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yatra.com
राष्ट्रपति ने विश्‍व पर्यटन दिवस के अवसर पर यात्रा, पर्यटन और आतिथ्‍य उद्योग की विभिन्‍न श्रेणियों में ‘राष्‍ट्रीय पर्यटन पुरस्‍कार 2015-16’ प्रदान किये 04 October 2017
राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने आज यहां ‘विश्‍व पर्यटन दिवस’ के अवसर पर संस्‍कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित एक समारोह में यात्रा, पर्यटन और आतिथ्‍य उद्योग की विभिन्‍न श्रेणियों में ‘राष्‍ट्रीय पर्यटन पुरस्‍कार 2015-16’ प्रदान किये। पर्यटन राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री अल्‍फोंस कन्‍ननथनम ने समारोह की अध्‍यक्षता की। समारोह में राज्‍यों के पर्यटन मंत्री, केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों के अधिकारी, प्रमुख होटलों के मालिक, ट्रेवल एजेंट और टूर ऑपरेटर सहित यात्रा और आतिथ्‍य उद्योग के सदस्‍य, पर्यटन और आतिथ्‍य संस्‍थानों के छात्र, ट्रेवल मीडिया तथा पत्रकार उपस्थित थे। इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने ‘अतुल्‍य भारत 2.0 अभियान : ‘एक विरासत अपनाएं’ परियोजना और नए अतुल्‍य भारत वेबसाइट का शुभारंभ भी किया। ‘अतुल्‍य भारत 2.0 अभियान’ डिजिटल और सोशल मीडिया पर अधिक ध्‍यान केंद्रित कर बाजार आधारित प्रचार योजनाओं और उत्‍पाद विशिष्‍टता के आधार पर रचनात्‍मकता के लिए विश्‍वभर में किये जा रहे मौजूदा वर्गीकृत प्रचार में हो रहे परिवर्तन को दर्शाता है। ‘एक विरासत अपनाएं’ परियोजना का उद्देश्‍य पर्यटक सुविधाएं विकसित करने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों को विरासत स्‍थल सौंपना है। इन स्‍थलों को अपनाकर वे ‘स्‍मारक मित्र’ बन जायेंगे। ‘नया अतुल्‍य भारत वेबसाइट’ मौजूदा वेबसाइट का उन्‍नत संस्‍करण हैं जिसमें कई उपयोगी सुविधाएं हैं। इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने कहा कि पर्यटन विश्‍व के सबसे बड़े उद्योग में से एक है। इसके विकास का अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि दुनिया भर में पर्यटकों की संख्या 1950 में 2.2 करोड़ थी जो 2016 में बढ़कर 123 करोड़ हो गई। विश्व के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में पर्यटन उद्योग का 10.2 प्रतिशत का योगदान है। अनुमान है कि दुनिया में प्रत्‍येक दसवां व्यक्ति पर्यटन उद्योग में कार्य करता है। भारत में भी बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका पर्यटन उद्योग से जुड़ी हुई है। वर्ष 2016 में सकल घरेलू उत्पाद में पर्यटन का 9.6 प्रतिशत और कुल रोजगार में 9.3 प्रतिशत योगदान था। पर्यटन उद्योग स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करने और गरीबी दूर करने में महत्‍वपूर्ण योगदान दे सकता है। एक आकंलन के अनुसार, पर्यटन उद्योग में 10 लाख रुपये का निवेश कर लगभग 90 लोगों को रोजगार प्रदान किया जा सकता है, जबकि कृषि क्षेत्र में लगभग 45 लोगों और विनिर्माण क्षेत्र में लगभग 13 लोगों के लिये रोजगार उपलब्‍ध होता है। राष्ट्रपति ने कहा कि समावेशी पर्यटन विकास से समेकित आर्थिक विकास को सुदृढ़ किया जा सकता है। प्रत्येक नागरिक को अपने स्तर पर पर्यटकों को अच्छा अनुभव प्रदान करने का प्रयास करना चाहिए। पर्यटन के प्रति जागरूक समाज में सरकार की भूमिका केवल दिशा और सुविधाजनक वातावरण प्रदान करने की है। राष्ट्रपति ने कहा कि पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से संस्कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा आज शुरू की गयी ‘एक विरासत परियोजना अपनाएं’ से हमारे समृद्ध और विविध विरासत स्मारकों को पर्यटक-अनुकूल बनाने की भरपूर संभावनाएं हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की भागीदारी से यह परियोजना हमारी विरासत के रखरखाव में मददगार साबित होगी। पर्यटन राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री अल्‍फोंस कन्‍ननथनम ने अपने संबोधन में राष्‍ट्रीय पर्यटन पुरस्‍कार 2015-16 के विजेताओं को बधाई दी और आग्रह किया कि विश्‍वभर के यात्रियों के लिए भारत को सबसे पसंदीदा गंतव्‍य स्‍थान बनाने के लिए सभी प्रतिबद्ध हों। उन्‍होंने कहा कि भारत में विदेशी पर्यटकों का आगमन बढ़ा है और घरेलू पर्यटक यात्राओं में वृद्धि हुई है। विश्‍व आर्थिक फोरम के यात्रा और पर्यटन प्रतिस्‍पर्धी सूचकांक 2017 में भारत की रैंकिंग वर्ष 2015 में 65वें स्‍थान से बढ़कर 52वें स्‍थान पर पहुंच गई थी और अब भारत का स्‍थान 12 पॉइंट और बढ़कर 40वां है। उन्‍होंने कहा कि भारत एक ऐसा गंतव्‍य स्‍थल है जहां सभी यात्रियों की जरूरतें पूरी होती हैं। हमारा सामूहिक लक्ष्‍य भारत में पर्यटन क्षेत्र को स्‍थायी और जिम्‍मेदार तरीके से विकसित करना है। बडे पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने, गरीबी उन्‍मूलन, स्‍थानीय समुदायों के आर्थिक और सामाजिक लाभ तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए अपनी अंतरनीहित क्षमताओं के कारण पर्यटन का वांछनीय स्‍थान है। उन्‍होंने यात्रा और पर्यटन उद्योग के नेताओं से पर्यटन पर अपने अभिनव विचार साझा करने का आग्रह किया ताकि इसे प्रधानमंत्री के महान विचार बदलते भारत के पर्यटन क्षेत्र में साकार किया जा सके। अपने स्‍वागत उद्बोधन में पर्यटन मंत्रालय में सचिव श्रीमती रश्मि वर्मा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से भारत का पर्यटन क्षेत्र बढि़या प्रदर्शन कर रहा है और इसकी वृद्धि दर विश्‍व पर्यटन की औसतन वृद्धि दर से अधिक है। 2016 में भारत में 8.80 मीलियन विदेशी पर्यटकों का स्‍वागत किया था जो 2015 की तुलना में 9.7 प्रतिशत अधिक था। जनवरी से जुलाई 2017 की अवधि के दौरान विदेशी पर्यटकों के आगमन में 15.7 प्रतिशत की दो अंकीय वृद्धिदर रही, जिसके कारण वर्तमान वर्ष में भी पर्यटन के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। यह पर्यटन क्षेत्र के हमारे साझेदारों की समर्थन और सहयोग के बिना संभव नहीं था। भारत सरकार का पर्यटन मंत्रालय प्रतिवर्ष यात्रा, पर्यटन और आतिथ्‍य उद्योग की विभिन्‍न श्रेणियों में राष्‍ट्रीय पर्यटन पुरस्‍कार प्रदान करता है। यह पुरस्‍कार राज्‍य सरकारों / केन्‍द्र शासित प्रदेशों, वर्गीकृत होटलों, विरासत होटलों, मान्‍यता प्राप्‍त ट्रेवल एजेंटों, टूर ऑपरेटरों, पर्यटक परिवहन संचालकों, व्‍यक्तियों और अन्‍य निजी संगठनों को अपने-अपने क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए प्रदान किये जाते हैं। राष्‍ट्रीय पर्यटन पुरस्‍कार पिछले कुछ वर्षों से यात्रा, पर्यटन और आतिथ्‍य क्षेत्रों में उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठित सम्‍मान माने जाते हैं। पुरस्‍कार समारोह की तिथि का चयन विश्‍व पर्यटन दिवस के उपलक्ष्‍य में किया गया जो प्रतिवर्ष 27 सितम्‍बर को मनाया जाता है। विश्‍व पर्यटन दिवस मनाने का उद्देश्‍य पर्यटन के महत्‍व और इसकी सामाजिक सांस्‍कृतिक राजनीतिक तथा आर्थिक मूल्‍यों के प्रति अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय में जागरूकता बढ़ाना है।
विभिन्‍न श्रेणियों में राष्‍ट्रीय पर्यटन पुरस्‍कार (2015-16) विजेताओं की सूची .
क्र.स.
श्रेणी
पुरस्‍कार विजेता
हॉल ऑफ फेम पुरस्‍कार 1 पर्यटन के व्‍यापक विकास के लिए सर्वश्रेष्‍ठ राज्‍य गुजरात
2 पर्यटन के व्‍यापक विकास के लिए सर्वश्रेष्‍ठ राज्‍य मध्‍य प्रदेश
3 सर्वश्रेष्‍ठ इनबाउंड टूर ऑपरेटर – श्रेणी- I मैसर्स ली पेसेज टू इंडिया टूर्स एंड ट्रेवल्‍स, नई दिल्‍ली
4 सर्वश्रेष्‍ठ इनबाउंड टूर ऑपरेटर – श्रेणी- I मैसर्स एसओटीसी ट्रेवल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड 5 सर्वश्रेष्‍ठ इनबाउंड टूर ऑपरेटर – श्रेणी-IV मैसर्स ट्रेवलाइट (इंडिया), नई दिल्‍ली
6 पर्यटक परिवहन संचालक-श्रेणी I मैसर्स अल्वर टूरिस्‍ट ट्रांसपोर्ट सर्विस, नई दिल्‍ली
7 सूचना प्रौद्योगिकी का सबसे अभिनव उपयोग पर्यटन विभाग, केरल सरकार

ट्रेवल एजेंट / इनबाउंड टूर ऑपरेटर .

श्रेणी I – 100करोड़ रूपये और उससे ऊपर की विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले .
8 प्रथम पुरस्‍कार मैसर्स एबर क्रोम्‍बी एंड कैंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्‍ली
9 दूसरा पुरस्‍कार मैसर्स एसडीयू ट्रेवल्‍स प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्‍ली

श्रेणी II - 50 करोड़ रूपये से अधिक लेकिन 100 करोड़ रूपये से कम विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले.
10 प्रथम पुरस्‍कार मैसर्स मीनार ट्रेवल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्‍ली
11 दूसरा पुरस्‍कार मैसर्स कैपर ट्रेवल कंपनी प्राइवेट लिमिटेड गुडगांव
श्रेणी III - 25 करोड़ रूपये से अधिक लेकिन 50 करोड़ रूपये से कम विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले 12 प्रथम पुरस्‍कार मैसर्स पेट्टिट्स इंडिया टूअर्स प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्‍ली
13 दूसरा पुरस्‍कार मैसर्स जीबी मोरिसन ट्रेवल प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्‍ली

श्रेणी IV - 10 करोड़ रूपये से अधिक लेकिन 25 करोड़ रूपये से कम विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले .
14 प्रथम पुरस्‍कार अम्‍बर टूर्स प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्‍ली
15 दूसरा पुरस्‍कार पेरिप्‍लस ट्रेवल्‍स प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्‍ली
श्रेणी V - 5 करोड़ रूपये से अधिक लेकिन 10 करोड़ रूपये से कम विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले 16 प्रथम पुरस्‍कार मैसर्स सेंटर टूअर्स एंड ट्रेवल्‍स, श्रीनगर
17 दूसरा पुरस्‍कार मैसर्स वेस्‍ना टूअर्स प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्‍ली
श्रेणी VI – 2.50 करोड़ रूपये से अधिक लेकिन 5 करोड़ रूपये से कम विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले 18 प्रथम पुरस्‍कार मैसर्स स्‍पेशल हॉलिडेज ट्रेवल्‍स प्राइवेट लिमिटेड 19 दूसरा पुरस्‍कार मैसर्स वल्‍र्डवाइड रेल जर्नी प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा

घरेलू टूर ऑपरेटर.
20 सर्वेश्रेष्‍ठ घरेलू टूर ऑपरेटर (सिक्किम सहित पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के पर्यटक उत्‍पादों को बढ़ावा देना और बिक्री करना) मैसर्स हीट ट्रेवल्‍स एंड टूर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, सिलिगुडी
शेष भारत के पर्यटक उत्‍पादों को बढ़ावा देना और बिक्री करना 21 सर्वेश्रेष्‍ठ घरेलू टूर ऑपरेटर –श्रेणी I मैसर्स यात्रा ऑनलाइन प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्‍ली
22 सर्वेश्रेष्‍ठ घरेलू टूर ऑपरेटर - श्रेणी II मैसर्स क्‍लबसाइड टूर्स एंड ट्रेवल्‍स प्राइवेट लिमिटेड, दार्जिलिंग

पर्यटक परिवहन संचालक .
श्रेणी I -पर्यटक परिवहन संचालन के जरिए 50 करोड और उससे अधिक का कारोबार करने वाले 23 प्रथम पुरस्‍कार मैसर्स ईसीओएस(I) मोबिलिटि एंड होस्पिटिलिटि प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्‍ली
श्रेणी II - पर्यटक परिवहन संचालन के जरिए 10 करोड और उससे अधिक लेकिन 50 करोड़ से कम का कारोबार करने वाले 24 प्रथम मैसर्स बाला टूरिस्‍ट सर्विस, चेन्‍नई
श्रेणी III - पर्यटक परिवहन संचालन के जरिए 1 करोड और उससे अधिक लेकिन 10 करोड़ से कम का कारोबार करने वाले 25 पहला पुरस्‍कार मैसर्स एफटीटी कैब्‍स प्राइवेट लिमिटेड,नई दिल्‍ली
26 दूसरा पुरस्‍कार मैसर्स पनिकर्स ट्रेवल्‍स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड,नई दिल्‍ली
सर्वश्रेष्‍ठ एडवंचर टूर ऑपरेटर 27
सर्वश्रेष्‍ठ एडवंचर टूर ऑपरेटर-इनबाउंड .
मैसर्स फॉर होरीजोन, फरीदाबाद
28 सर्वश्रेष्‍ठ एडवंचर टूर ऑपरेटर – घरेलू मैसर्स क्‍लब साइड टूर्स एंड ट्रेवल्‍स प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता
29
सर्वश्रेष्‍ठ एमआईसीई टूर ऑपरेटर्स.
मैसर्स अल्‍पकोर्ड नेटवर्क, नई दिल्‍ली
30 एमआईसीई और एडवंचर के अलावा अन्‍य स्‍थलों को बढ़ावा देने वाले टूर ऑपरेटर मैसर्स लोटस डेस्‍टीनेशन्स प्राइवेट लिमिटेड, कोच्चि
31 सर्वश्रेष्‍ठ पर्यटक गाइड श्री के काशीनाथ राव, तेलंगाना
32 श्रीमती रमा खांडवाला, मुम्‍बई
(विशेष पुरस्‍कार) 33 सर्वश्रेष्‍ठ वन्‍य जीव गाइड श्री सईब खान
सतपुडा राष्‍ट्रीय उद्यान, पचमढी, मध्‍य प्रदेश .

प्रचार और प्रोत्‍साहन के लिए पुरस्‍कार .
प्रकाशन में उत्‍कृष्‍टता
34
अंग्रेजी में उत्‍कृष्‍ट प्रकाशन.
कॉफी टेबल पुस्‍तक ‘’द हार्ट ऑफ इंक्रेडिबल इंडिया’’ के लिए मध्‍य प्रदेश पर्यटन
35
हिन्‍दी में उत्‍कृष्‍ट प्रकाशन.
सिंहस्‍थ 2016 विवरणिका के लिए मध्‍य प्रदेश पर्यटन
36 अंग्रेजी के अलावा अन्‍य विदेशी भाषा में उत्‍कृष्‍ट प्रकाशन (संयुक्‍त विजेता) स्‍पेनिश भाषा में विवरणिका के लिए केरल सरकार का पर्यटन विभाग
37 मेंडरिन भाषा में विवरणिका के लिए तेलंगाना सरकार का पर्यटन विभाग
38
सर्वश्रेष्‍ठ पर्यटन फिल्‍म्‍ .
राजस्‍थान पर प्रचार फिल्‍म, पर्यटन विभाग, राजस्‍थान सरकार
39 मैसर्स सेफ वील्‍ज़ टूर एंड ट्रेवल्‍स, मैसूरू की “विजिट मैसूरू” (विशेष पुरस्‍कार)
40 राज्‍यों/ केन्‍द्र शासित प्रदेशों द्वारा सर्वश्रेष्‍ठ पर्यटन प्रोत्‍साहन प्रचार सामग्री पर्यटन विवरणिका फिल्‍म ‘योअर नेक्‍सट ब्‍लॉक बस्‍टर डेस्टिनेशन’ के प्रकाशन के लिए पर्यटन विभाग, केरल सरकार
41 सोशल मीडिया / मोबाइल एप्‍प – सूचना प्रौद्योगिकी का सबसे अभिनव उपयोग सोशल मीडिया अभियान के लिए गोवा पर्यटन विकास निगम लिमिटेड, पणजी आतिथ्‍य वर्ग

सम्‍मेलन केन्‍द्र .
42 बैठक स्‍थल के आधार पर सर्वश्रेष्‍ठ होटल द अशोक, नई दिल्‍ली
43 सर्वश्रेष्‍ठ अकेला सम्‍मेलन केन्‍द्र लिओनिया अंतरराष्‍ट्रीय प्रदर्शनी और सम्‍मेलन केन्‍द्र, हैदराबाद
44 सर्वश्रेष्‍ठ अकेला रेस्‍टोरेट खैबर, मुम्‍बई

सर्वश्रेष्‍ठ शैफ.
45 4 स्‍टार, 5 स्‍टार, 5 स्‍टार डीलक्‍स, हेरिटेज क्‍लासिक और ग्रेंड श्रेणी के होटलों में श्री अरविंद राय, द अशोक होटल, नई दिल्‍ली
46 सर्वश्रेष्‍ठ महिला शैफ सुश्री मधुमिता महंता, एक्‍जक्यिूटिव शैफ, द ललित ग्रेट इस्‍टर्न, कोलकाता


अतुल्‍य भारत प्रवास और अल्‍पाहार सुविधा प्रतिष्‍ठान .
47 भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा मान्‍यता प्राप्‍त हाउस ऑफ कपाली, ग्रेटर नोएडा होटल 48 सर्वश्रेष्‍ठ पर्यावरण अनुकूल होटल आईटीसी मौर्य, नई दिल्‍ली
49 दिव्‍यांग अतिथियों के लिए श्रेष्‍ठ सुवधिाएं देने वाला होटल द ललित, नई दिल्‍ली


विरासत होटल.
50 विरासत मूल श्रेणी समोद हवेली, गंगापोल, जयपुर
51 विरासत भव्‍य श्रेणी फतेह प्रकाश पैलेस, उदयपुर

वर्गीकृत होटल .
52 3 स्‍टार होटल ब्‍लीस, तिरूपति
53 4 स्‍टार ताज विवांता, कुमारकोम, केरल
54 5 स्‍टार ट्राइडेंट, गुरूग्राम
55 5 स्‍टार डीलक्‍स
(संयुक्‍त विजेता) द ओबेराय उदयविलास, उदयपुर
56 द ताज वेस्‍ट एंड, बैगलुरू

विशिष्‍ट पर्यटन पुरस्‍कार .
57
सबसे अभिनव और असाधारण उत्‍पाद .
हनुवंतिया और जल महोत्‍सव, मध्‍य प्रदेश पर्यटन
58
जिम्‍मेदार पर्यटन परियोजना / पहल .
विभिन्‍न जिम्‍मेदार पर्यटन पहलों के लिए सिक्किम
59 कुमाराकोम में जिम्‍मेदार पर्यटन के लिए केरल सरकार का पर्यटन विभाग
60
पर्यटन अनुकूल गोल्‍फ कोर्स .
जेपी ग्रीन गोल्‍फ कोर्स, ग्रेटर नोएडा
61
स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र .
सोमतीराम रिसर्च इंस्‍टीटयूट एंड आयुर्वेद हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड, केरल
62
चिकित्‍सा पर्यटन सुविधा .
अपोलो हेल्‍थ सिटी, हैदराबाद
63
सर्वश्रेष्‍ठ फिल्‍म प्रोत्‍साहन अनुकूल राज्‍य .
मध्‍य प्रदेश
64
एडवेंचर पर्यटन के लिए सर्वश्रेष्‍ठ राज्‍य.
मध्‍य प्रदेश


अन्‍य श्रेणी .


सर्वश्रेष्‍ठ हवाई अड्डा .
65
10 श्रेणी के शहर .
छत्रपति शिवाजी अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डा, मुम्‍बई, महाराष्‍ट्र
66
अन्‍य शहर .
(संयुक्‍त विजेता) श्रीनगर अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डा, श्रीनगर, जम्‍मू और कश्‍मीर
67 स्‍वामी विवेकानंद हवाई अड्डा, रायपुर
68
पर्यटक अनुकूल रेलवे स्‍टेशन .
उज्‍जैन रेलवे स्‍टेशन, मध्‍य प्रदेश
69
सर्वश्रेष्‍ठ विरासत यात्रा .
इंडिया सिटी वॉक्‍स द्वारा लीडिंग फ्रॉम द फ्रंट : बीईंग गांधी – गांधी यात्रा 70
सर्वश्रेष्‍ठ विरासत शहर .
(संयुक्‍त विजेता) वारांगल, तेलंगाना
71 चंदेरी, मध्‍य प्रदेश
72 सर्वश्रेष्‍ठ सहेजा और दिव्‍यांग अनुकूल स्‍मारक चौमहला पैलेस, हैदराबाद, तेलंगाना

पर्यटक स्‍थलों का नगर पालिका प्रबंधन .
73
A श्रेणी .
ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी)
74
B श्रेणी .
खरगोन, मध्‍य प्रदेश
75
C श्रेणी .
सरोवरम बायो पार्क, केरल
76 सव्‍च्‍छता पुरस्‍कार तेलंगाना सरकार
पर्यटन के व्‍यापक विकास के लिए सर्वश्रेष्‍ठ राज्‍य / केन्‍द्र शासित प्रदेश .
77 तीसरा पुरस्‍कार (संयुक्‍त विजेता) केरल
78 गोवा
79 दूसरा पुरस्‍कार राजस्‍थान
80 पहला पुरस्‍कार आंध्र प्रदेश

दुर्ग शब्द का तात्पर्य है ऐसा गढ़ जहाँ पहुँचना कठिन हो।
02 May 2016
दुर्ग शब्द का तात्पर्य है ऐसा गढ़ जहाँ पहुँचना कठिन हो। याग्वल्क ने कहा की दुर्ग से राजा और प्रजा की सुरक्षा ,स्थिति और सामर्थ ज्ञात होती थी . लेकिन साथ में यह भी कहा जाता है की किसी दुर्ग की कहानी ,महज किसी राजा और रानी की कहानी नहीं होती .ऐसी ना जाने कितनी कथाएं ,किस्से और किवदंतिया है जो हमारे इतिहास से निकलती है या हमारे इतिहास में जमा है सच यही है की ये मानव -सभ्यता के विकास या पतन की कहानियां होती है . हजारों दुर्ग अपने अपने इतिहास के साथ अपनी एक कहानी लिए आज भी खड़े है . कौटिल्य ने दुर्गों के चार मुख्य प्रकार बताये जबकि मनु ने दुर्ग के छ प्रकार बताये है पर किसी ने भी रहस्यमय दुर्ग काकोई प्रकार नहीं बताया .
मध्य प्रदेश के महाराष्ट्र की सीमा से लगे निमाड़ में प्राचीन असीरगढ़ के किले में कौटिल्य और मनु के बताये दुर्ग शैली का समावेश तो है ही पर इस किले से जुडी किवदंतियां और लोककथाएं आज भी इसे रहस्यमयी दुर्ग बनाती है और लोगो की जुबान पर यह किला अलग अंदाज में आज भी आता है . निमाड़ का वह इलाका जहाँ उबड़ खाबड़ जमींन के बीच ज्वार की रोटी और अम्बाडी की भाजी की सौंधी सी महक आपको खाने की इच्छा जगती है जहाँ भरी दोपहर की गर्मी को प्याज और हरी मिर्च खा कर कम किया जाता है उस निमाड़ का अपना एक सांस्कृतिक पक्ष है एक लोक जीवन है .
इसी लोक संस्कृति में एक लोक कथा प्रचलित है ,कहते है की निमाड़ के जंगलों में अश्वतथामा आज भी अपनी पीड़ा के साथ भटक रहा है . असीर गढ़ का जंगल आज तक महाभारत कालीन अजेय योदधा अश्वतथामा को संरक्षण दिए हुए है जो आज भी असीर गढ़ के किले में घुमता रहता है . निमाड़ में यह भी किवदंती है की जब भी किसी ने अश्वत्त्थामा को देखा है वह अपना मानसिक संतुलन खो देता है . इसका कारणमेरी समझ से शायद उसकी पीड़ा,उसकी अभिशप्त जिंदगी की कल्पना ही होती होगी .
बचपन में सुनी " अश्वत्त्थामा मारा गया "की कथा का अंत भी असीरगढ़ की और ले जाता है पिता से सुनी और स्मृति में कहीं धुंधली पड़ी यह कथा खंडवा - बुरहानपुर की एक अनायास बनी यात्रा के वक्त फिर स्मृति पटल पर चमकने लगी और असीर गढ़ कीओर आकर्षित करने लगी थी उस यात्रा का पडाव बना खंडवा -बुरहानपुर के मध्य असीरगढ़ रोड रेलवे स्टेशन . यहाँ से लगभग १२ किलोमीटर दूर सतपुड़ा पर्वतमाला के एक शिखर पर रहस्यमयी दुर्ग बना हुआ है . यह दुर्ग चंदानी रेलवे स्टेशन से १२ किलो मीटर की दुरी पर है . सतपुड़ा के सघन जंगलों के बीच से होकर असीरगढ़ दुर्ग पहुँचना होता है . जंगल में वीरानी इतनी की हवा की सायं सायं सुनी जा सकती है ,गर्मी इतनी की पसीने से कपडे चिपकने लगते है और सूखे पतझड़ी वनों के बीचसे पत्तों पर चलते हुए पत्तों की खडखडाहट एक भय मिश्रित रोमांच पैदा करती है . निमाड़ की गर्म हवा के थपेड़े उनकी पत्तों से सरसराहट यह अहसास दिलाती है कि कहीं कोई है ,शायद हमारे कदमों के निशानों पर अपने कदम रखता हुआ हमारे पीछे चल रहा है . एक पल को यह ख्याल की कहीं कोई अनजानी रूह या अश्वत्त्थामा तो नहीं ?भय का इतना रोमांचक अहसास की पलट कर देखना भी जरुरी लगे और देखते हुए एक भय आपको कंपकंपा भी दे . पर पलटने पर कोई नहीं दिखाई देता ,शायद कोई परिंदा भी नहीं, बस एक वहम हमारे साथ चलता है की इस जंगल में एक अभिशप्त भटक रहा है ,कौन जाने वो कहाँ टकरा जाय . मन आपको बार बार चेतावनी देता हुआ सा डरता है की वापस चलाना चाहिए . किन्तु जिज्ञासा भरा मन किले की कथा , दुर्ग का शिल्प , अश्वत्त्थामा का इतिहास ,जंगल की यात्रा और दूर दूर तक फैली वीरानी - विराट प्रकृति का अनूठा आकर्षण पलटने भी नहीं देता . यही वो मानवीय जिज्ञासा का चरम बिंदु होता होगा जो आदमी को चाँद की सैर से लेकर समुन्दर की गर्त तक ख़ाक छानने को मजबूर करता होगा .कदम से कदम मिलाती वह सरसराहट बस एक वहम ही है जो कथाओं से उपजे भय का परिणाम हो सकती है हम चलते जाते है एक जिज्ञासा से लदे हुए की राजाओं को भी दुर्ग बनाने के लिए यही जगह क्यों सूझी होगी .और एक प्रशन मन में बार बार आता है की जहाँ एक आबादी की रक्षा का इतना प्रबंध था वहां आज इतनी वीरानी क्यों ?
मुझे रोमांचक यात्राओं का अजीब शौक है जो मुझे और मेरे परिवार को घुमक्कड़ बनाता रहा है ,फिर वह असीर का दुर्ग हो या सिरवेल की गहरे कुंए में उतरनेवाली गुफा यात्रा ही क्यों ना हो अक्सर हम यात्रा से लौट कर सोचते है हमने जान जोखिम में डाली थी .
सतपुडा के जंगल की रोमांचक यात्रा का लुफ्त लेते हुए १२-१३ किलोमीटर का यह थका देनेवाला रास्ता तय होता है जो हमें खडा करदेता है दक्षिण द्वार पर . इतिहासमे इसे दक्षिण की कुंजी [किला दक्खन ] कहा गया है . इतिहास कहता है दक्षिण भारत पर विजय पाने के लिए पहले इसी असीर गढ़ को जीतना जरुरी होता था . तो इसका अर्थ निकालती हूँ मै की यह उत्तर और दक्षिण के बीच एक बिंदु है जिसके इस- उस पार जाने के लिए इसे लांघना एक चुनौती रहा होगा . बहरहाल एक विचार मन में कौंघता है की अश्वत्त्थामा ने भी क्याजगह चुनी थी अपने लिए ?लगा शायद सदियों तक अभिशप्त जीवन के लिए इससे बेहतर विराना कहीं हो ही नहीं ?भूमितल से इसकी उंचाई 300 मीटर और समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 761 मीटर है .दुर्ग की उंचाई को लेकर एक दन्त कथा और है कि हिजरी संवत 866 में मोहम्मद खिलजी ने युद्ध के लिए असीरगढ़ के जंगलो में ढेर डाला था तो रात में नींद खुलने पर उसने अपने गुलाम को आवाज दी और वजू के लिए पानी माँगा ,तब गुलाम ने बताया की अभी सुबह नहीं हुई है सरकार ,आप जिसे भौर का तारा समझ रहे हो वह तो असीर गढ़ किले के अन्दर रात में जलनेवाला चिराग है . कहते है की किले की ऊंचाई देख कर ही बिना आक्रमण किये मोहम्मद खिलजी वापस चला गया था .
आज की स्थित में दुर्ग यद्दपि खँडहर ही कहा जाना चाहिए पर दुर्ग की इमारत को देख कर बुलंदी को महसूस किया जा सकता है उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़नेवाले प्राचीन मार्ग पर स्थित यह दुर्ग सबसे ऊँचे और शक्तिशाली दुर्गों में से एक है . दरअसल असीरगढ़ का किला केवल किला नहीं है . यहाँ तीन किलेबंदियाँ है .सबसे ऊँचे किले का नाम असीरगढ़ ,बीचवाले का नाम कमर गढ़ .और सबसे निचे मैदान वाले किले का नाम मलय गढ़ है . पूर्व से पश्चिम तक किले की लम्बाई और चौढहाई क्रमशः सवा और एक किलोमीटर के लगभग है .असीरगढ़ 1००० मीटर लम्बा और 6०० मीटर चोड़ा है . लगभग 8०-85 एकड़ जमींन एक मजबूत परकोटे से घिरी हुई है . चट्टानी प्राचीर लगभग 40 मीटर ऊँची है . दक्षिणी भाग में भयावह ढलान है .चट्टानों की इस लम्बी ढलान के कारण दुर्ग में जाने का मार्ग पूर्व और उत्तर में है . दूसरी पहाड़ी पर कमरगढ़ है ,यह किला फारुखी सुलतान आदिलशाह ने बनवाया था . कमर गढ़ और असीर गढ़ को जोड़ने के लिए दस मीटर ऊँची एक दिवार है ,यंही पर एक प्रशस्ति लगी है जो अकबर ,दानियल और शाहजहाँ के द्वारा दुर्ग फतह का प्रमाण है . चट्टान के पास ही एक बड़ा -सा दरवाजा है जो राजा गोपालदास ने बनवाया था टेढ़े-मेढ़े रास्तो से होते हुए सात दरवाजे पार करने के बाद मुख्य दरवाजा आता है . यूँ आप चाहें तो दक्षिण की तरफ से जीप द्वारा जा सकते है पर तब भी तोडा सा रास्ता तो पैदल ही पार करना पडता है .और सबसे ज्यादा अखरेगा यह की जंगल जैसी प्रकृति के बावजूद आपको नया अनुभव ना होना क्योंकि तब आपको नहीं मिलेगा जंगल का रोमांच और पत्तो की सरसराहट, निमाड़ी गर्मी और खुद के पसीने की गंध यात्रा केइस रोमांच से आप वंचित रह जाते है इसलिए जो लोग जंगल का मजा लेना चाहते है उन्हें इसी रास्ते से मजा आयगा फिर एक और आकर्षण क्या पता अश्वत्त्थामा कहीं किसी पेड़ के निचे विश्राम करता दिख जाय ,अपने रिसते घाव को सहलाता तालाब के शीतल जल में अपनी प्यास बुछाता अपने अनंतकाल से रिस रहे श्रापग्रस्त घाव को घोता . ओह अश्वस्थामा तुम्हे खोजने बार बार जंगल का रास्ता तय करना पड़े तो भी मेरा मन तुम्हारे दर्द को बांटना चाहता है . तुम्हारी मुक्ति का कोई उपाय खोजने की इच्छा है ,यह भी कोई सजा है श्राप देते हुए क्या तुम्हारी युगों युगों की पीड़ा उन्होंने एक बार भी महसूस नहीं की थी ? मन कहेगा आपका की एक बार अश्वत्त्थामा को हम इन्ही निमाडी सतपुड़ा के जंगल से निकाल सकें उसे नए युग के नए ज़माने में नया जीवन जीना सीखा सकें ? उसके घाव का कोई तो इलाज होगा इस नए ज़माने के पास ? मेरी तरह खोये हुए आप भी इसी चिंतन के साथ जब जंगल से गुजरे तो जीवन का नया दर्शन समझ सकते है , रास्ता हमेशा कठिन ही चुनना चाहिए क्योंकि तभी तो जीवन के अर्थ पता चलते है .
एक इतिहासकार ने इन रास्तों को लेकर लिखा है कि इसमें प्रवेश और निकासी के रास्ते खोजपाना दुष्कर है .आसपास कोई दुसरी पहाड़ी नहीं है ,जहाँ से इस किले पर नजर रखी जा सके . जमीं पर खड़े होकर अप देखते है कि यह किला आसमान के रास्ते ,बीच आधे पर नजर आता है ,ऊँगली स्वतः दांतों के निचे चली जाती है आश्चर्य होता है इस कल्पना पर कि आखिर आसमान और धरती बीच किला बनाया कैसे होगा ? वो कौन वास्तुशास्त्री होगा ? आप उसे सलाम किये बिना नहीं रह पायेंगे . किले की चोटी पर मस्जिद बनी है . मस्जिद में क शिलालेख पर अरबी में फारुखी बादशाहों की नामवली है . एक ऊँची सी बैठक पर इबादत खाना बना है जिसके एक खम्बे पर अकबर की प्रशस्ति है असीरगढ़ यूँ तो सघन जंगल में है ,लेकिन यहाँ तालाबों और कुओं -बावडियों की संख्या हैरत में डालती है जो यह बताती है की कभी यहाँ आबादी भरपूर रही होगी यहाँ पेयजल की उपलब्धता है .आश्चर्य होता है कि जहाँ गर्मी इतनी की हिरन काले पढ जाते है ,आदमी बेदम हो जाते है वहां इन जल स्त्रोतों में शीतल जल भरा हुआ कैसे ?
इतिहासकार फ़रिश्ता ने इस किले को आठवीं सदी में आसा अहीर द्वारा निर्मित कराया जना लिखा है . संभव है की उसी नाम का अप भ्रंश असीर हुआ हो और यह असीरगढ़ कहलाता हो . यहाँ आसा अहीर के वंशजों का ७०० सालों तक शासन रहा है , इतिहास में उल्लेख है की एक आक्रमण में चित्तोड़ की सेना की सहायता के लिए असीरगढ़ से सेना गई थी . अलाउद्दीन खिलजी ने सन 1295 में देवगिरी से लौटते हुए असीर गढ़ पर विजय प्राप्त की थी .सन 1400 में आसा अहीर के वंशजो से फारुखी बादशाह नासीर खान ने किला छीना था .200 सालो तक फिर यहाँ फारुखी शासन रहा जिन्होंने किले को और भव्यता और सुरक्षा दी . सन 1601 में आठ माह की घेराबंदी के बाद अकबर बादशाह ने सैनिकों को रिश्वत देकर किले पर कब्जा किया थाक्या शानदार इतिहास है किले का . और क्या विराटता ? क्या है किसी देश के पास एसा गौरवान्वित करता असीर गढ़ और उसकी शान के अनुरूप ऐसा इतिहास .
दुर्ग ,किले ,गढ़ महल दुमहले सब राज्य शक्ति के प्रतीक है जिनके अन्दर तमाम इतिहास सोया हुआ है जहाँ जाने कितने राजे रजवाड़े ,नवाब -शेख , बादशाह अपने- अपने अतीत के साथ दफ़न है ,जिनकी कथाएं इतिहास की वो कथाएं है जिनसे छल -प्रपंच , युद्ध और व्यूह ,नीति और कौशल को सीखा जा सकता है पर ये किला और इसके जंगल किसी राजे महाराजे की नहीं ये बल्किउसकी किवदंती कहते है जो सदियों से ज़िंदा है ,द्वापर युग में जन्मे एक श्रेष्ठ योद्धा की जो अपने पिता की भाँति शास्त्र -शस्त्र विद्या में निपुण थे . पिता -पुत्र की इस जोड़ी ने महांभारत के युद्ध में पांडवों की सेना को लोहे के चने चबवा दिए थे . हाँ महाभारत के कई प्रमुख पात्रों मे से एकअश्वत्त्थामा आज भी जिन्दा है . कहते है उनका वजूद इन्ही जंगलो में आज भी है . महाभारत के युद्ध के समय गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र व कुरुवंश के राजगुरु कृपाचार्य के भांजे अश्वत्त्थामा हजारों सालो से जिन्दा है जिन्हें मुक्त करने फिर कोई अवतार पैदा नहीं हुआ ,होगा कभी न कभी पर अभी तो वह भोग रहा है श्राप . अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने निकले अश्वतथामा को उनकी एक चूक भारी पड़ी और भगवान् श्री कृष्णने उन्हें युगों -युगों तक भटकने का श्राप दे दिया . ओह अश्वत्त्थामा यह कैसा श्राप ? क्यों ?और वह भी भगवान कहलानेवाले कृष्ण का ? इश्वर तो मुक्ति देते है ये कैसे इश्वर थे ? तुम भोग चुके हो श्राप और वे शिव वे कहाँ है जिन्हें तुम पांच हजार सालो से पूज रहे हो कब तक देवालयों में सोते रहेंगे कब जागेंगे तुम्हे मुक्ति देने के लिए ?अश्वत्त्थामा को मुक्ति दे दो देव ,इन्तहा हो गई उसकी सजा की . दुर्ग के अंदर राजपूत शैली में विक्रमादित्य द्वारा निर्मित एक शिवालय है जो पहाड़ी से घिरे तालाब के किनारे स्थित है . यह मंदिर ही उस रहस्य को निर्मित करता है जो तुम्हारे जिन्दा होने की पुष्टि करता हैअश्वत्त्थामा. माना जाता है की महाभारत का अभिशप्त युद्ध नायक अश्वत्त्थामा इन्ही जंगलों में शिरोपिडा लिए भटक रहा है . वह रोज इसी शिवमंदिर में शिव पूजन के लिए आता है . जनश्रुति है कि महाभारत के युद्ध के बाद पांडव पुत्रों को मारने और अश्वत्त्थामा से मणी छीन लिए जाने के बाद दर्द और असहनीय शिरोपीड़ा से व्याकुल भयभीत होकर वह खंडवा -बुरहानपुर के बीच असीर गढ़ के जगंलो में भटकता है .इसीलिए इस मंदिर को अश्वत्थामा मंदिर कहते है . ताप्ति महात्म्य में भी इसका जिक्र आता है .
स्थानीय लोग कहते है कि शिव मंदिर में भौर होते ही कोई पूजा कर जाता है शिवलिंग पर रोज ही ताजे फूल और गुलाल कोई चढ़ा जाता है . अपने संस्कारों से बंघा ब्राहमण पुत्र अब भी देव पूजन की परंपरा चलायमान रखे हुए है ,एक फिर सवाल कौंध जाता है मन मेंब्राह्मण तो रावण भी था और तुम भी , फिर क्षत्रिय ने श्राप क्यों दिए ? राजा राम हों या कृष्ण श्राप और मुक्ति की कहानियों के अधिष्टाता क्यों और कैसे ? नहीं जानती इसके पीछे क्या वजह रही होंगी ,कभी कभी लगता है की ब्राह्मणों की प्रज्ञा से वे भी भयभीत तो नहीं थे .
यह तो जनश्रुति है पर सच यह है कि 16वीं शती में असीर गढ़ किला संसार के आश्चर्यों मेसे एक गिना जाता था .सालो पहले असीर गढ़ की यात्रा याद करते हुए मन एक बार फिर असीर गढ़ के जंगलों में शिवमंदिर में बैठ उसकी मुक्ति की कामना करना चाहता है ,इश्वर मिले तो कहिये अश्वत्त्थामाको मुक्ति मिलन चाहिए ,आप ही ने कहा है न युद्ध में सब जायज है तो जो भी अश्वतथामा ने किया वह भी तो युद्ध का ही हिस्सा रहा होगा . सजा भी एक सीमा तक ठीक होती है देवता कहलानेवाले श्री कृष्ण श्राप देकर भूल ही गए और यह भी कीमाफ़ करने वाला हमेशा बड़ा होता है -इसी जंगल में मंदिर के सामने खड़े होकर मै चिल्लाकर कहती हूँ -तो करो ना अब उसे मुक्त ?
मन मेरे साथ नहीं लौटना चाहता वह छूट रहा है इसी जंगल में . जहाँ कोई अकेला संकट में है सदियों से मुक्ति की कामना में भटकता हुआ ---- अश्वतथामा तुम मिलने तो बाहर आओ क्यों लोगों से छुपते हो ? हो सकता है तुम्हारे दर्द का इलाज किसी के पास हो . यह द्वापर युग नहीं है यह कलयुग है .
-स्वाति तिवारी

विश्व के सात प्राकृतिक अजूबों में शामिल ग्रैंड कैनियन (संयुक्त राज्य अमेरिका) की यात्रा जहाँ चुप हैं नदियों के प्रवाह और समय के निशान
02 May 2016
वे कभी अमेरिका नहीं गए थे, फिर कैसे इतना कुछ शब्द शब्द वर्णन कर देते थे जैसे वहीँ खड़े हों? उनके शब्द मेरे कानों में गूँज रहे थे, नदी और उसकी सहायक नदियों ने उस क्षेत्र को परत-दर- परत काटा होगा और पठार ऊपर गया होगा, तब एक अजसामने आया जब पृथ्वी का भूगर्भीय इतिहास प्रकट हुआ ऐसा अजूबा कि देखने वाले बस देखते रह जाएँ दाँतों तले उँगली दबाएँ-- -“जानती हो इस अजूबे को क्या कहते है ?“ग्रैंड कैन्यन विश्व के एक विशाल प्राकृतिक अजूबे के साथ ही ग्रैंड कैन्यन अमेरिका के सबसे बड़े पर्यटक केंद्रों में से एक है।
आठवीं क्लास में पढ़ने वाली एक बच्ची जिसने तब केवल नर्मदा नदी और नर्मदा घाटी ही देखी सुनी थी उसके लिए वैश्विक अजूबा नया शब्द था मैंने तब पिताजी की तरफ आश्चर्य से देखा मेरी नज़रों में प्रश्नवाचक था ;हम कब जायेंगे देखने?

पिताजी ने विश्व एटलस निकाला और समझाया कि वह हमारे पड़ोस में थोड़ी है और वो तो सात समन्दर पार अमेरिका महाद्वीप पर है| पिता की आँखे भी आश्चर्य से भरी थी उन्होंने कहा वंडर्स ऑफ़ द वर्ल्ड -- एटलस अब मेरे हाथों में था| पिता भूगोल के शिक्षक थे दुनिया भर के एटलस उनकी हॉबी थी| वे दुनिया में बच्चों की रूचि जगाने के लिए ऐसी जगहों के बारे में बताया करते थे|  ग्रैंड कैन्यन दुनिया का महा दर्रा है जो पश्चिम से आरम्भ हुआ और दूसरी तरफ पूर्व से भी बनने लगा| साथ-साथ दो धाराओं की तरफ बनते बनते लगभग साठ लाख वर्ष पूर्व दोनों दरारें एक स्थान पर एक साथ मिल गईं जैसे गंगा-जमुना मिलती है ना| मेरी कॉपी पर पेन्सिल से दोनों तरफ से दो दरारों को खींचते हुए उन्होंने मिला दिया, वो कॉपी जिसमें वे दुनिया का एटलस समझाते थे, अब भी कहीं हमारे घर में मिल जाएगी| चित्र मेरी आँखों में अब भी बना हुआ है जो धुँधला हो गया था| नाऊ वी आर फ़्लाइंग ओवर वंडर ऑफ़ द वर्ल्ड-- -- -- -- ग्रैंड कैन्यन, हेलीकॉप्टर चालक की आवाज
से मेरी तन्द्रा भंग हुई| खिड़की से नीचे झाँका मेरी कॉपी के पन्ने पर पिता द्वारा खींची रेखा दुनिया के वितान पर एक विराट दर्रा, केवल रेखा नहीं था किसी कलाकार की पेंटिंग थी शायद, नहीं वो प्रकृति के ऐसे गुम्बद थे जैसे विष्णु के मंदिरों के होते हैं, वे रेत के टीले थे, वे लाल भूरे काले पहाड़ थे जिन पर नक्काशी दिखाई देती है| मैं रोमांचित होते हुए देख रही थी पिता का समझाया अजूबा, जो उनकी बेटी को उसकी बेटी ने दिखाया| पिता इस यात्रा में साथ नहीं हैं, उनका हाथ छूटे सालों हो गए, पर वे मेरे साथ थे| इस यात्रा में शब्द बन कर बार बार याद आ रहे थे मैंने आसमान की ओर देखा शायद वो मुझे दुनिया देखते हुए वहाँ से देख रहे हों? पिता से बेहतर भूगोल का शिक्षक मैंने अपने जीवन में फिर कहीं नहीं पाया और यात्रा गाइड तो वो अब भी मेरे बने रहते हैं शायद ही कोई यात्रा हो जिसमें वे याद ना आते हों| वे शब्दों से दुनिया भर की यात्रा करवा देते थे, जिज्ञासा जगाना कोई उनसे सीखे, वे आर्थिक रूप से संपन्न नहीं थे पर ज्ञान का अचूक भण्डार उनके पास था, न टी.वी. थे, ना फोन-कंप्यूटर का तो सवाल ही नहीं था फिर कैसे वे इतना जानते थे? मेरे लिए तो यही दुनिया का सबसे बड़ा अजूबा बना कहाँ सोचा था कभी कि मैं कभी अमेरिका महाद्वीप पर जाऊँगी? सपना भी नहीं देखा था कभी भूली बिसरी बातें अचानक सामने आ जाएँ तो स्मृति हमें कहाँ-कहाँ ले उड़ती है, परिवार साथ था पर स्मृति पिता के साथ यात्रा करवा रही थी| नीचे लालिमा लिए भूरे मटमैले पठार थे जिन पर परत-दर- परत दरारें दिखाई दे रही थीं, इनके बीच कहीं-कहीं जल धाराएँ दिख रही थीं, दूर-दूर तक फैले निर्जन भयावह से लगते एक क्षितिज से दूसरे क्षितिज तक अनंत में फैले रेतीले मरुस्थलीय पठार| हेलीकॉप्टर ने एक अजीब सी घरघर शुरू की तो एक पल को लगा, यदि इस वीराने में कुछ हो जाए तो पानी की एक बूँद भी देने वाला नहीं मिलेगा पर सामने से आते दूसरे हेलीकॉप्टर ने भय को उड़न छू कर दिया|
अपनी तीसरी बार की अमेरिका यात्रा में इस बार बच्चों ने हमारे साथ कैलिफ़ोर्निया (संयुक् राज्य अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित एक राज्य है) देखा। यह अमेरिका का सबसे अधिक आबादी और क्षेत्रफल में अलास्का और टेक्सास के पश्चात् तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। कैलिफ़ोर्निया के ऊपर औरिगन, और उसके नीचे मैक्सिको है। कैलिफ़ोर्निया की राजधानी सैक्रामेण्टो है। संयुक्त राज्य अमेरिका का आधा फल इस राज्य से आता है, ऐरिज़ोना [संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिण पश्चिमी हिस्से में स्थित एक राज्य है] इसका सबसे बड़ा शहर और राजधानी फ़िनक्स है। दूसरा सबसे बड़ा राज्य टक्सन है और उसके बाद फ़िनक्स के महानगर क्षेत्र स्थित शहर मेसा, ग्लेनडेल, चंदलर और स्कॉट्सडेल है, लास वेगास (नवादा का सबसे ज्‍़यादा आबादी वाला शहर है), क्‍लार्क काउंटी का स्थान है और जुआ, खरीदारी तथा शानदार खान-पान के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर जाना जाने वाला एक प्रमुख रिसॉर्ट शहर है। स्‍वयं को दुनिया की मनोरंजन राजधानी के रूप में प्रचारित करने वाला लॉस वेगास, कसीनो रिसॉर्ट्स की बड़ी संख्‍या और उनसे संबंधित मनोरंजन के लिए मशहूर है, सैन फ्रांसिस्को शहर [कैलिफ़ोर्निया में चौथी सबसे अधिक आबादी वाला शहर है और संयुक्त राज्य अमेरिका में 12 वीं सबसे अधिक आबादी वाला शहर है, यहाँ की 2008 में 808977 अनुमानित जनसंख्या है] जाने का प्रोग्राम बना लिया था उसी के साथ बच्चों ने इस विश्व के अजूबे को भी दिखाने का सोचा वो इसे पहले देख चुके थे| पल्लवी का कहना है कि यह लाइफ टाइम अचीवमेंट है माँ, चलो आपको नानाजी वाला ज्ञान आँखों से दिखाते हैं|
मैंने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि आपके पिता की कोई इच्छा आपके बच्चे इस तरह पूरी कर सकते हैं| यात्रा अद्भुत थी पति और बच्चे दामाद साथ थे, फिर क्या था मैं घुमक्कड़ मेरा मनघुमक्कड़, यात्रा की यायावरी में रमती हूँ प्रकृति के साथ| अल सुबह हम लॉस वेगास से ट्रेवल्स की बुकिंग अनुसार सड़क मार्ग [हाईवे us 93] से बस द्वारा निकले यह बस हमें होटल से ही पिक अप करती है,हेलीपेड तक ले जाने के लिए| हमारा पहला पड़ाव था लॉस वेगास से 33 मील दूर स्थित हूवर बाँध| यह बाँध नेवादा और एरिज़ोना राज्य की सीमा पर कोलोरोडो नदी की ब्लैक कैनियन के ऊपर बना हुआ है, बेहद नाजुक दिखने वाला यह पुल अनोखे पुलों में शामिल है| सन् १९३६ में बन कर तैयार हुआ हूवर बाँध, जो कभी बौल्डर बाँध के नाम से जाना जाता था, एक कंक्रीट गुरुत्वाकर्षण-चाप बाँध है, जो अमेरिकी राज्यों एरिज़ोना और नेवादा की सीमा के बीच स्थित कोलोराडो नदी के ब्लैक कैनियन पर है|जब 1936 में इसका निर्माण पूरा हुआ, तब यह पनबिजली ऊर्जा उत्पन्न करने वाला विश्व का सबसे बड़ा स्टेशन और विश्व की सबसे बड़ी संरचना थी| 1945 में ग्रांड कौली बाँध, इन दोनों ही मामलों में इससे आगे निकल गया| यह आज की तारीख में विश्व का 38वां सबसे बड़ा पनबिजली उत्पादन केंद्र है|लास वेगास, नेवादा के दक्षिणपूर्व में स्थित 30 मील (48 किमी) इस बाँध का नाम हरबर्ट हूवर के नाम पर रखा गया है जिन्होंने पहले एक वाणिज्य ट्रूव के रूप में और बाद में अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में इस बाँध के निर्माण में एक सहायक भूमिका निभाई| इसका निर्माण 1931 में शुरू हुआ और 30 सितंबर 1935 को राष्ट्रपति फ्रेंकलिन डी. रूजवेल्ट द्वारा इसे समर्पित कर दिया गया, लेकिन इसका निर्माण 1936 तक ही पूर्ण हो पाया जो अपने निर्धारित समय से दो वर्ष आगे चल रहा था| यह बाँध और ऊर्जा संयंत्र अमेरिका के आंतरिक विभाग के ब्यूरो ऑफ़ रिक्लमेशन द्वारा संचालित होता है| 1981 में ऐतिहासिक स्थानों के राष्ट्रीय रजिस्टर में सूचीबद्ध होने के बाद, हूवर बाँध को 1985 में एक नैशनल हिस्टोरिक लैंडमार्क नामित किया गया| बाँध में इस्तेमाल किया गया कंक्रीट, सेन फ्रांसिस्को से न्यूयॉर्क तक के दो-लेन वाले एक राजमार्ग के निर्माण के लिए पर्याप्त है| अमेरिका में बने दुनिया के सबसे ऊँचे हूवर बाँध के निर्माण के साथ 112 मौतें जुड़ी हुई थीं| बाँध पर काम करते हुए कितने लोगों की मृत्यु हुई और मरने वालों में कौन पहला और कौन आखरी था, इसका कोई निश्चित विवरण नहीं है| एक लोकप्रिय कथा के अनुसार हूवर बाँध के निर्माण में मरने वाले प्रथम व्यक्ति सर्वेक्षक जे.जी. टिएर्नेय थे, जिनकी मृत्यु बाँध के लिए आदर्श स्थान ढूँढते हुए डूब जाने से हुई| संयोगवश, उनके बेटे, पैट्रिक डब्ल्यू टिएर्नेय, बाँध पर कार्य करते हुए मरने वाले अंतिम व्यक्ति थे, जो उनके पिता के मृत्यु दिवस से 13 वर्ष बाद था| छियानवे लोगों की मृत्यु निर्माण स्थल पर निर्माण के दौरान हुई|
हालाँकि, एक और सर्वेक्षक की मृत्यु निर्माण से पहले एक संभावित निर्माण स्थल का सर्वेक्षण करते हुए हुई और इन आँकड़ों में निर्माण के दौरान हुए अन्य आकस्मिक और संयोग वश मृत्युएँ (जैसे दिल का दौरा, हृदयाघात, आदि) शामिल नहीं है| मीएड झील से बहता हुआ जल धीरे-धीरे संकुचित होते हुए स्लूस के माध्यम से गुज़रते हुए बिजलीघर में पहुँचता है और टर्बाइनों तक पहुँचते हुए उसकी गति लगभग 85 मील/घंटा (137 किमी/घंटा) हो जाती है| कोलोराडो नदी का पूरा प्रवाह टरबाइन के माध्यम से होकर गुजरता है जिसका पर्यावरण पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा| बाँध के निर्माण को नदी के मुहाने से संबद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के पतन के युग की शुरुआत के रूप में अंकित किया गया| बाँध के निर्माण के बाद और लेक मीएड के भर जाने पर, 1930 के दशक के उतरार्ध में छः साल के लिए, वस्तुतः पानी का कोई प्रवाह नदी के मुँह तक नहीं पहुँचा| डेल्टा के मुहाने को, जो पूर्व में कभी ताज़ेपानी-खारेपानी का एक मिश्रण क्षेत्र था और जो नदी के मुख से 65 किलोमीटर (40 मील) दक्षिण की ओर फैला हुआ था, एक व्युत्क्रम मुहाने में परिवर्तित कर दिया गया जहाँ नदी के मुख पर लवणता की मात्रा वास्तव में उच्च थी| कोलोराडो नदी ने हूवर बाँध के निर्माण से पूर्व प्राकृतिक बाढ़ का अनुभव किया था| बाँध ने प्राकृतिक बाढ़ को समाप्त कर दिया, जिसके कारण बाढ़ के अनुसार अनुकूलित हो चुकी कई प्रजातियाँ, जिनमें पौधे और पशुएँ दोनों शामिल हैं, खतरे में आ गए|
बाँध के निर्माण ने, बाँध से अनुप्रवाहित नदी में रहने वाली स्थानीय मछलियों की जनसंख्या को भी बहुत कम कर दिया है| कोलोराडो नदी में रहने वाली मछलियों की चार स्थानीय प्रजातियों को, U.S. फेडरल सरकार द्वारा वर्तमान में लुप्तप्रायः के रूप में सूचिबद्ध किया गया है, यह प्रजातियाँ हैं बोनिटेल चब, कोलोराडो पाइकमिनो, हम्पबैक चब और रेज़रबैक सकर| हूवर बाँध को कई फिल्मों में प्रदर्शित किया गया, जिनमें दी सिल्वर स्ट्रीक, सेबोटेओर, वेगास वेकेशन, चेरी 2000, ट्रांसफॉर्मर्स, विवा लॉस वेगास, युनिवर्सल सोल्जर, सुपरमैन और दर्जनों अन्य फिल्मों में शामिल हैं| कहते हैं, यह बाँध इंजीनियरिंग की दुनिया में कमाल माना जाता है| 
एरिज़ोना का मरुस्थल शुरू हो चुका था| हमें एक छोटी ड्राइव के बाद पहुँचना था किंग्समन शहर और फिर बोल्डरसिटी म्युनिसिपल एयर पोर्ट जहाँ हक्बेरी जनरल स्टोर है यहाँ से बेटी ने और मैंने पत्थरों की बनी कुछ गिफ्ट खरीदी| महँगा स्टोर था पर कुछ यादगारी तो लेनी ही थी सो ले ली| यहाँ से हेलीकॉप्टर से जाना था| हम थोड़ा विलम्ब से पहुँचे थे इंतज़ार करना पड़ा और तब तक भूख ने भी आक्रमण कर ही दिया था पर शाकाहारी मैं, तिवारीजी और बेटी कुछ हमारे मालवा जैसा चटपटा कचोरी समोसा तो मिलना नहीं था| बेटे दामाद ने आमलेट लिया और हमने बनाना ब्रेड और फल| मुझे मूँगफली और पकोड़े याद आये तो हँसी आ गई, पति देव ने पूछा कचोरी को याद कर रही हो, तो निकालो न इंदौरी सूखी कचोरी? भूल गई लाना| हेलीकॉप्टर में खिड़की मुझे मिली, पहला अनुभव था हेलीकॉप्टर का,हमें बेल्ट लगाना था उसी में लगा था हेडफोन, उड़ चले थे एक नए अनुभव की ओर| पहले आया हरा हरा सा दिखता बोल्डर सिटी फिर पिच-स्प्रिंग और फिर ग्रैंड कैन्यन जहाँ कोलोराडो नदी और उसकी सहायक नदियों ने रचा था एक अनोखा लैंडस्केप| बेहद रूखे क्षेत्र में कहीं-कहीं कुछ कँटीली झाड़ियाँ दिखाई दे रही थीं पर मरुस्थल का विस्तार तो रुखा और सुखा ही था, अगर हम हवाई मार्ग की जगह सड़क मार्ग से जाते तो किंगस्मन से स्ट्रेट रोड AZ 66 से 174 मील चलना पड़ता, पर तपती गर्म मरुभूमि का वीराना जिस पर परदेस। हवाई मार्ग ही ठीक लगा रेतीले पथरीले निर्जन-वीराने का एक अलग ही सम्मोहन महसूस हो रहा था| हमारा हेलीकॉप्टर पैचस्प्रिंग मे घूम रहा था चालक ने बताया कहीं-कहीं पहाड़ों के बीच बस्ती भी है कैनियन की गुफाओं और कुटिया जैसे घरों में अमेरिका के मूल वासी इतिहास काल से निवास करते हैं| देख रही थी मैं धरती की अरबों साल की भौगोलिक यात्रा 450 किलोमीटर लम्बी और 1,800 मीटर से भी ज्यादा खड़ी गहराई। याद आती है एक कहावत-- -करत- करत अभ्यास के, जड़मति होत सूजान, रस्सी आवत जात के सील पर पड़त निशान| ओह चट्टानों पर पानी की धार के निशान साफ दिखाई दे रहे थे| कोलोराडो नदी तुम पुरातन काल से यहाँ अपनी उपस्थिति के प्रमाण बना रही हो, चट्टानों से लड़ रही हो, आखिर क्यों? हेलीकॉप्टर उतर रहा है धीरे-धीरे जमीन पर| पहले से उतरा हेलीकॉप्टर उड़ान भरने को है, लाल भूरे रंग की ज़मीन पर हम खड़े सामने धीर-समीर नदी है काँच जैसा पानी, ग्रैंड कैन्यन घाटी संयुक्त राज्य अमेरिका के एरिज़ोना राज्य से होकर बहने वाली कोलोराडो नदी की धारा से बनी तंग घाटी है। यह घाटी अधिकांशत :ग्रैंड कैन्यन नेशनल पार्क से घिरी है जो अमेरिका के सबसे पहले राष्ट्रीय उद्यानों में से एक था ।इस स्थान पर पहुँचने वाले पहले यूरोपीय यात्री स्पेन के गार्सिया लोपेज दि गार्सेनाज थे जो यहाँ १५४० में पहुँचे थे। नए परीक्षणों के बाद भू-विशेषज्ञों का कहना है कि कोलोराडो बेसिन एक करोड़ सत्तर लाख वर्ष पूर्व बना था। वर्ष २००८ में इस नई खोज को प्रकाशित किया गया था जो घाटी से मिले कैल्साइट की यूरेनियम जाँच के बाद प्रकाश में आया था। हालाँकि बाद में इस खोज पर बहुत विवाद भी हुआ था। लगभग २० करोड़ वर्ष पूर्व कोलोराडो नदी और उसकी सहायक नदियों ने इस क्षेत्र को परत दर परत काटा था और कोलोराडो पठार ऊपर उठता गया था| चालक कहने लगा-“वर्ष २००८ में इस नई खोज को प्रकाशित किया गया था जो घाटी से मिले कैल्साइट की यूरेनियम जाँच के बाद प्रकाश में आया था। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट ने पिछली शताब्दी के आरंभ में ग्रैंड कैन्यन पार्क को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किया था। आज यह कई प्राणियों को संरक्षण देता है। कोलोराडो नदी में भी पर्यटक कई तरह के जल-क्रीड़ा (वाटर स्पोर्ट्स) का आनंद भी उठाते हैं। इस विशालकाय घाटी को देखने के लिए पर्यटकों को हवाई जहाज की सुविधा भी मिलती है। एक विशाल प्राकृतिक अजूबे के साथ ही ग्रैंड कैन्यन अमेरिका के सबसे बड़े पर्यटक केंद्रों में से एक है। ग्रैंडव्यू पाइंट से ग्रैंड कैन्यन और ब्लू आवर, ग्रैंड कैन्यन का आलौकिक दृश्य, सामने दूर तक अनंत विस्तार लिए पहाड़ों में अनेकानेक खाइयों से तराशी पत्थरों के अलग-अलग लाल-भूरे, धूसर-मटमैले, शाहबलूती-सुनहरे रंगों की कलाकृतियाँ दो बिलियन सालों का धरती के विकास का  भूगर्भीय प्रमाण बिखरा पड़ा था। सालों साल हुई धरती की कोख में ज्वालामुखीय हलचल का  एक अमूल्य  दस्तावेज़। जहाँ आग्नेय चट्टानें पठारों के रूप मे ऊपर  उठती गईं| आश्चर्य होता है कि कोलोरोड़ो नदी की मंद-मंथर गति भी पत्थरों को इस तरह काट अपने अस्तित्व का संघर्ष कर रही है। पल्लवी मेरा हाथ खींचती नदी के किनारे ले गई फोटो खींचने| फोटो तो मैंने पत्थरों, कँटीली झाड़ियों कैक्टस सब के लिये। नदी मुझे पास बुलाती रही शायद अपने गहन गहराइयों मे दबे राज़ सुनाना चाहती हो। मुख्य खाई घोड़े की नाल के आकार की है| गाइड कहता यह  अँग्रेजी अक्षर C का आकार है मुझे शिवलिंग सा लगता है आस्तिक होने के ही फायदे हैं ये| मैं नमन  कर लेती हूँ शिवलिंग हो ना हो प्रकृति का कृतित्व तो है ही। सामने के ये पठार विष्णु टेम्पल कहलाते हैं अपने आकार प्रकार से। भूख तेज़ हो जाती हमारा लंच शाकाहारी लिखवाया था पर माँसाहारी निकला बियर, आइसक्रीम और बनाना सेकाम चलाना पड़ा पैसे वापस दिये| नैसर्गिक सौंदर्य का रोमांचक अनुभव जिसमें पानी इंद्रधनुष दिखाई देता है । समय हो गया वापस चलने का हेलीकॉप्टर चालक अब मित्र बन गए| खूब फोटो खींचने के बादफिर उड़ान वीराने से सघन मानवीय आबादी वाले लॉस वेगास। प्लान बनता है क्यों ना कल आधा दिन है स्काय वॉक भी कर लें-- -- --कोलोराडो तुम हमेशा याद रहोगी| मैं हेलीकॉप्टर में आने के पहले दोनों हाथ
ऊपर करती हूँ पिता को आवाज लगाती-- -- -- -- -- --देखो पापा आज मैंने अजूबा देख लिया-- -- -- -- -

देखी मैंने एक नदी, गाती रीति रेत हुई
मरुस्थली चट्टानों से वह खूब लड़ी
बढ़ती चली, बहती गई, बाँधी गई, साधी गई,
फिर भी वह न ठहर सकी
झुकी नहीं, टूटी नहीं, मुड़-मुड़कर वह निकल चली|
-स्वाति तिवारी

हनुवंतिया टूरिस्ट कॉम्पलेक्स- एक आह्लादकारी अनुभव-शिवराज सिंह चौहान

कहा जाता रहा है कि आराम हराम है । हमें कर्मठ होने और हमेशा व्यस्त रहने की शिक्षा दी जाती रही है। यह बहुत अच्छी बात है। इससे हम अपने काम को पूरी सफलता से कर पाते हैं। लेकिन यह बात भी उतनी ही सही है कि काम ही काम करते रहने से जीवन उबाऊ और नीरस होने लगता है। इससे हमारी शारीरिक और मानसिक क्षमताओं पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। इससे बचने के लिये हमें समय-समय पर आमोद-प्रमोद भी करते रहना चाहिये। अगर यह मनोरम प्रकृति की गोद में संभव हो, तो इसका कोई जवाब ही नहीं है। इसीलिये हमारे पूर्वजों ने देशाटन और पर्यटन को बहुत अधिक महत्व दिया।
अपनी सिंगापुर यात्रा में मेरा 'सेन्टोसा आइलेण्ड' जाना हुआ। वहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता ने मुझे मंत्र-मुग्ध कर दिया। उस आइलेण्ड को जिस तरह अदभुत पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है, उससे मुझे प्रेरणा मिली कि मध्यप्रदेश में भी ऐसा कोई स्थल विकसित किया जाये। तत्काल मेरे मन में नर्मदा सागर बाँध के बेकवाटर में उभरे हनुवंतिया का चित्र उभर आया। वहाँ की मनोहारी प्राकृतिक सुषमा, सघन वन प्रांत और सुन्दर दृश्यावलियों को देखते हुए इससे सुन्दर स्थान कोई नहीं हो सकता।
संत के हदृय जैसे ‍िनर्मल नर्मदा जल की लहरों ने मुझे बचपन से ही बहुत आकर्षित किया है। माँ नर्मदा की लहरों में अठखेलियाँ करते हुए मेरा बचपन बीता। नर्मदा के तटों पर साधु-संतों के आश्रम, मंदिर और अन्य धार्मिक स्थान युगों-युगों से योगियों, सन्यांसियों, यायावरों और गृहस्थ श्रद्धालुओं को आकर्षित करते रहे हैं। लेकिन इन अनूठे प्राकृतिक स्थल में ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ लोग आमोद-प्रमोद कर सकें और परिवार के साथ वीकेण्ड मना सकें।
भोपाल लौटते ही मैंने पर्यटन विकास निगम के अधिकारियों को अपना विचार बताया। उन्हें यह बहुत अच्छा लगा। देखते ही देखते उन्होंने रात-दिन मेहनत कर इसे यथार्थ में बदल दिया। अब चुनौती यह है कि इस स्थान से अधिक से अधिक लोगों को किस तरह परिचित करवाकर उन्हें आकर्षित किया जाये। भागमभाग भरी जिन्दगी में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो प्राकृतिक स्थलों पर परिवार और प्रियजनों के साथ कुछ समय बिताना चाहते हैं। इसके लिये हनुवंतिया पर टूरिस्ट कॉम्पलेक्स बनाया गया है जहाँ बहुत अच्छी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

पर्यटन में मार्केटिंग का बहुत महत्व है। इसीको देखते हुए हमने हनुवंतिया में क्रूज 'नर्मदा क्वीन' पर मंत्रि-परिषद् की बैठक की। इसमें हमने पर्यटन को बढ़ावा देने के संबंध में अनेक निर्णय लिये। वहीं मैंने टूरिस्ट कॉम्पलेक्स का भी लोकार्पण किया।
हनुवंतिया में 12 से 21 फरवरी तक जल-महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस रंगारंग महोत्सव में पर्यटकों के साथ-साथ टूर और ट्रेवल कम्पनियों को भी आमंत्रित किया गया है। उन्हें इस स्थान पर पर्यटन को बढ़ावा देने की संभावनाओं को देखने का अवसर प्राप्त होगा। जल महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम, एडवेंचर स्पोर्टस गतिविधियाँ, पतंगबाजी, वॉलीबाल, केम्पफायर, स्टार ग्रेजिंग, साइकिलिंग, पैरा मोटरिंग, पैरा सेलिंग, हॉट एयर बलून, बर्ड वाचिंग जैसी अनेक गतिविधियाँ होंगी।

और हाँ, खाने-पीने के शौकीनों के लिये वहाँ फूड जोन भी होगा। जहाँ विशेषकर मालवा और निमाड़ के व्यंजनों का स्वाद चखने को मिलेगा। स्थानीय कला, संस्कृति और शिल्पों का भी अदभुत समागम होगा। समुद्र की तरह विस्तृत नर्मदा जल पर क्रूज शिप में घूमने का आनन्द भी अविस्मरणीय रहेगा। मैं यह बात दावे से कह सकता हूँ कि हनुवंतिया में कुछ समय बिताने से निश्चय ही जीवन में नई ताजगी आयेंगी। जल महोत्सव का आनन्द तो अविस्मरणीय होगा ही। तो फिर इंतजार किस बात का? कीजिये हनुवंतिया जाने की तैयारी।

3.74 करोड़ नौकरियों का मजबूत क्षेत्र है ट्रैवल एंड टूरिज्म वीजा व इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारों के चलते देश की ट्रैवल व टूरिज्म इंडस्ट्री उन्नति की ओर अग्रसर है। इस वर्ष 7.5 प्रतिशत की दर से बढ़ता यह सेक्टर साल के अंत तक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 3.74 करोड़ नौकरियां देगा।
ट्रैवल व टूरिज्म इंडस्ट्री देश के सबसे बड़े विदेशी मुद्रा अर्जक क्षेत्राें में से एक है। जीडीपी में अहम योगदान देने के साथ-साथ रोजगार के लिहाज से भी यह सेक्टर अग्रणी है। वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय ट्रैवल एंड टूरिज्म इंडस्ट्री इस साल 7.5 प्रतिशत की दर से ग्रोथ की ओर अग्रसर है और साल के अंत तक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 3.74 करोड़ नौकरियां देगी। केपीएमजी व सीआईआई की रिपोर्ट के मुताबिक 2012 में इस सेक्टर ने प्रत्यक्ष रूप से 2.5 करोड़ जॉब्स दी हैं और 2023 तक यह आंकड़ा 3.1 करोड़ होगा। वास्तविकता में तेजी से आगे बढ़ता यह सेक्टर नई नौकरियों के सृजन में अहम भूमिका निभा रहा है। बीते सालांे में पर्यटन क्षेत्र में भारत की मजबूत स्थिति ने इस ट्रेंड को बढ़ावा दिया है। डब्ल्यूटीटीसी रिपोर्ट के मुताबिक इस साल के अंत तक विश्व स्तर पर यह क्षेत्र प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 28 करोड़ 40 लाख नौकरियां उपलब्ध करवाएगा। असल में वीजा व इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारों के चलते देश के पास इस क्षेत्र में बेहतरीन अवसर हैं। साथ ही सरकारी इनिशिएटिव्स, इंडस्ट्री सहभािगता, स्टार्ट अप वेंचर्स के साथ भारत का लाेकप्रिय टूरिस्ट डेस्टिनेशन होना इस सेक्टर की ग्रोथ में अहम योगदान दे रहा है।

कैसे ले सकते हैं एंट्री

12वीं या ग्रेजुएशन के बाद आप शुरुआत कर सकते हैं। इस क्षेत्र में ग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट, डिप्लोमा व सर्टिफिकेशन कोर्स उपलब्ध हैं। इतना ही नहीं मास्टर्स ऑफ टूरिज्म एडमिनिस्ट्रेशन जैसे स्पेशलाइज्ड कोर्स भी योग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने में मददगार हैं। विदेशी भाषा के जानकारों व अच्छी कम्यूनिकेशन स्किल्स की इस क्षेत्र में मांग है। इसके अलावा सरकारी संस्थानों में ऑपरेशनल जॉब्स के लिए ट्रैवल व टूरिज्म में डिग्री जरूरी है।

क्षेत्र जहां बढ़ेंगे अवसर

मेडिकल टूरिज्म: एसोचैम का अनुमान है कि 2011 से 2015 के बीच भारत का मेडिकल टूरिज्म सेक्टर करीब 110 अरब रुपए का हो सकता है। तेजी से बढ़ता यह बाजार नौकरियों के नए अवसर पैदा करेगा।
बिजनेस ट्रैवल: जीबीटीए की रिपोर्ट के अनुसार बिजनेस ट्रैवलर्स की बढ़ती संख्या के चलते भारत दुनिया में दसवां सबसे बड़ा बिजनेस ट्रैल मार्केट है। मीटिंग्स, इनसेन्टिव्स, कॉन्फ्रेंसेस/कन्वेंशंस व एग्जीबिशंस (माइस) बिजनेस भी देश की टूरिज्म इंडस्ट्री में योगदान देने वाला प्रमुख क्षेत्र है जहां घरेलू माइस सेग्मेंट 15-20% की दर से बढ़ रहा है।

ऑनलाइन टूरिज्म: आंकड़ों के अनुसार यह सेक्टर भारत में 30 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी करेगा। जाहिर है नौकरी के लिए भी अच्छे अवसर यहां पैदा होंगे।

कहां मिलेगा काम

सरकारी पर्यटन विभाग, इमिग्रेशन व कस्टम सर्विसेज, ट्रैवल एजेंसियां, टूर ऑपरेटर्स व होटल प्रमुख सर्विस एरिया हैं जो जॉब्स दे रहे हैं। ट्रांसपोर्ट विभाग, फॉरेन एक्सचेंज, वीजा सर्विसेज, टूरिस्ट इंफॉर्मेशन ऑफिसेज, क्रूज लाइनर्स, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय टूरिज्म बोर्ड्स, ट्रैवल बीपीओ भी इस क्षेत्र के प्रमुख रिक्रूटर हैं। फ्रंट ऑफिस मैनेजमेंट, एचआर, बिजनेस डेवलपमेंट, पीआर व ईवेंट मैनेजमेंट से जुड़े पेशेवरों को यह इंडस्ट्री अच्छे अवसर देती है। इसके अलावा टूर मैनेजर, ट्रैवल प्रॉडक्ट डिजाइनर, ट्रैवल एजुकेटर के साथ-साथ पासपोर्ट, वीजा हैंडल करने वाले प्रोफेशनल्स, डेस्टिनेशन मैनेजर, ट्रैवल कंसल्टेंट्स की मांग भी यहां तेजी से बढ़ रही है।

इंडस्ट्री फैक्ट फाइल

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल टूरिज्म इंडेक्स 2015 में भारत 52वें स्थान पर है। 2013 में यह 65वें स्थान पर था।
2013-23 के बीच भारतीय टूरिज्म सेक्टर 7.9% की औसत दर से बढ़ेगा। साथ ही अगले दशक में तेजी से बढ़ती टूरिज्म इंडस्ट्री वाले देशों में भारत तीसरे स्थान पर होगा।
2015 के अंत तक ट्रैवल एंड टूरिज्म सेक्टर 3.74 करोड़ नौकरियां देते हुए कुल रोजगार का 9% हिस्सेदार होगा। 2025 तक इस सेक्टर में 4.6 करोड़ नौकरियां पैदा करने की क्षमता है।
डब्ल्यूटीटीसी सर्वे के अनुसार देश में महाराष्ट्र टॉप टूरिज्म डेस्टिनेशन है जहां पिछले वर्ष 45 लाख विदेशी और 84 लाख घरेलू पर्यटक पहुंचे। सर्वे में राज्यों की रैंकिंग रही-

1. महाराष्ट्र
2. दिल्ली
3. गोवा
4. कर्नाटक
5. तमिलनाडु


अर्थव्यवस्था मजबूत करने, लोगों में प्रसन्नता का स्तर बढ़ाने पर्यटन को मिलेगा भरपूर प्रोत्साहन
ुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाओं का दोहन रोजगार के अवसर निर्मित करने, अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और लोगों में प्रसन्नता का स्तर बढ़ाने के लिए किया जायेगा। उन्होंने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार निर्माण की असीम सम्भावनाएँ हैं। प्रदेश को सिर्फ ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जरुरत है। पर्यटन का विकास प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाएगा। श्री चौहान ने आज यहां सैर सपाटा में आयोजित भव्य समारोह से मध्यप्रदेश पर्यटन वर्ष 2015-16 का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर गृह मंत्री श्री बाबूलाल गौर भी उपस्थित थे।
श्री चौहान ने कहा कि पर्यटन वर्ष के एक साल में पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश पूरी तरह स्थापित हो जायेगा। उन्होंने कहा कि हेरिटेज टूरिज्म के साथ सांस्‍कृतिक पर्यटन को भी बडे पैमाने पर बढ़ावा दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि आम लोगो के सहयोग से ही पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सबसे ज्यादा पर्यटन स्थलों वाला प्रदेश है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय उद्यानों में बरसात में भी बफर जोन में पर्यटन की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है। वन्य प्राणियों को पास से देखने की योजना पर भी विचार चल रहा है।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा ने कहा की प्रदेश में पर्यटकों की संख्या 6 करोड़ 30 लाख तक बढ़ गयी है। इसे 10 करोड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया की पर्यटन प्रबंधन और प्रोत्साहन के क्षेत्र में प्रदेश को अब तक 61 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार मिले हैं। उन्होंने बताया की ग्वालियर, भोपाल, इंदौर और जबलपुर में साल भर, हर महीने सांस्‍कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। जिला पर्यटन विकास परिषदें भी पर्यटन स्थलो की ब्रांडिंग करेगी।
ट्रेवल और टूर ऑपरेटर्स की ओर से प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये संकल्प पारित किया गया। इंडिया ट्रेवल एंड टूर ऑपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री सुभाष गोयल ने मुख्यमंत्री को संकल्प पत्र सौंपा।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पर्यटन वर्ष का केलेण्डर जारी किया। भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की समय-सारणी और नर्मदा दर्शन का टूर पेकेज जारी किया।
प्रदेश के व्यंजनों पर आधारित कॉफी टेबल बुक, पर्यटन गतिविधियों पर त्रैमासिक न्यूज़ लेटर का विमोचन किया। उन्होंने मध्यप्रदेश पर्यटन की नए रंग रूप में बनाई गयी वेबसाइट का विमोचन किया और पर्यटन प्रोत्साहन एवं प्रचार पर आधारित सोशल मीडिया अभियान की भी शुरुआत की और प्रचार वाहन रवाना किया। श्री चौहान ने प्रसिद्ध चित्रकार श्री नरेश कपूरिया की नर्मदा पर 600 फिट पेंटिंग का भी विमोचन किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सिंहस्थ पर लगाई गई प्रदर्शनी का शुभारंभ भी किया।
इस अवसर पर सांसद श्री आलोक संजर, विधायक गण सर्वश्री रामेश्वर शर्मा, सुरेन्द्र नाथ सिंह, विश्वास सारंग, विष्णु खत्री, मुख्य सचिव श्री अंटोनी डिसा, प्रबंध संचालक पर्यटन विकास निगम श्री अश्विनी लोहानी। सचिव मुख्यमंत्री श्री हरिरंजन राव एवं बड़ी संख्या में पर्यटक उपस्थित थे


44 हजार में भोपाल से दुबई की सैर 6 दिन में
नईदिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की मिनीरत्न दर्जा प्राप्त कंपनी इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईआरसीटीसी) ने विदेश भ्रमण करने वाले पर्यटकों के लिए पहली बार विदेशी टूर पैकेज शुरू करने की घोषणा की है। शुरुआती पैकेज भोपाल से दुबई भ्रमण का है। बाद में अन्य आकर्षक पैकेज भी आ सकते हैं।
आईआरसीटीसी के प्रबंध निदेशक आर. के. टंडन ने बताया कि शुरुआत में भोपाल से दुबई के पांच रात्रि/छह दिन का पैकेज लांच किया जा रहा है, जिसमें पर्यटकों को मुंबई हवाईअड्डे से दुबई ले जाया जाएगा। वहां थ्री या फोर स्टार होटल में रुकने की व्यवस्था होगी। पर्यटकों को वहां सिटी टूर कराया जाएगा, क्रूज पर घुमाया जाएगा और डेजर्ट सफारी का भ्रमण कराया जाएगा। दुबई में पर्यटकों का मुख्य आकर्षण बुर्ज खलीफा पर चढऩे का मौका भी पर्यटकों को मिलेगा। इस पैकेज की कीमत 44,270 रुपए प्रति व्यक्ति रखी गई है। उन्होंने बताया कि यात्रा की शुरुआत भोपाल से होगी। यात्रियों को भोपाल से मुंबई एसी टू टीयर में ले जाया जाएगा। वहां से एयरपोर्ट जाने के लिए एसी कोच की व्यवस्था होगी। हवाई जहाज में इकोनॉमी क्लास का टिकट दिया जाएगा। पहले दिन ही पर्यटकों को 163 मंजिल के बुर्ज खलीफा का भ्रमण कराया जाएगा। इसके अलावा दुबई के स्थायी आकर्षण भी टूर में शामिल होंगे। वापसी में पर्यटकों को हवाईजहाज से मुंबई लाया जाएगा और वहां से भोपाल तक की यात्रा रेलगाड़ी में एसी टू टियर में होगी। पैकेज की कीमत में यात्रा टिकट, सभी वक्त का खाना-पीना, हवाईजहाज का टिकट, एयरपोर्ट टैक्स, वीजा शुल्क, साइट सीइंग, अंग्रेजी बोलने वाले गाइड की व्यवस्था आदि का शुल्क शामिल है। एक बार भोपाल में ट्रेन में चढ़ जाने के बाद यात्रा में सभी तरह के आवश्यकता को पूरा करने की जिम्मेदारी कंपनी की होगी। पहला टूर 21 अगस्त को भोपाल से शुरू होगा।



राजस्थान का स्‍वर्ग:
माउंट आबू
माउंट आबू की प्राकृतिक खूबसूरती इसे राजस्थान का स्‍वर्ग बनाती है. माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है। नीलगिरी की पहाड़ियों पर बसे माउंट आबू की भौगोलिक स्थित और वातावरण इसे राजस्थान के अन्य शहरों से भिन्न व मनोरम बनाता है। यह स्थान राज्य के अन्य हिस्सों की तरह गर्म नहीं है।
समुद्र तल से 1220मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट आबू हिन्दु और जैन धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल है। यहां का ऐतिहासिक मंदिर और प्राकृतिक खूबसूरती सैलानियों को बरबस ही अपनी ओर खींचती है। माउंट आबू पहले चौहान साम्राज्य का हिस्सा था। बाद में सिरोही के महाराजा ने माउंट आबू को राजपूताना मुख्यालय के लिए अंग्रेजों को पट्टे पर दे दिया। ब्रिटिश शासन के दौरान माउंट आबू मैदानी इलाकों की गर्मियों से बचने के लिए अंग्रेजों का पसंदीदा स्थान था। माउंट आबू प्राचीन काल से ही साधु संतों का निवास स्थान रहा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार हिन्दु धर्म के तैंतीस करोड़ देवी देवता इस पवित्र पर्वत पर भ्रमण करते हैं। कहा जाता है कि महान संत वशिष्ठ ने पृथ्वी से असुरों के विनाश के लिए यहां यज्ञ का आयोजन किया था। जैन धर्म के चौबीसवें र्तीथकर भगवान महावीर भी यहां आए थे। उसके बाद से माउंट आबू जैन अनुयायियों के लिए एक पवित्र और पूज्यनीय तीर्थस्थल बना हुआ है। आइए जानते हैं की माउंट आबू में देखने लायक क्या है -
दिलवाड़ा जैन मंदिर
इन मंदिरों का निर्माण ग्यारहवीं और तेरहवीं शताब्दी के बीच हुआ था। यह शानदार मंदिर जैन धर्म के र्तीथकरों को समर्पित हैं। दिलवाड़ा के मंदिरों में विमल वासाही मंदिर प्रथम र्तीथकर को समर्पित सर्वाधिक प्राचीन है जो 1031 ई.में बना था। दिलवाड़ा जैन मंदिर परिसर में पांच मंदिर संगमरमर का हैं। मंदिरों के लगभग 48स्तम्भों में नृत्यांगनाओं की आकृतियां बनी हुई हैं। दिलवाड़ा के मंदिर और मूर्तियां मंदिर निर्माण कला का उत्तम उदाहरण हैं।
नक्की झील
नक्की झील माउंट आबू का एक बेहतरीन पिकनीक स्थल है। झील से चारों ओर के पहाड़ियों का नजारा बेहद सुंदर दिखता है। इस झील में नौकायन का भी आनंद लिया जा सकता है।
सनसेट प्वाइंट
नक्की झील के दक्षिण-पश्चिम में स्थित सनसेट प्वांइट से डूबते हुए सूरज की खूबसूरती को देखा जा सकता है। यहां से दूर तक फैले हरे भरे मैदानों के दृश्य आंखों को सुकून पहुंचाते हैं। सूर्यास्त के समय आसमान के बदलते रंगों की छटा देखने सैकड़ों पर्यटक यहां आते हैं।
गोमुख मंदिर
इस मंदिर परिसर में गाय की एक मूर्ति है जिसके सिर के ऊपर प्राकृतिक रूप से एक धारा बहती रहती है। मंदिर में अरबुआदा सर्प की एक विशाल प्रतिमा है। संगमरमर से बनी नंदी की आकर्षक प्रतिमा को भी यहां देखा जा सकता है।
वन्यजीव अभ्यारण्य
यह अभ्यारण्य मांउट आबू का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। यहां मुख्य रूप से तेंदुए, स्लोथबियर,वाइल्ड बोर,सांभर,चिंकारा और लंगूर पाए जाते हैं। 288वर्ग किमी.में फैले इस अभ्यारण्य की स्थापना 1960में की गई थी। यहां पक्षियों की लगभग 250और पौधों की 110से ज्यादा प्रजातियां देखी जा सकती हैं।
अचलगढ़ किला व मंदिर
यह किला और मंदिर दिलवाड़ा के मंदिरों से 8 किमी. उत्तर पूर्व में स्थित हैं। पहाड़ी के तल पर 15वीं शताब्दी में बना अचलेश्वर मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है। कहा जाता है कि यहां भगवान शिव के पैरों के निशान हैं। नजदीक ही 16वीं शताब्दी में बने काशीनाथ जैन मंदिर भी हैं।
गुरु शिखर
गुरु शिखर अरावली पर्वत श्रृंखला की सबसे ऊंची चोटी है। पर्वत की चोटी पर बने इस मंदिर की शांति दिल को छू लेती है। मंदिर की इमारत सफेद रंग की है। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार दत्तात्रेय को समर्पित है। मंदिर से कुछ ही दूरी पर पीतल की घंटी है जो माउंट आबू को देख रहे संतरी का आभास कराती है।
कैसे जाएं माउंट आबू
वायु मार्ग
निकटतम हवाई अड्डा उदयपुर यहां से 185 किमी.दूर है। उदयपुर से माउंट आबू पहुंचने के लिए बस या टैक्सी की सेवाएं ली जा सकती हैं।
रेल मार्ग
नजदीकी रेलवे स्टेशन आबू रोड 28किमी.की दूरी पर है जो अहमदाबाद,दिल्ली,जयपुर और जोधपुर से जुड़ा है।
सड़क मार्ग
माउंट आबू देश के सभी प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग के जरिए जुड़ा है। दिल्ली के कश्मीरी गेट बस अड्डे से माउंट आबू के लिए सीधी बस सेवा है। राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें दिल्ली के अलावा अनेक शहरों से माउंट आबू के लिए अपनी सेवाएं मुहैया कराती हैं।


दार्जिलिंग यानी क्वीन ओफ हिल्स
क्वीन ओफ हिल्स के नाम से मशहूर दार्जिलिंग यानी एक ऐसी खूबसूरत जगह जो आपके दिल और दिमाग़ को सुकून पहुँचने के लिए ही ईश्वर ने बनाई है. दार्जिलिंग की यात्रा का एक खास आकर्षण हरे भरे चाय के बागान हैं। हजारों देशों में निर्यात होने वाली दार्जिलिंग की चाय सबको खूब भाती हैं। समुद्र तल से लगभग 6812फुट की उंचाई पर स्थित इस शहर की सुन्दरता को शब्दों में बयां करना बहुत कठिन हैं।
दार्जिलिंग कभी सिक्किम का हिस्सा हुआ करता था। अंग्रेजो ने इसे 1835 में लीज पर लेकर हिल स्टेशन की तरह विकसित करना शुरू किया. फिर चाय की खेती और दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की स्थापना और फिर शैक्षणिक संस्थानों की शुरुआत भी हुई। पश्चिम बंगाल में स्थित दार्जिलिंग की यात्रा न्यू जलपाईगुड़ी नामक शहर से शुरु होती है। बर्फ से ढके सुंदर पहाड़ो का दृश्य अतिमनोहरिय होता हैं। टॉय ट्रेन में यात्रा इसमें चार चांद लगा देती है। यह ट्रेन दार्जिलिंग के प्रसिद्ध हिल स्टेशन की सुंदर वादियों की सैर कराती है। दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे को 1999 में यूनेस्को द्धारा विश्व धरोंहरों की सूची में शामिल कर लिया गया था। इस सुन्दर पहाड़ी क्षेत्र के बहुत से गांव रेलपथ के निकट ही हैं। दार्जिलिंग जाते समय रास्ते में पडने वाले जंगल, तीस्ता और रंगीत नदियों का संगम देखने योग्य है। चाय के बगान और देवदार के जंगल भी अच्छा दृश्य बनाते हैं। टाइगर हिल पर ठहरकर समय व्यतीत करना, चाय बगान, नैचुरल हिस्ट्री म्यूजियम जैसी बहुत आर्कषण जगह है जो मन को मोह लेती है।

 
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