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:: पर्यावरण ::

 

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तिहरे खतरे का सामना कर रहे हैं दुनिया के समंदर
ओस्लो। ग्लोबल वार्मिग, अम्लीकरण और ऑक्सीजन के स्तर में लगातार कमी की तिकड़ी दुनियाभर के समुद्रों के लिए खतरा बनती जा रही है। इससे समुद्री जीव जंतुओं की कई प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
गुरुवार को जारी अंतरराष्ट्रीय शोध के नतीजों के मुताबिक, पूर्वानुमान के मुकाबले नए नतीजे ग्लोबल वार्मिग की अधिक विनाशकारी तस्वीर पेश करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, समुद्र लगातार गर्म हो रहे हैं। इस शताब्दी में समुद्र के तापमान में भले ही मामूली इजाफा दर्ज किया गया हो, लेकिन इसके खतरनाक नतीजे सामने आ चुके हैं। व्यवसायिक क्षेत्र में बड़े स्तर पर इस्तेमाल की जाने वाली मछलियां गहरे पानी या ध्रुवों की ओर खिसक रही हैं। मछलियों की कई प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर आ गई हैं।
अग्रणी वैज्ञानिकों की गैर सरकारी संस्था इंटरनेशनल प्रोग्राम ऑन द स्टेट ऑफ द ओशियन के मुताबिक, 'समुद्र और इसके पारिस्थितिक तंत्र को हो रहे नुकसान को अब तक कमतर आंका गया है। मौजूदा समय में कार्बन डाई आक्साइड के अत्याधिक उत्सर्जन से समुद्र का अम्लीकरण हो रहा है, यह पृथ्वी के इतिहास की अभूतपूर्व घटना है।'
इंटरनेशनल यूनियन फॉर कनवर्सेशन ऑफ नेचर की रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरण में ग्रीन हाउस गैसों के बढ़ते प्रभाव के कारण समुद्र का तापमान बढ़ रहा है। उर्वरकों और सीवेज का पानी लगातार समुद्र में बहाया जा रहा है, जिससे शैवालों की संख्या बढ़ रही है और समुद्र में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जा रही है। हवा में मौजूद कार्बन डाई आक्साइड जब समुद्र के पानी के संपर्क में आती है, तो अम्ल बन जाती है। अम्लीकरण, बढ़ता तापमान और ऑक्सीजन की कमी की खतरनाक तिकड़ी से दुनियाभर के समुद्रों के जीव जंतुओं के सामने आस्तित्व का खतरा मंडराने लगा है।


पहाड़ों पर भारी बर्फबारी, दिल्ली में गिरे ओले
नई दिल्ली। दिल्ली और एनसीआर में गुरुवार की रात झमाझम बारिश और सर्द हवाओं के चलते एक बार फिर से ठंड फिर लौट आई है। दिल्ली और एनसीआर के कई इलाके में ओले पड़े। वहीं, पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी, बारिश और सर्द हवाओं ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में भी दिखेगा। दिल्ली सहित पूरे एनसीआर में जनवरी में बारिश का 10 साल का रेकॉर्ड टूट गया। गुरुवार रात भर रुक-रुक कर बारिश हुई, जगहों पर ओले भी पड़े। शुक्रवार सुबह भी कई इलाकों में तेज बारिश हुई। एनसीआर में गुरुवार की शाम के वक्त से तेज सर्द हवाएं चल रही थीं। देर रात अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। कुछ इलाकों में ओले भी पड़े। मौसम विभाग ने शुक्रवार को अधिकतम तापमान में गिरावट आने की संभावना व्यक्त की है। इसके पहले बुधवार की रात और गुरुवार के दिन में हिमाचल में बर्फबारी के चलते 2 दर्जन से ज्यादा सड़कें बंद हो गईं। प्रदेश के कई इलाकों में 2 फुट तक बर्फ जम गई। कश्मीर में सेना को हिमस्खलन का अलर्ट जारी किया गया है। उत्तराखंड में बर्फबारी और बारिश से हाल बेहाल है। यूपी के कई इलाकों में बारिश हुई और ओले भी गिरे। मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ का असर बढ़ने की वजह से मौसम में यह बदलाव आया है। 48 घंटों में मौसम और बिगड़ सकता है। हिमाचल और उत्तराखंड में अगले 48 बर्फबारी की चेतावनी दी गई है। जम्मू-कश्मीर से भी भारी बर्फबारी की खबर है। स्नो ऐंड एवलांच स्टडी इस्टेबलिशमेंट ने सेना को चेतावनी जारी करते हुए कश्मीर के बर्फीले इलाकों में अलर्ट रहने को कहा है। डिवीजनल डिजास्टर मैनेजमेंट कश्मीर ने कुछ इलाकों में हिमस्खलन की चेतावनी भी जारी की है। जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद कर दिया गया। प्रदेश में औसतन 2 फीट तक बर्फ गिरी है। यूपी के कई जिलों में हुई बारिश से ठंड फिर लौट आई है। कई जिलों में ओले भी गिरे हैं। बिजली गिरने से 8 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 3 झुलस गए।


गंगा प्रदूषण पर फैक्ट्रियों को पीएमओ की चेतावनी
नई दि्ल्ली। इलाहाबाद में महाकुंभ से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गंगा और यमुना नदियों में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने दोनों नदियों के पानी को गंदा करने वाले उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से शुक्रवार को जारी बयान में कहा गया कि इलाहाबाद में महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं को स्वच्छ डल मुहैया कराने के लिए टिहरी बांध से पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध हो, इसकी निगरानी लगातार की जा रही है। पीएमओ के अनुसार संगम में यमुना और गंगा में जैव-रासायनिक ऑक्सिजन डिमांड (बीओडी) आम तौर पर 6 मिलीग्राम प्रति लीटर होता है, लेकिन मुख्य मुद्दा कागज उद्योगों से निकलने वाले उत्सर्जन का रंग है, जो रामगंगा और काली नदियों में आता है। रामगंगा और काली दोनों ही गंगा की सहायक नदियां हैं। गंगा और यमुना में स्वच्छ जल का प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि गंगा या उसकी सहायक नदियों में सभी उद्योगों का उत्सर्जन तय मानकों के अनुसार हो। पीएमओ की ओर से जारी बयान में कहा गया कि रामगंगा, काली और सहायक नदियों में जल की क्वॉलिटी की निगरानी रोजाना हो रही है। इस काम में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ समन्वय कर रहे हैं।


बाघों की मौत पर सरताज के खिलाफ मेनका का मोर्चा खुला रहेगा
भोपाल। मप्र में हो रहे बाघों की मौत को हादसा नहीं माना जा सकता। यह शिकारियों की सुनियोजित साजिश है। इस मामले में जब तक वन मंत्री सरताज सिंह इस्तीफा नहीं देते तब तक उनके खिलाफ मोर्चा खुला रहेगा। यह बात सोमवार को पीपुल्स फॉर एनिमल संस्था की अध्यक्ष और लोकसभा सांसद मेनका गांधी ने कही। वे एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोजेक्ट शुरू करने के मामले पर चर्चा करने भोपाल आई थीं। मेनका ने कहा कि वन मंत्री और वन विभाग की लचर व्यवस्था से बाघ मर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बांधवगढ़ में तो वन विभाग की जीप से बाघिन झुरझुरा की मौत हुई थी। उस मामले को दबा दिया गया। पन्ना में बाघ खत्म होने के बाद भी मप्र सरकार ने बाघों को बचाने के लिए कोई नई रणनीति नहीं बनाई है। सुश्री गांधी ने कहा कि प्रदेश के नेता और वन अधिकारियों के रिसोर्ट मालिकों से संबंध है, कई नेताओं की तो इन रिसोटों में हिस्सेदारी है। गायों की तस्करी के मामले में प्रदेश की पुलिस और राजनेता शामिल हैं। मेनका गांधी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। उन्होंने चौहान से कहा कि आपने और खूबसूरत बना दिया है। मेनका ने राजधानी के पर्यावरण की जमकर तारीफ की। मेनका ने नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर और महापौर कृष्णा गौर से भी भेंट की। मेनका गांधी द्वारा मोर्चा खोले जाने की बात पर सरताज सिंह का कहना है कि मेनका गांधी को पता नहीं हमसे क्या दुश्मनी है। वे ऐसा क्यों कह रही हैं। जब मुख्यमंत्री को मेरे काम करने के ढंग से एतराज नहीं है तो मेनका गांधी कुछ भी कहें कोई फर्क नहीं पड़ता। वैसे भी मेनका केंद्र में बैठकर राज्य के मंत्री का काम का आंकलन कैसे कर सकती हैं।


सर्दी ने तोड़ा 48 साल का रिकॉर्ड
नई दिल्ली। कड़ाके की ठंड ने बुधवार को पिछले 48 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दिल्ली के अधिकतम तापमान में सामान्य से 11 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी पांच दिन तापमान ऐसा बने रहने की उम्मीद है। तापमान में गिरावट की वजह पश्चिम विक्षोभ और उससे उत्तरी भारत में हुई बर्फबारी है। इसके अलावा ठंडी हवाओं का उत्तरी भारत में चल रहा चक्रवात भी मौसम को ठंडा बनाए हुए है। सहायक मौसम वैज्ञानिक ओमप्रकाश बताते हैं कि एकदम से राजधानी के तापमान में हुई गिरावट का कारण दिल्ली से उत्तराखंड और उत्तराखंड से जम्मू-कश्मीर फिर वहां से वापस दिल्ली होकर चलने वाली ठंडी हवाओं का चक्रवात है। इससे बुधवार रात को तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस से गिरकर चार डिग्री सेल्सियस हो गया। मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को जहां अधिकतम तापमान 15.3 डिग्री रहा वहीं बुधवार को यह गिरकर 9.8 डिग्री हो गया। अधिकतम और न्यूनतम तापमान दोनों में गिरावट के अलावा अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच अंतर की कमी से भी ठंड बढ़ी है। गौरतलब है कि साल के पहले दिन आगरा में पारा लुढ़ककर 0.9 डिग्री पर पहुंच गया, जो यूपी में सबसे कम है। उत्तर भारत का मैदानी इलाका भीषण ठंड की चपेट में है। साल की विदायी और अगवानी के दौरान आगरा और नारनौल (हरियाणा) सबसे ठंडे रहे, जहां पर पारा गिरकर 0.9 और 0.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। राजस्थान के चुरू में भी पारा 0.7 डिग्री तक गिरा।


कड़ाके की ठंड से जनजीवन बेहाल
कड़ाके की ठंड से जनजीवन बेहाल नई दिल्‍ली। भारत समेत कई मुल्‍कों में कड़ाके की ठंड से जनजीवन बेहाल हो गया है। भारत के अलावा, पाकिस्‍तान, अफगानिस्‍तान, नेपाल, भूटान, रूस में भी ठड़ाके की ठंड पड़ रही है। जबकि अमेरिका के कई इलाकों में बर्फबारी की खबर है। भारत की राजधानी दिल्‍ली समेत पूरा उत्‍तर भारत इन दिनों कड़ाके की ठंड से बेहाल है। उत्तर भारत में ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। देश के कई राज्यों में ठंड और घने कोहरे से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। उत्तर प्रदेश में ठंड से मरने वालों की सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहा। यहां नौ और लोगों की मौत हुई है। प्रदेश में ठंड से मरने वालों की संख्या 92 हो गई है। दिल्ली में तापमान गिरने से सर्दी बढ़ गई है। मंगलवार को अब तक का सबसे कम चार डिग्री सेल्सियस रहा। यहां के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे में घने कोहरे के चलते 60 उड़ानें देरी से रवाना हुईं और 38 रद कर दी गईं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में जारी बर्फबारी की वजह से वहां से चली ठंडी हवा लोगों को कड़ाके की सर्दी का अहसास करा रही है। लोग गर्म कपड़ों के बीच भी ठिठुरते नजर आए। अगले कुछ दिनों तक ऐसा ही मौसम बना रह सकता है। तापमान लुढ़कने से मौसम और ठंडा होगा। हल्की बूंदाबांदी और धुंध लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में कंपकंपाती ठंड का रुख बरकरार रहेगा। रविवार को दिल्‍ली का न्‍यूनतम तापमान दो डिग्री तक लुढ़क सकता है। हालांकि कड़ाके की सर्दी के बावजूद दिल्‍ली और दूसरे शहरों में गैंगरेप के खिलाफ लोगों का आंदोलन जारी है।
उधर राजस्थान के चूरू में नए साल की शुरूआत जीरो डिग्री टेंपरेचर के करीब से हुई है। खास बात ये है कि 2013 की एक जनवरी पांच सालों में सबसे ठंडी रही। इससे पहले वर्ष 2008 में एक जनवरी का न्यूनतम तापमान माइनस 1.0 डिग्री रहा था। चूरू मौसम केंद्र के अधिकारियों के मुताबिक श्रीनगर में बर्फबारी के बाद बर्फ से संपर्क होकर चली उत्तरी हवा की वजह से तापमान गिरा है और सर्दी अचानक बढ़ी है। नए साल के सवेरे ने लोगों की धूजणी छूटा दी। सर्दी इतनी तेज थी कि लोग गर्म कपड़ों से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। हालांकि सुबह 10 बजे बाद धूप खिली। लेकिन सर्द हवा के चलते सर्दी से राहत नहीं मिल पाई। दोपहर में भी ठंडी हवा का दौर चलता रहा। शाम ढलने के बाद कड़ाके की सर्दी ने जोर पकड़ लिया।
लोगों ने अलाव का सहारा लेकर राहत पाने की कोशिश की। खुले इलाकों में सर्दी का असर सबसे ज्यादा रहा। इससे शहरभर के मुख्य बाजारों व चौक-चौराहों में सन्नाटा पसर गया। मौसम विभाग के मुताबिक मंगलवार का अधिकतम तापमान 22.3 व न्यूनतम तापमान 0.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। नए साल पर बच्चों को कड़ाके की ठंड में गर्म कपड़ों में लिपटकर स्कूल जाना पड़ा। जिले के कई क्षेत्रों में कोहरे का भी असर रहा।
चूरू मौसम केंद्र के प्रभारी जिलेसिंह राव का मानना है कि फिलहाल एक-दो दिनों तक माइनस में न्यूनतम तापमान आने की संभावना नहीं है। हालांकि सर्दी का असर 10 जनवरी तक रहेगा। लेकिन अचानक बादल आ जाने से तापमान जीरो डिग्री से ऊपर ही जाने की संभावना बनी हुई है। बादलों के चलते मौसम सर्द रहेगा।


हिमालय में हुई बर्फबारी के कारण ठिठुरा शहर
भोपाल। हिमालय में हुई बर्फबारी के कारण वहां से आ रही ठंडी हवाओं ने गुरुवार को राजधानी को ठिठुरा दिया। सुबह से ही लोग ठंड की चपेट में थे। वहीं, इस महीने पहली बार न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे गया है। मौसम केंद्र ने अनुमान जताया है कि अभी दो-तीन दिन ऐसी ही सर्दी बरकरार रह सकती है। उधर, प्रदेश के अन्य हिस्सों में तेज ठंड पडऩा शुरू हो गई है। मौसम केंद्र के मुताबिक गुरुवार को न्यूनतम तापमान 7.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। यह सामान्य से चार डिग्री कम था। जबकि बुधवार के मुकाबले भी इतना ही कम था। बुधवार को 11.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। अधिकतम तापमान में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह बुधवार की भांति 25.3 डिग्री सेल्सियस ही रिकॉर्ड हुआ है। जम्मू-कश्मीर में बना पश्चिमी विक्षोभ बर्फबारी के बाद आगे बढ़ गया। जबकि इसके पीछे आ रहा दूसरा पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान में अटक गया है। इसके चलते प्रदेश में उत्तरी दिशा से उत्तरी और उत्तरी-पूर्वी हवाएं आना शुरू हो गई। ये काफी सर्द हवाएं हंै। जबकि इससे पहले प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिमी हवाएं आ रही थीं, जो कि गर्म हवाएं थीं। भले ही कड़ाके की सर्दी शुरू हो गई है, लेकिन शीत लहर के लिए अभी लोगों को इंतजार करना पड़ेगा। दिसंबर के अंत में या फिर जनवरी में शीतलहर चल सकती है।


तमिलनाडु और आंध्र से आज गुजरेगा नीलम चक्रवात
चेन्नई। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात के बुधवार शाम तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश के तटों से गुजरने की संभावना है। मौसम विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है। एक अधिकारी ने बताया कि अब चक्रवात चेन्नई से दक्षिण-दक्षिणपूर्व में करीब 340 किलोमीटर दूर है। उन्होंने कहा कि नीलम के आज (बुधवार) शाम कुड्डालोर (तमिलनाडु) व नेल्लोर (आंध्र प्रदेश) के तटों के बीच से गुजरने की सम्भावना है। मौसम विज्ञानी के मुताबिक चक्रवात की वजह से तटीय तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश होने की सम्भावना है। नीलम के नजदीक बढ़ने के साथ तमिलनाडु, पुड्डुचेरी व दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटों पर 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। अगले 36 घंटों के दौरान उत्तरी तमिलनाडु, पुड्डुचेरी व दक्षिणी आंध्र प्रदेश तटों से सटे समुद्र में स्थितियां सामान्य नहीं होंगी। चक्रवात में एक से डेढ़ मीटर तक ऊंची लहरें उठ सकती हैं इसलिए तमिलनाडु के चेन्नई, कांचीपुरम व तिरुवल्लूर जिलों व आंध्र प्रदेश के नेल्लोर के निचले इलाकों में बाढ़ आ सकती है। चक्रवात से तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका व्यक्त की गई है। तमिलनाडु सरकार ने तटीय जिलों में स्कूलों व कॉलेजों में अवकाश घोषित कर दिया है।


बाघ संरक्षित क्षेत्रों में पर्यटन पर रोक हटी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 41 बाघ अभयारण्यों के कोर इलाके में पर्यटन की अनुमति दे दी। इससे पहले केंद्र सरकार बाघ संरक्षण संबंधी नए दिशानिर्देश जारी कर चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा नए दिशानिर्देश जारी करने के बाद यह कदम उठाया। सरकार ने सोमवार को संशोधित गाइडलाइंस का नोटिफिकेशन जारी किया था। शीर्ष अदालत ने 24 जुलाई को कोर एरिया में पर्यटन पर प्रतिबंध लगाया था। कोर्ट ने कहा नई गाइडलाइंस के हिसाब से पर्यटन गतिविधियां संचालित की जा सकेंगी। बेंच ने स्पष्ट किया हैं कि उसने न तो इन दिशानिर्देशों को वैध करार दिया है, न ही अवैध। गाइडलाइंस से असंतुष्ट कोई भी पक्ष उसे उचित फोरम में चुनौती देने को स्वतंत्र है। अदालत ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया वे कि छह महीने में बाघ संरक्षण योजना तैयार करें। शीर्ष कोर्ट के आदेश के बाद मप्र में बांधवगढ़, पेंच, कान्हा, पन्ना, संजय गांधी, सतपुड़ा बाघ अभयारण्य को बुधवार से पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।


संक्रमण से मादा तेंदुए कैटरीना की मौत
भोपाल। वन विहार नेशनल पार्क में रविवार को मादा तेंदुए कैटरीना की मौत शाम साढ़े चार बजे हो गई। जहां पिछले दो दिनों में दो तेंदुए की मौत हुई है, वहीं दो की हालत गंभीर है। शनिवार को तेंदुए निम्मी की मौत के बाद उसके अवयव को संरक्षित कर लिया गया था। रविवार सुबह नौ बजे मादा तेंदुए निम्मी का और पांच बजे कैटरीना का पोस्टमार्टम वन्य प्राणी फॉरेंसिक लैब के डॉ. एबी श्रीवास्तव के नेतृत्व में किया गया। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में निम्मी की मौत की वजह मिर्गी और गले में भोजन फंसना बताया गया। जबकि कैटरीना की मौत बेबेसिया के संक्रमण के कारण हुई। वन विहार के सहायक संचालक डॉ. सुदेश वाघमारे ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।


पकड़ा गया तेंदुआ, खौफ खत्म
भोपाल। आईआईएफएम, भदभदा बस्ती और राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में तीन माह से सक्रिय तेंदुआ रविवार को पकड़ा गया। वह अलसुबह वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में फंस गया। रेस्क्यू टीम पहले उसे वन विहार ले आई, जहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इसके बाद उसे पिपरिया के पास सतपुड़ा नेशनल पार्क के मढ़ई रेंज में छोड़ दिया गया। सुबह 5 बजे बकरे के मिमियाने की आवाज सुनाई दी। गश्ती दल ने देखा तो तेंदुआ पिंजरे में फंस चुका था। दोपहर 3.30 बजे वन विभाग की टीम मढ़ई पहुंची। यहां पिंजरे को नाव पर लादकर तवा डेम पार कराया गया। शाम 5.30 बजे मढ़ई से 10 किमी दूर सुआंरिया के जंगल में तेंदुए को छोड़ दिया गया।


बाघ संरक्षण पर सरकार नए निर्देश जारी करे : सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बाघ संरक्षण पर केंद्र सरकार को हफ्तेभर की मोहलत दी है। इतने समय में उसे नए दिशा-निर्देश से संबंधित अधिसूचना जारी करने को कहा गया है। कोर्ट ने 24 जुलाई के अपने आदेश में भी ढील के संकेत दिए हैं। तब कोर्ट ने देशभर के टाइगर रिजर्व में पर्यटन व कारोबारी गतिविधियों पर रोक लगा दी थी। जस्टिस एके पटनायक और जस्टिस स्वतंत्र कुमार की बेंच ने मंगलवार को इस मामलेे की सुनवाई की। इस दौरान बेंच ने साफ कर दिया कि नए दिशा-निर्देशों से असंतुष्ट राज्य सरकारें कोर्ट में अपील कर सकती हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 16 अक्टूबर को होगी। शीर्ष कोर्ट में मध्यप्रदेश के पर्यावरणविद् अजय दुबे ने याचिका लगाई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, 'हम न किसी दिशा-निर्देश को वैध ठहरा सकते न उनको संविधान के खिलाफ घोषित कर सकते हैं।' कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलीसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया, 'राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा तैयार नए दिशा-निर्देशों को फौरन अधिसूचित कर दिया जाएगा।'


बाघों के कोर जोन में पर्यटकों पर रोक
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फ़ैसला लेते हुए बाघ संरक्षित क्षेत्र में पर्यटन पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड, राजस्थान, आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र को तीन माह में बफर जोन अधिसूचित करने को कहा था।
मंगलवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने राज्यों को बाघ अभयारण्यों के आसपास बफर जोन तय करने के लिए आखिरी मोहलत दी। तीन हफ्ते के भीतर आदेश तामील नहीं हुआ तो राज्यों पर अवमानना का केस चलेगा। साथ ही वन विभाग के प्रमुख सचिव पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। कोर्ट ने पिछला आदेश नहीं मानने के लिए आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, महाराष्ट्र और झारखंड पर 10-10 हजार का जुर्माना भी लगाया। झारखंड और अरुणाचल प्रदेश के वकील ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि वह इस बार समय पर काम पूरा कर लेंगे। हालांकि, यह रोक अभी अंतरिम आदेश के तौर पर है। प्रतिबंध सिर्फ 'कोर जोन' के लिए ही है। जस्टिस स्वतंत्र कुमार और इब्राहीम खलीफुल्ला की बेंच पर्यावरणविद अजय दुबे की अर्जी पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने 4 अप्रैल और 10 जुलाई को भी राज्यों से बफर जोन का इलाका तय करने के निर्देश दिए थे। मामले की सुनवाई 22 अगस्त को होगी। इसमें सभी राज्य राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की गाइड लाइन पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएंगे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट अंतिम फैसला देगा। उधर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। साथ ही कहा कि वह मंत्रालय की ओर से भी राज्यों को फौरन कार्रवाई करने को कहेगी।


नागपंचमी पर सपेरों से 177 सांप जब्त
भोपाल। वन विभाग अमले ने मंगलवार को सपेरों से 177 सांप जब्त किए। इन सांपों को वन विहार में टोकरियों से बाहर निकाला गया। सपेरों ने इन सांपों के न केवल विष दंत निकाल दिए थे बल्कि उनके मुंह भी धागे से सिल दिए, ताकि लोग बिना डरे उनकी पूजा कर सकें। वन विहार नेशनल पार्क के कर्मचारियों और सर्प विशेषज्ञ सलीम ने बड़ी मशक्कत के बाद सांपों के सिले हुए मुंह खोलकर उनके घाव साफ किए। वन विहार स्थित स्नेक पार्क के प्रभारी राजेश नामदेव ने बताया कि सांपों के मुंह तो खोल दिए हैं लेकिन इसके बाद भी ये सांप अधिक दिन जिंदा नहीं रह पाएंगे। जब्त किए गए सांपों में कोबरा के अलावा आठ प्रजातियों के सांप शामिल हैं। इनमें रेट स्नेक, वाटर स्नेक और सेडगोवा प्रजाति के सांप प्रमुख हैं। सर्प विशेषज्ञ मोहम्मद सलीम ने बताया कि सपेरों के चंगुल से छुड़ाए गए सांपों में से एक भी सांप जिंदा नहीं रहेगा। इसकी वजह है उनके विष दंत तोड़ दिया जाना। यही नहीं बेरहमी से प्रहार कर इनकी विष ग्रंथि भी निकाल ली जाती है। विष गं्रथि निकालने के लिए पंचर बनाने वाले लोहे के औजार का इस्तेमाल किया जाता है। अब इस स्थिति में इन सांपों को जंगल में छोड़ भी दिया जाए तो शिकार न कर पाने के कारण ये भूखे मर जाएंगे।