रही है। उन्होंने गरीब कल्याण वर्ष का उल्लेख करते हुए योजना को इस दिशा में उठाया गया प्रभावी कदम बताया और योजना की संक्षिप्त जानकारी दी। आभार प्रदर्शन प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा श्री संजय बंदोपाध्याय ने किया। विद्यार्थियों में दिखी नई उम्मीदें और उत्साह कार्यक्रम में बड़ी संख्या में योजना के लाभान्वित विद्यार्थी उपस्थित थे। उत्साह और नई उम्मीदें उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी। उनके जयकारे और तालियों के गड़गड़ाहट से पूरा पंडाल अनेक बार गुंजायमान हुआ। भारत माता के जयकारे में उनकी जोश भरी आवाज ने अतिथियों को भी प्रभावित किया। प्रतीक स्वरूप योजना प्रमाण पत्रों का वितरण नीट में चयनित रीवा की जास्मीन पटेल, खरगोन के पवन मंडलोई, जे.ई.ई. मेन में चयनित सिवनी के श्रेयस ठाकुर, ग्वालियर के शांतनु शर्मा, जबलपुर के केशव राठौर, इन्दौर के जूबिन नागपाल, क्लेट में चयनित इन्दौर की अनुज्ञा मुक्ति, इंजीनियरिंग शिक्षा में चयनित बैतूल की किरन जपाटे, आर्किटेक्चर शिक्षा में चयनित भोपाल की शुभांगी बागरे, आई.आई.एम. में चयनित बुरहानपुर की मानसी संजय तरकस, बी.एस.सी. में चयनित भोपाल के दीपक कुमार, बी.कॉम. में चयनित बैतूल की मोनिका सोनी, बी.कॉम आनर्स में चयनित भोपाल की आकृति मेहरा को अतिथियों द्वारा वितरित किये गये। अतिथियों का स्वागत पुस्तक भेंटकर किया गया। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सांसद श्री नंदकुमार सिंह चौहान, उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया, कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री विजय शाह, पंचायत एवं ग्रामीण मंत्री श्री गोपाल भार्गव, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस, लोक निर्माण मंत्री श्री रामपाल सिंह, सहकारिता राज्य मंत्री श्री विश्वास सारंग, सांसद श्री आलोक संजर, महापौर श्री आलोक शर्मा, विधायक सर्वश्री सुरेन्द्र नाथ सिंह, विष्णु खत्री एवं अन्य जनप्रतिनिधि तथा मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारीगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ मौजूद थे।


डॉ. वर्मा बरकतउल्ला विश्‍वविद्यालय, भोपाल के कुलपति नियुक्त
Our Correspondent :11 Aug 2017

कुलाधिपति और राज्यपाल श्री ओम प्रकाश कोहली ने डॉ. प्रमोद कुमार वर्मा प्राध्यापक, एप्लाईड जिओलाजी, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन को तत्काल प्रभाव से बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति के पद पर नियुक्त किया है। डॉ. वर्मा की नियुक्ति आगामी आदेश तक की गई है।


विज्ञान भी है हमारे तीर्थ स्थलों में - प्रो. कुठियाला
Our Correspondent :2 Aug 2017

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि हमारे तीर्थ स्थल विश्वास और परम्परा के केंद्र मात्र नहीं हैं, उनमें विज्ञान भी है जो जो आज कहीं लुप्तक हो गया है। अमरनाथ यात्रा के दौरान विश्वास के साथ एक समर्पण का भाव था| मन में भाव था कि जो होता जायेगा, वह करते जाएंगे। यह बात प्रो कुठियाला ने अमरनाथ यात्रा से लौटने के बाद आज विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित 'अमृत प्रसंग' कार्यक्रम में कही। अपनी धार्मिक यात्रा का अनुभव व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य के समय उस विज्ञान का ज्ञान था| इसी कारण से दो हजार वर्षों ज्यादा समय से चल रही एक लोक परंपरा ऐसी आस्था में बदल गई कि चारधाम की यात्रा जीवन का उद्देश्य बन गई| इस आस्था में कोई दैवीय शक्ति है तो कोई वैज्ञानिक शक्ति भी मौजूद हैं| उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि उनकी यह यात्रा पूर्व नियोजित थी। पूर्व में यात्रा को लेकर कोई निर्णय नहीं किया था| संयोग ऐसे बनते गये और एक दुर्गम यात्रा पूर्ण हो गई। यह एक सपना था जो पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि अमरनाथ गुफा प्रकृति का वरदान है और यह एक चोटी पर स्थित है। दुनियांभर में बर्फ के कारण बना इस तरह का दृश्य कहीं भी देखने में नहीं आता है जिसमें शिवलिंग बना हो। प्राकृतिक रूप से बर्फ से उल्टें पिरामिड की तरह की संरचना बनती है लेकिन अमरनाथ के पवित्र स्थल पर पिरामिड की संरचना नजर आती है और इसके पास ही एक दूसरी संरचना माता पार्वती जी के रूप में देखने को मिलती है। यह आश्चर्य है कि 14000 फीट की ऊंचाई पर जहां पानी नहीं, खाने को दाने नहीं, वहां कबूतर नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों और प्रकृति के प्रकोप के बावजूद भारतीय सेना और केन्द्रीय बल के जवान हर चोटी पर मौजूद है और इस यात्रा को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। जब वे अमरनाथ पहुंचे उसके दो दिन पूर्व ही आतंकवादियों ने गुजरात की बस को निशाना बनाया था| उन्होंने कहा कि श्रीनगर में ही एक स्थान पर 2300 वर्ष पूर्व आदिशंकराचार्य ने साधना की थी, वहां पर एक शिव मंदिर स्थित है| उसका वातावरण अद्भुत है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढियों का रास्ता है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा, कुलसचिव श्री दीपक शर्मा, विभागाध्यक्ष डॉ पवित्र श्रीवास्तव, डॉ पी शशिकला, डॉ राखी तिवारी, डॉ चैतन्य पी अग्रवाल, डॉ मोनिका वर्मा, डॉ अविनाश वाजपेयी, डॉ कंचन भाटिया, परीक्षा नियंत्रक डॉ राजेश पाठक ने कुलपति प्रो. कुठियाला का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष श्री संजय द्विवेदी ने किया।


जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी में द्वितीय दीक्षांत समारोह का आयोजन, 200 छात्रों को मिली डिग्री
Our Correspondent :3 December 2016
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में निर्णय लिया गया कि अगले शैक्षणिक सत्र से कक्षा एक से सात तथा 9वीं और 11वीं में अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों को विज्ञान, गणित और वाणिज्य समूह के विषयों में एनसीईआरटी पाठ्य-पुस्तकों से शिक्षण करवाया जायेगा। कक्षा 8, 10 और 12वीं में सत्र 2018-19 से एनसीईआरटी की पुस्तकों से शिक्षण करवाया जायेगा। मंत्रि-परिषद ने अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्यालय नई दिल्ली की स्थापना के लिए तृतीय श्रेणी के अनुवादक के कुल 10 पद के सृजन की मंजूरी दी। इनका वेतनमान 9300-34800+3200 ग्रेड-पे रहेगा। मंत्रि-परिषद ने कार्यालय कल्याण आयुक्त, भोपाल गैस पीड़ित भोपाल के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को उच्च न्यायालय के अधीक्षण में उच्च न्यायालय एवं विभिन्न जिला न्यायालयों की स्थापनाओं में उपलब्ध तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति में 10 वर्ष की सेवा अवधि पूरी कर चुके कर्मचारियों को सीधी भर्ती के लिए निर्धारित आयु में अधिकतम 10 वर्ष की सीमा तक छूट देने का निर्णय लिया। यह सुविधा आदेश जारी होने के दिनांक से 5 वर्ष की अवधि के लिए ही होगी। मंत्रि-परिषद ने कार्यशील पूँजी की व्यवस्था के लिए तीनों विद्युत कंपनियों द्वारा पावर फायनेंस कार्पोरेशन से माह जून 2016 में प्राप्त किए गए कुल 900 करोड़ रुपए के लघु अवधि ऋण के लिए राज्य शासन की गारंटी देने का निर्णय लिया। ऋण की गारंटी के लिए विद्युत कंपनियों द्वारा राज्य शासन को 0.5 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से गारंटी शुल्क का भुगतान किया जायेगा।

न सिरफिरों का इलाज जरूरी जो जेएनयू की छवि और राष्ट्र की अस्मिता से खेल रहे हैं-संजय द्विवेदी
17 February 2016
यह एक यक्ष प्रश्न है कि इतने बड़े विचारकों, विश्व राजनीति-अर्थनीति की गहरी समझ, तमाम नेताओं की अप्रतिम ईमानदारी और विचारधारा के प्रति समर्पण के किस्सों के बावजूद भारत का वामपंथी आंदोलन क्यों जनता के बीच स्वीकृति नहीं पा सका? अब लगता है, भारत की महान जनता इन राष्ट्रद्रोहियों को पहले से ही पहचानती थी, इसलिए इन्हें इनकी मौत मरने दिया। जो हर बार गलती करें और उसे ऐतिहासिक भूल बताएं, वही वामपंथी हैं। वामपंथी वे हैं जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे राष्ट्रनायक को 'तोजो का कुत्ता' बताएं, वे वही हैं जो चीन के साथ हुए युद्ध में भारत विरोध में खड़े रहे। क्योंकि चीन के चेयरमैन माओ उनके भी चेयरमेन थे। वे ही हैं जो आपातकाल के पक्ष में खड़े रहे। वे ही हैं जो अंग्रेजों के मुखबिर बने और आज भी उनके बिगड़े शहजादे (माओवादी) जंगलों में आदिवासियों का जीवन नरक बना रहे हैं।
देश तोड़ने की दुआएं कौन कर रहे हैः अगर जेएनयू परिसर में वे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ करते नजर आ रहे हैं, तो इसमें नया क्या है? उनकी बदहवासी समझी जा सकती है। सब कुछ हाथ से निकलता देख, अब सरकारी पैसे पर पल रहे जेएनयू के कुछ बुद्धिधारी इस इंतजाम में लगे हैं कि आईएसआई (पाकिस्तान) उनके खर्चे उठा ले। जब तक जेएनयू में भारत विरोधी नारे लगाने वाली ताकतें हैं ,देश के दुश्मनों को हमारे मासूम लोगों को कत्ल करने में दिक्कत क्या है? हमारा खून बहे, हमारा देश टूटे यही भारतीय वामपंथ का छुपा हुआ एजेंडा है। हमारी सुरक्षा एजेंसियां देश में आतंकियों के मददगार स्लीपर सेल की तलाश कर रही हैं, इसकी ज्यादा बड़ी जगह जेएनयू है। वहां भी नजर डालिए।
सरकारी पैसे पर राष्ट्रद्रोह की विषवेलः जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय एक ऐसी जगह है, जहां सरकारी पैसे से राष्ट्रद्गोह के बीज बोए जाते हैं। यहां ये घटनाएं पहली बार नहीं हुयी हैं। ये वे लोग हैं नक्सलियों द्वारा हमारे वीर सिपाहियों की हत्या पर खुशियां मनाते हैं। अपनी नाक के नीचे भारतीय राज्य अरसे से यह सब कुछ होने दे रहा है,यह आश्चर्य की बात है। इस बार भी घटना के बाद माफी मांग कर अलग हो जाने के बजाए, जिस बेशर्मी से वामपंथी दलों के नेता मैदान में उतरकर एक राष्ट्रद्रोही गतिविधि का समर्थन कर रहे हैं, वह बात बताती है, उन्हें अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। यह कहना कि जेएनयू को बदनाम किया जा रहा है,ठीक नहीं है। गांधी हत्या की एक घटना के लिए आजतक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लांछित करने वाली शक्तियां क्यों अपने लिए छूट चाहती हैं? जबकि अदालतों ने भी गांधी हत्या के आरोप से संघ को मुक्त कर दिया है। टीवी बहसों को देखें तो अपने गलत काम पर पछतावे के बजाए वामपंथी मित्र भाजपा और संघ के बारे में बोलने लगते हैं। भारत को तोड़ने और खंडित करने के नारे लगाने वाले और ‘इंडिया गो बैक’ जैसी आवाजें लगाने वाले किस तरह की मानसिकता में रचे बसे हैं, इसे समझा जा सकता है। देश तोड़ने की दुआ करने वालों को पहचानना जरूरी है।
राहुल जी, आप वहां क्या कर रहे हैः वामपंथी मित्रों की बेबसी, मजबूरी और बदहवासी समझी जा सकती है, किंतु भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जैसी जिम्मेदार पार्टी के नेता राहुल गांधी का रवैया समझ से परे है। कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय आंदोलन का अतीत और उसके नेताओं का राष्ट्र की रक्षा के लिए बलिदान लगता है राहुल जी भूल गए हैं। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि वे जाकर देशद्रोहियों के पाले में खड़े हो जाएं? उनकी पं. नेहरू, श्रीमती इंदिरा गांधी और श्री राजीव गांधी की विरासत का यह अपमान है। इनमें से दो ने तो अपने प्राण भी इस राष्ट्र की रक्षा के लिए निछावर कर दिए। ऐसे परिवार का अंध मोदी विरोध या भाजपा विरोध में इस स्तर पर उतर जाना चिंता में डालता है। पहले दो दिन कांग्रेस ने जिस तरह की राष्ट्रवादी लाइन ली, उस पर तीसरे दिन जेएनयू जाकर राहुल जी ने पानी फेर दिया। जेएनयू जिस तरह के नारे लगे उसके पक्ष में राहुल जी का खड़ा होना बहुत दुख की बात है। वे कांग्रेस जैसी गंभीर और जिम्मेदार पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। उन्हें यह सोचना होगा कि भाजपा और नरेंद्र मोदी का विरोध करते-करते कहीं वे देशद्रोहियों के एजेंडे पर तो नहीं जा रहे हैं। उन्हें और कांग्रेस पार्टी को यह भी ख्याल रखना होगा कि किसी दल और नेता से बड़ा है देश और उसकी अस्मिता। देश की संप्रभुता को चुनौती दे रही ताकतों से किसी भी तरह की सहानुभूति रखना राहुल जी और उनकी पार्टी के लिए ठीक नहीं है। जेएनयू की घटना को लेकर पूरे देश में गुस्सा है, ऐसे समूहों के साथ अपने आप को चिन्हित कराना, कांग्रेस की परंपरा और उसके सिद्धांतों के खिलाफ है।
अभिव्यक्ति की आजादी के नाम परः कौन सा देश होगा जो अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर खुद को तोड़ने की नारेबाजी को प्रोत्साहन देगा। राष्ट्र के खिलाफ षडयंत्र और देशद्रोहियों की याद में कार्यक्रम करने वालों के साथ जो आज खड़े हैं, वे साधारण लोग नहीं हैं। जिस देश ने आपको सांसद, विधायक, मंत्री और प्रोफेसर बनाया। लाखों की तनख्वाहें देकर आपके सपनों में रंग भरे, आपने उस देश के लिए क्या किया? आजादी आप किससे चाहते हैं? इस मुल्क से आजादी, जिसने आपको एक बेहतर जिंदगी दी। अन्याय और अत्याचार से मुक्ति दिलाने की आपकी यात्रा क्यों गांव-गरीब और मैदानों तक नहीं पहुंचती? अपने ही रचे जेएनयू जैसे स्वर्ग में शराब की बोतलों और सिगरेट की घुंओं में ‘क्रांति’ करना बहुत आसान है किंतु जमीन पर उतर कर आम लोगों के लिए संघर्ष करना बहुत कठिन है। हिंदुस्तान के आम लोग पढ़े-लिखे लोगों को बहुत उम्मीदों से देखते हैं कि उनकी शिक्षा कभी उनकी जिंदगी में बदलाव लाने का कारण बनेगी। किंतु आपके सपने तो इस देश को तोड़ने के हैं। समाज को तोड़ने के हैं। समाज में तनाव और वर्ग संघर्ष की स्थितियां पैदा कर एक ऐसा वातावरण बनाने पर आपका जोर है ताकि लोगों की आस्था लोकतंत्र से, सरकार से और प्रशासनिक तंत्र से उठ जाए। विदेशी विचारों से संचालित और विदेशी पैसों पर पलने वालों की मजबूरी तो समझी जा सकती है। किंतु भारत के आम लोगों के टैक्स के पैसों से एक महान संस्था में पढ़कर इस देश के सवालों से टकराने के बजाए, आप देश से टकराएंगें तो आपका सिर ही फूटेगा।
जेएनयू जैसी बड़ी और महान संस्था का नाम किसी शोधकार्य और अकादमिक उपलब्धि के लिए चर्चा में आए तो बेहतर होगा, अच्छा होगा कि ऐसे प्रदर्शनों-कार्यक्रमों के लिए राजनीतिक दल या समूह जंतर-मंतर, इंडिया गेट, राजधाट और रामलीला मैदान जैसी जगहें चुनें। शिक्षा परिसरों में ऐसी घटनाओं से पठन-पाठन का वातावरण तो बिगड़ता ही है, तनाव पसरता है, जो ठीक नहीं है। इससे विश्वविद्यालय को नाहक की बदनामी तो मिलती ही है, और वह एक खास नजर से देखा जाने लगता है। अपने विश्वविद्यालय के बचाने की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी शायद वहां के अध्यापकों और छात्रों की ही है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना ही, इस बार मिली बदनामी का सबसे बड़ा इलाज है।
एक लोकतंत्र में होते हुए आपकी सांसें घुट रही हैं, तो क्या माओ के राज में, तालिबानों और आईएस के राज में आपको चैन मिलेगा? सच तो यह है कि आप बेचैन आत्माएं हैं, जिनका विचार ही है भारत विरोध, भारत द्वेष, लोकतंत्र का विरोध। आपका सपना है एक कमजोर और बेचारा भारत। एक टूटा हुआ, खंड-खंड भारत। ये सपने आप दिन में भी देखते हैं, ये ही आपके नारे बनकर फूटते हैं। पर भूल जाइए, ये सपना कभी साकार नहीं होगा, क्योंकि देश और उसके लोग आपके बहकावे में आने को तैयार नहीं है। देश तोड़क गतिविधियों और राष्ट्र विरोधी आचरण की आजादी यह देश किसी को नहीं दे सकता। आप चाहे जो भी हों। जेएनयू या दिल्ली भारत नहीं है। भारत के गांवों में जाइए और पूछिए कि आपने जो किया उसे कितने लोगों की स्वीकृति है, आपको सच पता चल जाएगा। राष्ट्र की अस्मिता और चेतना को चुनौती मत दीजिए। क्योंकि कोई भी व्यक्ति, विचारधारा और दल इस राष्ट्र से बड़ा नहीं हो सकता। चेत जाइए।

महात्मा गाँधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय को नैक ने दिया 'ए' ग्रेड
Our Correspondent :21 September 2015
राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) ने अपने मूल्यांकन में महात्मा गाँधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, सतना को शीर्ष ग्रेड ‘ए’ के साथ मान्यता प्रदान की है.
मूल्यांकन एवं प्रत्यायन को मूलतः किसी भी शैक्षिक संस्था की ‘गुणवत्ता की स्थिति’ को समझने के लिए प्रयोग किया जाता है. वास्तव में यह मूल्यांकन यह निर्धारित करता है कि कोई भी शैक्षिक संस्था या विश्वविद्‌यालय प्रमाणन एजेंसी के द्‌वारा निर्धारित गुणवत्ता के मानकों को किस स्तर तक पूरा कर रहा है. यह मानदंड निम्न प्रकार हैं – शैक्षिक प्रक्रियाओं में संस्था का प्रदर्शन, पाठ्यक्रम चयन एवं कार्यान्वयन, शिक्षण अधिगम एवं मूल्यांकन तथा छात्रों के परिणाम, संकाय सदस्यों का अनुसंधान कार्य एवं प्रकाशन, बुनियादी सुविधाएँ तथा संसाधनों की स्थिति, संगठन, प्रशासन व्यवस्था, आर्थिक स्थिति तथा छात्र सेवाएँ इत्यादि.
महात्मा गाँधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय पहली बार ‘ए’ शीर्ष ग्रेड पाया है. विश्वविद्यालय ने 4 में से 3.72 (सीजीपीए) अंक पाए हैं. यह अंक विश्वविद्यालय की उच्च शैक्षिक स्थिति को दर्शाता है.


एमपी पीएससी : एक लाख प्रश्नों का बैंक बनेगा, उसी में से आएंगे प्रश्न
प्रारंभिक परीक्षा ऑनलाइन कराने का मामला अटका, अन्य परीक्षाएं ऑनलाइन होंगी, 12 को टेंडर जारी करेगा पीएससी

मप्रलोकसेवा आयोग पीएससी-2014 की प्रारंभिक परीक्षा को ऑनलाइन करवाने का मामला अटक गया है। सोमवार को हुई पीएससी प्रबंधन की बैठक में परीक्षा को ऑनलाइन करने के निर्णय पर सहमति नहीं बन पाई। हालांकि अन्य सभी परीक्षाएं ऑनलाइन ही की जाएंगी। इसके लिए 12 दिसंबर तक टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। इधर, पीएससी प्रबंधन ने तय किया है कि प्रारंभिक परीक्षा के लिए लगभग एक लाख प्रश्नों का बैंक तैयार किया जाएगा। उसी में से प्रश्न पूछे जाएंगे, ताकि एक ही गाइड से ज्यादा प्रश्न पूछे जाने जैसे आरोप लग सकें।

ऑनलाइन परीक्षा क्यों

दरअसल,पीएससी-2012 और प्रारंभिक परीक्षा-2013 के विवादों में पड़ने के बाद पीएससी प्रबंधन ने परीक्षा ऑनलाइन करवाने का निर्णय लिया था। मुख्य परीक्षा-2012 का परचा बाजार में बेचे जाने की घटना से हड़कंप मच गया था। एसटीएफ की जांच में 40 लाख रुपए में परचा बेचे जाने की बात सामने आई थी। इसी के चलते चयनित अभ्यर्थियों के इंटरव्यू अब तक नहीं हो पाए हैं। इन सब गड़बड़ियों से बचने के लिए ऑनलाइन परीक्षा का निर्णय लिया गया था।

प्रश्न बैंक से यह होगा फायदा

प्रारंभिकपरीक्षा-2013 में एक ही गाइड से 35 फीसदी प्रश्न पूछे जाने तथा 16 गलत प्रश्न की शिकायत पर बवाल मचा था। विवादों के बीच बमुश्किल प्रबंधन ने इसका रिजल्ट घोषित किया है। ऐसे ही विवादों के चलते लगभग एक लाख प्रश्नों की बैंक बनाने की तैयारी है।

जल्द लेंगे अंतिम निर्णय

राज्यसेवा को छोड़ सभी परीक्षाएं ऑनलाइन होंगी। इसके लिए 12 दिसंबर तक टेंडर जारी होंगे। पीएससी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा को ऑनलाइन करवाने पर अभी कोई निर्णय नहीं हो पाया है।'' मनोहरदुबे, सचिव,एमपी पीएससी


‘अखिल भारत शिक्षा संघर्ष यात्रा-2014’ रैली व भोपाल महा-पड़ाव से एकजुट संघर्ष की शुरूआत
शिक्षा के निजीकरण, बाज़ारीकरण व सांप्रदायीकरण के खिलाफ़ और ‘केजी से पीजी तक’ पूरी तरह मुफ़्त व सरकार द्वारा वित्त-पोषित ‘समान शिक्षा व्यवस्था’ की स्थापना के लिए, ‘अखिल भारत शिक्षा अधिकार मंच’, इसके 45 सदस्य व सहयोगी संगठनों व 200 से भी ज्यादा बिरादराना संगठनों द्वारा आयोजित ‘अखिल भारत शिक्षा संघर्ष यात्रा-2014’ का भोपाल महापड़ाव 4 दिसंबर 2014 के अंतर्गत विशाल रैली का आयोजन भोपाल टाकीज़ से लेकर यादगार-ए-शाहजहानी पार्क तक किया गया।
देश की विविधता को दर्शाते और अनेक भाषाओं में समतामूलक शिक्षा के लिए संघर्ष की प्रतिबद्धता को ज़ाहिर करते हुए देश के कोने-कोने से आए 2500 से ज्यादा लोगों ने नारों, गीतों और कलरव संगीत के साथ भोपाल टाकीज़ से रैली निकालकर यादगार-ए-शाहजहानी पार्क तक आई जहां जोरदार नारों से रैली का स्वागत किया गया।
जनगीतों के बीच शाहजहानी पार्क में ‘अखिल भारत शिक्षा संघर्ष यात्रा’ के तहत निकली पांच देश-व्यापी आंचलिक यात्राओं के प्रतिनिधियों ने पांच मशालें भोपाल महापड़ाव स्थल पर समर्पित की।
वरिष्ठ शिक्षाविद व अखिल भारत शिक्षा अधिकार मंच के अध्यक्ष मंडल सदस्य डॉ. अनिल सदगोपाल ने देश-व्यापी शिक्षा संघर्ष यात्राओं के अनुभव को सामने रखते हुए कहा कि ‘शिक्षा संघर्ष यात्रा’ का स्वागत हर जगह पर जनता के अलग-अलग तबकों ने पूरे जोश और उत्साह से किया। शिक्षा व्यवस्था पर पिछले दो से ज्यादा दशकों से जारी नवउदारवादी – सांप्रदायिक हमले को जनता पहचान रही है।
अखिल भारत शिक्षा अधिकार मंच के अध्यक्ष मंडल सदस्य प्रो. मधु प्रसाद ने कहा कि आज की सरकार शिक्षा के हक को वास्तव में लागू न कर के केवल लोकलुभावन मगर खोखले नारों और योजनाओं से जनता को बरगला रही है। लोग यह समझ चुके हैं कि स्कूल के लिए अच्छे व नियमित शिक्षक से लेकर शौचालय व साफ़-सफाई की व्यवस्था कराना सरकार की जिम्मेदारी है और इसके लिए जरूरी वित्तीय व आधारभूत प्रबंध न करके मोदी सरकार केवल लच्छेदार बातों में जनता को उलझाए हुए है।
अखिल भारत शिक्षा अधिकार मंच के अध्यक्ष मंडल सदस्य प्रो. जी. हरगोपाल ने शिक्षा के बाजारीकरण व सांप्रदायीकरण के खिलाफ व समान शिक्षा व्यवस्था के लिए ‘भोपाल आह्वान’ जारी किया। जिसके प्रति देश की अनेक वामपंथी व समाजवादी राजनीतिक दलों (यथा, सीपीआइ, सीपीआइ (एम), सीपीआई-एम.एल. (रेड स्टार), सीपीआई-एम.एल. (न्यू डेमोक्रेसी), सीपीआई-एम.एल. (लिबरेशन), समाजवादी जन परिषद) और जल-जंगल-जमीन के जनांदोलनों ने अपने समर्थन की घोषणा की। इसके ‘शिक्षा संघर्ष यात्रा’ के तीन सूत्रीय मकसद के प्रति अटूट प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए भोपाल महापड़ाव से आगे लड़ाई को मजबूती से जारी रखने का संकल्प लिया गया।

यात्रा का तीन-सूत्रीय मकसद इस प्रकार हैः

1. देश में ‘केजी से पीजी तक’ समानता पर आधारित व हर तरह के भेदभाव से मुक्त, सरकार द्वारा वित्त-पोषित और पूरी तरह मुफ़्त ‘समान शिक्षा व्यवस्था’ का निर्माण करना जिसमें 12वीं कक्षा तक ‘समान पड़ोसी स्कूल प्रणाली’ शामिल हो और जिसका प्रबंधन लोकतांत्रिक, विकेंद्रित व सहभागितापूर्ण हो। इस व्यवस्था में शिक्षा का माध्यम बहुभाषीयता के संदर्भ में हमारी मातृभाषाएं होनी चाहिए और इसके लिए भारत की भाषाओं को कार्यपालिका, विधायिका व न्यायपालिका, व्यापार व वाणिज्य, विज्ञान व तकनीकी और सूचना प्रौद्योगिकी समेत राष्ट्रीय जीवन के सभी क्षेत्रों में प्राथमिकता के साथ स्थापित किया जाना चाहिए। इस आमूलचूल बदलाव के ज़रिए ही शिक्षा व्यवस्था संविधान के आदर्शों के अनुरूप देश में लोकतांत्रिक, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, न्यायशील, प्रबुद्ध और मानवीय समाज के निर्माण में सक्षम बन पाएगी। इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए ज़रूरी है कि,
2. शिक्षा में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पी.पी.पी.) व प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ.डी.आइ.) समेत निजीकरण और बाज़ारीकरण की सभी नीतियों को रद्द किया जाए। साथ ही, विश्व व्यापार संगठन-गैट्स के पटल पर पेश उच्च शिक्षा के ‘प्रस्ताव’ को तुरंत वापस लिया जाए, इससे पहले कि वह वर्तमान में जारी ‘दोहा चक्र’ की वार्ताओं के ख़त्म होते ही बाध्यकारी हो जाए। तभी शिक्षा नीति के निर्धारण में देश की संप्रभुता को पुनर्स्थापित करना मुमकिन हो पाएगा; और
3. शिक्षा में हर तरह के सांप्रदायीकरण को खत्म किया जाए; साथ ही जातिगत, नस्लीय, पितृसत्तात्मक, संकीर्ण और विकलांगता-विरोधी भेदभावों व पूर्वाग्रहों और गैर-तार्किकता व अंधविश्वास को शिक्षा से बाहर किया जाए क्योंकि ये न सिर्फ देश के सामाजिक ताने-बाने को कमज़ोर करते हैं बल्कि किसी खास वर्ग, जाति, धर्म, संस्कृति, लिंग, भाषा, अंचल या तथाकथित ‘सामान्य’ शरीर की श्रेष्ठता के बेबुनियाद व अमानवीय विचार को थोप कर देश की समृद्ध विविधता को नकारते हैं और नवउदारवादी लूट के खिलाफ़ हमारी व्यापक एकजुटता को तोड़ते हैं।


सामुदायिक रेडियो आज भी प्रासंगिक हैं : प्रो कुठियाला
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्व विद्यालय (एमसीयू) में " वर्तमान परिदृश्य में सामुदायिक रेडियो की प्रासंगिक " विषय पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ । इस अवसर पर एमसीयू के कुलपति प्रो कुठियाला ने कहा कि सामुदायिक रेडियो ही सामाजिक संवाद के लिए प्रवशाली मीडिया हो सकता है । यह पहले भी बेहतर विकल्प था और आज भी प्रासंगिक हैं । कार्यक्रम में जम्मू कश्मीर में शारदा सामुदायिक रेडियो के संस्थापक व निर्देशक रमेश हांगुल ने कहा की सीमिति भौगोलिक दायरे में आने वाले समुदाय के लिए प्रसारण चुनौतीपूर्ण लेकिन रोमांचक है । यहां स्टूडेंट्स को सामुदायिक रेडियो संचालन और तकनीक के बारे में भी बताया गया ।

विद्यालयीन विद्यार्थियों पर शोध के लिये जमना माकवे को पीएचडी की उपाधि
भोपाल। राजधानी के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय द्वारा जमना प्रसाद माकवे को शोध कार्यो के लिये पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है। राजीव गांधी महाविद्यालय में प्राध्यापक पद पर कार्यरत श्री माकवे ने यह शोध कार्य डॉ. नीरजा शर्मा सतत शिक्षा विभाग बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के निर्देशन में पूरा किया है। विश्वविद्यालय ने श्री माकवे द्वारा माध्यमिक स्तर के आवासीय एवं गैर आवासीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के विद्यालयीन वातावरण के नैतिक मूल्यों पर प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन विषय पर शोध कार्य किया गया है। भोपाल नगर के विशेष संदर्भ मेें किये गये इस शोध कार्य के लिये विवि ने 17-10-14 को उन्हेंं पीएचडी की उपाधि दी गई। इस अवसर पर परिवार और शुभचिंतकों ने उन्हे हार्दिक बधाई दी।

धूमधाम से मना मिसाइल मेन डाॅ. कलाम का जन्म दिन
भोपाल। - स्कूल-काॅलेज के बच्चों ने पेंटिग बनाई, क्रिएटिव राईटिंग की
- केक कटा, पुरस्कार बंटे, बच्चों की जुबां पर ’आई विल फ्लाई, आई विल फ्लाई’
- डाॅ. कलाम की पसंसीदा कविता को गुनगुनाया, शपथ लीं

भोपाल। भारत के महान वैज्ञानिक, भारत रत्न मिसाइल मेन पूर्व राष्ट्रपति डाॅ. एपीजे अब्दुल का 83वां जन्मदिन 15 अक्टूबर को राजधानी में धूमधाम से मनाया गया। सर्च एण्ड रिसर्च डवलपमंेट सोसायटी ने शहर के स्कूल-काॅलेज के बच्चों के साथ मिलकर डाॅ. कलाम का जन्मदिन मनाया और उनकी दीर्घ आयु की कामना की।
स्वराज में आयोजित इस कार्यक्रम में डाॅ. कलाम के व्यक्त्वि और कृतित्व पर स्कूल-काॅलेज के छात्र-छात्राओं द्वारा बनाई गई पेटिंग की प्रदर्षनी लगाई गई। साथ ही छात्र-छात्राओं ने डाॅ. कलाम पर क्रिएटिव राईटिंग के जरिए अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में रामानंद संस्कृत महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य डा. उमा गुप्ता और हमीदिया कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में भूगोल की प्राध्यापक प्रो. अल्पना त्रिवेदी सोसायटी की चेयरपरसन डाॅ. मोनिका जैन, राजीव जैन, डाॅ. आदिल बेग सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। डाॅ. कलाम के जन्मदिन को सेलिब्रेट करने के लिए यहां सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय, बिलावोंग इंटरनेषनल स्कूल, कैम्पियन स्कूल, सेंट जोसफ स्कूल तथा हमीदियाा काॅलेज के छात्र-छात्राओं सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
यहां अतिथियों ने डाॅ. कलाम की जीवन और उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों से लेकर राष्ट्रपति पद रहते हुए देषहित में किए गए कार्यों का उल्लेख किया। अतिथियों ने वैज्ञानिकों के जन्मदिन मनाने की सर्च एण्ड रिसर्च डवलपमेंट सोसायटी की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे निष्चित तौर पर देष के वैज्ञानिकों का सम्मान बढ़ेगा और हमारी युवा पीढ़ी उनके कार्यों और उपलब्धियों से वाकिफ हो सकेगी। उन्होंने कहा कि देष के विकास में वैज्ञानिक समुदाय का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने कहा डाॅ. कलाम ने मिसाइल का प्रक्षेपण भारत को न केवल परमाणु शक्ति संपन्न बनायाच बल्कि देष को एक नई ताकत और पहचान दी है। भारत के राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्य भी हमेष याद किए जाएंगे। अतिथियों ने कहा कि डाॅ. कलाम का जीवन अनुकरणीय है।
सोसायटी की चेयरपरर्सन डाॅ. जैन ने यहां कहा कि डाॅ. कलाम को पढ़ना, मिलना, बात करना और उन्हें फाॅलो करना, सब कुछ अद्भुत है। वे सकारात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत हैं। यही कारण है कि देष के युवाओं के वे आईकन बन गए हैं। डाॅ. जैन ने कहा कि डाॅ. कलाम ने सर्च एण्ड रिसर्च डवलपमंेट सोसायटी के कार्यों को सराहा है। डाॅ. कलाम 12 दिसंबर 2012 को सोसायटी के निमंत्रण पर भोपाल में इंटरनेषनल कांफ्रेंस में शामिल हुए।

बेस्ट पेंटिंग और राईटिंग को अवार्ड

कार्यक्रम में अतिथियों ने सर्वश्रेष्ठ पेटिंग और सर्वश्रेष्ठ क्रिएटिव राईटिंग के लिए तीन-तीन प्रतिभागियों का चयन किया। इन्हें प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार के रूप डाॅ. कलाम द्वारा लिखी गईं पुस्तकें और मेडल प्रदान किए गए। अन्य सभी प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को सांत्वना पुरस्कार दिए गए।

गूंजा ’आई विल फ्लाई’, ’आई विल फ्लाई’

डाॅ. कलाम को स्कूल दिनों में प्रभावित करने वाली उनकी सबसे ज्यादा पसंदीदा कविता ’आई विल फ्लाई’, ’आई विल फ्लाई’ को उपस्थित छात्र-छात्राओं ने सामूहिक रूप से गाया। कविता के बाद डाॅ. कलाम द्वारा दिलाई जाने वाली दस शपथ भी विद्यार्थियों, अतिथियों एवं सोसायटी के सदस्यों द्वारा ली गई।

पहली बार हुआ ऐसा आयोजन

देष में वैज्ञानिकों के जन्मदिन को धूमधाम से मनाने का यह अपनी तरह की पहली पहल है। सर्च एण्ड रिसर्च डवलपमेंट सोसायटी की चेयरपरसन डाॅ. मोनिका जैन ने कहा कि अब देष के सभी महान वैज्ञानिकों के जन्मदिवस इसी तरह मनाएं जाएंगे। वैज्ञानिक धरोहर के समान हैं और उन्होंने भारत को विष्व में एक अलग स्थान दिलाया है। हमारे वैज्ञानिकों के उत्साह को बढ़ाने के लिए इस तरह की पहल पूरे देष में होनी चाहिए।

इन्हें मिले पुरस्कार

क्रिएटिव राईटिंग

प्रथम - कल्याणी शुक्ला - बिलाबोंग स्कूल
द्वितीय - सौम्या नायक - बिलावोंग स्कूल
तृतीय - इरावती सिंह और अर्थव - बिलावोंग स्कूल

पैंटिंग

प्रथम - सहाज सिद्दीकी - सेंट जोसफ स्कूल
द्वितीय - विजय गहरवाल - हमीदिया काॅलेज
तृतीय - विजय कीर - हमीदिया काॅलेज


'जर्मन डे क्विज' 8 अक्टूबर को
जर्मन सरकार की सांस्कृतिक संस्था 'मैक्स मूलर भवन नई दिल्ली' स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी के साथ मिलकर इस बुधवार इस ओपन क्विज का आयोजन कर रही है. 'जर्मन एकीकरण दिवस' को याद करने के लिए आयोजित हो रही इस क्विज का विषय है - 'जर्मन जर्मनी एंड जर्मन्स'
भारत में जर्मन भाषा की टीचिंग के 100 साल पूरे होने के उपलक्षय में जर्मन सरकार भारत भर में पूरे साल अलग अलग आयोजन कर रही है. भोपाल में यह आयोजन स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी के साथ मिलकर किये जा रहे हैं. इस साल भोपाल में आयोजित हो रहा मैक्स मूलर भवन का ये तीसरा आयोजन है

क्विज के बारे में :-

इवेंट का नाम - जर्मन डे क्विज
दिनांक - 8 अक्टूबर 2014 ,बुधवार
समय - सायं 5 से 7 बजे तक
स्थान - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी भोपाल

आयोजक - मैक्स मूलर भवन (गेटे इंस्टिट्यूट) नई दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी

क्विज की भाषा - अंग्रेजी (क्विज में भाग लेने के लिए जर्मन जानना जरुरी नहीं है)

क्विज के टॉपिक्स :-

- जर्मन भाषा
- जर्मन संस्कृति एवं साहित्य
- जर्मनी की जीवन शैली एवं खान पान
- आधुनिक जर्मनी की प्रमुख उपलब्धियां
- जर्मन शिष्टाचार एवं रीति रिवाज

पुरूस्कार :-

क्विज के 9 विजेताओं को मेगा प्राइज़
क्विज में भाग लेने वाले हर प्रतियोगी को पुरूस्कार

कैसे भाग ले सकते हैं :-

- शहर का कोई भी व्यक्ति इस क्विज में भाग ले सकता है
- क्विज पूरी तरह से निःशुल्क है
- क्विज मैं भाग लेने के लिए लाइब्रेरी के नंबर -2553765 या 2553767 पर रेगिअतरशन करा सकते हैं
- प्रतियोगिता के दिन 15 मिनिट पहले पहुंचकर भी रजिस्ट्रेशन कराये जा सकते हैं


राजस्थानी अंदाज में सेलिब्रेशन
भोपाल। ख़ुशी और उल्लास का माहोल, मन में जीतने की उमंग लिए मंगलवार को आनंद विहार कॉलेज में युवा उत्सव-२०१४ का आगाज हुआ । स्टूडेंट्स ने डांस , कोलाज और कार्टूनिंग कम्पटीशन में हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा से जजेज को इम्प्रेस किय। कोलाज कम्पटीशन में स्टूडेंट्स ने वाइल्ड लाइफ कंजरवेशन टॉपिक पर खूबसूरत कोलाज तैयार किए । स्टूडेंट्स आशिता निल्लोर ने कलरफुल पेपर की हेल्प से जिराफ बनाया और ट्री के साथ सेव वाइल्ड लाइफ का मैसेज दिया । वहीँ , कुछ स्टूडेंस्ट ने जंगल सीन क्रिएट करते हुए वाइल्ड लाइफ के दृश्य बनाए । सोलो डांस और ग्रुप डांस में लोक नृत्य प्रस्तुतियों ने मन मोहा । कालबेलिया नृत्य , लावादी नृत्य , राई नृत्य , आदि में स्टूडेंट्स ने प्रस्तुति दी । बुधवार को युवा उत्सव में पेंटिंग कम्पटीशन, लोक गायन और सुगम गायन का आयोजन किया जायेगा । फोक डांस के रंग
गीतांजलि कॉलेज में युवा उत्सव 2014 -15 का की शुरुआत सोलो और ग्रुप डांस कम्पटीशन से हुई । कुल 11 नृत्य प्रस्तुतियों में गरबा राजस्थानी (गुमर) छतीसग़ढ़ी एवं मारवाड़ी लोकनृत्य शामिल थे । सोलो डांस कम्पटीशन में फर्स्ट सोनम साहू (कथक), सेकंड ख्याति सक्सेना ने प्राप्त किया ।
ग्रुप डांस कम्पटीशन में फर्स्ट दिव्या तिवारी एवं समूह (राजस्थानी नृत्य) ने प्राप्त किया । सेकंड और थर्ड रैंक दामिनी एवं समूह (छतीसग़ढ़ी गोंड नृत्य ) और रेणुका लहरिया एवं समूह (छतीसग़ढ़ी) , रिंकी जैन एवं समूह (राजस्थानी होली नृत्य) ने प्राप्त किया । प्रतियोगिता में निर्णायकगण डॉ एफ बी बक्ष , डॉ शैलजा सोनी और डॉ मंजू शर्मा थे ।


अटल बिहारी हिन्दी विवि ने शुरू किया गर्भ में अभिमन्यु बनाने का प्रशिक्षण
गर्भस्थ शिशुओं पर दो दिनी सेमिनार का आयोजन

भोपाल। वह दिन दूर नहीं जब दंपती अपनी संतान में जैसे संस्कार चाहते हैं, गर्भवती महिलाओं के माध्यम से वे आने वाली पीढ़ी में पहुंचा दिये जायेंगे। यदि वह चाहती हैं कि उनकी संतान डॉक्टर, इंजीनियर या वैज्ञानिक बने तो इस प्रचीन पद्धति के अधुनातन प्रयोग के द्वारा यह भी संभव हो सकता है। महाभारत में जिस तरह अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु को गर्भ में ही चक्रव्यूह भेदने की शिक्षा मिल गई थी वैसी ही महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशु को भारतीय मूल्यों की शिक्षा दिए जाने की तैयारी प्रदेश के एकमात्र हिन्दी विश्वविद्यालय में शुरू हो गई है। विवि विभिन्न स्थानों पर गर्भ तपोवन केंद्र खोलने जा रहा है, जिनमें गर्भवती महिलाओं को योग, प्रार्थना और ध्यान के साथ महिला को ज्यादा से ज्यादा प्रसन्न और प्रफुल्लित रखकर गर्भस्थ शिशु को संस्कार सिखाए जाएंगे। अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में गर्भस्थ शिशुओं पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन गुरूवार को विशेषज्ञों की ओर से आंगनबाड़ी, शिक्षक और गर्भस्थ महिलाओं को गर्भ में शिशुओं की देखभाल सहित अन्य जानकारियां दी गर्इं।
कार्यशाला में अहमदाबाद के चिल्ड्रन यूनिवर्सिटी के कुलपति हर्षद भाई शाह ने बताया कि विश्वभर में ऐसे चार विश्वविद्यालय हैं जो बच्चों को लेकर उनके युवा होने तक उन्हें शिक्षित करते हैं। लेकिन यूके, साउथ अफ्रिका, चीन के संघाई तथा युरोपीयन कंट्री समूह के इन विश्वविद्यालयों में सात साल के होने के बाद किसी बालक को प्रवेश मिलता है और वह चौदह वर्ष के होने तक वहां रहकर शिक्षा प्राप्त कर सकता है जबकि हमारे देश में जो गुजरात में चाइल्ड यूनिवर्सिटी है वहां बालक का प्रवेश ऋणात्मक नौ यानि गर्भ में ही कर लिया जाता है। फिर उसके जन्म लेने के बाद वह अ_ारह साल के होने तक हमारे विश्वविद्यालय में शिक्षण लेता है।
श्री शाह ने कहा कि विश्वविद्यालय गर्भस्थ महिलाओं को उत्तम संतान के लिए किस तरह के संस्कारों का एक मां को पालन करना चाहिए, यह आवश्यक है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए अहमदाबाद में तपोवन रिसर्च सेंटर के नाम से दो अक्टूबर 2010 से यह उपक्रम शुरु किया गया है। इसके बाद अब मध्यप्रदेश के शहरों में भी तपोवन केन्द्र की स्थापना करने की तैयारी की जा रही है। वहीं उन्होंने बताया कि गुजरात की चिल्ड्रन यूनिवर्सिटी केरीयर आधारित शिक्षा दे रही है ताकि कोई बच्चा भविष्य में बेरोजगार न रहे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने अपनी इस शिक्षण प्रणाली के तहत चार आयामों को जोड़ा है। पहला शोध, दूसरा शिक्षण तीसरा-प्रशिक्षण और चौथा-विस्तारण है जो कि भारतीय संकल्पना धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष पर आधारित है।
अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में दो अक्टूबर से गर्भ संस्कार में नौ माह का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने संबंधी कोर्स की जानकारी देते हुए गुजरात से आईं ज्योति बेन थानकी ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को नौ महीने तक सिखाया जाएगा की बेहतर शिशु को जन्म देने के लिए उन्हें किन संस्कारों का पालन करना चाहिए। विवि इस ट्रेनिंग के दौरान की हर दिन की गतिविधियों का रिकार्ड रखेगा ताकि आगे इस पर अनुसंधान किया जा सके। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में गर्वस्थ महिलाओं के लिए ऐसे काउंसलर रखे जाना चाहिये जो माता बनने जा रही स्त्रियों से आत्मीय भाव के साथ वार्तालाप कर सकें। एक अच्छे संस्कारित शिशु निर्माण के पीछे निश्चित ही तपोवन रिसर्च सेन्टर में इन काउंसलरों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। ऐसे में इस कार्य के लिये उन्हीं महिलाओं को आगे आना चाहिये जिनमें इस प्रकार की स्वप्रेरित क्षमता हो, न कि धन कमाने के उद्देश्य से काउसंलर बनने के प्रयास करने चाहिये।
कार्यशाला में चिल्ड्रन विश्वविद्यालय की संयोजिका तर्पणा बेन ने भी अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि गर्भ के दौरान किसी भी स्त्री के लिये क्या आवश्यक है और क्या नहीं इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी होता है। इसलिये गर्भ संस्कार तपोवन केन्द्र में इस बात का खास ख्याल रखा जाता है कि स्त्री को खाने में क्या दिया जाये, उसका श्रृंगार कैसा हो, वह अधिक से अधिक प्रस्नन कैसे रह सकती है, उसके लिये क्या उपाय किये जाने चाहिये ।
अटल बिहारी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मोहनलाल छीपा ने कहा कि गर्भ से ही मनुष्य की शिक्षा आरंभ होती है। महाभारत में अभिमन्यु की गर्भ में चक्रव्यूह तोडऩे की कला सीखने की कहानी से हम सब परिचित हैं। गर्भावस्था ही संस्कार सिंचन का अति उपयुक्त समय है। इसलिए मां को गर्भावस्था के प्रत्येक क्षण का सही उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई प्रयोग विदेशों में होता है तो उस पर सभी सहजता से विश्वास कर लेते हैं, लेकिन जब वे प्रयोग भारत में होता है तो हमारे ही लोग उसे कपोल कल्पना समझने की भूल करते हैं। वास्तव में ऐसी जो समाज की धारण बन गई है उस धारणा को तोडऩे में निश्चित ही हिन्दी विश्वविद्यालय का यह नवीनतम प्रयास सफल होगा। अभी इस गर्भ संस्कार तपोवन केंद्र परियोजना में महिलाओं को गर्भ संस्कार की ट्रेनिंग दी जाएगी। शुरूआत भोपाल से की जा रही है। इसके बाद इसे अन्य शहरों के साथ ही ट्राइबल क्षेत्रों में भी स्थापित किया जाएगा। इसके लिए विवि ने गुजराज की चिल्ड्रन यूनिवर्सिटी से करार किया है।
उन्होंने कहा कि देश में अभी यह कोर्स केवल चिल्ड्रन यूनिवर्सिटी में ही चल रहा है। इस कोर्स के लिए सिलेबस को गुजराती से हिंदी में अनुवादित किया जा रहा है। कोर्स के संचालन के लिए विवि महिला एवं बाल विकास विभाग से सहयोग लेगा ताकि अधिक संख्या में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। प्रो. छीपा ने कहा कि जैसे महाभारत में जिस तरह अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु को गर्भ में ही चक्रव्यूह भेदने की शिक्षा मिल गई थी वैसी ही महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशु को भारतीय मूल्यों की शिक्षा इस कोर्स के माध्यम से दी जाएगी।

नि : शुल्क रहेगा पाठ्यक्रम

यह पाठ्यक्रम गर्भस्थ स्त्रियों के लिए रहेगा। पाठ्यक्रम 9 माह का होगा। इस अवधि में गर्भस्थ स्त्रियों को निर्धारित तपोपन केंद्र में रोज 3 घंटे के लिए आना होगा। एक तपोवन केंद्र में 15 से 25 महिलाओं को शिक्षा दी जाएगी। इन तीन घंटों में अच्छे संस्कारों की शिक्षा दी जाएगी। गुजरात विवि के कुलपति हर्षत भाई शाह ने दावा किया है इस पाठ्यक्रम के जरिए दंपत्ती जैसी संतान की चाहत रखेंगे, उन्हें वैसी संतान उन्हें प्राप्त होगी।


राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट तथा राष्ट्रीय प्रतिभा खोज छात्रवृत्ति
भोपाल। राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति तथा राष्ट्रीय प्रतिभा खोज चयन परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर से बढ़ाकर अब 18 सितंबर कर दी गई है। दोनों परीक्षा के आवेदन के लिए एम.पी. ऑनलाइन के कियोस्क पर विद्यार्थियों को नि:शुल्क आवेदन की सुविधा राज्य शासन द्वारा दी गई है। पूर्व निर्धारित अंतिम तिथि पर अनेक जिलों से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार कियोस्क पर विद्यार्थियों की भीड़ होने के कारण अंतिम तिथि में 3 दिवस की वृद्धि का निर्णय लिया गया है।
राज्य शिक्षा केन्द्र ने समस्त जिलों के कलेक्टर को आवेदन की अंतिम तिथि में वृद्धि संबंधी सूचना की जानकारी देते हुए परीक्षाओं के लिए प्राप्त आवेदनों की समीक्षा एवं अधिकाधिक संख्या में विद्यार्थियों को सम्मिलित करवाने का अनुरोध किया है। केन्द्र ने सभी कलेक्टर से अपेक्षा की है कि वे अपने स्तर पर उक्त परीक्षाओं के लिये आवेदन प्रक्रिया की समीक्षा करें।
उक्त परीक्षाओं के लिए आवेदन करने के लिए विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार का कोई शुल्क नहीं देना होगा। आवेदन-पत्र की प्रति एम.पी. ऑनलाइन के अधिकृत कियोस्क से नि:शुल्क प्राप्त होगी। स्कूल के प्रधानाचार्य द्वारा प्रमाणित प्रति के आधार पर विद्यार्थी कियोस्क के माध्मय से ऑनलाइन नि:शुल्क आवेदन कर सकेंगे।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति के तहत चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक प्रतिमाह 500 रुपये की छात्रवृत्ति प्राप्त होती है। परीक्षा के लिए शासकीय एवं अनुदान प्राप्त स्कूलों में वर्तमान में कक्षा 8 में अध्ययनरत् विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। वहीं राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा में चयनित विद्यार्थियों को उनके संपूर्ण विद्यार्थी काल के लिए छात्रवृत्ति दी जाती है। इसमें कक्षा 12वीं तक की शालेय शिक्षा के लिए 1250 रुपये प्रतिमाह एवं महाविद्यालयीन शिक्षा, पी.एच.डी. आदि तक 2000 रुपये प्रतिमाह की छात्रवृत्ति विद्यार्थी को प्राप्त होती है। राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा के लिए शासकीय अथवा अशासकीय किसी भी विद्यालय में कक्षा 10 में अध्ययनरत् विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं।


संपादकीय

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