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::पर्यावरण::

 
भूमि और जल संसाधनों के प्रबंधन वक्त की जरूरत है- श्री प्रकाश जावड़ेकर, केंद्रीय सूचना और प्रसारण, संसदीय कार्य, पर्यावरण एवं वन मंत्री
05 June 2014
भोपाल। भूमि और जल संसाधनों के प्रबंधन वक्त की जरूरत है. इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ फारेस्ट मैनेजमेंट और नेटवर्क ऑफ़ रूरल एंड अग्रेरियन स्टडीज द्वारा 'स्टडीइंग द रूरल' विषय पर आयोजित कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए केंद्रीय सूचना और प्रसारण, संसदीय कार्य, पर्यावरण एवं वन मंत्री, श्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा की नए परिप्रेक्ष्य और परिवर्तन पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक हैं. केंद्रीय मंत्री ने कहा की वाटरशेड प्रबंधन परियोजनाओं के क्रियान्वन से सिंचाई के लिए पानी की सुविधा उपलब्ध हुई जिससे किसानों को अत्यधिक लाभ मिला. अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा की नई फसलों, नए पैटर्न और इंटरनेट जैसी नई तकनीकों से विपणन कृषि उत्पादन में बिचौलियों का हस्तक्षेप कम हुआ. मंत्री जी ने उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के परिणामस्वरूप हुए दूषित पानी पर जताई। साथ ही उन्होंने यह भी कहा की जलवायु परिवर्तन की पृष्ठभूमि में पर्यावरण संरक्षण के लिए वन आवरण में वृद्धि की आवश्यकता है. इस अवसर पर बोलते हुए भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ गिरिधर किन्हल ने कहा की आईआईएफएम हमेशा से ही वन प्रबंधन शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी रहा है.
केंद्रीय सूचना और प्रसारण, संसदीय कार्य, पर्यावरण एवं वन मंत्री, श्री प्रकाश जावड़ेकर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ फारेस्ट मैनेजमेंट और नेटवर्क ऑफ़ रूरल एंड अग्रेरियन स्टडीज द्वारा 'स्टडीइंग द रूरल' विषय पर आयोजित कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए

"अनुसंधान एवं ग्रामीण अध्ययन ग्रामीण विकास के लिए प्रासंगिक नीतियों के निर्माण के लिए मदद करता है" - श्रीमती अरुणा शर्मा, अपर मुख्य सचिव एवं उपायुक्त पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा सामाजिक न्याय, मध्य प्रदेश
05 June 2014
भोपाल। अनुसंधान एवं ग्रामीण अध्ययन ग्रामीण विकास के लिए प्रासंगिक नीतियों के निर्माण के लिए मदद करता है. इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ फारेस्ट मैनेजमेंट और नेटवर्क ऑफ़ रूरल एंड अग्रेरियन स्टडीज द्वारा 'स्टडीइंग द रूरल' विषय पर आयोजित कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव एवं उपायुक्त पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा सामाजिक न्याय, मध्य प्रदेश, श्रीमती अरुणा शर्मा ने कहा की ग्रामीण अर्थव्यवस्था तेजी से परिवर्तनों के दौर से गुजर रही है और कृषि क्षेत्र के नीति निर्माताओं और प्रशासकों के लिए काफी महत्व रखती है. उन्होंने जानकारी देते हुए कहा की नवीनतम कैग की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के कृषि क्षेत्र में 74 प्रतिशत संपत्ति की बढ़ोतरी हुई है. अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा की लोगों को सड़कों, इंटरनेट और वित्तीय कनेक्टिविटी जैसी शीर्ष गुणवत्ता वाली बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है. वर्तमान समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नए नज़रिये से देखे जाने की जरूरत है.
इस अवसर पर बोलते हुए भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ गिरिधर किन्हल ने कहा की भारत के ग्रामीण जीवन राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में कृषि वस्तुओं के अधिकतम उत्पादन भारत के ग्रामीण जीवन राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में कृषि वस्तुओं के अधिकतम उत्पादन के बारे में है. ग्रामीण कार्यबल का दो तिहाई से अधिक हिस्सा अभी भी मुख्य रूप से कृषि के क्षेत्र में लगे हुए हैं, लेकिन उनकी उत्पादकता का स्तर कम है. नतीजतन, ग्रामीण और शहरी प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय (MPCE) के बीच की खाई बढ़ गई है. उन्होंने यह भी बताया की पूरे देश में मध्य प्रदेश ने कृषि क्षेत्र में सबसे ज्यादा विकास दर हासिल की है. कार्यशाला फोर्ड फाउंडेशन और आईसीएसएसआर उत्तरी क्षेत्रीय केंद्र द्वारा प्रायोजित है. देश के सभी भागों से आये अनुसंधान विद्वानों ने इस कार्यशाला में भाग लिया.

जनवादी आंदोलनों पर दमनकारी नीति अस्वीकार्यः महान संघर्ष समिति
05 June 2014
भोपाल। कई सामाजिक संगठनों के समर्थन के साथ महान संघर्ष समिति ने सरकार से सिंगरौली के महान जंगल में एस्सार व हिंडाल्को को प्रस्तावित कोयला खदान के विरोध में चल रहे आंदोलन पर शुरू दमनकारी नीति को समाप्त करने के लिए चेताया। आज भोपाल में एक संवाददाता सम्मेलन में महान संघर्ष समिति के सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि ग्राम सभा या कोई भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया दमनकारी वातावरण में आयोजित नहीं किया जा सकता है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री को तत्काल एस्सार के खदान को रद्द करने के के लिए कदम उठाने की जरुरत है जिससे महान के प्राचीन जंगलों को लूट से बचाया जा सके। करीब 54 गांवों के 50 हजार से अधिक लोगों की जीविका को रौंदते हुए एस्सार को खदान का लाइसेंस दिया गया है। महान संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से तत्काल इन गांवों में वनाधिकार कानून लागू करने की मांग की है।
अमिलिया निवासी व महान संघर्ष समिति के सदस्य हरदयाल सिंह गोंड ने बताया, “हमलोग पुलिस और प्रशासन के दबाव को झेल रहे हैं और हमारा अपराध बस इतना है कि हम लगातार अपने जंगल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं’’। किसी भी तरह के मुआवजा को लेने से इन्कार करने वाले गोंड ने कहा कि अब हमसे अपने जंगल का मुआवजा लेने को कहा जा रहा है लेकिन सच्चाई है कि हम जंगल से जितना लेते हैं, उसका मुआवजा देना नामुमकिन है। इसलिए राज्य सरकार को हमारे अधिकार सुनिश्चित करने होंगे। सरकार उधोगपतियों के हाथ की जागीर नहीं हो सकती।
करीब एक हफ्ते पहले ही जिला कलेक्टर एम सेलवेन्द्रन ने महान संघर्ष समिति और अन्य ग्रामीणों के साथ बैठक करके फर्जी ग्राम सभा पर बात की थी और नया ग्राम सभा आयोजित करवाने की घोषणा भी की थी। ग्रीनपीस की सीनियर कैंपेनर प्रिया पिल्लई ने कहा, “इस घोषणा के एक हफ्ते के भीतर ही ग्रीनपीस के संचार यंत्र (मोबाईल सिग्नल) और सोलर पैनल को अमिलिया गांव से जब्त कर लिया गया। उसी रात दो वनाधिकार कार्यकर्ताओं अक्षय और राहुल गुप्ता को बिना गिरफ्तारी वारंट के आधी रात को गिरफ्तार किया गया। हमलोगों को एफआईआर की कॉपी भी नहीं दिखायी गयी, जबकि इस संबंध में हमने सिंगरौली एसपी को चिट्ठी लिखकर उनसे सहयोग करने की बात कही है”।
पिल्लई ने सवाल उठाया कि इस तरह की दमनकारी नीति का क्या मतलब है? राज्य प्रशासन क्यों महान क्षेत्र के लोगों का संवाद दुनिया से खत्म करना चाहता है। हर हाल में ग्राम सभा को परदे के पीछे आयोजित नहीं की जा सकती।
अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी जंगल और अधिकार को बचाने के लिए संघर्षरत कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की निंदा की। सामाजिक कार्यकर्ता माधुरी बहन ने कहा, “सरकार की इस तरह की दमनकारी नीति स्वीकार नहीं की जा सकती। वनसत्याग्रहियों को सताया जा रहा है। कॉर्पोरेट हितों के लिए आम लोगों से वन और अन्य संसाधनों की चोरी देश के लिए आपदा साबित होगी। यह दुखद लेकिन सच है कि इस लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध के लिए भी जगह नहीं है”।
ग्रीनपीस ने महान में कार्यकर्ताओं की अवैध गिरफ्तारी के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, एशियन मानवाधिकार आयोग तथा संयुक्त राष्ट्र विशेष प्रतिवेदक को भी लिखा है । महान संघर्ष समिति और ग्रीनपीस कार्यकर्ताओं ने जनजातीय मामलों के केन्द्रीय मंत्री जोएल ओराम को एक ज्ञापन सौंपकर मांग की कि सरकार महान में निष्पक्ष ग्राम सभा करवाए तथा लोगों के अधिकारों की रक्षा करे।
संवाददाता सम्मेलन में “पावर फॉर द पीपुल” नाम से एक रिपोर्ट भी प्रकाशित की गयी, जिसमें महान वन क्षेत्र के ग्रामीणों का महान जंगल में निर्भर सामाजिक और आर्थिक हालात का अध्ययन किया गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दो गांवों (अमिलिया और बुधेर) के 60 प्रतिशत लोगों के पास एक एकड़ से भी कम जमीन है। ग्रामीणों का आर्थिक स्रोत का आधार वनोपज ही है क्योंकि सिर्फ खेती से वे अपनी आर्थिक जरुरत पूरी नहीं कर पाते हैं। साथ ही 37 प्रतिशत लोगों के पास अपनी भूमी नहीं है, इनमें ज्यादातर वे गरीब लोग हैं जिन्हें सामुदायिक वनाधिकार नहीं दिया जा सका है।
प्रिया पिल्लई ने बताया कि यह रिपोर्ट बताती है कि इन ग्रामीणों के आय का स्रोत वनोपज ही हैं। नतीजतन, अगर इन गरीबतम लोगों से ‘विकास’ के नाम पर जमीन ली जाती है तो ये मुआवजे के भी हकदार नहीं होंगे। जिला कलेक्टर ने एक साथ ही सामुदायिक वनाधिकार, मुआवजा और ग्राम सभा करवाने पर बात की लेकिन यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि प्रशासन इतने अनौपचारिक रुप से मुआवजा और वनाधिकार पर बात नहीं कर सकता।
प्रस्तावित कोयला खदान से 54 गांवों के 50 हजार से ज्यादा लोगों की जीविका खत्म हो जाएगी। गोंड ने कहा, “सबसे पहले सभी 54 गांवों के सामुदायिक वनाधिकार को मान्यता मिलनी चाहिए और उन्हें परियोजना की जानकारी उनके मूल भाषा में दी जानी चाहिए। इसके बाद लोगों को निर्णय करने का अधिकार मिलना चाहिए कि उन्हें जंगल चाहिए या नहीं लेकिन अभी तक किसी भी गांव में एक भी सामुदायिक वनाधिकार कानून को लागू नहीं किया जा सका है”।
महान कोल ब्लॉक परियोजना ने वनाधिकार कानून के अलावा वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत कई सारे नियमों का उल्लंघन किया है। प्रिया पिल्लई ने बताया कि इस परियोजना में वन सलाहाकार समिति के सलाहों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। साथ ही वन व पर्यावरण मंत्रालय को संचयी आकलन रिपोर्ट के बारे में भी समझना चाहिए क्योंकि इस क्षेत्र में कई और परियोजनाएँ भी आने वाली हैं।

जड़ों से है जीवन
05 June 2014
कोई भी वृक्ष अपनी जड़ों के साथ जुड़ा होता है और अगर उसे जड़ से अलग कर दिया जाए तो वह सूख जाता है, उसी तरह किसी भी समाज की जड़ उसका अतीत होता है और अगर उसको उसके अतीत से काट दिया जाए, तो वह भी तरक़्क़ी नहीं कर पाता है। हमें भी अपने अतीत की संस्कृति से अपने नाते को दोबारा जोड़ना होगा। इसकी तीन आवश्यकताएं हैं-

अरण्य

हमारी भारतीय संस्कृति अरण्य संस्कृति थी। हमारे शिक्षा के केंद्र अर्थात आश्रम अरण्य में थे। गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने अरण्यों को पुनर्जीवित करने के लिए शांति निकेतन की स्थापना की। कमरों के अंदर पढ़ने का चलन तो अंग्रेज़ों ने पैदा किया था, क्योंकि उनका देश ठंडा था और घरों से बाहर बैठकर पढ़ाई नहीं हो सकती थी। इसलिए उन्होंने यह सारा जाल बुना। उनके आने से पहले तक तो भारत में सबकुछ खुले आसमान के नीचे होता था। आकाश के नीचे और प्रकृति के सान्निध्य में मनुष्य के विचारों को स्फूर्ति मिलती है, नए-नए विचार आते हैं।
मनुष्य कमरे के अंदर उन्हीं विचारों को बार-बार दोहराता रहता है, जो उसके अंदर जमा होते हैं। चूंकि कमरे की इतनी कम परिधि होती है कि वह वहीं चक्कर काटता रहता है। भारत को अपने अतीत की ओर देखना चाहिए, अर्थात उसे पुन: वही जीवनपद्धति अपनानी चाहिए, जो उसे अरण्य संस्कृति से प्राप्त हुई थी। जिसमें चिंतन करने और नए विचार प्राप्त करने के लिए आसमान के नीचे, पेड़ों के नीचे और नदी किनारे बैठकर अध्ययन किया जाता था।

जीवंत जल

मनुष्य को ज़िंदा रहने के सभी साधन प्रकृति से मिलते हैं। जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है और ऑक्सीजन कमरे के अंदर पैदा नहीं हो सकती है। उसे जल की भी आवश्यकता होती है और जल के बारे में ऑस्ट्रेलिया के एक विद्वान, सोवरगर ने ‘ज़िंदा जल’ नामक पुस्तक लिखी। उनके अनुसार हर जगह का पानी ज़िंंदा नहीं रहता है, जैसे नल के अंदर गया हुआ पानी स्वच्छंद रूप से, ख़ासकर पहाड़ी नदी में बहने वाले जल की अपेक्षा कम स्वच्छ होता है, क्योंकि वह पानी पहाड़ों से टकरा-टकराकर अपने को स्वच्छ रखता है और उसी पानी को जीवंत कहा जाता है। गतिमान जल ही स्वच्छ है, जीवंत है।

बहुपयोगी वृक्ष

हम वृक्षों को इसलिए उगाते हैं, ताकि हमें उनसे खाद्य की प्राप्ति हो। शुरू में अन्न, मनुष्य की खुराक नहीं थी। शुरू-शुरू में हम पशुपालक थे और पशुओं के साथ अपना जीवनयापन करते हुए फलों का सेवन करते थे। फिर धीरे-धीरे घास के बीजों को पकाकर खाना शुरू किया गया और इस तरह मनुष्य ने अन्न पैदा करना, उसे संग्रह करना और उसे पकाना शुरू कर दिया। जब से मनुष्य ने अन्न की खेती करना और उसे संग्रह करना शुरू किया, तभी से दुनिया में अधिकांश लड़ाइयां शुरू होने लगीं। अब समय आ गया है, जब पूरी मनुष्य जाति को अपने भविष्य के बारे में नए सिरे से सोचना होगा। फिर प्रकृति की ओर लौटना होगा।
खर-दूषण आया कहां से?

कई वर्ष पहले इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में प्रदूषण के बारे में एक गोष्ठी हो रही थी। तभी वहां एक ग्रामीण आ गया। उसने उन सभी बातों को सुनने के बाद पूछा कि ये खरदूषण कहां से आ गया? ये बड़े-बड़े साहब उससे इतना क्यों डर रहे हैं, आख़िर ये है कहां? कुछ दशक पहले तक लोगों ने प्रदूषण शब्द के बारे में सुना भी न था। मैंने किसी की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह इनकी पोशाक के अंदर छिपा हुआ है। इनकी जीवनशैली ही प्रदूषण को जन्म देती है।

निर्माण पीछे पड़े हैं

मुझे सन् 72 में संयुक्त राष्ट्र विज्ञान परिषद की पत्रिका में छपे एक कार्टून की याद आती है, जिसमें एक बौना आदमी एक बड़े पेड़ को अपनी बांह के बीच में पकड़कर दौड़े जा रहा है। किसी ने उससे पूछा- कहां जा रहे हो, ज़रा ठहरो। उसने कहा, देखता नहीं है कि सीमेंट की सड़क मेरा पीछा करती आ रही है। काफ़ी सालों से मनुष्य को सभी तरह की सुख-सुविधाएं प्रदान करने की लालसा के कारण आज ऐसे कई निर्माण कार्यों पर ज़ोर दिया जा रहा है, जिससे हमारी प्रकृति और हमारे स्वास्थ्य को घातक नुक़सान हो रहा है। अब भी चेत जाएं हम तो ग़नीमत होगी।'

(इंडिया वाटर पोर्टल से साभार)

महान में नहीं होगी पेड़ों की अक्टूबर तक कटाईः मध्यप्रदेश सरकार ने एनजीटी में कहा
महान संघर्ष समिति ने महान को मिले मंजूरी को एनजीटी में दिया है चुनौती

नई दिल्ली। आज मध्यप्रदेश सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को कहा है कि महान जंगल में अक्टूबर तक कोई पेड़ नहीं काटे जायेंगे। राज्य सरकार का यह फैसला महान संघर्ष समिति के लिए अस्थायी राहत लेकर आया है जिन्होंने महान कोल ब्लॉक को मिले दूसरे चरण की मंजूरी को पिछले हफ्ते एनजीटी में चुनौती दी थी।
महान संघर्ष समिति के सदस्य और इस केस में अर्जीदार हरदयाल सिंह गोंड कहते हैं कि, “यह भले हमारे लिए अस्थायी राहत की बात है। लेकिन हमलोग जंगल में खदान से संबंधित किसी भी तरह के गतिविधि का विरोध जारी रखेंगे”।
इस महीने की शुरुआत में चार वन सत्याग्रहियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था जो जंगल में मार्किंग का शांतिपूर्वक विरोध कर रहे थे।
महान संघर्ष समिति द्वारा दायर अर्जी में महान कोल ब्लॉक को मिली मंजूरी में वन (संरक्षण) अधिनियम 1980, राष्ट्रीय वन नीति 1988, जैव विविधता अधिनियम 2002 और अनुसूचित जनजाति और अन्य वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 के प्रावधानों के साथ सतत विकास के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ बताया गया है। इस कोल ब्लॉक को एस्सार पावर और हिंडाल्को को संयुक्त रुप से आवंटित किया गया था।
गोंड आगे कहते हैं कि, “हमलोग इस कोयला खदान के प्रस्ताव का दो सालों से भी अधिक समय से विरोध कर रहे हैं। लेकिन हमारे विरोध के बावजूद यूपीए सरकार ने इसे दूसरे चरण की मंजूरी दे दी”।
महान जंगल में कोयला खदान आने से पांच लाख पेड़ काटे जायेंगे और हजारों ग्रामीणों की आजीविका खत्म होगी।
राष्ट्रीय वन नीति 1988 के अनुसार जंगली भूमि का गैर जंगली उद्देश्य के लिए उपयोग करने से पहले बेहद सावधानी की जरुरत है लेकिन महान के मामले में इस तरह की सावधानी नहीं बरती गयी। ग्रीनपीस की सीनियर कैंपेनर प्रिया पिल्लई कहती हैं कि, “5 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और मंत्रियों के समूह द्वारा सबसे आरामदायक तरीके से पेश किया गया है जिसने महान कोल ब्लॉक को पहले चरण की मंजूरी के लिए सिफारिश किया था”।
वे आगे कहती हैं कि, “सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव को बिल्कूल ही नजरअंदाज किया गया है”।

वनाधिकार कानून का उल्लंघन

वनाधिकार कानून 2006 को इस क्षेत्र में लागू ही नहीं किया गया है। जूलाई 2013 में खुद जनजातीय मंत्री केसी देव ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस मामले को लेकर पत्र लिखा था। इस क्षेत्र में एक भी सामुदायिक वनाधिकार नहीं दिया जा सका है। इसके अलावा वनाधिकार कानून में ग्राम सभा की मंजूरी को प्रासंगिक बनाया गया लेकिन अमिलिया में वनाधिकार पर आयोजित विशेष ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव पर फर्जी और मरे हुए लोगों के हस्ताक्षर कर दिये गए। इसी फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव के आधार पर महान कोल ब्लॉक को दूसरे चरण की पर्यावरण मंजूरी दे दी गयी।

वन संरक्षण अधिनियम की सिफारिश भी नजरअंदाज की गयी

वन संरक्षण अधिनियम 1980 के अनुसार जंगल के किसी भी विषयांतर के लिए वन सलाहकार समिति द्वारा विचार किया जायेगा जो बाद में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को अंतिम निर्णय के लिए सिफारिश कर देगा लेकिन महान के मामले में प्रक्रिया बहुत अलग निकला।
12 जूलाई 2011 को वन सलाहकार समिति ने अपनी रिपोर्ट में महान कोल ब्लॉक को अस्वीकार करने का सुझाव दिया। “ऐसा क्षेत्र के जमीनी हकीकत का वैज्ञानिक अध्ययन के बाद सिफारिश किया गया था लेकिन वन व पर्यावरण मंत्रालय ने इसपर विचार नहीं किया। अंततः महान को मंत्रीमंडल समूह की सिफारिश पर पहले चरण की मंजूरी दे दी गयी”।
ग्रीनपीस के सीनियर कैंपेनर नंदीकेश शिवालिंगम कहते हैं कि यह मंजूरी ही गलत है और आने वाले समय में यह एक गलत संदेश लेकर जायेगा।

वन्यजीव अध्ययन

पहले चरण की मंजूरी में स्पष्ट कहा गया कि वन्यजीव अध्ययन के लिए वन्यजीव संस्थान ऑफ इंडिया और वन्यजीव ट्रस्ट ऑफ इंडिया या इसी तरह के अन्य प्रतिष्ठित संस्थान द्वारा क्षेत्र में कोयला खदान से वन्यजीव के आवास पर प्रभाव का मूल्यांकन होना चाहिए। नन्दी बताते हैं कि, “लेकिन अंतिम रिपोर्ट अवैज्ञानिक और गलत और भ्रामक हैं। यह एक तरह से पिछली रिपोर्ट का ही कट पेस्ट है”।
महान जंगल में 164 प्रजातियों साल, साज, महुआ, तेंदू आदि का निवास स्थान है। इसके अलावा कई तरह के जानवरों का भी निवास है।

संचयी प्रभाव आकलन अभी भी प्रतीक्षित

संचयी प्रभाव आकलन जिसमें छोटे से क्षेत्र में कई पावर प्लांट और कोयला खदान होने का अध्ययन किया जाना है अभी भी प्रतीक्षित है। पहले चरण की मंजूरी के समय कहा गया था कि इस अध्ययन को आईसीएफआरई और एनईईआऱआई जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से कराया जाना है। प्रिया पिल्लई कहती हैं कि, “पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, क्षेत्र में आ रही परियोजनाओं की बड़ी संख्या को देखते हुए संचयी प्रभाव आकलन की आवश्यकता को पहचानता है और अभी तक पूरा हो जाने के अध्ययन के लिए इंतजार किए बिना परियोजना के लिए वन विभाग की मंजूरी दे दी गयी”।.
हरदयाल गोंड आगे कहते हैं कि, “हम आशा करते हैं कि एनजीटी इस केस में जंगल बचाने में हमारी मददगार साबित होगी। हमलोग अंत में न्याय लेकर रहेंगे”।
ग्रीनपीस और महान संघर्ष समिति लगातार जंगल में किसी भी तरह के गैर-जंगली काम का विरोध करती रहेगी।


एस्सार के साथ मोइली का प्रेम प्रसंग एक बार फिर उजागर
नई दिल्ली, 16 अप्रैल। यूपीए सरकार के समय हुए करोड़ों रुपये का एक और घोटाला सामने आया है। आज आए ताजे सबूतों ने उजागर किया है कि किस तरह पर्यावरण और पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोईली के द्वारा एस्सार को फायदा पहुंचाया गया। मोईली ने एस्सार को मुंबई तट से दूर 52, 000 करोड़ की रत्ना ऑयल फील्ड देने में समर्थन दिया।
ग्रीनपीस के जलवायु और ऊर्जा कैंपेन की प्रमुख विनुता गोपाल ने कहा कि, "इस नये सबूत से स्पष्ट हो जाता है कि मोईली ने एस्सार को अंतिम समय में मंजूरी दिया ताकि कोयला मंत्रालय द्वारा आवंटन रद्द करने की समय सीमा को पूरा किया जा सके। मोईली के पूर्ववर्ती मंत्रियों के अस्वीकृति को देखते हुए मंजूरी के निर्णय पर दुबारा गौर किया जाना चाहिए और एक स्वतंत्र, बेदाग निर्णय निर्माता द्वारा एक वास्तविक उद्देश्य के आधार पर लिया जाय। तबतक निकासी निर्णय बातिल और शून्य माना जाना चाहिए."।
12 फरवरी 2014 को वीरप्पा मोईली ने महान कोल लिमिटेड को दूसरे चरण का क्लियरेंस दिया था। महान कोल लिमिटेड एस्सार व हिंडाल्को का संयुक्त उपक्रम है जिसे सिंगरौली के महान जंगल में खनन के लिए क्लियरेंस दिया गया है। उस समय ग्रीनपीस ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर मोईली के इस्तीफे की मांग की थी।
ग्रीनपीस द्वारा एस्सार को प्रस्तावित कोयला खदान के विरोध के फलस्वरुप कंपनी ने ग्रीनपीस तथा महान के ग्रामीणों पर 500 करोड़ का मानहानि तथा बोलने पर प्रतिबंध का मुकदमा बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल किया था। साथ ही, कंपनी ने ग्रीनपीस पर मोईली से इस्तीफे की मांग करने पर रोक लगाने की मांग भी की थी।
वीरप्पा मोईली को मनमोहन सरकार के अंतिम दिनों में पर्यावरण मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था जबकि वो पहले से ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को संभाल रहे थे। दो महीनों की छोटी सी अवधि में एक ही मंत्री द्वारा रत्ना तेल क्षेत्र की मंजूरी के साथ ही महान वन मंजूरी हितों के टकराव का एक स्पष्ट उदाहरण है। मंत्री के नियुक्ति के समय से ही ग्रीनपीस इस बात की चेतावनी दे रही थी।


एस्सार का फ्लाई एश डैम टूटने से पानी खेतों और घरों तक पहुंचा, स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
सिंगरौली। एस्सार द्वारा बड़े पैमाने पर लापरवाही का एक और उदाहरण सामने आया है। खैराही स्थित एस्सार पावर प्लांट के फ्लाई एश डेम के मिट्टी की दीवार टूटने से राखयुक्त पानी गांव में फैल गया है। ग्रीनपीस ने मांग किया है कि एस्सार को तुंरत इसकी जिम्मेवारी लेकर अपने प्लांट को बंद करना चाहिए।
कुछ ही महीनों में यह दूसरा उदाहरण है। पिछले साल सिंतम्बर में, मध्यप्रेदश प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रिय कार्यालय (सिंगरौली) ने फ्लाई एश की एक बड़ी मात्रा पास के नदी और आसपास के क्षेत्र में फैलने की सूचना दी थी। इस साल जनवरी में प्रदुषण बोर्ड ने इस ओवरफ्लो की वजह से प्लांट को बंद करने का आदेश दिया था लेकिन कंपनी किसी सुरक्षा उपायों को पूरा किए बिना प्लांट को चालू करने में कामयाब रही थी।
ग्रीनपीस की अभियानकर्ता ऐश्वर्या मदिनेनी ने बताया कि, “कोयला विद्युत संयंत्रों से फ्लाई ऐश सिंगरौली के निवासियों के लिए एक बारहमासी समस्या हो गई है और हाल ही में एस्सार पावर प्लांट से विषाक्त फ्लाई एश का रिसाव स्वीकार नहीं किया जा सकता है। फ्लाई एश में भारी धातु जैसे आर्सेनिक, पारा होते हैं जिससे लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को सीधा नुकसान पहुंच सकता है”।
वह आगे कहती हैं कि, “सिंगरौली के निवासी अस्थमा, तपेदिक, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस जैसी बिमारियों से नियमित रुप से पीड़ित हैं। स्थानीय डाक्टर इसकी वजह सीधे तौर पर औद्योगिक प्रदुषण को मानते हैं। अब समय आ गया है कि सरकार इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा के लिए कदम उठाये”।

कोयले के जलने से फ्लाई एश उत्पादित होता है और इसके वातावरण में जाने से यह पानी और वायु दोनों को दूषित करता है। बीच गांव में फ्लाई एश के लिए तालाब होने से वहां के लोगों पर बिमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
मंथन अध्य्यन केन्द्र के संस्थापक श्रीपद धर्माधिकारी के अनुसार, “फ्लाई एश का पानी के साथ मिलना जल प्रदुषण का सबसे बुरा रुप है। फ्लाई एश डैम के टूटने से वहां के भूमिगत जल स्रोत भी प्रभावित हो सकते हैं। यह प्रदुषित पानी कुएँ और दूसरे जल स्रोतों में मिलकर खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर सकता है”।
हाल ही में आयी रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में जहरीले पारा के बढ़ने के संकेत मिल चुके हैं। आदमी और मछली दोनों के खून जांच में उच्च स्तर का पारा पाया गया था। पारा नियुरोओक्सिसिटी के साथ जुड़ा एक भारी धातु है और यह फ्लाई ऐश के गठन की प्रमुख घटकों में से एक है।
जहां एस्सार का नया एश पॉण्ड अभी निर्माणाधीन है। धर्माधिकारी बताते हैं कि, “इस तरह की घटना से बचने के लिए फ्लाई एश पॉण्ड को लेकर दिशा-निर्देश बनाये गए हैं लेकिन दुर्भाग्य से शायद ही, पावर प्लांट्स इस नियम का पालन करते हैं”।
भारी धातु के अलावा फ्लाई एश में रेडियोएक्टिव गुणों के होने का भी संदेह होता है जो आनुवांशिक परिवर्तन पैदा कर सकता है। फ्लाई एश के इस अनिश्चित निपटान से आसपास के लोगों की जिन्दगी और जीविका खतरे में है। धर्माधिकारी के अनुसार “पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (एमओईएफ) के विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) ने भारी धातुओं और रेडियोधर्मी तत्वों की वजह से फ्लाई ऐश के उपयोग के खिलाफ मजबूत तर्क व्यक्त किया है”।
सिंगरौली में, स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा फ्लाई एश प्रदुषण के खिलाफ शिकायत के बावजूद सरकार और कंपनी इस मुद्दे को हल करने में कोई रुचि नहीं दिखाती। ग्रीनपीस की मांग है कि एस्सार इस पूरे घटना की जिम्मेवारी लेते हुए अपने सभी कार्यों को बंद करे जबतक कि प्रदुषण नियंत्रण संबंधी सभी नियमों को पूरा नहीं कर लिया जाता।


एस्सार द्वारा दायर मुकदमा विरोध की आवाज को दबाने का प्रयासः ग्रीनपीस इंडिया
सिंगरौली। ग्रीनपीस इंडिया ने एस्सार द्वारा महान के ग्रामीणों को उकसाने के आरोपों का कटु आलोचना किया है। कंपनी ने प्रस्तावित कोयला खदान के विरोध में उठ रहे आवाज को एक बार फिर डराने का प्रयास किया है। एस्सार द्वारा जिला एवं सत्र न्यायालय वैढ़न में ग्रीनपीस और महान क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों पर मुकदमा दायर किया गया है। ग्रीनपीस अपने उपर लगाये गए आधारहीन आरोपों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया में हिस्सा लेगा।
ग्रीनपीस की सीनियर अभियानकर्ता प्रिया पिल्लई ने कहा कि, “एस्सार एक बार फिर अपने विरोध में उठ रहे आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है लेकिन उनके आरोपों में कोई दम नहीं है। एस्सार को अदालत में मुकदमा दायर करने से पहले सही तथ्यों की जांच करनी चाहिए”।
एस्सार दूसरे चरण के पर्यावरण मंजूरी के लिए दिए गए 36 शर्तों को पूरा करने का दावा करता है लेकिन तथ्य बताते हैं कि जिस ग्राम सभा के प्रस्ताव के अधार पर मंजूरी दी गयी उसे फर्जी तरीके से पारित किया गया था।
प्रिया कहती है कि, “इस बात के सबूत हैं कि पारित प्रस्ताव में जिन लोगों के हस्ताक्षर हैं उनमें कुछ लोग सालों पहले मर चुके हैं। लोगों के लिखित गवाही भी हैं जिसमें उन्होंने कहा है कि उनके नाम फर्जी तरीके से प्रस्ताव में डाले गए हैं। दूसरे चरण की मंजूरी असंवैधानिक है और इसे अदालत में चुनौति दी जाएगी”।
जिला कलेक्टर और जनजातीय मामलों के मंत्रालय का ध्यान दिलाने के बाद फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव के बारे में फरवरी में पुलिस में शिकायत दर्ज करायी जा चुकी है।
अमिलिया के निवासी जगनारायण शाह ने कहा कि, “हमने सिंगरौली में बड़े-बड़े कंपनियों से विस्थापित लोगों को गंभीर हालत में रहते देखा है। यह हमारे लिए असंभव है कि हम अपना जंगल और जमीन छोड़कर दस बाय दस के घर में विस्थापित जिन्दगी बितायें। अगर कंपनी खनन योजना में सफल होता है तो हम आजीविका से वंचित हो जायेंगे। हमें प्रकृति के साथ सद्भाव से रहने की वजह से सताया जा रहा है”।
इस साल के शुरुआत में एस्सार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में ग्रीनपीस पर 500 करोड़ के मानहानि तथा बोलने की आजादी पर प्रतिबंध लगाने का मुकदमा दायर किया था। इस मुकदमे में यह भी मांग की गयी थी कि ग्रीनपीस मुंबई स्थित एस्सार के मुख्यालय के 100 मीटर के भीतर कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं कर सके। ग्रीनपीस ने इसकी प्रतिक्रिया कोर्ट में पहले ही दायर कर दिया है। कंपनी ने यह मुकदमा ग्रीनपीस के 14 कार्यकर्ताओं द्वारा मुंबई में महालक्ष्मी स्थित मुख्यालय पर बैनर लहरा कर प्रदर्शन करने के बाद किया था। ग्रीनपीस एक अलाभकारी गैर सरकारी संगठन है जो पर्यावरण और वनवासियों के अधिकारों के लिए शांतिपूर्वक काम करता है। प्रिया बताती हैं कि, “ग्रीनपीस शांतिपूर्वक तरीके से काम करता है और आगे भी हम ऐसा करते रहेंगे जबतक कि महान के लोगों के साथ न्याय नहीं हो जाता। हम इन हास्यास्पद रणनीतियों से विचलित नहीं होंगे”।।


जलवायु परिवर्तन की वजह से भारत में खाद्यान संकटः संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट
नई दिल्ली। 31 मार्च 2014। संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन के लिए बने अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की नयी रिपोर्ट को आज जापान में जारी किया गया। इस रिपोर्ट ने दुनिया भर में चेतावनी की घंटी बजा दी है। ग्रीनपीस इंडिया ने भारतीय नेताओं से रिपोर्ट में दिए गए चेतावनी पर ध्यान देने की मांग की है। साथ ही, उसने तेजी से स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा की तरफ बढ़ने की गुहार लगायी है।
आईपीसीसी ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव पहले से ही सभी महाद्वीपों और महासागरों में विस्तृत रुप ले चुका है। रिपोर्ट के अनुसार जलवायु गड़बड़ी के कारण एशिया को बाढ़, गर्मी के कारण मृत्यु, सूखा तथा पानी से संबंधित खाद्य की कमी का सामना करना पड़ सकता है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले भारत जैसे देश जो मानसून पर ही निर्भर हैं के लिए यह काफी खतरनाक हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन की वजह से दक्षिण एशिया में गेंहू की पैदावार पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वैश्विक खाद्य उत्पादन धीरे-धीरे घट रहा है। आईपीसीसी के अध्यक्ष आरके पचौरी ने यह भी कहा कि दुनिया के कुछ हिस्सों में बहुप्रचारित हरित क्रांति अब स्थिर हो चुका है।
साथ ही एशिया में तटीय और शहरी इलाकों में बाढ़ की वृद्धि से बुनियादी ढांचे, आजीविका और बस्तियों को काफी नुकसान हो सकता है। ऐसे में मुंबई, कोलकाता, ढाका जैसे शहरों पर खतरे की संभावना बढ़ सकती है। जलवायु परिवर्तन से खतरे वास्तविक हैं, इस बात को आईपीसीसी कार्य समूह दो के रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है। 'जलवायु परिवर्तन 2014: प्रभाव, अनुकूलन और जोखिम' शीर्षक से रिपोर्ट जारी किया गया है। ग्रीनपीस की कैंपेनर अरपना उडप्पा ने कहा कि ‘यह स्पष्ट है कि कोयला और उच्च कार्बन उत्सर्जन से भारत के विकास और अर्थव्यवस्था पर धीरे-धीरे खराब प्रभाव पड़ेगा और देश में जीवन स्तर सुधारने में प्राप्त उपलब्धियां नकार दी जायेंगी। कुछ ही दिनों में भारत फिर से वोट डालने वाला है और नयी सरकार भी जलवायु परिवर्तन से भारत को होने वाले जोखिम से बेखबर नहीं हो सकता है’।
हाल ही में महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में करीब 12 लाख हेक्टेयर में हुए ओला वृष्टि से गेहू, कॉटन, ज्वार, प्याज जैसे फसल खराब हो गए थे। ये घटनाएँ भी आईपीसीसी की अनियमित वर्षा पैटर्न को लेकर किए गए भविष्यवाणी की तरफ ही इशारा कर रहे हैं।
आईपीसीसी ने इससे पहले भी समग्र वर्षा में कमी तथा चरम मौसम की घटनाओं में वृद्धि की भविष्यवाणी की थी। उडप्पा कहती हैं कि “इस रिपोर्ट में भी गेहूं के उपर खराब प्रभाव पड़ने की भविष्यवाणी की गयी है। इसलिए भारत सरकार को इस समस्या से उबरने के लिए सकारात्मक कदम उठाने होंगे”।
लेकिन इस रिपोर्ट में केवल निराश करने वाली बातें नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चेतावनी को अगर 2 डिग्री सेल्सियस के नीचे किया जाएगा तो इससे मध्य तथा नीचले स्तर के जोखिम कम होंगे। उडप्पा ने आगे कहा कि “नयी सरकार को तुरंत ही इस पर कार्रवायी करते हुए स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण से जुड़ी योजनाओं को लाना चाहिए”।
आपीसीसी रिपोर्ट में पाया गया है कि जलवायु परिवर्तन आदमी की सुरक्षा के लिए खतरा है क्योंकि इससे खराब हुए भोजन-पानी का खतरा बढ़ जाता है जिससे अप्रत्यक्ष रुप से विस्थापन और हिंसक संघर्ष का जोखिम बढ़ता है।
ग्रीनपीस इंटरनेशनल की शांति सलाहकार जेन ममन ने कहा कि “तेल रिसाव और कोयला आधारित पावर प्लांट सामूहिक विनाश के हथियार हैं। इनसे खतरनाक कार्बन उत्सर्जन का खतरा होता है। हमारी शांति और सुरक्षा के लिए हमें इन्हें हटा कर अक्षय ऊर्जा की तरफ कदम बढ़ाना चाहिए”।
ग्रीनपीस मांग करती है कि नयी सरकार सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के साथ आयोजित जलवायु सम्मेलन में गंभीर प्रस्तावों के साथ भाग ले जो दुनिया और भारत को स्वच्छ तथा सुरक्षित ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करे।


ग्रीनपीस कार्यकर्ताओं ने एस्सार मुख्यालय पर बैनर लहराया
महान (सिंगरौली) के ग्रामीणों को मिला शहरी नौजवानों का साथ। प्रस्तावित कोयला खदान को रद्द करने की मांग की।

स्पीडी क्लियरेंस दे रहे पर्यावरण मंत्री मोईली को हटाने का किया मांग

22 जनवरी, मुंबई। ग्रीनपीस कार्यकर्ताओं ने एस्सार के महालक्ष्मी स्थित 180 फीट लंबे इमारत को 36 * 72 फीट लंबे बैनर से ढक दिया। बैनर पर लिखा था- वी किल फॉरेस्टः एस्सार। बैनर पर पर्यावरण व वन मंत्रालय के मंत्री वीरप्पा मोईली तथा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तस्वीर भी थी। महान जंगल के प्रस्तावित विनाश को दर्शाते हुए 12 कार्यकर्ताओं ने बाघ की पोशाक में इमारत को घेर लिया। उन लोगों ने मांग किया कि एस्सार महान जंगल को बर्बाद करने के लिए प्रस्तावित कोयला खदान को रद्द करे। साथ ही, प्रधानमंत्री नवनियुक्त वन व पर्यावरण मंत्री वीरप्पा मोईली को हटाएं, जो लगातार पर्यावरण की चिंताओं और लोगों के वनाधिकारों को दरकिनार कर बिग टिकट प्रोजेक्ट को पर्यावरण क्लियरेंस दे रहे हैं।
ग्रीनपीस कार्यकर्ता प्रिया पिल्लई ने सवाल उठाते हुए कहा कि “हमारे नये पर्यावरण मंत्री ने सिर्फ बीस दिनों में करीब 1.5 लाख करोड़ के 70 प्रोजेक्टों को क्लियरेंस दिया है। इसका मतलब है कि उन्होंने एक प्रस्ताव पर बहुत कम समय खर्च किया। क्या मोईली को धनी कॉरपोरेट कंपनियों जैसे एस्सार जो महान जंगल को खत्म करने पर तुली है के जेब को भरने के लिए नियुक्त किया गया है। या फिर देश के पर्यावरण अधिकारों और वनजीवन को बचाने के लिए नियुक्त किया गया है”। प्रिया ने विस्तार से बताया कि महान को जिस तरीके से एस्सार को आवंटित किया गया वो सवालों के घेरे में है। सबसे पहले जयराम रमेश ने इस प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया था लेकिन कंपनी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए पहले चरण का क्लियरेंस हासिल कर लिया। वनाधिकार कानून को लागू किए बिना खदान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना हमारे संविधान का उल्लंघन है।
मुंबई के नौजवानों ने महान जंगल से आए आदिवासियों और अन्य समुदाय के लोगों के साथ कंधा से कंधा मिलाते हुए लिव आवर फॉरेस्ट अलोन (हमारे जंगल को अकेला छोड़ दो) लिखे बैनर को लहराया। सभी ग्रामीण महान संघर्ष समिति के सदस्य हैं। यह संगठन उनलोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया है जो महान जंगल में अपनी जीविका के लिए निर्भर हैं। ग्रामीणों और शहरी नौजवानों के बीच यह अनूठा मिलन एक पहल है, जिसके माध्यम से विकास के नाम पर जंगलों के विनाश की तरफ ध्यान दिलाने की कोशिश की गई है।
महान जंगल को महान कोल लिमिटेड को आवंटित किया गया है। इससे एस्सार पावर और हिंडाल्को इंडस्ट्री के पावर प्लांट को ईंधन सप्लाई किया जाएगा। यह उन कोल ब्लॉक में से एक है जिसे कोयला मंत्रालय ने कोयला घोटाले के दौरान औने-पौने दाम में कंपनियों को दे दिया था और अब वे सभी सीबीआई की जांच के दायरे में है। 14 हजार लोगों की जीविका, 160 तरह के पौधों और कई सारे जानवरों तथा पक्षियों के अलावा महान जंगल को इसलिए भी बचाना जरुरी है क्योंकि यह मध्यभारत के सघन जंगलों का आखरी टूकड़ा ही बचा हुआ है।
महान संघर्ष समिति के सदस्य और अमिलिया, सिंगरौली (मध्यप्रदेश) के ग्रामीण कृपानाथ ने कहा कि यह हमारे लिए ऐतिहासिक दिन है। एस्सार महान जंगल से हमारे घरों को नष्ट करने के लिए तथा खुद पैसा बनाने के लिए हमारी जीविका छीनने को प्रयासरत है। आज हमलोग करीब 2000 किलोमीटर की दूरी का सफर तय करके एस्सार के मुख्यालय पर आए हैं ताकि उन्हें यह संदेश चला जाय कि हमारी आवाज मौन नहीं हो सकती।
मुंबई के नौजवानों ने ग्रामीणों को मजबूत समर्थन दिया। अपनी चिंताओं को दोहराते हुए जंगलिस्तान के सदस्य बृकेश सिंह ने कहा कि भले हमलोग शहरों में रहते हों लेकिन हमारा महान के लोगों से मजबूत लगाव है। हमलोग जोखिम उठाते हुए इस इमारत को घेर रहे हैं ताकि कॉरपोरेट कंपनियों और वन व पर्यावरण मंत्रालय का घिनौना चेहरा लोगों के सामने आ सके। प्रस्वावित महान खदान को बंद करना ही पड़ेगा। हमलोग भारत के जंगलों को भ्रष्टाचार तथा लालच की भेंट नहीं चढ़ने देंगे।
जंगलिस्तान ग्रीनपीस इंडिया का सबसे ज्यादा दिनों तक चलने वाला अभियान है जिसके तहत शहरी नौजवान एकत्रित होकर जंगल बचाने के लिए खड़े हो रहे हैं।
ग्रीनपीस कार्यकर्ताओं ने लंदन में एस्सार पावर के मुख्यालय के सामने भी प्रदर्शन किया। उन्होंने महान के लोगों और शहरी युवाओं के साथ आवाज मिलाते हुए नारा लगया- एस्सार स्टे आउट ऑफ महान (एस्सार महान से बाहर रहो)। एस्सार कंपनी लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड है। ग्रीनपीस लंदन के कार्यकर्ता पॉल मोरजुओ ने कहा कि “भौगोलिक रुप से भले ही हम महान से हजारों किलोमीटर दूर हैं लेकिन हम महान के समुदाय के साथ मजबूती से खड़े हैं जो अपने घर को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भारत सरकार को अपने नागरिकों की इच्छाओं का सम्मान करना चाहिए तथा अपने महत्वपूर्ण पर्यावरण को बचाना चाहिए न कि कुछ निजी उद्योगपतियों के हित में काम करना चाहिए”।
एस्सार पावर और हिंडाल्को उन 61 निजी कंपनियों में है जिनको फरवरी 2014 तक पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अंतिम चरण का क्लियरेंस लेना है नहीं तो उनका आवंटन रद्द किया जा सकता है।


पर्यावरण पत्रकार सम्मेलन आज
भोपाल। भारतीय वन प्रबंधन संस्थान और पत्र सूचना कार्यालय द्वारा कल 21 नवम्बर, गुरुवार को एक पर्यावरण पत्रकार सम्मेलन (एनवायरमेंट जर्नलिस्ट्स मीट) का आयोजन किया जा रहा है। सुबह 10 बजे से भारतीय वन प्रबंधन संस्थान परिसर में स्थित समागम हाल में होने वाले इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि मुख्य सचिव श्री अन्‍टोनी डि सा होंगे।
सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज, नई दिल्ली के चेयरमेन डॉ. भास्कर राव सम्मेलन में मुख्य व्याख्यान देंगे। भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ. गिरिधर किन्हाल स्वागत भाषण देंगे और विषय प्रवर्तन करेंगे।


वन्य-प्राणी संरक्षण के लिए 12 अधिकारी-कर्मचारी पुरस्कृत
भोपाल। मुख्य सचिव श्री अन्टोनी डिसा ने आज यहाँ वन्य-प्राणी संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 12 अधिकारियों-कर्मचारियों को पुरस्कृत किया। राज्य शासन द्वारा वन्य-प्राणी संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए कर्मचारियों और अधिकारियों को प्रोत्साहित करने के लिए वर्ष 2008 से प्रारंभ इस पुरस्कार में 50 हजार की राशि दी जाती है।
वन्य-प्राणी संरक्षण पुरस्कार से आज तीन वर्गों में अधिकारी और कर्मचारी को नवाजा गया। वर्ग एक में वन मंडलाधिकारी, वन मंडल सागर श्री अनिल कुमार सिंह, सहायक वन संरक्षक होशंगाबाद श्री एस.एस.मेहता, सहायक संचालक कान्हा टाईगर रिजर्व मंडला श्री प्रकाश कुमार वर्मा और उप वन मंडलाधिकारी इंदौर श्री अभय कुमार जैन को पुरस्कृत किया गया। इसी तरह वर्ग-दो में वन क्षेत्रपाल माधव राष्ट्रीय उद्यान शिवपुरी श्री उदयभान सिंह मांझी और वन परिक्षेत्राधिकारी देवेन्द्रनगर पन्ना श्री नरेन्द्र सिंह को और वर्ग- तीन में वनपाल वन चौकी प्रभारी बागदेव होशंगाबाद श्री मुकेश कुमार पटेल, वन पाल माधव राष्ट्रीय उद्यान शिवपुरी श्री लक्ष्मीनारायण शाक्य, वन पाल इंदौर श्री मानसिंह पूंजा, वन रक्षक इंदौर श्री बृजेन्द्र सिंह तोमर, वन रक्षक झाबुआ श्री हेमेन्द्र सिंह डिण्डोर और वन सेविका कान्हा टाईगर रिजर्व मंडला कुमारी शकुन्तला धुर्वे को पुरस्कृत किया गया।


मुख्य सचिव ने दिलवाई वन्य-प्राणी संरक्षण की शपथ
भोपाल। वन्य-प्राणी सप्ताह के समापन पर आज वन विहार में आयोजित समारोह में विभिन्न प्रतियोगियों को पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री अंन्टोनी डिसा ने उपस्थितों को वनों और वन्य-प्राणियों के संरक्षण के लिए कार्य करने की शपथ दिलवाई। मुख्य सचिव ने डाक विभाग की ओर से वन्य-प्राणी संरक्षण पर प्रकाशित विशेष आवरण का विमोचन किया। इस विशेष आवरण में मध्यप्रदेश के वनों में संरक्षित शेरनी अपने चार बच्चों के साथ दृष्टव्य है।
मुख्य सचिव श्री अन्टोनी डिसा ने कहा कि वन्य-प्राणियों का संरक्षण बुनियादी आवश्यकता है। वन्य-प्राणियों के संरक्षण से वनों की रक्षा भी होती है और अंतत: मानव सहित संपूर्ण पर्यावरण और सृष्टि का संरक्षण होता है। मुख्य सचिव ने वन्य-प्राणी सप्ताह के श्रेष्ठ आयोजन के लिए वन विभाग को बधाई देते हुए संपन्न चित्रकला, फोटोग्राफी, वाद-विवाद, रंगोली स्पर्धाओं के विजयी विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया।
प्रदर्शनी का अवलोकन
मुख्य सचिव श्री डिसा ने छायाकार श्री अबरार खान द्वारा वन विहार परिसर में लगाई गई वन्य-प्राणी छायाचित्र प्रदर्शनी भी देखी। इस प्रदर्शनी में वन विहार एवं निकटवर्ती वन क्षेत्र के वन्य-प्राणियों, परिंदों के अलावा राजधानी के नैसर्गिक सौंदर्य से संबंधित लगभग सौ चित्र संयोजित किए गए।
बैठक में जानी योजनाएँ
मुख्य सचिव ने वन्य-प्राणी सप्ताह समापन समारोह के पूर्व वन विभाग की योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने प्रमुख सचिव वन श्री बी. पी. सिंह एवं विभागीय अधिकारियों से वन विभाग की गतिविधियों का ब्यौरा लिया।


वन्य-प्राणी संरक्षण सप्ताह का समापन,
भोपाल। मुख्य सचिव श्री अन्टोनी डिसा ने आज वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल में वन्य-प्राणी संरक्षण सप्ताह (एक से 7 अक्टूबर) के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया। प्रमुख सचिव वन श्री बी.पी. सिंह, चीफ पोस्ट मास्टर जनरल श्री ए.पी. श्रीवास्तव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्य-प्राणी श्री नरेन्द्र कुमार और प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम श्री आर.एन. सक्सेना भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
वन्य-प्राणी संरक्षण सप्ताह के दौरान वन विहार में चित्रकला, रंगोली, फोटोग्राफी, वाद-विवाद, निबंध, प्रश्नोत्तरी, फेंसी ड्रेस आदि प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं, जिनमें भोपाल के स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इसके अलावा पक्षी अवलोकन शिविर, शिक्षक कार्यशाला, सृजनात्मक कार्यशाला एवं खुला मंच का भी आयोजन किया गया। चित्रकला प्रतियोगिता 5 वर्ग में आयोजित की गई। प्राथमिक वर्ग में जीशान खान, माध्यमिक वर्ग में योगिता जकनोरे, वरिष्ठ वर्ग में रूपल डहारे, खुला वर्ग में शुभम वर्मा, डिफरेंशियली एबल्ड वर्ग में अंगेश्वर धुर्वे ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया।
रंगोली प्रतियोगिता में जूनियर वर्ग में मांडवी अजय आरूणकर और सीनियर वर्ग में तेजस्विनी शर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। फोटोग्राफी में जूनियर ग्रुप में अवनि मिश्रा, सीनियर वर्ग में अर्पित अर्गल प्रथम रहे। विद्यालयीन वाद-विवाद प्रतियोगिता में पक्ष में नंदना वार्ष्णेय और विपक्ष में सृष्टि शर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। महाविद्यालयीन वाद-विवाद प्रतियोगिता में सैयद जफीर अकबर ने पक्ष में और विपक्ष में श्रुति मिश्रा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। निबंध प्रतियोगिता में अनुराग शुक्ला कनिष्ठ वर्ग में, दिव्या दीक्षित वरिष्ठ वर्ग में और मोना कृपलानी खुला वर्ग में प्रथम रहे। सृजनात्मक प्रतियोगिता में कीर्ति मेटेकर, प्रश्नोत्तर में शिल्पी दुधांडे, फेंसी ड्रेस में प्रत्यूषा अडक ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।


तिहरे खतरे का सामना कर रहे हैं दुनिया के समंदर
ओस्लो। ग्लोबल वार्मिग, अम्लीकरण और ऑक्सीजन के स्तर में लगातार कमी की तिकड़ी दुनियाभर के समुद्रों के लिए खतरा बनती जा रही है। इससे समुद्री जीव जंतुओं की कई प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
गुरुवार को जारी अंतरराष्ट्रीय शोध के नतीजों के मुताबिक, पूर्वानुमान के मुकाबले नए नतीजे ग्लोबल वार्मिग की अधिक विनाशकारी तस्वीर पेश करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, समुद्र लगातार गर्म हो रहे हैं। इस शताब्दी में समुद्र के तापमान में भले ही मामूली इजाफा दर्ज किया गया हो, लेकिन इसके खतरनाक नतीजे सामने आ चुके हैं। व्यवसायिक क्षेत्र में बड़े स्तर पर इस्तेमाल की जाने वाली मछलियां गहरे पानी या ध्रुवों की ओर खिसक रही हैं। मछलियों की कई प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर आ गई हैं।
अग्रणी वैज्ञानिकों की गैर सरकारी संस्था इंटरनेशनल प्रोग्राम ऑन द स्टेट ऑफ द ओशियन के मुताबिक, 'समुद्र और इसके पारिस्थितिक तंत्र को हो रहे नुकसान को अब तक कमतर आंका गया है। मौजूदा समय में कार्बन डाई आक्साइड के अत्याधिक उत्सर्जन से समुद्र का अम्लीकरण हो रहा है, यह पृथ्वी के इतिहास की अभूतपूर्व घटना है।'
इंटरनेशनल यूनियन फॉर कनवर्सेशन ऑफ नेचर की रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरण में ग्रीन हाउस गैसों के बढ़ते प्रभाव के कारण समुद्र का तापमान बढ़ रहा है। उर्वरकों और सीवेज का पानी लगातार समुद्र में बहाया जा रहा है, जिससे शैवालों की संख्या बढ़ रही है और समुद्र में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जा रही है। हवा में मौजूद कार्बन डाई आक्साइड जब समुद्र के पानी के संपर्क में आती है, तो अम्ल बन जाती है। अम्लीकरण, बढ़ता तापमान और ऑक्सीजन की कमी की खतरनाक तिकड़ी से दुनियाभर के समुद्रों के जीव जंतुओं के सामने आस्तित्व का खतरा मंडराने लगा है।


वन्य-प्राणी सप्ताह का तीसरा दिन
भोपाल । वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल में आज वन्य-प्राणी सप्ताह के तीसरे दिन 'वन्य-प्राणी संरक्षण में शिक्षकों की भूमिका' विषय पर कार्यशाला हुई। शिक्षकों के माध्यम से वन्य-प्राणियों के प्रति संवेदनशीलता एवं जागरूकता की भावना विद्यार्थियों में उत्पन्न करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यशाला में भोपाल के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों के 35 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लिया। कार्यशाला का शुभारंभ संचालक, वन विहार श्री बी.पी.एस. परिहार ने किया। इसके अतिरिक्त छात्र-छात्राओं के लिये 'वन और वन्य-प्राणी बचेंगे तो पृथ्वी और हम बचेंगे' पर वाद-विवाद प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। प्रतियोगिता में भोपाल के 20 विद्यालय के 40 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
पक्षी अवलोकन शिविर में आज विभिन्न विद्यालय, महाविद्यालय और स्वयंसेवी संस्था के पर्यावरण और पक्षी प्रेमियों ने 50 से अधिक प्रजाति के पक्षियों का अवलोकन किया और बर्ड्.स-वाचिंग के बेसिक नियम सीखे। बर्ड-वाचिंग में खंजन, नीलकंठ, किलकिला, आबाबील, टिटहरी, जलमुर्गी, सफेद बगुला आदि पक्षियों का पर्यावरण प्रेमियों ने अवलोकन किया।
वन विहार में कल
वन्य-प्राणी सप्ताह के चौथे दिन प्रात: 6 बजे से 8.30 तक पक्षी अवलोकन शिविर के अलावा 11.30 बजे से 'विकसित राष्ट्र पृथ्वी के बढ़ते तापमान हेतु उत्तरदायी है' विषय पर शिक्षक वाद-विवाद प्रतियोगिता होगी।


वन विहार में प्रकृति-प्रेमियों ने किया पक्षी अवलोकन
भोपाल। वन्य-प्राणी सप्ताह के अवसर पर वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में आज दूसरे दिन विभिन्न कार्यक्रम हुए। आज वन विहार में पक्षी अवलोकन, रंगोली और फोटोग्राफी प्रतियोगिता हुई।
पक्षी अवलोकन प्रात: 6 बजे से आयोजित किया गया, जिसमें 85 प्रतिभागी ने भाग लिया। 'बर्ड वाचर्स' ने विभिन्न प्रकार की स्थानीय और माइग्रेटरी प्रजातियों की पहचान की। इसमें चातक, खंजन, वुलीनेक स्टार्क, रेड मुनिया, लेसर व्हिसलिंग डक, नाइट हेरॉन आदि प्रमुख हैं। इसी प्रकार रंगोली प्रतियोगिता सुबह 9 से 11 बजे तक हुई। इसमें 98 प्रतिभागी ने कला का प्रदर्शन किया। रंगोली के प्रतिभागियों ने प्रकृति से जुड़े विषयों पर सुंदर रंगोली बनाई। प्रतियोगिता में जूनियर वर्ग की मांडवी अजय आरुणकर प्रथम, निकिता पाल द्वितीय एवं प्रियांशु विश्वकर्मा तृतीय स्थान पर रहे। सीनियर वर्ग में तेजस्विनी शर्मा प्रथम, वाई.के. वर्मा द्वितीय और अतुल कुशवाहा तृतीय स्थान पर रहे।
फोटोग्राफी प्रतियोगिता में भोपाल के वरिष्ठ छाया चित्रकारों ने नवोदितों को वन्य-प्राणियों की फोटोग्राफी के गुरु-मंत्र दिये। इसमें श्री अनुराग दुबे, सुश्री भावना जायसवाल और श्री संजय जैन ने छाया-चित्रों की बारीकियाँ बतलाईं। गुरुवार-3 अक्टूबर के कार्यक्रम
वन विहार में गुरुवार 3 अक्टूबर को प्रात: 6 से 8.30 बजे तक पक्षी-अवलोकन शिविर होगा। सुबह 10.30 बजे 'वन और वन्य-प्राणी बचेंगे तो पृथ्वी और हम बचेंगे' विषय पर विद्यालयों की वाद-विवाद प्रतियोगिता होगी। इसके बाद शिक्षकों की कार्यशाला में 'वन्य-प्राणी संरक्षण में शिक्षकों की भूमिका' विषय पर परिचर्चा होगी।


वन्य-प्राणी की सुरक्षा में युवा वर्ग आगे आये- वन मंत्री श्री सिंह
भोपाल। मध्यप्रदेश के वन मंत्री श्री सरताज सिंह ने युवा वर्ग से वन्य-प्राणी संरक्षण सप्ताह के दौरान प्रदेश के विद्यालयों और महाविद्यालयों में आयोजित विविध कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने और वन्य-प्राणियों एवं उनके रहवास स्थलों की सुरक्षा का संकल्प लेने की अपील की है।
वन मंत्री श्री सिंह ने वन्य-प्राणी सप्ताह के अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा है कि वन क्षेत्रों की वानस्पतिक तथा जंतु जगत की विविधता के कारण प्रदेश का देश में अग्रणी स्थान है। वन विभाग ने स्थानीय समुदायों के सहयोग से वन एवं वन्य-प्राणियों की सुरक्षा की है। इससे बाघों एवं अन्य वन्य-प्राणी में इजाफा हुआ है। पन्ना में बाघ, बाँधवगढ़ में गौर और कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में कृष्ण मृग के पुनर्वास ने देश के सामने नई मिसाल पेश की है।
हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी प्रदेशभर में एक अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक वन्य-प्राणी सप्ताह मनाया जा रहा है।


वन राज्य मंत्री श्री मरावी की अपील अरण्य संस्कृति की रक्षा करें
भोपाल। मध्यप्रदेश के वन राज्य मंत्री श्री जयसिंह मरावी ने वन्य-प्राणी संरक्षण सप्ताह के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा है कि हमारी संस्कृति अरण्य संस्कृति रही है। अरण्य संस्कृति में वन एवं वन्य-प्राणियों की पूजा होती है। पर्यावरण की दृष्टि से इस संस्कृति की रक्षा करना आज पुन: समय की आवश्यकता बन गया है।
वन राज्य मंत्री श्री मरावी ने अपने संदेश में कहा कि बढ़ती आबादी और औद्योगिकीकरण ने वन्य-प्राणियों के रहवास पर संकट उत्पन्न कर दिया है। आपसी सामंजस्य और जन-भागीदारी से ही इस समस्या का समाधान संभव है। श्री मरावी ने कहा कि वन्य-प्राणी, पारिस्थितिकी तंत्र की महत्पूर्ण कड़ी होते हैं। इस कड़ी के संरक्षण और संवर्द्धन से ही मानव जाति की उन्नति निहित है। श्री मरावी ने प्रदेश के बच्चों और नागरिकों से वन्य-प्राणी संरक्षण सप्ताह के कार्यक्रमों में भाग लेकर जन-जागृति में योगदान देने की अपील की है।


वन एवं वन्य-प्राणी संरक्षण-संवर्धन पर सहयोग दें- श्री चौहान
भोपाल। मप्र के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने वन्य-प्राणी सप्ताह- 1 से 7 अक्टूबर के अवसर पर प्रदेशवासियों से वन और पुलिस विभाग को समय पर सूचनाएँ देकर वनों एवं वन्य-प्राणियों की सुरक्षा, संरक्षण और संवर्द्धन में सहयोग देने की अपील की है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस अवसर पर अपने बधाई संदेश में कहा है कि वन एवं वन्य-प्राणी प्रबंधन में जन-सहयोग काफी महत्वपूर्ण है। श्री चौहान ने कहा कि वन्य-प्राणी सप्ताह में वन और वन्य-प्राणियों के संरक्षण-संवर्धन के प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता और जन-भागीदारी की भावना विकसित होगी। मध्यप्रदेश इस कार्य में देश के अग्रणी राज्यों में सम्मिलित है। प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र हैं। प्रदेश के वन एवं वन्य-प्राणी के उत्कृष्ट प्रबंधन को राष्ट्रीय-स्तर पर सराहना मिली है।


हरियाली महोत्सव में सवा छह करोड़ पौधे रोपित
भोपाल। हरियाली महोत्सव में एक जून, 2013 से अब तक प्रदेश में 6 करोड़ 26 लाख पौधे रोपे जा चुके हैं। वन विभाग ने वर्षा ऋतु के दौरान 7 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। शेष रोपण की कार्यवाही चल रही है। इस वर्ष वन क्षेत्रों से बाहर भूमि पर पौध-रोपण को महत्व दिया जा रहा है। वन विभाग द्वारा रोपणियों को इसके लिये 42 लाख बीज वितरित किये गये थे।
प्रदेश में वनों के संवर्धन के लिये लागू हरियाली महोत्सव में वर्ष 2003-04 में जहाँ ढाई करोड़ से कम पौधे रोपित किये गये थे, वहीं वर्ष 2011-12 में सभी विभाग ने 12 करोड़ पौधे रोपित किये, जिसमें 7 करोड़ वन विभाग के पौधे शामिल हैं। प्रदेश में वर्ष 2010 को बाँस-रोपण वर्ष, 2011 को महुआ वर्ष और वर्ष 2012 को खमेर वर्ष के रूप में मनाया गया। बाँस वर्ष में वन विभाग और अन्य विभाग के माध्यम से 5 करोड़ बाँस पौधों का, महुआ वर्ष में 13 लाख महुआ के पॉलिथिन पौधों और 30 लाख महुआ बीज के माध्यम से रोपण हुआ। महुआ आदिवासियों का आहार होने के साथ-साथ आर्थिक लाभ का भी साधन है। खमेर वर्ष में 46 लाख खमेर के पौधों का रोपण किया गया। खमेर तेजी से बढ़ने वाला पौधा है, जिसकी काष्ठ इमारती लकड़ी के रूप में काम आने से किसानों को अच्छा आर्थिक लाभ मिलता है। खमेर काष्ठ के परिवहन को सरल बनाने के लिये राज्य शासन ने इसके को परिवहन अनुज्ञा-पत्र से मुक्त भी किया।
पौध-रोपण से रुकी वन आवरण में कमी
वन मंत्री श्री सरताज सिंह ने बताया कि पौध-रोपण के कार्य, जो पहले बजट के अभाव में सीमित मात्रा में किये जाते थे अब प्रचुर मात्रा में होने लगे हैं। अब लगभग 7 करोड़ पौधे प्रतिवर्ष अकेले वन विभाग की सभी एजेंसियों द्वारा लगाये जाते हैं। इतनी संख्या में पौध-रोपण के परिणाम स्वरूप वन आवरण में निरंतर हो रही कमी वर्ष 2005 से रुक चुकी है।


अभी और बरसेंगे बादल, दो दिन बाद फिर तेज होगी बारिश
भोपाल। राजधानी में लगातार हो रही बारिश अब लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। मौसम केंद्र का कहना है कि अगले एक-दो दिन शहर में हल्की वर्षा होगी। इसके बाद फिर तेज बारिश शुरू हो सकती है, क्योंकि उड़ीसा तट पर एक बार फिर ऊपरी हवा का चक्रवात बन गया है।
मौसम केंद्र के निदेशक डीपी दुबे ने बताया कि राजधानी में पिछले 11 दिनों में एक भी दिन ऐसा नहीं रहा, जब बारिश नहीं हुई। इस दौरान 32.66 सेमी बारिश हुई। सोमवार को भी 1.23 सेमी बारिश हुई। इस सीजन में अब तक 83.91 सेमी बारिश हो चुकी है। यह सामान्य से 32.26 सेमी ज्यादा है।
भदभदा-कलियासोत के गेट बंद
जलस्तर में बढ़ोतरी रुक जाने से रविवार देर रात भदभदा और कलियासोत डेम के गेट बंद कर दिए गए। नगर निगम के मुताबिक, रविवार रात में तालाब का जलस्तर 1666.20 पहुंच गया था। इसी वजह से गेट बंद किया गया। अब जलस्तर 1666.40 पर पहुंच गया है।
रेल यातायात
भोपाल रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले गुना-मक्सी सेक्शन और रूठियाई-महुगुढ़ा स्टेशन के बीच रेलवे ट्रैक पानी में डूबने से लगातार दूसरे दिन भी ट्रैफिक बाधित रहा। इस कारण मंगलवार को भी भोपाल-जोधपुर फास्ट पैसेंजर रद्द रहने की संभावना है। जोधपुर से भोपाल आने वाली ट्रेनें भी यहां नहीं आ सकेंगी।
इसके अलावा भोपाल से गुजरने वाली कुछ साप्ताहिक व एक्सप्रेस गाडिय़ों को बदले हुए रूट से चलाया जा रहा है। एडीआरएम अजय कुमार गुप्ता के नेतृत्व में ट्रैक सुधार का काम चल रहा है। इस काम में करीब 400 रेलकर्मी लगे हैं। बदले हुए रूट से चलने वाली गाडिय़ां इस प्रकार हैं।
व्यापार
भोपाल व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष अनुपम अग्रवाल ने बताया कि बारिश के कारण किराना, सर्राफा, कपड़ा, अनाज समेत हर कारोबार पर विपरीत असर पड़ा है। रमजान चल रहा है। सावन शुरू हो गया है, लेकिन बाजार सूने हैं।
स्वास्थ्य
अस्पताल पहुंच रहा हर चौथा मरीज बुखार का बारिश ने शहर के लोगों की सेहत बिगाड़ दी है। जेपी और हमीदिया अस्पताल में इलाज कराने पहुंच रहे हर चौथे व्यक्ति को वायरल बुखार है। ऐसी ही स्थिति निजी नर्सिंग होम्स की भी है। सीएमएचओ ने वायरल फीवर के मरीजों के इलाज में सतर्कता बरतने का अलर्ट जारी किया है।
जेपी अस्पताल अधीक्षक डॉ. वीणा सिन्हा ने बताया कि सोमवार को ओपीडी में 16०० मरीज विभिन्न बीमारियों का इलाज कराने पहुंचे, इनमें से 400 मरीज वायरल बुखार के थे। हमीदिया अस्पताल के ओपीडी में 14०० मरीज देखे गए। इनमें से 500 बुखार का इलाज कराने पहुंचे थे।
स्कूल
विद्यार्थियों की संख्या घटी
सीबीएसई स्कूलों के समूह सहोदय के अध्यक्ष पीएस कालरा ने बताया कि बारिश की वजह से प्राइवेट स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति 10 से 15 फीसदी घट गई है। शहरी क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में यह आंकड़ा 25 प्रतिशत से ज्यादा पहुंच गया है।


मुंबई: भारी बारिश बनी आफत
मुंबई। आज सुबह से जारी मूसलाधार बारिश से मुंबई का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में पूरे महाराष्ट्र में जोरदार बारिश की आशंका जताई है। लोगों को जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी गई है। भारी बारिश के कारण मुंबई के कई इलाकों में पानी भर गया है।
हालात को बिगड़ते देख बीएमसी ने सभी स्कूलों को बंद करने के आदेश दिए हैं। बारिश का असर मुंबई की लाइफ लाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों पर भी पड़ा है। सेंट्रल और हार्बर लाइन पर ट्रेनें 10 मिनट की देरी से चल रही हैं। मौसम विभाग ने दोपहर डेढ़ बजे हाई टाइड की आशंका जताई है, जिसके मद्देनजर मछुआरों को समुद्र किनारे नहीं जाने की सलाह दी गई है।
भारी बारिश के कारण शहर में जगह-जगह पानी इकट्ठा हो गया है, जिसके कारण लोगों को दफ्तर जाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।।


आज हो सकती है तेज बारिश
भोपाल। राजधानी में बुधवार को तेज बारिश हो सकती है। मौसम केंद्र के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में एक ओर कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय हुआ है। इसके चलते मौसम केंद्र ने तेज बारिश की संभावना जताई है।
मौसम केंद्र के मुताबिक जुलाई के महीने में अब तक भोपाल में 14 सेमी बारिश हो चुकी है। सोमवार को सुबह तो न के बराबर बारिश हुई थी, लेकिन रात में ०.५१ सेमी बारिश हो गई। मंगलवार को भी दिनभर कही-कहीं रिमझिम बारिश हुई। सहायक मौसम विज्ञानी ईआर चिंतलू ने बताया कि प्रदेश के उत्तर पूर्वी इलाके में पहले से ही ऊपरी हवा का चक्रवात बना हुआ है। बंगाल की खाड़ी और उड़ीसा तट पर बने कम दबाव के क्षेत्र के भी दक्षिणी मप्र पहुंचने की संभावना है। यही वजह है कि तेज बारिश की चेतावनी दी गई है। इधर, दिन और रात का तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है। मंगलवार को राजधानी का अधिकतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2 डिग्री कम है। वहीं न्यूनतम तापमान 23.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।।


पर्यावरण बचाने के लिए करेंगे जागरूक
भोपाल। शिक्षा विभाग ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स और फैकल्टी द्वारा पर्यावरण संरक्षण सहभागिता करने के लिए एक गाइड लाइन जारी की है। इसमें विभिन्न कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए हैं। दस बिंदु वाली गाइडलाइन में कहा गया है कि परिसर में पौधे लगाने के साथ पक्षियों की ऐसी प्रजातियों को संरक्षित किया जाए जिनकी प्रजाति खतरे में है। इन परिसर को हरित कुंज के रूप में संरक्षित रखा जाए। जगह-जगह कार्यशालाएं आयोजित कर लोगों को जागरूक किया जाए। यह भी कहा है कि स्टूडेंट्स और फैकल्टी तीन किमी से अधिक की दूरी के लिए वाहनों का पूल भी कर सकते हैं।


अभी जारी रहेगा बारिश का सिलसिला
भोपाल। प्रदेश के कई हिस्सों में रविवार को भी बारिश जारी रही। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश में बना कम दबाव का क्षेत्र अब ऊपरी हवा के चक्रवात में बदल गया है। इसी वजह से बारिश हो रही है।
आगे क्या : मौसम केंद्र के वैज्ञानिक ईआर चिंतलू का कहना है कि प्रदेश में फिलहाल बारिश की गतिविधि जारी रहेगी। रीवा, शहडोल, सागर और जबलपुर संभागों में भारी बारिश हो सकती है।


दिनभर शहर को भिगोती रहीं रिमझिम फुहारें, फिलहाल तेज बारिश की संभावना कम
भोपाल। राजधानी में फिलहाल तेज बारिश के आसार कम ही हैं। शुक्रवार को भी दिनभर रिमझिम फुहारें गिरती रहीं। मौसम केंद्र के मुताबिक शनिवार को भी ऐसा ही मौसम बने रहने की संभावना है।
मौसम केंद्र के मुताबिक शुक्रवार को दिनभर 0.9 मिमी बारिश हुई। मौसम विज्ञानी आरडी मेश्राम ने बताया कि कम दबाव का क्षेत्र अब राजस्थान की ओर चला गया है। इसी वजह से भोपाल समेत पूरे प्रदेश में तेज बारिश की संभावना कम है।
बारिश की वजह से शुक्रवार को वातावरण में ठंडक रही। बादलों की वजह से दृश्यता भी कम रही। बारिश और बादलों की वजह से दिन का तापमान सामान्य से काफी नीचे चल रहा है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 25.7 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से 7 डिग्री कम है। वहीं, न्यूनतम तापमान 21.9 डिग्री रहा, जो सामान्य से 2 डिग्री कम है।


अगले 48 घंटों में भारी बारिश की आशंका
देहरादून । मौसम के लिहाज से अगले 48 घंटे संवेदनशील माने जा रहे हैं। इससे राहत कार्यो में लगी मशीनरी के माथे पर चिंता गहरा गई है मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दो दिन गढ़वाल में भारी वर्षा की हो सकती है। हालांकि बृहस्पतिवार को मौसम ने कुछ राहत दी और केदारघाटी में राहत कार्यो की गति बढ़ाने के साथ ही केदारनाथ क्षेत्र में शवों की तलाश का काम जारी रहा। गुरुवार को सात शवों का अंतिम संस्कार किया गया। केदारनाथ में अब तक कुल 63 शवों का दाह संस्कार किया जा चुका है। दूसरी ओर मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने गौरीकुंड और गुप्तकाशी में राहत कार्यो का जायजा लिया और अधिकारियों के साथ बैठक की। गुप्तकाशी में इंतजार कर रही शासन द्वारा गठित टीम के करीब सौ सदस्यों को हेलीकॉप्टर से केदारनाथ भेज दिया गया है। टीम के तकरीबन इतने ही सदस्य बुधवार को भेजे जा चुके हैं। केदारनाथ में सफाई आदि का काम भी आरंभ कर दिया गया है।
केंद्र के निर्देश पर दिल्ली से पहुंची 40 चिकित्सकों की टीम में से 20 चिकित्सकों को केदारनाथ भेजा गया है। बताया जा रहा है कि चिकित्सक डीएनए सैंपल लेने के साथ ही वहां काम कर रही टीम की सेहत पर भी नजर रखेंगे। शेष बीस चिकित्सिकों को दो-दो के दल में गांवों की ओर रवाना किया गया। बुधवार को गौरीकुंड बेसकैंप से केदारनाथ की ओर रवाना हुआ दल रास्ता बनाते हुए रामबाड़ा तक पहुंच गया है। इस दल में विभिन्न महकमों के कर्मचारियों को शामिल किया गया है। केदारनाथ पहुंचे सात पर्वतारोहियों की टीम आसपास के इलाकों में शवों की खोज में जुटी रही। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र [यूएन] के छह सदस्यीय दल ने अगस्त्यमुनि और जखोली ब्लाक का दौरा किया। सूत्रों के अनुसार दल ने दोनों ब्लाक के गांवों का सर्वेक्षण किया। हालात का जायजा लेने के बाद शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
गुरुवार को केदारघाटी के गांवों में चार हेलीकॉप्टर की मदद से राहत सामाग्री पहुंचाने का काम जारी रहा। इनमें से दो हेलीकॉप्टर रुद्रप्रयाग के आसपास और दो गुप्तकाशी से ऊखीमठ क्षेत्र में राहत सामाग्री पहुंचा रहे हैं। जोशीमठ से दो हेलीकॉप्टर के जरिए बदरीनाथ में फंसे स्थानीय लोगों को निकालने का क्रम दूसरे दिन भी जारी रहा। इसके अलावा पंद्रह दिन से राहत की इंतजार कर रहे पिंडर घाटी के गांवों के लिए भी राहत भेजी गई। उत्तरकाशी में भी राहत कार्यो पर तीन हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। प्रशासन के अनुसार कुछ इलाकों में संपर्क मार्ग दुरुस्त करने के बाद खच्चरों की मदद से राहत सामाग्री भेजी जा रही है। साथ ही उत्तरकाशी शहर में भागीरथी से हो रहे भू-कटाव को रोकने के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की मदद से पुश्ता बनाने का कार्य भी शुरू हो गया है।


अभी बने रहेंगे बारिश के आसार
भोपाल। राजधानी समेत पूरे मध्यप्रदेश में बारिश का सिलसिला जारी है। बीते चौबीस घंटों के दौरान प्रदेश के कई इलाकों में बारिश हुई। हालांकि गुरुवार को बारिश रुकी हुई है। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल बारिश होती रहेगी, लेकिन अब इसकी तीव्रता में कुछ कमी आएगी। मौसम केंद्र के मुताबिक, कम दबाव का क्षेत्र अब भी मध्यप्रदेश में बना हुआ है। यही कारण है कि पूरे प्रदेश में बारिश हो रही है। अभी एक-दो दिन और ऐसी ही बारिश होगी और इसके बाद बारिश का दौर रुक जाएगा।


मानसून की अच्छी वर्षा से जलाशयों का जल स्तर बढ़ा
भोपाल। मध्यप्रदेश में जून माह में मानसून की अच्छी वर्षा होने के बाद से सभी जिलों में उत्पन्न होने वाली दिक्कतों से निपटने के लिए राज्य के मुख्यसचिव आर. परशुराम ने सभी कलेक्टरों को नागरिकों की सहायता के उपाय तत्काल करने के निर्देश दिये हैं
प्रदेश के 45 जिलों में एक जून से 28 जून तक सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है और पांच जिलों सीधी, बालाघाट, सिंगरौली, अनूपपुर और पन्ना में सामान्य वर्षा दर्ज की गई है।
जून माह में हुई अच्छी वर्षा के बाद प्रदेश के प्रमुख बांधों जलाशयों और नदियों के जलस्तर में वृद्घि हुई है। इंदिरा सागर जलाशय का जलस्तर समुद्र सतह से 243 मीटर, बरगी जलाशय का 403 मीटर, गांधी सागर का
381 मीटर, हलाली का 448 मीटर, कोलार का 429 मीटर, केरवा का 500 मीटर, तवा का 334 मीटर, बाणसागर का 323 मीटर और संजय सागर का 508 मीटर हो गया है।
प्रदेश में जारी वर्षा के दौर के चलते यहां की प्रमुख नदियों का जलस्तर भी बढ़ता जा रहा है। प्रदेश की प्रमुख नदियों में कल नर्मदा का जलस्तर सेठानी घाट, होशंगाबाद में 285 मीटर, बरमान घाट में 313 मीटर, तमस नदी 121 मीटर, केन नदी 84 मीटर, चंबल 450 मीटर, बेतवा 415 मीटर और पार्वती का 402 मीटर दर्ज किया गया।
राजस्व विभाग के सचिव अजीत केसरी ने जानकारी दी कि सागर जिले में 27 जून को अतिवृष्टि के कारण पानी में घिरे नागरिकों को निकालने के लिए सेना के स्थानीय स्टाफ की सहायता ली गई। सभी जिलों में अधिक वर्षा से उत्पन्न दिक्कतों से निपटने के लिए होमगार्ड जवानों को राहत कार्यों के संचालन एवं अन्य संबंधित विभागों द्वारा आवश्यक तैयारियां की गई हैं।
सागर जिले के ग्राम झागरी में 75 नागरिक को कल रात सुरक्षित बाहर निकाला गया था। ग्राम अदावन में धसान नदी में उफान आने से चारों ओर पानी से 37 लोग घिर गए थे, इन्हें भी सुरक्षित निकाल लिया गया।
दमोह जिले में ब्यारमा नदी में बाढ़ की स्थिति निर्मित होने पर 32 ग्राम के निवासियों को निकटवर्ती ग्रामों में ठहराया गया। इन नागरिकों के भोजन की व्यवस्था भी प्रशासन द्वारा करवाई गई। दमोह जिले के पटेरा में 3 दमोह में, 2 हटा और जबेरा में एक-एक शिविर लगाए गए हैं।


प्राकृतिक गैस की बढ़ी कीमतों को सीसीइए की मंजूरी
नई दिल्ली। आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) ने प्राकृतिक गैस की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर की गई सी रंगराजन कमेटी की सिफारिशों को मंजूर कर लिया है। इसके साथ ही प्राकृतिक गैस की कीमतों को भी मंजूरी मिल गई है। इस फैसले के बाद प्राकृतिक गैस की कीमत 4.2 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू से बढ़ाकर 8.4 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू की गई है। बढ़ी हुई कीमतें अप्रैल 2014 से लागू हो जाएंगी। हर तीन माह में इन कीमतों की समीक्षा की जाएगी।
कमेटी ने आज कोयला क्षेत्र के लिए अलग से रेगुलेटरी बॉडी बनाने को भी मंजूरी दे दी है। इसके बाद पावर कंपनियों के लिए कोयले की किल्लत दूर होगी और कीमत मनमाने तरह से नहीं बढ़ेगी। कोल रेगुलेटर की मुख्य जिम्मेदारी नीलामी से पहले रिजर्व प्राइस सुझाना, कीमत और क्वालिटी पर मतभेद हल करना होगा।
कोल रेगुलेटर की जिम्मेदारी के तहत कोयले की कीमत और क्वालिटी पर मतभेद हल करना, कोल ब्लॉक की नीलामी से पहले रिजर्व प्राइस सुझाना, कोयले की कीमत में पारदर्शिता की गाइडलाइंस के साथ ही कोल ब्लॉक की नीलामी की गाइडलाइंस तय करना शामिल होंगे। इसके अलावा मुंबई में मेट्रो के 23,126 करोड़ की लागत वाली मेट्रो को भी हरी झंडी दे दी है।
प्राकृतिक गैस की कीमतें बढ़ने के फैसले के बाद गेल और आईजीएल जैसी कंपनियों को नुकसान होने की उम्मीद जताई जा रही है। गैस कीमत बढ़ने के असर से पीएसयू कंपनियों, प्राइवेट कंपनियों का मुनाफा करीब बीस हजार करोड़ रुपये बढ़ जाएगा। हालांकि इससे पावर कंपनियों को सालाना 40,120 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ सकता है। इस असर बिजली पर भी पड़ेगा और यह करीब 1.5-2 रुपये प्रति यूनिट महंगी हो सकती है। वहीं सीएनजी 6.4-6.8 रुपये प्रति किलो महंगी होने के आसार हैं। इसके अलावा पीएनजी के दाम 4.8-5.2 रुपये प्रति सीयूएम बढ़ाए जा सकते हैं।


मानसून: यहां जून में ही बारिश का 38% कोटा पूरा, 75 साल का रिकॉर्ड टूटा
भोपाल। बादलों की मेहरबानी से जून में ही मानसून में होने वाली बारिश का 38 फीसदी कोटा बुधवार को पूरा हो गया। सुबह ८:३0 से रात ११:३0 बजे तक ८.९२ सेमी पानी गिरा। इसके चलते जून में अब तक राजधानी में ४१.४८ सेमी बारिश हो चुकी है। यह जून की औसत बारिश १४.४ सेमी से तीन गुना ज्यादा है। मौसम केंद्र में उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक जून में पहली बार इतनी बारिश दर्ज की गई है। 75 साल पहले जून १९३८ में रिकॉर्ड ३९.३२ सेमी बारिश हुई थी। भोपाल में मानसून में औसत बारिश १क्९ सेमी होती है। दो दिन और बारिश : मौसम केंद्र के मुताबिक पूरे प्रदेश में अगले दो दिनों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। जबलपुर, होशंगाबाद, भोपाल और इंदौर संभाग में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।
तीन दिन में ही २४.4७ सेमी
जून में अब तक जितनी बारिश हुई है, उसमें से ६0 फीसदी बारिश तो पिछले तीन दिनों में ही हुई है। मौसम केंद्र के मुताबिक सोमवार से बुधवार तक २४.4७ सेमी पानी गिरा है, जबकि इससे पहले जून के २३ दिनों में 17.01 सेमी ही बारिश हुई थी।
तीन दिन में बारिश
सोमवार - ४ सेमी
मंगलवार - ११.५५ सेमी
बुधवार - ८.९२ सेमी

फ्लाइट डाइवर्ट
जबलपुर में खराब मौसम की वजह से बुधवार सुबह 11:30 बजे दिल्ली से आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट को डाइवर्ट कर भोपाल उतारना पड़ा।
बाढ़ में छह बहे
प्रदेश के अनेक स्थानों पर मूसलाधार बारिश होने से नर्मदा, ताप्ती, बेतवा एवं अन्य छोटे नदी-नाले उफान पर हैं। सीहोर की सीवन नदी की बाढ़ में दो युवक और एक बच्चा बह गया। उज्जैन में दो और बैतूल में एक व्यक्ति के बहने की भी खबर है। कई स्थानों पर सड़क मार्ग बंद हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा बारिश सीहोर जिले के इछावर में 23 सेमी रिकॉर्ड की गई।
कई रास्ते बंद
रायसेन जिले में बरेली कस्बे के पास जयपुर-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित हो गया है। होशंगाबाद के पास बेतवा नदी के पुल पर भी दो फीट पानी बह रहा है जिससे पर्वतीय स्थल पचमढ़ी का मार्ग अवरुद्ध हो गया है। ञ्चविदिशा जिले में गंजबासौदा, खुरई आदि कई इलाकों का सड़क संपर्क टूट गया है। ञ्चदमोह के अभाना के पास पुलिया डूब जाने से दमोह-जबलपुर मार्ग बंद है।
दो महीने पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राजधानी के जिस 52 किमी लंबे नए बायपास का लोकार्पण किया था, वह पहली बारिश भी नहीं झेल पाया। इंदौर रोड खजूरी से मुबारकपुर चौराहे तक 13 किमी के हिस्से में सड़क मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात चार स्थानों पर धंस गई। इसमें करीब दो से तीन फीट गहरे गड्ढे हो गए। इसके चलते इसमें करीब दो दर्जन से ज्यादा वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गए। करीब पांच लोग घायल हुए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मंगलवार रात 10 बजे खजूरी सड़क के पास आयशर पेट्रोल पंप स्थित एक पुल के दोनों ओर सड़क धंस गई। इससे यहां से गुजर रहे ट्रक और एक वैन आपस में टकरा गए।
एक्सपर्ट व्यू
रोड मेटेरियल ठीक हो तो सड़क नहीं धंसती
पीडब्ल्यूडी के पूर्व मुख्य अभियंता बीके सोनगरिया ने कहा- यदि पहली बारिश में सड़क धंसी है तो निश्चित तौर पर गुणवत्ता से समझौता किया गया है। पहली या दूसरी कभी भी बारिश हो, लेकिन यदि रोड मेटेरियल ठीक डाला गया हो तो सड़क कभी नहीं धंसती।
बड़े तालाब का जलस्तर जून में पहली बार 1662 फीट
मानसून की मेहरबानी और पिछले दो दिनों से हो रही झमाझम बारिश के चलते पहली बार जून में बड़े तालाब का जलस्तर 1662.क्क् फीट के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। नगर निगम के मुताबिक वर्ष 1965 के बाद जून में यह सबसे ज्यादा जलस्तर है। इसकी वजह इस बार मानसून का जल्दी आना और अच्छी बारिश होना रहा है। इसके अलावा मौजूदा साल में तालाब से पेयजल के लिए कम पानी लेना है। बुधवार को महज एक ही दिन में २.२५ फीट की बढ़ोतरी हुई। अब यह अपने फुल टैंक लेवल 1666.80 से महज 4.८0 फीट कम है। मंगलवार को बड़े तालाब का जलस्तर अब 1659.75 था। निगम के अधिकारियों का कहना है कि यदि बारिश का ऐसा ही सिलसिला जारी रहा तो जल्द ही भदभदा के गेट खुल सकते हैं।
इसलिए बनी ये स्थिति
मानसून की मेहरबानी
इस बार मानसून तय समय से पहले आया है और अब तक रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो चुकी है। इसी वजह से जलस्तर में इतनी बढ़ोतरी हुई है।
नर्मदा ने भी दिया सहारा
पहले बड़े तालाब से रोजाना 28 एमजीडी पानी सप्लाई होता था। पिछले साल से नर्मदा जल सप्लाई होने से बड़े तालाब पर निर्भरता कम हुई और अब सिर्फ 18 एमजीडी पानी ही लिया जाता है।
पहले से ही थी अच्छी स्थिति
इस साल 17 जून को बड़े तालाब का जलस्तर 1659.60 फीट था। पिछले 48 सालों में सिर्फ दो बार जून में तालाब का जलस्तर इस आंकड़े के करीब पहुंचा है।
पिछले साल था फुल टैंक
पिछले साल बारिश के दौरान भदभदा डेम के गेट कई बार खोले गए। बड़ा तालाब फुल टैंक लेवल तक पहुंच गया था। इस वजह से भी तालाब का जलस्तर ज्यादा कम नहीं हो पाया।
भदभदा के गेट खोलने के लिए तैयारी
नगर निगम ने बारिश की स्थिति को देखते हुए भदभदा डेम के गेट खोलने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। बुधवार को यहां गेटों का मेंटेनेंस किया गया।
कोलार डेम का जलस्तर भी बढ़ा
कोलार डेम के जलस्तर में एक दिन में 1.86 मीटर की बढ़ोतरी हुई है। मंगलवार को यह 446.77 मीटर था, जबकि बुधवार को यह 448.63 मीटर हो गया।


तेज बारिश ने जमकर भिगोया, कहीं आफत तो कहीं राहत बनकर बरसे बदरा
भोपाल। राजधानी में मंगलवार को भी सोमवार जैसा ही नजारा दिखाई दिया। शाम करीब 6 बजे ही अंधेरा छा गया और तेज बारिश शुरू हो गई। करीब एक घंटे बाद बारिश की रफ्तार में कमी आई। हालांकि, देर रात तक रुक-रुककर बारिश होती रही। इस वजह से शहर की कई सड़कों और इलाकों में पानी भर गया। मौसम केंद्र ने चेतावनी दी है कि अगले 24 घंटे में राजधानी के कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है।
भोपाल में सोमवार रात हुई तेज बारिश के बाद मंगलवार को दिनभर मौसम खुला रहा। इस दौरान धूप भी निकली। हालांकि, शाम 5 बजे के बाद मौसम बदला और काले बादल छा गए और फिर तेज बारिश शुरू हो गई। मौसम केंद्र के निदेशक डॉ. डीपी दुबे ने बताया कि फिलहाल प्रदेश में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। बुधवार को राजधानी में कई स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है।


रात करेगी इंतजार, साल का सबसे बड़ा दिन आज
बरेली। शुक्रवार को दिन पूरी रौ में दिखेगा और रात का इंतजार बढ़ेगा। सूर्यदेव भी देर तक अपनी चमक बिखरते रहेंगे। वजह, वर्ष का सबसे बड़ा दिन जो होगा। इस दिन सूरज की किरणें 13 घंटे 33 मिनट और 46 सेकेंड लोगों को अपने ताप से परेशान करेंगी।
दरअसल, अपने अक्ष पर साढ़े 23 अंश झुकी पृथ्वी लगातार सूर्य की परिक्रमा करती है। बारी-बारी से इसके उत्तरी और दक्षिणी गोला‌र्द्ध सूर्य के सामने आते रहते हैं। इससे दिन और रात की अवधि निर्धारित होती है। 21 जून को पृथ्वी का उत्तरी गोला‌र्द्ध सूर्य के सामने होता है। सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ती हैं, जिससे दिन की अवधि दूसरे दिनों के मुकाबले बढ़ जाती है। दिन बड़ा होने से सूर्य का ताप भी अधिक महसूस होता है। इस खगोलीय घटना से सूर्य दक्षिणायन होना शुरू हो जाता है, जिससे दिन धीरे-धीरे छोटे होना शुरू हो जाते हैं। फलस्वरूप 23 सितंबर को दिन और रात की अवधि बराबर हो जाती है। दिन की अवधि इसके बाद भी घटती रहती है। 21 दिसंबर को दिन की अवधि सबसे कम हो जाती है और रात की सबसे ज्यादा। इसके बाद दिन की अवधि बढ़ने लगती है और 23 मार्च को एक बार फिर दिन और रात बराबर हो जाते हैं।
खगोलविद डॉ.वीके शर्मा के अनुसार दिन और रात का स्टैंडर्ड समय उज्जैन के अनुसार निर्धारित किया जाता है। उज्जैन में 21 जून को सूर्य 13 घंटे 33 मिनट और 46 सेंकेंड चमकेंगे। यहां पर सूर्योदय 5.41.52 बजे और सूर्यास्त 7.15.38 बजे होगा। जबकि बरेली में दिन की अवधि 13 घंटे 25 मिनट होगी। यहां सूर्योदय 5.23 और सूर्यास्त 6.48 बजे होगा।


मध्यप्रदेश में मानसून सक्रिय, हर जगह तेज बारिश के आसार
भोपाल। भोपाल समेंत पूरे मध्यप्रदेश में बारिश का सिलसिला जारी है। सोमवार को भी प्रदेश के अधिकतर इलाकों मे अच्छी बारिश हो रही है। लगातार हो रही बारिश से भोपाल समेंत पूरे प्रदेश का मौसम खुशनुमा हो रही है। ग्वालियर में पिछले 24 घंटों के दौरान करीब 6 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई।
भोपाल में भी 1.84 सेंटीमीटर बारिश हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी मध्यप्रदेश मे बना कम दबाव का क्षेत्र अब उत्तर पूर्वी राजस्थान पर पहुंच गया है। इस वजह से पश्चिमी मध्यप्रदेश यानी होशंगाबाद, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, और उत्तर पूर्वी मध्यप्रदेश यानी टीकमगढ़, छतरपुर, रीवा, सतना, सीधी में बारिश हो सकती है।


मौसम विभाग ने चेताया-रिमझिम नहीं, हो सकती है प्रदेश में भारी बारिश
भोपाल। मानसून अब भोपाल के साथ पूरे मध्यप्रदेश में सक्रिय हो गया है। गुरुवार को यह ग्वालियर और रीवा संभाग में भी पहुंच गया। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 36 घंटों के दौरान प्रदेश के जबलपुर, भोपाल व इंदौर संभाग के कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है।
मौसम केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को मानसून की वजह से जबलपुर, इंदौर और भोपाल संभाग में तेज बारिश दर्ज की गई। नैनपुर में 11, सिवनी में 8, देवरी में 7, केवलारी, लखनादौन, घनसौरा में 5 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।


सूरज की तपिश से मिली राहत, हल्की बारिश से मौसम सुहावना
नई दिल्ली। पिछले काफी समय से सूरज की तपिश झेल रहे उत्तर भारत में मौसम ने करवट बदली है। पिछले दो दिनों से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। बृहस्पतिवार की सुबह की शुरुआत भी बारिश की फुहारों के साथ हुई। उत्तर भारत के पर्वतीय राज्य बुधवार को खूब भींगे। इसके चलते मौसम काफी सुहावना हो गया है। इसका असर मैदानी भागों में भी देखने को मिला। इन क्षेत्रों में भी गत दिनों की अपेक्षा तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गई।
इधर, दिल्ली-एनसीआर में भी हल्की बारिश से लोगों को राहत की सांस मिली। हालांकि अभी भी मानसून के दस्तक देने में काफी वक्त है।
गौरतलब है कि बुधवार को अधिकतम तापमान 39.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, जब तक बंगाल की खाड़ी में हवा के दबाव में बदलाव नहीं होता, तब तक राजधानी में मानसून पूर्व की अच्छी बारिश होने की संभावना कम ही है। पंजाब व हरियाणा में गत दिनों की अपेक्षा तापमान में गिरावट दर्ज की गई। लोगों को गर्म हवाओं से निजात मिली। ऐसा मंगलवार की बारिश की वजह से हुआ। पंजाब में सबसे अधिक तापमान चंडीगढ़ का 36.9 और हरियाणा के अंबाला में सबसे अधिक 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पश्चिमी व पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में सामान्य से भारी बारिश हुई। बांदा में सबसे अधिक बारिश हुई। राज्य में सबसे अधिक तापमान इटावा का 41.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
राजस्थान में भी बुधवार को बारिश से पारे में गिरावट दर्ज की गई। हिमाचल प्रदेश में मानसून पूर्व की बारिश से प्रदेशवासियों को गर्मी खूब राहत मिली है। प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में दो दिन से हो रही बारिश से तापमान में काफी गिरावट आई है। उमस भी कम हो गई है। राज्य में मानसून के एक सप्ताह पहले पहुंचने की संभावना है। यहां ऊना का तापमान सबसे अधिक 36.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
वहीं, कश्मीर के लोगों पर बुधवार को भी मौसम खासा मेहरबान रहा और दिनभर रुक-रुककर बारिश होती रही। जम्मू में भी दिन की शुरुआत बारिश से हुई। राज्य में पश्चिमी विक्षोभ बृहस्पतिवार शाम तक कमजोर पड़ जाएगा। उसके बाद न केवल वादी का मौसम शुष्क रहेगा, बल्कि गर्मी फिर से जोर पकड़ेगी। उत्तराखंड में भी कुछ स्थानों पर बुधवार को हुई बारिश से लोगों को राहत मिली।


तपते उत्तर भारत में राहत की उम्मीद
नई दिल्ली। उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में सोमवार को तपिश का दौर जारी रहा। कुछ स्थानों पर फुहारें भी पड़ीं, लेकिन राहत के बजाय उमस से लोग बेहाल रहे। इस बीच राहत भरी खबर यह है कि जल्द ही इस क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में बारिश हो सकती है। वहीं, देश के पूर्वी भाग बिहार और झारखंड में एक-दो दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह से सक्रिय हो जाएगा, जबकि ओडिशा में मानसून की जबरदस्त बारिश जारी है।
राजधानी दिल्ली में सोमवार को लोगों को चिलचिलाती धूप की मार झेलनी पड़ी। गर्म हवाओं ने भी परेशान किया। अधिकतम तापमान 41.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पंजाब व हरियाणा में रविवार की तरह सोमवार को भी लोग लू के थपेड़ों में झुलसे। पंजाब में सबसे अधिक तापमान अमृतसर में 44.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि हरियाणा में हिसार अपने अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म रहा। उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर बारिश ने थोड़े समय के लिए राहत दी। इसके बाद लोगों को उमस भरी गर्मी की मार झेलनी पड़ी। राज्य में सबसे अधिक तापमान जालौन में 42.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजस्थान के भी कुछ हिस्सों में हल्की से सामान्य बारिश हुई।
पर्वतीय राज्यों में गर्मी से कश्मीर का बुरा हाल है। यहां के कई हिस्सों में पारा 35 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचा। जम्मू में भी लोग सूरज की तपिश से परेशान हुए। उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों को फिर घटाएं धोखा दे गई और दिनभर गर्मी एवं उमस से लोग बेहाल रहे। उत्तरकाशी व रुद्रप्रयाग में बादलों के बरसने से हल्की राहत मिली। इसके विपरीत हिमाचल प्रदेश में मानसून पूर्व की बारिश ने ही कहर बरपना शुरू कर दिया है। प्रदेश में इस साल बादल फटने की पहली घटना मंडी जिला के नगवाई क्षेत्र में घटी है। इसमें किसी की जान तो नहीं गई, लेकिन सैकड़ों पेड़ उखड़ गए और खेतों में खड़ी फसल तबाह हो गई। कई घरों में पानी भी घुस गया। प्रदेश में अन्य कई स्थानों पर बौछारें पड़ीं, जिसने उमस बढ़ा दी। प्रदेश में ऊना सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर रहा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मंगलवार को पर्वतीय राज्यों के कई हिस्सों में बारिश की संभावना है।
बारिश ने थामी मुंबई की रफ्तार :
लगातार हो रही मानसून की बारिश ने मुंबई की रफ्तार पर लगाम लगा दी है। रेल, रोड व हवाई यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। मुंबई की जीवन रेखा कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवा के गड़बड़ाने से ऑफिस-दुकान जाने वाले लाखों लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सेंट्रल व हार्बर लाइनों पर जलभराव के कारण ट्रेनें 30 से 40 मिनट की देरी से चल रही हैं। कम दृश्यता के कारण हवाई यातायात पर भी असर पड़ा है। महानगर के निचले इलाकों में जलभराव से जहां-तहां गाड़ियां फंस गई हैं। ठाणे में भारी बारिश से सोमवार को अचानक आई बाढ़ में दो बच्चे बह गए। माहिम क्षेत्र में एक चार मंजिला इमारत ढहने से एक महिला की मौत हो गई जबकि चार लोग जख्मी हो गए।


लू के थपेड़ों से जूझ रहा उत्तर भारत
नई दिल्ली। पंजाब और हरियाणा समेत उत्तर भारत के कई मैदानी इलाकों में एक बार फिर लोग लू के थपेड़ों से परेशान हुए। उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हुई, जिससे उमस भरी गर्मी में और इजाफा हो गया। पर्वतीय राज्यों में हिमाचल प्रदेश में मानसून पूर्व की बारिश हुई तो उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के लोग चिचिलाती धूप से परेशान हुए।
बीते कई दिनों से उमस भरी गर्मी से जूझ रहे राजधानी दिल्ली व आसपास के इलाके के लोगों के लिए अच्छी खबर है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार सोमवार व मंगलवार को यहां तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी की संभावना है। बुधवार से शनिवार तक अच्छी बारिश भी हो सकती है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। रविवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 40.2 दर्ज किया गया। घूमने-फिरने घर से बाहर निकले लोग पसीने से तरबतर नजर आए। पड़ोसी राज्य हरियाणा और पंजाब में कई दिनों की राहत के बाद लू के थपेड़ों से जनजीवन बेहाल दिखा। हरियाणा में हिसार सबसे गर्म रहा, यहां पारा 45 डिग्री तक पहुंचा। जबकि पंजाब में सबसे अधिक तापमान अमृतसर का 44.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसी तरह का मौसम राजस्थान में भी रहा, जहां कई स्थानों पर पारा 45 डिग्री के पार गया। उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश के बावजूद लोगों को कोई राहत नहीं मिली। उमस भरी गर्मी से दिन-रात लोग जूझते नजर आए। राज्य में सबसे अधिक तापमान बांदा में 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
हिमाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में रविवार को मानसून पूर्व की झमाझम बारिश हुई। इसके चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई। प्रदेशभर में 15 जून तक हर रोज बारिश की संभावना है और 20 जून से यहां मानसून सक्रिय हो जाएगा। रविवार को प्रदेश में अधिकतम तापमान ऊना का 39.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके विपरीत उत्तराखंड व जम्मू-कश्मीर के लोगों को गर्मी से कोई राहत नहीं मिली।
पहली बारिश में ही मुंबई बेहाल
देश की औद्योगिक राजधानी मुंबई में शनिवार को मानसून की दस्तक राहत के साथ आफत लेकर आई। अनुमान से एक दिन पहले पहुंचे दक्षिण-पश्चिम मानसून से उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली, लेकिन कई निचले इलाकों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई। अगले दो दिनों तक यहां भारी बारिश की संभावना है। वृहन्मुंबई नगर निगम की आपदा प्रबंधन सेल के मुताबिक, जोरदार बारिश से दादर इलाके में डेढ़ फुट तक जलभराव हुआ, जिससे यातायात ठप हो गया। जोगेश्वरी, विक्रोली, मजगांव, मलाड और अन्य निचले इलाकों में भी ऐसा ही मंजर देखने को मिला। दक्षिण मुंबई में शनिवार रात 32 मिमी और उपनगरीय इलाकों में 36.7 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।


गर्मी से तप रहे उत्तर भारत में राहत की फुहार
नई दिल्ली। गर्मी से तप रहे उत्तर भारत के अधिकांश इलाकों में गुरुवार को राहत की फुहारें पड़ीं। कई मैदानी इलाकों में धूल भरी आंधी चली। दिन भर की धूप की तपिश के बाद शाम को मौसम में आए इस बदलाव से तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई और शाम सुहानी हो गई।
राजधानी दिल्ली की सुबह चिपचिपाहट भरी गर्मी के साथ शुरू हुई। सूरज में तपिश इस कदर थी कि सुबह दफ्तर निकलने वालों को दोपहर सी गर्मी का एहसास हुआ। इसके बाद दिन भर लोग उमस से जूझते रहे। शाम पांच बजे के करीब पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में धूल भरी आंधी चली और दिल्ली व आसपास के इलाकों में बारिश भी हुई। महज कुछ मिनटों में यहां 14.6 मिमी बारिश दर्ज की गई।
दिल्ली में अधिकतम तापमान 46.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजधानी के मौसम में अचानक आई खराबी व कम दृश्यता के चलते 15 विमानों की लैंडिंग नहीं हो पाई। उन्हें जयपुर में उतारा गया। दर्जनों स्थानों पर जलभराव व पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित हुआ। 10 जून के करीब दिल्ली व आसपास के इलाके में फिर बारिश की संभावना है।
पड़ोसी राज्य हरियाणा में भी कई स्थानों पर हुई बारिश से लोगों को काफी राहत मिली। यहां भी दिन भर लोग प्रचंड गर्मी से जूझे। राज्य में सबसे कम तापमान नारनौल में 46 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पंजाब के कई हिस्सों पर अंधी के साथ हुई बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
चंडीगढ़ में लगभग 40 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। जबकि सबसे अधिक तापमान अमृतसर में 44.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राज्य में गर्मी से दो लोगों की मौत भी हो गई। उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में कई स्थानों पर झमाझम बारिश हुई। जबकि, पश्रि्वमी भाग में दिन भर की भीषण गर्मी के बाद शाम को आंधी से तापमान में कुछ कमी आई।
पर्वतीय राज्यों में भी कई स्थानों पर बारिश हुई। उत्तराखंड के मैदानी इलाकों देहरादून, कोटद्वार समेत कुछ स्थानों पर सुबह बौछारें पड़ने से कुछ सुकून मिला, लेकिन बाद में तेज धूप के चलते उमस ने परेशानी बढ़ाए रखी। उच्च पर्वतीय इलाकों में मौसम खुशनुमा हो गया। राज्य में सबसे अधिक तापमान रुड़की में 38.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसी प्रकार हिमाचल के उच्च पर्वतीय इलाकों केलंग, कुल्लू, मंडी, बिलासपुर के साथ ही शिमला आदि में भी बारिश हुई। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान ऊना में 42.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जम्मू-कश्मीर में भी कई स्थानों पर बारिश के बावजूद लोग चिपचिपाहट भरी गर्मी से परेशान रहे।
उप्र में बिजली गिरने से 12 की मौत
उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर गुरुवार को बारिश के दौरान बिजली गिरने से 12 लोगों की मौत हो गई। 16 लोग झुलसे भी हैं। बिजली गिरने की घटनाएं बहराइच, श्रावस्ती और गोंडा में हुई। बहराइच में भाई-बहन सहित आठ जबकि श्रावस्ती में चार लोगों पर बिजली मौत बनकर गिरी।


मानसून की तेज चाल बरकरार
पणजी। केरल को अनुमान से दो दिन पहले भिगोने वाले मानसून की तेज चाल बरकरार है। गोवा में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने सोमवार को अनुमानित तिथि से दो दिन पहले दस्तक दी। इसे देश में मानसून के समय से पहुंचने और सामान्य बारिश के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है।
भारतीय मौसम विभाग की गोवा शाखा के निदेशक केवी सिंह ने मानसून के राज्य में आगमन और समय से दो दिन पहले यहां पहुंचने की पुष्टि की है। उन्होंने इसे देश में अच्छी वर्षा की संभावनाओं के लिए सुखद खबर बताया है। मानसून के बादल एक जून को केरल पहुंचे थे और इसके गोवा पहुंचने में महज तीन दिन लगे। सिंह ने राज्य में बारिश के सामान्य रहने का अनुमान जताया है।
मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी दी है। राज्य सरकार ने एक जून से मछली पकड़ने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है जो 61 दिनों तक जारी रहेगा। राज्य के कृषि निदेशक सतीश तेंदुलकर का कहना है कि किसानों ने बुआई की तैयारी पहले ही कर ली है। सहकारी संस्थाओं ने धान की खेती के लिए बीज उपलब्ध करा दिए हैं। आम की कलमें और काजू के पौधों की बिक्री भी जारी है। तेंदुलकर के मुताबिक, बारिश तेज होने के साथ इनकी बिक्री में तेजी आने की उम्मीद है।


मौसम का बदला मिजाज, कुछ यूं बरसे बदरा कि भिगो दिया तन-मन
इंदौर। मौसम का मिजाज मंगलवार रात अचानक बदला और रात करीब 11 बजे आंधी चलने लगी। कई जगह पेड़ गिर गए और तेज बारिश शुरू हो गई। शहर के अधिकांश हिस्सों में बिजली गुल हो गई। बीआरटीएस पर जगह-जगह पानी भर गया। होर्डिंग्स गिर गए।
गॉधी हॉल में अन्नपूर्णा योजना के शुभारंभ के लिए लगा पांडाल गिर गया। मौसम केंद्र के अनुसार रात करीब सवा 11 बजे हवा की रफ्तार 82 किलोमीटर घंटा दर्ज की गई। महू में रात 12 बजे तेज बारिश होने लगी। देवास, उज्जैन, नीमच और खंडवा में भी तेज बारिश हुई। उज्जैन में 100 मकानों को क्षति पहुंची। खंडवा में बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई।


पर्यावरण दिवस: नदियों में पानी से ज्यादा बह रहा प्रदूषण
लखनऊ। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वर्ष 2009 में गंगा को प्रदूषण मुक्त करने का सपना देखा। लक्ष्य रखा गया वर्ष 2020 का। चार साल यूं ही गुजर गए। स्थितियां गवाह हैं कि इस लक्ष्य की प्राप्ति फिलहाल आसान नहीं। वर्ष 1986 में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने गंगा एक्शन प्लान की शुरुआत कर गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए अभियान की नींव रखी थी। कानपुर डाउन स्ट्रीम पर उस समय बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर मानक से चार गुना अधिक 8.6 मिग्रा. प्रति लीटर दर्ज किया गया था। आज 36 साल के लंबे सफर में गंगा सफाई पर 600 करोड़ की भारी भरकम रकम खर्च करने के बाद भी स्थिति ज्यों की त्यों है।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वर्ष 2012 की रिपोर्ट में यह बीओडी लगभग उसी स्तर पर 8.3 मिग्रा. प्रति लीटर रिकॉर्ड किया गया है। वहीं खतरनाक जीवाणुओं की तादाद भी 100 मिली. में एक लाख 12 हजार के भयावह स्तर में पाई गई है। यह आकड़े गंगा की स्थिति बयान करते हैं।
बात केवल यही तक सीमित नहीं है। सूबे में बहने वाली गोमती, यमुना, काली, हिंडन छोटी-बड़ी सभी प्रमुख 12 नदियां सीवेज व औद्योगिक प्रदूषण से कराह रही हैं और महकमे प्रदूषण से निपटने के नाम पर अरबों की योजनाएं बनाने में जुटे हैं।
गोमती सफाई पर 300 करोड़ से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन लखनऊ डाउन स्ट्रीम पर बीओडी चार गुना से अधिक तथा जीवाणु की संख्या एक लाख पाई गई है। बोर्ड द्वारा घाघरा व राप्ती के जल नमूनों की जांच की गई। केवल दो नमूनों को छोड़ सभी 45 स्थानों पर प्रदूषण इस कदर है कि उसमें डुबकी लगाना सेहत पर भारी पड़ेगा।
बिठूर, इलाहाबाद, वाराणसी गंगा को प्रदूषण से कहीं भी राहत नहीं है। हिंडन, काली और वरुणा जैसी छोटी नदियां तो तकरीबन खत्म हो चुकी हैं। हिंडन के पानी में घुलित आक्सीजन शून्य है। बीओडी मानक 22 से 26 गुना के खतरनाक स्तर में पहुंच गया है। वहीं जीवाणुओं की संख्या लगभग 2.5 लाख से अधिक रिकॉर्ड की गई है।
मेरठ में काली नदी ने तो प्रदूषण के सारे रिकॉर्ड ही तोड़ दिए हैं। यहां बीओडी मानक से 40 गुना अधिक है तो जीवाणुओं की तादाद 3.5 लाख से ज्यादा पाई गई है। उधर मथुरा में यमुना के भी हाल बहुत खराब है। सई, सरयु, रामगंगा, बेतवा, राप्ती नदियां भी प्रदूषण से बेहाल हैं।
झील प्रदूषण नियंत्रण योजना नाकाम
छह वर्ष पूर्व तालाब व झीलों को साफ करने के लिए शुरू की गई मुहिम भी बेअसर रही। गोरखपुर की रामगढ़ लेक पर 48 करोड़ रुपये व्यय हो चुके हैं किंतु बीओडी का स्तर मानक से अधिक 5.15 मिग्रा. प्रति लीटर पाया गया है। उधर झांसी के लक्ष्मी तालाब में भी प्रदूषण नियंत्रण की योजना मंजूर की गई है जहां बीओडी बहुत अधिक 37 मिग्रा. प्रति लीटर तथा जीवाणुओं की संख्या 70 हजार से अधिक मिली है। झांसी का ही माहिल तालाब, रायबरेली की समसपुर झील भी जबर्दस्त प्रदूषण की चपेट में है।
अधिकतर एसटीपी ठप
गंगा, यमुना गोमती व सहायक नदियों पर बने 35 सीवेज शोधन संयंत्रों (एसटीपी) में से अधिकतर या तो ठीक से काम नहीं कर रहे हैं या फिर ठप पड़े हैं। इनमें सहारनपुर, मुजफ्फर नगर, गाजियाबाद, कानपुर जाजमऊ, आगरा, मथुरा के शोधन संयत्रों की हालत खराब है। लखनऊ में सीवेज एसटीपी तक पहुंच ही नहीं रहा है।


दो जून को केरल पहुंचेगा मानसून मप्र में कई जगह प्री मानसून बारिश
भोपाल। परिस्थितियां अनुकूल होने के कारण दक्षिण-पश्चिमी मानसून दो जून को केरल पहुंच जाएगा। केरल में शुक्रवार को हल्की बारिश हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक केरल और लक्षद्वीप के कई इलाकों में शनिवार को सुबह तक भारी बारिश हो सकती है।
मानसून पिछले साल पांच जून को केरल पहुंचा था। उधर, अरब सागर से आ रही नमी की वजह से मध्यप्रदेश में इंदौर, रीवा तथा जबलपुर में मानसून पूर्व हल्की बारिश हुई है। मौसम विज्ञानी आरडी मेश्राम के अनुसार अगले २४ घंटों में जबलपुर, इंदौर और भोपाल संभाग में कई जगह बूंदाबादी हो सकती है।


उमस भरी गर्मी से मैदान में जनजीवन बेहाल
नई दिल्ली। तीन दिनों की राहत के बाद उत्तर भारत के अधिकांश मैदानी हिस्सों में सोमवार को लोगों को उमस भरी गर्मी की मार झेलनी पड़ी। सूरज की तपिश से भी दिन भर लोग परेशान हुए। इसके विपरीत पर्वतीय राज्यों में कई स्थानों पर सोमवार को झमाझम बारिश हुई। इससे वहां तापमान में गिरावट दर्ज की गई। ऐसा एक बार फिर से सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ के नाते हुआ।
राजधानी दिल्ली व आसपास के इलाकों में दिनभर लोग उमस भरी गर्मी से परेशान रहे। दिल्ली में अधिकतम तापमान 40 डिग्री के करीब रिकॉर्ड किया गया। शाम को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कुछ स्थानों पर धूल भरी आंधी भी चली। पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा में भी लोग उमस भरी गर्मी से बेहाल रहे। हरियाणा में सबसे अधिक तापमान नारनौल में 42.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पंजाब में सबसे अधिक अमृतसर में पारा 40 डिग्री तक पहुंचा। उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में सोमवार को भी अच्छी बारिश हुई। इसके चलते तापमान सामान्य से तीन-चार डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया। कुछ स्थानों पर आंधी भी चली।
पर्वतीय राज्यों में सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ ने अपना असर सोमवार को दिखाया। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में कई स्थानों पर जोर की बारिश हुई। उत्तराखंड के चारधाम समेत उत्तरकाशी, टिहरी, रुद्रप्रयाग व चमोली में कई स्थानों पर घटाएं झमाझम बरसीं। इससे अधिक ऊंचाई पर ठिठुरन का एहसास होने लगा, जबकि निचले स्थानों पर मौसम सुहावना हो गया। राज्य में अधिकतम तापमान हरिद्वार में 35.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसी प्रकार कश्मीर के उच्च पर्वतीय इलाकों में जोरदार बारिश हुई। जबकि हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में सोमवार को हुई जोरदार बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।


दो जून को केरल पहुंचेगा मानसून मप्र में कई जगह प्री मानसून बारिश
भोपाल। परिस्थितियां अनुकूल होने के कारण दक्षिण-पश्चिमी मानसून दो जून को केरल पहुंच जाएगा। केरल में शुक्रवार को हल्की बारिश हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक केरल और लक्षद्वीप के कई इलाकों में शनिवार को सुबह तक भारी बारिश हो सकती है।
मानसून पिछले साल पांच जून को केरल पहुंचा था। उधर, अरब सागर से आ रही नमी की वजह से मध्यप्रदेश में इंदौर, रीवा तथा जबलपुर में मानसून पूर्व हल्की बारिश हुई है। मौसम विज्ञानी आरडी मेश्राम के अनुसार अगले २४ घंटों में जबलपुर, इंदौर और भोपाल संभाग में कई जगह बूंदाबादी हो सकती है।


प्री मानसून बारिश ने कराया गर्मी में सर्दी का एहसास
रांची। आज सुबह से ही हो रही रिमझिम बारिश ने शहर का माहौल खुशगवार कर दिया है। पिछले कुछ दिनों की तेज गर्मी के बाद लोग राहत की सांस ले रहे हैं। देर तक बादल छाए रहने और उसके बाद शुरू हुई बारिश ने तापमान को अचानक बहुत कम कर दिया है जिससे लोगों को गर्मी के मौसम में भी सर्दी का एहसास हो रहा है।
बुधवार को भी कभी रुक-रुककर तो कभी मूसलाधार हुई बारिश ने शहर के लोगों को जेठ (ज्येष्ठ) में सावन का एहसास कराया।बुधवार को भी कभी रुक-रुककर तो कभी मूसलाधार हुई बारिश ने शहर के लोगों को जेठ (ज्येष्ठ) में सावन का एहसास कराया।
बारिश सुबह से शुरू हुई और देर शाम तक 25.2 मिलीमीटर रिकॉर्ड की गई। इस दौरान 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवा भी चली।
इसका असर शहर के तापमान पर भी दिखा। बुधवार को चालू माह में पहली बार दिन का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा।


बढ़ी गर्मी से कराह उठी जिंदगी
नई दिल्ली। उत्तर भारत में पड़ रही भीषण गर्मी से शुक्रवार को जिंदगी कराह उठी। मैदानी राज्यों में कई स्थानों पर पारा 47 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया। इंसान, बेजुबान बेहाल नजर आए। घरों में छोटे बच्चे तो जैसे बिलबिला उठे। राज्यों में हो रही बेतहाशा बिजली कटौती जले पर नमक सरीखे काम कर रही है।
पहाड़ों की गर्माहट के बारे में मैदानी इलाके के लोगों को पता चल चुका है। लिहाजा वे अब घर पर ही रहना मुनासिब समझ रहे हैं। यही कारण है कि शुक्रवार को माता वैष्णो देवी मार्ग पर श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम नजर आई। जिन हिल स्टेशनों पर गर्मियों में अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जाता था वहां रोजाना पारा 30 डिग्री के पार जा रहा है। प्रचंड गर्मी झेल रहे लोगों के लिए थोड़ी रहत भरी खबर है। 26 मई को पहाड़ों पर बारिश की संभावना है। इसके चलते मैदान के तापमान में भी गिरावट दर्ज की जाएगी। मैदानी राज्यों में शनिवार को कई स्थानों पर धूल भरी आंधी भी चल सकती है।
गत एक सप्ताह से गर्मी की भीषण मार झेल रही राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को सूरज ने फिर आग उगली। पंखे के नीचे बैठे लोगों को पसीने छूटते रहे। जो धूप में बाहर निकला उसका सिर चकराने लगा। यहां अधिकतम तापमान 47.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पड़ोसी राज्य हरियाणा व पंजाब गर्मी के मामले में दिल्ली से आगे नजर आए। अमृतसर अपने अधिकतम तापमान 47.7 डिग्री सेल्सियस के साथ पंजाब सबसे ऊपर रहा। जबकि हरियाणा में हिसार का अधिकतम तापमान 47.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश में भी गर्मी से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। लू के थपेड़े भी खूब चले। यहां बांदा में सबसे अधिक तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इतना ही तापमान राजस्थान के चुरू का रहा।
पहाड़ों पर सितम ढा रही गर्मी शुक्रवार को कुछ और आगे बढ़ी। जम्मू में दिन भर चले लू के थपेड़ों के बीच अधिकतम तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो इस मौसम में सबसे अधिक रहा। उत्तराखंड के प्रसिद्ध हिल स्टेशनों पर तो जैसे आग बरस रही है। देहरादून में पारा 38 के पार चला गया। जबकि रुड़की में सबसे ज्यादा तापमान 42.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हिमाचल में ऊना का पारा 45 डिग्री पार कर गया। जबकि पूरे राज्य में तापमान समान्य से 6 से 7 डिग्री तक अधिक बना हुआ है।


गर्मी ने तोड़ा दस साल का रिकॉर्ड, रविवार गिर सकता है पारा
नई दिल्ली। पूरा उत्तर भारत गर्मी से बेहाल है। पारे के तेवर में कोई कमी नहीं आई है। गुरुवार को दिल्ली एनसीआर में गर्मी ने पिछले दस साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। जी हां गुरुवार को दिल्ली का पारा न्यूनतम से चार डिग्री ज्यादा था। सुबह से शाम तक लू के थपेड़ों का दौर जारी रहा। मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि आने वाले आने वाले रविवार और दूसरे सप्ताह के सोमवार धूप कुछ कम होगी।
लेकिन फिलहाल गर्मी से निजात नहीं है। इस गर्मी की मार से पंजाब में चार लोगों ने दम तोड़ दिया। इस भीषण गर्मी से पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। पहाड़ों से सुकून गायब हो गया है। हरियाणा और पंजाब में भी में दिन भर लू चली। कई स्थानों पर अधिकतम पारा 45 से 47 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। जबकि हरियाणा के हिसार और पंजाब के फाजिल्का में अधिकतम तापमान 47.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पंजाब में लू लगने से चार लोगों की मौत हो गई। बठिंडा व अबोहर में 47 डिग्री तक पारा चढ़ा। उत्तर प्रदेश भी गर्मी से तप रहा है।
न्यूनतम तापमान में भी भारी वृद्धि के चलते रात को लोगों को रहात नहीं मिली। बांदा में पारा सबसे ऊपर 46.8 डिग्री तक पहुंचा। तपते राजस्थान के श्रीगंगानगर में अधिकतम तापमान 48.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उधर, पहाड़ों पर तो सुकून गायब हो गया है। यहां भी लू चल रही है। उत्तराखंड के गर्मी के चलते हिमखंड अपनी जगह छोड़ने लगे हैं। राज्य में अधिकतर स्थानों पर पारा सामान्य से चार या पांच डिग्री ऊपर पहुंच गया है। राच्य में सबसे अधिक तापमान कर्णप्रयाग व रुद्रप्रयाग में 40 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जम्मू में अधिकतम तापमान 45.8 डिग्री तक पहुंचा जो इस मौसम में सबसे ज्यादा था।
श्रीनगर में भी यही हाल रहा और पारा दो साल में सबसे ऊपर 32.2 डिग्री तक पहुंचा। हिमाचल में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति रही। शिमला में पारा 30 डिग्री सेल्सियस पार कर गया। ऊना का अधिकतम तापमान 45.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। उच्च पर्वतीय इलाकों में तापमान चार से पांच डिग्री सामान्य से अधिक चल रहा है। जबकि मैदानी भागों में यह सामान्य से 6 से 7 डिग्री सेल्सियस अधिक है। पर्वतीय राज्यों में 26 मई के बाद थोड़ी राहत की उम्मीद है।


गर्म हवाओं की तल्खी से बढ़ी बेचैनी
नई दिल्ली। देश के मैदानी भागों में जारी गर्म हवाओं की तल्खी बढ़ती जा रही है। भीषण तपिश के चलते लोग जहां हैं बेचैन हैं। राजधानी दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में पारा लगातार ऊपर जा रहा है। मंगलवार को उत्तर प्रदेश में लू लगने से 10 तो मध्य प्रदेश में तीन लोगों की मौत हो गई। बुंदेलखंड में कहीं-कहीं तापमान 49 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। राजस्थान के श्रीगंगानगर में पारा 47.1 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। पहाड़ी इलाकों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू में भी तपन महसूस की गई।
दिल्ली में तापमान 46.7 डिग्री रहा, जो इस सीजन का सर्वाधिक है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक गर्म हवाओं से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। कामकाजी लोग जो बाहर निकल रहे हैं, मौसम की इस बेरुखी की सबसे अधिक मार खाने को मजबूर हैं। पारे की बढ़ोतरी का एहसास ऐसा हो रहा है मानो सीधे आग की भट्टी के सामने जा खड़े हो गए हों। लू चलने का सिलसिला देर रात तक चलने से रातों की चैन भी छिन गई है। उत्तर प्रदेश में चिलचिलाती धूप ने लोगों को परेशान कर रखा है। बीते 4-5 दिन से तापमान लगातार बढ़ रहा है। बुधवार को तो बुंदेलखंड के कुछ स्थानों पर पारा 49 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। तेज धूप के साथ चल रही गर्म हवाएं मुश्किल पैदा कर रहीं है। इस दौरान लू से 10 लोगों की मौत हो गई।
पंजाब व हरियाणा में सूर्यदेव अपना प्रचंड रूप दिखा रहे हैं। आसमान से बरस रहे शोलों को देखते हुए लोगों ने दिनभर घर में ही दुबके रहना सही समझा। जालंधर में सबसे अधिक 46 डिग्री तापमान रहा। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्र शिमला का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है जो कि सामान्य से 6.3 डिग्री सेल्सियस अधिक है। वहीं, मैदानी क्षेत्र ऊना का तापमान 44 डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है। भीषण गर्मी से लोगों की आम दिनचर्या भी प्रभावित दिखाई दी। लोगों ने सुबह के बाद बाहर निकलने से परहेज किया। जम्मू और उत्तराखंड में भी यही स्थिति रही।


राहतः सूरज की तपिश हुई कम, बादलों ने ढक दी धूप की चादर
भोपाल। बादलों ने सूरज की तपिश कम कर दी है। यही वजह है कि लगातार दूसरे दिन रविवार को भी पारा 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। यही नहीं, यह सामान्य से भी नीचे दर्ज किया गया। इससे लोगों को गर्मी में हल्की राहत मिली हुई है। हालांकि, ये राहत सिर्फ दो दिन के लिए है। मौसम केंद्र ने बुधवार से फिर से तापमान में बढ़ोतरी की संभावना जताई है।
मौसम केंद्र के मुताबिक रविवार को अधिकतम तापमान 39.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। शनिवार को भी तापमान इतना ही था। यह सामान्य से एक डिग्री कम था। न्यूनतम तापमान में ढाई डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है। रविवार को यह 24.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। यह सामान्य तापमान से एक डिग्री कम था। जबकि, शनिवार को यह 27.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था।
मौसम केंद्र के अनुसार अब पश्चिमी विक्षोभ के कारण राजस्थान और उत्तरी मप्र में बादल छाए हुए हैं। इससे यहां तापमान में गिरावट है। साथ ही हवाओं की दिशा दक्षिण-पश्चिम हो गई है। यह हवा प्रदेश में अपने साथ नमी लेकर आ रही है। इसकी वजह से अधिकतम तापमान में गिरावट हो रही है।


वन अपराध की सूचना देने पर 25 हजार का इनाम
भोपाल। राज्य शासन द्वारा वन, वन्य-प्राणियों की सुरक्षा और वन अपराधों पर नियंत्रण के लिये अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। वन अपराध की सूचना देने वाले व्यक्तियों को पुरस्कृत करने के लिये निधि बनाई गई है। मध्यप्रदेश वन सुरक्षा पुरस्कार नियम 2004 के तहत वन अपराध सिद्ध होने पर, वन अपराध का पता लगाने में अपराधी को पकड़ने में, अपराधी की दोष-सिद्धि में या वनोपज तथा अन्य वस्तुओं की जप्ती में सहायता देने वाले व्यक्तियों को 25 हजार रुपये तक का पुरस्कार देने का प्रावधान किया गया है।
वन मंत्री श्री सरताज सिंह ने बताया कि जन-भागीदारी और क्षेत्रीय इकाइयों की सक्रियता से वन अपराधों पर नियंत्रण के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। अति-संवेदनशील वन क्षेत्रों में बीट व्यवस्था के स्थान पर सामूहिक गश्त के लिये 131 वन चौकी की स्थापना की गई है। वन चौकियों पर गठित गश्ती दलों के लिये 12 बोर की 2600 बंदूक प्रदान की गई हैं। यही नहीं पहली बार प्रदेश में परिक्षेत्र स्तर तक 136 अधिकारी को रिवाल्वर प्रदाय की गई है। संचार व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिये 4,266 वायरलेस सेट, 5500 मोबाइल सिम, 2946 मोबाइल हेण्ड-सेट, 900 पीडीए और 900 दूरबीन प्रदाय की गई हैं।
वन अपराधों पर नियंत्रण एवं त्वरित कार्यवाही के लिये सभी वन वृत्त में उड़नदस्ता दल भी कार्यरत हैं। इन उड़नदस्तों में पर्याप्त संख्या में वन-कर्मी, शस्त्र एवं वाहन उपलब्ध करवाये गये हैं। ऐसे क्षेत्रों में जहाँ संगठित वन अपराधों की संभावना है, विशेष सशस्त्र बल की 3 कम्पनियाँ भी तैनात की गई हैं।है।


पारा 40 डिग्री पार, धूप में निकलना हुआ बेहाल, सताने लगी है गर्मी
भोपाल। अप्रैल का दूसरा हफ्ता शुरू होते ही तेज गर्मी ने दस्तक दे दी है। सूरज के लगातार तीखे होते तेवरों से मंगलवार को इस सीजन में पहली बार पारा 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर पहुंच गया। पिछले पांच दिनों में अधिकतम तापमान में 4.7 डिग्री सेल्सियस का उछाल आ चुका है। इसके चलते लोग गर्मी से परेशान हैं। वहीं, मौसम केंद्र के मुताबिक आने वाले तीन-चार दिनों में गर्मी से राहत के कोई आसार नहीं हैं।
मंगलवार को अधिकतम तापमान 40.2 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। यह सामान्य से तीन डिग्री ज्यादा रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 20.4 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विज्ञानी आरडी मेश्राम ने बताया कि राजस्थान से आ रही हवाओं के कारण यहां तापमान में इजाफा हो रहा है।
3-4 दिन राहत नहीं
मौसम केंद्र के मुताबिक बुधवार को अधिकतम तापमान 40 डिग्री के ऊपर रहने की संभावना है। न्यूनतम तापमान 22 डिग्री रह सकता है। हालांकि तीन-चार दिन बाद एक ऊपरी हवा का चक्रवात बन सकता है। तब तापमान २ से ३ डिग्री तक कम हो सकता है।


फिर बदला मौसम का मिजाज, बूंदा-बांदी से बढ़ी ठंड
नई दिल्‍ली। देश की राजधानी दिल्‍ली और आसपास के राज्‍यों में बारिश होने से मौसम ने अचानक करवट ले ली है। दो दिनों से दिल्‍ली और एनसीआर क्षेत्र में अचानक से गर्मी बढ़ गई थी लेकिन कल रात से हो रही बारिश ने फिर से ठंड बढ़ा दी है। शुक्रवार की सुबह से आसमान में छाया बादल शाम होते-होते बरसने लगा। मौसम में आए इस परिवर्तन की वजह से राजधानी का मौसम सुहाना बन गया है। एक बार फिर लोगों ने हल्की सर्दी का एहसास किया। हालांकि मौसम में आए इस परिवर्तन की वजह पहाड़ी इलाकों में हुई बारिश बता रहे हैं। दिल्‍ली में शनिवार को अधिकतम तापमान 21 और न्यूनतम 13 डिग्री सेल्सियस के आसपास होने की संभावना जताई है। दिन के समय आसमान में बादल छाए रहेंगे और कुछ इलाकों में गरज के साथ हल्की बारिश भी हो सकती है। रविवार को भी मौसम का रूख कुछ इसी प्रकार करने की उम्मीद है। मौसम विभाग के अनुसार कुछ इलाकों में हल्की-फुल्की बारिश हुई है तो कहीं केवल बूंदा-बूंदी हुई है।बारिश के बाद राजधानी का तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग ने शनिवार को भी मौसम का रूख कुछ इसी प्रकार रहने की संभावना जताई है। हालांकि मौसम विभाग ने शनिवार को दिन में कई इलाकों में तेज बारिश की उम्मीद जताई है। बारिश के बारे में मौसम विभाग के पास खबर लिखे जाने तक कोई आंकड़ा नहीं था। विभाग का कहना है कि बारिश तो कई इलाकों में हुई है लेकिन आंकड़ा उपलब्ध कराने में समय लगेगा। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ में हुए एक बार फिर परिवर्तन की वजह से राजधानी के मौसम में भी बदलाव देखा जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्र जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड राज्यों में बारिश हुई है और जिसकी वजह से दिल्ली का मौसम बदला बदला नजर आ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया किया गया जो औसत से दो डिग्री सेल्सियस कम रहा।


नर्मदा के सर्वाधिक प्रदूषण वाले स्थान चिन्हित
भोपाल। जल संसाधन मंत्री जयंत मलैया ने कहा कि सरकार ने नर्मदा नदी में प्रदूषण को रोकने उन स्थानों का चयन किया है, जहां बहुत अधिक प्रदूषण है। वर्तमान दौर में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट एक बड़ी समस्या है। दो दशकों में शहरीकरण और उद्योग धंधों के विस्तार के साथ यह गंभीर रूप लेती जा रही है। सालिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग और प्रशिक्षण की जरूरत है। इसके अलावा लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने में विदेश और दूसरे राज्यों में इस्तेमाल हो रही तकनीक कारगर साबित हो सकती है। शहर के विज्ञान भवन में चल रहे तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का रविवार को अंतिम दिन था। मलैया इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अस्पतालों से निकलने वाले जैविक वेस्ट के मामले में और अधिक काम करने की जरूरत है। इस मौके पर ऑस्ट्रेलिया, सूडान, नेपाल और साउथ अफ्रिका से आए विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यान के माध्यम से प्रदूषण के दुष्परिणामों से अवगत कराया। विश्व स्वास्थ्य संगठन की क्षेत्रीय सलाहकार डॉ. पेडन ने कहा कि प्रदेश में जल प्रदूषण और वेस्ट मटेरियल से स्थिति खतरनाक बन सकती है। इसके लिए जरूरी होगा कि यहां नई तकनीक और योजनाओं पर काम हो।


अचानक आई तेज आंधी के बाद तेज बारिश
भोपाल। सोमवार रात साढ़े 9 बजे अचानक आई तेज आंधी के बाद बादल घिरे और शुरू हो गई तेज बारिश। हालांकि बारिश करीब 10 मिनट ही हुई, लेकिन इतनी ही देर में शहर अस्त-व्यस्त हो गया। चूना भट्टी, बोगदा पुल, कमला नगर पुलिस थाने के पास, लिंक रोड नंबर 1 पर पीसीसी के सामने, लिंक रोड नंबर 2 पर नर्मदा भवन के सामने और होशंगाबाद रोड क्षेत्र में करीब आठ पेड़ गिरे धराशायी हो गए। बारिश के दौरान एमपी नगर, अरेरा हिल्स, शिवाजी नगर समेत कई इलाकों में लैंडलाइन फोन ठप हो गए। इस दौरान बीएसएनएल समेत कई सेल्युलर कंपनियों का मोबाइल फोन नेटवर्क भी प्रभावित हुआ। होशंगाबाद रोड, एमपी नगर, साकेत नगर, शक्ति नगर, विद्यानगर, अवधपुरी, भेल टाउनशिप, चार इमली, शिवाजी नगर, बाग मुगलिया, बाग सेवनिया, कोलार, बैरागढ़ व पुराने शहर के कई इलाकों में भी बिजली गुल रही। देर रात तक बिजली कंपनी के कर्मचारी बिजली दुरुस्त करने में लगे रहे।
नर्मदा भवन के पास तेज बारिश और आंधी से पेड़ धराशायी हो गए। गोविंदपुरा हाट बाजार में दुकानें अस्त व्यस्त हो गईं। एमपी नगर जोन वन में पेड़ गिरने से चपेट में आए वाहन। प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय के सामने की सड़क पर पेड़ों की शाखाएं आ गिरीं।


यूका कचरा निपटान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माँगी ट्रायल रिपोर्ट
भोपाल। यूनियन कार्बाइड कारखाना परिसर में रखे जहरीले कचरे का पीथमपुर में ट्रायल करने के मामले में राज्य और केंद्र सरकार अब आपस में उलझ गई है। जहरीले कचरे के निपटान के मामले में सोमवार को हुई सुनवाई में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पीथमपुर में कचरे के निपटान का ट्रायल करने की बात कही है। वहीं, राज्य सरकार कीओर से मामले की पैरवी कर रहे रविशंकर प्रसाद ने कोर्ट को पीथमपुर के इंसीनरेटर में केवल इंडस्ट्रियल वेस्ट के डिस्पोजल का ट्रायल करने की जानकारी दी है। एक ही मामले में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अलग -अलग जवाब दाखिल होने से कचरा निपटान पर विवाद पैदा हो गया है। भोपाल गैस पीडि़त महिला उद्योग संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार ने बताया कि पीथमपुर के इंसीनरेटर में बीते दिनों यूका के जहरीले कचरे को जलाकर उसका ट्रायल किया गया है। जबकि कोर्ट में राज्य सरकार ने कचरा निपटान को लेकर भेजी रिपोर्ट में पीथमपुर के इंसीनरेटर में इंडस्ट्रियल वेस्ट के निपटान का ट्रायल करने की बात कही है।


यूका परिसर में आ रही है जहरीले रसायन की बदबू
भोपाल। यूनियन कार्बाइड कारखाना से गैस रिसाव की घटना के 28 साल बाद कारखाना परिसर में जहरीले रसायन अल्फा नेफ्थॉल की बदबू आ रही है। यह अल्फा नेफ्थॉल यूका परिसर के भूजल में ही नहीं, बल्कि कारखाने के आसपास की बस्तियों के ट्यूबवेल के पानी में भी मिला है। जो कारखाने में जमीन में दबाए गए जहरीले कचरे से रिसकर बस्तियों के ट्यूबवेल में पहुंचा है। यह खुलासा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) की यूका के भूजल की जांच रिपोर्ट में हुआ है। यह रिपोर्ट बीते सप्ताह आईआईटीआर ने सुप्रीम कोर्ट को भेजी है। आईआईटीआर की रिपोर्ट के मुताबिक यूका कारखाने की जमीन की ऊपरी सतह और उसकी निचली सतह पर 3.25 से 102.9 मिली ग्राम लैड प्रति किलोग्राम मिट्टी में है। इसी तरह 179 मिली ग्राम निकिल एक किलो मिट्टी में मौजूद है। मिट्टी में दोनों धातुओं का यह स्तर खतरनाक है। इसके अलावा कारखाने में खोदे गए पांच बोरवैल में अल्फा नेफ्थॉल की मात्रा 0.295 मिली ग्राम है। भोपाल गैस पीडि़त महिला उद्योग संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार ने बताया कि आईआईटीआर की रिपोर्ट ने गैस पीडि़तों के संगठनों के उस दावे पर मुहर लगा दी है, जिसमें कारखाना परिसर में रखे कचरे से भूजल के प्रदूषित होने की बात कही गई है। कारखाना में जहरीले कचरे के कारण कारखाना परिसर के बोरवेल के पानी की अपेक्षा बाहर का पानी ज्यादा प्रदूषित हुआ है। नगर निगम ने तीन साल पहले यूका और उसके आसपास के पानी की आई जांच रिपोर्ट के आधार पर ट्यूबवैल का पानी सप्लाई करना बंद कर दिया था। सप्लाई बंद होने से पहले गैस प्रभावित बस्तियों के जिन लोगों ने बोरवेल का पानी पिया है, उनके स्वास्थ्य पर हुए असर की जांच भी सरकार को कराना चाहिए। तभी जहरीले पानी से गैस पीडि़तों के स्वास्थ्य पर हुए प्रभाव का मूल्यांकन हो सकेगा।


पहाड़ों पर भारी बर्फबारी, दिल्ली में गिरे ओले
नई दिल्ली। दिल्ली और एनसीआर में गुरुवार की रात झमाझम बारिश और सर्द हवाओं के चलते एक बार फिर से ठंड फिर लौट आई है। दिल्ली और एनसीआर के कई इलाके में ओले पड़े। वहीं, पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी, बारिश और सर्द हवाओं ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में भी दिखेगा। दिल्ली सहित पूरे एनसीआर में जनवरी में बारिश का 10 साल का रेकॉर्ड टूट गया। गुरुवार रात भर रुक-रुक कर बारिश हुई, जगहों पर ओले भी पड़े। शुक्रवार सुबह भी कई इलाकों में तेज बारिश हुई। एनसीआर में गुरुवार की शाम के वक्त से तेज सर्द हवाएं चल रही थीं। देर रात अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। कुछ इलाकों में ओले भी पड़े। मौसम विभाग ने शुक्रवार को अधिकतम तापमान में गिरावट आने की संभावना व्यक्त की है। इसके पहले बुधवार की रात और गुरुवार के दिन में हिमाचल में बर्फबारी के चलते 2 दर्जन से ज्यादा सड़कें बंद हो गईं। प्रदेश के कई इलाकों में 2 फुट तक बर्फ जम गई। कश्मीर में सेना को हिमस्खलन का अलर्ट जारी किया गया है। उत्तराखंड में बर्फबारी और बारिश से हाल बेहाल है। यूपी के कई इलाकों में बारिश हुई और ओले भी गिरे। मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ का असर बढ़ने की वजह से मौसम में यह बदलाव आया है। 48 घंटों में मौसम और बिगड़ सकता है। हिमाचल और उत्तराखंड में अगले 48 बर्फबारी की चेतावनी दी गई है। जम्मू-कश्मीर से भी भारी बर्फबारी की खबर है। स्नो ऐंड एवलांच स्टडी इस्टेबलिशमेंट ने सेना को चेतावनी जारी करते हुए कश्मीर के बर्फीले इलाकों में अलर्ट रहने को कहा है। डिवीजनल डिजास्टर मैनेजमेंट कश्मीर ने कुछ इलाकों में हिमस्खलन की चेतावनी भी जारी की है। जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद कर दिया गया। प्रदेश में औसतन 2 फीट तक बर्फ गिरी है। यूपी के कई जिलों में हुई बारिश से ठंड फिर लौट आई है। कई जिलों में ओले भी गिरे हैं। बिजली गिरने से 8 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 3 झुलस गए।


गंगा प्रदूषण पर फैक्ट्रियों को पीएमओ की चेतावनी
नई दि्ल्ली। इलाहाबाद में महाकुंभ से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गंगा और यमुना नदियों में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने दोनों नदियों के पानी को गंदा करने वाले उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से शुक्रवार को जारी बयान में कहा गया कि इलाहाबाद में महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं को स्वच्छ डल मुहैया कराने के लिए टिहरी बांध से पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध हो, इसकी निगरानी लगातार की जा रही है। पीएमओ के अनुसार संगम में यमुना और गंगा में जैव-रासायनिक ऑक्सिजन डिमांड (बीओडी) आम तौर पर 6 मिलीग्राम प्रति लीटर होता है, लेकिन मुख्य मुद्दा कागज उद्योगों से निकलने वाले उत्सर्जन का रंग है, जो रामगंगा और काली नदियों में आता है। रामगंगा और काली दोनों ही गंगा की सहायक नदियां हैं। गंगा और यमुना में स्वच्छ जल का प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि गंगा या उसकी सहायक नदियों में सभी उद्योगों का उत्सर्जन तय मानकों के अनुसार हो। पीएमओ की ओर से जारी बयान में कहा गया कि रामगंगा, काली और सहायक नदियों में जल की क्वॉलिटी की निगरानी रोजाना हो रही है। इस काम में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ समन्वय कर रहे हैं।


बाघों की मौत पर सरताज के खिलाफ मेनका का मोर्चा खुला रहेगा
भोपाल। मप्र में हो रहे बाघों की मौत को हादसा नहीं माना जा सकता। यह शिकारियों की सुनियोजित साजिश है। इस मामले में जब तक वन मंत्री सरताज सिंह इस्तीफा नहीं देते तब तक उनके खिलाफ मोर्चा खुला रहेगा। यह बात सोमवार को पीपुल्स फॉर एनिमल संस्था की अध्यक्ष और लोकसभा सांसद मेनका गांधी ने कही। वे एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोजेक्ट शुरू करने के मामले पर चर्चा करने भोपाल आई थीं। मेनका ने कहा कि वन मंत्री और वन विभाग की लचर व्यवस्था से बाघ मर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बांधवगढ़ में तो वन विभाग की जीप से बाघिन झुरझुरा की मौत हुई थी। उस मामले को दबा दिया गया। पन्ना में बाघ खत्म होने के बाद भी मप्र सरकार ने बाघों को बचाने के लिए कोई नई रणनीति नहीं बनाई है। सुश्री गांधी ने कहा कि प्रदेश के नेता और वन अधिकारियों के रिसोर्ट मालिकों से संबंध है, कई नेताओं की तो इन रिसोटों में हिस्सेदारी है। गायों की तस्करी के मामले में प्रदेश की पुलिस और राजनेता शामिल हैं। मेनका गांधी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। उन्होंने चौहान से कहा कि आपने और खूबसूरत बना दिया है। मेनका ने राजधानी के पर्यावरण की जमकर तारीफ की। मेनका ने नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर और महापौर कृष्णा गौर से भी भेंट की। मेनका गांधी द्वारा मोर्चा खोले जाने की बात पर सरताज सिंह का कहना है कि मेनका गांधी को पता नहीं हमसे क्या दुश्मनी है। वे ऐसा क्यों कह रही हैं। जब मुख्यमंत्री को मेरे काम करने के ढंग से एतराज नहीं है तो मेनका गांधी कुछ भी कहें कोई फर्क नहीं पड़ता। वैसे भी मेनका केंद्र में बैठकर राज्य के मंत्री का काम का आंकलन कैसे कर सकती हैं।


सर्दी ने तोड़ा 48 साल का रिकॉर्ड
नई दिल्ली। कड़ाके की ठंड ने बुधवार को पिछले 48 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दिल्ली के अधिकतम तापमान में सामान्य से 11 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी पांच दिन तापमान ऐसा बने रहने की उम्मीद है। तापमान में गिरावट की वजह पश्चिम विक्षोभ और उससे उत्तरी भारत में हुई बर्फबारी है। इसके अलावा ठंडी हवाओं का उत्तरी भारत में चल रहा चक्रवात भी मौसम को ठंडा बनाए हुए है। सहायक मौसम वैज्ञानिक ओमप्रकाश बताते हैं कि एकदम से राजधानी के तापमान में हुई गिरावट का कारण दिल्ली से उत्तराखंड और उत्तराखंड से जम्मू-कश्मीर फिर वहां से वापस दिल्ली होकर चलने वाली ठंडी हवाओं का चक्रवात है। इससे बुधवार रात को तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस से गिरकर चार डिग्री सेल्सियस हो गया। मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को जहां अधिकतम तापमान 15.3 डिग्री रहा वहीं बुधवार को यह गिरकर 9.8 डिग्री हो गया। अधिकतम और न्यूनतम तापमान दोनों में गिरावट के अलावा अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच अंतर की कमी से भी ठंड बढ़ी है। गौरतलब है कि साल के पहले दिन आगरा में पारा लुढ़ककर 0.9 डिग्री पर पहुंच गया, जो यूपी में सबसे कम है। उत्तर भारत का मैदानी इलाका भीषण ठंड की चपेट में है। साल की विदायी और अगवानी के दौरान आगरा और नारनौल (हरियाणा) सबसे ठंडे रहे, जहां पर पारा गिरकर 0.9 और 0.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। राजस्थान के चुरू में भी पारा 0.7 डिग्री तक गिरा।


कड़ाके की ठंड से जनजीवन बेहाल
कड़ाके की ठंड से जनजीवन बेहाल नई दिल्‍ली। भारत समेत कई मुल्‍कों में कड़ाके की ठंड से जनजीवन बेहाल हो गया है। भारत के अलावा, पाकिस्‍तान, अफगानिस्‍तान, नेपाल, भूटान, रूस में भी ठड़ाके की ठंड पड़ रही है। जबकि अमेरिका के कई इलाकों में बर्फबारी की खबर है। भारत की राजधानी दिल्‍ली समेत पूरा उत्‍तर भारत इन दिनों कड़ाके की ठंड से बेहाल है। उत्तर भारत में ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। देश के कई राज्यों में ठंड और घने कोहरे से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। उत्तर प्रदेश में ठंड से मरने वालों की सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहा। यहां नौ और लोगों की मौत हुई है। प्रदेश में ठंड से मरने वालों की संख्या 92 हो गई है। दिल्ली में तापमान गिरने से सर्दी बढ़ गई है। मंगलवार को अब तक का सबसे कम चार डिग्री सेल्सियस रहा। यहां के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे में घने कोहरे के चलते 60 उड़ानें देरी से रवाना हुईं और 38 रद कर दी गईं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में जारी बर्फबारी की वजह से वहां से चली ठंडी हवा लोगों को कड़ाके की सर्दी का अहसास करा रही है। लोग गर्म कपड़ों के बीच भी ठिठुरते नजर आए। अगले कुछ दिनों तक ऐसा ही मौसम बना रह सकता है। तापमान लुढ़कने से मौसम और ठंडा होगा। हल्की बूंदाबांदी और धुंध लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में कंपकंपाती ठंड का रुख बरकरार रहेगा। रविवार को दिल्‍ली का न्‍यूनतम तापमान दो डिग्री तक लुढ़क सकता है। हालांकि कड़ाके की सर्दी के बावजूद दिल्‍ली और दूसरे शहरों में गैंगरेप के खिलाफ लोगों का आंदोलन जारी है।
उधर राजस्थान के चूरू में नए साल की शुरूआत जीरो डिग्री टेंपरेचर के करीब से हुई है। खास बात ये है कि 2013 की एक जनवरी पांच सालों में सबसे ठंडी रही। इससे पहले वर्ष 2008 में एक जनवरी का न्यूनतम तापमान माइनस 1.0 डिग्री रहा था। चूरू मौसम केंद्र के अधिकारियों के मुताबिक श्रीनगर में बर्फबारी के बाद बर्फ से संपर्क होकर चली उत्तरी हवा की वजह से तापमान गिरा है और सर्दी अचानक बढ़ी है। नए साल के सवेरे ने लोगों की धूजणी छूटा दी। सर्दी इतनी तेज थी कि लोग गर्म कपड़ों से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। हालांकि सुबह 10 बजे बाद धूप खिली। लेकिन सर्द हवा के चलते सर्दी से राहत नहीं मिल पाई। दोपहर में भी ठंडी हवा का दौर चलता रहा। शाम ढलने के बाद कड़ाके की सर्दी ने जोर पकड़ लिया।
लोगों ने अलाव का सहारा लेकर राहत पाने की कोशिश की। खुले इलाकों में सर्दी का असर सबसे ज्यादा रहा। इससे शहरभर के मुख्य बाजारों व चौक-चौराहों में सन्नाटा पसर गया। मौसम विभाग के मुताबिक मंगलवार का अधिकतम तापमान 22.3 व न्यूनतम तापमान 0.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। नए साल पर बच्चों को कड़ाके की ठंड में गर्म कपड़ों में लिपटकर स्कूल जाना पड़ा। जिले के कई क्षेत्रों में कोहरे का भी असर रहा।
चूरू मौसम केंद्र के प्रभारी जिलेसिंह राव का मानना है कि फिलहाल एक-दो दिनों तक माइनस में न्यूनतम तापमान आने की संभावना नहीं है। हालांकि सर्दी का असर 10 जनवरी तक रहेगा। लेकिन अचानक बादल आ जाने से तापमान जीरो डिग्री से ऊपर ही जाने की संभावना बनी हुई है। बादलों के चलते मौसम सर्द रहेगा।


हिमालय में हुई बर्फबारी के कारण ठिठुरा शहर
भोपाल। हिमालय में हुई बर्फबारी के कारण वहां से आ रही ठंडी हवाओं ने गुरुवार को राजधानी को ठिठुरा दिया। सुबह से ही लोग ठंड की चपेट में थे। वहीं, इस महीने पहली बार न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे गया है। मौसम केंद्र ने अनुमान जताया है कि अभी दो-तीन दिन ऐसी ही सर्दी बरकरार रह सकती है। उधर, प्रदेश के अन्य हिस्सों में तेज ठंड पडऩा शुरू हो गई है। मौसम केंद्र के मुताबिक गुरुवार को न्यूनतम तापमान 7.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। यह सामान्य से चार डिग्री कम था। जबकि बुधवार के मुकाबले भी इतना ही कम था। बुधवार को 11.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। अधिकतम तापमान में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह बुधवार की भांति 25.3 डिग्री सेल्सियस ही रिकॉर्ड हुआ है। जम्मू-कश्मीर में बना पश्चिमी विक्षोभ बर्फबारी के बाद आगे बढ़ गया। जबकि इसके पीछे आ रहा दूसरा पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान में अटक गया है। इसके चलते प्रदेश में उत्तरी दिशा से उत्तरी और उत्तरी-पूर्वी हवाएं आना शुरू हो गई। ये काफी सर्द हवाएं हंै। जबकि इससे पहले प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिमी हवाएं आ रही थीं, जो कि गर्म हवाएं थीं। भले ही कड़ाके की सर्दी शुरू हो गई है, लेकिन शीत लहर के लिए अभी लोगों को इंतजार करना पड़ेगा। दिसंबर के अंत में या फिर जनवरी में शीतलहर चल सकती है।


तमिलनाडु और आंध्र से आज गुजरेगा नीलम चक्रवात
चेन्नई। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात के बुधवार शाम तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश के तटों से गुजरने की संभावना है। मौसम विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है। एक अधिकारी ने बताया कि अब चक्रवात चेन्नई से दक्षिण-दक्षिणपूर्व में करीब 340 किलोमीटर दूर है। उन्होंने कहा कि नीलम के आज (बुधवार) शाम कुड्डालोर (तमिलनाडु) व नेल्लोर (आंध्र प्रदेश) के तटों के बीच से गुजरने की सम्भावना है। मौसम विज्ञानी के मुताबिक चक्रवात की वजह से तटीय तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश होने की सम्भावना है। नीलम के नजदीक बढ़ने के साथ तमिलनाडु, पुड्डुचेरी व दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटों पर 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। अगले 36 घंटों के दौरान उत्तरी तमिलनाडु, पुड्डुचेरी व दक्षिणी आंध्र प्रदेश तटों से सटे समुद्र में स्थितियां सामान्य नहीं होंगी। चक्रवात में एक से डेढ़ मीटर तक ऊंची लहरें उठ सकती हैं इसलिए तमिलनाडु के चेन्नई, कांचीपुरम व तिरुवल्लूर जिलों व आंध्र प्रदेश के नेल्लोर के निचले इलाकों में बाढ़ आ सकती है। चक्रवात से तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका व्यक्त की गई है। तमिलनाडु सरकार ने तटीय जिलों में स्कूलों व कॉलेजों में अवकाश घोषित कर दिया है।


बाघ संरक्षित क्षेत्रों में पर्यटन पर रोक हटी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 41 बाघ अभयारण्यों के कोर इलाके में पर्यटन की अनुमति दे दी। इससे पहले केंद्र सरकार बाघ संरक्षण संबंधी नए दिशानिर्देश जारी कर चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा नए दिशानिर्देश जारी करने के बाद यह कदम उठाया। सरकार ने सोमवार को संशोधित गाइडलाइंस का नोटिफिकेशन जारी किया था। शीर्ष अदालत ने 24 जुलाई को कोर एरिया में पर्यटन पर प्रतिबंध लगाया था। कोर्ट ने कहा नई गाइडलाइंस के हिसाब से पर्यटन गतिविधियां संचालित की जा सकेंगी। बेंच ने स्पष्ट किया हैं कि उसने न तो इन दिशानिर्देशों को वैध करार दिया है, न ही अवैध। गाइडलाइंस से असंतुष्ट कोई भी पक्ष उसे उचित फोरम में चुनौती देने को स्वतंत्र है। अदालत ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया वे कि छह महीने में बाघ संरक्षण योजना तैयार करें। शीर्ष कोर्ट के आदेश के बाद मप्र में बांधवगढ़, पेंच, कान्हा, पन्ना, संजय गांधी, सतपुड़ा बाघ अभयारण्य को बुधवार से पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।


संक्रमण से मादा तेंदुए कैटरीना की मौत
भोपाल। वन विहार नेशनल पार्क में रविवार को मादा तेंदुए कैटरीना की मौत शाम साढ़े चार बजे हो गई। जहां पिछले दो दिनों में दो तेंदुए की मौत हुई है, वहीं दो की हालत गंभीर है। शनिवार को तेंदुए निम्मी की मौत के बाद उसके अवयव को संरक्षित कर लिया गया था। रविवार सुबह नौ बजे मादा तेंदुए निम्मी का और पांच बजे कैटरीना का पोस्टमार्टम वन्य प्राणी फॉरेंसिक लैब के डॉ. एबी श्रीवास्तव के नेतृत्व में किया गया। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में निम्मी की मौत की वजह मिर्गी और गले में भोजन फंसना बताया गया। जबकि कैटरीना की मौत बेबेसिया के संक्रमण के कारण हुई। वन विहार के सहायक संचालक डॉ. सुदेश वाघमारे ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।


पकड़ा गया तेंदुआ, खौफ खत्म
भोपाल। आईआईएफएम, भदभदा बस्ती और राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में तीन माह से सक्रिय तेंदुआ रविवार को पकड़ा गया। वह अलसुबह वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में फंस गया। रेस्क्यू टीम पहले उसे वन विहार ले आई, जहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इसके बाद उसे पिपरिया के पास सतपुड़ा नेशनल पार्क के मढ़ई रेंज में छोड़ दिया गया। सुबह 5 बजे बकरे के मिमियाने की आवाज सुनाई दी। गश्ती दल ने देखा तो तेंदुआ पिंजरे में फंस चुका था। दोपहर 3.30 बजे वन विभाग की टीम मढ़ई पहुंची। यहां पिंजरे को नाव पर लादकर तवा डेम पार कराया गया। शाम 5.30 बजे मढ़ई से 10 किमी दूर सुआंरिया के जंगल में तेंदुए को छोड़ दिया गया।


बाघ संरक्षण पर सरकार नए निर्देश जारी करे : सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बाघ संरक्षण पर केंद्र सरकार को हफ्तेभर की मोहलत दी है। इतने समय में उसे नए दिशा-निर्देश से संबंधित अधिसूचना जारी करने को कहा गया है। कोर्ट ने 24 जुलाई के अपने आदेश में भी ढील के संकेत दिए हैं। तब कोर्ट ने देशभर के टाइगर रिजर्व में पर्यटन व कारोबारी गतिविधियों पर रोक लगा दी थी। जस्टिस एके पटनायक और जस्टिस स्वतंत्र कुमार की बेंच ने मंगलवार को इस मामलेे की सुनवाई की। इस दौरान बेंच ने साफ कर दिया कि नए दिशा-निर्देशों से असंतुष्ट राज्य सरकारें कोर्ट में अपील कर सकती हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 16 अक्टूबर को होगी। शीर्ष कोर्ट में मध्यप्रदेश के पर्यावरणविद् अजय दुबे ने याचिका लगाई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, 'हम न किसी दिशा-निर्देश को वैध ठहरा सकते न उनको संविधान के खिलाफ घोषित कर सकते हैं।' कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलीसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया, 'राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा तैयार नए दिशा-निर्देशों को फौरन अधिसूचित कर दिया जाएगा।'


बाघों के कोर जोन में पर्यटकों पर रोक
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फ़ैसला लेते हुए बाघ संरक्षित क्षेत्र में पर्यटन पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड, राजस्थान, आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र को तीन माह में बफर जोन अधिसूचित करने को कहा था।
मंगलवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने राज्यों को बाघ अभयारण्यों के आसपास बफर जोन तय करने के लिए आखिरी मोहलत दी। तीन हफ्ते के भीतर आदेश तामील नहीं हुआ तो राज्यों पर अवमानना का केस चलेगा। साथ ही वन विभाग के प्रमुख सचिव पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। कोर्ट ने पिछला आदेश नहीं मानने के लिए आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, महाराष्ट्र और झारखंड पर 10-10 हजार का जुर्माना भी लगाया। झारखंड और अरुणाचल प्रदेश के वकील ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि वह इस बार समय पर काम पूरा कर लेंगे। हालांकि, यह रोक अभी अंतरिम आदेश के तौर पर है। प्रतिबंध सिर्फ 'कोर जोन' के लिए ही है। जस्टिस स्वतंत्र कुमार और इब्राहीम खलीफुल्ला की बेंच पर्यावरणविद अजय दुबे की अर्जी पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने 4 अप्रैल और 10 जुलाई को भी राज्यों से बफर जोन का इलाका तय करने के निर्देश दिए थे। मामले की सुनवाई 22 अगस्त को होगी। इसमें सभी राज्य राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की गाइड लाइन पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएंगे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट अंतिम फैसला देगा। उधर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। साथ ही कहा कि वह मंत्रालय की ओर से भी राज्यों को फौरन कार्रवाई करने को कहेगी।


नागपंचमी पर सपेरों से 177 सांप जब्त
भोपाल। वन विभाग अमले ने मंगलवार को सपेरों से 177 सांप जब्त किए। इन सांपों को वन विहार में टोकरियों से बाहर निकाला गया। सपेरों ने इन सांपों के न केवल विष दंत निकाल दिए थे बल्कि उनके मुंह भी धागे से सिल दिए, ताकि लोग बिना डरे उनकी पूजा कर सकें। वन विहार नेशनल पार्क के कर्मचारियों और सर्प विशेषज्ञ सलीम ने बड़ी मशक्कत के बाद सांपों के सिले हुए मुंह खोलकर उनके घाव साफ किए। वन विहार स्थित स्नेक पार्क के प्रभारी राजेश नामदेव ने बताया कि सांपों के मुंह तो खोल दिए हैं लेकिन इसके बाद भी ये सांप अधिक दिन जिंदा नहीं रह पाएंगे। जब्त किए गए सांपों में कोबरा के अलावा आठ प्रजातियों के सांप शामिल हैं। इनमें रेट स्नेक, वाटर स्नेक और सेडगोवा प्रजाति के सांप प्रमुख हैं। सर्प विशेषज्ञ मोहम्मद सलीम ने बताया कि सपेरों के चंगुल से छुड़ाए गए सांपों में से एक भी सांप जिंदा नहीं रहेगा। इसकी वजह है उनके विष दंत तोड़ दिया जाना। यही नहीं बेरहमी से प्रहार कर इनकी विष ग्रंथि भी निकाल ली जाती है। विष गं्रथि निकालने के लिए पंचर बनाने वाले लोहे के औजार का इस्तेमाल किया जाता है। अब इस स्थिति में इन सांपों को जंगल में छोड़ भी दिया जाए तो शिकार न कर पाने के कारण ये भूखे मर जाएंगे।


टाइगर रिजर्व से बाहर निकले तीन बाघ
पन्ना। बाघों के लिए संरक्षित पन्ना नेशनल पार्क से निकलकर दो मादा व एक नर बाघ रिहायशी क्षेत्र से लगे जंगल में पहुंच गए। इसकी जानकारी लगते ही पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। हालाँकि तत्काल सक्रिय हुई पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीमों ने बुधवार सुबह दो बाघों को वापस रिजर्व क्षेत्र में पहुंचा दिया। तीसरा बाघ अब भी छतरपुर जिले में किशनगढ़ क्षेत्र के जंगलों में है। उसे वापस ले जाने के लिए देर शाम तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी था।पन्ना नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर विक्रम सिंह परिहार ने बताया कि रात में पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र के तीन बाघों के क्षेत्र से बाहर जाने की सूचना मिली थी। इनमें से दो बाघों के सिग्नल नेशनल पार्क के पूर्वी इलाके में मिल रहे थे, जबकि एक का सिग्नल दक्षिण दिशा में मिला। इस पर रेस्क्यू टीमों के जरिए बाघों को वापस रिजर्व में लाने की कार्रवाई शुरू की गई। टीमों को दो मादा बाघ पन्ना जिले के बराज और गुंदलाहा नाला क्षेत्र में मिल गए।


मानसून छाया लेकिन बारिश 23 प्रतिशत कम
नई दिल्ली। बुधवार को मानसून पूरे देश पर छा गया लेकिन बारिश सामान्य से 23 प्रतिशत बारिश कम होने से चिंताएं बढ़ गई हैं। कर्नाटक और महाराष्ट्र में पीने के पानी की उपलब्धता तथा मोटे अनाज का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
कृषि मंत्री शरद पवार, खाद्य मंत्री केवी थॉमस और मौसम विभाग के अधिकारियों ने मानसून की प्रगति पर चर्चा की। इसके बाद पवार ने कहा कि महाराष्ट्र और कर्नाटक को छोड़कर देश में पिछले 10 दिन में हालात सुधरे हैं। दोनों राज्यों में बारिश संतोषजनक नहीं रही। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश और गुजरात में अच्छी बारिश से मूंगफली और सोयाबीन की बुवाई में सुधार है। सिर्फ मोटे अनाज के हालात अच्छे नहीं है। इसके बावजूद अनाज की कमी नहीं है। कम बारिश से कीमतों पर असर नहीं पड़ेगा। मानसून ने पांच जून को केरल तट से देश में प्रवेश किया था। लेकिन उसके बाद वह सुस्त पड़ गया। इससे धान, दलहन तथा मोटे अनाज की बुवाई में देरी हुई है। जुलाई के पहले हफ्ते तक मानसून सामान्य से 30 प्रतिशत कम था। लेकिन पिछले दस दिन में इसमें सुधार आया। इससे यह अंतर सिर्फ 23 प्रतिशत रह गया। पिछले साल मानसून बेहतर रहने से जुलाई-जून 2011-12 में खाद्यान्न उत्पादन 25.26 करोड़ टन रहा। मौसम विभाग ने 2009 में सामान्य मानसून की भविष्यवाणी की थी। इसके बाद भी चार दशकों का सबसे भीषण सूखा पड़ा। अनाज की कीमतें तेजी से बढ़ी।


अमेरिका में लू से 40 से ज्यादा मरे
वॉशिंगटन। अमेरिका में इन दिनों लू का प्रकोप जारी है। गर्म हवाओं के चलते अब तक यहां 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। शनिवार को अमेरिका के मध्य पश्चिम और पूर्वी तट के कई बड़े शहरों में तापमान 100 डिग्री फैरनहाइट यानी 38 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज किया गया।
वॉशिंगटन में तापमान 105 डिग्री फैरनहाइट रहा, जबकि सेंट लुईस और इंडिआनापोलिस में भी तापमान तीन अंकों में पहुंच गया। सेंट लुईस के मेडिकल ऑफिसर ने लू लगने से हुई तीन मौतों की पुष्टि की है और बताया कि वह छह और मौतों की जांच कर रहे हैं। वहीं शिकागो प्रशासन के मुताबिक वहां अभी तक गर्मी से 10 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा वर्जीनिया में 10 और उसके पड़ोसी मैरीलैंड में नौ लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इन मौतों के अलावा ये गर्म हवाएं देश के मध्य पश्चिम इलाके में कृषि पर भी असर डाल रही हैं। मक्का और सोयाबीन की फसल गर्मी और कम बारिश से प्रभावित हो रही है। मौसम विभाग के मुताबिक ये गर्म हवाएं सामान्यत: इतने लम्बे समय तक बरकरार नहीं रहती हैं।


बाढ़ के कारण काजीरंगा उद्यान में 560 जानवरों की मौत
गुवाहाटी। बाढ़ के कारण काजीरंगा उद्यान में एक सींग वाले 14 गैंडों सहित 560 जानवरों की मौत हो चुकी है। असम के पर्यावरण मंत्री रकीब उल हुसैन ने बताया कि बाढ़ में 481 पाढ़ों की मौत हुई है। साथ ही 10 बारहसिंगे, 18 सांबर हिरण, 36 जंगली सूअर, पांच साही, दो जंगली भैंसे, दो जंगली भैंस और एक लोमड़ी बाढ़ के कारण मर गए हैं।
यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहरों की लिस्ट में शामिल इस पार्क में दुनिया के करीब एक तिहाई एक सींग वाले गैंडे रहते हैं। इसमें अभी भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है। तेज रफ्तार वाली गाड़ियों की वजह से भी करीब 25 पाढ़ों की मौत हुई है साथ ही शिकारियों ने दो गैंडों को मार दिया। हुसैन ने बताया कि राज्य के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से उद्यान के आधारभूत विकास के लिए दो करोड़ रुपए की राशि की मांग की है।


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश में भारी बारिश से जहां एक ओर लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं अनेक स्थानों पर प्रमुख नदियों का जलस्तर भी चढ़ने लगा है।
मौसम विभाग के अनुसार, बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के पूर्वी अंचल में भारी बारिश हुई है। इस दौरान सबसे ज्यादा वर्षा सिद्वार्थनगर जिले के बांसी में 210 मिलीमीटर पर दर्ज की गई है जबकि ककरही में 170, भिंगा में 150, बलरामपुर में 140, तुर्तीपार में 130, अयोध्या में 120, बहराइच में 110 और कानपुर में 100 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है।
पश्चिमी अंचल को छोडकर मॉनसून पूरे प्रदेश में सक्रिय है और बीते 24 घंटों के दौरान बलिया-गोरखपुर में 70-70 मिलीमीटर और लखनऊ, शारदानगर और पलियाकला में 60 मिलीमीटर वर्षा हुई है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, बीते दो दिनों के दौरान हुई व्यापक वर्षा से गंगा नदी का जल स्तर कानपुर, मिर्जापुर, वाराणसी, गाजीपुर और बलिया में उभार पर है जबकि बरेली और शाहजहांपुर में रामगंगा, बांदा में यमुना तथा लखनऊ, सीतापुर तथा सुल्तानपुर में गोमती नदी बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, घाघरा का जल स्तर बलिया और फैजाबाद में चढ रहा है जबकि राप्ती नदी बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और गोरखपुर में बढ रहा है। मौसम विज्ञानियों ने आगामी 24 घंटों के दौरान भी मानसून की सक्रियता बने रहने तथा प्रदेश के बडे़ इलाके में व्यापक वर्षा की संभावना व्यक्त की है।


देश के 71 शहरों में सीवेज सिस्टम खराब
sunita'भोपाल। मध्य प्रदेश सहित देश के 71 शहरों में सीवेज सिस्टम खराब है। पानी का सही तरीके से वितरण नहीं हो रहा है. शहरों की पानी की किल्लत दूर करने के लिए अन्य स्थानों से पानी लाना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। लंबी पाइप लाइन से कई जगह लीकेज की समस्या होती है जिसके कारण पानी बर्बाद होता है। यह कहना है सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरॉंमेंट की महानिदेशक सुनीता नारायण का। वे शुक्रवार को राजधानी के होटल अशोका लेक व्यू में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रही थी। इस दौरान उन्होंने बताया की मध्य प्रदेश में भी पानी वितरण की स्थिति खराब है। ज़्यादातर पाइप लाइन व सीवेज सिस्टम सालों पुराना हो चुका है। आज ज़रूरत दूर से पानी लाने की नही बल्कि अपनी वाटर बॉडी को बचाने की है।


यूका में पड़ा ज़हरीला कचरा जर्मनी जाएगा, मिली मंजूरी
नई दिल्ली। भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड कारखाने में पड़ा 350 मीट्रिक टन कचरा जर्मनी जाएगा। केंद्र सरकार ने यूनियन कार्बाइड कारखाने में पड़े जहरीले कचरे को नष्ट करने के लिए जर्मनी भेजने को मंजूरी दे दी है। कचरे को सालभर के भीतर भोपाल से जर्मनी ले जाया जाएगा। इसे जर्मनी ले जाने का काम जर्मन एजेंसी 'जीआईजेड आईएस' करेगी। मंगलवार को हुई बैठक में केंद्रीय कैबिनेट ने गृहमंत्री पी. चिदंबरम की अगुआई वाले मंत्री समूह की सिफारिशों के आधार पर इस प्रस्ताव को को मंजूरी दी। फैसले के मुताबिक केंद्र इस कचरे को जर्मनी ले जाने में होने वाले 25 करोड़ रुपए के खर्च का भुगतान करेगा। कारखाने में यह जहरीला कचरा 1984 में हुई गैस त्रासदी के समय से पड़ा हुआ है।


पर्यावरण विभाग ने भेजा बालको पावर प्लांट को नोटिस
कोरबा। वन भूमि में पावर प्लांट से निकलने वाली राख फेंकने पर क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण अधिकारी ने बालको पावर प्लांट प्रबंधन को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस बालको के 540 मेगावाट पावर प्लांट के प्रमुख को भेजा गया है। नोटिस में कहा गया है कि बालको पावर प्लांट से निकलने वाली राख को रिसदी और डिंगापुर के आसपास फेंका गया है। जिन स्थानों पर राख फेंकी गई है उनमें वन भूमि भी शामिल है। पर्यावरण संरक्षण मंडल ने इस तरह से राख फेंकने की कोई अनुमति नहीं दी है और न ही किसी अन्य संबंधित विभाग से इसके लिए अनुमति ली गई है। बालको का राखड़ बांध भी भर चुका है। इन स्थितियों में अगले एक सप्ताह के अंदर रिसदी, डिंगापुर क्षेत्र में डाली गई राख को बालको तत्काल उठवाये अन्यथा उनके खिलाफ वैधानिक कार्यवाही करते हुए बालको को कोयला, पानी और बिजली आपूर्ति बंद कर दी जायेगी। पत्र की प्रतिलिपि एसईसीएल, छत्तीसगढ़ पावर जनरेशन कंपनी सहित अन्य संबंधित विभागों को भी भेजी गई है।


अवैध व्यापार सुमात्रा में आरंगुटान जनसंख्या का खतरा
सुमात्रा। जंगली जानवरों के संरक्षण के लिए भारी निवेश के बावजूद, हाल के वर्षों में सुमात्रा के द्वीप पर आरेंगूटान की संख्या में नाटकीय रूप से गिरावट आई है. वन्य पशु संरक्षण संगठन के अनुसार 1970 के दशक के बाद से यातायात में हुई वृद्धि इसके लिए दोषी हैं. यहाँ के पर्यावरण समूह इंडोनेशिया में सज़ा देने ढीली प्रक्रियाओं को इसके लिए दोषी ठहराते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार यहाँ बंदरों को अवैध रूप से रखा जाता है. एक अनुमान के अनुसार पिछले 30 वर्षों में 2 हज़ार से ज़्यादा आरेंगूटान निजी मालिकों से जब्त किए गये. लेकिन मुट्ठी भर लोगों को ही इसके लिए दंडित किया गया. माना जा रहा है क़ी यदि वर्तमान स्थिति जारी रहती है तो सुमात्रा से आरेंगूटान विलुप्त हो जाएँगे. आरेंगूटान की कुल जनसंख्या के बारे में 50,000 से 60,000 तक होने का अनुमान है. वनों की कटाई से आरेंगूटान के निवास पर जो ख़तरा मंडरा रहा है वो इनके विनाश का एक बढ़ा कारण है.


चिड़ियाघर के वन्य प्राणियों को गोद ले सकेंगे लोग
ग्वालियर। महानगर के लोग चिड़ियाघर में रहने वाले वन्य प्राणियों को गोद ले सकेंगे। इसके लिए उन्हें एक निर्धारित राशि जमा करनी होगी। यह राशि चिड़ियाघर के विकास पर खर्च की जाएगी। चिड़ियाघर प्रबंधन ने वन्य प्राणियों को गोद देने का प्रस्ताव तैयार कर मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) को भेज दिया है। एमआईसी जल्द इस पर फैसला लेगी।
दो माह पूर्व चिड़ियाघर के अधिकारियों ने देश के विभिन्न महानगरों में चिड़ियाघरों का दौरा कर वन्य प्राणियों को गोद देने की व्यवस्था की जानकारी ली थी। निगम प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से न सिर्फ वन्य प्राणियों के प्रति लोगों में प्रेम का भाव जागेगा, बल्कि चिड़ियाघर पर खर्च होने वाली राशि का कुछ हिस्सा जनभागीदारी से मिल जाएगा। इस राशि से चिड़ियाघर में सुविधाओं का विस्तार भी किया जा सकेगा। गोद लेने की अवधि एक साल होगी। इसके अलावा गोद लेने वाले के नाम का एक बोर्ड संबंधित वन्य प्राणी के एनक्लोजर (पिंजरे) में लगाया जाएगा।


५ जून : विश्व पर्यावरण दिवस विशेष
अल गोर - पर्यावरण के नोबल पुरस्कार विजेता ।

पत्र लिखे और जीते : बेहतर पर्यावरण हेतु मेरे विचार
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रंगीन पंखों वाले पक्षियों में होता है तेजी से क्रमिक विकास
रंगीन पंखों वाले पक्षियों में होता है तेजी से क्रमिक विकास मेलबर्न. हाल ही में हुए एक ताज़ा अध्ययन में यह बात सामने आई है कि एक ही रंग वाले पक्षियों की तुलना में रंगीन पक्षी, नई प्रजातियों में तेजी से विकसित होते हैं। मेलबर्न विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के एक दल ने पता लगाया कि बहुत सारे रंगों के पंखों वाले पक्षी अपनी आबादी के भीतर तेजी से बदलते और विकसित होते हैं। नेचर पत्रिका में छपी खबर के अनुसार इससे 60 साल पुराने क्रमिक विकास सिद्धांत की पृष्टि होती है। इस शोध के लिए पक्षी प्रेमियों और आनुवांशिकी विज्ञानियों से पिछले कई दशकों में जुटाई सूचनाओं का प्रयोग किया गया। 1950 में एक से ज्यादा रंगों के पंखों और नई प्रजातियों के विकास के बीच संबंधों के बारे में जुलियन हक्स्ले जैसे कई प्रसिद्ध वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था लेकिन ऐसा पहली बार है जब वैज्ञानिकों ने इस बात की पुष्टि की है।


जैव विविधता पर तेज़ी से असर डाल रहा जलवायु परिवर्तन
बर्लिन। जलवायु परिवर्तन का असर जैव विविधता पर तेज़ी से पढ़ रहा है. जलवायु परिवर्तन के कारण जैव विविधता ख़तरे में आ गयी है. ठंडे और नम क्षेत्र तेज़ी से शुष्क और गर्म क्षेत्रों में बदल रहे हैं. जलवायु परिवर्तन का असर सबसे ज़्यादा पौधों की दुनिया पर पड़ रहा है. पहली बार वैश्विक स्तर और क्षेत्रीय आधार पर संयंत्र विविधता पर जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभाव पर अध्ययन किया गया है
बॉन गौटिंगेन और येल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गये एक नए अध्ययन में जो परिणाम सामने आए हैं वो चौकाने वाले हैं. शोध परियोजना के प्रमुख व बॉन विश्वविद्यालय के नीस संस्थान के डॉ. जनवरी हेनिंग का कहना है की जलवायु परिवर्तन जल्द ही मनुष्यों व जैव विविधता के लिए अप्रत्याशित परिणाम लेकर आ सकता है. शोधकर्ताओं ने जांच की है कि कैसे कई प्रजातियों के पौधे दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में वर्तमान जलवायु परिस्थितियों में होते हैं. पहली बार वैश्विक स्तर और क्षेत्रीय आधार पर संयंत्र विविधता पर जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभाव पर अध्ययन किया गया. शोध के दौरान जलवायु परिवर्तन परिदृश्यों को हस्तांतरित कर देखा गया की वर्ष 2100 तक कितने क्षेत्र की जैव विविधता भविष्य में नई स्थितियों के लिए अनुकूल होगी. लेकिन अध्ययन में पाया गया की हम बड़ी संख्या में प्रजातियों को खो देंगे. शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में हमारे ग्रह के संयंत्र विविधता पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के मामले में एक स्पष्ट विभाजन पर ध्यान आकर्षित कराया है. औद्योगिक देशों में जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण ग्रीन हाउस गैसों का बड़ी मात्रा में उत्सर्जन है. परेशानी की बात यह है की यह देश आधे-अधूरे मन से जलवायु नीति पर विचार विमर्श करते हैं.


कोअला की आबादी घटकर आधी हुई
क्वींसलैंड। ऑस्ट्रेलिया में क्वींसलैंड के पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय ने चौंकाने वाले परिणामों के साथ एक अध्ययन रिपोर्ट प्रकाशित की है. कोअला आबादी को लेकर किए गये सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि सिर्फ तीन साल में कोआला की संख्या में 50 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है. कुछ ही समय में पूरी आबादी विलुप्त हो सकती है.
ब्रिस्बेन के दक्षिण में, क्वींसलैंड के ऑस्ट्रेलियाई राज्य, "कोअला तट के रूप में नामित क्षेत्र में जाने जाते हैं. ऑस्ट्रेलिया में सबसे बड़ी कोअला आबादी पर 1996 के बाद से कोअला वैज्ञानिक रूप से निरीक्षण किया है. "एक अनुमान के अनुसार सिर्फ तीन साल में 2300 से अधिक पशुओं की हानि देखी गयी है. बिरगित ब्रौन, एक्शन समुदाय (आगा) संरक्षण एवं जो अच्छी तरह से ज्ञात मारसुपायल्स की रक्षा के लिए काम करता है के परियोजना निदेशक ने यह आशंका जताई है कि अन्य क्षेत्रों मे भी कोअला की संख्या में गिरावट की संभावना है. " दक्षिण पूर्व क्वींसलैंड सबसे बड़ी जनसंख्या वृद्धि के साथ क्षेत्रों में से एक है. हालांकि इस क्षेत्र में पहले से ही कुछ संरक्षित क्षेत्रों की पहचान की गई है. और भी क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों के बाहर कोअला के संख्या सबसे अधिक है. रिपोर्ट के अनुसार कोआला को कारों और कुत्तों के हामलों के बीच मारसुपायल्स में अस्तित्व के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
अध्ययन के मुताबिक 1996 तक कोअला तट क्षेत्र में 6200 से अधिक थे लेकिन इसके बाद दस साल में केवल 4600 की गिरावट आई है. अब यह लुप्तप्राय के रूप में वर्गीकृत हैं. सिर्फ तीन वर्षों में, इनकी संख्या अब सिकुड़ कर 2300 तक आधी हो गयी है. आने वाले वर्षों में इसी तरह की हानि होने का मतलब है की इनका अंत करीब होना. बिरगित ब्रौन का कहना है कि इस खूबसूरत जीव को बचाने के लिए प्रभावी सुरक्षा उपायों को लागू करने का समय है. उनका कहना है की कार की चपेट में आने तथा कुत्तों का शिकार होने पर मुआवज़े का प्रावधान किया जाना चाहिए.


प्रदेश की नदियों के कई हिस्से हो गये ज़हरीले
मेट्रो मिरर टीम

मध्यप्रदेश की नदियों के कई हिस्सों का पानी ज़हरीला हो चुका है. नदियों के अधिकांश हिस्सों का पानी अब न तो पीने लायक रहा और ना ही नहाने लायक. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मॉनिटरिंग रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की नदियों के कई हिस्सों मे बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) की मात्रा मानक स्तर से अधिक मिली है. रिपोर्ट की माने तो प्रदेश की लगभग सभी प्रमुख नदियों में कई स्थान ऐसे हैं जहाँ बीओडी की मात्रा 6 मिली ग्राम प्रति लीटर से अधिक मिली है. जबकि पीने व अन्य उपयोग मे लाए जाने वाले पानी में बीओडी का मानक स्तर 3 मिली ग्राम प्रति लीटर से कम होना चाहिए.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नर्मदा, ख़ान, बेतवा, मंदाकिनी, क्षिप्रा, चंबल, टोन्स व कलियासोत नदी के विभिन्न स्थानों के जल की जो मॉनिटरिंग की है उसमे कुछ जगहों पर बीओडी का स्तर 20 से 30 मिली ग्राम प्रति लीटर तक पाया गया है. सबसे ज़्यादा खराब स्थिति इंदौर मे ख़ान, नागदा मे चंबल तथा उज्जैन मे क्षिप्रा नदी की है. नदियों मे जो सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्र माने गए हैं उनमें इंदौर से बहने वाली ख़ान नदी के शक्कर खेड़ी, संवार व काबीट खेड़ी मे बीओडी की मात्रा 50 मिली ग्राम प्रति लीटर तक मिली है. इसका मुख्य कारण इंदौर से निकलने वाला सीवेज है. वहीं नागदा में चंबल नदी में बीओडी की मात्रा 50 मिली ग्राम प्रति लीटर तक मिली है. इसका मुख्य कारण औद्योगिक व घरेलू दूषित जल है. हालाँकि मानक स्तर के लिहाज से देखें तो होशंगाबाद में नर्मदा नदी के सेठानिघाट में बीओडी की मात्रा 3.1 मिली ग्राम प्रति लीटर है जबकि होशंगाबाद के ही कुछ क्षेत्रों में बीओडी की मात्रा 11.4 मिली ग्राम प्रति लीटर तक है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मॉनिटरिंग रिपोर्ट के अनुसार इंदौर में ख़ान नदी इंदौर सीवेज के कारण, नागदा में चंबल नदी औद्योगिक व घरेलू दूषित जल के कारण, उज्जैन में क्षिप्रा नदी उज्जैन सीवेज के कारण, होशंगाबाद में नर्मदा नदी औद्योगिक व घरेलू दूषित जल के कारण, माधवगढ़ में टोन्स नदी सीवेज के कारण, मंडीदीप में कलियासोत नदी औद्योगिक सीवेज के कारण, रायसेन में बेतवा नदी रायसेन के सीवेज के कारण प्रदूषित हो गयी है.

मापदंड के लिए प्राथमिकता तय
हालाँकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पानी की शुद्धता मापने के लिए प्राथमिकता के अनुसार मापदंड तैयार किए हैं. इसके लिए पाँच प्राथमिकता तैयार की गयी है. पहली प्राथमिका के लिए तय मापदंड में ऐसे स्थानों को रखा गया है जिसनें बीओडी की मात्रा 30 मिली ग्राम प्रति लीटर तक है. दूसरी प्राथमिकता के लिए तय मापदंड में उन स्थानों को रखा गया है जहाँ बीओडी की मात्रा 20 से 30 मिली ग्राम प्रति लीटर के बीच पायी गई है. तीसरी प्राथमिका में बीओडी की मात्रा 10 से 20 मिली ग्राम प्रति लीटर के बीच, चौथी प्राथमिका में बीओडी की मात्रा 6 से 10 मिली ग्राम प्रति लीटर के बीच तथा पाँचवी प्राथमिका में बीओडी की मात्रा 10 से 20 मिली ग्राम प्रति लीटर के बीच होना रखा गया है.

क्या है मापदंड
जानकारों का कहना है की तय मापदंड के अनुसार परंपरागत ट्रीटमेंट के बिना व कीटाणुओं को दूर कर पानी के जल स्त्रोत में बीओडी की मात्रा 2 मिली ग्राम प्रति लीटर या इससे कम होनी चाहिए. इसके अलावा परंपरागत ट्रीटमेंट के साथ व कीटाणुओं को दूर कर पानी के जल स्त्रोत में बीओडी की मात्रा 3 मिली ग्राम प्रति लीटर या इससे कम होनी चाहिए. वहीं आउटडोर स्नान के लिए उपयोग में लाए जाने वाले पानी में बीओडी का स्तर भी 3 मिली ग्राम प्रति लीटर या इससे कम होनी चहिये. यहीं नहीं मछली पालन व वन्य जीवन के पनपने के लिए पानी में पीएच की मात्रा 6.5 से 8.5 तथा घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा 4 मिली ग्राम प्रति लीटर या इससे अधिक या अमोनिया की मात्रा 1.2 मिली ग्राम प्रति लीटर या इससे कम निर्धारित है. विशेषज्ञों के अनुसार बीओडी एस तरह से पानी में कार्बनिक यौगिकों के माइक्रोबियल चयापचय के लिए ज़रूरी ऑक्सीजन की मात्रा है. पानी को शुद्ध रखने वाले जीवाणुओं के लिए बीओडी की मात्रा पानी में निर्धारित मानक से कम या ज़्यादा नहीं होनी चाहिए.


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