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विश्व डाइजेस्ट
ब्रिटेन - 103 साल के जॉर्ज ने जन्मदिन पर रचाई 91 साल की लुकी से शादी :
-ब्रिटेन में 103 साल के जॉर्ज किर्बी और 91 साल की डोरीन लुकी विवाह बंधन में बंध गए हैं। ये दुनिया में सबसे बुजुर्ग नवदंपति है। दुल्हन डोरीन शादी के बाद व्हील चेयर पर बैठे पति को ले जाते दिखीं। यह शादी किर्बी के 103वें जन्मदिन पर हुई। समारोह में 50 परिजन और करीबी मित्र मौजूद थे। गिनीज बुक का एक प्रतिनिधि भी इस शादी का गवाह बना।


चीन- जल्द ही ताइवान के लोगों को बिना परमिट के प्रवेश मिल सकेगा :
-ताइवान के निवासियों के लिए चीन सशर्त प्रवेश खत्म करने की योजना बना रहा है। शिन्हुआ समाचार एजेंसी के मुताबिक सलाहकार विधायी समिति चाइनीज पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस के प्रमुख झेंगशेंग ने श्यामेन में सातवें स्ट्रेट्स फोरम में इस फैसले की घोषणा की। अभी ताइवान में रहने वालों को चीन जाने के लिए वीजा जैसा प्रवेश परमिट लेना जरूरी है।


अमेरिका- 50 हजार मधुमक्खियों के हमले में घायल व्यक्ति की हालत सुधरी :
- एरिजोना के बगीचे में काम करते वक्त मधुमक्खियों के छत्ते से टकराने पर व्यक्ति को मधुमक्खियों ने हजारों डंक मार दिए थे। उसका इलाज किंगमैन रीजनल मेडिकल सेंटर में चल रहा है। अब उसकी स्थिति में सुधार हो रहा है। मधुमक्खी पालने वाले जॉनी होएट ने आकर स्थिति को संभाला, उसे भी 23 बार डंक लगे थे।


दक्षिण अफ्रीका- सूडान के राष्ट्रपति बशीर पर गिरफ्तारी का संकट :
- सूडान के राष्ट्रपति उमर अल-बशीर पर गिरफ्तारी का संकट आ गया है। बशीर अफ्रीकी संघ के दो दिवसीय सम्मेलन के लिए दक्षिण अफ्रीका में हैं। बशीर को इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) ने 2009 में दारफुर नरसंहार मामले में युद्ध अपराध का दोषी ठहराया था। आईसीसी के प्रमुख ने कहा है कि दक्षिण अफ्रीका को चाहिए कि वह सूडान के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करे।


पाकिस्तान - अंतरराष्ट्रीय एनजीओ ' सेव द चिल्ड्रन' पर लगे प्रतिबंध को हटाया :
- पाकिस्तान ने रविवार को अपने उस आदेश को निलंबित कर दिया जिसमें उसने अंतरराष्ट्रीय एनजीओ 'सेव द चिल्ड्रन' पर प्रतिबंध लगा दिया था। माना जा रहा है अमेरिका के दबाव की वजह से उसे ऐसा करना पड़ा। संस्था पर आरोप
था कि वह राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल है। इसके बाद 11 जून को संस्था का कामकाज प्रतिबंधित कर ऑफिस सील कर दिया गया था।

जर्मनी - आर्मी बेस कैंप में दबा हुआ है हिटलर का खजाना, कीमत 5 अरब रु. :
-हिटलर का खजाना जर्मनी के एक आर्मी बेस कैंप के नीचे दबा हुआ है। यह दावा है हॉलैंड के एक पत्रकार सिरिल विस्लर का। हालांकि, इस खजाने को लेकर सभी अनुमान और अटकलें गलत निकली हैं। नाजी शासन के दौरान लूटी गई सोने की छड़ें,जेवरात और विदेशी मुद्रा का सबसे बड़ा खजाना द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद गायब हो गया था। इसकी कीमत 5 अरब रुपए आंकी गई है।


ब्राज़ील: राष्ट्रपति भवन में जबरन कार घुसाने की नाबालिग की हिमाकत, सुरक्षाकर्मियों में मचा हड़कंप- चली गोलियां
29 Jun 2017
कार चालक तेज रफ्तार से राष्ट्रपति भवन के प्रवेश द्वार को तोड़ता भीतर चला गया। सुरक्षा गार्डों ने उसे चेतावनी देते हुए पहले हवा में गोलियां चलायीं और जब वाहन नहीं रूका तो उस पर भी गोलियां चलायीं। ब्राजील में एक नाबालिग शख्स ने राष्ट्रपति निवास के प्रवेश द्वार में जबरन अपनी कार घुसाने की कोशिश की। ऐसी हरकत पर अचानक से वहां सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों में हड़कंप मच गया। हालांकि पुलिस ने ऐसा करने पर आरोपी नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि जब ये घटना हुई उस समय राष्ट्रपति माइकल टेमर भवन के अंदर मौजूद नहीं थे। राष्ट्रपति भवन सूत्रों ने बताया कि एक कार चालक तेज रफ्तार से राष्ट्रपति भवन के प्रवेश द्वार को तोड़ता भीतर चला गया। सुरक्षा गार्डों ने उसे चेतावनी देते हुए पहले हवा में गोलियां चलायीं और जब वाहन नहीं रूका तो उस पर भी गोलियां चलायीं। सूत्रों ने बताया कि बाद में वाहन चालक को दबोच लिया गया जो नाबालिग था। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है। टेमर दूसरे सरकारी निवास में रहते हैं।
भारत को जरूरी सुरक्षा संसाधन मुहैया कराएगा अमेरिका
28 Jun 2017
वाशिंगटन। अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा है कि उनका देश भारत को दक्षिण एशिया में सुरक्षा मजबूत करने के लिए भारत को जरूरी संसाधन एवं तकनीक मुहैया कराएगा। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे खत्म होने के बाद माइक पेंस ने ये बयान दिया। पेंस ने कहा कि आपको घोषणा से इतर देखने की जरूरत नहीं है जिसके अनुसार अमेरिका भारत को सी गाडर्यिन यूएवी, अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर और सी-17 परिवहन विमान बेचेगा। उन्होंने कहा कि अभी बेचने की मंजूरी देने की प्रक्रिया चल रही है और उन्हें उम्मीद है कि इससे पारस्परिक सुरक्षा को लेकर दोनों देशों की प्रतिबद्धता दिखेगी और सुरक्षा के लिए भागीदारी के महत्व का पता चलेगा।
ड्रेगन का दुस्साहस... सिक्किम सेक्टर में घुसे चीनी सैनिक, हमारे 2 बंकर किए तबाह
27 Jun 2017
चीनी सैनिक सोमवार को सिक्किम सेक्टर में घुस आए। चीनी सैनिकों की भारत-चीन सीमा की सुरक्षा करने वाले भारतीय सेना के जवानों के साथ नोक-झोंक भी हुई। इसके अलावा चीनी सैनिकों ने दो बंकरों को भी नष्ट कर दिया। भारतीय सैनिक सिक्किम के डोका ला में 10 दिन से चीनी सैनिकों का सामना कर रहे हैं। भारतीय जवानों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर रोकने के लिए मानव शृंखला भी बनाई है। जवानों ने चीनी सैनिकों का वीडियो भी बनाया है। चीनी सैनिकों ने डोका ला इलाके के लालटेन में दो बंकरों को तबाह किया है। फ्लैग मीटिंग के बाद भी तनाव कम नहीं 20 जून को भारत और चीन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच फ्लैग मीटिंग हुई थी। इसके बाद भी तनाव कम नहीं हुआ है। भूटान और तिब्बत से सटे इस इलाके में चीनी सैनिकों ने नवंबर 2008 में भी घुसपैठ की कर भारतीय सेना के बंकर्स को तोड़ दिया था। 600 मीटर घुस आए थे पाक सैनिक गुरुवार को पाकिस्तान के सैनिक एलओसी के 600 मीटर तक अंदर घुस आए थे। भारतीय चौकियों से उनकी दूरी महज 200 मीटर की थी। जिसका जवाब भारतीय जवानों ने भी दिया था और एक हमलावर को मार गिराया था।
ट्रंप प्रशासन करना चाहता है भारत के साथ ऐसा परमाणु सौदा
24 Jun 2017
वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन भारत के साथ वेस्टिंग हाउस परमाणु रिएक्टर सौदे के साथ आगे बढऩा चाहता है। ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोमवार को प्रस्तावित मुलाकात से पहले व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि लगभग एक वर्ष पहले हुए इस समझौते को लागू करने की रफ्तार परमाणु दुर्घटना की स्थिति में देयता संबंधी चिंताओं की वजह से धीमा है। अधिकारी ने कहा कि हम अभी भी इस सौदे को आगे बढ़ाने में बहुत रुचि रखते हैं। वेस्टिंग हाउस इस परियोजना की व्यवहार्यता से खड़ा है। हम वेस्टिंग हाउस और उसके भारतीय भागीदारों के बीच जारी वार्ता को बहुत समर्थन करते हैं। गौरतलब है कि पिछले साल जून में भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम तथा अमेरिकी कंपनी वेस्टिंगहाउस भारत में छह परमाणु बिजली रिएक्टरों के लिए इंजीनियरिंग और स्थल डिजाइन कार्य तत्काल शुरू करने तथा अनुबंधात्मक व्यवस्था एक वर्ष में पूरा करने पर सहमति जताई थी।
भीषण विस्फोट से दहला पाकिस्तान, अब तक 11 लोगों की मौत, कर्इ घायल
23 Jun 2017
इस्लामाबाद पाकिस्तान के क्वेटा शहर में शुक्रवार को हुए एक विस्फोट में 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 16 अन्य घायल हो गए। एक पाकिस्तानी वेबसाइट के मुताबिक, विस्फोट बलूचिस्तान प्रांत के गुलिस्तान रोड पर स्थित पुलिस महानिरीक्षक एहसान महबूब के कार्यालय पास हुआ, जहां कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय हैं। पुलिस उपमहानिरीक्षक अब्दुल रज्जाक चीमा ने मृतकों की संख्या की पुष्टि की है। मरने वालों में चार पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि विस्फोट किस तरह का था, उसका अभी पता नहीं चल पाया है। चीमा ने कहा, 'घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी फुटेज को देखकर विस्फोट के कारण और उसकी प्रकृति का पता लगाया जाएगा।' पुलिस ने बताया कि घायलों को क्वेटा के सिविल अस्पताल ले जाया गया है। बताया जा रहा है कि इलाके में अब भी बचाव अभियान जारी है। विस्फोट की जिम्मेदारी फिलहाल किसी आतंकवादी संगठन ने नहीं ली है।
सऊदी अरब में परिवार रखना महंगा, 41 लाख भारतीयों पर पड़ेगा असर
22 Jun 2017
रियाद सऊदी अरब सरकार ने एक जुलाई से फैमिली टैक्स में इजाफा करने का निर्णय लिया है जिस वजह से वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऐसे में सऊदी अरब में काम करने वाले बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक अपने आश्रितों को वापस भारत भेजने की योजना बना रहे हैं। कइयों ने तो इसकी शुरुआत भी कर दी है। सऊदी अरब सरकार का एक जुलाई से अपने देश में रहने वाले प्रवासियों पर फैमिली टैक्स लगाने जा रही है। इसके तहत सऊदी अरब में परिवार के साथ रहने वाले दूसरे देशों के नागरिकों को प्रति आश्रित 100 रियाल (करीब 1700 रुपए) टैक्स के रूप में देने पड़ेंगे। यह वहां रहने वाले भारतीयों के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ है। अभी तक भारतीय विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब सरकार की तरफ से लगाए गए इस टैक्स के बारे में कोई बयान नहीं दिया है। एक अधिकारी ने कहा है कि इस नियम का सभी प्रवासियों पर असर पड़़ेगा। प
प्रवासियों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा एक रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब में करीब 41 लाख भारतीय रहते हैं। सऊदी अरब में रहने वाले प्रवासियों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है।
86 हजार आमदनी वालों को वीजा सऊदी सरकार पांच हजार रियाल (करीब 86 हजार रुपए) से ज्यादा आमदनी वाले प्रवासी कामगारों को फैमिली वीजा देती है। अगर पांच हजार रियाल वाले किसी परिवार में एक पति के अलावा एक पत्नी व दो बच्चे हैं तो उसे हर महीने 300 रियाल (पांच हजार रु.) टैक्स देना होगा।
इस टैक्स का करना होगा अग्रिम भुगतान सभी प्रवासी परिवारों के इस टैक्स का अग्रिम भुगतान करना होगा। यानी तीन आश्रित हैं तो 300 रियाल पहले ही टैक्स के रूप में देने होंगे।
2020 तक हर साल बढ़ेगा टैक्स सऊदी सरकार यह टैक्स 2020 तक हर साल 100 रियाल प्रति सदस्य बढ़ाती रहेगी। यानी 2020 में प्रत्येक परिवार को अपने हर सदस्य के लिए 400 रियाल (करीब 6,900 रुपए) प्रति माह देना होगा।

पाकिस्तान पर हमला करने की तैयारी में राष्ट्रपति ट्रंप, ऐसे देंगे अंजाम!
21 Jun 2017
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान में आतंक के सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के मूड में हैं। अमरीका पाकिस्तान में ऐसे ठिकानों पर हवाई हमले करने की रणनीति पर काम कर रहा है। जल्द ही इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा माना जा रहा है कि इन हमलों में ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। ट्रंप प्रशासन इसके साथ ही गैर नाटो सहयोगियों में पाकिस्तान का दर्जा भी घटा सकता है। पाक को मिलने वाली आर्थिक मदद को रोकने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि ट्रंप प्रशासन इस मुद्दे पर आधिकारिक रूप से इस मुद्दे पर कुछ नहीं कह रहे। हालांकि ट्रंप प्रशासन के कुछ अफसर ऐसे भी हैं, जिन्हें इन कदमों की सफलता पर संदेह है। उनका कहना है कि पाक पर इस तरह की सख्ती नहीं होगी। समीक्षा के दौरान बदली रणनीति अमरीकी अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप पाकिस्तान के साथ सहयोग बढ़ाना चाहते हैं, उसके साथ अपने संबंध बिगाडऩा नहीं चाहते हैं। ट्रंप प्रशासन इन दिनों 16 साल से चल रहे अफगान युद्ध पर की अपनी रणनीति की समीक्षा कर रहा है। अफगानिस्तान में स्थितियां सुधारने के लिए पाकिस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में अमरीका पाक पर सख्ती दिखाकर जोखिम नहीं लेगा। सार्वजनिक बयान से बच रहा अमरीका ट्रंप प्रशासन ने इस पूरे मामले पर फिलहाल सार्वजनिक रूप से भले ही कुछ नहीं कहा हो, लेकिन अफगान नीति की समीक्षा करना ही इस बात का संकेत है कि अमरीका अपनी अब तक की रणनीति पर पुनर्विचार कर रहा है।
आतंकियों को पनाह देने वाला मुल्क खुद ही नहीं महफूज़, पाकिस्तान में फिर हुआ आतंकी हमला, 2 सैनिकों की मौत
20 Jun 2017
एक नौसेना कर्मी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल एक अन्य ने सोमवार रात अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में आतंकवादियों ने नौसेना कर्मियों के वाहन पर हमला कर दिया, जिसमें दो की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए। 'डॉन' के अनुसार, एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि घटना सोमवार शाम को हुई, जब मोटरसाइकिल पर सवार चार आतंकवादियों ने ग्वादर जिले के जिवानी शहर में वाहन पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दी। एक नौसेना कर्मी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल एक अन्य ने सोमवार रात अस्पताल में दम तोड़ दिया। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सनाउल्ला जहरी ने घटना की निंदा करते हुए कहा, ''हम आतंकवादियों के सामने नहीं झुकेंगे।'' फिलहाल हमले की जिम्मेदारी किसी आतंकवादी संगठन ने नहीं ली है।
लंदन में मस्जिद से नमाज पढ़कर बाहर आ रहे लोगों को गाड़ी ने मारी टक्कर, एक की मौत, आठ घायल
19 Jun 2017
लंदन। उत्तरी लंदन में एक मस्जिद के पास तेज रफ्तार वैन ने श्रद्धालुओं को कुचल दिया, जिसमें एक की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य घायल हो गए। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सेवन सिस्टर्स रोड पर फिन्सबरी पार्क मस्जिद के पास आधीरात के बाद हुई इस घटना में 48 वर्षीय शख्स को गिरफ्तार किया गया है। मेट्रोपॉलिटन पुलिस की ओर से जारी बयान के मुताबिक, 'घटनास्थल से वैन के चालक को हिरासत में लिया गया और बाद में उसे गिरफ्तार किया गया। वह अस्पताल में है। अस्पताल से निकलने के बाद उसे एक बार फिर हिरासत में लिया जाएगा।' बयान के मुताबिक, घटनास्थल से न ही अन्य संदिग्धों की पहचान की गई है और न ही इस संबंध में पुलिस को बताया गया है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 'इस घटना की वजह से अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है, ताकि रमजान के दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।' प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि पुलिस मानकर चल रही है कि यह आतंकवादी हमला हो सकता है। थेरेसा ने कहा, 'मैं आज आपात बैठक की अध्यक्षता करूंगी। मेरी संवेदनाएं पीडि़तों, उनके परिवारों और मौके पर पहुंचे आपात सेवाकर्मियों के साथ हैं।' ब्रिटेन के मुस्लिम परिषद के मुताबिक, वैन जानबूझकर नमाजियों की भीड़ को कुचलती हुई आगे निकल गई। परिषद के महासचिव हारुन खान ने कहा, 'प्रत्यक्षदर्शियों ने जो कुछ भी बताया है, उससे लगता है कि आरोपी इस्लामोफोबिया से प्रेरित था।' एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उसने किस तरह वैन के आगे से हटकर अपनी जान बचाई।उसने बताया, 'मैं चकित था। मेरे आसपास लोग पड़े थे। भगवान का शुक्र है कि मैं एक तरफ हट गया।' एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उसने लोगों को चिल्लाते और चीखते देखा प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, 'सफेद रंग की वैन फिन्सबरी पार्क मस्जिद के बाहर आकर रुकी। वैन ने नमाज पढऩे के बाद मस्जिद से बाहर आ रहे लोगों को कुचलना शुरू कर दिया।' विपक्षी लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कोर्बिन ने ट्वीट कर कहा, 'मैं फिन्सबरी पार्क में हुई इस घटना से सकते में हूं। मैं मस्जिदों और पुलिस के संपर्क में हूं। मेरी संवेदनाएं इस भयावह घटना के पीडि़तों के साथ हैं।
खूबसूरत महिलाओं में इस देश ने मारी बाजी, इंडिया रहा इस नंबर पर
16 Jun 2017
महिला किसी भी देश की हो वो सुंदर और सम्मानित मानी जाती है, लेकिन हाल ही में हुए सर्वे में कुछ देशों की महिलाओं को सबसे ज्यादा सुंदर माना गया है। इनमें वेनेजुएला इस लिस्ट में नंबर 1 पर हैं। वेनेजुएला की लड़कियां बेहद खूबसूरत हैं। इस देश ने ब्यूटी कॉन्टेस्ट के 21 टाइटल जीते हैं। 7 मिस यूनिवर्स, 6 मिस वल्र्ड, 7 मिस इंटरनेशनल, 2 मिस अर्थ के खिताब इस देश के लड़कियां लेकर आई हैं। 40 रनर्सअप भी इस देश की लड़कियां रही हैं।
इस देश में सुंदर कुंआरी लड़कियां करती हैं ऐसा काम, 26 वर्ष की होते ही हो जाती है रिटायर
15 Jun 2017
प्योंगयांग उत्तर कोरिया कई मायनों में अनोखा देश है। उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में केवल सुंदर कुंआरी लड़कियों को ही ट्रैफिक अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाता है। इनकी यूनिफॉर्म नीले रंग की होती है, जिसके साथ ये काले रंग की हाई हील पहनती हैं। प्योंगयांग के चौराहों पर इन्हें यातायात को नियंत्रित करते हुआ देखा जा सकता है। इनका आधिकारिक नाम यातायात सुरक्षा अधिकारी है लेकिन सामान्य बोलचाल में इन्हें 'ट्रैफिक लेडिज' कहा जाता है।
नियुक्ति के लिए कड़े मापदंड अपनाए जाते हैं परमाणु संपन्न राष्ट्र होने के बाद भी उत्तर कोरिया की स्थिति आर्थिक रूप से कमजोर राष्ट्र की है, इसके बावजूद वहां के अधिकारी ट्रैफिक लेडिज के लिए ऐसे कड़े मानक अपनाते हैं। अधिकारी रिटायर्ड की जगह भरने के लिए नए ट्रैफिक लेडिज बनने के लिए तैयार लड़कियों की उपलब्धता को सुनिश्चित करते हैं।
26 में होती हैं रिटायर केवल 26 वर्ष का होते ही 'ट्रैफिक लेडिज' को रिटायर कर दिया जाता है। इससे पहले यदि किसी ट्रैफिक लेडिज ने विवाह कर लिया तो उसकी नौकरी स्वत: समाप्त हो जाती है।
कठिन है ड्यूटी ट्रैफिक नियमों का पर्यवेक्षण करने वाले सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 'ये ट्रैफिक लेडिज हमारी राष्ट्रीय राजधानी का प्रतिनिधित्व करती हैं'। कुंआरी ही क्यों योग्य मानी जाती हैं के जवाब में इस अधिकारी ने कहा कि उनकी ड्यूटी कठोर और कठिनाई से भरी है। केवल कुंआरी लड़कियां ही इतनी कठोर ड्यूटी आसानी से कर सकती हैं।

हादसों से बार-बार दहल रहा लंदन, कभी बेगुनाहों के खून से लाल हो गर्इ जमीन तो अब आग ने झुलसाया
14 Jun 2017
लंदन की 24 मंजिला ग्रेनफेल टावर में अाग लगने से हड़कंप की स्थिति बन गर्इ। आग बुझाने के लिए दो सौ से ज्यादा फायर फाइटर्स जुटे हैं।
लंदन की 24 मंजिला ग्रेनफेल टावर में अाग लगने से हड़कंप की स्थिति बन गर्इ। आग बुझाने के लिए दो सौ से ज्यादा फायर फाइटर्स जुटे हैं। आग की लपटें टाॅप फ्लोर तक उठती नजर आ रही हैं। ये पहला मौका नहीं है जब किसी हादसे ने लंदन को हिलाकर रख दिया है। पिछले कुछ महीनों में लंदन में एक के बाद एक हादसों ने यहां के लोगों को दहला कर रख दिया है। हम आपको बता रहे हैं वो हादसे जो 2017 में लंदन के साथ ही पूरी दुनिया में चर्चित रहे।
दो आतंकी हमलों से दहला था लंदन ब्रिटेन की राजधानी लंदन में 3 जून की रात को दो आतंकी हमले हुए। इनमें आठ लोगों की मौत हो गर्इ थी आैर दर्जनों लोग घायल हुए थे। लंदन ब्रिज आैर बरो मार्केट में हुए इस दोहरे हमले को तीन आतंकियों ने अंजाम दिया था। पुलिस ने तीनों को मार गिराया। वहीं इस मामले में पुलिस अब तक 21 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
ब्रिटेन की संसद पर हमले की कोशिश 22 मार्च 2017 को ब्रिटेन की संसद के बाहर आतंकी हमले ने हर किसी को भारतीय संसद पर हुए हमले की याद दिला दी। एक हमलावर ने अंधाधुंध गोलियां बरसाते हुए लोगों को अपनी कार से रौंद दिया। आरोपी ने बाद में ससंद में घुसने की कोशिश भी की आैर संसद की दीवार से अपनी कार को टकराया। हालांकि सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर को मार गिराया। इस घटना का सबसे दुखद पहलू 5 लोगों की मौत आैर 20 लोगों का घायल होना रहा। लंदन के अलावा ब्रिटेन के दूसरे शहर भी आतंक से पीड़ित रहे हैं। मैनचेस्टर में 23 मर्इ को आतंकी हमला हुआ था। एक म्यूजिक कंसर्ट के दौरान 22 लोगों की मौत हो गर्इ आैर 51 लोग घायल हो गए थे। वहीं हमलावर का शव घटनास्थल पर मिलने का दावा किया गया था।

इराक: सुरक्षा बलों की आतंक के खिलाफ जंग में बड़ी कार्रवाई, ISIS के 13 खतरनाक लड़ाकों को मार गिराया
13 Jun 2017
इराकी वायुसेना ने मोसुल में एक अभियान के तहत आईएस के कब्जे वाली इमारतों को लक्ष्य बनाकर कई हमले किए थे। मारे गए आतंकवादियों में संगठन का वरिष्ठ सदस्य भी शामिल हैं।
इराक के उत्तरी शहर मोसुल में सुरक्षाबलों ने इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकवादियों के खिलाफ बार फिर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस बार सुरक्षा बलों ने आईएस के 13 सदस्यों को मार गिराया है। इराकी संघीय पुलिस बल ने एक बयान में दावा किया कि मारे गए आतंकवादियों में संगठन का वरिष्ठ सदस्य भी शामिल हैं। बयान में बताया गया है कि इराकी वायुसेना ने मोसुल में एक अभियान के तहत आईएस के कब्जे वाली इमारतों को लक्ष्य बनाकर कई हमले किए थे। सेना के इन अलग अलग हमलों में 13 आतंकवादी मारे गए। मारे गए आतंकवादियों में एक आईएस का वरिष्ठ सदस्य भी है।

इजराइली नर्स ने फलस्तीनी बच्चे को पिलाया दूध, खून के प्यासे रिश्तों में दूध घुला तो दुनिया हैरान
12 Jun 2017
हर वक्त एक दूसरे के खून के प्यासे नजर आने वाले इजराइल आैर फलस्तीन के बीच दुश्मनी जगहाजिर है। मगर, एक एेसा मामला सामने आया है, जिसे जानकर दुनिया हैरान हो रही है।
यरुशलम। हर वक्त एक दूसरे के खून के प्यासे नजर आने वाले इजराइल आैर फलस्तीन के बीच दुश्मनी जगहाजिर है। मगर, एक एेसा मामला सामने आया है, जिसे जानकर दुनिया हैरान हो रही है। सड़क दुर्घटना में एक फलस्तीनी महिला बुरी तरह से घायल हो गर्इ थी। हादसे में उसके पति की मौत हो गर्इ। महिला को इजराइल के करीम अस्पताल में भर्ती कराया गया। फलस्तीनी महिला के बच्चे को भूख से बिलखता देख इजराइली नर्स का कलेजा पसीज गया। उसने बच्चे को गोद में उठाया आैर स्तनपान कराने लगी। अपनी शिफ्ट के दौरान नर्स ने नवजात को पांच बार स्तनपान कराया आैर जब परिवार इस बात को लेकर चिंतित था कि नर्स के जाने के बाद क्या होगा तो उला ने उसका भी बंदोबस्त किया। नर्स ने एक फेसबुक ग्रुप पोस्ट लिखी, जिस पर हजारों जवाब आए आैर कर्इ महिलाआें ने आकर बच्चे को अपना दूध पिलाने के लिए फोन कर प्रस्ताव भी दिया। इससे पहले, इजराइली नर्स ने पहले करीब सात घंटे तक बच्चे को बाेतल का दूध पिलाने की कोशिश की लेकिन उसने रोना बंद नहीं किया। इसके बाद उसने स्तनपान कराने का फैसला किया। सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा मानवता की मिसाल पेश करती इस तस्वीर की दुनिया भर में चर्चा हो रही है। जिस किसी की भी इस पर नजर पड़ रही है वह हैरानी जताने के साथ यह भी लिख रहा है, 'दुनिया में इंसानियत से बढ़कर कुछ भी नहीं है, सदैव इसकी जीत होती है

कतर पर भड़के ट्रंप, कहा- आतंकवाद को आर्थिक मदद देना तत्काल बंद करें
10 Jun 2017
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी देश कतर पर लंबे समय से आतंकवाद को बढ़ावा देने के अलावा उसे आर्थिक मदद मुहैया कराने का आरोप लगाया है।
वाशिंगटन। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी देश कतर पर लंबे समय से आतंकवाद को बढ़ावा देने के अलावा उसे आर्थिक मदद मुहैया कराने का आरोप लगाया है। ट्रंप ने कतर और अन्य खाड़ी देशों से आतंकवाद का वित्त पोषण तत्काल बंद करने के लिए कहा है। रोमानिया के राष्ट्रपति क्लॉस जोहानिस के साथ व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में आयोजित एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने कहा, 'आतंकवाद का वित्तपोषण बंद करें, हिंसा का पाठ पढ़ाना बंद करें, हत्याएं करना बंद करें'। ट्रंप ने कतर पर आतंकवाद का सबसे ज्यादा वित्त पोषण करने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि बहरीन, मिस्र, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने कतर से संबंध खत्म कर लिए हैं और उस पर कट्टरपंथी समूहों का साथ देने का आरोप लगाया है। उधर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने कहा है कि कतर को कट्टरपंथियों एवं आतंकवाद का समर्थन करने और अपनी क्षेत्रीय नीतियों को ध्यान में रखते हुए उन पर पुनर्विचार करना चाहिए। अमरीका में यूएई के राजदूत युसुफ अल ओतैबा ने अपने एक वक्तव्य में यह बात कही। ओतैबा ने कतर मामले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व का स्वागत करते हुए कहा कि कतर की ओर से आतंकवाद को समर्थन देना चिंताजनक है इसलिए उसे अपनी क्षेत्रीय नीतियों को ध्यान में रखते हुए उन पर पुनर्विचार करना चाहिए। यूएई के राजदूत ने कहा कि इससे कतर मामले को लेकर आवश्यक बातचीत के लिए मंच तैयार होगा।

ब्रिटेन चुनावः टेरीजा मे का समय से पहले चुनाव कराने का दांव पड़ा उल्टा, बहुमत से दूर, बढ़ा इस्तीफे का दबाव
9 Jun 2017
ब्रिटेन में प्रधानमंत्री टेरीजा मे को बड़ा झटका लगा है। मध्यावधि चुनावों में उनकी कंजर्वेटिव पार्टी संसद में बहुमत हासिल करने में नाकाम रही है।
ब्रिटेन में प्रधानमंत्री टेरीजा मे को बड़ा झटका लगा है। मध्यावधि चुनावों में उनकी कंजर्वेटिव पार्टी संसद में बहुमत हासिल करने में नाकाम रही है। इसके बाद ब्रेग्जिट वार्ता से पहले अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गर्इ है। साथ ही टेरीजा मे पर इस्तीफे का दबाव बढ़ गया है। विपक्षी पार्टियों के एकजुट होने की स्थिति में उन्हें पद छोड़ना होगा। कंजर्वेटिव पार्टी संसद में सर्वाधिक सीटें हासिल करने वाली पार्टी बनकर उभरी है। अभी तक 650 में से 645 सीटों के नतीजे आ गए हैं। इनमें कंजर्वेटिव पार्टी को 314, लेबर पार्टी को 261, स्काॅटिश नेशनल पार्टी को 35, लिबरल डेमोक्रेटस को 12, डेमोक्रेटस यूनियनिस्ट को 10 आैर अन्य को 13 सीटें मिली हैं। हालांकि चुनाव जीतने के लिए किसी भी पार्टी को 326 सीटें हासिल करने की जरूरत थी। टेरीजा मे का दांव उल्टा पड़ने के बाद अब उन पर प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने का दबाव है। बावजूद इसके उन्होंने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। इन चुनावों में कंजर्वेटिव पार्टी को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। साथ ही लेबर पार्टी को कर्इ सीटों का फायदा हुआ है। 2015 में हुए चुनावों में कंजर्वेटिव पार्टी जबरदस्त जीत के साथ सत्ता में आर्इ थी। अगला चुनाव 2020 में होने वाला था, लेकिन ब्रेग्जिट पर आए जनमत संग्रह के बाद टेरीजा ने 19 अप्रैल को मध्यावधि चुनाव कराने का फैसला किया था। विपक्षी लेबर पार्टी के नेता जेरमी काॅर्बिन का कहना है राजनीति बदल गर्इ है। मुझे नतीजों पर गर्व है। उन्होंने टेरीजा मे पर निशाना साधते हुए कहा कि वह जनादेश चाहती थीं आैर वे चुनाव हार गर्इ हैं।

अंग्रेजों की धरती पर हमारे लोग, ब्रिटेन के चुनावी दंगल में 56 भारतवंशी प्रत्याशी
8 Jun 2017
ब्रेग्जिट के बाद ब्रिटेन में होने जा रहा चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। इस अहम चुनाव में भारतीयों ने चुनावी मैदान में ताल ठोंकी है। चुनाव में कुल 56 भारतीय उम्मीदवार उतरे हैं।
लंदन ब्रेग्जिट के बाद ब्रिटेन में होने जा रहा चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। इस अहम चुनाव में भारतीयों ने चुनावी मैदान में ताल ठोंकी है। चुनाव में कुल 56 भारतीय उम्मीदवार उतरे हैं। चुनाव में जाधवपुर यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर 2009 में ब्रिटेन जाने वाले 18 वर्षीय युवक समेत कई भारतीय चेहरे शामिल हैं जो शरणार्थी और दशकों से रह रहे अल्पसंख्यक समुदायों के मुद्दों पर हो रही बहस में प्रत्याशी बन चुनाव में डटे हुए हैं। भारतीय मूल के मुख्य लोगों में प्रीति पटेल, आलोक शर्मा, कीथ वाज, वीरेन्द्र शर्मा और शैलेष वारा शामिल हैं। पिछले साल कीथ वाज का नाम ड्रग्स स्कैंडल से जुड़ा था फिर भी संभावना है कि जीत उनकी झोली में ही गिरेगी। ब्रेग्जिट लहर के जरिए अपनी चुनावी वैतरणी पार लगाने वाले सांसदों में ब्रिटेन की अंतरराष्ट्रीय विकास मामलों की मंत्री प्रीति पटेल शामिल हैं। वह ब्रिटिश कैबिनेट में वरिष्ठतम सदस्य हैं। 2015 के चुनाव में 10 भारतीय मूल के लोग चुनकर ब्रिटिश संसद पहुंचे थे। दो साल बाद इस बार भारतीय मूल के चुनाव लडऩे वालों की संख्या 56 हो गई है।
तनमनजीत सिंह
लेबर पार्टी के उम्मीदवार। अगर स्लॉग सीट पर जीतते हैं तो वहीं पहली बार सांसद चुने जाएंगे।
पॉल उप्पल
कंजर्वेटिव पार्टी की ओर से वोल्वरहैम्पटन साउथ वेस्ट से अपना नामांकन भरा है।
प्रीत कौर
बर्मिंघम एजबेस्टन सीट से लेबर पार्टी की उम्मीदवार हैं। प्रीत जीत जाती हैं तो वे पहली महिला सिख सांसद होंगी।
रोहित दास गुप्ता
लेबर पार्टी उम्मीदवार ईस्ट हैम्पशायर सीट से किस्मत आजमा रहे हैं। कोलकाता के पैतृक शहर छोड़कर 2009 में लंदन आए थे।
सिखों का जलवा
66 वर्षीय, काउंसलर कुलदीप सिंह सहोता, लेबर पार्टी की लोकल टेलफोर्ड से चुनावी मैदान में ।
18 साल के रांगी
ग्रीन पार्टी के बारे में भी यह कहा जा रहा है कि उसे भी कोई सीट नहीं हासिल होगी। ग्रीन पार्टी की तरफ से एशफील्ड से उतरे 18 वर्षीय एर्रन रांगी शुक्रवार को ए लेवल का एग्जाम देने जा रहे हैं। उन्होंने कहा- मैं जीत की उम्मीद नहीं कर रहा हूं, लेकिन चुनाव लडऩा बड़ी बात है।

लंदन अटैक में शामिल था पाकिस्तानी मूल का आतंकी, जर्सी से हुई पहचान
6 Jun 2017
लंदन.कुछ दिनों पहले लंदन में आतंकी हमला करने वाले एक शख्स की पहचान हो गई है। यह शख्स पाकिस्तानी मूल का है और ईस्ट लंदन के बार्किंग एरिया में रहता था। खास बात ये है कि इस आतंकी की पहचान उसकी ही बिल्डिंग में रहने वाले एक शख्स ने उसकी जर्सी से की। हमले के वक्त इस आतंकी ने ब्रिटिश फुटबॉल क्लब आर्सेनल की जर्सी पहने हुई थी। बता दें कि तीन जून को लंदन में हुए आतंकी हमले में 7 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे। ब्रिटिश अखबार ‘द मिरर’ के मुताबिक, जांच की वजह से इस आतंकी का नाम स्कॉटलैंड यार्ड, एमआई-5 और बाकी जांच एजेंसियां जाहिर नहीं कर रही हैं।
आतंक के खिलाफ 4 देशों ने मिलकर उठाया बड़ा कदम, 'दहशतगर्द' क़तर से सभी तरह के सम्बन्ध तोड़ने के किया ऐलान
5 Jun 2017
कतर पर आतंकवाद का समर्थन करने के आरोप में सऊदी अरब, बहरीन, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात ने सभी तरह के कूटनीतिक संबंध तोड़ने की घोषणा की है।
दुबई। कतर पर आतंकवाद का समर्थन करने के आरोप में सऊदी अरब, बहरीन, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने उससे सभी तरह के कूटनीतिक संबंध तोड़ने की घोषणा की है। इन देशों ने कतर पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के अलावा अपने आंतरिक मामलों में दखलंदाजी करने का भी आरोप लगाया है। बाहरीन ने सोमवार को कतर के साथ रिश्ते तोड़ने के अपने फैसले की जानकारी दी। बाहरीन सऊदी अरब का करीबी सहयोगी है। गौरतलब है कि अलजजीरा कतर का ही चैनल है, इसकी रिपोर्ट को लेकर इन देशों को कई बार असहज स्थिति का सामना करना पड़ता रहा है। सख्त शासन व्यवस्था वाले इन देशों में स्वतंत्र मीडिया और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए के लिए कोई स्थान नहीं है। लिहाजा, अरब जगत का सबसे लोकप्रिय न्यूज चैनल अल-जजीरा हमेशा से इन देशों के निशाने पर रहा है। हवाई व समुद्री संपर्क भी तोड़ने का ऐलान
कतर को अलग-थलग करने की रणनीति के तहत इन चारों देशों ने इसके साथ न केवल अपने कूटनीतिक और राजनयिक संबंध तोड़ लिए हैं, बल्कि हवाई व समुद्री संपर्क भी तोड़ने का ऐलान किया है। इसके साथ ही बहरीन ने कतर में रह रहे अपने सभी नागरिकों को 14 दिन के भीतर कतर छोड़ने का आदेश दिया है, जबकि कतर के राजनयिकों को 48 घंटे के अंदर बाहरीन छोड़ने को कहा गया है। इधर, सऊदी अरब ने अपने निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि देश को आतंकवाद और कट्टरपंथ से बचाने के लिए यह कदम उठाना लाजमी हो गया था। सऊदी की आधिकारिक न्यूज एजेंसी ने एक अधिकारिक सूत्र के हवाले से जानकारी दी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर ऐसा किया जा रहा है। इसके साथ ही सऊदी अरब ने अपने सभी मित्र राष्ट्रों और कंपनियों से भी अपील की है कि वे भी कतर के साथ सभी तरह के संपर्क तोड़ दें। मिस्र और UAE ने भी कतर से तोड़े संबंध
बहरीन और सऊदी अरब के बाद अब मिस्र और UAE ने भी कतर के साथ सभी तरह के संबंध तोड़ने की घोषणा कर दी है। अपने इस फैसले को जायज ठहराते हुए UAE ने कहा है कि कतर पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र की सुरक्षा को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, मिस्र ने भी कतर पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाया है।

भारतीय मूल के वराडकर बने आयरलैंड के प्रधानमंत्री, देश के सबसे युवा PM होंगे
3 Jun 2017
आयरलैंड में भारतीय मूल के लियो वराडकर को सत्ताधारी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी फाइन गेल का नेता चुना गया है।
डबलिन। आयरलैंड में भारतीय मूल के लियो वराडकर को सत्ताधारी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी फाइन गेल का नेता चुना गया है और अब वह देश के पहले समलैंगिक प्रधानमंत्री होंगे। 38 वर्षीय वराडकर ने अपने अपने प्रतिद्वंद्वी और हाउसिंग मिनिस्टर साइमन कोवेनी को 60 प्रतिशत वोटों से हराया और अब वह आयरलैंड के अब तक के सबसे युवा प्रधानमंत्री भी होंगे। उन्होंने देश के सत्ताधारी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी इन गेल के नेतृत्व का चुनाव जीत लिया है और वह अगले कुछ सप्ताह में देश के प्रधानमंत्री बन जाएंगे। वराडकर ने अपनी इस शानदार जीत के बाद कहा, 'मेरा चुनावी परिणाम ही सबकुछ बयां कर रहा है। मुझे पता है कि मेरे पिता पांच हजार किलोमीटर दूर चलकर आयरलैंड में एक नए घर बनाने का सपना देखते थे। मुझे लगता है कि उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि एक दिन उनका बेटा इस देश का प्रधानमंत्री होगा। आज देश में हर माता पिता को अपने बच्चे के ऊपर के गर्व होना चाहिए।' 18 जनवरी 1979 को डबलिन में पैदा हुए वराडकर के पिता अशोक मुंबई से आए एक डॉक्टर थे जिन्होंने आयरिश मूल की नर्स मरियम से शादी की थी। उन दोनों की मुलाक़ात इंग्लैंड के बर्कशर में साथ काम करते हुए हुई थी और बाद में वो दोनों 70 के दशक में आयरलैंड में बस गए थे। वराडकर ने अपना चुनावी अभियान सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित रखा। प्रधानमंत्री बनने के बाद अब उनके सामने आयरलैंड की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और ब्रेक्सिट के बाद के हालात से निबटने जैसी चुनौतियां होंगी।

पेरिस क्लाइमेट डीलः ट्रम्प ने अलग होते हुए भारत पर फोड़ा ठीकरा, कहा-भारत, चीन को दी गर्इं कर्इ सहूलियतें
2 Jun 2017
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमरीका को पेरिस क्लाइमेट डील से अलग करने का फैसला लिया है।
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमरीका को पेरिस क्लाइमेट डील से अलग करने का फैसला लिया है। ट्रम्प ने अपने इस फैसले के समर्थन में जो दलील दी है उसके मुताबिक भारत आैर चीन जैसे देशों पर इस डील में कोर्इ सख्ती नहीं की गर्इ है। हम आपको बता दें कि 2015 में हुए इस समझौते पर 195 देशों ने हस्ताक्षर किए थे। इस डील से अमरीका को अलग करने के फैसले के बाद ट्रम्प ने कहा है कि मैं इस डील को सपोर्ट कर अमरीका को सजा नहीं दे सकता हूं। ट्रम्प का दावा है कि इस क्लाइमेट डील के जरिए भारत आैर चीन जैसे देशाें को कर्इ तरह की सहूलियतें दी गर्इ हैं। अपने चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने इस डील को 'चीनी छल' करार दिया था। ट्रम्प ने कहा है कि इस डील के जरिए भारत को कोयला उत्पादन दोगुना करने की इजाजत मिल जाएगी। इस डील को लेकर उन्होंने यहां तक कह दिया है कि इसका पर्यावरण से कोर्इ लेनादेना नहीं है। इस डील का उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन कम करना था। इसके जरिए हर देश का कार्बन उत्सर्जन का टारगेट तय कर ग्लोबल टेम्परेचर को 2 डिग्री से ज्यादा बढ़ने से रोकने की कोशिश करना था। बराक आेबामा के अमरीकी राष्ट्रपति रहते हुए ये डील की गर्इ थी। ट्रम्प के इस निर्णय की आेबामा के साथ ही दुनिया के कर्इ देशों ने निंदा की है। हम आपको बता दें कि अमरीका दुनिया का करीब 33 फीसदी कार्बन उत्सर्जन करता है। इस डील को गति देने के लिए देशों को पांच सालों का प्लान देना था, जिसमें उन्हें ये बताना था कि कैसे वे कार्बन उत्सर्जन को कम कर सकते हैं आैर कैसे क्लाइमेट चेंज को रोक सकते हैं?

Live Show में एक लड़की ने खोल दी 'जुल्मी' पाकिस्तान की पोल, Viral हुई कहानी
1 Jun 2017
पाकिस्तान में लाइव टीवी शो के दौरान एक लड़की ने भेदभाव और जुल्म की कहानी सुनाई। उसने पाकिस्तान की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
इस्लामाबाद पाकिस्तान में लाइव टीवी शो के दौरान एक लड़की ने भेदभाव और जुल्म की कहानी सुनाई। उसने पाकिस्तान की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। तभी मशहूर टीवी होस्ट और अभिनेता साहिर लोधी ने उसे चुप करा दिया। साहिर पाकिस्तान में ट्विटर पर टॉप ट्रेंड कर रहे हैं। कुछ लोग उनकी खिंचाई कर रहे हैं तो कुछ तारीफ। मैं उस मुल्क में रहती हूं जहां औरतों की आवाज दबा दी जाती है। इस मुल्क में औरतों को इंसाफ नहीं मिलता। कभी जिंदा दफन कर दिया तो कभी कुरान से शादी करा दी गई। कभी दो चार किताबें पढऩे पर जुल्मों सितम सहना पड़ा। लोग कहते हैं कि बराबरी का जमाना है। अरे, कैसी बराबरी! कहां की बराबरी? मैं इस कौम की हर वो बेटी हूं जो चंद पैसे कमाने के लिए घर से निकलती हूं तो उसकी इज्जतों हुर्मतों का सौदा होता है। पसंद की शादी करने पर तेजाब फेंक दिया जाता है। ऐसे में दिल से एक ही शख्स को पुकारने का मन करता है कि चोर-लुटेरे कातिल सारे शहर के चौकीदार हुए हैं, हिर्सो हवस के मतवाले भी धरती के हक़दार हुए हैं, कोई नहीं ये देखने वाला, कोई नहीं ये पूछने वाला कि किन हाथों सौंप गए तुम दिल से प्यारा पाकिस्तान, कायदे आजम आओ जरा तुम देखो अपना पाकिस्तान। उस लड़की के भाषण पर लोगों ने जमकर ताली बजाई। साहिर बोले- आपकी मेरी जंग हो जाएगी । लड़की के इतना बोलते ही साहिर लोधी बुरी तरह से भड़क गए। कहा- आपकी मेरी जंग हो जाएगी। अब रूक जाइए। आप लोगों ने किस बात पर ताली बजाई? आप हमें बताइए? क्या हम कायदे आजम को ब्लेम करेंगे। कर सब हम रहे हैं और ब्लेम कायदे आजम को करेंगे?

चीन को नाराज नहीं करना चाहता भारत, इसलिए ठुकराया ऑस्ट्रेलिया के साथ संयुक्त नौसेना अभ्यास
31 May 2017
इस साल जनवरी महीने में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के रक्षा मंत्री को चिट्ठी लिखकर अनुमति मांगी थी कि वह नौसेना के संयुक्त अभ्यास में बतौर परवेक्षक के रुप में जुड़ना चाहता है। लेकिन जिसे भारत ने मंजूरी नहीं दी।
भारत और चीन के बीच आपसी रिश्तों में बढ़ती तनाव को ध्यान रखते हुए भारत ने ऑस्ट्रेलिया के अनुरोध को ठुकरा दिया है। चीन से बढ़ते मनमुटाव के कारण भारत ने अमरीका और जापान के साथ संयुक्त नौसेना अभ्यास में शिरकत करने के अनुरोध को खारिज कर दिया। क्योंकि इस मामले पर चीन ने पहले ही चेताया था कि इलाके में ज्यादा युद्धाभ्यास नहीं किया जाना चाहिए।

दुनिया की 'महाशक्ति' अमरीका इसे मानने लगा है ISIS से भी बड़ा खतरा, लगा सकता है हमेशा-हमेशा के लिए बैन!
30 May 2017
अमरीकी सीनेट के आर्म्ड सर्विसेस कमेटी के अध्यक्ष मैक्केन ने कहा कि मेरे विचार से रूस हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है, इसलिए हमें रूस को उसके व्यवहार के लिए प्रतिबंधित करना चाहिए।
मेलबर्न। अमरीका के सीनेटर जॉन मैक्केन ने वैश्विक सुरक्षा के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) से भी बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने कहा है कि सीनेट को अमरीकी चुनाव में कथित रूप से हस्तक्षेप के लिए मॉस्को पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। अमरीका में साल 2008 के राष्ट्रपति पद के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से उम्मीदवार रह चुके सीनेटर जॉन मैक्केन ने ऑस्ट्रेलाई प्रसारक कॉर्प टेलीविजन से साक्षात्कार के दौरान कहा, ' मुझे लगता है कि पुतिन सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण खतरा है। आईएस से भी बड़ा खतरा। ' उन्होंने कहा, 'अभी तक हालांकि रूस की ओर से अमरीकी चुनाव को प्रभावित करने वाले सबूत नहीं मिल पाए हैं, इसके बावजूद भी वे लोग हालिया फ्रांस चुनाव समेत अन्य चुनावों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहें हैं।' अमरीकी सीनेट के आर्म्ड सर्विसेस कमेटी के अध्यक्ष मैक्केन ने कहा कि मेरे विचार से रूस हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है, इसलिए हमें रूस को उसके व्यवहार के लिए प्रतिबंधित करना चाहिए।

यूनान के पूर्व प्रधानमंत्री कार विस्फोट में घायल, चलती कार में पार्सल बम में हुआ धमाका
26 May 2017
यूनान के पूर्व प्रधानमंत्री लुकास पापाडेमोस एक विस्फोट में घायल हो गए। पापाडेमोस की कार में पार्सल बम रखा था जिसमें विस्फोट के कारण उनके सहित कार में सवार दो अन्य लोग घायल हो गए।
यूनान के पूर्व प्रधानमंत्री लुकास पापाडेमोस एक विस्फोट में घायल हो गए। पुलिस ने बताया कि पापाडेमोस की कार में पार्सल बम रखा था जिसमें विस्फोट के कारण उनके सहित कार में सवार दो अन्य लोग घायल हो गए। यह घटना एथेंस के मध्य इलाके में घटी। विस्फोट के बाद तीन को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के मुताबिक पापाडेमोस की स्थिति खतरे से बाहर है। अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि उनके सीने और पेट में हलके चोट के निशान है जबकि दाहिने पैर में लगी चोट गहरी है जिसका इलाज किया जा रहा। स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक ने कहा कि यह विस्फोट उस समय हुआ जब पापाडेमोस अपनी चलती कार में एक पैकेट खोलने की कोशिश कर रहे थे। उनके सीने और पेट में चोट लगी है। पापाडेमोस को एक राजनीतिज्ञ से ज्यादा टेक्नोक्रेट थे जो कि यूनान कर्ज संकट के दौरान सोशलिस्ट्स और कंजरवेटिव्स गठबंधन के सहयोग से दिसंबर 2011 से मई 2012 के बीच के देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री थे। 69 वर्षीय पापाडेमोस 1994 से 2002 तक देश के सेंट्रल बैंक के प्रमुख और 2002 से 2010 तक यूरोपीय सेंट्रल बैंक के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं।

बहरीन में 5 शिया प्रदर्शनकारियों की पुलिस कार्रवाई में मौत, भड़की हिंसा
25 May 2017
मनामा.बहरीन में पुलिस द्वारा देश के प्रमुख शिया धार्मिक गुरु अयातुल्ला ईसा अहमद कासिम के समर्थकों पर गोलीबारी में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। सुन्नी शासित इस खाड़ी देश में तनाव की यह ताजा घटना है। गृह मंत्रालय ने घटना की जानकारी दी है। मंत्रालय ने ट्विटर पर एक संदेश में कहा कि मनामा की राजधानी के पास दिराज में ‘‘पांच लोगों की मौत हुई है।
प्रदर्शनकारियों में जेल से भागे आतंकवादी भी शामिल...
- मनामा की राजधानी दुराज में शिया समर्थक ईसा कासिम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का विरोध कर रहे थे। - इसी दौरान पुलिस की गोलीबारी में पांच शियाओं की मौत हो गई, जिसके बाद हिंसा भड़क गई। पुलिस ने 280 से ज्यादा समर्थकों को अरेस्ट किया है। - बहरीन मंत्रालय के मुताबिक, शिया धार्मिक गुरु अयातुल्ला ईसा के सपोर्टर्स ने प्रदर्शन के दौरान घातक हथियारों से पुलिस पर हमला किया। - बहरीन मंत्रालय ने यह भी दावा किया है कि प्रदर्शनकारियों में जेल से भागे आतंकी भी शामिल थे। इसके चलते पुलिस को गोली चलानी पड़ी। प्रदर्शकारियों और पुलिस के बीच का संघर्ष अन्य क्षेत्रों में भी फैल गया है।
कासिम पर हिंसात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप
-- ईसा कासिम के समर्थक बीते 11 महीने से दुराज स्थित उनके घर के बाहर धरने पर बैठे हैं। - कासिम को हिंसात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप में 21 मई को एक साल के निलंबित कारावास और 256000 जुर्माने की सजा सुनाई गई है। - जून 2016 में ईसा की बहरीन की राष्ट्रीयता छीन ली थी और उनकी राजनीतिक पार्टी अल वेफाक की मान्यता रद्द कर दी थी। - बहरीन कोर्ट के फैसले के अनुसार, ईसा कासिम की संपत्ति भी जब्त कर ली गई है, जिसमें 90 लाख डॉलर और दो घर शामिल हैं। - देश में शिया बहुसंख्यक हैं, जिन्होंने धार्मिक गुरु कासिम के समर्थन और देश के सुन्नी राजतंत्र के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन किए हैं। - वहीं, ‘ह्यूमन राइट्स वाच’ एनजीओ ने बहरीन की इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण और जायज विरोध को खत्म करने के उद्देश्य से रणनीतिक शक्ति का प्रदर्शन बताया है।

ब्रिटेन में हो सकते हैं और आतंकी हमले, सभी प्रमुख जगहों पर आर्मी तैनात
24 May 2017
लंदन. ब्रिटेन के शहर मैनचेस्टर में हुए फिदायीन हमले के बाद अभी और आतंकी हमले की आशंका है। पीएम थेरेसा मे ने मैक्सिमम लेवल के खतरे को देखते हुए गंभीर चेतावनी जारी की है और सिक्युरिटी कड़े करने के इंस्ट्रक्शन दिए हैं। देश में सभी प्रमुख जगहों पर आर्मी तैनात की गई है। बता दें कि सोमवार रात मैनचेस्टर के स्टेडियम में हुए आतंकी हमले में 22 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 59 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे।
सलमान अब्दी के साथ और भी लोग जुड़े हो सकते हैं..
- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पीएम थेरेसा मे ने डाउनिंग स्ट्रीट ऑफिस से मंगलवार रात देश को ऐड्रेस किया। उन्होंने कहा, "सिक्युरिटी फोर्सेस ने सलमान अब्दी नाम के एक संदिग्ध को अरेस्ट किया है, जिसका हमले में हाथ बताया जा रहा है। अब्दी ब्रिटेन का ही रहने वाला है। फोर्सेस का कहना है कि उसके साथ और भी लोग जुड़े हो सकते हैं। लिहाजा खतरा अभी बरकरार है। इसलिए अहम जगहों पर आर्मी की तैनाती का कदम उठाया गया है।" - थेरेसा मे ने कहा, "हालात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, ऐसा हो सकता है कि मैनचेस्टर में हुए हमले में किसी बड़े ग्रुप का हाथ हो, जिसमें कई लोग शामिल हों। आतंकी हमले का खतरा बहुत ज्यादा है, इसका मतलब है कि अभी और हमले हो सकते हैं।"
ऑपरेशन टेम्परर लागू
- थेरेसा मे ने कहा, "जिस तरह का खतरा हमारे सामने है, उससे निपटने और सुरक्षित रहने के लिए पुलिस को एडिशनल रिर्सोसेस और सपोर्ट की जरूरत है। ज्वाइंट टेररिज्म एनालिसिस सेंटर से चर्चा के बाद पुलिस ने सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर डिफेंस से आर्म्ड मिलिट्री पर्सनल्स की तैनाती के बारे में पूछा था, जिसके बाद आर्मी की तैनाती का फैसला लिया गया।" - "पुलिस की ये रिक्वेस्ट ऑपरेशन टेम्परर का हिस्सा थी। ऑपरेशन टेम्परर अब देश में लागू है। इसका मतलब है कि अहम जगहों की सुरक्षा के लिए अब आर्मी जिम्मेदार होगी। आर्मी प्रमुख जगहों की निगरानी बढ़ाने के लिए पुलिस को इंस्ट्रक्शन देंगे। खास इवेंट्स या खेलों के दौरान जनता की सुरक्षा के लिए आर्मी की तैनाती से पुलिस को मदद मिलेगी।"
आर्मी के 5 हजार जवान तैनात..
- थेरेसा मे ने कहा, "मैं नहीं चाहती थी कि जनता बिना वजह परेशान और चिंतित हो, लेकिन खतरे को देखते हुए यह एक समझदारी भरा फैसला है।" - पिछले 10 साल में ऐसा पहली बार है कि ब्रिटेन में आतंकी खतरे का डर हाइएस्ट लेवल पर जताया गया है। पूरे देश में आर्मी के 5 हजार जवानों को तैनात किया गया है। - बता दें कि ISIS ने मैनचेस्टर हमले की जिम्मेदारी ली है। संगठन ने और हमलों की भी चेतावनी दी है।

14 लाख भारतीय अमेरिका गए, 30,000 वीजा खत्म होने पर भी वहीं रह गए
24 May 2017
वॉशिंगटन.पिछले साल भारत से कुल 14 लाख लोग अमेरिका गए। उनमें से 30,000 वीसा अवधि खत्म होने का बाद भी वहीं रुके रहे। ये लोग नॉन इमीग्रेंट्स के तौर पर बिजनेस, स्टूडेंट, टूरिस्ट आदि वीसा लेकर अमेरिका पहुंचे थे। यह जानकारी अमेरिका के होमलैंड सिक्युरिटी डिपार्टमेंट ने कांग्रेस (अमेरिकी संसद) में पेश अपनी सालाना रिपोर्ट में दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 में दुनियाभर से आए करीब 5 करोड़ नॉन इमीग्रेंट्स को अमेरिका से लौट जाना था। लेकिन इनमें से 7,39,478 लोग तय अवधि के बाद भी अमेरिका में ही रह गए। यह दर 1.47 फीसदी है। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से 6,28,799 का अमेरिका में रुकना संदिग्ध है क्योंकि इन विदेशी नागरिकों के बारे में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
बाकी लोग तय अवधि खत्म होने के बाद ही सही लेकिन स्वदेश लौट गए। इसके अनुसार, तय अवधि से ज्यादा समय तक रुके 30,000 भारतीयों में से करीब 3,000 कानूनी तौर पर बाद में स्वदेश लौट गए।

मैनचेस्टर में ब्लास्ट: 30ft दूर जा गिरे लाेग; IS ने सोशल मीडिया पर मनाया जश्न
23 May 2017
मैनचेस्टर शहर में सोमवार की रात आतंकी हमला हुआ। इसमें 22 लोगों की मौत हो गई। वहीं, 59 से ज्यादा लोग जख्मी हैं। हमला उस वक्त हुआ, जब यहां के मैनचेस्टर एरिना में अमेरिकी सिंगर अरियाना ग्रांडे का कॉन्सर्ट खत्म हो गया था। हमले के बाद स्टेडियम में अफरा-तफरी मच गई।
दलोग एग्जिट गेट की तरफ भागने लगे। वहीं, स्टेडियम के बाहर अपने बच्चों का इंतजार कर रहे पेरेंट्स और दूसरे लोगों ने अपनों को खोजने के लिए सोशल मीडिया पर मदद मांगी। एक शख्स ने बताया कि मैं ब्लास्ट से करीब 30 फीट दूर जाकर गिरा। इस्लामिक स्टेट (आईएस) के सपोर्टर्स ने सोशल मीडिया पर जश्न मनाया
पेरेंट्स बाहर इंतजार कर रहे थे...
- अरियाना ग्रांडे के कॉन्सर्ट में बड़ी तादाद में यूथ मौजूद थे। स्टेडियम के बाहर कई लोग अपनों का इंतजार कर रहे थे। - मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शो का आखिरी गाना चल रहा था। तभी स्टेडियम के बाहर विंडो के पास धमाका हुआ। यह खबर स्टेडियम और बाहर इंतजार कर रहे लोगों के बीच पहुंची। लोग स्टेडियम से बाहर निकलने के लिए दौड़ने लगे। बाहर इंतजार कर रहे पेरेंट्स और रिश्तेदारों में डर फैल गया। सभी एक-दूसरे से अपनों की जानकारी लेने लगे। - बीबीसी के मुताबिक, एंडी होली अपनी पत्नी और बेटी का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने बताया- "मैं बेटी और पत्नी का इंतज़ार कर रहा था कि तभी तेज धमाका हुआ। मैं एक दरवाजे के पास से तीस फीट दूर दूसरे दरवाजे के पास जा गिरा। जब मैं उठा तो मैंने शवों को देखा। मेरे दिमाग में आया कि मैं एरिना में अंदर जाऊं और अपनी पत्नी और बेटी के बारे में पता लगाऊं।"
- "जब मैं उन्हें नहीं खोज सका तो मैं बाहर पुलिस के पास गया और कुछ लोगों की बॉडी के बीच उन्हें पहचानने की कोशिश की। हालांकि, बाद में पता चला कि दोनों सुरक्षित हैं।" - बता दें कि लंदन से मैनचेस्टर करीब 260 किमी की दूरी पर है।
सोशल मीडिया पर लोगों से अपील की
- एक महिला ने सोशल मीडिया पर अपनी बहन के बारे में जानकारी देने की अपील की। उन्होंने कहा कि मेरी छोटी बहन एमा कॉन्सर्ट में थी। वह जवाब नहीं दे रही है। मेरी मदद करें। - एक यूजर एरिन ने कहा- मेरी बहन को खोजने में मेरी मदद कीजिए। वह पिंक शर्ट और ब्लू जींस पहने है। उसका नाम व्हिटनी है। - एक और यूजर ने लिखा कि मेरा बेटा मैनचेस्टर एरिना में है। वह फोन नहीं उठा रहा है। इस मैसेज के साथ उसने अपने बेटे की फोटो भी पोस्ट की।

ब्रिटिश यूनिवर्सिटी ने कहा, रमजान में कहीं और जाकर पढ़ो नमाज
23 May 2017
मुस्लिमों के पवित्र महीने रमजान शुरू होने से ठीक पहले ब्रिटिश यूनिवर्सिटी ने मुसलमानों के लिए अलग से बनी इबादतगाह बंद कर दी। अब तक कैंपस में नमाज के लिए जगह थी, लेकिन अब यूनिवर्सिटी ने कहा है कि जगह की कमी है इसलिए इसे बंद किया जा रहा है। यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया (यूईए) ने अब इस गलियारे को लाइब्रेरी में शामिल कर लिया है।
यूनिवर्सिटी के मुस्लिम छात्रों से कह दिया गया है कि अब जुमे की नमाज पढ़ने के लिए आपके पास जगह नहीं रही। परीक्षा के मौसम में अब छात्रों को कैंपस के बाहर जाकर नमाज पढ़नी होगी। छात्रों ने इस जुमे को विरोधस्वरूप मुख्य यूनिवर्सिटी चौक पर ही नमाज पढ़ी। यूईए इस्लामी सोसायटी के प्रवक्ता ने कहा यह सुनकर वे स्तब्ध हैं। यूनिवर्सिटी ने भरोसा दिलाया था कि वह इसका कोई स्थायी समाधान निकालेगी लेकिन वह वादा पूरा नहीं कर पाई।
इससे पहले छात्र एक लेक्चर थिएटर में ही नमाज पढ़ते थे, लेकिन जुमे की नमाज के लिए उन्हें ब्लैकडेल स्टूडेंट रेजिडेंस के पास अलग बड़ी जगह दी गई थी। दोनों अस्थायी इंतजाम थे। लेकिन अब रविवार से छात्रों के पास दोनों में से कोई जगह नहीं बची।

नॉर्थ कोरिया के मिसाइल टेस्ट से भड़का UN, काउंसिल ने बुलाई इमरजेंसी मीटिंग
23 May 2017
यूनाइटेड नेशन की सिक्युरिटी काउंसिल ने नॉर्थ कोरिया के नए बैलिस्टिक मिसाइल टेस्ट की निंदा की है और इसे लेकर इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। बता दें इससे पहले रविवार को नॉर्थ कोरिया ने एक मिसाइल का टेस्ट किया था जो आसमान में 560 किलोमीटर तक गई थी।
नॉर्थ कोरिया की ओर से लगातार मिसाइल टेस्ट करने के अलावा उसके गैरजिम्मेदाराना और भड़काने वाले बर्ताव पर 15 सदस्यीय सिक्युरिटी काउंसिल ने चिंता जताई है। अमेरिका, जापान और साउथ कोरिया के अनुरोध पर नॉर्थ कोरिया के नए मिसाइल टेस्ट पर चर्चा के लिए यूनाइटेड नेशन सिक्युरिटी काउंसिल की मंगलवार को बैठक होगी।
कसाउथ कोरिया की सेना के एक अफसर के अनुसार, नॉर्थ कोरिया की ओर से दागी गई मिसाइल उसके पुकुकसोंग-2 के एडवांस वर्जन के समान है, जो आसमान में 560 किमी तक गई और उसके पूर्वी तटीय क्षेत्र में पानी में जा गिरी। इस मिसाइल टेस्ट में लिक्विड फ्यूल का टेस्ट किया गया था। बता दें, यूनाइटेड नेशन सिक्युरिटी काउंसिल ने नॉर्थ कोरिया पर 2006 में पहला प्रतिबंध लगाया था। नॉर्थ कोरिया अब तक पांच परमाणु परीक्षण और दो लंबी दूरी के रॉकेट का प्रक्षेपण भी कर चुका है। वो छठां न्यूक्लियर टेस्ट करने की भी धमकी दे रहा है।

जाधव मामले की फिर से सुनवाई के लिए आईसीजे पहुंचा पाकिस्तान, दाखिल की याचिका
20 May 2017
पाकिस्तान ने कथित भारतीय जासूस कुलभूषण जाधव मामले की छह सप्ताह के भीतर दोबारा सुनवाई की मांग को लेकर अंतर्राष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) में शुक्रवार (19 मई) को एक याचिका दाखिल की.
दुनिया न्यूज ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय अदालत द्वारा गुरुवार (18 मई) को जाधव की फांसी पर रोक लगाने के बाद पाकिस्तान ने मामले में आईसीजे के अधिकार क्षेत्र को दोबारा चुनौती देने की पूरी तैयारी कर ली है.
कानून के मुताबिक, जाधव अपीली अदालत में अपनी मौत की सजा के खिलाफ शनिवार (20 मई) के अंत तक अपील कर सकता है. कथित तौर पर जासूसी तथा आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता को लेकर पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने कुलभूषण जाधव को 10 अप्रैल को मौत की सजा सुनाई थी.
आईसीजे ने जाधव की सजा पर लगाई रोक
भारत ने गुरुवार (18 मई) को उस वक्त पाकिस्तान पर बड़ी कूटनीतिक विजय हासिल की जब हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तानी सैन्य अदालत से जासूसी के आरोप में फांसी की सजा पाये भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की सजा पर रोक लगा दी.
आईसीजे के अध्यक्ष रोनी अब्राहम ने फैसला पढ़ते हुये यह भी कहा, ‘पाकिस्तान को यह सुनिश्चित करने के लिये सभी आवश्यक कदम उठाने चाहिये कि इस मामले में अंतिम फैसला सुनाये जाने तक जाधव को फांसी न दी जाये.’ आईसीजे ने 9 मई को अंतरिम उपाय के तहत जाधव की मौत की सजा को स्थगित कर दिया था. न्यायालय ने पाकिस्तान को निर्देश दिया कि वह उसे ‘मौजूदा आदेश को अमल में लाने के लिये उठाये गये सभी कदमों से’ अवगत कराये.
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, ‘न्यायालय यह भी तय करता है कि उसके द्वारा अंतिम फैसला लिये जाने तक यह मामला उसके विचाराधीन रहेगा...’ भारत ने जाधव के मामले में आईसीजे के फैसले का स्वागत किया, लेकिन इस्लामाबाद ने कहा कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करता.

फ्लिन के ख़िलाफ़ जांच रोकने की बात से ट्रंप का इनकार, रूस संबंधी जांच को बताया विरोधियों की साज़िश
20 May 2017
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (19 मई) को मीडिया की उन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया है कि उन्होंने बर्ख़ास्त किए जा चुके एफबीआई निदेशक जेम्स कोमी से अपने पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक फ्लिन और रूस के बीच संबंधों की एजेंसी की जांच को रोकने को कहा था. व्हाइट हाउस के दैनिक संवाददाता सम्मेलन के दौरान इस रिपोर्ट को लेकर सवाल किए जाने पर उन्होंने ‘नहीं’ में जवाब दिया.
‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में मंगलवार (16 मई) को प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने कोमी को फ्लिन के खिलाफ जांच रोकने को कहा था. रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने कोमी को कहा था, ‘मुझे उम्मीद है आप इस बात को जाने देंगे.’ इसके अनुसार ट्रंप ने यह अनुरोध उस समय किया था जब फ्लिन के रूस के साथ संबंधों की रिपोर्ट उजागर होने के बाद उन्होंने (फ्लिन) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पद से इस्तीफा दे दिया था.
ट्रंप ने कोमी को ऐसे समय में अचानक बर्खास्त कर दिया था जब वह पिछले साल हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव के दौरान ट्रंप के चुनाव अभियान और रूस के बीच संबंधों की जांच का नेतृत्व कर रहे थे. ट्रंप ने कोमी को बर्खास्त करने के अपने निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि पूर्व एफबीआई प्रमुख कई लोगों के बीच ‘काफी अलोकप्रिय’ थे.
उन्होंने कहा, ‘मैंने वास्तव में निर्णय लेते समय सोचा था कि यह एक द्विदलीय निर्णय होगा. क्योंकि आपने देखा होगा कि न केवल रिपब्लिकन पक्ष के लोग बल्कि डेमोक्रेटिक पक्ष के भी सभी लोग निदेशक कोमी के बारे में गलत बातें कर रहे थे.’
विरोधियों ने निशाना बनाने के लिए रूस संबंधी जांच शुरू की: ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह वर्ष 2016 के राष्ट्रपति पद के चुनाव में रूस की कथित संलिप्तता को लेकर उनकी चुनाव प्रचार मुहिम की जांच के लिए एक विशेष अधिवक्ता की नियुक्ति का सम्मान करते हैं लेकिन इस पूरे मामले को उठाने का मकसद केवल उन्हें निशाना बनाना है.
ट्रंप ने चुनाव में रूसी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच के लिए पूर्व एफबीआई निदेशक राबर्ट मुलर की नियुक्ति संबंधी प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘मेरी और मेरी प्रचार मुहिम की रूस के साथ निश्चित ही कोई सांठ गांठ नहीं है.’ उन्होंने कहा, ‘मैं इस कदम का सम्मान करता हूं लेकिन इस पूरे मामले का मकसद मुझे निशाना बनाना है.’ राष्ट्रपति ने दोहराया कि उनका रूस से कोई लेना देना नहीं है. उन्होंने कहा कि वह अमेरिका को आगे ले जाना चाहते हैं.
उन्होंने कहा, ‘मैं कल (20 मई) सउदी अरब जाउंगा. मैं इस्राइल जाउंगा. मैं रोम जाउंगा. मैं जी 7 में हिस्सा लूंगा. मुझे ऐसी हर चीज से नफरत है जो लोगों को विभाजित करती है. लोग जो करना चाहता हैं, मुझे उससे कोई दिक्कत नहीं है लेकिन हमें देश को फिर से पटरी पर लाना होगा. हमने पिछले कुछ दिनों में इस दिशा में काफी प्रगति की है.’


बेनज़ीर भुट्टो हत्या मामले में व्यक्तिगत रूप से पेश होना चाहते हैं परवेज़ मुशर्रफ़'
20 May 2017
पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ बेनजीर भुट्टो हत्या मामले में वीडियो लिंक के जरिये गवाही देने के बजाय व्यक्तिगत रूप से पेश होना चाहते है. मुशर्रफ पर दो बार प्रधानमंत्री रहीं बेनजीर की 2007 में हुई हत्या में शामिल होने का आरोप है.अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (19 मई) को मीडिया की उन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया है कि उन्होंने बर्ख़ास्त किए जा चुके एफबीआई निदेशक जेम्स कोमी से अपने पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक फ्लिन और रूस के बीच संबंधों की एजेंसी की जांच को रोकने को कहा था. व्हाइट हाउस के दैनिक संवाददाता सम्मेलन के दौरान इस रिपोर्ट को लेकर सवाल किए जाने पर उन्होंने ‘नहीं’ में जवाब दिया.
डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुशर्रफ के वकील अख्तर शाह ने रावलपिंडी की आतंकवाद निरोधी अदालत में चल रहे इस हाईप्रोफाइल हत्या मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि उनका मुवक्किल वीडियो लिंक के जरिये गवाही दर्ज कराने का इच्छुक नहीं है. उन्होंने कहा कि मुशर्रफ व्यक्तिगत रूप से पेश होकर खुली अदालत में गवाही दर्ज कराना चाहते हैं जिसके लिये उन्हें रक्षा मंत्रालय से पुख्ता सुरक्षा इंतजाम की जरूरत है.‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में मंगलवार (16 मई) को प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने कोमी को फ्लिन के खिलाफ जांच रोकने को कहा था. रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने कोमी को कहा था, ‘मुझे उम्मीद है आप इस बात को जाने देंगे.’ इसके अनुसार ट्रंप ने यह अनुरोध उस समय किया था जब फ्लिन के रूस के साथ संबंधों की रिपोर्ट उजागर होने के बाद उन्होंने (फ्लिन) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पद से इस्तीफा दे दिया था.
टवकील के मुताबिक मुशर्रफ कई प्रतिबंधित और आतंकी संगठनों की हिट लिस्ट में हैं और उनकी जिंदगी को गंभीर खतरा रहता है.संघीय सरकार पहले ही ऐसे अनुरोध को खारिज कर चुकी है.
पूर्व सैन्य शासक के खिलाफ राजद्रोह का आरोप है और सरकार ने विशेष अदालत को दिये जवाब में कहा था, ‘‘कोई भगोड़ा अदालत के समक्ष अपनी शर्तें तय नहीं कर सकता और बातें नहीं थोप सकता, वह भी सिर्फ अपनी व्यक्तिपरक संतुष्टि के लिये, जिसमें वही तय करेगा कि वह कब और कितने समय के लिये पेश होगा.’’उन्होंने कहा, ‘मैंने वास्तव में निर्णय लेते समय सोचा था कि यह एक द्विदलीय निर्णय होगा. क्योंकि आपने देखा होगा कि न केवल रिपब्लिकन पक्ष के लोग बल्कि डेमोक्रेटिक पक्ष के भी सभी लोग निदेशक कोमी के बारे में गलत बातें कर रहे थे.’
मुशर्रफ ने पांच मई को भी विशेष अदालत में ऐसी ही एक याचिका दायर की थी जिसमें उन्होंने अदालत से सैन्य सुरक्षा और सुरक्षित तरीके से दुबई वापस जाने का रास्ता दिये जाने का आश्वासन मांगा था. मुशर्रफ अभी दुबई में ही रह रहे हैं. आतंकवाद विरोधी अदालत ने उन्हें और अन्य आरोपियों को बयान दर्ज कराने के लिये समन किया था.ट्रंप ने चुनाव में रूसी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच के लिए पूर्व एफबीआई निदेशक राबर्ट मुलर की नियुक्ति संबंधी प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘मेरी और मेरी प्रचार मुहिम की रूस के साथ निश्चित ही कोई सांठ गांठ नहीं है.’ उन्होंने कहा, ‘मैं इस कदम का सम्मान करता हूं लेकिन इस पूरे मामले का मकसद मुझे निशाना बनाना है.’ राष्ट्रपति ने दोहराया कि उनका रूस से कोई लेना देना नहीं है. उन्होंने कहा कि वह अमेरिका को आगे ले जाना चाहते हैं.हर चीज से नफरत है जो लोगों को विभाजित करती है. लोग जो करना चाहता हैं, मुझे उससे कोई दिक्कत नहीं है लेकिन हमें देश को फिर से पटरी पर लाना होगा. हमने पिछले कुछ दिनों में इस दिशा में काफी प्रगति की है.’


चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे से कश्मीर मामले का कोई सीधा संबंध नहीं : चीन
18 April 2017
बीजिंग: चीन ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे पर भारत की चिंताओं को दूर करने की कोशिश करते हुए कहा कि इसका कश्मीर मामले से ‘कोई प्रत्यक्ष संबंध’ नहीं है और ‘वन बेल्ट वन रोड’ परियोजना में शामिल होने के लिए नई दिल्ली का स्वागत है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने 14-15 मई से होने वाले ‘वन बेल्ट वन रोड’ (ओबीओआर) शिखर सम्मेलन के संबंध में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, हालांकि (कोई) भारतीय नेता यहां नहीं होंगे, लेकिन ओबीओआर शिखर सम्मेलन में भारत का एक प्रतिनिधि होगा.
भाषा की खबर के मुताबिक- वांग ने कहा, हम शिखर सम्मेलन में वार्ता में शामिल होने के लिए भारतीय प्रतिनिधि और भारतीय व्यापारिक एवं वित्तीय समुदाय के सदस्यों का स्वागत करते हैं. उन्होंने कहा कि इस शिखर सम्मेलन में 28 राष्ट्रपतियों एवं प्रधानमंत्रियों के भाग लेने की संभावना है. वांग ने कहा, ओबीओआर सभी प्रतिभागियों के साझा विकास के लिए है इसलिए हम ओबीओआर के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए भारत का स्वागत करते हैं. वांग ने कहा कि 46 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का मकसद आर्थिक है. उन्होंने कहा, इसका मकसद आर्थिक सहयोग एवं विकास है.
46 अरब अमेरिकी डॉलर की महत्वकांक्षी योजना है. इसके तहत चीन और पाकिस्तान अरब सागर में ग्वादर बंदरगाह को शिंजियांग से जोड़ने के लिए करीब 3,000 किलोमीटर लंबा आर्थिक गलियारा बना रहे हैं. यह कदम चीन में तेल परिवहन के लिए एक नया और सस्ता मालवाहक मार्ग खोलेगा. साथ ही इस रास्ते से चीनी वस्तुओं का मध्य पूर्व और अफ्रीका में निर्यात होगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि सीपीईसी और ग्वादर बंदरगाह चीन और पाक की सैन्य क्षमताएं बढ़ाएगा तथा अरब सागर में चीनी नौसेना की आसान पहुंच को संभव बनाएगा. ग्वादर में नौसैनिक अड्डा होने से चीनी जहाज हिंद महासागर क्षेत्र में अपने बेड़े की मरम्मत और रखरखाव जैसे कार्य के लिए भी बंदरगाह का इस्तेमाल कर पाएंगे. ऐसी कोई भी सुविधा चीन की नौसेना के भविष्य के मिशनों के लिए उसे सहयोग प्रदान करने वाली पहली ओवरसीज सुविधा होगी.
सीपीईसी पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत बलूचिस्तान से होकर गुजरेगा. इस गलियारे से चीन का मुस्लिम बहुल प्रांत शिंजियांग पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से जुड़ेगा.
इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत 1100 किलोमीटर का लंबा मोटरवे कराची और लाहौर शहर के बीच में बनाया जाएगा. रावलपिंडी और चीनी सीमा के बीच काराकोरम हाइवे को पूरी तरह से नया बनाया जाएगा.
इसके तहत कराची-पेशावर के बीच की मुख्य रेल लाइन को भी अपग्रेड किया जाएगा और दिसंबर 2019 तक इस रूट पर ट्रेन की रफ्तार को 160 किमी प्रति घंटे की से चलाया जाएगा. पाकिस्तान के रेल नेटवर्क को चीन के दक्षिणी शिनजियांग रेलवे से जोड़ा जाएगा.
भारत ने इस गलियारे को लेकर चीन से आपत्ति जताई, क्योंकि यह पाक अधिग्रहित कश्मीर से होकर गुजरता है. चीन ने यह कहते हुए परियोजना का बचाव किया है कि इससे क्षेत्रीय विकास में मदद मिलेगी.
भारत की चिंता ग्वादर पोर्ट को लेकर भी है. इस पोर्ट के जरिए चीन भारत को घेरने की रणनीति पर निश्चित ही आगे बढ़ेगा. पाकिस्तान को चीन से जोड़ने वाली सीमा पर नए रास्तों का निर्माण होगा जो भारत से लगे हुए है. चीन की वाजाही यहां और बढ़ जाएगी.


तुर्की पर राष्ट्रपति एर्दोगन का एकाधिकार, जनमत संग्रह में राष्ट्रपति शासन प्रणाली की जीत
17 April 2017
तुर्की के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने संसदीय शासन प्रणाली और राष्ट्रपति शासन प्रणाली को लेकर हुए जनमत संग्रह के नतीजों का ऐलान कर दिया. पीएम बिनाली यीलदीरिम ने राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन की शक्तियों में विस्तार को लेकर हुए जनमत संग्रह में 'हां' खेमे की जीत का दावा किया. उन्होंने कहा कि देश ने लोकतंत्र का एक नया अध्याय खोला है.
प्रधानमंत्री ने अंकारा में जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी की बालकनी से समर्थकों से कहा, 'गैर आधिकारिक नतीजों के मुताबिक राष्ट्रपति शासन प्रणाली की 'हां' वोट से पुष्टि हुई है.' उन्होंने कहा, 'यह फैसला लोगों ने लिया है. हमारे लोकतंत्र के इतिहास में एक नए अध्याय का सूत्रपात हुआ है.' उन्होंने बताया कि 99 फीसदी वोटों गिनती के बाद 51.3 फीसद लोगों ने 'हां' वोट किया. अब वो 2029 तक राष्ट्रपति बने रह सकते हैं. हालांकि बनाए गए मसौदे के अनुसार अगले राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव 3 नवंबर 2019 को होंगे.
एर्दोगन का ऐलान
तुर्की के राष्ट्रपति तैयद एर्दोगन ने भी जनमत संग्रह में जीत का ऐलान किया. इस्तांबुल में अपने सरकारी आवास से एर्दोगन ने जीत को ऐताहासिक करार दिया. एर्दोगन ने कहा- इस जीत से तुर्की के शासन में सेना के दखल के दरवाजे बंद हो जाएंगे.
साढ़े पांच करोड़ ने लिया हिस्सा
शासन प्रणाली में बदलाव के लिए तुर्की की 5.53 करोड़ जनता को वोट का अधिकार दिया गया था. जिनमें आधे से ज्यादा लोगों ने राष्ट्रपति शासन प्रणाली के पक्ष में वोट किया.
तैयप की शक्तियां बढ़ीं
जनमत संग्रह में राष्ट्रपति शासन प्रणाली को समर्थन मिलने के बाद राष्ट्रपति तैयद एर्दोगन तुर्की के सबसे शक्तिशाली व्यक्त बन जाएंगे. कैबिनेट मंत्रियों की नियुक्ति, नए फरमानों, जजों की नियुक्ति से लेकर संसद भंग करने का उनका एकाधिकार होगा.
बता दें कि करीब एक दशक तक तुर्की के प्रधानमंत्री रहने के बाद एर्दोगन 2014 में तुर्की के राष्ट्रपति बने थे. तुर्की में राष्ट्रपति को कार्यकारी शक्तियां हासिल नहीं हैं. इस जनमत संग्रह के बाद तुर्की के संस्थापक मुस्तफा कमाल अतातुर्क और उनके उत्तराधिकारी इस्मत इनोनु के बाद एर्दोगन को तुर्की के किसी भी नेता से अधिक शक्तियां मिलेंगी.
पीएम पद होगी खत्म
संविधान संशोधन को मंजूरी मिलने के बाद तुर्की में प्रधानमंत्री का पद पूरी तरह से खत्म हो जाएगा. नई व्यवस्था में राष्ट्रपति के पास सभी राज्यों की शासन व्यवस्था का नियंत्रण होगा.
विपक्ष का हमला
विपक्षी दलों ने इस व्यवस्था की आलोचना की है. मुख्य विपक्षी दल रिपब्लिकन पार्टी और डैमोक्रेटिक पार्टी ने संशोधन पर सवाल उठाए और कहा कि इससे एक ही व्यक्ति को असीम शक्तियां मिल जाएंगी.


मेडिकल कॉलेज की छात्रा रह चुकी है लाहौर में पकड़ी गई 20 वर्षीय संदिग्ध
17 April 2017
हाल ही में लाहौर में आतंकियों पर हुई कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार की गई 20 वर्षीय लड़की के बारे में नया खुलासा हुआ है. बताया जा रहा है कि यह लड़की मेडिकल छात्रा थी, जो कि कुछ समय पहले ही फेसबुक के जरिये इस्लामिक स्टेट से जुड़ी थी.
आपको बता दें कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने हाल ही में दावा किया था कि उन्होंने लाहौर की पंजाब हाउसिंग सोसाइटी में एक आतंकवादी को मारकर उसके दो अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार किया था. पाकिस्तान सेना की मीडिया विंग के अनुसार इस शूटआउट में कुल 6 लोग घायल हुए थे.
जांच के दौरान पता लगा है कि महिला का नाम नौरानी लेघारी के तौर पर हुई है, नौरानी पाकिस्तान के सिंध प्रांत के जामशोरो में लियाकत यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल हेल्थ साइंसेज में दूसरे वर्ष की छात्रा है. स्थानीय मीडिया के अनुसार, नौरीन लगभग दो महीने तक सीरिया में रुकी थी, लेकिन बाद में वह लाहौर लौट आई थी. नौरान पाकिस्तान के हैदराबाद की रहने वाली हैं, वह फरवरी माह में ही अपने कॉलेज से लापता हो गई थी.
अधिकारी के अनुसार, 10 फरवरी को नौरीन लाहौर पहुंची थी, जिसके बाद उन्होंने अपने फेसबुक प्रोफाइल से अपने भाई को मैसेज किया था कि वापस खलीफा की धरती पर पहुंच गई है. उन्होंने अपने भाई को मैसेज किया कि भाई, मैं नौरीन हूं, मुझे उम्मीद है कि आप सभी अच्छे होंगे और मैं भी सकुशल और खुश हूं. मैंने आपको यह बताने के लिए संपर्क किया है कि अल्लाह के फजल से, मैं खलीफा की धरती पर आ गई हूं और उम्मीद है कि एक दिन आप सब भी यहां आएंगे.


Forbes अंडर 30 सुपर अचीवर्स लिस्ट में 53 भारतीय; आलिया, दीपा, साक्षी शामिल
17 April 2017
न्यूयॉर्क: फोर्ब्स ने 2017 के लिए एशिया में 30 साल से कम उम्र के सुपर अचीवर्स की लिस्ट जारी की है। इसमें भारत की 53 शख्सियतों को जगह मिली है। इसमें प्रमुख रूप से एक्ट्रेस आलिया भट्ट, जिमनास्ट दीपा कर्माकर और ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडलिस्ट साक्षी मलिक को शामिल किया गया है।
- न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक, फोर्ब्स ने दूसरी बार '30 अंडर 30' एशिया लिस्ट जारी की है। इसमें चीन के 76 लोगों को जगह मिली है।
- दूसरे नंबर पर भारत है। उसके 53 लोग सुपर अचीवर्स में शामिल हैं।
- फोर्ब्स ने 10 कैटेगरी में 30-30 शख्सियतों की लिस्ट बनाई है। यानी लिस्ट में एंटरटेनमेंट, फाइनेंस, रिटेल, वेंचर कैपिटल, सोशल आंत्रप्रेन्योर, टेक्नोलॉजी के क्षेत्र से 300 लोग शामिल किए हैं।
- इसी साल जनवरी में भी फोर्ब्स ने दुनिया में बदलाव लाने वाले 30 साल से कम उम्र वाले 600 लोगों की लिस्ट जारी की थी। इसमें 30 भारतवंशी थे।
भारत की ओर से इन्होंने बनाई जगह और ये वजह
1# दीपा कर्माकर (23): भारत की ओर से लिस्ट में दीपा सबसे ऊपर हैं। वे ओलिंपिक में हिस्सा लेने वाली भारत की पहली महिला जिमनास्ट हैं। साथ ही वे पिछले 52 सालों में ओलिपिंक में कॉम्पीट करने वाली पहली भारतीय जिम्नास्ट भी बनी थीं।
फोर्ब्स ने कहा: "भले ही उन्होंने मेडल नहीं जीता लेकिन शानदार तरीके से चौथा स्थान हासिल किया। वे महज 0.15 प्वाइंट्स से ब्रॉन्ज मेडल जीतने से चूक गईं। उन्होंने फाइनल में प्रोडुनोवा वॉल्ट किया, जिसे अब तक केवल 5 जिम्नास्ट ही करने में कामयाब रहे हैं।"
2# साक्षी मलिक (24):साक्षी ने पिछले साल हुए रियो डि जेनेरियो ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता। ऐसा करने वाली वे पहली भारतीय महिला रेसलर बनीं।
फोर्ब्स ने कहा:"वे एक छोटे से शहर रोहतक से आती हैं। जब उन्होंने 12 साल की उम्र में रेसलिंग की थी तो लोगों का काफी विरोध झेलना पड़ा था।"
3# श्रीकांत बोला (25):बोला को मैन्युफेक्चरिंग एंड एनर्जी कैटेगरी में जगह मिली है।
फोर्ब्स ने क्या कहा: "वे बोलांट इंडस्ट्रीज के फाउंडर हैं। एक किसान के घर जन्मे बोला जन्म से ब्लाइंड हैं। बोला, मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट्स ऑफ टेक्नोलॉजी के पहले ब्लाइंड स्टूडेंट बने। यहां से पढ़ने के बाद वे भारत लौटे और हैदराबाद में कंपनी बनाई। उनकी कंपनी दिव्यांगों को इको-फ्रेंडली इक्विपमेंट बनाने की ट्रेनिंग देती है।"
4# आलिया भट्ट (24): आलिया ज्यादा कमाई करने वाली 20 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुकी हैं।
फोर्ब्स ने कहा: "आलिया की 6 फिल्मों ने रिलीज के शुरुआती हफ्ते में दुनिया में 15 मिलियन डॉलर की कमाई की।"
5# शरथ गायकवाड़ (25): पहले पैरालंपिक स्विमर, कोच हैं। अर्जुन अवॉर्ड विनर गायकवाड़ 96 मेडल जीत चुके हैं।
फोर्ब्स ने कहा: "उनके लिए केवल स्वीमिंग काफी नहीं थी। उन्हें लगा कि भारत में स्वीमिंग सूट मिलना अभी भी कठिन है। इसको देखते हुए उन्होंने गेमेटिक्स नामक खुद की एजेंसी बना ली। ये एजेंसी इंटरनेशनल ब्रांड्स और डोमेस्टिक रिटेलर के बीच पुल का काम करती है।"
6# त्रिशा शेट्टी (26): 'SheSays' नाम के एनजीओ की फाउंडर हैं। ये सेक्शुअल वॉयलेंस से पीड़ित महिलाओं को एजुकेशन, लीगल और मेडिकल सहायता मुहैया कराता है। फोर्ब्स ने कहा: ऑर्गनाइजेशन ने एजुकेशन वर्कशॉप के जरिए 60 हजार लोगों को जोड़ा है। एनजीओ लोगों में अवेयरनेस लाने और विक्टिम को सपोर्ट देने का काम भी कर रहा है। खासकर, उनको जो अपनी कहानी किसी को बता नहीं पाते।
7# अंकित क्वात्रा (25): देश से भूख की समस्या को दूर करने के लिए 'फीडिंग इंडिया' नाम का ऐप बनाया। लोगों तक वॉलंटियर्स के जरिए खाना पहुंचाते हैं। फोर्ब्स ने कहा:अंकित ने एक ऐप बनाया है। इस पर रेस्टॉरेंट्स और लोग उन्हें खाना दान करने के लिए कॉन्टैक्ट करते हैं। इसके बाद इसे जरूरतमंदों में बांट दिया जाता है।
8# संजय (15) और श्रवण (17) कुमारन: लिस्ट में शामिल ये दोनों भाई सबसे कम उम्र के हैं। 5 साल पहले 'गोडाइमेंशंस' नाम का ऐप डेवलपर बनाया था। अब तक वे ऐप स्टोर के लिए 7 और गूगल प्ले के लिए 3 ऐप बना चुके हैं। फोर्ब्स ने कहा: "उनके ऐप्स 60 से ज्यादा देशों में 70 हजार बार डाउनलोड्स हो चुके हैं। एप्पल ने इन्हें भारत का सबसे यंग मोबाइल प्रोग्रामर बताया है।"
ये भी हैं लिस्ट में शामिल
- केविन भारती मित्तल (29): हाइक ऐप के फाउंडर।
- वैष्णवी मुरली (29): ऑनलाइन आर्ट गैलरी आइकोवा आर्ट की फाउंडर।
- कोविद गुप्ता (28): भारतीय-अमेरिकी स्क्रीनराइटर और फिल्ममेकर।
- अमानत आनंद (24), शुभम इस्सर (23), योगिता अग्रवाल (23): टीचिंग टूल 'SoaPen' के कोफाउंडर।
- अदिति अशोक (18): गोल्फर।
- मरियप्पन थंगावेलू (21): रियो पैरालंपिक में हाईजंप में गोल्ड मेडलिस्ट।
- तापसी पन्नू (29): बॉलीवुड एक्ट्रेस।
- मसाबा गुप्ता (28): फैशन डिजाइनर।


अमेरिका को नॉर्थ कोरिया की खुली धमकी कहीं विश्वयुद्ध की आहट तो नहीं!
12 April 2017
नार्थ कोरिया और अमेरिका के बीच अब मामला संजीदा हो चुका है. इन दोनों देशों के नेताओं के दरमियान बात अब इस हद तक बढ़ गई है कि जंग का खतरा सिर उठाने लगा है. जंग किसी भी वक़्त शुरू हो सकती है. ऐसे में ज़रूरी हो जाता है कि हम ये जान लें कि अगर ऐसा हुआ तो तबाही की आंच कहां तक पहुंचेगी. कहीं ये विश्वयुद्ध की आहट तो नहीं. क्योंकि एक तरफ अरब देश तो दूसरी तरफ कोरियाई पेनिंनसुला जंग के ज्वालामुखी पर बैठा है. और ऊपर से अमेरिका नार्थ कोरिया के तानाशाह को तैश दिलाने की कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. अब कहीं जंग छिड़ गई तो अंदाजा लगाइए कि फिर क्या होगा?
अमेरिका की तरफ है नार्थ कोरिया का निशाना
घबराहट सब में हैं, इत्मिनान किसी को नहीं. चैन है कि आता ही नहीं और आएगा भी क्यों कर. हालात ही अब कुछ ऐसे हैं. एक तरफ साउथ कोरिया, अमेरिका, जापान और चीन अपने अपने हथियारों से लैस हैं. बस बिगुल फूंके जाने का इंतज़ार है. तो दूसरी तरफ मैदान में अकेला खड़ा नार्थ कोरिया का तानाशाह इस बात को लेकर कशमकश में है कि वो अपनी मिसाइलों का रूख किस ओर करे. इसलिए उसने तय किया है कि हमला कहीं से भी हो उसकी मिसाइलों का रूख सिर्फ एक तरफ होगा और वो है अमेरिका. बकौल नार्थ कोरिया के इस तानाशाह किम जोंग उन के उसके पास इसकी वाजिब वजह भी है. क्योंकि सीरिया पर हमले के बाद अब अमेरिका का रवैय्या पूरी तरह से जंग का हो गया है और इसीलिए उसने कोरियाई पेनिनसुला में अपने जंगी जहाज़ों को भेजा है. लिहाज़ा किम जोंग उन ने अमेरिका को आखिरी चेतावनी दी है कि जंग के लिए तैयार रहें.
अकेला पड़ गया है नार्थ कोरिया
किम जोंग की इस झुंझलाहट को समझना है तो इस नक्शे को पहले समझिए क्योंकि इसके बाद तस्वीर ज़्यादा साफ़ हो जाएगी. भले यहां से अमेरिका की दूरी करीब 10 हज़ार किलोमीटर हो, मगर साउथ कोरिया की सरहद उससे लगती है. और अमेरिका के दूसरे साथी जापान की दूरी महज़ एक हज़ार किलोमीटर है. चीन से भी रिश्ते कोई बहुत बेहतर नहीं हैं. क्योंकि किम जोंग की ज़हरीली मिसाइलों से खौफ उसे भी है. ले दे के उसके पड़ोस में रूस ही एक ऐसा देश है जिसके साथ कम्यूनिस्टों के दौर में उसका दोस्ताना रिश्ता रहा है. मगर मौजूदा वक्त में हालात ऐसे हैं कि उत्तर कोरिया खुद को अकेला ही समझता है. अकेले दम पर ही वो अमेरिका से लोहा लेने को न सिर्फ तैयार बैठा है बल्कि बराबरी की जंग का दम भी भर रहा है.
हथियारों से पहले ज़ुबानी जंग
दूसरी तरफ अमेरिका की ट्रम्प सरकार भी पूरी तैयारी किए बैठी है. कोरियाई प्रायद्वीप पर उसने अपने स्ट्राइक ग्रुप भेज दिए हैं. जिसमें निमित्ज़ क्लास एयरक्राफ्ट भी है. यूएसएस कार्ल विन्सन भी और एक कैरियर विंग के अलावा दो मिसाइल डेस्ट्रॉयर और एक गाइडेड मिसाइल क्रूजर शामिल है. अब ज़ाहिर है नार्थ कोरिया की चौखट के इतने नज़दीक आकर अमेरिका अगर अपनी ताकत दिखाएगा तो किम भी चुप बैठने वालों में से तो है नहीं. लिहाज़ा हथियारों की जंग से पहले ज़ुबानी जंग शुरू हो चुकी है.
अमेरिका ने की जंग की तैयारी
उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमरीका का जहाज़ भेजने का फैसला जल्दबाज़ी में उठाया गया कदम है. वो हमारी सीमाओं में घुसने की कोशिश कर रहा है. अगर अमरीका जंग चाहता है तो डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (नॉर्थ कोरिया) इसके लिए तैयार है. दरअसल, सीरिया पर हमले के फौरन बाद डोनाल्ड ट्रम्प के हौंसले काफी बढ़े हुए हैं. इसलिए ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के कोरियाई पेनिनसुला में जंगी जहाज भेजने के इस फैसले को किम जोंग-उन के लिए फाइनल वॉर्निंग माना जा रहा है. हालांकि ट्रम्प ने अपने एडवाइजर्स से ये भी कहा है कि अगर प्योंगयांग नरम रूख अपनाए तो वो दूसरे कई ऑप्शन्स पर विचार कर सकते हैं. मगर मौजूदा हालात देखकर ऐसा लगता तो नहीं हैं. दूसरी तरफ नार्थ कोरिया पर हमले को लेकर चीन का भी मामला डांवाडोल ही नज़र आ रहा है. जानकारों का मानना है कि चीन को किम से खतरा तो है मगर इतना भी नहीं कि वो अमेरिका के साथ खड़ा हो जाए. अमेरिका भी ये समझ रहा है लिहाज़ा उसने ये भी कह दिया है कि चीन अगर साथ नहीं देगा तो वो अकेले ही नॉर्थ कोरिया के खिलाफ एक्शन लेगा.
न्यूक्लियर टेस्ट कर सकता है नार्थ कोरिया
हालांकि अमेरिका के लिए नॉर्थ कोरिया पर हमला करना इतना आसान भी नहीं होगा क्योंकि वो जानता है कि दुनिया के इस सबसे सनकी तानाशाह के पास कई ऐसी मिसाइलें हैं, जो अमरीका तक न्यूक्लियर धमाका करने की सलाहियत रखती हैं. नॉर्थ कोरिया की स्थापना करने वाले अपने दादा किम संग की 105वीं सालगिराह के मौके पर ऐसी संभावना है कि वो छठा न्यूक्लियर टेस्ट कर सकता है. ऐसे में अगर जंग के हालात बनते हैं कि तो ये कहा जा सकता है कि अमेरिका का तो पता नहीं मगर उत्तर कोरिया के पास खोने के लिए कुछ नहीं है.
कोरियाई समंदर में हो सकता है भीषण घमासान
ज़ाहिर है मौजूदा वक़्त में अमेरिका को अगर किसी से ख़तरा है तो वो नार्थ कोरिया का सनकी तानाशाह ही है. लिहाज़ा राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने तेवरों से साफ कर दिया है कि इस बार अमेरिका आर-पार के मूड में है. अपने जंगी जहाज़ों को कोरियाई पेनिनसुला में उतार कर अमेरिका ने नार्थ कोरिया को आखिरी चेतावनी दे दी है और अगर किम जोंग उन के अड़ियल रवैय्ये में कोई तब्दीली नहीं आई तो ये जान लीजिए कि कोरियाई प्रायद्वीप के समंदर में फिर भीषण घमासान होगा.


जाधव की सजा दुनिया में PAK को अलग-थलग करने का बदला: US एक्सपर्ट्स
12 April 2017
वॉशिंगटन: भारत के पूर्व अफसर रहे कुलभूषण जाधव (46) को पाकिस्तान में फांसी की सजा सुनाने की दुनियाभर में चर्चा हो रही है। इस पर अमेरिकी एक्सपर्ट्स ने कहा है कि पाकिस्तान, अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में खुद को अलग-थलग किए जाने को लेकर भारत को कड़ा संदेश देना चाहता है। बता दें कि 10 मार्च को पाकिस्तान की आर्मी कोर्ट ने कुलभूषण को फांसी की सजा सुनाई थी। भारत में संसद में इसका जोरदार विरोध हुआ था। सुषमा स्वराज ने सदन में कहा था, "जाधव पूरे हिंदुस्तान का बेटा है। हर कीमत पर उन्हें बचाया जाएगा।"
- न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक यूएस के विदेश मंत्रालय की पूर्व अफसर एलिजा आयर्स ने कहा, "जाधव के मामले में कई गड़बड़ियां हुईं। एक तो पाक में भारतीय हाईकमिश्नर को कोई जानकारी नहीं दी गई। कोर्ट मार्शल का फैसला चौंकाने वाला रहा। इसमें भी पूरी गोपनीयता रखी गई। विरोधाभास तो ये है कि जितनी तेजी पाकिस्तान ने जाधव के मामले में दिखाई, उससे कहीं ज्यादा सुस्त मुंबई हमले की सुनवाई रही।"
- "पाक ने मुंबई हमले का केस करीब 9 साल से अटका रखा है।"
- बता दें कि एलिजा एक टॉप अमेरिकन थिंक टैंक में भारत, पाक और साउथ एशिया मामलों की सीनियर फैलो हैं।
- वॉशिंगटन के एक अन्य थिंक टैंक साउथ एशिया सेंटर एट द अटलांटिक काउंसिल के डायरेक्टर भरत गोपालस्वामी ने कहा, "जाधव को सजा देने में पाक ने सबूत दिए, वो काफी हल्के हैं। मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई। पाकिस्तान इसका इस्तेमाल भारत की आतंकवाद से लड़ाई की डिप्लोमेसी के खिलाफ करना चाहता है।"
और क्या बोले एक्सपर्ट?
- वुड्रो विल्सन सेंटर में साउथ एशिया मामलों के डिप्टी डायरेक्टर माइकल कूगलमैन ने कहा, "पाक ने जाधव के जिन सबूतों को आधार बनाया, वे रहस्य और अनिश्चितता से भरे हैं। लेकिन इन सबसे तय है कि पाक, भारत को कड़ा संदेश देना चाहता है। पाक नई दिल्ली को चेता रहा है कि वह उसके मामलों में न तो दखलअंदाजी न करे या उसे दुनिया में अलग-थलग करने की कोशिश न करे।"
- "अब ये देखना होगा कि भारत किस तरह जाधव की सजा रुकवाता है। वहीं पाक, कुलभूषण की रिहाई के लिए बड़ी सौदेबाजी करेगा। पाकिस्तान, भारत के साथ अपने बड़े मसलों को हल करने के लिए जाधव को ट्रम्प कार्ड की तरह इस्तेमाल कर सकता है।"
- क्रूगलमैन ने ये भी कहा, "भारत-पाक के रिलेशन लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर चल रहे हैं। दोनों किसी भी वक्त होनी वाली बातचीत को गुडबाय कह सकते हैं। कुल मिलाकर कहें तो आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच आपसी रिलेशन को लेकर बुरा वक्त आने वाला है।"
- स्टिमसन इंस्टीट्यूट के साउथ एशिया प्रोग्राम को डिप्टी डायरेक्टर समीर लालवानी के मुताबिक, "अगर पाक जाधव को चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के लिए खतरा मान रहा था तो उसे कुछ महीनों पहले ही सजा सुना देनी थी। अगर पाक जाधव की सजा के जरिए डिप्लोमेटिक दबाव बनाना चाहता है तो भी उसके लिए इंटरनेशनल कम्युनिटी को समझाना मुश्किल होगा।"
क्या बोले थे सुषमा-राजनाथ?
- राज्यसभा में लीडर ऑफ अपोजिशन गुलाम नबी आजाद ने कहा, "हम सरकार के साथ हैं। जाधव को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का अच्छे से अच्छा वकील किया जाना चाहिए।"
- इस पर सुषमा ने कहा, "ये पक्ष-विपक्ष का मसला नहीं है। मैं गुलाम नबी को धन्यवाद देना चाहती हूं कि वे इस मसले पर सरकार के साथ हैं। हिंदुस्तान के इस बेटे को बचाने के लिए अच्छा वकील खड़ा करना तो छोटी बात है, हम राष्ट्रपति तक भी बात करेंगे।"
- "पाक ने जाधव को जो सजा सुनाई है, वो सोचा-समझा मर्डर है। उन्होंने कुछ गलत नहीं किया। सरकार आउट ऑफ द वे जाकर मदद करेगी। अगर जाधव को फांसी होती है तो पाकिस्तान को गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। इसका असर बाइलैटरल रिलेशन पर भी पड़ेगा।"
- राजनाथ सिंह ने कहा, "कुलभूषण के पास वैलिड भारतीय वीजा मिला था। ऐसी स्थिति में वह जासूस कैसे हो सकता है? उसे बचाने के लिए जो बन पड़ेगा, वो सरकार करेगी। मैं आश्वस्त करता हूं कि उसके साथ अन्याय नहीं होगा। जाधव बहुत पहले ही नेवी छोड़ चुका था। उसका बिजनेस था। इसी सिलसिले में वह ईरान के चाबहार आया-जाया करता था। वहां से उसे अगवा किया और बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया हुआ दिखाया गया।"


अरुणाचल पर भारत का गैरकानूनी राज, नाखुश लोग बीजिंग लौटना चाहते हैं: चीन
12 April 2017
बीजिंग: चीन के सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि अरुणाचल प्रदेश (दक्षिणी तिब्बत) के लोग भारत के गैरकानूनी राज से नाखुश हैं और मुश्किलों में जीवन बिता रहे हैं, वे लोग बीजिंग लौटना चाहते हैं। चीन ने नई दिल्ली की इस बात के लिए भी आलोचना की है कि उसने दलाई लामा को इस राज्य के दौर की इजाजत दी। बीजिंग ने यह धमकी दी है कि इससे दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को हल करने की कोशिशों पर निगेटिव इम्पैक्ट (नकारात्मक असर) असर पड़ेगा। बता दें कि चीन अरुणाचल के तवांग को तिब्बत का दक्षिणी हिस्सा मानता है। लोग अब चीन की तरफ देख रहे हैं...
- न्यूज एजेंसी के मुताबिक चाइना डेली ने बुधवार को अपने आर्टिकल में कहा, "भारत के गैरकानूनी राज में दक्षिणी तिब्बत के लोग मुश्किल हालात में जीवन बिता रहे हैं, उन्हें तमाम तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है, लोग अब चीन की तरफ देख रहे हैं और वहां लौटना चाहते हैं।"
- बता दें कि चीन ने दलाई लामा के अरुणाचल प्रदेश खासकर तवांग दौरे का विरोध किया था। चीन की मीडिया और फॉरेन मिनिष्ट्री ने कई बार तिब्बतियों के आध्यात्मिक गुरु के दौरे का विरोध किया है।
- इस आर्टिकल में उन मीडिया रिपोर्ट्स का जिक्र करने से बचने की कोशिश की गई है जिनमें कहा गया था कि चीन के कम्युनिस्ट शासन के खिलाफ 120 से ज्यादा तिब्बतियों द्वारा आत्मदाह किया जा चुका है।
दलाई और भारत ने उकसावे वाले बयान दिए
- चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन लु कांग ने कहा, "दलाई लामा के विवादित क्षेत्र के दौरे के दौरान उनके और भारतीय अधिकारियों के राजनीतिक उकसावे वाले बयानों से पहले ही रिलिजियस एक्टिविटिज एक मुद्दा बन गई हैं। चीन अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता (sovereignty) और राष्ट्रीय सुरक्षा को सेफ करने के लिए आगे कदम उठाएगा।" तवांग को भारत के हवाले करना चाहते हैं दलाई
- चाइना डेली ने लिखा है, "दलाई लामा अपने अलगाववादी संगठन का अस्तित्व बचाने के लिए भारत का सपोर्ट हासिल करने के एवज में तवांग जिले को उसके हवाले करने में देर नहीं करना चाहते। 1683 में छठे दलाई लामा का जन्म तवांग में ही हुआ था, यह तिब्बतियों के बौद्धधर्म का सेंटर भी है।"
- आर्टिकल में लिखा गया है, "भावी पीढ़ियां इतिहास में 14वें दलाई लामा को मुश्किलें खड़ी करने वाले शख्स के तौर पर भी याद रखेंगी।" बता दें कि 81 साल के दलाई लामा इस परंपरा के 14वें धर्मगुरु हैं। उन्हें नोबल शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
- चीनी मीडिया ने दलाई लामा पर चीन और भारत के सीमा विवादों को हल करने में रोड़ा अटकाने और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया।अखबार के मुताबिक दलाई लामा हाल के वर्षों में 20 से भी ज्यादा बार खुद को पब्लिकली भारत का बेटा बता चुके हैं।
क्या है सीमा विवाद?
- भारत-चीन 20 साल से सीमा विवाद का हल निकालने की कोशिश कर रहे हैं। 3488 Km लंबी एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) को लेकर दोनों देशों में विवाद है।
- चीन का दावा है कि अरुणाचल पारंपरिक तौर पर दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है, वहीं भारत अक्साई चिन इलाके को अपना बताता है। 1962 के युद्ध में चीन ने इस इलाके पर कब्जा कर लिया था।



सीरिया में कथित रासायनिक हमले की रूस को पहले से थी जानकारी?
11 April 2017
वॉशिंगटन: अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि सीरिया पर हुए कथित रासायनिक हमले के बारे में रूस को पहले से पता था. समाचार एजेंसी एपी ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा है कि अमेरिकी जांचकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे है कि विद्रोहियों के कब्जे वाले गांव पर हुए सीरिया सरकार के कथित रासायनिक हमले के बारे में रूस को पहले से जानकारी थी.
इबलिब प्रांत में अस्पताल के ऊपर उड़ता देखा गया था रूस का ड्रोन
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि गत चार अप्रैल को इबलिब प्रांत में एक अस्पताल के ऊपर रूस का एक ड्रोन उड़ता हुआ देखा गया था. इस अस्पताल में लोग इलाज कराने के लिए पहुंचे थे. अमेरिका खुफिया एजेंसियों का मानना है कि बाद में या तो रूस या सीरिया की सेना ने इस अस्पताल पर बम गिरा दिया. ऐसा कथित रासायनिक हथयारों के हमले को छिपाने के लिए किया गया.
गौरतलब है कि अमेरिका ने शुक्रवार को सीरिया की सेना के शेराट एयरबेस पर मिसाइल हमला किया था. इस हमले ने सीरिया के कुल ऑपरेशनल विमानों का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा बर्बाद कर दिया. ये एयरक्राफ्ट्स या तो बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए या फिर पूरी तरह से बर्बाद हो गए. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कथित रासायनिक हमले के लिए सीरिया के लड़ाकू विमानों ने इसी एयरबेस से उड़ान भरी थी.
अमेरिकी वाणिज्य मंत्री विल्बुर रॉस ने कहा कि मिसाइल हमले में सीरियाई वायुसेना का 20 प्रतिशत हिस्सा नष्ट हो गया. अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने दावा किया कि शुक्रवार का सैन्य अभियान जबर्दस्त रूप से सफल रहा. उन्होंने यह भी माना कि मिसाइल हमले में सीरिया के रनवे नष्ट नहीं किए जा सके.
हमले में 80 से ज्यादा लोग मारे गए : टर्की
इसी बीच, तुर्की ने कहा कि मंगलवार (4 अप्रैल) के हमले के पीड़ितों से लिए नमूनों से यह संकेत मिलते हैं कि ये लोग बेहद जहरीले नर्व एजेंट सेरिन के संपर्क में आए थे। खान शेखुन में हुए इस हमले में 80 से ज्यादा लोग मारे गए थे।
निशाने पर नहीं थे रनवे
टिलरसन ने कहा, ‘रनवे के निर्माण की प्रकृति के चलते रनवे निशाने पर नहीं थे. हमारा सैन्य अनुमान यह है कि हम विभिन्न रनवे को गंभीर नुकसान नहीं पहुंचा सके.’ उन्होंने कहा, ‘वे (रनवे) बहुत मोटे हैं और वे इस तरीके से बने हैं कि नुकसान के कुछ घंटों बाद उनकी आसानी से मरम्मत की जा सकती है. इसलिए लक्ष्य एअरबेस को इस तरह निशाना बनाने का था कि वहां परिचालन ठप हो जाए.’


कुलभूषण जाधव की सजा के नतीजे भुगतने को तैयार रहे पाकिस्तान
11 April 2017
इस्लामाबाद: भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में ‘जासूसी’ के लिये मौत का फरमान सुनाये जाने की घटना को पाकिस्तानी मीडिया ने मंगलवार (11 अप्रैल) को ‘अभूतपूर्व’ बताया है और विशेषज्ञ उसके कूटनीतिक दुष्परिणामों पर ध्यान दिला रहे हैं.
पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने जाधव को ‘जासूसी एवं विध्वंसकारी गतिविधियों’ के लिए दोषी ठहराते हुए उन्हें मौत की सजा सुनायी. सेना की मीडिया शाखा ने सोमवार (10 अप्रैल) को एक बयान में कहा कि यह सजा ‘फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल’ ने सुनायी और सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने इसकी पुष्टि की.
दक्षिणपंथी अंग्रेजी भाषी अखबार ‘द नेशन’ ने अपने पहले पन्ने पर ‘डेथ टू स्पाई स्पाइक्स टेंशन’ (जासूस की सजाए मौत बढ़ा रही है तनाव) शीषर्क से अपनी प्रमुख खबर में टिप्पणी की कि ‘सोमवार को एक सैन्य अदालत ने दोनों परमाणु सम्पन्न देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव और बढ़ाते हुए हाई प्रोफाइल भारतीय जासूस को सजाए मौत सुनायी.’
अखबार ने राजनीतिक एवं रक्षा विशेषज्ञ डॉ. हसन अस्करी के हवाले से लिखा कि जाधव को फांसी देने का फैसला ‘दोनों देशों के बीच तनाव में और इजाफा करेगा.’ अस्करी ने कहा, ‘सेना ने सख्त सजा दी है जो पाकिस्तानी कानून के मुताबिक है.’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन हमें यह देखना होगा कि पाकिस्तान इसके राजनीतिक एवं कूटनीतिक दुष्प्रभावों को झेल सकता है या नहीं.’
‘द नेशन’ पर ‘नवा-ए-वक्त’ समूह का मालिकाना हक है, जो परंपरागत रूप से पाकिस्तानी संस्थानों से जुड़ा है और इसे भारत के मुखर आलोचक के तौर पर जाना जाता है. अन्य अखबारों ने भी इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है और अधिकतर ने कथित जासूस को सुनायी गयी सजा पर फोकस किया है.
‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने अपने पन्ने पर ‘सेल्फ कन्फेस्ड इंडियन स्पाई अवार्डेड डेथ सेंटेंस’ (स्वघोषित भारतीय जासूस को मौत की सजा) शीषर्क से खबर दी है और इस फैसले को ‘अभूतपूर्व’ बताया है.
इसकी रिपोर्ट में इस फैसले से दोनों ‘धुर विरोधी’ पड़ोसी देशों के बीच तत्काल कटु राजनीतिक विवाद पनपने की आशंका जतायी गयी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जाधव हुसैन मुबारक पटेल के नाम से पाकिस्तान में गुप्त तरीके से रहकर संचालन कर रहा था.
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार ‘डॉन’ ने इस फैसले को ‘विरल कदम’ बताया है. अखबार ने कहा कि यह फैसला ऐसे वक्त में सामने आया है जब पाकिस्तान और भारत के बीच पहले से तनाव जारी है. अखबार ने पूरे स्तंभ में खबर प्रकाशित की और फैसले पर विशेषज्ञों की राय भी दी.
इसके अनुसार कुछ लोगों का मानना है कि भारत की प्रतिक्रिया मजबूत है जबकि अन्य इस बात पर कायम रहे कि इससे संबंध में कोई नाटकीय बदलाव नहीं होगा.
अखबार ने लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) तलत मसूद के हवाले से लिखा, ‘लंबे समय से पाकिस्तान यह साबित करने के लिये संघर्ष कर रहा है कि पाकिस्तान की अस्थिरता में भारत का हाथ है. मामले में मदद मांगने के लिये हमारे राजदूत कई देश गये लेकिन कुछ भी हाथ नहीं आया. अब हमने अपना कदम उठाया है, यही ठीक है. हमें भारत के जवाबी हमले के लिये तैयार रहना चाहिए.’
मसूद ने कहा, ‘यह सही फैसला है. यह कानून के मुताबिक है और कानूनी तौर पर न्यायोचित है. बहरहाल हमें इस बात के लिये तैयार रहना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसे लेकर प्रतिक्रिया होगी और यहां तक कि पाकिस्तान को नियंत्रण रेखा पर उल्लंघनों में इजाफा को लेकर भी तैयार रहना चाहिए.’
राजनीतिक विशेषज्ञ एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) शहजाद चौधरी ने बताया, ‘मुझे नहीं लगता कि इस फैसले के नतीजतन भारत के साथ हमारे रिश्तों में बदलाव आयेगा.’ ‘जिओ न्यूज’ में वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने कहा, ‘सबसे पहले पाकिस्तान को जासूस के खिलाफ मिले सबूतों को सार्वजनिक करना चाहिए और अन्य देशों एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे साझा करना चाहिए.’
हामिद ने कहा, ‘दूसरी बात यह कि आखिर हर कोई पहले ही भारत की प्रतिक्रिया को लेकर क्यों बात कर रहा है? मेरा मानना है कि भारत को सूझबूझ से काम लेना चाहिए और इस खबर पर बिल्कुल ही प्रतिक्रिया नहीं करनी चाहिए. अगर लोगों को अजमल कसाब की फांसी याद हो तो पाकिस्तान इस पूरे मुद्दे पर खामोश रहा था. हमारा विशेषाधिकार सामान्य था, अगर कसाब के खिलाफ सबूत हैं तो उसे भारतीय कानून के मुताबिक सजा सुनायी जानी चाहिए.’
उन्होंने कहा, ‘इसलिए भारत को सूझबूझ से काम लेना चाहिए, ना कि इन खबरों पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए और ना ही जाधव को किसी नायक के तौर पर परोसना चाहिए. मीडिया को भी यही लहजा अपनाना चाहिए.’
वरिष्ठ पीपीपी नेता एवं पाकिस्तान के पूर्व गृहमंत्री रहमान मलिक ने कहा, ‘अगर कानून ने जाधव को दोषी पाया है तो हमें उसे मौत की सजा सुनाने का हक है और सजा का पालन किया जाना चाहिए. हमें भारतीय या अंतरराष्ट्रीय, किसी के भी दबाव में नहीं झुकना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सजा का पालन हो.’


US ने भेजा वॉरशिप, उत्तर कोरिया बोला- हम जंग के लिए तैयार
11 April 2017
सीरिया में मिसाइल हमले के बाद अब अमेरिका ने कोरियाई प्रायद्वीप में जंगी जहाज भेजा है, जिससे उत्तर कोरिया के साथ तनाव गहरा गया है. उत्तर कोरिया ने अमेरिका की ओर से कोरियाई प्रायद्वीप में जंगी जलपोत भेजने को गलत बताते हुए कड़ी चेतावनी दी है. उसने कहा है कि अमेरिका उसकी सीमाओं में जबरन घुस रहा है. ऐसे में अगर तनाव बढ़ता है, तो वह अमेरिका से जंग के लिए पूरी तरह तैयार है.
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केमिकल अटैक के बाद सीरिया में मिसाइल हमले का आदेश देकर सबको हैरान कर दिया था. शुक्रवार को अमेरिकी नौसेना ने जंगी जहाज से सीरिया के इडलिब इलाके में 59 मिसाइलें दागी थी. इसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से उत्तर कोरिया को कड़ा संदेश माना जा रहा है. अब अमेरिकी नौसेना के USS कार्ल विंसनएयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के सिंगापुर से उत्तर कोरिया की ओर जाने से तनाव गहरा गया है.
मिसाइल परीक्षण करने पर बनाई हमले की योजना
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध के बावजूद उत्तर कोरिया की ओर से मिसाइलों और परमाणु परीक्षण जारी रखने के चलते अमेरिका ने कार्रवाई करने की योजना बनाई है. संयुक्त राष्ट्र उत्तर कोरिया पर मिसाइल और परमाणु परीक्षण लगातार जारी रखने पर प्रतिबंध भी लगा चुका है. वैश्विक मंच से दुनिया के कई देशों ने भी इन मिसाइल परीक्षणों की कड़ी आलोचना की थी. उत्तर कोरिया पांच परमाणु परीक्षण कर चुका है. इनमें से दो परीक्षण पिछले साल हुए थे. उपग्रहों से प्राप्त विशिष्ट तस्वीरों का विश्लेषण कहता है कि उत्तर कोरिया संभवत: छठे परीक्षण की तैयारी कर रहा है.
उत्तर कोरिया सीमा पर चीन ने तैनात किए डेढ़ लाख सैनिक
वहीं, उत्तर कोरिया पर अमेरिकी हमले से उपजने वाले भावी हालात से निपटने के लिए चीन ने भी कमर कस ली है. चीन ने उत्तर कोरिया सीमा पर करीब डेढ़ लाख सैनिकों को तैनात कर दिया है. पीपुल्स लिबरेशन आर्मी फोर्स की मेडिकल और बैकअप यूनिटों को चीन-उत्तर कोरिया सीमा पर स्थित यालू नदी के किनारे तैनात किया गया है.
जंग के लिए तैयार उत्तर कोरिया
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी KCNA के मुताबिक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका ने कोरियाई प्रायद्वीप में जंगी जहाज भेजने का कदम जल्दबाजी में उठाया है. वह हमारी सीमा में घुसने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका की ओर से कोरियाई प्रायद्वीप पर जंगी जहाज भेजने के बाद उत्तर कोरिया का यह पहला बयाना है. उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका युद्ध चाहता है, तो उत्तर कोरिया इसके लिए पूरी तरह तैयार है.
ट्रंप पहले ही दे चुके हैं हमले के संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने उत्तर कोरिया पर हमले के संकेत पहले ही दे चुके हैं. अमेरिका ने साफ कहा था कि अगर संयुक्त राष्ट्र उत्तर कोरिया के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है, तो वह खुद कार्रवाई करेगा. खास बात यह है कि USS कार्ल विंसनएयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को ऑस्ट्रेलिया रवाना होना था, लेकिन उसने इसको रद्द कर दिया और कोरियाई प्रायद्वीप पहुंच गया. अमेरिका के इस कदम से लगता है कि वह उत्तर कोरिया पर जल्द ही हमला करेगा.



मिस्र: दो चर्चों में धमाकों के बाद देश में इमरजेंसी लागू, तीन दिनों के शोक की घोषणा
10 April 2017
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सीसी ने दो शहरों के गिरजाघरों में हुए धमाकों के बाद देश में तीन महीने के आपातकाल का एलान किया है। रविवार को हुए इन धमाकों में 45 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 120 से अधिक लोग घायल हुए थे। इन धमाकों के बाद मिस्र ने तीन दिन के शोक की घोषणा की गई है। राष्ट्रपति अल-सीसी ने घायलों के इलाज के लिये सैन्य अस्पतालों को खोलने के आदेश दिया है। राष्ट्रीय रक्षा परिषद की बैठक के बाद राष्ट्रपति निवास पर अपने भाषण के दौरान सीसी ने इसका एलान किया है। इसके साथ ही सिसी ने बम विस्फोटों के बाद महत्वपूर्ण आधारभूत ढांच की रक्षा के लिए सैन्य तैनाती का आदेश दिया है।
आईएस ने ली धमाकों की जिम्‍मेदारी
रविवार को हुए एलेक्जेंडरिया और तांता शहरों के गिरजाघरों में हुए विस्फोटों की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट समूह ने ली है। आईएसआईएस की संवाद समिति अमाक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कहा है कि इस्लामिक स्टेट के आतंकी दस्‍ते ने तांता और अलेक्जेंड्रिया में दोनों गिरजाघरों पर हमलों को अंजाम दिया। यह बम धमाके उस वक्‍त हुए जब रविवार को प्रार्थना सभा के लिए कॉप्टिक चर्चों में काफी संख्‍या में श्रद्धालु जुटे थे। हाल के वर्षों में यहां अल्पसंख्यक ईसाइयों पर किया गया यह सबसे बड़ा हमला है।
पहला धमाका
स्वास्थ्य मंत्रालय के बयान के मुताबिक पहला धमाका काहिरा से करीब 120 किलोमीटर दूर नील डेल्टा में तांता शहर के सेंट जॉर्ज कॉप्टिक चर्च में हुआ। इसमें 27 लोगों की मौत हुई जबकि 78 अन्य घायल हो गए। सुरक्षा सूत्रों ने कहा था कि शुरुआती जांच में संकेत मिले है कि ईस्टर से पहले के रविवार के मौके पर चर्च में इसाई प्रार्थना के दौरान एक शख्स ने चर्च में विस्फोटक उपकरण रखे थे। कुछ का कहना है कि इसे एक आत्मघाती हमलावर ने अंजाम दिया है। इस धमाके में मारे जाने वालों में तांता कोर्ट के प्रमुख सैमुअल जार्ज भी शामिल हैं।
एलेक्जेंड्रिया में आत्‍मघाती हमला
पुलिस के मुताबिक इसके कुछ घंटों बाद अलेक्जेंड्रिया के मनशिया जिले के सेंट मार्क्स कॉप्टिक ऑर्थोडॉक्स कैथेड्रल में भी एक आत्मघाती हमलावर ने धमाका किया। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक एलेक्जेंड्रिया के आत्मघाती बम धमाके में पुलिस कर्मियों समेत कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई जबकि 41 अन्य घायल हुए।
गृह मंत्रालय ने जारी किया बयान
एक बयान में गृह मंत्रालय ने कहा कि धमाके के वक्त पोप तावाड्रोस द्वितीय कैथेड्रल में मौजूद थे और प्रार्थना का नेतृत्व कर रहे थे लेकिन हमले में उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा है। इस बीच सुरक्षा बलों ने तांता शहर के सिडी अब्दुल रहीम मस्जिद में दो विस्फोटक उपकरणों को निष्क्रिय किया है। इस बयान में यह भी कहा गया है कि एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटक बेल्ट का इस्तेमाल कर खुद को एलेक्जेंड्रिया में चर्च के अंदर उडाने की साजिश रची थी लेकिन सुरक्षा बलों ने उसे रोक दिया। मंत्रालय ने कहा कि आत्मघाती हमलावर को कैथेड्रल में रोकने की कोशिश के दौरान एक पुलिस अधिकारी और एक महिला पुलिसकर्मी समेत तीन लोग मारे गये।


भारत-ऑस्ट्रेलिया में हुए 6 करार, आतंकवाद के मुद्दे पर भी समझौता
10 April 2017
भारत दौरे पर आये ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल के साथ सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साझा प्रेस कान्फ्रेंस को संबोधित किया. इस दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कुल 6 समझौते हुए. इनमें आतंकवाद के खात्मे को लेकर किया गया मुद्दा अहम है.
प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत दोस्त हैं, दोनों देशों की दोस्ती से दोनों देशों के नागरिकों का विकास होगा.
मोदी की तारीफ में पढ़े कसीदे
इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री का राष्ट्रपति भवन में भी स्वागत किया गया. इस मौके पर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत तरक्की और विकास के असाधारण रास्ते पर बढ़ रहा है. ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री का आज सुबह राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत किया गया. टर्नबुल चार दिवसीय भारत के दौरे पर है. सम्भावना है कि वह प्रधान मंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा और व्यापार जैसे मुद्दों पर बात कर सकते हैं.
भारत की पूरी दुनिया में सराहना
अपने स्वागत समारोह के अवसर पर पीएम मैल्कम टर्नबुल ने कहा, 'हमारा भारत के साथ मजबूत रिश्ता है और इसे और मजबूत करना है. हम इतिहास और मूल्यों के द्वारा एक-दूसरे से जुड़े हैं. आज ऑस्ट्रेलिया में करीब 5 लाख लोग भारतीय मूल के हैं. इसलिए हम दोनों देश साझी नियति के लिए एक-दूसरे से जुड़े हैं और हम दोनों प्रधानमंत्री यह सुनिश्‍च‍ित करने की कोश‍िश करेंगे कि हमारे रिश्ते और मजबूत हों. दोनों देश तरक्की और विकास के रास्ते की असाधारण यात्रा पर आगे चल रहे हैं. आज भारत की उपलब्ध‍ियों की पूरी दुनिया में सराहना हो रही है. हम भारत के साथ अपने रिश्ते और गहरा करना चाहते हैं.'


सीरिया: तीसरे विश्वयुद्ध की ओर बढ़ रही है दुनिया? जानें कौन देश किसके साथ
10 April 2017
सीरिया में केमिकल हमले के बाद दुनिया की दो महाशक्तियां फिर आमने-सामने है. सीरिया की असद सरकार के बचाव के लिए रूस ने अपना एक जंगी पोत भी सीरिया भेज दिया है. वहीं अमरीका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने सीरिया में विद्रोही ठिकानों पर हुए रासायनिक हमले के लिए रूस को ज़िम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि रूस इस बात पर सहमत हुआ था कि वह आश्वस्त करेगा कि सीरिया के रासायनिक हथियारों का ज़ख़ीरा खत्म हो जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ. दुनिया की इन दो बड़ी शक्तियों के आमने-सामने आ जाने के बाद ये कयास लग रहे हैं कि क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर है. अगर ऐसी स्थिति आती है तो कौन देश किसके साथ होगा ये सवाल भी कौंध रहा है.
अमेरिका के साथ कौन-कौन से देश?
सीरिया में जब 6 साल पहले अरब स्प्रिंग के प्रभाव में विद्रोह शुरू हुए थे तभी से अमेरिका असद विरोधी समूहों के पक्ष में खड़ा हो गया था. अरब का मामला है तो उसके पक्ष में सबसे पहले खड़ा दिखता है इस्राइल. इसके अलावा नैटो के सहयोदी देश- ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी समेत कई देश अमेरिका के साथ हर अंतरराष्ट्रीय मामले पर साथ दिखते हैं. वहीं सीरिया का पड़ोसी देश तुर्की पहले से ही अमेरिका के साथ है. सीरिया बॉर्डर पर रूसी विमान के मार गिराने के कारण रूस के तुर्की का तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है. अमेरिका के सहयोगी ग्रुप-7 के सदस्य देशों के विदेश मंत्री इटली में मुलाकात कर रहे हैं. इस मीटिंग में इस बात पर चर्चा की जाएगी कि रूसी सरकार पर सीरियाई राष्ट्रपति बशर-अल-असद से दूरी बनाने का दबाव किस तरह बनाया जाए.
ब्रिटेन
ब्रिटेन की सरकार ने अमेरिकी हमले का पूरा समर्थन किया है. ब्रितानी रक्षा मंत्री माइकल फैलन ने अमरीकी कार्रवाई को सही और सीमित बताया.
तुर्की
तुर्की के राष्ट्रपति तैयप अर्दोआन ने अमरीकी कार्रवाई को सीरिया में हो रहे कथित युद्ध अपराध का सही जवाब बताया है.
इस्राइल
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने एक बयान जारी कर अमरीकी कार्रवाई का पूरा समर्थन किया.
फ्रांस
फ्रांस वैसे अमेरिका के साथ खड़ा दिखता है लेकिन सीरिया में इसकी स्थिति पशोपेश वाली है. पेरिस में हुए आतंकी हमलों के बाद फ्रांस के युद्धक विमानों ने सीरिया में आईएसआईएस के ठिकानों पर बमबारी की थी लेकिन रूस के साथ तनाव की स्थिति में फ्रांस अमेरिका के साथ ही खड़ा होगा.
सऊदी अरब
अमेरिका की ही तरह सुन्नी बहुल खाड़ी देश सऊदी अरब भी किसी भी कीमत पर असद को हटाने पर अड़ा है. 2013 में जब असद पर रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का आरोप लगा था तब सऊदी अरब चाहता था कि अमेरिका हस्तक्षेप करे. अमेरिका द्वारा ऐसा न करने पर सऊदी अरब नाराज था, हालांकि अब ये देश अमेरिका के नेतृत्व में आईएसआईएस के खिलाफ अभियान में शामिल है.
रूसी खेमे में कौन-कौन से देश शामिल
रूस, ईरान और सीरिया की सरकार अगले अमरीकी हवाई हमले की स्थिति में जवाब देने की मुद्रा में दिख रही है. अमेरिका बीते हफ्ते सीरिया के एयरबेस पर हमला कर चुका है. अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप अपने एक भाषण में सीरियाई राष्ट्रपति को तानाशाह तक कह चुके हैं. सीरियाई सरकार के मुख्य सैन्य सहयोगी रूस ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन करने वाली और मनगढ़ंत आधार पर की गई आक्रामक कार्रवाई बताया. रूसी सरकार के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोफ़ ने अमरीका और रूस के पहले से खस्ताहाल संबंधों के गंभीर रूप से बिगड़ने की चेतावनी दी. हालांकि, रूस की संसद ड्यूमा ने संकेत दिए हैं कि अमरीकी कार्रवाई के बाद रूस अपने हमले तेज़ नहीं करेगा.
ईरान
सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के समर्थक ईरान ने अमरीकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है.


अमरीका की चेतावनी,'अगर UN ने सीरिया रसायनिक हमले पर नहीं निभाई जिम्मेदारी, तो हम खुद करेंगे कार्रवाई'
6 April 2017
वॉशिंगटन: संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत निकी हेली ने सीरिया को लेकर सुरक्षा परिषद की एक बैठक के दौरान कहा कि अगर संयुक्त राष्ट्र लगातार अपनी जिम्मेदारी पूरी करने में नाकाम साबित होता है, तो कई मौके ऐसे आते हैं जब अमरीका अपने स्तर पर कार्रवाई करने को मजबूर हो जाता है।'
रूस पर साधा निशाना
हेली ने रूस पर निशाना साधते हुए कहा कि जबतक रूस शह देना बंद नहीं करता है, तब तक असद इस तरह के रसायनिक हमले बंद नहीं करेंगे। मालूम हो कि सीरिया के इडलिब प्रांत में मंगलवार को हुए एक रसायनिक हमले में 75 लोगों की मौत हो गई थी। बड़ी संख्या में बच्चे इस हमले से प्रभावित हुए हैं। इन्हीं हमलों के मद्देनजर UN में सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई थी।
उधर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सीरिया में हुए रसायनिक हमले पर प्रतिक्रिया करते हुए कहा कि मंगलवार को सीरिया के नागरिकों पर हुआ यह हमला 'कई सीमाओं को लांघ' चुका है। ट्रंप ने यह भी कहा कि इस हमले के बाद बशर अल-असद की सत्ता के प्रति उनका नजरिया पूरी तरह से बदल गया है। ट्रंप ने जिस समय यह बयान दिया, उस समय जॉर्डन के सुल्तान किंग अब्दुल्ला उनके साथ ही ब्हाइट हाऊस में मौजूद थे। किंग अब्दुल्ला अमरीकी दौरे पर आए हुए हैं। ट्रंप ने इस हमले को इंसानियत पर किया गया हमला बताया। ट्रंप ने कहा,'सीरिया में बच्चों के ऊपर किया गया रसायनिक हमले का मुझपर बहुत गहरा असर पड़ा है। सीरिया और असद सरकार के प्रति मेरा रवैया बदल गया है।' इस घटना से पहले ट्रंप ने कई बार कहा था कि सीरिया की असद सरकार को हटाना उनके लिए प्राथमिकता नहीं है। ट्रंप ने कहा था कि असद को हटाने से कहीं ज्यादा वरीयता इस्लामिक स्टेट (ISIS) का खात्मा करना है।


पाकिस्तान छोड़कर भागने की तैयारी में नवाज शरीफ !
6 April 2017
इस्लामाबादः पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पनामागेट मामले में फंस गए हैं। इससे पहले कि सुप्रीम कोर्ट उनके खिलाफ सजा सुनाए, वो बीमारी के बहाने से देश छोड़कर भागना चाहते हैं। पाकिस्तान में इस तरह की चर्चाएं तेज हो गईं हैं। इस बीच पाकिस्तान सरकार ने अपोजिशन के आरोपों और कयासों को खारिज कर दिया है। सरकार ने कहा कि नवाज शरीफ की किडनी में स्टोन है और वो इसका इलाज करा रहे हैं। बता दें कि इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने आरोप लगाया था कि नवाज शरीफ सुप्रीम कोर्ट द्वारा पनामागेट स्कैम में दोषी ठहराए जाने के डर से विदेश भाग सकते हैं।
पीटीआई ने आरोप लगाया था कि नवाज इलाज का बहाना बनाकर विदेश चले जाएंगे और वहां से फिर नहीं लौटेंगे। अपोजिशन ने सुप्रीम कोर्ट से ये भी मांग की थी कि जब तक पनामागेट मामले की सजा पूरी नहीं हो जाती तब तक नवाज के विदेश जाने पर नजर रखी जाए। नवाज की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने मामला बढ़ता देख बुधवार शाम सफाई दी। बता दें कि पिछले साल भी नवाज शरीफ ओपन हार्ट सर्जरी के लिए लंदन गए थे और काफी वक्त तक वहां रहे थे।
क्या है पनामागेट और नवाज फैमिली पर आरोप?
पनामागेट स्कैम का खुलासा पिछले साल हुआ था। भारत के भी कई लोगों नाम भी इस स्कैम में सामने आए थे। इनमें से कुछ के खिलाफ जांच भी हुई। आरोप है कि नवाज शरीफ और उनकी फैमिली ने फर्जी कंपनियां बनाकर विदेश में करोड़ों डॉलर की प्रॉपर्टी बनाई। शरीफ की बेटी मरियम और उनके बेटे हुसैन के खिलाफ अपोजिशन ने सुप्रीम कोर्ट में सबूत भी पेश किए थे। खास बात ये है कि जैसे ही ये मामला सामने आया था, उसी दौरान नवाज नवाज सर्जरी के लिए लंदन चले गए थे। उस दौरान उनकी पूरी फैमिली साथ थी।
सुप्रीम कोर्ट सियासी तौर पर बेहद अहम इस मामले की सुनवाई फरवरी में ही पूरी कर चुका है। हालांकि, उसने फैसला अब तक नहीं सुनाया और इसे सुरक्षित रखा है। पाकिस्तान की मीडिया के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से देश में हालात बिगड़ सकते हैं। अपोजिशन सरकार के खिलाफ एकजुट हो सकता है। माना जा रहा है कि इस महीने के दूसरे हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ सकता है। पांच जजों की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की थी। इसमें चीफ जस्टिस भी शामिल थे।

तीसरे विश्वयुद्ध की आहट, अमरीका ने घेरनी शुरू की इस देश की सीमाएं !
6 April 2017
वॉशिंगटनः अब तक के इतिहास में पहली बार अमरीकी टैंक रूसी सीमा के 700 किलोमीटर की दूरी पर पहुंच गए हैं। रशिाय टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक़, अमरीकी ने टैंकों और अन्य भारी हथियारों को रूसी सीमा से लगे एस्टोनिया में तैनात कर दिया है।
रूस के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि अमरीका ने उसकी सीमा के इतने निकट अपने हथियारों को तैनात करके, मास्को को इतनी बड़ी चुनौती पेश की हो। दुनिया के रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि तीसरे विश्वयुद्ध की स्थिति में पहुंचने से पहले अमेरिका रूस को सभी ओर से घेर कर रखना चाहता है। इसे उन्होंने तीसरे विश्व युद्ध की आहट भी माना है।
वाशिंग्टन द्वारा इन आधुनिक सैन्य उपकरणों की तैनाती से पता चलता है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने भी पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का अनुसरण करते हुए, रूस विरोधी नीति पर काम करना शुरू कर दिया है। बराक ओबामा ने पूर्वी यूरोप में पोलैंड और रोमानिया को अमरीकी मिसाइल शील्ड की तैनाती के लिए चुना था। रूस को अपनी सीमाओं पर नए अनुभवों का ऐसी स्थिति में सामना करन पड़ रहा है, जब अमरीका और नैटो दिन प्रतिदिन उसकी सीमाओं के क़रीब आते जा रहे हैं।


उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रक्षेपण पर भड़का US, कहा - खुले हैं सभी विकल्प
5 April 2017
उत्तर कोरिया द्वारा जापान सागर में एक और बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने के कुछ ही घंटे बाद अमेरिका ने कहा है कि वह प्यांगयांग द्वारा एक के बाद एक किए जा रहे परमाणु हथियारों के परीक्षण के खतरे से निपटने के लिए हर विकल्प पर विचार कर रहा है. मिसाइल प्रक्षेपण की पुष्टि करते हुए अमेरिकी प्रशांत कमान ने कहा कि उसके तंत्रों ने उत्तर कोरिया द्वारा चार अप्रैल को सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर किए गए मिसाइल प्रक्षेपण को दर्ज किया है.
कमान ने एक बयान में कहा कि एकल बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण सिनपो के पास स्थित थल आधारित केंद्र से हुआ. मिसाइल के पथ पर तब तक नजर रखी गई, जब तक वह हवाई के समयानुसार सुबह 11 बजकर 51 मिनट पर जापान सागर में उतर नहीं गया.
गुरुवार को होगी बैठक
बयान में कहा गया कि शुरुआती आकलन दिखाते हैं कि मिसाइल मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल केएन-15 थी. विदेश मंत्री रेक्स टिलरसर ने एक बयान में कहा कि उत्तर कोरिया ने कल एक और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया, अमेरिका उत्तर कोरिया के बारे में काफी कुछ कह चुका है. हमें और कुछ नहीं कहना है. यह मिसाइल प्रक्षेपण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके चीनी समकक्ष शी चिनफिंग के बीच गुरुवार को फ्लोरिडा में होने जा रही बैठक से ठीक पहले किया गया है.
व्हाइट हाउस ने कड़ी प्रतिक्रिया
इस वार्ता में दोनों नेताओं के बीच उत्तर कोरिया की परमाणु संबंधी महत्वाकांक्षाओं समेत विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की संभावना है. व्हाइट हाउस ने इस प्रक्षेपण पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्योंगयांग के लिए समय पूरा हो रहा है. व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अब यह बेहद आपात स्थिति है क्योंकि मुझे लगता है कि समय तेजी से पूरा हो रहा है.
जापान ने भी की निंदा
इससे पहले जापान ने भी प्रक्षेपण की निंदा की और कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को उल्लंघन है. मुख्य कैबिनेट सचिव योशिहिदे सुगा ने कहा कि जापान उत्तर कोरिया द्वारा बार-बार उठाए जा रहे भड़काऊ कदमों को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा. सरकार ने इसका कड़ा विरोध किया है और कड़ी निंदा की है. प्योंगयांग परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम एक ऐसी लंबी दूरी की मिसाइल विकसित करना चाहता है जो अमेरिका के मुख्य भूभाग तक वार कर सके और उसने अभी तक पांच परमाणु परीक्षण किए हैं, इनमें से दो पिछले साल किए गए.
अमेरिका ने दी थी चेतावनी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में चेतावनी दी थी कि यदि चीन आगे नहीं आता है तो वह अकेला ही उत्तर कोरिया के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार है, यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच मुलाकात होने वाली है.


सीरिया में रासायनिक हमलों से दांव पर हैं आम नागरिकों की जिंदगी
5 April 2017
सीरिया में मंगलवार को किए गए रासायनिक हमले में 100 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में दर्जनों बच्चे हैं। करीब 400 लोग जख्मी हैं। हमला विद्रोहियों के प्रभाव वाले इदलिब प्रांत के खान शेखहुन शहर में किया गया। यूनियन ऑफ मेडिकल केयर ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार सुबह के वक्त शहर के एक रिहायशी इलाके में करीब 40 बार हवाई हमले किए गए।
सीरिया में चल रहे सिविल वॉर के दौरान कई बार रासायनिक हमले किए जा चुके हैं। सीरिया के विद्रोहियों का कहना है कि सरकार की ओर से लड़ रहा गुट खौफ बनाने के लिए केमिकल बम इस्‍तेमाल कर रहा है। इन बमों से क्‍लोरीन तथा कई दूसरी घातक गैसें निकलती हैं, जिनसे इसके प्रभाव वाले क्षेत्र में लोगों की मौत हो जाती है। दूसरी ओर सीरियाई सरकार ने आरोप को खारिज किया है।
आइए आपको बताएं कि पहले कब और कितनी बार सीरिया पर रासायनिक हमले हो चुके हैं:
अगस्‍त 20, 2012: पूर्व अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि केमिकल हथियार इस्‍तेमाल करने से पहले से पहले कई बार सोचना चाहिए। क्‍योंकि इसका असर व्‍यापक पैमाने पर होता है तथा इसकी ज़द में आम लोग भी आ जाते हैं।
मार्च 19, 2013: उत्‍तरी सीरिया के खान अल-अस्‍ल में किए गए एक रासायनिक हमले में 26 लोग मारे गए थे। इसमें एक दर्जन सीरियाई सरकार के सैनिक थे। यूनाइटेड नेशंस की जांच में पता चला था कि इस हमले में नर्व गैस सैरिन का उपयोग किया गया था। हालांकि हमला किसने किया था, यह कोई नहीं जान सका था।
अगस्‍त 21, 2013: सीरिया की राजधानी में रासायनिक हमले की वजह से सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी। यूनाइटेड नेशंस की जांच में पता चला था कि जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल में सैरिन भरकर नागरिक क्षेत्र पर हमला किया गया था। अमेरिका ने कहा था कि यह हमला सीरिया की सरकार ने करवाया था।
अगस्‍त 31, 2013: सीरियाई नागरिकों पर लगातार हो रहे रासायनिक हमले के बाद तत्‍कालीन अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा ने सीरियाई सरकार के प्रतिष्‍ठानों पर हमला करने के लिए अमेरिकी संसद कांग्रेस में प्रस्‍ताव रखा था। लेकिन पर्याप्‍त समर्थन न मिलने की वजह से यह निरस्‍त हो गया था।
अक्‍टूबर 14, 2013: सीरिया को रासायनिक हथियार बनाने, उसका स्‍टॉक बनाने और उपयोग करने की अनुमति मिल गई।
अगस्‍त 7, 2015: यूनाइटेड नेशंस सिक्‍योरिटी काउंसिल की एक टीम को सीरिया में रासायनिक हथियारों के इस्‍तेमाल की जांच के लिए भेजा गया। कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि सीरिया के नियंत्रण वाले स्‍थानों पर बार-बार क्‍लोरीन गैस से हमला किया जा रहा है। हालांकि क्‍लोरीन गैस को नर्व गैसों के बराबर जहरीला नहीं माना जाता है, लेकिन इसके उपयोग की मात्रा पर इसका दुष्‍प्रभाव निर्भर करता है।
अगस्‍त 24, 2016: यूएन की जांच में पता चला कि सीरियाई सरकार ने विरोधियों पर हमले के लिए क्‍लोरीन गैस से भरे हेलिकॉप्‍टर तैनात किए थे। खासतौर पर उत्‍तरी इदलीब प्रांत में इसका सबसे ज्‍यादा प्रयोग किया गया था। आतंकी गुट आईएसआईएस ने भी रासायनिक हमलों के लिए मस्‍टर्ड गैस का उपयोग किया है।
फरवरी 28, 2017: सीरियाई सरकार का सहयोग कर रहे रूस ने चीन के साथ मिलकर सीरिया पर रासायनिक हथियारों के उपयोग पर लगने वाले प्रतिबंध के खिलाफ वीटो का इस्‍तेमाल किया था।


पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाकर फिदायीन हमला, छह लोगों की मौत
5 April 2017
लाहौर: लाहौर में जनगणना दल की सुरक्षा में तैनात पाकिस्तानी जवानों को निशाना बनाकर किए गए हमले में छह लोगों की मौत हो गई और 18 अन्य लोग घायल हो गए. मरने वालों में पाकिस्तान के चार जवान भी शामिल हैं. इस हमले को एक युवा आत्मघाती हमलावर ने अंजाम दिया.
घायलों को अस्पताल भेजा गया
यह धमाका पंजाब प्रांत की प्रांतीय राजधानी लाहौर में छावनी इलाके के नजदीक हुआ. पंजाब प्रांत की सरकार के प्रवक्ता मलिक मोहम्मद खान ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा, ‘‘मारे गए छह लोगों में सेना के चार जवान शामिल हैं. धमाके में लगभग एक दर्जन लोग घायल हुए हैं जिन्हें कम्बाइंड मिल्रिटी हॉस्पिटल और लाहौर स्थित जनरल हॉस्पिटल में भेजा गया है.’’
किसी आतंकी संगठन ने नहीं ली जिम्मेदारी
घटनास्थल से मिली टीवी फुटेज और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि धमाके में दो वैन और एक मोटरसाइकिल क्षतिग्रस्त हो गए. अभी तक किसी भी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है.
इलाके की घेराबंदी की गई
मलिक मोहम्मद खान ने बताया कि इलाके की घेराबंदी कर ली गई है और कानून प्रवर्तन एजेंसियां सबूत जुटाने के लिए घटनास्थल पर पहुंच गई हैं. यह धमाका तब हुआ जब सेना के जवानों की सुरक्षा में एक दल जनगणना के आंकड़े जुटा रहा था. पाकिस्तान में बीते 19 साल में यह पहली जनगणना हो रही है. इसकी शुरूआत मार्च महीने में हुई थी.
लाहौर में सुरबा बलों को हाई अलर्ट जारी
लाहौर में सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. लाहौर पुलिस के एक सूत्र ने बताया कि युवा आत्मघाती हमलावर सेना के वाहन के नजदीक पैदल ही आया था और उसके बाद उसने खुद को उड़ा लिया. सूत्र ने कहा, ‘‘आत्मघाती हमलावर का धड़ से अलग हो चुका सिर मिला है. ऐसा लगता है कि हमले में आठ से दस किलो विस्फोटकों का इस्तेमाल हुआ था.’’
मौके पर मौजूद तैमुर शाहिद ने बताया कि वह घटनास्थल के नजदीक एक दुकान पर सामान लेने जा रहा था तभी उसने कुछ मीटर की दूरी पर तेज धमाके की आवाज सुनी. तैमुर ने कहा, ‘‘मैं घटनास्थल पर पहुंचा, वहां देखा कि कुछ सैनिक खून में लथपथ पड़े हैं. स्थानीय लोग उन्हें नजदीकी अस्पताल लेकर गए. बाद में घटनास्थल पर बचाव दल और सेना के अधिकारी पहुंच गए जिन्होंने इलाके की घेराबंदी कर दी.’’
हमले में वायुसेना का अधिकारी भी मारा गया
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री इमरान नजीर ने कहा कि घायलों में से चार की हालत गंभीर है. विस्फोट के समय पाकिस्तान की वायुसेना का एक अधिकारी अपनी पत्नी के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर वहां से गुजर रहा था. चार मृतक जवानों में वह भी शामिल है.
‘ऐसे कायराना हमलों से डराया नहीं जा सकता’
लाहौर कॉर्प्स कमांडर सादिक अली ने कहा कि ऐसे कायराना हमलों से लोगों को डराया नहीं जा सकेगा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी. कानून मंत्री राणा सानाउल्लाह ने कहा कि पाकिस्तान में आतंकवाद तब तक खत्म नहीं होगा जब तक कि अफगानिस्तान में जमातउल अहरार और अन्य आतंकी संगठनों के आतंकी शिविरों का सफाया नहीं हो जाता.
बीते 23 फरवरी को भी पाकिस्तान में हुआ था धमाका
लाहौर में बीते 23 फरवरी को भी विस्फोट हुआ था जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई थी और 30 लोग घायल हो गए थे. इसी महीने पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाकर किए गए हमले में 13 लोगों की मौत हो गई थी जिनमें से छह पुलिसकर्मी थे. इस हमले की जिम्मेदारी जमातउल अहरार ने ली थी.


आतंकियों को प्रतिबंध करने पर अमेरिका ने कहा-वीटो हमें ऐक्शन लेने से नहीं रोक सकता
4 April 2017
यूनाइटेड नेशंस: अमेरिका ने मंगलवार को कहा कि जो देश आतंकवादियों को प्रतिबंधित करने के मामले में वीटो का इस्तेमाल करके बाधा पहुंचा रहे हैं, वो ऐसा करके भी उसे ऐक्शन लेने से नहीं रोक सकते। अमेरिका ने यह बयान ऐसे वक्त में दिया है, जब भारत की लगातार कोशिशों के बाद यूएन द्वारा पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में चीन लगातार रोड़े अटका रहा है।
यूएन के लिए अमेरिकी राजदूत निकी हैली ने अप्रैल महीने के लिए सिक्यॉरिटी काउंसिल की प्रेजिडेंट का पद संभालने के बाद पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि जिन कुछ चीजों पर चर्चा की गई हैं, उनमें प्रतिबंध और लिस्ट में शामिल लोग भी हैं। निकी से यूनाइटेड नेशंस सिक्यॉरिटी काउंसिल (UNSC) की प्रतिबंधित लिस्ट में आतंकवादियों को खासतौर पर साउथ एशियाई इलाके से जुड़े आतंकवादियों को शामिल करने से जुड़ी कोशिशों के बारे में पूछा गया था। चीन का बिना नाम लिए इस बात का भी जिक्र किया गया कि किस तरह सुरक्षा परिषद के कुछ स्थाई सदस्य वीटो पावर का इस्तेमाल करके इन कोशिशों को नाकाम कर रहे हैं।
हैली ने इस पर कहा, 'क्या हम वीटो से जुड़े लोगों पर कुछ करने वाले हैं? हां, बिलकुल यह अमेरिका को कार्रवाई करने से नहीं रोक सकता। निश्चित तौर पर यह हमें यह देखने से रोक नहीं सकता कि हम कुछ बदलाव कर सकते हैं कि नहीं। हमारा मकसद है कि हम मिलकर उससे ज्यादा करें जो हम अलग-अलग कर सकते हैं। अगर हम अलग-अलग नहीं कर सकते तो हम इन चीजों को करने के लिए दूसरी दिशा में बढ़ेंगे।' उनके मुताबिक, यूएस यह सुनिश्चित करना चाहता है कि वह एक 'नतीजे' की ओर बढ़ रहा है, बस 'बैठा नहीं हुआ' और चीजों को खुद ब खुद होने नहीं दे रहा।


रूस मेट्रो ट्रेन ब्लास्ट फिदायीन हमला था, 23 साल के लड़के ने दिया था अंजाम
4 April 2017
सेंट पीटर्सबर्ग: यहां दो मेट्रो स्टेशनों के बीच सोमवार को ट्रेन ब्लास्ट हुआ। इसमें अब तक 11 लोगों की मौत हो गई। वहीं, 50 लोग जख्मी हो गए। यह एक फिदायीन हमला था। कहा जा रहा है इसे 23 साल के एक लड़के ने अंजाम दिया। यह हमलावर सेंट्रल एशिया का रहने वाला था। ब्लास्ट सनाया स्क्वेयर मेट्रो स्टेशन पर ट्रेन के अंदर हुआ। बता दें कि सेंट पीटर्सबर्ग रूस का दूसरा बड़ा शहर है। यहां करीब 50 लाख लोग रहते हैं। हमलावर एक्सप्लोसन बैग में रखकर लाया था...
- रूस की न्यूज एजेंसी इंटरफैक्स ने इंटेलिजेंस एजेंसियों के हवाले से लिखा कि सेंट पीटर्सबर्ग में ट्रेन ब्लास्ट का संदिग्ध 23 साल के आसपास का था। यह सेंट्रल एशिया का रहने वाला था। यह एक्सप्लोसन बैग में रखकर लाया था।
- ब्लास्ट उस वक्त हुआ जब मेट्रो ट्रेन टेक्नोलॉजी इंस्टीटयूट से सनाया मेट्रो स्टेशन की ओर जा रही थी।
- रॉयटर्स ने अफसरों और नेशनल एंटी-टेररिज्म कमेटी के हवाले से बताया कि ब्लास्ट एक ही जगह हुआ। इसके पहले रशियन मीडिया में दो ब्लास्ट की खबरें दिखाई जा रही थीं।
- अफसरों ने 11 लोगों के मौत की पुष्टि की है। वहीं, 50 लोग जख्मी हुए हैं। इस हमले के बाद एहतियात के तौर पर 10 मेट्रो स्टेशन को बंद कर दिया गया था।
- ब्लास्ट में जिस डिवाइस का इस्तेमाल किया गया उसे नुकीली चीजों से भरा गया था। इस वजह से लोगों को ज्यादा चोटें आई हैं।
- हादसे के बाद शहर के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सिक्युरिटी सख्त कर दी गई है।
ट्रम्प ने पुतिन से बात की
- डोनाल्ड ट्रम्प ने इस हमले की निंदा की। ट्रम्प ने प्रेसिडेंट व्लादिमिर पुतिन से फोन पर बात की। ट्रम्प ने जांच में हरसंभव मदद करने की बात की।
ब्लास्ट की वजह अभी साफ नहीं
- ब्लास्ट के बाद प्रेसिडेंट व्लादिमिर पुतिन ने कहा था कि अभी ब्लास्ट की वजह का पता नहीं है। यह आतंकवादी हमला हो सकता है। मैंने जांच के आदेश दिए हैं। हम सभी एंगल से जांच कर रहे हैं। बता दें कि ब्लास्ट के वक्त पुतिन सेंट पीटर्सबर्ग में मीडिया से बात कर रहे थे। वे यहां एक प्रोग्राम में शामिल होने आए थे।
क्या बताया आईविटनेसेस ने?
- एक आईविटनेस ने बताया कि मैं जब एक्सीलेटर से नीचे की तरफ जा रहा था तभी मैंने जोर का धमाका सुना। सब लोग डर गए और इधर- उधर भागने लगे।
- एक और शख्स ने रूस के लाइफ न्यूज को बताया कि लोगों के शरीर से खून बह रहा था। उनके बाल जल गए थे। सिक्युरिटी पर्सनल हमें स्टेशन से बाहर जाने के लिए कह रहे थे। मैं अपनी दोस्त को लेने के लिए यहां आया था।
पहले भी हुए धमाके
- इससे पहले, 2013 में रूस के वोल्गोग्राद शहर में भी एक रेलवे स्टेशन पर फिदायीन हमले में 17 लोग मारे गए थे।
- 2010 में मॉस्को के दो मेट्रो स्टेशनों पर सुसाइड अटैक हुए थे। इन धमाकों में 38 लोग मारे गए थे, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
- 2004 में चेचेन्या आतंकवादियों ने एक स्कूल में बच्चों को बंधक बना लिया था। इस बड़े हमले में 330 लोग मारे गए थे, जिसमें आधे बच्चे थे।


भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के प्रयासों में जगह बनाने की कोशिश करेगा US: निक्की हेली
4 April 2017
संयुक्त राष्ट्र: अमेरिका ने जम्मू-कश्मीर पर अपनी तटस्थ नीति में परिवर्तन के संकेत दिए हैं। अमेरिका ने मंगलवार को कहा कि वह भारत तथा पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने के प्रयासों में अपनी ‘जगह बनाने की कोशिश’ करेगा। अमेरिका ने कहा कि वह ‘कुछ घटित होने’ का इंतजार नहीं करेगा। इस तरह अमेरिका ने संकेत दिया है कि ऐसे प्रयासों में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भूमिका निभा सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने भारत-पाक विवाद में नहीं उलझने के अमेरिकी रुख में अचानक आए परिवर्तन की ओर संकेत देते हुए संवाददाताओं से कहा, ‘यह बिल्कुल सही है कि यह प्रशासन भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को लेकर चिंता रखता है और हम यह देखना चाहते हैं कि किसी भी विवाद को आगे बढ़ने से रोकने में हम किस तरह की भूमिका निभा सकते हैं।’ ट्रंप मंत्रिमंडल की वरिष्ठ भारतीय-अमेरिकी सदस्य हेली ने उम्मीद जताई कि प्रशासन बातचीत करेगा और तनाव को कम करने के प्रयासों का हिस्सा बनेगा।’
अप्रैल माह के लिए सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष पद संभालने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘हमें नहीं लगता कि कुछ घटित होने तक हमें इंतजार करना चाहिए।’ उनसे पूछा गया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे को लेकर तनाव बढ़ने के मद्देनजर क्या अमेरिका दक्षिण एशिया के दो पड़ोसियों के बीच शांति वार्ता करवाने के लिए कोई प्रयास करेगा, जिस पर उन्होंने यह टिप्पणी की। हेली ने कहा, ‘हां हमें बिलकुल ऐसा लगता है कि हमें इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। तनाव और विवाद बढ़ रहा है इसलिए हम यह देखना चाहते हैं कि हम इसका किस तरह हिस्सा बन सकते हैं।'
हेली ने कहा, ‘मुझे लगता है कि इसमें आप राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सदस्य को भागीदारी करते देखेंगे और आपको अचरज नहीं होना चाहिए अगर खुद राष्ट्रपति भी इसमें शामिल हों।’ यह पहली बार है जब ट्रंप मंत्रिमंडल की सदस्य के तौर पर निक्की हेली ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को लेकर चिंता जाहिर की है। पूर्ववर्ती बराक ओबामा प्रशासन का यह कहना था कि कश्मीर दक्षिण एशिया के दो पड़ोसियों के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है। विदेश मंत्रालय के पूर्व प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा था कि कश्मीर के मुद्दे पर दोनों राष्ट्रों को मिलकर काम करना चाहिए इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं है। अमेरिका ने यह भी कहा था कि कश्मीर मुद्दे पर बातचीत का स्वरूप, व्यापकता और गति क्या होगी यह भारत और पाकिस्तान को तय करना है।
भारत दृढ़ता से कहता आ रहा है कि कश्मीर उसके और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है, इसके साथ ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र या अमेरिका समेत किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार कर दिया था। दूसरी ओर पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मंचों पर कश्मीर मुद्दा बार-बार उठाता रहा है और इसका समाधान निकालने की खातिर विश्व समुदाय के साथ-साथ वॉशिंगटन की मध्यस्थता के लिए तैयार है।


रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में दो मेट्रो स्टेशनों पर बम धमाके में 10 की मौत, 50 घायल
3 April 2017
रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में दो मेट्रो स्टेशनों पर सोमवार की शाम बम धमाके हुए हैं. इन धमाकों में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, वहीं 50 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. हताहतों में बच्चे भी बताए जा रहे हैं. इन धमाकों में हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. वहीं शहर के सभी मेट्रो स्टेशनों को एहतियातन बंद करा दिया गया है.
कहां हुआ धमाका?
जानकारी के मुताबिक, सेंट पीटर्सबर्ग के मेट्रो स्टेशनों पर ट्रेन को निशाना बनाया गया है. इसके कारण स्टेशन धुएं से भर गया है. धमाके के बाद स्टेशन पर अफरातफरी मच गई और पास के तीन स्टेशनों को बंद कर दिया गया है. कई लोग घायल हुए हैं.
प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, धमाका इतना बड़ा था कि ट्रेन का दरवाजा उड़ गए. बताया जा रहा है कि धमाके के लिए IED का इस्तेमाल किया गया है. स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेट्रो स्टेशन पर जगह-जगह खून के धब्बे दिख रहे हैं. धमाकों के बाद शहर के सभी मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है और सुरक्षा जांच बढ़ा दी गई है.
दो मेट्रो स्टेशन को बनाया निशाना
लोकल मीडिया के मुताबिक, हमलावरों ने 2 मेट्रो स्टेशनों को निशाना बनाया. धमाके के कारण मेट्रो स्टेशन की टनल में भी दरार आ गई है. सेंट पीटर्सबर्ग के सनाया स्क्वैयर और सनाया प्लोशचाद स्टेशन को निशाना बनाया गया. यहां भारी संख्या में सुरक्षाबल और कई एंबुलेंस देखी गई.
धमाकों पर ये बोले पुतिन
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने धमाकों में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति शोक संवेदना जाहिर की है. इन धमाकों को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए पुतिन ने कहा, इस धमाकों के पीछे आतंकी हमले सहति सभी संभावित कारणों को ध्यान में रखते हुए जांच की जाएगी.
इससे पहले 2010 में मॉस्को के दो मेट्रो स्टेशनों पर आत्मघाती हमले में 40 लोग मारे गए थे, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। उस हमले की जिम्मेदारी चेचन विद्रोहियों ने लिया था.


हाफिज सईद और लखवी में अनबन! अलगाववादियों को मारने की साजिश?
3 April 2017
आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद और उसके कश्मीर ऑपरेशन के इंचार्ज जकी-उर-रहमान लखवी के बीच फूट पड़ने की खबरें आ रही हैं. भारतीय खुफिया एजेंसी ने कश्मीर में हिंसा को लेकर दोनों के बीच अनबन की जानकारी दी है.
'हिन्दु्स्तान टाइम्स' के अनुसार हाफिज सईद नहीं चाहता कि भारत में किसी भी प्रकार के आतंकी हमले में लश्कर-ए-तैयबा का नाम आए. हाफिज ने आदेश दिए हैं कि 'कश्मीर छोड़ो आंदोलन' के नाम से प्रेस रिलीज जारी की जाए. इससे यह संदेश देने की कोशिश है कि ये हमले बाहर से नहीं, बल्कि भारत के अंदर से ही हो रहे हैं. रिपोर्ट में कश्मीर के अलगाववादियों को भी मारने की साजिश की खबरें हैं.
जकी-उर-रहमान लखवी के हाफिज सईद के साथ कुछ अनबन हैं. हाफिज सईद अभी नजरबंद हैं. कथित तौर पर लखवी ने अपने ज्यादातर वफादारों को पीओके में स्थानांतरित कर दिया है. इनपुट बताते हैं कि लश्कर ने कश्मीर में अपने कार्यों में अपने नाम का उपयोग नहीं करने का निर्णय लिया है. खुफिया इनपुट से पता चलता है कि लश्कर नहीं चाहता कि कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में उसका नाम आए. हालांकि दोनों के बीच अनबन का कारण स्पष्ट नहीं है.
अलगाववादियों को मार तनाव फैलाने की कोशिश
रिपोर्ट में बताया गया है कि तहरीक-ए-मुजाहिदीन ने खुद को फिर से संगठित कर लिया है. इसमें बिलपापा नाम के आतंकी की मुख्य भूमिका है, जो मौलाना शौकत मर्डर केस को लेकर जेल में था. फिलहाल वह जमानत पर है. यह संगठन अलगाववादी नेताओं की हत्या कर घाटी में तनाव फैला सकता है.


चीन से नहीं मिली मदद, तो नॉर्थ कोरिया से अकेले निपटेगा US: ट्रंप
3 April 2017
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया को लेकर बड़ा बयान दिया है. ट्रंप ने कहा कि अगर चीन उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ कड़ा कदम नहीं उठाता है तब अमेरिका अकेले ही कार्रवाई करने के तैयार है. साउथ फ्लोरिडा में अपने मार-ए-लेगो एस्टेट में चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग की मेजबानी करने के कुछ ही दिन पहले ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स के साथ एक साक्षात्कार में यह टिप्पणी की है.
बृहस्पतिवार और शुक्रवार को होने वाली बैठक के दौरान शी और ट्रंप के बीच उत्तर कोरिया, व्यापार और दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय विवाद समेत कई सारे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है. ट्रंप ने अखबार से कहा कि हां, हम उत्तर कोरिया के बारे में बात करेंगे. उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया पर चीन का बहुत प्रभाव है और या तो चीन उत्तर कोरिया को लेकर हमारी मदद करने का फैसला करेगा या नहीं करेगा. अगर चीन हमारी मदद करने का फैसला करता है तो यह उसके लिए बहुत अच्छा होगा और अगर वह ऐसा नहीं करता है तो यह किसी के लिए अच्छा नहीं होगा.
मैं अतीत का अमेरिका नहीं
ट्रंप ने कहा कि चीन के लिए अमेरिका के साथ काम करने की वजह व्यापार है. उन्होंने कहा कि चीन की मदद के बिना अमेरिका, उत्तर कोरिया में हालात से निपट सकता है. जब उनसे पूछा गया कि वह उत्तर कोरिया से कैसे निपटेंगे तब ट्रंप ने कहा, मैं यह आपको बताने नहीं जा रहा हूं आप जानते हैं, मैं अतीत का अमेरिका नहीं हूं जहां हम आपको यह बताएंगे कि हम पश्चिम एशिया में कहां पर क्या करने जा रहे हैं.
अमेरिका और चीन को चुनौती
गौरतलब है कि आए दिन नॉर्थ कोरिया की ओर से मिसाइल, रॉकेट की टेस्टिंग से अमेरिका-चीन और जापान परेशान हैं. इस बीच, अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन जापान और दक्षिण कोरिया की यात्रा करने के बाद शनिवार को बीजिंग पहुंचे. नॉर्थ कोरिया को रोकने के लिए अमेरिका और चीन ने साथ आने के लिए हामी भरी है. अमेरिका के खिलाफ उसके हथियार कार्यक्रम को रोक सकें ऐसी लगातार कोशिश हो रही है.
नॉर्थ कोरिया अमेरिका के लिए कैसे खतरा?
नॉर्थ कोरिया अमेरिका को लगातार चुनौती देता रहा है. ओबामा के बाद ट्रंप प्रशासन में भी किम जोंग उन ने हथियारों के विस्तार कार्यक्रम को बंद नहीं किया है. पिछले साल जनवरी में नॉर्थ कोरिया ने हाइड्रोजन बम का टेस्ट किया था. ट्रंप की चेतावनी के बाद भी नॉर्थ कोरिया हथियारों के विस्तार कार्यक्रम से पीछे नहीं हट रहा है. साउथ कोरिया, अमेरिका और जापान जैसे देश इसे लेकर कई बार यूएन में शिकायत कर चुके हैं. इस साल उत्तर कोरिया ने पांच परमाणु और एक मिसाइल सीरीज के परीक्षण की शुरूआत की.


अदालत के आदेश के बाद पार्क को हिरासत में लिया
31 March 2017
अदालत से गिरफ्तारी आदेश जारी होने के बाद दक्षिण कोरिया की अपदस्थ राष्ट्रपति पार्क ग्यून-ही को हिरासत में ले लिया गया। भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग का सामना कर रही पूर्व राष्ट्रपति को गुरुवार देर रात हिरासत में लिए जाने के बाद शुक्रवार को उनके विरोधी खुशी मना रहे हैं। समर्थकों ने रिहा करने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया।
अभियोजकों ने अभी तक पार्क के खिलाफ औपचारिक आरोप तय नहीं किए हैं। अभियोजकों ने रिश्वत लेने, अधिकार का दुरुपयोग करने और सरकारी गोपनीयता भंग करने का संदेह जाहिर किया है।
अदालत ने कहा है, 'गिरफ्तारी के लिए न्यायसंगत आरोप अनिवार्य है। आशंका है कि सुबूत नष्ट कर दिए गए होंगे।' एशिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था दक्षिण कोरिया में पार्क ऐसी तीसरी पूर्व नेता हैं जिन्हें भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया जा सकता है। उनके मामले में नेताओं के साथ ही सैमसंग जैसे बड़े कारोबारी घराने भी फंसे हैं। दक्षिण कोरिया की पहली महिला राष्ट्रपति के जीवन में यह नाटकीय मोड़ माना जा रहा है।
घटनाक्रम
31 अक्टूबर 2016: पार्क की अभिन्न सहेली चोई सुन-सिल को अभियोजकों ने गिरफ्तार किया।
20 नवंबर 2016: अभियोजकों ने चोई पर सत्ता का दुरुपयोग करने और जालसाजी का प्रयास करने का आरोप लगाया।
9 दिसंबर 2016: संसद ने पार्क के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित किया। अधिकार छीना गया और मामला संविधान अदालत में भेजा गया।
17 फरवरी 2017: सैमसंग समूह के प्रमुख जाय वाई ली गिरफ्तार। सैमसंग प्रमुख ने सरकारी समर्थन हासिल करने के लिए चोई को रिश्वत दी थी।
10 मार्च 2017: संविधान अदालत ने महाभियोग को वैध ठहराया। राष्ट्रपति पद से अपदस्थ हुई पार्क।


तल्ख रिश्‍तों के बीच होगी ट्रंप और शी चिनफिंग की मुलाकात, भारत की पैनी नजर
31 March 2017
वाशिंगटन/बीजिंग: विश्व की दो महाशक्तियां चीन और अमेरिका जल्द ही बातचीत करने की तैयारी में हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग अगले सप्ताह अपने अमेरिकी समकक्ष डोनाल्ड ट्रंप के साथ पहली शिखर स्तरीय वार्ता करेंगे. मुलाकात के दौरान दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों की दशा और दिशा के लिए एक आधार तैयार कर सकते हैं.
दोनों नेताओं के इस वार्ता पर भारत की भी नजर रहेगी, क्योंकि इससे ट्रंप एशिया को लेकर अपने रुख को भी साफ कर सकते हैं. दरअसल, पीएम मोदी भी इस साल अमेरिका के दौरे पर जा सकते हैं. खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वर्ष के आखिर में वाशिंगटन का दौरा करेंगे जहां अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप उनकी मेजबानी करेंगे. नए अमेरिकी प्रशासन के तहत दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों के मद्देनजर व्‍हाइट हाउस ने पिछले दिनों ऐसे संकेत दिये हैं.
होगी पीएम मोदी और ट्रंप की भी मुलाकात
व्‍हाइट हाउस की ओर से पीएम मोदी और ट्रंप की मुलाकात की कोई तारीख नहीं बतायी गयी है लेकिन एक बयान में दोनों नेताओं के मुलाकात की बात कही गयी है. राष्‍ट्रपति ट्रंप ने भी कहा है कि वह साल के अंतिम दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी करने को उत्‍सुक हैं. आपको बता दें कि जनवरी में डोनाल्‍ड ट्रंप के राष्‍ट्रपति पद संभालने के बाद से दोनों नेताओं के बीच फोन पर कई मौकों पर बातचीत हो चुकी है.
गत सोमवार को ही डोनाल्‍ड ट्रंप ने फोन कर पीएम मोदी को विधानसभा चुनाव में मिली जीत पर बधाई दी है.
छह और सात अप्रैल को होगी शी और ट्रंप की मुलाकात
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने बताया कि शी छह और सात अप्रैल को फ्लोरिडा में अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे. उन्होंने कहा कि चीन-अमेरिका व्यापार और आर्थिक संपर्कों को साझा करते आ रहे हैं जो एक दूसरे के लिए पूरक हैं. प्रवक्ता ने कहा कि चीन अमेरिका के साथ व्यापार सहयोग को बढ़ाने, व्यापार संबंधी टकराव को बातचीत के माध्‍यम से दूर करने की कोशिश करेगा. चीन व्यापार एवं आर्थिक संबंधों के सतत विकास के लिए प्रयास करने की उम्मीद भी करता है.
चीन ने किया था अमेरिका को आगाह
पिछले दिनों चीन ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आगाह करते हुए कहा था कि दोनों देशों के बीच किसी भी तरह के व्यापार युद्ध से सिवाय नुकसान के कुछ हासिल नहीं होगा. चीन की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया जब आशंकाएं जतायी जा रही हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप चीनी उत्पादों पर शुल्क दर बढ़ाने के अपने चुनावी वादों को पूरा कर सकते हैं.


डेमोक्रैटिक सांसदों ने ट्रंप से की अपील, 'भारत के स्टील का इस्तेमाल मत करो'
31 March 2017
अमेरिकी सेनेट के 9 डेमोक्रैटिक सांसदों ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से अपील की है कि वह कीस्टोन परियोजना में विदेशी, खासतौर पर भारत और इटली से मंगवाए गए स्टील का इस्तेमाल ना होने दें। सांसदों ने अरबों रुपये की विवादित ट्रांस-नैशनल कीस्टोन ऑइल पाइपलाइन परियोजना के संदर्भ में यह बात कही है।
ट्रंप को भेजे गए अपने साझा पत्र में इन सांसदों ने लिखा, 'आपका मेमोरैंडम खासतौर पर नए और विस्तृत की गई पाइपलाइन परियोजनाओं की बात करता है। ऐसे में हम काफी उलझन में हैं। हमें यह जानकर बहुत निराशा हुई है कि कीस्टोन एक्सएल पाइपलाइन परियोजना में इस्तेमाल होने वाला पूरा स्टील अमेरिका का नहीं होगा।' इस पत्र की एक प्रति मीडिया में छपी है। पत्र में आगे कहा गया है, 'हमें इस बात से भी बहुत परेशान हैं कि कनाडा की इस कंपनी को भारत और इटली जैसे देशों से स्टील मंगवाने की इजाजत देकर आप एक ऐसी प्रथा बना रहे हैं जिसका असर अमेरिकी लोगों के रोजगार पर पड़ेगा। भारत और इटली जैसे देशों का इतिहास रहा है कि वे अवैध और गैरकानूनी कीमतों पर अमेरिका में अपने स्टील उत्पादों को खपाते हैं।'
क्रिस वैन होलेन और टेमी डकवर्थ ने ट्रंप को यह पत्र लिखकर कहा कि वह इस परियोजना में पूरी तरह से केवल अमेरिका में उत्पादित स्टील का ही इस्तेमाल करें। पत्र में कहा गया है कि अगर ट्रंप ऐसा नहीं करते हैं तो यह 'अमेरिका फर्स्ट' के उनके वादे का उल्लंघन होगा। सांसदों ने ट्रंप से अपील की है कि वे यह भी सुनिश्चित करें कि सभी नए पाइपलाइन्स के निर्माण और प्रबंधन में केवल अमेरिकी सामान व उत्पादों का इस्तेमाल किया जाए। पत्र में आगे लिखा गया है, 'अमेरिकी उत्पादों को खरीदने की वकालत करने वालों के तौर पर हम शुरुआत में इस मेमौंरेडम से काफी उत्साहित हुए थे। हमने सोचा था कि टैक्स देने वाली अमेरिकी जनता के पैसों से जितना संभव हो सके उतना ज्यादा अमेरिकी कंपनियों को ऑर्डर दिया जाएगा, लेकिन जब हमें पता चला कि आपके प्रशासन ने अमेरिकन उत्पादों को खरीदो की नीति से इस परियोजना को छूट दे दी है, तो हमें बेहद निराशा हुई।'
मालूम हो कि 24 जनवरी को ट्रंप ने एक मेमौरेंडम जारी किया था। इसमें कहा गया था कि अमेरिकी सीमा के अंदर सभी नए पाइपलाइन्स के निर्माण, मरम्मत, प्रबंधन में हरसंभव स्तर तक अमेरिकी उत्पादों का इस्तेमाल किया जाएगा। ट्रंप की इस नई नीति से कीस्टोन पाइपलाइन परियोजना को छूट दी गई थी। अब इन सांसदों ने ट्रंप से अपील की है कि वे अपने फैसले पर विचार करें और इस परियोजना में भी 'बाय अमेरिकन' नीति का पालन करें।


सीरियाई सेना का अलेप्पो में आईएस के गढ़ पर नियंत्रण
30 March 2017
दमिश्क: सीरियाई सेना ने बुधवार को उत्तरी सीरिया में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के कब्जे वाले डेर हाफेर शहर पर नियंत्रण कर लिया है, जो अलेप्पो के पूर्वी छोर पर स्थित है.
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, सीरियाई सेना ने डेर हाफेर के आसपास 27 कस्बों एवं गांवों पर नियंत्रण स्थापित किया और अलेप्पो और राक्का प्रांत को जोड़ने वाले 24 किलोमीटर राजमार्ग पर भी अधिकार जमा लिया.
फिलहाल, सीरियाई सेना आईएस के कब्जे वाले मसकानेह शहर की ओर बढ़ रही है. ऐसी ख़बरें हैं कि अमेरिका और एसडीएफ द्वारा अगले महीने की शुरुआत में राक्का शहर में पूर्ण स्तर पर सैन्य अभियान शुरू किया जाएगा.
एसडीएफ के प्रवक्ता तलाल सिलो ने हाल ही में कहा था कि उन्हें राक्का में सीरियाई सेना के साथ मिलकर आईएस के खिलाफ लड़ने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन अभी इस तरह की संभावना स्पष्ट नहीं है.


महिला होने के चलते मां को नहीं मिली जजों की बेंच में जगह: निक्की हेली
30 March 2017
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने दावा किया है कि भारत में उनकी मां को सिर्फ महिला होने की वजह से कभी जजों की बेंच में शामिल नहीं किया है। उन्होंने कहा कहा कि उनकी मां भारत की पहली महिला जस्टिसों में शामिल थीं लेकिन महिला होने के कारण उन्हें कभी बेंच में जगह नहीं दी गई। निक्की के पिता का नाम अजीत सिंह रंधावा और मां का नाम राज कौर रंधावा है। निक्की के माता पिता भारत से कनाडा आकर बस गए थे। फिर 1960 के दशक में वह अमेरिका आ गए थे।
निक्की ने कहा, यह बात मेरे दिल के बहुत करीब है। आप जानते हैं कि जब भारत में ज्यादा लोग शिक्षित नहीं हुआ करते थे, तब मेरी मां लॉ स्कूल गईं। उन्हें भारत की पहली महिला न्यायाधीशों में शामिल होने के लिए वास्तव में चुना गया था लेकिन तब महिलाओं की स्थिति के कारण उन्हें पीठ में जगह नहीं दी गई। उनके लिए यह देखना कितना शानदार रहा होगा कि उनकी बेटी दक्षिण कैरोलिना की गवर्नर और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत बनीं।
भारतीय प्रवासियों की बेटी होने पर गर्व
उन्होंने कहा कि उन्हें भारतीय प्रवासियों की बेटी होने पर गर्व है। हेली के अनुसार अन्य देशों के लोगों पर उनके धर्म के कारण प्रतिबंध नहीं लगाए जाने चाहिए। निक्की ने प्रश्नों के उत्तर देते हुए कहा, मुझे भारतीय प्रवासियों की बेटी होने का गर्व है जिन्होंने मेरे भाइयों, मेरी बहन और मुझे हर रोज यह याद दिलाया कि हम सौभाग्यशाली हैं कि हम इस देश में रह रहे हैं।
उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि वैध आव्रजन अमेरिका का ताना बाना है। इसलिए उस नजरिए से यह बात मेरे दिल के करीब है और मैं इसका बहुत समर्थन करती हूं। ट्रंप के यात्रा प्रतिबंध संबंधी शासकीय आदेश से जुड़े प्रश्न के जवाब में निक्की ने कहा कि धर्म के आधार पर कभी प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए। यह यात्रा प्रतिबंध धर्म के आधार पर नहीं लगाया गया यदि ऐसा होता तो दर्जनों ऐसे अन्य मुस्लिम बहुल देश हैं जो उन देशों की सूची में शामिल हो सकते थे जिन पर प्रतिबंध लगाया गया है।
उन्होंने कहा, हम अमेरिका के दरवाजे कभी बंद नहीं करेंगे लेकिन हमने जो किया, वह कुछ देर रूककर सोचने और यह कहने के लिए किया कि हम हमारे लोगों को किस तरह सुरक्षित रखने वाले हैं। निक्की ने कहा कि ट्रंप के यात्रा प्रतिबंध का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश में किसी प्रकार का खतरा प्रवेश ना कर सके।


इवांका ट्रम्प बिना सैलरी के व्हाइट हाउस में होंगी प्रेसिडेंट की एडवाइजर
30 March 2017
वॉशिंगटन: अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प की 35 वर्षीय बेटी इवांका व्हाइट हाउस में बिना सैलरी के एडवाइजर की जिम्मेदारी संभालेंगी। यह व्हाइट हाउस ने अनाउंस किया है। आगे इवांका के हसबैंड भी हैं प्रेसिडेंट के एडवाइजर
- इवांका का टाइटल 'Special Assistant to the President' होगा।
- इवांका के पति जैरेड कुशनर भी राष्ट्रपति की हेल्प के लिए सीनियर एडवाइजर के तौर पर बिना सैलरी के व्हाइट हाउस में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। प्रेसिडेंट के दामाद कुशनर एक रियल एस्टेट कारोबारी हैं।
- व्हाइट हाउस ने जारी एक स्टेटमेंट में कहा, ''हमें खुशी है कि प्रेसिडेंट की मदद के लिए इवांका ट्रम्प को उनकी अभूतपूर्व रोल के लिए चुना गया है।'' ''इवांका की सेवाएं अनपेड इम्प्लॉई की होंगी। यह हमारी नैतिकता और पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता है। अमेरिकी जनता को पॉलिसीज के फायदे के लिए उनकी अग्रणी भूमिका जरूरत है, जो कि पहले नहीं थीं।''
- डोनाल्ड ट्रम्प जब से राष्ट्रपति बने हैं, तब से व्हाइट हाउस में इवांका की मौजूदगी लगातार देखी गई है। जनवरी में जब जापानी पीएम शिंजो आबे अमेरिका आए थे, तब उन्हें रिसीव करने प्रेसिडेंट ट्रम्प के साथ इवांका मौजूद थीं।
पिता के साथ अक्सर आती हैं नजर
- इसी माह व्हाइट हाउस में जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल और प्रेसिडेंट ट्रम्प के बीच राउंड-टेबल डिस्कशन के दौरान इंवाका भी रहीं थीं।
-इवांका ने अपने बयान में कहा,'' राष्ट्रपति को मेरे सलाह देने को लेकर मैंने अपनी क्षमताओं के बारे कुछ चिंताएं सुनी हैं। यह मैं स्वेच्छा और सभी नैतिक नियमों का पालन करते हुए अनपेड इम्प्लॉई के तौर पर अन्य कर्मचारियों की तरह काम करूंगी।''
- प्रेसिडेंट ट्रम्प की सबसे बड़ी बेटी एडवाइजर बनने के बाद इवांका वेस्ट विंग में काम करेंगी।
- अब वह एक 'एडवाइजर' के तौर पर प्रेसिडेंट को फॉर्म 278 देंगी। इसका आशय है कि वह कानूनी तौर पर नियमों से बंधी हैं। इसमें उन्हें अपनी फाइनेंशियल डिटेल भी देना होगी।
- ट्रम्प के अटॉर्नी जेमी एस. गोरेलिक ने कहा कि इवांका का फैसला संघीय सरकार के आदर्शों के प्रति समर्पण दिखाता है।
-इवांका ने अपने बयान में कहा,'' राष्ट्रपति को मेरे सलाह देने को लेकर मैंने अपनी क्षमताओं के बारे कुछ चिंताएं सुनी हैं। यह मैं स्वेच्छा और सभी नैतिक नियमों का पालन करते हुए अनपेड इम्प्लॉई के तौर पर अन्य कर्मचारियों की तरह काम करूंगी।''
- प्रेसिडेंट ट्रम्प की सबसे बड़ी बेटी एडवाइजर बनने के बाद इवांका वेस्ट विंग में काम करेंगी।
- अब वह एक 'एडवाइजर' के तौर पर प्रेसिडेंट को फॉर्म 278 देंगी। इसका आशय है कि वह कानूनी तौर पर नियमों से बंधी हैं। इसमें उन्हें अपनी फाइनेंशियल डिटेल भी देना होगी।
- ट्रम्प के अटॉर्नी जेमी एस. गोरेलिक ने कहा कि इवांका का फैसला संघीय सरकार के आदर्शों के प्रति समर्पण दिखाता है।


रूस की इस मिसाइल ने उड़ाए अमेरिका के होश, जानिए क्यों
29 March 2017
मास्को: रूस की एक नई मिसाइल ने अमेरिका के माथे पर भी पसीना ला दिया है। रूस की इस नई मिसाइल को लेकर न सिर्फ अमेरिका बल्कि दुनिया के कई बड़े देश हैरान और परेशान हैं। 'जिरकोन' नाम की इस हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल की रफ्तार लगभग 7400 किमी. प्रति घंटा है।
इसकी सबसे बड़ी खासियत इसको एक बार लॉन्‍च कर न रोक पाना है। यदि ऐसा करने की कोशिश भी की गई तो यह उतनी ही तबाही मचा सकती है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को इस मिसाइल की तस्वीर जारी की है। इस मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत इसकी रफ्तार ही है, यही कारण है कि अमेरिका भी इस मिसाइल के सामने आने के बाद टेंशन में है।
इस मिसाइल के बारे में जानकारी देते हुए कहा गया है कि अगर एक बार लॉन्च करने के बाद इस मिसाइल को रोकने की कोशिश की गई, तो इसका मलबा भी निशाने को काफी हद तक नुकसान पहुंचा देगा। इस मिसाइल की क्षमता लगभग 400 किमी. तक बताई जा रही है, इसे 2022 तक रूस की सेना में शामिल किया जाएगा।
इस मिसाइल में स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग किया गया है, जो कि हवा से ऑक्सीजन का प्रयोग करता है। जिरकोन के साथ ही लॉन्च होने वाला पहला जहाज किरोव-वर्ग परमाणु शक्ति वाले युद्ध क्रूजरों में से एक होने की संभावना है, इनमें से दो अब भी रूसी नौसेना के साथ हैं।


ओबामा की जलवायु परिवर्तन नीति को राष्ट्रपति ट्रंप ने किया रद्द
29 March 2017
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओबामा प्रशासन के जलवायु परिवर्तन समझौते को उलटने के लिए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन की नीतियों को छलावा बताया है और पेरिस समझौता से अमेरिका को अलग करने की धमकी भी दी है. यह समझौता पिछले साल से प्रभावी हो हुआ था.
पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने की कोशिश के तहत यह समझौता किया था. शिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने सीन स्पाइसर के हवाले से बताया गया था कि ट्रंप कानूनी बाधाओं को कम करके देश के ऊर्जा संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए कार्यकारी आदेश जारी करेंगे. इससे सस्ती बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, जिससे आर्थिक विकास में तेजी आएगी और नौकरियां पैदा होंगी.
ट्रंप के आदेश का असर
जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रपति ट्रंप और पूर्व राष्ट्रपति ओबामा अलग-अलग नजरिया रखते हैं. ओबामा का मानना था कि दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन हो रहा है और इस समस्या से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता. नए आदेश के तहत ओबामा की स्वच्छ ऊर्जा योजना को रद्द कर दिया गया है. जिसमें पेरिस समझौते के आधार पर अमरीका के सभी राज्यों को कार्बन उत्सर्जन की सीमा को घटाना था.
रिपब्लिकन पार्टी शासित राज्य इन नियमों पर पहले ही अपनी आपत्ति जता चुके हैं. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस योजना के रद्द होने से अब लोगों को काम मिलेगा और देश में ईंधन के आयात में कमी आएगी. साथ ही कहा गया कि पिछली सरकार ने अपनी नीतियों के जरिए कामगारों से रोजगार छीना और अब उनकी सरकार लोगों को काम देने के साथ-साथ पर्यावरण को भी बचाएगी.
जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में ओबामा प्रशासन की यह शुरुआत दुनिया भर में सराही गई थी. एक सप्ताह पहले ट्रंप के पहले संघीय बजट में भी जलवायु परिवर्तन को उलटने की मंशा साफ तौर पर जाहिर की थी. उन्होंने इसमें स्वच्छ ऊर्जा योजना के लिए फंड में कटौती समेत अन्य कदम उठाए.
क्या है पेरिस समझौता
जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने और वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी को दो डिग्री सेल्सियस तक नीचे लाने के लिए यह समझौता किया गया था. इसके तहत ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए कदम उठाने पर सहमति बनी थी. पेरिस में 197 देशों ने जलवायु परिवर्तन समझौते को स्वीकार किया था. इसके तहत जलवायु परिवर्तन से निपटने में विकसित देशों की ओर से विकासशील देशों की मदद के लिए साल 2020 से 100 अरब डॉलर हर साल देने की प्रतिबद्धता जताई गई. लिहाजा इस समझौते को विकासशील देश अपने खिलाफ मानते हैं. ऐसे में ट्रंप ने इसे अब उलटने की योजना बनाई है.


इस साल PM मोदी से मिलना चाहते हैं डॉनल्ड ट्रंप: वाइट हाउस
29 March 2017
वॉशिंगटन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल अमेरिका दौरे पर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। बुधवार को वाइट हाउस द्वारा जारी किए गए एक बयान में कहा गया,'प्रेजिडेंट ट्रंप ने कहा है कि वह इस साल पीएम मोदी की मेजबानी करना चाहेंगे।'
बयान में कहा गया कि ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक सुधार अजेंडे का समर्थन किया है और भारत के लोगों के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया है। इसके एक दिन पहले डॉनल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को फोन करके विधानसभा चुनावों की कामयाबी के लिए बधाई दी थी। यह प्रधानमंत्री मोदी और डॉनल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई तीसरी बातचीत है। दोनों नेताओं में पहली बातचीत नवंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आने के बाद हुई थी। इसके बाद मोदी और ट्रंप ने 24 जनवरी को बात की थी और वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने की बात कही थी।
इससे पहले पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप जुलाई में जर्मनी में होने वाली जी-20 समिट में मिलेंगे। डॉनल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद दुनिया के कुछ प्रमुख नेताओं से बात की थी जिसमें पीएम मोदी भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उन्हें सबसे पहले जीत की बधाई देने वाले नेताओँ में से एक थे।


आज ट्रंप जलवायु परिवर्तन समझौते को उलटने के लिए जारी करेंगे आदेश
28 March 2017
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओबामा प्रशासन के जलवायु परिवर्तन की नीतियों को छलावा बताया है और पेरिस समझौता से अमेरिका को अलग करने की धमकी दी है. यह समझौता पिछले साल से प्रभावी हो हुआ है. सोमवार को व्हाइट हाउस के प्रवक्ता सीन स्पाइसर ने बताया कि आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन के जलवायु परिवर्तन समझौते को उलटने के लिए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे.
ओबामा प्रशासन ने जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने की कोशिश के तहत यह समझौता किया था. शिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने सीन स्पाइसर के हवाले से बताया कि ट्रंप कानूनी बाधाओं को कम करके देश के ऊर्जा संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए कार्यकारी आदेश जारी करेंगे. इससे सस्ती बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, जिससे आर्थिक विकास में तेजी आएगी और नौकरियां पैदा होंगी.
रविवार को अमेरिकी पर्यावरण संरक्षक एजेंसी के एडमिनिस्ट्रेटर स्कॉट प्रिट ने बताया कि इस कार्यकारी आदेश से स्वच्छ ऊर्जा योजना को उलट दिया जाएगा. ओबामा प्रशासन ने ऊर्जा संयंत्रों से निकलने वाली ग्रीन हाउस गैसों को कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पेरिस समझौता किया था. भारत की लंबी कोशिश के बाद इस समझौते पर सहमति बनी थी.
जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में ओबामा प्रशासन की यह शुरुआत दुनिया भर में सराही गई थी. एक सप्ताह पहले ट्रंप के पहले संघीय बजट में भी जलवायु परिवर्तन को उलटने की मंशा साफ जाहिर की गई थी. उन्होंने इसमें स्वच्छ ऊर्जा योजना के लिए फंड में कटौती समेत अन्य कदम उठाए.
क्या है पेरिस समझौता
जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने और वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी को दो डिग्री सेल्सियस तक नीचे लाने के लिए यह समझौता किया गया था. इसके तहत ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए कदम उठाने पर सहमति बनी थी. पेरिस में 197 देशों ने जलवायु परिवर्तन समझौते को स्वीकार किया था. इसके तहत जलवायु परिवर्तन से निपटने में विकसित देशों की ओर से विकासशील देशों की मदद के लिए साल 2020 से 100 अरब डॉलर हर साल देने की प्रतिबद्धता जताई गई. लिहाजा इस समझौते को विकासशील देश अपने खिलाफ मानते हैं. ऐसे में ट्रंप ने इसे अब उलटने की योजना बनाई है.


अब मानवरहित हेलिकॉप्टर खुद पहुंचाएगा अस्पताल....जानें कैसे
28 March 2017
अभी तक मानवरहित हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल हमला करने या फिर निगरानी के लिए इस्लेमाल किया जाता रहा है, लेकिन अब यह घायलों को सैकड़ों किमी दूर से लेकर अस्पताल पहुंचाने का काम करेगा. अमेरिकी सेना की ओर से डीपी-14 हॉक हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल घायल सैनिकों को युद्धस्थल से अस्पताल पहुंचाने में करेगी.
खास बात यह है कि यह मानवरहित हेलिकॉप्टर घायल सैनिक को खुद ही अस्पताल पहुंचाएगा. यह पूरी तरह से इंटरनल इनवेस्टिगेशन सिस्टम पर निर्भर होगा. लिहाजा इसमें जीपीएस की जरूरत नहीं होगी. यूएस आर्मी मेडिकल रिसर्च एंड मटेरियल कमांड इस हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल परंपरागत तरीके से इतर घायल सैनिकों को युद्धस्थल से अस्पताल पहुंचाने में करने पर विचार कर रहा है.
दो इंजन वाला यह हेलिकॉप्टर CH-47 चिनूक की तरह दिखता है. यह इतना छोटा है कि इसको किसी वाहन के अंदर रखकर ले जाया जा सकता है. दिलचस्प बात यह है कि डीपी-14 हॉक हेलिकॉप्टर महज 30 मिनट के अंदर उड़ान भरकर 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से घटनास्थल पर पहुंच सकेगा. यह 200 किलो वजन ले जाने में सक्षम है. राहत एवं बचाव अभियान के अलावा इस हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल कृषि, वन्यजीवों की सुरक्षा निगरानी और तलाशी अभियान में किया जा सकेगा.


ट्रंप ने मोदी को किया फोन, यूपी चुनाव में BJP की बंपर जीत पर दी बधाई
28 March 2017
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर उन्हें हाल के विधानसभा चुनाव में मिली जीत पर बधाई दी. व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर ने संवाददाताओं को बताया कि ट्रंप ने फोन पर मोदी और जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल को चुनावों में उनकी जीत पर बधाई दी है.
स्पाइसर ने कहा,'राष्ट्रपति ने सुबह जर्मन चांसलर मर्केल और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करके उन्हें उनके दलों की चुनावी जीत पर बधाई दी.’
हाल में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए थे जिनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में बीजेपी की सरकार बनी है. पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनी है. नोटबंदी के फैसले के बाद पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को मोदी की लोकप्रियता पर जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा था.
यहां यह गौरतलब है कि अभी तक पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात नहीं हुई है. लेकिन अपने चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप लगातार भारतीय समुदाय और पीएम मोदी की तारीफ कर चुके हैं. पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से पीएम मोदी के रिश्ते काफी अच्छे थे.


आस्‍ट्रेलिया के क्‍वींसलैंड तट से कल टकराएगा शक्तिशाली चक्रवात 'डेबी'
27 March 2017
ऑस्ट्रेलिया में शक्तिशाली चक्रवात डेबी की आशंकाओं को देखते हुए तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से घरों को खाली करने का अनुरोध किया गया है। मौसम विभाग ने इस तूफान को लेकर आगाह किया है कि यह चौथी श्रेणी का है। मौसम विभाग के मुताबिक इसके क्‍वींसलैंड के तट से टकराने पर हवाओं की रफ्तार 300 किमी प्रति घंटा तक हो सकती है। ऐसे में कई मकान ध्‍वस्‍त हो सकते हैं। सरकार और प्रशासन ने इस चक्रवात से बचने के लिए इसके दायरे में आने वाले करीब 3500 लोगों को सुरक्षित स्‍थान पर जाने की सलाह दी है। इनमें से कई को सुरक्षित स्‍थान पर भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
इसके मंगलवार से पहले ही क्वींसलैंड स्टेट पहुंचने की आशंका है। क्वींसलैंड स्टेट की प्रमुख एनास्टैसिया पलास्जककाुक ने चेतावनी दी कि यह तूफान 2011 में आई चक्रवात यसी से भी अधिक शक्तिशाली होगा। इस तूफान की वजह से घरों, फसलों और द्वीपों को काफी नुकसान पहुंचा था। बंदरगाह की प्रवक्ता फिओना कुभन्नघम ने कहा कि मैक और हे पॉइंट में एबॉट प्वाइंट कोल टर्मिनल और बंदरगाह को अगले आदेश तक के लिए बंद कर दिया गया है।
टाउनसविले के निकट कई निचले इलाकों से लोगों को जबरन हटाया गया है, जबकि प्राधिकरणों ने सिफारिश की है कि दक्षिण के इलाके से में हजारों लोगों को निकाला जाये। इस तूफान से निपटने के लिए सेना को तैयार रखा गया है। तेल और ईधन कंपनियों से अतिरिक्त आपूर्ति करने का अनुरोध किया गया है और अतिरिक्त खाद्य समाग्रियों को इलाके में भेज दिया गया है।


लंदन हमले के हमलावर की बेटी ने किया था, पिता की कट्टर इस्लामिक सोच का विरोध
27 March 2017
हाल ही में लंदन में ब्रिटेन की संसद पर की गई आतंकवादी हमले की कोशिश के दौरान हुई गोलीबारी में मारे गये हमलवार खालिद मसूद को लेकर एक खुलासा हुआ है. खालिद मसूद को उसके कट्टर इस्लामिक रवैये को लेकर अपनी बेटी का ही विरोध झेलना पड़ा था. खालिद मसूद की 18 वर्षीय बेटी टीगान हार्वे ने अपने पिता के बुर्का पहनने के आदेश को ठुकरा दिया था.
वेस्टर्न कल्चर छोड़ने का था दबाव
टीगान के अनुसार, उसके पिता कट्टर इस्लामिक सोच वाले इंसान थे. वह उन पर हमेशा से ही वेस्टर्न कल्चर को छोड़ने के लिए दबाव बनाते थे, और बुर्का पहनने के लिए कहते थे. लेकिन टीगान ने इस बात का लगातार विरोध किया और अपने हिसाब से जिंदगी को जीना ही बेहतर समझा.
बड़ी बहन ने मानी पिता की बात
छोटी बेटी टीगान से उलट खालिद मसूद की बड़ी बेटी 24 वर्षीय एंडी ने अपने पिता की बात को कबूल कर लिया. बड़ी बेटी ने अपने पिता की बात मानी, और इस्लाम धर्म के तहत जिंदगी को जीना शुरू किया.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर
जब से टीगान का यह बयान सामने आया है, इसके बाद से ही टीगान की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. लोग टीगान के समर्थन में आ गये हैं, और उनकी तारीफ कर रहे हैं.
बता दें कि लंदन स्थित वेस्टमिंस्टर ऐबी के पास बुधवार को एक व्यक्ति ने कार से राहगीरों को कुचल दिया था. इसके बाद खुद को पुलिस से घिरा हुआ देख उसने क पुलिस अधिकारी को चाकू मार दिया. हालांकि इसके बाद स्कॉटलैंड यार्ड ने उसे मार गिराया. इन हमलों में पांच लोगों की मौत हो गई और कम-से-कम 20 लोग घायल हो गए.


US एयरलाइन्स ने लेगिंग पहनने की वजह से दो लड़कियों को फ्लाइट में जाने से रोका
27 March 2017
अमेरिका की यूनाइटेड एयरलाइन्स की फ्लाइट में रविवार सुबह दो लड़कियों को लेगिंग पहने होने की वजह से सफर करने से रोक दिया गया। ऐसे ही कॉस्ट्यूम में आई एक और लड़की ने जब कपड़े चेंज किए तो उसे फ्लाइट में जाने की इजाजत दी गई। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर एयरलाइन्स के खिलाफ लोगों ने काफी नाराजगी जताई।
- वॉशिंगटन पोस्ट में एक चश्मदीद के हवाले से यह जानकारी दी गई है। घटना डेनवर से मिनीपोलिस जा रही फ्लाइट में हुई।
- घटना के दौरान डेनवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के गेट पर मौजूद शेन्नोन वॉट‌्स ने ट्वीटर पर लिखा, "वो उस पर दबाब डाल रहे थे कि लेंगिंग बदलो या उस पर कोई और ड्रेस पहनो, नहीं तो फ्लाइट में नहीं जाने दिया जा सकता। अमेरिका की पुलिस महिलाओं के कपड़ों को लेकर यह सब कब से करने लगी?"
- बता दें कि शेन्नोन सोशल एक्टिविस्ट हैं। वो मॉम्स डिमांड एक्शन फॉर गन रिफॉर्म्स ग्रुप की फाउंडर हैं।
यूनाटेड एयरलाइन्सने कहा- यह रूल के खिलाफ था
- इसके जवाब में यूनाइटेड एयरलाइन्स ने लिखा, "यूनाइटेड (एयरलाइन्स) को हक है कि वह कॉन्ट्रैक्ट ऑफ कैरेज के तहत सलीके के कपड़े नहीं पहने होने पर पैसेंजर्स को रोक सकती है। यह एजेंट की समझ पर छोड़ दें।"
- "एयरलाइन का पैसेंजर कॉन्ट्रैक्ट सभी पैसेंजर्स और क्रू मेंबर्स की सेफ्टी के लिए है। अगर पैसेंजर ठीक ढंग से कपड़े नहीं पहने और या खाली पैर हो तो उसे सफर करने से रोका जा सकता है।" हालांकि, एयरलाइन्स ने यह नहीं बताया कि सलीके वाले कपड़े के मायने क्या हैं।
- यूनाइटेड एयरलाइन्स के स्पोक्सपर्सन जोनाथन गुइरिन ने भी इसकी पुष्टि की है कि दो टीनएज लड़कियों को फ्लाइट में नहीं चढ़ने दिया गया। लेकिन उन्होंने कहा कि लड़कियों यूनाइटेड एयरलाइंस के इम्प्लाॅई पास पर सफर कर रही थीं, इस पर ड्रेस कोड में छूट नहीं दी जा सकती।
- उन्होंने कहा कि हमारे रेग्युलर पैसेंजर्स अगर लेगिंग या योग पैंट में हों तो उन्हें नहीं रोका जाता।
सोशल मीडिया पर नाराजगी
- इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर काफी नाराजगी जताई जा रही है। कुछ लोगों ने इसे भयानक, बेइज्जती करने वाली और बेवकूफी भरी हरकत कहा है। कुछ ने एयरलाइन्स से पूछा है कि लेगिंग को सलीके की ड्रेस क्यों नहीं कहा जा सकता।


ब्रिटिश संसद के बाहर हमला: 5 की मौत, ट्रंप और मोदी ने कहा- आतंक के खिलाफ हम ब्रिटेन के साथ
23 March 2017
लंदन: ब्रिटेन में संसद परिसर के बाहर एक संदिग्ध आतंकी के कार से कई राहगीरों को कुचलने और एक पुलिस कर्मी को चाकू मारने की घटना में पांच लोगों की मौत हो गयी और 40 अन्य लोग घायल हो गए. स्कॉटलैंड यार्ड के अधिकारियों ने ‘अंतरराष्ट्रीय आतंक' से प्रेरित इस घटना में हमलावर को मार गिराया.
मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने मारे गए पुलिस अधिकारी की पहचान 48 वर्षीय कीथ पाल्मर के तौर पर की है. साथ ही उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की है कि पुलिस हमलावर से ‘परिचित' थी. आतंकवाद रोधी नीति के राष्ट्रीय प्रमुख एवं कार्यवाहक उपायुक्त मार्क रॉवले ने कहा, कि मैं अब इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कि हमले में तीन आम लोग मारे गये हैं. मैंने पूर्व में संदिग्ध हमलावर के सशस्त्र अधिकारी द्वारा मारे जाने की पुष्टि भी की थी. इस तरह अब मरने वालों की संख्या पांच हो गई है.
रॉवले ने कहा, कि मैं हमलावर की पहचान को लेकर अभी कोई जानकारी नहीं दे सकता लेकिन हमें लगता है कि वह ‘अंतरराष्ट्रीय आतंक' से प्रेरित था. उन्होंने कहा, कि हमें लगता है कि हमले में करीब 40 लोग घायल हुए हैं लेकिन यह आकंडा बाद में बदल भी सकता है. कुछ लोगों को गंभीर चोटे भी आई हैं. इनमें तीन पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं जिनमें से दो की हालत नाजुक है.
ब्रिटिश संसदीय परिसर में हुए आतंकी हमले के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरीजा मे से बात की और दोषियों को कानून के दायरे में लाने के लिये अपनी सरकार के पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया. व्हाइटहाउस ने दोनों नेताओं के बीच फोन पर हुई बातचीत का ब्यौरा देते हुये कहा, कि हमले की प्रतिक्रिया देने और दोषियों को कानून के दायरे में लाने के लिये राष्ट्रपति ट्रंप ने पूर्ण सहयोग की प्रतिबद्धता जतायी और सरकार के पूरे समर्थन का भरोसा दिया.
बातचीत में ट्रंप ने ब्रिटिश सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई की भी सराहना की. वहीं बर्लिन में जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने भी ब्रिटिश संसद पर हुये हमले के बाद कहा कि जर्मनी ब्रिटेन के साथ ‘दृढता और सख्ती' से खडा है. मर्केल ने एक बयान में कहा, कि इस गतिविधि की पृष्ठभूमि हालांकि अभी नहीं पता है लेकिन मैं यह फिर से साफ करना चाहती हूं कि जर्मनी और उसके नागरिक हर तरह के आतंकवाद के खिलाफ जंग में ब्रिटेन के साथ पूरी दृढता और सख्ती से खडे हैं.
भारत ने ब्रिटेन की संसद के निकट वेस्टमिंस्टर में बुधवार को हुए आतंकी हमले की निंदा की है. भारत ने कहा है कि लोकतांत्रिक और सभ्य समाज में आतंकवाद के लिए कोई स्थान नहीं है. हमले को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने ट्वीट किया कि भारत वेस्टमिंस्टर आतंकी हमले की कड़ी निंदा करता है और लोगों की मौत पर शोक प्रकट करता है. लोकतांत्रिक और सभ्य समाज में आतंकवाद के लिए कोई स्थान नहीं है.
पीएम मोदी ने आज सुबह अपने ट्विटर वॉल पर लिखा कि हमले की खबर सुनकर आहत हूं. मेरी संवेदना पीडित परिवार के साथ है. इस कठिन घड़ी में भारत ब्रिटेन के साथ है. भारत आतंक के खिलाफ लड़ाई में ब्रिटेन के साथ है. इस ट्वीट को उन्होंने ब्रिटेन की पीएम को टैग किया.


अमेरिका: किसी भी वक्त मारा जा सकता है ISIS लीडर अबु बकर अल-बगदादी
23 March 2017
वॉशिगंटन: अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा कि इस्लामिक स्टेट समूह का नेता अबु बकर अल-बगदादी जल्द ही मारा जाएगा क्योंकि उसके लगभग सभी साथी मारे जा चुके हैं। टिलरसन ने 68 देशों के वैश्विक गठबंधन की मंत्री स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए कहा, ‘अबु बकर अल-बगदादी के लगभग सभी साथी अब मारे जा चुके हैं। इनमें ब्रसेल्स, पेरिस और अन्य स्थानों पर हमलों का मास्टरमाइंड भी शामिल था। अब किसी भी समय बगदादी का भी यही अंजाम सकता है।’
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि यह गठबंधन आईएसआईएस के खिलाफ जारी लड़ाई में अहम भूमिका निभाते हुए अंतिम दौर में पहुंच चुका है। हालिया अर्थपूर्ण वित्तीय योगदानों के अलावा सीरिया और इराक में विदेशी आतंकी लड़ाकों को विदेशों से आने वाले धन में भी पिछले साल 90 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है।
उन्होंने कहा कि अब आतंकियों के लिए अंदर आना बहुत मुश्किल हो गया है और इससे भी अहम बात यह है कि उनके लिए बाहर निकलकर इन देशों को धमकाना भी बहुत मुश्किल हो गया है। टिलरसन ने कहा कि इराक के नेतृत्व में मोसुल को वापस हासिल करने के लिए चल रही कवायद आईएसआईएस को उसके प्रमुख गढ़ से खदेड़ रही है और लाखों नागरिकों को आजाद कर रही है। उन्होंने कहा, ‘मोसुल का यह अभियान इराकी सुरक्षा बलों और कुर्द पेशमर्गा के बीच सहयोग के बिना सफल नहीं हो सकता था।’
गौरतलब है कि आईएसआईएस और अन्य आतंकवादी संगठनों से निपटने के लिये 68 देशों ने करार कर गठबंधन किया है। हालांकि भारत इस 68 देशों के वैश्विक सगंठन का हिस्सा नहीं है।


अमेरिका में गोलीबारी में एक पुलिस अधिकारी समेत चार की मौत
23 March 2017
अमेरिका में एक पुलिस अधिकारी समेत चार लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई. मामले में पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है. गोलीबारी की वजह आपसी विवाद बताया जा रहा है. पुलिस ने किसी तरह के आतंकी खतरे से भी इनकार किया है. फिलहाल मामले की जांच की जा रही है.
बुधवार को अमेरिका के उत्तरी विस्कॉन्सिन के तीन इलाकों में गोलीबारी की घटना हुई. ब्रिटिश संसद के बाहर आतंकी हमले के बाद अमेरिका में गोलीबारी की यह घटना सामने आई है. पुलिस के मुताबिक गोलीबारी की घटनाएं विस्कॉन्सिन इलाके में स्थित मैराथन सेविंग बैंक के अलावा एक कानूनी फर्म और एक अपार्टमेंट कंप्लेक्स परिसर में हुई.
इस दौरान गोलीबारी में स्वाट टीम के एक अधिकारी की मौत हो गई. हालांकि पुलिस ने हमले में जान गंवाने वाले किसी भी पीड़ितों के नाम का खुलासा नहीं किया है. न्याय विभाग के आपराधिक जांच शाखा के डिप्टी एडमिनिस्ट्रेटर जेसफ स्मिथ ने बताया कि 100 से ज्यादा अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं. इस बाबत जल्द ही जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी.


छह मुस्लिम बहुल देशों से ब्रिटेन आने वाले सवारी विमानों में लैपटॉप पर लगी रोक
22 March 2017
ब्रिटेन ने मंगलवार को छह मुस्लिम बहुल देशों से आने वाले सवारी विमानों पर लैपटॉप लाने पर रोक लगा दी. आदेश के मुताबिक - कैबिन बैगेज में लेपटॉप, आईपैड, टैबलेट, डीवीडी प्लेयर और एक तय साइज़ के मोबाइल फोन लाने पर रोक रहेगी. ब्रिटेन की तरफ से जारी यह प्रतिबंध 14 एयरलाइंस पर लागू रहेगा, जो सीधे मुस्लिम बहुल देशों से होकर आती है. इनमें तुर्की, लेबनान, इजिप्ट, जॉर्डन, ट्यूनिशिया और सउदी अरब शामिल हैं. इससे पहले अमेरिका ने मुस्लिम बहुल देशों से आ रही उड़ानों में यात्रियों पर नई पाबंदियों लगाई हैं, जिनमें इजिप्ट, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, तुर्की और यूएई से आर रहे यात्री विमान में लैपटॉप, आईपैड , कैमरा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान ले जाने पर रोक है. ऐसा सुरक्षा सबंधी खतरे के मद्देनज़र किया गया है.
अमेरिकी समाचारपत्र 'वॉशिंगटन पोस्ट' के मुताबिक, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने इस बारे में कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की है, और टिप्पणी करने से भी इंकार कर दिया है, लेकिन इस प्रतिबंध के बारे में रॉयल जोर्डानियन एयरलाइन्स ने सोमवार को एक ट्वीट के ज़रिये बताया. समाचारपत्र का यह भी दावा है कि दो सूत्रों ने पुष्टि की है कि प्रतिबंध लागू किए जाएंगे. रॉयल जोर्डानियन एयरलाइन्स का ट्वीट अब डिलीट किया जा चुका है, जिसमें कहा गया था कि 21 मार्च से यात्रियों को अपने साथ कुछ पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लेकर यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी. ट्वीट में कहा गया था, "कुछ संबंधित अमेरिकी विभागों से मिले निर्देशों के बाद हम अमेरिका आने और वहां से जाने वाले अपने प्रिय यात्रियों को सूचना देना चाहते हैं कि फ्लाइट केबिन में इलेक्ट्रॉनिक तथा इलेक्ट्रिकल उपकरण लेकर आना कड़ाई से प्रतिबंधित है..." ट्वीट के मुताबिक सेलफोन तथा मेडिकल उपकरणों से प्रतिबंध से छूट दी गई है.हालांकि एक अमेरिकी एयरलाइन अधिकारी के मुताबिक अमेरिकी एयरलाइनों को इस प्रतिबंध से परे रखा गया है.
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने इस संबंध में पूछे गए सभी सवालों को ट्रांसपोर्टेशन सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (टीएसए) के पास भेज दिया, और फिर टीएसए अधिकारियों ने उन्हें होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) के पास भेज दिया. होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने एक ईमेल के ज़रिये इन ख़बरों पर कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया.


तालिबान, आईएस से लड़ने के लिए अमेरिका और ज़्यादा फौजियों को भेजे : अफगानिस्तान
22 March 2017
वाशिंगटन: अफगानिस्तान चाहता है कि तालिबान और इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई में सैन्य बलों की कमी को पूरा करने के लिए अमेरिका और बल अफगानिस्तान में भेजे. अफगानिस्तान के विदेश मंत्री सलाहुद्दीन रब्बानी ने अफगानिस्तान में अमेरिका के शीर्ष कमांडर जॉन निकल्सन की उस बात का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने अमेरिका या गठबंधन के अन्य पक्षों से और कुछ हज़ार सैनिक युद्ध से प्रभावित इस देश में भेजने की बात कही थी.
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अब तक यह नहीं बताया है कि वह निकल्सन की टिप्पणी की प्रतिक्रिया में और अधिक सैन्य बल अफगानिस्तान भेजेगा या नहीं. अफगानिस्तान में अभी 8,400 अमेरिकी सैनिक तनात हैं. यहां अमेरिकी सैनिक आतंकवादियों से मुकाबला करने के लिए अभियान चला रहे हैं और अफगानिस्तान के सैनिकों को प्रशिक्षण दे रहे हैं. अफगानिस्तान में 16 साल से युद्ध चल रहा है.
काबुल के एक सैन्य अस्पताल पर इस महीने हुए भीषण हमले का हवाला देते हुए रब्बानी ने कहा कि अफगानिस्तान अपने सैन्य बलों की कमी को पूरा करने के लिए अमेरिका की मदद चाहता है. रब्बानी ने कहा, "हमें विश्वास है कि (अमेरिकी) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाला अमेरिकी प्रशासन रणनीतिक रूप से इस मामले से जुड़ा रहेगा और अपना सहायता जारी रखेगा.."


अमेरिका को आशंका, उत्तर कोरिया पाबंदी की परवाह किए बिना जल्द ही फिर करेगा मिसाइल प्रक्षेपण
22 March 2017
वाशिंगटन: अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने आशंका जताई है कि उत्तर कोरिया अगले कुछ दिनों में एक अन्य मिसाइल प्रक्षेपण कर सकता है. अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका ने अलग-थलग पड़े इस देश पर निगरानी बढ़ा दी है और उसने पूर्वी तटीय शहर वॉनसान में वीआईपी सीटों को बनाने के साथ-साथ मिसाइल लॉन्चर को भी देखा है. अधिकारियों ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि नए निगरानी यंत्रों में उपग्रह, ड्रोन और अन्य विमान शामिल हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने लंबी दूरी के मिसाइल परीक्षण करने को लेकर उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगाया है. उत्तर कोरिया ने कहा कि वह परमाणु आयुधों से लैस अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल विकसित करने के अंतिम चरण में है. यह बैलिस्टिक मिसाइल अमेरिका तक मार कर सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया आने वाले कुछ वर्षों में इस क्षमता को हासिल कर सकता है.
इससे पहले उत्तर कोरिया ने इस महीने जापान के समुद्र में चार बैलिस्टिक मिसाइल दागी थीं. उत्तर कोरिया ने शनिवार को नए तरीके के उच्च गति वाले रॉकेट इंजन का ज़मीनी परीक्षण किया था. उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने कहा कि यह परीक्षण इंजन की क्षमता का पता लगाने के लिए था, लेकिन हथियार विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी तकनीक उत्तर कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए भी लागू होती है.
व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर ने उत्तर कोरिया से पैदा होने वाले खतरे को 'गंभीर और बढ़ता हुआ' बताया था.


ट्रंप ने शीर्ष न्याय‍िक पद के लिए भारतीय-अमेरिकी को किया नामित
21 March 2017
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विधि क्षेत्र के दिग्गज भारतीय अमेरिकी अमूल थापर को शक्तिशाली अमेरिकी अपीली अदालत में प्रमुख न्यायकि पद के लिए नामित किया है. 47 वर्षीय अमूल थापर भारतीय मूल के पहले ऐसे अमेरिकी हैं, जिन्हें ट्रंप ने शीर्ष न्यायिक पद के लिए नामित किया है.
थापर को जब वर्ष 2007 में केंटकी के पूर्वी जिले में अमेरिका जिला जज के रूप में नियुक्त किया गया था, तो इस पद पर आसीन होने वाले वह पहले दक्षिण एशियाई आर्टिकल 3 जज थे. अगर सीनेट इस नियुक्ति की पुष्टि करती है तो थापर अमेरिका के शक्तिशाली सिक्स्थ सर्किट कोर्ट ऑफ अपील का हिस्सा होंगे.
यहां केंटकी, टेनेसी, ओहायो और मिशिगन राज्यों की अपीलों की सुनवाई होती है. थापर उन 20 लोगों में शामिल हैं, जिनके नाम ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान सुप्रीम कोर्ट के लिए नामित व्यक्तियों के रूप में जारी किए थे. सीनेट में बहुमत के नेता मिच मैकोनल ने थापर को नामित करने के ट्रंप के इरादे की सराहना की है.
आम तौर पर ट्रंप के आलोचक रहे साउथ एशियन बार एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (एसएबीए) ने भी ट्रंप के इस इरादे की तारीफ की है. थापर ने स्नातक की डिग्री बोस्टन कॉलेज से और कानून की डिग्री यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया से हासिल की है. वह जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी लॉ सेंटर में सहायक प्रोफेसर के तौर पर भी सेवा दे चुके हैं. थापर जहां ट्रंप समर्थक हैं, वहीं उनके पिता राज थापर ओबामा के समर्थक हैं.


आमदनी घटी, फिर भी दुनिया में सबसे ज्यादा खुश देश है नॉर्वे
21 March 2017
ओस्लो: बड़े-बुजुर्ग लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि पैसा खुशियां नहीं खरीद सकता। कहते हैं कि खुश होने के लिए बहुत सारा पैसा होना कोई शर्त नहीं। वर्ल्ड हैपी इंडेक्स की नई रिपोर्ट में नॉर्वे को दुनिया का सबसे खुश देश बताया गया है। पिछले साल नॉर्वे इस लिस्ट में चौथे नंबर पर था, लेकिन इस बार वह टॉप पर है। नॉर्वे के बाद डेनमार्क और आइसलैंड का नंबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दुनिया में सबसे ज्यादा खुशहाल देश नॉर्वे है। 14वें स्थान पर काबिज अमेरिका पिछले साल के मुकाबले इस बार एक स्थान और नीचे चला गया है। भारत इस सूची में 122वें स्थान पर है। पिछले साल भारत इस लिस्ट में 118वें स्थान पर था। वर्ल्ड हैपी इंडेक्स में कुल 155 देशों के नाम हैं। पिछले साल डेनमार्क इस सूची में सबसे ऊपर था।
पाकिस्तान और बांग्लादेश इस लिस्ट में भारत से आगे हैं। केंद्रीय अफ्रीका के देश सबसे ज्यादा दुखी देशों में शामिल हैं। बुरुंडी (154), तंजानिया (153), सीरिया (152) और रवांडा (151) स्थान पर हैं। इस सूची में टॉप टेन देश क्रमश: नॉर्वे, डेनमार्क, आइसलैंड, स्विट्जरलैंड, फिनलैंड, नीदरलैंड्स, कनाडा, न्यू जीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और स्वीडन हैं।
नॉर्वे की अर्थव्यवस्था में कच्चे तेल की काफी अहमियत है। पिछले काफी समय से कच्चे तेल की कीमत नीचे गिरने के बाद भी नॉर्वे इस इंडेक्स में सबसे ऊपर है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बेहद जागरूक नॉर्वे ने तेल उत्पादन को घटाने का फैसला किया था। आमदनी कम हो जाने के बावजूद नॉर्वे किस तरह इस सूची में पहले स्थान पर पहुंचा, यह दिलचस्प है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'खुशहाली के मामले में नॉर्वे को दुनिया के किसी भी अन्य देश से ज्यादा अंक मिले हैं। यहां के लोगों की खुशहाली का राज कच्चे तेल के उत्पादन से हासिल हुई दौलत नहीं है, बल्कि वे इसके बिना भी खुश हैं।' रिपोर्ट में आगे कहा गया है, 'तेल उत्पादन को कम करने का फैसला करके और वर्तमान से ज्यादा आने वाले कल पर खर्च कर नॉर्वे ने बाकी तेल उत्पादक अर्थव्यवस्थाओं से अलग मुकाम बनाया है।'
पिछले दशक के मुकाबले अमेरिका में लोगों की आमदनी ऊपर बढ़ गई है, लेकिन खुशी के मामले में अमेरिका नीचे गिर गया है। इस लिस्ट में अमेरिका 14वें नंबर पर है। पिछले साल वह 13वें स्थान पर था। इस सूची में ब्रिटेन 19वें नंबर पर है।


पहल नहीं करने की नीति छोड़कर भारत, पाकिस्‍तान पर पहले कर सकता है परमाणु हमला : विशेषज्ञ
21 March 2017
वाशिंगटन: अमेरिका में दक्षिण एशियाई मामलों के एक शीर्ष परमाणु विशेषज्ञ ने दावा किया है कि अगर भारत को यह आशंका हुई कि पाकिस्तान उस पर परमाणु हथियार से आक्रमण कर सकता है तो वह परमाणु का ‘पहले इस्तेमाल नहीं करने' की अपनी नीति को संभवत: त्याग सकता है और पाकिस्तान के खिलाफ उसके हमला से पहले ही हमला कर सकता है.
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में दक्षिण एशियाई परमाणु रणनीति के विशेषज्ञ विपिन नारंग ने वाशिंगटन में आयोजित ‘2017 कार्नेगी इंटरनेशनल न्यूक्लियर पॉलिसी कॉन्फ्रेंस' के दौरान कहा, ‘ऐसे साक्ष्य बढ़ रहे हैं कि भारत पाकिस्तान को पहले कदम उठाने की इजाजत नहीं देगा.' उन्होंने कहा कि भारत संभवत: ‘पहले इस्तेमाल नहीं करने' की अपनी नीति छोड़ सकता है और अगर उसे आशंका हुई कि पाकिस्तान उसके खिलाफ परमाणु हथियारों या ‘टैक्टिकल' परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने जा रहा है तो वह पाकिस्तान के खिलाफ उसके हमला करने से पहले हमला कर सकता है.
बहरहाल, उन्होंने यह उल्लेख किया कि भारत का पहले हमला संभवत: परंपरागत हमला नहीं होगा और वह पाकिस्तान के ‘टैक्टिकल' परमाणु हथियारों के मिसाइल लॉन्चरों को भी निशाना बना सकता है. नारंग ने कहा कि यह सोच अतिवादी विचारधारा वाले लोगों या अपनी सरकार द्वारा उनकी अपेक्षाओं के पूरा नहीं करने से निराश सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के नहीं हैं बल्कि भारत के स्‍ट्रटेजिक फोर्सेस के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस नागल के है.
परमाणु रणनीतिकार ने कहा कि भारत के बेहद सम्मानित प्रभावशाली व्यक्ति एवं पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन द्वारा वर्ष 2016 में प्रकाशित अपनी किताब ‘च्वाइसेस : इनसाइड द मेकिंग ऑफ इंडियन फॉरेन पॉलिसी' में इसका प्रमुखता से जिक्र किये जाने से यह संभवत: अधिक महत्वपूर्ण एवं आधिकारिक हो जाता है.
नारंग ने कहा, ‘गंभीर स्वरों को कभी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. ये स्वर यह सुझाव देते दिखाई दे रहे हैं कि भारत उसी दिशा में बढ़ सकता है और निश्चित रूप से उस दिशा में बढ़ना चाहता है.' उन्होंने कहा कि संक्षेप में कहें तो हमलोग चीन एवं पाकिस्तान के बीच भारत की परमाणु रणनीति के विच्छेद का गवाह बन सकते हैं.
अमेरिकी थिंक टैंक ‘स्टिमसन सेंटर' में वरिष्ठ सहयोगी और दक्षिण एशियाई मामलों के उप निदेशक समीर ललवानी ने कहा कि नारंग की इस टिप्पणी ने दक्षिण एशिया की सामरिक स्थिरता की समस्या की पारंपरिक समझ को चुनौती दी है.
ललवानी ने कहा कि उच्च-स्तरीय राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों (कार्यरत एवं सेवानिवृत्त) के हालिया बयानों एवं लेखों के आधार पर नारंग ने दलील दी कि भारत अपना प्रभाव बढ़ाने या पाकिस्तान के खिलाफ ‘पहले हमला' करने की इजाजत देकर अपनी ‘पहले नहीं इस्तेमाल करने' की परमाणु रणनीति में ‘जबर्दस्त बदलाव' कर परमाणु प्रतिरोधक बल बन सकता है.


ऑस्ट्रेलिया के चर्च में भारतीय पादरी का गला काटा, हमलावर बोला- वो पढ़े-लिखे नहीं थे
20 March 2017
मेलबर्न: यहां एक भारतीय मूल के पादरी टॉमी कलाथूर मैथ्यू (48) का चर्च में ही गला रेत दिया गया। इसे नस्ली हमला माना जा रहा है। हमलावर ने लोगों से कहा कि वे पढ़े-लिखे नहीं थे। एक 72 साल के शख्स को जानबूझकर हमला करने के आरोप में अरेस्ट किया गया। बाद में उसे बेल भी दे दी गई।S
- लोकल मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, "हमलावर ने पादरी से कहा कि वे भारतीय हैं। इस लिहाज से उन्हें हिंदू या मुसलमान होना चाहिए।" बाद में उसने लोगों से कहा कि वे अनक्वालिफाइड थे।
- बताया जा रहा है कि हमलावर रविवार को चाकू लेकर फॉकनर स्थित सेंट मैथ्यूज चर्च में दाखिल हुआ।
- चर्च आने वालीं एक महिला मेलिना के मुताबिक, "चर्च के पिछले हिस्से में बहुत तेज चिल्लाने की आवाज आई। इसके बाद मैंने देखा कि फादर टॉमी हाथ हिलाकर मुझे बुला रहे हैं।"
- "उन्होंने मुझे अपना गला दिखाया। बोले कि मेरा गला काट दिया गया है।"
- फिलहाल, टॉमी को शरीर के ऊपरी हिस्से में चोटें आई हैं। वे हॉस्टिपल में एडमिट हैं और उनकी हालत स्थिर है।
क्या बोली पुलिस?
- सीनियर कॉन्स्टेबल रायनन नॉर्टन के मुताबिक, "इस स्थिति में हमें लगता है कि घटना कुछ अलग तरह की है।"
- "हमें नहीं लगता कि वो किसी और के लिए खतरा बनेगा।"
- मेलबर्न में कैथोलिक चर्च के स्पोक्सपर्सन शेन हीली ने घटना को डर पैदा करने वाला बताया।
- शेन के मुताबिक, "किसी भी शख्स के साथ इस तरह का बर्ताव नहीं होना चाहिए। टॉमी लोगों के लिए अच्छा काम कर रहे हैं। ये कैथोलिक पादरियों को इन्सपिरेशन देने वाला है।"


NKorea ने किया रॉकेट इंजन का टेस्ट, तानाशाह बोला- दुनिया जल्द कामयाबी देखेगी
20 March 2017
सिओल: नॉर्थ कोरिया ने हाई-परफॉर्मेंस वाले नए रॉकेट इंजन का टेस्ट किया है। इस इंजन की मदद से वह स्पेस में रॉकेट भेज सकेगा। नॉर्थ के सरकारी मीडिया ने इस बात की जानकारी दी है। तानाशाह किम जोंग उन ने कहा है कि पूरी दुनिया जल्द ही हमारी ताकत और कामयाबी देखेगी। बता दें कि पिछले महीने नॉर्थ कोरिया ने 500 किमी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का टेस्ट किया था।
- नॉर्थ कोरिया के स्टेट मीडिया केसीएनए के मुताबिक, देश नए सैटेलाइट रॉकेट लॉन्च की तैयारी कर रही है।
- इंजन टेस्ट को लेकर उन ने कहा, "हमने बड़ा अचीवमेंट हासिल किया है। दुनिया जल्द ही हमारी और कामयाबी देखेगी।"
- केसीएनए के मुताबिक, "नया इंजन आउटर स्पेस में रॉकेट पहुंचाने में कारगर साबित होगा। इसके डेवलपमेंट से नॉर्थ कोरिया दुनिया के विकसित देशों की कैटेगरी में शामिल हो गया है।"
- वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि एटमी ताकत वाला नॉर्थ कोरिया अगर स्पेस प्रोग्राम में कामयाब हो जाता है तो बेहतर तरीके से हथियारों का टेस्ट कर सकेगा।
क्या बोला अमेरिका?
- अमेरिका के विदेश मंत्री रैक्स टिलरसन जापान और साउथ कोरिया के दौरे के बाद शनिवार को चीन पहुंचे।
- उन्होंने कहा, "अमेरिका नॉर्थ कोरिया के मुद्दे पर लंबे वक्त तक फेल्ड डिप्लोमेसी के तहत काम नहीं कर सकता।"
- टिलरसन ने वॉर्निंग दी कि नॉर्थ कोरिया के खिलाफ मिलिट्री एक्शन का ऑप्शन हमारे पास मौजूद है।
मार्च में दागी थीं 4 मिसाइलें
- जापान के पीएम शिंजो आबे का दावा था कि नॉर्थ कोरिया ने 6 मार्च को 4 मिसाइलें दागी थीं। इनमें से 3 सी ऑफ जापान में गिरी थीं।
- साउथ कोरियाई डिफेंस मिनिस्ट्री ने भी कहा था- नॉर्थ कोरिया ने कई मिसाइल दागी जो 1000 किमी तक गईं।
पिछले साल नॉर्थ कोरिया ने किए थे दो टेस्ट
- पिछले साल अक्टूबर में नॉर्थ कोरिया ने बेंग्योन एयरबेस से ही मुसुदन मिसाइल के 2 टेस्ट किए थे।
- योनहाप न्यूज एजेंसी के मुताबिक, साउथ कोरियाई मिलिट्री को शक है कि नॉर्थ मध्यम दूरी की मुसुदन मिसाइल का टेस्ट कर सकता है।
- इस महीने साउथ कोरिया के दौरे पर गए अमेरिकी डिफेंस मिनिस्टर जेम्स मैटिस ने नॉर्थ कोरिया को वॉर्निंग दी थी। कहा था- अगर नॉर्थ कोरिया कोई भी न्यूक्लियर अटैक करता है तो उसे गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।
- मैटिस ने कहा, "अमेरिका या उसके किसी सहयोगी पर एटमी हमला किया जाता है तो उसका जोरदार तरीके से जवाब दिया जाएगा।"
नॉर्थ कोरिया कर चुका है 2 एटमी टेस्ट
- 2016 में नॉर्थ कोरिया ने 2 न्यूक्लियर टेस्ट किए थे। इसमें एक हाइड्रोजन बम का टेस्ट भी शामिल है।
- इसके अलावा, उन ने पिछले साल ही कई मिसाइल टेस्ट भी किए थे।
- जनवरी में उन ने कहा था कि वह इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) बनाने के अंतिम चरण में है।


पाकिस्तान में हिंदू विवाह विधेयक बना कानून, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी
20 March 2017
इस्लामाबाद: पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से जुड़े बहुप्रतीक्षित विवाह कानून को राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने मंजूरी दे दी है। इसके बाद यह विधेयक अब कानून बन गया है। इसके बाद अब वहां रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को विवाह के बाद कानूनी मान्यता मिल सकेगी। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद पीएमओ से जारी एक बयान में इसकी पुष्टि करते हुए कहा गया है कि पीएम की सलाह पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने 'हिंदू विवाह विधेयक 2017' को मंज़ूरी दे दी है।
इससे पहले 9 मार्च को इसे संसद से मंजूरी मिली थी। कानून को पारित होने से पहले लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा है। नेशनल असेंबली में दूसरी बार यह विधेयक पारित हुआ था। इससे पहले पिछले साल सितंबर में संसद ने इस कानून को पारित कर दिया था। लेकिन बाद में सीनेट ने इसमें कुछ बदलाव कर दिए थे।
नियमानुसार, कोई भी विधेयक तभी राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है, जब दोनों सदनों से समान प्रति को ही पारित किया गया हो। दोनों सदनों से विधेयक के अंतिम स्वरूप को मंजूरी मिल गई जिसके बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा गया। कानून बनने के बाद यह तीन प्रांतों पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में लागू होगा।
सिंध प्रांत पहले ही अपने यहां हिंदू विवाह अधिनियम लागू कर चुका है। इस कानून को पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यक हिदुओं के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अधिनियम के अंतर्गत हिंदुओं को मुस्लिमों के 'निकाहनामे' की तरह शादी के प्रमाण के तौर पर 'शादीपरत' दिया जाएगा। विधवाओं को सरकार से मिलने वाली सुविधाओं का लाभ लेने में शादी का पंजीकरण काम आएगा। शादी के लिए हिंदू जोड़े की न्यूनतम उम्र 18 साल रखी गई है। कानून के मुताबिक, अलग होने के लिए हिंदू दंपती अदालत से तलाक का अनुरोध भी कर सकेंगे।
तलाक ले चुके व्यक्ति को इस कानून के तहत फिर से विवाह का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा हिंदू विधवा को पति की मृत्यु के छह महीने बाद फिर से शादी का अधिकार होगा। पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी वहां की जनसंख्या का करीब 1.6 फीसद है।
भारतीय कानून से कैसे है अलग
पाकिस्तान में हिंदू विवाह अधिनियम वहां के हिंदू समुदाय पर लागू होता है, जबकि भारत में हिंदू मैरिज एक्ट हिंदुओं के अलावा जैन, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी लागू होता है।
पाकिस्तानी कानून के मुताबिक शादी के 15 दिनों के भीतर इसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा। भारतीय कानून में ऐसा प्रावधान नहीं है। इस बारे में राज्य सरकारें कानून बना सकती हैं।
पाकिस्तान में शादी के लिए हिंदू जोड़े की न्यूनतम उम्र 18 साल रखी गई है। भारत में लड़के की न्यूनतम उम्र 21 साल और लड़की की 18 साल निर्धारित है।
पाकिस्तानी कानून के मुताबिक, अगर पति-पत्नी एक साल या उससे अधिक समय से अलग रह रहे हैं और साथ नहीं रहना चाहते, तो शादी को रद कर सकते हैं। भारतीय कानून में कम से कम दो साल अलग रहने की शर्त है।
पाकिस्तान में हिंदू विधवा को पति की मृत्यु के छह महीने बाद फिर से शादी का अधिकार होगा। भारत में विधवा पुनर्विवाह के लिए कोई समयसीमा तय नहीं है।


पाकिस्तान के साथ मिलकर बलिस्टिक मिसाइल्स, एयरक्राफ्ट्स बनाएगा चीन
17 March 2017
पेइचिंग: 2016 में जब भारत ने अग्नि 5 मिसाइल की लॉन्चिंग की, तो चीन काफी नाराज हुआ था। चीन ने इसपर आपत्ति भी जताई थी, लेकिन अब वही चीन अपने 'सदाबहार' दोस्त पाकिस्तान के साथ मिलकर बलिस्टिक, क्रूज, ऐंटी-एयरक्राफ्ट और ऐंटी-शिप मिसाइल बनाने की योजना बना रहा है। यह जानकारी चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने दी है।
चीन और पाकिस्तान दोनों साथ में मिलकर बड़ी संख्या में FC-1 शियोलॉन्ग कॉम्बेट एयरक्राफ्ट का उत्पादन करेंगे। FC-1 शियोलॉन्ग कॉम्बेट एयरक्राफ्ट हल्के वजन के होते हैं और इन्हें कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही, दोनों देश आतंकवाद निरोधी कार्यक्रमों में सहयोग बढ़ाने के लिए भी सहमत हो गए हैं। दोनों देशों में आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भी समझौता रजामंदी कायम हुई है। जिन आतंकवादियों के लिए कार्रवाई की बात हुई है, उनमें चीन के अंदर सक्रिय पूर्वी तुर्केस्तान इस्लामिक मूवमेंट भी शामिल है।
गुरुवार को पेइचिंग में पाकिस्तान के सेना प्रमुख कमर बाजवा और चीन की सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी फांग फेंगजुई की मुलाकात हुई। इस बैठक के दौरान ही दोनों देशों के बीच इस बाबत समझौता हुआ। चीन के सहयोग के बदले इस्लामाबाद ने चीन को चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) की पूरी सुरक्षा का आश्वासन दिया है। चीन के रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी बयान के मुताबिक, इस बैठक के दौरान बाजवा ने कहा, 'चीन और पाकिस्तान की एक-दूसरे के साथ खास दोस्ती है और उनके हित भी एकसमान हैं।'
CPEC की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान ने 15,000 जवानों को तैनात किया है। साथ ही, पाकिस्तानी नौसेना ने भी ग्वादर बंदरगाह की सुरक्षा बढ़ा दी है। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, मंगलवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चीन में पाकिस्तान के राजदूत मसूद खालिद ने इस बात की जानकारी दी। CPEC चीन की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरने वाला यह आर्थिक गलियारा चीन के शिनजांग प्रांत को बलूचिस्तान स्थित ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है।
चीन की सेना में काम कर चुके एक सैन्य विशेषज्ञ ने ग्लोबल टाइम्स को बताया, 'पाकिस्तान को तालिबान और अल-कायदा जैसे आतंकवादी संगठनों से हमेशा खतरा बना रहता है। ऐसे में सैन्य सहयोग जरूरी है। चीन और पाकिस्तान के बीच का सैन्य सहयोग उस इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, जहां चीन ने इतना बड़ा निवेश किया है।' जानकारी के मुताबिक, पाक सेनाध्यक्ष बाजवा ने इस बैठक के दौरान कहा कि पाकिस्तानी सेना चीन की सेना के साथ अपना सहयोग और बढ़ाना चाहती है, ताकि आतंकवादियों का अधिक दृढ़ता के साथ मुकाबला किया जा सके।


अमरीका ने H-1B वीजा की प्रीमियम प्रोसेसिंग स्थगित की
17 March 2017
वाशिंगटन: अमरीका ने आज एच-1बी वीजा की प्रीमियम प्रोसेसिंग को अस्थाई रूप से स्थगित कर दिया है। अप्रैल के पहले सप्ताह में कार्य वीजा के लिए आने वाले बड़ी संख्या में आवेदनों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। एच-1बी वीजा भारतीय आईटी कंपनियों तथा पेशेवरों के बीच काफी लोकप्रिय है।
अमरीकी नागरिकता तथा आव्रजन सेवाएं (यूएससीआईएस) की कार्यवाहक निदेशक लोरी साइलएब्बा ने सदन के सदस्यों को बताया कि एच-1बी कार्यक्रम को स्थगित नहीं किया गया है। हमने प्रीमियम प्रोसेसिंग स्थगित की है। इसका मतलब है कि हमें आवेदनों की प्रोसेसिंग 15 दिन में करनी होगी। अमरीका वित्त वर्ष 2017-18 के लिए एच-1बी कार्य वीजा के लिए आवेदन तीन अप्रैल से स्वीकार करना शुरू करेगा।
सांसदों के सवाल पर लोरी ने कहा कि अप्रैल के पहले सप्ताह मे यूएससीआईएस को दो लाख या इससे अधिक एच-1बी आवेदन मिलेंगे। उन्होंने कहा कि हम प्रीमियम प्रोसेसिंग नहीं कर पाएंगे। यदि एक सप्ताह में हमें दो लाख आवेदन मिलेंगे तो एेसा करना संभव नहीं है। इसे अस्थाई रूप से स्थगित किया गया है।


ढाका में रेपिड एक्‍शन बटालियन कैंप के बाहर आत्‍मघाती हमला
17 March 2017
पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजधानी ढाका में रेपिड एक्‍शन बटालियन कैंप के बाहर एक आत्‍मघाती हमलावर ने खुद को विस्‍फोटक से उड़ा लिया है। फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है। अभी तक इस हमले में मारे गए लोगों के बारे में पुलिस कुछ नहीं कह पा रही है। न ही आत्‍मघाती हमलावर की कोई जानकारी पुलिस को मिल सकी है। इस हमले में आरएबी के कुछ जवानों के घायल होने की भी खबर है।
जिस जगह यह हमला हुआ है वह अश्‍कोना स्थित हाजी कैंप के निकट है। स्‍थानीय मीडिया के मुताबिक इस हमले के बाद पूरे इलाके को पुलिस ने घेर कर सील कर दिया है। गौरतलब है कि दो दिन पहले ही चटगांव में हुए एक ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने संदिग्‍ध आतंकियों को मार गिराया था।


वीजा बैन पर तकरार, ट्रंप बोले- अधिकार क्षेत्र से बाहर न जाए अदालत
16 March 2017
वॉशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ट्रेवल बैन में हुए संशोधन के लागू होने से कुछ घंटे पहले ही बुधवार को एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने इस आदेश पर रोक लगा दी.
इस नए कानून पर रोक लगना प्रशासन के लिए बहुत बड़ा झटका है. जहां वे अस्थायी रूप से शरणार्थियों पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ छह प्रमुख मुस्लिम देशों के यात्रियों पर भी अस्थायी प्रतिबंध लगाना चाह रहे हैं.
हवाई में दायर हुए एक मुकदमे के जवाब में अमेरिकी जिला न्यायाधीश डेरिक वाटसन ने नए आदेश पर आपातकालीन रोक लगा दी है. मुकदमे में तर्क दिया गया था कि इस नए कानून में मुसलमानों के साथ भेदभाव किया जा रहा है.
इस पर ट्रंप ने नैशविले, टेनेसी में दिए गए अपने भाषण में कहा कि न्यायाधीश का आदेश हमें लोगों के सामने कमजोर दिखा रहा है और अदालत को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने की जरूरत नही है.
हवाई में विरोधी, राष्ट्रपति ट्रम्प के पहले के कैंपेनों का हवाला दे रहे हैं. जिसमें ट्रंप ने कहा था कि वे अमेरिका में पूरी तरह से मुस्लिमों की एंट्री बंद कर देंगे. हांलाकि बाद में ट्रंप ने अपनी भाषा पर नियंत्रण करते हुए ट्रेवल बैन और 6 देशों के अमेरिका में प्रवेश पर 90 दिन की रोक को अमेरिका की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया. इसके साथ ही अब ट्रंप लोगों को इसे किसी धर्म से जोड़ने के लिए मना कर रहे हैं. इन 6 देशों में ईरान, लीबिया, सीरिया, सोमालिया, सूडान और यमन हैं. पहले राक भी इस लिस्ट में शामिल था, लेकिन बाद में उसे इस लिस्ट से बाहर कर दिया.


मोदी की चुनावी जीत अच्छी खबर नहीं, भारत आसानी से समझौते नहीं करेगा: चीनी मीडिया
16 March 2017
बीजिंग: चीन के सरकारी मीडिया ने कहा है कि यूपी में मोदी की पार्टी को मिली जबर्दस्ती जीत से उनका 2019 में फिर सरकार में आना और पीएम बनना तय है। उनकी चुनावी जीत बेशक भारत की तरक्की के लिए अच्छी खबर है, लेकिन बाकियों के लिए नहीं। मोदी की जीत के ये मायने भी हैं कि दूसरे देशों के लिए उनके साथ किसी भी तरह का समझौता करना मुश्किल हो जाएगा।
- चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के एक ओपन एडिटोरियल (op-ed) में लिखा है, ''नरेंद्र मोदी की अगुआई में बीजेपी ने हाल ही में उत्तर प्रदेश चुनाव में जबर्दस्त जीत हासिल की है। यह देश का सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य है। इसके साथ ही देश के कुछ और राज्यों में भी उन्हें पब्लिक का जोरदार सपोर्ट मिला है।''
- ''इससे न सिर्फ मोदी की 2019 के चुनावों में जीतने की उम्मीद बढ़ी है, बल्कि कुछ लोगों का अनुमान है वो दूसरे टर्म के लिए भी सेट हो चुके हैं। उम्मीद यह भी जताई जा रही है कि उनके रहते भारत-चीन के बीच बॉर्डर विवाद सुलझ सकता है।''
मोदी का जीतना भारत के लिए अच्छी खबर, चीन के लिए नहीं
- ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, ''अगर मोदी अगला लोकसभा चुनाव जीत जाते हैं तो भारत का मौजूदा कड़ा रुख और सख्त बर्ताव जारी रहेगा। मोदी की जीत भारत के अपने डेवलपमेंट के लिए बेशक अच्छी खबर होगी। लेकिन बाकियों के लिए नहीं। उनकी जीत के ये मायने भी हैं कि दूसरे देशों के लिए उनके साथ किसी भी तरह का समझौता करना मुश्किल हो जाएगा।''
- ''बीजिंग और नई दिल्ली के बीच बॉर्डर के मसले को देखें तो अब तक इसका हल निकलने की उम्मीद नजर नहीं आई है। मोदी खुद एक बार भारत-चीन बॉर्डर पर देश के सबसे बड़े त्योहार दीपावली काे सेलिब्रेट कर अपना सख्त रुख जाहिर कर चुके हैं।''
मैन ऑफ एक्शन हैं मोदी
- ''जमीनी स्तर पर मोदी भले ही ज्यादा लचीले नजर ना आएं लेकिन उनके जैसे हार्डलाइनर्स में ये ताकत होती है कि वे अगर एक बार मन बना लें तो फैसलों को अमल में लाने की बेहतरीन काबिलियत के बूते वे किसी भी बात के लिए राजी हो सकते हैं।''
- ''मोदी की चुनावी जीत के बाद चीन को यह मौका मिला है कि वह इस बारे में और सोचे कि एक हार्ड लाइन सरकार के साथ अहम मसलों पर कैसे कामयाबी मिल सकती है। मोदी के कुछ कामों ने भले ही अच्छे नतीजे नहीं दिए हों लेकिन उन्होंने साबित कर दिया है कि वे मैन ऑफ एक्शन हैं। वे सिर्फ नारेबाजी करने वाले नेता नहीं हैं।''
मोदी की मजबूती से ऑब्जर्वर्स हुए चौकस
- ओपन एडिटोरियल में आगे लिखा गया है, ''कुछ समय से भारत-चीन के रिश्तों में तल्खी देखने को मिली है। लेकिन मोदी की सत्ता पर मजबूत होती पकड़ से ऑब्जर्वर्स चौकस हो गए और वो साेचने लगे कि दोनों देशों के रिश्ते बेहतर कैसे होंगे। मोदी के कुछ कदम भले ही नतीजे देने में नाकाम रहे हों, फिर भी उन्होंने साबित किया है कि वो सिर्फ नारे लगाने वाले राजनेता नहीं हैं, बल्कि काम करने वाले शख्स हैं।''
- ''मोदी का सख्त रवैया दोनों जगह नजर आता है। घरेलू राजनीति में जैसे उन्होंने नोटबंदी की और उनके डिप्लोमैटिक लॉजिक में भी।''
मोदी ने इंटरनेशनल लेवल पर बदली भारत की इमेज
- ओपन एडिटोरियल कहता है, ''मोदी ने इंटरनेशनल लेवल पर भारत की किसी को अपमानित नहीं करने वाली इमेज को बदला। उन्होंने दूसरे देशों के बीच विवादों पर अपनी सोच को खुलकर उजागर करना शुरू किया। उन्होंने भारत के चीन और रूस के साथ रिश्तों को बढ़ाया। शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन का मेंबर बनने के लिए अप्लाय किया।'' - ''मोदी ने अमेरिका और जापान के साथ डिफेंस कोऑपरेशन बढ़ाया है। इसके साथ ही साउथ चाइना सी मुद्दे और एशिया-पैसिफिक पर अमेरिका की स्ट्रैटजी को भी सपोर्ट किया है।''
भारत-चीन के बीच क्या है सीमा विवाद
- 1914 में अंग्रेजों के राज में तिब्बत के साथ शिमला समझौता किया गया था, जिसमें मैकमोहन लाइन को दोनों क्षेत्रों (भारत-तिब्बत) के बीच बॉर्डर माना गया था। लेकिन चीन सरकार इसे नहीं मानती।
- दोनों देशों के बीच 4057 किलोमीटर लंबी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए 19 बार बातचीत हो चुकी है, लेकिन यह बेनतीजा रही है।
- चीन अक्सई चिन को भी अपना इलाका बताता है, जबकि भारत कहता है कि चीन ने 1962 की जंग में उसके इस हिस्से पर कब्जा कर लिया था। यह इलाका विवादित है।
- चीन अरुणाचल प्रदेश को भी अपना हिस्सा बताता रहा है। वह इसे दक्षिणी तिब्बत कहता है।


अमेरिका से कनाडा पहुंचा बर्फीला तूफान, 7 की मौत, 9700 फ्लाइट रद्द
16 March 2017
अमेरिका के आठ उत्तरी राज्यों में दो दिन तक तबाही मचाने के बाद बर्फीला तूफान बुधवार को कनाडा पहुंच गया। अमेरिका के वेरमोट में 30 इंच तक बर्फ गिरी है।
इस कारण अमेरिका में छह और कनाडा में एक व्यक्ति की मौत हो गई।
अमेरिका में 9700 से अधिक फ्लाइट रद्द करनी पड़ी हैं। सैकड़ों जहाज का सफर भी थम गया है। अमेरिकी की तरह कनाडा में भी स्कूलों में छुटि्टयां कर दी गई हैं।


गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र को पांचवां प्रांत घोषित करने की तैयारी में पाकिस्तान
15 March 2017
इस्लामाबाद: रणनीतिक रूप से अहम माने जाने वाले विवादित गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र को पाकिस्तान अपना पांचवां प्रांत घोषित करने की योजना बना रहा है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान यह कदम चीन की चिंताओं को देखते हुए उठा रहा है, पर चूंकि यह इलाका पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से सटा हुआ है। ऐसे में भारत के लिए पाकिस्तान का यह कदम चिंता की वजह बन सकता है।
पाकिस्तान के मंत्री अंतर-प्रांतीय समन्वय मंत्री रियाज हुसैन पीरजादा ने पाकिस्तानी चैनल जियो टीवी से कहा कि विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज की अगुवाई वाली एक समिति ने गिलगित-बाल्टिस्तान को प्रांत का दर्जा देने का प्रस्ताव रखा है। पीरजादा ने कहा, 'समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का एक प्रांत बनाया जाना चाहिए।'
उन्होंने यह भी कहा कि उस क्षेत्र का दर्जा बदलने के लिए संविधान में संशोधन करना होगा। बता दें कि 46 अरब डॉलर की लागत से बनने वाला चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) इसी इलाके से होकर गुजरेगा। बता दें कि इस प्रॉजेक्ट पर भारत कई बार आपत्ति जता चुका है। भारत का मानना है कि पाक अधिकृत कश्मीर से गुजरने के चलते यह प्रॉजेक्ट भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है। हालांकि चीन और पाकिस्तान ने भारत की आपत्ति को तवज्जो नहीं दी है।
माना जा रहा है कि गिलगित-बाल्टिस्तान के अनिश्चित दर्जे को लेकर चीन की चिंता को देखते हुए ही पाकिस्तान ने उसका दर्जा बदलने का फैसला किया है। ऐसे में पाकिस्तान का यह कदम भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है क्योंकि यह इलाका पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से लगा हुआ है।
बता दें कि बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब और सिंध पाकिस्तान के चार प्रांत हैं। पाकिस्तान में गिलगित-बाल्टिस्तान को एक अलग भौगोलिक क्षेत्र माना जाता है। वहां प्रादेशिक असेंबली है और एक चुना हुआ मुख्यमंत्री भी है।
डॉन अखबार की एक पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान CPEC को कानूनी तौर पर पुख्ता बनाने के लिए इस इलाके के संवैधानिक दर्जे को बढ़ाने पर विचार कर रहा था। रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया था कि यह कदम पूरे कश्मीर क्षेत्र के भविष्य को लेकर पाकिस्तान के रुख में ऐतिहासिक बदलाव का इशारा दे सकता है।


व्हाइट हाऊस का H1B वीजा में बदलाव पर फिलहाल इंकार!
15 March 2017
वाशिंगटन: व्हाइट हाऊस ने आज कहा कि ट्रंप प्रशासन व्यापक आव्रजन सुधारों पर काम कर रहा है लेकिन उन्होंने एच1बी वीजा कार्यक्रम में किए जाने वाले संभावित बदलावों पर तीन अप्रैल से पहले कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
एच1बी वीजा भारतीय आईटी पेशेवरों के बीच खासा लोकप्रिय है। व्हाइट हाऊस यहां एच1बी वीजा में 3 अप्रैल से पहले शासकीय आदेश के जरिए किए जाने वाले संभावित बदलावों के सवाल पर जवाब दे रहा था । तीन अप्रैल के बाद आगामी वित्त वर्ष के लिए अमरीकी नागरिकता एवं प्रवासी सेवाओं के आवेदन लेने शुरू कर दिए जाएंगे। अगला वित्त वर्ष एक अक्तूबर 2017 से शुरू होगा।
व्हाइट हाऊस के प्रेस सचिव सीप स्पाइसर ने दैनिक प्रेस वार्ता के दौरान कहा,‘‘ मुझे लगता है कि मैंने पहले भी आव्रजन पर बात की है और इस व्यापक प्रक्रिया के दौरान हमने गैरकानूनी आव्रजन को कैसे रोका जाए और हम कानूनी आव्रजन के लिए क्या कर रहे हैं चाहे वे एच1बी हो या के1 या प्रणाली में मौजूद अन्य कोई वीजा इन दोनों तथ्यों पर विचार किया है। ’’


सीरिया में हवाई हमला, 9 की मौत
15 March 2017
बेरूत: सीरिया के विद्रोहियों के कब्जे वाले इदलिब प्रांत में आज किए गए हवाई हमले में एक बच्चे सहित 9 लोगों की मौत हो गई।
सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने इसकी जानकारी दी। उसका कहना था कि यह हवाई हमले संभवत: रूस द्वारा किया गया था जिसमें उत्तरी-पश्चिमी शहर इदलिब और मरात मिसरिन प्रांत को निशाना बनाया गया था।


भारतीय-अमेरिकी महिला ने ट्रंप के सहयोगी से पूछा, फासीवादी के लिए काम करने में कैसा लगता है?
14 March 2017
वॉशिंगटन: भारतीय मूल की एक अमेरिकी महिला ने एक स्थानीय ऐपल स्टोर पर वाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर से कई सवाल किए और उनसे बार-बार पूछा कि उन्हें एक ‘फासीवादी’ के लिए काम करना कैसा लगता है? इसके जवाब में अमेरिका के इस शीर्ष अधिकारी ने एक ‘नस्ली’ टिप्पणी कर दी।
श्री चौहान (33) ने शनिवार को स्पाइसर से सवाल करते हुए बनाए गए विडियो को ट्विटर पर डाल दिया, जिसमें श्री के सवालों पर उनकी प्रतिक्रिया दिखाई दे रही है। इनमें से कुछ सवाल इस प्रकार थे, ‘एक फासीवादी के लिए काम करते हुए कैसा लगता है?’ और ‘देश को बर्बाद करने के बारे में आप क्या सोचते हैं?’ चौहान ने स्पाइसर से रूस के बारे में भी सवाल पूछे और राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पर देशद्रोह करने का आरोप लगाया।
विडियो को चौहान ने सोशल मीडिया के कई मंचों पर डाला और वह वायरल हो गया। इसमें स्पाइसर यह कहते हुए सुने जा रहे हैं कि अमेरिका ‘इतना महान देश है कि वह आपको यहां रहने की अनुमति देता है।’ चौहान इस टिप्पणी को नस्ली टिप्पणी बताती हैं। उन्होंने कहा, ‘यह नस्लवाद है और एक तरह की धमकी है। जरा श्रीमान स्पाइसर के उस दुस्साहस के बारे में सोचिए कि वह यह जानने के बावजूद कि यह सब विडियो पर रिकॉर्ड हो रहा है और यह जानने के बावजूद कि वह हमारी सरकार में एक ताकतवर पद पर आसीन हैं, उन्होंने मेरे मुंह पर मुस्कुराते हुए यह बात कह दी।’
चौहान ने स्पाइसर के इस जवाब को अपनी नागरिकता के संदर्भ में दी गई धमकी बताया। श्री चौहान ने कहा, ‘मैं अब भी उस दुस्साहस से स्तब्ध हूं जिसके तहत कैमरे के सामने मेरी नागरिकता को धमकी दी गई। मैं विनम्र नहीं थी, लेकिन विनम्र न होने का यह अर्थ कब से हो गया कि मुझे अमेरिका से बाहर फेंक दिया जाना चाहिए। यह वह देश है, जहां मैं जन्मी, जहां पली-बढ़ी। यह वह देश है, जिसे मैं उसकी खामियों के बावजूद प्यार करती हूं।’
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कल अपने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में स्पाइसर ने कहा कि अमेरिका एक आजाद देश है और लोग अपनी मर्जी से जो करना चाहें, उन्हें वह करने का अधिकार है। चौहान के अनुसार वह इस स्टोर में आईफोन ठीक करवाने गई थीं। तभी उन्हें वहां स्पाइसर मिल गए। श्री चौहान ने मीडियम डॉट कॉम पर डाले गए पोस्ट में लिखा, ‘मुझे महसूस हुआ कि आम तौर पर स्पाइसर को दी जाने वाली सुरक्षाओं के बिना आज जवाब पाने का यह कितना बड़ा अवसर है। वास्तव में मैं बहुत घबराई हुई थी और कहीं अधिक ठोस सवाल पूछना चाहती थी, लेकिन ऐसा करने का समय ही नहीं था।’
श्री ने कहा कि वह लगभग एक दशक से वाशिंगटन डीसी में रह रही हैं और इस दौरान वह सार्वजनिक स्थलों पर कई अति विशिष्ट लोगों से मिली हैं लेकिन कभी उनसे बात नहीं की। उन्होंने कहा, ‘हालांकि, जो कुछ स्पाइसर और उनके बॉस (डॉनल्ड ट्रंप) इस देश में कर रहे हैं, मुझे नहीं लगता कि वे इन शर्तों और और परंपराओं के प्रति प्रतिबद्ध हैं। ट्रंप और उनके साथी कानून, हमारे संविधान और लोकतंत्र की खुले तौर पर धज्जियां उड़ा रहे हैं।’
विडियो के अनुसार, उन्होंने स्पाइसर से पूछा, ‘क्या आपने रूस की मदद की है? क्या आपने राष्ट्रपति की तरह, कभी देशद्रोह भी किया है? आप मुझे रूस के बारे में क्या बता सकते हैं? और सीन, आप अपने देश को तबाह करने के बारे में क्या सोचते हैं?’ संवाददाता सम्मेलन में स्पाइसर ने कहा कि यदि लोगों के पास सवाल हैं तो उन्हें उनसे सवाल पूछने चाहिए। उन्होंने कहा, ‘पूछ लीजिए। मैं दिनभर लोगों से बात करता हूं। इनमें से 99 प्रतिशत लोगों से बात करना अच्छा रहता है। इनमें वे लोग भी होते हैं, जो हमारी सोच, कार्यक्रम आदि से सहमत नहीं हो सकते।’


अमेरिकी विशेषज्ञ भी पीएम नरेंद्र मोदी के कायल, कहा-2019 के बाद भी वे भारत का नेतृत्‍व करते रहेंगे
14 March 2017
वाशिंगटन: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्‍व क्षमता का लोहा अब अमेरिकी विशेषज्ञों ने भी माना है. अमेरिकी शीर्ष विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के बाद वर्ष 2019 के आम चुनावों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्पष्ट तौर पर एक पसंदीदा नेतृत्वकर्ता के तौर पर उभरे हैं. एक विशेषज्ञ ने कहा कि पांच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे दिखाते हैं कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के नतीजे कोई असामान्य नहीं थे. एक अन्य विशेषज्ञ ने कहा कि ऐसा लगता है कि मोदी 2019 के बाद भी भारत का नेतृत्व करते रहेंगे.जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों के सहायक प्रोफेसर एडम जीगफेल्ड ने कहा कि विधानसभा चुनाव ज्यादा बदलाव का संकेत नहीं देते. उत्तरप्रदेश चुनाव के नतीजों ने दिखाया है कि वर्ष 2014 के आम चुनाव कोई ‘असामान्य’ चीज नहीं थे.
उन्होंने कहा, ‘यह भाजपा के लिए एक बड़ी जीत थी. उसका उम्मीदवार दो पिछले विजेताओं-बसपा और सपा की तुलना में कहीं अधिक अंतर से जीत गया.’अमेरिकन एंटरप्रोइज इंस्टीट्यूट के शोधार्थी सदानंद धूमे ने कहा कि इन चुनावों ने मोदी को वर्ष 2019 के चुनाव के लिए एक ‘स्पष्ट और पसंदीदा विजेता’ के तौर पर स्थापित कर दिया है. उन्होंने कहा, ‘मोदी वर्ष 2019 की दौड़ में सबसे आगे हैं.’ जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के वॉल्श स्कूल ऑफ फॉरेन सर्विस के प्रोफेसर इरफान नूरुद्दीन ने कहा कि वर्ष 2019 में भाजपा को सीधा बहुमत मिलने की संभावना कम है और मोदी गठबंधन की सरकार बनाने की दिशा में बढ़ेंगे. उन्होंने कहा कि भाजपा का एक के बाद एक राज्य में चुनाव प्रचार सफल रहा है जबकि विपक्ष ऐसा करने में नाकाम रहा है. नूरुद्दीन ने कहा कि जिस राज्य में पार्टी को सीधे विपक्ष का सामना करना पड़ता है, वहां यह अच्छा प्रदर्शन नहीं करती. यदि विपक्ष एक साथ आ जाए तो भाजपा को परास्त किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि पार्टी को जब बिखरे हुए विपक्ष का सामना करना पड़ता है, वहां उसे लाभ मिलता है. वर्ष 2019 में सत्ताविरोधी लहर मौजूद होगी.
चुनाव के दौरान उत्तरप्रदेश में मौजूद रहे धूमे ने कहा कि इन चुनावों में भाजपा ने खुद को जाति से ऊपर बताया लेकिन वहां जाति कार्ड खेला. राज्य में लोगों के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी बेहद लोकप्रिय है. इसने उस भारतीय जनता का दिल और दिमाग जीत लिया, जो इस नीति के चलते परेशान हुई. यहां एक संजीदा व्यक्ति है, जिसने भ्रष्ट और अमीर लोगों पर एक सैद्धांतिक प्रहार किया है.’ हालांकि धूमे ने यह भी कहा कि उत्तरप्रदेश में इस ऐतिहासिक जीत के बाद मोदी संभवत: ऐसे आर्थिक सुधार की दिशा में नहीं बढ़ेंगे, जैसा निजी क्षेत्र चाहता है. काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स में भारत, पाकिस्तान और दक्षिण एशिया के मामलों की वरिष्ठ शोधार्थी एलीसा आयर्स ने कहा कि भारत अपने उन आर्थिक सुधारों को बढ़ाने जा रहा है, जो देश की जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं. भाजपा अब राज्यसभा में बहुत सी सीटें हासिल करेगी, जो उसे भूमि अधिग्रहण अधिनियम और श्रम सुधार जैसे लंबित सुधारों को अंजाम देने में मदद करेंगी. वह वर्ष 2018 में सीटें हासिल करना शुरू कर देंगे. भाजपा वर्ष 2019 और इसके परे देख रही है.


अमेरिका में शीर्ष स्वास्थ्य सेवाओं की प्रमुख बनीं भारतवंशी सीमा वर्मा
14 March 2017
वाशिंगटन: भारतवंशी सीमा वर्मा को अमेरिका की शीर्ष स्वास्थ्य सेवाओं की प्रमुख बनाया गया है. सोमवार को अमेरिकी सीनेट ने 'सेंटर्स फॉर मेडिकेयर एंड मेडिकेड सर्विसेज' की प्रमुख के रूप में सीमा की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. भारतवंशी सीमा की नियुक्ति के पक्ष में 55-53 वोट पड़े. इसके तहत अमेरिका के 13 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया जाता है.
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनको इस अहम पद के लिए चुना था. उनको अमेरिका के इंडियाना राज्य के सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरीन सुधार के लिए जाना जाता है. अब वह ट्रंप के विवादास्पद स्वास्थ्य सेवा में सुधार में अहम भूमिका निभाएंगी. ट्रंप पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की हेल्थ केयर नीति के विपरीत अपनी हेल्थ केयर नीति लाना चाहते हैं. ऐसे में भारतीय मूल की सीमा एक खरब डॉलर की हेल्थ केयर एजेंसी 'सेंटर्स फॉर मेडिकेयर एंड मेडिकेड सर्विसेज' की सीएमएस के रूप में ट्रंप की योजनाओं को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगी.
अमेरिकी उप राष्ट्रपति माइक पेंस ने इंडियाना के गवर्नर रहने के दौरान सीमा को राज्य की हेल्थ केयर सलाहकार नियुक्त किया था. ट्रंप प्रशासन के हाउस रिपब्लिकन हेल्थ केयर बिल के आने से अमेरिका के स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक बदलाव होगा. इसका मकसद ओबामा केयर के उलट गरीबों के स्वास्थ्य सेवाओँ में खर्च को कम करना है. इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खर्च कम होगा. वहीं, इस कानून के आने से 2026 तक 2.4 करोड़ लोग स्वास्थ्य बीमा से वंचित हो जाएंगे.
फिलहाल ओबामा केयर के तरह फिलहाल सात करोड़ गरीबों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल रहा है. मामले में सीमा ने कहा कि गरीब हेल्थ केयर से जु़ड़े फैसले लेने में पूरी तरह सक्षम हैं. मेडिकेयर में सुधार से 5.6 करोड़ बुजुर्गों और दिव्यांगों को लाभ मिलेगा. सीनेट में सुनवाई के दौरान सीमा वर्मा ने कहा कि वह सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रम में सुधार करना चाहती हैं.
वह मेडिकेयर को वाउचर प्लान में तब्दील करने का समर्थन नहीं करती हैं, जिससे की सेवानिवृत्त लोग सरकारी निजी बीमा योजना को खरीद सकें. हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज सेक्रेटरी टॉम प्राइस ने कहा कि सीमा ने इंडियाना राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरीन सुधार किया है और उसको पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए.


अटॉर्नी जनरल सेशन्स ने मांगा 46 अमेरिकी अधिवक्ताओं का इस्तीफा
11 March 2017
वॉशिंगटन: अमेरिकी अटॉर्नी जनरल (महाधिवक्ता) जेफ सेशन्स ने उन 46 अधिवक्ताओं (अटॉर्नीज़) के इस्तीफे मांगे हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति बराक ओबामा प्रशासन के दौरान की गई थी. यह जानकारी न्याय मंत्रालय ने दी है. मंत्रालय ने इस कदम को 'समरूप सत्तांतरण' सुनिश्चित करने का प्रयास बताया है. जिन लोगों से इस्तीफा देने के लिए कहा गया है, उनमें सदर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयार्क के अटॉर्नी जनरल और भारतीय मूल के अमेरिकी प्रीत भरारा शामिल हैं. उनकी नियुक्ति पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने वर्ष 2009 में की थी. भरारा ने नवंबर में ट्रंप की चुनावी जीत के बाद उनसे मुलाकात की थी. इस मुलाकात के बाद मीडिया में आई खबरों में कहा गया कि ट्रंप ने भरारा को उनके पद पर बने रहने को कहा है.
भरारा से जुड़े सवालों का जवाब न तो व्हाइट हाउस ने दिया और न ही न्याय मंत्रालय ने. न्याय मंत्रालय की प्रवक्ता सारा इस्गर फ्लोर्स ने कल कहा कि अमेरिका में कुल मिलाकर 93 अधिवक्ता हैं. इनमें से कई तो पहले ही अपने पद छोड़ चुके हैं. लेकिन ट्रंप प्रशासन के शुरूआती हफ्तों में पद पर बने रहे 46 अधिवक्ताओं से 'एक समरूप सत्तांतरण सुनिश्चित करने के क्रम में' इस्तीफा देने को कहा गया है.
फ्लोर्स ने एक बयान में कहा कि जॉर्ज डब्ल्यू बुश और बिल क्लिंटन प्रशासन ने भी अपने कार्यकाल की शुरूआत में ऐसे ही अनुरोध किए थे. न्यूयार्क के सीनेटर चार्ल्स शूमर ने कहा कि वह अमेरिकी अधिवक्ताओं से, खासतौर पर भरारा से, इस्तीफे के लिए किए गए अनुरोधों की खबरों को सुनकर 'व्‍यथित' हैं. उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति ने मुझे नवंबर में फोन किया था और आश्वासन दिया था कि वह चाहते हैं कि भरारा सदर्न डिस्ट्रिक्ट के लिए अमेरिकी अटॉर्नी पद पर बने रहें.'


नेपाल सीमा पर बिगड़े हालात, उग्र नेपालियों ने एक भारतीय को मौत के घाट उतारा
11 March 2017
नेपाल सीमा पर नोमैंस लैंड पर पुल निर्माण को लेकर जारी तनाव बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को हुई झड़प में घायल नेपाली युवक की कल मौत हो गई। इसके बाद नेपाली और उग्र हो गए हैं। उग्र नेपालियों ने एक बिहारी मजदूर को मौत के घाट उतार दिया है और शव नेपाल उठा ले गए। वहीं उसके दूसरे साथी ने भारतीय सीमा की ओर भागकर अपनी जान बचाई। नेपालियों ने भारतीय सीमा में घुसकर अपना झंडा गाड़ दिया, जिसे बाद में उखड़वाया गया। इतना ही नहीं नेपालियों ने गुलेल से कांच की गोलियों की भी बौछार की। इसमें एसएसबी के एक दारोगा और कई जवान व ग्रामीण जख्मी हो गए।
कल नेपाल के गोकुलपुर में जेसीबी मशीन चलाकर मजदूरी करने वाला अजित कुमार निवासी पूरनपुर अपने एक बिहारी साथी के साथ संपूर्णानगर की ओर आ रहा था। पिलर संख्या 199-200 के मध्य उग्र नेपालियों ने दोनों को घेर लिया और धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले में बिहारी मजदूर की मौत हो गई। वहीं पूरनपुर निवासी उसका साथी अजित कुमार जान बचाकर भाग आया।
भारतीय सीमा में पहुंचकर उसने घटना की जानकारी दी तो भारतीय ग्रामीणों में भी नेपालियों के प्रति आक्रोश फैल गया। भारतीय ग्रामीणों ने भी नाराज होकर नेपाल सीमा की ओर पथराव शुरू कर दिया। सीमा पर दो कंपनी पीएसी व एसएसबी के पहुंचने से पूरा क्षेत्र छावनी में तब्दील हो गया है। तनाव के चलते बसही बाजार बंद हो गया। हालांकि प्रशासन ने बिहारी व्यक्ति की मौत की घटना की पुष्टि नहीं की है।
ध्वस्त होगा पुल: लखीमपुर प्रतिनिधि के अनुसार डीएम आकाशदीप व एसपी मनोज झा समेत अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत कराने का प्रयास किया, मगर माहौल नहीं सुधरा। सुबह होते ही फिर से सीमा पार से पथराव किया जाने लगा। जवाब देने के लिए भारतीय सीमा पर मुस्तैद एसएसबी के जवानों ने मोर्चा तो संभाला लेकिन संख्या कम होने के चलते उन पर दबाव नहीं बन पाया।
वार्ता के बाद हुए शांत: दोपहर बाद नेपाल के अफसर भी विवादित जगह पर पहुंचे और दोनों देशों के अफसरों के बीच वार्ता के बाद माहौल फिलहाल शांत है और नेपाली सीमा छोड़कर वापस अपने देश चले गए हैं। बताया गया है कि दोनों ही देशों के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि बहुत ही जल्द संयुक्त सर्वे के बाद सीमांकन कर लिया जाएगा और उस क्षेत्र में बनाया गया पुल ध्वस्त कर दिया जाएगा।


सीरियाई मुस्लिम परिवार पर यात्रा प्रतिबंध लागू करने पर अमेरिकी कोर्ट ने लगाई रोक
11 March 2017
मैडिसन: अमेरिका की एक संघीय अदालत के जज ने अमेरिका में शरण पाने की कोशिश में लगे एक सीरियाई परिवार के खिलाफ नया यात्रा प्रतिबंध लगाने से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को रोक दिया है. विस्कॉन्सिन पहुंचा एक सीरियाई मुसलमान परिवार पिछले साल से अपनी पत्नी और तीन वर्षीय बेटी के लिए अमेरिका में शरण पाने की कोशिश कर रहा है ताकि वे अलेप्पो छोड़ सकें और यहां आ सकें. उन्होंने फरवरी में मैडिसन की एक अदालत में मुकदमा दायर कर आरोप लगाया कि ट्रंप के पहले के यात्रा प्रतिबंध ने उनके लिए वीजा की प्रक्रिया को रोक दिया.
सीरियाई व्यक्ति के वकीलों के अनुसार परिवार के लिए वीजा की प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई और अब वे अमेरिकी दूतावासों में वीजा साक्षात्कार के लिए जॉर्डन जाने की तैयारी कर रहे हैं. वीजा जारी किये जाने का यह अंतिम चरण होता है लेकिन परिवार को साक्षात्कार के लिए अभी तक तारीख नहीं मिली है और इस बीच ट्रंप का नया यात्रा प्रतिबंध 16 मार्च से लागू होने जा रहा है जिससे यह डर पैदा हो गया है कि वीजा जारी किये जाने से पहले फिर से यह प्रक्रिया रुक सकती है.
सीरियाई व्यक्ति ने एक नई शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि पहले की तरह नया प्रतिबंध परेशानी खड़ा करने वाला है. उसने इसे मुसलमान विरोधी बताया. अमेरिकी न्याय विभाग की प्रवक्ता निकोल नवास ने कहा कि उनके वकील सीरियाई व्यक्ति की शिकायत की समीक्षा कर रहे हैं और उन्होंने इस पर तथा जज के आदेश पर आगे टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.



पाक को आतंकवाद प्रायोजक देश घोषित करने के लिए विधेयक पेश
10 March 2017
वाशिंगटन: पाकिस्तान को आतंकवाद प्रायोजक देश घोषित करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस में एक विधेयक पेश किया गया है। पाकिस्तान स्टेट स्पांसर ऑफ टेरेरिज्म एक्ट (एचआर-1449) नामक यह विधेयक गुरुवार को सदन की आतंकवाद संबंधी उपसमिति के अध्यक्ष टेड पो ने पेश किया।
टेक्सास के प्रभावशाली सांसद ने पाकिस्तान के साथ संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने की भी मांग की है। विधेयक पेश करते हुए पो ने कहा, पाकिस्तान एक गैर भरोसेमंद सहयोगी है।
इस्लामाबाद ने सालों तक अमेरिका के कट्टर शत्रु की सहायता भी की है। ओसामा बिन लादेन को आश्रय देने से लेकर हक्कानी नेटवर्क के साथ उसके नजदीकी रिश्ते रहे हैं। ये इस बात के प्रमाण हैं कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वह किसके साथ है।
ऐसे में यही वक्त है जब हमें उसकी सहायता बंद कर देनी चाहिए। उसे वह नाम देना चाहिए जो वह है, 'आतंकवाद का प्रायोजक देश।'
इसके अलावा 'द नेशनल इंट्रेस्ट' मैग्जीन में पो ने जेम्स क्लाड के साथ मिलकर एक लेख लिखा है। इसमें पाकिस्तान के साथ संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने की मांग की गई है।
क्लाड जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन में रक्षा विभाग में उप सहायक मंत्री रह चुके हैं। लेख में कहा गया है कि पाक के बर्ताव को बदलने के सारे प्रयास नाकाम हो चुके हैं।
अब वक्त है कि अमेरिका खुद अपने दखल की सीमा निर्धारित करे। दोनों ने अमेरिका-भारत संबंधों के लिहाज से भी पाकिस्तान को लेकर नजरिए में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया है।
क्या कहता है विधेयक?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से 90 दिनों के भीतर रिपोर्ट जारी कर यह बताने को कहा गया है कि क्या पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से निपटने में सहयोग दिया है।
-इसके 30 दिन के बाद विदेश मंत्री से रिपोर्ट पेश करने की मांग की गई है जिसमें यह साफ तौर पर कहा जाए कि पाकिस्तान आतंकवाद का प्रायोजक देश है।
-यदि पाकिस्तान को आतंकवाद प्रायोजक देश नहीं ठहराया जाता है तो रिपोर्ट में यह विस्तार से बताया जाए कि किन कानूनी पैमानों के तहत ऐसा किया गया है।
पहली बार नहीं
अमेरिका में पाकिस्तान को आतंकवाद प्रायोजक देश घोषित करने की मांग पहली बार नहीं उठाई गई है। इससे पहले बराक ओबामा के कार्यकाल में इस संबंध में ऑनलाइन याचिका ह्वाइट हाउस को भेजी गई थी। इसे भारी समर्थन मिला था। लेकिन, ओबामा प्रशासन ने उस मांग को ठुकरा दिया था।
सेना प्रमुख को भी संदेश
अमेरिकी मध्य कमान के कमांडर जनरल जोसेफ वोटेल ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में और अधिक दृढ़ता दिखाने का संदेश दिया है।
सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति की सुनवाई में वोटेल ने कहा कि बाजवा ने उन आतंकी समूहों पर कार्रवाई शुरू की है जिनके खिलाफ कार्रवाई करने में उनके पूर्ववर्ती उत्सुकता नहीं दिखाते थे।
लेकिन, जरूरत इस बात की है कि वह और अधिक दृढ़ संकल्प होकर इस पर ध्यान केंद्रित करें।


दक्षिण कोरिया: राष्‍ट्रपति पार्क के खिलाफ महाभियोग पर अदालत की मुहर
10 March 2017
सियोल: दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने शुक्रवार को राष्ट्रपति पार्क ग्युन-हे के खिलाफ संसद से पारित महाभियोग प्रस्ताव को बरकरार रखा, जिसके बाद देश में पिछले 92 दिनों के नेतृत्व संकट का समाधान हो गया है. संवैधानिक अदालत की कार्यवाहक न्यायाधीश ली जुंग मी ने यह फैसला सुनाया, जिसका सीधा प्रसारण टेलीविजन पर किया गया. उन्होंने कहा,"राष्ट्रपति की गतिविधियों के नकारात्मक प्रभाव व परिणाम बेहद गंभीर हैं और उन्हें पद से हटाना व्यापक हित में है."
समाचार एजेंसी योनहाप के मुताबिक, पार्क देश की लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई पहली ऐसी नेता हैं, जिन्हें पद से हटा गया है. अदालत के आठ न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से महाभियोग के पक्ष में वोट किया. संसद ने पार्क के खिलाफ नौ दिसंबर को महाभियोग प्रस्ताव पारित किया था.
उन पर सरकारी मामलों में अपनी करीबी दोस्त को सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप करने देने, उनसे मिलकर एक खास कंपनी समूह से धन उगाही करने, सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति में पद के दुरुपयोग तथा 2014 में नौका दुर्घटना के दौरान अपनी जवाबदेहियों की उपेक्षा के आरोप थे, जिसमें 300 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी.
अदालत ने माना कि पार्क ने अपनी करीबी व विश्वसनीय मित्र चोई सून-सिल को सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप की अनुमति देकर गैर-कानूनी कार्य किया. हालांकि, अदालत ने सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति में अपने पद के दुरुपयोग से संबंधित पार्क के खिलाफ लगे अन्य आरोपों को सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया.
पार्क पर 2014 में नौका डूबने की घटना के दौरान कथित रूप से लापरवाही बरतने के आरोप पर न्यायाधीश ने कहा कि ये आरोप अदालत में विचारणीय नहीं हैं. अदालत ने कहा कि पार्क के स्थान पर नए राष्ट्रपति का चुनाव 60 दिनों के भीतर करना होगा.
अदालत के बाहर बड़ी संख्या में पार्क के समर्थक और विद्रोही जुटे थे. किसी भी तरह के झगड़े की आशंका को टालने के लिए यहां बड़ी संख्या में पुलिस बलों व बसों की तैनाती की गई थी. पार्क देश की पहली महिला राष्ट्रपति थीं. उन्होंने 25 फरवरी, 2013 को पद संभाला था.


अमेरिका के शीर्ष सैन्य अफसर की राय, परमाणु युद्ध का रूप ले सकता है भारत-पाक तनाव
10 March 2017
वॉशिंगटन: भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहा तनाव दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर वॉर की वजह बन सकता है। एक शीर्ष अमेरिकी जनरल ने इस बात की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों की ओर से हमले और उसके जवाब में भारत की कार्रवाई परमाणु युद्ध की वजह बन सकती है। यूएस सेंट्रल कमांड के कमांडर जनरल जोसेफ वोटेल ने सैन्य सेवाओं से संबंधित समिति को दी गई अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव लगातार जारी है।
वोटेल ने गुरुवार को अमेरिकी सांसदों को बताया, 'पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न किए जाने से भारत चिंतित है। पिछले साल अपने हिस्से में आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई भी की थी।' वोटेल ने कहा, 'हमारा आकलन है कि भारत में इस तरह के आतंकवादी हमले और उसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ होने वाली कार्रवाई दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति पैदा कर सकती है।'
वोटेल ने कहा, 'इसके अलावा भारत की ओर से पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति भी दोनों देशों के बीच संबंधों के सुधार में एक बाधा है। इसके चलते भी भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे परंपरागत तनाव में इजाफा होने की संभावना है। इन सभी कारणों के चलते दोनों देशों के बीच परमाणु युद्ध की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।'


रडार और विमान रोधी हथियारों को चकमा देने वाला ड्रोन बना रहा है चीन
9 March 2017
बीजिंग: चीन की सबसे बड़ी मिसाइल निर्माता कंपनी सेना के लिए उन्नत ड्रोन बना रही है जो रडार और विमान रोधी हथियारों को चकमा दे सकता है।
चीन के सरकारी समाचार पत्र ने एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कोर(सीएएसआईसी)के उप महाप्रबंधक वेई यियिन के हवाले से कहा कि सीएएसआईसी लंबे समय तक और अधिक ऊचाई में चुपके से उड़ने वाला ड्रोन बनाने पर ध्यान केन्द्रित कर रहा है।
वेई ने कहा,‘‘जैसे कि सैन्य सुधारों ने दुनियाभर में सशस्त्र बलों में काफी बदलाव किया है तो ड्रोन आधुनिक युद्ध में अनिवार्य हथियार बन गया है क्योंकि ये दुश्मनों की गतिविधियों की हाई रेजोल्यूशन की तस्वीरें ले सकते हैं, लंबी दूरी के सटीक हमले,पनडुब्बी विरोधी अभियान और हवाई हमले भी कर सकते हैं।’’विमानों की तरह दिखने वाले अन्य चीनी ड्रोन के विपरीत सीएएसआईसी के ड्रोन क्रूज मिसाइल की तरह दिखते हैं। यह कंपनी चीन में क्रूज मिसाइल बनाने वाली इकलौती कंपनी है।


इजरायल के प्रधानमंत्री रूस की यात्रा पर रवाना
9 March 2017
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सीरिया में युद्ध समाप्ति के समझौते की अटकलों के बीच गुरुवार को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने के लिए रूस की एक दिवसीय यात्रा पर रवाना हुए। एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने कहा कि अगर किसी शांति समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं तो वह पुतिन से सीरिया में ईरान की मौजदूगी को रोकने का आग्रह करेंगे।
नेतन्याहू के कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, “प्रधानमंत्री किसी भी तरह के समझौते पर वार्ता के संबंध में भूमध्यसागर और हमारी उत्तरी सीमाओं में ईरान के सैनिकों या इसके समर्थकों की मौजदूगी पर इजरायल के कड़े विरोध को व्यक्त करेंगे।”
नेतन्याहू, पुतिन के समक्ष इस तथ्य को भी दोहरा सकते हैं कि गोलन हाइट्स का इलाका किसी भी तरह से इस चर्चा का हिस्सा नहीं हो सकता। इजरायल ने 1967 में मध्य पूर्व युद्ध में गोलन हाइट्स पर कब्जा कर लिया था और बाद में इसे अपने साथ मिला लिया था।
इजरायल का कहना है कि ईरान ने अपने निकट सहयोगी सीरिया को सात साल के गृहयुद्ध में काफी सहायता प्रदान की है। इजरायल युद्ध के दौरान औपचारिक रूप से तो तटस्थ रहा है लेकिन वह कथित तौर पर पड़ोसी सीरिया में कई हवाई हमलों को अंजाम देता रहा है।


सीरिया में हवाई हमले में 23 नागरिक मारे गए
9 March 2017
सीरिया के अल-रक्का शहर के पास अमेरिकी नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन के हवाई हमलों में 23 नागरिकों की मौत हो गई। युद्ध संबंधी गतिविधियों की निगरानी करने वाले लंदन के एक संगठन ने गुरुवार को यह जानकारी दी। समाचार एजेंसी ‘एफे’ की रिपोर्ट के अनुसार, सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स (एसओएचआर) ने बताया कि मृतकों में छह बच्चे और चार महिलाएं शामिल हैं।
एसओएचआर के अनुसार, मारे गए अधिकांश लोग एक ही परिवार से थे। इस हमले में कई लोग घायल हुए हैं लेकिन एनजीओ ने कहा है कि फिलहाल घायलों की निश्चित संख्या बताने में सक्षम नहीं हैं लेकिन यह जरूर है कि घायलों में कई की हालत गंभीर है।
रिपोर्ट के अनुसार, एनजीओ ने अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन से अल-रक्का जैसे शहरी इलाकों में हवाई हमलों में सावधानी बरतने के अपने अनुरोध को दोहराया है। संस्था ने कहा है कि हमलों में नागरिकों को मारे जाने के औचित्य को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता।


मोसुल से भागा आईएस सरगना अबू बकर अल बगदादी
8 March 2017
सैन्य अभियान के बीच आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आइएस) का सरगना अबू बकर अल बगदादी इराकी शहर मोसुल से भाग चुका है। अमेरिकी और इराकी खुफिया सूत्रों का मानना है कि वह रेगिस्तानी इलाके में छिपा है और इस वक्त उसका ध्यान केवल अपनी जिंदगी बचाने पर है। मोसुल ही वह शहर है जहां 2014 में बगदादी ने खुद को खलीफा घोषित किया था।
अमेरिकी गठबंधन की मदद से इराकी बलों ने पांच महीने पहले इस शहर को आतंकियों से मुक्त कराने का अभियान शुरू किया था। जनवरी में पूर्वी मोसुल पर नियंत्रण करने में कामयाब रहे सैनिक तेजी से अब पश्चिमी मोसुल में आगे बढ़ रहे हैं और उनकी जीत तय है। इस महीने की शुरुआत में इराकी टीवी नेटवर्क अलसुमारिया के हवाले से अल-अरबिया ने बताया था कि लड़ाकों के बीच बगदादी का एक बयान बांटा गया है। इसमें उसने हार कबूलते हुए लड़ाकों को अपने देश लौटने या खुद को उड़ा लेने का हुक्म दिया था।
खुफिया सूत्रों के मुताबिक आइएस नेतृत्व और लड़ाकों के बीच अब कोई संपर्क नहीं है। बगदादी ने संचार के सभी माध्यमों से खुद को दूर कर लिया है। मोसुल के आबादी वाले इलाके से निकलकर वह रेगिस्तानी इलाके के आसपास के गांवों में छिपा है। 24 घंटे में कई बार वह अपनी लोकेशन बदलता है। आइएस पर किताब लिखने वाले हिशाम अल हाशिमी के अनुसार वह उत्तर-पश्चिमी इराकी शहर बाज और सीरियाई शहर अल्बू कमाल के बीच फैले रेगिस्तानी इलाके में कहीं हो सकता है।
2337 अरब का नुकसान
इराक के प्रधानमंत्री हैदर अल आब्दी ने बुधवार को बताया कि इराक में आइएस 35 अरब डॉलर (करीब 2337 अरब रुपये) की संपत्ति और आधारभूत संरचना को नुकसान पहुंचा चुका है। सीरिया में 24 फरवरी को आइएस ठिकानों पर किए गए हमले को लेकर उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों में आतंकी ठिकानों को निशाने बनाने से भी अब इराक पीछे नहीं हटेगा।
इस बीच, संघीय पुलिस के मेजर जनरल अली खादिम अल लामी ने बताया है कि मोसुल के संग्रहालय में अब कोई कलाकृति नहीं बची है। इस संग्रहालय और सरकारी मुख्यालय से सुरक्षा बलों ने मंगलवार को आतंकियों को खदेड़ दिया था।


काबुल के सैन्य अस्पताल पर आतंकी हमले में 30 से ज़्यादा की मौत, इस्लामिक स्टेट ने ली ज़िम्मेदारी
8 March 2017
काबुल स्थित अफगानिस्तान के सबसे बड़े सैन्य अस्पताल पर बुधवार (8 मार्च) को डॉक्टरों की भेष में हमला करने वाले आतंकवादियों के साथ सुरक्षाकर्मियों की छह घंटे चली मुठभेड़ में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली है जो अफगानिस्तान में अपना असर बढ़ा रहा है। इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने एक प्रामाणिक टेलीग्राम खाते से भेजे अपने वक्तव्य में सरदार मोहम्मद दाउद खान अस्पताल में किये गये हमले की जिम्मेदारी ली है।
राजधानी के वजीर अकबर खान इलाके के दो असैन्य अस्पतालों के निकट स्थित 400 शैया वाले यह सैन्य सरदार मोहम्मद दाउद खान अस्पताल पर आतंकवादी हमले में 50 अन्य घायल हो गए। विस्फोटों और गोलियों की आवाज से राजधानी काबुल का राजनयिक इलाका दहल गया। अस्पताल के वार्डों में छिपे दहशतजदा मेडिकल स्टाफ ने सोशल मीडिया पर मदद के लिए हताशा भरे संदेश डाले। टीवी फुटेज में दिखाया गया कि मेडिकल स्टाफ में से कुछ सबसे ऊपर वाली मंजिल की खिड़कियों के छज्जे पर शरण ले रखी थी।
अस्पताल के एक कर्मचारी ने फेसबुक पर लिखा, ‘हमलावर अस्पताल के अंदर हैं। हमारे लिये दुआ कीजिये।’ अस्पताल प्रशासकों ने एएफपी को बताया कि विस्फोट के बाद चिकित्सकों के सफेद कोट पहने तीन बंदूकधारी अस्पताल में घुस आये जिससे वहां अफरातफरी मच गयी। अस्पताल प्रशासक अब्दुल हाकिम ने एएफपी को टेलीफोन पर जल्दबाजी में बताया, ‘हमलावर हर जगह गोलियां चला रहे हैं। हम स्थिति को नियंत्रण में करने की कोशिश कर रहे हैं।’ जब अफगान विशेष बल हमलावरों को काबू में करने की कोशिश कर रहे थे तो कम से कम दो अन्य तेज धमाकों की आवाज सुनी गयी।
अस्पताल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने कहा, ‘यह एक आपराधिक कृत्य है। अस्पतालों पर हमले को किसी भी तरह न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। हम इन अपराधियों को कभी माफ नहीं करेंगे। दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से इस हमले में कुछ लोग मारे गये। चिकित्सकों के भेष में हमलावरों ने पीछे के गेट से प्रवेश किया।’ अस्पताल के प्रशासकों ने बताया कि एक फिदाई हमलावर ने बैकडोर प्रवेश पर खुद को उड़ा दिया जिसके बाद डॉक्टरों सा सफेद कोट पहने तीन बंदूकधारियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। गोलीबारी की आवाज के बाद अस्पताल में सारे लोग इधर उधर भागने लगे।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता दौलत वजीरी ने एएफपी को बताया, ‘आज के हमले में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और तकरीबन 50 घायल हो गए।’ वजीरी ने बताया, ‘ज्यादातर पीड़ित मरीज, डॉक्टर और नर्स हैं। अफगानिस्तान के मुख्य कार्यकारी अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने हाल के हमलों के बारे में कहा, ‘यह एक आपराधिक कार्रवाई है। कोई भी चीज अस्पतालों पर हमले का औचित्य नहीं जता सकता।’
अब्दुल्ला ने कहा, ‘हम कभी इन अपराधियों को माफ नहीं कर सकते। बदकिस्मती से, इस हमले में कुछ हताहत हुए।’ यह हमला ऐसे समय में किया गया है जब गर्मियों में तालिबान के हमले शुरू होने से पहले ही उसके आतंकवादियों के हमले बढ़ गये हैं। रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि एक फिदाई हमलावर ने खुद को विस्फोट से उड़ा दिया जबकि एक अन्य हमलावर को सुरक्षा कर्मियों ने ढेर कर दिया। इस संघर्ष में एक सुरक्षाकर्मी की मौत हो गई है जबकि तीन अन्य घायल हो गए।
सुरक्षा बलों ने सैन्य अस्पताल की घेरेबंदी कर दी है जबकि अफगान सरकार के हेलीकॉप्टर इलाके के ऊपर चक्कर लगा रहे हैं। इस बीच, इस्लामिक स्टेट समूह ने सैन्य अस्पताल पर हमले की जिम्मेदारी ली और दावा किया कि इस हमले के पीछे उसके लड़ाके हैं। समूह ने एक प्रामाणिक टेलीग्राम खाते के मार्फत अपने वक्तव्य में कहा, ‘इस्लामिक स्टेट के घुसपैठियों ने काबुल के सैन्य अस्पताल पर हमला किया।’ अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में इस हमले की निंदा की और इसे ‘सभी अफगान पुरुषों और सभी अफगान महिलाओं’ पर हमला बताया।


अमेरिका में बसे भारतीयों के जीवनसाथियों की मुसीबतें बढ़ाएगा ट्रंप का एच-4 वीजा बैन
8 March 2017
अमेरिका के नए राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप एच-1बी वीजा धारकों की मुश्‍किलों को बढ़ाने की कमर कस चुके हैं। ट्रंप प्रशासन की ओर से जो नया प्रस्‍ताव दिया गया है उसके तहत एच-4 वीजा को 60 दिनों के लिए फ्रीज किया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो फिर भारतीयों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं।
क्‍या है एच-4 वीजा
अमेरिका के न्‍याय विभाग की ओर से एच-4 वीजा को फ्रीज करने से जुउ़ा प्रस्‍ताव दिया गया है। इंग्लिश डेली टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इस नए प्रस्‍ताव के बाद एच-4 वीजा के लिए अप्‍लाई करने वालों के सामने अनिश्चितता का माहौल बन गया है। एच-4 वीजा, एच-1बी वीजा धारकों के उन पर निर्भर रहने वाले जीवन साथियों को जारी किया जाता है। गौरतलब है कि एच-1बी वीजा का भविष्‍य फिलहाल खुद खतरे में है। अमेरिकी प्रशासन इस वीजा सिस्‍टम में भी बदलाव लाना चाहता है। फरवरी 2015 में हजारों भारतीयों के जीवन साथी कड़े संघर्ष के बाद इस वीजा के अधिकारी बने थे। उस समय अमेरिका की होमलैंड सिक्‍योरिटी ने एच-1बी वाले भारतीय वीजा धारकों के जीवनसाथियों को एच-4 वीजा स्‍कीम के तहत उस समय काम करने की मंजूरी दी थी जब एच-1बी वीजा धारक अपने ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हों।
कोर्ट में दायर याचिका
एच-4 वीजा को लेरक वर्ष 2015 में जो आदेश आया उसे अमेरिकी ग्रुप सेव जॉब्‍स की ओर से कोर्ट में चुनौती दी गई। लेकिन कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। जैसे ही ट्रंप ने राष्‍ट्रपति पद संभाला, इस ग्रुप की ओर से कोर्ट में एक और अपील दायर की गई। ऐसा लगता है कि अमेरिकी न्‍याय विभाग इस मुद्दे पर इस ग्रुप को समर्थन कर रहा है। विभाग की ओर से एक डॉक्‍यूमेंट दायर किया गया है जिसका टाइटल है, 'कॉनसेंट मोशन टू होल्‍ड प्रोसिडिंग्‍स इन एबेयांस फॉर 60 डेज।' जनवरी में खबरें आई थीं कि ट्रंप वीजा से जुड़ा एक नया एग्जिक्‍यूटिव ऑर्डर साइन कर सकते हैं। यह नया एग्जिक्‍यूटिव ऑर्डर वीजा कार्यक्रमों को निशाना बनाने वाला होगा और इसका सीधा असर अमेरिका में मौजूद भारतीय टेक्‍नोलॉजी कंपनियों पर पड़ेगा। ड्राफ्ट के तहत एक नया नियम लाया जा सकता है जिसके तहत सिर्फ सर्वश्रेष्‍ठ और सबसे तेज उम्‍मीदवार को ही इन वीजा के लिए सेलेक्‍ट किया जाएगा। करीब 90 प्रतिशत इंडियन आईटी कंपनियां एच1बी वीजा के तहत काम कर रही हैं।


मलेशियाई नागरिकों को राहत, उत्तर कोरिया छोड़ने पर अस्थाई रोक
7 March 2017
सियोल: उत्तर कोरिया ने मलेशिया में अपने शीर्ष नेता किम जोंग-उन के सौतेले भाई किम जोंग-नम की मौत के बाद दोनों देशों के बीच उपजे कूटनीतिक तनाव के बीच देश में रह रहे मलेशियाई नागरिकों के उत्तर कोरिया छोड़ने पर अस्थाई रोक लगा दी है.
उत्तर कोरिया की आधिकारिक समाचार एजेंसी 'कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी' (केसीएनए) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि विदेश मंत्रालय ने प्योंगयांग स्थित मलेशियाई दूतावास को सूचित किया है कि जब तक मलेशिया में उत्तर कोरियाई राजनयिकों और नागरिकों की सुरक्षा और 'मामले (नम हत्याकांड) के निष्पक्ष निपटारे की गारंटी' नहीं मिलती तब तक मलेशियाई नागरिकों को देश छोड़ने की अनुमति नहीं होगी.
दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी 'योनहाप' की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर कोरिया में रह रहे मलेशियाई इस प्रतिबंध के बावजूद पहले की तरह ही बगैर किसी परेशानी के देश में रहेंगे.
वहीं, इसकी प्रतिक्रिया में मलेशिया की सरकार ने भी अपने देश से उत्तर कोरियाई दूतावास के सदस्यों और अधिकारियों के देश छोड़ने पर रोक लगा दी है.
'द स्टार' के अनुसार, मलेशिया के गृह मंत्री अहमद जाहिद हमीदी ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, "हम ऐसा करना नहीं चाहते थे, लेकिन इसकी जरूरत थी."
उन्होंने कहा, "गृह मंत्रालय ने उत्तर कोरियाई दूतावास के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी सदस्य के देश छोड़कर जाने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है."
अहमद ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्रा प्रतिबंध केवल राजनयिकों पर ही लागू होगा, अन्य उत्तर कोरियाई नागरिकों को देश छोड़ जाने की अनुमति होगी.
इस घोषणा के तुरंत बाद पुलिस ने कुआलालंपुर में उत्तर कोरियाई दूतावास को चारों ओर से घेर लिया.
मलेशिया के उप विदेश मंत्री रीजल मेरिकन नैना मेरिकन ने बताया कि उत्तर कोरिया में उनके दूतावास के तीन सदस्यों और उनके परिवार सहित कुल 11 लोग फंसे हुए हैं.
'स्टार डेली' के अनुसार, मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब तुन रजाक ने कहा कि वह उत्तर कोरिया द्वारा मलेशियाई नागरिकों के देश छोड़कर जाने पर लगाए गए प्रतिबंध की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं. उन्होंने इस मुद्दे पर राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग की एक आपात बैठक भी बुलाई.


मोसुल के सरकारी मुख्यालय से खदेड़े गए आइएस आतंकी
7 March 2017
इस्लामिक स्टेट (आइएस) के कब्जे वाले मोसुल शहर को मुक्त कराने के अभियान में इराकी बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षा बलों ने मंगलवार को आतंकियों को प्रांतीय सरकार के मुख्यालय, दूसरे ब्रिज अल-हुरिय्याह और सेंट्रल बैंक की मुख्य शाखा से भी खदेड़ दिया है।
इराक में मोसुल ही आइएस का अंतिम गढ़ बचा था। उसे मुक्त कराने के लिए 17 अक्टूबर से इराकी सेना ने अमेरिकी गठबंधन की मदद से अभियान छेड़ रखा है। शहर के पूर्वी हिस्से को छुड़ा लिया गया है जबकि पश्चिमी भाग से आतंकियों को खदेड़ने के लिए लड़ाई चल रही है।
आतंरिक मामलों के मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल अब्देल अमीर अल-मुहम्मदावी ने बताया कि मोसुल के मुख्य संग्रहालय पर भी नियंत्रण पा लिया गया है। इसे आतंकियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया था। एक विशेष रैपिड रिस्पांस टीम ने सोमवार रात शहर में स्थित निनवे प्रांत के मुख्यालय और आसपास की सरकारी इमारतों पर धावा बोला। एक घंटे चली लड़ाई में बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए। सरकारी इमारतों पर नियंत्रण मिलने से इराकी बलों को समीप के पुराने शहर में जमे आतंकियों पर हमला करने में मदद मिलेगी।
निनवे प्रांत की राजधानी से आतंकियों को खदेड़ने का अभियान अब बेहद जटिल चरण में पहुंच चुका है। शहर के पुराने हिस्से में घनी आबादी में हजारों आतंकियों के छुपे होने का अनुमान है। पुराना शहर टाइगरिस नदी के पश्चिमी तट पर है। यह नदी शहर को दो हिस्सों में बांटती है। शहर के पश्चिमी हिस्से की आबादी साढ़े सात लाख बताई जाती है। शरणार्थियों के लिए काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन ने कहा कि पश्चिमी मोसुल में लड़ाई के चलते 50 हजार से ज्यादा लोगों ने पलायन किया है।


अमेरिका की नागरिकों को चेतावनी - अफगानिस्तान, पाक, बांग्लादेश न जाएं, किया भारत का भी ज़िक्र
7 March 2017
वाशिंगटन: अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए परामर्श जारी किया है कि वे पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश की यात्रा नहीं करें और कहा कि भारत में भी चरमपंथी तत्व 'सक्रिय' हैं.
अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने परामर्श में कहा, "अमेरिकी सरकार का आकलन है कि दक्षिण एशिया के आतंकवादी समूह अमेरिकी प्रतिष्ठानों, नागरिकों और हितों को निशाना बना सकते हैं... अमेरिकी नागरिकों को अफगानिस्तान जाने से बचना चाहिए, क्योंकि इस देश का कोई इलाका हिंसा से मुक्त नहीं है..."
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है, "पाकिस्तान में कई आतंकवादी संगठन, जातीय समूह तथा दूसरे चरमपंथी हैं, जो अमेरिकी नागरिकों के लिए खतरा पैदा करते हैं..."
इसके अलावा अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत के बारे में भी कहा, "भारत में भी चरपमंथी तत्व सक्रिय हैं, जैसा हालिया आपात संदेश में कहा गया था... बांग्लादेश में आतंकवादियों ने कई स्थानों और संस्थाओं को निशाना बनाया है..."


चीन ने भारतीय सीमा के पास तिब्बत के दूसरे सबसे बड़े एयरपोर्ट टर्मिनल को खोला
6 March 2017
पेइचिंग: चीन ने सोमवार को तिब्बत के दूसरे सबसे बडे एयरपोर्ट टर्मिनल को खोल दिया। भारतीय सीमा के नजदीक स्थित यह एयरपोर्ट टर्मिनल 10,300 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। 2020 तक यह सालाना 7,50,000 यात्रियों और 3 हजार टन माल संभालने लायक हो जाएगा। नया टर्मिनल तिब्बत में खुला छठा टर्मिनल है जो न्यिंगची मेनलिंग एयरपोर्ट पर स्थित है। यह टर्मिनल अरुणाचल प्रदेश के काफी नजदीक है।
चीन तिब्बत में तेजी से इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलप कर रहा है जिससे भारत की चिंता बढ़ना लाजिमी है। चीन ने तिब्बत में रोड, रेल और हवाई इन्फ्रास्ट्रक्चर को आक्रामक तरीके से बढ़ा रहा है। इससे चीनी सेना को भी सीधा फायदा पहुंच रहा है। भारत ने भी हाल के सालों में चीन सीमा से सटे इलाकों में इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास पर जोर देना शुरू किया है।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक 2020 तक एयरपोर्ट करीब साढे सात लाख यात्रियों और 3 हजार टन कार्गो को ढोने के लायक हो जाएगा। न्यिंगची एयरपोर्ट चीन के पश्चिमोत्तर प्रांत शांक्शी की राजधानी शियान के लिए नए एयर रूट को खोलेगा। तिब्बत में चीन के नागरिक उड्डयन प्रशासन के उप निदेशक लियू वेई ने बताया कि इसके अलावा नया टर्मिनल शुरू होने के साथ ही ल्हासा, ग्वांगझौ, कनमिंग, चोंगक्विंग और शेनझेन के लिए उड़ानों के फेरे भी बढ़ाए जाएंगे।
हवाईअड्डे का 2006 में संचालन शुरू हुआ था और उसके बाद से यहां यात्रियों की संख्या में साल-दर-साल बढ़ोतरी हो रही है। 2016 में इस एयरपोर्ट से यात्रा करने वालों की तादाद 3 लाख 90 हजार पहुंच गई थी। इस तरह पिछले कुछ सालों में यहां से कुल 40 लाख यात्रियों ने सफर किया है। लियू ने कहा कि नया टर्मिनल शुरू होने से यात्रियों की बढ़ती संख्या के कारण होने वाला दबाव कम होगा।
न्यिंगची दक्षिण-पूर्व तिब्बत में स्थित है जिसकी समुद्र तल से औसत ऊंचाई 2,950 मीट है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के सालों में शहर ने पीच ब्लॉसम फेस्टिवल सरीखे आयोजनों से बड़ी तादाद में पर्यटकों को लुभाया है।


उ. कोरिया ने फिर किया चार बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण
6 March 2017
सियोल: संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को ठेंगा दिखाते हुए उत्तर कोरिया ने सोमवार को मध्यम दूरी की चार बैलेस्टिक मिसाइलों का परीक्षण करके अपने इरादे जता दिए। करीब 260 किलोमीटर की ऊंचाई पर जाकर एक हजार किलोमीटर का सफर तय करके ये मिसाइलें जापान सागर में गिरीं। दक्षिण कोरिया की सेना ने साफ कर दिया कि ये मिसाइलें अंतरमहाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइलें (आईसीबीएम) थीं, जो अमेरिका तक मार करने में सक्षम हैं।
इस तरह से परमाणु हथियार संपन्न उत्तर कोरिया ने अमेरिका के समक्ष कड़ी चुनौती पेश कर दी है। दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका के कट्टर दुश्मन उत्तर कोरिया ने पांच हजार किलोमीटर तक मार करने में सक्षम बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है। परीक्षण के समय ये मिसाइलें जापान की धरती से महज 300 किलोमीटर पहले समुद्र में गिरीं।
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने उत्तर कोरिया से इसके लिए कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने ने कहा है कि यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों का खुला उल्लंघन है। जबकि दक्षिण कोरिया के कार्यवाहक राष्ट्रपति ह्वांग क्यो हान ने इसे अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के लिए चुनौती बताया है। उन्होंने कहा कि अब उनका देश और जल्द अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम थाड को तैनात करेगा।
अमेरिका ने टेस्ट की गई मिसाइल के आईसीबीएम होने पर शक जताते हुए कहा कि अमेरिका को फिलहाल कोई खतरा नहीं है। उल्लेखनीय है कि उत्तर कोरिया से अमेरिका की दूरी करीब चार हजार किलोमीटर है। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद उत्तर कोरिया की तरफ से मिसाइल का पहला परीक्षण है। इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने उत्तर कोरिया से संबंधों में सुधार के लिए प्रयास करने के संकेत दिए थे।
अब ट्रंप के सुरक्षा सलाहकार नई स्थितियों में अमेरिका की भूमिका पर विचार कर रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिकी विशेषज्ञ अब विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जो अब ज्यादा नहीं बचे हैं। इससे पहले अमेरिका ने सन 1991 में दक्षिण कोरिया से अपने परमाणु हथियार हटा लिये थे। तब दोनों कोरियाई देशों ने प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त रखने के समझौते पर दस्तखत किये थे।
मगर, उत्तर कोरिया बाद में इस समझौते से मुकर गया। उत्तर कोरिया ने सितंबर 2016 में अपना पांचवां शक्तिशाली परमाणु परीक्षण किया था, जिसे उसने हाइड्रोजन बम कहा था, जो परमाणु बम से 100 गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है।
चीन ने कहा, दोनों पक्ष संयम बरतें
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जेंग शुआंग ने कहा है कि दोनों पक्षों को ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़े। सभी संबद्ध पक्षों को संयम बरतना चाहिए। प्रवक्ता का इशारा क्षेत्र में चल रहे अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास और उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण की ओर था।


पाकिस्तान को अमेरिकी मदद में कमी की भरपाई कर रहा है चीन
6 March 2017
वॉशिंगटन: पाकिस्तानी नेता अक्सर अपने सदाबहार दोस्त चीन के साथ 'शक्कर जैसी मिठास' वाले रिश्तों का राग गाते रहते हैं। हालांकि अमेरिका के साथ सुविधा वाले रिश्तों का अब पाकिस्तान में उतना जिक्र नहीं होता है। ट्रंप प्रशासन जब अपने मुख्य साझेदार के प्रति नीतियों को अंतिम रूप देने की कोशिश करेगा तब उसे महसूस होगा कि पाकिस्तान अब पेइचिंग की गोद में बैठा हुआ है और उसने 2030 तक ऊर्जा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और उद्योग के क्षेत्र में 46 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है। यह इतनी राशि है जो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है।
दूसरी तरफ वॉशिंगटन का इस्लामाबाद पर प्रभाव कम होता दिख रहा है। अमेरिका के कई नीतिनिर्माता पाकिस्तान को आतंकवादियों के पनाहगाह के रूप में देखते हैं। उनके मुताबिक 9/11 हमले के बाद पाकिस्तान को सुरक्षा और आर्थिक मदद के तौर पर 30 अरब डॉलर की सहायता दी गई जिसका कोई फायदा नहीं मिला है। हालांकि अगर अमेरिका पाकिस्तान से पूरी तरह किनारा करता है तो क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से मामला उलझ सकता है।
पाकिस्तान में विपक्ष के नेता बिलावल भुट्टो ने अपने हालिया वॉशिंगटन दौरे में कहा था, 'मुझे ऐसा महसूस होता है कि हम (पाकिस्तान और अमेरिका) एक बार फिर ऐसे सहयोगी बन चुके हैं जो अलग हो सकते हैं।' दरअसल 2011 में अमेरिकी कमांडोज ने पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था, उसके बाद से ही पाकिस्तान को अमेरिकी मदद घटती जा रही है और दोनों के रिश्तों में खटास बढ़ती जा रही है। इसके अलावा जिस तरह अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी सिकुड़ रही है, पाकिस्तान का अमेरिका के लिए महत्व भी घट रहा है और वह प्राथमिकता में नीचे पहुंच गया है। पाकिस्तान को अमेरिकी मदद में अभी और गिटावट तब आएगी जब राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप दूसरे देशों के मदद के बजट को नाटकीय तौर पर कम करने के अपने प्रस्ताव पर अमल करेंगे।
डॉनल्ड ट्रंप अमेरिका की आतंकवाद से रक्षा के लिए भले ही दृढ़ संकल्पित हैं लेकिन पाकिस्तान से पीछे हटना आसान नहीं होगा क्योंकि वह एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है जहां अल कायदा के सरगना अयमान अल-जवाहिरी के छिपे होने का संदेह है। जवाहिरी अफगानिस्तान में शांति वार्ता में प्रमुखता से भूमिका निभा सकता है। अफगानिस्तान में अभी भी अमेरिका के 8,500 सैनिक तैनात हैं, इसका मतलब है कि अमेरिका की अफगानिस्तान में रूचि बरकरार है।
चीन भी पाकिस्तान में आतंकवाद को लेकर चिंतित है। उइगर उग्रवादी समूहों के पाकिस्तान-अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में ठिकाना बनाने और अलकायदा के साथ-साथ तालिबान से उनके लिंक की रिपोर्ट्स से चीन का चिंतित होना लाजिमी है। लेकिन इन सबसे ऊपर, चीन पाकिस्तान में रणनीतिक और आर्थिक फायदे देख रहा है। पाकिस्तान के चीन को हिंद महासागर तक पहुंच की पेशकश से चीन के लिए मध्य-पूर्व से तेल आयात कराने में शामानी हो सकती है।


ट्रम्प के नेवी मिनिस्टर के लिए नॉमिनेट बिल्डेन का इस्तीफा, 3 मंत्री कर चुके हैं रिजाइन
27 Feb. 2017
डोनाल्ड ट्रम्प की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रहीं। अब उनके एडमिनिस्ट्रेशन में नेवी मिनिस्टर के लिए नॉमिनेट फिलिप बिल्डेन ने इस्तीफा दे दिया है। यूएस डिफेंस मिनिस्टर ने कहा कि बिल्डेन ने ये फैसला बिजनेस के दबाव के चलते लिया। पहले आर्मी मिनिस्टर के नॉमिनेट विन्सेंट वायोला और लेबर मिनिस्टर नॉमिनेट एंडी पुजडर भी इस्तीफा दे चुके हैं।
- यूएस के डिफेंस मिनिस्टर जिम मैटिस के मुताबिक, "बिल्डेन ने मुझे नेवी मिनिस्टर की पोस्ट छोड़ने की जानकारी दी है। उन्हें हमने इस पोस्ट के लिए नॉमिनेट किया था।"
- बता दें कि अमेरिका में सरकार किसी भी शख्स को मिनिस्टर पोस्ट के लिए नॉमिनेट करती है, जिसे बाद में सीनेट मंजूरी देती है।
- मैटिस ने कहा, "ये फैसला उन्होंने कुछ निजी कारणों से लिया है। उन्हें बिजनेस में कुछ परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।"
- "हालांकि, उनके इस्तीफे से मैं निराश हूं। उनके फैसले का सम्मान करता हूं। उम्मीद करता हूं कि वे देश को दूसरे तरीके से सपोर्ट करते रहेंगे।"
'ट्रम्प को नेवी मिनिस्टर की पोस्ट के लिए सलाह दूंगा'
- मैटिस ने कहा, "आने वाले दिनों में मैं प्रेसिडेंट ट्रम्प को नेवी मिनिस्टर के अप्वाइंटमेंट के लिए नए नाम का सुझाव दूंगा।"
- "हम कोशिश करेंगे कि जो नया शख्स आए, वो नेवी और मरीन कॉर्प्स में ट्रम्प के विजन को साकार कर सके।"
क्या बोले बिल्डेन?
- बिल्डेन ने कहा, "मैं ट्रम्प को शुक्रिया कहना चाहता हूं कि उन्होंने मुझ पर मरीन्स फोर्स के लिए भरोसा किया।"
- "लेकिन मैं ये भी कहना चाहता हूं कि अपने बिजनेस पर असर पड़ने के चलते मैं सही तरीके से अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा सकता।"
- इससे पहले आर्मी मिनिस्टर के नॉमिनेट विन्सेंट वायोला और लेबर मिनिस्टर नॉमिनेट एंडी पुजडर ने भी इस्तीफा दे दिया था।
- रूस से रिलेशन बढ़ाने के आरोपों पर नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर माइकल फ्लिन को इस्तीफा देना पड़ा था।


Oscars में छाए एंटी-ट्रम्प बयान, मेक्सिकन एक्टर बोले- दीवार अलग नहीं कर पाएगी
27 Feb. 2017
यहां डॉल्बी थिएटर में हुई ऑस्कर सेरेमनी में एंटी-ट्रम्प स्पीच छाई रहीं। प्रेजेंटर्स और अवॉर्ड विनर्स ने डोनाल्ड ट्रम्प के इमिग्रेशन बैन के खिलाफ स्पीच दीं। अवॉर्ड फंक्शन में ट्रम्प का विरोध करने वाले पहले शख्स होस्ट जिमी किमेल रहे। उन्होंने कहा, "ऑस्कर अवॉर्ड अमेरिका समेत 225 देशों में दिखाया गया। क्या वे हमसे नफरत करते हैं।" एक मेक्सिकन एक्टर गेल गार्सिया ने कहा कि कोई दीवार हमें अलग नहीं कर पाएगी।
- किमेल ने कहा, "मैं प्रेसिडेंट को शुक्रिया कहना चाहता हूं। पिछले साल ऑस्कर को नस्ली करार दिया गया था। फिल्मों को लेकर मौजूदा साल शानदार रहा।"
- "ब्लैक लोगों ने नासा को बचाया तो व्हाइट लोगों ने जैज म्यूजिक को। इसे आप तरक्की कह सकते हैं।"
- जिमी ने हॉलीवुड स्टार मेरिल स्ट्रीप की गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड में दी गई स्पीच का भी जिक्र किया। मेरिल ने वहां ट्रम्प की पॉलिसीज को क्रिटिसाइज किया था।
कई विनर्स ने भी ट्रम्प को क्रिटिसाइज किया
- बेस्ट मेकअप और हेयरस्टाइल के लिए ऑस्कर जीतने वाले इतालवी आर्टिस्ट ने कहा, "मैं भी एक इमिग्रेंट हूं।"
- बेस्ट डॉक्युमेंट्री फीचर के लिए ऑस्कर जीतने वाली प्रोड्यूसर-डायरेक्टर एजरा ऐडलमान ने माना कि उन्होंने ये अवार्ड पुलिस वॉयलेंस के पीड़ितों और क्रिमिनल इनजस्टिस के हक में लिया है।
- पहली बार बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड जीतने वालीं वियोला डेविस ने कहा, "एक जगह है जहां सभी महान लोग इकट्ठा होते हैं और वो जगह है कब्रिस्तान।"
- "लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं किस तरह की कहानी बताना पसंद करोगी?"
- "मैं कहती हूं, उन लोगों कहानी जो बड़े सपने देखते हैं लेकिन वो पूरे नहीं हो पाते। उन लोगों की कहानी जो प्यार में पड़कर सब खो देते हैं।"
- कई विनर्स ने तो ऑडियंस में खड़े होकर अपना अवॉर्ड इमिग्रेंट्स को ही डैडिकेट किया।
और क्या बोले आर्टिस्ट?
- बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड पाने पाने वाली 'मूनलाइट' के प्रोड्यूसर एडेल रोमान्स्की ने कहा कि वे ये पुरस्कार उन ब्लैक लड़कों और ब्राउन लड़कियों को समर्पित करते हैं जो घर पर बैठकर सेरेमनी देखते हुए खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।
- मेक्सिको के एक्टर-डायरेक्टर गेल गार्सिया बेर्नल ने कहा, "एक ह्यूमन बीइंग होने के नाते किसी भी तरह की दीवार हमें अलग नहीं कर सकती।"
- बता दें ट्रम्प ने मेक्सिको बॉर्डर पर इलीगल इमिग्रेंट्स को रोकने के लिए एक दीवार बनाने की बात कही थी।


ट्रम्प को झटका : हिलेरी की पार्टी ने इमीग्रेंट के बेटे को चुना राष्ट्रीय अध्यक्ष
27 Feb. 2017
वॉशिंगटन: अमेरिका में प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प की इमीग्रेशन नीति से मुकाबला करने के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी ने नया रास्ता निकाला है। शनिवार को पार्टी ने थॉमस पेरेज को अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया। पेरेज भले ही राष्ट्रपति ओबामा के समय 2013 से 2017 तक श्रम मंत्री थे, लेकिन उनके माता-पिता दोनों इमीग्रेंट थे और लैटिन अमेरिकी देश से आए थे पेरेज डेमोक्रेटिक पार्टी के पहले लैटिनो अध्यक्ष हैं।
पहले राउंड की वोटिंग में पेरेज पिछड़ गए थे लेकिन दूसरे राउंड में उन्हें 235 वोट मिले और वे जीत गए। राष्ट्रपति चुनाव में हिलेरी क्लिंटन के प्रतिद्वंद्वी बर्नी सैंडर्स के प्रतिनिधि कीथ एलिसन को 200 वोट मिले। एलिसन को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया गया है। एलिसन अमेरिकी संसद में चुने जाने वाले पहले मुस्लिम हैं। सभी सैंडर्स समर्थक एलिसन के साथ थे, जबकि हिलेरी-ओबामा समर्थकों ने पेरेज को वोट दिए।
जीत के बाद क्या कहा पेरेज ने?
पेरेज ने जीत के बाद कहा, प्रेसिडेंट ट्रम्प के कार्यकाल में बहुत बड़ी चुनौतियां हैं। अगर अभी हमने कदम नहीं उठाए तो भविष्य में लोग पूछेंगे 2017 में आप कहां थे। श्रममंत्री के रूप में पेरेज ने ओवर टाइम की राशि बढ़ाने सहित कई कदम उठाए थे। रिपब्लिकंस ने तब कहा था कि इससे कारोबारियों पर बहुत ज्यादा भार पड़ेगा। अब उनके सामने 2018 के चुनावों में उम्मीदवारों के चयन से लेकर ट्रम्प की नीतियों का जवाब देना तक शामिल है।
पेरेज के माता-पिता लैटिन अमेरिकी थे
पेरेज का जन्म 7 अक्टूबर 1961 को अमेरिका में ही हुआ। लेकिन उनके माता-पिता लैटिन अमेरिकी देश डोमेनिकन रिपब्लिक से आए थे। पिता सर्जन थे जिन्होंने सेकंड वर्ल्डवॉर में अमेरिकी सेना में शामिल होकर नागरिकता हासिल की थी। टॉम 12 साल के थे जब उनके पिता की मौत हो गई। मां ग्रेस अपने पिता रफैल ब्राशे के साथ 1930 में आई थीं। रफैल अमेरिका में डोमेनिकन रिपब्लिक के राजदूत थे। बाद में उन्हें उनके ही देश ने अवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया और वे अमेरिका में ही रह गए।


किम जोंग नम की हत्‍या के लिए दिए गए थे 90 डॉलर
25 Feb. 2017
उत्‍तर कोरियाई शासक किम जोंग उन के सौतेले भाई की हत्‍या करने वाले संदिग्‍धों में से एक इंडोनेशियाई महिला ने बताया कि उसे इस काम के लिए 90 डॉलर दिए गए जिसके कारण उसे लगा कि वह एक मजाक का हिस्‍सा बन रही है।
हिरासत में न देखें माता-पिता
मलेशिया में इंडोनेशिया के डिप्‍टी एंबेस्‍डर एंड्रियानो इरविन ने बताया, सिति ऐसयाह ने अधिकारियों को बताया कि वह नहीं चाहती थी कि उसके माता-पिता उसे हिरासत में देखें। ऐसयाह से मिलने के आधे घंटे बाद इरविन ने बताया, ‘वह नहीं चाहती की उसकी हालत देख उसका परिवार दुखी हो।‘ उन्‍होंने बताया, उसने हमारे जरिए अपने माता पिता के लिए केवल यही संदेश दिया कि वे चिंता न करें और अपना ध्‍यान रखें।
सुनियोजित तरीके से हुई थी हत्‍या
कुआलालंपुर एयरपोर्ट पर 13 फरवरी को यात्रियों की भीड़ भाड़ में ही सुनियोजित तरीके से किम जोंग नम की हत्‍या की गयी थी। हमले के बाद कुछ ही घंटों के भीतर किम की मौत हो गयी जिसमें दो महिलाएं किम के पीछे गईं और उसके चेहरे पर कुछ लगा दिया। 25 वर्षीय ऐसयाह ने पहले कहा कि उसे इस हमले में फंसाया गया है लेकिन मलेशियाई पुलिस ने कहा कि उसके साथ एक और वियतनाम की महिला संदिग्‍ध है और उसे भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। अब तक की जानकारी के अनुसार उत्‍तरी कोरिया ने किम की हत्‍या के लिए एक टीम मलेशिया भेजा था।
उत्‍तर कोरिया में ही बना होगा रासायनिक जहर
विशेषज्ञों ने बताया कि यह मोटा, तैलीय विष निश्‍चित तौर पर देश के लैब में निर्मित किया गया है और अंतर्राष्‍ट्रीय संधि के तहत प्रतिबंधित है। मामले में प्राथमिक संदिग्‍ध उत्‍तर कोरिया ने इस संधि पर हस्‍ताक्षर नहीं किया और जटिल रासायनिक हथियार कार्यक्रम के विकास में दश्‍ाकों का समय लगा दिया। हालांकि किम जोंग नम अपने भाई के लिए राजनीतिक खतरा नहीं थे, वे देश की तानाशाही में एक संभावित प्रतिद्वंद्वी हो सकते थे।
वहीं से आया था जहर: मलेशिया
हमले के पीछे उत्‍तर कोरिया पर सीधे तौर से मलेशिया आरोप नहीं लगा रही है लेकिन अधिकारियों का कहना है कि चार उत्‍तर कोरियाई पुरुषों ने दो महिलाओं को जहर सौंपा था। हत्‍या के तुरंत बाद वे चारों मलेशिया से फरार हो गए। शनिवार को पुलिस ने इस बात की पुष्‍टि की कि कुआलालंपुर के बाहरी इलाकों में इस हफ्ते के शुरुआत में जो छापेमारी की गयी वह इस मामले की पड़ताल का ही हिस्‍सा था। वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारी अब्‍दुल सामाह मत जो इस मामले की जांच कर रहे हैं उन्‍होंने यह नहीं बताया कि उस जांच के दौरान उनकी टीम को वहां क्‍या मिला लेकिन उन्‍होंने बताया कि बरामद वस्‍तुओं को जांच के लिए भेजा गया है ताकि उनपर अगर किसी तरह का केमिकल लगा हो तो पता चल सके।
वीडियो फुटेज में दिख रहीं हमलावर
कई सालों से विदेश में रहने वाले किम जोंग नम पर 13 फरवरी को दो महिलाओं ने हमला कर दिया जब वे मकाऊ जाने के लिए विमान का इंतजार कर रहे थे। निगरानी के लिए लगे वीडियो कैमरे के फुटेज में दो महिलाएं उनके चेहरे पर कुछ लगाती हुई नजर आ रही हैं। इन दोनों को हिरासत में ले लिया गया है।
किम पर घातक रसायन VX का उपयोग किया गया था जिसका कुछ नमक के दानों के बराबर का हिस्‍सा किसी को मारने के लिए काफी होता है। इस गंधहीन केमिकल को स्‍किन के जरिए सूंघने, निगलने या अवशोषित करने भर से मौत हो जाती है।


मोहम्मद अली के बेटे को अमेरिका में हवाईअ्डडे पर रोका, पूछा-क्या तुम मुस्लिम हो?
25 Feb. 2017
वाशिंगटन: विश्वप्रसिद्ध मुक्केबाज मोहम्मद अली के बेटे को फ्लोरिडा हवाई अड्डे पर पूछताछ के लिए दो घंटे तक रोककर रखा गया। वह जमैका से लौट रहे थे। उन्हें इसलिए रोका गया क्योंकि उनका नाम अरबी भाषा जैसा लग रहा था।
मोहम्मद अली जूनियर के दोस्त और वकील क्रिस मानसीनी ने लुइसविले कूरियर जर्नल को बताया कि 44 वर्षीय मोहम्मद अली जूनियर का जन्म फिलाडेल्फिया में हुआ और उनके पास अमेरिकी पासपोर्ट है। अली जूनियर अपनी मां खलीला कमाचो-अली के साथ यात्रा कर रहे थे।
मानसीनी ने अखबार को बताया कि उन दोनों को फोर्ट लॉडेरडेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पूछताछ के लिए सात फरवरी को रोका गया क्योंकि उनके नाम सुनने में अरबी भाषा की तरह लग रहे थे।
हालांकि कमाचो-अली को उस समय छोड़ दिया गया जब उन्होंने अपने पति मोहम्मद अली के साथ अपनी तस्वीर दिखाई।
मानसीनी ने बताया कि अली जूनियर के पास हालांकि ऐसी कोई तस्वीर नहीं थी और उनके साथ करीब दो घंटे तक पूछताछ की गई। उनसे लगातार यह सवाल पूछा गया कि उन्हें अपना नाम कहां से मिला है और क्या वह मुस्लिम हैं।
मोहम्मद अली विश्वप्रसिद्ध मुक्केबाज थे और उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार करने के बाद 1964 में अपना जन्म नाम कैशियस क्ले छोड़ दिया था। तीन विश्व हैवीवैट खिताब जीतने वाले अली रिंग के बाहर नागरिक अधिकारों की लड़ाई के लिए भी जाने जाते हैं।


US में मारे गए इंजीनियर की पत्नी ने पूछा- यहां से हमारा क्या वास्ता?
25 Feb. 2017
अमेरिका में मारे गए भारतीय इंजीनियर श्रीनिवास कुचीवोतला की पत्नी सुनयना डुमाला ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने अमेरिकी शहर ह्यूस्टन में श्रीनिवास की कंपनी गारमिन की एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया.
यूं छलका पत्नी का दर्द
कंसास में नौकरीशुदा सुनयना ने कहा कि ट्रंप सरकार की नीतियां अमेरिका के अल्पसंख्यकों में डर पैदा कर रही हैं. उन्होंने पूछा, 'क्या हमारा वाकई अमेरिका से वास्ता है? सुनयना का कहना था कि अमेरिका में अल्पसंख्यकों पर हमलों ने उनके मन में वहां रहने पर शक पैदा कर दिया था. लेकिन श्रीनिवास ने उन्होंने समझाया था कि अमेरिका में अच्छी बातें भी होती हैं. सुनयना के मुताबिक उन्हें इस बात पर शक है कि अमेरिकी सरकार इस तरह के गुनाह रोकने के लिए कारगर कदम उठाएगी.
नफरत का शिकार हुए श्रीनिवास
गुरुवार को कंसास शहर के ओलेथ इलाके में एक शख्स ने श्रीनिवास समेत 3 लोगों को गोली मार दी थी. ये तीनों उस वक्त ऑस्टिन बार एंड ग्रिल नाम के रेस्तरां में बैठे थे. गोली चलाने वाला एडम पुरिंटन नाम का शख्स पूर्व नौसैनिक है. एडम ने गोली चलाने से पहले चिल्लाकर कहा था, 'मेरे देश से निकल जाओ.' मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हमलावर ने इन लोगों को मध्य-पूर्व का समझ लिया था. गोलीबारी में 32 साल के आलोक मदासानी के अलावा 24 साल के अमेरिकी नागरिक इन ग्रिलॉट घायल हुए थे. चश्मदीदों के मुताबिक ग्रिलॉट ने घटना के वक्त बीच-बचाव की कोशिश की थी.
कौन थे श्रीनिवास?
32 साल के श्रीनिवास गारमिन कंपनी में 2014 से काम कर रहे थे. उन्होंने साल 2005 में हैदराबाद की जवाहर लाल नेहरू टेक्निकल यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी. बी.टेक पूरी करने के बाद वो आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए थे. यहां उन्होंने टेक्सस यूनिवर्सिटी से साल 2007 में मास्टर्स डिग्री हासिल की. उनकी पत्नी सुनैना भी कंसास की ही एक टेक्नॉलॉजी कंपनी में काम करती हैं.



 
 
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