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मासूम नमन को मुख्यमंत्री बाल हदय उपचार योजना से मिला नया जीवन
10 July 2018
होशंगाबाद जिले के सेमरीहरचंद निवासी विनोद साहू के 2 वर्षीय मासूम बेटे नमन को मुख्यमंत्री बाल हदय उपचार योजना से नया जीवन मिला है। बच्चे के इलाज के लिये एक लाख रूपये खर्च कर पाना, मामूली परचूनी की दुकान चलाने वाले पिता के बस की बात नहीं थी। नमन अपने परिवार में 4 बहनों के बीच अकेला भाई है। जन्म के समय से काफी कमजोर था। ह्रदय रोग की परेशानी के कारण खेलकूद भी नहीं पाता था। विनोद साहू के पास बेटे नमन के ऑपरेशन के लिए पर्याप्त पैसा नहीं था। ऐसे में विनोद ने जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों से नमन का उपचार करवाने की ठानी। चिकित्सकों ने भी भरपूर मदद की। मुख्यमंत्री बाल हदय उपचार योजना में नमन के हदय के ऑपरेशन के लिए 90 हजार रूपये की राशि स्वीकृत करवाई गई। स्वीकृत राशि से नमन के हदय का होशंगाबाद के प्लेटीनियम अस्पताल में सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया। आज नमन बिल्कुल स्वस्थ है। खेलने लगा है, पूरे घर में उसकी आवाज भी सुनाई देती है।
जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है योग - मुख्यमंत्री श्री चौहान
21 Jun 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि योग जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है। श्री चौहान आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित चौथे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में स्कूली बच्चों को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन स्कूल शिक्षा विभाग के तत्वावधान में राज्य-स्तरीय योग प्रशिक्षण केन्द्र द्वारा किया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बच्चों से कहा कि रोज आधा घंटा योग करें। नियमित योगाभ्यास से ही योग के फायदे मिलेंगे। योगासन, प्राणायाम को जीवन का अभिन्न अंग बनायें। उन्होंने कहा कि योग से शरीर मजबूत होता है। मन प्रसन्न और बुद्धि प्रखर बनती है। खूब मन लगाकर पढ़ें। अच्छे अंक लायें। उच्च शिक्षा की फीस राज्य सरकार भरवाएगी। योगाभ्यास में भोपाल के विभिन्न स्कूलों के 500 से अधिक बच्चे शामिल हुए। बच्चों ने योगासन और प्राणायाम का अभ्यास किया।
विश्वास और सकारात्मकता से योग करने पर होता है लाभ -राज्यपाल श्रीमती पटेल
21 Jun 2018
राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर राजभवन में आयोजित योग कार्यक्रम में कहा कि विश्वास और सकारात्मक सोच के साथ योग प्रक्रियाएं करने से बहुत लाभ होता है। इसे जीवन में नियमित रूप से और गंभीरता से करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में योग गुरू राजीव जैन त्रिलोक ने आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा तैयार योग प्रक्रियाएँ करवाई। कार्यक्रम में लगभग 700 महिलाओं-पुरूषों ने योगाभ्यास किया। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कहा कि योग देश की प्राचीन धरोहरों में से एक है। समाज के हर वर्ग पर योग विधा के संवर्धन एवं संरक्षण की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि योग हमारी आत्मा को शुद्ध करता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के अथक प्रयासों से देश की प्राचीन योग पद्धति को अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में प्रतिष्ठा,सम्मान और लोकप्रियता प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि गीता में कृष्ण ने एक स्थान पर कहा है कि योग से कर्मो में कुशलता आती है। राज्यपाल ने कहा कि राजभवन में एक मई से स्थापित योग केन्द्र अब निरंतर चलता रहेगा। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर प्रसारित शुभकामना संदेश का प्रसारण किया गया। कार्यक्रम में राजभवन में स्थापित योग केन्द्र के प्रशिक्षणार्थी कर्मचारियों ने अपने अनुभव बताये।
अद्भुत वैज्ञानिक विधा है योग : आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है योग
21 Jun 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि योग अद्भुत वैज्ञानिक विधा है। योग आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है। शरीर को स्वस्थ रखने का प्रभावी माध्यम है। योग से मन प्रसन्न, बुद्धि प्रखर और शरीर स्वस्थ रहता है। श्री चौहान अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आज यहाँ लाल परेड ग्राउण्ड पर हुए राज्य स्तरीय योगाभ्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। केन्द्रीय मंत्री सामाजिक अधिकारिता एवं न्याय मंत्री श्री थावरचंद गहलोत ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि के रूप में दि योग इनस्टिट्यूट मुंबई की निदेशक, महिला योग गुरू हंसा जयदेव योगेन्द्र उपस्थित थीं। इस अवसर पर महापौर श्री आलोक शर्मा, नगर निगम अध्यक्ष श्री सुरजीत सिंह चौहान, भोपाल विकास प्राधिकरण अध्यक्ष श्री ओम यादव, मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह, महानिदेशक पुलिस श्री आर.के. शुक्ला भी मौजूद थे। राज्यस्तरीय कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिकारी, योग प्रेमी और स्कूली बच्चों ने योगाभ्यास किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि योग नियमित रूप से करना चाहिए। श्री चौहान ने उनके साथ वर्ष 1998 में हुई दुर्घटना का उल्लेख करते हुये कहा कि एक समय ऐसा लग रहा था, कि मेरे लिये कभी चलना भी संभव नहीं होगा। योग के चमत्कार से आज मैं प्रति-दिन 18 घंटे काम करने में समर्थ हो गया हूँ। योग की महत्ता स्थापित करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं योग करें और दूसरों को भी योग के लिये प्रेरित करें। नियमित योग करने से शरीर स्वस्थ रहेगा। दवाईयों का खर्चा कम होगा। जीवन में नई ऊर्जा और आनंद मिलेगा। श्री चौहान ने कहा कि योग का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। हमारे ऋषि-मुनियों ने वर्षों के चिंतन-मनन से जीवन जीने की योग विधा को विकसित किया है। भारत ने ही दुनिया को योग, विश्व बन्धुत्व, कल्याण और सद्भावना का संदेश दिया है। योग के लोकव्यापीकरण में स्वामी बाबा रामदेव के योगदान का उल्लेख करते हुये उन्होंने कहा कि विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दुनिया में योग का प्रतिष्ठापन करवाया है। केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक स्वास्थ्य के लिये योग अति आवश्यक है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से ही संयुक्त राष्ट्र संघ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रहा है। दुनिया में आज अनेक देशों में योग हो रहा है। उन्होंने योग की महत्ता को प्रचारित करने में सभी वर्गों के सहयोग की जरूरत बतायी। योगाभ्यास का प्रारंभ ओंकार ध्वनि से हुआ। कार्यक्रम में योगासन, कपालभार्ति, प्राणायाम और ध्यान की क्रियाएं हुईं। योगासन में ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्ध चक्रासन, त्रिकोणासन, भद्रासन, वज्रासन, अर्ध उष्ट्रासन, उष्ट्रासन, शशांकासन, उत्तानमंडूकासन, वक्रासन, मकरासन, भुजंगासन, शलभासन, सेतुबंधासन, उत्तानपादासन, अर्ध हलासन, पवनमुक्तासन, शवासन, आदि आसन और नाड़ीशोधन, शीतली, भ्रामरी प्राणायाम करवाए गये। कार्यक्रम के प्रारंभ में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के भाषण का सीधा प्रसारण दिखाया गया। प्रारंभ में राष्ट्रगीत वंदे-मातरम् का गायन हुआ। योगाचार्य पं. राधेश्याम मिश्रा ने यौगिक क्रियाओं का संचालन करवाया। श्री कार्तिक दास और सुश्री दामिनी ढलाई ने कार्यक्रम का संचालन किया।
निपाह वायरस से भयभीत होने से नहीं सूझबूझ और सावधानी से बचा जा सकता है
1 Jun 2018
भोपाल। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत द्वारा आज पुरानी विधानसभा स्थित यादव मोहल्ला झुग्गी बस्ती में निपाह वायरस से बचने हेतु अग्रिम सुरक्षा की दृष्टि से निःशुल्क दवाइयो का वितरण किया गया। चिकित्सकों ने रहवासियों को दवाईयों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि निपाह वाइरस से भयभीत होने से नहीं सूझबूझ और सावधानी से बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि निपाह वायरस के संक्रमण के लक्षणों की शुरुआत एन्सेफेलेटिक सिंड्रोम से होती है, जिसमें बुखार, सिरदर्द, म्यालगिया की अचानक शुरुआत, उल्टी, सूजन, विचलित होना और मानसिक भ्रम शामिल हैं. संक्रमित व्यक्ति 24 से 48 घंटों के भीतर कॉमेटोज हो सकता है। उन्होंने बताया कि आप जो खाना खाते हैं वह चमगादड़ या उनके मल से दूषित नहीं हुआ हो। चमगादड़ के कुतरे फलों को खाने से बचना चाहिए। अपने हाथों को अच्छी तरह से साफ करें। रोगी के लिए उपयोग किए जाने वाले कपड़े, बर्तन और सामान को अलग से साफ रखना चाहिए। वायरस से प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा न करें और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से दूर रहें। बड़ी संख्या में रहवासियों ने वायरस से बचने के उपाय समझे। चिकित्सकों ने तीन दिवस तक सूरक्षा डोज लेने का सभी से आग्रह किया। शिविर में विशेषज्ञ डॉ. सारिका शर्मा, डॉ. रेणुका वर्मा, डॉ. रेणुका शर्मा, डॉ. लक्की कारखुर ने सैकडों रहवासियो का उपचार कर निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया। इस अवसर पर प्रान्त सचिव श्री हरीश बारी सहित श्रीमती वंदना सैनी, श्रीमती प्रतिमा हरित, श्री अमित सैनी, श्री राजेश ललवानी, एवं जिला अभिभाषक संघ के वरिष्ठ सदस्य श्री प्रदीप शर्मा एडवोकेट उपस्थित थे।
भारत में प्रतिदिन 2700 लोग तंबाकू सेवन से अपनी जान गंवा रहे धुआं रहित तम्बाकू दिल की बीमारी का बड़ा कारण- विश्ेाषज्ञ
31 May 2018
नई दिल्ली 31 मई। दुनिया भर में आज का दिन (31मई) विश्व तंबाकू निषेध दिवस के रुप में मनाया जा रहा है, और इसी 24 घंटे के दौरान देशभर में करीब 2739 लोग तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों के कारण कैंसर व इससे होने वाली बीमारियों से दम तोड़ देंगे। इसकी रोकथाम के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों से होने वाली बीमारियों और मौतों की रोकथाम को ध्यान में रखकर इस वर्ष 2018 का थीम ‘‘ टोबेको और कार्डियेावैस्कूलर डिजिज (तंबाकू और हृद्वय रोग ) ’’ रखा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और सहयोगी लोगों को तंबाकू और कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के बीच के संबंध के बारे में जागरूक करेंगे, जिसमें हृद्याघात (स्ट्रोक) भी शामिल है, जो दुनिया के मौत का प्रमुख कारण है। तंबाकू के उपयोग को रोगों के अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण (आईसीडी -10) के तहत बीमारी के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसकी लत को छोड़ने की दर बहुत कम है। भारत में तंबाकू सेवन की लत को छोड़ने की दर केवल 3 प्रतिशत ही है। इस लत को छोड़ने की इतनी कम संभावना और तम्बाकू के उपयोग की इतनी अधिक आशंका के कारण बीमारियां बढ़ती है। तम्बाकू और इसके सेवन के प्रसार को सही ही तंबाकू महामारी कहा गया है। विशेषज्ञों ने आम लोगों में सामान्य रूप से प्रचलित धुएं रहित या चबाने वाला तम्बाकू, सिगरेट और बिड़ी से सुरक्षित है और इससे दिल की बीमारी नहीं होती की इस धारणा को भ्रामक और गलत बताया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। धूम्रपान या चबाने के रूप में तंबाकू का उपयोग कैंसर, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। वायस ऑफ टोबेको विक्टिमस के पैट्रन (वीओटीवी) व ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) दिल्ली के प्रोफेसर और कार्डियक थोरैसिक और वेस्कुलर सर्जरी के प्रमुख डॉ. शिव चौधरी ने कहा, तंबाकू दुनिया में कार्डियो-वेस्कुलर मौत और अक्षमता का सबसे ज्यादा ज्ञात और रोकथाम योग्य कारण है। निकोटीन जैसे रसायन प्रकृति में संक्रामक होते हैं जिससे कोरोनरी समस्याएं होती हैं। यह सर्वविदित है कि धूम्रपान हृदय रोग का खतरा बढ़ता है लेकिन तथ्य यह है कि तंबाकू के धुएं रहित रूप समान रूप से हानिकारक हैं। ग्लोबल एडल्ट तंबाकू सर्वेक्षण (जीएटीएस -2) 2016-17 के अनुसार, भारत में धुआं रहित तंबाकू का सेवन धूम्रपान तम्बाकू से कहीं अधिक है। वर्तमान में 42.4 प्रतिशत पुरुष, 14.2 प्रतिशत महिलाएं और सभी वयस्कों में 28.6 प्रतिशत धूम्रपान करते हैं या फिर धुआं रहित तम्बाकू का उपयोग करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक इस समय 19 प्रतिशत पुरुष, 2 प्रतिशत महिलाएं और 10.7 प्रतिशत वयस्क धूम्रपान करते हैं, जबकि 29 .6 प्रतिशत पुरुष, 12.8 प्रतिशत महिलाएं और 21.4 प्रतिशत वयस्क धुआं रहित तंबाकू का उपयोग करते हैं। 19.9 करोड़ लोग धुआं रहित तंबाकू का उपयोग करते हैं जिनकी संख्या सिगरेट या बिड़ी का उपयोग करने वाले 10 करोड़ लोगों से कहीं अधिक हैं। सबसे चिंताजनक है कि प्रतिवर्ष देशभर में 10 लाख लोग इससे दम तोड़ रहे है। वंही देशभर में 5500 बच्चे हर दिन तंबाकू सेवन की शुरुआत कर रहें है और वयस्क होने की आयु से पहले ही तम्बाकू के आदी हो जाते हैं। टाटा मेमोरियल अस्पताल, मुंबई के प्रोफेसर और सर्जिकल ओन्कोलॉजी डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि किसी भी रूप में तम्बाकू का सेवन शरीर के किसी भी हिस्से को इसके हानिकारक प्रभाव से नहीं बचाती। यहां तक कि धुआं रहित तंबाकू प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूपों में भी इसी तरह के दुष्प्रभाव का कारण बनता है। हमारे शरीर के अंगों को सीधे नुकसान पहुंचाने के अलावा, धुआं रहित तम्बाकू का उपभोग करने वाले लोगों में दिल के दौरे के बाद मृत्यु दर में काफी वृद्धि करता है। तम्बाकू के सभी उत्पादों और रूपों से आने वाले राजस्व की तुलना में सरकार के साथ-साथ समाज का तम्बाकू जनित बीमारियों की रोकथाम और उपचार पर होने वाला स्वास्थ्य पर खर्च कई गुना अधिक है। संबंध हेल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) के ट्रस्टी संजय सेठ ने कहा कि अनुमान है कि सभी कार्डियोवेस्कुलर (सीवी) रोग का लगभग 10 प्रतिशत का कारण तम्बाकू का उपयोग है। भारत में सीवी रोग की बड़ी संख्या को देखते हुए, इसका दुष्प्रभाव बहुत अधिक है। उन्होंने कहा कि जब सरकारें स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की स्थापना के लिए बड़े पैमाने पर बजट खर्च कर रही हैं, उन्हें रोकथाम की रणनीतियों पर अधिक ध्यान देना चाहिए, जिनमें तम्बाकू उपयोग में कमी करना प्रमुख है। आज तम्बाकू निषेध दिवस पर हम सबको तंबाकू उत्पादों को अलविदा कहने का संकल्प लेना चाहिए ताकि आने वाले समय में हम इन आंकड़ेां को बदल पाये।
सभी शासकीय जिला चिकित्सालयों में कीमोथैरेपी यूनिट स्थापित
21 May 2018
प्रदेश के सभी 51 जिलों के जिला चिकित्सालयों में कैंसर कीमोथैरेपी यूनिट स्थापित की गयी है। प्रदेश में कैंसर केयर कार्यक्रम के तहत यह कार्य किया गया है। अब कैंसर मरीजों को नि:शुल्क कीमोथैरेपी सुविधा सभी जिला चिकित्सालय में उपलब्ध हो गई है। यूनिट के लिये एक चिकित्सक एवं 2 स्टाफ नर्स को प्रशिक्षित किया गया है। कैंसर रोग विशेषज्ञ और कैंसर की औषधियाँ प्रत्येक जिले में उपलब्ध है। जिला चिकित्सालयों में कैंसर केयर के लिये पलंग आरक्षित किये गये हैं। प्रशिक्षित डाक्टर द्वारा कैंसर कीमोथैरेपी के प्रोटोकॉल अनुसार फॉलोअप उपचार दिया जा रहा है। जिला चिकित्सालय में प्रशिक्षित चिकित्सक एवं स्टॉफ नर्स द्वारा कैंसर की जटिलता से पीड़ित मरीजों को उपचार, सर्जरी और रेडियोथैरेपी के लिये उचित टर्शरी कैंसर अस्पताल में रैफर करने के लिए मागदर्शन तथा गंभीर अवस्था में जटिलता से पीड़ित मरीजों को पेलेटिव केयर आदि सेवाएँ दी जा रही हैं। जिला अस्पताल उज्जैन में पेलेटिव केयर सेन्टर की स्थापना की गयी है। इसमें औषधियाँ एवं उपचार नि:शुल्क उपलब्ध है। जिला चिकित्सालयों में कैंसर मरीजों को आवश्यकतानुसार जाँच भी आउटसोर्स के माध्यम से नि:शुल्क दी जा रही है। प्रशिक्षित डाक्टर और स्टॉफ नर्स को समय-समय पर सतत् चिकित्सा शिक्षा देकर उनका ज्ञानवर्द्धन किया जा रहा है। टेली-मेडीसिन के माध्यम से भी कैंसर रोग विशेषज्ञों से परामर्श लेकर जिला-स्तर पर कैंसर मरीजों को उचित इलाज और मार्गदर्शन दिया जा रहा है। कैंसर केयर कार्यक्रम में 54 चिकित्सकों और 102 स्टॉफ नर्सों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। वर्ष 2017-18 में लक्षण के आधार पर संभावित कैंसर के 18 हजार 817 मरीजों का पंजीयन किया गया। साथ ही, 4,432 मरीजों का कैंसर कीमोथैरेपी प्रोटोकॉल अनुसार उपचार किया गया है।
कुपोषण को हराने में जुटी आजीविका मिशन की टीम राधा
11 May 2018
राजगढ़ जिले के विकासखण्ड खुजनेरी में ग्राम करेड़ी में आजीविका मिशन की सजग महिला राधाबाई अपनी महिला टीम के साथ कुपोषित बच्चों के लिये यशोदा माँ का रोल अदा कर रही हैं। ये महिलाएँ मिशन की सहायता से अपनी आर्थिक उन्नति के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाने में भी बहुत आगे हैं। ये सभी स्व-सहायता समूह के रूप में संगठित होकर संजीवनी अभियान से जुड़ गई हैं। इन्होंने गाँव के 26 कुपोषित बच्चों को गोद लेकर उन्हें प्रति दिन अपने खर्चे पर प्रोटीन पाउडर युक्त दूध पिलाने का जिम्मा उठाया है। इन महिलाओं ने गाँव को कुपोषण मुक्त बनाने का निश्चय किया है। खुजनेर की परियोजना अधिकारी श्रीमती पुष्पा गोयल ने बताया कि करेड़ी ग्राम में आँगनवाड़ी केंद्र संचालित है। इस केन्द्र में डेढ़ सौ बच्चों का पंजीयन है। इन आँगनवाड़ी केंद्रों में 28 बच्चे कुपोषित हैं, जिनमें से 6 बच्चों को अन्य लोगों द्वारा गोद लिया जा चुका है। शेष बच्चों को कुपोषण से मुक्त कराने की जिम्मेदारी इन महिलाओं ने ली है। इन्होंने निर्णय लिया है कि प्रति दिन आँगनवाड़ी केंद्र पर दो-दो महिलाएँ पहुँचेंगी और कुपोषित बच्चों को प्रोटीन पाउडर युक्त दूध पिलाएँगी। इन महिलाओं ने अपने इस फैसले के क्रियान्वयन में होने वाले व्यय को अपनी बचत से गठित आपदा कोष से समायोजित करने की व्यवस्था की है।
टी.बी. मुक्त समाज निर्माण के लिये स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग लिया जाये
3 May 2018
राज्यपाल श्रीमती आनन्दीबेन पटेल ने कहा है कि टी.बी. पीड़ितों की मदद के लिए सामाजिक एवं स्वयंसेवी संस्थाओं और सम्पन्न तबके की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित की जाये। उन्होंने कहा कि समाजसेवी कम से कम एक टी.बी. पीड़ित बच्चे को गोद लें। राज्यपाल ने आज जबलपुर सर्किट हाउस में टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान यह बात कही। श्रीमती पटेल ने कहा कि वर्ष 2022 तक देश को टी.बी. मुक्त बनाने के प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने के लिए समाज के सभी वर्गों की सहभागिता जरूरी है। इस दिशा में कारगर पहल की जाये। उन्होंने कहा कि सरकार के अलावा सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से भी टी.बी. मरीजों के लिये पौष्टिक आहार की व्यवस्था की जा सकती है । श्रीमती पटेल ने कहा कि कोई भी रोग ऐसा नहीं, जिसे निश्चय और दृढ़इच्छा शक्ति से हराया नहीं जा सके। टी.बी. के मरीज को पौष्टिक खाद्य पदार्थ जैसे फल, दूध, घी आदि की जरूरत होती है । इसलिए समाज अपना दायित्व निभाते हुए रोगियों तक यह सामग्री पहुँचायें तथा रोगियों द्वारा इसका सेवन सुनिश्चित करने की ओर भी ध्यान दें। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने सेठ गोविन्ददास जिला चिकित्सालय (विक्टोरिया हॉस्पिटल) के टी.बी. वार्ड एवं मेडिसिन वार्ड का निरीक्षण किया और मरीजों को फल वितरित किया । राज्यपाल ने मरीजों से बातचीत की और इलाज की भी जानकारी ली। राज्यपाल द्वारा हाइपरसोनिक विक्टोटॉमी मशीन का लोकार्पण राज्यपाल श्रीमती पटेल ने जबलपुर में जोतपुर स्थित दादा वीरेन्द्रपुरी जी नेत्र संस्थान देवजी नेत्रालय में अत्याधुनिक तकनीक वाली मशीन विटीज हाइपरसोनिक विक्टोटॉमी मशीन का लोकार्पण किया। राज्यपाल ने अस्पताल द्वारा गरीबों के लिए नि:शुल्क ऑपरेशन शिविरों के आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि आँखों का इलाज और मरीजों की सेवा पुण्य का कार्य है ।
जिला चिकित्सालय शिवपुरी को मिला "निरन्तर उत्कृष्टता पुरस्कार"
9 April 2018
जिला चिकित्सालय शिवपुरी को भारत सरकार द्वारा कायाकल्प अभियान में 'निरंतर उत्कृष्टता पुरस्कार' प्रदाय किया गया है। बीस लाख रूपये का यह पुरस्कार निरंतर प्रयास कर गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदायगी एवं स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण की दिशा में उल्लेखनीय कार्यो के लिये दिया गया है। विगत वर्ष की तरह वर्ष 2017-18 में भी जिला चिकित्सालय शिवपुरी द्वारा कायाकल्प अभियान के तहत उत्कृष्ट कार्य किया गया है। इससे जनमानस में स्वास्थ्य संस्थाओं के प्रति विश्वास सुद्दढ़ हुआ है। संस्था द्वारा किए गए निरंतर प्रयासों के लिये जिला चिकित्सालय शिवपुरी को राज्य में 'कायाकल्प कन्टीन्यूइड एक्सीलेंस' पुरस्कार से भी पुरस्कृत किया गया है।
तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थाअेां के लिए राष्ट्रीय अभियान चलाने की मांग सांसद के नेतृत्व में मिला प्रतिनिधिमंडल
29 March 2018
नई दिल्ली 29 मार्च। बिहार के सिवान से सांसद ओमप्रकाश के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलकर देशभर में बच्चों व युवाअेंा को व्यसनों से बचाने की अपील की और राष्ट्रीय स्तर पर तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थाअेां के लिए अभियान चलाने के लिए ज्ञापन दिया। सांसद ओमप्रकाश ने महामहिम राष्ट्रपति को बताया कि यह बहुत ही गंभीर समस्या है, बच्चेंा, युवाअेां को इसके दुष्परिणामेंा की जानकारी है लेकिन वे फिर भी इसका सेवन कर रहे है। इसकी रोकथाम के लिए जागरुकता कार्यक्रम चलाना काफी नही है, इसके लिए इस अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर चलाना होगा। इसके साथ ही बच्चों व युवाअेंा को इस अभियान के तहत संकल्प लेना होगा कि इसका सेवन नही करेंगे। इस तरह के अभियान की मुहिम की जिम्मेदारी भी इनके हाथों में हो, तभी वे सार्थक होंगे। सांसद ओमप्रकाश ने बताया कि संबध हैल्थ फांउडेशन (एसएचएफ) वायॅस आॅफ टोबेको विक्टिम देशभर में तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थानों के लिए काम कर रहें है। खासतौर पर मध्यप्रददेश और महाराष्ट्र के शिक्षण संस्थाअेां को तंबाकू मुक्त कराया है। जिसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे है। आजकल युवाअेां में तंबाकू का प्रचलन बढ़ रहा है, जो कि बेहद चितंा का विषय है। लोक स्वास्थ्य के लिए यह अतिआवश्यक है कि तंबाकू से नष्ट होने वाली अपनी युवा पीढ़ी को बचाने की जरुरत है। संबध हैल्थ फांउडेशन (एसएचएफ) के संजय सेठ ने बताया कि देशभर में 50 प्रतिशत कैंसर तंबाकू के कारण होता है वंही 90 प्रतिशत मुंह का कैंसर भी तंबाकू के कारण हेाता है। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (गेट्स-2) 2017 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 28.6 प्रतिशत लोग किसी न किसी रुप मंेे तंबाकू उत्पादों का उपभोग करतें है। प्रतिवर्ष देशभर में 10 लाख लोग इससे दम तोड़ रहे है। वंही देशभर में 5500 बच्चे हर दिन तंबाकू सेवन की शुरुआत कर रहें है और वयस्क होने की आयु से पहले ही तम्बाकू के आदी हो जाते हैं। जेा कि बेहद चिंताजनक है। देश में 92 प्रतिशत युवा मानते है कि धूम्रपान ही गंभीर बीमारियों का कारक है वंही 96 प्रतिशत युवा आबादी मानती है कि चबाने वाला तंबाकू गंभीर बीमारियों का मुख्य कारक है। सेठ ने बताया कि तंबाकू सेवन करने वाले केवल तीन प्रतिशत लोग ही इस लत को छोड़ने में सक्षम हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि हम बच्चों को तम्बाकू सेवन की पहल करने से ही रोके। उन्होने महामहिम राष्ट्रपति को बताया कि इसके लिए तंबाकू के इस्तेमाल और रक्षात्मक नियमों की निगरानी रखकर, शिक्षण संस्थाओं केा तंबाकु मुक्त बनाकर इसको सफल बनाया जा सकता है और युवाअेां को इससे बचाया जा सकता है। प्रतिनिधिमंडल में की संबध हैल्थ फांउडेशन के संजय सेठ, वायस आॅफ टोबेको विक्टिमस की डायरेक्टर आशिमा सरीन, एम्स के डा.शिव चैधरी, विभोर निझावन, डा.मुदित अग्रवाल, प्रदीप माथुर, दीपक छीबा, अरविंद माथुर इत्यादि शामिल थे।
निरोगी और सुखी जीवन का आधार है आयुर्वेद : मंत्री श्री पटेल
23 March 2018
आयुष एवं कुटीर ग्रामोद्योग राज्य मंत्री श्री जालम सिंह पटेल ने आज आयुष केम्पस स्थित शासकीय स्वशासी होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में नव निर्मित 'हेनीमन सभागारें' का लोकार्पण किया। इसी सभागार में आज से एच.आई.वी. निदान एवं प्रबंधन पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ भी मंत्री श्री पटेल ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मंत्री श्री पटेल ने कहा कि आयुष से एच.आई.वी. के निदान की पहल अनुकरर्णीय है, हमारे चिकित्सक इस क्षेत्र में बेहतर कार्य और प्रयोगों से आमजन को लाभ पहुँचायेंगे। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नही बल्कि सम्पर्ण वेद है। श्री पटेल ने कहा कि आयुष चिकित्सक अपने कर्तव्यों के निर्वहन के साथ पीड़ित मानव की सेवा भी कर रहे हैं। श्री पटेल ने कहा कि आयुर्वेद पद्धति प्रकृति से जुड़ी है। इसे अपनाकर व्यक्ति निरोगी और सुखी जीवन पाते हैं। उन्होंने चिकित्सा सेवा को परोपकार के रूप में लिए जाने का आव्हान किया। प्रमुख सचिव सह आयुक्त श्रीमती शिखा दुबे ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए विभागीय गतिविधियों सहित प्रशिक्षण कार्यक्रम के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी महाविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक एवं अध्ययनरत विद्यार्थीगण उपस्थित थे।
राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के पहले दिन लक्ष्य के 60 प्रतिशत बच्चों ने पी दवा
11 March 2018
राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के द्वितीय चरण में आज पहले दिन प्रदेश में 0 से 5 वर्ष तक के लाखों बच्चों ने पोलियो की खुराक ली। प्रदेश में एक करोड़ 6 लाख लक्ष्य के विरुद्ध आज लगभग 60 प्रतिशत बच्चों ने पोलियो की दवा पी। जनसम्पर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने दतिया, सागर में गृह मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह, उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया ने ग्वालियर, कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन ने बालाघाट, और स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्री शरद जैन ने जबलपुर में बच्चों को पोलियो ड्राप पिलाई। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के सीहोर जिले के रेहटी में हुए कार्यक्रम के दौरान भी अनेक बच्चों को पोलियो की दवा दी गई। भोपाल में लगभग एक लाख 26 हजार बच्चों को पोलियो की खुराक दी गई। राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. संतोष शुक्ला ने बताया कि स्वास्थ्य कर्मचारियों ने आज सेवा के अनूठे उदाहरण प्रस्तुत किये। जे.पी. अस्पताल भोपाल की एएनएम श्रीमती राधा शर्मा इन दिनों चाइल्ड केयर अवकाश पर हैं। इसके बावजूद वे स्व-प्रेरणा से अभियान में शामिल हुईं। भिण्ड जिले के श्री रामशंकर शर्मा के घर गमी होने के बावजूद वे अभियान में शामिल हुए। कोलार के स्वास्थ्य अधिकारी ने रोडवेज की बसों में जाकर बच्चों को दवा पिलाई। राजगढ़ जिले में उर्स मेले में पोलियो बूथ लगाकर बच्चों को दवा पिलाई गई। वहीं रायसेन की विशेष अदालत में हाई कोर्ट जज ने स्वयं पात्र बच्चों को दवा पिलाई। एनसीसी कार्यकर्ता, प्रशिक्षु नर्सिंग, जन अभियान परिषद और आजीविका मिशन सदस्य, सेवानिवृत्त स्वास्थ्य कर्मी, नवीन पदस्थापित एएनएम, वनांचल कार्यक्रम में वनकर्मी, आयुर्वेद मेडिकल ऑफिसर, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, जन स्वास्थ्य रक्षक, आँगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका, आशा सहयोगी, पैरामेडिकल स्टाफ, पॉलीटेक्नीक कॉलेज, मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राएँ, स्वयं सेवकों आदि ने भी उत्साह से अभियान में भाग लिया। इन्हें स्वास्थ्य विभाग ने प्रशिक्षित किया था। अभियान में कुछ जिलों में नकारात्मक गतिविधियों की जानकारी मिली। इनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विदिशा के विकास खंड त्यौंदा विकासखंड के फोकल पांइन्ट पर हड़ताली कर्मचारियों द्वारा रुकावट पैदा की गई। इनके विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। बड़वानी जिले के सेंधवा में भी अज्ञात व्यक्तियों ने 4 बूथ केन्द्रों पर टीकाकर्मियों को धमकाया। इसी तरह नरसिंहपुर, छिन्दवाड़ा के जुन्‍नारदेव और सतना जिले के अमरपाटन में भी अभियान में विघ्न डालने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है।
कैंसर मरीजों का एम.वाय. अस्पताल में नि:शुल्क बोनमैरो ट्रांसप्लांट शुरू
11 March 2018
इंदौर के शासकीय महात्मा गाँधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध महाराज यशवंत राव चिकित्सालय में स्थित बोनमैरो ट्रांसप्लांट सेन्टर में उपचार आरंभ हो गया है। पहली बार 3 मार्च 2018 को जूनी इंदौर के श्री उपेन्द्र और नीमच की श्रीमती कुसुम का बोनमैरो ट्रांसप्लांट नि:शुल्क किया गया है। देश की निजी संस्थाओं में बोनमैरो ट्रांसप्लांट की लागत 15 से 25 लाख रुपये है जबकि प्रदेश के एम.वाय. हॉस्पिटल में यह नि:शुल्क किया जा रहा है। इस शासकीय संस्थान में गरीब मरीजों का नि:शुल्क बोनमैरो ट्रांसप्लांट प्रदेश ही नहीं, देश में भी एक अनूठी पहल है। यहां एपीएल मरीजों को भी सस्ती दर पर इलाज मिलेगा। पहली बार 3 मार्च को श्री उपेन्द्र की बोनमैरो ट्रांसप्लांट की प्रकिया शुरू हुई है। इसमें ब्लड से करीब 400 मि. मी. स्टेम सेल निकाले गये। इस प्रक्रिया में 7 घंटे लगे। इन्हें फ्रीज करके रखा गया। अगले दिन शरीर में ट्रांसप्लांट किये गये। श्री उपेन्द्र (33) को दो हफ्तों से कीमोथेरेपी दी जा रही थी। नीमच की श्रीमती कुसुम (45) को 5 माह पहले ही कैंसर होने का पता चला। नीमच और उदयपुर में इलाज कराने के बाद इंदौर आई हैं। हिमोग्लोबिन मात्र 3 ग्राम बचा था। बाल भी झड़ने लगे थे। डॉक्टरों ने बताया कि बोनमैरो ट्रांसप्लांट के बाद उन्हें अब कीमोथेरेपी और अन्य जाँचें नहीं करवानी पड़ेगी। महाराज यशवंतराव चिकित्सालाय में 5 करोड़ की लागत से स्थापित बोनमैरो ट्रांसप्लांट सेन्टर में बच्चों को होने वाली बीमारियाँ थैलीसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, एप्लास्टिक एनीमिया का बोनमैरो ट्रांसप्लांट द्वारा उपचार किया जाएगा। सेन्टर विश्वस्तरीय गुणवत्ता मापदंडों के अनुसार स्थापित किया गया है। सेन्टर में विश्व ख्याति प्राप्त बोनमैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञों की मानद सेवाएं ली जा रही हैं। इंदौर के चिकित्सकीय, नर्सिंग और पैरामेडीकल स्टाफ को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों में प्रशिक्षण दिलाया गया है। राज्य शासन ने डॉ. प्रीति मालपानी और डॉ. पी. चौधरी को अमेरिका के कोलम्बिया विश्वविद्यालय में 6 माह का बोनमैरो ट्रांसप्लांट का प्रशिक्षण दिलाया है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 20 जनवरी 2018 को इस सेन्टर का लोकार्पण किया था।
संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवायें प्रभावित नहीं होंगी - मिशन संचालक श्री विश्वनाथन
26 February 2018
प्रदेश में सभी टीकाकरण सत्र नियमित रूप से आयोजित किये जाने के लिये वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। किसी भी स्थान पर पूर्व से नियोजित टीकाकरण सत्रों को प्रभावित नहीं होने दिया जायेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन म.प्र के मिशन संचालक श्री एस.विश्वनाथन ने संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के परिप्रेक्ष्य में की गई इस व्यवस्था की जानकारी दी। मिशन संचालक ने बताया कि गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के लिये निर्धारित तालिका अनुसार टीकाकरण सेवायें उपलब्ध कराने के लिये प्रदेश शासन संकल्पित है। प्रदेश में चिन्हित स्थानों पर टीकाकरण सत्र आयोजित किये जाते हैं। संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से लगभग 18 प्रतिशत टीकाकरण सत्रों के प्रभावित होने को अनुमान की स्थिति से निपटने के लिये समीक्षा उपरांत अतिरिक्त प्रशिक्षित मानव संसाधन को नियोजित कर टीकाकरण सत्रों के सुचारू संचालन हेतु व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था अंतर्गत सेवानिवृत्त एएनएन, एलएचवी तथा स्टाफ नर्सो को प्रभावित टीकाकरण सत्र स्थलों पर भेजकर टीकाकरण कार्य करवाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, नर्सिंग शालाओं की भी सहायता ली जा रही है। इस अतिरिक्त कार्य हेतु प्रति सत्र के मान से मानदेय भी दिया जाएगा। हड़ताल से प्रभावित होने वाले अनुमानित 1600 टीकाकरण सत्रों के सुचारू संचालन के लिये प्रत्येक सत्र की निगरानी की जाएगी । यदि किसी स्थल पर टीकाकरण सत्र निर्धारित दिनांक को नहीं हो पाता है, तो उसके अगले दिन सत्र आयोजित करवाया जायेगा। मिशन संचालक श्री एस. विश्वनाथन ने कहा है कि नागरिकों को गुणवत्तापूर्वक स्वास्थ्य सेवायें देने के प्रदेश शासन के दायित्व का सुचारू निर्वहन सुनिश्चित किया जा रहा है। हड़ताल से आम नागरिकों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
राजस्व मंत्री श्री गुप्ता ने करुणाधाम में किया ओपीडी सेवा का शुभारंभ
25 February 2018
राजस्व मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने करुणाधाम आश्रम नेहरु नगर में ओपीडी स्वास्थ्य सेवा का शुभारंभ किया। ओपीडी में हर माह के अंतिम रविवार को सुबह 10 से 12 बजे तक एम्स या हमीदिया के न्यूरोलाजिस्ट मरीजों का निःशुल्क इलाज करेंगे। यह कार्य नेशनल मेडिकोज आर्गेनाईजेशन एवं भारतीय विचार संस्थान के सहयोग से शुरु किया गया है। इसके अतिरिक्त डॉ रायजादा रोज सुबह 10 से 12 बजे तक होम्योपैथी उपचार करते हैं। डॉ रायजादा ने बताया कि जल्द ही दांतों के उपचार की व्यवस्था भी की जाएगी। इस दौरान माटी कला बोर्ड के चेयरमैन श्री रामदयाल प्रजापति एवं समाजसेवी उपस्थित थे।
बेहतर स्वास्थ सेवाओं से नवजात शिशु मृत्यु दर में भारी कमी
22 February 2018
प्रदेश में गर्भवती माताओं की बेहतर देखभाल से नवजात शिशु मृत्यु दर 51 से घटकर 32 हो गई है। प्रदेश में गर्भवती माताओं का गर्भधारण पता चलते ही पंजीयन कर नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था की गई है। राज्य में सामान्य एवं जोखिम वाली गर्भधात्री महिलाओं का सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया जा रहा है। नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे वर्ष 2005-06 के अनुसार 26.2 प्रतिशत प्रसव ही स्वास्थ्य संस्था में में कराये जाते थे। वर्ष 2015-16 के डाटा के अनुसार 80.8 प्रतिशत प्रसव स्वास्थ्य संस्था में कराये जा रहे हैं। सुरक्षित प्रसव के लिये प्रदेश में 1536 शासकीय प्रसव केन्द्र संचालित किये जा रहे हैं। जननी-शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के माध्यम से सुरक्षित प्रसव के लिये नि:शुल्क परिवहन, औषधि उपचार, ब्लड ट्रांसफ्यूजन एवं नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था उपलब्ध करवायी जा रही है। जननी सुरक्षा योजना में ग्रामीण प्रसूताओं को 1400 और शहरी प्रसूताओं को 1000 रुपये की राशि प्रोत्साहन स्वरूप दी जा रही है। ग्राम एवं स्वास्थ्य संस्था स्तर पर महिलाओं और गर्भवती महिलाओं का परीक्षण कर उपचार करने के मकसद से वर्ष में एक बार महिला स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किये जा रहे हैं। वर्ष 2015-16 से अभी तक 58 लाख से अधिक महिलाओं को स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाई गई हैं। रोशनी क्लीनिक व्यवस्था में गर्भवती महिलाओं की प्रसव संबंधी तथा अन्य बीमारियों की जाँच एवं उपचार के लिये सप्ताह में प्रत्येक बुधवार जिला चिकित्सालय में गई है। इन क्लीनिक में रेफर महिलाओं को आवश्यक उपचार कर दवाइयाँ उपलब्ध करवाई जा रही हैं। वर्ष 2015-16 से अभी तक एक लाख 41 हजार महिलाओं का परीक्षण का उपचार किया गया है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना में माह की 9 तारीख को सरकारी अस्पताल में प्रायवेट और सरकारी डॉक्टरों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की जाँच की जा रही है। अगस्त-2016 से नवम्बर-2017 तक 10 लाख 11 हजार 401 गर्भवती महिलाओं की विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा प्रसवपूर्व जाँच करवाई गई है। न्यू बोर्न केयर इकाई नवजात शिशुओं की देखभाल करने के लिये 1536 प्रसव केन्द्रों पर संचालित की जा रही हैं। नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई- वर्ष 2008 में प्रदेश के गुना और शिवपुरी जिला अस्पताल में गंभीर रूप से बीमार एवं कम वर्तमान में 49 जिला अस्पताल और 5 मेडिकल कॉलेज में 54 इकाइयाँ संचालित हो रही हैं। इन इकाइयों में जन्म के समय शिशु को सांस लेने में होने वाली कठिनाई, पीलिया, अन्य गंभीर बीमारी के इलाज की व्यवस्था है। इन इकाईयों में वर्ष 2011-12 से जनवरी-2018 तक 4 लाख 96 हजार 326 नवजात शिशुओं का उपचार किया गया। प्रदेश के 60 चिन्हित सिविल अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य संस्था पर नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाइयाँ संचालित हो रही हैं। अब तक इन इकाइयों में 76 हजार से अधिक नवजात शिशुओं को रखकर उनका उपचार किया गया है। बारह वर्ष तक के बच्चों में अति गंभीर लक्षणों के होने पर उन्हें तत्काल उपचार उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से बाल गहन चिकित्सा इकाई का निर्माण किया गया है। अभी यह इकाइयाँ 7 जिलों मुरैना, दतिया, शिवपुरी, गुना, रतलाम, भोपाल और छिन्दवाड़ा में चल रही हैं। वर्ष 2015-16 से जनवरी-2018 तक 29 हजार 868 बच्चों का इन इकाइयों में उपचार किया गया है। पीडियाट्रिक-इमरजेंसी ट्रायऐज एवं ट्रीटमेंट यूनिट में गंभीर रूप से बीमार शिशु के चिकित्सालय आने पर लक्षणों के आधार पर उपचार किया जा रहा है। प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालयों में यह यूनिट कार्य कर रही है। इन यूनिट में अब तक 22 हजार 163 बच्चों को भर्ती कर उनका उपचार किया गया। कुपोषित बच्चों को भर्ती कर उपचार करने के लिये पोषण पुनर्वास केन्द्र की स्थापना की गई है। इन केन्द्रों पर 5 वर्ष तक के कुपोषित बच्चों को 14 दिनों तक माता के साथ भर्ती कर उपचारित किये जाने की सुविधा है । इन केन्द्रों में वर्ष 2006-07 से दिसम्बर-2017 तक 5 लाख 97 हजार 860 कुपोषित बच्चों का उपचार किया गया। राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम में बच्चों को 4 प्रकार के वर्ग में विभाजित कर आवश्यक उपचार प्रदाय किया जा रहा है। वर्ष 2015-16 से नवम्बर-2017 तक 4 करोड़ 35 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें से 25 लाख 67 हजार बच्चों को उपचारित किया गया। करीब 52 हजार 124 बच्चों की सर्जरी की गई। चिकित्सा इकाइयों में नवजात शिशु के स्थिरीकरण के बाद परिजनों को नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल के लिये दक्ष किया जाता है, जिससे शिशु की घर पर बेहतर तरीके से देखभाल की जा सके। जन्म से 28 दिन की अवधि नवजात शिशु के लिये अंत्यंत संवेदनशील समय है। इस अवधि में ही शिशुओं की मृत्यु की सर्वाधिक आशंका होती है। इस कार्यक्रम में संस्थागत प्रसव में 6 तथा घर पर हुए प्रसव पर आशा कार्यकर्ता द्वारा 7 बार भेंट की जाती हैं। आशा कार्यकर्ता द्वारा कम वजन के बच्चों के घर में निश्चित समय अवधि में भेंट की जाती है। भेंट के दौरान टीकाकरण, स्वच्छता, ओआरएस का प्रयोग, निमोनिया की पहचान, स्तनपान आदि के बारे में जानकारी साझा की जाती है। प्रदेश में जन-समुदाय को बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के मकसद से दस्तक अभियान वर्ष 2017 से शुरू किया गया है। इसमें 76 लाख 68 हजार 973 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। गंभीर कुपोषित 26 हजार 973 बच्चों की पहचान की गई। इसमें से 8 हजार 256 बच्चों को पोषण-पुनर्वास केन्द्र में भर्ती कर उपचारित किया गया। अति गंभीर खून की कमी से पीड़ित 1476 बच्चों के लिये रक्ताधन की व्यवस्था की गई। दस्त रोग के 27 हजार 162, निमोनिया के 6 हजार 509 और अन्य बीमारियों के 18 हजार 696 बच्चों में लक्षण पाये जाने पर उनका उपचार किया गया। प्रदेश में 9 माह से 5 वर्ष तक के 63 लाख 33 हजार बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाई गई। जन्मजात विकृति वाले 6 हजार 704 बच्चों की पहचान कर उनके उपचार की व्यवस्था की गई। राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत प्रभावित 14 जिलों में 13 लाख 31 हजार 920 परिवारों में नमक के नमूनों में आयोडीन की उपलब्धता की जाँच की गई। इन सभी कार्यक्रमों के कारण वर्ष 2005 में शिशु मृत्यु दर 76 और नवजात शिशु मृत्यु दर 51 से घटकर वर्ष 2016 में क्रमश: 47 एवं 32 प्रति हजार जीवित जन्म रह गई है।
कुपोषण नियंत्रण में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था वरदान सिद्ध हुई-मंत्री श्री भार्गव
21 February 2018
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने कहा है कि कुपोषण के विरुद्ध प्रदेश में चलाए जा रहे अभियान में 'मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम'' वरदान सिद्ध हो रहा है। प्रदेश के 85 विकासखण्डों की 25 हजार प्राथमिक शालाओं के 11.50 लाख विद्यार्थियों को अतिरिक्त पोषण-आहार के रूप में गुड़ और मूंगफली की चिक्की प्रदान की जाती हैं। इसी तरह मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश की एक लाख 14 हजार प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं के 60 लाख से अधिक बच्चों को प्रति दिन स्वादिष्ट मध्यान्ह भोजन भी दिया जा रहा है। मंत्री श्री भार्गव ने बताया कि प्रदेश में मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2004 में विद्यालयों में बच्चों को पका हुआ भोजन देने की व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था के प्रथम चरण में यह योजना केवल प्राथमिक विद्यालयों में लागू की गई थी। वर्ष 2008 से माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों के लिये भी मध्यान्ह भोजन वितरण व्यवस्था प्रारंभ की गई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के एक लाख 14 हजार प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में दर्ज 64 लाख 11 हजार छात्र-छात्राओं में से 60 लाख 31 हजार बच्चे इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। कार्यक्रम में पारदर्शिता, नियमितता और गुणवत्ता नियंत्रण के लिये स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ही विद्यालयों में भोजन तैयार कर दिये जाने के निर्देश दिये गये हैं। समूहों को खाद्यान्न राज्य स्तर से सीधे प्रदाय किया जाता है। श्री भार्गव ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा कुपोषण के विरुद्ध जंग से भी इस योजना को जोड़ा गया है। प्रदेश के 85 विकासखण्ड के 25 हजार विद्यालयों के 11.50 लाख विद्यार्थियों को योजना के माध्यम से अतिरिक्त पोषण-आहार सप्ताह में तीन दिन प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा 35 हजार 416 विद्यालयों को एलपीजी गैस कनेक्शन प्रदान किये जा चुके हैं, जिनसे मध्यान्ह भोजन तैयार किया जाता है। श्री भार्गव ने जानकारी दी कि विद्यालय में रसोई-घर की स्वच्छता और भोजन की पौष्टिकता को प्रोत्साहित करने के लिये प्रत्येक जिले में तीन स्वच्छ किचन को क्रमश: 50 हजार, 30 हजार और 20 हजार रुपये का पुरस्कार भी प्रदान किया जाता है।
जन्मजात रोगों से घिरे बच्चों को मध्यप्रदेश में मिल रही नि:शुल्क चिकित्सा
21 February 2018
राज्य शासन द्वारा ह्रदय रोग, मूक-बधिर, कटे-फटे होंठ आदि बीमारियों के साथ जन्मे बच्चों को रोगमुक्त बनाने के लिये नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।गंभीर ह्रदय रोग से पीड़ित था कृष्णा सीहोर जिले के ग्राम निवारिया का 5 वर्षीय बालक आज स्वस्थ है राज्य शासन द्वारा ह्रदय रोग, मूक-बधिर, कटे-फटे होंठ आदि बीमारियों के साथ जन्मे बच्चों को रोगमुक्त बनाने के लिये नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।गंभीर ह्रदय रोग से पीड़ित था कृष्णा सीहोर जिले के ग्राम निवारिया का 5 वर्षीय बालक आज स्वस्थ है और परिवार प्रसन्न। कृष्णा का डेढ़ वर्ष की उम्र तक भी चलने-बोलने में कठिनाई, खाने में अरुचि, निरंतर रोना, रोते समय होंठ नीले पड़ जाना आदि जारी रहा, तो उसके माता-पिता बालीबाई और जसमत सिंह ने डॉक्टर को दिखाया। चिकित्सीय जाँच में वह गंभीर ह्रदय रोग से ग्रसित पाया गया। माता-पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि वे इतना बड़ा खर्च उठाने में बिलकुल समर्थ नहीं थे। एक दिन जसमत को किसी ने बताया कि सीहोर में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से मिलो तो बच्चे का नि:शुल्क इलाज संभव है। सीएमएचओ ने बताया कि ह्रदय रोग की गंभीरता को देखते हुए कृष्णा के तीन ऑपरेशन होंगे। जाँच के बाद कृष्णा को तुरंत शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र (डीईआईसी) भिजवाया गया। केन्द्र में उसके स्वास्थ्य परीक्षण के बाद एक निजी अस्पताल में पहला सफल ऑपरेशन किया गया, परंतु कृष्णा की कमजोर हालत को देखते हुए यह ऑपरेशन देश के किसी बड़े अस्पताल में ही संभव था। कृष्णा का दूसरा सफल ऑपरेशन 22 जनवरी, 2018 को बैंगलुरु के नारायणा ह्रदयालय में एसआरसी चिल्ड्रन हॉस्पिटल, मुम्बई के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा किया गया। इस ऑपरेशन पर खर्च हुए 3 लाख 20 हजार रुपये की प्रतिपूर्ति मुख्यमंत्री बाल ह्रदय उपचार योजना से की गई। कृष्णा आज स्वस्थ है। फॉलोअप विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा शासकीय नियमानुसार उसका निरंतर नि:शुल्क जारी है।
सरकारी योजनाओं से कमजोर वर्गों को मिल रही नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा
19 February 2018
प्रदेश में राज्य बीमारी सहायता, मुख्यमंत्री बाल ह्रदय योजना, मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना, नि:शुल्क कीमोथैरेपी-डायलिसिस योजना आदि से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बड़ी बीमारी की चपेट में आने पर नि:शुल्क शासकीय सहायता मिल रही है। अब स्वस्थ है मासूम मानसी: सिवनी जिले के ग्राम भाटीपाड़ा की दो वर्षीय मानसी जन्म से ही काफी कम वजन की थी। आँगनवाड़ी कार्यकर्ता ने जब मानसी को देखा तो उसका राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम से स्वास्थ्य परीक्षण करवाकर उसे पोषण-पुनर्वास केन्द्र में भर्ती किया। इसके बाद भी जब उसके वजन में कोई परिवर्तन नहीं आया तो टीम ने जिला-स्तरीय बाल ह्रदय रोग शिविर में जाँच की सलाह दी। जाँच में पता चला कि मानसी के दिल में छेद है। मानसी का परिवार गहरे अवसाद में डूब गया। एक तो इतनी बड़ी बीमारी और उस पर इलाज के लिये पैसे नहीं। तब टीम ने मुख्यमंत्री बाल ह्रदय उपचार योजना की जानकारी देते हुए मानसी के पिता को नि:शुल्क ऑपरेशन की सलाह दी। टीम की सहायता से नवम्बर-2017 में जबलपुर में मानसी का ऑपरेशन हुआ। आज वह स्वस्थ है, खाने-पीने लगी है और उसका वजन भी बढ़ रहा है। अब बोलने-सुनने लगी पूर्वी: पन्ना जिले में अमानगंज के प्रहलाद सोनी के घर में उस वक्त खुशियाँ छा गईं, जब लम्बे समय बाद उनके यहाँ बेटी का जन्म हुआ। कुछ समय बाद यह खुशी काफूर होने लगी, जब पता लगा कि पूर्वी बोल और सुन नहीं सकती। डॉक्टर से सलाह लेने पर पता चला कि पूर्वी काकलियर इम्पलांट की सहायता से ही सुन सकेगी। इसके लिये 6-7 लाख रुपये के खर्च की बात सुनकर माता-पिता असहाय महसूस करने लगे। इसी बीच किसी ने उनको आरबीएसके योजना की जानकारी दी और बताया कि मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना से उनकी बेटी का नि:शुल्क उपचार संभव है। जाँच के बाद डॉक्टरों ने पूर्वी को पन्ना जिला चिकित्सालय रेफर किया और सतना में पूर्वी का सफल ऑपरेशन किया गया। पूर्वी ने सुनना शुरू किया और अब बोलने भी लगी है। पूर्वी की माँ ज्योति ने ढाई वर्ष में पहली बार पूर्वी के मुंह से माँ सुना तो वह खुशी से रोने लगी। कुष्ठ रोगी दूर सिंह ह्रदय रोग से मुक्त हुए: बड़वानी जिले के आशा ग्राम की कुष्ठ उन्मूलन बस्ती में रहने वाले 41 वर्षीय दूरसिंह गुथरिया के परिवार को इनके ह्रदय रोग का पता चला तो मायूस हो गये। जानकारों ने ढाँढस बंधाया और जानकारों से सम्पर्क किया। तब राज्य बीमारी सहायता योजना का पता लगा। योजनान्तर्गत दूरसिंह का नि:शुल्क ऑपरेशन हुआ। आज दूर सिंह न केवल स्वस्थ हैं, बल्कि अपना काम भी भली-भाँति कर रहे हैं। आशा ग्राम में लिपिक के पद पर पदस्थ दूर सिंह का सफल ह्रदय ऑपरेशन इंदौर के निजी अस्पताल में नि:शुल्क हुआ। बचपन में ही माँ को कुष्ठ रोग हो जाने के कारण उनके पिता ने माँ को त्याग दिया था। दूर सिंह अपनी माँ, पत्नी और दो बच्चों के साथ कुष्ठ निवारण बस्ती में ही रहते हैं।
कुपोषण से बचाने के लिए छात्राओं का स्वास्थ्य परिक्षण कराया जाये-राज्यपाल
15 February 2018
राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि हर महाविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ साल में एक बार सभी छात्राओं के स्वास्थ, विशेष रूप से खून की जांच कराना चाहिए ताकि उनके शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा का पता लगने से कुपोषित होने से बचाया जा सकता है। हमारे खाने में सभी प्रकार के पोषण तत्व होना चाहिये, आहार की कमी से कई बीमारियाँ जन्म लेती हैं। राज्यपाल ने आज शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्वशासी महाविद्यालय के वार्षिकोत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस अवसर राज्यपाल ने बीएससी की छात्रा कु. सुमैया अली को श्री शंकरदयाल शर्मा गोल्ड मेडल, एमएससी केमेस्ट्री की छात्रा कु.निदा नाज को मुख्यमंत्री गोल्ड मेडिल, तथा बीएचएससी की छात्रा कु.जैनब मोदी को उषा जैन अवार्ड सहित अन्य छात्राओं को पुरस्कार वितरित किये। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि अच्छी माँ बनने के लिए पूर्ण पोषण की आवश्यकता है़। माँ का कर्तव्य है कि वे बच्ची को जन्म देने के साथ उसको अच्छी शिक्षा भी दे। उन्होंने कहा कि पूरे देश में बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ' अभियान चलाया जा रहा है। आज समाज तेजी से आगे बढ़ रहा है, महिलाओं में जागरूकता बढ़ रही है और भ्रूण हत्या की घटनाएं कम हो रही हैं। उससे लगता है कि अगली जनगणना पर महिलाओं की जनसंख्या पुरूषों के बराबर हो जायेगी। पुरूषों की तुलना में महिलाएं अधिक कार्य करने में सक्षम हैं। आज महिलाऐं राजनीतिक, प्रशासनिक सामाजिक क्ष्रेत्र के साथ ही सेना जैसे कठिन क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। राज्यपाल ने खुले में शौच से मुक्ति के प्रति जागरूकता अभियान चलाने पर जोर देते हुए कहा कि खुले में शौच करने की प्रवृत्ति से कई घटनाएं घटित होती हैं। इसलिए गांवों में हर घर में शौचालय बनाने के लिए प्रेरित किया जाये। प्राचार्य डॉ. रोमशा सिंह ने महाविद्यालय की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होनें बताया कि महाविद्यालय की अनेक छात्राओं का बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में चयन हुआ है। कार्यक्रम का संचालन छात्रसंघ प्रभारी डॉ.उर्मिला शिरीष ने तथा आभार छात्रसंघ की अध्यक्षा कु. उल्फा खान ने किया। राज्यपाल ने डॉ.भावना श्रीवास्तव द्वारा लिखित पुस्तक का लोकार्पण भी किया।
प्रदेश के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में उपलब्ध हैं नि:शुल्क दवाएँ
7 February 2018
सरदार वल्लभ भाई पटेल नि:शुल्क औषधि वितरण योजना में राज्य शासन द्वारा प्रदेश के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में 250 से अधिक नि:शुल्क दवाएँ उपलब्ध करवाई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह योजना वर्ष 2012 में प्रत्येक वर्ग के रोगियों को कम दामों पर निरंतर दवा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से 1595 स्वास्थ्य केन्द्रों पर आरंभ की गई थी। चिकित्सालय में ओपीडी और भर्ती रोगियों को 24 घंटे सर्वाधिक उपयोग में आने वाले जेनेरिक दवाओं की व्यवस्था की गई है। चिकित्सकों को निर्देश दिये गये हैं कि दवा के स्टॉक में उपलब्ध न होने पर निकटतम वैकल्पिक दवा दें। सभी शासकीय चिकित्सकों को ईडीएल के तहत दवा लिखने के लिये कहा गया है। गुणवत्ता परीक्षण दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये औषधियों के हर बैच के साथ एनएबीएल से अनुमोदित प्रयोगशाला की रिपोर्ट अनिवार्य की गई है। स्वास्थ्य संचालनालय ने एनएबीएल से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से 410 औषधियाँ एवं सर्जिकल सूचर की गुणवत्ता जाँच के लिये अनुबंध किया है। शेष औषधियों एवं सूचर के लिये एनएबीएल से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से गुणवत्ता परीक्षण के लिये दर निर्धारण किये जाने की कार्यवाही मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भोपाल द्वारा की जा रही है। निर्धारित न्यूनतम आवश्यक औषधियों की सूची प्रत्येक स्वास्थ्य संस्था के लिये सर्वाधिक उपयोग में आने वाली न्यूनतम आवश्यक औषधियों की सूची जिलों में उपलब्ध करवाई गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ओर सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक को न्यूनतम 250 से 300 औषधियाँ उपलब्ध करवाने के निर्देश दिये गये हैं। अनिवार्य औषधि सूची को पुनरीक्षित करने की प्रक्रिया वर्ष 2016-17 में अनिवार्य औषधि सूची को पुनरीक्षित करने की प्रक्रिया विशेषज्ञों की सहायता से की गई। विभाग ने 456 औषधियों की अनिवार्य संशोधित औषधि सूची तैयार कर ली है। एम.पी. औषधि सॉफ्टवेयर कॉर्पोरेशन द्वारा सॉफ्टवेयर 'एम.पी. औषधि'' शुरू किया गया है। इसमें ड्रग इनवेन्ट्री कंट्रोल, जो पहले जिला चिकित्सालय तक सीमित था, उसे अब प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तक उपलब्ध करवाया जाना प्रस्तावित है। स्थानीय क्रय की संशोधित व्यवस्था प्रदेश में 100 जन-औषधि केन्द्र प्रारंभ करने की कार्यवाही की जा रही है। केन्द्रों पर जेनेरिक दवाएँ कम दरों पर मिलेंगी। स्थानीय क्रय की निविदा में कम दरों पर जेनेरिक दवाएँ उपलब्ध करवाने वाली कम्पनियों को प्रतिस्पर्धा में भाग लेने के लिये आमंत्रित किया जायेगा। स्वास्थ्य विभाग की कल्याणकारी योजना
हमीदिया अस्पताल की व्यवस्था में सुधार के लिए किये गए प्रबंधकीय बदलाव
6 February 2018
हमीदिया अस्पताल में कुशल प्रबंधन और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रबंधकीय बदलाव किये गये है। इसमें सुरक्षा एवं सफाई व्यवस्था, वार्डों एवं विभागों में स्टाफ की पदस्थापना, सी.एम.ओ. नाईट निरीक्षण प्रणाली, नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी, ड्यूटी रोस्टर डिस्पले, एच.एम.आई.एस. सॉफ्टवेयर की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण कार्य शुरू किये गये हैं। हमीदिया अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए केन्द्रीय सरकार के उपक्रम की संचालित एजेंसी को सुरक्षा व्यवस्था का कार्य सौंपा गया है। इससे अस्पताल परिसर में वाहनों के आवागमन में सुधार हुआ है। वार्ड में भर्ती मरीज के परिजन को प्रवेश-पत्र जारी किये जा रहे है, जिससे वार्ड में अनावश्यक भीड़ में कमी आयी है। अधीक्षक स्वयं अस्पताल का निरीक्षण कर रहे हैं। आकस्मिक चिकित्सा विभाग में तीन पालियों में चिकित्सा अधिकारी 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं। इसी तरह नर्सों की स्थायी ड्यूटी भी लगाई जा रही है। उन्हें विभागाध्यक्ष के अधीन किया गया है। सभी वार्डों में स्टाफ नर्स, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का ड्यूटी रोस्टर प्रमुख स्थान पर डिसप्ले किया जा रहा है। अस्पताल में पूर्व में मेनुअल वर्क होने से संबंधित स्टाफ को आपसी सामंजस्य में परेशानी होती थी, जिससे विभाग का कार्य प्रभावित होता था। अस्पताल में हॉस्पिटल मैनेंजमेंट सिस्टम लगाया गया है। इससे अस्पताल में आने वाले मरीजों के उपचार में पारदर्शिता रखी जा रही है। केन्द्रीय औषधि भण्डार में उपलब्ध दवाई अन्य सामग्री का ऑनलाईन वितरण सभी वार्डो में किया जा रहा है। अस्पताल में आवश्यकतानुसार सफाई कर्मचारी, सुरक्षा कर्मचारी और वार्ड बाय और कर्मचारियों की बढ़ोत्तरी की गई है। इसके लिए फुल प्रूफ मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया गया है, जिसमें विभिन्न लेवल पर अधिकारियों एवं सुपरवाईजर को पदस्थ किया गया है। साथ ही कार्य क्षेत्र के हिसाब से एस.ओ.पी. बनाई गई है, इससे विभिन्न व्यवस्थाओं पर नियंत्रण किया जा रहा है।
राजस्व मंत्री श्री गुप्ता द्वारा मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवा शिविर का शुभारंभ
1 February 2018
राजस्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने शासकीय जयप्रकाश चिकित्सालय में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवा शिविर का शुभारंभ किया। उन्होंने श्री शाहिद हुसैन को 97 हजार रुपये और श्री छोटेलाल साहू को एक लाख 62 हजार रुपये की राज्य बीमारी सहायता राशि के स्वीकृति पत्र दिये। श्री गुप्त ने कहा कि शिविर में आने वाले सभी मरीजों का नि:शुल्क उपचार किया जायेगा। उन्होंने बताया कि शिविर में प्रायवेट डॉक्टर भी सेवाएँ दे रहे हैं। श्री गुप्ता ने बताया की काटजू हास्पीटल को भी 100 बेड का बनाया जायेगा। इस दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी श्री सुधीर जेसानी एवं अन्य चिकित्सक उपस्थित थे।
हमीदिया अस्पताल में पहली बार "पेंशन्ट फ्रैंडली" उपचार की व्यवस्था शुरू
1 February 2018
भोपाल के हमीदिया अस्पताल में मरीजों को बेहतर उपचार के लिये 'पेंशन्ट फ्रैंडली' बनाने की व्यवस्था शुरू की गई है। इस व्यवस्था में रजिस्ट्रेशन काउंटर, पूछ-ताछ केन्द्र, साईनेज बोर्ड एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की पदस्थापना की गई है। ये सुविधायें पूर्व में अस्पताल में नहीं थीं। प्रशासनिक फेरबदल किये जाने के बाद अस्पताल में अनेक सुधार भी हुए हैं। अस्पताल में पहली बार ऑनलाइन अपाईनमेंट सिस्टम जल्द लागू किया जा रहा है। इस सिस्टम में मरीज घर बैठे उपचार के लिये अपाईनमेंट लेकर अपना रजिट्रेशन कर सकेंगे। रजिस्ट्रेशन में पर्चा एवं फ्री स्लिप की व्यवस्था भी मरीजों को ऑनलाइन दी जाएगी, जिससे मरीजों को रजिस्ट्रेशन नम्बर के आधार पर दवाइयाँ अस्पताल के काउंटर से मिलेंगी। हमीदिया अस्पताल में मरीजों के रजिस्ट्रेशन काउंटर की संख्या 4 से बढ़ाकर 10 कर दी गई है। इससे मरीजों को रजिस्ट्रेशन के लिये लम्बी कतार में इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मरीजों के लिये पूछताछ केन्द्र स्थापित किये गये हैं, जिनमें तीनों पालियों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। इससे आने वाले मरीजों को कम समय में उचित उपचार का मार्गदर्शन मिलेगा। इसी तरह, अस्पताल में आवश्यक स्थानों पर साईनेज बोर्ड लगाये गये हैं, जिससे मरीजों को उपचार के लिये केन्द्रों तक जाने में कठिनाई नहीं होगी। अस्पताल में मरीजों को उपचार से संबंधित जानकारी और मार्गदर्शन देने के लिये 24 घंटे सामाजिक कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लागाई जा रही है। उनकी मॉनीटरिंग हमीदिया अस्पताल के विभागाध्यक्ष करेंगे।
मंत्री डॉ. मिश्र ने बच्चों को पल्स पोलियो की दवा पिलाई
28 January 2018
जनसम्पर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने दतिया की राजघाट कॉलोनी से पल्स पोलिया अभियान की शुरूआत की। उन्होंने नन्हे बच्चों को पल्स पोलियो की दवा पिलाई। डॉ. मिश्र ने पल्स पोलियो अभियान को सफल बनाने के लिये मोटर साईकिल रैली को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। जनसम्पर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने दतिया जिले की अगोरा ग्राम पंचायत के ग्राम आनंदपुर पहुँचकर अम्बेडकर प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान बौद्ध संत भी उपस्थित थे। डॉ. मिश्र ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर देव तुल्य मानव थे। मध्यप्रदेश एवं केन्द्र सरकार द्वारा उनकी स्मृति को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए नई दिल्ली, महू, तथा लंदन सहित पांच स्थानों पर बाबा साहब की स्मृति में तीर्थ स्थल बनाए गए हैं।
दतिया में होगी ई-अस्पताल सुविधा : केन्द्रीय मंत्री श्री प्रसाद
28 January 2018
केन्द्रीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं कानून मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद ने दतिया प्रवास के दौरान दतिया जिला अस्पताल में 'ई-अस्पताल' की सुविधा विकसित करने की घोषणा की है। ई-अस्पताल में ग्रामीण क्षेत्र में बैठा व्यक्ति भी टेलीक्रांफ्रेसिंग द्वारा जिला चिकित्सालय के विशेषज्ञों की सलाह लेकर अपना ईलाज करवा सकता है। दतिया जिला अस्पताल की बिस्तर क्षमता 300 है। केन्द्रीय मंत्री श्री प्रसाद ने शनिवार को दतिया में अधिकारियों कहा कि दतिया धार्मिक नगरी है। यहां पर डिजीटल लेनदेन को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने पीताम्बरा पीठ पहुंच कर पूजा-अर्चना भी की।
प्रदेश की पहली शासकीय बोन-मेरो ट्रांसप्लांट यूनिट एम. वाय. अस्पताल इंदौर में शुरू
23 January 2018
मध्यप्रदेश में पहली बार एम.वाय शासकीय अस्पताल इंदौर में बोन-मेरो ट्रांसप्लांट की यूनिट स्थापित की गई है। यूनिट में ट्रांसप्लांट की शुरूआत थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों से की जा रही है। इसके बाद यह सुविधा सिकलसेल ऐनीमिया, ल्यूकेमिया से पीड़ित बच्चों को भी उपलब्ध करवाई जाएगी। ट्रांसप्लांट के लिये 12 साल से कम उम्र के बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी। मरीजों के रजिस्ट्रेशन के लिये दिसम्बर-2017 में इंदौर, भोपाल एवं ग्वालियर में कैम्प आयोजित किये गये थे। अब तक प्रदेश के 150 थेलेसिमिया मरीजों का रजिस्ट्रेशन बोनमेरो ट्रांसप्लांट के लिये हुआ है। थैलेसिमिया एक अनुवांशिक बीमारी है। इसके अंतर्गत नवजात बच्चों में अनुवांशिक जीन की खराबी से हीमोग्लोबिन की कमी के कारण प्रति माह रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। प्रति माह रक्त चढ़ाने की यह प्रक्रिया काफी पीड़ादायक होती है। बोनमेरो ट्रांसप्लांट किये जाने से इन बच्चों में प्रति माह खून चढ़ाने की आवश्यकता समाप्त जाएगी एवं बच्चों का जीवनकाल बेहतर हो जाएगा। बोन-मेरो ट्रांसप्लांट यूनिट एम.वाय. हॉस्पिटल की चौथी मंजिल पर संचालित है। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर से संबद्ध एम.वाय. महाराजा चिकित्सालय में प्रदेश के प्रथम 6 बिस्तरीय बोनमेरो ट्रांसप्लांट सेंटर की स्थापना की गई है। परियोजना की कुल लागत 5 करोड़ रुपये है। निर्माण कार्य पर 3 करोड़ 50 लाख व्यय किये गये हैं। उपकरणों पर एक करोड़ 50 लाख रुपये व्यय हुए हैं। कोलंबिया विश्वविद्यालय (यूएसए) के सह-प्राध्यापक डॉ. प्रकाश सतवानी यूनिट की स्थापना के लिये आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। वर्तमान में एम.वाय. हॉस्पिटल इंदौर के दो चिकित्सक कोलंम्बिया विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। शिशु रोग विभाग के दो अन्य चिकित्सक भी 6 माह के प्रशिक्षण के लिये कोलंबिया विश्वविद्यालय भेजे जा रहे हैं। प्रशिक्षण व्यय राज्य सरकार वहन कर रही है। बोनमेरो ट्रांसप्लांट सेंटर की स्थापना के लिये डॉ. प्रकाश सतवानी, कोलंबो, यूनिवर्सिटी, न्यूयार्क (यूएसए), डॉ. लारेन्स फॉकनर, बोनमेरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ, इटली, मेडिकल को-ऑर्डिनेटर, क्योर 2 चिल्ड्रन फाउण्डेशन, इटली एवं संकल्प इण्डिया फाउण्डेशन, बैंगलोर से अभिमत प्राप्त किया गया। बोनमेरो ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में कार्य कर रहे एनजीओ संकल्प इण्डिया फाउण्डेशन, बैंगलोर के साथ एमओयू भी किया गया है। इस एमओयू के अंतर्गत बोनमेरो ट्रांसप्लांट सेंटर में कार्य करने वाले ब्लड बैंक एवं रेडियोथेरेपी के चिकित्सकों, पीडियाट्रिक सर्जन, बेहोशी विशेषज्ञ, प्रशासकीय अधिकारी, नर्सिंग, टेक्नीशियन एवं फार्मासिस्ट स्टॉफ की बोनमेरो ट्रांसप्लांट से संबंधित ट्रेनिंग बैंगलोर एवं अहमदाबाद में करवाई जाएगी।
जे.पी. अस्पताल में अब न्यूरो सर्जरी भी होगी
16 January 2018
भोपाल के जय प्रकाश चिकित्सालय में मस्तिष्क विकार पीड़ित मरीजों के लिये न्यूरो सर्जरी की सेवाएँ शुरू की गई हैं। इसमें दुर्घटना से ग्रस्त मस्तिष्क विकार, ब्रेन ट्यूमर, ब्रेन हेमरेज, पेरालिसिस आदि दिमाग से जुड़े रोगों की जाँच एवं उपचार न्यूरो सर्जन डॉ. योगेश तिवारी द्वारा किया जायेगा। अस्पताल में डॉ. तिवारी प्रत्येक मंगलवार एवं गुरुवार को ओपीडी में मरीजों की जाँच करेंगे और प्रति सोमवार एवं बुधवार को ऑपरेशन करेंगे। सप्ताह में एक दिन डीईआईसी में आने वाले बच्चों का परीक्षण होगा। 18 साल तक के बच्चों की होगी नि:शुल्क न्यूरो सर्जरी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुधीर जेसानी ने बताया कि जे.पी. अस्पताल में न्यूरो सर्जरी की ओपीडी शुरू होने के साथ राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में जन्म से 18 साल तक के न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट और अन्य सर्जरी योग्य चिन्हांकित बच्चों की नि:शुल्क सर्जरी भी होगी। इसके लिये मॉडल कास्टिंग की राशि स्वीकृत कर सिविल सर्जन को दी जायेगी। इसी प्रकार गरीबी रेखा के नीचे वाले मरीजों की शल्य-चिकित्सा राज्य बीमारी सहायता निधि पैकेज के तहत नि:शुल्क होगी। गरीबी रेखा के ऊपर जीवन-यापन करने वाले मरीजों की सर्जरी के लिये शुल्क का निर्धारण रोगी कल्याण समिति द्वारा किया जायेगा।
मध्यप्रदेश में बाल मृत्यु दर में पहली बार 7 अंकों की गिरावट
12 January 2018
केन्द्र शासन द्वारा हाल ही में जारी सेम्पल रजिस्ट्रेशन सर्वे (एसआरएस-2016) में मध्यप्रदेश में बाल मृत्यु दर में 7 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई है। परिणाम स्वरूप 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की बाल मृत्यु दर वर्ष 2015 के 62 से गिरकर 55 प्रति हजार जीवित जन्म हो गई है। यह गिरावट राज्य शासन द्वारा आरंभ किये गये दस्तक अभियान, विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं और अन्य प्रयासों के चलते हुई है। देश में सर्वाधिक गिरावट दर्ज करने वाले राज्यों में 10 अंक के साथ असम प्रथम और 7 अंक के साथ मध्यप्रदेश द्वितीय स्थान पर है। भारत में बाल मृत्यु दर में 4 अंकों की गिरावट दर्ज हुई है। यह दर वर्ष 2015 में 43 से घटकर 39 प्रति हजार जीवित जन्म रिपोर्ट हुई है। बाल मृत्यु के प्रमुख कारणों में निमोनिया 14 प्रतिशत, दस्त रोग 9.2 प्रतिशत, गंभीर कुपोषण 45 प्रतिशत और गंभीर एनीमिया हैं। इसे मद्देनजर रखते हुए प्रदेश में 6 माह के अंतराल में घर-घर जाकर दस्तक अभियान में पीड़ित बच्चों की पहचान, उपचार और प्रबंधन की कार्यवाही की जा रही है। अभियान में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए की खुराक रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के लिये दी जा रही है। गंभीर रक्ताल्पता से ग्रसित बच्चों को नि:शुल्क खून चढ़ाया जा रहा है। इससे वे बाल्यावस्था में होने वाली बीमारियों से बच रहे हैं। दस्त रोग की रोकथाम के लिये हर घर में ओआरएस तथा जिंक गोली वितरण के साथ उचित शिशु एवं बाल आहार की समझाइश भी परिवारों को दी जा रही है। सुदूर इलाकों में परिवारों को बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि पहली बार प्रदेश में बाल मृत्यु दर में इतनी महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गई है। दस्तक अभियान के 15 जून से 31 जुलाई-2017 के मध्य हुए प्रथम चरण में 5 वर्ष से कम उम्र के 76 लाख बच्चों तक घर-घर पहुँच बनाई गई। गंभीर कुपोषण, गंभीर एनीमिया, निमोनिया, दस्त रोग, जन्मजात विकृतियों तथा अन्य बीमारियों की सक्रिय पहचान की गई। द्वितीय चरण 18 दिसम्बर, 2017 से 18 जनवरी, 2018 के मध्य किया जा रहा है। अब तक 68 लाख बच्चों की नामजद जानकारी दर्ज करने के साथ 23 लाख बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर चिन्हित बच्चों का नि:शुल्क उपचार किया जा रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिये विटामिन-ए का सप्लीमेंट दिया गया है। पोषण पुनर्वास केन्द्रों में 1500 बच्चों को भर्ती किया जा चुका है और शेष बच्चों को नि:शुल्क परिवहन से लाने की व्यवस्था की जा रही है। 514 बच्चों को नि:शुल्क ब्लड ट्रांसफ्यूजन (खून चढ़ाना) किया जा चुका है, शेष की व्यवस्था की जा रही है। जन्मजात विकृतियों वाले 3237 बच्चों की पहचान कर उनके इलाज का नि:शुल्क प्रबंध किया जा रहा है। निमोनिया के 2245 और दस्त रोग के 3351 बच्चों की पहचान कर उपचारित किया गया है। गंभीर संक्रमण सेप्सिस से पीड़ित 1318 बच्चों की पहचान कर उपचारित किया जा रहा है। यह बच्चे दो माह से कम उम्र के हैं। करीब 25 हजार बच्चों में अन्य बीमारियाँ पाई गईं जिनके उपचार का प्रबंध दस्तक दल द्वारा किया जा रहा है।

नेत्र ज्योति के साथ मंजू के जीवन में भी लौटीं खुशियाँ
Our Correspondent :12 January 2018
देवास जिले के ग्राम डोकाकुई निवासी मंजू की ज़िंदगी हँसी-खुशी चल रही थी कि 5 वर्ष पहले उसे टायफाइड हुआ और धीरे-धीरे दोनों आँखों से दिखाई देना बंद हो गया। चालीस वर्षीय मंजू के जीवन में जैसे अँधेरा ही अँधेरा छा गया। कुछ लोगों ने उचित इलाज कराने की भी सलाह दी पर मंजू के परिवार का मानना था कि टायफाइड के दौरान उसने किसी नुक्ते में खाना खा लिया, इसलिये माता के प्रकोप से उसकी आँखों की रोशनी चली गई। परिवार अनेक धर्म-स्थल पर जाकर आँखें ठीक होने की मन्नत माँगता रहा पर कुछ नहीं हुआ। परिवार थक-हारकर बैठ गया। एक तरफ गरीबी और दूसरी तरफ घर की धुरी गृहणी की आँखों की रोशनी जाना परिवार में जैसे सब-कुछ छिन्न-भिन्न हो गया था। बच्चों के पालन-पोषण पर इसका बहुत खराब असर पड़ रहा था। तभी एक दिन स्वास्थ्यकर्मी मंजू के घर पहुँचे और उसे समझा-बुझाकर कन्नौद के सिविल अस्पताल लाया गया। चिकित्सकों ने मंजू और उसके परिवार वालों को समझाया कि देवास जाकर आँखों की जाँच करवाओ तो संभवत: आँखें ठीक हो जायेंगी। पर परिवार मान कर बैठा था कि अब कुछ नहीं हो सकता। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी फिर भी निरंतर प्रयास करते रहे। गत 22 दिसम्बर, 2017 को सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग द्वारा कन्नौद शासकीय स्कूल में शिविर का आयोजन किया गया, जहाँ स्वास्थ्यकर्मी पुन: मंजू को लेकर शिविर में गये। शिविर में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.के. सरल ने उसका परीक्षण किया। डॉ. सरल ने उसे समझाया कि यह माता का प्रकोप नहीं बल्कि उसकी आँखों में मोतियाबिंद हुआ है। ऑपरेशन से उसकी आँखों की रोशनी वापस आ जायेगी। बमुश्किल परिवार को ऑपरेशन के लिये राजी किया गया। परिवार ने कहा कि वे ऑपरेशन का खर्च नहीं उठा सकते। डॉ. सरल ने उन्हें बताया कि देवास आने-जाने का खर्च, अस्पताल में जाँच, ऑपरेशन, उपचार, दवाइयाँ और भोजन सब नि:शुल्क रहेगा। मंजू का ऑपरेशन वह स्वयं करेंगे। इस पर मंजू एवं परिजन मान गये। गत 27 दिसम्बर को डॉ. सरल ने देवास में मंजू की एक आँख का सफल ऑपरेशन किया। उसके बाद 30 दिसम्बर को दूसरी आँख का भी ऑपरेशन सफल रहा। मंजू और उसका परिवार आज बहुत खुश है। उसकी आँखों की रोशनी वापस आ गई है। घर का वातावरण बदल गया है। पूरा परिवार डॉ. सरल, राज्य शासन और अस्पताल के कर्मचारियों को दुआ देते नहीं थक रहा है


राज्य बीमारी सहायता निधि से पुष्पलता को मिला नि:शुल्क इलाज
Our Correspondent :9 January 2018
बैतूल की पुष्पलता खाना पकाते वक्त आग से हुई दुर्घटना में बुरी तरह जल गई थी। जलने की वजह से इनके हाथ-पैरों में टेड़ापन आ गया था। आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से उन्होंने जिले के आसपास के अस्पतालों में अपना इलाज करवाया। धनराशि खर्च होने के बावजूद भी यह पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाई। पुष्पलता की सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के पर्यवेक्षक से चर्चा हुई। इसके बाद इन्होंने ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. रजनीश शर्मा से भी बात की। चर्चा के बाद पुष्पलता को बताया गया कि राज्य बीमारी सहायता निधि के अंतर्गत उनकी सर्जरी करवाई जा सकती है। पुष्पलता के पास बीपीएल कार्ड भी था। पुष्पलता की पहले बैतूल में लगे स्वास्थ्य परीक्षण शिविर में जाँच की गई। जाँच के बाद उन्हें राज्य बीमारी सहायता निधि से ऑपरेशन के लिये 2 लाख रुपये की राशि मंजूर हुई। पुष्पलता को सर्जरी के लिये नागपुर के कुणाल हॉस्पिटल भेजा गया। पिछले वर्ष नवम्बर माह में पुष्पलता के ऑपरेशन किये गये। ऑपरेशन के बाद पुष्पलता के हाथ ने काम करना शुरू कर दिया है। अब वह सामान्य रूप से काम करने में सक्षम हो गई हैं।


6 मेडिकल कॉलेज को आधुनिक उपकरण खरीद के लिये 60 करोड़ जारी
Our Correspondent :5 January 2018
चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा 6 मेडिकल कॉलेज को सीटी स्केन, एमआरआई सहित अन्य जाँच उपकरण जिनमें गामा कैमरा, कलर डॉपलर शामिल हैं, की खरीदी के लिए राशि जारी की है। कॉलेजों को कुल 60 करोड़ रुपये प्रदाय किये गये हैं। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त श्री शिव शेखर शुक्ला ने कॉलेजों के डीन को मध्यप्रदेश लोक स्वास्थ्य सेवाएँ निगम मर्यादित एवं भारत शासन के संस्थान जी.ई.एम. और एच.एल.एल. के माध्यम से अगले 3 से 6 माह के भीतर उपकरणों को क्रय और स्थापित कर, जाँच की सुविधाएँ सुनिश्चित कराने के निर्देश दिये हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा आवंटित राशि में भोपाल मेडिकल कॉलेज को 29.2 करोड़, इंदौर को 11.73 करोड़, जबलपुर को 5.3 करोड़, ग्वालियर को 5.6 करोड़, रीवा को 3.9 करोड़ और मेडिकल कॉलेज सागर को जारी 4 करोड़ रुपये की राशि शामिल है। इस महत्वपूर्ण कदम से मेडिकल कॉलेजों से संबद्व चिकित्सालयों में उपकरणों की अनुपलब्धता एवं जरूरी जाँच नहीं होने की समस्या दूर हो सकेगी।


तंबाकू उत्पादेां पर 85 सचित्र चेतावनी निरस्त करना युवा पीढ़ी के लिए नुकसानदायक
Our Correspondent :3 January 2018
नई दिल्ली 03 जनवरी। तंबाकू उत्पादों पर 85 प्रतिशत तस्वीरों वाली चेतावनी को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट के 15 दिसंबर 2017 को दिए गए फैसले पर वकीलों, समाजसेवियेां ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होने हाइकोर्ट के फैसले को बच्चों, युवकेंा के स्वास्थ्य के लिए हानि पहुचंाने वाला और सरकार के प्रयासों केा नुकसान पहुचंाने वाला बताया है। कर्नाटक हाई कोर्ट के 15 दिसंबर 2017 को सिगरेट एवं तम्बाकू उत्पाद (पैकेजिंग एवं लेबलिंग) संशोधन विनिमयन, 2014 को निरस्त कर देने का फैसला दिया था। सिगरेट के पैकेटों पर 85 प्रतिशत तस्वीरों वाली चेतवानी छापने वाली अधिसूचना सरकार द्वारा 15 दिसंबर, ,2017 को जारी की गई थी। बहुत लंबे संघर्ष के बाद इनका क्रियान्वयन अप्रैल, 2016 से शुरू हो पाया था। इसके कारण तस्वीरों वाली चेतावनी छापने वाला भारत विश्व में 136 वें स्थान से ऊपर उठकर अप्रत्याशित रूप से तीसरे पर पहुंच गया था। इस निर्णय के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भारत को पुरस्कृत भी किया गया था। इतना ही नहीं इसके लिए विश्व के कई देशों ने भारत की सराहना भी की थी। कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले में न्यायधीश बी.वी.नागराथन ने कहा कि इस तरह की तस्वीरों वाली और लिखी हुई तम्बाकू उत्पादों के सेवन के कारण कैंसर होने की चेतावनी अनावश्यक है, क्योंकि चेतावनी के सुझाव चिकित्सा की दृष्टि से साबित किए गए नहीं हैं और सार्वभौमिक रूप इसे स्वीकार नहीं किया गया है। इस फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट के वकील सुश्री एश्वर्या भाटी ने कहा है कि तम्बाकू सेवन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले परिणामों पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान ने अपनी रिपोर्ट फरवरी, 2011 में सुप्रीम कोर्ट में पेश की है। इस रिपेार्ट में स्पष्ट तौर पर तम्बाकू सेवन का संबंध कैंसर से स्थापित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने मुरली देवड़ा बनाम सरकार (वर्ष 2001) के मामले में यह स्वीकार किया है कि धूम्रपान फेफड़े के कैंसर और अन्य बीमारियों का कारण है। वर्ष 2013 के एक अन्य मामले, लाखों लोगों के स्वास्थ्य बनाम भारत सरकार एवं अन्य में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि इन उत्पादों के सेवन से कैंसर रोगियों की संख्या में तेजी आएगी। सुश्री भाटी ने कहा कि सिगरेट एंव अन्य तम्बाकू उत्पाद(निषेध) अधिनियम (कोटपा) के विवरण एंव कारणों से यह निर्विवाद रूप से साबित होता है कि तम्बाकू सेवन के कारण अकाल मृत्यु, विकलांगता और भारी आर्थिक हानि होती है। तम्बाकू सेवन से विभिन्न तरह के रोग पैदा होने पर साबित होने के कारण ही संसद ने कानून बनाया है। इंडियन अस्थमा केयर सोसायटी के धर्मवीर कटेवा ने भारत सरकार के सिगरेट एंव अन्य तंबाकू उत्पादों के पैकेटों पर वर्ष 2016 में 85 प्रतिशत तस्वीरों वाली चेतावनी छापने को अनिवार्य करने के सरकार के निर्णय को सही ठहराया है। उन्होंने कहा कि देश के युवाअेंा के स्वास्थ्य की रक्षा करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण निर्णय था। विश्व स्वास्थ्य संगठन की कॉन्फरेंस ऑफ द पार्टिज के सातवें सत्र का उद्घाटन करते हुए केन्द्रीय स्वास्थ्य परिवार एवं कल्याण मंत्री श्री जे पी नड्डा ने कहा था कि हम विश्व स्वास्थ्य संगठन फ्रेमवर्क कन्वेंशन फॉर तम्बाकू कंट्रोल (एफसीटीसी) के अप्रसारी रोग कार्यक्रम एवं हस्तक्षेप को वर्ष 2015 के बाद के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के रूप में सुदृढ़ करने तथा इसके क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर ट्विटर पर ट्विट कर कहा था कि आइए ‘‘आज हम तम्बाकू सेवन के खतरों के प्रति जागरूकता फैलाने तथा देश में तम्बाकू सेवन को कम करने के लिए काम करने की शपथ लें।’’ तम्बाकू ने सिर्फ उन लोगों के जीवन को दुष्प्रभावित करता है जो इसका सेवन करते हैं बल्कि उन्के जीवन पर भी असर डालता है जो इसका सेवन करने वालों के आसपास रहते हैं। तम्बाकू को ना कह कर, आइए हम स्वस्थ भारत की नींव रखें।


नि:शुल्क कॉकलियर इम्पलांट से बोलने-सुनने लगी है तितिक्षा
Our Correspondent :29 December 2017
बच्चों की गम्भीर बीमारी और इलाज के महँगे खर्च की चिंता से जूझते आर्थिक रूप से कमजोर माता-पिता के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम वरदान सिद्ध हो रहा है। सिवनी जिले के मंगलीपेठ के दुकानदार के घर 15 फरवरी 2011 को सुंदर सी बेटी का जन्म हुआ। पूरे परिवार की लाड़ली-दुलारी बेटी का घर वालों ने बड़े प्यार से तितिक्षा नाम रखा। एक वर्ष की होने पर भी जब तितिक्षा नाम पुकारने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देती थी, तो माता-पिता ने विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाया। चिकित्सक ने उन्हें बताया कि उनकी बच्ची सुनने में सक्षम नहीं है। माता-पिता इलाज के लिए यहाँ-वहाँ भटकते रहे, परन्तु कोई परिणाम नही निकला। तभी उन्हें वर्ष 2014 में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में कॉकलियर इम्पलांट के लिये जिला पुर्नवास केन्द्र में आयोजित शिविर के बारे में पता चला। शिविर में जाँच के दौरान बच्ची की शत-प्रतिशत श्रवण हीनता की जानकारी मिली। तितिक्षा को नि:शुल्क कॉकलियर इम्पलांट के लिए अरबिन्दो मेडिकल कॉलेज इन्दौर भेजा गया, जहाँ अप्रैल 2015 में उसको बाल श्रवण योजना में सफलता पूर्वक नि:शुल्क कॉकलियर इम्पलांट किया गया। इम्पलांट के पहले और बाद मे जिला विकलांग पुर्नवास केन्द्र मे विशेषज्ञों द्वारा तितिक्षा को आवश्यक स्पीच थैरेपी दी गई। उसे पहले मोटी और पतली आवाजों तथा धीमी और तेज आवाज, उसके बाद विभिन्न प्रकार की आवाजों को सुनना सिखाया गया। कुछ ही समय में तितिक्षा ध्वनि को सुनने और समझने के साथ-साथ परिवार वालों की आवाज को पहचानने लगी। धीरे-धीरे वह शब्द सुनने और बोलने का प्रयास भी करने लगी। जब उसके मुँह से पहली बार मम्मी-पापा, दादा-दादी जैसे शब्द निकले, तो परिवार में त्योहार जैसा माहौल हो गया। अब तितिक्षा नये-नये शब्दों का उच्चारण सीख रही है। तिक्षिता सामान्य बच्चों की तरह ही पढ़ाई-लिखाई करने लगी है। अभी वह केन्द्रीय विद्यालय डूंडा-सिवनी में पहली कक्षा मे पढ़ रही है।


मुख्यमंत्री बाल ह्रदय उपचार योजना से अल्फिया को मिली नि:शुल्क शल्य चिकित्सा
Our Correspondent :24 December 2017
चार साल की अल्फिया के माता-पिता उस वक्त स्तब्ध रह गये जब भोपाल के डॉक्टरों ने बताया कि उसके दिल में छेद है और ऑपरेशन कराना पड़ेगा। अल्फिया के बैतूल निवासी पिता श्री अब्दुल तालिब नेत्रहीन हैं और माँ अज़ीज़ा परवीन गृहणी। अल्फिया अपने माता-पिता के साथ अपने दादा के पास रहती है जो फल बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। अल्फिया का जन्म महाराष्ट्र के बरूड़ में सरकारी अस्पताल में हुआ था। अल्फिया जन्म से ही बीमार रहती थी और लगातार रोती थी। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि कुमरा को जब दिखाया तो उन्होंने बोला कि बालिका का ऑपरेशन कराना पड़ेगा। भोपाल के अस्पताल में दिखाने पर उन्होंने ऑपरेशन में 2 लाख का खर्च बताया। इतनी बड़ी राशि का बंदोबस्त असंभव लगने के बाद वे वापस आ गये। इसी बीच आँगनवाड़ी में आरबीएसके शिविर में चिकित्सक ने अल्फिया की जाँच की और मुख्यमंत्री बाल ह्रदय योजना में नि:शुल्क ऑपरेशन की जानकारी दी। अल्फिया के दादा-दादी ऑपरेशन करवाने से बहुत डर रहे थे। इसलिये चिकित्सक द्वारा बार-बार समझाने के बावजूद वे ऑपरेशन करवाने के लिये राजी नहीं हो रहे थे। जब यह जानकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रदीप मोजेस को मिली तो उन्होंने अल्फिया की माँ को समझाया कि भोपाल के हॉस्पिटल में बच्ची का नि:शुल्क ऑपरेशन होगा और वह बिल्कुल ठीक हो जायेगी। परवीन ने अपने सास-ससुर को कठिनाई से राजी किया। अंतत: अल्फिया का सफल ऑपरेशन 30 अक्टूबर, 2017 को मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में किया गया। उसे लगातार फॉलोअप के लिये बुलाया जाता है। आज अल्फिया पूर्णत: स्वस्थ है और उसकी मुस्कुराहट से पूरे घर का माहौल बदल गया है।


फ्लेसिड और मोटर डिले बिमारी से ग्रसित मासूम ऋषभ को मिला नि:शुल्क उपचार
Our Correspondent :21 December 2017
मासूम ऋषभ पिता सुखदेव महोबे जन्म से ही फ्लेसिड एवं मोटर डिले से ग्रसित था। जन्म के समय जब वो रोया नहीं तो मां ज्योति और परिजन घबरा गए। ज्योति के पति सुखदेव महोबे ड्रायवर हैं। सुखदेव की आमदनी भी ज्यादा नहीं है। कहीं बाहर उपचार कराना इनके लिये संभव नहीं था। ऋषभ की स्थिति को देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंन्द्र चिकित्सकों ने बताया कि ऋषभ फ्लेसिड (अंगो का लुंजपुंजपन) एवं शरीर के विकास की धीमी गति (मोटर डिले) बीमारी से ग्रसित है। ऋषभ को 15 दिन एस.एन.सी.यू. (गहन शिशु चिकित्सा इकाई) में भर्ती किया गया। ऋषभ ने रोना तो शुरू किया किन्तु उसे बहुत ज्यादा झटके आने लगे। तत्कालीन जिला टीकाकरण अधिकारी एवं वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ द्वारा ऋषभ पर विशेष ध्यान देकर उपचार किया गया। चिकित्सकों ने परिजनों को बताया कि इस प्रकार की बीमारी में बच्चा धीरे-धीरे सीखेगा उसकी प्रगति देर से होगी। इस बीच मई 2016 में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र आमला में आर.बी.एस.के. (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) का शिविर हुआ। ऋषभ को लेकर माता-पिता पहुंचे। चिकित्सकों ने डी.ई.आई.सी. सेंटर (जिला शीध्र हस्ताक्षेप केन्द्र) बैतूल ले जाने की सलाह दी एवं संपूर्ण जानकारी से अवगत कराया। ज्योति ऋषभ को लेकर उपचार हेतु जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र में आने लगी। यहां ज्योति को डी.ई.आई.सी. ने धीरज रखकर रोज आने के लिये परामर्श दिया। अब ज्योति को ऋषभ में थोड़ा सुधार परिलक्षित हुआ तो वह रोज आने लगी। ज्योति के चेहरे पर असीम मुस्कान और संतोष के भाव हैं। वह कहती हैं कि जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र में कार्यरत स्टाफ का व्यवहार बहुत सहयोगात्मक है। ऋषभ को मिली नि:शुल्क सहायता और सेवा से ज्योति बहुत प्रसन्न है। अब ऋषभ गर्दन सम्भाल लेता है, बैठ जाता है, खड़ा भी हो जाता है और मम्मी-पापा, अम भी बोल लेता है। अब मां को विश्वास है कि ऋषभ भी सामान्य बच्चे की तरह एक दिन स्कूल जायेगा। उनके सूने जीवन में उजियारा करेगा


आयुर्वेद के प्रति आकर्षण बढ़ाने में वन मेला का महत्वपूर्ण योगदान
Our Correspondent :20 December 2017
वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय वन मेला के माध्यम से जन-साधारण में आयुर्वेद के प्रति आकर्षण बढ़ा है। डॉ. शेजवार लाल परेड मैदान में अंतर्राष्ट्रीय वन मेला के समापन समारोह में बोल रहे थे। डॉ. शेजवार ने कहा कि आयुर्वेद महाविद्यालयों से जुड़े विद्यार्थी गाँवों तथा जंगलों का भ्रमण कर जड़ी-बूटियों की पहचान कर ज्ञान बढ़ायें। उन्होंने कहा कि जैव-विविधता बोर्ड द्वारा ग्रामीण स्तर पर समितियों का गठन किया जा रहा है। इन समितियों के माध्यम से भी जड़ी-बूटियों की पहचान को बरकरार रखने में मदद मिलेगी। वन मंत्री ने कहा कि आयुर्वेद की पुर्नस्थापना के लिए आयुर्वेद के ज्ञान का विस्तार होना चाहिये। इसके लिये अंतर्राष्ट्रीय वन मेला बेहतर मंच उपलब्ध कराता है। श्री महेश कोरी, अध्यक्ष, मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ ने कहा कि संघ द्वारा वनवासियों के आर्थिक तथा सामाजिक उत्थान की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। तेंदूपत्ता संग्राहकों को समुचित पारिश्रमिक उपलब्ध कराने के साथ ही बोनस भी उपलब्ध कराया जाता है। श्री जव्वाद हसन, प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ ने बताया कि सात दिवसीय आयोजन में लगभग एक लाख से अधिक लोगों ने मेले का भ्रमण किया। वन मेले में लगभग 80 लाख रुपये की बिक्री हुई। क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में 22 एमओयू के माध्यम से एक करोड़ 56 लाख रुपये के अनुबंध किये गये। वन मंत्री द्वारा अंतर्राष्ट्रीय वन मेले के दौरान आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख डॉ. अनिमेष शुक्ला भी उपस्थित थे।


नर्मदा ट्रामा सेन्टर भोपाल को मिला भोपाल में प्रथम एवं मध्यप्रदेश का दूसरा "एन.ए.बी.एच. नर्सिंग एक्सीलेंस सर्टिफिकेशन "
Our Correspondent :16 December 2017
गुणवत्ता के मापदंड आज विश्वभर में सभी सेवा और उत्पादन के क्षेत्र में अपनाये जा रहे है और जब बात स्वास्थ्य क्षेत्र की हो तो गुणवत्ता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है.ईएसआई बात को ध्यान में रखकर ११ बर्ष पूर्व २००६ में नर्मदा ट्रामा सेन्टर की स्थापना करने वाले डायरेक्टर द्वारा डा. राजेश शर्मा एवं डा.रेणु शर्मा ने कुछ वर्ष पूर्व अन्तर्राष्ट्रीय मानकों को हेल्थ क्षेत्र में लागु करने वाली संस्था "एन.ए.बी.एच" से सर्टिफिकेशन प्राप्त करने के लिए प्रयास आरम्भ किये.आज सामान्यजन में एन.ए.बी.एच को लेकर जागरूकता का आभाव हे ."एन.ए.बी.एच" वास्तव में "नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फार हॉस्पिटल एंड हेल्थ केयर प्रोवाइडस " होता है.यह एक स्वतंत्र इकाई है.जो QCI{क्वालिटी काउंसनिल ऑफ़ इंडिया} एवं ISQUA से सम्बन्ध है.


टी.बी. रोकने एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान 31 दिसम्बर तक जारी रहेगा
Our Correspondent :15 December 2017
प्रदेश के 27 जिलों में 4 दिसम्बर से टी.बी. रोकने के लिये एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान चलाया जा रहा है। आगामी 31 दिसम्बर तक चलने वाले इस अभियान में स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर टी.बी. के संभावित मरीजों को चिन्हित कर पास के डीएमसी केन्द्र (डेजिग्नेटेड माइक्रोस्कोपिक सेंटर) में खंखार की जाँच के लिये भेज रहे हैं। अभियान में अब तक 2 लाख से अधिक व्यक्तियों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। इसमें लगभग 9 हजार संभावित मरीज मिले हैं, जिनके सेम्पल लेकर उसमें स्पूटन की जाँच की जा रही है। पॉजिटिव पाये गये मरीजों का उपचार आरंभ कर दिया गया है। अभियान में उन समुदायों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जो आमतौर पर अस्पताल नहीं पहुँचते। शहरी क्षेत्र में निर्माणाधीन क्षेत्र, शरणार्थी शिविर, फुटपाथ पर रहने वाले, अनाथालय और जेल के कैदियों का परीक्षण किया जा रहा है। ग्रामीण एवं आदिवासी इलाकों में खदान में काम करने वाले श्रमिक, बुनकर, काँच उद्योग में काम करने वाले, कॉटन मिल वर्कर और पहुँचविहीन इलाकों में अभियान चलाया जा रहा है। क्षय रोग के लक्षण:- * दो सप्ताह से अधिक खाँसी या खंखार में खून आना * शाम के समय बुखार और रात में पसीना आना * भूख कम या नहीं लगना * छाती में दर्द होना, वजन कम होना तथा गले में गठान होना।


प्रदेश की पहली शासकीय बोन-मेरो ट्रांसप्लांट यूनिट इंदौर में स्थापित होगी
Our Correspondent :14 December 2017
मध्यप्रदेश में भी शासकीय अस्पताल में पहली बार बोन-मेरो ट्रांसप्लांट की सुविधा राज्य सरकार उपलब्ध करवाने जा रही है। आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्री शिवशेखर शुक्ला ने बताया है कि शीघ्र ही इंदौर के महाराजा यशवंतराव हॉस्पिटल में बोन-मेरो ट्रांसप्लांट यूनिट स्थापित की जा रही है। ट्रांसप्लांट की शुरूआत थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों से की जाएगी। इसके बाद यह सुविधा सिकलसेन ऐनीमिया, ल्यूकेमिया से पीड़ित बच्चों को उपलब्ध करवाई जाएगी। ट्रांसप्लांट के लिये 12 साल से कम उम्र के बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी। आयुक्त चिकित्सा शिक्षा ने बताया है कि बोन-मेरो ट्रांसप्लांट यूनिट एम.वाय. हॉस्पिटल की चौथी मंजिल पर संचालित होगी। इसके लिये महाराजा यशवंतराव हॉस्पिटल इंदौर को डेढ करोड़ की राशि बोन-मेरो ट्रांसप्लांट यूनिट में स्टेम सेल, एचएलए एवं सायटोमेट्री लैब की स्थापना हेतु आवश्यक उपकरणों के क्रय एवं अन्य कार्यों के लिये प्रदान की गई है। कोलंबिया विश्वविद्यालय यूएसए के सह-प्राध्यापक डॉ. प्रकाश सतवानी यूनिट की स्थापना के लिये आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। साथ ही एम.वाय. हॉस्पिटल इंदौर के शिशु रोग विभाग के दो चिकित्सक को 6 माह की प्रशिक्षण की सुविधा कोलंबिया विश्वविद्यालय में दिया जाना सुनिश्चित करवायेंगे। वर्तमान में दो चिकित्सक आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षण व्यय राज्य सरकार वहन कर रही है। मध्यप्रदेश के अप्रवासी भारतीयों को प्रदेश से जोड़े रखने की मुख्यमंत्री श्री चौहान की अनूठी पहल के परिणाम धरातल पर परिलक्षित होने लगे हैं। डॉ. सतवानी का जन्म इसी प्रदेश की माटी में हुआ है। अपनी जमीन से जुड़े रहने की इच्छा को प्रदेश सरकार की पहल द्वारा साकार रूप दिया जा रहा है।
25 दिसम्बर से इंदौर, भोपाल और ग्वालियर में होंगे शिविर
बोन-मेरो ट्रांसप्लांट इकाई द्वारा थैलिसीमिया के मरीजों के लिये दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में शिविर लगाये जाएंगे। शिविरों में डॉ. प्रकाश सतवानी बोन-मेरो ट्रांसप्लांट के बारे में जानकारी देंगे। मरीजों की नि:शुल्क एचएलए टाइपिंग भी की जाएगी। एम.वाय. ऑडिटोरियम एम.जी.एम. मेडिकल कॉलेज इंदौर में 25 दिसम्बर को, 26 दिसम्बर को गाँधी मेडिकल कॉलेज भोपाल के आडिटोरियम में और 27 दिसम्बर को ऑडिटोरियम गजराराजा मेडिकल कॉलेज ग्वालियर के आडिटोरियम में ‍शिविर लगेंगे। प्रत्येक शिविर में सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक व्याख्यान होगा। दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक एचएलए टाइपिंग होगी।
ट्रांसप्लांट कार्य अप्रैल-2018 से किये जाने का लक्ष्य
बोन-मेरो ट्रांसप्लांट का कार्य अप्रैल-2018 से प्रारंभ किये जाने का लक्ष्य रखा गया है। शिविरों में एचएलए टाइपिंग के बाद प्रतीक्षा सूची जारी की जाएगी। ट्रांसप्लांट के लिये 12 वर्ष से कम उम्र के ऐसे बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनके स्वस्थ भाई-बहन डोनर के रूप में तैयार होंगे। साथ ही जिनका ट्रांसप्लांट सफल होने की संभावना ज्यादा रहेगी।
चयन के लिये 22 दिसम्बर तक होगा पंजीयन
बोन-मेरो ट्रांसप्लांट करवाने के लिये चयन के लिये 22 दिसम्बर 2017 तक पंजीयन कराना होगा। चयन के लिये 3 पेज के फार्म में मरीज एवं उनके अभिभावकों द्वारा जानकारी उपलब्ध करवानी होगी। यह फार्म गॉधी मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग, चाचा नेहरू अस्पताल इंदौर और जयारोग्य चिकित्सालय ग्वालियर के शिशु रोग विभाग के चिकित्सकों के पास उपलब्ध रहेगा। संबंधित शिशु रोग विभाग में आवश्यक पूर्ति कर पंजीयन करवाना जरूरी होगा।


विश्व स्वास्थ्य नीति में भारतीय चिकित्सा पद्धति और पातंजलि योग को महत्ता
Our Correspondent :14 December 2017
'सभी के लिये स्वास्थ्य'' के तहत विश्व स्वास्थ्य नीति बनाने के लिये जापान में हुई बैठक में सर्व-सम्मति से भारतीय चिकित्सा पद्धति और स्वास्थ्यवर्धक ऊर्जा के लिये पातंजलि योग शामिल करने की महत्ता पर बल दिया गया। इससे सिद्ध होता है कि विश्व में आयुर्वेद सहित भारतीय चिकित्सा पद्धति की विश्वसनीयता है। आयुर्वेद जीवन जीने की कला सिखाता है। यह बात केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री हर्षवर्धन ने भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय वन मेला-2017 का शुभारंभ करते हुए कही। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि भारत ज्ञान, व्यापार, आध्यात्म, चिकित्सा पद्धति आदि के क्षेत्र में विश्व गुरु था। भारत की विकास दर पहली से 17वीं शताब्दी तक सर्वाधिक थी। आज 'सभी के लिये स्वास्थ्य'' नारे को सफल बनाने में भी भारत को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में 30 वर्ष से अधिक अवधि तक काम करने के बाद आयुर्वेद और हर्बल में उनका विश्वास काफी बढ़ा है। उन्होंने मेला आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इतने बड़े मेले को सफलतापूर्वक जारी रखना चुनौतीपूर्ण कार्य है। यह मेले की सच्चाई को सिद्ध करता है। यह मेला देश के अन्य राज्यों के लिये भी अनुकरणीय उदाहरण बनेगा। उन्होंने कहा कि बाँस शिल्प को बढ़ाने के लिये जल्दी ही संसद में विधेयक लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की सात्विकता को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये सभी को सक्रिय रहकर कार्य करना होगा। विकास के साथ पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन आज विश्व की ज्वलंत समस्या बन गया है। डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने कहा कि आयुर्वेद और एलोपैथी चिकित्सा पद्धति एक-दूसरे की विरोधाभासी न होकर पूरक हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता के चलते लघु वनोपज संघ के विंध्य हर्बल उत्पादों की प्रशंसा बाबा रामदेव ने भी की है। देश के 17 राज्यों में विंध्य हर्बल उत्पाद की आपूर्ति होती है। कार्यक्रम को वन राज्य मंत्री श्री सूर्यप्रकाश मीणा, लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष श्री महेश कोरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अनिमेष शुक्ला और लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक श्री जव्वाद हसन ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वन, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने की। राज्य मंत्री वन एवं उद्यानिकी खाद्य प्र-संस्करण (स्वतंत्र प्रभार) श्री सूर्यप्रकाश मीणा, सहकारिता एवं गैस राहत राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री विश्वास सारंग और राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष श्री महेश कोरी विशिष्टि अतिथि के रूप में मौजूद थे।


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने राज्य बीमारी सहायता पोर्टल का शुभारंभ किया
Our Correspondent :1 December 2017
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज राज्य बीमारी सहायता पोर्टल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री रुस्तम सिंह और मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह भी उपस्थित थे। इस पोर्टल के माध्यम से राज्य बीमारी सहायता निधि की मॉनिटरिंग और स्वीकृति ऑनलाइन की जा सकेगी। अब राज्य बीमारी सहायता निधि के प्रकरण की स्वीकृति की सूचना और मरीज को उपचार प्रारंभ करने की जानकारी एसएमएस द्वारा दी जायेगी। मरीज को केवल एक बार मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होना होगा। वह अपनी इच्छा के अनुसार शासन द्वारा मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों में इलाज करा सकेगा। संभागीय जिला मुख्यालयों को छोड़कर शेष जिलों से मेडिकल बोर्ड सीधे मरीज को उपचार के लिये शासन द्वारा मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों को भेज सकेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवा शिविरों के ब्रोशर का विमोचन किया। आगामी 5 जनवरी से 11 फरवरी के बीच प्रदेश के सभी 51 जिलों में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवा शिविर आयोजित किये जायेंगे। इन स्वास्थ्य शिविरों में राज्य बीमारी सहायता योजना के पात्र हितग्राहियों और मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना तथा मुख्यमंत्री बाल श्रवण उपचार योजना में बच्चों को लाभान्वित किया जायेगा। इस अवसर पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य श्रीमती गौरी सिंह, आयुक्त स्वास्थ्य श्रीमती पल्लवी जैन गोविल सहित अधिकारीगण उपस्थित थे।


विश्व एड्स दिवस पर होंगे कई कार्यक्रम
Our Correspondent :30 November 2017
राज्य एड्स नियंत्रण समिति द्वारा विश्व एड्स दिवस- एक दिसम्बर को 'मेरा स्वास्थ्य मेरा अधिकार' विषयक अनेक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। समन्वय भवन में 'एड्स नियंत्रण कार्यक्रम-चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ पर केन्द्रित सेमिनार का शुभारंभ लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री रूस्तम सिंह प्रात: 11.30 बजे करेंगे। समिति द्वारा शाम 5.30 बजे समन्वय भवन से गैमन इंडिया मॉल से न्यू मार्केट तक केन्डल मार्च भी निकाला जायेगा। मार्च का शुभारंभ चिकित्सा शिक्षा एवं लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री शरद जैन करेंगे। साथ ही भोपाल में विभिन्न स्थानों पर जागरूकता गतिविधियाँ भी आयोजित होंगी। डीबी मॉल परिसर, महाराणा प्रताप नगर, लालघाटी चौराहा, नंदन कानन चार इमली, कोलार तिराहा, मीनाल रेसीडेंसी, आशिमा मॉल परिसर और वल्लभ भवन पार्क में समिति स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से शाम 5 से 7 बजे तक एड्स रोगियों के प्रति भेदभाव दूर करने के लिये जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित करेंगी। एच.आई.बी./ एड्स के विरूद्ध संकल्प के प्रतिरूप रेड रिबन की आकृति बनाकर उस पर जन-सामान्य द्वारा मोमबत्ती जलाकर प्रतिबद्धता प्रदर्शित की जायेगी।


गरीब मरीजों की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के 12 साल-स्वास्थ्य मंत्री श्री रुस्तम सिंह
Our Correspondent :28 November 2017
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को स्वच्छता ही सेवा है अभियान के अंतर्गत भोपाल के सभी मंडलों में स्वच्छता अभियान को गतिशील बनाया गया। जहां बस्तियां शौचालय विहीन थी वहां शौचालय के लिये सेप्टिक टेंक की खुदाई की और बनाने के लिए श्रमदान किया। प्रदेश के मंत्री श्री उमांशकर गुप्ता ने वार्ड नं. 26 में दलित बस्ती जहां शौचालय नहीं था सेप्टिक टेंक की खुदाई की और शौचालय की नींव रखी। सांसद श्री आलोक संजर और राजेन्द्र गुप्ता ने वार्ड क्र. 49 में सुलभ शौचालय परिसर में सफाई की और जन-जन को अस्वच्छता जनित रोगों से बचाव के उपाय सुझाये। पार्टी के जिला अध्यक्ष व विधायक श्री सुरेन्द्रनाथ सिंह ने वार्ड क्र. 43 में सामुदायिक भवन सफाई कर स्वच्छता का संकल्प दिलाया एवं वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिवस को सेवा दिवस रूप में पूरे जिले मनाया गया और सभी 85 वार्डों में जनप्रतिनिधि एवं जिला पदाधिकरी ने स्वच्छता का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री जी को जन्मदिन की बधाई दी। महापौर श्री आलोक शर्मा ने जैन मंदिर परिसर में झाडू लगाई और जनता को प्रेरित किया जिससे जन समुदाय स्वच्छता अभियान से जुड़ गया। टी.टी. नगर स्टेडियम से स्वच्छता ही सेवा की रैली निकालकर न्यू मार्केट, रोशनपुरा चैराहा होते हुए पुनः स्टेडियम में समाप्त हुई। रैली में स्कूली छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और जनता को स्वच्छता का महत्व बताया। वरिष्ठ मंत्री श्री जयंत मलैया ने वार्ड 47, पंचशील नगर, पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री विजेश लूनावत ने वार्ड क्र. 28, मंत्री श्री विश्वास सारंग ने संकट मोचन हनुमान मंदिर के आसपास, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री रामेश्वर शर्मा ने वार्ड क्र. 80, श्री तपन भौमिक ने सुल्तानिया अस्पताल परिसर, श्री रमेश शर्मा गुट्टू भैया ने वार्ड क्र. 20, प्रदेश मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर ने गोविंदपुरा क्षेत्र, प्रदेश प्रवक्ता श्री राहुल कोठारी वार्ड क्र. 48 एवं श्री अभिलाष पांडे ने वार्ड क्र. 45 में स्वच्छता अभियान में भाग लिया। वार्ड क्रमांक 51 में स्वास्थ्य परीक्षण और चिकित्सा शिविर संपन्न हुआ। समता चैक पर आज आईटी एवं सोशल मीडिया विभाग ने डिजिटल फाॅर्म में मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने से लेकर आज तक पार्टी व सरकार की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए स्क्रीन के माध्यम से लोगों को दिखाया। उक्त आशय की जानकारी जिला मीडिया प्रभारी राजेन्द्र गुप्ता ने दी


प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर भोपाल में स्वच्छता सेवा का संकल्प लिया- श्री सुरेन्द्रनाथ सिंह
Our Correspondent :18 September 2017
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को स्वच्छता ही सेवा है अभियान के अंतर्गत भोपाल के सभी मंडलों में स्वच्छता अभियान को गतिशील बनाया गया। जहां बस्तियां शौचालय विहीन थी वहां शौचालय के लिये सेप्टिक टेंक की खुदाई की और बनाने के लिए श्रमदान किया। प्रदेश के मंत्री श्री उमांशकर गुप्ता ने वार्ड नं. 26 में दलित बस्ती जहां शौचालय नहीं था सेप्टिक टेंक की खुदाई की और शौचालय की नींव रखी। सांसद श्री आलोक संजर और राजेन्द्र गुप्ता ने वार्ड क्र. 49 में सुलभ शौचालय परिसर में सफाई की और जन-जन को अस्वच्छता जनित रोगों से बचाव के उपाय सुझाये। पार्टी के जिला अध्यक्ष व विधायक श्री सुरेन्द्रनाथ सिंह ने वार्ड क्र. 43 में सामुदायिक भवन सफाई कर स्वच्छता का संकल्प दिलाया एवं वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिवस को सेवा दिवस रूप में पूरे जिले मनाया गया और सभी 85 वार्डों में जनप्रतिनिधि एवं जिला पदाधिकरी ने स्वच्छता का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री जी को जन्मदिन की बधाई दी। महापौर श्री आलोक शर्मा ने जैन मंदिर परिसर में झाडू लगाई और जनता को प्रेरित किया जिससे जन समुदाय स्वच्छता अभियान से जुड़ गया। टी.टी. नगर स्टेडियम से स्वच्छता ही सेवा की रैली निकालकर न्यू मार्केट, रोशनपुरा चैराहा होते हुए पुनः स्टेडियम में समाप्त हुई। रैली में स्कूली छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और जनता को स्वच्छता का महत्व बताया। वरिष्ठ मंत्री श्री जयंत मलैया ने वार्ड 47, पंचशील नगर, पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री विजेश लूनावत ने वार्ड क्र. 28, मंत्री श्री विश्वास सारंग ने संकट मोचन हनुमान मंदिर के आसपास, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री रामेश्वर शर्मा ने वार्ड क्र. 80, श्री तपन भौमिक ने सुल्तानिया अस्पताल परिसर, श्री रमेश शर्मा गुट्टू भैया ने वार्ड क्र. 20, प्रदेश मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर ने गोविंदपुरा क्षेत्र, प्रदेश प्रवक्ता श्री राहुल कोठारी वार्ड क्र. 48 एवं श्री अभिलाष पांडे ने वार्ड क्र. 45 में स्वच्छता अभियान में भाग लिया। वार्ड क्रमांक 51 में स्वास्थ्य परीक्षण और चिकित्सा शिविर संपन्न हुआ। समता चैक पर आज आईटी एवं सोशल मीडिया विभाग ने डिजिटल फाॅर्म में मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने से लेकर आज तक पार्टी व सरकार की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए स्क्रीन के माध्यम से लोगों को दिखाया। उक्त आशय की जानकारी जिला मीडिया प्रभारी राजेन्द्र गुप्ता ने दी


आयुर्वेद सम्मत जीवनशैली का प्रचार-प्रसार आवश्यक : मंत्री श्रीमती चिटनिस
Our Correspondent :21 Aug 2017
महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने आज एक दिवसीय राष्ट्रीय आयुर्वेद कौशल कार्यशाला का शुभारंभ किया। विश्व आयुर्वेद परिषद द्वारा आर.डी. आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में 'सामान्य स्त्री रोगों का आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति द्वारा निराकरण' विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए श्रीमती चिटनिस ने कहा कि वर्तमान में जीवन पद्धति और आहार-विहार में आये परिवर्तन के परिणामस्वरूप लोगों का स्वास्थ्य के प्रति दृष्टिकोण बदला है। आयुर्वेदिक पद्धतियाँ दैनिक जीवनचर्या और सामान्य खानपान के माध्यम से ही कई रोगों के निदान के उपाय बताती हैं। आयुर्वेद सम्मत समग्र जीवनशैली से कई बीमारियों से बचा जा सकता है। श्रीमती चिटनिस ने उन्होंने महिला स्वास्थ्य तथा पोषण के संबंध में सामान्य तथा विशेषज्ञतापूर्ण जानकारियाँ सहजता से उपलब्ध कराने के लिये विशेष प्रयास करने की आवश्यकता बताई। कार्यशाला में विषय-विशेषज्ञों ने विभिन्न स्त्री रोगों के आयुर्वेद में उपचार तथा उनकी पद्धतियों पर प्रकाश डाला। प्रमुख सचिव आयुष श्रीमती शिखा दुबे भी कार्यक्रम में उपस्थित थीं

शत-प्रतिशत टीकाकरण के लिये पुरस्कार योजना
Our Correspondent :17 Aug 2017
सघन मिशन इन्द्रधनुष में शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने वाले जिलों को पुरस्कृत करने के लिये लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने संयुक्त रूप से पुरस्कार योजना लागू की है। इसमें जिला एवं ग्राम पंचायत-स्तर पर 2-2 लाख रुपये और स्वास्थ्य विभाग सेक्टर (प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र) स्तर पर एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया जायेगा। शत-प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को भोपाल में मार्च माह में समारोह आयोजित कर पुरस्कृत किया जायेगा। प्रधानमंत्री ने शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिये सघन मिशन इन्द्रधनुष देशभर में लागू किया है। मिशन में प्रदेश के 13 जिले विदिशा, रायसेन, सागर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, श्योपुर, झाबुआ और अलीराजपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं। इनमें 31 जनवरी, 2018 तक शत-प्रतिशत टीकाकरण लक्ष्य प्राप्ति की जाना है। लक्ष्य में 2 वर्ष तक के बच्चों का सूचीकरण, आरसीएच पोर्टल में इंद्राज, बीसीजी, डीपीटी-3, पेंटा/डीपीटी और खसरा टीकाकरण शामिल है। पुरस्कार के लिये 18 फरवरी, 2018 से 28 फरवरी, 2018 के बीच प्रमुख सचिव स्वास्थ्य से 2 वर्ष उम्र तक के प्रत्येक शिशु के टीकाकरण का सत्यापन कराकर पुरस्कार के लिये पात्र जिला, सेक्टर, ग्राम पंचायत की जानकारी विकास आयुक्त को उपलब्ध करायेंगे। जिला एवं सेक्टर-स्तर के पुरस्कार में से किसी भी व्यक्ति विशेष को अधिकतम 10 प्रतिशत राशि दी जा सकेगी। शेष राशि जिला/सेक्टर स्तर के उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को वितरित करना होगी। पुरस्कार राशि स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध करायी जायेगी। ग्राम पंचायत की पुरस्कार राशि में से 20 हजार रुपये पुरस्कार स्वरूप होंगे। शेष एक लाख 80 हजार रुपये की राशि ग्राम पंचायत अधोसंरचना विकास कार्यों पर व्यय की जा सकेगी। नगद पुरस्कार 20 हजार में से सरपंच, उप सरपंच को अधिकतम 10 हजार रुपये और शेष 10 हजार रुपये टीकाकरण लक्ष्य प्राप्ति में उत्कृष्‍ट कार्य करने वाले मैदानी अमले को दिये जायेंगे। यह पुरस्कार राशि पंचायत संचालनालय द्वारा प्रदान की जायेगी।

अब तक स्वाइन फ्लू के 37 मरीज मिले
Our Correspondent :17 Aug 2017
प्रदेश में एक जुलाई से 16 अगस्त तक एच-1 एन-1 के 221 संदिग्ध मरीजों के सेम्पल जाँच के लिये भेजे गये। इनमें से 195 की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। सैंतीस मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। छब्बीस सेम्पल की रिपोर्ट आना शेष है। वर्तमान में शासकीय अस्पतालों में 13 और निजी अस्पताल में 8 मरीज उपचाररत हैं। यह जानकारी आज स्वास्थ्य विभाग द्वारा एच-1 एन-1 संक्रमण, मलेरिया, डेंगू एवं चिकनगुनिया की प्रभावी रोकथाम के लिये की जा रही दैनिक समीक्षा में दी गयी। बैठक में चिकित्सकों को निर्देश दिये गये कि जन-साधारण को संक्रमण के विरुद्ध जागरूक करें। बचाव ही उपचार है। सर्दी-खाँसी आने पर रूमाल या टिशु पेपर का उपयोग करें। टिशु पेपर उपयोग के बाद डस्टबिन में ही डालें। खाँसने वाले से कम से कम एक मीटर की दूरी बनाये रखें। पीड़ित व्यक्ति इस बात का ध्यान रखें कि खाना खाते समय ही मुँह में हाथ लगायें और किसी से हाथ न मिलायें। नाक, मुँह या आँखों का स्पर्श करने पर साबुन से हाथ धोएँ, यथा-संभव भीड़ वाले इलाकों में जाने से बचें। नमक के गुनगुने पानी या लिस्ट्रिन से गरारे करें। गर्म तरल पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करें। संतुलित एवं पौष्टिक भोजन करें। विटामिन-सी जैसे नींबू, आँवला, संतरा आदि का अधिक से अधिक सेवन करें। दिन में कम से कम एक बार जल-नेति/सूत्र-नेति से नाक साफ करें। यह संभव न हो तो नाक को जोर से छींकते हुए रुई के फोहे को नमक के गर्म पानी में भिगोकर नासिका द्वारों को साफ करें। यदि विटामिन-सी की टेबलेट लेते हैं तो ध्यान रखें, उसमें जिंक शामिल हो। जिंक वाली विटामिन-सी की टेबलेट का सेवन करने से शरीर द्वारा विटामिन-सी का अवशोषण किया जा सकेगा।

प्रदेश के 13 जिलों में अक्टूबर से जनवरी तक 4 चरण में चलेगा टीकाकरण अभियान
Our Correspondent :9 Aug 2017
जल जनित बीमारियाँ- डायरिया, आंत्रशोथ, हैजा और बीमारियों की रोकथाम एवं उपचार के लिये प्रदेश में जिला एवं विकासखंड स्तर पर 415 काम्बेट टीम का गठन किया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा समस्या मूलक गाँव और कस्बों को चिन्हित कर सतत निगरानी रखी जा रही है। यह जानकारी आज स्वास्थ्य विभाग द्वारा संक्रामक रोगों की दैनिक समीक्षा के दौरान दी गई। लोगों से कहा गया है कि अपने क्षेत्र में किसी भी प्रकार की जल-जनित बीमारी फैलने पर दूरभाष क्रमांक 0755- 4094192 एवं कॉल-सेन्टर 8989988712 पर तत्काल सूचना दें। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री रूस्तम सिंह ने बताया कि हर साल गर्मी की समाप्ति और वर्षा ऋतु के आरंभ पर पहले पानी की कमी फिर वर्षा के कारण पानी प्रदूषित होने पर जल-जनित बीमारियों के फैलने की संभावना बढ़ जाती है। प्रदेश के प्रत्येक गाँव के आरोग्य केन्द्र तथा डिपो होल्डर के पास पर्याप्त मात्रा में ब्लीचिंग पाउण्डर, जीवन रक्षक घोल, क्लोरीन, क्लोरोक्वीन, पैरासिटामोल, मैट्रो‍निडाजॉल आदि की गोलियाँ उपलब्ध करवाई गई हैं। सेक्टर प्रभारी, बहुउद्देशीय कार्यकर्ता और आशा के माध्यम से संक्रामक बीमारियों के तत्काल रोकथाम के प्रयास किये जा रहे हैं। किसी गाँव में बीमारी प्रकरण होने पर आशा इसकी सूचना संबंधित विकासखंड चिकित्सा अधिकारी को देती है ताकि उसकी रोकथाम के तत्काल कदम उठाये जा सकें। श्री सिंह ने दूषित पानी से होने वाली बीमारियों से बचने के लिये ये सावधानी बरतने की अपील की है। खाने-पीने में हमेशा साफ- शुद्ध पानी का उपयोग करें। शौच से आने के बाद साफ पानी और साबुन से हाथ अच्छी तरह धोयें। ताजे बने भोजन और खाद्य वस्तुओं का सेवन करें। हमेशा भोजन व अन्य खाद्य सामग्री को ढंक कर रखें ताकि मक्खियों, धूल आदि से दूषित न हो। यदि पानी दूषित लगता हो तो उसे उबालकर साफ कपड़े से छान लें। क्लोरीन की गोली डालें, एक घंटे बाद उपयोग करें। स्वाईन फ्लू के 11 मरीज उपचाररत स्वास्थ्य विभाग द्वारा आज स्वाईन फ्लू, डेंगू, चिकनगुनिया और संक्रामक रोगों की दैनिक समीक्षा में बताया गया कि 1 जुलाई से 8 अगस्त तक स्वाईन फ्लू के 95 सेम्पल भेजे गये जिनमें 91 की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। इनमें 17 पॉजिटिव हैं और 4 सेम्पल की रिपोर्ट आना शेष है। वर्तमान में शासकीय अस्पताल में 3 और निजी अस्पताल में 8 स्वाईन फ्लू मरीज उपचाररत हैं। आलोच्य अवधि में 14 जिलों में 42 डेंगू के मरीज पाये गये। 8 अगस्त को 4 प्रयोगशाला में 28 सेम्पल भेजे गये थे जिसमें 2 डेंगू प्रभावित पाये गये। इस अवधि में चिकनगुनिया के 14 संदिग्ध मरीज मिले थे लेकिन जाँच में निगेटिव रिपोर्ट आई। प्रदेश में स्वाईन फ्लू से एक मरीज की मृत्यु हो चुकी है।

प्रदेश के 13 जिलों में अक्टूबर से जनवरी तक 4 चरण में चलेगा टीकाकरण अभियान
Our Correspondent :29 July 2017
सघन मिशन इन्द्रधनुष के तहत अक्टूबर, नवम्बर, दिसम्बर 2017 और जनवरी 2018 में प्रदेश के 13 जिलों के जन्म से 5 साल तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण होगा। केन्द्र शासन द्वारा मिशन में देश के 118 जिलों और 17 शहर का चयन किया गया है। इनमें अलीराजपुर, छतरपुर, झाबुआ, पन्ना, रायसेन, रीवा, सागर, शहडोल, श्योपुर, सीधी, सिंगरौली और टीकमगढ़ जिला और शहरों में इंदौर शामिल है। यह जानकारी आज राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-मध्यप्रदेश के मिशन संचालक डॉ. संजय गोयल की अध्यक्षता में हुई स्टेट टास्क फोर्स इम्यूनाइजेशन बैठक में दी गई। सघन टीकाकरण अभियान अक्टूबर, नवम्बर, दिसम्बर और आगामी जनवरी माह की 7 तारीख से आरंभ होकर 7 दिन चलेगा। अभियान में 0 से 2 वर्ष तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही 0 से 5 वर्ष के बच्चों का टीकाकरण किया जायेगा। मिशन संचालक ने निर्देश दिये कि अस्पताल में आने वाले 5 वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण अवश्य सुनिश्चित करे। अधिक से अधिक बच्चों का टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के महिला-बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्कूल शिक्षा, नगरीय विकास, वन, युवा कल्याण एवं खेल, जनसम्पर्क और आयुष विभाग को भी अभियान से जोड़ा गया है। इनके अलावा यूनीसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूएनडीपी, सीएचएआई, रोटरी, आईएमए और आईएपी की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। लक्ष्य का 90 प्रतिशत से अधिक प्राप्त करने वाले जिलों को पुरस्कृत भी किया जायेगा। मिशन की टैग लाइन होगी ' पाँच साल में सात बार, छूटे न टीका एक भी बार'। बैठक में संबंधित विभागों और संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

तम्बाकू सेवन – विकास के सभी प्रयासों को क्षीण करने में सबसे बड़ी बाधा
Our Correspondent :31 May 2017
तम्बाकू सेवन – दुनिया भर में विकास के लाभों को क्षीण करने में प्रमुख बाधा है। यह समय से पहले की विकृति /मृत्यु दर का सबसे बड़ा कारण है। तम्बाकू के उत्पादों में लगभग 5000 से 7000 विषाक्त पदार्थ होते हैं, इनमें से सबसे खतरनाक निकोटीन, कार्बन मोनोऑक्साइड और टार है। आमतौर पर तम्बाकू का इस्तेमाल सिगरेट, बीडी, सिगार, हुक्का, शीशा, तम्बाकू चबाना, लौंग सिगरेट, तम्बाकू सूंघना और ई-सिगरेट के रूप में होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ) की रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रति वर्ष प्रत्याक्ष तम्बाकू के इस्तेमाल/तम्बाकू के धूएं से लगभग छह मिलियन लोगों की मृत्यु होती है और यह अधिकतर एनसीडी के लिए प्रमुख खतरे का कारक है। इसके अलावा संक्रमण की बीमारियों में से श्वसन संक्रमण और तपेदिक की वजह से लगभग 4 – 5 प्रतिशत मृत्यु दर का कारण तम्बाकू सेवन है। माना जाता है कि 2030 तक तम्बाकू से संबंधित बीमारियों के कारण मृत्यु दर लगभग 8 मिलियन होगी। तम्बाकू से सभी व्यक्तियों को खतरा है, फिर चाहे वे किसी भी उम्र, लिंग, जाति और सांस्कृतिक/शैक्षिक पृष्ठभूमि का व्यक्ति क्यों न हो। प्रकार/रूप पर ध्यान दिए बिना तम्बाकू व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालती है। दुनिया भर में अभी भी मृत्यु दर सबसे महत्वपूर्ण कारण धूम्रपान है, जिसे रोका जा सकता है। सिगरेट के धूएं में मौजूद विषाक्त पदार्थ से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ जाती है और डीएनए को नुकसान पहुंचता है, जिससे कैंसर/ट्यूमर की बीमारी होती हैं। सिगरेट के धूएं से प्रभावित होने वाले अन्य लोगों के हृदयवाहिनी प्रणाली पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे उनमें कोरोनरी हृदय रोग/ स्ट्रोक हो जाते हैं। सिगरेट के धूएं के कारण शिशुओं/बच्चों को बार-बार/ गंभीर अस्थमा के दौरे पड़ते हैं, श्वसन/कान संक्रमण होता है और शिशु की अचानक मृत्यु हो सकती है। भारत में लगभग 274.9 मिलियन लोग तम्बाकू का सेवन करते हैं। इनमें से 163.7 मिलियन लोग धुआं रहित तम्बाकू (एसएलटी), 68.9 मिलियन धूम्रपान करते हैं और 42.3 मिलियन दोनों का इस्तेमाल करते हैं। एसएलटी का इस्तेमाल विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र (वैश्विक वयस्क तम्बाकू सर्वेक्षण, 2009-10) में अधिक किया जाता है। एनएफएचएस-3 (2005-06) की तुलना में एनएफएचएस-4 (2015-16) के आंकड़ों से वयस्कों में (पुरूषः 57 प्रतिशत से 44.5 प्रतिशत, महिलाः 10.8 प्रतिशत से 6.8 प्रतिशत) तम्बाकू के इस्तेमाल में कमी के संकेत मिलते हैं। तम्बा कू के इस्तेशमाल से जुड़े स्वामस्य् क संबंधी खतरों को उजागर करने और तम्बािकू के उपभोग को रोकने के लिये प्रभावी नीतियों की हिमायत करने के वास्ते प्रति वर्ष 31 मई को ‘विश्वन तम्बाकू निषेध दिवस’ मनाया जाता है। इस वर्ष का विषय है- “तम्बाकू-विकास के लिए खतरा”, जो तम्बाकू के इस्तेमाल, तम्बाकू नियंत्रण और सतत् विकास के बीच के संबंध को रेखांकित करता है। सीवीडी, कैंसर और सीओपीडी सहित एनसीडी के कारण समय से पहले होने वाली मृत्यु में एक तिहाई कमी लाने के 3.4 एसडीजी के लक्ष्य को 2030 तक हासिल करने के लिए सतत् विकास एजेंडा में तम्बाकू पर नियंत्रण को सख्ती से शामिल किया गया है। तम्बाकू की खेती के लिए प्रति वर्ष 2-4 प्रतिशत वैश्विक वनों की कटाई की जाती है और इसके उत्पाद निर्माण से 2एमटी से अधिक का ठोस कचरा पैदा होता है। तम्बाकू की खेती के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कीटनाशक/उर्वरक आमतौर पर जहरीले होते हैं और जलापूर्ति को प्रदूषित करते हैं। तम्बाकू पर व्यापक नियंत्रण से तम्बाकू की खेती, उत्पाेदन, व्यापार और उपभोग से पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रबभाव से निपटने के साथ ही गरीबी और भूख के दुष्चक्र को रोका जा सकता है। इसके अतिरिक्तर इससे सतत कृषि/आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया और जलवायु परिवर्तन के ज्व लंत मुद्दे से निपटा जा सकता है। तम्बाकू उत्पादों पर कर बढ़ाना व्यावपक स्वास्थ्य कवरेज और अन्य विकास कार्यक्रमों के वित्त पोषण के लिये सहायक हो सकता है। सतत तम्बाकू-मुक्त विश्वय के लिए सरकारी प्रयासों के अलावा, व्यक्ति/समुदाय भी काफी योगदान दे सकते हैं। तम्बाकू एनसीडी के लिए प्रमुख निवारक खतरे का कारक होने का कारण, लगातार बढ़ती बीमारी के बोझ को कम करने और देशों का विकास को सुनिश्चित करने में सामूहिक तम्बाकू नियंत्रण प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। तंबाकू की महामारी से निपटने के लिए तंबाकू नियंत्रण पर डब्ल्यूएचओ फ्रेमवर्क कन्वेंशन में विश्व बैंक ने तम्बाकू उत्पादों को अवहनीय बनाने के लिए कर नीति में सुधार का प्रस्ताव किया, जिससे तम्बानकू का इस्तेतमाल कम और लोगों के स्वास्थ्य में सुधार होगा। एमएचएफडब्ल्यू (भारत सरकार) द्वारा शुरू किया गया राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम (2007-08) का उद्देश्य तम्बाकू नियंत्रण कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन के साथ ही तम्बाकू के हानिकारक प्रभावों के संबंध में जागरूकता फैलाना है। इस कार्यक्रम के तहत समग्र नीति तैयार करने, योजना बनाने, निगरानी करने और विभिन्न गतिविधियों का मूल्यांकन करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण इकाई की है। तम्बाकू पर कर बढ़ाकर इसकी कीमत में बढ़ोत्तरी एक प्रभावी रणनीति है, देश में सिगरेट और बड़े पैमाने पर बीडी उत्पादन (लघु/ कुटीर उद्योगों को छोड़कर) उद्योग पर उत्पाद शुल्क लागू है। तम्बाकू के इस्तेमाल को रोकने के अऩ्य प्रयासों में स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाना, तम्बाकू रोधी अभियान, तम्बाकू का सेवन करने वालों के लिए व्यसन से बचाव/पुनर्वास के कार्यक्रम बढ़ाना, अन्य लोगों का धूम्रपान के संपर्क को कम करना, तम्बाकू के विज्ञापनों, प्रसार और प्रायोजन पर प्रतिबंध लगाना शामिल है। इसके अतिरिक्त एम तम्बाकू समाप्ति कार्यक्रम भी चल रहे हैं। जनता के स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 2003 में भारत सरकार ने सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद (विज्ञापन पर प्रतिबंध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति तथा वितरण का नियमन) अधिनियम लागू किया था, जिसमें (सीओपीटीए) 2014 में संशोधन किया गया। इसमें सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने पर प्रतिबंध, विज्ञापन और नाबालिगों/शैक्षिक संस्थानों के नजदीक तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक, तम्बाकू उत्पादों के पैकेट पर सचित्र स्वास्थ्य चेतावनी तथा उत्पाद में टार/निकोटीन के भाग को नियंत्रित करने का प्रावधान है। सीओटीपीए को लागू करने में राज्यों के अधिकार बढ़ाने तथा तम्बाकू के सेवन से स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव और अन्य लोगों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 2007 में भारत सरकार ने पायलट राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) का शुभारंभ किया था। 2012-17 के दौरान सभी 36 राज्यों/ 672 जिलों को चरणबद्ध रूप से कवर करने के लिए 700 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन के साथ एनटीपीसी का विस्तार किया जा रहा है। डॉ. मार्गरेट चैन (महानिदेशक, डब्ल्यूएचओ) ने तम्बाकू नियंत्रण उपायों एमपीओडब्ल्यूईआर के तुरंत कार्यान्वयन पर बल दिया है। जिसमें तम्बाकू के इस्तेमाल की निगरानी/रोकथाम नीतियां, लोगों की धूम्रपान के धूएं से सुरक्षा, तम्बाकू का सेवन बंद करने में मदद करना, तम्बाकू के खतरों के बारे में चेतावनी देना, तम्बाकू के विज्ञापन/प्रसार/प्रायोजन पर पाबंदी लगाना और तम्बाकू उत्पादों पर कर बढ़ाना शामिल है। मई 2016 में एमएचएफडब्ल्यू, डब्ल्यूएचओ-भारत कार्यालय और हृदय ने संयुक्त रूप से भारत में तम्बाकू नियंत्रण उपायों के लिए तकनीकी चर्चा आयोजित की थी। बच्चों और किशोरों के बीच तम्बाकू के इस्तेमाल को रोकने के लिए युवा उत्प्रेरक के रूप में अपने साथियों, परिवारों और समाज में तम्बाकू का इस्तेमाल न करने की वकालत कर सकते हैं। इसलिए तम्बाकू के सेवन के दुष्प्रभावों को उजागर करने के लिए स्कूल आधारित कार्यक्रमों के जरिए उनमें जागरूकता फैलाना अति आवश्यक है। इसके अलावा डब्ल्यूएचओ ने सभी राष्ट्रों को तम्बाकू उत्पादों की सादी पैकेजिंग करने का निर्देश दिया है। राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम और अनुसंधान संस्थान में “वैश्विक धूआं रहित तम्बाकू ज्ञान केंद्र” की स्थापना की गई है। तम्बाकू या निकोटीन वाले गुटखा/पान मसाला के उत्पादन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। “स्वस्थ्य रहें, गतिशील रहें, पहल” के अंतर्गत भारत सरकार ने टोलफ्री टोबैको सेसेशन क्वीटलाइन और एम सेसेशन सर्विस का शुभारंभ किया है। तम्बाकू का उपभोग दर्शाने वाली फिल्मों में तम्बाकू रोधी स्वास्थ्य स्थलों, चेतावनी और संदेश प्रदर्शित करना अनिवार्य है। मार्च, 2017 में हमारी सरकार ने सभी तम्बाकू उत्पादों के लिए निर्दिष्ट स्वास्थ्य चेतावनी के 2 चित्र को शामिल करने के लिए सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद (पैकेजिंग/लैबलिंग) नियम 2008 में, संशोधन किया जो एक अप्रैल, 2017 से प्रभावी है। तम्बाकू उत्पादों के विज्ञापन पर प्रतिबंध के बावजूद एसएलटी निर्माता अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए भ्रामक ब्रांड साझा करने की रणनीतियों और मशहूर हस्तियों द्वारा विज्ञापन करवाने जैसे अन्य उपायों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि सरकार पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा और अन्य विनियमों के जरिए एसएलटी उत्पादों को सख्ती से नियमित करती है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम में पैक किए गए एसएलटी उत्पादों का उत्पादन, बिक्री, परिवहन और भंडारण पर रोक का प्रावधान है। इसके अलावा एसएलटी के बारे में जन जागरूकता संदेश और प्रभावी /व्यवस्थित निगरानी प्रणाली व्यापक तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के आवश्यक अंग है।

मध्यप्रदेश में पाँच बूंद दवा बचाएगी प्रति वर्ष 338 बच्चों की जान सरकारी अस्पतालों में निशुल्क उपलब्ध होगी 2 हज़ार तक की वैक्सीन
Our Correspondent :3 December 2016
भोपाल। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण श्री प्रवीर कृष्ण ने आज यहाँ टेली मेडिसिन योजना का शुभारंभ किया। भोपाल स्थित 'एम्स'' में स्थापित सेन्टर से योजना का शुभारंभ हुआ। इसके साथ ही प्रदेश को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और मोबाइल मेडिसिन की सुविधा भी प्राप्त होगी। प्रदेश के तीन मेडिकल कॉलेज भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर के साथ सीधी, शहडोल, शाजापुर, बैतूल, खरगोन, मंदसौर, मण्डला, बालाघाट, झाबुआ, श्योपुरकला के जिला चिकित्सालयों को टेली मेडिसिन की सुविधा से जोड़ा गया है। बाद में अन्य जिलों को भी इस सुविधा से जोड़े जाने की योजना है।
श्री प्रवीर कृष्ण ने कहा कि टेली मेडिसिन द्वारा जिलों के चिकित्सक चिकित्सा जगत के विशेषज्ञों से परामर्श कर सकेंगे, जिससे गंभीर रोग से पीड़ित व्यक्तियों के उपचार में सुविधा प्राप्त हो सकेगी। वर्तमान में दिल्ली, भोपाल, लखनऊ, चण्डीगढ़ के चिकित्सा विशेषज्ञों से प्रदेश के जिला चिकित्सालयों के चिकित्सक परामर्श प्राप्त कर सकेंगे।

इसके साथ ही प्रदेश को मोबाइल मेडिसिन की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है। इसके द्वारा रोगी सामान्य रोगों के लक्षण टेलीफोन पर चिकित्सकों को बताकर उपचार प्राप्त कर सकेंगे। चिकित्सक द्वारा रोगों के लक्षण जानकर संबंधित मरीज को एस.एम.एस. के माध्यम से दवा की जानकारी दी जायेगी। अपने मोबाइल पर एस.एम.एस. को चिकित्सालय में दिखाने पर मरीज नि:शुल्क दवा प्राप्त कर सकेंगे। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त श्री पंकज अग्रवाल, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की राज्य संचालक श्रीमती एम. गीता, स्वास्थ्य संचालक श्री संजय गोयल, एम्स भोपाल के अधिकारी एवं संबंधित चिकित्सक उपस्थित थे।
प्रमुख सचिव ने कोलार डिस्पेंसरी का निरीक्षण किया
प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण श्री प्रवीर कृष्ण ने आज कोलार स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के नवनिर्मित भवन का निरीक्षण कर वहाँ संचालित स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। श्री प्रवीर कृष्ण ने अस्पताल भवन में पर्याप्त साफ-सफाई, पार्किंग एवं रख-रखाव के संबंध में निर्देश दिये। उन्होंने वहाँ प्रसूति कक्ष में 30 बिस्तर के स्थान पर 50 बिस्तर बढ़ाने के निर्देश भी दिये। श्री प्रवीर कृष्ण ने कहा कि जन-सामान्य की जानकारी के लिये प्रसूति कक्ष के बाहर जननी सुरक्षा 108 कॉल सेन्टर और प्रसूति के लिये शासन द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी के बोर्ड लगाये जायें। उन्होंने ममता, आस्था और कायाकल्प से संबंधित अभियानों के अनुसार नियमित व्यवस्था करने के निर्देश भी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को दिये। उन्होंने कोलार डिस्पेंसरी में दो मेडिकल ऑफिसर तुरन्त ही नियुक्त करने के निर्देश भी दिये। उल्लेखनीय है कि अभी हाल ही में 364.97 लाख की राशि से कोलार सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन का निर्माण हुआ है। इसमें अगस्त माह से अभी तक 4,628 व्यक्ति ने उपचार करवाया एवं 65 डिलेवरी हुई।


नागरिकों ने ली वातावरण स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी
Our Correspondent :3 December 2016
जनसंपर्क, जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने स्वच्छता अभियान में दतिया नगर के मुख्य मार्ग पर नागरिकों के लिए एक हजार डस्टबिन वितरित करवाईं। स्वच्छता अभियान को समर्थन देते हुए व्यापारियों और नागरिकों ने खुद अपने आसपास का परिवेश स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी ली है। आज समारोह में जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्रा ने माँ पीताम्बर पीठ के पास स्थानीय बाजार में सड़कंन और गलियाँ साफ-सुधरी रखने के लिए एक हजार डस्टबिन वितरित की। नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों को भी ट्रालियाँ प्रदान की गई। कार्यक्रम में नगर पालिका दतिया के अध्यक्ष श्री सुभाष अग्रवाल, जिला अंत्योदय समिति के उपाध्यक्ष श्री रामजी खरे सहित अन्य जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे

बुखार होने पर चिकित्सक की सलाह जरूर लें
21 October 2016
लोक स्वस्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री रूस्तम सिंह ने बुखार आने की स्थिति में अपनी मर्जी से दवा न लेने, चिकित्सक की सलाह पर रक्त की जाँच एवं दवाइयों का सेवन करने, अपने घर और घर के आसपास पानी न जमा होने देने और पूरी तरह से शरीर ढँकने वाले कपड़े पहनने की नागरिकों से अपील की है। श्री सिंह ने कहा डेंगू, चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू प्रभावित राज्यों में जाने और आने वाले लोग बुखार की कदापि अनदेखी न करें। भोपाल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वीणा सिन्हा ने सलाह दी है कि यदि बुखार 102 डिग्री से अधिक है, तो बुखार कम करने के लिये सिर पर ठण्डे पानी की पट्टियाँ रखें, सिर्फ पेरासिटामॉल की गोली दें और तुरंत चिकित्सक की सलाह लें। नॉन स्टीरोइडल, एंटी-इनफ्लेमेटरी दवाइयों जैसे स्प्रीरिन, आइबूप्रोफिन, नेप्रोक्सीन दवाइयों का उपयोग न करें। ये दवाइयाँ शरीर में तेजी से रक्त स्राव कर सकती हैं। पर्याप्त मात्रा में तरल पेय और पानी पियें, साथ ही आराम भी करें। उच्च जोखिम वाले जैसे गर्भवती महिलाएँ, बच्चे, वृद्ध, डायबिटीज एवं हृदय रोगी 12 घंटे में ही उपचार लें। अन्य लोग डेंगू लक्षण होने पर 24 घंटे के अंदर उपचार ले लें।
डेंगू के लक्षण पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में नि:शुल्क जाँच उपचार करायें डेंगू डेन नामक वायरस के कारण होता है, जो मच्छर के काटने से फैलता है। इसमें 2 से 7 दिन तक बुखार, सिरदर्द, माँसपेशियों, जोड़ों और आँखों के आसपास दर्द, छाती और दोनों हाथों लाल चकत्ते- दाने, गंभीर अवस्था में नाक, मसूड़ों, पेट/आँत से खून का रिसाव होता है। श्री सिंह ने कहा ऐसे लक्षण पाये जाने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर नि:शुल्क परामर्श जाँच, उपचार का लाभ लें। मच्छरों की उत्पत्ति एवं बचाव
एडिज मच्छर साफ पानी से भरे कंटेनर के साथ ही अंडर ग्राउण्ड टेंक और जमा हुए पानी में भी पैदा होते हैं। सभी बर्तनों को सप्ताह में एक बार जरूर पानी खाली करके अच्छी तरह साफ करें। लार्वा को नष्ट करने के लिये टेमोफॉस और मच्छर के लिये पायरेथ्रम का स्प्रे किया जाता है। भोपाल में 121 टीमें लगातार लार्वा सर्वेक्षण के साथ डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया की रोकथाम के लिये निरंतर सक्रिय है। दिनांक 19 अक्टूबर तक पाँच लाख 55 हजार 509 घरों का सर्वेक्षण किया जा चुका है, जिसमें 31 हजार 664 घरों में लार्वा पाया जाने पर विनष्टीकरण कार्यवाही की गई।

दीवाली पर पटाखों का शोर सुन सकेगा नन्हा मुकेश
21 October 2016
मजदूरी कर परिवार की गुजर-बसर कर रहे गजेन्द्र राठौर की आँखें आज खुशी से छलक रही हैं। उनका जन्म से बधिर नन्हा बेटा इस बार दीवाली में पटाखों की आवाज सुन सकेगा। यही नहीं दीवाली के बाद बेटी के भी कान का ऑपरेशन हो जाएगा वह भी सुन सकेगी। जन्म से बधिर गजेन्द्र के दोनों बच्‍चों के लिए मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना से 13 लाख रूपये मंजूर किए गए हैं। खरगोन जिले के गोगाँव निवासी गजेन्द्र राठौर कहते हैं हम चाहते थे हमारे बच्चे भी सबकी तरह बोले-सुनें पर इतनी बड़ी रकम का इंतजाम मैं दूर-दूर तक नहीं कर सकता था। तब बेबसी और लाचारी घेर लेती। ऐसे में सरकार की यह मदद मुझको किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं लग रही। बच्चों की माँ की खुशी का तो बखान ही नहीं किया जा सकता। गजेन्द्र के दोनों बच्चे सुन न सकने के कारण केवल टुकर-टुकर देखते रहते थे। इसी साल फरवरी में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम ने ग्राम लाखी आँगनवाड़ी में बच्चों का चेक अप कर कॉकलियर इम्प्लांट की अनुशंसा की। दोनों बच्चों के इलाज के लिए 6 लाख 50 हजार के मान से 13 लाख रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना से दी गई। मुकेश को इंदौर के अरविन्दो मेडिकल कॉलेज में भेजा गया। ऑपरेशन के बाद कॉकलियर इम्प्लांट किया गया। पहली बार मुकेश ने अपने मामा-पिता की आवाज सुनी। उसकी बहन निहारिका का ऑपरेशन हीमोग्लोबिन कम होने से दीवाली के बाद हो सकेगा। गजेन्द्र कहता है "जो भगवान ने नहीं दिया सरकार ने दे दिया'' कैसे शुक्रिया अदा करूँ समझ नहीं आता।

स्वच्छ भारत अभियान में जन-भागीदारी ,शौचालय निर्माण में 64 फीसदी की वृद्धि
20 September 2016
हरियाणा के मेवात जिले के कोराली गांव की अमीना के छोटे से घर में तीन चार महीने पहले ही शौचालय बना है। उनका कहना है कि शौचालय बन जाने से वे अपने आपको जहां सुरक्षित महसूस करते हैं, वहीं पर उन्हेंे हर दिन अपने स्वानस्य्म को लेकर जोखिम नहीं उठाना पड़ता। अमीना बताती है कि खेतों में कीडे मकोडें और सांपों का ही डर नहीं रहता बल्कि कौन आपको देख रहा है। ये पीड़ा भी कचोटती रही है, खतरा हर समय बना रहता है। इतना ही नहीं कई बार तो शौच करते-करते बीच में उठ जाना पड़ जाता था। पर अब सब ये बीते समय की बात है। आज मैं अपने घर के अंदर ही शौच जा सकती हूं और मुझे किसी प्रकार का कोई डर नहीं।
उनके पति इरफान का कहना है कि मुख्यक सड़क के किनारे अक्सतर लोग शाम के समय शराब पीएं रहते है और ऐसे में किसी महिला का बाहर शौच के लिए जाना मुनासिब नहीं है और कुछ महीने पहले तक महिलाएं घर के मर्द को साथ लेकर ही शौच के लिए जा सकती थी। इस गांव में लगभग हर घर में शौचालय बना दिया गया है। कुल मिलाकर 150 शौचालय बनाए गए है। कोराली गांव के उमर मोहम्मनद का कहना है कि पहले इस गांव में सड़क हो या खेत चलना मुश्किल होता था, क्योंदकि हर जगह लोग शौच करने बैठ जाते थे और जगह – जगह गंदगी फैल जाती थी, खासकर बरसात के मौसम में पांव रखने की जगह नहीं होती थी। पर अब स्थिति खुशग्वा र हो गई है। इसके साथ ही इस ग्राम पंचायत के अधीन छापरा गांव में भी 60 शौचालय अब तक बन चुके है और खुशी की बात यह है कि जिनके घरों में शौचालय नहीं बने है वे शौचालय बनाने की मांग करने लगे है ऐसा पहले नहीं था। शौचालय बनाने के लिए लोगों को राजी करना पड़ता था तथा उन्हें खुले में शौच करने से होने वाली बीमारियों की जानकारी देनी पड़ती थी। इसी गांव की हफीजन के 8 बच्चे हैं और वे चाहते हैं कि उनके घर में भी जल्दथ से जल्दी शौचालय बना दिया जाए। इस मेवात में ही हीरमिथला गांव में आज हर घर में शौचालय है। किसी किसी के घर में तो दो से ज्याहदा शौचालय है क्यों कि बेटों की शादी होने से परिवार बढ़ जाने पर वे अब ज्यातदा शौचालय की मांग करने लगे है। हालांकि मेवात में ही पानी की सुविधा उपलब्धज न होने की वजह से शौचालय बन जाने पर भी उनका इस्तेामाल नहीं हो पा रहा।
मेवात में लोगों को शौचालय बनाने के प्रति जागरूकता दिलाने और इनके निर्माण के पीछे सुलभ अंतर्राष्ट्रीलय समाज सेवा संगठन (SULABH INTERNATIONAL SOCIAL SERVICE ORGNIGATION) का हाथ है,जहां इन शौचालयों को बनाने के लिए तकनीक और निर्माण का कार्य सुलभ संस्थाी ने उपलब्ध, करवाया हैं, वहीं इन शौचालयों को बनाने के लिए विभिन्नक बैंकों, कुछ विमानन कंपनियों और निजी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा उनके सीएसआर फंड से उपलब्धन कराया गया है। किसी भी सरकार के लिए इतनी बड़ी मुहिम को अकेले में चलाना आसान नहीं है और सुलभ अंतर्राष्ट्री य समाज सेवा संगठन इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इस संगठन ने ग्रामीण इलाकों में 1,10,000 के लगभग शौचालय बनाए है और 12000 से ऊपर स्कू लों में शौचालयों के ब्लॉंकों का निर्माण किया है। शहरी इलाकों में भी इस संस्थान ने 8500 सार्वजनिक शौचालय बनाए है जिन्हें हररोज एक करोड़ के करीब लोग इस्तेममाल करते है। महाराष्ट्रश के पंधारपुर में सुलभ द्वारा सबसे बड़ा शौचालय परिसर बनाया गया है, जहां पर 1140 शौचालय बन चुके है और 350 वॉशरूम बनाए गए है। यहां पर कुल मिलाकर 2500 शौचालय बनाये जाने है। यहां पर प्रतिदिन 1,50,000 तीर्थयात्री शौचालयों का प्रयोग कर रहे हैं। इतना ही नहीं यहां पर दिव्यांतगलोगों के लिए उनकी सहुलियत के अनुसार शौचालय बनाए गए है। महिलाओं और पुरूषों के शौचालय अलग- अलग है। इसी राज्या के शिरडी में दूसरा बडा परिसर बनाया गया है, जहां पर एक लाख के लगभग तीर्थयात्री हर रोज इनका प्रयोग करते है।
2 अक्तू बर, 2014 में स्वथच्छज भारत अभियान की शुरूआत से ग्रामीण इलाकों में अब तक 219.72 लाख शौचालय बनाए जा चुके है और केवल 2015-16 में ही 43,94,090 शौचालय बनाए गए है। नेशनल सेम्प ल सर्वे की एक रिपोर्ट के अनुसार 2014-15 से 2015-16 की अवधि में शौचालय के निर्माण में 64 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। अब तक 76586 गांवों ने अपने को खुले में शौच से मुक्त् घोषित किया है। लेकिन जैसा कि इस रिपोर्ट में कहा गया है कि हमारे देश में अब भी ग्रामीण इलाकों में आधे से ज्याेदा लोग खुले में शौच करते है और पिछले वर्ष मई-जून में किए गए सर्वे के अनुसार केवल 43.5 ग्रामीण घरों में शौचालय है और 42.5 ग्रामीण घरों में पानी की व्यववस्थाव उपलब्धल कराई गई है। जहां तक शहरी इलाकों का सवाल है, वहां पर हालांकि एनएसएस की इसी रिपोर्ट के अनुसार 88.8 प्रतिशत घरों में शौचालय है। पर शहरी इलाकों की झुग्गीप झोपड़ी बस्तियों में स्थिति दयनीय है। उदाहरण के तौर पर दिल्लीश की ही एक ऐसी बस्ती में जहां जनसंख्या 12000 से ऊपर है वहीं म्यु निस्पिलटी द्वारा केवल 20 से 25 शौचालय बनाए गए है। दूसरी बात यह है कि इन बस्तियों के अनाधिकृत होने के कारण वहां पर सीवर या तो नदारद है या खुले रहने से गंदगी की वजह से वहां पर हर तरह की बीमारियों से लोग परेशान रहते है।
हाल ही में शहरी विकास मंत्री श्री एम. वेंकैया नायडू ने ‘स्वच्छ सर्वेक्षण-2017’ का शुभारंभ किया था। शहरी क्षेत्रों में सर्वे का यह दौर अक्टूबर, 2014 में स्वच्छ भारत अभियान के शुभारंभ के बाद किया गया था है और इसका उद्देश्य संबंधित राज्यों एवं शहरी स्थानीय निकायों द्वारा स्वच्छता प्रयासों के स्तरों का आकलन करना तथा पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण के बाद अर्जित की गई बेहतरी, जिनके परिणामों की घोषणा इस वर्ष जनवरी में की गई, को दर्ज करना है। इसके अतिरिक्त, यह स्वच्छता स्तरों के संबंध में दूसरों के मुकाबले नगरों को श्रेणीबद्ध करने में भी मदद करता है। जहां पहले दौर में दस लाख या इससे अधिक की आबादी वाले 73 नगरों में सर्वेक्षण का काम किया गया वहीं पर सर्वे के इस दूसरे दौर में एक लाख या उससे अधिक आबादी वाली 500 नगरों एवं शहरों को कवर किया जाएगा। इसके अतिरिक्त एक लाख से कम आबादी वाले राजधानी नगरों तथा विरासत, पर्यटन एवं पहाड़ी स्थानों आदि के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण शहर भी इसमें शामिल होंगे। इन 500 नगरों की रैंकिंग सर्वे के इस दूसरे दौर के बाद की जाएगी, जो देश में शहरी आबादी के लगभग 70 प्रतिशत हैं। पूरे भारत के लिए चार अंकों की एक स्वच्छता हेल्पलाइन की भी शुरूआत की गई है,जिसके तहत कोई भी टोल-फ्री नम्बर 1969 पर कॉल कर सकता है और शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान के किसी भी पहलू के बारे में जानकारी मांग सकता है। देश को खुले में शौच से मुक्त करने के लक्ष्यक के लिए अब तीन वर्ष से भी कम समय बाकी है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार पिछले वर्षों में भी पूर्ण स्वअच्छ ता को लेकर वार्षिक लक्ष्यों को भी पूरा नहीं किया गया था। इसलिए जाहिर है स्व्च्छवता की इस मुहिम को और तेज किए जाने की जरूरत है। ग्रामीण इलाकों में जहां जागरूकता को और अधिक व्या्पक बनाने की जरूरत है, वहीं पर शौचालय बनाने के लिए राशि देने की व्ययवस्थाम को भी और लचीला करना होगा, ताकि कोई भी ग्रामीण परिवार इस सुविधा से वंचित न रह पाएं।

गर्मी में कैसा हो आपका खानपान
18 April 2016
चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के मौसम गर्मी में आपकी कार्यक्षमता पर तो बुरा असर पड़ता ही है, अपने ऊपर अधिक ध्यान देने की भी जरूरत होती है। खासकर खानपान का तो इस मौसम में विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

गर्मी के इस मौसम में अगर अपने ऊपर पर्याप्त ध्यान न दिया जाए तो तरह-तरह की मुश्किलें सामने आ सकती हैं। शरीर से अत्यधिक मात्रा में पसीना निकलने से जहां डीहाइड्रेशन की समस्या परेशान करती है, वहीं गंदगी भी कई बीमारियों की वजह बनती है। ऐसे में खाने-पीने का खास खयाल रखा जाए तो शरीर के कमजोर होने और बीमारी पास आने की आशंका काफी कम हो जाती है। दूसरी तरफ खाने-पीने में लापरवाही और कुछ अन्य जरूरी बातों का ध्यान न रखने पर मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

पानी अधिक लें, चाय छोड़ें

इस मौसम में शरीर में पानी का स्तर ठीक रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए यह भी जानना जरूरी है कि कौन-सा पेय पदार्थ लें और कौन-सा नहीं। ऐसे पेय पदार्थ लेने से बचें, जो पेट में गैस पैदा करते हैं। खासकर चाय का सेवन बहुत कम कर दें। अगर संभव हो तो चाय छोड़ ही दें या दो कप से ज्यादा न लें, क्योंकि यह आपके पाचनतंत्र को बिगाड़ती है।

नारियल पानी है अमृत

नारियल पानी इस मौसम में काफी मिलता है और यह इस मौसम में सेहत के लिए काफी फायदेमंद भी होता है। इस मौसम में जौ भी काफी फायदेमंद साबित होती है। इसे दही में डाल कर सत्तू के रूप में भी खा सकते हैं या इसे उबाल कर टमाटर, खीरा, मिर्च, हरी चटनी, नमक आदि मिला कर भी खाया जा सकता है। रोटी में भी जौ के आटे का इस्तेमाल करें। गेहूं और जौ का आटा बराबर मात्रा में मिलाकर रोटी बनाएं। इस मौसम में यह शरीर को ठंडा भी रखेगी और पेट भी ठीक रहेगा।

चना जो आपको रखे ठंडा

चने को भी डाइट में प्रमुखता से शामिल करें। काला और हरा चना दोनों ही इस मौसम में ज्यादा खाना चाहिए, क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है। इससे पेट नहीं फूलता और भूख भी शांत हो जाती है।

मौसमी फलों को दें तरजीह

फलों में मौसमी, तरबूज, खरबूजा आदि इस मौसम में काफी फायदेमंद होते हैं। पित्त की समस्या है तो खीरे और लौकी के रस को बराबर मात्रा में मिला कर उसमें सेंधा नमक या लवण भास्कर आयुर्वेदिक चूर्ण डाल कर कर पी जाएं। यह गैस को नियंत्रित रखता है और पाचन क्षमता को भी बेहतर बनाता है। सलाद और चाट में भी सादे नमक की बजाय इन्हीं का इस्तेमाल करें। यह आम का भी मौसम है, लेकिन आम को खाने में थोड़ी सावधानी बरतें। खाने से पहले आम को दो घंटे के लिए पानी में रखें, फिर उसका इस्तेमाल करें।

धनिया, पुदीना और प्याज भी जरूरी

इस मौसम में हरी चटनियों का सेवन कर सकते हैं। धनिया, पुदीना, आंवला, प्याज आदि की चटनी बना कर खाने के साथ खाएं। यह आपके खाने का स्वाद भी बढ़ाती है और मौसम के अनुरूप भी है।

कामकाजी हैं तो..

कामकाजी लोग खाली पेट घर से बिलकुल न निकलें, क्योंकि इससे लू लगने की आशंका बढ़ जाती है। कामकाजी महिलाएं लंच में सलाद ज्यादा लें तो बेहतर है। नाश्ता करके ही घर से निकलें।

नॉनवेज न खाएं

आप मांसाहारी हैं तो इस मौसम में उसकी मात्र कम कर दें। अल्कोहल के इस्तेमाल से भी बचें। ये गर्म तासीर की चीजें हैं, जिन्हें पचाने के लिए शरीर को काफी मेहनत करनी पड़ती है।

बच्चों का रखें खास खयाल

बच्चों को इस मौसम में ऐसी चीजें न दें, जो जल्दी खराब हो जाती हैं। नूडल्स आदि पर रोक लगाएं। नींबू पानी नियमित रूप से दें। बच्चा खाना वापस ला रहा है तो उसे चावल और जौ की चीजें दे सकते हैं।

खाली पेट घर से कभी न निकलें

इस मौसम में आप लू की चपेट में आ सकते हैं। इससे बचने के लिए सुबह बिना कुछ खाए घर से न निकलें।

सुबह का नाश्ता कैसा हो?

सुबह का नाश्ता इस मौसम में बहुत जरूरी है, इसलिए इसे कभी भी मिस न करें। नाश्ते में आप तरल पदार्थों को तरजीह दें। नारियल पानी, फल आदि को प्रमुखता से शामिल कर सकते हैं। पोहे को भी नाश्ते में सर्व किया जा सकता है।

दोपहर का खाना कैसा हो?

दोपहर में अगर ज्यादा भूख नहीं है तो काले चने की चाट बना सकते हैं, जिसे घर में बनाना बेहतर है। हरे चने की चाट भी खाई जा सकती है। अगर ज्यादा भूख है तो रोटी, सब्जी, रायता, लस्सी, छाछ और हरी सब्जियों को खाने में शामिल करें। दही का सेवन कई रूप में किया जा सकता है। गोभी इस मौसम में कम खाएं, क्योंकि ये इस मौसम की सब्जी नहीं है। इस मौसम की सब्जियों में बीन्स, पालक, सेम की फली, बैंगन आदि का उपयोग करें। लौकी को भी अलग-अलग तरह से बना सकते हैं।

शाम के नाश्ते में क्या लें

शाम को मुरमुरे, भेलपुरी खाना ठीक रहेगा। कभी-कभी सलाद भी ले सकते हैं। शाम को शरबत, ठंडाई आदि पी जा सकती है। खस, गुलाब आदि का शरबत भी अच्छा रहता है। नींबू पानी और छाछ तो फायदेमंद हैं ही।

रात के खाने को हल्का रखें

रात के खाने को हल्का रखें। इस समय सलाद और सब्जी ज्यादा खाएं। रोटी खाते हैं तो उसकी संख्या लंच से एक कम रखें। दूध की जरूरत गर्मियों में होती नहीं। नींद की समस्या है तो तो दूध पी सकते हैं, पर उसकी मात्र कम रखें और उसमें इलाइची डाल लें। चाय-कॉफी का सेवन रात में बिल्कुल न करें।

बीपी की समस्या है तो

बीपी का खतरा इस मौसम में बढ़ जाता है। इसके अलावा मधुमेह के रोगियों में डिहाइड्रेशन होने की आशंका भी रहती है। ऐसे लोग खाने का समय निश्चित रखें और पानी व तरल पदार्थ समय-समय पर लेते रहें। इस मौसम में खाना बिल्कुल न छोड़ें। मूंग की खिचड़ी ले सकते हैं। यह पेट के लिए काफी फायदेमंद रहती है। डायबिटिक हैं तो रात का खाना खाना कभी न भूलें और अपने डॉक्टर के निर्देशानुसार खाना-पीना, दवा आदि समय पर लेते रहें।ा।

भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र ने चिकित्सकों द्वारा 18 जनवरी सोमवार को प्रस्तावित हड़ताल
18 January 2016
भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र ने चिकित्सकों द्वारा 18 जनवरी सोमवार को प्रस्तावित हड़ताल को ध्यान में रखते हुए सभी चिकित्सा व्यवस्थाएं सुनिष्चित करने के दिषा निर्देंष जारी किए हैं। इस दौरान बीएमएचआरसी मुख्य अस्पताल और आठों मिनी यूनिटों में आम दिनों की तरह चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध रहेगी। अस्पताल प्रबंधन ने सभी चिकित्सकों और प्रषासनिक अधिकारियों के अवकाष निरस्त कर दिए हैं। साथ ही मुख्य अस्पताल और मिनी यूनिटों में 18 जनवरी को सीनियर रेजीडेंट और जूनियर रेजीडेंट को अपनी सेवाएं प्रदान करने हेतु तैनात किया है। अस्पताल एवं मिनी यूनिटों में तैनात चिकित्सकों की सूची संलग्न है।

दिल का सबसे खतरनाक दुश्मन है हाई ब्लड प्रेशर
17 November 2015
कोलेस्ट्राल और चर्बी की अधिकता से खतरों को देखते हुए दिल को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा तरीका वजन घटाना है। कोलेस्ट्राल पर नियंत्रण से भी फायदा है। लेकिन, दिल के लिए और भी खतरे हैं। नए प्रमाण मिले हैं कि हाई ब्लडप्रेशर दिल का सबसे बड़ा दुश्मन है।
अमेरिका में बहुप्रतीक्षित परीक्षण स्प्रिंट के परिणामों ने इस खतरे की पुष्टि की है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) की वार्षिक बैठक में ट्रायल के निष्कर्षों से हलचल मच गई। 9 नवंबर को न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित परिणामों ने ब्लड प्रेशर के संबंध में वर्तमान सिफारिशों पर सवाल उठाए हैं। बताया गया है, ब्लड प्रेशर जितना कम होगा उतना ही अच्छा है।
स्प्रिंट के तहत 140 एमएम एचजी और उससे कम ब्लड प्रेशर वाले लोगों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। डॉक्टर 140 एमएम से कम रक्तचाप को ठीक मानते हैं। शोधकर्ताओं ने 50 वर्ष से अधिक आयु के हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित 9300 मरीजों के लिए 140 एमएम एचजी और 120 एमएम से कम ब्लड प्रेशर रखने के लक्ष्य तय किए। सिस्टोलिक प्रेशर हृदय से पूरे शरीर को खून पंप करने की गति दर्शाता है। जिन लोगों ने 120 से कम ब्लड प्रेशर बनाए रखने का लक्ष्य रखा, उनमें हृदय से संबंधित बीमारियों के कारण मौतों की दर कम पाई गई। 120 ग्रुप के लोगों में दूसरे ग्रुप के लोगों की तुलना में हार्ट फेल का खतरा 38% और दिल की बीमारियों से मरने का खतरा 43% कम रहा। यह अंतर इतना नाटकीय था कि शोधकर्ताओं ने दो वर्ष पहले ट्रायल बंद कर दिया क्योंकि वे आधे मरीजों के लिए ऊंचा लक्ष्य रखने को जायज नहीं ठहरा सकते थे।
स्प्रिंट ट्रायल के चेयरमैन, तुलाने यूनिवर्सिटी के डॉ. पाल व्हेल्टन कहते हैं कि कम ब्लड प्रेशर बेहतर है। कम ब्लड प्रेशर के फायदे अन्य संभावित खतरों की तुलना में बहुत अधिक हैं। ये खतरे हाई ब्लड प्रेशर के इलाज की दवाइयों के साइड इफेक्ट और ब्लड प्रेशर को बहुत कम रखने से जुड़े हैं। एएचए और अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन अधिकतर लोगों के लिए 140/90 और 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए 150/90 ब्लड प्रेशर की सिफारिश करती है।
वैसे, दिल को नुकसान पहुंचाने वाले कारणों की सूची में हाई ब्लड प्रेशर नया तत्व नहीं है। डॉक्टर वर्षों से जानते हैं, बहुत ज्यादा ब्लड प्रेशर से हृदय और खून की शिराओं पर दबाव पड़ता है। इससे लोगों को दिल का दौरा और ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है। जनसंख्या पर आधारित अध्ययनों के आंकड़े बताते हैं, निम्न ब्लड प्रेशर वाले लोगों को दिल की बीमारियां कम होती हैं। उनकी असमय मौत की दर भी कम रहती है। स्प्रिंट रिसर्चर प्रोफेसर डॉ. जेक्सन राइट का कहना है, उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों का इलाज उन समस्याओं के खतरों को कम करता है।
स्प्रिंट की स्टडी के नतीजे ब्लड प्रेशर के अधिकतम लक्ष्य पर चल रही भीषण बहस को और भड़काएंगे। 2013 में विशेषज्ञों के एक ग्रुप ने 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए ब्लड प्रेशर की सीमा 150 तक बढ़ाने की सिफारिश की थी। वृध्द लोगों के लिए हाई ब्लड प्रेशर का स्तर कुछ तथ्यों पर गौर करने से सही लगता है। मेडिकल छात्रों को पढ़ाया जाता है कि अधिकतम सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर जानने के लिए मरीज की आयु में 100 का अंक जोड़ लिया जाए। विशेषज्ञ सोचते हैं, आयु के साथ धमनियों के कड़ा होने की भरपाई के लिए रक्त के दबाव का स्तर ऊंचा होना चाहिए। इसके अलावा निम्न ब्लड प्रेशर से बुजुर्गों के गिरने, चक्कर आने और भ्रमित होने जैसी स्थितियां बन सकती हैं।
कुछ विशेषज्ञ चिंतित हैं कि बहुत निम्न ब्लड प्रेशर बुजुर्गों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। बेथ इजरायल डीकोनेस मेडिकल सेंटर में न्यूरोलॉजी के प्रमुख डॉ. क्लिफर्ड सेपर ने बताया, दिमाग में खून का प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए जिन मरीजों का ब्लड प्रेशर अत्यंत कम रखा गया वे बेहोशी, सुस्ती और गिरने जैसी समस्याओं का इलाज करा रहे हैं। स्प्रिंट में जिस ग्रुप ने ब्लड प्रेशर कम रखा उनमें गिरने को छोड़कर बाकी साइड इफेक्ट की दर 1% से 2% पाई गई।

क्या महत्व है ब्लड प्रेशर का ?

ब्लड प्रेशर के स्तर से संकेत मिलता है कि जब आपका हृदय शरीर में रक्त फेंकता है तब धमनियों पर कितना दबाव पड़ता है। यह खून शरीर के ऊतकों को ऑक्सीजन और पोषक तत्व देता है। कचरा बाहर निकालता है। ब्लड प्रेशर बढ़ने पर ये गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

बीमारियां

आंखों की कमजोरी
हार्ट फेल
किडनी फेल
ब्रेन स्ट्रोक
हार्ट अटैक

क्या महत्व है ब्लड प्रेशर का ?

ब्लड प्रेशर के स्तर से संकेत मिलता है कि जब आपका हृदय शरीर में रक्त फेंकता है तब धमनियों पर कितना दबाव पड़ता है। यह खून शरीर के ऊतकों को ऑक्सीजन और पोषक तत्व देता है। कचरा बाहर निकालता है। ब्लड प्रेशर बढ़ने पर ये गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

डॉक्टर का निर्णय

हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित व्यक्ति का ब्लड प्रेशर कम करने के लिए डॉक्टर को अधिक दवाइयां देने से पहले मरीज की आयु जैसे कारणों पर गौर करना होगा।

क्या है नई रिसर्च

नई रिसर्च के अनुसार सामान्य ब्लड प्रेेशर 120 होना चाहिए। 120 से कम ब्लड प्रेशर होने पर हृदय में गड़बड़ी और जल्द मौत का खतरा कम हो सकता है।

किशोरियों को स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाने हर गाँव में चलेगा अभियान
13 August 2015
महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती माया सिंह ने कहा है कि किशोरियों को स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाने के लिये प्रदेश के हर गाँव में अभियान चलाया जायेगा। श्रीमती सिंह आज सीहोर जिले के बुधनी तहसील में प्रोजेक्ट उदिता और नवनिर्मित आँगनवाड़ी केन्द्र का शुभारंभ कर रही थीं।
महिला-बाल विकास मंत्री श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योजनाएँ शुरू की, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता मिली। उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में किशोरी बालिकाओं को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाने के लिये प्रोजेक्ट उदिता की शुरूआत की गई। इसे मुख्यमंत्री ने महिला पंचायत में लोकार्पित किया। उन्होंने आँगनवाड़ी और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से कहा कि वे इस प्रोजेक्ट के जरिये किशोरी बालिकाओं को सेनेटरी नेपकिन के उपयोग के प्रति जागरूक बनाये। उन्होंने स्वच्छता संबंधी आवश्यक जानकारी दें। उन्होंने कहा कि बाल, महिला और बच्चियों के कुपोषण को समाप्त करने के लिये समाज की सहभागिता जरूरी है। श्रीमती सिंह ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न स्थल पर प्रोजेक्ट उदिता में 208 ऑटोमेटिक वेंडिंग मशीन लगाई जा चुकी है एवं शीघ्र 240 मशीन और लगायी जायेंगी।
प्रमुख सचिव महिला-बाल विकास श्री जे.एन. कंसोटिया कहा कि प्रोजेक्ट उदिता यह अच्छी शुरूआत है जिसके दूरगामी प्रभाव समाज में दिखलायी देंगे।
आयुक्त एकीकृत बाल विकास श्रीमती पुष्पलता सिंह ने कहा कि माहवारी के दौरान अस्वच्छ कपड़ों के प्रयोग से प्रजनन स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव होते हैं। उन्होंने बताया कि शोध के अनुसार देश में 23 प्रतिशत किशोरियाँ प्रथम माहवारी के बाद स्कूल जाना छोड़ देती हैं, केवल 12 प्रतिशत सेनेटरी नेपकिन का प्रयोग करती हैं, 10 प्रतिशत माहवारी के दौरान अस्वच्छ कपड़ों के प्रयोग से बीमार होती हैं। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट उदिता पायलेट के रूप में ग्वालियर, इंदौर, झाबुआ, नरसिंहगढ़, मुरार, महू, बुरहानपुर और बुधनी में शुरू किया गया है। माह के चौथे मंगलवार को आँगनवाड़ी में होने वाले किशोरी दिवस पर आँगनवाड़ी कार्यकर्ता किशोरियों की समस्याएँ, जिज्ञासाएँ और शंकाओं का समाधान करेंगे। आँगनवाड़ी केन्द्र में वेंडिंग मशीन से सेनेटरी नेपकिन का सेट (3 नेपकिन) 10 रुपये में उपलब्ध रहेगा। अच्छी गुणवत्ता के सेनेटरी नेपकिन उत्पादन के लिये स्थानीय महिला स्व-सहायता समूह को प्रशिक्षित किया जायेगा।
श्रीमती माया सिंह ने बुधनी के कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य को विद्यालय में उपयोग के लिये वेंडिंग मशीन प्रदान की। उन्होंने प्रोजेक्ट उदिता प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। लाड़ली लक्ष्मी योजना के हितग्राहियों को प्रमाण-पत्र वितरित किये और आँगनवाड़ी केन्द्र में वृक्षारोपण किया।

भोपाल में मेडिकल कॉलेज भी खोलेगा मेदांता ग्रुप
17 June 2015
मेदांता ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स राजधानी में सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के साथ ही मेडिकल कॉलेज भी खोलेगा। राज्य सरकार इसके लिए सस्ती दर पर जमीन उपलब्ध कराएगी। जमीन आरक्षण की प्रक्रिया अगस्त में शुरू होगी। मेदांता ग्रुप इस कॉलेज को शुरू करने के लिए करीब 1 हजार करोड़ रु. का निवेश करेगा।
इंदौर में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2014 में मेदांता ने भोपाल में 300 बिस्तर वाला सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल खोलने का प्रस्ताव दिया था। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की सलाह पर ग्रुप ने हाॅस्पिटल के साथ मेडिकल कॉलेज खोलने का भी निर्णय लिया है। ग्रुप ने हॉस्पिटल के प्रस्ताव को बदलने की मांग की है। संशोधित प्रस्ताव स्वास्थ्य संचालनालय के अफसरों ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेज दिया है।
उम्मीद की जा रही है कि जमीन आवंटन अगस्त 2015 से पहले कर दिया जाएगा। मेदांता ग्रुप के सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के मेडिकल कॉलेज में बदलने से 700 करोड़ का निवेश बढ़ गया है। हॉस्पिटल के लिए करीब 300 करोड़ के निवेश होना था।
मेडिकल कॉलेज के खुलने से यह राशि 1 हजार करोड़ रुपए हो गई है।
मेदांता ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल के सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल खोलने वाले प्रस्ताव को मेडिकल कॉलेज के प्रस्ताव में बदला गया है। प्रस्ताव चिकित्सा शिक्षा संचालनालय को ट्रांसफर कर दिया है।

-अशोक वीरांग, ज्वाइंट डायरेक्टर , हेल्थ (जीआईएस)

भोपाल में मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव बनाया है। कॉलेज के साथ ही 300 बिस्तर वाला जनरल और सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल रहेगा। इसके लिए जमीन तलाशने का काम एक टीम कर रही है। -डॉ. नरेश त्रेहान, चेयरमैन, मेदांता द मेडिसिटी

भोपाल को मिलेगा यह फायदा

-लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट के साथ-साथ बोनमैरो और जीन थैरेपी ट्रीटमेंट की सुविधा मिलेगी।
-20 प्रकार की स्पेशिएलिटी क्लीनिक्स बनेंगी। प्रत्येक स्पेशिएलिटी में 10-10 पलंग रहेंगे।
-ब्लड कैंसर आैर थैलीसीमिया से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए अलग यूनिट होगी।
-मेदांता ग्रुप के अभी गुड़गांव, रांची और इंदौर में सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल हैं।

हर साल मिलेंगे 1050 नए डॉक्टर

मेदांता कॉलेज के खुलने से राजधानी में निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या 7 हो जाएगी। अभी भोपाल में 4 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें एमबीबीएस की 600 सीटें हैं। इसके अलावा एडवांस और महावीर जैन मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार हैं। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया दोनों कॉलेजों का एमबीबीएस की 150-150 सीट के लिए निरीक्षण कर चुकी है। इसी साल मान्यता मिलने की उम्मीद है। मेदांता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के खुलने से निजी कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों की संख्या 1050 हो जाएगी।

क्या खाया क्या पाया!
पोषण और फिटनेस से जुड़ी जाने कितनी ही बातें हम जानते हैं। इनके बारे में दूसरों को सुझाव भी देते हैं। तो आइए, जांच लेते हैं कि जिन बातों पर हम यकीन करते हैं, उनमें कितनी सच्चाई है, कितना भ्रम...

क्या खाया क्या पाया

(1) भोजन में वसा रहेगी, तो मोटापा बढ़ेगा।

1. हां। 2. नहीं।
3. मात्रा पर निर्भर करता है।
4. तेल से नहीं, केवल घी, मक्खन आदि से बढ़ता है।

(2) रात को चावल नहीं खाने चाहिए, नुकसान करते हैं।

1. हां। 2. नहीं।
3. खाकर तुरंत सोने से नुकसान होता है।
4. पनी निथारकर खा सकतें हैं।

(3) रात के भोजन में दाल हो, तो नुकसान करती है।

1. हां, इससे वजन बढ़ता है।
2. नहीं।
3. होनी चाहिए, ये प्रोटीन का स्त्रोत है।
4. एक आयु के बाद ऐसा होता है।

(4) बाजार में मिलने वाले लो फैट फूड फायदेमंद होते हैं और फिट रखते हैं।

1. सही है।
2. बिल्कुल नहीं।
3. निर्भर करता है कि साथ में क्या खा रहे हैं।
4. शाम के बाद न खाएं, क्योंकि तब पचाना मुष्किल होगा।

(5) काजू कोलेस्ट्राॅल बढ़ाता है।

1. हां। 2. नहीं।
3. निर्धारित मात्रा में ले सकते हैं।
4. केवल काजू न खाएं, साथ में अन्य मेवे भी लें, तो नहीं बढ़ेगा।

(6) शहद व नींबू को गुनगुने पानी में लेने से वनज घटता है।

1. हां।
2. सुबह खाली पेट लेने से फायदा होता है।
3. खाने के साथ लें, तो बेहतर।
4. यह केवल भ्रम है।

(7) शक्कर की जगह गुड़ या शहद का इस्तेमाल बेहतर होता है।

1. बिल्कुल सही।
2. बिल्कुल गलत।
3. मधुमेह के रोगियों के लिए अच्छा हो सकता है।
4. बेहतर पोषक तत्व मिलेंगे।

(8) गृहिणियां घर के कामों में ही इतना व्यायाम कर लेती हैं कि अलग से करने की जरूरत नहीं है।

1. हां। 2. नहीं।
3. अगर झाडू आदि खुद करती हैं, तो ठीक है।
4. सुबह-सुबह घर के काम करने वालों के लिए ये सच है।

(9) दूध पीने से कफ बनता है।
1. हां। 2. नहीं।
3. खाली पेट पिएं, तो बनता है।
4. खांसी आ रही हो, तो बनेगा।

(10) चावल खाने से मोटापा बढ़ता है।

1. हां।
2. नहीं।
3. निर्धारित मात्रा में ले सकते हैं।
4. पानी निथारकर नहीं लें, तों बढ़ेगा।

उत्तर...
1. (3) निर्धारित मात्रा है 5 छोटे चम्मच प्रति व्यक्ति, प्रतिदिन। इतनी मात्रा में तेल, घी, मक्खन कुछ भी लें, नुकसान नहीं करेगा।
2. (2) चावल के साथ दाल और चपाती हो, तो चावल नुकसान नहीं करते।
3. (3) दिन की तरह रात के भोजन में भी संतुलित पोेषण होना चाहिए। एक कटोरी दाल रात में भी खाना चाहिए।
4. (2) लो फैट हुए तो क्या, उनमें सोडियम, ष्षक्कर या मैदा ज्यादा हो सकती है, तो नुकसान ही करेगी।
5. (3) किसी भी ष्षाकाहारी भोज्य पदार्थ में कोलेस्ट्राॅल नहीं होता, इसलिए काजू भी निर्धारित मात्रा में ले सकते हैं।
6. (4) यह केवल भ्रम है। किसी भी भोज्य पदार्थ में ये गुण नहीं होता कि वनज घटा सके।
7. (2) तीनों में ऊर्जा बराबर मात्रा में होती है। पोषक तत्व इतने कम होते हैं कि अंतर नहीं पड़ता।
8. (2) व्यायाम करते समय लगातार बिना रूके पूरे ध्यान से व्यायाम किया जाता है। घर के कामों में क्रियाएं रूक-रूककर की जाती हैं, सो पर्याप्त व्यायाम नहीं होता।
9. (2)दूध पेट में जाता है, कफ फेफड़ों में संक्रमण का नतीजा होता है। दोनों का आपस में कोई ताल्लुक नहीं है।
10.(3)कोई भी 100 ग्राम अनाज एक जैसी ऊर्जा देता है। आप इसका संतुलन बनाएं रखेंगे, तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा।


स्वास्थ्य अपडेट
1-पुरुषों की तुलना में महिलाएं अलग तरह से फैट बर्न करती हैं। पुरुष जल्दी फैट बर्न करते हैं और उनकी मसल्स ज्यादा बढ़ती हैं क्योंकि उनमें अतिरिक्त टेस्टोस्टेरॉन होता है।

2-महिलाओं में उतना ही टेस्टोस्टेरॉन लेवल होता है जितना एक 10 साल के बच्चे में होता है जबकि उनमें फैट सेल्स पुरुषों की तुलना में पांच गुना ज्यादा बड़े होते हैं।

3-रिसर्च में यह साबित हो चूका है कि एक्सरसाइज करने और दौड़ने से सिर्फ शरीर ही नहीं दिमाग पर भी असर होता है । इससे आपका मूड अच्छा होता है , ब्रेन पावर और आत्मविश्वास भी बढ़ता है ।

4-दुबले होने के लिए खाना छोड़ने पर शरीर भूख लगने के डर से फैट बचाकर रखने लगता है। यानी आप फैट हटाने की बजाय उसे बचाने लगते हैं और मोटापा बढ़ने लगता है।


Diabetes
चपेट में दुनिया


द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी में प्रकाशित एक स्टडी में कहा गया है कि डायबिटीज को मैनेज करने वाली दवाओं के सेवन से हार्ट फेल होने की आशंका बढ़ जाती है। वैसे डायबिटीज के खतरे कम नहीं है और ये लगातार फैल रही है।
डायबिटीज भारत में लगातार बढ़ रही है। यह देश में ही नहीं बढ़ रही बल्कि इस समय पूरी दुनिया इसकी चपेट में है। ताजा आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में इस समय हर 12 व्यस्क लोगों में से एक इस बीमारी से ग्रस्त है। यह आंकड़ा लगातार बढ़ने की आशंका है। भारत में टाइप-2 डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है। वंशानुगतता, जीवन शैली में आए बदलाव, भोजन में कैलोरी की मात्रा बढ़ जाना और व्यायाम से दूर होना डायबिटीज के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

38 करोड़ मरीज हैं: बढ़ेंगे 55 %

यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंजलिया के ताजा अध्ययन के मुताबिक इस समय दुनिया में डायबिटीज के करीब 38.7 करोड़ मरीज हैं। यह अध्ययन 2013 के आंकड़ों के अनुसार है। अब यह संख्या और बढ़ चुकी है। यही नहीं यह इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि 2035 तक डायबिटीज के दुनियाभर में करीब 59.2 करोड़ मरीज हो जाएंगे। यानी अगले दो दशक में मरीजों की संख्या में करीब 55 फीसदी इजाफा होगा। अध्ययन में दुनियाभर में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, बदलती खान-पान की आदतें और शरीरिक गतिविधियों के कम होने को इस बीमारी के बढ़ने का प्रमुख कारण माना गया है।

ये भी जानें

अमेरिका सबसे महंगा

जर्नल फार्माकोइकोनॉमिक्स में छपी एक स्टडी में बताया गया कि यदि किसी को टाइप-2 डायबिटीज है तो उसके लिए अमेरिका सबसे महंगा देश है। टाइप-2 डायबिटीज के मरीज को अमेरिका में जीवन भर में 2,83,000 डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। वैसे दुनियाभर में साल 2014 में डायबिटीज के इलाज में 612 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च किए गए हैं।

यूरोप में बच्चों को खतरा

इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज होने के मामले में यूरोप सबसे ऊपर है। जबकि मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका में हर 10 व्यस्क में से एक को डायबिटीज है। अफ्रीका में 2014 में जिन डायबिटीज के मरीजों की मौत हुई है उनमें 76 फीसदी लोगों की उम्र 60 वर्ष के अंदर ही है।

क्यों फैल रही है भारत में ३ कारण

80% डायबिटीज के मरीज लो या मिडिल इनकम देशों में हैं। सबसे अधिक मरीज 40 से 59 साल की उम्र के बीच के हैं।
49 लाख लोगों की डायबिटीज के कारण मौत हुई है 2014 में। हर सात सेकंड में एक व्यक्ति की मौत हो रही है।
7.7 करोड़ लोग भारत में प्री-डायबिटिक कंडीशन से पीड़ित हैं। यह आंकड़ा तेजी से बढ़ता जा रहा है।

एवरेज से ज्यादा हैं भारत में मरीज

भारत और चीन डायबिटीज के मामले में सबसे आगे हैं। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के आंकड़ों के मुताबिक चीन में सर्वाधिक 9.84 करोड़ डायबिटीज के मरीज हैं। वहीं दूसरे नंबर पर भारत है। भारत में इस समय 6.5 करोड़ से ज्यादा डायबिटीज के मरीज हैं। चीन और भारत के साथ डायबिटीज को लेकर इसलिए भी चिंता है क्योंकि यहां की 10 फीसदी वयस्क जनसंख्या इस गंभीर बीमारी की चपेट में है, जबकि ग्लोबल एवरेज 8.3 फीसदी का है।

Less Exercise

हमारे देश में पिछले करीब दो दशकों में लोगों की लाइफस्टाइल में तेजी से परिवर्तन हुआ है, जो डायबिटीज बढ़ने का एक प्रमुख कारण है। हमारी फिजिकल एक्सरसाइज और एक्टिविटी में काफी कमी आई है। अमेरिका और यूरोप के देशों में आज भी लोग साइकिलिंग और एक्सरसाइज कर रहे हैं

Eating Habits

भारतीयों में वैसे भी जेनेटिकली डायबिटीज होने की आशंका आिधक रहती है। ऊपर से पिछले कुछ सालों में हमने जंक फूड ज्यादा खाना शुरू कर दिया है। इससे पेट जैसी बैड लोकेशन पर फैट जमा होता है। जिससे सेंट्रल ओबिसिटी बढ़ रही है। फैटी फूड और शक्कर का अधिक सेवन खतरा बढ़ा रहा है।

Stressing Up

बदलते परिवेश में भारतीयों में स्ट्रेस के गंभीर मामले बढ़ रहे हैं। स्ट्रेस के कारण कैटेकोलामाइन और कॉर्टीसोल हार्मोन बनते हैं। ये हार्मोन हमारे इंसुलिन सिस्टम को प्रभावित करते हैं, जिससे डायबिटीज होने का खतरा बढ़ता है।

Diabetes
चपेट में दुनिया

द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी में प्रकाशित एक स्टडी में कहा गया है कि डायबिटीज को मैनेज करने वाली दवाओं के सेवन से हार्ट फेल होने की आशंका बढ़ जाती है। वैसे डायबिटीज के खतरे कम नहीं है और ये लगातार फैल रही है।
डायबिटीज भारत में लगातार बढ़ रही है। यह देश में ही नहीं बढ़ रही बल्कि इस समय पूरी दुनिया इसकी चपेट में है। ताजा आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में इस समय हर 12 व्यस्क लोगों में से एक इस बीमारी से ग्रस्त है। यह आंकड़ा लगातार बढ़ने की आशंका है। भारत में टाइप-2 डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है। वंशानुगतता, जीवन शैली में आए बदलाव, भोजन में कैलोरी की मात्रा बढ़ जाना और व्यायाम से दूर होना डायबिटीज के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

38 करोड़ मरीज हैं: बढ़ेंगे 55 %

यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंजलिया के ताजा अध्ययन के मुताबिक इस समय दुनिया में डायबिटीज के करीब 38.7 करोड़ मरीज हैं। यह अध्ययन 2013 के आंकड़ों के अनुसार है। अब यह संख्या और बढ़ चुकी है। यही नहीं यह इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि 2035 तक डायबिटीज के दुनियाभर में करीब 59.2 करोड़ मरीज हो जाएंगे। यानी अगले दो दशक में मरीजों की संख्या में करीब 55 फीसदी इजाफा होगा। अध्ययन में दुनियाभर में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, बदलती खान-पान की आदतें और शरीरिक गतिविधियों के कम होने को इस बीमारी के बढ़ने का प्रमुख कारण माना गया है।

ये भी जानें

अमेरिका सबसे महंगा

जर्नल फार्माकोइकोनॉमिक्स में छपी एक स्टडी में बताया गया कि यदि किसी को टाइप-2 डायबिटीज है तो उसके लिए अमेरिका सबसे महंगा देश है। टाइप-2 डायबिटीज के मरीज को अमेरिका में जीवन भर में 2,83,000 डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। वैसे दुनियाभर में साल 2014 में डायबिटीज के इलाज में 612 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च किए गए हैं।

यूरोप में बच्चों को खतरा

इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज होने के मामले में यूरोप सबसे ऊपर है। जबकि मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका में हर 10 व्यस्क में से एक को डायबिटीज है। अफ्रीका में 2014 में जिन डायबिटीज के मरीजों की मौत हुई है उनमें 76 फीसदी लोगों की उम्र 60 वर्ष के अंदर ही है।

क्यों फैल रही है भारत में ३ कारण

80% डायबिटीज के मरीज लो या मिडिल इनकम देशों में हैं। सबसे अधिक मरीज 40 से 59 साल की उम्र के बीच के हैं।
49 लाख लोगों की डायबिटीज के कारण मौत हुई है 2014 में। हर सात सेकंड में एक व्यक्ति की मौत हो रही है।
7.7 करोड़ लोग भारत में प्री-डायबिटिक कंडीशन से पीड़ित हैं। यह आंकड़ा तेजी से बढ़ता जा रहा है।

एवरेज से ज्यादा हैं भारत में मरीज

भारत और चीन डायबिटीज के मामले में सबसे आगे हैं। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के आंकड़ों के मुताबिक चीन में सर्वाधिक 9.84 करोड़ डायबिटीज के मरीज हैं। वहीं दूसरे नंबर पर भारत है। भारत में इस समय 6.5 करोड़ से ज्यादा डायबिटीज के मरीज हैं। चीन और भारत के साथ डायबिटीज को लेकर इसलिए भी चिंता है क्योंकि यहां की 10 फीसदी वयस्क जनसंख्या इस गंभीर बीमारी की चपेट में है, जबकि ग्लोबल एवरेज 8.3 फीसदी का है।

Less Exercise

हमारे देश में पिछले करीब दो दशकों में लोगों की लाइफस्टाइल में तेजी से परिवर्तन हुआ है, जो डायबिटीज बढ़ने का एक प्रमुख कारण है। हमारी फिजिकल एक्सरसाइज और एक्टिविटी में काफी कमी आई है। अमेरिका और यूरोप के देशों में आज भी लोग साइकिलिंग और एक्सरसाइज कर रहे हैं

Eating Habits

भारतीयों में वैसे भी जेनेटिकली डायबिटीज होने की आशंका आिधक रहती है। ऊपर से पिछले कुछ सालों में हमने जंक फूड ज्यादा खाना शुरू कर दिया है। इससे पेट जैसी बैड लोकेशन पर फैट जमा होता है। जिससे सेंट्रल ओबिसिटी बढ़ रही है। फैटी फूड और शक्कर का अधिक सेवन खतरा बढ़ा रहा है।

Stressing Up

बदलते परिवेश में भारतीयों में स्ट्रेस के गंभीर मामले बढ़ रहे हैं। स्ट्रेस के कारण कैटेकोलामाइन और कॉर्टीसोल हार्मोन बनते हैं। ये हार्मोन हमारे इंसुलिन सिस्टम को प्रभावित करते हैं, जिससे डायबिटीज होने का खतरा बढ़ता है।

गत सात दिवस में स्वाईन फ्लू से 8 की मृत्यु
भोपाल। राज्य में स्वाईन फ्लू पर नियंत्रण के प्रयास तेजी से सफल हो रहे हैं। प्रदेश में 11 से 15 फरवरी के दौरान पाँच दिवस में कुल 7 मृत्यु और 17 फरवरी को एक मृत्यु की सूचना है। बहुआयामी प्रयासों के कारण अब तेजी से स्थिति में सुधार हो रहा है।


मध्यप्रदेश में अब शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष फोकस- CM श्री चौहान
भोपाल। मप्र के मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि रोटी, कपड़ा, मकान और पढ़ाई, लिखाई, दवाई मनुष्य की मूलभूत जरूरतें हैं। सत्ता में आते ही सबसे पहला कार्य प्रदेश की अधोसंरचना सँवारने का किया। खेती और उद्योगों पर ध्यान केन्द्रित किया। अब विशेष फोकस शिक्षा और स्वास्थ्य पर किया जा रहा है। श्री चौहान आज यहाँ इंडिया टूडे एजूकेशनल समिट को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय भी मौजूद थे।
श्री चौहान ने कहा कि शिक्षा व्यवसाय नहीं मिशन है। प्रदेश में मिशन भावना के साथ कार्य करने को तत्पर निजी क्षेत्र का खुले दिल से स्वागत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने का हर संभव प्रयास कर रही है। प्रयास है कि निजी शिक्षा संस्थानों में सामान्य वर्ग के बच्चे भी अध्ययन कर सकें। शिक्षा की गुणवत्ता उच्च-स्तरीय हो। उन्होंने बताया कि देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय को देश के टॉप दस विश्वविद्यालय में शामिल करवाने के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर सबका अधिकार है लेकिन सब इसका उपयोग नहीं करते हैं। अत: जो साधन सम्पन्न है प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हैं, उनसे कर के रूप में राजस्व प्राप्त कर गरीब जरूरतमंदों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोटी, कपड़ा और मकान उपलब्ध करवाना ही सामाजिक न्याय है। उन्होंने कहा कि जब वे सरकार में आये थे तब प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं का अभाव था इसलिये पहले बुनियादी ढाँचा खड़ा किया गया। स्कूल-कॉलेज खोले गए। उस समय प्रदेश के 29 लाख बच्चे स्कूल नहीं जाते थे आज वह संख्या एक लाख से कम हो गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रदेश ने आर्थिक क्षेत्र में काफी प्रगति की है। नौ वर्ष से विकास दर डबल डिजिट में है। इस वर्ष 11.08 प्रतिशत की विकास दर देश में सर्वाधिक है। कृषि विकास दर चमत्कारिक 24.99 प्रतिशत रही है। लेकिन यह पड़ाव भर है। विकास का प्रकाश आम आदमी तक पहुँचाने वाली प्रगति ही वास्तविक उन्नति है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में शासन द्वारा संचालित योजना, सुविधाओं की जानकारी देते हुए कहा कि इसमें आवश्यक सुधार के लिए सरकार निरंतर तैयार है। विचार से ही नई योजनाओं का जन्म होता है उन्होंने बताया कि विद्यार्थी पंचायतों के निर्णयों से प्रदेश में अनेक नई योजनाओं का जन्म हुआ है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि प्रदेश सरकार विकास के साथ है। सरकार निरंतर चिंतन-मनन करते हुए विकास के नये प्रतिमान बना रही हैं। मध्यप्रदेश शिक्षा का नया हब बन रहा है। सरकार का प्रयास है कि शिक्षा के विस्तार के साथ ही उसकी गुणवत्ता के कार्य भी किये जायें। इन प्रयासों में निजी निवेशकों की भागीदारी, उनके सहयोग और सुझाव सरकार खुले मन से स्वीकार रही है। मेयर के रूप में होनोलूलू में हुए सेमीनार में शामिल होने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहले विदेशों में भोपाल की पहचान गैस त्रासदी की घटना से होती थी। पिछले नौ वर्ष में राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश की नई पहचान बनी है। लोग कहते हैं कि मध्यप्रदेश वह राज्य है जहाँ का मुख्यमंत्री आम आदमी के रूप में जन-कल्याण के कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम में प्रश्नोत्तर सत्र भी हुआ। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। कार्यक्रम को आईसेक्ट विश्वविद्यालय के चांसलर श्री संतोष चौबे ने भी संबोधित किया।


नींद नहीं आती तो एम्स में दिखाएं
अगले माह शुरू होगी प्रदेश की सबसे बड़ी स्लीपिंग डिसऑर्डर क्लिनिक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) में जल्द ही प्रदेश की सबसे बड़ी स्लीपिंग डिसऑर्डर क्लिनिक शुरू हो जाएगी। इस क्लिनिक में नींद से जुडी बीमारियों जैसे अनिद्रा , सांस रुकना या खराटे , स्लीप एप्निया , नींद में चलना जैसी बिमारियों का उपचार किया जाएगा। एम्स के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग में तैयार हो रही इस क्लिनिक में प्रदेश के सबसे बड़ी स्लीप लैब (सिक्स बेड) तैयार की जा रही है। इसमें एक साथ छेह मरीज़ों का उपचार किया जा सकता है। यहां तीन बेड वयस्कों के लिए और एक बेड़ बच्चों के लिए होगा । वही दो फोर्डेबल बेड होंगे । निजी अस्पतालों में इस इलाज के लिए २० से २५ हजार रुपए लिए जाते है , जबकि एम्स में ५०० रु प्रतिदिन में उपचार होगा ।

कई तरह से हो सकता है स्लीपिंग डिसऑर्डर

स्लीपिंग डिसऑर्डर कई तरीकों का हो सकता है । जैसे बिस्तर पर जाने के काफी देर बाद नींद आना , दिन में नींद के झटके आते रहना , रात में ज्यादा सपने आना , बार-बार नींद का टूटना , मुँह सुखना, पानी पीने या पेशाब के लिए बार बार उठाना , खर्राटें लेना , रातों में टांगों का छटपटाना , नींद में चलना आदि ।

डॉक्टर की सलाह लें

जो लोग सोते समय तेज खर्राटें लेते है और उनको इनमे से एक भी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें । रक्तचाप, मधुमेह , रात में बार-बार पेशाब आना , सुबह मुँह सुखना, दिन में थकावट रहना , नींद न आना या ज्यादा आना ।

जाँच के साथ उपचार

इसके लिए एम्स में स्लीपिंग लेब तैयार की गई है । लैब के फाइबर चैम्बर में सोने की सामान्य स्थितियां पैदा की जाती हैं । इस दौरान व्यक्ति के सोने के तीन चरण , शरीर का तापमान , मस्तिष्क की क्रियाशीलता को नपा जाता है ।


नींद नहीं आती तो एम्स में दिखाएं
अगले माह शुरू होगी प्रदेश की सबसे बड़ी स्लीपिंग डिसऑर्डर क्लिनिक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) में जल्द ही प्रदेश की सबसे बड़ी स्लीपिंग डिसऑर्डर क्लिनिक शुरू हो जाएगी। इस क्लिनिक में नींद से जुडी बीमारियों जैसे अनिद्रा , सांस रुकना या खराटे , स्लीप एप्निया , नींद में चलना जैसी बिमारियों का उपचार किया जाएगा। एम्स के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग में तैयार हो रही इस क्लिनिक में प्रदेश के सबसे बड़ी स्लीप लैब (सिक्स बेड) तैयार की जा रही है। इसमें एक साथ छेह मरीज़ों का उपचार किया जा सकता है। यहां तीन बेड वयस्कों के लिए और एक बेड़ बच्चों के लिए होगा । वही दो फोर्डेबल बेड होंगे । निजी अस्पतालों में इस इलाज के लिए २० से २५ हजार रुपए लिए जाते है , जबकि एम्स में ५०० रु प्रतिदिन में उपचार होगा ।

कई तरह से हो सकता है स्लीपिंग डिसऑर्डर

स्लीपिंग डिसऑर्डर कई तरीकों का हो सकता है । जैसे बिस्तर पर जाने के काफी देर बाद नींद आना , दिन में नींद के झटके आते रहना , रात में ज्यादा सपने आना , बार-बार नींद का टूटना , मुँह सुखना, पानी पीने या पेशाब के लिए बार बार उठाना , खर्राटें लेना , रातों में टांगों का छटपटाना , नींद में चलना आदि ।

डॉक्टर की सलाह लें

जो लोग सोते समय तेज खर्राटें लेते है और उनको इनमे से एक भी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें । रक्तचाप, मधुमेह , रात में बार-बार पेशाब आना , सुबह मुँह सुखना, दिन में थकावट रहना , नींद न आना या ज्यादा आना ।

जाँच के साथ उपचार

इसके लिए एम्स में स्लीपिंग लेब तैयार की गई है । लैब के फाइबर चैम्बर में सोने की सामान्य स्थितियां पैदा की जाती हैं । इस दौरान व्यक्ति के सोने के तीन चरण , शरीर का तापमान , मस्तिष्क की क्रियाशीलता को नपा जाता है ।


फिटनेस के लिए सीढ़ियां
स्टेयर्स वर्कआउट, एक ऐसा तरीका है जिसमें आप बिना किसी खर्चे के, जरा-सी मेहनत के साथ, अतिरिक्त समय दिए बिना फिट रह सकते हैं। बस इसके लिए आपको लिफ्ट छोड़कर सीढ़ियों को अपनाना होगा।
किसी भी तरीके से की गई फिजिकल एक्सरसाइज सेहत के लिए अच्छी होती है। अगर आप वॉक पर जाने के लिए समय निकालते ही हैं तो वॉक की जगह सीढ़ियां चढ़ना आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। यहां इसके 6 कारण दिए जा रहे हैं -

वॉकिंग से बेहतर

चलने से तीन गुना ज्यादा कैलोरी सीढ़ी चढ़ने में बर्न होती है। इसमें ज्यादा ऊर्जा खर्च होती है क्योंकि आप गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध काम करते हैं। यानी 15 मिनट का स्टेयर्स वर्कआउट 45 मिनट की वॉक के बराबर है।

लोअर बॉडी को फायदा

सीढ़ियां चढ़ने से लोअर बॉडी (हिप मसल्स और जांघों की मसल्स) की अासानी से एक्सरसाइज हो जाती है। इसके अलावा शरीर में ब्लड सर्कुलेशन भी बढ़ता है। इस वर्कआउट में चोट लगने की आशंका भी काफी कम रहती है।

कोर मसल्स की मजबूती

सीढ़ी चढ़ते समय हम घुटनों को ऊपर की ओर ले जाते हैं जिसका सीधा असर कोर मसल्स (पेट-पसलियों की मसल्स) पर पड़ता है। रोजाना सीढ़ियां चढ़ने-उतरने से वजन कम करने में काफी मदद मिल सकती है।
बेहतर मेटाबॉलिज्म

30 सीढ़ियां चढ़ने से कम से कम 10 कैलोरीज बर्न होती हैं। सीढ़ियों की संख्या बढ़ाने पर ज्यादा से ज्यादा कैलोरी बर्न होंगी और मसल्स मजबूत होंगी, जिससे आपका मेटाबॉलिज्म भी और अच्छा होगा।

पाचनतंत्र को मदद

अगर नियम से रोजाना स्टेयर्स वर्कआउट किया जाए तो सही ढंग से कैलोरीज बर्न होने लगती हैं। इसका सीधा असर हमारे पाचनतंत्र पर पड़ता है और यह बेहतर होता है। इसके अलावा कॉस्टिपेशन (कब्ज) की शिकायत से भी निजात मिल जाती है।

कार्डियो एक्सरसाइज

रोजाना दो बार सीढ़ियां (24 स्टेप्स) चढ़ना-उतरना एक अच्छी कार्डियो एक्सरसाइज है। इस एक्सरसाइज से डायबिटीज काबू में करने, कॉलेस्ट्रॉल कम करने और दिल की सेहत अच्छी रखने में मदद मिलती है।

कैसे करें शुरुआत?

धीमी शुरुआत करें

शुरुआत में एक या दो फ्लाइट (1 फ्लाइट = 12 सीढ़ियां) चढ़ें। जब लगने लगे कि आप और ज्यादा सीढ़ियां चढ़ सकते हैं, तब फ्लाइट्स बढ़ाएं। सीढ़ियां चढ़ने से पहले वार्मअप जरूर करें। मसल्स को स्ट्रेच करना भी अच्छा रहेगा।

खुद पर दबाव ना डालें

धीमी शुरुआत करें, फिर धीरे-धीरे गति और सीढ़ियों की संख्या बढ़ाएं। जल्दी खत्म करने के लिए सीिढ़यां छोड़-छोड़कर ना चढ़ें। इससे बैलेंस बिगड़ने से चोट लग सकती है।

सांस लेते रहें

सीढ़ियां चढ़ते हुए एक सी लय में सांस लेंं। सांस रोकने की कोशिश ना करें। कोशिश करें कि एक बार सांस लेने और छोड़ने में आप कुल चार सीढ़ियां (स्टेप्स) चढ़ जाएं।

पैरों को आराम दें

सीढ़ियां चढ़ते समय पैरों पर ज्यादा जोर दें। पैर पटकते हुए चढ़ने से बचें। इससे घुटनों पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके अलावा उतरते समय घुटनों को फ्री रखें, उन्हें कड़ा ना करें। ऊपर पहुंचकर उतरने से पहले पिंडलियों को थोड़ा स्ट्रैच जरूर करें। अगर उम्र ज्यादा है तो दीवार की साइड चलें ताकि जरूरत पड़ने पर सपोर्ट लिया जा सके।

ये बचें

> 70 वर्ष सेे अधिक उम्र के लोग और घुटनों या हिप्स में दर्द या चोट से पीड़ित मरीज।
> बिना डॉक्टरी सलाह के गर्भवती महिलाएं।
> दिल के मरीज या जिनकी हाल ही में एंजियोप्लास्टी हुई हो।
> जिसका हाल ही में घुटनों का या हिप रिप्लेसमेंट से जुड़ा ऑपरेशन हुआ हो।


फेफड़े करते है वजन कम करने में मदद
यह तो सभी जानते हैं कि जितनी एक्सरसाइज की जाए, शरीर उतना ही स्वस्थ रहता है। जो हम सब शायद नहीं जानते होंगे वह यह है कि हमारेे शरीर का 80 प्रतिशत फैट फेफड़ों की मदद से निकलता है। ब्रिटिश मेडिकल जरनल में छपी ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के वैज्ञानिकों की रिसर्च तो यही कहती है। इसके पीछे कारण बताया गया है खून में मौजूद फैट ट्रिगलाइसेराइड। यह कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बना होता है और जब फैट बर्न होता है फेफड़ों के जरिए कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में निकलता है। इस प्रक्रिया के लिए ऑक्सीजन की जरूरत भी पड़ती है जो सांस के जरिए ही मिलती है। कुल मिलाकर रिसर्च यही कहती है कि वजन कम करने में आपके फेफड़े भी बड़ सहायक होते हैं।
200ग्राम फैट बर्न होता है रिसर्च के मुताबिक, अगर हम दिनभर 12 सांसें प्रति मिनट की रफ्तार से श्वास लेते हैं।


भ्रामरी प्राणायाम से होता है तनाव दूर
भ्रामरी प्राणायाम से मानसिक तनाव, गुस्सा, चिंता, चिड़चिड़ापन और आलस दूर होता है। रक्तचाप और गले के रोग भी इसकी मदद से कम किए जा सकते हैं।

कैसे करें
एक आसनी पर ध्यान लगाने की मुद्रा या आरामदायक मुद्रा में बैठ जाएं। अंगूठों की मदद से दोनों कानों को बंद करें और आखें भी बंद कर लें।
अब गहरी सांस लें।
सांस छोड़ते हुए मादा मधुमक्खी या भंवरे के जैसी आवाज निकालें।
ऐसा करने पर आपको अपने दिमाग में कंपन महसूस होगा।
इस पूरी प्रक्रिया को रुक-रुककर नौ बार दोहराएं।

ध्यान रहे

हाथ के अंगूठे से कान अच्छी तरह से बंद हों ताकि कोई भी बाहरी आवाज ना सुनाई दे। साथ ही आंखें भी अच्छे से बंद करें ताकि अंधेरे का आभास हो।
रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।


सरदार वल्लभ भाई पटेल औषधि वितरण योजना राष्ट्र केलिए अनुकरणीय
मध्यप्रदेश में राज्य केसमस्त नागरिकों को श्रेष्ठतम गुणवत्ता की औषधियाँप्रदाय करने केलिए राज्य शासन नेविगत दो वर्ष सेसरदार वल्लभ भाई पटेल नि:शुल्क औषधि वितरण योजना प्रारंभ की है। योजना केमाध्यम सेराज्य में लगभग 10 हजार शासकीय चिकित्सालय एवं 48 हजार ग्राम आरोग्य केन्द्र केमाध्यम से 250 प्रकार की औषधियोंका वितरण आवश्यकतानुसार किया जाता है। यह औषधियाँडब्ल्यू.एच.ओ. जी.एम.पी. गुणवत्ता की होती हैं। अर्थात्यह ऐसी औषधियाँहैं, जो निर्यात योग्य हैं। इन औषधियों का उपार्जन राष्ट्रीय टेन्डर केमाध्यम सेसम्पूर्ण पारदर्शिता बरतते हुए किया जाता है। यह अत्यंत ही महत्वपूर्ण योजना है, जिसका लाभ लगभग 4 लाख सेअधिक नागरिक प्रतिदिन या लगभग सवा करोड़ नागरिक प्रतिमाह प्राप्त करतेहैं। विगत माह योजना का सूक्ष्म अध्ययन विश्व स्वास्थ्य संस्थान नेकिया था। संस्थान नेइसे एक आदर्श योजना निरूपित कर दिनांक 20-22 नवम्बर को चेन्नई में राष्ट्रीय कार्यशाला में अनुकरणीय योजना केरूप में प्रस्तुत किया। इसकेबाद देश केकई राज्य इस योजना का अनुकरण करनेकी प्रक्रिया प्रारंभ कर रहेहैं।
यह विशेषत: उल्लेखनीय हैकि निर्यात स्तर की औषधियाँही क्रय की जाती हैं, जो बाजार में उपलब्ध ब्रांडेड औषधियोंसे 10 से 15 गुना सस्ती होती हैं। राज्य शासन विगत दो वर्ष से 200 से 250 करोड़ की औषधियाँक्रय करता है, जिनका अनुपातिक बाजार मूल्य लगभग 2000 से 2500 करोड़ रुपयेहोता है। इस प्रकार राज्य शासन लगभग 2000 करोड़ की बचत कर राज्य केप्रत्येक नागरिक को यह दवाइयाँ उपलब्ध करवा रहा है। सरदार वल्लभ भाई पटेल योजना की अपार सफलता से उत्साहित होकर राज्य शासन द्वारा केंसर की दवाइयों एवं कीमोथेरेपी की भी नि:शुल्क जेनेरिक औषधियों केमाध्यम सेउपचार प्रारंभ किया जा रहा है। मात्र 15 दिवस की अवधि में लगभग 4000 केंसर पीड़ित मरीज पंजीबद्ध हो गयेहैं, जिनका उपचार शासकीय चिकित्सालयों में प्रारंभ कर दिया गया है। योजना का विस्तार करतेहुए राज्य शासन ने डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हार्ट की बिमारियों एवं थैलासीमिया केरोगियों का भी नि:शुल्क उपचार एवं दवा वितरण राज्य केसभी जिला चिकित्सालयोंमेंप्रारंभ कर दिया है। योजना केसहयोगी रूप में स्वास्थ्य विभाग सभी चिकित्सालय में 48 प्रकार की जाँचों की सुविधा भी नि:शुल्क कराता है। इससेप्रतिदिन 75 हजार नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं। मध्यप्रदेश देश का एकमात्र राज्य हैजो अपनेसभी नागरिकों को शासकीय चिकित्सालयों में न केवल नि:शुल्क औषधियाँ एवं जाँचें उपलब्ध कराता हैअपितुमरीजों को नि:शुल्क भोजन तथा सोलह सौ 108 एवं जननी वाहनों से नि:शुल्क सामान्य एवंआपात परिवहन उपलब्ध करवाता है।
राज्य की स्वास्थ्य सेवाएँप्रतिदिन नयेसोपान प्राप्त कर रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की गारंटी केसाथ एक नई व्यवस्था न केवल राज्य केसमक्ष बल्कि देश केसमक्ष उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।यह मध्यप्रदेश केस्वास्थ्य सेवाओं केइतिहास में एक गौरवशाली अध्याय जोड़ रही है। यह निर्विघ्न संचालित होगा।


आकृति नेचर क्योर सेंटर में 17 नवंबर को नि: शुल्क नैचुरोपैथी कैंप
राष्ट्रीय राजमार्ग के पास ग्राम फंदा, आकृति नेचर क्योर सेंटर, भोपाल में एएनसीसी (आकृति नेचर क्योर सेंटर) द्वारा 17 नवंबर को 10 बजे से 1 बजे तक और 4 बजे से 7 बजे तक नि: शुल्क प्राकृतिक चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया है।
गुजरात के प्रसिद्ध प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. जे संघवी इस कैंप में मरीजों की जांच करेंगे। डॉ. संघवी गुर्दे और अन्य महत्वपूर्ण अंग विकारों के विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। उन्होंने स्वप्रतिरक्षित रोगों जैसे संधिवात गठिया, सोरायसिस, एसएलई और पाचन तंत्र विकारों जैसे कोलाइटिस, आईबीएस, अल्सरेटिव कोलाइटिस आदि का सफलतापूर्वक इलाज किया है।
आकृति ग्रुप के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक हेमंत कुमार ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा में शरीर को स्वस्थ करने की निहित क्षमता है, जिससे यह कल्याण आधारित सिद्धांतों का एक समग्र दृष्टिकोण है। प्रकृति और चिकित्सा संबंधी तकनीकों की अरोग्यकर शक्ति का उपयोग करके शरीर, मन और भावनाओं को सही करने में सहयोग किया जाता है। इस कैंप में मरीजों का नि:शुल्क इलाज किया जाएगा। इस कैंप का मुख्य उद्देश्य गुर्दे के विकारों, स्वप्रतिरक्षित रोगों और पाचन तंत्र की समस्याओं से े पीड़ित लोगों को लाभ प्रदान करना है।
प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांत के अनुसार सभी बीमारियों की जड़ शरीर में विषाक्त पदार्थों का जमाव है। विषाक्त पदार्थों की रोकथाम और उन्मूलन ही स्वास्थय रहने का महत्वपूर्ण कारक है। प्रकृति के पांच तत्वों पर आधारित उपचार में रोगों को रोकने के बेहद जरूरी गुण हैं। दवाओं का किसी भी प्रकार का इस्तेमाल प्रकृति इलाज की पद्धतियों में नहीं होता है। लोग 0755-3939100 या 8435500847 पर कॉल करके पंजीकरण करा सकते हैं।


मलेरिया और डेंगू नियंत्रण केलियेसर्वेक्षण कार्य सतत जारी
भोपाल । भोपाल नगर में स्वास्थ्य विभाग एवं नगर निगम के दलों द्वारा विभिन्न कालोनियों में सर्वेक्षण, लार्वा नष्ट करने और जनता को जागरूक बनाने का अभियान सतत रूप से जारी है। अरेरा कालोनी के विभिन्न इलाकों, कोलार मार्ग से लगी कालोनियों और नये एवं पुराने शहर के मोहल्लों में मच्छरों की रोकथाम के लिये फॉगिंग मशीन से निरंतर रोकथाम के प्रयास किये जा रहे हैं। आज 4782 घरों का सर्वे संपन्न हुआ, जिनमें से मात्र 446 घरों में लार्वा पाये जाने पर उन्हें नष्ट करने की कार्यवाही की गई। अभियान में 78 दल कार्य कर रहे हैं। आज हुई कार्यवाही के दौरान 28 हजार 940 कंटेनर चेक किये गये। नागरिकों द्वारा पुराने टायरों और गमलों के साथ ही घरों की छत तथा घरों के आसपास ठहरे हुए पानी को हटाने के स्वेच्छिक प्रयास भी किये जा रहे हैं।
प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को विस्तृत निर्देश भेजकर मलेरिया, डेंगू और अन्य मौसमी रोगों की रोकथाम के लिये संबंधित अमलेको सक्रिय रहने के लिये कहा गया है। दायित्व में लापरवाही किये जाने पर दोषी चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी दण्डित किये जायेंगे।


केंद्र सरकार मध्य प्रदेश में फार्मा पार्क स्थापित करेगी: अनंत कुमार, केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री
भोपाल । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 2 अक्टूबर को प्रदेश की 70,000 स्वास्थ्य संस्थाओं में विशेष स्वच्छता अभियान की शुरूआत जयप्रकाश चिकित्सालय से करेंगे। इसके साथ ही प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य रक्षा के लिये संचालित ममता अभियान में चिन्हित 12 व्यवहार को आमजन में लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से ममता मशाल जुलूस भी पूरे प्रदेश में निकाले जायेंगे।
स्वच्छता अभियान में प्रदेश की प्रत्येक स्वास्थ्य संस्था को स्वच्छ बनाया जायेगा। जिला अस्पताल से लेकर ग्राम आरोग्य केन्द्र-स्तर तक की कुल 70 हजार स्वास्थ्य संस्था में संबंधित संस्था प्रभारी एवं स्थानीय जन-प्रतिनिधियों की उपस्थिति में दोपहर 12.30 बजे से स्वच्छ बनाने के लिये श्रमदान किया जायेगा।
जयप्रकाश चिकित्सालय भोपाल में मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त स्थानीय सांसद, विधायक, महापौर एवं पार्षद भी शामिल होकर स्वच्छता अभियान में सहभागी बनेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य रक्षा के शासन के संकल्प के रूप में एक मशाल भी प्रज्जवलित की जायेगी।
इसी दिन शाम 7 बजे से प्रत्येक जिला, विकासखण्ड एवं ग्राम पंचायत मुख्यालय-स्तर पर ममता मशाल जुलूस निकाले जायेंगे। राजधानी के प्रत्येक वार्ड में स्थानीय पार्षद, गणमान्य नागरिक एवं स्वास्थ्य विभाग के अमले द्वारा ममता मशाल जुलूस निकाला जायेगा। जुलूस के माध्यम से आमजन को प्रत्येक आयु वर्ग के लोगों और विशेषत: गर्भवती महिलाओं में खून की कमी एवं इसके प्रबंधन के उपाय सहित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य जागरूकता संबंधी संदेशों का प्रचार-प्रसार किया जायेगा।
आमजन को गर्भवती महिलाओं में प्रसव के दौरान होने वाले संभावित खतरे के लक्षणों एवं उनके प्रबंधन के विषय में जानकारी देने का ममता अभियान संचालित है। प्रत्येक विकासखण्ड में ममता रथ भी संचालित है। मशाल जुलूस के दौरान भी ममता रथ द्वारा विशेष प्रस्तुतियाँ दी जायेंगी।


रायसेन में जनरल नर्सिंग प्रशिक्षण कॉलेज का शिलान्यास
भोपाल । स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा द्वारा रायसेन में 60 सीटर जनरल नर्सिंग प्रशिक्षण कॉलेज भवन का शिलान्यास तथा नर्सिंग प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ किया गया। अध्यक्षता वन मंत्री डॉ गौरीशंकर शेजवार ने की। डॉ. मिश्रा ने जिला चिकित्सालय के उन्नयन तथा ओटी के विस्तार एवं आधुनिकीकरण की भी स्वीकृति दी।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में एक साल में 4 लाख व्यक्ति को 15 करोड़ रूपए की निःशुल्क दवाएँ वितरित की गई हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के अस्पतालों में सुबह का नाश्ता, दोपहर का खाना निःशुल्क उपलब्ध करवाया जाता है। प्रदेश में 108 एंबुलेंस से स्वास्थ्य सेवाएँ तत्काल जरूरतमंदों तक पहुँची हैं।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि सीमित संसाधनों में प्रदेश सरकार द्वारा लोगों को जो स्वास्थ्य सुविधाएँ दी जा रही हैं, वैसी अन्य राज्यों में नहीं हैं। उन्होंने बताया कि निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण, निःशुल्क जाँच और निःशुल्क दवा वितरण का काम मध्यप्रदेश में ही हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जन-स्वास्थ्य को लेकर गंभीर हैं। उन्हीं के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य सुविधाओं का गाँव-गाँव तक विस्तार संभव हो पाया है।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि एक साल में प्रदेश के किसानों को 12000 करोड़ की राशि वितरित की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गरीब, मजदूर, किसानों, महिलाओं, सर्वहारा वर्ग की सरकार है। राज्य सरकार इनके कल्याण के लिए कई योजनाएँ और कार्यक्रम चला रही हैं।
वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने कहा कि रायसेन में 60 सीटर नर्सिंग कॉलेज तथा कॉलेज भवन के निर्माण की स्वीकृति एक साथ मिलना प्रसन्नता की बात है। उन्होंने कहा कि कॉलेज के प्रारंभ होने से न केवल 60 बच्चियों को प्रशिक्षण मिलेगा बल्कि रोजगार भी प्राप्त करेंगी। डॉ. मिश्रा और डॉ. शेजवार ने जिला चिकित्सालय का निरीक्षण कर मरीजों से भी भेंट की।


केंद्र सरकार मध्य प्रदेश में फार्मा पार्क स्थापित करेगी: अनंत कुमार, केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री
केन्द्रीय उर्वरक, रसायन एवं फार्मास्युटिकल मंत्री श्री अनंत कुमार ने कहा है कि भोपाल में फार्मा पार्क बनाया जायेगा। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि मध्यप्रदेश मेडिकल डिवाइसेस बनाने वाला देश का पहला राज्य मध्यप्रदेश बने। श्री अनंत कुमार आज यहाँ छठवीं अंतर्राष्ट्रीय ईको कोर्स एवं वर्कशाप के उदघाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूली पाठ्यक्रम में जीवन-शैली पर आधारित पाठ शामिल किया जायेगा।
केन्द्रीय मंत्री श्री अनंत कुमार ने कहा कि आज बहुत सी बीमारियाँ जीवन-शैली के कारण हो रही हैं। जीवन-शैली के बारे में पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिये मध्यप्रदेश देश का ऐसा राज्य है जहाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानदण्डों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएँ संचालित की जा रही हैं। उन्होंने हृदय से संबंधित बीमारियों के पीछे भी वर्तमान जीवन-शैली को दोषी माना। उन्होंने कहा कि जीवन-शैली के कारण मधुमेह की बीमारी होती है और उससे हृदय की बीमारी होती है। आज देश में मधुमेह के आठ करोड़ मरीज हैं। देश में हर घंटे 350 लोग हृदयाघात से मरते हैं। हृदयाघात से होने वाली हर दस मौत में से दो मरीज तीस वर्ष से कम उम्र के होते हैं। इससे बचने के लिये हमें रोकथाम, जागरूकता और उपचार पर ध्यान देना होगा। वर्तमान जीवन-शैली की वजह से कम उम्र में यह बीमारी हो रही है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में योग, व्यायाम, अनुशासन, भोजन पद्धति के बारे में बताया जाना चाहिये। तहसील और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तक कार्डियक इमरजेंसी के लिये व्यवस्था होना चाहिये। उन्होंने कहा कि ईको मशीन प्रत्येक जिला मुख्यालय पर होना चाहिये।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने केन्द्रीय मंत्री श्री कुमार के सुझावों पर कहा कि मध्यप्रदेश में अगले शैक्षणिक सत्र से बेहतर जीवन-शैली का पाठ पाठ्यक्रम में शामिल किया जायेगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में बड़े स्वास्थ्य संस्थानों को आने के लिये प्रोत्साहित किया जायेगा। आगामी अक्टूबर माह में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में हेल्थ केयर पर फोकस रहेगा। उन्होंने कहा कि शरीर सब धर्मों के पालन का माध्यम है इसलिये शरीर स्वस्थ होना चाहिये। ईको कार्डियोग्राफी मानवता के लिये वरदान है। हृदय की नियमित जाँच होना जरूरी है। प्रदेश में गरीबों के इलाज के लिये राज्य बीमारी सहायता कोष गठित किया गया है। मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से भी बीमारियों के लिये सहायता दी जाती है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना जैसी अभिनव योजना शुरू की गई है। प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में चार लाख मरीज को प्रतिदिन नि:शुल्क दवा वितरित की जाती है और 75 हजार मरीज की प्रतिदिन नि:शुल्क जाँच की जाती है। प्रदेश में संस्थागत प्रसव 22 से बढ़कर 86 प्रतिशत हो गया है। एम्बुलेंस 108 योजना से हर माह 81 हजार लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
ईको कार्डियोग्राफी के विश्व विख्यात विशेषज्ञ डॉ. नवीन सी. नंदा ने कहा कि मध्यप्रदेश स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहा है। ईको कार्डियोग्राफी विशेषज्ञ डॉ. आई.वी. विजयलक्ष्मी ने कहा कि मध्यप्रदेश में बच्चों के हृदय रोग के उपचार का केन्द्र स्थापित करें। डॉ. पंकज मनोरिया ने वर्कशाप के बारे में जानकारी दी। डॉ. पी.सी. मनोरिया ने स्वागत भाषण दिया।
कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री श्री अनंत कुमार और मुख्यमंत्री श्री चौहान ने डॉ. नवीन पी नंदा और डॉ. आई.वी. विजयलक्ष्मी को लाईफ टाईम अचीव्हमेंट अवार्ड से सम्मानित किया। इसी तरह डॉ. संजय मित्तल और डॉ. समीर श्रीवास्तव को अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस तथा डॉ. शांतनु सेन गुप्ता को स्पेशल सर्विस अवार्ड से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में राजस्व मंत्री श्री रामपाल सिंह और सांसद श्री आलोक संजर, डॉ. एस.के. पाराशर सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आये चिकित्सक शामिल थे।


एप बता देगा किस दवा से होगा रिएक्शन
चंडीगढ़ पीजीआई में कार्यरत सिस्टम एनालिस्ट नवीन बिंद्रा ने तैयार किया ये एप जिससे मरीज़ तमाम तरीकों के रिएक्शन से बच सकते है । इस एप में दवा और उससे हो सकने वाले रिएक्शन की जानकारी है, मरीज़ ये एप डाउनलोड करके उन दवाइयों के नाम जान सकते है और एहतियात बरत सकते हैं ।
एप में ये भी बताया गया है कि मेडिसिन रियेक्ट करे तो लक्षण क्या होंगे और उससे कैसे बचाव करना है ।
नवीन कहते है की ये एप उपयोगी साबित होगा ।
नवीन ने बताया कि फार्माकोलॉजी डिपार्टमेंट से रिएक्शन की आकांशा वाली दवाओं का डेटा ही दाल दिया जायेगा । इस काम में अभी एक मेहना और लगेगा क्यूंकि दवा का डेटा बहुत अधिक है।

प्रियंका पारे

एम्स मे एरोबिक्स से होगा मरीजों का इलाज़
मरीज़ों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल अब चिकित्सीय उपचार में एरोबिक्स का इस्तेमाल करेगा | एरोबिक्स मरीज़ों की जल्द स्वस्थ होने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा| एरोबिक्स क्लीनिक आयुष बिल्डिंग में शुरू की जाएगी| एम्स प्रबंधन में शुरू होने के साथ ही एरोबिक्स क्लीनिक भी काम करने लगेगी| विशेषज्ञों के मुताबिक मरीज़ों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए इलाज़ के साथ ही व्यायाम भी बहुत ज़रूरी है| व्यायाम शरीर को स्वस्थ रखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करते हैं| इलाज़ के साथ ही मरीज़ नियमित रूप से व्यायाम करें तो आधे समय में ही ठीक हो सकता हैं| इसके लिए एरोबिक सबसे बेहतर व्यायाम हैं| इसके लिए दो प्रशिक्षित ट्रेनर की नियुक्ति भी की गयी हैं|


खून में ऑक्सीजन की जाँच के लिए मिला एक और एनालाइज़र
जेपी अस्पताल में अब अस्थमा और सांस की अन्य बीमारियो से पीड़ित मरीज़ों को शरीर में ऑक्सीजन और अन्य महत्वपूर्ण गेसों की जाँच के लिए यहाँ वहाँ नहीं भटकना पड़ेगा |इन जाँचों के लिए अस्पताल में एक और आर्टीरियल ब्लड गेस एनालाइज़र आ गया हैं| इसके आने से सांस के मरीज़ों के साथ वेंटिलेटर के मरीज़ों को भी राहत मिलेगी |दरअसल सांस के रोग से पीड़ित मरीज़ों के शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा का पता एबीजी एनालाइज़र से लगाया जाता हैं| गंभीर मरीज़ों को दिनभर में आठ से दस बार इस जाँच की ज़रूरत होती हैं| अस्पताल में अभी तक एक ही एबीजी एनालाइज़र एसएनसीयू में था| गंभीर मरीज़ों की इस मशीन पर जाँच की जाती थी| अब अस्पताल में एक और जाँच मशीन आने से मरीज़ों को सहुलियत हो जाएगी| अस्पताल की अधिक्षक डॉक्टर वीना सिन्हा के अनुसार एबीजी एनालाइज़र एक कंपनी द्वारा उपलब्ध कराया हैं| फिलहाल इसको डेमो के लिए रखा गया हैं| जल्द ही यह काम करना शुरू कर देगा| ओपीडी मे प्रतिदिन करीब 70 मरीज़ों को यह टेस्ट लिखे जाते हैं| एक मशीन होने से मरीज़ को अपनी रिपोर्ट दिखाने क लिए अगले दिन फिर से चक्कर लगाना पड़ता हैं|


वायरस के इस्तेमाल करते हुए टीबी का नया टीका बनाया
टोरंटो। पहली बार जैविक रूप से संवर्धित किसी वायरस का इस्तेमाल करते हुए खतरनाक बीमारी टीबी का नया असरदार टीका तैयार किया गया है। इस टीके को विकसित करने वाले कनाडाई वैज्ञानिकों का दावा है कि यह टीका टीबी का रामबाण इलाज साबित होगा।
मैक्मास्टर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डॉ. फियोना स्मैल के अनुसार, 'उनकी टीम द्वारा विकसित टीका वर्तमान में टीबी के इलाज के लिए मौजूद एकमात्र बीसीजी टीके का असरकारक विकल्प बनेगा।' बीसीजी टीके को 1920 में विकसित किया गया था। पूरी दुनिया में डॉक्टर टीबी के इलाज में इसी टीके का इस्तेमाल करते हैं। डॉ. स्मैल का कहना है, 'अभी भी टीबी एक खतरनाक बीमारी बनी हुई है। एचआइवी के बाद यह दूसरी जानलेवा बीमारी के रूप में लोगों के लिए खतरा बनी हुई है। वर्तमान बीसीजी टीका इसके इलाज में निष्प्रभावी साबित हो रहा है।' उन्होंने बताया कि उनकी टीम द्वारा विकसित टीका शरीर में प्रतिरोधक तत्वों को नए सिरे से विकसित करेगा। ध्यान रहे कि विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रतिरक्षण कार्यक्रम के तहत एशिया, अफ्रीका, पूर्वी यूरोप और दक्षिण अमेरिका के देशों में बीसीजी टीकाकरण अभियान चला रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अब इस टीके की खोज से टीबी के खिलाफ अभियान को नई गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस टीके को तैयार करने में दस वर्षों का समय लगा है। मानव पर इसके क्लीनिकल ट्रायल के सकारात्मक परिणाम निकले हैं।


दिल की बीमारियों से दूर रखता है अखरोट
वाशिंगटन। हालिया शोध में पता चला है कि रोजाना अखरोट खाने से डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है।
कनेक्टिकट स्थित येल ग्रिफिन प्रिवेंशन रिसर्च सेंटर के शोधकर्ताओं के मुताबिक, रोज 56 ग्राम अखरोट के सेवन से अधिक वजन वाले वयस्कों के शरीर की आंतरिक प्रक्रिया में सुधार आता है। इस शोध में 30 से 75 साल के 46 वयस्कों को शामिल किया गया था। प्रतिभागियों का बॉडी मास इंडेक्स 25 से भी अधिक था। इनमें पुरुषों की कमर 40 इंच व महिलाओं की कमर 35 इंच थी। शोध से पहले शर्त रखी गई थी कि प्रतिभागी धूमपान न करता हो लेकिन ज्यादातर को पाचन संबंधी बीमारियों और डायबिटीज से पीड़ित होना चाहिए। प्रतिभागियों को रोजाना नाश्ते में 56 ग्राम अखरोट दिया गया जिससे उनके स्वास्थ्य में पहले से सुधार देखा गया। प्रमुख शोधकर्ता और येल ग्रिफिन प्रिवेंशन रिसर्च सेंटर के निदेशक डॉक्टर डेविड केट्ज ने कहा, खाने की आदतों को बदलना मुश्किल है, लेकिन उसमें सुधार किया जाना जरूरी है। यह शोध 'जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ न्यूट्रिशियन' में प्रकाशित हुआ है।


आपने अपने जीवन में जो फर्क सालों में नहीं देखा होगा वह फर्क आपको विगेन थेरेपी से 1 से 10 दिनों में दिखाई देगा।
विगेन इंडिया थेरेपी सेन्टर में इन सभी समस्याओं का समाध् ाान किया जाता है। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, पीठ का दर्द, आॅर्थोराईटीस, घुटनों का दर्द, आस्टीपओपोरोसिस, स्पाॅन्डीलीसिस, सायटिका, नसों से जुड़ी बीमारी, खून से जुड़ी बीमारी, किडनी स्टोन गाल ब्लेडर स्टोन, पेट से संबंधित बीमारी, एसिडिटी, अल्सर, गैस, अपचन, काॅन्स्टीपेशन, आॅख, कान, मसूड़ों की बीमारी स्लिप डिस्क, हाॅर्मोन का बेलेन्स बिगड़ना ;डायबिटीस, थायराॅयड, सेक्स हार्मोन इत्यादिद्ध, सिर दर्द, आधा सिर दर्द ;मायग्रेनद्ध सायनस, लकवा, पॅरेलायसिस, मोतियाबिन्द, तवचा रोग, स्लीप डिसआर्डर, लम्पस, स्त्रीयों की बीमारियां ;कन्सीविंग प्रोब्लम, बल्की यूटेरस, डिसलोकेशन आॅफ युटेरस, मेन्सेस प्रोब्लम, हायड्रोसिल, इम्पोटेन्सीद्ध, टयूमर आदि घातक बीमारियाॅ, मोटापा गाॅरन्टी के साथ खत्म होगा। भारत में पहली बार विगेन इंडिया प्राकृतिक सिद्धांतों पर आधारित थैरेपी से लोगों को बड़ी से बड़ी बीमारियों से निजात दिला रहा है। विगेन हेल्थ हाउस ;थेरेपी सेंटरद्ध में प्रतिदिन 300 से 500 लोग फ्री में थैरेपी लेकर अपनी शरीर की समस्त समस्याओं से निजात पाते है। सेंटर से मशीनें घरेलू उपयोग हेतु भी दी जाती है। प्रत्येक बीमारी के लिए सेंटर में अलग-अलग मशीनें उपलब्ध कराई जाती है। हमारे यहां उपलब्ध मशीनें जैसे- टाॅप एन टाॅप 8500, - टाॅप एन टाॅप 8000, - वीटीबी - ईटीएस मेट - वाटर डाक्टर - डाक्टर 2 - ज्वाइंट बेल्ट - चैम्पीयन बेल्ट इत्यादि। भारतियों के पास ऐसा कोई जरिया आया जो कि बिना किसी दवाई, इंजेक्शन व बिना किसी आॅपरेशन के लोगों को प्राकृतिक तरीके से ठीक करता है। भोपालवासियों से अनुरोध है कि विगेन हेल्थ हाउस ;थेरेपी सेंटरद्ध में आकर प्राकृतिक थैरेपी का अनुभव जरूर लें। अद्भुत 19 प्राकृतिक तत्वों अविश्वसनीय 21 वीं सदी का से अपनी शरीर को अनोखा चमत्कार स्वस्थ्य बनायें

फ्री थेरेपी हर बीमारी का जड़ से इलाज
सेंटर से लाभान्वित स्वस्थलाभ ले रही श्रीमती रूकमनी गुप्ता, 55 वर्ष 4 साल से शुगर थी। इनका शुगर लेवल 650 रहता था और दोनों समय में इन्सुलिन लेती थी। जो अब बिल्कुल ठीक है वजन भी काफी कम हुआ। पहले 135 अब 95 हो गया है। अब बिना दवाई के बिना इन्सुलिन बिल्कुल ठीक है।श्री व्ही.एस. कपूर, 70 वर्षमुझे एक साल पहले मेरी जीभ में एक छाला हुआ था धीरे-धीरे करके वह छाला बढ़ने लगा और मेरी तकलीफ भी बढ़ने लगी। फिर डाक्टर को दिखाया तो उन्होंने जीभ का कैंसर बताया। फिर मुझे विगेन थैरेपी सेंटर के बारे में पता चला और यहा आकर विगेन थैरेपी लेने से मेरे जीभ का छाला बिल्कुल ठीक हो गया है।हमारी थैरेपी इन सभी प्राकृतिक सिद्धांतों पर कार्य करती है।
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भोपाल टेस्ट-ट्यूब-बेबी सेंटर के रिकार्ड की हुई सराहना
टेस्ट-ट्यूब-बेबी तकनीक द्वारा एक दिन में 7 बच्चों का जन्म मप्र के लिए गौरव की बात मप्र शासन के वरिष्ठ मंत्री श्री बाबूलाल गौर जी ने जन्में सातों बच्चों एवं उनकी माताओं को आर्शीवाद दिया मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री श्री बाबूलाल गौर ने जाने माने टेस्ट-ट्यूब-बेबी विशेषज्ञ डाॅ. सिंह दम्पत्ति डाॅ. मोनिका सिंह एवं डाॅ. रणधीर सिंह को उनकी इस उपलब्धि पर हार्दिक बध्ााईयां दी एवं उन्होंने इस उपलब्धि को मध्यप्रदेश के लिए गौरव की बात बताई। इसके पूर्व डाॅ. सिंह ने पत्रकारवार्ता में बताया कि ये हमारे जीवन की यह एक बड़ी उपलब्धि है कि एक ही दिन में सात टेस्ट-ट्यूब-बेबी का जन्म हमारे सेन्टर में हुआ। मां शब्द को सुनने के लिए कई वर्षो से तरस रहीं इन महिलाओं की खुशियों की कल्पना भी नही की जा सकती है। जब उन्हें दो-दो स्वस्थ्य बच्चों की सौगात मिली। इन महिलाओं के लिये वो कहावत चरितार्थ होती है कि ऊपर वाला जब भी देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है। वर्षो से इन मांओ की सूनी गोद दो-दो बच्चों से भरते ही उनकी आंखों से खुशियों के आंसू छलक पड़े उस वक्त उनकी आत्मा से निकले हुये आर्शीवाद को शब्दों में बयां नही किया जा सकता। इसके पूर्ब करीब पांच वर्ष पूर्व भी हमारे सेन्टर में एक दिन में 6 बच्चों का जन्म हो चुका है। इन्हीं उपलब्धियों की वजह से हाल ही में ।ेपं ैचमबपपिब अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस ;।ैच्प्त्म्द्ध में उद्बोध्ान हेतु भोपाल से एकमात्र डाॅ. सिंह दम्पत्ति डाॅ. मोनिका सिंह एवं डाॅ. रणधीर सिंह को आमंत्रित किया गया है।1 से 5 अगस्त 2013 तक ।ेपं ैचमबपपिब अंतराष्ट्रीय कांफ्रेंस ;।ैच्प्त्म्द्ध में इन उपलब्धियों के लिए भोपाल से एकमात्र डाॅ. सिंह दम्पत्ति को आमंत्रित किया गया है। अंतर्राष्ट्रीय कंाफ्रेंस न्ै।ए ठवेजवद 12 से 17 व्बजए 13 दृ तक, पूरे भारत से एकमात्र डाॅ. सिंह दम्पत्ति एक साथ चार विभिन्न विषयों पर अपने उद्बोधन देंगेभोपाल टेस्ट-टयूब-बेबी सेंटर म्.1ध्13ए अरेरा काॅलोनी ;7 नं. बस स्टाॅप के पासद्ध भोपाल, में डाॅ. मोनिका सिंह एवं डाॅ. रणधीर सिंहद्वारा विश्व की सबसे कम कीमत की टेस्ट-ट्यूब-बेबी तकनीक की खोज कर कई निर्धन निःसंतान दम्पत्तियों की गोद खुशियों से भर दी। अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस न्ै।ए ठवेजवद व्बजए13. में पूरे भारत से एकमात्र डाॅ. सिंह दम्पत्ति एक साथ विभिन्न विषयों पर अपने उद्बोधन प्रस्तुत करेंगे। डाॅ. सिंह दम्पत्ति ने पत्रकारवार्ता में बताया कि टेस्ट-ट्यूब-बेबी में अब पैसा बाधा नहीं रह गया है। अब गरीब निःसंतान दम्पत्ति जिनकी उम्र कम है, कम कीमत में नई तकनीक द्वारा टेस्ट ट्यूब बेबी करवा सकते हैं।
1. भ्रण के फर्टिलाइजेशन के लिए 20 से 25 दिनों के बजाय अब लगभग 10 दिन के अंतराल में यह प्रक्रिया कम उम्र की म्हिलाओं में संभव हो गई है जिस कारण से इसकी कीमत में भी एक चैथाई अंतर आया है, क्योंकि इसमें अब पहले की अपेक्षा इंजेक्शन कम लगते है।
2. पांच दिन के बजाय तीन दिन में भ्रण ट्रंासफर करना अधिक कीफायती
3. ए.एम.एच. की जंाच अत्यधिक उपयोगी
4. सरोगेट मदर के रिजल्ट बेहतर करने के उपाय ।
इन सभी विषयों पर न्ै।ए ठवेजवद में उद्बोधन प्रस्तुत करेंगे।निःसंतान दंपति हेल्पलाईन-मो-933133385, 9303132578, 0755.2677277


पायजन क्लीनिक को आई. ई. डी. आर. ए द्वारा“इंडियन हेल्थकेयर एक्सीलेंस अवाॅर्ड” का राष्ट्र स्तरीय पुरस्कार
बेस्ट स्किनकेयर क्लीनिक, इंटरनेशनल आर्च आफ यरोप फार क्वालिटी एंड टेक्नोलाजी, बिग रिसर्च एक्सीलेंस अवार्ड प्राप्त करने के पश्चात पायजन एंटी एजिंग क्लीनिक को इंडियन एकोनामिक डेवलपमेंट एण्ड रिसर्च एसोसिएशन द्वारा उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने पर इंडियन हेल्थकेयर एक्सीलेंस अवार्ड प्रदान किया गया है।
इस समारोह में डा बी् एन सिंह ;पूर्व गवर्नर एवं यूनियन मिनिस्टरद्ध, श्री एमण् वीण् राजशेखरन ;फार्मर यूनियन मिनिस्टरद्धए जस्टिस ओ पी् वर्मा ;सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिसद्ध, डाॅ जीण् वीण् जीण् कृष्णमूर्ति ;फार्मर इलेक्टर कमिश्नरद्धए श्री जोगिंदर सिंह ;फार्मर सीबीआई डायरेक्टरद्ध, नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित इस प्रतिष्ठित पुरस्कार समारोह में अवार्ड जीतकर क्लीनिक के चीफ एक्जीक्यूटिव आफिसर डा अभिनीत गुप्ता बेहद उत्साहित होकर कहते हैं कि हमारे अपनी सेवाओं में गुणवत्ता का स्तर लगातर कायम रखने सफल रहे हैं जिसके परिणाम स्वरूप न सिर्फ 1 लाख संतुष्ट ग्राहकों का बढ़ता विश्वास हमारे साथ है बल्कि अनेक अवार्ड्स इसका प्रत्यक्ष प्रमाण भी है। भोपाल, रायपुर, इंद्रौर, पुणे,जयपुर, बंगलूरू मे भी हमारे सभी क्लीनिक सफलतापूर्वक संचारित हो रहे है। हेयर रीग्राथ, स्किन व्हाईटनिंग, बोटाक्स, टैटू एवं सभी प्रकार के कास्मेटिक ट्रीटमेंट विश्वस्तरीय वातावरण में 40 डाक्टर्स की उच्च प्रशिक्षित टीम द्वारा पायजन एंटी एजिंग क्लीनिक में प्रदान किए जाते है।
-पिछले वर्ष भी पायजन ऐन्टी ऐजिंग क्लीनिक को शशी थरूर द्वारा उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने के क्षेत्र में अवार्ड द्वारा सम्मानित किया गया
-पूर्व में पायजन क्लीनिक को दिल्ली में आयाजित पुरस्कार वितरण समारोह में क्रिकेटर श्रीकांत के द्वारा वेस्ट स्किनकेयर क्लीनिक के सम्मान से संस्थान के डायरेक्टर अभिनीत गुप्ता को दिया गया।


डायरिया का सस्ता देसी टीका तैयार
नई दिल्ली। अब जल्दी ही दुनिया भर के गरीब और मध्यवर्गीय परिवार के बच्चों को भी रोटावायरस से सुरक्षा देने वाले टीके लग सकेंगे। बच्चों को दस्त और आंत्रशोथ का शिकार बनाने वाले इस वायरस से आजादी दिलाने वाला ऐसा टीका भारत ने विकसित किया है, जो पुराने टीकों के मुकाबले 90 फीसद से ज्यादा सस्ता है।
केंद्र सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की साझेदारी में विकसित किए गए इन टीकों के तीसरे चरण का क्लीनिकल परीक्षण भी पूरा हो चुका है। अब जल्दी ही भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआइ) की इजाजत से ये टीके बाजार में बेचे जाने के लिए बनाए जा सकेंगे। उम्मीद की जा रही है कि दुनिया के दूसरे मुल्कों में भी इन टीकों की खासी मांग होगी।
इस टीके के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले जैव प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व सचिव एम.के. भान कहते हैं कि लगभग तीन दशक की लगातार कोशिश के बाद यह संभव हो सका है। साथ ही ये बताते हैं कि यह टीका बच्चों में 56 फीसद तक प्रभावी पाया गया है। यानी, यह टीका लगाए जाने के बाद बच्चों में रोटावायरस के संक्रमण का खतरा इतना कम हो जाता है। तीसरे चरण का क्लीनिकल परीक्षण देश में तीन अलग-अलग जगहों पर 6,799 बच्चों में किया गया था। अब जल्दी ही क्लीनिकल परीक्षण की रिपोर्ट औषधि महानियंत्रक को सौंपी जाएगी। इसकी अनुमति मिलने के बाद इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा।
इन टीकों की सबसे खास बात है इनका पहले के टीकों के मुकाबले 90 फीसद से भी ज्यादा सस्ता होना। निजी कंपनी ने इसकी कीमत लगभग 54 रुपए रखने का एलान किया है, जबकि पहले से मौजूद टीके 800 से 900 रुपए तक में बिक रहे हैं। बच्चों को रोटावायरस के संक्रमण से बचाने के लिए बच्चे को छह, दस और 14 हफ्ते की उम्र में इसकी तीन खुराक पिलानी होगी। रोटावेक नाम के वैक्सीन का तीसरे चरण का क्लीनिक ट्रायल पूरा हो चुका है।
उल्लेखनीय है कि डायरिया से प्रति वर्ष पांच साल से कम उम्र के एक लाख बच्चों की भारत में मौत हो जाती है। इस सस्ते इलाज से गरीब वर्ग के बच्चों की जान बचाईजा सकेगी। साथ ही इस वैक्सीन से डायरिया और आंत्रशोथहोने की 56 फीसद आशंका भी कम हो जाती है।


दिमाग को दुरूस्त करने के लिए एक झपकी
दिन में केवल एक झपकी न सिर्फ याददाश्त बल्कि आपके दिमाग को भी दुरूस्त करती है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ता मैथ्यू वॉकर और उनकी टीम ने पाया कि दोपहर में लंबी झपकी लेने वाले छात्रों की सीखने की क्षमता में वृद्धि होती है। जबकि लगातार दिनभर जगने वाले छात्रों का मस्तिष्क सीखने की क्षमता खोने लगता है। यूनिवर्सिटी ऑफ एरीजोना के मनोविज्ञान के प्रोफेसर लिन नैडल एवं उनकी टीम ने शिशुओं पर नैपिंग के प्रभाव का अध्ययन किया, तो उनका नतीजा भी यही रहा। झपकी लेने वाले शिशु बेहतर लर्नर पाए गए। कुछ सीखने के बाद नींद लेने वाले बच्चे चीजों को बेहतर ढंग से समझ पाए। यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिलवानिया स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिक मार्कोस फ्रैंक ने अपने अध्ययन में पाया कि नींद के दौरान दिमाग अपने आपको पुनर्व्यवस्थित कर लेता है और यह क्रिया सीखने के लिए बेहद आवश्यक होती है। नींद के दौरान मस्तिष्क स्विच ऑफ नहीं होता। फर्क इतना ही है कि जब हम जागे हुए रहते हैं, तो यह अलग तरीके से एक्टिव रहता है। वैज्ञानिक मैथ्यू वॉकर के शोध के नतीजे बताते हैं कि मस्तिष्क की मेमोरी पावर सीमित और शॉर्ट टर्म होता है। कुछ तथ्यों को लॉन्ग टर्म मेमोरी में भेजने और नई जानकारियों के भंडारण के लिए स्पेस बनाने के लिए मस्तिष्क को नींद की जरूरत पड़ती है। ऎसे में दिमाग कहीं अधिक एक्टिव और फ्रेश फील करता है। इस शोध में करीब 40 लोगों पर तुलनात्मक अध्ययन किया गया, जिसमें से 20 लोगों ने दोपहर में 90 मिनट की नींद ली और 20 जगे रहे। यह दुनिया का पहला ऎसा शोध नहीं है जो नैपिंग की पैरवी करता हो। इससे पहले हुए शोधों में कुछ इसी तरह के नीजे सामने आए हैं। लिहाजा कहा जा सकता है कि काम के बीच में ब्रेक ले ही लिया जाना चाहिए।


अवचेतन का संदेश सुने, बुरी आदतों से छुटकारा पाएँ
टीवी और इलेक्ट्रानिक उपकरणों के कोहराम ने हमारी सुनने की नैसर्गिक क्षमताओं को कुंद कर दिया है और हम शरीर के मूक संदेशों को सुनना भूल ही गए हैं। यही कारण है कि अब देह आपका ध्यान खींचने के लिए और कठोर भाषा अपनाती है। आपको परेशान करने की कोशिश करती है। उसका संदेश बीमारियों के जरिए शरीर में नजर आने लगता है। जैसे सिरदर्द, बीच-बीच में टूटने वाली नींद,दुर्घटनाओं का आघात यानी ट्रॉमा,लाइलाज मर्ज,खासतौर से पीठ और पेट के रोग। सम्मोहन का नजरिया है कि कोई भी पीड़ा हो,वह एक संदेश है अवचेतन का। आपका अवचेतन आपसे कुछ कहना चाहता है, भागदौड़ छोड़कर जरा रूक जाएं और ध्यान दें। उसकी आवाज सुनें। उसे महसूस करें। यह ध्यान पद्धति सिखाती है कि देह की आवाज फिर कैसे सुननी शुरू की जाए और कैसे एक बार फिर पुरानी पीड़ाओं से छुटकारा पाया जाए।

बॉडी माइंड बैलेंसिंग को किसी भी असंतुलन को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। भले ही वह वजन बढ़ने की समस्या हो, हाजमे की दिक्कतें हों, तरह-तरह के दर्द हों,तनाव या बेचैनी हो। यहां तक कि इसके जरिए बुरी आदतों से छुटकारा पाया जा सकता है। यह ध्यान पद्धति हमारी चिंता भी कम करती है। हम जानते हैं कि डर से तनाव पैदा होता है। लेकिन,इसकी उल्टी प्रक्रिया भी चलती है यानी तनाव से डर भी पैदा होता है। जाहिर है हम जितना रिलैक्स रहना सीखेंगे,उतनी ही कम चिंता सताएगी। नींद अच्छी आएगी,जिससे वैलनेस की अनुभूति को और सहारा मिलेगा। इससे हमें समझने में मदद मिलती है कि हमारी देह और हमारा मन हमारे हाथ में किस तरह बेहतरीन उपकरण हैं। और तब नए किस्म की समझ पैदा होती है,उसके प्रकाश में हमें दिखाई देता है कि हमारा स्वास्थ्य हमारे ही हाथ में है। मनुष्य की तीन अवस्थाएं होती हैं,एक है रोग,दूसरा है निरोग और तीसरा है नैरोग्य। नैरोग्य यानी वैलनेस। यह जो वैलनेस है उसकी अनुभूति हमसे बिछुड़ गई है,वह अनुभूति जो तब पैदा होती है जब देह और मन एक स्वर में गुनगुनाते हैं। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने अब स्वीकार कर लिया है कि देह और मन के बीच एक गहरा संबंध होता है,वह एक इकाई है।

तनाव भरे समय में ऎसा इंसान मिलना मुश्किल है जिसे कोई न कोई शारीरिक तकलीफ या कोई मानसिक उलझन न हो। लोगों को अक्सर यह महसूस होता है कि वैसे तो उन्हें अपने स्वास्थ्य में कुछ गड़बड़ नहीं दिखाई देती,लेकिन कुछ ऎसा भी है जो दुरूस्त नहीं लगता। कुछ बेचैनी सी,कुछ असंतुलन सा। मनुष्य की तीन अवस्थाएं होती हैं-एक है रोग,दूसरा है निरोग और तीसरा है नैरोग्य। नैरोग्य यानी वैलनेस। यह जो वैलनेस है उसकी अनुभूति हमसे बिछुड़ गई है,वह अनुभूति जो तब पैदा होती है जब देह और मन एक स्वर में गुनगुनाते हैं। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने अब स्वीकार कर लिया है कि देह और मन के बीच एक गहरा संबंध होता है,वह एक इकाई है। लगभग आधी से अधिक शारीरिक व्याधियां मानसिक तनाव के कारण होती हैं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि हमें बौद्धिक समझ प्रदान करने वाले हमारे सचेत मन,यानी कॉशन्स माइंड की पतली सी परत हमारे समूचे अस्तित्व का सिर्फ दसवां हिस्सा होती है। जैसे किसी फल का छिलका होता है वैसे ही सचेत मन अवचेतन मन का एक छिलका भर होता है। इसी छिलके को हम शिक्षित करते हैं,सभ्य,सुसंस्कृत बनाते हैं,नीति,धर्म इत्यादि सिखाते हैं लेकिन इस चेतन परत के मुकाबले मस्तिष्क की अवचेतन परतें अधिक महत्वपूर्ण हैं। अगर हमारा नाता अपने ही अवचेतन से टूट गया तो हमारा जीवन स्वस्थ और संतुलित नहीं रह पाता। जब भी आदमी किसी रोग से ग्रसित होता है तो उसकी जड़ें उसके गहन अवचेतन मन में होती हंै। कोई दबाया हुआ क्रोध या दुख या भय अंदर पड़ा-पड़ा नासूर बन जाता है और फिर वह कैंसर या अन्य किसी रोग के रूप में प्रगट होता है। वो रसायन शरीर के अंगों में प्रवेश कर उन अंगों को कमजोर बनाता है और धीरे-धीरे रोग उनमें घर बना लेता है। अवचेतन की इसी शक्ति को ध्यान में रख कर ओशो ने एक प्राचीन तिब्बती ध्यान पद्धति को पुनर्जीवित किया है। उसे नाम दिया है बॉडी-माइंड बैलेंसिंग,देह और मन का संतुलन। यह एक ऎसी निर्देशित ध्यान पद्धति है जिसके जरिए लोग अपने देह और मन का एक इकाई की तरह उपयोग करना सीखते हैं और स्वास्थ्य को अनुभव कर पाते हैं। ओशो ने कहा है कि एक बार आप शरीर से संवाद करना शुरू करते हैं तो चीजें बहुत आसान हो जाती हैं। क्योंकि शरीर पर जबर्दस्ती नहीं की जा सकती, उसे प्रेम से फुसलाया जा सकता है।


बारिश मे रखे स्वास्थ्य का ध्यान
बारिश के समय बीमारियों का अंबार लग जाता है। इन दिनों मौसम बड़ी ही तेजी से बदलता है और साथ ही संक्रमण का भी डर पैदा हो जाता है। सर्दी-जुखाम और बुखार का खतरा बहुत रहता है लेकिन इन बीमारियों की शुरुआत टॉन्‍सिल से ही होती है। टॉन्‍सिल में गला बहुत दर्द होता है तथा खाने का भी स्‍वाद नहीं पता चलता। लेकिन टॉन्सिल को घरेलू उपचार से ठीक किया जा सकता है। इसके लिए निम्न सावधानियां और उपचार की ज़रूरत पड़ेगी -
1. स्‍वच्‍छता को अपनाए ताकि कोई भी बीमारी आपको छू नहीं पाए। बाथरूम से आने के बाद, खाने से पहले या फिर छींकने के बाद अपने हाथों को धोना ना भूलें। उस व्‍यक्ति से पूरी तरह से बचें जिसको खांसी या जुखाम हो।
2. कोल्‍ड ड्रिंक ना पिएं। ठंडा पेय पीने से गले में संक्रमण होने का खतरा अधिक ज्‍यादा रहता है। टॉन्‍सिल ना हो इसके लिये बारिश में कोल्‍ड ड्रिंक ना पिएं। अगर आपको गर्मी लग रही है और आप ज्‍यादा देर के लिये इंतजार नहीं कर सकते हैं, तो कम से कम अपने पसीन को सूख जाने दें, तभी कोल्‍ड ड्रिंक पिएं।
3. हर्बल टी पिएं। हर्बल टी पीने से कफ फैलाने वाले जर्म और बैक्‍टीरिया मर जाते हैं। टॉन्‍सिल को दूर करने का यह सबसे आम और प्राकृतिक उपचार है। यह शरीर के लिये भी अच्‍छी है और गले की लिये भी।
4. खट्टे फल ना खाएं। खट्टे फलों में मौजूद एसिड आपके गले को और भी ज्‍यादा नुक्‍सान पहुंचा सकते हैं। जब गला खराब हो तो आपको नींबू, संतरा, स्‍ट्रॉबेरी और मुंसम्‍बी नहीं खाना चाहिये।
5. तंबाकू या फिर धूम्रपान करने की आदत पर लगाम लगाएँ। ज्‍यादातर टॉन्‍सिल होने के पीछे होने का कारण केवल यही तंबाकू होती है। तंबाकू गले को सुखा देती है जिससे संक्रमण होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है।


बचपन में सीटी स्कैन से कैंसर का ख़तरा
ब्रिटेन। बचपन में सीटी स्कैन करने से रक्त, दिमाग और अस्थि मज्जा के कैंसर का खतरा तीन गुना बढ़ जाता है। कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने एक शोधपत्र में बताया है कि कैंसर का खतरा कुल मिला कर छोटा-सा प्रतीत होता है। फिर भी उन्होंने सीटी स्कैन में विकिरण की खुराक न्यूनतम रखने और जहां उचित हो उसका विकल्प खोजने की अपील की।
मेडिकल जर्नल लांसेट में अपने लेख में अनुसंधानकर्ताओं ने दावा किया कि उनका अध्ययन बचपन में सीटी स्कैन विकिरण से रूबरू होने और बाद के वर्षों में कैंसर के खतरों के बीच रिश्ता जोड़ने वाला पहला है। अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि पिछले 10 साल में सीटी स्कैन बहुत तेजी से बढ़ा है, खास कर अमेरिका में। अनुसंधानकर्ताओं ने इसके लिए ब्रिटेन में एक लाख 80 हजार लोगों का अध्ययन किया जो 1985 से 2002 के दौरान बचपन में या 22 साल से कम उम्र में सीटी स्कैन से गुजरे थे। अध्ययन के अनुसार उनमें से 74 को ल्युकेमिया से और 135 को दिमाग के कैंसर से ग्रस्त पाया गया।

 
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