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बिजनेस समाचार

मार्केट वॉच

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, इंदौर
OCT. 8-10, 2014


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6 लाख 89 हजार करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव आये
Our Correspondent :11 October 2014
भोपाल । मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि हाल ही में सम्पन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से मध्यप्रदेश में निवेश का वातावरण बना है। दुनियाभर से निवेशक मध्यप्रदेश आना चाहते हैं। प्रधानमंत्री जी ने भी मध्यप्रदेश की सराहना की है। मध्यप्रदेश की ब्रांडिंग निवेश के आईडियल डेस्टिनेशन के रूप में हुई है। यह एक स्वर्णिम अवसर है। सक्रिय रहकर इसका लाभ उठाकर मध्यप्रदेश को बदलना है। अब मध्यप्रदेश को खेती के साथ उद्योग में भी अग्रणी बनाना है। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहाँ ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के फाओअप संबंधी बैठक ले रहे थे।
बताया गया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान प्रदेश में 6 लाख 89 हजार करोड़ रूपये के 3,177 निवेश प्रस्ताव मिले हैं। बैठक में मंत्रीमंडल के सदस्य और विभिन्न विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट विश्लेषण

  • एम.एस.एम.ई. तथा जी.आई.एस में 7600 डेलीगेट्स आये।

  • विश्व के 28 सहभागी तथा 9 पार्टनर देश शामिल हुए।

  • इतिहास में पहली बार दिल्ली से बाहर 28 राजदूत तथा उच्चायुक्त एक साथ एकत्रित हुए।

  • नौ कन्ट्री सेशन सहित 38 सत्र हुए।

  • समिट में 6.89 लाख करोड़ के निवेश के प्रस्ताव (इन्टेशन टू इनवेस्ट) प्राप्त।

  • मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव हर सप्ताह प्रगति की समीक्षा करेंगे।

  • सिंगल विंडो का वास्तविक लाभ दिलाने निवेशकों से ऑनलाइन कम्बाइंड एप्लीकेशन लिये जायेंगे।

  • निवेशकों को यूनिक आई डी कोड दिया जायेगा।

  • प्रत्येक निवेश प्रस्ताव की डीपीआर बनेगी।

  • 10 करोड़ से कम निवेश की मानीटरिंग जिला स्तर पर, 10 से 100 करोड़ तक की औद्योगिक केन्द्र विकास निगम स्तर पर, 100 करोड़ से अधिक निवेश की मानीटरिंग राज्य स्तर पर ट्रायफेक के माध्यम से।

  • निवेश को अमली जामा पहनाने समयबद्ध चरण निर्धारित।

बैठक में श्री चौहान ने कहा कि मैं खुली आँख से सपने देखता हूँ। उत्साह को ठंडा नहीं होने दें। चार साल में मध्यप्रदेश को पूर्ण विकसित राज्य के रूप में बदलना है। सरकार के इस दृष्टिकोण में किसी भी जन-प्रतिनिधि अथवा अधिकारी का अहंकार आड़े नहीं आये।

निवेश के लिये प्रो-एक्टिव दृष्टिकोण से प्रयास करें
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में निवेश लाना राज्य की निर्वाचित सरकार का फैसला है। सभी मंत्री और अधिकारी प्रो-एक्टिव दृष्टिकोण से हरसंभव प्रयास करें। राज्य के हित में साहसिक निर्णय लें और समय-सीमा का सख्ती से पालन करें। हर विभाग अपने से संबंधित निवेशकों की जानकारी रखें और निवेशकों से सम्पर्क करें। सिंगल डोर पॉलिसी को क्रियान्वित करें। नये निवेशकों से भी सम्पर्क करें। यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर ध्यान दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वंय हर सोमवार को निवेशकों को समय निर्धारित कर मिलेंगे। मध्यप्रदेश को निवेश के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिये बड़े, मध्यम और लघु सभी तरह के उद्योगों को महत्व दिया जायेगा।

ग्लोबल टेलेंट पूल तैयार होगा
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि प्रदेश के प्रतिभावान युवाओं का ग्लोबल टेलेंट पूल तैयार करने की कार्रवाई शुरू की जाये। जैविक खेती और जैविक उत्पाद को प्रोत्साहित किया जायेगा। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना में हर जिले में दस-दस युवा उद्यमी को तैयार करें। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिये की गई घोषणाओं के संबंध में समय-सीमा में आदेश जारी किये जायें। सभी विभाग नयी कार्य-संस्कृति विकसित करें। समय-सीमा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि आगामी एक से सात नवम्बर तक मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर हर विभाग एक रचनात्मक कार्यक्रम करने की रूपरेखा बनाये। मुख्य सचिव इन कार्यक्रमों का समन्वय करेंगे।
हर निवेशक को मिलेगा यूनिक आईडिंटीफिकेशन कोड
बैठक में मुख्य सचिव श्री अंटोनी डिसा ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की उपलब्धियों और आगामी कार्रवाई के संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 200 शीर्ष उद्योगपति सहित 5,500 उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा 107 उद्योग संगठन और सार्वजनिक उपक्रम के प्रतिनिधियों तथा 2100 लघु एवं मध्यम उद्यमी भी शामिल हुए। समिट में पाँच महाद्वीप के 32 देश शामिल हुए जिनमें 9 पार्टनर कंट्री थे। इसमें 28 राजदूत और हाई कमिश्नर्स ने भाग लिया। समिट के दौरान निवेश से संबंधित विभिन्न विषयों पर 38 सत्र आयोजित किये गये। समिट के दौरान वेबसाइट के माध्यम से 4 लाख 37 हजार करोड़ के 3,164 प्रस्ताव तथा समिट के दौरान 13 घोषणा से 2 लाख 52 हजार करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव, इस तरह कुल 6 लाख 89 हजार करोड़ रूपये के 3,177 निवेश प्रस्ताव मिले। ये प्रस्ताव 21 विभाग से संबंधित हैं।
मुख्य सचिव ने बताया कि हर निवेशक को एक यूनिक आईडिंटीफिकेशन कोड नंबर आगामी 31 अक्टूबर से पहले दिया जायेगा। संबंधित विभाग का नोडल अधिकारी उनसे सम्पर्क करेगा तथा उनके प्रस्ताव की डीपीआर आगामी नवम्बर-दिसम्बर माह में तैयार करवायेगा। डीपीआर के बाद कम्बाइंड एप्लीकेशन फार्म ट्राइफेक में प्रस्तुत किया जायेगा। ट्राइफेक द्वारा निवेश प्रस्तावों की ऑनलाईन मानिटरिंग और ट्रेकिंग की प्रणाली तैयार की गई है। इन निवेश प्रस्ताव में से 99 प्रस्ताव 500 करोड़ रूपये से अधिक निवेश के हैं। इन प्रस्तावों की अलग-अलग मानीटरिंग के लिये एक-एक विशेष अधिकारी अलग से नियुक्त किया जायेगा। निवेश प्रस्तावों की साप्ताहिक और मासिक समीक्षा की जायेगी। मुख्य सचिव प्रत्येक गुरूवार को समीक्षा करेंगे। मंत्रि-परिषद के समक्ष भी मासिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जायेगा।


6 लाख 89 हजार करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव आये
Our Correspondent :11 October 2014
भोपाल । मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहाँ ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2014 के समापन समारोह में बताया कि इस समिट में 6 लाख 89 हजार करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव आये हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को देश की अर्थ-व्यवस्था का ड्राइविंग फोर्स बनाने के लिये हरसंभव प्रयास किये जायेंगे। अगली इन्वेस्टर्स समिट इंदौर में 19 से 21 अक्टूबर 2016 के बीच होगी। समारोह में उपस्थित केन्द्रीय मंत्रियों ने मध्यप्रदेश के लिये हजारों करोड़ रूपये की निवेश सौगातों की घोषणा की।

प्रत्येक निवेशक के साथ एक अधिकारी जोड़ेंगे

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि समिट में प्राप्त निवेश प्रस्तावों के आधार पर रोडमेप बनाया जायेगा। प्रत्येक निवेशक के साथ एक अधिकारी को जोड़कर सिंगल डोर व्यवस्था से स्वीकृतियाँ दिलाई जायेंगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योगों के लिये जरूरी पानी, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, भूमि, प्रतिभा और विश्वास है। इनके आधार पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' के सपने को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। मध्यप्रदेश में 'ईज़ ऑफ बिजनेस डूईंग' पर रिपोर्ट तैयार कर देश के सामने रखेंगे। उन्होंने उद्यमियों से आव्हान किया कि मध्यप्रदेश के विकास में भागीदार बनें, 'मेक इन एमपी' में शामिल हों और नये मध्यप्रदेश की रचना करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशकों के विश्वास को मध्यप्रदेश सरकार टूटने नहीं देगी। वे स्वयं हर सोमवार को निवेशकों से मुलाकात करेंगे। निवेशक अपने सुझाव आईडियास फॉर सीएम वेबसाइट पर भी दे सकते हैं। श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में ऐसी व्यवस्था बनाना चाहते हैं जिसमें मनुष्य सुखी, सफल और सार्थक जीवन जिये। मध्यप्रदेश ऐसा राज्य होगा जिसमें रचनाधर्मिता, कला और संस्कृति का सम्मान होगा। नवाचारी प्रयोगों को प्रोत्साहन देने के लिये वेंचर केपिटल फंड बनाया जायेगा।

एक लाख करोड़ का पेट्रो केमिकल इंवेस्टमेंट रीजन बनेगा

केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री अनंत कुमार ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के औद्योगिक विकास का केन्द्र बिन्दु बनेगा। उन्होंने घोषणा की कि बीना रिफायनरी के क्षेत्र में केन्द्र सरकार एक लाख करोड़ की लागत से पेट्रो केमिकल पेट्रो इन्वेस्टमेंट रीजन बनायेगी। बीना के पास देश का पहला लेण्ड लॉक पेट्रो केमिकल काम्पलेक्स बनाया जायेगा। बीना रिफायनरी की क्षमता 6 मिलियन टन से बढ़ाकर 8 मिलियन टन तक की जायेगी। इसमें 25 हजार करोड़ रूपये का निवेश बीपीसीएल द्वारा किया जायेगा। बाद में इस क्षमता को 15 मिलियन टन तक बढ़ाया जायेगा। मध्यप्रदेश में गैस अथारिटी ऑफ इंडिया द्वारा 10 हजार करोड़ के निवेश से गैस िग्रड बनाया जायेगा। जबलपुर और शहडोल में 12 हजार करोड़ रूपये के निवेश से उर्वरक संयंत्र स्थापित किये जायेंगे। मण्डीदीप में प्लास्टिक पार्क और ग्वालियर में पॉलीमर पार्क बनाया जायेगा। भोपाल में नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ फार्मा एज्यूकेशन एण्ड रिसर्च द्वारा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करेगा।
केन्द्रीय इस्पात एवं खान मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि मध्यप्रदेश में समग्र और संतुलित विकास की कल्पना को मूर्तरूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उपक्रम सेल मध्यप्रदेश में 50 मिलियन टन आयरन खनिज का एसेस कर रहे हैं। इसके पॉयलट प्लांट में 1500 करोड़ रूपये का निवेश किया जायेगा। यदि 140 मिलियन टन तक आयरन खनिज एसेस होता है, तो 12 हजार करोड़ की लागत से स्टील प्लांट लगाया जायेगा। नालको बॉक्साइट रिजर्व क्षेत्र में एल्यूमीनियम रिफायनरी के लिये 6000 करोड़ का निवेश करेगा। सौर ऊर्जा के लिये एचसीएल 100 करोड़ तथा मेगनीज संयंत्र के लिये मॉइल 250 करोड़ रूपये का निवेश करेगा। इसी तरह एनएमडीसी टीकमगढ़ में हीरा उत्खनन के लिये 1000 करोड़ कानिवेश करेगा। एनएमडीसी अगले तीन साल के भीतर मध्यप्रदेश के जियो केमिकल और जियो माइनिंग सर्वे का काम पूरा करेगा। कोल ब्लॉक पर आधारित पावर प्लांट के लिये नालको 19 हजार करोड़ रूपये तथा एनएमडीसी 3000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा।
केन्द्रीय सामाजिक न्याय मंत्री श्री थावर चन्द्र गेहलोत ने कहा कि मध्यप्रदेश में 50 करोड़ की लागत से राष्ट्रीय मानसिक चिकित्सा एवं पुनर्वास केन्द्र की स्थापना की जा रही है। नि:शक्तजन के लिये कम्पोजिट रीजनल सेंटर और सभी जिलों में नि:शक्त पुनर्वास केन्द्र स्वीकृत किये गये हैं। सभी संभागीय मुख्यालय पर एक-एक रीजनल सेंटर स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक संस्थानों के नेट प्राफिट में से दो प्रतिशत कार्पोरेट-सोशल रिस्पांसबिलिटी के लिये देने का प्रावधान है।

मात्र 120 दिन में मिली प्रदेश की 60 परियोजना को पर्यावरण स्वीकृति

केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि मध्यप्रदेश के सभी क्षेत्र की 60 परियोजनाओं की पर्यावरण स्वीकृति पिछले 120 दिन में दी गई है। इनमें पॉवर, सिंचाई और माइनिंग से संबंधित विभिन्न परियोजनाएँ हैं। उनके विभाग द्वारा पर्यावरण से जुड़ी स्वीकृतियाँ देने की प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है। इसके लिये ऑनलाइन आवेदन करने की व्यवस्था शुरू की गई है। पॉवर ट्रांसमिशन लाइन, सिंचाई पाइप लाइन, सड़क और रेलवे के लीनियर प्रोजेक्ट की स्वीकृति देने का भी विकेन्द्रीकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि देश का विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ होगा।

म.प्र. का विकास मॉडल अन्य प्रदेश के लिये मिसाल

केन्द्रीय कोयला एवं नवीन और नवीनीकृत ऊर्जा राज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा कि मध्यप्रदेश का विकास मॉडल अन्य राज्य के लिये मिसाल है। उन्होंने बताया कि एनटीपीसी का सबसे ज्यादा केपिटल इंवेस्टमेंट मध्यप्रदेश में 75 हजार करोड़ रूपये का है। एनटीपीसी द्वारा गाडरवारा में 1320 मेगावॉट का पॉवर प्लांट बनाया जा रहा है। दो अन्य पॉवर प्लांट के लिये टेण्डर की प्रक्रिया शुरू की गई है। नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश में 50 हजार करोड़ रूपये का निवेश किया जायेगा। स्वच्छ भारत अभियान में ऊर्जा मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम मध्यप्रदेश में 125 करोड़ की लागत से 12 हजार 477 स्कूल में शौचालय बनवायेंगे। इसके अलावा कार्पोरेट-सोशल रिस्पांसबिलिटी के तहत 300 करोड़ रूपये और खर्च करेंगे।
केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि दिल्ली, मुम्बई इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर मध्यप्रदेश में पीथमपुर-धार-महू क्षेत्र में सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल हब बनेगा। इसी परियोजना में उज्जैन के पास स्मार्ट इण्डस्ट्रियल सिटी विकसित होगी। मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन के लिये खाद्य प्र-संस्करण संयंत्र स्थापित किये जायेंगे। इसके लिये केन्द्र, राज्य सरकार के साथ कार्य करेगा। मध्यप्रदेश में तेजी से फॉरेन इक्विटी फ्लो बढ़ रहा है।

उद्योग जगत हुआ निहाल-बढ़-चढ़कर दिये निवेश प्रस्ताव

समारोह में उपस्थित उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव बताये तथा मध्यप्रदेश में अपनी निवेश योजनाओं की जानकारी दी। जे पी ग्रुप के श्री जयप्रकाश गौर ने कहा कि उनका समूह मध्यप्रदेश में 35 हजार करोड़ रूपये का निवेश करेगा। जिसमें सीमेंट प्लांट, रीवा में स्मार्ट सिटी, टी वी चेनल तथा हिन्दी समाचार-पत्र शामिल है। उन्होंने कहा कि उनका समूह मध्यप्रदेश में बीते 40 वर्ष से कार्य कर रहा है।
एस्सेल ग्रुप के श्री सुभाष चन्द्रा ने बताया कि उनका समूह मध्यप्रदेश में 5000 करोड़ रूपये का निवेश कर चुका है तथा 50 हजार करोड़ रूपये का निवेश वे 6 परियोजना में करने वाले हैं। इसमें प्रदेश के पाँच शहर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने तथा हेल्थ और वेलनेस प्रोजेक्ट शामिल हैं।
स्पेन के राजदूत श्री गुस्ताव मेन्यूअल ने कहा कि निवेशक मध्यप्रदेश की सिंगल डोर पॉलिसी से प्रभावित हैं। उनके देश के बड़े उद्योग अधोसंरचना, परिवहन और नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं।
स्वीडन के राजदूत श्री हेराल्ट सेंडबर्ग ने कहा कि आर्थिक विकास के क्षेत्र में स्वीडन की बड़ी कम्पनियाँ सेवा और निर्माण क्षेत्र में निवेश करने के लिये उत्साहित है। प्रसिद्ध फिल्म निदेशक श्री प्रकाश झा ने कहा कि मध्यप्रदेश देश की आत्मा है। मध्यप्रदेश अपने जैसा है और बहुत प्यार करता है। वे यहाँ इस वर्ष चार फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं।

32 देश, 9 पार्टनर कन्ट्री और 28 राजदूत ने की भागीदारी

कार्यक्रम में मुख्य सचिव श्री अंटोनी डिसा ने समिट की समरी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि समिट के दौरान कुल 32 देश और 9 पार्टनर कंट्री सहित 28 राजदूत शामिल हुए। समिट के दौरान 38 सत्र में निवेशकों ने हिस्सा लिया। इनमें 150 से अधिक विषय-विशेषज्ञ ने प्रस्तुतीकरण दिया। कार्यक्रम में पुस्तकों 'इन्दौर एण्ड सराउन्डिंग' और 'रेसीडेंसी इंदौर' का विमोचन किया गया। आरंभ में स्वागत भाषण सीआईआई के महानिदेशक श्री सी. बेनर्जी ने दिया।
समारोह में प्रदेश की वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया, वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया, ऊर्जा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री पारस जैन, परिवहन मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह, राजस्व मंत्री श्री रामपाल सिंह और पर्यटन राज्य मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा सहित उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित थे।ं।


6 लाख 89 हजार करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव आये
Our Correspondent :11 October 2014
भोपाल । मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहाँ ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2014 के समापन समारोह में बताया कि इस समिट में 6 लाख 89 हजार करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव आये हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को देश की अर्थ-व्यवस्था का ड्राइविंग फोर्स बनाने के लिये हरसंभव प्रयास किये जायेंगे। अगली इन्वेस्टर्स समिट इंदौर में 19 से 21 अक्टूबर 2016 के बीच होगी। समारोह में उपस्थित केन्द्रीय मंत्रियों ने मध्यप्रदेश के लिये हजारों करोड़ रूपये की निवेश सौगातों की घोषणा की।

प्रत्येक निवेशक के साथ एक अधिकारी जोड़ेंगे

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि समिट में प्राप्त निवेश प्रस्तावों के आधार पर रोडमेप बनाया जायेगा। प्रत्येक निवेशक के साथ एक अधिकारी को जोड़कर सिंगल डोर व्यवस्था से स्वीकृतियाँ दिलाई जायेंगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योगों के लिये जरूरी पानी, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, भूमि, प्रतिभा और विश्वास है। इनके आधार पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' के सपने को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। मध्यप्रदेश में 'ईज़ ऑफ बिजनेस डूईंग' पर रिपोर्ट तैयार कर देश के सामने रखेंगे। उन्होंने उद्यमियों से आव्हान किया कि मध्यप्रदेश के विकास में भागीदार बनें, 'मेक इन एमपी' में शामिल हों और नये मध्यप्रदेश की रचना करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशकों के विश्वास को मध्यप्रदेश सरकार टूटने नहीं देगी। वे स्वयं हर सोमवार को निवेशकों से मुलाकात करेंगे। निवेशक अपने सुझाव आईडियास फॉर सीएम वेबसाइट पर भी दे सकते हैं। श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में ऐसी व्यवस्था बनाना चाहते हैं जिसमें मनुष्य सुखी, सफल और सार्थक जीवन जिये। मध्यप्रदेश ऐसा राज्य होगा जिसमें रचनाधर्मिता, कला और संस्कृति का सम्मान होगा। नवाचारी प्रयोगों को प्रोत्साहन देने के लिये वेंचर केपिटल फंड बनाया जायेगा।

एक लाख करोड़ का पेट्रो केमिकल इंवेस्टमेंट रीजन बनेगा

केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री अनंत कुमार ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के औद्योगिक विकास का केन्द्र बिन्दु बनेगा। उन्होंने घोषणा की कि बीना रिफायनरी के क्षेत्र में केन्द्र सरकार एक लाख करोड़ की लागत से पेट्रो केमिकल पेट्रो इन्वेस्टमेंट रीजन बनायेगी। बीना के पास देश का पहला लेण्ड लॉक पेट्रो केमिकल काम्पलेक्स बनाया जायेगा। बीना रिफायनरी की क्षमता 6 मिलियन टन से बढ़ाकर 8 मिलियन टन तक की जायेगी। इसमें 25 हजार करोड़ रूपये का निवेश बीपीसीएल द्वारा किया जायेगा। बाद में इस क्षमता को 15 मिलियन टन तक बढ़ाया जायेगा। मध्यप्रदेश में गैस अथारिटी ऑफ इंडिया द्वारा 10 हजार करोड़ के निवेश से गैस िग्रड बनाया जायेगा। जबलपुर और शहडोल में 12 हजार करोड़ रूपये के निवेश से उर्वरक संयंत्र स्थापित किये जायेंगे। मण्डीदीप में प्लास्टिक पार्क और ग्वालियर में पॉलीमर पार्क बनाया जायेगा। भोपाल में नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ फार्मा एज्यूकेशन एण्ड रिसर्च द्वारा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करेगा।
केन्द्रीय इस्पात एवं खान मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि मध्यप्रदेश में समग्र और संतुलित विकास की कल्पना को मूर्तरूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उपक्रम सेल मध्यप्रदेश में 50 मिलियन टन आयरन खनिज का एसेस कर रहे हैं। इसके पॉयलट प्लांट में 1500 करोड़ रूपये का निवेश किया जायेगा। यदि 140 मिलियन टन तक आयरन खनिज एसेस होता है, तो 12 हजार करोड़ की लागत से स्टील प्लांट लगाया जायेगा। नालको बॉक्साइट रिजर्व क्षेत्र में एल्यूमीनियम रिफायनरी के लिये 6000 करोड़ का निवेश करेगा। सौर ऊर्जा के लिये एचसीएल 100 करोड़ तथा मेगनीज संयंत्र के लिये मॉइल 250 करोड़ रूपये का निवेश करेगा। इसी तरह एनएमडीसी टीकमगढ़ में हीरा उत्खनन के लिये 1000 करोड़ कानिवेश करेगा। एनएमडीसी अगले तीन साल के भीतर मध्यप्रदेश के जियो केमिकल और जियो माइनिंग सर्वे का काम पूरा करेगा। कोल ब्लॉक पर आधारित पावर प्लांट के लिये नालको 19 हजार करोड़ रूपये तथा एनएमडीसी 3000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा।
केन्द्रीय सामाजिक न्याय मंत्री श्री थावर चन्द्र गेहलोत ने कहा कि मध्यप्रदेश में 50 करोड़ की लागत से राष्ट्रीय मानसिक चिकित्सा एवं पुनर्वास केन्द्र की स्थापना की जा रही है। नि:शक्तजन के लिये कम्पोजिट रीजनल सेंटर और सभी जिलों में नि:शक्त पुनर्वास केन्द्र स्वीकृत किये गये हैं। सभी संभागीय मुख्यालय पर एक-एक रीजनल सेंटर स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक संस्थानों के नेट प्राफिट में से दो प्रतिशत कार्पोरेट-सोशल रिस्पांसबिलिटी के लिये देने का प्रावधान है।

मात्र 120 दिन में मिली प्रदेश की 60 परियोजना को पर्यावरण स्वीकृति

केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि मध्यप्रदेश के सभी क्षेत्र की 60 परियोजनाओं की पर्यावरण स्वीकृति पिछले 120 दिन में दी गई है। इनमें पॉवर, सिंचाई और माइनिंग से संबंधित विभिन्न परियोजनाएँ हैं। उनके विभाग द्वारा पर्यावरण से जुड़ी स्वीकृतियाँ देने की प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है। इसके लिये ऑनलाइन आवेदन करने की व्यवस्था शुरू की गई है। पॉवर ट्रांसमिशन लाइन, सिंचाई पाइप लाइन, सड़क और रेलवे के लीनियर प्रोजेक्ट की स्वीकृति देने का भी विकेन्द्रीकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि देश का विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ होगा।

म.प्र. का विकास मॉडल अन्य प्रदेश के लिये मिसाल

केन्द्रीय कोयला एवं नवीन और नवीनीकृत ऊर्जा राज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा कि मध्यप्रदेश का विकास मॉडल अन्य राज्य के लिये मिसाल है। उन्होंने बताया कि एनटीपीसी का सबसे ज्यादा केपिटल इंवेस्टमेंट मध्यप्रदेश में 75 हजार करोड़ रूपये का है। एनटीपीसी द्वारा गाडरवारा में 1320 मेगावॉट का पॉवर प्लांट बनाया जा रहा है। दो अन्य पॉवर प्लांट के लिये टेण्डर की प्रक्रिया शुरू की गई है। नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश में 50 हजार करोड़ रूपये का निवेश किया जायेगा। स्वच्छ भारत अभियान में ऊर्जा मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम मध्यप्रदेश में 125 करोड़ की लागत से 12 हजार 477 स्कूल में शौचालय बनवायेंगे। इसके अलावा कार्पोरेट-सोशल रिस्पांसबिलिटी के तहत 300 करोड़ रूपये और खर्च करेंगे।
केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि दिल्ली, मुम्बई इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर मध्यप्रदेश में पीथमपुर-धार-महू क्षेत्र में सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल हब बनेगा। इसी परियोजना में उज्जैन के पास स्मार्ट इण्डस्ट्रियल सिटी विकसित होगी। मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन के लिये खाद्य प्र-संस्करण संयंत्र स्थापित किये जायेंगे। इसके लिये केन्द्र, राज्य सरकार के साथ कार्य करेगा। मध्यप्रदेश में तेजी से फॉरेन इक्विटी फ्लो बढ़ रहा है।

उद्योग जगत हुआ निहाल-बढ़-चढ़कर दिये निवेश प्रस्ताव

समारोह में उपस्थित उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव बताये तथा मध्यप्रदेश में अपनी निवेश योजनाओं की जानकारी दी। जे पी ग्रुप के श्री जयप्रकाश गौर ने कहा कि उनका समूह मध्यप्रदेश में 35 हजार करोड़ रूपये का निवेश करेगा। जिसमें सीमेंट प्लांट, रीवा में स्मार्ट सिटी, टी वी चेनल तथा हिन्दी समाचार-पत्र शामिल है। उन्होंने कहा कि उनका समूह मध्यप्रदेश में बीते 40 वर्ष से कार्य कर रहा है।
एस्सेल ग्रुप के श्री सुभाष चन्द्रा ने बताया कि उनका समूह मध्यप्रदेश में 5000 करोड़ रूपये का निवेश कर चुका है तथा 50 हजार करोड़ रूपये का निवेश वे 6 परियोजना में करने वाले हैं। इसमें प्रदेश के पाँच शहर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने तथा हेल्थ और वेलनेस प्रोजेक्ट शामिल हैं।
स्पेन के राजदूत श्री गुस्ताव मेन्यूअल ने कहा कि निवेशक मध्यप्रदेश की सिंगल डोर पॉलिसी से प्रभावित हैं। उनके देश के बड़े उद्योग अधोसंरचना, परिवहन और नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं।
स्वीडन के राजदूत श्री हेराल्ट सेंडबर्ग ने कहा कि आर्थिक विकास के क्षेत्र में स्वीडन की बड़ी कम्पनियाँ सेवा और निर्माण क्षेत्र में निवेश करने के लिये उत्साहित है। प्रसिद्ध फिल्म निदेशक श्री प्रकाश झा ने कहा कि मध्यप्रदेश देश की आत्मा है। मध्यप्रदेश अपने जैसा है और बहुत प्यार करता है। वे यहाँ इस वर्ष चार फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं।

32 देश, 9 पार्टनर कन्ट्री और 28 राजदूत ने की भागीदारी

कार्यक्रम में मुख्य सचिव श्री अंटोनी डिसा ने समिट की समरी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि समिट के दौरान कुल 32 देश और 9 पार्टनर कंट्री सहित 28 राजदूत शामिल हुए। समिट के दौरान 38 सत्र में निवेशकों ने हिस्सा लिया। इनमें 150 से अधिक विषय-विशेषज्ञ ने प्रस्तुतीकरण दिया। कार्यक्रम में पुस्तकों 'इन्दौर एण्ड सराउन्डिंग' और 'रेसीडेंसी इंदौर' का विमोचन किया गया। आरंभ में स्वागत भाषण सीआईआई के महानिदेशक श्री सी. बेनर्जी ने दिया।
समारोह में प्रदेश की वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया, वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया, ऊर्जा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री पारस जैन, परिवहन मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह, राजस्व मंत्री श्री रामपाल सिंह और पर्यटन राज्य मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा सहित उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित थे।ं।


मध्यप्रदेश में आईटी के क्षेत्र में अच्छा काम हुआ
Our Correspondent :11 October 2014
भोपाल । ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान आज इन्दौर में मध्यप्रदेश में आईटी, आईटीईएस, बीपीओ, बीपीएम में निवेश की सुविधाओं विषयक सेक्टोरल सेमीनार में मध्यप्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुए काम की सराहना की गई। सेमीनार में भारत सरकार के अधिकारियों, उद्यमियों तथा विशेषज्ञों ने प्रतिभागिता की। उन्होंने इस काम को और बेहतर करने के संबंध में सुझाव भी दिये।
भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. आर.एस. शर्मा ने अपने मुख्य वक्तव्य में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया के अभियान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य भारत के हर नागरिक की ब्राण्ड बेंड कनेक्टिविटी तक पहुँच बनाना है। अगले दो वर्ष में हर पंचायत में यह सुविधा उपलब्ध हो जायेगी। डिजिटल सर्विस डिलीवरी के विषय में उन्होंने बताया कि इसमें पहचान के प्रमाणीकरण पर जोर दिया गया है। प्रत्येक व्यक्ति के पास मोबाइल फोन होना चाहिए, जिससे वह डिजिटल सुविधाओं का लाभ ले सके। डिजिटल इंडिया में हर नागरिक के बेंक एकाउंट खोलने की योजना है। वित्तीय समावेशन डिजिटल इंडिया का महत्वपूर्ण अंग है।
श्री शर्मा ने बताया कि डिजिटल इंडिया में सरकार द्वारा जारी किये जाने वाले सभी प्रमाण-पत्र और दस्तावेज डिजिटाइज होंगे। किसी भी व्यक्ति को सरकार के विभागों द्वारा जारी प्रमाण-पत्रों की प्रति दिखाने के लिये मजबूर नहीं किया जायेगा। साथ ही कोई व्यक्ति देश के किसी भी कोने में रहे, उसे पात्रता के अनुसार सुविधाएँ वहीं मिलेंगी। नगद भुगतान को कम से कम कर इलेक्ट्रॉनिक भुगतान को अधिकतम किया जायेगा।
प्रो. शर्मा ने कहा कि ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में बहुत अच्छा काम हुआ है। अभी विभिन्न एप्लीकेशन्स के बीच कनेक्टिविटी देना जरूरी है। ई-गवर्नेंस मोबाइल फोन पर उपलब्ध हो और इसके एप्लीकेशन्स को री-डिजाइन करने की जरूरत है।
पार्टनर, इन्फ्रा-स्ट्रक्चर्स एण्ड गव्हनर्मेंट सर्विसेज के श्री जयजीत भट्टाचार्य ने ईएसडीएम नीतियों के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहाकि इलेक्ट्रॉनिक के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने प्रक्रियाओं को सरल बनाने के साथ-साथ इससे जुड़े विषयों पर जन-जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया। अनेक देशों का उदाहरण देते हुए बेहतर कनेक्टिविटी की जरूरत बताई। वीपी हेड-ग्लोबल गव्हनर्मेंट इंडस्ट्री ग्रुप के श्री तन्मय चक्रवर्ती ने मध्यप्रदेश में हुए शानदार विकास के लिये सरकार और मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आईटी, आईटीईएस, बीपीओ, बीपीएम के क्षेत्र में अच्छा काम हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्हें मध्यप्रदेश को केवल एक सुझाव देना है कि अगली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तक सरकार की सारी सुविधाओं और प्रक्रियाओं को डिजिटाइज कर लिया जाये। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में एन्ड्राइड मोबाइल फोन का व्यापक रूप से प्रयोग होने लगा है। अत: अब हमें एम-गवर्नेंस की ओर बढ़ने की जरूरत है।
टेली परफार्मेंस इंडिया के श्री संजय मेहता ने कहा कि उनकी कंपनी 2007 से प्रदेश में बीपीओ सेवाएँ दे रही हैं और अभी तक कोई समस्या नहीं आई है। यहाँ की सरकार बहुत संवेदनशील है और तत्काल कार्यवाही करती है। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था में बड़ी संख्या में कर्मचारी छोटे शहरों से और 25 साल से कम उम्र के हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में प्रशिक्षण सुविधा के विस्तार की जरूरत बताते हुए ट्रेनिंग सब्सिडी दिये जाने का सुझाव दिया।
डायरेक्टर सर्व इन बीपीओ सर्विसेज श्री अभिषेक गुप्ता ने कहा कि उन्हें भोपाल में बीपीओ चलाने का बहुत अच्छा अवसर प्राप्त हुआ है। उन्हें इस काम में कोई कठिनाई नहीं आई है और उनका व्यवसाय सुचारू रूप से चल रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की बीपीओ नीति बहुत अच्छी है। उन्होंने छोटे उद्यमियों को ग्रामीण क्षेत्रों में बीपीओ स्थापित करने का सुझाव दिया। मेनेजिंग डायरेक्टर नेटलिंक साफ्टवेयर श्री अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार की अच्छी नीतियों और संवेदनशील प्रशासन के कारण यहाँ उद्योगपति निवेश करने को आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने छोटे शहरों में युवाओं को रोजगार देने तथा लोगों को सुविधाएँ देने के लिये बीपीओ स्थापित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इसके लिये युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
असेंचर इंडिया के वाईस प्रेसीडेंट श्री रवीन्द्र रेड्डी ने इस क्षेत्र में दुनिया में हुए अच्छे कार्यों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय उद्यमियों के माध्यम से इस क्षेत्र में उद्यम शुरू किये जाने चाहिए। उन्होंने स्थानीय तौर पर टेलेंट पूल बनाने का भी सुझाव दिया।
सूचना प्रौद्योगिकी एवं मुख्यमंत्री के सचिव श्री हरिरंजन राव ने विषय-प्रवर्तन कर सेमीनार के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
मध्यप्रदेश इलेक्ट्रानिक विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री एम. सेलवेन्द्रन ने कहा कि सेमीनार में विशेषज्ञों द्वारा दिये गये सुझावों को शासन की नीति में शामिल किया जायेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी समय-समय पर आवश्यकतानुसार नीतिगत परिवर्तन किये जाते रहेंगे।।


स्मार्ट सिटी निवेशकों के लिये बेहतर मौका
Our Correspondent :10 October 2014
भोपाल । मध्यप्रदेश में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये जो नागरिक सुविधाएँ और अधोसंरचना विकसित होगी उसमें निवेश के लिये निवेशकों को बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 100 शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा को लेकर देशभर में अपार उत्साह का वातावरण है, निवेशकों को इसका लाभ उठाना चाहिए। यह जानकारी प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास एस.एन. मिश्रा ने आज ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 'स्मार्ट एण्ड लिवेबल सिटीज थ्रू टीओडी' विषयक पर सेमीनार में निवेशकों को दी।
एस.एन. मिश्रा ने बताया कि शहरों में बढ़ती आबादी से स्मार्ट सिटी की अवधारणा को महत्व मिल रहा है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी ऐसी हो जिसकी अधोसंरचना मजबूत और वहाँ सभी नागरिक सुविधाएँ बेहतर हों। उस क्षेत्र की विद्युत, जल, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन आदि बुनियादी सुविधाओं का प्रबंधन भी अच्छा हो। स्मार्ट शहर की कनेक्टिविटी अन्य क्षेत्र से सुलभ हो, जिससे आम आदमी एक स्थान से दूसरे स्थान सुगमता से पहुँच सके। श्री मिश्रा ने बताया कि अभी इंदौर और भोपाल में लाईट मेट्रो सेवा शुरू करने की योजना शुरू की गई है। सेमीनार में दोनों शहर की मेट्रो परियोजना को फिल्म के जरिये दिखाया गया।
गृह निर्माण मण्डल के आयुक्त श्री नीतेश व्यास ने कहा कि प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप स्मार्ट सिटी की प्रभावी पहल में मध्यप्रदेश सरकार पूरा सहयोग करेगी। सेमीनार में भोपाल के नार्थ टी.टी. नगर की पुनर्घत्वीकरण योजना का प्रस्तुतिकरण भी हुआ।
सेमीनार में गुजरात इंटरनेशनल फायनेंस टेक-सिटी कंपनी लिमिटेड (गिफ्ट) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री डी.एल.एन. मूर्ति ने अहमदाबाद विमान तल के समीप निर्मित स्मार्ट सिटी की विस्तृत जानकारी देते हुए ट्रांजिस्ट ओरिएन्टेड डेवलपमेंट (टीओपी) के लाभ की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी में नागरिक परिवहन सेवा का प्रभावी होना जरूरी है।
भारतीय ग्रुप के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर शैलेष पाठक ने कहा कि स्मार्ट सिटी ऐसी हो जहाँ तीन साल का बच्चा भी अकेले स्कूल जा सके। स्मार्ट सिटी में आई टी केम्पस, स्कूल, हास्पिटल आदि की सुविधाएँ उपलब्ध हों।
सिटी कार्पोरेशन लिमिटेड के डायरेक्टर जे.के. भोंसले ने आदर्श स्मार्ट सिटी की रूपरेखा की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उनकी कम्पनी भोपाल-इंदौर के बीच विकसित होने वाले सुपर इकानॉमिक कॉरीडोर में अपनी सेवाएँ देने को इच्छुक हैं।


मप्र में वर्ष 2017 तक पवन ऊर्जा से 3261 मेगावाट बिजली पैदा होगी
Our Correspondent :10 October 2014
भोपाल । नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि विभाग के माध्यम से अपरमपारिक ऊर्जा स्त्रोतों से विद्युत क्षमता को बढ़ावा देने के लिये निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आकर्षक नीति के चलते इस क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति हो रही है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में वर्ष 2017 तक पवन ऊर्जा से 3261 मोगावाट बिजली पैदा होगी और मध्यप्रदेश की पवन उर्जा से बिजली पैदा करने वाले श्रेष्ठ राज्य के रूप में पहचान होगी। उन्होंने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश करने वाले निवेशकों को राज्य सरकार की ओर से हरसंभव मदद दी जायेगी।
उर्जा मंत्री श्री शुक्ल आज इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में “एमपी द इमेजिंग विण्ड पावर हब ऑफ द नेशन’’ सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। इस मौके पर 107 मेगावाट विण्ड के प्रोजेक्ट-पत्र लेटर ऑफ कमिटमेंट किया गया। इस सत्र में मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान और मुख्य सचिव श्री अन्टोनी डिसा ने भी शिरकत कर प्रदेश में होने वाले निवेश के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा निवेशकों का मनोबल बढ़ाया।
मंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि पिछले वर्षों में नवकरणीय उर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को न केवल देश में बल्कि एशिया में विशिष्ट पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि पवन उर्जा के उत्पादन के लिये मध्यप्रदेश में अनुकूल स्थान उपलब्ध है। श्री शुक्ल ने बताया कि इंदौर के पास देवास में भारत का एक बड़ा पवन उर्जा संयंत्र कार्य कर रहा है। श्री शुक्ल ने बताया कि विण्ड एनर्जी पावर पॉलिसी 2012 के बाद प्रदेश में 5,500 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएँ आयी हैं।
अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय उर्जा श्री एस.आर.मोहंती ने विभागीय गतिविधि तथा उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ग्रीन कॉरिडोर में मध्यप्रदेश के शामिल होने पर निवेशकों ने अपनी रूचि दिखाई है। उन्होंने कहा कि पवन उर्जा के प्रोजेक्ट में विश्व बेंक और एशियाई बेंक मदद करने के लिये तैयार है।
सत्र में संयुक्त सचिव भारत सरकार आलोक श्रीवास्तव, एम.डी.रिन्यूएबल पॉवर श्री सुमंत सिन्हा, एम.डी. गणेशा पॉवर रमेश केमल, सीएमडी रीजेन पॉवर श्री गौतम चोपड़ा ने विण्ड पॉवर के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों की जानकारी ली। श्री केमल द्वारा प्रदेश में विण्ड पावर के क्षेत्र में 1000 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। उन्होंने मध्यप्रदेश की खूबियों के बारे में भी जानकारी दी। श्री केमल ने बताया कि उनके द्वारा पवन उर्जा में उपयोग में आने वाली ब्लेड की मेन्युफेक्चरिंग फेक्ट्री लगायी जा रही है। वक्ताओं ने बताया कि पवन उर्जा के 175 मेगावाट क्षमता के प्रोजेक्ट वर्तमान में रतलाम, मंदसौर में चल रहे हैं।


अब 100 बिस्तर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के लिये भी रियायती दर पर भूमि
Our Correspondent :10 October 2014
भोपाल । प्रदेश में जनता को बेहतर स्वास्थ्य और उपचार सुविधाएँ मुहैया करवाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को अब अधिक प्रोत्साहन दिया जायेगा। इसके लिये हेल्थ केयर इन्वेस्टमेंट पॉलिसी 2012 में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है। इससे इस क्षेत्र में निवेशकों को और अधिक सहायता प्राप्त होगी। प्रदेश में अब 100 बिस्तर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के लिये भी रियायती दर पर भूमि उपलब्ध होगी। पूर्व में कम से कम 200 बिस्तर के अस्पताल की स्थापना पर यह सुविधा दी जाती थी। स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग अब सूचना प्रौद्योगिकी के साधनों का और अधिक प्रयोग करेंगे। प्रमुख सचिव अजय तिर्की ने आज इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आयोजित दो सत्र में निवेशकों से चर्चा करते हुए यह जानकारी दी।
श्री तिर्की ने बताया कि राज्य सरकार ने प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों के लिये विशेष पेकेज नीति निर्धारित करते हुए संशोधित आदेश जारी किया है। प्रदेश के इंदौर नगर को छोड़कर शेष नगर निगम, नगर पालिका और पंचायत क्षेत्र के लिये यह संशोधन मान्य होंगे। सौ बिस्तर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के निर्माण के लिये एक एकड़ तक, 200 बिस्तरीय अस्पताल के लिये 2 एकड़, 300 बिस्तरीय अस्पताल के लिये 3 एकड़ तक, 400 बिस्तरीय अस्पताल के लिये 4 एकड़ तक और 500 बिस्तरीय सुपर स्पेशलिटी अस्पताल या उससे अधिक बिस्तरीय अस्पताल के निर्माण के लिये 5 एकड़ तक शासकीय भूमि रियायती दर पर उपलब्ध करवाई जायेगी। शासकीय भूमि के मूल्य में भोपाल नगर निगम क्षेत्र में 40 प्रतिशत और प्रदेश के अन्य नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्र (इंदौर नगरीय क्षेत्र छोड़कर) में 60 प्रतिशत छूट दी जायेगी। सुविधाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड ऑफ हास्पिटल्स से अधिमान्यता की अनिवार्यता रहेगी।
प्रमुख सचिव ने बताया कि प्रशासकीय विभाग पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से भूमि आवंटन के लिये उपयुक्त्निवेशक चुनेंगे। शासकीय भूमि के मूल्य में रियायत, भूमि के मूल्य को छोड़कर कुल परियोजना लागत की 25 प्रतिश्त से अधिक नहीं होगी। आवंटित भूमि पर अस्पताल निर्माण का कार्य एक साल में शुरू करना अनिवार्य होगा। विलंब की स्थिति में भूमि का आवंटन स्वमेव निरस्त माना जायेगा। आवंटन की तिथि से 3 साल की अवधि में अस्पताल का संचालन भी प्रारंभ करना होगा। रियायती दर पर भूमि उपलब्ध करवाने पर परियोजना के लिये पूँजीगत और ब्याज अनुदान की पात्रता नहीं होगी। अस्पताल के लिये रियायती दर पर भूमि उपलब्ध करवाने पर जनरल वार्ड के लिये कुल बिस्तर क्षमता के 50 प्रतिश्त बिस्तर आरक्षित रखने की अनिवार्यता रहेगी। आवंटित भूमि का उपयोग किसी भी दशा में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के अलावा अन्य किसी प्रयोजन के लिये नहीं किया जा सकेगा।।


मध्यप्रदेश में इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मेनेजमेंट सिस्टम पर अमल होगा
Our Correspondent :10 October 2014
भोपाल । मध्यप्रदेश के 377 शहरी नगरीय निकायों के लिए इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मेनेजमेंट सिस्टम स्थापित कर अमल किया जायगा। नगरीय निकायों को 25-26 क्लस्टर में विभाजित कर सिस्टम का क्रियान्वयन होगा। यह परियोजना निजी-जन भागीदारी (PPP) मोड पर संचालित होगी। परियोजना लागत का 70 प्रतिशत राज्य शासन और 30 प्रतिशत निजी क्षेत्र द्वारा राशि वहन किया जायेगा। यह जानकारी आज ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में “वेस्ट मेनेजमेंट- ए स्टेट टूवर्ड सस्टेनेबिलिटी” विषयक सेमीनार में आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास संजय शुक्ला ने निवेशकों को दी। सेमीनार में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्य सचिव अंटोनी डिसा भी शामिल हुए।
श्री शुक्ल ने निवेशकों को मध्यप्रदेश में वेस्ट मेनेजमेंट के संबंध में कुछ नगरीय निकायों द्वारा पीपीपी मोड द्वारा किये गये कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नगर परिषद नामली, सैलाना, गौतमपुरा, राजगढ़ (धार) और महेश्वर कचरामुक्त शहर घोषित हो चुके हैं। जन-भागीदारी से संचालित कार्यक्रम में चित्रकूट नगर पालिका भी इसमें शामिल है। कार्यक्रम में घर-घर से कचरे का संग्रहण, परिवहन, प्रोसेसिंग, आईईसी गतिविधियाँ और निर्वाचित जन-प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका दिखी है। इन्दौर नगर निगम ने भी पीपीपी मोड के जरिये ए टू जेड गुडगाँव प्रा.लि. के साथ इस दिशा में कार्य किया है। ग्वालियर नगर निगम भी निजी क्षेत्र की भागीदारी से कार्य कर रहा है।
श्री शुक्ल ने निवेशकों को बताया कि मध्यप्रदेश सरकार ने विजन 2018 में सभी शहरी-नगरीय निकायों में सॉलिड वेस्ट मेनेजमेंट को अमल में लाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सभी शहरों में घर-घर से कचरा एकत्रित कर उसका डिस्पोजल करवाया जायेगा। क्लस्टर आधारित प्रोजेक्ट में प्रत्येक 50-80 किलोमीटर परिधि के निकायों का एक क्लस्टर रहेगा, उसमें छोटे निकाय भी शामिल रहेंगे। श्री शुक्ल ने कहा कि शहरों में कचरा प्रबंधन आर्थिक एवं सामाजिक लाभ का विषय है।
आयुक्त नगर तथा ग्राम निवेश श्री गुलशन बामरा ने निवेशकों से वेस्ट मेनेजमेंट सिस्टम के लिए मध्यप्रदेश में निवेश का अनुरोध किया।
राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्था, नागपुर के प्रधान वैज्ञानिक प्रो. ए.एन. वैद्य ने कचरा प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिये। एम.के. एरोमेटिक्स लिमिटेड के चेयरमेन श्री महेश के. मर्चेंट ने उपयोग किये जा चुके प्लास्टिक के संग्रहण और डि-कम्पोज की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए उसके सामाजिक लाभ बताये।
जाधवपुर विश्वविद्यालय के मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रो. साधन के. घोष ने कहा कि प्रदेश में वेस्ट मेनेजमेंट के सर्विस प्रोवाइडर बड़ी संख्या में मौजूद हैं। वेस्ट मेनेजमेंट में समाज की सहभागिता के साथ ही सही तकनीक की जानकारी भी होना चाहिए। उन्होंने इसके लिए नीति निर्धारित करने का सुझाव भी दिया। ए टू जेड इंटरनेशनल लिमिटेड के संचालक दीपक अग्रवाल ने सिस्टम स्थापित करने के लिए निजी क्षेत्र में क्षमता विकसित करने तथा समाज में जागरूकता लाने को कहा। सूरत नगर निगम के आयुक्त मिलिंद तोरावाने ने अपने शहर के वेस्ट मेनेजमेंट की जानकारी दी। सेमीनार में बड़ी संख्या में निवेशक उपस्थित थे।



Our Correspondent :10 October 2014
भोपाल । प्रत्येक कंपनी को वित्तीय वर्ष के नेट प्रॉफिट का कम से कम 2 प्रतिशत समाज-सेवा में खर्च करना अनिवार्य है। इस तरह का कानून विश्व में सिर्फ भारत में बनाया गया है। यह कानून 2013 में बनाया गया। इस कानून के दायरे में ऐसी कंपनी, जिनकी नेटवर्थ 500 करोड़ या इससे अधिक हो अथवा टर्न ओवर 1000 करोड़ या अधिक या एक वित्तीय वर्ष में नेट प्रॉफिट 5 करोड़ या उससे अधिक हो, को कार्पोरेट-सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) कमेटी ऑफ द बोर्ड बनाना पड़ेगा।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में यह जानकारी 'कार्पोरेट-सोशल रिस्पांसबिलिटी' सेक्टोरल सेमीनार में सीईओ इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ कार्पोरेट अफेयर्स भास्कर चटर्जी ने दी। उन्होंने कहा कि इसका लाभ किसी राजनैतिक गतिविधि या राजनैतिक दल को नहीं दिया जा सकता। गरीब से गरीब व्यक्ति को इसका लाभ मिलना चाहिए। कंपनी के कर्मचारी को भी इसका लाभ नहीं दिया जा सकता है। प्रत्येक वर्ष किये गये कार्यों की रिपोर्ट वेबसाइट पर डालनी होगी। श्री चटर्जी ने बताया कि अगर कंपनी ने निर्धारित राशि खर्च नहीं की तो उसे स्पष्टीकरण देना होगा। ऐसा नहीं करने पर आर्थिक दंड लगाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में विभिन्न कंपनी द्वारा समाज-सेवा पर लगभग 20 हजार करोड़ रूपये खर्च किये जायेंगे।
अबांथा ग्रुप की यशश्री गुर्जर ने बताया कि कंपनी प्रोजेक्ट शुरू करने के साथ ही सीएसआर शुरू कर देती है। उन्होंने सरकार द्वारा इस तरह का कानून बनाये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। सुश्री गुर्जर ने कहा कि कंपनी को वह कार्य करना चाहिए जिसे सरकार नहीं कर पा रही है। डायरेक्टर एमपीकॉन श्री सुरजीत राय ने कहा कि कार्पोरेट, सरकार, एनजीओ और कम्युनिटी के बीच सामंजस्य के साथ सीएसआर हो, तो समाज के लिये बेहतर होगा। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिये।।


प्रदेश में स्वास्थ्य रक्षा के क्षेत्र में आय.टी. का बेहतर उपयोग
Our Correspondent :10 October 2014
भोपाल। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आज निवेशकों और समिट में आये प्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी के व्यापक प्रयोग के लिये अपनाई गई विधियों की जानकारी दी गई। दो सत्र 'इनेबलिंग हेल्थ केयर इन्फ्रा-स्ट्रक्चर सर्विस डिलीवरी एफीशियेन्सी' और 'रिवाल्यूशनाइजिंग हेल्थ केयर थ्रू आय टी' को प्रमुख सचिव अजय तिर्की, स्वास्थ्य आयुक्त पंकज अग्रवाल, स्वास्थ्य संचालक नवनीत कोठारी के अलावा विषय-विशेषज्ञों ने संबोधित किया। इस अवसर पर प्रदेश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में निवेश के इच्छुक उद्यमियों को राज्य सरकार द्वारा लागू किये गये लाभकारी प्रावधानों के बारे में भी बताया गया।
प्रमुख सचिव श्री तिर्की ने बताया कि मध्यप्रदेश में यूनिवर्सल हेल्थ कव्हरेज के जरिये बिना किसी भेदभाव के सभी नगरों और ग्रामों में हर व्यक्ति को नि:शुल्क दवाएँ उपलब्ध करवाई जा रही हैं। सरदार वल्लभ भाई पटेल योजना, जननी सुरक्षा योजना, जननी एक्सप्रेस, गौरवी केन्द्र, ममता अभियान आदि के माध्यम से नागरिकों की स्वास्थ्य रक्षा का कार्य किया जा रहा है। अस्पतालों में चिकित्सकीय जाँच, पौष्टिक भोजन और रोगियों को परिवहन के लिये पूरी सहायता दी जाती है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सीयूजी सिम प्रदान की गई हैं, जिससे वह सुदूर ग्रामों में किसी रोग के लक्षण एक व्यक्ति में मिलने पर भी उसकी सूचना तत्काल सेक्टर प्रभारी चिकित्सक को देते हैं। इससे प्रभावित क्षेत्र में मेडिकल टीम भेजकर तत्काल उपचार प्रारंभ किया जाता है। ग्राम आरोग्य केन्द्रों में भी आवश्यक दवाएँ उपलब्ध करवाई गई हैं। प्रमुख सचिव ने बताया कि मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा में कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
प्रथम सत्र के संचालक स्वास्थ्य आयुक्त पंकज अग्रवाल ने जानकारी दी कि फार्मास्युटिकल उद्योग की स्थापना के लिये भी मध्यप्रदेश में विशेष पेकेज की व्यवस्था है। बॉयो-टेक्नालॉजी के प्रयोग की स्थिति में प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य संचालक श्री नवनीत कोठारी ने द्वितीय सत्र का संचालन किया।
दोनों सत्र में विषय-विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। राजेश जैन ने पीपीपी में इस क्षेत्र में कार्य विस्तार की संभावनाएँ बताई। रवि भंडारी, अहमदाबाद ने टेली मेडिसिन के क्षेत्र में हो रहे कार्यों का विवरण दिया। तरंग ज्ञानचंदानी, सीईओ जसलोक अस्पताल, मुंबई ने चिकित्सा क्षेत्र में आवश्यक अधोसंरचना और रोगी की सुरक्षा के महत्व की जानकारी दी। नर्मदा अस्पताल समूह के डॉ. राजेश शर्मा ने ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं और बच्चों के एनीमिया से प्रभावित होने की समस्या पर प्रकाश डाला और इसके लिये स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रारंभ अभियान की सराहना की। शबनम सिंह ने नर्सिंग प्रशिक्षण और डॉ. रघुरमन ने चिकित्सा क्षेत्र में अमृता इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल साइंसेस द्वारा दिये जा रहे योगदान की जानकारी दी।


प्रदेश में नई तकनीक के कृषि यंत्रों की निर्माण इकाइयों की अपार संभावना
Our Correspondent :10 October 2014
भोपाल । प्रदेश में नई तकनीक के कृषि यंत्रों की निर्माण इकाइयों की अपार संभावनाएँ उपलब्ध हैं। कृषि यंत्रीकरण के लाभ को देखते हुए किसान नए-नए यंत्रों को अपनाने के लिये तैयार है। यह बात इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2014 में “इफीशियन्ट फार्मिंग-लोकास्ट फार्म टेक्नालॉजिज एण्ड मशीनरी’’ विषयक सत्र में किसान-कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने कही।
श्री बिसेन ने कहा कि मध्यप्रदेश आज देश का सबसे तेजी से बढ़ता प्रदेश है। विगत 3 वर्ष से कृषि क्षेत्र की प्रगति देश में सर्वाधिक रही है। प्रदेश को विगत दो वर्ष से लगातार कृषि कर्मण अवार्ड प्राप्त हो रहा है। हमारे किसानों द्वारा गत वर्ष लगभग 87 हजार ट्रेक्टर्स क्रय किए गए हैं, जो उत्तरप्रदेश के बाद सर्वाधिक हैं। प्रदेश में ट्रेक्टर विक्रय की ग्रोथ रेट लगभग 32 प्रतिशत है, जो देश में सर्वाधिक है। श्री बिसेन ने कहा कि प्रदेश सरकार द्धारा भी महंगे कृषि यंत्रों पर भारत सरकार के अनुदान के अलावा टाप-अप अनुदान दिया जा रहा है। कृषि यंत्रों पर वेट टेक्स समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि नई यंत्रीकरण तकनीकों के प्रसार के लिये राज्य सरकार द्वारा “यंत्रदूत ग्राम’’ का व्यापक कार्यक्रम चलाया गया है। इसमें प्रतिवर्ष 200 ग्राम विकसित किए जा रहे हैं। युवाओं के माध्यम से प्रतिवर्ष 500 कस्टम हायरिंग केन्द्र भी स्थापित किए जा रहे हैं। राज्य सरकार युवाओं को इनकी स्थापना के लिये 10 लाख तक का अनुदान दे रही है। भविष्य में इन कस्टम हायरिंग केन्द्र की संख्या 700 कर दी जायेगी।
श्री बिसेन ने कहा कि मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति भी बड़े निर्माताओं के लिये सर्वाधिक अनुकूल है। यहाँ से देश के सभी क्षेत्रों में सामग्री आसानी से पहुँचाई जा सकती है। कृषि मंत्री ने उद्योगपतियों से आव्हान किया कि मध्यप्रदेश में कृषि यंत्रीकरण के क्षेत्र में उपलब्ध अपार संभावनाओं और राज्य सरकार की उदार नीतियों को ध्यान में रखते हुए नई इकाइयाँ स्थापित करें।
सत्र संचालन कृषि उत्पादन आयुक्त श्री आर.के.स्वाईं ने किया। भारत सरकार के कृषि अनुसंधान और शिक्षा सचिव डॉ. एस. अय्यपन, केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. ज्ञानेन्द्र सिंह, श्री के.के.सिंह डायरेक्टर सीआईएई, श्री रोहितास माल, श्री पी.वी.एस. भदौरिया, श्री जसकरणसिंह महल लुधियाना और डॉ. सी.वी.मेहता ने अपने प्रेजेन्टेशन दिये।
सत्र के दौरान शक्तिमान ग्रुप राजकोट ने 50 करोड़ का पूँजी निवेश कर रोटावेटर संयंत्र लगाने और टायनो ग्रुप ने 100 करोड़ की लागत से रोटावेटर, जीरो ट्रिल मशीन संयंत्र लगाने पर सहमति व्यक्त की।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश कुमार राजौरा और मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री अरूण पांडे सहित देश-विदेश के प्रतिनिधि उपस्थित थे।


मप्र में 36,000 करोड़ की 200 से अधिक पीपीपी परियोजना विभिन्न चरण में
Our Correspondent :10 October 2014
भोपाल । मध्यप्रदेश में जन-निजी-भागीदारी (पीपीपी) मोड में 36,000 करोड़ लागत की 200 से अधिक परियोजना विभिन्न चरण में हैं। इनमें 70 प्रतिशत परियोजनाएँ सड़कों से संबंधित हैं। वित्त मंत्री श्री जयन्त मलैया ने यह जानकारी आज ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 'मध्य प्रदेश में पीपीपी में निवेश के अवसर' विषयक सेक्टोरल सेमीनार में दी।
श्री मलैया ने बताया कि पीपीपी मोड में कार्य करने वाले देशों में मध्यप्रदेश का तीसरा स्थान है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की आर्थिक प्रगति बहुत तेज है। राज्य सरकार उद्योग-व्यवसाय को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार ने हर सेक्टर के लिए नीतियाँ बनाई हैं। इस संदर्भ में उन्होंने उद्योग संवर्धन नीति, पर्यटन और अन्य नीतियों में किये गए संशोधनों का विस्तार से उल्लेख किया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव वित्त श्री अजय नाथ भी उपस्थित थे।
आयुक्त संस्थागत वित्त एवं मुख्यमंत्री के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने मध्यप्रदेश में पीपीपी के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों पर एक प्रेजेन्टेशन दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी सेक्टर में पी पी पी को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने पर्यटन, परिवहन, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स, स्टील सायलो, इलेक्ट्रॉनिक्स, शहरी परिवहन, सिटी सर्विस इन्दौर, ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं, गरीबों के लिए मकानों के निर्माण आदि क्षेत्रों का विशेष रूप से जिक्र किया। बताया गया कि पीपीपी परियोजनाओं को तेज गति से क्रियान्वित करने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक केबिनेट कमेटी है। इसके अलावा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक साधिकार समिति भी कार्य कर रही है। प्रदेश में बहुत अच्छा पीपीपी सेल है। पीपीपी परियोजनाओं को अनुदान और वायेबिलिटी गेप फंडिंग के लिए दो कोष स्थापित हैं।
भारत में पीपीपी अवधारणा के जनक पूर्व आईएएस अधिकारी श्री गजेन्द्र हल्दिया ने पीपीपी के क्षेत्र में अपने अनुभवों को बताया। उन्होंने उद्यमियों से मध्यप्रदेश पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए कहा। श्री हल्दिया ने मध्यप्रदेश सरकार की विकास के लिए प्रतिबद्धता तथा राजनैतिक नेतृत्व की खासतौर पर प्रशंसा की। श्री हल्दिया ने कहा कि मेन्युफेक्चरिंग सेक्टर की सफलता के लिए अधोसंरचना बहुत आवश्यक है। उद्यमियों को मध्यप्रदेश में अधोसंरचना विकास के लिए निवेश करना चाहिये।

अन्य सत्र

आज कार्पोरेट-सोशल रिस्पांसिबिलिटी, हाउ ग्रेट लीडर्स इंस्पायर एक्शन विषयों पर भी सेक्टोरल सेमीनार और आस्ट्रेलिया का कंट्री सेशन भी हुआ।


गिट्टी तोड़ती थी, अब ए-क्लास कांट्रेक्टर हूँ
Our Correspondent :10 October 2014
भोपाल । कभी मैं गिट्टी तोड़ती थी, अब ए-क्लास कांट्रेक्टर हूँ। यह बात राजगढ़ जिले की एंटरप्रोन्योर सुश्री लीलाबाई ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में सेक्टोरल सेमीनार 'वूमेन एंटरप्रेन्यूर्स' में कही। अन्य महिलाओं ने भी अपने अनुभव शेयर किये।
केसला जिला होशंगाबाद की अनीताबाई और उसकी सहयोगी ने बताया कि वे स्वयं की सहकारी समिति चलाने के साथ ही महिलाओं को सामाजिक कुरीतियों से लड़ने की समझाइश भी देते हैं। डिंडोरी की रेखा प्रदान ने बताया कि समूह में 1500 महिला जुड़ी हैं। समूह कोदो-कुटकी से संबंधित कार्य करती हैं। उन्होंने बताया कि स्व-रोजगार से जुड़ने पर साहूकारों के कर्ज से मुक्ति मिली है।

स्कूल-कॉलेज स्तर से हो काउंसलिंग

अध्यक्ष मध्यप्रदेश एसोसिएशन ऑफ महिला एंटरप्रोन्योर श्रीमती अर्चना भटनागर ने कहा कि स्कूल और कॉलेज स्तर से ही लड़कियों को उनकी रूचि अनुसार व्यवसाय की ट्रेनिंग दी जाय। उन्होंने बताया कि मैंने अपना बिजनेस 500 से कम रुपये में तब शुरू किया था जब मेरे एक साल का बच्चा था। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ लेकर महिलाएँ अपना व्यवसाय शुरू कर सकती हैं। श्रीमती भटनागर ने कहा कि इम्प्रूवमेंट की गुंजाइश हमेशा रहती है इसलिए सीखने की आदत कभी नहीं छोड़ी। उन्होंने वित्त, मार्केट और तकनीकी की उपलब्धता के संबंध में भी बताया।
डायरेक्टर ओमेगा रेंक बियरिंग दीपा प्रकाश ने कहा कि मध्यप्रदेश में महिला एंटरप्रोन्योर के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं। उन्होंने स्वयं के एंटरप्रोन्योर बनने की पूरी कहानी भी बतायी।
भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट के मेंटर अजय जोशी ने बिजनेस शुरू करने की विभिन्न्प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 72 करोड़ का लोन विभिन्न एंटरप्रोन्योर को वितरित किया जा चुका है। श्री जोशी ने बताया कि महिलाओं को नि:शुल्क परामर्श दिया जाता है।
आयुक्त महिला-बाल विकास कल्पना श्रीवास्तव ने राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को स्व-रोजगार स्थापित करने के लिये चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने 200 बी.सी. से 2014 तक की महिला एंटरप्रोन्योर के विकास की स्थिति भी बतायी। श्रीमती श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में 27 हजार महिला विभिन्न एंटरप्रोन्योरशिप गतिवधियों से जुड़ी हैं।
प्रमुख सचिव महिला-बाल विकास जे.एन. कंसोटिया ने महिला एंटरप्रोन्योर की शंकाओं का समाधान किया।


डिफेन्स और इलेक्ट्रानिक्स इंडस्ट्री के लिए मध्यप्रदेश आदर्श राज्य
Our Correspondent :10 October 2014
भोपाल । डिफेन्स इंडस्ट्री सहित अन्य क्षेत्रों के इलेक्ट्रानिक उत्पादों से संबंधित उद्योगों के लिए मध्य प्रदेश आदर्श राज्य है। यह बात ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दूसरे दिन आज इलेक्ट्रानिक सिस्टम डिजाइन एण्ड मेन्यूफेक्चरिंग (ई एस डी एम) विषय पर हुए सेक्टोरल सेमीनार में विशेषज्ञों ने कही। चर्चा के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री भूपेन्द्र सिंह भी उपस्थित रहे।
ब्रह्मोस मिसाइल के फाउण्डर प्रो. ए.एस. पिल्लई ने कहा कि डिफेन्स इलेक्ट्रानिक्स एक नया उभरता हुआ क्षेत्र है। इसके विकास के लिए मध्य प्रदेश में बहुत अनुकूल परिस्थितियाँ और अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि दिनों-दिन इलेक्ट्रानिक्स क्षेत्र का महत्व बढ़ता जा रहा है। अगला युद्ध अगर हुआ तो इलेक्ट्रानिक आधारित ही होगा। उन्होंने कहा कि डिफेन्स रिसर्च डेव्हलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डी आर डी ओ) ग्वालियर में कार्यरत है। वहाँ डिफेन्स इलेक्ट्रानिक उद्योगों का अच्छा विकास हो सकता है। देश की रक्षा के लिए इलेक्ट्रानिक उत्पादों की बहुत जरूरत है। उन्होंने ब्रह्मोस और अग्नि मिसाइल कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि इनमें उपयोग किया जाने वाला इलेक्ट्रानिक से संबंधित एक भी आयटम मध्य प्रदेश में नहीं बन रहा। उन्होंने उद्यमियों से कहा कि वे इस क्षेत्र पर ध्यान देते हुए मध्य प्रदेश में निवेश करें। इस संदर्भ में उन्होंने मध्य प्रदेश की निवेश-हितैषी नीतियों तथा अनुकूल अवसरों के बारे में विस्तार से बताया।
भारत सरकार में संयुक्त सचिव, इलेक्ट्रानिक्स डॉ. अजय कुमार ने कहा कि बीते वर्षों में भारत की अर्थ-व्यवस्था में सूचना प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अब इलेक्ट्रानिक्स भारत की अगली शक्ति होगी। उन्होंने देश में इलेक्ट्रानिक्स उद्योगों को दी जाने वाली और विचाराधीन सुविधाओं तथा रियायतों पर प्रकाश डाला और कहा कि वर्ष 2020 तक इलेक्ट्रानिक आयात को शून्य स्तर तक ले जाने का लक्ष्य है। इसमें मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। भारत के पहले दो इलेक्ट्रानिक मेन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स का शिलान्यास मध्य प्रदेश में हो चुका है।उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रानिक उत्पादन में अच्छा कार्य करने वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए भारत सरकार द्वारा शीघ्र ही राष्ट्रीय पुरस्कार स्थापित किये जायेंगे। उन्होंने मध्य प्रदेश की अन्य खूबियों पर चर्चा करते हुए यहाँ पर्याप्त मानव संसाधन और प्रतिभाशाली युवाओं की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि युवाओं के लिए इलेक्ट्रानिक्स कौशल विकास कार्यक्रम भी शुरू किया गया है।
सत्र में समूह चर्चा के दौरान सचिव सूचना प्रौद्योगिकी श्री हरिरंजन राव ने प्रसिद्ध उद्योगपति टी. वासु से इलेक्ट्रानिक्स उद्यमियों के समक्ष चुनौतियों के बारे में पूछा। श्री वासु ने बताया कि इलेक्ट्रानिक्स उत्पादों की लगातार घटती कीमत एक बड़ी चुनौती है, जिससे उद्यमियों में अनिश्चितता का भाव रहता है। उन्होंने इस विषय में और भी महत्वपूर्ण बातें बतायी।


कनाडा-भारत-मध्यप्रदेश के निवेश संबंधों को और मजबूत किया जायेगा
Our Correspondent :09 October 2014
भोपाल। कनाडा के ट्रेड कमिश्नर अपने देश के उद्यमियों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिये प्रोत्साहित करेंगे

कनाडा के कन्ट्री सेशन में व्यापक चर्चा

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान आज हुए कनाडा के कन्ट्री सेशन में वहाँ के ट्रेड कमिश्नर मार्क सेल्वियन, एलेन ओलीवर तथा अमित शाह ने मध्यप्रदेश के उद्यमियों के साथ कनाडा और मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं तथा सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की। कनाडा के तीनों अधिकारी ने कहा कि भारत-कनाडा-मध्यप्रदेश के निवेश संबंधों को और मजबूत किया जायेगा। उन्होंने कहा कि वे अपने देश के उद्यमियों को मध्यप्रदेश में निवेश करने के लिये प्रोत्साहित करेंगे।
मार्क सेल्वियन ने अपने प्रजेन्टेशन में कनाडा और भारत में समानताओं को दर्शाते हुए कहा कि दोनों देश के बीच संबंध और मजबूत किये जाने की काफी संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा कि कनाडा को खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, अधोसंरचना और ज्ञान-आधारित क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त है। उनका देश इन क्षेत्रों में मध्यप्रदेश के साथ मिलकर काम कर सकता है। श्री सेल्वियन ने मध्यप्रदेश के उद्यमियों को कनाडा में उद्योग एवं व्यवसाय के अवसरों की जानकारी देते हुए वहाँ की नीतियों, कराधान व्यवस्था आदि से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि कनाडा के वित्तीय संस्थान कॉफी कम ब्याज दर पर उद्यमों को सहायता देते हैं। उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग तथा अन्य क्षेत्रों में मध्यप्रदेश के साथ सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
कनाडा के ओनटेरियो के ट्रेड कमिश्नर श्री अमित शाह ने मध्यप्रदेश में हो रहे तीव्र विकास की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्यमों का जिस तरह से विकास हो रहा है, उससे मध्यप्रदेश के उद्यमियों को कनाडा में और कनाडा के उद्यमियों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिये सहायता मिलेगी।
क्यूबेक के ट्रेड कमिश्नर श्री एलेन ओलीवर ने मध्यप्रदेश में स्मार्ट सिटी के निर्माण में सहयोग की पेशकश की। उन्होंने कहा कि क्यूबेक में मेन्युफेक्चरिंग और हाईटेक उत्पादों पर फोकस किया गया है। उन्होंने मोन्ट्रेयल में चल रही विभिन्न विकास परियोजना के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि क्यूबेक द्वारा भारत और मध्यप्रदेश में अधोसंरचना तथा इंजीनियिरंग सेवाएँ दी जा सकती हैं। जल और अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में उन्होंने अपने देश की विशेषज्ञता और मध्यप्रदेश में सहयोग की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत और मध्यप्रदेश के साथ व्यापार उनके देश के लिये बहुत महत्वपूर्ण है। श्री ओलीवर ने ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, माइनिंग और कृषि उद्योग के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। डीआई/जीएनओएस के डायरेक्टर ने मधुमेह रोगियों की देखने की कम होती शक्ति को बढ़ाने की दिशा में उनकी संस्था द्वारा किये जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। इस अवसर पर कनाडा में व्यवसाय कर रहे कुछ भारतीय उद्यमियों ने अपने अनुभव बताये।

चेक रिपब्लिक

चेक रिपब्लिक के कन्ट्री सेशन में वहाँ के डायरेक्टर टेक्निकल श्री जे.एम. लेगे (Lagey), श्री जारो स्लेविरा (Jaro Slavira), श्री मिलोस्लेव स्टेक (Miloslav Staek) और श्री जीरी जेनीकर (Jiri Janicker) ने उनके देश में औद्योगिक और व्यवसायिक गतिविधियों के बारे में मध्यप्रदेश के उद्यमियों को बताया।
श्री लेगे ने साइपाल (SAIPAL) कम्पनी के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि स्कोडा ऑटो इण्डिया 7 साल से भारत में सफलतापूर्वक कार्य कर रही है। यहाँ उनकी कम्पनी का अनुभव बहुत अच्छा रहा है। उन्होंने स्कोडा इण्डिया की प्रॉडक्ट रेन्ज के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि भारत में स्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं और यह बात भारत के उज्जवल भविष्य के प्रति आशान्वित करती है। यहाँ पर जो सुधार की प्रक्रिया चल रही है उसके अच्छे परिणाम सामने आयेंगे।
जारो स्लेविरा ने स्कोडा पॉवर प्रायवेट लिमिटेड इन इंडिया की गतिविधियों की चर्चा करते हुए कहा कि उनका देश नवीनतम टर्बाइन टेक्नालॉजी के क्षेत्र में सहयोग कर सकता है। उन्होंने बताया कि स्कोडा पावर की 6 परियोजना भारत में क्रियान्वयन के विभिन्न चरण में है। चेक ट्रेड कम्पनी के श्री अश्वीर खुराना ने कहा कि उनकी संस्था भारत और चेक गणराज्य के बीच व्यापार को बढ़ावा देती है।।


मध्यप्रदेश में वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक हब के विस्तार की काफी संभावनाएँ
Our Correspondent :09 October 2014
भोपाल । खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा है कि देश के मध्य में स्थित होने के कारण मध्यप्रदेश में वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक हब के विकास की प्रबल संभावना है। उन्होंने निवेशकों से इस क्षेत्र में आगे आकर कार्य करने की बात कही। खाद्य मंत्री कुंवर शाह आज ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2014 में 'ए-वेयर हाउसिंग एण्ड लॉजिस्टिक हब' सेमीनार में निवेशकों को संबोधित कर रहे थे।
खाद्य मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश ने सितंबर 2012 में वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक पॉलिसी लागू की है। नीति में निवेशकों को 15 प्रतिशत केपिटल सब्सिडी तथा 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी का फायदा दिया गया है। इस पॉलिसी के बाद 15 लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदामों का निर्माण प्रारंभ हुआ। इसमें से 2.35 लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदामों का कार्य पूरा कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्टील सायलोज के निर्माण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दस स्थान पर 5 लाख मीट्रिक क्षमता के स्टील सायलोज का निर्माण प्रारंभ कर दिया है।
खाद्य मंत्री ने बताया कि होशंगाबाद जिले के पवारखेड़ा में प्रदेश का पहला लॉजिस्टिक हब विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बुरहानपुर, उज्जैन, रतलाम, कटनी, जबलपुर एवं बीना में रेलवे लाइन होने के कारण यहाँ लॉजिस्टिक हब विकसित किये जाने के लिये परिस्थितयाँ अनुकूल हैं। उन्होंने कहा कि बीना एवं कटनी में इसके लिये भू-खण्ड चिन्हित कर लिये गये हैं। उन्होंने निवेशकों से प्रदेश की 22 हजार उचित मूल्य दुकान में अपने उत्पाद बेचने के लिये प्रस्ताव देने की भी बात कही। खाद्य मंत्री ने इंदौर के प्रथम सेन्टर फॉर पेरीशिएबल कार्गो के बारे में भी जानकारी दी।
प्रमुख सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग श्री अशोक वर्णवाल ने निवेशकों को बताया कि पिछले 3 वर्ष में प्रदेश में गोदामों के निर्माण के क्षेत्र में निवेशकों में उत्साह पैदा हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में 112 मीट्रिक टन भण्डारण क्षमता प्रायवेट क्षेत्र में और 46 मीट्रिक टन क्षमता सरकारी क्षेत्र में है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में गोदामों की संख्या पर्याप्त होने के कारण यहाँ पर अनाज नष्ट होने की संभावना 0.1 प्रतिशत रह गई है।
श्री वर्णवाल ने बताया कि रीवा, शहडोल, जबलपुर, संभाग के अलावा श्योपुर जिले में अभी भी अनाज भण्डारण के लिये गोदामों की पर्याप्त संख्या नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि निवेशक इस क्षेत्र में आते हैं तो उन्हें उत्साहजनक परिणाम मिलेंगे। प्रमुख सचिव ने पवारखेड़ा में निर्माणाधीन लॉजिस्टिक हब के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इसमें 140 करोड़ रूपये का निवेश किया जा रहा है। सत्र में संत खरे सीईओ टर्मिनल एवं इन्फ्रा-स्ट्रक्चर लिमिटेड, श्री अनुराग गुप्ता एसोसिएट डायरेक्टर कनाडा पेसिफिक कंसलटेन्सी सर्विस ने भी अपने संगठन के बारे में जानकारी दी। कंटेनर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया के एमडी श्री अनिल गुप्ता ने बताया कि देशभर में उनके संग्ठन के 63 टर्मिनल चल रहे हैं और कंटेनर ऑफ इंडिया ने 5 हजार 300 करोड़ रुपये का टर्नओवर लिया है। उन्होंने निवेशकों से इस क्षेत्र में अच्छी संभावनाओं को देखते हुए निवेश किये जाने की बात कही।


मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिये अलग मंत्रालय होगा
Our Correspondent :09 October 2014
भोपाल । ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2014 का शुभारंभ आज यहाँ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग के सम्मेलन से हुआ। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिये अलग मंत्रालय बनाने और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में लघु उद्योग संवर्धन बोर्ड गठित करने की घोषणा की।
केन्द्रीय सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री कलराज मिश्र ने प्रदेश में उद्यमियों को प्रशिक्षण देने के लिये 30 से 40 इनक्यूबेशन केन्द्र खोलने और 150 करोड़ की लागत से एक टूल रूम खोलने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि देश में 500 इनक्यूबेशन केन्द्र खुलेंगे।
समिट की अध्यक्षता करते हुए लोक सभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने कहा कि मध्यप्रदेश हर क्षेत्र में विकास के अद्भुत दौर का अनुभव कर रहा है। लोक सभा अध्यक्ष ने सूक्ष्म और लघु उद्योग क्षेत्र में उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने पर जोर देते हुए कहा कि इससे मध्यप्रदेश और देश का गौरव बढ़ेगा। श्रीमती महाजन ने कहा कि प्रदेश ने पिछले एक दशक में विकास का अद्भुत दौर का अनुभव किया है। हर क्षेत्र में प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को किसी भी तरह से बाधा नहीं आने दी जायेगी। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म उद्योग कम लागत में ज्यादा लोगों को रोजगार देते हैं इसलिये राज्य को इनसे विशेष लगाव है। उन्होंने लघु उद्योगों के उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिये इंदौर में एक प्रदर्शनी सेंटर की स्थापना की आवश्यकता बताई।

150 करोड़ की लागत से खुलेगा प्रदेश में टूल रूम

केन्द्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने बताया कि सूक्ष्म और लघु उद्योगों की बेंक लोन समस्या दूर करने के लिये क्रेडिट गारंटी फंड स्थापित किया गया है। इसमें राज्यों के योगदान का दस गुना उन्हें वापस दिया जायेगा। उन्होंने मध्यप्रदेश से इस फंड में योगदान देने का आग्रह करते हुए कहा कि सूक्ष्म और लघु उद्यमियों के लिये केन्द्रीय सूक्ष्म और लघु उद्योग मंत्रालय की ओर से बेंकों को गारंटी दी जायेगी।
श्री मिश्र ने कहा कि यदि सूक्ष्म और लघु उद्योगों का टर्नओवर निर्धारित सीमा से बढ़ जाये तो भी उनकी श्रेणी में परिवर्तन नहीं होगा। वे सूक्ष्म और लघु उद्योग की श्रेणी में ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिये नई नीति बनाई जा रही है जिसमें उद्यमिता विकास और कौशल विकास पर ध्यान दिया जायेगा। साथ ही प्रदेश में 150 करोड़ की लागत से एक टूल रूम खोला जायेगा, जिसमें तकनीकी शिक्षा प्राप्त उद्यमियों को प्रशिक्षण दिया जायेगा। पूरे देश में ऐसे 15 टूल रूम खोले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब सूक्ष्म और लघु उद्योगों का पंजीयन आनलाइन होगा। इसके लिये सेल्फ सर्टिफिकेशन को आधार बनाया जायेगा। श्री मिश्र ने कहा कि प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया मिशन को पूरा करने में मध्यप्रदेश ने मेक इन मध्यप्रदेश मिशन बनाकर सकारात्मक पहल की है।
श्री मिश्र ने मध्यप्रदेश में आर्थिक और कृषि क्षेत्र में हुई प्रगति को अद्भुत बताते हुए कहा कि प्रदेश ने सूक्ष्म और लघु उद्योगों के विकास में उल्लेखनीय काम किया है। सूक्ष्म और लघु उद्योगों की सबसे बड़ी आवश्यकता भूमि और बिजली को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति को देखते हुए कृषि आधारित सूक्ष्म उद्योगों की अपार संभावनाएँ हैं।
श्री मिश्र ने कहा कि मध्यप्रदेश में आज औद्योगिक विकास के अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। प्रदेश में उपलब्ध औद्योगिक संकुलों की उपस्थिति और आधारभूत अधोसंरचना से प्रदेश की प्रगति और सूक्ष्म उद्योगों के विकास के स्वर्णिम अवसर बने हैं। बड़े और छोटे उद्योगों को परस्पर आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा भूमि बेंक बनाने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश ने कृषि क्षेत्र में उत्पादन का रिकार्ड बनाया है। अब मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास दर में भी रिकार्ड बनायेगा। उद्योग और कृषि दोनों क्षेत्र का समान विकास होगा। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म और लघु उद्योग से जुड़े उद्यमियों को केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से पूरा संरक्षण, समर्थन और सुरक्षा दी जायेगी।
श्री मिश्र ने बताया कि देश में सूक्ष्म और लघु उद्योगों का भारत के औद्योगिक विकास में 8 प्रतिशत का योगदान है। इसमें से 45 प्रतिशत निर्माण क्षेत्र में और 40 प्रतिशत निर्यात क्षेत्र में है। इस समय देश में 3 करोड़ 60 लाख इकाइयाँ हैं, जिनमें आठ करोड़ से ज्यादा लोगों को काम मिला है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लघु और सूक्ष्म उद्योगों के विकास के लिये अलग से मंत्रालय बनाया और इन उद्योगों को परिभाषित करने का काम किया था

मुख्यमंत्री ने छोटे उद्योगों के लिये खोले विकास के द्वार

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को अनावश्यक कानूनों से मुक्त किया जायेगा। प्रदेश में उद्योग व्यवसायों के लिये स्व-घोषित एक ही रिटर्न जमा करने की योजना लागू की जायेगी। लायसेंस रजिस्ट्रेशन देने की समय-सीमा निर्धारित होगी। समय-सीमा में लायसेंस रजिस्ट्रेशन जारी नहीं हुआ तो स्वत: जारी होना मान लिया जायेगा। प्रदेश में 16 श्रम अधिनियम के तहत संधारित की जाने वाली 61 पंजी के स्थान पर एक ही पंजी की व्यवस्था लागू की जायेगी। इसी तरह 13 रिटर्न के स्थान पर 2 रिटर्न ही भरने होंगे। नौ श्रम कानून के प्रावधानों से सूक्ष्म उद्योगों को छूट दी जायेगी। लघु उद्योगों पर स्टेण्डिंग आर्डर एक्ट तभी लागू किया जायेगा जब श्रमिकों की संख्या 50 से अधिक होगी, वर्तमान में यह संख्या 20 है। प्रदेश में नवाचारी उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिये 100 करोड़ रूपये का वेंचर फण्ड स्थापित किया जायेगा। लघु और कुटीर उद्योगों के लिये औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम 20 प्रतिशत भूमि आरक्षित रखी जायेगी। बड़े उद्योगों के साथ सहायक इकाई के रूप में कार्यरत लघु उद्योग यदि बड़े उद्योग को 75 प्रतिशत उत्पाद देते हैं तो उन्हें भी वही छूट दी जायेगी जो बड़े उद्योग को दी गई है। बड़े उद्योग को अपने सहयोगी छोटे उद्योग को भूमि सब लीज करने की सुविधा दी जायेगी। लघु और मध्यम उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण संयंत्र लगाने पर पूंजी अनुदान दिया जायेगा। लघु उद्योगों के लिये ब्याज अनुदान की सीमा 20 लाख से बढ़ाकर 35 लाख रूपये की जायेगी। लघु, मध्यम उद्योगों को वेट की 75 प्रतिशत प्रतिपूर्ति तत्काल तथा 25 प्रतिशत कर निर्धारण के बाद कर दी जायेगी। इसमें अपात्र उद्योगों की संख्या 52 से घटाकर 19 की जायेगी ताकि अधिक से अधिक उद्योगों को सहायता प्राप्त हो सके। विशेष पेकेज के लिये जिलों के स्थान पर अब विकासखण्ड को पिछड़ा मानकर उद्योग लगाने पर विशेष सुविधाएँ दी जायेंगी। प्रदूषण मंडल से सहमति का आवेदन अब ऑनलाइन तथा निर्धारित समय-सीमा में जारी किया जायेगा। जारी सहमति का नवीनीकरण अब 5 से 15 साल के लिये वैध होगा। जिन्होंने सहमति का नवीनीकरण नहीं कराया है उन्हें वन टाइम सेटलमेंट की सुविधा दी जायेगी। लघु श्रेणी के 544 प्रकार की इकाइयाँ अब ऑनलाइन आवेदन जमा करके ही आवश्यक सहमति प्राप्त कर सकेंगी। फूड एण्ड ड्रग कंट्रोल से अनुमति और लायसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जायेगा। उत्पाद निर्माण का प्रमाणीकरण अब हर साल नहीं बल्कि 5 साल में एक बार लेना होगा। नये उत्पाद को शामिल करने के आवेदन का निराकरण 5 दिन में कर दिया जायेगा। परफार्मेंस सर्टिफिकेट तीन दिन में जारी किया जायेगा। यदि लघु उद्योग के पास भारत शासन की अनापत्ति है तो उसे तीन दिन में राज्य शासन से अनुमति दी जायेगी। समय-सीमा में स्वीकृति जारी करने को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में शामिल किया जायेगा। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों में विपणन का कार्य मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम करेगा।
मुख्यमंत्री ने अपील की कि स्वच्छ भारत अभियान में भागीदारी करें, नये उत्पाद के निर्माण के साथ 10 पेड़ लगायें, बेटी बचाओ अभियान में भागीदारी करें तथा हर बच्चा स्कूल जाये इसके लिये स्कूल चले हम अभियान में सहयोग करें। मध्यप्रदेश को समृद्ध और विकसित बनाने में सहयोग करें।
उद्योग मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने कहा कि सूक्ष्म और लघु उद्योगों की प्रदेश में अपार संभावनाएँ हैं। मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार और युवा उद्यमी योजनाओं के चलते सफलता की कई कहानियाँ सामने आई हैं। उन्होंने सूक्ष्म और लघु उद्योगों को मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास की आधारशिला बताते हुए कहा कि प्रदेश में लघु उद्यमियों के उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार लेगी। उन्होंने कहा कि आज मुख्यमंत्री श्री चौहान के प्रयासों से प्रदेश निवेश कारीडोर बन रहा है।
कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को वर्ष 2011-12 तथा वर्ष 2012-13 के लिये राज्य स्तरीय पुरस्कार दिये गये। वर्ष 2011-12 के लिये प्रथम पुरस्कार मेसर्स रामा वुड क्राफ्ट-सतना, द्वितीय पुरस्कार मेसर्स कम्फर्ट सिस्टम-भोपाल और तृतीय पुरस्कार मेसर्स श्री पेकर्स प्रायवेट लिमिटेड- उज्जैन को दिया गया। वर्ष 2012-13 के लिये प्रथम पुरस्कार मेसर्स माइका प्लाई-मण्डीदीप, द्वितीय पुरस्कार मेसर्स यूनाईटेड इंजीनियरिंग-भोपाल तथा तृतीय पुरस्कार मेसर्स भंवरदीप कापर स्ट्रिप लिमिटेड-मंडीदीप को दिया गया। कार्यक्रम में 'लेंड बेंक 2014'' पुस्तिका का विमोचन किया गया। इसमें उद्योगों के लिये प्रदेश में आरक्षित 26 हजार हेक्टेयर भूमि तथा अन्य सुविधाओं की जानकारी दी गई है।
कार्यक्रम में विभिन्न देशों से आये राजदूत तथा हाई-कमिश्नर सहित वित्त मंत्री जयंत मलैया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुश्री कुसुम महदेले, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री विजय शाह, महिला-बाल विकास मंत्री माया सिंह, परिवहन मंत्री भूपेन्द्र सिंह, स्कूल शिक्षा मंत्री पारस जैन, श्रम मंत्रीअंतर सिंह आर्य, पर्यटन राज्य मंत्री सुरेन्द्र पटवा, महापौर कृष्णमुरारी मोघे, इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शंकर लालवानी, विधायक, जन-प्रतिनिधि तथा उद्यमी उपस्थित थे।


समावेशी विकास के लिये जरूरी है सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों का विकास
Our Correspondent :09 October 2014
भोपाल । समावेशी विकास के लिये जरूरी है सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों का विकास। चेयरमेन एमसीएक्स सत्यानंद मिश्रा ने यह यह बात ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 'क्रेडिट फ्लो टू एमएसएमई' सेक्टोरल सेमीनार में कही। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के विकास के लिये जरूरी है कि पूरे प्रदेश में माइक्रो फायनेंस इंस्टीटयूट (एमएफआई) खुलने चाहिए।
श्री मिश्रा ने कहा कि प्रदेश सरकार और बेंक क्रेडिट फ्लो करें तो सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के विकास में सहूलियत होगी। उन्होंने स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर दिया। सीएमडी सेन्ट्रल बेंक ऑफ इंडिया श्री राजीव ऋषि ने कहा कि 10 लाख तक के लोन में को-लेटरल की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि देश में 8 लाख 52 हजार करोड़ रुपये का ऋण एमएसएमई को दिया गया है। श्री ऋषि ने मुख्यमंत्री द्वारा वेंचर फण्ड में 100 करोड़ रुपये देने की घोषणा की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इससे एमएसएमई के विकास में सहायता मिलेगी।
प्रेसीडेंट एमएसएमई चेम्बर चन्द्रकान्त सलुंखे ने एमएसएमई को प्रभावित करने वाले कारकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि औद्योगिक विकास में 8 प्रतिशत का योगदान एमएसएमई का है। श्री सलुंखे ने बताया कि बेंकों को को-लेटरल फ्री लोन के बारे में जानकारी नहीं है जिससे उन्हें लोन लेने में कठिनाई होती है।
डायरेक्टर जीसी एण्ड पीएसआरआई इटली एलबर्टो केनपरी ने इटली में लघु उद्योगों के लिये ऋण प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इटली में एमएसएमई के लिये यूरोपियन यूनियन द्वारा भी लोन दिया जाता है। श्री केनपरी ने कहा कि भारत बहुत बड़ा बाजार है। यहाँ एमएसएमई की असीम संभावनाएँ हैं।
एमडी एल एण्ड टी फायनेंस दीनानाथ दुभाषी ने कम्पनी के कार्यों के बारे में बताया। उन्होंने एमएसएमई के लिये लोन लेने में आने वाली कठिनाइयों तथा नॉन बेंकिंग फायनेंस के बारे में जानकारी दी। सचिव वित्त मनीष रस्तोगी ने प्रदेश में एमएसएमई के लिये दी जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। विशेषज्ञों ने उद्यमियों की शंकाओं का समाधान भी किया।


पैसे की नहीं आइडिया की है कमी : ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2014
Our Correspondent :09 October 2014
भोपाल । सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के विकास के लिए पैसे की नहीं आइडिया की कमी है। अच्छे प्रस्ताव लाने पर हर स्तर पर मदद मिलती है। भारत सरकार के एडीशनल सेक्रेटरी और डेवलपमेंट कमिश्नर एमएसएमई श्री अमरेन्द्र सिन्हा ने यह बात क्लस्टर एण्ड वेण्डर डेवलपमेंट पर हुए सेक्टोरल सेमीनार में कही। श्री सिन्हा ने कहा कि क्लस्टर एण्ड वेण्डर डेवलपमेंट के लिये उद्यमियों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के लिये इंदौर में सिंगल विण्डो व्यवस्था शुरू की जायेगी।
श्री सिन्हा ने कहा कि पूरे देश में वेण्डर डेवलपमेंट प्रोग्राम चलाये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि एमएसएमई के उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के लिये इण्डियन इंस्टीटयूट ऑफ साइंस और काउंसिल ऑफ साइंस एण्ड इंडस्ट्रियल रिसर्च के साथ प्रोजेक्ट तैयार किया गया है।
एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर एडवाइजरी सर्विसेस ई एण्ड वाय एल एल पी श्री शशि कुमार सुन्दरराजन ने कहा कि वेण्डर को शासन की योजनाओं के बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने मार्केटिंग सपोर्ट और टेक्निकल अपग्रेडेशन स्कीम के बारे में भी जानकारी दी। श्री सुन्दरराजन ने कहा कि वेण्डर को पूरे प्रदेश में एंकर यूनिट के साथ लिंकेज करनी चाहिए। पूर्व एडीशनल चीफ सेक्रेटरी श्री पी.के. दाश ने प्रदेश सरकार द्वारा क्लस्टर एण्ड वेंडर डेवलपमेंट के बारे में किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
सेमीनार में एजीएम भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड प्रभाकर दास, ईडी आई एल एण्ड एफ एस क्लस्टर कृष्ण कुमार और एम डी बेण्ड ज्वाइंटस लिमिटेड उत्तम गांगुली ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिये। विशेषज्ञों ने उद्यमियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिये।


निवेश बढ़ाने स्किल डेवलपमेंट जरूरी
Our Correspondent :09 October 2014
भोपाल । ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में स्किल डेवलपमेंट पर हुए सेक्टोरल सेमीनार में विशेषज्ञों ने कहा कि निवेश बढ़ाने के लिये स्किल डेवलपमेंट जरूरी है। सेमीनार में प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा संजय सिंह ने कहा कि प्रदेश में स्किल डेवलपमेंट के लिये शासन द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। भोपाल और इंदौर में मेगा आईटीआई खोली जा रही हैं। सभी अनसर्विस्ड ब्लॉक में आईटीआई और स्किल डेवलपमेंट सेन्टर पीपीपी मोड पर खोलने की नीति बनाई गई है। निजी निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिये तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास नीति-2012 में व्यापक संशोधन किये गये हैं।
श्री सिंह ने बताया कि निजी निवेशकों के लिये आईटीआई स्थापित करने के लिये भवन निर्माण, उपकरण आदि पर किये गये पूँजीगत निवेश पर 3 करोड़ तक का अनुदान दिया जायेगा। शासन द्वारा 50 प्रतिशत सीट के प्रशिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति की जायेगी। इसके साथ ही 5 एकड़ शासकीय भूमि नि:शुल्क देने तथा प्रशिक्षकों पर प्रशिक्षण लागत के 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति का प्रावधान भी नई नीति में किया गया है। स्किल ट्रेनिंग देने वाले को 50 प्रतिशत प्रशिक्षणार्थी को रोजगार दिलवाने पर 3000 रुपये हजार प्रति प्रशिक्षणार्थी के मान से अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है।
एमडी, एनएसडीसी श्री दिलीप सिनॉय ने कहा कि प्रशिक्षणार्थियों का ऑनलाइन एसेसमेंट होना चाहिए। उन्होंने बताया कि एनएसडीसी द्वारा संस्थाओं की कुल लागत की 75 प्रतिशत तक की फण्डिंग की जाती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दी जा रही ट्रेनिंग का विश्लेषण कर पाठयक्रमों में सुधार किया जाना चाहिए। स्कूल के पाठयक्रम में भी स्किल डेवलपमेंट के संबंध में पढ़ाया जाये। कई राज्यों में ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने फिल्म 'हुनर है तो कदर है' के माध्यम से स्किल के महत्व को बताया।
जेनपेक्ट द स्किल्स एकेडमी के वाइस चेयरमेन श्री प्रमोद भसीन ने कहा कि हुनरमंद होने पर देश ही नहीं विदेशों में जॉब के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि वर्क फोर्स स्किलिंग जरूरी है। श्री भसीन ने कहा कि प्रदेश में उत्कृष्ट स्किल डेवलपमेंट सेन्टर बनाये जायें, जहाँ उत्कृष्ट ट्रेनिंग दी जायें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित युवाओं को जॉब उपलब्ध करवाने के लिये व्यवस्थित नेटवर्क होना चाहिए। श्री भसीन ने कहा कि आर्थिक विकास और ब्रॉड बेण्ड एक-दूसरे से जुड़े हैं।
प्रिन्सिपल डायरेक्टर सिम्बायोसिस ओपन एजुकेशन सोसायटी डॉ. स्वाति मजूमदार ने कहा कि माँ-बाप के साथ-साथ बच्चों की भी लास्ट च्वॉइस होती है, वोकेशनल ट्रेनिंग। उन्होंने कहा कि वोकेशनल ट्रेनिंग प्राप्त युवाओं का भी समाज में सम्मान होना चाहिए। उन्होंने बताया कि मेरा बेटा खुद 9वीं और 10वीं की पढ़ाई के साथ कुकिंग की पढ़ाई भी करता था। कुकिंग भी एक वोकेशनल कोर्स है। उन्होंने स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी मॉडल के बारे में बताया। संचालक कौशल एवं विकास श्री एम.सिबी. चक्रवर्ती ने प्रदेश में स्किल डेवलपमेंट के लिये किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी।


पेरू करेगा भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
Our Correspondent :09 October 2014
भोपाल । भारत एवं मध्यप्रदेश के साथ आयात-निर्यात एवं निवेश के अवसर बढ़ाने के लिए पेरू शीघ्र ही भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करेगा। भारत और पेरू में कई आर्थिक एवं ऐतिहासिक समानताएँ हैं। दोनों ही प्रजातांत्रिक देश हैं, दोनों ही देश समावेशी विकास के पक्षधर हैं। ऐसे में दोनों देशों के मध्य आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ाए जाने के लिए अच्छा वातावरण है।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के पहले दिन आज ब्रिलिएन्ट कन्वेंशन हॉल इंदौर में पेरू देश के प्रेजेन्टेशन एवं इंटर-एक्टिव सेशन के दौरान पेरू के राजदूत श्री लुईस माइगुएल केबेलो अरोयो ने यह बात कही। इस अवसर पर पेरू की अर्थ-व्यवस्था, आयात-निर्यात एवं निवेश के संबंध में पावर प्वाइन्ट प्रेजेन्टेशन के माध्यम से विस्तार से जानकारी भी दी गई। इंटर-एक्टिव सेशन भी हुआजिसमें मध्यप्रदेश के उद्यमियों एवं पेरू के डेलीगेट्स ने विस्तार से चर्चा की।
श्री अरोयो ने बताया कि प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर पेरू में निवेश की अपार संभावनाएँ हैं। वहाँ कॉपर, टिन, क्यूनोवा, सिल्वर आदि बहुतायत से उपलब्ध है।
पेरू के आर्थिक कॉउंसलर श्री मेग्युएल केबेलो ने बताया कि पेरू भारत एवं मध्यप्रदेश में निवेश के लिए संभावनाएँ तलाश रहा है। वर्तमान में भारत में पेरू की कंपनी एजेई कोला ड्रिंक्स बना रही है, जिसका भारत एवं मध्यप्रदेश में अच्छा व्यापार है।


विभिन्न विषय पर 38 सत्र होंगे
Our Correspondent :08 October 2014
भोपाल । इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में तीन दिन में विभिन्न विषय पर 38 सत्र होंगे। पहले दिन 8 अक्टूबर को होने वाले सत्र क्रेडिट फ्लो टू एम.एस.एम.ई. विषय पर आधारित होगा। इसमें सचिव, वित्त मनीष रस्तोगी, चेयरमेन एमसीएक्स सत्यानंद मिश्र, सेन्ट्रल बेंक ऑफ इण्डिया के चेयरमेन एवं एम.डी. राजीव ऋषि प्रमुख वक्ता होंगे।

एम.पी. - ए वेयर-हाउसिंग एण्ड लॉजिस्टिक हब

अशोक वर्णवाल - प्रमुख सचिव, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, म.प्र. शासन
चन्द्रहास दुबे - एम.डी. एम.पी. वेयर हाउसिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स कार्पोरेशन.
अनुराग गुप्ता - एसोसिएट डायरेक्टर
कनाडा पेसिफिक कन्सल्टिंग सर्विस

संत खरे - सीईओ केसर टर्मिनल्स एण्ड इन्फ्रा-स्ट्रक्चर लिमिटेड
मनीष पुरी - एमडी एपीसी- इंडिया लिंकस

क्लस्टर एण्ड वेण्डर डेवलपमेंट

डी.एस. मंडलोई - एम.एस.एम.ई. डेवलपमेंट इन्टीट्यूट इंदौर
अमरेन्द्र सिन्हा - अतिरिक्त सचिव, विकास आयुक्त एम.एस.एम.ई
शशि कुमार सुन्दर राजन - कार्यपालक निदेशक- एडवाइजरी सर्विस ई इण्ड वाई
प्रभाकर दास - एजीएम (एएससी) बीएचईएल

आर्गेनिक एम.पी.

डॉ. राजेश राजोरा - प्रमुख सचिव, कृषि, म.प्र. शासन
जी.एस. कौशल - संचालक, कृषि, म.प्र. शासन
ए.के. कृष्णन कुमार - एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर आई.एल.एफ.एस.

डॉ. राहुल मीरचन्दानी - एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर एरियस एग्रो लिमिटेड

भावीन परमार - डिप्टी जनरल मैनेजर मोरारका आर्गेनिक्स

इंटेलेक्चुअल प्रापर्टी राइट

गयूर आलम - आई.पी.आर., नेशनल लॉ विश्वविद्यालय, भोपाल
मीनू चन्द्रा - आई.पी. एटर्नी-डायरेक्टर आई.पी. पॉलिसी लीगल एण्ड

कार्पोरेट अफेयर मायक्रोसाफ्ट लिमिटेड

संदीप नावलेकर - चेयरमेन- आई.पी.एफ.सी. कमेटी

एम.डी.- डार्लिग पम्पस लिमिटेड

विकास मांजरेकर - वायस प्रेसीडेंट- मेन्यूफेक्चरिंग एण्ड आर एण्ड डी AVTEC लिमिटेड

प्रोमोटिंग इन्टरप्रेन्यूरशिप

इनोवेशन एण्ड स्टार्ट अप्स

किरण कार्णिक - चेयरमेन, इंडिया इनोवेशन फंड
राजीव वैष्णव - वायस प्रेसीडेंट NASSCOM
रोहताश मल - ई.एम. 3 एग्री सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड
मुरली वलांगति - सी.ई.ओ. रूरल शोर बिजनेस सर्विस लिमिटेड

फूड प्रोसेसिंग फ्राम फार्म टू फेक्ट्री टू फोर्क

अनुराग वास्तव - आयुक्त, म.प्र.शासन उद्यानिकी
राधेश्याम जुलानिया - प्रमुख सचिव, उद्यानिकी व खाद्य प्रसंस्करण म.प्र. शासन
कुसुम महदेले - मंत्री उद्यानिकी व खाद्य प्रसंस्करण
रोजी शर्मा - संयुक्त सचिव, केन्द्रीय खाद्य प्र-संस्करण मंत्रालय
संजीव चोपड़ा - संयुक्त सचिव, केन्द्रीय कृषि मंत्रालय
एम.ए.तेजानी - एम.डी. गिटस फूड

स्किल डेवलपमेंट

दिलीप चिनॉय - एम.डी., एन.एस.डी.सी.
वन्दना लूथरा - वायस प्रेसीडेंट, वी.एल.सी.सी.
संजय कुमार सिंह - प्रमुख सचिव, तकनीकी शिक्षा व कौशल विकास
जे.पी. राय - डायरेक्टर जनरल, नेशनल स्किल डेवलपमेंट एजेंसी

डॉ. स्वाति मजूमदार - प्रिसिंपल डायरेक्टर, सिम्बायोसिस ओपन एजुकेशन सोसायटी

प्रमोद भसीन - वायस चेयरमेन, जेनपेक्ट, द स्किल्स अकादमी

9 अक्टूबर को 15 सत्र

क्रियेटिंग इनेबलिंग हेल्थ केयर इन्फ्रा-स्ट्रक्चर- सर्विस डिलीवेरी इफीशियेंसी
प्रवीर कृष्ण - प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य विभाग, म.प्र. शासन
पंकज अग्रवाल - आयुक्त स्वास्थ्य, म.प्र.शासन
रवि भण्डारी - सी.ई.ओ., शलबी ग्रुप ऑफ हास्पिटल्स
राजेश शर्मा - सी.ई.ओ., नर्मदा ग्रुप ऑफ हास्पिटल
डॉ. तरंग ज्ञानचंदानी - सी.ई.ओ., जसलोक हास्पिटल
डॉ. नरेश त्रेहान - चेयरमेन व एम.डी. मेदांता हास्पिटल
डॉ. शुभम सिंह - डीन, मेक्स हेल्थकेयर
इफीशिएन्ट फार्मिंग- लो कास्ट फार्म टेक्नालॉजिज एण्ड मशीनरी
आर.के. स्वाईं - आयुक्त, कृषि उत्पादन, म.प्र. शासन
डा. ज्ञानेन्द्र सिंह - पूर्व निदेशक, सी.आई.ए.ई., भोपाल
जसकरण सिंह महल - डीन, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय

डॉ. सी. दिवाकर दुरईराजा - डीन, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय

प्रोफसर पी.बी.एस. बदुरिया - एच.ओ.डी. (कृषि), आई.आई.टी. खड़गपुर

ई.एस.डी.एम. सेक्टर वेल्कमिंग द न्यूज ऐज

वेणुगोपाल धूत - सी.ई.ओ., वीडियोकान
एम सेलवेन्द्रन - एम.डी., एम.पी.एस.ई.डी.सी.

वूमन इन्टरप्रेन्यूर्स

मिनी मेनन - एक्जीक्यूटिव एडीटर- ब्लूमबर्ग टी.वी.
अर्चना - एम.डी., हेलाईड केमिकल्स लिमिटेड

स्मार्ट एण्ड लिववेल सिटीज थ्रू टी.ओ. डी.

संजय शुक्ला - आयुक्त, नगरीय विकास, म.प्र. शासन
समीर शाह - एम.डी., आई.टी.डी.सी.
डी.एल.एन. मूर्ति - सीनियर वायस प्रेसीडेंट- (GIFT) (गुजरात)
विश्वनाथ सिस्टा - एक्सपर्ट टाउन प्लानर

प्रोफेसर जगन शाह - डायरेक्टर, नेशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ अरबन अफेयर्स, नई दिल्ली

शैलेश पाठक - कार्यपालक निदेशक, भारतीय ग्रुप
रिवाल्यूशनइजिंग हेल्थकेयर थ्रू आई.टी. इंटरवेन्शन

अजय कुमार - संयुक्त सचिव, सूचना प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार
प्रवीर कृष्ण - प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य, म.प्र. शासन
फैज अहमद किदवई - मिशन डायरेक्टर, एन.आर.एच.एम.
अजय कुमार - डायरेक्टर जनरल, एन.आई.सी., नई दिल्ली

सोलर पॉवर इन एम.पी.

उपेन्द्र त्रिपाठी - सचिव, केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत शासन
तरूण कपूर - संयुक्त सचिव, एम.एन.आर.ई.
सुनील वाधवा - सी.ई.ओ., आई एल एण्ड एफ एस कम्पनी
जानसन वर्गीस - हेल्थ एशिया पेसिफिक सन एडीसन
विनीत मित्तल - एम.डी., वेल्सपन एनर्जी
राजेन्द्र निमजे - एम.डी., सोलर एनर्जी लिमिटेड
पी.पी.पी. इन्वेस्टमेन्ट आपरच्युनिटी इन एम.पी.
गजेन्द हालदिया - पूर्व आई.ए.एस.
विवेक अग्रवाल - एम.डी., एम.पी.आर.डी.सी., म.प्र. शासन
शिखा शर्मा - एम.डी., एक्सिस बेंक

वेस्ट मेनेजमेंट- स्टेप टूवर्ड्स सस्टेनेबिलिटी

संजय शुक्ला - आयुक्त, नगरीय प्रशासन, म.प्र.शासन
महेश के. मर्चेंट - एम.के. एरोमेटिक्स, चेन्नई
प्रो. सधान के. घोष - एच.ओ.डी., जाधवपुर विश्वविद्यालय (पश्चिम बंगाल)
महेश के. मर्चेंट - चेयरमेन, एम.के. एरोमेटिक्स (चैन्नई)
दीपक अग्रवाल - डायरेक्टर, ए टू ज़ेड
कार्पोरेट- सोशल रेस्पांसिबिलिटी
डॉ. भास्कर चटर्जी - डी.जी.एण्ड सी.ई.ओ., इंडियन इन्टीटूयूट ऑफ कार्पोरेट अफेयर्स
सु यश गुर्जर - सी.ई.ओ., अवधा फाउंडेशन
एम.पी. द इमेजिंग विण्ड पॉवर हब ऑफ द नेशन
उपेन्द्र त्रिपाठी - सचिव, केन्द्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा
आलोक वास्तव - संयुक्त सचिव, केन्द्रीय नवीन व नवकरणीय ऊर्जा
सुमन्त सिन्हा - एम.डी., रिन्यू पॉवर
रमेश कैमल - एम.डी., गमेशा पॉवर
मधुसूदन खेमका - सी.एम.डी.-रीजेन पॉवर
गौतम चोपड़ा - वायस प्रेसीडेंट-कान्टीनम एनर्जी
पी.पी.पी. इन्वेस्टमेन्ट अपारच्युनिटी
विवेक अग्रवाल - एम.डी., एम.पी.आर.डी.सी एण्ड सी.आई.ओ.
अभय अग्रवाल - ई एण्ड वाई
डिर्क सोमर - इन्टरनेशनल फाइनेंस कार्पोरेश

10 अक्टूबर को आठ सत्र

टेकिंग एम.पी. अप द इण्डस्ट्री वेल्यू चेन

सुधीर मेहता - एम.डी. पिनेकल इण्डस्ट्रीज
सत्येन शाह - हेड, सप्लाई, जॉन डेयर
राजेन्द्र जोशी - वायस प्रेसीडेंट- जॉन डेयर
कीर्ति राठौर - चेयरमेन- डिलक्स बीयरिंग लिमिटेड

मेकिंग एम.पी. द टूरिस्ट स्टेट

हरिरजंन राव - सचिव, पर्यटन
सुनीत कोठारी - मेम्बर, होटल एवं रेस्टारेंट एसोसिएशन
सुभाष गोयल - प्रेसीडेंट आई.ए.टी.ओ.

टेक्सटाइल्स वीविंग द फ्यूचर

अरूण कुमार भट्ट - ओ.एस.डी., मुख्यमंत्री प्रकोष्ठ
राजेन्द्र गुप्ता - चेयरमेन, ट्राइडेंट लिमिटेड
श्रेयस्कर चौधरी - एम.डी., प्रतिभा सिंटेक्स लिमिटेड
अखिलेश राठी - डिप्टी चेयरमेन, एम.पी. टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन

हेवी इंजीनियरिंग एण्ड मशीन टूल्स मेकिंग हेडवे

राजन एस. कटोच - सचिव, केन्द्रीय भारी उद्योग मंत्रालय
शशि रंजन प्रसाद - ईडी, बी.एच.ई.एल.
राजेन्द्र जोशी - वायस प्रेसीडेंट, जान डेयर

पॉलिसी इनीशियेटिव्ह एण्ड फेसीलिटेटिंग

आर.एस. शर्मा - सचिव, DeitY ,GOI
हरिरंजन राव - सचिव, DIT, GOMP
टी.रवीन्द्र रेड्डी - एससेन्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
अभिषेक गुप्ता - डायरेक्टर शूरवीन बी.पी.ओ.
संजय मेहता - एम.डी. टेली परफारमेंस इंडिया
एम. सेलवेन्द्रन - एम.डी. एम.पी.एस.ई.डी.सी.
इसके अलावा इन तीन दिन में विभिन्न देशों के कन्ट्री सेशन्स भी आयोजित किए गए हैं। 8 अक्टूबर को कनाडा, चेक रिपब्लिक, मेक्सिको तथा पेरू द्वारा विभिन्न निवेश संभावनाओं पर चर्चा होगी। 9 अक्टूबर को आस्ट्रेलिया द्वारा कंट्री सेशन आयोजित किया गया है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के अंतिम दिन दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, मलेशिया तथा क्यूबेक द्वारा पर्यटन, अधोसंरचना तथा स्मार्ट सिटी पर चर्चा होगी।।


प्रधानमंत्री श्री मोदी ने की मध्यप्रदेश की भरपूर प्रशंसा
10 October 2014
भोपाल । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के उदघाटन समारोह के अपने संबोधन में मध्यप्रदेश की प्रशंसा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश पहला राज्य है, जिसने केन्द्र की घोषणाओं पर त्वरित अमल किया है। श्री मोदी ने कहा कि केन्द्र ने मेक इन इण्डिया के तहत देश में रक्षा उत्पादों के निर्माण की घोषणा की और मध्यप्रदेश ने रक्षा उत्पाद के निर्माण की नीति बना ली। यह देश के रक्षा उत्पादों के लिये महत्वपूर्ण कदम है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी तरह केन्द्र ने डिजिटल इण्डिया की घोषणा की और मध्यप्रदेश में दो इलेक्ट्रॉनिक मेन्युफेक्चरिंग सेंटर का शिलान्यास हो गया। केन्द्र की प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत बहुत ही कम समय में मध्यप्रदेश में 36 लाख खाते खोल दिये गये और इसमें एक कदम आगे बढ़कर परिवार को इकाई के रूप में जोड़ दिया।
प्रधानमंत्री ने जब मध्यप्रदेश की सराहना की तो, समारोह स्थल करतल ध्वनि से गूँज उठा। इस पर श्री मोदी ने कहा कि मैं यह सब अपनी जानकारी के आधार पर कह रहा हूँ। कोई लिखित भाषण नहीं पढ़ रहा हूँ। यह भी कि वे चुनाव के बाद पहली बार मध्यप्रदेश आ रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि स्पष्ट नीति, मकसद पाने का इरादा और दिशा निर्धारित हो तो बीमारू राज्य भी प्रगतिशील हो सकता है। इसका उदाहरण मध्यप्रदेश है। उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए जानकारी दी कि मध्यप्रदेश ऐसा राज्य है जो देश की कुल जैविक खेती में 40 प्रतिशत का योगदान कर रहा है। मध्यप्रदेश 'मेक इन इण्डिया'' की अवधारणा कम लागत, अधिक उत्पादन, प्रभावी शासन और उचित अधोसंरचना को पूरा करता है। श्री मोदी ने मध्यप्रदेश के नेतृत्व और टीम वर्क की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश की ताकत राज्यों में निहित होती है और जो राज्यों की ताकत समझता है, वही देश आगे बढ़ सकता है।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि नई दिल्ली में 100 ग्लोबल समिट के आयोजन से देश का विकास नहीं हो सकता। उनका कहना था कि विकास इंदौर जैसी जगहों पर आयोजित समिट से ही संभव होगा।


मध्यप्रदेश में अम्बानी, गौतम अडानी निवेश करेंगें
10 October 2014
भोपाल । भारत का शीर्ष उद्योग जगत मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की आत्मीयता, डायनॉमिक नेतृत्व, औद्योगिक नीतियों और प्रदेश द्वारा निवेशकों को उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं से अभिभूत है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के उदघाटन सत्र के तत्काल बाद देश के विभिन्न उद्योग समूह के प्रमुखों ने न केवल मध्यप्रदेश में निवेश की इच्छा व्यक्त की वरन् कहा कि मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास में भी देश का अग्रणी राज्य बनेगा।
भारत के शीर्ष उद्योगपति श्री मुकेश अंबानी ने अपने संबोधन में रिलायंस समूह द्वारा आगामी डेढ़ वर्ष में 20 हजार करोड़ रूपये का निवेश करने और उनके छोटे भाई श्री अनिल अंबानी ने रिलायंस ए.डी.ए. समूह के मध्यप्रदेश में वर्तमान 30 हजार करोड़ के निवेश को बढ़ाकर 60 हजार करोड़ करने का वायदा किया।
गोदरेज समूह के चेयरमेन श्री आदि गोदरेज का कहना था कि मध्यप्रदेश में उद्योग जगत का हर कार्य सरलता तथा सुगमता से होता है। उनका इस प्रदेश से 27 वर्ष से अधिक का औद्योगिक संबंध है। वर्तमान सरकार जिस तरह प्रदेश में उद्योगों को सहूलियत दे रही है उसका पूरे प्रदेश को लाभ मिलेगा।
रिलायंस ए.डी.ए. समूह के चेयरमेन श्री अनिल अंबानी लगातार चौथी बार मध्यप्रदेश की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में पहुँचे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री चौहान के नेतृत्व, यहाँ की पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था तथा सहयोगी औद्योगिक नीतियों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उनका समूह कोल, पावर, सीमेंट तथा टेलीकॉम में सन 2020 तक 30 हजार करोड़ रूपये का और निवेश करेगा। अभी प्रदेश में उनके समूह द्वारा इन क्षेत्र में लगभग 30 हजार करोड़ का निवेश है। आगामी वर्षों में यह निवेश बढ़कर दोगुना हो जायेगा।
लार्सन ट्रूब्रो (एल.एन.टी.) समूह के चेयरमेन श्री ए.एम. नायर ने मध्यप्रदेश में कौशल विकास केन्द्र सहित रक्षा उत्पाद में निवेश की मंशा व्यक्त की।
टाटा समूह के चेयरमेन श्री सायरस मिस्त्री ने कहा कि टाटा कंसलटेंसी सर्विस इंदौर में 10 हजार युवा को रोजगार देगी। उन्होंने देवास में स्थापित टाटा इंटरनेशनल के विस्तार सहित विदिशा में फूड पेकेजिंग, देवास में स्किल ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने, जबलपुर तथा उज्जैन में प्रस्तावित बीआरटीएस में सहयोग देने की बात की। उन्होंने भोपाल में ड्रायवर मेकेनिक ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने की भी मंशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि टाटा समूह मध्यप्रदेश में निवेश के लिये संकल्पित है।
प्रसिद्ध उद्योगपति श्री गौतम अडानी ने कहा कि उनका समूह आगामी पाँच वर्ष में प्रदेश में 20 हजार करोड़ का निवेश करेगा। श्री अडानी ने पिछले आठ-दस वर्ष में प्रदेश में हुये चहुँमुखी विकास की सराहना की।
रिलायंस समूह के चेयरमेन श्री मुकेश अंबानी ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का ‍डिजिटल केपिटल बनेगा। उनका समूह 2015 तक इस प्रदेश में ‍डिजिटल इंटरनेट, ऊर्जा, रिटेल आदि व्यवसायों में 20 हजार करोड़ का निवेश करेगा। उन्होंने प्रदेश में आर्गेनिक फार्मिंग में भी रूचि व्यक्त की।
एस.आर. समूह के चेयरमेन श्री शशि रूइया ने ऊर्जा, स्टील, बीपीओ तथा कोलबेंड में 4000 करोड़ रूपये का निवेश करने की जानकारी दी।
वेल्सपाइन समूह की सुश्री सिंदूर मित्तल ने कहा कि मध्यप्रदेश में जिस गति तथा तत्परता से उद्योगों को सुविधाएँ मिल रही हैं, वे उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि नवकरणीय ऊर्जा में समूह आगामी दिनों में 5000 करोड़ का निवेश करेगा।
आस्ट्रेलिया से आये जे.एन.एस. समूह के श्री जान स्टोन ने कहा कि नया इतिहास लिखने के लिये उनका समूह भारत और मध्यप्रदेश के साथ है। उन्होंने निवेश का माहौल तैयार करने के लिये प्रदेश सरकार की सराहना की।
पेंटालून समूह के चेयरमेन श्री किशोर बियानी ने मध्यप्रदेश में फूड पार्क स्थापित कर 10,000 युवाओं को रोजगार देने का वायदा किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का गेहूँ पास्ता बनाने के लिये सर्वाधिक उपयुक्त है।
सीआईआई के चेयरमेन तथा डीसीएम समूह के प्रमुख श्री अजय श्रीराम, सिम्बोइसिस की प्रबंध संचालक डॉ. स्वाति मजूमदार, आईटीसी के श्री वाय.सी. देवेश्‍वर ने भी अपने संबोधन में मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियों की सराहना की।

हम दो कदम आगे बढ़कर साथ देंगे- मुख्यमंत्री श्री चौहान

औद्योगिक समूह के इस विशाल वैश्विक समागम के प्रथम सत्र में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उद्योग जगत का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी कीमत पर आपके विश्वास को टूटने नहीं दूँगा। मध्यप्रदेश को निवेश के क्षेत्र में आदर्श राज्य बनायेंगे। उद्योग-व्यवसाय स्थापित करने में जितनी मेहनत और तत्परता से आप कार्य करेंगे, हम दो कदम आगे आकर आपको सहयोग देंगे। उन्होंने कहा विश्वास नहीं टूटेगा-साथ नहीं छूटेगा। देश की प्रगति में मध्यप्रदेश श्रेष्ठतम योगदान देगा।


मप्र देश की अर्थ-व्यवस्था का ड्राइविंग फोर्स-प्रधानमंत्री श्री मोदी
10 October 2014
भोपाल ।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत की क्षमता का उपयोग भारत को आगे बढ़ाने में करना होगा, इसमें राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मध्यप्रदेश देश की अर्थ-व्यवस्था का ड्राइविंग फोर्स बन सकता है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री इस दिशा में उम्दा प्रयास कर रहे हैं। देश को राज्यों की मदद से आगे ले जायें, यही भारत सरकार की भूमिका होगी। प्रधानमंत्री श्री मोदी आज इन्दौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के उदघाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर लोक सभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय श्रम, इस्पात और रोजगार मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, केन्द्रीय सामाजिक न्याय मंत्री श्री थावरचंद गेहलोत, 28 देश के राजदूत और हाई-कमिश्नर, प्रदेश मंत्रीमंडल के सदस्य और देश के प्रमुख उद्योगपति उपस्थित थे।

हर राज्य अपना ग्लोबल टेलेंट पूल बनायें

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि आज समय बदल गया है कोई भी देश वैश्विक अर्थ-व्यवस्था से कट कर अकेला नहीं रह सकता। उस पर ग्लोबल अर्थ-व्यवस्था का प्रभाव होता है। इसे ध्यान में रखकर हमें आगे बढ़ना होगा। हर राज्य अपना ग्लोबल टेलेंट पूल बनायें। हर राज्य के नागरिक दुनिया में कहीं भी हो उनका ग्लोबल नेटवर्क बनायें और उनके अनुभव और प्रतिभा का उपयोग देश के विकास के लिये करें। देश की ताकत राज्यों में निहित होती है। देश को आगे बढ़ाना है, तो राज्यों को आगे बढ़ाना होगा। भारत का हर मजबूत राज्य एक मजबूत स्तंभ होगा जो देश को मजबूत करेगा। केन्द्र का दायित्व है कि सभी राज्यों को विकास के लिये प्रोत्साहित करे, जहाँ जरूरत हो वहाँ राज्य के साथ खड़ा हो। देश के विकास के लिये टीम इंडिया को लेकर काम करना होगा और टीम इंडिया प्रधानमंत्री और सभी राज्य के मुख्यमंत्री से मिलकर बनती है। केन्द्र और राज्य एक दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि पूरक हैं, यह संदेश हम देश को देना चाहते हैं। केन्द्र और राज्य की शक्ति के मिलने से अतिरिक्त ऊर्जा बनती है, जो देश को आगे बढ़ायेगी।

रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना सर्वोच्च प्राथमिकता

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश के सामने नौजवानों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। निर्माण, कृषि और सेवा तीन क्षेत्रों को समान महत्व देकर रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना होगा। मेक इन इंडिया से हमने विश्व को विश्वास दिलाया है कि भारत में अपार संभावनाएँ हैं, भारत को केवल बाजार नहीं समझें। भारत विकास करेगा तो इसकी क्रय शक्ति बढ़ेगी तभी बाजार बढ़ेगा इसलिए भारत में निवेश करना जरूरी है। केन्द्र को हर राज्य की सामर्थ्य, प्राथमिकता और संसाधन पता हो तो तेजी से विकास किया जा सकता है। संपूर्ण भारत का कौशल के अनुसार मेपिंग किया जाये तो रोजगार की समस्या नहीं होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज हिन्दुस्तान को लाखों वाहन चालकों की जरूरत है। पब्लिक-प्रायवेट पार्टनरशिप मॉडल पर ड्रायविंग इंस्टीटयूट स्थापित कर बेहतर गुणवत्ता के वाहन चालक उपलब्ध करवाये जा सकते हैं। धरातल की वास्तविकताओं को ध्यान रखकर हमें माइक्रो प्लानिंग करना होगी। लघु अवधि और दीर्घ अवधि की योजनाओं पर समान रूप से ध्यान देना होगा। अभी शैक्षिक जगत देश के विकास की योजना में शामिल नहीं हुआ है, इससे नुकसान हुआ है। जरूरी है कि शैक्षिक जगत, शासकीय विशेषज्ञ, वित्तीय विशेषज्ञ और निवेशक चारों मिलकर विचार करें कि देश को आगे बढ़ाने के लिये क्या जरूरी है। यह चारों क्षेत्र विकास के लिये मिलकर काम करें। वर्तमान में विश्व के देश भारत में निवेश के लिये तैयार हैं यह राज्यों के लिये मौका है। जो राज्य तैयार होगा वह इसका लाभ ले सकेगा। रेलवे देश की अर्थ-व्यवस्था की गति को बढ़ाने की ताकत रखता है। केन्द्र सरकार इस दिशा में काम कर रही है। रेलवे के विकास से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

मध्यप्रदेश के विकास के बारे में पूरे विश्व को पता चले

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मध्यप्रदेश की प्रशंसा करते हुए कहा कि सही नेतृत्व, स्पष्ट नीति, साफ नियत, नेक इरादे, निर्धारित दिशा और मकसद पाने का इरादा हो तो बीमारू राज्य सबसे अधिक प्रगति करने वाला राज्य बन सकता है। यह मुख्यमंत्री श्री चौहान और मध्यप्रदेश की टीम ने कर दिखाया है। पूरे विश्व को पता चलना चाहिये कि मध्यप्रदेश ने किस तरह से सर्वाधिक विकास दर प्राप्त की है। अधोसंरचना, सिंचाई, कृषि, बिजली, सड़क के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में जो उपलब्धि हासिल की है वे विकास की महत्वपूर्ण धरोहर है। मध्यप्रदेश इसके लिये अभिनंदन का अधिकारी है। केन्द्र ने मेक इन इंडिया के तहत देश में रक्षा उत्पादों के निर्माण की बात की और मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने रक्षा उत्पाद के निर्माण की नीति बना ली है। यह देश के रक्षा उत्पादों के लिये महत्वपूर्ण कदम है। केन्द्र ने डिजिटल इंडिया की घोषणा की और मध्प्रदेश में दो इलेक्ट्रानिक मेन्युफेक्चरिंग सेंटर का शिलान्यास हो गया । यह बताता है कि केन्द्र और राज्य सरकार किस तरह तेजी से मिलकर प्रगति कर सकते हैं। केन्द्र ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना बनाई और मध्यप्रदेश ने बहुत कम समय में इसके 36 लाख खाते खोल दिये और केन्द्र सरकार से आगे बढ़ाकर इसमें परिवार को इकाई के रूप में जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि उद्योगों के लिये उपलब्ध भूमि, मानव संसाधन, सुशासन मध्यप्रदेश में निवेश का सुनहरा अवसर उपलब्ध करवाते हैं। इतनी क्षमता वाला मध्यप्रदेश विकास के लिये अनुकूलता प्रदान करता है। निर्माण के ऐसे क्षेत्र को प्राथमिकता दें जिनमें निर्यात की संभावनाएँ हो। मध्यप्रदेश ऐसा प्रदेश है जिसने कृषि विकास के साथ उद्योंगो के लिये अधोसंरचना तैयार की है। कृषि क्षेत्र में अब मूल्य संवर्धन और कृषि अधोसंरचना पर ध्यान देना होगा। इससे किसानों की आय बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ऐसा प्रदेश है, जो देश की कुल जैविक खेती में 40 प्रतिशत का योगदान कर रहा है। जैविक कृषि उत्पादों का वैश्विक बाजार है। कृषि के साथ मध्यप्रदेश वैश्विक बाजार के लिये कृषि आधारित उत्पाद तैयार करें।

मध्यप्रदेश ने डिजिटल इंडिया के लिये काम शुरू किया

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज देश में एक नये विश्वास का संचार हुआ है। विकास दर बढ़ने लगी है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश को आशा और विश्वास से भर दिया है। पॉलिसी पेरेलेसिस का दौर खत्म हो गया है। देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में पिछले सात साल से विकास दर दहाई अंक में है। आज देश में सर्वाधिक विकास दर 11.08 प्रतिशत मध्यप्रदेश की है। मध्यप्रदेश द्वारा 24.99 प्रतिशत की कृषि विकास दर हासिल करने में प्रदेश के किसानों और जनता की महत्वपूर्ण भूमिका है। अधोसंरचना विकास कर मध्यप्रदेश को बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर निकाला है। अब इसे तेजी से आगे बढ़ाना है इसमें उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया का नारा दिया है। मध्यप्रदेश ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। मध्यप्रदेश ने कृषि, सिंचाई और विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश आज रेवेन्यू सरप्लस प्रदेश है। हम मध्यप्रदेश को मेक इन इंडिया के लिये मेक इन मध्यप्रदेश के रूप में आदर्श राज्य बनायेंगे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक शांति है। उद्योगों के लिये जमीन उपलब्ध है। उद्योगों को स्वीकृतियाँ देने के लिये वास्तविक सिंगल विंडो बनायी गयी है। अब हर औद्योगिक परियोजना के लिये एक अधिकारी को जिम्मेदार बनाया जायेगा ताकि निश्चित समय-सीमा में स्वीकृतियाँ जारी हो सकें। विभिन्न स्वीकृतियों की समय-सीमा को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में शामिल किया गया है। श्री चौहान ने बताया कि प्रदेश में श्रम कानूनों को सरल किया गया है। अब उद्योगों के लिये स्व-घोषणा और एक ही रिटर्न लागू किया जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल और फूड एवं ड्रग कंट्रोलर की प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि उद्योगपति मध्यप्रदेश में निवेश करें उनका समय और परिश्रम व्यर्थ नहीं जायेगा। मध्यप्रदेश प्रधानमंत्री के सपनों को पूरा करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगा।
स्वागत भाषण में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ने बताया कि समिट में 28 देश के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। समिट में 9 देश पार्टनर कंट्री है। मध्यप्रदेश देश में सबसे तेजी से प्रगति करने वाला प्रदेश है। प्रदेश में वैश्विक निवेश के लिये महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध है। प्रसिद्ध गायक शान ने 'मध्यप्रदेश गान' प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में मुख्य सचिव श्री अंटोनी डिसा ने मध्यप्रदेश की आर्थिक प्रगति पर प्रेजेंटेशन दिया।


इनोवेटिव आइडिया वाले युवाओं को भी लोन
09 October 2014
भोपाल । ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के पहले दिन बुधवार को सूक्ष्म व लघु उद्योगों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी घोषणाएं की। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने उद्‌घाटन सत्र में कहा- छोटे उद्योग प्रदेश की रीढ़ हैं और मैं इनका ध्यान अपने बच्चों की तरह रखूंगा। इन उद्योगों के लिए प्रदेश में अलग मंत्रालय होगा। लघु उद्योग संवर्धन बोर्ड बनेगा, जिसकी समीक्षा मुख्यमंत्री खुद करेंगे। इनोवेटिव आइडिया रखने वाले युवा उद्यमियों के लिए सौ करोड़ के वेंचर फंड की भी शिवराज ने घोषणा की। इस फंड से युवाओं को लोन दिया जाएगा। अभी तक ऐसा फंड किसी राज्य में नहीं है।
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री कलराज मिश्र ने प्रदेश में करीब 150 करोड़ की लागत से टूल रूम खोलने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जल्द ऐसा प्रावधान ला रही है कि यदि सूक्ष्म व लघु उद्योग तरक्की कर अपना टर्नओवर एक हजार करोड़ भी कर ले तो भी उसे उसी दर्जे की सुविधाएं मिलती रहेंगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि की तरक्की चमत्कृत करने वाली है, उद्योग में भी ऐसी तरक्की हुई तो मप्र देश और दुनिया का अव्वल राज्य बनेगा।

निवेश और उद्यमिता को गांवों तक ले जाएंगे : शिवराज
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि वे अब प्रदेश में निवेश और उद्यमिता को गांवों तक ले जाएंगे। सिर्फ खेती से काम नहीं चलेगा। जापान, द. कोरिया और चीन की तर्ज पर छोटे-छोटे कस्बों तक उद्योग व निवेश भेजेंगे।
इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2014 के औपचारिक उद्‌घाटन से ठीक पहले शिवराज चौहान ने खास बातचीत में कहा कि मैं प्रदेश के छोटे कस्बों में भी युवाओं में ऐसी उद्यमिता देखना चाहता हूं कि वे नौकरी मांगने की बजाय देने वाले की भूमिका निभाएं और यह कोई मुश्किल काम नहीं है। बीपीओ जैसे व्यवसाय बड़े शहरों में खर्चीले होने के कारण मुश्किल में हैं।
छोटे कस्बों में युवक इन्हें किराये के स्थानों पर शुरू करें। मैं अनुदान दिलवाऊंगा। श्री चौहान ने कहा हमारे पास बिजली, पानी, जमीन है और ऐसी पॉलिसीज हैंं जो निवेशकों को गांवों तक खींच लाएंगी। हम औद्योगिक विकास को सिर्फ पीथमपुर, मालनपुर या मंडीदीप तक सीमित नहीं रखना चाहते। बदनावर से श्योपुर तक छोटे-बड़े व मझोले उद्योग लगवाएंगे।
निवेश के करार और असली निवेश के बीच के लंबे अंतर पर श्री चौहान ने कहा कि दो सालों में प्रदेश में 1.25 लाख करोड़ का निवेश आया है। ऐसे समय में जबकि मंदी छाई हुई थी, पूंजी बाहर जा रही थी और पूर्व केंद्र सरकार की नीतियों से नकारात्मक माहौल बना हुआ था। ऐसे में सवा लाख करोड़ का निवेश प्रदेश के लिए गौरव की बात है।
चौहान ने कहा कि अब हम बड़े उद्योगों के अलावा छोटे और मझोले उद्योगों पर खास ध्यान दे रहे हैं। नेशनल जीडीपी में छोटे और मझोले उद्योगों की हिस्सेदारी जहां 8 फीसदी है, वहीं प्रदेश में यह 9.25 फीसदी है, जिसे आगे और बढ़ाएंगे। आईटी और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग ऐसे सेक्टर होंगे, जहां हम सबसे ज्यादा ग्रोथ देख रहे हैं।

मुकेश-अनिल को एक मंच पर लाने वाले शिवराज दूसरे मुख्यमंत्री

शिवराज सिंह चौहान देश के ऐसे दूसरे सीएम बन गए हैं, जो मुकेश और अनिल अंबानी को एक मंच पर लाने में कामयाब हुए हैं। मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के अलावा अंबानी बंधुओं को वाइब्रेंट गुजरात के आयोजन में साथ देखा गया था। अब दोनों ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के मंच पर दिखेंगे।
अनिल राज्य में अब तक 40 हजार करोड़ का निवेश कर चुके हैं, जबकि उनके भाई मुकेश की कंपनी प्रदेश के विभिन्न शहरों में 4जी का काम कर रही है, जिसमें अभी तक लगभग 3 हजार करोड़ का निवेश हो चुका है। आने वाले दो वर्षों में यह बढ़कर 15 से 20 हजार करोड़ तक हो सकता है।

लेकिन एक मंच पर भी छह कुर्सी दूर होंगे अंबानी बंधु

मुकेश और अनिल अंबानी समिट में मंच पर एक साथ होकर भी दूर-दूर रहेंगे। मुकेश पीएम के दाएं और बैठेंगे, वहीं अनिल बाएं और छह कुर्सी दूर बैठेंगे। मुकेश फार्च्यून में तो अनिल उनसे एक किमी दूर होटल रेडिसन में रुकेंगे।

मोदी एयरपोर्ट पर दस मिनट और मंच पर 30 मिनट बोलेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को समिट का औपचारिक उद्‌घाटन करेंगे। वे सुबह एयरपोर्ट पर 9.25 से 9.50 तक रहेंगे और भाजपा कार्यकर्ताओं को दस मिनट संबोधित करेंगे। भाजपा पदाधिकारी व कार्यकर्ता मोदी को स्वागत में मात्र एक हार पहनाएंगे। मोदी समिट स्थल पर 10.15 से 11.15 तक रहेंगे। वे यहां 30 मिनट तक उद्योगपतियों को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री दस मिनट बोलेंगे।

मेदांता इंदौर में एक हजार करोड़ का करेगा निवेश

मेदांता ग्रुप के प्रमुख डॉ. नरेश त्रेहान ने बताया कि इंदौर में ग्रुप पहले 400 करोड़ के निवेश से 500 बेड का सुपर स्पेश्यिलिटी अस्पताल बनाएगा। बाद में क्षमता 1000 बेड की होगी, जिसमें एक हजार करोड़ का निवेश होगा। इधर, ऑनलाइन बुलाए जा रहे इंटेशन टू इंटरेस्ट में बुधवार तक 4 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। बीती समिट में 3.56 लाख करोड़ के करार हुए थे।


मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा इन्दौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों की समीक्षा मध्यप्रदेश की आर्थिक रेटिंग "ए" श्रेणी की हुई
Our Correspondent :26 September 2014
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर, इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2014 की तैयारियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री के साथ उद्योग मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया भी थीं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि समिट के आयोजन से विश्व-स्तर पर मध्यप्रदेश की पहचान बन रही है। समिट की देश में ही नहीं वरन विश्व-स्तर पर भी चर्चाएँ हो रही हैं। उन्होंने बताया कि भोपाल में आज आस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर ने मुलाकात कर प्रदेश में डेयरी उद्योग में निवेश की संभावनाओं के संबंध में चर्चा की। कनाडा से भी समिट के पूर्व, दौरे का प्रस्ताव आया है। इस प्रकार पूरा विश्व हमारी ओर संभावनाओं की दृष्टि से देख रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश असीम संभावनाओं का प्रदेश है। प्रकृति ने अपनी अनमोल संपदा से हमें परिपूर्ण किया है। प्रदेश की आर्थिक रेटिंग भी ए ग्रेड में है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को प्रदेश के विकास से जोड़ेंगे और प्रदेश की जनता को भी विकास में सहभागी बनायेंगे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि समिट देश में ही नहीं वरन पूरे मध्यप्रदेश के उद्योगपतियों को भी अन्य देशों में व्यापक बाजार उपलब्ध करवायेगी। इस ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में सात से अधिक देश अपने प्रेजेन्टेशन देंगे। ये देश मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं तथा अपने देशों में निवेश की संभावनाओं पर अपना दृष्टिकोण रखेंगे। अभी तक 3000 से अधिक डेलीगे अपना पंजीयन करा चुके हैं और 250 से अधिक डेलीगेट् के आवेदन लंबित हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि समिट विश्व-स्तर की होना चाहिये। आने वाले सभी डेलीगेट् को हर तरह से बेहतर माहौल मिले।
इसके पूर्व मुख्यमंत्री श्री चौहान ने एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 9 अक्टूबर के आगमन की तैयारियों का जायजा लिया। पुराना एयरपोर्ट के बाहर कॉरिडोर का निरीक्षण किया। एयरपोर्ट से एमआर-10 से होते हुए ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर तक के मार्ग का निरीक्षण किया और निर्देश दिये कि मार्ग के दोनों ओर सभी व्यवस्थाएँ चाक-चौबंद हों। आकर्षक होर्डिंग लगे जिनमें मध्यप्रदेश के पर्यटन, उद्योग, संस्कृति, कृषि एवं प्राकृतिक विषय अंकित हों।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर के मुख्य हाल और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। वहाँ के अन्य कक्षों का भी निरीक्षण किया और बैठक व्यवस्था देखी। उन्होंने निर्देश दिये कि निवेशकों और मंच पर उपस्थित अन्य लोगों के लिये एक समान व्यवस्था की जाये।
मुख्यमंत्री ने प्रेस ब्रीफिंग कक्ष, मीडिया कक्ष के संबंध में भी चर्चा की और वहाँ सभी आधुनिक व्यवस्थाएँ उपलब्ध करवाने के निर्देश दिये। पार्किंग, होटलों और बैठक व्यवस्था पूर्ण होने पर पुनः प्रेजेन्टेशन के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि इस दौरान आम जनता को कोई परेशानी न मुख्यमंत्री के साथ मुख्य सचिव श्री एंटोनी डिसा, विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी पुलिस श्री सुरेन्द्र सिंह, ट्रायफेक के एमडी श्री डी.पी. आहूजा सहित इंदौर के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट समीक्षा : अबकी बार करार नहीं, आमदनी और रोजगार बढ़ाने पर फोकस
Our Correspondent :26 September 2014
इंदौर. 8 से 10 अक्टूबर तक होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर समिट की तैयारियों की समीक्षा करने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान इंदौर आए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया की तर्ज पर मेक इन एमपी का नारा दिया और कहा- हमें भारत के अंदर मप्र का निर्माण करना है। यह समिट इसी दिशा में एक शुरुआत है। हम निवेशकों से करार करने पर जोर नहीं दे रहे। निवेशक स्वयं लगातार आएंगे, प्रदेश को कृषि से उद्योग की ओर ले जाना है ताकि रोजगार के अवसर और आमदनी बढ़े।

सुपर कॉरिडोर पर हो ब्रांडिंग, कचरा व पशु न दिखें : मुख्यमंत्री ने पौने तीन बजे पुराना एयरपोर्ट भवन देखा। यहां प्रधानमंत्री से कुछ लोगों के मिलने की व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद सुपर कॉरिडोर पहुंचे और शुरुआती बिंदुओं पर होर्डिंग्स, पोस्टर लगाने, कॉरिडोर के रेलवे ओवरब्रिज पर ब्रांडिंग करने के निर्देश दिए। साथ ही कचरा व आवारा पशु न दिखे ये निर्देश भी दिए। इसके बाद उन्होंने ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर की व्यवस्थाएं देखी।

सुरक्षा के लिए धारा 144 लगाने की मांग

एसपी मुख्यालय ने कलेक्टर को पत्र लिख मांग की है कि समिट के मद्देनजर शहर में कई महत्वपूर्ण व्यक्ति आएंगे। इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से धारा 144 लगाई जाए। प्रशासन मंगलवार को आदेश जारी कर सकता है।


सभी औद्योगिक क्षेत्रों की ब्रान्डिंग तथा मार्केटिंग की जायेगी
Our Correspondent :26 September 2014
भोपाल। "मेक इन इंडिया" की लांचिंग में उद्योग मंत्री श्रीमती सिंधिया वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने कहा कि मध्यप्रदेश के सभी औद्योगिक क्षेत्रों की ब्रान्डिंग एवं मार्केटिंग की जायेगी। सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दिया जायेगा। उद्योग मंत्री श्रीमती सिंधिया आज सीआईआई द्वारा आयोजित 'मेक इन इंडिया' की लांचिंग को सम्बोधित कर रही थी। श्रीमती सिंधिया ने कहा कि राज्य को 'मेन्यूफेक्चरिंग हब' के रूप में विकसित करना है। उन्होंने चेम्बर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों को इंदौर में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आमंत्रित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की मंशानुसार सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को मजबूत करने के मद्देनजर इन्वेस्टर्स समिट के पहले दिन एमएसएमई उद्योगों पर चर्चा होगी। पहली बार 15 से ज्यादा विदेशी राजदूत इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे तथा अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। 'मेक इन इंडिया' की लांचिंग के सीधे प्रसारण के दौरान आईटीसी के चेयरमेन श्री देवेश्वर द्वारा मध्यप्रदेश को निवेश के लिये बेहतर राज्य कहे जाने पर श्रीमती सिंधिया ने ताली बजाकर स्वागत करते हुए कहा कि 'मेक इन इंडिया' की तरह अब 'मेक इन मध्यप्रदेश' को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर प्रमुख सचिव उद्योग मोहम्मद सुलेमान, सीआईआई के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में उद्योगपति उपस्थित थे।


मध्यप्रदेश की सूचना प्रौद्योगिकी निवेश नीति-2012 में संशोधन
Our Correspondent :24 September 2014
भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश की सूचना प्रौद्योगिकी नीति-2012 में संशोधन और नवीन बीपीओ/बीपीएम उद्योग नीति-2014 के प्रारूप को कल सम्पन्न मंत्रि-परिषद् की बैठक में मंजूरी दी गई। यह पहल अगले माह इंदौर में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के संदर्भ में की गई है।
सूचना प्रौद्योगिकी निवेश नीति-2012 में छूट/ प्रोत्साहन संबंधी प्रावधानों में संशोधन किये गये हैं। इनके अनुसार मध्यप्रदेश में कार्यरत आईटी इकाइयों को गुणवत्ता प्रमाणीकरण (आईएसओ-9001 अथवा उच्चतर) प्राप्त करने में लगी वास्तविक लागत की प्रतिपूर्ति की जा सकेगी। परियोजना लागत के अनुरूप रियायती दरों पर दी जाने वाली भूमि के स्लेब 4 से घटाकर 2 किये गये हैं। इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर मेन्युफेक्चरिंग इकाइयों के लिये प्रति एकड़ 50 इंजीनियर/ आईटी/आईटीईएस प्रोफेशनल्स को रोजगार देना अनिवार्य होगा।
संशोधन के अनुसार समुचित प्राधिकारी से अनुमति के बाद निवेशक इकाइयों के लिये लीज पर आवंटित भूमि पर निर्मित भवन/ स्थान में से आईटी गतिविधियों के लिये तृतीय पक्ष को स्थान लायसेंस आधार पर दे सकेगा। मध्यप्रदेश में 10 करोड़ तक का निवेश करने वाली नवीन आईटी इकाइयों को 7 वर्ष तक प्रतिवर्ष 4 लाख तथा अधिकतम सीमा तक 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान की पात्रता होगी। 10 करोड़ तक का निवेश करने वाली इकाइयों को एक बार निवेश के 25 प्रतिशत पूँजीगत अनुदान की पात्रता होगी। नवीन आईटी इकाइयों को वेट और केन्द्रीय विक्रय कर की राशि पर इनपुट टैक्स रिबेट को समायोजित करने के बाद प्रोत्साहन सहायता दो वर्ग में दी जायेगी।
आईटी इकाइयों को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय/ अन्तर्राष्ट्रीय आई टी सेमीनारों, प्रदर्शनियों में शामिल होने तथा वहाँ अपना स्टॉल लगाने की स्थिति में प्रतिवर्ष एक बार स्टॉल के वास्तविक किराये पर 50 प्रतिशत अनुदान की प्रतिपूर्ति की पात्रता होगी। यह नीति अब वर्ष 2019 तक अथवा नई नीति की घोषणा होने तक लागू रहेगी।
नवीन बीपीओ/बीपीएम उद्योग निवेश नीति

नवीन बीपीओ/बीपीएम उद्योग निवेश नीति-2014 में कुछ सुविधाओं को छोड़कर शेष सभी सुविधाएँ संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी नीति-2014 के अनुसार प्राप्त होगी। इसके अनुसार राज्य शासन द्वारा बीपीओ/बीपीएम उद्योगों के लिये छोटे भू-खण्ड चिन्हांकित किये जायेंगे। साथ ही प्लग एण्ड प्ले सुविधा देने के लिये भवनों का निर्माण भी किया जायेगा। राज्य शासन द्वारा ऐसी गतिविधियों का चिन्हांकन किया जायेगा, जिन्हें मध्यप्रदेश में कार्य करने वाले बीपीओ/बीपीएम उद्योगों को आउटसोर्स किया जा सके।
नवीन बीपीओ/बीपीएम उद्योगों को अपने सेन्टर संचालित करने के लिये उनके द्वारा किराये से भवन लिये जाने पर कार्पोरेट एरिया के 11 रुपये प्रति वर्ग फीट प्रतिमाह की दर से अनुदान की पात्रता होगी।


प्रमुख देशों के राजदूतों से भी सम्पर्क करें
Our Correspondent :09 September 2014
भोपाल। वाणिज्य, उद्योग और रोजगार मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने आज मंत्रालय में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट-2014 की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में श्रीमती सिंधिया ने विभागीय अधिकारियों व सहयोगी एजेंसियों को निर्देश देते हुए कहा कि प्रमुख देशों में स्थित भारतीय दूतावासों से अनुरोध कर वहाँ के व्यापार-उद्योग संगठनों को इस समिट में आमंत्रित करना सुनिश्चित करें। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान तथा स्वयं के द्वारा सम्पर्क किए गए विभिन्न देश के राजदूतों से समिट में उपस्थिति का फॉलोअप किए जाने के लिये भी कहा।
उद्योग मंत्री श्रीमती सिंधिया ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में देश के मशहूर उद्योगपति मध्यप्रदेश आकर निवेश के इच्छुक है। निवेशकों की दिलचस्पी प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों से लेकर सुदूर कस्बों तथा बीहड़ों में भी उद्योग लगाने की है। इस परिप्रेक्ष्य में इस समिट को सफल बनाने के हर संभव प्रयास किये जाये। उन्होंने तय समय-सीमा में निर्धारित कार्यों को पूरा करने को कहा।
बैठक में प्रमुख सचिव, उद्योग मोहम्मद सुलेमान, आयुक्त उद्योग वी.एल.कान्ताराव, सचिव उद्योग अनुपम राजन, प्रबंध संचालक ट्राइफेक डी.पी.आहूजा तथा सहयोगी ऐजेन्सी सी.आई.आई., जे.डब्लू.टी. तथा इरनेस्ट एण्ड यंग कम्पनी के अधिकारी उपस्थित थे।


ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियाँ
Our Correspondent :03 September 2014
भोपाल। मध्यप्रदेश में औद्योगिक राजधानी इंदौर में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं। अब तक देश-विदेश के 648 डेलीगेट्स ने अपनी सहमति दी है। ग्यारह देश के उद्योगपति और प्रतिनिधियों ने यहाँ पहुँचने की सहमति दी है।
विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर वाणिज्य, उद्योग मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने आज मंत्रालय में उच्च अधिकारियों के साथ चर्चा की।
उद्योग मंत्री श्रीमती सिंधिया ने विशेषकर इन्वेस्टर्स समिट के लिये प्रचार-प्रसार के माध्यमों के बारे में चर्चा की। उन्होंने इस सम्मेलन के लिये समाचार-पत्रों में प्रिंट विज्ञापन, प्रदर्शनी, रेडियो जिंगल्स, टेलीविजन विज्ञापन, होर्डिंग्स आदि के संबंध में अधिकारियों से चर्चा कर समय-सीमा में कार्यों को पूर्ण करने के निर्देश दिये। समिट के आयोजन के लिये डिजाइन पार्टनर मेसर्स जे.डब्ल्यू.टी. को चुना गया है। इस अवसर पर कम्पनी द्वारा प्रेजेन्टेशन भी दिया गया।
बैठक में मुख्यमंत्री के सचिव एस.के. मिश्रा, प्रमुख सचिव उद्योग मोहम्मद सुलेमान, एम.डी. ट्राइफेक डी.पी. आहुजा, आयुक्त उद्योग व्ही.एल. कान्ताराव, सचिव उद्योग अनुपम राजन, संचालक माध्यम सुरेश तिवारी तथा अपर सचिव जनसंपर्क अनिल माथुर उपस्थित थे।


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