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माशिमं के अधिकारी देते हैं अलग-अलग जानकारी , रिजल्ट भी छापों और 90,000 भी दो
Our Correspondent :18 May 2016
हरीश बाबू
भोपाल। यूं तो माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश में मार्कशीट व अन्य खामियों को लेकर तो कई गलतियां प्रकाशित होती रहती है। लेकिन इस बार माशिमं ने नया ही कारनामा किया है। माशिमं द्वारा 21 अप्रैल 2016 को एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में रिजल्ट को प्रकाशित करने के लिए प्रपोजल मंगाए गए थे। आधी-अधूरी जानकारी के साथ प्रकाशित सूचना में स्पष्ट नहीं था कि 10वीं और 12वीं के रिजल्ट को वेबसाइट/आईवीआरएस/एसएमएस से प्रकाशित करने पर 90,000 हजार रूपये प्रकाशित करने वाले को देने होंगे। इस संबंध में और कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। जब जानकारी के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल सम्पर्क किया गया तो मंडल द्वारा गोल-मोल जानकारी देकर जवाबदारी से पल्ला झाड़ लिया गया।
अब जब 10वीं और 12वीं के रिजल्ट एनाउंस हो चुंके हैं। तब यह सवाल उठता है कि किन वेबसाइट व फर्म्स के प्रपोजल को रिजल्ट प्रकाशित करने के लिए चुना गया? प्रपोजल सूचना में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया था कि कितनी फर्मों के प्रपोजल को सलेक्ट किया जाएगा। प्रपोजल मंगाए जाने के लिए सिर्फ इतनी ही जानकारी दी गई है कि वेबसाइट पर रिजल्ट प्रकाशित करने पर 90,000 रूपये का भुगतान किये जाएंगे, लेकिन माशिमं के अधिकारी मानते हैं कि जो भी फर्म आवेदन करती है। उसे माशिमं को राशि भुगतान करना पड़ता है तभी उन्हें रिजल्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी जाती है। सवाल तो यह भी उठता है कि कोई की फर्म या वेबसाइट माशिमं के 10वीं व 12वीं के रिजल्ट प्रकाशित करने के लिए 90,000 हजार का भुगतान क्यों करेगी? इन रिजल्ट को प्रकाशित करने में उन फर्म्स को क्या फायदा होगा?
तकनीकी रूप से सक्षमता का ढोंग करने वाली माध्यमिक शिक्षा मंडल की स्वयं की वेबसाइट ही अपडेट नहीं है। वेबसाइट देखकर अगर कोई व्यक्ति कुछ जानकारी फोन से प्राप्त करना चाहे तो उसे वो मिल ही नहीं पाएगी। क्योंकि कॉन्टेक्ट वाला पेज ही ओपन नहीं होता। वही 17 मई को 10वीं का रिजल्ट प्रकाशित होने के बावजूद वेबसाइट की लास्ट अपडेट तारीख 13 मई 2016 ही दिखा रही है। एक्जामिनेशन वाले पेज में 2014-15 की प्रवेष एवं परीक्षा संबंधी मार्गदर्शिका को ही अपलोड किया गया। लगता है माषिमं ने 2015-16 में पूर्व मार्गदर्षिका को ही आधार बनाया। वहीं फोटो गेलरी भी खाली है। यहां भी माषिमं में कभी भी कोई गतिविधियां संचालित नहीं होती। स्टडी मटेरियल का पेज भी खाली है। वाही जिम्मेदारान अफसर अलग - अलग राग अलापते हैं।
मुझे याद नहीं है कि कितने प्रपोजल आए थे। यही कोई 6-7 प्रपोजल आए होंगे। जिन्होंने प्रपोजल के साथ 90,000 हजार जमा किये उन्हें ही रिजल्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी गई है। हमने कोई टेंडर जारी नहीं किया था। सिर्फ प्रपोजल ही बुलाए थे, जो भी प्रपोजल देता है उन सभी के प्रपोजल स्वीकार कर लिए जाते हैं।
- भूपेश गुप्ता, आईटी हेड, माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्यप्रदेश, भोपाल
हमने जो टेंडर प्रकाशित कराया था। उसमें सारी जानकारी दी गई थी, जो भी समाचार वेबसाइट 90,000 हजार रूपये देती है। उसे ही रिजल्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी जाती है। हमने उस सूचना में स्पष्ट रूप से लिख कर प्रकाशित किया था कि प्रपोजल के साथ ही पैसे भी जमा कराने होंगे।
- एस.के. चौरसिया, जनसम्पर्क अधिकारी, माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्यप्रदेश, भोपाल।

अरबिंदो में दाखिले के नाम पर 12 लाख ठगे, 56 लाख में हुई थी डील
Our Correspondent: 11 April 2014
इंदौर/भोपाल। पीएमटी फर्जीवाड़े में स्पेशल टास्क फोर्स के हत्थे चढ़े सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर के छात्र हरिज्ञानसिंह विमल ने इंदौर के पंजाबी परिवार को भी ठगा था।

परिवार के दो रिश्तेदारों की बेटियों को अरबिंदो मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के नाम पर 12 लाख रूपए लिए और भाग गया। परिवार ने छात्र केखिलाफ अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की कोर्ट में परिवाद लगाया था। अब छात्र की पेशी के लिए कोर्ट एसटीएफ को गिरफ्तारी वारंट जारी करने जा रही है।
समर कॉलोनी की अमनदीप कौर पति परमिंदर झज ने बताया, दो साल पहले वे दूर के रिश्तेदार पंजाब की जसनीत कौर पिता गुरमीतसिंह मान और रमनप्रीत कौर पिता हरपिंदरसिंह के दाखिले को लेकर अरबिंदो मेडिकल कॉलेज गई थीं। वहां हरिज्ञानसिंह विमल ने उन्हें जीएम प्रदीप रघुवंशी से मिलवाया था। जीएम रघुवंशी ने दाखिले का आश्वासन देकर पैसे की बात हरिज्ञान से करने को कहा था।

मांगे थे 35 लाख, सौदा तय हुआ 28 में

हरिज्ञान ने दोनों छात्राओं के प्रवेश के लिए 38-38 लाख मांगे थे, पर सौदा 28-28 लाख पर तय हुआ था। दोनों की सीटें बुक करने उसने 2-2 लाख रूपए लिए थे, जिसकी उन्हें कॉलेज से फर्जी रसीदें भी मिली थीं। 15 दिन बाद उसने नामांकन के लिए 8 लाख और मांगे। छात्राओं के पिता गुरमीतसिंह व हरपिंदर ने हरिज्ञान को 8 लाख दिए, पर उसने दाखिला नहीं करवाया। पहले बहानेबाजी करता रहा, फिर गायब हो गया।

हरिज्ञान के भाई ने लौटाए 4 लाख

पीडित परिवार हरिज्ञान की तलाश में लगा था, इसी बीच अमनदीप कौर से हरिज्ञान का बड़ा भाई लाखनसिंह मिला और उसने अपने भाई के कारनामे स्वीकार कर 27 सितंबर 2012 को चार लाख रूपए लौटा दिए। शेष 8 लाख रूपए भी देने का वादा किया।

संजीव सक्सेना के बाद दिलीप गुप्ता का स्कैच जारी

एसटीएफ ने गुरूवार रात बिल्डर दिलीप गुप्ता का स्कैच जारी कर दिया। एसटीएफ को दिलीप गुप्ता की दुग्ध संघ भर्ती परीक्षा के फर्जीवाड़े में तलाश है। उसके ऊपर एसटीएफ ने पांच हजार रूपए के इनाम की भी घोष्ाणा की है। संजीव सक्सेना के साथ उसका भी फरारी उद्घोष्ाणा में नाम है। शाहपुरा निवासी दिलीप गुप्ता दलाली करता था। इससे पहले एसटीएफ ने कांग्रेस नेता संजीव सक्सेना का फोटो जारी किया था।

निलंबित सीएसपी समेत दो आरोपियों पर इनाम

भोपाल. एसटीएफ ने ग्वालियर के निलंबित सीएसपी रक्षपाल सिंह यादव की सूचना देने पर तीन हजार रूपए के इनाम का ऎलान किया है। इसी तरह मंदसौर स्थित आलोक नर्सिग होम के संचालक पर भी एक हजार रूपए के इनाम की घोष्ाणा की गई है। एसटीएफ सूत्रों के अनुसार गोपालगंज सागर निवासी रक्षपाल सिंह यादव ग्वालियर में सीएसपी थे। उन्होंने अपने बेटे अजीत यादव का पीएमटी-2012 में पैसा देकर चयन कराया था।

इस मामले में अजीत ने आत्मसमर्पण किया था लेकिन रक्षपाल फरार हो गया। नौकरी से गायब रहने पर रक्षपाल को निलंबित किया गया। इसके बाद एसटीएफ ने बुधवार को तीन हजार रूपए के इनाम की घोष्ाणा कर दी। इसी तरह एसटीएफ ने मंदसौर निवासी डॉ. आलोक मेहता पर भी एक हजार रूपए का इनाम की घोष्ाणा की है।

समर्पण के बाद गिरफ्तारी

प्री-पीजी मामले में फरार चल रहे डॉक्टर आयुष्ा मेहता को एसटीएफ ने गुरूवार दोपहर दो बजे न्यायालय से गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले एसटीएफ के अफसर केस डायरी लेकर जिला अदालत पहुंचे थे। उल्लेखनीय है कि आयुष्ा लंबे अरसे से फरार था। वह बुधवार दोपहर न्यायालय में समर्पण करने पहुंचा था। इसके बाद अदालत ने एसटीएफ से कहा था कि आयुष्ा के संबंध में केस डायरी लेकर उपस्थित हो।/font>

20 ब्यूटी पार्लरों पर कर विभाग के छापे
Our Correspondent : 3 July 2012
इंदौर। सोमवार को शहर के 20 संस्थानों पर वाणिज्यिक कर विभाग की 30 टीमों ने दबिश दी। इससे ब्यूटी पार्लर, स्पा व सैलून प्रबंधकों में हड़कंप मच गया। ये सभी वे संस्थान हैं जिन्होंने विभाग के नोटिस देने के बाद भी विलासिता एवं आमोद-प्रमोद और विज्ञापन कर अधिनियम-2011 में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था।
कमिश्नर अमित राठौर के मार्गदर्शन व डिप्टी कमिश्नर (इन्फोर्समेंट) सुनील मिश्रा ने कहा कि एक्ट को लागू हुए सालभर से अधिक हो गया है लेकिन कई संस्थानों ने न रजिस्ट्रेशन लिया और न ही टैक्स भरा इसलिए एक साथ यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा दस्तावेजों की जांच हो रही है और राशि का खुलासा मंगलवार तक हो सकेगा। इस कार्रवाई में इंदौर डिवीजन एक, दो व तीन के करीब सौ अधिकारी व कर्मचारी शामिल थे। श्री मिश्रा के अनुसार जिन संस्थानों में छापे मारे गये उनमें बेबलिस (पलासिया), टच एंड ग्लो (मंगलसिटी), वैलेजा (ट्रेजर आईलैंड), राग (आनंद बाजार), क्रेमसन (एमजी रोड), ला सॉल (सी-21 मॉल), हबीब्स (गीताभवन), मैट्रिक्स (गीताभवन, स्कीम 54), एक्सप्रेशन, लाइफस्टाइल (दो स्थानों पर), वेरोनिका (स्कीम 94 बॉम्बे हॉस्पिटल), मानसी ब्यूटी एकेडमी एंड पार्लर (रतलाम कोठी, न्यू पलासिया), जीबा थाई स्पा (सेंट्रल मॉल), एवेडा थाई स्पा (ट्रेजर आईलैंड), एसआर इंटरप्राइजेस (न्यू पलासिया) व स्टाइल (दो संस्थान) शामिल हैं।

चांदी के फर्नीचर और नेताओं से जुड़ी सीडियां मिली
Our Correspondent : 23 June 2012
भोपाल। आयकर विभाग ने बिल्डर दिलीप सूर्यवंशी के ठिकानों से बेशकीमती चांदी का फर्नीचर, पचास विदेशी शराब की बोतलें और कई नेताओं की सीडी भी बरामद की है। सूत्रों की मानें तो सूर्यवंशी के निवास से 50 से अधिक अलग-अलग ब्रांड की आयतित शराब बरामद हुई है। विभाग इसकी जानकारी एक्साइज विभाग को देने जा रहा है। यही नहीं जिस टेबल और नक्काशीदार फर्नीचर पर बैठकर सूर्यवंशी का परिवार अपने मेहमानों को खाना खिलाता था वो चांदी की परत चढ़े हुए थे।
इनके अलावा दिलीप सूर्यवंशी के ठिकानों से बड़ी मात्रा में नेताओं से जुड़ी सीडियां मिली है। इन सीडियों में प्रदेश के कई सफेदपोश नेताओं की तस्वीरें हैं। इन नेताओं से सूर्यवंशी के संबंधों की भी जांच कराई जा रही है।
आयकर विभाग के छापे में एक और बड़े खुलासे में पता चला है कि दिलीप सूर्यवंशी 1820 डंपर का मालिक है। एक की कीमत 25 लाख आंकने पर कुल दाम 455 करोड़ रूपए होता है। इतना ही नहीं, सूर्यवंशी के निर्माण उपकरणों के जखीरे में करीब सवा सौ करोड़ रूपए की कीमत के 143 ग्र्रेडर और 82 करोड़ रूपए कीमत के 11 क्रशर मेस्टो भी शामिल हैं। खास बात यह है कि सूर्यवंशी का यह साम्राज्य 8 साल में खड़ा हुआ है। वह वर्ष 2003 तक साधारण बिल्डर और इंजीनियर के तौर पर काम करता था। सूत्र बताते हैं, आयकर विभाग तेज रफ्तार से बड़ी संपत्ति का हिसाब खोज रहा है।
दिलीप बिल्डकॉन ने अगस्त 2007 से नवंबर 2010 तक अपने पांच संयत्रों से 36 लाख टन गिट्टी क्रश की है। इसमें से 15.47 लाख टन कंपनी के भोपाल व इंदौर प्लांट से क्रश की गई है। शेष हिमाचल के कांगड़ा और गुजरात के उदालपुरा व धनोदरा के प्लांटों में क्रश की गई। यह जांच का विषय है कि क्या इतनी गिट्टी क्रश करने की रॉयल्टी सरकार को दी गई है? ध्यान रहे, दिलीप बिल्डकॉन के पास एक दर्जन से अधिक क्रशर प्लांट हैं। इनकी क्रशिंग का हिसाब अभी सामने नहीं आया है। दिलीप सूर्यवंशी के यहां से भोपाल के मास्टरप्लान से संबंधित दस्तावेज हाथ लगे हैं। दोनों के ठिकानों से बड़ी मात्रा में अन्य कागजात भी मिले हैं, जिन्हें गाडियों में भरकर इनकम टैक्स दफ्तर ले जाया गया है। सूर्यवंशी के निवास पर बड़ी-बड़ी पेटियां फाइलों से भरी गई हैं। सूर्यवंशी और सुधीर शर्मा के यहां कार्रवाई में जमीनों से जुड़े अहम दस्तावेज मिले हैं। इनमें 1500 एकड़ से अधिक जमीन होने की जानकारी मिली है। इन जमीनों में किए गए निवेश के लिए जुटाई गई राशि कहां से आई और इनकी वर्तमान कीमत क्या है इसका भी आकलन करने में टीम जुट गई है।

38 बैंक खाते, करोड़ों रुपए और 10 किलो सोना मिला
Our Correspondent : 22 June 2012
भोपाल। दिलीप सूर्यवंशी और सुधीर शर्मा के ठिकानों पर आयकर विभाग की कार्यवाही दूसरे दिन भी जारी रही। टीम को दूसरे दिन भी करोड़ों की संपत्ति होने के दस्तावेज मिले. कंस्ट्रक्शन के कारोबार से जुड़े सूर्यवंशी के घर से जो दस्तावेज मिले। दस्तावेज़ों के अनुसार सूर्यवंशी की भोपाल और आसपास करीब 300 एकड़ से ज्यादा जमीन है। वहीं सुधीर शर्मा के नेहरू नगर स्थित आकृति गार्डन में 12 मकान व फ्लैट होने के कागजात मिले हैं। अब तक सोने चांदी के जेवरात का मूल्यांकन 10 करोड़ से अधिक पहुंच गया है। इसमें दस किलो सोना और 100 किलो चांदी है। नकदी का आंकड़ा पांच करोड़ से बढ़कर 6.5 करोड़ रुपए पहुंच गया है।
इनके अलावा इंदौर में दिलीप बिल्डकॉन के अब तक 38 बैंक खाते मिले हैं जिनके ट्रांजेक्शन को रोक दिया गया है। छह लॉकर भी सील किए गए हैं। चार लॉकर डायरेक्टर सीए संजय मेहता के मिले हैं जिनमें से दो स्वयं और एक-एक पत्नी और मां के नाम से है। यही नहीं वंदना नगर निवासी मुकेश सिंह गौर और स्कीम 74 निवासी राजेंद्र नायक के यहां से भी एक-एक बैंक लॉकर मिला जिन्हें सील किया गया है। टीम को इंदौर से 28 लाख रुपए मिले थे जिनमें से 20 लाख की नकदी अवैध पाई गई है। उसे जब्त कर लिया है।
राजेंद्र नायक के घर से 16 लाख रुपए, वहीं एमएनआर माइनिंग के मुकेश सिंह गौर के यहां से चार लाख रुपए मिले हैं। इन दोनों ठिकानों से आयकर टीम को दो किलो सोने के जेवरात भी मिले थे जिसे महिलाओं के अनुपात (प्रति महिला 500 ग्राम) में सही पाए जाने पर उसे वापस कर दिया गया है। आठ स्थानों पर की गई कार्रवाई में से गुरुवार शाम तक चार स्थानों पर कार्रवाई खत्म हो गई थी। शेष चार स्थानों में संजय मेहता का घर और मोदी टॉवर स्थित दफ्तर के साथ ही बंशी प्लाजा स्थित उत्तम इंफ्रा-नेट का दफ्तर और राजेंद्र सिंह का घर शामिल है। संजय मेहता के साथ ही अन्य जगह देर रात तक कार्रवाई खत्म हो सकती है।
कहां-कहां जमीन
दिलीप सूर्यवंशी की रातीबड़ में 200 एकड़, नीलबड़ में दो जगहों पर 30 एकड़, मेंडोरी में 2 एकड़, मंडोरा में 6 एकड़, छपरी गांव में 10 एकड़, पीपलनेर में 4 एकड़, सेवनिया गौड़, अनारा, बंजारी, कोलार रोड और अहमदपुर कला में भी 20 एकड़ से अधिक जमीनें की जानकारी मिली है। इसके अलावा नवोदय स्कूल रातीबड़ के पास स्टोन क्रेशर, भागवान धामनिया गावं में एक क्रेशर और केरवा में डेढ़ एकड़ में बनी कोठी भी शामिल आयी। वहीं सुधीर शर्मा के 12 मकान व फ्लैट होना मिला है। आकृति गार्डन नेहरू नगर में डी-55, डी-56, डी-51 जिसमें इसमें सुधीर शर्मा की एक कंपनी में डायरेक्टर अभिजीत रहते हैं। डी-50, ई-3 व ई-4 में सुधीर शर्मा दफ्तर चलाते हैं। आकृति गार्डन में ही 5 फ्लैट के दस्तावेज शर्मा के यहां से मिले। रुड़की में ऑर्चिड फार्मूलेशन प्रा. लि. नामक दवा फैक्ट्री शामिल है। सुधीर शर्मा के करीबी जबलपुर निवासी व वैभव इंटरप्राइजेज के संचालक अरुण चोपड़ा के पास जमीनों के दस्तावेज, आधा दर्जन फ्लैट और 5 एकड़ जमीन के दस्तावेज मिले हैं।


प्रशिक्षु डीएसपी अरविंद व स्टेला को बताया मौत का जिम्मेदार
Our Correspondent : 21 June 2012
सागर। जवाहरलाल नेहरू पुलिस अकादमी में प्रशिक्षु डीएसपी ओमप्रकाश केन ने अपने सुसाइड नोट में प्रशिक्षु डीएसपी अरविंद सिंह ठाकुर व उसकी महिला मित्र प्रशिक्षु डीएसपी स्टेला को मौत का जिम्मेदार ठहराया है। सुसाइड नोट के मुताबिक ओमप्रकाश ने दोनों को एक दिन आपत्तिजनक स्थिति में देखा था, इसके बाद वे उसका नाम एक अन्य प्रशिक्षु महिला डीएसपी से जोड़कर उसे प्रताडि़त करने लगे। पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार ओपी ने सुसाइड नोट में लिखा है कि- 13 जून को रात ८ बजे जब मैं अपने कमरे में आया तो रूम पार्टनर अरविंद और स्टेला बाथरूम में थे। मुझे देखते ही पहले स्टेला बाथरूम से निकली और बाद में अरविंद बाहर आया। इसी का बदला लेने के लिए ही यह दोनों मेरा नाम एक महिला प्रशिक्षु डीएसपी से जोड़कर मुझे प्रताडि़त करने लगे, जबकि वह बिल्कुल सही लड़की है। मुझे अपनी बेगुनाही साबित करने का और तरीका नहीं समझ आ रहा, इसलिए यह कदम उठा रहा हूं। मेरी मौत के जिम्मेदार अरविंद ठाकुर ओर स्टेला होंगे।
उधर ओमप्रकाश के पिता बालकृष्ण केन ने बेटे की हत्या का संदेह जताते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि जेएनपीए से उन्हें बेटे की मौत की सूचना नहीं दी गई। किसी अन्य परिचित से उन्हें इस बात की जानकारी मिली। पिता ने निजी हॉस्पिटल में बेटे के इलाज को लेकर भी सवाल उठाए। सागर जोन के आईजी पंकज श्रीवास्तव का कहना है कि सुसाइड नोट में डीएसपी अरविंद व स्टेला पर लगाए गए आरोपों के संबंध में दोनों से पूछताछ की बात कही है।

दिलीप सूर्यवंशी और सुधीर शर्मा के 60 ठिकानों पर आयकर के छापे
Our Correspondent : 21 June 2012
भोपाल। आयकर विभाग ने बुधवार को प्रदेश भाजपा से जुड़े दो व्यवसायियों दिलीप सूर्यवंशी और सुधीर शर्मा के देशभर में करीब 60 ठिकानों छापा मार कार्यवाही की। यह छापे भोपाल के अलावा इंदौर, जबलपुर, कोलकाता, मुंबई समेत दस शहरों में मारे गये। छापे में करीब छह करोड़ रुपए नकद और 200 एकड़ जमीन के दस्तावेज मिले हैं।
नोट गिनने के लिए टीम को मशीन लगानी पड़ी। वहीं ज्वेलरी के मूल्यांकन का काम भी चल रहा है।
जानकारी के अनुसार इनके अलावा जो अन्य व्यक्ति छापे की जद में आए हैं उनमें से कुछ भाजपा के पदाधिकारी व बड़े नेताओं के करीबी बताए जाते हैं। आयकर विभाग का एक जांच दल सुबह अरेरा कॉलोनी स्थित दिलीप सूर्यवंशी के निवास पर पहुंचा। जबकि दूसरी टीम ने नेहरू नगर स्थित आकृति गार्डन में सुधीर शर्मा के घर पर छापे की कार्रवाई शुरू की। शर्मा आकृति गार्डन के दो मकानों में रहते हैं। इसी कॉलोनी में उनके पास कुछ और मकान होने का भी पता चला है। आयकर विभाग ने इन मकानों को कंट्रोल रूम बना लिया है। यही नहीं आयकर विभाग ने मुख्यमंत्री के निजी सचिव हरीश सिंह के भाई भारत सिंह के यहां भी छापा मारा जो भाजपा की नेता सीमा सिंहके पति हैं।
कहाँ पड़े छापे
इनके अलावा आयकर विभाग ने दिलीप बिल्डकॉन समूह की एक कंपनी में पार्टनर देवेंद्र जैन के राजगढ़ और भोपाल में गुलमोहर स्थित निवास पर छापा मारा। देवेंद्र, के भाई उपेंद्र जैन और मुकेश जैन आईपीएस अफसर हैं। उपेंद्र जैन उज्जैन में पदस्थ हैं और मुकेश जैन केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सुरक्षा में संबद्ध हैं। बताया जाता है की प्रारंभिक जांच में 20 से अधिक कंपनियों, रातीबड़ व बिलकिसगंज में 200 एकड़ जमीन, माइनिंग और रियल स्टेट में निवेश के कागज मिले हैं। छापे के दौरान यह भी पता चला कि दिलीप बिल्डकॉन कंपनी का सालाना टर्नओवर 2004 में 13 करोड़ था, सिर्फ आठ साल में ही यह बढ़कर 1000 करोड़ पहुंच गया। इसके बावजूद सूर्यवंशी काफी कम टैक्स दे रहे थे। दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि दिलीप बिल्डकॉन के पास इस समय 5000 करोड़ के ठेके मप्र समेत अन्य राज्यों में हैं।
यह आए कार्यवाही की जद में
जिन लोगों पर आयकर छापे की कार्रवाई उनमें मुख्यमंत्री के निजी सचिव हरीश सिंह के भाई व दिलीप बिल्डकॉन के एम्पलाईभारत सिंह जो। दिलीप बिल्डकॉन में डायरेक्टर देवेंद्र जैन, दिलीप बिल्डकॉन में एम्पलाई राजा घोष, चार्टर्ड एकाउंटेंट संजय मेहता, दो साल पहले सुधीर शर्मा के साथ वीएनएस ग्रुप का सौदा करने वाले संजय पांडे करने वाले सुधीर शर्मा के भाई बृजेंद्र शर्मा शामिल हैं। इनके अलावा देवेंद्र जैन के भाई आईपीएस अफसर मुकेश जैन व उपेंद्र जैन के घर भी छापे की कार्रवाई की गई। इनके अलावा एक अखबार के कर्ताधर्ता जेके सिंह, दिलीप सूर्यवंशी की एक कंपनी में पार्टनर जेएस वालिया, कांग्रेस से जुड़े छात्र नेता रहे व बीयू के सतत शिक्षा विभाग में परियोजना अधिकारी व चाणक्य कॉलेज के संचालक नरेंद्र त्रिपाठी, सुधीर शर्मा से जुड़ेराजेंद्र नायक, राजीव सिन्हा व नीलेश उपाध्याय तथा मप्र सरकार में एक मंत्री के करीबी जगदीश धनेरिया के घर भी छापे की कार्रवाई की गई।
दोनों के ग्रुप में यह कंपनियां शामिल
दिलीप सूर्यवंशी ग्रुप की कंपनियों में दिलीप बिल्डकॉन प्रा.लि., सूर्यवंशी मिनरल्स प्रा.लि., डीबीएल निडियल-मोडासा टोल-वे लि., डीबीएल सरदारपुर-बदनावर टोल-वे लि., डीबीएल सिलवानी-सुल्तानगंज टोल-वे लि., कैमूर आयरन ओर प्रा.लि. व सूर्यवंशी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. सहित अन्य कंपनियां शामिल हैं। जबकि सुधीर शर्मा ग्रुप की कंपनियों में एसआर फैरो अलॉयज लिमिटेड, श्याम रिफ्रेकटरीज लि., एसआर सिरेमिक एंड रिफ्रेकटरीज प्रा.लि., एसआर फार्मूलेशन इंडिया प्रा.लि., एसआर सिंह एंड कंपनी प्रा.लि., शिवालिका मिनरल्स जबलपुर, जय मिनरल्स व संगीता मिनरल्स, ऑर्चिड बायोटैक प्रा.लि., विद्या निकेतन समिति (वीएनएस) ग्रुप के शिक्षण संस्थान व उत्तम एग्रो इंडस्ट्री लिमिटेड शामिल हैं।
 
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