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::मीडिया::

 

पी आर सी आई का १० वां ग्लोबल कम्युनिकेशन कॉनक्लेव कोलकत्ता में संपन्न : नो निगेटिव मंडे सहित दैिनक भास्कर को मिले 11 अवॉर्ड्स
Our Correspondent :22 January 2016
दैनिक भास्कर को पीआरसीआई (पब्लिकेशन रिलेशन काउंसिल ऑफ इंडिया) कोलैटरल्स अवॉर्ड्स में 10 अवॉर्ड प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा भास्कर को चाणक्य अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है। इस तरह कुल 11 अवार्ड्स हासिल करने पर दैनिक भास्कर चैंपियन ऑफ चैम्पियंस के रूप में द्वितीय स्थान पर रहा।
कोलकाता में आयोजित हुई पीआरसीआई की ग्लोबल कम्युनिकेशन कॉन्क्लेव के दौरान 'हॉल ऑफ फेम इन पीआर एंड कार्पोरेट कोलैटरल्स 2016' सेरेमनी में दैिनक भास्कर को ये पुरस्कार प्रदान किए गए।
पाठकों के प्रत्येक सप्ताह को पॉजिटिव शुरुआत देने वाले अभियान नो निगेटिव मंडे को विभिन्न कैटेगरी में तीन अवॉर्ड मिले हैं। इसके आलावा सालभर आयोिजत िकए जाने वाले सामाजिक सरोकार के विभिन्न अभियानों (सीएसआर) के लिए दो अवॉर्ड मिले। जबकि भास्कर की गृह पत्रिका संवाद को प्लेटिनम अवॉर्ड प्राप्त हुआ।
दैनिक भास्कर के नो निगेटिव मंडे और सामाजिक अभियानों कंप्यूटर एजुकेशन, तिलक होली, एक पेड़ एक जिंदगी, मिट्‌टी के गणेश, सार्थक दीपावली और अन्नदान आदि को पाठकों ने बेहद पसंद किया और भरपूर सराहना की है। पीआरसीआई कोलैटरल्स में मिले अवॉर्ड्स पाठकों की इसी सराहना का नतीजा हैं।
पब्लिक रिलेशन (पीआर) में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले विभिन्न क्षेत्रों के इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स को प्रत्येक वर्ष पीआरसीआई कोलैटरल्स अवॉर्ड्स प्रदान किए जाते हैं। जबकि चाणक्य अवॉर्ड उन लोगों या कंपनियों को प्रदान किया जाते हैं जिन्होंने विगत कुछ वर्षों में समाज एवं देश के प्रति अहम योगदान दिया है।

सोशल लीडरशिप कैटेगरी में चाणक्य अवॉर्ड प्राप्त हुआ है।
इन श्रेिणयों में िमले अवाॅर्ड

इिनशिएटिव कैटेगरी अवॉर्ड

नो निगेटिव मंडे आइडिया ऑफ द ईयर गोल्ड
नो निगेटिव मंडे कार्पोरेट एडवरटाइजिंग कैंपेन गोल्ड
नो निगेटिव मंडे सोशल मीडिया कैंपेन ऑफ द ईयर सिल्वर
संवाद हाउस जरनल प्लेटिनम

एनुअल रिपोर्ट एनुअल रिपोर्ट सिल्वर
कार्पोरेट ब्रोशर कार्पोरेट ब्रोशर ब्रोंज
डायरी-2016 डायरी-2016 स्मॉल गोल्ड
सीएसआर पब्लिक सर्विस कैंपेन सिल्वर
सीएसआर सीएसआर ब्रोंज
कार्पोरेट इवेंट बेमिसाल भोपाल ब्राॅन्ज


पत्रकार सुरक्षित होंगे तभी प्रेस की आजादी सुरक्षित रहेगी : डॉ. नंदकिशोर त्रिखा
Our Correspondent :26 November 2015
''प्रेस की आजादी सुरक्षित रखनी है तो पत्रकार सुरक्षित रहना चाहिए।'' यह बात गत 22 नवंबर को नई दिल्‍ली में आयोजित एक संगोष्‍ठी में नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्‍ट्स के पूर्व राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डॉ. नंदकिशोर त्रिखा ने कही। इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्‍ली जर्नलिस्‍ट्स एसोसिएशन ने किया था और विषय था- 'पत्रकार सुरक्षा अधिनियम और मीडिया आयोग की जरूरत।'अपने संबो‍धन में डॉ. त्रिखा ने पत्रकार और पत्रकारिता के गौरवपूर्ण इतिहास पर प्रकाश डाला।
इसके साथ ही उन्‍होंने मीडिया के वर्तमान परिदृश्‍य पर चिंता जताते हुए कहा कि आज जितनी मीडिया की दयनीय और पत्रकारों की असहाय स्थिति है, ऐसी पूर्व में नहीं रही। संपादक संस्‍था की साख गिरी है। पत्रकार आजादी खो चुका है और वहीं, मालिक मजबूत हो रहा है। उन्‍होंने चिंता प्रकट करते हुए कहा कि पत्रकारों पर जानलेवा हमले बढ़ते जा रहे हैं। यह पत्रकार ही नहीं, बल्कि समाज के लिए भी खतरे की घंटी है क्‍योंकि पत्रकार समाज के लिए काम करता है।
डॉ. त्रिखा ने तीसरे प्रेस आयोग के गठन पर बल देते हुए कहा कि 1952 में पहला प्रेस आयोग बना और आपातकाल के बाद दूसरा। तब से स्थिति काफी बदली है। प्रिंट व रेडियो के साथ-साथ इलेक्‍ट्रॉनिक और वेबमीडिया का विस्‍तार हुआ है। अब फिर से इन सभी मीडिया माध्‍यमों की स्थिति पर विचार करना होगा।
नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्‍ट्स के अध्‍यक्ष श्री रासबिहारी ने कहा कि आज समाज में पत्रकार सबसे शोषित है। पत्रकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं और जिस तरह से अखबारों और टीवी चैनलों में पत्रकारों की छंटनी हो रही है, उससे पत्रकारों के भविष्‍य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि पत्रकार सुरक्षा अधिनियम, मीडिया आयोग और मीडिया परिषद् की मांग को लेकर आगामी 7 दिसंबर को देशभर के पत्रकार संसद का घेराव करेंगे। प्रेस एसोसिएशन के सचिव श्री मनोज वर्मा ने कहा कि उत्‍तरप्रदेश, पं. बंगाल, दिल्‍ली जैसे अनेक राज्‍यों में पत्रकारों का शोषण और उत्‍पीड़न किया जा रहा है। यह दुर्भाग्‍यपूर्ण है। पत्रकार नहीं बचेगा तो लोकतंत्र नहीं बचेगा। आपातकाल में कोशिश की गई थी पत्रकारों को दबाने की। एनयूजे ने तब संघर्ष किया। हम लंबे समय से पत्रकार सुरक्षा अधिनियम की मांग कर रहे हैं। हम बहुत मांग कर चुके, अब आंदोलन ही रास्‍ता है।
दिल्‍ली जर्नलिस्‍ट्स एसोसिएशन के अध्‍यक्ष श्री अनिल पांडेय ने राष्‍ट्रीय एवं वैश्विक परिप्रेक्ष्‍य में पत्रकारों की स्थिति का अवलोकन करते हुए कहा कि आज पत्रकार अनेक तरह की चुनौतियां का सामना कर रहा है। उन पर जानलेवा हमले हो रहे हैं। बड़े पैमाने पर उनकी छंटनी हो रही है। इसलिए समग्र मीडिया का मूल्‍यांकन करने के लिए तीसरा प्रेस आयोग अतिशीघ्र बनना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन दिल्‍ली जर्नलिस्‍ट्स एसोसिएशन के कार्यकरिणी सदस्‍य श्री संजीव सिन्‍हा ने किया। इस कार्यक्रम में एनयूजे के पूर्व उपाध्‍यक्ष श्री सुभाष निगम, एनयूजे के कोषाध्‍यक्ष श्री दधिबल यादव, एनयूजे राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी सदस्‍य श्री मनोहर सिंह, डीजेए के कोषाध्‍यक्ष श्री राजेंद्र स्‍वामी, डीजेए कार्यकारिणी सदस्‍य श्रीमती सीमा किरण एवं सर्वश्री संजय सक्‍सेना, राजकमल चौधरी, सगीर अहमद, वरिष्‍ठ टीवी पत्रकार श्री उमेश चतुर्वेदी, योजना पत्रिका के संपादक श्री ऋतेश पाठक, यथावत पत्रिका के एसोसिएट संपादक श्री ब्रजेश झा, अंकुर विजयवर्गीय (हिंदुस्‍तान टाइम्‍स), उमाशंकर मिश्र (अमर उजाला), पंकज प्रसून (न्‍यूज नेशन), श्री कंत शरण (नेपालवन टीवी) सहित बड़ी संख्‍या में पत्रकारगण उपस्थित रहे।


हिंदी मीडिया के १०१ दिग्गज भेंट की
Our Correspondent :01 September 2015
श्री संजय द्विवेदी , अध्यक्ष, जनसंचार विभाग , माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय और सीनियर पत्रकार ने श्री शिवहर्ष सुहालका , प्रधान संपादक , मेट्रोमिरर डॉटकॉम और सेक्रेटरी जनरल , फॉरवर्ड इंडिया फोरम को अपनी पुस्तक १०१ हिंदी मीडिया के दिग्गज भेंट की ।श्री संजय द्विवेदी ने फॉरवर्ड इंडिया फोरम के उद्देश्यों के सराहना की एवं इससे जुड़ने हेतु सहमति भी दी ।


समाज की हकीकत बयाँ करने में फोटो पत्रकार की भूमिका महत्वपूर्ण
Our Correspondent :20 August 2015
भोपाल। मप्र के जनसंपर्क एवं ऊर्जा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि समाज की हकीकत बयाँ करने में फोटो पत्रकार की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। बिना फोटो के प्रभावी समाचार की कल्पना नहीं की जा सकती है। जनसंपर्क मंत्री श्री शुक्ल कर्मश्री संस्था के फोटो पत्रकार सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर प्रिन्ट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के 175 फोटोग्राफर एवं केमरामेन का सम्मान किया गया। सम्मान स्वरूप फोटो पत्रकारों को शॉल-श्रीफल भेंट किया गया।
जनसंपर्क मंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि फोटोग्राफर और केमरामेन रिस्क लेकर कार्य करते हैं। उनके द्वारा लिये गये श्रेष्ठ फोटो से समाचार-पत्रों का प्रभाव समाज पर ज्यादा असरदायक तरीके से पड़ता है। श्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार ने पहली बार श्रेष्ठ प्रेस फोटोग्राफर्स को सम्मानित करने के लिये राज्य-स्तरीय फोटो पत्रकारिता समारोह का आयोजन किया। जनसंपर्क विभाग द्वारा अगले वर्ष से आंचलिक स्तर पर श्रेष्ठ फोटोग्राफी करने वाले प्रेस फोटोग्राफर्स को भी सम्मानित किया जायेगा।
परिवहन मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रेस फोटोग्राफर के बगैर समाचार-पत्र की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने कर्मश्री संस्था की इस पहल की सराहना की। श्री सिंह ने विश्व फोटोग्राफी दिवस के मौके पर समस्त फोटोग्राफर्स को शुभकामनाएँ दीं।
कर्मश्री संस्था के अध्यक्ष और विधायक श्री रामेश्वर शर्मा ने कहा कि आज पूरा विश्व संचार, समाचार और पत्रकारों का लोहा मान रहा है। खबरों की दुनिया में कलमकारों के साथ-साथ समाचारों की प्रमाणिकता पर मोहर लगाने का काम फोटो पत्रकार करते हैं। फोटो पत्रकार हमेशा पर्दे के पीछे रहकर खबरों में रंग भरने का काम करते हैं। उनकी कर्मठता अनुकरणीय है।


रवीन्द्र जैन, अनिल माथुर को श्रीफल राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार

बांसवाडा (राजस्थान)। पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य और समर्पित योगदान के लिए देश में हिन्दी के जाने-माने पत्रकार व अग्निबाण भोपाल के संपादक रवीन्द्र जैन, प्रदीप जोशी, श्रीमती उपमिता वाजपेई, श्रीमती संगीता प्रणवेन्द्र, अनिल माथुर (जनसम्पर्क डायरेक्टर ) को प्रतिष्ठित श्रीफल पत्रकारिता पुरस्कार 2015 देने की घोषणा हुई है। यह पुरस्कार पूज्य मुनि श्री पूज्यसागर महाराज की प्रेरणा से धार्मिक श्रीफल परिवार ट्रस्ट द्वारा प्रति वर्ष प्रदान किया जाता है।
धार्मिक श्रीफल परिवार के पुरस्कार संयोजक भरत जैन इन्दौर ने पुरस्कारों की घोषणा करते हुए बताया कि इस बार श्री भट्टारक चारुकीर्ती श्रवणबेलागोला की स्मृति में श्रीफल जैन पत्रकारिता पुरस्कार अग्निबाण भोपाल के संपादक रवीन्द्र जैन को प्रदान किया जाएगा। उनके अलावा कर्पूर चंद्र कुलिश स्मृति पुरस्कार सूरत में राजस्थान पत्रिका के संपादक प्रदीप जोशी को, भगवान बाहुबली स्मृति पुरस्कार दैनिक भास्कर के नेशनल रूम में कार्यरत उपमिता वाजपेयी को, उल्लेखनीय पत्रकारिता पुरस्कार इंडिया न्यूज जयपुर की संवाददाता श्रीमती संगीता प्रणवेन्द्र को, आचार्य अभिनंदन सागर स्मृति पुरस्कार वरिष्ठ पत्रकार अनिल माथुर को दिया जाएगा। सम्मान समारोह 23 अगस्त को बांसवाड़ा राजस्थान में उपाध्याय श्री अनुभव सागर जी महाराज एवं मुनिश्री पूज्य सागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित किया जाएगा। पुरस्कार समारोह में सम्मानित होने वाले पत्रकारों को शॉल, स्मृति चिह्न, प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि उत्कृष्ट और समर्पित पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिष्ठित श्रीफल पत्रकारिता पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2009 में हुई थी। पूर्व में हिन्दी और अंग्रेजी के अनेक जाने-माने पत्रकार और फोटो पत्रकार यह सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। पुरस्कार का निर्णय पत्रकारिता के क्षेत्र में विशेष योगदान के आधार पर श्रीफल परिवार और वरिष्ठ पत्रकारों की टीम करती है।


मेरे जीते जी नहीं कराया काम तो जमाना तुम्हें कोसेगा

विदिशा। एक तरफ तो सरकार महापुरुषों की शौर्य गाथाएं नई पीढ़ी तक पहुंचाना चाहती है। इसके लिए तमाम प्रयास करने के दावे भी करती है, लेकिन जो इस काम को पूरा करने में तन-मन और धन लगाकर जुटे हुए है, उनकी सुध तक लेना उचित नहीं समझती। ऐसी ही विसंगति से दो-चार हो रहे हैं विदिशा के वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी रघुवीर चरण शर्मा। वे अपनी सम्मान निधि से अब तक 25 लाख रुपए राष्ट्र, समाज और शहीदों की याद को अमर करने के लिए दान कर चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता से कई काम अभी शुरू ही नहीं हो सके हैं।
स्वतंत्रता दिवस के पूर्व 'पत्रिका से शर्मा ने कहा कि अब मेरी उम्र 90 वर्ष हो गई। पता नहीं कब जिन्दगी की शाम हो जाए, लेकिन यह तय है कि मेरे जीते जी मेरी सम्मान निधि से कराए जाने वाले कार्यों को प्रशासन ने तवज्जो नहीं दी तो जमाना शासन-प्रशासन को कोसेगा। शर्मा के कहा,'मैंने डेढ़ लाख रुपए देकर विदिशा में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा स्थापित कराई। उसका अनावरण आज तक नहीं हो सका। छात्राओं की परेशानी देख गल्र्स कॉलेज में कैंटीन बनाने के लिए 2 लाख रुपए दिए, लेकिन वह भी शुरू नहीं हो सकी। तीन महापुरुषों की प्रतिमा के लिए 2-2 लाख रुपए का संकल्प लिया, लेकिन उसकी जगह भी प्रशासन सुनिश्चित नहीं कर सका।

मेरा नहीं, शहीदों का हो सम्मान

उन्होंने कहा कि हर स्वतंत्रता, गणतंत्र दिवस पर प्रशासन स्वतंत्रता सेनानी के रूप में मुझे शाल-श्रीफल और फूल माला पहनाता है। लेकिन मुझे इसकी जरूरत नहीं, अगर देश, समाज और शहीदों की याद में कुछ बेहतर हो सके तो सबसे बड़ा सम्मान वही होगा। उन्होंने कहा कि मैंने तो अपना दायित्व निभा दिया, अपनी सम्मान निधि को भी देश और समाज हित में दान कर दिया, लेकिन अब ये शासन-प्रशासन का दायित्व है कि वो उसे साकार कर पाता है या नहीं।

जमीन का टुकड़ा नहीं मिला

पीड़ा बताते हुए शर्मा ने कहा कि शहर की कला और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए हिन्दी भवन निर्माण कराने का मेरा सपना था। इसके लिए ट्रस्ट बनवाकर 10 लाख रुपए भी ट्रस्ट को दे दिए, लेकिन प्रशासन एक टुकड़ा जमीन भी अब तक नहीं ढूंढ सका। धन्य है शासन-प्रशासन जो सम्मान निधि में से दिए गए दान, उम्र और भावनाओं की भी कद्र नहीं करता।,


स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर स्वाधीनता संग्राम सेनानी ने अपनी अंतिम इंच्छा बताई

भोपाल -मध्य प्रदेश के बरिष्ठ स्वाधीनता संग्राम सेनानी श्री प्रताप सिंह [नन्हे राजा ] उम्र 97 बर्ष ने अपनी अंतिम इंच्छा गणेश शंकर विधार्थी प्रेस क्लब प्रांतीय अध्यक्ष संतोष गंगेले के समक्ष रखते हुए कहा की मैंने आजादी के लिए जो किया उसे दोहराना उचित नहीं है , लेकिन बर्तमान सरकार के मुखिया शिव राज सिंह चौहान हर तरफ ध्यान दे रहे है , आजादी के सैनानिओ के प्रति सम्मान कर है , क्यों की ऐसा लगता है की उनके मंत्री जिस जिला में जाते अपनी पार्टी के नेताओ के घर जाते है , मुझे दुँख है की श्री नरोत्तम मिश्रा जी नौगाव अनेक वार हो जाने के वाद कभी भी उन्होंने मेरी सुध नहीं ली। मुख्य मंत्री जी स्वयं नौगाव हो जाते है , कभी उन्होंने यह तय नहीं किया की वह अपने मंच पर स्वाधीनता संग्राम सेनानी को स्थान दे , उनकी सुध ले।
इस कारण उन्होंने एक पत्र सरकार को जारी किया जिसमे उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा जाहिर कर दी की उनका जीवन अंतिम दौर में है यदि में अपने निकट शिव राज सिंह को पा जाता तो मुझे ख़ुशी होती। यह पत्र आजादी की बर्ष गाँठ के एक दिन पूर्व जारी हुआ है।


'स्वामित्व ही संदेश है'- मुकेश कुमार

प्रख्यात जनसंचार शास्त्री मार्शल मेक्लुहान का कथन है कि 'माध्यम ही संदेश है'। वर्तमान भारतीय मीडिया की स्थिति को देखकर आज यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि 'स्वामित्व ही संदेश है'। आज समाचारपत्र, टेलीविजन एवं अन्य मीडिया संस्थानों के मालिकों द्वारा तय किए गए विचार ही मीडिया में दिखाई देते हैं। यह विचार आज माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में वरिष्ठ पत्रकार श्री मुकेश कुमार ने व्यक्त किए।
आज विश्वविद्यालय परिसर में श्री मुकेश कुमार की नई पुस्तक 'टी.आर.पी: टी.वी. न्यूज और बाजार' पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस प्रसंग पर बोलते हुए श्री मुकेश कुमार ने कहा कि टी.आर.पी. की वास्तविकता एवं टी.आर.पी. पर भारतीय मीडिया जगत का विचार जानने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का सर्वेक्षण किया गया। तमाम कमियों एवं आलोचनाओं के बावजूद टी.आर.पी. के आकड़ों से ही आज भारतीय टेलीविजन मीडिया संचालित हो रहा है। एक ओर मीडिया संस्थाओं को मीडिया मालिकों के हितों को ध्यान में रखना है वहीं दूसरी ओर टी.आर.पी. के आकड़ों के अनुसार अपनी विषय सामग्री बनानी है। ऐसे दौर में टेलीविजन मीडिया में दर्शक हाशिए पर जा रहा है। लोग अपने-अपने हिसाब से टी.आर.पी. का उपयोग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मीडिया के संचालन के लिए पूँजी की आवश्यकता होती है और यह बाजार से प्राप्त होती है। इसीलिए आज की मीडिया को बाजार संचालित करता है। टी.आर.पी. हमें सिर्फ यह नहीं बताता की कौन-सा चैनल, कौन-सा कार्यक्रम नंबर वन है, बल्कि वह एक मार्केट पर्शेप्सन भी देता है। आज संपूर्ण टेलीविजन जगत में समाचार चैनलों का केवल 7 प्रतिशत शेयर है और इसमें भी अंग्रेजी न्यूज चैनल का केवल 0.3 प्रतिशत शेयर है।
इस परिचर्चा में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भी सहभगिता की। विश्वविद्यालय के विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग एवं संचार शोध के विद्यार्थियों ने परिचर्चा में हिस्सा लिया। परिचर्चा में ए.बी.पी. न्यूज के ब्यूरो चीफ वरिष्ठ पत्रकार श्री बृजेश राजपूत भी उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त जनसंपर्क विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पवित्र श्रीवास्तव, संचार शोध विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका वर्मा एवं अन्य शिक्षक उपस्थित थे।


पूर्व राष्ट्रपति स्व ० श्री ए पी जे कलाम साहब की याद में 9 अगस्त 2015 से प्रदेश के प्रत्येक जिला में उनकी स्मृति में बृक्षा रोपण किये जायेगे -गणेश शंकर विधार्थी प्रेस क्लब मध्य प्रदेश का अभूतपूर्व निर्णय -संतोष गंगेले

भोपाल -गणेश शंकर विधार्थी प्रेस क्लब मध्य प्रदेश प्रांतीय अध्यक्ष संतोष गंगेले ने संगठन की ओर से एक अभूतपूर्व निर्णय लिया है की भारत के पूर्व राष्ट्रपति स्व ० श्री ए पी जे कलाम साहब की याद में 9 अगस्त 2015 से प्रदेश के प्रत्येक जिला में उनकी स्मृति में बृक्षा रोपण किये जायेगे। चूँकि श्री कलाम साहब भारतीय संस्कृति -संस्कारो के साथ साथ एक विज्ञानिक ,देश के उच्च पद पर रहे साथ ही उन्होंने अपने जीवन में समरसता ,शांति सदभाव को प्रमुख्य स्थान दिया। वह मिसाल मैन के साथ साथ मानवता की मिशाल थे। जो बृक्ष लगाये जायेगे भारतीय आजादी के इतिहास में 9 अगस्त 1942 को प्रमुख स्थान दिया जाता है ,आज के दिन भारत छोडो आंदोलन के लिए तिरंगा झंडा आजादी के सपूतो ने उठाया था । . इस दिन को हम आजादी का पहिला दिन ही मानते है।
गणेश शंकर विधार्थी प्रेस क्लब मध्य प्रदेश का अभूतपूर्व निर्णय का स्वागत संगठन के कार्यवाहक अध्यक्ष श्री कीर्ति राणा उपाध्यक्ष श्री सोनू चौवे ,श्री गणेश सोनी ,महा सचिव श्री चंदा बारगल सचिव डॉ श्री बी एल गुर्जर ने किया है।


आंचलिक फोटोग्राफी पत्रकारिता पुरस्कार भी स्थापित होगा

जनसंपर्क एवं ऊर्जा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ कहे जाने वाले मीडिया की ताकत को समाज ने मान्यता दी है। इसमें फोटोग्राफर्स का योगदान अद्वितीय है। जनसंपर्क मंत्री ने कहा कि इस वर्ष से राज्य-स्तर के साथ-साथ आंचलिक फोटो पत्रकारिता को भी पुरस्कृत किया जायेगा। जनसंपर्क मंत्री श्री शुक्ल आज भोपाल में स्व. महेन्द्र चौधरी स्मृति राज्य-स्तरीय फोटो पत्रकारिता सम्मान समारोह में बोल रहे थे। श्री शुक्ल ने वर्ष 2008 से 2014 के चयनित 7 प्रेस फोटोग्राफर को सम्मानित किया। जनसंपर्क मंत्री ने इस मौके पर पत्रकारों की सुरक्षा के लिये स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा योजना 15 अगस्त, 2015 से लागू किये जाने की घोषणा की। जनसंपर्क मंत्री श्री शुक्ल ने स्व. महेन्द्र चौधरी के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके पुत्र श्री संजीव चौधरी का सम्मान किया।
जनसंपर्क मंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि फोटोग्राफर पत्रकारिता जगत के ऐसे महत्वपूर्ण हिस्से हैं, जिनके बिना समाचार अधूरा रहता है। उन्होंने कहा कि अनेक बार ऐसे मौके आते हैं, जब प्रेस फोटोग्राफर की तस्वीर हकीकत को ज्यादा अच्छे से बयान करती है। मध्यप्रदेश के विकास एवं प्राकृतिक सौंदर्य की चर्चा करते हुए श्री शुक्ल ने कहा कि इससे प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय-स्तर पर पहचान मिली है। उन्होंने फोटोग्राफर्स से मध्यप्रदेश के विकास और इसकी खूबियों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलवाने में सहयोग का आग्रह किया। श्री शुक्ल ने बताया कि हाल ही के वर्षों में कृषि, बिजली, अधोसंरचना के क्षेत्र में तेजी से विकास एवं सामाजिक योजनाओं से प्रदेश को अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय-स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। उन्होंने मीडिया से सकारात्मक पत्रकारिता को प्रोत्साहित करने का आग्रह भी किया।
प्रमुख सचिव जनसंपर्क विभाग श्री एस.के. मिश्रा ने कहा कि स्व. महेन्द्र चौधरी ने जिस सादगी के साथ बेहतरीन फोटोग्राफी की है, वह नौजवान फोटोग्राफर्स के लिये प्रेरणादायी रहेगी। उन्होंने फोटोग्राफी के इतिहास एवं इस क्षेत्र में हो रहे विकास का उल्लेख किया। प्रमुख सचिव ने कहा कि वर्ष 2015 से अब संभागवार उत्कृष्ट प्रेस फोटोग्राफर्स को सम्मानित किया जायेगा

पुरस्कृत फोटोग्राफर

जनसंपर्क मंत्री श्री शुक्ल ने वर्ष 2008 में श्री अखिल हार्डिया, वर्ष 2009 में श्री राजेश मालवीय, वर्ष 2010 में श्री संदीप जड़िया, वर्ष 2011 में श्री ए.एम. फारुखी, वर्ष 2012 में श्री प्रवीण वाजपेयी, वर्ष 2013 में श्री प्रकाश हतवलने, वर्ष 2014 में श्री रवि उपाध्याय को स्व. महेन्द्र चौधरी स्मृति राज्य-स्तरीय फोटो पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित किया। सम्मान स्वरूप एक लाख 51 हजार, प्रशस्ति-पत्र, शॉल-श्रीफल भेंट किया गया।
जनसंपर्क मंत्री श्री शुक्ल ने इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित पद्मश्री श्री वामन ठाकरे, वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री श्री विजयदत्त श्रीधर, श्री महेश श्रीवास्तव, इंदौर के छायाकार श्री भालू मोढ़े, जूरी के सदस्य सर्वश्री प्रकाश कुलकर्णी, उमेश ठाकुर, आर.सी. साहू, सतीश टेवरे का सम्मान किया। कार्यक्रम को पद्मश्री वामन ठाकरे ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विकास की इस दौड़ में सामाजिक संवेदनाओं के भाव को फोटोग्राफर को याद रखना चाहिये। जनसंपर्क आयुक्त श्री अनुपम राजन ने आभार व्यक्त किया।


स्वस्थ एवं सुखी समाज के लिये मीडिया सकारात्मकता को प्राथमिकता द

ऊर्जा एवं जनसम्पर्क मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि भारत के प्राचीनकाल के वैभव को लौटाने एवं स्वस्थ एवं सुखी समाज के निर्माण के लिये मीडिया को सकारात्मकता को प्राथमिकता देना होगी। मीडिया समाज को तेजी से प्रभावित करता है। इस वजह से मीडिया की समाज के प्रति ज्यादा जिम्मेदारी हो जाती है। ऊर्जा मंत्री श्री शुक्ल आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय मीडिया महा-सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन का विषय 'स्वस्थ एवं सुखी समाज के निर्माण में मीडिया की भूमिका'' था।
जनसम्पर्क मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर दुनिया के अनेक देश ने भारत की प्राचीन परम्परा योग को अपनाकर भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की चौथे स्तंभ के रूप में मान्यता होने की चर्चा करते हुए श्री शुक्ल ने कहा कि समाज में मीडिया सजग प्रहरी की भूमिका का निर्वहन करता है। सृजनशीलता एवं सकारात्मक समाचारों से समाज पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा और देश में स्वस्थ एवं सुखी समाज का निर्माण होगा। जनसम्पर्क मंत्री ने कहा कि हाल ही के वर्षों में मध्यप्रदेश में कृषि, बिजली, स्वास्थ्य, सड़क एवं अन्य अधोसंरचना कार्यों में राज्य सरकार ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इससे मध्यप्रदेश की सारे देश में तेजी से उभरते राज्य के रूप में पहचान बनी है। उन्होंने दुष्प्रचार करने वालों से मुकाबला करने के लिये मीडिया से समाज में सही वस्तु-स्थिति पहुँचाने का भी आग्रह किया।
महा-सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित ब्रॉडकास्टर एडीटर एसोसिएशन, नई दिल्ली के सचिव एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री एन.के. सिंह ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं में प्रतिपक्ष और मीडिया की अलग भूमिका रही है। मीडिया सत्ता को उनकी कमजोरियों से वाकिफ कराने का सतत कार्य करता है। उन्होंने कहा कि आने वाले 5 वर्ष में भारत का मीडिया और मजबूत होगा तथा दुनियाभर का मीडिया भारत के मीडिया का अनुसरण करेगा। श्री एन.के. सिंह ने कहा कि भारत का मीडिया सेल्फ रेगुलेट होता है, जबकि यूरोप में मीडिया कांटेक्ट बेस है। राजयोगिनी बी.के. अवधेश बहनजी ने कहा कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था पिछले 74 वर्ष से आदर्श समाज के निर्माण के लिये प्रयत्नशील है। संस्था के इस उद्देश्य को पूरा करने में मीडिया अहम रोल अदा कर सकती है।
कार्यक्रम को नेशनल को-ऑर्डिनेटर मीडिया विंग सुशांत भाईजी, वरिष्ठ पत्रकार प्रो. कमल दीक्षित, प्रोफेसर सच्चिदानंद जोशी, पत्रकार श्री विनोद नागर और श्री बी.के. कोमल ने भी संबोधित किया। सम्मेलन के आयोजन एवं उद्देश्य के बारे में बहन रीना ने जानकारी दी।


जैव प्रौद्योगिकी के बारे में लोगों को शिक्षित करना मीडिया की जिम्मेदारी - अनुराग श्रीवास्तव

पत्रकारिता विश्वविद्यालय में विज्ञान सम्प्रेषण एवं जैविक सुरक्षा पर चल रही कार्यशाला का समापन
भोपाल, 15 जुलाई । जनसाधारण को जैव प्रौद्योगिकी के बारे में शिक्षित करना मीडिया की जिम्मेदारी है। यह विचार पत्रकारिता विश्वविद्यालय में चल रही दो दिवसीय विज्ञान सम्प्रेषण एवं जैविक सुरक्षा विषयक मीडिया कार्यशाला के समापन सत्र में मुख्य वन संरक्षक श्री अनुराग श्रीवास्तव ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जैव अभियांत्रिकी को लेकर जो गलत अवधारणाएँ प्रचलित हो रही हैं उन्हें पत्रकारिता के माध्यम से दूर किया जा सकता है। जिन रासायनिकखादों को कृषि में उपयोग करने के लिए रोका गया है वे मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक हैं। आज जैविक सुरक्षा दुनिया के सामने बहुत बड़ा मुद्दा है। विज्ञान के विषयों पर कार्य करने वाले संवाददाताओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही वैज्ञानिक नवाचारों को विज्ञान रिपोर्टिंग में अधिकाधिक शामिल करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर बोलते हुए पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि हमारे सामने जैविक सुरक्षा से जुड़े अनेक खतरे हैं जिनके विषय में जानकारी दिये जाने की आवश्यकता है और इसके विषय में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जैविक सुरक्षा के ऊपर होने वाली इस तरह की कार्यशालाएँ जैविक सुरक्षा के खतरों एवं उससे जुड़ी जानकारी के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। विज्ञान सम्बन्धी रिपोर्टिंग के द्वारा लोगों को जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और विज्ञान से जुड़े नवाचारों के बारे में जानकारी मिलती है। इस तरह की कार्यशालाएँ सही मायनों में जैव प्रौद्योगिकी और जैविक सुरक्षा जैसे विषयों में जानकारी देने के लिए उपयोगी हैं। कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। पत्रकारिता विश्वविद्यालय में आयोजित यह कार्यशाला भारतीय जनसंचार संस्थान के सहयोग से वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से की गई। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम तथा वैश्विक पर्यावरण समूह इसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोगी थे। इस कार्यशाला में भारतीय जनसंचार संस्थान की ओर से डॉ. गीता बोमजाई, डॉ. आनंद प्रधान तथा डॉ. रईस अलताफ ने प्रतिभागिता की। पत्रकारिता विश्वविद्यालय की न्यू मीडिया विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. पी.शशिकला ने इस कार्यशाला का संयोजन किया।


किसानों के बीच नई कृषि तकनीक के बारे जागरूकता बढ़ाना और उनमें वैज्ञानिक सोच पैदा करना
समय की मांगः श्री रंजन मुखर्जी, अपर महानिदेशक, प्रसार भारती


प्रसार भारती के अपर महानिदशक श्री रंजन मुखर्जी ने कहा है कि किसानों के बीच नई कृषि तकनीक के बारे जागरूकता बढ़ाना और उनमें वैज्ञानिक सोच पैदा करना समय की मांग है। मंगलवार को माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में कम्युनिकेटिंग साइंस एंड बायोसेफ्टी पर आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रसार भारती के अपर महानिदशक श्री रंजन मुखर्जी ने कहा कि कृषि संबंधित शोध को प्रयोगशालाओं से किसानों तक पहुंचाने की जरूरत है ताकि किसान इससे लाभान्वित हो सकें और कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी हो सके। दूरदर्शन के किसान चैनल का उद्देश्य कृषि विज्ञान की प्रासंगिक तकनीकों से किसानों को परिचित करना और कृषि उपज में बढ़ोतरी कराना है। उन्होंने कहा कि किसान चैनल विज्ञान रिपोर्टिंग में एक नया पत्रकारीय मानदंड स्थापित करेगा।
अपने उद्घाटन भाषण में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति प्रो. बी.के. कुठियाला ने कहा कि लोगों के बीच विज्ञान के संचार में मीडिया की भूमिका अहम है। वैज्ञानिक नवाचार और शोध समाज के कल्याण के लिए होने चाहिए। रेडियो एक लोकप्रिय जनमाध्यम है जिसने संकर किस्म के चावल रेडियो राइस को लोकप्रिय बनाया। मीडिया को हमेशा सच की तलाश करनी चाहिए और तथ्यों के आधार पर वस्तुपरक रिपोर्टिंग को तरजीह देनी चाहिए।
इस मौके पर बोलते हुए पत्र सूचना कार्यालय के अपर महानिदेशक डॉ. पी.जे. सुधाकर ने कहा सरकार ने जैव सुरक्षा के मुद्दे पर कई कदम उठाए हैं। बायोसेफ्टी रेग्युलेटरी सिस्टम पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के मानकों के तहत काम करता है।
भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली की प्रोफेसर गीता बामजई ने कार्यशाला के उद्देश्यों के बारे में बताया। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल की न्यू मीडिया टेक्नॉलजी की हेड डॉ. पी. शशिकला ने कार्यशाला में हिस्सा लेने आए लोगों का स्वागत किया। भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली एसोसिएट प्रो. श्री आनंद प्रधान धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), नई दिल्ली के द्वारा पत्र सूचना कार्यालय, भोपाल के सहयोग से किया गया है। यह कार्यशाला संयुक्त राष्ट्र के कम्युनिकेटिंग साइंस एंड बायोसेफ्टी के क्षेत्र में कैपिसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम के तहत आयोजित की जा रही है। इस कार्यशाला का उद्देश्य कृषि बायोटेक्नॉलजी और जैव सुरक्षा के लिए जरूरी संचार के क्षेत्र में आ रही चुनौतियों से मीडियाकर्मियों को परिचित कराना है और उन्हें इन मुद्दों के प्रति संवेदनशील बनाना है।
माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में कम्युनिकेटिंग साइंस एंड बायोसेफ्टी पर आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रसार भारती के अपर महानिदशक श्री रंजन मुखर्जी।


पत्रकार संदीप कोठारी की हत्या के विरोध में धरना
Our Correspondent :26 June 2015
भोपाल मध्यप्रदेष मीडिया संघ भोपाल ने बालाघाट के शहीद पत्रकार संदीप कोठारी को जिंदा जलाने के विरोध में बोर्ड आफिस चैराहा भोपाल में डाॅ. भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा के स्थल पर प्रातः 12 बजे से 3 बजे तक धरना दिया गया। शहीद पत्रकार संदीप कोठारी के फोटो पर भोपाल के पत्रकारों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
धरना स्थल पर नायब तहसीलदार, तहसीलदार, एडीएम ने पहंुचकर धरना समाप्त करने के लिए एसडीएम ने सभी पत्रकारों को साथ लेकर भोपाल कलेक्टर निषांत बरबडे को ज्ञापन भी सौंपा। कलेक्टर निषंात बरबडे ने मीडिया संघ को आष्वस्त कराया कि आज ही मेमोरेंडम बनाकर मा. मुख्यमंत्री जी तक पहंुचा दी जायेगी। मध्यप्रदेष मीडिया संघ की प्रमुख मांगे जो मुख्यमंत्री जी से की -
1. शहीद पत्रकार संदीप कोठारी को 30 लाख आर्थिक सहायता दी जाए।
2. शहीद पत्रकार संदीप कोठारी के परिवार के सदस्य को नौकरी दी जाए।
3. शहीद पत्रकार संदीप कोठारी के परिवार की सुरक्षा की जाए।
4. शहीद पत्रकार संदीप कोठारी की हत्या करने वाले 7 अपराधियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाए।
5. मध्यप्रदेष में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाया जाए।


प्रधानमंत्री के नाम दिया कलेक्टर को दिया ज्ञापन
Our Correspondent :27 May 2015
भोपाल मध्यप्रदेश मीडिया संघ जिला अशोकनगर ने जनसम्पर्क संचालानलय भोपाल में पत्रकारों के हितों पर हो रहे कुठाराघात को लेकर कलेक्टर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम एक ज्ञापन देते हुए सीबीआई जांच कराने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया है कि मध्यप्रदेश जनसम्पर्क संचालनालय एवं म.प्र.माध्यम, मध्यप्रदेश में 1 अप्रेल 2014 से 31 मार्च 2015 तक के बजट राशि, जिसमें 1 लाख से ऊपर की राशि के विज्ञापन, क्षेत्रीय प्रचार, फीचर सेवा, पत्रकार सत्कार, एन.जी.ओ, को दिए गए। वर्क आर्डर एंव जिला, राज्य स्तरीय अधिमान्यतायें की सी.बी.आई जांच के आदेश प्रदान कराने का कष्ट मध्यप्रदेश शासन के जनसम्पर्क संचालनालय एवं म.प्र.माध्यम ने विगत 10 वर्षों से करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार किया है एवं अपात्र लोगों की अधिमान्यतायें की हैं। उक्त विभाग के द्वारा नेताओं व विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के परिवार में बेटा-बेटी, पति-पत्नि को लाखों रुपये के नियम विरुद्ध विज्ञापन दिये हैं। जनसम्पर्क संचलानालय, म.प्र.माध्यम में वर्षों से अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं हुए हैं। जनसम्पर्क संचालानलय एवं म.प्र.माध्यम में अधिकारियों, कर्मचारियों के फोर व्हीलर अटैच हैं। म.प्र. माध्यम में सूचना का अधिकार अधिनियम से बाहर रखा गया है, पूरे मामले की सीबीआई जांच की जाए। ज्ञापन देने वालों में मीडिया संघ के जिला अध्यक्ष देवेन्द्र ताम्रकार, महासचिव नीरज शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र शर्मा, पत्रकार सुनील जैन कलाकार, शरद ब्यास, राजेन्द्र रजक पत्रकार, अजय शर्मा, विवेक उपाध्याय, प्रेम सड़ाना, अखिलेश श्रीवास्तव आदि पत्रकार उपस्थित थे।


श्री अनिल माथुर जनसम्पर्क संचालक बने
Our Correspondent :08 May 2015
मध्यप्रदेश जनसम्पर्क विभाग के अपर संचालक श्री अनिल माथुर को संचालक जनसम्पर्क बनाया गया है। नवभारत से पत्रकारिता में केरियर शुरू करने वाले श्री अनिल माथुर एक कर्मठ और ईमानदार जनसम्पर्क अधिकारी माने जाते है। विभिन्न मीडिया संस्थानों और पत्रकारों ने श्री अनिल माथुर को बधाई दी है। मेट्रोमिरर डॉट कॉम के प्रधान संपादक श्री शिवहर्ष सुहालका ने बधाई सन्देश भेजकर उन्हें प्रमुख प्राथमिकताओं के बारे में पूछा है और आशा व्यक्त की है कि जनसम्पर्क विभाग वापस खोयी इमेज को प्राप्त करेगा फॉरवर्ड इंडिया फोरम के चेयरमैन और जागरण लेकसिटी के वाईस चांसलर श्री अनूप स्वरूप ने बधाई देते हुए कहा कि श्री माथुर से मीडिया और पत्रकारों को बहुत आशाएें हैं।


दैनिक एल. एन स्टार का शुभारम्भ
एल. एन. सी. टी समूह द्वारा प्रकाशित दैनिक एल. एन स्टार का आज अक्षय तृतीया के दिन शुभारम्भ किया गया । इस अवसर पर प्रधान संपादक श्री सुरेश चौकसे , अंबरीश चौकसे , पी. आर. एस. आई के चेयरमैन संजय सीठा, मेट्रोमिरर डॉट कॉम के प्रधान संपादक शिवहर्ष सुहालका , संजीव गुप्ता -सेक्रेटरी पी. आर. एस. आई विष्णु खन्ना , पुष्पेन्द्र पाल सिंह , रवि खरे ने प्रथम अंक का विमोचन किया। श्री सुरेश चौकसे ने कहा कि हम ने सरोकार कि पत्रकारिता का संकल्प लिया है।


राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस आयोजित
राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के अवसर पर पब्लिक रिलेशन सोसायटी

भोपाल द्वारा ‘सबका साथ सबका विकास’ विषय पर एक दिवसीय गोष्टी का आयोजन किया। जिसका शुभारंभ वरिष्ठ समाजसेवी श्री सुरेश चौकसे द्वारा किया गया। इस अवसर पर माखनलाल पत्रकारिता वि.वि. के पत्रकारिता विभाग के प्रमुख पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने सी.एस.आर. माॅडल की सफलता हेतु जनसंपर्क रणनीति को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कारपोरेट जगत को वंचित वर्ग से सीधे जोड़कर समाज का विकास सुनिश्चित करना होगा । जनसम्पर्क विभाग के पूर्व अपरसंचालक प्रकाश साकल्ले ने समाज के सबसे कमजोर वर्ग को ध्यान में रखकर शासकीय योजनओं के क्रिन्यान्वयन पर फोकस किया।
पब्लिक रिलेशन सोसायटी के सचिव डाॅ. संजीव गुप्ता ने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति, वेदों तथा प्रकृति में भी सबको साथ लेकर ही विकास की कल्पना साकार की गई है। विज्ञान में इको सिस्टम भी इसी अवधारणा पर कार्य करता है। दीनदयाल उपाध्याय जी की अंतयोदय की अवधारणा भी समाज के अंतिम छोर के वंचित व्यक्ति के कल्याण एवं सहयोग के साथ ही संपूर्ण समाज के विकास को देखता है। अध्यक्ष संजय सीठा ने नेशनल चेप्टर की भावना अनुरूप ‘प्रभावी सी.एस.आर. के लिए बेहतर जनसंपर्क’ की रणनीति की सम्पूर्ण समाज के विकास के लिए आवश्यक बताया एवं कहा कि सी.एस.आर. के निमित्त पन्द्रह हजार करोड़ की राशि का सही उपयोग समाज विकास में होना चाहिए।
चेप्टर के कोषाध्क्षय मनोज द्विवेदी ने कहा कि कार्पोरेट सोशल रिस्पोसबिलिटी को सिर्फ मंदिर एवं ट्रस्ट तक सीमित न रखकर समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना होगा । पत्रकारिता वि.वि. के प्रबंधन विभाग के अध्यक्ष डाॅ.अविनाश बाजपेयी ने कहा कि कार्पोरेट क्षेत्र आजकल सामाजिक उत्तरदायित्वों के प्रति लगातार संवेदनशीलता का प्रदर्शन कर रहा है। डाॅ. पवित्र श्रीवास्तव ने कहा कि सबका साथ लेकर ही सम्पूर्ण समाज का विकास एवं जागरूकता के लिए बेहतर जनसंपर्क किया जा सकता है। नेशनल चेप्टर के वरिष्ठ प्रतिनिधि विष्णु खन्ना ने सी.एस.आर. माॅडल को देश के हित में सही तरीकों से लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कार्पोरेट जगत अगर ठान ले तो समाज का वंचित वर्ग, समाज विकास में महती भूमिका का निर्वहन कर सकता है। इस अवसर पर महेंद्र सिंह पवार, शिव हर्ष सुहालका, राकेश शर्मा, विशेष सोनी, विनोद मंडलोई सहित गणमान्य लोग उपस्थित थे ।


भोपाल में नया पत्रकार भवन बनाने का मार्ग प्रशस्त
लीज निरस्त होने से पत्रकारों ने पुराना भवन सरकार को सौंपा
-आलोक सिंघई

Our Correspondent :19 March 2015
भोपाल,18 मार्च 2015। राजधानी भोपाल के पत्रकारों ने सरकार को प्रदेश में स्वस्थ संवाद का नया मंच बनाने का अवसर प्रदान कर दिया है। इस फैसले में पत्रकारों ने मालवीय नगर स्थित पत्रकार भवन सरकार को सौंप दिया है ताकि वह इस भवन को गिराकर दस मंजिला सर्वसुविधा युक्त आधुनिक भवन बनाने का काम आरंभ कर सके। आज साधारण सभा की बैठक में पत्रकार भवन समिति के सदस्य पत्रकारों ने विधिवत प्रस्ताव पारित करके भवन का स्वामित्व सरकार को सौंपने का फैसला लिया है। प्रशासन की ओर से टीटीनगर एसडीएम ने भवन का कब्जा विधिवत प्राप्त कर लिया है। इसके साथ ही भवन पर अवैध कब्जे के खिलाफ बरसों से चल रही पत्रकारों की मुहिम ने अपना सुखांत लक्ष्य पूरा कर लिया है। अब सरकार इस भवन को डाइनामाईट लगाकर गिराएगी और परिसर से समीप स्थित झुग्गियां, किचिन गार्डन के रूप में जुड़े मैदान और पत्रकार भवन को मिलाकर लगभग तीन हजार वर्गमीटर क्षेत्र में नए अत्याधुनिक भवन का निर्माण करेगी।
भोपाल के जिला दंडाधिकारी निशांत बरवड़े ने विगत 2 फरवरी को पारित प्रकरण क्रमांक 01। अ-20(4)। 13-14 में पत्रकार भवन की लीज निरस्त करने का आदेश दिया था जिसके बाद भोपाल के पत्रकारों ने नवनिर्माण के लिए ये भवन सरकार को सौंपने का फैसला लिया है। पत्रकारों के पास अब तक केवल 27007 वर्गफीट जमीन का पट्टा था जो नए भवन के साथ बढक़र लगभग चार गुना हो जाएगा। कलेक्टर ने यह फैसला लीजधारक वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन, भोपाल की ओर से शर्तों के उल्लंघन किए जाने के बाद लिया है।अपने निर्णय में जिला दंडाधिकारी ने कहा है कि वर्ष 1969 में वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन भोपाल को मालवीय नगर स्थित प्लाट नंबर 01 शीट नंबर 21का 27007 वर्गफीट भूमि का पट्टा सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां संचालित करने के उद्देश्य से प्रदान किया गया था। संस्था ने इस भूखंड का उपयोग विवाह और अन्य गैर पत्रकारिता गतिविधियों के लिए करना शुरु कर दिया। इस पट्टे की लीज वर्ष 1999 में समाप्त हो चुकी थी जिसका नवीनीकरण भी नहीं कराया गया।
पत्रकार भवन को आपराधिक और व्यावसायिक गतिविधियों का अड्डा बनाए जाने की शिकायतें मिलने के बाद पत्रकार भवन समिति को मप्र भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 182 के अंतर्गत कारण बताओ नोटिस दिया गया था कि लीज शर्तों का उल्लंघन करने के कारण क्यों ने भवन को राजसात करके पुन: प्रवेश की कार्रवाई की जाए। वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन की ओर से अवधेश भार्गव ने स्वीकार किया कि लीज डीड की शर्तों का उल्लंघन तो किया ही जा रहा है साथ में भवन का उपयोग गैर पत्रकारिता गतिविधियों के लिए भी किया जा रहा है। उन्होंने आयुक्त जनसंपर्क संचालनालय को भी पत्र लिखकर आबंटित भूमि सरकार को लौटाने का अनुरोध किया। पत्रकार भवन समिति भोपाल के अध्यक्ष एन.पी. अग्रवाल ने भी आयुक्त जनसंपर्क संचालनालय को को पत्र भेजकर बताया कि समिति ने 30.11.2014 को हुई बैठक में इस भूखंड पर समाचार पत्रों और पत्रकारों के हित में बहुमंजिला इमारत बनाए जाने का निर्णय लिया है। कलेक्टर के समक्ष सुनवाई के दौरान बाद में पंजीकृत कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने आपत्ति भी दर्ज कराई जिसके जवाब में अनावेदक अवधेश भार्गव ने बताया कि आपत्ति करने वाले लोग मप्र श्रमजीवी पत्रकार संघ के हैं जिसका पंजीयन वर्ष 1992 में हुआ था। अन्य दावेदार इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट का पंजीयन भी वर्ष 1974 में हुआ था। जाहिर है कि बाद में अस्तित्व में आईं इन संस्थाओं का पत्रकार भवन से कोई लेना देना नहीं है। पत्रकार भवन पर अवैध कब्जा जमाने वालों का तर्क था कि लीज डीड में समयावधि नहीं लिखी है इसलिए उसे तीस साल में नवीनीकरण कराए जाने की जरूरत नहीं है। इस पर जिला दंडाधिकारी ने कहा कि वर्ष 2002 तक जो लीज जमा कराई जा रही थी वह लीज डीड की आम शर्तों के अनुसार थी जाहिर है कि पट्टे के आबंटन की सामान्य प्रक्रिया इस प्रकरण में भी लागू होगी।
भू राजस्व संहिता की धारा 182(2) में साफ लिखा है कि सरकारी पट्टेदार को उसकी भूमि से राजस्व अधिकारी के आदेश द्वारा निम्नलिखित आधारों में से किसी एक या अधिक आधारों पर बेदखल किया जा सकेगा। अर्थात-(एक) यह कि उसने लगान का उस तारीख से जिनको कि वह शोध्य हो गया था , तीन मास की कालावधि तक भुगतान नहीं किया गया है। या (दो) यह कि उसने एसी भूमि का उपयोग उन प्रयोजनों से जिनके लिए वह प्रदान की गई थी, भिन्न प्रयोजनों के लिए किया है। या (तीन) यह कि उसके पट्टे की अवधि का अवसान हो चुका है या(चार) यह कि उसने अनुदान की किसी निबंधन या शर्त का उल्लंघन किया है।
अपने फैसले में जिला दंडाधिकारी ने कहा है कि लीज धारक ने इन सभी शर्तों का उल्लंघन किया है इसलिए भूखंड पर पुन: प्रवेश का ही विकल्प शेष रह गया है। इसलिए पट्टा निरस्त करके भूखंड का आधिपत्य प्राप्त करने का आदेश दिया जाता है। इसके लिए राजधानी परियोजना टीटीनगर वृत्त भोपाल से उक्त भूखंड पर पुन: प्रवेश की कार्रवाई करके आधिपत्य प्राप्त करें। आज पत्रकार भवन समिति ने साधारण सभा की बैठक में आधिपत्य सौंपने की कार्रवाई का विधिवत प्रस्ताव तैयार करके एसडीएम को सौंप दिया है,ताकि नया भवन बनाया जा सके।
गौरतलब है कि लगभग बीस सालों से सरकारी बजट को छिन्नभिन्न करने वाले सत्ता माफिया के गुर्गे इस पत्रकार भवन का उपयोग कर रहे थे। वे समय समय पर मुख्यमंत्री और सरकार के मंत्रियों व सचिवों को भी ब्लैकमेल करते थे और उन पर फिजूल खर्ची की योजनाओं के लिए बजट आबंटित करने का दबाव बनाते रहते थे। कांग्रेस की पूर्ववर्ती दिग्विजय सिंह सरकार ने इस सत्ता माफिया को भरपूर प्रश्रय दिया था। इसके बाद भाजपा की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस माफिया तंत्र को भेदने का प्रयास भी किया लेकिन उनके हटते ही ये गिरोह फिर सक्रिय हो गया था। वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने जब ये समस्या लाई गई तो उन्होंने प्रशासन को संविधान सम्मत काम करने के निर्देश दिये। प्रस्तुत तथ्यों के प्रकाश में प्रशासन ने पत्रकार भवन को दुबारा बनाने का फैसला लिया है। जिसके बाद सत्ता माफिया के गढ़ बन चुके इस भवन को ढहाने की कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त हुआ है। बरसों से प्रदेश और पत्रकारों के हित में लड़ाई लड़ रहे कई जांबाज पत्रकारों ने इस संग्राम में अपनी आहुतियां दी हैं। प्रदेश और पत्रकारों के हित में पहली बार किसी सरकार ने यह फैसला लिया है जिसका स्वागत राजधानी के अलावा प्रदेश भर के जमीनी पत्रकार कर रहे हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि शिवराज सिंह सरकार इस यशस्वी कार्य को बखूबी अंजाम देगी और नई पीढी़ के पत्रकारों के लिए नया भवन बनाकर एक गौरवमयी विरासत में शामिल होने का अवसर प्रदान करेगी।


आपदा प्रबंधन में मीडिया की अहम भूमिकाः डॉ. किन्हाल, निदेशक, आईआईएफएम
आपदा प्रबंधन के बारे में शिक्षा एवं प्रशिक्षण देता है आपदा प्रबंधन संस्थानः डॉ. राजेश प्रसाद मिश्रा, ईडी, डीएमआई

Our Correspondent :16 March 2015
आपदा प्रबंधन में मीडिया की अहम भूमिका है। यह बात भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) के निदेशक डॉ. गिरधर किन्हाल ने “मीडिया एवं आपदा प्रबंधन” विषय पर आयोजित मीडिया कार्यशाला में कही। इस कार्यशाला का आयोजन पार्यावरण परिसर स्थित आपदा प्रबंधन संस्थान (डीएमआई) के होस्टल में किया गया था और इसका उद्घाटन डॉ. किन्हाल ने किया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. किन्हाल ने कहा कि मीडिया प्राकृतिक आपदा और मानव निर्मित आपदा के बारे में लोगों को जानकारी देकर जागरूक बनाता है और इस तरह आपदाओं के द्वारा जानमाल पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने की दिशा में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन जैसे पर्यावरणीय आपदा तो मानव द्वारा प्रकृति के अंदरूनी मामलों में किए गए हस्तक्षेप का नतीजा है। डॉ. किन्हाल ने पत्र सूचना कार्यालय, भोपाल और आपदा प्रबंधन संस्थान को संयुक्त रूप से इस कार्याशाला को आयोजित करने पर बधाई दी।
इस मौके पर बोलते हुए आपदा प्रबंधन संस्थान के कार्यकारी निदेशक (ईडी) डॉ. राजेश प्रसाद मिश्रा ने कहा कि मीडिया लोगों को आपदा प्रबंधन के बारे में उपयुक्त समय पर जानकारी पाने में मदद तो करता ही है, साथ ही उन्हें आपदा से पहले सावधान करने में भी काफी सहायता करता है। उन्होंने कहा कि मीडिया आपदा के समय जानमाल की सुरक्षा की दिशा में भी अहम भूमिका अदा करता है। डीएमआई के निदेशक श्री राकेश दूबे ने कहा कि उनका संस्थान फिलवक्त 40 प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है। उन्होंने मॉक ड्रील पर जोर दिया और कहा कि मॉक ड्रील जैसे कार्यक्रम आपदा के समय हमारे लिए काफी मददगार साबित होते हैं।
कार्यक्रम में बोलते हुए पत्र सूचना कार्यालय के अपर महानिदेशक डॉ. पी.जे. सुधाकर ने कहा कि आकाशवाणी एवं दूरदर्शन जैसे सरकारी मीडिया आपदा के बारे में तथ्यात्मक और सही जानकारी प्रदान करते हैं और आपदा से लड़ने में लोगों की काफी मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन कानून 2005 इस मामले में मील का पत्थर साबित हुआ है। बहुत सारे पत्रकारों ने आपदा प्रबंधन की दिशा में सोशल मीडिया के योगदान पर चर्चा की और इसे आपदा प्रबंधन की दिशा में काफी उपयोगी बताया। इस मौके पर कार्यशाला में हिस्सा लेने वाले लोगों को डीएमआई के कार्यकारी निदेशक डॉ. राजेश प्रसाद मिश्रा ने प्रमाण पत्र वितरित इस कार्यशाला में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया से संबंधित बहुत सारे पत्रकारों ने हिस्सा लिया। इस कार्यशाला का आयोजन पत्र सूचना कार्यालय, भोपाल और आपदा प्रबंधन संस्थान ने संयुक्त रूप से किया था।
पार्यावरण परिसर स्थित आपदा प्रबंधन संस्थान (डीएमआई), भोपाल के होस्टल में आयोजित मीडिया कार्यशाला “मीडिया एवं आपदा प्रबंधन” को संबोधित करते हुए भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) के निदेशक डॉ. गिरधर किन्हाल। साथ में हैं पत्र सूचना कार्यालय के अपर महानिदेशक डॉ. पी.जे. सुधाकर।


मूल्य जानते सब हैं, पालन करने की जरूरत : डॉ. सच्चिदानंद जोशी
भारत का मीडिया दुनिया में बेहतर - प्रो.कुठियाला
समाज के मूल्यों का प्रभाव मीडिया पर पड़ता है - डॉ. अनूप स्वरूप

Our Correspondent :16 March 2015
भोपाल। कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा है कि प्रत्येक व्यक्ति मूल्यों की जानकारी रखता है। जरूरत बस मूल्यों को सदैव याद रखने और उनका पालन करने की है। डॉ. जोशी 'संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी में मूल्यनिष्ठता' पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संविमर्श का समापन कर रहे थे।
मध्यप्रदेश सरकार और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की ओर से महाकुम्भ सिंहस्थ-2016 के परिप्रेक्ष्य में हुए इस संविमर्श में देशभर से विद्वान शामिल हुए। सभी ने मीडिया से जुड़े विभिन्न वृत्तिज्ञों (प्रोफेशनल्स) के मूल्यों पर विमर्श किया। सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने की।
कुलपति प्रो. जोशी ने मीडिया शिक्षकों के मूल्यों को प्रमुखता से रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सम्प्रेषणीयता, रचनात्मकता, गतिकता, ग्रहणशीलता, सतर्कता, दक्षता, सत्यपरकता और संवेदनशीलता सहित प्रमुख मूल्यों का मीडिया शिक्षक को स्वयं के व्यवहार में पालन करना चाहिए।
जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी के कुलपति श्री अनूप स्वरूप ने कहा कि समाज के जो मूल्य हैं, उनका प्रभाव मीडिया पर पड़ता है। इसलिए हमें समाज के मूल्यों की भी चिंता करनी चाहिए। प्रज्ञा प्रवाह संस्था के श्री दीपक शर्मा ने सोशल मीडिया और तकनीक के अधिक उपयोग के दुष्परिणामों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल माध्यम का एक घंटे से अधिक उपयोग करने पर सोचने की क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। तकनीक के मूल्य नहीं होते, मूल्य तो मनुष्य के होते हैं।
संचालक जनसम्पर्क श्री लाजपत आहूजा ने उज्जैन में होने वाले महाकुम्भ सिंहस्थ को उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम को जोडऩे का आयोजन बताया। मीडिया के संबंध में आज की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तीसरे प्रेस आयोग की जरूरत अब महसूस हो रही है।

भारत का मीडिया दुनिया में बेहतर

माखनलाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने कहा कि दुनिया में मार्केटिंग के मूल्यों की चिंता पहले होती है जबकि हमारे देश में लोकहित के मूल्य सबसे पहले होते हैं। दुनिया के कई देशों के मीडिया की तुलना में भारत का मीडिया बहुत बेहतर है। भारतीय मीडिया में मूल्य आज भी जीवित हैं। वह समाज के हित में अच्छा काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी बात यह है कि हम अच्छे मूल्यों को पहचानें, उन्हें अपने जीवन में उतारें और उनको विकसित करने का प्रयास करें। प्रो. कुठियाला ने कहा कि धारणाओं के आधार पर मूल्यों का विकास होता है।
सत्र का संचालन डॉ. अनुराग सीठा ने किया। आभार जनसंचार विभाग के अध्यक्ष श्री संजय द्विवेदी ने माना। संपादक, उप संपादक, रिपोर्टर, लेखक, मीडिया प्रबंधक और संचारक के मूल्यों पर विचार-विमर्श सत्र की अध्यक्षता लखनऊ से आए मीडिया शिक्षक एवं लेखक श्री रमेशचन्द्र त्रिपाठी ने की। मुख्य वक्ता दिल्ली से आए वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रामजी त्रिपाठी थे। इस दौरान माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के प्रोडक्शन निदेशक श्री आशीष जोशी ने प्रोड्यूसर, वरिष्ठ पत्रकार विजय मनोहर तिवारी ने रिपोर्टर, प्रबंधन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अविनाश वाजपेयी ने मीडिया प्रबंधक, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सौरभ मालवीय ने संचारक, असिस्टेंट प्रोफेसर श्री सुरेन्द्र पाल ने फोटो जर्नलिस्ट और उत्तरप्रदेश शासन के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मनोज कुमार ने प्रशासन के मूल्यों पर अपनी बात कही।
राजनीति और सिविल सर्विसेज के मुकाबले मीडिया में कई गुना ज्यादा ईमानदारी
व्यपाम के भ्रष्टाचार ने कई प्रतिभाओं को मार डाला - विजय मनोहर तिवारी


पत्रकार के पास सभी साधनों का होना जरुरी है ताकि सूचनाओ को शीघ्र संग्रहित कर भेजा जा सके। उन्होंने कहा की फटेहाल रहने का मतलब ईमानदारी नहीं होता है। व्यावसायिक परीक्षा मंडल में हुए भ्रष्टाचार पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस घोटाले से हजारों प्रतिभाओं की हत्या हुई है। उन्होंने कहा की कुछ पत्रकार जो वाल्मिकी बनकर पत्रकारिता में आते है और रत्नाकर बनकर काम करते है उन्हें कोई नहीं पूछता। उन्होंने धार्मिक चैनलों पर प्रहार करते हुए कहा की सभी धार्मिक चैनल बिके हुए है।फोटो मेट्रोमिरर डॉट कॉम से


मीडिया एवं आई.टी. कर्मियों के जीवन मूल्य
Our Correspondent :16 March 2015
1-मीडिया एवं आई.टी. कर्मियों के जीवन मूल्य - जो जीवन मूल्य के आदर्श मानव जीवन क के लिए हैं वही मीडिया एवं आई.टी. कर्मियों के लिए होंगे । क्योंकि मीडिया एवं आई.टी. का प्रभाव क्षेत्र अत्यंत व्यापक होता जा रहा है इसलिए इन मानव मूल्यों का सामान्य से अधिक प्रबल बोध मीडिया और आई. टी. कर्मियों में होना अपेक्षित है।
2. सत्य की खोज मानव जीवन का एक वृहद उददेश्य है। मीडिया एवं आई.टी. कर्मियों के लिए सत्य की खोज के साथ उसकी अभिव्यक्त्ति एवं प्रस्तुतियां अनिवार्य मूल्य हैं। सत्य की प्रकृति इस प्रकार की है कि पूर्णता में ही सत्य है । पूर्ण सत्य का पूर्ण बोध मूल्य भी ऐसे कर्मियों में होना अनिवार्य है।
3.मीडिया और आई. टी कर्मियों के लिए निष्पक्षता का मूल्य उनके सामाजिक दायित्व को निभाने के लिए अनिवार्य है।
4. मार्केटिंग के प्रभावी वातावरण में सह-अस्तिव, सहिष्णुता सहयोग के मूल्य भी मीडिया कर्मियों के आदर्श कार्य के लिए अनिवार्य है।
5. लोक मंगल के बोध का मूल्य और आई.टी. कर्मियों के लिए अनिवार्य है। इनमें सर्वजन हिताय और बहुजन हिताय के मध्य कभी कभी असमंजस की स्थिति हो सकती है । इस असमंजस में विवेक के प्रयोग का मूल्य चाहिए।
6-मीडिया और आई.टी. कर्मियों में जिझासु भाव का हर समय जाग्रत रहना अनिवार्य है । क्योंकि सत्य ई खोज, उसकी पुष्टि, निष्पक्ष प्रस्तुति और लोक-मंगल का विवेक होने के लिए जानकारी , सूचनाओं और ज्ञानार्जुन करने का स्वभाव अनिवार्य है।
7-मीडिया और आई.टी कर्मियों की अपनी पहचान क्या है ? मूल्यों के आधार पर सर्वप्रथम वह मनुष्य है फिर वह राष्ट्र का नागरिक है और उसके पश्चात वह एक मीडिया या आई.टी कर्मी है।
8-मीडिया और आई.टी कर्मियों की प्रतिबद्धता में स्पष्टता होनी चाहिए कि वह सर्वप्रथम राष्ट्र और उसके पश्चात ही संस्था या व्यक्ति होने चाहिए।
9-मीडिया और आई.टी कर्मियों के ध्येय राष्ट्र और समाज के ध्येय से भिन्न नही हो सकते और उसकी प्रथम ध्येय निष्ठता, सामाजिक ध्येय के प्रति होना ही उचित है।
10-विपरीत परिस्थितियों में भी मीडिया और आई.टी. कर्मियों को ईमानदार होने का व्यक्तित्व अत्यंत अनिवार्य है। इसके लिए साहसी होने का भी गुण अनिवार्य है।
11-प्रकृति की विविधता और बहुलता को मानव जीवन का मूल्य बनाकर आदर्श सामाजिक संवाद की स्थितियां बन सकती है ।
12-मीडिया और आई.टी. कर्मियों में आर्थिक, सामाजिक और व्यावहारिक शुचिता के मूल्य उदाहरण स्थापित करने वाले होने चाहिए।


चेतना की स्वतंत्रता सबसे महत्वपूर्ण- गौर
समाज के लिए राजनितिक , आर्थिक, और सामाजिक स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है परन्तु सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण चेतना की स्वतंत्रता होती है । इस स्वतंत्रता के संदर्भ में पत्रकारिता की भूमिका अहम है । यहाँ टिपण्णी मध्यप्रदेश के गृह मंत्री श्री बाबूलाल गौर ने सप्रे संग्रहालय के पत्रकारिता पुरुस्कार अलंकरण समारोह को सम्बोधित करते हुए की । श्री गौर ने प्रदेश के ११ पत्रकारों को सम्मान स्वरूप प्रशस्ति- पत्र , शाल एवं कमल भेंट किए । उन्होंने पुरस्कृत पत्रकारों को बधाई दी और शुभकामना की कि भविष्य में उनके कार्य में और निखार आएगा । समारोह की अध्यक्षता अनन्य हिंदी सेवी श्री कैलाशचन्द्र पंत ने की ।
इस अवसर पर लब्धप्रतिष्ठ संपादक एवं पूर्व कुलपति श्री अच्युतानंद मिश्र ने " स्वामी श्रद्धानंद और उनके पत्रकार कुल " ग्रंथ का विमोचन किया । विद्वान आचार्य डा. विष्णुदत्त राकेश ने इस पुस्तक में हिंदी पत्रकारिता में गुरुकुल कांगड़ी के स्नातकों के यशस्वी अवदान का प्रामाणिक वृत्तांत लिपिबद्ध किया है । स्वामी श्रद्धानंद के दीक्षोपदेश का उद्रधृत करते हुए कहा कि उन्होंने सत्य को ही कर्म और विचार का आधार माना था । आधुनिक पत्रकारिता की विशद चर्चा करते हुए श्री मिश्र ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि पत्रकारिता के सामने विश्वसनीयता का संकट पैदा हो गया है जो सबसे बड़ा खतरा है । मनीषी संपादक श्री नारायण दत्त की प्रेरणा से सप्रे संग्रहालय द्वारा प्रस्तुत इस पुस्तक का प्रकाशन नई दिल्ली के प्रभात प्रकाशन ने किया है ।

अध्यक्षीय उद्बोधन में संपादक साहित्यकार श्री कैलाशचन्द्र पंत ने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा में चेतना की स्वतंत्रता पर निरंतर जोर दिया जाता रहा है । गुरुकुलों से विद्यार्थियों को इसके संस्कार मिलते थे । स्वामी श्रद्धानंद और उनके पत्रकार कुल पुस्तक के प्रेरणास्त्रोत श्री नारायण दत्त जी इस परंपरा के प्रत्यक्ष प्रमाण है कि उसकी निरंतरता का स्त्रोत शुष्क नहीं पड़ा है ।

पूर्व मंत्री श्री सत्यनारायण शर्मा ने कहा की सप्रे संग्रहालय राष्ट्र की बौद्धिक चेतना का अलख जगाए हुए है । पत्रकारिता के पुरखों का स्मरण करते रहना आश्वसितदायी है । डॉ. संतोष मानव , डॉ. राजीव अग्निहोत्री और श्री युगेश शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए । आरम्भ में सप्रे संग्रहालय के संस्थापक श्री विजयदत्त श्रीधर ने पुरस्कार योजना और ग्रंथ की प्रस्तावना प्रस्तुत की । निदेशक डॉ. मंगला अनुजा ने प्रशस्ति वाचन किया । श्री नुरुल हसन नूर ने अतिथियों का स्वागत किया । कार्यक्रम का सुरुचिपूर्ण संचालन शोध छात्रा सुश्री लावण्यमयी शर्मा ने किया ।
वर्ष २०१५ के लिए " संतोष शुक्ल स्मृति लोक संप्रेषण पुरुस्कार " जनसम्पर्क विभाग के अपर सचिव श्री अनिल माथुर। वेटेरन जर्नलिस्ट फेडरेशन दवारा प्रवर्तित " हुकुमचंद नारद पुरस्कार" श्री युगेश शर्मा, " लाल बलदेवसिंह पुरस्कार" दैनिक हरिभूमि के संपादक डॉ. संतोष मानव तथा " माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार" दैनिक पीपुल्स समाचार के संपादक डॉ. राजीव अग्निहोत्री को प्रदान किया गया । " जगदीशप्रसाद चतुर्वेदी पुरस्कार" दैनिक भास्कर जबलपुर के समाचार संपादक डॉ. पंकज शुक्ल , "राजेंद्र नूतन पुरस्कार" पत्रिका के विशेष संवाददाता श्री शिरीष खरे , " झाबरमल्ल शर्मा पुरस्कार" दैनिक भास्कर के कार्टूनिस्ट श्री हरिओम तिवारी , "रामेश्वर गुरु पुरस्कार" एल. एन. स्टार की विशेष संपादक सुश्री शिफाली , " आरोग्य सुधा पुरस्कार" प्रदेश टुडे के प्रशासनिक संवाददाता श्री पंकज शुक्ल , " यशवंत अरगरे पुरस्कार" नवदुनिया की संवाददाता सुश्री रूचि दीक्षित और फोटो पत्रकरिता के लिए " होमई व्यारावाला पुरस्कार" नवदुनिया के प्रवीण दीक्षित को प्रदान किया गया ।

कार्यक्रम के अंत में संत पत्रकार बी.जी. वर्गीज़ , शीर्षस्थ कार्टूनिस्ट आर.के. लक्ष्मण , लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार प्रो कृष्णदत्त पालीवाल और श्री शंकरलाल साबू के निधन पर मौन श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में सर्वश्री शंभुदयाल गुरु , डॉ. विजयबहादुर सिंह , सुरेश चौकसे, डॉ. रत्नेश , कृष्णगोपाल व्यास , डॉ. सुरेश मिश्र , प्रो सतीश मेहता , प्रो पुष्पेंदरपाल सिंह , वसंत निर्गुडे , सी.के सरदाना , सैयद अख्तर हुसैन। किशनपंत , विनय उपाध्याय , भरत चतुर्वेदी , चंद्रप्रकाश जायसवाल , शहीद अफरीदी , डॉ. कीर्ति शर्मा , राजेश पांडे, राकेश दिक्षित ,ओमप्रकाश मेहता , सोमदत्त शास्त्री , सुश्री राखी तिवारी , श्यामसुन्दर शर्मा समेत राजधानी के प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


मूल्यानुगत पत्रकारिता: आवश्यकता और चुनौतियां भोपाल। मूल्यानुगत मीडिया अभिक्रम समिति एवं माधवराव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय के तत्वावधान में शनिवार, 20 दिसंबर को मूल्यानुगत पत्रकारिता : आवश्यकता और चुनौतियां विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। माधवराव सप्रे समाचार पत्राचार संग्रहालय में दोपहर 1 बजे से आयोजित इस संगोष्ठी के मुख्य वक्ता, श्री मनोज श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव, मप्र शासन होंगे। इसके अलावा संगोष्ठी में पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार श्रीविजयदत्त श्रीधर और वरिष्ठ पत्रकार श्री जयदीप कार्णिक, संपादक वेव दुनिया, इंदौर एवं वरिष्ठ पत्रकार कमलदीक्षित मुख्य विमर्श कर्ता होंगे। कार्यक्रम संयोजक प्रकाश साकल्ले ने बताया कि संगोष्ठी में पत्रकारिता कर्मी, पत्रकारिता के शोधकर्ता और विद्यार्थी शामिल होकर पत्रकारिता की चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।


मैनिट और नासा एस्ट्रो बॉयोलॉजी के क्षेत्र मेंमिलकर शोध करेंगे- डॉ अप्पूकुट्टन के.के मैनिट
10 August 2014
प्रधानमंत्री नेसाफ-सुथरेभारत केलिए स्वच्छ भारत अभियान की परिकल्पना की है। मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट), भोपाल में राज्य स्तरीय अन्तर माध्यम प्रचार समन्वय समिति (आईएमपीसीसी) की बैठक को संबोधित करते हुए पत्र सूचना कार्यालय के अपर महानिदेशक डॉ. पी.जे. सुधाकर नेकहा कि महात्मा गांधी स्वच्छता को लेकर काफी भावुक थे। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान गांधी जी के महान सपनों का फल है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार नेई- प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। डिजीटलीकरण और तकनीक के विकास से सूचना के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता मिली है। मैनिट केनिदेशक अप्पूकुट्टन के.के. ने जानकारी दी कि मैनिट ने नासा केसाथ एक एमओयूपर दस्तखत किए हैं। दोनों संस्थान मिलकर एस्ट्रो बॉयोलॉजी के क्षेत्र में मिलकर शोध करेंगे। उन्होंने मैनिट के अब तक की उपलब्धियों पर एक शानदार प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने कहा है कि मैनिट के बच्चों को वैश्विक स्तर की शिक्षा देने के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों से प्रोफेसर्स को आंमत्रित किया गया है।
दूरदर्शन केनिदेशक सेतुमाधवन नेबैठक केदौरान गांधी जयंती केमौकेपर देश स्तर पर किसान चैनल लॉन्च करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि स्वच्छता सीधे तौर पर स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है और हम इसको हल्के में नहीं ले सकते। उन्होंने सभी सदस्यों को विश्वास दिलाया कि केंद्र सरकार के विभागों द्वारा स्वच्छ भारत अभियान केप्रचार-प्रसार के लिए उठाए जा रहे कदमों का दूरदर्शन व्यापक तौर पर कवरेज देगा। इस मौके पर बोलते हुए आकाशवाणी के केंद्र निदेशक श्री खान ने कहा सार्वजनिक प्रसारणकर्ता केतौर पर आकाशवाणी लोगों को सूचना और मनोरंजन देने का काम करता है। दूरदर्शन समाचार के निदेशक राजीव जैन नेकहा कि केंद्र सरकार के संस्थानों में साइंटिफिक टेंपरामेंट की जरूरत है। इस मौके पर पत्र सूचना कार्यालय के अपर महानिदेशक डॉ. पी.जे. सुधाकर द्वारा लिखित फीचर ‘डिजीटल इंडिया: ई-गवर्नेंस’ भी जारी किया गया। आईएमपीसीसी की इस बैठक में यह तय किया गया कि अक्टूबर महीने में स्वच्छ भारत अभियान पर फोकस किया जाएगा। इस बैठक में पत्र सूचना कार्यालय, दूरदर्शन, आकाशवाणी, डीएफपी समेत केंद्र सरकार केबहुत से विभागों के अधिकारी और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।
पत्र सूचना कार्यालय के अपर महानिदेशक डॉ. पी.जे. सुधाकर मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट), भोपाल मेंराज्य स्तरीय अन्तर माध्यम प्रचार समन्वय समिति (आईएमपीसीसी) की बैठक को संबोधित करतेहुए।
मैनिट के निदेशक अप्पूकुट्टन के.के., भोपाल में राज्य स्तरीय अन्तर माध्यम प्रचार समन्वय समिति(आईएमपीसीसी) की बैठक को संबोधित करते हुए।
पत्र सूचना कार्यालय के अपर महानिदेशक डॉ. पी.जे. सुधाकर मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट), भोपाल में राज्य स्तरीय अन्तर माध्यम प्रचार समन्वय समिति (आईएमपीसीसी) की बैठक को संबोधित करते हुए।


पत्रकार को झूठे केस में फंसाने के मामले में डी.जी.पी. ने सी.आई.डी. जाँच के दिए निर्देश
10 August 2014
भोपाल। ऐसा वाक्या पहली बार देखने में आया जब देवरी के एक पत्रकार दीपक चौरसिया को एक आत्महत्या के मामले में फर्जी आपराधिक प्रकरण कायम किये जाने पर देवरी क्षेत्र के भाजपा और कांग्रेस के नेतागण अपनी राजनैतिक प्रतिबद्धताओं को छोडक़र पत्रकार के समर्थन में भोपाल आकर वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा के नेतृत्व में पुलिस मुख्यालय पहुंचकर प्रदेश पुलिस महानिदेशक श्री नंदन दुबे से मिलकर पूरे मामले में सी.आई.डी. जाँच की मांग की। जिस पर तत्काल जाँच के आदेश किये गये है।
यह पूरा मामला सागर जिले के देवरी नगर का है। जहां पिछले दिनों शिक्षक अंबिका साहू ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उक्त मामले में पुलिस द्वारा नगर के वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया के विरुद्ध 306, 389 का फर्जी अपराध कायम किए जाने के बाद नगर के पत्रकारों एवं राजनैतिक दलों ने कड़ी निंदा की है।
उक्त मामले में बुधवार को पूर्व विधायक एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पं. ब्रजबिहारी पटेरिया, भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेश पाण्डेय, कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष विजय गुरु, दिलीप नेमा (पूर्व नेता प्रतिपक्ष, न.प. अध्यक्षपति), राकेश मिश्रा (वरिष्ठ कांग्रेस नेता), अनिल भटेले (वरिष्ठ कांग्रेस नेता) एवं पत्रकार संजय गुप्ता, जिलाध्यक्ष वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन, बलराम जाटव, नरेश गौर, कुन्दन चौरसिया आदि ने वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा से मुलाकात की। इसके बाद पी.आर.ओ. राजेश भाटिया के माध्यम से डी.जी.पी. श्री नंदन दुबे से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। पत्रकार दीपक चौरसिया पर बनाए गए फर्जी मामले की निष्पक्ष सी.आई.डी. जाँच की मांग की। जिस पर डी.जी.पी. श्री दुबे ने तत्काल सी.आई.डी. जाँच के निर्देश दिए।


मध्‍यभारत की आवाज़
10 August 2014
खुशनुमा मौसम के साथ जब सुरमयी संगीत गूंजा तो श्रोता भी खुद को झूमने से रोक नहीं पाए। सदाबहार गीतों से सजी इस शाम को प्रतिभागियों ने अपनु सुरीली आवाज से यादगार बना दिया। मौका था जी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के सिंगिंग कॉम्पटीशन "जी मध्य भारत की आवाज का जादू" ग्रेंड फिनाले का। इसमें बच्चों से लेकर युवाओं तक ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा। कॉम्पटीशन में इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रायपुर और भोपाल से सिलेक्ट १० प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर डीजीपी नंदन दुबे, , Business Head, Regional Channels विनोद दास, Zee Media Corporation Ltd के रीजनल एडीटर एमपी-सीजी राजेंद्र शर्मा, Zee Media Corporation Ltd के AVP सेल्‍स जुबीन ठाकुर, सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।


विद्यार्थी जी के 125 वाॅ वलिदान दिवस पर विशेष आलेख-
20 March 2014
भारत देश की आजादी के लिए अपना जीवन न्यौछावर करने बाले भारतीय पत्रकारिता के पुरौधाश्शहीद गणेश शकर विद्यार्थी का जन्म आश्विन शुक्ल चतुर्दशी संवत् 1947 दिनांक 26 अक्टूवर 1890 को श्रीमती गोमती देवी श्रीवास्तव (कायस्थ) की कोख से हुआ, उस समय श्रीमती गोमती देवी अपने पिता जी के घर अतरसुईया मोहल्ला इलाहावाद में थी इसलिए उनका जन्म ननिहाल में हुआ । इनके पिता का नाम बाबू जय नारायण लाल एक शिक्षक थें , यह परिवार ग्वालियर जिला के मुुंगावली में रहा करता था, । सामप्रदायिक एकता के प्रतीक अमरषहीद गणेष षंकर विद्यार्थी जी के प्रपितामह (परदादा) का नाम मुंषी देवी प्रसाद था जो हथगाॅव जिला फतेहपुर उत्तर प्रदेश के निवासी थें । इनके दादा जी का नाम बंशगोपाल उनके पुत्र बाबू जय नारायण लाल थें जो शिक्षक रहे । गणेश शंकर विद्यार्थी जी का विवाह 19 बर्ष की आयु में हेा गया था । अपनी अल्य आयु में जो कार्य किए वह समाज व देश हितों के लिए किए गये , उन्हे भारतीय इतिहास में उचित स्थान दिया गया है । देश की स्वतंत्रता केक लिए किए गए गणेश शंकर विद्यार्थी जी के सराहनीय प्रयासों को कभी भुलाया नही जा सकता हे । उन्होने जाति - धर्म के भेद-भाव को मिटाकर मानव-धर्म को सर्वोपरि माना और अंततः इसी के लिए उन्होने अपने प्राणों को भी बलिदान कर दिया । विद्यार्थी जी देश भक्त, समाजसेवी, कुशल बक्ता और महान राजनीतिज्ञ ही नही , बल्कि वह देश के निर्भीक पत्रकारों में से थे । अंग्रेजों की गुलामी के समय भारत देश में हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में कर्मयोगी और उर्दू में स्वराज्य नामक समाचार पत्रों के माध्यम से विद्यार्थी जी ने अपनी लेखनी से लिखना शुरू किया था, देश के लोगों को जगाने का काम यहीं से शुरू किया । जब विद्यार्थी जी को यह लगने लगा कि हम अपनी लेखनी स्वतंत्र नही चला पाते है तो उन्होने अपना स्वयं का समाचार पत्र्रपताप का प्रकाशन किया । उनकी पत्रकारिता का उद्देश्य मानव जाति का कल्याण उनका उद्देश्य रहा उन्होने हमेशा प्रताप समाचार पत्र के माध्यम से गरीव, असहाय, जनता की अवाज बुलंद किया करते थें । गणेशशंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब प्रान्तीय समिति ने विद्यार्थी जी के जीवन एवं उनके कर्मयोग को जन जन पहुॅचाने के लिए मानवसेवा, समाजसेवा,भारतीय संस्कृति-संस्कारों के साथ साथ बर्तमान मीडिया में स्वतंत्र पत्रकारिता, साहित्यकारो, इलेक्ट्रानिक मीडिया,सोशल मीडिया को एक माला में पिरोकर कार्य करने का संकल्प लिया है । इस संस्था में समाज के नीचे से उच्च स्थान तक बैठें लोगों को उनका मान सम्मान दिलाने एवं पत्रकारिता को निष्पक्ष एवं सेवाभावना के साथ कार्य करने पर बल दिया है । साहसी, वुध्िदमान, योग्यता के साथ साथ मानवता के धनी गणेश षंकर विद्यार्थी जी ने अपने मित्र पंडित सुन्दर लाल के सम्पर्क में आने के बाद उन्हे पत्रकारिता से मोह हो गया और उन्होने क्राॅतिकारी महर्षि अरविन्द घोष के कर्मयोगिन से प्रभावित होकर एक पत्र कर्मयोगी समाचार पत्र को अपने लेख लिखने लगे यही से उन्होने पत्रकारिता की शुरूआत की इसके बाद अनेक समाचार पत्रों से जुड़ते चले गये । उन्होने आचार्य महावीर प्रसाद व्दिवेदी के सरस्वती समाचार पत्र में संपादन के साथ अनेक सालों तक वह पत्रकारिता के साथ जुड़े रहे । उन्होने तय किया कि वह देश की स्वाधीनता के लिए स्वयं अपना समाचार पत्र प्रकाशित कर कार्य करेगें । उन्होने अभ्युदय समाचार पत्र से कार्य छोड़कर पंडित शिवनारायण मिश्र के साथ बिचार विमर्श करने के बाद स्वंय का समाचार पत्र प्रकाशन करने का तय किया । विधिक कार्यावाही करने के वाद 9 नवम्बर 1913 को प्रताप समाचार पत्र का उदय हुआ । देश व समाज के लिए समाचार प्रकाशित करने का होसला बुलंद किया । अंग्रेजी हुकुमत के सामने झुके नही जिस कारण अनेकों वार प्रताप समाचार पत्र को बंद किया गया तथा गणेश शंकर विद्यार्थी जी को जेल भेजा गया ।
23 मार्च 1931 को क्रांतिकारी सरकार ने सरदार भगत सिंह को फाॅसी दी जिससे जनता बोखला गई तथा सरकार के खिलाफ नारे बाजी दंगों में परिवर्तन हो गई । कानपुर में हिन्दु मुस्लिम दंगों को अनेकोवार रोकने के बाद भी दंगे शांत को पूरा प्रयास किया । 25 मार्च 1931 को अपने साथी राम रतन गुप्त जी चैवे गोला मोहल्ला से होते हुए मठिया पहुॅचे जहां कुछ देशद्रोही लोगों ने घेर कर गणेश शंकर विद्यार्थी जी की हत्या कर दी । गणेश शंकर विद्यार्थी जी ने अपने जीवन में कभी किसी को धोका नही दिया, मानव सेवा करते हुए अपने प्राणों की आहूति दी थी । उन्ही के विचारों से प्रभावित होकर हरिहर भवन नौगाॅव (बुन्देलखण्ड) में उनके नाम से एक पत्रकारों का संगठन 1 जनवरी 2013 को गठित किया गया जिसका नाम गणेश शंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब दिया गया । इस संस्था का पंजीयन होकर मध्य प्रदेश के लगभग 25 जिलों में समितियाॅ गठित कर ली गई है । गणेश शंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब संस्था मध्य प्रदेश के प्रत्येक जिला, तहसील, थाना व ग्राम पंचायत स्तर तक पहुूचने के लिए लगातार मीडियाॅ से जुड़ें लोगों के संपर्क में है । इसका कार्य क्षेत्र सम्पूर्ण मध्य प्रदेश बनाया गया है । गणेश शंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब प्रदेश अध्यक्ष -संतोश गंगेले ने अपना जीवन इस संस्था एवं संगठन को समर्पित करते हुए प्रदेश में गणेश श्षंकर विधार्थी जी के जीवन से प्रभावित लोगों को समिति में स्थान देने पर बल दिया है । शहीद गणेशशंकर विद्यार्थी हिन्दी पत्रकारिता के पुरौधा, देश के सुधारवादी नेता , स्वधीनता आन्दोलन के कर्मठ सिपाही रहे । उनकी जयन्ती पर प्रेस क्लब उन्हे याद करते हुये उनके पदचिन्हो पर चलने का प्रयास जारी रहेगा ।

गणेश शंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब संस्था मध्य प्रदेश का एक विशाल सम्मेलन राजगढ़ (व्यावरा) की तहसील जीरापुर में भोपाल के संभागीय अध्यक्ष श्री माखन बिजयवर्गीय, जिला अध्यक्ष श्री दिनेश जमीदार के सहयोग से संपन्न हुआ, जो इतिहासिक आयोजन गिना जायेगा । गणेश शंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब संस्था मध्य प्रदेश ने अपने एक बर्ष के कार्यकाल में प्रदेश के अंदर ऐसो आश्चर्य जनक कार्य किए है जिनकी आम जनता को आशा नही थी, आने बाले समय में प्रदेश के महान पत्रकारों , साहित्यकारों को इस संगठन में स्थान देकर संगठन प्रदेश में अपनी पहचाने बनाने जा रहा है ।


वरिष्ठ पत्रकार और लेखक खुशवंत सिंह का निधन
20 March 2014
नई दिल्ली। जाने-माने पत्रकार और लेखक खुशवंत सिंह का गुरुवार को नई दिल्ली में निधन हो गया। वह 99 वर्ष के थे। वह अपने दिलखुश अंदाज के लिए जाने जाते थे। उन्होंने अपने अंतिम दिनों तक लेखन नहीं छोड़ा था। कई अखबारों में उनके कॉलम लगातार छप रहे थे। खुशवंत को दिल्ली के जानकारों के तौर पर भी जाना जाता है। उनका अंतिम संस्कार आज शाम को किया जाएगा।
खुशवंत सिंह उन लोगों में से थे जिन्हें भारत के साथ साथ पाकिस्तान में भी लोग बेहद सम्मान देते थे। उनका जन्म दो फरवरी 1915 को पंजाब में हुआ था। उन्हें पद्म भूषण और पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है।


पत्रकार राजेश दुबे का निधन
भोपाल:राजधानी के वरिष्ठ पत्रकार राजेश दुबे का बुधवार को एक निजी अस्‍पताल मे निधन हो गया वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे भदभदा विश्रामघट पर अंतिम सस्कार किया गया


मनोरंजन उद्योग मे तेज़ी
भारत का मीडीया और मनोरंजन उद्योग अगले चार साल में 14.2 फीसदी बढ़कर 1.78 करोड़ रुपए का हो जाएगा| फिक्की-केपीएमजी के एक रिपोर्ट मे यह जानकारी दी गई है| रिपोर्ट मे कहा गया है"मीडीया एवम इंटरटेनमेंट उद्योग सालाना 14.2(सीएज़ीआर)बढ़कर तक हो जाएगी| फिक्की के एमएंडई कमिटी के चेयरमेन और स्टार इंडिया के सीईओ उदय शंकर ने कहा," उदासी और दुर्भाग्य के इस महॉल मे ब मीडीया एवम मनोरंजन उद्योग मे पिछले साल 12 फीसदी के जबर्दस्त बढ़त हुई थी| उन्होने कहा की यह सब ऐसे माहोल मे हासिल किया गया है, जब कुल आर्थिक बढ़त 4 फीसदी के आसपास ही है और इस उद्योग के लोगो को मुद्रा विनिमय की मुश्किलों का सामना करना पड़ा हैं| रिपोर्ट मे कहा गया है की वर्ष 2018 तक डिजिटल विज्ञापनों मे सालाना चक्रवृद्धि बढ़त 27.7 फीसदी की होगी| वर्ष 2103 में भारत की टीवी इंडस्ट्री 41,700 करोड़ रुपए की थी और वर्ष 2013-18 के बीच इसमें 16 फीसदी की बढ़त होने की उम्मीद है| वर्ष 2018 तक यह 88,550 करोड़ तक पहुँच सकती है| प्रिंट मीडीया 8.4 फीसदी की बढ़त के साथ 2014 में 24,300 करोड़ रुपये तक पहुँच जाएगा |


अजय अग्रवाल बने के पी. आर. सी. आई राष्ट्रीय अध्यक्ष
17 February 2014
मुंबई। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के विपणन प्रमुख,हेदराबाद, श्री अजय अग्रवाल ने पब्लिक रीलेशन काउंसिल ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार सभाला , मुंबई कॉनक्लवे मे श्री आर. टी कुमार ने श्री अजय अग्रवाल को चार्ज दिया. श्री अग्रवाल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर श्री एम. बी जयराम , श्री आर. टी कुमार, श्री एन. डी राजपाल और शिवहर्ष सुहलका ने उन्हे बधाई दी और पी. आर. सी. आई नई उचाईयो को छूने की कामना की


रेस्पॉन्सिबल कम्यूनिकेशन पर 8वाँ पी. आर. सी. आई ग्लोबल कॉनक्लवे सम्पन्न
17 February 2014
मुंबई। पी. आर. सी. आई चाणक्य अवॉर्ड 2014 विभिन्न क्षेत्र की प्रमुख हस्तियो को दिए गये | प्रख्यात पत्रकार और IBN-18 के चीफ़ एडिटर राजदीप सरदेसाई और डॉ. दिनकर रायकर, ग्रूप एडिटर , लोकमत ग्रूप, मुंबई को मीडीया पर्सनॅलिटी ऑफ द ईयर अवॉर्ड से नवाजा गया| साथ ही भारत की कई जानी मानी हस्तियो को विभिन्न क्षेत्र मे उल्लेखनीय कार्य हेतु चाणक्य अवॉर्ड दिए गये |
भारत की महान पत्रकारिता के अमिट हस्ताक्षर राहुल बारपुते
Our Correspondent 10 Dec. 2012
इंदौर के लिए यह एक यादगार दिन था। राहुल बारपुते की बेमौसम याद। यह न बारपुते की जयंती थी, न पुण्यतिथि। उनके देहांत 17 साल बाद पहली बार उस लेखनी का कमाल सामने आया,जिसने पत्रकारों और पाठकों की एक पीढ़ी को प्रभावित किया। एक छोटे से शहर में रहकर पूरे देश की पत्रकारिता में अपनी धाक जमाई। राहुल बारपुते का अविस्मरणीय योगदान सिर्फ इंदौर या मध्यप्रदेश की पत्रकारिता तक ही सीमित नहीं है। वे सिर्फ हिंदी पत्रकारिता में भी अपने कृतित्व के लिए याद नहीं किए जाएंगे, बल्कि उन्होंने भारत की पत्रकारिता में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है। उन्हें आदर्श संपादकीय नेतृत्व के रूप में हमेशा याद किया जाएगा, जिन्होंने एक समृद्ध पीढ़ी तैयार की और भावी पीढि़यों के लिए अद्भुत मिसालें पेश कीं। भाषा के लिहाज से बेहद सजग और हर विधा में गहराई से जुड़े एक संवेदनशील रचनाधर्मी व्यक्तित्व। वे आज की पत्रकारिता के लिए एक उजली आशा हैं। एक प्रेरणा। एक ऊर्जावान उपस्थिति।

इंदौर के आनंद मोहन माथुर सभागार में रविवार ;14 जुलाई की शाम इंदौर प्रेस क्लब के प्रतिष्ठा प्रसंग ‘राहुल स्मरण‘ में यह उद्गार देश के नामचीन संपादकों ने व्यक्त किए। ‘प्रभात खबर‘ के प्रध्ाान संपादक हरिवंश, ‘जनसत्ता‘ के संपादक ओम थानवी, ‘नईदुनिया‘ के प्रधान संपादक श्रवण गर्ग, वरिष्ठ पत्रकार डाॅ. वेदप्रताप वैदिक, अभय छजलानी और राहुल देव अतिथि वक्ता थे। पत्रकार विजय मनोहर तिवारी द्वारा संकलित अहम दस्तावेज ‘राहुल बारपुते‘ का विमोचन भी किया गया। यह राहुलजी के 30-40 साल पुराने संपादकीय, आलेख, रिपोर्ताज एवं नियमित काॅलम का एकमात्र दुर्लभ संग्रह है, जो उनके देहावसान के 17 साल बाद प्रकाशित हुआ। समारोह में श्री हरिवंश ने कहा कि आज की पत्रकारिता में राहुलजी के कृतित्व से आज भी उम्मीदें जागती हैं। अपने दौर में अगर वे श्रेष्ठ कर पाए तो यह हम सबके लिए एक सबक है कि हम भी अपने समय की जरूरतों के मुताबिक अपने कर्तव्य में खरे उतरें। डाॅ. वैदिक ने कहा कि राहुलजी की खुबी ही यही थी कि न सिर्फ वे अपनी भूमिका में खरे उतरे, बल्कि उन्होंने एक पूरी पीढ़ी को भी तैयार किया। दूसरों की प्रशंसा और प्रोत्साहन में वे वाकई खुला आसमान थे, जैसा कि राजेंद्र माथुर ने उनके बारे में कहा।

श्री थानवी ने कहा कि सच तो यह है कि हमने राहुल बारपुते के किस्से ही सुने हैं। दिल्ली में प्रभाष जोशी और राजेंद्र माथुर जैसे शिखर संपादक इस बात का ताकतवर परिचय थे कि राहुल बारपुते किस कदकाठी के संपादक रहे होंगे। पत्रकारिता में उनका योगदान बहुआयामी है। श्री देव ने कहा कि बारपुते ने इंदौर जैसे छोटे शहर से बड़ी से बड़ी मिसालें सहज रूप में कायम कीं। राजेंद्र माथुर और प्रभाष जोशी जैसे प्रखर संपादक देश को दिए। उनकी लेखनी आज भी प्रासंगिक है। वे दूरदृष्टा चिंतक थे। श्री गर्ग ने कहा कि राहुलजी और उनके समय की पत्रकारिता को याद करना इंदौर में केदारनाथ के दर्शन करने जैसा अनुभव है, लेकिन यह दुखद है कि पत्रकारिता में उनके अवदान को प्रयासपूर्वक भुलाने की कोशिश की गई। यह अनायास स्मरण एक ऐसे आकाश को याद करना है, जिसनेप्रतिभाओें को उड़ान के अनंत अवसर दिए। आज के संपादकों के लिए ऐसा कर पाना नामुमकिन ही लगता है। यह वाकई वे ही कर सकते थे, जिन्हें खुद पर भरोसा था। उन्होंने हमेशा अपने से श्रेष्ठ को भी तवज्जो दी। श्री छजलानी ने कहा कि साठ और सत्तर के दशक में नईदुनिया को पत्रकारिता का विश्वसनीय ब्रांड बनाने में राहुलजी की भूमिका ही महत्वपूर्ण थी। वे सहज-सरल भाषा के प्रति बेहद सजग संपादक थे। कुछ लिखने के पहले काफी कुछ पढ़ने का मंत्र अपने सहयोगियों को उन्होंने ही दिया। मध्यप्रदेश के पूर्व महाधिवक्ता आनंद मोहन माथुर ने राहुल बारपुते के साथ अपने पांच दशक पुराने आत्मीय दोस्ताना रिश्ते को याद किया। 375 पेज की पुस्तक के प्रकाशक मध्यप्रदेश माध्यम के एडिशनल डायरेक्टर सुरेश तिवारी ने कहा कि ऐसी और रचनाओं को प्रकाशित करने में माध्यम सदैव तत्पर है। मंच पर राहुल बारपुते की पोती रेवा नांदेड़कर भी मौजूद थीं।

अतिथियों का स्वागत प्रवीण कुमार खारीवाल, अरविंद तिवारी, सुनील जोशी, कमल कस्तूरी, अतुल लागू, शशीन्द्र जलधारी, सुरेश तिवारी, डाॅ. पल्लवी अड़ाव, अरूण डिके, अरविंद अग्निहोत्री, बालकृष्ण गायके, किशोर कुमार रावल, सत्यानारायण व्यास, अशोक वानखेड़े, ड़ाॅ. हनीष अजमेरा आदि ने किया। प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने स्वागत भाषण में क्लब की रचनात्मक गतिविधियों की जानकारी दी। पुस्तक के सूत्रधार विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि किताब के बहाने राहुलजी के रचना संसार और उनके करीबी मित्रों व सहयोगियों से निरंतर संपर्क एक तीर्थयात्रा के पवित्र अनुभव जैसा था। उन्होंने कहा कि यह काम मूलतः पत्रकारिता के शिक्षण संस्थानों को करना चाहिए था, ताकि विद्यार्थियों को लिखने का सलीका आए और इस बहाने वे पुरानी पीढ़ी के महान संपादकों के व्यक्तित्व से परिचित हों। कार्यक्रम का संचालन मशहूर चित्रकार प्रभु जोशी ने किया। आभार इंदौर प्रेस क्लब के महासचिव अरविंद तिवारी ने माना।

कार्यक्रम में मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष अशोक कुमार पांडे, शास्त्रीय गायिका व कुमार गंधर्व की सुपुत्री कलापिनी कोमकली, प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता मुकंुद कुलकर्णी व डाॅ. वसुंधरा कालेवार समेत कई लेखक, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे। समारोह में राजेश जैन द्वारा राहुल बारपुते पर केंद्रित एक स्लाइड शो प्रस्तुत किया गया, जिसमें राहुलजी के अत्यंत दुर्लभ चित्रों के जरिए उनकी सादगी से भरी जीवनशैली की प्रेरक झांकी पेश की गई। इस मौके पर राहुलजी पर विशेष रूप से प्रकाशित प्रेस क्लब टाइम्स और इंदौर प्रेस क्लब की स्मारिका ‘मीडिया खड़ा बाजार में‘ का भी विमोचन हुआ। इंदौर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित इस समारोह में मध्यप्रदेश माध्यम, सानंद न्यास, अभ्यास मंडल, नाट्य भारती, आनंद मोहन माथुर चेरिटेेबल ट्रस्ट, अभिनव कला समाज, श्रुति संवाद, श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति,सूत्रधार और प्रेस क्लब टाइम्स सहभागी रहे।


‘सादा जीवन-उच्च विचार‘
Our Correspondent 10 August 2013
‘सादा जीवन-उच्च विचार‘ की बात को श्रद्धेस राहुल जी ने अपने जीवन में सौ प्रतिशत चरितार्थ किया। आमतौर पर सफेद कुर्ता-पायजामा पहनने वाले बाबा का व्यक्तित्व बहुआयामी था। राहुल जी की विद्वता और प्रखर लेखन क्षमता को स्व. बाबू लाभचंदजी छजलानी और स्व. नरेंद्र तिवारीजी ने न केवल पहचाना, वरन उन्हें नईदुनिया से जोड़कर उसकी वैचारिक बुनियाद को मजबूत बना दिया। राहुलजी ने भी अपनी सम्पूर्ण क्षमता और काबिलियत को अखबार में झोंक डाला। उन्हीं के नेतृत्व में अखबार ने हिन्दी पत्रकारिता के राष्ट्रीय क्षितिज पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। राहुलजी और नईदुनिया एक-दूसरे के पर्याय बन गए।
प्रचार-प्रसार से दूर

बाबा अपने स्वयं के प्रचार-प्रसार से सदा दूर रहे। उनका मानना था किअखबार जनसेवा और राष्ट्रसेवा के लिए होते है न कि अपने खुद के प्रचार के लिए। उन्होंने मुझे स्टैडिंग आॅर्डर दे रखा था कि उनका फोटो और समाचार उन्हें बताए बगैर कभी न छापा जाए। उन्होंने अपने और परिवार के हितों के लिए अखबार या अपने पद का कभी इस्तेमाल नहीं किया। उनके साथ हुई एक घटना बहुत चर्चित है। एक रोज राहुलजी किसी काम के लिए अपनी साइकिल से सराफा बाजार गए। सराफा की संकरी सड़क पर साइकिल खड़ी करके वे एक दुकान में गए। इसी दौरान सराफा थाने का एक सिपाही आया और वह साइकिल उठाकर थाने जाने लगा। आगे-आगे सिपाही और पीछे-पीछे राहुलजी। थाने में पूछताछ के दौरान जब बाबा ने अपना नाम, पता और स्वयं को नईदुनिया का प्रध्ाान संपादक होना बताया तो वहां मौजूद प्रधान आरक्षक ने फटकार लगाते हुए पुलिसिया भाषा में कहा-झूठ बोलते हो! हम क्या पूरा थाना जानता है कि नईदुनिया के संपादक गोपीकृष्ण गुप्ता ;अखबार के तत्कालीन सिटी रिपोर्टरद्ध हैं। बाबा ने विनम्रतापूर्वक अनुरोध किया कि हेडसाहब, आपकों मुझ पर यकीन न हो तो गोपीजी को फोन लगाकर पूछ लीजिए। गोपीजी को फोन लगाया गया तो उन्होंने प्रध्ाान आरक्षक से कहा-पहले तो उन सज्जन को ससम्मान कुर्सी पर बैठाइए। वो मेरे बाॅस है। वे ही नईदुनिया के प्रधान संपादक हैं-मैं नहीं। गोपीजी कुछ ही मिनटों में थाने पहंुचे। उन्होंने और पुलिसवालों ने बाबा से माफी मांगी, किन्तु बाबा ने फिर भी विनम्रतापूर्वक सिपाही और हेडसाहब की अपनी ड्यूटी निभाने के लिए तारीफ की।
धन-संपदा का मोह नहीं
स्वभाव से अलमस्त एवं फक्कड़ राहुलजी को कभी धन-संपदा का मोह नहीं रहा। इंद्रौर में प्रेस क्लब एक ट्रेड यूनियन संगठन नहीं है,सकेत के पास जब पहली पत्रकार कॅालोनी बनी तो उन्होंने उसमें प्लाॅट लेने में कोई रूचि नहीं दिखाई। इसके बाद जब हम लोगों ;प्रताप चांद, जयकृष्ण गौड़, सतीश जोशी, मैं और अन्य पत्रकारद्ध ने मिलकर “संवाद नगर” नाम से दूसरी काॅलोनी बनाने के प्रयास शुरू किए तब भी बाबा ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। सूचना मिलने पर एक दिन श्रीमती विमला बारपुते ;जिन्हें हम आदर से काकू कहकर पुकारते थेद्ध ने मुझे फोन किया। कहने लगीं-शशीन्द्र तुम तो बाबा के नेचर को जानते हो। उनके लिए तो सबकुछ नईदुनिया ही है। घर-परिवार की उन्हें कोई परवाह नहीं है। संवाद नगर की सदस्यता का एक फाॅर्म तुम मुझे लाकर दे दो। प्लाॅट के रूपए भी मुझसे ही ले लेना। इस प्रकार बाबा संवादनगर के सदस्य बन गए। मकान बन जाने के बावजूद वे उसमें रहने नहीं गए। वह मकान बाबा ने रहने के लिए अपने मित्र कला गुरू विष्णु चिंचालकर को दे दिया।
बाबा के साथ आने का मतलब
गृह निर्माण मंडल के निर्माण कार्य पहली बारिश में ही हर जगह से रिसने लगे थे। घटिया निर्माण कार्य को लेकर बाबा समेत सभी पत्रकार सदस्यों में रोष था। मकानों की कीमत भी बहुत ज्यादा थी। तय किया कि यह मामला मुख्यमंत्री ;तत्कालीनद्ध मोतीलाल वोरा के समक्ष रखा जाए। बाबा के सुझाव पर ही हमने मटेरियल की गुणवत्ता की जांच जीएसआईटीएस की लैब में कराई। रिपोर्ट में हमारे आरोप व शंकाओं की पुष्टि हुई। तत्पश्चात बाबा के नेतृत्व में ही एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री श्री वोरो से मिला और उन्हें जांच रिपोर्ट के साथ ज्ञापन सौंपा। प्रामाणिक जांच रिपोर्ट और इससे भी बढ़कर राहुलजी की उपस्थिति के सामने वोराजी ने संवादनगर के मकानों की कीमतें कम करने में देरी नही की। श्री वोरा ने कहा था- श्राहुलजी जैसे शीर्षस्थ पत्रकार का इंदौर से चलकर भोपाल आना ही ज्ञापन की सच्चाई, ईमानदारी एवं प्रामाणिकता को साबित करने के लिए काफी है।
इंदौर प्रेस क्लबः एक वास्तविक आवश्यकताराहुल बारपुते
सोलह वर्ष के फासले से यह ब्योरेवार याद करना मुश्किल है कि किनपरिस्थितियों में तथा किन लक्ष्यों से प्रेरित होकर प्रेस क्लब की स्थापना हुई थी। मैं जानता हंू कि प्रत्येक विधिवत गठित संस्था का अपना एक लिखित संविधान होता है, लेकिन प्रत्येक विधान में काफी कुछ करने अथवा न करने की गंुजाइश संस्थापकगण रख ही लेते हैं, लिहाजा प्रेस क्लब की इतनें सालों की गतिविधियों को देखकर ही उसके चरित्र और कृतित्व के बारे में कुछ कहा जा सकता है।
प्रेस क्लब एक ट्रेड यूनियन संगठन नहीं है, और न ही वह अन्य कतिपय प्रेस क्लबों की भांति सदस्यों के आमोद-प्रमोद का एक केंद्र है। दरअसल इंद्रौर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित अधिकांश कार्यक्रमों का मकसद एक ही रहा है और वह है सदस्यों के मानसिक क्षितिजों का निरंतर विस्तार। प्रेस क्लब में रखे गए मेहमान-वक्ता-रजिस्टर के पन्नों को सरसरी निगाहों से देखे जाने पर भी यह स्पष्ट हो जाता है कि विभिन्न विचारों और दलों के प्रतिनिधि इस संस्था में आते रहे हैं और अपनी बातें मुक्त रूप से क्लब के सदस्यों के सामने रखते रहे हैं। पत्रकारिता की आचरण संहिता का पालन क्लब के सदस्यों ने अभूतपूर्व अखंडता से किया है, जिसका एक अच्छा नतीजा क्लब के मेहमानों और क्लब के सदस्यों के बीच पूर्ण विश्वास के वातावरण के रूप में मिला है। इससे सभी लाभान्वित हुए हैं। वक्ता खुलकर बोले और सदस्यों को विभिन्न प्रश्नों के अलग-अलग पहलू समझ में आए। ऐसा आदान-प्रदान अन्यत्र शायद ही हो पाता।
अपने मानसिक क्षितिजों के विस्तार के अलावा अपनी व्यावसायिक-पटुता बढ़ाने के अन्य प्रयास भी प्रेस क्लब के तत्वावधान में यदा-कदा होते रहे हैं। कुल-मिलाकर प्रेस क्लब एक ऐसा मंच, शायद अनजाने ही, बन गया है, जो पत्रकारिता के स्तर को बढ़ाने में मददगार रहा है। यदि किसी भी व्यवसाय का स्तर सुधारना है, तो उसे ऐसी किसी संस्था की वास्तविक जरूरत होती है। वास्तविक आवश्यकता की पूर्ति करने वाला हर माध्यम टिकाऊ होता ही है। शायद इसीलिए प्रेस क्लब सोलह वर्ष तक बना रह सका और आगे भी बना ही रहेगा। अन्यथा इस प्रेस क्लब के सदस्यों में ही ऐसे अनेक साथी मिलेंगे जिन्होंने कोई एक दर्जन प्रेस क्लब संस्थाओं को बनते-बिगड़ते और मिटते देखा है।
हर सलाह पर अमल किया
मिलनसार राहुलजी जगत मित्र थे। देशभर में उनके लाखों प्रशंसक थे। मेरा उनसे परिचय 1959 में हुआ। वे मेरे दार्शनिक गुरू थे। अभ्यास मंडल को उनका मार्गदर्शन सदैव मिला। अभ्यास मंडल की स्थापना के संदर्भ में राहुलजी की सलाह हमें बहुत काम आई। सम्पत्ति मत बनाओ, शासकीय अनुदान से दूर रहो, संस्था के चुनाव आम सहमति से हों तथा आर्थिक व्यवहार में पारदर्शिता एवं मितव्ययता रखो-इस तरह की तमाम सलाहों पर मैंने और मेरे साथियों ने अभीं तक अमल किया है।
बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी बाबा बड़े मिलनसार थे। वे पूर्ण रूप से समाज-चिंतक थे। अनेक क्षेत्रों के मान्यवर व्यक्ति जैसे हमीद दलवई, प्रो. नरहर कुमेदकर, डाॅ. अनिल सदगोपाल, स्वामी अग्निवेश, चंद्रकांत शाह, यदुनाथ थत्ते, असगर अली इंजीनियर, मेधा पाटकर, ओमप्रकाश रावल आदि उनसे सलाह मशविरा करने आते थे। राहुतजी महान थे। फिर भी वे मुझ जैसे व्यक्तियों से भी बड़ी आत्मीयता से बातें करते और समस्याओं का समाधान करते थे।
बेबाक राय रखते
1980 में गुजरात में श्अंतर भारतीश् का चिंतन शिविर हुआ। सात प्रदेशों के 45 वरिष्ठ कार्यकर्ता बलसाड़ जिले के फणसा ग्राम में जमा हुए। शिविर तीन दिन का था। इंदौर से राहुलजी, गुरूजी चिंचालकर एवं मैं रेल से अनारक्षित तृतीय श्रेणी में सफर कर फणसा पहुंचे। दैनिक कार्यक्रमों के अलावा रात्रि 9 बजे राहुलजी कुर्सी पर बैठते और हम सभी शिविरार्थी दरी पर। चर्चा सत्र में कोई भी व्यक्ति किसी भी विषय पर प्रश्न करता और राहुलजी उस पर अपनी राय देते थे। रात दो बजे तक सवाल-जवाब का दौर चलता था। अध्यात्म, राजनीति, अर्थशास्त्र, शिक्षा सुधार तथा समाज के विभिन्न विषयों पर बाबा सहज रूप में अपने बेबाक विचार प्रस्तुत करते थे। उनके साथ बिताए वे तीन दिन जीवन के अमूल्य क्षण थे।

काकू जैसी सेवाभावी पत्नी
राहुलजी सांसारिक संन्यासी थे। लोधीपुरा में उनका निवास अत्यन्त साध्ाारण एवं मध्यवर्गीय परिवार जैसा था। उनका वैचारिक स्तर इतना ऊंचा था कि कार-बंगला जैसी भौतिक सुख-सुविधाएं उनके लिए तुच्छ थीं। राहुलजी की पत्नी विमलाजी को सब आदर से श्काकूश् कहते थे। वे नौकरी करती थीं। एक शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल की प्राचार्य थीं। नौकरी की व्यस्तता के बावजूद काकू घर की सारी व्यवस्थाओं और जिम्मेदारियों को बखूबी निभाती थी। राहुलजी से मिलने आने वाले अनगिनत मेहमानों की खातिरदारी में काकू कोई कोर-कसर नहीं छोड़ती। बिना किसी त्रास व परेशानी के खुशी-खुशी अतिथि सत्कार करने का कार्य काकू जैसी सेवाभावी पत्नी ही कर सकती है। घर-परिवार के प्रति समर्पित काकू एक आदर्श गृहिणी और पतिव्रता महिला थीं। बाबा ने हाय-फाय जीवन की कभी कामना नहीं की। संवाद-से भाषण की उनकी कला अद्भुत थी। किसी भी आयु के व्यक्ति से वे सहज रूप से संवाद करते थे।
जब में निरुत्तर हो गया
एक बार राहुलजी ने अभ्यास मंडल के बाईग्राम प्रकल्प के बारे में मुझसे पूछा-श्ग्रामीण क्षेत्र में काम करने का तुम्हारा उद्देश्य क्या हैघ्श् मैंने उत्तर दिया-‘ग्रामीणों की सेवा करना तथा उनमें जागरूकता बढ़ाना।‘ बाबा ने कहा-‘सेवा का व्रत अच्छा है, परन्तु जागरूकता बढ़ाकर ग्रामीणों की अपेक्षाएं बढ़ेंगी, उसका तुम्हारे पास क्या उपाय है! मैं निरूत्तर था। सचमुच उन्होंने समस्या के एक गंभीर बिन्दु पर मेरा ध्यान आकर्षित किया था।
अनूठे कार्यो में सहयोग
राहुलजी ने अपने निकटतम मित्रों का एक अनौपचारिक समूह बनाया था। ये सभी मित्र अपनी-अपनी क्षमतानुसार राशि इकट्ठा कर किसी अनूठे कार्य में संलग्न व्यक्तियों को आर्थिक सहायता प्रदान करते थे। मगर इसका कोई समाचार किसी अखबार में प्रकाशित नहीं होता था। यह दर्शाता है कि वे आत्म प्रचार से कितना परहेज रखते थे। वास्तव में बाबा ने एक अलौकिक एवं सार्थक जीवन जीया। इस तरह की शख्सियतें मानव जीवन के लिए प्रेरक होती हैं।
-प्रेस क्लब टाईम्स से साभार

वरिष्ठ पत्रकार संजीव माजूपूरिया का निधन
Our Correspondent 10 Dec. 2012
भोपाल। वरिष्ठ पत्रकार श्री संजीव माजूपूरिया का आकस्मिक निधन 9 जनवरी को हो गया है। श्री संजीव माजूपूरिया विस्पर इन द कॉरिडोर के संपादक रहे है। उनके आकस्मिक निधन पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा व मेट्रो मिरर के प्रधान संपादक शिवहर्ष सुहालका ने गहरा क व्यक्त किया है। श्री शर्मा ने अपने शोक संदेश में कहा है कि श्री मजुपुरिया ने सदैव रचनात्मक एवं सकारात्मक पत्रकारिता की। जनसंपर्क मंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और उनके परिजन को इस असीम दुख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। उनकी अंतिम यात्रा गुरुवार 10 जनवरी को उनके निवास स्थान से निकली गई।

अंधविश्वास फैलाते विज्ञापन और मीडिया की भूमिका
1. कोई फीस नहीं, 1000 % समाधान 3 घंटे में स्पैशलिस्ट प्रेमविवाह, प्यार में धोखा, सौतन-दुश्मन छुटकारा, घरवालों को मनाना।
2. सिर्फ 450 रुपए में मनचाही लड़की, स्त्री या विधवा को घर बैठे 5 मिनट में अपनी महबूबा बनाओ मेरे से पहले कोई काम नहीं कर सकता।
3. फ्री परामर्श, फ्री काम, न पैसा ऑनली समाधान बिना पूछे दिल का हाल जाने निराश प्रेमी प्रेमिका 2 घंटों में प्यार हासिल करें।

प्रतिष्टित अखबारों में प्रकाशित यह चंद विज्ञापन है जो ज्योतिष व तंत्र-मंत्र के नाम पर जनता में अंधविश्वास फैला रहे हैं। आज जब मनुष्य विज्ञान में तरक्की कर चांद पर बस्ती बसाने और मंगल ग्रह पर पानी खोजने में जुटा तब ऐसे समय में ज्योषियों और बाबाओं की एक बड़ी कौम लोगों को सिर्फ 450 रुपए में मनचाही लड़की, स्त्री या विधवा को घर बैठे 5 मिनट में अपनी महबूबा बनाने के लुभावने ऑफर दे रहे हैं। मजे की बात तो यह है कि लोग इनके झांसे में भी आ रहे हैं। सड़क के किनारे टेंट लगाकर बैठा झोला छाप डॉक्टर आधुनिक मेडिकल सुविधाओं को धत्ता बताते हुए आंखा का चश्मा उतारने, जड़ी बूटियों से हर मर्ज का इलाज करने का दावा कर रहा है। यहां तक तो बात समझ में आती है लेकिन चिंता तब होती है जब जनता को जागरुक करने और जनजागरण की बात करने वाला मीडिया भी इन्हें तवज्जों दे लगे। आजकल ज्यादातर अखबारों में ऐसे विज्ञापन प्रकाशित हो रहे हैं जो ज्योतिष और तंत्र मंत्र जैसी विधाओं को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। हालांकि ज्योतिष एक प्राचीन विद्या है लेकिन कुछ फर्जी लोग इसका गलत फायदा उठा रहे हैं।

इन विज्ञापनों को लेकर बुद्धीजीवियों का एक बड़ा वर्ग मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाने लगा है। अखबारों में प्रकाशित होने वाले इस तरह के विज्ञापनों से सबसे ज्यादा भ्रमित आम जनता व नाबालिग लड़के लड़कियां हो रहे हैं। विज्ञापनों के लालच में मीडिया इन फर्जी ज्योतिषियों व बाबाओं को जो बढ़ावा दे रहा है वो खुद मीडिया की भूमिका को संदेह के घेरे में ला रही है। ऐसा नहीं है कि इस तरह के विज्ञापनों से ही मीडिया को कमाई होती है या इनके प्रकाशित नहीं होने से मीडिया को आर्थिक रूप से बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। अकसर मीडिया में ही ऐसे समाचार देखने व पढ़ने को मिल जाते हैं जिसमें लोग इन बाबाओं के चक्कर में आकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर बैठते हैं। अब मजबूरी यह है कि इस तरह के विज्ञापनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए भी स्पष्ट नियम नहीं है। इसी का फायदा इस तरह के फ़र्ज़ी ज्योतिष व बाबा उठाते हैं। पुलिस में भी अमूमन इस तरह के प्रकरणों की शिकायतें ना के बराबर होती है। जानकारों का कहना है कि जिस प्रकार एक ज्‍योतिषी किसी प्रयोगशाला में प्रयोग कर ग्रहों के प्रभाव को प्रमाणित करने में असमर्थ हैं, उसी प्रकार वैज्ञानिक भी ये स्‍पष्‍ट नहीं कर पाते कि ग्रहों का प्रभाव जड़ चेतन पर नहीं पडता है, यही कारण है कि लोगों की भ्रांति दूर नहीं हो पाती। जब किसी प्रकार की भ्रांति दूर ही न की जा सके, तो फिर पत्र पत्रिकाओं में या टी वी चैनलों में ज्‍योतिष के कार्यक्रमों का जनसाधारण के लिए कोई उपयोग नहीं रह जाता। हां, पाठकों के भ्रम के कारण चैनलों को उनके उद्देश्‍य के अनुरूप विज्ञापन के द्वारा बडे लाभ की व्‍यवस्‍था अवश्‍य हो जाती है। मीडिया को ही क्‍या दोष दिया जाए , आजतक सरकार या जनता ने भी कभी ज्‍योतिष की परीक्षा के लिए सार्थक कदम नहीं उठाए हैं, ज्‍योतिष की विवादास्‍पद स्थिति के यही सारे कारण है। ज्योतिष विधा यों तो हमेशा लोकप्रिय रही है लेकिन इन दिनों इसके प्रति कुछ ज्यादा ही लगाव देखा जा रहा है। जब से टीवी पर ज्योतिष और चमत्कारों की चर्चाएं बढ़ी हैं तब से तो ज्योतिष का ग्लैमर ही कुछ विचित्र होता जा रहा है। ज्‍योतिष जैसा पवित्र विषय भी बहुत सारे स्‍वार्थी लोगों के द्वारा अपने स्‍वार्थ की पूर्ति का एक साधन बन गया है।

जिस अनुपात में ज्योतिष का वर्चस्व बढ़ा है उस अनुपात में ज्योतिषीय सच्चापन नहीं बढ़ पाया है। ज्योतिष ने सेवा से कहीं आगे बढ़कर धंधे का स्वरूप इख़्तियार कर लिया है।

आस्था और अनास्था के इसी भंवर के बीच वह आम आदमी है जिसकी ज्योतिष शास्त्र के प्रति श्रद्धा है और उसे अज्ञात और भावी के संकेत प्राप्त करने की आतुरता है। इसी श्रद्धा का दोहन ही तो आजकल के ज्योतिषी कर रहे हैं। देखा जाए तो आजकल मीडिया का जमाना है। हर क्षेत्र में हमें नई-नई बातें सुनने और जानने को मिलती हैं। ज्‍योतिष भी इससे कुछ अलग नहीं है। कोई ज्‍योतिषी नाड़ी की बात करता है, तो कोई भृगु संहिता की। कोई कृष्‍णमूर्ती पद्धति का ज़िक्र करता है, तो कोई लाल किताब का। ऐसे में आम आदमी के लिए यह समझना बेहद मुश्किल हो जाता है कि आख़िर ये सब हैं क्‍या और इन सबका वे अपने दैनिक जीवन में क्‍या फायदा उठा सकते हैं?

दरअसल भारत में धर्म, आस्था, विश्वास के नाम पर कुत्सित व्यापार हो रहा है। ज्योतिष और तंत्र-मंत्र, सुरक्षा कवच बेचने, शनि के प्रकोप से बचने, मोक्ष प्राप्त करने, सांसारिक व्याधियों से छुटकारा दिलाने के लिए अनेक साधु-संत, योगी, तात्रिक, ज्योतिषी और भविष्यवक्ता लगे हुए हैं। उनका अपना प्रचार तंत्र है, चेले-चपाटे हैं, दलाल हैं, अपने टीवी चैनल हैं, अखबारों में आधे, पूरे पेज के विज्ञापन हैं। अंध विश्वास फैलाने, लोगों की दुबर्लता का शोषण करने में अनेक चैनल अहम भूमिका निभा रहे हैं। कम से कम 20 चैनल ऐसे अवश्य हैं, जिन पर नित्य ऐसे कार्यक्रम दिखाए जाते हैं जो व्यक्ति को केवल भ्रमित ही नहीं करते, उन्हें अंधविश्वासी और दुर्बल भी बनाते हैं। अनेक चैनलों पर विविध प्रकार के रक्षा कवच बिकते हैं। किसी वैज्ञानिक ने आज तक ज्योतिष को विज्ञान नहीं माना है। ज्योतिष शास्त्र का जन्म ही समाज में घबराहट पैदा करने के लिए हुआ। असुरक्षा की भावना का हाल यह है कि असंख्य पढ़े-लिखे आधुनिक सोच वाले व्यक्ति भी सुबह जब अखबार हाथ में लेते हैं, तो सबसे पहले अपना भविष्यफल देखते हैं। लगभग सभी अखबारों का यह अनिवार्य स्तंभ है। अपनी अनेक समस्याओं से पीड़ित व्यक्ति ज्योतिषियों-तांत्रिकों की शरण में जाता है, जो उसके विश्वास का शोषण करते हैं।

मीडिया इस तरह के विज्ञापन न लें इसके लिए एक मात्र उपाय सरकारी नियंत्रण हो सकता है, जो मीडिया की बेहतर छवि व आम जनता की भलाई के लिए आवश्यक है। इस तरह के विज्ञापन छापने की लिए खुली छूट देना यह कदम न तो जनता के हित में होगा और ना ही देश के हित में और न स्वयं मीडिया की विश्वसनीयता के लिए हितकारी होगा।
आज सही अर्थों में देश में लोकतंत्र के अस्तित्व का आधार मीडिया ही है। अतः मीडिया को स्वयं आत्म शुद्धि करने के उपाय करने होंगे। उसे स्वयं संगठित होकर मजबूत संगठनों का निर्माण करना होगा और अपनी कार्य शैली के लिए नियमावली बनाना होगी,स्व निर्मित ठोस कानून बनाने होंगे। ताकि उन नियमों का पालन करते हुए अपने क्षेत्र में व्याप्त कचरे को साफ किया जा सके। मीडिया को स्वयं ही विश्वसनीय एवं देश और जनता के लिए जिम्मेदार बनना होगा।

नवीन गुप्ता होंगे ''पंजाब की शक्ति'' के संपादक
दैनिक भास्कर के लुधियाना संस्करण में बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत नवीन गुप्ता लुधियाना से ही लांच होने जा रहे अखबार ''पंजाब की शक्ति'' के संपादक होंगे। उन्होंने दैनिक भास्कर से इस्तीफा दे दिया है। वे पिछले पांच वर्षों से दैनिक भास्कर, लुधियाना में कार्यरत थे।
राज्यसभा टीवी के संपादक उर्मिलेश ने दिया इस्तीफा
राज्यसभा टीवी के संपादक उर्मिलेश ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालाँकि उनके इस्तीफे के कारणों का पता नहीं चल पाया है। गौरतलब है की उर्मिलेश के ही नेतृत्व में यह चैनल लांच हुआ था। वे करीब डेढ़ साल से इस पद पर कार्यरत थे।
आंख बंद कर समाचार देने की मनोवृत्ति में बदलाव की जरूरत : गिरीश उपाध्याय
वैश्विक दबाव की पत्रकारिता का कुहासा छंटने लगा है : पुष्पेन्द्र पाल सिंह
भोपाल। जर्नलिस्ट्स यूनियन आफ मध्यप्रदेश*जम्प* द्वारा आयोजित संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार व नवदुनिया के संपादक श्री गिरीश उपाध्याय ने कहा कि अधकचरा ज्ञान वाली पीढ़ी पत्रकारिता को संचालित कर रही है इस कारण समस्याओं को बढ़ावा मिल रहा है। बिना पुष्टि किये आंख बंद कर समाचार देने की मनोवृत्ति में इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि आपसी ज्ञान बांटने से पत्रकारिता समृद्ध हो जायेगी इसके लिये अधिक चिन्ता करने की जरूरत नहीं है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता संस्थान के विभागध्यक्ष श्री पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने कहा कि वैश्विक युग में मीडिया की चाल को लेकर अब कुहासा छंटने लग गया है जो आने वाले दिनों में सब ठीक हो जायेगा। उन्होंने कहा कि भारत की खासबात यह है कि यहां प्रिंट मीडिया का प्रभाव बरकरार है जबकि अमेरिका जैसे देश में प्रिंट मीडिया कमजोर हुआ है। एनयूजे के उपाध्यक्ष श्री रामभुवन सिंह सिंह कुशवाह व जम्प के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने भी अपने विचार रखे। संगोष्ठी का विषय था वैश्विक युग में मीडिया। कार्यक्रम का संचालन डा. नवीन जोशी ने किया जबकि आभार जिला इकाई के अध्यक्ष प्रवाल सक्सेना ने माना।

श्री गिरीश उपाध्याय ने कहा कि पत्रकारिता की शिक्षा के बाद भी पत्रकार का अनुभव अधिक मायने रखता है। संस्थानों का संचालन अधकचरे ज्ञान वाले पत्रकारों के हाथों में आ गया है जिससे पत्रकारिता का प्रभाव कम हुआ है। उन्होंने कहा कि समय के साथ हमें बदलाव तो लाना होगा लेकिन इसमें बहने की बजाये सहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कम्पोजिंग के युग से फेसबुक के युग तक आ गये हैं इसलिये व्यवहारिक बदलाव की अपेक्षा सभी पत्रकारों से की जा रही है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता त्याग के बजाये नौकरी हो गई है तो उसी प्रकार के परिणाम सामने आने लग गये हैं।
पत्रकारिता विभाग के पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने कहा कि पत्रकारिता में समाचार के प्रस्तुतितकरण पर अधिक ध्यान होता जा रहा है जबकि विषय वस्तु गौण होती जा रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने दौर इस भटकाव से सन्तुलित पत्रकारिता की ओर लौटेगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक युग बुराईयों से कुहासा छंटने लग गया है और भारत के अनुरूप पत्रकारिता का युग आने वाला है। एनयूजे के उपाध्यक्ष श्री रामभुवन सिंह कुशवाह ने कहा कि हालांकि प0समाचार पत्रों में बाजारवाद हावी है ऐसे में सत्तर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत ही दुनियां का नेतृत्व करेगा। जम्प के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने कहा कि मीडिया में स्वच्छ छवि के पत्रकारों को निराशा का सामना नहीं करना पड़ता है क्यों बाहरी प्रभाव से हमारी संस्कृति ही हमें बचा ले जाती है7 आपने मध्यप्रदेश का उदाहारण देते हुये कहा कि मध्यप्रदेश पत्रकारिता की उर्वरा भूमि हैं जिसने देश को मूर्धन्य पत्रकार दिये हैं। हमें गर्व है कि मध्यप्रदेश की पत्रकारिता पर किसी भी प्रकार का कलंक नहीं लगा है। कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथि वक्ताओं का स्वागत प्रदेश इकाई के सचिव अतुल पुरोहित व भोपाल इकाई सचिव दिनेश शर्मा ने किया। परिचर्चा में कई पत्रकारों ने सवाल पूछ कर अपने विचारों का समाधान किया।

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"From Confrontation To Cooperation" A case study By Shashi Kant Shukla, C K Sardana