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D-81935/12-09-17

किसानों को लाभकारी मूल्य मिलना होगा सुनिश्चित
Our Correspondent : 13 Aug 2017
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मुख्ममंत्री भावांतर भुगतान योजना, कस्टम प्रोसेसिंग सेंटर्स योजना, किसानों की संतानों के लिए कृषक उद्यमी योजना लागू की जायेगी। उन्होंने डिफाल्टर किसानों के लिये समाधान योजना और मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना लागू किये जाने की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले तीन माह में सभी अविवादित नामांतरण, बंटवारे और सीमांकन प्रकरण निराकृत हो जायेंगे। इसके बाद तीन माह से अधिक पुराने प्रकरण की जानकारी देने वाला पुरस्कृत होगा! संबंधित राजस्व अधिकारी के विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवाई होगी। श्री चौहान आज आकाशवाणी से प्रसारित कार्यक्रम “दिल से” में किसानों के साथ सीधी बात कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि भावांतर योजना के द्वारा किसानों को उनके उत्पाद का लाभकारी मूल्य मिलना सुनिश्चित हो जायेगा। इस योजना में फसल गिरदावरी मोबाइल एप के माध्यम से प्राप्त संपूर्ण डाटा संकलित किया जायेगा। इससे किस किसान ने कौन सी फसल कितने रकबे में बोई, यह पता चलेगा और औसत उत्पादन की गणना कर समर्थन मूल्य और विक्रय मूल्य के अंतर की राशि को सीधे किसानों के खातों में डालने की व्यवस्था होगी। किसानों को राजस्व मामलों सीमांकन, नामांतरण और बँटवारे आदि में विलम्ब नहीं हो इसके लिए रेवन्यू केसेस मॉनीटरिंग सिस्टम की जानकारी देते हुये श्री चौहान ने बताया कि अगले तीन माह में सभी अविवादित नामांतरण, बंटवारे और सीमांकन प्रकरण निराकृत हो जायेंगे। इसके बाद तीन माह से अधिक पुराने ऐसे लंबित प्रकरणों की जानकारी देने वालों को नगद पुरस्कार मिलने और पुरस्कार की राशि दोषी अधिकारी कर्मचारी से वसूलने की बात कही। उन्होंने बताया कि शीघ्र ऐसी व्यवस्था की जायेगी जिसमें प्रति वर्ष खसरा की नकल की प्रतिलिपि नि:शुल्क किसानों को उपलब्ध करवाई जायेगी। उन्होंने बताया कि कस्टम प्रोसेसिंग सेंटर्स योजना शीघ्र प्रारंभ की जायेगी जिसमें युवाओं को 25 लाख रूपये के केन्द्र की स्थापना पर 40 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। इन केन्द्रों में किसान अपने कृषि उद्यानिकी उत्पाद लाकर किराये पर उनकी क्लीनिंग, ग्रेडिंग, पैकिंग और मूल्य संवर्द्धन करवा सकेंगे। किसानों की संतानों के लिए कृषक उद्यमी योजना शीघ्र शुरू की जा रही है जिसमें स्वरोजगार के लिए 10 लाख से 2 करोड़ रूपये का ऋण सरकार की गारंटी पर मिलेगा। इसमें 15 प्रतिशत अनुदान तथा 5 वर्षों तक 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान की भी व्यवस्था की गई है। श्री चौहान ने बताया कि किसानों की आय को दोगुना करने के प्रधानमंत्री के लक्ष्य को प्राप्त करने का रोडमैप तैयार कर लिया है जिसे हर जिले के किसानों के साथ साझा किया जा रहा है। इसमें पाँच बिन्दुओं कृषि लागत में कमी, उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि, कृषि विविधीकरण, उत्पादन का लाभकारी मूल्य और कृषि के जोखिम अथवा आपदाओं में बेहतर राहत की व्यवस्था करने पर मुख्य रूप से ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि आय को दोगुना करना कोई कल्पना नहीं है। बुरहानपुर के गाँव हैदरपुर के श्री प्रकाश जावले ने खेती की सही पद्धति, माइक्रो न्यूट्रेंट आदि का उपयोग कर एक एकड़ सोयाबीन का उत्पादन 5 से 7 क्विंटल कर लिया। गन्ने में ड्रिप फर्टीगेशन और एसएसआई पद्धति से उत्पादन 40 से 53 टन कर लिया। इस मॉडल से खेती कर प्रति एकड़ 62 हजार रूपये के लाभ को उन्होंने एक लाख रूपये कर लिया है। इसी तरह छिंदवाड़ा जिले के पांढ़ुर्ना के गांव तिगांव के श्री मधुसूदन टोनपे, सीधी जिले के गांव उपनी के श्री हरीलाल जायसवाल ने हाईटेक सब्जी के उत्पादन से, उज्जैन के गांव माकड़ोन के श्री हरीश पाटीदार ने पॉली हाउस में जैविक पान की खेती से, आगर जिले के गांव नलखेड़ा के श्री बद्रीलाल धाकड़ ने एक हेक्टेयर के बगीचे में 600 क्विंटल संतरे का उत्पादन कर लागत का 6 गुना तक बढ़ाने की जानकारी दी। उन्होंने खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए सरकार के प्रयासों की भी जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि किसानों को सस्तीदर पर कृषियंत्र किराये पर उपलब्ध करवाने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटरों की स्थापना और ग्रामीण युवाओं को उनसे जोड़ा गया है। यह भी बताया कि मिट्टी की जाँच की व्यवस्था सभी विकासखण्डों में करवाई जा रही है ताकि जाँच के लिये किसानों को ज्यादा दूर नहीं जाना पड़े। मुख्यमंत्री कृषक सहकारी ऋण सहायता योजना के द्वारा खाद बीज के लिए माइनस 10 प्रतिशत पर कर्ज दिया जाता है। साहूकार पैसों की वसूली के लिए जोर जबरदस्ती नहीं कर सके, इसके उचित प्रबंध किये गये हैं। साथ ही साहूकार मूलधन से अधिक ब्याज नहीं ले सके, इसके लिये कानून में संशोधन की पहल की गई है। संशोधित प्रस्ताव राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिये भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने किसानों को वैज्ञानिक आधार पर बीज दर अनुसार बुवाई करने, अरहर की धारवाड़ पद्धति से, धान की श्री पद्धति से, रिज-फरो पद्धति से सोयाबीन की खेती करने, अंतवर्तीय फसलों की खेती करने का परामर्श दिया। श्री चौहान ने बताया कि अंतवर्तीय फसलें किसानों को प्राकृतिक आपदा के समय सुरक्षा देती है। उन्होंने खेती के साथ सहायक व्यवसाय के द्वारा अतिरिक्त आय अर्जित करने के लिये किसानों को प्रेरित किया। पशुपालन को लाभदायक बनाने के लिये आचार्य विद्या सागर गौ संवर्धन योजना की जानकारी देते हुये मुख्यमंत्री ने बताया कि 10 लाख रुपये तक की इकाई के लिये ढ़ाई लाख रूपये के अनुदान की व्यवस्था है। विगत दिनों प्याज के मूल्यों में आई गिरावट का उल्लेख करते हुये श्री चौहान ने बताया कि भविष्य में प्याज ठीक मूल्य पर बिके, इसके लिये प्याज के भंडारण में मदद की योजना तैयार की गई है जिसमें किसानों को 50 मी. टन क्षमता वाले भंडार गृह बनाने पर 50 प्रतिशत पौने दो लाख रूपये अनुदान राशि के रूपये मिलते हैं। उन्होंने खरपतवार नियंत्रण की दृष्टि से मल्चिंग को बढ़ावा देने फार्म पॉण्ड की प्लास्टिक लाइनिंग योजना, सोलर ड्रायर योजना और समन्वित कीट प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिये जाने की बात कही। दूध उत्पादकों को उनके दुग्ध उत्पादक का उचित मूल्य दिलाने की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुये मुख्यमंत्री ने बताया कि तीन हजार दूध संकलन केन्द्रों से प्रतिदिन एक लाख किलो दूध एकत्रित हो रहा है। प्रदेश में 14 मिलियन टन दुग्ध उत्पादन द्वारा राज्य देश में चौथे स्थान पर है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किसानों पर आई विपदाओं के विभिन्न प्रसंगों को उल्लेख करते हुये कहा कि सरकार सदैव उनके साथ रही है। विगत दिनों दलहन फसलों और प्याज के मंडी में प्रचलित दरों में गिरावट का उल्लेख करते हुये उन्होंने बताया कि सरकार के प्रयासों से किसानों को लगभग एक हजार करोड़ रूपये से अधिक की आय प्राप्त हुई है। सरकार द्वारा किसानों को प्राकृतिक और आकस्मिक आपदाओं के विरूद्ध सुरक्षा कवच प्रदाय किये जाने की जानकारी देते हुये मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना में मृत्यु पर 4 लाख रूपये की, स्थाई नि:शक्ता पर एक लाख और अस्थाई पर 50 हजार रूपये देने और सिंचित फसल की 50 प्रतिशत से अधिक क्षति होने पर 26 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर राहत दिलवाने के विषय में बताया। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि आपदा की स्थिति में ऋण वसूली रोक दी जाती है। ऋण का ब्याज सरकार भरती है। लंबित होने पर भी अगले वर्ष ऋण दिया जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने के लिये प्रधानमंत्री श्री मोदी का आभार ज्ञापित करते हुये बताया कि राज्य में 50 लाख किसानों को इससे जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में देश का सबसे बड़ा फसल बीमा दावा भुगतान राज्य में किया गया था। खरीफ 2016 की फसल बीमा योजना के एक हजार 880 करोड़ रूपये के दावों का भुगतान भी अगस्त माह में कर दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने सिंचाई सुविधाओं को बढ़ाने के प्रयासों तथा निर्माणाधीन और स्वीकृत योजनाओं का विवरण देते हुये बताया कि वर्ष 2025 तक 60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचित कर दिया जाएगा। इसी तरह नर्मदा के जल से मालवा में 6,50,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा देने की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 4,47,000 हेक्टेयर सैंच्य क्षेत्र को केन-बेतवा में शामिल करवाने के प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी के पर ड्राप मोर क्राप के सिद्धांत को क्रियान्वित करने के संकल्प को दोहराते हुये बताया कि प्रेशर से सिंचाई के लिये जल उपलब्ध करवाने की व्यवस्था 44 परियोजनाओं के 12 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है। ड्रिप इरीगेशन से उद्यानिकी फसलों की खेती करने के लिए किसानों को बधाई देते हुये बताया कि इस पद्धति से 40 से 60 प्रतिशत पानी कम लगता है। उत्पादन भी 10 से 30 प्रतिशत बढ़ जाता है। इसके साथ ही सिंचाई पंपों के अस्थाई कनेक्शनों को स्थाई पंप कनेक्शन में परिवर्तित करने के लिए मुख्यमंत्री स्थाई कृषि पंप कनेक्शन योजना की जानकारी दी जिसमें फ्लेट रेट पर 5 लाख कृषि पंपों को स्थाई कनेक्शन दिये जाना है। साथ ही किसानों के समक्ष बिजली की रीडिंग लेकर वास्तविक क्षमता अनुसार बिल निर्धारण व्यवस्था के बारे में भी बताया। उन्होंने बताया कि 5 हॉर्स पावर के विद्युत पंप पर सालाना 31 हजार की लागत आती है जिसमें से किसानों को मात्र 7 हजार रूपये ही देने पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में विद्युत अधोसंरचना का विकास नहीं हुआ है, उन क्षेत्र में मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना लागू की जायेगी जिसमें 3 लाख 41 हजार रूपये की लागत वाला 3 हॉर्स पावर का सोलर पंप मात्र 34 हजार रूपये में मिलेगा जबकि 5 हॉर्स पावर का 4 लाख 68 हजार रूपये का पंप सिर्फ 68 हजार में मिलेगा। मुख्यमंत्री ने किसानों को लाभकारी मूल्य दिलवाने की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुये बताया कि एक हजार करोड़ रूपये की लागत से मूल्य स्थिरीकरण कोष की स्थापना की गई है। जो बाजार में हस्तक्षेप कर किसानों को उनकी उपज का उचित दाम दिलवायेगा। इसके साथ ही कृषि उत्‍पाद लागत एवं विपणन आयोग का गठन किया गया है जो फसलों की कीमतें गिरने पर हस्तक्षेप करेगा। इसी तरह उर्वरक अग्रिम भंडारण योजना द्वारा खाद के अग्रिम भंडारण के लिए प्रेरित किया जायेगा। उन्होंने बताया कि अग्रिम उठाव की प्रक्रिया में ब्याज का भुगतान भी किसानों को नहीं करना पड़ेगा। रबी एवं खरीफ फसलों के लिए एक मुश्त अथवा अलग-अलग ऋण की व्यवस्था करने तथा डिफाल्टर किसानों को जीरो प्रतिशत पर कर्ज उपलब्ध करवाने के लिए समाधान योजना लागू करने की जानकारी मुख्यमंत्री ने दी। किसान अपनी फसले सीधे उपभोक्ता को बेच कर अधिक लाभ कमा सके, इसके लिए सभी नगरीय निकायों में किसान बाजार बनवाने की बात कही। मुख्यमंत्री ने किसानों से चर्चा में बताया कि कृषि प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार है। अच्छी खेती से प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। किसान के पास पैसा आता है तो वो बाजार जाता है जिससे व्यापारी की दुकान चलती है। दुकान का सामान कारखाने से आता है। कारखाने के चलने से पूंजी का निर्माण होता है। रोजगार के नये अवसर बनते हैं। इसीलिये यदि फसल अच्छी नहीं होती तो पूरी अर्थव्यवस्था ठप हो जाती है। इसीलिये खेती सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने खेती किसानी से जुड़े विषयों पर चर्चा की शुरूआत वर्षा की स्थिति से की। वर्षा की स्थिति बताते हुये मुख्यमंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया कि किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा से निपटने की आकस्मिक योजना सरकार ने बना ली है। किसानों की मेहनत से प्रदेश कृषि के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है। पाँच वर्षों से कृषि कर्मण पुरस्कार मिल रहा है, कृषि विकास दर पिछले 5 वर्षों में औसतन 20 प्रतिशत रही है। दलहन, तिलहन, चना, मसूर, सोयाबीन, अमरूद, टमाटर और लहसुन के उत्पादन में प्रदेश देश में पहले नम्बर पर है। इसी तरह गेहूँ, अरहर, सरसों, आँवला, संतरा, मटर और धनिये के उत्पादन में देश में दूसरे नम्बर पर है। मात्र एक दशक की अवधि में राज्य का कृषि उत्पादन ढ़ाई गुना बढ़ गया है। बलराम जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री ने किसानों के साथ सरकारी योजनाओं, उन्नत खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में किसानों द्वारा किये जाने वाले कार्यों, सरकारी प्रयासों और परिणामों पर दिल खोलकर संवाद किया। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि उनका परिवार सुखी रहे, इसके लिए सरकार संकल्पित है। अन्नदाता को किसी भी संकट और परेशानी से बचाने के लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि सरकार की योजनाओं को अपनी योजना मानकर उनका पूरा लाभ लें। उन्होंने कृषि विभाग, शोध संस्थाओं, शैक्षणिक संगठनों आदि से मिलकर कार्य करने का आग्रह किया है।


देशभर के किसानों पर क़र्ज़ 12,60,000 करोड़ और तीन बरस में उद्योगपतियों को रियायत 17,15,00,000 करोड़
Our Correspondent : 5 April 2017
भोपाल। तो देश की इकनॉमी का सच है क्या । क्योंकि एक तरफ 12 लाख 60 हजार करोड़ का कर्ज देशभर के किसानों पर है । जिसे माफ करने के लिये तमाम राज्य सरकारों के पास पैसा है नहीं । तो दूसरी तरफ 17 लाख 15 हजार करोड की टैक्स में माफी उद्योग सेक्टर को सिर्फ बीते तीन वित्तीय वर्ष में दे दी गई । यानी उघोगों को डायरेक्ट या इनटायरेक्ट टैक्स में अगर कोई माफी सिर्फ 2013 से 2016 के दौरान ना दी गई होती तो उसी पैसे से देशभर के किसानो के कर्ज की माफी हो सकती थी । तो क्या वाकई किसान और कारोबारियों के बीच मोटी लकीर खिंची हुई है । या फिर किसान सरकार की प्रथामिकता में कभी रहा ही नहीं । ये सवाल इसलिये क्योकि एक तरफ एनपीए या उगोगो को टैक्स में रियायत देने पर सरकार से लेकर बैंक तक खामोश रहते हैं। लेकिन दूसरी तरफ किसानों की कर्ज माफी का सवाल आते ही महाराष्ट्र से लेकर पंजाब तक के सीएम तक केन्द्रीय सरकार से मुलाकात कर पैसों की मांग करते हैं। और केन्द्र सरकार किसानों का मुद्दा राज्य का बताकर पल्ला झाड़ती है तो एसबीआई चैयरमैन किसानों की कर्ज माफी की मुश्किलें बताती है । तो किसान देश की प्राथमिकता में कहां खड़ा है । ये सवाल इसलिये जिस तरह खेती राज्य का मसला है, उसी तरह उद्योग भी राज्य का मसला होता है । और इन दो आधारों के बीच एक तरफ केन्द्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने राज्यसभा में 16 जून 2016 को कहा , उघोगो को तीन बरस [ 2013-2016] में 17 लाख 15 हजार करोड रुपये की टैक्स माफी दी गई । तो दूसरी तरफ कृषि राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने नंवबर 2016 में जानकारी दी किसानों पर 12 लाख 60 हजार रुपये का कर्ज है । जिसमें 9 लाख 57 हजार करोड रुपये कमर्शियल बैक से लिये गये है ।

और इसी दौर में ब्रिक्स बैंक के प्रजीडेंट के वी कामत ने कहा कि 7 लाख करोड का एनपीए कमर्शियल बैंक पर है । यानी एक तरफ उघोगो को राहत । दूसरी तरफ उघोगों और कारपोरेट को कर्ज देने में किसी बैक को कोई परेशानी नहीं है। लेकिन किसानों के कर्ज माफी को लेकर बैंक से लेकर हर सरकार को परेशानी। जबकि देश का सच ये भी है कि जितना लाभ उठाकर उघोग जितना रोजगार देश को दे नही पाते, उससे 10 गुना ज्यादा लोग खेती से देश में सीधे जुड़े हैं। आंकड़ों के लिहाज से समझें तो संगठित क्षेत्र में महज तीन करोड रोजगार हैं। चूंकि खेती से सीधे जुड़े लोगों की तादाद 26 करोड है। यानी देश की इक्नामी में जो राहत उघोगों को, कारपोरेट को या फिर सर्विस सेक्टर में भी सरकारी गैर सरकारी जितना भी रोजगार है, उनकी तादाद 3 करोड़ है । जबकि 2011 के सेंसस के मुताबिक 11 करोड 80 लाख अपनी जमीन पर खेती करते है । और 14 करोड 40 लाख लोग खेत मजदूर है । यानी सवा करोड की जनसंख्या वाले देश की हकीकत यही है कि हर एक रोजगार के पीछ अगर पांच लोगों का परिवार माने तो संगठित क्षेत्र से होने वाली कमाई पर 15 करोड़ लोगों का बसर होता है। वहीं खेती से होने वाली कमाई पर एक सौ दस करोड़ लोगों का बसर होता है । और इन हालातों में अगर देश की इक्नामी का नजरिया मार्केट इक्नामी पर टिका होगा या कहे पश्चिमी अर्थवयवस्था को भी भारत अपनाये हुये है तो फिर जिन आधारों पर टैक्स में राहत उद्योगों को दी जाती है । या बैंक उद्योग या कारपोरेट को कर्ज देने से नहीं कतराते तो उसके पीछे का संकट यही है कि अर्थशास्त्री ये मान कर चलते है कि खेती से कमाई देश को नहीं होगी । उद्योगों या कारपोरेट के लाभ से राजस्व में बढोतरी होगी ।

यानी किसानों की कर्ज माफी जीडीपी के उस हिस्से पर टिकी है जो सर्विस सेक्टर से कमाई होती है । और देश का सच भी यही है खेती पर चाहे देश के सौ करोड़ लोग टिके है लेकिन जीडीपी में खेती का योगदान महज 14 फिसदी है । तो इन हालातो में जब यूपी में किसानों की कर्ज माफी का एलान हो चुका है तो बीजेपी शासित तीन राज्यों में हो क्या रहा है जरा इसे भी देख लें। मसलन हरियाणा जहा किसान का डिफॉल्टर होना नया सच है ।

आलम ये कि हरियाणा के 16.5 लाख किसानों में से 15.36 लाख किसान कर्जदार हैं । इन किसानों पर करीब 56,336 करोड़ रुपए का कर्ज है, जो 2014-15 में 40,438 करोड़ रुपए था । 8.75 लाख किसाने ऐसे हैं, जिन्होंने कमर्शियल बैंक, भूमि विकास बैंक, कॉपरेटिव बैंक और आणतियों से कर्ज लिया हुआ है । और कर्ज के कुचक्र में ऐसे फंस गए हैं कि अब कर्ज न निगलते बनता है न उगलते।

किसानों की परेशानी ये है कि वो फसल के लिए बैंक से कर्ज लेते हैं। ट्रैक्टर, ट्यूबवैल जैसी जरुरतों के लिए जमीन के आधार पर भूमि विकास बैंक या कॉपरेटिव सोसाइटी से लोन लेता है। मौसम खराब होने या फसल बर्बादी पर कर्ज का भुगतान नहीं कर पाता तो अगली फसल के लिए आढ़तियों के पास जाते हैं। और फिर फसल बर्बादी या कोई भी समस्या न होने पर डिफॉल्टर होने के अलावा कोई चारा नहीं रहता। लेकिन-अब यूपी में जिस तरह किसानों का कर्ज माफ हुआ है, हरियाणा के किसान भी यही मांगने लगे हैं। और दूसरा राज्य है राजस्धान । जहा किसानो को कर्ज देने की स्थिति में सरकार नहीं है । लेकिन राजस्धान का संकट ये है कि एक तरफ कर्ज मांगने वाले किसानो की तादाद साढे बारह हजार है तो दूसरी तरफ वर्ल्ड बैंक से किसानो के लिये जो 545 करोड रुपये मिले लेकिन उसे भी सरकार खर्च करना भूल गई और इसी एवज में जनता का गाढ़ी कमाई के 48 करोड़ रुपए अब ब्याज के रुप में वसुधंरा सरकार वर्ल्ड बैंक को भरेगी । दरअसल वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट की शुरुआत 2008 में हुई थी,जब वसुंधरा सरकार ने राजस्थान एग्रीकल्चर कांपटिटवेसन प्रोजेक्ट बनाया था और फंडिंग के लिए वर्ल्ड बैंक को भेजा गया था । वर्ल्ड बैंक के इस प्रोजेक्ट के तहत कृषि, बागवानी, पशुपालन, सिंचाई और भूजल जैसे कई विभागों को मिलकर किसानों को कर्ज बांटने की योजना थी । वसुंधरा सरकार गई तो कांग्रेस की गहलोत सरकार आई और उसने 2012 में फंडिंग के लिए 832 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट वर्ल्ड बैंक को दिया । वर्ल्ड बैंक ने 545 करोड़ रुपए 1.25 फीसदी की ब्याज दर पर राजस्थान सरकार को दे दिए. लेकिन 2016 तक इसमें से महज 42 करोड़ ही सरकार किसानों को बांट पाई ।यानी एक तरफ किसानों को कर्ज नहीं मिल रहा। और दूसरी तरफ वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट के तहत जो 545 करोड़ रुपए में से जो 42 करोड बांटे भी गये वह किस रुप में ये भी देख लिजिये । 17 जिलों में यंत्र, बीज और खाद के लिए सिर्फ 14 लाख 39 हजार रुपए बांटे गए । फल, सब्जी, सोलर पंप के लिए 3 लाख 13 हजार रुपए। जल संग्रहण के लिए 7 लाख दो हजार रुपए बांटे गए । पशुपालन के लिए 2 लाख 19 हजार रुपए दिए ।नहरी सिंचाई निर्माण के लिए 2 लाख 36 हजार रुपए दिए गए । और भू-जल गतिविधियों के लिए 11 लाख 50 हजार रुपए बांटे गए । यानी सवाल सरकार का नहीं सरोकार का है । क्योकि अगर सरकार खजाने में पैसा होने के बावजूद जनकल्याण का काम सरकार नहीं कर सकती तो फिर सरकार का मतलब क्या है। और तीसरा राज्य महाराष्ट्र जहां बीते दस बरस से किसानो का औसत खुदकुशी का आलम यही है कि हर तीन घंटे में एक किसान खुदकुशी करता है । खुदकुशी करने वाले हर तीन में से एक किसान पर 10 हजार से कम का कर्ज होता है । हालात है कितने बदतर ये 2015 के एनसीआरबी के आंकडों से समझा जा सकता है । 2015 में 4291 किसानों ने खुदकुशी की । जिसमें 1293 किसानो की खुदकुशी की वजह बैक से कर्ज लेना था । जबकि 795 किसानो ने खेती की वजह से खुदकुशी की । यानी खुदकुशी और कर्ज महाराष्ट्र के किसानों की बड़ी समस्या है, जिसका कोई हल कोई सरकार निकाल नहीं पाई।

और अब यूपी में किसानों की कर्ज वापसी के बीच महाराष्ट्र के देवेन्द्र फडणवीस सरकार पर ये दबाव पड़ना तय है कि वो भी महाराष्ट्र के किसानों के लिए कर्जवापसी की घोषणा करें। क्योंकि विपक्ष और सरकार की सहयोगी शिवसेना लगातार ये मांग कर रहे हैं और महाराष्ट्र में कई जगह धरना-प्रदर्शन हो रहे हैं। यानी यूपी की कर्जमाफी किसानो के लिये राहत है या राजनीतिक के लिये सुकून । इसका फैसला भी अब हर चुनाव में होगा। .


खेती-किसानी में समृद्ध होता मध्यप्रदेश
Our Correspondent :29 November 2016
देश और प्रदेश की समृद्धि के लिये यह जरूरी है कि खेती-किसानी लाभप्रद हो। मध्यप्रदेश की एक बड़ी आबादी गाँवों में है और जो किसी न किसी रूप में कृषि कार्य से जुड़ी है। मैं खुद भी किसान हूँ और मुझे पता है कि आज से ग्यारह वर्ष पूर्व किसानों का दर्द क्या था। सिंचाई सुविधा नहीं थी, उत्पादन और लागत में बड़ा अंतर था। ऋण की ब्याज दर 13-14 प्रतिशत थी, बिजली नहीं थी और इस पर अगर प्राकृतिक आपदा आ गयी, तो किसान की तो कमर ही टूट जाती थी। खेती से जुड़े मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की विकट समस्या हो जाती थी। प्रदेश में वर्ष 2003 में सत्ता परिवर्तन से प्रदेश के खेती-किसानी में एक नया इतिहास रचने की शुरूआत हुई। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जो खुद एक किसान हैं, ने ग्यारह वर्ष पूर्व 29 नवम्बर, 2005 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर कृषि को सर्वोच्च प्राथमिकता वाले एजेंडे में रखा। उनका प्रण था कि हर हालत में खेती को लाभ का व्यवसाय तो बनाना ही है, इसके लिये जो आवश्यक और अनुकूल वातावरण चाहिये था, वह भी निर्मित करना है, इसमें मुख्यमंत्री सफल भी रहे। उन्होंने कभी न मिलने वाली बिजली दस घंटे किसानों को मिले, यह सुनिश्चित किया। सिंचाई का रकबा साढ़े सात लाख हेक्टेयर ही था, वर्ष 2005 में, आज 36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिचाई उपलब्ध है। किसानों को जीरो प्रतिशत ब्याज पर ऋण दिया गया। एक कदम आगे बढ़ते हुए यह निर्णय लिया गया एक लाख का ऋण लेने पर किसानों को 90 हजार ही लौटाने होंगे। यही नहीं प्राकृतिक आपदा आने पर किसानों को इतना मुआवजा मिले कि उसकी क्षतिपूर्ति हो सके, इस दिशा में ठोस कदम उठाये गये। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के लक्ष्य 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के संकल्प को साकार करने के लिये देश में सबसे पहले रोड-मेप तैयार किया। खेती-किसानी पर आने वाली आपदा से पीड़ित किसानों को राहत देने में भी सरकार ने पिछले 11 साल में किसानों की हमदर्द बनने की जो मिसाल कायम की है, वह बेमिसाल है। वर्ष 2005-06 से वर्ष 2015-16 तक किसानों को 11 हजार 262 करोड़ 16 लाख 90 हजार रुपये की राशि वितरित की गयी। यह एक इतिहास है। इससे प्रभावितों को न केवल राहत मिली, बल्कि वे आपदा का भी सामना कर पाये। कृषि क्षेत्र को उन्नत बनाने, उत्पादन बढ़ाने के जो प्रयास सरकार ने पिछले 11 वर्ष में किये, उसके परिणामों पर अगर नजर डालें, तो लगेगा कि यह प्रयास अगर पूर्व में किये जाते तो शायद आज हमारे प्रदेश के हालात और ज्यादा बेहतर होते। कृषि विकास दर मध्यप्रदेश में खेती-किसानी में सरकार द्वारा उठाये गये कदमों का सबसे अनुकूल प्रभाव कृषि विकास दर पर पड़ा। पिछले चार वर्ष में हमारी कृषि विकास दर 18 प्रतिशत प्रतिवर्ष है। यह दर प्राप्त करने वाला मध्यप्रदेश देश का एकमात्र राज्य है। यही नहीं प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद, जो 10.5 प्रतिशत है, में कृषि का योगदान 5 प्रतिशत है, यह भी देश में सर्वाधिक है। कृषि उत्पादन में वृद्धि वर्ष 2004-05 के उत्पादन पर हम नजर डालें, तो हमारा कुल कृषि उत्पादन 2.14 करोड़ मीट्रिक टन था। पिछले 11 वर्ष में हुए प्रयासों के बाद यह उत्पादन दोगुना होकर 4.23 करोड़ मीट्रिक टन हो गया। यह वृद्धि 97.66 प्रतिशत है। खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि खाद्यान्न उत्पादन में भी प्रदेश ने वर्ष 2004-05 की तुलना में एक लम्बी छलांग लगायी है। प्रदेश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 11 वर्ष पूर्व 1.43 करोड़ मीट्रिक टन था। वर्ष 2015-16 में यह 3.46 करोड़ मीट्रिक टन है। प्रतिवर्ष 12 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी है और पिछले 11 वर्ष के मुकाबले यह वृद्धि 142 प्रतिशत है। यह एक अप्रत्याशित उपलब्धि है। सम्पूर्ण खाद्यान्न उत्पादन में मध्यप्रदेश अब तीसरे स्थान पर है, गेहूँ उत्पादन में दूसरे स्थान पर है और मक्का में पाँचवें स्थान पर है। दलहन उत्पादन में वृद्धि दलहन फसलों के उत्पादन में भी मध्यप्रदेश ने पिछले ग्यारह वर्ष में अपार वृद्धि की है। वर्ष 2004-05 में प्रदेश का दलहन फसलों का उत्पादन 33.51 लाख मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2015-16 में बढ़कर 58.15 लाख मीट्रिक टन हो गया। यह वृद्धि 73.53 प्रतिशत है। आज हमारा प्रदेश देश के कुल दलहन उत्पादन का 28 प्रतिशत उत्पादन करता है। तिलहन फसलों के उत्पादन में वृद्धि तिलहन फसलों का उत्पादन वर्ष 2004-05 में कुल 39.08 लाख मीट्रिक टन था, जो आज बढ़कर 57.69 लाख मीट्रिक टन हो गया है। आज हमारे प्रदेश का तिलहन उत्पादन में पूरे देश में 30 प्रतिशत का योगदान है। मुख्य फसलों की उत्पादकता में वृद्धि पिछले ग्यारह वर्ष में गेहूँ, धान, मक्का और सरसों की औसत उत्पादकता में भी रिकार्ड बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2004-05 में 18.21 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गेहूँ का उत्पादन था, जो आज बढ़कर 31.31 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गया है। धान की औसत पैदावार वर्ष 2004-05 में 8.18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी, जो बढ़कर 27.74 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गयी है, यह तीन गुना से अधिक है। मक्का की औसत पैदावार 14 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी, जो बढ़कर 29.33 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गयी है। पिछले ग्यारह वर्ष में यह वृद्धि 109.50 प्रतिशत दर्ज की गयी है। सरसों की औसत पैदावार भी बढ़ी है। प्रति हेक्टेयर 9.54 क्विंटल सरसों अब 11.35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादित हो रही है। कृषि क्षेत्र में वृद्धि सरकार के प्रयासों से प्रदेश के कृषि क्षेत्र में भी पिछले ग्यारह वर्ष में वृद्धि हुई है। वर्ष 2004-05 में 1 करोड़ 92 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र था, जो अब बढ़कर 2 करोड़ 37 लाख हेक्टेयर हो गया है। कृषि के क्षेत्र में इस दौरान 45 लाख हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी हुई है। वर्तमान में हमारी कृषि सघनता 153 प्रतिशत है। सिंचित क्षेत्रफल भी बढ़ा नहरों, कुंओं, तालाबों से की जाने वाली सिंचाई के क्षेत्रफल में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। वर्ष 2004-05 में सिंचित रकबा 40 लाख 31 हजार हेक्टेयर था। वर्ष 2015-16 में यह बढ़कर 110 लाख हेक्टेयर होने का अनुमान है, जो दोगुना से अधिक है। प्रदेश में नहरों से सिंचित क्षेत्र 90 लाख 75 हजार हेक्टेयर था। अब यह बढ़कर 36 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया है। जैविक खेती का विकास और प्रसार जैविक खेती में भी प्रदेश में जो प्रयास हुए, उसके परिणाम स्वरूप आज हम पूरे देश का 40 प्रतिशत से अधिक जैविक खेती का उत्पादन करते हैं। आज हमारे प्रदेश में करीब दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती की जा रही है। दुनिया का एक तिहाई जैविक कपास भी हमारे प्रदेश में पैदा होता है। बीजों की पैदावार में अव्वल प्रमाणीकृत बीजों की पैदावार में भी आज हमारा प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हुआ है। वर्ष 2004-05 में मात्र 14 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज पैदा होता था, जो अब बढ़कर 40 लाख क्विंटल हो गया है। कृषि यंत्रों का विस्तार मध्यप्रदेश में खेती-किसानी को उन्नत बनाने के लिये सरकार के प्रयासों के बेहतर परिणाम मिले हैं। किसानों ने बड़े पैमाने पर कृषि यंत्रों को अपनाया है। यही कारण है कि हमारी खेती के उत्पादन में समृद्धता आयी है। आज हमारे प्रदेश में 87 हजार 143 ट्रेक्टर का पंजीयन हुआ है। इसके कारण हमारी फार्म पॉवर उपलब्धता जो 0.80 किलोवॉट प्रति हेक्टेयर थी, वह बढ़कर 1.85 किलोवॉट प्रति हेक्टेयर हो गयी है। धान की रोपाई में एसआरआई पद्धति का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश में 40 हजार कोनोवीडर एवं 20 हजार मार्कर यंत्र किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध करवाया गया है। जिससे एसआरआई पद्धति से धान की रोपाई के रकबे में वृद्धि हुई है। रिज एण्ड फरो पद्धति से सोयाबीन की बोनी का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया है। एक लाख सीड ड्रिलों को रिज-फरो सीड ड्रिल के अटेचमेंट 90 प्रतिशत अनुदान पर कृषकों को उपलब्ध करवाये गये हैं। इस पद्धति को किसान व्यापक रूप से अपना रहे हैं, जिसके अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं। प्रदेश में वर्ष 2009-10 से लागू की गयी हलधर योजना में जो भी किसान अपनी खेती की गहरी जुताई करवाता है, उसे पचास प्रतिशत अधिकतम 2000 रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। इस योजना से किसानों की खेत की मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और फसल की उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है। इस योजना में अभी तक 3 लाख 65 हजार हेक्टेयर में गहरी जुताई की गयी है। कृषि शक्ति योजना वर्ष 2011 से शुरू की गयी है। योजना में यंत्र-दूत ग्रामों का चयन कर उन्हें तकनीकी रूप से विकसित करने का कार्यक्रम लिया गया है। यंत्र-दूत में अभी तक कुल 600 ग्राम विकसित किये जा चुके हैं। चुने हुए ग्रामों के कृषकों को कृषि यंत्र को अपनाने के लिये प्रोत्साहित किया जाता है। कृषकों को प्रदर्शन, प्रशिक्षण, संगोष्ठी, भ्रमण आदि के जरिये यंत्रीकरण के लाभों के बारे में बताया जाकर वास्तविक रूप से अपनाये जाने के लिये तकनीकी सहयोग भी दिया जाता है। इस कार्यक्रम से चयनित ग्रामों में किसानों की उत्पादकता में काफी वृद्धि पायी गयी है एवं किसान आर्थिक रूप से सुदृढ़ हुए हैं। कस्टम हायरिंग सेंटर प्रदेश में निजी क्षेत्र में 1250 कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना की गयी हैं। इस वर्ष 2016-17 में 612 नये कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किये जा रहे हैं, जिसमें अनुदान की राशि अधिकतम 10 लाख रुपये है। इसी वर्ष 50 हाईटेक कस्टम हब की स्थापना भी होने जा रही है, जिनकी लागत 40 लाख से लेकर 2 करोड़ रुपये तक है। बीमा योजना का सफल क्रियान्वयन आपदा के बाद किसानों को राहत मिले, उनकी क्षति ग्रस्त फसलों का मुआवजा मिले, इस दिशा में भी सरकार के प्रयास महत्वपूर्ण रहे हैं। इसी के तहत वर्ष 1999-2000 रबी से लेकर वर्ष 2014-15 की रबी फसलों तक कुल 80 लाख 54 हजार किसान को 5452 करोड़ 87 लाख रुपये की बीमा दावा राशि बाँटी गयी है। वर्ष 2014-15 में लगभग 2 लाख किसान को 150 करोड़ 84 लाख की बीमा दावा राशि वितरित की गयी, वहीं खरीफ-2015 के लिये 20 लाख 46 हजार किसान को 4416 करोड़ 89 लाख की दावा राशि का वितरण कार्य शुरू किया गया है। यह राशि देश में अब तक सबसे अधिक बाँटी जाने वाली दावा राशि है। मृदा स्वास्थ्य-कार्ड कृषि के लिये मिट्टी उपजाऊ बने, इसका निरंतर परीक्षण हो, इसके लिये मृदा स्वास्थ्य-कार्ड बनाये जा रहे हैं। सभी 313 विकासखण्ड में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला तथा सभी 10 संभागीय मुख्यालय पर बीज और उर्वरक परीक्षण प्रयोगशालाएँ स्थापित की जा रही हैं। अभी तक प्रदेश में 45 लाख से अधिक किसान के स्वाइल हेल्थ-कार्ड बनाये जा चुके हैं। तीसरी फसल के क्षेत्र का विस्तार किसानों की आय में वृद्धि हो, इसके लिये सरकार ने तीसरी फसल लेने के लिये किसानों को प्रोत्साहित किया। पिछले वित्त वर्ष में करीब तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तीसरी फसल ली गयी है। मध्यप्रदेश ने कृषि क्षेत्र में जो उपलब्धि हासिल की है उसे राष्ट्रीय स्वीकार्यता भी मिली है। प्रदेश को मिले सम्मान से जहाँ प्रदेश का गौरव बढ़ा है वहीं किसानों का हौसला भी बढ़ा है। देश में मध्यप्रदेश अकेला है जिसे लगातार चार बार कृषि कर्मण अवार्ड मिला है। वर्ष 2011-12 और 2012-13 में कुल खाद्यान्न उत्पादन में प्रथम, वर्ष 2013-14 में कुल गेहूँ उत्पादन में प्रथम और वर्ष 2014-15 में कुल खाद्यान्न उत्पादन में मध्यप्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड मिला है।


किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केन्द्र सरकार अनाज का उत्पादन बढाने, लागत कम करने तथा किसानों की आमदनी के अन्य साधनों खोलने के साथ उनकी उपज की उचित मार्केटिंग का जी तोड़ प्रयास कर रही है- श्री राधा मोहन सिंह
24 November 2016
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केन्द्र सरकार अनाज का उत्पादन बढाने, लागत कम करने तथा किसानों की आमदनी के अन्य साधनों खोलने के साथ उनकी उपज की उचित मार्केटिंग का जी तोड़ प्रयास कर रही है। कृषि मंत्री ने यह बात आज यहां सेंगरि ला इरोज होटेल में एसोचेम द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम का विषय था - किसानों को बाजार से कैसे जोड़ा जाए। कृषि मंत्री ने कहा कि अब यह जरूरी हो गया है कि बाजार, किसान की पहुच के अन्दर हो और उनके और उपभोक्ताओं के बीच कोई बिचौलिया नहीं हो, उपज का मूल्य पारदर्शी तरीके से तय हो और किसान को उनकी उपज का अविलंब भुगतान हो। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार देश भर में एक ऐसा ढांचा खड़ा कर रही है जिसमें बाजार सीधे खेत से जुड़ जाएंगे और उपभोक्ता सीधे किसान के खेत से उपज खरीद सकेंगे। कृषि मंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार किसानों को उनकी उपज की अच्छी कीमत दिलाने के लिए पहले ही राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी ई-नाम अप्रैल 2016 में लांच कर चुकी है। ई-नाम पोर्टल से मार्च, 2018 तक कुल 585 मंडियों को जोड़े जाने की योजना हैI सितम्बर-2016 तक 200 मंडियों के लक्ष्य के सापेक्ष 10 राज्‍यों की 250 मंडियों को ई-नाम से जोड़ दिया गया हैI उन प्रदेशों की मंडिया ई-नाम से जुड़ सकती हैं जिन्होंने अपने विपणन कानूनों में तीन सुधार कर लिये हैं - ई ट्रेडिंग की व्यवस्था, एकल बिंदु पर मंडी शुल्क की उगाही और सिंगल लाइसेंस से पूरे प्रदेश में व्यापार। दो प्रमुख राज्‍य बिहार और केरल कोई मंडी कानून न होने से अभी ई-नाम परियोजना से नहीं जुड़ पा रहे हैं। कृषि मंत्री ने इन राज्‍यों की सरकारों से किसान हित में मंडी कानून बनाकर ई-नाम परियोजना से जोड़ने का अनुरोध किया है। कृषि मंत्री ने कहा कि ई-नाम की इस नयी व्यवस्था में अब किसान कहीं भी बैठकर ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए अपनी फसल बेच सकता है तथा इसके जरिए वह उपज की गुणवत्ता के अनुसार उत्तम मूल्य प्राप्त कर सकता है I यदि उसे मूल्य पसंद ना हो तो वह ऑनलाइन की गयी सर्वोच्च बोली खारिज भी कर सकता है। किसान को ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था भी है। इसके अतिरिक्‍त किसानों को उपभोक्‍ताओं से सीधे जोड़ने के लिए वर्तमान सरकार किसानों के खेत से उत्‍पाद की सीधा खरीद को प्रोत्‍साहित कर रही है। इसके लिए 22 राज्‍यों ने अपने विपणन कानूनों में बदलाव भी कर लिया है। कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि देश में कृषि उपज का विपणन, राज्य सरकारों की विनियमित मंडियों के माध्‍यम से किया जाता है, जिनकी कुल संख्या 6746 हैI उन्होंने कहा कि वैसे तो किसानों पर गठित राष्ट्रीय आयोग की सिफारिश के अनुसार 80 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक मंडी होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान में लगभग 580 वर्ग किलोमीटर में एक मंडी हैI मंडियों की संख्‍या बढ़ाने के लिए सरकार मंडी कानून में सुधार करवाकर निजी क्षेत्र की मंडियां स्‍थापित करवाने का प्रयास कर रही है। अब तक 21 राज्‍यों ने इस संबंध में अपने विपणन कानूनों में सुधार कर लिया है।

एक एकड़ से ढ़ाई एकड़ तक के भू-धारकों को मिलेगा-कुंआ, खेत
19 November 2016
महात्मा गांधी नरेगा की कपिलधारा उप योजना में एक एकड़ से ढ़ाई एकड़ तक के भू-धारकों को ''कुंआ-खेत तालाब'' का संयुक्त लाभ मिलेगा। अपर मुख्य सचिव ग्रामीण विकास श्री आर.एस. जुलानिया ने सभी जिला कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को इस संबंध में निर्देश जारी किये हैं। हितग्राहियों का चयन प्राथमिकता के आधार पर किया जायेगा। इसमें पहली प्राथमिकता विधवा एवं परित्यक्ता महिला, अनुसूचित जाति/जनजाति को तथा इसके बाद अन्य भू-धारकों को योजना का लाभ मिलेगा। जिन भू-धारकों को सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। खेत तालाब 400 घनमीटर जल-संरक्षण क्षमता का बनाना होगा। खेत तालाब और कुंआ बनाने के समय निकलने वाली मिट्टी का उपयोग खेत को समतल बनाने तथा मेढ़ बंधान में किया जायेगा। कूप निर्माण गोलाकार होगा जिसका व्यास 5 मीटर और गहराई 12 मीटर होगी। इसके अलावा लागत सीमा के भीतर अधिक गहराई कराने के लिए हितग्राही स्वतंत्र होगा। हितग्राही कुंआ बनाने के लिए सामग्री मद से मशीन से बोरिंग करा सकता है। कुंआ खुदाई के बाद कुंआ बंधान के लिए आधार कठोर पत्थर पर आरसीसी की बीम डालकर निर्माण करना होगा। कुंए की मुंडेर की चौड़ाई 30 से 40 सेमी तथा ऊँचाई 75 सेमी होना जरूरी होगा। कुंए के बाहरी हिस्से में न्यूनतम एक मीटर की जगत बनाना होगी। खेत तालाब और कूप निर्माण को जोड़ना
कपिलधारा कूप के साथ खेत तालाब का भी लाभ हितग्राही को मिलेगा। खेत के उपरी हिस्से में खेत तालाब तथा निचले हिस्से में कुंए का निर्माण करवाया जायेगा, जिससे खेत तालाब से प्रवाहित जल कुंए में इकट्ठा हो सके। खेत तालाब से कुंए तक पानी के प्रवाह के बीच में पाइप डालना होगा तथा कुएं के समीप उसे बोल्डर, रेत से फिल्टर करना होगा। इसके लिए कार्य-स्थल का चयन हितग्राही की पसंद से होगा। इसमें भू- जलविद की भी सहायता ली जा सकेगी। कूप तथा खेत तालाब निर्माण की एजेंसी हितग्राही भी हो सकता है। यदि हितग्राही आजीविका मिशन के समूह का हितग्राही है, तो वह समूह की एजेंसी होगा। अन्य परिस्थितियों में ग्राम पंचायत निर्माण एजेंसी होगी। कुंआ, खेत तालाब की लागत 2 लाख 30 हजार रूपये निर्धारित की गयी है। इसमें एक लाख 15 हजार मजदूरी के लिए और 1 लाख 15 हजार सामग्री पर खर्च किए जा सकेंगें। कपिलधारा कूप में हितग्राही मेट का कार्य करेगा। मजदूरी भुगतान के मस्टर रोल जारी होंगे तथा सामग्री की राशि हितग्राही के खाते में सीधे जमा करवायी जायेगी।

खेती को फायदे का धंधा बनाना नारा नहीं मंत्र है
19 November 2016
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि खेती को फायदे का धंधा बनाना नारा नहीं मंत्र है। खेती को लाभप्रद बनाने के लिए प्रदेश में सिंचाई सुविधाएँ बढ़ाई जा रही हैं। राज्य सरकार सिंचाई सुविधाएँ बढ़ाने के लिए नया तरीका अपना रही है। सिंचाई के लिए लिफ्ट इरिगेशन की कार्य-योजना तैयार की गई है, ताकि गाँव डूब क्षेत्र में नहीं आयें और किसान आसानी से सिंचाई कर सकें। इसमें पाईप लाइन के जरिये खेतों तक पानी पहुँचाया जायेगा। नरसिंहपुर जिले में 2,100 करोड़ की चिनकी उदवहन सिंचाई योजना क्रियान्वित की जायेगी। श्री चौहान जिले के घाट बम्हौरी (समनापुर) में हितग्राही सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए संजीवनी का कार्य करेगी। उन्होंने सभी जरूरतमंदों को वर्ष 2022 तक मकान मालिक बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आगामी दो वर्ष में प्रदेश के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में 13 लाख मकान बनाये जायेंगे। प्रदेश सरकार हर गरीब को मकान बनाने के लिये डेढ़ लाख की आर्थिक सहायता देगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के युवाओं को नौकरी मांगने वाले नहीं नौकरी देने वाले सफल उद्यमी बनायेगी। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना में राज्य सरकार 10 लाख से एक करोड़ रूपये तक की आर्थिक सहायता दिलाने में मदद करेगी। सरकार बैंक गारंटी भी देगी और 5 साल तक ब्याज अनुदान भी राज्य सरकार द्वारा मुहैया करवाया जायेगा। इस योजना में अब कुटीर उद्योग के लिये भी लाभ दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि हम युवाओं की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं। विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए हरसंभव मदद की जायेगी। अब सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्ति दी जायेगी। आई.आई.टी., आई.आई.एम., मेडिकल एवं इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए जरूरतमंद विद्यार्थियों की फीस राज्य सरकार भरेगी।

किसान की बरकत, दोगुनी आय दिवास्वप्न नहीं,मोदी की प्रतिबद्धता...
14 April 2016
कृषि भारत की संस्कृति और सामाजिक सरोकार रहा है। ‘‘सांई इतना दीजिये जामें कुटुम्ब समाये, मैं भी भूखा न रहूं, साधू न भूखा जाये’’ इसमें बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय की सात्विक भावना समाहित है। लेकिन भौतिक विज्ञान के प्रभाव ने खेती की प्राथमिकता दोयम कर दी। खेती हाषिये पर चली गयी। रही-सही कसर खेती की बढ़ती लागत ने पूरी कर दी। रासायनिक खाद से उत्पादकता वृद्धि की चाहत ने जहां खेती को मंहगा बना दिया है, वहीं उत्पादकता वृद्धि के लालच में रासायसनिक खाद ने भूमि को बंजर बना दिया। मां की सेहत पीली पड़ जाती है, तो उसका असर सन्तति पर पड़ता है। बच्चा स्वस्थ्य कैसे रह सकता है। केन्द्र में सरकारें आयी, किसानों की समस्याएं सियासी मुद्दा बन गयी और चुनाव आते ही फौरी राहत देकर सियासी दलों ने किसानों को वोट बैंक बना दिया। नतीजा सामने है कि 45 प्रतिषत किसान वैकल्पिक व्यवसाय मिलने की दषा में किसानी से तौबा करने को तैयार है, खेती से पलायन की उनकी नियति बन चुकी है। 16वीं लोकसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री नरेन्द्र मोदी ने अच्छे दिन आने का वादा किया और 20-22 माह के कार्यकाल में किसान की आय 2022 तक दोगुनी करनें का महत्वाकांक्षी मिषन घोषित कर दिया। ऐसे में जहां देष में खेती की विकास दर कहीं जीरों तो कहीं 0.5 प्रतिषत है, किसान की आय दोगुना करने का लक्ष्य बहुतों को असंभव लगता है। क्योंकि इसके लिए खेती की विकास दर न्यूनतम दहाई में 10 प्रतिषत पहुंचाना पड़ेगी। नरेन्द्र मोदी के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को कांगे्रस तो हवा-हवाई बताकर नहीं थकती, जबकि आलोचक दो कारण बताकर इसे अर्द्धसत्य बता रहे है। उनका मानना है कि 0.5 प्रतिषत से कृषि विकास दर 10 प्रतिषत पहुंचाना और किसानों को समर्थन मूल्य में पर्याप्त वृद्धि करना असंभव है तो आमदनी दोगुनी जमीन पर कैसे हो सकती है। समर्थन मूल्य में मोदी सरकार द्वारा वृद्धि भी अधिकतम 4 प्रतिषत हुई है। लेकिन जिस तरह नरेन्द्र मोदी सरकार ने ताना-बाना बुना है, अर्द्धसत्य पूर्ण सत्य में ही बदलेगा और दुनिया आष्चर्यचकित रह जाने वाली है। केन्द्र सरकार ने बजट में घोषणा की है कि खेती देष की अधूरी पड़ी सिंचाई योजनाएं टाईम फे्रम में पूरी होगी। 86 हजार करोड़ रू. इसके लिए रखा गया है। काम किस गति से आरंभ हुआ है, बताने के लिए इतना पर्याप्त है कि अधूरी पड़ी 23 सिंचाई परियोजनाओं पर जिस तेजी से काम शुरू हुआ है, मार्च 2017 तक ये पूरी जो जायेगी। जिससे 80 लाख हेक्टेयर धरती पर नई सिंचाई क्षमता बढ़ जायेगी। फिलहाल देष का 47 प्रतिषत काष्त का रकबा सिंचाई के अधीन है। 53 प्रतिषत रकबा के लिए किसान बादलों पर टकटकी लगाये रहते है। यह स्थिति बदलने जा रही है, जिससे सूखा पड़ने पर किसान मायूस नहीं होगा। यही कारण है कि देष में आज सूखा की स्थिति के बावजूद कृषि उत्पादन बढ़ने का अनुमान कृषि विज्ञानी बता रहे है। मोदी सरकार गिरते भूजल से चिंतित है। उसने मनरेगा को सिंचाई कार्यों से जोड़ा है। 5 लाख खेत तालाब बनाकर (रेन वाॅटर हार्वेस्टिंग की जा रही है) मनरेगा में 38 हजार करोड़ रू. का प्रावधान किया जाना केन्द्र सरकार के संकल्प की गवाही देता है। कई दषकों से किसान रासायनिक खाद से खेतों को पूर रहे है, जिससे उर्वरा शक्ति में असंतुलन पैदा हो गया है, उर्वरा शक्ति क्षीण हो गयी है। अलबत्ता, किसान की लागत में दोगुना वृद्धि होने से मौसम की त्रासदी कोढ़ मंे खाज सिद्ध हो रही है। नरेन्द्र मोदी सरकार ने राज्यों को स्वाईल टेस्टिंग के जरिये स्वाईल हेल्थ कार्ड किसानों को तकसीम करनें के लिए वित्तीय मदद दी है। आने वाले दिनों में हर काष्तकार अपनी जमीन का हेल्थ कार्ड देखकर ही न्यूनतम रासायनिक खाद का इस्तेमाल कर सकेगा, जिससे भूमि को खुराक मिलेगी और उत्पादन सुनिष्चित होगा। जहां तक समर्थन मूल्य में प्रचुर वृद्धि का सवाल है उसे सामाजिक सरोकार से जोड़ा जाता है कि यदि एकदम एमएसपी ऊंची हो गयी तो उपभोक्ता को मार्केट में गांठ ढ़ीली करना पड़ेगी, जिससे मुद्रास्फीति का स्तर बढ़ेगा। दूसरी बात यह है कि एमएसपी पढ़े-लिखे किसानों के लिए है। प्र्रदेष के सुदूरवर्ती गांव में आज भी लोग समर्थन मूल्य नहीं समझते। फसल पकते ही बाजार में फसल उतार दी जाती है। बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेष, पं. बंगाल जैसे राज्यों में किसान समर्थन मूल्य से ज्यादा सरोकार ही नहीं रखते, क्योंकि उन्हें जागरूक ही नहीं बनाया गया है। इसलिए समर्थन मूल्य की उत्पादन वृद्धि मंे भूमिका नगण्य ही कही जायेगी। अलबत्ता, मध्यप्रदेष जैसे प्रगतिषील राज्य के मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान ने समर्थन मूल्य पर बोनस देकर और ई-उपार्जन की पद्धति विकसित कर न केवल लोक षिक्षण का कार्य किया अपितु उत्पादन वृद्धि में किसानों में स्पर्धा जगा दी। यही कारण है कि मध्यप्रदेष में कृषि उत्पादन का देष दुनिया में कीर्तिमान बना। चैथी बार मध्यप्रदेष को कृषि कर्मण सम्मान हासिल हुआ। मुख्यमंत्री और किसानों की विष्वव्यापी सराहना हुई। किसी राज्य में कृषि उत्पादन में निरंतर वृद्धि की मध्य्रपदेष मिसाल बना। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 2022 तक किसान की आय दोगुनी करना न तो थोथा दावा और न दिवास्वप्न है, और न थोथेबाजी है। नरेन्द्र मोदी ने कई मिथक तोड़े है। किसान की आय दोगुना करना अपवाद नहीं होगा। अलबत्ता, अर्द्धसत्य को पूरी हकीकत में बदलने में राज्यों की सरकारों को केन्द्र के साथ कदम मिलाना है। किसानों को सुविधाओं का लाभ लेना है। देष में सिंचाई का रकबा जो 47 प्रतिषत पर सिमट गया है, उसे 90 प्रतिषत लाने के प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों में पूरक बनना है। मध्यप्रदेष में ही आजादी के बाद से 2003 तक सिंचाई का रकबा 7 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया था, इसे षिवराज सिंह चैहान सरकार ने 10 वर्षों में 35 लाख हेक्टेयर करके करिष्मा कर दिखाया है। प्रदेष में हर गांव में विपुल उत्पादन किसानों की मेहनत और सरकार की मदद की गवाही देतो है। यह कहना अतिष्योक्ति नहीं होगी कि नरेन्द्र मोदी सरकार की प्राथमिकता गांव, गरीब और किसान है। सारी विकास योजनाएं गांव और किसान के इर्द-गिर्द घूमती है। हाल में हुए सर्वेक्षण में पता चला है कि लाखों करोड़ रू. का कृषि उत्पादन हाट की सुविधाओं के अभाव में हर साल साग, सब्जी-भाजी, फल-फूल, जिन्सों के रूप में सड़ गल जाता है। किसान लागत मूल्य से भी वंचित रह जाते है। कभी-कभी तो गांव, खेड़ों की सड़कें प्याज, टमाटर, आलू से पट जाती थी। इस कमी को पूरा करनें के लिए केन्द्र सरकार ने ई-ट्रेडिंग करनें के लिए देष की 500 से अधिक कृषि उपज मंडियों को ई-ट्रेडिंग से जोड़ दिया है। इसका विधिवत उद्घाटन 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वंय करनें की घोषणा कर किसानों को अपना उत्पाद देष की किसी भी मंडियों में आॅनलाईन बेचने की सुविधा प्रदान कर दी है। हर्ष का विषय है कि मध्यप्रदेष में भोपाल की करोंद मंडी 14 अप्रैल से देषभर की मंडियों से जुड़ गयी है। पूरा देष किसानों के लिए विपणन केन्द्र बन चुका है। इससे मध्यप्रदेष का आलू, टमाटर, पपीता, संतरा, सरबती गेहूं, बासमती चावल और अन्य उत्पाद दूरदराज प्रदेषों में बेचे जाने से किसान की गांठ में पैसा आयेगा। किसान की आमदनी में बरकत होगी। किसान को प्रौद्योगिकी का कमाल कुतुहल का विषय बनेगा। नरेन्द्र मोदी परंपरागत चाय के विक्रता रहे है, लेकिन उन्होनें कृषि के अर्थषास्त्र को समझाकर खेती की आय दोगुनी करनें के लिए एक सूत्र दिया है। काष्त जमीन को तीन भागों में विभाजित कर एक तिहायी पर विपुल उत्पादन लिया जाये। दूसरे भाग पर कृषि उद्यान, मधुमक्खी पालन, इमारती लकड़ी लगाकर पूरक आय की जाये। तीसरे भाग में पषुधन, मुर्गीपालन, मतस्यपालन का ताना-बाना बुना जाये। जब कृषि और कृषक तीन स्तंभों पर आधारित होगा, परस्पर सहयोग और समन्वय से बरकत होगी। सरकार ने कृषि लागत को घटाने, जैविक खेती को प्रोत्साहन देने और साख व्यवस्था में सस्ता ब्याज, प्रमाणित बीज, नीम कोटेड यूरिया जैसी व्यवस्था की है। खरीफ और रबी के मौसम में यूरिया की अफीम की तरह कालाबाजारी होती थी। बीस माह मं नरेन्द्र मोदी सरकार ने करिष्मा कर दिया, जिससे यूरिया का प्रचुर भंडार राज्यों में पहुंच रहा है और खाद कारखाने खाद उठाने वालों को दावत दे रहे है। बात ठीक है, गुन न हिरानो, गुना गाहक हिरानों है। देरआयत दुरूस्त आयत दिन फिरे है। किसान की आय दोगुना होगी और घर-घर खेत खलिहान में समृद्धि दस्तक देगी। सब्र का फल मीठा होता है। डाॅ. मनमोहन सिंह कहते थे मंहगायी थमने के लिए जादू की छड़ी नहीं है। लेकिन वहीं कांगे्रसी अब जानबूझकर अच्छे दिनों का स्वागत करनें के बजाय अडंगा लगाकर समय चक्र को गलत दिषा देना चाहते है, जो नहीं हो सकता। आजादी के पूर्व जो सपना स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों ने देखा था, पूरा होने का वक्त आ चुका है।



राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए फैंस से मिली बधाई पर बिग बी ने जताया 'असीम आभार'
29 March 2016
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 18 फरवरी को एक दिवसीय प्रवास पर मध्यप्रदेश आये। श्री मोदी ने अपने प्रवास के दौरान सीहोर जिले के समीप शेरपुर गांव में किसान महासम्मेलन को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का शुभारंभ भी किया। किसानों को अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों की सारी मुसीबतों का समाधान है। इस योजना से किसानों को आने वाले दिनों में अनेक दिक्कतों से निजात मिलेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के किसानों ने अपने परिश्रम और सूझ-बूझ से प्रदेश सरकार के साथ मिलकर कृषि क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा है। उन्होंने खुशी जतायी कि मध्यप्रदेश को कृषि के क्षेत्र में सिरमौर बनाया गया है। लगातार चार वर्ष तक मध्यप्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड मिलना बड़ी बात है। देश के आर्थिक विकास में मध्यप्रदेश के कृषि जगत का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों और गांवों की स्थिति में बदलाव लाने भारत सरकार की प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों की सारी मुसीबतों का समाधान है। उन्होंने कहा कि सरकार की किसान हितैषी नीतियों और किसानों की मेहनत से वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का प्रयास किया जायेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी 18 फरवरी को भोपाल से 38 किलोमीटर दूर सीहोर जिले के ग्राम शेरपुर में किसान महासम्मेलन में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का शुभारंभ करने के बाद संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नई फसल बीमा योजना की मार्गदर्शी पुस्तिका का लोकार्पण भी किया।
प्रधानमंत्री ने प्रदेश भर से लाखों की संख्या में उनका अभिनन्दन करने आये किसानों का आव्हान किया कि अधिक से अधिक नई फसल बीमा योजना से जुड़ें। देश के इतिहास में पहली बार किसानों की भलाई के लिये इतनी बड़ी योजना बनायी गई है। यदि किसान इस योजना से जुड़ गये तो कोई भी प्राकृतिक आपदा डरा नहीं पायेगी।

मध्यप्रदेश की जमकर सराहना

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने संबोधित करते हुये कहा कि मध्यप्रदेश के किसानों ने अपने परिश्रम और सूझ-बूझ से प्रदेश सरकार से मिलकर कृषि क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा है। उन्होंने खुशी जतायी कि मध्यप्रदेश को कृषि में देश में सिरमौर बनाया गया है। लगातार चार वर्ष तक मध्यप्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड मिलना बड़ी बात है। देश के आर्थिक विकास में मध्यप्रदेश के कृषि जगत का महत्वपूर्ण योगदान है। दो वर्ष तक वर्षा की स्थिति ठीक नहीं होने के बाद भी किसानों ने उत्पादन में कमी नहीं आने दी। विपरीत परिस्थितियों में यह उपलब्धि किसानों के अहर्निश पुरुषार्थ का परिणाम है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में मध्यप्रदेश के कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों को देखते हुए नई फसल बीमा योजना का प्रदेश से शुभारंभ करने को उचित बताते हुए कहा कि पुरानी फसल बीमा योजना के बारे में किसानों के मन में कई आशंकाएँ थीं। इसलिये ऐसी फसल बीमा योजना बनायी गई है, जिसमें किसानों की सारी मुसीबतों का समाधान है। इसमें रबी के लिये डेढ़ प्रतिशत और खरीफ के लिये 2 प्रतिशत से ज्यादा प्रीमियम नहीं होगा। जबकि पुरानी फसल बीमा योजना में प्रीमियम 12 से 14 प्रतिशत था। नई फसल बीमा योजना में किसानों के भुगतान पर कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है। साथ ही गाँव के एक भी किसान का नुकसान हुआ तो उसे फसल बीमा का लाभ मिलेगा। पुरानी फसल बीमा योजना में बीज बोने के बाद ही बीमा होता था। नई योजना में बारिश नहीं होने के कारण बोनी नहीं कर पाने पर भी किसानों को मदद दी जायेगी। खेत में कटी हुई फसल का नुकसान होने पर भी बीमा राशि दी जायेगी। पहले बीमा राशि स्वीकृत होने में काफी समय लगता था। अब 25 प्रतिशत राशि तत्काल दी जायेगी तथा बाकी राशि कम से कम समय में दी जायेगी। अब किसानों की फसल का एक तिहाई नुकसान होने पर भी मुआवजा दिया जायेगा। पहले 50 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान पर मुआवजा दिया जाता था। मुआवजा राशि को बढ़ाकर तीन गुना कर दिया गया है।

राष्ट्रीय कृषि बाजार 14 अप्रैल से शुरू होगा

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि किसानों और गाँवों की स्थिति में बदलाव लाना भारत सरकार की प्राथमिकता है। परम्परागत कृषि के साथ आधुनिक तकनीकी का उपयोग कर किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनायी जायेगी।
आने वाले समय में डिजिटल इंडिया का फायदा किसानों को दिलवाने के लिये राष्ट्रीय कृषि बाजार का प्लेटफार्म विकसित किया जायेगा। इसमें देश की साढ़े पाँच सौ से अधिक मंडियों को नेटवर्क से जोड़ा जायेगा। राष्ट्रीय कृषि बाजार आगामी 14 अप्रैल को बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती से शुरू किया जायेगा।

गन्ना उत्पादक किसानों की हित चिंता

केन्द्र सरकार ने गन्ना उत्पादक किसानों के हितों की चिंता की है। उन्हें गन्ने का बकाया भुगतान दिलाया गया है। केंद्र सरकार ने गन्ना उत्पादक किसानों के हित में निर्णय लिया है कि गन्ने से एथनाल बनाकर पेट्रोल में 10 प्रतिशत मिलाया जायेगा। यह पर्यावरण और किसानों के फायदे की दृष्टि से भी बेहतर होगा। प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में ‘स्टार्टअप इंडिया - स्टेंडअप इंडिया’ अभियान में पहल करने के लिये युवाओं से आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जैविक खेती के क्षेत्र में भी देश, दुनिया की आवश्यकता की पूर्ति कर सकता है।
साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में कम पानी के उपयोग से अधिक फसल पैदा करने का लक्ष्य है। मध्यप्रदेश की कृषि क्रांति का मूल कारण सिंचाई पर जोर देना है। इसके लिये उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार की सराहना करते हुए कहा कि अब पूरे देश में इसी काम को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि गाँव का पानी गाँव में - मंत्र को लेकर आगे बढ़ें। कम पानी से अधिक सिंचाई के लिये टपक सिंचाई को बढ़ावा दें। केन्द्र ने खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाई। जिससे किसानों को आसानी से खाद की उपलब्धता हुई। नीम कोटिंग यूरिया के उपयोग से कृषि भूमि को भी फायदा हुआ। उन्होंने आग्रह किया कि अधिक से अधिक किसान मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवायें और जमीन में उपयुक्त फसल लगायें। आज दुनिया हमसे अपेक्षा कर रही है कि अधिक उत्पादन कर दुनिया की खाद्यान्न की आवश्यकताओं की पूर्ति हम करें। इसके लिये योजना बनाकर काम करना होगा।

प्रधानमंत्री सबसे बड़े किसान हितैषी - मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को किसान मित्र प्रधानमंत्री बताते हुए कहा कि उन्होंने भारत का सम्मान और गौरव बढ़ाया है। जिन देशों में प्रधानमंत्री गए वहाँ भारत का सम्मान बढ़ाया। श्री चौहान ने कहा कि पिछले दो साल में संकट के बावजूद किसानों ने हार नहीं मानी। किसानों को 4800 करोड़ की राहत राशि दी गयी है। केंद्र ने संकट में 2000 करोड़ देकर किसानों की मदद की। फसल बीमे की 4300 करोड़ की राशि किसानों के खाते में पहुँच रही है। किसानों को फसल नुकसान से ज्यादा राहत मिल रही है। उन्होंने कहा कि पहले सिर्फ साढ़े सात लाख हेक्टेयर में सिंचाई होती थी। अब 36 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है। नर्मदा को सहायक नदियों से जोड़कर खेतों में पानी पहुँचाया जा रहा है। अगले दो साल में 60 लाख हेक्टेयर में सिंचाई करने का लक्ष्य है।
श्री चौहान ने प्रधानमंत्री को कल्पनाशील व्यक्तित्व का धनी बताते हुए कहा कि उनकी सख्त निगरानी के कारण प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं हुई। नीम कोटेड यूरिया फायदेमंद साबित हुआ। उन्होंने मंडियों को इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्म से जोड़ने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने नई फसल बीमा योजना के फायदे गिनाते हुए कहा कि पहले की सरकारों ने किसानों के हित की दॄष्टि से नहीं सोचा। पहले किसानों को 18 प्रतिशत पर ऋण मिलता था अब जीरो प्रतिशत पर मिल रहा है। सरकार ने किसानों का 900 करोड़ का ब्याज अपने खजाने से भरा है। बिजली बिल के 300 करोड़ रुपये को भी अपने खजाने से दिया है। प्रदेश में खेती की समृद्धि के लिए उठाये गए कदमों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सब्जी और फलों का अलग से रूट बनाया जायेगा। उद्यानिकी फसलों के निर्यात के लिए एपीडा जैसी संस्था बनेगी। सोलर पंप सेट पर 85 प्रतिशत का अनुदान दिया जायेगा।

कृषि बीमा योजना बड़ा उपहार - केन्द्रीय कृषि मंत्री

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन सिंह ने स्वागत भाषण में कहा कि श्री मोदी ने सत्ता सम्हालते ही गरीबों का विकास और किसानों की समृद्धि का संकल्प लिया था। उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना के लाभ गिनाते हुए कहा कि इससे सभी विसंगतियाँ दूर हो गयी हैं। आजादी के बाद यह किसानों को मिला सबसे बड़ा उपहार है। उन्होंने मध्यप्रदेश से अपेक्षा की कि वह केंद्र की अन्य योजनाओं की तरह इस क्रान्तिकारी योजना के क्रियान्वयन में भी आगे रहेगा।
विदेश मंत्री श्रीमती स्वराज ने कहा कि श्री मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बहुत कम समय में बड़ी उपलब्धियाँ हासिल हुई हैं। फसल बीमा योजना उसी की एक कड़ी है। मध्यप्रदेश के सभी ज़िलों में सिंचाई प्लान बन रहे हैं। ऐसे परिवर्तनकारी प्रयासों से कोई किसान खेती नहीं छोड़ेगा और न ही खेती से निराश होगा।
केंद्रीय इस्पात एवं खान मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि केंद्र की ओर से राज्य को भरपूर सहयोग मिलेगा। सिंचाई सुविधाएँ बढ़ने, किसानों के हित में नीतियाँ लागू करने और नवाचारों को अपनाने से प्रदेश का कृषि क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है।
केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री श्री थावरचंद गहलोत ने नई फसल बीमा योजना को किसानों के लिए अनूठा उपहार बताया।

प्रधानमंत्री ने कृषि कर्मण अवार्ड की ट्रॉफी प्रदान की

प्रधानमंत्री ने वर्ष 2013-14 के लिए मध्यप्रदेश को मिले सबसे बड़े कृषि कर्मण अवार्ड की ट्राफी मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को प्रदान की। मुख्यमंत्री ने श्री मोदी को खेती की समृद्धि का प्रतीक हल भेंट किया। प्रधानमंत्री को राज्य की ओर से स्मृति-चिन्ह भेंट किया गया। श्री चौहान ने किसानों की ओर से प्रधानमंत्री के लिए अभिनन्दन-पत्र पढ़ा। उन्होंने अपेक्षा की कि श्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया का सिरमौर बनेगा। प्रधानमंत्री ने खरीफ-2015 में फसल बीमा योजना की राशि प्रतीक स्वरूप 3 हितग्राही किसानों को भेंट की। उन्होंने प्रतीक स्वरूप 3 किसानों को स्वाइल हेल्थ कार्ड भी प्रदान किये।

पंजीकृत कृषकों से सिंचाई एवं कृषि यंत्रो का उठाव करने की अपील
11 March 2016
कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं में 30 जनवरी 2016 तक ऑनलाईन पंजीकृत कृषकों को कृषि सिंचाई उपकरण और कृषि यंत्रो का वितरण ऑनलाईन व्यवस्था से किया जायेगा। इसके लिये ऑनलाईन पंजीकृत कृषकों में से चयनित कृषकों की सूची वरिष्ठ कार्यालय द्वारा जारी की जा चुकी है जिसकी सूचना मोबाईल संदेश द्वारा कृषकों को दी जा चुकी है। पंजीकृत कृषकों से अपील की है कि संबंधित वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों से संपर्क कर सिंचाई एवं कृषि यंत्रो का उठाव समयावधि में सुनिश्चित करे एवं देयक संबंधित वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों के माध्यम से प्रस्तुत करें ताकि इसी वित्तीय वर्ष में योजनाओं के अंतर्गत कृषकों को लाभांवित किया जा सके।।


पंजाब और मध्यप्रदेश की एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के मध्य एमओयू होगा
Our Correspondent :08 March 2016
भोपाल। मध्यप्रदेश की जबलपुर एग्रीकल्चर यूविर्सिटी और पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के बीच कृषि संबंधी तकनीकी ओर शोधों के आदान-प्रदान के लिये शीघ्र ही एम.ओ.यू. होगा। यह निर्णय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और पंजाब के मुख्यमंत्री श्री प्रकाशसिंह बादल के मध्य रविवार को लुधियाना में हुई चर्चा में लिया गया। चर्चा में पंजाब और मध्यप्रदेश के मध्य कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सार्थक बातचीत हुई। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से पंजाब के उप मुख्यमंत्री श्री सुखबीर सिंह बादल ने भी सौजन्य भेंट की।
इसके पहले मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी का भ्रमण किया। श्री चौहान ने यूनिवर्सिटी द्वारा कृषि क्षेत्र में किये जा रहे नये अनुसंधानों, सरसों की विकसित किस्मों, ड्रिप इरिगेशन, मशरूम की नयी किस्मों और उनके उत्पादन, उन्नत कृषि यंत्रों और फसल व्याधियों के उपचार क्षेत्र में हो रहे कार्यों का मैदानी अवलोकन किया। इस दौरान पंजाब के अपर मुख्य सचिव कृषि श्री सुरेश कुमार, कृषि मंत्री सरदार तोतासिंह, यूनिवर्सिटी के उप कुलपति डॉ. बी.एस. ढिल्लो भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने यूनिवर्सिटी परिसर में लगायी गयी कृषि प्रदर्शनी को भी देखा। मुख्यमंत्री श्री चौहान के समक्ष यूनिवर्सिटी ने अपनी गतिविधियों का प्रजेंटेशन भी दिया। मुख्यमंत्री ने यूनिवर्सिटी की गतिविधियों की सराहना की।


किसानों की आय दोगुना करने के लिये रोडमेप तैयार
Our Correspondent :02 March 2016
भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव के उत्तर में कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में मध्यप्रदेश ने हर क्षेत्र में चहुँमुखी प्रगति की है। उन्होंने वर्ष 2002-03 और आज की तुलना करते हुए कहा कि प्रदेश ने कृषि, सिंचाई, विद्युत उत्पादन, दुग्ध उत्पादन, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं की आम नागरिकों तक पहुँच, शिक्षा सुविधाओं का विस्तार और गुणवत्ता वृद्धि, महिला सशक्तिकरण, अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक और अन्य कमजोर तबकों के कल्याण के आँकड़े उदृत करते हुए विपक्ष पर करारे प्रहार किये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आँकड़ों से प्रमाणित किया कि उनकी सरकार के द्वारा किये गये विकास कार्यों और पिछली सरकार के कार्यों में जमीन-आसमान का फर्क है।
श्री चौहान ने एक बार फिर मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि अगले पाँच सालों में किसानों की आय दोगुना करने के प्रधानमंत्री के संकल्प को साकार करने के लिये राज्य सरकार ने रोडमेप तैयार कर लिया है। इसके अनुसार कृषि और संबंधित क्षेत्र को मिलाकर नई रणनीति बनाई जायेगी। इसमें बागवानी, पशुपालन, शहद पालन, मछली-पालन, डेयरी जैसे कृषि सहायक क्षेत्रों को जोड़ा जायेगा।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि लगातार 8-10 वर्ष से विकास दर का डबल डिजिट में रहना और कृषि विकास दर 20 से 24 प्रतिशत तक पहुँचना प्रदेश की इस दशक की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कृषि को लाभदायी व्यवसाय बनाने के प्रयासों की सफलता के बाद उन्हें निरंतर रखते हुए अब प्रदेश में उद्योगों का जाल बिछाने की कोशिशें की जा रही है। उन्होंने कहा कि देशी-विदेशी निवेशकों का मध्यप्रदेश में विश्वास बढ़ा है। प्रदेश में बड़े उद्योगों के साथ ही कुटीर और छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिये नया विभाग बनाया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का मानना है कि बढ़ती आबादी का सारा बोझ खेती-किसानी नहीं उठा सकती। इसलिए कौशल उन्नयन, कृषि सहयोगी क्षेत्रों को बढ़ावा देने और स्व-रोजगार योजनाओं पर फोकस किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अभिभाषण पर चर्चा के दौरान प्रतिपक्षी सदस्यों द्वारा उठाये गये मुद्दों का बिन्दुवार उत्तर देते हुए राज्य सरकार की उपलब्धियाँ सामने रखीं। उन्होंने कहा कि किसानों के खेतों में सोलर ऊर्जा के पोल लगाने के संबंध में प्रतिपक्ष द्वारा उठाये गये मुद्दे का उचित संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी। श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिये धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने प्रतिपक्ष का आव्हान किया कि सरकार किसी भी दल की हो, कोशिश प्रदेश के सर्वांगीण विकास की होनी चाहिए। उन्होंने इस संबंध में प्रतिपक्ष का सहयोग भी माँगा।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस बात का पुरजोर खण्डन किया कि वर्तमान केन्द्र सरकार ने प्रदेश की सहायता राशि में कटौती की है। उन्होंने कहा कि केन्द्र ने राज्यों की राशि न केवल 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दी है, बल्कि उसे राज्य की आवश्यकता के अनुरूप व्यय करने की स्वतंत्रता भी दी है, जो पहले नहीं थी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अपने उत्तर के प्रारंभ में कहा कि विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री के स्वागत पर हुए व्यय को लेकर की गई आपत्तियाँ उनकी समझ से परे है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का स्वागत राज्य सरकार का कर्त्तव्य है। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि प्रधानमंत्री ने अपनी महत्वाकांक्षी फसल बीमा योजना को जारी करने के लिये मध्यप्रदेश को चुना। उन्होंने नई फसल बीमा योजना को किसानों के हित में अभूतपूर्व कदम बताया।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश आज देश में विभिन्न क्षेत्रों में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि विकास दर में, जैविक खेती के क्षेत्र में, दलहन उत्पादन, सोयाबीन, तिलहन, प्रमाणित बीज, चना, औषधि एवं सुगंधित फसलों के उत्पादन, लहसुन, अमरूद और मटर उत्पादन, पीपीपी मॉडल में स्टील सायलो की स्थापना, इलेक्ट्रानिक उपार्जन व्यवस्था, खेती के लिये प्रतिदिन 10 घण्टे गुणवत्तापूर्ण बिजली प्रदाय, पीपीपी मोड में देश में सबसे अधिक सड़कों का निर्माण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में देश में सबसे ज्यादा सड़कों का निर्माण, दस्तावेजों के ऑनलाइन पंजीयन और ई-स्टॉम्पिंग, सबसे ज्यादा 3 शहरों का स्मार्ट सिटी का चयन, नि:शक्त विवाह प्रोत्साहन योजना लागू करने, बहु-विकलांग एवं मानसिक रूप से नि:शक्त व्यक्ति को आर्थिक सहायता देने की योजना प्रारंभ करने, मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना लागू करने, लोक सेवा गारण्टी कानून बनाने, सीएम हेल्प लाईन जैसा कॉल सेन्टर प्रारंभ करने और स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने में देश में प्रथम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की साख बढ़ने से बड़े और छोटे उद्योग आ रहे हैं। कॉटेज इण्डस्ट्री को भी महत्व दिया जा रहा है। लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये अलग मंत्रालय बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को अपना उद्योग शुरू करने के लिये आर्थिक सहायता दी जाती है। इस साल एक लाख युवाओं को सहायता दी जायेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के युवा प्रतिभाशाली, ऊर्जावान और क्षमतावान है, यदि उन्हें थोड़ा सहयोग मिल जायें तो वे टाटा, बिड़ला जैसे बड़े उद्योगपति बन सकते हैं।
केन्द्रीय बजट की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट गाँव और गरीबों का बजट है। राज्य सरकार ने संकल्प लिया है कि किसी भी गरीब को भूखा नहीं रहने देंगे। गरीबों और मजदूरों को एक रुपये किलो गेहूँ, चावल और नमक उपलब्ध करवाया जा रहा है। चाहे वह किसी भी योजना में पंजीकृत हो।

सबको आवास

श्री चौहान ने कहा कि ऐसे भूमिहीन गरीब परिवार जो शासकीय जमीन पर वर्षों रह रहे हैं उन्हें भूमि स्वामी का पट्टा दिया जायेगा। वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत 2 लाख 14 हजार आदिवासी परिवारों को पट्टे दिये गये हैं। दिसम्बर 2006 के पहले के सभी कब्जाधारी परिवारों के दावों का फिर से परीक्षण करने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि सबके लिये आवास का सपना साकार कर रहे हैं। इसके लिये ग्रामीण क्षेत्र में एक लाख की और शहरी क्षेत्र में ढाई लाख की आवास सहायता गरीबों को दी जायेगी।

मेधावी निर्धन बच्चों की शिक्षा के लिये नयी योजना बनेगी

शिक्षा के क्षेत्र में उठाये गये महत्वपूर्ण कदमों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में शिक्षा पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी। कर्मीकल्चर था। पाँच सौ रुपये गुरुजी - शिक्षाकर्मियों का वेतन था। आज शिक्षाकर्मियों को अध्यापक बनाकर उन्हें छठवें वेतनमान का लाभ दिया जा रहा है। अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के अलावा सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को भी स्कॉलरशिप देने का फैसला राज्य सरकार ने लिया है। अनुसूचित जाति, जनजाति के बच्चों की प्रायवेट इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज में लगने वाली फीस सरकार भरेगी, ताकि फीस न देने के कारण वे शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की शिक्षा के लिये जल्दी ही ऐसी योजना बनाई जायेगी जिसमें निर्धन प्रतिभाशाली बच्चों की फीस राज्य सरकार भरेगी।
मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की चर्चा करते हुए कहा कि सिंचाई सुविधाएँ बढ़ने से यह संभव हुआ है। सरकार ने संकल्प लिया है कि हर किसान के खेत में पानी पहुँचाया जायेगा। हर भूमि का उपयोग अच्छी फसल के लिये किया जायेगा। उन्होंने कहा कि नर्मदा का पानी क्षिप्रा, गंभीर और कालीसिंध नदियों को जोड़ते हुए किसानों के खेतों में पहुँचाया जायेगा। उन्होंने कहा कि जीरो प्रतिशत पर कृषि ऋण देने जैसे उपायों के कारण कृषि उत्पादन अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है।
श्री चौहान ने वर्ष 2003 में प्रदेश की विकास की स्थिति और वर्तमान में विकास के आँकड़े उदृत करते हुए बताया कि प्रदेश वर्ष 2003 में अत्यंत पिछड़ा राज्य था, आज देश के अग्रणी राज्यों में है। उन्होंने कहा कि विद्युत उत्पादन मात्र 5173 मेगावाट था, आज 16 हजार 116 मेगावाट हो गया है। सिंचाई का रकबा साढ़े सात लाख हेक्टेयर था, जो आज बढ़कर 36 लाख हेक्टेयर हो गया है। गेहूँ का उत्पादन मात्र 73.65 मीट्रिक टन था, जो आज 184.80 लाख मीट्रिक टन हो गया है। वर्ष 2018 तक विद्युत का उत्पादन 18 हजार मेगावाट हो जायेगा। सकल घरेलू उत्पाद 1,02,839 करोड़ था जो आज 5,08,006 करोड़ हो गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोई भी इलाज से वंचित नहीं रहने पाये इसके लिये नि:शुल्क उपचार, औषधियाँ, जाँच, भोजन आदि का वितरण शासकीय चिकित्सालयों में किया जा रहा है। अब कीमोथैरेपी और डॉयलेसिस की सुविधाएँ भी उपलब्ध करवाई गई हैं।
महिलाओं को अवसर दिया जाये तो चमत्कार कर सकती हैं। उनकी क्षमताओं का भरपूर उपयोग करने के लिये महिला स्व-सहायता समूहों के गठन को आंदोलन का रूप दिया जायेगा। महिला उद्यमियों को ब्याज में अतिरिक्त छूट की भी व्यवस्था की जा रही है। स्थानीय निकायों और शासकीय सेवाओं में भी आरक्षण दिया गया है।
सूखे के संकट से निपटने के लिये पर्याप्त तैयारियाँ की गई हैं। समूह पेयजल की अवधारणा पर कार्य करते हुए सरकार का प्रयास है कि माताओं, बहनों, बेटियों को हेण्डपम्प से पानी नहीं भरना पड़े, हर घर में नल से जल मिले।
उच्च शिक्षा के लिए धन की कमी नहीं होने दी जायेगी। प्रदेश की बड़ी जनसंख्या को उसकी ताकत बनाने के लिये युवाओं के हाथों को हुनरमंद बनाने का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने की दिशा में प्रदेश में तेजी से काम हो रहा है। इंदौर ग्रामीण और बुधनी क्षेत्र खुले में शौच से मुक्त ब्लॉक बन गये हैं।
शहरों की तस्वीर बदलने के लिये अगले 4 वर्षों में 75 हजार करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे। गाँव को स्मार्ट विलेज बनाया जायेगा। हर गाँव में कम से कम 15 लाख रुपये से अधिक की राशि व्यय होगी।
नर्मदा मैया के शुद्धिकरण के लिये 1500 करोड़ की राशि व्यय की जायेगी। मध्यप्रदेश में पर्यटन की समृद्ध सम्पदा है। इसका अधिकतम दोहन कर रोजगार के अधिक से अधिक अवसर निर्मित करने के लिये नये पर्यटन केन्द्र विकसित किये गये हैं। इस वर्ष पर्यटन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। प्रदेश को पर्यटन का आदर्श डेस्टिनेशन बनाने का प्रयास है।
प्रदेश शांति का टापू बना रहे, इसके प्रभावी प्रयास किये गये हैं। कोई भी सूचीबद्ध दस्यु गिरोह संचालित नहीं है।
भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिये भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही और व्यवस्था में परिवर्तन कर भ्रष्टाचार की संभावनाएँ खत्म करने के कार्य किये गये हैं। लोक सेवा गारंटी कानून, ई-टेण्डरिंग, पेमेण्ट, मेजरमेण्ट की व्वयस्था और विशेष न्यायालयों का गठन किया गया है। यह व्यवस्था की गई है कि न्यायालय द्वारा एक वर्ष में निर्णय किया जाये, ताकि भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही त्वरित गति से की जा सके। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि किसी भी भ्रष्टाचारी को बख्शा नहीं जायेगा।
सिंहस्थ के गरिमामय आयोजन की व्यवस्थाएँ की गई हैं। इस अवसर पर वैचारिक कुंभ का आयोजन भी किया जा रहा है। आयोजन के माध्यम से भारतीय संस्कृति की सदभावना, सहअस्तित्व और विश्व कल्याण का संदेश दुनिया में प्रसारित होगा।।


किसानों की आय दोगुना करने के लिये रोडमेप तैयार ीन साल में सभी गाँव पक्की सड़क से जुड़ेंगे
01 March 2016
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव के उत्तर में कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में मध्यप्रदेश ने हर क्षेत्र में चहुँमुखी प्रगति की है। उन्होंने वर्ष 2002-03 और आज की तुलना करते हुए कहा कि प्रदेश ने कृषि, सिंचाई, विद्युत उत्पादन, दुग्ध उत्पादन, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं की आम नागरिकों तक पहुँच, शिक्षा सुविधाओं का विस्तार और गुणवत्ता वृद्धि, महिला सशक्तिकरण, अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक और अन्य कमजोर तबकों के कल्याण के आँकड़े उदृत करते हुए विपक्ष पर करारे प्रहार किये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आँकड़ों से प्रमाणित किया कि उनकी सरकार के द्वारा किये गये विकास कार्यों और पिछली सरकार के कार्यों में जमीन-आसमान का फर्क है।
श्री चौहान ने एक बार फिर मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि अगले पाँच सालों में किसानों की आय दोगुना करने के प्रधानमंत्री के संकल्प को साकार करने के लिये राज्य सरकार ने रोडमेप तैयार कर लिया है। इसके अनुसार कृषि और संबंधित क्षेत्र को मिलाकर नई रणनीति बनाई जायेगी। इसमें बागवानी, पशुपालन, शहद पालन, मछली-पालन, डेयरी जैसे कृषि सहायक क्षेत्रों को जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि लगातार 8-10 वर्ष से विकास दर का डबल डिजिट में रहना और कृषि विकास दर 20 से 24 प्रतिशत तक पहुँचना प्रदेश की इस दशक की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कृषि को लाभदायी व्यवसाय बनाने के प्रयासों की सफलता के बाद उन्हें निरंतर रखते हुए अब प्रदेश में उद्योगों का जाल बिछाने की कोशिशें की जा रही है। उन्होंने कहा कि देशी-विदेशी निवेशकों का मध्यप्रदेश में विश्वास बढ़ा है। प्रदेश में बड़े उद्योगों के साथ ही कुटीर और छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिये नया विभाग बनाया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का मानना है कि बढ़ती आबादी का सारा बोझ खेती-किसानी नहीं उठा सकती। इसलिए कौशल उन्नयन, कृषि सहयोगी क्षेत्रों को बढ़ावा देने और स्व-रोजगार योजनाओं पर फोकस किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अभिभाषण पर चर्चा के दौरान प्रतिपक्षी सदस्यों द्वारा उठाये गये मुद्दों का बिन्दुवार उत्तर देते हुए राज्य सरकार की उपलब्धियाँ सामने रखीं। उन्होंने कहा कि किसानों के खेतों में सोलर ऊर्जा के पोल लगाने के संबंध में प्रतिपक्ष द्वारा उठाये गये मुद्दे का उचित संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी। श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिये धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने प्रतिपक्ष का आव्हान किया कि सरकार किसी भी दल की हो, कोशिश प्रदेश के सर्वांगीण विकास की होनी चाहिए। उन्होंने इस संबंध में प्रतिपक्ष का सहयोग भी माँगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस बात का पुरजोर खण्डन किया कि वर्तमान केन्द्र सरकार ने प्रदेश की सहायता राशि में कटौती की है। उन्होंने कहा कि केन्द्र ने राज्यों की राशि न केवल 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दी है, बल्कि उसे राज्य की आवश्यकता के अनुरूप व्यय करने की स्वतंत्रता भी दी है, जो पहले नहीं थी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अपने उत्तर के प्रारंभ में कहा कि विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री के स्वागत पर हुए व्यय को लेकर की गई आपत्तियाँ उनकी समझ से परे है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का स्वागत राज्य सरकार का कर्त्तव्य है। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि प्रधानमंत्री ने अपनी महत्वाकांक्षी फसल बीमा योजना को जारी करने के लिये मध्यप्रदेश को चुना। उन्होंने नई फसल बीमा योजना को किसानों के हित में अभूतपूर्व कदम बताया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश आज देश में विभिन्न क्षेत्रों में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि विकास दर में, जैविक खेती के क्षेत्र में, दलहन उत्पादन, सोयाबीन, तिलहन, प्रमाणित बीज, चना, औषधि एवं सुगंधित फसलों के उत्पादन, लहसुन, अमरूद और मटर उत्पादन, पीपीपी मॉडल में स्टील सायलो की स्थापना, इलेक्ट्रानिक उपार्जन व्यवस्था, खेती के लिये प्रतिदिन 10 घण्टे गुणवत्तापूर्ण बिजली प्रदाय, पीपीपी मोड में देश में सबसे अधिक सड़कों का निर्माण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में देश में सबसे ज्यादा सड़कों का निर्माण, दस्तावेजों के ऑनलाइन पंजीयन और ई-स्टॉम्पिंग, सबसे ज्यादा 3 शहरों का स्मार्ट सिटी का चयन, नि:शक्त विवाह प्रोत्साहन योजना लागू करने, बहु-विकलांग एवं मानसिक रूप से नि:शक्त व्यक्ति को आर्थिक सहायता देने की योजना प्रारंभ करने, मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना लागू करने, लोक सेवा गारण्टी कानून बनाने, सीएम हेल्प लाईन जैसा कॉल सेन्टर प्रारंभ करने और स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने में देश में प्रथम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की साख बढ़ने से बड़े और छोटे उद्योग आ रहे हैं। कॉटेज इण्डस्ट्री को भी महत्व दिया जा रहा है। लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये अलग मंत्रालय बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को अपना उद्योग शुरू करने के लिये आर्थिक सहायता दी जाती है। इस साल एक लाख युवाओं को सहायता दी जायेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के युवा प्रतिभाशाली, ऊर्जावान और क्षमतावान है, यदि उन्हें थोड़ा सहयोग मिल जायें तो वे टाटा, बिड़ला जैसे बड़े उद्योगपति बन सकते हैं। केन्द्रीय बजट की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट गाँव और गरीबों का बजट है। राज्य सरकार ने संकल्प लिया है कि किसी भी गरीब को भूखा नहीं रहने देंगे। गरीबों और मजदूरों को एक रुपये किलो गेहूँ, चावल और नमक उपलब्ध करवाया जा रहा है। चाहे वह किसी भी योजना में पंजीकृत हो।

सबको आवास

श्री चौहान ने कहा कि ऐसे भूमिहीन गरीब परिवार जो शासकीय जमीन पर वर्षों रह रहे हैं उन्हें भूमि स्वामी का पट्टा दिया जायेगा। वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत 2 लाख 14 हजार आदिवासी परिवारों को पट्टे दिये गये हैं। दिसम्बर 2006 के पहले के सभी कब्जाधारी परिवारों के दावों का फिर से परीक्षण करने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि सबके लिये आवास का सपना साकार कर रहे हैं। इसके लिये ग्रामीण क्षेत्र में एक लाख की और शहरी क्षेत्र में ढाई लाख की आवास सहायता गरीबों को दी जायेगी। मेधावी निर्धन बच्चों की शिक्षा के लिये नयी योजना बनेगीशिक्षा के क्षेत्र में उठाये गये महत्वपूर्ण कदमों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में शिक्षा पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी। कर्मीकल्चर था। पाँच सौ रुपये गुरुजी - शिक्षाकर्मियों का वेतन था। आज शिक्षाकर्मियों को अध्यापक बनाकर उन्हें छठवें वेतनमान का लाभ दिया जा रहा है। अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के अलावा सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को भी स्कॉलरशिप देने का फैसला राज्य सरकार ने लिया है। अनुसूचित जाति, जनजाति के बच्चों की प्रायवेट इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज में लगने वाली फीस सरकार भरेगी, ताकि फीस न देने के कारण वे शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की शिक्षा के लिये जल्दी ही ऐसी योजना बनाई जायेगी जिसमें निर्धन प्रतिभाशाली बच्चों की फीस राज्य सरकार भरेगी। मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की चर्चा करते हुए कहा कि सिंचाई सुविधाएँ बढ़ने से यह संभव हुआ है। सरकार ने संकल्प लिया है कि हर किसान के खेत में पानी पहुँचाया जायेगा। हर भूमि का उपयोग अच्छी फसल के लिये किया जायेगा। उन्होंने कहा कि नर्मदा का पानी क्षिप्रा, गंभीर और कालीसिंध नदियों को जोड़ते हुए किसानों के खेतों में पहुँचाया जायेगा। उन्होंने कहा कि जीरो प्रतिशत पर कृषि ऋण देने जैसे उपायों के कारण कृषि उत्पादन अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है।
श्री चौहान ने वर्ष 2003 में प्रदेश की विकास की स्थिति और वर्तमान में विकास के आँकड़े उदृत करते हुए बताया कि प्रदेश वर्ष 2003 में अत्यंत पिछड़ा राज्य था, आज देश के अग्रणी राज्यों में है। उन्होंने कहा कि विद्युत उत्पादन मात्र 5173 मेगावाट था, आज 16 हजार 116 मेगावाट हो गया है। सिंचाई का रकबा साढ़े सात लाख हेक्टेयर था, जो आज बढ़कर 36 लाख हेक्टेयर हो गया है। गेहूँ का उत्पादन मात्र 73.65 मीट्रिक टन था, जो आज 184.80 लाख मीट्रिक टन हो गया है। वर्ष 2018 तक विद्युत का उत्पादन 18 हजार मेगावाट हो जायेगा। सकल घरेलू उत्पाद 1,02,839 करोड़ था जो आज 5,08,006 करोड़ हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोई भी इलाज से वंचित नहीं रहने पाये इसके लिये नि:शुल्क उपचार, औषधियाँ, जाँच, भोजन आदि का वितरण शासकीय चिकित्सालयों में किया जा रहा है। अब कीमोथैरेपी और डॉयलेसिस की सुविधाएँ भी उपलब्ध करवाई गई हैं। महिलाओं को अवसर दिया जाये तो चमत्कार कर सकती हैं। उनकी क्षमताओं का भरपूर उपयोग करने के लिये महिला स्व-सहायता समूहों के गठन को आंदोलन का रूप दिया जायेगा। महिला उद्यमियों को ब्याज में अतिरिक्त छूट की भी व्यवस्था की जा रही है। स्थानीय निकायों और शासकीय सेवाओं में भी आरक्षण दिया गया है। सूखे के संकट से निपटने के लिये पर्याप्त तैयारियाँ की गई हैं। समूह पेयजल की अवधारणा पर कार्य करते हुए सरकार का प्रयास है कि माताओं, बहनों, बेटियों को हेण्डपम्प से पानी नहीं भरना पड़े, हर घर में नल से जल मिले। उच्च शिक्षा के लिए धन की कमी नहीं होने दी जायेगी। प्रदेश की बड़ी जनसंख्या को उसकी ताकत बनाने के लिये युवाओं के हाथों को हुनरमंद बनाने का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने की दिशा में प्रदेश में तेजी से काम हो रहा है। इंदौर ग्रामीण और बुधनी क्षेत्र खुले में शौच से मुक्त ब्लॉक बन गये हैं। शहरों की तस्वीर बदलने के लिये अगले 4 वर्षों में 75 हजार करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे। गाँव को स्मार्ट विलेज बनाया जायेगा। हर गाँव में कम से कम 15 लाख रुपये से अधिक की राशि व्यय होगी।
नर्मदा मैया के शुद्धिकरण के लिये 1500 करोड़ की राशि व्यय की जायेगी। मध्यप्रदेश में पर्यटन की समृद्ध सम्पदा है। इसका अधिकतम दोहन कर रोजगार के अधिक से अधिक अवसर निर्मित करने के लिये नये पर्यटन केन्द्र विकसित किये गये हैं। इस वर्ष पर्यटन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। प्रदेश को पर्यटन का आदर्श डेस्टिनेशन बनाने का प्रयास है। प्रदेश शांति का टापू बना रहे, इसके प्रभावी प्रयास किये गये हैं। कोई भी सूचीबद्ध दस्यु गिरोह संचालित नहीं है।
भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिये भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही और व्यवस्था में परिवर्तन कर भ्रष्टाचार की संभावनाएँ खत्म करने के कार्य किये गये हैं। लोक सेवा गारंटी कानून, ई-टेण्डरिंग, पेमेण्ट, मेजरमेण्ट की व्वयस्था और विशेष न्यायालयों का गठन किया गया है। यह व्यवस्था की गई है कि न्यायालय द्वारा एक वर्ष में निर्णय किया जाये, ताकि भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही त्वरित गति से की जा सके। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि किसी भी भ्रष्टाचारी को बख्शा नहीं जायेगा। सिंहस्थ के गरिमामय आयोजन की व्यवस्थाएँ की गई हैं। इस अवसर पर वैचारिक कुंभ का आयोजन भी किया जा रहा है। आयोजन के माध्यम से भारतीय संस्कृति की सदभावना, सहअस्तित्व और विश्व कल्याण का संदेश दुनिया में प्रसारित होगा।

किसान राहत के लिए आकलन सेटेलाईट की आंख से होगा, पटवारी की आंख से नहीं- श्री नंदकुमार सिंह चौहान
29 February 2016
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद श्री नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार कृषि के क्षेत्र में श्री नरेंद्र मोदी सरकार ने प्रभावी आर्थिक सुधार के रूप में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना दी है। किसान की प्राकृतिक आपदा, बीमारी, कीटव्याधि से होने वाली क्षति का आकलन अब पटवारी नहीं करेगा। सेटेलाईट की आंख से क्षति का आकलन होने से कही कोई पक्षपात अथवा कमोवेश के गुंजाईश नहीं रहेगी। रबी फसल पर डेढ़ और खरीफ पर 2 प्रतिशत बीमा प्रीमियम लगेगा और क्षति के प्रारंभिक आकलन के साथ ही बीमित फसल का 25 प्रतिशत अग्रिम भुगतान किसान के खाते में कर दिया जायेगा। नई फसल बीमा को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की सौगात बताते हुए आपने खंडवा और बुरहानपुर क्षेत्र की जनसभाओं में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु और सड़क परिवहन मंत्री श्री नीतिन गडकरी ने निमाड़ की झोली में रेल, सड़क परिवहन सुविधाओं की सौगात डाली है, निमाड़ की जनता उनकी ऋणी रहेगी। श्री नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के जन्मदिन 5 मार्च को सेवा दिवस मानकर रचनात्मक कार्यक्रम हाथ में लेने का निष्चय किया है। हम सभी सेवा दिवस पर रचनात्मक कार्य में भागीदार बनकर जनता को अपनी विनम्र सेवा की अनुभूति देंगे। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में जीरो प्रतिशत ब्याज पर फसल कर्ज, बीज खरीद के लिए लिया जाने वाले कर्ज की अदायगी पर सरकार ने 10 प्रतिशत की छूट देने का अभिनव निर्णय लिया है। इससे यदि किसान 1 लाख का कर्ज लेता है तो उसे चुकाते समय वापस 90 रू. हजार रू. देना पड़ेगा। असल मकसद जनता को खुशहाल बनाना और कर्ज ग्रस्तता से मुक्ति देना है। उन्होंने श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मिशन-2018 को सफल बनाने और प्रदेश में चैथी बार पार्टी की श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सरकार बनाने की अपील की।
सेवा दिवस तैयारी बैठकों में किसान मोर्चा सक्रिय, खेती के क्षेत्र में पहली बार सरकार ने जोखिम के लिए सुरक्षा कवच दिया- किसान मोर्चा
29 February 2016
भारतीय जनता पार्टी द्वारा 5 मार्च को मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के जन्मदिवस पर आयोजित किये जा रहे सेवा दिवस पर किसान मोर्चा रिस्क मैनेजमेंट के क्षेत्र में अभिनव पहल (आजादी के बाद) की गई कार्यवाही पर गोष्ठियां आयोजित करेगा। किसान मोर्चा के पदाधिकारियों ने संभागों में पहुंचकर किसानों की चैपाल में सेवा दिवस पर परिसंवाद गोष्ठी की तैयारी आरंभ कर दी है। श्री बीडी पटैल रीवा संभाग, श्री रवीष चौहान भोपाल, श्री भरत राजपूत होशंगाबाद और श्री संदीप पटैल जबलपुर संभाग के जिलों में पहुंचकर 5 मार्च के सेवा दिवस कार्यक्रम को अंतिम रूप देने में जुट गये हैं।
श्री रवीष चौहान ने भोपाल, रायसेन में किसान चैपाल में बताया कि श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में किसानों को राहत देने में तत्परता सुनिष्चित की है। अब तक मध्यप्रदेश किसानों को 4300 करोड़ रू. की राहत प्रदेश में बांटी जा चुकी है। किसान की खुशहाली श्री शिवराज की प्रतिबद्धता है। उनके जन्मदिन पर किसान प्रदेश में सेवा दिवस पर गोष्ठी आयोजित कर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दी गई जोखिम में वित्तीय प्रबंधन, राहत सहायता, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर विस्तार से चर्चा कर इसके अंचल में सभी खातेदारों को लाने का आग्रह किया जायेगा।

पहली बार बीमा नीति में किसानों की संभावित आय का बीमा शामिल
29 February 2016
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी फसल बीमा योजना बनाई गई है जिसमें किसानों की संभावित आय का बीमा शामिल किया गया है। श्री चौहान आज विदिशा में श्री बाढ़ वाले गणेश मंदिर परिसर में 42 करोड़ 75 लाख की लागत से पर्यटन विकास निगम द्वारा बनाये गये 'दिवस बसेरा' और निर्माण कार्यों का लोकार्पण कर रहे थे।
श्री चौहान ने कहा कि नई फसल बीमा योजना किसान हितैषी है। इसमें किसान के खेत को इकाई माना गया है और जब तक किसानों का अनाज घर तक न पहुँचे तब तक उसकी फसल बीमित रहेगी। उन्होंने जिला प्रशासन से नई बीमा नीति का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा ताकि हर किसान उससे लाभांवित हो सके। श्री चौहान ने इसके लिये हर गाँव में किसान सभा कर लोगों को जानकारी देने और बीमा करवाने के लिये प्रेरित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने किसानों से खेती के अलावा फल, फूल, सब्जी की खेती करने को कहा। उन्होंने कहा कि इसके लिये किसानों को समझाइश दी जाये, ताकि उनकी नियमित आमदनी हो सके। उन्होंने कहा कि विदिशा में शीघ्र ही फूड प्रोसेसिंग की व्यवस्था की जायेगी। उन्होंने विदिशा जिले के औद्योगिक प्रक्षेत्र जम्बार बागरी में उद्योगपतियों से उद्योग लगाने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिये शासन हरसंभव सहायता देगा।
श्री चौहान ने इस मौके पर राज्य शासन की विभिन्न योजनाओं से लाभांवित हितग्राहियों को चेक और सामग्री वितरित की।


प्रधानमंत्री ने फसल बीमा योजना के लिए संचालनगत दिशा-निर्देशों का अनावरण किया ; सीहोर में किसानों की विशाल रैली को संबोधित किया
19 February 2016
राष्‍ट्रीय कृषि बाजार के लिए डिजिटल प्‍लेफॉर्म 14 अप्रैल को बाबा साहेब अम्‍बेडकर की जयंती पर लांच किया जाएगा

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज मध्‍य प्रदेश के सीहोर में आज किसानों की एक विशाल रैली में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए संचालनगत दिशा-निर्देशों का अनावरण किया।
किसानों के लिए इस व्‍यापक फसल बीमा योजना के लाभों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परेशानियों के वक्‍त किसानों की समस्‍याओं के लिए एक समाधान मुहैया करा सकता है। उन्‍होंने कहा कि पुरानी फसल बीमा योजनाओं की कमियों को दूर करने तथा फसल बीमा को लेकर किसानों के बीच भरोसा कायम करने का पूरा प्रयास किया गया है। उन्‍होंने कहा कि दावों का शीघ्र निपटान सुनिश्चित करने के लिए इस योजना में व्‍यापक रूप से प्रौद्योगिकी का इस्‍तेमाल किया जाएगा। उन्‍होंने किसानों को इस योजना का लाभ उठाने के लिए प्रोत्‍साहित किया।
प्रधानमंत्री ने किसानों के कल्‍याण के लिए केन्‍द्र सरकार द्वारा उठाई कई अन्‍य पहलों को रेखांकित किया। उन्‍होंने गन्‍ना किसानों के बकाये को खत्‍म करने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र किया, जो कई हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था।
‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा किसानों का कल्‍याण इस पहल के मूल में है। उन्‍होंने 14 अप्रैल 2016, बाबा साहेब अम्‍बेडकर की जयंती पर डिजिटल प्‍लेटफॉर्म-राष्‍ट्रीय कृषि बाजार को लांच करने की घोषणा की। यह किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर मूल्‍य दिलाने में सक्षम होगा।
प्रधानमंत्री ने मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जैव खेती और यूरिया की पर्याप्‍त उपलब्‍धता सुनिश्चित कराने जैसे कृषि क्षेत्र में उठाए गए अन्‍य बड़े कदमों का भी जिक्र किया।
श्री नरेन्‍द्र मोदी ने मध्‍य प्रदेश के किसानों एवं मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को कृषि क्षेत्र में राज्‍य के शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड एवं चुने हुए लाभार्थियों को बीमा दावों के निपटान प्रमाण पत्र भी प्रदान किए।

'दिनांक 18 फरवरी, 2016 को भोपाल में आयोजित किसान कल्‍याण मेले के अवसर पर माननीय कृषि तथा किसान कल्‍याण मंत्री श्री राधामोहन सिंह जी के अभिभाषण का मसौदा
19 February 2016
मंच पर विराजमान हम सबके प्रेरणास्‍त्रोत सम्‍माननीय प्रधान मंत्री श्रीमान नरेन्‍द्र मोदी जी; माननीय विदेश मंत्री बहन सुषमा स्‍वराज जी; मध्‍य प्रदेश के लोकप्रिय माननीय मुख्‍यमंत्री श्रीमान शिवराज सिंह चौहान जी; केन्‍द्रीय मंत्रिपरिषद में मेरे सहकर्मी माननीय कोयला व खान मंत्री श्रीमान नरेन्‍द्र सिंह तोमर जी; माननीय सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्री श्रीमान थावर चंद गहलोत जी; मध्‍य प्रदेश के किसान कल्‍याण एवं कृषि विकास मंत्री श्रीमान गौरी शंकर बिसेन; माननीय राजस्‍व मंत्री श्रीमान रामपाल सिंह; भाजपा के प्रदेश अध्‍यक्ष श्रीमान नंद कुमार सिंह चौहान; किसान भाइयों, पत्रकार बंधुओं, देवियो व सज्‍जनों।
2. आज हम सबके लिए यह बडे गर्व की बात है कि माननीय प्रधान मंत्री जी हम सबके बीच मौजूद हैं। माननीय प्रधान मंत्री जी की गरिमामयी उपस्थिति किसानों तथा कृषि की बेहतरी के लिए उनकी प्रतिबद्धता का जीता जागता उदाहरण है। मैं आपकी ओर से, देश भर के किसानों की ओर से माननीय प्रधानमंत्री जी का अभिनन्दन करता हूँ।
3. प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, स्वायल हैल्थ कार्ड योजना, जैविक खेती के विकास के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना, नीम कोटेड यूरिया जैसी किसान हितकारी पहल माननीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में पहली बार देश की कृषि के सतत विकास की गति को अब निश्चित तेज करेगी। 24 घंटे चलने वाला किसान टी.वी. निश्चित रुप से देश के किसानों के लिए कृषि ज्ञान को बढ़ाने में बेहतर मदद कर रहा है।
4. दुग्ध उत्पादन एवं छोटे किसानों की समृद्धि के लिए देसी नस्ल की गायों के संवर्धन एवं संरक्षण हेतु राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरुआत तथा मत्स्य उत्पाद एवं मछुआरों की आमदनी को बढ़ाने हेतु नीली क्रांति की मोदी सरकार की योजना का लाभ इस वर्ष दोनों ही क्षेत्रों में 5-6 % की वृद्धि के रूप में स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
5. देश में कुछ ऐसे भी नेता हैं, जो किसानों की बातें तो करते हैं जिन्‍होंने पिछले दस वर्षों तक इस देश पर राज तो किया है, देश को कितना लूटा और किसानों के लिए क्या किया, यह नहीं बताते। इस देश के किसान आपदाओँ मेंजिस प्रकार से पीड़ित होते रहे हैं, उसकी जो राहत के मानदंड थे, दस वर्षों में क्‍या बदलाव किया, यह बताने की उनकी स्थिति नहीं है, लेकिन मोदी सरकार आते ही माननीय प्रधानमंत्री जी ने स्‍वयं पहल की और आपदा राहत के मानकों में भारी परिवर्तन किया। यह तो राहत का मामला है, किन्‍तु किसान जो कर्जा लेता है, खेती करता है, उसके पूरे परिश्रम का लाभ जब मिलने का अवसर आता है और उस समय प्राकृतिक आपदाओं के कारण उसकी पूरी फसल बरबाद हो जाती है, तो उसके लिए जो दस वर्षों से फसल बीमा योजना चल रही थी, जिसके कारण पूरी फसल बरबाद होने के बाद उसकी भरपाई नहीं हो पाती थी, प्रीमियम भी किसानों को ज्‍यादा देना पड़ता था, बीमित राशि कम होती थी, कैपिंग इसलिए था कि राज खजाने पर अधिक बोझ नहीं पड़े। हमारे प्रधानमंत्री जी ने फसल बीमा के विषय को बड़ी गंभीरता से लिया, स्‍वयं कई दिनों तक रात-रात भर जागकर किसानों की हित रक्षा हेतु कौन सी फसल बीमा योजना लाई जाए ताकि किसान अपने को सुरक्षित महसूस करें और नुकसान की पूरी भरपाई हो । राज खजाने पर चाहे जितना भी बोझ हो, इसकी चिन्‍ता नहीं, किसान की चिन्‍ता पहले – प्रधानमंत्री जी की इसी भावना ने फसल बीमा योजना की तमाम विसंगतियों को दूर कर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का नया स्‍वरूप देश के किसानों के लिए लाये हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना- फसल बीमा के लिए सरकार की ओर से अब तक की सबसे बड़ी सहायता योजना है, जिसके अंतर्गत आपदा से होने वाली फसल क्षति की भरपाई की जाएगी। जिसके दिशानिर्देश को आज प्रधानमंत्री जी जारी करेंगे। इस अवसर पर मैं पुन: आपकी तथा देश के किसानों की ओर से प्रधानमंत्री जी का अभिनन्‍दन करता हूं, वंदन करता हूं।
6. और अन्‍त में मैं, मध्‍य प्रदेश के मेहनतकश किसानों को , खेती में काम करने वाले कामगारों को, प्रदेश के मुख्‍य मंत्री और कृषि मंत्री को बधाई दूंगा जिनके सम्मिलित प्रयासों से मध्‍य प्रदेश राज्‍य को विगत वर्ष (2013-14) में गेहूं के उत्‍पादन के लिए कृषि कर्मण पुरस्‍कार दिया जा रहा है। मुझे यह बताते हुए अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है कि समग्र खाद्य अनाजों की श्रेणी-1 (10 मिलियन टन से अधिक उत्‍पादन करने वाले राज्‍य) के लिए इस वर्ष (2014-15) मध्‍य प्रदेश राज्‍य को कृषि कर्मण पुरस्‍कार भी प्राप्‍त होगा। मुझे पूरा विश्‍वास है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ यहां के किसानों को पहुंचाने में यह राज्‍य अग्रणी रहेगा।

 प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए बड़ी सहायता योजना— श्री राधा मोहन सिंह
 प्रधानमंत्री जी ने फसल बीमा के विषय को स्वंय गंभीरता से लिया
 देश में कुछ नेता हैं जो सिर्फ किसानों के नाम पर भाषण करते हैं उनकी सरकार ने दस साल में किसानों के लिए कुछ नहीं किया

19 February 2016
भोपाल। केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए मोदी सरकार की ओर से अब तक की सबसे बड़ी सहायता योजना है। यह योजना किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगी और  इसके तहत आपदा से होने वाली फसल क्षति की भरपाई की जाएगी। प्रधानमंत्री जी ने फसल बीमा के विषय को बड़ी गंभीरता से लिया, स्वंय कई दिनों तक रात-रात भर जागकर किसानों के हित रक्षा हेतु कौन सी फसल बीमा योजना लाई जाए ताकि किसान अपने को सुरक्षित महसूस करें और नुकसान की पूरी भरपाई हो सके इसके लिए कार्य किया। राज खजाने पर चाहे जितना भी बोझ हो इसकी चिन्ता से अधिक किसान की चिन्ता की। प्रधानमंत्री जी की इसी भावना ने फसल बीमा योजना की तमाम विसंगतियों को दूर करने का काम किया। हमारी सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का नया स्वरूप देश के किसानों के लिए लेकर आई है। श्री राधा मोहन सिंह आज भोपाल में आयोजित किसान कल्याण मेले के अवसर पर बोल रहे थे। इस अवसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वाराज, मध्य  प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय कोयला व खान मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावर चंद गहलोत, मध्य प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री गौरी शंकर बिसेन, राजस्व मंत्री रामपाल सिंह, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष् नंद कुमार सिंह चौहान आदि उपस्थित थे। श्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सहित देश के किसानों और कृषि् विकास के लिए जो कार्य प्रधानमंत्री जी की पहल पर हुआ है उसके लिए देश के किसानों की ओर से मैं उनका अभिनन्द करता हूं वंदन करता हूं।
केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि देश में कुछ ऐसे भी नेता हैं, जो आज कल किसानों की बातें करते हैं। यह वह नेता हैं जिन्होंने पिछले दस वर्षों तक इस देश पर राज किया, पर देश को कितना लूटा और किसानों के लिए क्या किया, यह नहीं बताते। इस देश के किसान आपदाओँ में जिस प्रकार से पीड़ित होते रहे हैं, उसकी जो राहत के मानदंड थे, दस वर्षों में क्या बदलाव किया, यह बताने की उनकी स्थिति नहीं है, लेकिन मोदी सरकार आते ही प्रधानमंत्री जी ने स्वयं पहल की और आपदा राहत के मानकों में भारी परिवर्तन किया। यह तो राहत का मामला है, किन्तु किसान जो कर्जा लेता है, खेती करता है, उसके पूरे परिश्रम का लाभ जब मिलने का अवसर आता है और उस समय प्राकृतिक आपदाओं के कारण उसकी पूरी फसल  बरबाद हो जाती है, तो उसके लिए जो दस वर्षों से फसल बीमा योजना चल रही थी, जिसके कारण पूरी फसल बरबाद होने के बाद उसकी भरपाई नहीं हो पाती थी, प्रीमियम भी किसानों को ज्यादा देना पड़ता था, बीमित राशि कम होती थी, कैपिंग इसलिए था कि राज खजाने पर अधिक बोझ नहीं पड़े।
लेकिन हमारे प्रधानमंत्री जी ने फसल बीमा के विषय को बड़ी गंभीरता से लिया और इस दिशा में पहल करते हुए दिनरात काम किया। ताकि किसानों का कल्याण हो।  कारण प्रधानमंत्री जी किसानों की समस्या और दुख दर्द को समझते हैं महसूस करते हैं जबकि देश पर सालों राज करने वाले नेता जिन्हें खेती के बारे में कुछ पता नहीं वह सिर्फ भाषण देते हैं। श्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, स्वायल हैल्थ कार्ड योजना, जैविक खेती के विकास के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना, नीम कोटेड यूरिया जैसी किसान हितकारी पहल माननीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में पहली बार देश की कृषि के सतत विकास की गति को अब निश्चित तेज करेगी। 24 घंटे चलने वाला किसान टी.वी. चैनल देश के किसानों के लिए कृषि ज्ञान को बढ़ाने में बेहतर मदद कर रहा है। दुग्ध उत्पादन एवं छोटे किसानों की समृद्धि के लिए देसी नस्ल की गायों के संवर्धन एवं संरक्षण हेतु राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरुआत तथा मत्स्य उत्पाद एवं मछुआरों की आमदनी को बढ़ाने हेतु नीली क्रांति की मोदी सरकार की योजना का लाभ इस वर्ष दोनों ही क्षेत्रों में 5-6 % की वृद्धि के रूप में स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
श्री राधा मोहन सिहं ने कहा कि मध्य प्रदेश में कृषि विकास और किसान कल्याण का जो कार्य हो रहा है उसी के चलते मध्य प्रदेश को वर्ष (2013-14) में गेहूं के उत्पादन के लिए कृषि कर्मण पुरस्कार दिया जा रहा है।समग्र खाद्य अनाजों की श्रेणी-1 (10 मिलियन टन से अधिक उत्पादन करने वाले राज्य) के लिए भी इस वर्ष (2014-15) मध्यय प्रदेश राज्य को कृषि कर्मण पुरस्कार भी प्राप्त होगा।

सी एम शिवराज ने सिंगापूर में कहा
Our Correspondent :14 January 2016
नई फसल बीमा बनाने पर प्रधानमंत्री और एन डी ए सरकार को दी बधाई
कहा केंद्र सरकार का क्रांतिकारी फैसला पहले की बीमा पालिसी से बेहतर बताया
कहा पहले प्रक्रिया लंबी होती थी , प्रीमियम वसूलने के बाद अगर नुक्सान ज्यादा हो जाये तो केंद्र और राज्य को बीमा का पैसा आधा आधा देना होता था इस फसल बीमा पालिसी में सारी कमिया दूर की गई अब फसल के नुकसान होने पर 25 प्रतिशत राशि तुरंत दी जायेगी और शेष राशि फसल आकलन के बाद इस फसल बीमा पालिसी से अगर पूरे गाव की फसल ख़राब न होने पर या कुछ हिस्से की ख़राब हुई और फसल कटने के बाद फसल ख़राब होने पर भी पूरी फसल की बीमा का लाभ किसानो को मिलेगा ।

वीडियो गैलरी



गेहूँ की फसल में खरपतवार नियंत्रण हेतु सलाह
Our Correspondent :07 January 2016
भोपाल। किसान भाईयों को सलाह दी जाती है कि वर्तमान समय में जिन किसान भाईयों की गेहूँ की फसल 18-21 दिन की हो गई है तो प्रथम सिंचाई सीआरआई अवस्था (क्राउन रूट निकलते समय) में पहली सिंचाई करें। इस सिंचाई के करने से फसल अच्छी वृद्धि करती है। इसी प्रकार से जिन किसान भाईयों के खेतों में गेहूँ की फसल में खरपतवार जैसे गेहूं सा (फेलेरिस माइनर) जंगली जई, दूब घास, हिरन खुरी, बथुआ आदि का प्रक्रोप होता है। इन खरपतवारों के कारण गेहूँ की फसल में 30-45 प्रतिशत की हानि हो सकती है। अतः जिन किसान भाईयों के खेत में चौडी़ पत्ती वाले खरपतवार दिखाई दे रहे है तो 2-4 डी सोडियम लवण 80 प्रतिशत डब्ल्यूपी 01 लीटर दवा 500-600 लीटर पानी में मिलाकर पहली सिंचाई के बाद स्प्रे करें। इसी प्रकार से जिन किसान भाईयों के खेत में सकरी पत्ती वाले खरपतवार दिखाई दे रहे हो तो मेटसल्फ्यूरॉन मिथाईल 20 प्रतिशत डब्ल्यू.पी 20-30 ग्राम मिली. हे.500-600 लीटर पानी में मिलाकर पहली सिंचाई के बाद स्प्रे किया जाना चाहिए। जिन किसान भाईयों के खेत में चौडी एवं सकरी पत्ती वाले खरपतवार दिखाई दे रहे हो तो किसान भाई सल्फोसल्फ्यूरॉन 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी फीनोन्सोप्रोप इथाइल 10 प्रतिशत ईसी दवा का मिश्रण 500-600 लीटर पानी में मिलाकर किसान पहली सिंचाई के बाद खेत में नमी रहने पर खरपतवार नियंत्रण हेतु उपयोग कर सकते है। अधिक जानकारी के लिए किसान भाई अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी कृषि विकास अधिकारी या विकासखण्ड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से सम्पर्क कर सकते है।


किसानों की तरक्की के लिये कृषि के साथ पशुपालन को भी दिया जाये बढ़ावा
Our Correspondent :02 January 2016
चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में कृषक प्रशिक्षण केन्द्र का लोकार्पण

भोपाल। केन्द्रीय राज्य मंत्री सूक्ष्म, लघु तथा मझोले उद्योग श्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि किसानों की तरक्की के लिये कृषि के साथ-साथ पशुपालन और कृषि से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिये जाने की जरूरत है। केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री गिरिराज सिंह आज सतना के महात्मा गाँधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में कृषक प्रशिक्षण केन्द्र का लोकार्पण कर रहे थे। इस मौके पर ऊर्जा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल भी मौजूद थे।
केन्द्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के बाद ही सही मायनों में गाँव का विकास होगा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री और कृषि वैज्ञानिक स्वामीनाथन के कृषि के क्षेत्र में किये गये विकास कार्यों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक अपनाने के साथ-साथ हमें अपनी पुरानी कृषि परम्पराओं का भी ख्याल रखना होगा। ऊर्जा एवं जनसंपर्क मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में पिछले 10 वर्ष में किसानों की तरक्की के लिये अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। इसका ही परिणाम है कि मध्यप्रदेश को कृषि के क्षेत्र में विकास के लिये 3 बार कृषि कर्मण पुरस्कार मिला है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि मध्यप्रदेश को यह पुरस्कार चौथी बार भी मिलेगा। समारोह में कृषि विपणन बोर्ड के आयुक्त श्री अरुण पाण्डे ने प्रदेश में कृषि उपज मण्डियों को आधुनिक किये जाने के बारे में जानकारी दी।
ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेशचन्द्र गौतम ने बताया कि कृषक भवन एवं कृषि प्रशिक्षण केन्द्र एक करोड़ 20 लाख की लागत से बनकर तैयार हुआ है। इतनी ही लागत की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला बनायी जायेगी। विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय-स्तर पर अपने कार्यक्रम एवं गतिविधियों के माध्यम से विशिष्ट पहचान बनायी है।


अऋणी किसानों के लिए प्रीमियम जमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर
17 December 2015
भोपाल। राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय बीमा योजना के अंतर्गत रबी 2015-16 मौसम की फसल हेतु अऋणी किसानों को लाभ दिलाने के लिए इस योजना से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। अऋणी किसानों को राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना का लाभ दिलाने के लिए अऋणी किसानों के प्रस्ताव प्राप्त कर बैंकों तथा सहकारी बैंकों के माध्यम से जिला स्तर से अग्रणी बैंक अधिकारी एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक सभी प्रस्ताव संकलित कर संबंधित बैंक को भेजना सुनिश्चित करेंगे। अऋणी किसानों के लिए प्रीमियम जमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर 2015 निर्धारित की गई है।।
किसान 31 दिसम्बर से पहले फसल बीमा करायें
17 December 2015
भोपाल। राष्ट्रीय कृषि बीमा योजनान्तर्गत रबी 2015-16 में फसल बीमा हेतु जिले में अऋणी कृषकों को 31 दिसम्बर 2015 तक लाभ दिलाये जाने हेतु अभियान चल रहा है। जिले में किसानों के हितार्थ शासन द्वारा राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना का संचालन किया जा रहा है। रबी 2015-16 मौसम हेतु शासन द्वारा अधिसूचित फसलें जैसे गेहूँ सिंचित, गेहूँ असिंचित, चना, सरसों फसलों पर पटवारी हलकावार अधिसूचना जारी की जा चुकी है। किसान भाई प्राकृतिक आपदा में क्षति से बचने के लिये अंतिम तिथि 31 दिसम्बर 2015 से पहले उक्त योजना में भाग लेकर अधिक से अधिक फसल बीमा करावें। उक्त योजना हेतु जिले की समस्त बैंक शाखाओं में राजस्व अभिलेख एवं सोइंग सर्टिफिकेट (बोनी प्रमाणपत्र) के साथ प्रीमियम जमा करावें। बीमा संबंधी समस्या आने पर ग्राम स्तर पर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, विकासखण्ड स्तर पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं जिला स्तर पर उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास के कार्यालय में संपर्क करें।

कृषि मंथन के निष्कर्षों पर तत्काल बनाये कार्ययोजनाएँ
02 December 2015
बँटाई पर खेती करनेवाले किसानों के हित में भू-राजस्व संहिता अधिनियम के स्थान पर बँटाईदारों के हितों के संरक्षण विधेयक का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। इसे अगली केबिनेट में चर्चा और अनुमोदन के लिये रखा जायेगा। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड देने के संबंध में बताया गया कि 5दिसम्बर को विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस पर पूरे जिलो में कार्यक्रम होंगे। इस दौरान 1.25 लाख मृदा स्वास्थ्य कार्ड बाँटे जायेंगे। मुख्यमंत्री स्वयं जबलपुर से इसकी शुरूआत करेंगे।
यह जानकारी आज यहाँ मंत्रालय में कृषि मंथन-2015 के निष्कर्षो की समीक्षा बुलाई गयी उच्च स्तरीय बैठक में दी गयी। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि मंथन-2015 के निष्कर्षो की समीक्षा करते हुए सम्बंधित विभागों को तत्काल कार्य-योजनाएँ बनाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कृषि मंथन की 21 निष्कर्ष पर बिन्दुवार चर्चा की और कार्य-योजनाओं को अंतिम रूप दिया। संबंधित विभागों ने मुख्यमंत्री को अनुशंसाओं पर की गई कार्रवाई कर भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि किसानों के हित में हर हाल में कृषि मंथन के निष्कर्षो पर तत्काल अमल करना जरूरी है। किसानों के स्थायी पंप कनेक्शन देने के अभियान के संबंध में बताया गया कि जल्दी ही शुरूआत होगी। सोलर पंप पर सब्सिडी दी जायेगी। योजना में दो हार्स पावर, तीन हार्स पावर पर डीसी और 5 हार्स पावर के एसी पम्प शामिल किये जायेंगे। वर्ष 2015-16 में 4000 सोलर पंप दिये जायेंगे। इस पर 36 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा। सभी किसानों का ऑनलाइन पंजीयन करवाया जायेगा। उद्यानिकी फसलों के निर्यात के लिये भारत सरकार की एपीडा जैसी संस्था बनाने के लिये टी.ओ.आर. तैयार कर ली गई है। भारत सरकार से भी मार्गदर्शन मांगा गया है। छोटी-छोटी राशि के अनुदान वाली योजनाओं को बंद करने की अनुसंशा पर चर्चा में बताया गया कि ऐसी 103 योजनाएँ हैं जिनका व्यापक प्रभाव और लाभ नहीं हुआ है। अनावश्यक सब्सिडी आधारित इन योजनाओं को बंद किया जायेगा या इनका स्वरूप बदला जायेगा।
जानकारी दी गयी कि किसानों को सहकारिता के नेटवर्क में शामिल करने के लिये आज से सहकारी बैंक की शाखाओं में अभियान शुरू हो गया है जो 31 दिसम्बर तक चलेगा। किसानों के लिये अगले साल अप्रैल तक एसएमएस आधारित सूचना सेवा शुरू हो जायेगी।
मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायत स्तर पर युवाओं में उद्यमिता की भावना प्रोत्साहित करने और उन्हें खाद्य प्र-संस्करण आधारित इकाइयाँ स्थापित करने के लिये विशेष प्रोत्साहन प्रयास करने के निर्देश दिये। उन्होंने जिला स्तर पर उत्सुक युवाओं के सम्मेलन आयोजित करने को कहा। उन्होंने मिल्क रुट और सब्जी रूट तय करने के भी निर्देश दिये। बताया गया कि
फल और फूलों के लिये 132 मंडी में व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि इन मंडियों में ताजा रेट लिस्ट लगी रहना चाहिए ताकि किसानों को किसी प्रकार का घाटा न हो और उन्हें अच्छे से अच्छे दाम मिले।
मुख्यमंत्री ने जलाभिषेक अभियान को पुन: पूरी तैयारी के साथ चलाने के निर्देश देते हुए कहा कि जिला स्तर पर सिंचाई योजना बनाते समय माइक्रो सिंचाई पर ध्यान केंद्रित किया जाये। श्री चौहान ने प्रदर्शन प्रक्षेत्र का विकास कर किसान मित्र और किसान दीदी को प्रशिक्षण दिलाने के निर्देश दिये। उन्होंने कृषि विभाग के अमले को जिलों में भेजने के निर्देश दिये।
बैठक में बताया गया कि एग्रो फारेस्ट्री नीति तैयार की जा रही है। जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय में खाद्य प्र-संस्करण विभाग और कृषि विज्ञान प्रौद्योगिकी को मिलाकर पोस्ट हार्वेस्ट मैनेंजमेंट इंस्टीट्यूट की स्थापना के प्रस्ताव पर चर्चा होगी।
बैठक में कृषि मंत्री श्री गौरी शंकर बिसेन, सहकारिता मंत्री श्री गोपाल भार्गव, राजस्व मंत्री श्री रामपाल सिह, पशुपालन मंत्री सुश्री कुसुम मेहदेले, वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया , उच्च शिक्षा मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता, वन मंत्री श्री गौरी शंकर शेजवार, अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री श्री ज्ञान सिंह, खाद्य मंत्री कुंवर श्री विजय शाह, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री पारस जैन, नर्मदा घाटी विकास राज्य मंत्री श्री लाल सिंह आर्य,स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी, मुख्य सचिव श्री अंटोनी डिसा, मुख्यमंत्री के सचिव श्री विवेक अग्रवाल और सम्बंधित विभागों के प्रमुख सचिव उपस्थित थे।


युद्ध-स्तर पर किया जाये किसानों को राहत राशि का भुगतान
02 December 2015
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि किसानों को राहत राशि का भुगतान सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए युद्ध-स्तर पर किया जाये। उन्होंने इसमें आय कर की शर्त इस वर्ष के लिये समाप्त करने के निर्देश दिये। साथ ही स्पष्ट कहा कि योजनाओं का लाभ हितग्राहियों को सरलता से समय पर मिलना सुनिश्चित करने की जवाबदारी कलेक्टरों की होगी। इसमें गड़बड़ी मिलने पर सख्त कार्रवाई की जायेगी।
मुख्यमंत्री आज यहाँ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। इसके पहले उन्होंने समाधान ऑनलाइन के जरिये विभिन्न जन शिकायतों के निराकरण का जायजा लिया और लापरवाही पाये जाने पर संयुक्त संचालक मंडी बोर्ड सहित 5 कर्मियों को निलम्बित किया।

राहत राशि के वितरण में आयकरदाता की शर्त समाप्त

श्री चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों के राहत के राशि के वितरण का कार्य चुनौती के रूप में लें। इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए युद्ध-स्तर पर किया जाये। इसमें विभिन्न विभाग के कर्मचारियों की सेवाएँ ली जायें। उन्होंने कहा कि इस वर्ष राहत वितरण में किसानों के आयकरदाता नहीं होने की शर्त समाप्त की जाती है। इसके घोषणा-पत्र किसानों से भरवाने के कारण राहत राशि वितरण में काफी देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि राहत वितरण में व्यवधान पैदा करने वाले कर्मियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाये। उन्होंने जिलेवार राहत राशि वितरण की जानकारी ली। साथ ही एक निश्चित समय-सीमा में राहत वितरण के लिये कलेक्टरों को निर्देशित किया। बताया गया कि प्रदेश में 337 करोड़ की राहत राशि स्वीकृत की जा चुकी है, जो सीधे किसानों के खातों में भुगतान की जा रही है।

पेंशन का वितरण ग्राम सभा में करवायें

मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से स्पष्ट कहा कि विभिन्न योजनाओं का लाभ निचले स्तर तक सरलता से समय पर पहुँचना चाहिये। इसमें किसी तरह की देरी और गड़बड़ी सहन नहीं की जायेगी। उन्होंने कहा कि वे स्वयं जिलों के भ्रमण के दौरान आमजन से सीधे संवाद कर योजनाओं की मैदानी हकीकत जानेंगे। विभिन्न योजनाओं का डिलेवरी मेकेनिज्म दुरूस्त किया जाये। इससे हितग्राहियों को कोई परेशानी नहीं हो। उन्होंने पेंशन का वितरण डोंडी पिटवाकर एक दिन ग्रामसभा में सबके सामने करवाने के निर्देश दिये, ताकि हितग्राहियों को बैंक के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। श्री चौहान ने योजनाओं के क्रियान्वयन को बेहतर बनाने के लिये कलेक्टरों से सुझाव भी मांगे। साथ ही कहा कि कलेक्टर मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी तरह की गड़बड़ी नही होना चाहिये।

दमोह कलेक्टर पर नाराजगी व्यक्त

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस दौरान आपस में बात करने पर दमोह कलेक्टर श्री निवास शर्मा पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। साथ ही उन्हें नोटिस जारी करने के लिये मुख्य सचिव को निर्देश दिये। उन्होंने अधिकारियों को अपनी कार्य-प्रणाली सुधारने और व्यवहार में गंभीरता बरतने को कहा।

आवेदकों की समस्यायें जानी और कार्रवाई के दिये निर्देश

मुख्यमंत्री ने समाधान ऑनलाइन के जरिये विभिन्न जिलों की 12 जनशिकायत के निराकरण की जानकारी ली। भिंड जिले के ग्राम चन्दहरा के श्री वंशीधर शर्मा के पुत्र श्री कल्याण शर्मा की कुंए में कार्य करते हुए दुर्घटना में 07 दिसम्बर 2013 को मृत्यु हो गयी। इसमें मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना में आर्थिक सहायता राशि स्वीकृति में विलम्ब करने पर तत्कालीन संयुक्त संचालक मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड, ग्वालियर को निलंबित करने के निर्देश दिये गये। साथ ही आवेदक को एक लाख रूपये का भुगतान करने के निर्देश दिये। मंदसौर निवासी श्रीमती सुशीला देवी पंडया के पति द्वारा 2006 में नगर निगम भोपाल में की गयी एलम की आपूर्ति का भुगतान नहीं होने पर तत्कालीन सहायक ऐलियम्मा जोई को निलंबित किया। साथ ही आवेदक को ब्याज सहित भुगतान और ब्याज की बसूली संबंधित कर्मियों से करने को कहा गया। सीहोर जिले के डोभा निवासी श्री बद्रीप्रसाद मेहरा को भू-अर्जन की मुआवजा राशि के भुगतान में देरी करने वाले अधिकारियों से ब्याज की राशि वसूलने, उनके विरूद्ध कार्रवाई करने तथा आवेदक को शीघ्र राशि भुगतान करने के निर्देश दिये गये। सीहोर निवासी नरसिंह गोयल को छात्रगृह योजना में किराये की राशि शीघ्र भुगतान करने के लिये निर्देशित किया गया।
अशोकनगर के पिपरई निवासी प्रीतिबाई की दो पुत्री की खदान में डूबने से हुई मृत्यु पर आवेदक को एक-एक लाख की राहत राशि का भुगतान करने के निर्देश दिये। अनूपपुर जिले के वेंकटनगर निवासी श्री नीरज गुप्ता के पिता की उत्तराखण्ड आपदा के दौरान मृत्यु हो गयी थी। आवेदक को पूर्व में डेढ़ लाख की राहत राशि का भुगतान किया जा चुका था। पिता का मृत्यु प्रमाण-पत्र और दो लाख की राहत राशि का भुगतान उत्तराखण्ड शासन के माध्यम से और करवाया गया।
अनूपपुर जिले के नौगवां निवासी श्री कैलाश प्रसाद एवं अन्य को मजदूरी का भुगतान करवाया गया तथा इसमें विलम्ब करने वाले वन परिक्षेत्र अधिकारी के विरूद्ध विभागीय जाँच के आदेश दिये गये। रतलाम जिले की रंगवाड़ी निवासी श्रीमती रेशमबाई को भूमि की मुआवजा राशि भुगतान के निर्देश दिये। जिला रीवा के ग्राम हसलो के श्री राममिलन तिवारी के बैल की बिजली गिरने से मृत्यु होने पर सहायता राशि का भुगतान नहीं करने पर नई गढ़ी तहसील के नायब नाजिर श्री रविकांत तिवारी को निलंबित तथा आवेदक को राहत राशि भुगतान के निर्देश दिये गये। जिला सागर के बेहरिया कला के श्री महेन्द्र रजक को विकलांग पेंशन का भुगतान पिछले छह माह से नहीं मिलने पर ग्राम पंचायत सचिव श्री परमलाल लोधी एवं पंचायत समन्वयक श्री प्रमोद जैन को निलंबित करने, रोजगार सहायक की सेवा समाप्ति और आवेदक को पेंशन के भुगतान के निर्देश दिये गये। उमरिया जिले के ग्राम रिझौहा के श्री द्वारिका सिंह को मजदूरी के भुगतान तथा सतना के श्री नत्थूलाल जायसवाल को मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम में टेंडर के लिये जमा करायी अमानत राशि का भुगतान करवाने के निर्देश संबंधितों को दिये।।

इस वर्ष 105 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बुवाई का लक्ष्य
26 November 2015
भोपाल। प्रदेश में इस वर्ष रबी फसल की बुवाई का 105.09 लाख हेक्टेयर लक्ष्य तय किया गया है। इसमें से 49 लाख 41 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बोवाई हो चुकी है। संचालक कृषि ने किसानों को बीजोपचार के बाद और कम जल माँग वाली फसलों तथा किस्मों की बुवाई करने की सलाह दी है।
रबी फसलों के लिये इस वर्ष 20 लाख 20 हजार क्विंटल बीज की जरूरत होगी। इसके लिये 19 लाख 19 हजार क्विंटल बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है। इसमें से 10 लाख 24 हजार क्विंटल बीज का उठाव हो चुका है। रबी फसलों के लिये खाद की व्यवस्था भी की गयी। उर्वरक का 16 लाख 62 हजार मीट्रिक टन भण्डारण का लक्ष्य है। इसमें से 6 लाख 8 हजार मीट्रिक टन का भण्डारण किया जा चुका है। इसमें से 4 लाख 22 हजार मीट्रिक टन उर्वरक का उठाव हो चुका है। रबी फसलों के लिये डी.ए.पी. का 4 लाख 29 हजार मीट्रिक टन भण्डारण किया गया है। इसमें से एक लाख 11 हजार मीट्रिक टन का उठाव हो चुका है। काम्पलेक्स का एक लाख 75 हजार मीट्रिक टन का भण्डारण किया गया है। इसमें से 42 हजार मीट्रिक टन का उठाव हो चुका है।

इस वर्ष धान एवं मोटे अनाज की समर्थन मूल्य पर खरीदी 26 अक्टूबर से
Our Correspondent :19 September 2015
प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष 2015-16 में धान एवं मोटा अनाज की समर्थन मूल्य पर खरीदी की तिथि संभागवार तय की गई है। खरीदी के संबंध में जिला कलेक्टर्स को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने निर्देश जारी किये हैं।
इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग में मोटा अनाज की खरीदी 26 अक्टूबर से अगली 15 जनवरी 2016 तक की जायेगी। रीवा, शहडोल, सागर, जबलपुर, ग्वालियर और चम्बल संभाग में मोटे अनाज की खरीदी 2 नवम्बर से 25 जनवरी तक की जायेगी। मोटे अनाज में इन संभागों में ज्वार, मक्का और बाजरा की खरीदी होगी। इंदौर, उज्जैन, भोपाल, नर्मदापुरम, रीवा, शहडोल, सागर, जबलपुर, ग्वालियर और चम्बल संभाग में समर्थन मूल्य पर धान का उपार्जन 2 नवम्बर से 25 जनवरी तक चलेगा। प्रदेश में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर धान 15 लाख मीट्रिक टन और मक्का 5 लाख मीट्रिक टन उपार्जन किये जाने का अनुमान है।


किसानों के लिये 5500 करोड़ की बिजली की सब्सिडी
Our Correspondent :23 December 2014
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज संपन्न हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में बिजली टेरिफ में वृद्धि के भार से किसानों को बचाने के लिये वर्ष 2015-16 में 5500 करोड़ की सब्सिडी देने का निर्णय लिया गया। इससे करीब साढ़े 18 लाख किसान को फायदा होगा। अन्य वर्गों के लिये इस वर्ष विद्युत वितरण कम्पनियों को 300 करोड़ की सब्सिडी दी जायेगी। इस तरह इस वर्ष कुल सब्सिडी राशि 5800 करोड़ होगी।
मंत्रि-परिषद ने एक हेक्टेयर तक की भूमि वाले 5 हार्स पावर तक के अनुसूचित जाति एवं जनजाति के कृषि उपभोक्ताओं को नि:शुल्क बिजली देने का निर्णय लिया। इससे करीब साढ़े चार लाख किसान लाभान्वित होंगे।
मंत्रि-परिषद ने 30 यूनिट तक की मासिक खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 90 पैसे की सब्सिडी जारी रखने का निर्णय लिया। स्थायी कनेक्शन वाले कृषि उपभोक्ताओं से प्रति हार्स पावर प्रतिवर्ष 1200 रुपये की दर से विद्युत बिल लिये जाने का निर्णय लिया गया। विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित दर तथा कृषि उपभोक्ता द्वारा देय दर में अंतर की राशि का पूरा भार राज्य शासन वहन करेगा। अस्थायी कनेक्शन वाले कृषि उपभोक्ताओं को एक रुपये 75 पैसे प्रति यूनिट की दर से सब्सिडी दी जायेगी।
स्थायी तथा अस्थायी दोनों श्रेणी के कृषि उपभोक्ताओं के लिये ईंधन लागत समायोजन का पूरा भार राज्य सरकार वहन करेगी। इसके बदले में सब्सिडी दी जायेगी। मंत्रि-परिषद ने नगरपालिका तथा नगर पंचायत की निम्न दाब सड़क बत्ती योजनाओं के लिये नियत प्रभार (फिक्सड कॉस्ट) पर 95 रुपये प्रति किलोवाट प्रतिमाह सब्सिडी देने का निर्णय लिया। उच्च दाब उदवहन/समूह सिंचाई योजनाओं को वार्षिक न्यूनतम प्रभार से छूट देने का निर्णय भी लिया गया। ऊर्जा प्रभार में भी 190 पैसे प्रति यूनिट सब्सिडी दी जायेगी।
मंत्रि-परिषद ने गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले अनुसूचित जाति एवं जनजाति के एकल बत्ती उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 25 यूनिट तक की बिजली नि:शुल्क देने का निर्णय लिया।
मंत्रि-परिषद ने 25 हार्स पावर तक के पावरलूम उपभोक्ताओं को वास्तविक खपत के आधार पर बिजली बिल जारी करने का निर्णय लिया। उन उपभोक्ताओं को ऊर्जा प्रभार में एक रुपये 25 पैसे प्रति यूनिट सब्सिडी भी दी जायेगी। पावरलूम उपभोक्ताओं को सब्सिडी वाणिज्य, उद्योग और रोजगार विभाग द्वारा दी जायेगी।

आईसीटी योजना

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में कम्प्यूटर शिक्षा के विस्तार के लिये 2000 शासकीय हाई/हायर सेकेण्डरी स्कूल में ICT@School योजना क्रियान्वित करने का निर्णय लिया। योजना में 20 हजार शिक्षक को प्रशिक्षित किया जायेगा। इस पर 128 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

अम्बेडकर विश्वविद्यालय

मंत्रि-परिषद ने महू स्थित बाबा साहब अम्बेडकर राष्ट्रीय सामाजिक विज्ञान संस्थान को विश्वविद्यालय का स्वरूप देने का निर्णय लिया। विश्वविद्यालय का नाम डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय होगा। मंत्रि-परिषद ने विश्वविद्यालय के लिये आगामी सत्र से ही पाठ्यक्रम शुरू करने के लिये अध्यादेश जारी करने का निर्णय लिया। विश्वविद्यालय में अतिरिक्त रूप से 99 शैक्षणिक और 3 गैर-शैक्षणिक पद के सृजन को स्वीकृति दी गई।

उप पुलिस अधीक्षक

मंत्रि-परिषद ने उप पुलिस अधीक्षक के सीधी भर्ती के 252 रिक्त पद पदोन्नति से भरे जाने का निर्णय लिया। यह पद वर्ष 2015 में भरे जायेंगे और इसके लिये संबंधित सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम को शिथिल किया जायेगा। इन पदों का समायोजन भविष्य में वर्षवार रिक्तियों के अनुसार सीधी भर्ती के पदों पर ही किया जायेगा। पूर्ण समायोजन होने तक इन पदों पर पदोन्नति की कार्यवाही नहीं की जायेगी।

उच्च न्यायालय के लिये पद

मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर के लिये 60 पद के सृजन को मंजूरी दी। इनमें डाटा एंट्री ऑपरेटर के 25, कान्सोल ऑपरेटर/सिस्टम मेनेजर के 16, सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर के 8, सिस्टम एनालिस्ट के 5, सीनियर सिस्टम एनालिस्ट के 3, प्रिसिंपल सिस्टम एनालिस्ट के 2 और चीफ सिस्टम एनालिस्ट का एक पद शामिल है।

मंत्रि-परिषद ने जिला न्यायालयों के लिये भी 200 पद के सृजन को मंजूरी दी। इनमें कान्सोल ऑपरेटर/सिस्टम मेनेजर के 150 (150 तहसील के लिये) और सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर के 50 पद शामिल है।

केंसर इलाज के लिये राशि

मंत्रि-परिषद ने उद्योग विभाग के उप संचालक श्री एन.आर. सूर्यवंशी को उनकी पत्नी के ब्रेस्ट केंसर के इलाज के लिये एक लाख 70 हजार 140 रुपये का भुगतान टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मुम्बई को करने की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की।

अन्य निर्णय

मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन की नियमित पद-स्थापना के सभी संवर्गों में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की अधिवार्षिकी आयु 60 वर्ष करने का निर्णय लिया। इस निर्णय से वर्ग-1, 2 और 3 के अधिकारी-कर्मचारी भी अब 60 वर्ष में सेवानिवृत्त होंगे।
मंत्रि-परिषद ने अधिवक्ता संघों के पुस्तकालयों को और समृद्ध करने के उद्देश्य से पुस्तक क्रय के लिये विधि मंत्री को 50 हजार और मुख्यमंत्री को एक लाख रुपये तक का अनुदान स्वीकृत करने की वित्तीय शक्तियाँ देने का निर्णय लिया। पहले यह राशि क्रमश: 25 हजार और 50 हजार रुपये थी।


मध्यप्रदेश को मिला गेहूँ उत्पादन में उत्कृष्टता के लिए कृषि कर्मण अवार्ड
Our Correspondent :16 December 2014
भोपाल । मध्यप्रदेश को गेहूँ उत्पादन में उत्कृष्ट कार्य के लिए वर्ष 2013-14 के प्रतिष्ठित कृषि कर्मण अवार्ड के लिए चुना गया है। वर्ष 2011 और 2012 में भी मध्यप्रदेश को समग्र खाद्यान्न उत्पादन में श्रेष्ठता के लिए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुका है।
केन्द्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश केकिसानों को उन्नत तकनीक और विस्तार सेवाएँ प्रदान करने के लिए समर्पित प्रयास किये जिससे प्रदेश को यह मुकाम हासिल हो सका है। पुरस्कार में दो करोड़ रुपये नगद, ट्रॉफी और प्रशस्ति-पत्र दिया जाता है। शीघ्र ही होने वाले एक समारोह में यह पुरस्कार दिया जायेगा।
कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन में सिंचाई क्षमता में बढ़ोत्तरी, बिजली की उपलब्धता, समय पर खाद-बीज का वितरण, भण्डारण क्षमता में बढ़ोत्तरी, ब्याज रहित कृषि ऋण, गेहूँ, धान और मक्के के उपार्जन पर बोनस जैसे कारणों का महत्वपूर्ण योगदान है।
प्रदेश में 2012-13 में 277 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन के साथ मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा था। इसमें 161 लाख टन गेहूँ उत्पादन शामिल है। प्रदेश लगातार दो अंक की कृषि वृद्धि दर बनाये रखने में सफल हुआ है। देश के खाद्यान्न उत्पादन में प्रदेश का योगदान 11.2 प्रतिशत है। इस प्रकार खाद्यान्न उत्पादन करने वाले उत्तर प्रदेश, पंजाब, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार को मध्यप्रदेश ने पीछे छोड़ दिया है।
कृषि कर्मण पुरस्कार के लिये खाद्यान्न उत्पादन, उत्पादकता, खेती पर व्यय, देश की तुलना में उत्पादकता में बढ़ोतरी, और खाद्यान्न उत्पादन के लिये नवाचारी उपाय जैसे विशेष मापदंड निर्धारित किये गये थे। इन सभी मापदंडों में मध्यप्रदेश ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वर्ष 2007-08 में खाद्यान्न उत्पादन 128.30 लाख मीट्रिक टन था जो 2012-13 में बढ़कर 277 लाख मीट्रिक टन हो गया है। इसी प्रकार खाद्यान्न की उत्पादकता 2007-08 में 1064 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी जो 2012-13 में बढ़कर 1952 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है।

गेहूँ उत्पादन

मध्यप्रदेश में वर्ष 2013-14 में 174 लाख 78 हजार मीट्रिक टन गेहूँ उत्पादन किया गया। इसमें से 71 लाख 88 हजार मीट्रिक टन गेहूँ समर्थन मूल्य पर उपार्जित किया गया। प्रदेश की मंडियों में कुल 122 लाख 58 हजार मीट्रिक टन गेहूँ किसानों ने बेचा।
मध्यप्रदेश ने गेहूँ की उत्पादकता में विगत वर्ष में 20.15 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हासिल करते हुए 29.76 क्विंटल प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन प्राप्त किया। प्रदेश में 57 लाख हेक्टेयर में गेहूँ की फसल ली जाती है। वर्ष 2012-13 में गेहूँ उत्पादन में हरियाणा और वर्ष 2013-14 में पंजाब को पीछे छोड़कर मध्यप्रदेश देश में दूसरा राज्य बन गया है।


चौथी अंतर्राष्ट्रीय सोया फूड कान्फ्रेंस 7 नवंबर को भोपाल में
27 September 2014
भोपाल। सोय फूड प्रमोशन एण्ड वेलफेयर एसोसिएशन (एसएफपीडब्ल्यूए) द्वारा 7 नवंबर को होटल कोर्टयार्ड बाय मैरियट में चौथी अंतर्राष्ट्रीय सोय फूड कान्फ्रेंस का आयोजन किया जाएगा। अमेरिका की यू.एस. सोयबीन एक्सपोर्ट काउंसिल (यूएसएसईसी) के सहयोग से आयोजित की जा रही इस कान्फे्रंस में भारत सहित ब्रिटेन, ब्राजील, जापान, कोरिया व अमेरिका आदि देशों से आ रहे विषय विशेषज्ञ भाग लेंगे। भारतीय सोयाबीन उत्पाद इकाईयों को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर लाने तथा इस क्षेत्र में मौजूद वैश्विक चुनौतियों, बदलावों, संभावनाओं एवं रणनीति पर चर्चा करना इस कान्फ्रेंस के प्रमुख उद्देश्य हैं
जिन प्रमुख विशेषज्ञों के उद्बोधन इस कान्फ्रेंस में सुनने को मिलेंग उनमें गुजरात के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. एस.के. नंदा, बोरलॉग इन्स्टीट्यूट ऑफ साउथ एशिया के डायरेक्टर जनरल डॉ. एच.एस. गुप्ता, डायरेक्टोरेट ऑफ सोयबीन रिसर्च के डायरेक्टर डॉ. एस.के. श्रीवास्तव, ब्राजील से आ रहे आगस्तो सीएम फ्रेरे, यूके के रिचर्ड वेरेन, कोरिया के ओह सेंग हो, अमेरिका के डॉ. मियान एन रियाज, जापान के केंजी माश्तुमोटो आदि प्रमुख हैं।


हलधर कृषि एक्सपो में विश्व की तीन प्रतिष्ठित कम्पनी से एमओयू
27 September 2014
भोपाल। किसानों को खेती के लिये उन्नत कृषि यंत्र उपलब्ध करवाने के लिये राज्य सरकार ने आज विश्व की तीन प्रतिष्ठित कम्पनियों से एमओयू किये हैं। यह कम्पनियाँ हैं इटली की मास्कियो-गास्पारदो, जापान की कुबोटा तथा न्यू हॉलेंड की फिएट (इंडिया) प्रायवेट लिमिटेड। इन कम्पनियों से मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में आज राज्य-स्तरीय हलधर कृषि एक्सपो-2014 में करारनामे हुए। राज्य सरकार की ओर से तीनों करारनामे कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय द्वारा हस्ताक्षरित किये गये।
किसानों को कृषि महोत्सव के जरिये उन्नत कृषि यंत्र और तकनीक से अवगत करवाने के लिये चलाये जा रहे अभियान की कड़ी में आज जिन तीन कम्पनी से करारनामे हुए हैं वे कृषि के क्षेत्र में बेहतर यंत्र बनाने में दक्ष और प्रतिष्ठित हैं।
इटली की मास्कियो-गास्पारदो के प्लांट 13 देश में स्थापित हैं। हाल ही में भारत में पुणे में एक नया प्लांट स्थापित किया है। यह कम्पनी मध्यप्रदेश में उन्नत तकनीक यंत्रों से सोयाबीन, मक्का एवं कपास की उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेगी। कम्पनी कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय को एसपी न्यूमेटिक, मल्टीक्रॉप, पॉवर हेरो, फर्टिलाइजर स्प्रेडर एवं श्रेडर यंत्र उपलब्ध करवायेगी।
जापान की कुबोटा कम्पनी प्रदेश में धान की उत्पादकता बढ़ाने में कृषि विभाग को मदद करेगी। ट्रेक्टर एवं यंत्र निर्माण में विश्वविख्यात इस कम्पनी ने हाल ही में चेन्नई में एक प्लांट स्थापित किया है। कम्पनी मध्यप्रदेश को यंत्रीकृत धान की रोपाई से धान की उत्पादकता बढ़ाने के लिये सेल्फ प्रोपेल्ड राईस ट्रांस प्लांटर एवं सीडलिंग मशीन उपलब्ध करवायेगी।
न्यू हॉलेंड की फिएट कम्पनी करारनामे के अनुसार प्रदेश में गन्ना, कपास, मक्का तथा सोयाबीन उत्पादकता बढ़ाने के लिये प्रदेश सरकार के साथ मिलकर किसानों की मदद करेगी। कम्पनी ने इस कार्य के प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण के लिये गन्ना हार्वेस्टर, बेलर-रेक, कॉटन पिकर, फोडर मेज हार्वेस्ट, न्यूमेटिक कॉटन प्लांटर, सब-साईलर, शुगरकेन इनफील्डर सहित 18 मशीन उपलब्ध करवाने पर सहमति दी है।


कृषि महोत्सव का पहला दिन
27 September 2014
भोपाल। किसानों को कृषि की नवीनतम तकनीक की जानकारी देने और प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में मिली उपलब्धियों को उत्सव के रूप में मनाने के लिये जिले से ग्राम-पंचायत-स्तर तक कृषि महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 25 सितम्बर को भोपाल में सातवें राष्ट्रीय बीज सम्मेलन में कृषि महोत्सव का शुभारंभ किया। महोत्सव 20 अक्टूबर तक चलेगा। महोत्सव में पहले दिन 313 कृषि क्रांति-रथ द्वारा 1072 ग्राम का भ्रमण कर कृषकों को विभिन्न तकनीक एवं योजना की जानकारी दी गई।
कृषि महोत्सव के शुभारंभ पर ग्राम-स्तरीय कृषक शिविरों में 43 हजार 341 कृषक शामिल हुए। शिविरों में सूरजधारा योजना में 1418, अन्नपूर्णा में 621 और बीज ग्राम योजना में 494 कृषक को कृषि-किट वितरित किये गये। मिट्टी परीक्षण के लिये 4135 नमूने लिये गये। मुख्यमंत्री खेत-तीर्थ योजना में 31 भ्रमण-दल बनाये गये हैं।

49 हजार 116 राजस्व अभिलेख वितरित

महोत्सव में कृषकों को 49 हजार 116 राजस्व अभिलेख का वितरण किया गया। इस दौरान आयोजित पशु-चिकित्सा शिविरों में 18 हजार 212 पशु का उपचार किया गया। शिविरों में 5761 किसान को क्रेडिट-कार्ड वितरित किये गये। सीमांकन के 34 और नामांतरण के 275 प्रकरण का निराकरण और 211 ऋण-पुस्तिका का वितरण किया गया। स्थाई पम्प-कनेक्शन 643 किसान को दिये गये। 'मेरा खेत-मेरी माटी' योजना में 424 कार्य प्रारंभ किये गये। इस दौरान 1473 कृषक का स्वास्थ्य परीक्षण भी करवाया गया। जिन ग्रामों में कृषि-रथ रुके, वहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।
किसानों को कृषि की नवीनतम तकनीक की जानकारी देने और प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में मिली उपलब्धियों को उत्सव के रूप में मनाने के लिये जिले से ग्राम-पंचायत-स्तर तक कृषि महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 25 सितम्बर को भोपाल में सातवें राष्ट्रीय बीज सम्मेलन में कृषि महोत्सव का शुभारंभ किया। महोत्सव 20 अक्टूबर तक चलेगा। महोत्सव में पहले दिन 313 कृषि क्रांति-रथ द्वारा 1072 ग्राम का भ्रमण कर कृषकों को विभिन्न तकनीक एवं योजना की जानकारी दी गई।
कृषि महोत्सव के शुभारंभ पर ग्राम-स्तरीय कृषक शिविरों में 43 हजार 341 कृषक शामिल हुए। शिविरों में सूरजधारा योजना में 1418, अन्नपूर्णा में 621 और बीज ग्राम योजना में 494 कृषक को कृषि-किट वितरित किये गये। मिट्टी परीक्षण के लिये 4135 नमूने लिये गये। मुख्यमंत्री खेत-तीर्थ योजना में 31 भ्रमण-दल बनाये गये हैं।

49 हजार 116 राजस्व अभिलेख वितरित

महोत्सव में कृषकों को 49 हजार 116 राजस्व अभिलेख का वितरण किया गया। इस दौरान आयोजित पशु-चिकित्सा शिविरों में 18 हजार 212 पशु का उपचार किया गया। शिविरों में 5761 किसान को क्रेडिट-कार्ड वितरित किये गये। सीमांकन के 34 और नामांतरण के 275 प्रकरण का निराकरण और 211 ऋण-पुस्तिका का वितरण किया गया। स्थाई पम्प-कनेक्शन 643 किसान को दिये गये। 'मेरा खेत-मेरी माटी' योजना में 424 कार्य प्रारंभ किये गये। इस दौरान 1473 कृषक का स्वास्थ्य परीक्षण भी करवाया गया। जिन ग्रामों में कृषि-रथ रुके, वहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।


प्र-संस्करण के उपयोग में लायी गयी उपज पर मण्डी फीस में छूट
राज्य शासन ने कृषि उपज उड़द/उड़दा, मूंग, तुअर (अरहर), चना, मसूर, बटरा/बटरी, जो विदेशों से या राज्य के बाहर से किसी मण्डी क्षेत्र में प्र-संस्करण के लिये लायी गयी हो, पर देय मण्डी फीस के भुगतान पर पूर्ण छूट दिये जाने का निर्णय लिया है। किसान-कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा दी जाने वाली यह छूट 23 अगस्त, 2014 से एक वर्ष की अवधि के लिये प्रभावशील रहेगी। इस संबंध में मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) में अधिसूचना जारी कर दी गई है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना में हर परिवार की एक महिला का बेंक खाता खुलेगा
प्रधानमंत्री जन-धन योजना में प्रत्येक परिवार की एक महिला का बेंक खाता अवश्य खोला जायेगा। बेंककर्मी घर-घर सम्पर्क कर सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक परिवार का बेंक में खाता हो। यह बात विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने आज सीहोर जिले की बुदनी विधानसभा के ग्राम सुडानिया कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण किया जायेगा तथा समाज के वंचित वर्ग को आर्थिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जायेगा। श्रीमती स्वराज ने ग्राम में विकास कार्यों केलिये सांसद निधि से दस लाख की राशि देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वे अब प्रतिमाह तीन दिन अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा में ही रहेंगी।
राजस्व एवं पुनर्वास तथा सीहोर जिला प्रभारी मंत्री श्री रामपाल सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में अनेक जन-कल्याणकारी योजनाओं का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया है।

करोड़ों के विकास कार्यों का शिलान्यास एवं लोकार्पण

विदेश मंत्री श्रीमती स्वराज ने ग्राम सुडानिया में लगभग 3 करोड़ 5 लाख की लागत से होने वाले 18 विकास कार्य का शिलान्यास तथा 46 लाख 80 हजार की लागत से पूर्ण हुए 4 विकास कार्य का लोकार्पण किया। श्रीमती स्वराज ने ग्राम कचनारिया में भी लगभग 2 करोड़ 5 लाख के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया। उन्होंने 16 हितग्राही को लगभग तीन लाख की राशि के चेक प्रदान किए।
कार्यक्रम में मार्कफेड के अध्यक्ष श्री रमाकांत भार्गव, अध्यक्ष जिला पंचायत सीहोर श्री धर्मेन्द्र सिंह चौहान, विधायक श्री विजय पाल सिंह, श्री राजेन्द्र सिंह राजपूत, श्री गुरुप्रसाद शर्मा, श्री रामकिशन चौहान, श्री रमेश सक्सेना श्री रघुनाथ सिंह भाटी, श्री रवि मालवीय सहित अन्य जन-प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।


26 जिले में सामान्य, 3 में सामान्य से अधिक एवं 22 जिले में सामान्य से कम वर्षा
मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 जून से 15 सितम्बर 2014 तक प्रदेश के 26 जिले में सामान्य, 3 जिले में सामान्य से अधिक और 22 जिले में सामान्य से कम वर्षा हुई है। प्रदेश में खण्डवा, बड़वानी और बुरहानपुर जिले में सामान्य से अधिक वर्षा हुई है। जिन जिलों में सामान्य वर्षा हुई है, उनमें बैतूल, राजगढ़, टीकमगढ़, शिवपुरी, नीमच, सीधी, गुना, खरगोन, हरदा, झाबुआ, मंदसौर, अशोकनगर, छिन्दवाड़ा, अनूपपुर, इंदौर, श्योपुर, धार, होशंगाबाद, सीहोर, विदिशा, शाजापुर, आगर-मालवा, रायसेन, मण्डला, डिंडोरी और अलीराजपुर जिले शामिल हैं।
सामान्य से कम वर्षा वाले जिले भोपाल, कटनी, बालाघाट, सिंगरौली, ग्वालियर, सागर, सिवनी, दतिया, दमोह, उज्जैन, रीवा, उमरिया, पन्ना, शहडोल, रतलाम, सतना, छतरपुर, देवास, मुरैना, भिण्ड, नरसिंहपुर और जबलपुर है।


देश के इतिहास में पहली बार एक साल में प्रदेश के किसानों को 12 हजार करोड़ से ज्यादा की सहायता
मध्यप्रदेश में पिछले साल किसानों को सब्सिडी, राहत और बोनस के रूप में 12 हजार 345 करोड़ 27 लाख रुपये का भुगतान किया गया। इससे एक करोड़ 49 लाख 14 हजार 620 किसान क फायदा हुआ। अकेले एक साल में किसानों को राहत और अन्य सहायता के रूप में देश के इतिहास में पहली बार किसानों को इतनी बड़ी राशि का भुगतान किया गया। प्राकृतिक आपदा से फसलों को हुए नुक्सान पर 3 हजार 48 करोड़ 50 लाख रुपये राहत के रूप में दिये गये। इससे 47 लाख 51 हजार किसान को लाभ मिला। धान, मक्का और गेहूँ पर बोनस के रूप में 1,327 करोड़ 73 लाख की राशि 12 लाख 82 हजार 527 किसान को दी गई। इसमें से धान पर 233 करोड़ 95 लाख, मक्का पर 12 करोड़ 99 लाख और गेहूँ 1,080 करोड़ 79 लाख रुपये बोनस के रूप में दिये राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना में इस दौरान 17 लाख 80 हजार 221 किसान को दावों के भुगतान के रूप में 2504 करोड़ 4 लाख रुपये दिये गये। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने 1 लाख 79 हजार 872 किसान को 237 करोड़ 46 लाख रुपये सब्सिडी के रूप में दिये। ऊर्जा विभाग ने भी 37 लाख 84 हजार किसान को 4 हजार 667 करोड़ 15 लाख रुपयेकृषि पम्पों पर अनुदान के रूप में दिये।
सहकारिता विभाग ने पिछले वर्ष 31 लाख 37 हजार किसान को 560 करोड़ 39 लाख रुपये शून्य प्रतिशत ब्याज पर अनुदान के रूप में दिये।


मध्यप्रदेश को लगातार दूसरी बार प्रतिष्ठित कृषि कर्मण पुरस्कार
भोपाल। देश में सर्वाधिक खाद्यान्न उत्पादन के साथ मध्यप्रदेश ने देश के खाद्यान्न कटोरे के रूप में अपनी पहचान बनाई है। देश के खाद्यान्न भण्डार में सर्वाधिक योगदान के लिये राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने आज नई दिल्ली में एक भव्य समारोह में मध्यप्रदेश को भारत सरकार के प्रतिष्ठित कृषि कर्मण पुरस्कार से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने पुरस्कार ग्रहण किया।
वर्ष 2010-11 में कृषि कर्मण पुरस्कार की स्थापना के बाद खाद्यान्न उत्पादन श्रेणी में लगातार दूसरी बार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। यह पहली बार है जब मध्यप्रदेश ने गेहूँ के साथ-साथ धान और दलहन तीनों में देश में सर्वोत्तम बढ़त प्राप्त की है।
छिन्दवाड़ा जिले के चौरई की श्रीमती शशि खंडेलवाल और बड़नगर उज्जैन जिले के श्री योगेन्द्र कौशिक को प्रगतिशील किसान के रूप में सम्मानित किया गया। इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शरद पवार, केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री वीरप्पा मोइली, कृषि मंत्री श्री गौरी शंकर बिसेन, मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, प्रदेश संगठन महामंत्री श्री अरविन्द मेनन, कृषि उत्पादन आयुक्त, अपर मुख्य सचिव श्री मदन मोहन उपाध्याय, प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा, कृषि संचालक श्री डी.एन. शर्मा एवं वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।
कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन में सिंचाई क्षमता में बढ़ोतरी, बिजली की उपलब्धता, समय पर खाद-बीज का वितरण, भण्डारण क्षमता में बढ़ोतरी, ब्याज रहित कृषि ऋण, गेहूँ, धान और मक्के के उपार्जन पर बोनस जैसे कारणों का महत्वपूर्ण योगदान है।
प्रदेश में 2012-13 में 277 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन के साथ मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है। इसमें 161 लाख टन गेहूँ उत्पादन शामिल है। प्रदेश लगातार दो अंकों की कृषि वृद्धि दर बनाये रखने में सफल हुआ है। देश के खाद्यान्न उत्पादन में प्रदेश का योगदान 11.2 प्रतिशत है। देश के कुल गेहूँ उत्पादन में मध्यप्रदेश का योगदान 17.5 प्रतिशत और दलहन उत्पादन में 28.65 प्रतिशत है। इस प्रकार खाद्यान्न उत्पादन करने वाले उत्तर प्रदेश, पंजाब, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार को मध्यप्रदेश ने पीछे छोड़ दिया है।
कृषि कर्मण पुरस्कार के लिये खाद्यान्न उत्पादन, उत्पादकता, खेती पर व्यय, देश की तुलना में उत्पादकता में बढ़ोतरी, और खाद्यान्न उत्पादन के लिये नवाचारी उपाय जैसे विशेष मापदंड निर्धारित किये गये थे। इन सभी मापदंडों में मध्यप्रदेश ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वर्ष 2007-08 में खाद्यान्न उत्पादन 128.30 लाख मीट्रिक टन था जो 2012-13 में बढ़कर 277 लाख मीट्रिक टन हो गया है। इसी प्रकार खाद्यान्न की उत्पादकता 2007-08 में 1064 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी जो 2012-13 में बढ़कर 1952 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है।

गेहूँ उपार्जन

पिछले पाँच साल में गेहूँ उत्पादन और उपार्जन में मध्यप्रदेश ने शानदार प्रदर्शन किया है। गेहूँ उत्पादकता वर्ष2007-08 में 1714 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी जो अब 2959 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है। गेहूँ उत्पादन वर्ष 2007-08 में 67.37 लाख मीट्रिक टन था जो 2012-13 में बढ़कर 161.25 लाख मीट्रिक टन हो गया है। इस साल 175 लाख मीट्रिक टन तक पहुँचने का अनुमान है। पिछले पाँच साल में गेहूँ के प्रति क्विंटल उपार्जन पर 2702 करोड़ रुपये बोनस के रूप में गेहूँ उत्पादक किसानों को दिये गये हैं।

साख सुविधा

प्रदेश के रिकार्ड खाद्यान्न उत्पादन में किसानों की मेहनत के साथ उन्हें मिलने वाली साख सुविधाओं की भी मुख्य भूमिका रही है। छोटे किसान भी बोनी के लिये प्रोत्साहित हुए हैं। साख के अभाव में वे खेती में पैसे लगाने से हिचकते थे। ब्याज रहित कर्ज से उन्हें राहत मिली। पिछले पाँच साल में 39820 करोड़ रुपये ऋण के रूप उपलब्ध कराये गये। गेहूँ उत्पादन के लिये 34 हजार करोड़ बोनस के रूप में दिये गये। खेती के लिये सहकारिता कर्ज वर्ष 2013-14 में बढ़कर 11209 करोड़ रुपये हो गया है। यह वर्ष 2003-04 में मात्र 1213 करोड़ रुपये था। इस साल मार्च तक किसानों को 12 हजार करोड़ रुपये का सहकारिता ऋण दिया जायेगा। अगले पाँच साल में 25 हजार करोड़ तक यह आंकड़ा जायेगा

सिंचाई

पिछले दस साल में प्रदेश्ने सिंचाई क्षमता बढ़ाने में अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है। बड़े जलाशयों और परियोजनाओं की नहरों का निर्माण दशकों बाद पूरा हुआ। बलराम तालाब योजना, महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में कुओं का निर्माण करने जैसे उपायों से हर खेत को पानी मिला। वर्ष 2003 में जहाँ मात्र साढ़े सात लाख हेक्टेयर में सिंचाई होती थी आज 25 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है।

बिजली

भरपूर बिजली मिलने से हर खेत तक पानी पहुँचाने में आसानी हुई है। एक दशक पहले की स्थिति में बिजली नहीं मिलने से खेती और खेती से जुड़े काम प्रभावित हुए। आज खेती के लिये दस घंटे बिजली मिल रही है। वर्ष 2009 में खेती के लिये 6776 मिलियन यूनिट बिजली उपलब्ध थी जो 2012-13 में बढ़कर 9478 मिलियन यूनिट हो गई है। बिजली की उपलब्धता में 16.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। किसानों को राहत देते हुए 1800 करोड़ के बिजली देयकों का भुगतान राज्य सरकार ने माफ कर दिया है।

भण्डारण

खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोतरी को देखते हुए मध्यप्रदेश ने अपनी भण्डारण क्षमता में भी वृद्धि की है। वर्ष 2010-11 में भण्डारण क्षमता 79 लाख मीट्रिक टन थी जो 2013-14 में बढ़कर 115 लाख मीट्रिक टन हो गई है और अगले साल तक 152 लाख मीट्रिक टन हो जायेगी। इस प्रकार भण्डारण क्षमता में भी मध्यप्रदेश अन्य राज्यों से आगे निकल जायेगा। देश में साइलो बेग के उपयोग की शुरूआत मध्यप्रदेश ने ही की है।

नवाचार

प्रदेश ने कृषि क्षेत्र में कई नवाचारी काम किये हैं जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है। इनसे कृषि में तेजी से सकारात्मक बदलाव आया है। गेहूँ और मूंग उत्पादन के लिये विशेष प्रयास किये गये हैं। शरबती गेहूँ से प्रदेश को नई पहचान मिली है। खेती से जुड़े उद्यानिकी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में भी नवाचारी उपाय किये गये हैं। गाँवों में कृषि यंत्रों की उपलब्धता, खेती से संबंधित मामलों में तत्काल निर्णय लेने के लिये कृषि कैबिनेट का गठन, कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से हर जिले में कम से कम पाँच हजार किसानों को परामर्श देने की पहल और गेहूँ के ई-उपार्जन जैसे प्रयासों से खेती और किसानों को नई ऊर्जा और प्रोत्साहन मिला है।


केन्द्रीय अध्ययन दल आएगा फसलों की क्षति देखने
भोपाल। केन्द्रीय अध्ययन दल 13 से 15 मार्च तक राज्य का दौरा कर फसलों के नुकसान की जानकारी प्राप्त करेगा। प्रदेश में इस सप्ताह हुई वर्षा और दुबारा हुई ओला वृष्टि के कारण फसलों को पहुँची क्षति का जिलों से पूरक प्रतिवेदन भी मँगवाया जा रहा है। मुख्य सचिव श्री अंटोनी डिसा ने आज वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से सभी कलेक्टर और कमिश्नर से चर्चा की। मुख्य सचिव ने कहा कि 5 मार्च के पश्चात हुए नुकसान के आधार पर प्रतिवेदन अगले तीन दिनों में उपलब्ध कराएं। मुख्य सचिव ने केन्द्रीय अध्ययन दल के भ्रमण में संबंधित संभाग के कमिश्नर को साथ रहने के निर्देश दिए। केन्द्रीय दल प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 13 मार्च और क्षेत्र भ्रमण के उपरांत मुख्य सचिव के साथ 15 मार्च को चर्चा करेगा। प्रमुख सचिव राजस्व श्री आर. के. चतुर्वेदी ने वीडियो कान्फ्रेंस में जानकारी दी कि केन्द्रीय अध्ययन दल राज्य में तीन समूहों में भ्रमण करेगा।
मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि प्रभावित किसानों को जनहानि और पशुहानि के मामलों में तत्काल आवश्यक सहायता देने की कार्यवाही पूरी की जाए। उन्होंने जिलों में बैंकों के साथ 19 मार्च तक बैठक करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव श्री डिसा ने कहा कि जिलों से प्राप्त जानकारी के बाद केन्द्र को राज्य की ओर से मेमोरेण्डम दिया गया है। मुख्य सचिव ने खरीफ फसलों को हुए नुकसान के पश्चात शत-प्रतिशत प्रभावित किसानों को राहत राशि का भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। वीडियो कान्फ्रेंस में बताया गया कि लगभग सभी जिलों में खरीफ फसलों की क्षति के बाद राहत राशि दी जा चुकी है। हाल ही मे हुई रबी फसलों की क्षति के लिए किसानों को राहत के साथ ही विभिन्न योजनाओं का लाभ देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

प्रावधानों को किया गया शिथिल

राज्य में कुछ योजनाओं के नियमों में सीमित अवधि के लिए संशोधन भी किए गए हैं। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत पचास प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान वाले कृषक परिवारों को सामूहिक विवाह के स्थान पर घर से संपन्न होने वाले विवाह के लिए भी आवश्यक लाभ 30 जून तक दिया जा सकेगा। 'मेरा खेत मेरी माटी' योजना में प्रदेश में आठ लाख से अधिक कार्य गणतंत्र दिवस की ग्राम सभाओं में अनुमोदित हुए हैं। जिलों में आवश्यकतानुसार ये कार्य प्रारंभ किए जा सकते हैं। प्रभावित एवं जरुरतमंद परिवारों की स्थिति को देखते हुए सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को देने की व्यवस्था की गई है।
वीडियो कान्फ्रेंस में आगामी 25 मार्च से प्रदेश में प्रारंभ हो रहे गेहूँ उपार्जन की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती अरुणा शर्मा, कृषि उत्पादन आयुक्त श्री एम. एम. उपाध्याय, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री अजय नाथ, प्रमुख सचिव कृषि श्री राजेश राजौरा, आयुक्त भू अभिलेख श्री राजीव रंजन के अलावा सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव श्री के. सुरेश वीडियो कान्फ्रेंस में उपस्थित थे।


कृषि पर निर्भरता कम करने पशु एवं मछली-पालन जरूरी- राज्यपाल
Our Correspondent : 08 Oct. 2013
भोपाल। अर्थ-व्यवस्था की कृषि पर निर्भरता को दूर करने के लिये पशु-पालन और मछली-पालन जरूरी है। राज्यपाल श्री रामनरेश यादव ने यह बात नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में कही।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्र पशु चिकित्सक के रूप में पशु-पालकों को स्वावलंबी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। उन्होंने कहा कि उन्नत पशु-पालन द्वारा प्रदेश भारत के अग्रणी राज्य की पंक्ति में स्थान बना सकता है। श्री यादव ने कहा कि नानाजी देशमुख ग्रामीणों को स्व-रोजगार उपलब्ध करवाने के लिये जीवनपर्यंत संघर्षरत रहे। उन्होंने मध्यप्रदेश को गौ-वंश की सर्वाधिक संख्या वाला प्रदेश बताया। श्री यादव ने प्रदेश को दुग्ध उत्पादन में देश में पहला स्थान दिलवाने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
राज्यपाल ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली के उप महानिदेशक पशु विज्ञान डॉ. कृष्ण मुरारीलाल पाठक को विश्वविद्यालय की ओर से मानद उपाधि दी। उन्होंने विश्वविद्यालय के 3 छात्र को पीएचडी, 2 छात्र को स्वर्ण-पदक, 141 विद्यार्थी को स्नातक एवं 45 को स्नातकोत्तर उपाधि दी। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की स्मारिका और विश्वविद्यालयों में हुए शोधों पर आधारित 'रिसर्च हाईलाइट्स' पत्रिका का विमोचन भी किया।
पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गोविंद प्रसाद मिश्र ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस मौके पर विभिन्न विश्वविद्यालय के कुलपति एवं प्राध्यापक उपस्थित थे।


शीघ्र भेजें अति वर्षा से प्रभावित फसलों की क्षति का ब्यौरा
Our Correspondent : 01 Oct. 2013
भोपाल। मप्र में अति वर्षा से फसलों को पहुंची क्षति के संबंध में शीघ्र विस्तृत सर्वेक्षण भेजने के निर्देश दिए गए हैं। ओ एस डी मुख्य सचिव कार्यालय श्री अंटोनी डिसा ने आज मंत्रालय में एक बैठक में प्रदेश के कमिश्नर्स से चर्चा करते हुए यह निर्देश दिए। प्रदेश के कुछ जिलों में फसलों को पहुँचे नुकसान के संबंध में निर्धारित प्रारूप में प्राप्त जानकारी एकजाई रूप से केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। बैठक में श्री डिसा ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के क्रियान्वयन के संबंध में भी कमिश्नर्स से बातचीत की और उनके संभाग में अब तक संपन्न कार्यों का विवरण प्राप्त किया। बैठक में कमिश्नर्स के अलावा प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन श्री के. सुरेश, प्रमुख सचिव राजस्व श्री आर.के. चतुर्वेदी, वित्त सचिव श्री मनीष रस्तोगी और आयुक्त भू-अभिलेख श्री राजीव रंजन भी उपस्थित थे।

कटाई के बाद फसलों को रखें सुरक्षित स्थान पर
Our Correspondent : 01 Oct. 2013
भोपाल। किसान समय पर रबी फसलों की बोवनी करने के लिये नमी का लाभ लेकर खेत की तैयारी करें। कटाई के बाद फसलों को सुरक्षित स्थान पर रखें। किसान-कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा दी गई सलाह के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों में किसान तोरिया, सरसों और मटर की बोवाई कर सकते हैं।
भरपूर मात्रा में सिंचाई की सुविधा होने पर दिसम्बर अंत तक किसान गेहूँ की बोवनी भी कर सकते हैं। हाल ही में जिन स्थानों पर वर्षा हुई है, वहाँ खाली खेतों में खरपतवार उगने लगे हैं, जिन्हें भूमि में मिलाये जाने पर वे ही खाद का काम करेंगे और फसलों में इनकी संख्या में नियंत्रित रहेगी। इन्हें नाडेप या वर्मी कम्पोस्ट के गड्ढों में डालकर जैविक खाद बनाने के काम में भी लिया जा सकता है। सलाह के अनुसार किसानों को काटी गई फसल खेतों में अधिक समय तक नहीं छोड़ना चाहिये। फसल यदि गीली हो गई हो तो उसे सुखाकर थ्रेसिंग करना चाहिये। ऐसी फसल को बीज के लिये सुरक्षित की जाने वाली फसल के साथ नहीं मिलाना चाहिये। रबी मौसम के लिये आवश्यक उर्वरकों की अग्रिम व्यवस्था की गई है, जिससे कि आवश्यकता के अनुसार किसान समय पर खाद उठा सकें। इसके अलावा धान की फसल में कीट नियंत्रण के लिये दवा का छिड़काव करें।


क्षतिग्रस्त सोयाबीन की फसल के एवज में किसानों को बीमा कंपनियों से राहत और क्षतिपूर्ति सुनिश्चित की जायेगी- शिवराज
Our Correspondent : 30 spt. 2013
भोपाल। मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज ‘धान का कटोरा’ सिवनी-बालाघाट अंचल में आयोजित जनआशीर्वाद यात्रा के दौरान जुटे हजारों किसानों को यह कहते हुए कि जहां-जहां सोयाबीन की फसल जलवृष्टि, अति जलबृष्टि अथवा अन्य कारण से क्षतिग्रस्त हुई है किसानों को उनकी क्षति का भरपूर मुआवजा और राहत दिलाई जायेगी। किसानों के चेहरे पर खुशियां बिखेरी जायेगी। बीमा कंपनियों को तल्ख चेतावनी दी गयी है कि वे अपने फर्ज में खरी उतरंें। केवलारी में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार जहां विकास और सुशासन को परवान चढ़ा रही है वहंीं कांगे्रस का एकसूत्रीय कार्यक्रम शिवराज हटाओं बना है और कांगे्रसी इसी एकसूत्रीय कार्यक्रम के लिए सारी उर्जा लगा रहे है। प्रदेश की जनता कांगे्रस की इन तिकड़मों को भली-भांति पहचान चुकी है और वह कांगे्रस के मनोरथ कभी पूरे नहीं होने देगी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भाजपा ने किसानों को फसल की लागत का समुचित मूल्य दिलाने के लिए समर्थन मूल्य पर 150 रू. क्विंटल का विशेष बोनस दिया है। लेकिन कांगे्रस को अन्नदाता को मिलने वाली कोई भी राहत रास नहीं आती। कांग्रेस ने खाद की जो बोरी सवा पांच सौ रू. में मिलती थी उसका मूल्य पौने तेरह सौ रू. करके किसानों के चौन को छीन लिया है। उन्होनें कहा कि मध्यप्रदेश में और देश में कांगे्रस ने पांच दशकों तक एकछत्र शासन किया है लेकिन विकास और सुशासन के मामलें में कांगे्रसी उपलब्धियां नगण्य है। समाज में अलगाववाद की भावना का विकास करना और जनता में राजनैतिक प्रतिस्पर्धी के मामलें में खौंफ पैदा करना कांगे्रस का आचार-व्यवहार रहा है। उन्होनें कहा कि भारतीय जनता पार्टी सरकार की दस वर्षो की उपलब्धियां कांगे्रस की 50 वर्षो की उपलब्धियों से 10 गुना भारी हैै। यही कारण है कि कांगे्रस कुंठाग्रस्त होकर हताशा में चरित्रहनन की राजनीति पर केन्द्रित होकर रह गयी है। प्रदेश की जनता कांगे्रस की इस ओछी मानसिकता को बर्दाश्त नहीं करेगी और विधानसभा चुनाव 2013 तथा लोकसभा चुनाव 2014 में माकूल जबाव देगी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांगे्रस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि वे प्रदेशों में पार्टी संगठन में जान फूंकने के लिए एकता का मंत्र फूंकने का दावा कर रहे है। लेकिन वे संगठन हीं नहीं चला सकते ंतो सरकार क्या चलायेंगे। महाराष्ट्र में उनका संगठन का दौरा विफल हो गया ंतो उन्होनें कांगे्रस के सेवादल पर नजला उतारा और कहा कि कांगे्रसी सेवादल स्वंयसेवक संघ की तरह सेवा और जनराहत से क्यों नहीं जुड़ पाया है। जाहिर है कि कांगे्रस का विकास, जनसेवा से कभी कोई सरोकार नहीं रहा है इसलिए कांगे्रसी सेवादल सिर्फ कांगे्रस के वरिष्ठ नेताओं को सलामी देने वाला सीमांतक दस्ता बनकर रह गया है। कांगे्रस के पास विकास और सुशासन का कोई एजेंडा नहीं है। कांगे्रस हवाई सपने देख रही है और उसकी हर हरकत सत्ता प्राप्त करने, कुर्सी तक पहुंचने के प्रयासों के लिए केन्द्रित हेाती हैै, जबकि भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री जनता का प्रथम सेवक होता है। कांगे्रस के दौर में मुख्यमंत्री राजा होता था, जनता को उस तक पहुंचने के लिए कठिन तपस्या करना पड़ती थी। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास श्यामला हिल्स के द्वार निश्यिाम आम आदमी के लिए खुले हुए है।
मध्यप्रदेश में खेती लाभ का धंधा गांव में उद्योग युवकों में स्वरोजगार के लिए पहल से मध्यप्रदेश की अधोसरंचना सुनिश्चित होगी- शिवराज सिंह चौहान
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश बीमारू राज्य से दु्रत गति से विकास करने वाला प्रदेश बना है। मध्यप्रदेश की देश और दुनिया में विकासशील प्रदेश के रूप में पहचान बनी है, इस कार्य में प्रदेश के अन्नदाताओं की पहल रंग लाई है। उन्होनें प्रदेश सरकार की सुविधाओं का समुचित लाभ उठाकर कृषि उत्पादन को नये शिखर पर पहुंचाया है जिससे मध्यप्रदेश में कृषि उत्पादन की दर 18.91 से बढ़कर 13 प्रतिशत अतिरिक्त दर्ज हुई है। भाजपा शासित राज्यों में विकास और सुशासन का जो दौर आया है उससे कांगे्रस के हाथ से तोते उड़ गये है और नई-नई तिकड़मबाजियां सोच रही है। रघुराजन समिति की रिपोर्ट को जारी करने के समय पर ध्यान दिया जाये ंतो यह कांगे्रस का चुनावी शगुफा बनकर रह गया है। इसे जनता स्वीकार नहीं करेगी। उन्होनें कहा कि मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता ने कांगे्रस को हताश कर दिया है और वह सिर्फ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विरोध में खड़ी हो गयी है। कांगे्रस की इस कपोल-कल्पित आरोपों की राजनीति को प्रदेश की जनता भली-भांति समझ चुकी है और कांगे्रस को तीसरी बार पराजित करके कांगे्रस को प्रदेश की जनता दंडित करेगी। विधानसभा चुनाव 2003 और 2008 में प्रदेश की जनता ने कांगे्रस को प्रदेश से खारिज कर दिया है, 2013 में कांगे्रस की विफलता दीवार पर लिखी इबारत की तरह स्पष्ट हो रही है। क्योंकि भारतीय जनता पार्टी की सरकार में प्रदेश का किसान खुशहाल हुआ है, युवकों को नौकरियों एवं स्वरोजगार के अवसर मिले है। पांच लाख नौकरियां और भर्ती एक रिकार्ड है। कांगे्रस तीसरी बार प्रदेश से खारिज होने के बाद प्रदेश में राजनैतिक इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर रह जायेगी। प्रदेश की जनता गांधीजी की अंतिम इच्छा को पूरी करनें में आगे आयेंगे।
उन्होनें कहा कि कांगे्रस उपाध्यक्ष ने गांधीजी के उपदेशों को सामने लाने के लिए जिलों से अपील की है। सवाल यह है कि जब देश की नीतियां अमेरिका में तय होंगी आमजन की भागीदारी बढ़ाने के बजाय देश में कृषि के उद्धार का काम विदेशी कंपनियों पर छोड़ दिया जायेगा ंतो महात्मा गांधी की आत्मा कितनी दुखी होगी यह कल्पना की जा सकती है। देश के आम आदमी से सरोकार के बजाय कांगे्रस ने देश की जनता को बाजार के रहमों-करम पर छोड़ दिया है। भारत विदेशी कंपनियों का मुनाफा कमाने वाला बाजार रह गया है। मंहगाई, भ्रष्टाचार प्रतिबद्धता नहीं रही है। कांगे्रस हर क्षेत्र में भटक चुकी है भारतीय जनता पार्टी से वैचारिक स्तर पर सामना करने के बजाय अब कांगे्रस आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित होकर अपनी हताशा और कुंठा व्यक्त कर रही है इसे नंवबर के चुनाव में पराजित कर मध्यप्रदेश से विसर्जित करनें में जन-जन की महत्वपूर्ण भागीदारी होगी।
इस अवसर पर पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, सांसद प्रभात झा, साधना सिंह चौहान, अनुसूचति जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष फग्गनसिंह कुलस्ते, प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश सिंह, अनुसुईया उइके, वरिष्ठ मंत्री नानाभाऊ माहोड़, देवीसिंह सैयाम, प्रदेश मंत्री तपन भौमिक, नीता पटैरिया, जिला अध्यक्ष नरेश दिवाकर, ढ़ालसिंह बिसेन, श्रीराम ठाकुर, मुकेश बघेल, राधा साहू, वेदसिंह ठाकुर, मदन चौरसिया, तुलसीराम ठाकुर, दिलीप बघेल सहित क्षेत्रीय विधायक तथा नेतागण उपस्थित थे।


धान खरीदी को वैट कर से मुक्त करके मुख्यमंत्री ने किसान, उपभोक्ता, व्यापारियों को सकून दिया है- गोपीकृष्ण नेमा
Our Correspondent : 30 spt. 2013
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी व्यापारी प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक गोपीकृष्ण नेमा ने मध्यप्रदेश में धान खरीदी को वैट कर से मुक्त करके किसानों को उत्पादन का अधिक मूल्य सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त किया है। वहीं उपभोक्ता को इस कदम से चावल क्रय करने में पहले से कम मूल्य भुगतान करना पड़ेगा। मंहगाई के इस दौर में राज्य सरकार की यह पहल प्रदेश के उपभोक्ताओं के प्रति संवेदना का मरहम बनेगी। गोपीकृष्ण नेमा ने व्यापारी प्रकोष्ठ द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए प्रदेश के मिलर उद्योग और व्यापारियों को बधाई दी। उन्होनें कहा कि भारतीय जनता पार्टी सरकार में हर वर्ग की सुनवाई हुई है। प्रदेश सरकार संवेदनशील और पारदर्शी है।

अति-वर्षा से 52 हजार 458 हेक्टेयर में फसल क्षति अनुमानित
Our Correspondent : 30 Augest 2013
भोपाल।अति-वृष्टि और वर्षा से प्रदेश में 52 हजार 458 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल क्षति का अनुमान है। सीहोर जिले में 18 हजार 800 हेक्टेयर, रायसेन में 11 हजार 600 हेक्टेयर, अशोकनगर 6792, होशंगाबाद 4876, राजगढ़ 3808, श्योपुर 2,949, शिवपुरी 1400, नरसिंहपुर 1000, सिवनी 955 और रतलाम जिले में 10 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल क्षति का अनुमान है। वर्षा से सिवनी जिले में 6 कुएँ, उज्जैन में 2 कुएँ और छिन्दवाड़ा जिले में 68 कुएँ नष्ट हुए हैं। जबलपुर जिले में 838 और अशोकनगर में 50 मुर्गियाँ भी मरी हैं। वर्षा से 517 पशु-हानि हुई है, जिसमें 145 जबलपुर जिले में, 95 छिन्दवाड़ा, 61 रतलाम, 45 सागर, 43 रायसेन, 21 अशोकनगर, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी 13-13, विदिशा 9, होशंगाबाद और छतरपुर 8-8, कटनी 6, नरसिंहपुर 4, खरगोन, सिवनी 2-2 और बालाघाट जिले में एक पशु-हानि शामिल है।
प्रदेश में अब तक 1198.4 मिलीलीटर वर्षा हो चुकी है, जो सामान्य औसत वर्षा 749.2 मिलीमीटर से 60 प्रतिशत अधिक है। पूर्वी मध्यप्रदेश की अपेक्षा आज पश्चिमी मध्यप्रदेश में वर्षा से राहत रही। पश्चिमी मध्यप्रदेश के कुछ ही जिलों में आज मात्र 1.3 सामान्य औसत वर्षा दर्ज की गई। इसके विपरीत पूर्वी मध्यप्रदेश के लगभग सभी जिलों में सामान्य औसत वर्षा से 17 प्रतिशत अधिक 13.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। वैसे फिलहाल पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य औसत वर्षा से 49 प्रतिशत और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 70 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज है। नर्मदा नदी में भरपूर पानी के कारण ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर और बरगी बाँध के गेटों के खुलने का सिलसिला जारी है। ओंकारेश्वर बाँध के 5 गेट से 74 हजार 701 क्यूसेक, इंदिरा सागर बाँध के 12 गेट से 7883 क्यूसेक और बरगी बाँध के 13 गेट से 78 हजार 187 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।


सोयाबीन में कीट नियंत्रण के लिये सामयिक सलाह
Our Correspondent : 22 Augest 2013
किसान-कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम खुलने के साथ खेतों का निरीक्षण कर कीट रोग और खरपतवार के नियंत्रण के लिये सजग रहें। सोयाबीन में लगने वाले कम्बल कीट से बचने के लिये क्वीनालफॉस 1.5 प्रतिशत या मिथाइल पेराथियान 2 प्रतिशत चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुरकाव करें।
इसके अलावा क्वीनालफॉस 25 ई.सी. 1000 मिलीलीटर दवा या साइपरमेथीन 10 ई.सी. या डेल्टामेथ्रीन 2.8 ई.सी. दवा 750 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर दवा का 700 से 800 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। इसी प्रकार गर्डल बीटल सोयाबीन को क्षति पहुँचाने वाला कीट है, जो तने के अंदर प्रवेश कर उसे खोखला कर देता है। इसकी पहचान पौधे के तने के ऊपरी भाग या पर्ण वृन्त पर कीट द्वारा बनाये गये दो छल्लों से की जा सकती है। इससे चक्र या घेरे का ऊपरी भाग मुरझाकर सूख जाता है। इसके नियंत्रण के लिये ट्राइजोफॉस 40 ईसी 800 मिलीलीटर या इथोफेनप्राक्स एक लीटर दवा का प्रयोग 750 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। एक अन्य प्रमुख कीट तना छेदक मख्खी कीट से बचाव के लिये ट्राइजोफॉस 40 ई.सी. दवा की 800 मिलीलीटर मात्रा 750 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव किया जाये।


गांव का किसान है सबसे बडा वैज्ञानिक - डाॅ. कुसमरिया
Our Correspondent : 02 Augest 2013
चित्रकूट की राज्यस्तरीय कार्यशाला में हो रहा जैविक खेती पर चित्रकूट 3 अगस्त 2013/ जमीन के अंदर जो कार्वन तत्व खत्म हो रहा है उसके प्रति किसानों को जानकारी देना होगा। जैविक और फर्टीलाइजर के बीच का भ्रम दूर करना पडेगा। हम आधुनिक तरीके से विचार करें। अमृत पानी एवं अमृत मिट्टी बनाने का कार्य 80 प्रतिशत किसानों के बीच में करना होगा। दुनियां के प्रयोगों को देखकर अपने हितकर प्रयोगों का प्रयोग करना चाहिये। उपरोक्त बातें दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के उद्यमिता विद्यापीठ में डाॅ. राममनोहर लोहिया सभागार में म0प्र0 के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डाॅ. रामकृृष्ण कुसमरिया द्वारा राज्य स्तरीय जैविक खेती कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर कही गई। कृषि विज्ञान केन्द्र मझगवां एवं किसान कल्याण एवं कृषि विकास म0प्र0 के संयुक्त आयोजन में आयोजित इस कार्यशाला का शुभारम्भ राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख एवं स्वामी विवेकानंद जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उसके बाद प्रदेश के सभी अधिकारियों एवं प्रगतिशील कृषकों को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री डाॅ. कुसमरिया ने कहा कि प्रभु राम के द्वारा शेष कार्यों को श्रद्धेय नानाजी देशमुख के बाद उनके मार्गदर्शन में हम सबको मिला है। जैविक क्षेत्र सबसे ज्यादा अपने म0प्र0 में है। जैविक द्वारा उत्पादन अधिक होता है। लंदन के फर्टीलाइजर व्यापारी का मन बदलकर जैविक खेती करना प्रारम्भ किया है। तो अपने किसान भाई फर्टीलाइजर का प्रयोग क्यों करें। जैविक प्रक्रिया को किसानों के बीच अपनाने का कार्य बहुत बडी उपलब्धता एवं सफलता सिद्ध होगी। भयमुक्त क्षेत्र में भयमुक्त कार्य करेंगे। सबसे बड़ा वैज्ञानिक गांव का किसान है। स्वस्थ्य रहना है तो अपनी खाद-अपना बीज अपनाना होगा। जैसा रहे अन्न-वैसा रहे मन। इस अवसर पर म0प्र0 किसान कल्याण एवं कृषि विभाग के संचालक डाॅ. डी.एन. शर्मा ने कहा कि हम जैविक खेती के लिये म0प्र0 को आगे बढायेंगे। म0प्र0 जैविक पर नं. 1 पर है। लेकिन संतोषप्रद नहीं है। आगे काम करने की आवश्यकता है। आप सभी लोग जैविक दूत के रूप में जैविक के महत्व को गांव-गांव बतायेंगे। प्रत्येक जिले के पंजीयन का 50 प्रतिशत छूट का लाभ किसानों को दिलायेंगे। इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिता में लेना है। कौशल विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत युवाओं को आगे बढ़ाना होगा। इस अवसर पर म0प्र0 के 10 संभागों के संयुक्त संचालक कृषि तथा सभी 50 जिलों के उप संचालक कृषि एवं आत्मा परियोजना के संचालकों सहित सभी कृषि विकास एवं प्रशिक्षण केन्द्रों के प्राचार्य एवं प्रदेश के कई जिलों से प्रगतिशील किसान उपस्थित होकर म0प्र0 को जैविकमय बनाने के लिये मंथन कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र में कृषि विज्ञान केन्द्र गनीवां चित्रकूट के प्राचार्य डाॅ. छोटे सिंह एवं कृषि विज्ञान केन्द्र मझगवां के कार्यक्रम समन्वयक डाॅ. आर. एस. नेगी, जैविक खेती के संयुक्त संचालक के.पी. अहिरवाल मंचासीन रहे तथा प्रथम दिवस पर कृषि वैज्ञानिक डाॅ. वेदप्रकाश सिंह, डाॅ. श्यामसुन्दर कौशिक, जैविक प्रमाणीकरण के उप संचालक जितेन्द्र सिंह परिहार, डाॅ. लोकेश गंगरेडे, ए.बी. मिश्रा द्वारा अलग-अलग तकनीकी सत्रों के माध्यम से नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट, आर्गेनिक फूड प्रोडक्सन के लिये सर्टीफिकेशन प्रोसेस, आर्गेनिक फार्मिंग प्रैक्टिस तथा जैविक उत्पादों के विपणन के साथ नक्षत्रीय खेती के बारे में भी बताया गया।


"नहरों से आबाद नहीं बर्बाद हो रहे हैं किसान"
Our Correspondent : 02 Augest 2013
इंदौर। इंदिरा सागर व ओंकारेश्वर परियोजना में कमांड एरिया का विकास ठीक से नहीं होने से सैकड़ों हेक्टेयर जमीन बर्बाद हो रही है। किसान खुशहाल होने की बजाय, बर्बाद हो रहे हैं। मार्जिनल व छोटे किसानों की हालात तो बहुत खराब है।
नहरों की खुदाई से जो मटेरियल खेतों में डाला जा रहा है, उससे सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन बर्बाद हो गई है। इसके लिए मुआवजा भी व्यवस्थित रूप में नहीं दिया जा रहा है। नहरों के निर्माण में केंद्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय की रिपोर्ट एनवीडीए के लिए मजाक बन गई है।
केंद्रीय सचिव द्वारा मुख्य सचिव को पत्र लिख कर चेतावनी देने के बाद भी पूरे मसले पर एनवीडीए नर्मदा विकास प्राधिकरण की मनमानी जारी है। 21 गांवों में किए गए सर्वे की रिपोर्ट बता रही है कि यहां कि 500 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर पानी भर गया है। 6 करोड़ से अधिक की फसल चौपट हो गई है।
यह दलीलें नर्मदा बचाओ आंदोलन द्वारा दायर याचिका में मेधा पाटकर ने हाईकोर्ट में गुरूवार को पेश की। पाटकर ने याचिका के संबंध में दस्तावेज, सुप्रीम कोर्ट के फैसले व विभिन्न कमेटियों की रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष वर्तमान में हो रही बारिश के कारण कमांड एरिया व नहर निर्माण क्षेत्र में हो रही तबाही की तस्वीरें पेश की।
21 गांव के सर्वे की रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि करीब 400 किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। इससे करीब 6 करोड़ का नुकसान हो गया। इसमें बड़वाह, सनावद व बड़वानी तहसील के गांव शामिल है। नहरों के अव्यवस्थित निर्माण से खेतों में पानी भर गया है। निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की, जबकि निर्माण योजना में सभी प्रस्तावित है। उ नहरों के लिए अधिग्रहित जमीनों को मुआवजा दिया जा रहा है।
इसके मलबे व निर्माण की लापरवाही से बर्बाद हो रही जमीनों का कोई आकलन नहीं किया गया। इसी तरह से जो मुआवजा दिया जा रहा है, वह भी पुरानी गाइड लाइन के हिसाब से दिया जा रहा है।
इन मुद्दों को भी रखा
कई जगह 200 से 300 मीटर की गैप छोड़ नहरों का निर्माण किया जा रहा है। इससे पानी खेतों में फैलेगा।
जमीन के बदले जमीन की मांग करने पर पत्थर वाली जमीन दी जाती है।
मुआवजा देने के लिए कोर्ट के निर्देश का भी पालन नहीं किया जा रहा है।
जल जमाव होने से जमीन में क्षार की मात्रा बढ़ रही है।
नहरों के अधूरे निर्माण के कारण जमीन में पानी का रिसाव होने से जमीन का उपजाउपन समाप्त हो रहा है।
पुनर्वास के लिए तय स्थानों पर मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई गई।


फसलों का निकला दम,अन्नदाता मायूस
Our Correspondent : 02 Augest 2013
खरगोन। किसान के लिए अब सावन की झड़ी मुसीबत बन रही है। सतत बारिश ने फसलों का दम ही निकाल दिया है। किसानों के चेहरों पर मायूसी छाने लगी है
वे धूप का इंतजार रहे हैं ताकि गलती हुई फसल को राहत मिल सके। किसानों का कहना है कि ऎसी ही बारिश जारी रही तो हाथ कुछनहीं आने वाला, ऎसे तो सावन में आंसुओं की झड़ी लग जाएगी।
कसरावद. अत्यधिक वष्ााü से फसलों की स्थिति काफी खराब है। पिछले 48 घंटे से क्षेत्र मे जारी बरसात के कारण नर्मदा व वेदा नदी के साथ ही नाले भी उफान पर हंै।
इस कारण कई खेतों मे पानी घुस रहा है।खेत तालाब बनते जा रहे हैं। किसान अशोक पटेल पाटियापूरा ने बताया कि अधिक बारिश के कारण फसलों की स्थिति दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। लगातार पानी गिरने से खेतों मे फसलों से अधिक खरपतवार उग आई है, लेकिन बारिश बंद ना होने के कारण ना तो खरपतवार को काट पा रहे है और ना ही दवाई का छिड़काव कर पा रहे हैं।
ऎसे में कपास, मक्का, मूंग व सोयाबीन की फसलें काफी खराब हो रही हैं। नायब तहसीलदार मधुकांत दुबे ने बताया कि नर्मदा किनारे स्थिति गांवों मे पटवारी व कोटवारों को तैनात कर दिया है। एहतिहात के तौर पर निचली बस्तियों के रहवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए सूचित कर दिया है।
अंचल में फसलें चौपट
छोटी खरगोन. सतत रूप से हो रही बारिश का असर फसलों पर भी नजर आने लगा है।सोयाबीन फसल गलने लगी है। कपास के पौधे भी बड़े नहीं हो पा रहे हैं। खेतों में एक महीने से पानी गिरने के कारण फसल सड़ने की नौबत आ पहुंची है। किसान बलिराम बरफा एवं राधेश्याम सिर्वी का कहना है कि हमारी सब्जी की फसल भी अत्यधिक बारिश के कारण खराब हो गई ह
नांद्रा. ग्राम में भी बारिश नहीं थमने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। सोयाबीन, मक्का, मूंग, चवला एवं कपास फसलों पर संकट मंडराने लगा है। सोयाबीन पर फूल आने लगे हैं यदि इसी तरह बारिश होती रही तो फसलें सड़ जाएंगी। किसानों का कहना है कि फसलों को धूप बेहद आवश्यक है।
झिरन्या. क्षेत्र में एक माह से हो रही रिमझिम बारिश के कारण फसलों पर मच्छर तथा इल्लियों का प्रकोप बढ़ गया है। कीटनाशक दवाएं भी बेअसर साबित हो रही हैं। किसानों का कहना है कि एक माह से फसलों के लिए धूप का इंतजार है। धूप नहीं मिलने से फसलें बढ़ नहीं रही है। मानसून की सक्रियता को देखते हुए यदि वर्षा का दौर कुछ दिन यूं ही जारी रहा तो उत्पादन की दृष्टि से अमूमन सभी फसलें प्रभावित होंगी।
मंडलेश्वर. बारिश के चलते क्षेत्र में अधिकांश खेत तालाब बन चुके हैं। चोली रोड सिथत खेतों में जल निकासी की परेशानी आ रही है। किसान चंचल अग्रवाल ने बताया कि अत्यधिक बारिश से फसल सड़ने की कगार पर पहुंच गई है। शासन को अतिवृष्टि का मुआवजा देना चाहिए।
काटकूट. क्षेत्र के किसान भी अत्यधिक बारिश के कारण फसलों को लेकर चिंतित हैं। खेतों में खड़ी फसलें लगभग खराब होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। किसान मोतीलाल सर्वा, श्यामलाल सारण का कहना है कि यदि बारिश नहीं थमी तो मुसीबत बढ़ जाएगी। किसान कहीं का नहीं रह जाएगा।
बलवाड़ा. क्षेत्र में भी अतिबारिश के कारण फसलें प्रभावित होने लगी हैं। सोयाबीन की फसल में फूल आना शुरू हुए थे, लेकिन बारिश के कारण वो गलने लगी है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के किसान इसे लेकर चिंतित हैं।


अधिकारी किसानों से संपर्क कर नई तकनीकों की जानकारी दें- कलेक्टर
Our Correspondent : 02 Augest 2013
भोपाल। जिले में कृषि,उद्यानिकी, पशु पालन एवं मत्स्य पालन से जुड़े विभागों के अधिकारियों को चाहिए कि वे क्षेत्र में भ्रमण करें और कृषकों एवं पशु पालकों को आधुनिक तकनीकी जानकारी और मार्गदर्शन दें। कलेक्टर श्री निशांत वरवड़े ने यह निर्देश आज आत्मा गवर्निंग बोर्ड की बैठक में दिए।
कलेक्ट्रेट कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक में जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री राकेश श्रीवास्तव, सदस्य आत्मा गवर्निंग बोर्ड उप संचालक कृषि श्री के.पी.पाण्डे, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं श्री पी.एस.पटेल, उप संचालक मत्स्य श्री आर.एन.अग्निहोत्री, कृषक सदस्य श्री पदमसिंह ठाकुर, श्री छगनसिंह मीणा, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक श्री आर.एस.यादव, परियोजना संचालक आत्मा श्रीमती रश्मि वर्गीस, उप परियोजना संचालक श्री एल.बी.एस.चौहान, श्री एस.के.राठौर, विकासखंड तकनीकी प्रबंधक श्री अमर दीक्षित, प्रीति द्विवेदी और विषय वस्तु विशेषज्ञ अंकिता गुप्ता आदि मौजूद थे।
बैठक में श्रीमती रश्मि वर्गीस ने विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने वर्ष 2013-14 की कार्ययोजना, गुजरात एग्री ग्लोबल मीट के लिए कृषकों के चयन आदि के संबंध में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जिसे अनुमोदित किया गया।


मध्य प्रदेश में 5 वर्ष में प्रमाणित बीज का उत्पादन दोगुना हुआ
Our Correspondent : 02 Augest 2013
भोपाल। मध्य प्रदेश में अनाज उत्पादन को बढ़ाने के लिये सहकारी समितियों के माध्यम से प्रमाणित बीज के उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है। वर्ष 2012-13 में 11 लाख 50 हजार क्विंटल प्रमाणित बीज का उत्पादन किया गया। प्रदेश में वर्ष 2008-09 में 5 लाख 80 हजार क्विंटल बीज का उत्पादन हुआ।
प्रदेश में फसल उत्पादन बढ़ाने के लिये बीज प्रतिस्थापन की दर को बढ़ाये जाने के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से प्रदेश में वर्ष 2002-03 से ग्रामीण-स्तर पर बीज उत्पादक समितियों के गठन का कार्य प्रारंभ किया गया। वर्तमान में 2,316 प्राथमिक बीज उत्पादक समितियाँ पंजीकृत हैं। प्रदेश में मुख्य फसलों सोयाबीन, गेहूँ की बीज प्रतिस्थापन दर 30 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। राज्य में किसानों को उपलब्ध करवाये जा रहे कुल प्रमाणित बीज में से 64 प्रतिशत प्रमाणित बीज सहकारी समिति के माध्यम से उपलब्ध करवाया जा रहा है।
राज्य सहकारी बीज संघ ने इस वर्ष विदिशा, बैतूल, बालाघाट, जबलपुर, खण्डवा, पन्ना, ग्वालियर एवं शहडोल में नये क्षेत्रीय कार्यालय खोले जाने का निर्णय लिया है।


किसानों के खाते में नहीं आया पैसा
Our Correspondent : 29 July 2013
हरदा। खरीफ फसल की बीमा राशि बांटने में गड़बड़ी हो रही है। किसानों के खाते में पैसा नहीं आ आया। बैंक जाने पर किसानों को असमंजस में डाला जा रहा है। यह आरोप लगाते हुए जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश यादव ने कहा बीमा राशि से वंचित किसान बैकिंग लोकपाल एवं संबंधित बैंक के उच्च अधिकारियों से शिकायत करें।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2012-13 की खरीफ फसल खराब होने से जिले के 6203 किसानों के लिए केंद्र सरकार ने चार करोड़ 53 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। यह पैसा सीधे किसानों के खातों में जमा होना था। किंतु ऐसा नहीं हुआ।
राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना में जिस पटवारी हल्के में फसल खराब घोषित कर अनावारी रिपोर्ट दी जाती है। उस हल्के के सभी गांव के किसानों को बीमा राशि का लाभ दिया जाता है। बीमा योजना की राशि की प्रीमियम बीमा कंपनी में जमा कराने की अंतिम तिथि 30 जुलाई है। क्योंकि इस वर्ष भी अतिवर्षा की स्थिति को देखते हुए किसानों को फसल बीमा राशि की मांग करनी पड़ सकती है।


खेतों में पानी भरने से फसल हो रही बर्बाद
Our Correspondent : 29 July 2013
राजगढ़| जिले भर में जून माह से लगातार हो रही बारिश लोगों के लिए आफत बन गई है। नगर से लेकर गांव और घरों से लेकर खेतों में भरे पानी से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। खेतों में पानी भरने से खरीफ की फसल गलकर बर्बाद हो रही है। मजदूरी करके अपना परिवार चला रहे लोगों को काम नहीं मिलने से परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। बारिश से लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं।
पिछले दो महीने से लगातार जोरदार बारिश की दौर चल रहा है। इस दौरान अब तक सात सौ मिमी से अधिक बारिश हो चुकी है। लगातार हो रही बारिश से खेतों में पानी जमा हो गया है, इससे सोयाबीन, मक्का, उड़द, मूंग आदि फसलों के तने व जड़ें गलकर पीली पड़ गई हैं। किसानों की फसल खराब होने से इनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि उनके लिए आसमान से आफत बरस रही है। फसल नष्ट हो गई तो हम कहीं के नहीं रहेंगे। परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो जाएगा।
आंधी, ओलावृष्टि और अब झमाझम
मोया के कृषक करण सिंह जाटव, बद्रीलाल यादव, पटेल घीसा लाल यादव, भारत सिंह, चाठा के काशीराम, महाबल के राम प्रसाद जाटव, हबीपुरा गांव के सर लाल दांगी आदि ने कहा कि अब तो आसमान से किसानों के लिए आफत बरस रही है। रबी फसल को आंधी-बारिश और ओलावृष्टि ने नष्ट दिया था, इससे किसानों की आर्थिक रूप से कमर टूट चुकी है। रही-सही कसर लगातार हो रही बारिश पूरी कर रही है, इससे सोयाबीन सहित सभी फसलें गल रही हैं। जिलेभर में अब तक साठ फीसदी से अधिक फसल नष्ट हो चुकी है।
मिल सकता है जीवनदान
किसानों का कहना है कि अब भी बारिश थम जाए तो गल रही फसलें संभल सकती हैं। बारिश थमने के साथ हल्की धूप निकल जाए तो खेतों का पानी सूखने के साथ फसल को धूप लग जाएगी, इससे वह नष्ट होने से बच जाएंगी।
नहीं मिल रही मजदूरी
बीते वर्षों में बोवनी के बाद अंकुरित सोयाबीन की फसल में निंदाई-गुड़ाई का कार्य किया जाता था। यह कार्य कई दिनों तक चलने से गांवों में दिहाड़ी मजदूरों को काम मिल जाता था। इससे उनकी रोजी-रोटी चलती थी, लेकिन लगातार बारिश होने से इस बार निंदाई-गुड़ाई भी नहीं हो सकी है। इससे मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। शहरों के आसपास गांव के लोग शहर पहुंचकर काम कर लेते थे, लेकिन बारिश होने से वह भी मजदूरी के लिए परेशान हो रहे हैं।
पंद्रह घंटे बंद रहा गांव का रास्ता
शनिवार सुबह तीन घंटे की झमाझम बारिश के बाद ब्यावरा-मोया मार्ग सुबह 10 बजे नाले पर पानी आ जाने से अवरुद्ध हो गया, जो पंद्रह घंटे बाद रात एक बजे खुल पाया। मोया-चमारी का नाला अजनार नदीं में मिलता है। दिनभर हुई बारिश से अजनार नदी उफान पर आ गई, इससे नाले का पानी रुकने से जलस्तर बढ़ गया, जो नदी का जल स्तर कम होने के बाद रात एक बजे खुला। इस दौरान ग्रामीणों का ब्यावरा आना-जाना पूरी तरह बंद रहा। नाले पर बड़ी संख्या में लोग पानी उतरने का इंतजार करते रहे। जब शाम तक पानी कम नहीं हुआ तो कई लोगों ने तैर कर नाले को पार किया और अपने गंतव्य तक पहुंचे।


फसल के मुआवजे में मिले दो व तीन रुपये के चेक
Our Correspondent : 25 July 2013
चंडीगढ़। प्रदेश के राजस्व विभाग की ओर से किसानों को उनकी खराब हुई फसल के मुआवजे के रूप में दो व तीन रुपये के चेक मिले हैं। झज्जर जिले में बेरी के तहसीलदार ने किसान टेकचंद पुत्र भीम सिंह को तीन रुपये तथा सत्य नारायण पुत्र हरि सिंह को दो रुपये का चेक प्रदान किया है।
इनेलो विधायक अभय सिंह चौटाला ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार एक रुपये प्रति एकड़ की दर से किसानों को मुआवजा दे रही है। टेकचंद की तीन एकड़ और सत्य नारायण की दो एकड़ जमीन में लगी फसल पिछले साल प्राकृतिक आपदा के चलते खराब हो गई थी, जिसका मुआवजा तीन रुपये और दो रुपये इस साल मिल पाया है।
अभय चौटाला ने इन चेक की फोटो प्रतियां बांटते हुए बताया कि दोनों चेक पर 22 मार्च 2013 की तारीख पड़ी है। यह दोनों चेक अकाउंट-पे हैं। एक्सिस बैंक के इन चेक के भुगतान के लिए यदि किसानों को सहकारी बैंक में भी अपना खाता खुलवाना पड़े तो उन्हें 500-500 रुपये की राशि खर्च करनी पड़ेगी। निजी बैंक में खाता खुलवाने के लिए करीब पांच हजार रुपये की राशि लगती है।
अभय चौटाला ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार किसानों की हमदर्द होने का दावा करती है, लेकिन उन्हें फसल के मुआवजे के नाम पर तीन और दो रुपये के चेक प्रदान किए जाते हैं। इससे कांग्रेस के किसान प्रेम की असलियत सामने आ गई है। उन्होंने कहा कि किसानों को 30 से 35 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा मिलना चाहिए।
विपक्ष लोगों को गुमराह कर रहा: सीएम
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अभय चौटाला के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पांच हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा प्रदान करती है। एक रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देने का इनेलो का आरोप लोगों को गुमराह करने वाला है। विपक्ष को गैर जिम्मेदाराना बयान देने से बचना चाहिए। हुड्डा ने कहा कि एक जमीन कई-कई किसानों के नाम होती है। जब मुआवजा मिलने की बारी आती है तो जिस हिस्सेदार का जितना हिस्सा बनता है, उसे मुआवजे के रूप में दे दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इनेलो के शासनकाल में मात्र पैसों में ही मुआवजा मिलता था, जबकि हम नियमों के अनुसार अधिक मुआवजा दे रहे हैं।
सरकार की नजर में यह हैं फसल की लागत दरें
प्रदेश के कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक ने सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में सूचना दी है कि गेहूं का लागत मूल्य प्रति क्विंटल 1613 रुपये और धान का लागत मूल्य प्रति क्विंटल 1757 रुपये क्विंटल आता है। बाजरे की फसल का लागत मूल्य 1315 रुपये, मकी का लागत मूल्य 1654 रुपये और कपास का लागत मूल्य 3783 रुपये प्रति क्विंटल बनता है। भारतीय किसान यूनियन के प्रेस सचिव राकेश कुमारी ने यह जानकारी मांगी थी। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक ने अपने पत्रांक 1041-पीए-आरटीआई-19.6.2013 में यह जानकारी दी है।


देश में सोयाबीन का उत्पादन 140 लाख टन रहने का अनुमान
Our Correspondent : 17 July 2013
कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते दामों में गिरावट
कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते सोया तेल और सोयाबीन दोनों के दामों में गिरावट देखने को मिल रही है। सोमवार को सोया रिफाइंड जहां 655-58 रुपए प्रति क्विंटल पर चल रहा था, वहीं सोया साल्वेंट 620-25 रुपए पर था। हालांकि एनसीडीईएक्स में जुलाई और अगस्त के सौदों में सोयाबीन के दाम 691 रुपए और 675 रुपए के आसपास चल रहे थे।


जिन खेतों में 72 घंटे से ज्यादा पानी रहा भरा वहां फसल सडऩे का खतरा
Our Correspondent : 16 July 2013
राजगढ़। क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश के कारण धूप नहीं निकल रही है। इसका दुष्प्रभाव अब खरीफ फसलों पर नजर आने लगा है। खेतों में पानी और लगातार नमी के कारण सोयाबीन, मक्का, ज्वार, तिल, मूंग, उड़द, अरहर, मूंगफली सहित अन्य खरीफ फसलों में इल्ली व अन्य बीमारियों के लक्षण नजर आने लगे हैं। फसलों में कीटों का प्रकोप बढऩे लगा है। छोटे कद वाली फसलें गलने लगी हैं।
कृषि विभाग के मुताबिक जिले में खरीफ फसल तीन लाख 97 हजार 940 हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई है। इसमें सोयाबीन तीन लाख 15 हजार पांच सौ हेक्टेयर, मक्का 54 हजार दो सौ हेक्टेयर सहित अन्य फसलें बोई गई हैं।
कहीं कीट, तो कहीं गलने लगीं फसल : पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश की वजह से खेतों में पानी भरा है। हाल में जिन खेतों में बोवनी हुई उनकी अंकुरित फसलें गलने लगी हैं। इससे मक्का, ज्वार, सोयाबीन, तिल व अन्य फसलों की पौध गलने लगी है। धूप नहीं मिलने से सोयाबीन सहित अन्य फसलों में कीटों के प्रकोप की आशंका बढ़ गई है।
शुरुआती में खेतों में पानी भरा होने से कीटनाशकों का छिड़काव नहीं हो रहा है। यदि यही स्थिति रही तो कीट प्रकोप कहर बन सकता है।
करने होंगे बचाव के उपाय: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कीटों से फसल बचाने किसानों को प्रति हेक्टेयर आठ सौ एमएल ट्रायजोफॉस का छिड़काव करना होगा। जिन खेतों में पानी भरा है, वहां नालियां बनाने की जरूरत है। श्री पंदराम के अनुसार जिन खेतों में 24-48 घंटे या इससे अधिक समय से पानी जमा है। उनमें दो ग्राम प्रतिलीटर बाविस्टीन पावडर घोल तैयार कर स्प्रे करना होगा।
जिले में 80 क्षेत्र में सोयाबीन: जिले के कुल हेक्टेयर क्षेत्र के 80 प्रतिशत खेतों में सोयाबीन की फसल है। पानेर के रामेश्वर मीणा के खेत में 20 दिन पहले बुआई की थी, लेकिन पानी भरा होने से फसल खराब होने लगी है। खानपुरा के किशोरी लाल मीणा, प्रेम सौंधिया, अरन्या के गौरी लाल सौंधिया ने बताया इनके खेतों में एक सप्ताह पूर्व बोवनी की, अब यह अनाज अंकुरित होकर वहीं सडऩे की स्थिति में है।
खेतों में भरा पानी सबसे से पहले निकालना होगा। साथ ही आवश्यक दवाओं का छिड़काव जल्द करना होगा, ताकि फसलों में कीट पनपने के साथ ही मर जाए। नहीं तो नुकसान की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।


यह है साढ़े तीन फीट की लौकी
Our Correspondent : 16 July 2013
गंजबासौदा(विदिशा)। बाजार में सब्जियों के हाईब्रिड बीज आ जाने से सब्जियों की शक्ल भी बदलने लगी है। शासकीय जन चिकित्सालय में डा. धन्नजय शर्मा के क्वार्टर में लगी लौकी बेल में लंबे-लंबे फल लग रहे हैं एक-एक लौकी की लंबाई तीन से साढ़े तीन फीट निकल रही है। लौकी के वजन से बेल और उसके लिए बनाया गया मचान भी झुक रहा है।
डा. शर्मा ने बताया कि वह लौकी का जूस सुबह पीते हैं। इसके चलते उन्होंने क्वार्टर में लौकी की बेल लगाई है, जो खूब फल फूल रही है।



मध्यप्रदेश के 75 लाख किसान के पास किसान क्रेडिट कार्ड
Our Correspondent : 29 June 2013
भोपाल। मध्यप्रदेश में खेती को लाभ का व्यवसाय बनाये जाने के उद्देश्य से सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों को क्रेडिट कार्ड की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।
प्रदेश में वर्तमान में 75 लाख किसानों के पास क्रेडिट कार्ड हैं। इनमें से 45 लाख किसानों को सहकारी संस्थाओं के माध्यम से एवं 30 लाख किसानों को व्यवसायिक बैंकों के माध्यम से क्रेडिट कार्ड उपलब्ध करवाये गये हैं। राज्य में लगभग 90 लाख के करीब किसान है।
प्रदेश में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों द्वारा वन कृषकों को भी किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है। पिछले वर्ष एक लाख 696 वन कृषक को किसान क्रेडिट कार्ड जारी कर उन्हें 71 करोड़ 56 लाख रुपये के कृषि ऋण वितरित किए गए। राज्य में उज्जैन एवं भिण्ड जिले को छोड़कर शेष 48 जिलों में एक लाख 72 हजार 352 वन कृषक हैं।


खरीफ फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ा
Our Correspondent : 28 June 2013
नई दिल्ली : सरकार ने चालू खरीफ फसल के लिए धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 60 रूपये की हल्की बढ़ोतरी कर इसे 1,310 रूपये प्रति क्विंटल रखा है, पर दलहनों और तिलहनों के एमएसपी में 450 रूपए तक की अच्छी खासी बढ़ोतरी की गयी है, ताकि किसान इनकी खेती के लिए प्रोत्साहित हों और आयात पर निर्भरता कम हो.
मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति सीसीईए की आज हुई बैठक के बाद सूत्रों ने बताया कि समिति ने फसल साल 2013-14 जुलाई से जून के दौरान प्रस्तावित खरीफ फसलों के एमएसपी को मंजूरी दी है.
मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति सीसीईए की बैठक में खरीफ की फसलों के लिए एमएसपी के प्रस्तावों पर निर्णय किया गया. सामान्य धान का एमएसपी 1,250 रूपये से बढ़ाकर 1,310 रूपये प्रति क्विंटल किया गया है, जबकि 'ए’ ग्रेड के धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 65 रूपये बढ़ाकर 1,345 रूपये प्रति क्विंटल कर दिया गया.
वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने 14 फसलों के एमएसपी के बारे में फैसलों की आज जानकारी दी. उन्होंने कहा कि 'केवल दो फसलों को छोड़ कर बाकी पर हमने कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) के प्रस्ताव को ही स्वीकार किया है. बाजरा और तुअर के मामले में हमने आयोग के प्रस्ताव से ऊंचा एमएसपी तय किया है.’ दलहनों में तुअर का एमएसपी 450 रूपये बढ़कर 4,300 रूपये प्रति क्विंटल और मूंग 100 रूपये बढ़ाकर 4,500 रूपये प्रति क्विंटल कर दिया गया. उड़द के एमएसपी को 4,300 रूपये के पिछले साल के स्तर पर ही रखा गया है.
सीसीईए ने कपास का एमएसपी 100 रूपये बढ़ाया है. औसत क्वालिटी के कपास का एमएसपी 3,700 रूपये प्रति क्विंटल और लंबे रेशे के कपास का एमएसपी 4000 रूपये प्रति क्विंटल रखा गया है.
तिलहन श्रेणी में सीसीईए ने सोयाबीन ब्लैक का एमएसपी 300 रूपये बढ़ाकर 2,500 रूपये क्विंटल और सोयाबीन पीली का एमएसपी 320 रूपये बढ़ाकर 2,560 रूपये क्विंटल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है.
तिल का एमएसपी 300 रूपये बढ़कर 4,500 रूपये कर दिया गया. जबकि सूरजमुखी और रामतिल का न्यूनतम समर्थन मूल्य क्रमश 3,700 और 3,500 रूपये क्विंटल पर पहले की तरह रखा गया है.


'किसानों के सच्चे लीडर थे इसलिए डिप्टी नहीं, सुपर सीएम कहलाते थे सुभाष भाई'
Our Correspondent : 27 June 2013
इंदौर. सुभाष यादव को कांग्रेस की दिग्विजयसिंह की सरकार में ज्यादा अहमियत नहीं मिली, लेकिन वे पीछे नहीं हटे। उन्होंने हार नहीं मानी। केंद्र की एनडीए सरकार के खिलाफ 10 हजार किसानों का मार्च जब नई दिल्ली पहुंचा तो कांग्रेस हाईकमान ने भी सुभाष भाई का लोहा मान लिया। उन्होंने किसानों के लिए 888 मांगों का पत्र सौंपा जिसे ऐतिहासिक किसान मांग पत्र कहा जाता है।
कांग्रेस ने उन्हें प्रदेश में उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी से नवाजा। बोरावां से भोपाल तक करीब से जानने वालों की मानें तो उनके काफिले में हमेशा 20 से ज्यादा गाड़ियां दौड़ती थीं। यह देख उन्हें सुपर सीएम भी कहा जाने लगा। दिग्विजय सिंह से प्रारंभिक वैचारिक मतभेद के बाद भी उन्होंने उनका पूरा सम्मान किया।
नतीजतन सुभाष भाई के निधन का समाचार सुनकर सबसे पहले परिवार को सांत्वना देने वालों में दिग्विजयसिंह शामिल थे। यही उनकी शख्सियत की सबसे बड़ी खासियत थी। अपनेपन से लोगों का हुनर जीतना वो खूब जानते थे। एक बार जिस शख्स से मिलते थे दूसरी मुलाकात दो साल बाद भी हो तब भी उसे नाम से पुकारते थे। हालांकि यह विलक्षण स्मरणशक्ति अंतिम दिनों से कुछ माह पूर्व ही जाने लगी थी।
राजनीतिक सफरनामा
पंचायत से शुरुआत
सहकारिता के सिरमौर
1971 में प्राथमिक सेवा सहकारी समिति बोरावां के सदस्य बने। ञ्च 27 जून 1974 यानी आज से ठीक 39 साल पहले उन्हें जिला सहकारी केंद्रीय बैंक खरगोन के अध्यक्ष पद पर निर्वाचित किया गया। ञ्च 13 जून 1984 से 20 अप्रैल 1990, 17 मई 1990 से 30 जून 1990 व 26 जून 1983 से 3 अप्रैल 1994 की अवधियों में भी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक खरगोन अध्यक्ष सर्वानुमति से निर्वाचित हुए। ञ्च 31 दिसंबर 1980 को मप्र राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष मनोनीत हुए। ञ्च 31 दिसंबर 1984 से वर्ष 2002 तक कई बार अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
प्रदेश और देश की राजनीति में दखल
1980 और वर्ष 1985 में खरगोन संसदीय सीट से चुनाव जीते। ञ्च 1993 में कसरावद विस क्षेत्र से चुनाव जीते, कृषि सहकारिता, जलसंसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग जैसे अहम विभागों के रूप में दायित्व संभालते हुए 10 वर्षो तक उपमुख्यमंत्री रहे। ञ्च 1998 में इसी विस क्षेत्र से दोबारा चुनाव जीता। ञ्च 2003 में तीसरी बार इसी क्षेत्र से चुनाव जीते। पर इस बार प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं रही।
कई रूपों में याद रहेंगे
प्रयोगधर्मी : निमाड़ में खेती को नई राह दिलाने के लिए कई सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति दिलाई। खुद ने उन्नतशील कृषि का उदाहरण पेश करते हुए जिले के किसानों को हाइब्रिड बीज से परिचित कराया। बीज सहकारी समिति का गठन कराया। हॉर्टिकल्चर को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं बनवाई।
समर्पित : शकर कारखाना, सूत मिल, इंजीनियरिंग कॉलेज, फॉर्मेसी कॉलेज सहित कई काम-धंधे शुरू कर लोगों को शिक्षा व रोजगार उपलब्ध कराया।
प्रेरणास्रोत: 2003 में जब कांग्रेस प्रदेश में सत्ता से बेदखल हुई। मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह ने राजनीति से 10 साल का संन्यास ले लिया लेकिन सुभाष भाई ने लड़ने का रास्ता चुना। कांग्रेसियों के गिरते मनोबल को उठाने के लिए हाईकमान के निर्देश पर खुद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।
गजब का हौसला : 15 मार्च 1999 को केंद्र की एनडीए सरकार के खिलाफ निमाड़ के 10 हजार किसानों का मार्च निकालकर नई दिल्ली पहुंच गए। सुंदरलाल पटवा के मुख्यमंत्रित्व काल में उनके कसरावद क्षेत्र में दौरे के दौरान किसानों की मांग मनवाने पर अड़ गए। पटवा ने गाड़ी आगे बढ़ाने को कहा तो सायलेंसर पकड़ लिया। गाड़ी हिल भी न सकी। बचपन से उन्हें कुश्ती का शौक था।
प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुभाष यादव के निधन की सूचना मिलने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यादव के सांसद पुत्र अरुण यादव को अपने साथ दिल्ली लेकर गए। चौहान को ग्वालियर होते हुए दिल्ली जाना था। उनके साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और अनूप मिश्रा भी जाने वाले थे, लेकिन उन्होंने कार्यक्रम बदला और यादव को विशेष विमान में साथ लेकर सीधे दिल्ली पहुंच गए। तोमर और मिश्रा बाद में ट्रेन से ग्वालियर गए। यादव के निधन पर राज्यपाल रामनरेश यादव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सहित कई नेताओं ने शोक संवेदना व्यक्त की। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुई श्रद्धांजलि सभा में नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। अपेक्स बैंक के अधिकारियों- कर्मचारियों ने भी यादव के निधन पर शोक व्यक्त किया है। यादव लंबे समय तक अपेक्स बैंक के चेयरमैन रहे हैं।


किसानों को भरपूर राहत राशि मिलेगी
Our Correspondent : 28 June 2013
जनसंपर्क मंत्री और शाजापुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने कालापीपल विकासखण्ड के विभिन्न ग्राम का भ्रमण कर ओला प्रभावित फसलों का निरीक्षण किया। श्री शर्मा ने कहा कि शासन के प्रावधान के अनुसार ओला प्रभावित फसल हानि की भरपूर राहत राशि किसानों को दी जायेगी।
श्री शर्मा ने भ्रमण के दौरान ग्राम खमलाम, सुकलिया, डोडी, हरूखेड़ी, बेरछा दातार, बमुलिया, मुछाली, जावड़िया घरवास, लसुड़िया घाघ, निपानिया खुर्द, अरनियाकलां, तिलावद, बिसनखेड़ा, सेरपुरा तथा कोलवा गाँवों में ओला प्रभावित गेहूँ, चना, आलू, धनिया आदि फसलों के नुकसान का जायजा लिया।
श्री शर्मा ने कहा कि राज्य शासन केन्द्र से विशेष पैकेज की माँग करेगा। राहत राशि वितरण में कोई गड़बड़ी न हो इसलिए किसानों को चेक के माध्यम से राहत राशि का वितरण किया जायेगा। उन्होंने राजस्व अधिकारियों से समय-सीमा में शत-प्रतिशत ओला प्रभावित फसलों का आकलन करने को कहा।


मध्यप्रदेश सरकार कृषि पर 6000 करोड़ रुपए खर्च करेगी
Our Correspondent : 4 Feb. 2013
भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बार 1500 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदने की घोषणा की है। केंद्र गेहूं का समर्थन मूल्य 1350 रुपए क्विंटल घोषित कर चुका है। यानी राज्य सरकार गेंहूं पर 100 की बजाय 150 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देगी। हालांकि संभावना ये भी है कि केंद्र गेहूं पर 50 रुपए अतिरिक्त बोनस घोषित कर सकता है। शिवराज ने केंद्र से मांग की कि वह गेहूं का समर्थन मूल्य कम से कम 1600 रुपए क्विंटल रखे। रविवार को यहां किसान महापंचायत में मुख्यमंत्री ने बिजली पंप कनेक्शन पर प्रति हार्स पावर 1200 रुपए सालाना के फ्लैट रेट की भी घोषणा की। अब तक यह दर 1950 रुपए प्रति हार्सपॉवर सालाना थी। यह भी फ्लैट रेट नहीं था। इसमें स्थायी और अस्थायी कनेक्शन पर अलग-अलग दरें थीं। अब सभी तरह के कनेक्शन की एक ही दर होगी। 1200 रुपए प्रति हार्सपॉवर सालाना। महापंचायत में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की बेहतरी के लिए 6000 करोड़ रुपए खर्च करेगी। उन्होंने किसानों को विदेश यात्रा पर भेजने की भी घोषणा की। इस मौके पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने शिवराज सिंह की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा शिवराज ने वो कर दिखाया जो मैं उतर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद पर रहते नहीं कर पाया। महापंचायत में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नरेंद्रसिंह तोमर, कृषि मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया, ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव, महिला बाल विकास मंत्री रंजना बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी और पूर्व सांसद कैलाश सारंग भी थे।

 
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