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राष्ट्रपति ने सद्गुरु कबीर महोत्सव को संबोधित किया
11 November 2017
राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने आज (10 नवंबर, 2017) भोपाल में सद्गुरु कबीर महोत्सव को संबोधित किया। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में ‘राष्ट्रीय कबीर सम्मान’ गठित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस सम्मान से उन कवियों को प्रोत्साहन मिलता है, जिन्होंने संत कबीर की परंपरा को आगे बढ़ाया। उन्होंने पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और उनके योगदान की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि सद्गुरु कबीर केवल महान आध्यात्मिक नेता ही नहीं थे, बल्कि समाज सुधारक भी थे। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष किया और इन कुरीतियों को दूर करने के लिए प्रयास भी किया। राष्ट्रपति ने कहा कि संत कबीर द्वारा दिखाए गए समानता और सद्भाव के रास्ते हमारे समाज के लिए प्रेरणा हैं। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर ‘मध्य प्रदेश में कबीर’ पुस्तक की पहली प्रति प्राप्त की। राष्ट्रपति ने बाद में भोपाल में रानी झांसी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रपति कल अमरकंटक में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्व विद्यालय के दूसरे दीक्षान्त समारोह को संबोधित करेंगे
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में केंद्र की भाजपा सरकार के तीन वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में दिए गए उद्बोधन के मुख्य बिंदु
27 May. 2017
अमित शाह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने इन तीन वर्षों में कई क्षेत्रों में असाधारण काम करके मील का पत्थर स्थापित किया है और एक महान भारत की नींव डालने का काम किया है:
लोकतंत्र में सरकार के कामकाज का सबसे बड़ा पैमाना जनादेश होता है। 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद देश में हुए सभी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने अपने जनाधार को बढ़ाया है और ज्यादातर चुनावों में विजय प्राप्त की है:
देश की जनता यह मानती है कि मोदी सरकार गरीबों की सरकार है, देश के गौरव को बढ़ाने वाली सरकार है, पारदर्शी व निर्णायक सरकार है। देश की जनता मानती है कि श्री नरेन्द्र मोदी जी आजादी के बाद देश के सबसे लोकप्रिय लोकनेता बन कर उभरे हैं:
इन तीन सालों में देश की जनता का आत्मविश्वास बढ़ाने, दुनिया में देश की प्रतिष्ठा व मान-सम्मान में वृद्धि करने और देश की सोच के स्केल को बदलने में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी सफल हुए हैं:
इन तीन वर्षों में देश की राजनीति से परिवारवाद, जातिवाद और तुष्टीकरण के अभिशाप को ख़त्म करने का काम हुआ है जो देश की राजनीति के लिए एक शुभ संकेत है:
आजादी के 70 सालों में जो चीजें हम अचीव नहीं कर पाए, मोदी सरकार ने इन तीन वर्षों में इसे अचीव किया है, इसलिए हमने तीन साल के पूरे होने पर अपने लोकसंपर्क अभियान का नारा बनाया है - साथ है, विश्वास है, हो रहा विकास है:
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार एक निर्णायक सरकार है, त्वरित फैसले लेने वाली सरकार है और योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने वाली सरकार है:
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने सभी दलों को साथ लाकर जीएसटी के माध्यम से ‘एक राष्ट्र, एक कर' के स्वप्न को साकार करके दिखाया है जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि है
सर्जिकल स्ट्राइक करके सेना के जवानों ने जो वीरता दिखाई और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जिस राजनीतिक दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय दिया, उससे भारत दुनिया में एक मजबूत राष्ट्र के रूप में प्रतिष्ठित हुआ है:
स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, स्किल इंडिया और मुद्रा योजना के माध्यम से देश भर में लगभग 8 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है:
आजादी के 70 साल बाद भी बिजली से वंचित देश के 18 हजार गाँवों में से लगभग 13 हजार से अधिक गाँवों में बिजली पहुंचाने का कार्य पूरा कर लिया गया है, बाकी बचे गाँवों में भी 2018 तक बिजली पहुंचाने का काम पूरा कर लिया जाएगा:
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में भारत आज दुनिया में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है, महंगाई काबू में है, विदेशी मुद्रा भंडार अपने रिकॉर्ड स्तर पर है, सेंसेक्स 31000 को पार कर गई है, निफ्टी भी अपने उच्चतम स्तर पर है:
सार्वजनिक जीवन में शुचिता लाने के लिए और चुनावी राजनीति में से काले-धन के दुष्प्रभाव को निरस्त करने के लिए कैश में लिए जाने वाले चंदे की रकम को दो हजार रुपये तक सीमित करने का साहस भी नरेन्द्र मोदी सरकार ने किया है:
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने आज, शुक्रवार को भाजपा के केन्द्रीय मुख्यालय में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में केंद्र की भाजपा सरकार के तीन बेमिसाल वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया और मोदी सरकार की उपलब्धियों और गरीब-कल्याण की नीतियों पर विस्तार से चर्चा की।
साथ है, विश्वास है, हो रहा विकास है
माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने इन तीन वर्षों में कई क्षेत्रों में असाधारण काम करके मील का पत्थर स्थापित किया है और एक महान भारत की नींव डालने का काम किया है। उन्होंने कहा कि इन तीन सालों में देश की जनता का आत्मविश्वास बढ़ाने, दुनिया में देश की प्रतिष्ठा व मान-सम्मान में वृद्धि करने और देश की सोच के स्केल को बदलने में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी सफल हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन तीन वर्षों में देश की राजनीति में आमूल-चूल परिवर्तन आया है, इन तीन वर्षों में हमारे विरोधी भी हमारी सरकार पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा सकते। उन्होंने कहा कि इन तीन वर्षों में देश की राजनीति में से परिवारवाद, जातिवाद और तुष्टीकरण के अभिशाप को ख़त्म करने का काम हुआ है जो देश की राजनीति के लिए एक शुभ संकेत है। उन्होंने कहा कि आजादी के 70 सालों में जो चीजें हम अचीव नहीं कर पाए, मोदी सरकार ने इन तीन वर्षों में उन चीजों को हासिल करने में सफलता अर्जित की है और इसलिए हमने भाजपा सरकार के तीन साल के पूरे होने पर लोकसंपर्क अभियान का नारा बनाया है - साथ है, विश्वास है, हो रहा विकास है।
संवेदनशील, पारदर्शी एवं निर्णायक सरकार श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने ओबीसी कमीशन को संवैधानिक मान्यता देने की 1955 से लंबित मांग को पूरा कर के देश के करोड़ों पिछड़े लोगों को सम्मान से जीने का अधिकार दिया है। उन्होंने कहा कि 40 सालों से लंबित पूर्व सैनिकों की ‘वन रैंक, वन पेंशन’ (ओआरओपी) को पूरा करके संवेदनशील भाजपा सरकार ने लगभग 8000 करोड़ रुपये की राशि को पूर्व सैनिकों के खाते में सीधा पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि एक साथ 104 उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करके भारत एक ग्लोबल लीडर के रूप में दुनिया में उभरा है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक करके सेना के जवानों ने जो वीरता दिखाई और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जिस राजनीतिक दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय दिया, उससे भारत दुनिया में एक मजबूत राष्ट्र के रूप में प्रतिष्ठित हुआ है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने एक राष्ट्रवादी सरकार का परिचय देते हुए शत्रु संपत्ति बिल को क़ानून बनाकर इसपर एक्शन लिया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने नोटबंदी, फर्जी कंपनियों के खिलाफ एक्शन और बेनामी संपत्ति का क़ानून लाकर मोदी सरकार ने काले-धन को ख़त्म करने की दिशा में निर्णायक पहल की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने चुनाव सुधार की एक नई सोच देश की जनता और सभी राजनीतिक दलों के सामने रखने का काम किया ताकि पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक के सारे चुनाव एक ही दिन कराया जा सके और जनता के ऊपर से चुनाव खर्च के बोझ को कम किया जा सके। श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने सभी दलों को साथ लाकर जीएसटी के माध्यम से ‘एक राष्ट्र, एक कर' के स्वप्न को साकार करके दिखाया है जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि ग्यारह सौ से ज्यादा अप्रासंगिक कानूनों को ख़त्म करके मोदी सरकार ने क़ानून के जंगल में मंगल का काम किया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा के लिए 48000 करोड़ रुपया आवंटित करके गरीबों की जिन्दगी को आसान बनाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नाम पर भीम एप शुरू करके गरीबों को डिजिटल ट्रांजेक्शन का सबसे पॉपुलर एप उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि विकलांगों को दिव्यांग का नाम देकर और उनकी भलाई के लिए कई योजनायें लाकर मोदी सरकार ने एक संवेदनशील सरकार होने का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि मैटरनिटी की छुट्टी को 26 सप्ताह तक बढ़ा कर मोदी जी ने इस देश के करोड़ों गर्भवती महिलाओं को खुद के और बच्चे की स्वास्थ्य की देखभाल करने का मौक़ा दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार एक निर्णायक सरकार है, त्वरित फैसले लेने वाली सरकार है और योजनाओं को समाज के अन्तिम व्यक्ति तक पहुंचाने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में हमने देश को पॉलिसी पैरालिसिस वाली सरकार के स्थान पर एक निर्णायक सरकार देने का काम किया है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि नार्थ-ईस्ट के विकास के लिए भी मोदी सरकार ने काफी कार्य किये हैं। उन्होंने कहा कि योग के माध्यम से भारतीय संस्कृति को पूरी दुनिया में सम्मान दिलाने का काम मोदी सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि हलके लड़ाकू विमान ‘तेजस' को वायु सेना में सम्मिलित करके ‘मेक इन इंडिया' इनिशिएटिव को बहुत बड़ा बल प्रदान किया गया है, साथ ही, सेना के आधुनिकीकरण को भी बहुत तेजी के साथ आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि पेरिस जलवायु सम्मेलन में भारत की भूमिका को पूरी दुनिया ने सराहा है और भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस मामले में भी ग्लोबल लीडर के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि लाल बत्ती के वीआईपी कल्चर को बदलने का काम भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ', नमामि गंगे और स्वच्छता अभियान के माध्यम से जनसमस्याओं को जन-भागीदारी से सुलझाने की पहल भी मोदी सरकार ने की है।
11. सरकार की प्रमुख पहलों का निर्माण समाज के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन का लक्ष्य गांधीजी की 150वीं जयंती के साथ 02 अक्तूबर, 2019 तक भारत को स्वच्छ बनाना है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बहाली के लिए मनरेगा जैसे कार्यक्रमों पर बढ़े व्यय से रोजगार में वृद्धि हो रही है। 110 करोड़ से अधिक लोगों तक अपनी वर्तमान पहुंच के साथ आधार लाभों के सीधे अंतरण, आर्थिक नुकसान रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद कर रहा है। डिजिटल भारत कार्यक्रम डिजिटल ढांचे के सर्वव्यापक प्रावधान और नकदीरहित आर्थिक लेन-देन साधनों के द्वारा एक ज्ञानपूर्ण अर्थव्यवस्था का निर्माण कर रहा है। स्टार्ट-अप इंडिया और अटल नवाचार मिशन जैसी पहलें नवाचार और नए युग की उद्यमिता को प्रोत्साहन दे रही हैं। कौशल भारत पहल के अंतर्गत, राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन 2022 तक 30 करोड़ युवाओं को कौशलयुक्त बनाने के लिए कार्य कर रहा है।
उपलब्धियों भरा वर्ष श्री शाह ने कहा कि मैं यह गर्व के साथ कहना चाहता हूँ कि पिछला वित्तीय वर्ष कई मायनों में बेमिसाल उपलब्धियों वाला वर्ष रहा। उन्होंने कहा कि 2016-17 वित्तीय वर्ष में यूरिया का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ, इस वित्तीय वर्ष में सबसे ज्यादा इथेनॉल का उत्पादन हुआ, सबसे ज्यादा घरेलू गैस कनेक्शन वितरित किये गए, सबसे ज्यादा कोयले का उत्पादन हुआ, सबसे ज्यादा विद्युत् उत्पादन हुआ, सबसे ज्यादा पूंजी रेलवे के विकास के लिए दी गई, सबसे ज्यादा राजमार्ग बनाए गए, सबसे ज्यादा तेज गति से ग्रामीण सड़कें बनाई गयी, सबसे ज्यादा सॉफ्टवेयर का निर्यात किया गया और सबसे ज्यादा मोटर गाड़ी व टू व्हीलर का उत्पादन हुआ। उन्होंने कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार अब तक के रिकॉर्ड स्तर पर है, यही बताता है कि श्री नरेन्द्र मोदी सरकार किस तरह से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इन तीन वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने न्यू इंडिया की नींव रखने का काम किया है, वे देश को महान भारत बनाने की दिशा में आगे लेकर बढ़े हैं।
सोशल सेक्टर में सुधार भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अंतर्गत देश भर में लगभग साढ़े 28 करोड़ से अधिक लोगों के बैंक अकाउंट खोले गए हैं और उन्हें देश के अर्थतंत्र की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा और जीवन सुरक्षा बीमा के अंतर्गत लगभग 13 करोड़ नागरिकों को सुरक्षा कवच दिया गया है, उज्ज्वला योजना के माध्यम से देश के दो करोड़ गरीब महिलाओं को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है, गिव इट अप के तहत लगभग एक करोड़ से अधिक लोगों ने अपनी सब्सिडी छोड़ी है, जेनेरिक दवाओं के माध्यम से देश के गरीब लोगों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने का काम किया गया है, स्टैंट के दाम 80% तक कम किये गए हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी बिजली से वंचित देश के 18 हजार गाँवों में से लगभग 13 हजार से अधिक गाँवों में बिजली पहुंचाने का कार्य पूरा कर लिया गया है, बाकी बचे गाँवों में भी 2018 तक बिजली पहुंचाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुद्रा बैंक के माध्यम से साढ़े साथ करोड़ युवाओं को स्वरोजगार के लिए काफी आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने 2018 तक लेप्रोसी और कालाजार से मुक्त होने का लक्ष्य रखा है, 2020 तक चेचक से मुक्ति पाने का लक्ष्य तय किया है, इस दिशा में देश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा देश भर में लगभग साढ़े चार करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है, मिशन इन्द्रधनुष के माध्यम से साढ़े सात करोड़ बच्चों के टीकाकरण का काम किया गया है। उन्होंने कहा कि स्किल इंडिया के माध्यम से युवाओं के स्किल अपग्रेडेशन का कार्य तेज गति से प्रगति पर है। स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, स्किल इंडिया और मुद्रा योजना के माध्यम से देश भर में लगभग 8 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम मजदूरी में 42% की वृद्धि हुई है, यूनिवर्सल पीएफ अकाउंट के माध्यम से मजदूरों की बहुत सारी समस्याओं का अंत किया गया है। उन्होंने कहा कि एक गरीब और बूढ़े मजदूरों के पेंशन को न्यूनतम एक हजार करके सम्मान देने का काम किया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ग तीन और वर्ग चार की नौकरी में से इंटरव्यू को ख़त्म करने का काम भी मोदी सरकार ने किया है, भाजपा की सभी राज्य सरकारों ने भी इस पारदर्शी मॉडल को अपनाया है।
भारत: दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में भारत आज दुनिया में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है, महंगाई काबू में है, विदेशी मुद्रा भंडार अपने रिकॉर्ड स्तर पर है, एक साल में विदेशी मुद्रा सेंसेक्स 31000 को पार कर गई है और निफ्टी भी अब तक के सबसे उच्च स्तर पर है। उन्होंने कहा कि बिजली उपलब्धता में भारत 2014 में दुनिया में 99वें स्थान पर था जबकि आज हम 76 स्थान ऊपर उठ कर 26वें स्थान पर आ गए हैं जो कि एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास दर पांच प्रतिशत से ऊपर रहा है। उन्होंने कहा कि आईएमएफ के अनुसार भारत का विकास दर 7.2 फीसदी रहने की संभावना है जबकि कांग्रेस की यूपीए सरकार 2014 में इसे 4.8 फीसद में छोड़ कर गई थी। उन्होंने कहा कि लगातार तीसरे वर्ष कृषि विकास दर में वृद्धि दर्ज की गई है, कांग्रेस की यूपीए सरकार के समय कृषि विकास दर ऋणात्मक थी जबकि मोदी सरकार में यह लगातार 4% से ऊपर है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल कॉम्पिटिटिव इंडेक्स में हम 71वें स्थान से 39वें स्थान पर आ गाये हैं। उन्होंने कहा कि नेमुरा के अनुसार, निर्यात में शुरुआती गिरावट के बात लगातार वृद्धि का दौर जारी है और मार्च महीने में यह सालाना आधार पर 27.6 प्रतिशत बढ़ा है। एफडीआई में 45% की वृद्धि हुई है, एक्सपोर्ट में तेजी आई है, ब्याज दरों में कटौती करने में हमें सफलता मिली है, राजकोषीय खाते को 3.9 प्रतिशत तक रखने में हम सफल हुए हैं और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर संग्रह में लगभग 20% की वृद्धि दर्ज की गई है जो आजादी के बाद से सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष जहां भारत में प्रति व्यक्ति आय 93,293 रुपये थी, वहीं इस वित्त वर्ष यह 103,007 रुपये रहने का अनुमान है।
काले धन पर प्रहार भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने इन तीन वर्षों में काले-धन के रास्ते को बंद करने के लिए कई कदम उठाये हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने नोटबंदी का ऐतिहासिक फैसला लेते हुए काले-धन के खिलाफ लड़ाई की अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई, फर्जी कंपनियों के खिलाफ एक्शन और बेनामी संपत्ति का क़ानून लाकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में केंद्र की मोदी सरकार ने काले-धन को रोकने की दिशा में निर्णायक पहल की। उन्होंने कहा कि कोल ब्लॉक आवंटन और स्पेक्ट्रम की पारदर्शी नीलामी सुनिश्चित की गई और इससे भ्रष्टाचार को ख़त्म करने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि मनी लॉन्डरिंग के जरिये अर्जित की गई बेनामी संपत्ति में से लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति सीज की गई है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई की कटिबद्धता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि लगभग 9.36 लाख करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी गई है, साइप्रस, सिंगापुर और मॉरीशस रूट बंद करके काले धन को वापिस लाने को अर्थतंत्र में वापस लाने के रास्ते बंद किये गए हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में शुचिता लाने के लिए और चुनावी राजनीति में से काले-धन के दुष्प्रभाव को निरस्त करने के लिए कैश में लिए जाने वाले चंदे की रकम को दो हजार रुपये तक सीमित करने का साहस भी नरेन्द्र मोदी सरकार ने किया है।
किसानों की भलाई के लिए प्रतिबद्ध सरकार माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि किसानों की भलाई के लिए मोदी सरकार ने कई इनिशिएटिव लिए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए स्वायल हेल्थ कार्ड, नीम कोटेड यूरिया, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, ई-मंडी इत्यादि योजनाओं के माध्यम से किसानों के जीवन-स्तर को ऊपर उठाने के लिए कार्य किये गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से खेत से लेकर खलिहान तक किसानों की फसल को सुरक्षित करने का काम किया गया है। उन्होंने कहा कि रबी और खरीफ फसलों के मिनिमम सपोर्ट प्राइस में सरकार द्वारा लगातार तीसरी बार वृद्धि की गई है, दलहन फसलों को एमएसपी पर खरीद कर सरकार ने दाल उत्पादक किसानों को काफी राहत प्रदान की गयी है, किसान क्रेडिट कार्ड के जरिये किसानों की सुविधा में बढ़ोत्तरी की गई है। उन्होंने कहा कि आपदा के समय किसानों को सहायता देने के सभी पैमानों में बढ़ोत्तरी की गई है। किसानों को दी जाने वाली आवंटित राशि को लगभग दोगुना कर दिया गया है, गन्ना किसानों का भुगतान लगभग - लगभग पूरा कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि नीम कोटेड यूरिया के मदद से पेस्टीसाइड के उपयोग और खाद के उपयोग में कमी लाई गई है, साथ ही खादों के दाम में भी आजादी के बाद पहली बार कमी आई है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में तेज प्रगति श्री शाह ने कहा कि आजादी के बाद सबसे तेज गति से राजमार्गों का निर्माण मोदी सरकार में हो रहा है, राजमार्गों को लेवी फ्री एवं क्रोसिंग फ्री बनाने का काम किया जा रहा है, जम्मू-कश्मीर में सबसे बड़ी सुरंग का उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने किया, आज ही प्रधानमंत्री जी ने असम को अरुणाचल प्रदेश से जोड़ने वाली देश की सबसे लंबी सड़क पुल भूपेन हजारिक का उद्घाटन किया है। उन्होंने कहा कि विद्युत् उत्पादन क्षमता में एक तिहाई जबकि विद्युत् ट्रांसमिशन में एक चौथाई बढ़ोत्तरी हुई है। उन्होंने कहा कि रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए करोड़ों का निवेश किया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में लगभग 30 करोड़ एलइडी बल्ब बांटे गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष लगभग 28 लाख विदेशी पर्यटकों को देश में लाने का काम किया गया है, इसमें लगभग 13% की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि ग्राम सड़क योजना में लगभग 130 किलोमीटर सड़क रोज बनाया गया है, उड़ान के माध्यम से सस्ती हवाई यात्रा की शुरुआत की गई है, सागरमाला में कार्य प्रगति पर है और नाविक नेविगेशन में भी दुनिया के कई देश भारत के साथ आ रहे हैं, होम लोन की दर को कम करके लोगों को राहत दी गयी है और सस्ते घर के सपने को साकार करने का काम हुआ है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार के कामकाज का सबसे बड़ा पैमाना जनता का जनादेश होता है। उन्होंने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद देश में हुए सभी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने अपने जनाधार को बढ़ाया है और ज्यादातर चुनावों में विजय प्राप्त की है, यह मोदी सरकार को जनता का सर्टिफिकेट है। उन्होंने कहा कि देश की जनता यह मानती है कि मोदी सरकार गरीबों की सरकार है, देश के गौरव को बढ़ाने वाली सरकार है, पारदर्शी व निर्णायक सरकार है। उन्होंने कहा कि देश की जनता मानती है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी आजादी के बाद से देश के सबसे लोकप्रिय लोकनेता बन कर उभरे हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा शुरू की गयी योजनायें
1. प्रधानमंत्री जन धन योजना 2. प्रधानमंत्री आवास योजना 3. प्रधानमंत्री सुकन्या समृद्धि योजना 4. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना 5. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना 6. प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना 7. अटल पेंशन योजना 8. सांसद आदर्श ग्राम योजना 9. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 10. प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना 11. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना 12. प्रधानमंत्री जन औषधि योजना 13. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 14. मेक इन इंडिया 15. स्वच्छ भारत अभियान 16. किसान विकास पत्र 17. सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम 18. डिजिटल इंडिया 19. स्किल इंडिया 20. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना 21. मिशन इन्द्रधनुष 22. दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना 23. दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना 24. पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमेव जयते योजना 25. अटल मिशन फॉर रेजुवेनशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत योजना) 26. स्वदेश दर्शन योजना 27. पिल्ग्रिमेज रेजुवेनशन एंड स्पिरिचुअल ऑग्मेंटशन ड्राइव (प्रसाद योजना) 28. नेशनल हेरिटेज सिटी डेवलपमेंट एंड ऑग्मेंटशन योजना (ह्रदय योजना) 29. उड़ान स्कीम 30. नेशनल बाल स्वछता मिशन 31. वन रैंक वन पेंशन (OROP) स्कीम 32. स्मार्ट सिटी मिशन 33. गोल्ड मोनेटाईजेशन स्कीम 34. स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया 35. डिजिलॉकर 36. इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम 37. श्यामा प्रसाद मुखेर्जी रुर्बन मिशन 38. सागरमाला प्रोजेक्ट 39. ‘प्रकाश पथ’ – ‘वे टू लाइट’ 40. उज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना 41. विकल्प स्कीम 42. नेशनल स्पोर्ट्स टैलेंट सर्च स्कीम 43. राष्ट्रीय गोकुल मिशन 44. पहल – डायरेक्ट बेनिफिट्स ट्रांसफर फॉर LPG (DBTL) कंस्यूमर्स स्कीम 45. नेशनल इंस्टीटूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (नीति आयोग) 46. प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना 47. नमामि गंगे प्रोजेक्ट 48. सेतु भारतं प्रोजेक्ट 49. रियल एस्टेट बिल 50. आधार बिल 51. क्लीन माय कोच 52. राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान 53. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 54. प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना 55. उन्नत भारत अभियान 56. टी बी मिशन 2020 57. धनलक्ष्मी योजना 58. नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम 59. गंगाजल डिलीवरी स्कीम 60. प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान 61. विद्यांजलि योजना 62. स्टैंड अप इंडिया लोन स्कीम 63. ग्राम उदय से भारत उदय अभियान 64. सामाजिक अधिकारिता शिविर 65. रेलवे यात्री बीमा योजना 66. स्मार्ट गंगा सिटी 67. मिशन भागीरथ 68. विद्यालक्ष्मी लोन स्कीम 69. स्वयं प्रभा 70. प्रधानमंत्री सुरक्षित सड़क योजना 71. शाला अश्मिता योजना 72. प्रधानमंत्री ग्राम परिवहन योजना 73. राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा अभियान – National Health Protection Mission 74. राईट टू लाइट स्कीम (आने वाली योजना) 75. राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव 76. उड़ान – उडे देश का आम नागरिक 77. डिजिटल ग्राम 78. ऊर्जा गंगा 79. सौर सुजाला योजना 80. एक भारत श्रेष्ठ भारत 81. शहरी हरित परिवहन योजना (GUTS) 82. नोटबंदी 83. प्रधानमंत्री युवा योजना 84. भारत नेशनल कार असेसमेंट प्रोग्राम (NCAP) 85. अमृत OR AMRIT (अफोर्डेबल मेडिसिन एंड रिलाएबल इम्प्लांट्स फॉर ट्रीटमेंट) 86. राष्ट्रीय आदिवासी उत्सव 87. प्रवासी कौशल विकास योजना 88. प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना 89. गर्भवती महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता योजना 90. वरिष्ठ नागरिकों के लिए Fixed Deposit स्कीम – वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना 2017 91. प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान 92. यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम 93. जन धन खाता धारकों के लिए बीमा योजना 94. महिला उद्यमियों के लिए स्टार्ट-अप इंडिया योजना 95. मछुआरों के लिए मुद्रा लोन योजना 96. ग्रीन अर्बन मोबिलिटी स्कीम 97. राष्ट्रीय वयोश्री योजना 98. MIG के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना लोन स्कीम 99. पॉवेरटेक्स इंडिया स्कीम 100. भारत के वीर पोर्टल 101. व्यापारियों के लिए भीम आधार एप 102. भीम रेफेरल बोनस स्कीम और कैशबैक स्कीम 103. शत्रु सम्पति कानून 104. डिजिधन मेला 105. राष्ट्रीय जनजातीय कार्निवल 106. यूनिवर्सल बेसिक आय योजना


भारत के गणतंत्र दिवस 2017 की पूर्व संध्या पर भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का राष्ट्र के नाम संदेश
25 Jan. 2017
प्यारे देशवासियो,

हमारे राष्ट्र के अड़सठवें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर, मैं भारत और विदेशों में बसे आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूं। मैं सशस्त्र बलों, अर्द्धसैनिक बलों और आंतरिक सुरक्षा बलों के सदस्यों को अपनी विशेष बधाई देता हूं। मैं उन वीर सैनिकों और सुरक्षाकर्मियों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं जिन्होंने भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने और कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। भाइयो और बहनो,
2. 15 अगस्त, 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ, हमारे पास अपना कोई शासन दस्तावेज नहीं था। हमने 26 जनवरी, 1950 तक प्रतीक्षा की, जब भारतीय जनता ने इसके सभी नागरिकों के लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता तथा लैंगिक और आर्थिक समता के लिए स्वयं को एक संविधान सौंपा। हमने भाईचारे, व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता को प्रोत्साहित करने का वचन दिया। उस दिन हम विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र बन गए।
3. लोगों के विश्वास और प्रतिबद्धता ने हमारे संविधान को जीवन प्रदान किया और हमारे राष्ट्र के संस्थापकों ने, बुद्धिमत्ता और सजगता के साथ भारी क्षेत्रीय असंतुलन और बुनियादी आवश्यकताओं से भी वंचित विशाल नागरिक वर्ग वाली एक गरीब अर्थव्यवस्था की तकलीफों से गुजरते हुए, नए राष्ट्र को आगे बढ़ाया।
4. हमारे संस्थापकों द्वारा निर्मित लोकतंत्र की मजबूत संस्थाओं को यह श्रेय जाता है कि पिछले साढ़े छ: दशकों से भारतीय लोकतंत्र अशांति से ग्रस्त क्षेत्र में स्थिरता का मरूद्यान रहा है। 1951 में 36 करोड़ की आबादी की तुलना में, अब हम 1.3 अरब आबादी वाले एक मजबूत राष्ट्र हैं। उसके बावजूद, हमारी प्रति व्यक्ति आय में दस गुना वृद्धि हुई है, गरीबी अनुपात में दो तिहाई की गिरावट आई है, औसत जीवन प्रत्याशा दुगुनी से अधिक हो गई है, और साक्षरता दर में चार गुना बढ़ोतरी हुई है। आज हम विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था हैं। हम वैज्ञानिक और तकनीकी जनशक्ति के दूसरे सबसे बड़े भंडार, तीसरी सबसे विशाल सेना, न्यूक्लीयर क्लब के छठे सदस्य, अंतरिक्ष की दौड़ में शामिल छठे सदस्य और दसवीं सबसे बड़ी औद्योगिक शक्ति हैं। एक निवल खाद्यान्न आयातक देश से भारत अब खाद्य वस्तुओं का एक अग्रणी निर्यातक बन गया है। अब तक की यात्रा घटनाओं से भरपूर, कभी-कभी कष्टप्रद, परंतु अधिकांश समय आनंददायक रही है।
5. जैसे हम यहां तक पहुंचे हैं वैसे ही और आगे भी पहुंचेंगे। परंतु हमें बदलती हवाओं के साथ तेजी से और दक्षतापूर्वक अपने रुख मंर परिवर्तन करना सीखना होगा। प्रगतिशील और वृद्धिगत विकास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की उन्नति से पैदा हुए तीव्र व्यवधानों को समायोजित करना होगा। नवाचार, और उससे भी अधिक समावेशी नवाचार को एक जीवनशैली बनाना होगा। शिक्षा को प्रौद्योगिकी के साथ आगे बढ़ना होगा। मनुष्य और मशीन की दौड़ में, जीतने वाले को रोजगार पैदा करना होगा। प्रौद्योगिकी अपनाने की रफ्तार के लिए एक ऐसे कार्यबल की आवश्यकता होगी जो सीखने और स्वयं को ढालने का इच्छुक हो। हमारी शिक्षा प्रणाली को, हमारे युवाओं को जीवनपर्यंत सीखने के लिए नवाचार से जोड़ना होगा।

प्यारे देशवासियो,
6. हमारी अर्थव्यवस्था चुनौतीपूर्ण वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद, अच्छा प्रदर्शन करती रही है। 2016-17 के पूर्वाद्ध में, पिछले वर्ष की तरह, इसमें 7.2 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई , और इसमें निरंतर उभार दिखाई दे रहा है। हम मजबूती से वित्तीय दृढ़ता के पथ पर अग्रसर हैं और हमारा मुद्रास्फीति का स्तर आरामदायक है। यद्यपि हमारे निर्यात में अभी तेजी आनी बाकी है, परंतु हमने विशाल विदेशी मुद्रा भंडार वाले एक स्थिर बाह्य क्षेत्र को कायम रखा है।
7. काले धन को बेकार करते हुए और भ्रष्टाचार से लड़ते हुए, विमुद्रीकरण से आर्थिक गतिविधि में, कुछ समय के लिए मंदी आ सकती है। लेन-देन के अधिक से अधिक नकदीरहित होने से अर्थव्यवस्था की पारदर्शिता बढ़ेगी।

भाइयो और बहनो,
8. स्वतंत्र भारत में जन्मी, नागरिकों की तीन पीढ़ियाँ औपनिवेशिक इतिहास के बुरे अनुभवों को साथ लेकर नहीं चलती हैं। इन पीढ़ियों को स्वतंत्र राष्ट्र में शिक्षा प्राप्त करने, अवसरों को खोजने और एक स्वतंत्र राष्ट्र में सपने पूरे करने का लाभ मिलता रहा है। इससे उनके लिए कभी-कभी स्वतंत्रता को हल्के में लेना; असाधारण पुरुषों और महिलाओं द्वारा इस स्वतंत्रता के लिए चुकाये गए मूल्यों को भूल जाना; और स्वतंत्रता के पेड़ की निरंतर देखभाल और पोषण की आवश्यकता को विस्मृत कर देना आसान हो जाता है। लोकतंत्र ने हम सब को अधिकार प्रदान किए हैं। परंतु इन अधिकारों के साथ-साथ दायित्व भी आते हैं, जिन्हें निभाना पड़ता है। गांधीजी ने कहा, ‘आजादी के सर्वोच्च स्तर के साथ कठोर अनुशासन और विनम्रता आती है। अनुशासन और विनम्रता के साथ आने वाली आजादी को अस्वीकार नहीं किया जा सकता; अनियंत्रित स्वच्छंदता असभ्यता की निशानी है, जो अपने और दूसरों के लिए समान रूप से हानिकारक है।’

प्यारे देशवासियो,
9. आज युवा आशा और आकांक्षाओं से भरे हुए हैं। वे अपने जीवन के उन लक्ष्यों को लगन के साथ हासिल करते हैं, जिनके बारे में वे समझते हैं कि वे उनके लिए प्रसिद्धि, सफलता और प्रसन्नता लेकर आएंगे। वे प्रसन्नता को अपना अस्तित्वपरक उद्देश्य मानते हैं जो स्वाभाविक भी है। वे रोजमर्रा की भावनाओं के उतार-चढ़ाव में, और अपने लिए निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति में प्रसन्नता खोजते हैं। वे रोजगार के साथ-साथ जीवन का प्रयोजन भी ढूंढते हैं। अवसरों की कमी से उन्हें निराशा और दुख होता है जिससे उनके व्यवहार में क्रोध, चिंता, तनाव और असामान्यता पैदा होती है। लाभकारी रोजगार, समुदाय के साथ सक्रिय जुड़ाव, माता-पिता के मार्गदर्शन, और एक जिम्मेवार समाज की सहानुभूति के जरिए उनमें समाज अनुकूल आचरण पैदा करके इससे निपटा जा सकता है।

भाइयो और बहनो,
10. मेरे एक पूर्ववर्ती ने मेरी मेज पर फ्रेम किया हुआ कथन छोड़ा जो इस प्रकार था: ‘शांति और युद्ध में सरकार का उद्देश्य शासकों और जातियों की महिमा नहीं है बल्कि आम आदमी की खुशहाली है।’ खुशहाली जीवन के मानवीय अनुभव का आधार है। खुशहाली समान रूप से आर्थिक और गैर आर्थिक मानदंडों का परिणाम है। खुशहाली के प्रयास सतत विकास के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं, जिसमें मानव कल्याण, सामाजिक समावेशन और पर्यावरण को बनाए रखना शामिल है। हमें अपने लोगों की खुशहाली और बेहतरी को लोकनीति का आधार बनाना चाहिए।
11. सरकार की प्रमुख पहलों का निर्माण समाज के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन का लक्ष्य गांधीजी की 150वीं जयंती के साथ 02 अक्तूबर, 2019 तक भारत को स्वच्छ बनाना है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बहाली के लिए मनरेगा जैसे कार्यक्रमों पर बढ़े व्यय से रोजगार में वृद्धि हो रही है। 110 करोड़ से अधिक लोगों तक अपनी वर्तमान पहुंच के साथ आधार लाभों के सीधे अंतरण, आर्थिक नुकसान रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद कर रहा है। डिजिटल भारत कार्यक्रम डिजिटल ढांचे के सर्वव्यापक प्रावधान और नकदीरहित आर्थिक लेन-देन साधनों के द्वारा एक ज्ञानपूर्ण अर्थव्यवस्था का निर्माण कर रहा है। स्टार्ट-अप इंडिया और अटल नवाचार मिशन जैसी पहलें नवाचार और नए युग की उद्यमिता को प्रोत्साहन दे रही हैं। कौशल भारत पहल के अंतर्गत, राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन 2022 तक 30 करोड़ युवाओं को कौशलयुक्त बनाने के लिए कार्य कर रहा है।
भाइयो और बहनो,
12. मुझे पूरा विश्वास है कि भारत का बहुलवाद और उसकी सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषायी और धार्मिक अनेकता हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। हमारी परंपरा ने सदैव ‘असहिष्णु’ भारतीय नहीं बल्कि ‘तर्कवादी’ भारतीय की सराहना की है। सदियों से हमारे देश में विविध दृष्टिकोणों, विचारों और दर्शन ने शांतिपूर्वक एक दूसरे के साथ स्पर्द्धा की है। लोकतंत्र के फलने-फूलने के लिए, एक बुद्धिमान और विवेकपूर्ण मानसिकता की जरूरत है। एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए विचारों की एकता से अधिक, सहिष्णुता, धैर्य और दूसरों कासम्मान जैसे मूल्यों का पालन करने की आवश्यकता होती है। ये मूल्य प्रत्येक भारतीय के हृदय और मस्तिष्क में रहने चाहिए; जिससे उनमें समझदारी और दायित्व की भावना भरती रहे।
प्यारे दशवासियो,
13. हमारा लोकतंत्र कोलाहलपूर्ण है। फिर भी जो लोकतंत्र हम चाहते हैं वह अधिक हो, कम न हो। हमारे लोकतंत्र की मजबूती इस सच्चाई से देखी जा सकती है कि 2014 के आम चुनाव में कुल 83 करोड़ 40 लाख मतदाताओं में से 66 प्रतिशत से अधिक ने मतदान किया। हमारे लोकतंत्र का विशाल आकार हमारे पंचायती राज संस्थाओं में आयोजित किए जा रहे नियमित चुनावों से झलकता है। फिर भी हमारे कानून निर्माताओं को व्यवधानों के कारण सत्र का नुकसान होता है जबकि उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस करनी चाहिए और विधान बनाने चाहिए। बहस, परिचर्चा और निर्णय पर पुन:ध्यान देने के सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।
14. जबकि हमारा गणतंत्र अपने अड़सठवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि हमारी प्रणालियां श्रेष्ठ नहीं हैं। त्रुटियों की पहचान की जानी चाहिए और उनमें सुधार लाना चाहिए। स्थायी आत्मसंतोष पर सवाल उठाने होंगे। विश्वास की नींव को मजबूत बनाना होगा। चुनावी सुधारों पर रचनात्मक परिचर्चा करने और स्वतंत्रता के बाद के उन शुरुआती दशकों की परंपरा की ओर लौटने का समय आ गया है जब लोक सभा और राज्य विधान सभाओं के चुनाव एक साथ आयोजित किए जाते थे। राजनीतिक दलों के विचार-विमर्श से इस कार्य को आगे बढ़ाना चुनाव आयोग का दायित्व है।

प्यारे देशवासियो,
15. भयंकर रूप से प्रतिस्पर्द्धी विश्व में, हमें अपनी जनता के साथ किए गए वादे पूरा करने के लिए पहले से अधिक परिश्रम करना होगा।

० हमें और अधिक परिश्रम करना होगा क्योंकि गरीबी से हमारी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। हमारी अर्थव्यवस्था को अभी भी गरीबी पर तेज प्रहार करने के लिए दीर्घकाल में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि करनी होगी। हमारे देशवासियों का पांचवां हिस्सा अभी तक गरीबी रेखा से नीचे बना हुआ है। गांधीजी का प्रत्येक आंख से हर एक आंसू पोंछने का मिशन अभी भी अधूरा है।
० हमें अपने लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए और प्रकृति के उतार-चढ़ाव के प्रति कृषि क्षेत्र को लचीला बनाने के लिए और अधिक परिश्रम करना है। हमें जीवन की श्रेष्ठ गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए, गांवों के हमारे लोगों को बेहतर सुविधाएं और अवसर प्रदान करने होंगे।
० हमें विश्वस्तरीय विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के सृजन द्वारा युवाओं को और अधिक रोजगार अवसर प्रदान करने के लिए अधिक परिश्रम करना है। घरेलू उद्योग की स्पर्द्धात्मकता में गुणवत्ता, उत्पादकता और दक्षता पर ध्यान देकर सुधार लाना होगा।
० हमें अपनी महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा और संरक्षा प्रदान करने के लिए और अधिक परिश्रम करना है। महिलाओं को सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने में सक्षम बनना चाहिए। बच्चों को पूरी तरह से अपने बचपन का आनंद उठाने में सक्षम होना चाहिए।
० हमें अपने उन उपभोग तरीकों को बदलने के लिए और अधिक परिश्रम करना है जिनसे पर्यावरणीय और पारिस्थिकीय प्रदूषण हुआ है। हमें बाढ़, भूस्खलन और सूखे के रूप में, प्रकोप को रोकने के लिए प्रकृति को शांत करना होगा।
० हमें और अधिक परिश्रम करना होगा क्योंकि निहित स्वार्थों द्वारा अभी भी हमारी बहुलवादी संस्कृति और सहिष्णुता की परीक्षा ली जा रही है। ऐसी स्थितियों से निपटने में तर्क और संयम हमारे मार्गदर्शक होने चाहिए।
० हमें आतंकवाद की बुरी शक्तियों को दूर रखने के लिए और अधिक परिश्रम करना है। इन शक्तियों का दृढ़ और निर्णायक तरीके से मुकाबला करना होगा। हमारे हितों की विरोधी इन शक्तियों को पनपने नहीं दिया जा सकता।
० हमें अपने उन सैनिकों और सुरक्षाकर्मियों की बेहतरी को सुनिश्चित करने के लिए और अधिक परिश्रम करना है, जो आंतरिक और बाह्य खतरों से हमारी रक्षा करते हैं।
० हमें और अधिक परिश्रम करना है क्योंकि;
हम सभी अपनी मां के लिए एक जैसे बच्चे हैं;
और हमारी मातृभूमि, हम में से प्रत्येक से, चाहे हम कोई भी भूमिका निभाते हों;
हमारे संविधान में निहित मूल्यों के अनुसार;
निष्ठा, समर्पण और दृढ़ सच्चाई के साथ;
अपना कर्तव्य पूरा करने के लिए कहती है।
जय हिंद!

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार। पिछले महीने हम सब दिवाली का आनंद ले रहे थे।
Our Correspondent :28 November 2016
मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार। पिछले महीने हम सब दिवाली का आनंद ले रहे थे। हर वर्ष की तरह इस बार दिवाली के मौके पर, मैं फिर एक बार जवानों के साथ दिवाली मनाने के लिये, चीन की सीमा पर, सरहद पर गया था।ITBPके जवान, सेना के जवान - उन सबके साथ हिमालय की ऊंचाइयों में दिवाली मनाई। मैं हर बार जाता हूँ, लेकिन इस दिवाली का अनुभव कुछ और था। देश के सवा-सौ करोड़ देशवासियों ने, जिस अनूठे अंदाज़ में, यह दिवाली सेना के जवानों को समर्पित की, सुरक्षा बलों को समर्पित की, इसका असर वहाँ हर जवानों के चेहरे पर अभिव्यक्त होता था। वो भावनाओं से भरे-भरे दिखते थे और इतना ही नहीं, देशवासियों ने जो शुभकामनायें-सन्देश भेजे, अपनी ख़ुशियों में देश के सुरक्षा बलों को शामिल किया, एक अद्भुत response था। और लोगों ने सिर्फ़ सन्देश भेजे, ऐसा नहीं, मन से जुड़ गए थे; किसी ने कविता लिखी, किसी ने चित्र बनाए, किसी ने कार्टून बनाए, किसी ने वीडियो बनाए, यानि न जाने हर घर सेनानियों की जैसे चौकी बन गया था। और जब भी ये चिट्ठियाँ मैं देखता था, तो मुझे भी बड़ा आश्चर्य हो रहा था कि कितनी कल्पकता है, कितनी भावनायें भरी हैं और उसी में से MyGov को विचार आयाकि कुछ चुनिन्दा चीज़ें निकाल करके उसकी एक Coffee Table Book बनाई जाए। काम चल रहा है, आप सबके योगदान से, देश के सेना के जवानों की भावनाओं को आप सबकी कल्पकता से, देश के सुरक्षा बलों के प्रति आपका जो भाव-विश्व है, वह इस ग्रन्थ में संकलित होगा। सेना के एक जवान ने मुझे लिखा - प्रधानमंत्री जी, हम सैनिकों के लियेहोली, दिवाली हर त्योहार सरहद पर ही होता है, हर वक्त देश कीहिफाज़त में डूबे रहते हैं। हाँ, फिर भी त्योहारों के समय घर की याद आ ही जाती है। लेकिन सच कहूँ, इस बार ऐसा नहीं लगा। ऐसा कतई feel नहीं हुआ कि त्योहार है और मैं घर नहीं हूँ। ऐसा महसूस हुआ मानो हम भी, सवा-सौ करोड़ भारतवासियों के साथ दिवाली मनारहे हैं। मेरे प्यारे देशवासियो, जो अहसास इस दिवाली, इस माहौल में जो अनुभूति, हमारे देश के सुरक्षा बलों के बीच, जवानों के बीच जगा है, क्या ये सिर्फ़ कुछ मौकों पर ही सीमित रहना चाहिये? मेरी आपसे appeal है कि हम, एक समाज के रूप में, राष्ट्र के रूप में, अपनास्वभाव बनाएँ, हमारी प्रकृति बनाएँ। कोई भी उत्सव हो, त्योहार हो, खुशी का माहौल हो, हमारे देश के सेना के जवानों को हम किसी-न- किसी रूप में ज़रूर याद करें। जब सारा राष्ट्र सेना के साथ खड़ा होता है, तो सेना की ताक़त 125 करोड़ गुना बढ़ जाती है। कुछ समय पहले मुझे जम्मू-कश्मीर से, वहाँ के गाँव के सारे प्रधान मिलने आये थे।Jammu-Kashmir Panchayat Conference के ये लोग थे। कश्मीर घाटी से अलग-अलग गाँवों से आए थे। क़रीब 40-50 प्रधान थे। काफ़ी देर तक उनसे मुझे बातें करने का अवसर मिला। वे अपने गाँव के विकास की कुछ बातें लेकर के आए थे, कुछ माँगें लेकर के आएथे, लेकिन जब बात का दौर चल पड़ा, तो स्वाभाविक था, घाटी के हालात, क़ानून व्यवस्था, बच्चों का भविष्य, ये सारी बातें निकलना बड़ा स्वाभाविक था। और इतने प्यार से, इतने खुलेपन से, गाँव के इन प्रधानों ने बातें की, हर चीज़ मेरे दिल को छूने वाली थी। बातों-बातों में, कश्मीर में जो स्कूलें जलाई जाती थीं, उसकी चर्चा भी हुई और मैंने देखा कि जितना दुःख हम देशवासियों को होता है, इन प्रधानों को भी इतनी ही पीड़ा थी और वो भी मानते थे कि स्कूल नहीं, बच्चों का भविष्य जलाया गया है। मैंने उनसे आग्रह किया था कि आप जाकर के इन बच्चों के भविष्य पर अपना ध्यान केन्द्रित करें। आज मुझे ख़ुशी हो रही है कि कश्मीर घाटी से आए हुए इन सभी प्रधानों ने मुझे जो वचन दिया था, उसको भली-भाँति निभाया; गाँव में जाकर के सब दूर लोगों को जागृत किया।अभी कुछ दिन पहले जब Board की exam हुई, तो कश्मीर के बेटे और बेटियों ने क़रीब 95%, पचानबे फ़ीसदी कश्मीर के छात्र-छात्राओं ने Board की परीक्षा में हिस्सा लिया।Board की परीक्षाओं में इतनी बड़ी तादाद में छात्रों का सम्मिलित होना, इस बात की ओर इशारा करता है कि जम्मू-कश्मीर के हमारे बच्चे उज्ज्वल भविष्य के लिये, शिक्षा के माध्यम से - विकास की नई ऊँचाइयों को पाने के लिये कृतसंकल्प हैं। उनके इस उत्साह के लिये, मैं छात्रों को तो अभिनन्दन करता हूँ, लेकिन उनके माता-पिता को, उनके परिजनों को, उनके शिक्षकों को और सभी ग्राम प्रधानों को भी ह्रदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। प्यारे भाइयो और बहनों, इस बार जब मैंने ‘मन की बात’ के लिये लोगों के सुझाव मांगे, तो मैं कह सकता हूँ कि एकतरफ़ा ही सबके सुझाव आए। सब कहते थे कि 500/- और 1000/- वाले नोटों पर और विस्तार से बातें करें। वैसे 8 नवम्बर, रात 8 बजे राष्ट्र के नाम संबोधन करते हुए, देश में सुधार लाने के एक महाभियान का आरम्भ करने की मैंने चर्चा की थी। जिस समय मैंने ये निर्णय किया था, आपके सामने प्रस्तुत रखा था, तब भी मैंने सबके सामने कहा था कि निर्णय सामान्य नहीं है, कठिनाइयों से भरा हुआ है। लेकिन निर्णय जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही उस निर्णय को लागू करना है। और मुझे ये भी अंदाज़ थाकि हमारे सामान्य जीवन में अनेक प्रकार की नयी–नयी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। और तब भी मैंने कहा था कि निर्णय इतना बड़ा है, इसके प्रभाव में से बाहर निकलने में 50 दिन तो लग ही जाएँगे। और तब जाकर के normal अवस्था की ओर हम क़दम बढ़ा पाएँगे।70 साल से जिस बीमारियों को हम झेल रहे हैं उस बीमारियों से मुक्ति का अभियान सरल नहीं हो सकता है। आपकी कठिनाइयों को मैं भली-भांति समझ सकता हूँ। लेकिन जब मैं आपका समर्थन देखता हूँ, आपका सहयोग देखता हूँ; आपको भ्रमित करने के लिये ढेर सारे प्रयास चल रहे हैं, उसके बावजूद भी, कभी-कभी मन को विचलित करने वाली घटनायें सामने आते हुए भी, आपने सच्चाई के इस मार्ग को भली-भांति समझा है, देशहित की इस बात को भली-भांति आपने स्वीकार किया है। पाँच सौ और हज़ार के नोट और इतना बड़ा देश, इतनी करेंसियों की भरमार, अरबों-खरबों नोटें और ये निर्णय - पूरा विश्व बहुत बारीक़ी से देख रहा है, हर कोई अर्थशास्त्री इसका बहुत analysis कर रहा है, मूल्यांकन कर रहा है। पूरा विश्व इस बात को देख रहा है कि हिन्दुस्तान के सवा-सौ करोड़ देशवासी कठिनाइयाँ झेल करके भी सफलता प्राप्त करेंगे क्या! विश्व के मन में शायद प्रश्न-चिन्हहो सकता है! भारत को भारत के सवा-सौ करोड़ देशवासियों के प्रति, सिर्फ़ श्रद्धा ही श्रद्धा है, विश्वास ही विश्वास है कि सवा-सौ करोड़ देशवासी संकल्प पूर्ण करके ही रहेंगे। और हमारा देश, सोने की तरह हर प्रकार से तप करके, निखर करके निकलेगा और उसका कारण इस देश का नागरिक है, उसका कारण आप हैं, इस सफलता का मार्ग भी आपके कारण ही संभव हुआ है। पूरे देश में केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय स्वराज संस्थाओं की सारी इकाइयाँ, एक लाख तीस हज़ार bank branch, लाखों बैंक कर्मचारी, डेढ़ लाख से ज़्यादा पोस्ट ऑफिस, एक लाख से ज़्यादा बैंक-मित्र - दिन-रात इस काम में जुटे हुए हैं, समर्पित भाव से जुटे हुए हैं। भाँति-भाँति के तनाव के बीच, ये सभी लोग बहुत ही शांत-चित्त रूप से, इसे देश-सेवा का एक यज्ञ मान करके, एक महान परिवर्तन का प्रयास मान करके कार्यरत हैं। सुबह शुरू करते हैं, रात कब पूरा होगा, पता तक नहीं रहता है, लेकिन सब कर रहे हैं। और उसी का कारण है कि भारत इसमें सफल होगा, ये स्पष्ट दिखाई दे रहा है। और मैंने देखा है कि इतनी कठिनाइयों के बीच बैंक के, पोस्ट ऑफिस के सभी लोग काम कर रहे हैं। और जब मानवता के मुद्दे की बात आ जाए, तो वो दो क़दम आगे दिखाई देते हैं। किसी ने मुझे कहा कि खंडवा में एक बुज़ुर्ग इंसान का accident हो गया। अचानक पैसों की ज़रूरत पड़ गई। वहाँ स्थानीय बैंक के कर्मचारी के ध्यान में आया और मुझे ये जान करके खुशी हुई कि ख़ुद जाकर के उनके घर, उस बुज़ुर्ग को उन्होंने पैसे पहुँचाए, ताकि इलाज़ में मदद हो जाए। ऐसे तो अनगिनत किस्से हर दिन टी.वी. में, मीडिया में, अख़बारों में, बातचीत में सामने आते हैं। इस महायज्ञ के अन्दर परिश्रम करने वाले, पुरुषार्थ करने वाले इन सभी साथियों का भी मैं ह्रदय से धन्यवाद करता हूँ। शक्ति की पहचान तो तब होती है, जब कसौटी से पार उतरते हैं। मुझे बराबर याद है, जब प्रधानमंत्री के द्वारा जन-धन योजना का अभियान चल रहा था और बैंक के कर्मचारियों ने जिस प्रकार से उसको अपने कंधे पर उठाया था और जो काम 70 साल में नहीं हुआ था, उन्होंने करके दिखाया था। उनके सामर्थ्य का परिचय हुआ। आज फिर एक बार, उस चुनौती को उन्होंने लिया है और मुझे विश्वास है कि सवा-सौ करोड़ देशवासियों का संकल्प, सबका सामूहिक पुरुषार्थ, इस राष्ट्र को एक नई ताक़त बना करके प्रशस्त करेगा। लेकिन बुराइयाँ इतनी फैली हुई हैं कि आज भी कुछ लोगों की बुराइयों की आदत जाती नहीं है। अभी भी कुछ लोगों को लगता है कि ये भ्रष्टाचार के पैसे, ये काले धन, ये बेहिसाबी पैसे, ये बेनामी पैसे, कोई-न-कोई रास्ता खोज करके व्यवस्था में फिर से ला दूँ। वो अपने पैसे बचाने के फ़िराक़ में गैर-क़ानूनी रास्ते ढूंढ़रहे हैं। दुःख की बात ये है कि इसमें भी उन्होंने ग़रीबों का उपयोग करने का रास्ता चुनने का पसंद किया है।ग़रीबों को भ्रमित कर, लालच या प्रलोभन की बातें करके, उनके खातों में पैसे डाल करके या उनसे कोई काम करवा करके, पैसे बचाने की कुछ लोग कोशिश कर रहे हैं। मैं ऐसे लोगों से आज कहना चाहता हूँ - सुधरना, न सुधरना आपकी मर्ज़ी, क़ानून का पालन करना, न करना आपकी मर्ज़ी, वो क़ानून देखेगा क्या करना? लेकिन, मेहरबानी करके आप ग़रीबों की ज़िंदगी के साथ मत खेलिए। आप ऐसा कुछ न करें कि record परग़रीब का नाम आ जाए और बाद में जब जाँच हो, तब मेरा प्यारा ग़रीब आपके पाप के कारण मुसीबत में फँस जाए। और बेनामी संपत्ति का इतना कठोर क़ानून बना है, जो इसमेंलागू हो रहा है, कितनी कठिनाई आएगी। और सरकार नहीं चाहती है कि हमारे देशवासियों को कोई कठिनाई आए। मध्यप्रदेश के कोई श्रीमान आशीष ने इस पाँच सौ और हज़ार के माध्यम से भ्रष्टाचार और काले धन के ख़िलाफ़ जो लड़ाई छेड़ी गयी है, उन्होंने मुझे टेलीफ़ोन किया है, उसे सराहा है: - “सर नमस्ते, मेरा नाम आशीष पारे है। मैं ग्राम तिराली, तहसील तिराली, ज़िला हरदा, मध्यप्रदेश का एक आम नागरिक हूँ। आप के द्वारा जो मुद्रा हज़ार-पाँच सौ के नोट बंद किए गए हैं, यह बहुत ही सराहनीय है। मैं चाहता हूँ कि ‘मन की बात’ में कई उदाहरण लोगों को बताइए कि लोगों ने असुविधा सहन करने के बावजूद भी उन्होंने राष्ट्र उन्नति के लिये यह कड़ा क़दम के लिए स्वागत किया है, जिससे लोग एक तरह सेउत्साहवर्द्धित होंगे और राष्ट्र निर्माण के लिए cashless प्रणाली बहुत आवश्यक है और मैं पूरे देश के साथ हूँ और मैं बहुत खुश हूँ कि आपने हज़ार-पाँच सौ के नोट बंद करा दिए।’ वैसा ही मुझे एक फ़ोन कर्नाटक के श्रीमान येलप्पावेलान्करजी की तरफ़ से आया है: - ‘मोदी जी नमस्ते, मैं कर्नाटक का कोप्पल डिस्ट्रिक्ट का इस गाँव से येलप्पा वेलान्करबात कर रहा हूँ। आपको मन से मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ, क्योंकि आपने कहा था कि अच्छे दिन आएँगे, लेकिन किसी ने भी नहीं सोचा कि ऐसा बड़ा क़दम आप उठाएँगे।पाँच सौ का और हज़ार का नोट, ये सब देखकर के काला धन और भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाया। हर एक भारत के नागरिक को इससे अच्छे दिन कभी नहीं आएँगे।इसी के लिए मैं आपको मनपूर्ण धन्यवाद करना चाहता हूँ। कुछ बातें मीडिया के माध्यम से, लोगों के माध्यम से, सरकारी सूत्रों के माध्यम से जानने को मिलती हैं, तो काम करने का उत्साह भी बहुत बढ़ जाता है। इतना आनंद होता है, इतना गर्व होता है कि मेरे देश में सामान्य मानव का क्या अद्भुत सामर्थ्य है। महाराष्ट्र के अकोला में National Highway NH-6 वहाँ कोई एक restaurant है। उन्होंने एक बहुत बड़ा board लगाया है कि अगर आप की जेब में पुराने नोट हैं और आप खाना खाना चाहते हैं, तो आप पैसों की चिंता न करें, यहाँ से भूखा मत जाइए, खाना खा के ही जाइए और फिर कभी इस रास्ते से गुजरने का आ जाए आपको मौका, तो ज़रूर पैसे दे कर के जाना। और लोग वहाँ जाते हैं, खाना खाते हैं और 2-4-6 दिन के बाद जब वहाँ से फिर से गुजरते हैं, तो फिर से पैसे भी लौटा देते हैं। ये है मेरे देश की ताक़त, जिसमें सेवा-भाव, त्याग-भाव भी है और प्रामाणिकता भी है। मैं चुनाव में चाय पर चर्चा करता था और सारे विश्व में ये बात पहुँच गई थी। दुनिया के कई देश के लोग चाय पर चर्चा शब्द भी बोलना सीख गए थे। लेकिन मुझे पता नहीं कि चाय पर चर्चा में, शादी भी होती है। मुझे पता चला कि 17 नवम्बर को सूरत में, एक ऐसी शादी हुई, जो शादी चाय पर चर्चा के साथ हुई। गुजरात में सूरत में एक बेटी ने अपने यहाँ शादी में जो लोग आए, उनको सिर्फ़ चाय पिलाई और कोई जलसा नहीं किया, न कोई खाने का कार्यक्रम, कुछ नहीं - क्योंकि नोटबंदी के कारण कुछ कठिनाई आई थी पैसों की। बारातियों ने भी उसे इतना ही सम्मान माना।सूरत के भरत मारू और दक्षा परमार - उन्होंने अपनी शादी के माध्यम से भ्रष्टाचार के खिलाफ़, कालेधन के खिलाफ़, ये जो लड़ाई चल रही है, उसमें जो योगदान किया है, ये अपने आप में प्रेरक है। नवपरिणीत भरत और दक्षा को मैं बहुत-बहुत आशीर्वाद भी देता हूँ और शादी के मौके को भी इस महान यज्ञ में परिवर्तित करके एक नये अवसर में पलट देने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। और जब ऐसे संकट आते हैं, लोग रास्ते भी बढ़िया खोज लेते हैं। मैंने एक बार टीवी न्यूज़ में देखा, रात देर से आया था, तो देख रहा था। असम में धेकियाजुली करके एक छोटा सा गाँव है।Tea-worker रहते हैं और Tea-worker को साप्ताहिक रूप से पैसे मिलते हैं। अब 2000 रुपये का नोट मिला, तो उन्होंने क्या किया? चार अड़ोस-पड़ोस की महिलायें इकट्ठी हो गयी और चारों ने साथ जाकर के ख़रीदी की और 2000 रुपये का नोट payment किया, तो उनको छोटी currency की जरुरत ही नहीं पड़ी, क्योंकि चारों ने मिलकर ख़रीदा और तय किया कि अगले हफ़्ते मिलेंगे, तब उसका हिसाब हम कर लेंगे बैठ करके। लोग अपने-आप रास्ते खोज रहे हैं। और इसका बदलाव भी देखिए! सरकार के पास एक message आया, असम के Tea garden के लोग कह रहे हैं कि हमारे यहाँ ATM लगाओ। देखिए, किस प्रकार से गाँव के जीवन में भी बदलाव आ रहा है। इस अभियान का कुछ लोगों को तत्काल लाभ मिल गया है। देश को तो लाभ आने वाले दिनों में मिलेगा, लेकिन कुछ लोगों को तो तत्काल लाभ मिल गया है। थोड़ा हिसाब पूछा, क्या हुआ है, तो मैंने छोटे-छोटे जो शहर हैं, वहाँ की थोड़ी जानकारी पाई। क़रीब 40-50 शहरों की जानकारी जो मुझे मिली कि इस नोट बंद करने के कारण उनके जितने पुराने पैसे बाक़ी थे, लोग पैसे नहीं देते थे tax के - पानी का tax नहीं, बिजली का नहीं, पैसे देते ही नहीं थे और आप भली-भाँति जानते हैं - ग़रीब लोग 2 दिन पहले जा कर के पाई-पाई चुकता करने की आदत रखते हैं। ये जो बड़े लोग होते हैं न, जिनकी पहुँच होती है, जिनको पता है कि कभी भी उनको कोई पूछने वाला नहीं है, वो ही पैसे नहीं देते हैं। और इसके लिए काफ़ी बकाया रहता है। हर municipality को tax का मुश्किल से 50% आता है। लेकिन इस बार 8 तारीख़ के इस निर्णय के कारण सब लोग अपने पुराने नोटें जमा कराने के लिए दौड़ गए। 47 शहरी इकाइयों में पिछले साल इस समय क़रीब तीन-साढ़े तीन हज़ार करोड़ रुपये का tax आया था। आपको जानकर के आश्चर्य होगा, आनंद भी होगा - इस एक सप्ताह में उनको 13 हज़ार करोड़ रुपये जमा हो गया। कहाँ तीन-साढ़े तीन हज़ार और कहाँ 13 हज़ार! और वो भी सामने से आकर के। अब उन municipality में 4 गुना ये पैसा आ गया, तो स्वाभाविक है, ग़रीब बस्तियों में गटर की व्यवस्था होगी, पानी की व्यवस्था होगी, आंगनबाड़ी की व्यवस्था होगी। ऐसे तो कई उदाहरण मिल रहे हैं कि जिसमें इसका सीधा-सीधा लाभ भी नज़र आने लगा है। भाइयो-बहनो, हमारा गाँव, हमारा किसान ये हमारे देश की अर्थव्यवस्था की एक मज़बूत धुरी हैं। एक तरफ़ अर्थव्यवस्था के इस नये बदलाव के कारण, कठिनाइयों के बीच, हर कोई नागरिक अपने आपको adjust कर रहा है। लेकिन मैं मेरे देश के किसानों का आज विशेष रूप से अभिनंदन करना चाहता हूँ। अभी मैं इस फ़सल की बुआई के आँकड़े ले रहा था। मुझे ख़ुशी हुई, चाहे गेहूँ हो, चाहे दलहन हो, चाहे तिलहन हो; नवम्बर की 20 तारीख़ तक का मेरे पास हिसाब था, पिछले वर्ष की तुलना में काफ़ी मात्रा में बुआई बढ़ी है। कठिनाइयों के बीच भी, किसान ने रास्ते खोजे हैं। सरकार ने भी कई महत्वपूर्ण निर्णय किए हैं, जिसमें किसानों को और गाँवों को प्राथमिकता दी है। उसके बाद भी कठिनाइयाँ तो हैं, लेकिन मुझे विश्वास है कि जो किसान हमारी हर कठिनाइयाँ, प्राकृतिक कठिनाइयाँ हो, उसको झेलते हुए भी हमेशा डट करके खड़ा रहता है, इस समय भी वो डट करके खड़ा है। हमारे देश के छोटे व्यापारी, वे रोजगार भी देते हैं, आर्थिक गतिविधि भी बढ़ाते हैं। पिछले बजट में हमने एक महत्वपूर्ण निर्णय किया था कि बड़े-बड़े mall की तरह गाँव के छोटे-छोटे दुकानदार भी अब चौबीसों घंटा अपना व्यापार कर सकते हैं, कोई क़ानून उनको रोकेगा नहीं। क्योंकि मेरा मत था, बड़े-बड़े mall को 24 घंटे मिलते हैं, तो गाँव के ग़रीब दुकानदार को क्यों नहीं मिलना चाहिये? मुद्रा-योजना से उनको loan देने की दिशा में काफी initiative लिए। लाखों-करोड़ों रुपये मुद्रा-योजना से ऐसे छोटे-छोटे लोगों को दिए, क्योंकि ये छोटा कारोबार, करोड़ों की तादाद में लोग करते हैं और अरबों-खरबों रुपये के व्यापार को गति देते हैं। लेकिन इस निर्णय के कारण उनको भी कठिनाई होना स्वाभाविक था। लेकिन मैंने देखा है कि अब तो हमारे इन छोटे-छोटे व्यापारी भी technology के माध्यम से, Mobile App के माध्यम से, मोबाइल बैंक के माध्यम से, क्रेडिट कार्ड के माध्यम से, अपने-अपने तरीक़े से ग्राहकों की सेवा कर रहे हैं, विश्वास के आधार पर भी कर रहे हैं। और मैं अपने छोटे व्यापारी भाइयो-बहनों से कहना चाहता हूँ कि मौका है, आप भी digital दुनिया में प्रवेश कर लीजिए। आप भी अपने मोबाइल फ़ोन पर बैंकों की Appdownload कर दीजिए। आप भी क्रेडिट कार्ड के लिए POS मशीन रख लीजिए।आप भी बिना नोट कैसे व्यापार हो सकता है, सीख लीजिए। आप देखिए, बड़े-बड़े मॉल technology के माध्यम से अपने व्यापार को जिस प्रकार से बढ़ाते हैं, एक छोटा व्यापारी भी इस सामान्य user friendly technology से अपना व्यापार बढ़ा सकता है। बिगड़ने का तो सवाल ही नहीं उठता है, बढ़ाने का अवसर है। मैं आप को निमंत्रण देता हूँ किcashless society बनाने में आप बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं, आप अपने व्यापार को बढ़ाने में, mobile phone पर पूरीbanking व्यवस्था खड़ी कर सकते हैं और आज नोटों के सिवाय अनेक रास्ते हैं, जिससे हम कारोबार चला सकते हैं।technological रास्ते हैं, safeहै, secure हैऔर त्वरित है। मैं चाहूँगा कि आप सिर्फ़ इस अभियान को सफल करने के लिए मदद करें, इतना नहीं, आप बदलाव का भी नेतृत्व करें और मुझे विश्वास है, आप बदलाव का नेतृत्व कर सकते हैं।आप पूरे गाँव के कारोबार में ये technology के आधार पर काम कर सकते हैं, मेरा विश्वास है।I मैं मज़दूर भाइयों-बहनों को भी कहना चाहता हूँ, आप का बहुत शोषण हुआ है।कागज़ पर एक पगार होता है और जब हाथ में दिया जाता है, तब दूसरा होता है। कभी पगार पूरा मिलता है, तो बाहर कोई खड़ा होता है, उसको cut देना पड़ता है और मज़दूर मजबूरन इस शोषण को जीवन का हिस्सा बना देता है।इस नई व्यवस्था से हम चाहते हैं कि आपका बैंक में खाता हो, आपके पगार के पैसे आपके बैंक में जमा हों, ताकि minimum wagesका पालन हो। आपको पूरा पैसा मिले, कोई cut ना करे। आपका शोषण न हो। और एक बार आपके बैंक खाते में पैसे आ गए, तो आप भी तो छोटे सेमोबाइल फ़ोन पर - कोई बड़ा smart phoneकी ज़रूरत नहीं हैं,आजकल तो आपका mobile phone भी ई-बटुवे का काम करता है- आप उसी mobile phone से अड़ोस-पड़ोस की छोटी-मोटी दुकानमें जो भी खरीदना है, खरीद भी सकते हैं, उसी से पैसे भी दे सकते हैं। इसलिए मैं मज़दूर भाइयों-बहनों को इस योजना में भागीदार बनने के लिए विशेष आग्रह करता हूँ, क्योंकि आखिरकार इतना बड़ा मैंने निर्णय देश के ग़रीब के लिये, किसान के लिये, मज़दूर के लिये, वंचित के लिये, पीड़ित के लिये लिया है, उसका benefit उसको मिलना चाहिए। आज मैं विशेष रूप से युवक मित्रों से बात करना चाहता हूँ। हम दुनिया में गाजे-बाजे के साथ कहते हैं कि भारत ऐसा देश है कि जिसके पास 65% जनसंख्या, 35 साल से कम उम्र की है।आप मेरे देश के युवा और युवतियाँ, मैं जानता हूँ, मेरा निर्णय तो आपको पसन्द आया है।मैं ये भी जानता हूँ कि आप इस निर्णय का समर्थन करते हैं।मैं ये भी जानता हूँ कि आप इस बात को सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाने के लिए बहुत योगदान भी करते हैं।लेकिन दोस्तो, आप मेरे सच्चे सिपाही हो, आप मेरे सच्चे साथी हो।माँ भारती की सेवा करने का एक अद्भुत मौका हमारे सामने आया है, देश को आर्थिक ऊंचाइयों पर ले जाने का अवसर आया है। मेरे नौजवानो, आप मेरी मदद कर सकते हो क्या? मुझे साथ दोगे, इतने से बात बनने वाली नहीं है।जितना आज की दुनिया का अनुभव आपको है, पुरानी पीढ़ी को नहीं है।हो सकता है, आपके परिवार में बड़े भाई साहब को भी मालूम नहीं होगा और माता-पिता, चाचा-चाची, मामा-मामी को भी शायद मालूम नहीं होगा।आप App क्या होती है, वो जानते हो, online bankingक्या होता है, जानते हो, online ticket booking कैसे होता है, आप जानते हो।आपके लिये चीज़ें बहुत सामान्य हैं और आप उपयोग भी करते हो।लेकिन आज देश जिस महान कार्य को करना चाहता है, हमारा सपना है cashless society.ये ठीक है कि शत-प्रतिशतcashless society संभव नहीं होती है। लेकिन क्यों न भारत less-cash society की तो शुरुआत करे।एक बार अगर आज हम less-cash society की शुरुआत कर दें, तो cashless society की मंज़िल दूर नहीं होगी। और मुझे इसमें आपकी physical मदद चाहिए, ख़ुद का समय चाहिए, ख़ुद का संकल्प चाहिए। और आप मुझे कभी निराश नहीं करोगे, मुझे विश्वास है, क्योंकि हम सब हिंदुस्तान के ग़रीब की ज़िंदगी बदलने की इच्छा रखने वाले लोग हैं। आप जानते हैं,cashless society के लिये, digital banking के लिये या mobile banking के लिये आज कितने सारे अवसर हैं। हर बैंक online सुविधा देता है। हिंदुस्तान के हर एक बैंक की अपनी mobile app है। हर बैंक का अपना wallet है।wallet का सीधा-सीधा मतलब है e-बटुवा। कई तरह के card उपलब्ध हैं। जन-धन योजना के तहत भारत के करोड़ों-करोड़ ग़रीब परिवारों के पास Rupay Card है और 8 तारीख़ के बाद तो जो Rupay Card का बहुत कम उपयोग होता था, गरीबों ने Rupay Card का उपयोग करना शुरू किया और क़रीब-करीब 300% उसमें वृद्धि हुई है। जैसे mobile phone में prepaid card आता है, वैसा बैंकों में भी पैसा ख़र्च करने के लिये prepaid card मिलता है। एक बढ़िया platform है, कारोबार करने की UPI, जिससे आप ख़रीदी भी कर सकते हैं, पैसे भी भेज सकते हैं, पैसे ले भी सकते हैं। और ये काम इतना simple है जितना कि आप WhatsApp भेजते हैं। कुछ भी ना पढ़ा-लिखा व्यक्ति होगा, उसको भी आज WhatsApp कैसे भेजना है, वो आता है, forward कैसे करना है, आता है। इतना ही नहीं,technology इतनीसरल होती जा रही है कि इस काम के लिए कोई बड़े smart phone की भी आवश्यकता नहीं है। साधारण जो feature phone होता है, उससे भी cash transfer हो सकती है। धोबी हो, सब्ज़ी बेचनेवाला हो, दूध बेचनेवाला हो, अख़बार बेचनेवाला हो, चाय बेचनेवाला हो, चने बेचनेवाला हो, हर कोई इसका आराम से उपयोग कर सकता है। और मैंने भी इस व्यवस्था को और अधिक सरल बनाने के लिए और ज़ोर दिया है। सभी बैंक इस पर लगी हुई हैं, कर रही हैं।और अब तो हमने ये onlinesurcharge का भी ख़र्चा आता था, वो भी cancel कर दिया है। और भी इस प्रकार के कार्ड वगैरह का जो ख़र्चा आता था, उसे आपने देखा होगा पिछले 2-4 दिन में अख़बारों में, सारे ख़र्चे ख़त्म कर दिए, ताकि cashless society की movement को बल मिले। मेरे नौजवान दोस्तो, ये सब होने के बाद भी एक पूरी पीढ़ी ऐसी है कि जो इससे अपरिचित है।और आप सभी लोग, मैं भली-भांति जानता हूँ, इस महान कार्य में सक्रिय हैं।WhatsApp पर जिस प्रकार केcreative message आप देते हैं -slogan, कवितायेँ, किस्से, cartoon, नयी-नयी कल्पना, हंसी-मज़ाक - सब कुछ मैं देख रहा हूँ और चुनौतियों के बीच ये हमारी युवा पीढ़ी की जो सृजन शक्ति है, तो ऐसा लग रहा है, जैसे ये भारत भूमि की विशेषता है कि किसी ज़माने में युद्ध के मैदान में गीता का जन्म हुआ था, वैसे ही आज इतने बड़े बदलाव के काल से हम गुजर रहे हैं, तब आपके अन्दर भी मौलिक creativity प्रकट हो रही है।लेकिन मेरे प्यारे नौजवान मित्रो, मैं फिर एक बार कहता हूँ, मुझे इस काम में आपकी मदद चाहिए।जी-जी-जी, मैं दुबारा कहता हूँ, मुझे आपकी मदद चाहिए और आप, आप मुझे विश्वास है मेरे देश के करोड़ों नौजवान इस काम को करेंगे।आप एक काम कीजिए, आज से ही संकल्प लीजिए कि आप स्वयं cashless society के लिए ख़ुद एक हिस्सा बनेंगे।आपके mobile phone पर onlineख़र्च करने की जितनीtechnology है, वो सब मौजूद होगी। इतना ही नहीं, हर दिन आधा-घंटा, घंटा, दो घंटा निकाल करके कम से कम 10 परिवारों को आप ये technology क्या है,technology का कैसे उपयोग करते हैं, कैसे अपनी बैंकों की App download


आज वेटिकन सिटी में मदर टेरेसा को संत घोषित किया जाएगा
5 September 2016
जन्म: 26 अगस्त, 1910, स्कॉप्जे, (अब मसेदोनिया में)
मृत्यु: 5 सितंबर, 1997, कलकत्ता, भारत
कार्य: मानवता की सेवा, ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ की स्थापना
ऐसा माना जाता है कि दुनिया में लगभग सारे लोग सिर्फ अपने लिए जीते हैं पर मानव इतिहास में ऐसे कई मनुष्यों के उदहारण हैं जिन्होंने अपना तमाम जीवन परोपकार और दूसरों की सेवा में अर्पित कर दिया। मदर टेरेसा भी ऐसे ही महान लोगों में एक हैं जो सिर्फ दूसरों के लिए जीते हैं। मदर टेरेसा ऐसा नाम है जिसका स्मरण होते ही हमारा ह्रदय श्रध्धा से भर उठता है और चेहरे पर एक ख़ास आभा उमड़ जाती है। मदर टेरेसा एक ऐसी महान आत्मा थीं जिनका ह्रदय संसार के तमाम दीन-दरिद्र, बीमार, असहाय और गरीबों के लिए धड़कता था और इसी कारण उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन उनके सेवा और भलाई में लगा दिया। उनका असली नाम ‘अगनेस गोंझा बोयाजिजू’ (Agnes Gonxha Bojaxhiu ) था। अलबेनियन भाषा में गोंझा का अर्थ फूल की कली होता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि मदर टेरेसा एक ऐसी कली थीं जिन्होंने छोटी सी उम्र में ही गरीबों, दरिद्रों और असहायों की जिन्दगी में प्यार की खुशबू भर दी थी।
प्रारंभिक जीवन
मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त, 1910 को स्कॉप्जे (अब मसेदोनिया में) में हुआ। उनके पिता निकोला बोयाजू एक साधारण व्यवसायी थे। मदर टेरेसा का वास्तविक नाम ‘अगनेस गोंझा बोयाजिजू’ था। अलबेनियन भाषा में गोंझा का अर्थ फूल की कली होता है। जब वह मात्र आठ साल की थीं तभी उनके पिता परलोक सिधार गए, जिसके बाद उनके लालन-पालन की सारी जिम्मेदारी उनकी माता द्राना बोयाजू के ऊपर आ गयी। वह पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। उनके जन्म के समय उनकी बड़ी बहन की उम्र 7 साल और भाई की उम्र 2 साल थी, बाकी दो बच्चे बचपन में ही गुजर गए थे। वह एक सुन्दर, अध्ययनशील एवं परिश्रमी लड़की थीं। पढाई के साथ-साथ, गाना उन्हें बेहद पसंद था। वह और उनकी बहन पास के गिरजाघर में मुख्य गायिका थीं। ऐसा माना जाता है की जब वह मात्र बारह साल की थीं तभी उन्हें ये अनुभव हो गया था कि वो अपना सारा जीवन मानव सेवा में लगायेंगी और 18 साल की उम्र में उन्होंने ‘सिस्टर्स ऑफ़ लोरेटो’ में शामिल होने का फैसला ले लिया। तत्पश्चात वह आयरलैंड गयीं जहाँ उन्होंने अंग्रेजी भाषा सीखी। अंग्रेजी सीखना इसलिए जरुरी था क्योंकि ‘लोरेटो’ की सिस्टर्स इसी माध्यम में बच्चों को भारत में पढ़ाती थीं।
भारत आगमन
सिस्टर टेरेसा आयरलैंड से 6 जनवरी, 1929 को कोलकाता में ‘लोरेटो कॉन्वेंट’ पंहुचीं। वह एक अनुशासित शिक्षिका थीं और विद्यार्थी उनसे बहुत स्नेह करते थे। वर्ष 1944 में वह हेडमिस्ट्रेस बन गईं। उनका मन शिक्षण में पूरी तरह रम गया था पर उनके आस-पास फैली गरीबी, दरिद्रता और लाचारी उनके मन को बहुत अशांत करती थी। 1943 के अकाल में शहर में बड़ी संख्या में मौते हुईं और लोग गरीबी से बेहाल हो गए। 1946 के हिन्दू-मुस्लिम दंगों ने तो कोलकाता शहर की स्थिति और भयावह बना दी।
मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी वर्ष 1946 में उन्होंने गरीबों, असहायों, बीमारों और लाचारों की जीवनपर्यांत मदद करने का मन बना लिया। इसके बाद मदर टेरेसा ने पटना के होली फॅमिली हॉस्पिटल से आवश्यक नर्सिग ट्रेनिंग पूरी की और 1948 में वापस कोलकाता आ गईं और वहां से पहली बार तालतला गई, जहां वह गरीब बुजुर्गो की देखभाल करने वाली संस्था के साथ रहीं। उन्होंने मरीजों के घावों को धोया, उनकी मरहमपट्टी की और उनको दवाइयां दीं। धीरे-धीरे उन्होंने अपने कार्य से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इन लोगों में देश के उच्च अधिकारी और भारत के प्रधानमंत्री भी शामिल थे, जिन्होंने उनके कार्यों की सराहना की।
मदर टेरेसा के अनुसार, इस कार्य में शुरूआती दौर बहुत कठिन था। वह लोरेटो छोड़ चुकी थीं इसलिए उनके पास कोई आमदनी नहीं थी – उनको अपना पेट भरने तक के लिए दूसरों की मदद लेनी पड़ी। जीवन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर उनके मन में बहुत उथल-पथल हुई, अकेलेपन का एहसास हुआ और लोरेटो की सुख-सुविधायों में वापस लौट जाने का खयाल भी आया लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 7 अक्टूबर 1950 को उन्हें वैटिकन से ‘मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी’ की स्थापना की अनुमति मिल गयी। इस संस्था का उद्देश्य भूखों, निर्वस्त्र, बेघर, लंगड़े-लूले, अंधों, चर्म रोग से ग्रसित और ऐसे लोगों की सहायता करना था जिनके लिए समाज में कोई जगह नहीं थी। ‘मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी’ का आरम्भ मात्र 13 लोगों के साथ हुआ था पर मदर टेरेसा की मृत्यु के समय (1997) 4 हजार से भी ज्यादा ‘सिस्टर्स’ दुनियाभर में असहाय, बेसहारा, शरणार्थी, अंधे, बूढ़े, गरीब, बेघर, शराबी, एड्स के मरीज और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों की सेवा कर रही हैं मदर टेरेसा ने ‘निर्मल हृदय’ और ‘निर्मला शिशु भवन’ के नाम से आश्रम खोले । ‘निर्मल हृदय’ का ध्येय असाध्य बीमारी से पीड़ित रोगियों व गरीबों का सेवा करना था जिन्हें समाज ने बाहर निकाल दिया हो। निर्मला शिशु भवन’ की स्थापना अनाथ और बेघर बच्चों की सहायता के लिए हुई। सच्ची लगन और मेहनत से किया गया काम कभी असफल नहीं होता, यह कहावत मदर टेरेसा के साथ सच साबित हुई। जब वह भारत आईं तो उन्होंने यहाँ बेसहारा और विकलांग बच्चों और सड़क के किनारे पड़े असहाय रोगियों की दयनीय स्थिति को अपनी आँखों से देखा। इन सब बातों ने उनके ह्रदय को इतना द्रवित किया कि वे उनसे मुँह मोड़ने का साहस नहीं कर सकीं। इसके पश्चात उन्होंने जनसेवा का जो व्रत लिया, जिसका पालन वो अनवरत करती रहीं।
सम्मान और पुरस्कार
मदर टेरेसा को मानवता की सेवा के लिए अनेक अंतर्राष्ट्रीय सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त हुए। भारत सरकार ने उन्हें पहले पद्मश्री (1962) और बाद में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ (1980) से अलंकृत किया। संयुक्त राज्य अमेरिका ने उन्हें वर्ष 1985 में मेडल आफ़ फ्रीडम 1985 से नवाजा। मानव कल्याण के लिए किये गए कार्यों की वजह से मदर टेरेसा को 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला। उन्हें यह पुरस्कार ग़रीबों और असहायों की सहायता करने के लिए दिया गया था। मदर तेरस ने नोबेल पुरस्कार की 192,000 डॉलर की धन-राशि को गरीबों के लिए एक फंड के तौर पर इस्तेमाल करने का निर्णय लिया।
मृत्यु
बढती उम्र के साथ-साथ उनका स्वास्थ्य भी बिगड़ता गया। वर्ष 1983 में 73 वर्ष की आयु में उन्हें पहली बार दिल का दौरा पड़ा। उस समय मदर टेरेसा रोम में पॉप जॉन पॉल द्वितीय से मिलने के लिए गई थीं। इसके पश्चात वर्ष 1989 में उन्हें दूसरा हृदयाघात आया और उन्हें कृत्रिम पेसमेकर लगाया गया। साल 1991 में मैक्सिको में न्यूमोनिया के बाद उनके ह्रदय की परेशानी और बढ़ गयी। इसके बाद उनकी सेहत लगातार गिरती रही। 13 मार्च 1997 को उन्होंने ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ के मुखिया का पद छोड़ दिया और 5 सितम्बर, 1997 को उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के समय तक ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ में 4000 सिस्टर और 300 अन्य सहयोगी संस्थाएं काम कर रही थीं जो विश्व के 123 देशों में समाज सेवा में कार्यरत थीं। मानव सेवा और ग़रीबों की देखभाल करने वाली मदर टेरेसा को पोप जॉन पाल द्वितीय ने 19 अक्टूबर, 2003 को रोम में “धन्य” घोषित किया।
मदर टेरेसा के अनमोल विचार

मैं चाहती हूँ कि आप अपने पड़ोसी के बारे में चिंतित रहें। क्या आप अपने पड़ोसी को जानते हैं?
यदि हमारे बीच शांति की कमी है तो वह इसलिए क्योंकि हम भूल गए हैं कि हम एक दूसरे से संबंधित हैं।
यदि आप एक सौ लोगों को भोजन नहीं करा सकते हैं, तो कम से कम एक को ही करवाएं।
यदि आप प्रेम संदेश सुनना चाहते हैं तो पहले उसे खुद भेजें। जैसे एक चिराग को जलाए रखने के लिए हमें दिए में तेल डालते रहना पड़ता है।
अकेलापन सबसे भयानक ग़रीबी है।
अपने क़रीबी लोगों की देखभाल कर आप प्रेम की अनुभूति कर सकते हैं।
अकेलापन और अवांछित रहने की भावना सबसे भयानक ग़रीबी है।
प्रेम हर मौसम में होने वाला फल है, और हर व्यक्ति के पहुंच के अन्दर है।
आज के समाज की सबसे बड़ी बीमारी कुष्ठ रोग या तपेदिक नहीं है, बल्कि अवांछित रहने की भावना है।
प्रेम की भूख को मिटाना, रोटी की भूख मिटाने से कहीं ज्यादा मुश्किल है।
अनुशासन लक्ष्यों और उपलब्धि के बीच का पुल है।
सादगी से जियें ताकि दूसरे भी जी सकें।
प्रत्येक वस्तु जो नहीं दी गयी है खोने के सामान है।
हम सभी महान कार्य नहीं कर सकते लेकिन हम कार्यों को प्रेम से कर सकते हैं।
हम सभी ईश्वर के हाथ में एक कलम के सामान है।
यह महत्वपूर्ण नहीं है आपने कितना दिया, बल्कि यह है की देते समय आपने कितने प्रेम से दिया।
खूबसूरत लोग हमेशा अच्छे नहीं होते। लेकिन अच्छे लोग हमेशा खूबसूरत होते हैं।
दया और प्रेम भरे शब्द छोटे हो सकते हैं लेकिन वास्तव में उनकी गूँज अन्नत होती है।
कुछ लोग आपकी ज़िन्दगी में आशीर्वाद की तरह होते हैं तो कुछ लोग एक सबक की तरह।

प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’
29 February 2016
मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार! आप रेडियो पर मेरी ‘मन की बात’ सुनते होंगे, लेकिन दिमाग इस बात पर लगा होगा – बच्चों के exam शुरू हो रहे हैं, कुछ लोगों के दसवीं-बारहवीं के exam शायद 1 मार्च को ही शुरू हो रहे हैं। तो आपके दिमाग में भी वही चलता होगा। मैं भी आपकी इस यात्रा में आपके साथ शरीक होना चाहता हूँ। आपको आपके बच्चों के exam की जितनी चिंता है, मुझे भी उतनी ही चिंता है। लेकिन अगर हम exam को, परीक्षा को देखने का अपना तौर-तरीका बदल दें, तो शायद हम चिंतामुक्त भी हो सकते हैं।
मैंने पिछली मेरी ‘मन की बात’ में कहा था कि आप NarendraModiApp पर अपने अनुभव, अपने सुझाव मुझे अवश्य भेजिए। मुझे खुशी इस बात की है – शिक्षकों ने, बहुत ही सफल जिनकी करियर रही है ऐसे विद्यार्थियों ने, माँ-बाप ने, समाज के कुछ चिंतकों ने बहुत सारी बातें मुझे लिख कर के भेजी हैं। दो बातें तो मुझे छू गईं कि सब लिखने वालों ने विषय को बराबर पकड़ के रखा। दूसरी बात इतनी हजारों मात्रा में चीज़ें आई कि मैं मानता हूँ कि शायद ये बहुत महत्वपूर्ण विषय है। लेकिन ज़्यादातर हमने exam के विषय को स्कूल के परिसर तक या परिवार तक या विद्यार्थी तक सीमित कर दिया है। मेरी App पर जो सुझाव आये, उससे तो लगता है कि ये तो बहुत ही बड़ा, पूरे राष्ट्र में लगातार विद्यार्थियों के इन विषयों की चर्चायें होती रहनी चाहिए।
मैं आज मेरी इस ‘मन की बात’ में विशेष रूप से माँ-बाप के साथ, परीक्षार्थियों के साथ और उनके शिक्षकों के साथ बातें करना चाहता हूँ। जो मैंने सुना है, जो मैंने पढ़ा है, जो मुझे बताया गया है, उसमें से भी कुछ बातें बताऊंगा। कुछ मुझे जो लगता है, वो भी जोड़ूंगा। लेकिन मुझे विश्वास है कि जिन विद्यार्थियों को exam देनी है, उनके लिए मेरे ये 25-30 मिनट बहुत उपयोगी होंगे, ऐसा मेरा मत है।
मेरे प्यारे विद्यार्थी मित्रो, मैं कुछ कहूँ, उसके पहले आज की ‘मन की बात’ का opening, हम विश्व के well-known opener के साथ क्यूँ न करें। जीवन में सफलता की ऊँचाइयों को पाने में कौन-सी चीज़ें उनको काम आईं, उनके अनुभव आपको ज़रूर काम आएँगे। भारत के युवाओं को जिनके
प्रति नाज़ है, ऐसे भारतरत्न श्रीमान सचिन तेंदुलकर, उन्होंने जो message भेजा है, वह मैं आपको

सुनाना चाहता हूँ:

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“नमस्कार, मैं सचिन तेंदुलकर बोल रहा हूँ। मुझे पता है कि exams कुछ ही दिनों में start होने वाली हैं। आप में से कई लोग tense भी रहेंगे। मेरा एक ही message है आपको कि आपसे expectations आपके माता-पिता करेंगे, आपके teachers करेंगे, आपके बाकी के family members करेंगे, दोस्त करेंगे। जहाँ भी जाओगे, सब पूछेंगे कि आपकी तैयारी कैसी चल रही है, कितने percent आपका स्कोर करोगे। यही कहना चाहूँगा मैं कि आप ख़ुद अपने लिए कुछ target set कीजियेगा, किसी और के expectation के pressure में मत आइयेगा। आप मेहनत ज़रूर कीजियेगा, मगर एक realistic achievable target खुद के लिए सेट कीजिये और वो target achieve करने के लिए कोशिश करना। मैं जब Cricket खेलता था, तो मेरे से भी बहुत सारे expectations होते थे। पिछले 24 साल में कई सारे कठिन moments आये और कई-कई बार अच्छे moments आये, मगर लोगों के expectations हमेशा रहते थे और वो बढ़ते ही गये, जैसे समय बीतता गया, expectations भी बढ़ते ही गए। तो इसके लिए मुझे एक solution find करना बहुत ज़रूरी था। तो मैंने यही सोचा कि मैं मेरे खुद के expectations रखूँगा और खुद के targets set करूँगा। अगर वो मेरे खुद के targets मैं set कर रहा हूँ और वो achieve कर पा रहा हूँ, तो मैं ज़रूर कुछ-न-कुछ अच्छी चीज़ देश के लिए कर पा रहा हूँ। और वो ही targets मैं हमेशा achieve करने की कोशिश करता था। मेरा focus रहता था ball पे और targets अपने आप slowly-slowly achieve होते गए। मैं आपको यही कहूँगा कि आप, आपकी सोच positive होनी बहुत ज़रूरी है। positive सोच को positive results follow करेंगे। तो आप positive ज़रूर रहियेगा और ऊपर वाला आपको ज़रूर अच्छे results दे, ये मुझे, इसकी पूरी उम्मीद है और आपको मैं best wishes देना चाहूँगा exams के लिए। एक tens।on free जा के पेपर लिखिये और अच्छे results पाइये। Good Luck!” दोस्तो, देखा, तेंदुलकर जी क्या कह रहे हैं। ये expectation के बोझ के नीचे मत दबिये। आप ही को तो आपका भविष्य बनाना है। आप खुद से अपने लक्ष्य को तय करें, खुद ही अपने target तय करें - मुक्त मन से, मुक्त सोच से, मुक्त सामर्थ्य से। मुझे विश्वास है कि सचिन जी की ये बात आपको काम आएगी। और ये बात सही है | प्रतिस्पर्द्धा क्यों? अनुस्पर्द्धा क्यों नहीं। हम दूसरों से स्पर्द्धा करने में अपना समय क्यों बर्बाद करें। हम खुद से ही स्पर्द्धा क्यों न करें। हम अपने ही पहले के सारे रिकॉर्ड तोड़ने का तय क्यों न करें। आप देखिये, आपको आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं पायेगा और अपने ही पिछले रिकॉर्ड को जब तोड़ोगे, तब आपको खुशी के लिए, संतोष के लिए किसी और से अपेक्षा भी नहीं रहेगी। एक भीतर से संतोष प्रकट होगा।
दोस्तो, परीक्षा को अंकों का खेल मत मानिये। कहाँ पहुँचे, कितना पहुँचे? उस हिसाब-किताब में मत फँसे रहिये। जीवन को तो किसी महान उद्देश्य के साथ जोड़ना चाहिए। एक सपनों को ले कर के चलना चाहिए, संकल्पबद्ध होना चाहिए। ये परीक्षाएँ, वो तो हम सही जा रहे हैं कि नहीं जा रहे, उसका हिसाब-किताब करती हैं; हमारी गति ठीक है कि नहीं है, उसका हिसाब-किताब करती हैं। और इसलिए विशाल, विराट ये अगर सपने रहें, तो परीक्षा अपने आप में एक आनंदोत्सव बन जायेगी। हर परीक्षा उस महान उद्देश्य की पूर्ति का एक कदम होगी। हर सफलता उस महान उद्देश्य को प्राप्त करने की चाभी बन जायेगी। और इसलिए इस वर्ष क्या होगा, इस exam में क्या होगा, वहाँ तक सीमित मत रहिये। एक बहुत बड़े उद्देश्य को ले कर के चलिये और उसमें कभी अपेक्षा से कुछ कम भी रह जाएगा, तो निराशा नहीं आएगी। और ज़ोर लगाने की, और ताक़त लगाने की, और कोशिश करने की हिम्मत आएगी। जिन हज़ारों लोगों ने मुझे मेरे App पर मोबाइल फ़ोन से छोटी-छोटी बातें लिखी हैं। श्रेय गुप्ता ने इस बात पर बल दिया है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन रहता है। students अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपनी health का भी ध्यान रखें, जिससे आप exam में स्वस्थतापूर्वक अच्छे से लिख सकें। अब मैं आज आखिरी दिन ये तो नहीं कहूँगा कि आप दंड-बैठक लगाना शुरू कर दीजिये और तीन किलोमीटर, पाँच किलोमीटर दौड़ने के लिए जाइये। लेकिन एक बात सही है कि खास कर के exam के दिनों मे आप का routine कैसा है। वैसे भी 365 दिवस हमारा routine हमारे सपनों और संकल्पों के अनुकूल होना चाहिये। श्रीमान प्रभाकर रेड्डी जी की एक बात से मैं सहमत हूँ। उन्होंने ख़ास आग्रह किया हैं, समय पर सोना चाहिए और सुबह जल्दी उठकर revision करना चाहिए। examination centre पर प्रवेश-पत्र और दूसरी चीजों के साथ समय से पहले पहुँच जाना चाहिए। ये बात प्रभाकर रेड्डी जी ने कही है, मैं शायद कहने की हिम्मत नहीं करता, क्योंकि मैं सोने के संबंध में थोड़ा उदासीन हूँ और मेरे काफ़ी दोस्त भी मुझे शिकायत करते रहते हैं कि आप बहुत कम सोते हैं। ये मेरी एक कमी है, मैं भी ठीक करने की कोशिश करूँगा। लेकिन मैं इससे सहमत ज़रूर हूँ। निर्धारित सोने का समय, गहरी नींद - ये उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि आपकी दिन भर की और गतिविधियाँ और ये संभव है। मैं भाग्यवान हूँ, मेरी नींद कम है, लेकिन बहुत गहरी ज़रूर है और इसके लिए मेरा काम चल भी जाता है। लेकिन आपसे तो मैं आग्रह करूँगा। वरना कुछ लोगों की आदत होती है, सोने से पहले लम्बी-लम्बी टेलीफ़ोन पर बात करते रहते हैं। अब उसके बाद वही विचार चलते रहते हैं, तो कहाँ से नींद आएगी? और जब मैं सोने की बात करता हूँ, तो ये मत सोचिए कि मैं exam के लिए सोने के लिए कहा रहा हूँ। गलतफ़हमी मत करना। मैं exam के time पर तो आपको अच्छी परीक्षा देने के लिए तनावमुक्त अवस्था के लिए सोने की बात कर रहा हूँ। सोते रहने की बात नहीं कर रहा हूँ। वरना कहीं ऐसा न हो कि marks कम आ जाये और माँ पूछे कि क्यों बेटे, कम आये, तो कह दो कि मोदी जी ने सोने को कहा था, तो मैं तो सो गया था। ऐसा नहीं करोगे न! मुझे विश्वास है नहीं करोगे। वैसे जीवन में, discipline सफलताओं की आधारशिला को मजबूत बनाने का बहुत बड़ा कारण होती है। एक मजबूत foundation discipline से आता है। और जो unorganized होते हैं, Indiscipline होते हैं, सुबह करने वाला काम शाम को करते हैं, दोपहर को करने वाला काम रात देर से करते हैं,उनको ये तो लगता है कि काम हो गया, लेकिन इतनी energy waste होती है और हर पल तनाव रहता है। हमारे शरीर में भी एक-आध अंग, हमारे body का एक-आध part थोड़ी-सी तकलीफ़ करे, तो आपने देखा होगा कि पूरा शरीर सहजता नहीं अनुभव करता है। इतना ही नहीं, हमारा routine भी चरमरा जाता है। और इसलिए किसी चीज़ को हम छोटी न मानें। आप देखिये, अपने-आपको कभी जो निर्धारित है, उसमें compromise करने की आदत में मत फंसाइए। तय करें, करके देखें। दोस्तो, कभी-कभी मैंने देखा है कि जो student exam के लिए जाते हैं, दो प्रकार के student होते हैं, एक, उसने क्या पढ़ा है, क्या सीखा है, किन बातों में उसकी अच्छी ताक़त है - उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। दूसरे प्रकार के student होते हैं - यार, पता नहीं कौन-सा सवाल आयेगा, पता नहीं कैसा सवाल आयेगा, पता नहीं कर पाऊंगा कि नहीं कर पाऊंगा, पेपर भारी होगा कि हल्का होगा? ये दो प्रकार के लोग देखे होंगे आपने। जो कैसा पेपर आयेगा, उसके tension में रहता है, उसका उसके परिणाम पर भी नकारात्मक प्रभाव होता है। जो मेरे पास क्या है, उसी विश्वास से जाता है, तो कुछ भी आ जाये, वो निपट लेता है। इस बात को मुझसे भी अच्छी तरह अगर कोई कह सकता है, तो checkmate करने में जिनकी मास्टरी है और दुनिया के अच्छों-अच्छों को जिसने checkmate कर दिया है, ऐसे Chess के champ।on विश्वनाथन आनंद, वो अपने अनुभव बतायेंगे। आइये, इस exam में आप checkmate करने का तरीका उन्हीं से सीख लीजिए:

“Hello, this is Viswanathan Anand. First of all, let me start off by wishing you all the best for your exams. I will next talk a little bit about how I went to my exams and my experiences for that. I found that exams are very much like problems you face later in life. You need to be well rested, get a good night’s sleep, you need to be on a full stomach, you should definitely not be hungry and the most important thing is to stay calm. It is very very similar to a game of Chess. When you play, you don’t know, which pawn will appear, just like in a class you don’t know, which question will appear in an exam. So if you stay calm and you are well nourished and have slept well, then you will find that your brain recalls the right answer at the right moment. So stay calm. It is very important not to put too much pressure on yourself, don’t keep your expectations too high. Just see it as a challenge – do I remember what I was taught during the year, can I solve these problems. At the last minute, just go over the most important things and the things you feel, the topics you feel, you don’t remember very well. You may also recall some incidents with the teacher or the students, while you are writing an exam and this will help you recall a lot of subject matter. If you revise the questions you find difficult, you will find that they are fresh in your head and when you are writing the exam, you will be able to deal with them much better. So stay calm, get a good night’s sleep, don’t be over-confident but don’t be pessimistic either. I have always found that these exams go much better than you fear before. So stay confident and all the very best to you.”
विश्वनाथन आनंद ने सचमुच में बहुत ही महत्वपूर्ण बात बताई है और आपने भी जब उनको अन्तर्राष्ट्रीय Chess के गेम में देखा होगा, कितनी स्वस्थता से वो बैठे होते हैं और कितने ध्यानस्थ होते हैं। आपने देखा होगा, उनकी आँखें भी इधर-उधर नहीं जाती हैं। कभी हम सुनते थे न, अर्जुन के जीवन की घटना कि पक्षी की आँख पर कैसे उनकी नज़र रहती थी। बिलकुल वैसे ही विश्वनाथन को जब खेलते हुए देखते हैं, तो बिलकुल उनकी आँखें एकदम से बड़ी target पर fix रहती हैं और वो भीतर की शांति की अभिव्यक्ति होती है। ये बात सही है कि कोई कह दे, इसलिये फिर भीतर की शांति आ ही जायेगी, ये तो कहना कठिन है। लेकिन कोशिश करनी चाहिये! हँसते-हँसते क्यों न करें! आप देखिये, आप हँसते रहेंगे, खिलखिलाहट हँसते रहेंगे exam के दिन भी, अपने-आप शांति आना शुरू हो जाएगी। आप दोस्तों से बात नहीं कर रहे हैं या अकेले चल रहे हैं, मुरझाए-मुरझाए चल रहे हैं, ढेर सारी किताबों को last moment भी हिला रहे हैं, तो-तो फिर वो शांत मन हो नहीं सकता है। हँसिए, बहुत हँसते चलिए, साथियों के साथ चुटकले share करते चलिए, आप देखिए, अपने-आप शांति का माहौल खड़ा हो जाएगा।
मैं आपको एक बात छोटी सी समझाना चाहता हूँ। आप कल्पना कीजिये कि एक तालाब के किनारे पर आप खड़े हैं और नीचे बहुत बढ़िया चीज़ें दिखती हैं। लेकिन अचानक कोई पत्थर मार दे पानी में और पानी हिलना शुरू हो जाए, तो नीचे जो बढ़िया दिखता था, वो दिखता है क्या? अगर पानी शांत है, तो चीज़ें कितनी ही गहरी क्यों न हों, दिखाई देती हैं। लेकिन पानी अगर अशांत है, तो नीचे कुछ नहीं दिखता है। आपके भीतर बहुत-कुछ पड़ा हुआ है। साल भर की मेहनत का भण्डार भरा पड़ा है। लेकिन अशांत मन होगा, तो वो खज़ाना आप ही नहीं खोज पाओगे। अगर शांत मन रहा, तो वो आपका खज़ाना बिलकुल उभर करके आपके सामने आएगा और आपकी exam एकदम सरल हो जायेगी। मैं एक बात बताऊं मेरी अपनी – मैं कभी-कभी कोई लेक्चर सुनने जाता हूँ या मुझे सरकार में भी कुछ विषय ऐसे होते हैं, जो मैं नहीं जानता हूँ और मुझे काफी concentrate करना पड़ता है। तो कभी-कभी ज्यादा concentrate करके समझने की कोशिश करता हूँ, तो एक भीतर तनाव महसूस करता हूँ। फिर मुझे लगता है, नहीं-नहीं, थोड़ा relax कर जाऊँगा, तो मुझे अच्छा रहेगा। तो मैंने अपने-आप अपनी technique develop की है। बहुत deep breathing कर लेता हूँ। गहरी साँस लेता हूँ। तीन बार-पांच बार गहरी साँस लेता हूँ, समय तो 30 सेकिंड, 40 सेकिंड, 50 सेकिंड जाता है, लेकिन फिर मेरा मन एकदम से शांत हो करके चीज़ों को समझने के लिए तैयार हो जाता है। हो सकता है, ये मेरा अनुभव हो, आपको भी काम आ सकता है। रजत अग्रवाल ने एक अच्छी बात बतायी है। वो मेरी App पर लिखते हैं - हम हर दिन कम-से-कम आधा घंटे दोस्तों के साथ, परिवारजनों के साथ relax feel करें। गप्पें मारें। ये बड़ी महत्वपूर्ण बात रजत जी ने बताई है, क्योंकि ज्यादातर हम देखते हैं कि हम जब exam दे करके आते हैं, तो गिनने के लिए बैठ जाते हैं, कितने सही किया, कितना गलत किया। अगर घर में माँ-बाप भी पढ़े लिखे हों और उसमें भी अगर माँ-बाप भी टीचर हों, तो-तो फिर पूरा पेपर फिर से लिखवाते हैं –
बताओ, तुमने क्या लिखा, क्या हुआ! सारा जोड़ लगाते हैं, देखो, तुम्हें 40 आएगा कि 80 आएगा, 90 आएगा! आपका दिमाग जो exam हो गयी, उसमें खपा रहता है। आप भी क्या करते हैं, दोस्तों सेफ़ोन पर share करते हैं, अरे यार, उसमें तुमने क्या लिखा! अरे यार, उसमें तुम्हारा कैसा गया! अच्छा, तुम्हें क्या लगा। यार, मेरी तो गड़बड़ हो गयी। यार, मैंने तो गलती कर दी। अरे यार, मुझे ये तो मालूम था, लेकिन मुझे याद नहीं आया। हम उसी में फँस जाते हैं। दोस्तो, ये मत कीजिये। exam के समय हो गया, सो हो गया। परिवार के साथ और विषयों पर गप्पें मारिए। पुरानी हँसी-खुशी की यादें ताज़ा कीजिए। कभी माँ-बाप के साथ कहीं गये हों, तो वहाँ के दृश्यों को याद करिए। बिलकुल उनसे निकल करके ही आधा घंटा बिताइए। रजत जी की बात सचमुच में समझने जैसी है।

दोस्तो, मैं क्या आपको शांति की बात बताऊँ। आज आपको exam देने से पहले एक ऐसे व्यक्ति ने आपके लिए सन्देश भेजा है, वे मूलतः शिक्षक हैं और आज एक प्रकार से संस्कार शिक्षक बने हुए हैं। रामचरितमानस, वर्तमान सन्दर्भ में उसकी व्याख्या करते-करते वो देश और दुनिया में इस संस्कार सरिता को पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे पूज्य मुरारी बापू ने भी विद्यार्थियों के लिए बड़ी महत्वपूर्ण tip भेजी है और वे तो शिक्षक भी हैं, चिन्तक भी हैं और इसलिए उनकी बातों में

दोनों का मेल है: -
“मैं मुरारी बापू बोल रहा हूँ। मैं विद्यार्थी भाइयों-बहनों को यही कहना चाहता हूँ कि परीक्षा के समय में मन पर कोई भी बोझ रखे बिना और बुद्धि का एक स्पष्ट निर्णय करके और चित को एकाग्र करके आप परीक्षा में बैठिये और जो स्थिति आई है, उसको स्वीकार कर लीजिए। मेरा अनुभव है कि परिस्थिति को स्वीकार करने से बहुत हम प्रसन्न रह सकते हैं और खुश रह सकते हैं। आपकी परीक्षा में आप निर्भार और प्रसन्नचित्त आगे बढ़ें, तो ज़रूर सफलता मिलेगी और यदि सफलता न भी मिली, तो भी fail होने की ग्लानि नहीं होगी और सफल होने का गर्व भी होगा। एक शेर कह कर मैं मेरा सन्देश और शुभकामना देता हूँ – लाज़िम नहीं कि हर कोई हो कामयाब ही, जीना भी सीखिए नाकामियों के साथ। हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री का ये जो ‘मन की बात’ का कार्यक्रम है, उसको मैं बहुत आवकार देता हूँ। सबके लिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामना।
धन्यवाद।”
पूज्य मुरारी बापू का मैं भी आभारी हूँ कि उन्होंने बहुत अच्छा सन्देश हम सबको दिया। दोस्तो, आज एक और बात बताना चाहता हूँ। मैं देख रहा हूँ कि इस बार जो मुझे लोगों ने जो अपने अनुभव बताये हैं, उसमें योग की चर्चा अवश्य की है। और ये मेरे लिए खुशी की बात है कि इन दिनों मैं दुनिया में जिस किसी से मिलता हूँ, थोड़ा-सा भी समय क्यों न मिले, योग की थोड़ी सी बात तो कोई न कोई करता ही करता है। दुनिया के किसी भी देश का व्यक्ति क्यों न हो, भारत का कोई व्यक्ति क्यों न हो, तो मुझे अच्छा लगता है कि योग के संबंध में इतना आकर्षण पैदा हुआ है, इतनी जिज्ञासा पैदा हुई है और देखिये, कितने लोगों ने मुझे मेरे मोबाइल App पर, श्री अतनु मंडल, श्री कुणाल गुप्ता, श्री सुशांत कुमार, श्री के. जी. आनंद, श्री अभिजीत कुलकर्णी, न जाने अनगिनत लोगों ने meditation की बात की है, योग पर बल दिया है। खैर दोस्तो, मैं बिलकुल ही आज ही कह दूँ, कल सुबह से योग करना शुरू करो, वो तो आपके साथ अन्याय होगा। लेकिन जो योग करते हैं, वो कम से कम exam है इसलिए आज न करें, ऐसा न करें। करते हैं तो करिये। लेकिन ये बात सही है कि विद्यार्थी जीवन में हो या जीवन का उत्तरार्द्ध हो, अंतर्मन की विकास यात्रा में योग एक बहुत बड़ी चाभी है। सरल से सरल चाभी है। आप ज़रूर उस पर ध्यान दीजिए।
हाँ, अगर आप अपने नजदीक में कोई योग के जानकार होंगे, उनको पूछोगे तो exam के दिनों में पहले योग नहीं किया होगा, तो भी दो-चार चीज़ें तो ऐसे बता देंगे, जो आप दो-चार-पाँच मिनट में कर सकते हैं। देखिये, अगर आप कर सकते हैं तो! हाँ, मेरा उसमें विश्वास बहुत है। मेरे नौजवान साथियो, आपको परीक्षा हॉल में जाने की बड़ी जल्दी होती है। जल्दी-जल्दी पर अपने bench पर बैठ जाने का मन करता है? क्या ये चीज़ें हड़बड़ी में क्यों करें? अपना पूरे दिन का समय का ऐसा प्रबंधन क्यों न करें कि कहीं ट्रैफिक में रुक जाएँ, तो भी समय पर हम पहुँच ही जाएँ। वर्ना ऐसी चीज़ें एक नया तनाव पैदा करती हैं। और एक बात है, हमें जितना समय मिला है, उसमें जो प्रश्नपत्र है, जो instructions हैं, हमें कभी-कभी लगता है कि ये हमारा समय खा जाएगा। ऐसा नहीं है दोस्तो। आप उन instructions को बारीकी से पढ़िए। दो मिनट-तीन मिनट-पाँच मिनट जाएगी, कोई नुकसान नहीं होगा। लेकिन उससे exam में क्या करना है, उसमें कोई गड़बड़ नहीं होगी और बाद में पछतावा नहीं होगा और मैंने देखा है कि कभी-कभार पेपर आने के बाद भी pattern नयी आयी है, ऐसा पता चलता है, लेकिन पढ़ लेते हैं instructions, तो शायद हम अपने आपको बराबर cope-up कर लेते हैं कि हाँ, ठीक है, चलो, मुझे ऐसे ही जाना है। और मैं आपसे आग्रह करूँगा कि भले आपके पाँच मिनट इसमें जाएँ, लेकिन इसको ज़रूर करें।
श्रीमान यश नागर, उन्होंने हमारे मोबाइल App पर लिखा है कि जब उन्होनें पहली बार पेपर पढ़ा, तो उन्हें ये काफी कठिन लगा। लेकिन उसी पेपर को दोबारा आत्मविश्वास के साथ, अब यही पेपर मेरे पास है, कोई नये प्रश्न आने वाले नहीं हैं, मुझे इतने ही प्रश्नों से निपटना है और जब दोबारा मैं सोचने लगा, तो उन्होंने लिखा है कि मैं इतनी आसानी से इस पेपर को समझ गया, पहली बार पढ़ा तो लगा कि ये तो मुझे नहीं आता है, लेकिन वही चीज़ दोबारा पढ़ा, तो मुझे ध्यान में आया कि नहीं-नहीं सवाल दूसरे तरीक़े से रखा गया है, लेकिन ये तो वही बात है, जो मैं जानता हूँ। प्रश्नों को समझना ये बहुत आवश्यक होता है। प्रश्नों को न समझने से कभी-कभी प्रश्न कठिन लगता है। मैं यश नागर की इस बात पर बल देता हूँ कि आप प्रश्नों को दो बार पढ़ें, तीन बार पढ़ें, चार बार पढ़ें और आप जो जानते हैं, उसके साथ उसको match करने का प्रयास करें। आप देखिये, वो प्रश्न लिखने से पहले ही सरल हो जाएगा।
मेरे लिए आज खुशी की बात है कि भारतरत्न और हमारे बहुत ही सम्मानित वैज्ञानिक सी.एन.आर. राव, उन्होंने धैर्य पर बल दिया है। बहुत ही कम शब्दों में लेकिन बहुत ही अच्छा सन्देश हम सभी विद्यार्थियों को उन्होंने दिया है। आइये, राव साहब का message सुनें:-
“This is C.N.R. Rao from Bangalore. I fully realise that the examinations cause anxiety. That too competitive examinations. Do not worry, do your best. That’s what I tell all my young friends. At the same time remember, that there are many opportunities in this country. Decide what you want to do in life and don’t give it up. You will succeed. Do not forget that you are a child of the universe. You have a right to be here like the trees and the mountains. All you need is doggedness, dedication and tenacity. With these qualities you will succeed in all examinations and all other endeavours. I wish you luck in everything you want to do. God Bless.” देखा, एक वैज्ञानिक का बात करने का तरीका कैसा होता है। जो बात कहने में मैं आधा घंटा लगाता हूँ, वो बात वो तीन मिनट में कह देते हैं। यही तो विज्ञान की ताकत है और यही तो वैज्ञानिक मन की ताकत है। मैं राव साहब का बहुत आभारी हूँ कि उन्होंने देश के बच्चों को प्रेरित किया। उन्होंने जो बात कही है – दृढ़ता की, निष्ठा की, तप की, यही बात है – dedication, determination, diligence. डटे रहो, दोस्तो, डटे रहो। अगर आप डटे रहोगे, तो डर भी डरता रहेगा। और अच्छा करने के लिए सुनहरा भविष्य आपका इन्तजार कर रहा है। अब मेरे App पर एक सन्देश रुचिका डाबस ने अपने exam experience को share किया है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में exam के समय एक positive atmosphere बनाने का लगातार प्रयास होता है और ये चर्चा उनके साथी परिवारों में भी होती थी। सब मिला करके positive वातावरण।
ये बात सही है, जैसा सचिन जी ने भी कहा, positive approach, positive frame of mind positive energy को उजागर करता है। कभी-कभी बहुत सी बातें ऐसी होती हैं कि जो हमें प्रेरणा देती हैं, और ये मत सोचिए कि ये सब विद्यार्थियों को ही प्रेरणा देती हैं। जीवन के किसी भी पड़ाव पर आप क्यों न हों, उत्तम उदाहरण, सत्य घटनाएँ बहुत बड़ी प्रेरणा भी देती हैं, बहुत बड़ी ताकत भी देती हैं और संकट के समय नया रास्ता भी बना देती हैं। हम सब electricity bulb के आविष्कारक थॉमस एलवा एडिसन, हमारे syllabus में उसके विषय में पढ़ते हैं। लेकिन दोस्तो, कभी ये सोचा है, कितने सालों तक उन्होंने इस काम को करने के लिए खपा दिए। कितनी बार विफलताएँ मिली, कितना समय गया, कितने पैसे गए। विफलता मिलने पर कितनी निराशा आयी होगी। लेकिन आज उस electricity, वो bulb हम लोगों की ज़िंदगी को भी तो रोशन करता है। इसी को तो कहते हैं, विफलता में भी सफलता की संभावनायें निहित होती हैं।
श्रीनिवास रामानुजन को कौन नहीं जानता है। आधुनिक काल के महानतम गणित विचारकों में से एक नाम –Indian Mathematician. आपको पता होगा, उनका formal कोई education mathematics में नहीं हुआ था, कोई विशेष प्रशिक्षण भी नहीं हुआ था, लेकिन उन्होंने Mathematical analysis, number theory जैसे विभिन्न क्षेत्रों में गहन योगदान किया। अत्यंत कष्ट भरा जीवन, दुःख भरा जीवन, उसके बावज़ूद भी वो दुनिया को बहुत-कुछ दे करके गए। जे. के. रॉलिंग एक बेहतरीन उदाहरण हैं कि सफलता कभी भी किसी को भी मिल सकती है। हैरी पॉटर series आज दुनिया भर में लोकप्रिय है। लेकिन शुरू से ऐसा नहीं था। कितनी समस्या उनको झेलनी पड़ी थी। कितनी विफलताएँ आई थीं। रॉलिंग ने खुद कहा था कि मुश्किलों में वो सारी ऊर्जा उस काम में लगाती थीं, जो वाकई उनके लिए मायने रखता था। Exam आजकल सिर्फ़ विद्यार्थी की नहीं, पूरे परिवार की और पूरे स्कूल की, teacher की सबकी हो जाती है। लेकिन parents और teachers के support system के बिना अकेला विद्यार्थी, स्थिति अच्छी नहीं है। teacher हो, parents हों, even senior students हों, ये सब मिला करके हम एक टीम बनके, unit बनके समान सोच के साथ, योजनाबद्ध तरीक़े से आगे बढ़ें, तो परीक्षा सरल हो जाती है।
श्रीमान केशव वैष्णव ने मुझे App पर लिखा है, उन्होंने शिकायत की है कि parents ने अपने बच्चों पर अधिक marks मांगने के लिए कभी भी दबाव नहीं बनाना चाहिये। सिर्फ़ तैयारी करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिये। वो relax रहे, इसकी चिंता करनी चाहिये। विजय जिंदल लिखते हैं, बच्चों पर उनसे अपनी उम्मीदों का बोझ न डालें। जितना हो सके, उनका हौसला बढ़ायें। विश्वास बनाये रखने में सहायता करें। ये बात सही है। मैं आज parents को अधिक कहना नहीं चाहता हूँ। कृपा करके दबाव मत बनाइये। अगर वो अपने किसी दोस्त से बात कर रहा है, तो रोकिये मत। एक हल्का-फुल्का वातावरण बनाइए, सकारात्मक वातावरण बनाइए। देखिये, आपका बेटा हो या बेटी कितना confidence आ जायेगा। आपको भी वो confidence नज़र आयेगा।
दोस्तो, एक बात निश्चित है, ख़ास करके मैं युवा मित्रों से कहना चाहता हूँ | हम लोगों का जीवन, हमारी पुरानी पीढ़ियों से बहुत बदल चुका है। हर पल नया innovation, नई टेक्नोलॉजी, विज्ञान के नित नए रंग-रूप देखने को मिल रहे हैं और हम सिर्फ अभिभूत हो रहे हैं, ऐसा नहीं है। हम उससे जुड़ने का पसंद करते हैं। हम भी विज्ञान की रफ़्तार से आगे बढ़ना चाहते हैं। मैं ये बात इसलिए कर रहा हूँ, दोस्तो कि आज National Science Day है। National Science Day, देश का विज्ञान महोत्सव हर वर्ष 28 फरवरी हम इस रूप में मनाते हैं। 28 फरवरी, 1928 सर सी.वी. रमन ने अपनी खोज ‘रमन इफ़ेक्ट’ की घोषणा की थी। यही तो खोज थी, जिसमें उनको नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ और इसलिए देश 28 फरवरी को National Science Day के रूप में मनाता है। जिज्ञासा विज्ञान की जननी है। हर मन में वैज्ञानिक सोच हो, विज्ञान के प्रति आकर्षण हो और हर पीढ़ी को innovation पर बल देना होता है और विज्ञान और टेक्नोलॉजी के बिना innovation संभव नहीं होते हैं। आज National Science Day पर देश में innovation पर बल मिले। ज्ञान, विज्ञान, टेक्नोलॉजी ये सारी बातें हमारी विकास यात्रा के सहज हिस्से बनने चाहिए और इस बार National Science Day का theme है ‘Make in India Science and Technology Driven innovations'. सर सी.वी. रमन को मैं नमन करता हूँ और आप सबको विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए आग्रह कर रहा हूँ।
दोस्तो, कभी-कभी सफलताएँ बहुत देर से मिलती हैं और सफलता जब मिलती है, तब दुनिया को देखने का नज़रिया भी बदल जाता है। आप exam में शायद बहुत busy रहे होंगे, तो शायद हो सकता है, बहुत सी ख़बरे आपके मन में register न हुई हों। लेकिन मैं देशवासियो को भी इस बात को दोहराना चाहता हूँ। आपने पिछले दिनों में सुना होगा कि विज्ञान के विश्व में एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण ख़ोज हुई है। विश्व के वैज्ञानिकों ने परिश्रम किया, पीढ़ियाँ आती गईं, कुछ-न-कुछ करती गईं और क़रीब-क़रीब 100 साल के बाद एक सफलता हाथ लगी। ‘Gravitational Waves’ हमारे वैज्ञानिको के पुरुषार्थ से, उसे उजागर किया गया, detect किया गया। ये विज्ञान की बहुत दूरगामी सफलता है। ये खोज न केवल पिछली सदी के हमारे महान वैज्ञानिक आइन्स्टाइन की theory को प्रमाणित करती है, बल्कि Physics के लिए महान discovery मानी जाती है। ये पूरी मानव-जाति को पूरे विश्व के काम आने वाली बात है, लेकिन एक भारतीय के नाते हम सब को इस बात की खुशी है कि सारी खोज की प्रक्रिया में हमारे देश के सपूत, हमारे देश के होनहार वैज्ञानिक भी उससे जुड़े हुये थे। उनका भी योगदान है। मैं उन सभी वैज्ञानिकों को आज ह्रदय से बधाई देना चाहता हूँ, अभिनन्दन करना चाहता हूँ। भविष्य में भी इस ख़ोज को आगे बढ़ाने में हमारे वैज्ञानिक प्रयासरत रहेंगे। अन्तर्राष्ट्रीय प्रयासों में भारत भी हिस्सेदार बनेगा और मेरे देशवासियो, पिछले दिनों में एक महत्वपूर्ण निर्णय किया है। इसी खोज में और अधिक सफ़लता पाने के लिए Laser Interferometer Gravitational-Wave Observatory, short में उसको कहते हैं ‘LIGO’, भारत में खोलने का सरकार ने निर्णय लिया है। दुनिया में दो स्थान पर इस प्रकार की व्यवस्था है, भारत तीसरा है। भारत के जुड़ने से इस प्रक्रिया को और नई ताक़त मिलेगी, और नई गति मिलेगी। भारत ज़रूर अपने मर्यादित संसाधनों के बीच भी मानव कल्याण की इस महत्तम वैज्ञानिक ख़ोज की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनेगा। मैं फिर एक बार सभी वैज्ञानिकों को बधाई देता हूँ, शुभकामनायें देता हूँ। मेरे प्यारे देशवासियो, मैं एक नंबर लिखवाता हूँ आपको, कल से आप missed call करके इस नंबर से मेरी ‘मन की बात’ सुन सकते हैं, आपकी अपनी मातृभाषा में भी सुन सकते हैं। missed call करने के लिए नंबर है – 81908-81908. मैं दोबारा कहता हूँ 81908-81908.
दोस्तो, आपकी exam शुरू हो रही है। मुझे भी कल exam देनी है। सवा-सौ करोड़ देशवासी मेरी examination लेने वाले हैं। पता है न, अरे भई, कल बजट है! 29 फरवरी, ये Leap Year होता है। लेकिन हाँ, आपने देखा होगा, मुझे सुनते ही लगा होगा, मैं कितना स्वस्थ हूँ, कितना आत्मविश्वास से भरा हुआ हूँ। बस, कल मेरी exam हो जाये, परसों आपकी शुरू हो जाये। और हम सब सफल हों, तो देश भी सफल होगा। तो दोस्तो, आपको भी बहुत-बहुत शुभकामनायें, ढेर सारी शुभकामनायें। सफलता-विफलता के तनाव से मुक्त हो करके, मुक्त मन से आगे बढ़िये, डटे रहिये। धन्यवाद!


‘मन की बात’ - प्रधानमंत्री श्री मोदी
Our Correspondent :21 September 2015
मेरे प्यारे देशवासियो, आप सबको नमस्कार! ‘मन की बात’ का ये बारहवां एपिसोड है और इस हिसाब से देखें तो एक साल बीत गया। पिछले वर्ष, 3 अक्टूबर को पहली बार मुझे ‘मन की बात’ करने का सौभाग्य मिला था। ‘मन की बात’ - एक वर्ष, अनेक बातें। मैं नहीं जानता हूँ कि आपने क्या पाया, लेकिन मैं इतना ज़रूर कह सकता हूँ, मैंने बहुत कुछ पाया।
लोकतंत्र में जन-शक्ति का अपार महत्व है। मेरे जीवन में एक मूलभूत सोच रही है और उसके कारण जन-शक्ति पर मेरा अपार विश्वास रहा है। लेकिन ‘मन की बात’ ने मुझे जो सिखाया, जो समझाया, जो जाना, जो अनुभव किया, उससे मैं कह सकता हूँ कि हम सोचते हैं, उससे भी ज्यादा जन-शक्ति अपरम्पार होती है। हमारे पूर्वज कहा करते थे कि जनता-जनार्दन, ये ईश्वर का ही अंश होता है। मैं ‘मन की बात’ के मेरे अनुभवों से कह सकता हूँ कि हमारे पूर्वजों की सोच में एक बहुत बड़ी शक्ति है, बहुत बड़ी सच्चाई है, क्योंकि मैंने ये अनुभव किया है। ‘मन की बात’ के लिए मैं लोगों से सुझाव माँगता था और शायद हर बार दो या चार सुझावों को ही हाथ लगा पाता था। लेकिन लाखों की तादाद में लोग सक्रिय हो करके मुझे सुझाव देते रहते थे। यह अपने आप में एक बहुत बड़ी शक्ति है, वर्ना प्रधानमंत्री को सन्देश दिया, mygov.in पर लिख दिया, चिठ्ठी भेज दी, लेकिन एक बार भी हमारा मौका नहीं मिला, तो कोई भी व्यक्ति निराश हो सकता है। लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगा।
हाँ... मुझे इन लाखों पत्रों ने एक बहुत बड़ा पाठ भी पढ़ाया। सरकार की अनेक बारीक़ कठिनाइयों के विषय में मुझे जानकारी मिलती रही और मैं आकाशवाणी का भी अभिनन्दन करता हूँ कि उन्होंने इन सुझावों को सिर्फ एक कागज़ नहीं माना, एक जन-सामान्य की आकांक्षा माना। उन्होंने इसके बाद कार्यक्रम किये। सरकार के भिन्न-भिन्न विभागों को आकाशवाणी में बुलाया और जनता-जनार्दन ने जो बातें कही थीं, उनके सामने रखीं। कुछ बातों का निराकरण करवाने का प्रयास किया। सरकार के भी हमारे भिन्न-भिन्न विभागों ने, लोगों में इन पत्रों का analysis किया और वो कौन-सी बातें हैं कि जो policy matters हैं? वो कौन-सी बातें हैं, जो person के कारण परेशानी हैं? वो कौन-सी बातें हैं, जो सरकार के ध्यान में ही नहीं हैं? बहुत सी बातें grass-root level से सरकार के पास आने लगीं और ये बात सही है कि governance का एक मूलभूत सिद्धांत है कि जानकारी नीचे से ऊपर की तरफ जानी चाहिए और मार्गदर्शन ऊपर से नीचे की तरफ जाना चाहिये। ये जानकारियों का स्रोत, ‘मन की बात’ बन जाएगा, ये कहाँ सोचा था किसी ने? लेकिन ये हो गया।
और उसी प्रकार से ‘मन की बात’ ने समाज- शक्ति की अभिव्यक्ति का एक अवसर बना दिया। मैंने एक दिन ऐसे ही कह दिया था कि सेल्फ़ी विद डॉटर (selfie w।th daughter) और सारी दुनिया अचरज हो गयी, शायद दुनिया के सभी देशों से किसी-न-किसी ने लाखों की तादाद में सेल्फ़ी विद डॉटर (selfie w।th daughter) और बेटी को क्या गरिमा मिल गयी। और जब वो सेल्फ़ी विद डॉटर (selfie w।th daughter) करता था, तब अपनी बेटी का तो हौसला बुलंद करता था, लेकिन अपने भीतर भी एक commitment पैदा करता था। जब लोग देखते थे, उनको भी लगता था कि बेटियों के प्रति उदासीनता अब छोड़नी होगी। एक Silent Revolution था।
भारत के tourism को ध्यान में रखते हुए मैंने ऐसे ही नागरिकों को कहा था, “Incredible India”, कि भई, आप भी तो जाते हो, जो कोई अच्छी तस्वीर हो, तो भेज देना, मैं देखूंगा। यूँ ही हलकी-फुलकी बात की थी, लेकिन क्या बड़ा गज़ब हो गया! लाखों की तादाद में हिन्दुस्तान के हर कोने की ऐसी-ऐसी तस्वीरें लोगों ने भेजीं। शायद भारत सरकार के tourism ने, राज्य सरकार के tourism department ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि हमारे पास ऐसी-ऐसी विरासतें हैं। एक platform पर सब चीज़ें आयीं और सरकार का एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ। लोगों ने काम को बढ़ा दिया।
मुझे ख़ुशी तो तब हुई कि पिछले अक्टूबर महीने के पहले मेरी जो पहली ‘मन की बात’ थी, तो मैंने गाँधी जयंती का उल्लेख किया था और लोगों को ऐसे ही मैंने प्रार्थना की थी कि 2 अक्टूबर महात्मा गाँधी की जयंती हम मना रहे हैं। एक समय था, खादी फॉर नेशन (Khadi for Nation). क्या समय का तकाज़ा नहीं है कि खादी फॉर फैशन (Khadi for Fashion) - और लोगों को मैंने आग्रह किया था कि आप खादी खरीदिये। थोडा बहुत कीजिये। आज मैं बड़े संतोष के साथ कहता हूँ कि पिछले एक वर्ष में करीब-करीब खादी की बिक्री डबल हुई है। अब ये कोई सरकारी advertisement से नहीं हुआ है। अरबों-खरबों रूपए खर्च कर के नहीं हुआ है। जन-शक्ति का एक एहसास, एक अनुभूति।
एक बार मैंने ‘मन की बात’ में कहा था, गरीब के घर में चूल्हा जलता है, बच्चे रोते रहते हैं, गरीब माँ - क्या उसे gas cylinder नहीं मिलना चाहिए? और मैंने सम्पन्न लोगों से प्रार्थना की थी कि आप subsidy surrender नहीं कर सकते क्या? सोचिये... और मैं आज बड़े आनंद के साथ कहना चाहता हूँ कि इस देश के तीस लाख परिवारों ने gas cylinder की subsidy छोड़ दी है - और ये अमीर लोग नहीं हैं। एक TV channel पर मैंने देखा था कि एक retired teacher, विधवा महिला, वो क़तार में खड़ी थी subsidy छोड़ने के लिए। समाज के सामान्य जन भी, मध्यम वर्ग, निम्न-मध्यम वर्ग जिनके लिए subsidy छोड़ना मुश्किल काम है। लेकिन ऐसे लोगों ने छोड़ा। क्या ये Silent Revolution नहीं है? क्या ये जन-शक्ति के दर्शन नहीं हैं?
सरकारों को भी सबक सीखना होगा कि हमारी सरकारी चौखट में जो काम होता है, उस चौखट के बाद एक बहुत बड़ी जन-शक्ति का एक सामर्थ्यवान, ऊर्जावान और संकल्पवान समाज है। सरकारें जितनी समाज से जुड़ करके चलती हैं, उतनी ज्यादा समाज में परिवर्तन के लिए एक अच्छी catalytic agent के रूप में काम कर सकती हैं। ‘मन की बात’ में, मुझे सब जिन चीज़ों में मेरा भरोसा था, लेकिन आज वो विश्वास में पलट गया, श्रद्धा में पलट गया और इसलिये मैं आज ‘मन की बात’ के माध्यम से फिर एक बार जन-शक्ति को शत-शत वन्दन करना चाहता हूँ, नमन करना चाहता हूँ। हर छोटी बात को अपनी बना ली और देश की भलाई के लिए अपने-आप को जोड़ने का प्रयास किया। इससे बड़ा संतोष क्या हो सकता है?
‘मन की बात’ में इस बार मैंने एक नया प्रयोग करने के लिए सोचा। मैंने देश के नागरिकों से प्रार्थना की थी कि आप telephone करके अपने सवाल, अपने सुझाव दर्ज करवाइए, मैं ‘मन की बात’ में उस पर ध्यान दूँगा। मुझे ख़ुशी है कि देश में से करीब पचपन हज़ार से ज़्यादा phone calls आये। चाहे सियाचिन हो, चाहे कच्छ हो या कामरूप हो, चाहे कश्मीर हो या कन्याकुमारी हो। हिन्दुस्तान का कोई भू-भाग ऐसा नहीं होगा, जहाँ से लोगों ने phone calls न किये हों। ये अपने-आप में एक सुखद अनुभव है। सभी उम्र के लोगों ने सन्देश दिए हैं। कुछ तो सन्देश मैंने खुद ने सुनना भी पसंद किया, मुझे अच्छा लगा। बाकियों पर मेरी team काम कर रही है। आपने भले एक मिनट-दो मिनट लगाये होंगे, लेकिन मेरे लिए आपका phone call, आपका सन्देश बहुत महत्वपूर्ण है। पूरी सरकार आपके सुझावों पर ज़रूर काम करेगी।
लेकिन एक बात मेरे लिए आश्चर्य की रही और आनंद की रही। वैसे ऐसा लगता है, जैसे चारों तरफ negativity है, नकारात्मकता है। लेकिन मेरा अनुभव अलग रहा। इन पचपन हज़ार लोगों ने अपने तरीके से अपनी बात बतानी थी। बे-रोकटोक था, कुछ भी कह सकते थे, लेकिन मैं हैरान हूँ, सारी बातें ऐसी ही थीं, जैसे ‘मन की बात’ की छाया में हों। पूरी तरह सकारात्मक, सुझावात्मक, सृजनात्मक - यानि देखिये देश का सामान्य नागरिक भी सकारात्मक सोच ले करके चल रहा है, ये तो कितनी बड़ी पूंजी है देश की। शायद 1%, 2% ऐसे फ़ोन हो सकते हैं जिसमें कोई गंभीर प्रकार की शिकायत का माहौल हो। वर्ना 90% से भी ज़्यादा एक ऊर्जा भरने वाली, आनंद देने वाली बातें लोगों ने कही हैं।
एक बात और ध्यान में मेरे आई, ख़ास करके specially abled - उसमें भी ख़ासकर के दृष्टिहीन अपने स्वजन, उनके काफी फ़ोन आये हैं। लेकिन उसका कारण ये होगा, शायद ये TV देख नहीं पाते, ये रेडियो ज़रूर सुनते होंगे। दृष्टिहीन लोगों के लिए रेडियो कितना बड़ा महत्वपूर्ण होगा, वो मुझे इस बात से ध्यान में आया है। एक नया पहलू मैं देख रहा हूँ, और इतनी अच्छी-अच्छी बातें बताई हैं इन लोगों ने और सरकार को भी संवेदनशील बनाने के लिए काफी है।
मुझे अलवर, राजस्थान से पवन आचार्य ने एक सन्देश दिया है, मैं मानता हूँ, पवन आचार्य की बात पूरे देश को सुननी चाहिए और पूरे देश को माननी चाहिए। देखिये, वो क्या कहना चाहते हैं, जरुर सुनिए –
“मेरा नाम पवन आचार्य है और मैं अलवर, राजस्थान से बिलॉन्ग करता हूँ। मेरा मेसेज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से यह है कि कृपया आप इस बार ‘मन की बात’ में पूरे भारत देश की जनता से आह्वान करें कि दीवाली पर वो अधिक से अधिक मिट्टी के दियों का उपयोग करें। इस से पर्यावरण का तो लाभ होगा ही होगा और हजारों कुम्हार भाइयों को रोज़गार का अवसर मिलेगा। धन्यवाद।”
पवन, मुझे विश्वास है कि पवन की तरह आपकी ये भावना हिन्दुस्तान के हर कोने में जरुर पहुँच जाएगी, फैल जाएगी। अच्छा सुझाव दिया है और मिट्टी का तो कोई मोल ही नहीं होता है, और इसलिए मिट्टी के दिये भी अनमोल होते हैं। पर्यावरण की दृष्टि से भी उसकी एक अहमियत है और दिया बनता है गरीब के घर में, छोटे-छोटे लोग इस काम से अपना पेट भरते हैं और मैं देशवासियों को जरुर कहता हूँ कि आने वाले त्योहारों में पवन आचार्य की बात अगर हम मानेंगे, तो इसका मतलब है, कि दिया हमारे घर में जलेगा, लेकिन रोशनी गरीब के घर में होगी।
मेरे प्यारे देशवासियो, गणेश चतुर्थी के दिन मुझे सेना के जवानों के साथ दो-तीन घंटे बिताने का अवसर मिला। जल, थल और नभ सुरक्षा करने वाली हमारी जल सेना हो, थल सेना हो या वायु सेना हो – Army, Air Force, Navy. 1965 का जो युद्ध हुआ था पाकिस्तान के साथ, उसको 50 वर्ष पूर्ण हुए, उसके निमित्त दिल्ली में इंडिया गेट के पास एक ‘शौर्यांजलि’ प्रदर्शनी की रचना की है। मैं उसे चाव से देखता रहा, गया था तो आधे घंटे के लिए, लेकिन जब निकला, तब ढाई घंटे हो गए और फिर भी कुछ अधूरा रह गया। क्या कुछ वहाँ नही था? पूरा इतिहास जिन्दा कर के रख दिया है। Aesthetic दृष्टि से देखें, तो भी उत्तम है, इतिहास की दृष्टि से देखें, तो बड़ा educative है और जीवन में प्रेरणा के लिए देखें, तो शायद मातृभूमि की सेवा करने के लिए इस से बड़ी कोई प्रेरणा नहीं हो सकती है। युद्ध के जिन proud moments और हमारे सेनानियों के अदम्य साहस और बलिदान के बारे में हम सब सुनते रहते थे, उस समय तो उतने photograph भी available नहीं थे, इतनी videography भी नहीं होती थी। इस प्रदर्शनी के माध्यम से उसकी अनुभूति होती है।
लड़ाई हाजीपीर की हो, असल उत्तर की हो, चामिंडा की लड़ाई हो और हाजीपीर पास के जीत के दृश्यों को देखें, तो रोमांच होता है और अपने सेना के जवानों के प्रति गर्व होता है। मुझे इन वीर परिवारों से भी मिलना हुआ, उन बलिदानी परिवारों से मिलना हुआ और युद्ध में जिन लोगों ने हिस्सा लिया था, वे भी अब जीवन के उत्तर काल खंड में हैं। वे भी पहुँचे थे। और जब उन से हाथ मिला रहा था तो लग रहा था कि वाह, क्या ऊर्जा है, एक प्रेरणा देता था। अगर आप इतिहास बनाना चाहते हैं, तो इतिहास की बारीकियों को जानना-समझना ज़रूरी होता है। इतिहास हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है। इतिहास से अगर नाता छूट जाता है, तो इतिहास बनाने की संभावनाओं को भी पूर्ण विराम लग जाता है। इस शौर्य प्रदर्शनी के माध्यम से इतिहास की अनुभूति होती है। इतिहास की जानकारी होती है। और नये इतिहास बनाने की प्रेरणा के बीज भी बोये जा सकते हैं। मैं आपको, आपके परिवारजनों को - अगर आप दिल्ली के आस-पास हैं - शायद प्रदर्शनी अभी कुछ दिन चलने वाली है, आप ज़रूर देखना। और जल्दबाजी मत करना मेरी तरह। मैं तो दो-ढाई घंटे में वापिस आ गया, लेकिन आप को तो तीन-चार घंटे ज़रूर लग जायेंगे। जरुर देखिये।
लोकतंत्र की ताकत देखिये, एक छोटे बालक ने प्रधानमंत्री को आदेश किया है, लेकिन वो बालक जल्दबाजी में अपना नाम बताना भूल गया है। तो मेरे पास उसका नाम तो है नहीं, लेकिन उसकी बात प्रधानमंत्री को तो गौर करने जैसी है ही है, लेकिन हम सभी देशवासियों को गौर करने जैसी है। सुनिए, ये बालक हमें क्या कह रहा है:
“प्रधानमंत्री मोदी जी, मैं आपको कहना चाहता हूँ कि जो आपने स्वच्छता अभियान चलाया है, उसके लिये आप हर जगह, हर गली में डस्टबिन लगवाएं।”
इस बालक ने सही कहा है। हमें स्वच्छता एक स्वभाव भी बनाना चाहिये और स्वच्छता के लिए व्यवस्थायें भी बनानी चाहियें। मुझे इस बालक के सन्देश से एक बहुत बड़ा संतोष मिला। संतोष इस बात का मिला, 2 अक्टूबर को मैंने स्वच्छ भारत को लेकर के एक अभियान को चलाने की घोषणा की, और मैं कह सकता हूँ, शायद आज़ादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ होगा कि संसद में भी घंटों तक स्वच्छता के विषय पर आजकल चर्चा होती है। हमारी सरकार की आलोचना भी होती है। मुझे भी बहुत-कुछ सुनना पड़ता है, कि मोदी जी बड़ी-बड़ी बातें करते थे स्वच्छता की, लेकिन क्या हुआ ? मैं इसे बुरा नहीं मानता हूँ। मैं इसमें से अच्छाई यह देख रहा हूँ कि देश की संसद भी भारत की स्वच्छता के लिए चर्चा कर रही है।
और दूसरी तरफ देखिये, एक तरफ संसद और एक तरफ इस देश का शिशु - दोनों स्वच्छता के ऊपर बात करें, इससे बड़ा देश का सौभाग्य क्या हो सकता है। ये जो आन्दोलन चल रहा है विचारों का, गन्दगी की तरफ नफरत का जो माहौल बन रहा है, स्वच्छता की तरफ एक जागरूकता आयी है - ये सरकारों को भी काम करने के लिए मजबूर करेगी, करेगी, करेगी! स्थानीय स्वराज की संस्थाओं को भी - चाहे पंचायत हो, नगर पंचायत हो, नगर पालिका हो, महानगरपालिका हो या राज्य हो या केंद्र हो - हर किसी को इस पर काम करना ही पड़ेगा। इस आन्दोलन को हमें आगे बढ़ाना है, कमियों के रहते हुए भी आगे बढ़ाना है और इस भारत को, 2019 में जब महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती हम मनायेंगे, महात्मा गांधी के सपनों को पूरा करने की दिशा में हम काम करें।
और आपको मालूम है, महात्मा गांधी क्या कहते थे? एक बार उन्होंने कहा है कि आज़ादी और स्वच्छता दोनों में से मुझे एक पसंद करना है, तो मैं पहले स्वच्छता पसंद करूँगा, आजादी बाद में। गांधी के लिए आजादी से भी ज्यादा स्वच्छता का महत्त्व था। आइये,


दुनिया में हिन्दी का महत्व बढ़ रहा है- प्रधानमंत्री श्री मोदी
Our Correspondent :11 September 2015
हिन्दी को अन्य भारतीय भाषाओं से जोड़ना और डिजिटल दुनिया में उपयोग बढ़ाना होगा
हर पीढ़ी का दायित्व है भाषा को समृद्ध बनाये - प्रधानमंत्री श्री मोदी
भोपाल। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि दुनिया में भाषा के रूप में हिन्दी का महत्व बढ़ रहा है। हिन्दी भाषा को समृद्ध बनाने के लिए इसे अन्य भारतीय भाषाओं से जोड़ना होगा और डिजिटल दुनिया में उपयोग बढ़ाना होगा। हर पीढ़ी का दायित्व है कि भाषा को समृद्ध बनाये। प्रधानमंत्री श्री मोदी आज यहाँ दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन के उदघाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
प्रधानमंत्री ने सम्मेलन के उदघाटन समारोह में सम्मेलन पर केन्द्रित डाक टिकिट का लोकार्पण किया। साथ ही विश्व हिन्दी सम्मेलन की स्मारिका, गगनांचल पत्रिका के विशेषांक तथा प्रवासी साहित्य जोहानसबर्ग से आगे का विमोचन किया। सम्मेलन में 39 देश के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि हर पीढ़ी का दायित्व है कि उसके पास जो विरासत है उसे सुरक्षित रखें और आने वाली पीढ़ी को सौंपे। भाषा जड़ नहीं होती उसमें जीवन की तरह चेतना होती है। इस चेतना की अनुभूति भाषा के विकास और समृद्धि से होती है। भाषा में ताकत होती है जहाँ से भी गुजरती है वहाँ की परस्थिति से अपने में समाहित करती है। हिन्दुस्तान की सभी भाषाओं की उत्तम चीजों को हिन्दी भाषा की समृद्धि का हिस्सा बनाना चाहिए। मातृभाषा के रूप में हर राज्य के पास भाषा का खजाना है, इसे जोड़ने में सूत्रधार का काम करें। भाषाविदों का अनुमान है कि 21वीं सदी के अंत तक दुनिया की छह हजार भाषाओं में से 90 प्रतिशत के लुप्त होने की संभावना है। इसे चेतावनी समझकर अपनी भाषा का संरक्षण और संवर्धन करना होगा। हमारी भाषा में ज्ञान और अनुभव का भंडार है। भाषा के प्रति लगाव इसे समृद्ध बनाने के लिए होना चाहिए।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि डिजिटल दुनिया ने हमारे जीवन में गहरे तक प्रवेश कर लिया है। हमें हिन्दी और भारतीय भाषाओं को तकनीकी के लिए परिवर्तित करना होगा। बदले हुए तकनीकी परिदृश्य में भाषा का बड़ा बाजार बनने वाला है। भाषा अभिव्यक्ति का माध्यम है। भाषा हर किसी को जोड़ने वाली होना चाहिए। हर भारतीय भाषा अमूल्य है। भाषा की ताकत का अंदाजा उसके लुप्त होने के बाद होता है। हिन्दी भाषा का आंदोलन देश में ऐसे महापुरूषों ने चलाया जिनकी मातृभाषा हिन्दी नहीं थी, यह प्रेरणा देता है। भाषा और लिपि की ताकत अलग-अलग होती है। देश की सारी भाषाएँ नागरी लिपि में लिखने का आंदोलन यदि प्रभावी हुआ होता तो लिपि राष्ट्रीय एकता की ताकत के रूप में उभर कर आती। आज दुनिया के अलग-अलग देशों में हिन्दी का महत्व बढ़ रहा है। भारतीय फिल्मों ने भी दुनिया में हिन्दी को पहुँचाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि विश्व हिन्दी सम्मेलन के माध्यम से हिन्दी को समृद्ध बनाने की पहल होगी और निश्चित परिणाम निकलेंगे।
विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने सम्मेलन को मध्यप्रदेश और भोपाल में आयोजित करने का कारण बताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश हिन्दी के लिये समर्पित राज्य है और भोपाल सफल आयोजन करने के लिये विख्यात है। श्रीमती स्वराज ने विश्व हिन्दी सम्मेलन के आयोजनों की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 32 वर्षों बाद यह भारत में आयोजित हो रहा है। पहला सम्मेलन 1975 में नागपुर में हुआ था। तब से भोपाल के दसवें सम्मेलन तक आयोजन का स्वरूप बदला है। पहले के सम्मेलन साहित्य केन्द्रित थे लेकिन दसवाँ सम्मेलन भाषा की उन्नति पर केन्द्रित है। उन्होंने कहा कि भाषा की उन्नति के लिये संवर्धन ही नहीं संरक्षण की भी जरूरत पड़ रही है। उन्होंने कहा कि विचार सत्रों में रिपोर्ट तत्काल लिखी जायेगी और भाग लेने वाले विद्वानों से अनुमोदन भी करवाया जायेगा ताकि समापन सत्र में अनुशंसाएँ पढ़ी जायें और उन पर अमल भी प्रारंभ हो जाये। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सम्मेलन परिणाम देने वाला होगा।
श्रीमती स्वराज ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा हिन्दी बोलने को प्रोत्साहित करने से हर नागरिक गौरव अनुभव करता है। इस सम्मेलन से प्रधानमंत्री के प्रयासों को गति मिलेगी और हिन्दी को अपेक्षित स्थान और सम्मान मिलेगा। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में हिन्दी के विस्तार और संभावनाओं पर आधारित विषय पर चर्चा होगी।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री और अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी को सम्मेलन के आयोजन की सहमति देने के लिये धन्यवाद दिया। श्री चौहान ने कहा कि जिस गुजरात से महात्मा गांधी ने हिन्दी का जयघोष किया था उसी गुजरात से आज श्री मोदी जी हिन्दी का मान बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने की घोषणा भी गुजरात से हुई थी। श्री मोदी हिन्दी बोलने वाले प्रधानमंत्री हैं और उन्होंने देश-विदेश में हिन्दी का मान बढ़ाया है। यहाँ तक कि संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा में भी हिन्दी को सम्मान दिलाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश इस सम्मेलन के निष्कर्षों का अक्षरश: पालन करेगा।
विदेश राज्य मंत्री जनरल वी. के. सिंह ने आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन का शुभारंभ हिन्दी के स्तुति गान के साथ हुआ। अतिथियों को अंग वस्त्र भेंट कर स्वागत किया गया।
इस अवसर पर राज्यपाल श्री रामनरेश यादव, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केसरी नाथ त्रिपाठी, राज्यपाल गोवा श्रीमती मृदुला सिन्हा, केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद, झारखण्ड के मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास, विज्ञानं एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, गृह राज्य मंत्री डॉ. किरण रिजीजू, मॉरिशस की मानव संसाधन एवं विज्ञान मंत्री श्रीमती लीलादेवी दुक्कन, विदेश सचिव श्री अनिल वाधवा, आयोजन समिति के उपाध्यक्ष सांसद श्री अनिल माधव दवे सहित विभिन्न देश से आये हिंदी विद्वान और राज्य मंत्री मंडल के सदस्य उपस्थित थे।


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा आकाशवाणी पर 'मन की बात' का मूल पाठ
मन की बात करने का मन नहीं हो रहा था आज। बोझ अनुभव कर रहा हूँ, कुछ व्यथित सा मन है। पिछले महीने जब बात कर रहा था आपसे, तो ओले गिरने की खबरें, बेमौसमी बरसात, किसानों की तबाही। अभी कुछ दिन पहले बिहार में अचानक तेज हवा चली। काफी लोग मारे गए। काफी कुछ नुकसान हुआ। और शनिवार को भयंकर भूकंप ने पूरे विश्व को हिला दिया है। ऐसा लगता है मानो प्राकृतिक आपदा का सिलसिला चल पड़ा है। नेपाल में भयंकर भूकंप की आपदा। हिंदुस्तान में भी भूकंप ने अलग-अलग राज्यों में कई लोगों की जान ली है। संपत्ति का भी नुकसान किया है। लेकिन नेपाल का नुकसान बहुत भयंकर है।
मैंने 2001, 26 जनवरी, कच्छ के भूकंप को निकट से देखा है। ये आपदा कितनी भयानक होती है, उसकी मैं कल्पना भली-भांति कर सकता हूँ। नेपाल पर क्या बीतती होगी, उन परिवारों पर क्या बीतती होगी, उसकी मैं कल्पना कर सकता हूँ।
लेकिन मेरे प्यारे नेपाल के भाइयो-बहनो, हिन्दुस्तान आपके दुःख में आपके साथ है। तत्काल मदद के लिए चाहे हिंदुस्तान के जिस कोने में मुसीबत आयी है वहां भी, और नेपाल में भी सहाय पहुंचाना प्रारंभ कर दिया है। सबसे पहला काम है रेस्क्यू ऑपरेशन, लोगों को बचाना। अभी भी मलबे में दबे हुए कुछ लोग जीवित होंगे, उनको जिन्दा निकालना हैं। एक्सपर्ट लोगों की टीम भेजी है, साथ में, इस काम के लिए जिनको विशेष रूप से ट्रेन किया गया है ऐसे स्निफ़र डॉग्स को भी भेजा गया है। स्निफर डॉग्स ढूंढ पाते हैं कि कहीं मलबे के नीचे कोई इंसान जिन्दा हो। कोशिश हमारी पूरी रहेगी अधिकतम लोगों को जिन्दा बचाएं। रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद रिलीफ का काम भी चलाना है। रिहैबिलिटेशन का काम भी तो बहुत लम्बा चलेगा।
लेकिन मानवता की अपनी एक ताकत होती है। सवा-सौ करोड़ देश वासियों के लिए नेपाल अपना है। उन लोगों का दुःख भी हमारा दुःख है। भारत पूरी कोशिश करेगा इस आपदा के समय हर नेपाली के आंसू भी पोंछेंगे, उनका हाथ भी पकड़ेंगे, उनको साथ भी देंगे। पिछले दिनों यमन में, हमारे हजारों भारतीय भाई बहन फंसे हुए थे। युद्ध की भयंकर विभीषिका के बीच, बम बन्दूक के तनाव के बीच, गोलाबारी के बीच भारतीयों को निकालना, जीवित निकालना, एक बहुत बड़ा कठिन काम था। लेकिन हम कर पाए। इतना ही नहीं, एक सप्ताह की उम्र की एक बच्ची को जब बचा करके लाये तो ऐसा लग रहा था कि आखिर मानवता की भी कितनी बड़ी ताकत होती है। बम-बन्दूक की वर्षा चलती हो, मौत का साया हो, और एक सप्ताह की बच्ची अपनी जिन्दगी बचा सके तब एक मन को संतोष होता है।
मैं पिछले दिनों विदेश में जहाँ भी गया, एक बात के लिए बहुत बधाइयाँ मिली, और वो था यमन में हमने दुनिया के करीब 48 देशों के नागरिकों को बचाया था। चाहे अमेरिका हो, यू.के. हो, फ्रांस हो, रशिया हो, जर्मनी हो, जापान हो, हर देश के नागरिक को हमने मदद की थी। और उसके कारण दुनिया में भारत का ये “सेवा परमो धर्मः”, इसकी अनुभूति विश्व ने की है। हमारा विदेश मंत्रालय, हमारी वायु सेना, हमारी नौसेना इतने धैर्य के साथ, इतनी जिम्मेवारी के साथ, इस काम को किया है, दुनिया में इसकी अमिट छाप रहेगी आने वाले दिनों में, ऐसा मैं विश्वास करता हूँ। और मुझे खुशी है कि कोई भी नुकसान के बिना, सब लोग बचकर के बाहर आये। वैसे भी भारत का एक गुण, भारत के संस्कार बहुत पुराने हैं।
अभी मैं जब फ्रांस गया था तो फ्रांस में, मैं प्रथम विश्व युद्ध के एक स्मारक पर गया था। उसका एक कारण भी था, कि प्रथम विश्व युद्ध की शताब्दी तो है, लेकिन साथ-साथ भारत की पराक्रम का भी वो शताब्दी वर्ष हैI भारत के वीरों की बलिदानी की शताब्दी का वर्ष है और “सेवा परमो-धर्मः” इस आदर्श को कैसे चरितार्थ करता रहा हमारा देश , उसकी भी शताब्दी का यह वर्ष है, मैं यह इसलिए कह रहा हूँ कि 1914 में और 1918 तक प्रथम विश्व युद्ध चला और बहुत कम लोगों को मालूम होगा करीब-करीब 15 लाख भारतीय सैनिकों ने इस युद्ध में अपनी जान की बाजी लगा दी थी और भारत के जवान अपने लिए नहीं मर रहे थेI हिंदुस्तान को, किसी देश को कब्जा नहीं करना था, न हिन्दुस्तान को किसी की जमीन लेनी थी लेकिन भारतीयों ने एक अदभुत पराक्रम करके दिखाया थाI बहुत कम लोगों को मालूम होगा इस प्रथम विश्व युद्ध में हमारे करीब-करीब 74 हजार जवानों ने शहादत की थी, ये भी गर्व की बात है कि इस पर करीब 9 हजार 2 सौ हमारे सैनिकों को गैलेंट्री अवार्ड से डेकोरेट किया गया थाI इतना ही नहीं, 11 ऐसे पराक्रमी लोग थे जिनको सर्वश्रेष्ठ सम्मान विक्टोरिया क्रॉस मिला थाI खासकर कि फ्रांस में विश्व युद्ध के दरमियान मार्च 1915 में करीब 4 हजार 7 सौ हमारे हिनदुस्तानियों ने बलिदान दिया था। उनके सम्मान में फ्रांस ने वहां एक स्मारक बनाया है। मैं वहाँ नमन करने गया था, हमारे पूर्वजों के पराक्रम के प्रति श्रध्दा व्यक्त करने गया था।
ये सारी घटनायें हम देखें तो हम दुनिया को कह सकते हैं कि ये देश ऐसा है जो दुनिया की शांति के लिए, दुनिया के सुख के लिए, विश्व के कल्याण के लिए सोचता है। कुछ न कुछ करता है और ज़रूरत पड़े तो जान की बाज़ी भी लगा देता है। यूनाइटेड नेशन्स में भी पीसकीपिंग फ़ोर्स में सर्वाधिक योगदान देने वालों में भारत का भी नाम प्रथम पंक्ति में है। यही तो हम लोगों के लिए गर्व की बात है।
पिछले दिनों दो महत्वपूर्ण काम करने का मुझे अवसर मिला। हम पूज्य बाबा साहेब अम्बेडकर की 125 वीं जयन्ती का वर्ष मना रहे हैं। कई वर्षों से मुंबई में उनके स्मारक बनाने का जमीन का विवाद चल रहा था। मुझे आज इस बात का संतोष है कि भारत सरकार ने वो जमीन बाबा साहेब अम्बेडकर के स्मारक बनाने के लिए देने का निर्णय कर लिया। उसी प्रकार से दिल्ली में बाबा साहेब अम्बेडकर के नाम से एक इंटरनेशनल सेंटर बने, पूरा विश्व इस मनीषी को जाने, उनके विचारों को जाने, उनके काम को जाने। ये भी वर्षों से लटका पड़ा विषय था, इसको भी पूरा किया, शिलान्यास किया, और 20 साल से जो काम नहीं हुआ था वो 20 महीनों में पूरा करने का संकल्प किया। और साथ-साथ मेरे मन में एक विचार भी आया है और हम लगे हैं, आज भी हमारे देश में कुछ परिवार हैं जिनको सर पे मैला ढ़ोने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
क्या हमें शोभा देता है कि आज भी हमारे देश में कुछ परिवारों को सर पर मैला ढोना पड़े? मैंने सरकार में बड़े आग्रह से कहा है कि बाबा साहेब अम्बेडकर जी के पुण्य स्मरण करते हुए 125 वीं जयन्ती के वर्ष में, हम इस कलंक से मुक्ति पाएं। अब हमारे देश में किसी गरीब को सर पर मैला ढोना पड़े, ये परिस्थति हम सहन नहीं करेंगे। समाज का भी साथ चाहिये। सरकार ने भी अपना दायित्व निभाना चाहिये। मुझे जनता का भी सहयोग चाहिये, इस काम को हमें करना है।
बाबा साहेब अम्बेडकर जीवन भर शिक्षित बनो ये कहते रहते थे। आज भी हमारे कई दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित समाज में, ख़ास करके बेटियों में, शिक्षा अभी पहुँची नहीं है। बाबा साहेब अम्बेडकर के 125 वीं जयन्ती के पर्व पर, हम भी संकल्प करें। हमारे गाँव में, नगर में, मोहल्ले में गरीब से गरीब की बेटी या बेटा, अनपढ़ न रहे। सरकार अपना कर्त्तव्य करे, समाज का उसमें साथ मिले तो हम जरुर संतोष की अनुभूति करते हैं। मुझे एक आनंद की बात शेयर करने का मन करता है और एक पीड़ा भी बताने का मन करता है।
मुझे इस बात का गर्व होता है कि भारत की दो बेटियों ने देश के नाम को रौशन किया। एक बेटी साईना नेहवाल बैडमिंटन में दुनिया में नंबर एक बनी, और दूसरी बेटी सानिया मिर्जा टेनिस डबल्स में दुनिया में नंबर एक बनी। दोनों को बधाई, और देश की सारी बेटियों को भी बधाई। गर्व होता है अपनों के पुरुषार्थ और पराक्रम को लेकर के। लेकिन कभी-कभी हम भी आपा खो बैठते हैं। जब क्रिकेट का वर्ल्ड कप चल रहा था और सेमी-फाइनल में हम ऑस्ट्रेलिया से हार गए, कुछ लोगों ने हमारे खिलाड़ियों के लिए जिस प्रकार के शब्दों का प्रयोग किया, जो व्यवहार किया, मेरे देशवासियो, ये अच्छा नहीं है। ऐसा कैसा खेल हो जिसमें कभी पराजय ही न हो अरे जय और पराजय तो जिन्दगी के हिस्से होते हैं। अगर हमारे देश के खिलाड़ी कभी हार गए हैं तो संकट की घड़ी में उनका हौसला बुलंद करना चाहिये। उनका नया विश्वास पैदा करने का माहौल बनाना चाहिये। मुझे विश्वास है आगे से हम पराजय से भी सीखेंगे और देश के सम्मान के साथ जो बातें जुड़ी हुई हैं, उसमें पल भर में ही संतुलन खो करके, क्रिया-प्रतिक्रिया में नहीं उलझ जायेंगे। और मुझे कभी-कभी चिंता हो रही है। मैं जब कभी देखता हूँ कि कहीं अकस्मात् हो गया, तो भीड़ इकट्ठी होती है और गाड़ी को जला देती है। और हम टीवी पर इन चीजों को देखते भी हैं। एक्सीडेंट नहीं होना चाहिये। सरकार ने भी हर प्रकार की कोशिश करनी चाहिये। लेकिन मेरे देशवासियो बताइये कि इस प्रकार से गुस्सा प्रकट करके हम ट्रक को जला दें, गाड़ी को जला दें.... मरा हुआ तो वापस आता नहीं है। क्या हम अपने मन के भावों को संतुलित रखके कानून को कानून का काम नहीं करने दे सकते हैं? सोचना चाहिये।
खैर, आज मेरा मन इन घटनाओं के कारण बड़ा व्यथित है, ख़ास करके प्राकृतिक आपदाओं के कारण, लेकिन इसके बीच भी धैर्य के साथ, आत्मविश्वास के साथ देश को भी आगे ले जायेंगे, इस देश का कोई भी व्यक्ति...दलित हो, पीड़ित हो, शोषित हो, वंचित हो, आदिवासी हो, गाँव का हो, गरीब हो, किसान हो, छोटा व्यापारी हो, कोई भी हो, हर एक के कल्याण के मार्ग पर, हम संकल्प के साथ आगे बढ़ते रहेंगे।
विद्यार्थियों की परीक्षायें पूर्ण हुई हैं, ख़ास कर के 10 वीं और 12 वीं के विद्यार्थियों ने छुट्टी मनाने के कार्यक्रम बनाए होंगे, मेरी आप सबको शुभकामनाएं हैं। आपका वेकेशन बहुत ही अच्छा रहे, जीवन में कुछ नया सीखने का, नया जानने का अवसर मिले, और साल भर आपने मेहनत की है तो कुछ पल परिवार के साथ उमंग और उत्साह के साथ बीते यही मेरी शुभकामना है।


Text of Prime Minister’s ‘Mann ki Baat’ on All India Radio
आज फिर मुझे आप से मिलने का सौभाग्य मिला है। आपको लगता होगा कि प्रधानमंत्री ऐसी बातें क्यों करता है। एक तो मैं इसलिए करता हूँ कि मैं प्रधानमंत्री कम, प्रधान सेवक ज्यादा हूँ। बचपन से मैं एक बात सुनते आया हूँ और शायद वही ‘मन की बात’ की प्ररेणा है। हम बचपन से सुनते आये हैं कि दुःख बांटने से कम होता है और सुख बांटने से बढ़ता है। ‘मन की बात’ में, मैं कभी दुःख भी बांटता हूँ , कभी सुख भी बांटता हूँ। मैं जो बातें करता हूँ वो मेरे मन में कुछ पीड़ाएं होती हैं उसको आपके बीच में प्रकट करके अपने मन को हल्का करता हूँ और कभी कभी सुख की कुछ बातें हैं जो आप के बीच बांटकर के मैं उस खुशी को चौगुना करने का प्रयास करता हूँ।
मैंने पिछली बार कहा था कि लम्बे अरसे से मुझे हमारी युवा पीढ़ी की चिंता हो रही है। चिंता इसलिए नहीं हो रही है कि आपने मुझे प्रधानमंत्री बनाया है, चिंता इसलिए हो रही है कि किसी मां का लाल, किसी परिवार का बेटा, या बेटी ऐसे दलदल में फंस जाते हैं तो उस व्यक्ति का नहीं, वो पूरा परिवार तबाह हो जाता है। समाज, देश सब कुछ बरबाद हो जाता है। ड्रग्स, नशा ऐसी भंयकर बीमारी है, ऐसी भंयकर बुराई है जो अच्छों अच्छों को हिला देती है।
मैं जब गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में काम करता था, तो कई बार मुझे हमारे अच्छे-अच्छे अफसर मिलने आते थे, छुट्टी मांगते थे। तो मैं पूछता था कि क्यों ? पहले तो नहीं बोलते थे, लेकिन जरा प्यार से बात करता था तो बताते थे कि बेटा बुरी चीज में फंसा है। उसको बाहर निकालने के लिए ये सब छोड़-छाड़ कर, मुझे उस के साथ रहना पड़ेगा। और मैंने देखा था कि जिनको मैं बहुत बहादुर अच्छे अफसर मानता था, वे भी सिर्फ रोना ही बाकी रह जाता था। मैंनें ऐसी कई माताएं देखी हैं। मैं एक बार पंजाब में गया था तो वहां माताएं मुझे मिली थी। बहुत गुस्सा भी कर रही थी, बहुत पीड़ा व्यक्त कर रही थीं।
हमे इसकी चिंता समाज के रूप में करनी होगी। और मैं जानता हूँ कि बालक जो इस बुराई में फंसता है तो कभी कभी हम उस बालक को दोशी मानते हैं। बालक को बुरा मानते हैं। हकीकत ये है कि नशा बुरा है। बालक बुरा नही है, नशे की लत बुरी है। बालक बुरा नही है हम अपने बालक को बुरा न माने। आदत को बुरा मानें, नशे को बुरा मानें और उससे दूर रखने के रास्ते खोजें। बालक को ही दुत्कार देगें तो वो और नशा करने लग जाएगा। ये अपने आप में एक Psycho-Socio-Medical problem है। और उसको हमें Psycho-Socio-Medical problem के रूप में ही treat करना पड़ेगा। उसी के रूप में handle करना पड़ेगा और मैं मानता हूँ कि कुछ समस्याओं का समाधान मेडिकल से परे है। व्यक्ति स्वंय, परिवार, यार दोस्त, समाज, सरकार, कानून, सब को मिल कर के एक दिशा में काम करना पड़ेगा। ये टुकड़ों में करने से समस्या का समाधान नहीं होना है।
मैंने अभी असम में डी0जी0पी0 की Conference रखी थी। मैंने उनके सामने मेरी इस पीड़ा को आक्रोश के साथ व्यक्त किया था। मैंने पुलिस डिपार्टमेंट में इसकी गम्भीर बहस करने के लिये, उपाय खोजने के लिए कहा है। मैंने डिपार्टमेंट को भी कहा है कि क्यों नहीं हम एक टोल-फ्री हैल्पलाईन शुरू करें। ताकि देश के किसी भी कोने में, जिस मां-बाप को ये मुसीबत है कि उनके बेटे में उनको ये लग रहा है कि ड्रग की दुनिया में फंसा है, एक तो उनको दुनिया को कहने में शर्म भी आती है, संकोच भी होता है, कहां कहें? एक हैल्पलाईन बनाने के लिए मैंने शासन को कहा है। वो बहुत ही जल्द उस दिशा में जरूर सोचेंगे और कुछ करेंगे।
उसी प्रकार से, मैं जानता हूँ ड्रग्स तीन बातों को लाता है और मैं उसको कहूँगा, ये बुराइयों वाला Three D है – मनोरंजन के Three D की बात मैं नहीं कर रहा हूँ।

एक D है Darkness, दूसरा D है Destruction और तीसरा D है Devastation।

नशा अंधेरी गली में ले जाता है। विनाश के मोड़ पर आकर खड़ा कर देता है और बर्बादी का मंजर इसके सिवाय नशे में कुछ नहीं होता है। इसलिये इस बहुत ही चिंता के विषय पर मैंने चर्चा की है।
जब मैंने पिछले ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस बात का स्पर्श किया था, देश भर से करीब सात हजार से ज्यादा चिट्ठियां मुझे आकाशवाणी के पते पर आईं। सरकार में जो चिट्ठियां आईं वो अलग। ऑनलाइन, सरकारी पोर्टल पर, MyGov.in पोर्टल पर, हजारों ई-मेल आए। ट्विटर, फेसबुक पर शायद, लाखों कमेन्ट्स आये हैं। एक प्रकार से समाज के मन में पड़ी हुई बात, एक साथ बाहर आना शुरू हुआ है। मैं विशेषकर, देश के मीडिया का भी आभारी हूँ कि इस बात को उन्होनें आगे बढ़ाया। कई टी. वी. ने विशेष एक-एक घंटे के कार्यक्रम किये हैं और मैंने देखा, उसमें सिर्फ सरकार की बुराइयों का ही कार्यक्रम नहीं था, एक चिन्ता थी और मैं मानता हूं, एक प्रकार से समस्या से बाहर निकलने की जद्दो-जहद थी और उसके कारण एक अच्छा विचार-विमर्श का तो माहौल शुरू हुआ है। सरकार के जिम्मे जो बाते हैं, वो भी Sensitised हुई हैं। उनको लगता है अब वे उदासीन नहीं रह सकते हैं। मैं कभी-कभी, नशे में डूबे हुए उन नौजवानों से पूछना चाहता हूँ कि क्या कभी आपने सोचा है आपको दो घंटे, चार घंटे नशे की लत में शायद एक अलग जिन्दगी जीने का अहसास होता होगा। परेशानियों से मुक्ति का अहसास होता होगा, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि जिन पैसों से आप ड्रग्स खरीदते हो वो पैसे कहां जाते हैं? आपने कभी सोचा है? कल्पना कीजिये! यही ड्रग्स के पैसे अगर आतंकवादियों के पास जाते होंगे! इन्हीं पैसों से आतंकवादी अगर शस्त्र खरीदते होंगे! और उन्हीं शस्त्रों से कोई आतंकवादी मेरे देश के जवान के सीने में गोलियां दाग देता होगा! मेरे देश का जवान शहीद हो जाता होगा! तो क्या कभी सोचा है आपने? किसी मां के लाल को मारने वाला, भारत मां के प्राण प्रिय, देश के लिए जीने-मरने वाले, सैनिक के सीने में गोली लगी है, कहीं ऐसा तो नहीं है न? उस गोली में कहीं न कहीं तुम्हारी नशे की आदत का पैसा भी है, एक बार सोचिये और जब आप इस बात को सोचेंगे, मैं विश्वास से कहता हूँ, आप भी तो भारत माता को प्रेम करते हैं, आप भी तो देश के सैनिकों को सम्मान करते हैं, तो फिर आप आतंकवादियों को मदद करने वाले, ड्रग-माफिया को मदद करने वाले, इस कारोबार को मदद कैसे कर सकते हैं।
कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि जब जीवन में निराशा आ जाती है, विफलता आ जाती है, जीवन में जब कोई रास्ता नहीं सूझता, तब आदमी नशे की लत में पड़ जाता है। मुझे तो ऐसा लगता है कि जिसके जीवन में कोई ध्येय नहीं है, लक्ष्य नहीं है, उंचे इरादे नहीं हैं, एक वैक्यूम है, वहां पर ड्रग का प्रवेश करना सरल हो जाता है। ड्रग से अगर बचना है, अपने बच्चे को बचाना है तो उनको ध्येयवादी बनाइये, कुछ करने के इरादे वाले बनाइये, सपने देखने वाले बनाइये। आप देखिये, फिर उनका बाकी चीजों की तरफ मन नही लगेगा। उसको लगेगा नहीं, मुझे करना है।
आपने देखा होगा, जो खिलाड़ी होता है…ठण्ड में रजाई लेकर सोने का मन सबका करता है, लेकिन वो नहीं सोता है। वो चला जाता है खुले मैदान में, सुबह चार बजे, पांच बजे चला जाता है। क्यों ? ध्येय तय हो चुका है। ऐसे ही आपके किसी बच्चे में, ध्येयवादिता नहीं होगी तो फिर ऐसी बुराइयों के प्रवेश का रास्ता बन जाता है।
मुझे आज स्वामी विवेकानन्द के वो शब्द याद आते हैं। हर युवा के लिये वो बहुत सटीक वाक्य हैं उनके और मुझे विश्वास है कि वाक्य, बार-बार गुनगुनायें स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा है – ‘एक विचार को ले लो, उस विचार को अपना जीवन बना लो। उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो। उस विचार को जीवन में उतार लो। अपने दिमाग, मांसपेशियां, नसों, शरीर के प्रत्येक हिस्से को उस विचार से भर दो और अन्य सभी विचार छोड़ दो’।
विवेकानन्द जी का यह वाक्य, हर युवा मन के लिये है, बहुत काम आ सकता है और इसलिये, मैं युवकों से कहूँगा ध्येयवादी बनने से ही बहुत सी चीजों से बचा जा सकता।
कभी-कभी यार दोस्तों के बीच रहते हैं तो लगता है ये बड़ा Cool है। कुछ लोगों को लगता है कि ये Style statement है और इसी मन की स्थिति में कभी- कभी पता न रहते हुए ही, ऐसी गम्भीर बीमारी में ही फंस जाते हैं। न ये Style statement है और न ये Cool है। हकीकत में तो ये बरबादी का मंजर है और इसलिए हम सब के हृदय से अपने साथियों को जब नशे के गौरव गान होते हो, अब अपने अपने मजे की बाते बताते हो, तालियां बजाते हो, तब ‘No’ कहने की हिम्मत कीजिए, reject करने की हिम्मत कीजिए, इतना ही नही, उनको भी ये गलत कर रहे हो, अनुचित कर रहे हो ये कहने की आप हिम्मत जताइए।
मैं माता- पिता से भी कहना चाहता हूँ। हमारे पास आज कल समय नही हैं दौ़ड़ रहे हैं। जिंदगी का गुजारा करने के लिए दौड़ना पड़ रहा है। अपने जीवन को और अच्छा बनाने के लिये दौड़ना पड़ रहा है। लेकिन इस दौड़ के बीच में भी, अपने बच्चों के लिये हमारे पास समय है क्या ? क्या कभी हमने देखा है कि हम ज्यादातर अपने बच्चों के साथ उनकी लौकिक प्रगति की ही चर्चा करते हैं? कितने marks लाया, exam कैसे गई, ज्यादातर क्या खाना है ? क्या नहीं खाना है ? या कभी कहाँ जाना है? कहां नहीं जाना है , हमारी बातों का दायरा इतना सीमित है। या कभी उसके हृदय के भीतर जाकर के अपने बच्चों को अपने पास खोलने के लिये हमने अवसर दिया है? आप ये जरूर कीजिये। अगर बच्चे आपके साथ खुलेंगे तो वहां क्या चल रहा है पता चलेगा। बच्चे में बुरी आदत अचानक नहीं आती है, धीरे धीरे शुरू होती है और जैसे-जैसे बुराई शुरू होती है तो घर में उसका बदलाव भी शुरू होता है। उस बदलाव को बारीकी से देखना चाहिये। उस बदलाव को अगर बारीकी से देखेंगे तो मुझे विश्वास है कि आप बिल्कुल beginning में ही अपने बालक को बचा लेंगे। उसके यार दोस्तों की भी जानकारी रखिये और सिर्फ प्रगति के आसपास बातों को सीमित न रखें। उसके जीवन की गहराई, उसकी सोच, उसके तर्क, उसके विचार उसकी किताब, उसके दोस्त, उसके मोबाइल फोन्स….क्या हो रहा है? कहां उसका समय बीत रहा है, अपने बच्चों को बचाना होगा। मैं समझता हूं जो काम मां-बाप कर सकते हैं वो कोई नहीं कर सकता। हमारे यहां सदियों से अपने पूर्वजों ने कुछ बातें बड़ी विद्वत्तापूर्ण कही हैं। और तभी तो उनको स्टेट्समैन कहा जाता है। हमारे यहां कहा जाता है -

5 वर्ष लौ लीजिये
दस लौं ताड़न देई
5 वर्ष लौ लीजिये
दस लौं ताड़न देई
सुत ही सोलह वर्ष में
मित्र सरिज गनि देई
सुत ही सोलह वर्ष में
मित्र सरिज गनि देई

कहने का तात्पर्य है कि बच्चे की 5 वर्ष की आयु तक माता-पिता प्रेम और दुलार का व्यवहार रखें, इसके बाद जब पुत्र 10 वर्ष का होने को हो तो उसके लिये डिसिप्लिन होना चाहिये, डिसिप्लिन का आग्रह होना चाहिये और कभी-कभी हमने देखा है समझदार मां रूठ जाती है, एक दिन बच्चे से बात नहीं करती है। बच्चे के लिये बहुत बड़ा दण्ड होता है। दण्ड मां तो अपने को देती है लेकिन बच्चे को भी सजा हो जाती है। मां कह दे कि मैं बस आज बोलूंगी नहीं। आप देखिये 10 साल का बच्चा पूरे दिन परेशान हो जाता है। वो अपनी आदत बदल देता है और 16 साल का जब हो जाये तो उसके साथ मित्र जैसा व्यवहार होना चाहिये। खुलकर के बात होनी चाहिये। ये हमारे पूर्वजों ने बहुत अच्छी बात बताई है। मैं चाहता हूं कि ये हमारे पारिवारिक जीवन में इसका कैसे हो उपयोग।
एक बात मैं देख रहा हूं दवाई बेचने वालों की। कभी कभी तो दवाईयों के साथ ही इस प्रकार की चीज आ जाती हैं जब तक डॉक्टर के Prescription के बिना ऐसी दवाईयां न दी जायें। कभी कभी तो कफ़ सिरप भी ड्रग्स की आदत लेने की शुरूआत बन जाता है। नशे की आदत की शुरूआत बन जाता है। बहुत सी चीजे हैं मैं इसकी चर्चा नहीं करना चाहता हूं। लेकिन इस डिसिप्लिन को भी हमको स्वीकार करना होगा।
इन दिनों अच्छी पढ़ाई के लिये गांव के बच्चे भी अपना राज्य छोड़कर अच्छी जगह पर एडमिशन के लिये बोर्डिंग लाइफ जीते हैं, Hostel में जीते हैं। मैंने ऐसा सुना है कि वो कभी-कभी इस बुराइयों का प्रवेश द्वार बन जाता है। इसके विषय में शैक्षिक संस्थाओं ने, समाज ने, सुरक्षा बलों ने सभी ने बड़ी जागरूकता रखनी पड़ेगी। जिसकी जिम्मेवारी है उसकी जिम्मेवारी पूरा करने का प्रयास होगा। सरकार के जिम्मे जो होगा वो सरकार को भी करना ही होगा। और इसके लिये हमारा प्रयास रहना चाहिये।
मैं यह भी चाहता हूं ये जो चिट्ठियां आई हैं बड़ी रोचक, बड़ी दर्दनाक चिट्ठियां भी हैं और बड़ी प्रेरक चिट्ठियां भी हैं। मैं आज सबका उल्लेख तो नहीं करता हूं, लेकिन एक मिस्टर दत्त करके थे, जो नशे में डूब गये थे। जेल गये, जेल में भी उन पर बहुत बंधन थे। फिर बाद में जीवन में बदलाव आया। जेल में भी पढ़ाई की और धीरे धीरे उनका जीवन बदल गया। उनकी ये कथा बड़ी प्रचलित है। येरवड़ा जेल में थे, ऐसे तो कईयों की कथाएं होंगी। कई लोग हैं जो इसमें से बाहर आये हैं। हम बाहर आ सकते हैं और आना भी चाहिये। उसके लिये हमारा प्रयास भी होना चाहिये, उसी प्रकार से। आने वाले दिनों में मैं Celebrities को भी आग्रह करूंगा। चाहे सिने कलाकार हों, खेल जगत से जुड़े हुए लोग हों, सार्वजनिक जीवन से जुड़े हुए लोग हों। सांस्कृतिक सन्त जगत हो, हर जगह से इस विषय पर बार-बार लोगों को जहां भी अवसर मिले, हमें जागरूक रखना चाहिये। हमें संदेश देते रहना चाहिये। उससे जरूर लाभ होगा। जो सोशल मीडिया में एक्टिव हैं उनसे मैं आग्रह करता हूं कि हम सब मिलकर के Drugs Free India hash-tag के साथ एक लगातार Movement चला सकते हैं। क्योंकि इस दुनिया से जुड़े हुए ज्यादातर बच्चे सोशल मीडिया से भी जुड़े हुए हैं। अगर हम Drugs Free India hash-tag, इसको आगे बढायेंगे तो एक लोकशिक्षा का एक अच्छा माहौल हम खड़ा कर सकते हैं।
मैं चाहता हूं कि इस बात को और आगे बढायें। हम सब कुछ न कुछ प्रयास करें, जिन्होंने सफलता पाई है वो उसको Share करते रहें। लेकिन मैंने इस विषय को इसलिये स्पर्श किया है मैंने कहा कि दुख बांटने से दुख कम होता है। देश की पीड़ा है, ये मैं कोई उपदेश नहीं दे रहा हूं और न ही मुझे उपदेश देने का हक है। सिर्फ अपना दुख बांट रहा हूं, या तो जिन परिवारों में ये दुख है उस दुख में मैं शरीक होना चाहता हूं। और मैं एक जिम्मेवारी का माहौल Create करना चाहता हूं। हो सकता है इस विषय में मत-मतान्तर हो सकते हैं। लेकिन कहीं से तो शुरू करना पड़ेगा।
मैंने कहा था कि मैं खुशियां भी बांटना चाहता हूं। मुझे गत सप्ताह ब्लाइंड क्रिकेट टीम से मिलने का मौका मिला। World Cup जीत कर आये थे। लेकिन जो मैंने उनका उत्साह देखा, उनका उमंग देखा, आत्मविश्वास देखा, परमात्मा ने जिसे आंखें दिये है, हाथ-पांव दिये हैं सब कुछ दिया है लेकिन शायद ऐसा जज्बा हमारे पास नहीं है, जो मैंने उन ब्लांइड क्रिकेटरों में देखा था। क्या उमंग था, क्या उत्साह था। यानि मुझे भी उनसे मिलकर उर्जा मिली। सचमुच में ऐसी बातें जीवन को बड़ा ही आनंद देता है।
पिछले दिनों एक खबर चर्चा में रही। जम्मू कश्मीर की क्रिकेट टीम ने मुम्बई जाकर के मुम्बई की टीम को हराया। मैं इसे हार-जीत के रूप में नहीं देख रहा हूं। मैं इस घटना को दूसरे रूप में देख रहा हूँ। पिछले लम्बे समय से कश्मीर में बाढ़ के कारण सारे मैदान पानी से भरे थे। कश्मीर संकटों से गुजर रहा है हम जानते हैं कठिनाइयों के बीच भी इस टीम ने जो Team- Spirit के साथ, बुलन्दी के के हौसले के साथ, जो विजय प्राप्त किया है वो अभूतपूर्व है और इसलिये कठिनाइंयां हैं, विपरीत परिस्थितियां हो, संकट हो उसके बाद भी लक्ष्य को कैसे प्राप्त किया जा सकता है, ये जम्मू कश्मीर के युवकों ने दिखाया है और इसलिये और इसलिये मुझे इस बात को सुन करके विशेष आनन्द हुआ, गौरव हुआ और मैं इन सभी खिलाडि़यों को बधाई देता हूं।
दो दिन पहले यूनाइटेड नेशन ने, योग को, पूरा विश्व 21 जून को योग दिवस के रूप में माने इसके लिये स्वीकृति दी है। भारत के लिये बहुत ही गौरव का, आनन्द का अवसर है। सदियों से हमारे पूर्वजों ने इस महान परम्परा को विकसित किया था, उससे आज विश्व जुड़ गया। योग व्यक्तिगत जीवन में तो लाभ करता था, लेकिन योग ने ये भी दिखा दिया वो दुनिया को जोड़ने का कारण बन सकता है। सारी दुनिया योग के मुद्दे पर यू.एन. में जुड़ गई। और मैं देख रहा हूं कि सर्वसम्मति से प्रस्ताव दो दिन पहले पारित हुआ। और 177 देश, Hundred and Seventy Seven Countries Co-Sponsor बनी। भूतकाल में नेल्सन मंडेला जी के जन्म दिन को मनाने का निर्णय हुआ था। तब Hundred and Sixty Five Countries Co- Sponsor बनी थी। उसके पूर्व International Toilet Day के लिये प्रयास हुआ था तो Hundred and Twenty Two Countries Co- Sponsor हुई थी। उससे पहले 2 अक्तूबर को Non-Violence Day के लिये Hundred and Forty Countries Co- Sponsor बनी थी। इस प्रकार के प्रस्ताव से Hundred and Seventy Seven Countries ने Co-Sponsor बनना यानि एक World Record हो गया है। दुनिया के सभी देशों का मैं आभारी हूं जिन्होंने भारत की इस भावना का आदर किया। और विश्व योग दिवस मनाने का निर्णय किया। हम सबका दायित्व बनता है कि योग की सही भावना लोगों तक पहुंचे।
पिछले सप्ताह मुझे मुख्यमंत्रियों की मीटिंग करने का अवसर मिला था। मुख्यमंत्रियों की मीटिंग तो 50 साल से हो ही रही है, 60 साल से हो रही है। लेकिन इस बार प्रधानमंत्री के निवास स्थान पर मिलना हुआ और उससे भी अधिक हमने एक Retreat का कार्यक्रम प्रारंभ किया, जिसमें हाथ में कोई कागज नहीं, कोई कलम नहीं, साथ में कोई अफसर नहीं, कोई फाइल नहीं। सभी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बराबर के मित्र के रूप में बैठे। दो ढाई घण्टे तक समाज के, देश के भिन्न भिन्न विषयों पर बहुत गम्भीरतापूर्वक बातें की, हल्के फुल्के वातावरण में बातें कीं। मन खोलकर के बातें कीं। कहीं उसको राजनीति की छाया नहीं दी। मेरे लिये ये बहुत ही आनन्ददायक अनुभूति थी। उसको भी मैं आपके बीच Share करना चाहता हूं।
पिछले सप्ताह मुझे Northeast जाने का अवसर मिला। मैं तीन दिन वहां रहा। मैं देश के युवकों को विशेष आग्रह करता हूं कि आपको अगर ताज महल देखने का मन करता है, आपको अगर सिंगापुर देखने का मन करता है, आपको कभी दुबई देखने का मन करता है। मैं कहता हूं दोस्तो, प्रकृति देखनी है, ईश्वर का प्राकृतिक रूप देखना है तो आप Northeast जरूर जाइये। मैं पहले भी जाता था। लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में जब गया, तो वहां की शक्ति को पहचानने का प्रयास किया। अपार शक्तियों की संभावनाओं से भरा हुआ हमारा Northeast है। इतने प्यारे लोग हैं, इतना उत्तम वातावरण है। मैं सचमुच में बहुत आनन्द लेकर आया हूं। कभी कभी लोग पूछते हैं न? मोदी जी आप थकते नहीं हैं क्या? मैं कहता हूं Northeast जाकर के तो लगता है कि कहीं कोने भी थकान हुई होगी, वो भी चली गई। इतना मुझे आनन्द आया। और जो प्यार दिया वहां के लोगों ने जो मेरा स्वागत सम्मान वो तो एक बात है। लेकिन जो अपनापन था वो सचमुच में, मन को छूने वाला था, दिल को छूने वाला था। मैं आपको भी कहूंगा, ये सिर्फ मोदी को ही ये मजा लेने का अधिकार नहीं है भारत के हर देश वासी को है। आप जरूर इसकी मजा लीजिये।
अगली ‘मन की बात’ होगी तब तो 2015 आ जायेगी। 2014 का ये मेरा शायद ये आखिरी कार्यक्रम है। मेरी आप सबको क्रिसमस की बहुत बहुत शुभकामनायें हैं। 2015 के नववर्ष की मैं Advance में आप सबको बहुत बहुत शुभकामनायें देता हूं। मेरे लिये ये भी खुशी की बात है कि मेरे मन की बात को Regional Channels की जो Radio Channels हैं आपके जो प्रादेशिक चैनल हैं उसमें जिस दिन सुबह मेरे ‘मन की बात’ होती है उस दिन रात को 8 बजे प्रादेशिक भाषा में होती है। और मैंने देखा है कुछ प्रादेशिक भाषा में तो आवाज भी मेरे जैसे कुछ लोग निकालते हैं। मैं भी हैरान हूं कि इतना बढि़या काम हमारे आकाशवाणी के साथ जो कलाकार जुड़े हुए हैं वो कर रहे हैं मैं उनको भी बधाई देता हूं। और ये लोगों तक पहुंचने के लिये मुझे बहुत ही अच्छा मार्ग दिखता है। इतनी बड़ी मात्रा में चिट्ठियां आई हैं। इन चिट्ठियों को देखकर के हमारे आकाशवाणी ने इसका जरा एक तरीका ढूंढा है। लोगों को सहूलियत हो इसलिये उन्होंने पोस्ट-बॉक्स नम्बर ले लिया है। तो ‘मन की बात’ पर अगर आप कुछ बात कहना चाहते हैं तो आप पोस्ट-बॉक्स पर लिख सकते है अब।

मन की बात,

पोस्ट बॉक्स 111,

आकाशवाणी, नई दिल्ली।

मुझे इंतजार रहेगा आपके पत्रों का। आपको पता नहीं है, आपके पत्र मेरे लिये प्रेरणा बन जाते हैं। आपके कलम से निकली एक-आध बात देश के काम आ सकती है। मैं आपका आभारी हूं। फिर हम 2015 में जनवरी में किसी न किसी रविवार को जरूर 11 बजे मिलेंगे बाते करेंगे। बहुत बहुत धन्यवाद।


आस्था
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के कथन व सोच पर मलेशिया की सर्वोच्च अदालत ने भी अपनी मोहर लागा दी है । दोनों की सोच में अंतर नहीं नज़र आता,मलेशिया की अदालत के फैसले के मुताबित अल्लाह मुसलमानों के लिए ही है,तथा इसका प्रयोग कोई और नहीं कर सकता ।
परन्तु सच तो ये है की अल्लाह, भगवन व गॉड एक ही है और इन्हे किसी दायरे में नहीं बांधा जा सकता ये इंसान की आस्था पर निर्भर करता है और जिस तरह स्वामी स्वरूपानंद ने कहा की साईं बाबा की पूजा ना की जाये वो कोई भगवन नहीं है ,ऐसा कह कर वो करोड़ो लोगो की आस्था को ठेस पंहुचा रहे है । भारत व विदेश में कई लोग ऐसे है जो साईं बाबा के भक्त है और उनपर आस्था रखते है ।
भारत एक स्वतंत्र देश है यहाँ हर कोई अपनी इच्छा अनुसार अपनी श्रद्धा रख सकता है । किसी को भी अपना अराध्या मान कर पूजा कर सकता है तथा ऐसा करना किसी भी व्यक्ति की निजी आस्था से जुड़ा है तथा किसी व्यक्ति की आस्था पर सवाल उठाना गलत होगा । ये कोई बंधन नहीं है ये अपनी सोच व श्रद्धा है ।
क्या स्वामीजी उन करोड़ों लोगों को रोक सकतें है जो साईं बाबा पर आस्था रखते है ?
किसी की आस्था को खत्म करना इत्ता आसान नहीं होता इसका सबसे बड़ा उदहारण हिन्दू धर्म की कृष्ण भक्त मीरा बाई है ।
स्वामी जी कहतें है की ये एक पैसा कमाने का जरिया है,उनका कहना है की मंदिर के नाम पर कमाई की जा रही है,परन्तु भारत में और भी कई ऐसे मंदिर है जिनमे हर साल करोड़ों का चढ़ावा आता है उसका उदाहरण बालाजी मंदिर है ।
स्वामीजी का तर्क है की साईं बाबा की पूजा करने से हिन्दू धर्म बंट जायेगा,आखिर ये समाज पाना मुश्किल है कि साईं बाबा की पूजा करने पर कैसे हिन्दू धर्म बंट सकता है ?
क्या ये बात सत्य नहीं है कि गुलामी के काल में विदेशी ताकतों ने सदियों तक हिन्दू धर्म को खत्म करने के अनेक उपाय व प्रयास किये पर क्या वो इसमें सफल हो पाएं ?
तो आज कैसे हो सकतें है ?
इसका भी उदाहरण है की गुलामी के काल में कई शासकों ने हिन्दू धर्म के मंदिर तोड़ दिए थे परन्तु लोगों का विश्वास हिन्दू धर्म पर आज भी अटूट है । हिन्दू धर्म की मान्यता क्या है,कैसे है,और कब से है ये हर हिन्दू जानता है तथा मानता भी है ।
ऐसे में इन तर्कों पर विवाद अवश्य पैदा हो सकता है परन्तु आस्था नहीं थम सकती ।
यही कहना सही होगा की हर व्यक्ति को अधिकार है अपने अराध्या पर विश्वास रखने का,उनसे ये हक़ छीनने के बारेme सक्चना भी घातक हो सकता है । पर इंसान के अपने कुछ तर्क होते है जिनके आधार पर वो अपने अराध्या की पूजा करता है व उनपे आस्था रखता है।

-प्रियंका पारे


प्रधानमंत्री का विकास का वादा - स्कैम से स्किल इंडिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को १२ घंटे चली चर्चा में ये विश्वास दिलाया की आने वाले अगले पांच सालों में वे सभी वादें पूरे करेंगे जिनका उल्लेख राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में किया था ।
संसद में अपने पहले भाषण में मोदी ने मुख्य रूप से गरीबों और अल्पसंख्यकों को सशक्त बना कर देश के विकास की बात की ।
संसद में मोदी ने अपने सपनों का भी उल्लेख किया तथा इंडिया को " स्कैम इंडिया से स्किल इंडिया " बनाने की बात कही । उन्होंने अपने शब्दों में कहा की वो देश के विकास के लिए हर क्षेत्र और सेक्टर में विकास को बढ़ाने की पूरी कोशिश करेंगे तथा उन्होंने मुख्य रूप से खेती को उन्नत बनाने व ढांचागत विकास पर जोर डाला तथा सभी दलों से सहयोग की मांग की साथ ही कुछ अधूरा रह जाने पे माफ़ी मांगी ।
प्रधानमंत्री जी ने एक घंटे में पूरे देश के हर तरह के विकास की बात कही, गरीबों से लेकर महिलाओं की सुरक्षा तक उन्होंने अपने विचार प्रस्तुत किये ।
उन्होंने युवा ताकत को लेकर कहा की हमारे यहाँ ६५ फीसदी युवा है, जबकि हमारा पडोसी देश चीन अब बूढ़ा हो रहा है ,ये हमारे लिए आनंदपूर्ण है और हमें युवा ताकत का उपयोग देश की उन्नती के लिए करना चाहिए ।
गरीबों को लेकर मोदी ने कहा की हमारी पहली प्राथमिकता गरीबों का स्तर ऊचा करना है ,२०२२ में जब हम अपना ७५वां स्वतंत्रा दिवस मनाएं तब तक हमारे देश का विकास इतना हो की एक भी नागरिक बिजली,पानी, शौचालय से अछूता न हो ।
मोदी ने नेताओं से महिलाओं के साथ होने वाले बलात्कारों के प्रति सोच व रवैया बदलने की अपील की है । उन्होंने अपने शब्दों में कहा की "हम सभी को ऐसी घटनाओं का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करना बंद करना चाहिए । ऐसा करके हम अपनी माँ- बहनों की इज्जत और मर्यादा से खिलवाड़ कर रहे है |

-प्रियंका पारे


मोदी सरकार - बेहतर तालमेल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपने मंत्रिमंडल के गठन में बेहतर तालमेल और बेहतर नतीजों के इरादे से 17 संबंधित मंत्रालयों के 7 समूह बना दिए। इनमें कुछ बुनियादी सुविधाओं वाले विभाग शामिल हैं।

प्रवासी मंत्रालय विदेश , कॉर्पोरेट को वित्त में जोड़ा

संप्रग-2 के काल में बनाए गए प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्रालय को विदेश मंत्रालय से जोड़ दिया गया है। विदेश मंत्री के रूप में सुषमा स्वराज इसे देखेंगी। इसी तरह कार्पोरेट मामलों को वित्त मंत्रालय से जोड़ दिया गया है जिसे वित्त मंत्री अरूण जेटली देखेंगे।
बुनियादी ढांचा क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने परिवहन, हाईवे और जहाजरानी को मिला दिया है जिसके प्रमुख नितिन गडकरी बनाए गए हैं।

बिजली, कोयला और अक्षय ऊर्जा एक साथ

अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा संयोजन के तहत बिजली, कोयला और अक्षय उर्जा को मिला दिया गया है। पीयूष गोयल को इसका स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है।
शहरी विकास, आवास और गरीबी उन्मूलन जैसे संबंधित मंत्रालयों को भी एक में मिला कर उसका मंत्री एम वेंकैया नायडु को बनाया गया है। इसी तरह ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पेय जल तथा सफाई के महकमों का एक समूह बनाते हुए उसे गोपीनाथ मुंडे को सौंपा गया है।
गोवा के श्रीपद नाईक को संस्कृति एवं पर्यटन का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है।


अमेरिकी मीडिया भी नरेंद्र मोदी का मुरीद
अमेरिकी मीडिया ने प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह को व्यापक कवरेज दी है और दक्षिण एशियाई देशों के नेताओं को आमंत्रित करने के उनके फैसले की सराहना की है। लॉस एंजिलिस टाइम्स ने शीर्षक दिया नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली, बदलाव के संकेत|
द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कहा, चाय बेचने वाले के बेटे मोदी ने विश्व के सबसे बड़े के लोकतंत्र के प्रधानमंत्री के रूप में सपथ ली और छोटा मंत्रिमंडल रखा । भारतीयों को एक शानदार भविष्य का वायदा किया । इस अखबार ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने भारत के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली और आर्थिक सुधारों के लिए एक नई सरकार की पेशकश की।

द शिकागो ट्रिब्यून ने कहाकि पहली बार, भारत ने सभी आठ दक्षेस राष्ट्रो के प्रमुखों को समारोह में आमंत्रित किया और सभी ने प्रतिनिधि भेजे।
अखबार ने कहा कि हालांकि शरीफ की मौजूदगी सबसे प्रमुख थी


मोदी से नाराज़ हुए रामदेव
हरिद्वार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी अभियान में सक्रिय रहे योगगुरू बाबा रामदेव अब उनसे नाराज बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि रामदेव सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ-ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए और अपने स्थान पर बालकृष्ण के साथ 40 प्रतिनिधियों को भेजा। मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए रामदेव ने संकल्प लिया था।
सूत्रों के अनुसार रामदेव की नाराजगी का कारण मंत्री पद बांटने में उनकी बात नहीं मानी गई। इसके अलावा योगगुरू चाहते थे कि नेहरू-गांधी परिवार को शपथ-ग्रहण समारोह में नहीं बुलाया जाए। आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि बाबा रामदेव दिल्ली इसलिए नहीं आए कि वे नौ माह से अधिक समय से हरिद्वार से बाहर थे। संस्था के कई काम रूके थे। योगगुरू ने जो सत्ता बदलने का प्रण किया था वह पूरा किया।
उनका कहना है कि जीत की खुशी में शरीक होने के लिए तो पूरा देश है। शपथ ग्रहण में नहीं आने को उनकी नाराजगी से जोड़कर पेश न किया जाए।


शेहला मसूद हत्याकांड :
प्यार, जलन और महत्वकांक्षा की दास्तान

भोपाल के बहुचर्चित आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद हत्याकांड की सीबीआई द्वारा की गयी जाँच लगभग पूरी हो गयी. 11 महीने पहले हुए इस हत्याकांड ने शहर के साथ ही प्रदेश के राजनीतिक गलियारों मे सनसनी फैला दी थी. सीबीआई ने दावा किया है कि उसने पूरा मामला सुलझा लिया है, लेकिन कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं. ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब तलाशना बाकी है. बहरहाल जो भी हो इस चर्चित हत्याकांड में कई ऐसे खुलासे हुए हैं जिसमें प्यार, जलन और महत्वकांक्षा की कहानी सामने आई है जिसने प्रदेश ही नही बल्कि पूरे देश को झझकोर कर रख दिया.
इस पूरे मामले के केंद्र बिंदु रहे भाजपा विधायक ध्रुव नारायण सिंह को सीबीआई ने क्लीनचिट दे दी है जबकि पाँच लोगो को आरोपी करार दिया है. इनमें जाहिदा, सबा, शाकिब डेजर, ताबिश और इरफान शामिल है. इस मामले मे जो तथ्य सामने आए हैं उसके अनुसार जाहिदा को शेहला की ध्रुव नारायण सिंह से करीबी पसंद नही थी. शेहला की ध्रुव से करीबी न केवल जाहिदा को बैचेन कर रही थी बल्कि भविष्य के लिए ख़तरा भी महसूस करा रही थी. ज़ाहिदा को शेहला की ध्रुव से नज़दीकी जब बर्दास्त के बाहर हो गई तो उसने शेहला को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया. इस काम में उसका साथ दिया उसकी सहेली सबा फारूखी ने. वहीं अन्य साथियों मे शाकिब डेजर, ताबिश और इरफान शामिल थे.
इरफान की गिरफ्तारी के बाद हुआ था खुलासा
इस हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा कानपुर स्थित बेकनगंज थाना क्षेत्र में इरफान उर्फ श्याम की गिरफ्तारी के बाद हुआ था. इरफान के अनुसार शेहला मसूद की हत्या का कांट्रेक्ट शार्प शूटर शानू के साथ तीन लोगों ने लिया था। शानू की दो माह पहले गैंगवार में डीआईजी आफिस के सामने हत्या कर दी गयी थी। आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई को हत्या का ठेका देने वाली महिला ज़ाहिदा परवेज की गिरफ्तारी के बाद अहम सुराग मिले थे। इसी के बाद तलाक महल निवासी इरफान उर्फ श्याम को एसटीएफ के सीओ त्रिवेणी सिंह ने मंगलवार रात घर के पास से एक तमंचा व कारतूस समेत गिरफ्तार कर लिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इरफान मुख्य रूप से चरस की तस्करी का काम करता है। सीबीआई के भोपाल मुख्यालय पर हत्या की मुख्य आरोपी ज़ाहिदा व उसके साथी के गिरफ्तारी के बाद हत्याकांड में उसके हाथ का पता चला। इरफान शहर के कुख्यात अपराधी रहे शानू ओलंगा का दाहिना हाथ है। शानू को इसी साल जनवरी माह में डीआईजी आफिस के सामने गोलियों से भून दिया गया था। इरफान के मुताबिक शेहला की हत्या का ठेका शानू ओलंगा ने लिया था। शेहला की हत्या करने से पहले उसने भोपाल जाकर एक सप्ताह तक उनकी गतिविधियों की रैकी की थी। इसके बाद घटना को अंजाम दिया।
अवैध संबंध को वजह बताया था
इसके बाद जाहिरा परवेज को गिरफ्तार कर लिया गया था. ज़ाहिदा ने शेहला की हत्या कराने का अपराध कबूल कर लिया था. शुरुआती पूछताछ में ज़ाहिदा ने शेहला की हत्या के पीछे अपने पति से उसके अवैध संबंध को वजह बताया था. यद्यपि सीबीआई को आशंका थी कि इसके पीछे कोई गहरी साजिश हो सकती है. उसके अनुसार उसके पति और शेहला के बीच अवैध संबंध होने की आशंका थी। इसी कारण उसने शेहला को मरवाने का फैसला किया। उसके इस कबूलनामा पर पुलिस को यकीन नहीं था. हालाँकि सीबीआई के अनुसार जाँच में दूसरी ही बात सामने आई. खुद ज़ाहिदा के ध्रुव के साथ अवैध संबंध थे. वहीं खुद ध्रुव के कई महिलाओं के साथ संबंध होने की जानकारी सामने आई. गौरतलब है कि आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद को भोपाल स्थित उनके घर के बाहर 11 अगस्त 2011 को सुबह 11:19 बजे उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वे पिछले साल 16 अगस्त को अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोध आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन करने जा रही थी. पुलिस को उनकी हत्या का कोई भी चश्मदीद गवाह भी नहीं मिला था। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने हत्यारे का सुराग देने के लिए 10 लाख रुपये इनाम की घोषणा की थी. 28 फ़रवरी को सीबीआई ने भोपाल की ही एक इंटीरियर डिज़ाइनर ज़ाहिदा परवेज़ को शेहला की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था.
पल-पल की जानकारी रखती थी.
सीबीआई के अनुसार आरोपी जाहिदा परवेज शेहला की पल-पल की जानकारी रख रही थी. मसलन, वो कहां-कहां जाती है, किससे मिलती है? अण्णा के आंदोलन में क्यों शामिल हुई? सीबीआई के अनुसार शेहला मसूद को उसके ऑफिस के कर्मचारी ने हत्या के तीन दिन पहले ही आगाह कर दिया था कि जाहिदा परवेज उसकी पल-पल की जानकारी रख रही है। यह बात शेहला के कर्मचारी इरशाद ने सीबीआई को बयान में दिए। उसे सीबीआई ने गवाह बनाते हुए बयान को चार्जशीट में शामिल किया है। हालाँकि आरोपी जाहिदा और सबा फारुखी की वकील नफीस खान का कहना है कि सीबीआई ने पन्नों की संख्या बढ़ाने के मकसद से अनावश्यक चीजें चार्जशीट में शामिल की हैं। सीबीआई ने चार्जशीट में जाहिदा की निजी तस्वीरों को बिना वजह शामिल कर दिया है। साथ ही अखबारों की ऐसी कतरनों को भी शामिल किया है जिसका मामले से कोई लेना-देना ही नहीं है। संदेह के घेरे में चल रहे ध्रुव के बयानों को सीबीआई ने शामिल हीं नहीं किया है। सीबीआई द्वारा जब्त सबूत में कई ऐसे राज छुपे हुए हैं जिनका खुलासा होना बाकी है. उल्लेखनीय है कि सीबीआई द्वारा जाहिदा के ऑफिस से जब्त सीडी सुर्खियों में रही थी। तब जाहिदा ने सीबीआई कोर्ट इंदौर में कहा था कि वह सीडी शेहला और ध्रुव की है जबकि सीडी उसकी और ध्रुव की निकली थी।
अब आगे क्या ?
शेहला मसूद की हत्या के मामले की सुनवाई अब इंदौर में हो या भोपाल में? इस बात का फैसला आगामी 11 जून को होगा। इंदौर में सीबीआई की विशेष अदालत ने सीबीआई और आरोपियों के वकील की दलील सुनने के बाद यह बात कही। इधर चार्जशीट दाखिल किए जाने के दूसरे दिन आरोपी जाहिदा परवेज व सबा फारुखी ने कोर्ट में पेशी के बाद मीडिया के सवालों के जवाब में दोहराया कि आखिर सीबीआई ने गुनहगार को बचाकर बेगुनाहों को फंसा दिया। शुक्रवार को सीबीआई जार्चशीट पेश की थी। शनिवार को इस मामले के पांचों आरोपी जाहिदा, सबा, शाकिब डेजर, ताबिश और इरफान को मजिस्ट्रेट डॉ. शुभ्रा सिंह के समक्ष पेश किया गया। इस मामले की सुनवाई इंदौर में करने के संबंध में सीबीआई ने अपील प्रस्तुत करते हुए प्रमाण के तौर पर कुछ दस्तावेज पेश किए, वहीं दूसरी तरफ आरोपियों की ओर से मामले की सुनवाई भोपाल की सीबीआई अदालत में कराने की मांग की गई। अगली सुनवाई 11 जून को होगी। इससे पूर्व सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक हेमंत शुक्ला ने सभी आरोपियों को चार्ज शीट की कॉपियां उपलब्ध कराई। कोर्ट में मौजूद जाहिदा-सबा की वकील नफीसा खान ने चालान की कॉपियां अपने पास रखी, जबकि शेष तीनों आरोपियों की ओर से कोई वकील मौजूद नहीं होने पर चालान की प्रति वे अपने साथ जेल ले गए।
इस मामले के खुलासे मे सबसे ज़्यादा मदद ज़ाहिदा की डायरी से मिली. डायरी के कुछ अंश इस तरह हैं-
2 मई 2009 - आज ध्रुव पहली बार मेरे ऑफिस आए। उनके आने को लेकर मैं बहुत खुश थी।
14 मई 2009- आज मेरे पति असद पहली बार ध्रुव से मिले। उन दोनों की मीटिंग मैंने पहले ही तय कर दी थी लेकिन बेवकूफ असद 8 बजे ही सो गए थे। मैंने उन्हें जिद करके कहा कि वो ध्रुव से नहीं मिलेंगे तो उसे काम नहीं मिलेगा।
1 जुलाई 2009 - ध्रुव मेरे ऑफिस आए हमने एक दूसरे को गले भी लगाया फिर हमने मस्ती के लिए सब कुछ किया।
14 जुलाई 2009- आज मेरे से बहुत बड़ी गलती हुई। मैंने ध्रुव के रिलायंस के नंबर पर एसएमएस कर दिया। उसमें लिखा की मेरी जान हो तुम, आई लव यू। यह मैसेज ध्रुव की पत्नी वंदना ने देख लिया। इसके बाद दोनों में झगड़ा हुआ और हम दोनों में कुछ दिन बातचीत बंद हो गई।
18 जुलाई 2009 -गलती से सबक लेकर हमने तय किया था कि आगे से हम कोडवर्ड में बात करेंगे।
3 फरवरी 2010- मुझे यह चीज परेशान कर रही है कि उसके शेहला, माहिरा सभी से अब तक रिलेशन हैं।
19 फरवरी 2010 - वो बहुत सारी जगह जाते हैं, कई महिलाओं से उनके शारीरिक संबंध हैं।
13 फरवरी 2010 -ध्रुव मैं तुमसे नफरत करती हूं। क्या फायदा ऐसे रिश्ते का। कोई काम के नहीं हैं ये रिश्ते। जाओ ध्रुव आपको शेहला या निशि का साथ मुबारक हो, मेरी किस्मत में तुम नहीं हो शायद।


 
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