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श्री लक्ष्मीकांत शर्मा से बातचीत संस्कृति की बुनियाद पर विकाश की इमारत
Madhya Pradesh Sandesh May 2013
श्री लक्ष्मीकांत शर्मा मध्यप्रदेश मंत्रिपरिषद के सदस्य हैं। उनसे हुई बातचीतपर आधारित आलेख यहाॅ प्रस्तुत हैं।श्री शिवराज सिह चैहान सदा ही राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत नेता के रूप में उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि मध्यप्रदेश को विकाश की ओर तेजी से अग्रसर करने में सफल रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चैहान की भारतीय संसकृति और जीवन मूल्यों के प्रति गहरी आस्था है। वंदेमातरम् का मंत्रालय में हर माह के प्रथम दिवस सामूहिक गान होता है। यह राष्ट्रगीत भारतीय स्वातंन्नय आंदोलन का मूलमंत्र रहा है। मंत्रालय में यह परंपरा उत्साह के साथ जारी है। मध्यप्रदेश में पहला अवसर है जब प्रदेश का अपना प्रयाण गीत मध्यप्रदेश गान तैयार किया गया है।


अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय

पूरे देश में एक यह गलत धारणा चलती रही है कि अंग्रजी के बिना विकाश संभव नहीं है। यह सोच बिल्कुल गलत है। चीन और जापान जैसे दशों ने अपनी भाषा के बल पर ही प्रगति की है। हमने भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना की है। इसके माध्यम से चिकित्सा, अभियांत्रिकीय सहित सभी विषयों का हिन्दी में अध्यापन कराया जाएगा। ये पूरे देश के सामने एक अनुपम उदाहरण होगा। इससे हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी को अपना गौरवमय स्थान प्राप्त होगा और हिन्दी माध्यम से पढ़ने वाले बच्चें आगे बढ़ सकेंगे।

दुनिया का पहला बौद्ध विश्वविद्यालय

बौद्ध धर्म का उदय भारत में ही हुआ और सनातन धर्म से इसका कोई मौलिक मतभेद नहीं रहा। हमने साॅची में बौद्ध विश्वविद्यालय की स्थापना की है।
अपनी संासकृतिक परम्परा और विरासत से कट कर, कोई समाज उन्नति नहीं कर सकता। मध्यप्रदेश में अपनी संास्कृतिक पहचान को बचाए रखने के लिए अभिनव प्रयास किये जा रहे हैं।

संस्कृत विश्वविद्यालय

भारत का संपूर्ण प्राचीन ज्ञान-विज्ञान संस्कृत ग्रथों में निहित है। संस्कृत भारत और भारतीय संस्कृति की आत्मा है। संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए हमने उज्जैन में पाणिनी संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय की स्थापना की है। इससे संस्कृत के संरक्षण और प्रसार की दिशा में बहुत मदद मिली है। अब हम विश्व संस्कृत सम्मेलन करने की तैयारी कर रहे है।

मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना

हर व्यक्ति की जीवन में एक बार तीर्थ यात्रा करने की इच्छा रहती है। लेकिन गरीब लोगों के लिए तीर्थ यात्रा एक सपना ही बना रहता है। हमने 60 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे वृद्धजनों जो आयकरदाता नहीं हैं, को सरकारी खर्च पर तीर्थ यात्रा कराने के लिए मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना शुरू की इसमें सभी धर्मो के तीर्थ स्थलों को शामिल किया गया है।
मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले तीर्थ यात्रियों के किराये की आधी राशि राज्य सरकार ने वहन किये जाने का निर्णय लिया है। इसी तरह, गुरू नानकदेव के जन्म स्थल लरकाना साहब पाकिस्तान स्थित की यात्रा पर जाने वाले यात्रियों का आधा खर्च भी अब सरकार उठा रही हैं हिंगलाजमाता के मंदिर ;पाकिस्तानद्ध, सीतामाता मंदिर अशोक वाटिका ;श्रीलंकाद्ध औरअंगारकोट मंदिर ;कम्बोडियाद्ध के लिए यह सुविधा दी गयी है।


तीर्थ-मेला प्राधिकरण


मध्यप्रदेश में विभिन्न पर्वो पर तीर्थ स्थानों में मेलों का आयोजन सदियों से किया जाता रहा है। इन तीर्थ स्थलों का रखरखाव और मेलों में सुव्यवस्थित तरीकों से प्रबंध करने और तीर्थ यात्रियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तीर्थ मेला प्राध्िाकरण का गठन किया।
मध्यप्रदेश सरकार का सिंहस्थ 2004 के सफल आयोजन में सराहनीय कार्य रहा। वर्ष 2016 में होने वाले सिंहस्थ के उचित प्रबंधन के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई है।

राम वन-गमन पथ और नर्मदा परिक्रमा पथ

हमने भगवान श्रीराम के वनगमन पथ के विकास की योजना को मूर्त रूप दिया है। इसके अन्तर्गत सरभंगा आश्रम, सुतीक्षण ऋषि आश्रम, सिद्धा पहाड़, रामवन एवं कामदगिरी में विकास की पहल की गई है। साथ ही नर्मदा परिक्रमा पथ का भी विकास जारी है। नर्मदा की परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं प्रदान की जा रही है। मध्यप्रदेश की संस्कृति की परिचायक नर्मदा के धार्मिक और आर्थिक महत्व को दृष्टिगत रखते हुए यह परिक्रमा पथ विकसित किया जा रहा है।


रामलीला उत्सव


रामलीला की भारत में बहुत समृद्ध परम्परा रही है। भारत ही नहीं दुनिया के अनेक देशों में रामलीला विभिन्न स्वरूपों में की जाती है। देश के लोगों को दुनिया के विभिन्न देशों में की जाने वाली रामलीला की विधाओं से परिचित कराने के उद्देश्य से हमने ओरछा में अंतराष्ट्रीय रामलीला महोत्सव शुरू किया है। रामायण कला संग्रहालय साकेत ओरछा को विस्तारित करते हुए अन्तर्राष्ट्रीय रामायण कला केन्द्र के रूप में विकसित किया जाना प्रस्तावित है। उद्देश्य यह है कि दुनिया के अन्य देशों में रामकथा से संबंधित साहित्य, प्रदर्शनकारी कलारूप तथा तत्वसंबंधी आभूषणों, चित्रों, मुकुट, मुखौटों, मंचन सामग्रियों को प्रदर्शित किया जाये।

नदी-मंदिर


संपूर्ण भारतीय संस्कृति नदियों के किनारे विकसित हुई है और इन्हीं के किनारे विकसित हुई है और इन्हीं के किनारे हमारे अध्िाकतर मंदिर स्थित हैं। हमने पूरे प्रदेश में नदियों, मंदिरों, घ्ााटों तथा नगरों के संरक्षण और विकास के लिए सुविचारित कदम उठाये हैं। हमने अनेक शहरों को पवित्र नगर घोषित किया है और उसी के अनुसार उन्हें विकसित किया जा रहा है।
अमरकंटक, ओरछा, पन्ना, ओंकारेश्वर, उज्जैन, महेश्वर, मुल्ताई, दतिया, मैहर, चित्रकूट और सलकनपुर को पवित्र नगर घोषित किया गया है। इससे नई पीढ़ी अपने धार्मिक स्थलों के प्रति आस्था और संस्कार के साथ जुड़ते हुए अपनी परम्परा और परिवेश को आगे बढ़ाने की ओर अग्रसर होगी। नदियों को जोड़ने की ऐतिहासिक पहल प्रदेश सरकार ने की है।
अभी तक शासकीय मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए ही मदद की जाती थी किन्तु अब राज्य सरकार ने प्रायवेट मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए भी पहल की है। धार्मिक महत्व के स्थलों अमरकंटक, महेश्वर, ओंकारेश्वर, ओरछा, सांची, भोजपुर, होशंगाबाद, मैहर, जबलपुर, नेमावर, सलकनपुर, उज्जैन तथा चित्रकूट, नलखेड़ा ;शाजापुरद्ध देवास, बरमानघाट ;नरसिंहपुरद्ध जटाशंकर धाम ;छतरपुरद्ध और कुण्डेश्वर में सुविधाओं का विकास किया गया है।

मातृभूमि


मातृभूमि के प्रति लोगों विशेषकर युवाओं में प्रेम बढ़ाने के उद्देश्य से हमने अनेक कदम उठाये है। शहीद चन्द्रशेखर आजाद के जन्म स्थान भाबरा में चन्द्रशेखर आजाद मंदिर बनाया गया है। साथ ही भावरा का नामकरण आजाद नगर करने के लिए जरूरी कार्यवाही की। आजाद जन्मशती यात्रा का आयोजन सरकार ने किया। हम वर्तमान और आने वाली पीढि़यों को भारत के गौरवशाली अतीज और महापुरूषों के जीवन और तथा उनके योगदान से परिचित कराने के लिए वीर भारत का निर्माण कर रहे है। मध्यप्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में भारत के गौरवशाली अतीत को प्रदर्शित कर मातृभूमि और राष्ट्र प्रेम की भावना को मजबूति दी जाएगी।
प्राचीन संस्कृति की गौरव गाथा को संरक्षित करने के अभियान में पुरासंपदाओं की स्वर्णिम विरासत से जनसामान्य को जोड़ने का प्रयास किया है। बोलिंयो के विकाश के लिए बोली अकादमी बनाई गई है। राष्ट्रभक्ति पर आधारित एफ.एम. रेडियो आजाद हिन्द प्रारंभ किया गया हैं। साहित्य, परंपरा, शास्त्रीय नृत्य, भक्ति और स्वाधीनता केन्द्रित सांस्कृतिक उत्सव प्रारंभ किये गये हैं। सन् 1857 मुक्ति संग्राम से शहीदों के स्मारक बनायें गये हैं। ग्वालियर राजा मारसिंह संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की स्थापना भी हमारा भारतीय संस्कृति को समृद्ध करने का एक प्रयास है।
भोपाल में राजा भोज की प्रतिमा की स्थापना की गई है।
इसका उद्देश्य वर्तमान पीढ़ी को राजा भोेज के व्यक्तित्व, कृतित्व और योगदान से अवगत कराना है। इस मूर्ति की स्थापना और राजा भोज के राज्यारोहण के एक हजार वर्ष पूर्ण होने पर किये गये कार्यक्रमों के माध्यम से भोपाल नगन की स्थापना और भोपाल ताल के निर्माण उनके योगदान को याद किया गया। शहीदों की याद में मध्यप्रदेश में क्रंाति यात्रा निकाली गई। कई लोगों ने यह पहली बार जाना कि कमल का फूल और रोटीक्रंातिकारियों के प्रतीक चिन्ह थे। आदिवासी महानायकों टंट्या भीम और भीमा नायक की पुण्य स्मृति में स्मारकों का निर्माण किया जा रहा है। स्वामी विवेकानंद जयंती के 150 वर्ष को समारोहपूर्वक मनाने के मध्यप्रदेश सरकार के निर्णय के पीछे भी युवाओं को इतिहास से परिचित कराकर भविष्य में भारतीयता के प्रति गर्व से आगे बढ़ाने का सोच है। विवेकानंद जयंती को प्रदेश में युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।


जन्मभूमि रक्षा अभियान


वर्तमान युग में अनेकानेक कारणों से लोगो में देश प्रेम की भावना धीरे-धीरे कम होती जा रही है। राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़े प्रतीकों और महापुरूषों की ओर नौजवानों का रूझान कम हुआ है। उनमें इस भावना को पुनः जगाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने जन्मभूमि रक्षा अभियान चलाया है।

सूर्य नमस्कार


मध्यप्रदेश सरकार ने स्कूलों में सूर्य नमस्कार शुरू किया है। स्कूलों में किये जाने वाले सूर्य नमस्कार में गिनती का प्रयोग किया गया। शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए सूर्य नमस्कार से ज्यादा वैज्ञानिक और सरल व्यायाम विश्व में शायद ही दूसरा कोई हो। इतना ही नहीं राज्य सरकार ने एक व्यापक योग नीति लागू की है। इसमें स्कूलों में योग सिखाने के साथ-साथ योग शिक्षा के प्रसार में श्रेष्ठ काम करने वाले व्यक्तियों और सस्थाओं को बढ़ावा देने के प्रावधान है। इस नीति के क्रियान्वयन के लिए योग परिषद का गठन किया गया है। योग प्रशिक्षण संस्थाओं के पाठ्यक्रम में इसे शामिल किया गया है।करने की श्रंखला प्रारंभ की

सांस्कृतिक उत्सव

प्रदेश में साहित्यकारों की स्मृति में उनके लेखन विचार एवं अनुदान को समर्पित समारोह की श्रृखंला शुरू की गई। प्रमुख रूप से अरविन्द घ्ाोष, नरेश मेहता, श्रीकृष्ण सरल, भवानी प्रसाद मिश्र, शरद जोशी, सुभद्रा कुमारी चैहान और बालकृष्ण शर्मा नवीन की स्मृति में समारोह शुरू किये गये। आंचलिक संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिये अनेक नये उत्सव प्रारंभ किये गये।
भोजपुर में भोजपुर उत्सव, विदिशा में बेतवा उत्सव, उदयपुर एवं सिरोंज में संास्कृतिक उत्सव, जबलपुर में नर्मदा महोत्सव, ग्वालियर में धरोहर उत्सव, चित्रकूट में महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नानाजी देशमुख की स्मृति में शरदोत्सव, खण्डवा में फूलों के रंग से और भोपाल में परम्परागत कठपुतली पर केन्द्रित पुतल उत्सव शुरू किया गया। शास्त्रीय नृत्य गायन केन्द्रित ग्वालियर में तानसेन समारोह एवं पं. कृष्ण राव शंकर पंडित संगीत समारोह, मैहर में उस्ताद अलाउद्दीन खाॅ संगीत समारोह, इंद्रौर में अमीर खाॅ समारोह, देवास में कुमार गंधर्व समारोह के साथ ही शास्त्रीय नृत्य पर एकाग्र खजुराहो नृत्य समारोह विश्व प्रतिष्ठा के प्रमुख आयोजनों को नया स्वरूप दिया गया है।
तुलसी पर्व, सुफी प्रसंग, कव्वाली प्रसंग, भजन संध्याएं और संकीर्तिन समारोह के साथ ही गांवोा में भारतीय संस्कृति के आधारभूत महान चरित्र नायक श्रीराम एवं लीला पुरूष श्रीकृष्ण की लीलाओं के मंचन रामलीला और रासलीला के आयोजन की परम्परा स्थापित की गई। स्वाध्ाीनता केन्द्रित समारोह में लोकतंत्र का उत्सव भारत पर्व, जनजातीय चेतना पर केन्द्रित आदि विद्रोही जन योद्धा नाट्य समारोह, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जश्ने जम्हूरियत और शहीद दिवस पर भक्ति संगीत सभा पीर परायी जाणे रे का आयोजन संासकृतिक जनभागीदारी बढ़ाने के लिए किये जाते हैं।
मध्यप्रदेश के कला वैविध्य को राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित करने के लिए देेशके विभिन्न महानगरों में मध्यप्रदेश उत्सव आयोजित करने की श्रंखला प्रारंभ की गई है।


उत्सव


भारतीय समाज सदा से उत्सवधर्मी रहा है। कहा यह जाता है कि वर्ष के 365 दिनों में शायद ही ऐसा कोई दिन हो जब कोई न कोई उत्सव, व्रत, तीज-त्योहार न होता है। भारतीय समाज भी तद्नुसार पंचंाग से ही चलता रहा है। सरकार ग्रे्रगेरियन कलेण्डर से भले ही चलती हो, लेकिन समाज का आधार पंचंाग ही रहा। भारत में नये वर्ष का आरंभ गुड़ी पड़वा से होता है। इसीलिये राज्य सरकार ने गुड़ी पड़वा को शासकीय अवकाश घोषित कर दिया। इस दिन उज्जैन में विक्रमोत्सव का आयोजन कर विक्रम संवत को भी याद किया जाता है। साथ ही, भारतीय कालगणना परंपरा पर गोष्ठी का आयोजन किया जाता है।

संस्कृति के संग्रहालय


पश्चिम की संस्कृति युवाओं पर हावी न हो, इसके लिए सोची समझी रणनीति के तहत हमारे आदिगुरू, महर्षि, देवी-देवताओं के नाम पर सृजनपीठ, संग्रहालय की स्थापना की गई है।
आदिगुरू शंकराचार्य के नाम से ओंकारेश्वर, महर्षि परशुराम के नाम से जानापाव में आश्रम, संत रविदास से नाम से महू में सृजनपीठ की स्थापना प्रस्तावित है। पीठ के माध्यम से वैदिक एवं पौराणिक ज्ञान परम्परा तथा सामाजिक समरसता का वर्तमान संदर्भ में शोध किया जाना प्रमुख उद्देश्य है। कलाओं में लीला पुरूष कृष्ण पर आधारित कृष्णायन की स्थापना
उज्जैन में, कलाओं में देवी की छवियों पर आधारित दुर्गायन की स्थापना मैहर में और कलाओं में शिव का स्वरूप आधारित नटराज की स्थापना ओंकारेश्वर में करना प्रस्तावित है। देश के प्रमुख आख्यानों रामकथा एवं कृष्ण कथा की लीला प्रस्तुतियों के प्रशिक्षण के लिए लीला गुरूकुल की स्थापना की जा रही है।
मध्यप्रदेश के संास्कृतिक वैविध्य तथा विकाश में मराठी और पंजाबी संस्कृति का महत्वपूर्ण योगदान है। इस संास्कृतिक समरसता को रेखंाकित करने के उद्देश्य से मराठी और पंजाबी अकादमियों की स्वतंत्र स्थापना की गयी है। भोपाल में जनजातीय संग्रहालय स्थापित किया गया है। प्राचीन भारत के साहित्य, संस्कृति, जीवन पद्धति, ज्ञान विज्ञान से अध्ययन, अनुशीलन और अनुसंधान के लिए उज्जैन में महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ और ध्ार्मपाल शोधपीठ स्थापित की गई है।





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