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मध्यप्रदेश काउन्सिल ऑफ साइन्स एंड टेक्नोलॉजी

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टेक इनोवेशन चैलेंज 2016 के विजेताओं की घोषणा>
Our Correspondent :11 May 2016
भोपाल, 10 मई 2016। सीआईआई यंग इंडियन्स-भोपाल चैप्टर, सीआईआई-मध्यप्रदेश तथा राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) द्वारा आयोजित टेक इनोवेशन चैलेंज 2016 के विजेताओं की घोषणा आज की गई। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का पहला पुरस्कार यूआईटी कॉलेज की टीम को उनके आइडिया विन बिन-वाईफाई डस्ट बिन को मिला। वहीं बराबरी का मुकाबला रहने की वजह दूसरे पुरस्कार के दो संयुक्त विजेता रहे। स्कोप कॉलेज की टीम को यह पुरस्कार उनकी प्रविष्टि ऑटोमेटिक स्पीड कंट्रोलर को दिया गया जबकि टू्रबा कॉलेज की टीम ने सोलर रूफ लाइटिंग विषय पर अपने आइडिया के लिए प्राप्त किया। तृतीय पुरस्कार एलएनसीटी कॉलेज की टीम को उनके इनोवेशन जनरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी थ्रू फुटस्टेप - वॉक एण्ड शॉक के लिए दिया गया। पुरस्कार वितरण समारोह आज दोपहर आरजीपीवी के सभागार में आयोजित किया गया।
आरजीपीवी के वाइस चांसलर एवं पुरस्कार वितरण समारोह के मुख्य अतिथि प्रोफेसर पीयूष त्रिवेदी ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। इस प्रतियोगिता का आयोजन इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों के बीच नवाचार को बढ़ावा देने तथा उनकी प्रतिभा को पहचानने के उद्देश्य से किया गया था। प्रतिभागियों ने स्मार्ट सिटी, अक्षय ऊर्जा, यातायात प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन सहित ग्रामीण भारत में टेक्नालॉजी आदि विषयों पर अपनी अपनी प्रविष्टियां भेजी थीं।
पुरस्कार वितरण समारोह के पूर्व अंतिम 11 प्रतियोगियों ने निर्णायक मण्डल के समक्ष अपने आइडिया को समझाने के लिए प्रजेंटशन दिया। निर्णायक मण्डल ने आइडिया की विशिष्टता, समस्या को सुलझाने में उपयोगिता, आइडिया की व्यावहारिकता तथा उसके व्यावसायिक उपयोग आदि बिंदुओं पर विचार कर अंतिम तीन प्रविष्टियों को पुरस्कार के लिए चुना। इन तीन विजेताओं के नाम भारत सरकार को उसकी स्टार्ट अप योजना के तहत विचार के लिए भेजे जाएंगे।
प्रोफेसर पीयूष त्रिवेदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि युवाओं में उद्यमशीलता को बढ़ावा देकर उनके उत्साह, ऊर्जा व महत्वाकांक्षा को न केवल सही दिशा दी जा सकती है बल्कि देश के आर्थिक विकास में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उद्यमी नवाचारों को बढ़ावा देने वाले, रोजगार में वृद्धि करने वाले तथा आर्थिक प्रवृत्तियों को बदलने वालों के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह तो एक शुरूआत है आने वाले समय में आरजीपीवी टेक इनोवेशन जेसी अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन करेगा।
सीआईआई यंग इंडियन्स के भोपाल चैप्टर की ईएण्डआई शाखा के प्रमुख सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने कहा कि सीआईआई उद्यमिता और नवाचार विषय उनकी कार्यसूची में प्रमुखता से शामिल किया गया है। इसके तहत व्यापार और सामाजिक विकास के बीच संतुलन बैठाने के लिए अनेक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
सीआईआई यंग इंडियन्स-भोपाल चैप्टर के अध्यक्ष राकेश सुखरामानी ने कहा कि भारत इस समय उद्यमिता के तेज विकास और स्टार्ट अप्स का दौर से गुजर रहा है। भारत सरकार इसको बढ़ावा देने की दिशा हरसंभव मदद कर रही है। उन्होंने कहा कि इनोवेशन उद्यमिता का प्रमुख तत्व है तथा विद्यार्थी जीवन काल से ही इनोवेशन को बढ़ावा दिया जाना जरूरी है। यह प्रतियोगिता इसी दिशा में एक पहल थी।


अभिनेता इरफान ने रिलीज किया ‘मदारी’ फिल्म का पहला पोस्टर
11 May 2016
मुंबई। अभिनेता इरफान ने अपनी आने वाली सामाजिक-राजनीतिक फिल्म ‘मदारी’ का पहला आधिकारिक पोस्टर आज साझा किया। इस फिल्म का निर्देशन निशिकांत कामत ने किया है। पोस्टर में 49 वर्षीय अभिनेता का चेहरा गंभीर दिखाई दे रहा है। फिल्म की ‘टैग लाइन’ है ‘चुप रहिए.. देश सो रहा है’।
यह फिल्म कथित रूप से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आधारित है। इसकी शूटिंग दिल्ली, राजस्थान, देहरादून, शिमला एवं मुंबई में की गई है। इस फिल्म में जिमी शेरगिल भी भूमिका निभा रहे हैं। इस फिल्म से अभिनेता नील नितिन मुकेश ने फिल्म निर्माता के रूप में शुरआत की है। सिनेमाघरों में यह फिल्म 10 जून को दिखाई जाएगी।



देश का पहला wifi जोन इंडस्ट्रियल एरिया जोन बना पिलुखेडी़ राजगढ़
14 April 2016
कुछ दिन पहले राजगढ़ के 4 युवा आईटी इंजिनियर शकील अंजुम, तुषार भरथरे, भानु यादव & अभिषेक भरथरे ने 3 गाँव WiFi जोन किये थे।
मुख्यमंत्री ने भी राजगढ़ के युवाओ की तारीफ़ की थी इसके बाद प्रशासन ने भी इनके प्रयास सरहना की मुख्य रूप से राजगढ़ कलेक्टर तरुण पिथोढ़े जी ने डिजिटल राजगढ बनाने का प्रयास शुरू किया है
इसके बाद इंडस्ट्री क सहयोग से पिलु खेडी़ इंडस्ट्रीयल एरिया और गीलाखेडी़ गाँव wifi जोन बना जिसको इन्ही 4 युवाओ शकील अंजुम, तुषार भरथरे, भानु यादव & अभिषेक भरथरे ने wifi जोन बनाया .इस सेवा में सिक्यूरिटी का विशेष ध्यान रखा गया है
पहले लोगो को रजिस्ट्रेशन करना होगा फिर otp मैसेज मिलेगा जिसके बाद वोह इन्टरनेट एक्सेस कर पाएंगे।इस कदम से साइबर क्राइम कम होगा और इन्टरनेट स्पीड 3 से 6 एमबीपीएस तक मिलेगी। तीन एमबीपीएस तक की बैंडविड्थ अनलिमिटेड डेटा के साथ उपलब्ध कराई जो कि आवश्यकता अनुसारअनुसारt बढ़ाई जा सकती है। निजी खर्चे पर किया गया देश का पहला वाईफाई इंडस्ट्रियल एरिया है।
शुरुआत में 30 मिनट तक फ्री इन्टरनेट एक्सेस मिलेगा उसके बाद 80 से 90 रुपये में एक GB के वाउचर मिलेंगे.

तुषार इंजीनियरशकील अंजुमशकील अंजुम



हमने एक वाइ फ़ाइ आर्गेनाइजेशन बनाए है जिसका नाम वाइ फ़ाइ इंडिया आर्गेनाइजेशन है www.wifindia.org.in इसमें हम उन लोगो को निशुल्क सलाह देंगेt जो लोग अपने गाँव, कोलज, स्कूल शहर को वाइ फ़ाइ ज़ोन बनवाना चाहते है एवं युवा वर्ग को वाई फाई एवं नेटवरकिंग की ट्रेनीग देंगे. शकील अंजुम



नासा


फेसबुक और गूगल से अधिक कर्मचारी

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा में करीब 58 हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं। इनमें 18 हजार से अधिक स्थायी कर्मचारी हैं, जबकि 40 हजार से अधिक कॉन्ट्रेक्चुअल और गारंटी वर्क एम्पलॉई हैं। ये फेसबुक और गूगल जैसी मशहूर कंपनियों के कर्मचारियों की संख्या से अधिक है। नासा में सर्वोच्च पद एडमिस्ट्रेटर का होता है। इस पर अमेरिकी मूल का व्यक्ति ही रह सकता है। वर्तमान में यह जिम्मा चार्ल्स एफ बोल्डन जूनियर संभाल रहे हैं। नासा ने अपने प्रोडक्ट और सेवाओं के लिए कई प्राइवेट कंपनियों से कॉन्ट्रेक्ट किया है। इनसे नासा को आर्थिक मदद भी मिलती है। आधिकारिक आर्थिक मदद का 15 फीसदी इसके कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर खर्च होता है।

नेपाल और नामीबिया के बजट से अधिक बजट

नासाको वार्षिक बजट के अलावा अलग-अलग मदों के लिए समय-समय पर बजट मिलता रहता है। 2012 में इसका बजट अमेरिका के कुल बजट का 0.48 फीसदी था। नासा की ज्यादातर फंडिंग प्राइवेट कंपनियों से होती है। नासा के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2014 में उसके पास 1764 करोड़ डॉलर (करीब 1.02 लाख करोड़ रुपए) का बजट है, जो कि इसरो के बजट (100 करोड़ डॉलर से) से 17 गुना से अधिक है। साथ ही नामीबिया के वार्षिक बजट से चार गुना और नेपाल के बजट का पांच गुना है। दुनिया के करीब सौ देशों का बजट इससे कम है। नासा का बजट हमेशा से विवादों में रहा है। अमेरिकी कहते हैं कि उनसे लिए जा रहे टैक्स का आधा हिस्सा सिर्फ नासा के बजट के लिए ही होता है, अंतरिक्ष अंवेषण पर इतना खर्च उचित नहीं है।

70 से अिधक देशों के वैज्ञानिक

नासाके शोध और आविष्कार का फायदा पूरी दुनिया को हुआ है। इस संगठन में दुनिया के 70 से अधिक प्रमुख देशों के वैज्ञानिक और रिसर्चर्स काम कर रहे हैं। नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार वहां चार से पांच फीसदी वैज्ञानिक भारतीय या भारतीय मूल के हैं। नासा अभी तक 30 हजार से अधिक एप्लीकेशन्स पर रिसर्च कर चुका है। इनमें इंसुलिन पम्प, फायर फाइटिंग गियर, वेदर सैटेलाइट आदि शामिल हैं। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) में नासा और उसके वैज्ञानिकों का सहयोग महत्वपूर्ण है। इस प्रोग्राम के 2028 तक चलने का अनुमान है। यह कई देशाें का संयुक्त प्रोजेक्ट है। इस स्टेशन पर अब तक 15 देशों के अंतरिक्ष यात्री रिसर्च के लिए जा चुके हैं।

60 साल के लिए गूगल ने नासा से 1.16 अरब डॉलर का करार किया है। इसके तहत वह इसके तीन बड़े हैंगरों का नवीनीकरण करेगी। गूगल इसके बदले नासा के इन हैंगर का इस्तेमाल उड्‌डयन, अंतरिक्ष अन्वेषण एवं रोबोटिक्स से जुड़ी परियोजनाओं में करेगी।

अमेरिका की अंतरिक्ष विज्ञान और शोध एजेंसी नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) की नींव 1958 में तत्कालीन राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहॉवर ने रखी थी। इसे उन्होंने एक साल पहले सोवियत यूनियन के द्वारा लॉन्च किए गए पहले आर्टिफिशियल सैटेलाइट की लॉन्चिंग के जवाब में खड़ा किया था। इसे पहले नेशनल एडवाइजरी कमेटी फॉर एयरोनॉटिक्स के नाम से जाना जाता था। आज नासा दुनिया का सबसे बड़ा और शक्तिशाली अंतरिक्ष शोध संगठन है। अमेरिकी सरकार की नजर में नासा की अहमियत इससे पता चलती है कि वह हर साल नासा का बजट दो फीसदी बढ़ा रही है। इस बार उसने इसका बजट पिछले साल की तुलना में 36.4 करोड़ डॉलर बढ़ाकर 1800 करोड़ डॉलर किया है।

कहां और कैसा है नासा का नेटवर्क?

नासा का हेडक्वार्टर वॉशिंगटन डीसी में है। यह चार अलग-अलग यूनिट्स से निर्देशित होता है। इनमें एयरोनॉटिक्स, एक्सप्लोरेशन सिस्टम, साइंस और स्पेस ऑपरेशन्स शामिल हैं। जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी (जेपीएल) और कैनेडी स्पेस सेंटर (केएससी) इसके दो बड़े रिसर्च सेंटर हैं। जेपीएल जहां 177 एकड़ में फैली है, वहीं केएससी 55 किमी का एरिया कवर करता है। कैलिफोर्निया स्थित नासा अम्स भी इसका एक बड़ा रिसर्च सेंटर है। इसके अलावा दुनियाभर में नासा के सेंटर और लॉन्चिंग स्टेशन हैं।

2011 में अमरीकी स्पेस शटल के रिटायर होने के बाद से अंतरिक्ष यात्रियों के लिए रूसी सोयूज ही अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) तक पहुंचने का एकमात्र विकल्प है। अमेरिका और यूरोप के अंतरिक्ष यात्री भी इसका इस्तेमाल करते हैं।
इन तीन कारणों से ख्यात

प्रोजेक्ट अपोलो

इस प्रोजेक्ट के जरिए नासा ने दुनिया में पहली बार चंद्रमा पर 12 अंतरिक्ष यात्रियों का समूह भेजा था। यह मिशन 1969 से 1972 तक चला। इस मिशन ने चंद्रमा की प्रकृति और वातावरण को जानने में मदद की थी। प्रोजेक्ट अपोलो को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी कोसमर्पित किया गया था। इस मिशन के लिए 4 लाख लोगों को हायर किया गया था। साथ ही करीब बीस हजार इंडस्ट्रियल फर्म की मदद ली गई थी।

स्कायलैब

नासा के इस मिशन का मकसद अमेरिका के पहले स्पेस स्टेशन को अंतरिक्ष में स्थापित करना था। 1973 में शुरू हुए तीन सदस्यीय इस मिशन के जरिए 84 दिन तक यह जानने की कोशिश हुई थी कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से मनुष्य के शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है। दुर्भाग्य से यह प्रयोगशाला छह साल तक अंतरिक्ष में घूमती रही थी और अंतिम पांच साल इस पर किसी का नियंत्रण नहीं रहा। इसका धरती पर गिरना तय था, जिससे भारी जनहानि की आशंका थी। 11 जुलाई 1979 को इसके अवशेष हिंद महासागर और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में गिरे थे।

स्पेस शटल

यह भी नासा की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। यह एक तरह का अर्थ ऑर्बिटल स्पेसक्राफ्ट सिस्टम है, जिसके जरिए चंद्रमा और मंगल अंतरिक्ष के अन्य क्षेत्रों तक पहुंचा जा सकता है। इसके जरिए अभी तक 135 अभियानों को अंजाम दिया जा चुका है। 1969 के बाद प्रयोग में आए इस सिस्टम का आधिकारिक नाम स्पेस ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम है। इसके जरिए कई सैटेलाइट और हबल स्पेस टेलिस्कोप स्थापित किए जा चुके हैं।

99% भारतीय छात्र (अंतरिक्ष केंद्र की विजिट करने वाले छात्रों में से) नासा जाने की इच्छा जताते हैं, जबकि सिर्फ एक फीसदी शैक्षिणिक संस्थान इसरो के दौरे में रुचि लेते हैं। नासा एक टूरिज्म हब के रूप में भी डेवलप हो रहा है।


डिजिटल मध्यप्रदेश की ओर बढ़ते कदम

डिजिटल इंडिया के सपने को सार्थक बनाने की दिशा में डिजिटल मध्यप्रदेश की ओर महत्वपूर्ण कदम बढ़ाये जा चुके हैं। बीते समय में जहाँ इन्दौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट उल्लेखनीय सफलताओं के साथ संपन्न हुई वहीं आई.टी. के क्षेत्र में भोपाल एवं जबलपुर में आई.टी. पार्क एवं इलेक्ट्रॉनिक मेन्युफेक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना के लिए शुरूआत हुई, वहीं भोपाल को प्रस्तावित "सेमी कन्डक्टर फेब' (सेमी कन्डक्टर वेफर फेब्रिकेशन मेन्युफेक्चरिंग फेसिलिटीज) केरूप मेंअत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक चिप निर्माण इकाई की नई सौगात मिलनेजा रही है।
समिट में प्रदेश में आई.टी., आई.टी.ई.एस., बी.पी.ओ. एवं बी.पी.एम. में निवेश की सुविधाओं विषयपर सेक्टोरियल सेमीनार में प्रदेश में सूचनाप्रौद्योगिकी केक्षेत्र में हुए काम की सराहना की गई। इससे यह उम्मीद की जा सकती है कि डिजिटल मध्यप्रदेश'' और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे भी इसी प्रकार परिणाममूलकउपलब्धियाँहासिल की जाती रहेंगी। राज्य शासन ने मध्यप्रदेश इन्फार्मेशन टेक्नालॉजी इन्वेस्टमेंटपॉलिसी (एज अमेंडेड-2014) और मध्यप्रदेश बी.पी. ओ. एवं बी.पी.एम. इण्डस्ट्री इन्वेस्टमेंट पॉलिसी-

2014 जारी की है। इससेनिश्चित ही प्रदेश में इन क्षेत्रोंमेंपूँजी निवेश का प्रवाह बढ़ेगा।

सेमी कन्डक्टर फेब'

सेमी कन्डक्टर फेब' (सेमी कन्डक्टर वेफर फेब्रिकेशन मेन्युफेक्चरिंग फेसिलिटीज) केरूप मेंभोपाल को एक अनूठी एवं अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स चिप निर्माण इकाई की सौगातमिलनेजा रही है। इससे 'अल्ट्रा हाई-माडर्न तकनीक ' के क्षेत्र में प्रदेश के विकास का नया मार्गप्रशस्त होगा। इसके जरिये प्रत्यक्ष औरअप्रत्यक्ष रूप सेकरीब 1 लाख 22 हजार लोगों को रोजगार मिलनेकी संभावना है। इसकेलियेजापान सेभीमदद ली जायेगी। फेब की क्षमता लगभग 40 हजार डब्ल्यू.एस.पी.एम. रहेगी। इसकेलियेराजा भोज विमानतल केपास लगभग 100 एकड़ भूमि उपलब्ध करवायी जायेगी।इस फेब की स्थापना सेदेश में इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एवं मेन्युफेक्चरिंग पर बहुत प्रभावपड़ेगा। यह इलेक्ट्रॉनिक मेन्युफेक्चरिंग सिस्टम डिजाइन एवं मेन्युफेक्चरिंग के क्षेत्र में क्रिटिकलपिलर केसेटअप को स्थापित करनेमें मदद करेगा। यह टेक्नालॉजी एवं पूँजी केप्रवाह को बढ़ानेमें मददगारसाबित होगा। यह इकाई रोजगार केनयेअवसर उपलब्ध करवानेकेसाथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्समेन्युफेक्चरिंग मेंउच्च वेल्यूएडीशन भी करेगी।"केन्द्र ने 'डिजिटल इण्डिया' की घोषणा की और मध्यप्रदेश में दो इलेक्ट्रॉनिक मेन्युफेक्चरिंग क्लस्टर का शिलान्यास हो गया। केन्द्र ने मेक इन इण्डिया के तहत देश में रक्षा उत्पादों के निर्माण की बात की और मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने रक्षा उत्पाद के निर्माण की नीति बना ली है। उद्योगों के लिये उपलब्ध भूमि, मानव संसाधन, सुशासन मध्यप्रदेश में निवेश का सुनहरा अवसर उपलब्ध करवाते हैं।'
(प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के शुभारंभ

मौके पर दिये गये भाषण के आई.टी.एस.ई.जेड. मंजूरप्रदेश में आई.टी. नीति केआधार पर इलेक्ट्रॉनिक्स और आई.टी. उद्योग में निवेश को आकर्षितकरनेकेलियेलागूआई.टी. नीति देश की सर्वोत्तम नीतियों में सेएक है। कौशल विकास तथा बेहतरीनबुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता राज्य में निवेश प्रवाह को आकर्षित करती है। बैंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, मुम्बई आदि केबाद अब आई.टी. कम्पनियोंको मध्यप्रदेश पसंद आ रहा है।आई.टी. में निवेश आकर्षित करनेकेलियेराज्य शासन द्वारा भूमि, स्टाम्प शुल्क में रियायत, विशिष्ट परियोजना लागत की प्रतिपूर्ति, भूमि केउपयोग तथा वैधानिक नियमों में छूट आदि प्रावधानों कीपेशकश है।प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्पलेक्स इंदौर, खण्डवा रोड, इंदौर तथा गंगा मालनपुर ग्वालियर मेंआई.टी. पार्क स्थापित कियेगयेहैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, और जबलपुर मेंआई.टी. पार्क प्रस्तावित हैं।राज्य में आई.टी. एस.ई.जेड. को औपचारिक मंजूरी दी जा चुकी है। इंदौर केसुपर कॉरिडोर में टाटा कंसलटेंसीसर्विसेस द्वारा 500 करोड़ की लागत सेदो चरण में सॉफ्टवेयर डेव्हलपमेंट केम्पस का कार्य प्रगति पर है।
वर्तमान मेंआई.टी. विभाग केपास लगभग 536 एकड़ जमीन उपलब्ध है।प्रदेश मेंब्लॉक-स्तर तक नेटवर्क सेजोड़नेकेलियेलगभग 24 हजार किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबरनेटवर्क विकसित किया गया है। सभी ग्राम-पंचायत में इंटरनेट सेवा उपलब्ध होगी। प्रदेश को आई.टी. तथा ई-गवर्नेंस केक्षेत्र में कई राष्ट्रीय अवार्ड मिलेहैं। इनमें स्कॉच स्मार्ट गवर्नेंस अवार्ड-2013, सीएसआई अवार्ड फॉर एक्सीलेंस इन आई.टी. फॉर कॉम्पलेक्स-2013, सीएसआई निहिलेंट अवार्ड-2009 से2013 तक लगातार, वेब रत्न अवार्ड, 2009-10, ई-गवर्नेंस केलियेराष्ट्रीय पुरस्कार 2009-10, NASSCOM सीएनबीसी टीवी 18 अवार्ड 2009, मंथन अवार्ड-दक्षिण एशिया-2009, डीएआरपीजी और सिल्वर आइकान अवार्ड-2008 शामिल हैं।

प्रदेश का पहला ई-कार्यालय

सरकारी प्रक्रियाओं तथा सेवा प्रदाय व्यवस्थाओं में दक्षता को ध्यान में रखतेहुए राष्ट्रीय ई-शासन योजना मेंप्रदेश में ई-कार्यालय को कोर मिशन मोड प्रोजेक्ट केरूप मेंक्रियान्वित किया जा रहा हैइसका उद्देश्य "पेपरलेस ऑफिस'' की ओर बदलाव करतेहुए सरकार की प्रचालन दक्षता में व्यापक सुधारकरना है। पॉयलट परियोजना मेप आई.टी. मेंएन.आई.सी. केमाध्यम सेक्रियान्वित की जा रही है।
इसमें 2 अप्रैल, 2014 सेमेप आई.टी. में कागज आधारित फाइल प्रणाली केस्थान पर पूर्णतया ई-कार्यालय प्रणाली लागूकी गयी है। ई-ऑफिस परियोजना में सभी अधिकारी-कर्मचारियों केसुरक्षित लॉग इन तैयार कर, अधिकारी/निर्णयकर्ता स्तर पर डिजिटल सिग्नेचर जारी कियेगयेहैं। ई-ऑफिस प्रणाली में वर्तमान में प्रचलित नस्तियों को एक बार स्केन कर ई-ऑफिस सर्वर पर ट्रान्सफर कर दिया गया है, जिसमें सभी पूर्ववर्ती निर्णयों एवं कार्यवाही का ब्यौरा उपलब्ध है। इस तरह मध्यप्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी ऐसा पहला विभाग है, जिसकेऑफिस को पेपर-लेस बनाया गया है।
ई-ऑफिस में नियमित नस्ती केमाध्यम सेनिर्णय प्रक्रिया केसाथ-साथ अवकाश तथा यात्राआवेदन तथा स्वीकृति, यात्रा बिलों केनिराकरण की भी सुविधा उपलब्ध है। ई-ऑफिस केनॉलेज मेनेजमेंटमॉड्यूल में सभी महत्वपूर्ण परिपत्र, निर्णय को भी ऑनलाइन नोटिस बोर्ड पर प्रसारित किया जा सकताई-ऑफिस वेब बेस्ड होने से अधिकारी-कर्मचारी कार्यालय के बाहर होने/यात्रा के दौरान भीसिक्योर्ड नेटवर्क के माध्यम सेनस्तियों का निराकरण कर सकते हैं। उपलब्ध विभिन्न रिपोर्टस मेंपत्र अथवा नस्ती किस व्यक्ति केपास पेंडिंग हैं इयकी जानकारी सहज ही उपलब्ध होनेसेनिर्णयों को अनावश्यक कारणों सेलम्बित नहीं किया जा सकता। इससेजवाबदेही सुनिश्चित होनेसेप्रक्रिया में तेजी आती है। प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्माण में युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिये विशेष कौशल प्रशिक्षण संस्थान खोला जायेगा। इलेक्ट्रॉनिक विषय पढ़ानेवालेशिक्षकोंको प्रशिक्षण देनेकेलियेएक अकादमिक केन्द्र खोला जायेगा। प्रदेश में नेशनल डाटा सेंटर की भी स्थापना होगी, जिसमें सभी राज्य के महत्वपूर्ण आँकड़ेसंधारित कियेजायेंगे। इसकेलियेएन.आई.सी. 200 करोड़ का निवेश करेगी। केन्द्रीय मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद और मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान नेभोपाल और जबलपुर में इलेक्ट्रॉनिक मेन्युफेक्चरिंग क्लस्टर (ई.एम.सी.) और आई.टी. पार्क का शिलान्यास करतेहुए यह बात कही। इसकेसाथ निजी क्षेत्र की यूनिट सेफ्रान सोलर सिस्टम्स का शिलान्यास भी किया गया। ई.एम.सी. और आई.टी. पार्क में लगभग 10,000 लोगों को रोजगार केनयेअवसर मिलेंगेऔर लगभग 100 करोड़ का निवेश होगा। ई-शक्ति अभियान महिलाओंमें इंटरनेट एवंकम्प्यूटर केउपयोग को बढ़ावा देनेएवं इसकेप्रति जागरूकता लानेकेलिये सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रदेश की 5 लाख महिलाओं को इंटरनेट प्रशिक्षण देनेकेलियेई-शक्ति अभियान शुरूकिया जा रहा है।
अभियान के लक्षित प्रशिक्षणार्थी समूह में महिला-बाल विकास की आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका एवं सुपरवाइजर, स्वास्थ्य विभाग की महिला ए.एन.एम. एवं आशा कार्यकर्ता, स्कूल शिक्षा की महिला शिक्षक एवं हायर सेकेण्ड्री की छात्राएँ, उच्च शिक्षा की महिला प्राध्यापक एवं छात्राएँ, पुलिस की महिला आरक्षक एवं महिलाकर्मी तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास के महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य, नगर निगम की महिलाकर्मी तथा किसान-कल्याण एवं कृषि विभाग की महिला किसान मित्र सम्मिलित हैं। प्रशिक्षण सरल हिन्दी मेंजिलेवार गूगल टीम द्वारा दिया जायेगा।

एम.पी. कोड पोर्टल

सूचना प्रौद्योगिकी में कियेजा रहेनवाचार एवं अभिनव पहल में एम.पी. कोड पोर्टल भी विकसित किया जा रहा है। इस पर शासन केमहत्वपूर्ण एक्ट, रूल्स-रेगुलेशन एवंनोटिफिकेशन उपलब्ध रहेंगे।

डिजिटल मध्यप्रदेश : एक नजर में
• स्टेट डाटा सेंटर का निर्माण तथा सफलतापूर्वक संचालन।
• राज्य-स्तर सेविकासखण्ड स्तर तक स्टेट वाईड एरिया नेटवर्क कनेक्टिविटी। अब तक 4000 से ज्यादा कार्यालय जुड़े।
• पूरेप्रदेश में विभिन्न लोक-सेवाएँप्रदान करनेकेलिये 12 हजार सेअधिक नागरिक सुविधा केन्द्रों की स्थापना।
• स्टेट पोर्टल तथा स्टेट सर्विस डिलिवरी गेट-वेका निर्माण एवंसंचालन।
• जियोग्राफिकल इन्फारमेशन सिस्टम की प्रभावी स्थापना केलियेस्टेट स्पेशियल डाटा इन्फ्रा-

स्ट्रक्चर का निर्माण।
• भोपाल मेंभारतीय सूचना संस्थान (आई.सी.टी.) की स्थापना की कार्यवाही प्रगति पर। प्रदेश में राष्ट्रीय मिशन मोड तथा राज्य मिशन मोड में ई-गवर्नेंस परियोजनाओं का वृहद स्तर पर संचालन किया जा रहा है। प्रदेश में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस परियोजनाओं में ई-जिला, ई-कोर्ट और ई- ऑफिस परियोजना शामिल हैं। इसकेअलावा ई-रोजगार पोर्टल, एस.आर.डी.एच. परियोजना और क्राइम एण्ड क्रिमिनल ट्रेकिंग सिस्टम भी संचालित हो रहा है। राज्य ई-गवर्नेंस परियोजनाओं में ई-पंजीयन, वाणिज्यिक कर, परिवहन कार्यालयों एवं प्रक्रियाओं का ऑटोमेशन, महाधिवक्ता कार्यालय और व्यापम का कम्प्यूटराइजेशन, समग्र सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम और ई-गतिमान योजना प्रमुख है। प्रदेश मेंप्रोजेक्ट मैनेजमेंट की कार्य-संस्कृति को और बेहतर बनानेकेलियेराज्य सेजिला- स्तर तक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की पद-स्थापना की मंजूरी दी गई है। ये प्रोफेशनल्स बड़ी परियोजनाओं को तय समय-सीमा में और निर्धारित लागत पर पूरी करनेमें सहयोग करेंगे। राज्य सरकारद्वारा (CPCT) Computer Profeciens and Compentency Test को प्रारंभ करनेका निर्णय लिया गया है।यह परीक्षा डाटा एन्ट्री अर्हता परीक्षा केरूप में CAT की तर्ज पर प्रतिवर्ष 2 बार होगी।प्रदेश की ई-मेल नीति-2014 जारी की गई है। ऐसा करनेवाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है।प्रदेश में राज्य सेविकासखण्ड-स्तर तक आई.टी. कॉडर बनाया गया है। प्रदेश के 15 जिलेमें 25 करोड़ लागत सेक्षेत्रीय आई.टी. प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित कियेगयेहैं।


जानें इंटरनेट की दुनिया को

फेसबुक फाउंडर मार्क जुकरबर्ग ने भारत यात्रा के दौरान कहा की इंटरनेट मानवाधिकार है । इसकी पहुंच हर इंसान तक होनी चाहिए । इसी बहाने आइए जानें आखिर इंटरनेट का मालिक कौन है ? कौन इसे सही ढंग से चलाता है ?
इंटरनेट आज दुनिया की सबसे जरुरी चीज़ों में से एक है । जो लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं उनसे पूछिए यदि एक दिन इंटरनेट बंद हो जाए तो उनका क्या हाल होता है । लाखों लोगों की नौकरियां इंटरनेट की मदद से चल रही हैं तो अरबों लोग इसका दूसरे कामों में इस्तेमाल करते हैं । सोचिए यदि कोई व्यक्ति या कंपनी या देश इसका मालिक हो तो वह दुनिया में कितना शक्तिशाली होगा ।
दरअसल , हमारे सरकारी दस्तावेजों से लेकर चैट और ईमेल रिकॉर्ड तक इंटरनेट की वर्चुअल दुनिया में रखे हुए है । ऐसे में जो इसका मालिक होगा उसका माला- माल होना तय है| वह न केवल दूसरे व्यक्ति के ईमेल और चेट में सेंध लगा सकता है बल्कि गोपनीय निर्णयों की भी जानकारी हासिल कर सकता है । यही कारण हैं की दुनिया की प्रमुख शक्तियां इंटरनेट पर वर्चस्व ज़माने की होड़ में हैं । हालांकि अच्छी बात यह है की इंटरनेट पर किसी व्यक्ति विशेष, संगठन या संस्था आदि का स्वामित्व नहीं हैं । इंटरनेट की शुरुआत और वक्त के साथ उसमें हर दिन होने वाले बदलावों में सरकार से लेकर निजी क्षेत्र और इंजीनियर्स से लेकर सिविल सोसायटी तक के लोगों का महत्वपूर्ण योगदान है ।

तो कौन है ऑनर?

यदि इंटरनेट के मालिकाना हक़ की बात करें तो इसके दो उत्तर हैं । पहला इंटरनेट पर किसी का भी अधिकार नहीं है । दूसरा उत्तर है कि इंटरनेट पर बहुत से लोगों का अधिकार है । अगर आप इंटरनेट को एक सयुंक्त उपक्रम या किसी कंपनी के रूप में देख रहे हैं तो इसका कोई मालिक नहीं हैं । हां, ऐसे कई संस्थान हैं जो इंटरनेट का स्ट्रक्चर और कैसे काम करेगा इसको तय करते है , लेकिन इनके पास इंटरनेट का मालिकाना हक़ नहीं हैं । इस पर किसी सरकार या कंपनी का भी अधिकार नहीं हैं । इसी बात का दूसरा पक्ष यह हैं की इंटरनेट पर हजारों लोगों और कंपनियों का अधिकार हैं । इंटरनेट कई बिट्स और पीसेज में चलता है और हर टुकड़े पर किसी कंपनी या संस्था का अधिकार है । आप इंटरनेट कैसे एक्सेस कर रहे हो और इसकी क्या क्वालिटी है इस पर भी कई कंपनियों का नियंत्रण है । इनका अधिपत्य पुरे सिस्टम पर तो नहीं होता है लेकिन यह इंटरनेट एक्सपीरियंस को प्रभावित करते हैं । एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर सिस्टम के बीच इंटरनेट ट्रैफिक का ट्रांसफर एक फिज़िकल नेटवर्क के बीच होता है । इसे इंटरनेट बैकबोन कहते हैं । आज इस इंटरनेट बैकबोन को मजबूत बनाने के लिए दुनिया की तमाम बड़ी कंपनियां , रॉउटस , नेटवर्क एक्सेस पॉइंट और केबल व अन्य सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं । ये कंपनियां इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स हैं ।

अमेरिका का अधिक दबदबा

इंटरनेट पर किसका और कितना अधिकार हो, इस बात पर लंबे समय से बहस हो रही है। इंटरनेट गवर्नेंस को लेकर दो दशकों से कई देश सक्रीय है। बहस इस बात पर भी है कि इस पर नियंत्रण हो या न हो। हालांकि अभी तक अमेरिका का इंटरनेट की दुनिया में सबसे अधिक दबदबा रहा है । इसका एक बड़ा कारण यह है कि इंटरनेट का जन्म अमेरिका में हुआ हैं । इसके अलावा इंटरनेट कॉपोरेशन फॉर असाइंड नेम्स एंड नंबर्स जैसी करीब- करीब सभी बड़ी संस्थाएं अमेरिका में ही है । हालांकि लम्बे समय से यह बात चल रही है कि इंटरनेट पर एकाधिकार की बात से बचने के लिए इसे संयुक्त राष्ट्र के अंतर्गत किसी लोकतान्त्रिक व्यवस्था में लाया जाय । साइबर सुरक्षा की चिंता जताते हुए कुछ देशों की सरकारों के नियंत्रण में रहें । वैसे अब अमेरिका का दबदबा कम करने के लिए खुद अमेरिका में स्थित संस्थाएं ही काम कर रही है । पिछले वर्ष अक्टूबर में उरुग्वे में हुई समिट में इंटरनेट कॉपोरेशन फॉर असाइंड नेम्स एंड नंबर्स और द इंटरनेट टास्क फ़ोर्स सहित सभी ने यह बात कही थी कि वे खुद को अमेरिका सरकार के प्रभाव से मुक्त रखेंगे ।


APPLE ने iphone 6, iphone 6+ और i watch को किया लॉन्च

(i watch)
- APPLE के लॉन्चिंग इवेंट में पफार्मेंस देने पहुंचा U2 बैंड।
- Apple Watch heart rate को भी रीड कर सकती है। Apple के मुताबिक इसकी touchscreen pressure-sensitive है।
- "most personal device we've ever created"- Tim Cook Apple CEO
- APPLE की नई पेशकश i watch हुई लॉन्च
- कंपनी ने आईफोन 4 से लेकर आईफोन 5, एस और सी को एक जैसे ही डिजायन में पेश किया था। लेकिन यह नया आईफोन अलग डिजाइन में पेश किया है।
- आईफोन 6 पहला ऐसा पहला फोन है, जो जबरदस्त वायरलैस कनेक्टिविटी के साथ आया है। इसमें एनएफसी का शानदार वर्जन दिया गया है।
- एप्पल 6 और 6+ में अब तक का सबसे शानदार कैमरा दिया है जो 13 और 16 मेगापिक्सल का है और इस फ्रंट कैमरा 8 मेगापिक्सल का होगा।
- 19 सितंबर से 9 देशों में ( अमेरिका, फ्रांस, हांगकांग, कनाडा, जर्मनी, सिंगापोर, यूके, ऑस्ट्रेलिया, जापान) मिलेंगे नए आईफोन
- 12 सितंबर से शुरू होंगे प्रीऑर्डर
11.15 - आईफोन 6 प्लस की स्क्रीन 5.5 इंच और आईफोन 6 की स्क्रीन 4.7 इंच है।
- अमेरिका में आईफोन 6 के अनलॉक्‍ड वर्जन की शुरुआती कीमत 649 डॉलर (करीब 39,500 रुपए) है। वहीं, आईफोन 6 प्‍लस के अनलॉक्‍ड वर्जन की शुरुआती कीमत 749 डॉलर (करीब45,600 रुपए) है। भारत में भी इसकी कीमत इसी रेंज के आसपास होने की उम्‍मीद है।
11.10 - The cameras on the iPhones can shoot videos at 1080p. The frame rate is 30 or 60 FPS. Slow-motion videos can be shot at 240 FPS.
11pm - iphone 6+ में higher resolution गेम्स भी खेले जा सकेंगे।
10.50- आईफोन 5 (7.6 mm) के मुकाबले आईफोन 6 ( 6.9 mm) पतला है।
10.40-APPLE ने iphone 6 और iphone 6+ को किया लॉन्च।
APPLE ने iphone 6 और iphone 6+ को किया लॉन्च। दोनों नए फोन A8 प्रोसेसर के साथ आए हैं। दोनों का बैटरी बैकअप iphone 5s के मुकाबले बेहतर है।
10.35- iphone 6 की लॉन्चिंग के लिए टिम कुक मंच पर पहुंचे।
10.15pm- 15 मिनट में लॉन्च होगा new iphone 6
09.47 pm - #iPhone6 टि्वटर पर जमकर ट्रैंड कर रहा है।
09.37- apple inc के सीनियर वाइस प्रेसिडेंड Phil Schiller ने कहा कि करीब करीब समय हो चुका है।
08.41pm- एक वेबसाइट के मुताबिक दुनिया में सबसे पहले 4 आस्ट्रेलियाई व्यक्तियों को iphone 6 खरीदने का मौका मिलेगा।
08.30 pm- लॉन्च से कुछ ही समय पहले 7 मिनट का वीडियो लीक हुआ जिसमें iphone 6 के बारे में जानकारी दी गई। हालांकि अब वीडियो को हटा लिया गया है।


नई तकनीकी

लंदन:वैज्ञानिकों ने माइटोकांड्रिया प्रोटीन के उस समूह का पता लगाने का दावा किया है, जो शरीर की उम्र संबंधी प्रक्रिया को नियंत्रित कर सकता है। वैज्ञानिकों की इस खोज से बढ़ती उम्र में होने वाली कैंसर जैसी बीमारियों से राहत मिल सकती है और इससे किसी व्यक्ति के जीवन काल को भी बढ़ाया जा सकता है। मॉलिक्यूलर सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार शरीर में ऊर्जा पैदा करने वाला माइटोकांड्रिया मानव कोशिकाओं के अंदर पॉवर स्टेशन की भूमिका निभाता है। कुछ वैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुसार यह मानव की बढ़ती उम्र से जुड़ी प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार होता है। स्वीडन के गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के एक दल ने माइटोकांड्रिया के एमटीसी नामक एक ऐसे प्रोटीन का पता लगाया है, जो उम्र संबंधी विकार को नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सकता है।

दक्षिण अफ्रीका में लंगूरों ने की नई खोज

जोहानिसबर्ग: लंगूरों के लिए जब पेड़ों से फल तोड़कर खाने की बात हो, तो वे फिर इधर-उधर मटरगश्ती करने में अपना समय नहीं गंवाते बल्कि उस समय उनका पूरा ध्यान अपना पेट भरने पर होता है। लंगूरों की इस आदत से दक्षिण अफ्रीका में एक नए प्रकार के संतरे की खोज हुई है। दक्षिण अफ्रीकी किसान एल्विन वान डेर मर्वे ने बताया कि कई साल पहले मजदूरों ने देखा कि एक पेड़ पर लगे संतरों को लंगूर जल्द ही चट कर गए। उस समय दूसरे पेड़ों पर भी संतरे लगे थे, लेकिन लंगूरों ने सबसे पहले उस खास पेड़ के संतरों पर ही झपट्टा मारा। अगले साल भी ठीक ऐसा ही हुआ। किसान और खेत मजदूरों के लिए यह एक पहेली बन गया कि लंगूर एक खास पेड़ के संतरों को ही सबसे पहले क्यों अपना भोजन बनाते हैं। इस पर एक मजदूर ने इस रहस्य को आखिरकार सुलझा लिया। पता चला कि जिस पेड़ के संतरों पर लंगूर सेना झपट पड़ती है, दरअसल उस पेड़ के संतरे दूसरे पेड़ों पर लगे संतरों से तीन-चार सप्ताह पहले ही पक जाते हैं। मर्वे ने बताया कि बाद में परीक्षण में पता चला कि लंगूरों की पसंद के पेड़ पर लगे संतरे खाने में मीठे होते हैं और ये तेजी से पकते हैं। इस किसान ने बाद में कलम के जरिए उस पेड़ से और पेड़ तैयार किए। दक्षिण अफ्रीक की स्रिटस ग्रोअर एसोसिएशन के प्रमुख जस्टिन चाडविक ने कहा कि विशेषज्ञ प्रयोगशालाओं में लगातार संतरे की ऐसी किस्म विकसित करने में लगे हैं, जो खाने में मीठी और तेजी से पकने वाली हो।

लापता विमान : नई वस्तुएं दिखीं, खोज अभियान तेज

पर्थ: मलेशिया के दुर्घटनाग्रस्त विमान के मलबे की तलाश के लिए चलाए रहे अभियान के क्रम में शनिवार को चीन के विमान ने हिंद महासागर के नए इलाके में नई वस्तुओं का पता लगाया है। इसके बाद खोज अभियान को और तेज कर दिया गया। दुर्घटनाग्रस्त विमान की खोज का अभियान शुक्रवार को नाटकीय अंदाज में दक्षिणी हिंद महासागर से 1,100 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थानांतरित कर दिया गया। चीन के समुद्री सुरक्षा प्रशासन के पोत हैक्जुन 01 और चीनी नौसेना के पोत जिंगानशान दो हेलीकॉप्टरों के साथ तलाशी अभियान में लगे हुए हैं।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार चीन के एक विमान ने तीन बहती हुई वस्तुओं का पता लगाया। ये वस्तुएं सफेद, लाल और नारंगी रंग की थीं। तलाशी अभियान के दौरान शुक्रवार को पांच विमानों ने अलग-अलग वस्तुओं का पता लगाया था।
ऑस्ट्रेलियाई समुद्री सुरक्षा प्राधिकरण (एएमएसए) ने एक बयान में कहा, शनिवार की तलाश संबंधी गतिविधियां पूरी हो गई। 2,52,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में खोज की गई। मलेशिया के कार्यवाहक परिवहन मंत्री हिशामुद्दीन हुसैन ने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने यात्रियों के परिजन को फिर से भरोसा दिया है कि किसी भी जीवित व्यक्ति की तलाश जारी रहेगी।
मलेशिया एयरलाइंस के इस विमान ने बीते 8 मार्च को कुआलालंपुर से बीजिंग के लिए उड़ान भरी थी और इसके कुछ देर बाद यह लापता हो गया था। इसमें पांच भारतीय नागरिकों सहित 239 लोग सवार थे। इसमें सबसे अधिक चीन के 154 लोग सवार थे। मलेशिया सरकार ने सोमवार को विमान के हादसे का शिकार होने का ऐलान किया।

प्रियंका पारे

गूगल प्लस के प्रमुख ने कंपनी छोड़ी

गूगल प्लस को हेड करने वाले भारतीय विक गंडोत्र ने कंपनी का साथ छोड़ दिया है. गुंडोत्र ने इसकी घोषणा अपने गूगल प्लस पेज पर ही की. गंडोत्र ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'गूगल के साथ करीब 8 साल काम करने के बाद मैं ये कंपनी छोड़ने की घोषणा कर रहा हूं. मैं इस बात को लेकर उत्साहित हूं कि अब नेक्स्ट (करियर में) क्या होगा. लेकिन अभी इस बारे में बात करने का समय नहीं है. अभी समय है अपने पिछले 8 साल का जश्न मनाने का.'
गंडोत्र IIT, मद्रास से पासआउट हैं और गूगल से पहले माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के लिए काम कर चुके हैं. वो 2007 में गूगल से जुड़े. गूगल के सीईओ लैरी पेज ने कहा, 'विक ने गूगल प्लस को बनाया. कुछ ही लोग होते हैं जो इतनी हिम्मत और लगन से इस तरह काम करते हैं. उनके हार्ड वर्क और पैशन के लिए मैं उनका शुक्रिया अदा करता हूं. हम विक को आने वाले समय के लिए गुड लक विश करते हैं.'


चीनी इंटरनेट कंपनियों की अमेरिकी दौड़

चीन की अमेजन के नाम से मशहूर जेडी.कॉम इस साल अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज में दस्तक देने जा रही है। इस ऑनलाइन रिटेल कंपनी का सालाना कारोबार 979 अरब रुपए है। जेडी के अलावा 30 अन्य चीनी फर्मों के इस वर्ष अमेरिकी शेयर बाजार में उतरने की संभावना है। अधिकतर आईपीएओ इंटरनेट कंपनियों के होंगे। इन कंपनियों को चीन की बढ़ती ऑनलाइन आबादी के कारण मुनाफा हो सकता है। सरकारी अनुमान के अनुसार चीन में अगले वर्ष इंटरनेट का उपयोग करने वालों की संख्या 60 करोड़ से बढ़कर 80 करोड़ हो जाएगी।
चीनी कंपनियों को अमेरिका में सूचीबद्ध होने से फायदा है। उन पर सख्त नियंत्रण लागू नहीं होंगे। चीन में आईपीओ जारी होने के पहले दिन घोषित मूल्य से 44 प्रतिशत अधिक मूल्य पर शेयर नहीं बेचे जा सकते हैं। कुछ अन्य समस्याएं हैं। चीनी कानून के तहत कंपनियां अपने हिसाब-किताब से संबंधित सभी दस्तावेज विदेशी पार्टियों को नहीं दिखा सकती हैं। इससे अमेरिकी सिक्यूरिटी और एक्सचेंज कमीशन के लिए धोखाधड़ी की जांच करना कठिन होता है। 2011 में कई चीनी फर्मों को गड़बड़ी के कारण अमेरिकी एक्सचेंजों से अलग कर दिया गया था।


मुंबई को मिला दुनिया का बेहतरीन अंतरराष्टीय एयरपोर्ट एयरपोर्ट टर्मिनल-2

मुंबई : मुंबई को शुक्रवार को विश्वस्तरीय हवाईअड्डा टर्मिनल टी-2 मिल गया जिसमें अपनी तरह की सबसे बड़ी आर्ट गैलरी है और यह देश की सांस्कृतिक विरासत का शानदार नमूना लिए हुए हैं।
इस टर्मिनल की डिजाइन नृत्य करते मयूर से प्रेरित है। यह टर्मिनल फरवरी से परिचालन में आएगा। टी-2 को 9,800 करोड़ रुपए के निवेश से बनाया गया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे राष्ट्र को समर्पित करते हुए कहा, ‘यह विश्वस्तरीय ढांचा तैयार करने की हमारी क्षमता प्रदर्शित करता है। टी-2 सचमुच प्रथम दर्जे का टर्मिनल है। इसने देश में नागर विमानन के क्षेत्र विकास में एक नए अध्याय की शुरुआत की है।’ करीब 4.39 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले टर्मिनल-2 को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह सालाना 4 करोड़ यात्रियों का बोझ उठा सके।
टर्मिनल में 3 किलोमीटर तक कलाकृतियों से उरेकी गई दीवार पर हजारों की संख्या में कलाकृतियां हैं जिनका नाम ‘जय हे’ दिया गया है। जय हे आगंतुकों को देश की विविधताओं से भरी सांस्कृतिक विरासत की झलक देता है। इसमें मुंबई की जीवनशैली को भी दिखाने का प्रयास किया गया है जहां बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से आए लोग काम करते हैं।
अत्याधुनिक टी-2 सिंगापुर के चांगी टी.3 (3.80 लाख वर्ग मीटर) और लंदन के हीथ्रो टी-5 (3.53 लाख वर्ग मीटर) से भी बड़ा है।।

 

 

 


हिन्दी और साइबर संसार
19 September 2013

यूनिकोड हिन्दी में लिखकर हर कोई इंटरनेट पर हिन्दी को आगे बढ़ा सकता है। गृहिणियां व्यंजन विधियां और घर-परिवार की बातें लिख सकती हैं, बुजुर्ग अपने अनुभव और संस्मरण साझा कर सकते हैं, तो दुकानदार अपने पेषे के बारे में बता सकते हैं।आंकड़े बताते हैं कि हम भारतीय न तो संख्याबल में कम हैं, न ही ज्ञान-विज्ञान और तकनीक के मामले में पीछे हैं, लेकिन हिन्दी सहित हमारी तमाम भाषाएं साइबर संसार में पिछड़ रही हैं। एक ऐसे दौर में, जब दुनियाभर का ज्ञान इंटरनेट पर एक क्लिक पर उपलब्ध है, हम अंग्रेजी पर ही निर्भर बने हुए हैं।
यदि आप अपनी भाषा से प्रेम करते हैं, उसमें लिखना चाहते हैं और बगैर ज्यादा मेहनत के उसके लिए कुछ करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है।
कैसे लिखें

हिन्दी में सैकड़ों फाॅन्ट हैं, लेकिन इंटरनेट के लिए सबसे उपयुक्त है यूनिकोड। इसे किसी भी कम्प्यूटर पर पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं आती। जब आप रोमन हिन्दी में लिखते हैं, तो पढ़ने में बड़ा अटपटा लगता है और दो-चार पंक्तियों से लम्बा लेखन पढ़ा ही नहीं जाता। इंटरनेट पर ढेरों लित्यंतरण औजार मुक्त उपलब्ध हैं। आपको टाइपिंग सीखने की जेहमत भी नहीं उठानी है। रोमन में लिखें, जिसे ये टूल्स यूनिकोड हिन्दी में बदल देते हैं। इसके अलावा सीधे हिन्दी टाइपिंग के भी साॅफ्टवेयर और टूल्स मौजूद हैं, जिन पर आप टाइपराइटर ष्षैली में भी हिन्दी टाइपिंग कर सकते हैं। यदि आप ष्षुरूआत कर रहे हैं, तो गूगल की ट्रांसलिटरेषन साइट या जीमेल में हिन्दी टाइपिंग की सुविधा का इस्तेमाल करें।

क्या लिखें

यूनिकोड में आप अपनी कहानियां, कविताएं, सामान्य और विषेषज्ञतापूर्ण लेख, संस्मरण, संदेष, पत्र, कुछ भी लिख सकते हैं। जहां आपको न चाहते हुए भी अग्रेजी या रोमन हिन्दी में लिखना पड़ता है, हर उस जगह पर आप यूनिकोड हिन्दी में लिख सकते हैं। यूनिकोड में लिखकर आप बड़ी आसानी से हिन्दी में खोजबीन सर्च भी कर सकते हैं।

कहा लिखे

निजी संवाद- ईमेल, फेसबुक जैसी सोषल साइट्स पर हिन्दी में लिखें।इसे पढ़ना सहज होता है और आपकी बात ज्यादा असर करती है, क्योंकि हिन्दी हमारी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा है। और कुछ नहीं, तो आप एक पारिवारिक ब्लाॅग षुरू कर अपने करीबियों को अपनी भाषा के माध्यम से जोड़ सकते हैं।

ब्लाॅग- ब्लाॅग इंटरनेट पर निजी डायरी है, जहां आप अपनी अनुभूतियां, विचार, यादें, कविताएं, कहानियां, लेख दर्ज कर सकते हैं। ब्लाॅग बनाना एकदम आसान और बिल्कुल मुफ्त है।

वेबसाइट- हिन्दी वेबसाइट का इस्तेमाल निजी और व्यावसायिक प्रचार के लिए किया जा सकता है।

विभिन्न कोष- गद्यकोष, कविताकोष, अभिव्यक्ति जैसी वेबसाइट हजारों सदस्यों के सक्रिय सहयोग से हिन्दी साहित्य के विष्वकोष का रूप ले चुकी हैं। इनकी समृद्धि में आप भी योगदान दे सकते हैं। मौलिक रचनाओं के साथ ही आप अपने पास उपलब्ध काॅपीराइट मुक्त रचनाओं को टाइप करके, पूरे संदर्भ के साथ इन्हें भेज सकते हैं, ताकि दुनिया में कोई भी हिन्दीप्रेमी उन्हें पढ़ सके, प्रिंट ले सके।

क्या पढ़े

भले ही कम मात्रा में सही, लेकिन वेब संसार में विविधतापूर्ण हिन्दी सामग्री उपलब्ध है। यहां सबसे अधिक है साहित्य। प्रेमचंद, रवींद्रनाथ ठाकुर से लेकर कई समकालीन रचनाकारों का साहित्य सुलभ है। हिन्दी की पूरी-पूरी पुस्तकें भी डाउनलोड की जा सकती हैं। यूनिकोड में प्रकाषित पुस्तकों के साथ ही यहां उनके पीडीएफ संस्करण भी मिल जाएंगे। यही नहीं, कला, संस्कृति, धर्म-अध्यात्म, विज्ञान, अर्थषास्त्र , भाषा पर तमाम हिन्दी वेबसाइट मौजूद हैं। यहां तक कि पाठ्यपुस्तकें भी पढ़ी जा सकती हैं।

बहरहाल, हिन्दी बोलने-समझने के बावजूद जब तक आप हिन्दी में लिखेंगे नहीं, यह पीछे ही रहेगी। एक बार यूनिकोड हिन्दी में लिखकर तो देखिए। यह सहज, आसान और असरदार है।

- सइबर संसार पर सामग्री की उपलब्धता के मामले में हिन्दी बहुत पीछे है। यहां अग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिष, रूसी, इतालवी जैसी भाषाएं तो मीलों आगे हैं ही, जापानी, वियतनामी, यूक्रेनी, मलय जैसी सीमित क्षेत्रीय भाषाएं भी हिन्दी से कहीं आगे हैं।

- भारत में फेसबुक के 7.8 करोड़ व ट्विटर के 3.5 करोड़ सदस्य हैं, लेकिन देवनागरी में लिखने वालों का हिस्सा नगण्य है।

रोमन में लिखें और यूनिकोड हिन्दी में बदलें
www.google.com/intl/hi/inputtools/cloud/try/
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हिन्दी पद्य साहित्य का आॅनलाइन कोश
www.gandyakosh.org
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अच्छी हिन्दी कविताओं का लगातार बढ़ता आॅनलाइन कोष
www.anubhuti-hindi.org
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हिन्दी की प्रसिद्ध रचनाएं
www.rachana.purdir.in/2009/08/read-hindi-stories-online.html
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मुंषी प्रेमचंद की कहानियां
www.premchand.kahaani.org/2009/09/contents.html
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हिन्दी साहित्य का संकलन
www.bharatdarshan.co.nz/literature-colection/2/58/short-stroies.html/
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महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विष्वविद्यालय द्वारा विकसित महत्वपूर्ण वेबसाइट
www.hindisamay.com
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इंटरनेट पर हिन्दी से सम्बंधित सबकुछ यहां मौजूद है
www.hindikunj.com
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सन् 2000 से नियमित प्रकाषित आॅनलाइन प्रतिष्ठित पत्रिका
www.abhivyakti-hindi.org

गलती से भेजा मेल रोक दें!
16 September2013

जीमेल खातों के लिए अन-डू सुविधा शुरू की गई है। अब जीमेल यूजर्स गलती से भेज दिए गए ई-मेल को रद्द कर सकते हैं। इसे छोड़ दिए तीर को तरकश में वापस पाने जैसा भी समझ सकते हैं।

बॉस यां दोस्त को गलती से कोई ई-मेल भेज दिया है, तो आप उसे जीमेल की अनडू सुविधा के जरिए रद्द कर सकते हैं। अनडू सुविधा का लाभ उठाने के इन निर्देषों का पालन करें-

- सबसे पहले अपने जीमेल अकाउंट को खोलें। अब स्क्रीन पर दाई तरफ ऊपर की ओर दिखाई दे रहे सेटिंग विकल्प को चुनें।

- सेटिंग में क्लिक करते ही आपके सामने ढेर सारे टैब विकल्प आ जाएंगे। इनमें से लैब विकल्प चुनें।

- इसमें मौजूद विकल्पों में नीचे से दूसरे नम्बर पर ‘अनडू सेण्ड’ विकल्प पर जाएं। इसके सामने बने इनेबल बटन को सलेक्ट करें।

- अंत में बाई ओर दिखाई दे रहे सेव बटन पर क्लिक करके सेटिंग सेव कर दें।

- अब दोबारा होम पेज पर जाएं और फिर से सेटिंग विकल्प पर क्लिक करें। पुनः अनडू विकल्प में जाकर मेल भेजने का समय सिलेक्ट करें। आप जो समय चुनेंगे, उतनी देर आपके भेजे मेल को पहुंचने में लगेगी। इस दौरान आप उसे रोक सकेंगे या एडिट कर सकेंगे।

अब 3डी प्रिंटर से निकलेंगे मानव-अंग
07 September 2013

लंदन। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने ऐसा 3डी प्रिंटर बनाने में कामयाबी हासिल की है, जो सिर्फ एक बटन दबाते ही प्रत्यारोपण के लिए मानव अंग तैयार कर देगा। प्रिंटर के एक सिरे में बस जरूरी कोशिकाएं व अन्य चीजें डालनी होंगी और यह उन्हें व्यवस्थित कर मानव अंग में तब्दील कर देगा।
वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रिंटर का नोकदार सिरा [नोजल हेड] इस काम को अंजाम देगा। इस नोजल हेड को विस्टा 3डी नाम दिया गया है। यह नोजल हेड पतली से पतली चीजों को एक-दूसरे से पूरी सटीकता से जोड़ देगा। इससे खिलौने, मेडिकल उपकरण, हवाई जहाज के पुर्जे और इंसान के शरीर में प्रत्यारोपण के लिए अंग तैयार किए जा सकेंगे।
मेलबर्न टीटीपी कंपनी के प्रबंध निदेशक सैम हाइड ने इस आविष्कार को उत्साहजनक करार दिया। कैम्ब्रिज न्यूज से बातचीत के दौरान हाइड ने बताया कि पांच से 10 वर्षो में प्रिंटर से मानव शरीर के लिए अंग तैयार होने लगेंगे। उन्होंने बताया कि प्रिंटर में जरूरी कोशिकाएं डालने के बाद उन्हें सही अवस्था में रखने की जरूरत होती है ताकि उन्हें किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। इस काम को बहुत बारीकी से अंजाम देना होता है। 3डी प्रिंटर यही काम करेगा। हाइड ने बताया कि शुरुआत में प्रिंटर से आसान ढांचे वाले अंग तैयार किए जाएंगे और फिर धीरे-धीरे इससे जटिल अंग बनाए जाएंगे।
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में चिकित्सा उपकरणों के विशेषज्ञ डा. सीन चेंग ने कहा कि इस प्रिंटर के सहारे मानव अंगों के बनने से हर साल लाखों लोगों की जिंदगी बचाई जा सकेगी। हालांकि इस तकनीक के इस्तेमाल से पहले अभी कुछ जरूरी चरण पूरे होने बाकी हैं। नोजल को फिलहाल एक 2डी प्रिंटर से जोड़ा गया है। इसे 3डी प्रिंटर से जोड़ने में अभी दो साल का वक्त लग सकता है।

चीन बना रहा है मानवरहित हाईस्पीड हेलीकॉप्टर
07 September 2013

बीजिंग। चीन ने गुरुवार को अपने मानवरहित हेलीकॉप्टर की अद्यतन अवधारणा का प्रदर्शन किया। बताया जा रहा है कि चीन ऐसे हेलीकॉप्टर विकसित कर रहा है जो मौजूदा हेलीकॉप्टरों के मुकाबले दोगुनी रफ्तार से उड़ान भर सकते हैं। जेवाई-8 नाम के ये हेलीकॉप्टर अधिकतम 400 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ान भर सकते हैं।
चीनी हेलीकॉप्टर अनुसंधान एवं विकास संस्थान में इंजीनियर झू इनचुई ने कहा कि ये हेलीकॉप्टर 2015 में परीक्षण उड़ान भर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इन्हें तियांजिन के उत्तरी शहर में चीन के दूसरे हेलीकॉप्टर प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया गया था। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, जेवाई-8 में अमेरिका द्वारा तैयार किए गए प्रयोग के तौर पर विकसित किए गए हेलीकॉप्टर एक्स2 जैसी ही उच्च गति वाली तकनीक को अपनाया गया है। एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चीन (एवीआइसी) में मानवरहित हेलीकॉप्टर प्रौद्योगिकी अनुसंधान के प्रभारी फैंग यांगहांग का कहना है कि चीन ने मानवरहित हेलीकॉप्टर की कोर प्रौद्योगिकी में महारत हासिल कर ली है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने ऐसे मानवरहित हेलीकॉप्टर विकसित कर लिए हैं जो एक टन वजन के साथ भी उड़ान भर सकते हैं।

पीसी से मैनेज करें एंड्रायड को
06 September 2013


एंड्रायड-2 Airdroid-2
www.airdroid.com
बात अगर एंड्रायड डिवाइस को अपने पीसी से मैनेज करने की हो तो इसके लिए एयर-2 ड्रायड आपका पसंदीदा एप है। आप ब्राउजर विंडो से अपने पूरे फोन में एक्ससेस कर सकते हैं, भले ही आपका फोन व पीसी एक समान वाईफाई नेटवर्क पर न हो। आप मैसेज पढ़ सकते हैं, भेज सकते हैं, इनकमिंग काॅल्स रिजेक्ट कर सकते हैं, कांटेक्ट्स मैनेज कर सकते हैं, फाइल ट्रांसफर कर सकते हैं, एप्स को इंस्टाल व रिमूव कर सकते हैं, रिंगटोन क्रिएट कर सकते हैं, यूआरएल लिंक को फोन में भेज सकते हैं। फोन की लोकेशन भी जान सकते हैं। आप अपने फोन के फ्रंट/रियर कैमरे के व्यू को भी देख सकते हैं। खास बात ये है कि इसमें आपको अपने पीसी में ड्राइवर्स इंस्टाल करने की जरूरत नहीं और न ही फोन के लिए केबल ढूढने की।कुछ एप्स का इस्तेमाल कर आप अपने एंड्रायड फोन को पीसी से भी मैनेज कर सकते हैं।
Mobogenie
www.mobogenie.com
केवल विंडोज के लिए उपलब्ध मोबोजेनी में क्लीन यूजर इंटरफेस बड़े आइकन के साथ है। आप मीडिया, फाइल्स काटैक्ट्स और मैसेज को मैनेज करने के लिए आसानी से फोन स्टोरेज में एक्सेस कर सकते हैं। आप मैसेज को एक से ज्यादा लोगों को भेज सकते हैं, अपने पीसी का इस्तेमाल करके अपने फोन की मदद से। एप मैनेजर गूगल प्ले से एप डाउनलोड करने के लिए आपके डेस्कटाॅप इंटरनेट कनेक्शन को युज करता है। साथ ही डाउनलोड किए एप को आपके फोन में इंस्टाल भी कर देता है और वो भी बिना किसी डाटा चार्ज के। आप अपने एंड्रायड फोन का पूरा बैकअप भी अपने पीसी में ले सकते हैं और साथ ही उसे जरूरत पड़ने पर री-स्टोर भी कर सकते हैं।
SnapPea
www.snappea.com
केविंडोज और मैक के लिए उपलब्ध कुछ एंड्रायड डेस्कटाॅप मैनेजमेंट टूल्स में से एक है स्नाप्पया इसमें ब्राउजर बेस्ड वर्जन है जो काफी कुछ एयरड्रायड की तरह काम करता है। आपको पहले फ्री एप अपने फोन पर इंस्टाल करना होगा और फिर अपने ब्राउजर विंडो में वाई-फाई पर फोन में एक्सेस कर सकते हैं। आप एप्स को इंस्टाल व रिमूव कर सकते हैं, फोन काॅन्टैक्ट्स को देख सकते हैं, उन्हें एडिट कर सकतें, मैसेज का आदान-प्रदान कर सकते हैं। पीसी व स्मार्टफोन के बीच फाइलों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। स्नाप्पया आपकी आईटन्स लाइब्रेरी से म्यूजिक भी इंपोर्ट करने के साथ इसे स्मार्टफोन में सिंक भी कर सकता है।
Moborobo
www.moborbo.com
सबसे शक्तिशाली पाॅवरफुल डेस्कटाॅप में से एक मोबोरोबो एंड्रायड और आईओएस दोनों ही डिवाइस के साथ काम कर सकता है। आप अपने काटैक्ट्स, मैसेज, एप्स के साथ-साथ मेन विंडो के जरिए मल्टीमीडिया फाइल्स भी देख सकते हैं। साथ ही आपको मेन विंडो में बैटरी लेवल,फर्मवाॅयर और उपलब्ध स्टोरज भी दिखते हैं। आप कनेक्टेड डिवाइस के जरिए आसानी से स्क्रीन शाॅट भी ले सकते हैं और इसे डेस्कटाॅप पर सेव भी कर सकते हैं। साॅफ्टवेयर का इस्तेमाल करके आप मैसेज का जवाब दे सकते हैं, एप्स को इंस्टाल या रिमूव कर सकते हैं और डाटा को मल्टीपल डिवाइस में भेज सकते हैं। इसमें भी बैकअप फीचर है।
Mobiledit!Lite
www.mobiledit.com
इस टूल का फ्री लाइट वर्जन सीमित है और केवल बेसिक फंक्शंस को एक्सेस करने की सुविधा देता है। आप अपने फोन को केबल, वाई-फाई या ब्लूटूथ के जरिए कनेक्ट कर सकते हैं और हां यह सभी स्मार्टफोन के साथ काम करने के अलावा कुछ फीचर फोन के साथ भी काम कर सकता है। आप अपने डिवाइस के बारे में जानकारी ले सकते हैं, मैसेज भेज सकते हैं, पीसी से जरूरी अपडेट अपने डिवाइस पर इंस्टाल कर सकते हैं और स्मार्टफोन व पीसी के बीच फाइलों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। इसका पेड वर्जन ;1,619द्ध आपको डुप्लीकेट काॅन्टैक्ट्स को रिमूव करने का आॅप्शन देने के साथ-साथ आॅटोमैटिक बैकअप देता है।
QtADB
http://qtadb.com
यह ओपन सोर्स एंड्रायड मैनेजमेंट साॅफ्टवेयर विंडोज, मैक और लाइनक्स के लिए उपलब्ध है। भले ही इसमें बेसिक इंटरफेस है, लेकिन यह दूसरे डेस्कटाॅप मैनेजर्स जैसे फीचर ही उपलब्ध करवाता है और इस्तेमाल में यह आपको किसी भी अन्य डेस्कटाॅप मैनेजर से कम नहीं लगेगा। इसमें आप अपने काॅन्टैक्ट्स को मैनेज कर सकते हैं, उन्हें एडिट भी कर सकते हैं। मैसेज का आदान-प्रदान कर सकते हैं, स्क्रीनशाॅट ले सकते हैं, डाटा ट्रांसफर कर सकते हैं और एप्स को रिमूव या इंस्टाल भी कर सकते हैं।
pocket.do
http://pocket.do
अगर आपको लगता है कि एंड्रायड का इस्तेमाल काॅम्पलीकेटेड है, तो आपको पोकेट डू पर विचार करना चाहिए। यह ब्राउजर विंडो पर काम करता है। इसमें भी पीसी व फोन का एकसमान वाई-फाई नेटवर्क पर होना जरूरी नहीं है। इसमें फेसबुक एकाउंट या गूगल एकाउंट या फिर क्यू आर कोड को ब्राउजर में स्कैन करके डिवाइस कनेक्ट की जा सकती है। एक बार कनेक्ट होने के बाद आप काॅन्टैक्ट्स मैनेज कर सकते हैं, मैसेज का आदान-प्रदान कर सकते हैं और फोटो भी ट्रांसफर कर सकते हैं। आप अपनी डिवाइस को मैप पर लोकेट करने के साथ-साथ उसे लाॅक भी कर सकते हैं।एंड्रायड को अपने पर्सनल कंप्यूटर पीसी से मैनेज करने के लिए पेश हैं कुछ खास एप्स की जानकारी
PC NOTIFICATIONS
यदि आप अपने डिवाइस को पीसी के जरिए मैनेज नहीं करना चाहते है, तो आप नोटिफिकेशंस के आॅप्शन भी ले सकते हैं। इसमें कोई भी काॅल आने पर, मैसेज आने पर या बैटरी लो होेने पर आपके पीसी में पाॅप-अप के जरिए अलर्ट आ जाएगा। इसके लिए आपको http://code.google.com/p/and roid-notifier पर जाकर Remote Notifier को डाउनलोड करना होगा। आपके डिवाइस से पीसी को भेजे जाने वाले नोटिफिकेशंस में वाई-फाई या ब्लूटूथ का इस्तेमाल होगा।
TEAMVIEWER
टीम व्यूवर रिमोट साॅफ्टवेयर काफी लोकप्रिय है और यह सैमसंग एंड्रायड डिवाइल को सपोर्ट करता है। इसके लिए पहले आपको टीम व्यूवर को अपने पीसी पर इंस्टाल करन होगा, टीम व्यूवर एप को तुरंत सपोर्ट करता है और अब आप आसानी से आगे जा सकते हैं। आप सैमसंग डिवाइस को रिमोट के जरिए एक्सेस कर सकते हैं।

जेब में समाने वाला प्रिंटर लॉन्च
15 July 2013

नई दिल्ली। LG कंपनी ने एक ऐसा फोटो प्रिंटर लांच किया है जो आसानी से जेब में रखा जा सकता है. अपने इस गैजेट से प्रिंट करना इतना आसान बना दिया है कि मात्र 15 सेकेंड में आप प्रिंट ले सकते हैं. कंपनी ने इसकी कीमत मात्र 13500 रखी है.
इस प्रिंटर को ब्लूटूथ और एनएफसी (नीयर फिल्ड टेक्नोलॉजी) के जरिए भी कनेक्ट किया जा सकता है. इस पेपर का साइज 50x76 MM है. इसको चलाने के लिए इसे चार्ज किया जाता है.
क्या है प्रिंटर में खास
इस प्रिंटर में यूजर एलबम क्रिएट कर सकता है, उसे एडिट और डिलीट भी कर सकता है. इसका रेजॉल्युशन 313 डीपीआई, इसकी प्रिंट करने की स्पीड 45 सेकेंड और ये अधिकतम 1000 प्रिंट निकाल सकता है. कनेक्टिविटी के मामले में इसे आईओएस मोबाइल और आईओएस पैड, एंड्रॉयड वाले मोबाइल से कनेक्ट किया जा सकता है. साथ ही इसमें ब्लूटूथ और एनएफसी फीचर भी है. इसका वजन सिर्फ 212 ग्राम और डाइमेंशन 72.4 x 120.9 x 24.0 MM है. ये प्रिंटर औसत रूप से 15.91 वॉट और अधिकतम 34.49 वॉट लेता है. इसमें ली-पॉलीमर 500 एमएएच वाली बैटरी लगी है.

एसएमएस के जरिए रेल टिकट बुकिंग हो गई शुरू
01 July 2013

नई दिल्ली। अब रेल यात्री एसएमएस के जरिए अपना टिकट बुक करा सकेंगे। यह सेवा सोमवार, एक जुलाई से शुरू हो गई। इसके अलावा अब यात्रियों को टिकट रद्द कराने पर अधिक पैसे कटवाने होंगे। मोबाइल से टिकट बुक कराने के लिए उपभोक्ता को 139 और 5676714 पर टिकट बुकिंग का मैसेज करना होगा। इसके लिए यात्री को प्रति एसएमएस तीन रुपये का शुल्क अदा करना होगा और भुगतान गेटवे की सुविधा के लिए पांच से दस रुपए का शुल्क लिया जाएगा।
मोबाइल एसएमएस के जरिए टिकट बुक कराने वाले यात्री को एसएमएस के जरिए ट्रेन संख्या, यात्रा शुरू करने की जगह और गंतव्य स्थान, यात्रा की तारीख, क्लास, नाम और उम्र जैसे यात्री विवरण देने होंगे। एसएमएस के जरिए टिकट बुक कराने वाले यात्रियों को टिकट का प्रिंट आउट रखने की भी जरूरत नहीं होगी। वह अपने मोबाइल पर आए एसएमएस को दिखाकर अपनी यात्रा कर सकेंगे।
आज से ही रेल मंत्रालय की ओर से किराया वापसी के नियम लागू हो रहे हैं। इसके चलते अब टिकट रद्द कराने पर यात्री को पहले से अधिक पैसे कटवाने होंगे। नए नियमों के तहत यात्रियों को अब अधिकतम धन वापसी के लिए अपना टिकट मौजूदा 24 घंटे के नियम के बजाय यात्रा के कम से कम 48 घंटे पहले रद्द कराना होगा। साथ ही यात्रियों को अब अपने कंफर्म टिकटों को रद्द कराने पर 25 प्रतिशत शुल्क कटौती के बाद शेष धन वापसी के लिए टिकट को ट्रेन के प्रस्थान समय से पूर्व 48 घंटे के भीतर और कम से कम छह घंटे पहले तक रद्द कराना होगा।
रेल मंत्रालय ने प्रति यात्री न्यूनतम रद्दीकरण शुल्क में जो बदलाव किया है उसके मुताबिक एसी प्रथम श्रेणी के लिए ये दर 120 रुपए, एसी द्वितीय श्रेणी के लिए 100 रुपए, एसी तृतीय श्रेणी और चेयरकार के लिए 90 रुपए, स्लीपर श्रेणी के लिए 60 रुपए और द्वितीय श्रेणी के लिए 30 रुपए होगी। अगर टिकट को ट्रेन रवाना होने के निर्धारित समय से छह घंटे पहले से लेकर वास्तविक प्रस्थान समय से दो घंटे बाद तक रद्द कराया जाता है तो 50 प्रतिशत कटौती की जाएगी।

ये बाइक करेगी हवा से बातें !
28 June 2013

नई दिल्ली : सैन फ्रांसिस्को की ऑटोमोबाइल कंपनी 'मिशन मोटर्स' ने ऐसी इलेक्ट्रिक बाइक बनाई है जो 257 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी. 'मिशन आर एस' दुनिया की सबसे तेज इलेक्ट्रिक बाइक है. 160 हॉर्सपावर की क्षमता वाली इस बाइक को किसी पेट्रोलियम इंधन की जरूरत नहीं है.
ये कार बैटरी से चलती है. इसमें किसी प्रकार के पेट्रोलियम का इस्तेमाल नहीं हुआ है इसलिए ये प्रदूषण भी नहीं फैलाती है.
इस बाइक की खास बात है कि ये सिर्फ 3 सेकेंड में ही 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है. 36 लाख कीमत की ये बाइक जल्द ही ऑटोमोबाइल मार्केट में बिक्री के लिए उपलब्‍ध हो जाएगी.

इंसानों से बातें करने वाला रोबोट करेगा अंतरिक्ष की सैर
27 June 2013

टोक्यो। अमेरिका और रूस के बाद जापान की अंतरिक्ष में एक नया मुकाम हासिल करने की तैयारी है। एशियाई देश चार अगस्त को इंसानों से बेधड़क बातें करने वाले रोबोट को अपने एक अंतरिक्ष यात्री के साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन भेजेगा। किरोबो नाम के इस मशीनी एस्ट्रोनॉट की अंतरिक्ष यात्रा पहला ऐसा मौका होगा, जब धरती से बाहर इंसान और रोबोट के बीच संवाद होगा।
जापान के दक्षिण-पश्चिम स्थित तानीगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र से चार अगस्त को किरोबो, कौउनोत्री-4 स्पेसक्राफ्ट के जरिये अंतरिक्ष स्टेशन रवाना होगा। जापानी अंतरिक्ष यात्री कोइची वाकाता भी इस मिशन का हिस्सा होंगे। वाकाता वहां स्पेस स्टेशन की कमान की जिम्मेदारी संभालने वाले पहले जापानी होंगे।
34 सेमी और एक किलो के नन्हे किरोबो को यह नाम जापानी शब्द किबो (आशा) और रोबोट को जोड़कर दिया गया। जापानी डेली प्रेस के मुताबिक, बुधवार को पत्रकारों से रूबरू हुए किरोबो ने तमाम सवालों का बखूबी जवाब दिया। लांचिंग के पहले शून्य गुरुत्व में रहने समेत किरोबो अंतरिक्ष में काम करने के लिए जरूरी इम्तहान पास कर चुका है।
किरोबो से पूछा गया कि उसका सपना क्या है? उसने कहा, वह ऐसे भविष्य की उम्मीद करता है, जहां इंसान और रोबोट एक साथ रहें और कंधे से कंधा मिलाकर काम करें। टोक्यो यूनिवर्सिटी, टोयोटा और डेंट्सू इंक ने मिलकर तैयार किया है। टोक्यो विवि में प्रोफेसर तोमोतोका ताकाहाशी ने कहा कि किरोबो अंतरिक्ष यात्रियों की मदद करेगा, वहीं उसका हमशक्ल रोबोट मिराता नीचे कंट्रोल रूम में जिम्मेदारी संभालेगा। वैज्ञानिकों का मुख्य लक्ष्य किरोबो और अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के बीच संवाद पर होगा। उनका कहना है कि एंड्रायड सिस्टम पर बना किरोबो जब स्पेस स्टेशन पर वाकाता से मिलेगा तो उसे पहचान लेगा। उसे पिछली बातें भी याद रहती हैं।

इंसानी दिमाग का डिजिटल 3डी एटलस तैयार किया
24 June 2013

लंदन। वैज्ञानिकों ने इंसानी दिमाग का एकदम नया एटलस तैयार करने में कामयाबी हासिल कर ली है। वह भी उम्दा डिजिटल 3डी मॉडल। उन्होंने इसे 'बिग ब्रेन' नाम दिया है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि उनकी इस खोज से इंसानी दिमाग की अब तक अबूझ कई रहस्यमय गुत्थी को सुलझाने में मदद मिलेगी।
जर्मनी के वैज्ञानिकों ने दस वर्षो के अथक प्रयास के बाद मानव मस्तिष्क का यह डिजिटल 3डी मॉडल तैयार किया है। शोध से जुड़ीं जूलिच रिसर्च सेंटर की वैज्ञानिक कैटरीन एमंट्स का कहना है कि यह गूगल अर्थ इस्तेमाल करने जैसा है। इस मॉडल से देखने पर दिमाग एक खुली किताब की तरह लगता है। मॉडल में इंसानी बाल से भी महीन तंतुओं का विश्लेषण किया गया है। इस प्रक्रिया में कुल मिलाकर तकरीबन 80 अरब न्यूरॉन की तस्वीर उतारी गई है। एमंट्स के अनुसार, इस डिजिटल 3डी मॉडल के जरिये अब मनुष्य मस्तिष्क की कई अबूझ सूक्ष्म कोशिकाओं के अस्तित्व का पता लगाने में भी मदद मिलेगी। उनका कहना है कि दिमाग की कई बड़ी कोशिकाओं के बारे में भी हम अब तक अंधेरे में तीर चलाते रहे हैं। लेकिन अब उनकी संरचना के बारे में कुछ सटीक कहा जा सकता है।
'साइंस जर्नल' में छपे शोध पत्र में एमंट्स के हवाले से बताया गया है कि दिमाग का डिजिटल 3 डी मॉडल तैयार करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक 65 वर्षीय मृत महिला के मस्तिष्क का सहारा लिया। शोधकर्ताओं ने उसके दिमाग के अंदरुनी हिस्से के 7,400 पतले-पतले टुकड़े किए। इसमें हर टुकड़ा इंसानी बाल की मोटाई का आधा था। फिर 3डी कैमरों से हर हिस्से की अलग-अलग तस्वीर उतारी गई। फिर कंप्यूटर के जरिये डाटा को जोड़ कर डिजिटल 3डी मॉडल तैयार किया गया। इसके बारे में कैंब्रिज विश्वविद्यालय के मनोचिकित्सक प्रो. पॉल फ्लेचर का कहना है कि इस मॉडल के तैयार होने के बाद इंसानी दिमाग की हर हरकत को पढ़ना अब आसान हो जाएगा। इससे दिमाग संबंधी रोगों के सटीक इलाज में भी मदद मिलने की संभावना है। शोधकर्ता इस मॉडल को दुनिया भर के वैज्ञानिकों को भेजने जा रहे हैं।।

कमरे से निकलते ही बंद हो जाएगी लाइट
15 June 2013

बरेली। यह डिवाइस उन लापरवाह लोगों की काट है, जो बिजली की फिजूल खर्ची नहीं समझते। कमरे से बाहर जाने के बाद लाइट, पंखे और एसी के स्विच ऑफ नहीं करते।
या फिर उनके लिए जो जल्दबाजी में ऐसा करना भूल जाते हैं। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक के कुछ छात्रों ने मिलकर डिवाइस के रूप में ऑटोमैटिक रूम लाइट कंट्रोलर तैयार किया है। महज एक हजार रुपये की लागत से तैयार इस डिवाइस में लगा सेंसर दरवाजे से किसी के आते ही खुद से जुड़ी लाइट ऑन कर देता है। पंखा, कूलर और एसी खुद-ब-खुद चलने लगते हैं। कमरे से बाहर जाते ही विद्युत चलित सारे उपकरण स्वत ही बंद हो जाते हैं। डिवाइस कमरे का तापमान भी प्रदर्शित करती है, जिसके मुताबिक एसी, पंखा और कूलर आदि की स्पीड सुनिश्चित करना आसान होगा। छात्र आत्माराम, सतीश कुमार, सौरभ कुमार और फैजीवाल ने यह डिवाइस असिस्टेंट प्रोफेसर आशीष शंखवार के निर्देशन में तैयार की है। वह बताते हैं कि ऊर्जा की बचत के लिए यह डिवाइस बेहद कारगर है। जासूसी रोबोट भी इसे भी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग विभाग के बीटेक फाइनल इयर के छात्रों ने ही बनाया है- नाम है स्पाइरो यानि स्पाई रोबोट। यह दुश्मनों की जासूसी का काम करेगा। असिस्टेंट प्रोफेसर अतुल सरोजवाल के निर्देशन में इसे तैयार करने वाले छात्र हेमंत सिंह खनका, हिमांशु गंगवार, मुकुल शुक्ला व नितिन मौर्य का कहना है कि यह पहला ऐसा रोबोट है जो जमीन के साथ ही पानी में भी चल सकता है। इसमें लगे वायरलेस कैमरे को वाईफाई से कनेक्ट करके किसी भी स्थल की ऑन लाइन निगरानी की जा सकती है।

अब हवा-धूप से चार्ज होगा मोबाइल
15 June 2013

मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के विद्यार्थियों ने भविष्य की तकनीकी चुनौतियों को देखते हुए ऐसे अहम डिजायन तैयार किए हैं, जो न केवल कम लागत वाले हैं, बल्कि दैनिक जरूरतों को और बेहतर विकल्प देंगे। विद्यार्थियों ने कम लागत के थ्रीडी प्रिंटर का डिजाइन तैयार करने में कामयाबी हासिल की है। साथ ही, हवा व धूप से मोबाइल चार्ज करने की विधि भी खोज ली है।
विद्यार्थियों ने संस्थान के कमाद स्थित परिसर में ओपन हाउस के दौरान कई नए मॉडल प्रदर्शित किए हैं। इनमें रेल हादसों पर अंकुश लगाने के लिए स्वचालित ब्रेक सिस्टम, स्वचालित व्हीलचेयर, धूल सोखने वाली मशीन, पानी का छिड़काव करने वाले यंत्र, इंटेलीजेंट पार्किग सिस्टम, ऑटोमेटिक पेपर रिसाइकलर, पर्वतीय क्षेत्र में बीज बोने के लिए रोबोट, अंधे लोगों के लिए ऑटो नेविगेशन उपकरण, होम ऑटोमेशन सिस्टम प्रमुख हैं।
मंडी आइआइटी के निदेशक टीए गोंजालविस का कहना है, 'विद्यार्थियों की ओर से प्रदर्शित मॉडलों ने विशेषाों को प्रभावित किया है।'
3डी प्रिंटर को प्रथम पुरस्कार:
विद्यार्थियों द्वारा निर्मित 3डी प्रिंटर की लागत बाजार में फिलहाल उपलब्ध प्रिंटरों के मुकाबले कम है। ओपन हाउस में जज इस मॉडल से खासे प्रभावित हुए व इसे प्रथम पुरस्कार के लिए चुना गया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रिंटर से 3डी पिक्चर भी प्रिंट की जा सकेगी।
मोबाइल चार्जिग में क्रांति:
संस्थान के इंजीनियरों ने हवा व धूप के उपयोग से चलने वाला हाइब्रिड मोबाइल चार्जर बनाया है। इस चार्जर की खासियत है कि इससे घर के अंदर बैठे हुए भी मोबाइल चार्ज किया जा सकता है। यह इस तरह से डिजायन किया गया है कि सीधी धूप के बिना भी मोबाइल चार्ज हो सकता है। ओपन हाउस में इस डिजाइन को दूसरा पुरस्कार मिला।
गृहणियों की समस्या दूर:
सेल्फ क्लॉथ रैक व फोल्डिंग मशीन और थ्री इन वन वैक्यूम क्लीनर व फर्श ड्रायर जैसे उत्पाद तैयार कर संस्थान के इंजीनियरों ने गृहिणियों की समस्या दूर कर दी है। सेल्फ क्लॉथ रैक व फोल्डिंग मशीन अंधेरा या नमी होने पर खुद ही कपड़े रैक में डाल देगी और उसे फोल्ड भी खुद करेगी।
सफाई के समाधान के लिए बनाए गए थ्री इन वन सॉल्यूशन में ऑटोमेटिक मशीन बिना किसी मदद के खुद सारी सफाई कर देगी। इसे रिमोट से नियंत्रित किया जा सकता है। ऑटो ट्रैस कंपेक्टर एक स्वचालित मशीन है जिससे कचरे के आकार को रोलर के माध्यम से कम किया जा सकेगा। यह कार्यालय परिसर, कॉलेज परिसर और घरों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

नोकिया ने भारत में किया आशा 501 का वैश्विक लांच
10 May 2013

नई दिल्ली। जून 2013 से बाजार में होगा उपलब्ध 5-6 हजार रुपये के बीच होगी कीमत

>> नए आशा प्लेटफॉर्म पर आधारित होगा यह फोन
>> फुल टचस्क्रीन और बेहद किफायती फोन
>> ग्राहक मुफ्त में कर सकेंगे फेसबुक का इस्तेमाल
>> नए नोकिया एक्सप्रेस ब्राउजर पर काम करेगा
>> नया ब्राउजर इंटरनेट डाटा को 90 फीसदी तक कंप्रेस करता है

17 घंटे का टॉकटाइम और 48 दिन का स्टैंडबाय टाइम
3.2 मेगापिक्सल कैमरा और छह रंगों में उपलब्ध
यह बहुत सांकेतिक है कि हम इस फोन को फिनलैंड, लंदन या अमेरिका से लांच नहीं कर रहे हैं। हम इसे यहां भारत में लांच कर रहे हैं क्योंकि हमारा बहुत ज्यादा काम भारतीय ग्राहकों पर केंद्रित है। दुनिया का 80 फीसदी हिस्सा 2जी वातावरण पर काम करता है और आशा 501 इसी वातावरण के मुताबिक है। हम इस श्रेणी में 3जी उत्पाद भी लाएंगे। 90 देशों के 60 मोबाइल ऑपरेटरों के साथ मिलकर हम आशा स्मार्टफोन को बेचेंगे।
- स्टीफन इलोप सीईओ, नोकिया
नोकिया स्मार्टफोन बाजार में बड़ी हिस्सेदारी पर नजरें टिकाए है। इस बाजार में आई-फोन और सैमसंग से पिछडऩे के बाद कंपनी नई आशा रेंज के जरिए मध्यम वर्गीय लोगों के हाथ में स्मार्टफोन देने की रणनीति पर काम कर रही है। कंपनी इस फोन को सभी उभरते हुए देशों में लांच करेगी और बड़ी संख्या में फोन बेचने की उम्मीद संजोए है। चीन के बाद भारत ही नोकिया का सबसे बड़ा बाजार है।


चोरी या गुम हुए मोबाइल को हर बार कैसे पाएं मुफ्त में वापस!
08 Feb 2013

हर किसी के लिए अपना मोबाइल फोन खास होता है चाहे वह सस्ता हो महंगा। जब किसी का मोबाइल खो जाता है तो उसे कई बड़ी परेशानियों को झेलना पड़ता है, जो शायद मोबाइल की कीमत से कहीं ज्यादा भारी पड़ती है। इसलिए जब भी आप मोबाइल खरीदें तो इसके बाद आपको कुछ सावधानियां रखनी चाहिए, जिससे आप खोए हुए मोबाइल को दोबारा खोज सकते हैं।
1- आईएमईआई-
हर मोबाइल या स्मार्टफोन का आईएमईआई नंबर होता है। अपने फोन से स्टार हैस क्६ हैस डायल कर अपने मोबाइल फोन का आईईएमआई नंबर पता कर सकते हैं। इस नंबर को हमेशा कही सुरक्षित जगह पर नोट कर लेना चाहिए, ताकि भविष्य में यदि कभी मोबाइल खो जाता है तो यह आपके काम आ सके। आप इस नंबर की मदद से अपना मोबाइल फोन ट्रैक कर सकत हैं। आईएमईआई नंबर देखने के लिए हैंडसेट की बैटरी निकालकर फोन के पैनल में लगे स्टीकर से आईएमईआई नंबर देख सकते हैं।
2- अवास्त मोबाइल सिक्योरिटी-
अवास्त मोबाइल सिक्योरिटी की मदद से भी खोए हुए मोबाइल को ट्रैक किया जा सकता है। यह एप्लीकेशन फ्री में डाउन लोड किया जा सकता है। इससे आप न केवल अपने मोबाइल को ट्रैक कर सकत हैं, बल्कि इसे कंट्रोल भी कर सकते हैं। जब भी मोबाइल खो जाए तो आप अपने खोए हुए मोबाइल में एक एसएससएस भेजकर उसकी लोकेशन के बारे में जान सकते हैं।
3- मोबाइल चेस लोकेशन ट्रैकर-
मोबाइल चेस लोकेशन ट्रैकर भी एक ऐसा एप्लीकेशन है, जिसकी मदद से गुम या चोरी हुए मोबाइल को ट्रैक करना आसान है। इसकी मदद से आपके हैंडसेट में किसी दूसरे के सिम होने का भी पता चल जाता है। यह एप्पलीकेशन जीपीएस कनेक्टिीविटी के माध्यम से न केवल हैंडसेट की सही लोकेशन बताएगी, बल्कि लोकेशन आई भी एसएमएस से भेज देगी।
4- थीफ ट्रैकर-
थीफ ट्रैकर एप्लीकेशन बहुत ही मददगार साबित होता है, जब आपका मोबाइल चोरी हो जाए। यह मोबाइल चोरी करने वाले व्यक्ति के बारे में आपको पूरी जानकारी देगी साथ आपका चोरी हुए मोबाइल का उपयोग करना भी चोर के लिए मुश्किल हो जाएगा और वह आपके मोबाइल का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। साथ इससे एक विशेष फीचर है कि यह आपको मेल द्वारा फोटो खींचकर सेंड भी करेगा, जिससे आप मोबाइल की लोकेशन का पता कर सकेंगे।
5- स्मार्ट लुक-
स्मार्टलुक एप्लीकेशन भी काफी कुछ थीफ ट्रैकर की तरह काम करता है। यह भी आपके फोन को चुराने वाले व्यक्ति की फोटो खींचकर मेल कर देगी। यह जीपीएस की मदद से आपको मोबाइल फोन की लोकेशन भी बताती रहेगी, जिससे आप अपना मोबाइल फोन ट्रैक कर सकेंगे।
6- एंटी थेफ्ट अलार्म-
एंटी थेफ्ट अलार्म भी मोबाइल चोरी रोकने में मददगार एप्लीकेशन है। इस एप्लीकेशन को डाउनलोड करने के बाद फोन में इसे एक्टिीवेट करना होगा। इसके बाद अगर कोई आपका मोबाइल छूने की कोशिश करता है तो आपके मोबाइल का तेज अलार्म बजेगा और आप जान जाएंगे कि कोई आपके मोबाइल को चोरी करने की कोशिश कर रहा है।
7- कैस्पर स्काई-
कैस्पर स्काई मोबाइल सिक्योरिटी एप्लीकेशन को भी अवास्त की तरह डाउनलोड किया जा सकता है। इससे अवांछित एसएमए और टैक्स फिल्टर किया जा सकता है। इसमें स्कैनर भी है, जो किसी वायरस एप्लीकेशन को इंस्टाल करने से पहले आपको सूचित करता है।
8- लुकआउट सिक्योरिटी एंड एंटीवायरस-
लुकआउट सिक्योरिटी एंड एंटीवायरस फ्री एप्लीकेशन है। इसमें चोरी गए या खोए मोबाइल को गूगल मैप की मदद से उसकी लोकेशन का पता कर सकते हैं। यदि फोन स्विच ऑफ कर दिया जाता है तो यह एप्लीकेशन फोन की आखिरी लोकेशन भी बता देगी। यह डिवाइस आपको फोन खोजने में मदद कर सकती है।
9- ट्रेंड माइक्रो-
ट्रेंड माइक्रो मोबाइल सिक्योरिटी एंड एंटीवायरस बेस्ट सेलिंग एप्पलीकेशन में से एक है। इसके प्राइवेसी स्कैनर की मदद से चोरों को दूर रखा जा सकता है। अगर बच्चे जरूरी चीजें अगर डिलेट करते हैं तो किड्स फीचर की मदद से अपने फोन की कुछ चीजें ब्लॉक की जा सकती हैं।
10- प्लान बी लुकआउट मोबाइल सिक्युरिटी-
प्लान बी लुकआउट सिक्योरिटी एप्लीकेशन की मदद से भी खोए या चोरी गए फोन की लोकेशन आसानी से ट्रैक की जा सकती है। यह एप्लीकेशन जीपीएस की मदद से आपको गायब फोन की लोकेशन बताती रहती है। इसमें प्लान ए और बी भी है। यदि कोई फोन से जीपीएस ऑफ कर देता है तो एप्लीकेशन आपको मेल द्वारा इस बात की जानकारी दे देगी ताकि पता चल सके कि आपके फोन की आखिरी लोकेशन क्या थी।

राजधानी में 16 दिसंबर से मिलेगा आईपैड मिनी
15 Dec 2012

भोपाल। देश के बाजारों के लिए एप्पल ने आईपैड मिनी और न्यू आईपैड की कीमतें तय कर दी हैं। आईपैड मिनी की प्राइस 21,900 रुपए और आईपैड 4 जी की प्राइस 31,900 रुपए से शुरू होगी। भोपाल में आईपैड मिनी 16 दिसंबर से उपलब्ध होगा। करीब 20 ग्राहक इसके लिए पहले ही एडवांस बुकिंग करा चुके हैं। एप्पल इन दिनों संकट के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में वह भारत जैसे उभरते बाजारों पर अधिक फोकस कर रहा है। इसी के चलते दुनिया के बाजारों में लांच होने के महज 7 दिनों के भीतर उसने यहां के बाजारों में मिनी आईपैड उपलब्ध करा दिया है। एप्पल के उत्पादों के स्थानीय विक्रेता अनिल सिंघई ने बताया कि दुनिया के बाजारों में लांच होने के बाद से ही मिनी आईपैड को लेकर राजधानी के युवाओं में खासी उत्सुकता है। भारतीय बाजारों में उपलब्ध कराए जा रहा एप्पल टीवी एक दरअसल एक सेट टॉप बॉक्स है। इसकी मदद से इंटरनेट के कंटेंट टीवी पर देखे जा सकेंगे। एप्पल के मार्केट शेयर में पिछले चार साल की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। गुरुवार को अमेरिकी बाजारों में इसके शेयर 6.9 फीसदी की गिरावट के साथ 538 डॉलर पर आ गए। यह 17 दिसंबर 2008 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है। ऐसे में कंपनी ग्रोथ के लिए भारतीय बाजारों की ओर उम्मीद से देख रहा है। इसके खास फीचर 7.9 इंच (टच स्क्रीन, 1024 गुणे 768 पिक्सल), ए5 ड्यूल कोर एएस प्रोसेसर, 5 एमपी रियर कैमरा विथ 1080 पी वीडियो, 1.2एमपी फ्रंट कैमरा विथ 720पी वीडियो, 10 घंटे का बैटरी बेक अप, 7.2 एमएम थिक स्क्रीन 308 ग्राम वजन हैं ।

आज ठप हो सकता है आपका कंप्यूटर
9 July 2012

न्यूयॉर्क। सोमवार को 'डीएनएस चेंजर' नमक मालवेयर दुनिया के 3.5 लाख से ज्यादा कंप्यूटरों में इंटरनेट सेवा ठप कर सकता है। कंप्यूटर विशेषज्ञों के मुताबिक डीएनएस चेंजर इंटरनेट ट्रैफिक को फर्जी वेबसाइटों की ओर मोड़ता है। एफबीआई ने यह वायरस पिछले साल नवंबर में पकड़ा था। इससे प्रभावित सर्वरों को अस्थायी तौर पर वैध सर्वरों से जोड़ा गया था। यही अवधि नौ जुलाई 2012 को खत्म होने जा रही है। ऐसे में डीएनएस चेंजर से प्रभावित कंप्यूटरों में इंटरनेट से संबंधित समस्या फिर आ सकती है।

इंटरनेट पर सेंसरशिप की मांग बढ़ी
न्यूयार्क। पिछले साल के अंतिम छह माह में भारत की ओर से इंटरनेट सामग्री पर पाबंदी लगाने की शिकायतें 49 फीसदी बढ़ी हैं। इस दौरान भारत की ओर से 255 शिकायतें आईं, जबकि दुनिया भर की सरकारों से एक हजार शिकायतें मिलीं। इंटरनेट कंपनी गूगल के अनुसार शिकायतों में यू-ट्यूब वीडियो और सर्च से सामग्री हटाने का आग्रह किया गया। कंपनी ने आधे से ज्यादा बार इन्हें माना। यू-ट्यूब वीडियो को लेकर 133 शिकायतें आईं जिनमें से 10 राष्ट्रीय सुरक्षा और 77 मानहानि से जुड़ी सामग्री को लेकर थीं। वेब सर्च को लेकर 26 और 49 ब्लॉगों को लेकर भी भारत ने आपत्ति की है। राजनीतिक टिप्पणियां खास तौर से निशाने पर रहीं जिन्हें लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें आईं। 2011 के पहले छह महीनों की तुलना में बाद के छह महीनों में 49 फीसदी ज्यादा शिकायतें दर्ज कराई गईं।
 
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