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ग्रामीण भारत


D-83252/24-3-18


ग्रामीण अंचलों का औचक निरीक्षण करेंगे मुख्यमंत्री श्री चौहान
19 Jun 2018
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उज्जवला योजना से महिलाओं के स्वास्थ्य को सुरक्षा कवच मिला है। साथ ही वन-संपदा और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित हुआ है। इस योजना से गरीब परिवारों की महिलाओं ने राहत की सांस ली है। शहडोल जिले के ग्राम पडमनिया की विशेष पिछड़ी जनजाति की रामरति बैग पति धनू बैगा को 70 वर्ष की उम्र में उज्जवला योजना से चूल्ह के धुएँ से मुक्ति मिली है। उज्जवला योजना में रामरति को सरकार की ओर से नि:शुल्क गैस चूल्हा और गैस सिलेण्डर अभी हाल ही में सोहागपुर जनपद मुख्यालय में हुए शिविर में मिला है। अब उम्र के इस पड़ाव में रामरति को लकड़ी इकट्ठा करने जंगल नहीं जाना पड़ता। चूल्हे की तरह बर्तन गंदे नहीं होते। रामरति को चूल्हे के धुएँ से हो रही खांसी और आँखों की जलन से भी मुक्ति मिल गई है। नीमच जिले में भगवानपुरा की सपना भैरुलाल, ग्वालटोली की ममता यादव, सोनिया बैरागी और पूजा मेहर सहित करीब 35 गरीब परिवारों की महिलाओं को भी उज्जवला योजना में नि:शुल्क गैस चूल्हा और गैस सिलेण्डर मिला है। अब ये महिलाओं परिवार का भोजन कम समय में बना लेती हैं और बाकी समय को बच्चों की पढ़ाई और देखभाल में लगाती हैं
ग्रामीण अंचलों का औचक निरीक्षण करेंगे मुख्यमंत्री श्री चौहान
11 May 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि समाज के गरीबों, ग्रामीणों और किसानों के लिये संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत जानने के लिये वे ग्रामीण अंचलों का औचक निरीक्षण करेंगे। मुख्यमंत्री ने सीहोर जिले में नसरूल्लागंज तहसील के ग्राम बीजला में ग्रामीणों से जन-संवाद करते हुए यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ग्रामीणों को बताया कि प्रदेश में किसानों, गरीबों, श्रमिकों और अन्य जरूरतमंद लोगों के उत्थान के लिये अभियान चलाकर महत्वपूर्ण योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि इस अभियान के दौरान अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और निष्ठा से करें। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि घर और समाज में बेटियों को सम्मान दें, गाँव में स्वच्छता और पौध रोपण के लिये एकजुट होकर कार्य करें। मुख्यमंत्री जन-संवाद के दौरान जिले के प्रभारी मंत्री श्री रामपाल सिंह, वन विकास निगमाध्यक्ष श्री गुरूप्रसाद शर्मा, वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन अध्यक्ष श्री राजेन्द्र सिंह राजपूत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती उर्मिला मरेठा सहित अन्य जन-प्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या मे ग्रामीणजन मौजूद थे।
आजीविका समूह और मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना से आत्म-निर्भर बनी ग्रामीण महिलाएँ
9 May 2018
प्रदेश में जरूरतमंदों को स्वयं का व्यवसाय शुरू करने में आजीविका मिशन और मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना मददगार साबित हो रही है। इस योजना का लाभ समाज की ग्रामीण महिलाओं ने भी आगे बढ़कर उठाया है। इन योजनाओं की मदद से ग्रामीण और जरूरतमंद महिलाएँ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव लाने में निरंतर सफलता अर्जित कर रही हैं। अनुपपूर जिले में विकासखंड पुष्पराजगढ़ के ग्राम किरगी की राजकुमारी जायसवाल साधारण ग्रामीण महिला की तरह परिवार का पालन-पोषण कर रही थीं। उनकी सिलाई की छोटी-सी दुकान थी, जिसे पति के साथ मिलकर चला रही थीं। राजकुमारी के मन में अपने इस कारोबार को बढ़ाने की प्रबल इच्छा थी, लेकिन पूँजी का न होना उनके लिये बहुत बड़ी समस्या थी। राजकुमारी को एक दिन म.प्र. राज्य ग्रामीण अजीविका मिशन के बारे में पता लगा, तो उसने आजीविका समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। इसके बाद तो राजकुमारी के जीवन में खुशहाली के सभी दरवाजे खुल गये। राजकुमारी ने आजीविका समूह से जुड़ने के बाद नियमित रूप से बचत करना शुरू कर दिया। समूह से पहली बार 20 हजार रुपये का ऋण लेकर दीपावली के मौके पर पटाखों का व्यापार किया। इस व्यापार से हुई आमदनी और ब्याज की राशि समूह को वापस लौटाने के बाद दूसरी बार 50 हजार रुपये का ऋण लिया। इस ऋण राशि को भी ब्याज सहित समूह को लौटा दिया। इन दो अनुभवों ने राजकुमारी की हिम्मत बढ़ा दी। इसके बाद उसने समूह से ऋण लेकर सिलाई के व्यवसाय को बढ़ाया। आज राजकुमारी के सिलाई सेन्टर में 6 अन्य महिलाएँ भी काम कर रही हैं। सेंटर चलाने का सब खर्च काटने के बाद इन्हें 8 से 10 हजार रुपये महीना आमदनी आसानी से हो रही है। अब राजकुमारी ने मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना में एक लाख रुपये का ऋण लेकर रेडीमेड गारमेंट की दुकान भी खोली है। उन्हें इस पर सब्सिडी भी मिली है। बी.एससी तक पढ़ी राजकुमारी जायसवाल ने महिला समूह और मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना के बारे में अपने गाँव की अन्य महिलाओं को भी बताया है। छिन्दवाड़ा जिले के सौसर की श्रीमती रोशनी वाकेकर को भी स्वयं का सिलाई सेंटर चलाने में मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना से भरपूर मदद मिली है। श्रीमती रोशनी पहले प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने का काम करती थीं और बचे हुए समय में घर में सिलाई का काम करती थीं। अपने सिलाई सेन्टर को बढ़ाना चाहती थीं, लेकिन पूँजी की समस्या थी। हाथकरघा कार्यालय में मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना में लोन का आवेदन दिया, तो एक लाख 50 हजार रुपये का ऋण मंजूर हो गया। ऋण के साथ सब्सिडी भी मिली। रोशनी ने नगरपालिका काम्पलेक्स की दुकान में दो सिलाई मशीन और पीको मशीन रखकर सिलाई का काम शुरू किया। इस दुकान से उसे अब सभी खर्च काटकर 5 से 6 हजार रुपये आमदनी हो रही है। आज रोशनी अपनी दुकान में जरूरतमंद महिलाओं को रियायती दर पर प्रशिक्षण देने का काम भी रही है। श्रीमती रोशनी बैंक को प्रति माह करीब 2 हजार 500 रुपये की मासिक किश्त नियमित रूप से लौटा रही हैं
पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधि निर्वाचन क्षेत्रों में ही अनुदान राशि का उपयोग करेंगे
20 February 2018
जिला एवं जनपद पंचायतों के निर्वाचित जन-प्रतिनिधि अपनी अनुदान राशि का उपयोग अपने निर्वाचन क्षेत्र में ही अधोसंरचना विकास के कार्यों के लिये ही कर सकेंगे। इस आशय के दिशा-निर्देश सोमवार को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी कर दिये गये हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सांसदों एवं विधायकों की तरह ही जनपद और जिला पंचायतों के निर्वाचित जन-प्रतिनिधियों को अनुदान राशि मुहैया करवाई जाती है। इसके तहत विकल्प पर जिला पंचायत के अध्यक्ष 25 लाख रुपये, उपाध्यक्ष 15 लाख रुपये तथा प्रत्येक निर्वाचित सदस्य 10 लाख रुपये की राशि के कार्य क्षेत्र में स्वीकृत कर सकेंगे। इसी प्रकार, जनपद पंचायत स्तर पर अध्यक्ष के विकल्प पर 12 लाख रुपये, जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष के विकल्प पर 8 लाख रुपये तथा जनपद पंचायत सदस्य के विकल्प पर 4 लाख रुपये के कार्य स्वीकृत किये जा सकते हैं। मंत्री श्री भार्गव ने बताया कि इस राशि के सदुपयोग के लिये पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। तदनुसार जिला पंचायत अध्यक्ष सम्पूर्ण जिले में, जनपद पंचायत अध्यक्ष अपने सम्पूर्ण जनपद पंचायत क्षेत्र में तथा जिला और जनपद पंचायत के सदस्य अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत अधोसंरचना विकास के कार्य स्वीकृत कर सकेंगे। राज्य शासन द्वारा स्वीकृत किये जा सकने वाले कार्यों के अंतर्गत सीमेंट-कांक्रीट रोड एवं नाली निर्माण, रपटा या पुलिया निर्माण, शासकीय भवन की बाउण्ड्री-वॉल, शासकीय भवनों का निर्माण, जिनमें सामुदायिक भवन, शाला भवन, आँगनवाड़ी भवन, स्वास्थ्य केन्द्र, शासकीय भवनों में अतिरिक्त कक्ष का निर्माण, यात्री प्रतीक्षालय निर्माण, शमशान-कब्रिस्तान बाउण्ड्री-वॉल, ग्राम चौपाल, रंगमंच निर्माण, सार्वजनिक चबूतरे, शासकीय सम्पत्तियों के भीतर पेवर ब्लॉक, एलईडी स्ट्रीट लाइट, सामुदायिक और शासकीय भवनों में शौचालय निर्माण, स्पॉट सोर्स नल-जल योजना, भू-स्तर टंकी का निर्माण, आर.ओ. वॉटर प्लांट के लिये इस राशि का उपयोग किया जा सकेगा। लेकिन पेयजल परिवहन पर व्यय, मुरमीकरण, ग्रेवल रोड, स्टॉप-डेम या चेक-डेम निर्माण, स्वागत-द्वार, सौर-ऊर्जा लाइट और पानी का टैंकर क्रय प्रतिबंधित रहेंगे। इन कार्यों के लिये सक्षम प्रशासकीय और तकनीकी स्वीकृति लिया जाना अनिवार्य होगा। क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में ग्राम पंचायत का ही चयन करना होगा। सहमति के आधार पर संबंधित विभाग द्वारा भी कार्य करवाया जा सकेगा। इन कार्यों का निरंतर पर्यवेक्षण भी किया जायेगा। कार्य स्वीकृति पंचायत दर्पण पोर्टल पर अपलोड करना जरूरी होगा। अनियमिता की शिकायत पर सरपंच और सचिव के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जायेगी।
एक सड़क ने बदला गांव का जीवन : खुले तरक्की के द्वार
19 February 2018
सीहोर जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर स्थित कोरकू आदिवासी बहुल ग्राम है सारस। यह ग्राम लोहा पठार से लगा हुआ है। इसके दाहिनी ओर कोलार डेम है। आजादी के बाद यहां पर पहली बार प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में डामरीकृत सड़क बनी है। सड़क की लंबाई 8.00 किमी. एवं लागत रूपये 274.77 लाख है। इस सड़क के बनने से ग्राम सारस की 794 आबादी एवं ग्राम मगरपाट की 514 आबादी लाभान्वित हुई है। पहले यह गांव सड़क विहीन था। यहां का रास्ता दुर्गम और जोखिम भरा था। आदिवासी बस्ती होने के बावजूद सड़क के अभाव में शासन की कोई भी विकास योजना गांव तक अपने वास्तविक रूप में नहीं पहुंच पा रही थी। वर्षाकाल में इस ग्राम का संपर्क मुख्य मार्ग से टूट जाता था। यहां तक कि ग्रामवासी स्वास्थ्य सुविधाओं से महरुम रह जाते थे। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना इस ग्राम के लिये वरदान बनकर आई, जिसके अंतर्गत ग्राम सारस को भोपाल कोलार मुख्य मार्ग से जोड़ दिया गया। साथ ही रास्ते में आने वाले नालों पर पुल-पुलियों का निर्माण किया गया। सड़क निर्माण के बाद ग्राम सारस के लोगों के लिये परम्परागत व्यवसायों के अतिरिक्त नई संभावनाओं के द्वारा भी खुले है। दुग्ध उत्पादन व्यवसाय से जुड़े शंकर सिंह कोरकू, रामलाल, जयसिंह का कहना है कि इस सड़क ने दुग्ध व्यवसाय को लाभकारी बना दिया है। अब वह किसी भी मौसम में शहर जाकर दूध बेच सकते है। पहले वर्षा ऋतु में धंधा बंद हो जाता था परन्तु पक्की सड़क बन जाने से बारह महीने आवागमन की सुविधा हो गई है। सड़क बन जाने के बाद प्रशासन के लोग आसानी से गांव तक पहुंचने लगे हैं। शासन की कई योजनाओं की जानकारी और उनका क्रियान्वयन आसान हो गया है। पहले हैंडपम्प खराब होने या बिजली खराब होने पर उसमें सुधार का कार्य होने में महीनों लग जाते थे। अब अधिकारियों तक शिकायत पहुंचने पर यह कार्य तत्काल हो जाते हैं। सड़क के कारण ग्राम में शिक्षक आसानी से पहुंच जाते हैं मध्यान्ह भोजन योजना का क्रियान्वयन भी आसानी से किया जा रहा है। गंभीर बीमारी अथवा प्रसव की स्थिति में मरीज को तुरन्त जिला अस्पताल सीहोर या भोपाल ले जाया जाता है जिससे कई जान बच जाती है। अब गांव तक आटो रिक्शा और अन्य वाहन चलने लगे हैं जिससे आवागमन भी आसान हो गया है। किसान अपनी फसल मंडी तक आसानी से ले जा रहे है।
ग्राम हड़हा वासियों को मिले पक्के घर
18 February 2018
प्रधानमंत्री आवास योजना उमरिया जिले की जनपद पंचायत पाली के ग्राम हड़हा में बैगा जनजाति एवं अनुसूचित जाति के कोरी परिवार तथा पिछड़ा वर्ग के विश्वकर्मा परिवारों के लिये नया सवेरा लेकर आई है। इन परिवारों को अपने घर मिल गये हैं। ग्राम हड़हा के भूखन कोरी सात सदस्यीय परिवार के साथ पुस्तैनी कच्चे आवास में रह रहे थे। घर बरसात में टपकता था, खेती एवं मजदूरी से इतनी आय नहीं हो पाती थी कि परिवार की आवश्यकता के अनुसार अच्छा घर बनवा सकें। वर्ष 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास योजना में इनका चयन हुआ। इन्हें घर बनाने के लिये शासन द्वारा तीन किश्तों में एक लाख 50 हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई। इसके साथ ही शौचालय के लिये समग्र स्वच्छता अभियान से 12 हजार रुपये भी प्राप्त हुए। अब इनका आशियाना बन चुका है। ग्राम हड़हा के ही जमुना प्रसाद विश्वकर्मा, राम विशाल बैगा, राम यज्ञ बैगा के भी प्रधानमंत्री आवास योजना से स्वयं के पक्के आवास का सपना हकीकत में बदल गया है। संध्या और किशोर को भी मिले घर : खण्डवा जिले में खालवा विकासखण्ड के ग्राम खारकलां में ब्याह कर आई संध्या को रहने को कच्चा घर मिला जिसमें शौचालय भी नहीं था। संध्या के दो बच्चों का जन्म भी कच्ची झोपड़ी में ही हुआ। बच्चे देखते-देखते बड़े हो गये और स्कूल भी जाने लगे, लेकिन संध्या का शौचालययुक्त पक्के घर में रहने का सपना पूरा नहीं हो सका। संध्या का यह सपना प्रधानमंत्री आवास योजना ने इस वर्ष पूरा कर दिया है। अब संध्या अपने पक्के मकान में रहकर बहुत खुश है। जिले के ग्राम खारकलां का किशोर पिता हुकुमचंद कोरकू गरीब घर में पैदा हुआ। पिता मजदूरी करते थे, सो गरीबी के कारण ज्यादा पढ़-लिख नहीं सका और बड़ा होकर पिता के साथ मजदूरी करने जाने लगा। पता का छोटा-सा कच्चा घर था। किशोर की शादी हो गई तो घर में जगह कम पड़ने लगी। किशोर ने भी अपनी पत्नी संध्या के साथ मजदूरी कर कच्ची झोपड़ी बना ली और वह भी अपनी पत्नी के साथ कच्चे घर में रहने लगा। संध्या जब भी किशोर से शौचालय और पक्का मकान बनाने को कहती तो किशोर बात टाल देता, क्योंकि पक्का मकान बनाने के लिये लगने वाले एक-डेढ़ लाख रुपये इकट्ठे करना उसके बस की बात नहीं थी। किशोर ने दोस्तों को परेशानी बताई तो दोस्तों ने उसे प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के बारे में बताया। किशोर ने आवास के लिये आवेदन किया, कुछ ही दिनों में उसे एक लाख 35 हजार रुपये की मदद स्वीकृत हो गई। अपना घर बनाने में उसने मजदूरी की जिसके 15 हजार उसे सरकार ने दिये। अब वह पत्नी और दो बेटियों के साथ मजे से शौचालययुक्त पक्के मकान में जीवन-बसर कर रहा है।
ग्रामीण महिलायें बनीं स्वावलम्बी : गाँव हुए खुशहाल
17 February 2018
स्कूलों में गुड़-मूंगफली चिक्की देने की राज्य शासन की योजना एक पंथ दो काज साबित हो रही है। गुड़ और मूंगफली से जहाँ बच्चों का हीमोग्लोबिन बढ़ने से कुपोषण खत्म होता है, वहीं आजीविका मिशन के जरिये स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा चिक्की तैयार किये जाने से उन्हें रोजगार भी मिल रहा है। धार जिले में तीन स्व-सहायता समूह चिक्की तैयार कर रहे हैं। तिरला में जय गुरुदेव स्व-सहायता समूह, गंधवानी में धारेश्वर और डही विकास खंड में आजाद आजीविका स्व-समूह को प्रशिक्षण दिलवाकर इनसे गुड़ चिक्की का निर्माण करवाया जा रहा है। प्रदेशों में प्राथमिक शालाओं के बच्चों को सप्ताह में तीन दिन मंगलवार,गुरुवार और शनिवार को 25 ग्राम चिक्की देने का निर्णय लिया गया है। इन तीनों विकास खण्ड के 853 स्कूलों के लगभग 29 हजार छात्र-छात्राओं को प्रति सप्ताह तीन दिन के मान से लगभग 87 क्विंटल चिक्की वितरित करने के लिए तीनों यूनिट द्वारा निरंतर काम किया जा रहा है। स्व-सहायता समूह द्वारा तैयार करने से चिक्की की लागत ब्राण्डेड उत्पाद से आधी आ रही है। बाजार में चिक्की सामान्यत: 140 प्रति किलो ग्राम में मिलती है। जबकि स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार चिक्की की लागत 70 रूपये प्रति किलो ग्राम में आ रही है जिसकी स्कूलों में 80 रूपये प्रति किलो ग्राम की दर से आपूर्ति की जा रही है। समूह को 10 रुपये प्रति किलो ग्राम की बचत हो रही है। स्कूल ड्रेस सिलाई से जुड़ीं स्व-सहायता समूह की 2000 महिलाएँ : राजगढ़ जिले में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने स्कूल ड्रेस सिलाई कार्य से महिलाओं को जोड़ा है। जिले में प्रत्येक वर्ष शासकीय एवं निजी स्कूलों में छात्र-छात्राओं द्वारा गणवेश क्रय में लगभग 5 करोड़ रुपये का वार्षिक टर्न ओवर का व्यवसाय उपलब्ध है। मिशन ने महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण दिया। वर्ष 2015-16 के सत्र में हुए पहले प्रयास में 200 स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने 12 हजार 500 स्कूल ड्रेस के आर्डर प्राप्त किये। कुल टर्न ओवर 25 लाख के साथ महिलाओं को 40 हजार रुपये वार्षिक की औसत आमदनी हुई। अगले सत्र 2016-17 में 25 हजार ड्रेस के आर्डर मिले और टर्न ओवर 50 लाख रुपये रहा। वर्ष 2017-18 में अब तक स्व-सहायता समूह की महिलाओं को 50 हजार स्कूल ड्रेस निर्माण का आर्डर मिल चुका है। ये महिलाएँ अपने गाँव में कपड़े सिल कर रेडीमेड वस्त्रों के रूप में बेच रही हैं। समूह की प्रशिक्षित महिलाएँ अन्य जिलों में जाकर मास्टर ट्रेनर के रूप में महिलाओं को सिलाई प्रशिक्षण भी देती है। स्वच्छ भारत मिशन से मिला 30,000 टी-शर्ट सप्लाई आर्डर : समूह की महिलाओं को स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत 6000 टी-शर्ट सप्लाई के भी आर्डर मिल चुके है जिसका टर्नओवर 18 लाख रुपये था। वर्ष 2017-18 में भी स्वच्छ भारत मिशन द्वारा महिलाओं को 30 हजार टी-शर्ट सिलकर अन्य आठ जिलों में सप्लाई का आर्डर प्राप्त हुआ है जिसका वार्षिक टर्नओवर 90 लाख रुपये है। आजीविका मिशन बना पदमा के लिए आय का जरिया : शाजापुर जिले के ग्राम खेड़ावत की पदमा लावरिया हमेशा इसी उधेड़बुन में रहतीं कि कैसे परिवार का जीवन स्तर ऊँचा करें पर जल्दी शादी होने से ना पढ़ाई-लिखाई कर पाई और न ही कुछ अलग करने का मौका मिला। ऐसे में एक दिन उन्हें राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की जानकारी मिली तो उन्होंने गाँव की महिलाओं के साथ स्व-सहायता समूह का गठन किया। तुलसी स्व-सहायता नाम से गठित इस समूह ने आपसी लेन-देन के साथ गतिविधियाँ शुरू कीं। इसके बाद मिशन से प्रशिक्षण ले कर उसने आस-पास के गाँव की महिलाओं को समूह से जोड़ने काम शुरू किया। इससे उसे 324 रुपये प्रति-दिवस का मानदेय माह में कम से कम 10 दिन के लिए मिलने लगा। पदमा ने कृत्रिम आभूषण निर्माण प्रशिक्षण लिया और बैंक से 50 हजार रुपये का ऋण लिया। उसने अपने घर के पास ही किराने के दुकान भी खोली जिससे उसे 3000 रुपये से अधिक की मासिक आमदनी हो जाती है। आज पदमा खुश भी है और आत्मविश्वास से भरपूर भी। अपने आप में सिमटे गाँव बैहार में आज है 16 स्व-सहायता समूह : अनूपपुर जिले के जैतहरी विकास खण्ड में एक गाँव है बैहार। पहाड़ों और जंगलों से घिरे इस गाँव में अधिकारियों और कर्मचारियों का आवागमन भी कम हो पाता था। जब अधिकारी गाँव में पहुँचते हैं तो गाँव वाले घर के दरवाजे बंद कर अंदर चले जाते थे। आवागमन की सुविधा भी कम होने से गाँव के लोगों का सम्पर्क बाहर के लोगों से कम ही था। आजीविका मिशन ने इस गाँव की उन्नति करने की ठानी। मिशन के सदस्य बार-बार गाँव पहुँचे, समूह के बारे में समझाइश दी। आखिर सबसे पहला महिला स्व-सहायता समूह बन ही गया। धीरे-धीरे समूह ने गति पकड़ी और सभी सदस्य 10 रुपये की प्रति सप्ताह बचत करने लगे तथा छोटी-मोटी जरूरतों के लिए बचत राशि से आपसी लेन-देन भी करने लगे। छ: माह बाद समूह को चक्रीय राशि के रूप में 15 हजार रुपये मिले। समूह की सचिव राधा ने पाँच हजार रुपये का ऋण लेकर किराने की दुकान खोली। समूह को 6 माह बाद 3 लाख 50 हजार रुपये आजीविका मिशन द्वारा सामुदायिक निवेश निधि के रूप में दिये गये। राधा ने इससे पुन: ऋण के रूप में 25 हजार रुपये की राशि ली और अपनी किराने की दुकान को बढ़ाया। राधा ने ऋण राशि वापिस कर पुन: 35 हजार रुपये का ऋण लेकर आटा चक्की लगाई। आज राधा की किराना दुकान और आटा चक्की से गाँव वालों को काफी सहूलियत हो गई है और राधा को 15 हजार रुपये की मासिक आय भी हो रही है। मिशन के प्रयासों से यहाँ 16 समूहो का गठन किया जा चुका है। राधा नर्मदा ग्राम संगठन में पुस्तक संचालक का काम भी कर रही है और अपने बच्चों को अमरकंटक के अच्छे स्कूल में शिक्षा दिला रही है। गौ-पालन और ब्यूटीपार्लर से 12,000 रूपये कमा रही है भावना : धार जिले के ग्राम उमरिया निवासी भावना के पति सुरेन्द्र सिंह बिजली सुधारने और कृषि मजदूरी का काम करते हैं। इससे उन्हें हर महिने मात्र 2 से 3 हजार रुपये की ही आमदनी हो पाती है। इससे भावना को घर चलाना बहुत मुश्किल हो जाता था। एक दिन भावना को जय महालक्ष्मी आजीविका स्व-सहायता समूह की जानकारी मिली। भावना समूह से जुड़ी और अपनी छोटी-मोटी आवश्यकताओं के लिए छोटा-छोटा ऋण लिया। मिशन की सहायता से भावना ने ब्यूटीपार्लर और पति ने डेयरी का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने वर्ष 2014 में एक गाय खरीदी और प्रतिदिन 7-8 लीटर दूध बेचना शुरू किया। एक वर्ष में ही भावना ने तीन गाय और खरीद ली आज वह प्रतिदिन 20 लीटर दूध बेच रही है। भावना ने वर्ष 2015 में गाँव में ही ब्यूटीपार्लर शुरू किया। आजीविका मिशन के सहयोग से भावना ने साँची दुग्ध संघ डेयरी भी गाँव मे शुरू की। जिससे दूध आसानी से बिक जाता है। भावना समूह से लिये गये 60 हजार रूपये और बैंक के 20 हजार रुपये के ऋण को भी आसानी से चुका रही है। समूह की मदद से भावना ने पक्का मकान बनवा लिया है। भावना कहती है पैसा बढ़ने से समाज में भी इज्जत बढ़ी है और समूह से जुड़ने के कारण सरकारी योजना का भी लाभ लेना भी आसान लगने लगा है।
एक वर्ष में प्रदेश की शत-प्रतिशत ग्राम पंचायतों के पास होंगे स्वयं के भवन
15 February 2018
आगामी एक वर्ष में प्रदेश की शत-प्रतिशत ग्राम पंचायतों के पास स्वयं का भवन उपलब्ध हो जाएगा। इन भवनों का नाम 'भारत निर्माण केन्द्र'' होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव द्वारा शेष एक हजार 46 ग्राम पंचायतों में भवन निर्माण के लिये एक करोड़ 51 लाख रुपये की राशि की स्वीकृति जारी कर दी गई है। मंत्री श्री भार्गव ने बताया कि पंचायतराज संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक है कि सर्वप्रथम इन संस्थाओं के पास स्वयं का भवन होना चाहिए, जिससे पंचायत अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन सुचारु ढंग से कर सकेंगी। श्री भार्गव ने बताया कि विभाग द्वारा गत वर्ष कराये सर्वे के अनुसार प्रदेश में कुल 5 हजार 166 भवनविहीन ग्राम पंचायतें थीं। इनमें से पूर्व में दी गई स्वीकृति के आधार पर 1189 पंचायत भवन पूर्ण किये जा चुके हैं। शेष 2 हजार 931 भवन वर्तमान में निर्माणाधीन हैं तथा बाकी 1046 पंचायत भवनों के लिये प्रत्येक को 14 लाख 48 हजार रुपये के मान से एक करोड़ 51 लाख 46 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
गरीबों और किसानों के कल्याण का है केन्द्रीय बजट : मुख्यमंत्री श्री चौहान
1 February 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि संसद में आज प्रस्तुत केन्द्रीय बजट गरीबों और किसानों के कल्याण का बजट है। यह भारत के आम आदमी को राहत देने वाला बजट है। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहाँ मंत्रालय में बजट पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नये भारत के निर्माण के सपने को साकार करने वाला है। यह बजट गरीबी दूर करने और रोजगार के अवसर सृजित करने वाला क्रांतिकारी बजट है। किसानों और गरीबों के लिये बजट में अभूतपूर्व कदम उठाये गये हैं। इसमें किसानों की आय को दोगुना करने के उपाय हैं। यह बजट ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला है। उन्होंने कहा कि अर्थ-व्यवस्था के क्षेत्र में प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा उठाये गये कड़े कदमों के सुपरिणाम सामने आ रहे हैं। इस बजट से भारत की तेजी से बढ़ती अर्थ-व्यवस्था में और तेजी आयेगी। श्री चौहान ने कहा कि इस बजट में गरीब कल्याण एजेंडे का ध्यान रखा गया है। बजट में ग्रामीण क्षेत्र में एक साल में गरीबों के लिये एक करोड़ मकान बनाने की बात कही गई है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी फैसला लिया गया है। इसके तहत दस करोड़ गरीब परिवारों के पाँच लाख रूपये तक के इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी। प्रत्येक तीन संसदीय क्षेत्रों में एक मेडिकल कॉलेज की घोषणा भी की गई है। बजट में शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी पहल की गई है। उज्जवला योजना के माध्यम से आठ करोड़ गरीब महिलाओं को धुएँ से मुक्ति मिलेगी। कृषि के क्षेत्र में लागत मूल्य में 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर खरीफ और रबी में समर्थन मूल्य का निर्धारण तथा कृषि क्षेत्र में दस लाख करोड़ रूपये कर्ज की व्यवस्था की गई है। ग्रामीण अधोसंरचना के लिये 14 लाख करोड़ रूपये की व्यवस्था की गई है इससे ग्रामीण क्षेत्र में बदलाव आयेगा। अधोसंरचना क्षेत्र में निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सिंचाई के क्षेत्र में माइक्रो सिंचाई पर जोर देते हुये सूक्ष्म सिंचाई कोष बनाने की व्यवस्था की गई है। बांस मिशन से भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सौभाग्य योजना के अंतर्गत 4 करोड़ गरीबों के घरों में नि:शुल्क बिजली पहुँचायी जायेगी। अनुसूचित जाति-जनजाति के लिये बजट में 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह कमजोर वर्गों के उत्थान के लिये महत्वपूर्ण है। रेल्वे के विस्तार के लिये एक सौ 48 लाख करोड़ रूपये की राशि खर्च की जायेगी। ढ़ाई लाख गांव ब्रॉडबैंड से जोड़े जायेंगे। दस प्रमुख स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जायेगा। एमएसएमई के ऋण के लिये 3 हजार 794 करोड़ रूपये की व्यवस्था की गई है, इससे रोजगार बढ़ेंगे। कुल मिलाकर इस बजट में गरीबी दूर करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिये क्रांतिकारी पहल की गई है।
केन्द्रीय बजट से गाँवों और किसानों की आर्थिक स्थिति और अधिक मजबूत होगी
1 February 2018
वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया ने आज संसद में प्रस्तुत केन्द्रीय बजट को किसान और ग्रामीण हितैषी बताया है। उन्होंने कहा है कि प्रस्तुत बजट से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को तेजी से पूरा किया जा सकेगा। वित्त मंत्री श्री मलैया ने रबी फसलों की तरह खरीफ फसलों की एमएसपी को उत्पादन लागत से डेढ़ गुना किये जाने के निर्णय को स्वागत योग्य बताया है। इसी तरह किसानों के हितों का ख्याल रखते हुए कृषि क्षेत्र में संस्थागत ऋण को 11 लाख करोड़ रूपये तक किये जाने, छोटे और सीमांत किसानों के हितों को देखते हुए देश के 22 हजार ग्रामीण हॉटों को कृषि बाजार के रूप में विकसित करने, मत्स्य और पशु-पालन को बढ़ावा देने के लिये 10 हजार करोड़ रुपये के 2 नये कोष का गठन किये जाने का निर्णय किसानों की आमदनी बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगा। महिलाओं के सशक्तिकरण की चर्चा करते हुए वित्त मंत्री श्री मलैया ने कहा कि महिलाओं के स्व-सहायता समूह को दी जाने वाली ऋण राशि को बढ़ाकर 75 हजार करोड़ रुपये करने से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएँ अधिक संख्या में आत्म-निर्भर हो सकेंगी। वित्त मंत्री श्री मलैया ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2019 तक एक करोड़ से ज्यादा आवास का निर्माण किया जाना और उज्जवला योजना में 8 करोड़ गरीब महिलाओं को नि:शुल्क घरेलू एलपीजी कनेक्शन दिये जाने का निर्णय भी महत्वपूर्ण है। वित्त मंत्री श्री मलैया ने स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिये वर्ष 2018-19 में मुद्रा के अंतर्गत 3 लाख करोड़ रुपये के ऋण वितरण और 70 लाख रोजगार के सृजन के निर्णय को भी महत्वपूर्ण बताया है। वित्त मंत्री श्री मलैया ने कहा है कि अधोसंरचना के विकास के लिये भी बजट में पर्याप्त प्रावधान किये गये हैं।
उज्जवला योजना से शांति बाई को मिली धुएं से मुक्ति
12 January 2018
रायसेन जिले में सांची की गरीब महिला शांतिबाई को परिवार के लिये खाने बनाने के लिये जंगल से सिर पर लकड़ी का बोझ रखकर लाना पड़ता था। कई बार खाना बनाते समय लकड़ियाँ गिली होने के कारण बुझ जाती थीं तो धोकनी की तरह मुह से हवा कर चूल्हा जलाना पड़ता था। इससे शांतीबाई के फेफड़े दर्द करने लगे थे। लकड़ी के धुएं से फेफड़ों को भी बहुत नुकसान हो रहा था। प्रधान मंत्री उज्जवला योजना ने इस तरह परेशानी भील रही करोड़ो गरीब महिलाओं की चिंता है। प्रशासन ने इसी योजना में शांति बाई को नि:शुल्क कुकिंग गैस कनेक्शन दिलवाया है। अब इस गरीब महिला का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है और दूर जंगल से लकड़ी इकट्टा करने की झंझट से भी मुक्ति मिल गई है। शांति बाई को उज्जवला योजना में नि:शुल्क मिली कुकिंग गैस कनेक्शन से न केवल धुएँ, कालिख और घुटन से मुक्ति मिली है, बल्कि खाना बनाना भी अब बहुत आसान हो गया है। दूसरों के घरों में गैस चूल्हा जलते देख शांति बाई भी सोचती थी कि उसके पास भी अपना एक गैस कनेक्शन हो और वह भी दूसरों की तरह जल्दी खाना बना पाए। शांति बाई के इस सपने को साकार किया है प्रधानमंत्री उज्जवाला योजना ने। गैस कनेक्शन मिलने से अब शांति बाई कम समय में स्वादिष्ट खाना बना लेती है और अपने काम पर भी समय पर चली जाती है। पहले जहां दो घण्टे उसे खाना बनाने में ही लग जाते थे, अब वह सिर्फ एक घण्टे में ही खाना बना लेती है। अब उसे साल भर के लिए लकड़ी और कंडा इकट्ठा करके नहीं रखना पड़ता। इसके अलावा लकड़ी के धुंए से घर काला होने की परेशानी से भी मुक्ति मिली है।
70 साल में पहली बार आठ गाँवों में पहुँची बिजली
12 January 2018
मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के 8 दुर्गम वन ग्रामों में पिछले 70 साल से बिजली की रोशनी का इंतजार तब खत्म हुआ जब इन गाँवों में बिजली का बल्ब जलाकर दिखाया गया। जिले के भिलमाढाना वन एवं राजस्व, कोटरी, छींदखेड़ा, हींगपानी, टुईयापानी, सांवरी तथा भौंभरी गाँवों ने इससे पहले कभी बिजली की रोशनी नहीं देखी थी। कठिनाइयों, घने जंगलों एवं दुर्गम पहाड़ों के कारण गाँवों तक बिजली पहुँचाना बेहद कठिन था, लेकिन ऊर्जा विभाग के अमले की दृढ़-इच्छाशक्ति ने इस कार्य को भी कर दिखाया है। आज इन गाँवों में लालटेन के स्थान पर बिजली की रोशनी देखकर त्यौहार जैसा माहौल बना हुआ है। ग्रामवासियों को चहुँमुखी विकास की धारा में शामिल होने का अवसर प्राप्त हुआ है। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के प्रबंध संचालक श्री मुकेश चन्द गुप्ता ने नरसिंहपुर के अधीक्षण यंत्री एवं उनकी टीम की सराहना की है। नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा एवं तेंदूखेड़ा के घने जंगलों से घिरे सतपुड़ा की चोटी पर स्थित इन गाँवों में ग्रामीणों की दिनचर्या सूर्यास्त के बाद ठहर जाती थी। बिजली न होने के कारण मजदूरी के अलावा रोजगार के अन्य कोई साधन भी नहीं थे। इन दुर्गम गाँवों तक बिजली पहुँचाने के लिये इसके पूर्व भी कई प्रयास किये गये लेकिन विभिन्न बाधाओं के कारण ये गाँव हमेशा विद्युतीकरण से अछूते रहे। केन्द्र सरकार की दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना लागू होने के बाद इन गाँवों की तस्वीर बदल गई है। योजना के तहत आवंटित राशि से गाँवों के विद्युतीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ की गई तथा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद वन विभाग को लगभग एक करोड़ 26 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति तथा 6.286 एकड़ वैकल्पिक जमीन आवंटित करने के बाद ही यह भागीरथी प्रयास सफल हो सका। विद्युतीकरण कार्य में स्थानीय ग्रामवासियों को रोजगार स्वरूप कार्य करने का अवसर भी प्राप्त हुआ है। जिले में बड़ी संख्या में हो रहे अन्य विद्युतीकरण के कार्यों में भी उनके लिये रोजगार की संभावनाएँ उत्पन्न हुई हैं। ग्रामों में बिजली आ जाने से मुख्यमंत्री स्थायी कृषि पम्प और अन्य योजनाओं में ग्रामवासियों को शामिल होने का अवसर भी मिल गया है। इन गाँवों के विद्युतीकरण में सबसे बड़ी चुनौती सामग्री के परिवहन की थी। घने जंगलों में बसे इन गाँवों के पहुँच मार्ग परिवहन लायक नहीं थे, जिससे बिजली के खम्भों, ट्रांसफार्मर, केबिल तथा अन्य सामग्री भेजना कठिन था, लेकिन कम्पनी के अधिकारियों-कर्मचारियों की लगन से यह कार्य पूरा हो सका। बिजली पहुँचाने के इस अभियान में 8 गाँवों में 8 ट्रांसफार्मर, 11 के.व्ही. की 45 कि.मी. केबिल, 7.5 कि.मी. एल.टी. लाइन का उपयोग किया गया। सौभाग्य योजना में 353 हितग्राहियों को नि:शुल्क नवीन कनेक्शन प्रदान किये गये। इस प्रकार लगभग 2 हजार 600 ग्रामवासी लाभान्वित हुए। इस अभियान में कुल 4 करोड़ 56 लाख 34 हजार रुपये व्यय हुए।
सुठालिया कस्बे में दिन-रात उपलब्ध है ई-रिक्शा सेवा
10 January 2018
राजगढ़ जिले के सुठालिया कस्बे में किसी को भी, कभी भी ई-रिक्शा सेवा की आवश्यकता होती है तो वह सीधे कैलाश मेहर को मोबाइल पर फोन करता है और तुरंत सेवा उपलब्ध होती है। कैलाश मेहर को यह ई-रिक्शा राज्य सरकार की मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना में ऋण पर मिला है। युवा कैलाश मेहर केवल आठवीं कक्षा तक पढ़े होने के कारण कुछ दिनों पहले तक मजूदरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। स्थानीय नगर परिषद् की मदद से उन्हें मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना में प्रशिक्षण मिला और ई-रिक्शा भी। इसके लिये इन्हें 1.40 लाख रुपये का लोन बैंक से दिलवाया गया जिसमें 20 हजार रुपये का शुद्ध अनुदान भी शामिल है। इन्होंने लोन की दो किश्तें समय पर जमा कर दी हैं। तीसरी किश्त जमा करने के बाद इन्हें 5 हजार रुपये का अतिरिक्त अनुदान भी मिलेगा। ई-रिक्शा के मालिक बन चुके कैलाश मेहर आज आसानी से 8-10 हजार रुपये महीना अपने कस्बे में ही रहकर कमा रहे हैं। आसपास के 6-7 गांव में भी अपनी सेवा दे रहे हैं। साथ ही, सप्ताह में मंगलवार और शुक्रवार के दिन आँगनवाड़ी केन्द्रों तक टीकाकरण की वेक्सीन पहुँचाने का पुनीत कार्य भी कर रहे हैं। अब सुठालिया कस्बे में कैलाश मेहर एक जाना-माना नाम है।
aa ग्रामीणों को घर बैठे बैंक सुविधा दिला रही हैं सीमा पांचाल
9 January 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिये किये जा रहे प्रयासों के अच्छे परिणाम प्रदेश में अब बखूबी दिखने लगे हैं। झाबुआ जिले के ग्राम खरडूबड़ी की मात्र 8वीं पास सीमा पांचाल बैंक प्रतिनिधि के रूप में ग्रामीणों के बैंक संबंधी छोटे लेन-देन का काम करती हैं। बैंक उन्हें हर ट्रांजेक्‍शन पर कमीशन भी देता है। सीमा पहले घर के काम के साथ-साथ किराना की दुकान एवं आटा चक्की के काम में परिवार का सहयोग करती थी। इतने पर भी मात्र 4-5 हजार रूपये प्रति माह की ही आमदनी हो पाती थी। अब 10-12 हजार की आय होने से बच्चों का दाखिला भी अच्छे स्कूल में करा दिया है। सीमा को आजीविका मिशन के संपर्क में आने के बाद बैंक सखी का दर्जा मिला। बैंक सखी का काम करने के लिये उसने दिसम्बर 2016 में बैंक से एक लाख रूपये का ऋण लेकर इंटरनेट कनेक्शन के साथ लेपटॉप लिया और कियोस्क सेंटर चलाने के लिये आवश्यक उपकरण खरीदे। बैंक ऑफ बड़ौदा से प्रशिक्षण भी लिया। सीमा ने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह घर से बाहर निकलेगी और बैंक का काम कर सकेगी। बैंक सखी के रूप में काम करने में इतना सम्मान और पैसा मिलेगा। पहले उसे बड़े अधिकारियों से बात करने में संकोच होता था। आज उसमें भरपूर आत्म-विश्वास है। वह कहती है कि मैंने कभी सोचा नहीं था कि मात्र 8वीं पास होने के बाद भी मुझे इतना अच्छा व्यवसाय मिलेगा। पहले कम्प्यूटर एवं लेपटॉप छूने में भी डर लगता था। अब यह सब बहुत आसान हो गया है। बैंक सखी बनने के बाद वह दिल्ली भी हो आई है। सीमा का अन्य ग्रामीण महिलाओं से कहना है कि मैं यह कर सकती हूँ तो आप क्यों नहीं? आप भी मेरी तरह राज्य शासन की स्व-रोजगार ऋण योजना और स्व-रोजगार प्रशिक्षण का लाभ लेकर स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ कर खुद को आत्म-विश्वास से भरपूर बनायें।

aa मुख्यमंत्री ने गांवों में पहुँचकर सुनी ग्रामीणों की समस्याएँ
7 December 2017
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज शिवपुरी जिले के ग्राम बूढ़ाडोगर, कुल्हाड़ी एवं चितारा में पहुंचकर ग्रामीणों की कुशलक्षेम पूछी और उनकी समस्याओं को सुना। मुख्यमंत्री ने ग्राम कुल्हाड़ी में ग्रामीणों से कहा कि मैं स्वयं गांव-गांव जाकर आप लोगों के हाल-चाल जानने आया हूं। उन्होंने ग्रामीणों से भावांतर भुगतान योजना, अविवादित नामांतरण, बंटवारा एवं सीमांकन के प्रकरणों के निराकरण की जानकारी ली। साथ ही, किसानों को निःशुल्क बी-1 एवं खसरे की नकल देने की जानकारी भी दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान को ग्रामीणों ने पेयजल की समस्या से अवगत कराया। उन्होंने इसके तत्कालिक और दीर्घकालिक समाधान हेतु गांव की नलजल योजना गहरे ट्यूबवेल के माध्यम से शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने गांव में एक तालाब बनाने तथा सिंध नदी पर स्टापडेम बनाने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभांवित करतार सिंह एवं देवेन्द्र सिंह यादव के आवास का निरीक्षण किया। इस दौरान ग्राम पंचायत के सरपंच श्री लालाराम यादव ने बताया कि ग्राम पंचायत में 190 प्रधानमंत्री आवास बनाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के ग्रामीण क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री रूस्तम सिंह, स्थानीय जन-प्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।

aa भोपाल में 29 अक्टूबर से खुलेगा खादी इण्डिया लाउंज
27 October 2017
केन्द्रीय खादी और ग्रामोद्योग आयोग द्वारा 29 अक्टूबर से भोपाल में नया बिक्री केन्द्र 'खादी इण्डिया लाउंज'' आरंभ किया जा रहा है। कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री श्री अंतर सिंह आर्य के विशिष्ट आतिथ्य में होने वाले कार्यक्रम का उद्घाटन केन्द्रीय खादी ग्रामोद्योग के अध्यक्ष श्री विनोद कुमार सक्सेना प्रात: 11 से करेंगे। समारोह में खादी वस्त्रों और हर्बल उत्पादों की प्रदर्शनी के साथ परिधान उत्सव (फैशन-शो) में खादी वस्त्रों की आकर्षक प्रस्तुति भी होगी। खादी परिधान उत्सव में होने वाले फैशन-शो में राष्ट्रीय-स्तर के ड्रेस डिजायनर द्वारा तैयार खादी के आधुनिक वस्त्रों-जैकेट, शर्ट, लेडीज गाउन, स्कर्ट, कुर्ते के साथ खादी डेनिम जीन्स आकर्षण रहेंगे। खादी की जैकेट के साथ सिल्क की जैकेट भी रहेंगी। जवाहर चौक के सरस्वती नगर में खुलने वाले खादी इण्डिया लाउंज के शो-रूम में इंटरनेशनल स्तर के ड्रेस डिजायनरों द्वारा तैयार खादी के परम्परागत वस्त्रों के साथ आधुनिक वस्त्र भी बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगे। लाउंज में भारत के विभिन्न प्रांतों के खादी एवं खादी सिल्क के वस्त्र अपनी स्थानीय विशेषता के साथ भोपाल में ही उपलब्ध हो सकेंगे। खादी और ग्रामोद्योग के माध्यम से देश में अब तक एक करोड़ 37 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाया जा चुका है। भारतीय जलवायु के अनुरूप इन वस्त्रों का उत्पादन, बिक्री एवं इनसे रोजगार को दोगुना करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के तहत देशभर में नये खादी इण्डिया लाउंज खोले जा रहे हैं।

aa ग्राम सभाओं में मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना में किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया शुरू
12 October 2017
मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना में किसानों के पंजीयन की कार्यवाही ग्राम सभाओं में शुरू हो गई है। सभी किसानों का पंजीयन सुनिश्चित होने तक यह कार्यवाही जारी रहेगी। ग्राम सभाओं में विभागीय अधिकारी अधूरे आवेदनों को स्वयं पूरा करवायेंगे और ग्राम सभा के प्रभारी अधिकारी किसान को पंजीयन की पावती भी देंगे। इस योजना में पंजीयन के लिये किसानों को आधार कार्ड, समग्र आईडी, मोबाइल नम्बर तथा बैंक खाते आदि की जानकारी देना जरूरी है।
योजना का अधिकाधिक लाभ दिलाने जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी-
योजना में सात दलहनी फसलों सोयाबीन, मूंगफली, तिल, रामतिल, मक्का, मूंग और उड़द का 16 अक्टूबर से 15 दिसम्बर 2017 तक कृषि उपज मंडियों में क्रय-विक्रय किया जाएगा। प्रमुख सचिव किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग डॉ. राजेश राजौरा ने जिला कलेक्टरों से कहा है कि कृषि उपज मंडियों में क्रय-विक्रय की कार्यवाही अनुज्ञप्तिधारी व्यापारियों के द्वारा ही सुनिश्चित की जाए ताकि अधिकाधिक किसानों को इस योजना का समुचित लाभ मिल सके। जिला कलेक्टरों को निर्देश दिये गये हैं, कि 16 अक्टूबर से पहले जिला मुख्यालय की मंडियों के अनुज्ञप्तिधारी व्यापारियों की बैठक कर क्रय-विक्रय की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करें। इसी प्रकार राजस्व अनुभाग स्तर पर भी बैठक की जाए और अनुभाग की कृषि उपज मंडियों तथा उप मंडियों में अनुज्ञप्तिधारी व्यापारियों के माध्यम से दलहनी फसलों के क्रय-विक्रय की सुचारू व्यवस्था की जाए।
257 कृषि उपज मंडी समितियों को 405 लाख रुपये स्वीकृत-
मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना और किसान हितैषी एवं कृषि प्रोन्नति से जुड़े किसान सम्मेलन के लिये प्रदेश की 257 कृषि उपज मंडी समितियों को 405 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस राशि का व्यय मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड की कृषि अनुसंधान एवं अधोसंरचना विकास निधि की अर्जित ब्याज मद से किया जाएगा। कृषि उपज मंडी समितियों को यह राशि निर्धारित श्रेणी के अनुसार मिलेगी। ज्ञातव्य है कि प्रदेश में 'क' श्रेणी की 39, 'ख' श्रेणी की 42, 'ग' श्रेणी की 56 और 'घ' की 120 कृषि उपज मंडी समितियाँ हैं।

aa भावांतर भुगतान योजना किसानों के लिए महाबोनस- श्री चौहान
12 October 2017
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सरकार ने किसानों के लिए महाबोनस की व्यवस्था भावांतर भुगतान योजना द्वारा की है। इसका लाभ लेने के लिए पंजीयन करवाना अनिवार्य है। किसान भाई पंजीयन करवाने में चूके नहीं, अन्यथा योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। श्री चौहान आज प्रदेश की समस्त ग्राम सभाओं को लाइव संबोधित कर रहे थे। उन्होंने किसानों से भावांतर भुगतान योजना, उसकी प्रक्रियाओं और प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करते हुये बताया कि मक्का उत्पादक किसानों की समस्याओं का समाधान करवाया जाएगा। जले ट्रांसफार्मर को बदलवाने के लिए उपभोक्ताओं की संख्या 75 से घटाकर 50 प्रतिशत कर दी गई है। साथ ही जमा की जाने वाली बकाया राशि भी 40 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दी गई है। दीवाली के बाद कपास उत्पादक जिलों में 16 खरीदी केन्द्र शुरू हो जाएंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किसानों द्वारा योजना में कम पंजीयन करवाने पर चिंता व्यक्त करते हुये अपील की कि वे अंतिम तिथि से पूर्व पंजीयन जरूर करवायें। प्रदेश सरकार आम आदमी और गरीब किसान की सरकार है, जो संकट के समय हमेशा किसानों के साथ रही है। खेती को लाभकारी बनाने के लिए हर उपाय करती है। उन्होंने कहा कि बंपर उत्पादन के कारण फसलों के बाजार मूल्य में गिरावट हो गई थी। सरकार ने भंडारण आदि की दिक्कतों के बावजूद 8 रूपए प्रति किलो की दर से प्याज की खरीदी कर, किसानों का नुकसान नहीं होने दिया। मूंग, तुअर आदि की बाजार मूल्य से करीब डेढ़ हजार रूपए अधिक पर खरीदी की। श्री चौहान ने कहा कि किसान की फसल कम मूल्य पर नहीं बिकने देने की प्रतिबद्धता का सरकार ने पालन किया था जिस पर एक हजार करोड़ रूपये से अधिक राशि का व्यय किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की मदद के लिए पैसों की चिंता नहीं करती है। किसान को फसल का उचित मूल्य मिले, इसके लिये राज्य सरकार कटिबद्ध है। श्री चौहान ने बताया कि फसलों के उचित दाम किसानों को मिलें, इसकी गारंटी के लिए भावांतर योजना लागू की है। योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो 15 अक्टूबर तक योजना के पोर्टल पर पंजीयन करवा लेंगे। उन्होंने बताया कि ग्राम सभा में पंजीयन का कार्य किया जा रहा है। साथ ही गेहूँ, धान का ई-उपार्जन करने वाली 3500 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों और 257 कृषि उपज मंडियों में भी नि:शुल्क पंजीयन सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। पंजीयन करवाने वाले किसानों को उनके मोबाइल पर शार्ट मैसेज सर्विस (एस.एम.एस) के द्वारा सूचना दी जाएगी। हर किसान को यूनिक आई डी नम्बर दिया जाएगा जिसे कृषि उपज मंडी में विक्रय करते समय किसानों को देना होगा। तभी उन्हें भावांतर योजना का लाभ मिलेगा। पंजीयन के समय राजस्व अभिलेख, आधार कार्ड, समग्र आई.डी. और बैंक खाता क्रमांक की जानकारी भी देना होगी। किसान द्वारा फसल बोनी का राजस्व विभाग द्वारा सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक जिले के फसलवार पाँच वर्षों में सर्वश्रेष्ठ तीन वर्षों की फसल कटाई प्रयोगों के परिणामों के आधार पर उत्पादकता की गणना की जाएगी। मुख्यमंत्री ने भावांतर भुगतान योजना में फसल के मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आठ फसलों में से किसी फसल का मंडी में निर्धारित अवधि के दौरान विक्रय न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम और मॉडल विक्रय दर से अधिक पर होता है, तो विक्रय की दर तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य के बीच के अंतर की राशि किसान के खाते में जमा की जाएगी। इसी तरह यदि निर्धारित फसलों में से कोई फसल मॉडल विक्रय मूल्य से कम में विक्रय की जाती है, तो न्यूनतम समर्थन मूल्य और मॉडल विक्रय मूल्य के भावांतर की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में जमा की जाएगी जिसकी सूचना मोबाईल पर भी दी जाएगी। किसान फसल की बिक्री मंडियों में व्यापारी को करेंगे। व्यापारी उन्हें तत्काल राशि देगा। भावांतर की राशि दो माह की अवधि में उनके बैंक खातों में जमा हो जाएगी। श्री चौहान ने बताया कि 16 अक्टूबर से 15 दिसम्बर 2017 के मध्य 7 फसलों सोयाबीन, मूंगफली, तिल, रामतिल, मक्का, मूंग, उड़द और 1 फरवरी से 30 अप्रैल 2018 तक अरहर (तुअर) का विक्रय करते समय यूनिक आई.डी. देना होगी। मंडी में क्रय-विक्रय, खरीदी के समय अनुबंध पत्र, तौल पर्ची, भुगतान पत्रक मंडी कर्मचारियों द्वारा तैयार किया जाएगा। उन्होंने किसानों से अपील की कि योजना में पंजीयन का अवसर गवांए नहीं। ग्राम सभा में ही पंजीयन का कार्य करवा लें। योजना का सबको लाभ मिलेगा, व्यवस्था में सहयोग करें। स्वयं का और अपने आस-पास के किसानों का पंजीयन करवाने में सहयोग करें। मुख्यमंत्री ने ग्राम सभा में उपस्थित ग्रामीणों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ दी। उन्होंने कहा कि आपके जीवन में सुख-समृद्धि के लिये आपकी सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। खेती को लाभकारी बनाने का लक्ष्य है। इसकी सफलता के लिए सबको मिलकर काम करना होगा।

aa सरपंच पद के अभ्यर्थी ऑनलाइन भी भर सकेंगे नाम निर्देशन-पत्र
12 October 2017
सरपंच पद के अभ्यर्थी अब परंपरागत प्रक्रिया के साथ ही ऑनलाइन भी नाम निर्देशन-पत्र भर सकते हैं। यह स्वैच्छिक है। अभ्यर्थी राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा बनाई गई OLIN एप्लीकेशन के माध्यम से नाम निर्देशन-पत्र भर सकते हैं। आगामी दिसम्बर माह में सीधी जिले की 56, सिंगरौली जिले की 31 और इंदौर जिले की 3 ग्राम पंचायतों के आम निर्वाचन प्रस्तावित हैं। अभ्यर्थी द्वारा स्वयं या सुविधा केन्द्र के माध्यम से ऑनलाइन नाम निर्देशन-पत्र भरने के बाद उसका फाईनल प्रिंट आउट निकाला जाएगा। इस प्रिंट आउट में जरूरी जानकारी भर कर आवश्यक दस्तावेज के साथ नियत समयावधि में रिटर्निंग आफिसर को देना होगा।
एप्लीकेशन OLIN के फायदे-
एप्लीकेशन OLIN के माध्यम से अभ्यर्थी किसी भी समय नाम निर्देशन-पत्र तैयार कर सकते हैं। इस व्यवस्था से ओवर राइटिंग और अपठनीयता की वजह से नाम निर्देशन-पत्र निरस्त होने की आशंका समाप्त होगी। संवीक्षा, नाम वापसी और प्रतीक चिन्ह आबंटन की जानकारी अभ्यर्थी को एस.एम.एस. से मिलेगी। अभिलेख सुरक्षित रहेंगे। एप्लीकेशन OLIN पर अभ्यर्थी को उनके निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची, मतदाता केन्दों की सूची और मतों की गणना संबंधी पत्रक प्राप्त हो सकेंगे। इसके साथ ही अन्य अभ्यर्थियों के संबंध में विभिन्न जानकारियाँ जैसे शपथ-पत्र, जाति प्रमाण-पत्र एवं अन्य दस्तावेजों की कापी मिल सकेगी। राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री आर. परशुराम ने बताया है कि अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए रिटर्निंग आफिसर के कार्यालय में सुविधा केन्द्र स्थापित किये जायेंगे। सुविधा केन्द्र में OLIN की सुविधा नि:शुल्क रहेगी। आनलाइन कियोस्क और लोक सेवा केन्द्रों पर भी OLIN की सुविधा मिलेगी, लेकिन यहाँ पर निर्धारित शुल्क देना होगा। मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट www.mplocalelection.gov.in पर OLIN की लिंक दी गयी है।

छह फरवरी को भोपाल में त्रिस्तरीय पंचायतीराज की महापंचायत - अभय मिश्रा
महापंचायत में होगा मुख्यमंत्री का अब तक सबसे बडा सम्मान
अभय मिश्रा और डी पी धाकढ की मुख्यमंत्री से अहम मुलाकात
मुख्यमंत्री ने कहा छह फरवरी को करेगे के घोषणा

18 January 2016
पिछले छह माह से अपने अधिकारो के लिए आंदोलनरत त्रिस्तरीय पंचायतीराज के जनप्रतिनिधियों के लिए बडी खबर है। आज त्रिस्तरीय पंचायतीराज संगठन के अध्यक्ष अभय मिश्रा और प्रदेष संयोजक डी पी धाकढ की मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान के निवास पर हुई अहम मुलाकात के बाद अभय मिश्रा खुषी जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान ने हमारी लगभग सभी न्यायोचित मांगे मान ली है। जिसके चलते पंचायजीराज संगठन आगामी छह फरवरी को राजधानी भोपाल में महापंचायत आयोजित करेगा जिसमें मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान त्रिस्तरीय पंचायतीराज के प्रतिनिधियों को अधिकार दिए जाने की घोषणा करेगे।
मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चोहान के साथ मुलाकात करने के बाद अभय मिश्रा ने प्रेस को जारी विज्ञप्ती में कहा कि त्रिस्तरीय पंचायतीराज संगठन अपने अधिकारो के लिए पिछले छह माह से अनुनय विनय से शुरू होकर आंदोलन की राह तक पहुॅच गया एंव विभिन्न उतार चढावो से होते हुए चार जनवरी को उनके समक्ष आंदोलन समाप्ती की घोषणा कर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के प्रति न्याय की अपेक्षा के साथ पंचायतीराज के अधिकारो के बागडोर मुख्यमंत्री के हाथों सौप दी थी । बकौल अभय मिश्रा तब मुख्यमंत्री ने कहा आंदोलन से नही दिल से दूगा, अब पंचायतीराज के जनप्रतिनिधियो की लडाई मेरी हैं जितना मांगा हैं उससे ज्यादा दूगा। लेकिन हमारी रणनीति में थोडी से चूक यह रही कि हम अपनी बात मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान के समक्ष प्रत्यक्ष तौर पर मिलकर रख नही सकै, शायद हमें इसलिए अपने अधिकारो को पाने के लिए लंबा सर्घष करना पडा।
अभय मिश्रा ने कहा कि जनवरी के बाद आज हम मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान से उनके निवास पर मिले और मुख्यमंत्री ने जो कहा था उसे चरितार्थ कर दिखाया। बहुत बडे हद्वय का परिचय देकर पंचायतीराज के जनप्रतिनिधियों का दिल जीत लिया।
मिश्रा ने कहा कि शासन के द्वारा दिये जा रहे अधिकारो से हम उपकृत और अभिभूत हैं और त्रिस्तरीय पंचायतीराज संगठन ने निणर्य लिया हैं कि छह फरवरी को भोपाल में पंचायतीराज की महापंचायत में मुख्यमंत्री का अब तक का सबसे बडा सम्मान करेगा। जिसके लिए मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी हैं। अभय मिश्रा और डी पी धाकढ ने सभी निर्वाचित प्रतिनिधियो से अपील की हैं कि मुख्यमंत्री जी ने हमारा जो मान रखा हैं उससे कही बडा उनका सम्मान करने के लिए स भी जनप्रतिनिधियों को छह फरवरी को भोपाल में एकत्रित होना होगा।

त्रिस्तरीय पंचायतीराज संगठन की मेहनत रंग लायेगीः अभय मिश्रा
सरकार की ओर से पंचायतीराज को अधिकार दिए जाने के संकेत

17 December 2015
भोपाल: त्रिस्तरीय पंचायतीराज संगठन के अध्यक्ष अभय मिश्रा ने कहा कि मीडीया और सरकारी सूत्रों के माध्यम से ज्ञात हुआ हैं कि प्रदेश सरकार जल्द ही पंचायतीराज के जनप्रतिनिधियों को 1994 की तर्ज पर पूरे अधिकार देने वाली हैं, यह त्रिस्तरीय पंचायतीराज संगठन के आंदोलन की बडी जीत है। अभय मिश्रा ने प्रदेष सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि पंचायतीराज संगठन ने अपनेे अधिकारों की मांग को लेकर 2 दिसम्बर को भोपाल में आयोजित कोर कमेटी के बैठक में निणर्य लेते हुए प्रदेष सरकार को मांगे माने जाने के लिए सात दिवस का समय दिया था। सात दिवस में मांगे ना माने जाने पर मैहर चुनाव में बीजेपी को हराने की बात कही थी।
जिसके बाद मीडीया के माध्यम से ज्ञात हुआ कि प्रदेश सरकार पंचायतीराज के प्रतिनिधियों की सभी मांगे मानने के लिए तैयार हो गयी हैं ओर मुख्य सचिव को इसकी तैयारी करने के निर्देष मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चोहान ने दिए हैं।
अभय मिश्रा ने कहा कि मीडीया व सरकारी सूत्रो से ज्ञात हुआ कि विधानसभा सत्र के समापन के बाद प्रदेश सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चोहान पंचायतीराज के जनप्रतिनिधियों को अधिकार दिए जाने की घोषणा कर सकते है।
अभय मिश्रा ने कहा कि इस खबर के बाद हमने विधानसभा सत्र की समाप्ती तक आंदोलन को विराम दे दिया है। विधानसभा सत्र के बाद आगामी रणनीति तय की जाएगी।
अभय मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चोहान पंचायत प्रतिनिधियों के मांग के अनुरूप 1994 के तर्ज पर समूचे अधिकार उन्हे देते हैं तो यह पंचायतीराज संगठन की बडी जीत होगी। मिश्रा ने कहा कि पिछले पांच माह से पंचायतीराज संगठन के बैनरतले प्रदेश भर के पंचायत प्रतिनिधि अपने अधिकारो की मांग के लिए आंदोलनरत थे, पंचायतीराज के किर्यान्वन और अधिकारीराज के खिलाफ पंचायतीराज संगठन की इस आंदोलन की मांगो को शायद पंचायतीराज के जनप्रतिनिधी ठीक ढंग से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चोहान के सामने नही पहुच पाये। जिसके चलते पंचायतीराज के अधिकारो के लिए जनप्रतिनिधियों को इतना लंबा सर्घष करना पडा।
अभय मिश्रा ने कहा कि यह त्रिस्तरीय पंचायतीराज संगठन की बडी जीत होगी।

मध्यप्रदेश की विदिशा एवं हरदा जिला पंचायत समेत 16 पंचायत पुरस्कृत
भोपाल। राष्ट्रीय पंचायत राज दिवस पर आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सदारत में नई दिल्ली में गरिमापूर्ण समारोह में पंचायत सशक्तिकरण की दिशा में मध्यप्रदेश की विदिशा एवं हरदा जिला पंचायत समेत 16 पंचायत को पुरस्कृत किया गया। समारोह में केन्द्रीय पंचायत राज मंत्री श्री वीरेन्द्र सिंह और राज्य मंत्री श्री निहाल चन्द भी उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने उपस्थित पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि पंचायत सदस्यों को गाँव के बारे में गौरवान्वित महसूस करना चाहिये। उन्होंने वित्तीय प्रावधानों की तुलना में विकास के प्रति दृढ़-निश्चय को महत्वपूर्ण करार देते हुए गाँव में बच्चों की शिक्षा, उनके टीकाकरण आदि पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने गाँव का जन्म-दिन मनाने जैसा सुझाव भी दिया।
समारोह में मध्यप्रदेश की 2 जिला पंचायत हरदा एवं विदिशा को 30-30 लाख, विदिशा तथा इछावर जनपद पंचायत को 20-20 लाख तथा 12 ग्राम पंचायत हिनोतिया, थर्रह, पामेद, हरदा खुर्द, गोमगाँव, गुर मेला, कुकरावार, बागवाड़ा, हिलगन, सोनपुर, गठहौली तथा खैरिया ग्राम पंचायत को 8-8 लाख की सम्मान-निधि से पुरस्कृत किया गया।
पंचायत सशक्तिकरण की दिशा में पुरस्कृत ग्राम पंचायतों ने विकेन्द्रीकृत एवं सहभागितापूर्ण स्थानीय स्व-शासन के क्रियान्वयन एवं सामाजिक न्याय, प्रभावी सेवा सुपुर्दगी और समावेशी विकास तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में कामयाबी हासिल की है। पिछले वित्त के लिये पंचायत राज मंत्रालय ने स्वतंत्र एजेंसी टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान से करवाये गये मूल्यांकन अध्ययन के आधार पर श्रेष्ठ पंचायत राज संस्थाओं का चयन कर उन्हें पुरस्कृत किया है।


गाँवो के विकास की समन्वित योजना बनेगी
21 August 2015
भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने केन्द्रीय पंचायत सचिव श्री विजय आनंद से २५ अप्रैल को मुलाकात के दौरान कहा कि प्रदेश में गांवों के विकास की समन्वित योजना बनायीं जायेगी। प्रदेश में १० हजार से अधिक जनसंख्या वाली ३२०० ग्राम पंचायतों के आदर्श रूप से विकसित किया जायेगा । प्रदेश में गांवों में विकास के लिये मुख्यमंत्री ग्राम सड़क और पंच परमेश्वर योजना के जरिये बेहतर काम हुआ है। गाँवों में 24 घंटे बिजली दी जा रही है। गाँवों में नलों से जल प्रदाय की योजना बनायी गई है। सभी आँगनबाड़ी और ग्राम पंचायतों के भवन बनाये जा रहे हैं। केन्द्रीय सचिव श्री आनंद ने कहा कि गाँवों के समूह बनाकर विकास तथा आदर्श ग्राम विकसित करने की योजना बनायीं जाये।
मुलाकात के दौरान मुख्य सचिव श्री अंटोनी डिसा , अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती अरुणा शर्मा और मुख्यमंत्री के सचिव सचिव श्री हरिरंजन राव उपस्थित थे।


प्रदेश का हर गाँव बनेगा स्मार्ट विलेज
21 August 2015
प्रदेश के हर गाँव को अगले पाँच साल में स्मार्ट विलेज बनाया जायेगा। स्मार्ट विलेज सुनियोजित ढंग से विकसित ग्राम होंगे। इसके लिये अगले एक माह में एकीकृत ग्राम विकास योजना बनाई जायेगी। प्रदेश में स्वर्गीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के जन्म-दिवस आगामी 25 सितम्बर से गरीब कल्याण वर्ष मनाया जायेगा। जिसमें गरीबों के लिये आजीविका, आवास सहित विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से गरीबों का कल्याण किया जायेगा। आगामी जुलाई माह से प्रदेश में पाँचवीं तक के सभी शासकीय स्कूलों में मध्यान्ह-भोजन कार्यक्रम में सप्ताह में तीन बार दूध भी दिया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक में इस संबंध में निर्देश दिये। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव और मुख्य सचिव श्री अन्टोनी डिसा भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ग्रामीण विकास से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिये कि ग्रामों में जल स्त्रोतों की सफाई का अभियान चलाया जाये। ग्रामीण विकास की योजनाओं में निर्मित परिसम्पत्तियों का उपयोग सुनिश्चित किया जाये। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें। प्रदेश में प्लास्टिक वेस्टेज के रिसाइकल्स से निर्मित सड़कों की गुणवत्ता को देखते हुए इसे बढ़ावा दिया जाये। इससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी। जिन हितग्राहियों को आवास योजना में आवास स्वीकृत हुए हैं उन्हें मुख्यमंत्री की ओर से पत्र भेजा जाये। सहरिया और बैगा जैसी जनजातियों के हितग्राहियों के लिये आवास निर्माण का अभियान चलाया जाये। वर्ष 2018 तक प्रदेश के प्रत्येक घर में शौचालय बनवाये जायें। एकीकृत जल ग्रहण क्षेत्र प्रबंध कार्यक्रम का इम्पेक्ट असेसमेंट करवाया जाये।
मुख्यमंत्री ने मनरेगा की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिये कि योजना में मजदूरी का भुगतान समय से किया जाये। पंच परमेश्वर योजना की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि प्रत्येक ग्राम के समन्वित विकास की योजना बनाई जाये। मुख्यमंत्री ग्राम हाट बाजार योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाये। ग्रामों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करें।
बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में 12 हजार 471 किलोमीटर लंबाई की 5,836 सड़क बनाई गई हैं। इन पर 2,169 करोड़ रुपये व्यय हुए हैं। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में निर्मित ग्रेवल सड़कों के डामरीकृत सड़कों में उन्नयन की परियोजना विश्व बेंक को भेजी गई हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 5,239 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई गई हैं। सड़कों की गुणवत्ता की जाँच के लिये प्रत्येक जिले में लेब स्थापित की गई है। इंदिरा आवास योजना में 95 हजार 435 आवास तथा मुख्यमंत्री अंत्योदय आवास योजना में 6,037 आवास निर्माणाधीन है। प्रदेश में विशेष गाम सभाएँ कर आवासहीनों की सूची बनाई जायेगी। मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास मिशन में 4 लाख 92 हजार हितग्राहियों को आवासीय ऋण उपलब्ध करवाया गया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश में 5 लाख 21 हजार घर में शौचालय बनवाये गये हैं। एकीकृत जल-ग्रहण क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम के तहत प्रदेश में 65 हजार 375 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता निर्मित की गई है। मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम से 71 लाख 86 हजार बच्चों को लाभान्वित किया गया है। विदिशा जिले में मध्यान्ह भोजन के तहत स्कूलों में दूध के प्रदाय से कुपोषण रोकने में मदद मिली है। मनरेगा में प्रदेश में 11 करोड़ 71 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित किया गया है। पंच परमेश्वर योजना में ग्राम पंचायतों को बीते चार वर्ष में 5,108 करोड़ रूपये विकास कार्यों के लिये उपलब्ध करवाये गये हैं। इस योजना में ग्रामों में सीमेंट- कांक्रीट रोड तथा नालियों के निर्माण करवाये गये। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में प्रदेश में एक लाख 365 स्व-सहायता समूह बनाये गये। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्रीमती अरूणा शर्मा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।


 
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