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माशिमं के अधिकारी देते हैं अलग-अलग जानकारी , रिजल्ट भी छापों और 90,000 भी दो
Our Correspondent :18 May 2016
हरीश बाबू
भोपाल। यूं तो माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश में मार्कशीट व अन्य खामियों को लेकर तो कई गलतियां प्रकाशित होती रहती है। लेकिन इस बार माशिमं ने नया ही कारनामा किया है। माशिमं द्वारा 21 अप्रैल 2016 को एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में रिजल्ट को प्रकाशित करने के लिए प्रपोजल मंगाए गए थे। आधी-अधूरी जानकारी के साथ प्रकाशित सूचना में स्पष्ट नहीं था कि 10वीं और 12वीं के रिजल्ट को वेबसाइट/आईवीआरएस/एसएमएस से प्रकाशित करने पर 90,000 हजार रूपये प्रकाशित करने वाले को देने होंगे। इस संबंध में और कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। जब जानकारी के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल सम्पर्क किया गया तो मंडल द्वारा गोल-मोल जानकारी देकर जवाबदारी से पल्ला झाड़ लिया गया।
अब जब 10वीं और 12वीं के रिजल्ट एनाउंस हो चुंके हैं। तब यह सवाल उठता है कि किन वेबसाइट व फर्म्स के प्रपोजल को रिजल्ट प्रकाशित करने के लिए चुना गया? प्रपोजल सूचना में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया था कि कितनी फर्मों के प्रपोजल को सलेक्ट किया जाएगा। प्रपोजल मंगाए जाने के लिए सिर्फ इतनी ही जानकारी दी गई है कि वेबसाइट पर रिजल्ट प्रकाशित करने पर 90,000 रूपये का भुगतान किये जाएंगे, लेकिन माशिमं के अधिकारी मानते हैं कि जो भी फर्म आवेदन करती है। उसे माशिमं को राशि भुगतान करना पड़ता है तभी उन्हें रिजल्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी जाती है। सवाल तो यह भी उठता है कि कोई की फर्म या वेबसाइट माशिमं के 10वीं व 12वीं के रिजल्ट प्रकाशित करने के लिए 90,000 हजार का भुगतान क्यों करेगी? इन रिजल्ट को प्रकाशित करने में उन फर्म्स को क्या फायदा होगा?
तकनीकी रूप से सक्षमता का ढोंग करने वाली माध्यमिक शिक्षा मंडल की स्वयं की वेबसाइट ही अपडेट नहीं है। वेबसाइट देखकर अगर कोई व्यक्ति कुछ जानकारी फोन से प्राप्त करना चाहे तो उसे वो मिल ही नहीं पाएगी। क्योंकि कॉन्टेक्ट वाला पेज ही ओपन नहीं होता। वही 17 मई को 10वीं का रिजल्ट प्रकाशित होने के बावजूद वेबसाइट की लास्ट अपडेट तारीख 13 मई 2016 ही दिखा रही है। एक्जामिनेशन वाले पेज में 2014-15 की प्रवेष एवं परीक्षा संबंधी मार्गदर्शिका को ही अपलोड किया गया। लगता है माषिमं ने 2015-16 में पूर्व मार्गदर्षिका को ही आधार बनाया। वहीं फोटो गेलरी भी खाली है। यहां भी माषिमं में कभी भी कोई गतिविधियां संचालित नहीं होती। स्टडी मटेरियल का पेज भी खाली है। वाही जिम्मेदारान अफसर अलग - अलग राग अलापते हैं।
मुझे याद नहीं है कि कितने प्रपोजल आए थे। यही कोई 6-7 प्रपोजल आए होंगे। जिन्होंने प्रपोजल के साथ 90,000 हजार जमा किये उन्हें ही रिजल्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी गई है। हमने कोई टेंडर जारी नहीं किया था। सिर्फ प्रपोजल ही बुलाए थे, जो भी प्रपोजल देता है उन सभी के प्रपोजल स्वीकार कर लिए जाते हैं।
- भूपेश गुप्ता, आईटी हेड, माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्यप्रदेश, भोपाल
हमने जो टेंडर प्रकाशित कराया था। उसमें सारी जानकारी दी गई थी, जो भी समाचार वेबसाइट 90,000 हजार रूपये देती है। उसे ही रिजल्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी जाती है। हमने उस सूचना में स्पष्ट रूप से लिख कर प्रकाशित किया था कि प्रपोजल के साथ ही पैसे भी जमा कराने होंगे।
- एस.के. चौरसिया, जनसम्पर्क अधिकारी, माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्यप्रदेश, भोपाल।

अरबिंदो में दाखिले के नाम पर 12 लाख ठगे, 56 लाख में हुई थी डील
Our Correspondent: 11 April 2014
इंदौर/भोपाल। पीएमटी फर्जीवाड़े में स्पेशल टास्क फोर्स के हत्थे चढ़े सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर के छात्र हरिज्ञानसिंह विमल ने इंदौर के पंजाबी परिवार को भी ठगा था।

परिवार के दो रिश्तेदारों की बेटियों को अरबिंदो मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के नाम पर 12 लाख रूपए लिए और भाग गया। परिवार ने छात्र केखिलाफ अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की कोर्ट में परिवाद लगाया था। अब छात्र की पेशी के लिए कोर्ट एसटीएफ को गिरफ्तारी वारंट जारी करने जा रही है।
समर कॉलोनी की अमनदीप कौर पति परमिंदर झज ने बताया, दो साल पहले वे दूर के रिश्तेदार पंजाब की जसनीत कौर पिता गुरमीतसिंह मान और रमनप्रीत कौर पिता हरपिंदरसिंह के दाखिले को लेकर अरबिंदो मेडिकल कॉलेज गई थीं। वहां हरिज्ञानसिंह विमल ने उन्हें जीएम प्रदीप रघुवंशी से मिलवाया था। जीएम रघुवंशी ने दाखिले का आश्वासन देकर पैसे की बात हरिज्ञान से करने को कहा था।

मांगे थे 35 लाख, सौदा तय हुआ 28 में

हरिज्ञान ने दोनों छात्राओं के प्रवेश के लिए 38-38 लाख मांगे थे, पर सौदा 28-28 लाख पर तय हुआ था। दोनों की सीटें बुक करने उसने 2-2 लाख रूपए लिए थे, जिसकी उन्हें कॉलेज से फर्जी रसीदें भी मिली थीं। 15 दिन बाद उसने नामांकन के लिए 8 लाख और मांगे। छात्राओं के पिता गुरमीतसिंह व हरपिंदर ने हरिज्ञान को 8 लाख दिए, पर उसने दाखिला नहीं करवाया। पहले बहानेबाजी करता रहा, फिर गायब हो गया।

हरिज्ञान के भाई ने लौटाए 4 लाख

पीडित परिवार हरिज्ञान की तलाश में लगा था, इसी बीच अमनदीप कौर से हरिज्ञान का बड़ा भाई लाखनसिंह मिला और उसने अपने भाई के कारनामे स्वीकार कर 27 सितंबर 2012 को चार लाख रूपए लौटा दिए। शेष 8 लाख रूपए भी देने का वादा किया।

संजीव सक्सेना के बाद दिलीप गुप्ता का स्कैच जारी

एसटीएफ ने गुरूवार रात बिल्डर दिलीप गुप्ता का स्कैच जारी कर दिया। एसटीएफ को दिलीप गुप्ता की दुग्ध संघ भर्ती परीक्षा के फर्जीवाड़े में तलाश है। उसके ऊपर एसटीएफ ने पांच हजार रूपए के इनाम की भी घोष्ाणा की है। संजीव सक्सेना के साथ उसका भी फरारी उद्घोष्ाणा में नाम है। शाहपुरा निवासी दिलीप गुप्ता दलाली करता था। इससे पहले एसटीएफ ने कांग्रेस नेता संजीव सक्सेना का फोटो जारी किया था।

निलंबित सीएसपी समेत दो आरोपियों पर इनाम

भोपाल. एसटीएफ ने ग्वालियर के निलंबित सीएसपी रक्षपाल सिंह यादव की सूचना देने पर तीन हजार रूपए के इनाम का ऎलान किया है। इसी तरह मंदसौर स्थित आलोक नर्सिग होम के संचालक पर भी एक हजार रूपए के इनाम की घोष्ाणा की गई है। एसटीएफ सूत्रों के अनुसार गोपालगंज सागर निवासी रक्षपाल सिंह यादव ग्वालियर में सीएसपी थे। उन्होंने अपने बेटे अजीत यादव का पीएमटी-2012 में पैसा देकर चयन कराया था।

इस मामले में अजीत ने आत्मसमर्पण किया था लेकिन रक्षपाल फरार हो गया। नौकरी से गायब रहने पर रक्षपाल को निलंबित किया गया। इसके बाद एसटीएफ ने बुधवार को तीन हजार रूपए के इनाम की घोष्ाणा कर दी। इसी तरह एसटीएफ ने मंदसौर निवासी डॉ. आलोक मेहता पर भी एक हजार रूपए का इनाम की घोष्ाणा की है।

समर्पण के बाद गिरफ्तारी

प्री-पीजी मामले में फरार चल रहे डॉक्टर आयुष्ा मेहता को एसटीएफ ने गुरूवार दोपहर दो बजे न्यायालय से गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले एसटीएफ के अफसर केस डायरी लेकर जिला अदालत पहुंचे थे। उल्लेखनीय है कि आयुष्ा लंबे अरसे से फरार था। वह बुधवार दोपहर न्यायालय में समर्पण करने पहुंचा था। इसके बाद अदालत ने एसटीएफ से कहा था कि आयुष्ा के संबंध में केस डायरी लेकर उपस्थित हो।/font>

20 ब्यूटी पार्लरों पर कर विभाग के छापे
Our Correspondent : 3 July 2012
इंदौर। सोमवार को शहर के 20 संस्थानों पर वाणिज्यिक कर विभाग की 30 टीमों ने दबिश दी। इससे ब्यूटी पार्लर, स्पा व सैलून प्रबंधकों में हड़कंप मच गया। ये सभी वे संस्थान हैं जिन्होंने विभाग के नोटिस देने के बाद भी विलासिता एवं आमोद-प्रमोद और विज्ञापन कर अधिनियम-2011 में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था।
कमिश्नर अमित राठौर के मार्गदर्शन व डिप्टी कमिश्नर (इन्फोर्समेंट) सुनील मिश्रा ने कहा कि एक्ट को लागू हुए सालभर से अधिक हो गया है लेकिन कई संस्थानों ने न रजिस्ट्रेशन लिया और न ही टैक्स भरा इसलिए एक साथ यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा दस्तावेजों की जांच हो रही है और राशि का खुलासा मंगलवार तक हो सकेगा। इस कार्रवाई में इंदौर डिवीजन एक, दो व तीन के करीब सौ अधिकारी व कर्मचारी शामिल थे। श्री मिश्रा के अनुसार जिन संस्थानों में छापे मारे गये उनमें बेबलिस (पलासिया), टच एंड ग्लो (मंगलसिटी), वैलेजा (ट्रेजर आईलैंड), राग (आनंद बाजार), क्रेमसन (एमजी रोड), ला सॉल (सी-21 मॉल), हबीब्स (गीताभवन), मैट्रिक्स (गीताभवन, स्कीम 54), एक्सप्रेशन, लाइफस्टाइल (दो स्थानों पर), वेरोनिका (स्कीम 94 बॉम्बे हॉस्पिटल), मानसी ब्यूटी एकेडमी एंड पार्लर (रतलाम कोठी, न्यू पलासिया), जीबा थाई स्पा (सेंट्रल मॉल), एवेडा थाई स्पा (ट्रेजर आईलैंड), एसआर इंटरप्राइजेस (न्यू पलासिया) व स्टाइल (दो संस्थान) शामिल हैं।

 
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