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ट्रेनी आईएएस ने बीच में ही छोड़ी नौकरी
11 January 2016
भोपाल। सरकारी तंत्र की अव्यवस्थाओं से खफा 2014 बैच के युवा आईएएस अफसर ने दो साल में ही नौकरी को अलविदा कह दिया। जबलपुर में सहायक कलेक्टर रहे आईएएस रोमन सैनी ने नौकरी के प्रशि
क्षण पीरियड में ही इस्तीफा दे दिया है।
वे अब दिल्ली में गरीब व मध्यमवर्गीय बच्चों को नि:शुल्क सिविल सर्विसेज की कोचिंग दे रहे हैं। एमबीबीएस करने के बाद सैनी पहले प्रयास में ही सिविल सेवा में चयनित हुए। राजस्थान के रायकरनपुरा गांव निवासी रोमन अभी महज 23 साल के हैं। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने महज 16 साल की उम्र में एम्स में दाखिले का टेस्ट पास कर लिया था। उनकी मेरिट में 18वीं रैंक थी। पिता इंजीनियर और मां गृहणी हैं।
आईएएस बनने के बाद सैनी मध्यप्रदेश आए। यहां उनकी पदस्थापना जबलपुर में असिस्टेंट कलेक्टर के रूप में हुई, लेकिन सरकारी तंत्र से खफा होकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
गरीब बच्चों को दे रहे कोचिंग
नौकरी छोडऩे के बाद रोमन सैनी दिल्ली में एन एकेडमी नाम से कोचिंग संस्था चला रहे हैं। उनकी यह संस्था सिविल सेवा में जाने की इच्छा रखने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को ऑनलाइन ट्रेनिंग के जरिए मदद देती है। यह काम वे अपने दोस्त गौरव मुंजाल के साथ मिलकर कर रहे हैं। सिविल सर्विसेस को लेकर उनके अनेक वीडियो यू-ट्यूब पर हैं, जिन्हें हजारों हिट्स मिल रहे हैं।
सरकार निकलवा रही है खर्चे का हिसाब
दिल्ली में इस्तीफा देने के बाद केन्द्रीय कार्मिक मंत्रायल ने प्रदेश सरकार के जीएडी विभाग को एक पत्र भेजकर कहा है कि उनके मप्र में पदस्थापना के दौरान वेतन और भत्तों पर कितना खर्च हुआ इसका हिसाब भेजें। नियमानुसार प्रशिक्षण के दौरान नौकरी छोडऩे पर प्रशिक्षण खर्च संबंधित अफसर से वसूला जाता है।
रोमन गरीब बच्चों को सिविल सर्विसेस की तैयारी के लिए मदद मुहैया कराना चाहते थे। उन्हें पढ़ाना बेहद पसंद है। यही वजह है कि उन्होंने सिविल सर्विसेस की जगह एकेडमिक में जाने का फै सला किया। ज्वाइनिंग के कुछ ही दिन बाद उन्होंने सितंबर में ही इस्तीफा दे दिया था।
-एसएन रूपला, कलेक्टर जबलपुर

फिजी सरकार ने बनाया काउंसिल जनरल : श्याम श्रॉफ
13 July 2015
फिजी की सरकार ने श्याम श्रॉफ को अपना काउंसिल जनरल बनाया है। श्रॉफ मुंबई के दूतावास में ही बैठकर काम करेंगे। ख्यात फिल्म प्रोड्यूसर और डिस्ट्रीब्यूटर श्याम श्रृंगार फिल्म्स लि. के मालिक हैं और चालीस साल से फिल्मोद्योग में हैं। मुंबई यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में डिग्री लेने के बाद उन्होंने मेलबोर्न बिजनेस स्कूल से एमबीए किया है। उनकी कंपनी 1950 से फिल्में बनाते आई है, चलती का नाम गाड़ी से लेकर हावड़ा ब्रिज तक बनी। 1960 के दशक में कंपनी डिस्ट्रीब्यूशन में आ गई, मेरा गांव मेरा देश, होली आई रे जैसी फिल्मों का डिस्ट्रीब्यूशन इसी कंपनी ने किया। 70 के दशक में श्याम और उनके भाई बालकृष्ण श्रॉफ ने कंपनी का काम संभाला और शंकर दादा जैसी फिल्म प्रोड्यूस की।
इंटरनेट विलेन नंबर वन : टेरेसा मे
13 July 2015
वे ब्रिटेन की गृहमंत्री हैं। 1956 में जन्मी टैरेसा का इन दिनों इसलिए विरोध हो रहा है, क्योंकि उन्होंने बिना इंटरनेट कंपनियों की राय लिए एक कानून को अमल में लाने को कहा है। यह कानून जांच के अधिकार से संबंधित हैं और इसमें इंटरनेट कंपनियों से राय नहीं ली गई है। इसी कारण से उन्हें ब्रिटेन में इंटरनेट विलेन ऑफ द ईयर बता रहे हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड से बीए (ऑनर्स) करने वाली टेरेसा ने 2 साल तक बैंक ऑफ इंग्लैंड में नौकरी भी की है। वे पहली बार 1002 में चुनाव लड़ी, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।


एम श्रीधर आचार्युलू, केन्द्रीय सूचना आयुक्त
पत्नी को आय बताने का आदेश इन्होंने ही दिया था

27 October 2014
जन्म- 10 नवंबर 1956
पिता- एमएस आचार्य, मां- रंगनायकम्मा
शिक्षा- मासूम अली हाईस्कूल, एडब्ल्यू जूनियर कॉलेज, सीकेएम कॉलेज, लॉ कॉलेज से एलएलएम और उस्मानिया यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म।
क्यों चर्चा में- उन्होंने कहा है कि किसी भी शुक्रवार को गिरफ्तारी करना ठीक नहीं है।

सूचना के अधिकार के तहत पत्नी को यह अधिकार है कि वह पति की संपत्ति निवेश आदि की जानकारी ले। यह फैसला सुनाने वाले श्रीधर आचार्युलू ही हैं। उन्होंने घरेलू हिंसा से पीड़ित एक परित्यक्त महिला के आवेदन पर यह फैसला सुनाया था। उन्होंने इस तर्क को भी नकार दिया कि आय की जानकारी निजी होती है। इससे पहले तक इस तरह की सूचनाओं को इस अधिकार के तहत नहीं बताया जाता था, लेकिन श्रीधर के फैसले के बाद यह बताया जाने लगा।
आंध्रप्रदेश के वारंगल में जन्मे श्रीधर के पिता स्वतंत्रता सेनानी थे। साथ ही वे वहां से जनधर्म साप्ताहिक और वारंगल वाणी दैनिक निकालते थे। पढ़ने के दौरान ही उन्हें पांच स्वर्ण पदक मिले। पढ़ाई करने के बाद वे नाल्सर यूनिवर्सिटी में कानून के प्रोफेसर हो गए। केंद्रीय सूचना आयुक्त बनने के दो माह पहले ही सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के रूप में सम्मानित किए गए। उन्होंने कानून और पत्रकारिता पर करीब 28 पुस्तकें लिखी, जो अंग्रेजी और तेलुगु में हैं। उनके करीबी उन्हें मदभूषी श्रीधर कहते हैं।
बात पिछले साल की है। दिल्ली के एक स्कूल की कर्मचारी ने अपनी सर्विस बुक और अन्य जानकारियों के लिए आवेदन किया। जो नहीं मिला। शिक्षिका साधना ने इस पर सूचना के अधिकार के तहत आवेदन दे दिया। चूंकि दिल्ली में दिल्ली शिक्षा कानून लागू होता है और ऐसा प्रसंग अभी तक आया नहीं था। इस मामले पर फैसला देते हुए श्रीधर आचार्युलू ने ही यह आदेश दिया कि आरटीआई कानून के प्रावधान निजी स्कूलों पर भी लागू होते हैं। भले ही वे दिल्ली शिक्षा कानून या फिर शिक्षा अधिकार कानून के तहत संचालित किए जा रहे हो।


बिक्रम ठेकेदार: ट्रक ड्राइवर से मंत्री बनने तक का सफर
27 October 2014
कोसली (रेवाड़ी)। नवनियुक्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) व कोसली के विधायक बिक्रम सिंह ठेकेदार जैसा नसीब हर किसी को नसीब नहीं होता। साधारण ट्रक चालक से लेकर मंत्री बनने तक का उनका सफर चमत्कारिक ढंग से पूरा हुआ है।
कुछ माह पहले तक तो बिक्रम गंभीरता से टिकट की दौड़ में शामिल नहीं थे, लेकिन मोदी लहर में मिला राव इंद्रजीत सिंह का साथ बिक्रम को एक ही झटके में शिखर पर पहुंचा गया। मामूली चालक से राज्यमंत्री तक का सफर तय करने वाले बिक्रम ठेकेदार के कस्बे में आज जश्न का माहौल है। साधारण परिवार में जन्में बिक्रम सिंह व अन्य परिजनों ने कभी नहीं सोचा था कि वे इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचेगे।

वरदान बना नाना के घर आना

बिक्त्रम सिंह का जन्म 19 नंवबर, 1968 को गुड़गांव जिले के गांव रामनगर में किसान दलीप सिंह व राजबाला के घर में हुआ था। बिक्रम के एक भाई व दो बहने हैं तथा बिक्रम सबसे बड़े हैं। उनका बचपन अपने ननिहाल सहादत्तनगर में उसके नाना सुमेर सिंह के घर में बीता। नाना के घर आना उनके लिए वरदान बन गया। उन्होंने मिडल की शिक्षा सहादत्तनगर, दसवीं गांव लुलाअहीर, बारहवीं कोसली व ग्रेजुऐशन की डिग्री डीएवी विद्यालय अजमेर से प्राप्त की।
पिता दलीप सिंह का कहना है कि उन्होने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा कभी प्रदेश का मंत्री बनेगा। घर पर आने जाने वाले लोगो का मुंह मीठा करवा रहे दलीप सिंह को उम्मीद है कि अब विकास कार्य तेज होंगे।


पीपुलसॉफ्ट का अधिग्रहण करवाया, पर नहीं लिया बोनस
शेफ्रा कैट्ज:इन्हें आॅरेकलने कंपनी का को-सीईओ बनाया है। वे दुनिया की सबसे ज्यादा पैकेज 44.3 मिलियन डॉलर पाने वाली फीमेल एग्जीक्यूटिव बन गई हैं।

डील मेकर कहलाने वाली कैट्ज ने 1999 में सीनियर वीपी के तौर पर ऑरेकल ज्वाॅइन किया था। उन्होंने कंपनी के लिए सबसे बड़ी डील 10.3 बिलियन में पीपुलसॉफ्ट के अधिग्रहण में मुख्य भूमिका निभाई थी।
व्हाॅर्टन स्कूल से ग्रेजुएट कैट्ज ने 2013 में कंपनी के खराब परफॉर्मेंस के चलते 7 लाख 17 हजार डॉलर का बोनस लेने से इनकार कर दिया था।


जिनके सामाग्रा सेनिटेशन अभियान के साथ जुड़े हैं 50 हज़ार लोग
स्वप्निल चतुर्वेदी: अगलेसप्ताह लैंडमार्क सेंट्रल पार्क में होने वाले ग्लोबल सिटीजन अवॉर्ड समारोह में सम्मनित होने वाले चार लोगों में दो भारतीय हैं- स्वप्निल चतुर्वेदी और अनूप जैन। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उपस्थित रहेंगे।

स्वप्निल ने 2011 में सामाग्रा सेनिटेशन की स्थापना की। यह संस्था शहर में जरूरतमंद लोगों को शौचालय की बेहतर सुविधा देती है।
2001 में स्वप्निल अमेरिका गए थे। ग्रेजुएशन के बाद वहीं एक कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम किया। 2007 में भारत लौटकर समाज सेवा में जुट गए।


इंग्लैंड की यॉर्कशायर लीग में भी अॉलराउंड परफाॅमस
पृथ्वी शॉ : हैरिसशील्ड टूर्नामेंट में 546 रनों की रिकॉर्ड पारी खेलने वाले 14 साल के इस युवा क्रिकेटर से क्रिकेट का सामान बनाने वाली कंपनी ने 36 लाख रु. की डील की है।

पृथ्वी अभी इंग्लैंड की यॉर्कशायर लीग में क्लीथॉर्प्स सीसी टीम के लिए खेल रहे हैं। हाल में उन्होंने एक मैच में अर्द्धशतक मारा और दूसरे मैच में पांच विकेट भी लिए।
पृथ्वी को अभी पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर का प्रोफेशनल मैनेजमेंट ग्रुप ट्रेनिंग दे रहा है


मंदी के बावजूद नहीं गिरने दी मारुति की सेल और हिस्सेदारी
मयंक पारीख: मारुतिसुजुकी इंडिया लिमिटेड के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर के कंपनी से इस्तीफा देने की चर्चा है। उन्होंने यह कदम तब उठाया है, जब कंपनी अपनी सीडान कार सियाज को लॉन्च करने की तैयारी में है।

पिछले दो वर्षों में ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी होने के बावजूद बाजार में मारुति की कारों की सेल और हिस्सेदारी बढ़ाने का श्रेय इन्हें ही है।
1991 में एमसिल के साथ कॅरिअर की शुरुआत की। उन्होंने आईआईएम-बेंगलुरू से मैनेजमेंट की पढ़ाई की।


कई कंपनियों को ग्लाेबल लीडर बनाने में की है मदद
आदिल जैनुलभाई: मैकेंजीइंडिया के पूर्व चेयरमैन को केंद्र सरकार ने क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया का मुखिया बनाया है। वे 34 साल तक मैकेंजी के साथ जुड़े रहे।

आईआईटी,बॉम्बे से मैकेनिकल इंजीनियरिंग और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए करने वाले आदिल ने कई कंपनियों को ग्लोबल लीडर बनने में मदद की।
आदिल रिलायंस इंडस्ट्रीज, लार्सन एंड टूब्रो और नेटवर्क-18 के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक रहे हैं।


681 अरब की संपत्ति के मालिक और बेटा बन गया बौद्ध भिक्षु
जन्म : 1अप्रैल 1938
शिक्षा: हार्वर्डसे एमबीए
परिवार: पहलीशादी थाई राजकुमारी से हुई थी, जिससे एक बेटा और एक बेटी है। दूसरी शादी लेटचुइमी हेलेन मेरी से हुई, जो पेरिस में म्यूजिक रिकॉर्डिंग हाउस की मालिक हैं। इनसे एक बेटी है।
चर्चा में क्यों : 681 अरब रु. की संपत्ति के मालिक इस मलेशियाई बिज़नेसमैन को सीबीआई ने एयरसेल-मैक्सिस सौदे में आरोपी ठहराया है।

दक्षिण-पूर्व एशियाके दूसरे और दुनिया के 99वें सबसे अमीर बिज़नेसमैन अनंदा कृष्णन का बेटा अजाह श्रीपानो 2008 के आसपास अचानक लापता हो गया था। उन्होंने उसे बहुत ढूंढ़ा। कुछ पता चला। इसी दौरान उन्हें किसी परिचित ने बताया कि उसने उनके बेटे की शक्ल से मिलता-जुलता लड़का उत्तरी थाईलैंड के बौद्ध भिक्षुओं के मठ में देखा है। वे तुरंत वहां पहुंचे। बेटे को गेरुए रंग के वस्त्र, छोटे-छोटे बाल और हाथ में भिक्षा मांगने वाला कटोरा देखकर वे दंग रह गए।
महल से घर के बजाए बेटे को जंगल में देखकर वे सदमे में चले गए। बेटा बौद्ध भिक्षु बन चुका था। उसे समझाने का कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने बेटे से कम से कम उनके साथ भोजन करने का आग्रह किया। लेकिन अजाह ने इससे भी इनकार कर दिया। उसने पिता से कहा- मुझे माफ कीजिए। मैं आपका निमंत्रण स्वीकार नहीं कर सकता। मुझे दूसरे भिक्षुओं की तरह भिक्षा मांग कर ही अपने भोजन का इंतजाम करना है। अनंदा को इसका बेहद दुख हुआ कि अरबों रुपए की संपत्ति होने के बावजूद वे अपने बेटे को भोजन तक नहीं करा सकते। इसके बाद अनंदा को लौटना पड़ा। हालांकि अनंदा जब भी किसी पारिवारिक कार्यक्रम में उसे बुलाते तो वह जरूर आता है। 2011 में आनंदा का 70वां जन्मदिन था। वो उसे बेटे के साथ मनाना चाहते थे। उन्होंने बेटे को बुलाया और उसे अपने प्राइवेट जेट से भूटान के पारो लाए। यहां पुत्र ने पिता का जन्मदिन मनाया। मलेशिया के पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट में काम कराने के लिए अंग्रेज अनंदा के दादा को श्रीलंका के जाफना से यहां लाए थे। इसके बाद वे श्रीलंका नहीं लौटे और मलेशिया के लिटिल इंडिया कहलाने वाले ब्रिकफील्डस में ही बस गए। उनके बाद अनंदा के पिता भी यहां सरकारी नौकरी करने लगे थे।
अनंदा शुरू से ही पढ़ने में होशियार थे, इसलिए मेलबर्न यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस और इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन करने के लिए उन्हें स्कॉलरशिप मिली थी। वे यहां पढ़ाई के साथ छात्रों के अखबार में काम करते। रिस्क लेने की आदत थी, इसलिए साथ में बेटिंग भी करते। हमेशा लो प्रोफाइल रहने वाले अनंदा का बिज़नेस इंटरटेनमेंट से लेकर ऑइल, पावर, शिपिंग, टेलिकम्युनिकेशंस और प्रॉपर्टी फील्ड्स में फंसा है। उनकी कमाई का एक चौथाई हिस्सा गैंबलिंग से आता है।



मोदी सरकार - बेहतर तालमेल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपने मंत्रिमंडल के गठन में बेहतर तालमेल और बेहतर नतीजों के इरादे से 17 संबंधित मंत्रालयों के 7 समूह बना दिए। इनमें कुछ बुनियादी सुविधाओं वाले विभाग शामिल हैं।

प्रवासी मंत्रालय विदेश , कॉर्पोरेट को वित्त में जोड़ा

संप्रग-2 के काल में बनाए गए प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्रालय को विदेश मंत्रालय से जोड़ दिया गया है। विदेश मंत्री के रूप में सुषमा स्वराज इसे देखेंगी। इसी तरह कार्पोरेट मामलों को वित्त मंत्रालय से जोड़ दिया गया है जिसे वित्त मंत्री अरूण जेटली देखेंगे।
बुनियादी ढांचा क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने परिवहन, हाईवे और जहाजरानी को मिला दिया है जिसके प्रमुख नितिन गडकरी बनाए गए हैं।

बिजली, कोयला और अक्षय ऊर्जा एक साथ

अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा संयोजन के तहत बिजली, कोयला और अक्षय उर्जा को मिला दिया गया है। पीयूष गोयल को इसका स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है।
शहरी विकास, आवास और गरीबी उन्मूलन जैसे संबंधित मंत्रालयों को भी एक में मिला कर उसका मंत्री एम वेंकैया नायडु को बनाया गया है। इसी तरह ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पेय जल तथा सफाई के महकमों का एक समूह बनाते हुए उसे गोपीनाथ मुंडे को सौंपा गया है।
गोवा के श्रीपद नाईक को संस्कृति एवं पर्यटन का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है।


 
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