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टीम मोदी को शुभकामनाएं
मोदी गुरु ने सभी को एकसाथ निपटा दिया। भ्रष्ट अफसरों , नेता और बेईमान बिज़नस करने वाले के यहाँ मातम छाया हुआ है। मान गए मोदी गुरु को। अब सभी लाकर्स और प्रॉपर्टी का भी यही हाल होना चाहिए।





अजय बोकिल
शोभा का ट्वीट और जोगावत
देश में जब गधों और उनकी गुणवत्ता तथा उपयो4गिता पर बड़ी राजनीतिक बहस छिड़ी हो, तब पेज 3 लेखिका शोभा डे ने एक ट्वीट कर अपनी उस मानसिकता का परिचय दिया, जो शायद गर्दभ समुदाय में भी स्वीकार्य न हो। शोभा डे ने हाल में एक मोटे और थुलथुल पुलिस वाले की तस्वीर पोस्ट कर ट्रवीट किया कि ‘मुंबई में पुलिस का भारी सुरक्षा इंतजाम।‘ ट्वीट में सुरक्षा के साथ साथ मुंबई पुलिस की सेहत और फिटनेस पर भी तीखा कटाक्ष था। क्योंकि जिस पुलिस वाले को तस्वीर में दिखाया गया था, उसका चलना- फिरना भी मुश्किल लग रहा था। शोभा के इस ट्वीट पर सवा करोड़ लाइक्स मिले। गोया लोग उनसे इसी तरह के ट्वीट की आस लगाए हुए थे। लेकिन सोशल मीडिया में शोभा के इस ट्वीट की काफी आलोचना हुई।
इस ट्वीट को मुंबई पुलिस ने काफी गंभीरता से लिया और शोभा डे को उनकी ही शैली में जवाब दिया। मुंबई पुलिस ने अपने ट्वीट में कहा कि मैडम आपने जो तस्वीर पोस्ट की है, वह मुंबई के किसी पुलिसकर्मी की नहीं है। उसने पहनी ड्रेस भी हमारी नहीं है। कम से कम आप से तो जिम्मेदार नागरिक की तरह बर्ताव की अपेक्षा है। इस ट्वीट- वाॅर का क्लायमेक्स अभी होना था। लोगों ने खोज निकाला कि वह ‘मुटल्ला’ पुलिसवाला आखिर है कौन? पता चला कि वह तो मप्र के नीमच का पुलिस इंस्पेक्टर दौलतराम जोगावत है। जोगावत ने भी उसी शैली में शोभा डे को जवाब ‍िदया। उसने मीडिया से कहा कि मैडम मेरा मोटापा इंसुलिन डिस्बैलेंस के कारण है। इसी वजह से मेरा वजन 180 किलो हो गया है। यह अोवर वेट होने का मामला नहीं है। अगर मैडम चाहें तो वह मेरा इलाज करा सकती हैं। आखिर कौन पतला नहीं होना चाहता। पता चला कि जोगावत की यह हालत 1993 में हुए एक आॅपरेशन के कारण हुई है न ‍िक सेहत के प्रति लापरवाही के कारण।
मुददा यह नहीं ‍िक शोभा डे ने बिना सोचे- समझे जोगावत की तस्वीर पोस्ट की बल्कि यह है ‍कि उन्हें दूसरों का इस तरह मजाक बनाने का अधिकार‍ दिया ‍िकसने? शोभा डे उस सोसाइटी की प्रतिनिधि हैं, जहां गरीबी एक शगल और मजबूरी एक थ्रिल है। वो एक ऊंची मीनार में रहने वाले लोग हैं, जहां जीवन की कठोर वास्तविकताएं केवल एंज्वाय की जाती हैं। शोभा डे अंगेरजी में लिखती हैं और अमूमन उसी दुनिया के बारे में लिखती हैं, ‍िजसमें वो जीती हैं। पैसा और शोहरत उनके इर्द गिर्द घूमते हैं। वे अंगरेजी में एक स्तम्भ भी लिखती हैं, जिसके चलने की वजह उसका विवादास्पद होना ही है। चमक- दमक की दुनिया में उन्हें आधुनिक सोच वाली बेबाक और बेकतल्लुफ लेखिका माना जाता है। उनके लेखन का साहित्यिक मूल्य क्या है, यह बहस का विषय है, लेकिन वे जब तब अपने नाॅन सीरियस ट्वीट्स के कारण चर्चा में बनी रहती हैं। मसलन बीफ बैन के माहौल में उन्होने गोहत्या विरोधियों को खुली चुनौती दी थी कि मैंने अभी अभी बीफ खाया है। हिम्मत है तो कोई आकर मुझे कत्ल करे। भारतीय‍ खिलाडि़यों के रियो अोलिपिंक मे प्रदर्शन को लेकर उनका कटाक्षपूर्ण ट्वीट था कि रियो जाअो सेल्फी लो, खाली हाथ वापस आअो। लेकिन भारतीय महिला खिलाडि़यों ने अपने प्रदर्शन से शोभा डे को करारा जवाब दिया था।
शोभा ने एक बार विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को नसीहत दे डाली थी ‍कि वे ट्रवीट करना बंद कर दें। यह बात अलग है ‍िक सुषमा ने शोभा की बात को तवज्जो नहीं दी। सवाल यह है कि शोभा डे इस तरह के ट्वीट कर सुर्खियों में क्यों बनी रहना चाहती हैं और इससे उन्हें क्या लाभ होता है? वे अगर किसी घटना या विचार पर प्रतिक्रियास्वरूप ट्वीट करें, इसमें गलत कुछ नहीं है। क्योंकि देश में लोकतंत्र है और अपनी बात कहने की आजादी है। लेकिन सवाल उसके पीछे की नीयत का है। शोभा के ट्वीट जूती को जूती की जगह दिखाने की मानसिकता लिए होते हैं। इसके लिए वे सार्वजनिक अभिव्यक्ति के उन बु‍नियादी मानदंडों का भी पालन नहीं करते, जो उन जैसी सेलिब्रिटी से अपेक्षित है। मोटे पुलिस वाले की तस्वीर मय कमेंट के पोस्ट करने के पहले यह तो जांच लिया होता कि वह किसकी है, कहां की है और इस तस्वीर के पीछे की वजह क्या है? माना कि हमारे देश में ज्यादातर पुलिस वाले अपनी फिटनेस पर उतना ध्यान नहीं दे पाते। इसकी वजह उनका अोवर वर्कलोड ौर तनाव है। फिर भी वे 24 घंटे अपना कर्तव्य निभाते रहते हैं। उस पर गैरजिम्मेदाराना कमेंट करने में शोभा जैसे लोगों को क्या लगता है? जाहिर है ‍िक उनकी मंशा केवल व्यवस्था, व्यक्ति और विचार का मजाक उड़ाना भर है। उनके कारणों पर जाना नहीं है। पेज थ्री मानसिकता भी यही है। वह केवल अपने बारे में सोचती है। अपने तक सोचती और अपनी दुनिया में मस्त रहती है। जीवन की कड़वी सच्चाइयों से उनका कोई लेना देना नहीं है। ये खाते कहीं की,बजाते किसी और की हैं। ये महज शोभा की सुपारियां हैं, ‍जिनका देश और समाज के लिए कोई उपयोग नहीं है।
अजय बोकिल
‘राइट क्लिक’
(‘सुबह सवेरे’ में दि. 24 फरवरी 2017 को प्रकाशित)




एक बार परीक्षा में फेल होना जिन्दगी में फेल होना नहीं होता है?
स्कूल और कॉलेज के दरवाजे हमशा खुले रहते हैं। जिंदगी भगवान का दिया हुआ अनमोल तोहफा है, जिन्दगी में खुश रहने के बहुत से रास्ते होते हैं। दुनिया के सैकड़ों सफल व्यक्ति एसे हैं, जिन्होंने कभी डिग्री नहीं ली, लेकिन दुनिया के टॉप विष्वविद्यालयों के प्रोफेशनल्स को नौकरी दी, आप भी असफलता से सफलता के कदम छू सकते हैं। धीरूभाई अंबानी, बील गेटस और स्टीव जॉब्स जैसे सफल उद्द्योगपतियों के पास कोई डिग्री नहीं थी। सफल व्यक्ति वह होता है, जो हमेशा सकारात्मक सोच, दृढ़ निष्चय और कठोर मेहनत करने में विश्वास रखता है।
मेट्रो मिरर- फॉरवर्ड इंडिया फोरम काउंसलिंग केन्द्र
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