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परीक्षा अलर्ट इंटर्नशिप नियुक्तियां

D-81586/11-07-17

विद्यार्थियों ने बनाईं पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं
Our Correspondent :21 Aug 2017

भोपाल, 20 अगस्त। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नवीन मीडिया विभाग की ओर से 'मिट्टी के गणेश निर्माण कार्यशाला' का आयोजन किया गया। कार्यशाला में पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली सामाजिक संस्था 'नर्मदा समग्र' से जुड़े नवीन बोडख़े ने विद्यार्थियों को मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाने का प्रशिक्षण दिया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि पीओपी से बनने वाली गणेश प्रतिमाएं पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती हैं। पर्यावरण बचाने के लिए गणेश उत्सव के दौरान मिट्टी की प्रतिमाओं का पूजन करना चाहिए। मिट्टी से बनी प्रतिमाएं ईको-फ्रेंडली (पर्यावरण-अनुकूल) होती हैं। मिट्टी से मूर्ति बनाना बहुत आसान है। प्रशिक्षण के बाद हर कोई अपने घर पर ही प्रतिमा बना सकता है। नवीन मीडिया विभाग के विद्यार्थियों ने कार्यशाला में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और भगवान गणेश की सुंदर प्रतिमाओं का निर्माण किया। इस अवसर पर प्रशिक्षक नवीन बोडख़े ने कहा कि प्रतिमाओं के निर्माण में उपयोग किए जाने वाले रंग एवं अन्य वस्तुएं भी पर्यावरण के अनुकूल होनी चाहिए। कार्यशाला का उद्घाटन नवीन मीडिया विभाग की अध्यक्ष डॉ. पी. शशिकला ने किया।
प्रतिमाओं को सजाएंगे आज : कार्यशाला में जिन विद्यार्थियों ने मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं बनाई हैं, वे सोमवार को उनको रंगों से सजाएंगे। प्रतिमाओं पर किया जाने वाला रंग भी पर्यावरण के अनुकूल होगा। इसके बाद कलात्मक एवं मोहक गणेश प्रतिमाओं के विक्रय एवं प्रदर्शन के लिए विद्यार्थी स्टॉल भी लगाएंगे।


पढ़ाई के खर्च की चिंता हुई अब दूर : योजना में चयनित विद्यार्थी
Our Correspondent :20 Aug 2017

मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के प्रमाण-पत्र वितरण समारोह में विभिन्न जिलों से आये विद्यार्थियों ने कहा कि 'हमारी पढ़ाई के खर्च की चिंता दूर हो गयी है। हमारे माता-पिता को अब पढ़ाई के लिये जरूरी पैसों की व्यवस्था के लिये भटकना नहीं पड़ेगा।' सोचा भी नहीं था कि बिना पैसों के बनेंगे डॉक्टर जिला खरगोन के श्री पवन मंडलोई का प्रवेश नीट के माध्यम से श्री अरविंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस इंदौर में हुआ है। इनके पिताजी का निधन जब वे कक्षा दस में थे तभी हो गया था। उन्होंने बताया कि सपने में भी नहीं सोचा था कि इस हालत में वे डॉक्टर बन पायेंगे। सरकार ने हमारी फीस भरने की जिम्मेदारी लेकर हम जैसे अनेक मध्यमवर्गीय एवं गरीब परिवार से आने वाले बच्चों पर बहुत बड़ा उपकार किया है। इसे जिंदगीभर याद रखेंगे। भविष्य हुआ सुरक्षित जिला भोपाल की कुमारी शुभांगी बागरे ने बताया कि हमारे पापा श्री राधेश्याम बागरे की छोटी सी दुकान है। मुख्यमंत्री ने यह योजना लागू कर हमारी और हमारे पापा की चिंता दूर कर दी है। अब हमें भविष्य की चिंता नहीं है। हम बेहतर शिक्षा प्राप्त कर अपना भविष्य सँवार सकेंगे। अब इसमें हमारी आर्थिक स्थिति बाधा नहीं बनेगी। कुमारी बागरे ने स्कूल ऑफ प्लानिंग एण्ड आर्किटेक्चर, भोपाल में प्रवेश लिया है। इसकी सालाना फीस एक लाख पचास हजार रूपये है। यह फीस अब पूरे पाँच साल सरकार देगी। इतना तो कोई मामा नहीं करता जिला इंदौर की कुमारी अनुज्ञा मुकाती ने भावुक होते हुए कहा कि इतना तो अपने भांजों के लिये मामा नहीं करते हैं, जितना कि मुँहबोले मामा मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किया है। मामा की कथनी और करनी में अंतर नहीं है। कुमारी मुकाती का प्रवेश क्लेट के माध्यम से एनएलआईयू, भोपाल में हुआ है। इनके पापा पत्रकार हैं। अब गरीब बच्चा भी ले सकेगा उच्च शिक्षा जिला राजगढ़ के श्री दीपक कुमार ने कहा कि अब गरीबी शिक्षा में आड़े नहीं आयेगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने हम गरीबों की पीड़ा को समझा और यह योजना लागू कर हमें ऐसी सौगात दी है कि अब हम उच्च शिक्षा से वंचित नहीं रहेंगे। कुछ इसी तरह के विचार आईआईटी इंदौर में प्रवेश ले चुके सिवनी जिले के छात्र श्री श्रेयांस ठाकुर, ग्वालियर के श्री शांतनु शर्मा, जबलपुर के श्री केशव राठौर और इंदौर के श्री जुबिन नागपाल ने भी व्यक्त किये। मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के प्रमाण-पत्र वितरण समारोह में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने एमबीबीएस के लिए चयनित रीवा की कुमारी जसमिन पटेल, इन्दौर के श्री स्वप्निल कुन्हारे, इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश लेने वाली इन्दौर की कुमारी आस्था डोंगरे, बैतूल की कुमारी किरण जपाटे, आईआईएम इंदौर में प्रवेश लेने वाली बुरहानपुर की कुमारी मानसी संजय तरकस और उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने वाले भोपाल के श्री दीपक कुमार, बैतूल की कुमारी मोनिका सोनी और भोपाल की कुमारी आकृति मेहरा को भी प्रमाण-पत्र प्रदान किये।


एक योजना ने बदला हजारों का जीवन
Our Correspondent :20 Aug 2017

प्रदेश के गरीब प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा का सपना मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की मेधावी विद्यार्थी योजना ने साकार कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना से देश-प्रदेश के शिक्षण संस्थाओं में 32,185 छात्र-छात्राओं को प्रवेश मिल गया है। अब वे धन के अभाव की चिंता से मुक्त होकर मेहनत से उच्च शिक्षा के अपने सपनों को पूरा कर सकेंगे। योजना में मध्यप्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों द्वारा देश के कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों जैसे आई.आई.टी. मुम्बई, दिल्ली, कानपुर, इन्दौर, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी और दिल्ली विश्वविद्यालय सहित देश के 18 आई.आई.टी., 14 एन.आई.टी., 10 राष्ट्रीय विधि संस्थान (नेशनल लॉ इन्स्टीट्यूट), 14 आई.आई.टी. संस्थान एवं 14 अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में 250 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों द्वारा प्रवेश लेकर इस योजना का लाभ लिया जा रहा है। उल्लेखनीय है विगत वर्षों में उच्च शिक्षा के लिये पात्र विद्यार्थियों के उत्तीर्ण होने का औसत प्रतिशत 46 रहा है। इनमें से 27 प्रतिशत ड्राप आउट हो जाते हैं। इनमें अधिकांश विद्यार्थी धनाभाव के कारण उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में प्रवेश नहीं ले पाते थे। मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रदेश के सभी मेधावी विद्यार्थियों को उनकी विशेष योग्यता और प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिये वर्ष 2017 से मुख्यमंत्री मेधावी योजना प्रारंभ की गयी है। यह योजना मध्यप्रदेश के मूल निवासी मेधावी विद्यार्थियों के लिये है, जिनके पालकों की वार्षिक आय 6 लाख रूपये तक है। उन्होंने 12वीं की माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षा में 75 प्रतिशत अथवा सी.बी.एस.सी./आई.सी.एस.ई की परीक्षा में 85 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किये हैं। योजना सभी इंजीनियरिंग, मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेदिक, विधि एवं अन्य समस्त स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले मेधावी विद्यार्थियों के लिये लागू की गयी है, जिन्होंने मध्यप्रदेश एवं भारत सरकार के उच्च संस्थानों में प्रवेश लिया है। योजना के प्रथम चरण में हमारे प्रदेश के 150 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों ने प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कालेजों में प्रवेश लिया है। इसी तरह प्रदेश के इंजीनियरिंग कालेजों के 762 विद्यार्थी, पोलिटेक्निक महाविद्यालयों के 83 विद्यार्थी एवं उच्च शिक्षा के महाविद्यालयों के 20 हजार से अधिक विद्यार्थी इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट में 20 से अधिक विद्यार्थियों ने प्रवेश ले लिया है। आई.आई.एम. इन्दौर एवं स्कूल ऑफ प्लानिंग एवं आर्किटेक्चर जैसे राष्ट्रीय संस्थानों में 17 से अधिक विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है।


मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना प्रमाण-पत्र वितरण
Our Correspondent :20 Aug 2017

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह ने युवाओं का आव्हान किया है कि प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ और भारत को विश्व गुरु बनाने के लिये आगे आयें। समाज सेवा के लिए संकल्पित हो। सरकार युवाओं की प्रतिभा को कुंठित नहीं होने देगी, उनके सपनों को साकार करने में हरसंभव सहयोग करेगी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद श्री अमित शाह ने कहा है कि नये भारत का निर्माण युवाओं की जिम्मेदारी है। युवाओं को अवसर देने का कार्य सरकार पूरी जवाबदारी से कर रही है। वे आज यहाँ मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के लाभान्वितों को प्रमाण पत्र वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। विद्यार्थी कल्याण कोष बनेगा कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रतिभाओं को पंख देने का संकल्प आज पूरा हो रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों में प्रतिभा, क्षमता और योग्यता होने बावजूद आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वे उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर पाते थे। इन बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिये मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना शुरू की गई है। इसका लाभ लेकर बच्चे अनंत आकाश में उड़ान भरें और अपने परिवार, प्रदेश व देश का नाम रोशन करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक स्थिति से कमजोर विद्यार्थियों की मदद के लिये विद्यार्थी कल्याण कोष बनाया जायेगा। इस कोष में मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना का लाभ लेने वाले जो विद्यार्थी रोजगार से लग जाते हैं, वे मदद करेंगे। इसी तरह जिनका मेडिकल कॉलेज में प्रवेश हो जाता है वे पढ़ाई पूरी करने के बाद तीन वर्ष तक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवायें देंगे। इनके साथ ही इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर ईमानदारी से कार्य करने का संकल्प भी मुख्यमंत्री ने दिलवाया। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का मान, सम्मान और स्वाभिमान पूरी दुनिया में बढ़ा है। उनका सम्मान सभी भारतीयों का सम्मान है। उन्होंने पॉलिसी पैरालिसिस की स्थिति खत्म की। उन्होंने युवाओं की बेहतरी के लिये अनेक कदम उठाये हैं। इससे भारत गौरवशाली बन रहा है। उन्होंने कहा कि श्री मोदी के नेतृत्व में भारत भौतिकता की अग्नि में दग्ध विश्व को शाश्वत शांति के पथ का दिग्दर्शन करवाने में विश्व गुरु की भूमिका में आ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिये युवाओं के जीवन को बेहतर बनाना है। इसके लिये मध्यप्रदेश सरकार ने बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें, साईकिल एवं गणवेश उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। साथ ही कमजोर वर्गों के साथ-साथ सामान्य वर्ग के निर्धन विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्ति मुहैया करवायी जा रही है। छात्राओं को गाँव की बेटी एवं प्रतिभा किरण योजना का लाभ तथा बारहवीं में 85 प्रतिशत अंक लाने वाले विद्यार्थियों को लेपटॉप और कालेज में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को स्मार्ट फोन उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि केवल सरकारी नौकरी ही रोजगार का रास्ता नहीं है। स्व-रोजगार में मदद देने के लिये प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई स्किल इंडिया, स्टार्टअप, स्टैंडअप इंडिया एवं मध्यप्रदेश शासन की मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार और कांट्रेक्टर योजना का लाभ लेकर युवा दूसरों को रोजगार देने के काबिल बन रहे हैं। प्रदेश सरकार कौशल उन्नयन में सहयोग के लिये अभूतपूर्व कार्य कर रही है। सिंगापुर के सहयोग से ग्लोबल स्किल पार्क का विकास किया जा रहा है, जिसमें एक साथ दस हजार युवाओं को प्रशिक्षण मिलेगा। आई.टी.आई. का उन्यनयन किया जा रहा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के लिये पौधे लगाने, नशा मुक्त समाज बनाने एवं बेटा-बेटी को समान मानने का संकल्प भी दिलाया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री श्री मोदी के सपनों को साकार किया जायेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जॉब सीकर को जॉब क्रिएटर बनाया सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने कहा कि न्यू इंडिया के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विभिन्न नवाचारी योजनाओं के द्वारा युवाओं को नये विचारों को क्रियान्वित और नई संभावनाओं को तलाशने का अवसर दिया है। उन्होंने युवाओं से कहा कि सरकार से विकास का मंच, उन्हें मिला है, उन्हें भी गरीबों की सेवा के लिये संकल्पित होना चाहिए। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने युवाओं के विकास से देश प्रदेश का विकास होगा, इस अवधारणा के साथ युवाओं के सपनों को साकार करने में सहयोग किया है। डिजिटल इंडिया, मुद्राबैंक, स्टार्टअप, स्टैंडअप और स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रम ने युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनाया है। उनकी सरकार ने पिछले तीन साल में विकास की गति बदलने का कार्य किया है। पूर्व सरकार के कार्यकाल में जो अर्थव्यवस्था लकवाग्रस्त थी उसे आज दुनिया की सबसे तेज प्रगति करने वाली अर्थव्यवस्था का सम्मान मिल रहा है। दुनियाभर में हो रही प्रदेश के विकास की चर्चा श्री शाह ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद सरकार का दायित्व है। आर्थिक अभाव में प्रतिभाओं के कुंठन से समाज में अन्याय का भाव पनपता है। सामाजिक न्याय के प्रयासों में मेधावी विद्यार्थी योजना में बहुत बड़ी संभावना दिख रही हैं। योजना से लाभान्वित होने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के जीवन में एक नई शुरूआत हुई है, जो उन्हें नई ऊँचाई पर ले जायेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान जैसा संवेदनशील व्यक्तित्व ही इस तरह की पहल कर सकता है। उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश के विकास की दुनियाभर में चर्चा हो रही है। उन्होंने सर्वांगीण विकास पर विचार करने, योजना निर्माण करने और बेहतर क्रियान्वयन कर, उनका लाभ अंतिम छोर तक पहुँचाया है। बीमारु राज्य कहा जाने वाला मध्यप्रदेश आज देश के सर्वश्रेष्ठ राज्यों की सूची में शामिल है। स्वागत उदबोधन में तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री श्री दीपक जोशी ने कहा कि प्रदेश सरकार सबको शिक्षा के लक्ष्य प्राप्ति के प्रयास कर रही है। उन्होंने गरीब कल्याण वर्ष का उल्लेख करते हुए योजना को इस दिशा में उठाया गया प्रभावी कदम बताया और योजना की संक्षिप्त जानकारी दी। आभार प्रदर्शन प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा श्री संजय बंदोपाध्याय ने किया। विद्यार्थियों में दिखी नई उम्मीदें और उत्साह कार्यक्रम में बड़ी संख्या में योजना के लाभान्वित विद्यार्थी उपस्थित थे। उत्साह और नई उम्मीदें उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी। उनके जयकारे और तालियों के गड़गड़ाहट से पूरा पंडाल अनेक बार गुंजायमान हुआ। भारत माता के जयकारे में उनकी जोश भरी आवाज ने अतिथियों को भी प्रभावित किया। प्रतीक स्वरूप योजना प्रमाण पत्रों का वितरण नीट में चयनित रीवा की जास्मीन पटेल, खरगोन के पवन मंडलोई, जे.ई.ई. मेन में चयनित सिवनी के श्रेयस ठाकुर, ग्वालियर के शांतनु शर्मा, जबलपुर के केशव राठौर, इन्दौर के जूबिन नागपाल, क्लेट में चयनित इन्दौर की अनुज्ञा मुक्ति, इंजीनियरिंग शिक्षा में चयनित बैतूल की किरन जपाटे, आर्किटेक्चर शिक्षा में चयनित भोपाल की शुभांगी बागरे, आई.आई.एम. में चयनित बुरहानपुर की मानसी संजय तरकस, बी.एस.सी. में चयनित भोपाल के दीपक कुमार, बी.कॉम. में चयनित बैतूल की मोनिका सोनी, बी.कॉम आनर्स में चयनित भोपाल की आकृति मेहरा को अतिथियों द्वारा वितरित किये गये। अतिथियों का स्वागत पुस्तक भेंटकर किया गया। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सांसद श्री नंदकुमार सिंह चौहान, उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया, कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री विजय शाह, पंचायत एवं ग्रामीण मंत्री श्री गोपाल भार्गव, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस, लोक निर्माण मंत्री श्री रामपाल सिंह, सहकारिता राज्य मंत्री श्री विश्वास सारंग, सांसद श्री आलोक संजर, महापौर श्री आलोक शर्मा, विधायक सर्वश्री सुरेन्द्र नाथ सिंह, विष्णु खत्री एवं अन्य जनप्रतिनिधि तथा मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारीगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ मौजूद थे।


डॉ. वर्मा बरकतउल्ला विश्‍वविद्यालय, भोपाल के कुलपति नियुक्त
Our Correspondent :11 Aug 2017

कुलाधिपति और राज्यपाल श्री ओम प्रकाश कोहली ने डॉ. प्रमोद कुमार वर्मा प्राध्यापक, एप्लाईड जिओलाजी, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन को तत्काल प्रभाव से बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति के पद पर नियुक्त किया है। डॉ. वर्मा की नियुक्ति आगामी आदेश तक की गई है।


विज्ञान भी है हमारे तीर्थ स्थलों में - प्रो. कुठियाला
Our Correspondent :2 Aug 2017

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि हमारे तीर्थ स्थल विश्वास और परम्परा के केंद्र मात्र नहीं हैं, उनमें विज्ञान भी है जो जो आज कहीं लुप्तक हो गया है। अमरनाथ यात्रा के दौरान विश्वास के साथ एक समर्पण का भाव था| मन में भाव था कि जो होता जायेगा, वह करते जाएंगे। यह बात प्रो कुठियाला ने अमरनाथ यात्रा से लौटने के बाद आज विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित 'अमृत प्रसंग' कार्यक्रम में कही। अपनी धार्मिक यात्रा का अनुभव व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य के समय उस विज्ञान का ज्ञान था| इसी कारण से दो हजार वर्षों ज्यादा समय से चल रही एक लोक परंपरा ऐसी आस्था में बदल गई कि चारधाम की यात्रा जीवन का उद्देश्य बन गई| इस आस्था में कोई दैवीय शक्ति है तो कोई वैज्ञानिक शक्ति भी मौजूद हैं| उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि उनकी यह यात्रा पूर्व नियोजित थी। पूर्व में यात्रा को लेकर कोई निर्णय नहीं किया था| संयोग ऐसे बनते गये और एक दुर्गम यात्रा पूर्ण हो गई। यह एक सपना था जो पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि अमरनाथ गुफा प्रकृति का वरदान है और यह एक चोटी पर स्थित है। दुनियांभर में बर्फ के कारण बना इस तरह का दृश्य कहीं भी देखने में नहीं आता है जिसमें शिवलिंग बना हो। प्राकृतिक रूप से बर्फ से उल्टें पिरामिड की तरह की संरचना बनती है लेकिन अमरनाथ के पवित्र स्थल पर पिरामिड की संरचना नजर आती है और इसके पास ही एक दूसरी संरचना माता पार्वती जी के रूप में देखने को मिलती है। यह आश्चर्य है कि 14000 फीट की ऊंचाई पर जहां पानी नहीं, खाने को दाने नहीं, वहां कबूतर नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों और प्रकृति के प्रकोप के बावजूद भारतीय सेना और केन्द्रीय बल के जवान हर चोटी पर मौजूद है और इस यात्रा को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। जब वे अमरनाथ पहुंचे उसके दो दिन पूर्व ही आतंकवादियों ने गुजरात की बस को निशाना बनाया था| उन्होंने कहा कि श्रीनगर में ही एक स्थान पर 2300 वर्ष पूर्व आदिशंकराचार्य ने साधना की थी, वहां पर एक शिव मंदिर स्थित है| उसका वातावरण अद्भुत है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढियों का रास्ता है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा, कुलसचिव श्री दीपक शर्मा, विभागाध्यक्ष डॉ पवित्र श्रीवास्तव, डॉ पी शशिकला, डॉ राखी तिवारी, डॉ चैतन्य पी अग्रवाल, डॉ मोनिका वर्मा, डॉ अविनाश वाजपेयी, डॉ कंचन भाटिया, परीक्षा नियंत्रक डॉ राजेश पाठक ने कुलपति प्रो. कुठियाला का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष श्री संजय द्विवेदी ने किया।


मीडिया, पुलिस दोनों समाज के लिए – श्रीमती सिंह
Our Correspondent :31 July 2017

राष्‍ट्रपति पदक से सम्‍मानित वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारी श्रीमती अनुराधा शंकर सिंह ने कहा कि मीडिया और पुलिस दोनों में बहुत समानता है। मीडिया समाज का विभाग है, वहीं पुलिस जनता के द्वारा चुनी गई सरकार का एक विभाग है। दोनों का काम समाज को दिशा देने का है, लेकिन जब पुलिस और मीडिया के अहंकार आपस में टकराते हैं तो फिर परेशानियां होती हैं। श्रीमती सिंह ने यह विचार माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय द्वारा आयोजित सत्रारंभ समारोह के अंतिम दिन पुलिस और मीडिया विषय पर आयोजित सत्र में व्‍यक्‍त किए। उन्‍होंने बताया कि मीडिया और पुलिस दोनों को एक-दूसरे की जरूरत होती है। मीडिया को पुलिस से अपराध से जुड़ी खबरें चाहिए, वहीं पुलिस के लिए मीडिया एक बड़ा स्रोत होता है क्‍योंकि पत्रकार सब जगह आ-जा सकते हैं। कई बार व्‍यक्तिगत स्‍वार्थ के कारण दोनों के रिश्‍ते बिगड़ जाते हैं, लेकिन दोनों को एक-दूसरे के काम और सीमाएं मालूम होना चाहिए। उन्‍होंने मीडिया के विद्यार्थियों से कहा कि उन्‍हें कानून का सामान्‍य ज्ञान होना चाहिए और पुलिस के अधिकारों से भी परिचित होना चाहिए। विद्यार्थियों के सवालों का जवाब देते हुए उन्‍होंने बताया यह दुर्भाग्‍य है कि हमारे देश में आज भी अंग्रेजों के द्वारा बनाया गया पुलिस एक्‍ट प्रचलन में है, यह उपनिवेशवादी है और स्‍वतंत्रता संग्राम के समय जनता को नियंत्रण में करने के लिए इसे बनाया गया था। उच्‍चतम न्‍यायालय ने 11 साल पहले मॉडल पुलिस एक्‍ट दिया और उसे सभी राज्‍य सरकारों से लागू करने के लिए कहा। राजस्‍थान और हरियाणा में यह एक्‍ट लागू हो चुका है, कई राज्‍यों में अभी नया पुलिस एक्‍ट बनना बाकी है। उन्‍होंने बताया कि यह एक गलत धारणा है कि पुलिस और जनता के बीच सम्‍बन्‍ध अच्‍छे नहीं हैं। पुलिस स्‍टेशन ही एकमात्र ऐसा सरकारी कार्यालय है जो चौबीस घंटे खुला रहता है। उन्‍होंने कहा कि यह सही है कि पुलिस का व्‍यवहार ठीक नहीं होता, उसका कारण विभाग की सामन्‍ती व्‍यवस्‍था है। सत्र की अध्‍यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि परिवर्तित वातावरण में मीडिया और पुलिस के बीच संवाद बना रहना चाहिए क्‍योंकि यह समाज के हित में हैं। कार्यक्रम का संचालन संचार शोध विभाग की अध्‍यक्ष डॉ. मोनिका वर्मा ने किया। न्‍यू मीडिया टेक्‍नॉलॉजी विभाग की अध्‍यक्ष डॉ. पी. शशिकला ने श्रीमती सिंह का सम्‍मान किया।
भारतीय युवाओं के पास हैं आज ज्‍यादा अवसर - प्रो. कुठियाला
समारोह के अंतिम सत्र को सम्‍बोधित करते हुए कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि आज भारत की वर्तमान पीढ़ी के पास विश्‍व के अन्‍य युवाओं की तुलना में बहुत अवसर हैं। उन्‍होंने ऐसे समय में जन्‍म लिया है जब पूरा विश्‍व भारत की ओर आशाभरी नजरों से देख रहा है और युवाओं के पास ऐसी तकनीक उपलब्‍ध है जिससे पूरे विश्‍व में संचार किया जा सकता है। इसके अलावा प्राचीन समृद्ध विरासत है जो अपने आप में सौभाग्‍य है। सात हजार वर्ष पूर्व इसी धरती पर रहने वाले लोग प्रकृति के रहस्‍य जानते थे और उसके अनुसार जीवन जीते थे। अमेरिका और रूस के वैज्ञानिकों ने भी कहा है कि सात हजार वर्ष पूर्व वैदिक सभ्‍यता मौजूद थी। आज अमेरिका में भारतीय सभ्‍यता और संस्‍कृति को पढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर विभाग खोले जा रहे हैं। प्रो. कुठियाला ने विद्यार्थियों से आव्‍हान किया कि वे खूब पढ़ें, चिंतन करें और फिर लिखें। साथ ही अलग-अलग विषयों पर अलग-अलग लोगों से सलाह मश्‍वरा करना चाहिए। मंच पर विश्‍वविद्यालय के कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा एवं कुलसचिव श्री दीपक शर्मा जी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन समारोह के संयोजक श्री संजय द्विवेदी ने किया।
डिजिटल संसार में फर्जी खबर सबसे बड़ी समस्‍या- श्री खरे
वरिष्‍ठ पत्रकार श्री अनुज खरे ने कहा कि बड़ी संख्‍या में डिजिटल संसार में आई फर्जी खबर मीडिया का हिस्‍सा बन रही है। भारत में जो डेटा उपभोग बढ़ा है, उसमें 70 फीसदी हिस्‍सा संदेशों और वीडियो के कारण है । सत्रारंभ समारोह के अंतिम दिन 'डिजिटल मीडिया और युवा' विषय पर आयोजित सत्र को सम्‍बोधित करते हुए श्री खरे ने कहा कि आने वाले समय में फर्जी खबर सबसे बड़ी समस्‍या होगी, क्‍योंकि लोग स्रोत और सत्‍य को जाने बगैर संदेश को आगे बढ़ा देते हैं। उन्‍होंने कहा कि अमेरिका में राष्‍ट्रपति के चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए संदेशों का अध्‍ययन किया गया उसमें यह पाया गया कि फर्जी खबर को लगभग 90 लाख प्रतिक्रियाएं और पसंद, नापसंद मिली, जबकि अमेरिका के ही 19 विश्‍वसनीय वेबसाइट पर जारी संदेशों को 70 लाख प्रतिक्रियाएं मिलीं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि फर्जी खबर किस तरह से आगे बढ़ती है। उन्‍होंने बहुत सारे उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को समझाया कि डिजिटल संसार में फर्जी कंटेंट और संदेशों को सॉफ्टवेयर की मदद से चेक किया जा सकता है। सिंगापुर, केलिफोर्निया जैसे राज्‍यों में इसके लिए कानून भी बनाए हैं। जर्मनी में भी इस बारे में भी कानून बनाया जा रहा है। जी. डिजिटल के सम्‍पादक श्री दयाशंकर मिश्र ने कहा कि डिजिटल मीडिया में काम करने के लिए गंभीर बनना पड़ेगा और अन्‍य सब माध्‍यमों से सामंजस्‍य करना होगा। भारत में अभी समाचार पत्र का भविष्‍य उज्‍ज्‍वल है, आने वाले समय में सभी के लिए एक माध्‍यम हो जाएगा। सत्र का संचालन कम्‍प्‍यूटर विभाग की सह प्राध्‍यापक डॉ. सुनीता द्विवेदी ने किया।
माध्‍यम नहीं विचार है कालजयी - 'न्‍यू मीडिया में केरियर' विषय पर सत्र सम्‍पन्‍न
वैब दुनिया के रीडर, सम्‍पादक श्री जयदीप कार्णिक ने कहा कि सभी तरह के मीडिया में पत्रकारिता, प्राण और आत्‍मा है। माध्‍यम पुराने हो जाते हैं, लेकिन विचार हमेशा बने रहते हैं और वे ही कालजयी हैं। इसलिए पत्रकारिता में आने वाले विद्यार्थियों को विचारों पर काम करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि कबीर के दोहे, गालिब के शेर, गुलजार के गीत और महात्‍मा गांधी के विचार समाचार पत्रों के साथ साथ न्‍यू मीडिया के कंटेंट का भी हिस्‍सा हैं। सत्रारंभ समारोह में 'न्‍यू मीडिया में केरियर' विषय पर हुए सत्र में उन्‍होंने कहा कि फेसबुक, गूगल जैसी बड़ी कंपनियों के कारण वेबसाइट्स और न्‍यूज पोर्टल को पर्याप्‍त राजस्‍व प्राप्‍त नहीं हो रहा है, जबकि दोनों बड़ी कंपनियां अरबों कमा रही हैं। उन्‍होंने कहा कि परम्‍परागत मीडिया के राजस्‍व से जुड़ी विज्ञापन एजेंसियां और मीडिया हाउसेस नहीं चाहते हैं कि सोशल मीडिया को विज्ञापन मिले। सत्र का संचालन सहायक प्राध्‍यापक, श्री सुरेन्‍द्र पॉल ने किया।
यूनिवर्सल डिजाईन के लिए पाठक को चुनने का अधिकार देना चाहिए
मुम्‍बई के प्रो. पी. जे. मैथ्‍यु मार्टिन ने कहा कि न्‍यू मीडिया में विजुअल और दृश्‍य-श्रृव्‍य कंटेंट को सभी वर्ग के हिसाब से बनाया जाना चाहिए। ‘यूनिवर्सल डिजाईन इन न्‍यू मीडिया और कम्‍प्‍यूटर’ विषय पर आयोजित सत्र में उन्‍होंने कहा कि मीडिया में आने वाला कंटेंट में उपशीर्षक और कैप्‍शन होना चाहिए ताकि जो लोग सुन और देख नहीं सकते, वे भी उसका लाभ ले सकें। उन्‍होंने कहा कि सहज, सुलभ होना चाहिए। और इस क्षेत्र में रोजगार के भी अच्‍छे अवसर विद्यमान हैं। इस बारे में देश में कानून भी बन चुके हैं। सत्र का संचालन डॉ. पी. शशिकला ने किया।


दो-दिवसीय राज्य युवा उत्सव का 31 जुलाई से आयोजन
Our Correspondent :29 July 2017

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया की पहल पर राज्य युवा उत्सव का आयोजन वर्ष में दो बार किये जाने का निर्णय लिया गया था। इसी श्रंखला में प्रथम राज्य युवा उत्सव का दो-दिवसीय आयोजन 31 जुलाई को होगा। युवा उत्सव में सात संभाग के करीब 450 कलाकार प्रशासन अकादमी, शहीद भवन और मानस भवन में विभिन्न विधाओं में रंगारंग प्रस्तुति देंगे। प्रथम राज्य युवा उत्सव के अंतर्गत 31 जुलाई को प्रशासन अकादमी के स्वर्ण जयंती सभागृह में प्रात: 10 बजे लोक-नृत्य और दोपहर 2 बजे शास्त्रीय-नृत्य की प्रस्तुति होगी। शहीद भवन में प्रात: 10 बजे कलाकारों द्वारा नाटक का मंचन किया जायेगा। इसी दिन मानस भवन के सत्संग मण्डपम् में प्रात: 10 बजे हारमोनियम, दोपहर 12.30 बजे से तबला, 3.30 बजे से सितार, गिटार और वीणा तथा सायं 7 बजे बाँसुरी विधा में विभिन्न कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। युवा उत्सव के दूसरे दिन एक अगस्त को विभिन्न संभाग के कलाकार प्रशासन अकादमी में प्रात: 10 बजे से लोक-गीत और मानस भवन में 11 बजे से वकृत्व कला में प्रस्तुति देंगे। प्रथम राज्य युवा उत्सव का समापन प्रशासन अकादमी के स्वर्ण जयंती सभागृह में सायं 5 बजे होगा।


सुचरित्र युवा ही राष्ट्र निर्माण करेंगे - दीदी मंदाकिनी
Our Correspondent :28 July 2017

प्रसिद्ध कथावाचक और औजस्वी वक्ता दीदी मंदाकिनी ने युवाओं से आव्हान किया कि वे पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण न करें। पाश्चात्य संस्कृतिक की आंधी की परत जमा हो गई है, आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी अस्मिता को जागृत करें और उसे विकसित करें। सुचरित्र युवा और समाज ही राष्ट्र को शक्ति प्रदान करेंगे और राष्ट्र निर्माण करेंगे। रामचरितमानस मर्मज्ञ दीदी मंदाकिनी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सत्रारंभ समारोह में द्वितीय दिवस ‘राष्ट्रनिर्माण में युवा’ विषय पर विद्यार्थियों को सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि राम राज्य में भौतिक दरिद्रता नहीं थी, रावण राज्य में भी नहीं थी, लेकिन वहां मानसिक दरिद्रता थी। युवाओं की वर्तमान स्थिति को लेकर उन्होंने कहा कि आज संस्कार, संस्कृति, ज्ञान सभी मौजूद हैं, लेकिन फिर भी युवाओं में भटकाव है। इस पर सबको मिलकर विचार करना चाहिए। उन्होंने आने वाले पत्रकारों से आव्हान किया कि वे कलम की शक्ति का सदुपयोग कर भारत को फिर से विश्व गुरु बनाएँ। सामाजिक व्यवस्था को लेकर उन्‍होंने कहा कि आज चहुँओर विकास हो रहा है। सड़कें, सेतु, विद्यालय, अस्पताल, तेज गति के वाहनों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन क्या यह वास्तव में विकास है। अस्‍पतालों की संख्या बढ़ने का अर्थ है कि रोग बढ़ रहे हैं। न्यायालयों की संख्या बढ़ रही है, इसका अर्थ है कि झगड़े बढ़ रहे हैं। तेज गति के वाहनों के कारण दूरियाँ कम हो रही हैं, लेकिन हृदयगत दूरी बढ़ रही है। रामचरितमानस के लक्ष्मण एवं सुपर्णखा के एक प्रसंग का वर्णन करते हुए दीदी मंदाकिनी ने कहा कि बढ़े हुए नाखून वासना का प्रतीक है। यह जब देह से आगे बढ़ जाये तो उसे काटना आवश्‍यक होता है, उसी प्रकार मनुष्य की वासना अमर्यादित हो जाये तो समाज में व्यक्ति के नाक-कान कट जाते हैं। प्रेम और वासना में अंतर है, पाश्चात्य संस्कृति के लोग इस बात को नहीं समझ पाते हैं। आज है विश्वास का संकट विद्यार्थियों को एक घटना का उदाहरण देते उन्होंने कहा कि आज मनुष्य को मनुष्य के ऊपर ही विश्वास नहीं रहा इसीलिए वह चैकीदारी के लिए वह कुत्ते पाल रहा है। प्रतिदिन मीडिया की खबरें देखकर, पीड़ा और दुख होता है। ऐसा लगता है कि सकारात्मक चिंतन समाप्त हो गया है । सफलता की होड़ यदि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए हो तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन यह प्राणलेवा बन गई है। इसने आक्रामकता और टकराव का रूप ले लिया है। राजनीति ही नहीं कला, संगीत और खेल जगत में भी आक्रामकता देखने को मिलती है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने दीदी मंदाकिनी का शॉल-श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष डॉ. राखी तिवारी ने किया।


समय, ईश्वर और स्वयंभू है- डॉ. अग्रवाल
Our Correspondent :28 July 2017

देश के राष्ट्रपति के पूर्व सचिव रहे डॉ. विजय अग्रवाल ने कहा कि समय, ईश्वर की तरह है और स्वयंभू है, जिसका निर्माण किसी ने नहीं किया। समय प्रबंधन कुछ भी नहीं है, स्वयं का प्रबंधन ही समय प्रबंधन होता है। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सत्रारंभ समारोह के दूसरे दिन ‘समय प्रबंधन’ विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. अग्रवाल ने कहा कि अक्सर लोग समयबद्धता का पालन न करने के कारण दूसरों पर आरोप लगाकर बहाना बनाते हैं, जबकि वास्तव में कोई भी आपको आपके मन के विरूद्ध नहीं ले जा सकता और आपके समय में हस्तक्षेप कर सके। व्यक्ति ही समय प्रबंधन करने वाला मूल तत्व है। समय ईश्वर की तरह ही अदृश्य है। समय की कीमत को बताते हुए उन्होंने कहा कि समय का मापन नहीं किया जा सकता, यह एकमात्र एहसास है। समय ही जिंदगी में एकमात्र ऐसी अनमोल कीमती वस्तु है, जिसको ईश्वर ने सभी को समान रूप से दिया है। भगवान शिव ही हैं जो समय से परे हैं, इसीलिए उन्हें महाकाल कहा गया है। दुनिया में जितने भी महान लोग हुए हैं, उनके पास कुछ अतिरिक्त योग्यता नहीं थी, केवल उन्होंने समय का सही उपयोग करके खुद को महान बनाया। विद्यार्थियों को समय का सदुपयोग करने को लेकर उन्होंने कहा कि आप जिस समय जो काम करें उसी में ही तल्लीनता से लगें। इससे काम की गुणवत्ता में फर्क आयेगा। उन्होंने कहा कि समय आपकी पसंद या नापसंद के आधार पर मापा जाता है। जिस काम को आप पसंद करते हैं उसमें समय के बीतते का पता नहीं लगता। मन और समय के रिश्ते को समझना बहुत जरूरी है। ज्ञानयोग, कर्मयोग और भक्तियोग तीनों का मिश्रण ही समययोग का निर्माण करता है। इस सत्र में विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा भी मंच पर मौजूद थे। सत्र का संचालन कम्प्यूटर विभाग के सह प्राध्यापक डॉ. मनीष माहेश्वरी ने किया।


एक हजार वर्षों की गुलामी में हम ज्ञान से दूर हो गए - स्वामी धर्मबंधु
Our Correspondent :28 July 2017

वैदिक मिशन ट्रस्ट के प्रमुख स्‍वामी धर्मबंधु ने कहा कि भारत देश हमेशा से ही विशाल देश के रूप में जाना जाता रहा है और यह दुनिया का सबसे बड़ा विकसित और सांस्कृतिक देश रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देश यहाँ की संस्कृति को तोड़ना चाहते थे लेकिन वे सफल नहीं हो पाए। हमारे देश ने पिछले दो हजार वर्षों में 11 बड़े आक्रमण झेले और आखिरी के पांच आक्रमणों में हम पराजित हुए। लेकिन हमारे देश की संस्कृति पर इसका कोई असर नहीं हुआ। स्वामी धर्मबंधु माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सत्रारंभ समारोह के द्वितीय दिवस पर 'उदयीमान भारत और युवा' विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हम सैकड़ों वर्षों तक गुलामी में रहे और जब हमें आजादी मिली तो सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से खोखले हो चुके थे। आजादी के साथ संविधान, कानून और एक झंडा साथ ही 30 लाख स्क्वायर क्षेत्र मिला। भारतीयों की क्षमता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जार्जबुश ने अपने एक संबोधन में अमेरिकन लोगों से कहा था कि भारतीयों से गणित और विज्ञान सीखना चाहिए। भारतीय ईमानदारी और मेहनत से अपने को प्रगति के पथ पर ले जा रहें है। हमारी विकास दर जरुर कम है लेकिन हमनें चीन की तरह लाशों पर बिल्डिंगें नहीं चमकाई। ताइवान और इजरायल का उदहारण देते हुए स्‍वामीजी ने कहा कि ये देश आपने आपको शक्तिशाली बना चुके हैं।


पत्रकार कभी सेवानिवृत्त नहीं होते : श्री अग्रवाल
Our Correspondent :28 July 2017

मुम्‍बई के जाने माने अपराध रिपोर्टर श्री विवेक अग्रवाल ने कहा कि सेना का जवान और कलम के सिपाही अर्थात पत्रकार कभी सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) नहीं होते। पत्रकार के लिए कोई निश्‍चित समय सीमा नहीं होती उसको 24 घंटे काम करना पड़ता है। श्री अग्रवाल ने उक्‍त विचार माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यलय के सत्राराम्‍भ समारोह के दूसरे दिन 'आतंकवाद, अपराध और पत्रकारिता' विषयक सत्र में व्‍यक्‍त किए। उन्‍होंने कहा कि पत्रकार को अराजक लेकिन स्‍वअनुशासित होना चाहिए। उसे आम नागरिक एवं समाज के प्रति जिम्‍मेदार होना चाहिए। आप जो भी खबर लिखें उसकी पूरी तरह से जांच जरूर कर लें। वाट़सएप से मिली खबर पर समाचार न लिखें। पत्रकार का किसी मामले में स्‍वयं का भी विचार होना चाहिए। पत्रकारिता के विषय को लेकर उन्‍होंने कहा कि मीडिया संस्‍थान उन्‍हीं खबरों को देना चाहते हैं जो टीआरपी एवं प्रसार संख्‍या बढ़ाएं। मीडिया मुददों पर लोगों के मन में छवि निर्माण करता है और यह छवि आगे भी बनी रहती है। पूरे विश्‍व में चार विषय - धर्म, वासना, अपराध और मनोरंजन बिकते हैं। भारत में क्रिकेट एक ऐसा विषय है जिस पर खबरें बिकती हैं। उन्‍होंने कहा कि खोजी पत्रकारिता अखबार की जरूरत है। मीडिया में सरकार के अधिकारी जो बताते हैं वह आधा सच होता है। शेष सच को बताने की जिम्‍मेदारी पत्रकार की होती है। उन्‍होंने युवा पत्रकारों को प्रेरित किया कि वे न्‍यू मीडिया में काम करें और उसका स्‍तर भाषा और कंटेंट से बढ़ाएं क्‍योंकि जितना ज्‍यादा यह माध्‍यम सफल होगा उतना ज्‍यादा ही लोगों के लिए सदुपयोगी होगा। विद्यार्थियों को मीडिया के काम करने के मंत्र बताते हुए उन्‍होंने कहा कि हर खबर की सत्‍यता की जांच करना चाहिए। सत्र का संचालन मीडिया प्रबंधन विभाग के अध्‍यक्ष डॉ अविनाश वाजपेयी ने किया। डॉ मनीष माहेश्‍वरी ने श्री अग्रवाल का सम्‍मान किया।


पत्रकारिता के लिए संवेदनशील बने- श्री अंसारी
Our Correspondent :27 July 2017

माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सत्रारंभ कार्यक्रम में शुभारम्‍भ के बाद तीन सत्र भी आयोजित हुए। ‘टीवी न्यूज़ का भविष्य’ विषय पर हुए सत्र को संबोधित करते हुए आज तक के न्यूज़ एंकर श्री सईद अंसारी ने कहा कि पत्रकारिता में संवेदनशील होना बहुत आवश्यक है। दूसरों के दर्द, तकलीफ को महसूस करने वाला व्यक्ति ही सफल और अच्छा पत्रकार होता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य सिर्फ पेशा नहीं होना चाहिए,बल्कि मिशन होना चाहिए क्योंकि मिशन है तो ही मीडिया इंडस्ट्री में लम्बे समय तक टिका जा सकता है। पत्रकारिता के विद्यार्थियों को लेकर उन्होंने कहा की टीवी न्यूज़ में भविष्य उज्जवल है।आने वाले समय में विषय आधारित चैनल होंगे। स्कोप बढेगा लेकिन प्रतिस्पर्धा भी बढेगी, इसके लिए उन्हें तैयार होना चाहिए। आज टेलीविज़न न्यूज़ में भाषा और खबरों की समझ होने के साथ सृजनात्मकता होना भी आवश्यक है। एक टेलीविज़न न्यूज़ चैनल में लगभग 20 विभाग होते है जिनके लिए मानव संसाधन चाहिए। मीडिया में आने वाला समय विशेषज्ञता का होगा। विद्यार्थियों को प्रयास करना चाहिए कि इंटर्नशिप के दौरान ही वह अपनी नौकरी पक्की कर ले। टीवी न्यूज़ के भविष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर शुरू हुए न्यूज़ चैनल के कारण पत्रकारों के लिए काफी अवसर उपलब्ध है। पत्रकारिता विभाग की अध्‍यक्ष डॉ राखी तिवारी ने सत्र का संचालन किया।
मनुष्‍य के मस्तिष्‍क का विस्‍तार है सिनेमा – श्री सेन
समारोह के तीसरे सत्र में फिल्‍म निदेशक श्री सुदीप्‍तो सेन ने फिल्‍म निर्माण में केरियर विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि फिल्‍म मनुष्‍य के मस्तिष्‍क और भावनाओं का विस्‍तार है, जो चीजें हम रोज महसूस करते हैं उसे सिनेमा आगे बढ़ाता है। उन्‍होंने कहा कि फिल्‍म निर्माण में केरियर के लिए हमें इस तरह से तैयार होना होता है कि फिल्‍म मैकिंग उद्योग हमें चुने। मशीन को चलाकर फिल्‍म का निर्माण नहीं किया जा सकता है। 122 वर्ष लम्‍बे इतिहास में सिनेमा पूरी तरह बदल गया है। दुनिया की नजरों में भारत बहुत बड़ा बाजार है। यह बात उन्‍होंने जब महसूस की, जब देश से अचानक लगातार कई सुंदरियां विश्‍व पटल पर उभर कर आईं और उन्‍हें मिस यूनिवर्स, मिस वर्ल्‍ड जैसे खिताब मिले। बाद में पता लगा कि एक सौंदर्य प्रसाधन की कंपनी का कारोबार 90 से लेकर 1900 करोड़ हो गया है। हॉलीवुड सिनेमा हमारे यहां की गरीबी-भुखमरी को दिखाकर करोड़ों रुपये कमा लेता है। इस सत्र का संचालन विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के अध्‍यक्ष डॉ पवित्र श्रीवास्‍तव ने किया।‘विश्वविद्यालय एक परिचय’ पर आयोजित चतुर्थ सत्र में श्री संजय द्विवेदी ने विश्वविद्यालय का इतिहास और विकास, डॉ. पवित्र श्रीवास्‍तव ने प्रवेश अनुशासन और रैगिंग और डॉ. राखी तिवारी ने पारस्‍परिक सम्‍बन्‍ध, डॉ. राजेश पाठक ने परीक्षा विषय पर विद्यार्थियों को सम्‍बोधित किया।


नोबेल पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी ने किया युवाओं से आव्हान
Our Correspondent : 27 July 2017

‘भय मुक्त, सुरक्षित भारत बनाएँ’
शांतिदूत के रूप में पहचाने जाने वाले, नोबेल पुरस्कार से सम्‍मानित श्री कैलाश सत्यार्थी ने युवाओं से आव्हान किया कि वह भय मुक्त और सुरक्षित भारत के निर्माण के लिए आगे आएं। युवा समस्या नहीं, समाधान है। हमारी आज़ादी जब तक मुकम्मल नहीं है जब तक की हम बहन एवं बेटियों को सुरक्षित नहीं कर लेते। वेदों ने भी कहा है कि समाज के बेहतरी का विचार रखने वाले लोगो को एक साथ आना चाहिए। विश्वभर में भारत की छवि बदली है। अब हमे आशा भरी नज़रों से देखा जाने लगा है। यह विचार श्री सत्यार्थी ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सत्रारंभ समारोह में व्‍यक्‍त किये। वे शुभारम्‍भ सत्र के मुख्‍य अतिथि थे। उन्‍होंने कहा कि हमारे मन में अन्‍याय, अत्‍याचार और गलत चीजों के खिलाफ गुस्‍सा होना चाहिए, क्‍योंकि वह एक ता‍कत है और परिवर्तनकारक होगा। दुनियाभर में नौजवानों, महिलाओं और बच्‍चों का हिंसा में उपयोग किये जाने को लेकर उन्‍होंने चिंता जताई और सवाल किया कि भारत जैसे देश में बच्‍चे कब सुरक्षित होंगे। हर घंटे, दो बच्‍चे यौन शोषण का शिकार हो रहे हैं। उन्‍होंने युवाओं से आव्हान किया कि वे परिवर्तन के लिए आगे आएं। जो लोग बाहर से सिर्फ आलोचना करते हैं वे इतिहास नहीं लिखते। इतिहास वो बनाते हैं जो हार या जीत की परवाह करे बगैर मैदान में उतर जाते हैं। दुनियाभर में बच्‍चों के शोषण को लेकर उन्‍होंने कहा कि यह तर्क पूर्णत: असत्‍य है कि गरीबी के कारण बच्‍चे पुस्‍तकों-स्‍कूलों से दूर हैं। यदि विश्‍वभर का एक सप्‍ताह के सेना का खर्च कम कर दिया जाए तो या फिर यूरोप में लिपिस्टिक-पाउडर पर खर्च होने वाला छठवां हिस्‍सा बचा लिया जाए या अमेरिका में तंबाखू पर होने वाले खर्च का पांचवा हिस्‍सा बचा लिया जाए तो दुनियाभर के सारे बच्‍चों को स्‍कूल में पढ़ाया जा सकता है। सभी बच्‍चों को प्राथमिक स्‍कूल भेजने पर मात्र 22 बिलियन डॉलर ही खर्च हो रहे हैं, जबकि सेना पर दो ट्रिलियन डॉलर प्रतिवर्ष खर्च होते हैं।
आम आदमी की ताकत से बदला संविधान
समारोह में श्री सत्‍यार्थी ने भारत में शिक्षा के अधिकार के कानून को लेकर किये गये उनके प्रयास का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने कहा कि बालश्रम से मुक्‍त हुये बच्‍चों को स्‍कूल में दाखिला दिलाने के दौरान उन्‍हें अनुभव हुआ कि बच्‍चों की शिक्षा को लेकर कानून बनना चाहिए। लेकिन इसके लिए संविधान में संशोधन आवश्‍यक होगा। इस बारे में उन्‍होंने तत्‍कालीन प्रधानमंत्री श्री अटलबिहारी वाजपेयी से भी चर्चा की। इसके बाद उन्‍होंने कन्‍याकुमारी से यात्रा निकाली और इस यात्रा में 163 सांसद अलग-अलग स्‍थानों पर शामिल हुए। दिल्‍ली में यात्रा की समाप्ति पर प्रधानमंत्री, राष्‍ट्रपति बच्‍चों से भी मिले। यह एक आम आदमी की ताकत है कि चार महीने में भारत का संविधान बदला और शिक्षा का अधिकार कानून बना। आज इससे करोड़ों बच्‍चे लाभान्वित हो रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि हमारा देश लगातार आगे बढ़ रहा है। दुनियाभर में भारत की छवि बदली है। कई ऐसे देश हैं जो आज भारतीयों से प्रतिस्‍पर्धा के कारण चिढ़ते हैं और कुछ वीजा बंद करने की मांग कर रहे है, ऐसे भी देश हैं जहां भारतीय उनकी दौलत की बुनियाद बन चुके हैं।

नोबेल पुरस्‍कार के बाद चालीस हजार आमंत्रण मिले
विश्‍वभर में बालश्रम के विरुद्ध आंदोलन के नेतृत्वकर्ता श्री सत्‍यार्थी ने कहा कि वर्ष 2014 नोबेल पुरस्‍कार मिलने के बाद उन्‍हें विश्‍वभर से कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निमंत्रण प्राप्‍त हुए। उन्‍हें लगभग अभी तक 40 हजार आमंत्रण प्राप्‍त हुए। उनकी टीम ने इसका अध्‍ययन किया और पाया कि यदि वे इन सब कार्यक्रमों में भाग लेंगे तो उन्‍हें 175 वर्ष लगेंगे।
शिक्षा खुद को जानने की शुरुआत
श्री सत्‍यार्थी ने एक कहानी के माध्‍यम से विद्यार्थियों को बताया कि शिक्षा खुद को जानने की शुरुआत है, सही मायने में सीखने के लिए हमें अहंकार को छोड़ना होगा। उन्‍होंने मीडिया के विद्यार्थियों को कहा कि जिस पाठ्यक्रम को उन्‍होंने चुना है वह इस प्रकार का यज्ञ है जिसमें गुणात्‍मकता होगी। कलम की ताकत बहुत बड़ी होती है और लिखे और पढ़े गये शब्‍द कभी समाप्‍त नहीं होते। वे एक ईको सिस्‍टम का निर्माण करते हैं। हमारे यहां शब्‍द को आकाश भी कहा गया है। वर्तमान में टेलीविजन के टीआरपी ट्रैण्‍ड को लेकर उन्‍होंने कहा न्‍यूज चैनल में टीआरपी सैक्‍स स्‍कैण्‍डल, पॉलिटिकल स्‍कैण्‍डल और व्‍यक्तियों के आसपास ही है। टीवी मीडिया वंचित वर्ग और महिलाओं, बच्‍चों को कवर नहीं करता। जो विज्ञापन दिला सके वही कंटेंट टीवी पर नजर आता है। इस कारण समाज का एक बड़ा हिस्‍सा हमेशा पीछे छूट जाता है। उन्‍होंने कहा कि मीडिया को मुद्दों के फॉलोअप पर भी काम करना चाहिए। क्‍योंकि इसमें चेहरों के पीछे जिंदगियां होती है और काला-सफेद सत्‍य होता है।

बच्‍चों के चेहरों पर ईश्‍वर को देखा
श्री सत्‍यार्थी ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्‍होंने बताया कि किस तरह ‘संघर्ष जारी रहेगा’ पत्रिका शुरू करने के बाद पंजाब की एक घटना ने उनका जीवन बदल दिया। बंधुआ मजदूरों को पंजाब के गांव से छुड़ाने के दौरान उनकी पिटाई भी हुई। वे एक मजदूर के अनुरोध पर उसकी बेटी साबो को उन लोगों से छुड़ाने के लिए गये थे, जिसको मजदूर के मालिकों ने वेश्यावृत्ति के लिए बेच दिया था। इस मामले में उन्‍होंने दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय में बंदी प्रत्‍यक्षीकरण याचिका भी लगाई। बाद में 36 लोग न्‍यायालय के आदेश से मुक्‍त किये गये। दिल्‍ली में जब वे आये तो उन्‍होंने आजाद हुए बच्‍चों के चेहरों पर ईश्‍वर को देखा। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि विद्यार्थियों को संकल्‍प लेना चाहिए कि वे केरियर के अलावा अपने देश और समाज के लिए क्‍या योगदान कर सकते हैं। नवागत विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उन्‍होंने कहा कि सत्रारंभ कार्यक्रम में समाज के प्रमुख व्‍यक्तियों को इसलिए आमंत्रित किया जाता है ताकि विद्यार्थी अपने केरियर के अतिरिक्‍त कुछ और ज्ञान भी प्राप्‍त कर सके, जो, उन्‍हें अपने जीवन में काम आए। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम के संयोजक एवं जनसंचार विभाग के अध्‍यक्ष श्री संजय द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. कुठियाला ने श्री सत्‍यार्थी का शॉल-श्रीफल भेंटकर सम्‍मान भी किया। मंच पर पूर्व राष्‍ट्रपति ए.पी.जे. अब्‍दुल कलाम को श्रद्धा-सुमन भी अर्पित किए गए। प्रारम्‍भ में विद्यार्थियों ने सरस्‍वती वंदना प्रस्‍तुत की। कार्यक्रम में ‘अतुल्‍य भारतम’ और ‘मीडिया नवचिंतन’ पत्रिका के नये अंक का विमोचन भी किया गया। फोटो कैप्‍शन - फोटो नंबर – 8259 – नोबल पुरस्‍कार से सम्‍मानित श्री कैलाश सत्‍यार्थी विद्यार्थियों के साथ सेल्‍फी लेने से खुद को रोक नहीं पाए।


माखनलाल चतुर्वेदी वि. वि. का सत्रारंभ समारोह 27 जुलाई से
Our Correspondent :24 July 2017

प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवम संचार विश्वविद्यालय का सत्रारंभ समारोह आयोजित किया जा रहा है| तीन दिवसीय यह समारोह 27 जुलाई से समन्वय भवन, न्यू मार्केट में शुरू होगा| शुभारम्भ सत्र नोबेल पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी के मुख्य आतिथ्य में सुबह 11 से शुरू होगा| विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला सत्र की अध्यक्षता करेंगें| विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों को समाज की प्रख्यात हस्तियों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराने और मीडिया और संचार जगत से रूबरू कराने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष सत्रारंभ समारोह आयोजित किया जाता है| समारोह में अलग-अलग विषयों पर सत्र आयोजित किये जाएगें| सत्रों में आज तक टेलीविज़न चैनल के एंकर श्री सईद अंसारी 'टीवी न्यूज़ का भविष्य', प्रसिद्द फिल्म निदेशक श्री सुदीप्तो सेन (मुंबई) 'फिल्म निर्माण में कैरियर', प्रसिद्ध कथावाचक दीदी मन्दाकिनी 'राष्ट्र निर्माण में युवा', ख्यात क्राइम पत्रकार श्री विवेक अग्रवाल (मुंबई) 'आतंकवाद, अपराध और पत्रकारिता', स्वामी धर्मबंधु 'उदीयमान भारत और युवा', प्रो. बृज किशोर कुठियाला 'मानव संचार की दुनिया', डॉ विजय अग्रवाल 'समय प्रबंधन', प्रख्यात पत्रकार और वेबदुनिया के संपादक श्री जयदीप कार्णिक 'न्यू मीडिया में कैरियर', मीडिया प्रोफेसर पी. जे. मैथ्यू मार्टिन 'यूनिवर्सल डिजाईन इन मीडिया', भास्कर डॉट कॉम, भोपाल, के संपादक श्री अनुज खरे और जी डिजीटल, दिल्ली, के संपादक श्री दयाशंकर मिश्र 'डिजीटल मीडिया और युवा' और वरिष्ठ आईपीएस श्रीमती अनुराधा शंकर सिंह 'पुलिस और मीडिया' विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित करेंगें| समारोह के दौरान 'विश्वविद्यालय:एक परिचय' सत्र में विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास, विकास, प्रवेश और परीक्षा से सम्बंधित जानकारी भी विद्यार्थियों को दी जाएगी| विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के अध्यक्ष श्री संजय द्विवेदी, विज्ञापन और जनसंपर्क विभाग के अध्यक्ष डॉ पवित्र श्रीवास्तव, पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष डॉ राखी तिवारी और परीक्षा नियंत्रक डॉ राजेश पाठक इस बारे में विद्यार्थियों को जानकारी देंगें| समारोह का समापन 29 जुलाई को होगा|


भारत चीन संबंधो पर लोक व्यख्यान आयोजित
Our Correspondent :15 July 2017

प्रज्ञा प्रवाह के सहयोग से प्रति माह आयोजित होने वाली लोक व्याख्यानों की श्रंखला में आज सेंट्रल लाइब्रेरी में भारत चीन सम्बन्धों पर लोक व्याख्यान आयोजित किया गया । जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी के कुलपति व पूर्व राजनयिक श्री अनूप स्वरूप इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता थे । मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति श्री रवीद्र कान्हेरे ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की । वक्ताओं ने क्या कहा
श्री अनूप स्वरूप (कुलपति, जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी) · आज चीन से हम आयात ज्यादा करते हैं और निर्यात कम जबकि 1950 के दशक में स्थिति उल्टी थी । तब व्यापार संतुलन पूरी तरह से हमारे पक्ष में था । क्योंकि तब चीन एक सुई भी नहीं बना पाता था · तो फिर 70 साल में ऐसा क्या हुआ कि आज आधी दुनिया चीन में बने प्रॉडक्ट यूज कर रही है और हम ज्यों के त्यों खड़े हैं · चीन को समझना चाहते हैं तो चीन के संस्थापक माओ के द्वारा काही गईं ये तो प्रसिद्ध बातें सुनिए 1. ताकत हमेशा बंदूक की नली से निकलती है 2. मुझे बस खड़े होने की जगह दे दो मैं पूरी दुनिया हिला दूंगा · मैं पिछले कई सालों से चीन जा रहा हूँ पर पिछले 20 सालों में मैंने चीन में जबर्दस्त परिवर्तन देखा है अब चीन के शहर यूरोप के किसी शहर से कम नहीं लगते · भारत चीन के वर्तमाना संबंधो को कुछ ऐसे समझिए कि चीन जहां इस समय “एग्रेसिव डिफेंस की पॉलिसी” पर चल रहा है वहीं भारत “डिफ़ेंसिव अफेंस की पॉलिसी” पर चल रहा है · बहुत समय बात ऐसा देखने को मिला है कि चीन के प्रति भारत ने आक्रामक रवैया अपनाया है क्योंकि भारत को अच्छे से पता है अब वह चीन से हर मोर्चे पर निपटने में सक्षम है · फिलहाल जो संकट है उसकी जड़ में 1890 में चीन व अंग्रेजों के बीच हुई वह संधि है जिसे चीन चाहता है कि भारत व भूटान मान्यता दे दें पर उसका असली मकसद भारत तक पहुँचने के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सड़क का निर्माण करना है
श्री रवीद्र कान्हेरे (कुलपति , भोज मुक्त विश्व विद्यालय) · भारत व चीन संबंधो के बारे में हमारी राय पर 1962 के भारत चीन युद्ध की अच्छी ख़ासी छाया है · याद रखिए हम 1962 का युद्ध इसलिए नहीं हारे थे कि हमारे सेनाएँ कमजोर थीं बल्कि इसलिए क्योंकि हमारे तब के राजनेताओं के एक के बाद एक कई बड़ी गलतियाँ की थीं · देश के पहले गृह मंत्री सरदार पटेल ने हमेशा नेहरू जी को चीन के खतरे के प्रति आगाह कराया पर नेहरू जी ने एक ना सुनी · नेहरू जी के ऊपर शांति के दूत बनने की सनक इस कदर सवार थी उन्होने एक बार तो भारतीय सेनाओं को भंग करने के प्रस्ताव पर विचार शुरू कर दिया था · लापरवाही की हद यह थी कि 1962 के समय हमारी ज़्यादातर आयुध निर्माण इकाइयां साबुन और तेल बना रहीं थी · हमारी सेनाओं ने यह युद्ध बिना जूते और गर्न कपड़ों के लड़ा था · नेहरू ने तो यह तक कहा था कि हम आक्साइचिन के लिए क्यों लड़ रहे हैं जबकि वहाँ को एक तिनका भी नहीं उगता ...कितना गैर ज़िम्मेदारी भरा बयान था ये · मेरा मानना है कि एक राष्ट्र को सबसे पहले स्वार्थी होना चाहिए · देश को अपना हिट पहले देखना चाहिए नैतिकता बाद में · क्योंकि राष्ट्र पहले है और सिद्धान्त उसके बाद आते हैं · हम चीन के समान के बहिष्कार की बात तो करते हैं पर वास्तविकता में ऐसा कर नहीं पाते क्योंकि हमारा नेशनल कैरेक्टर बहुत मजबूत नहीं है · क्या आप जानते हैं कि चीन इतनी प्रगति क्यों कर पाया तो इसका उत्तर यह है कि एक कम्यूनिस्ट देश में कोई कम्यूनिस्ट नारे नहीं चलते । वहाँ कोई अधिकार की बात नहीं कर सकता । बस आदेश निकलते हैं और उनका पालन होता है ।


मेधावी विद्यार्थी योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये : मुख्यमंत्री श्री चौहान
Our Correspondent :11 July 2017

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना की जानकारी का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाये। सभी पात्र विद्यार्थियों तक योजना की जानकारी पहुँचे। श्री चौहान तकनीकी शिक्षा विभाग की समीक्षा कर रहे थे। इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दीपक जोशी भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने योजना की प्रगति की जानकारी ली। समीक्षा में बताया गया कि योजना के तहत 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश मिल गया है। उनकी फीस राज्य सरकार भरवायेगी। करीब 11 हजार विद्यार्थियों ने योजना के तहत पंजीयन करवा लिया है। योजना वेबसाइट पर 24 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने विजिट किया है। पंजीयन कार्य निंरतर जारी है। ऐसे पात्र विद्यार्थी जिन्होंने शिक्षण संस्थाओं में फीस जमा करा दी है, उनकी फीस की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा की जा रही है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ग्लोबल स्किल पार्क निर्माण कार्य की प्रगति की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य निर्धारित समयावधि में पूर्ण किया जाना है। श्री चौहान ने आई.टी.आई. चलो अभियान की भी जानकारी ली। उनको बताया गया कि अभियान के दौरान लक्ष्य से अधिक विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। अभियान के दौरान 5 लाख 40 हजार छात्र-छात्राओं ने संस्थान में प्रवेश ले लिया है। जबकि लक्ष्य 5 लाख का ही था। मुख्यमंत्री को बताया गया कि मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना में पंजीयन तेजी के साथ हो रहा है। अभी तक भोपाल पंजीयन में अग्रणी है। इसके बाद देवास, इंदौर और बालाघाट जिले हैं। पंजीयन निरंतर जारी है। इस अवसर पर बताया कि आगर मालवा में 95, अलीराजपुर में 12, अनूपपुर में 47, अशोक नगर में 93, बड़वानी में 138, बालाघाट में 436, बैतूल में 196, भिंड में 97, भोपाल में 681, बुरहानपुर में 187, छतरपुर में 152, छिंदवाड़ा में 234, दमोह में 254, दतिया में 50, देवास में 614, धार में 207, डिंडोरी में 38, गुना में 168, ग्वालियर में 280, हरदा में 73, होशंगाबाद में 286, इंदौर में 571, जबलपुर में 377, झाबुआ में 69, कटनी में 133, खंडवा में 475, खरगोन में 324, मंडला में 64, मंदसौर में 455, मुरैना में 119, नरसिंहपुर में 284, नीचम में 193, पन्ना में 71, रायसेन में 231, राजगढ़ में 262, रतलाम में 101, रीवा में 267, सागर में 296, सतना में 284, सीहोर में 411, सिवनी में 133, शहडोल में 111, शाजापुर में 215, श्योपुर में 27, शिवपुरी में 77, सीधी में 89, सिंगरौली में 35, टीकमगढ़ में 124, उज्जैन में 427, उमरिया में 80 और विदिशा में 225 मेधावी विद्यार्थियों ने पंजीयन करवाया है। बैठक में प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री अशोक बर्णवाल, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा एवं कौशल उन्नयन श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री के सचिव श्री हरिरंजन राव भी उपस्थित थे।


स्किल इंडिया की प्रभावी पहल ग्लोबल स्किल्स पार्क - मुख्यमंत्री श्री चौहान
Our Correspondent :3 Jun 2017

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि जहाँ एक ओर हमारे यहाँ बेरोजगारी की समस्या है वहीं दुनिया में हुनरमंद व्यक्तियों की कमी है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दूरदृष्टि के साथ स्किल इंडिया द्वारा इस दिशा में सार्थक कोशिश की है। प्रधानमंत्री के प्रयासों में सर्वश्रेष्ठ योगदान के लिये प्रदेश संकल्पित है। ग्लोबल स्किल्स पार्क इस दिशा में प्रभावी पहल है। श्री चौहान आज आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में ग्लोबल स्किल्स पार्क के शिलान्यास और ग्लोबल कंसलटेशन ऑन स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में तकनीकी प्रशिक्षण का नया दौर शुरू हो गया है। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं का कायाकल्प हो रहा है। उनमें आगामी 5 वर्षों में आधुनिकतम व्यवसायों की प्रशिक्षण व्यवस्था उपलब्ध हो जायेगी। उन्होंने युवाओं का आव्हान किया कि वे न्यू इंडिया निर्माण के लिये हुनरमंद बनें। विकास की अनंत संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी युवा शक्ति हमारे पास है। यदि इसे हुनरमंद कर दिया जाये तो वर्तमान समय की कमजोरी बड़ी आबादी, भविष्य में हमारी ताकत बन जायेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा के लिये प्रभावी कार्य किए गए हैं। व्यवसायिक शिक्षा के प्रसार के साथ ही, उसकी गुणवत्ता को भी सुनिश्चित किया गया है। स्तरहीन प्रशिक्षण संस्थाओं को चिन्हित कर बंद करवाने के कार्य किये गये हैं। करीब 37 संस्थाओं को बंद कर दिया गया है और लगभग 70 संस्थाओं पर कार्रवाई की जा रही है। यह निर्णय इसलिये लिया गया ताकि छात्रों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ नहीं कर सके। श्री चौहान ने कहा कि शिक्षा के प्रमुख तीन उद्देश्य होते हैं। ज्ञान, कौशल और संस्कार। शिक्षा प्रणाली में यह उद्देश्य संतुलित तरीके से प्राप्त नहीं हो सकने के कारण बेरोजगारों की ऐसी फौज खड़ी हो गई है, जो केवल किताबी ज्ञान संपन्न है। प्रदेश में प्रयास किया गया है कि जो शैक्षणिक शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं उन्हें उसका पूरा अवसर मिले। वही व्यवसायिक शिक्षा प्राप्त करने वालों को भी सरकार का भरपूर सहयोग मिले। राज्य में मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना लागू की गई है। योजना में मेधावी छात्रों को चाहे वे मेडिकल-इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थाओं में अथवा व्यवसायिक शिक्षा के शिक्षण केन्द्रों में प्रवेश लेते हैं उनकी फीस राज्य सरकार द्वारा भरवाने की व्यवस्था की गई है। प्रयास है कि प्रतिभा की उन्नति में धन की कमी बाधा नहीं बने। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में गत दिवस करीब साढ़े छह करोड़ पौधों का रोपण करने के लिये प्रदेश की जनता के प्रति आभार ज्ञापित किया। पर्यावरण को बचाने और पृथ्वी के बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने के प्रयासों के प्रति जनता के कर्त्तव्य-पालन के लिये बधाई प्रेषित की। केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा कि मेक इन इंडिया को सफल बनाने के लिये मेकर्स ऑफ इंडिया की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्किल इंडिया द्वारा इस दिशा में विजनरी पहल की है। उनके प्रयासों को पूरा करने में मध्यप्रदेश की अग्रणी भूमिका है। उन्होंने कहा कि देश-प्रदेश में जिस तेजी और दूरदर्शिता के साथ विकास की कोशिशें हो रही हैं, उनसे यह आभास हो रहा है कि विकास के सफल प्रयासों को देखने के लिये दुनिया के दूसरे देश यहाँ आयेंगे। उन्होंने प्रदेश में स्किल इंडिया की दिशा में किये जा रहे कार्यों की व्यापक सराहना करते हुए कहा कि कौशल उन्नयन के प्रयासों में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है। केन्द्र सरकार के कौशल उन्नयन के सभी कार्यक्रमों तथा योजनाओं को एक साथ करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। प्रदेश ने आईटीआई की ऑनलाइन परीक्षा संचालित कर अन्य राज्यों को इस दिशा में पहल के लिये प्रेरित किया है। विभिन्न व्यवसायिक प्रशिक्षणों की आधुनिक सुविधाओं का उल्लेख करते हुए श्री रूड़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कौशल उन्नयन के विभिन्न कार्यक्रमों को एक मंत्रालय में समाहित कर विजनरी पहल की है। आई.टी.आई को कौशल उन्नयन विभाग में शामिल किया है। देश तेजी से गुणवत्तापूर्ण व्यवसायिक शिक्षा की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रचलित व्यवसायिक शिक्षा की प्रचलित प्रणाली में गुणवत्ता का पूर्णत: अभाव था। आई.टी.आई. के 13 हजार संस्थानों में 127 पाठ्यक्रम संचालित होते हैं, जिनमें से मात्र इलेक्ट्रिकल और फिटर ट्रेडों में 18 लाख, अन्य 9 ट्रेडों में मात्र एक लाख और शेष में एक लाख विद्यार्थी प्रवेश लेते हैं। जबकि वर्तमान समय में उद्योगों की आवश्यकता एक ही ट्रेड में अलग-अलग तरह के विशेषज्ञ प्रशिक्षण की है। उन्होंने कहा कि डिग्री आधारित बेरोजगारों की फौज खड़ी करने वाली शिक्षा प्रणाली पर विचार किया जाना चाहिये। केन्द्रीय मंत्री ने प्रदेश में पौध-रोपण के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ग्लोबल स्किल्स पार्क एक ऐतहासिक कदम है। व्यवसायिक प्रशिक्षण के लिये 650 करोड़ रुपये की विशाल धनराशि का निवेश सरकार की दूरदृष्टि का प्रमाण है। प्रदेश के तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दीपक जोशी ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री की पहल मेक इन इंडिया, डिजिटल इण्डिया और स्किल इंडिया को सफल बनाने के लिये प्रतिबद्ध प्रयास कर रही है। आई.टी.आई. को अग्रणी संस्थान बनाने के प्रयास हुए हैं। आई.टी.आई. चलें अभियान द्वारा प्रदेश में 5 लाख युवाओं को व्यवसायिक शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। इउनमें से 70 प्रतिशत का रोजगार स्थापित कराने का प्रयास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि ग्लोबल स्किल्स पार्क युवाओं के जीवन में परिवर्तन का मील का पत्थर साबित होगा। विश्व प्रसिद्ध क्रिकेटर श्री के.श्रीकांत ने कहा कि ग्लोबल स्किल्स पार्क की पहल देश में कौशल उन्नयन के प्रयासों का मार्गदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि परियोजना का प्रारूप उसकी सुपर सक्सेस को बता रहा है। एशियन डेवलपमेंट बैंक की सुश्री सॉगवान ली ने कहा कि भारत की स्किल इंडिया पहल में बैंक द्वारा तकनीकी सहयोग किया जा रहा है। मध्यप्रदेश की परियोजना बैंक की देश में 5वीं परियोजना है। इससे देश में व्यावसायिक प्रशिक्षण की संस्थानात्मक व्यवस्था में मजबूती आयेगी। उन्होंने परियोजना में निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया। आईटीईईएस सिंगापुर के श्री ब्रूस पो ने कहा कि स्किल्स पार्क प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक विकास प्रक्रिया को नई गति देगा। प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव ने परियोजना की जानकारी दी। मुख्य कार्यपालन अधिकारी ग्लोबल स्किल्स पार्क श्री संजीव सिंह ने आभार माना। कार्यक्रम में पार्क के आकल्पन पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। अतिथियों का बुक और पेन भेंट कर अभिनंदन किया गया। प्रारंभ में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री रूड़ी के साथ अकादमी के प्रांगण में नीम वृक्ष के पौधों का रोपण किया।


कौशल विकास केन्द्र आदर्श बनाये जायेंगे- मुख्यमंत्री श्री चौहान
Our Correspondent :3 Jun 2017

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की आज केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री श्री राजीव प्रताप रूडी के साथ बैठक हुई। इस दौरान प्रदेश में संचालित कौशल विकास केन्द्रों के उन्नयन और प्रशिक्षण पर चर्चा हुई। श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को हुनरमंद बनाने के लिये औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और कौशल विकास केन्द्रों को आदर्श बनाया जायेगा। श्री रूडी ने बताया कि हर जिले में प्रधानमंत्री कौशल केन्द्र स्थापित किया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि युवाओं को हुनरमंद बनाकर स्व-रोजगार और रोजगार हासिल करने के काबिल बनाने के लिये प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में 133 कौशल विकास केन्द्र खोले गये हैं। हर जिले में आदर्श कौशल विकास केन्द्र स्थापित करने की योजना है। इनमें रोजगारोन्मुखी लघु अवधि के प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किये जायेंगे। उन्होंने दिव्यांगों के प्रशिक्षण संबंधी योजना के प्रस्ताव और व्यावहारिक बनाने के लिये अधिकारियों को निर्देशित किया। इसमें केन्द्र से सहयोग की अपेक्षा है। प्रदेश में संचालित एस.सी.वी.टी. ट्रेड को एन.सी.वी.टी. में शामिल करने के लिये ऑफ लाइन आवेदन की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया। केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री रूडी ने बताया कि प्रत्येक जिले में प्रधानमंत्री कौशल केन्द्र खोले जायेंगे। मध्यप्रदेश में 17 केन्द्र स्थापित किये जा चुके हैं। इनमें मानक स्तर का प्रशिक्षण दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि केन्द्र से प्रदाय की गई राशि का प्रशिक्षण में उपयोग किया जाये। प्रशिक्षण गुणवत्तापूर्ण होना चाहिये। प्रशिक्षण के लिये धनराशि की कमी नहीं होगी। उन्होंने छोटी-छोटी संस्थाओं की प्रभावी मॉनीटरिंग व्यवस्था करने की अपेक्षा व्यक्त की। बैठक में प्रदेश के तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी, मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव, संचालक कौशल विकास श्री संजीव सिंह आदि उपस्थित थे।


एम. सी. यू. के चार विद्यार्थी नेट में उत्तीर्ण
Our Correspondent :30 May 2017

भोपाल, मई 30. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवम् संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में अध्ययनरत चार विद्यार्थियों ने सीबीएससी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट) उत्तीर्ण की हैं| सीबीएससी ने सोमवार को ही जनवरी-2017 आयोजित परीक्षा का परिणाम घोषित किया| नेट उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों में नितेश त्रिपाठी (एम. एससी. - मीडिया रिसर्च), विशाखा राजुरकर राज (एम. फिल.- मीडिया स्टडीज)- दोनों संचार शोध विभाग से, मोहित पाठक (एम. एससी. फिल्म प्रोडक्शन) - विज्ञापन एवम जनसंपर्क विभाग और मनीष दुबे (एम. जे.) - पत्रकारिता विभाग, शामिल हैं| ये सभी विद्यार्थी अभी अंतिम सेमेस्टर में अध्ययनरत हैं और पत्रकारिता एवम जन संचार विषय से नेट उत्तीर्ण कर सहायक प्राध्यापक पद के लिए पात्र हो गए हैं| विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला, कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा और कुलसचिव श्री दीपक शर्मा ने इसे उल्लेखनीय उपलब्धि बताते हुए सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ दी|


8 जून को होगी "क्रिएटिव राइटिंग वर्कशॉप"
Our Correspondent :24 May 2017

स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा है कि प्रदेश में बोर्ड परीक्षा परिणाम में सुधार के लिये अब प्रति सप्ताह वीडियों कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समीक्षा की जायेगी। उन्होंने जिला अधिकारियों से स्कूल शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिये सरकारी स्कूलों की निरीक्षण प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिये। स्कूल शिक्षा मंत्री आज प्रशासन अकादमी में जिला अधिकारियों की राज्य-स्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी मौजूद थे। बैठक में कक्षा 10 और कक्षा 12 के बोर्ड परीक्षा परिणामों की जिलेवार समीक्षा की गई। स्कूल मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि प्रदेश भर में जिन शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्य के लिये अटैच किया है, उन्हें हर हाल में 31 मई तक शालाओं में पद-स्थापना के लिये कार्यमुक्त किया जाये। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे जिले में ऐसी व्यवस्था करें, जिससे महत्वपूर्ण काम को छोड़कर शिक्षकों को गैर-शिक्षकीय कार्य में न लगाया जाये। इसके लिये उन्होंने राज्य-स्तर पर कलेक्टर्स को पुन: पत्र लिखे जाने के निर्देश दिये। स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर शाह ने मंडला और रायसेन जिले में लागू 'ज्ञानार्जन' प्रोजेक्ट को पूरे प्रदेश में लागू किये जाने की बात कही। 'ज्ञानार्जन' प्रोजेक्ट में सरकारी स्कूलों में कक्षा 10 और 12 के सिलेबस को प्रतिदिन के हिसाब से बाँटकर सॉफ्टवेयर के जरिये मॉनिटरिंग किये जाने की व्यवस्था है। इस व्यवस्था से कक्षा 10 और 12 के बोर्ड परीक्षा परिणाम में इन जिलों में उल्लेखनीय सुधार आया है। स्कूल शिक्षा मंत्री ने दिव्यांग छात्रों की पढ़ाई और हॉस्टल की व्यवस्था पर और ध्यान दिये जाने की बात कही। स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी ने कहा कि फील्ड अधिकारियों से प्राप्त सुझाव से परीक्षा परिणाम में बेहतर तरीके से सुधार किये जा सकते है। उन्होंने शिक्षकों की नियमित उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिये भी कहा। बैठक में माध्यमिक स्तर पर स्कूल शिक्षा की स्थिति, शिक्षा में गुणवत्ता की कार्य-योजना, नि:शुल्क साइकिल योजना, भवन निर्माण, सी.एम. हेल्पलाइन के प्रकरणों और समेकित छात्रवृत्ति योजना पर भी चर्चा की गयी। स्कूल शिक्षा विभाग की सचिव श्रीमती दीप्ती गौड़ मुखर्जी ने गुणवत्ता सुधार के लिये सरकारी स्कूलों में पेरेन्ट्स मीटिंग को नियमित करने के निर्देश दिये। आयुक्त लोक शिक्षण श्री नीरज दुबे ने बोर्ड परीक्षा परिणामों का विश्लेषण कर आगे सुधार लाने के निर्देश दिये। बैठक में राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक श्री लोकेश जाटव ने स्कूल शिक्षा में सुधार के लिये राज्य, जिला, विकासखंड और संकुल स्तर पर टीम भावना के साथ कार्य किये जाने का सुझाव दिया। बैठक में संयुक्त संचालक स्कूल शिक्षा संभागीय कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी और परियोजना समन्वयक जिला शिक्षा केन्द्र मौजूद थे।
क्रिएटिव राइटिंग वर्कशॉप : एक नज़र में
आयोजन का नाम - क्रिएटिव राइटिंग वर्कशॉप
दिनांक - 8 जून 2017 गुरुवार
समय - दोपहर 12 से 4 बजे तक
स्थान - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी
कौन भाग ले सकता है - 16 साल से ऊपर का कोई भी व्यक्ति
वर्कशॉप के लिए निर्धारित सीटें - 20
वर्कशॉप की फीस - कुछ भी नहीं (निःशुल्क )
रजिस्ट्रेशन करना है - मेल के द्वारा
रजिस्ट्रेशन के लिए ये जानकारी मेल करें
1.-आपका नाम , आयु, व्यवसाय,मोबाइल नंबर
2.-आपके द्वारा लिखी गयी कोई कविता या लेख
'3.-आप इस वर्कशॉप में क्यों भाग लेना चाहते हैं' इस विषय पर अधिकतम 300 शब्दों का एक लेख
किस मेल पर भेजना है - club.ink13@gmail.com.
रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि है - 4 जून 2017
पपोएट्री मेंटर के बारे में ... इंकलेट ऑनलाइन जर्नल की प्रधान संपादिका
ब्लूशिफ्ट जर्नल की पोएट्री रीडर
स्प्राउट मैगज़ीन की सह-प्रबंध संपादिका
ग्लास काइट एंथोलोजी वर्कशॉप की पोएट्री मेंटर
आइयोवा यंग रायटर स्टुडियो की पूर्व छात्रा
ऑक्सफोर्ड व कैंब्रिज राइटिंग वर्कशॉप की पूर्व छात्रा
इस वर्ष AAL रायटर रिट्रीट आइसलैंड में भाग लिया
अगस्त 2017 से न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में क्रिएटिव राइटिंग में अंडर-ग्रेड कोर्स के लिए चयनित
इंडियन लिट्रेचर, वायाव्य और सुवेनियर जैसी कई प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में उनकी कवितायें प्रकाशित हो चुकी हैं


राजकपूर मेमोरियल ऑडिटोरियम का निर्माण मार्च 2018 तक पूर्ण हो
14 April 2017
वाणिज्य, उद्योग एवं रोजगार तथा खनिज साधन मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने रीवा में निर्माणाधीन राजकपूर मेमोरियल ऑडिटोरियम का निर्माण मार्च 2018 तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं। श्री शुक्ल आज निर्माण कार्य की समीक्षा कर रहे थे।
श्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि ऑडिटोरियम के निर्माण में गति लाई जाए। उन्होंने कहा कि किए गए कार्य का समय पर मेजरमेंट हो। खर्च हुई राशि का भी विवरण संधारित किया जाए। उद्योग मंत्री ने कहा कि वे प्रतिमा निर्माण कार्य-स्थल पहुँचकर भी प्रगति को देखेंगे। श्री शुक्ल ने कहा कि आगामी विंध्य महोत्सव में इस विश्व-स्तरीय ऑडिटोरियम को कपूर परिवार की मौजूदगी में लोकार्पित कराया जायेगा।
उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में निर्माणाधीन कुलपति आवास के निर्माण की जानकारी भी ली। बताया गया कि आगामी दो माह के अंदर कुलपति आवास का कार्य भी पूर्ण हो जाएगा। श्री शुक्ल ने आवास परिसर में लॉन के साथ चौड़ी सड़क भी बनाने को कहा।


47 वां लोक व्याख्यान संपन्न
औपनिवेशिक मानसिकता पर प्रोफेसर ज्ञान वर्धन पाठक का व्याख्यान

Our Correspondent :10 April 2017
स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में आज प्रज्ञा प्रवाह के सहयोग से एक लोक व्याख्यान का आयोजन किया गया । मासिक लोक व्याख्यानों की श्रंखला के इस 47 वें व्याख्यान का विषय था - “औपनिवेशिक मानसिकता से भारतीय मानस की मुक्ति “ । कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रोफेसर ज्ञान वर्धन पाठक थे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता नेशनल लॉं इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी भोपाल की प्रोफेसर राका आर्य ने की ।
कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है :-
कार्यकम का नाम – पब्लिक लेक्चर
विषय – औपनिवेशिक मानसिकता से भारतीय मानस की मुक्ति
दिनांक – 9 अप्रैल 2017
स्थान – स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी
वक्ता – प्रोफेसर ज्ञान वर्धन पाठक
अध्यक्षता – प्रोफेसर राका आर्य

लेक्चर की प्रमुख बातें :-
प्रोफेसर ज्ञान वर्धन ने कहा
· यदि आप ब्रिटिश उपनिवेशवाद को अच्छे से समझना चाहते हैं तो शशि थरूर की अभी हाल में प्रकाशित हुई किताब “इरा ऑफ डार्कनेस” पढ़ें जिसमें उन्होने ब्रिटिश औपनिवेशक हथकंडों के बारे में विस्तार से लिखा है
· कार्ल मार्क्स कहते थे कि “ पूंजीवाद की उच्चतर अवस्था उपनिवेशवाद है “ अर्थात किसी देश में पहले पूंजीवाद आता है , अर्थात औद्योगिक क्रांति आती है और फिर उसके बाद वह देश उपनिवेश बनाता है
· पर हमारे मामले में यह प्रक्रिया उल्टी हुई । पहले 1757 में अंग्रेजों ने भारत को उपनिवेश बनाया उसके बाद भारत से मिले धन का इस्तेमाल कर 1760 में इंग्लैंड का औद्योगिकीकरण शुरू किया
· इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि अंग्रेजों ने अपने शासन के शुरुआती 38 वर्षों में ही लगभग 200 मिलियन पाउंड की राशि इंग्लैंड भेजी । इसी राशि से उन्होने वहाँ उद्योगों की स्थापना की । क्योंकि उस समय की इंग्लैंड की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि वे बड़े बड़े उद्योग लगा पाते
· 1757 में अंग्रेजों ने बंगाल जीता था तो उसने लिखा कि ये देश तो स्वर्ग के समान है मैंने अपनी ज़िंदगी में इतना समृद्ध देश नहीं देखा ।
· जब अंग्रेज़ भारत आए तो विश्व की जीडीपी में भारत का हिस्सा 23 % था और इंग्लैंड का केवल 1.8% । 200 वर्षों के अङ्ग्रेज़ी शासन के बाद 1947 में विश्व जीडीपी में भारत का हिस्सा घटकर 1.8% हो गया , ये था औपनिवेशिक शासन का असर
· अंग्रेजों ने भारत आते ही ये पाँच काम किए
1. भारतीय राजाओं को समझा कर उन्हें इस चीज़ के लिए मनाया कि “ आपको सेना रखने की जरूरत नहीं है बिना सेना रखे भी तुम्हारा राजपाट कायम रहेगा” इस तरीके से उन्होने हमारी ताकत छीन ली
2. उन्होने भारतीय शासकों को बहला फुसलाकर उनसे व्यापारिक अधिकार ले लिए , जिसके कारण वे आगे चलकर भारतीय व्यापार को वे नियंत्रित करने लगे । इससे उन्होने हमारा लाभ छीन लिया
3. उन्होने दोषपूर्ण व्यापारिक व टैक्स नीति अपनाकर भारतीय कारीगरों व दस्तकारों का हुनर छीन लिया
4. उन्होने हिन्दू व मुसलमान को लड़ाकर एक समाज के रूप में हमें कमजोर कर दिया
5. उन्होने ग्रामीण भारत में सदियों से मौजूद शिक्षा प्रणाली को खत्म करने के राजाज्ञाएँ जारी की और ब्राह्मणो को समाज का दुश्मन बता दिया
· पर सबसे बड़ी गलती हमने आज़ादी के बाद की जब हमने उनके द्वारा दिये गए इतिहास को सही माना लिया और उसी को पढ़ाना शुरू कर दिया । जबकि असल में ये इतिहास अंग्रेजों ने अपनी सुविधा के लिए तैयार किया था
· इतिहास असल में समाज की स्मृति होती है । जिस प्रकार यदि किसी व्यक्ति की स्मृति छीन ली जाए तो वह इधर उधर भटकता रहता है और दर दर की ठोकरें खाता है और दुनिया उसे पागल घोषित कर देती है । इतिहास , अर्थात स्मृति छिन जाने से भारतीय समाज की भी यही हालत हो गयी है
· आज हमारे देश में अलगु अधिकांश कानून औपनिवेशिक है जो अंग्रेजों ने अपनी सुविधा के लिए बनाए थे पर शर्म की बात है कि हम उन क़ानूनों को आज भी बनाए हुए हैं और उनका बड़ी बेशर्मी से बचाव भी करते हैं
· भारत का वर्तमान प्रशासनिक ढांचा भी औपनिवेशक मानसिकता से संचालित होता है जहां हर किसी को बस हुक्म मानने के लिए तैयार किया जाता है ।
· स्वतन्त्रता और लोकतन्त्र हमारे खून में होता है । यह धारणा कि अंग्रेजों ने हमें लोकतन्त्र सिखाया सरासर झूँठ है
· यदि आप असली भारतीय इतिहास पढ़ना चाहते हैं तो आपको पर्सिअन, अरेबिक और फ्रेंच सीखनी पड़ेगी । क्योंकि असली भारतीय इतिहास इन भाषाओं की किताबों में मौजूद है । इंग्लिश में जो इतिहास मौजूद है वह तो अंग्रेजों द्वारा अपनी सुविधा के लिए लिखवाया गया इतिहास है और हिन्दी में मौजूद इतिहास अङ्ग्रेज़ी इतिहास का अनुवाद है
प्रोफेसर राका आर्य ने कहा
· आज़ादी के 70 साल बाद भी यदि हम औपनिवेशिक मानसिकता के शिकार हैं और उससे संचालित हो रहे हैं तो उसमें गलती अंग्रेजों की नहीं बल्कि खुद हमारी है
· कोई शातिर कौम यदि आपको नीचा दिखाने के लिए अपने शासन काल में कोई तंत्र तैयारा करती है तो उसके जाने के बाद उसे खत्म करना हर स्वाभिमानी कौम की ज़िम्मेदारी होती है और हम यहाँ क्या कर रहे हैं हम तो उस तंत्र को आगे बढ़ाने में जी जान से जुटे हुए हैं
· मेरी पहचान मेरे लिए महत्वपूर्ण है इसलिए उसे मुझे ही खोजना होगा । आज के तकनीकी युग में आप यह काम आसानी से कर सकते हैं\
· मेरी सलाह है कि कभी भी ओरिजनल को खोजने मत निकलिए, क्योंकि भारतीय सभ्यता या संकृति जैसी कोई चीज़ आपको कभी नहीं मिलेगी । समागम हमारी महान सभ्यता का हिस्सा रहा है हमें बाहरी तत्वों को अपने में अच्छे से समाहित कर चुकी असली भारतीय सभ्यता खोजने की जरूरत है
· पश्चिमीकरण का विरोध कीजिये , पश्चिम का नहीं ....क्योंकि जिस तरह पश्चिम ने हमारी कई अच्छी चीजों को अपनाया है वैसे ही हमें उनकी अच्छी चीजों से खुद को वंचित नहीं करना चाहिए




प्रकाशनार्थ माखनलाल में खुलेगा भाषा व संस्कृति अध्ययन विभाग
9 March 2017
भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में भारतीय भाषाओं पर वैज्ञानिक शोध हेतु एक विभाग स्थापित किया जाएगा। इसी प्रकार संस्कृति के अध्ययन के लिए भी एक विभाग की स्थापना की जाएगी। दोनों नव-निर्मित विभाग प्रारंभ में केवल शोध का कार्य करेंगे, बाद में इन विभागों के विषयानुसार पाठ्यक्रम भी चलाए जा सकेंगे। दोनों विभागों में तीन-तीन छात्रिवृत्तियों का प्रावधान किया गया है। उक्त निर्णय 8 मार्च को मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में सम्पन्न विश्वविद्यालय की प्रबंध समिति की बैठक में लिए गए। बैठक में वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया सहित विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला, कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री एस.के. मिश्रा एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री उमेश उपाध्याय उपस्थित थे।

माखनलाल विश्वविद्यालय के रीवा एवं खण्डवा परिसरों के लिए भूमि उपांतरण एवं भवन निर्माण के लिए प्रत्येक परिसर हेतु 60 करोड़ की राशि स्वीकृति भी बैठक में की गई। ज्ञातव्य है कि राज्य शासन की ओर से विश्वविद्यालय के खण्डवा एवं रीवा परिसर के निर्माण के लिए 5-5 एकड़ भूमि प्रदान की गई है। इन दोनों स्थानों पर निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा।

इसी प्रकार भारतीय जीवन बीमा निगम के माध्यम से विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को गेच्युटी दिलाए जाने की स्वीकृति बैठक में प्रदान की गई एवं इस हेतु भारतीय जीवन बीमा निगम को दो करोड़ सत्तर लाख रूपये एकमुश्त एवं प्रतिवर्ष रूपये चैबीस लाख प्रीमियम दिये जाने की स्वीकृति भी प्रदान की गई। विश्वविद्यालय के कारपस को रिजर्व बैंक आफ इंडिया के 8 प्रतिशत सेविंग(टैक्सेवल) बांड 2003 में विनियोजित किए जाने की स्वीकृति बैठक में दी गई।

विश्वविद्यालय के कुलपति ने बताया कि मीडिया का आधार भाषा है और भारतीय भाषाओं में अंतर्संवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, जिससे देश में एकता और एकात्मता स्थापित हो। भाषा विज्ञान विभाग में प्रयास किया जाएगा कि भारतीय भाषाओं की समानताओं एवं एक ही स्रोत से उत्पत्ति पर वैज्ञानिक शोध कार्य तीन शोधार्थियों द्वारा किया जाय। इसी प्रकार मीडिया संस्कृति का वाहक भी और संस्कृति का निर्माण भी करता है इसलिए मीडिया के विश्वविद्यालय में संस्कृति के अध्ययन का भी प्रावधान किया गया है। इस विभाग में भी में तीन शोधार्थियों द्वारा शोध किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शोध प्रस्ताव प्राप्त करने के लिए शीघ्र ही विज्ञापन जारी किया जाएगा। प्रबंध समिति की बैठक के दौरान विश्वविद्यालय द्वारा काठमाण्डू विश्वविद्यालय के साथ ‘भारत-नेपाल सम्बन्धों में मीडिया की भूमिका’ विषय पर काठमाण्डू में दो दिवसीय संगोष्ठी के आयोजन पर भी चर्चा हुई, जिसमें मुख्यमंत्री स्वयं उपस्थित रहने वाले हैं। विश्वविद्यालय द्वारा 18-19 मार्च,2017 को भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता के परिसर में ‘भारतीय भाषाओं में अंतर्संवाद’ विषय पर कोलकाता में आयोजित संगोष्ठी की सूचना भी कुलपति ने दी।

सबसे बड़ी पुरस्कार राशि के लिए पहली बार 40 लॉ स्कूलों में घमासान,
वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी उद्घाटन करेंगे
भारत की सबसे बड़ी मूट कोर्ट प्रतियोगिता

16 Feb. 2017
स्कूल ऑफ़ लॉ , जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी, भोपाल के द्वारा राष्ट्रीय स्तर की मूट कोर्ट प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है, जिसे कई अग्रणी लॉ संस्थायों से जम कर सरहना मिल रही है| देश भर से 40 प्रतिष्ठित लॉ संस्थानों सहित कई महत्वपूर्ण प्राइवेट यूनिवर्सिटीयों के साथ नेशनल लॉ विश्वविद्यालय भी भाग ले रहे हैं|
यह उल्लेखनीय है की 40 टीमों की अधिकतम सीमा के बावजूद 60 से अधिक टीमों ने संपर्क किया था| मूट कोर्ट प्रतियोगितायों के इतिहास में पहली बार भारत में कोई संस्थान 3.25 लाख रुपये की शानदार इनामी राशि दे रहा है| विजेता टीम को 1.5 लाख रुपये नकद राशि मिलेगी जबकि उप विजेता को 1.00 लाख रुपये दिए जायेंगे| इसके अलावा बेस्ट रिसर्चर, बेस्ट स्पीकर एवं बेस्ट मेमोरियल के लिए प्रत्येक को 25,000 रुपये दिए जायेंगे|
कानून के विभिन्न क्षेत्रो जैसे बार, बेंच, शिक्षा व् उद्योग जगत की अनेक प्रख्यात हस्तियों को प्रतियोगिता के प्रिलिमनरी, क्वार्टर फाइनल, सेमी फाइनल तथा फाइनल राउंड्स को जज करने के लिए आमंत्रित किया गया हैं| उद्घाटन व् समापन सत्रों में अनेक महत्त्वपूर्ण अतिथियों में जस्टिस, सीनियर एडवोकेट्स, शिक्षाविदों के साथ ही वाईस चांसलर्स भी उपस्थित रहेंगे|
उद्घाटन समारोह का आयोजन 17 फरवरी 2017 के दिन अपराह्न 4 बजे से किया जायेगा | समारोह में राज्य सभा सांसद, पूर्व विधि मंत्री एवं वरिष्ठ अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय श्री राम जेठमलानी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे | मूट प्रॉब्लम :- सविधान के अनुच्छेद के 19(1)(a) और सिनेमाटोग्राफ एक्ट को मूट प्रॉब्लम बनाया गया है|
अनाथ बच्चा पोंटोस देश का सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर बन जाता है| वो अपने स्ट्रगल को बायोपिक के जरिये दिखाना चाहता है| फिल्म जब सेंसर के पास जाती है तो उसे ‘A’ सर्टिफिकेट दे देते है| फुटबॉलर प्रोड्यूसर के विरुद्ध केस करता है|
विनम्र निवेदन है कि कार्यक्रम के वृहद् कवरेज हेतु प्रेस फोटोग्राफर और संवाददाताओं की नियुक्ति करना सुनिश्चित करें |


भोपाल में ग्लोबल स्किल इंप्लायमेंट पार्टनरशिप अप्रैल में देश-विदेश की कंपनियों को किया जायेगा अमंत्रित
उद्योग मंत्री श्री शुक्ल तथा तकनीकि शिक्षा राज्य मंत्री श्री जोशी ने की तैयारियों की समीक्षा

16 Feb. 2017
प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भोपाल में वृहद पैमाने पर आगामी अप्रैल माह में ग्लोबल स्किल इंप्लायमेंट पार्टनरशिप का आयोजन किया जायेगा | मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर आयोजित इस पार्टनरशिप में देश-विदेश की प्रमुख बड़ी कंपनियों को अमंत्रित किया जायेगा | वाणिज्य,उद्योग तथा रोजगार मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल और तकनिकी शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी की मौजूदगी में पार्टनरशिप की तैयारियों की समीक्षा कर रूपरेखा तय की गई | बैठक में उद्योग तथा तकनिकी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे |
उद्योग मंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री की जिस मंशानुरूप यह पार्टनरशिप आयोजित होना है | इनटेंशन टु इंप्लाइमेट के उद्देश्य की पूर्ति होना चाहिए | उन्होंने कहा कि समय कम है इस बात को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां युद्ध स्तर पर होना चाहिए | उद्योग मंत्री ने कहा कि आयोजन वृहद हो इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही तथा कोताही ना बरती जायें |
राज्य मंत्री जोशी ने कहा कि पार्टनरशिप का मुख्य उद्देश्य युवाओं को उनके कौशल के अनुसार रोजगार के बेहतर से बेहतर अवसर मिले | उन्होंने कहा कि सभी प्रमुख बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों को समय रहते अमंत्रित कर लिया जाये | साथ ही तैयारियों को निर्धारित आयोजन से पहले पूरा किया जाना सुनिश्चित करे |
बैठक में अध्यक्ष मध्यप्रदेश रोजगार निर्माण बोर्ड श्री हेमंत विजयराव देशमुख ने आयोजन की रूपरेखा की जानकारी देते हुए आपेक्ष की रोजगार और कौशल विकास के इस वैश्विक कार्यक्रम को सफल बनाना चाहिए | प्रमुख सचिव उद्योग श्री मोहम्मद सुलेमान ने आयोजन के उद्देश्य बताते हुए कहा कि प्रदेश के मानव संसाधन को दुनिया के समाने रखना है | उन्होंने कहा कि आयोजन में उद्योग विभाग सहयोगी रहेगा |
प्रमुख सचिव श्री आशोक वर्णमाल ने आयोजन के लिए अपने विचार रखते हुए सुझाव भी दिये | प्रमुख सचिव तकनिकी शिक्षा श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव ने कहा कि आयोजन के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उसकी रूपरेखा तैयार की जायेगी | इसके लिए उद्योग विभाग का पूरा-पूरा सहयोग लिया जायेगा |
बैठक में उद्योग तथा तकनिकी शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे |


सरसंघचालक ने किया माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कैलेंडर का विमोचन
भारत की ज्ञान परंपरा पर केंद्रित है विश्वविद्यालय का कैलेंडर

11 Feb. 2017
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कैलेंडर का विमोचन किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला भी उपस्थित थे।
सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कैलेंडर के विषय और उसके आकल्पन की सराहना की है।
विश्वविद्यालय का वर्ष 2017 का कैलेंडर भारत की ज्ञान परंपरा पर केन्द्रित है। 12 पृष्ठीय कैलेंडर में पृथक-पृथक पृष्ठों पर चार वेदों ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्वेद एवं सामवेद की व्याख्या के साथ उपनिषद्, रामायण, महाभारत और गीता को रेखांकित किया गया है। इसके साथ ही प्राचीन भारत के शिक्षा के चार केंद्र नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला एवं सांदीपनी आश्रम का उल्लेख हैं। कैलेंडर में भारतीय तिथियों को भी दर्शाया गया है। महत्वपूर्ण तीज-त्यौहारों के साथ शासकीय अवकाश की भी जानकारी कैलेंडर में शामिल की गयी है। विगत वर्ष (2016) का कैलेंडर सिंहस्थ पर केन्द्रित था, जिसमें कुम्भ की संचार परंपरा को वर्णित किया गया था।

जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी में द्वितीय दीक्षांत समारोह का आयोजन, 200 छात्रों को मिली डिग्री
Our Correspondent :3 December 2016
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में निर्णय लिया गया कि अगले शैक्षणिक सत्र से कक्षा एक से सात तथा 9वीं और 11वीं में अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों को विज्ञान, गणित और वाणिज्य समूह के विषयों में एनसीईआरटी पाठ्य-पुस्तकों से शिक्षण करवाया जायेगा। कक्षा 8, 10 और 12वीं में सत्र 2018-19 से एनसीईआरटी की पुस्तकों से शिक्षण करवाया जायेगा। मंत्रि-परिषद ने अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्यालय नई दिल्ली की स्थापना के लिए तृतीय श्रेणी के अनुवादक के कुल 10 पद के सृजन की मंजूरी दी। इनका वेतनमान 9300-34800+3200 ग्रेड-पे रहेगा। मंत्रि-परिषद ने कार्यालय कल्याण आयुक्त, भोपाल गैस पीड़ित भोपाल के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को उच्च न्यायालय के अधीक्षण में उच्च न्यायालय एवं विभिन्न जिला न्यायालयों की स्थापनाओं में उपलब्ध तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति में 10 वर्ष की सेवा अवधि पूरी कर चुके कर्मचारियों को सीधी भर्ती के लिए निर्धारित आयु में अधिकतम 10 वर्ष की सीमा तक छूट देने का निर्णय लिया। यह सुविधा आदेश जारी होने के दिनांक से 5 वर्ष की अवधि के लिए ही होगी। मंत्रि-परिषद ने कार्यशील पूँजी की व्यवस्था के लिए तीनों विद्युत कंपनियों द्वारा पावर फायनेंस कार्पोरेशन से माह जून 2016 में प्राप्त किए गए कुल 900 करोड़ रुपए के लघु अवधि ऋण के लिए राज्य शासन की गारंटी देने का निर्णय लिया। ऋण की गारंटी के लिए विद्युत कंपनियों द्वारा राज्य शासन को 0.5 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से गारंटी शुल्क का भुगतान किया जायेगा।

अगले शैक्षणिक सत्र से एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को मंजूरी
Our Correspondent :19 November 2016
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में निर्णय लिया गया कि अगले शैक्षणिक सत्र से कक्षा एक से सात तथा 9वीं और 11वीं में अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों को विज्ञान, गणित और वाणिज्य समूह के विषयों में एनसीईआरटी पाठ्य-पुस्तकों से शिक्षण करवाया जायेगा। कक्षा 8, 10 और 12वीं में सत्र 2018-19 से एनसीईआरटी की पुस्तकों से शिक्षण करवाया जायेगा। मंत्रि-परिषद ने अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्यालय नई दिल्ली की स्थापना के लिए तृतीय श्रेणी के अनुवादक के कुल 10 पद के सृजन की मंजूरी दी। इनका वेतनमान 9300-34800+3200 ग्रेड-पे रहेगा। मंत्रि-परिषद ने कार्यालय कल्याण आयुक्त, भोपाल गैस पीड़ित भोपाल के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को उच्च न्यायालय के अधीक्षण में उच्च न्यायालय एवं विभिन्न जिला न्यायालयों की स्थापनाओं में उपलब्ध तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति में 10 वर्ष की सेवा अवधि पूरी कर चुके कर्मचारियों को सीधी भर्ती के लिए निर्धारित आयु में अधिकतम 10 वर्ष की सीमा तक छूट देने का निर्णय लिया। यह सुविधा आदेश जारी होने के दिनांक से 5 वर्ष की अवधि के लिए ही होगी। मंत्रि-परिषद ने कार्यशील पूँजी की व्यवस्था के लिए तीनों विद्युत कंपनियों द्वारा पावर फायनेंस कार्पोरेशन से माह जून 2016 में प्राप्त किए गए कुल 900 करोड़ रुपए के लघु अवधि ऋण के लिए राज्य शासन की गारंटी देने का निर्णय लिया। ऋण की गारंटी के लिए विद्युत कंपनियों द्वारा राज्य शासन को 0.5 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से गारंटी शुल्क का भुगतान किया जायेगा।

100 सबसे ज्यादा लोकप्रिय हिन्दी किताबों का कलेक्शन
Our Correspondent :18 November 2016
स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी अपनी स्थापना के 50 वर्ष बाद अब लाइब्रेरी में हिन्दी की पुस्तकें शामिल करने जा रही है । इस रविवार लाइब्रेरी में 100 किताबों का "मेगा हिन्दी कलेक्शन" शामिल किया जाएगा । हिन्दी की सबसे ज्यादा लोकप्रिय 100 किताबों का यह कलेक्शन 26 नवंबर तक लाइब्रेरी डिस्प्ले पर मौजूद रहेगा । इस दौरान शहर का कोई भी लाइब्रेरी आकर इन किताबों को पढ़ सकता है । लाइब्रेरी के मेंबर्स 26 नवंबर तक इन किताबों को अपने अकाउंट में रिजर्व करा सकेंगे । तथा 27 नवंबर से इन किताबों को पढ़ने के लिए घर ले जा सकेंगे । हिन्दी किताबों को पढ़ने के लिए लाइब्रेरी मेंबर्स को अलग से कोई मैम्बरशिप लेने की जरूरत नहीं है । उनकी वर्तमान सदस्यता में ही वे हिन्दी की किताबें इश्यू करा सकते हैं । लाइब्रेरी के हर तरह के मेंबर्स को हिन्दी किताबें इश्यू कराने की अनुमति होगी । इससे पहले मेंबर्स की राय जानने के लिए लाइब्रेरी द्वारा अक्तूबर माह में हिन्दी के 2 टीज़र कलेक्शन लॉंच किए गए थे जो जबर्दस्त लोकप्रिय हुए थे । इन टीज़र कलेक्शन में मेम्बर्स द्वारा जिस तरह के किताबें ज्यादा पसंद की गईं थी उन्हीं किताबों को इस मेगा कलेक्शन में शामिल किया गया है मेगा कलेक्शन में शामिल किताबों का चयन लाइब्रेरी में अभी हाल में गठित 10 सदस्यीय "क्लब हिन्दी" द्वारा किया गया है । हिन्दी पाठकों की विविध रुचियों को ध्यान में रखते हुए इस कलेक्शन में लगभग हर तरह की हिन्दी किताबों को शामिल किया गया हैं जिसमें हिन्दी की क्लासिक बुक्स से लेकर आज के समय में लोकप्रिय माइथालॉजिकल बुक्स के अनुवाद भी शामिल हैं । हिन्दी कलेक्शन : एक नज़र में कलेक्शन का नाम - मेगा हिन्दी कलेक्शन कलेक्शन में शामिल हैं - हिन्दी की 100 सबसे लोकप्रिय किताबें विशेष - ये लाइब्रेरी का पहला बड़ा हिन्दी कलेक्शन है
कब शामिल किया जाएगा - 20 नवंबर 2016 को डिस्प्ले पर कब तक रहेगा - 26 नवंबर तक किताबें रिजर्व कराईं जा सकती हैं - 26 नवंबर तक किताबें इश्यू कराईं जा सकती हैं - 27 नवंबर से अगला हिन्दी कलेक्शन कब आएगा - हर महीने के आखिरी रविवार को
कलेक्शन में शामिल कुछ पुस्तकों के नाम हिन्दी साहित्य की क्लासिक बुक्स :- रात का रिपोर्टर - निर्मल वर्मा सूरज का सातवाँ घोडा - धर्मवीर भारती गोरा - रवीद्र नाथ टैगोर कैसी लगाई आग - असगर वजाहत शेखर एक जीवनी - अज्ञेय छावा - शिवाजी सावंत चित्रलेखा - भगवती चरण वोहरा काशी का अस्सी - काशीनाथ सिंह नदी के द्वीप - अज्ञेय मंटो की कहानियाँ - सहादत हसन मंटो लोकप्रिय प्रेरणादायी पुस्तकों के हिन्दी अनुवाद रिच डैड पुअर डैड - किओसाकी मेरा चीज़ किसने हटाया - स्पेन्सर जॉनसन अप्रेषित पत्र - रंगरजन शक्ति के 48 नियम - रोबर्ट ग्रीन दौलत और सफलता की राह - मर्फी चिंता छोड़ो सुख से जिओ - डेल करनेगी सकारात्मक सोच - नॉर्मन विनसेट पील अति प्रभावकारी लोगों की सात बातें - स्टीफन कोवी रहस्य - रोंडा बर्न पावर, मैजिक, हीरो - रोंडा बर्न लोकप्रिय पुस्तकों के हिन्दी अनुवाद अलकेमिस्ट - पाउलो कोहलों एडल्ट्री - पाउलो कोहलों काइट रनर - खालिद होसेनी लाइफ ऑफ पाई - यान मरटेल सोफी का संसार - गार्डर चाणक्य मंत्र - अश्विन सांघी कृष्ण कुंजी - क्षविन सांघी चेतन भगत की सभी किताबों के हिन्दी अनुवाद हैरी पॉटर की सभी किताबों के हिन्दी अनुवाद प्रसिद्ध लेखकों की पुस्तकों के हिन्दी अनुवाद राम चन्द्र गुहा अमिताभ घोष खुशवंत सिंह रस्किन बॉन्ड अमर्त्य सेन वी एस नाइपाल रोहिंटन मिस्त्री पवन कुमार वर्मा लोकप्रिय पौराणिक किताबों के हिन्दी अनुवाद काली का उदय - आनंद नीलकंठन दशराजन - अशोक बैंकर ईक्षवाकू के वंशज - आमिश असुर - आनंद नीलकंठन अयोध्या का राजकुमार - बैंकर हिन्दी की नई पुस्तकें कोठगोई - प्रभात रंजन नरक यात्रा - ज्ञान चतुर्वेदी मणिकरणिका - डॉ तुलसीरम अगला यथार्थ - हिमांशु जोशी ढाक के तीन पात - मलय जैन नए लोगों के लिए लाइब्रेरी की सदस्यता के प्लान
व्यक्तिगत सदस्यता (वार्षिक शुल्क - 1200 रुपये ) मूवी मेम्बरशिप (वार्षिक शुल्क - 1600 रुपये) फैमिली मेम्बरशिप (वार्षिक शुल्क - 2500 रुपये )
जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्रा ने किया पत्रकारिता विश्वविद्यालय का निरीक्षण
Our Correspondent :15 November 2016
जनसंपर्क, जल-संसाधन तथा संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने आज भोपाल के महाराणा प्रताप नगर स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय का निरीक्षण किया। मंत्री डॉ. मिश्रा ने विश्वविद्यालय के बिशनखेड़ी में बनने वाले भवन के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने प्रबंध समिति की बैठक शीघ्र आहूत कर आगामी आवश्यक कार्यवाहियाँ पूर्ण करवाने को कहा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बृजकिशोर कुठियाला और कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी दी। विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित पत्रिकाएँ और अन्य प्रकाशन की भी जनसंपर्क मंत्री को जानकारी दी गई।
मंत्री डॉ. मिश्रा ने विश्वविद्यालय में इलेक्ट्रानिक मीडिया विभाग के विद्यार्थियों से उनकी कक्षा में जाकर बातचीत की। जनसंपर्क मंत्री ने विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग की कार्य-प्रणाली की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कम्प्यूटर साईंस, पत्रकारिता प्रबंधन, जनसंचार, न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी, जनसंपर्क और विज्ञापन, प्रकाशन, कम्युनिकेशन रिसर्च, प्रशिक्षण और टेक्स बुक राईटिंग विभाग के कार्यों की जानकारी भी प्राप्त की। जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्रा ने विश्वविद्यालय के पुस्तकालय का भी निरीक्षण किया। पुस्तकालय प्रभारी ने जानकारी दी कि पुस्कालय में पत्रकारिता और संचार से संबंधित पाठ्य-पुस्तकों के अलावा उत्कृष्ट साहित्य भी विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध है। शोध-पत्र पत्रिकाएँ भी नियमित रूप से आती हैं। जनसंपर्क मंत्री ने विश्वविद्यालय परिसर का भी अवलोकन किया। उन्होंने भवन की छत पर स्थापित विशाल घड़ी को उपयोगी बताते हुए इसे और आकर्षक रूप से स्थापित करने की जरूरत बताई। जनसंपर्क मंत्री को जानकारी दी गई कि विश्वविद्यालय के विधार्थियों को बिना हेलमेट के दुपहिया वाहनों का उपयोग करने की मनाही है। जनसंपर्क मंत्री ने विश्वविद्यालय में कामकाजी महिलाओं के लिए संचालित पाठ्यक्रम की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिकेशन रिसर्च की कक्षा में जाकर गतिविधियाँ जानीं।

23 अक्टूबर को आयोजित होगी "मध्यप्रदेश क्विज"
21 October 2016
मध्यप्रदेश की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने पर विशेष आयोजन अगले सप्ताह मध्यप्रदेश अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे कर रहा है । इस अवसर को यादगार बनाने के उद्देश्य से शासकीय मौलाना आज़ाद सेंट्रल लाइब्रेरी आगामी 23 अक्टूबर को एक विशेष क्विज का आयोजन कर रही है । मध्यप्रदेश सामान्य ज्ञान पर आधारित इस क्विज में किसी भी आयु वर्ग का कोई भी व्यक्ति भाग ले सकता है ।
क्विज का उद्देश्य लोगों को अपने प्रदेश से बेहतर तरीके से परिचित कराना है क्विज में भाग लेने के लिए किसी पूर्व रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है । भाग लेने का इच्छुक कोई भी व्यक्ति 23 अक्टूबर को सुबह 8.30 बजे लाइब्रेरी पहुँचकर इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सकता सकता है । जगह सीमित होने के कारण सबसे पहले आने वाली 100 टीमों को ही इस क्विज में प्रवेश दिया जाएगा एक्सीलेंस कॉलेज की छात्रा चारवी गुप्ता इस क्विज की क्विज मास्टर होंगी । तथा रोजगार निर्माण के संपादक श्री पुष्पेंद्र पाल सिंह इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे
कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है

कार्यक्रम - मध्यप्रदेश क्विज
दिनांक - 23 अक्टूबर 2016 रविवार
समय - सुबह 9 बजे
स्थान - सेंट्रल लाइब्रेरी भोपाल

क्विज मास्टर - चारवी गुप्ता
पुरुस्कार - 6000/- रुपये

मुख्य अतिथि - पुष्पेंद्र पाल सिंह (संपादक, रोजगार निर्माण) कौन भाग ले सकता है - कोई भी व्यक्ति

रजिस्ट्रेशन कहाँ होगा - पहले से रजिस्ट्रेशन करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्या कोई रजिस्ट्रेशन शुल्क है - नहीं कितने मेंबर्स की टीम होना चाहिए - 02 मेंबर्स की

भाग लेने के लिए क्या करना है - क्विज के दिन सुबह 8.30 बजे लाइब्रेरी पहुंचे
क्विज में प्रवेश मिलेगा - सबसे पहले आने वाली केवल 100 टीमों को
क्विज में पूंछे जाने वाले विषय मध्यप्रदेश का इतिहास, संकृति व पर्यटन
मध्यप्रदेश का भूगोल, नदियां, वन व जलवायु
मध्यप्रदेश के खनिज व उद्योग
मध्यप्रदेश की जनसंख्या
मध्यप्रदेश सरकार की प्रमुख योजनाएँ
पिछले 1 वर्ष की मध्यप्रदेश सरकार की गतिविधियां

कार्य व्यवहार व आचरण से लैंगिक भेदभाव को रोकें
21 October 2016
भारत में लैंगिक भेदभाव और अत्याचार सिखाने की पाठशाला यदि कहीं नहीं है, तो फिर समाज में यह अत्याचार करने की प्रेरणा कहां से प्राप्त हो रही है और इस असमानता को निरन्तर बढ़ावा कौन लोग दे रहे हैं? यह समाज में चिन्तनीय विषय है। जिसे हमें अपने कार्य व्यवहार, आचरण एवं सदभाव से रोकना होगा। उक्त विचार भारत यात्रा पर निकले श्री राकेश कुमार सिंह ने आज यहां माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में विशेष व्याख्यान के दौरान व्यक्त किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने की। समारोह में देश के 10 राज्यों की 16000 किलोमीटर साइकिल यात्रा कर चुके भारत यात्री राकेश कुमार सिंह ने अपनी यात्रा के बारे में विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहां कि मार्च, 2014 में जब उन्होंने यह साइकिल यात्रा प्रारंभ की थी उस वक्त उत्तर प्रदेश, बिहार समेत दक्षिण भारत में तेजाब की घटनाएं ज्यादा हो रही थी। यह तेजाब फेंकने की प्रेरणा कहां से मिली और लोगों में लिंग के आधार पर नफरत का बीज कहां से पैदा हुआ। जब यह विषय सोच में आया तो पता चला कि हमारा समाज कोख से जन्म ले रहे बेटा और बेटी में ही अन्तर करके ही चल रहा है। बेटी पैदा होते समय लक्ष्मी जरूर कहा जाता है, परन्तु बड़े होने पर उसे दान में दे दिया जाता है। क्या कभी बेटे को भी दान में दिया है किसी ने । यह असमानता दैनिक क्रिया में एवं शादी समारोह में भी दिखाई देती है। दहेज के खिलाफ लड़ाई झूठी है। हमें परिवारों में आन्तरिक व्यवस्था पर ध्यान देते हुए भारत की शक्ति को और मजबूत बनाना होगा, तभी हम लैंगिक भेदभाव से उत्पन्न असमानता को समाप्त कर सकेगें। उन्होंने कहा कि वह इस यात्रा के माध्यम से लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास कर रहे हैं। समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि समाज में 60-70 साल की विकृतियों को हमें समझना होगा और समाज की सोच बदलनी होगी। कुछ विकृतियां हल हुई हैं और कुछ अभी यथावत हैं। हमें महिलाओं को सम्मानित दर्जा देने के कारगर प्रयास करने होंगे। यह बात सच है कि भारत में महिलाओं का स्थान ऊंचा है और मां के प्रति बहुत श्रद्धा है। हम आज भी मां का आदेश सर्वोपरि मानते हैं। उन्होंने भारत यात्री श्री राकेश कुमार सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों का आव्हान किया कि वह भी इस दिशा में कलम उठाकर, लेखक बनकर, फिल्मकार बनकर, एनिमेशन कार्य करके अथवा अन्य कोई विधा अपनाकर इस सामाजिक बुराई को खत्म करने का प्रयास करेंगे, तो यह निश्चित ही समाज के लिए उपयोगी होगा। कुलपति ने भारत यात्री श्री राकेश कुमार सिंह को स्मृति चिन्ह एवं पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया। समारोह का संचालन जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष श्री संजय द्विवेदी ने किया। कार्यक्रम की शुरूआत सरस्वती वंदना से हुई, तत्पश्चात छात्रा सुश्री उवर्शी विश्वकर्मा ने एकल गीत प्रस्तुत किया और राष्ट्रगीत के साथ समारोह का समापन हुआ। समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित हुए। ‘कौन है राकेश कुमार सिंह’ बिहार के छपरा जिले के छोटे से गांव तरियानी में जन्में राकेश कुमार सिंह समाज में लैंगिक भेदभाव मिटाने के मिशन पर निकले हैं। उन्होंने मार्च 2014 से साइकिल यात्रा करते हुए तमिलनाडु, पण्डुचेरी, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आन्धप्रदेश, उड़ीसा, बिहार और मध्यप्रदेश की ज़मीं को स्पर्श किया है और इन राज्यों में लैंगिक समानता के साथ सह-अस्तित्व और सह-जीवन का मंत्र जनमानस तक पहुंचा चुके हैं। उनकी इस यात्रा का मकसद पुरूष-स्त्री के बीच ही नहीं बल्कि तीसरे समलैंगिक समूहों के बीच असमानता को पाटना है। उन्होंने पिछले दो साल में दस राज्यों में यह सन्देश देते हुए 16000 किलोमीटर की यात्रा तय की है। और इस यात्रा के दौरान लगभग साढ़े चार लाख लोगों से सीधे तौर पर संवाद कायम किया है। समाज में असमानता के संवेदनशील मुद्दे पर अलग-अलग समूहों से बातचीत करते हुए उन्होंने सामाजिक विसंगता को दूर करने का प्रयास किया है।
मिस्टर फ्रेशर बने आदिल, मिस फ्रेशर बनीं आफरीन
21 October 2016
नगाड़े संग ढोल बाजे....
- जवाहरलाल नेहरू पीजी कॉलेज की फ्रेशर पार्टी में जमकर किया छात्र-छात्राओं ने धमाल - क्लासीकल, हिपहॉप डांस में झूमकर नाचे
- एंटी रैंिगंग, गेट टू गेदर का किया आयोजन
भोपाल। जवाहरलाल नेहरू पीजी कॉलेज की गुरुवार को मोटल सिराज में फ्रेशर पार्टी आयोजित की गई जिसमें मिस्टर फ्रेशर का खिताब आदिल को दिया गया जबकि मिस फ्रेशर आफरीन चुनीं गईं। इस दौरान जूनियर-सीनियर छात्र-छात्राओं ने क्लासीकल व हिपहॉप डांस में धमाल मचा दिया। समारोह में कॉलेज के डायरेक्टर आसिफ जकी, प्रिंसीपल डॉ. वाई पी सिंह मौजूद थे। कॉलेज के मीडिया प्रभारी विवाल जकी ने बताया कि जूनियर-सीनियर की फ्रेशर पार्टी में 150 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। शुभारंभ पर डायरेक्टर आसिफ जकी ने कहा कि फ्रेशर पार्टी से स्टूडेंट में नई ऊर्जा का संचार होता है। पुराने गिले-शिकवे भूलकर सकारात्मक सोच जिंदगी बदल देती है। तत्पश्चात नगाड़े संग ढोल बाजे... डिस्को दीवाने गाने पर विलाल, वहीद, ऋषि, अहीवा, अदनान, शोजर, इफला आदि स्टूडेंट जमकर नाचे। समारोह में एंटी रैगिंग, गेट टू गेटर का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन अर्पित ने किया

2 अक्टूबर को होगी "इंडिया क्विज"
29 September 2016
आगामी 2 अक्टूबर को गांधीजी की जयंती के अवसर पर शासकीय मौलाना आज़ाद केन्द्रीय पुस्तकालय एक ओपन क्विज आयोजित करने जा रही है । भारत के आजादी आंदोलन पर केन्द्रित इस क्विज में किसी भी आयु का कोई भी शहरवासी भाग ले सकता है । क्विज का उद्देश्य लोगों को भारत की स्वतन्त्रता के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी देना है सिविल सर्विसेज क्लब के सहयोग से आयोजित हो रही इस क्विज के विजेताओं को कुल 6000/- रुपये के नगद पुरुसकार दिये जाएंगे मशहूर क्विज मास्टर व एक्सीलेंस कॉलेज के पूर्व छत्र अभिषेक दुबे इस क्विज में क्विज मास्टर की भूमिका निभाएंगे क्विज रविवार 2 अक्टूबर को सुबह 10 बजे सेंट्रल लाइब्रेरी के मुख्य हाल में आयोजित होगी । इसमें भाग लेने के लिए किसी को पहले से कोई रजिस्ट्रेशन कराने की कोई जरूरत नहीं है । इच्छुक व्यक्ति 2 लोगों की टीम बनाकर रविवार को सुबह 9.30 बजे सेंट्रल लाइब्रेरी पहुँचें क्विज का विवरण इस प्रकार है - क्विज का नाम - इंडिया क्विज 2016
कब - 2 अक्टूबर 2016
अवसर - गांधीजी की जयंती समय - सुबह 10 बजे
स्थान - सेंट्रल लाइब्रेरी भोपाल

पहला युवा मंच कार्यक्रम सम्पन्न
06 September 2016
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर हुई चर्चा
भारत सरकार द्वारा बनाई जा रही नई शिक्षा नीति पर युवाओं के विचार जानने के उद्देश्य से इस रविवार स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में युवा मंच नामक कार्यक्रम आयोजित हुआ । प्रज्ञा प्रवाह के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में 10 युवाओं ने टी एस आर सुब्रमणियम समिति की रिपोर्ट पर अपने विचार व्यक्त किए व उसे लागू करने के प्रभावी तरीके सुझाए इस कार्यक्रम में बाल साहित्य शोध केंद्र के अध्यक्ष श्री महेश सक्सेना व भारतीय सेना के रिटायर्ड कर्नल श्री वीरेंद्र चौबे विशेषज्ञ के तौर पर मौजूद थे कार्यक्रम के विशेष अतिथि के रूप में आयुक्त लोक शिक्षण श्री नीरज दुबे मौजूद थे
कार्यक्रम में युवा वक्ताओं द्वारा रखे गए प्रमुख सुझाव :-
योगेश अजमेरा के सुझाव
भारत में शिक्षा के लिए किया जाने वाला आवंटन अभी भी बहुत कम है । समिति का सुझाव की हमें बजट का 6 % शिक्षा पर खर्च करना चाहिए को जरूर लागू किया जाना चाहिए शिक्षा के प्रशासन को बेहतर बनाने के लिए 'भारतीय शिक्षा सेवा' नाम से एक अखिल भारतीय सेवा शुरू की जानी चाहिए स्वामी विवेकानंद ने कहा था ' लोगों के दिमाग बहुत सारी गैर जरूरी बातें भर देना और उसे लोगों के दिमाग में सड़ने के लिए छोड़ देना शिक्षा नहीं हैं ....शिक्षा वह है जो व्यक्ति अपने जीवन में उतार सके' हमें बहुत सारी गैर जरूरी चीजों को अपने पाठ्यक्रम से हटाने की जरूरत है और उन चीजों को शामिल करने की जरूरत है जो हमें बेहतर जीवन जीने में मददगार बनें कक्षा 5 तक ही हमें सब विषय पढ़ाने चाहिए उसके बाद हमें छात्रों को कोई तीन विषय चुनने की छूट देनी चाहिए ताकि वे अपनी पसंद के विषय को पढ़ें और अपनी पढ़ाई को एंजॉय करें भारत में 'स्कूल में उपस्थिति योग्यता से ज्यादा महत्वपूर्ण है' हमें इस पर दोबारा सोचने की जरूरत है । स्कूल में दिनभर बैठाने की वजाय हमें छात्रों के लिए ज्यादा रोचक गतिविधियां तय करनी चाहिए सावन श्रीवास्तव के सुझाव
हमारे देश से ज्यादा मेडल माइकल फेलप्स ने जीते हैं क्या कारण है कि आबादी में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश खेलों में छोटे छोटे देशों से भी पीछे है । इसका सबसे बड़ा कारण है स्कूलों में खेलों को बढ़ावा ना दिया जाना हमें स्कूल के पाठ्यक्रम में खेलों को भी उतना ही महत्व देने की जरूरत है जितना हम सबजेक्ट्स को देते हैं । हर क्लास में स्पोर्ट्स एक अनिवार्य विषय होना चाहिए और हर स्टूडेंट्स के स्पोर्ट्स के मार्क्स उसकी मार्कशीट में शामिल किए जाने चाहिए पाठ्यक्रम से गैर जरूरी चीज़ें हटाकर स्पोर्ट्स के लिए समय निकाला जा सकता है यदि हमनें समय रहते सुधार नहीं किया तो ऐसा वक्त भी आ सकता है जब भारत केवल कम्प्युटर गेम्स में ही मेडल जीत पाएगा विक्रांत शर्मा के सुझाव
हर स्कूल में अनिवार्य रूप से कैरियर काउन्सलर की भर्ती होनी चाहिए जो बच्चों की बदलती रुचि व एक्सपोजर के हिसाब से उन्हे विकल्प बता सकें इंजीन्यरिंग व अन्य तकनीकी विषयों के साथ हिस्ट्री, फिलोसोफी और साइकॉलजी जैसे आर्ट्स के विषय पढ़ने का विकल्प दिया जाना चाहिए । ताकि लोग कैरियर के साथ साथ अपनी रुचि के विषय भी पढ़ सकें भारत में मास्टर डिग्री एक साल की कर देनी चाहिए ताकि लोग एक से ज्यादा विषयों में मास्टर्स करके अपनी विशेषज्ञता का क्षेत्र बढ़ा सकें पूनम असावरा के सुझाव
अच्छे डॉक्टर , इंजीनियर बनाने से ज्यादा हमें अच्छे नागरिक बनाने पर ज़ोर देना चाहिए । गांधीजी भी यही चाहते थे कि भारतीय शिक्षा का उद्देश्य जिम्मेदार व आत्मनिर्भर नागरिक बनाना होना चाहिए देश के सभी प्रतिष्ठित व्यक्तियों को कुछ समय निकालकर स्कूलों में पढ़ाना चाहिए । इससे उनमें लगातार सीखने की प्रवृति बनी रहेगी और स्टूडेंट्स को भी सफल लोगों से पढ़कर उन जैसा बनने की प्रेरणा मिलेगी शिक्षा व्यवस्था में हमें टीचर स्टूडेंट के रिश्ते को मजबूत बनाने की जरूरत है जिसके लिए आवश्यकता है समर्पित शिक्षकों की ।
अमृता सिंह के सुझाव
हमें समाज के हर व्यक्ति को एक जैसे स्तर की शिक्षा देने की जरूरत हैं क्योंकि आज के समय में लोगों के अलग अलग स्तर के लिए शिक्षा ही जिम्मेदार है अच्छी शिक्षा के लिए आवश्यक है स्किल्ड व टीचिंग को पसंद करने वाले टीचर्स है । सरकार को पूरे देश के लिए एक टीचिंग कैडर तैयार करना चाहिए जिसे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से चुना जाना चाहिए शिवपाल सिंह ठाकुर के सुझाव
हमें टीचिंग कैरियर को आकर्षक बनाना होगा । क्या कारण है कि देश का सबसे अच्छा टैलेंट टीचर नहीं बनना चाहता । यह प्रोफेशन देश के किसी भी प्रोफेशन से ज्यादा महत्वपूर्ण है इसलिए इसमें देश का सबसे अच्छा टैलेंट खीचना जरूरी है हमें पहली क्लास से ही बच्चों की हर एक्टिविटी को मॉनिटर करना शुरू कर देना चाहिए एक ट्रेकिंग सिस्टम बनाने की जरूरत है ताकि 5 वीं क्लास तक आते आते हमें उस बच्चे का स्वभाव समझ में आ जाये संस्कार के बिना शिक्षा 'बिना दायित्व के अधिकार देने जैसा है' कोई कितना भी विरोध करे पर हमें शिक्षा में नैतिक मूल्य सिखाने वाली धार्मिक पुस्तकों को भी शामिल करना चाहिए रवीना मिश्रा के सुझाव
हमें 9 वीं क्लास तक हर किसी को पास करने की पॉलिसी खत्म कर देनी चाहिए । हर स्तर पर परीक्षा होनी चाहिए ताकि स्टूडेंट में जीतने और आगे बढ्ने की भावना बनी रहे और आगे चलकर वह प्रतियोगी माहौल के साथ सामंजस्य बैठा सके स्कूली शिक्षा को हमें 3 भागों में बाँट देना चाहिए 1. कक्षा 1 से 5 तक - इसमें हमें अच्छा इंसान बनाने पर ज़ोर देना चाहिए 2. कक्षा 6 से 8 - इसमें हमें अच्छा नागरिक बनाने पर फोकस करना कहहिए 3. कक्षा 9 से 12 - इसमें हमें छात्रों को सबजेक्ट एक्सपर्ट बनाने पर ध्यान देना चाहिए संदीप पटेल के सुझाव
हमें शिक्षा के तीनों आयाम - शिक्षा, परीक्षा व प्रशिक्षण पर बराबर ध्यान देने की जरूरत है छात्रों की भांति हमें समय समय पर शिक्षकों का भी मूल्यांकन करने की जरूरत है , इसके लिए विभाग से अलग एक स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसी होनी चाहिए अभिषेक शर्मा के सुझाव
पूरे देश में एक जैसा पाठ्यक्रम लागू किया जाना चाहिए ताकि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में सभी छात्रों को बराबर मौका मिले दुनिया के टॉप 100 विश्वविद्यालयों में कोई भी भारतीय संस्था नहीं है पर इन टॉप 100 संस्थानों में आधे से ज्यादा शिक्षक भारतीय हैं । हमें इस पर ध्यान देने की जरूरत है । हमें अपने शिक्षण संस्थानों को राजनाइटिक दखलंदाज़ी से दूर रखना चाहिए ताकि वे बेहतरीन लोगों को अपने साथ जोड़ सकें हमारी शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो 'जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब क्रेएटर पैदा करे' आयुक्त लोक शिक्षण श्री नीरज दुबे का सम्बोधन
सुब्रमणियम समिति की रिपोर्ट तैयार होने से पहले चर्चाओं के लंबे दौर चले थे यही कारण है कि इस रिपोर्ट में वह हर चीज़ मौजूद है जो आप नई शिक्षा नीति में शामिल करना चाहते थे हर सफल व्यक्ति किसी एक अच्छे शिक्षक की देन है - हम अपने आस पास जिन सफल लोगों को देखते हैं वे सब किसी ना किसी अच्छे टीचर की देन हैं । इस देश ने कई महान व्यक्ति तब भी पैदा किए हैं जब यहाँ शिक्षा नीति जैसे कोई डोक्यूमेंट भी नहीं होते थे हर कोई अच्छे टीचर चाहता है पर टीचर कोई नहीं बनना चाहता - हमारे समाज की यह सबसे बड़ी बिडम्बना है कि हम सब अपने बच्चों के लिए अच्छे से अच्छे टीचर चाहते हैं पर कोई भी अच्छा व्यक्ति टीचर नहीं बनना चाहता । हमें देश के सर्वश्रेष्ठ टैलेंट को टीचिंग की ओर आकर्षित करना होगा

वैदिक काल से रहा है मनोरंजन का अस्तित्व
3 September 2016
माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, भोपाल के रजत जयंती वर्ष पर मुंबई प्रेस क्लब में हुई संगोष्ठी
भोपाल। वैदिक काल से मनोरंजक का अस्तित्व रहा है। नाट्यशास्त्र की रचना इसका उदाहरण है। देवताओं के राजा इंद्र ने कहा था कि देवताओं को रंगमंच का भय रहता है। इसके लिए ज्ञानी लोगों की जरूरत है। अमृत मंथन को दुनिया की पहली नाट्य प्रस्तुति माना जाता है। इस नाटक को देखने के बाद प्रजापति ने कहा कि इसमें सौन्दर्य का अभाव है। इसके बाद उन्होंने इंद्र को 25 अप्सरायें दी। आज भी फिल्मों में अप्सराओं की जरूरत पड़ती है। सुप्रसिद्ध फिल्म निर्देशक व अभिनेता डा. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने यह बात कही। श्री द्विवेदी शुक्रवार को मुंबई प्रेस क्लब में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता व जनसंचार विश्वविद्यालय, भोपाल के रजत जयंती वर्ष के मौके पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।
संगोष्ठी के पहले सत्र ‘मनोरंजन का संसार एवं बदलता सांस्कृतिक परिदृश्य’ विषय पर अपने विचार रखते हुए धारावाहित चाणक्य से प्रसिद्ध हुए डा. द्विवेदी ने कहा कि मनोरंजन सिर्फ फिल्में व टीवी नहीं हैं। क्रिकेट और फुटबाल भी मनोरंजन है। उन्होंने कहा की आजादी की लड़ाई लड़ रहे महात्मा गांधी से जब कहा गया है कि फिल्म एक प्रभावशाली माध्यम है। इसलिए फिल्मों को भी आजादी की लड़ाई से जोड़ा जाए तो बापू इसके लिए तैयार नहीं हुए। क्योंकि उनको फिल्म वालों के चरित्र पर विश्वास नहीं था। आज भी मध्यवर्गीय भारतीयों के मन में फिल्मों से जुड़ों लोगों को लेकर एक अविश्वास है। इसको लेकर ख्वाजा अहमद अब्बास ने बापू को लंबा पत्र भी लिखा था। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, दिल्ली के सदस्य सचिव डा सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि हम कलात्मक विलासिता की तरफ बढ़ रहे हैं। जिस तरह मनोरंजन का संसार बदल रहा है। उसको स्वीकार करने के लिए हमें खुद में भी बदलाव लाना होगा। डा. जोशी ने कहा कि व्यक्ति अपनी मनस्थिति के हिसाब से सुखी व दुखी रहता है। मनोरंजन के दुनिया के लोगों को यह बात समझनी होगी। वहीँ, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि मीडिया का 70 फीसदी हिस्सा मनोरंजन है, लेकिन किसी भी विश्वविद्यालय में इसकी पढ़ाई नहीं होती थी। तीन साल पहले माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि में एमबीए इन इंटरटेन कम्यूनिकेशन की पढ़ाई शुरू की गई। इस विषय की पढ़ाई शुरू करने से पहले इसको लेकर हमारे मन में काफी संकोच था। पर हमें लगा की मनोरंजन के क्षेत्र में प्रबंधन का महत्व बढ़ने वाला है। इस लिए यह पढ़ाई लोगों के काम की होगी। उन्होंने कहा कि भारत में मनोरंजन के क्षेत्र में हस्तक्षेप की जरूरत है। चर्चा सत्र का संचालन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी ने किया। फिल्मकारों का साहित्य से नहीं है नाता :
संगोष्ठी के दूसरे सत्र में ‘मनोरंजन व मर्यादा’ विषय पर चर्चा की शुरुआत करते हुए ‘वेलकम टू सज्जनपुर’ व ‘वेलडन अब्बा’ जैसी फिल्मों के लेखन अशोक मिश्र ने कहा कि आज मनोरंजन के लिए ज्ञानी होने की जरूरत नहीं है। अधिकांश फिल्मकारों का साहित्य से कोई सरोकार नहीं है। इसके बावजूद वे सफल हैं। आज एआईबी जैसे शो भी मनोरंजन का साधन हैं और इसकी आलोचना करने वालों को पिछड़ा समझा जाता है। उन्होंने कहा कि न्यूज चैनल भी मनोरंजन का साधन बन चुके हैं। मंत्री का सेक्स स्कैंडल लोगों के लिए सिर्फ खबर नहीं बल्कि मनोरंजन का साधन है। श्री मिश्र ने कहा सत्यजीत रे यथार्थवादी सिनेमा के लिए जाने जाते हैं। लेकिन उन्होंने रियलिटी दिखाने के लिए कभी गालियों का सहारा नहीं लिया। लेकिन आज के फिल्म निर्माता-निर्देशक अपनी फिल्मों में गालियों के इस्तेमाल के लिए सेंसर बोर्ड से लड़ रहे हैं। फिल्म ’वेलकम बैक’ के सह निर्देशक व आने वाली फिल्म एमएस धोनी के कार्यकारी निर्माता विनित जोशी ने कहा कि फिल्म वेलकम बैक में सेंसर बोर्ड ने दर्जनभर से अधिक कट लगाए थे। इस फिल्म को मर्यादा में लाने के लिए हमें चार दिन लगे। उन्होंने कहा कि मर्यादा में रहकर भी सुपरहिट फिल्में बनाई जा सकती हैं। फिल्मकार सुदीप्तो सेन ने कहा कि भारतीय सिनेमा में हिंदी सिनेमा का कोई खास योगदान नहीं है। सिनेमा के लिए अक्षय कुमार और सलमान खान की जरूरत नहीं। नमस्ते लंदन, वेलकम बैंक सहित दर्जनों फिल्मों के कलानिर्देशक जयंत देशमुख ने कहा कि फिल्म की कहानी अमर्यादित होने पर भी हम चाह कर वह फिल्म नहीं ठुकरा सकते क्योंकि हमारे पास विकल्प नहीं। उन्होंने कहा कि टीआरपी के लिए टीवी सीरियल की कहानी बदलती रहती है और बाद मे वह कहानी मर्यादा तोड़ने लगती है। विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा ने कहा कि दुनिया में सबसे ज्यादा फिल्में भारत में बनती हैं। लेकिन हम ही सबसे बड़े नकलची भी हैं। प्रेमचंद जैसे लेखक का फिल्म इंडस्ट्री से बहुत जल्द मोहभंग हो गया था। संगोष्ठी के तीसरे सत्र में ‘मनोरंजन की संस्कृति और मीडिया दृष्टि’ विषय पर हुई परिचर्चा में वरिष्ठ पत्रकार विश्वनाथ सचदेव, हरि मृदुल व रूना गुप्ते ने अपने विचार व्यक्त किए। संचालन डा सौरभ मालवीय ने किया।
(डॉ. पवित्र श्रीवास्तव) निदेशक, जनसंपर्कलिया।

मनोरंजन का संसार और बदलता सांस्कृतिक परिदृश्य पर संगोष्ठी का आयोजन
Our Correspondent :1 September 2016
मुम्बई प्रेस क्लब में 2 सितम्बर को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय का कार्यक्रम
भोपाल, 31 अगस्त। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल की ओर से 'मनोरंजन का संसार और बदलता सांस्कृतिक परिदृश्य' विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह संगोष्ठी 2 सितम्बर को मुम्बई प्रेस क्लब में सुबह 11:30 बजे से प्रारंभ होगी। आयोजन में प्रमुख रूप से प्रख्यात निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, वरिष्ठ पटकथा लेखक अशोक मिश्र, प्रख्यात कला निर्देशक जयंत देशमुख, साहित्यिक पत्रिका नवनीत के संपादक विश्वनाथ सचदेव और मी मरीठी एवं लाइव इंडिया समाचार वाहनी (चैनल) के संपादक पराग छापेकर शामिल होंगे। संगोष्ठी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला करेंगे।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय देश का प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय है। पत्रकारिता एवं आईटी की शिक्षा में विश्वविद्यालय का महत्त्वपूर्ण स्थान है। विश्वविद्यालय इस साल अपना रजत जयंती वर्ष मना रहा है। जयंती वर्ष के संदर्भ में विश्वविद्यालय की ओर से देश के प्रमुख स्थानों पर बौद्धिक और अकादमिक आयोजन किए जा रहे हैं। इसी तारतम्य में मुम्बई के प्रेस क्लब में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। संगोष्ठी में तीन सत्र होंगे। संगोष्ठी का शुभारंभ सुबह 11:30 बजे होगा। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. सच्चिदानंद जोशी होंगे। मुख्य वक्ता के तौर पर डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी का उद्बोधन होगा। इस सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला करेंगे। वहीं, द्वितीय सत्र दोपहर एक बजे प्रारंभ होगा, जिसमें 'मनोरंजन और मर्यादा' विषय पर विमर्श किया जाएगा। इस सत्र के मुख्य अतिथि जयंत देशमुख और मुख्य वक्ता अशोक मिश्र, पराग छापेकर तथा सुदीप्तो सेन होंगे। अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा करेंगे। तृतीय और समापन सत्र दोपहर बाद 3:30 बजे से होगा। इस सत्र में 'मनोरंजन की संस्कृति और मीडिया दृष्टि' विषय पर प्रमुख उद्बोधन होंगे। इस सत्र के मुख्य अतिथि विश्वनाथ सचदेव होंगे। जबकि मुख्य वक्ता फिल्म पत्रकार हरि मृदुल एवं रूना गुप्ते और टीवी कलाकार यामिनी ठाकुर हैं। संगोष्ठी के संयोजक जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी हैं।
(डॉ. पवित्र श्रीवास्तव)
निदेशक, जनसंपर्क


 
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