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बिजनेस समाचार

मार्केट वॉच

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, इंदौर
OCT. 8-10, 2014


बैंकिंग / फाइनेंसियल मिरर

बिजनेस-आयडियाँ

बिजनेस- ऑफर

बिजनेस- पर्सनेलिटीज

बिजनेस- फीचर्स



यह कंपनी दे रही है 73 रुपए में अनलिमिटेड 4G डाटा
18 April 2017
नई दिल्लीः इन दिनों टैलीकॉम कंपनियां सस्ता से सस्ता प्लान लांच कर रही हैं। रिलायंस जियो ने ऑफर्स की झड़ी लगा दी जिसके बाद से टैरिफ भी सस्ते हो गए हैं लेकिन अब अनलिमिटेड 4G प्लान की शुरूआत होती दिख रही है।
नॉर्वे की टैलीकॉम कंपनी टैलीनॉर इंडिया ने 73 रुपए का प्लान पेश किया है। इस प्लान के तहत यूजर्स को 28 दिनों के लिए अनलिमिटेड 4G डाटा मिलेगा। साथ ही देश में किसी भी नैटवर्क पर 90 दिनों तक 25 पैसे प्रतिमिनट की दर से कॉलिंग होगी और 25 रुपए का टॉकटाइम भी मिलेगा।
इसके अलावा जो यूजर्स 73 का पहला रिचार्ज करा रहे हैं वे अगले महीने STV47 का रिचार्ज करा सकते हैं। इस प्लान में उन्हें 28 दिनों तक 400MB इंटरनैट की सुविधा मिलेगी।
कहां के लिए है प्लान?
फिलहाल यह ऑफर सिर्फ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सर्कल के लिए ही है। टैलीनॉर के आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सर्कल बिजनेस हेड श्रीनाथ कोटियन ने कहा है, ‘आज की दुनिया में कस्टमर्स अपने मोबाइल में इंटरनैट ब्राइज करना चाहते हैं। FR73 एक कंप्लीट वैल्यू पैक है जिसमें अनलिमिटेड इंटरनैट, बेस्ट कॉलिंग रेट्स और फ्री टॉक टाइम भी दिया जा रहा है। यह प्रोडक्ट हमें सबसे सस्ता होने को भी दर्शाता है।’


लंदन में गिरफ्तारी के बाद माल्या को मिली ज़मानत, ट्वीट कर कहा- भारतीय मीडिया ने बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया
18 April 2017
नई दिल्ली: लंदन में विजय माल्या की गिरफ्तारी के तुरंत बाद ही उन्हें जमानत भी मिल गई. विजय माल्या ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि कोर्ट में प्रत्यर्पण के सिलसिले में उनकी सुनवाई पहले से तय थी. उन्होंने भारतीय मीडिया पर भी टिप्पणी करते हुए ट्वीट किया कि उन्होंने (भारतीय मीडिया ने) मेरी कोर्ट में पेशी को काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया.
इससे पहले स्कॉटलैंड यार्ड ने मंगलवार को विजय माल्या को वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जमानत मिल गई.
भारत में भगोड़ा घोषित विजय माल्या को धोखाधड़ी के आरोपों में नयी दिल्ली के प्रत्यर्पण आग्रह पर मंगलवार (18 अप्रैल) को स्कॉटलैंड यार्ड ने लंदन में गिरफ्तार कर लिया, लेकिन चंद घंटे बाद उसे जमानत मिल गई. शराब कारोबारी माल्या भारत में ऋण डिफॉल्ट मामले में वांछित है. उसे मंगलवार सुबह उस समय गिरफ्तार कर लिया गया जब वह मध्य लंदन पुलिस थाने में पेश हुआ.
2016 से फरार चल रहे शराब कारोबारी को वेस्टमिंस्टर अदालत के आदेश पर स्कॉटलैंड यार्ड की पुलिस ने मंगलवार को करीब 9:30 सुबह (भारतीय समयानुसार) गिरफ्तार किया. उनपर भारतीय बैंकों के 9000 करोड़ सहित कुल 12000 करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज नहीं चुकाने का आरोप है.
जानकारी के मुताबिक आगे की कार्रवाई के लिए सीबीआई की एक टीम लंदन जाएगी. माल्या का ब्रिटेन से भारत में प्रत्यर्पण की संभावना अब बढ़ गई है. उन्हें लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया जाएगा. विजय माल्या की गिरफ्तारी वेस्टमिंस्टर कोर्ट के आदेश पर हुई है. भारत सरकार ने 8 फरवरी को विजय माल्या के प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन की सरकार को अर्जी भेजी थी. जनवरी 2017 में सीबीआई कोर्ट ने माल्या के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था.
किस बैंक पर है कितना कर्ज
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया पर 1600 करोड़, पंजाब नैशनल बैंक पर 800 करोड़, आईडीबीआई बैंक पर 800 करोड़, बैंक ऑफ इंडिया पर 650 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा पर 550 करोड़, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया पर 430 करोड़, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर 410 करोड़, यूको बैंक पर 320 करोड़, कॉरपोरेशन बैंक पर 310, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर पर 150 करोड़, इंडियन ओवरसीज बैंक पर 140 करोड़, फेडरल बैंक पर 90 करोड़, पंजाब एंड सिंध बैंक पर 60 करोड़ और एक्सिस बैंक पर 50 करोड़ रुपए का कर्ज है.
क्या है मामला
माल्या पर सरकारी बैंकों से लिए गए नौ हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज की देनदारी है. माल्या ने करीब 8.2 हजार करोड़ रुपए अपनी कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस समेत कई कंपनियों के नाम पर ले रखे थे. बैंकों की शिकायत पर उसके खिलाफ भारत सरकार का प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो समेत कई एजंसियां जांच कर रही हैं. उसके खिलाफ आर्थिक गबन के कई मामले चल रहे हैं. कुछ मामलों में अदालत के निर्देश पर माल्या की कंपनियों के स्वामित्व वाली परिसंपत्तियां जब्त की गई हैं. बैंकों का कर्ज न चुकाने और देश छोड़कर भाग जाने के कारण माल्या के प्रकरण में सरकारी को खासी शर्मिंदगी उठानी पड़ी है. जब बैंकों ने कर्ज वसूली के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया तो माल्या मार्च 2016 में ब्रिटेन भाग गया था.


SBI के इन खाता धारकों को नहीं है मिनिमम बैलेंस रखने की जरूरत
17 April 2017
नई दिल्ली: भारतीय स्‍टेट बैंक (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) ने अपने ग्राहकों को ट्वीट के जरिए स्पष्ट कर किया है कि छोटे बचत बैंक खाता, सामान्य बचत बैंक खाता, जन धन खाता और और व्यावसायिक वेतन खाता धारकों को न्यूनतम राशि बनाए रखना जरूरी नहीं है.
ग़ौरतलब है कि भारतीय स्‍टेट बैंक ने 1 अप्रैल से बचत खातों में न्यूनतम शेष राशि रखने की सीमा बढ़ा दी थी.
न्यूनतम राशि नहीं रखने पर भरने होंगे जुर्माने
एसबीआई की वेबसाइट के अनुसार एसबीआई के बचत खाताधारकों को मासिक आधार पर न्यूनतम राशि को अपने खाते में रखना होगा. ऐसा नहीं होने पर उन्हें 20 रुपए (ग्रामीण शाखा) से 100 रुपए (महानगर) देने होंगे. बैंक में 31 मार्च तक बिना चेक बुक वाले बचत खाते में 500 रुपये और चेक बुक की सुविधा के साथ 1,000 रुपये रखने की आवश्यकता थी. हालांकि सुरभि, मूल बचत खाता और प्रधानमंत्री जनधन योजना खातों में यह व्यवस्था लागू नहीं होगी.
चेक के प्रति पन्ने के लिए देने होंगे तीन रुपए
इसके अलावा बैंक ने लॉकर किराया भी बढ़ा दिया है. साथ ही एक साल में लॉकर के उपयोग की संख्या भी कम कर दी है. 12 बार उपयोग करने के बाद ग्राहक 100 रुपए के साथ सेवा कर देना होगा. चेक बुक के मामले में चालू खाताधारकों को एक वित्त वर्ष में 50 चेक मुफ्त मिलेंगे. उसके बाद उन्हें चेक के प्रति पन्ने के लिए तीन रुपए देने होंगे. इस प्रकार, 25 पन्नों वाले चेक बुक के लिए उन्हें 75 रुपए के साथ सेवा कर देना होगा. एसबीआई के बचत खाते में अगर 25,000 रुपये बना रहता है तो संबंधित ग्राहक असीमित बार एटीएम का इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि पांच बार से अधिक एटीएम के उपयोग करने पर ग्राहक को शुल्क देना होगा.
एक अप्रैल से पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का एसबीआई में विलय
स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर सहित भारतीय स्टेट बैंक के पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का शनिवार को देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक में विलय हो गया. इसके साथ ही स्टेट बैंक दुनिया के 50 बड़े बैंकों में शामिल हो गया है.
स्टेट बैंक द्वारा शनिवार को जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर (एसबीबीजे), स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद (एसबीएच), स्टेट बैंक ऑफ मैसूर (एसबीएम), स्टेट बैंक ऑफ पटियाला (एसबीपी) और स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर (एसबीटी) तथा भारतीय महिला बैंक (बीएमबी) का एक अप्रैल से भारतीय स्टेट बैंक में विलय हो गया है.
इस विलय के साथ भारतीय स्टेट बैंक के खाताधारकों की कुल संख्या 37 करोड़ और उसकी शाखाओं का नेटवर्क 24,000 के आंकड़े को छू जायेगा. देशभर में उसके 59,000 एटीएम होंगे. विलय के बाद बैंक की जमा राशि 26 लाख करोड़ रुपये से अधिक और कर्ज पर दी गई राशि 18.50 लाख करोड़ रुपये होगी.


सिगरेट कंपनियों में निवेश कर LIC ने कमाया करोड़ों का प्रॉफिट
17 April 2017
नई दिल्ली: सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एल.आई.सी.) ने सिगरेट बनाने वाली कंपनी आई.टी.सी. में निवेश कर हजारों करोड़ रुपए का लाभ कमाया है। वहीं निजी बीमा कंपनियों की ‘स्वास्थ्य के प्रति जवाबदेही’ की पॉलिसी के चलते सिगरेट कंपनियों से निवेश निकालने का फायदा एल.आई.सी. जैसी सरकारी कंपनियों को मिला है। वैश्विक स्तर पर कई बीमा तथा म्यूचुअल फंड कंपनियां तंबाकू जैसे क्षेत्रों में निवेश से दूर रहती हैं।
पिछली तिमाही में सार्वजनिक क्षेत्र की चारों बीमा कंपनियों को आई.टी.सी. में अपनी 21 प्रतिशत हिस्सेदारी पर 15,000 करोड़ रुपए का लाभ हुआ जबकि पूरे 2016-17 में इस निवेश पर फायदा 20,000 करोड़ रुपए से अधिक का रहा। इसके अलावा एस.यू.यू.टी.आई. (यूनिट ट्रस्ट आफ इंडिया की विशेषीकृत इकाई) के जरिए सरकार ने आई.टी.सी. में 31,000 करोड़ रुपए मूल्य की हिस्सेदारी ले रखी है। एस.यू.यू.टी.आई. पूर्व यू.टी.आई. के निवेश पोर्टफोलियो की होल्डिंग कंपनी है।
एस.यू.यू.टी.आई. ने 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची
एस.यू.यू.टी.आई. ने हाल में आई.टी.सी. में करीब 2 प्रतिशत हिस्सेदारी 6700 करोड़ रुपए में बेची। उसके बाद निजी कंपनी में उसकी हिस्सेदारी घटकर 9.1 प्रतिशत पर आ गई। आई.टी.सी. का बाजार मूल्यांकन करीब 3.4 लाख करोड़ रपए है। हालांकि कंपनी विविध कारोबार में लगी है लेकिन अब भी उसकी कुल आय में सिगरेट कारोबार का एक बड़ा योगदान है।
निजी बीमा कंपनियां लाईं निवेश में कमी
कई म्यूचुअल फंड तथा निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों के शीर्ष कार्यकारियों का कहना है कि उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी चिंता के कारण ‘जिम्मेदार निवेश रणनीति’ के तहत तम्बाकू और शराब जैसे क्षेत्रों में अपना निवेश हटा दिया है या उसमें काफी कमी लाई है।
एल.आई.सी. की आई.टी.सी. में 16.3 प्रतिशत हिस्सेदारी
एल.आई.सी. की हिस्सेदारी प्रतिरूप के विश्लेषण से पता चलता है कि उसकी आई. टी.सी. में करीब 16.3 प्रतिशत हिस्सेदारी है। जीवन बीमा कंपनी ने पिछली तिमाही में हिस्सेदारी 2 प्रतिशत बढ़ाई और उसके पास फिलहाल 55,000 करोड़ रुपए मूल्य की हिस्सेदारी है। एल.आई.सी. के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनियों ओरिएंटल इंश्योरैंस कंपनी, न्यू इंडिया इंश्योरैंस कंपनी तथा जनरल इंश्योरैंस कार्पोरेशन ऑफ इंडिया की भी आई.टी.सी. में अच्छी हिस्सेदारी है जिसका मूल्य करीब 17,000 करोड़ रुपए है। एक तरफ जहां सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां आई.टी.सी. में निवेश कर रही हैं जबकि आई.सी.आई.सी.आई. प्रूडैंशियल लाइफ तथा कई म्यूचुअल फंड समेत निजी क्षेत्र की कंपनियों ने अपनी हिस्सेदारी में उल्लेखनीय कमी की है या निवेश निकाल लिया है।

कुछ शहरों में हर दिन बदलेंगी पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें
12 April 2017
नई दिल्लीः अगर आप हर महीने-दो महीने पर पेट्रोल-डीजल की बदलती क़ीमतों से परेशान हैं तो सोच लीजिए कि आने वाले दिनों में ये क़ीमतें हर दिन बदलने वाली हैं. तेल कंपनियों के एक नए प्रस्ताव के तहत भारत के कुछ शहरों में पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों को अंतरराष्ट्रीय क़ीमतों से जोड़ा जाएगा.
भारतीय तेल कंपनियां मसलन इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प इस योजना के लिए तैयार हैं कि हर दिन अंतरराष्ट्रीय मार्केट के हिसाब से भारत के कुछ शहरों में पेट्रोल दिया जाए.
आईओसी के चेयरमैन बी अशोक ने पीटीआई से कहा, 'हम चाहेंगे कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के हिसाब से पेट्रोल-डीज़ल मिले.'
उन्होंने बताया कि पहले ये पायलट योजना पुड्डुचेरी, आंध्र प्रदेश के विशाखापटनम, राजस्थान के उदयपुर, झारखंड के जमशेदपुर और चंडीगढ़ में लागू की जाएगी. इस बारे में पूछे जाने पर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना था कि इस फैसले से सरकार का कोई लेना देना नहीं है और हर दिन तेल की कीमतें बदलने का प्रस्ताव विशेषज्ञों की राय पर लिया जा रहा है.
अभी कैसे तय होती है क़ीमत
इस समय भारत में तेल की क़ीमतें अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से जुड़ी हुई तो हैं लेकिन हर दिन के हिसाब से नहीं.
हर माह की पहली तारीख और 16 तारीख को औसत अंतरराष्ट्रीय कीमत और करेंसी की रेट के आधार पर तेल की क़ीमतें तय की जाती हैं.
कई बार ऐसा भी होता है कि तेल की क़ीमतें काफी नीचे जाने पर भी उपभोक्ता तक वो फायदा नहीं पहुंचता है और इसे लेकर कंपनियों और सरकार की काफ़ी आलोचना भी होती रहती है.
अब कंपनियों के नए पायलट से हर दिन ये क़ीमतें बदलेंगी. उम्मीद जताई जा रही है कि लोगों की ये शिकायत ख़त्म हो जाएगी कि कंपनियां तेल की कम क़ीमत पर होने वाले फ़ायदे को लोगों तक नहीं पहुंचा रही हैं.
हालांकि अभी ये पायलट कुछ ही शहरों में शुरू होगा. यह पूछे जाने पर कि योजना कब से शुरू होगी, आईओसी के चेयरमैन ने कहा कि ऐसा एक महीने में हो सकता है.
हालांकि उन्होंने कोई तारीख नहीं बताई लेकिन मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि एक मई से ये पायलट शुरू हो सकता है.
सरकार और तेल कीमतें
जून 2010 में ये फैसला किया गया था कि पेट्रोल की क़ीमतें अब सरकार तय नहीं करेगी.
इसके बाद अक्तूबर 2014 में डीज़ल की क़ीमतों को भी सरकार के नियंत्रण से अलग कर लिया गया.
सैद्धांतिक रूप से तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतें तय करने का हक है लेकिन ये फैसले अभी भी राजनीतिक रुख़ को देखकर किए जाते हैं क्योंकि सभी तेल कंपनियां सरकारी हैं.
एक अप्रैल को आख़िरी बार पेट्रोल की कीमतें बदली थीं और इसमें करीब चार रूपए की गिरावट आई थी जबकि डीज़ल के रेट करीब तीन रुपए गिरे थे.
कंपनियों ने ये फैसला करीब ढाई महीने बाद किया था. पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव के दौरान तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की क़ीमतों में कोई फेरबदल नहीं किया था.


आपका बचत खाता हो सकता है ब्लॉक, अगर 30 अप्रैल तक नहीं किया सेल्फ सर्टिफाइड. यहां पढ़ें क्या करें.
12 April 2017
नई दिल्ली: आयकर विभाग के नए आदेश के तहत देश में कई खाताधारकों के बचत खाते या कहें बैंक अकाउंट को ब्लॉक किया जा सकता है. आयकर विभाग का यह आदेश एफएटीसीए के प्रावधानों के तहत आया है. आयकर विभाग ने कहा है कि यदि आपके बैंक खाते 1 जुलाई 2014 से 31 अगस्त 2015 के बीच खुले हैं उन्हें अपने खातों को जल्द से जल्द स्व प्रमाणित करना है. आयकर विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि ऐसे सभी बैंक खाता धारकों को यह कार्यवाही 30 अप्रैल तक हर हाल में पूरी कर लेनी है. ऐसा नहीं करने वालों के खातों को ब्लॉक कर दिया जाएगा.
इससे यह साफ है कि ऐसे बैंक खाता धारक अपने खातों से किसी प्रकार का वित्तीय लेन-देन नहीं कर पाएंगे. इस संबंद में सीबीडीटी ने भी एक बयान जारी कर ऐसे खाता धारकों को साफ आदेश दे दिया है. एफएटीसीए को लागू करने के लिए अमेरिका के साथ अन्‍तर सरकारी समझौता(आईजीए) 31 मार्च 2015 को किया गया. आयकर नियम 1962 के नियम 1114एच(8) में वैकल्पिक प्रक्रिया उपलब्‍ध कराई गई हैं. वित्‍तीय संस्‍थानों को स्‍वयं प्रमाण पत्र प्राप्‍त करना होगा और 1 जुलाई 2014 से 31 अगस्‍त 2015 तक सभी निजी और कम्‍पनी खातों पर विचार करना होगा. ऐसा स्‍वयं प्रमाणन, प्रलेखन को 31 अगस्‍त 2016 तक वित्‍तीय संस्‍थानों को प्राप्‍त करना था अन्‍यथा उन्‍हें खाता बंद करना पड़ता और पहले से जारी खाते के लिए निर्धारित सतर्कता प्रक्रिया के अनुसार रिपोर्ट करनी होती.
हितधारकों की कठिनाईयों को देखतेहुए 3 अगस्‍त 2016 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्‍यम से बताया गया कि जिन मामलों में स्‍वयं प्रमाणन नहीं हुआ है उन मामलों में 31 अगस्‍त 2016 तक वित्‍तीय संस्‍थानों को खाता बंद नहीं करना पड़ेगा. वित्‍तीय संस्‍थानों को यह सलाह भी दी गई कि वे स्‍वयं प्रमाणन प्राप्ति सहित सभी सतर्कता कार्य पूरा करें. वित्‍तीय संस्‍थानों ने अध्‍यव्‍यवसाय के लिए प्रक्रिया पूरी की संशोधित समयसीमा के बारे में पूछताछ की है. वित्‍तीय संस्‍थानों को सलाह दी जाती है कि वे स्‍वयं प्रमाण प्राप्‍त करने का प्रयास करें. खाताधारकों को सूचित किया जाता है कि 30 अप्रैल 2017 तक स्‍वयं प्रमाण प्राप्‍त नहीं होने पर खाते बंद करदिए जायेंगे. इसका अर्थ यह होगा कि ऐसे खातों में वित्‍तीय संस्‍थान खाताधारक को कोई लेनदेन करने से रोकेंगे.
जानकारी के लिए 10 अहम बातें :
1. एफएटीसीए (FATCA) के तहत भारत और अमेरिका के बीच ऐसी संधि है जिसके बाद ऐसे खाता धारकों के वित्तीय लेन-देन की जानकारी एक दूसरे से साझा की जाती है.
2. भारत और अमेरिका ने इस संबंध में 31 अगस्त 2015 को एक संधि पर हस्ताक्षर किए थे. इसे विदेशी खाते कर क्रियान्वयन कानून का नाम दिया गया.
3. खाता धारक और निवेशकों को यह जरूरी हो गया है कि वह टैक्स लेने वाले देश, उस देश से मिला टिन नंबर, जन्मस्थान, नागरिकता आदि की जानकारी देनी होगी.
4. आयकर विभाग ने कहा है कि यदि अकाउंट को ब्लॉक कर दिया गया तब खाता धारक निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही अपने खाते से काम कर सकेगा.
5. इससे पहले बैंकों को यह प्रक्रिया 31 अगस्त 2016 तक पूरे करने के निर्देश दिए गए थे. बाद में यह तारीख 30 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी गई थी. अब भी लोगों को उम्मीद थी कि एक बार फिर तारीख को बढ़ा दिया जाएगा. लेकिन अब आयकर विभाग ने साफ कर दिया है कि इस बार ऐसा नहीं होगा. ऐसे खाताधारकों को 30 अप्रैल तक यह काम पूरा करना ही होगा.
6. आयकर विभाग ने इस संबंध में कई वित्तीय संस्थानों को हो रही दिक्कतों के चले पहले यह तारीख 30 अप्रैल 2017 तक बढ़ाने की छूट दे दी थी.
7. आयकर विभाग के सख्त रुख को देखते हुए म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय संस्थानों ने अपने ग्राहकों को साफ कर दिया है कि वह नए नियमों के तहत अपने अपने स्व प्रमाणित करने वाले काम पूरा कर लें.
8. अब आयकर विभाग ने सभी वित्तीय संस्थानों को यह निर्देश दे दिया है कि वह सभी इस काम में तत्परता दिखाएं. ताकि जरूरी काम पूरा हो सके.
9. जानकारी के लिए बता दें कि यह संधि और नियम इसीलिए बनाया गया था ताकि दूसरे देशों में अर्जित संपत्ति से की जाने वाली आय पर जरूरी कर लगाया जा सके.
10. आयकर विभाग ने एफएटीसीए के तहत आने वाले सभी खाता धारकों के खातों के बारे में जानकारी साझा करने के लिए बैंकों को पहले ही आदेश दे दिया है.


डीलरों ने दी चेतावनी, पेट्रोल पंप रविवार को बंद रहेंगे, सुबह 9 से शाम 6 बजे तक ही खुलेंगे
11 April 2017
नई दिल्ली: देशभर के पेट्रोल पंप मालिकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनका मार्जिन बढ़ाए जाने की मांग को नहीं माना गया, तो वे हर रविवार को पंप बंद रखेंगे. यही नहीं, जब तक सरकार इस मामले में दखल नहीं देती है, सप्ताह के शेष दिनों में भी पेट्रोल पंप सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक ही काम करेंगे, ताकि वे लोग अपने खर्चों में कमी ला सकें.
कन्सॉर्टियम ऑफ इंडियन पेट्रोलियम डीलर्स के महासचिव रवि शिंदे ने NDTV प्रॉफिट को बताया कि पेट्रोल पंप मालिकों ने तय किया है कि 14 मई से प्रत्येक रविवार को पंप बंद रखे जाएंगे, तथा 15 मई से डीलर सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक ही काम करेंगे. यह कन्सॉर्टियम देशव्यापी संगठन है, और लगभग 50,000 पेट्रोल पंप डीलरों का प्रतिनिधित्व करता है.
रवि शिंदे ने यह भी जानकारी दी कि इन फैसलों के अलावा पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन 10 मई को 'नो परचेज़ डे' (कोई खरीद नहीं दिवस) के रूप में मनाएगी, ताकि मांगों पर ज़ोर दिया जा सके. उन्होंने कहा, "इससे (जनता को) ज़्यादा परेशानी पैदा नहीं होगी, लेकिन यह तेल कंपनियों के लिए संकेत होगा कि डीलर अब लड़ाई के लिए तैयार हैं..."
पंप मालिकों की मांगों के बारे में बात करते हुए रवि शिंदे ने बताया कि तेल मार्केटिंग कंपनियों ने "लिखित में दिया हुआ अपना वादा पूरा नहीं किया, जिसमें उन्होंने अपूर्व चंद्र कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक डीलरों को मार्जिन देना था..."
रवि शिंदे ने कहा कि डीलर मार्जिन की बात की जाए तो अपूर्व चंद्र कमेटी के आकलन के अनुसार डीलरों को पेट्रोल पर 3,333 रुपये प्रति किलोलिटर (1,000 लिटर) मिलने चाहिए, और डीज़ल पर 2,126 रुपये प्रति किलोलिटर. उन्होंने कहा, "जबकि इस समय हमें पेट्रोल तथा डीज़ल पर क्रमशः 2,570 रुपये तथा 1,620 रुपये मिल रहे हैं..."
पेट्रोल पंप मालिकों ने जनवरी में डिजिटल भुगतानों पर लगने वाले कर के विरोध में क्रेडिट तथा डेबिट कार्ड के ज़रिये भुगतान लेने से मना करने की चेतावनी दी थी, और उस समय सरकार को दखल देना पड़ा था.
चूंकि देश में डीज़ल की मांग कम हुई है, इसलिए 31 मार्च, 2017 को समाप्त हुए पिछले वित्तवर्ष के दौरान भारत में ईंधन की खपत पांच फीसदी की धीमी गति से बढ़ी. तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनैलिसिस सेल (पीपीएसी) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता भारत में वर्ष 2016-17 के दौरान ईंधन और पेट्रोलियम उत्पादों की मांग 194.2 मिलियन टन रही, जबकि उससे पिछले वित्तवर्ष के दौरान यह 184.6 मिलियन टन रही थी.


अगर पत्नी को भी देते हैं घर का किराया तो देना होगा सबूत, वरना नहीं मिलेगी टैक्स में छूट
Our Correspondent :11 April 2017
नई दिल्ली: आप एक करदाता हैं और किराये के घर में रहते हैं तो आपको टैक्स बचाने के रेंट स्लिप दिखानीं होंगीं। हाल ही में मुंबई इनकम टैक्स अपीलीय ट्रिब्यूनल (आईटीएटी) ने एक कर दाता को टैक्स में छूट देने से मना कर दिया। मुंबई की वह कर दाता अपनी मां को कैश में घर का रेंट देती हैं, लेकिन वह इसके पुख्ता सबूत नहीं दे पाईं। एक दूसरे मामले में अहमदाबाद आईटीएटी ने एक कर दाता के एचआरए (हाउस रेंट अलाउंस) को मंजूरी दे दी। जबकि वह अपनी पत्नी को घर का किराया देता था। इकॉनोमिक टाइम्स के मुताबिक यह देखते हुए कि टैक्स बचाने के लिए सैलरी पाने वालों के लिए सीमित रास्ते हैं। इसलिए वह एचआरए का पूरा लाभ उठाते हैं। वह टैक्स में छूट पाने के लिए यह दिखाते हैं कि वह परिवार के किसी सदस्य के साथ किराये पर रहते हैं और रेंट देते हैं। कई जगह ऐसा है भी कि लोग अपने किसी रिश्तेदार के यहां किराये पर रह रहे हैं और रेंट की असली स्लिप लगाते हैं।
किसी भी रिश्तेदार को रेंट देना अवैध नहीं है, लेकिन अगर इनकम टैक्स के अधिकारियों ने रेंट स्लिप की जांच की और इसके पुख्ता सबूत नहीं मिले तो फिर आपके दावे को प्रमाण के साथ खारिज कर दिया जाएगा। इसलिए रिश्तेदार को रेंट देने पर सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। अगर आप किसी रिश्तेदार के यहां रहते हैं और एक कर दाता हैं तो एक रेंट एग्रीमेंट बनवा लीजिए और अपने खाते से ही रिश्तेदार के खाते में रेंट ट्रांसफर कीजिए। आईटी एक्ट के सेक्शन 10(13ए) के मुताबिक कोई एचआरए तभी क्लेम कर सकता है जब प्रॉपर्टी उसके नाम पर न हो और सही में वह उसका रेंट दे रहा हो।
ई वाय-इंडिया में पीपल एडवाइजरी सर्विस पार्टनर अमरपाल एस चड्ढा ने बताया कि माता-पिता या पत्नी को रेंट दिया जा सकता है। इससे करदाता की पात्रता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, पर इसके लिए करदाता एचआरए क्लेम करने के नियमों को पूरा करता हो। ऐसा ही अहमदाबाद में एचआरए क्लेम करने के मामले में हुआ। बजरंग प्रसाद के एचआरए के क्लेम को खारिज नहीं किया। जबकि वह अपनी पत्नी को घर का किराया देता है। इस पर आईटीएटी ने कहा कि कर दाता दो पात्रताएं पूरी करता है एक तो घर उसके नाम पर नहीं है और दूसरा वह हर महीने अपने बैंक खाते से अपनी पत्नी के खाते में घर का रेंट ट्रांसफर करता था।


पेट्रोल पंप 10 मई के बाद हर रविवार रहेंगे बंद, पट्रोलियम डीलर्स ने लिया फैसला
10 April 2017
नई दिल्ली: कंसोरटियम ऑफ इंडियन पट्रोलियम डीलर्स(सीआईपीडी) ने 10 मई के बाद से हर रविवार को पेट्रोल पंप बंद रखने की घोषणा की है। उन्होंने यह फैसला तेल कंपनियों की ओर से हो रही लगातार अनदेखी के चलते लिया है। रविवार को कुरुक्षेत्र में हुई सीआईपीडी की बैठक में निर्णय लिया गया है कि बीते वर्ष नवंबर महीने में मुंबई और इस वर्ष मार्च में तेल कंपनियों के साथ हुई बैठक में उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकल पाया। इसके बाद सीआईपीडी ने हर रविवार पेट्रोल पंप बंद रखने की घोषणा की है।
सीआईपीडी ने यह भी कहा है कि तेल कंपनियों ने यदि इसके बाद भी सुधार नहीं किया तो पेट्रोल पंपों को रात में भी बंद रखा जाएगा। आपको बता दें कि देशभर में 53 हजार पेट्रोल पंप हैं और अगर सीआईपीडी का यह फैसला लागू हो जाता है तो आम लोगों के लिए दिक्कत खड़ी हो सकती है। मौजूदा समय में सीआईपीडी के इस फैसले के संबंध में तेल कंपनियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सीआईपीडी के राष्ट्रीय एडी सत्यानारायणन ने कहा, “वर्ष 2011 से तेल कंपनियां पंप मालिकों को मार्जिन नहीं दे रही है, जिससे पंप संचालक को नुकसान हो रहा है। इससे बचने के लिए उन्होंने समय-समय पर मार्जिन दिए जाने की मांग की, लेकिन अधिकारियों की ओर से लगातार अनदेखी की जा रही है।
फैसले से क्या हो सकता है असर
सीआईपीडी का फैसले लागू होने से पेट्रोल पंपों पर निश्चित रुप से भीड़ बढ़ेगी। इसके साथ ही रविवार के दिन पेट्रोल या डीजल खत्म होने पर लोगों को अगले दिन तक का इंतजार करना पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर, इससे तेल खपत पर प्रभाव पड़ेगा और प्रत्येक महीने तेल कंपनियों को होने वाले करोड़ों रुपये के मुनाफे पर भी असर पड़ेगा।


सेंसेक्स 131 अंक गिराकर 28,575 के स्तर पर हुआ बंद, छोटे-मझौले शेयर्स में दिखी खरीदारी
10 April 2017
नई दिल्लीः शुक्रवार के कारोबारी सत्र में शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 131 अंक कमजोर होकर 29575.74 के स्तरपर और निफ्टी 17 अंक की कमजोरी के साथ 9181.45 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुआ है। बीएसई में करीब आधे फीसद और एनएसई में 0.18 फीसद की कमजोरी हुई है। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप (0.43 फीसद) औऱ स्मॉलकैप में तीन चौथाई फीसद की तेजी हुई है।
आईटी सेक्टर में बिकवाली
सेक्टोरियल इंडेक्स की बात करें तो फाइनेंशियल सर्विस (0.02 फीसद), आईटी (1.41 फीसद) और रियल्टी (0.56 फीसद) लाल निशान में बंद हुए हैं। वहीं, निफ्टी (0.42 फीसद), ऑटो (0.37 फीसद), एफएमसीजी (0.13 फीसद), मेटल (0.88 फीसद), फार्मा (0.29 फीसद), पीएसयू बैंक (0.62 फीसद) और निजी बैंक (0.56 फीसद) की तेजी हुई है।
इंफोसिस टॉप लूजर
दिग्गज शेयर्स की बात करें तो निफ्टी में शुमार शेयर्स में से 29 हरे निशान में और 22 लाल निशान में बंद हुए हैं। सबसे ज्यादा तेजी आईओसी, बीपीसीएल, ग्रासिम, यस बैंक और इंफ्राटेल के शेयर्स में हुई है। वहीं, गिरावट इंफोसिस, एशियनपेंट, इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिडेट, एचसीएल टेक और विप्रो के शेयर्स में हुई है।
करीब 2.30 बजे
सोमवार को शेयर बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ देखने को मिल रही है। करीब 2.30 बजे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 77 अंक की कमजोरी के साथ 29,629 के स्तर पर और निफ्टी 9.40 अंक की बढ़त के साथ 9188 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। दिग्गज शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी बीपीसीएल, आईओसी, इंफ्राटेल, येस बैंक और टाटा मोटर डीवीआर के शेयर में देखने को मिल रही है। बीपीसीएल 3.85 फीसद की तेजी के साथ 701 के स्तर पर, आईओसी 3.38 फीसद की बढ़त के साथ 410 के स्तर पर और यस बैंक 2.12 फीसद की बढ़त के साथ 1589 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं, गिरावट इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड, एशियन पेंट, इंफोसिस, एचसीएल टेक और एनटीपीस के शेयरों में है।
नैशनल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप में 0.49 फीसद और स्मॉलकैप में 0.82 फीसद की तेजी देखने को मिल रही है। आईटी क्षेत्र में बिकवाली देखने को मिल रही है। इसमें 0.70 फीसद की कमजोरी है।
करीब 12.30 बजे
सोमवार को शेयर बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ देखने को मिल रही है। करीब 12.30 बजे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 15 अंक की कमजोरी के साथ 29,692 के स्तर पर और निफ्टी 6 अंक की बढ़त के साथ 9204 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। दिग्गज शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी बीपीसीएल, आईओसी, इंफ्राटेल, येस बैंक और एक्सिस बैंक के शेयर में देखने को मिल रही है। बीपीसीएल 4.08 फीसद की तेजी के साथ 702 के स्तर पर, आईओसी 3.79 फीसद की बढ़त के साथ 412 के स्तर पर और यस बैंक 2.08 फीसद की बढ़त के साथ 1588 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं, गिरावट इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड, विप्रो, एशियन पेंट, एनटीपीस और आईशर मोटर्स के शेयरों में है।
नैशनल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप में 0.41 फीसद और स्मॉलकैप में 0.77 फीसद की तेजी देखने को मिल रही है। आईटी क्षेत्र में बिकवाली देखने को मिल रही है। इसमें 0.42 फीसद की कमजोरी है।
सुबह 9.30 बजे
ग्लोबल मार्केट से मिल रहे मिले जुले संकेतों के बीच सोमवार को शेयर बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ देखने को मिल रही है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 60 अंक की बढ़त के साथ 29766 के स्तर पर और निफ्टी 21 अंक की तेजी के साथ 9218 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। दोनों सूचकांक में करीब चौथाई फीसद की तेजी देखने को मिल रही है। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप में आधे फीसद और स्मॉलकैप में 0.79 फीसद की मजबूती देखने को मिल रही है।
ग्लोबल मार्केट में मिले जुले संकेत
भारतीय शेयर बाजार खुलने से पहले एशियाई बाजार से मिले जुले संकेत मिल रहे हैं। जापान का निक्केई 0.63 फीसद की तेजी के साथ 18782.98 के स्तर पर, हैंगसेंग में 0.08 फीसद की तेजी के साथ 24287.44 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं, शांघाई 0.30 फीसद की कमजोरी के साथ 3276.86 के स्तर पर और कोरिया का कोस्पी 0.81 फीसद की कमजोरी के साथ 2135.04 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। अमेरिकी बाजार के सूचकांक डाओ जोन्स 0.03 फीसद की कमजोरी के साथ 20656.10 के स्तर पर, एसएंडपी500 0.08 फीसद की कमजोरी के साथ 2355.54 के स्तर पर और नैस्डैक 0.02 फीसद की कमजोरी के साथ 5877.81 के स्तर पर बंद हुए हैं।
रियल्टी सेक्टर में खरीदारी
सेक्टोरियल इंडेक्स की बात करें तो सभी सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं। सबसे ज्यादा खरीदारी रियल्टी सेक्टर में देखने को मिल रही है। वहीं, फाइनेंशियल सर्विस 0.01 फीसद, एफएमसीजी (0.16 फीसद), आईटी (0.39 फीसद), मेटल (0.38 फीसद) और फार्मा (0.12 फीसद) की बढ़त देखने को मिल रही है।
आईओसी और बीपीसीएल टॉप गेनर
दिग्गज शेयर्स की बात करें तो निफ्टी में शुमार शेयर्स में से 33 हरे निशान में और 18 लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। सबसे ज्यादा तेजी आईओसी, बीपीसीएल, एल एंड टी, अंबूजा सीमेंट और इंफ्राटेल के शेयर्स में देखने को मिल रही है। वहीं गिरावट, एचडीएफसी, इंडियाबुल्स हाउंसिंग फाइनेंस लिमिटेड, ल्यूपिन, आईशर मोटर्स और हिंदु्स्तान यूनिलिवर के शेयर्स में देखने को मिल रही है।


बैंकों, डाक घरों के बचत खातों से कैश ट्रांजैक्शन पर लागू नहीं होगी 2 लाख रुपये की सीमा
6 April 2017
नई दिल्ली: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने आज स्पष्ट किया है कि 2 लाख रुपये से ज्यादा के कैश ट्रांजैक्शन पर रोक का नियम बैंकों और डाक घरों के बचत खातों पर लागू नहीं होगा। सरकार ने वित्तीय कानून 2017 के जरिए 2 लाख रुपये से ज्यादा के नकदी लेनदेन पर रोक लगा दी और यह प्रावधान कर दिया कि इस सीमा ज्यादा जितनी नकद राशि का लेनदेन होगा, उतना ही जुर्माना वसूला जाएगा।
आय कर कानून में जोड़ी गई नई धारा 269ST पर स्पष्टीकरण देते हुए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा कि यह पाबंदी बैंकों और डाक घरों पर लागू नहीं होगी। एक बयान में कहा गया है, 'यह फैसला भी लिया गया है कि नकदी लेनदेन पर पाबंदी बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक या पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक से निकासी पर लागू नहीं होगी।'
सीबीडीटी ने कहा है कि सरकार, बैंकिंग कंपनी, डाक घर बचत बैंक या को-ऑपरेटिव बैंक की ओर से मिली रिसीट पर भी यह पाबंदी लागू नहीं होगी। सीबीडीटी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के लिए नीति निर्धारण करने वाली सर्वोच्च संस्था है। सीबीडीटी ने कहा कि इससे जुड़ी जरूरी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
दरअसल, साल 2017-18 के बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 3 लाख रुपये से ज्यादा के नकदी लेनदेन पर पाबंदी लगाने का ऐलान किया था। लेकिन, फाइनैंस बिल में इसकी सीमा घटाकर 2 लाख कर दी गई और पिछले महीने इसे लोकसभा से पास भी करवा दिया गया। एक सीमा के बाद नकदी लेनदेन पर पाबंदी लगाकर डिजिटल इकॉनमी को बढ़ावा देने का मकसद काले धन पर रोक लगाना है।
नियम के मुताबिक कोई भी व्यक्ति एक दिन में 2 लाख रुपये से ज्यादा का नकद लेनदेन नहीं कर सकता। इसमें एकबारगी लेनदेन और किसी एक आयोजन या समारोह के लिए बारबार का लेनदेन शामिल है। फाइनैंस ऐक्ट में यह भी कहा गया है कि 10,000 रुपये से ज्यादा का कोई पूंजीगत खर्च भी निवेश से जुड़ी छूट या मूल्य कटौती भत्ते के काबिल नहीं माना जाएगा। इसी तरह, राजस्व खर्च के रूप में भी नकदी की सीमा 20,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये कर दी गई है।


एडीबी का दावा, GDP में चीन से आगे बना रहेगा भारत
6 April 2017
नई दिल्ली: एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के अनुमान की बात करें तो भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2017-18 में सुधरकर 7.4 प्रतिशत और इससे अगले वित्त वर्ष में और बढ़कर 7.6 प्रतिशत रह सकती है. इस प्रकार आर्थिक वृद्धि के मामले में भारत चीन से आगे बना रहेगा.
खत्म होने को है नोटबंदी का प्रतिकूल असर
एडीबी के अग्रणी आर्थिक प्रकाशन ‘एशियाई विकास परिदृश्य’ में कहा गया है, ‘उच्च मूल्य वर्ग के नोटों को चलन से हटाने से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभाव नए बैंक नोटों के आने के साथ धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है. मजबूत खपत और वित्तीय सुधारों के आगे बढ़ने से व्यावसायिक विश्वास में सुधार आने की उम्मीद है. इसके साथ ही देश में निवेश संभावना भी बेहतर होगी.’ वर्ष 2016-17 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रही. खास बात यह है कि पिछले साल नवंबर में 500 और 1,000 रुपये के नोटों को अमान्य किये जाने से अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका के बावजूद यह वृद्धि हासिल की गई.
चीन के मुकाबले भारत की जीडीपी अधिक रहेगी
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘दक्षिण एशिया क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत की वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष में 7.1 प्रतिशत रहने के बाद 2017-18 में 7.4 प्रतिशत और इससे अगले साल 2018-19 में 7.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद है.’ जहां तक चीन की बात है, रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की सकल उत्पादन वृद्धि 2017 में नरम पड़कर 6.5 प्रतिशत और 2018 में 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है. इससे पहले 2016 में यह 6.7 प्रतिशत थी.
आर्थिक वृद्धि को भारत के प्रयास चीन पर भारी
एडीबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय और राजकोषीय स्थायित्व के लिए चीन की सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं. लगातार ढांचागत सुधारों से आर्थिक वृद्धि दर को सरकार के तय लक्ष्य के दायरे में बनाये रखने में मदद मिलेगी. दूसरी तरफ पिछले कुछ वर्षों में भारत ने आर्थिक सुधारों के मोर्चे पर कई कदम उठाये हैं. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अधिक उदार बनाया है और वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) को लागू करने की दिशा में अहम पहल की है. कारोबारी परिदृश्य को सुगम बनाने के लिये भी कदम उठाये हैं.
दक्षिण एशिया सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र
रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया दुनिया के सभी उप-क्षेत्रों में सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र होगा. इस क्षेत्र की वृद्धि दर 2017 में 7 प्रतिशत और 2018 में 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है. भविष्य की संभावनाओं का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील एशिया की दो तिहाई अर्थव्यवस्थाओं में बाहरी मांग सुधरने, वैश्विक स्तर पर जिंसों के दाम बढ़ने और घरेलू स्तर पर सुधारों को आगे बढ़ाने से यह क्षेत्र वैश्विक वृद्धि में 60 प्रतिशत योगदान के साथ एकमात्र सबसे बड़ा योगदान करने वाला बना रहेगा.


घर के किराये की फर्जी स्लिप लगाकर नहीं बचा पाएंगे टैक्स, आयकर विभाग मांग सकता है पुख्ता सबूत
5 April 2017
अब घर के किराये की फर्जी स्लिप लगाकर कोई अपना टैक्स नहीं बचा पाएगा। इनकम टैक्स विभाग ऐसे लोगों पर सख्त होने जा रहा है। घर के किराये की फर्जी रसीदों को एम्पलॉयर्स भी नजरअंदाज कर देते हैं। टैक्स अधिकारी भी इसपर ज्यादा ध्यान नहीं देते, इसे अनदेखा कर देते हैं। आयकर विभाग अब इसका ठोस सबूत मांग सकता है कि आपने जहां की रेंट स्लिप दी है वहां आप वास्तव में किराए पर रहते हैं। लोग जिस कंपनी में नौकरी करते हैं वहां से मिलने वाले हाउस रेंट के 60 फीसदी तक की रकम पर टैक्स देने से बच सकते हैं, इसके लिए उन्हें किराये की असली स्लिप लगानी होगी। कई जगह देखा जाता है कि कर्मचारी अपने पिता के घर में रह रहा होता है और रेंट स्लिप लगा देता है। कभी-कभी किराएदार होने पर भी किराए की रकम बढ़ाकर दिखाई जाती है। इकॉनमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, आयकर अधिकारी अब दिखाई गई टैक्सेबल इनकम का आंकड़ा मंजूर करते वक्त सबूत मांग सकते हैं। इसमें लीज एंड लाइसेंस एग्रीमेंट, किराएदारी के बारे में हाउसिंग को-ऑपरेटिव सोसायटी को जानकारी देने वाला लेटर, बिजली का बिल और पानी का बिल जैसे सबूत हो सकते हैं।
डेलॉयट हास्किंस एंड सेल्स एलएलपी के सीनियर टैक्स अडवाइजर दिलीप लखानी ने बताया कि इनकम टैक्स अपीलेट ट्राइब्यूनल की रूलिंग ने सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के क्लेम पर विचार करने और जरूरी होने पर उस पर सवाल करने के लिए आकलन अधिकारी के सामने एक मानक रख दिया है। इससे सैलरी लेने वाले पर यह जिम्मेदारी आएगी कि वह टैक्स छूट पाने के लिए नियमों का पालन करे। माना जाता है कि फर्जी रेंट रसीदें देने वाले कर्मचारी के पास इनमें से कोई भी जरूरी दस्तावेज नहीं होता है। हो सकता है कि वह व्यक्ति असल में किराये पर नहीं रह रहा हो। अपने परिवार के घर में ही रह रहा हो और अपने पिता से किराये की रसीद पर दस्तखत कराकर जमा कर रहा हो।
कुछ मामलों में असल में किरायेदार होने पर भी किराये की रकम बढ़ाकर दिखाई जाती है। इसमें तब तक दिक्कत नहीं आती जब तक कि किराया पाने वाला शख्स टैक्स चुकाने की लिमिट से बाहर हो। एक टैक्स ऑफिसर ने कहा, ‘टेक्नॉलजी और सख्त रिपोर्टिंग सिस्टम से नजर बनाए रखने में आसानी होगी।’ ऐसे कई मामले देखे गए हैं, जिनमें कोई व्यक्ति भले ही अलग रह रहा हो, लेकिन वह दावा करता है कि उसी शहर में रहने वाले एक रिश्तेदार को किराया चुका रहा है, जिनकी वहीं कोई प्रॉपर्टी हो।


रिलायंस जियो डीटीएच का वेलकम ऑफर, 90 दिनों के लिए सर्विस फ्री!
5 April 2017
नई दिल्ली : रिलायंस जियो के बाद अब भारतीय बाजार में रिलायंस जियो डीटीएच अपनी चमक बिखेरने को तैयार है. हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रिलायंस जल्द ही डीटीएच की दुनिया में कदम रखने जा रही है.
रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्राहक या उपभोक्ता रिलायंस जियो डीटीएच के वेलकम ऑफर योजना की उम्मीद कर सकते हैं. इसके साथ ही रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि जियो डीटीएच सर्विस 90 दिनों के लिए मुफ्त रहेगी. इसका मतलब यह है कि उपभोक्ताओं को करीब 3 महीने तक जियो की डीटीएच सेवा के लिए कोई भुगतान नहीं करना होगा.
जियो डीटीएच सेट टॉप बॉक्स पूरी तरह से तैयार है और कंपनी इसे अप्रैल में किसी भी दिन भारतीय बाजार में लॉन्च कर सकती है.रिपोर्ट्स की मानें तो एंड्रॉयड और एप्पल सेट टॉप बॉक्स के जरिए टेलीविजन पर टीवी चैनल देखने के लिए भी जियो डीटीएच सर्विस मदद करेगी और इसके लिए ग्राहकों को महीने में सिर्फ 180 रुपए का भुगतान करना होगा.
जियो डीटीएच सेट टॉप बॉक्स जियो ब्रॉडब्रैंड कनेक्टीविटी के साथ काम करेगा जो कि 1 जीबीपीएस की स्ट्रीमिंग स्पीड देगी. सेट टॉप बॉक्स की तस्वीर पहले ही ऑनलाइन लीक हो चुकी है और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बॉक्स में 300 से ज़्यादा टीवी चैनल और 50 से अधिक एचडी चैनल होंगे.


भारत में वॉट्सऐप जल्द शुरू कर सकता है पेमेंट सर्विस
4 April 2017
नई दिल्ली: भारत में तेजी से फैल रहा वॉट्सऐप जल्द ही पेमेंट सर्विस लॉन्च कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो आप वॉट्सऐप के जरिए पैसे भेज सकेंगे और पेमेंट भी कर सकेंगे। नोटबंदी के बाद देश में बढ़ते ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस को देखते हुए वॉट्सऐप पेमेंट ऑप्शन दे सकता है।
The Ken वेबसाइट में पब्लिश एक रिपोर्ट के मुताबिक वॉट्सऐप, जिसकी भारत में कोई अलग टीम नहीं है वह डिजिटल ट्रांजैक्शंस बिजनस को लीड करने के लिए टीम तैयार करने की कोशिश में है। भारत में लोकप्रिय मेसेजिंग ऐप वॉट्सऐप ने फरवरी में बताया था कि वह 20 करोड़ ऐक्टिव यूजर्स का आंकड़ा पार कर चुका है। कंपनी के ग्लोबल यूजर्स की बात करें तो वह 120 करोड़ के आसपास हैं।
केन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वॉट्सऐप भारत में UPI के जरिए अगले 6 महीनों के अंदर पेमेंट सर्विस शुरू कर सकता है। यहां यह ध्यान देने वाली बात है कि वॉट्सऐप ने पेमेंट सिस्टम के लिए लोकप्रिय डिजिटल वॉलिट्स को नहीं UPI को चुना है। केन ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा है कि वॉट्सऐप ने पहले डिजिटल वॉलिट के बारे में सोचा था लेकिन 20 मार्च को आरबीआई के गाइडलाइन्स आने के बाद वॉट्सऐप UPI पर दांव लगाना चाहता है।
लोकप्रिय मोबाइल वॉलिट पेटीएम के 20 करोड़ यूजर्स हैं, लेकिन आरबीआई की गाइडलाइंस के बाद डिजिटल वॉलिट इंडस्ट्री के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वहीं UPI के जरिए पेमेंट भीम और पीएसपी ऐप के बाद बढ़ने लगी हैं।


2016-17 में लक्ष्य के पार पहुंची कर प्राप्ति, 17.10 लाख करोड़ रुपये रहा कर संग्रह
4 April 2017
नई दिल्ली: सरकार के खजाने में समाप्त वित्त वर्ष 2016-17 में तय लक्ष्य से ज्यादा 17.10 लाख करोड़ रुपये का कर संग्रह हुआ है। सरकार ने एक फरवरी 2017 को पेश 2017-18 के बजट में पिछले वित्त वर्ष के लिए कर संग्रह 16.97 लाख करोड़ रुपये रहने का संशोधित अनुमान लगाया है। वित्त मंत्रालय ने एक वक्तव्य में कहा है कि 17.10 लाख करोड़ रुपये का कर संग्रह एक साल पहले के मुकाबले 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। एक साल पहले 2015-16 में वास्तविक कर प्राप्ति 14.55 लाख करोड़ रुपये रही थी।
राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा, 'कुल निवल कर राजस्व संग्रह 18 प्रतिशत बढ़कर 17.10 लाख करोड़ रुपये हो गया। पिछले छह साल में यह सबसे ज्यादा है।' प्रत्यक्ष कर संग्रह अप्रैल-मार्च अवधि में 14.2 प्रतिशत बढ़कर 8.47 लाख करोड़ रुपये, अप्रत्यक्ष कर संग्रह 22 प्रतिशत बढ़कर 8.63 लाख करोड़ रुपये हो गया। मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2016-17 में निवल प्रत्यक्ष कर संग्रह 8.47 लाख करोड़ रुपये रहा है जो कि वर्ष के लिए रखे गए संशोधित अनुमान की शत प्रतिशत प्राप्ति है।
इसी प्रकार मार्च 2017 तक अप्रत्यक्ष कर संग्रह संशोधित लक्ष्य का 101.35 प्रतिशत रहा है। अप्रत्यक्ष कर संग्रह के लिए 8.5 लाख करोड़ रुपये का संशोधित अनुमान लगाया गया। वर्ष के दौरान सकल राजस्व संग्रह के मामले में कंपनी कर प्राप्ति 13.1 प्रतिशत जबकि व्यक्तिगत आयकर में 18.4 प्रतिशत की वृद्धि रही। हालांकि, रिफंड समायोजन के बाद कंपनी कर में निवल वृद्धि 6.7 प्रतिशत और व्यक्तिगत आयकर में 21 प्रतिशत वृद्धि रही है।
वर्ष के दौरान अप्रैल 2016 से मार्च 2017 के बीच कुल 1.62 लाख करोड रपये का रिफंड जारी किया गया। यह एक साल पहले इसी अवधि में किए गए रिफंड से 32.6 प्रतिशत अधिक रहा। अप्रत्यक्ष करों में केंद्रीय उत्पाद शुल्क संग्रह 33.9 प्रतिशत बढ़कर 3.83 लाख करोड़ रुपये और सेवाकर की प्राप्ति 20.2 प्रतिशत बढ़कर 2.54 लाख करोड़ रुपये रही। सीमा शुल्क प्राप्ति एक साल पहले के मुकाबले 7.4 प्रतिशत बढ़कर 2.26 लाख करोड़ रुपये रही।


SBI का ग्राहकों को बड़ा तोहफा, बेस रेट 0.15% घटायाः लोन होंगे सस्ते
3 April 2017
नई दिल्लीः देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई ने अपने ग्राहकों को बड़ा तोहफा दे दिया है. एसबीआई ने बेंचमार्क लेंडिंग रेट यानी बेस रेट में 0.15 फीसदी की कटौती कर इसे 9.10 फीसदी कर दिया है. जाहिर तौर पर इसके चलते ग्राहकों के लोन की ब्याज दरों में कमी आएगी और आपका लोन सस्ता होगा. एसबीआई ने एक अप्रैल से अपने बेस रेट में 0.15 फीसदी की कटौती कर इसे 9.256 फीसदी से 9.10 फीसदी कर दिया है.
जानिए किसको मिलेगा बड़ा तोहफा?
एसबीआई के बेस रेट घटने का फायदा बैंक के पुराने ग्राहकों को मिलेगा और उनके होम लोन की दरें 9.25 फीसदी से घटकर 9.10 फीसदी हो गई हैं. बेस रेट सस्ते होने से ग्राहकों के होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन, बिजनेस लोन वगैरह सभी के ब्याज दर घट जाएंगे. माना जा रहा है कि एसबीआई का बेस रेट घटने से आपके लोन की ईएमआई में सालाना कम से कम 2000 रुपये की बचत होगी.
नए ग्राहकों के लिए क्या है खबर?
हालांकि एसबीआई ने एमसीएलआर (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लैंडिंग रेट्स) में कटौती नहीं की है जिसकी वजह से नए कस्टमर्स को सस्ते लोन का फायदा नहीं मिलेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि नए ग्राहकों के ज्यादातर लोन के ब्याज एमसीएलआर के जरिए तय होते हैं. अनुमान के मुताबिक एमसीएलआर से एसबीआई के सिर्फ 30 से 40 फीसदी फ्लोटिंग रेट लोन जुड़े हैं, बाकी 60 से 70 फीसदी लोन की इंटरेस्ट बेस रेट से जुड़े हुए हैं. फिलहाल एसबीआई का एक साल का एमसीएलआर 8 फीसदी और 2 साल का 8.1 फीसदी पर है.
क्या है बेस रेट?
बैंकों में बेस रेट वह न्यूनतम दर होती है जिस पर बैंक अपने ग्राहकों को सभी तरह के लोन देते हैं. कोई भी बैंक बेस रेट से कम पर अपने ग्राहकों को लोन नहीं दे सकता है और इसकी निगरानी रिजर्व बैंक द्वारा की जाती है. वहीं एमसीएलआर बैंकों का लोन की दरें तय करने का फॉर्मूला होता है जो कि बैंक के जमा और उधारी की दरों के आधार पर तय किया जाता है.
एसबीआई की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक नया बेस रेट 1 अप्रैल से प्रभावी माना जाएगा यानी इस महीने की ईएमआई कम देने के साथ इसकी शुरुआत हो गई है.



जल्द आ रहा है 200 रुपए का नया नोट, RBI ने शुरू की तैयारी
3 April 2017
नई दिल्ली: आरबीआई ने 200 रुपये के नए नोट लाने की तैयारी शुरू की. सूत्रों ने बताया कि 200 रुपये का नया नोट नए सुरक्षा फीचर से साथ आएगा.
इसके अलावा सरकार 500 और 2000 रुपए के बैंक नोटों के सुरक्षा फीचर में हर 3-4 साल में बदलाव करने की सोच रही है ताकि जाली नोटों की समस्या पर लगाम लगाई जा सके. सरकार ने नोटबंदी के बाद पिछले चार महीने में भारी मात्रा में जाली मुद्रा पकड़ने जाने के मद्देनजर यह फैसला किया है. सूत्रों के अनुसार इस मुद्दे पर गुरुवार को यहां एक उच्चस्तरीय बैठक में चर्चा हुई. बैठक में केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि सहित वित्त व गृह मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे. इस कदम का समर्थन करते हुए गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि ज्यादातर विकसित देश अपने मुद्रा नोटों में सुरक्षा फीचर हर 3-4 साल में बदल देते हैं. भारत के लिए इस नीति का पालन करना अनिवार्य है.
भारतीय नोटों के डिजाइन में बदलाव लंबे समय से लंबित है. वर्ष 2000 में 1000 रुपए का नोट पेश किया गया था तथा उसके बाद नोटबंदी तक उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया. वहीं 1987 में पेश 500 रुपए का नोट पेश किया और उसमें बदलाव एक दशक पहले किया गया था. अधिकारियों का कहना है कि नये मुद्रा नोटों में भी अतिरिक्त सुरक्षा फीचर नहीं हैं. हाल ही में पकड़े गए जाली नोटों में पाया गया है कि 17 सुरक्षा फीचर में से कम से कम 11 की नकल की गई है. अधिकारियों का कहना है कि नये मुद्रा नोटों में भी अतिरिक्त सुरक्षा फीचर नहीं हैं.हाल ही में पकड़े गए जाली नोटों में पाया गया है कि 17 सुरक्षा फीचर में से कम से कम 11 की नकल की गई है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को राष्ट्र को संबोधित करते हुए 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने का ऐलान किया था। मोदी ने कहा था कि अब लोगों के पास मौजूद 500 और 1000 के नोट केवल कागज के एक टुकड़े के समान रह जाएंगे।


पीपीएफ और छोटी बचत जमा योजनाओं पर ब्याज दरों में कटौती का ऐलान, 1 अप्रैल से लागू
31 March 2017
नई दिल्ली: नए वित्त वर्ष की शुरुआत कुछ सख्त तरीके से होती लग रही है. सरकार ने लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) समेत लघु बचत जमा योजनाओं पर ब्याज दर 0.1 प्रतिशत घटा दी है. नई दरें एक अप्रैल से प्रभावी होने जा रही हैं. इसका सीधा सा अर्थ यह हुआ कि आपको अपने निम्नलिखित खातों व योजनाओं में जमा रकम पर 1 अप्रैल 2017 से कम ब्याज मिलेगा.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ), किसान विकास पत्र, सुकन्या समृद्धि खाता और सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम की मौजूदा ब्याज दरों पर यह कटौती लागू होगी. इस नए नियम के मुताबिक, पीपीएफ पर 7.9 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा, जबकि 31 मार्च तक यह 8 फीसदी की दर से मिला है.
वहीं किसान विकास पत्र पर 7.6 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा जबकि पांच साल की मियाद के लिए सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम पर 8.4 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा. वहीं पांच साल की मियाद वाले नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट पर यह दर 7.9 फीसदी होगी. एक से पांच साल की मियादी जमा पर ब्याज दर 6.9 से 7.7 प्रतिशत होगी और इसका भुगतान तिमाही आधार पर होगा. रेकरिंग जमा (आरडी) पर ब्याज दर 7.2 प्रतिशत होगी.
मंत्रालय ने 2016-17 की चौथी तिमाही के लिये ब्याज दरों को अधिसूचित करते हुए कहा- सरकार के निर्णय के आधार पर लघु बचत जमा योजनाओं पर ब्याज दरों को तिमाही आधार पर अधिसूचित किया जाता है.
बता दें कि साल 2017 की शुरुआत में सरकार की ओर से लोगों को तोहफा दिया गया है. सरकार ने लोक भविष्य निधि (PPF) और डाकखानों (Post Office) के जरिए परिचालित किसान विकास पत्र जैसी अन्य लघु बचत योजनाओं (Small saving scheme) पर ब्याज दर जनवरी-मार्च तिमाही में अपरिवर्तित रखने का फैसला लिया था. सरकार ने लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों की तिमाही समीक्षा की नयी व्यवस्था पिछले साल अप्रैल से शुरू की है. श्यामला गोपीनाथ पैनल द्वारा दिए गए फॉर्म्युले के बाद यह व्यवस्था की गई.


नोटबंदी: पुरानी करेंसी बदलने का आखिरी दिन, कैदी से लेकर NRI तक कतार में
31 March 2017
केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक के लिए नोटबंदी की आखिरी प्रक्रिया 31 मार्च को खत्म हो रही है. सुबह से रिजर्व बैंक के बाहर लंबी कतार लगी है. देशभर में लोग प्रतिबंधित हुई 500 और 1000 रुपये की करेंसी को रिजर्व बैंक में जमा कराने के लिए परेशान हो रहे हैं.
नोटबंदी के ऐलान के बाद जेल से छूटे कैदी
रिजर्व बैंक के बाहर कतार में लगे लोगों से 'आज तक' संवाददाताओं ने बात की. कतार में लगे एक ऐसे ही व्यक्ति ने बताया कि नोटबंदी के ऐलान के वक्त वह जेल की सलाखों के पीछे था. जब वह जेल से छूटकर बाहर आया तो उसे अपने घर में 16,000 की पुरानी करेंसी मिली. लेकिन इन आखिरी घंटों में उसे कम उम्मीद है कि वह इन पैसों के बदले जारी हुई नई करेंसी उसे मिल पाएगी.
मां के निधन के बाद मिली पुरानी करेंसी
वहीं रिजर्व बैंक की कतार में लगा एक ऐसा बेटा भी है जिसकी मां का कुछ दिन पहले निधन हो गया. निधन के बाद उसे मां के बक्से में कई प्रतिबंधित करेंसी मिली. इस करेंसी को रिजर्व बैंक में जमाकर नई करेंसी पाने की जद्दोजहद में पड़े इस आदमी का कहना है कि तबीयत खराब होने के कारण उसकी मां को न तो नोटबंदी का ऐलान समझ में आया और न ही यह जानकारी थी कि 500 और 1000 रुपये की पुरानी करेंसी प्रतिबंधित की जा चुकी है.
पासपोर्ट एंट्री पर बदल रहे नोट
चंडीगढ़ में आरबीआई के रीजनल सेंटर में काफी लोग अपने हाथ में पुराने नोट लेकर उनको बदलवाने के लिए पहुंच रहे हैं. लेकिन यहां पर ये पुराने नोट नहीं बदले जा रहे हैं. हालांकि आरबीआई के दफ्तर के बाहर एक नोटिस लगा है जिस पर लिखा है कि ऐसे लोग जो कि नोटबंदी के दौरान देश में नहीं थे वो अपने दस्तावेज दिखा कर (पासपोर्ट) पुराने नोट बदल सकते हैं.
आरबीआई के रीजनल ऑफिस में नहीं बदला जा रहा नोट
कुछ NRI ऐसे भी हैं जो कि RBI के रीजनल सेंटर पर पहुंचे हैं. उन्हें अंदर नहीं जाने दिया जा रहा और पुराने नोट नहीं बदले जा रहे हैं. ये NRI अपने हाथों में अपने पासपोर्ट और दूसरे तमाम दस्तावेज लेकर रीजनल ऑफिस के बाहर जमे हैं.
आरबीआई की दफ्तर के बाहर कुछ लोग इस उम्मीद पर भी आए हैं कि पुराने नोट जमा करने में आरबीआई कुछ नरम रुख ले ले और वह अपनी पुरानी करेंसी को जमा करा दें. लेकिन इनको भी आरबीआई के दफ्तर में जाने नहीं दिया जा रहा.


ITR फाइल करना 1 अप्रैल से और भी सरल, जानें 5 बड़े बदलाव
30 March 2017
नई दिल्ली: नए वित्तीय वर्ष से ITR फाइल करना पहले के मुकाबले काफी आसान होने वाला है. सैलरीड क्लास के लिए आयकर रिटर्न भरने के लिए एक छोटा नया फॉर्म 1 अप्रैल से उपलब्ध होगा. आयकर विभाग ने इस फॉर्म में कुछ बिंदुओं को हटा दिया है जिससे यह पहले से छोटा और अधिक आसान बन गया है. देखें 5 बड़े बदलाव
1. नया फार्म भरना 'सहज'
वेतन और ब्याज से आय वाले व्यक्तिगत टैक्स देने वालों के लिए फॉर्म में सूचना भरने को पहले से कम बॉक्स होंगे. आय कटौती के दावों से जुड़े कुछ बॉक्स को आईटीआर-1 फॉर्म में शामिल कर दिया गया है. इस फॉर्म का नाम 'सहज' रखा गया है. निर्धारण वर्ष 2017-18 के रिटर्न फॉर्म में आयकर के अध्याय 6-ए के तहत किए जाने वाले विभिन्न कटौती के दावों की जानकारी से जुड़ा बॉक्स हटा दिया गया है और केवल उन्हीं बिंदुओं को इसमें रखा गया है जिन्हें आमतौर पर इस्तेमाल में लाया जाता है.
2. छूट के लिए फार्म में ऑप्शन
जिन बिंदुओं को सहज फॉर्म में शामिल किया गया है उनमें आयकर की धारा 80सी, 80डी के तहत मिलने वाली कटौतियां शामिल हैं. इसके अलावा जो व्यक्तिगत करदाता अन्य मदों में कर कटौती चाहते हैं वह इसके लिए विकल्प चुनकर जानकारी दे सकते हैं.
3. 18 अलग-अलग बिंदु और लाइनें
वर्तमान में जो आईटीआर 1/ सहज फॉर्म है उसमें आयकर अधिनियम की धारा-80 के तहत 18 अलग-अलग बिंदु और लाइनें हैं. इस धारा के तहत जीवन बीमा, पीपीएफ सहित विभिन्न प्रकार के निवेश और बचत पर 1.50 लाख रुपए तक की कटौती का दावा किया जाता है. इसी प्रकार धारा 80डी के तहत हेल्थ बीमा प्रीमियम भुगतान की कुल आय में से कटौती का प्रावधान है.
4. लोगों को जोड़ने की पहल
आयकर विभाग के अनुसार- फॉर्म अधिसूचित कर दिए गए हैं और आयकर विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं. आईटीआर-1 से लेकर आईटीआर 6 तक फॉर्म उपलब्ध हैं. सरकार की इस पहल का मकसद लोगों को रिटर्न दाखिल करने के लिए प्रोत्साहित करना भी है. अभी पैन रखने वाले 29 करोड़ लोगों में से केवल 6 करोड़ लोग ही आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं. रिटर्न दाखिल करने के लिए ई-फाइलिंग की सुविधा 1 अप्रैल से उपलब्ध हो जाएगी और इसे 31 जुलाई तक भरा जा सकता है.
5. देनी होगी ये जानकारी
रिटर्न फॉर्म भरते समय करदाता को अपना पैन, आधार नंबर, व्यक्तिगत सूचना और जानकारी देनी होगी इसके साथ ही उसके द्वारा भरे गए टैक्स, टीडीएस की जानकारी अपने आप ही उसमें आ जाएगी. 1 जुलाई के बाद से टैक्स देने वालों के लिए आधार नंबर और आधार नंबर के लिए आवेदन किया गया है उसकी जानकारी देना जरूरी है.


1 अप्रैल से ये 10 चीजें होंगी महंगी, जानें किन चीजों पर मिलेगी राहत
30 March 2017
नया वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से शुरू हो रहा है. बजट में प्रस्तावित सभी तरह के टैक्स 1 अप्रैल से लागू हो जाएंगे. आर्थिक दरों में हुए बदलाव और नए वित्तीय नियमों से आम लोगों की जरूरत की कई चीजों की कीमतों पर असर होगा. हम आपको बताते हैं 1 अप्रैल से कौन सी चीज महंगी होगी और क्या होगा सस्ता:
महंगी होंगीं ये चीजें
1. कार, मोटरसाइकिल और कमर्शियल वाहनों के बीमा एक अप्रैल से महंगे हो जाएंगे.
2. तंबाकू वाले पान-मसाले व गुटखे पर उत्पाद शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़कर 12 प्रतिशत हो जाएगा. जिसका असर इनका इस्तेमाल करने वालों की जेब पर पड़ेगा.
3. सिगरेट पर उत्पाद शुल्क 215 रुपये प्रति हजार से बढ़कर 311 रुपये प्रति हजार हो रहा है. जिससे अब सिगरेट का धुंआ लोगों के स्वास्थ्य के साथ-साथ जेब पर भी महंगा पड़ेगा.
4. LED बल्ब बनाने के लिए इस्तेमाल में लाई जाने वाली सामग्री पर भी मूल सीमा शुल्क और 6 प्रतिशत प्रतिपूर्ति शुल्क लगेगा. इससे एलईडी बल्ब महंगे हो जाएंगे.
5. चांदी के बर्तन और चांदी से बनने वाले सामान 1 अप्रैल से महंगे होंगे.
6. फोन के दामों में भी 1 अप्रैल से बढ़ोतरी हो सकती है. इसका कारण है मोबाइल फोन बनाने के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले प्रिंटिड सर्किट बोर्ड पर भी सीमा शुल्क लगा दिया गया है.
7. कई नियमों में हुए बदलाव से स्टील के सामान पर भी महंगाई की मार पड़ेगी. अगर आप स्टीनल के बर्तन खरीदना चाहते हैं तो 1 अप्रैल से पहले खरीद लीजिए.
8. एल्यूमीनियम पर सरकार द्वारा अयस्क और कनसंट्रेट पर 30 प्रतिशत आयात शुल्क लगा दिया गया है, इस वजह से इससे जुड़े तमाम पदार्थ महंगे हो जाएंगे.
9. एनएचएआई ने टोल प्लाजा पर 2 से 3 फीसदी की बढ़ोतरी तय की है. हालांकि कुछ स्थानों पर इससे ज्यादा या कम की बढ़ोतरी भी की जा सकती है. 2 से 3 फीसदी की बढ़ोतरी होने पर वाहन चालकों को अब 5 से 10 रुपए ज्यादा टोल टैक्स देना होगा.
10. अभी तक जो भी टेलीकॉम कंपनियां फ्री में अनलिमिटेड डाटा और कॉलिंग की सुविधा दे रही थीं, वह 31 मार्च को इन सेवाओं को खत्म कर देंगी. 4जी मार्केट में तेज कंपीटिशन के बीच उपभोक्ताओं को कोई पैक चुनना पड़ सकता है.
ये 5 चीजें होंगी सस्ती
1. इस बार बजट में रेल टिकट करवाते वक्त लगने वाले सर्विस चार्ज कम कर दिए थे जिससे रेल बुकिंग सस्ती होगी.
2. बजट में सरकार ने लोगों सस्ते मकान उपलब्ध कराने के लिए होम लोन ब्याज पर छूट की घोषणा की थी. नए वित्तीय वर्ष में अगर आप घर खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो इस साल आपको फायदा होगा.
3. बजट प्रावधान के कारण आरओ के दाम कम होंगे.
4. लैदर का सामान खरीदने का मन बना रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है. लेदर का सामान सस्ता होगा.
5. पार्सल यानी डाक की सुविधा सस्ती पड़ेगी.


SC ने 1 अप्रैल से BS-3 वाहन पर लगाई रोक, 8 लाख से ज्यादा गाड़ियां हुईं कबाड़
29 March 2017
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बीएस-3 वाहनों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया है. ये आदेश 1 अप्रैल से लागू होगा. कोर्ट के इस आदेश के बाद ऑटो कंपनियों को गहरा झटका लगा है. ऑटो कंपनियों का दावा है वाहनों की बिक्री पर रोक से उन्हें बड़ा नुकसान होगा. याचिका पर सुनवाई के बाद मंगलवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा- जब कम्पनियों को पता था कि 1 अप्रैल से बीएस-4 लागू होना है, फिर भी वो टेक्नोलॉजी विकसित करने पर क्यों बैठे रहे. क्यों नहीं बीएस-4 नॉर्म्स की गाड़ियां बनायी गईं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोगों की सेहत, ऑटोमोबाइल कम्पनियों के फायदे से ज्यादा जरुरी हैं. कोर्ट का फैसला उस याचिका पर आया है जिसमें 31 मार्च के बाद ऐसे वाहन बेचने पर लगी रोक को चुनौती दी गई थी. अदालत ने कहा कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़क पर आने की इजाजत नहीं दी जा सकती.
कंपनियों की दलील
कोर्ट में बजाज और डेमलर क्रेस्लर कंपनियों ने सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और बाकी के याचिकाकर्ता ऑटोमोबाइल कंपनियों की याचिका का विरोध किया था. बजाज और डेमलर का ये कहना था कि हमने बीएस-4 गाड़ियों की तकनीक और उत्पादन पर काफी निवेश किया है. ऐसे में इन कंपनियों को पुरानी नॉर्म्स की गाड़ियां बेचने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए.
केंद्र सरकार ने किया था समर्थन
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने ऑटो कंपनियों को राहत देने का समर्थन किया था. सरकार ने दलील दी थी की 1 अप्रैल के बाद बीएस-3 वाहन के उत्पादन पर तो रोक है लेकिन बिक्री और रजिस्ट्रेशन पर पाबंदी नहीं होनी चाहिए. इससे पहले भी बीएस-3 प्राभावी होने के बावजूद बीएस-2 गाड़ियों की बिक्री की इजाजत दी गयी थी. लेकिन कोर्ट ने सरकार की ये दलील नहीं मानी.
ऑटो कंपनियों के मुताबिक 8 लाख 20 हजार से ज्यादा बीएस-3 नॉर्मस की गाड़ियां बिकने को तैयार खड़ी हैं. जिनमें करीब 6 लाख मोटरसाईकिल शामिल हैं. स्टॉक में मौजूद बीएस-3 वाहनों की अनुमानित कीमत 12 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है.


एक से अधिक बैंक खाते हैं तो उठाना पड़ेगा नुकसान, जानें कैसे
29 March 2017
नई दिल्ली: आज के दौर में काफी लोग एक से अधिक बैंकों के खाते रखते हैं. इसे जरूरत समझें या फिर मजबूरी. एक आम इंसान के लिए यह परेशानी का सबब हो सकता है, लेकिन यदि आप एक कारोबारी हैं और दिनभर में पैसों का लेनदेन लाखों-करोड़ों में है तो यह आपके लिए फायदेमंद है.
एक तय वेतन पाने वाले के लिए एक से अधिक बैंक खाते रखना नुकसानदेह साबित हो सकता है क्योंकि हर बैंक अपने खातों को बनाए रखने के लिए एक निश्चित राशि तय करते हैं जिसका भुगतान खाताधारक को करना होता है. इसके अतिरिक्त भी बैंकिंग खातों को सक्रिय रखने के लिए चार्जेस का भुगतान खाताधारक को करना होता है. इसका नुकसान भी खाताधारकों को ही उठाना पड़ता है.
न्यूनतम बैलेंस
अधिकतर बचत खातों में बैंक की ओर से न्यूनतम बैलेंस रखने का प्रावधान होता है, जिसमें आपको नियमित तौर पर बैंक विशेष द्वारा निर्धारित राशि रखनी होती है. अगर आप ऐसा नहीं करते तो बैंक आपके ऊपर जुर्माना लगाता है और आपके खाते पर रोक भी लगा सकती है. शहरी इलाकों में न्यूनतम बैलेंस की सीमा अधिकतम 10,000 रुपए हैं, हालांकि यह न्यूनतम बैलेंस की सीमा बैंक विशेष पर निर्भर करती है और अलग-अलग बैंकों के बचत खातों को बनाए रखने के लिए उस बैंक द्वारा तय मानकों को पूरा करना जरूरी होता है. ऐसे में अगर आपके पास एक या दो से ज़्यादा बैंको के बचत खाते हैं तो उसे बनाए रखने के लिए आपको अधिक खर्च करना होगा
बैंक द्वारा लिए जाने वाले शुल्क
सभी बैंक अपने सेविंग्स खातों सहित क्रेडिट और डेबिट कार्ड व अन्य बैंकिंग सुविधाओं के लिए ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क वसूलते हैं. यहां भी ग्राहकों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है. उसे सभी बचत खातों को बनाए रखने के लिए सभी बैंकों के शुल्क प्रभार को पूरा करना पड़ता है और ऐसा नहीं करने पर आपक बचत खाता स्वतः ही बंद हो जाता है. खाते को फिर से चालू करवाने के लिए आप को अतिरिक्त चार्ज देना पड़ता है
नकदी का बेजां इस्तेमाल
एक या दो से ज्यादा बैंकों में अकाउंट होने से आपको बैंक द्वारा निर्धारित न्यूनतम बैंलेंक की सीमा को बनाए रखना होता है. ऐसे में अलग-अलग बैंकों के बचत खाते सक्रिय रहें इसलिए उनमें पर्याप्त राशि का होना जरूरी होता जिसका नुकसान ग्राहकों को उठाना पड़ता है. यदि इसी राशि को दूसरी योजनाओं जैसे शेयर बाजार, म्युचूअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट में लगाया जाए तो इसका फायदा मिलता है. दूसरी ओर बैंकों में पड़े पैसे जो कि न्यूनतम बैंलें को बनाए रखने के लिए होते हैं, उसका फायदा हमें नहीं मिल पाता और न ही हम पैसा निकाल सकते हैं.
इनकम टैक्स फाइल करने में परेशानी
ज़्यादा बैंको में अकाउंट होने से आयकर जमा करते वक्त काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कागजी कार्रवाई में अधिक माथापच्ची करनी पड़ती है. इसके साथ ही इनकम टैक्स फाइल करते वक्त सभी बैंक खातों से जुड़ी जानकारी रखना और उनके स्टेटमेंट का रिकॉर्ड एकत्रित करना काफी पेचीदा काम हो जाता है


सातवां वेतन आयोग : कर्मचारी नेताओं के साथ आज होगी अलाउंस समिति की अहम बैठक
28 March 2017
नई दिल्ली: सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) की रिपोर्ट की सिफारिश के बाद अलाउंस को लेकर हुए विवाद के बाद सरकार द्वारा गठित समिति कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से बात कर रही है. पिछले एक महीने में कई बार यह खबर आई की इस समिति ने बातचीत पूरी कर ली है और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. लेकिन बाद में फिर यह बात साफ हुई कि समिति अभी भी कर्मचारी प्रतिनिधियों से बात कर रही है.
सूत्रों का कहना है कि आज भी समिति की एक बैठक कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से होने जा रही है. इस बैठक में क्या निर्णय होगा. इस बारे में बैठक के बाद पता चलेगा. जानकारी के लिए बता दें कि कर्मचारियों को एचआरए, टीए-डीए के साथ-साथ कई और अलाउंस के मुद्दे पर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर आपत्ति है. उल्लेखनीय है कि अंग्रेजों के शासन काल से चले आ रहे कई भत्तों को सातवें वेतन आयोग ने समाप्त कर दिया है. सातवें वेतन आयोग ने मौजूद 196 अलाउंस में अधिकतर को या तो समाप्त कर दिया या फिर उसे मिलाकर केवल 55 अलाउंस रखे हैं.
सातवें वेतन आयोग (seventh Pay Commission) की सिफारिशों पर केंद्रीय कर्मचारियों की आपत्तियों के निराकरण के लिए सरकार ने सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए तीन समितियों को गठन किया था जिनको कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से बातचीत के लिए अधिकृत किया गया था. इन समितियों में एक समिति वित्त सचिव अशोक लवासा के नेतृत्व में बनाई गई थी. इसी समिति के पास अलाउंस का मुद्दा भी था. पहले कहा जा रहा था कि फरवरी की 22 तारीख को इस समिति की अंतिम बैठक हुई जिसमें कर्मचारियों से अंतिम बार अलाउंस के मुद्दे पर चर्चा की गई थी. अलाउंस समिति से बातचीत करने के लिए कर्मचारियों के संयुक्त संगठन एनजेसीए के प्रतिनिधि शामिल हुए थे.


सरकार ने गेहूं, तुअर दाल पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया
28 March 2017
नई दिल्ली: सरकार ने गेहूं और तुअर (अरहर) दाल पर तत्काल प्रभाव से 10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाया है ताकि इस वर्ष रिकार्ड उत्पादन होने की संभावना के मद्देनजर किसानों के हितों को सुरक्षित रखा जा सके. सरकार ने गत 8 दिसंबर को गेहूं पर सीमाशुल्क 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया था. ऐसा घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और खुदरा मूल्यों पर लगाम रखने के उद्देश्य से किया गया था. तुअर दाल पर कोई शुल्क नहीं था.
वित्त राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने लोकसभा में इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि 17 मार्च, 2012 की सरकार की एक अधिसूचना में संशोधन किया गया है ताकि गेहूं और तुअर पर 10 प्रतिशत का ‘बेसिक सीमाशुल्क तत्काल प्रभाव से लागू हो.’ उन्होंने कहा कि इस फैसले से मौजूदा आयात के स्तर पर करीब 840 करोड़ रपये का राजस्व प्रभाव होने का अनुमान है.
इस कदम से गेहूं और तुअर के थोक मूल्य में कमी लाने में मदद मिलेगी और अच्छे उत्पादन की उम्मीद कर रहे किसानों को भी अच्छा समर्थन मूल्य मिलेगा. मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में गेहूं की नयी फसल मंडियों में पहुंचने लगी है.
सरकार के दूसरे आकलन के अनुसार 2016-17 फसल उत्पादन वर्ष (जुलाई 2016 से जून 2017 तक) में अच्छे मानसून की वजह से गेहूं का उत्पादन रिकार्ड करीब 9.7 करोड़ टन होने का अनुमान है. इससे पिछले वर्ष यह 9.23 करोड़ टन था.
इसी तरह तुअर दाल का उत्पादन 42.3 लाख टन होने का अनुमान है जो इससे पिछले साल में 25.6 लाख टन रहा था. तुअर दाल की फसल खरीफ के मौसम में उगाई जाती है. गौरतलब है कि तुअर दाल का थोक मूल्य अधिक उत्पादन की वजह से कम हो गया है और कुछ स्थानों पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिल रहा है.


GST से जुड़े चार विधेयक लोकसभा में हुए पेश, जानिए नए कानून के बारे में
27 March 2017
नई दिल्लीः सोमवार को बजट सत्र के दूसरे चरण में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी से संबंधित सहायक 4 विधेयकों को लोकसभा में पेश कर दिया है। इन बिलों पर 29 मार्च को बहस होगी। कैबिनेट ने 20 मार्च को ही इन चार बिलों जेटली सेंट्रल जीएसटी (C-GST), इंटिग्रेटेड जीएसटी (आई-GST), यूनियन जीएसटी (यूटी-GST) और मुआवजा कानून बिल को मंजूरी दी थी। गौरतलब है कि जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी की चार दरें 5,12,18 और 28 फीसद तय की थीं।
सरकार चाहती है कि जीएसटी से संबंधित विधेयक लोकसभा में 29 मार्च या अधिक से अधिक 30 मार्च तक पारित हो जाएं। इसके बाद इन विधेयकों को राज्यसभा में रखा जाएगा। इससे सरकार को राज्यसभा में किसी तरह के संशोधन को लोकसभा में लाने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।
आपको बता दें कि संसद का मौजूदा सत्र 12 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। हालांकि इन्हें धन विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा, लेकिन सरकार दोनों सदनों में चर्चा चाहती है। सरकार का इरादा जीएसटी को एक जुलाई से लागू करने का है। जीएसटी लागू होने के बाद उत्पाद, सेवा कर, वैट और अन्य स्थानीय शुल्क इसमें समाहित हो जाएंगे
क्या है जीएसटी
वस्तु एवं सेवा कर(जीएसटी) एक अप्रत्यक्ष कर है। जीएसटी के लागू होने से हर सामान और हर सेवा पर सिर्फ एक टैक्स लगेगा यानी वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स की जगह एक ही टैक्स लगेगा। देश के लोगों को जीएसटी से सबसे बड़ा फायदा होगा क्योंकि, पूरे देश में सामान पर देश के लोगों को एक ही टैक्स चुकाना होगा।
जीएसटी बिल से होने वाले फायदे
इस बिल के लागू होते ही देशभर में एकल टैक्स व्यवस्था लागू हो जाएगी। लोगों को कई तरहों के टैक्स से छुटकारा तो मिलेगा ही साथ ही चीजें सस्ती भी हो जाएंगी। एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, वैट, मनोरंजन टैक्स जैसे कई तरह के टैक्सों से छुटकारा मिलेगा। लगभग सभी राज्यों में ज्यादातर चीजें एक ही दाम पर मिलेंगी। कई चीजों की एक राज्य से दूसरे राज्य में हो रही तस्करी पर काफी हद तक रोक लगेगी। जीएसटी लागू होने से टैक्स भी घट सकता है। टैक्स चोरी रुकेगी और देश की अर्थव्यवस्था को इसका फायदा मिलेगा।
जीएसटी से क्या-क्या होगा बाहर
शराब पूरी तरह से जीएसटी से बाहर रहेगी, यानी इस पर टैक्स लगाने के लिए राज्य सरकारें स्वतंत्र होंगी। हालांकि पेट्रोल, डीजल, केरोसीन, रसोई गैस पर अलग-अलग राज्य में जो टैक्स लगते हैं, वो फार्मूला अभी कुछ सालों तक जारी रहेगा। मतलब केंद्र और राज्य सरकारें दोनों मिलकर उस पर टैक्स लगाती रहेगी।
क्या सस्ता होगा और क्या महंगा
इसके लागू होते ही केंद्र को मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स सब खत्म हो जाएंगे। राज्यों को मिलने वाला वैट, मनोरंजन कर, लक्जरी टैक्स, लॉटरी टैक्स, एंट्री टैक्स, चुंगी वगैरह भी खत्म हो जाएगी। जीएसटी लागू होने पर कंपनियों का परेशानियां और खर्च भी कम होगा। व्यापारियों को सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
ये टैक्स होंगे खत्म
जीएसटी लागू होने के बाद सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स (सेवाकर), एडिशनल कस्टम ड्यूटी (सीवीडी), स्पेशल एडिशनल ड्यूटी ऑफ कस्टम (एसएडी), वैट/ सेल्स टैक्स, सेंट्रल सेल्स टैक्स, मनोरंजन कर, ऑक्ट्रॉय एंड एंट्री टैक्स, परचेज टैक्स, लक्ज़री टैक्स खत्म हो जाएंगे।
ये होगी कर और उपकर की दर
जीएसटी परिषद ने जीएसटी व्यवस्था में सबसे ऊंची 28 फीसद के ऊपर लगने वाली उपकर की दर को अधिकतम 15 फीसद तय किया है। नई व्यवस्था में सबसे ऊंची दर भोग विलासिता के सामान पर लागू होगी। इसे देखते हुए परिषद ने इस दर के ऊपर उपकर लगाने की अधिकतम सीमा तय कर दी है। जीएसटी व्यवस्था में उपकर की अधिकतम 15 फीसद दर का इस्तेमाल लग्जरी कारों, एयरेटेड पदार्थों जैसे उत्पादों पर किया जाएगा। पान मसाला उत्पादों पर उपकर की अधिकतम दर मूल्यानुसार 135 फीसद तय की गई है।


1 अप्रैल से बदल जाएंगे इनकम टैक्स से जुड़े ये 10 नियम
27 March 2017
नई दिल्ली: पिछले बुधवार को लोकसभा ने वित्त विधेयक पास कर दिया. इसी के साथ ही बजट संबंधी सत्र 2017-18 की प्रक्रिया पूरी हो गई. चूंकि वित्त विधेयक, धन-संबंधी विधेयक होता है, इसलिए इसे सिर्फ लोकसभा द्वारा पास किया जाना ज़रूरी होता है, और राज्यसभा से पारित करवाने की आवश्यकता नहीं होती. 1 अप्रैल से शुरू हो रहे नए वित्त वर्ष के साथ ही इनकम टैक्स से जुड़े कुछ खास नियमों में बदलाव हो जाएगा. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट 2017 में इनकम टैक्स में कई बदलावों की भी घोषणा की थी. वित्त विधेयक में कुछ बदलावों को लोकसभा ने अपनी मंजूरी दे दी है. ऐसे में आप भी जान लीजिए कि नए वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल से क्या कुछ बदलने वाला है:
1. ढाई लाख से 5 लाख रुपये के बीच की इनकम वालों का टैक्स 10 फीसद से घटाकर 5 फीसदी कर दिया जाएगा. हालांकि, सेक्शन 87ए के तहत मिलने वाली 5000 रुपये की छूट को घटाकर 2500 रुपये कर दी गई है. इतना ही नहीं, जिन आयकरदाताओं की आय 3.5 लाख रुपये से ऊपर है उनके लिए कोई छूट नहीं है. इसका मतलब यह होगा कि 3 से 5 लाख रुपए की करयोग्य आय वालों को 7,700 रुपए की बचत होगी, जबकि 5 से 50 लाख रुपए टैक्‍सेबल इनकम वालों को 12,900 रुपए की बचत होगी.
2. 50 लाख से लेकर एक करोड़ रुपए तक की वार्षिक आय वाले लोगों को 10 प्रतिशत सरचार्ज देना होगा. (वहीं एक करोड़ रुपए सालाना इनकम वाले लोगों को पहले की ही तरह 15 प्रतिशत सरचार्ज देना होगा.)
3. पांच लाख रुपए की सालाना आय (व्यावसायिक इनकम के अलावा) वाले व्‍यक्तिगत करदाताओं के लिए सुविधा के लिए टैक्‍स रिटर्न फाइल करने के लिए एक पेज का फॉर्म पेश किया जाएगा.
4. राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्‍कीम में निवेश पर आकलन वर्ष 2018-19 के लिए किसी भी प्रकार का कर लाभ नहीं मिलेगा. इस टैक्‍स सेविंग स्‍कीम की घोषणा वित्‍त वर्ष 2012-13 में की गई थी. यह योजना प्रतिभूति बाजार में पहली बार निवेश करने वाले निवेशकों को प्रोत्‍साहित करने के लिए शुरू की गई थी.
5. यदि सर्च ऑपरेशन के दौरान 50 लाख रुपए से अधिक की अघोषित आय या संपत्ति का पता चलता है तो आयकर अधिकारी पिछले 10 साल के कर मामलों को दोबारा खोल सकते हैं. वर्तमान में कर अधिकारियों को पिछले छह साल के दस्‍तावेजों की ही छानबीन करने का अधिकार हासिल है. समय पर अपना रिटर्न फाइल नहीं करने वाले करदाताओं को आकलन वर्ष 2018-19 के लिए 10,000 रुपए तक का जुर्माना देना पड़ सकता है. हालांकि, यदि किसी व्‍यक्ति की कुल आय 5 लाख रुपए से अधिक नहीं है, तो इस धारा के तहत उस पर अधिक‍तम जुर्माने की राशि 1,000 रुपए से अधिक नहीं होगी.
6. लांग टर्म गेन के लिए किसी संपत्ति के होल्डिंग पीरियड को 3 साल से घटाकर अब 2 साल कर दिया गया है. यदि कोई व्‍यक्ति संपत्ति खरीदकर उसे 2 साल के भीतर ही बेच देता है तो उसे इस पर होने वाले लाभ पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स देना होगा. यदि इस संपत्ति की बिक्री खरीदने की तारीख से दो साल बाद की जाती है तो उस पर कोई टैक्‍स देय नहीं होगा.
7. सरकार ने किराये पर घर देने वालों के कर लाभ में कटौती कर दी है. मौजूदा कर कानून के मुताबिक किराये पर दी गई संपत्ति के लिए करदाता रेंटल इनकम को समायोजित करने के बाद होम लोन पर चुकाए जाने वाले संपूर्ण ब्‍याज पर टैक्‍स कटौती का लाभ ले सकता है. अब नए नियम के मुताबिक खुद के रहने वाले मकान के लिए होम लोन पर ब्‍याज के भुगतान में 2 लाख रुपए पर टैक्‍स कटौती का लाभ मिलेगा लेकिन रेंट पर दी गई प्रॉपर्टी के लिए करदाता रेंटल इनकम एडजस्‍ट करने के बाद प्रतिवर्ष केवल 2 लाख रुपए पर ही टैक्‍स लाभ हासिल कर सकेगा. दो लाख रुपए से अधिक की राशि को अगले आठ असेसमेंट वर्षों तक आगे ले जाया जा सकेगा.
8. प्रतिमाह 50,000 रुपए से अधिक के किराये का भुगतान करने वाले व्‍यक्ति को अब 5 प्रतिशत टीडीएस (स्रोत कर कर) काटना होगा. कर विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से ऐसे व्‍यक्ति जिनकी रेंटल इनकम बहुत अधिक है, वो कर के दायरे में आ जाएंगे. यह नियम एक जून 2017 से प्रभावी होगा
9. नेशनल पेंशन सिस्‍टम (एनपीएस) से आंशिक निकासी/आहरण पर कोई टैक्‍स नहीं लगेगा. प्रस्‍तावित बदलावों के अनुसार, एनपीएस सब्‍सक्राइबर्स अपने अंशदान का 25 प्रतिशत हिस्‍सा रिटायरमेंट से पहले आपातकालीन स्थिति में निकाल सकेंगे. यह याद रखें कि रिटायरमेंट पर कुल फंड का 40 प्रतिशत हिस्‍सा ही कर मुक्त होता है.
10. एक जुलाई से पैन कार्ड बनवाने और इनकम टैक्‍स दाखिल करने के लिए आधार नंबर अनिवार्य होगा. सरकार ने कालेधन की रोकथाम के लिए नकद लेनदेन की सीमा भी 3 से घटाकर अब 2 लाख रुपए कर दी गई है. यदि कोई व्‍यक्ति दो लाख रुपए से अधिक का लेनदेन करते पाया जाता है तो उसे इस सीमा से अधिक राशि पर 100 प्रतिशत जुर्माना देना होगा.


पीएम का वादा पूरा, होम लोन पर मिलेगी सब्सिडी, 2.3 लाख रुपये तक का होगा फायदा
23 March 2017
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत ब्याज दर सब्सिडी योजना में नए सरकारी निर्देश जारी किए गए हैं, जिनके बाद मध्यम आय वर्ग (यानी एमआईजी) को घर खरीदने के लिए कर्ज़ा (होम लोन) लेने पर फायदा मिलेगा. इस योजना की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए वर्ष की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संदेश में की थी. अब छह लाख रुपये से 18 लाख रुपये सालाना तक कमाने वाले लोग प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत पहला घर खरीदने पर होम लोन ब्याज में सब्सिडी के हकदार होंगे. इस योजना का नाम क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम फॉर मिडिल इन्कम ग्रुप्स (सीएलएसएस - एमआईजी) रखा गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि 12 लाख रुपये तक कमाने वालों को नौ लाख रुपये तक के होम लोन पर चार प्रतिशत की सब्सिडी दी जाएगी, और 18 लाख रुपये तक कमाने वालों को 12 लाख रुपये तक के होम लोन पर तीन फीसदी की सब्सिडी दी जाएगी. होम लोन के ब्याज पर सब्सिडी देने की यह योजना सरकार की 'सबके लिए घर' पहले का हिस्सा है, और इस योजना को शुरू में सिर्फ एक साल के लिए लागू किया जाएगा.
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत होम लोन ब्याज पर सब्सिडी योजना की 10 खास बातें

क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम फॉर मिडिल इन्कम ग्रुप्स (सीएलएसएस - एमआईजी) के तहत होम लोन के वे सभी आवेदन आएंगे, जो 1 जनवरी, 2017 से अब तक मंज़ूर हो चुके हैं, या जो फिलहाल विचाराधीन हैं. इसके तहत लाभ लेने के लिए आवेदक के नाम से पहले से कोई घर नहीं होना चाहिए.

योजना के तहत 12 लाख रुपये वार्षिक तक की आय वालों को 90 वर्ग मीटर तक कारपेट एरिया वाले और 18 लाख रुपये वार्षिक तक की आय वालों को 110 वर्ग मीटर तक कारपेट एरिया वाले घर खरीदने या बनवाने पर लिए गए गृहऋणों पर ही यह लाभ दिया जाएगा.

योजना के अंतर्गत लाभ उन्हीं गृह ऋणों पर दिया जाएगा, जिनकी अवधि 20 साल या उससे कम होगी.

नेशनल हाउसिंग बैंक के प्रबंध निदेशक तथा मुख्य कार्यकारी (एमडी एवं सीईओ) श्रीराम कल्याणरमन का कहना है कि यदि 8.65 प्रतिशत की सामान्य गृहऋण ब्याज दर के हिसाब से देखा जाए, तो नौ लाख रुपये के गृहऋण पर मिलने वाली चार फीसदी सब्सिडी से ईएमआई 2,062 रुपये प्रतिमाह कम हो जाएगी, और 12 लाख रुपये के गृहऋण पर मिलने वाली तीन फीसदी सब्सिडी से ईएमआई 2,019 रुपये प्रतिमाह कम हो जाएगी,

ऋण की इन रकमों पर बनने वाली कुल ब्याज सब्सिडी एक ही बार में सरकार द्वारा बैंक को चुका दी जाएगी, जिससे आवेदक की ईएमआई का बोझ हल्का हो जाएगा.

मध्यम आय वर्ग के लोगों को नौ लाख रुपये तथा 12 लाख रुपये के कर्ज़ पर 20 साल की अवधि में मिलने वाली सब्सिडी लगभग 2.30 लाख रुपये बैठेगी (जिसका हिसाब 20 वर्ष के गृहऋण पर 9 प्रतिशत ब्याज दर के आधार पर लगाया गया है...)

योग्य आवेदकों को सीएलएसएस - एमआईजी के तहत ब्याज सब्सिडी का लाभ पाने के लिए बैंक (ऋण देने वाले) के पास आवेदन करना होगा. ब्याज सब्सिडी को नेशनल हाउसिंग बैंक (एनएचबी) तथा हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (हुडको) सीधे ऋणदाता को दे देंगे. ऋणदाता इसके लिए कर्ज़ा लेने वालों से कोई अतिरिक्त प्रोसेसिंग फीस नहीं ले सकेंगे.

वाणिज्यिक बैंकों के अतिरिक्त हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, राज्य तथा अर्बन कोऑपरेटिव (सहकारी) बैंक, छोटे वित्तीय बैंकों जैसे अन्य वित्तीय संस्थान तथा गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां-माइक्रो फाइनेंस कंपनियां भी इस योजना के तहत गृहऋण दे सकेंगी.

योजना को लागू करने के लिए बुधवार को 45 हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों, 15 बैंकों, दो क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, एक कोऑपरेटिव बैंक, चार छोटे फाइनेंस बैंकों तथा तीन गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों-माइक्रो फाइनेंस कंपनियों ने नेशनल हाउसिंग बैंक (एनएचबी) के साथ करार पर हस्ताक्षर किए हैं.


मध्यप्रदेश की बेहतर ब्रॉडिंग से औद्योगिक क्षेत्र में हुआ बड़ा निवेश
23 March 2017
उद्योग-वाणिज्य, रोजगार एवं खनिज मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पिछले 5 वर्ष में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिये भागीरथ प्रयास हुए हैं। श्री शुक्ल ने कहा कि रोड-शो तथा ब्रॉडिंग का असर अब प्रदेश में दिखने लगा है। औद्योगिक क्रांति से रोजगार के अवसर बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि अक्टूबर-2016 में इंदौर में हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 5 करोड़ 62 लाख रुपये के 2630 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। समिट के दौरान बड़े उद्योग के 359 निवेश प्रस्ताव में से 216 प्रस्ताव पर तेजी से काम हो रहा है। समिट में मिले 30 हजार 300 करोड़ के 139 निवेश प्रस्ताव पर निवेशकों को जमीन उपलब्ध करवा दी गयी है। खनिज मंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में खनिज के अवैध उत्खनन और परिवहन पर सख्ती के साथ शिकंजा कसा गया है। इसी का परिणाम है कि राज्य शासन की खनिज राजस्व आय में वृद्धि हुई है। उद्योग एवं खनिज मंत्री श्री शुक्ल आज विधानसभा में अपने विभागों की अनुदान माँगों पर हुई चर्चा का उत्तर दे रहे थे। उद्योग मंत्री ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2014 में 4 करोड़ 36 लाख के 2630 निवेश प्रस्ताव में से 1963 निवेश प्रस्ताव धरातल पर आ गये हैं और इनमें 2 करोड़ 70 लाख निवेशहुआ है। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में 2 लाख से अधिक व्यक्तियों को रोजगार मिला है।
उद्योग मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में जिन उद्योगपतियों ने भागीदारी की है, उसका लाभ मध्यप्रदेश को मिला है। उद्योगपति श्री मुकेश अंबानी ने जियो टेली कम्युनिकेशन में 15 हजार करोड़ का, रिलायंस इण्डस्ट्री लिमिटेड के श्री अनिल अंबानी ने मध्यप्रदेश में आज तक लगभग 35 हजार करोड़ का निवेश अल्ट्रा मेगा ताप संयंत्र और सीमेंट कम्पनी में किया है। प्रदेश में एक रुपये 19 पैसे की न्यूनतम दर पर सस्ती बिजली रिलायंस की तरफ से मिल रही है।
उद्योग मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक क्रांति का दौर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की दूरदर्शिता और पारदर्शिता के कारण शुरू हुआ है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय-स्तर पर रोड-शो किये हैं। मध्यप्रदेश में फूड प्रोसेसिंग की संभावना की चर्चा करते हुए उद्योग मंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि ख्याति-प्राप्त आईटीसी कम्पनी ने जमीन की माँग की है। बुधनी में ट्रायडेंट टावेल का कारखाना सफलतापूर्वक काम कर रहा है। ओसवाल ने भी अपनी औद्योगिक इकाई प्रदेश में स्थापित की है। ऑटोमोबाइल क्षेत्र में वाल्वो जैसी कम्पनी ने अपनी यूनिट लगायी है। उद्योग मंत्री ने कहा कि आई.टी. के क्षेत्र में भी टीसीएस और इन्फोसिस जैसी कम्पनी अपनी यूनिट इंदौर में लगा रही है। इन कम्पनियों से मध्यप्रदेश के युवाओं को अपने ही प्रदेश में रोजगार मिलना शुरू हो गया है। रीवा में विश्व का सबसे बड़ा सोलर प्लांट लगने जा रहा है। इस प्लांट से 18 हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा। हिंडाल्को ने प्रदेश में 25 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया है। प्रदेश में लगने वाले उद्योगों में स्थानीय व्यक्तियों को 50 प्रतिशत रोजगार दिया जा रहा है।
उद्योग मंत्री श्री शुक्ल ने बताया कि प्रदेश में लगने वाले उद्योग के लिये एक लाख 20 हजार एकड़ का लैण्ड बैंक तैयार कर लिया गया है। उद्योगपति ऑनलाइन भूमि आवंटन के लिये आवेदन कर सकते हैं। इसमें से 60 हजार एकड़ भूमि का विकास भी किया जा चुका है। रक्षा क्षेत्र में हुए निवेश की चर्चा करते हुए श्री शुक्ल ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर, भिण्ड में पुंज लॉयड लिमिटेड कम्पनी इजराइल के साथ स्माल आर्म्स निर्माण इकाई लगा रही है। इस इकाई में मई-2017 तक उत्पादन शुरू हो जायेगा। उद्योग मंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश में कोई भी सीमा समुद्र से नहीं लगती है। इस कमी को दूर करने के लिये ड्राय पोर्ट और एयर कार्गो स्थापित किये जा रहे हैं। इनसे प्रदेश के उत्पादों को बंदरगाह तक आसानी से पहुँचाया जा सकेगा।
उद्योग मंत्री ने कहा कि पीपीपी मोड पर मॉडल रोजगार कार्यालय बनाये जा रहे हैं। इसके माध्यम से स्थानीय युवाओं तथा अन्य रोजगार चाहने वालों को तकनीकी मदद से रोजगार के अवसरों की जानकारी के साथ ही परामर्श एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था की जायेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रतिवर्ष 60 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार दिलवाया जा रहा है।
खनिज साधन
खनिज साधन मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में अवैध उत्खनन तथा परिवहन पर सख्ती से रोक लगायी गयी है। इसमें लिप्त किसी को भी बख्शा नहीं जायेगा। उन्होंने कहा कि इसके लिये कठोर निर्णय लेने के साथ ही अंकुश लगाने से प्रदेश की खनिज राजस्व आय में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। श्री शुक्ल ने बताया कि प्रदेश में खनिज राजस्व से वर्ष 2014-15 में करीब 3478 करोड़ रुपये और वर्ष 2015-16 में 3610 करोड़ रुपये की राजस्व आय हुई है। राजस्व आय में प्रतिवर्ष लगातार वृद्धि हो रही है।
श्री शुक्ल ने कहा कि खनिज साधन विभाग में कई नवाचार किये गये हैं। खनिज के परिवहन के लिये ऑनलाइन प्रक्रिया से ई-टीपी जारी करने की व्यवस्था लागू की गयी है। यह व्यवस्था 37 जिलों में लागू हो गयी है। इस व्यवस्था से खनिज के परिवहन में कैशलेस ट्रांजेक्शन हो सकेगा। खनिज परिवहन करने वाले वाहनों के ई-पंजीयन करवाये जाने की व्यवस्था लागू की गयी है। खनिज परिवहन वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाया जा रहा है।
खनिज साधन मंत्री श्री शुक्ल ने बताया कि प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना लागू होने से 914 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है। यह राशि उन जिलों में खर्च की जा रही है, जिन जिलों में खनिज से आय हुई है। प्रदेश के 10 जिलों में 890 कार्य स्वीकृत किये गये हैं। इस पर 143 करोड़ की राशि खर्च की जा रही है। यह राशि विकास कार्यों पर खर्च की जा रही है। श्री शुक्ल के जवाब के बाद सदन में उनके विभाग से संबंधित 999 करोड़ 64 लाख 28 हजार रुपये की अनुदान माँगों को ध्वनि-मत से पारित कर दिया गया।


एवेन्यू की बंपर लिस्टिंग से राधाकिशन दमानी बने देश के 17वें सबसे अमीर बिजनसमैन
22 March 2017
मुंबई: रीटेल कंपनी के मालिक राधाकिशन दमानी मंगलवार को देश के टॉप 20 अरबपतियों में शामिल हो गए। रीटेल चेन ऑपरेट करने वाली उनकी कंपनी एवेन्यू सुपरमार्ट्स शेयर बाजार में लिस्ट हुई। पिछले 13 साल में लिस्टिंग के दिन किसी कंपनी में ऐसी तेजी नहीं आई थी। दमानी की वेल्थ अनिल अग्रवाल, अनिल अंबानी, गोदरेज परिवार और राहुल बजाज से अधिक हो गई है। एवेन्यू के पहले दिन के परफॉर्मेंस को देखें तो वह देश के 17वें सबसे अमीर बिजनसमैन बन गए। देश की सबसे प्रॉफिटेबल रीटेल चेन डीमार्ट पर एवेन्यू का मालिकाना हक है।
डीमार्ट का शेयर 604.40 रुपये पर लिस्ट हुआ, जबकि इश्यू प्राइस 299 रुपये था। यह 102 पर्सेंट का रिटर्न है। पिछले 13 साल में लिस्टिंग के दिन किसी शेयर की कीमत में इतनी बढ़ोतरी नहीं हुई थी। कंपनी का शेयर 117 पर्सेंट चढ़कर इंट्राडे में 650 रुपये तक पहुंच गया था। तब इसका मार्केट कैप 40,000 करोड़ रुपये हो गया था।
कंपनी का शेयर मंगलवार को 640.75 रुपये पर बंद हुआ। इस हिसाब से कंपनी में उनकी हिस्सेदारी के आधार पर दमानी की संपत्ति 5.2 अरब डॉलर होती है। इस लिहाज से वह देश के 17वें सबसे अमीर इंसान बन गए हैं। इस मामले में वह बजाज ऑटो के राहुल बजाज, अनिल अंबानी और वेदांता रीसॉर्सेज के अनिल अग्रवाल से आगे निकल गए हैं।
डीमार्ट का मार्केट कैप बंद भाव के हिसाब से 39,988 करोड़ रुपये रहा, जो इसे देश में मार्केट कैप के लिहाज से 65वीं बड़ी कंपनी बनाता है। इसका मार्केट कैप ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, मैरिको और बैंक ऑफ बड़ौदा से अधिक है।
दमानी हमेशा सुर्खियों से दूर रहते हैं और शेयर बाजार के दिग्गज निवेशकों के बीच 'मिस्टर वाइट एंड वाइट' के नाम से मशहूर हैं। उसकी वजह यह है कि वे हमेशा सफेद कपड़े पहनते हैं। दमानी ने 1999 में रीटेल बिजनस शुरू किया था। उस वक्त तक अंबानी, कुमार मंगलम बिड़ला और फ्यूचर ग्रुप के किशोर बियानी के कदम इस सेक्टर में नहीं पड़े थे।
जाने-माने इनवेस्टमेंट बैंकर हेमेंद्र कोठारी ने बताया, 'राधाकिशन दमानी लो प्रोफाइल, स्मार्ट, मौके को पहचानने वाले और शानदार निवेशक हैं, जो किसी कंपनी में निवेश करने से पहले उसके बारे में पूरी पड़ताल करते हैं।' कोठारी ने बताया, 'वह खास विजन के साथ स्टॉक की पड़ताल करते हैं।'
बिग बुल के नाम से मशहूर निवेशक राकेश झुनझुनवाला दमानी को अपना गुरु मानते हैं। दमानी पिता के देहांत के बाद भाई के स्टॉक ब्रोकिंग बिजनस से 32 साल की उम्र में जुड़े थे, लेकिन 1980 और 1990 के दशक की शुरुआत में कई मल्टीनैशनल कंपनियों में निवेश करके उन्होंने सफलता की मंजिल तय की।
हर्षद मेहता के स्टॉक्स में शॉर्ट सेलिंग करने और सफल रहने पर दमानी की खास पहचान बनी। उनके एक करीबी दोस्त ने बताया कि दमानी हाई क्वॉलिटी बिजनस को वाजिब कीमत पर खरीदने में यकीन रखते हैं।


आयकर रिटर्न और पैन के लिए अनिवार्य होगा आधार कार्ड!
22 March 2017
नई दिल्ली: केंद्र सरकार इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने के लिए आधार नंबर बताने को अनिवार्य करने जा रही है. यही नहीं, जल्द ही परमानेंट एकाउंट नंबर (PAN) के लिए आवेदन करते समय भी आधार नंबर बताना अनिवार्य होगा. सरकार ने वित्त विधेयक में एक संशोधन के द्वारा इसका प्रस्ताव रखा है.
सूत्रों के अनुसार इस बारे में निर्णय पिछले साल ही ले लिया गया था. हालांकि सरकार के इस प्रस्ताव का कई संगठनों द्वारा विरोध भी किया जा सकता है, जिनकी मांग है कि इसे स्वैच्छ‍िक बनाया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सितंबर में अपने एक आदेश में ऐसा निर्देश भी दिया था.
गौरतलब है कि आधार कार्ड देश में कई तरह के वित्तीय लेनदेन में जुड़ता जा रहा है. सभी बैंक एकाउंट को आधार नंबर से लिंक करने का काम चल रहा है. इसी तरह 1 अप्रैल से ईपीएफ एकाउंट खोलने के लिए भी आधार नंबर देना जरूरी हो जाएगा. आधार कार्ड तैयार करने वाली एजेंसी यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) पहले यह कह चुकी है कि आधार के आथेंटिकेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले सभी डिवाइस में 1 जून के बाद नए इनक्रिप्शन स्टैंडर्ड लागू किए जाएंगे.
इसी तरह, आयकर दाख‍िल करने की प्रक्रिया को भी निरंतर आसान और आथेंटिक बनाया जा रहा है. हाल में आयकर विभाग ने एक ऐसा मोबाइल ऐप लाने की घोषणा की है जिससे टैक्स जमा किया जा सकता है और रिफंड को ट्रैक किया जा सकता है. आधार कार्ड की शुरुआत साल 2009 में यूपीए सरकार ने की थी.


नकद लेनदेन को लेकर सरकार और सख्त, 2 लाख रुपये से ज्यादा कैश ट्रांजेक्शन पर लगेगा 100 फीसदी जुर्माना
21 March 2017
नई दिल्ली: दो लाख रुपये से अधिक के नकद लेनदेन अब गैर-कानूनी माना जाएगा और ऐसा करने पर भारी जुर्माना भरना होगा. सरकार ने मंगलवार को यह नया प्रस्ताव रखा है. नए नियमों के मुताबिक तय सीमा से अधिक राशि के नकद लेनदेन पर 100 फीसदी तक जुर्माना लगेगा.
फरवरी में आम बजट पेश करने के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि नकद लेनदेन की सीमा 3 लाख रुपये तय की जानी चाहिए. लेकिन अब सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट में संशोधन कर अगले महीने से शुरू हो रहे नए वित्त वर्ष से नकद लेनदेन की अधिकतम राशि दो लाख रुपये करने का फैसला किया है. सरकार का यह पहल कालेधन पर अंकुश लगाने और लोगों को डिजिटल ट्रांजेक्शन के लिए प्रोत्साहित करने के वास्ते है.
बजट पेश किए जाने के बाद राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा था कि सरकार सभी बड़े नकद लेनदेनों पर नजर रखेगी. इससे पहले सरकार ने 2 लाख रुपये से अधिक के नकद लेनदेन के लिए पैन कार्ड या आयकर पहचान की विस्तृत जानकारी देना अनिवार्य कर दिया था. हालांकि सरकार, बैंकिंग कंपनियों, पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक या को-ऑपरेटिव बैंकों के लिए नकद लेनदेन की सीमा लागू नहीं होगी.


नोटबंदी पर SC से अटॉर्नी जनरल ने कहा- कानून से बड़ा नहीं पीएम मोदी का वादा
21 March 2017
नई दिल्ली: नोटबंदी ऐलान पर उठे एक सवाल के जवाब में केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्पीच कानून से बड़ी नहीं है. भारत सरकार के अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने मंगलवार कोर्ट को बताया कि नोटबंदी के ऐलान के बाद 30 दिसंबर की डेडलाइन कानून के मुताबिक है. वहीं इस तारीख को 31 दिसंबर करने का पीएम मोदी का वादा इस कानून से बड़ा नहीं है. यह सवाल सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने आई एक याचिका से उठा है. इस याचिका में केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक पर नोटबंदी की घोषणा के वक्त किए गए वादे से मुकरने का आरोप है. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक को नोटिस जारी कर मामले में जवाब मांगा था.
एक याचिकाकर्ताओं ने पुरानी करेंसी जमा करने पर पेनाल्टी के प्रावधान पर सवाल उठाते हुए कोर्ट से गुहार लगाई थी कि पीएम मोदी ने 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी का ऐलान करते वक्त अपनी स्पीच में वादा किया था. नोटबंदी के फैसले में 30 दिसंबर 2016 तक प्रतिबंधित की गई करेंसी को बैंक में जमा कराने की डेडलाइन तय की थी. लेकिन पीएम मोदी ने वादा किया था कि जो नागरिक किसी कारण से इस अवधि तक अपने पास रखी प्रतिबंधित करेंसी को जमा नहीं करा पाता, उसे 31 मार्च 2017 तक रिजर्व बैंक में यह करेंसी जमा कराने का मौका मिलेगा.
नोटबंदी के ऐलान के बाद रिजर्व बैंक ने भी अपने सर्कुलर में कहा था कि पुरानी करेंसी को 31 मार्च तक रिजर्व बैंक में जमा किया जा सकेगा. हालांकि उसने रिजर्व बैंक में जमा कराने वालों को यह वजह बताने की शर्त रख दी थी कि क्यों उक्त करेंसी को 30 दिसंबर 2016 की डेडलाइन तक नहीं जमा कराया गया.
चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में अगली सुनवाई 11 अप्रैल की तय की है. कोर्ट में बेंच ने याचिकाकर्ता से यह जानकारी भी मांगी कि क्या वह नोटबंदी की तय मियाद 30 दिसंबर 2016 तक भारत में नहीं थे. वहीं कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा है कि आखिर क्यों केन्द्र सरकार ने क्यों नागरिकों को 31 मार्च 2017 तक प्रतिबंधिक करेंसी को नहीं जमा करने दिया.


Idea और Vodafone मर्जर: उन सवालों के जवाब जो आपके मन में हैं
20 March 2017
नई दिल्ली: दुनिया की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में से एक Vodafone ने आज स्वदेशी टेलीकॉम कंपनी आइडिया के साथ अपने विलय का आधिकारिक ऐलान कर दिया है. अब आपके मन में कई सवाल रहे होंगे. जैसे अगर आपके पास वोडाफोन का सिम है तो क्या होगा या फिर आइडिया का सिम है तो क्या होगा? क्या इन दोनों को मिलकर कोई नई कंपनी आ रही है? क्या टैरिफ और सस्ते होंगे? इंटरनेट सस्ता मिलेगा?
ऐसे ही सवालों का जवाब यहां आसान और सरल शब्दों में जान लीजिए.
चेयरमैन कौन होगा?
इन दोनों कंपनियों के विलय के बाद इसके चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला होंगे जो आदित्य बिड़ला ग्रुप के हेड हैं. जबकि कंपनी का सीएफओ वोडाफोन की तरफ से रखा जाएगा. इसके अलावा सीईओ की नियूक्ति दोनों कंपनियां मिल कर करेंगी.
दोनों कंपनियों ने मर्जर के बाद कोई नई कंपनी आएगी?
वोडाफोन के सीईओ विटोरियो ने कहा है कि दोनों कंपनियां मजबूत हैं, इसलिए विलय के बाद भी अलग अलग ब्रांड से चलती रहेंगी. यानी ये दोनों मिलकर कोई नई कंपनी नहीं बनाएंगे, बल्कि वोडाफोन और आइडिया के नाम से ही चलेंगे.
क्या आज से ही दो कंपनियों एक हो गई हैं?
नहीं, क्योंकि अभी आधिकारिक ऐलान हुआ है लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है. आइडिया के बोर्ड से इस डील को हरी झंडी मिल गई है, लेकिन अभी कई अप्रूवल मिलने बाकी हैं. इनमें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, मार्केट रेग्यूलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सजेंज बोर्ड और फोरेन इनवेस्टमेंट प्रोमोशन बोर्ड शामिल हैं. 2018 तक प्रक्रिया पूरी होगी जिसके बाद ये दोनों कंपनियां एक हो जाएंगी.
किसके कितने होंगे शेयर्स?
विलय होने के बाद कंपनी के शेयर्स में 45.1 फीसदी वोडाफोन के पास होगा जबकि 26 फीसदी आइडिया का होगा. इसके अलावा बाकी शेयरहोल्डर्स का होगा.
क्या नंबर-1 बन जाएगी ये कंपनी?
विलय के बाद इस भारत में इस कंपनी के 400 मिलियन कस्टमर्स होंगे और मार्केट शेयर 35 फीसदी का होगा. यानी एयरटेल फिलहाल नंबर-1 टेलीकॉम कंपनी है, लेकिन विलय के बाद एयरटेल दूसरे नंबर पर चली जाएगी. इस कंपनी के पास सबसे ज्यादा मोबाइल यूजर्स तो होंगे ही साथ ही रेवेन्यू के मामले में भी भारती एयरटेल और जियो को माते देते हुए ये नंबर-1 बन जाएगी.
कमाई में भी होगी नंबर-1?
दोनों कंपनियां का सालाना रेवेन्यू 80 हजार करोड़ रुपये का होगा. यानी रेवेन्यू के मामले में यह कंपनी का मार्केट शेयर 41 फीसदी होगा जबकि यूजर्स के मामले में इसके शेयर 35 फीसदी होगा.
क्या एयरटेल और जियो को होगा नुकसान?
रिलायंस जियो भारत में तेजी से पांव पसार रही है, इसलिए दूसरी कपनियों पर दबाव बढ़ना लाजमी है. इस विलय से एयरटेल और जियो को खास नुकसान नहीं होगा, क्योंकि एयरटेल ने पहले ही टेलीनॉर को खरीद लिया है और कंपनी अपने 4G नेटवर्क को बेहतर करने के लिए तीकोना डिजिटल नेटवर्क से स्पेकट्रम खरीद रही है. इस डील की वैल्यू 1500 से 1700 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है. रिलायंस जियो न सिर्फ मोबाइल सर्विस से बल्कि कई दूसरी सर्विसों से भी अपने कस्टमर्स को रोकने की कोशिश करेगा.
टैरिफ वॉर हो सकते हैंं तेज
इस मर्जर से यूजर्स को आने वाले दिनों में नए प्लान और पैक्स मिल सकते हैं. क्योंकि पहले जियो को टक्कर देने के लिए एयरटेल नए प्लान लॉन्च कर रही थी, लेकिन अब इसके बाद एयरटेल के साथ आइडिया-वोडा भी नए प्लान और पैक्स के साथ बाजार में होंगी.


जीएसटी के पूरक विधेयकों को मंत्रिमंडल की मंजूरी
20 March 2017
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) व्यवस्था को लागू करने में सहायक चार विधेयकों के प्रारूप को मंजूरी दे दी। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद अब इन विधेयकों को संसद में पेश किया जायेगा। राज्यों को राजस्व नुकसान की स्थिति में उसकी भरपाई से जुड़े मुआवजा विधेयक, केंद्र में जीएसटी व्यवस्था को लागू करने के लिये केंद्रीय जीएसटी (सी-जीएसटी), अंतर राज्यीय व्यापार के लिए एकीकृत जीएसटी (आई-जीएसटी) और केंद्र शासित प्रदेश के लिए यूटी-जीएसटी विधेयकों को अब संसद में पेश किया जायेगा।
सूत्रों के अनुसार इन्हें धन-विधेयक के तौर पर पेश किया जायेगा। सूत्रों ने बताया, 'जीएसटी से जुड़े पूरक विधेयकों के प्रारूप को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। इन्हें अब इस सप्ताह संसद में पेश किया जाएगा, यहां तक कि आज ही इन्हें पेश किया जा सकता है।' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रिमंडल की बैठक में जीएसटी विधेयकों को मंजूरी देना एकमात्र अजेंडा था।
सूत्रों ने बताया कि इन चारों विधेयकों पर संसद में एक साथ चर्चा होगी। संसद में इनके पारित होते ही विभिन्न राज्यों में भी राज्य-जीएसटी पर विधानसभाओं में चर्चा और उन्हें पारित कराने का काम शुरू हो जायेगा।
उल्लेखनीय है कि जीएसटी परिषद ने अपनी पिछली दो बैठकों में राज्य जीएसटी सहित पांचों विधेयकों के प्रारूप पर अपनी सहमति की मुहर लगा दी थी। राज्य-जीएसटी विधेयक को विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं में पारित कराया जाएगा जबकि अन्य चार विधेयक संसद में पारित कराए जाएंगे। सभी विधेयकों के पारित होने पर एक जुलाई से देश में जीएसटी सिस्टम को लागू किया जा सकेगा। जीएसटी परिषद ने जीएसटी के तहत चार श्रेणियों में 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत की दर तय की हैं।



इंडिया टुडे कॉनक्लेव 2017: बिना टैक्स 'स्मार्ट सिटी' बनाना नामुमकिन
17 March 2017
नई दिल्ली: इंडिया टुडे कॉनक्लेव 2017 के पांचवे सत्र दि गवर्नेंस एजेंडा में केन्द्रीय मंत्री वेकैय्या नायडू, रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावाडेकर शामिल हुए. इस सत्र का संचालन इंडिया टुडे समूह के एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा ने किया. इस सत्र में देश को अधिक साक्षर, डिजिटल और स्मार्ट बनाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा की गई.
इंडिया टुडे कॉनक्लेव 2017 के इस सत्र पर बोलते हुए केन्द्रीय मंत्री वेंकैय्या नायडू ने कहा कि केन्द्र सरकार के मंत्री इस मंच पर इसलिए हैं क्योंकि यहां देश के भविष्य की चर्चा हो रही है. नायडू ने बताया कि देश को स्मार्ट बनाने के लिए जरूरी है कि देश में स्मार्ट सिटी का निर्माण तेजी से किया जाए. स्मार्ट सिटी से नायडू का मतलब ऐसा शहर जो भविष्य में देश की चुनौतियों का सामना करते हुए नागरिकों को एक अच्छा जीवन दे.
नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में 100 स्मार्ट सिटी का लक्ष्य है. इन शहरों को स्मार्ट बनाना का प्लान दिल्ली में नहीं तैयार किया जाएगा. शहरों को स्मार्ट बनाने के लिए बेहद जरूरी है कि प्रत्येक शहर को उसकी जरूरतों और उसके लोगों की सोच के साथ विकसित किया जाए. नायडू ने कहा कि स्मार्ट सिटी महज सरकार की कोशिशों से नहीं तैयार किया जा सकता. इसके लिए जरूरी है कि इन शहरों में रहने वाले लोग अपनी जिम्मेदारी निभाएं और अपने स्मार्ट सिटी को विकसित करें.
वेंकैय्या नायडू के मुताबिक स्मार्ट सिटी का सपना बिना सबके लिए घर बनाए पूरा नहीं किया जा सकता है. केन्द्र सरकार देश में सस्ते घर के जरिए इस सपने को पूरा करने की पूरी तैयारी कर चुकी है. नायडू के मुताबिक केन्द्र सरकार अपना दायित्व निभा रही है. अब इसमें जरूरत है कि पूरा देश अपना योगदान करे जिसे भविष्य का भारत अथवा नए भारत का उदय हो सके.
राज्यों को कमर कसने की जरूरत
इस सत्र के दौरान ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंनगप्पा ने पूछा कि केन्द्र सरकार ने 2 साल पहले स्मार्ट सिटी की घोषणा कर दी है और 100 शहरों की लिस्ट बना ली है. लेकिन इन्हें स्मार्ट बनाने के लिए सरकार ने अभी तक क्या कदम उठाए हैं? नायडू ने कहा कि बीते 2 साल के दौरान केन्द्र सरकार ने शहरों को स्मार्ट बनाने का पूरा प्लान तैयार कर लिया है. इस काम को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी इंफ्रा अपनी जगह पर है. अब केन्द्र सरकार राज्यों से लैंड और हाउसिंग के क्षेत्र में अपना योगदान करने का इंतजार कर रही है. नायडू ने कहा कि केन्द्र सरकार किसी भी कार्यक्रम का ढ़ांचा तैयार कर सकती है लेकिन उसे लागू करना राज्य सरकार का काम है.


1 जुलाई से जीएसटी लागू करने का रास्ता हुआ साफ, काउंसिल ने सभी बिलों को दी मंजूरी
Our Correspondent :17 March 2017
गुरुवार को जीएसटी काउंसिल की बैठक में बचे हुए दो मसौदा कानूनों को भी मंजूरी मिल चुकी है। ये मसौदे यूटीजीएसटी और एसजीएसटी थे। पांच मसौदा कानूनों को जीएसटी काउंसिल की मंजूरी मिल चुकी है और इसी के साथ अब 1 जुलाई से जीएसटी के लागू होने का रास्ता भी साफ होता नजर आ रहा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है।
अरुण जेटली ने कहा है- जीएसटी काउंसिल की तरफ से ये सभी बिल मंजूर किए जा चुके हैं और अब इन्हें संसद की मंजूरी मिलना बाकी है। हम पूरी कोशिश करेंगे कि संसद से बिल को मंजूरी मिल जाए। जीएसटी काउंसिल ने रजिस्ट्रेशन, पेमेंट, रिफंड, इनवाइस और रिटर्न के सभी नियम व शर्तों को मंजूर कर दिया है और अब सिर्फ कुछ मामूली सुधार करने बाकी हैं। इसे लेकर काउंसिल 31 मार्च को दोबारा से मीटिंग करेगी और उसमें कुछ और मुद्दों पर बात की जाएगी।
जेटली ने कहा है कि वह पूरी कोशिश करेंगे कि इसी बजट सत्र में जीएसटी को मंजूरी मिल जाए, ताकि 1 जुलाई से जीएसटी लागू करने का रास्ता साफ हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि यूटीजीएसटी मसौदा कानून केंद्रशासित प्रदेशों अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दमन एवं दीव तथा दादरा एवं नगर हवेली के लिए है, जहां विधानसभा नहीं है। इन सभी को मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। आपको बता दें कि कर की दरें 5 फीसदी, 12 फीसदी, 15 फीसदी और 28 फीसदी रखी गई हैं।


फ्री ऑफर पर फंस सकता है रिलायंस जियो, 'हैपी न्यू इयर' पर ट्राइब्यूनल की टेढ़ी नजर
Our Correspondent :16 March 2017
अपने ग्राहकों को फ्री मोबाइल सर्विस दिए जाने के मामले में रिलायंस जियो मुसीबत में दिख रहा है क्योंकि टेलिकॉम ट्राइब्यूनल नहीं चाहता है कि जियो का \'हैपी न्यू इयर\' ऑफर्स जारी रहे। इससे पहले टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने जियो की मुफ्त पेशकश आगे भी जारी रखने को हरी झंडी दी थी। अब दूरसंचार विवाद निपटान एवं अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीसैट) ने ट्राई से जियो को मुफ्त सेवाएं जारी रखने की अनुमति देने वाला 31 जनवरी का पत्र फिर से जांचकर दो हफ्तों में जवाब देने को कहा।
आज के आदेश में टीडीसैट ने ट्राइ से कहा कि वह दो हफ्तों के अंदर 'परिणाम और जांच के निष्कर्ष' से अवगत कराए। पिछले सप्ताह टीडीसैट ने जियो के मुफ्त ऑफर पर रोक लगाने पर रोक लगाने की अंतरिम अपील पर ट्राई, भारती एयरटेल, आइडिया सेल्युलर, रिलायंस जियो समेत सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी एयरटेल ने इस अपील में जियो को मुफ्त सेवाएं देने जारी रखने की ट्राई की अनुमति पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। एयरटेल ने ट्राइब्यूनल से यह निर्देश भी देने की मांग की कि वह ट्राई को उसके फैसलों के सभी रिकॉर्ड्स सौंपे। अपील में जियो को अपने ग्राहकों को जीरो टैरिफ प्लान और प्रमोशनल प्लांस देने से रोकने की भी मांग की गई है।
गौरतलब है कि जियो ने पिछले साल सितंबर महीने में अपनी औपचारिक लॉन्चिंग की और दिसंबर में उसने अपने मुफ्त ऑफर्स को 31 मार्च 2017 तक बढ़ाने की घोषणा कर दी। जियो के इस ऐलान के बाद एयरटेल और आइडिया ने जियो को फ्री ऑफर 90 दिनों के बाद भी जारी रखने की अनुमति देने के लिए ट्राई के खिलाफ टेलिकॉम ट्राइब्यूनल का रुख किया। दोनों कंपनियों ने ट्राई की यह कहकर आलोचना की कि जियो नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है और वह (ट्राई) मूकदर्शक बना है। 31 जनवरी को ट्राई ने कहा था कि जियो का फ्री वॉइस कॉलिंग और डेटा प्लान नियमकीय निर्देशों के खिलाफ नहीं है।
ट्राई ने कहा था कि जांच में जियो की ओर से 4 दिसंबर, 2016 को लॉन्च 'हैपी न्यू इयर ऑफर' इसके पहले वाले 'वेलकम ऑफर' से अलग है। इसलिए, हैपी न्यू इयर ऑफर को वेलकम ऑफर का विस्तार नहीं माना जा सकता क्योंकि दोनों के बेनिफिट में अंतर है। हाल ही में जियो ने ऐलान किया कि वह अपनी मोबाइल सर्विसेज के लिए 1 अप्रैल, 2017 से पेमेंट लेने लगेगा।


भारतीय शेयर बाजार में मजबूती का दौर जारी, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर्स में तेजी
Our Correspondent :16 March 2017
मजबूत विदेशी संकेतों के बीच गुरूवार के सत्र में भारतीय शेयर बाजार की शुरूआत आज बढ़त के साथ हुई। करीब 2.15 बजे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 172.72 अंक की तेजी के साथ 29,569.78 के स्तर पर और निफ्टी 58.50 की तेजी के साथ 9143.30 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। बीएसई में 0.58 फीसद और एनएसई में 0.68 फीसद की मजबूती देखने को मिल रही है। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप (1.17 फीसद) और स्मॉलकैप (1.21 फीसद) की तेजी देखने को मिल रही है।
प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 160 अंक की बढ़ोतरी के साथ 29558 के स्तर पर और निफ्टी 53 अंक की बढ़ोतरी के साथ 9138 के स्तर पर खुला। करीब 9.23 बजे निफ्टी 9139.85 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। यह निफ्टी का नया सर्वोच्य स्तर है। इससे पहले मंगवार के कारोबार में निफ्टी ने 9122 का ऑल टाईम हाई बनाया था। भारतीय बाजार की मजबूत शुरूआत से ठीक पहले सिंगापुर निफ्टी 0.75 फीसद की बढ़त के साथ 9178 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
विदेशी बाजार से मजबूत संकेत
फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में मामूली कटौती के बाद बुधवार के कारोबार में अमेरिकी शेयर बाजार आधेफीसद से ज्यादा की बढ़त के साथ बंद हुए। डाओ जोंस 0.54 फीसद की बढ़त के साथ 20950 के स्तर पर, एसएंडपी 0.84 फीसद की बढ़त के साथ 2385 के स्तर पर और नैस्डेक 0.74 फीसद की बढ़त के साथ 5900 के स्तर पर बंद हुए। वहीं आज सुबह एशियाई बाजारों में चीन के इंडेक्स शंघाई 0.63 फीसद की बढ़त के साथ 3262 के स्तर पर और हैंगसैंग 1.10 फीसद की बढ़त के साथ 24054 के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। जापान का इंडेक्स निक्केई 0.10 फीसद की मामूली कमजोरी के साथ 19551 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
मेटल शेयर्स चमके
सेक्टोरियल इंडेक्स की बात करें तो सभी सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं। सबसे ज्यादा खरीदारी मेटल सेक्टर में देखने को मिल रही है। बैंक, फाइनेंशियल सर्विस, फार्मा, एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर में आधे फीसद तक की तेजी देखने को मिल रही है। वहीं, रियल्टी और सरकारी बैंक क्षेत्र में एक फीसद से ज्यादा की बढ़त है। आईटी में 0.82 फीसद की मजबूती है।
अदानीपोर्ट्स और टाटास्टील टॉप गेनर्स
दिग्गज शेयर्स की बात करें तो निफ्टी में शुमार शेयर्स में से 47 हरे निशान में और 8 गिरावट के साथ कारोबार कर रहे है। सबसे ज्यादा तेजी अदानीपोर्ट्स, टाटास्टील, हिंडाल्को, इंडसइंड बैंक और ऑरोफार्मा के शेयर्स में देखने को मिल रही है। वहीं गिरावट भारतीएयरटेल, रिलायंस, कोल इंडिया, जील और यस बैंक के शेयर के शेयर में देखने को मिल रही है।


जल्द ही घर खरीदने के लिए निकाल सकेंगे PF की 90 फीसदी रकम
Our Correspondent :15 March 2017
नई दिल्ली: केंद्र सरकार 4 करोड़ एंप्लॉयीज प्रविडेंट फंड मेंबर्स को घर खरीदने के लिए 90 पर्सेंट तक की पीएफ राशि की निकासी के लिए नियम में संशोधन करेगी। इससे ईपीएफओ मेंबर्स को घर खरीदने के लिए डाउन पेमेंट करने में मदद मिलेगी। केंद्र सरकार की ओर से बुधवार को संसद में यह जानकारी दी गई। स्कीम में संशोधन के बाद एंप्लॉयीज अपने ईपीएफ अकाउंट से ही होम लोन की ईएमआई भी चुका सकेंगे। ईपीएफओ की ओर से प्रस्तावित नए प्रावधानों के मुताबिक कम से कम 10 सबस्क्राइबर्स को मिलकर एक को-ऑपरेटिव सोसाइटी का गठन करना होगा। तभी पीएफ अकाउंट से वे रकम निकाल सकेंगे।
कर्मचारियों के लिए हाउसिंग स्कीम से जुड़े सवाल के जवाब में बंडारू दत्तात्रेय ने संसद में कहा, 'सरकार ने एंप्लॉयीज प्रविडेंट फंड स्कीम, 1952 में संशोधन कर रही है। इस स्कीम में पैराग्राफ 68 BD जोड़ा जाएगा।' मंत्री ने बताया, 'नए प्रावधानों के मुताबिक यदि कोई सबस्क्राइबर किसी को-ऑपरेटिव सोसाइटी और हाउसिंग सोसाइटी का मेंबर होता है तो वह घर या फ्लैट की खरीद के लिए अपने खाते से 90 पर्सेंट तक की राशि निकाल सकेंगे। यही नहीं मकान के निर्माण के लिए रकम निकाली जा सकेगी।'
पिछले ही दिनों केंद्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने पीएफ खाताधारकों को ऐसी सुविधा दिए जाने की बात कही थी। गौरतलब है कि ज्यादातर कर्मचारी अपना कामकाजी जीवन किराये के मकान में काट देते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली सारी राशि का इस्तेमाल वे घर खरीदने में करते हैं। फिलहाल ईपीएफओ के दायरे में आने वाले सभी कर्मचारियों को अपने मूल वेतन का 12 फीसदी भविष्य निधि में देना होता है। इसमें मूल वेतन के अलावा महंगाई भत्ता शामिल होता है।


खुशखबरी: आज दोगुनी हो सकती है कर मुक्त ग्रेच्युटी की सीमा
Our Correspondent :15 March 2017
नई दिल्लीः आज यूनियन कैबिनेट ग्रेच्युटी के नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट पेश कर सकती है। इसके तहत टैक्स फ्री ग्रेच्युटी की सीमा को दोगुना करते हुए उसे 10 लाख रुपए से 20 लाख रुपए किया जा सकता है। अगर आप भी प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं और केन्द्रीय कर्मचारियों जैसी सुविधा पाना चाहते हैं, तो आपको एक खास सुविधा मिलने वाली है। जल्द ही प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारी भी 20 लाख रुपए तक कर मुक्त ग्रेच्युटी के लिए पात्र होंगे, जिस पर आज ही फैसला आ सकता है।
केन्द्र ने यह फैसला किया है कि प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों की ग्रेच्युटी की राशि को दोगुना करते हुए सरकारी कर्मचारियों के बराबर किया जाए। आपको बता दें कि अभी तक प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी 10 लाख रुपए तक कर मुक्त ग्रेच्युटी के लिए पात्र हैं, जबकि सरकारी कर्मचारियों को यह फायदा 20 लाख रुपए तक पर मिलता है।
श्रम मंत्रालय, ट्रेड यूनियन और कर्मचारियों के संगठन ने भी एक त्रिपक्षीय मीटिंग में प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की कर मुक्त ग्रेच्युटी की सीमा को बढ़ाकर 20 लाख किए जाने पर सहमति बनाई है। पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट में संशोधन करने के लिए संसद में बजट सत्र के दूसरे भाग में एक बिल पेश किया जाएगा। यह कदम सातवें वेतन आयोग की उस सिफारिश के बाद उठाया गया है, जिसमें केन्द्रीय कर्मचारियों को 20 लाख रुपए तक की ग्रेच्युटी को कर मुक्त किए जाने की बात कही गई थी।
मीटिंग में श्रम मंत्री ने यह भी कहा था कि लाए जाने वाले बिल में यह भी व्यवस्था होगी कि जब-जब वेतन आयोग की तरफ से केन्द्रीय कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी को लेकर कोई बदलाव होगा, तो वह प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए भी मान्य होगा। आपको बता दें कि किसी भी व्यक्ति को ग्रेच्युटी 5 साल तक लगातार किसी कंपनी में काम करने के बाद मिलती है, जबकि लेबर यूनियन ने मांग की है कि इस सीमा को घटाकर 1 साल किया जाए। साथ ही यह कानून ऐसे प्रतिष्ठानों में लागू होता है जहां कर्मचारियों की संख्या कम से कम 10 हो।


शेयर बाजार में तेजी का दौर जारी, सेंसेक्स में 450 अंकों से ज्यादा की बढ़त
Our Correspondent :14 March 2017
नई दिल्ली: मंगलवार के कारोबारी सत्र में शेयर बाजार की शानदार शुरुआत देखने को मिली है। करीब 1.15 बजे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 472.91 अंकों की तेजी के साथ 29418.53 के स्तर पर और निफ्टी 144 अंकों की तेजी के साथ 9078.20 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज पर मिडकैप 1.36 फीसद और स्मॉलकैप 0.98 फीसद की बढ़त देखने को मिल रही है।
शुरूआती मिनटों में ही निफ्टी ने 9122 का अपना नया शिखर बनाया। इससे पहले निफ्टी का ऑल टाईम हाई 9119 का था। हालांकि ऊपरी स्तर से कुछ मुनाफावसूली का दवाब दिखा। करीब साढ़े नौ बजे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 440 अंक की बढ़त के साथ 29386 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इससे पहले सेंसेंक्स ने 29487 का ऊपरी स्तर छुआ। वहीं निफ्टी 136 अंक की बढ़त के साथ 9071 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी के साथ साथ बैंक निफ्टी ने भी अपना 21042 का अपना पिछला हाई पार किया। बैंक निफ्टी 1.68 फीसद की बढ़त के साथ 21076 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।


Airtel सरप्राइज ऑफर में अपने यूजर्स को दे रहा फ्री में 30GB डेटा, जानें कैसे करना है क्लेम
14 March 2017
नई दिल्ली: एयरटेल ने अपने सरप्राइज ऑफर के तहत 4G डेटा देना शुरू किया है। हाल ही में एयरटेल ने कहा था कि 13 मार्च से पोस्टपेड यूजर्स को सरप्राइज ऑफर मिलना शुरू होगा। वादे के मुताबिक एयरटेल अब यूजर्स को फ्री में डेटा मिलना शुरू हो गया है। My Airtel App के जरिए यूजर्स को 30GB 4G डेटा दिया जा रहा है। अगर आप पोस्टपेड यूजर हैं और एयरटेल के ऐप पर जाएंगे तो आपको सबसे ऊपर के बैनर में फ्री डेटा के बारे में बताया जाएगा। यहां से क्लिक करके इस ऑफर को लिया जा सकता है। एयरटेल के ज्यादातर पोस्टपेड कस्टमर्स को माय एयरटेल ऐप के जरिए मैसेज मिलने शुरू हुए हैं जिसमें तीन महीने के लिए 30GB 4G डेटा के बारे में लिखा है। इस डेटा में से हर महीने यूजर्स 10GB डेटा यूज कर सकते हैं। मतलब तीन महीने तक लगातार आपके अकाउंट में 10GB डेटा आएगा। माय एयरटेल एेप में आप अपना डेटा बेलेंस देख भी सकते हैं। गौरतलब है कि एयरटेल ही ऐसी कंपनी है जिसे रिलायंस जियो के आने के बाद सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। इसलिए कंपनी ऑफर्स के जरिए कस्टमर्स को अपने पास से जाने नहीं देना चाहती है।अगले महीने से जियो की प्राइम सर्विस शुरू हो रही है जिसके तहत 303 रुपये में हर महीने 28GB 4G डेटा दिया जाएगा। साथ ही जियो अपने यूजर्स के लिए अनलिमिटेड कॉलिंग और एसएमएस की भी सुविधा देगी। हालांकि इसके लिए पहले प्राइम मेंबर बनना होगा जिसके लिए 99 रुपये का रजिस्ट्रेशन करना होगा। उसके बाद ही जियो के यूजर इस 303 रुपए के रिचार्ज का फायदा उठा सकते हैं।
अगर जियो के नॉन प्राइम मेंबर हैं तो इस रिचार्ज पर आपको सिर्फ 2.5GB डेटा ही मिलेगा। हालांकि कॉलिंग और एसएमएस फ्री रहेगी। जबकि प्राइम मेंबर का 1 जीबी डेटा खत्म होने के बाद उसका इंटरनेट बंद नहीं होगा बस स्पीड 128kbps की हो जाएगी। इंटरनेट चलता रहेगा। हाल ही में एयरटेल ने प्रीपेड यूजर्स के लिए एक प्लान लॉन्च किया है जिसमें उन्हें 28GB डेटा दिया जा रहा था। हालांकि ये ऑफर चुनिंदा यूजर्स के लिए ही था। इसके अलावा कंपनी ने हाल ही में myInfinty plan में भी बदलाव करके डेटा बढ़ाया है।


जीडीपी पर नोटबंदी का असर समाप्त, महंगाई बढ़ने की आशंका
11 March 2017
भारतीय रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के बाद महंगाई बढ़ने की आशंका जताते हुए डिजिटल भुगतान को 'सुरक्षित' बनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने कहा है कि अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी का जो अस्थायी प्रतिकूल असर था वह 'काफी हद तक' कमजोर पड़ चुका है। रिजर्व बैंक के एक पत्र में 'नोटबंदी के व्यापक आर्थिक प्रभाव' पर एक प्रारंभिक आकलन रिपोर्ट का जिक्र किया गया है।
रिपोर्ट का हवाला देते हुए पत्र में कहा गया है कि 1,000 और 500 रुपए के नोटों को बंद किये जाने के साथ ही 15.6 लाख करोड़ रुपए मूल्य के नोट चलन से बाहर हो गए। लेकिन अभी उस करंसी का सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सका है जो पुराने नोटों के रुप में बैंकिंग प्रणाली में लौटी है क्योंकि इसकी गणना और मिलान प्रक्रिया अभी जारी है। पत्र में कहा गया है कि नोटबंदी का अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर असर पड़ा है।
हालांकि, इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने कहा कि इसका प्रतिकूल असर कुछ समय के लिए ही था, जो नवंबर-दिसंबर में महसूस किया गया। रिजर्व बैंक ने कहा कि नोटबंदी का असर फरवरी के मध्य से कम होना शुरू हो गया। बैंकिंग प्रणाली में नई करंसी आने के साथ नोटबंदी का असर अब कम होना शुरू हो गया है।
केंद्रीय बैंक ने अपने आकलन में कहा कि नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, लेकिन अब भी इसका आधार काफी छोटा है। रिजर्व बैंक ने कहा है, 'यह महत्वपूर्ण है कि डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिये प्रयास तेज किये जाने चाहिए। यह भी उतना ही अहम है कि डिजिटल भुगतान को सुरक्षित और बेहतर बनाया जाये।'
केंद्रीय बैंक की आकलन रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल भुगतान के सुरक्षा उपायों की लगातार समीक्षा होनी चाहिये और इसमें सुधार होना चाहिये। देश में साक्षरता के निम्न स्तर को देखते हुये डिजिटल भुगतान को मजबूत और विश्वासपरक बनाया जाना चाहिये।


GST के कारण घट सकता है ग्लूकोज बिस्किट का साइज
11 March 2017
नई दिल्ली: आम बोलचाल में चायवाला बिस्किट कहा जाने वाला ग्लूकोज बिस्किट अगर अगले वित्त वर्ष से साइज में छोटा हो जाए या इसके पैकेट का आकार घट जाए तो इसके लिए आप गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) को दोष दे सकते हैं। बिस्किट मैन्युफैक्चरर्स को लग रहा है कि सस्ते ग्लूकोज बिस्किट पर महंगे क्रीम या ओट बिस्किट के बराबर टैक्स लग सकता है। इसकी वजह से इन मैन्युफैक्चरर्स को लाभ कमाने के लिए साइज घटाने पर मजबूर होना पड़ सकता है। ग्लूकोज बिस्किट्स को स्कूलों में मिडडे मील में इस्तेमाल किया जा रहा है।
बिस्किट मैन्युफैक्चरर्स वेलफेयर असोसिएशन के प्रेजिडेंट हरेश दोशी ने कहा, 'यह कैटिगरी पूरी तरह से प्राइस पर टिकी हुई है। हम कॉस्ट में होने वाली कोई भी बढ़ोतरी ग्राहकों पर नहीं डाल सकते हैं।' इन मैन्युफैक्चरर्स ने गुड्स ऐंड सर्विसेज काउंसिल के सामने दलील दी है कि 100 रुपये प्रति किलो से कम दाम वाले बिस्किट्स को जीरो टैक्स ब्रैकेट में रखा जाए और इस तरह से इन्हें महंगे बिस्किट्स से अलग माना जाए।
मौजूदा वक्त में कम दाम वाले बिस्किट्स को सेंट्रल एक्साइज से छूट है, लेकिन इन पर राज्यों में वैल्यू ऐडेड टैक्स लगता है। असोसिएशन चाहती है कि इस अंतर को गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स में भी कायम रखा जाए। जीएसटी को 1 जुलाई से लागू किया जाना है। दोशी ने कहा, 'ड्राई फ्रूट कुकीज और ओट मील को सस्ते बिस्किट्स के साथ नहीं रखा जा सकता है।' उन्होंने कहा कि इस सेगमेंट में कीमतों में बड़ा इजाफा नहीं देखा गया है, भले ही इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी हुई हो। उन्होंने कहा कि इसकी वजह यह है कि इस सेगमेंट में कन्ज्यूमर्स कीमतों को लेकर बेहद संवेदनशील हैं।


आर कॉम (RCom) नये 4जी ग्राहकों के लिये लाया ऑफर, 49 रुपये में 1GB डाटा
10 March 2017
नई दिल्ली: रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) मोबाइल ग्राहकों के लिये नई पेशकश लेकर आयी है. कंपनी 4जी ग्राहकों को एक जीबी डाटा 49 रुपये में जबकि 3जीबी डाटा 149 रुपये में देगी. साथ ही अपने नेटवर्क पर असीमित मात्रा में स्थानीय एवं एसटीडी कॉल की सुविधा देगी.
कंपनी ने यह घोषणा ऐसे समय की है कि जब कंपनियां रिलायंस जियो की आक्रमक कीमत योजना के बाद ग्राहकों को बनाये रखने के लिये आकषर्क पैकेज ला रही हैं. ‘जॉय ऑफ होली’ के तहत पेश की गयी योजना की वैधता 28 दिन होगी.
कंपनी ने आज एक बयान में कहा, ‘‘इसकी शुरुआत के साथ रिलायंस कम्युनिकेशंस के सभी नये 4जी ग्राहक को एक जीबी डाटा केवल 49 रुपये में मिलेगा जबकि 3जीबी डाटा 149 रुपये में उपलब्ध होगा. इसके साथ समान नेटवर्क पर स्थानीय एवं एसटीडी कॉल 28 दिन के लिये मुफ्त होंगे.’’
अनिल अंबानी की कंपनी आर कॉम ने अपने 3जी और 2जी ग्राहकों के लिये कई योजनाओं की घोषणा की. इसमें 99 रुपये में असीमित 3जी डाटा और 49 रुपये में असीमित 2जी डाटा शामिल हैं. आर कॉम के अनुसार दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और जम्मू कश्मीर में नये 3जी ग्राहक 99 रपये के रिचार्ज पर असीमित 3जी डाटा प्राप्त कर सकेंगे. साथ ही उन्हें 20 रुपये का टॉम टाइम मिलेगा. इस योजना में वॉयस कॉल 25 पैसे प्रति मिनट होगा और इसकी वैधता 28 दिन होगी.
इसके अलावा, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और चेन्नई में नये 2जी ग्राहक केवल 49 रुपये के रिचार्ज पर असीमित 2जी डाटा प्राप्त कर सकेंगे. साथ ही उन्हें 20 रुपये का टॉम टाइम भी मिलेगा. इस योजना के तहत उनका कॉल करने का शुल्क 25 पैसे प्रति मिनट होगा और यह 28 दिन के लिये वैध होगा.


एक बार में हो पूरा सेटलमेंट, बैंकों से बात करने को तैयार हूं: ट्विटर पर बोले माल्या
10 March 2017
नई दिल्ली: परेशान विजय माल्या बैंकों के साथ वन-टाइम सेटलमेंट करना चाहते हैं। उन्होंने ट्वीट्स कर समझौते की बात कही है। उन्होंने एक ट्वीट में लिखा है, "पब्लिक सेक्टर बैंकों में वन-टाइम सेटलमेंट की पॉलिसी होती है, सैकड़ों कर्जदारों ने इस तरह अपना मामला निपटाया है, तो मेरे मामले में इस तरह से केस सुलझाने से इनकार क्यों किया जा रहा है?" बता दें कि माल्या भारतीय बैंकों के 9000 करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्जदार हैं। वे एक साल से भारत छोड़कर लंदन में रह रहे हैं। कोर्ट उन्हें भगोड़ा करार दे चुकी है। भारत सरकार उन्हें ब्रिटेन से लाने की कोशिश कर रही है।
- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, माल्या ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा है, "मैंने सुप्रीम कोर्ट के सामने एक ऑफर रखा था, लेकिन बैंकों ने बिना कोई विचार किए ही उसे नकार दिया। मैं पूरी साफगोई से सेटलमेंट करने को तैयार हूं।"
- तीसरे ट्वीट में लिखा है, "मुझे उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दखल देकर मामले को खत्म करने की कोशिश करेगा। मैं हर तरह से तैयार हूं।"
- चौथे ट्वीट में लिखा, "मैंने बिना कोई एतराज जताए हर कोर्ट के आदेश का पालन किया है, लगता है कि सरकार मुझे फेयर ट्रायल के बिना ही दोषी करार देना चाहती है।"
- माल्या ने अपने पांचवें ट्वीट में लिखा है, "सुप्रीम कोर्ट में मेरे खिलाफ अटॉर्नी जनरल द्वारा लगाए गए आरोपों से सरकार का रुख का साबित होता है।" SC ने माल्या से पूछा-क्या एसेट्स का सही खुलासा किया है
- इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने बीते गुरुवार को माल्या पर उनकी प्रॉपर्टीज के डिसक्लोजर्स को लेकर कई सवाल दागे। कोर्ट ने पूछा कि क्या माल्या ने एसबीआई की अगुआई वाले बैंकों के कंसोर्टियम को सही जानकारियां दी थीं।
- बता दें कि बैंकों के कंसोर्टियम ने आरोप लगाया था कि माल्या ने अपने 3 बच्चों को 4 करोड़ डॉलर ट्रांसफर किए थे, जो कर्नाटक हाईकोर्ट के एक आदेश का पूरी तरह वॉयलेशन था।
- बैंकों की तरफ से पैरवी कर रहे अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में कहा कि हकीकत में माल्या को यूनाइटेड किंगडम की कंपनी डियाजिओ से 4 करोड़ डॉलर मिले थे। सुनवाई के दौरान बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट से
माल्या को यह निर्देश देने के लिए कहा कि वह डियाजिओ से मिली 4 करोड़ डॉलर (267 करोड़ रुपए) की रकम वापस लाएं।
- कर्नाटक हाई कोर्ट ने माल्या को अपनी कोई भी मूवेबल या इममूवेबल प्रॉपर्टी किसी थर्ड पार्टी को ट्रांसफर करने से रोक दिया था। रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि माल्या को ब्रिटेन से भारत वापस भेजने की अपील की जा रही है।
- सुप्रीम कोर्ट ने माल्या के खिलाफ कोर्ट के आदेश की अवमानना मामले में सुनवाई के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।

पेटीएम क्रेडिट कार्ड से वॉलेट में पैसा डालने पर 2% चार्ज लेगा
9 March 2017
नई दिल्लीः ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल में आने वाला मोबाइल वॉलेट पेटीएम अब आपसे पैसा वसूलने के तरीके बढ़ा रहा है. पेटीएम के यूजर्स को अपने क्रेडिट कार्ड के जरिये वॉलेट में पैसा ट्रांसफर करने पर 2 फीसदी का शुल्क देना होगा. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि यूजर्स क्रेडिट कार्ड से पेटीएम पर पैसे लोड करके अपने बैंक अकाउंट में उस पैसे को बिना ट्रांजैक्शन कॉस्ट के ट्रांसफर करते हैं. इस तरह क्रेडिट कार्ड के जरिये अपने मोबाइल वॉलेट पेटीएम में पैसा डालकर मुफ्त में लोन की सुविधा लेते हैं और बाद में इस पैसे को अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कर इसपर कोई शुल्क नहीं देते. पेटीएम ने 2 फीसदी चार्ज 8 मार्च से लागू कर दिया है और ये एप पर भी दिखने लगा है.
क्यों किया पेटीएम ने ये फैसला?
पेटीएम ने बुधवार 8 मार्च को एक ब्लॉग जारी कर कहा, ‘ग्राहकों द्वारा क्रेडिट कार्ड के जरिए पेटीएम वॉलेट में पैसे डालने पर पेटीएम को काफी चार्ज देना पड़ता है. वहीं हालिया समय में यूजर वॉलेट में पैसे डालने के बाद उसे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने लगे हैं जिससे पेटीएम को नुकसान हो रहा है. कुछ फाइनेंस के जानकार कुछ लोगों ने इस मॉडल का इस्तेमाल पैसे को घुमाने के लिए करना शुरू कर दिया है. ऐसे यूजर्स के लिए यह पेटीएम की कॉस्ट पर फ्री में लोन लेने जैसा है जो गौरकानूनी भी है. कंपनी के मुताबिक वो क्रेडिट कार्ज के जरिए पेटीएम का पैसा लगा कर पैसे रोटेट करते थे.
पेटीएम ने कहा कि वॉलेट में डाले गए अमाउंट को पेटीएम के जरिए ही सर्विसेज और प्रॉडक्ट्स के लिए यूज किया जाए तभी पेटीएम के लिए क्रेडिट कार्ड के ट्रांजेक्शन मुफ्त देना संभव हो सकेगा. और जब तक ऐसा नहीं होता तब तक उस पर चार्ज रहेगा. हालांकि, दूसरे पेमेंट ऑप्शन्स जैसे कि डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग के जरिये पैसे डालने पर अभी कोई चार्ज नहीं लगेगा. पेटीएम के मुताबिक ऐसा मजबूरी में करना पड़ रहा है क्योंकि बहुत से लोग क्रेडिट कार्ड के जरिये अपने मोबाइल वॉलेट में पैसा डालकर फ्री में लोन की सुविधा ले रहे थे. ये सामान्य लोगों के लिए
क्रेडिट कार्ड से कैसे उठा रहे थे लोग फायदा?
नोटबंदी के बाद पेटीएम ने दुकानदारों के लिए 0 फीसदी की दर से ट्रांजैक्शन करने का प्लेटफॉर्म शुरू किया था लेकिन कुछ यूजर्स अपने पेटीएम वॉलेट में क्रेडिट कार्ड से पैसे डालकर फिर उसे जीरो ट्रांजेक्शन कॉस्ट पर अपने बैंक खाते में जमा करा देते थे. इस तरह से पेटीएम के पैसे बिना किसी तरह का चार्ज दिए ही पेटीएम वॉलेट से बैंक खाते में चले जाते थे और किसी तरह का कोई चार्ज नहीं देना पड़ता था. जबकि क्रेडिट कार्ड पर लोन लेने के लिए ग्राहकों को ब्याज देना पड़ता है पर पेटीएम के जरिए लोग फ्री में पैसा बैंक से ले रहे थे.
पेटीएम पर अभी भी आप क्रेडिट कार्ड से रीचार्ज कर सकते हैं, लेकिन 8 मार्च से क्रेडिट कार्ड से पैसे लोड करने पर 2 फीसदी का चार्ज लागू कर दिया गया है. हालांकि, पेटीएम 2 फीसदी की दर से काटे गए टैक्स जितना अमाउंट कैशबैक के तौर पर देगा. फिलहाल यूजर्स को क्रेडिट कार्ड से पैसे लोड करने पर उतने ही कैशबैक मिल जाएंगे जितने काटे जाएंगे. ये कैशबैक कूपन के तौर पर दिए जाएंगे जिन्हें पेटीएम या कुछ दूसरे लिमिटेड ऐप्स पर यूज किए जा सकते हैं. लेकिन यह साफ नहीं है कि ये कैशबैक ऑफर कब तक के लिए है.


अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी के असर पर पक्का निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी: सुब्रमणियम
9 March 2017
नई दिल्ली: मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियम् का कहना है कि घरेलू अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी के असर को लेकर अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
गौरतलब है कि सरकार ने गत आठ मार्च को पुराने 1,000 और 500 रपये मूल्य
के नोटों का चलन बंद किया था जबकि लोगों के पास चलन में कुल नकदी का 86 प्रतिशत इन्हीं नोटों के रूप में था।
सुब्रमणियम् कल यहां बाजार प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता हित के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठन कट्स और राजस्थान विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कट्स की एक विग्यप्ति के मुताबिक मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि जीडीपी के आपचारिक आंकड़े असंगठित अर्थव्यवस्था पर असर को पूरी तरह नहीं दर्शाते। अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी के असर के आकलन के लिए कुछ और समय चाहिए।
उन्होंने कहा कि नोटबंदी के असर को संभवत: तीन पैमानों पर मापा जा सकता है। इनमें करदाताओं की संख्या और कर राशि में बढ़ोतरी, सकल घरेलू उत्पाद :जीडीपी: की वृद्धि और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार की रफ्तार शामिल है।
सुब्रमणियम् ने यह भी कहा कि वर्ष 2016-17 की आर्थिक समीक्षा में देश में व्यक्तियों और वस्तुओं के आगमन के रझानों का पता लगाने के लिए वृहद आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया और इससे कई नयी बातें सामने आयी हैं जिनके आधार पर महत्वपूर्ण नीतिगत सुझाव दिए गए है।
उन्होंने कहा उदाहरण के लिए उपग्रह चित्र से संकेत मिलता है कि हर साल देश के अंदर करीब 90 लाख लोग रोजी रोटी के लिए अपना ठिकाना एक स्थान से दूसरे स्थान पर बदलते हैं। यह संख्या पहले के अनुमानों का दो गुना है।
इसी तरह व्यापार के वृहद आंकड़े दर्शाते हैं कि जीडीपी के हिसाब से भारत के आंतरिक व्यापार का अनुपात कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में आकर्षक है।



जनधन खाते का खर्च निकालने को चार्ज जरूरी : एसबीआइ
8 March 2017
बचत खाते में न्यूनतम बैलेंस बढ़ाने और इससे कम बैलेंस होने पर चार्ज लगाने के फैसले की चारों ओर कड़ी आलोचना होने पर भारतीय स्टेट बैंक ने बचाव किया है। उसने तर्क दिया है कि उसे बड़ी संख्या में जनधन खातों का रखरखाव करना है। इसके वित्तीय भार की भरपाई करने के लिए चार्ज लगाया गया है।
बैंक ने यह भी कहा है कि चार्ज पर पुनर्विचार करने के बारे में उसे सरकार की ओर से कोई औपचारिक पत्र नहीं मिला है। अगर उसे कोई पत्र मिलता है तो वह आवश्यक कदम उठायेगा। उसने पिछला स्पष्टीकरण भी दोहराया है कि जनधन खातों में पेनाल्टी नहीं लगेगी।
पिछले सप्ताह देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआइ ने बचत खातों में न्यूनतम बैलेंस बढ़ाने के साथ ही इससे कम बैलेंस होने पर पेनाल्टी दुबारा लगाने की घोषणा की थी। इसके अलावा उसने दूसरी सेवाओं पर चार्ज लगाये थे। ये चार्ज एक अप्रैल से प्रभावी किये जाएंगे। इसके बाद विपक्षी पार्टियों समेत तमाम वर्गो की ओर से कड़ी आलोचना की गई।
एसबीआइ की चेयरपरसन अरुंधती भट्टाचार्य ने यहां महिला उद्यमियों के राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद संवाददाताओं को बताया कि हमें वित्तीय समावेशन के लिए खोले गये 11 करोड़ जनधन खातों का भार उठाना है। इन खातों का रखरखाव करने के लिए आ रहे वित्तीय भार को संतुलित करने के लिए हमें चार्ज लगाने की आवश्यकता है। हमने तमाम विकल्पों पर सावधानीपूर्वक विचार किया और सबसे उपयुक्त कदम उठाया।
एसबीआइ ने महानगरों में बचत खातों में मासिक औसत बैलेंस (एमएबी) 5000 रुपये कर दिया है। खाते में बैलेंस इससे कम होने पर 100 रुपये तक (सेवा कर अलग) लगेगा। छोटे शहरों के लिए एमएबी कम रखा गया है। इसी तरह चार्ज भी निर्धारित बैलेंस के मुकाबले वास्तविक बैलेंस के बीच के अंतर के आधार पर तय होगा। भट्टाचार्य ने कहा कि सभी बैंकों में न्यूनतम बैलेंस का नियम है।
एसबीआइ में न्यूनतम बैलेंस सबसे कम है। बैंक पहले भी बैलेंस कम होने पर चार्ज लगाता था। उसने 2012 में यह चार्ज हटा दिया था। उन्होंने दावा किया कि ज्यादातर खातों में बैलेंस 5000 रुपये से ज्यादा रहता है इसलिए पेनाल्टी की चिंता करने की जरूरत नहीं है।


GPF निकासी के लिए नियमों में ढील, अब 15 दिन में मिलेगा पैसा
8 March 2017
केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है कि जनरल प्रॉवीडेंट फंड (जीपीएफ) से पैसा निकालने के नियमों में ढील दी गई है जिसके तहत अब उन्हें 15 दिन में पैसा मिल जाएगा. इसके साथ ही कर्मचारी अब खास काम से अपने जीपीएफ का पैसा दस साल की नौकरी पूरा होने के बाद निकाल सकेंगे. पहले यह सीमा 15 साल थी. जीपीएफ से अब पैसा प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा के लिए और सभी संस्थानों हेतु निकाला जा सकेगा. इससे हपले केवल उच्च स्कूल स्तर पर ही जीपीएफ से पैसा निकाला जा सकता था.
मंत्रालय ने इस बारे में एक आदेश जारी किया है. इसके अनुसार, अंशधारकों द्वारा उठाई गई चिंताओं के निवारण के लिए नियमों में समय-समय पर संशोधन किए जाते हैं. हालांकि प्रावधान मोटे तौर पर प्रतिबंधात्मक ही रहते हैं. प्रावधानों में ढील और प्रक्रिया को सरल बनाने की जरूरत महसूस की जा रही थी. मंत्रालय ने केंद्र विभाग के सभी विभागों को भेजे आदेश में यह जानकारी दी है. बदले नियमों के तहत, 12 महीने के वेतन या कुल अंशदान की तीन चौथाई राशि जो भी कम हो के निकासी की अनुमति देने का फैसला किया गया है. बीमारी के मामले में अंशधारक के खाते की कुल राशि की 90 प्रतिशत तक राशि की निकासी की जा सकेगी.
पीएफ निकालना हुआ आसान, बस एक फॉर्म से बनेगा काम
अंशधारक सेवा के 10 साल पूरे होने के बाद निकासी कर सकता है. जीपीएफ से राशि की निकासी टिकाऊ उपभोक्ता सामान खरीदने के लिए भी की जा सकती है. मौजूदा नियमों में यह तय नहीं था कि आवेदक को राशि का भुगतान कितने दिन में किया जाएगा. मंत्रालय ने कहा है- जीपीएफ से धन निकासी के आवेदन को मंजूरी व राशि के भुगतान के लिए 15 दिन की समयावधि तय की गई है. बीमारी या अन्य आपात स्थिति में यह सीमा घटाकर सात दिन भी हो सकती है. इसके साथ ही कर्मचारियों को जीपीएफ से पैसा निकालने के लिए अब कोई पूरक साक्ष्य नहीं देना होगा बल्कि एक स्वघोषणा ही देनी होगा.
फिलहाल एक साल के भीतर सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों को अपने जीपीएफ से 90 प्रतिशत तक राशि निकालने की अनुमति है. इस अवधि को बढाकर दो साल करने का प्रस्ताव है. इसी तरह मोटर कार, मोटरसाइकिल व स्कूटर आदि वाहनों की खरीर या इस उद्देश्य से लिए गए रिण को चुकाने के लिए भी जीपीएफ से पैसा निकाला जा सकता है.


टाटा मोटर्स ने पेश की अपनी पहली स्पोर्ट्स कार 'रेसमो'
7 March 2017
नई दिल्लीः भारत की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी टाटा मोटर्स ने अपनी पहली स्पोर्ट्स कार रेसमो आज जिनेवा मोटर शो में पेश कर दी है. टाटा मोटर्स खासतौर पर पैसेंजर और कमर्शियल व्हीकल बनाने वाली कंपनी है और स्पोर्ट्स कार के तौर पर ये रेसमो ये उसकी पहली पेशकश है. कंपनी ने 2 सीटर यह कार अपने नये उप-ब्रांड टेमो के तहत पेश की है. इसके साथ ही नेक्स्ट जेनरेशन के मॉडल्स में सेडान टिगोर और एसयूवी नेक्सन को भी यहां पेश किया है.
टाटा मोटर्स के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर गुएंतेर बुशचेक ने कहा, ‘रेसमो, टाटा मोटर्स में हो रहे बदलावों का प्रतीक है.’ कंपनी ने खुद को युवा ब्रांड के रूप में स्थापित करने के प्रयासों के तहत यह नई स्पोर्ट्स कार पेश की है. कंपनी ने भारत व ग्लोबल लेवल पर कार उपभोक्ताओं की जन-सांख्यिकी प्रोफाइल में बदलाव को देखते हुए यह कदम उठाया है. टेमो उप ब्रांड के तहत यह स्पोर्ट्स कार 2017-18 में बाजार में आ सकती है इसमें 1.2 लीटर का पेट्रोल इंजन है.
रेसमो पेश किए जाने के समय टाटा संस के चेयरमैन एमिरेट्स रतन टाटा व समूह के नये चेयरमैन एन चंद्रशेखरन भी मौजूद थे. रेसमो नेक्स्ट जेनरेशन की कनेक्टेडेड कार है. इसमें माइ्रकोसाफ्ट की क्लाउड बेस्ड टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल किया गया है.
क्या है टाटा की पहली स्पोर्ट्स कार रेसमो की खासियत?
टाटा मोटर्स की रेस्मो इसकी फ्यूचर कॉन्सेप्ट कार जिसे कंपनी ने स्पोर्ट्स कार की तर्ज पर बनाया है. हालांकि भारतीय सड़क को ध्यान में रख कर इसमें कुछ खास फीचर्स दिए गए हैं जो इसे अलग बनाते हैं. इसमें 1.2 लीटर का सुपर चार्ज्ड पेट्रोल इंजन लगा है जो 190 बीएचपी पावर जेनरेट करता है. रेसमो 0 से 100 किलोमीटर की रफ्तार महज 6 सेकेंड में छू लेती है. टाटा मोटर्स का दावा है कि रेसमो को मशीन और टेक्नोलॉजी को मिला कर बनाया गया है जो इसकी यूएसपी है.


पीएम मोदी ने पूरा किया वादा, 8% रिटर्न देने वाली नई 'वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना 2017' को हरी झंडी- खास बातें
7 March 2017
नई दिल्ली: जल्द ही सस्ते घर और अधिक सस्ते हो सकते हैं। मोदी सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग को अधिक से अधिक लोगों की पहुंच में लाने की कवायद कर रही है। अगर सरकार की ये योजना कामयाब हो जाती है तो अधिक से अधिक लोगों को अफोर्डेबल हाउसिंग के तहत मिलने वाले सस्ते घर और अधिक सस्ते दाम पर मिलेंगे। आइए जानते हैं सरकार क्या कर रही है इसके लिए।
स्टांप ड्यूटी हो सकती है खत्म शहरी विकास मंत्री एम वैंकैया नायडू ने रीयल एस्टेट कंपनियों के संगठन क्रेडाई के एक कार्यक्रम में ऐसा बयान दिया है, जिस पर अगर अमल हो जाता है तो घर और अधिक सस्ते हो जाएंगे। नायडू ने सभी राज्यों से अनुरोध किया है कि वे किफायती आवासीय परियोजना के तहत घर लेने वालों को स्टांप ड्यूटी में छूट दें, ताकि अधिक से अधिक लोग सरकार की इस योजना से जुड़ कर इसका लाभ ले सकें।





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