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D-83201/21-3-18


D-83201/21-3-18


जरबेरा फूलों की खेती से 30 लाख सालाना कमा रहे कृषक शरद सिंह
9 May 2018
एक एकड़ से कम रकबे में जरबेरा फूल उत्पादन से छिन्दवाड़ा जिले के किसान शरद सिंह सालाना 30 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। कृषक शरद सिंह ने 4 हजार वर्ग मीटर में 3 साल पहले 58 लाख रुपये की लागत से पॉली-हाऊस बनाया। पॉली-हाऊस में जरबेरा फूलों के उत्पादन से लगातार 30 लाख रुपये सालाना से ज्यादा की कमाई कर कृषक शरद ने इतिहास रचा है। कृषक शरद को पॉली-हाऊस बनाने के लिये 50 प्रतिशत शासकीय अनुदान के रूप में 28 लाख रुपये की मदद मिली थी। इसे पॉली-हाऊस से सालाना 7-8 लाख जरबेरा फूलों की स्टिक प्राप्त होती है। यह स्टिक 5 रुपये प्रति स्टिक के भाव से कुल 35 से 40 लाख रुपये में बाजार में बिकती है। तमाम खर्चें निकालकर उन्हें शुद्ध रूप से 30 लाख रुपये से अधिक की सालाना आय होती है। कृषक शरद सिंह ने साबित कर दिया है कि फूलों की व्यावसायिक खेती को नई तकनीक से किया जाये, तो यह बहुत फायदेमंद व्यवसाय है। मार्केट में फूलों की बिक्री की कोई समस्या नहीं है। शरद के जरबेरा फूल नागपुर की मंडी में बिकते हैं। इन फूलों की सुन्दरता और बड़े आकार के कारण मार्केट में इनकी माँग दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।
किसानों के लिये उपार्जन केन्द्रों में करें सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ
2 May 2018
जनसम्पर्क, जल-संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा रीवा जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र की अध्यक्षता में आज रीवा में जिला योजना समिति की बैठक सम्पन्न हुई। उद्योग मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल भी बैठक में शामिल हुए। मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि सभी उपार्जन केन्द्रों में किसानों के लिये आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएँ। किसानों को उपार्जित फसल का भुगतान समय पर करवाया जाए। ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ पात्र व्यक्तियों को मिले तथा सिलेण्डर की रिफिलिंग निकटतम स्थानों में हो। हाट-बाजार में गैस एजेन्सियाँ सिलेण्डर लेकर जाएं, जिससे हितग्राही गैस की रिफिलिंग करवा सकें। प्रभारी मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि जल-संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य प्राथमिकता से करवाए जाएँ। पुरानी जल संरचनाओं को पुनर्जीवित करने के भी कार्य भी पूर्ण करवाये जायें। उन्होंने रीवा जिले में मिशन इन्द्रधनुष में बच्चों एवं गर्भवती माताओं के टीकाकरण कार्य में शत-प्रतिशत उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना के तहत ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में विद्युतीकरण के लक्ष्य को नियत समय में पूर्ण किये जाने के निर्देश दिये। मंत्रीद्वय ने प्रधानमंत्री असंगठित श्रमिक पंजीयन में जिले में 6 लाख 77 हजार 102 श्रमिकों द्वारा पंजीयन करवाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। जिला कलेक्टर ने बताया कि पंजीकृत हितग्राहियों का सत्यापन अगले 2-3 दिन में पूर्ण करवा लिया जायेगा। इस दौरान सांसद श्री जनार्दन मिश्र, रीवा की महापौर सुश्री ममता गुप्ता, विन्ध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुभाष अन्य जन-प्रतिनिधि तथा वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। पर्यटन विकास परिषद की बैठक प्रभारी मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने रीवा पर्यटन विकास परिषद की बैठक ली। बैठक में वर्तमान पर्यटन स्थलों के साथ ही नवीन पर्यटन स्थलों के विकास के संबंध में चर्चा की गई। डॉ. मिश्र ने कहा कि रीवा जिले के ऐतिहासिक एवं प्राचीन स्थलों का जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण कर इन्हें पर्यटन सर्किल में जोड़ा जाए ताकि पर्यटक इन स्थलों का आसानी से भ्रमण कर सकें।
किसानों को भुगतान समय से हो, आवश्यकतानुसार नवीन उपार्जन केन्द्र खोले जायें
27 April 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिये हैं कि सभी जिलों में आवश्यकतानुसार नवीन उपार्जन केन्द्र खोले जायें। किसानों को भुगतान समय से हो। उपार्जन कार्य की लगातार मानीटरिंग की जाये। उपार्जन के दौरान किसान हितैषी दृष्टिकोण रखा जाये। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहाँ वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से प्रदेश में चल रहे गेहूँ, चना, मसूर और सरसों के उपार्जन की समीक्षा कर रहे थे। इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया, वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार, सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री विश्वास सारंग और मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि किसानों को समय से एसएमएस मिले तथा खरीदी केन्द्र पर उपार्जन सुनिश्चित किया जाये। उपार्जन के बाद शीघ्र परिवहन किया जाये। यह सुनिश्चित करें कि किसानों को खरीदी के तीसरे दिन भुगतान मिले। किसी कारण से एसएमएस से सूचना के बाद निर्धारित दिन पर किसान नहीं आ पाता है तो उन्हें दोबारा एसएमएस किया जाये। खरीदी, परिवहन और किसान को भुगतान की लगातार मानीटरिंग की जाये। खरीदी केन्द्रों पर पर्याप्त संसाधन और उपकरण हों। यह सुनिश्चित करें कि बोरे के निर्धारित वजन के बराबर ही कटौती की जाये। उपार्जन केन्द्रों पर छाया और पीने के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करें। उपार्जन केन्द्रों पर एक प्रशासनिक अधिकारी की ड्यूटी लगायें। मण्डियों में आवश्यकतानुसार मजदूरी की दरें बढ़ायें। जिन उपार्जन केन्द्रों पर नाफेड के सर्वेयर नहीं हो, वहाँ कृषि, खाद्य और सहकारिता की समिति बनाकर एफ.ए.क्यू गुणवत्ता का उपार्जन करें। ओला प्रभावित और सूखे से प्रभावित किसानों को राहत राशि मिलना शेष नहीं रहे। उपार्जित खाद्यान्न के परिवहन में देरी नहीं हो। आवश्यकतानुसार मण्डियों में विद्युत चलित ट्रेडिंग मशीनें लगायें। प्रभारी मंत्री भी प्रतिदिन करेंगे उपार्जन की मानीटरिंग मुख्यमंत्री ने कहा कि कलेक्टर उपार्जन कार्य के साथ भुगतान की स्थिति की प्रतिदिन समीक्षा करें। प्रभारी मंत्री भी प्रतिदिन उपार्जन कार्य की मानीटरिंग करेंगे। खरीदी, परिवहन, भुगतान और कैश की प्रतिदिन रिपोर्ट लें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कृषि समृद्धि योजना के तहत वर्ष 2016-17 की प्रोत्साहन राशि अधिकांश किसानों के खातों में पहुँच गई है। वर्ष 2017-18 की प्रोत्साहन राशि 265 रूपये प्रति क्विंटल गेहूँ तथा चना, मसूर और सरसों में 100 रूपये प्रति क्विंटल की दर से आगामी 10 जून को किसानों के खातों में डाली जायेगी। किसानों को एसएमएस की विकेन्द्रीकृत व्यवस्था बताया गया कि उपार्जन के लिये किसानों को एसएमएस भेजने की विकेन्द्रीकृत व्यवस्था की गई है। खरीदी केन्द्रों पर तौल व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण किया गया है। प्रदेश में अब तक 45 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया है। गेहूँ, चना, मसूर, सरसों को मण्डियों में बेचने वाले किसानों को भी मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना में प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। इन किसानों का पंजीयन किया गया है। बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रेज्डबेड पद्धति से 4.5 क्विंटल प्रति बीघा हुआ सोयाबीन उत्पादन
12 April 2018
उज्जैन जिले की तराना तहसील के गाँव सामटिया-खेड़ी के किसान रामप्रसाद ने कृषि विभाग की सलाह पर रेज्डबेड पद्धति अपनाकर जल निकासी की अच्छी व्यवस्था कर ली है। पहले अपनी लगभग 4 हेक्टेयर कृषिभूमि पर साधारण सीडड्रिल से बुवाई कर मात्र दोक्विंटल प्रति बीघा सोयाबीन उत्पादन कर पाते थे। रामप्रसाद ने रेज्डबेड पद्धति का उपयोग कर वर्ष 2017-18 में साढ़े चार क्विंटल प्रति-बीघा सोयाबीन का उत्पादन प्राप्त किया है। रामप्रसाद पहले जब साधारण सीडड्रिल से बुवाई करते थे, तो गलती जमीन में पानी भर जाने से अक्सर इनकी फसल नष्ट हो जाती थी। इस विधि का प्रयोग करने से बीज भी ज्यादा लगता था। उद्यानिकी विभाग से इनका ड्रिप पद्धति का प्रोजेक्ट मंजूर हुआ। इन्हें कृषि विभाग की सलाह पर नलकूप योजना का लाभ मिला। इससे इनकी पूरी भूमि सिचिंत हो गई है। ग्रामीण विस्तार अधिकारी के मार्गदर्शन में तीन बीघा में इन्होंने सन्तरे का बगीचा भी लगाया है और एक बीघा में अमरूद के पेड़ लगाए हैं। फलोद्यान से इनको पिछले दो वर्ष से एक लाख रूपये से अधिक की अतिरिक्त आमदनी हो रही है। रामप्रसाद ने बायोगैस निर्माण की व्यवस्था की है, जिससे इन्हे कम लागत में अच्छा जैविक खाद मिल रहा है। कृषक रामप्रसाद खेती के साथ पशुपालन भी कर रहे हैं। इनके पास चार दुधारू भैंस, दो गाय और दो बकरी हैं। खेतों में काम करने के लिए दो बैल भी हैं। इन्हें प्रति-दिन पर्याप्त दूध मिलने लगा है। इनका प्रति माह 6 हजार रूपये का दूध बिकने भी लगा है। रामप्रसाद अब स्लरी और अन्य जैविक कृषि अपशिष्ट से खाद तैयार करते हैं। अब रासायनिक खाद का बिल्कुल उपयोग नहीं करते। इन्होंने कृषक के रूप में पूरे इलाके में अपनी पहचान बनाई है। इन्होने अपने बलबूते पर कम जमीन से अधिक पैदावार कर कृषक समाज में मिसाल पेश की है। आस-पास के किसान अब रामप्रसाद से सलाह लेने आते हैं।
कृषक उद्यमी योजना को अन्य प्रदेशों में भी क्रियान्वित करने की आवश्यकता
22 March 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव कुमार ने आज मंत्रालय में सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री चेतन कश्याप, किसान कल्याण और कृषि विकास मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन, ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन और मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश में कृषकों की आमदनी को बढ़ाने और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने तथा उद्योगों की स्थापना के लिये कृषकों को प्रोत्साहित करने के लिये कृषक उद्यमी ऋण योजना के बारे में बताया कि इस योजना में 15 प्रतिशत सब्सिडी, सात साल तक पाँच प्रतिशत ब्याज अनुदान और बैंक गारंटी सरकार द्वारा दी जाती है। योजना में 10 लाख से दो करोड़ रूपये तक ऋण दिये जाने का प्रावधान है। योजना के तहत इस वर्ष 3 हजार औद्योगिक इकाईयां स्थापित करवाने का प्रयास किया जायेगा। श्री चौहान ने बताया कि किसानों की कृषि उत्पादकता को बढ़ाने के लिये सिंचाई साधनों का विस्तार तेजी से किया गया है। पिछले करीब डेढ़ दशक में सिचिंत क्षेत्र साढ़े सात लाख से बढ़कर 40 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसे 80 लाख हेक्टेयर तक ले जाया जायेगा, तब राज्य का लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्र सिचिंत होगा। उन्होंने कहा कि उत्पादकता बढ़ने के साथ ही किसान को फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिये राज्य ने भावांतर भुगतान योजना बनाई है। यह योजना सरकार और किसान दोनों के लिये उपयोगी है। इससे किसान को फसल का वाजिब मूल्य मिलता है और उपार्जन प्रक्रिया पर होने वाले व्यय की बचत भी होती है। इस योजना के तहत अभी 25 लाख मीट्रिक टन फसल का भावांतर राशि भुगतान किया गया है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव कुमार ने मध्यप्रदेश शासन की कृषक उद्यमी योजना की सराहना की। उन्होंने इस योजना को देश के अन्य प्रदेशों में भी क्रियान्वित करने की आवश्यकता बतायी। श्री कुमार ने कहा कि इस योजना का नीति आयोग द्वारा गहन अध्ययन करवाया जायेगा। उन्होंने बताया कि सहकारी संघवाद की संकल्पना को अस्तित्व में लाने के लिये राज्य विशेष की आवश्यकताओं, समस्याओं और संसाधनों के आधार पर योजनाओं का निर्माण किया जाना आवश्यक है। राज्यों की विशिष्टताओं के अध्ययन के लिये देश के सभी राज्यों का वे भ्रमण कर रहे हैं। उन्होंने आयोग द्वारा प्रस्तावित योजनाओं और संकल्पनाओं पर भी चर्चा की।
खेती में कृ‍षि यंत्रों का भरपूर उपयोग कर रहे हैं किसान
16 March 2018
मध्यप्रदेश में खेती में कृषि यंत्रों का उपयोग करने वाले किसानों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे कृषि उत्पादन बढ़ा है और किसानों की आमदनी में भी इजाफा हुआ है। राज्य सरकार द्वारा किसानों को पारम्परिक खेती के साथ उद्यानिकी की फसलों को लेने के लिये भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। शहडोल जिले में बारहमासी खेती के प्रति किसानों की रूचि बढ़ी है। अब यहां के किसान पॉली हाउस में अनुकूल माहौल बना कर बारहमांसी सब्जी की खेती से दो गुना उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा बारहमासी खेती पर किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान भी दिया जा रहा है। जिले के गोहपारू ब्लॉक के उमरिया गांव के किसान देवीदीन अहिरवार ने पॉली हाउस तैयार किया है। अब वे पूरे साल खेत में सब्जी ले रहे हैं। उन्हें इससे अच्छा मुनाफा भी हुआ है। जिले के अन्य ब्लॉक सुहागपुर, बुढार, ब्यौहारी और जयसिंहनगर के किसानों ने भी अपने खेतों में पॉली हाउस का निर्माण कर सब्जी का उत्पादन लिया है। पॉली हाउस में एक एकड़ भूमि पर 50 हजार रूपये की पूंजी लगती है। इस पूंजी से किसान को खेती से एक लाख 50 हजार रूपये तक का फायदा हो जाता है। सीहोर जिले में नसरूल्लागंज तहसील के ग्राम ससली के किसान महेन्द्र सिंह पिछले कई वर्षो से 6 एकड़ सिंचित भूमि पर खेती करते आ रहे हैं। महेन्द्र सिंह बताते हैं कि कई वर्षो से किराये की मशीन से थ्रेसिंग का कार्य करते थे। इस कारण उन्हें करीब 15 हजार रूपये भुसा बनाने और दाने निकालने पर खर्च करना पड़ते थे। उन्होंने इस संबंध में किसान कल्याण एवं कृषि विभाग के अधिकारियों से चर्चा की। फलस्वरूप महेन्द्र सिंह ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में 80 हजार रूपये का अनुदान लेकर मल्टीक्राप थ्रेसर खरीदा। आज वे अपनी स्वयं की थ्रेसर मशीन से काम कर रहे हैं। क्षेत्र के अन्य किसानों ने महेन्द्र सिंह से मल्टीक्राप थ्रेसर मशीन के संबंध में और उनको मिली अनुदान राशि के बारे में पूछताछ कर मशीन लेने का मन बनाया है।
मध्यप्रदेश में उन्नत खेती बन रही सर्वाधिक लाभकारी व्यवसाय
13 March 2018
मध्यप्रदेश में खेती को लाभ का धंधा बनते देख उच्च शिक्षा प्राप्त नौजवान आधुनिक तकनीक से खेती को अपना व्यवसाय बना रहे हैं। लोग सरकारी नौकरी छोड़कर खेती की ओर बढ़ रहे हैं। अब तो वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत पट्टे में मिली जमीन पर भी सदियों से भूमिहीन रहे आदिवासी आत्म-निर्भर बनने के लिये खेती को ही अपना रहे हैं। बड़वानी के हरीश मुकाती ने इलेक्ट्रानिक्स एण्ड कम्यूनिकेशन ब्रांच में इंजीनियरिंग करने के बाद अपने पिता के खेत की 2 हजार वर्ग मीटर भूमि पर सन् 2016 में पॉली हाउस बनवाया है। इसके लिए उन्हें उद्यानिकी विभाग से मार्गदर्शन और लागत का 50 प्रतिशत 8 लाख रुपये का अनुदान भी मिलाहै। पॉली हाउस में उन्होंने पुणे से लाकर 12 हजार गुलाब के पौधे रोपे हैं। डच वैरायटी के इन गुलाबों से हरीश को साल में 1.56 लाख रुपये का मुनाफा मिल रहा है। साल के चार सीजन में ये पौधे हरीश को तकरीबन 52 हजार फूल देते हैं। पाँच रुपये की दर से बिकने वाले इन फूलों से हरीश को प्रति वर्ष 2.60 लाख रुपये का व्यवसाय मिलता है। एक बार पौधे लगाने से सात सालों तक हरीश को ऐसे ही गुलाब मिलते रहेंगे। खरगौन जिले में नागझिरी के बापू सिंह परिहार ने शासकीय नौकरी से वीआरएस लेकर अपने गाँव मेंउन्नत खेती-किसानी शुरू की है। गोगांवा जनपद कार्यालय में लेखापाल पद से वर्ष 2013 में सेवानिवृत्ति लेने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की मदद से अपने 12 एकड़ के खेत में अनार का बाग लगाया। उद्यानिकी विभाग की सहायता से बापू सिंह ने ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था की है। बापू सिंह ने अनार की अच्छी फसल मिलने पर खरीफ में मूंग और रबी में चने की अंतरवर्ती फसल लेना भी शुरू कर दिया है। मूंग से उन्हें डेढ़ लाख रुपये से अधिक मुनाफा हुआ है। इस साल चने से भी डेढ़ लाख रुपये के लाभ की उम्मीद है। बापू सिंह कहते हैं 25 साल सरकारी नौकरी करने के बाद आज पुश्तैनी जमीन पर उन्नत तरीके से खेती करने और अपने गाँव में ही रहने का आनंद ही कुछ और है। सीहोर जिले आष्टा विकासखण्ड के ग्राम कोठरी निवासी गजराज सिंह ने बी.ए करने के बाद अपने पिता के मार्गदर्शन में खेती करना शुरू किया। उन्होंने महसूस किया की खरीफ और रबी फसल की थ्रेशिंग में वह काफी पिछड़ जाते हैं। उन्होंने कृषि विस्तार अधिकारी को अपनी समस्या बतायी, जिन्होंने ट्रैक्टर चलित मल्टीक्रॉप थ्रेशर और उस पर दिए जाने वाले शासकीय अनुदान की जानकारी दी। सरकारी मदद से गजराज सिंह ने 30 हार्स पॉवर क्षमता का मल्टी क्रॉप थ्रेशर खरीदा। थ्रेशर खरीदने के एक माह के अन्दर उनके खाते में सरकारी अनुदान की 72 हजार रुपये की राशि भी पहुँच गई। गजराज सिंह कहते है अब बहुत आराम हो गया हैं। अपनी फसल थ्रेशर से तत्काल निकालने के बाद आस-पास के किसानों को भी 5-6 हजार रुपये तक के किराये पर थ्रेशर दे देता हूँ। इससे मुझे अतिरिक्त आमदनी हो जाती है। सशक्तिकरण की मिसाल बनी मुरैना जिले के जलालगढ़ की महिला रेखा त्यागी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के हाथों दिल्ली में कृषि कर्मण अवार्ड ले चुकी हैं। इन्होंने पति की मृत्यु के बाद खेती को परिवार की आजीविका के लिए अपनाया है। कृषि विभाग के सहयोग से रेखा ने सघनता पद्धति से बाजरे की खेती की और औसत उत्पादन 20 की जगह 40 क्विंटल तक पहुँचा दिया। इस नवाचार से उन्हें अच्छी आमदनी हुई। उन्होंने अपनी दोनों बेटियों की संपन्न परिवार में शादी कर दी है। बेटे को बी.एससी (कम्प्यूटर) की शिक्षा दिला रही हैं। जिले में अन्य पुरूष किसान भी हैं जिन्हें राज्य स्तरीय पुरस्कार मिल चुका है। राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाली रेखा त्यागी इकलौती महिला किसान हैं। मुरैना जिले के ग्राम करारी के किसान अतर सिंह और बीरमपुरा के राधे शर्मा 50-50 हजार रुपये का राज्य स्तरीय कृषक कर्मण अवार्ड पा चुके हैं। जिले के 35 किसानों को ब्लॉक स्तर का 10-10 हजार रुपये का कृषक कर्मण अवार्ड मिला है। शहडोल जिले के ग्राम केलमनियाँ के आदिवासी किसान बबनू कोल आज वन अधिकार अधिनियम में मिली भूमि पर खेती करने से आत्मनिर्भर हो गये हैं। बबनू कोल कहते हैं की मेरे पुरखों के पास खेती योग्य जमीन नहीं थी। इसलिये हमेशा ही मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करना पड़ता था। वर्ष 2012 में हितग्राही सम्मेलन में मुझे मिली जमीन पर मैं धान, अरहर, कोदो आदि उगाकर आज अपने परिवार का अच्छी तरह पालन कर पा रहा हूँ। अपने बाप-दादा की तरह अब मुझे दूसरों पर आश्रित नहीं रहना पड़ता। स्वयं खेती करता हूँ। पैदावार अधिक होने पर मंडी में बेचने से अच्छे पैसे मिल जाते हैं। आज मेरे बच्चे भी अच्छी शिक्षा पा रहे हैं।
उद्यानिकी फसलों से भरपूर लाभ कमा रहे किसान
10 March 2018
प्रदेश में किसान परम्परागत फसल के साथ-साथ उद्यानिकी फसल में आधुनिक तकनीक का उपयोग कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से इसके लिए किसानों को सब्सिडी के साथ भरपूर वित्तीय मदद भी दी जा रही है। इन किसानों ने उद्यानिकी फसलो की खेती में अपनी विशिष्ट पहचान भी बनाई है। मन्दसौर- जिले के मल्हारगढ़ विकासखण्ड के ग्राम बही के किसान दशरथ पाटीदार 1.50 हेक्टेयर कृषि भूमि में वर्षो से परम्परागत खेती करते आ रहे हैं। परम्परागत खेती में सीमित आमदनी होने से इन्हें घर चलाने में कठिनाई होती थी। इस संबंध में उन्होंने उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से चर्चा की। किसान दशरथ को उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने मल्चिंग प्लस ड्रिप पद्धति के बारे में जानकारी दी। नई तकनीक से उन्होंने अपने खेत में उद्यानिकी फसलें मिर्ची, टमाटर, ककड़ी आदि लगाई। नई तकनीक से किसान दशरथ को सब्जी का उम्मीद से ज्यादा उत्पादन मिला। इसके बाद उन्होंने शेडनेट भी लगाया। शेडनेट की आमदनी से उनका आत्मविश्वास बढ़ा तो उन्होंने अपने खेत में डेयरी भी लगाई। आज दशरथ कृषि में नई तकनीक अपनाकर बहुत खुश हैं शाजापुर- जिले की कालापीपल तहसील के ग्राम चारखेड़ी के किसान जगदीश मल्चिंग पद्धति को अपनाकर लखपति बन गये हैं। पूर्व में जगदीश चना, गेहूँ और अन्य परम्परागत फसल ही लिया करते थे। इससे उनके खेत में कृषि उत्पादन लगातार घट रहा था। उन्होंने उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया तो अधिकारियों ने मल्चिंग पद्धति से मिर्च की खेती करने की सलाह दी। उद्यानिकी विभाग की ओर से इस काम के लिए उन्हें सब्सिडी भी मिली। किसान जगदीश ने 0.250 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 200 क्विंटल हरी मिर्च की पैदावर प्राप्त की। इससे उन्हें 2 लाख रुपये की अतिरिक्त आमदनी हुई। उन्होंने उद्यानिकी फसल से मिली सफलता को अपने किसान साथियों के बीच साझा किया है। सिवनी- जिला मुख्यालय से 38 कि.मी दूर ग्राम ढेका के किसान प्रहलाद ठाकुर को भी उद्यानिकी फसल से फायदा पहुँचा है। इनके पास 2 हेक्टेयर पैत्रक कृषि भूमि है। प्रहलाद भी वर्षो से अपनी कृषि भूमि में परम्परागत फसल ले रहे थे। घटती कृषि आमदनी से उन्हें अपना घर चलाना मुश्किल होता जा रहा था। इन्होने उद्यानिकी विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। प्रशिक्षण लेने के बाद प्रहलाद ने ड्रिप एरीगेशन के साथ मल्चिंग पद्धति से उद्यानिकी फसल लेने का मन बनाया। उद्यानिकी विभाग की ओर से उन्हें करीब 1 लाख 30 हजार रुपये का अनुदान भी मिला। इसके के बाद उन्होंने अपने खेत में मौसमी सब्जी के साथ अदरक की खेती प्रारंभ की। किसान प्रहलाद को उद्यानिकी विभाग के मैदानी अमले का मार्गदर्शन भी मिला। किसान प्रहलाद ने पिछले चार वर्षो में औसत रूप से उद्यानिकी खेती से 24 लाख रुपये का मुनाफा कमाया। आज वे विश्वास से कहते हैं कि उद्यानिकी फसल से ही उनके जीवन में बदलाव आया है।
किसान राधेश्याम ने सोलर पंप से की गेहूँ और चने की सिंचाई
9 March 2018
खरगोन जिले के ग्राम बमनाला क्षेत्र के किसान राधेश्याम प्रताप सिंह पटेल ने इस वर्ष रबी की फसल गेहूँ और चने की सिंचाई बिना बिजली खर्च किये की है। उन्होंने अपने खेत में इस वर्ष सोलर पंप से सिंचाई की है। किसान राधेश्याम का खेत ऐसी जगह पर है, जहाँ से बिजली लाइन नहीं गुजरी है। इस कमी की वजह से राधेश्याम को खेतों में लगी फसल में सिंचाई करने में असुविधा होती थी और उन्हें कृषि उत्पादन भी भरपूर नहीं मिल पाता था। इस संबंध में उन्होंने अपने क्षेत्र के किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के मैदानी अमले से चर्चा की। राधेश्याम को मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना की जानकारी दी गई। उन्होंने आगे बढ़कर अपना प्रकरण तैयार करवाया। जिले के अक्षय ऊर्जा अधिकारी ने आवश्यक कार्यवाही कर 3 लाख 10 हजार रुपये लागत का 3 हॉर्स पावर का सोलर पंप उनके खेत में लगवाया। उनको सोलर पंप योजना में 90 प्रतिशत सब्सिडी भी मिली हैं। उन्हें सोलर पंप के लिए केवल 36 हजार 150 रुपये ही देना पड़े। किसान राधेश्याम के खेत में लगा सोलर पंप क्षेत्र के आसपास के किसानों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। इन किसानों ने भी अपने खेतों में सोलर पंप लगाने का मन बनाया है। खरगोन जिले में 25 किसानों को मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना का लाभ दिलवाया गया है।
प्रदेश में वर्ष 2022 तक होगी 62 लाख हेक्टेयर में सिंचाई
8 March 2018
प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं की सतत वृद्धि की गई है। प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि करते हुए निर्मित सिंचाई क्षमता बढ़ाकर वर्तमान में 42 लाख हेक्टर की जा चुकी है। इसमें से 34 लाख हेक्टर जल संसाधन विभाग एवं नर्मदा घाटी विकास विभाग की परियोजनाओं से सिंचित होती है। इस वर्ष प्रदेश में अल्पवर्षा एवं भीषण सूखे के बावजूद भी जल संसाधन विभाग तथा नर्मदा घाटी विकास विभाग की परियोजनाओं से 27.79 लाख हेक्टर में रबी में तथा 2.35 हेक्टर में खरीफ में सिंचाई की गई है। जल संसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज विधायक श्री रामनिवास रावत की ध्यानकार्षण सूचना के उत्तर में यह जानकारी दी। मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित करने के लिए कृत संकल्प है और तीव्रगति से समयबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। वर्तमान में जल संसाधन विभाग एवं नर्मदा घाटी विकास की 16.72 लाख हेक्टर रबी सिंचाई की परियोजनाएं निर्माणाधीन है। इसके अतिरिक्त प्रदेश भर में 9.59 लाख हेक्टर की परियोजनाएं स्वीकृत हैं। इनके निर्माण के उपरांत प्रदेश में जल संसाधन विभाग एवं नर्मदा घाटी विकास परियोजनाओं से वर्ष 2022 तक 36 लाख हेक्टर से बढ़ाकर 62 लाख हेक्टर में सिंचाई सुविधा निर्मित हो जाएगी। इसके अतिरिक्त प्रदेश में 11 लाख हेक्टर से अधिक की सिंचाई परियोजनाएं चिन्हित की गई है जिसकी तत्परता से स्वीकृति के लिए हमारी सरकार प्रयासरत है। हमारी सरकार ने सिंचाई परियोजनाओं में धनराशि की कमी नहीं आने दी है और अगले वर्षों में हम सिंचाई परियोजनाओं में एक लाख करोड़ रूपयों से अधिक व्यय करने जा रहे हैं। मंत्री डॉ. मिश्र ने बताया कि विजयपुर तहसील में चेटीखेड़ा परियोजना के डूब क्षेत्र में सहरिया जनजाति के परिवार आ रहे हैं जिनका पूर्व में विस्थापन कुनोपालपुर अभ्यारण के लिए किया गया था। सहरिया जनजाति के परिवारों के दोहरे विस्थापन की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इस पृष्ठ में सतत प्रयास कर रहे हैं कि सहरिया जनजाति के परिवारों को भूमि के बदले भूमि उपलब्ध कराने के बाद परियोजना की स्वीकृति दी जाए। परियोजना के लिए बजट में प्रावधान भी किया है। इसी तरह चंबल मुख्य नहर से हिरनीखेड़ा गांव के पास के 35 ग्रामों को सूक्ष्म सिंचाई पद्धति से लगभग 12 हजार हेक्टर में सिंचाई के लिए परियोजना बनवाई गई है। परियोजना की डीपीआर परीक्षण में है। मूंझरी मध्यम परियोजना का पूर्व में सर्वेक्षण कराया गया था। परियोजना की जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने और अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई करने के उद्देश्य से पुन: सर्वेक्षण कराया जा रहा है। हमारा यह प्रयास है कि इस परियोजना से 9500 हेक्टर में सिंचाई लाभ प्रदाय करें। मंत्री डॉ. मिश्र ने बताया कि कूनो नदी पर एक स्टाप डेम बनाया जा चुका है। साध्य परियोजना मिलने पर स्वीकृतियां दी जा रही है। शासन द्वारा समयबद्ध तरीके से एवं तत्परता से सिंचाई परियोजनाओं के चिन्हांकन से लेक निर्माण एवं स्वीकृति की कार्यवाही की जा रही है।
भावांतर योजना को अधिक बेहतर बनाने के प्रयास : सेटेलाइट से होगा फसल सर्वेक्षण
27 February 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भावांतर भुगतान योजना को और अधिक बेहतर बनाया जायेगा। योजनांतर्गत फसल पंजीयन की मेन्यूल सर्वेक्षण व्यवस्था को बदला जायेगा। सर्वेक्षण का कार्य सेटेलाइट के माध्यम से करवाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे सर्वेक्षण में मानवीय त्रुटियाँ नहीं हों। उन्होंने कहा कि किसान फसल को अच्छे मूल्य पर बाजार में बेच सकें, इसके लिये भंडारण को प्रेरित करने का भी प्रयास किया जा रहा है। किसान को फसल भंडारित करने पर फसल मूल्य का 25 प्रतिशत भुगतान तत्काल बैंक से मिल जायेगा। इसका ब्याज सरकार द्वारा भरा जायेगा। यह योजना किसानों में तेजी से लोकप्रिय हुई है। किसान अब अन्य फसलों को भी इस योजना में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। श्री चौहान आज एक समाचार चैनल के कार्यक्रम 'शिखर सम्मेलन' में पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि जनता काम करने वालों को समर्थन देती है। प्रदेश में सरकार ने समावेशी विकास को साकार करने का प्रयास किया है। गरीबों को एक रुपये किलो अनाज, मेधावी बच्चों की उच्च शिक्षा की फीस भरवाने,नि:शुल्क इलाज, रहने के लिये भूमि आदि अनेक सामाजिक सुरक्षा की योजनाएँ जनता के साथ संवाद कर बनाई गई हैं। कृषि क्षेत्र में सरकार के प्रयासों से बम्पर उत्पादन हुआ है। नई चुनौती किसान को उसकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाना है। कृषि उत्पाद मूल्य संवर्धन की दिशा में भी प्रयास किये जा रहे हैं। सूखे के दृष्टिगत गेहूँ के लिये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य 1735 रुपये के अतिरिक्त 265 रुपये किसानों को दिये जायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई करने के साथ व्यवस्था में सुधार के लिये लोकसेवा प्रदाय, संपत्ति राजसात करने के कानून और ई-टेंडरिंग, ई-मेजरमेंट और ई-पेमेंट की व्यवस्थाएं की गई हैं। शिक्षकों का केवल एक कैडर होगा। विगत वर्षों में करीब 2 लाख शिक्षकों की नियु्क्ति हुई है। शीघ्र ही 40 हजार शिक्षकों की भर्ती की जायेगी। बुन्देलखंड में 50 छोटी-बड़ी सिंचाई परियोजनाओं पर काम हो रहा है। चंदेलकालीन तालाबों को भरने के प्रयास किये गये हैं। केन-बेतवा पर बांध बनाने की योजना है। सरकार ने सिंचित क्षेत्र 7.5 लाख से बढ़ाकर 40 लाख हेक्टेयर किया है। यह कार्य निश्चित समय से पूर्व हुआ है। इसे बढ़ाकर 80 लाख हेक्टेयर करने की योजना है। उन्होंने बताया कि निजी स्कूलों में मनमानी फीस आदि अनियमिताओं को रोकने शीघ्र ही विधेयक ला रहे है। युवाओं को नये अवसर उपलब्ध करवाने के लिये युवा सशक्तिकरण मिशन बनाया है। इस वर्ष 7.5 लाख युवाओं को कौशल उन्नयन और 7.5 लाख युवाओं को स्व-रोजगार दिलाने का प्रयास किया जायेगा। वर्ष 2019 में 2 अक्टूबर तक ग्रामीण अंचल के सभी घरों में शौचालय होगा। स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाओं के लिये सागर में मेडिकल कॉलेज खोला गया है। इस वर्ष सात नये मेडिकल कॉलेज खोले जायेंगे। राज्य में 5 लाख तक उपचार योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होगा। कार्यक्रम की चर्चा में मुख्यमंत्री ने मासूम बालिकाओं के साथ बलात्कार के दोषी को मृत्युदंड देने के विधेयक को राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिये भेजने की जानकारी दी। उन्होंने कानून एवं व्यवस्था की स्थिति पर बताया कि प्रदेश में कोई बड़ा सूचीबद्ध डकैत गिरोह नहीं है, सिमी का नेटवर्क ध्वस्त हो गया है। नक्सलवाद बालाघाट की सीमा पर थमा है। उन्होंने बताया कि भू क्षेत्र सीमित राज्य होने से समुद्री तट नहीं है। इसके बावजूद प्रदेश में दो ग्लोबल इन्वेस्टर समिट 2014-2016 के दौरान दो लाख करोड़ का निवेश आया है। उन्होंने डेढ़ दशक पूर्व की राज्य की स्थिति को बताते हुए प्रदेश की प्रगति का विवरण दिया। बताया कि राज्य पॉवर सरप्लस स्टेट है। शहरी विकास पर 85 हजार करोड़ रुपये व्यय होंगे। प्रदेश प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क एवं आवास योजनाओं में अव्वल है। पीने के पानी और विद्युत आपूर्ति की बेहतर व्यवस्थाएँ की गई हैं।
मछली पालन और सिंघाड़े की खेती से हर साल 10 लाख आमदनी
26 February 2018
नरसिंहपुर जिले की मछुआ सहकारी समिति सांईखेड़ा के सदस्यों को मछली पालन और सिंघाड़े की खेती से हर साल करीब 10 लाख रूपये की शुद्ध आमदनी हो रही है। मछली पालन विभाग की ग्रामीण तालाबों में मत्स्य पालन की योजना में समिति के 25 सदस्यों को मछली पालन के लिए 6.77 हेक्टर जल क्षेत्र का 10 वर्षीय पट्टा वर्ष 2012-13 में दिया गया था। इन सदस्यों ने मछली पालन विभाग की नाव जल क्रय योजना में चार-चार हजार रूपये के अनुदान और मत्स्य आहार पर 90 प्रतिशत अनुदान का लाभ लेकर मछली पालन शुरू किया। मछुआ सहकारी समिति के सदस्यों ने मछली पालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में मिश्रित कार्प कतला, रोहू, मृगल प्रजाति के मत्स्य बीज का संचयन प्रति हेक्टर 10 से 15 हजार फ्रिंग लिंग की दर से पहले वर्ष से ही शुरू किया। इससे प्रति हेक्टर प्रति वर्ष 1.6 टन तक मछली का उत्पादन होने लगा। इससे समिति सदस्यों को प्रति वर्ष प्रति हेक्टर डेढ़ लाख रूपये तक की आमदनी होने लगी। पट्टे पर दिये गये तालाब से हर साल 8 लाख रूपये का लाभ समिति सदस्यों को मछली पालन से मिलने लगा। समिति सदस्यों ने सिंघाड़ा की खेती भी शुरू कर दी। इससे 50 क्विंटल तक सिंघाड़ा का उत्पादन होने लगा। सिंघाड़ा उत्पादन से प्रति वर्ष 2 लाख रूपये तक की अतिरिक्त आमदनी अब हो रही है। इस तरह मछली पालन और सिंघाड़े की खेती से धीरे- धीरे आमदनी बढ़ते हुए प्रति वर्ष 10 लाख रूपये तक पहुंच गई। समिति अध्यक्ष देवराज कहार बताते हैं कि मछली पालन के लिए तालाब पट्टे पर देने की मध्यप्रदेश सरकार की यह बहुत अच्छी योजना है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मछुआ आवास के लिए प्रति सदस्य 50 हजार रूपये की आर्थिक सहायता भी वर्ष 2015-16 में दी गई। समिति के प्रत्येक सदस्य को मछुआ क्रेडिट कार्ड योजना में मत्स्य पालन व्यवसाय के लिए 10 हजार रूपये भी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की सांईखेड़ा शाखा द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे हैं। आत्मा परियोजना के तहत उत्कृष्ट कार्य के लिए मछुआ सहकारी समिति सांईखेड़ा को 10 हजार रूपये का पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है।
कृषकों की आय दो गुनी करने उद्यानिकी फसलों का रोडमेप तैयार
25 February 2018
कृषकों की आय दोगुनी करने के लिए तैयार रोडमेप पर कार्रवाई करते हुए उद्यानिकी क्षेत्र रकवा लगभग 19 लाख 12 हजार हेक्टेयर हो चुका है। फलस्वरूप सभी मुख्‍य उद्यानिकी फसलों में प्रदेश के किसानों द्वारा सरप्लस उत्पादन किया जा रहा है। उद्यानिकी विभाग द्वारा फसलोत्तर प्रबंधन के लिए अधोसंरचना निर्माण एवं खाद्य प्र-संस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए अनुदान दिए जाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस रणनीति के तहत दो वर्षों में 2 लाख 75 हजार मीट्रिक टन प्याज भण्डारण क्षमता निर्मित की गई। अभी 1 लाख 66 हजार मीट्रिक टन क्षमता के प्याज भण्डारण गृह निर्माणाधीन हैं। नश्वर उत्पादों के भण्डारण के लिये दो वर्षों में 3 लाख 22 हजार मीट्रिक टन कोल्ड स्टोरेज क्षमता विकसित की गई है। उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों के उत्पादों की विपणन व्यवस्था के विशेष प्रयास किये जा रहे है। इसमें उत्पादक संगठनों और स्थानीय कृषकों के समूहों को तकनीक सहायता दी जा रही है। देश-विदेश के विक्रेताओं से संपर्क कराने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। देश-विदेश के खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों एवं क्रेताओं के साथ चर्चा कर प्रदेश में निवेश करने के लिए उन्हें आमंत्रित किया गया है। अभी 1200 से 1300 करोड़ रूपये के अनुबंध निवेश के लिए किये गये हैं। 'नमामि देवी नर्मदे' सेवा यात्रा के दौरान 2 जुलाई 2017 को विभाग द्वारा नर्मदा तट एवं बेसिन क्षेत्रों के 24 जिलों में 14 हजार 422 कृषकों की निजी भूमि पर 11 हजार 104 हेक्टेयर क्षेत्र में 41 लाख 72 हजार फलदार पौधों का रोपण किया गया। इस वर्ष 2 जुलाई 2018 को होने वाले पौध रोपण के लिए विभाग को 75 लाख पौध रोपण का लक्ष्य दिया गया है। जलवायु परिवर्तन के जोखिम को वहन करने तथा वर्ष भर ताजी सब्जियों एवं पुष्पों का निरंतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए संरक्षित खेती की योजना में वर्ष 2016-17 में 103 हेक्टेयर में पाली हाउस/शेडनेट हाउस और 3110 हेक्टेयर में प्लास्टिक मल्चिंग के लिए अनुदान दिया गया। वर्ष 2017-18 में 73 हेक्टेयर में पाली हाउस/ शेडनेट हाउस का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही 3600 हेक्टेयर में प्लास्टिक मल्चिंग पर अनुदान दिया जा रहा है। वर्ष 2018-19 में 1183 हेक्टेयर में कृषकों को पाली हाउस/ शेडनेट हाउस के निर्माण तथा 8500 हेक्टेयर में प्लास्टिक मल्चिंग के लिए अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। पानी का समुचित उपयोग तथा सिंचाई में विद्युत एवं श्रम की बचत कर क्षेत्र एवं उत्पादन में वृद्धि के लिए इस वित्त वर्ष में 41 हजार 882 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सेट लगाए गए हैं। अगले वित्त वर्ष में 52 हजार हेक्टेयर में ड्रिप/स्प्रिंकलर संयंत्र लगाया जाना प्रस्तावित है।
रोशन लाल ने बनाई गन्ना बुवाई की अनोखी "बड चीपर मशीन
25 February 2018
नरसिंहपुर जिले के विकासखंड गोटेगाँव के ग्राम मेख के किसान रोशनलाल विश्वकर्मा ने ऐसी मशीन बनाई है, जिससे खेत में गन्ना की बुवाई में 90 प्रतिशत तक बीज की बचत होती है। मशीन की उपयोगिता को देखते हुए देश के गन्ना उत्पादक उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तामिलनाडु आदि प्रदेशों में ही नहीं, बल्कि ब्राजील, केन्या, इथोपिया जैसे देशों में भी इसकी माँग बढ़ गई है। कृषक रोशनलाल अपनी मशीन बड चिपर के लिए न केवल प्रदेश में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पुरस्कृत हो चुके हैं। इन्हें जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर द्वारा कृषक फैलो सम्मान से भी अलंकृत किया गया है। अभी हाल ही में उन्हें राजस्थान राज्य के उदयपुर में किसान वैज्ञानिक के रूप में सम्मानित किया गया है। रोशनलाल बताते हैं कि गन्ना लगाने की सामान्य पद्धति में सीधे गन्ने के टुकड़ों को खेतों में लगाया जाता है, ऊपर से मिट्टी पूर दी जाती है। इसके बाद इसमें पानी देकर गन्ने को दबाना पड़ता है। इस पद्धति में एक एकड़ में 35 से 40 क्विंटल गन्ना बीज लगता है। इनके द्वारा बनाई गई बड चिपर मशीन से गन्ने के टुकड़ों से केवल उसकी आँख (बड) सुरक्षित निकाल ली जाती है। गन्ने की इसी आँख (बड) को खेत में सीधे लगाया जा सकता है या इस बड से पॉलीथिन में या प्लास्टिक की ट्रे से गन्ने की पौध भी तैयार की जा सकती है। गन्ने की आँख से गन्ने के कल्ले निकलते हैं। बड चिपर मशीन से गन्ना लगाने में केवल गन्ने की आँख वाला छोटा-सा डेढ़ इंच का गन्ने का टुकड़ा ही लगाना होता है। शेष गन्ने का उपयोग गुड या शक्कर बनाने में किया जाता है। इस विधि में एक एकड़ में केवल डेढ़ क्विंटल गन्ना ही लगता है। सामान्य पद्धति से गन्ने के बीजोपचार में अधिक मेहनत लगती है। बड चीपर वाली पद्धति में गन्ने का बीजोपचार आसान हो जाता है। इससे गन्ने में कोई रोग नहीं लगता और अधिक पैदावार होती है। पुरानी पद्धति से गन्ना लगाने में औसतन एक एकड़ में 300 से 400 क्विंटल गन्ना पैदा होता है, वहीं बड पद्धति से लगाने में 400 से 500 क्विंटल गन्ना पैदा होता है। इसके अन्य फायदे भी हैं। खेत में गन्ने के बीज का परिवहन आसान होता है, श्रम की बचत होती है, मजदूर भी कम लगते हैं और किसान की आय में वृद्धि होती है। रोशनलाल ने मशीन का अविष्कार वर्ष 2003 में किया था। वर्ष 2006 से गन्ना किसानों को मशीन देना प्रारंभ किया। इन्होंने इस मशीन का पेटेंट भी करा लिया है। इस मशीन के 3 मॉडल तैयार किये हैं। पहला मॉडल हाथ से चलाने वाली बड चिपर मशीन, दूसरा मॉडल पैरों से चलाई जाने वाली फुट मशीन और तीसरा मॉडल मोटर द्वारा चलित पॉवर मशीन है। गन्ना उत्पादक लोगों की माँग पर मशीन को देश-विदेश भिजवाते हैं। हस्तचलित मशीन केवल 1200 रुपये में उपलबध कराते हैं। बड चिपर की बिक्री से उन्हें साल-भर में करीब 5 लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है। रोशनलाल अब तक 10 हजार से अधिक मशीन देश में और 100 से अधिक मशीन विदेशों में सप्लाई कर चुके हैं।
धान प्रधान बालाघाट जिले में केले की खेती बनी अप्रत्याशित लाभ का जरिया
23 February 2018
बालाघाट जिले में किसान परम्परागत रूप से धान की खेती करते हैं। धान की खेती में अन्य फसलों की तुलना में लागत अधिक आती है और मुनाफा कम ही होता है। इसलिये किसान देवेन्द्र नगपुरे ने धान की खेती को छोड़ कर नगदी फसल केले की खेती को अपना लिया है। एक साल में ही देवेन्द्र ने केले की फसल से भरपूर आय अर्जित कर धान की खेती करने वाल किसानों को नई राह दिखाई है। जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर गोंदिया रोड पर मुख्य सड़क से लगे ग्राम पेंडरई में देवेन्द्र नगपुरे केले की खेती करते हैं। इन्होंने कृषि संकाय में 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई की है और पुस्तकों से मिले ज्ञान का उपयोग अब अपनी केले की खेती में कर रहे हैं। इन्हें उद्यान विभाग के अधिकारियों का मार्गदर्शन मिल रहा है। उद्यान विभाग ने इनके खेत में अनुदान पर ड्रिप सिंचाई सिस्टम लगवाया है। देवेन्द्र ने वर्ष 2016 में रायपुर से केले की जी-9 किस्म के पौधे लगाकर 2 एकड़ खेत में केले की फसल लगाई। इन्हें 9-10 माह में ही डेढ़ लाख रुपये की आय हो गई। कम रकबे की फसल से हुई आय ने देवेन्द्र को केले की खेती में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। वर्ष 2017 में इन्होंने केले की खेती का रकबा बढ़ाकर साढ़े तीन एकड़ कर लिया है। देवेन्द्र के खेतों में लगी केले की फसल में फल आने लगे हैं। इस वर्ष उन्हें कम से कम 5-6 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है। अब देवेन्द्र आने वाले वर्ष में केले का रकबा बढ़ाकर 6 एकड़ तक करने की तैयारी कर रहे हैं। अब वह महाराष्ट्र के जलगांव के केले के पौधे लगायेंगे। इन्होंने पिछले साल अपने खेत में पत्तागोभी एवं मक्का की फसल भी लगाई और डेढ़ लाख रुपये की अतिरिक्त आमदनी पाई। इस वर्ष इन्होंने 10 क्विंटल अरहर की फसल भी ली है। देवेन्द्र ने खेती की नई तकनीक एवं नये तरीकों को सीखने के लिये इंडोनेशिया, सउदी अरब, उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद और अन्य देशों का भ्रमण भी किया है। वह अब भी हर वर्ष अपने दोस्तों के ग्रुप में कृषि के नये तरीके सीखने विदेश भ्रमण पर जाते हैं। देवेन्द्र ने बालाघाट से लगे ग्राम कोसमी में फसलों के बीज, खाद, कीटनाशक दवा और अन्य कृषि आदान सामग्री की दुकान खोली है। किसानों को समय-समय पर जरूरी सलाह भी देते रहते हैं। प्रगतिशील किसान देवेन्द्र खेती से अपने परिवार के लिये आय अर्जित करने के साथ ही गांव के पांच अन्य लोगों को रोजगार भी दे रहे है
पॉली हाउस में खेती से कमा रहे 30 लाख सालाना: 12 बेरोजगारों को दिया रोजगार
21 February 2018
राजगढ़ जिले की नरसिंहगढ़ तहसील के लसूडल्या रामनाथ ग्राम के प्रहलाद शर्मा वर्षो से परम्परागत तरीकों से सोयाबीन,चना और गेहूँ की फसल लिया करते थे। उन्हें इन फसलों से वर्ष भर में ढाई से तीन लाख रुपये तक की आमदनी हो पाती थी। सिंचाई की सुविधा की कमी और मौसम की अनियमितता की वजह से कई बार घाटा भी सहन करना पड़ता था। इस वजह से किसान प्रहलाद ने उद्यानिकी फसल भी लेने का मन बनाया। इसके लिए उन्होंने उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से बातचीत भी की। किसान प्रहलाद ने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजना में पॉली हाउस तकनीक से खेती करना शुरू किया। इसके लिए उन्होंने करीब 2 करोड़ रुपये का ऋण बैंक से लिया। उन्हें ऋण के साथ उद्यानिकी विभाग की योजना में 67 लाख रुपये का अनुदान भी मिला। किसान प्रहलाद ने पॉली हाउस में गुलाब की टॉप सीक्रेट किस्म की खेती प्रारंभ की। इससे उन्हें 18 लाख रुपये का मुनाफा हुआ। अब प्रहलाद के अपने खेत में पॉली हाउस की संख्या 8 है। इनके पास 3.200 हेक्टेयर कृषि भूमि थी। उद्यानिकी फसल के मुनाफे से उन्होंने एक हेक्टेयर भूमि और खरीद ली है। अपनी कृषि भूमि में ही रहने के लिए मकान भी बना लिया है। किसान प्रहलाद पॉली हाउस में गुलाब के फूल के साथ शिमला मिर्च, भिण्डी और ककड़ी की भी खेती कर रहे हैं। प्रहलाद अपने गाँव के अन्य किसानों को भी उद्यानिकी फसल लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे है।
पटेल कृषि फार्म के मार्के से बिक रहा है एप्पल बैर
20 February 2018
मध्यप्रदेश में किसानों को परम्परागत फसल लेने के साथ-साथ उद्यानिकी फसल लेने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। उज्जैन जिले के माकड़ोन टप्पे के ग्राम भगवतपुरा के किसान हुकुम सिंह पटेल ने अपने खेत में उद्यानिकी फसल लगाकर मुनाफा कमाया है। किसान हुकुम सिंह के पास 200 बीघा जमीन है। वे अपनी कृषि भूमि पर परम्परागत सोयाबीन और गेहूँ, चने की फसल लेते रहे हैं। हुकुम सिंह ने परम्परागत फसल के साथ-साथ पिछली बार ढाई बीघा जमीन में एप्पल बेर की वेरायटी लगाई। थाईलैण्ड की इस वेरायटी के बेर में एप्पल का आकार और स्वाद मिलता है। इस बार बेर की फसल अधिक होने पर उन्होंने अनूठे स्वाद वाले इस बेर की पेकेजिंग करने और ब्रॉण्ड नाम से बेचने का निर्णय लिया। उनके ब्रॉण्ड को इंदौर और भोपाल की मण्डियों में अच्छा रिस्पांस मिला। अच्छे स्वाद के कारण 'पटेल कृषि फार्म'' ब्रॉण्ड की पहचान उज्जैन के आसपास की मण्डियों में भी हो गई है। स्थिति यह बनी कि जैसे ही मण्डियों में बेर की गाड़ी पहुँचती है तो वह हाथों-हाथ बिक जाती है। किसान हुकुम सिंह बताते हैं कि थाईलैण्ड की इस वेरायटी बेर को बाजार में 35 से 40 रुपये प्रति किलो के भाव पर खरीदा जा रहा है। उन्होंने बेर की फसल में रासायनिक खाद का भी कम प्रयोग किया है। किसान हुकुम सिंह ने अपने खेत में नये प्रयोग जारी रखते हुए 7 बीघा जमीन में कागज़ी नीबू और 5 बीघा जमीन में सीताफल भी लगाये हैं। हुकुम सिंह बताते हैं कि उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने फलों की खेती लेने में तकनीकी सलाह भी दी है, जो उनकी आमदनी बढ़ाने में कारगर साबित हुई है।
सागर जिले के ओला-वृष्टि प्रभावित खेतों में पहुँचे मुख्यमंत्री श्री चौहान
16 February 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान शुक्रवार को सागर जिले की बीना तहसील के ओलावृष्टि प्रभावित जोद, गिरोल और लहरवास गाँवों में पहुँचे। श्री चौहान ने खेतों में जाकर क्षतिग्रस्त फसलों का मुआयना किया। मुख्यमंत्री ने कृषकों से बात कर उन्हें ढाँढस बँधाते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार आपके साथ है। श्री चौहान ने कहा कि इन परिस्थितियों का मुकाबला मिलकर करेंगे। सभी प्रभावित गांवों का सर्वे करवाया जा रहा है। सर्वे टीम में पटवारी, कृषि विभाग का अमला और गाँव के पंच शामिल होंगे। सर्वे की सूची पंचायत में चस्पा की जाएगी ताकि पूरी पारदर्शिता बनी रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओला-वृष्टि से प्रभावित कृषकों को फसल बीमा राशि सहित 30 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर राहत राशि भी दी जाएगी। कर्ज वसूली स्थगित की जाएगी और ब्याज की शासन द्वारा प्रतिपूर्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि खाद-बीज के लिये किसानों को शून्य प्रतिशत पर ऋण मिलेगा। श्री चौहान ने किसानों को आश्वस्त किया कि ओला-वृष्टि से प्रभावित सभी कृषकों के नुकसान की भरपाई राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। इस मौके पर सांसद श्री लक्ष्मीनारायण यादव, अन्य जन-प्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी तथा किसान मौजूद थे।
किसान दुखी न हों, फसल नुकसान की पूरी भरपाई की जायेगी - मुख्यमंत्री श्री चौहान
14 February 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ओला प्रभावित किसानों से अपील की है कि वे संकट के समय किसी प्रकार की चिंता नहीं करें। फसल नुकसान की पूरी भरपाई कर दी जायेगी। उन्होंने प्रभावित किसानों के नाम जारी अपील में कहा कि जब असमय फसल को नुकसान होता है तो जीवन प्रभावित होता है। बच्चों का भविष्य प्रभावित होता है, लेकिन चिंता करने और शोक मनाने की जरूरत नहीं है। राहत की राशि और फसल बीमा की राशि मिलाकर फसल नुकसान की पूरी भरपाई कर दी जायेगी। संकट के समय सरकार हर पल किसानों के साथ है। किसानों को किसी प्रकार का कष्ट नहीं उठाने देंगे। किसान भाई अपने चेहरों पर उदासी नहीं लायें। उन्हें दुखी होने की जरूरत नहीं है। श्री चौहान ने कहा कि ओलावृष्टि से हुए फसलों के नुकसान का पारदर्शिता के साथ पूरा आकलन किया जायेगा। नुकसान के आकलन के लिये सर्वेक्षण दल बनाये जा रहे हैं और नुकसान के आकलन को पंचायतों में चस्पा करने की कार्यवाही शीघ्र शुरू की जाएगी। यदि आकलन पर किसी को आपत्ति होती है तो तत्काल सुधार भी किया जायेगा। उन्होंने कहा कि पूरी सरकार किसानों के साथ है। किसान को नुकसान नहीं उठाने देंगे। मुख्यमंत्री ने निवास पर उच्च-स्तरीय आपात बैठक बुलाकर ओला प्रभावित क्षेत्रों में हुए फसल नुकसान की जानकारी ली। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार 13 जिलों के 621 गाँवों में ओला-वृष्टि से नुकसान हुआ है। भोपाल संभाग में भोपाल, विदिशा, सीहोर जिलों में ज्यादा नुकसान हुआ है। सिवनी, छिंदवाडा, बालाघाट, देवास एवं होशंगाबाद जिलों में भी ज्यादा नुकसान की जानकारी है। लगभग 27 हजार हेक्टेयर क्षेत्र ओला-वृष्टि से प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री ने पटवारी, ग्राम सेवक, कृषि विभाग के मैदानी अमले और जन-प्रतिनिधियों का दल बनाकर तत्काल फसल नुकसान का सर्वे कार्य शुरू करने के निर्देश दिये हैं। बैठक में मुख्य सचिव श्री बी. पी. सिंह, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री ए.पी. श्रीवास्तव, कृषि उत्पादन आयुक्त श्री पी.सी. मीना, प्रमुख सचिव कृषि श्री राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव राजस्व श्री अरूण पांडे, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री अशोक बर्णवाल और श्री एस.के. मिश्रा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे
वन मंत्री डॉ. शेजवार ने किया ओला-वृष्टि प्रभावित गांवों का दौरा
13 February 2018
वन, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने आज रायसेन जिले के ओला-वृष्टि प्रभावित गांवों का दौरा किया। डॉ. शेजवार ने ग्राम भर्तीपुर, मादा, सलामतपुर, नरोदा, मुरलीखेड़ी, धनियाखेड़ी, ऐरग, अन्होरी, बारला, सकतपुर, बेलना और महेश्वरी गांव में ओले से क्षतिग्रस्त फसलों का जायजा लिया और किसानों से बात की। वन मंत्री ने किसानों से कहा कि मुश्किल की घड़ी में सरकार किसानों के साथ है। उन्होंने राजस्व अधिकारियों से फसल क्षति का आंकलन शीघ्र करवा कर मुआवजा की कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उद्यानिकी प‍द्धति से बंजर भूमि पर हो रही अनार की भरपूर खेती
13 February 2018
बड़वानी जिले के ग्राम बिल्वाडेब के मोहन अगल्चा की तीन एकड़ बंजर भूमि गाँव से कुछ दूर स्थित है। इस भूमि पर मोहन जो कुछ भी लगाते थे, उसका परिणाम सिर्फ शून्य ही होता था। लागत भी नहीं निकलती थी। इस कारण ग्रामवासी इस भूमि की तरफ देखना भी पसंद नही करते थे अब स्थिति बदल गई है। इसी भूमि से मोहन अगल्चा सालाना 5 लाख रूपये कमा रहे हैं। अब इस कमाई से उन्होंने गाँव में अपना दो मंजिला पक्का मकान भी बनवा लिया है। मोहन आज खुशी-खुशी बताते हैं कि सन 2013-14 में जब उद्यानिकी विभाग के पदाधिकारियों ने उनकी इस बंजर भूमि पर अनार की खेती से लखपति बनने की बात कही थी, तब उन्होने भी यकीन नही किया था। उद्यानिकी विभाग ने उन्हें अनार के 880 पौधे तथा ड्रिप लगाने का लाभ दिया, तो एक साल में ही भरपूर उत्पादन देखकर आश्चर्यचकित हुए। अनार के पौधों ने तेजी से बढ़ते हुये दूसरे साल ही उन्हें 80 हजार रूपये का फायदा दिया। आज स्थिति यह है कि उनकी इस बंजर भूमि पर अनार के पौधों में 600-600 ग्राम के लाल सूर्ख अनार पैदा हो रहे हैं। अनार की खेती से ही मोहन को पिछले वर्ष लगभग 5 लाख रूपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है । कृषक मोहन अगल्चा बताते हैं कि इस वर्ष अभी अनार के पौधों पर अत्यधिक फूलन है। उद्यानिकी विभाग की सलाह इस बार उनके खेत पर 700-700 ग्राम के अनार लगे हैं। इससे उन्हें 7 लाख रूपये का शुद्ध लाभ मिलने की पूरी आशा है। अनार की खेती से लखपति बने मोहन ने अपने अनार के बगीचे में पहली बार मधुमक्खी पालन की एक यूनिट भी आत्मा परियोजना के माध्यम से स्थापित की है। अब कृषक मोहन अगल्चा अनार उत्पादन में प्रदेश में कीर्तिमान स्थापित करने में तल्लीन हो गये हैं।
सरकार किसानों की सुनती भी है और किसानों के लिये करती भी है
12 February 2018
सरकार किसानों की सुनती भी है और किसानों की भलाई के लिये करती भी है। आज जम्बूरी मैदान में किसान सम्मेलन में भाग लेने आये किसानों ने यह बात कही। सीहोर जिले के शिकारपुर के किसान तिलकराम मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की किसानों के लिए की गई घोषणाओं से खुश हैं। उनका कहना है कि गेहूँ के समर्थन मूल्य पर 200 रुपये की प्रोत्साहन राशि से उन्हें लाभ मिलेगा। खिलचीपुर तहसील जिला राजगढ़ के किसान श्री रामप्रसाद और श्री भंवरलाल किसान सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा की गई घोषणाओं को किसानों की भलाई करने वाली सरकार के रूप में देखते हैं। उनका कहना है कि खेती में लागत बढ़ी है पर सरकार ने गेहूँ समर्थन मूल्य पर प्रोत्साहन राशि देकर बड़ी राहत दी है। शाजापुर जिला तहसील कालापीपल के गाड़ियाखेड़ी ग्राम के कृषक श्री भंवरलाल किसान सम्मेलन की घोषणाओं से खुश हुए। उन्होंने कहा कि इस साल प्रति क्विंटल गेहूँ के समर्थन मूल्य की घोषणा पर 200 रुपये की प्रोत्साहन राशि किसानों के लिये बहुत बड़ी घोषणा है। श्री भंवरलाल कहते हैं कि वह गेहूँ की फसल सबसे ज्यादा क्षेत्र में लेते हैं। काकड़िया पंचायत के ग्राम रसूलिया जिला भोपाल निवासी किसान उमराव सिंह, भानपुरा ग्राम जिला भोपाल के किसान श्री काले खाँ भी कहते हैं कि सरकार न केवल किसानों की सुनती है बल्कि किसानों की भलाई के लिये काम भी करती भी है। ग्राम मेंगरा नवीन के कृषक दयाल सिंह गुर्जर ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कृषकों के दर्द को समझकर इसे दूर करने की घोषणाएँ की हैं। उन्होंने कहा कि भावांतर भुगतान योजना सही मायने में तभी सफल हो सकेगी जब किसानों को उनके अनाज का समय से भुगतान मिले। उन्होंने अनाज भंडारण से एक माह के अंतराल का ब्याज सरकार द्वारा दिए जाने की सराहना की। ग्राम वागसी के श्री नारायण सिंह गौर ने कहा कि भगवान देता है तब छप्पर फाड़कर देता है। यह बात आज जम्बूरी मैदान पर किसान सम्मेलन में सही साबित हुई जिसमें किसानों की हितैषी, किसानों के लिये और किसानों के समर्थन से बनाई जा रही मुख्यमंत्री उत्पादकता योजना, मुख्यमंत्री ऋण समाधान योजना, एक हजार कस्टम हायरिंग सेंटर, कृषक युवा उद्यमी योजना की घोषणा से साबित हुई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को हजारों परिवारों की दुआएँ मिलेंगी। अनुसूचित जाति के कृषक श्रीराम ने कहा कि 'मुख्यमंत्री ने हमें बहुत कछु दओ है वे सदा सुखी रहें''। ग्राम सुमेर के कृषक श्री विश्वनाथ ने बताया कि किसानों को उनकी फसल की बीमा राशि, समय पर खाद अनाज सामग्री और उनकी फसल की उपज का वाजिब मूल्य मिलता रहे, हम इसी में सुखी हैं। किसानों को खसरे की नकल, सीमांकन, कृषि उपज मंडियों में ग्रेडिंग व्यवस्था, खेती को लाभ का धंधा बनाना, एक एकड़ में उपज की 25 हजार कीमत की फसल मिलना और सिंचाई का निरंतर रकबा बढ़ाना जैसे अच्छे कार्यों के दूरगामी परिणाम होंगे। यह सम्मेलन किसानों के कल्याण का इतिहास बनेगा। भोपाल के जंबूरी मैदान में किसान महा-सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के हित में आज कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं। महा-सम्मेलन में शामिल हुए किसानों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसानों को अपनी उपज 4 माह तक भण्डारण की सुविधा मिलने से उन्हें अब उपज के वाजिब दाम मिल सकेंगे और भण्डारण का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। राजगढ़ जिले के राजेड़ी ग्राम के मांगीलाल खारपा और महेन्द्र सिंह ने खेती के साथ गौ-पालन को बढ़ावा देने के लिये मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अब वर्षभर में आचार्य विद्यासागर गौ-संवर्धन योजना में 15 हजार हितग्राहियों को लाभ दिया जायेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जन-भागीदारी से ग्राम पंचायत स्तर तक गौ-शालाएँ चलाई जायें, तो उसके अच्छे परिणाम सामने आयेंगे। भोपाल जिले के बरखेड़ा पठानी के किसान गजेसिंह ने किसान क्रेडिट कार्ड को रूपे कार्ड में परिवर्तित करने के निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त की। इस निर्णय से किसानों को जल्द नगदी मिल सकेगी और उसका उपयोग खेती के लिये किया जा सकेगा। रायसेन जिले के साँची विकासखण्ड के चिरौली गाँव के प्रहलाद सिंह ने प्याज को भावांतर योजना में शामिल करने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से प्याज की फसल पर किसानों को सही दाम नहीं मिल पा रहे थे। इस निर्णय से प्याज उत्पादक किसानों को राहत मिलेगी। पन्ना जिले के गुन्नौर तहसील के ग्राम मैना के किसान रामगोविंद ने कस्टम प्रोसेसिंग और सर्विसिंग सेंटर संचालन की जिम्मेदारी किसानों को सौंपे जाने पर खुशी व्यक्त की है। इसी तरह शाजापुर के ग्राम गोयला और ग्राम वेदाननगर के किसानों ने बँटाईदार किसानों को राज्य सरकार द्वारा दी गई सुविधाओं को महत्वपूर्ण बताया। बैतूल जिले के मुलताई तहसील के प्रभातपट्टन् ब्लाक के ग्राम धावला और हिरड़ी निवासी किसान भाई भीमा साहू और गुलचंद का मुख्य मंत्री द्वारा भावांतर के तहत किसानों को फसलों को बेहतर दाम दिलवाने के लिए शासकीय खर्चे पर गोदाम/वेयरहाउस में फसल रखने की घोषणा पर एक साथ प्रतिक्रिया थी कि 'साब जासे तो किसान जी जाएंगा बहुत बड़िया बात कही है मुख्यमंत्री ने'। शाजापुर जिले के ग्राम मौजीपुर निवासी माँगीलाल और मेहरबान सिंह तो इतने प्रसन्न नजर आए कि बोले 'राजा जी की जय हो साब, छोटा कास्तकार तो बहुत परेशान था, अब तो मदद मिल जाएंगी।
इस वर्ष गेहूं का समर्थन मूल्य 2000 रूपये प्रति क्विंटल करेंगे
12 February 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने के लिये मुख्यमंत्री कृषि उत्पादकता प्रोत्साहन योजना की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि इस योजनांतर्गत वर्ष 2017 में जिस समर्थन मूल्य पर गेहूँ और धान खरीदा गया था, उसमें 200 रूपये प्रति क्विंटल जोड़कर किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस वर्ष प्रधानमंत्री द्वारा गेहूँ का समर्थन मूल्य 1735 रूपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, जिसे इस योजनांतर्गत प्रोत्साहन राशि जोड़कर 2000 रूपये प्रति क्विंटल किया जायेगा। उन्होंने कहा कि इसी तरह अगले वर्ष धान में भी 200 रूपये प्रति क्विंटल बोनस राशि देंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि रबी 2016-17 में समर्थन मूल्य पर 67.25 लाख मैट्रिक टन गेहूँ का ई-उपार्जन किया गया। इसमें 7.38 लाख किसानों को 1340 करोड़ रूपये का भुगतान होगा। इसी तरह खरीफ 2017 में समर्थन मूल्य पर 16.59 लाख मैट्रिक टन धान ई-उपार्जन किया गया, जिसका 2.83 लाख किसानों को 330 करोड़ रूपये का भुगतान होगा।
बाजार के उतार-चढ़ाव और मंदी से किसानों को बचाने में सक्षम है भावांतर योजना
12 February 2018
जनसंपर्क, जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज दतिया जिले ग्राम कुरथरा में किसानों से भेंट की। उन्होंने इस अवसर पर बताया कि सूखा राहत राशि के रूप में कुरथरा ग्राम के 1324 किसानों को 62 लाख 20 हजार 448 रुपए प्राप्त होंगे। उन्होंने बताया कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। जरूरत इस बात की है कि किसान भाई आगे बढ़कर योजनाओं का लाभ लें। जनसम्पर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि भावांतर भुगतान योजना मध्यप्रदेश सरकार की अनोखी योजना है। योजना के तहत् बाजार के उतार-चढ़ाव और मंदी से किसानों को बचाने की व्यवस्था की गई है। यदि बाजार में किसान की फसल कम दामों पर बिकती है तो मध्यप्रदेश सरकार किसान की फसल का मूल्य तथा समर्थन मूल्य के भाव का अंतर किसान के खाते में जमा करेगी। किसान को किसी भी तरह से परेशान नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार एक रुपए किलो गेहूं, चावल, नमक स्कूल जाने पर बच्चों को यूनिफार्म, साईकिल, मुफ्त में किताबें दे रही है। कार्यक्रम में अनेक ग्रामीणजन एवं जनप्रतिनिधि उपस्थिति थे।
ओलावृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई होगी : मुख्यमंत्री श्री चौहान
11 February 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ओलावृष्टि प्रभावित क्षेत्रों के कलेक्टरों को तत्काल फसल हानि का आकलन कराने के निर्देश दिये हैं। श्री चौहान ने प्रदेश के कई जिलों में ओलावृष्टि होने की सूचना मिलने पर संबंधित जिलों के कलेक्टरों से जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किसान भाईयों को आश्वस्त किया है कि ओलावृष्टि से फसलों की क्षति की भरपाई की जायेगी। उन्होंने कहा है कि किसान भाई चिंता नहीं करें। संकट की घड़ी में सरकार सदैव की तरह उनके साथ है। मुख्यमंत्री ने ओलावृष्टि से प्रभावित जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि फसल के नुकसान के मूल्यांकन के लिये तत्काल टीमें भेजकर हानि का आकलन करवायें ताकि समय पर किसानों को उचित मुआवजा दिया जा सके।
किसानों को सिंचाई सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता : मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र
9 February 2018
जनसम्पर्क , जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने कहा कि किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों पर कोई उपकार नहीं कर रही, बल्कि अपनी जिम्मेदारी निभा रही है। डॉ. मिश्र ने दतिया जिले के ग्राम भागौर में किसानों को संबोधित करते हुए कही। जनसम्पर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि भागौर में 926 किसान है जिन्हें 59 लाख 98 हजार 246 रुपए की सूखा राहत राशि मिलेगी। उन्होंने बताया कि अभी तक 517 किसानों ने ही अपने कागज जमा किए है, उन्हें सूखा राहत राशि दी जा रही है। उन्होंने बाकी किसानों से भी अपील की कि वे अपने कागज पटवारी अथवा तहसीलदार को प्रदान करें ताकि उन्हें भी यह राशि शीघ्र दी जा सके। उन्होंने कहा कि भागौर के अधिकांश मौजे में सिंचाई की सुविधा मिल चुकी है। खैरी नहर के चालू होने पर शेष रकबे में भी सिंचाई- सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी। उन्होंने कहा कि 35 गाँव में पानी की सबसे ज्यादा किल्लत थी। सतही नल-जल योजना के माध्यम से यह समस्या अब दूर हो गई है। जनसम्पर्क मंत्री ने प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना सौभाग्य की जानकारी देते हुए बताया कि हर घर में निःशुल्क विद्युत कनेक्शन दिया जायेगा। जनसम्पर्क मंत्री ने किसानों से कहा कि वह भावांतर में पंजीयन जरूर कराएं ताकि उन्हें चना, मसूर, सरसों, प्याज आदि के उचित दाम मिल सके। उन्होंने बीमा योजना में भी पंजीयन कराने की अपील की। कार्यक्रम में अनेक जनप्रतिनिधि और ग्रामवासी उपस्थित थे।
257 कृषि उपज मंडियों में किसानों को मिल रहा रियायती दर पर भोजन aa
8 February 2018
प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में फसल बेचने के लिये आने वाले किसानों को मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा अनेक तरह की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। किसानों को अपनी फसल बेचने के बाद सुविधाजनक तरीके से कृषि उपज मंडी परिसर में भोजन मिल सके, इसके लिये किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने मंडी प्रांगण में ही रियायती दर पर भोजन योजना संचालित की है। रियायती दर भोजन योजना में प्रदेश की 257 कृषि उपज मंडियों में किसानों को 5 रुपये थाली की दर पर भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है। मंडी बोर्ड ने योजना के संचालन के लिये एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि अनुदान के रूप में कृषि उपज मंडियों को दी है। किसानों की रियायती दर पर भोजन व्यवस्था प्रदेश की 'क' और 'ख' श्रेणी की मंडी समितियों द्वारा स्वयं के स्त्रोतों द्वारा चलायी जा रही है। जबकि 'ग' और 'घ' श्रेणी की मंडियों में भोजन व्यवस्था के लिये राज्य सरकार द्वारा अनुदान राशि दी जा रही है। कृषि विपणन पुरस्कार योजना प्रदेश के किसान अपनी उपज को मंडी परिसर में ही लाकर बेचें, इसके लिये मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा कृषि विपणन पुरस्कार योजना चलाई जा रही है। योजना में कृषि उपज मंडी समितियों में वर्ष में दो बार नर्मदा जयंती और बलराम जयंती के मौक पर ड्रा निकाले जाते हैं। प्रदेश की 'क' श्रेणी की मंडी में बम्पर ड्रा पर विजेता किसान को 35 हार्स पावर का ट्रेक्टर और 'ख', 'ग' और 'घ' श्रेणी की मंडी में ड्रा के अनुसार विजेता किसान को 50 हजार रुपये मूल्य तक के कृषि यंत्र दिये जाते हैं। इसके अलावा मंडियों में किसानों को नगद पुरस्कार भी दिये जा रहे हैं। पिछले दो सालों में 880 किसानों को डेढ करोड़ रुपये के पुरस्कार प्रोत्साहन स्वरूप दिये गये हैं। प्रदेश में मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड तीन स्तरीय संस्था है जिसका मुख्यालय भोपाल में और 7 आँचलिक कार्यालय भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, जबलपुर एवं रीवा में हैं। प्रदेश में 257 मंडियां और 287 उप मंडियां कार्यरत हैं। प्रदेश में हॉट-बाजारों की संख्या 1321 है।
सर्वाधिक क्षेत्र में जैविक खेती करने वाला राज्य बना मध्यप्रदेश : राज्य मंत्री श्री सारंग aa
8 February 2018
सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री विश्वास सारंग ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश में सर्वाधिक क्षेत्र में जैविक खेती करने वाला राज्य है। प्रदेश के एक लाख 48 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती हो रही है। श्री सारंग आज भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान भोपाल में 'खाद्य एवं पर्यावरण सुरक्षा हेतु जैविक अपशिष्ट रिसाईक्लिंग' विषय पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ कर रहे थे। राज्य मंत्री श्री सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का अग्रणी कृषि प्रदेश है। प्रदेश में कृषि विकास की दर 9.7 प्रतिशत का आकड़ा पार कर चुकी है। उन्होंने कहा कि खेती से उत्पन्न फसल के अपशिष्टों के सही उपयोग का उपयुक्त विकल्प जैविक खेती है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उरर्वकों के बढ़ते बाजार मूल्य के चलते जैविक खेती से ही खेती की लागत कम करने के साथ मृदा, जल और पर्यावरण का सुरक्षित संवर्धन संभव है। श्री सारंग ने कहा कृषि से निकलने वाले अपशिष्टों का आसान तकनीक के माध्यम से कम्पोस्ट, जैव ईधन और बायो गैस उत्पादन में उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने वैज्ञानिकों एवं किसानों के बीच वैचारिक चर्चाओं की जरूरत बताई। सेमिनार में नरेन्द्र देव कृषि विश्वविद्यालय फैजाबाद के पूर्व उप-कुलपति डॉ. एस.एस. खन्ना, राज माता विजया राजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के डॉ. ए.के. सिंह, ए.डी.जी. आई.सी.ए.आर. डॉ. एस.के. चौधरी, आई.आई.एस.एस. भोपाल के निर्देशक डॉ. अशोक के. पात्रा, वैज्ञानिक और किसान मित्र मौजूद थे।
भावांतर भुगतान योजना में 10.58 लाख किसानों को 1450 करोड़ का भुगतान aa
7 February 2018
मध्यप्रदेश में खरीफ-2017 में भावांतर भुगतान योजना में किसानों को उनकी उपज का मण्डियों में हुए उतार-चढ़ाव के अंतर का भुगतान किया जा रहा है। प्रदेश में भावांतर भुगतान योजना में 10 लाख 58 हजार किसानों को 1449 करोड़ 91 लाख रुपये का भुगतान किया जायेगा। किसानों को जनवरी के मक्का, फरवरी, मार्च और अप्रैल के तुअर का भी भावांतर भुगतान योजना में लाभ दिया जायेगा। अक्टूबर-2017 में मण्डियों में फसल बेचने वाले एक लाख 36 हजार किसानों को भावांतर भुगतान योजना में 146 करोड़ 73 लाख रुपये का भुगतान किया गया। नवम्बर माह में 5 लाख 26 हजार किसानों को 773 करोड़ 32 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। दिसम्बर माह में तीन लाख 97 हजार किसानों द्वारा बेची गई कृषि उपज का भुगतान 620 करोड़ 75 लाख रुपये किसानों के बैंक खातों में 12 फरवरी, 2018 को किया जायेगा।
जनसम्पर्क मंत्री ने शिक्षक बनकर दतिया के ग्रामों में किसानों को समझाई भावांतर भुगतान योजना aa
7 February 2018
जनसम्पर्क, जल-संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र एक शिक्षक की तरह किसानों को भावांतर भुगतान योजना के बारे में समझा रहे हैं। डॉ. मिश्र ने आज दतिया जिले के विभिन्न ग्रामों में पहुँचकर आम नागरिकों विशेष तौर पर किसानों से रू-ब-रू होकर उन्हें भावांतर भुगतान योजना सहित अन्य योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। जनसम्पर्क मंत्री इसके पहले भी अनेक ग्रामों में किसानों को भावांतर भुगतान योजना के विभिन्न लाभकारी प्रावधानों की जानकारी दे चुके हैं। जनसम्पर्क मंत्री ने दतिया जिले के ग्राम बरगांय, ग्राम जिगना और सोनागिर पहुँचकर ग्रामवार भावांतर भुगतान योजना में लाभान्वित किसानों की संख्या और दी जाने वाली राशि की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रबी के लिए नवीन पंजीयन 12 फरवरी से किए जाएंगे। किसानों द्वारा सूखा राहत की राशि के लिए पटवारी अथवा तहसीलदार को आधार नम्बर, मोबाइल नम्बर आदि की जानकारी भी प्रदान की जानी चाहिए। उन्होंने सिनावल, सेवनी, मुरेरा आदि ग्रामों में लाभान्वित हितग्राहियों को भी जानकारी प्रदान की। जनसम्पर्क मंत्री ने किसानों से कहा कि वे आगे बढ़कर इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ लें। उन्होंने किसानों को बताया कि योजना में किसानों को चने के लिए 4400 रुपए और प्याज के लिए 800 रुपए प्रति क्विंटल राशि का भुगतान किया जाएगा। जनसम्पर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने सौभाग्य योजना की भी जानकारी दी। उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि योजना में प्रत्येक व्यक्ति को नि:शुल्क विद्युत कनेक्शन दिया जा रहा है। हर घर तक सहज, सरल रूप में योजना का लाभ पहुँचाने के लिए राज्य सरकार संकल्पबद्ध है। सभी ग्रामों में जनसम्पर्क मंत्री का स्वागत किया गया। जनसम्पर्क मंत्री ने ग्राम डांग करैरा का दौरा भी किया।
किसानों को लागत का डेढ़ गुना देने की व्यवस्था विचाराधीन: मंत्री डॉ.मिश्र aa
6 February 2018
जनसम्पर्क, जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने दतिया जिले के विभिन्न ग्रामों में पहुंचकर किसानों को राहत राशि, सौभाग्य योजना में नि:शुल्क विद्युत कनेक्शन आदि योजनाओं की जानकारी दी। डॉ. मिश्र सर्वप्रथम ग्राम बहादुरपुर पहुंचे। उन्होंने किसानों को बताया कि केन्द्र सरकार शीघ्र ही इस प्रकार की व्यवस्था कर रही है कि किसानों को उनकी फसलों में लगी लागत की डेढ़ गुनी कीमत मिल सके। यदि फसल की कीमत कम मिलती है तो भावांतर भुगतान की तर्ज पर राशि प्रदान की जाएगी। जनसम्पर्क मंत्री ने बताया कि बहादुरपुर में 536 किसानों को 42 लाख 10 हजार 52 रूपये और महाराजपुर में 292 किसानों को 15 लाख 72 हजार रूपये की राशि दी जाएगी। निरावल और मकौनी पहुंचे जनसम्पर्क मंत्री ग्राम निरावल में जनसम्पर्क मंत्री ने ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राहत राशि के तहत निरावल में 479 किसानों को 19 लाख 20 हजार रूपये, बिड़निया में 318 किसानों को 19 लाख 56 हजार भवानीपुर में 344 किसानों को 15 लाख 30 हजार मकौनी में 424 किसानों को 20 लाख 24 हजार रूपये की राशि और खैरी के 145 किसानों को 14 लाख 34 हजार की राशि मिलेगी। चिरूला में मोटर साईकिल से पहुंचे डा.मिश्र किसानों के दुख-दर्द में शामिल होने डॉ. नरोत्तम मिश्र ग्राम चिरूला मोटर साईकिल से पहुंचे। उन्होंने किसानों को बताया कि चिरूला में 989 किसानों को 42 लाख 68 हजार रूपये की राहत राशि वितरित की जाएगी। करारीखुर्द में 528 किसानों को 28 लाख 58 हजार रूपये की राशि तथा विल्हार में 75 किसानों को 6 लाख 45 हजार रूपये की राहत राशि दी जा रही है।
‘‘ग्रामीण भारत के ख्वाबों की नई इबारत, किसान को सूखा से मुक्ति’’
4 February 2018
हमने ग्रामीण भारत की बुनियादी जरूरतों पर बेरूखी बरती। महत्वाकांक्षी योजनाओं को गले लगाया। इनमें उदारीकरण ने तड़का लगा दिया। आर्थिक उदारीकरण के साथ गांव, गरीब और किसान का चेहरा आंकड़ों के जंगल में खोे गया। बाजारवाद परवान चढ़ा जिससे गांवों की अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण के प्रयास के साथ ही गांव, गरीब और किसान रोग बढ़ता ही गया ज्यांे-ज्यों दवा की के पशोपेश में पड़ता रहा। प्रिवेन्सन इज वेटर देन क्योर सिर्फ नारा बनकर रहा गया। राजनैति दलों ने चुनावी आहट के साथ कर्ज माफी देकर तात्कालिक लाभ तो उठाया लेकिन स्थाई समाधान की ओर ध्यान देने के बजाय अनुदान की परिपाटी आरंभ कर दारोमदार बिचैलियों के हाथ में सौंप दिया। बजट सस्ते और महंगे उत्पाद की घोषणा तक सिकुड़ कर रह गया। देश में जीएसटी लागू होने के बाद उत्पाद और सेवा के सस्ते महंगे होने का तारतम्य खतम होने से बजट पर निगाह रखने वालो को हताशा हुई। वास्तव में बजट आर्थिक सुधार केंद्रित हो गया। स्थाई समाधान बजट की फितरत बना दी गई। यहाॅ सामूहिकता की दृष्टि के अभाव में व्यक्तिनिष्ठ समुदाय की खुशियां गायब हो गई। गांवों की अधोसंरचना, किसानों को साख सुविधा, किसान के उत्पाद के समर्थन मूल्य में डेढ़ गुना वृद्धि, हेल्थ कव्हर जैसी योजनाएं बजट की शीर्षक बनकर उभरी। बजट के बाद जब-जब शेयर बाजार गुलजार होता था। बाजार में खुशियां मनाई जाती रही है लेकिन बजट में दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ पर कर लगाना अर्थजगत को माफिक नहीं आने से उसने बजट की गांव, गरीब, किसान के हक में आई राहतों को नजर अंदाज करके हायतोबा मचा दी। आखिर इस मानसिकता को क्या कहा जायेगा। दरअसल बजट में पुराने ख्वाबों को नई इबारत में उतारा गया है। ग्रामोन्मुखी पहल पर जो सराहना मिलना थी, नजर नहीं आई लेकिन आगाज अच्छा है तो अंजाम भी भला होगा इस सकारात्मक सोच में भी कृपणता देखी जा रही है। अर्थशास्त्र की सम्यक दृष्टि से देखा जाये तो मानना पड़ेगा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी कदाचित पहले ऐसे राजनेता हैं जिन्होंने अपने चुनावी बजट को देश के दीर्घकालीन हितों को समर्पित किया है। वाहवाही लूटने का अवसर खोजने की तनिक भी परवाह नहीं की। इसके लिए श्री नरेंद्र मोदी और श्री अरूण जैटली वास्तव में बधाई के पात्र हैं जिन्होंने कहा था कि चुनाव जीतने के लिए राष्ट्रहित को कुर्बान नहीं किया जा सकता है। वे अपने कथन पर सोलह आने खरे उतरे हैं। इसे दार्शनिक भाव से उच्च विचार कह कर हमने इतिश्री मान ली। वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली ने 24.42 लाख करोड़ रू. का बजट पेश करते हुए किसानों पर रहम करते हुए कहा है कि उसे लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य सुनिश्चित किया जायेगा। कृषि विज्ञानी डाॅ.स्वामी नाथन ने भी इस घोषणा को किसानों की आकंाक्षा के अनुकूल बताते हुए बजट को किसानोन्मुखी बताया है तथापि उन्होंने कहा है कुछ कसर और पूरी की जा सकती थी। किसानों को संस्थागत कर्ज की राशि 11 लाख रू. कर दी गई है। किसान और गरीब दोनों की सेहत पर श्री नरेंद्र मोदी सरकार की नजर गड़ी हुई है। ऐसे में जब बाजार मायूस है और दलाल स्ट्रीट में कारपोरेट सेक्टर से इसे ब्लेक फ्रायेड की संज्ञा दे रहा है तो विपक्ष का यह इलजाम तो मोदी ने झूठा साबित कर दिया है कि एनडीए सरकार उद्योग पतियों की हित चिन्तक है, यह सूटबूट की सरकार है। किसानों पर करम से यही अर्थ निकलता है कि सरकार ने स्वीकारा है कि देश की 65 प्रतिशत आबादी का खेती मूलाधार है। खेती की सेहत सुधरेगी तो अर्थव्यवस्था अपने आप सशक्त होगी। जहाॅ बजट में मध्यम वित्त वर्ग नौकरी पेशा को राहत न देने का सवाल है तो समझने की बात है कि वह आंकड़ों का खेल बन कर रह जाता। इस हाथ दिया उस हाथ टेक्स का स्लेब बदलकर ले लिया होता। बजट में कृषि क्षेत्र में 11 लाख करोड़ रू. क्रेडिट कार्ड के जरिए जरूरत मंद किसानों को कर्ज के रूप में हासिल होगा। सभी फसलों को प्रोत्साहन देते हुए लागत मूल्य का डेढ़ गुना मूल्य सुनिश्चित होगा। इससे अब वे माटी मोल अपनी जिन्स बेचने के लिए लाचार नहीं होंगे। मंडियों को ई प्लेटफार्म से जोड़ा गया है। इससे किसान को बेहतर विपणन सेवा मिलेगी। देश की जिस मंडी में पुसावेगा किसान जिन्स बेच सकेगा। उसके खाते में राशि जमा हो जायेगी। लागत मूल्य के साथ मुनाफा उनकी हथेली पर रखा जायेगा। अधोसंरचना विकास के लिए 5.97 लाख करोड़ रू. मिलेगा। 3 लाख किलोमीटर सड़के बनेगी। दो लाख करोड़ रू. स्मार्ट सिटी विकास के लिए मिलेंगे। सेहत लाख नियामत। दस करोड़ गरीब परिवारों के लिए पांच लाख करोड़ रू. सलाना स्वास्थ्य बीमा के लिए मिलेगा। क्षय रोग पीड़ितों को 500 रू. माहवार पौष्टिक आहार के लिए दिया जायेगा। हर परिवार को बीमारी के इलाज पर 5 लाख रू. सीमा में इलाज की सुविधा होगी। इसके लिऐ रोगी का आधार कार्ड ही ब्लैंक चेक होगा। अब ब्लेक बोर्ड की जगह डिजीटल बोर्ड लेगा। एक लाख करोड़ रू. उच्च शिक्षा में लगी संस्थाओं के इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए मिलेगा जिससे इनका स्तर विश्वस्तरीय बनेगा। लघु मध्यम उद्योगों के लिए 3794 करोड़ रू. मिलेंगे। 250 करोड़ रू. तक का कारोबार करने वाले उद्योगों को 25 प्रतिशत कर देना होगा। इस सीमा को बढ़ाये नहीं जाने से कारपोरेट घराने सरकार के बजट को हताशाजनक बता रहे हैं। विपक्ष का ध्यान इस ओर जाता तो उन्हें अपने कथन और आरोप की अतिश्योक्ति का आभास जरूर होगा, लेकिन इसकी अपेक्षा फिलहाल खुदगर्ज राजनेताओं से करना व्यर्थ है। भारत ने विश्व मंच पर बदलते मौसम की क्रूरता कम करने के प्रयासों में अग्रणी होने का संकल्प लिया। इसके लिए उज्जवला योजना का विस्तार एक प्रयास हैं आठ करोड़ महिलाओं को गैस कनेक्शन निशुल्क दिया जायेगा। कामकाजी महिलाओं की ईपीएफ हिस्सेदारी कम की जायेगी। युवा शक्ति के लिए 70 लाख नये रोजगार सृजित होंगे। 50 लाख युवकों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जायेगा। प्रौद्योगिकी के युग में कौशल विकास रोजगार, स्वरोजगार का गारन्टी कार्ड बन चुका है। बजट ने वरिष्ठ नागरिकों की जीवन की संध्या में उनकी बचत का लाभ उन्हें सुनिश्चित करने के लिए 50 हजार तक बैंक जमा में कर छूट दी है। पहले यह 10 हजार रू. थी। देश की रक्षा की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया है। इस वर्ष रक्षा बजट में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि की है जिससे यह राशि 2.95 लाख करोड़ हुई है। साथ ही रक्षा उत्पादन के स्वदेशीकरण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाकर मेक इन इंडिया का सशक्तिकरण किया गया है। रक्षा उत्पादन के लिए प्रथक नीति लाई जा रही है जिससे निजी क्षेत्र का अवसर दिया जायेगा। रक्षा उत्पादन के स्वदेशीकरण और मेकइनइंडिया मिशन को गति प्रदान करने के लिए दो औद्योगिक गलियारे बनाने की पृष्ठ भूमि भी बजट में दी गई है। इसके तहत प्रौद्योगिकी आयात के लिए विदेशी कंपनियांे को दावत दी जायेगी जो भारतीय साझेदारी में उद्योग लगायेगी। रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के साथ निर्यात की दिशा में भारत कदम बढ़ायेगा। इससे रोजगार के प्रचुर अवसर पैदा होंगे। रक्षा सेवाओं के आधुनिकीकरण पर 99 हजार करोड़ रू. खर्च होंगे। श्री नरेंद्र मेादी सरकार ने बीते वर्ष रक्षा कार्यों पर बजट से अधिक खर्च करके रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित कर दी है। देश में करीब 24 लाख फौजी पेंशन भोगी है इनकी पेंशन के लिए 1 लाख, 8 हजार करोड़ रू. का प्रावधान किया गया है। इसे मिलाकर रक्षा बजट चार लाख करोड़ रू. पहुंचता है। इसकी अहमियत मोदी सरकार ने पहली बार आंकी है। इसकी धमक हमारे पड़ौसियों के जेहन में है और उनकी समझ में आ गया है कि भारत 1962 की गलत फहमी में नहीं है। वक्त की नजाकत को भारत समझ चुका है। इसका प्रतिफल देश को मिला है। जिस डेªगन के कदम सिर्फ आगे बढ़ने के अभ्यस्त थे कहा जाता था हिमालय हिल सकता है लाल सेना पीछे नहीं हटती। डोकलाम में पहली बार लाल सेना के कदम पीछे हटे हैं। भारत ने अपवाद बना दिया है। बजट को लेकर प्रधानमंत्री का यह कहना है कि इससे नये भारत का स्वप्न साकार होगा इसलिए प्रासंगिक लगता है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए कड़े निर्णय और अप्रिय निर्णय लिये जिससे अन्य बजट अवसरों की तरह वाहवाही कम मिली है, लेकिन ध्यान देने की बात है कि मोदी जी ने कडवी दवा ईजाद की है जो स्थाई असर देते हुए स्वाद कसैला कर देती है। फिर भी जनता उसे सहर्ष हजम करने को तैयार है, क्योंकि देश की जनता को भरोसा है कि नरेंद्र मोदी की नीयत साफ और इरादे नेक है। स्वहित की जगह राष्ट्र हित सर्वोच्च है। राष्ट्र प्रथम दलीय हित गौण होता है।
एम.बी.ए. डिग्री होल्डर सुबीर ने अपनाई उन्नत खेतीaa
2 February 2018
कटनी जिले में ग्राम पंचायत कछगवां के ग्राम देवरी में एम.बी.ए. डिग्री होल्डर सुबीर चतुर्वेदी उद्यानिकी की उन्नत तकनीक अपनाते हुए पॉली हाउस में उद्यानिकी फसलों की खेती कर रहे हैं। उन्होंने वर्ष 1998 से 2006 तक राष्ट्रीय अखबार में एडवरटाईजिंग मार्केटिंग मैनेजर के पद पर भी काम किया है। वर्ष 2006 से 2012 तक प्राईवेट बीमा कंपनी में सीनियर ब्रांच मैनेजर के पद पर भी रहे परिवार के लिये सुबीर कटनी में आकर बसे और प्रोफेशन से हटकर हॉर्टीकल्चर को अपनाया। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और विभागीय ट्रेनिंग से सुबीर ने सबसे पहले पॉली हाउस लगाकर शिमला मिर्च का उत्पादन किया। इसके बाद अब अपने पॉली हाउस में खीरे का उत्पादन कर रहे हैं। सुबीर को वर्ष 2016-17 में उद्यानिकीय विभाग की संरक्षित खेती योजना में पॉली हाउस निर्माण के लिये अनुदान मिला। इससे उन्होंने आधा एकड़ क्षेत्र में 17 लाख 80 हजार रुपये की लागत से पॉली हाउस का निर्माण करवाया। इसमें 8 लाख 90 हजार रुपये की अनुदान राशि भी उद्यानिकी विभाग द्वारा सुबीर को दी गई। सुबीर को शुरूआत में शिमला मिर्च उत्पादन के समय कुछ तकनीकी समस्यायें आईं, लेकिन उसका निराकरण भी हुआ। इसके बाद सात माह में शिमला मिर्च के उत्पादन से चार लाख रुपये की आय हुई। इसके बाद सुबीर ने पॉली हाउस में इटालियन खीरे का उत्पादन प्रारंभ किया। इससे महज दो-ढाई माह में ही सुबीर को 2 से 3 लाख रुपये तक आमदनी हुई है। अभी भी सुबीर के पॉली हाउस में खीरे का उत्पादन हो रहा है। सुबीर चतुर्वेदी अब प्रगतिशील किसानों की श्रेणी में शामिल हो गये हैं और उद्यानिकी की अन्य उन्नत फसलों के उत्पादन की तैयारी कर रहे हैं।
अभिषेक बने उत्कृष्ट युवा किसान: सालाना कमा रहे 15 लाखaa
2 February 2018
जबलपुर जिले के दानी गांव के उत्कष्ट कृषक अवार्ड से सम्मानित अभिषेक का मानना है कि खेती से लाभ कमाने के लिए आधुनिक कृषि पद्धति को अपनाना जरूरी है। स्वयं के अनुभव के आधार पर अभिषेक बताते हैं कि परम्परागत ढंग से जब उनका परिवार खेती करता था, तो बमुश्किल गुजर-बसर हो पाती थी। उनकी पढ़ाई के लिए पिता के पास पैसे नहीं थे, वे खेत बेचना चाहते थे। अभिषेक ने खेती को आधुनिक कृषि पद्धति अपनाकर शुरू किया और केवल 15 वर्षों में उन्होंने परिस्थियाँ बदल दी। अभिषेक खेती से अब 10 से 15 लाख रूपये सालाना शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं। खुद की खेती से करीब 200 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। कृषक अभिषेक ने वर्ष 2000 में पिता के निधन के बाद पढ़ाई छोड़ खेती करने का निर्णय लिया। उस समय इनकी उम्र मात्र 17 वर्ष थी। भाई अभ्येन्द्र के साथ हर कठिनाई का डटकर सामना किया। कृषि विभाग ने समय-समय पर उनको उन्नत बीज उपलब्ध कराए, पशु पालन से लाभ कमाने के तरीके, बैंक ऋण, जैविक खाद निर्माण प्रक्रिया में सहयोग, फसल चक्र की उपयोगिता आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी आदि में पूरी तरह सहयोग दिया। हर समय कुछ नया करने की सोच रखने वाले इस युवा किसान ने खेती में वैज्ञानिकता को जोड़ा। एक ही समय में कई प्रकार की खेती की। अभिषेक खरीफ की फसल में उड़द, मूंग, मक्का जैसी फसल बोते हैं वहीं रबी में चना, मसूर, बटरी, उगाते हैं। कैश क्राप गन्ना भी लेते हैं। पशुपालन, एग्रो फॉरेस्ट, वर्मी कम्पोस्ट इनकी कृषि को अब लाभ का धंधा बना रही है। खेती के साथ अभिषेक गुड़ और घी बनाकर भी मुनाफा कमा रहे हैं। गन्ने की खेती करने में इन्हें प्रति वर्ष 40 से 50 हजार प्रति एकड़ मुनाफा होता है। गन्ने से गुड़ बनाने का काम भाई के साथ निजी प्लांट में करते हैं। अभिषेक ने वर्मी कम्पोस्ट के निर्माण की तकनीक सीखी और इस विधा से जैविक खाद बनाते और बेचते हैं। अभिषेक ने अपने व्यापार को पूरी तरह डिजिटलाईंज्ड कर दिया है। इस काम को करने के लिए अभिषेक ने विशेष एक्सलशीट स्वयं डिजाइन की है।
गरीबों और किसानों के कल्याण का है केन्द्रीय बजट : मुख्यमंत्री श्री चौहान
1 February 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि संसद में आज प्रस्तुत केन्द्रीय बजट गरीबों और किसानों के कल्याण का बजट है। यह भारत के आम आदमी को राहत देने वाला बजट है। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहाँ मंत्रालय में बजट पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नये भारत के निर्माण के सपने को साकार करने वाला है। यह बजट गरीबी दूर करने और रोजगार के अवसर सृजित करने वाला क्रांतिकारी बजट है। किसानों और गरीबों के लिये बजट में अभूतपूर्व कदम उठाये गये हैं। इसमें किसानों की आय को दोगुना करने के उपाय हैं। यह बजट ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला है। उन्होंने कहा कि अर्थ-व्यवस्था के क्षेत्र में प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा उठाये गये कड़े कदमों के सुपरिणाम सामने आ रहे हैं। इस बजट से भारत की तेजी से बढ़ती अर्थ-व्यवस्था में और तेजी आयेगी। श्री चौहान ने कहा कि इस बजट में गरीब कल्याण एजेंडे का ध्यान रखा गया है। बजट में ग्रामीण क्षेत्र में एक साल में गरीबों के लिये एक करोड़ मकान बनाने की बात कही गई है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी फैसला लिया गया है। इसके तहत दस करोड़ गरीब परिवारों के पाँच लाख रूपये तक के इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी। प्रत्येक तीन संसदीय क्षेत्रों में एक मेडिकल कॉलेज की घोषणा भी की गई है। बजट में शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी पहल की गई है। उज्जवला योजना के माध्यम से आठ करोड़ गरीब महिलाओं को धुएँ से मुक्ति मिलेगी। कृषि के क्षेत्र में लागत मूल्य में 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर खरीफ और रबी में समर्थन मूल्य का निर्धारण तथा कृषि क्षेत्र में दस लाख करोड़ रूपये कर्ज की व्यवस्था की गई है। ग्रामीण अधोसंरचना के लिये 14 लाख करोड़ रूपये की व्यवस्था की गई है इससे ग्रामीण क्षेत्र में बदलाव आयेगा। अधोसंरचना क्षेत्र में निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सिंचाई के क्षेत्र में माइक्रो सिंचाई पर जोर देते हुये सूक्ष्म सिंचाई कोष बनाने की व्यवस्था की गई है। बांस मिशन से भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सौभाग्य योजना के अंतर्गत 4 करोड़ गरीबों के घरों में नि:शुल्क बिजली पहुँचायी जायेगी। अनुसूचित जाति-जनजाति के लिये बजट में 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह कमजोर वर्गों के उत्थान के लिये महत्वपूर्ण है। रेल्वे के विस्तार के लिये एक सौ 48 लाख करोड़ रूपये की राशि खर्च की जायेगी। ढ़ाई लाख गांव ब्रॉडबैंड से जोड़े जायेंगे। दस प्रमुख स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जायेगा। एमएसएमई के ऋण के लिये 3 हजार 794 करोड़ रूपये की व्यवस्था की गई है, इससे रोजगार बढ़ेंगे। कुल मिलाकर इस बजट में गरीबी दूर करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिये क्रांतिकारी पहल की गई है।
किसान का बेटा अब "सिडनी" में पढ़ेगा इंजीनियरिंगaa
1 February 2018
श्योपुर जिले के छोटे से ग्राम बगडुआ निवासी किसान हरिमोहन जाटव का बेटा मान सिंह जाटव अब यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलोजी, सिडनी (आस्ट्रेलिया) में पढ़ने के लिये जायेगा। मान सिंह की मेहनत और मध्यप्रदेश शासन की विदेश में उच्च शिक्षा अध्ययन योजना से यह संभव हुआ है । आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा इस योजना में विदेश में अध्ययन हेतु मान सिंह को 9 लाख 66 हजार 704 रूपये की छात्रवृत्ति स्वीकृत की गई है। ग्राम बगडुआ निवासी मान सिंह जाटव के पिता हरिमोहन जाटव लघु कृषक हैं। इनके पास मात्र 3 बीघा जमीन है, जिससे पाँच सदस्यीय परिवार का भरण- पोषण होता है। वे स्वयं अनपढ़ है लेकिन उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझते हुए अपने बच्चों को पढा़ने में कोई कोर-कसर नहीं छोडी़ है। बचपन से मेधावी रहे छात्र मान सिंह जाटव ने प्राइमरी की शिक्षा ग्राम बगडुआ में प्राप्त की, मिडिल शिक्षा समीपवर्ती ग्राम सोईकलां से पूरी करने के बाद श्योपुर स्थित शासकीय उत्कृष्ट हायर सेकेण्डरी स्कूल से हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी की परीक्षा क्रमशः 75 एवं 67 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इसके उपरांत शासकीय इंदिरा गांधी इंजीनियरींग कॉलेज सागर से इलेक्ट्रिकल ब्रांच में बीई की डिग्री प्राप्त की। वर्ष 2017 में प्रवेश परीक्षा के माध्यम से मान सिंह जाटव का चयन आस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलोजी सिडनी में कंप्यूटर कंट्रोल इंजीनियरिंग के मास्टर डिग्री पाठ्यक्रम के लिये हुआ। लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण होनहार छात्र मान सिंह जाटव का विदेश जाकर अध्ययन करना एक सपना ही था। इस सपने को साकार करते हुए मध्यप्रदेश शासन ने विदेश में उच्च अध्ययन योजना के तहत मान सिंह को छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई है। मानसिंह यूटीएस आस्ट्रेलिया में 2 साल कंप्यूटर कंट्रोल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री करने के बाद अपने देश भारत में ही सेवा करने के लिये कृत संकल्पित हैं।
संतरा और अमरूद की जैविक पद्धत्ति से खेती करते हैं विष्णु तिवारीaa
1 February 2018
सतना जिले की बिरसिंहपुर तहसील के पगारकला निवासी 45 वर्षीय किसान विष्णु तिवारी के खेतों में सुन्दर और स्वादिष्ट संतरे की खेती लोगों के आकर्षण का केन्द्र बनाइ गई है। स्थानीय बाजार में इनके संतरों की बड़ी माँग भी है। विष्णु तिवारी अपने खेतों मे गेंहूँ और चना की परम्परागत फसल के साथ संतरे का उत्पादन भी कर रहे हैं। किसान विष्णु तिवारी का बाग मीठे संतरे के फलों से गुलजार है। एक एकड़ मे लगाये गये संतरे के पौधों से हर वर्ष 4-5 लाख रुपये की आमदनी आसानी से हो रही है। स्थानीय बाजार में इनका संतरा 30-40 रुपये प्रति किलो के मान से हमेशा ही बिकता है। संतरे की खेती से उत्साहित होकर विष्णु और अधिक क्षेत्र में संतरे की नई कलमें लगा रहे हैं। संतरे की खेती को अपनी आय का मुख्य साधन बनाना चाहते हैं विष्णु। इनके संतरे के बाग और आमदनी देखकर गाँव के दो अन्य किसानों ने भी संतरे के बाग लगाये हैं। विष्णु तिवारी का कहना है कि वे जीरो बजट की खेती अर्थात जैविक खेती कर रहे हैं। रासायनिक खाद, कीटनाशक एवं महंगे संसाधनों का प्रयोग नही करते हैं। मौसमी खेती के साथ ही संतरे और अमरूद की बागवानी कर अपनी आय में कई गुना इजाफा कर रहे हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र के कृषि वैज्ञानिको की राय में चित्रकूट क्षेत्र की जलवायु भी बागवानी के लिये सर्वथा अनुकूल है। पगारकला गाँव में संतरे की लाभकारी खेती देखकर आसपास के गाँवों के किसान भी इसे अपना रहे हैं।
जैविक पद्धति से एप्पल बेर की बम्पर फसल ले रहे नवनीतaa
29 January 2018
आजकल बैतूल में प्रमुख फल विक्रेताओं के पास हरे सेब की तरह दिखने वाला एक फल बड़ी मात्रा में दिखायी दे रहा है। लोगों ने जब फल विक्रेताओं से इसके बारे में पूछा तो जवाब मिला 'यह सेब नहीं एप्पल बेर है।' बैतूल और घोड़ाडोंगरी विकासखण्ड में एप्पल बेर के 6-7 हजार पेड़ अभी फलन पर है। यह फल सिर्फ बैतूल के बाजार में ही नहीं बल्कि बैतूल के आसपास इटारसी, होशंगाबाद, छिंदवाड़ा, नागपुर और अमरावती जैसे अन्‍य शहरों के बाजारों में भी धूम मचा रहा है। एप्पल बेर की जैविक रूप से खेती कर रहे हैं बैतूल बाजार निवासी किसान नवनीत वर्मा । नवनीत सामान्य किसान नहीं बल्कि तकनीकी रूप से जागरूक कृषि स्नातक किसान हैं। नवनीत ने दस वर्ष पहले इन्दिरा गाँधी विश्वविद्यालय से कृषि विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की थी। तभी से अपनी पंरपरागत खेती को नई तकनीक से जोड़ने का प्रयोग कर रहे हैं। नवनीत के परिवार में 15 एकड़ जमीन है जिस पर पूर्व में उनके पिता कृषि की नई तकनीक अपनाकर सोयाबीन, गन्ना, गेहूँ आदि फसलें लेते थे एवं कुछ सब्जियों की खेती करते थे। इससे होने वाली आय बहुत सामान्य हुआ करती थी। इस सब को देखते हुए नवनीत ने उद्यानिकी फसल लेने का मन बनाया। जमीन बैतूल शहर के पास होने के कारण इन्हें उद्यानिकी की फसल लगाने वाले मजदूर आसानी नहीं मिलते थे। नवनीत ने महाराष्ट्र से एप्पल बेर के करीब 500 पेड़ मंगवाकर उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 1.5 एकड़ जमीन में लगाये। रसायन खाद की जगह स्वयं के द्वारा तैयार की गई जैविक खाद और जैविक दवाईयों का उपयोग किया, इससे उन्हें भारी सफलता भी मिली। कृषि स्नातक नवनीत ने पहले दो सालों तक बेर के पेड़ों में दोनों तरफ डेढ़-डेढ़ फीट की पट्टी छोड़कर दो लाईनों के बीच फूल गोभी और मटर की फसल ली। इससे उन्हें करीब एक लाख 20 हजार रूपये का अतिरिक्त मुनाफा हुआ। इसके बाद उन्होंने बेर के पेड़ों में व्यवसायिक उत्पादन शुरू किया। इनके उत्पादित एक जैविक एप्पल बेर का औसत वजन लगभग 100 से 165 ग्राम तक है। वर्तमान में नवनीत प्रति-दिन लगभग एक क्विंटल बेर की रोजाना तुड़ाई कर रहे हैं, जो थोक में 35 रूपये एवं फुटकर में 50 से 60 रूपये प्रति-किलो की कीमत में आसानी से बाजार में बिक रहे हैं। अभी तक लगभग 4 क्विंटल जैविक एप्पल बेर की तुड़ाई कर चुके हैं। नवनीत को भरोसा है कि इस वर्ष 80 से 100 क्विंटल तक जैविक एप्पल बेर की उपज उन्हें प्राप्त हो जायेगी। नवनीत के जैविक एप्पल बेर की सफलता को देखकर बैतूल जिले के अन्य किसानों ने भी एप्पल बेर की खेती करने का मन बनाया है
राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना से प्रदेश की 58 मण्डियाँ जुड़ीं
24 January 2018
प्रदेश के किसानों को अपनी उपज की कीमत सही मिल सके, इसके लिये प्रदेश की 58 कृषि उपज मण्डियों को 'ई-नाम'' ट्रेडिंग पोर्टल से जोड़ा गया है। किसान इस व्यवस्था के माध्यम से अपनी कृषि उपज का विक्रय कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में एक ओर जहाँ बोली लगाने वाले व्यापारी की जानकारी गोपनीय होती है, वहीं दूसरी ओर किसान को भी व्यापारियों के मध्य हो रही प्रतिस्पर्धा का लाभ मिलता है। इसमें एक और फायदा यह है कि मण्डी क्षेत्र के बाहर अथवा अन्य मण्डी क्षेत्र का व्यापारी सीधे जिन्स की बोली ई-नाम के पोर्टल पर लगा सकता है। इससे किसानों को स्थानीय बाजार के अलावा बाहर के बाजारों का भी लाभ प्राप्त होता है। राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) एक पैन इण्डिया इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है, जो कृषि से संबंधित उपजों के लिये एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार का निर्माण करने के लिये मौजूदा कृषि उपज मण्डी समिति का एक अच्छा माध्यम है। ई-नाम पोर्टल सभी कृषि उपज मण्डी समितियों से संबंधित सूचना और सेवाओं के लिये एकल प्रणाली (सिंगल विण्डो) सेवा प्रदान में सक्षम है। इस योजना में अन्य सेवाओं के साथ-साथ मण्डी प्रांगण में कृषि उपज के आगमन और कीमतों, व्यापार प्रस्तावों को खरीदने और बेचने, व्यापार प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया के प्रावधानों को भी शामिल किया गया है। ई-नाम पोर्टल की शुरूआत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अप्रैल-2016 में की थी। मध्यप्रदेश में पंडित लक्ष्मीनारायण शर्मा कृषि उपज मण्डी समिति करौंद, भोपाल में पायलेट योजना से इसकी शुरूआत की गई थी। राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़कर कोई भी कृषि उपज मण्डी राष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क में भाग ले सकती हैं। किसान जब स्थानीय स्तर पर अपने उत्पाद बेचने के लिये मण्डी में लाते हैं तो स्थानीय व्यापारियों के साथ-साथ इंटरनेट के माध्यम से देश के अन्य राज्यों में स्थित व्यापारियों को भी अपना माल बेचने का विकल्प उनके पास रहता है। इस व्यवस्था में किसान अपनी उपज को वहीं बेचने के लिये स्वतंत्र होते हैं, जहाँ उन्हें अच्छे दाम मिलते हैं। प्रदेश में ई-नाम के पोर्टल को तौल-काँटों से भी जोड़े जाने का कार्य किया जा रहा है। इस पोर्टल की एक खास बात यह भी है कि किसान को उनके द्वारा बेची गई कृषि उपज का भुगतान उसी दिन बैंक खाते में मिल जाता है। भोपाल संभाग की 15 कृषि मण्डियों, इंदौर संभाग 9 कृषि मण्डियों, उज्जैन संभाग 12, ग्वालियर संभाग 6, सागर संभाग 5, जबलपुर संभाग की 9 और रीवा संभाग 2 कृषि उपज मण्डियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ दिया गया है।
aa उद्यानिकी फसलों से राजकुमार की आय में 5 गुना वृद्धि
21 January 2018
छिन्दवाड़ा जिले के ग्राम थुनिया उदना के कृषक राजकुमार के पास 2.60 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इस पर वर्ष में 2 बार मक्का और गेहूं की फसल लेते थे। इससे उन्हें ढाई लाख रुपये तक की वार्षिक आय होती थी। उद्यानिकी से ड्रिप संयंत्र उपलब्ध होने की जानकारी मिली तो उन्होंने विभाग से ड्रिप संयंत्र खरीद कर 2.500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की। इस संयंत्र को लगाने पर इन्हें विभाग से 2 लाख 83 हजार 598 रुपये का अनुदान भी मिला। इस सिंचाई सुविधा से इन्होंने वर्ष भर आलू, पत्तागोभी, मिर्च, लहसून आदि की फसलें लीं जिससे लगभग 12 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई। राजकुमार ने 4 माह पूर्व 1.400 हेक्टेयर भूमि में पत्तागोभी की फसल की बोनी की जिसमें एक हजार 750 क्विंटल पत्तागोभी हुई। इसे बेचने पर उन्हें 9 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिला जो उद्यानिकी फसलों के अंतर्गत उच्च्तम लाभ है। अब राजकुमार 2 हेक्टेयर क्षेत्र में प्लास्टिक मल्चिंग का प्रयोग करके मिर्च की फसल लगाना चाहते हैं। इसके लिये संरक्षित खेती के अंतर्गत इन्होंने ऑनलाइन पंजीयन भी करवा लिया है। इससे विभाग से अनुदान मिलने से इनकी आय में 4 से 5 गुना बढ़ोतरी होगी। कृषक राजकुमार ने उद्यानिकी फसलों से पहले की तुलना में आय बढ़ने से अपनी बड़ी बेटी का बहुत अच्छी तरह से विवाह किया है। बच्चे स्कूल में पढ़ रहे हैं। खुद का पक्का मकान हो गया है। कृषि कार्य के लिये ट्रेक्टर भी ले लिया है। उद्यानिकी फसलों से जो लाभ उन्हें मिला है, वह अन्य फसल से नहीं मिल पाया है। इसलिये अब वे सभी को उद्यानिकी फसलों लेने की सलाह दे रहे हैं।
जैविक खाद से कृषि लागत हुई लगभग शून्य
12 January 2018
ग्राम कचनारिया तहसील आगर के किसान गंगासिंह आज आधुनिक तरीकमे से जैविक खेती कर रहे है। इस खेती से लागत और मेहनत का भरपूर लाभ प्राप्त कर रहे हैं। अब गंगासिंह उन्नत कुषक बन गये हैं। किसान गंगा सिंह पूर्व में अन्य किसानों की तरह पारम्परिक तरीके से खेती कर रहे थे। इससे लागत के अनुरूप लाभ प्राप्त नहीं हो रहा था। इसी बीच आत्मा परियोजना के तकनीकी सहायक श्री वेदप्रकाश सेन के सम्पर्क में आये गंगा सिंह। तब उन्हें कृषि विभाग की योजनाओं के बारे में मालूम हुआ। इसके बाद गंगा सिंह ने विभाग द्वारा आयोजित जैविक प्रशिक्षणों में भी भाग लिया। प्र‍शिक्षणों में उन्हें जैविक खाद बनाने की तकनीक का ज्ञान प्राप्त हुआ। आत्मा परियोजनान्तर्गत गंगा सिंह ने वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण करवाकर जैविक खाद का उत्पादन करना प्रारंभ कर दिया। अब जैविक खाद बनाकर स्वयं की खेती में इसका उपयोग कर रहे हैं। इस प्रयोग से गंगा सिंह की कृषि लागत लगभग शून्य हो गई है। फसल भी अधिक मात्रा में क्वालिटी की मील रही है। इस किसान के लिये खेती अब लाभ धन्धा बन गई है। गंगासिंह अब जैविक खाद तैयार कर स्वयं तो अपनी खेती में उपयोग करते ही हैं, साथ ही अन्य किसानों को भी जैविक खाद का विक्रय कर लाभ प्राप्त कर रहे हैं।




aa खेती को सफल व्यवसाय बनाने में सफल हुए अभिषेक
11 January 2018
जबलपुर जिले के ग्राम दोनी (खजरी) के 33 वर्षीय अभिषेक के पिता ने उनकी पढ़ाई पूरी कराने के लिए अपनी कृषि जमीन को बेचने का विचार बना लिया था। अभिषेक इस बात से बहुत आहत हुए कि उनके पूर्वजों की जमीन उनकी पढ़ाई के लिए बेची जा रही है। इसलिये उन्होंने पढ़ाई छोड़ इस जमीन पर खेती कर सफल किसान बनने का निश्चय किया। सन 2000 में अभिषेक के पिता की मृत्यु हो गई तब अभिषेक महज 17 वर्ष के थे। इतनी छोटी उम्र में उन्होंने खेती करने का विचार बना लिया था लेकिन खेती को लेकर उनका यह विचार कुछ अलग तरह के सपनों के साथ था। अपने सपनों को पंख देने अभिषेक के पास पूँजी का अभाव एक प्रमुख समस्या थी। इसके लिए उन्होंने अलग-अलग जगह से ऋण लिया। उनके संघर्ष को खेती के कम अनुभव ने और कठिन बना दिया। अभिषेक ने अपने भाई अभ्येन्द्र के साथ हर कठिनाई का डटकर सामना किया। अभिषेक प्रारंभ में परम्परागत खेती करते थे। तब प्राप्त होने वाला मुनाफा भी बहुत कम था। हर समय कुछ नया करने की सोच रखने वाले इस युवा किसान ने खेती में वैज्ञानिकता को जोड़ा एक ही समय में कई प्रकार की खेती की। अभिषेक खरीफ की फसल में उड़द मूंग, मक्का जैसी फसल बोते हैं। वहीं रबी में चना, मसूर, बटरी, गन्ना उगाते हैं। पशुपालन, एग्रोफॉरेसट, वर्मी कम्पोस्ट इनकी कृषि को अब लाभ का धंध बना रही है। अपनी खेती से 40-50 लाख तक का व्यापार करते हैं जो सकल लाभ के रूप में 10-15 लाख रुपये होता है। रबी और खरीफ की अन्य फसलों के साथ अभिषेक गुड़ और घी बनाकर मुनाफा कमा रहे हैं। गन्ने की खेती से भी प्रति वर्ष 40 से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुनाफा कमा रहे हैं। गन्ने से गुड बनाने का काम अपने भाई के साथ अपने निजी प्लांट में करते हैं। गुड़ का व्यापार अधिकांश थोक में ही होता है। घी के व्यापार में अभिषेक अपने घर के सदस्यों का सहयोग भी लेते हैं। घी की गुणवत्ता और देशीपन को बनाए रखने में अभिषेक की माँ और उनकी पत्नी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 14 लीटर दूध से एक किलोग्राम घी निकलता है जो बाजार में 500 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से आसानी से बिक जाता है। जैविक खेती को अपनी सम्पूर्ण कृषि का आधार बनाते हुए अभिषेक ने वर्मी कम्पोस्ट के निर्माण की तकनीकी भी सीख ली। अब वे जैविक खाद बेचकर लाभ कमा रहे हैं। युवा कृषक अभिषेक अधिकांश व्यापार थोक में होता है। व्यापारी उनसे खरीदी कर बाजारों में जाकर इन उत्पाद को बेचते हैं। बाजार की बेहतरीन समझ और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बेचने की अपनी प्रतिबद्धता के चलते अभिषेक अपने उत्पादों को बाजार में भी परखते हैं कि उनका उत्पाद जिस गुणवत्ता के साथ खरीदा गया, उसी रूप में बाजार में बिक रहा है या नहीं। उत्पादों में मिलावट पाई जाने पर अभिषेक ऐसे व्यापारी से भविष्य में व्यापार नहीं करते। वे किसी भी स्थिति में अपने उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर किसी प्रकार का समझौता नहीं करते। उनका कहना है कि लोगों की पसंद ही मेरी पहली प्राथमिकता है। अभिषेक अपने व्यापार के तरीके को पूरी तरह डिजिटलाईज्ड कर दिया है। वह अपने व्यापार की बचत, खर्च जैसी हर छोटी से छोटी बात को लैपटाप पर फीड करते हैं। इस युवा कृषक ने इस समय 170-180 लोगों को रोजगार दिया है। इन्होंने प्रत्येक मजदूर को एक विशेष पहचान संख्या दी है जिससे प्रत्येक मजदूर डिजिटल रूप से अपने कार्य दिवस अनुसार वेतन प्राप्त करता है। अभिषेक इन मजदूरों का बैंक एकाउण्ट स्वयं खुलवाते हैं तथा उनके एकाउण्ट नवम्बर तथा मजदूरों को प्राप्त विशेष पहचान संख्या से जोड़ देते हैं जिससे भुगतान प्रक्रिया आसान हो जाती है। इस काम को करने लिए अभिषेक ने लैपटाप में एक स्पेशल एक्सेल शीट भी स्वयं डिजाइन की है जिसमें मजदूरों के वेतन से लेकर, बचत राशि, फसलों के भाव जैसी सभी महत्वपूर्ण जानकारी का विस्तृत विवरण रहता है। आज अभिषेक अपनी शानदार सफलता से बेहद खुश नजर आते हैं। वे समय-सयम पर कृषि विभाग द्वारा दी गई सहायता ओर मार्गदर्शन के लिए शासन को धन्यवाद ज्ञापित करना नहीं भूलते। कृषि विभाग ने समय-समय पर उनको उन्नत बीज उपलब्ध कराए, पशुपालन से लाभ कमाने के तरीके, बैंक ऋण, जैविक खाद निर्माण प्रक्रिया में सहयोग, फसल चक्र की उपयोगिता आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी आदि पर पूरी तरह सहयोग दिया। अभिषेक मानते हैं कि खेती से अलग लाभ कमाना है तो खेती को नये आयाम देने होंगे, बहुफसलीय पद्धति तथा जैविक खेती को अपनाना होगा। जैविक शक्कर का बाजार में लाना होगा। खेती के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देने की सोच रखने वाले अभिषेक को 11 दिसम्बर को भेड़ाघाट में आयोजित नर्मदा सेवा समितियों के राज्य स्तरीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा उत्कृष्ट किसान के रूप में सम्मानित भी किया गया है।




aa ड्रिप सिंचाई सिस्टम से खेती, बागवानी हुई आसान
11 January 2018
ग्राम रायपुरिया, विकासखण्ड पेटलावद जिला झाबुआ में खेती के लिये पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं रहता था। इस कारण गेहूँ और चना की पारम्परिक खेती कर रहे युवा किसान ओमप्रकाश पाटीदार हमेशा चिन्चित रहते थे। उन्होंने कृषि विभाग के स्थानीय महकमे से सम्पर्क किया। तब उन्हें मालूम हुआ कि ड्रिप सिंचाई सिस्टम अपनाने से कम से कम पानी में भी अच्छी खेती की जा सकती है। यह सिस्टम खेत पर लगाने के लिये राज्य सरकार अनुदान भी देती है। फिर क्या था, ओमप्रकाश ने सिस्टम के बारे में पूरी जानकारी हासिल की, कृषि और उद्यानिकी महकमें के सहयोग से जरूरी प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। तत्पश्चात अपनी 17-18 बीघा जमीन पर ड्रिप सिंचाई सिस्टम लगवाया। सरकार ने ओमप्रकाश को यह सिस्टम लगाने में भरपूर मदद की, साथ ही 65 हजार रूपये अनुदान भी दिया। कृषक ओमप्रकाश ने अपनी जमीन पर उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में टमाटर और मिर्ची के साथ गुलाब की फसल भी लगाई। ड्रिप सिंचाई सिस्टम से फसलों को पाला-पोसा। खेत में टमाटर, मिर्ची और गुलाब की भरपूर पैदावार मिली। केवल गुलाब की खेती पूरी 2बीघा जमीन पर की तो 25 हजार रूपये का शुद्ध लाभ मिला। अन्य फसलों के फायदे अलग हैं। अब ओमप्रकाश गेहूँ और चने की फसल में भी ड्रिप सिंचाई सिस्टम का ही उपयोग कर रहे हैं और अच्छी उत्पादन प्राप्त कर रहे है। ड्रिप सिंचाई सिस्टम से खेती और बागवानी करने से ओमप्रकाश की आमदनी में बहुत तेजी से इजाफा हुआ है। ओमप्रकाश का घर-परिवार निश्चिंत और खुशहाल हो गया है। आमदनी अच्छी होने से ओमप्रकाश ने नया ट्रेक्टर भी खरीद लिया। इस ट्रेक्टर से खुद की खेती में काफी मदद मिलती है। यही ट्रेक्टर गाँव के दूसरे किसानों की खेती के लिये किराये पर देकर भी आमदनी हो जाती है। अब तो ओमप्रकाश ने नई मोटर सायकल भी खरीद ली है।




aa जनसम्पर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने किया कृषक दूत की डायरी और कैलेण्डर का विमोचन
9 January 2018
जनसम्पर्क, जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने साप्ताहिक कृषक दूत समाचार पत्र की ओर से वर्ष 2018 के डायरी और कैलेण्डर का विमोचन किया। इस अवसर पर साप्ताहिक कृषक दूत के संपादक श्री अमरेन्द्र मिश्रा, श्री दुर्गेश केसवानी उपस्थित थे।





aa डेयरी से रोजाना 1500 रुपये कमा रहे विवेक खरे
9 January 2018
पन्ना नगर के टिकुरिया मोहल्ला निवासी विवेक खरे डेयरी व्यवसाय से रोजाना 1500 रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। विवेक को पशुपालन विभाग के अधिकारियों द्वारा आचार्य विद्यासागर गौ-संवर्धन योजनान्तर्गत स्थापित डेयरी इकाई के बारे में जानकारी दी गई। विवेक योजनान्तर्गत डेयरी इकाई स्थापना के लिये 5 देशी गाय (गिर/साहीवाल) का ऋण आवेदन विभाग के माध्यम से किया गया। विभाग द्वारा परीक्षण उपरांत आवेदन बैंक शाखा पन्ना भेजा गया। बैंक द्वारा श्री खरे को डेयरी इकाई स्थापना के लिये दो लाख 43 हजार 450 रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। ऋण राशि पर 6 हजार रुपये शासकीय अनुदान दिया गया। विवेक द्वारा देशी गिर नस्ल की पाँच गाय राजस्थान से खरीदी गईं। उनके द्वारा गायों से प्रतिदिन लगभग 50 लीटर दुग्ध का उत्पादन किया जाकर 50 रुपये प्रति लीटर की दर से पन्ना नगर में विक्रय किया जा रहा है, जिससे प्रतिदिन समस्त खर्च उपरांत लगभग 1500 रुपये प्रतिदिन की आय प्राप्त हो रही है। विवेक द्वारा अजोला घास उत्पादन किया जा रहा है। इससे पशुओं को पर्याप्त मात्रा में संतुलित पशु-आहार एवं प्रोटीन भी मिलता है। साथ ही गायों के गोबर से विवेक ने गोबर गैस प्लांट भी लगाया है, जिसकी गैस का उपयोग वहां काम करने वाले श्रमिक कर रहे हैं। इसी वित्तीय वर्ष में गोपाल पुरस्कार योजनान्तर्गत विकासखण्ड एवं जिला-स्तर पर विवेक खरे की गाय ने दुग्ध उत्पादन में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके फलस्वरूप विवेक को 60 हजार रुपये का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है। विवेक अपनी डेयरी में दो अन्य लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं।

भावांतर योजना की जानकारी लेने आये तेलंगाना के अधिकारी
9 January 2018
प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को उनकी कृषि उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए लागू की गयी भावांतर भुगतान योजना की ख्याति अब प्रदेश की सीमा के बाहर भी पहुँच रही है। योजना की जानकारी लेने मंगलवार को तेलंगाना के अधिकारी भोपाल पहुंचे। तेलंगाना के अधिकारियों की टीम 12 जनवरी तक प्रदेश में भावांतर भुगतान योजना, विपणन की व्यवस्थाओं सहित न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित अन्य योजनाओं की जानकारियों का अध्ययन करेगी। टीम में श्री पी. रवि कुमार जेडीएस हैदराबाद, श्री ई.मल्लेशम डीडी एम हैदराबाद और अधिकारी श्री अजमीरा राजू सेलेक्शन ग्रेड सेक्रेटरी एएमसी शामिल हैं

aa पॉली हाउस में कोलकता के मीठे पान की बेमिसाल खेती
28 December 2017
हरदा जिले के टिमरनी विकास खंड के गांव छिरपुरा के बंसत वर्मा अपने पॉली हाउस में पान की बेमिसाल पैदावर से बहुत खुश हैं। उन्हें पंरपरागत खेती से अलग हटकर किया गया यह प्रयोग अच्छा मुनाफा दे रहा है। खेती में नए प्रयोग और अच्छा मुनाफा कमाने बंसत ने उद्यानिकी विभाग की योजना के अन्तर्गत पॉली हाउस बनाकर पान की खेती की शुरूआत की। इस खेती में सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बात यह है कि एक बार पान की बेल लगाने के बाद सालों तक इससे पत्ते ले सकते हैं। बार-बार बीज (बेल) लगाने की आवश्यकता नहीं होती। पंरपरागत खेती से हटकर यह प्रयोग हरदा जिले में पहली बार हुआ है कि जब किसी किसान ने पॉली हाउस बनाकर पान की खेती शुरू की है। बंसत वर्मा ने 9.37 लाख रुपये से अपना पाली हाउस बनवाया और वहाँ कोलकता की सुप्रसिद्ध सोफिया पान की प्रजाति को पहली बार लगाया। यह संरक्षित खेती है। पॉली हाउस बनाने से पान की फसल तेज गर्मी, पाले और बरसात की वहज से नष्ट नहीं होती। एक बार रोपाई करने के बाद 20 साल तक रोपाई की जरूरत नहीं पड़ती। बसंत वर्मा ने एक हजार वर्ग मीटर के पॉली हाउस में कोलकाता से पान की 10 हजार बीज (बेल) लाकर लगाई। इससे एक साल में चार लाख पान के पत्तों का उत्पादन हुआ। बंसत ने पूर्ण जैविक विधि से पान के पत्ते पैदा किये। इसमें जीवामृत और सरसों की खली, दूध, मठा, नीम तेल का उपयोग किया। इससे लागत में भी भारी कमी आई। सिंचाई के लिए ड्रिप एण्ड फागर लगवाए। इस पान का पत्ता एक रूपये से दो रूपए तक मूल्य में भोपाल, इंदौर, इटारसी, और खण्डवा में बिकता है। बंसत वर्मा की सफलता से प्रभावित होकर इंदौर और भोपाल में भी किसानों ने चार एकड़ के पॉली हाउस बनवाकर इस पान की प्रजति की पैदावर लेना शुरू कर दिया है।

aa मत्स्यपालन से 20 लाख रूपये सालना कमा रहे अनिल सकसेना
28 December 2017
होशंगाबाद की ग्राम पंचायत निटाया के ग्राम चंद्रपुरा के अनिल सक्सेना ने जिला मत्स्य विभाग के सहयोग से एक एकड़ शासकीय तालाब को पट्टे पर लेकर उसमें मत्स्य बीच उत्पादन का कार्य शुरू किया। मत्स्य विभाग के मागदर्शन में 2.25 एकड़ भूमि क्रय कर 12 नर्सरियों का निर्माण भी किया। नर्सरियों में मत्स्य बीज संवर्धन से फ्राई एवं फिगंर लिंग का वितरण प्रति वर्ष किया। इससे उत्तरोतर उत्पादन और आय में बढ़ोत्तरी हुई। अनिल सक्सेना ने वर्ष 2004-05 से अपने प्रक्षेत्र पर 0.50 हेक्टेयर जल क्षेत्र में झींगा पालन का कार्य प्रारंभ किया। झींगा एवं मत्स्य बीज उत्पादन से अनिल प्रति वर्ष लगभग 18 से 20 लाख रूपये की आय प्राप्त कर रहे हैं। यही नहीं, उनके मत्स्य बीज एवं झींगा उत्पादन के कार्य को देखते हुए उन्हें सीआईएफई मुम्बई द्वारा पुरस्कृत भी किया गया है। जिला प्रशासन ने भी उनके हुनर की कद्र की है। म.प्र. स्थापना दिवस के अवसर पर इसी वर्ष अनिल सक्सेना को 25 हजार रूपए की नगद राशि प्रदान कर पुरस्कृत किया गया है। इस व्यवसाय की सफलता से आस-पास के क्षेत्र में अनिल सक्सेना की पूछ-परख भी बढ़ गई है।

aa नईगढ़ी में कौशल उन्नयन केन्द्र एवं कृषि उपज मंडी शुरू होगी : मुख्यमंत्री श्री चौहान
27 December 2017
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रीवा जिले के नईगढ़ी में विकास यात्रा के दौरान जिला स्तरीय अंत्योदय मेले में कहा कि नईगढ़ी क्षेत्र के 236 गांवों में सिंचाई सुविधा के लिये माइक्रो सिंचाई परियोजना बनाई गई है, इसका कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा। इसके बाद भी जो क्षेत्र सिंचाई से वंचित रहेगा, वहां सर्वेक्षण के बाद सिंचाई सुविधा देने के प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने नईगढ़ी में कृषि उपज मण्डी खोलने तथा कौशल उन्नयन केन्द्र स्थापित करने की घोषणा की। श्री चौहान ने इस अवसर पर 187.14 करोड़ रूपये लागत के विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल नईगढ़ी का नाम ठाकुर गोपाल शरण सिंह तथा ढेरा हायर सेकेण्डरी स्कूल का नाम शहीद राम सजीवन जायसवाल के नाम पर करने की घोषणा की। उन्होंने नईगढ़ी में मिनी स्टेडियम तथा देवतालाब में अष्टभुजी माता मंदिर परिसर में धर्मशाला निर्माण करवाने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे की शिक्षा के सपने को अधूरा नहीं रहने दिया जायेगा। अब 12वीं में 70 प्रतिशत अंक लाने वाले विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना का लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि रीवा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना में 25 हजार गरीबों को आवास स्वीकृत किये गये हैं। इनमें से 11 हजार से अधिक आवास तैयार हो गये हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बेटियों के साथ दुराचार करने वालों को फांसी देने का कानून बनाया जा रहा है। बसावन मामा क्षेत्र में गौ-अभ्यारण्य के लिये आवश्यक राशि उपलब्ध करवाई जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही गरीबों के लिये 200 रूपये प्रतिमाह बिजली का बिल देने की योजना लागू की जायेगी। इससे बिजली बिल कम-अधिक आने की समस्या समाप्त हो जायेगी। समारोह में उद्योग मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल और विधायक श्री गिरिश गौतम ने विभिन्न योजनओं के 52 हितग्राहियों को एक करोड़ 49 लाख रूपये के हितलाभ का वितरण किया। इस दौरान सांसद श्री जनार्दन मिश्रा, विधायक श्री दिव्यराज सिंह एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे

aa आदिवासी किसानों का सुरक्षा-कवच है भावांतर भुगतान योजना
24 December 2017
आदिवासी बहुल झाबुआ जिले के किसानों को भी किसान कल्याण विभाग की भावांतर भुगतान योजना का लाभ मिला है। यह योजना आदिवासी किसानों का सुरक्षा-कवच बन गई है। पहले ये किसान मण्डियों में कृषि उपज का उतार-चढ़ाव होने के कारण काफी नुकसान सहते थे। इस योजना से जिले में 1078 किसानों को फायदा पहुँचा है। उनके खाते में करीब 72 लाख रुपये की भावांतर राशि जमा करवाई गई है। जिले के राणापुर विकासखण्ड के ग्राम खेरमाल के किसान मानसिंह ने इस वर्ष अपने खेत में सोयाबीन लगाया था। मण्डी में भाव के भारी उतार-चढ़ाव से मानसिंह को सोयाबीन का समर्थन मूल्य नहीं मिल पाया। मानसिंह ने भावांतर भुगतान योजना में अपना पंजीयन करवाया। इस योजना ने मानसिंह के नुकसान की भरपाई हुई। उसे भावांतर राशि करीब 24 हजार रुपये सीधे उसके खाते में मिली। मानसिंह अब जागरूक होने का दावा करता है। साथ ही क्षेत्र के अन्य किसानों को जागरूक बना रहा है, भावांतर भुगतान योजना के फायदे समझा रहा है और योजना में पंजीयन कराने में उनकी मदद भी कर रहा है।

aa आजीविका मिशन की कृषि सखी प्रीति बनी प्रगतिशील किसान
23 December 2017
आदिवासी बहुल झाबुआ जिले के किसानों को भी किसान कल्याण विभाग की भावांतर भुगतान योजना का लाभ मिला है। यह योजना आदिवासी किसानों का सुरक्षा-कवच बन गई है। पहले ये किसान मण्डियों में कृषि उपज का उतार-चढ़ाव होने के कारण काफी नुकसान सहते थे। इस योजना से जिले में 1078 किसानों को फायदा पहुँचा है। उनके खाते में करीब 72 लाख रुपये की भावांतर राशि जमा करवाई गई है। जिले के राणापुर विकासखण्ड के ग्राम खेरमाल के किसान मानसिंह ने इस वर्ष अपने खेत में सोयाबीन लगाया था। मण्डी में भाव के भारी उतार-चढ़ाव से मानसिंह को सोयाबीन का समर्थन मूल्य नहीं मिल पाया। मानसिंह ने भावांतर भुगतान योजना में अपना पंजीयन करवाया। इस योजना ने मानसिंह के नुकसान की भरपाई हुई। उसे भावांतर राशि करीब 24 हजार रुपये सीधे उसके खाते में मिली। मानसिंह अब जागरूक होने का दावा करता है। साथ ही क्षेत्र के अन्य किसानों को जागरूक बना रहा है, भावांतर भुगतान योजना के फायदे समझा रहा है और योजना में पंजीयन कराने में उनकी मदद भी कर रहा है।

aa जनसम्‍पर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने किसानों को दिये मृदा स्वास्थ्य कार्ड
22 December 2017
सागर जिले के देवरी विकासखण्ड के ग्राम खेरूआ की श्रीमती प्रीति आठ्या प्रगति स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। बकौल प्रीति वो आज 2 लाख रुपये से अधिक की सालाना आमदनी प्राप्त कर रही हैं। उन्होने 4 कमरों का पक्का मकान और घरेलू विस्तार के लिये बोरिंग कराने का काम लगाया है। प्रीति के घर में 4 एकड़ असिंचित जमीन थी, जिसमें परंपरागत तकनीक से सोयाबीन, चना और मसूर की खेती होती थी। घर के आठ सदस्यों का पेट भरने का एकमात्र जरिया यही खेती थी। प्रीति ने आजीविका मिशन से जुड़ने पर कृषि सखी का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण में उन्हे खेती में कम लागत से अधिक उत्पादन लेने की तकनीक की जानकारी मिली। इस जानकारी का पहला प्रयोग उन्होने अपने ही घर की खेती को सुधारने में किया। प्रीति को पहले खेती से प्राप्त आमदनी घर चलाने के लिये पूरी नहीं पड़ती थी। इस कारण घर के वयस्क सदस्यों के साथ मिलकर मजदूरी भी करती थी। प्रीति ने 9 हजार रूपये समूह से उधार लिये और अपने 4 एकड़ खेत के साथ-साथ अधिया पर 2 एकड़ जमीन लेकर सोयाबीन लगाया। सोयाबीन से उन्हे 50 हजार रूपये की आमदनी हुई। उन्होने अपने खेत में इस लागत से कुआं खुदवाना शुरू कर दिया और पहली बार लहसुन और प्याज लगाया। अकेले लहसुन से उन्हे 2,50,000 रूपये प्राप्त हुए। बाकी फसलों ने उनको मजदूरी से छुटकारा दिलवा दिया है। प्रीति को पहली बार घर में इतनी बड़ी रकम फसलों को बेचकर प्राप्त हुई, तो घर के सभी सदस्य उत्साहित थे। घर के लोगों ने प्रीति की सलाह पर 8 एकड़ रकबे में (4 एकड़ अधिया) सब्जी की खेती शुरू की। प्रीति को आजीविका मिशन से उन्नत खेती के गुर प्राप्त हो गये थे, जिनको अपनाकर उसने अपने परिवार का जीवन बदल दिया है। प्रीति का परिवार आज बहुत खुशहाल है। प्रीति ने खेती में अपनाये तरीकों को कृषि सखी के रूप में अपने गांव के अलावा आस-पास के बाडी, विछुआ, पथरिया, खैरीपदम, पिपरिया, रसेना, सगरा, सिमरिया, बिजौरा के महिला स्व-सहायता समूहों में जाकर बताना शुरू किया है। समूह की महिलाओं को उसने भूमिगत नाडेप, मडका दवा, जिव्रलिक एसिड, बहु-फसली तकनीक बताई है। स्वयं महिलाओं की मदद से प्रदर्शन प्लॉट बनाये, पोषण वाटिकायें, श्रीविधि से गेंहू, हल्दी की खेती शुरू की। इससे उनके गांव के अलावा कई गावं के लोग उन्हे व्यक्तिगत रूप से कृषि का जानकार मानने लगे हैं। प्रीति ने अपने गांव के अलावा आसपास के 60 एकड़ में प्याज और लहसुन की खेती की शुरूआत की है और समूह की महिलाओं को लाभ की फसल से जोड़ा है।

aa सेवंती के फूलों की खेती से करोड़पति बने किसान
22 December 2017
बैतूल जिले के आठनेर विकासखंड के गुनखेड़ गाँव के कृषक हनुमंतराव पुत्र कृष्णराव कनाठे पूरे गांव में विकास की मिसाल बन गये है। पूर्व में अपनी ढाई हेक्टेयर जमीन पर परंपरागत रूप से खेती करते थे। वर्ष 2002 में उद्यानिकी विभाग के संपर्क में आने पर एक हजार वर्ग मीटर पर सेवंती के फूलों की खेती प्रारंभ की। पहले ही वर्ष में मेहनत रंग लाई और मात्र 3 हजार रुपये खर्च करके 55 हजार रुपए की शुद्ध आय प्राप्त हुई। सेवंती के फूलों से हुए इस लाभ से प्रोत्साहित होकर हनुमंतराव ने अगले वर्ष इसके दुगने क्षेत्र में सेवंती के फूलों की खेती की। अगले वर्ष भी फूलों की खेती से आशातीत लाभ मिलने से प्रोत्साहित होकर हनुमंतराव वर्ष-दर-वर्ष फूलों की खेती का क्षेत्र बढ़ाते रहे। आज लगभग 2.5 एकड़ जमीन में सेवंती, रजनीगंधा, ग्लेडियोलस, गेंदा, डेजी एवं अन्य फूलों की खेती कर लाभ कमा रहे हैं। नई पीढ़ी के हनुमंतराव नई तकनीकी को अपनाने में भी पीछे नहीं हैं। वर्ष 2016-17 में उद्यानिकी विभाग की संरक्षित खेती योजना का लाभ लेते हुये विभाग से 4 लाख 67 हजार 500 रूपये का अनुदान प्राप्त कर एक हजार वर्गमीटर में पॉली हाउस निर्माण कर वहां सेवंती की खेती करना प्रारंभ किया। खुले क्षेत्र में 1.5 एकड़ में सेवंती की खेती से लगभग 30 क्विंटल फूल का उत्पादन हो रहा है। इसे औसतन 125 रूपये किलो मूल्य पर स्थानीय बाजार एवं नागपुर बाजार में बेचा जा रहा है। एक हजार वर्गमीटर के पॉलीहॉउस में लगभग 18-20 क्विंटल सेवंती फूल का उत्पादन हो रहा है। पॉली हाउस में उत्पादित फूल की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण फूल औसतन 250 रूपये प्रति किलो के मूल्य पर आसानी से बिक जाते हैं। लगभग एक एकड़ जमीन पर अन्य फूल जैसे रजनीगंधा, ग्लेडियोलस, गेंदा आदि की खेती करते हैं। वर्तमान में सेवंती एवं अन्य फूलों की खेती से 2.5 एकड़ जमीन पर उन्हें प्रतिवर्ष 7,50,000 से 8,00,000 रूपये तक का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। फूलों की खेती से हो रहे लाभ से हनुमंतराव ने अपने बच्चों के साथ छोटे भाइयों को भी पढ़ाया-लिखाया। एक भाई कृषि में पोस्ट ग्रेजुएट होकर कृषि विभाग में तथा दूसरा भाई राष्ट्रपति भवन में बॉडी गॉर्ड के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहा है। हनुमंत राव के खेती एवं सामुदायिक विकास को देखते हुए उद्यानिकी विभाग द्वारा वर्ष 2016-17 में उन्हें हॉलैंड- नीदरलैंड की विदेश यात्रा पर भी भेजा गया, जहाँ से फूलों की खेती एवं विपणन के नए गुर सीख कर आये हनुमंतराव नई ऊर्जा से फूलों की खेती में लग गए हैं। हनुमंतराव की खेती से हो रहे लाभ से गांव के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं। इन किसानों ने सेवंती के फूलों की खेती प्रारंभ की है। ये सभी किसान आपस में मिलजुल कर सेवंती की खेती करते है और उत्पादित फूलों को मिलजुल कर बाजार में बेचते हैं। धीरे धीरे, वर्ष-दर-वर्ष गाँव में सेवंती के फूलों की खेती करने वाले किसानों की संख्या बढ़ रही हैं। वर्तमान में गुनखेड़ गाँव का लगभग हर किसान सेवंती के फूलों की खेती कर रहा है। इस समय गाँव में लगभग 70 एकड़ जमीन पर सेवंती के फूलों की खेती की जा रही है। इसी वर्ष सेवंती की खेती से गाँव के किसानों को लगभग 2 करोड़ रूपये की आमदनी हुई है।

aa डेयरी विकास योजना ने राजेन्द्र सिंह को बनाया सफल दुग्ध व्यवसायी
21 December 2017
मध्यप्रदेश के अन्तिम छोर पर पथरीली बंजर भूमि पर बसे ग्राम अंगारी तहसील-सुवासरा, जिला मंदसौर के किसान राजेन्द्र सिंह देवड़ा पर्याप्त कृषि भूमि, बिजली एवं सिंचाई के संसाधनों की उपलब्धता के बाद भी निरन्तर घटती जा रही आमदनी के कारण चिंतित रहते थे। एक दिन गांव के पास ही पशु चिकित्सा शिविर लगा तो वहां पहुंच गये। जहां उन्हें पशुपालन विभाग की हितग्राही मूलक आचार्य विद्यासागर गौ-संवर्धन डेयरी विकास योजना की विस्तृत जानकारी मिली। राजेन्द्र सिंह ने इस योजना में आवेदन किया। प्रकरण स्वीकृत होने पर उन्हें बैंक से 8 लाख 40 हजार का ऋण और पशुपालन विभाग से 1 लाख 50 हजार रूपये का अनुदान मिला। राजेन्द्र सिंह ने प्राप्त धन राशि से 3 घरेलू और 10 अन्य उन्नत नस्ल की भेंस खरीद कर दूध डेयरी खोली। तब इन्हें दुग्ध व्यवसाय का व्यापारिक महत्व समझ में आया। बचपन से ही पशुपालन का अनुभव होने से हितग्राही को कामयाबी हासिल हुई। देखते ही देखते पिछले एक वर्ष में राजेन्द्र सिंह का दुग्ध व्यवसाय चल निकला। अब पशुपालन के कारण अपनी खुद की डेयरी से रोजाना 70 से 80 लीटर दूध बेचकर 2700 रूपये तक कमा रहे हैं। सफलता के इस सफर में एक कड़ी और तब जुड़ गई, जब इन्होंने कुछ और पशुपालकों को जोड़कर दुग्ध संग्रहण केन्द्र प्रारंभ किया। प्रबंधित पशुपालन के जरिये धीरे-धीरे पूरे गांव की जीवन रेखा को बदल दिया। पशुओं से प्राप्त अन्य उत्पाद गोबर और मूत्र से उन्नत किस्म की जैविक खाद तैयार कर मिट्टी की उर्वर क्षमता में अभूतपूर्व इजाफा किया। उद्यानिकीय और औषधीय फसलों के उत्पादन से राजेन्द्र सिंह एवं गाँव के अन्य किसान बहुत खुश हैं। इससे गांव के विकास में तेजी दिखाई दे रही है। अब राजेन्द्र सिंह देवड़ा अपने द्दढ़ संकल्पित प्रयासों के कारण क्षेत्र में युवा दुग्ध व्यवसायी के रूप में जाने जाते हैं। अपनी उपलब्धि के लिए वे आचार्य विद्यासागर गौ-संवर्धन डेयरी विकास योजना को श्रेय दे रहे हैं।

aa 80 वर्षीय किसान अट्ठीलाल कमा रहे 4 लाख सालाना
18 December 2017
कटनी जिले के मझगवां में रहने वाले 80 साल के अट्ठीलाल कुशवाहा उम्र के इस पड़ाव में भी अपनी जमीन में सब्जियों की खेती करते हैं। इसके लिये शासन की योजनाओं का भरपूर लाभ भी ले रहे हैं। सब्जी उत्पादन से ही सालाना 4 लाख रुपये कमा रहे हैं। अट्ठीलाल वर्तमान में भिंडी, मटर, मिर्ची, बंदगोभी और शिमला मिर्च की खेती कर रहे हैं। ऑफ सीजन में सब्जियों का उत्पादन हो और अधिक मूल्य में सब्जियों का विक्रय कर लाभ कमाया जा सके, इसके लिये अट्ठी लाल ने अपने खेत में एक एकड़ में संरक्षित खेती योजना के तहत शैडनेट हाउस लगवाया है। इसके लिये उन्हें उद्यानिकी विभाग द्वारा 14 लाख 20 हजार रुपये की अनुदान राशि दी गई है। शैडनेट हाउस के साथ ही मल्चिंग और ड्रिप एरीगेशन का उपयोग सब्जी के बेहतर उत्पादन के लिए कर रहे हैं। मल्चिंग और ड्रिप एरीगेशन के उपयोग से खेती से उन्हें सौ गुना फायदा हो रहा है। ड्रिप एरीगेशन से पानी देने पर पानी का बचाव और मल्चिंग के उपयोग से निदाई में लाभ हो रहा है। अब चार घंटे का काम एक घंटे में हो जाता है। ड्रिप के माध्यम से घोल बनाकर पौधों में दवाईयों का छिड़काव भी सुगमता से हो रहा है। इससे मजदूरी कर खर्च भी बच रहा है।

aa भावांतर भुगतान योजना से किसानों को मिल रहा फसलों का वाजिब दाम
29 November 2017
मध्यप्रदेश में किसानों को अब उनकी फसल का वाजिब दाम मिल रहा है। भावांतर भुगतान योजना खेती को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है। योजना के तहत इंदौर जिले में अभी तक 3 हजार 123 किसानों को 3 करोड़ 50 लाख 95 हजार 336 रुपये भावांतर राशि का भुगतान मिल चुका है। यह राशि आरटीजीएस के जरिए किसानों के खातों में सीधे भेजी गई है। किसानों को उनकी फसल मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, उड़द, मूंग और तिल के लिए भावांतर राशि का यह भुगतान किया गया। सागर जिले में भावान्तर भुगतान योजना में अब तक 7 हजार 500 किसानों को 8 करोड़ 27 लाख रुपये भावातंर राशि का भुगतान किया गया है। जिले में मुख्यत: खरीफ के दो प्रमुख फसल उड़द और सोयाबीन पर भावांतर राशि का भुगतान किया गया। सागर कृषि उपज मंडी में अपनी फसल बेचने आये घंसू राय ने बताया कि भावांतर भुगतान योजना से किसानों को बहुत लाभ मिल रहा है। पहले व्यापारी 1500 से 1600 रुपये में अनाज खरीदते थे। अब योजना के लागू होने से यह राशि बढ़कर 5 हजार 400 रुपये हो गई है। किसान किशन पटेल और सचिन जैन भी भावांतर भुगतान योजना के लागू होने से बहुत खुश है क्योंकि अब उन्हें उनके उपज के अच्छे पैसे मिल रहे है।

aa कृषि आधारित आजीविका मिशन से 13,57,183 हितग्राही लाभान्वित
21 November 2017
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत प्रदेश के चयनित जिलों के ग्रामीण अंचलों में स्व-रोजगार के संसाधन मुहैया कराये जा रहे हैं। मिशन के अंतर्गत संचालित कृषि आधारित आजीविका गतिविधियों से 13 लाख 57 हजार 183 ग्रामीण हितग्राही लाभान्वित किये जा चुके हैं। ज्ञातव्य है कि प्रदेश के 43 जिलों के 271 विकासखण्‍डों में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन सघन रूप से क्रियान्वित किया जा रहा है। कम्युनिटी मैनेज्ड संस्टेनेबल एग्रीकल्चर मॉडल (सीएमएसए) के अंतर्गत वर्तमान में 54 हजार 742 हितग्राहियों के साथ 25 हजार 580 एकड़ भूमि में कृषि मॉडल विकसित किया जा रहा है। इस मॉडल के तहत प्रत्येक हितग्राही की एक एकड़ अथवा 0.5 एकड़ भूमि का उपयोग किया जाता है। इसमें से 0.5 एकड़ अथवा 0.25 एकड़ में एसआरआई/सोयाबीन/खरीफ फसल ली जाती है। शेष 0.5 एकड़ में 7 सतह वेजीटेबल/फल उत्पादन लिया जाता है और रबी सीजन में गेहूँ, चना और सरसों की फसल ली जाती है। इस मॉडल से कृषि उत्पादन पर व्यय न्यूनतम होता है। मजदूरी हितग्राही द्वारा की जाती है और किसान एक एकड़ भूमि से एक लाख रुपये की आय प्राप्त कर सकता है। आजीविका फ्रेश योजना में स्व-सहायता समूह द्वारा उत्पादित सब्जियाँ एवं अन्य उत्पादन के विक्रय की व्यवस्था की जाती है। इस समय प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में 429 आजीविका फ्रेश संचालित की जा रही हैं। एसआरआई कार्यक्रम में एक लाख 35 हजार 276 हितग्राहियों द्वारा 51 हजार 381 एकड़ भूमि में धान का उत्पादन किया जा रहा है। इस पद्धति की सहायता से किसान पारम्परिक तरीके से पैदा की जाने वाली फसल की तुलना में 2 से 3 गुना अधिक फसल प्राप्त कर रहे हैं। मिशन के प्रारंभ से पूर्व एनआरएलपी जिलों में मिशन से जुड़े किसानों द्वारा वर्ष 2012 में 196 एकड़ भूमि में एसआरआई पद्धति से धान का उत्पादन किया जाता था, जो अब बढ़कर 51 हजार 381 एकड़ हो गया है। मिशन के अंतर्गत सिस्टम ऑफ मेज इन्टेन्सिफिकेशन (एसएमआई) में 2,163 हितग्राहियों द्वारा 73 एकड़ भूमि में नई तकनीक से सरसों का उत्पादन प्रारंभ कराया गया है। सिस्टम ऑफ व्हीट इन्टेन्सिफिकेशन (एसडब्ल्यूआई) में वर्ष 2014 से गेहूँ का उत्पादन 15 हजार 389 हितग्राहियों द्वारा किया जा रहा है। इस पद्धति से किसान 2 से 3 गुना तक अधिक फसल का उत्पादन ले रहे हैं। मिशन से जुड़े किसानों द्वारा वर्ष 2012 में 63 एकड़ भूमि में एसडब्ल्यूआई पद्धति से गेहूँ का उत्पादन कराया गया जो अब बढ़कर 771 एकड़ भूमि हो गया है। कृषि आधारित आजीविका मिशन के अंतर्गत सब्जी उत्पादन कार्यक्रम में किसानों को व्यावसायिक सब्जी उत्पादन के लिए प्रेरित किया गया है। वर्तमान में लगभग 3 लाख 91 हजार 814 किसानों को व्यावसायिक सब्जी उत्पादन के साथ जोड़ा गया है। आज की स्थिति में मिशन के अंतर्गत चयनित जिलों में किसानों द्वारा एक लाख 71 हजार 213 एकड़ भूमि में व्यावसायिक सब्जी उत्पादन किया जा रहा है। इससे किसानों की आमदनी में 3 हजार से लेकर 15 हजार रुपये प्रति माह तक की वृद्धि हुई है। हल्दी उत्पादन के तहत मिशन में 9,242 हितग्राहियों के साथ 4,389 एकड़ भूमि में हल्दी उत्पादन कराया जा रहा है। किसानों को हल्दी का उचित मूल्य दिलाने के लिये बड़वानी और सागर जिले में प्रोसेसिंग संयंत्र लगाकर हल्दी पावडर का विक्रय किया जा रहा है। अनार उत्पादन कार्यक्रम के तहत मिशन के विभिन्न जिलों में अनार प्लांटेशन कराया जा रहा है। करीब 3,405 किसान 710 एकड़ भूमि में अनार उत्पादन कर रहे हैं। इससे इन किसानों की आमदनी में 3 वर्ष के बाद प्रति एकड़ उत्साहजनक वृद्धि होगी। मिशन के अंतर्गत चयनित जिलों में 19 हजार 442 हितग्राहियों द्वारा आलू उत्पादन किया जा रहा है। वर्ष 2012 में मिशन से जुड़े किसानों द्वारा केवल 376.25 एकड़ भूमि में आलू का उत्पादन किया जाता था और अब 1,505 एकड़ भूमि में आलू का उत्पादन किया जा रहा है। आलू उत्पादन संकुलों में नई कृषि तकनीक का उपयोग करने से डेढ़ से दो गुना वृद्धि हुई है। कोल्ड-स्टोरेज एवं प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर आलू का वेल्यू एडीशन भविष्य के लिये सुनिश्चित किया जा रहा है। आलू उत्पादकों की एक प्रोड्यूसर कम्पनी बनाई गई है। इस संबंध में सिद्धि विनायक, पुणे से भी सहयोग लेकर बायबैक एवं मार्केटिंग लिंकेज सुनिश्चित किया जा रहा है। वाडी (WADI) विकसित कार्यक्रम के अंतर्गत आदर्श ब्लॉक बड़वानी में राजपुर, श्योपुर में कराहल एवं डिण्डोरी में समनापुर और जिला धार, शहडोल, मण्डला, अनूपपुर, अलीराजपुर में 4,506 हितग्राहियों का चयन कर वाडी विकसित कर हितग्राहियों की आय 10 हजार रुपये प्रति माह तक बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 5 लाख 84 हजार 134 हितग्राहियों द्वारा वर्मी पिट/नाडेप बनाए गये हैं। इसमें एक फीट से 2.5 से 2.7 टन जैविक खाद निकलती है, जो एक हेक्टेयर खेती के लिए पर्याप्त होती है। इससे हितग्राही जैविक खाद का अधिक से अधिक उपयोग करने की ओर अग्रसर हो रहे हैं, जैविक खेती को बढ़ावा मिलना सुनिश्चित है। मिशन के अंतर्गत आगामी वर्षों में प्रमाणिक जैविक खेती कराने की योजना है। कृषि आधारित आजीविका मिशन के अंतर्गत महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना का 3 संस्थाओं आसा, प्रदान और कार्ड द्वारा क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत 35 हजार 116 ग्रामीण महिला किसानों को लाभान्वित किया जा रहा है। परियोजना के क्षेत्र में 28 उत्पादक कम्पनियों का गठन किया गया है। इसमें 20 कृषि आधारित, 4 दुग्ध और 4 मुर्गी-पालन की कम्पनियाँ हैं। इन उत्पादक कम्पनियों से ग्रामीण अंचलों के 43 हजार 499 हितग्राही जुड़े हैं। ग्रामीण अंचलों में 7 लाख 72 हजार 635 आजीविका पोषण वाटिका (Ketchan Garden) तैयार की गई हैं।

aa भावांतर भुगतान योजना पर पूरे देश की निगाहें - मुख्यमंत्री श्री चौहान
20 November 2017
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भावांतर भुगतान योजना किसानों के हित संरक्षण की अद्भुत योजना है। इस पर पूरे देश की निगाहें हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिये हैं कि किसानों की उपज के भावांतर की सही राशि किसानों के खातों में पहुंचाना सुनिश्चित करें। इस योजना के अंतर्गत पहला भुगतान एक लाख 35 हजार से ज्यादा किसानों को 22 नवम्बर को एक साथ होगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला कलेक्टरों से भावांतर भुगतान योजना के संबंध में विस्तृत चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि पूरी सतर्कता के साथ भावांतर भुगतान की सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी कर ली जायें ताकि किसानों को उनकी उपज की सही राशि का समय पर भुगतान मिल सके। इसमें किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। जिन किसानों ने इस योजना के अंतर्गत 16 अक्टूबर से 31 अक्टूबर के बीच अपनी उपज बेची है, उन्हें 22 नवम्बर को उनके खातों में सीधे भुगतान होगा। उन्होंने कहा कि जो किसान पंजीयन नहीं करा पाये थे, उन्हें 15 से 22 नवम्बर तक पंजीयन की सुविधा दी गई है। श्री चौहान ने होशंगाबाद, हरदा, भोपाल, देवास, सीहोर एवं नरसिंहपुर जिले में उड़द के कम भाव आने पर कलेक्टरों से कहा कि वे कृषि उपज मण्डियों का भ्रमण कर इसका जायजा लें। आवश्यक होने पर बोली निरस्त करें, जिससे किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम मिलना सुनिश्चित हो। उन्होंने पोर्टल पर जानकारी अपलोड और सत्यापन करने के निर्देश दिये ताकि समय पर भुगतान किया जा सके। श्री चौहान ने खरीफ फसल की बीमा राशि किसानों को मिलना सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इसमें कोई कमी नहीं रहे। यह योजना किसानों के लिये संजीवनी की भांति है। इसके अंतर्गत लगभग आठ हजार करोड़ रूपये किसानों को भुगतान होगा। प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा ने बताया गया कि भावांतर भुगतान योजना क्रियान्वित होने से मण्डियों में आवक बढ़ी है। साथ ही अन्य प्रदेशों से मध्यप्रदेश के किसानों को उनकी उपज का ज्यादा दाम भी मिल रहा है। खरीदी की पूरी चाक-चौबंद व्यवस्थाएं की गई हैं। सभी मण्डियों में मॉडल रेट भी प्रदर्शित किये गये हैं। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री पी.सी. मीना एवं अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित थे।

aa कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए मध्यप्रदेश को मिला प्रथम पुरस्कार
16 November 2017
मध्यप्रदेश को कृषि के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति के लिए आज नई दिल्ली में पुरस्कृत किया गया। केन्द्रीय भू-तल एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश को बड़े राज्यों की श्रेणी में कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए प्रथम पुरस्कार से नवाजा। मध्यप्रदेश सरकार की तरफ से किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन ने नई दिल्ली में आयोजित 'स्टेट ऑफ स्टेट्स-2017'' कार्यक्रम में यह पुरस्कार ग्रहण किया। मध्यप्रदेश पिछले 4 वर्षों से लगातार कृषि कर्मण अवार्ड से नवाजा जा रहा है। प्रदेश की कृषि उत्पादन दर 20 प्रतिशत से अधिक रही है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार इस वित्तीय वर्ष में यह दर बढ़कर 29.1 प्रतिशत होने की संभावना है। कार्यक्रम में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, केरल और पाण्डिचेरी राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ ही अन्य राज्यों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

aa भावांतर भुगतान योजना से मंडियों में आवक बढ़ी, किसानों को मिल रहे अच्छे दाम
13 November 2017
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने आज यहाँ मंत्रालय में वीडियों कांफ्रेंसिंग के जरिये भावांतर भुगतान योजना के क्रियान्वयन के संबंध में संभागायुक्तों और कलेक्टरों से मैदानी स्तर की जानकारी ली। कलेक्टरों ने बताया कि भावांतर भुगतान योजना के प्रारंभ में जो भ्रम बने हुए थे, अब दूर हो गये हैं। परिणामस्वरूप मंडियों में आवक बढ़ रही है। फसलों का अच्छा दाम मिलने पर किसान संतुष्ट हैं। जनजातीय जिलों के दूरस्थ क्षेत्रों में 20 साप्ताहिक हाट बाजारों में भी फसल की आवक हो रही है। बढती आवक को देखते हुए इन हाट बाजारों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा 51 उप मंडियों को भी क्रियाशील कर दिया गया है जहाँ किसान अच्छी मात्रा में अनाज लेकर आ रहे हैं। अब तक 171 लाख मीट्रिक टन अनाज की आवक मंडियों में हो चुकी है। मात्र एक महीने में मंडियों को पिछले साल के मुकाबले 28 करोड़ रूपये की आय हुई है। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों की किसानों के हित में आगे बढ़कर काम करके योजना को सफल बनाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह समय किसानों का साथ देने का समय है, वे संकट में हैं। भावांतर भुगतान योजना किसानों की सेवा करने का माध्यम है। इससे किसानों को ऐतिहासिक न्याय दिलाने में सफलता मिलेगी। उन्होंने किसानों को उनकी फसल का पूरा दाम दिलवाने के लिये निगरानी दलों को और ज्यादा सक्रिय और सचेत बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि योजना को बदनाम करने वालों को मौका न दें। श्री चौहान ने कहा कि जिन किसानों ने 16 से 31 अक्टूबर तक अपनी फसल बेच दी थी, उनको भी अंतर की राशि का भुगतान देना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि भुगतान की प्रक्रियाओं में पूरी तरह पारदर्शिता बरतें। किसानों को सहारा देकर उनकी सेवा करें और किसान विरोधी लोगों को किसान हितैषी इस योजना को बदनाम करने का कोई मौका नहीं दें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कलेक्टरों से कहा कि वे 16 से 31 अक्टूबर की अवधि में मंडियों में फसल बेचने वाले एक लाख 55 हजार पंजीकृत किसानों को एसएमएस के माध्यम से योजना में कितना भुगतान किया जा रहा है, इसकी सूचना 20 नवंबर तक आवश्यक रूप से दें। मुख्यमंत्री ने जिला और संभाग स्तरीय निगरानी दलों को मंडियों का दौरा करने के निर्देश दिये। श्री चौहान ने सभी किसानों के बैंक खातों का सत्यापन सुनिश्चित करवाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि बैंक खातों के अलावा बोनी का रकबा, उत्पादन आदि का सत्यापन भी सावधानी से करें। सभी पंजीकृत किसानों का बैंक खातों का ब्यौरा मंडियों को उपलब्ध कराने और वहां से किसानों के खातों में डालने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी भी प्रकार की शिकायत होने पर अपनी बात कहने का भी मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 20 नवम्बर को उज्जैन में आयोजित होने वाले किसान सम्मेलन में 15 दिनों की भावांतर की राशि किसानों के खातों में डाल दी जायेगी। उन्होंने कहा कि किसानों का विश्वास भावांतर भुगतान योजना में बढ़ रहा है। सभी भ्रम दूर हो गये हैं। उन्होंने कहा कि कुछ तथाकथित किसान विरोधी लोगों ने योजना के बारे में भ्रम फैलाने की कोशिश की थी, वे कामयाब नहीं हुए। श्री चौहान ने कहा कि किसानों को मालूम होना चाहिये कि उन्हें कितना दाम मिला है। प्रत्येक किसान को इस योजना का फायदा मिलना चाहिये। यदि वास्तविक किसान किसी कारण अपना पंजीयन करवाने से चूक गये हैं या किसी कारण नहीं करवा पाये हैं तो उनका पूरा ब्यौरा लेकर उसे सत्यापित कर पंजीयन करवायें। ऐसे किसानों के लिये पोर्टल पर पंजीयन की सुविधा 15 से 22 नवम्बर तक रहेगी। उन्होंने कपास उत्पादक जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिये कि कपास की खरीदी के लिये विशेष इंतजाम करें और इस पर निगरानी रखें। इस अवसर पर बताया गया कि प्रदेश के 8 केन्द्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 15 हजार 500 क्विंटल कपास की खरीदी हुई है। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से कहा कि वे किसानों को भण्डारण अनुदान योजना का लाभ लेने के लिये भी प्रेरित करें। गोडाउन अनुदान योजना में अनुदान राशि सात रूपये से बढ़ाकर 9 रूपये 90 पैसे प्रति क्विंटल प्रति माह किया गया है। उन्होंने कहा कि पंजीकरण के लिये आफलाइन आवेदनों को जल्दी ही आनलाइन दर्ज करायें।
कलेक्टरों की सराहना
मुख्यमंत्री ने आदिवासी किसानों की उपज को मंडियों में लाने के लिये लिये शहडोल, झाबुआ और अलीराजपुर जिलों के कलेक्टरों के प्रयासों की सराहना की। इन जिलों में आदिवासी किसानों की उपज संग्रह करने के लिये विशेष वाहनों की व्यवस्थाएँ की गई हैं। शहडोल में इस प्रकार 2000 क्विंटल अनाज मंडी में आ पाया। यहाँ प्रत्येक गाँव में एक नोडल अधिकारी को नियुक्त किया गया है ताकि प्रत्येक किसान को भावांतर योजना का लाभ दिला सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि भावांतर भुगतान योजना के क्रियान्वयन को मिशन मोड में लिया गया है। उन्होंने किसानों के साथ ऐतिहासिक निर्णय करने के लिये इसी गति से भविष्य में भी प्रयास जारी रखने के निर्देश दिये।
आदिवासियों की जमीन के संबंध में भ्रम फैलाने वालों पर कार्रवाई करें
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने संभागायुक्तों और कलेक्टरों से अन्य विषयों पर चर्चा करते हुए अवगत कराया कि कुछ समाज विरोधी व्यक्ति और समूह आदिवासी समुदायों में भ्रम फैला रहे हैं कि सरकार उनकी जमीन गैर आदिवासी लोगों को बेचने का कानूनी प्रावधान कर रही है। श्री चौहान ने संभागायुक्तों और कलेक्टरों से कहा कि ऐसे लोगों पर नजर रखें और भ्रम फैलाने पर उनके विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं कर रही है और न ही ऐसा करने की कोई मंशा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के लोग अपनी जमीन के मालिक थे और हमेशा रहेंगे। उन्होंने कहा कि असामाजिक और समाज विरोधी तत्व आदिवासी बहुल जिलों में भ्रामक सूचनाएँ फैला रहे हैं, उन पर ध्यान नहीं दें। उन्होंने कलेक्टरों से कहा कि वे आदिवासी समुदाय के लोगों को सचेत करें और उन्हें ऐसे लोगों के बहकावे में नहीं आने के लिये लगातार सावधान करें। वीडियो कांफ्रेंसिंग में मुख्य सचिव श्री बी.पी.सिंह एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

aa सवा लाख किसानों को मिलेगी 197 करोड़ रूपये की भावांतर राशि
9 November 2017
भावांतर भुगतान योजना में प्रदेश के सवा लाख किसानों को 197 करोड़ रूपये की भावांतर राशि वितरित की जायेगी। इन किसानों द्वारा गत 16 से 31 अक्टूबर के बीच मंडियों में फसल विक्रय की गई है। योजना में पंजीकृत किसानों को मण्डियों के भाव की सूचना एस.एम.एस. से और रेडियो के माध्यम से दी जायेगी। यह जानकारी आज यहाँ मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा ली गई भावांतर भुगतान योजना की समीक्षा बैठक में दी गयी। बैठक में मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बैठक में भावांतर भुगतान योजना के तहत अब तक की गई कार्रवाई की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिये कि यह सुनिश्चित किया जाये कि योजना के तहत कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हो। योजना की लगातार मॉनीटरिंग की जाये। योजना के तहत जिलों में भावांतर राशि का भुगतान कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति बनाकर कराया जाये। योजना की जानकारी किसानों तक पहुँचायें। किसानों को मण्डियों के भाव की जानकारी देने की व्यवस्था बनायें ताकि उन्हें अपनी उपज मण्डी में ले जाने से पहले भाव की जानकारी हो। इसके लिये किसानों को एस.एम.एस. और रेडियो के माध्यम से जानकारी दी जाये। उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों के हित में एक बड़ा कदम है। इसके क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश ने एक नया इतिहास रचा है। बैठक में बताया गया कि मण्डियों में योजना के तहत व्यवस्थित रूप से कार्रवाई चल रही है। योजना के प्रारंभ होने के बाद से अन्य राज्यों के मॉडल मण्डी रेट की तुलना में भावांतर भुगतान योजना की औसत दरें सोयाबीन और तिल में पूरी तरह स्थिर और समान है। बैठक में प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि महाराष्ट्र के प्रमुख सचिव कृषि के अनुसार महाराष्ट्र सरकार इसी खरीफ से सोयाबीन के लिये मध्यप्रदेश की तरह भावांतर भुगतान योजना लागू करने जा रही है। भावांतर योजना के तहत मण्डियों में अब तक दो लाख 15 हजार किसानों द्वारा 7 लाख 87 हजार मेट्रिक टन सोयाबीन, 63 हजार 590 किसानों द्वारा 59 हजार 790 मेट्रिक टन उड़द, 24 हजार 633 किसानों द्वारा 93 हजार 108 मेट्रिक टन मक्का का क्रय-विक्रय किया गया है। इस तरह योजना में अब तक कुल 3 लाख 3 हजार पंजीकृत किसानों ने लगभग 10 लाख मेट्रिक टन कृषि उत्पाद का आठ मण्डियों में क्रय-विक्रय किया है। योजना के तहत पंजीकृत किसानों के 90 प्रतिशत क्षेत्र का सत्यापन हो गया है। इस बार पिछले वर्ष की तुलना में मण्डियों में आवक 23 प्रतिशत बढ़ी है। भावांतर भुगतान योजना के तहत ज्वार-बाजरा की फसल के लिये किसानों के पंजीयन का कार्य चल रहा है। बैठक में अपर मुख्य सचिव वित्त श्री ए.पी. श्रीवास्तव, कृषि उत्पादन आयुक्त श्री पी.सी. मीणा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री अशोक वर्णवाल और श्री एस.के. मिश्रा, प्रमुख सचिव सहकारिता श्री के.सी. गुप्ता, प्रबंध संचालक मण्डी श्री फैज अहमद किदवई, आयुक्त जनसंपर्क श्री अनुपम राजन, मुख्यमंत्री के सचिव श्री विवेक अग्रवाल भी उपस्थित थे।

aa अक्टूबर में फसल बेचने वाले किसानों को भावांतर राशि आगामी दो सप्ताह में मिलेगीें
3 November 2017
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भावांतर योजना में पंजीकृत किसानों द्वारा 16 से 31 अक्टूबर के दौरान विक्रय की गई फसलों के भावांतर की राशि आगामी दो सप्ताह में उनके बैंक खातों में पहुँच जानी चाहिये। भुगतान की ऐसी व्यवस्था की जाये कि एक ही क्लिक में समस्त खातों में राशि का हस्तांतरण हो जाये। उन्होंने कहा कि भुगतान की सूचना पंजीकृत किसानों को एस.एम.एस. के माध्यम से भी दी जाये। श्री चौहान ने यह निर्देश भावांतर योजना की समीक्षा के दौरान आज मंत्रालय में अधिकारियों को दिये। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश की समस्त मण्डियों में फसलों की बिक्री संबंधी व्यवस्थाओं की निरंतर मॉनीटरिंग की जाये। यह सुनिश्चित किया जाये कि फसलों की बिक्री उचित मूल्य पर हो। उन्होंने कहा कि भावांतर योजना किसानों को फसलों का उचित मूल्य दिलाने की सर्वश्रेष्ठ पहल है। उसका लाभ किसानों को मिले, इस कार्य की नियमित मॉनीटरिंग होती रहे। किसानों से अनुरोध किया है कि योजना का लाभ लेने के लिये आगे आयें। किसी प्रकार के बहकावे में नहीं आयें। इस संबंध में व्यापक स्तर पर जानकारियों का प्रसार किया जाये। बैठक में बताया गया कि भावांतर योजना में पंजीकृत पात्र एक लाख 17 हजार 500 किसानों द्वारा 16 से 31 अक्टूबर के मध्य मंडी में 35 लाख क्विंटल फसलों का विक्रय किया गया है। राज्य सरकार द्वारा किसानों के बैंक खातों में लगभग 167 करोड़ 42 लाख की भावांतर की राशि जमा की जायेगी। यह भी बताया गया कि जो किसान अपनी फसल का भण्डारण करना चाहते हैं और बाद में उचित मूल्य मिलने पर फसल की बिक्री करना चाहते हैं। उनको लायसेंसी गोदाम में भण्डारण करने पर प्रति क्विंटल प्रति माह 9 रूपये 90 पैसे का अनुदान शासन द्वारा दिया जायेगा। बैठक में अपर मुख्य सचिव वित्त श्री ए.पी. श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव कृषि श्री राजेश राजौरा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री एस.के. मिश्रा, आयुक्त जनसंपर्क श्री अनुपम राजन, स्टेट वेयर हाऊस कार्पोरेशन के प्रबंध संचालक श्री के.सी. गुप्ता, प्रबंध संचालक राज्य कृषि विपणन मण्डी बोर्ड श्री फैज अहमद किदवई सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

aa भावांतर भुगतान योजना जारी रहेगी : किसान किसी के बहकावें में न आयें
1 November 2017
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भावांतर भुगतान योजना किसानों के हित संरक्षण के लिये निरंतर जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि विपक्षी लोग इस योजना के बारे में भम फैला रहे हैं। मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि किसान भाई किसी के भी बहकावे में न आयें। उन्होंने कहा कि मैं किसान का बेटा हूँ और किसानों की पीड़ा को अच्छी तरह से समझता हूँ। श्री चौहान मंदसौर जिले के ग्राम भानपुरा में प्रदेश के स्थापना दिवस के अवसर पर विकास यात्रा के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर नहर परियोजना की यूनिट-2 का लोकार्पण के साथ ही, करीब 500 करोड़ रूपये के विकास और निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण भी किया। इन परियोजनाओं से जिले के 130 गाँव के किसानों की 37 हजार 700 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। श्री चौहान ने समारोह में घोषणा की कि इस वर्ष प्रदेश में कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए किसानों को 2 माह के लिये अस्थाई बिजली कनेक्शन दिये जाएंगे। अगले 3 साल में प्रदेश के हर गरीब व्यक्ति को सरकार पक्का मकान बनाकर देगी। उन्होंने कहा कि हर गरीब व्यक्ति को उसके वर्तमान निवास की जमीन का पट्टा दिया जाएगा और सरकार उसे घर बनाकर भी देगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ग्राम भानपुरा से प्रदेश की विकास यात्रा का शुभारंभ करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश अब सतत विकास की नई मिसाल बनेगा। विकास की तेज रफ्तार को किसी भी सूरत में रूकने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने पिछले 5 वर्षों में प्रदेश की विकास दर 20 प्रतिशत से अधिक रहने का श्रेय किसानों की मेहनत को देते हुए कहा कि प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं रहा है। पहले प्रदेश में केवल 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही सिंचाई होती थी। सरकार के प्रयासों से अब यह रकबा 40 लाख हेक्टेयर तक बढ़ गया है। मुख्यमंत्री ने गरोठ, भानपुरा क्षेत्र के किसानों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसा पहली बार हुआ कि अंदरूनी नहर बनाकर और उसमें पाईप लाइन डालकर गांधी सागर का पानी भानपुरा और गरोठ तहसील के घर-घर और खेत-खेत तक पहुँचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र अब फसलों से लहलहायेगा। श्री चौहान ने इस अवसर पर शामगढ़-सुवासरा सिंचाई परियोजना के लिये 800 करोड़ रूपये मंजूर करने की घोषणा की। इस परियोजना के पूरा होने पर 180 गाँव की 40 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई जल की स्थाई सुविधा मिलेगी। उन्होंने नीमच जिले के मनासा क्षेत्र में सिंचाई जल पहुँचाने का सर्वे कराने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय जन-प्रतिनिधियों की माँग के अनुरूप सिंचाई परियोजनाओं का परीक्षण कराकर साध्यता प्रतिवेदन के आधार पर स्वीकृति दी जायेगी। दूधाखेड़ी माताजी के मंदिर में सभी प्रकार के नव-निर्माण कार्य कराये जायेंगे। गरोठ में 100 बिस्तरीय अस्पताल शुरू करने के लिये सकारात्मक कदम उठाये जायेंगे। श्री चौहान ने कहा कि दलोदा में फूड पार्क स्थापना संबंधी सभी बाधा दूर करेंगे। गरोठ क्षेत्र के टोलों/मजरों को राजस्व ग्राम बनायेंगे। अगले दो साल में बिजली से वंचित सभी परिवारों तक बिजली पहुँचायेंगे। कार्यक्रम में गरोठ और भानपुरा ब्लाक के कुल 17 हजार 892 हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं के 24 करोड़ रूपये से अधिक राशि के हितलाभ पत्र वितरित किये गये। मुख्यमंत्री ने प्रतीक स्वरूप 25 हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किये। कार्यक्रम को क्षेत्रीय सांसद श्री सुधीर गुप्ता और गरोठ विधायक श्री यशपाल सिंह सिसोदिया ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में विधायक सर्वश्री जगदीश देवड़ा, ओमप्रकाश सखलेचा, दिलीप सिंह परिहार, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रियंका डॉ. मुकेश गिरि गोस्वामी, किसान कल्याण आयोग के अध्यक्ष श्री ईश्वरलाल पाटीदार, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री मदनलाल राठौर, पंचायत राज संस्थाओं के पदाधिकारी, अन्य जन-प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद थे।

aa किसानों को 50 हजार रूपये तक नगद भुगतान करने में ज्यादा रूचि ले रहे व्यापारी
1 November 2017
प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में भावांतर भुगतान योजना के क्रियान्वयन से किसानों ने राहत महसूस की है। मंडियों में उपज की सही तुलाई की समुचित व्यवस्था से किसान खुश है। उपज खरीदने वाले व्यापारी भी किसानों को ज्यादातर नगद भुगतान करने में रूचि ले रहे हैं। होशंगाबाद जिले की पिपरिया मंडी में चन्देरी के किसान श्री संजय सोढानी ने मक्का 900 रुपये क्विंटल के भाव से बेचा तो खरीदने वाले व्यापारी ने 70 हजार 650 रुपये का पूरा भुगतान नगद किया। इसी तरह पिपरिया मंडी में ही बारंगी गाँव के श्री शिवप्रसाद रघुवंशी को 4221 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से मूंग बेचने पर 65 हजार 425 रुपये, सिहोरा गाँव की सुश्री मीना साहू को 2455 रुपये प्रति क्विंटल भाव से सोयाबीन बेचने पर 52 हजार 782 रुपये तथा पौड़ी गाँव के श्री जितेन्द्र पटेल को 952 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से मक्का बेचने पर 52 हजार 360 रुपये नगद मिले। डबरा कृषि उपज मंडी में मेहगांव के किसान श्री भारत सिंह ने 3500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से 16.40 क्विंटल उड़द बेची तो कुल कीमत 57 हजार 400 रुपये नगद मिली। दतिया मंडी में सिकौआ गांव के श्री सालिकराम साहू ने 2700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से 19.25 क्विंटल उड़द बेची तो उसे कुल कीमत 51 हजार 960 रुपये नगद मिली। इसी तरह श्योपुर मंडी में कनपुरा गाँव के श्री छोट्या किसान ने 2741 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से 19 क्विंटल सोयाबीन बेची तो उसे पूरी कीमत 52 हजार 79 रुपये नगद मिली। भावांतर भुगतान योजना में किसानों को उनकी उपज की कीमत का 50 हजार रुपये नगद भुगतान करने में व्यापारियों को अब कोई दिक्कत नहीं हो रही है। कृषि उपज मंडी खरगोन में फर्म अरिहंत टेडर्स ने ग्राम बिस्टान के किसान श्री दिलीप शिवराम और ग्राम उमरखली के किसान श्री गोविंद हीरालाल की मक्का की उपज नीलामी के माध्यम से क्रमश: 1140 रुपये और 1051 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से खरीदी। फर्म ने इन दोनों किसानों को कुल मूल्य का 50-50 हजार रुपये मंडी में ही नगद भुगतान किया और शेष राशि इन किसानों के खातों में आरटीजीएस से जमा करवाई। इसी फर्म‍ने ग्राम डोगरगांव के किसान श्री राजेश बाबूलाल का सोयाबीन नीलामी में 2641 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से खरीदा और कुल मूल्य 51 हजार 235 रुपये का नगद भुगतान किया। सीहोर कृषि उपज मंडी में ईटखेड़ी की किसान सुश्री धापूबाई ने 35.48 क्विंटल और पिपलिया नगर के श्री उमर खान ने 24.81 क्विंटन सोयाबीन फसल का भावांतर भुगतान योजना में पंजीयन कराया तो इन्हें क्रमश: 97 हजार 393 रुपये और 69 हजार 468 रुपये कुल भुगतान मिला। व्यापारी श्री दिलीप कुमार जगमोहन शाह ने इन दोनों का सोयाबीन खरीदा और 50-50 हजार रुपये नगद भुगतान किया तथा शेष राशि इन किसानों के खातों में आरटीजीएस से जमा कराई। इसी प्रकार, रतलाम मंडी में बाशिन्दा ग्राम की किसान सुश्री माया राठौर ने 26.18 क्विंटल सोयाबीन 2675 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेचा तो उसे 70 हजार रुपये का भुगतान मिला। खरीददार ने सुश्री माया राठौर को 50 हजार रुपये नगद दिये और 20 हजार रुपये उनके बैंक खाते में आरटीजीएस से जमा कराये। सागर मंडी में जैसीनगर में किसान धनेश ठाकुर ने 25 क्विंटल सोयाबीन 2595 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेचा तो उसे पूरी कीमत 64 हजार 875 रुपये नगद मिली। प्रदेश में किसानों के हित संरक्षण के लिये सभी जिलों में कलेक्टर और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी स्वयं मंडियों की व्यवस्थाएँ देख रहे हैं। इसके फलस्वरूप किसानों को उपज का सही मूल्य मिल रहा है।

aa भावांतर योजना के बाद किसानों को मिल रहे वाजिब दाम
1 November 2017
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मंत्रालय में मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना की समीक्षा की। उन्होंने मंडियो में उपजों के मॉडल रेट प्रदर्शित करने और खरीदी की सभी व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। बैठक में मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह, अपर मुख्य सचिव गृह श्री के.के. सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त श्री पी.सी. मीणा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव द्वय श्री अशोक वर्णवाल और श्री एस.के. मिश्रा, मंडी आयुक्त श्री फैज अहमद किदवई एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बताया गया कि मंडियों में माहौल बिगाड़ने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। किसानों को नगद भुगतान शुरू हो गया है। उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही है। मुख्यमंत्री ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को मंडियों का दौरा कर किसानों की समस्याएँ तत्काल निराकृत करवाने के निर्देश दिये। समीक्षा में बताया गया कि भावांतर योजना के बाद उड़द और मूंग की उपजों के वाजिब दाम किसानों को मिल रहे हैं। यह भी बताया गया कि भावान्तर योजना से न तो बाजार पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ा है और न ही उपजों के भावों में कमी आई है। किसानों को भी किसी प्रकार का नुकसान नहीं हो रहा है। मंडियों में शांति से व्यापार हो रहा है। किसानों को आसानी से नगद भुगतान हो रहा है। सभी जिलों में कलेक्टर एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारी मंडियों की व्यवस्थाएँ देख रहे हैं।

aa किसानों को हर हाल में उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के निर्देश
31 October 2017
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज निवास पर उच्च स्तरीय अधिकारियों की बैठक में भावांतर भुगतान योजना की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिये कि किसानों को हर हाल में उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना सुनिश्चित करें। बैठक में मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। श्री चौहान ने कहा कि भावांतर भुगतान योजना के संबंध में फैलायी जा रही भ्रांतियों को दूर करने के लिये जिलों में नियंत्रण कक्ष स्थापित किये जायें। टोल फ्री नम्बर पर किसानों की समस्याओं को सुनकर तत्काल उसका समाधान सुनिश्चित करने की पुख्ता व्यवस्था बनायें। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपे ताकि वे वहां की मंडियों में जाकर योजना के क्रियान्वयन की सुचारू व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें, किसानों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान भी करें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि कृषि उपज के एवज में किसानों को नगद भुगतान करने में व्यापारियों को किसी भी प्रकार की कोई बाधा नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि उपज की ब्रिकी करने पर 50 हजार रूपये तक राशि का नगद भुगतान अवश्य किया जाये।

aaकृषक कल्याण एवं कृषि विकास में अव्वल हुआ मध्यप्रदेश


30 October 2017

मध्यप्रदेश में विकास और जन कल्याण के विभिन्न क्षेत्रों में हुई अभूतपूर्व प्रगति देखने में पड़ोसी राज्य का मीडिया जगत रूचि लेने लगा है। इसी परिप्रेक्ष्य में महाराष्ट्र राज्य के पत्रकारों का एक दल मध्यप्रदेश आया है। इस दल में शामिल वरिष्ठ पत्रकारों ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया, विकास कार्यों को देखा, नवाचारों से अवगत हुए, किसानों और उद्यमियों से मिलकर प्रदेश की माली हालत भी जानी। जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र से आज महाराष्ट्र राज्य के वरिष्ठ पत्रकारों के दल ने उनके निवास पर भेंट की। डॉ. मिश्र ने पत्रकारों का प्रदेश भ्रमण पर स्वागत करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में कृषि, शिक्षा, रोजगार, उद्योग और महिला-बाल विकास जैसी सीधी आम आदमी से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन से उल्लेनीय प्रगति की है। डॉ. नरोत्तम मिश्र ने कहा है कि मध्यप्रदेश में गत 14 वर्ष में 7 लाख हेक्टेयर से 40 लाख हेक्टेयर तक सिंचाई क्षेत्र में वृद्धि एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। सिंचाई क्षेत्र में 6 गुना वृद्धि के फलस्वरूप ही मध्यप्रदेश लगातार कृषि कर्मण अवार्ड प्राप्त कर रहा हैं। हर खेत तक सिंचाई के लिए जल पहुँचाने के कार्य को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने गुजरात की तरह मध्यप्रदेश में विद्युत फीडर सेपरेशन सिस्टम लागू कर हर वर्ग के लिए पर्याप्त विद्युत प्रदाय की व्यवस्था सुनिश्चित की है। डॉ. मिश्र ने कहा कि मध्यप्रदेश की कई योजनाएं अब अन्य राज्यों में लागू की जा रही है। इनमें प्रमुख रूप से लाड़ली लक्ष्मी योजना, सायकिल प्रदाय योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना शामिल हैं। जनसंपर्क मंत्री ने कहा कि हाल ही लागू भावांतर भुगतान योजना किसानों को बाजार में उनकी उपज का सम्मानजनक मूल्य दिलवाने में उपयोगी सिद्ध हो रही है। डॉ. मिश्र ने पत्रकारों को प्रदेश में संसदीय कार्य और जनसंपर्क की गतिविधियों की जानकारी दी। विशेष रूप से पत्रकारों के लिए बीमा योजना, श्रद्धानिधि योजना, अधिमान्यता प्रदान करने और विभिन्‍न क्षेणियों में पुरस्कृत किए जाने के प्रावधानों और योजनाओं की जानकारी दी। जनसम्‍पर्क मंत्री डॉ. मिश्र को पत्रकारों ने बताया कि उन्हें मध्यप्रदेश विशेष कर भोपाल पहुँचकर प्राकृतिक सुंदरता देखकर खुशी मिली है। विभिन्न संस्थानों के भ्रमण से नई जानकारियां भी प्राप्त हो रही है। महाराष्ट्र राज्य का यह पत्रकार दल 29 अक्टूबर को मध्यप्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त श्री पी.सी. मीणा और प्रमुख सचिव कृषक कल्याण एवं कृषि विकास डॉ. राजेश राजौरा से मिला। प्रदेश में किसानों के लिये और कृषि के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा क्रियान्वित योजनाओं की जानकारी ली प्रदेश की उपब्धियाँ जानी। पत्रकारों को कृषि उत्पादन आयुक्त श्री पी.सी. मीणा ने बताया कि मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप किसानों की आय दोगुनी करने के लिये प्रभावी कार्य-योजना बनाकर उस पर अमल किया जा रहा है। प्रदेश को पिछले पाँच वर्षों से लगातार राष्ट्रीय कृषि कर्मण अवार्ड मिल रहे हैं। प्रमुख सचिव डॉ. राजौरा ने बताया कि मध्यप्रदेश देश में दलहन, तिलहन, चना, मसूर, सोयाबीन, अमरूद, टमाटर और लहसुन उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। गेहूँ , अरहर, सरसों, आंवला, संतरा, मटर और धनिया उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश का वर्ष 2004-05 में कृषि उत्पादन 2.14 करोड़ मीट्रिक टन था जो वर्ष 2016-17 में बढ़कर 5.44 करोड़ मीट्रिक टन हो गया है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में किसानों की समस्याओं के समाधान तथा कृषि क्षेत्र के विकास के लिये डॉ. स्वामी नाथन आयोग की अनुशंसाओं के क्रियान्वयन को राज्य सरकार ने प्राथमिकता प्रदान की है। किसानों के हित के लिये मध्यप्रदेश में कृषि केबिनेट का गठन किया गया है। डॉ. राजौरा ने बताया कि देश में पहली बार भावान्तर भुगतान योजना सोयाबीन, मुंगफली, तिल, रामतिल, मक्का, मूंग, उड़द और अरहर की फसलों के लिये लागू की गई है। इस योजना में पोर्टल पर किसानों का पंजीयन किया गया है। प्रदेश के 16 लाख से अधिक किसानों ने विभिन्न फसलों का इस योजना में पंजीयन करवाया है। उन्होंने बताया कि किसानों का नि:शुल्क पंजीयन 11 सितम्बर से 15 अक्टूबर तक किया गया। मध्यप्रदेश की कृषि उपज मंडियों में फसलों की आवक शुरू हो गई है। किसानों के बैंक खाते में न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा घोषित मंडियों की मॉडल विक्रय दल के अन्तर की राशि जमा की जा रही है।
पत्रकारों ने जनजातीय संग्रहालय एवं पुरातत्व संग्रहालय देखा
पत्रकारों के दल ने संस्कृति विभाग के जनजातीय संग्रहालय, पुंरातत्व विभाग के राज्य संग्रहालय और शौर्य स्मारक का भी भ्रमण किया। इस अवसर पर बताया गया कि भौगोलिक रूप से मध्यप्रदेश की भारत के नक्शे में केन्द्रीय स्थिति है। मध्यप्रदेश की सीमायें पाँच राज्यों को स्पर्श करती हैं। मध्य्रप्रदेश की जनजातीय संस्कृति में इन राज्यों की झलक स्वष्ट देखने को मिलती है। संग्रहालय में आदिवासी संस्कारों में जीवन के विभिन्न चरणों रहन सहन, त्यौहारों और विवाह जैसी रस्मों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। संग्रहालय की स्थापना का उद्देश्य आदिवासी समाज को समग्रता से देखने और उनकी जीवन को समझने की कोशिश करना है। महाराष्ट्र के पत्रकारों के दल ने पुरातत्व विभाग के राज्य संग्रहालय का भी भ्रमण किया। संग्रहालय प्रभारी ने बताया कि संग्रहालय में 16 गैलरी हैं। राज्य संग्रहालय का निर्माण 12 करोड़ रूपये की लागत से किया गया है। संग्रहालय की गैलरी में प्रौगेतिहासिक एवं जीवाश्म, उत्खनित सामग्री, धातु प्रतिमा, अभिलेख, प्रतिमाओं, रॉयल कलेक्शन, टेक्सटाईल, स्वाधीतना संग्राम, डाक टिकिट, आफ्टोग्राफस, पांडुलिपियां, लघुरंग चित्रों, मुद्राओं, अस्त्र-शस्त्र आदि को सलीके से प्रदर्शित किया गया है।


aa ग्राम सभाओं में मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना में किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया शुरू
12 October 2017
मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना में किसानों के पंजीयन की कार्यवाही ग्राम सभाओं में शुरू हो गई है। सभी किसानों का पंजीयन सुनिश्चित होने तक यह कार्यवाही जारी रहेगी। ग्राम सभाओं में विभागीय अधिकारी अधूरे आवेदनों को स्वयं पूरा करवायेंगे और ग्राम सभा के प्रभारी अधिकारी किसान को पंजीयन की पावती भी देंगे। इस योजना में पंजीयन के लिये किसानों को आधार कार्ड, समग्र आईडी, मोबाइल नम्बर तथा बैंक खाते आदि की जानकारी देना जरूरी है।
योजना का अधिकाधिक लाभ दिलाने जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी-
योजना में सात दलहनी फसलों सोयाबीन, मूंगफली, तिल, रामतिल, मक्का, मूंग और उड़द का 16 अक्टूबर से 15 दिसम्बर 2017 तक कृषि उपज मंडियों में क्रय-विक्रय किया जाएगा। प्रमुख सचिव किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग डॉ. राजेश राजौरा ने जिला कलेक्टरों से कहा है कि कृषि उपज मंडियों में क्रय-विक्रय की कार्यवाही अनुज्ञप्तिधारी व्यापारियों के द्वारा ही सुनिश्चित की जाए ताकि अधिकाधिक किसानों को इस योजना का समुचित लाभ मिल सके। जिला कलेक्टरों को निर्देश दिये गये हैं, कि 16 अक्टूबर से पहले जिला मुख्यालय की मंडियों के अनुज्ञप्तिधारी व्यापारियों की बैठक कर क्रय-विक्रय की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करें। इसी प्रकार राजस्व अनुभाग स्तर पर भी बैठक की जाए और अनुभाग की कृषि उपज मंडियों तथा उप मंडियों में अनुज्ञप्तिधारी व्यापारियों के माध्यम से दलहनी फसलों के क्रय-विक्रय की सुचारू व्यवस्था की जाए।
257 कृषि उपज मंडी समितियों को 405 लाख रुपये स्वीकृत-
मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना और किसान हितैषी एवं कृषि प्रोन्नति से जुड़े किसान सम्मेलन के लिये प्रदेश की 257 कृषि उपज मंडी समितियों को 405 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस राशि का व्यय मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड की कृषि अनुसंधान एवं अधोसंरचना विकास निधि की अर्जित ब्याज मद से किया जाएगा। कृषि उपज मंडी समितियों को यह राशि निर्धारित श्रेणी के अनुसार मिलेगी। ज्ञातव्य है कि प्रदेश में 'क' श्रेणी की 39, 'ख' श्रेणी की 42, 'ग' श्रेणी की 56 और 'घ' की 120 कृषि उपज मंडी समितियाँ हैं।

aa भावांतर भुगतान योजना किसानों के लिए महाबोनस- श्री चौहान
12 October 2017
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सरकार ने किसानों के लिए महाबोनस की व्यवस्था भावांतर भुगतान योजना द्वारा की है। इसका लाभ लेने के लिए पंजीयन करवाना अनिवार्य है। किसान भाई पंजीयन करवाने में चूके नहीं, अन्यथा योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। श्री चौहान आज प्रदेश की समस्त ग्राम सभाओं को लाइव संबोधित कर रहे थे। उन्होंने किसानों से भावांतर भुगतान योजना, उसकी प्रक्रियाओं और प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करते हुये बताया कि मक्का उत्पादक किसानों की समस्याओं का समाधान करवाया जाएगा। जले ट्रांसफार्मर को बदलवाने के लिए उपभोक्ताओं की संख्या 75 से घटाकर 50 प्रतिशत कर दी गई है। साथ ही जमा की जाने वाली बकाया राशि भी 40 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दी गई है। दीवाली के बाद कपास उत्पादक जिलों में 16 खरीदी केन्द्र शुरू हो जाएंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किसानों द्वारा योजना में कम पंजीयन करवाने पर चिंता व्यक्त करते हुये अपील की कि वे अंतिम तिथि से पूर्व पंजीयन जरूर करवायें। प्रदेश सरकार आम आदमी और गरीब किसान की सरकार है, जो संकट के समय हमेशा किसानों के साथ रही है। खेती को लाभकारी बनाने के लिए हर उपाय करती है। उन्होंने कहा कि बंपर उत्पादन के कारण फसलों के बाजार मूल्य में गिरावट हो गई थी। सरकार ने भंडारण आदि की दिक्कतों के बावजूद 8 रूपए प्रति किलो की दर से प्याज की खरीदी कर, किसानों का नुकसान नहीं होने दिया। मूंग, तुअर आदि की बाजार मूल्य से करीब डेढ़ हजार रूपए अधिक पर खरीदी की। श्री चौहान ने कहा कि किसान की फसल कम मूल्य पर नहीं बिकने देने की प्रतिबद्धता का सरकार ने पालन किया था जिस पर एक हजार करोड़ रूपये से अधिक राशि का व्यय किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की मदद के लिए पैसों की चिंता नहीं करती है। किसान को फसल का उचित मूल्य मिले, इसके लिये राज्य सरकार कटिबद्ध है। श्री चौहान ने बताया कि फसलों के उचित दाम किसानों को मिलें, इसकी गारंटी के लिए भावांतर योजना लागू की है। योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो 15 अक्टूबर तक योजना के पोर्टल पर पंजीयन करवा लेंगे। उन्होंने बताया कि ग्राम सभा में पंजीयन का कार्य किया जा रहा है। साथ ही गेहूँ, धान का ई-उपार्जन करने वाली 3500 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों और 257 कृषि उपज मंडियों में भी नि:शुल्क पंजीयन सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। पंजीयन करवाने वाले किसानों को उनके मोबाइल पर शार्ट मैसेज सर्विस (एस.एम.एस) के द्वारा सूचना दी जाएगी। हर किसान को यूनिक आई डी नम्बर दिया जाएगा जिसे कृषि उपज मंडी में विक्रय करते समय किसानों को देना होगा। तभी उन्हें भावांतर योजना का लाभ मिलेगा। पंजीयन के समय राजस्व अभिलेख, आधार कार्ड, समग्र आई.डी. और बैंक खाता क्रमांक की जानकारी भी देना होगी। किसान द्वारा फसल बोनी का राजस्व विभाग द्वारा सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक जिले के फसलवार पाँच वर्षों में सर्वश्रेष्ठ तीन वर्षों की फसल कटाई प्रयोगों के परिणामों के आधार पर उत्पादकता की गणना की जाएगी। मुख्यमंत्री ने भावांतर भुगतान योजना में फसल के मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आठ फसलों में से किसी फसल का मंडी में निर्धारित अवधि के दौरान विक्रय न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम और मॉडल विक्रय दर से अधिक पर होता है, तो विक्रय की दर तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य के बीच के अंतर की राशि किसान के खाते में जमा की जाएगी। इसी तरह यदि निर्धारित फसलों में से कोई फसल मॉडल विक्रय मूल्य से कम में विक्रय की जाती है, तो न्यूनतम समर्थन मूल्य और मॉडल विक्रय मूल्य के भावांतर की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में जमा की जाएगी जिसकी सूचना मोबाईल पर भी दी जाएगी। किसान फसल की बिक्री मंडियों में व्यापारी को करेंगे। व्यापारी उन्हें तत्काल राशि देगा। भावांतर की राशि दो माह की अवधि में उनके बैंक खातों में जमा हो जाएगी। श्री चौहान ने बताया कि 16 अक्टूबर से 15 दिसम्बर 2017 के मध्य 7 फसलों सोयाबीन, मूंगफली, तिल, रामतिल, मक्का, मूंग, उड़द और 1 फरवरी से 30 अप्रैल 2018 तक अरहर (तुअर) का विक्रय करते समय यूनिक आई.डी. देना होगी। मंडी में क्रय-विक्रय, खरीदी के समय अनुबंध पत्र, तौल पर्ची, भुगतान पत्रक मंडी कर्मचारियों द्वारा तैयार किया जाएगा। उन्होंने किसानों से अपील की कि योजना में पंजीयन का अवसर गवांए नहीं। ग्राम सभा में ही पंजीयन का कार्य करवा लें। योजना का सबको लाभ मिलेगा, व्यवस्था में सहयोग करें। स्वयं का और अपने आस-पास के किसानों का पंजीयन करवाने में सहयोग करें। मुख्यमंत्री ने ग्राम सभा में उपस्थित ग्रामीणों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ दी। उन्होंने कहा कि आपके जीवन में सुख-समृद्धि के लिये आपकी सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। खेती को लाभकारी बनाने का लक्ष्य है। इसकी सफलता के लिए सबको मिलकर काम करना होगा।

aaइफ्को, कृभको की तरह बीज संघ का भी ब्रॉण्ड होगा : राज्य मंत्री श्री सारंग


27 September 2017

सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री विश्वास सारंग ने कहा है कि इफ्को और कृभको की तरह बीज संघ अपना ब्रॉण्ड तैयार कर रहा है। बीज संघ द्वारा शार्ट टर्म और लांग टर्म की योजनाएँ बनाकर उन पर अमल किया जा रहा है। राज्य मंत्री श्री सारंग आज राज्य सहकारी बीज संघ की वार्षिक साधारण सभा को संबोधित कर रहे थे। श्री सारंग ने कहा कि बीज संघ का अपना ब्रॉण्ड होगा। बीज की गुणवत्ता को मेंटेन रखा जाएगा। ब्रॉण्ड के माध्यम से प्रदेश की बीज उत्पादक समितियों के बीज की मार्केटिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस कार्य-योजना पर अमल शुरू कर दिया गया है। यह लांग टर्म योजना है। राज्य मंत्री ने कहा कि बीज उत्पादक समितियों के बीज का पूरी तरह विक्रय सुनिश्चित करने के लिये शार्ट टर्म योजना के अंतर्गत समितियों को लॉजिस्टिक सुविधा देना तुरंत शुरू किया जा रहा है। श्री सारंग ने कहा कि बीज संघ, बीज उत्पादक समितियों के सदस्यों के सुझाव पर अमल करेगा। बीज संघ के माध्यम से बीज सोसायटी की मार्केटिंग चेन बनाई जाएगी। सहकारिता राज्य मंत्री श्री सारंग ने कहा कि प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित किया जाएगा, जो एक प्रकार के बीज उत्पादन के अनुकूल हैं और जहाँ पर बीज उत्पादक समितियाँ उस बीज का उत्पादन कर रही हैं। एक अथवा एक से अधिक जिलों को मिलाकर एक क्लस्टर बनाया जाएगा। बीज उत्पादन में इन समितियों को तकनीकी और वैज्ञानिक इनपुट दिया जाएगा। इस क्षेत्र से बीज का वितरण माँग वाले क्षेत्रों में सुनिश्चित किया जाएगा। बैठक में बीज संघ के वार्षिक प्रतिवेदन, बजट और आय-व्यय का अनुमोदन किया गया। बैठक में एम.डी. बीज संघ श्री आर.के. घिया, एम.डी. अपेक्स बैंक श्री प्रदीप नीखरा, एम.डी. बीज प्रमाणीकरण संस्था श्री के.एस. टेकाम, संबंधित विभागों के अधिकारी और बीज उत्पादक समितियों के पदाधिकारी मौजूद थे।


“सोयाबीन: विकल्प एवं अवसर” विषय पर कॉन्फ्रेंस आयोजित
25 September 2017
“सोयाबीन: विकल्प एवं अवसर” पर कॉन्फ्रेंस आयोजित की गयी। इसका आयोजन यूएस सोयाबीन एक्सपोर्ट काउंसिल (यूएसएसईसी) की ओर से किया गया था। इसमें उद्योगों, सरकार, शिक्षा विभाग, कृषि, नीति विशेषज्ञों, यूएस डिपाटर्मेंट ऑफ एग्रीकल्चर (यूएसडीए), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रीशन आदि भी शामिल रहे।
सोया प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसओपीए) के निदेशक श्री डी. एन. पाठक ने कहा
कि सोया बिजनेस भारत का सबसे तेजी से फलता-फूलता कारोबार है, जिसकी सालाना वृद्धि दर 8 से 10 फीसदी है। श्री पाठक ने दलील दी कि हमारी सरकार ने इस मुद्दे पर उचित नीति बनाकर सोया के खाद्य उत्पादों को स्कूलों के पोषाहार और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों में शामिल करना चाहिए। ड्यूपाइंट न्यूट्रीशन के श्री इंद्रानिल चटर्जी ने सोया प्रोटीन से तैयार प्रचुर मात्रा में प्रोटीन युक्त खाद्य और पेय पदार्थों के संबंध में प्रेजेंटेशन दिया।
यूएसएसईसी में सोया फूड प्रोग्राम के हेड डॉ. रतन शर्मा
ने भारत में पोषण की सुरक्षा और स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में सोया की ओर से निभाई जाने वाली भूमिका के बारे में कहा कि सोयाबीन कुछ पौधों में से एक है, जो कम वसा के साथ उच्च क्वालिटी का प्रोटीन भी लोगों को मुहैया कराता है। सोयाबीन लोगों को बेहतर महसूस करने में मदद करता है, जिससे वे लंबे समय तक अच्छी जिंदगी जी सकते हैं। सोयाबीन में सभी 3 माइक्रो न्यूट्रिएंट होते हैं। इसके साथ ही इसमें फाइबर, विटामिन और मिनरल भी होते हैं। सोयाबीन से प्राप्त प्रोटीन मनुष्य की सेहत के लिए जरूरी अमीनो एसिड मुहैया कराता है। 250 ग्राम सोयाबीन में 3 लीटर दूध, 1 किलो मांस या 24 अंडों के बराबर प्रोटीन होता है। पोषक तत्वों का सबसे समृद्ध स्रोत होने के अलावा सोयाबीन में फाइटोकैमिकल (आइसोफ्लेवोन्स) भी शामिल होते हैं, जिससे स्वास्थ्य को कई लाभ होते हैं। सोया प्रोटीन और आइसोफ्लेवोन्स एक साथ मिलने से सेहत को अनगिनत फायदे होते हैं। यह कैंसर की रोकथाम, कोलेस्ट्रोल कम करने, दिल को स्वस्थ रखने, जोड़ों की बीमारियों और मासिक धर्म नियमित करने में प्रमुख भूमिका निभाता है। ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम रहने को कारण डायबिटीज में शुगर के कम लेवल को बरकरार रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डॉ. शर्मा ने कई सोया उत्पादों के बारे में विचार-विमर्श किया, जिसमें सोया मिल्क, टोफू, सोया नगेट्स, सोया के गुणों से भरपूर गेहूं का आटा और सोया के गुणों वाले चने का आटा और दाल शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इन उत्पादों का निर्माण उच्च प्रसंस्करण तकनीक से किया गया है। ये खाने में काफी स्वादिष्ट और सेहत के लिए सुरक्षित हैं। उन्होंने जोर दिया कि सोया भारत में प्रोटीन कैलोरी संबंधी कुपोषण कम करने का शानदार उपाय है। हमारी सरकार को नौजवान पीढ़ी के बेहतर स्वास्थ्य के लिए कई सहायक पोषण और कल्याण कार्यक्रमों में सोयाबीन को प्रमुख पोषक तत्व के रूप में शामिल करना चाहिए। अमेरिका में पोषक सोया तेल के निर्माण के साथ हाई क्वालिटी का ऑयलिक सोया तेल भी विकसित किया गया है। हाई ऑयलिक सोया ऑयल को आंशिक रूप से हाइड्रोडिजिनेटेड वेजिटेबल ऑयल का इंडस्ट्री का पसंदीदा विकल्प माना जाता है। यह सभी तरह के प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, खास तौर से स्नैक्स की डीप फ्राइंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हाई आयलिक सोया ऑयल ट्रांस फैट से मुक्त होता है। इसमें सेचुरेटेड फैट कम होता है और इसमें किसी भी पारंपरिक सोया तेल के मुकाबले 3 गुना ज्यादा लाभदायक मोनो अनसेचुरेटेड फैट होता है। डॉ. शर्मा के अनुसार, हाल ही में अगस्त 2017 में यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एपडीए) ने बंज नॉर्थ अमेरिका की एक याचिका को मंजूरी दी, जिसमें दावा किया गया है कि सोयाबीन तेल का प्रयोग करने से दिल के रोगों का खतरा कम होता है। सोया तेल अमेरिका में सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाने वाला उत्पाद है और पॉलिअनसेचुरेटेड फैट का प्रमुख स्रोत है। खाद्य तेलों में सोयाबीन का तेल भारत में सबसे अधिक प्रयोग किया जाने वाला दूसरा खाद्य तेल है। सोयाबीन के तेल को दिल के लिए काफी अच्छा माना जाता है, क्योंकि इसमें अनसेचुरेटेड फैटी एसिड बहुत कम होते हैं। मनुष्य के स्वास्थ्य और उसकी सेहत के लिए 2 फैट कंपोनेंट, लाइनोलेयिक और लाइनोलेनिक एसिड इसमें शामिल होते हैं। ये दोनों एसिड सोयाबीन के तेल में उचित मात्रा में पाए जाते हैं। यह विटामिन ई का अच्छा स्रोत है। मछली के तेल की तरह, सोयाबीन के तेल में ओमेगा-3 होता है, जो दिल के रोगों और कैंसर से हमारी रक्षा करता है। भारत में सोया युक्त खाद्य उत्पादों के बारे में विचार-विमर्श करते हुए डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि उचित मात्रा में पोषक पदार्थों वाले और स्वादिष्ट क्वॉलिटी वाले फूड प्रॉडक्ट के निर्माण में कच्चा माल प्रमुख भूमिका निभाता है। स्पेशल सोयाबीन का उत्पादन भारत में नहीं होता। इससे भारत के सोया फूड सेक्टर में अच्छी क्वालिटी के सोयाबीन का उत्पादन कम होता है, जिसे और अच्छा बनाने की संभावनाएं भी कम ही रहती हैं। डॉ. शर्मा ने अमेरिका के फूड स्पेशलिटी सोयाबीन के प्रयोग की सिफारिश की, जिससे भारतीय सोयाबीन की तुलना में अच्छी कर्वालिटी के सोया उत्पाद तो मिलते ही हैं, इनकी स्वीकार्यता भी बढ़ जाती है और इन्हें और बेहतर बनाने की संभावना भी रहती है। हाल में सोया संबंधी खाद्य उत्पादों का प्रसंस्करण लघु, मध्यम और दीर्घ पैमाने पर रोजगार के अवसरों का सृजन करने का बेहतरीन स्रोत बन कर उभरा है। भारत दुनिया का पांचवा सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक देश है, पर इसके पोषक तत्वों के संबंध में जागरूकता की कमी और उचित प्रसंस्करण तकनीक के अभाव में यह उत्पाद अब तक भारतीय आहार में उतनी तेजी से स्वीकार नहीं किया जा सका है। हालांकि सोया फूड प्रोसेसिंग का क्षेत्र 10 फीसदी सालाना की दर से प्रगति कर रहा है, पर देश में प्रोटीन की कमी के पूरा करने के लिए इसे तेजी से भारतीय आहार में शामिल करने पर जोर देना चाहिए। इस कार्यक्रम में सोया फूड इंडस्ट्री, ट्रेड एसोसिशसंस, न्यूटीशन प्रोफेशनल्स, वैज्ञानिकों, देश भर की बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रफेशनल्स और प्रेस व मीडिया के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यूएस सोयाबीन एक्सपोर्ट काउंसिल (यूएसएसईसी) प्रमुख भागीदारों की महत्वपूर्ण साझेदारी वाली संस्था है, जिसका प्रतिनिधित्व अमेरिका के सोयाबीन उत्पादक करते हैं। उत्पादों को जहाज से भेजने वाले कारोबारी, विक्रेता, खाद्य उत्पादों का कारोबार करने वाली सहायक इंडस्ट्रीज और कृषि संस्थाएं भी इसके शामिल हैं। दुनिया भर में कार्यालयों के ग्लोबल नेटवर्क और अमेरिका में मजबूती से समर्थन प्राप्त होने के कारण यूएसएसईसी व्यापारिक और तकनीकी सेवाएं भी प्रदान करता है। इसके अलावा यूएसएसईसी अमेरिका के सोयाबीन उत्पादों की विश्व स्तर पर प्राथमिकता सुनिश्चित कर इन्हें दुनिया भर के बाजारों में मुहैया कराना भी तय करता है।

किसानों को लाभकारी मूल्य मिलना होगा सुनिश्चित
Our Correspondent : 13 Aug 2017
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मुख्ममंत्री भावांतर भुगतान योजना, कस्टम प्रोसेसिंग सेंटर्स योजना, किसानों की संतानों के लिए कृषक उद्यमी योजना लागू की जायेगी। उन्होंने डिफाल्टर किसानों के लिये समाधान योजना और मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना लागू किये जाने की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले तीन माह में सभी अविवादित नामांतरण, बंटवारे और सीमांकन प्रकरण निराकृत हो जायेंगे। इसके बाद तीन माह से अधिक पुराने प्रकरण की जानकारी देने वाला पुरस्कृत होगा! संबंधित राजस्व अधिकारी के विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवाई होगी। श्री चौहान आज आकाशवाणी से प्रसारित कार्यक्रम “दिल से” में किसानों के साथ सीधी बात कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि भावांतर योजना के द्वारा किसानों को उनके उत्पाद का लाभकारी मूल्य मिलना सुनिश्चित हो जायेगा। इस योजना में फसल गिरदावरी मोबाइल एप के माध्यम से प्राप्त संपूर्ण डाटा संकलित किया जायेगा। इससे किस किसान ने कौन सी फसल कितने रकबे में बोई, यह पता चलेगा और औसत उत्पादन की गणना कर समर्थन मूल्य और विक्रय मूल्य के अंतर की राशि को सीधे किसानों के खातों में डालने की व्यवस्था होगी। किसानों को राजस्व मामलों सीमांकन, नामांतरण और बँटवारे आदि में विलम्ब नहीं हो इसके लिए रेवन्यू केसेस मॉनीटरिंग सिस्टम की जानकारी देते हुये श्री चौहान ने बताया कि अगले तीन माह में सभी अविवादित नामांतरण, बंटवारे और सीमांकन प्रकरण निराकृत हो जायेंगे। इसके बाद तीन माह से अधिक पुराने ऐसे लंबित प्रकरणों की जानकारी देने वालों को नगद पुरस्कार मिलने और पुरस्कार की राशि दोषी अधिकारी कर्मचारी से वसूलने की बात कही। उन्होंने बताया कि शीघ्र ऐसी व्यवस्था की जायेगी जिसमें प्रति वर्ष खसरा की नकल की प्रतिलिपि नि:शुल्क किसानों को उपलब्ध करवाई जायेगी। उन्होंने बताया कि कस्टम प्रोसेसिंग सेंटर्स योजना शीघ्र प्रारंभ की जायेगी जिसमें युवाओं को 25 लाख रूपये के केन्द्र की स्थापना पर 40 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। इन केन्द्रों में किसान अपने कृषि उद्यानिकी उत्पाद लाकर किराये पर उनकी क्लीनिंग, ग्रेडिंग, पैकिंग और मूल्य संवर्द्धन करवा सकेंगे। किसानों की संतानों के लिए कृषक उद्यमी योजना शीघ्र शुरू की जा रही है जिसमें स्वरोजगार के लिए 10 लाख से 2 करोड़ रूपये का ऋण सरकार की गारंटी पर मिलेगा। इसमें 15 प्रतिशत अनुदान तथा 5 वर्षों तक 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान की भी व्यवस्था की गई है। श्री चौहान ने बताया कि किसानों की आय को दोगुना करने के प्रधानमंत्री के लक्ष्य को प्राप्त करने का रोडमैप तैयार कर लिया है जिसे हर जिले के किसानों के साथ साझा किया जा रहा है। इसमें पाँच बिन्दुओं कृषि लागत में कमी, उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि, कृषि विविधीकरण, उत्पादन का लाभकारी मूल्य और कृषि के जोखिम अथवा आपदाओं में बेहतर राहत की व्यवस्था करने पर मुख्य रूप से ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि आय को दोगुना करना कोई कल्पना नहीं है। बुरहानपुर के गाँव हैदरपुर के श्री प्रकाश जावले ने खेती की सही पद्धति, माइक्रो न्यूट्रेंट आदि का उपयोग कर एक एकड़ सोयाबीन का उत्पादन 5 से 7 क्विंटल कर लिया। गन्ने में ड्रिप फर्टीगेशन और एसएसआई पद्धति से उत्पादन 40 से 53 टन कर लिया। इस मॉडल से खेती कर प्रति एकड़ 62 हजार रूपये के लाभ को उन्होंने एक लाख रूपये कर लिया है। इसी तरह छिंदवाड़ा जिले के पांढ़ुर्ना के गांव तिगांव के श्री मधुसूदन टोनपे, सीधी जिले के गांव उपनी के श्री हरीलाल जायसवाल ने हाईटेक सब्जी के उत्पादन से, उज्जैन के गांव माकड़ोन के श्री हरीश पाटीदार ने पॉली हाउस में जैविक पान की खेती से, आगर जिले के गांव नलखेड़ा के श्री बद्रीलाल धाकड़ ने एक हेक्टेयर के बगीचे में 600 क्विंटल संतरे का उत्पादन कर लागत का 6 गुना तक बढ़ाने की जानकारी दी। उन्होंने खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए सरकार के प्रयासों की भी जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि किसानों को सस्तीदर पर कृषियंत्र किराये पर उपलब्ध करवाने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटरों की स्थापना और ग्रामीण युवाओं को उनसे जोड़ा गया है। यह भी बताया कि मिट्टी की जाँच की व्यवस्था सभी विकासखण्डों में करवाई जा रही है ताकि जाँच के लिये किसानों को ज्यादा दूर नहीं जाना पड़े। मुख्यमंत्री कृषक सहकारी ऋण सहायता योजना के द्वारा खाद बीज के लिए माइनस 10 प्रतिशत पर कर्ज दिया जाता है। साहूकार पैसों की वसूली के लिए जोर जबरदस्ती नहीं कर सके, इसके उचित प्रबंध किये गये हैं। साथ ही साहूकार मूलधन से अधिक ब्याज नहीं ले सके, इसके लिये कानून में संशोधन की पहल की गई है। संशोधित प्रस्ताव राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिये भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने किसानों को वैज्ञानिक आधार पर बीज दर अनुसार बुवाई करने, अरहर की धारवाड़ पद्धति से, धान की श्री पद्धति से, रिज-फरो पद्धति से सोयाबीन की खेती करने, अंतवर्तीय फसलों की खेती करने का परामर्श दिया। श्री चौहान ने बताया कि अंतवर्तीय फसलें किसानों को प्राकृतिक आपदा के समय सुरक्षा देती है। उन्होंने खेती के साथ सहायक व्यवसाय के द्वारा अतिरिक्त आय अर्जित करने के लिये किसानों को प्रेरित किया। पशुपालन को लाभदायक बनाने के लिये आचार्य विद्या सागर गौ संवर्धन योजना की जानकारी देते हुये मुख्यमंत्री ने बताया कि 10 लाख रुपये तक की इकाई के लिये ढ़ाई लाख रूपये के अनुदान की व्यवस्था है। विगत दिनों प्याज के मूल्यों में आई गिरावट का उल्लेख करते हुये श्री चौहान ने बताया कि भविष्य में प्याज ठीक मूल्य पर बिके, इसके लिये प्याज के भंडारण में मदद की योजना तैयार की गई है जिसमें किसानों को 50 मी. टन क्षमता वाले भंडार गृह बनाने पर 50 प्रतिशत पौने दो लाख रूपये अनुदान राशि के रूपये मिलते हैं। उन्होंने खरपतवार नियंत्रण की दृष्टि से मल्चिंग को बढ़ावा देने फार्म पॉण्ड की प्लास्टिक लाइनिंग योजना, सोलर ड्रायर योजना और समन्वित कीट प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिये जाने की बात कही। दूध उत्पादकों को उनके दुग्ध उत्पादक का उचित मूल्य दिलाने की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुये मुख्यमंत्री ने बताया कि तीन हजार दूध संकलन केन्द्रों से प्रतिदिन एक लाख किलो दूध एकत्रित हो रहा है। प्रदेश में 14 मिलियन टन दुग्ध उत्पादन द्वारा राज्य देश में चौथे स्थान पर है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किसानों पर आई विपदाओं के विभिन्न प्रसंगों को उल्लेख करते हुये कहा कि सरकार सदैव उनके साथ रही है। विगत दिनों दलहन फसलों और प्याज के मंडी में प्रचलित दरों में गिरावट का उल्लेख करते हुये उन्होंने बताया कि सरकार के प्रयासों से किसानों को लगभग एक हजार करोड़ रूपये से अधिक की आय प्राप्त हुई है। सरकार द्वारा किसानों को प्राकृतिक और आकस्मिक आपदाओं के विरूद्ध सुरक्षा कवच प्रदाय किये जाने की जानकारी देते हुये मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना में मृत्यु पर 4 लाख रूपये की, स्थाई नि:शक्ता पर एक लाख और अस्थाई पर 50 हजार रूपये देने और सिंचित फसल की 50 प्रतिशत से अधिक क्षति होने पर 26 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर राहत दिलवाने के विषय में बताया। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि आपदा की स्थिति में ऋण वसूली रोक दी जाती है। ऋण का ब्याज सरकार भरती है। लंबित होने पर भी अगले वर्ष ऋण दिया जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने के लिये प्रधानमंत्री श्री मोदी का आभार ज्ञापित करते हुये बताया कि राज्य में 50 लाख किसानों को इससे जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में देश का सबसे बड़ा फसल बीमा दावा भुगतान राज्य में किया गया था। खरीफ 2016 की फसल बीमा योजना के एक हजार 880 करोड़ रूपये के दावों का भुगतान भी अगस्त माह में कर दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने सिंचाई सुविधाओं को बढ़ाने के प्रयासों तथा निर्माणाधीन और स्वीकृत योजनाओं का विवरण देते हुये बताया कि वर्ष 2025 तक 60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचित कर दिया जाएगा। इसी तरह नर्मदा के जल से मालवा में 6,50,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा देने की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 4,47,000 हेक्टेयर सैंच्य क्षेत्र को केन-बेतवा में शामिल करवाने के प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी के पर ड्राप मोर क्राप के सिद्धांत को क्रियान्वित करने के संकल्प को दोहराते हुये बताया कि प्रेशर से सिंचाई के लिये जल उपलब्ध करवाने की व्यवस्था 44 परियोजनाओं के 12 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है। ड्रिप इरीगेशन से उद्यानिकी फसलों की खेती करने के लिए किसानों को बधाई देते हुये बताया कि इस पद्धति से 40 से 60 प्रतिशत पानी कम लगता है। उत्पादन भी 10 से 30 प्रतिशत बढ़ जाता है। इसके साथ ही सिंचाई पंपों के अस्थाई कनेक्शनों को स्थाई पंप कनेक्शन में परिवर्तित करने के लिए मुख्यमंत्री स्थाई कृषि पंप कनेक्शन योजना की जानकारी दी जिसमें फ्लेट रेट पर 5 लाख कृषि पंपों को स्थाई कनेक्शन दिये जाना है। साथ ही किसानों के समक्ष बिजली की रीडिंग लेकर वास्तविक क्षमता अनुसार बिल निर्धारण व्यवस्था के बारे में भी बताया। उन्होंने बताया कि 5 हॉर्स पावर के विद्युत पंप पर सालाना 31 हजार की लागत आती है जिसमें से किसानों को मात्र 7 हजार रूपये ही देने पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में विद्युत अधोसंरचना का विकास नहीं हुआ है, उन क्षेत्र में मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना लागू की जायेगी जिसमें 3 लाख 41 हजार रूपये की लागत वाला 3 हॉर्स पावर का सोलर पंप मात्र 34 हजार रूपये में मिलेगा जबकि 5 हॉर्स पावर का 4 लाख 68 हजार रूपये का पंप सिर्फ 68 हजार में मिलेगा। मुख्यमंत्री ने किसानों को लाभकारी मूल्य दिलवाने की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुये बताया कि एक हजार करोड़ रूपये की लागत से मूल्य स्थिरीकरण कोष की स्थापना की गई है। जो बाजार में हस्तक्षेप कर किसानों को उनकी उपज का उचित दाम दिलवायेगा। इसके साथ ही कृषि उत्‍पाद लागत एवं विपणन आयोग का गठन किया गया है जो फसलों की कीमतें गिरने पर हस्तक्षेप करेगा। इसी तरह उर्वरक अग्रिम भंडारण योजना द्वारा खाद के अग्रिम भंडारण के लिए प्रेरित किया जायेगा। उन्होंने बताया कि अग्रिम उठाव की प्रक्रिया में ब्याज का भुगतान भी किसानों को नहीं करना पड़ेगा। रबी एवं खरीफ फसलों के लिए एक मुश्त अथवा अलग-अलग ऋण की व्यवस्था करने तथा डिफाल्टर किसानों को जीरो प्रतिशत पर कर्ज उपलब्ध करवाने के लिए समाधान योजना लागू करने की जानकारी मुख्यमंत्री ने दी। किसान अपनी फसले सीधे उपभोक्ता को बेच कर अधिक लाभ कमा सके, इसके लिए सभी नगरीय निकायों में किसान बाजार बनवाने की बात कही। मुख्यमंत्री ने किसानों से चर्चा में बताया कि कृषि प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार है। अच्छी खेती से प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। किसान के पास पैसा आता है तो वो बाजार जाता है जिससे व्यापारी की दुकान चलती है। दुकान का सामान कारखाने से आता है। कारखाने के चलने से पूंजी का निर्माण होता है। रोजगार के नये अवसर बनते हैं। इसीलिये यदि फसल अच्छी नहीं होती तो पूरी अर्थव्यवस्था ठप हो जाती है। इसीलिये खेती सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने खेती किसानी से जुड़े विषयों पर चर्चा की शुरूआत वर्षा की स्थिति से की। वर्षा की स्थिति बताते हुये मुख्यमंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया कि किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा से निपटने की आकस्मिक योजना सरकार ने बना ली है। किसानों की मेहनत से प्रदेश कृषि के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है। पाँच वर्षों से कृषि कर्मण पुरस्कार मिल रहा है, कृषि विकास दर पिछले 5 वर्षों में औसतन 20 प्रतिशत रही है। दलहन, तिलहन, चना, मसूर, सोयाबीन, अमरूद, टमाटर और लहसुन के उत्पादन में प्रदेश देश में पहले नम्बर पर है। इसी तरह गेहूँ, अरहर, सरसों, आँवला, संतरा, मटर और धनिये के उत्पादन में देश में दूसरे नम्बर पर है। मात्र एक दशक की अवधि में राज्य का कृषि उत्पादन ढ़ाई गुना बढ़ गया है। बलराम जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री ने किसानों के साथ सरकारी योजनाओं, उन्नत खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में किसानों द्वारा किये जाने वाले कार्यों, सरकारी प्रयासों और परिणामों पर दिल खोलकर संवाद किया। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि उनका परिवार सुखी रहे, इसके लिए सरकार संकल्पित है। अन्नदाता को किसी भी संकट और परेशानी से बचाने के लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि सरकार की योजनाओं को अपनी योजना मानकर उनका पूरा लाभ लें। उन्होंने कृषि विभाग, शोध संस्थाओं, शैक्षणिक संगठनों आदि से मिलकर कार्य करने का आग्रह किया है।


देशभर के किसानों पर क़र्ज़ 12,60,000 करोड़ और तीन बरस में उद्योगपतियों को रियायत 17,15,00,000 करोड़
Our Correspondent : 5 April 2017
भोपाल। तो देश की इकनॉमी का सच है क्या । क्योंकि एक तरफ 12 लाख 60 हजार करोड़ का कर्ज देशभर के किसानों पर है । जिसे माफ करने के लिये तमाम राज्य सरकारों के पास पैसा है नहीं । तो दूसरी तरफ 17 लाख 15 हजार करोड की टैक्स में माफी उद्योग सेक्टर को सिर्फ बीते तीन वित्तीय वर्ष में दे दी गई । यानी उघोगों को डायरेक्ट या इनटायरेक्ट टैक्स में अगर कोई माफी सिर्फ 2013 से 2016 के दौरान ना दी गई होती तो उसी पैसे से देशभर के किसानो के कर्ज की माफी हो सकती थी । तो क्या वाकई किसान और कारोबारियों के बीच मोटी लकीर खिंची हुई है । या फिर किसान सरकार की प्रथामिकता में कभी रहा ही नहीं । ये सवाल इसलिये क्योकि एक तरफ एनपीए या उगोगो को टैक्स में रियायत देने पर सरकार से लेकर बैंक तक खामोश रहते हैं। लेकिन दूसरी तरफ किसानों की कर्ज माफी का सवाल आते ही महाराष्ट्र से लेकर पंजाब तक के सीएम तक केन्द्रीय सरकार से मुलाकात कर पैसों की मांग करते हैं। और केन्द्र सरकार किसानों का मुद्दा राज्य का बताकर पल्ला झाड़ती है तो एसबीआई चैयरमैन किसानों की कर्ज माफी की मुश्किलें बताती है । तो किसान देश की प्राथमिकता में कहां खड़ा है । ये सवाल इसलिये जिस तरह खेती राज्य का मसला है, उसी तरह उद्योग भी राज्य का मसला होता है । और इन दो आधारों के बीच एक तरफ केन्द्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने राज्यसभा में 16 जून 2016 को कहा , उघोगो को तीन बरस [ 2013-2016] में 17 लाख 15 हजार करोड रुपये की टैक्स माफी दी गई । तो दूसरी तरफ कृषि राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने नंवबर 2016 में जानकारी दी किसानों पर 12 लाख 60 हजार रुपये का कर्ज है । जिसमें 9 लाख 57 हजार करोड रुपये कमर्शियल बैक से लिये गये है ।

और इसी दौर में ब्रिक्स बैंक के प्रजीडेंट के वी कामत ने कहा कि 7 लाख करोड का एनपीए कमर्शियल बैंक पर है । यानी एक तरफ उघोगो को राहत । दूसरी तरफ उघोगों और कारपोरेट को कर्ज देने में किसी बैक को कोई परेशानी नहीं है। लेकिन किसानों के कर्ज माफी को लेकर बैंक से लेकर हर सरकार को परेशानी। जबकि देश का सच ये भी है कि जितना लाभ उठाकर उघोग जितना रोजगार देश को दे नही पाते, उससे 10 गुना ज्यादा लोग खेती से देश में सीधे जुड़े हैं। आंकड़ों के लिहाज से समझें तो संगठित क्षेत्र में महज तीन करोड रोजगार हैं। चूंकि खेती से सीधे जुड़े लोगों की तादाद 26 करोड है। यानी देश की इक्नामी में जो राहत उघोगों को, कारपोरेट को या फिर सर्विस सेक्टर में भी सरकारी गैर सरकारी जितना भी रोजगार है, उनकी तादाद 3 करोड़ है । जबकि 2011 के सेंसस के मुताबिक 11 करोड 80 लाख अपनी जमीन पर खेती करते है । और 14 करोड 40 लाख लोग खेत मजदूर है । यानी सवा करोड की जनसंख्या वाले देश की हकीकत यही है कि हर एक रोजगार के पीछ अगर पांच लोगों का परिवार माने तो संगठित क्षेत्र से होने वाली कमाई पर 15 करोड़ लोगों का बसर होता है। वहीं खेती से होने वाली कमाई पर एक सौ दस करोड़ लोगों का बसर होता है । और इन हालातों में अगर देश की इक्नामी का नजरिया मार्केट इक्नामी पर टिका होगा या कहे पश्चिमी अर्थवयवस्था को भी भारत अपनाये हुये है तो फिर जिन आधारों पर टैक्स में राहत उद्योगों को दी जाती है । या बैंक उद्योग या कारपोरेट को कर्ज देने से नहीं कतराते तो उसके पीछे का संकट यही है कि अर्थशास्त्री ये मान कर चलते है कि खेती से कमाई देश को नहीं होगी । उद्योगों या कारपोरेट के लाभ से राजस्व में बढोतरी होगी ।

यानी किसानों की कर्ज माफी जीडीपी के उस हिस्से पर टिकी है जो सर्विस सेक्टर से कमाई होती है । और देश का सच भी यही है खेती पर चाहे देश के सौ करोड़ लोग टिके है लेकिन जीडीपी में खेती का योगदान महज 14 फिसदी है । तो इन हालातो में जब यूपी में किसानों की कर्ज माफी का एलान हो चुका है तो बीजेपी शासित तीन राज्यों में हो क्या रहा है जरा इसे भी देख लें। मसलन हरियाणा जहा किसान का डिफॉल्टर होना नया सच है ।

आलम ये कि हरियाणा के 16.5 लाख किसानों में से 15.36 लाख किसान कर्जदार हैं । इन किसानों पर करीब 56,336 करोड़ रुपए का कर्ज है, जो 2014-15 में 40,438 करोड़ रुपए था । 8.75 लाख किसाने ऐसे हैं, जिन्होंने कमर्शियल बैंक, भूमि विकास बैंक, कॉपरेटिव बैंक और आणतियों से कर्ज लिया हुआ है । और कर्ज के कुचक्र में ऐसे फंस गए हैं कि अब कर्ज न निगलते बनता है न उगलते।

किसानों की परेशानी ये है कि वो फसल के लिए बैंक से कर्ज लेते हैं। ट्रैक्टर, ट्यूबवैल जैसी जरुरतों के लिए जमीन के आधार पर भूमि विकास बैंक या कॉपरेटिव सोसाइटी से लोन लेता है। मौसम खराब होने या फसल बर्बादी पर कर्ज का भुगतान नहीं कर पाता तो अगली फसल के लिए आढ़तियों के पास जाते हैं। और फिर फसल बर्बादी या कोई भी समस्या न होने पर डिफॉल्टर होने के अलावा कोई चारा नहीं रहता। लेकिन-अब यूपी में जिस तरह किसानों का कर्ज माफ हुआ है, हरियाणा के किसान भी यही मांगने लगे हैं। और दूसरा राज्य है राजस्धान । जहा किसानो को कर्ज देने की स्थिति में सरकार नहीं है । लेकिन राजस्धान का संकट ये है कि एक तरफ कर्ज मांगने वाले किसानो की तादाद साढे बारह हजार है तो दूसरी तरफ वर्ल्ड बैंक से किसानो के लिये जो 545 करोड रुपये मिले लेकिन उसे भी सरकार खर्च करना भूल गई और इसी एवज में जनता का गाढ़ी कमाई के 48 करोड़ रुपए अब ब्याज के रुप में वसुधंरा सरकार वर्ल्ड बैंक को भरेगी । दरअसल वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट की शुरुआत 2008 में हुई थी,जब वसुंधरा सरकार ने राजस्थान एग्रीकल्चर कांपटिटवेसन प्रोजेक्ट बनाया था और फंडिंग के लिए वर्ल्ड बैंक को भेजा गया था । वर्ल्ड बैंक के इस प्रोजेक्ट के तहत कृषि, बागवानी, पशुपालन, सिंचाई और भूजल जैसे कई विभागों को मिलकर किसानों को कर्ज बांटने की योजना थी । वसुंधरा सरकार गई तो कांग्रेस की गहलोत सरकार आई और उसने 2012 में फंडिंग के लिए 832 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट वर्ल्ड बैंक को दिया । वर्ल्ड बैंक ने 545 करोड़ रुपए 1.25 फीसदी की ब्याज दर पर राजस्थान सरकार को दे दिए. लेकिन 2016 तक इसमें से महज 42 करोड़ ही सरकार किसानों को बांट पाई ।यानी एक तरफ किसानों को कर्ज नहीं मिल रहा। और दूसरी तरफ वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट के तहत जो 545 करोड़ रुपए में से जो 42 करोड बांटे भी गये वह किस रुप में ये भी देख लिजिये । 17 जिलों में यंत्र, बीज और खाद के लिए सिर्फ 14 लाख 39 हजार रुपए बांटे गए । फल, सब्जी, सोलर पंप के लिए 3 लाख 13 हजार रुपए। जल संग्रहण के लिए 7 लाख दो हजार रुपए बांटे गए । पशुपालन के लिए 2 लाख 19 हजार रुपए दिए ।नहरी सिंचाई निर्माण के लिए 2 लाख 36 हजार रुपए दिए गए । और भू-जल गतिविधियों के लिए 11 लाख 50 हजार रुपए बांटे गए । यानी सवाल सरकार का नहीं सरोकार का है । क्योकि अगर सरकार खजाने में पैसा होने के बावजूद जनकल्याण का काम सरकार नहीं कर सकती तो फिर सरकार का मतलब क्या है। और तीसरा राज्य महाराष्ट्र जहां बीते दस बरस से किसानो का औसत खुदकुशी का आलम यही है कि हर तीन घंटे में एक किसान खुदकुशी करता है । खुदकुशी करने वाले हर तीन में से एक किसान पर 10 हजार से कम का कर्ज होता है । हालात है कितने बदतर ये 2015 के एनसीआरबी के आंकडों से समझा जा सकता है । 2015 में 4291 किसानों ने खुदकुशी की । जिसमें 1293 किसानो की खुदकुशी की वजह बैक से कर्ज लेना था । जबकि 795 किसानो ने खेती की वजह से खुदकुशी की । यानी खुदकुशी और कर्ज महाराष्ट्र के किसानों की बड़ी समस्या है, जिसका कोई हल कोई सरकार निकाल नहीं पाई।

और अब यूपी में किसानों की कर्ज वापसी के बीच महाराष्ट्र के देवेन्द्र फडणवीस सरकार पर ये दबाव पड़ना तय है कि वो भी महाराष्ट्र के किसानों के लिए कर्जवापसी की घोषणा करें। क्योंकि विपक्ष और सरकार की सहयोगी शिवसेना लगातार ये मांग कर रहे हैं और महाराष्ट्र में कई जगह धरना-प्रदर्शन हो रहे हैं। यानी यूपी की कर्जमाफी किसानो के लिये राहत है या राजनीतिक के लिये सुकून । इसका फैसला भी अब हर चुनाव में होगा। .


खेती-किसानी में समृद्ध होता मध्यप्रदेश
Our Correspondent :29 November 2016
देश और प्रदेश की समृद्धि के लिये यह जरूरी है कि खेती-किसानी लाभप्रद हो। मध्यप्रदेश की एक बड़ी आबादी गाँवों में है और जो किसी न किसी रूप में कृषि कार्य से जुड़ी है। मैं खुद भी किसान हूँ और मुझे पता है कि आज से ग्यारह वर्ष पूर्व किसानों का दर्द क्या था। सिंचाई सुविधा नहीं थी, उत्पादन और लागत में बड़ा अंतर था। ऋण की ब्याज दर 13-14 प्रतिशत थी, बिजली नहीं थी और इस पर अगर प्राकृतिक आपदा आ गयी, तो किसान की तो कमर ही टूट जाती थी। खेती से जुड़े मजदूरों के सामने रोजी-रोटी की विकट समस्या हो जाती थी। प्रदेश में वर्ष 2003 में सत्ता परिवर्तन से प्रदेश के खेती-किसानी में एक नया इतिहास रचने की शुरूआत हुई। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जो खुद एक किसान हैं, ने ग्यारह वर्ष पूर्व 29 नवम्बर, 2005 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर कृषि को सर्वोच्च प्राथमिकता वाले एजेंडे में रखा। उनका प्रण था कि हर हालत में खेती को लाभ का व्यवसाय तो बनाना ही है, इसके लिये जो आवश्यक और अनुकूल वातावरण चाहिये था, वह भी निर्मित करना है, इसमें मुख्यमंत्री सफल भी रहे। उन्होंने कभी न मिलने वाली बिजली दस घंटे किसानों को मिले, यह सुनिश्चित किया। सिंचाई का रकबा साढ़े सात लाख हेक्टेयर ही था, वर्ष 2005 में, आज 36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिचाई उपलब्ध है। किसानों को जीरो प्रतिशत ब्याज पर ऋण दिया गया। एक कदम आगे बढ़ते हुए यह निर्णय लिया गया एक लाख का ऋण लेने पर किसानों को 90 हजार ही लौटाने होंगे। यही नहीं प्राकृतिक आपदा आने पर किसानों को इतना मुआवजा मिले कि उसकी क्षतिपूर्ति हो सके, इस दिशा में ठोस कदम उठाये गये। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के लक्ष्य 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के संकल्प को साकार करने के लिये देश में सबसे पहले रोड-मेप तैयार किया। खेती-किसानी पर आने वाली आपदा से पीड़ित किसानों को राहत देने में भी सरकार ने पिछले 11 साल में किसानों की हमदर्द बनने की जो मिसाल कायम की है, वह बेमिसाल है। वर्ष 2005-06 से वर्ष 2015-16 तक किसानों को 11 हजार 262 करोड़ 16 लाख 90 हजार रुपये की राशि वितरित की गयी। यह एक इतिहास है। इससे प्रभावितों को न केवल राहत मिली, बल्कि वे आपदा का भी सामना कर पाये। कृषि क्षेत्र को उन्नत बनाने, उत्पादन बढ़ाने के जो प्रयास सरकार ने पिछले 11 वर्ष में किये, उसके परिणामों पर अगर नजर डालें, तो लगेगा कि यह प्रयास अगर पूर्व में किये जाते तो शायद आज हमारे प्रदेश के हालात और ज्यादा बेहतर होते। कृषि विकास दर मध्यप्रदेश में खेती-किसानी में सरकार द्वारा उठाये गये कदमों का सबसे अनुकूल प्रभाव कृषि विकास दर पर पड़ा। पिछले चार वर्ष में हमारी कृषि विकास दर 18 प्रतिशत प्रतिवर्ष है। यह दर प्राप्त करने वाला मध्यप्रदेश देश का एकमात्र राज्य है। यही नहीं प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद, जो 10.5 प्रतिशत है, में कृषि का योगदान 5 प्रतिशत है, यह भी देश में सर्वाधिक है। कृषि उत्पादन में वृद्धि वर्ष 2004-05 के उत्पादन पर हम नजर डालें, तो हमारा कुल कृषि उत्पादन 2.14 करोड़ मीट्रिक टन था। पिछले 11 वर्ष में हुए प्रयासों के बाद यह उत्पादन दोगुना होकर 4.23 करोड़ मीट्रिक टन हो गया। यह वृद्धि 97.66 प्रतिशत है। खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि खाद्यान्न उत्पादन में भी प्रदेश ने वर्ष 2004-05 की तुलना में एक लम्बी छलांग लगायी है। प्रदेश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 11 वर्ष पूर्व 1.43 करोड़ मीट्रिक टन था। वर्ष 2015-16 में यह 3.46 करोड़ मीट्रिक टन है। प्रतिवर्ष 12 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी है और पिछले 11 वर्ष के मुकाबले यह वृद्धि 142 प्रतिशत है। यह एक अप्रत्याशित उपलब्धि है। सम्पूर्ण खाद्यान्न उत्पादन में मध्यप्रदेश अब तीसरे स्थान पर है, गेहूँ उत्पादन में दूसरे स्थान पर है और मक्का में पाँचवें स्थान पर है। दलहन उत्पादन में वृद्धि दलहन फसलों के उत्पादन में भी मध्यप्रदेश ने पिछले ग्यारह वर्ष में अपार वृद्धि की है। वर्ष 2004-05 में प्रदेश का दलहन फसलों का उत्पादन 33.51 लाख मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2015-16 में बढ़कर 58.15 लाख मीट्रिक टन हो गया। यह वृद्धि 73.53 प्रतिशत है। आज हमारा प्रदेश देश के कुल दलहन उत्पादन का 28 प्रतिशत उत्पादन करता है। तिलहन फसलों के उत्पादन में वृद्धि तिलहन फसलों का उत्पादन वर्ष 2004-05 में कुल 39.08 लाख मीट्रिक टन था, जो आज बढ़कर 57.69 लाख मीट्रिक टन हो गया है। आज हमारे प्रदेश का तिलहन उत्पादन में पूरे देश में 30 प्रतिशत का योगदान है। मुख्य फसलों की उत्पादकता में वृद्धि पिछले ग्यारह वर्ष में गेहूँ, धान, मक्का और सरसों की औसत उत्पादकता में भी रिकार्ड बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2004-05 में 18.21 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गेहूँ का उत्पादन था, जो आज बढ़कर 31.31 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गया है। धान की औसत पैदावार वर्ष 2004-05 में 8.18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी, जो बढ़कर 27.74 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गयी है, यह तीन गुना से अधिक है। मक्का की औसत पैदावार 14 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी, जो बढ़कर 29.33 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गयी है। पिछले ग्यारह वर्ष में यह वृद्धि 109.50 प्रतिशत दर्ज की गयी है। सरसों की औसत पैदावार भी बढ़ी है। प्रति हेक्टेयर 9.54 क्विंटल सरसों अब 11.35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादित हो रही है। कृषि क्षेत्र में वृद्धि सरकार के प्रयासों से प्रदेश के कृषि क्षेत्र में भी पिछले ग्यारह वर्ष में वृद्धि हुई है। वर्ष 2004-05 में 1 करोड़ 92 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र था, जो अब बढ़कर 2 करोड़ 37 लाख हेक्टेयर हो गया है। कृषि के क्षेत्र में इस दौरान 45 लाख हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी हुई है। वर्तमान में हमारी कृषि सघनता 153 प्रतिशत है। सिंचित क्षेत्रफल भी बढ़ा नहरों, कुंओं, तालाबों से की जाने वाली सिंचाई के क्षेत्रफल में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। वर्ष 2004-05 में सिंचित रकबा 40 लाख 31 हजार हेक्टेयर था। वर्ष 2015-16 में यह बढ़कर 110 लाख हेक्टेयर होने का अनुमान है, जो दोगुना से अधिक है। प्रदेश में नहरों से सिंचित क्षेत्र 90 लाख 75 हजार हेक्टेयर था। अब यह बढ़कर 36 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया है। जैविक खेती का विकास और प्रसार जैविक खेती में भी प्रदेश में जो प्रयास हुए, उसके परिणाम स्वरूप आज हम पूरे देश का 40 प्रतिशत से अधिक जैविक खेती का उत्पादन करते हैं। आज हमारे प्रदेश में करीब दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती की जा रही है। दुनिया का एक तिहाई जैविक कपास भी हमारे प्रदेश में पैदा होता है। बीजों की पैदावार में अव्वल प्रमाणीकृत बीजों की पैदावार में भी आज हमारा प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हुआ है। वर्ष 2004-05 में मात्र 14 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज पैदा होता था, जो अब बढ़कर 40 लाख क्विंटल हो गया है। कृषि यंत्रों का विस्तार मध्यप्रदेश में खेती-किसानी को उन्नत बनाने के लिये सरकार के प्रयासों के बेहतर परिणाम मिले हैं। किसानों ने बड़े पैमाने पर कृषि यंत्रों को अपनाया है। यही कारण है कि हमारी खेती के उत्पादन में समृद्धता आयी है। आज हमारे प्रदेश में 87 हजार 143 ट्रेक्टर का पंजीयन हुआ है। इसके कारण हमारी फार्म पॉवर उपलब्धता जो 0.80 किलोवॉट प्रति हेक्टेयर थी, वह बढ़कर 1.85 किलोवॉट प्रति हेक्टेयर हो गयी है। धान की रोपाई में एसआरआई पद्धति का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश में 40 हजार कोनोवीडर एवं 20 हजार मार्कर यंत्र किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध करवाया गया है। जिससे एसआरआई पद्धति से धान की रोपाई के रकबे में वृद्धि हुई है। रिज एण्ड फरो पद्धति से सोयाबीन की बोनी का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया है। एक लाख सीड ड्रिलों को रिज-फरो सीड ड्रिल के अटेचमेंट 90 प्रतिशत अनुदान पर कृषकों को उपलब्ध करवाये गये हैं। इस पद्धति को किसान व्यापक रूप से अपना रहे हैं, जिसके अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं। प्रदेश में वर्ष 2009-10 से लागू की गयी हलधर योजना में जो भी किसान अपनी खेती की गहरी जुताई करवाता है, उसे पचास प्रतिशत अधिकतम 2000 रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। इस योजना से किसानों की खेत की मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और फसल की उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है। इस योजना में अभी तक 3 लाख 65 हजार हेक्टेयर में गहरी जुताई की गयी है। कृषि शक्ति योजना वर्ष 2011 से शुरू की गयी है। योजना में यंत्र-दूत ग्रामों का चयन कर उन्हें तकनीकी रूप से विकसित करने का कार्यक्रम लिया गया है। यंत्र-दूत में अभी तक कुल 600 ग्राम विकसित किये जा चुके हैं। चुने हुए ग्रामों के कृषकों को कृषि यंत्र को अपनाने के लिये प्रोत्साहित किया जाता है। कृषकों को प्रदर्शन, प्रशिक्षण, संगोष्ठी, भ्रमण आदि के जरिये यंत्रीकरण के लाभों के बारे में बताया जाकर वास्तविक रूप से अपनाये जाने के लिये तकनीकी सहयोग भी दिया जाता है। इस कार्यक्रम से चयनित ग्रामों में किसानों की उत्पादकता में काफी वृद्धि पायी गयी है एवं किसान आर्थिक रूप से सुदृढ़ हुए हैं। कस्टम हायरिंग सेंटर प्रदेश में निजी क्षेत्र में 1250 कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना की गयी हैं। इस वर्ष 2016-17 में 612 नये कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किये जा रहे हैं, जिसमें अनुदान की राशि अधिकतम 10 लाख रुपये है। इसी वर्ष 50 हाईटेक कस्टम हब की स्थापना भी होने जा रही है, जिनकी लागत 40 लाख से लेकर 2 करोड़ रुपये तक है। बीमा योजना का सफल क्रियान्वयन आपदा के बाद किसानों को राहत मिले, उनकी क्षति ग्रस्त फसलों का मुआवजा मिले, इस दिशा में भी सरकार के प्रयास महत्वपूर्ण रहे हैं। इसी के तहत वर्ष 1999-2000 रबी से लेकर वर्ष 2014-15 की रबी फसलों तक कुल 80 लाख 54 हजार किसान को 5452 करोड़ 87 लाख रुपये की बीमा दावा राशि बाँटी गयी है। वर्ष 2014-15 में लगभग 2 लाख किसान को 150 करोड़ 84 लाख की बीमा दावा राशि वितरित की गयी, वहीं खरीफ-2015 के लिये 20 लाख 46 हजार किसान को 4416 करोड़ 89 लाख की दावा राशि का वितरण कार्य शुरू किया गया है। यह राशि देश में अब तक सबसे अधिक बाँटी जाने वाली दावा राशि है। मृदा स्वास्थ्य-कार्ड कृषि के लिये मिट्टी उपजाऊ बने, इसका निरंतर परीक्षण हो, इसके लिये मृदा स्वास्थ्य-कार्ड बनाये जा रहे हैं। सभी 313 विकासखण्ड में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला तथा सभी 10 संभागीय मुख्यालय पर बीज और उर्वरक परीक्षण प्रयोगशालाएँ स्थापित की जा रही हैं। अभी तक प्रदेश में 45 लाख से अधिक किसान के स्वाइल हेल्थ-कार्ड बनाये जा चुके हैं। तीसरी फसल के क्षेत्र का विस्तार किसानों की आय में वृद्धि हो, इसके लिये सरकार ने तीसरी फसल लेने के लिये किसानों को प्रोत्साहित किया। पिछले वित्त वर्ष में करीब तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तीसरी फसल ली गयी है। मध्यप्रदेश ने कृषि क्षेत्र में जो उपलब्धि हासिल की है उसे राष्ट्रीय स्वीकार्यता भी मिली है। प्रदेश को मिले सम्मान से जहाँ प्रदेश का गौरव बढ़ा है वहीं किसानों का हौसला भी बढ़ा है। देश में मध्यप्रदेश अकेला है जिसे लगातार चार बार कृषि कर्मण अवार्ड मिला है। वर्ष 2011-12 और 2012-13 में कुल खाद्यान्न उत्पादन में प्रथम, वर्ष 2013-14 में कुल गेहूँ उत्पादन में प्रथम और वर्ष 2014-15 में कुल खाद्यान्न उत्पादन में मध्यप्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड मिला है।


किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केन्द्र सरकार अनाज का उत्पादन बढाने, लागत कम करने तथा किसानों की आमदनी के अन्य साधनों खोलने के साथ उनकी उपज की उचित मार्केटिंग का जी तोड़ प्रयास कर रही है- श्री राधा मोहन सिंह
24 November 2016
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केन्द्र सरकार अनाज का उत्पादन बढाने, लागत कम करने तथा किसानों की आमदनी के अन्य साधनों खोलने के साथ उनकी उपज की उचित मार्केटिंग का जी तोड़ प्रयास कर रही है। कृषि मंत्री ने यह बात आज यहां सेंगरि ला इरोज होटेल में एसोचेम द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम का विषय था - किसानों को बाजार से कैसे जोड़ा जाए। कृषि मंत्री ने कहा कि अब यह जरूरी हो गया है कि बाजार, किसान की पहुच के अन्दर हो और उनके और उपभोक्ताओं के बीच कोई बिचौलिया नहीं हो, उपज का मूल्य पारदर्शी तरीके से तय हो और किसान को उनकी उपज का अविलंब भुगतान हो। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार देश भर में एक ऐसा ढांचा खड़ा कर रही है जिसमें बाजार सीधे खेत से जुड़ जाएंगे और उपभोक्ता सीधे किसान के खेत से उपज खरीद सकेंगे। कृषि मंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार किसानों को उनकी उपज की अच्छी कीमत दिलाने के लिए पहले ही राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी ई-नाम अप्रैल 2016 में लांच कर चुकी है। ई-नाम पोर्टल से मार्च, 2018 तक कुल 585 मंडियों को जोड़े जाने की योजना हैI सितम्बर-2016 तक 200 मंडियों के लक्ष्य के सापेक्ष 10 राज्‍यों की 250 मंडियों को ई-नाम से जोड़ दिया गया हैI उन प्रदेशों की मंडिया ई-नाम से जुड़ सकती हैं जिन्होंने अपने विपणन कानूनों में तीन सुधार कर लिये हैं - ई ट्रेडिंग की व्यवस्था, एकल बिंदु पर मंडी शुल्क की उगाही और सिंगल लाइसेंस से पूरे प्रदेश में व्यापार। दो प्रमुख राज्‍य बिहार और केरल कोई मंडी कानून न होने से अभी ई-नाम परियोजना से नहीं जुड़ पा रहे हैं। कृषि मंत्री ने इन राज्‍यों की सरकारों से किसान हित में मंडी कानून बनाकर ई-नाम परियोजना से जोड़ने का अनुरोध किया है। कृषि मंत्री ने कहा कि ई-नाम की इस नयी व्यवस्था में अब किसान कहीं भी बैठकर ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए अपनी फसल बेच सकता है तथा इसके जरिए वह उपज की गुणवत्ता के अनुसार उत्तम मूल्य प्राप्त कर सकता है I यदि उसे मूल्य पसंद ना हो तो वह ऑनलाइन की गयी सर्वोच्च बोली खारिज भी कर सकता है। किसान को ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था भी है। इसके अतिरिक्‍त किसानों को उपभोक्‍ताओं से सीधे जोड़ने के लिए वर्तमान सरकार किसानों के खेत से उत्‍पाद की सीधा खरीद को प्रोत्‍साहित कर रही है। इसके लिए 22 राज्‍यों ने अपने विपणन कानूनों में बदलाव भी कर लिया है। कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि देश में कृषि उपज का विपणन, राज्य सरकारों की विनियमित मंडियों के माध्‍यम से किया जाता है, जिनकी कुल संख्या 6746 हैI उन्होंने कहा कि वैसे तो किसानों पर गठित राष्ट्रीय आयोग की सिफारिश के अनुसार 80 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक मंडी होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान में लगभग 580 वर्ग किलोमीटर में एक मंडी हैI मंडियों की संख्‍या बढ़ाने के लिए सरकार मंडी कानून में सुधार करवाकर निजी क्षेत्र की मंडियां स्‍थापित करवाने का प्रयास कर रही है। अब तक 21 राज्‍यों ने इस संबंध में अपने विपणन कानूनों में सुधार कर लिया है।

एक एकड़ से ढ़ाई एकड़ तक के भू-धारकों को मिलेगा-कुंआ, खेत
19 November 2016
महात्मा गांधी नरेगा की कपिलधारा उप योजना में एक एकड़ से ढ़ाई एकड़ तक के भू-धारकों को ''कुंआ-खेत तालाब'' का संयुक्त लाभ मिलेगा। अपर मुख्य सचिव ग्रामीण विकास श्री आर.एस. जुलानिया ने सभी जिला कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को इस संबंध में निर्देश जारी किये हैं। हितग्राहियों का चयन प्राथमिकता के आधार पर किया जायेगा। इसमें पहली प्राथमिकता विधवा एवं परित्यक्ता महिला, अनुसूचित जाति/जनजाति को तथा इसके बाद अन्य भू-धारकों को योजना का लाभ मिलेगा। जिन भू-धारकों को सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। खेत तालाब 400 घनमीटर जल-संरक्षण क्षमता का बनाना होगा। खेत तालाब और कुंआ बनाने के समय निकलने वाली मिट्टी का उपयोग खेत को समतल बनाने तथा मेढ़ बंधान में किया जायेगा। कूप निर्माण गोलाकार होगा जिसका व्यास 5 मीटर और गहराई 12 मीटर होगी। इसके अलावा लागत सीमा के भीतर अधिक गहराई कराने के लिए हितग्राही स्वतंत्र होगा। हितग्राही कुंआ बनाने के लिए सामग्री मद से मशीन से बोरिंग करा सकता है। कुंआ खुदाई के बाद कुंआ बंधान के लिए आधार कठोर पत्थर पर आरसीसी की बीम डालकर निर्माण करना होगा। कुंए की मुंडेर की चौड़ाई 30 से 40 सेमी तथा ऊँचाई 75 सेमी होना जरूरी होगा। कुंए के बाहरी हिस्से में न्यूनतम एक मीटर की जगत बनाना होगी। खेत तालाब और कूप निर्माण को जोड़ना
कपिलधारा कूप के साथ खेत तालाब का भी लाभ हितग्राही को मिलेगा। खेत के उपरी हिस्से में खेत तालाब तथा निचले हिस्से में कुंए का निर्माण करवाया जायेगा, जिससे खेत तालाब से प्रवाहित जल कुंए में इकट्ठा हो सके। खेत तालाब से कुंए तक पानी के प्रवाह के बीच में पाइप डालना होगा तथा कुएं के समीप उसे बोल्डर, रेत से फिल्टर करना होगा। इसके लिए कार्य-स्थल का चयन हितग्राही की पसंद से होगा। इसमें भू- जलविद की भी सहायता ली जा सकेगी। कूप तथा खेत तालाब निर्माण की एजेंसी हितग्राही भी हो सकता है। यदि हितग्राही आजीविका मिशन के समूह का हितग्राही है, तो वह समूह की एजेंसी होगा। अन्य परिस्थितियों में ग्राम पंचायत निर्माण एजेंसी होगी। कुंआ, खेत तालाब की लागत 2 लाख 30 हजार रूपये निर्धारित की गयी है। इसमें एक लाख 15 हजार मजदूरी के लिए और 1 लाख 15 हजार सामग्री पर खर्च किए जा सकेंगें। कपिलधारा कूप में हितग्राही मेट का कार्य करेगा। मजदूरी भुगतान के मस्टर रोल जारी होंगे तथा सामग्री की राशि हितग्राही के खाते में सीधे जमा करवायी जायेगी।

खेती को फायदे का धंधा बनाना नारा नहीं मंत्र है
19 November 2016
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि खेती को फायदे का धंधा बनाना नारा नहीं मंत्र है। खेती को लाभप्रद बनाने के लिए प्रदेश में सिंचाई सुविधाएँ बढ़ाई जा रही हैं। राज्य सरकार सिंचाई सुविधाएँ बढ़ाने के लिए नया तरीका अपना रही है। सिंचाई के लिए लिफ्ट इरिगेशन की कार्य-योजना तैयार की गई है, ताकि गाँव डूब क्षेत्र में नहीं आयें और किसान आसानी से सिंचाई कर सकें। इसमें पाईप लाइन के जरिये खेतों तक पानी पहुँचाया जायेगा। नरसिंहपुर जिले में 2,100 करोड़ की चिनकी उदवहन सिंचाई योजना क्रियान्वित की जायेगी। श्री चौहान जिले के घाट बम्हौरी (समनापुर) में हितग्राही सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए संजीवनी का कार्य करेगी। उन्होंने सभी जरूरतमंदों को वर्ष 2022 तक मकान मालिक बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आगामी दो वर्ष में प्रदेश के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में 13 लाख मकान बनाये जायेंगे। प्रदेश सरकार हर गरीब को मकान बनाने के लिये डेढ़ लाख की आर्थिक सहायता देगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के युवाओं को नौकरी मांगने वाले नहीं नौकरी देने वाले सफल उद्यमी बनायेगी। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना में राज्य सरकार 10 लाख से एक करोड़ रूपये तक की आर्थिक सहायता दिलाने में मदद करेगी। सरकार बैंक गारंटी भी देगी और 5 साल तक ब्याज अनुदान भी राज्य सरकार द्वारा मुहैया करवाया जायेगा। इस योजना में अब कुटीर उद्योग के लिये भी लाभ दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि हम युवाओं की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं। विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए हरसंभव मदद की जायेगी। अब सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्ति दी जायेगी। आई.आई.टी., आई.आई.एम., मेडिकल एवं इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए जरूरतमंद विद्यार्थियों की फीस राज्य सरकार भरेगी।

किसान की बरकत, दोगुनी आय दिवास्वप्न नहीं,मोदी की प्रतिबद्धता...
14 April 2016
कृषि भारत की संस्कृति और सामाजिक सरोकार रहा है। ‘‘सांई इतना दीजिये जामें कुटुम्ब समाये, मैं भी भूखा न रहूं, साधू न भूखा जाये’’ इसमें बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय की सात्विक भावना समाहित है। लेकिन भौतिक विज्ञान के प्रभाव ने खेती की प्राथमिकता दोयम कर दी। खेती हाषिये पर चली गयी। रही-सही कसर खेती की बढ़ती लागत ने पूरी कर दी। रासायनिक खाद से उत्पादकता वृद्धि की चाहत ने जहां खेती को मंहगा बना दिया है, वहीं उत्पादकता वृद्धि के लालच में रासायसनिक खाद ने भूमि को बंजर बना दिया। मां की सेहत पीली पड़ जाती है, तो उसका असर सन्तति पर पड़ता है। बच्चा स्वस्थ्य कैसे रह सकता है। केन्द्र में सरकारें आयी, किसानों की समस्याएं सियासी मुद्दा बन गयी और चुनाव आते ही फौरी राहत देकर सियासी दलों ने किसानों को वोट बैंक बना दिया। नतीजा सामने है कि 45 प्रतिषत किसान वैकल्पिक व्यवसाय मिलने की दषा में किसानी से तौबा करने को तैयार है, खेती से पलायन की उनकी नियति बन चुकी है। 16वीं लोकसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री नरेन्द्र मोदी ने अच्छे दिन आने का वादा किया और 20-22 माह के कार्यकाल में किसान की आय 2022 तक दोगुनी करनें का महत्वाकांक्षी मिषन घोषित कर दिया। ऐसे में जहां देष में खेती की विकास दर कहीं जीरों तो कहीं 0.5 प्रतिषत है, किसान की आय दोगुना करने का लक्ष्य बहुतों को असंभव लगता है। क्योंकि इसके लिए खेती की विकास दर न्यूनतम दहाई में 10 प्रतिषत पहुंचाना पड़ेगी। नरेन्द्र मोदी के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को कांगे्रस तो हवा-हवाई बताकर नहीं थकती, जबकि आलोचक दो कारण बताकर इसे अर्द्धसत्य बता रहे है। उनका मानना है कि 0.5 प्रतिषत से कृषि विकास दर 10 प्रतिषत पहुंचाना और किसानों को समर्थन मूल्य में पर्याप्त वृद्धि करना असंभव है तो आमदनी दोगुनी जमीन पर कैसे हो सकती है। समर्थन मूल्य में मोदी सरकार द्वारा वृद्धि भी अधिकतम 4 प्रतिषत हुई है। लेकिन जिस तरह नरेन्द्र मोदी सरकार ने ताना-बाना बुना है, अर्द्धसत्य पूर्ण सत्य में ही बदलेगा और दुनिया आष्चर्यचकित रह जाने वाली है। केन्द्र सरकार ने बजट में घोषणा की है कि खेती देष की अधूरी पड़ी सिंचाई योजनाएं टाईम फे्रम में पूरी होगी। 86 हजार करोड़ रू. इसके लिए रखा गया है। काम किस गति से आरंभ हुआ है, बताने के लिए इतना पर्याप्त है कि अधूरी पड़ी 23 सिंचाई परियोजनाओं पर जिस तेजी से काम शुरू हुआ है, मार्च 2017 तक ये पूरी जो जायेगी। जिससे 80 लाख हेक्टेयर धरती पर नई सिंचाई क्षमता बढ़ जायेगी। फिलहाल देष का 47 प्रतिषत काष्त का रकबा सिंचाई के अधीन है। 53 प्रतिषत रकबा के लिए किसान बादलों पर टकटकी लगाये रहते है। यह स्थिति बदलने जा रही है, जिससे सूखा पड़ने पर किसान मायूस नहीं होगा। यही कारण है कि देष में आज सूखा की स्थिति के बावजूद कृषि उत्पादन बढ़ने का अनुमान कृषि विज्ञानी बता रहे है। मोदी सरकार गिरते भूजल से चिंतित है। उसने मनरेगा को सिंचाई कार्यों से जोड़ा है। 5 लाख खेत तालाब बनाकर (रेन वाॅटर हार्वेस्टिंग की जा रही है) मनरेगा में 38 हजार करोड़ रू. का प्रावधान किया जाना केन्द्र सरकार के संकल्प की गवाही देता है। कई दषकों से किसान रासायनिक खाद से खेतों को पूर रहे है, जिससे उर्वरा शक्ति में असंतुलन पैदा हो गया है, उर्वरा शक्ति क्षीण हो गयी है। अलबत्ता, किसान की लागत में दोगुना वृद्धि होने से मौसम की त्रासदी कोढ़ मंे खाज सिद्ध हो रही है। नरेन्द्र मोदी सरकार ने राज्यों को स्वाईल टेस्टिंग के जरिये स्वाईल हेल्थ कार्ड किसानों को तकसीम करनें के लिए वित्तीय मदद दी है। आने वाले दिनों में हर काष्तकार अपनी जमीन का हेल्थ कार्ड देखकर ही न्यूनतम रासायनिक खाद का इस्तेमाल कर सकेगा, जिससे भूमि को खुराक मिलेगी और उत्पादन सुनिष्चित होगा। जहां तक समर्थन मूल्य में प्रचुर वृद्धि का सवाल है उसे सामाजिक सरोकार से जोड़ा जाता है कि यदि एकदम एमएसपी ऊंची हो गयी तो उपभोक्ता को मार्केट में गांठ ढ़ीली करना पड़ेगी, जिससे मुद्रास्फीति का स्तर बढ़ेगा। दूसरी बात यह है कि एमएसपी पढ़े-लिखे किसानों के लिए है। प्र्रदेष के सुदूरवर्ती गांव में आज भी लोग समर्थन मूल्य नहीं समझते। फसल पकते ही बाजार में फसल उतार दी जाती है। बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेष, पं. बंगाल जैसे राज्यों में किसान समर्थन मूल्य से ज्यादा सरोकार ही नहीं रखते, क्योंकि उन्हें जागरूक ही नहीं बनाया गया है। इसलिए समर्थन मूल्य की उत्पादन वृद्धि मंे भूमिका नगण्य ही कही जायेगी। अलबत्ता, मध्यप्रदेष जैसे प्रगतिषील राज्य के मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान ने समर्थन मूल्य पर बोनस देकर और ई-उपार्जन की पद्धति विकसित कर न केवल लोक षिक्षण का कार्य किया अपितु उत्पादन वृद्धि में किसानों में स्पर्धा जगा दी। यही कारण है कि मध्यप्रदेष में कृषि उत्पादन का देष दुनिया में कीर्तिमान बना। चैथी बार मध्यप्रदेष को कृषि कर्मण सम्मान हासिल हुआ। मुख्यमंत्री और किसानों की विष्वव्यापी सराहना हुई। किसी राज्य में कृषि उत्पादन में निरंतर वृद्धि की मध्य्रपदेष मिसाल बना। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 2022 तक किसान की आय दोगुनी करना न तो थोथा दावा और न दिवास्वप्न है, और न थोथेबाजी है। नरेन्द्र मोदी ने कई मिथक तोड़े है। किसान की आय दोगुना करना अपवाद नहीं होगा। अलबत्ता, अर्द्धसत्य को पूरी हकीकत में बदलने में राज्यों की सरकारों को केन्द्र के साथ कदम मिलाना है। किसानों को सुविधाओं का लाभ लेना है। देष में सिंचाई का रकबा जो 47 प्रतिषत पर सिमट गया है, उसे 90 प्रतिषत लाने के प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों में पूरक बनना है। मध्यप्रदेष में ही आजादी के बाद से 2003 तक सिंचाई का रकबा 7 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया था, इसे षिवराज सिंह चैहान सरकार ने 10 वर्षों में 35 लाख हेक्टेयर करके करिष्मा कर दिखाया है। प्रदेष में हर गांव में विपुल उत्पादन किसानों की मेहनत और सरकार की मदद की गवाही देतो है। यह कहना अतिष्योक्ति नहीं होगी कि नरेन्द्र मोदी सरकार की प्राथमिकता गांव, गरीब और किसान है। सारी विकास योजनाएं गांव और किसान के इर्द-गिर्द घूमती है। हाल में हुए सर्वेक्षण में पता चला है कि लाखों करोड़ रू. का कृषि उत्पादन हाट की सुविधाओं के अभाव में हर साल साग, सब्जी-भाजी, फल-फूल, जिन्सों के रूप में सड़ गल जाता है। किसान लागत मूल्य से भी वंचित रह जाते है। कभी-कभी तो गांव, खेड़ों की सड़कें प्याज, टमाटर, आलू से पट जाती थी। इस कमी को पूरा करनें के लिए केन्द्र सरकार ने ई-ट्रेडिंग करनें के लिए देष की 500 से अधिक कृषि उपज मंडियों को ई-ट्रेडिंग से जोड़ दिया है। इसका विधिवत उद्घाटन 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वंय करनें की घोषणा कर किसानों को अपना उत्पाद देष की किसी भी मंडियों में आॅनलाईन बेचने की सुविधा प्रदान कर दी है। हर्ष का विषय है कि मध्यप्रदेष में भोपाल की करोंद मंडी 14 अप्रैल से देषभर की मंडियों से जुड़ गयी है। पूरा देष किसानों के लिए विपणन केन्द्र बन चुका है। इससे मध्यप्रदेष का आलू, टमाटर, पपीता, संतरा, सरबती गेहूं, बासमती चावल और अन्य उत्पाद दूरदराज प्रदेषों में बेचे जाने से किसान की गांठ में पैसा आयेगा। किसान की आमदनी में बरकत होगी। किसान को प्रौद्योगिकी का कमाल कुतुहल का विषय बनेगा। नरेन्द्र मोदी परंपरागत चाय के विक्रता रहे है, लेकिन उन्होनें कृषि के अर्थषास्त्र को समझाकर खेती की आय दोगुनी करनें के लिए एक सूत्र दिया है। काष्त जमीन को तीन भागों में विभाजित कर एक तिहायी पर विपुल उत्पादन लिया जाये। दूसरे भाग पर कृषि उद्यान, मधुमक्खी पालन, इमारती लकड़ी लगाकर पूरक आय की जाये। तीसरे भाग में पषुधन, मुर्गीपालन, मतस्यपालन का ताना-बाना बुना जाये। जब कृषि और कृषक तीन स्तंभों पर आधारित होगा, परस्पर सहयोग और समन्वय से बरकत होगी। सरकार ने कृषि लागत को घटाने, जैविक खेती को प्रोत्साहन देने और साख व्यवस्था में सस्ता ब्याज, प्रमाणित बीज, नीम कोटेड यूरिया जैसी व्यवस्था की है। खरीफ और रबी के मौसम में यूरिया की अफीम की तरह कालाबाजारी होती थी। बीस माह मं नरेन्द्र मोदी सरकार ने करिष्मा कर दिया, जिससे यूरिया का प्रचुर भंडार राज्यों में पहुंच रहा है और खाद कारखाने खाद उठाने वालों को दावत दे रहे है। बात ठीक है, गुन न हिरानो, गुना गाहक हिरानों है। देरआयत दुरूस्त आयत दिन फिरे है। किसान की आय दोगुना होगी और घर-घर खेत खलिहान में समृद्धि दस्तक देगी। सब्र का फल मीठा होता है। डाॅ. मनमोहन सिंह कहते थे मंहगायी थमने के लिए जादू की छड़ी नहीं है। लेकिन वहीं कांगे्रसी अब जानबूझकर अच्छे दिनों का स्वागत करनें के बजाय अडंगा लगाकर समय चक्र को गलत दिषा देना चाहते है, जो नहीं हो सकता। आजादी के पूर्व जो सपना स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों ने देखा था, पूरा होने का वक्त आ चुका है।



राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए फैंस से मिली बधाई पर बिग बी ने जताया 'असीम आभार'
29 March 2016
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 18 फरवरी को एक दिवसीय प्रवास पर मध्यप्रदेश आये। श्री मोदी ने अपने प्रवास के दौरान सीहोर जिले के समीप शेरपुर गांव में किसान महासम्मेलन को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का शुभारंभ भी किया। किसानों को अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों की सारी मुसीबतों का समाधान है। इस योजना से किसानों को आने वाले दिनों में अनेक दिक्कतों से निजात मिलेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के किसानों ने अपने परिश्रम और सूझ-बूझ से प्रदेश सरकार के साथ मिलकर कृषि क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा है। उन्होंने खुशी जतायी कि मध्यप्रदेश को कृषि के क्षेत्र में सिरमौर बनाया गया है। लगातार चार वर्ष तक मध्यप्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड मिलना बड़ी बात है। देश के आर्थिक विकास में मध्यप्रदेश के कृषि जगत का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों और गांवों की स्थिति में बदलाव लाने भारत सरकार की प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों की सारी मुसीबतों का समाधान है। उन्होंने कहा कि सरकार की किसान हितैषी नीतियों और किसानों की मेहनत से वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का प्रयास किया जायेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी 18 फरवरी को भोपाल से 38 किलोमीटर दूर सीहोर जिले के ग्राम शेरपुर में किसान महासम्मेलन में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का शुभारंभ करने के बाद संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नई फसल बीमा योजना की मार्गदर्शी पुस्तिका का लोकार्पण भी किया।
प्रधानमंत्री ने प्रदेश भर से लाखों की संख्या में उनका अभिनन्दन करने आये किसानों का आव्हान किया कि अधिक से अधिक नई फसल बीमा योजना से जुड़ें। देश के इतिहास में पहली बार किसानों की भलाई के लिये इतनी बड़ी योजना बनायी गई है। यदि किसान इस योजना से जुड़ गये तो कोई भी प्राकृतिक आपदा डरा नहीं पायेगी।

मध्यप्रदेश की जमकर सराहना

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने संबोधित करते हुये कहा कि मध्यप्रदेश के किसानों ने अपने परिश्रम और सूझ-बूझ से प्रदेश सरकार से मिलकर कृषि क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा है। उन्होंने खुशी जतायी कि मध्यप्रदेश को कृषि में देश में सिरमौर बनाया गया है। लगातार चार वर्ष तक मध्यप्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड मिलना बड़ी बात है। देश के आर्थिक विकास में मध्यप्रदेश के कृषि जगत का महत्वपूर्ण योगदान है। दो वर्ष तक वर्षा की स्थिति ठीक नहीं होने के बाद भी किसानों ने उत्पादन में कमी नहीं आने दी। विपरीत परिस्थितियों में यह उपलब्धि किसानों के अहर्निश पुरुषार्थ का परिणाम है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में मध्यप्रदेश के कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों को देखते हुए नई फसल बीमा योजना का प्रदेश से शुभारंभ करने को उचित बताते हुए कहा कि पुरानी फसल बीमा योजना के बारे में किसानों के मन में कई आशंकाएँ थीं। इसलिये ऐसी फसल बीमा योजना बनायी गई है, जिसमें किसानों की सारी मुसीबतों का समाधान है। इसमें रबी के लिये डेढ़ प्रतिशत और खरीफ के लिये 2 प्रतिशत से ज्यादा प्रीमियम नहीं होगा। जबकि पुरानी फसल बीमा योजना में प्रीमियम 12 से 14 प्रतिशत था। नई फसल बीमा योजना में किसानों के भुगतान पर कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है। साथ ही गाँव के एक भी किसान का नुकसान हुआ तो उसे फसल बीमा का लाभ मिलेगा। पुरानी फसल बीमा योजना में बीज बोने के बाद ही बीमा होता था। नई योजना में बारिश नहीं होने के कारण बोनी नहीं कर पाने पर भी किसानों को मदद दी जायेगी। खेत में कटी हुई फसल का नुकसान होने पर भी बीमा राशि दी जायेगी। पहले बीमा राशि स्वीकृत होने में काफी समय लगता था। अब 25 प्रतिशत राशि तत्काल दी जायेगी तथा बाकी राशि कम से कम समय में दी जायेगी। अब किसानों की फसल का एक तिहाई नुकसान होने पर भी मुआवजा दिया जायेगा। पहले 50 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान पर मुआवजा दिया जाता था। मुआवजा राशि को बढ़ाकर तीन गुना कर दिया गया है।

राष्ट्रीय कृषि बाजार 14 अप्रैल से शुरू होगा

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि किसानों और गाँवों की स्थिति में बदलाव लाना भारत सरकार की प्राथमिकता है। परम्परागत कृषि के साथ आधुनिक तकनीकी का उपयोग कर किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनायी जायेगी।
आने वाले समय में डिजिटल इंडिया का फायदा किसानों को दिलवाने के लिये राष्ट्रीय कृषि बाजार का प्लेटफार्म विकसित किया जायेगा। इसमें देश की साढ़े पाँच सौ से अधिक मंडियों को नेटवर्क से जोड़ा जायेगा। राष्ट्रीय कृषि बाजार आगामी 14 अप्रैल को बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती से शुरू किया जायेगा।

गन्ना उत्पादक किसानों की हित चिंता

केन्द्र सरकार ने गन्ना उत्पादक किसानों के हितों की चिंता की है। उन्हें गन्ने का बकाया भुगतान दिलाया गया है। केंद्र सरकार ने गन्ना उत्पादक किसानों के हित में निर्णय लिया है कि गन्ने से एथनाल बनाकर पेट्रोल में 10 प्रतिशत मिलाया जायेगा। यह पर्यावरण और किसानों के फायदे की दृष्टि से भी बेहतर होगा। प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में ‘स्टार्टअप इंडिया - स्टेंडअप इंडिया’ अभियान में पहल करने के लिये युवाओं से आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जैविक खेती के क्षेत्र में भी देश, दुनिया की आवश्यकता की पूर्ति कर सकता है।
साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में कम पानी के उपयोग से अधिक फसल पैदा करने का लक्ष्य है। मध्यप्रदेश की कृषि क्रांति का मूल कारण सिंचाई पर जोर देना है। इसके लिये उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार की सराहना करते हुए कहा कि अब पूरे देश में इसी काम को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि गाँव का पानी गाँव में - मंत्र को लेकर आगे बढ़ें। कम पानी से अधिक सिंचाई के लिये टपक सिंचाई को बढ़ावा दें। केन्द्र ने खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाई। जिससे किसानों को आसानी से खाद की उपलब्धता हुई। नीम कोटिंग यूरिया के उपयोग से कृषि भूमि को भी फायदा हुआ। उन्होंने आग्रह किया कि अधिक से अधिक किसान मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवायें और जमीन में उपयुक्त फसल लगायें। आज दुनिया हमसे अपेक्षा कर रही है कि अधिक उत्पादन कर दुनिया की खाद्यान्न की आवश्यकताओं की पूर्ति हम करें। इसके लिये योजना बनाकर काम करना होगा।

प्रधानमंत्री सबसे बड़े किसान हितैषी - मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को किसान मित्र प्रधानमंत्री बताते हुए कहा कि उन्होंने भारत का सम्मान और गौरव बढ़ाया है। जिन देशों में प्रधानमंत्री गए वहाँ भारत का सम्मान बढ़ाया। श्री चौहान ने कहा कि पिछले दो साल में संकट के बावजूद किसानों ने हार नहीं मानी। किसानों को 4800 करोड़ की राहत राशि दी गयी है। केंद्र ने संकट में 2000 करोड़ देकर किसानों की मदद की। फसल बीमे की 4300 करोड़ की राशि किसानों के खाते में पहुँच रही है। किसानों को फसल नुकसान से ज्यादा राहत मिल रही है। उन्होंने कहा कि पहले सिर्फ साढ़े सात लाख हेक्टेयर में सिंचाई होती थी। अब 36 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है। नर्मदा को सहायक नदियों से जोड़कर खेतों में पानी पहुँचाया जा रहा है। अगले दो साल में 60 लाख हेक्टेयर में सिंचाई करने का लक्ष्य है।
श्री चौहान ने प्रधानमंत्री को कल्पनाशील व्यक्तित्व का धनी बताते हुए कहा कि उनकी सख्त निगरानी के कारण प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं हुई। नीम कोटेड यूरिया फायदेमंद साबित हुआ। उन्होंने मंडियों को इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्म से जोड़ने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने नई फसल बीमा योजना के फायदे गिनाते हुए कहा कि पहले की सरकारों ने किसानों के हित की दॄष्टि से नहीं सोचा। पहले किसानों को 18 प्रतिशत पर ऋण मिलता था अब जीरो प्रतिशत पर मिल रहा है। सरकार ने किसानों का 900 करोड़ का ब्याज अपने खजाने से भरा है। बिजली बिल के 300 करोड़ रुपये को भी अपने खजाने से दिया है। प्रदेश में खेती की समृद्धि के लिए उठाये गए कदमों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सब्जी और फलों का अलग से रूट बनाया जायेगा। उद्यानिकी फसलों के निर्यात के लिए एपीडा जैसी संस्था बनेगी। सोलर पंप सेट पर 85 प्रतिशत का अनुदान दिया जायेगा।

कृषि बीमा योजना बड़ा उपहार - केन्द्रीय कृषि मंत्री

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन सिंह ने स्वागत भाषण में कहा कि श्री मोदी ने सत्ता सम्हालते ही गरीबों का विकास और किसानों की समृद्धि का संकल्प लिया था। उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना के लाभ गिनाते हुए कहा कि इससे सभी विसंगतियाँ दूर हो गयी हैं। आजादी के बाद यह किसानों को मिला सबसे बड़ा उपहार है। उन्होंने मध्यप्रदेश से अपेक्षा की कि वह केंद्र की अन्य योजनाओं की तरह इस क्रान्तिकारी योजना के क्रियान्वयन में भी आगे रहेगा।
विदेश मंत्री श्रीमती स्वराज ने कहा कि श्री मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बहुत कम समय में बड़ी उपलब्धियाँ हासिल हुई हैं। फसल बीमा योजना उसी की एक कड़ी है। मध्यप्रदेश के सभी ज़िलों में सिंचाई प्लान बन रहे हैं। ऐसे परिवर्तनकारी प्रयासों से कोई किसान खेती नहीं छोड़ेगा और न ही खेती से निराश होगा।
केंद्रीय इस्पात एवं खान मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि केंद्र की ओर से राज्य को भरपूर सहयोग मिलेगा। सिंचाई सुविधाएँ बढ़ने, किसानों के हित में नीतियाँ लागू करने और नवाचारों को अपनाने से प्रदेश का कृषि क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है।
केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री श्री थावरचंद गहलोत ने नई फसल बीमा योजना को किसानों के लिए अनूठा उपहार बताया।

प्रधानमंत्री ने कृषि कर्मण अवार्ड की ट्रॉफी प्रदान की

प्रधानमंत्री ने वर्ष 2013-14 के लिए मध्यप्रदेश को मिले सबसे बड़े कृषि कर्मण अवार्ड की ट्राफी मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को प्रदान की। मुख्यमंत्री ने श्री मोदी को खेती की समृद्धि का प्रतीक हल भेंट किया। प्रधानमंत्री को राज्य की ओर से स्मृति-चिन्ह भेंट किया गया। श्री चौहान ने किसानों की ओर से प्रधानमंत्री के लिए अभिनन्दन-पत्र पढ़ा। उन्होंने अपेक्षा की कि श्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया का सिरमौर बनेगा। प्रधानमंत्री ने खरीफ-2015 में फसल बीमा योजना की राशि प्रतीक स्वरूप 3 हितग्राही किसानों को भेंट की। उन्होंने प्रतीक स्वरूप 3 किसानों को स्वाइल हेल्थ कार्ड भी प्रदान किये।

पंजीकृत कृषकों से सिंचाई एवं कृषि यंत्रो का उठाव करने की अपील
11 March 2016
कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं में 30 जनवरी 2016 तक ऑनलाईन पंजीकृत कृषकों को कृषि सिंचाई उपकरण और कृषि यंत्रो का वितरण ऑनलाईन व्यवस्था से किया जायेगा। इसके लिये ऑनलाईन पंजीकृत कृषकों में से चयनित कृषकों की सूची वरिष्ठ कार्यालय द्वारा जारी की जा चुकी है जिसकी सूचना मोबाईल संदेश द्वारा कृषकों को दी जा चुकी है। पंजीकृत कृषकों से अपील की है कि संबंधित वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों से संपर्क कर सिंचाई एवं कृषि यंत्रो का उठाव समयावधि में सुनिश्चित करे एवं देयक संबंधित वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों के माध्यम से प्रस्तुत करें ताकि इसी वित्तीय वर्ष में योजनाओं के अंतर्गत कृषकों को लाभांवित किया जा सके।।


पंजाब और मध्यप्रदेश की एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के मध्य एमओयू होगा
Our Correspondent :08 March 2016
भोपाल। मध्यप्रदेश की जबलपुर एग्रीकल्चर यूविर्सिटी और पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के बीच कृषि संबंधी तकनीकी ओर शोधों के आदान-प्रदान के लिये शीघ्र ही एम.ओ.यू. होगा। यह निर्णय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और पंजाब के मुख्यमंत्री श्री प्रकाशसिंह बादल के मध्य रविवार को लुधियाना में हुई चर्चा में लिया गया। चर्चा में पंजाब और मध्यप्रदेश के मध्य कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सार्थक बातचीत हुई। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से पंजाब के उप मुख्यमंत्री श्री सुखबीर सिंह बादल ने भी सौजन्य भेंट की।
इसके पहले मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी का भ्रमण किया। श्री चौहान ने यूनिवर्सिटी द्वारा कृषि क्षेत्र में किये जा रहे नये अनुसंधानों, सरसों की विकसित किस्मों, ड्रिप इरिगेशन, मशरूम की नयी किस्मों और उनके उत्पादन, उन्नत कृषि यंत्रों और फसल व्याधियों के उपचार क्षेत्र में हो रहे कार्यों का मैदानी अवलोकन किया। इस दौरान पंजाब के अपर मुख्य सचिव कृषि श्री सुरेश कुमार, कृषि मंत्री सरदार तोतासिंह, यूनिवर्सिटी के उप कुलपति डॉ. बी.एस. ढिल्लो भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने यूनिवर्सिटी परिसर में लगायी गयी कृषि प्रदर्शनी को भी देखा। मुख्यमंत्री श्री चौहान के समक्ष यूनिवर्सिटी ने अपनी गतिविधियों का प्रजेंटेशन भी दिया। मुख्यमंत्री ने यूनिवर्सिटी की गतिविधियों की सराहना की।


किसानों की आय दोगुना करने के लिये रोडमेप तैयार
Our Correspondent :02 March 2016
भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव के उत्तर में कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में मध्यप्रदेश ने हर क्षेत्र में चहुँमुखी प्रगति की है। उन्होंने वर्ष 2002-03 और आज की तुलना करते हुए कहा कि प्रदेश ने कृषि, सिंचाई, विद्युत उत्पादन, दुग्ध उत्पादन, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं की आम नागरिकों तक पहुँच, शिक्षा सुविधाओं का विस्तार और गुणवत्ता वृद्धि, महिला सशक्तिकरण, अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक और अन्य कमजोर तबकों के कल्याण के आँकड़े उदृत करते हुए विपक्ष पर करारे प्रहार किये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आँकड़ों से प्रमाणित किया कि उनकी सरकार के द्वारा किये गये विकास कार्यों और पिछली सरकार के कार्यों में जमीन-आसमान का फर्क है।
श्री चौहान ने एक बार फिर मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि अगले पाँच सालों में किसानों की आय दोगुना करने के प्रधानमंत्री के संकल्प को साकार करने के लिये राज्य सरकार ने रोडमेप तैयार कर लिया है। इसके अनुसार कृषि और संबंधित क्षेत्र को मिलाकर नई रणनीति बनाई जायेगी। इसमें बागवानी, पशुपालन, शहद पालन, मछली-पालन, डेयरी जैसे कृषि सहायक क्षेत्रों को जोड़ा जायेगा।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि लगातार 8-10 वर्ष से विकास दर का डबल डिजिट में रहना और कृषि विकास दर 20 से 24 प्रतिशत तक पहुँचना प्रदेश की इस दशक की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कृषि को लाभदायी व्यवसाय बनाने के प्रयासों की सफलता के बाद उन्हें निरंतर रखते हुए अब प्रदेश में उद्योगों का जाल बिछाने की कोशिशें की जा रही है। उन्होंने कहा कि देशी-विदेशी निवेशकों का मध्यप्रदेश में विश्वास बढ़ा है। प्रदेश में बड़े उद्योगों के साथ ही कुटीर और छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिये नया विभाग बनाया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का मानना है कि बढ़ती आबादी का सारा बोझ खेती-किसानी नहीं उठा सकती। इसलिए कौशल उन्नयन, कृषि सहयोगी क्षेत्रों को बढ़ावा देने और स्व-रोजगार योजनाओं पर फोकस किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अभिभाषण पर चर्चा के दौरान प्रतिपक्षी सदस्यों द्वारा उठाये गये मुद्दों का बिन्दुवार उत्तर देते हुए राज्य सरकार की उपलब्धियाँ सामने रखीं। उन्होंने कहा कि किसानों के खेतों में सोलर ऊर्जा के पोल लगाने के संबंध में प्रतिपक्ष द्वारा उठाये गये मुद्दे का उचित संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी। श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिये धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने प्रतिपक्ष का आव्हान किया कि सरकार किसी भी दल की हो, कोशिश प्रदेश के सर्वांगीण विकास की होनी चाहिए। उन्होंने इस संबंध में प्रतिपक्ष का सहयोग भी माँगा।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस बात का पुरजोर खण्डन किया कि वर्तमान केन्द्र सरकार ने प्रदेश की सहायता राशि में कटौती की है। उन्होंने कहा कि केन्द्र ने राज्यों की राशि न केवल 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दी है, बल्कि उसे राज्य की आवश्यकता के अनुरूप व्यय करने की स्वतंत्रता भी दी है, जो पहले नहीं थी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अपने उत्तर के प्रारंभ में कहा कि विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री के स्वागत पर हुए व्यय को लेकर की गई आपत्तियाँ उनकी समझ से परे है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का स्वागत राज्य सरकार का कर्त्तव्य है। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि प्रधानमंत्री ने अपनी महत्वाकांक्षी फसल बीमा योजना को जारी करने के लिये मध्यप्रदेश को चुना। उन्होंने नई फसल बीमा योजना को किसानों के हित में अभूतपूर्व कदम बताया।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश आज देश में विभिन्न क्षेत्रों में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि विकास दर में, जैविक खेती के क्षेत्र में, दलहन उत्पादन, सोयाबीन, तिलहन, प्रमाणित बीज, चना, औषधि एवं सुगंधित फसलों के उत्पादन, लहसुन, अमरूद और मटर उत्पादन, पीपीपी मॉडल में स्टील सायलो की स्थापना, इलेक्ट्रानिक उपार्जन व्यवस्था, खेती के लिये प्रतिदिन 10 घण्टे गुणवत्तापूर्ण बिजली प्रदाय, पीपीपी मोड में देश में सबसे अधिक सड़कों का निर्माण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में देश में सबसे ज्यादा सड़कों का निर्माण, दस्तावेजों के ऑनलाइन पंजीयन और ई-स्टॉम्पिंग, सबसे ज्यादा 3 शहरों का स्मार्ट सिटी का चयन, नि:शक्त विवाह प्रोत्साहन योजना लागू करने, बहु-विकलांग एवं मानसिक रूप से नि:शक्त व्यक्ति को आर्थिक सहायता देने की योजना प्रारंभ करने, मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना लागू करने, लोक सेवा गारण्टी कानून बनाने, सीएम हेल्प लाईन जैसा कॉल सेन्टर प्रारंभ करने और स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने में देश में प्रथम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की साख बढ़ने से बड़े और छोटे उद्योग आ रहे हैं। कॉटेज इण्डस्ट्री को भी महत्व दिया जा रहा है। लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये अलग मंत्रालय बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को अपना उद्योग शुरू करने के लिये आर्थिक सहायता दी जाती है। इस साल एक लाख युवाओं को सहायता दी जायेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के युवा प्रतिभाशाली, ऊर्जावान और क्षमतावान है, यदि उन्हें थोड़ा सहयोग मिल जायें तो वे टाटा, बिड़ला जैसे बड़े उद्योगपति बन सकते हैं।
केन्द्रीय बजट की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट गाँव और गरीबों का बजट है। राज्य सरकार ने संकल्प लिया है कि किसी भी गरीब को भूखा नहीं रहने देंगे। गरीबों और मजदूरों को एक रुपये किलो गेहूँ, चावल और नमक उपलब्ध करवाया जा रहा है। चाहे वह किसी भी योजना में पंजीकृत हो।

सबको आवास

श्री चौहान ने कहा कि ऐसे भूमिहीन गरीब परिवार जो शासकीय जमीन पर वर्षों रह रहे हैं उन्हें भूमि स्वामी का पट्टा दिया जायेगा। वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत 2 लाख 14 हजार आदिवासी परिवारों को पट्टे दिये गये हैं। दिसम्बर 2006 के पहले के सभी कब्जाधारी परिवारों के दावों का फिर से परीक्षण करने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि सबके लिये आवास का सपना साकार कर रहे हैं। इसके लिये ग्रामीण क्षेत्र में एक लाख की और शहरी क्षेत्र में ढाई लाख की आवास सहायता गरीबों को दी जायेगी।

मेधावी निर्धन बच्चों की शिक्षा के लिये नयी योजना बनेगी

शिक्षा के क्षेत्र में उठाये गये महत्वपूर्ण कदमों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में शिक्षा पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी। कर्मीकल्चर था। पाँच सौ रुपये गुरुजी - शिक्षाकर्मियों का वेतन था। आज शिक्षाकर्मियों को अध्यापक बनाकर उन्हें छठवें वेतनमान का लाभ दिया जा रहा है। अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के अलावा सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को भी स्कॉलरशिप देने का फैसला राज्य सरकार ने लिया है। अनुसूचित जाति, जनजाति के बच्चों की प्रायवेट इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज में लगने वाली फीस सरकार भरेगी, ताकि फीस न देने के कारण वे शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की शिक्षा के लिये जल्दी ही ऐसी योजना बनाई जायेगी जिसमें निर्धन प्रतिभाशाली बच्चों की फीस राज्य सरकार भरेगी।
मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की चर्चा करते हुए कहा कि सिंचाई सुविधाएँ बढ़ने से यह संभव हुआ है। सरकार ने संकल्प लिया है कि हर किसान के खेत में पानी पहुँचाया जायेगा। हर भूमि का उपयोग अच्छी फसल के लिये किया जायेगा। उन्होंने कहा कि नर्मदा का पानी क्षिप्रा, गंभीर और कालीसिंध नदियों को जोड़ते हुए किसानों के खेतों में पहुँचाया जायेगा। उन्होंने कहा कि जीरो प्रतिशत पर कृषि ऋण देने जैसे उपायों के कारण कृषि उत्पादन अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है।
श्री चौहान ने वर्ष 2003 में प्रदेश की विकास की स्थिति और वर्तमान में विकास के आँकड़े उदृत करते हुए बताया कि प्रदेश वर्ष 2003 में अत्यंत पिछड़ा राज्य था, आज देश के अग्रणी राज्यों में है। उन्होंने कहा कि विद्युत उत्पादन मात्र 5173 मेगावाट था, आज 16 हजार 116 मेगावाट हो गया है। सिंचाई का रकबा साढ़े सात लाख हेक्टेयर था, जो आज बढ़कर 36 लाख हेक्टेयर हो गया है। गेहूँ का उत्पादन मात्र 73.65 मीट्रिक टन था, जो आज 184.80 लाख मीट्रिक टन हो गया है। वर्ष 2018 तक विद्युत का उत्पादन 18 हजार मेगावाट हो जायेगा। सकल घरेलू उत्पाद 1,02,839 करोड़ था जो आज 5,08,006 करोड़ हो गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोई भी इलाज से वंचित नहीं रहने पाये इसके लिये नि:शुल्क उपचार, औषधियाँ, जाँच, भोजन आदि का वितरण शासकीय चिकित्सालयों में किया जा रहा है। अब कीमोथैरेपी और डॉयलेसिस की सुविधाएँ भी उपलब्ध करवाई गई हैं।
महिलाओं को अवसर दिया जाये तो चमत्कार कर सकती हैं। उनकी क्षमताओं का भरपूर उपयोग करने के लिये महिला स्व-सहायता समूहों के गठन को आंदोलन का रूप दिया जायेगा। महिला उद्यमियों को ब्याज में अतिरिक्त छूट की भी व्यवस्था की जा रही है। स्थानीय निकायों और शासकीय सेवाओं में भी आरक्षण दिया गया है।
सूखे के संकट से निपटने के लिये पर्याप्त तैयारियाँ की गई हैं। समूह पेयजल की अवधारणा पर कार्य करते हुए सरकार का प्रयास है कि माताओं, बहनों, बेटियों को हेण्डपम्प से पानी नहीं भरना पड़े, हर घर में नल से जल मिले।
उच्च शिक्षा के लिए धन की कमी नहीं होने दी जायेगी। प्रदेश की बड़ी जनसंख्या को उसकी ताकत बनाने के लिये युवाओं के हाथों को हुनरमंद बनाने का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने की दिशा में प्रदेश में तेजी से काम हो रहा है। इंदौर ग्रामीण और बुधनी क्षेत्र खुले में शौच से मुक्त ब्लॉक बन गये हैं।
शहरों की तस्वीर बदलने के लिये अगले 4 वर्षों में 75 हजार करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे। गाँव को स्मार्ट विलेज बनाया जायेगा। हर गाँव में कम से कम 15 लाख रुपये से अधिक की राशि व्यय होगी।
नर्मदा मैया के शुद्धिकरण के लिये 1500 करोड़ की राशि व्यय की जायेगी। मध्यप्रदेश में पर्यटन की समृद्ध सम्पदा है। इसका अधिकतम दोहन कर रोजगार के अधिक से अधिक अवसर निर्मित करने के लिये नये पर्यटन केन्द्र विकसित किये गये हैं। इस वर्ष पर्यटन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। प्रदेश को पर्यटन का आदर्श डेस्टिनेशन बनाने का प्रयास है।
प्रदेश शांति का टापू बना रहे, इसके प्रभावी प्रयास किये गये हैं। कोई भी सूचीबद्ध दस्यु गिरोह संचालित नहीं है।
भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिये भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही और व्यवस्था में परिवर्तन कर भ्रष्टाचार की संभावनाएँ खत्म करने के कार्य किये गये हैं। लोक सेवा गारंटी कानून, ई-टेण्डरिंग, पेमेण्ट, मेजरमेण्ट की व्वयस्था और विशेष न्यायालयों का गठन किया गया है। यह व्यवस्था की गई है कि न्यायालय द्वारा एक वर्ष में निर्णय किया जाये, ताकि भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही त्वरित गति से की जा सके। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि किसी भी भ्रष्टाचारी को बख्शा नहीं जायेगा।
सिंहस्थ के गरिमामय आयोजन की व्यवस्थाएँ की गई हैं। इस अवसर पर वैचारिक कुंभ का आयोजन भी किया जा रहा है। आयोजन के माध्यम से भारतीय संस्कृति की सदभावना, सहअस्तित्व और विश्व कल्याण का संदेश दुनिया में प्रसारित होगा।।


किसानों की आय दोगुना करने के लिये रोडमेप तैयार ीन साल में सभी गाँव पक्की सड़क से जुड़ेंगे
01 March 2016
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव के उत्तर में कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में मध्यप्रदेश ने हर क्षेत्र में चहुँमुखी प्रगति की है। उन्होंने वर्ष 2002-03 और आज की तुलना करते हुए कहा कि प्रदेश ने कृषि, सिंचाई, विद्युत उत्पादन, दुग्ध उत्पादन, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं की आम नागरिकों तक पहुँच, शिक्षा सुविधाओं का विस्तार और गुणवत्ता वृद्धि, महिला सशक्तिकरण, अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक और अन्य कमजोर तबकों के कल्याण के आँकड़े उदृत करते हुए विपक्ष पर करारे प्रहार किये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आँकड़ों से प्रमाणित किया कि उनकी सरकार के द्वारा किये गये विकास कार्यों और पिछली सरकार के कार्यों में जमीन-आसमान का फर्क है।
श्री चौहान ने एक बार फिर मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि अगले पाँच सालों में किसानों की आय दोगुना करने के प्रधानमंत्री के संकल्प को साकार करने के लिये राज्य सरकार ने रोडमेप तैयार कर लिया है। इसके अनुसार कृषि और संबंधित क्षेत्र को मिलाकर नई रणनीति बनाई जायेगी। इसमें बागवानी, पशुपालन, शहद पालन, मछली-पालन, डेयरी जैसे कृषि सहायक क्षेत्रों को जोड़ा जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि लगातार 8-10 वर्ष से विकास दर का डबल डिजिट में रहना और कृषि विकास दर 20 से 24 प्रतिशत तक पहुँचना प्रदेश की इस दशक की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कृषि को लाभदायी व्यवसाय बनाने के प्रयासों की सफलता के बाद उन्हें निरंतर रखते हुए अब प्रदेश में उद्योगों का जाल बिछाने की कोशिशें की जा रही है। उन्होंने कहा कि देशी-विदेशी निवेशकों का मध्यप्रदेश में विश्वास बढ़ा है। प्रदेश में बड़े उद्योगों के साथ ही कुटीर और छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिये नया विभाग बनाया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का मानना है कि बढ़ती आबादी का सारा बोझ खेती-किसानी नहीं उठा सकती। इसलिए कौशल उन्नयन, कृषि सहयोगी क्षेत्रों को बढ़ावा देने और स्व-रोजगार योजनाओं पर फोकस किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अभिभाषण पर चर्चा के दौरान प्रतिपक्षी सदस्यों द्वारा उठाये गये मुद्दों का बिन्दुवार उत्तर देते हुए राज्य सरकार की उपलब्धियाँ सामने रखीं। उन्होंने कहा कि किसानों के खेतों में सोलर ऊर्जा के पोल लगाने के संबंध में प्रतिपक्ष द्वारा उठाये गये मुद्दे का उचित संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी। श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिये धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने प्रतिपक्ष का आव्हान किया कि सरकार किसी भी दल की हो, कोशिश प्रदेश के सर्वांगीण विकास की होनी चाहिए। उन्होंने इस संबंध में प्रतिपक्ष का सहयोग भी माँगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस बात का पुरजोर खण्डन किया कि वर्तमान केन्द्र सरकार ने प्रदेश की सहायता राशि में कटौती की है। उन्होंने कहा कि केन्द्र ने राज्यों की राशि न केवल 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दी है, बल्कि उसे राज्य की आवश्यकता के अनुरूप व्यय करने की स्वतंत्रता भी दी है, जो पहले नहीं थी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अपने उत्तर के प्रारंभ में कहा कि विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री के स्वागत पर हुए व्यय को लेकर की गई आपत्तियाँ उनकी समझ से परे है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का स्वागत राज्य सरकार का कर्त्तव्य है। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि प्रधानमंत्री ने अपनी महत्वाकांक्षी फसल बीमा योजना को जारी करने के लिये मध्यप्रदेश को चुना। उन्होंने नई फसल बीमा योजना को किसानों के हित में अभूतपूर्व कदम बताया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश आज देश में विभिन्न क्षेत्रों में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि विकास दर में, जैविक खेती के क्षेत्र में, दलहन उत्पादन, सोयाबीन, तिलहन, प्रमाणित बीज, चना, औषधि एवं सुगंधित फसलों के उत्पादन, लहसुन, अमरूद और मटर उत्पादन, पीपीपी मॉडल में स्टील सायलो की स्थापना, इलेक्ट्रानिक उपार्जन व्यवस्था, खेती के लिये प्रतिदिन 10 घण्टे गुणवत्तापूर्ण बिजली प्रदाय, पीपीपी मोड में देश में सबसे अधिक सड़कों का निर्माण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में देश में सबसे ज्यादा सड़कों का निर्माण, दस्तावेजों के ऑनलाइन पंजीयन और ई-स्टॉम्पिंग, सबसे ज्यादा 3 शहरों का स्मार्ट सिटी का चयन, नि:शक्त विवाह प्रोत्साहन योजना लागू करने, बहु-विकलांग एवं मानसिक रूप से नि:शक्त व्यक्ति को आर्थिक सहायता देने की योजना प्रारंभ करने, मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना लागू करने, लोक सेवा गारण्टी कानून बनाने, सीएम हेल्प लाईन जैसा कॉल सेन्टर प्रारंभ करने और स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने में देश में प्रथम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की साख बढ़ने से बड़े और छोटे उद्योग आ रहे हैं। कॉटेज इण्डस्ट्री को भी महत्व दिया जा रहा है। लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये अलग मंत्रालय बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को अपना उद्योग शुरू करने के लिये आर्थिक सहायता दी जाती है। इस साल एक लाख युवाओं को सहायता दी जायेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के युवा प्रतिभाशाली, ऊर्जावान और क्षमतावान है, यदि उन्हें थोड़ा सहयोग मिल जायें तो वे टाटा, बिड़ला जैसे बड़े उद्योगपति बन सकते हैं। केन्द्रीय बजट की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट गाँव और गरीबों का बजट है। राज्य सरकार ने संकल्प लिया है कि किसी भी गरीब को भूखा नहीं रहने देंगे। गरीबों और मजदूरों को एक रुपये किलो गेहूँ, चावल और नमक उपलब्ध करवाया जा रहा है। चाहे वह किसी भी योजना में पंजीकृत हो।

सबको आवास

श्री चौहान ने कहा कि ऐसे भूमिहीन गरीब परिवार जो शासकीय जमीन पर वर्षों रह रहे हैं उन्हें भूमि स्वामी का पट्टा दिया जायेगा। वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत 2 लाख 14 हजार आदिवासी परिवारों को पट्टे दिये गये हैं। दिसम्बर 2006 के पहले के सभी कब्जाधारी परिवारों के दावों का फिर से परीक्षण करने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि सबके लिये आवास का सपना साकार कर रहे हैं। इसके लिये ग्रामीण क्षेत्र में एक लाख की और शहरी क्षेत्र में ढाई लाख की आवास सहायता गरीबों को दी जायेगी। मेधावी निर्धन बच्चों की शिक्षा के लिये नयी योजना बनेगीशिक्षा के क्षेत्र में उठाये गये महत्वपूर्ण कदमों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में शिक्षा पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी। कर्मीकल्चर था। पाँच सौ रुपये गुरुजी - शिक्षाकर्मियों का वेतन था। आज शिक्षाकर्मियों को अध्यापक बनाकर उन्हें छठवें वेतनमान का लाभ दिया जा रहा है। अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के अलावा सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को भी स्कॉलरशिप देने का फैसला राज्य सरकार ने लिया है। अनुसूचित जाति, जनजाति के बच्चों की प्रायवेट इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज में लगने वाली फीस सरकार भरेगी, ताकि फीस न देने के कारण वे शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की शिक्षा के लिये जल्दी ही ऐसी योजना बनाई जायेगी जिसमें निर्धन प्रतिभाशाली बच्चों की फीस राज्य सरकार भरेगी। मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की चर्चा करते हुए कहा कि सिंचाई सुविधाएँ बढ़ने से यह संभव हुआ है। सरकार ने संकल्प लिया है कि हर किसान के खेत में पानी पहुँचाया जायेगा। हर भूमि का उपयोग अच्छी फसल के लिये किया जायेगा। उन्होंने कहा कि नर्मदा का पानी क्षिप्रा, गंभीर और कालीसिंध नदियों को जोड़ते हुए किसानों के खेतों में पहुँचाया जायेगा। उन्होंने कहा कि जीरो प्रतिशत पर कृषि ऋण देने जैसे उपायों के कारण कृषि उत्पादन अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है।
श्री चौहान ने वर्ष 2003 में प्रदेश की विकास की स्थिति और वर्तमान में विकास के आँकड़े उदृत करते हुए बताया कि प्रदेश वर्ष 2003 में अत्यंत पिछड़ा राज्य था, आज देश के अग्रणी राज्यों में है। उन्होंने कहा कि विद्युत उत्पादन मात्र 5173 मेगावाट था, आज 16 हजार 116 मेगावाट हो गया है। सिंचाई का रकबा साढ़े सात लाख हेक्टेयर था, जो आज बढ़कर 36 लाख हेक्टेयर हो गया है। गेहूँ का उत्पादन मात्र 73.65 मीट्रिक टन था, जो आज 184.80 लाख मीट्रिक टन हो गया है। वर्ष 2018 तक विद्युत का उत्पादन 18 हजार मेगावाट हो जायेगा। सकल घरेलू उत्पाद 1,02,839 करोड़ था जो आज 5,08,006 करोड़ हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोई भी इलाज से वंचित नहीं रहने पाये इसके लिये नि:शुल्क उपचार, औषधियाँ, जाँच, भोजन आदि का वितरण शासकीय चिकित्सालयों में किया जा रहा है। अब कीमोथैरेपी और डॉयलेसिस की सुविधाएँ भी उपलब्ध करवाई गई हैं। महिलाओं को अवसर दिया जाये तो चमत्कार कर सकती हैं। उनकी क्षमताओं का भरपूर उपयोग करने के लिये महिला स्व-सहायता समूहों के गठन को आंदोलन का रूप दिया जायेगा। महिला उद्यमियों को ब्याज में अतिरिक्त छूट की भी व्यवस्था की जा रही है। स्थानीय निकायों और शासकीय सेवाओं में भी आरक्षण दिया गया है। सूखे के संकट से निपटने के लिये पर्याप्त तैयारियाँ की गई हैं। समूह पेयजल की अवधारणा पर कार्य करते हुए सरकार का प्रयास है कि माताओं, बहनों, बेटियों को हेण्डपम्प से पानी नहीं भरना पड़े, हर घर में नल से जल मिले। उच्च शिक्षा के लिए धन की कमी नहीं होने दी जायेगी। प्रदेश की बड़ी जनसंख्या को उसकी ताकत बनाने के लिये युवाओं के हाथों को हुनरमंद बनाने का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने की दिशा में प्रदेश में तेजी से काम हो रहा है। इंदौर ग्रामीण और बुधनी क्षेत्र खुले में शौच से मुक्त ब्लॉक बन गये हैं। शहरों की तस्वीर बदलने के लिये अगले 4 वर्षों में 75 हजार करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे। गाँव को स्मार्ट विलेज बनाया जायेगा। हर गाँव में कम से कम 15 लाख रुपये से अधिक की राशि व्यय होगी।
नर्मदा मैया के शुद्धिकरण के लिये 1500 करोड़ की राशि व्यय की जायेगी। मध्यप्रदेश में पर्यटन की समृद्ध सम्पदा है। इसका अधिकतम दोहन कर रोजगार के अधिक से अधिक अवसर निर्मित करने के लिये नये पर्यटन केन्द्र विकसित किये गये हैं। इस वर्ष पर्यटन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। प्रदेश को पर्यटन का आदर्श डेस्टिनेशन बनाने का प्रयास है। प्रदेश शांति का टापू बना रहे, इसके प्रभावी प्रयास किये गये हैं। कोई भी सूचीबद्ध दस्यु गिरोह संचालित नहीं है।
भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिये भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही और व्यवस्था में परिवर्तन कर भ्रष्टाचार की संभावनाएँ खत्म करने के कार्य किये गये हैं। लोक सेवा गारंटी कानून, ई-टेण्डरिंग, पेमेण्ट, मेजरमेण्ट की व्वयस्था और विशेष न्यायालयों का गठन किया गया है। यह व्यवस्था की गई है कि न्यायालय द्वारा एक वर्ष में निर्णय किया जाये, ताकि भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही त्वरित गति से की जा सके। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि किसी भी भ्रष्टाचारी को बख्शा नहीं जायेगा। सिंहस्थ के गरिमामय आयोजन की व्यवस्थाएँ की गई हैं। इस अवसर पर वैचारिक कुंभ का आयोजन भी किया जा रहा है। आयोजन के माध्यम से भारतीय संस्कृति की सदभावना, सहअस्तित्व और विश्व कल्याण का संदेश दुनिया में प्रसारित होगा।

किसान राहत के लिए आकलन सेटेलाईट की आंख से होगा, पटवारी की आंख से नहीं- श्री नंदकुमार सिंह चौहान
29 February 2016
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद श्री नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार कृषि के क्षेत्र में श्री नरेंद्र मोदी सरकार ने प्रभावी आर्थिक सुधार के रूप में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना दी है। किसान की प्राकृतिक आपदा, बीमारी, कीटव्याधि से होने वाली क्षति का आकलन अब पटवारी नहीं करेगा। सेटेलाईट की आंख से क्षति का आकलन होने से कही कोई पक्षपात अथवा कमोवेश के गुंजाईश नहीं रहेगी। रबी फसल पर डेढ़ और खरीफ पर 2 प्रतिशत बीमा प्रीमियम लगेगा और क्षति के प्रारंभिक आकलन के साथ ही बीमित फसल का 25 प्रतिशत अग्रिम भुगतान किसान के खाते में कर दिया जायेगा। नई फसल बीमा को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की सौगात बताते हुए आपने खंडवा और बुरहानपुर क्षेत्र की जनसभाओं में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु और सड़क परिवहन मंत्री श्री नीतिन गडकरी ने निमाड़ की झोली में रेल, सड़क परिवहन सुविधाओं की सौगात डाली है, निमाड़ की जनता उनकी ऋणी रहेगी। श्री नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के जन्मदिन 5 मार्च को सेवा दिवस मानकर रचनात्मक कार्यक्रम हाथ में लेने का निष्चय किया है। हम सभी सेवा दिवस पर रचनात्मक कार्य में भागीदार बनकर जनता को अपनी विनम्र सेवा की अनुभूति देंगे। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में जीरो प्रतिशत ब्याज पर फसल कर्ज, बीज खरीद के लिए लिया जाने वाले कर्ज की अदायगी पर सरकार ने 10 प्रतिशत की छूट देने का अभिनव निर्णय लिया है। इससे यदि किसान 1 लाख का कर्ज लेता है तो उसे चुकाते समय वापस 90 रू. हजार रू. देना पड़ेगा। असल मकसद जनता को खुशहाल बनाना और कर्ज ग्रस्तता से मुक्ति देना है। उन्होंने श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मिशन-2018 को सफल बनाने और प्रदेश में चैथी बार पार्टी की श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सरकार बनाने की अपील की।
सेवा दिवस तैयारी बैठकों में किसान मोर्चा सक्रिय, खेती के क्षेत्र में पहली बार सरकार ने जोखिम के लिए सुरक्षा कवच दिया- किसान मोर्चा
29 February 2016
भारतीय जनता पार्टी द्वारा 5 मार्च को मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के जन्मदिवस पर आयोजित किये जा रहे सेवा दिवस पर किसान मोर्चा रिस्क मैनेजमेंट के क्षेत्र में अभिनव पहल (आजादी के बाद) की गई कार्यवाही पर गोष्ठियां आयोजित करेगा। किसान मोर्चा के पदाधिकारियों ने संभागों में पहुंचकर किसानों की चैपाल में सेवा दिवस पर परिसंवाद गोष्ठी की तैयारी आरंभ कर दी है। श्री बीडी पटैल रीवा संभाग, श्री रवीष चौहान भोपाल, श्री भरत राजपूत होशंगाबाद और श्री संदीप पटैल जबलपुर संभाग के जिलों में पहुंचकर 5 मार्च के सेवा दिवस कार्यक्रम को अंतिम रूप देने में जुट गये हैं।
श्री रवीष चौहान ने भोपाल, रायसेन में किसान चैपाल में बताया कि श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में किसानों को राहत देने में तत्परता सुनिष्चित की है। अब तक मध्यप्रदेश किसानों को 4300 करोड़ रू. की राहत प्रदेश में बांटी जा चुकी है। किसान की खुशहाली श्री शिवराज की प्रतिबद्धता है। उनके जन्मदिन पर किसान प्रदेश में सेवा दिवस पर गोष्ठी आयोजित कर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दी गई जोखिम में वित्तीय प्रबंधन, राहत सहायता, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर विस्तार से चर्चा कर इसके अंचल में सभी खातेदारों को लाने का आग्रह किया जायेगा।

पहली बार बीमा नीति में किसानों की संभावित आय का बीमा शामिल
29 February 2016
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी फसल बीमा योजना बनाई गई है जिसमें किसानों की संभावित आय का बीमा शामिल किया गया है। श्री चौहान आज विदिशा में श्री बाढ़ वाले गणेश मंदिर परिसर में 42 करोड़ 75 लाख की लागत से पर्यटन विकास निगम द्वारा बनाये गये 'दिवस बसेरा' और निर्माण कार्यों का लोकार्पण कर रहे थे।
श्री चौहान ने कहा कि नई फसल बीमा योजना किसान हितैषी है। इसमें किसान के खेत को इकाई माना गया है और जब तक किसानों का अनाज घर तक न पहुँचे तब तक उसकी फसल बीमित रहेगी। उन्होंने जिला प्रशासन से नई बीमा नीति का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा ताकि हर किसान उससे लाभांवित हो सके। श्री चौहान ने इसके लिये हर गाँव में किसान सभा कर लोगों को जानकारी देने और बीमा करवाने के लिये प्रेरित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने किसानों से खेती के अलावा फल, फूल, सब्जी की खेती करने को कहा। उन्होंने कहा कि इसके लिये किसानों को समझाइश दी जाये, ताकि उनकी नियमित आमदनी हो सके। उन्होंने कहा कि विदिशा में शीघ्र ही फूड प्रोसेसिंग की व्यवस्था की जायेगी। उन्होंने विदिशा जिले के औद्योगिक प्रक्षेत्र जम्बार बागरी में उद्योगपतियों से उद्योग लगाने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिये शासन हरसंभव सहायता देगा।
श्री चौहान ने इस मौके पर राज्य शासन की विभिन्न योजनाओं से लाभांवित हितग्राहियों को चेक और सामग्री वितरित की।


प्रधानमंत्री ने फसल बीमा योजना के लिए संचालनगत दिशा-निर्देशों का अनावरण किया ; सीहोर में किसानों की विशाल रैली को संबोधित किया
19 February 2016
राष्‍ट्रीय कृषि बाजार के लिए डिजिटल प्‍लेफॉर्म 14 अप्रैल को बाबा साहेब अम्‍बेडकर की जयंती पर लांच किया जाएगा

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज मध्‍य प्रदेश के सीहोर में आज किसानों की एक विशाल रैली में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए संचालनगत दिशा-निर्देशों का अनावरण किया।
किसानों के लिए इस व्‍यापक फसल बीमा योजना के लाभों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परेशानियों के वक्‍त किसानों की समस्‍याओं के लिए एक समाधान मुहैया करा सकता है। उन्‍होंने कहा कि पुरानी फसल बीमा योजनाओं की कमियों को दूर करने तथा फसल बीमा को लेकर किसानों के बीच भरोसा कायम करने का पूरा प्रयास किया गया है। उन्‍होंने कहा कि दावों का शीघ्र निपटान सुनिश्चित करने के लिए इस योजना में व्‍यापक रूप से प्रौद्योगिकी का इस्‍तेमाल किया जाएगा। उन्‍होंने किसानों को इस योजना का लाभ उठाने के लिए प्रोत्‍साहित किया।
प्रधानमंत्री ने किसानों के कल्‍याण के लिए केन्‍द्र सरकार द्वारा उठाई कई अन्‍य पहलों को रेखांकित किया। उन्‍होंने गन्‍ना किसानों के बकाये को खत्‍म करने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र किया, जो कई हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था।
‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा किसानों का कल्‍याण इस पहल के मूल में है। उन्‍होंने 14 अप्रैल 2016, बाबा साहेब अम्‍बेडकर की जयंती पर डिजिटल प्‍लेटफॉर्म-राष्‍ट्रीय कृषि बाजार को लांच करने की घोषणा की। यह किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर मूल्‍य दिलाने में सक्षम होगा।
प्रधानमंत्री ने मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जैव खेती और यूरिया की पर्याप्‍त उपलब्‍धता सुनिश्चित कराने जैसे कृषि क्षेत्र में उठाए गए अन्‍य बड़े कदमों का भी जिक्र किया।
श्री नरेन्‍द्र मोदी ने मध्‍य प्रदेश के किसानों एवं मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को कृषि क्षेत्र में राज्‍य के शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड एवं चुने हुए लाभार्थियों को बीमा दावों के निपटान प्रमाण पत्र भी प्रदान किए।

'दिनांक 18 फरवरी, 2016 को भोपाल में आयोजित किसान कल्‍याण मेले के अवसर पर माननीय कृषि तथा किसान कल्‍याण मंत्री श्री राधामोहन सिंह जी के अभिभाषण का मसौदा
19 February 2016
मंच पर विराजमान हम सबके प्रेरणास्‍त्रोत सम्‍माननीय प्रधान मंत्री श्रीमान नरेन्‍द्र मोदी जी; माननीय विदेश मंत्री बहन सुषमा स्‍वराज जी; मध्‍य प्रदेश के लोकप्रिय माननीय मुख्‍यमंत्री श्रीमान शिवराज सिंह चौहान जी; केन्‍द्रीय मंत्रिपरिषद में मेरे सहकर्मी माननीय कोयला व खान मंत्री श्रीमान नरेन्‍द्र सिंह तोमर जी; माननीय सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्री श्रीमान थावर चंद गहलोत जी; मध्‍य प्रदेश के किसान कल्‍याण एवं कृषि विकास मंत्री श्रीमान गौरी शंकर बिसेन; माननीय राजस्‍व मंत्री श्रीमान रामपाल सिंह; भाजपा के प्रदेश अध्‍यक्ष श्रीमान नंद कुमार सिंह चौहान; किसान भाइयों, पत्रकार बंधुओं, देवियो व सज्‍जनों।
2. आज हम सबके लिए यह बडे गर्व की बात है कि माननीय प्रधान मंत्री जी हम सबके बीच मौजूद हैं। माननीय प्रधान मंत्री जी की गरिमामयी उपस्थिति किसानों तथा कृषि की बेहतरी के लिए उनकी प्रतिबद्धता का जीता जागता उदाहरण है। मैं आपकी ओर से, देश भर के किसानों की ओर से माननीय प्रधानमंत्री जी का अभिनन्दन करता हूँ।
3. प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, स्वायल हैल्थ कार्ड योजना, जैविक खेती के विकास के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना, नीम कोटेड यूरिया जैसी किसान हितकारी पहल माननीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में पहली बार देश की कृषि के सतत विकास की गति को अब निश्चित तेज करेगी। 24 घंटे चलने वाला किसान टी.वी. निश्चित रुप से देश के किसानों के लिए कृषि ज्ञान को बढ़ाने में बेहतर मदद कर रहा है।
4. दुग्ध उत्पादन एवं छोटे किसानों की समृद्धि के लिए देसी नस्ल की गायों के संवर्धन एवं संरक्षण हेतु राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरुआत तथा मत्स्य उत्पाद एवं मछुआरों की आमदनी को बढ़ाने हेतु नीली क्रांति की मोदी सरकार की योजना का लाभ इस वर्ष दोनों ही क्षेत्रों में 5-6 % की वृद्धि के रूप में स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
5. देश में कुछ ऐसे भी नेता हैं, जो किसानों की बातें तो करते हैं जिन्‍होंने पिछले दस वर्षों तक इस देश पर राज तो किया है, देश को कितना लूटा और किसानों के लिए क्या किया, यह नहीं बताते। इस देश के किसान आपदाओँ मेंजिस प्रकार से पीड़ित होते रहे हैं, उसकी जो राहत के मानदंड थे, दस वर्षों में क्‍या बदलाव किया, यह बताने की उनकी स्थिति नहीं है, लेकिन मोदी सरकार आते ही माननीय प्रधानमंत्री जी ने स्‍वयं पहल की और आपदा राहत के मानकों में भारी परिवर्तन किया। यह तो राहत का मामला है, किन्‍तु किसान जो कर्जा लेता है, खेती करता है, उसके पूरे परिश्रम का लाभ जब मिलने का अवसर आता है और उस समय प्राकृतिक आपदाओं के कारण उसकी पूरी फसल बरबाद हो जाती है, तो उसके लिए जो दस वर्षों से फसल बीमा योजना चल रही थी, जिसके कारण पूरी फसल बरबाद होने के बाद उसकी भरपाई नहीं हो पाती थी, प्रीमियम भी किसानों को ज्‍यादा देना पड़ता था, बीमित राशि कम होती थी, कैपिंग इसलिए था कि राज खजाने पर अधिक बोझ नहीं पड़े। हमारे प्रधानमंत्री जी ने फसल बीमा के विषय को बड़ी गंभीरता से लिया, स्‍वयं कई दिनों तक रात-रात भर जागकर किसानों की हित रक्षा हेतु कौन सी फसल बीमा योजना लाई जाए ताकि किसान अपने को सुरक्षित महसूस करें और नुकसान की पूरी भरपाई हो । राज खजाने पर चाहे जितना भी बोझ हो, इसकी चिन्‍ता नहीं, किसान की चिन्‍ता पहले – प्रधानमंत्री जी की इसी भावना ने फसल बीमा योजना की तमाम विसंगतियों को दूर कर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का नया स्‍वरूप देश के किसानों के लिए लाये हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना- फसल बीमा के लिए सरकार की ओर से अब तक की सबसे बड़ी सहायता योजना है, जिसके अंतर्गत आपदा से होने वाली फसल क्षति की भरपाई की जाएगी। जिसके दिशानिर्देश को आज प्रधानमंत्री जी जारी करेंगे। इस अवसर पर मैं पुन: आपकी तथा देश के किसानों की ओर से प्रधानमंत्री जी का अभिनन्‍दन करता हूं, वंदन करता हूं।
6. और अन्‍त में मैं, मध्‍य प्रदेश के मेहनतकश किसानों को , खेती में काम करने वाले कामगारों को, प्रदेश के मुख्‍य मंत्री और कृषि मंत्री को बधाई दूंगा जिनके सम्मिलित प्रयासों से मध्‍य प्रदेश राज्‍य को विगत वर्ष (2013-14) में गेहूं के उत्‍पादन के लिए कृषि कर्मण पुरस्‍कार दिया जा रहा है। मुझे यह बताते हुए अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है कि समग्र खाद्य अनाजों की श्रेणी-1 (10 मिलियन टन से अधिक उत्‍पादन करने वाले राज्‍य) के लिए इस वर्ष (2014-15) मध्‍य प्रदेश राज्‍य को कृषि कर्मण पुरस्‍कार भी प्राप्‍त होगा। मुझे पूरा विश्‍वास है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ यहां के किसानों को पहुंचाने में यह राज्‍य अग्रणी रहेगा।

 प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए बड़ी सहायता योजना— श्री राधा मोहन सिंह
 प्रधानमंत्री जी ने फसल बीमा के विषय को स्वंय गंभीरता से लिया
 देश में कुछ नेता हैं जो सिर्फ किसानों के नाम पर भाषण करते हैं उनकी सरकार ने दस साल में किसानों के लिए कुछ नहीं किया

19 February 2016
भोपाल। केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए मोदी सरकार की ओर से अब तक की सबसे बड़ी सहायता योजना है। यह योजना किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगी और  इसके तहत आपदा से होने वाली फसल क्षति की भरपाई की जाएगी। प्रधानमंत्री जी ने फसल बीमा के विषय को बड़ी गंभीरता से लिया, स्वंय कई दिनों तक रात-रात भर जागकर किसानों के हित रक्षा हेतु कौन सी फसल बीमा योजना लाई जाए ताकि किसान अपने को सुरक्षित महसूस करें और नुकसान की पूरी भरपाई हो सके इसके लिए कार्य किया। राज खजाने पर चाहे जितना भी बोझ हो इसकी चिन्ता से अधिक किसान की चिन्ता की। प्रधानमंत्री जी की इसी भावना ने फसल बीमा योजना की तमाम विसंगतियों को दूर करने का काम किया। हमारी सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का नया स्वरूप देश के किसानों के लिए लेकर आई है। श्री राधा मोहन सिंह आज भोपाल में आयोजित किसान कल्याण मेले के अवसर पर बोल रहे थे। इस अवसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वाराज, मध्य  प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय कोयला व खान मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावर चंद गहलोत, मध्य प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री गौरी शंकर बिसेन, राजस्व मंत्री रामपाल सिंह, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष् नंद कुमार सिंह चौहान आदि उपस्थित थे। श्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सहित देश के किसानों और कृषि् विकास के लिए जो कार्य प्रधानमंत्री जी की पहल पर हुआ है उसके लिए देश के किसानों की ओर से मैं उनका अभिनन्द करता हूं वंदन करता हूं।
केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि देश में कुछ ऐसे भी नेता हैं, जो आज कल किसानों की बातें करते हैं। यह वह नेता हैं जिन्होंने पिछले दस वर्षों तक इस देश पर राज किया, पर देश को कितना लूटा और किसानों के लिए क्या किया, यह नहीं बताते। इस देश के किसान आपदाओँ में जिस प्रकार से पीड़ित होते रहे हैं, उसकी जो राहत के मानदंड थे, दस वर्षों में क्या बदलाव किया, यह बताने की उनकी स्थिति नहीं है, लेकिन मोदी सरकार आते ही प्रधानमंत्री जी ने स्वयं पहल की और आपदा राहत के मानकों में भारी परिवर्तन किया। यह तो राहत का मामला है, किन्तु किसान जो कर्जा लेता है, खेती करता है, उसके पूरे परिश्रम का लाभ जब मिलने का अवसर आता है और उस समय प्राकृतिक आपदाओं के कारण उसकी पूरी फसल  बरबाद हो जाती है, तो उसके लिए जो दस वर्षों से फसल बीमा योजना चल रही थी, जिसके कारण पूरी फसल बरबाद होने के बाद उसकी भरपाई नहीं हो पाती थी, प्रीमियम भी किसानों को ज्यादा देना पड़ता था, बीमित राशि कम होती थी, कैपिंग इसलिए था कि राज खजाने पर अधिक बोझ नहीं पड़े।
लेकिन हमारे प्रधानमंत्री जी ने फसल बीमा के विषय को बड़ी गंभीरता से लिया और इस दिशा में पहल करते हुए दिनरात काम किया। ताकि किसानों का कल्याण हो।  कारण प्रधानमंत्री जी किसानों की समस्या और दुख दर्द को समझते हैं महसूस करते हैं जबकि देश पर सालों राज करने वाले नेता जिन्हें खेती के बारे में कुछ पता नहीं वह सिर्फ भाषण देते हैं। श्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, स्वायल हैल्थ कार्ड योजना, जैविक खेती के विकास के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना, नीम कोटेड यूरिया जैसी किसान हितकारी पहल माननीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में पहली बार देश की कृषि के सतत विकास की गति को अब निश्चित तेज करेगी। 24 घंटे चलने वाला किसान टी.वी. चैनल देश के किसानों के लिए कृषि ज्ञान को बढ़ाने में बेहतर मदद कर रहा है। दुग्ध उत्पादन एवं छोटे किसानों की समृद्धि के लिए देसी नस्ल की गायों के संवर्धन एवं संरक्षण हेतु राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरुआत तथा मत्स्य उत्पाद एवं मछुआरों की आमदनी को बढ़ाने हेतु नीली क्रांति की मोदी सरकार की योजना का लाभ इस वर्ष दोनों ही क्षेत्रों में 5-6 % की वृद्धि के रूप में स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
श्री राधा मोहन सिहं ने कहा कि मध्य प्रदेश में कृषि विकास और किसान कल्याण का जो कार्य हो रहा है उसी के चलते मध्य प्रदेश को वर्ष (2013-14) में गेहूं के उत्पादन के लिए कृषि कर्मण पुरस्कार दिया जा रहा है।समग्र खाद्य अनाजों की श्रेणी-1 (10 मिलियन टन से अधिक उत्पादन करने वाले राज्य) के लिए भी इस वर्ष (2014-15) मध्यय प्रदेश राज्य को कृषि कर्मण पुरस्कार भी प्राप्त होगा।

सी एम शिवराज ने सिंगापूर में कहा
Our Correspondent :14 January 2016
नई फसल बीमा बनाने पर प्रधानमंत्री और एन डी ए सरकार को दी बधाई
कहा केंद्र सरकार का क्रांतिकारी फैसला पहले की बीमा पालिसी से बेहतर बताया
कहा पहले प्रक्रिया लंबी होती थी , प्रीमियम वसूलने के बाद अगर नुक्सान ज्यादा हो जाये तो केंद्र और राज्य को बीमा का पैसा आधा आधा देना होता था इस फसल बीमा पालिसी में सारी कमिया दूर की गई अब फसल के नुकसान होने पर 25 प्रतिशत राशि तुरंत दी जायेगी और शेष राशि फसल आकलन के बाद इस फसल बीमा पालिसी से अगर पूरे गाव की फसल ख़राब न होने पर या कुछ हिस्से की ख़राब हुई और फसल कटने के बाद फसल ख़राब होने पर भी पूरी फसल की बीमा का लाभ किसानो को मिलेगा ।

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गेहूँ की फसल में खरपतवार नियंत्रण हेतु सलाह
Our Correspondent :07 January 2016
भोपाल। किसान भाईयों को सलाह दी जाती है कि वर्तमान समय में जिन किसान भाईयों की गेहूँ की फसल 18-21 दिन की हो गई है तो प्रथम सिंचाई सीआरआई अवस्था (क्राउन रूट निकलते समय) में पहली सिंचाई करें। इस सिंचाई के करने से फसल अच्छी वृद्धि करती है। इसी प्रकार से जिन किसान भाईयों के खेतों में गेहूँ की फसल में खरपतवार जैसे गेहूं सा (फेलेरिस माइनर) जंगली जई, दूब घास, हिरन खुरी, बथुआ आदि का प्रक्रोप होता है। इन खरपतवारों के कारण गेहूँ की फसल में 30-45 प्रतिशत की हानि हो सकती है। अतः जिन किसान भाईयों के खेत में चौडी़ पत्ती वाले खरपतवार दिखाई दे रहे है तो 2-4 डी सोडियम लवण 80 प्रतिशत डब्ल्यूपी 01 लीटर दवा 500-600 लीटर पानी में मिलाकर पहली सिंचाई के बाद स्प्रे करें। इसी प्रकार से जिन किसान भाईयों के खेत में सकरी पत्ती वाले खरपतवार दिखाई दे रहे हो तो मेटसल्फ्यूरॉन मिथाईल 20 प्रतिशत डब्ल्यू.पी 20-30 ग्राम मिली. हे.500-600 लीटर पानी में मिलाकर पहली सिंचाई के बाद स्प्रे किया जाना चाहिए। जिन किसान भाईयों के खेत में चौडी एवं सकरी पत्ती वाले खरपतवार दिखाई दे रहे हो तो किसान भाई सल्फोसल्फ्यूरॉन 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी फीनोन्सोप्रोप इथाइल 10 प्रतिशत ईसी दवा का मिश्रण 500-600 लीटर पानी में मिलाकर किसान पहली सिंचाई के बाद खेत में नमी रहने पर खरपतवार नियंत्रण हेतु उपयोग कर सकते है। अधिक जानकारी के लिए किसान भाई अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी कृषि विकास अधिकारी या विकासखण्ड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से सम्पर्क कर सकते है।


किसानों की तरक्की के लिये कृषि के साथ पशुपालन को भी दिया जाये बढ़ावा
Our Correspondent :02 January 2016
चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में कृषक प्रशिक्षण केन्द्र का लोकार्पण

भोपाल। केन्द्रीय राज्य मंत्री सूक्ष्म, लघु तथा मझोले उद्योग श्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि किसानों की तरक्की के लिये कृषि के साथ-साथ पशुपालन और कृषि से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिये जाने की जरूरत है। केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री गिरिराज सिंह आज सतना के महात्मा गाँधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में कृषक प्रशिक्षण केन्द्र का लोकार्पण कर रहे थे। इस मौके पर ऊर्जा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल भी मौजूद थे।
केन्द्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के बाद ही सही मायनों में गाँव का विकास होगा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री और कृषि वैज्ञानिक स्वामीनाथन के कृषि के क्षेत्र में किये गये विकास कार्यों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक अपनाने के साथ-साथ हमें अपनी पुरानी कृषि परम्पराओं का भी ख्याल रखना होगा। ऊर्जा एवं जनसंपर्क मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में पिछले 10 वर्ष में किसानों की तरक्की के लिये अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। इसका ही परिणाम है कि मध्यप्रदेश को कृषि के क्षेत्र में विकास के लिये 3 बार कृषि कर्मण पुरस्कार मिला है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि मध्यप्रदेश को यह पुरस्कार चौथी बार भी मिलेगा। समारोह में कृषि विपणन बोर्ड के आयुक्त श्री अरुण पाण्डे ने प्रदेश में कृषि उपज मण्डियों को आधुनिक किये जाने के बारे में जानकारी दी।
ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेशचन्द्र गौतम ने बताया कि कृषक भवन एवं कृषि प्रशिक्षण केन्द्र एक करोड़ 20 लाख की लागत से बनकर तैयार हुआ है। इतनी ही लागत की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला बनायी जायेगी। विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय-स्तर पर अपने कार्यक्रम एवं गतिविधियों के माध्यम से विशिष्ट पहचान बनायी है।


अऋणी किसानों के लिए प्रीमियम जमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर
17 December 2015
भोपाल। राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय बीमा योजना के अंतर्गत रबी 2015-16 मौसम की फसल हेतु अऋणी किसानों को लाभ दिलाने के लिए इस योजना से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। अऋणी किसानों को राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना का लाभ दिलाने के लिए अऋणी किसानों के प्रस्ताव प्राप्त कर बैंकों तथा सहकारी बैंकों के माध्यम से जिला स्तर से अग्रणी बैंक अधिकारी एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक सभी प्रस्ताव संकलित कर संबंधित बैंक को भेजना सुनिश्चित करेंगे। अऋणी किसानों के लिए प्रीमियम जमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर 2015 निर्धारित की गई है।।
किसान 31 दिसम्बर से पहले फसल बीमा करायें
17 December 2015
भोपाल। राष्ट्रीय कृषि बीमा योजनान्तर्गत रबी 2015-16 में फसल बीमा हेतु जिले में अऋणी कृषकों को 31 दिसम्बर 2015 तक लाभ दिलाये जाने हेतु अभियान चल रहा है। जिले में किसानों के हितार्थ शासन द्वारा राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना का संचालन किया जा रहा है। रबी 2015-16 मौसम हेतु शासन द्वारा अधिसूचित फसलें जैसे गेहूँ सिंचित, गेहूँ असिंचित, चना, सरसों फसलों पर पटवारी हलकावार अधिसूचना जारी की जा चुकी है। किसान भाई प्राकृतिक आपदा में क्षति से बचने के लिये अंतिम तिथि 31 दिसम्बर 2015 से पहले उक्त योजना में भाग लेकर अधिक से अधिक फसल बीमा करावें। उक्त योजना हेतु जिले की समस्त बैंक शाखाओं में राजस्व अभिलेख एवं सोइंग सर्टिफिकेट (बोनी प्रमाणपत्र) के साथ प्रीमियम जमा करावें। बीमा संबंधी समस्या आने पर ग्राम स्तर पर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, विकासखण्ड स्तर पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं जिला स्तर पर उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास के कार्यालय में संपर्क करें।

कृषि मंथन के निष्कर्षों पर तत्काल बनाये कार्ययोजनाएँ
02 December 2015
बँटाई पर खेती करनेवाले किसानों के हित में भू-राजस्व संहिता अधिनियम के स्थान पर बँटाईदारों के हितों के संरक्षण विधेयक का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। इसे अगली केबिनेट में चर्चा और अनुमोदन के लिये रखा जायेगा। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड देने के संबंध में बताया गया कि 5दिसम्बर को विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस पर पूरे जिलो में कार्यक्रम होंगे। इस दौरान 1.25 लाख मृदा स्वास्थ्य कार्ड बाँटे जायेंगे। मुख्यमंत्री स्वयं जबलपुर से इसकी शुरूआत करेंगे।
यह जानकारी आज यहाँ मंत्रालय में कृषि मंथन-2015 के निष्कर्षो की समीक्षा बुलाई गयी उच्च स्तरीय बैठक में दी गयी। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि मंथन-2015 के निष्कर्षो की समीक्षा करते हुए सम्बंधित विभागों को तत्काल कार्य-योजनाएँ बनाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कृषि मंथन की 21 निष्कर्ष पर बिन्दुवार चर्चा की और कार्य-योजनाओं को अंतिम रूप दिया। संबंधित विभागों ने मुख्यमंत्री को अनुशंसाओं पर की गई कार्रवाई कर भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि किसानों के हित में हर हाल में कृषि मंथन के निष्कर्षो पर तत्काल अमल करना जरूरी है। किसानों के स्थायी पंप कनेक्शन देने के अभियान के संबंध में बताया गया कि जल्दी ही शुरूआत होगी। सोलर पंप पर सब्सिडी दी जायेगी। योजना में दो हार्स पावर, तीन हार्स पावर पर डीसी और 5 हार्स पावर के एसी पम्प शामिल किये जायेंगे। वर्ष 2015-16 में 4000 सोलर पंप दिये जायेंगे। इस पर 36 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा। सभी किसानों का ऑनलाइन पंजीयन करवाया जायेगा। उद्यानिकी फसलों के निर्यात के लिये भारत सरकार की एपीडा जैसी संस्था बनाने के लिये टी.ओ.आर. तैयार कर ली गई है। भारत सरकार से भी मार्गदर्शन मांगा गया है। छोटी-छोटी राशि के अनुदान वाली योजनाओं को बंद करने की अनुसंशा पर चर्चा में बताया गया कि ऐसी 103 योजनाएँ हैं जिनका व्यापक प्रभाव और लाभ नहीं हुआ है। अनावश्यक सब्सिडी आधारित इन योजनाओं को बंद किया जायेगा या इनका स्वरूप बदला जायेगा।
जानकारी दी गयी कि किसानों को सहकारिता के नेटवर्क में शामिल करने के लिये आज से सहकारी बैंक की शाखाओं में अभियान शुरू हो गया है जो 31 दिसम्बर तक चलेगा। किसानों के लिये अगले साल अप्रैल तक एसएमएस आधारित सूचना सेवा शुरू हो जायेगी।
मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायत स्तर पर युवाओं में उद्यमिता की भावना प्रोत्साहित करने और उन्हें खाद्य प्र-संस्करण आधारित इकाइयाँ स्थापित करने के लिये विशेष प्रोत्साहन प्रयास करने के निर्देश दिये। उन्होंने जिला स्तर पर उत्सुक युवाओं के सम्मेलन आयोजित करने को कहा। उन्होंने मिल्क रुट और सब्जी रूट तय करने के भी निर्देश दिये। बताया गया कि
फल और फूलों के लिये 132 मंडी में व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि इन मंडियों में ताजा रेट लिस्ट लगी रहना चाहिए ताकि किसानों को किसी प्रकार का घाटा न हो और उन्हें अच्छे से अच्छे दाम मिले।
मुख्यमंत्री ने जलाभिषेक अभियान को पुन: पूरी तैयारी के साथ चलाने के निर्देश देते हुए कहा कि जिला स्तर पर सिंचाई योजना बनाते समय माइक्रो सिंचाई पर ध्यान केंद्रित किया जाये। श्री चौहान ने प्रदर्शन प्रक्षेत्र का विकास कर किसान मित्र और किसान दीदी को प्रशिक्षण दिलाने के निर्देश दिये। उन्होंने कृषि विभाग के अमले को जिलों में भेजने के निर्देश दिये।
बैठक में बताया गया कि एग्रो फारेस्ट्री नीति तैयार की जा रही है। जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय में खाद्य प्र-संस्करण विभाग और कृषि विज्ञान प्रौद्योगिकी को मिलाकर पोस्ट हार्वेस्ट मैनेंजमेंट इंस्टीट्यूट की स्थापना के प्रस्ताव पर चर्चा होगी।
बैठक में कृषि मंत्री श्री गौरी शंकर बिसेन, सहकारिता मंत्री श्री गोपाल भार्गव, राजस्व मंत्री श्री रामपाल सिह, पशुपालन मंत्री सुश्री कुसुम मेहदेले, वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया , उच्च शिक्षा मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता, वन मंत्री श्री गौरी शंकर शेजवार, अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री श्री ज्ञान सिंह, खाद्य मंत्री कुंवर श्री विजय शाह, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री पारस जैन, नर्मदा घाटी विकास राज्य मंत्री श्री लाल सिंह आर्य,स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी, मुख्य सचिव श्री अंटोनी डिसा, मुख्यमंत्री के सचिव श्री विवेक अग्रवाल और सम्बंधित विभागों के प्रमुख सचिव उपस्थित थे।


युद्ध-स्तर पर किया जाये किसानों को राहत राशि का भुगतान
02 December 2015
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि किसानों को राहत राशि का भुगतान सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए युद्ध-स्तर पर किया जाये। उन्होंने इसमें आय कर की शर्त इस वर्ष के लिये समाप्त करने के निर्देश दिये। साथ ही स्पष्ट कहा कि योजनाओं का लाभ हितग्राहियों को सरलता से समय पर मिलना सुनिश्चित करने की जवाबदारी कलेक्टरों की होगी। इसमें गड़बड़ी मिलने पर सख्त कार्रवाई की जायेगी।
मुख्यमंत्री आज यहाँ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। इसके पहले उन्होंने समाधान ऑनलाइन के जरिये विभिन्न जन शिकायतों के निराकरण का जायजा लिया और लापरवाही पाये जाने पर संयुक्त संचालक मंडी बोर्ड सहित 5 कर्मियों को निलम्बित किया।

राहत राशि के वितरण में आयकरदाता की शर्त समाप्त

श्री चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों के राहत के राशि के वितरण का कार्य चुनौती के रूप में लें। इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए युद्ध-स्तर पर किया जाये। इसमें विभिन्न विभाग के कर्मचारियों की सेवाएँ ली जायें। उन्होंने कहा कि इस वर्ष राहत वितरण में किसानों के आयकरदाता नहीं होने की शर्त समाप्त की जाती है। इसके घोषणा-पत्र किसानों से भरवाने के कारण राहत राशि वितरण में काफी देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि राहत वितरण में व्यवधान पैदा करने वाले कर्मियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाये। उन्होंने जिलेवार राहत राशि वितरण की जानकारी ली। साथ ही एक निश्चित समय-सीमा में राहत वितरण के लिये कलेक्टरों को निर्देशित किया। बताया गया कि प्रदेश में 337 करोड़ की राहत राशि स्वीकृत की जा चुकी है, जो सीधे किसानों के खातों में भुगतान की जा रही है।

पेंशन का वितरण ग्राम सभा में करवायें

मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से स्पष्ट कहा कि विभिन्न योजनाओं का लाभ निचले स्तर तक सरलता से समय पर पहुँचना चाहिये। इसमें किसी तरह की देरी और गड़बड़ी सहन नहीं की जायेगी। उन्होंने कहा कि वे स्वयं जिलों के भ्रमण के दौरान आमजन से सीधे संवाद कर योजनाओं की मैदानी हकीकत जानेंगे। विभिन्न योजनाओं का डिलेवरी मेकेनिज्म दुरूस्त किया जाये। इससे हितग्राहियों को कोई परेशानी नहीं हो। उन्होंने पेंशन का वितरण डोंडी पिटवाकर एक दिन ग्रामसभा में सबके सामने करवाने के निर्देश दिये, ताकि हितग्राहियों को बैंक के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। श्री चौहान ने योजनाओं के क्रियान्वयन को बेहतर बनाने के लिये कलेक्टरों से सुझाव भी मांगे। साथ ही कहा कि कलेक्टर मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी तरह की गड़बड़ी नही होना चाहिये।

दमोह कलेक्टर पर नाराजगी व्यक्त

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस दौरान आपस में बात करने पर दमोह कलेक्टर श्री निवास शर्मा पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। साथ ही उन्हें नोटिस जारी करने के लिये मुख्य सचिव को निर्देश दिये। उन्होंने अधिकारियों को अपनी कार्य-प्रणाली सुधारने और व्यवहार में गंभीरता बरतने को कहा।

आवेदकों की समस्यायें जानी और कार्रवाई के दिये निर्देश

मुख्यमंत्री ने समाधान ऑनलाइन के जरिये विभिन्न जिलों की 12 जनशिकायत के निराकरण की जानकारी ली। भिंड जिले के ग्राम चन्दहरा के श्री वंशीधर शर्मा के पुत्र श्री कल्याण शर्मा की कुंए में कार्य करते हुए दुर्घटना में 07 दिसम्बर 2013 को मृत्यु हो गयी। इसमें मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना में आर्थिक सहायता राशि स्वीकृति में विलम्ब करने पर तत्कालीन संयुक्त संचालक मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड, ग्वालियर को निलंबित करने के निर्देश दिये गये। साथ ही आवेदक को एक लाख रूपये का भुगतान करने के निर्देश दिये। मंदसौर निवासी श्रीमती सुशीला देवी पंडया के पति द्वारा 2006 में नगर निगम भोपाल में की गयी एलम की आपूर्ति का भुगतान नहीं होने पर तत्कालीन सहायक ऐलियम्मा जोई को निलंबित किया। साथ ही आवेदक को ब्याज सहित भुगतान और ब्याज की बसूली संबंधित कर्मियों से करने को कहा गया। सीहोर जिले के डोभा निवासी श्री बद्रीप्रसाद मेहरा को भू-अर्जन की मुआवजा राशि के भुगतान में देरी करने वाले अधिकारियों से ब्याज की राशि वसूलने, उनके विरूद्ध कार्रवाई करने तथा आवेदक को शीघ्र राशि भुगतान करने के निर्देश दिये गये। सीहोर निवासी नरसिंह गोयल को छात्रगृह योजना में किराये की राशि शीघ्र भुगतान करने के लिये निर्देशित किया गया।
अशोकनगर के पिपरई निवासी प्रीतिबाई की दो पुत्री की खदान में डूबने से हुई मृत्यु पर आवेदक को एक-एक लाख की राहत राशि का भुगतान करने के निर्देश दिये। अनूपपुर जिले के वेंकटनगर निवासी श्री नीरज गुप्ता के पिता की उत्तराखण्ड आपदा के दौरान मृत्यु हो गयी थी। आवेदक को पूर्व में डेढ़ लाख की राहत राशि का भुगतान किया जा चुका था। पिता का मृत्यु प्रमाण-पत्र और दो लाख की राहत राशि का भुगतान उत्तराखण्ड शासन के माध्यम से और करवाया गया।
अनूपपुर जिले के नौगवां निवासी श्री कैलाश प्रसाद एवं अन्य को मजदूरी का भुगतान करवाया गया तथा इसमें विलम्ब करने वाले वन परिक्षेत्र अधिकारी के विरूद्ध विभागीय जाँच के आदेश दिये गये। रतलाम जिले की रंगवाड़ी निवासी श्रीमती रेशमबाई को भूमि की मुआवजा राशि भुगतान के निर्देश दिये। जिला रीवा के ग्राम हसलो के श्री राममिलन तिवारी के बैल की बिजली गिरने से मृत्यु होने पर सहायता राशि का भुगतान नहीं करने पर नई गढ़ी तहसील के नायब नाजिर श्री रविकांत तिवारी को निलंबित तथा आवेदक को राहत राशि भुगतान के निर्देश दिये गये। जिला सागर के बेहरिया कला के श्री महेन्द्र रजक को विकलांग पेंशन का भुगतान पिछले छह माह से नहीं मिलने पर ग्राम पंचायत सचिव श्री परमलाल लोधी एवं पंचायत समन्वयक श्री प्रमोद जैन को निलंबित करने, रोजगार सहायक की सेवा समाप्ति और आवेदक को पेंशन के भुगतान के निर्देश दिये गये। उमरिया जिले के ग्राम रिझौहा के श्री द्वारिका सिंह को मजदूरी के भुगतान तथा सतना के श्री नत्थूलाल जायसवाल को मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम में टेंडर के लिये जमा करायी अमानत राशि का भुगतान करवाने के निर्देश संबंधितों को दिये।।

इस वर्ष 105 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बुवाई का लक्ष्य
26 November 2015
भोपाल। प्रदेश में इस वर्ष रबी फसल की बुवाई का 105.09 लाख हेक्टेयर लक्ष्य तय किया गया है। इसमें से 49 लाख 41 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बोवाई हो चुकी है। संचालक कृषि ने किसानों को बीजोपचार के बाद और कम जल माँग वाली फसलों तथा किस्मों की बुवाई करने की सलाह दी है।
रबी फसलों के लिये इस वर्ष 20 लाख 20 हजार क्विंटल बीज की जरूरत होगी। इसके लिये 19 लाख 19 हजार क्विंटल बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है। इसमें से 10 लाख 24 हजार क्विंटल बीज का उठाव हो चुका है। रबी फसलों के लिये खाद की व्यवस्था भी की गयी। उर्वरक का 16 लाख 62 हजार मीट्रिक टन भण्डारण का लक्ष्य है। इसमें से 6 लाख 8 हजार मीट्रिक टन का भण्डारण किया जा चुका है। इसमें से 4 लाख 22 हजार मीट्रिक टन उर्वरक का उठाव हो चुका है। रबी फसलों के लिये डी.ए.पी. का 4 लाख 29 हजार मीट्रिक टन भण्डारण किया गया है। इसमें से एक लाख 11 हजार मीट्रिक टन का उठाव हो चुका है। काम्पलेक्स का एक लाख 75 हजार मीट्रिक टन का भण्डारण किया गया है। इसमें से 42 हजार मीट्रिक टन का उठाव हो चुका है।

इस वर्ष धान एवं मोटे अनाज की समर्थन मूल्य पर खरीदी 26 अक्टूबर से
Our Correspondent :19 September 2015
प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष 2015-16 में धान एवं मोटा अनाज की समर्थन मूल्य पर खरीदी की तिथि संभागवार तय की गई है। खरीदी के संबंध में जिला कलेक्टर्स को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने निर्देश जारी किये हैं।
इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग में मोटा अनाज की खरीदी 26 अक्टूबर से अगली 15 जनवरी 2016 तक की जायेगी। रीवा, शहडोल, सागर, जबलपुर, ग्वालियर और चम्बल संभाग में मोटे अनाज की खरीदी 2 नवम्बर से 25 जनवरी तक की जायेगी। मोटे अनाज में इन संभागों में ज्वार, मक्का और बाजरा की खरीदी होगी। इंदौर, उज्जैन, भोपाल, नर्मदापुरम, रीवा, शहडोल, सागर, जबलपुर, ग्वालियर और चम्बल संभाग में समर्थन मूल्य पर धान का उपार्जन 2 नवम्बर से 25 जनवरी तक चलेगा। प्रदेश में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर धान 15 लाख मीट्रिक टन और मक्का 5 लाख मीट्रिक टन उपार्जन किये जाने का अनुमान है।


किसानों के लिये 5500 करोड़ की बिजली की सब्सिडी
Our Correspondent :23 December 2014
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज संपन्न हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में बिजली टेरिफ में वृद्धि के भार से किसानों को बचाने के लिये वर्ष 2015-16 में 5500 करोड़ की सब्सिडी देने का निर्णय लिया गया। इससे करीब साढ़े 18 लाख किसान को फायदा होगा। अन्य वर्गों के लिये इस वर्ष विद्युत वितरण कम्पनियों को 300 करोड़ की सब्सिडी दी जायेगी। इस तरह इस वर्ष कुल सब्सिडी राशि 5800 करोड़ होगी।
मंत्रि-परिषद ने एक हेक्टेयर तक की भूमि वाले 5 हार्स पावर तक के अनुसूचित जाति एवं जनजाति के कृषि उपभोक्ताओं को नि:शुल्क बिजली देने का निर्णय लिया। इससे करीब साढ़े चार लाख किसान लाभान्वित होंगे।
मंत्रि-परिषद ने 30 यूनिट तक की मासिक खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 90 पैसे की सब्सिडी जारी रखने का निर्णय लिया। स्थायी कनेक्शन वाले कृषि उपभोक्ताओं से प्रति हार्स पावर प्रतिवर्ष 1200 रुपये की दर से विद्युत बिल लिये जाने का निर्णय लिया गया। विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित दर तथा कृषि उपभोक्ता द्वारा देय दर में अंतर की राशि का पूरा भार राज्य शासन वहन करेगा। अस्थायी कनेक्शन वाले कृषि उपभोक्ताओं को एक रुपये 75 पैसे प्रति यूनिट की दर से सब्सिडी दी जायेगी।
स्थायी तथा अस्थायी दोनों श्रेणी के कृषि उपभोक्ताओं के लिये ईंधन लागत समायोजन का पूरा भार राज्य सरकार वहन करेगी। इसके बदले में सब्सिडी दी जायेगी। मंत्रि-परिषद ने नगरपालिका तथा नगर पंचायत की निम्न दाब सड़क बत्ती योजनाओं के लिये नियत प्रभार (फिक्सड कॉस्ट) पर 95 रुपये प्रति किलोवाट प्रतिमाह सब्सिडी देने का निर्णय लिया। उच्च दाब उदवहन/समूह सिंचाई योजनाओं को वार्षिक न्यूनतम प्रभार से छूट देने का निर्णय भी लिया गया। ऊर्जा प्रभार में भी 190 पैसे प्रति यूनिट सब्सिडी दी जायेगी।
मंत्रि-परिषद ने गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले अनुसूचित जाति एवं जनजाति के एकल बत्ती उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 25 यूनिट तक की बिजली नि:शुल्क देने का निर्णय लिया।
मंत्रि-परिषद ने 25 हार्स पावर तक के पावरलूम उपभोक्ताओं को वास्तविक खपत के आधार पर बिजली बिल जारी करने का निर्णय लिया। उन उपभोक्ताओं को ऊर्जा प्रभार में एक रुपये 25 पैसे प्रति यूनिट सब्सिडी भी दी जायेगी। पावरलूम उपभोक्ताओं को सब्सिडी वाणिज्य, उद्योग और रोजगार विभाग द्वारा दी जायेगी।

आईसीटी योजना

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में कम्प्यूटर शिक्षा के विस्तार के लिये 2000 शासकीय हाई/हायर सेकेण्डरी स्कूल में ICT@School योजना क्रियान्वित करने का निर्णय लिया। योजना में 20 हजार शिक्षक को प्रशिक्षित किया जायेगा। इस पर 128 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

अम्बेडकर विश्वविद्यालय

मंत्रि-परिषद ने महू स्थित बाबा साहब अम्बेडकर राष्ट्रीय सामाजिक विज्ञान संस्थान को विश्वविद्यालय का स्वरूप देने का निर्णय लिया। विश्वविद्यालय का नाम डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय होगा। मंत्रि-परिषद ने विश्वविद्यालय के लिये आगामी सत्र से ही पाठ्यक्रम शुरू करने के लिये अध्यादेश जारी करने का निर्णय लिया। विश्वविद्यालय में अतिरिक्त रूप से 99 शैक्षणिक और 3 गैर-शैक्षणिक पद के सृजन को स्वीकृति दी गई।

उप पुलिस अधीक्षक

मंत्रि-परिषद ने उप पुलिस अधीक्षक के सीधी भर्ती के 252 रिक्त पद पदोन्नति से भरे जाने का निर्णय लिया। यह पद वर्ष 2015 में भरे जायेंगे और इसके लिये संबंधित सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम को शिथिल किया जायेगा। इन पदों का समायोजन भविष्य में वर्षवार रिक्तियों के अनुसार सीधी भर्ती के पदों पर ही किया जायेगा। पूर्ण समायोजन होने तक इन पदों पर पदोन्नति की कार्यवाही नहीं की जायेगी।

उच्च न्यायालय के लिये पद

मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर के लिये 60 पद के सृजन को मंजूरी दी। इनमें डाटा एंट्री ऑपरेटर के 25, कान्सोल ऑपरेटर/सिस्टम मेनेजर के 16, सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर के 8, सिस्टम एनालिस्ट के 5, सीनियर सिस्टम एनालिस्ट के 3, प्रिसिंपल सिस्टम एनालिस्ट के 2 और चीफ सिस्टम एनालिस्ट का एक पद शामिल है।

मंत्रि-परिषद ने जिला न्यायालयों के लिये भी 200 पद के सृजन को मंजूरी दी। इनमें कान्सोल ऑपरेटर/सिस्टम मेनेजर के 150 (150 तहसील के लिये) और सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर के 50 पद शामिल है।

केंसर इलाज के लिये राशि

मंत्रि-परिषद ने उद्योग विभाग के उप संचालक श्री एन.आर. सूर्यवंशी को उनकी पत्नी के ब्रेस्ट केंसर के इलाज के लिये एक लाख 70 हजार 140 रुपये का भुगतान टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मुम्बई को करने की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की।

अन्य निर्णय

मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन की नियमित पद-स्थापना के सभी संवर्गों में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की अधिवार्षिकी आयु 60 वर्ष करने का निर्णय लिया। इस निर्णय से वर्ग-1, 2 और 3 के अधिकारी-कर्मचारी भी अब 60 वर्ष में सेवानिवृत्त होंगे।
मंत्रि-परिषद ने अधिवक्ता संघों के पुस्तकालयों को और समृद्ध करने के उद्देश्य से पुस्तक क्रय के लिये विधि मंत्री को 50 हजार और मुख्यमंत्री को एक लाख रुपये तक का अनुदान स्वीकृत करने की वित्तीय शक्तियाँ देने का निर्णय लिया। पहले यह राशि क्रमश: 25 हजार और 50 हजार रुपये थी।


मध्यप्रदेश को मिला गेहूँ उत्पादन में उत्कृष्टता के लिए कृषि कर्मण अवार्ड
Our Correspondent :16 December 2014
भोपाल । मध्यप्रदेश को गेहूँ उत्पादन में उत्कृष्ट कार्य के लिए वर्ष 2013-14 के प्रतिष्ठित कृषि कर्मण अवार्ड के लिए चुना गया है। वर्ष 2011 और 2012 में भी मध्यप्रदेश को समग्र खाद्यान्न उत्पादन में श्रेष्ठता के लिए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुका है।
केन्द्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश केकिसानों को उन्नत तकनीक और विस्तार सेवाएँ प्रदान करने के लिए समर्पित प्रयास किये जिससे प्रदेश को यह मुकाम हासिल हो सका है। पुरस्कार में दो करोड़ रुपये नगद, ट्रॉफी और प्रशस्ति-पत्र दिया जाता है। शीघ्र ही होने वाले एक समारोह में यह पुरस्कार दिया जायेगा।
कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन में सिंचाई क्षमता में बढ़ोत्तरी, बिजली की उपलब्धता, समय पर खाद-बीज का वितरण, भण्डारण क्षमता में बढ़ोत्तरी, ब्याज रहित कृषि ऋण, गेहूँ, धान और मक्के के उपार्जन पर बोनस जैसे कारणों का महत्वपूर्ण योगदान है।
प्रदेश में 2012-13 में 277 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन के साथ मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा था। इसमें 161 लाख टन गेहूँ उत्पादन शामिल है। प्रदेश लगातार दो अंक की कृषि वृद्धि दर बनाये रखने में सफल हुआ है। देश के खाद्यान्न उत्पादन में प्रदेश का योगदान 11.2 प्रतिशत है। इस प्रकार खाद्यान्न उत्पादन करने वाले उत्तर प्रदेश, पंजाब, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार को मध्यप्रदेश ने पीछे छोड़ दिया है।
कृषि कर्मण पुरस्कार के लिये खाद्यान्न उत्पादन, उत्पादकता, खेती पर व्यय, देश की तुलना में उत्पादकता में बढ़ोतरी, और खाद्यान्न उत्पादन के लिये नवाचारी उपाय जैसे विशेष मापदंड निर्धारित किये गये थे। इन सभी मापदंडों में मध्यप्रदेश ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वर्ष 2007-08 में खाद्यान्न उत्पादन 128.30 लाख मीट्रिक टन था जो 2012-13 में बढ़कर 277 लाख मीट्रिक टन हो गया है। इसी प्रकार खाद्यान्न की उत्पादकता 2007-08 में 1064 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी जो 2012-13 में बढ़कर 1952 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है।

गेहूँ उत्पादन

मध्यप्रदेश में वर्ष 2013-14 में 174 लाख 78 हजार मीट्रिक टन गेहूँ उत्पादन किया गया। इसमें से 71 लाख 88 हजार मीट्रिक टन गेहूँ समर्थन मूल्य पर उपार्जित किया गया। प्रदेश की मंडियों में कुल 122 लाख 58 हजार मीट्रिक टन गेहूँ किसानों ने बेचा।
मध्यप्रदेश ने गेहूँ की उत्पादकता में विगत वर्ष में 20.15 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हासिल करते हुए 29.76 क्विंटल प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन प्राप्त किया। प्रदेश में 57 लाख हेक्टेयर में गेहूँ की फसल ली जाती है। वर्ष 2012-13 में गेहूँ उत्पादन में हरियाणा और वर्ष 2013-14 में पंजाब को पीछे छोड़कर मध्यप्रदेश देश में दूसरा राज्य बन गया है।


चौथी अंतर्राष्ट्रीय सोया फूड कान्फ्रेंस 7 नवंबर को भोपाल में
27 September 2014
भोपाल। सोय फूड प्रमोशन एण्ड वेलफेयर एसोसिएशन (एसएफपीडब्ल्यूए) द्वारा 7 नवंबर को होटल कोर्टयार्ड बाय मैरियट में चौथी अंतर्राष्ट्रीय सोय फूड कान्फ्रेंस का आयोजन किया जाएगा। अमेरिका की यू.एस. सोयबीन एक्सपोर्ट काउंसिल (यूएसएसईसी) के सहयोग से आयोजित की जा रही इस कान्फे्रंस में भारत सहित ब्रिटेन, ब्राजील, जापान, कोरिया व अमेरिका आदि देशों से आ रहे विषय विशेषज्ञ भाग लेंगे। भारतीय सोयाबीन उत्पाद इकाईयों को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर लाने तथा इस क्षेत्र में मौजूद वैश्विक चुनौतियों, बदलावों, संभावनाओं एवं रणनीति पर चर्चा करना इस कान्फ्रेंस के प्रमुख उद्देश्य हैं
जिन प्रमुख विशेषज्ञों के उद्बोधन इस कान्फ्रेंस में सुनने को मिलेंग उनमें गुजरात के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. एस.के. नंदा, बोरलॉग इन्स्टीट्यूट ऑफ साउथ एशिया के डायरेक्टर जनरल डॉ. एच.एस. गुप्ता, डायरेक्टोरेट ऑफ सोयबीन रिसर्च के डायरेक्टर डॉ. एस.के. श्रीवास्तव, ब्राजील से आ रहे आगस्तो सीएम फ्रेरे, यूके के रिचर्ड वेरेन, कोरिया के ओह सेंग हो, अमेरिका के डॉ. मियान एन रियाज, जापान के केंजी माश्तुमोटो आदि प्रमुख हैं।


हलधर कृषि एक्सपो में विश्व की तीन प्रतिष्ठित कम्पनी से एमओयू
27 September 2014
भोपाल। किसानों को खेती के लिये उन्नत कृषि यंत्र उपलब्ध करवाने के लिये राज्य सरकार ने आज विश्व की तीन प्रतिष्ठित कम्पनियों से एमओयू किये हैं। यह कम्पनियाँ हैं इटली की मास्कियो-गास्पारदो, जापान की कुबोटा तथा न्यू हॉलेंड की फिएट (इंडिया) प्रायवेट लिमिटेड। इन कम्पनियों से मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में आज राज्य-स्तरीय हलधर कृषि एक्सपो-2014 में करारनामे हुए। राज्य सरकार की ओर से तीनों करारनामे कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय द्वारा हस्ताक्षरित किये गये।
किसानों को कृषि महोत्सव के जरिये उन्नत कृषि यंत्र और तकनीक से अवगत करवाने के लिये चलाये जा रहे अभियान की कड़ी में आज जिन तीन कम्पनी से करारनामे हुए हैं वे कृषि के क्षेत्र में बेहतर यंत्र बनाने में दक्ष और प्रतिष्ठित हैं।
इटली की मास्कियो-गास्पारदो के प्लांट 13 देश में स्थापित हैं। हाल ही में भारत में पुणे में एक नया प्लांट स्थापित किया है। यह कम्पनी मध्यप्रदेश में उन्नत तकनीक यंत्रों से सोयाबीन, मक्का एवं कपास की उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेगी। कम्पनी कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय को एसपी न्यूमेटिक, मल्टीक्रॉप, पॉवर हेरो, फर्टिलाइजर स्प्रेडर एवं श्रेडर यंत्र उपलब्ध करवायेगी।
जापान की कुबोटा कम्पनी प्रदेश में धान की उत्पादकता बढ़ाने में कृषि विभाग को मदद करेगी। ट्रेक्टर एवं यंत्र निर्माण में विश्वविख्यात इस कम्पनी ने हाल ही में चेन्नई में एक प्लांट स्थापित किया है। कम्पनी मध्यप्रदेश को यंत्रीकृत धान की रोपाई से धान की उत्पादकता बढ़ाने के लिये सेल्फ प्रोपेल्ड राईस ट्रांस प्लांटर एवं सीडलिंग मशीन उपलब्ध करवायेगी।
न्यू हॉलेंड की फिएट कम्पनी करारनामे के अनुसार प्रदेश में गन्ना, कपास, मक्का तथा सोयाबीन उत्पादकता बढ़ाने के लिये प्रदेश सरकार के साथ मिलकर किसानों की मदद करेगी। कम्पनी ने इस कार्य के प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण के लिये गन्ना हार्वेस्टर, बेलर-रेक, कॉटन पिकर, फोडर मेज हार्वेस्ट, न्यूमेटिक कॉटन प्लांटर, सब-साईलर, शुगरकेन इनफील्डर सहित 18 मशीन उपलब्ध करवाने पर सहमति दी है।


कृषि महोत्सव का पहला दिन
27 September 2014
भोपाल। किसानों को कृषि की नवीनतम तकनीक की जानकारी देने और प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में मिली उपलब्धियों को उत्सव के रूप में मनाने के लिये जिले से ग्राम-पंचायत-स्तर तक कृषि महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 25 सितम्बर को भोपाल में सातवें राष्ट्रीय बीज सम्मेलन में कृषि महोत्सव का शुभारंभ किया। महोत्सव 20 अक्टूबर तक चलेगा। महोत्सव में पहले दिन 313 कृषि क्रांति-रथ द्वारा 1072 ग्राम का भ्रमण कर कृषकों को विभिन्न तकनीक एवं योजना की जानकारी दी गई।
कृषि महोत्सव के शुभारंभ पर ग्राम-स्तरीय कृषक शिविरों में 43 हजार 341 कृषक शामिल हुए। शिविरों में सूरजधारा योजना में 1418, अन्नपूर्णा में 621 और बीज ग्राम योजना में 494 कृषक को कृषि-किट वितरित किये गये। मिट्टी परीक्षण के लिये 4135 नमूने लिये गये। मुख्यमंत्री खेत-तीर्थ योजना में 31 भ्रमण-दल बनाये गये हैं।

49 हजार 116 राजस्व अभिलेख वितरित

महोत्सव में कृषकों को 49 हजार 116 राजस्व अभिलेख का वितरण किया गया। इस दौरान आयोजित पशु-चिकित्सा शिविरों में 18 हजार 212 पशु का उपचार किया गया। शिविरों में 5761 किसान को क्रेडिट-कार्ड वितरित किये गये। सीमांकन के 34 और नामांतरण के 275 प्रकरण का निराकरण और 211 ऋण-पुस्तिका का वितरण किया गया। स्थाई पम्प-कनेक्शन 643 किसान को दिये गये। 'मेरा खेत-मेरी माटी' योजना में 424 कार्य प्रारंभ किये गये। इस दौरान 1473 कृषक का स्वास्थ्य परीक्षण भी करवाया गया। जिन ग्रामों में कृषि-रथ रुके, वहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।
किसानों को कृषि की नवीनतम तकनीक की जानकारी देने और प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में मिली उपलब्धियों को उत्सव के रूप में मनाने के लिये जिले से ग्राम-पंचायत-स्तर तक कृषि महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 25 सितम्बर को भोपाल में सातवें राष्ट्रीय बीज सम्मेलन में कृषि महोत्सव का शुभारंभ किया। महोत्सव 20 अक्टूबर तक चलेगा। महोत्सव में पहले दिन 313 कृषि क्रांति-रथ द्वारा 1072 ग्राम का भ्रमण कर कृषकों को विभिन्न तकनीक एवं योजना की जानकारी दी गई।
कृषि महोत्सव के शुभारंभ पर ग्राम-स्तरीय कृषक शिविरों में 43 हजार 341 कृषक शामिल हुए। शिविरों में सूरजधारा योजना में 1418, अन्नपूर्णा में 621 और बीज ग्राम योजना में 494 कृषक को कृषि-किट वितरित किये गये। मिट्टी परीक्षण के लिये 4135 नमूने लिये गये। मुख्यमंत्री खेत-तीर्थ योजना में 31 भ्रमण-दल बनाये गये हैं।

49 हजार 116 राजस्व अभिलेख वितरित

महोत्सव में कृषकों को 49 हजार 116 राजस्व अभिलेख का वितरण किया गया। इस दौरान आयोजित पशु-चिकित्सा शिविरों में 18 हजार 212 पशु का उपचार किया गया। शिविरों में 5761 किसान को क्रेडिट-कार्ड वितरित किये गये। सीमांकन के 34 और नामांतरण के 275 प्रकरण का निराकरण और 211 ऋण-पुस्तिका का वितरण किया गया। स्थाई पम्प-कनेक्शन 643 किसान को दिये गये। 'मेरा खेत-मेरी माटी' योजना में 424 कार्य प्रारंभ किये गये। इस दौरान 1473 कृषक का स्वास्थ्य परीक्षण भी करवाया गया। जिन ग्रामों में कृषि-रथ रुके, वहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।


प्र-संस्करण के उपयोग में लायी गयी उपज पर मण्डी फीस में छूट
राज्य शासन ने कृषि उपज उड़द/उड़दा, मूंग, तुअर (अरहर), चना, मसूर, बटरा/बटरी, जो विदेशों से या राज्य के बाहर से किसी मण्डी क्षेत्र में प्र-संस्करण के लिये लायी गयी हो, पर देय मण्डी फीस के भुगतान पर पूर्ण छूट दिये जाने का निर्णय लिया है। किसान-कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा दी जाने वाली यह छूट 23 अगस्त, 2014 से एक वर्ष की अवधि के लिये प्रभावशील रहेगी। इस संबंध में मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) में अधिसूचना जारी कर दी गई है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना में हर परिवार की एक महिला का बेंक खाता खुलेगा
प्रधानमंत्री जन-धन योजना में प्रत्येक परिवार की एक महिला का बेंक खाता अवश्य खोला जायेगा। बेंककर्मी घर-घर सम्पर्क कर सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक परिवार का बेंक में खाता हो। यह बात विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने आज सीहोर जिले की बुदनी विधानसभा के ग्राम सुडानिया कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण किया जायेगा तथा समाज के वंचित वर्ग को आर्थिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जायेगा। श्रीमती स्वराज ने ग्राम में विकास कार्यों केलिये सांसद निधि से दस लाख की राशि देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वे अब प्रतिमाह तीन दिन अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा में ही रहेंगी।
राजस्व एवं पुनर्वास तथा सीहोर जिला प्रभारी मंत्री श्री रामपाल सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में अनेक जन-कल्याणकारी योजनाओं का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया है।

करोड़ों के विकास कार्यों का शिलान्यास एवं लोकार्पण

विदेश मंत्री श्रीमती स्वराज ने ग्राम सुडानिया में लगभग 3 करोड़ 5 लाख की लागत से होने वाले 18 विकास कार्य का शिलान्यास तथा 46 लाख 80 हजार की लागत से पूर्ण हुए 4 विकास कार्य का लोकार्पण किया। श्रीमती स्वराज ने ग्राम कचनारिया में भी लगभग 2 करोड़ 5 लाख के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया। उन्होंने 16 हितग्राही को लगभग तीन लाख की राशि के चेक प्रदान किए।
कार्यक्रम में मार्कफेड के अध्यक्ष श्री रमाकांत भार्गव, अध्यक्ष जिला पंचायत सीहोर श्री धर्मेन्द्र सिंह चौहान, विधायक श्री विजय पाल सिंह, श्री राजेन्द्र सिंह राजपूत, श्री गुरुप्रसाद शर्मा, श्री रामकिशन चौहान, श्री रमेश सक्सेना श्री रघुनाथ सिंह भाटी, श्री रवि मालवीय सहित अन्य जन-प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।


26 जिले में सामान्य, 3 में सामान्य से अधिक एवं 22 जिले में सामान्य से कम वर्षा
मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 जून से 15 सितम्बर 2014 तक प्रदेश के 26 जिले में सामान्य, 3 जिले में सामान्य से अधिक और 22 जिले में सामान्य से कम वर्षा हुई है। प्रदेश में खण्डवा, बड़वानी और बुरहानपुर जिले में सामान्य से अधिक वर्षा हुई है। जिन जिलों में सामान्य वर्षा हुई है, उनमें बैतूल, राजगढ़, टीकमगढ़, शिवपुरी, नीमच, सीधी, गुना, खरगोन, हरदा, झाबुआ, मंदसौर, अशोकनगर, छिन्दवाड़ा, अनूपपुर, इंदौर, श्योपुर, धार, होशंगाबाद, सीहोर, विदिशा, शाजापुर, आगर-मालवा, रायसेन, मण्डला, डिंडोरी और अलीराजपुर जिले शामिल हैं।
सामान्य से कम वर्षा वाले जिले भोपाल, कटनी, बालाघाट, सिंगरौली, ग्वालियर, सागर, सिवनी, दतिया, दमोह, उज्जैन, रीवा, उमरिया, पन्ना, शहडोल, रतलाम, सतना, छतरपुर, देवास, मुरैना, भिण्ड, नरसिंहपुर और जबलपुर है।


देश के इतिहास में पहली बार एक साल में प्रदेश के किसानों को 12 हजार करोड़ से ज्यादा की सहायता
मध्यप्रदेश में पिछले साल किसानों को सब्सिडी, राहत और बोनस के रूप में 12 हजार 345 करोड़ 27 लाख रुपये का भुगतान किया गया। इससे एक करोड़ 49 लाख 14 हजार 620 किसान क फायदा हुआ। अकेले एक साल में किसानों को राहत और अन्य सहायता के रूप में देश के इतिहास में पहली बार किसानों को इतनी बड़ी राशि का भुगतान किया गया। प्राकृतिक आपदा से फसलों को हुए नुक्सान पर 3 हजार 48 करोड़ 50 लाख रुपये राहत के रूप में दिये गये। इससे 47 लाख 51 हजार किसान को लाभ मिला। धान, मक्का और गेहूँ पर बोनस के रूप में 1,327 करोड़ 73 लाख की राशि 12 लाख 82 हजार 527 किसान को दी गई। इसमें से धान पर 233 करोड़ 95 लाख, मक्का पर 12 करोड़ 99 लाख और गेहूँ 1,080 करोड़ 79 लाख रुपये बोनस के रूप में दिये राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना में इस दौरान 17 लाख 80 हजार 221 किसान को दावों के भुगतान के रूप में 2504 करोड़ 4 लाख रुपये दिये गये। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने 1 लाख 79 हजार 872 किसान को 237 करोड़ 46 लाख रुपये सब्सिडी के रूप में दिये। ऊर्जा विभाग ने भी 37 लाख 84 हजार किसान को 4 हजार 667 करोड़ 15 लाख रुपयेकृषि पम्पों पर अनुदान के रूप में दिये।
सहकारिता विभाग ने पिछले वर्ष 31 लाख 37 हजार किसान को 560 करोड़ 39 लाख रुपये शून्य प्रतिशत ब्याज पर अनुदान के रूप में दिये।


मध्यप्रदेश को लगातार दूसरी बार प्रतिष्ठित कृषि कर्मण पुरस्कार
भोपाल। देश में सर्वाधिक खाद्यान्न उत्पादन के साथ मध्यप्रदेश ने देश के खाद्यान्न कटोरे के रूप में अपनी पहचान बनाई है। देश के खाद्यान्न भण्डार में सर्वाधिक योगदान के लिये राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने आज नई दिल्ली में एक भव्य समारोह में मध्यप्रदेश को भारत सरकार के प्रतिष्ठित कृषि कर्मण पुरस्कार से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने पुरस्कार ग्रहण किया।
वर्ष 2010-11 में कृषि कर्मण पुरस्कार की स्थापना के बाद खाद्यान्न उत्पादन श्रेणी में लगातार दूसरी बार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। यह पहली बार है जब मध्यप्रदेश ने गेहूँ के साथ-साथ धान और दलहन तीनों में देश में सर्वोत्तम बढ़त प्राप्त की है।
छिन्दवाड़ा जिले के चौरई की श्रीमती शशि खंडेलवाल और बड़नगर उज्जैन जिले के श्री योगेन्द्र कौशिक को प्रगतिशील किसान के रूप में सम्मानित किया गया। इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शरद पवार, केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री वीरप्पा मोइली, कृषि मंत्री श्री गौरी शंकर बिसेन, मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, प्रदेश संगठन महामंत्री श्री अरविन्द मेनन, कृषि उत्पादन आयुक्त, अपर मुख्य सचिव श्री मदन मोहन उपाध्याय, प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा, कृषि संचालक श्री डी.एन. शर्मा एवं वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।
कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन में सिंचाई क्षमता में बढ़ोतरी, बिजली की उपलब्धता, समय पर खाद-बीज का वितरण, भण्डारण क्षमता में बढ़ोतरी, ब्याज रहित कृषि ऋण, गेहूँ, धान और मक्के के उपार्जन पर बोनस जैसे कारणों का महत्वपूर्ण योगदान है।
प्रदेश में 2012-13 में 277 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन के साथ मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है। इसमें 161 लाख टन गेहूँ उत्पादन शामिल है। प्रदेश लगातार दो अंकों की कृषि वृद्धि दर बनाये रखने में सफल हुआ है। देश के खाद्यान्न उत्पादन में प्रदेश का योगदान 11.2 प्रतिशत है। देश के कुल गेहूँ उत्पादन में मध्यप्रदेश का योगदान 17.5 प्रतिशत और दलहन उत्पादन में 28.65 प्रतिशत है। इस प्रकार खाद्यान्न उत्पादन करने वाले उत्तर प्रदेश, पंजाब, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार को मध्यप्रदेश ने पीछे छोड़ दिया है।
कृषि कर्मण पुरस्कार के लिये खाद्यान्न उत्पादन, उत्पादकता, खेती पर व्यय, देश की तुलना में उत्पादकता में बढ़ोतरी, और खाद्यान्न उत्पादन के लिये नवाचारी उपाय जैसे विशेष मापदंड निर्धारित किये गये थे। इन सभी मापदंडों में मध्यप्रदेश ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वर्ष 2007-08 में खाद्यान्न उत्पादन 128.30 लाख मीट्रिक टन था जो 2012-13 में बढ़कर 277 लाख मीट्रिक टन हो गया है। इसी प्रकार खाद्यान्न की उत्पादकता 2007-08 में 1064 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी जो 2012-13 में बढ़कर 1952 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है।

गेहूँ उपार्जन

पिछले पाँच साल में गेहूँ उत्पादन और उपार्जन में मध्यप्रदेश ने शानदार प्रदर्शन किया है। गेहूँ उत्पादकता वर्ष2007-08 में 1714 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी जो अब 2959 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है। गेहूँ उत्पादन वर्ष 2007-08 में 67.37 लाख मीट्रिक टन था जो 2012-13 में बढ़कर 161.25 लाख मीट्रिक टन हो गया है। इस साल 175 लाख मीट्रिक टन तक पहुँचने का अनुमान है। पिछले पाँच साल में गेहूँ के प्रति क्विंटल उपार्जन पर 2702 करोड़ रुपये बोनस के रूप में गेहूँ उत्पादक किसानों को दिये गये हैं।

साख सुविधा

प्रदेश के रिकार्ड खाद्यान्न उत्पादन में किसानों की मेहनत के साथ उन्हें मिलने वाली साख सुविधाओं की भी मुख्य भूमिका रही है। छोटे किसान भी बोनी के लिये प्रोत्साहित हुए हैं। साख के अभाव में वे खेती में पैसे लगाने से हिचकते थे। ब्याज रहित कर्ज से उन्हें राहत मिली। पिछले पाँच साल में 39820 करोड़ रुपये ऋण के रूप उपलब्ध कराये गये। गेहूँ उत्पादन के लिये 34 हजार करोड़ बोनस के रूप में दिये गये। खेती के लिये सहकारिता कर्ज वर्ष 2013-14 में बढ़कर 11209 करोड़ रुपये हो गया है। यह वर्ष 2003-04 में मात्र 1213 करोड़ रुपये था। इस साल मार्च तक किसानों को 12 हजार करोड़ रुपये का सहकारिता ऋण दिया जायेगा। अगले पाँच साल में 25 हजार करोड़ तक यह आंकड़ा जायेगा

सिंचाई

पिछले दस साल में प्रदेश्ने सिंचाई क्षमता बढ़ाने में अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है। बड़े जलाशयों और परियोजनाओं की नहरों का निर्माण दशकों बाद पूरा हुआ। बलराम तालाब योजना, महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में कुओं का निर्माण करने जैसे उपायों से हर खेत को पानी मिला। वर्ष 2003 में जहाँ मात्र साढ़े सात लाख हेक्टेयर में सिंचाई होती थी आज 25 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है।

बिजली

भरपूर बिजली मिलने से हर खेत तक पानी पहुँचाने में आसानी हुई है। एक दशक पहले की स्थिति में बिजली नहीं मिलने से खेती और खेती से जुड़े काम प्रभावित हुए। आज खेती के लिये दस घंटे बिजली मिल रही है। वर्ष 2009 में खेती के लिये 6776 मिलियन यूनिट बिजली उपलब्ध थी जो 2012-13 में बढ़कर 9478 मिलियन यूनिट हो गई है। बिजली की उपलब्धता में 16.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। किसानों को राहत देते हुए 1800 करोड़ के बिजली देयकों का भुगतान राज्य सरकार ने माफ कर दिया है।

भण्डारण

खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोतरी को देखते हुए मध्यप्रदेश ने अपनी भण्डारण क्षमता में भी वृद्धि की है। वर्ष 2010-11 में भण्डारण क्षमता 79 लाख मीट्रिक टन थी जो 2013-14 में बढ़कर 115 लाख मीट्रिक टन हो गई है और अगले साल तक 152 लाख मीट्रिक टन हो जायेगी। इस प्रकार भण्डारण क्षमता में भी मध्यप्रदेश अन्य राज्यों से आगे निकल जायेगा। देश में साइलो बेग के उपयोग की शुरूआत मध्यप्रदेश ने ही की है।

नवाचार

प्रदेश ने कृषि क्षेत्र में कई नवाचारी काम किये हैं जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है। इनसे कृषि में तेजी से सकारात्मक बदलाव आया है। गेहूँ और मूंग उत्पादन के लिये विशेष प्रयास किये गये हैं। शरबती गेहूँ से प्रदेश को नई पहचान मिली है। खेती से जुड़े उद्यानिकी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में भी नवाचारी उपाय किये गये हैं। गाँवों में कृषि यंत्रों की उपलब्धता, खेती से संबंधित मामलों में तत्काल निर्णय लेने के लिये कृषि कैबिनेट का गठन, कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से हर जिले में कम से कम पाँच हजार किसानों को परामर्श देने की पहल और गेहूँ के ई-उपार्जन जैसे प्रयासों से खेती और किसानों को नई ऊर्जा और प्रोत्साहन मिला है।


केन्द्रीय अध्ययन दल आएगा फसलों की क्षति देखने
भोपाल। केन्द्रीय अध्ययन दल 13 से 15 मार्च तक राज्य का दौरा कर फसलों के नुकसान की जानकारी प्राप्त करेगा। प्रदेश में इस सप्ताह हुई वर्षा और दुबारा हुई ओला वृष्टि के कारण फसलों को पहुँची क्षति का जिलों से पूरक प्रतिवेदन भी मँगवाया जा रहा है। मुख्य सचिव श्री अंटोनी डिसा ने आज वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से सभी कलेक्टर और कमिश्नर से चर्चा की। मुख्य सचिव ने कहा कि 5 मार्च के पश्चात हुए नुकसान के आधार पर प्रतिवेदन अगले तीन दिनों में उपलब्ध कराएं। मुख्य सचिव ने केन्द्रीय अध्ययन दल के भ्रमण में संबंधित संभाग के कमिश्नर को साथ रहने के निर्देश दिए। केन्द्रीय दल प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 13 मार्च और क्षेत्र भ्रमण के उपरांत मुख्य सचिव के साथ 15 मार्च को चर्चा करेगा। प्रमुख सचिव राजस्व श्री आर. के. चतुर्वेदी ने वीडियो कान्फ्रेंस में जानकारी दी कि केन्द्रीय अध्ययन दल राज्य में तीन समूहों में भ्रमण करेगा।
मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि प्रभावित किसानों को जनहानि और पशुहानि के मामलों में तत्काल आवश्यक सहायता देने की कार्यवाही पूरी की जाए। उन्होंने जिलों में बैंकों के साथ 19 मार्च तक बैठक करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव श्री डिसा ने कहा कि जिलों से प्राप्त जानकारी के बाद केन्द्र को राज्य की ओर से मेमोरेण्डम दिया गया है। मुख्य सचिव ने खरीफ फसलों को हुए नुकसान के पश्चात शत-प्रतिशत प्रभावित किसानों को राहत राशि का भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। वीडियो कान्फ्रेंस में बताया गया कि लगभग सभी जिलों में खरीफ फसलों की क्षति के बाद राहत राशि दी जा चुकी है। हाल ही मे हुई रबी फसलों की क्षति के लिए किसानों को राहत के साथ ही विभिन्न योजनाओं का लाभ देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

प्रावधानों को किया गया शिथिल

राज्य में कुछ योजनाओं के नियमों में सीमित अवधि के लिए संशोधन भी किए गए हैं। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत पचास प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान वाले कृषक परिवारों को सामूहिक विवाह के स्थान पर घर से संपन्न होने वाले विवाह के लिए भी आवश्यक लाभ 30 जून तक दिया जा सकेगा। 'मेरा खेत मेरी माटी' योजना में प्रदेश में आठ लाख से अधिक कार्य गणतंत्र दिवस की ग्राम सभाओं में अनुमोदित हुए हैं। जिलों में आवश्यकतानुसार ये कार्य प्रारंभ किए जा सकते हैं। प्रभावित एवं जरुरतमंद परिवारों की स्थिति को देखते हुए सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को देने की व्यवस्था की गई है।
वीडियो कान्फ्रेंस में आगामी 25 मार्च से प्रदेश में प्रारंभ हो रहे गेहूँ उपार्जन की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती अरुणा शर्मा, कृषि उत्पादन आयुक्त श्री एम. एम. उपाध्याय, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री अजय नाथ, प्रमुख सचिव कृषि श्री राजेश राजौरा, आयुक्त भू अभिलेख श्री राजीव रंजन के अलावा सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव श्री के. सुरेश वीडियो कान्फ्रेंस में उपस्थित थे।


कृषि पर निर्भरता कम करने पशु एवं मछली-पालन जरूरी- राज्यपाल
Our Correspondent : 08 Oct. 2013
भोपाल। अर्थ-व्यवस्था की कृषि पर निर्भरता को दूर करने के लिये पशु-पालन और मछली-पालन जरूरी है। राज्यपाल श्री रामनरेश यादव ने यह बात नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में कही।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्र पशु चिकित्सक के रूप में पशु-पालकों को स्वावलंबी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। उन्होंने कहा कि उन्नत पशु-पालन द्वारा प्रदेश भारत के अग्रणी राज्य की पंक्ति में स्थान बना सकता है। श्री यादव ने कहा कि नानाजी देशमुख ग्रामीणों को स्व-रोजगार उपलब्ध करवाने के लिये जीवनपर्यंत संघर्षरत रहे। उन्होंने मध्यप्रदेश को गौ-वंश की सर्वाधिक संख्या वाला प्रदेश बताया। श्री यादव ने प्रदेश को दुग्ध उत्पादन में देश में पहला स्थान दिलवाने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
राज्यपाल ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली के उप महानिदेशक पशु विज्ञान डॉ. कृष्ण मुरारीलाल पाठक को विश्वविद्यालय की ओर से मानद उपाधि दी। उन्होंने विश्वविद्यालय के 3 छात्र को पीएचडी, 2 छात्र को स्वर्ण-पदक, 141 विद्यार्थी को स्नातक एवं 45 को स्नातकोत्तर उपाधि दी। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की स्मारिका और विश्वविद्यालयों में हुए शोधों पर आधारित 'रिसर्च हाईलाइट्स' पत्रिका का विमोचन भी किया।
पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गोविंद प्रसाद मिश्र ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस मौके पर विभिन्न विश्वविद्यालय के कुलपति एवं प्राध्यापक उपस्थित थे।


शीघ्र भेजें अति वर्षा से प्रभावित फसलों की क्षति का ब्यौरा
Our Correspondent : 01 Oct. 2013
भोपाल। मप्र में अति वर्षा से फसलों को पहुंची क्षति के संबंध में शीघ्र विस्तृत सर्वेक्षण भेजने के निर्देश दिए गए हैं। ओ एस डी मुख्य सचिव कार्यालय श्री अंटोनी डिसा ने आज मंत्रालय में एक बैठक में प्रदेश के कमिश्नर्स से चर्चा करते हुए यह निर्देश दिए। प्रदेश के कुछ जिलों में फसलों को पहुँचे नुकसान के संबंध में निर्धारित प्रारूप में प्राप्त जानकारी एकजाई रूप से केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। बैठक में श्री डिसा ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के क्रियान्वयन के संबंध में भी कमिश्नर्स से बातचीत की और उनके संभाग में अब तक संपन्न कार्यों का विवरण प्राप्त किया। बैठक में कमिश्नर्स के अलावा प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन श्री के. सुरेश, प्रमुख सचिव राजस्व श्री आर.के. चतुर्वेदी, वित्त सचिव श्री मनीष रस्तोगी और आयुक्त भू-अभिलेख श्री राजीव रंजन भी उपस्थित थे।

कटाई के बाद फसलों को रखें सुरक्षित स्थान पर
Our Correspondent : 01 Oct. 2013
भोपाल। किसान समय पर रबी फसलों की बोवनी करने के लिये नमी का लाभ लेकर खेत की तैयारी करें। कटाई के बाद फसलों को सुरक्षित स्थान पर रखें। किसान-कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा दी गई सलाह के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों में किसान तोरिया, सरसों और मटर की बोवाई कर सकते हैं।
भरपूर मात्रा में सिंचाई की सुविधा होने पर दिसम्बर अंत तक किसान गेहूँ की बोवनी भी कर सकते हैं। हाल ही में जिन स्थानों पर वर्षा हुई है, वहाँ खाली खेतों में खरपतवार उगने लगे हैं, जिन्हें भूमि में मिलाये जाने पर वे ही खाद का काम करेंगे और फसलों में इनकी संख्या में नियंत्रित रहेगी। इन्हें नाडेप या वर्मी कम्पोस्ट के गड्ढों में डालकर जैविक खाद बनाने के काम में भी लिया जा सकता है। सलाह के अनुसार किसानों को काटी गई फसल खेतों में अधिक समय तक नहीं छोड़ना चाहिये। फसल यदि गीली हो गई हो तो उसे सुखाकर थ्रेसिंग करना चाहिये। ऐसी फसल को बीज के लिये सुरक्षित की जाने वाली फसल के साथ नहीं मिलाना चाहिये। रबी मौसम के लिये आवश्यक उर्वरकों की अग्रिम व्यवस्था की गई है, जिससे कि आवश्यकता के अनुसार किसान समय पर खाद उठा सकें। इसके अलावा धान की फसल में कीट नियंत्रण के लिये दवा का छिड़काव करें।


क्षतिग्रस्त सोयाबीन की फसल के एवज में किसानों को बीमा कंपनियों से राहत और क्षतिपूर्ति सुनिश्चित की जायेगी- शिवराज
Our Correspondent : 30 spt. 2013
भोपाल। मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज ‘धान का कटोरा’ सिवनी-बालाघाट अंचल में आयोजित जनआशीर्वाद यात्रा के दौरान जुटे हजारों किसानों को यह कहते हुए कि जहां-जहां सोयाबीन की फसल जलवृष्टि, अति जलबृष्टि अथवा अन्य कारण से क्षतिग्रस्त हुई है किसानों को उनकी क्षति का भरपूर मुआवजा और राहत दिलाई जायेगी। किसानों के चेहरे पर खुशियां बिखेरी जायेगी। बीमा कंपनियों को तल्ख चेतावनी दी गयी है कि वे अपने फर्ज में खरी उतरंें। केवलारी में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार जहां विकास और सुशासन को परवान चढ़ा रही है वहंीं कांगे्रस का एकसूत्रीय कार्यक्रम शिवराज हटाओं बना है और कांगे्रसी इसी एकसूत्रीय कार्यक्रम के लिए सारी उर्जा लगा रहे है। प्रदेश की जनता कांगे्रस की इन तिकड़मों को भली-भांति पहचान चुकी है और वह कांगे्रस के मनोरथ कभी पूरे नहीं होने देगी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भाजपा ने किसानों को फसल की लागत का समुचित मूल्य दिलाने के लिए समर्थन मूल्य पर 150 रू. क्विंटल का विशेष बोनस दिया है। लेकिन कांगे्रस को अन्नदाता को मिलने वाली कोई भी राहत रास नहीं आती। कांग्रेस ने खाद की जो बोरी सवा पांच सौ रू. में मिलती थी उसका मूल्य पौने तेरह सौ रू. करके किसानों के चौन को छीन लिया है। उन्होनें कहा कि मध्यप्रदेश में और देश में कांगे्रस ने पांच दशकों तक एकछत्र शासन किया है लेकिन विकास और सुशासन के मामलें में कांगे्रसी उपलब्धियां नगण्य है। समाज में अलगाववाद की भावना का विकास करना और जनता में राजनैतिक प्रतिस्पर्धी के मामलें में खौंफ पैदा करना कांगे्रस का आचार-व्यवहार रहा है। उन्होनें कहा कि भारतीय जनता पार्टी सरकार की दस वर्षो की उपलब्धियां कांगे्रस की 50 वर्षो की उपलब्धियों से 10 गुना भारी हैै। यही कारण है कि कांगे्रस कुंठाग्रस्त होकर हताशा में चरित्रहनन की राजनीति पर केन्द्रित होकर रह गयी है। प्रदेश की जनता कांगे्रस की इस ओछी मानसिकता को बर्दाश्त नहीं करेगी और विधानसभा चुनाव 2013 तथा लोकसभा चुनाव 2014 में माकूल जबाव देगी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांगे्रस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि वे प्रदेशों में पार्टी संगठन में जान फूंकने के लिए एकता का मंत्र फूंकने का दावा कर रहे है। लेकिन वे संगठन हीं नहीं चला सकते ंतो सरकार क्या चलायेंगे। महाराष्ट्र में उनका संगठन का दौरा विफल हो गया ंतो उन्होनें कांगे्रस के सेवादल पर नजला उतारा और कहा कि कांगे्रसी सेवादल स्वंयसेवक संघ की तरह सेवा और जनराहत से क्यों नहीं जुड़ पाया है। जाहिर है कि कांगे्रस का विकास, जनसेवा से कभी कोई सरोकार नहीं रहा है इसलिए कांगे्रसी सेवादल सिर्फ कांगे्रस के वरिष्ठ नेताओं को सलामी देने वाला सीमांतक दस्ता बनकर रह गया है। कांगे्रस के पास विकास और सुशासन का कोई एजेंडा नहीं है। कांगे्रस हवाई सपने देख रही है और उसकी हर हरकत सत्ता प्राप्त करने, कुर्सी तक पहुंचने के प्रयासों के लिए केन्द्रित हेाती हैै, जबकि भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री जनता का प्रथम सेवक होता है। कांगे्रस के दौर में मुख्यमंत्री राजा होता था, जनता को उस तक पहुंचने के लिए कठिन तपस्या करना पड़ती थी। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास श्यामला हिल्स के द्वार निश्यिाम आम आदमी के लिए खुले हुए है।
मध्यप्रदेश में खेती लाभ का धंधा गांव में उद्योग युवकों में स्वरोजगार के लिए पहल से मध्यप्रदेश की अधोसरंचना सुनिश्चित होगी- शिवराज सिंह चौहान
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश बीमारू राज्य से दु्रत गति से विकास करने वाला प्रदेश बना है। मध्यप्रदेश की देश और दुनिया में विकासशील प्रदेश के रूप में पहचान बनी है, इस कार्य में प्रदेश के अन्नदाताओं की पहल रंग लाई है। उन्होनें प्रदेश सरकार की सुविधाओं का समुचित लाभ उठाकर कृषि उत्पादन को नये शिखर पर पहुंचाया है जिससे मध्यप्रदेश में कृषि उत्पादन की दर 18.91 से बढ़कर 13 प्रतिशत अतिरिक्त दर्ज हुई है। भाजपा शासित राज्यों में विकास और सुशासन का जो दौर आया है उससे कांगे्रस के हाथ से तोते उड़ गये है और नई-नई तिकड़मबाजियां सोच रही है। रघुराजन समिति की रिपोर्ट को जारी करने के समय पर ध्यान दिया जाये ंतो यह कांगे्रस का चुनावी शगुफा बनकर रह गया है। इसे जनता स्वीकार नहीं करेगी। उन्होनें कहा कि मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता ने कांगे्रस को हताश कर दिया है और वह सिर्फ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विरोध में खड़ी हो गयी है। कांगे्रस की इस कपोल-कल्पित आरोपों की राजनीति को प्रदेश की जनता भली-भांति समझ चुकी है और कांगे्रस को तीसरी बार पराजित करके कांगे्रस को प्रदेश की जनता दंडित करेगी। विधानसभा चुनाव 2003 और 2008 में प्रदेश की जनता ने कांगे्रस को प्रदेश से खारिज कर दिया है, 2013 में कांगे्रस की विफलता दीवार पर लिखी इबारत की तरह स्पष्ट हो रही है। क्योंकि भारतीय जनता पार्टी की सरकार में प्रदेश का किसान खुशहाल हुआ है, युवकों को नौकरियों एवं स्वरोजगार के अवसर मिले है। पांच लाख नौकरियां और भर्ती एक रिकार्ड है। कांगे्रस तीसरी बार प्रदेश से खारिज होने के बाद प्रदेश में राजनैतिक इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर रह जायेगी। प्रदेश की जनता गांधीजी की अंतिम इच्छा को पूरी करनें में आगे आयेंगे।
उन्होनें कहा कि कांगे्रस उपाध्यक्ष ने गांधीजी के उपदेशों को सामने लाने के लिए जिलों से अपील की है। सवाल यह है कि जब देश की नीतियां अमेरिका में तय होंगी आमजन की भागीदारी बढ़ाने के बजाय देश में कृषि के उद्धार का काम विदेशी कंपनियों पर छोड़ दिया जायेगा ंतो महात्मा गांधी की आत्मा कितनी दुखी होगी यह कल्पना की जा सकती है। देश के आम आदमी से सरोकार के बजाय कांगे्रस ने देश की जनता को बाजार के रहमों-करम पर छोड़ दिया है। भारत विदेशी कंपनियों का मुनाफा कमाने वाला बाजार रह गया है। मंहगाई, भ्रष्टाचार प्रतिबद्धता नहीं रही है। कांगे्रस हर क्षेत्र में भटक चुकी है भारतीय जनता पार्टी से वैचारिक स्तर पर सामना करने के बजाय अब कांगे्रस आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित होकर अपनी हताशा और कुंठा व्यक्त कर रही है इसे नंवबर के चुनाव में पराजित कर मध्यप्रदेश से विसर्जित करनें में जन-जन की महत्वपूर्ण भागीदारी होगी।
इस अवसर पर पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, सांसद प्रभात झा, साधना सिंह चौहान, अनुसूचति जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष फग्गनसिंह कुलस्ते, प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश सिंह, अनुसुईया उइके, वरिष्ठ मंत्री नानाभाऊ माहोड़, देवीसिंह सैयाम, प्रदेश मंत्री तपन भौमिक, नीता पटैरिया, जिला अध्यक्ष नरेश दिवाकर, ढ़ालसिंह बिसेन, श्रीराम ठाकुर, मुकेश बघेल, राधा साहू, वेदसिंह ठाकुर, मदन चौरसिया, तुलसीराम ठाकुर, दिलीप बघेल सहित क्षेत्रीय विधायक तथा नेतागण उपस्थित थे।


धान खरीदी को वैट कर से मुक्त करके मुख्यमंत्री ने किसान, उपभोक्ता, व्यापारियों को सकून दिया है- गोपीकृष्ण नेमा
Our Correspondent : 30 spt. 2013
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी व्यापारी प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक गोपीकृष्ण नेमा ने मध्यप्रदेश में धान खरीदी को वैट कर से मुक्त करके किसानों को उत्पादन का अधिक मूल्य सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त किया है। वहीं उपभोक्ता को इस कदम से चावल क्रय करने में पहले से कम मूल्य भुगतान करना पड़ेगा। मंहगाई के इस दौर में राज्य सरकार की यह पहल प्रदेश के उपभोक्ताओं के प्रति संवेदना का मरहम बनेगी। गोपीकृष्ण नेमा ने व्यापारी प्रकोष्ठ द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए प्रदेश के मिलर उद्योग और व्यापारियों को बधाई दी। उन्होनें कहा कि भारतीय जनता पार्टी सरकार में हर वर्ग की सुनवाई हुई है। प्रदेश सरकार संवेदनशील और पारदर्शी है।

अति-वर्षा से 52 हजार 458 हेक्टेयर में फसल क्षति अनुमानित
Our Correspondent : 30 Augest 2013
भोपाल।अति-वृष्टि और वर्षा से प्रदेश में 52 हजार 458 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल क्षति का अनुमान है। सीहोर जिले में 18 हजार 800 हेक्टेयर, रायसेन में 11 हजार 600 हेक्टेयर, अशोकनगर 6792, होशंगाबाद 4876, राजगढ़ 3808, श्योपुर 2,949, शिवपुरी 1400, नरसिंहपुर 1000, सिवनी 955 और रतलाम जिले में 10 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल क्षति का अनुमान है। वर्षा से सिवनी जिले में 6 कुएँ, उज्जैन में 2 कुएँ और छिन्दवाड़ा जिले में 68 कुएँ नष्ट हुए हैं। जबलपुर जिले में 838 और अशोकनगर में 50 मुर्गियाँ भी मरी हैं। वर्षा से 517 पशु-हानि हुई है, जिसमें 145 जबलपुर जिले में, 95 छिन्दवाड़ा, 61 रतलाम, 45 सागर, 43 रायसेन, 21 अशोकनगर, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी 13-13, विदिशा 9, होशंगाबाद और छतरपुर 8-8, कटनी 6, नरसिंहपुर 4, खरगोन, सिवनी 2-2 और बालाघाट जिले में एक पशु-हानि शामिल है।
प्रदेश में अब तक 1198.4 मिलीलीटर वर्षा हो चुकी है, जो सामान्य औसत वर्षा 749.2 मिलीमीटर से 60 प्रतिशत अधिक है। पूर्वी मध्यप्रदेश की अपेक्षा आज पश्चिमी मध्यप्रदेश में वर्षा से राहत रही। पश्चिमी मध्यप्रदेश के कुछ ही जिलों में आज मात्र 1.3 सामान्य औसत वर्षा दर्ज की गई। इसके विपरीत पूर्वी मध्यप्रदेश के लगभग सभी जिलों में सामान्य औसत वर्षा से 17 प्रतिशत अधिक 13.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। वैसे फिलहाल पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य औसत वर्षा से 49 प्रतिशत और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 70 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज है। नर्मदा नदी में भरपूर पानी के कारण ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर और बरगी बाँध के गेटों के खुलने का सिलसिला जारी है। ओंकारेश्वर बाँध के 5 गेट से 74 हजार 701 क्यूसेक, इंदिरा सागर बाँध के 12 गेट से 7883 क्यूसेक और बरगी बाँध के 13 गेट से 78 हजार 187 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।


सोयाबीन में कीट नियंत्रण के लिये सामयिक सलाह
Our Correspondent : 22 Augest 2013
किसान-कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम खुलने के साथ खेतों का निरीक्षण कर कीट रोग और खरपतवार के नियंत्रण के लिये सजग रहें। सोयाबीन में लगने वाले कम्बल कीट से बचने के लिये क्वीनालफॉस 1.5 प्रतिशत या मिथाइल पेराथियान 2 प्रतिशत चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुरकाव करें।
इसके अलावा क्वीनालफॉस 25 ई.सी. 1000 मिलीलीटर दवा या साइपरमेथीन 10 ई.सी. या डेल्टामेथ्रीन 2.8 ई.सी. दवा 750 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर दवा का 700 से 800 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। इसी प्रकार गर्डल बीटल सोयाबीन को क्षति पहुँचाने वाला कीट है, जो तने के अंदर प्रवेश कर उसे खोखला कर देता है। इसकी पहचान पौधे के तने के ऊपरी भाग या पर्ण वृन्त पर कीट द्वारा बनाये गये दो छल्लों से की जा सकती है। इससे चक्र या घेरे का ऊपरी भाग मुरझाकर सूख जाता है। इसके नियंत्रण के लिये ट्राइजोफॉस 40 ईसी 800 मिलीलीटर या इथोफेनप्राक्स एक लीटर दवा का प्रयोग 750 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। एक अन्य प्रमुख कीट तना छेदक मख्खी कीट से बचाव के लिये ट्राइजोफॉस 40 ई.सी. दवा की 800 मिलीलीटर मात्रा 750 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव किया जाये।


गांव का किसान है सबसे बडा वैज्ञानिक - डाॅ. कुसमरिया
Our Correspondent : 02 Augest 2013
चित्रकूट की राज्यस्तरीय कार्यशाला में हो रहा जैविक खेती पर चित्रकूट 3 अगस्त 2013/ जमीन के अंदर जो कार्वन तत्व खत्म हो रहा है उसके प्रति किसानों को जानकारी देना होगा। जैविक और फर्टीलाइजर के बीच का भ्रम दूर करना पडेगा। हम आधुनिक तरीके से विचार करें। अमृत पानी एवं अमृत मिट्टी बनाने का कार्य 80 प्रतिशत किसानों के बीच में करना होगा। दुनियां के प्रयोगों को देखकर अपने हितकर प्रयोगों का प्रयोग करना चाहिये। उपरोक्त बातें दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के उद्यमिता विद्यापीठ में डाॅ. राममनोहर लोहिया सभागार में म0प्र0 के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डाॅ. रामकृृष्ण कुसमरिया द्वारा राज्य स्तरीय जैविक खेती कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर कही गई। कृषि विज्ञान केन्द्र मझगवां एवं किसान कल्याण एवं कृषि विकास म0प्र0 के संयुक्त आयोजन में आयोजित इस कार्यशाला का शुभारम्भ राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख एवं स्वामी विवेकानंद जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उसके बाद प्रदेश के सभी अधिकारियों एवं प्रगतिशील कृषकों को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री डाॅ. कुसमरिया ने कहा कि प्रभु राम के द्वारा शेष कार्यों को श्रद्धेय नानाजी देशमुख के बाद उनके मार्गदर्शन में हम सबको मिला है। जैविक क्षेत्र सबसे ज्यादा अपने म0प्र0 में है। जैविक द्वारा उत्पादन अधिक होता है। लंदन के फर्टीलाइजर व्यापारी का मन बदलकर जैविक खेती करना प्रारम्भ किया है। तो अपने किसान भाई फर्टीलाइजर का प्रयोग क्यों करें। जैविक प्रक्रिया को किसानों के बीच अपनाने का कार्य बहुत बडी उपलब्धता एवं सफलता सिद्ध होगी। भयमुक्त क्षेत्र में भयमुक्त कार्य करेंगे। सबसे बड़ा वैज्ञानिक गांव का किसान है। स्वस्थ्य रहना है तो अपनी खाद-अपना बीज अपनाना होगा। जैसा रहे अन्न-वैसा रहे मन। इस अवसर पर म0प्र0 किसान कल्याण एवं कृषि विभाग के संचालक डाॅ. डी.एन. शर्मा ने कहा कि हम जैविक खेती के लिये म0प्र0 को आगे बढायेंगे। म0प्र0 जैविक पर नं. 1 पर है। लेकिन संतोषप्रद नहीं है। आगे काम करने की आवश्यकता है। आप सभी लोग जैविक दूत के रूप में जैविक के महत्व को गांव-गांव बतायेंगे। प्रत्येक जिले के पंजीयन का 50 प्रतिशत छूट का लाभ किसानों को दिलायेंगे। इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिता में लेना है। कौशल विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत युवाओं को आगे बढ़ाना होगा। इस अवसर पर म0प्र0 के 10 संभागों के संयुक्त संचालक कृषि तथा सभी 50 जिलों के उप संचालक कृषि एवं आत्मा परियोजना के संचालकों सहित सभी कृषि विकास एवं प्रशिक्षण केन्द्रों के प्राचार्य एवं प्रदेश के कई जिलों से प्रगतिशील किसान उपस्थित होकर म0प्र0 को जैविकमय बनाने के लिये मंथन कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र में कृषि विज्ञान केन्द्र गनीवां चित्रकूट के प्राचार्य डाॅ. छोटे सिंह एवं कृषि विज्ञान केन्द्र मझगवां के कार्यक्रम समन्वयक डाॅ. आर. एस. नेगी, जैविक खेती के संयुक्त संचालक के.पी. अहिरवाल मंचासीन रहे तथा प्रथम दिवस पर कृषि वैज्ञानिक डाॅ. वेदप्रकाश सिंह, डाॅ. श्यामसुन्दर कौशिक, जैविक प्रमाणीकरण के उप संचालक जितेन्द्र सिंह परिहार, डाॅ. लोकेश गंगरेडे, ए.बी. मिश्रा द्वारा अलग-अलग तकनीकी सत्रों के माध्यम से नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट, आर्गेनिक फूड प्रोडक्सन के लिये सर्टीफिकेशन प्रोसेस, आर्गेनिक फार्मिंग प्रैक्टिस तथा जैविक उत्पादों के विपणन के साथ नक्षत्रीय खेती के बारे में भी बताया गया।


"नहरों से आबाद नहीं बर्बाद हो रहे हैं किसान"
Our Correspondent : 02 Augest 2013
इंदौर। इंदिरा सागर व ओंकारेश्वर परियोजना में कमांड एरिया का विकास ठीक से नहीं होने से सैकड़ों हेक्टेयर जमीन बर्बाद हो रही है। किसान खुशहाल होने की बजाय, बर्बाद हो रहे हैं। मार्जिनल व छोटे किसानों की हालात तो बहुत खराब है।
नहरों की खुदाई से जो मटेरियल खेतों में डाला जा रहा है, उससे सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन बर्बाद हो गई है। इसके लिए मुआवजा भी व्यवस्थित रूप में नहीं दिया जा रहा है। नहरों के निर्माण में केंद्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय की रिपोर्ट एनवीडीए के लिए मजाक बन गई है।
केंद्रीय सचिव द्वारा मुख्य सचिव को पत्र लिख कर चेतावनी देने के बाद भी पूरे मसले पर एनवीडीए नर्मदा विकास प्राधिकरण की मनमानी जारी है। 21 गांवों में किए गए सर्वे की रिपोर्ट बता रही है कि यहां कि 500 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर पानी भर गया है। 6 करोड़ से अधिक की फसल चौपट हो गई है।
यह दलीलें नर्मदा बचाओ आंदोलन द्वारा दायर याचिका में मेधा पाटकर ने हाईकोर्ट में गुरूवार को पेश की। पाटकर ने याचिका के संबंध में दस्तावेज, सुप्रीम कोर्ट के फैसले व विभिन्न कमेटियों की रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष वर्तमान में हो रही बारिश के कारण कमांड एरिया व नहर निर्माण क्षेत्र में हो रही तबाही की तस्वीरें पेश की।
21 गांव के सर्वे की रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि करीब 400 किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। इससे करीब 6 करोड़ का नुकसान हो गया। इसमें बड़वाह, सनावद व बड़वानी तहसील के गांव शामिल है। नहरों के अव्यवस्थित निर्माण से खेतों में पानी भर गया है। निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की, जबकि निर्माण योजना में सभी प्रस्तावित है। उ नहरों के लिए अधिग्रहित जमीनों को मुआवजा दिया जा रहा है।
इसके मलबे व निर्माण की लापरवाही से बर्बाद हो रही जमीनों का कोई आकलन नहीं किया गया। इसी तरह से जो मुआवजा दिया जा रहा है, वह भी पुरानी गाइड लाइन के हिसाब से दिया जा रहा है।
इन मुद्दों को भी रखा
कई जगह 200 से 300 मीटर की गैप छोड़ नहरों का निर्माण किया जा रहा है। इससे पानी खेतों में फैलेगा।
जमीन के बदले जमीन की मांग करने पर पत्थर वाली जमीन दी जाती है।
मुआवजा देने के लिए कोर्ट के निर्देश का भी पालन नहीं किया जा रहा है।
जल जमाव होने से जमीन में क्षार की मात्रा बढ़ रही है।
नहरों के अधूरे निर्माण के कारण जमीन में पानी का रिसाव होने से जमीन का उपजाउपन समाप्त हो रहा है।
पुनर्वास के लिए तय स्थानों पर मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई गई।


फसलों का निकला दम,अन्नदाता मायूस
Our Correspondent : 02 Augest 2013
खरगोन। किसान के लिए अब सावन की झड़ी मुसीबत बन रही है। सतत बारिश ने फसलों का दम ही निकाल दिया है। किसानों के चेहरों पर मायूसी छाने लगी है
वे धूप का इंतजार रहे हैं ताकि गलती हुई फसल को राहत मिल सके। किसानों का कहना है कि ऎसी ही बारिश जारी रही तो हाथ कुछनहीं आने वाला, ऎसे तो सावन में आंसुओं की झड़ी लग जाएगी।
कसरावद. अत्यधिक वष्ााü से फसलों की स्थिति काफी खराब है। पिछले 48 घंटे से क्षेत्र मे जारी बरसात के कारण नर्मदा व वेदा नदी के साथ ही नाले भी उफान पर हंै।
इस कारण कई खेतों मे पानी घुस रहा है।खेत तालाब बनते जा रहे हैं। किसान अशोक पटेल पाटियापूरा ने बताया कि अधिक बारिश के कारण फसलों की स्थिति दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। लगातार पानी गिरने से खेतों मे फसलों से अधिक खरपतवार उग आई है, लेकिन बारिश बंद ना होने के कारण ना तो खरपतवार को काट पा रहे है और ना ही दवाई का छिड़काव कर पा रहे हैं।
ऎसे में कपास, मक्का, मूंग व सोयाबीन की फसलें काफी खराब हो रही हैं। नायब तहसीलदार मधुकांत दुबे ने बताया कि नर्मदा किनारे स्थिति गांवों मे पटवारी व कोटवारों को तैनात कर दिया है। एहतिहात के तौर पर निचली बस्तियों के रहवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए सूचित कर दिया है।
अंचल में फसलें चौपट
छोटी खरगोन. सतत रूप से हो रही बारिश का असर फसलों पर भी नजर आने लगा है।सोयाबीन फसल गलने लगी है। कपास के पौधे भी बड़े नहीं हो पा रहे हैं। खेतों में एक महीने से पानी गिरने के कारण फसल सड़ने की नौबत आ पहुंची है। किसान बलिराम बरफा एवं राधेश्याम सिर्वी का कहना है कि हमारी सब्जी की फसल भी अत्यधिक बारिश के कारण खराब हो गई ह
नांद्रा. ग्राम में भी बारिश नहीं थमने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। सोयाबीन, मक्का, मूंग, चवला एवं कपास फसलों पर संकट मंडराने लगा है। सोयाबीन पर फूल आने लगे हैं यदि इसी तरह बारिश होती रही तो फसलें सड़ जाएंगी। किसानों का कहना है कि फसलों को धूप बेहद आवश्यक है।
झिरन्या. क्षेत्र में एक माह से हो रही रिमझिम बारिश के कारण फसलों पर मच्छर तथा इल्लियों का प्रकोप बढ़ गया है। कीटनाशक दवाएं भी बेअसर साबित हो रही हैं। किसानों का कहना है कि एक माह से फसलों के लिए धूप का इंतजार है। धूप नहीं मिलने से फसलें बढ़ नहीं रही है। मानसून की सक्रियता को देखते हुए यदि वर्षा का दौर कुछ दिन यूं ही जारी रहा तो उत्पादन की दृष्टि से अमूमन सभी फसलें प्रभावित होंगी।
मंडलेश्वर. बारिश के चलते क्षेत्र में अधिकांश खेत तालाब बन चुके हैं। चोली रोड सिथत खेतों में जल निकासी की परेशानी आ रही है। किसान चंचल अग्रवाल ने बताया कि अत्यधिक बारिश से फसल सड़ने की कगार पर पहुंच गई है। शासन को अतिवृष्टि का मुआवजा देना चाहिए।
काटकूट. क्षेत्र के किसान भी अत्यधिक बारिश के कारण फसलों को लेकर चिंतित हैं। खेतों में खड़ी फसलें लगभग खराब होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। किसान मोतीलाल सर्वा, श्यामलाल सारण का कहना है कि यदि बारिश नहीं थमी तो मुसीबत बढ़ जाएगी। किसान कहीं का नहीं रह जाएगा।
बलवाड़ा. क्षेत्र में भी अतिबारिश के कारण फसलें प्रभावित होने लगी हैं। सोयाबीन की फसल में फूल आना शुरू हुए थे, लेकिन बारिश के कारण वो गलने लगी है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के किसान इसे लेकर चिंतित हैं।


अधिकारी किसानों से संपर्क कर नई तकनीकों की जानकारी दें- कलेक्टर
Our Correspondent : 02 Augest 2013
भोपाल। जिले में कृषि,उद्यानिकी, पशु पालन एवं मत्स्य पालन से जुड़े विभागों के अधिकारियों को चाहिए कि वे क्षेत्र में भ्रमण करें और कृषकों एवं पशु पालकों को आधुनिक तकनीकी जानकारी और मार्गदर्शन दें। कलेक्टर श्री निशांत वरवड़े ने यह निर्देश आज आत्मा गवर्निंग बोर्ड की बैठक में दिए।
कलेक्ट्रेट कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक में जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री राकेश श्रीवास्तव, सदस्य आत्मा गवर्निंग बोर्ड उप संचालक कृषि श्री के.पी.पाण्डे, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं श्री पी.एस.पटेल, उप संचालक मत्स्य श्री आर.एन.अग्निहोत्री, कृषक सदस्य श्री पदमसिंह ठाकुर, श्री छगनसिंह मीणा, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक श्री आर.एस.यादव, परियोजना संचालक आत्मा श्रीमती रश्मि वर्गीस, उप परियोजना संचालक श्री एल.बी.एस.चौहान, श्री एस.के.राठौर, विकासखंड तकनीकी प्रबंधक श्री अमर दीक्षित, प्रीति द्विवेदी और विषय वस्तु विशेषज्ञ अंकिता गुप्ता आदि मौजूद थे।
बैठक में श्रीमती रश्मि वर्गीस ने विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने वर्ष 2013-14 की कार्ययोजना, गुजरात एग्री ग्लोबल मीट के लिए कृषकों के चयन आदि के संबंध में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जिसे अनुमोदित किया गया।


मध्य प्रदेश में 5 वर्ष में प्रमाणित बीज का उत्पादन दोगुना हुआ
Our Correspondent : 02 Augest 2013
भोपाल। मध्य प्रदेश में अनाज उत्पादन को बढ़ाने के लिये सहकारी समितियों के माध्यम से प्रमाणित बीज के उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है। वर्ष 2012-13 में 11 लाख 50 हजार क्विंटल प्रमाणित बीज का उत्पादन किया गया। प्रदेश में वर्ष 2008-09 में 5 लाख 80 हजार क्विंटल बीज का उत्पादन हुआ।
प्रदेश में फसल उत्पादन बढ़ाने के लिये बीज प्रतिस्थापन की दर को बढ़ाये जाने के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से प्रदेश में वर्ष 2002-03 से ग्रामीण-स्तर पर बीज उत्पादक समितियों के गठन का कार्य प्रारंभ किया गया। वर्तमान में 2,316 प्राथमिक बीज उत्पादक समितियाँ पंजीकृत हैं। प्रदेश में मुख्य फसलों सोयाबीन, गेहूँ की बीज प्रतिस्थापन दर 30 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। राज्य में किसानों को उपलब्ध करवाये जा रहे कुल प्रमाणित बीज में से 64 प्रतिशत प्रमाणित बीज सहकारी समिति के माध्यम से उपलब्ध करवाया जा रहा है।
राज्य सहकारी बीज संघ ने इस वर्ष विदिशा, बैतूल, बालाघाट, जबलपुर, खण्डवा, पन्ना, ग्वालियर एवं शहडोल में नये क्षेत्रीय कार्यालय खोले जाने का निर्णय लिया है।


किसानों के खाते में नहीं आया पैसा
Our Correspondent : 29 July 2013
हरदा। खरीफ फसल की बीमा राशि बांटने में गड़बड़ी हो रही है। किसानों के खाते में पैसा नहीं आ आया। बैंक जाने पर किसानों को असमंजस में डाला जा रहा है। यह आरोप लगाते हुए जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश यादव ने कहा बीमा राशि से वंचित किसान बैकिंग लोकपाल एवं संबंधित बैंक के उच्च अधिकारियों से शिकायत करें।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2012-13 की खरीफ फसल खराब होने से जिले के 6203 किसानों के लिए केंद्र सरकार ने चार करोड़ 53 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। यह पैसा सीधे किसानों के खातों में जमा होना था। किंतु ऐसा नहीं हुआ।
राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना में जिस पटवारी हल्के में फसल खराब घोषित कर अनावारी रिपोर्ट दी जाती है। उस हल्के के सभी गांव के किसानों को बीमा राशि का लाभ दिया जाता है। बीमा योजना की राशि की प्रीमियम बीमा कंपनी में जमा कराने की अंतिम तिथि 30 जुलाई है। क्योंकि इस वर्ष भी अतिवर्षा की स्थिति को देखते हुए किसानों को फसल बीमा राशि की मांग करनी पड़ सकती है।


खेतों में पानी भरने से फसल हो रही बर्बाद
Our Correspondent : 29 July 2013
राजगढ़| जिले भर में जून माह से लगातार हो रही बारिश लोगों के लिए आफत बन गई है। नगर से लेकर गांव और घरों से लेकर खेतों में भरे पानी से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। खेतों में पानी भरने से खरीफ की फसल गलकर बर्बाद हो रही है। मजदूरी करके अपना परिवार चला रहे लोगों को काम नहीं मिलने से परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। बारिश से लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं।
पिछले दो महीने से लगातार जोरदार बारिश की दौर चल रहा है। इस दौरान अब तक सात सौ मिमी से अधिक बारिश हो चुकी है। लगातार हो रही बारिश से खेतों में पानी जमा हो गया है, इससे सोयाबीन, मक्का, उड़द, मूंग आदि फसलों के तने व जड़ें गलकर पीली पड़ गई हैं। किसानों की फसल खराब होने से इनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि उनके लिए आसमान से आफत बरस रही है। फसल नष्ट हो गई तो हम कहीं के नहीं रहेंगे। परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो जाएगा।
आंधी, ओलावृष्टि और अब झमाझम
मोया के कृषक करण सिंह जाटव, बद्रीलाल यादव, पटेल घीसा लाल यादव, भारत सिंह, चाठा के काशीराम, महाबल के राम प्रसाद जाटव, हबीपुरा गांव के सर लाल दांगी आदि ने कहा कि अब तो आसमान से किसानों के लिए आफत बरस रही है। रबी फसल को आंधी-बारिश और ओलावृष्टि ने नष्ट दिया था, इससे किसानों की आर्थिक रूप से कमर टूट चुकी है। रही-सही कसर लगातार हो रही बारिश पूरी कर रही है, इससे सोयाबीन सहित सभी फसलें गल रही हैं। जिलेभर में अब तक साठ फीसदी से अधिक फसल नष्ट हो चुकी है।
मिल सकता है जीवनदान
किसानों का कहना है कि अब भी बारिश थम जाए तो गल रही फसलें संभल सकती हैं। बारिश थमने के साथ हल्की धूप निकल जाए तो खेतों का पानी सूखने के साथ फसल को धूप लग जाएगी, इससे वह नष्ट होने से बच जाएंगी।
नहीं मिल रही मजदूरी
बीते वर्षों में बोवनी के बाद अंकुरित सोयाबीन की फसल में निंदाई-गुड़ाई का कार्य किया जाता था। यह कार्य कई दिनों तक चलने से गांवों में दिहाड़ी मजदूरों को काम मिल जाता था। इससे उनकी रोजी-रोटी चलती थी, लेकिन लगातार बारिश होने से इस बार निंदाई-गुड़ाई भी नहीं हो सकी है। इससे मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। शहरों के आसपास गांव के लोग शहर पहुंचकर काम कर लेते थे, लेकिन बारिश होने से वह भी मजदूरी के लिए परेशान हो रहे हैं।
पंद्रह घंटे बंद रहा गांव का रास्ता
शनिवार सुबह तीन घंटे की झमाझम बारिश के बाद ब्यावरा-मोया मार्ग सुबह 10 बजे नाले पर पानी आ जाने से अवरुद्ध हो गया, जो पंद्रह घंटे बाद रात एक बजे खुल पाया। मोया-चमारी का नाला अजनार नदीं में मिलता है। दिनभर हुई बारिश से अजनार नदी उफान पर आ गई, इससे नाले का पानी रुकने से जलस्तर बढ़ गया, जो नदी का जल स्तर कम होने के बाद रात एक बजे खुला। इस दौरान ग्रामीणों का ब्यावरा आना-जाना पूरी तरह बंद रहा। नाले पर बड़ी संख्या में लोग पानी उतरने का इंतजार करते रहे। जब शाम तक पानी कम नहीं हुआ तो कई लोगों ने तैर कर नाले को पार किया और अपने गंतव्य तक पहुंचे।


फसल के मुआवजे में मिले दो व तीन रुपये के चेक
Our Correspondent : 25 July 2013
चंडीगढ़। प्रदेश के राजस्व विभाग की ओर से किसानों को उनकी खराब हुई फसल के मुआवजे के रूप में दो व तीन रुपये के चेक मिले हैं। झज्जर जिले में बेरी के तहसीलदार ने किसान टेकचंद पुत्र भीम सिंह को तीन रुपये तथा सत्य नारायण पुत्र हरि सिंह को दो रुपये का चेक प्रदान किया है।
इनेलो विधायक अभय सिंह चौटाला ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार एक रुपये प्रति एकड़ की दर से किसानों को मुआवजा दे रही है। टेकचंद की तीन एकड़ और सत्य नारायण की दो एकड़ जमीन में लगी फसल पिछले साल प्राकृतिक आपदा के चलते खराब हो गई थी, जिसका मुआवजा तीन रुपये और दो रुपये इस साल मिल पाया है।
अभय चौटाला ने इन चेक की फोटो प्रतियां बांटते हुए बताया कि दोनों चेक पर 22 मार्च 2013 की तारीख पड़ी है। यह दोनों चेक अकाउंट-पे हैं। एक्सिस बैंक के इन चेक के भुगतान के लिए यदि किसानों को सहकारी बैंक में भी अपना खाता खुलवाना पड़े तो उन्हें 500-500 रुपये की राशि खर्च करनी पड़ेगी। निजी बैंक में खाता खुलवाने के लिए करीब पांच हजार रुपये की राशि लगती है।
अभय चौटाला ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार किसानों की हमदर्द होने का दावा करती है, लेकिन उन्हें फसल के मुआवजे के नाम पर तीन और दो रुपये के चेक प्रदान किए जाते हैं। इससे कांग्रेस के किसान प्रेम की असलियत सामने आ गई है। उन्होंने कहा कि किसानों को 30 से 35 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा मिलना चाहिए।
विपक्ष लोगों को गुमराह कर रहा: सीएम
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अभय चौटाला के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पांच हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा प्रदान करती है। एक रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देने का इनेलो का आरोप लोगों को गुमराह करने वाला है। विपक्ष को गैर जिम्मेदाराना बयान देने से बचना चाहिए। हुड्डा ने कहा कि एक जमीन कई-कई किसानों के नाम होती है। जब मुआवजा मिलने की बारी आती है तो जिस हिस्सेदार का जितना हिस्सा बनता है, उसे मुआवजे के रूप में दे दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इनेलो के शासनकाल में मात्र पैसों में ही मुआवजा मिलता था, जबकि हम नियमों के अनुसार अधिक मुआवजा दे रहे हैं।
सरकार की नजर में यह हैं फसल की लागत दरें
प्रदेश के कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक ने सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में सूचना दी है कि गेहूं का लागत मूल्य प्रति क्विंटल 1613 रुपये और धान का लागत मूल्य प्रति क्विंटल 1757 रुपये क्विंटल आता है। बाजरे की फसल का लागत मूल्य 1315 रुपये, मकी का लागत मूल्य 1654 रुपये और कपास का लागत मूल्य 3783 रुपये प्रति क्विंटल बनता है। भारतीय किसान यूनियन के प्रेस सचिव राकेश कुमारी ने यह जानकारी मांगी थी। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक ने अपने पत्रांक 1041-पीए-आरटीआई-19.6.2013 में यह जानकारी दी है।


देश में सोयाबीन का उत्पादन 140 लाख टन रहने का अनुमान
Our Correspondent : 17 July 2013
कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते दामों में गिरावट
कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते सोया तेल और सोयाबीन दोनों के दामों में गिरावट देखने को मिल रही है। सोमवार को सोया रिफाइंड जहां 655-58 रुपए प्रति क्विंटल पर चल रहा था, वहीं सोया साल्वेंट 620-25 रुपए पर था। हालांकि एनसीडीईएक्स में जुलाई और अगस्त के सौदों में सोयाबीन के दाम 691 रुपए और 675 रुपए के आसपास चल रहे थे।


जिन खेतों में 72 घंटे से ज्यादा पानी रहा भरा वहां फसल सडऩे का खतरा
Our Correspondent : 16 July 2013
राजगढ़। क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश के कारण धूप नहीं निकल रही है। इसका दुष्प्रभाव अब खरीफ फसलों पर नजर आने लगा है। खेतों में पानी और लगातार नमी के कारण सोयाबीन, मक्का, ज्वार, तिल, मूंग, उड़द, अरहर, मूंगफली सहित अन्य खरीफ फसलों में इल्ली व अन्य बीमारियों के लक्षण नजर आने लगे हैं। फसलों में कीटों का प्रकोप बढऩे लगा है। छोटे कद वाली फसलें गलने लगी हैं।
कृषि विभाग के मुताबिक जिले में खरीफ फसल तीन लाख 97 हजार 940 हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई है। इसमें सोयाबीन तीन लाख 15 हजार पांच सौ हेक्टेयर, मक्का 54 हजार दो सौ हेक्टेयर सहित अन्य फसलें बोई गई हैं।
कहीं कीट, तो कहीं गलने लगीं फसल : पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश की वजह से खेतों में पानी भरा है। हाल में जिन खेतों में बोवनी हुई उनकी अंकुरित फसलें गलने लगी हैं। इससे मक्का, ज्वार, सोयाबीन, तिल व अन्य फसलों की पौध गलने लगी है। धूप नहीं मिलने से सोयाबीन सहित अन्य फसलों में कीटों के प्रकोप की आशंका बढ़ गई है।
शुरुआती में खेतों में पानी भरा होने से कीटनाशकों का छिड़काव नहीं हो रहा है। यदि यही स्थिति रही तो कीट प्रकोप कहर बन सकता है।
करने होंगे बचाव के उपाय: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कीटों से फसल बचाने किसानों को प्रति हेक्टेयर आठ सौ एमएल ट्रायजोफॉस का छिड़काव करना होगा। जिन खेतों में पानी भरा है, वहां नालियां बनाने की जरूरत है। श्री पंदराम के अनुसार जिन खेतों में 24-48 घंटे या इससे अधिक समय से पानी जमा है। उनमें दो ग्राम प्रतिलीटर बाविस्टीन पावडर घोल तैयार कर स्प्रे करना होगा।
जिले में 80 क्षेत्र में सोयाबीन: जिले के कुल हेक्टेयर क्षेत्र के 80 प्रतिशत खेतों में सोयाबीन की फसल है। पानेर के रामेश्वर मीणा के खेत में 20 दिन पहले बुआई की थी, लेकिन पानी भरा होने से फसल खराब होने लगी है। खानपुरा के किशोरी लाल मीणा, प्रेम सौंधिया, अरन्या के गौरी लाल सौंधिया ने बताया इनके खेतों में एक सप्ताह पूर्व बोवनी की, अब यह अनाज अंकुरित होकर वहीं सडऩे की स्थिति में है।
खेतों में भरा पानी सबसे से पहले निकालना होगा। साथ ही आवश्यक दवाओं का छिड़काव जल्द करना होगा, ताकि फसलों में कीट पनपने के साथ ही मर जाए। नहीं तो नुकसान की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।


यह है साढ़े तीन फीट की लौकी
Our Correspondent : 16 July 2013
गंजबासौदा(विदिशा)। बाजार में सब्जियों के हाईब्रिड बीज आ जाने से सब्जियों की शक्ल भी बदलने लगी है। शासकीय जन चिकित्सालय में डा. धन्नजय शर्मा के क्वार्टर में लगी लौकी बेल में लंबे-लंबे फल लग रहे हैं एक-एक लौकी की लंबाई तीन से साढ़े तीन फीट निकल रही है। लौकी के वजन से बेल और उसके लिए बनाया गया मचान भी झुक रहा है।
डा. शर्मा ने बताया कि वह लौकी का जूस सुबह पीते हैं। इसके चलते उन्होंने क्वार्टर में लौकी की बेल लगाई है, जो खूब फल फूल रही है।



मध्यप्रदेश के 75 लाख किसान के पास किसान क्रेडिट कार्ड
Our Correspondent : 29 June 2013
भोपाल। मध्यप्रदेश में खेती को लाभ का व्यवसाय बनाये जाने के उद्देश्य से सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों को क्रेडिट कार्ड की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।
प्रदेश में वर्तमान में 75 लाख किसानों के पास क्रेडिट कार्ड हैं। इनमें से 45 लाख किसानों को सहकारी संस्थाओं के माध्यम से एवं 30 लाख किसानों को व्यवसायिक बैंकों के माध्यम से क्रेडिट कार्ड उपलब्ध करवाये गये हैं। राज्य में लगभग 90 लाख के करीब किसान है।
प्रदेश में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों द्वारा वन कृषकों को भी किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है। पिछले वर्ष एक लाख 696 वन कृषक को किसान क्रेडिट कार्ड जारी कर उन्हें 71 करोड़ 56 लाख रुपये के कृषि ऋण वितरित किए गए। राज्य में उज्जैन एवं भिण्ड जिले को छोड़कर शेष 48 जिलों में एक लाख 72 हजार 352 वन कृषक हैं।


खरीफ फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ा
Our Correspondent : 28 June 2013
नई दिल्ली : सरकार ने चालू खरीफ फसल के लिए धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 60 रूपये की हल्की बढ़ोतरी कर इसे 1,310 रूपये प्रति क्विंटल रखा है, पर दलहनों और तिलहनों के एमएसपी में 450 रूपए तक की अच्छी खासी बढ़ोतरी की गयी है, ताकि किसान इनकी खेती के लिए प्रोत्साहित हों और आयात पर निर्भरता कम हो.
मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति सीसीईए की आज हुई बैठक के बाद सूत्रों ने बताया कि समिति ने फसल साल 2013-14 जुलाई से जून के दौरान प्रस्तावित खरीफ फसलों के एमएसपी को मंजूरी दी है.
मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति सीसीईए की बैठक में खरीफ की फसलों के लिए एमएसपी के प्रस्तावों पर निर्णय किया गया. सामान्य धान का एमएसपी 1,250 रूपये से बढ़ाकर 1,310 रूपये प्रति क्विंटल किया गया है, जबकि 'ए’ ग्रेड के धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 65 रूपये बढ़ाकर 1,345 रूपये प्रति क्विंटल कर दिया गया.
वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने 14 फसलों के एमएसपी के बारे में फैसलों की आज जानकारी दी. उन्होंने कहा कि 'केवल दो फसलों को छोड़ कर बाकी पर हमने कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) के प्रस्ताव को ही स्वीकार किया है. बाजरा और तुअर के मामले में हमने आयोग के प्रस्ताव से ऊंचा एमएसपी तय किया है.’ दलहनों में तुअर का एमएसपी 450 रूपये बढ़कर 4,300 रूपये प्रति क्विंटल और मूंग 100 रूपये बढ़ाकर 4,500 रूपये प्रति क्विंटल कर दिया गया. उड़द के एमएसपी को 4,300 रूपये के पिछले साल के स्तर पर ही रखा गया है.
सीसीईए ने कपास का एमएसपी 100 रूपये बढ़ाया है. औसत क्वालिटी के कपास का एमएसपी 3,700 रूपये प्रति क्विंटल और लंबे रेशे के कपास का एमएसपी 4000 रूपये प्रति क्विंटल रखा गया है.
तिलहन श्रेणी में सीसीईए ने सोयाबीन ब्लैक का एमएसपी 300 रूपये बढ़ाकर 2,500 रूपये क्विंटल और सोयाबीन पीली का एमएसपी 320 रूपये बढ़ाकर 2,560 रूपये क्विंटल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है.
तिल का एमएसपी 300 रूपये बढ़कर 4,500 रूपये कर दिया गया. जबकि सूरजमुखी और रामतिल का न्यूनतम समर्थन मूल्य क्रमश 3,700 और 3,500 रूपये क्विंटल पर पहले की तरह रखा गया है.


'किसानों के सच्चे लीडर थे इसलिए डिप्टी नहीं, सुपर सीएम कहलाते थे सुभाष भाई'
Our Correspondent : 27 June 2013
इंदौर. सुभाष यादव को कांग्रेस की दिग्विजयसिंह की सरकार में ज्यादा अहमियत नहीं मिली, लेकिन वे पीछे नहीं हटे। उन्होंने हार नहीं मानी। केंद्र की एनडीए सरकार के खिलाफ 10 हजार किसानों का मार्च जब नई दिल्ली पहुंचा तो कांग्रेस हाईकमान ने भी सुभाष भाई का लोहा मान लिया। उन्होंने किसानों के लिए 888 मांगों का पत्र सौंपा जिसे ऐतिहासिक किसान मांग पत्र कहा जाता है।
कांग्रेस ने उन्हें प्रदेश में उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी से नवाजा। बोरावां से भोपाल तक करीब से जानने वालों की मानें तो उनके काफिले में हमेशा 20 से ज्यादा गाड़ियां दौड़ती थीं। यह देख उन्हें सुपर सीएम भी कहा जाने लगा। दिग्विजय सिंह से प्रारंभिक वैचारिक मतभेद के बाद भी उन्होंने उनका पूरा सम्मान किया।
नतीजतन सुभाष भाई के निधन का समाचार सुनकर सबसे पहले परिवार को सांत्वना देने वालों में दिग्विजयसिंह शामिल थे। यही उनकी शख्सियत की सबसे बड़ी खासियत थी। अपनेपन से लोगों का हुनर जीतना वो खूब जानते थे। एक बार जिस शख्स से मिलते थे दूसरी मुलाकात दो साल बाद भी हो तब भी उसे नाम से पुकारते थे। हालांकि यह विलक्षण स्मरणशक्ति अंतिम दिनों से कुछ माह पूर्व ही जाने लगी थी।
राजनीतिक सफरनामा
पंचायत से शुरुआत
सहकारिता के सिरमौर
1971 में प्राथमिक सेवा सहकारी समिति बोरावां के सदस्य बने। ञ्च 27 जून 1974 यानी आज से ठीक 39 साल पहले उन्हें जिला सहकारी केंद्रीय बैंक खरगोन के अध्यक्ष पद पर निर्वाचित किया गया। ञ्च 13 जून 1984 से 20 अप्रैल 1990, 17 मई 1990 से 30 जून 1990 व 26 जून 1983 से 3 अप्रैल 1994 की अवधियों में भी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक खरगोन अध्यक्ष सर्वानुमति से निर्वाचित हुए। ञ्च 31 दिसंबर 1980 को मप्र राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष मनोनीत हुए। ञ्च 31 दिसंबर 1984 से वर्ष 2002 तक कई बार अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
प्रदेश और देश की राजनीति में दखल
1980 और वर्ष 1985 में खरगोन संसदीय सीट से चुनाव जीते। ञ्च 1993 में कसरावद विस क्षेत्र से चुनाव जीते, कृषि सहकारिता, जलसंसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग जैसे अहम विभागों के रूप में दायित्व संभालते हुए 10 वर्षो तक उपमुख्यमंत्री रहे। ञ्च 1998 में इसी विस क्षेत्र से दोबारा चुनाव जीता। ञ्च 2003 में तीसरी बार इसी क्षेत्र से चुनाव जीते। पर इस बार प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं रही।
कई रूपों में याद रहेंगे
प्रयोगधर्मी : निमाड़ में खेती को नई राह दिलाने के लिए कई सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति दिलाई। खुद ने उन्नतशील कृषि का उदाहरण पेश करते हुए जिले के किसानों को हाइब्रिड बीज से परिचित कराया। बीज सहकारी समिति का गठन कराया। हॉर्टिकल्चर को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं बनवाई।
समर्पित : शकर कारखाना, सूत मिल, इंजीनियरिंग कॉलेज, फॉर्मेसी कॉलेज सहित कई काम-धंधे शुरू कर लोगों को शिक्षा व रोजगार उपलब्ध कराया।
प्रेरणास्रोत: 2003 में जब कांग्रेस प्रदेश में सत्ता से बेदखल हुई। मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह ने राजनीति से 10 साल का संन्यास ले लिया लेकिन सुभाष भाई ने लड़ने का रास्ता चुना। कांग्रेसियों के गिरते मनोबल को उठाने के लिए हाईकमान के निर्देश पर खुद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।
गजब का हौसला : 15 मार्च 1999 को केंद्र की एनडीए सरकार के खिलाफ निमाड़ के 10 हजार किसानों का मार्च निकालकर नई दिल्ली पहुंच गए। सुंदरलाल पटवा के मुख्यमंत्रित्व काल में उनके कसरावद क्षेत्र में दौरे के दौरान किसानों की मांग मनवाने पर अड़ गए। पटवा ने गाड़ी आगे बढ़ाने को कहा तो सायलेंसर पकड़ लिया। गाड़ी हिल भी न सकी। बचपन से उन्हें कुश्ती का शौक था।
प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुभाष यादव के निधन की सूचना मिलने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यादव के सांसद पुत्र अरुण यादव को अपने साथ दिल्ली लेकर गए। चौहान को ग्वालियर होते हुए दिल्ली जाना था। उनके साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और अनूप मिश्रा भी जाने वाले थे, लेकिन उन्होंने कार्यक्रम बदला और यादव को विशेष विमान में साथ लेकर सीधे दिल्ली पहुंच गए। तोमर और मिश्रा बाद में ट्रेन से ग्वालियर गए। यादव के निधन पर राज्यपाल रामनरेश यादव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सहित कई नेताओं ने शोक संवेदना व्यक्त की। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुई श्रद्धांजलि सभा में नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। अपेक्स बैंक के अधिकारियों- कर्मचारियों ने भी यादव के निधन पर शोक व्यक्त किया है। यादव लंबे समय तक अपेक्स बैंक के चेयरमैन रहे हैं।


किसानों को भरपूर राहत राशि मिलेगी
Our Correspondent : 28 June 2013
जनसंपर्क मंत्री और शाजापुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने कालापीपल विकासखण्ड के विभिन्न ग्राम का भ्रमण कर ओला प्रभावित फसलों का निरीक्षण किया। श्री शर्मा ने कहा कि शासन के प्रावधान के अनुसार ओला प्रभावित फसल हानि की भरपूर राहत राशि किसानों को दी जायेगी।
श्री शर्मा ने भ्रमण के दौरान ग्राम खमलाम, सुकलिया, डोडी, हरूखेड़ी, बेरछा दातार, बमुलिया, मुछाली, जावड़िया घरवास, लसुड़िया घाघ, निपानिया खुर्द, अरनियाकलां, तिलावद, बिसनखेड़ा, सेरपुरा तथा कोलवा गाँवों में ओला प्रभावित गेहूँ, चना, आलू, धनिया आदि फसलों के नुकसान का जायजा लिया।
श्री शर्मा ने कहा कि राज्य शासन केन्द्र से विशेष पैकेज की माँग करेगा। राहत राशि वितरण में कोई गड़बड़ी न हो इसलिए किसानों को चेक के माध्यम से राहत राशि का वितरण किया जायेगा। उन्होंने राजस्व अधिकारियों से समय-सीमा में शत-प्रतिशत ओला प्रभावित फसलों का आकलन करने को कहा।


मध्यप्रदेश सरकार कृषि पर 6000 करोड़ रुपए खर्च करेगी
Our Correspondent : 4 Feb. 2013
भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बार 1500 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदने की घोषणा की है। केंद्र गेहूं का समर्थन मूल्य 1350 रुपए क्विंटल घोषित कर चुका है। यानी राज्य सरकार गेंहूं पर 100 की बजाय 150 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देगी। हालांकि संभावना ये भी है कि केंद्र गेहूं पर 50 रुपए अतिरिक्त बोनस घोषित कर सकता है। शिवराज ने केंद्र से मांग की कि वह गेहूं का समर्थन मूल्य कम से कम 1600 रुपए क्विंटल रखे। रविवार को यहां किसान महापंचायत में मुख्यमंत्री ने बिजली पंप कनेक्शन पर प्रति हार्स पावर 1200 रुपए सालाना के फ्लैट रेट की भी घोषणा की। अब तक यह दर 1950 रुपए प्रति हार्सपॉवर सालाना थी। यह भी फ्लैट रेट नहीं था। इसमें स्थायी और अस्थायी कनेक्शन पर अलग-अलग दरें थीं। अब सभी तरह के कनेक्शन की एक ही दर होगी। 1200 रुपए प्रति हार्सपॉवर सालाना। महापंचायत में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की बेहतरी के लिए 6000 करोड़ रुपए खर्च करेगी। उन्होंने किसानों को विदेश यात्रा पर भेजने की भी घोषणा की। इस मौके पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने शिवराज सिंह की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा शिवराज ने वो कर दिखाया जो मैं उतर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद पर रहते नहीं कर पाया। महापंचायत में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नरेंद्रसिंह तोमर, कृषि मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया, ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव, महिला बाल विकास मंत्री रंजना बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी और पूर्व सांसद कैलाश सारंग भी थे।

 
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