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D-81646/17-07-2017









फीचर

1- लखनऊ में अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक प्रारम्भ


2- युवाओं में भारत का गौरव व संस्कृति जानने की जिज्ञासा और समाज के लिए कुछ न कुछ करने की ललक - डॉ. मनमोहन वैद्य


3- बिना भेदभाव के नागरिक और राष्ट्रीय बोध जगाने का काम करता है संघ: श्री दत्तात्रेय होसबाले


4- विघटनकारी संदेश (आलेख) - एस. शंकर




माँ की पुकार
रोशन कर इस जहान में अपने नाम को,
आखिर किस जहान में चला गया रे तू?
सुरक्षित कर, पराए घर के चिरागों को,
मेरे घर के दिये को ही बुझा गया रे तू!

मर मिटा ख़ुशी से, अपनी धरती माँ के लिए,
पर जाते-जाते, अपनी माँ की हंसी को भी मिटा गया रे तू!
तू तो चला गया अपनी माँ की गोद में सोने,
पर ऐ धरती के सपूत,
अपनी इस माँ की गोद सूनी कर गया रे तू!

तू तोह हो चला अमर, मर मिट के भी,

अपनी माँ को तो जीवित लाश बना गया रे तू!
सुलाना चाहती थी में अपने चाँद को, ममता की छाँव में,
पर मेरी ममता को अमावस्या का अन्धकार बना गया रे तू!

तेरी लम्बी उम्र की दुआ भी ना मांग सकी में जी भर के,
मर-मिटने को तो इतना व्याकुल था रे तू!
तुझे रोकने के लिए हक़ भी ना जता पाई में तुझपर अपना,
मेरा नहीं अपनी धरती माँ का लाडला बीटा था रे तू!

अब बस शिकायत ही कर सकती हूँ, तेरी इस तस्वीर के आगे खड़े होकर,
की एक बार भी अपनी माँ के बारे में न सोच सका रे तू!
पर फिर भी फक्र है मुझे तुझ पर मेरे लाल,
की इस माँ का खून हो के भी केवल अपनी माँ का ही रहा रे तू!
- अनुजा गुरेले



मुख्यमंत्री श्री चौहान से मिले संतूर वादक श्री शर्मा और योग गुरु श्रीमती हंसा
21 Jun 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से प्रसिद्ध संतूर वादक पद्मविभूषण श्री शिवकुमार शर्मा और महिला योग गुरु श्रीमती हंसा जयदेव योगेन्द्र ने आज मुख्यमंत्री निवास में सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गहलोत भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पद्मविभूषण श्री शर्मा को शाल-श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। श्री चौहान ने भेंट के दौरान इंस्टीट्यूट की निदेशक महिला योग गुरु श्रीमती हंसा जयदेव योगेन्द्र की पुस्तक 'योगा फॉर आल' का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने योग के प्रसार में श्रीमती हंसा के प्रयासों की सराहना की। श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल से अब योग विश्व में जनांदोलन बन गया है।

aaशिर्डी साईं बाबा फाउंडेशन अब मंत्रो के जरिये युवापीढ़ी में नई ऊर्जा और जोश पैदा करेगी'


11 Jun 2018

मुंबई। साईं बाबा फाउंडेशन (एसएसबीएफ) के प्रबंध ट्रस्टी व फिल्म और धारावाहिकों के निर्माता तथा अभिनेता आशिम खेत्रपाल ने ३० धार्मिक मंत्रों की रिकॉर्डिंग शनिवार ९ जून २०१८ को मुंबई के अँधेरी (वेस्ट) में स्थित ए टू स्टूडियो में शुरू किया।जिसमें 'शिव मंत्र',' गणेश मंत्र','साई मंत्र' जैसे ३० धार्मिक मंत्रो की रिकॉर्डिंग गायक आशिम खेत्रपाल की आवाज में रिकॉर्ड हो रहा है और जिसे संगीतकार अमर प्रभाकर देसाई ने संगीत से संवारा है।और यह पूरा काम मशहूर लेखक विकास कपूर के देखरेख में हो रहा है। धार्मिक मंत्रों की रिकॉर्डिंग के बारे में आशिम खेत्रपाल ने कहा," मंत्रो में बड़ी शक्ति होती है।उसके सुनने भर से हमें नई शक्ति और जोश मिलता है।आज सभी लोग परेशान है,चाहे किसी भी रूप में।यह सभी मंत्र काफी काम करते है,इससे लोगों को मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी।जोकि आप कभी भी सुन सकते है,जिससे मन एकाग्र हो जाता है।जब भी हम किसी भी धार्मिक स्थल पर जाते है तो हमको मानसिक शांति मिलती है।जिसका कारण है वहाँ पर चलने वाले वैदिक मंत्र,उपदेश,श्लोक इत्यादि।" धारावाहिक' ॐ नमः शिवाय','श्री गणेश','जय संतोषी माँ' जैसे सुपरहिट धार्मिक धारावाहिको और फिल्मों में पिछले २२ साल से लेखक के तौर पर मशहूर लेखक विकास कपूर ने कहा," आज लोग धीरे धीरे लोग मंत्र की शक्ति को लोग भूलते जा रहे है। यह एक तरह से मैडिटेशन का काम करता है।और हमारे शरीर में नई शक्ति और ऊर्जा प्रदान करता है। हमलोग शिरडी साईं बाबा फाउंडेशन की तरफ से यह कोशिश कर रहे है कि आज की युवा पीढ़ी जागृत हो और इन मंत्रो की शक्ति को समझे। "


भोपाल में नज्म-शायरी और सरगोशियाँ की इक शाम आपके नाम 14 मई को
12 May 2018
भोपाल में नज्म-शायरी और सरगोशियाँ की इक शाम आपके नाम का आयोजन सोमवार 14 मई को शाम 7 बजे होटल अशोक लेक व्यू, श्यामला हिल्स में किया गया है। पद्मश्री डॉ ज्ञान चतुर्वेदी श्रीमती ममता तिवारी की कृतिया सरगोशियाँ एवं यूं भी कभी कभी [द्वितीय संस्करण] का लोकार्पण करेंगे। साथ ही डॉ ज्ञान चतुर्वेदी कविता पाठ की महफ़िल मे भी शिरकत करेंगें। डॉ ज्ञान चतुर्वेदी कविता पाठ की महफ़िल में शिरकत करेंगें। कविता पाठ की महफ़िल में कवि श्री विनय उपाध्याय, शायर श्री बद्र वास्ती, कवित्री श्रीमती सुनीता सिंह, श्रीमती सीमा पाठक, तथा श्रीमती ममता तिवारी नज्म- शायरी और सरगोशियाँ की इक शाम आपके नाम में अपनी-अपनी रचनाओं से समा बांधेंगे।
18 मई को अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस : 15 जगह लगेंगी छायाचित्र प्रदर्शनी
11 May 2018
पुरातत्व विभाग द्वारा 18 मई को अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाया जायेगा। इस दिन प्रदेश में 15 स्थानों पर छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई जाएगी। भोपाल के राज्य संग्रहालय में 'विश्व के प्रमुख संग्रहालय'' विषय पर छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई जाएगी। आयुक्त पुरातत्व श्री अनुपम राजन ने बताया है कि रानी दुर्गावती संग्रहालय जबलपुर में 'शिवलिंगम', तुलसी संग्रहालय रामवन (सतना) में 'राग-रागिनी', केन्द्रीय संग्रहालय इंदौर में 'शिवपुत्र कार्तिकेय', त्रिवेणी संग्रहालय उज्जैन में 'शिवपुत्र गणेश कार्तिकेय', महाराजा छत्रसाल संग्रहालय धुवेला (पन्ना) में 'महाकाल के अद्भुत श्रृंगार', गूजरी महल संग्रहालय ग्वालियर में 'भारतीय चित्रकला में रामकथा', जिला पुरातत्व संग्रहालय व्यंकट भवन रीवा में 'मध्यप्रदेश की छत्रियाँ' यशोवर्मन पुरातत्व संग्रहालय मंदसौर में 'भीम बैटिका के शैलचित्र', पुरातत्व संग्रहालय दमयंती महल दमोह में 'गौरी पुत्र गणेश' जिला पुरातत्व संग्रहालय पन्ना में 'कांस्य प्रतिमाओं में शैव प्रतिमाएँ', पुरातत्व संग्रहालय कसरावद (खरगौन) में 'देवी पार्वती', जिला पुरातत्व संग्रहालय भिण्ड में 'मध्यप्रदेश की कोठियाँ', देवी अहिल्याबाई होलकर संग्रहालय महेश्वर (खरगौन) में 'शिल्पकला में नायिकाएँ' और जिला पुरातत्व संग्रहालय विदिशा में 'मध्यप्रदेश के जैन स्मारक' विषय पर छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
खुशी के लिये नहीं, खुश होकर काम करने से मिलेगी खुशी - स्वामी सुखबोधानन्द
4 May 2018
वेद मर्मज्ञ एवं प्रखर आध्यात्मिक गुरू स्वामी सुखबोधानन्द ने कहा है कि खुशी के लिये काम करने से खुशी नहीं मिलेगी, बल्कि खुश होकर काम करने से खुशी मिलेगी। यंत्रवत जीवन और प्रतिक्रिया करने की प्रवृत्ति से मुक्ति पाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि परेशानियों और समस्याओं को सकारात्मक दृष्टि से देखने पर वे भी गुरू बन जाती हैं। स्वामी सुखबोधानन्द ने आज यहां प्रशासन अकादमी में आनन्द विभाग के अंतर्गत राज्य आनन्द संस्थान द्वारा आयोजित 'आनन्द व्याख्यान' में यह विचार व्यक्त किये। मन की भीतर की स्थिति है आनन्द मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि सकारात्मक विचार ही सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। उन्होंने कहा कि सभी प्रकार का दर्शन आनन्द को प्राप्त करने का मार्ग बताता है। साम्यवाद और पूंजीवाद ने भी आनन्द प्राप्ति का रास्ता दिखाया था, लेकिन कालांतर में सही साबित नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि आनन्द और सुख में भेद नहीं समझने के कारण ऐसा होता है। उन्होंने कहा कि आनन्द मन की भीतर की स्थिति है, जबकि सुख बाहरी परिस्थितियों से निर्मित होता है। श्री चौहान ने कहा कि केवल अधोसंरचनाएं खड़ी करने से आनन्द नहीं मिलता। अर्थपूर्ण जीवन जीना महत्वपूर्ण है। समृद्ध लोग भी दुखी रहते हैं और अभाव में रहने वाले भी खुश रहते हैं। इसलिये मनोदशा को सकारात्मक बनाने की कला सीखना होगा। प्रत्येक क्षण में है आनन्द स्वामी सुखबोधानंद ने आनन्द की चारित्रिक विशेषताओं और जीवन में उसकी उपस्थिति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आनन्द को भविष्य में देखने की प्रवृत्ति और आदत बना लेने से निराशा और दुख ही हाथ आयेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान ही सब कुछ है, इसलिए आनन्द भी वर्तमान में ही उपस्थित है। यह मन के भीतर है। उन्होंने कहा कि जब सब दरवाजे बंद हो जाते हैं, तब ईश्वर नया द्वार खोल देता है। इसलिए प्रत्येक क्षण में आनन्द है। प्रत्येक पल में जीवन है। प्रत्येक पल ऊर्जावान है। वर्तमान में भूतकाल का हस्तक्षेप नहीं होने दें स्वामीजी ने कहा कि राग और द्वेष का रूपांतरण प्रेम में करने के लिए भक्ति की जरूरत पड़ती है। इसलिए भक्ति प्रमुख तत्व है। स्वामी ने कहा कि भविष्य माया है। सिर्फ वर्तमान ही सच है और वर्तमान में ही आनन्द व्याप्त है। उसकी अनुभूति करने की आवश्यकता है। आश्चर्य तत्व की प्रधानता होना चाहिए। उन्होने कहा कि वर्तमान में भूतकाल का हस्तक्षेप नहीं होने दें, इसके प्रति भी सचेत रहें। आनंद का दूसरा स्वरूप ऊर्जा है। आनन्द विभाग के मंत्री श्री लाल सिंह आर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान निरंतर नवाचार करने वाले मुख्यमंत्री हैं। आनन्द विभाग की स्थापना इसका उदाहरण है। उन्होंने बताया कि बहुत कम समय में आनन्द विभाग की गतिविधियों का प्रदेशव्यापी विस्तार हुआ है। पूरे देश में इसकी सराहना हो रही है। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द विभाग श्री इकबाल सिंह बैंस और आनन्द क्लबों के सदस्य उपस्थित थे।
संस्कृत भाषा के व्यापक प्रसार से भारत की प्राचीन संस्कृति का होगा संरक्षण
18 March 2018
भोपाल में आज हुए राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में संस्कृत भाषा के विद्वानों का मत था कि संस्कृत भाषा के व्यापक प्रसार से ही सही मायनों में प्राचीन भारतीय संस्कृति का संरक्षण किया जा सकता है। इसके लिये प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा प्रभावी नीति तैयार करने पर जोर दिया गया। सम्मेलन में संस्कृत विद्यालयों के प्रतिभाशाली बच्चों को पुरूस्कृत किया गया। सम्मेलन के विभिन्न सत्र में, क्षेत्रीय सहसंगठन मंत्री विद्या भारती, प्रो. श्री निरंजन शर्मा, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान लखनऊ के प्रो. आजाद मिश्र, नई दिल्ली के प्रो. देवेन्द्र मिश्र, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. भगवतशरण शुक्ल और राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान मुंबई के प्रो. भारतभूषण मिश्र ने विचार रखे। सम्मेलन में डॉ. सम्पदानंद मिश्र पुंडुचेरी ने बताया कि उनके द्वारा संस्कृत भाषा के प्रसार के लिये 24 घंटे का रेडियो कार्यक्रम प्रसारित किया जा रहा है जिसे दुनिया के 124 देश में रूचि के साथ सुना जा रहा है। सम्मेलन में प्रो. मिथिला प्रसाद त्रिपाठी और संस्कृत विद्यवान श्री मनमोहन उपाध्याय ने कहा कि संस्कृत प्राचीन भाषा है। इसके विकास से छात्र अन्य विषयों का कुशलता पूर्वक अध्ययन कर सकेंगे। आयुक्त लोक शिक्षण श्री नीरज दुबे ने संस्कृत को रोजगार के साथ जोड़े जाने पर बल दिया। महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के निर्देशक श्री पी.आर. तिवारी ने बताया कि भोपाल में सर्वसुविधा युक्त चार मंजिला नवीन भवन के लिये 8 करोड़ 38 लाख रूपये मंजूर किये गये है। इस भवन में 200 सीटर का ऑडीटोरियम, गेस्ट हाउस और कार्यालय की व्यवस्था है। प्रदेश का पहला शासकीय माध्यमिक कन्या आवासीय संस्कृत विद्यालय भोपाल से प्रारंभ किये जाने की स्वीकृति प्राप्त हो गई है। जहाँ कक्षा 6 से 8 तक संस्कृत माध्यम में शिक्षा दी जायेगी। इस विद्यालय के साथ 90 सीटर छात्रावास, नि:शुल्क भोजन एवं समस्त सुविधाएं रहेगी। यहाँ छात्राएँ पारस्परिक एवं आधुनिक पद्धतियों के माध्यम से अध्ययन करेंगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में शिक्षण सत्र 2016-17 में 168 विद्यालय को सम्बद्धता प्रदान की गयी हैं। सम्मेलन में सांस्कृतिक संध्या में संस्कृत बैण्ड की प्रस्तुति हुई।
स्वामी जयेन्द्र सरस्वती के निधन से देश ने श्रेष्ठ संत खोया
28 February 2018
उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया ने कांची कामकोटी पीठ के शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती के देहावसान पर गहन दु:ख व्यक्त किया है। उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा है कि देश ने संत परम्परा का एक श्रेष्ठ मनीषी खो दिया है। मंत्री श्री पवैया ने शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती को वेदांत का उत्कृष्ठ विद्वान बताते हुए कहा कि उन्होंने देश में चारों ओर भ्रमण कर संस्कृत भाषा और नैतिकता का जन-जागरण किया है। उन्होंने अपने आध्यात्मिक व्यक्तित्व से देश के ज्वलंत विषयों को प्रभावित किया। वे न केवल हिन्दू समाज, बल्कि सभी पंथों में आदर की दृष्टि से देखे जाते रहेंगे।
भोपाल में हो रही है हैप्पीनेस इंडेक्स इंटरनेशनल वर्कशॉप
21 February 2018
नई दिल्ली. 26 सेकंड के वीडियो क्लिप से चर्चा में आई मलयालम अभिनेत्री प्रिया प्रकाश वारियर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को सुनवाई करेगा। प्रिया ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने, आपराधिक कार्रवाई रोकने और दूसरे राज्यों को भी ऐसा नहीं करने का निर्देश देने की मांग की है। प्रिया के वकील हरीश बीरन ने तुरंत सुनवाई का अनुरोध किया, जिसे चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ ने स्वीकार कर लिया। फिल्म ‘अरु अदार लव’ के गाने ‘मानिक्य मलाराया पूवी’ को लेकर तेलंगाना में प्रिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। - शिकायत में कहा गया है कि गाने में पैगम्बर मोहम्मद की पत्नी का जिक्र कर मुस्लिम समुदाय की भावनाएं आहत की गई हैं।
बुक लॉंच कार्यक्रम कल शाम 5 बजे
16 February 2018
क्लब लिटराटी द्वारा कल स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में एक बुक लॉंच कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है । इस कार्यक्रम में 2009 बैच के आईएएस अधिकारी तरुण पिथोड़े की दूसरी किताब "Happiness" लॉंच की जाएगी । रियल एस्टेट रेगुलरिटी अथॉरिटी के अध्यक्ष व मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव श्री एंटनी डिसा इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे । इंग्लिश में लिखी गयी किताब में लेखक ने 'लोगों को बेहतर जीवन जीने में मदद करने के लिए कई बेहतरीन आइडियाज सामने रखे हैं ' । इससे पूर्व इंग्लिश व हिन्दी में प्रकाशित हुई तरुण की पहली किताब " आई एम पॉसिबल" हर आयु वर्ग के लोगों द्वारा काफी पसंद की गयी थी । मूलतः मध्यप्रदेश के निवासी तरुण कुमार पिथोड़े ने भोपाल स्थित मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रद्योगिकी संस्थान ने बी टेक किया है । वे भारतीय प्रशासनिक सेवा में आने से पहले भारतीय इंजीनियरिंग सेवा में भी रह चुके हैं । सीहोर के पहले वे राजगढ़ जिले के कलेक्टर थे तथा उससे पहले उन्होने प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड के डायरेक्टर के रूप में कार्य किया । स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में कल शाम 5 बजे आयोजित होने वाला कार्यक्रम सभी शहरवासियों के लिए ओपन है । इच्छुक व्यक्ति 4.45 तक लाइब्रेरी पहुँचकर इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं ।
कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है कार्यक्रम का नाम - बुक लॉंच कार्यक्रम दिनांक - 17 फरवरी 2018 शनिवार समय - शाम 5 बजे स्थान - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी आयोजक - क्लब लिटराटी किताब का नाम - Happiness : A New Model of Human Behaviour लेखक - तरुण कुमार पिथोड़े मुख्य अतिथि - एंटनी डिसा

श्रवणबेलगोला की तीर्थ यात्रा ट्रेन के जिला क्रम में परिवर्तन
16 February 2018
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अन्तर्गत जैन तीर्थ श्रवणबेलगोला को जाने वाली विशेष ट्रेन के जिलों के क्रम और अनुरक्षकों की संख्या में परिवर्तन किया गया है। इसमें अब आगर-मालवा जिले को भी शामिल किया गया है। यह ट्रेन शाजापुर से 27 फरवरी को प्रारंभ होकर इंदौर, उज्जैन, भोपाल होते हुए श्रवणबेलगोला जाने वाली थी। अब यह यात्रा इसी तारीख को शाजापुर से प्रारंभ होकर इंदौर-उज्जैन-हबीबगंज (भोपाल) होते हुए श्रवणबेलगोला जायेगी। इस ट्रेन में शाजापुर से 120 बर्थ (8 सुरक्षा), उज्जैन से 125 (3 सुरक्षा), इंदौर से 170 (3 सुरक्षा) भोपाल से 275 (5 सुरक्षा) सीहोर से 100 (2 सुरक्षा) रायसेन से 110 बर्थ (2 सुरक्षा) आवंटित की गई है। हरदा जिले के तीर्थ यात्री हबीबगंज (भोपाल) से ट्रेन में बैठेंगे। इनके लिए 25 बर्थ (1 सुरक्षा) आवंटित की गई है। आगर-मालवा जिले के तीर्थ यात्री उज्जैन से ट्रेन में बैठेंगे। इनके लिए 50 बर्थ (1 सुरक्षा) आवंटित की गई हैं। यह विशेष ट्रेन 4 मार्च को श्रवणबेलगोला से रवाना होकर हबीबगंज (भोपाल) से होते हुए उज्जैन, इंदौर से शाजापुर वापस जाएगी
आदिवासी लोक कला को जन-जन तक पहुँचाना आवश्यक- राज्यपाल
15 February 2018
राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज राजभवन में ट्रायल पेंटिग वर्कशाप का उदघाटन करते हुए कहा कि आदिवासी लोक कला को स्कूलों में अतिरिक्त पाठ्यक्रम के रूप में शुरू किया जाये तथा इसकी प्रतियोगिता आयोजित की जायें। प्रायमरी, मिडिल और हायर सेकेण्डरी तीन स्तर पर सिलेबस तैयार किये जायें । स्कूलों में इस विषय में रूचि लेने वाले छात्रों की प्रतियो‍गिता आयोजित कर प्रमाण-पत्र दिया जाये तथा विजेता छात्रों की अंकसूची में अतिरिक्त बोनस अंक जोड़ें। उन्होंने कहा कि आदिवासी लोक कला को जन-जन तक पहुँचाने और इसके प्रचार-प्रसार की बहुत आवश्यकता है। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ.एम मोहनराव, प्रमुख सचिव संस्कृति श्री मनोज श्रीवास्तव, आयुक्त आयुष श्रीमती शिखा दुबे, संचालक श्री अक्षय कुमार सिंह , समन्वयक जनजाति संग्रहालय श्री अशोक मिश्र, और निदेशक श्रीमती वंदना पांड्या भी उपस्थित थीं। राज्यपाल ने स्वास्तिक की आकृति बनाकर वर्कशाप का शुभारंभ किया। राजभवन परिसर में स्थित क्षिप्रा अतिथिगृह में 15 फरवरी से 23 फरवरी, 2018 तक चलने वाले इस वर्कशाप का आयोजन संस्कृति विभाग, आदिवासी लोक कला परिषद और लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, भोपाल द्वारा आयोजित किया गया है। इस वर्कशाप में दस भील और दस गौंड जाति के कलाकार पर अपनी पेंटिंग का प्रदर्शन करेंगे। वर्कशाप प्रतिदिन प्रात: 11 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगी।
बड़वाले महादेव मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री श्री चौहान
13 February 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान आज सपत्निक यहां पुराने शहर स्थित बड़वाले महादेव मंदिर पहुंचे और पूर्जा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेश की समृद्धि की कामना करते हुए प्रदेशवासियों को महाशिवरात्रि की बधाई और शुभकामनाएं दी। श्री चौहान ने शिव बारात में शामिल होने वाले पारंपरिक रथ को भी खींचा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हिन्दू संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा में शिव की आराधना का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि विष पीकर अमृत देने वाले आदिदेव शिव स्वयं में सृष्टि निर्माता मंगलकारी देव हैं। मुख्यमंत्री के साथ भोपाल के महापौर श्री आलोक शर्मा भी थे।
भारत भवन की 36वीं वर्षगाँठ के दस दिवसीय समारोह का शुभारंभ आज
12 February 2018
बहुकला केन्द्र भारत भवन की 36वीं वर्षगाँठ को समारोहपूर्वक भोपाल में 13 से 23 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है। इस समारोह में कला प्रदर्शनियाँ, गायन, वादन, कला शिविर, लोक संगीत, नृत्य, कविता-पाठ, कहानी-पाठ, फिल्म नाटक पर केन्द्रित प्रस्तुतियाँ होंगी। प्रमुख सचिव संस्कृति एवं न्यासी सचिव भारत भवन श्री मनोज श्रीवास्तव ने यह जानकारी देते हुए बताया है कि समारोह का शुभारंभ 13 फरवरी की शाम 6.30 बजे लब्ध प्रतिष्ठित नृत्यांगना सुश्री सोनल मानसिंह करेंगी। शाम 6.45 बजे श्री रामसिंह उर्वेती के चित्रों की प्रदर्शनी का शुभारंभ होगा। इसके बाद शाम 7 बजे 'संकल्प से सिद्धि'' में सुश्री सोनल मानसिंह द्वारा परिकल्पित और निर्देशित भरतनाट्यम पर आधारित नृत्य-नाटिका की प्रस्तुति होगी। समारोह के दूसरे दिन 14 फरवरी को दोपहर 2 बजे बैजूबावरा फिल्म का प्रदर्शन होगा। शाम 7 बजे श्रीमती अश्विनी भिड़े देशपाण्डे तथा संजीव अभ्यंकर का शास्त्रीय गायन होगा। तीसरे दिन 15 फरवरी को शाम 7 बजे दयाशंकर की डायरी नाटक की प्रस्तुति होगी। इसका निर्देशन सुश्री नादिरा बब्बर ने किया है। चौथे दिन 16 फरवरी को दोपहर 12 बजे चित्रकला शिविर का शुभारंभ होगा। यह शिविर 23 फरवरी तक चलेगा। शाम 7 बजे श्री मोहित टाकलकर द्वारा निर्देशित मैथमेजिशियन नाटक की प्रस्तुति होगी। अगले दिन 17 फरवरी को शाम 7 बजे श्री जय देशमुख द्वारा निर्देशित 'नट सम्राट'' नाटक की प्रस्तुति होगी। यह प्रस्तुति एकरंग थिएटर सोसायटी भोपाल द्वारा की जाएगी। पाँचवे दिन 18 फरवरी को दोपहर 11 बजे कहानी पाठ होगा। इसमें श्री अशोक मिश्र, श्री उदयन वाजपेयी, श्री जयशंकर, श्री तरुण भटनागर एवं श्री रिजवानुल हक कहानी पाठ करेंगे। रात्रि में सुश्री गगन गिल, श्री पंकज राग, श्री एकान्त श्रीवास्तव, श्री कुमार अनुपम, श्री विवेक निराला, सुश्री राजुला शाह, सुश्री बाबुआ कोहली एवं सुश्री उपासना झा कविता पाठ करेंगे। छठवें दिन 19 फरवरी को दोपहर 2 बजे 'चोखेरवाली' फिल्म का प्रदर्शन होगा। रात्रि में श्री मधुसूदन कर्था तथा साथी कलाकारों द्वारा चेण्डा मेलम समूह वादन और इसके बाद श्री अनूपरंजन पाण्डे के निर्देशन में 'बस्तर बैण्ड'' की आकर्षक प्रस्तुति होगी। 20 फरवरी को शाम 7 बजे 'मीरा'' नृत्य-नाटिका की प्रस्तुति होगी। इसे सुश्री लता सिंह मुंशी और साथी कलाकार प्रस्तुति देंगे। 21 फरवरी की शाम 7 बजे मध्यप्रदेश के लोक अंचलों की प्रस्तुतियाँ होंगी। अगले दिन 22 फरवरी को शाम 7 बजे श्री रोजू मजूमदार और श्री कदरी गोपालनाथ की बांसुरी और सेक्सोफोन जुगलबंदी होगी। भारत भवन की 36वीं वर्षगाँठ के आखरी दिन 23 फरवरी को शाम 7 बजे सातवीं समकालीन भारतीय कला द्वैवार्षिकी में ग्रेण्ड अवार्ड तथा विशेष प्रशंसा पुरस्कार प्राप्त कलाकारों का सम्मान होगा।
किसी जरूरतमंद को रास्ता देने तुम झुक गए विंध्याचल इसलिए तुम पहाड़ हो
12 February 2018
शनिवार-रविवार 10-11 फरवरी 2018 दो दिवसीय कार्यक्रम के समापन सत्र में रविवार 11 फरवरी को देश के जाने माने कवियों साहित्यकारों लेखकों ने अपनी कविताओं का पाठ किया। राज्य संग्रहालय में आयोजित यह कविता पाठ मुक्तिबोध के जन्म के सौ वर्ष पूर्ण होने पर उनके लिए समर्पित किया गया। कविता पाठ से पहले प्रगतिशील लेखक संघ के इतिहास पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन हुआ। इसके बाद आयोजित कविता पाठ में देश भर से कवियों ने अपनी प्रतिरोधी स्वर की कविताओं का पाठ किया। इनमें सर्वश्री मलय, राजेश जोशी, राजेन्द्र शर्मा, कुमार अंबुज, कात्यायनी, हरिओम राजोरिया, मोहन कुमार डहेरिया, नीलेश रघुवंशी, अनिल करमेले और अरबाज़ खान अपनी कविताएं सुनाईं। युवा कवि अरबाज खान ने नमाजियों के बीच बच्चों की ऊधम पट्टी पर केंद्रित कविता सुनाई। उन्होंने दूसरी कविता में उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी को इसलिए मार दिया जाएगा कि उसके रिश्तेदार और धर्मबंधु अलग देश में हैं। उड़ती चिडिय़ा का धोखा देकर मेरा भी खतना किया गया इसलिए मैं मारा जाऊंगा। अनिल करमेले ने अपनी कविताओं का पाठ किया टेलीग्राफ सहित चार कविताओं का पाठ किया। मोहन डहेरिया ने कौन गा रहा है ये गीत से श्रोताओं को प्रभावित किया। हरिओम राजोरिया ने पता न था से कविता के माध्यम से मनुष्य की गरिमा के हनन को व्यक्त किया। उन्होंने विरासत और अन्य कविताओं का पाठ किया। नीलेश रधुवंशी ने अपनी कविता साइकिल में बताया कि साइकिल चलाते हुए जमीन पर रहते हुए भी दो इंच ऊंची उठी मैं राजेंद्र शर्मा ने चब्बनी कविता के माध्यम से मनुष्य की प्रवृत्तियों पर प्रकाश डाला। दिल्ली से आई कात्यायनी ने आस्था कविता के माध्यम से बताया कि आस्था की आंखें नहीं होतीं / वह संसस में भीम की तरह प्रवेश कर सकती है/ तर्क को गहरे गढ्डे में दफन कर सकती है/ इतिहास की कपाल क्रिया कर फिर से लिख सकती है। कुमार अंबुज ने इंसान के गलत तरीकों से अमर होने की आकांक्षा को रखांकित किया। राजेश जोशी ने शिवालिक की पहाडिय़ां कविता के माध्यम से समाज के तथाकथित बड़े लोगों की प्रवृत्यिों पर आक्षेप किया। उनकी कविता में वे बताते हैं कि उन्होंने कई बार विंध्याचल के कानों में जोर जोर से चिल्ला कर कहा / कि ऋषियों की बातों पर भरोसा छोड़, तुम्हीं ने मुझे सिखाया कि झुक जाना छोटा हो जाना नहीं है। किसी जरूरतमंद को रास्ता देने तुम झुक गए इसलिए तुम पहाड़ हो। वरिष्ठ कवि मलय ने अपनी कविता में पानी, कैसे छोड़ दूं यह दुनिया आदि कविताएं सुनाईं। दो दिवसीय इस सम्मेलन में तमिलनाडू, झारखंड, पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़, से आए साहित्यकारों लेखकों सांस्कृतिक कार्यकताओं ने विचार विनियम करते हुए नई ऊर्जा और चेतना का संचार हुआ।
साहित्य का अर्थ है आत्मा से संवाद'
4 February 2018
भोपाल, 04 फरवरी, 2018। समाचार-पत्र जो काम नहीं कर सकते, वह काम साहित्य करता है। साहित्य के शब्द आत्मा से संवाद करते हैं। जब हम एकांत में होते हैं तो साहित्य के शब्द गुनगुनाते हैं। जब हम आत्मा के पास जाते हैं, तब भी हम साहित्य से संवाद करते हैं। यह विचार वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विजय बहादुर सिंह ने पंडित बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान समारोह में व्यक्त किए। मीडिया विमर्श की ओर से आयोजित समारोह में दसवाँ पं. बृजलाल द्विवेदी सम्मान साहित्यिक पत्रिका 'अलाव' के संपादक रामकुमार कृषक को दिया गया। साहित्यिक पत्रकारिता की निष्पक्षता के संबंध में डॉ. सिंह ने कहा कि पत्रकारिता राजनीति के पक्ष में खड़ी हो सकती है, किंतु साहित्य कभी किसी के पक्ष या विपक्ष में नहीं लिखा जाता। उन्होंने कहा कि साहित्य सत्य पर टिका होता है। जब कभी सच संदिग्ध दिखाई देता है, तो लोग सच जानने के लिए साहित्य के पास जाते हैं। महाभारत और रामायण यह कभी झूठे नहीं पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में शब्द को ब्रह्म कहा गया है। वेद-उपनिषद ब्रह्म हैं। डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि शब्द के ब्रह्म होने की सबसे अधिक संभावना जिस क्षेत्र में बनती है, वह साहित्य का क्षेत्र है। कवि में निवास करती है संस्कृति : साहित्यकार डॉ. विजय बहादुर सिंह ने कहा कि कवि में एक पूरी संस्कृति निवास करती है। जब पूछा जाता है कि आपकी संस्कृति क्या है, तब हम कहते हैं कि महाभारत और रामायण हमारी संस्कृति है। अर्थात् कवि हमारी संस्कृति की पहचान होते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी विश्वविद्यालय कवि नहीं बना सकता। कवि पैदा होते हैं। जिस प्रकार पीपल का वृक्ष उगता है, पहाड़ से नदी निकलती है, उसी तरह कवि भी नैसर्गिक होता है। त्रुटियों की अपेक्षा समाधान की बात हो : कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि हम वर्तमान परिदृश्य की त्रुटियों की ओर ध्यान देते हैं। संगोष्ठियों में सामाजिक संवाद के माध्यमों को विवादित बना कर चल देते हैं। हम समाधान और सहमति के लिए संवाद क्यों नहीं करते हैं? उन्होंने कहा कि उस समय की प्रतीक्षा है जब विमर्श में शामिल होने वाले विभिन्न विचारधारा के विद्वान सहमति बनाकर उठना शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि सामाजिक संवाद में पक्षहीन हस्तक्षेप होना चाहिए। प्रो. कुठियाला ने कहा कि नये मीडिया में युवाओं द्वारा जो सृजन किया जा रहा है, वह समाज में प्रभाव उत्पन्न कर रहा है। यह माध्यम बहुत तेजी से विस्तारित हुआ है। इसलिए हमें इस माध्यम की ओर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के बौद्धिक आयोजनों में हमें विचार करना चाहिए कि समाज से नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं। पत्रकारिता एक लोकतांत्रिक कर्म : समारोह में सम्मानित साहित्यकार एवं संपादक रामकुमार कृषक ने कहा कि पत्रकारिता एक लोकतांत्रिक, जनतांत्रिक कर्म है। इसका पक्ष-विपक्ष हो सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा की पत्रकारिता की पहुँच समाज में व्यापक होती है। वहीं, साहित्यिक पत्रकारिता की पहुँच सीमित होती है। ऐसे में साहित्यिक पत्रकारिता के प्रयासों को जब हम सम्मान देते हैं तो इसका अर्थ होता है कि हम मूल्यों से जुड़े रहना चाहते हैं। अपनी पत्रिका अलाव के संबंध में उन्होंने कहा कि अगस्त, 1988 में अपने कुछ मित्रों के साथ उन्होंने इसकी शुरुआत की थी। वह यात्रा 51वें अंक तक पहुँच गई है। हमारी कोशिश रही है कि अपने समय के सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और भाषा-साहित्य से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से बात की जाए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कहा कि हम जिस पत्रकारिता को जी रहे हैं, उसे गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे पत्रकारों ने सींचा है। साहित्यिक पत्रकारिता एवं साहित्यकार आज मुख्यधारा की पत्रकारिता को समृद्ध करने में अपना योगदान दे सकते हैं। डॉ. द्विवेदी ने कहा कि भारत में पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास रहा है। जब भी देश का प्रश्न आता है, पत्रकारिता अपने सभी प्रकार के हित छोड़कर देशहित में सामने आती है। इससे पूर्व वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज ने श्री कृषक के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वे विचारों की ऐसी खेती करते हैं, जिसकी फसल अलाव के रूप में सामने आती है, जो समाज का बौद्धिक पोषण करती है। उन्होंने हम देखते हैं कि आज साहित्यकारों के अनेक चश्मे हैं। किंतु, एक चश्मा ऐसा भी होना चाहिए जो वंचित समाज की पीड़ा को देख सके। मतभेद कभी भी मनभेद में परिवर्तित नहीं होने चाहिए। आज हम देखते हैं कि मतभेद न केवल मनभेद में बदले हैं, बल्कि हिंसक भी हो गए हैं। श्री पंकज ने कहा कि साहित्यिक पत्रकारिता के संपादकों को समाज को बेहतर बनाने के प्रयास करने चाहिए। इस अवसर पर कवि एवं पत्रकार डॉ. सुधीर सक्सेना ने कहा कि आज बड़े समाचार-पत्रों में साहित्य के लिए स्थान सिकुड़ता जा रहा है। जबकि एक समय में समाचार-पत्र साहित्य की नर्सरी हुआ करते थे। उन्होंने इस पुरस्कार के संबंध में कहा कि मीडिया विमर्श का यह सम्मान साहित्यिक पत्रकारिता के क्षेत्र में स्थापित हो चुका है। दस वर्षों में कभी भी पुरस्कार को लेकर कोई विवाद की स्थिति नहीं बनी। मीडिया विमर्श के चयन मण्डल ने सदैव ही श्रेष्ठता का चयन किया है। कार्यक्रम की शुरुआत में स्वागत भाषण एवं पुरस्कार की पृष्ठभूमि मीडिया विमर्श के कार्यकारी संपादक प्रो. संजय द्विवेदी ने रखी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुभद्रा राठौर ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सौरभ मालवीय ने किया। इस अवसर पर शहर के गणमान्य नागरिक, देशभर से आए पत्रकार एवं संचार के क्षेत्र में कार्यरत लोग उपस्थित रहे। पुस्तकों का विमोचन : इस अवसर पर दो पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। युवा पत्रकार केशव पटेल की पुस्तक 'न्यू मीडिया : न्यू फ्रंटियर्स ऑफ कम्युनिकेशन' और युवा पत्रकार हेमंत पाणिग्रह की पुस्तक 'मोदी युग : एक मूल्यांकन'। मोदी युग : एक मूल्यांकन प्रो. संजय द्विवेदी की पुस्तक 'मोदी युग' की समीक्षाओं का संकलन है।
दसवाँ बृजलाल द्विवेदी सम्मान आज
3 February 2018
भोपाल, 03 फरवरी, 2018। हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता का प्रतिष्ठित सम्मान 'पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान' रविवार को सुबह 11 बजे 'अलाव' (दिल्ली) के संपादक रामकुमार कृषक को दिया जाएगा। सम्मान समारोह का आयोजन गांधी भवन में किया जाएगा। मीडिया विमर्श की ओर से दिए जाने वाले इस सम्मान का यह दसवाँ वर्ष है। पिछले वर्ष यह सम्मान 'अक्षरा' (भोपाल) के संपादक कैलाशचंद्र पंत को दिया गया था। मीडिया विमर्श के कार्यकारी संपादक संजय द्विवेदी ने बताया कि आयोजन के मुख्यअतिथि वरिष्ठ पत्रकार डॉ. हिमांशु द्विवेदी होंगे और अध्यक्षता माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला करेंगे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रख्यात समालोचक डॉ. विजय बहादुर सिंह होंगे। साथ ही डॉ. सुधीर सक्सेना (संपादक : दुनिया इन दिनों) तथा गिरीश पंकज कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि होंगे। उन्होंने बताया कि रामकुमार कृषक साहित्यिक पत्रकारिता के एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर होने के साथ-साथ देश के जाने-माने संस्कृतिकर्मी, कवि एवं लेखक हैं। 1989 से वे लोकोन्मुख साहित्य चेतना पर केंद्रित महत्वपूर्ण पत्रिका 'अलाव' का संपादन कर रहे हैं। गजल और गीत विधाओं में विशेष योगदान के साथ-साथ कहानी, संस्मरण, साक्षात्कार और आलोचना आदि गद्य विधाओं में भी उल्लेखनीय स्थान। सात कविता संग्रहों के अलावा विविध विधाओं में एक दर्जन से अधिक किताबें प्रकाशित।1978 से 1992 तक राजकमल प्रकाशन में संपादक और संपादकीय प्रमुख रहे। श्री द्विवेदी ने बताया कि त्रैमासिक पत्रिका 'मीडिया विमर्श' द्वारा प्रारंभ किए गए इस अखिल भारतीय सम्मान के अंतर्गत साहित्यिक पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले संपादक को ग्यारह हजार रुपये, शाल, श्रीफल, प्रतीक चिन्ह और सम्मान पत्र से अलंकृत किया जाता है।
मीडिया विमर्श के आयोजन में सम्मानित होगें ‘अलाव’ के संपादक रामकुमार कृषक
30 January 2018
भोपाल, 30 जनवरी, 2018। हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता को सम्मानित किए जाने के लिए दिया जाने वाला पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान इस वर्ष ‘अलाव’ (दिल्ली) के संपादक श्री रामकुमार कृषक को दिया जाएगा। सम्मान कार्यक्रम आगामी 4, फरवरी, 2018 को गांधी भवन, भोपाल में दिन में 11 बजे आयोजित किया गया है। मीडिया विमर्श पत्रिका के कार्यकारी संपादक संजय द्विवेदी ने बताया कि आयोजन के मुख्यअतिथि वरिष्ठ पत्रकार डा. हिमांशु द्विवेदी होंगें तथा अध्यक्षता माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला करेंगे। कार्यक्रम के मुख्यवक्ता प्रख्यात समालोचक डा. विजय बहादुर सिंह रहेंगे। साथ ही डा. सुधीर सक्सेना(संपादकः दुनिया इन दिनों) तथा श्री गिरीश पंकज कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि होगें। श्री रामकुमार कृषक साहित्यिक पत्रकारिता के एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर होने के साथ-साथ देश के जाने-माने संस्कृतिकर्मी,कवि एवं लेखक हैं। 1989 से वे लोकोन्मुख साहित्य चेतना पर केंद्रित महत्वपूर्ण पत्रिका ‘अलाव’ का संपादन कर रहे हैं।पुरस्कार के निर्णायक मंडल में सर्वश्री विश्वनाथ सचदेव, रमेश नैयर, डा. सच्चिदानंद जोशी शामिल हैं। इसके पूर्व यह सम्मान वीणा(इंदौर) के संपादक स्व. श्यामसुंदर व्यास, दस्तावेज(गोरखपुर) के संपादक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, कथादेश (दिल्ली) के संपादक हरिनारायण, अक्सर (जयपुर) के संपादक डा. हेतु भारद्वाज, सद्भावना दर्पण (रायपुर) के संपादक गिरीश पंकज, व्यंग्य यात्रा (दिल्ली) के संपादक डा. प्रेम जनमेजय,कला समय के संपादक विनय उपाध्याय (भोपाल) संवेद के संपादक किशन कालजयी(दिल्ली) और अक्षरा(भोपाल) के संपादक कैलाशचंद्र पंत को दिया जा चुका है। त्रैमासिक पत्रिका ‘मीडिया विमर्श’ द्वारा प्रारंभ किए गए इस अखिलभारतीय सम्मान के तहत साहित्यिक पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले संपादक को ग्यारह हजार रूपए, शाल, श्रीफल, प्रतीकचिन्ह और सम्मान पत्र से अलंकृत किया जाता है। कौन हैं रामकुमार कृषकः 1 अक्टूबर, 1943 को अमरोहा (मुरादाबाद-उप्र) के एक गांव गुलड़िया में जन्मे रामकुमार कृषक ने मेरठ विश्वविद्यालय से हिंदी में एमए की उपाधि और प्रयाग विवि से साहित्यरत्न की उपाधि प्राप्त की। दिल्ली में लंबे समय पत्रकारिता की। अध्यापन और लेखन करते हुए आठवें दशक के प्रमुख प्रगतिशील-जनवादी कवियों में शुमार हुए। गजल और गीत विधाओं में विशेष योगदान के साथ-साथ कहानी, संस्मरण, साक्षात्कार और आलोचना आदि गद्य विधाओं में भी उल्लेखनीय स्थान। सात कविता संग्रहों के अलावा विविध विधाओं में एक दर्जन से अधिक किताबें प्रकाशित।1978 से 1992 तक राजकमल प्रकाशन में संपादक और संपादकीय प्रमुख रहे। 1989 से अलाव पत्रिका के संपादक।
मध्यप्रदेश की सुख-समृद्धि का आधार है नर्मदा नदी : मुख्यमंत्री श्री चौहान
24 January 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि नर्मदा नदी मध्यप्रदेश की सुख-समृद्धि का आधार है। नर्मदा जल भारतीय संस्कृति में आस्था, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि माँ नर्मदा की गोद में मल-जल की एक बूँद भी नहीं जाने दी जायेगी। इसके लिये नर्मदा नदी से लगे शहरों में सीवरेज वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाये जा रहे हैं। ये ट्रीटमेंट प्लांट आने वाले डेढ़ साल में बनकर तैयार हो जायेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज नरसिंहपुर जिले के बरमानकलां में नर्मदा जयंती कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने बरमानकलां में अंत्योदय मेले में 11 हजार 263 हितग्राहियों को 96.28 करोड़ के हित-लाभ-पत्र वितरित किये। श्री चौहान ने 25 करोड़ की लागत के 10 निर्माण एवं विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण भी किया। 2 जुलाई को नर्मदा कछार में 8 करोड़ पौधे लगेंगे मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नर्मदा नदी किसी ग्लेशियर से नहीं निकलती है। नर्मदा के दोनों तटों पर लगे पेड़ वर्षा का जल सोखते हैं और बूँद-बूँद करके नर्मदा में छोड़ते हैं। इससे ही नर्मदा नदी में जल की आपूर्ति होती है। उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी के संरक्षण के लिये दोनों तटों पर पेड़-पौधे लगाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष 2 जुलाई को नर्मदा केचमेंट क्षेत्र में 8 करोड़ पौधे लगाये जायेंगे। पिछले वर्ष नर्मदा के तटों पर 6 करोड़ 63 लाख पौधे लगाये गये थे। मुख्यमंत्री द्वारा विकास कार्यों की घोषणाएँ मुख्यमंत्री ने बरमानकलां में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, रैन-बसेरा भवन, रानी कोठी के जीर्णोद्धार, राजमार्ग-26 से बरमानकलां में नर्मदा तट तक के पहुँच मार्ग को चौड़ा करने और घाटों का सौंदर्यीकरण कराने की भी घोषणा की। कार्यक्रम में बताया गया कि जिले में 71 नर्मदा सेवा समितियाँ गठित की गई हैं। नदी के 32 प्रमुख घाटों पर नियमित नर्मदा आरती और साफ-सफाई की योजना तैयार की गयी है। नर्मदा के 21 घाटों के सौंदर्यीकरण की करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये की परियोजना मंजूरी के लिये राज्य सरकार को भेजी गई है। इस अवसर पर लोक निर्माण, विधि-विधायी कार्य और नरसिंहपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री रामपाल सिंह, सांसद श्री राव उदय प्रताप सिंह, विधायक श्री जालम सिंह पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संदीप पटेल, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र फौजदार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती शीलादेवी ठाकुर, अन्य जन-प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे
जयपुर में मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी सर्वश्रेष्ठ घोषित 24 January 2018
राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद नई दिल्ली और राजस्थान उर्दू अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में जयपुर में हुई तीन-दिवसीय कॉन्फ्रेंस में देशभर की 14 अकादमियों में से मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी को सर्वाधिक सक्रिय और सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया है। राजस्थान उर्दू अकादमी के सचिव श्री मोअज़्ज़म अली ने अपनी तक़रीर में कहा कि मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी का नाम फ़ज़ल ताबिश के ज़माने में उभरा था। उसके बाद वहाँ सन्नाटा रहा, लेकिन आज इस अकादमी ने फ़ज़ल ताबिश के कामों को आगे बढ़ाने के साथ ही तालीम, ज़बान और अदब तीनों से मुताल्लिक अपनी सरगर्मियों के हवाले से अद्भुत प्रयास किये हैं। कॉन्फ्रेंस में अकादमी के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सचिव मौजूद थे। मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की सचिव डॉ. नुसरत मेहदी ने अकादमी की गतिविधियों, कार्यक्रमों और आयोजनों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश में उर्दू अकादमी की गतिविधियों को बढ़ाने, भव्यता प्रदान करने एवं नई योजनाएँ लागू करवाने का पूरा श्रेय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को जाता है। कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद और देश की विभिन्न उर्दू अकादमियों के मध्य बेहतर तालमेल के साथ उर्दू भाषा, साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में कारगर कदम उठाने पर बल दिया गया।
आदि शंकराचार्य के एकात्मवाद में है दुनिया की समस्याओं का हल
22 January 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी दुनिया की सारी समस्याओं का हल आदि शंकराचार्य के एकात्मवाद में है। विश्व शांति का मार्ग युद्ध में नहीं है बल्कि आदि शंकर के अद्ववैत दर्शन में है। उन्होंने कहा कि अद्ववैत दर्शन के प्रसार के लिये ओंकारेश्वर में आदि शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास स्थापित किया जायेगा। न्यास के माध्यम से नैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुन-र्जागरण का कार्य किया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज आदि शंकराचार्य की दीक्षा-स्थली ओंकारेश्वर में एकात्म यात्रा की पूर्णता पर आयोजित एकात्म पर्व को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य श्री अमित शाह का वीडियो संदेश दिखाया गया। चार स्थान से शुरू हुई यात्रा यह एकात्म यात्रा सामाजिक समरसता और एकात्मता का संदेश देने के लिये आदि शंकराचार्य से जुड़े चार धार्मिक स्थानों से 19 दिसम्बर को प्रारंभ हुई थी। इन स्थानों में अमरकंटक, उज्जैन, रीवा का पचमठा एवं ओंकारेश्वर शामिल हैं। यात्रा के दौरान जगह-जगह जनसंवाद किये गये। यात्रा को भारी जन-समर्थन मिला। यात्रा की पूर्णता पर ओंकारेश्वर में अद्वैत वेदान्त दर्शन के विश्व स्तर पर प्रसार के लिये आचार्य शंकर संग्रहालय और अंतर्राष्ट्रीय वेदान्त संस्थान तथा ओंकार पर्वत पर आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊँची विशाल धातु प्रतिमा स्थापना के लिये भूमि-पूजन किया गया। इस मौके पर एकात्मता का संकल्प भी लिया गया। सब में है एक ही चेतना - मुख्यमंत्री श्री चौहान मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि शंकराचार्य ने पूरे भारत को सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बाँधा तथा समूचे विश्व को एकात्मता का संदेश दिया। केवल मनुष्य ही नहीं अपितु समस्त जड़, चेतन में आत्मिक एकता है। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर में वेदांत संस्थान बनाया जाएगा जो विश्व को अद्वैत वेदांत दर्शन की जानकारी देगा। ओंकारेश्वर में ब्रह्मा पुरी, विष्णु पुरी एवं शिव पुरी को आकाशीय फुटओवर ब्रिज से जोड़ा जाएगा। आदि शंकर संस्थान में आधुनिक तकनीक से माया और ब्रह्म के शंकर के संदेश को दिखाया जाएगा। साथ ही शंकर के जीवन-दर्शन एवं जीवन चरित को ऑडियो-वीडियो के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि ओंकारेश्वर में स्थापित किया जा रहा आदि शंकराचार्य सांस्कृतिक एकता न्यास आध्‍यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक पुनर्जागरण का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर की यह पवित्र भूमि सांस्कृतिक एवं आत्मिक पुनर्जागरण का केंद्र बनेगी। आदि शंकराचार्य की गुफा का जीर्णोद्धार किया जायेगा, आदि शंकर स्मृति केन्द्र बनाया जायेगा। उन्होंने बताया कि एकात्म यात्रा में 23 हज़ार ग्राम-पंचायतों से 30 हज़ार धातु कलश आए हैं, जो आदि शंकराचार्य की यहाँ स्थापित होने वाली प्रतिमा का आधार बनेंगे। राष्ट्रीय सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी ने कहा कि केरल से निकलकर आदि शंकर ने हम सबको यह संदेश दिया कि हम सब एक हैं। आज आदि शंकर से प्रेरणा प्राप्त कर हम यह संदेश सारे विश्व को दें। भारत की शक्ति संरक्षक की है, विध्वंसक की नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान ने एकात्म यात्रा आयोजित कर अद्भुत एवं प्रशंसनीय कार्य किया है। श्री अमित शाह का वीडियो संदेश कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह का वीडियो संदेश दिखाया गया। इसमें उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नर्मदा यात्रा एवं एकात्म यात्रा के माध्यम से सांस्कृतिक एकता का उत्कृष्ट कार्य किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को हृदय से साधुवाद दिया और कहा कि आदिशंकर के योगदान को ओंकारेश्वर में मूर्त रूप देने का श्री चौहान का यह उत्कृष्ट प्रयास है। यहां पर आदि शंकराचार्य को गुरु मिले, यह स्थान जनता की अपार श्रद्धा एवं आस्था का केंद्र है। पूज्य स्वामी श्री अवधेशानंदगिरि जी महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी श्री अवधेशानंदगिरि ने कहा कि आदि शंकराचार्य के संदेश को प्रसारित करने वाली यह महती यात्रा है। मुख्यमंत्री को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि नर्मदा के तट पर एक और कुंभ का आयोजन हुआ। उन्होंने शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ओंकारेश्वर पाटलीपुत्र और तक्षशिला जैसा विश्व प्रसिद्ध केन्द्र बने। स्वामी सत्यमित्रानंदजी भारत माता मंदिर के स्वामी सत्यमित्रानंदजी ने कहा कि सारे संसार में एक ही तत्व व्याप्त है। आँखें अलग-अलग हैं पर देखने वाला एक है। यह अद्वैतवाद का संदेश है। मुख्यमंत्री ने आदि शंकराचार्य सांस्कृतिक एकता न्यास बनाकर पूरे देश को बाँधने वाली योजना बनाई है, यह अति विशिष्ट एवं दिव्य है। वे इसके लिए बधाई के पात्र है। श्री सत्यमित्रानंदजी ने न्यास के लिए 5 लाख की राशि देने की घोषणा की। सदगुरू श्री जग्गी वासुदेव ईशा फाउण्डेशन के संस्थापक श्री जग्गी वासुदेव ने कहा कि भारत के हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश को आध्यात्मिक केन्द्र बनाने का पावन कार्य किया जा रहा है। ओंकारेश्वर में स्थापित किये जाने वाला वेदांत केन्द्र ज्ञान का भंडार होगा। यहाँ से पूरे विश्व को ज्ञान प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य आने वाली पीढ़ी को सर्वाधिक प्रभावित करेंगे, क्योंकि उनमें बौद्धिक विलक्षणता एवं तार्किकता थी। उनका ज्ञान बुद्धि की कसौटी पर खरा उतरता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान गुरू के चरणों में बैठने से मिलता है। हमारी संस्कृति विनम्रता की है। हमने नदी, पहाड़ एवं प्रकृति के अवयवों से ज्ञान प्राप्त किया। हमें हमारी इसी संस्कृति की पुन-र्स्थापना करनी है। इसी तरह अन्य संत और मनीषियों ने भी अपने विचार व्यक्त किये। भव्य समारोह में पधारे धर्माचार्य और अतिथिगण इस अवसर पर चिन्मय मिशन के प्रमुख पूज्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने मुख्यमंत्री द्वारा घोषित न्यास की स्थापना के लिये मिशन की ओर से 25 लाख रुपये की राशि देने की घोषणा की। महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी परमानंद गिरि, पूज्य स्वामी परमात्मानंद सरस्वती, पूज्य स्वामी संवित सोमगिरि और पूज्‍य स्वामी अखिलेश्‍वरानंद, रामकृष्ण मिशन के स्वामी सुप्रतिप्तानंद, चिन्मय मिशन के स्वामी प्रबोधानंद, प्रजापति ब्रह्माकुमारी की अवधेश दीदी, कबीर पंथ के प्रहलाद टिपानिया, आर्ट ऑफ लिविंग के भव्यतेज, प्रसिद्ध चित्रकार वासुदेव कामथ, प्रसिद्ध मूर्तिकार श्री चरणजीत यादव, विष्णु फाउंडेशन चेन्नई के स्वामी हरिप्रसाद, माता अमृतानंदन, स्वामी प्रजनानामृतानंद, श्रंगेरी पीठ से श्री गौरीशंकर, स्वरूपानंद आश्रम केरल के स्वामी शेवर गिरि, धर्माचार्य डॉ डेविड फाईले दिल्ली विभिन्न धर्मों के धर्मगुरू, संत-महात्मा, मनीषी तथा भारतीय जनता पाटी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद श्री नंदकुमार सिंह चौहान, ऊर्जा मंत्री श्री पारसचंद्र जैन, संस्कृति राज्य मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा, मुख्यमंत्री श्री चौहान की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह, जन-प्रतिनिधि और देशभर से आये समाजसेवी तथा विभिन्न स्वैच्छिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में आम जनता मौजूद थी। वैदिक मंत्रों एवं शंखनाद से हुआ शुभारम्भ मुख्यमंत्री श्री चौहान ने धर्माचार्यों और अन्य अतिथियों का शॉल-श्रीफल से अभिनंदन किया। पूर्व में श्री चौहान आदि शंकराचार्य की चरण पादुकाएँ और श्रीमती साधना सिंह चौहान द्वादश कलश सिर पर लेकर मंच पर पहुँचे। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वस्ति-वाचन और आदि शंकराचार्य के श्लोकों के वाचन से हुआ। कार्यक्रम स्थल पर मुख्य मंच के आसपास चारों मठों और चार वेदों ऋग्वेद, सामवेद, अथर्ववेद एवं यजुर्वेद के दर्शन पर आधारित मंचों का निर्माण किया गया था, जो भारतीय संस्कृति का संदेश दे रहे थे। मंच पर आदि गुरू शंकराचार्य की प्रतिमा की प्रतिकृति का अनावरण भी किया गया। कलाकारों ने दिया सांस्कृतिक एकता का संदेश प्रदेश की जीवन-रेखा नर्मदा नदी के पावन तट पर आयोजित प्राणी मात्र में एकात्मता और सांस्कृतिक एकता का संदेश देते इस कार्यक्रम में मणिपुर और उड़ीसा के कलाकारों द्वारा शंखघोष, पश्चिम बंगाल के कलाकारों द्वारा पुरूलिया छाऊ नृत्य तथा असम के बिहू नृत्य खूबसूरती के साथ प्रस्तुत किये गये। भोपाल के ध्रुवा बैंड द्वारा सांस्कृतिक चेतना और भावनात्मक एकता की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। इस दौरान देशभर से आये कलाकारों ने गीत-संगीत एवं नृत्य के माध्यम से सांस्कृतिक एकता के संदेश को रेखांकित किया।
पुरातत्व संग्रहालयों के उन्नयन के लिये 877.51 लाख रूपये स्वीकृत
21 January 2018
संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय के अधीन संग्रहालय और स्थानीय संग्रहालयों में उन्नयन और विकास कार्य करवाये जाकर नया स्वरूप दिया गया है। वर्ष 2017-18 में अब तक विदिशा, राजगढ़, मंदसौर, भोपाल, सतना, जबलपुर, शहडोल एवं इंदौर के संग्रहालय में उन्नयन एवं विकास कार्य कराये जा चुके हैं। पुरातत्व आयुक्त श्री अनुपम राजन ने यह जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार द्वारा केन्द्रीय सहायता के तहत स्थानीय संग्रहालयों के उन्नयन एवं विकास कार्य के लिये 877.51 लाख रूपये की मंजूरी दी गई है। स्वीकृत राशि में से राज्य संग्रहालय भोपाल, गुजरी महल संग्रहालय ग्वालियर एवं नवीन संग्रहालय सिरोंज जिला विदिशा में विकास कार्य कराये जायेंगे। श्री राजन ने पुरातत्व विभाग की वित्तीय वर्ष 2017-18 की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि रायसेन जिले की ग्राम पंचायत हर्रई के ग्राम ढावला में शिव मंदिर के मलवा सफाई कार्य में 4 मंदिर के अवशेष प्रकाश में आये हैं। ये अवशेष 11वीं-12वीं शती ई. के इस क्षेत्र के परमार कालीन शिल्पकला के प्रमाण दर्शाते हैं। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष में अब तक खण्डवा, धार, खरगोन, उज्जैन, बुरहानपुर एवं सीहोर जिले की 12 तहसीलों के 751 ग्रामों का सर्वेक्षण और मुरैना, बैतूल एवं सीहोर जिले की 14 तहसीलों में पूर्ण रूप से सर्वेक्षित कार्य कराये जा चुके हैं। भिण्ड जिले के गोहद किला में करवाये गये अनुरक्षण कार्य के लिये यूनिस्को के बैंकाक स्थित कार्यालय द्वारा 'यूनेस्को एशियन पेसिफिक हैरिटेज अवार्ड-2107' दिये जाने की घोषणा की गई है। उल्लेखनीय है कि विभिन्न देशों के 43 प्रोजेक्टस में से अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण विशेषज्ञों की समिति द्वारा भारत के 7 प्रोजेक्ट्स का चयन अवार्ड के किया गया है। इसमें गोहद के किला को यह गौरव हासिल हुआ है।
ओंकारेश्वर में सांस्कृतिक न्यास एवं वेदांत संस्था की स्थापना की जाएगी : मुख्यमंत्री श्री चौहान
18 January 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज होशंगाबाद जिले के बाबई में एकात्म यात्रा में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में कहा है कि दुनिया से आतंकवाद एवं नस्लवाद की समाप्ति आदि गुरू शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत दर्शन से ही संभव है। श्री चौहान ने इस मौके पर ओंकारेश्वर में आदि गुरू शंकराचार्य सांस्कृतिक न्यास एवं वेदांत संस्था की स्थापना कराने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने जनसंवाद में कहा कि परमात्मा को प्राप्त करने के तीन रास्ते हैं। पहला ज्ञान, दूसरा भक्ति और तीसरा कर्म। उन्होंने कहा कि अधिकांश व्यक्ति कर्म के मार्ग पर चलते हैं। कर्म वह है जब एक शिक्षक बच्चों को सही तरीके से पढ़ाये, कर्म वह है जब एक डॉक्टर मरीज का उपचार सही तरीके से करे, कर्म वह है जब एक इंजीनियर पुल का निर्माण बेहतर तरीके से करे और कर्म वह है जब जनप्रतिनिधि शुद्ध मन से जनता की सेवा करे। डॉ. श्रीकृष्ण गोपाल ने जनसंवाद कार्यक्रम में कहा कि आदि गुरू शंकराचार्य का जन्म तो केरल में हुआ, लेकिन अध्ययन करने के लिए वे नर्मदा तट के किनारे आए थे। केदार नाथ से केरल तक भारत एक है। इस विश्वास के आधार पर उन्होंने दक्षिण के मठ में उत्तर के एवं उत्तर के मठ में दक्षिण के पुजारियों की नियुक्ति की। डॉ. गोपाल ने कहा कि आदि गुरू का दर्शन आज भी श्रेष्ठ है। उन्होंने कहा कि आदि गुरू ने नर्मदा नदी के तट पर दीक्षा प्राप्त की। इससे मध्य प्रदेश की धरती धन्य हुई। महामण्डलेश्वर अखिलेश्वरानंद ने कहा कि पचमठा से शुरू हुई एकात्म यात्रा के प्रति आम जनता में आदर का भाव है। एकात्म यात्रा में शामिल हुए मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री श्री चौहान बाबई में एकात्म यात्रा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री आदि गुरू शंकराचार्य की सांकेतिक चरण पादुका को सिर पर रखकर पैदल जनसंवाद स्थल तक पहुंचे। श्री चौहान ने इस अवसर पर स्कूलों में हुई चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। जनसंवाद कार्यक्रम में धुव्रा बैण्ड के 9 सदस्यीय दल ने आदि गुरू शंकराचार्य विरजित संस्कृत श्लोकों एवं स्त्रोतों की शानदार प्रस्तुति दी। धुव्रा बैण्ड ने म.प्र. गान की भी संस्कृत में प्रस्तुति दी। उल्लेखनीय है कि धुव्रा बैण्ड विश्व का एक मात्र ऐसा संगीत बैण्ड है जो संस्कृत भाषा में अपनी प्रस्तुति देती है। धुव्रा बैण्ड की इस अनोखी एवं शानदार प्रस्तुति नेसभी लोगों का मन मोह लिया। धुव्रा बैण्ड पचमठा से एकात्म यात्रा में शामिल हुआ है और 22 जनवरी को ओंकारेश्वर में भी प्रस्तुति देगा। एकात्म यात्रा के जनसंवाद कार्यक्रम में जिले के प्रमुख विभागों ने जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रदर्शनी भी लगाई। जनसंवाद कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से होशंगाबाद जिले के अटल बाल पालकों ने भेट की और जिले को कुपोषण मुक्त करने हेतु किए जा रहे प्रयासों एवं अनुभव से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। जनसंवाद कार्यक्रम में म.प्र. विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा, यात्रा के समन्वयक श्री शिव चौबे, सांसद श्री उदय प्रताप सिंह, विधायक श्री सरताज सिंह, श्री विजयपाल सिंह और श्री ठाकुर दास नागवंशी, राज्य अंत्योदय समिति के सदस्य श्री हरिशंकर जयसवाल, नगरपालिका होशंगाबाद के अध्यक्ष श्री अखिलेश खंडेलवाल, आचार्य उमेश, आचार्य बलराम, साध्वी संयम भारती, जनप्रतिनिधिगण, ग्रामीणजन एवं प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधिगण मौजूद थे।
आदि गुरू श्री शंकराचार्य ज्ञान, भक्ति एवं कर्म के त्रिवेणी संगम : मुख्यमंत्री श्री चौहान
18 January 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने शाजापुर में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में कहा कि एकात्म यात्रा से मध्यप्रदेश की धरती से जगत के कल्याण का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। यह यात्रा हर प्रकार के भेदभाव मिटाकर सामाजिक समरसता का भाव जागृत कर रही है। उन्होंने कहा कि आदि गुरू शंकराचार्य का अद्वैत दर्शन ही समाज से भेदभाव मिटा सकता है। समाज को एकजुट कर सामाजिक समरसता का मूलमंत्र देने वाला भी अद्वैत वाद है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आदि गुरू श्री शंकराचार्य ज्ञान, भक्ति एवं कर्म का त्रिवेणी संगम हैं। मुख्यमंत्री ने जनसंवाद में उपस्थित विशाल जनसमुदाय को एकात्मवाद का संकल्प दिलवाया और एकात्म यात्रा पर आधारित चित्रकला एवं अन्य प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर श्री वी. भागैया ने कहा कि आदि गुरू ने न केवल भारत बल्कि संपूर्ण विश्व को अद्वैत दर्शन दिया है। विश्व-कल्याण, सामाजिक एकता, सामाजिक समरसता के लिए अद्वैत दर्शन एक मात्र उपाय है। संत स्वामी आध्यात्मानंद जी महाराज अहमदाबाद ने आदि गुरू शंकराचार्य के जीवन वृत्त पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर की धरती को पवित्र किया है। स्वामी श्री संवित सोमगिरी जी महाराज बिकानेर ने कहा कि एकात्म यात्रा से देश और प्रदेश में ऐसा वातावरण निर्मित हुआ है कि संपूर्ण देश अब मध्यप्रदेश की ओर देख रहा है। उन्होंने कहा कि एकात्म यात्रा प्रेम, आनंद, सौहार्द एवं आत्मीयता की यात्रा है। प्रारंभ में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने संतगणों का पुष्पहार एवं शाल पहनाकर स्वागत किया। इस मौके पर चैन्नई के समूह द्वारा आदि गुरू शंकराचार्य के जीवन वृत पर आधारित नाटिका का मंचन किया एवं नृत्य नाटिका 'भज गोविन्दम-भज गोविन्दम' प्रस्तुत की। एकात्म यात्रा में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान मुख्यमंत्री श्री चौहान एकात्म यात्रा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ध्वज हाथ में लेकर और मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह ने सिर पर कलश रखकर नगर भ्रमण किया। यात्रा का नगर के गणमान्य नागरिकों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इस मौके पर प्रभारी मंत्री श्री दीपक जोशी, सिंहस्थ समिति के अध्यक्ष श्री माखन सिंह चौहान, सांसद श्री मनोहर ऊँटवाल, श्री वी. भागैया, ऊर्जा विकास निगम के अध्यक्ष श्री विजेन्द्र सिंह सिसोदिया, पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री रायसिंह सेंधव, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड चेयरमेन श्री सुरेश आर्य, यात्रा के प्रदेश सह संयोजक श्री नारायण व्यास, जनअभियान परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री प्रदीप पाण्डेय, विधायकगण, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक अध्यक्ष श्री शिवनारायण पाटीदार, जिला यात्रा प्रभारी श्री गिरीराज भाई मण्डलोई एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। जनसंवाद में स्वामी श्री संवित सोमगिरी जी महाराज बिकानेर, स्वामी भूमानंद जी महाराज जोधपुर, स्वामी नर्मदानंद जी महाराज ओंकारेश्वर, स्वामी आध्यात्मानंद जी महाराज अहमदाबाद एवं संत श्री रघुनाथदास जी, रामदास जी, त्रिलोकदास जी, श्री बालकदास जी, श्री हरिदास जी, श्री गोविन्द दास जी, श्री उमेशनाथ जी, श्री तिलकनाथ भी मौजूद थे
आज से इन्टरनेशनल पाँच दिवसीय स्प्रिचुअल फिल्म फेस्टिबल
18 January 2018
प्रदेश में चल रही एकात्म यात्रा के सांस्कृतिक आयाम के रूप में भोपाल में 5 दिवसीय स्प्रिचुअल फिल्म फेस्टीवल एक साथ तीन सांस्कृतिक स्थल भारत भवन, जनजातीय संग्रहालय एवं राज्य संग्रहालय में आयोजित किया जा रहा है। इसमें विश्व सिनेमा की चुनिंदा आध्यात्म केन्द्रित फिल्में, जिनका सतत रूप से महत्व रहा है, को प्रदर्शित किया जायेगा। प्रमुख सचिव,संस्कृति श्री मनोज श्रीवास्तव ने यह जानकारी देते हुए बताया है कि संस्कृति विभाग द्वारा आईएसएफएफआई कोलकाता के समन्वय से यह आयोजन किया जा रहा है। आदि शंकराचार्य पर केन्द्रित फिल्म के प्रदर्शन से होगा शुभारंभ भोजपुरी साहित्य अकादमी द्वारा समन्वित इस समारोह का शुभारंभ 19 जनवरी को सुबह 11 बजे भारत भवन में प्रख्यात फिल्मकार श्री जी.वी.अय्यर की आदि शंकराचार्य पर केन्द्रित फिल्म के प्रदर्शन से होगा। इसी स्थान पर गौर हरि दास्तान, उप्पिना काकड़ा आदि फिल्म का प्रदर्शन होने के साथ ही ' चेतना जगाता सिनेमा' विषय पर परिचर्चा होगी। राज्य संग्रहालय में इसी दिन दोपहर 2 बजे से फिल्म प्रदर्शन एवं कार्यशाला आयोजित होगी। इसमें फिल्म समीक्षा को लेकर संवाद,मुक्ति भवन, बुद्धा एवं द थिंकिंग बॉडी फिल्मों के प्रदर्शन होंगे। दूसरे दिन भारत भवन में सुबह 10 बजे से कॉफीन मेकर, डॉ. प्रकाश बाबा ऑमटे, रेधा एवं अदामिन्ते माकान अबू फिल्म प्रदर्शन,सिनेमा में आध्यात्म की धूरि, संगीत एवं कला पर चर्चा होगी। जनजातीय संग्रहालय में सुबह 10 बजे से योग कार्यशाला, इन सर्च आफ शंकरा, आउकास्ट दर हाऊस देट केरोल बिल्ट एवं पाथ टू हेप्पीनेस आदि का फिल्म प्रदर्शन होगा। तीसरे दिन 21 जनवरी को भारत भवन में सुबह 11 बजे से यात्रिक, रस-यात्रा, अवेक द लाइफ ऑफ योगानन्द आदि फिल्मों के प्रदर्शन के साथ ही परिचर्चा होगी। इसी दिन सुबह 10 बजे से जनजातीय संग्रहालय में कार्यशाला के अलावा ' बेक्कू द कैट फिल्म का प्रदर्शन होगा। चौथे दिन के समारोह की शुरूआत भारत भवन में सुबह 10 बजे से कठोपनिषद, सौबाला,खोभ आदि फिल्मों के प्रदर्शन के साथ ही कार्यशाला, उद्बोधन एवं संवाद सत्र आयोजित होंगे। इसी दिन जनजातीय संग्रहालय में सुबह 10 बजे से ही फोटोग्राफी कार्यशाला एवं फिल्म बनारस द अनएक्सप्लोर्ड को दिखाया जायेगा। समारोह के आखरी दिन 23 जनवरी को भारत भवन में सुबह 10 बजे से अल्जीरिया ए ह्यूमेनिटेरियन एक्सपीडिशन, स्वामी विवेकानंद, समाधि मया द इल्यूजन एवं धुन में ध्यान फिल्मों का प्रदर्शन होगा। फेस्टिबल का समापन इसी दिन भारत भवन में शाम 6 बजे से होगा। प्रमुख सचिव ने बताया है कि इन्टरनेशनल स्प्रिचुअल फिल्म फेस्टिबल में देश- दुनिया के प्रतिष्ठित फिल्मकलाकार, सिने-विश्लेषकों, मीडिया एवं आलोचकों की भागीदारी हो रही है । । इसमें अनंत नारायण महादेवन, अजीत राय, रत्नोत्तमा सेनगुप्ता, डी.आर.कार्तिकेय, राजीव मेहरोत्रा, सोमा घोष, अखिलेश, मानसी महाजन, बिन्नी सरीन,यू.राधाकृष्णन, टी.एस. नागभरणा एवं चन्द्रशेखर तिवारी विभिन्न संवाद, परिचर्चा सत्रों में विचार प्रसतुत करेंगे। समारोह को फिल्मकार सुश्री सुमना मुखर्जी क्यूरेट करेंगी।
भोपाल में 26 से 30 जनवरी तक लोकरंग राष्ट्रीय समारोह
17 January 2018
संस्कृति विभाग द्वारा प्रति वर्ष गणतंत्र दिवस को लोकपर्व के रूप में राष्ट्रीय समारोह 'लोकरंग'' का प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन किया जाता है। तीन दशक की इस कला यात्रा में लोकरंग ने अपनी जनोन्मुखी पहचान और सर्वव्यापी प्रतिष्ठा बनाई है। इस वर्ष भी यह समारोह 26 से 30 जनवरी तक बीएचईएल दशहरा मैदान भोपाल में आयोजित होगा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1986 से प्रारंभ हुए इस आयोजन का यह 33वाँ वर्ष है। प्रमुख सचिव, संस्कृति श्री मनोज श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया है कि परम्परा के बहुवर्णी उत्सव लोकरंग को प्रति वर्ष किसी एक विषय पर एकाग्र आयोजन परिकल्पित किया जाता है। इस वर्ष के समारोह का केन्द्रीय विषय 'कलाओं के नाग'' (सर्प) रखा गया है। समारोह में इस वर्ष सुषिर वाद्यों पर वृहद प्रदर्शनी, चित्र शैलियों में नाग अंकन पर एकाग्र प्रदर्शनी, विश्व के अन्य देशों के हिन्दू मंदिर और स्थापत्य पर एकाग्र प्रदर्शनी, शक्ति के 108 स्वरूपों की पहली चित्र प्रदर्शनी का संयोजन किया जायेगा। लोकरंग के इस भव्य आयोजन में समवेत नृत्य-नाट्य प्रस्तुति 'पिथौरा एक अनोखी भीली जलकथा', जनजातीय और लोक के प्रदर्शनकारी नृत्य रूपों का प्रदर्शन, शिल्प मेला, बच्चों के लिये गतिविधियाँ, व्यंजन मेला मुख्य आकर्षण होंगे। लोकरंग के अंतिम दिन राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की पुण्य-तिथि के अवसर पर भक्ति संगीत संध्या भी होगी।
आदि गुरू शंकराचार्य के प्रयासों से भारतीय संस्कृति आज भी अक्षुण्ण है
11 January 2018
देश में एक नहीं अनेक मत-मतान्तर दिखाई देते हैं। ऐसे में आदि गुरू शंकराचार्य द्वारा बताए गए अद्वैतवाद दर्शन में विश्व की समस्याओं का समाधन निहित है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने यह बात आज विदिशा में एकात्म यात्रा में जन-संवाद को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि विश्व में आंतकवाद जैसी प्रवृत्तियों को समाप्त करने और शांति स्थापित करने की दिशा में शंकराचार्य का एकात्म दर्शन सही दिशा दे सकता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि शंकराचार्य द्वारा समाज सुधार के लिए दो हजार वर्ष पूर्व किये गये प्रयास अकल्पनीय हैं। उन्होंने देश को पूर्व-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण से जोड़ने का जो कार्य किया, वह अद्वितीय है। आज भी उत्तराखण्ड में स्थित बद्रीनाथ मंदिर में दक्षिण भारत के नम्बूदिरी ब्राह्मण पुजारी हैं। यह देश को एक करने के लिए शंकराचार्य द्वारा देश की संस्कृति को जोड़ने का अभूतपूर्व प्रयास है। उन्होंने देश को ''जियो और जीने दो'' का दर्शन दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ''वसुधैव कुटुम्बकम'' के माध्यम से सारी दुनिया को एक ही परिवार मानना और सभी प्राणियों को एक समान दर्जा देना शंकराचार्य की विशेषता थी। उन्होंने विश्व के कल्याण का आव्हान किया और कहा कि सभी में एक ही चेतना है। छोटे-बड़े के बीच कोई भेद नहीं है। शंकराचार्य के प्रयासों से भारतीय संस्कृति आज भी अक्षुण्ण है। हमें इस संस्कृति का संवर्धन कर इसकी रक्षा करनी चाहिए। शंकराचार्य भगवान शंकर के अवतार थे, जिन्होंने मात्र 32 वर्ष की आयु में संसार त्याग दिया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस अवसर पर संकल्प लिया कि वे सभी त्यौहार समाज के सभी वर्गो के साथ मनाकर एकात्म यात्रा के मूल स्वरूप को सार्थक करेंगे। जीव, जगत और जगदीश मूलभूत एकात्म भाव को आत्मसात कर स्वयं को और समाज को उन्नत करने का कार्य करेंगे। सरसंघ संचालक श्री मोहन भागवत ने कहा कि हमारे देश के सभी पंथ-संप्रदाय एकता और भाईचारे का संदेश देते हैं। हम प्रवचनों के माध्यम से दी गई सीख को अपने आचरण में उतारें। ऊँच-नीच से परे रहकर समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए काम करें। ऐसा करने से ही शंकराचार्य के वेदांत दर्शन को हम आत्मसात कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अद्वैत वेदांत की भावना को मिलकर आगे बढ़ाएं। अद्वैत वेदांत ही सम्पूर्ण विश्व को मैत्री का संदेश देता है। स्वामी अखिलेश्वरानंद ने कहा कि यात्रा के दौरान सामाजिक समरसता का अभूतपूर्व स्वरूप देखने को मिला। स्वामी अखिलेश्वरानंद ने प्रदेश सरकार द्वारा नर्मदा के प्रवाह को अविरल रखने के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि नदियों को ''सदा नीरा'' रखने के लिए समुचित प्रयास जरूरी हैं। इसके पूर्व सरसंघ चालक श्री मोहन भागवत, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, उद्यानिकी राज्यमंत्री श्री सूर्यप्रकाश मीणा तथा साधु-संतों ने प्रतीक स्वरूप लाई गई शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन किया। कार्यक्रम में विदिशा जनपद पंचायत की सभी ग्राम पंचायतों और नगरपालिका के सभी वार्डों से एकात्म यात्रा के लिए धातु कलश एकत्र कर जन-संवाद कार्यक्रम स्थल पर लाए गए, यहाँ कलशों का पूजन किया गया। धु्रवा बैंड द्वारा संस्कृत भाषा में अपनी आकर्षक प्रस्तुतियां दी गई। पुलिस परेड ग्राउण्ड में हुए कार्यक्रम में विधायक द्वय श्री कल्याण सिंह ठाकुर, श्री वीर सिंह पवार, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री तोरण सिंह दांगी, एकात्म यात्रा के जिला समन्वयक श्री श्यामसुन्दर शर्मा, नगरपालिका अध्यक्ष श्री मुकेश टण्डन समेत अन्य जन-प्रतिनिधि तथा प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा यात्रा में शामिल हुए सहभागी तथा बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।
एकात्म यात्रा को अदभुत जनसमर्थन : मुख्यमंत्री श्री चौहान
11 January 2018
एकात्म यात्रा आगामी 22 जनवरी को ओंकारेश्वर पहुँचेगी। यात्रा के समापन कार्यक्रम में आदि गुरू शंकराचार्य की भव्य प्रतिमा, शंकर संग्रहालय और वेदांत संस्थान स्थल का भूमि पूजन किया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहाँ एकात्म यात्रा के संबंध में समीक्षा बैठक ली। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बैठक में कहा कि एकात्म यात्रा को अदभुत जनसमर्थन मिल रहा है। इसमें समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हो रहे हैं। अद्वैत दर्शन में वर्तमान की सभी समस्याओं का समाधान है। यात्रा के समापन के अवसर पर आयोजित भव्य और गरिमामय समारोह के माध्यम से दुनिया को अद्वैत दर्शन का संदेश दिया जायेगा। इस विचार के प्रसार के लिये सांस्‍कृतिक एकता न्यास की स्थापना की जायेगी। समापन समारोह में धार्मिक और आध्यात्मिक धर्मगुरू उनके अनुयायी और बुद्धिजीवी वर्ग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। आदि शंकराचार्य की भव्य प्रतिमा ओंकार पर्वत पर स्थापित की जायेगी। यात्रा में शामिल हुए 17 लाख से ज्यादा लोग बैठक में बताया गया कि मुख्य समारोह बड़वाह-ओंकारेश्वर मार्ग पर ग्राम थापना में आयोजित होगा। इसके लिये 800 से ज्यादा विषय-विशेषज्ञों और धर्माचार्यों को आमंत्रित किया जा रहा है। गत 19 दिसम्बर से प्रारंभ हुई यह यात्रा अब तक दो हजार 231 ग्रामों और शहरों से गुजरी है तथा यात्रा के दौरान 6 हजार 624 किलो मीटर दूरी तय की गई है। यात्रा के दौरान 17 लाख से अधिक लोग शामिल हुये हैं तथा 20 हजार 519 धातु पात्र अब तक संकलित किये गये हैं। चार यात्राएं ओंकारेश्वर, उज्जैन, पचमठा और अमरकंटक से निकली है। इसके अलावा एक यात्रा केरल के कालड़ी से शुरू हुई है जो पूरे देश में घूम रही है। यह पाँचों यात्राएं ओंकारेश्वर पहुँचेगी। कार्यक्रम स्थल का आकल्पन आदि गुरू शंकराचार्य के जीवन की प्रमुख घटनाओं के चित्र तैयार कर किया जायेगा। बैठक में जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री प्रदीप पांडेय, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री एस.के. मिश्रा, प्रमुख सचिव संस्कृति श्री मनोज श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री विवेक अग्रवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री हरिरंजन राव, आयुक्त जनसंपर्क श्री पी. नरहरि, कमिश्नर एवं आई.जी. इंदौर, कलेक्टर और एस.पी. खण्डवा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
वेदान्त दर्शन परमात्मा के दर्शन का सशक्त मार्ग: मंत्री श्री पवैया
11 January 2018
उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया ने कहा है कि वेदान्त दर्शन जड़, चेतन और प्राणी मात्र में परमात्मा के दर्शन का सशक्त मार्ग है। साधु-संत चलते-फिरते तीर्थ हैं, उनके एक ही मंच पर दर्शन का सौभाग्य मिलना गौरवपूर्ण क्षण का एहसास कराता है। श्री पवैया महर्षि आश्रम में आयोजित महर्षि महेश योगी जन्म शताब्दी वर्ष पूर्णता समारोह को संबोधित कर रहे थे। मंत्री श्री पवैया ने विद्यार्थियों और युवाओं का आव्हान किया कि शिक्षा के भौतिक ज्ञान के साथ-साथ विद्यावान बनकर राष्ट्र की सेवा में सक्रिय भागीदारी निभायें। उन्होंने महर्षि योगी द्वारा प्रतिपादित उच्च आदर्शों और ज्ञान की परम्पराओं को आत्मसात करने की जरूरत बताई। संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सुरेन्द्र पटवा ने कहा कि मानव जन्म की सार्थकता तभी होगी, जब हम अपनी संस्कृति, परम्पराओं और रीति-रिवाजों को कायम रखते हुए सकारात्मक वातावरण निर्मित कर अपने जीवन का आनंद ले सकें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास कार्य के साथ-साथ संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। सांसद श्री आलोक संजर ने कहा कि जीवन के आनंद को खोजने के लिए व्यक्ति इधर-उधर भटकता है जबकि आनंद हमारे बीच में ही विद्यमान है, उसकी अनुभूति की आवश्यकता है। मंत्री द्वय एवं सांसद की मौजूदगी में महर्षि महेश योगी जन्म शताब्दी में हुए पिछले वर्ष 102 कान्फ्रेंस की रिपोर्ट पर आधारित चित्रमय दर्शन पुस्तक, बाल एवं सीट कलेण्डर का विमोचन किया गया। मंत्री द्वय ने पूज्य पाद स्वामी वसुदेवानंद सरस्वती जी महाराज, अयोध्या एवं अन्य धार्मिक स्थलों से आए साधु-संतों से आशीर्वाद प्राप्त किया। समारोह के सूत्रधार ब्रम्हृचारी डॉ. गिरीश ने जन्म शताब्दी समारोह की उपयोगिता रेखांकित करते हुए बताया कि महर्षि के ब्रम्हृ वाक्य, 'जीवन आनंद है' के फलितार्थ करने के लिए 11 से 13 जनवरी तक आशीर्वाद दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें देश-विदेश से साधु-संत, विद्वान एवं विद्यार्थी शामिल होंगे।
मुरैना में स्वामी विवेकानन्द स्मृति समारोह 11-12 जनवरी को
9 January 2018
मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा स्वामी विवेकानन्द समारोह 11-12 जनवरी को मुरैना में आयोजित किया जायेगा। पहले दिन दोपहर में निबंध, लेखन प्रतियोगिता होगी। इसमें विद्यालय और महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं भाग लेंगी। दूसरे दिन 'वर्तमान परिदृश्य में स्वामी विवेकानन्द के विचारों की प्रासांगिता' विषय पर व्याख्यान होगें। डॉ. लखनलाल खरे (करैरा) एवं डॉ. राम कुमार सिंह (मुरैना) के वक्तव्य होगे। कार्यक्रम की अध्यक्ष्ता डॉ. भागीरथ कुमरावत करेंगे। तृतीय और अंतिम सत्र में सरस्वती विद्या मंदिर में रात्रि 6 बजे रचनापाठ होगा। इसमें स्थानीय साहित्यकार श्री राम प्रबल श्रीवास्तव, श्री सीताराम बघेल, श्री मुन्नालाल 'मृदुल' श्री वासुदेव 'व्यग्र', श्री रवि तोमर एवं श्रीमती संध्या सुरभि अपना पाठ करेंगे। श्री प्रमोद प्रयासी कार्यक्रम का संचालन करेंगे।
पुरातत्व आयुक्त श्री राजन ने किया शिवलिंगम प्रदर्शनी का शुभारंभ
9 January 2018
पुरातत्व आयुक्त श्री अनुपम राजन ने राज्य संग्रहालय, श्यामला हिल्स, भोपाल में 'शिवलिंगम' छायाचित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। आठ दिवसीय यह प्रदर्शनी 6 जनवरी तक लगेगी। आम जन सुबह 10.30 बजे से 5.30 बजे शाम तक अवलोकन कर सकते हैं। 'शिवलिंगम' छायाचित्र प्रदर्शनी आकर्षण शिवलिंग शिव का प्रतीक है, जो उनके निश्छल ज्ञान और तेज को प्रतिबिम्बित करता है। शिव का अर्थ है 'कल्याणकारी, लिंग का अर्थ है- 'सृजन'। सृजनहार के रूप में और उत्पादकता शक्ति के रूप में लिंग की पूजा होती है। स्कंध पुराण में लिंग का आशय 'लय' (प्रलय) बताया गया है। प्रलय के समय अग्नि में सब भस्म होकर शिवलिंग में समा जाता है और सृष्टि के आदि में लिंग से सब प्रकट होता है। लिंग मानव सभ्यता के प्राचीन धार्मिक प्रतीक में से एक है। शिवलिंग की महत्ता, उसकी रचना, दुर्लभता के साथ स्थापित स्थल पर भी निर्भर करती है। शिवलिंगों के कई रूपों का निर्माण विभिन्न कालक्रमों में किया गया है। प्राकृतिक रूप से नदी के बहाव के साथ अद्भुत शिवलिंगों का निर्माण होता है। सिंधु घाटी की सभ्यता से लेकर इतिहास में सामान्य शिवलिंग, एकमुखी शिवलिंग, चतुर्मुखी शिवलिंग, पंचमुखी शिवलिंग और अष्टमुखी आदि शिवलिंग निर्मित हुए हैं। लिंगाकृति में कभी-ब्रह्मा, विष्णु, महेश, सूर्य तो कभी पार्वती, गणेश या नन्दी आदि की प्रतिमाओं की रचना की गई है। इन्हीं सभी प्रतिमाओं को लेकर शिवलिंग, मुखलिंग एवं लिंगोद्भव प्रतिमाओं पर केन्द्रित तकरीबन 70 छायाचित्रों की प्रदर्शनी राज्य संग्रहालय श्यामला हिल्स भोपाल के प्रदर्शनी कक्ष में लगाई गई है। उल्लेखनीय है कि सानफ्रांसिस्को के संग्रहालय की 4-5वीं शती ई. की शिव की जटाधारी प्रतिमा, इसी काल का विदिशा में उदयगिरि का मनोहारी एक मुखलिंग, 5वीं से 6वीं शती ई. की मध्यप्रदेश की ही एकमुखी शिवलिंग प्रतिमाएँ इस प्रदर्शनी में देखी जा सकती है, जो खोह, भूमरा, नचना आदि स्थलों से प्राप्त हैं। इसी तरह उत्तरप्रदेश के मथुरा की अद्भुत मुखलिंगी प्रतिमाएँ भी प्रदर्शनी का आकर्षण हैं।
एकात्म यात्रा की पूर्व संध्या पर 1.21 लाख दीप जलाकर कर रचा इतिहास
8 January 2018
रतलाम में जन-अभियान परिषद की नगर विकास प्रस्फुटन समिति ने एकात्म यात्रा की पूर्व संध्या पर आदिगुरू शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने के लिये झाली तालाब में 1 लाख 21 हजार दीप एक साथ प्रज्ज्‍वलित किये। दीप यज्ञ में सभी जाति, धर्म और वर्ग के लोगों ने दीप प्रज्ज्वलन कर भारतीय संस्कृति की अनेकता में एकता की पहचान का परिचय दिया। प्रस्फुटन समिति ने रतलाम जिले के प्रमुख स्वयंसेवी, धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के साथ शहर के युवा वर्ग और महिलाओं को पंजीयन के माध्यम से इस मुहीम से जोड़ा था। इसके लिये 15 दिनों से तैयारी चल रही थी। गायत्री परिवार द्वारा एकात्म से सामाजिक समरसता और सद्भाव को पोषित करने के लिये वैदिक रीति से दीप यज्ञ का आयोजन किया गया। लोगों ने 36 स्थानों पर दीप दान किया। इस अवसर पर आदि गुरू शंकराचार्य द्वारा रचित नर्मदाष्टक गान के साथ 108 दीप माला से माँ भारती की आरती की गई। रतलाम के लोगों ने तन-मन-धन से योगदान देकर दीपक को एकात्मता का प्रतीक मानकर दीप दान को अनूठा बनाया।
उज्जैन में आज से तीन दिवसीय शैव महोत्सव
4 January 2018
महाकाल की पवित्र नगरी उज्जैन में शुक्रवार 5 जनवरी से तीन दिवसीय द्वादश ज्योतिर्लिंग सम्मेलन 'शैव महोत्सव'' का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव में सभी मंदिरों के अधिदैविक, अधिभौतिक एवं आध्यात्मिक महात्म्य, पूजन एवं परम्पराओं पर चर्चा की जायेगी। इस दौरान विभिन्न सत्रों में कर्मकाण्ड, वेद-वेदांग, सामाजिक समरसता आदि विषयों पर संगोष्ठी आयोजित कर मंथन किया जायेगा। महोत्सव में श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा 'श्री महाकालेश्वर वेद अलंकरण'' सम्मान भी दिया जायेगा। आयोजन का उद्देश्य शैव महोत्सव के आयोजन का उद्देश्य विश्व-स्तर पर द्ववादश ज्योतिर्लिंग के महात्म्य को प्रसारित करना है। हिन्दू धर्म-संस्कृति एवं दर्शन पर गहन विचार-मंथन एवं चिन्तन कर उन्हें समसामयिक संदर्भ में प्रतिपादित करना, हिन्दू धर्म संस्थानों की गरिमा के अनुरूप वेदोक्त पूजा पद्धति की साम्य के साथ निरूपित करना, वेदोक्त एवं पुराणिक संदर्भों के अनुरूप आधुनिक प्रबंधन तकनीक एवं संसाधनों का प्रयोग करते हुए पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी के अनुकूल उत्कृष्ट व्यवस्था का निर्माण करना एवं इसके लिये द्वादश ज्योतिर्लिंगों के व्यवस्था प्रबंधन एवं समन्वयन करना, सामाजिक लोक उत्तरदायित्व के कार्यों का विस्तार किये जाने पर विचार एवं इसके माध्यम से सामाजिक समरसता के स्थापन का कार्य करना शामिल है। राष्ट्रोत्थान के लिये द्वादश ज्योतिर्लिंग संस्थानों की प्रतिभागिता एवं समन्वय, शैव एवं वैष्णव देवस्थान जो कि आदिकाल से राष्ट्रीय चेतना के केन्द्र रहे हैं, के गौरव की पुनर्स्थापना तथा आध्यात्मिक मनोभाव के साथ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य है। शैव महोत्सव में प्रबोधन के विषय शैव महोत्सव में भगवान के निराकार स्वरूप का विवेचन और विभिन्न शैव दर्शनों का प्रतिपादन होगा। साथ ही आगम/तंत्र ग्रंथ, पुराण, स्मृति वेदांत में भगवान के साकार स्वरूप का विवेचन किया जायेगा। मंदिरों की व्यवस्था एवं प्रबंधन पर पौराणिक सन्दर्भों को दृष्टिगत रखते हुए आधुनिक प्रबंधन पद्धति एवं संस्थान का प्रयोग करते हुए उत्कृष्ट व्यवस्था का निर्माण किया जायेगा। सामाजिक एवं शैक्षिक प्रकल्पों के माध्यम से सामाजिक समरसता की चेतना का प्रसार कैसे किया जाये, इस विषय पर चर्चा की जायेगी। गौ-सेवा, शिक्षा, जैविक कृषि, शून्य बजट कृषि एवं भारतीय चिकित्सा पद्धति पर चिन्तन भी किया जायेगा। शोभायात्रा का मार्ग शैव महोत्सव के दौरान 5 जनवरी को शाम 4 बजे भव्य शोभायात्रा श्री महाकालेश्वर मंदिर से निकलेगी। शोभायात्रा का मार्ग महाकाल मंदिर से कोट मोहल्ला चौराहा, गुदरी चौराहा, रामानुजकोट, कार्तिक चौक, दानीगेट, ढाबा रोड, कंठाल चौराहा, सतीगेट, छत्रीचौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार होते हुए वापस महाकाल मंदिर पर सम्पन्न होगी। शैव कला संगम एवं प्रदर्शनी शैव महोत्सव के अंतर्गत 5, 6 एवं 7 जनवरी को बारह ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृति, भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों के चित्रों तथा सभी वेदों के वैज्ञानिक पक्ष पर आधारित चित्र एवं शैवदर्शन पर प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है। इसमें चित्रकारों को आमंत्रित कर उनके चित्रांकनों का भी प्रदर्शन किया जायेगा। यह प्रदर्शनी स्वामी सन्तदास उदासीन आश्रम नृसिंह घाट रोड पर आयोजित की गई है। कार्यक्रम की रूपरेखा शैव महोत्सव-2018 के अंतर्गत प्रथम दिवस 5 जनवरी को आयोजन स्थल सन्तदास उदासीन आश्रम नृसिंह घाट पर प्रात: 8 से 9 बजे तक पंजीयन के उपरान्त प्रात: 9.30 से 11.30 तक उद्घाटन सत्र होगा, 11.45 से 1.30 तक उद्बोधन सत्र होगा तथा दोपहर 1.30 से 3 बजे तक महाप्रसादी के पश्चात सायं 4 बजे से शोभायात्रा श्री महाकालेश्वर मंदिर से प्रारंभ होगी। शैव महोत्सव के द्वितीय दिवस 6 जनवरी को प्रात: 9.30 से 11 बजे तक उद्बोधन सत्र होगा, 11.15 से एक बजे तक द्वितीय उद्बोधन सत्र होगा। एक बजे से 2.30 तक महाप्रसादी के पश्चात दोपहर 3 बजे से 4.30 बजे तक तृतीय उद्बोधन सत्र होगा। चतुर्थ उद्बोधन सत्र का समय सायं 4.45 से 6.30 तक रहेगा। सायं 6.30 बजे से 9 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। सभी उद्बोधन सत्र सभी चार व्यासपीठों पर समानान्तर रूप से आयोजित होंगे। शैव महोत्सव के तृतीय एवं अंतिम दिवस पर प्रात: 9 बजे से 10 बजे तक स्वामी सन्तदास उदासीन आश्रम नृसिंह घाट पर आयोजित कार्यक्रम में अनुभव कथन होंगे। समापन सत्र प्रात: 10.30 से प्रारंभ होगा, जो कि महाप्रसादी भोजन के साथ सम्पन्न होगा।
एकात्म यात्रा का 9 जनवरी को विदिशा में प्रवेश
29 December 2017
एकात्म यात्रा 9 जनवरी को विदिशा जिले में प्रवेश करेगी और 11 जनवरी को विदिशा जिला मुख्यालय पर जनसंवाद के उपरांत भोपाल के लिए रवाना होगी। एकात्म यात्रा के भव्य आयोजन और व्यापक प्रचार-प्रसार के लिये कल एसएटीआई के कैलाश सत्यार्थी सभागृह में बैठक आहूत की गई। बैठक में एकात्म यात्रा के रूटचार्ट की विस्तृत जानकारी दी गई। व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु ग्रामों की दीवारों पर लेखन कार्य, मुख्य जनसंवाद स्थलों पर की जाने वाली व्यवस्थाओं से अवगत कराया गया। नगरपालिका अध्यक्ष श्री मुकेश टण्डन ने कहा कि निकाय क्षेत्रों के सभी वार्डो से एक-एक कलश पवित्र मिट्टी जन-संवाद स्थलों पर संग्रहित की जाएगी। निकाय क्षेत्र में यात्रा के भव्य स्वागत के लिये लोगों का आव्हान किया गया है। कलेक्टर श्री अनिल सुचारी ने एकात्म यात्रा के रूटचार्ट के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि नौ जनवरी की सुबह सांची से एकात्म यात्रा विदिशा जिले में प्रवेश करेगी। नगर के विभिन्न संगठनों, सामाजिक संस्थाओं के साथ-साथ धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि यात्रा में शामिल होंगे। इस दौरान विदिशा, गुलाबगंज मैरिज गार्डन, बासौदा नौलखी मंदिर, सिरोंज श्री कृष्ण गौशाला, लटेरी थाना परिसर में जन-संवाद होंगे। विदिशा में 11 जनवरी को मुख्य संवाद कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक शामिल होंगे। बैठक में विदिशा जिला व्यापार महासंघ के अध्यक्ष श्री मुन्ना भैया जैन, श्री संदीप डोंगर सिंह समेत अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं यात्रा हेतु नियुक्त ग्राम समन्वयक तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी मौजूद थे।
संतों के दिखाए सन्मार्ग से ही कल्याण होगा : मुख्यमंत्री श्री चौहान
27 December 2017
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज ओरछा में श्री रामराजा मंदिर में दर्शन किये। श्री चौहान ने ओरछा में श्री मुरारी बापू की रामकथा भी सुनी तथा संतों का आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बापूजी स्वयं भक्ति, ज्ञान और कर्म योग के संत शिरोमणि हैं। उन्होंने कहा कि जब हर क्षेत्र में लोग अपने दायित्वों का ईमानदारी और निष्ठा से निर्वहन करेंगे, तभी देश और समाज की प्रगति होगी तथा सबका विकास होगा। श्री चौहान ने कहा िक संतों के दिखाये सन्मार्ग पर चलने से ही सभी का कल्याण होगा। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री श्री रूस्तम सिंह, विधायक श्री अनिल जैन, श्रीमती अनीता नायक, श्री के.के. श्रीवास्तव, ओरछा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र सिंह राठौर और अन्य जन-प्रतिनिधि मौजूद रहे।
पांच जनवरी 2018 से उज्जैन में तीन दिवसीय भव्य शैव महोत्सव
23 December 2017
महाकाल की नगरी उज्जैन में पांच से सात जनवरी 2018 तक तीन दिवसीय शैव महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रतीक रूप में सभी बारह ज्योतिर्लिंगों का समागम होगा। शैव दर्शन एवं परंपरा से जुडे संत-महात्मा बड़ी संख्या में शामिल होंगे। पांच जनवरी को भव्य शोभा यात्रा के साथ इसका शुभारंभ होगा। सभी द्वादश ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां शोभा यात्रा का मुख्य आकर्षण होंगी। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहां निवास पर शैव महोत्सव की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि इसे भव्य आध्यात्मिक समागम बनाने में किसी प्रकार की कमी नहीं होगी। सभी संतों को आदरपूर्वक आमंत्रित किया जायेगा। उन्होने आम श्रद्धालुओं के अलावा विदयार्थियों को भी इस महोत्सव से जोड़ने के निर्देश दिये। शैव महोत्सव 2018 के माध्यम से हिन्दू धर्म, संस्कृति एवं दर्शन पर गहन विचार-मंथन कर वर्तमान संदर्भों में इसके महत्व को प्रसारित किया जायेगा। इस दौरान विभिन्न सत्रों में आध्‍यात्मिक विषयों पर वेदाचार्यों द्वारा चिंतन होगा। इस तीन दिवसीय शैव महोत्सव में शोभायात्रा, शैव कला संगम एवं प्रदर्शनी, वेद अलंकरण, डाक टिकट विमोचन मुख्य आकर्षण होंगे। शैव महोत्सव केन्द्रीय आयोजन समिति उज्जैन द्वारा पूरी तैयारियां की जा रही है। समिति के संरक्षक मुख्यमंत्री श्री चौहान एवं अध्यक्ष श्री माखन सिंह चौहान और उपाध्यक्ष श्री दिनेश चन्द्र हैं। बैठक में श्री माखन सिंह चौहान, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री अशोक बर्णवाल, उज्जैन आयुक्त श्री एम.बी.ओझा, कलेक्टर श्री संकेत भेंडवे महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

aaप्रसिद्ध पयर्टन स्थल "कुकुरू" में तीन दिवसीय फेस्टीवल 26 दिसम्बर से होगा शुरू


22 December 2017

बैतूल जिले में सतपुड़ा की हसीन वादियों के बीच बसे प्रसिद्ध पयर्टन स्थल 'कुकुरू' में 26 से 28 दिसम्बर तक सैलानियों के लिए ईको टूरिज्म, एडवेंचर स्पोर्ट्स के फेस्टीवल का भव्य आयोजन किया जायेगा। इसके समीप स्थित कुर्सी जलाशय में जारबिंग बाल बनाना राइड मोटरवोट एंव टेंट कैंपिग जैसी गतिविधियाँ आकर्षण का मुख्य केन्द्र रहेंगी। ज्ञातव्य है कि कुकुरू के बिट्रिश कालीन काफी बागान वेलीआफ फ्लॉवर्स, हिल्स व्यू, सिपना उदगम स्थल बुच प्वाइंट, भौडिया कुण्ड का सनसेट, देड़पानी की पवन चक्की एवं लोकलदरी का आकर्षण पर्यटन सैलानियों के लिए मौजूद रहेगा।
तीन दिन के कार्यक्रम
पहले दिन फेस्टीवल के शुभारंभ पश्चात दोपहर 3 बजे से रस्साकशी, मार्शल आर्ट प्रदर्शन तथा शाम 7 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इसके समानांतर पूरे दिन वोटिंग, मोटर बोट (कुर्सी जलाशय), पैराग्लाइडिंग, पैरासेंलिंग, साइकिलिंग, रॉक क्लाइंबिंग, वेली क्रॉसिंग, टेंट केपिंग, हॉट एअर बैलून, ट्रेडिंग, जारबिन बाल, बनाना राइड जैसी एडवेंचर्स गतिविधियां होंगी। दूसरे दिन 27 दिसम्बर को सुबह 10.30 बजे से सायं 5 बजे तक स्कूली बच्चों की क्विज प्रतियोगिता, नृत्य, रंगोली एवं पेटिंग प्रतियोगिता के साथ ही समानांतर पूरे दिन एडवेंचर्स गतिविधियाँ होंगी। फेस्टीवल के अंतिम दिन सुबह 10.30 बजे से दोपहर 1 बजे तक स्कूली बच्चों द्वारा कुर्सी दौड़, चम्मच दौड़ और अंताक्षरी कार्यक्रम किए जायेंगे। दोपहर 3 बजे पर्यटन स्थल कुकुरू के मुख्य स्थलों को भ्रमण और शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इस दिन भी समानांतर एडवेंचर्स गतिविधियां होंगी।
पर्यटकों को बस सुविधा
फेस्टीवल में पर्यटकों और दर्शकों के लिए जिला प्रशासन द्वारा सशुल्क बस सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी। स्थानीय बस स्टेण्ड एवं रेलवे स्टेशन से प्रात: 7 बजे एवं 9 बजे बस सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा पर्यटकों को सशुल्क ठहरने के लिये भी इंतजाम किये गए हैं।


aaओंकारेश्वर वेदान्त दर्शन का अदभुत केन्द्र बनेगा – मुख्यमंत्री श्री चौहान


19 December 2017

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि ओंकारेश्वर वेदान्त दर्शन के अदभुत केन्द्र के रूप में स्थापित होगा। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर में आदिशंकराचार्य की प्रतिमा स्थापित कर उनके योगदान को चिरस्मरणीय बनाया जायेगा। समाज ठीक दिशा में चले, इसलिये सन्तों के नेतृत्व में आदिशंकराचार्य के अद्वैतवाद का प्रचार-प्रसार किया जायेगा। आज सनातन धर्म बचा है तो वह शंकराचार्य की देन है। वे न होते तो भारत का यह स्वरूप ही न होता। उन्होंने उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम को जोड़ा। सांस्कृतिक रूप से देश को एक किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने यह बात आज उज्जैन में एकात्म यात्रा का शुभारंभ करते हुए कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक अदभुत बात है कि बद्रीनाथ मन्दिर में केरल के नंबुरिपाद ब्राह्मण पुजारी हैं। द्वादश ज्योतिर्लिंग की कल्पना भी शंकराचार्यजी ने की। दुनिया के सामने आज जितने संकट हैं, उन सबका समाधान अद्वैत वेदान्त में है। शंकराचार्य सर्वज्ञ थे। ओंकारेश्वर में गुरू से ज्ञान प्राप्त कर वे भारत भ्रमण पर निकल गये और स्थान-स्थान पर शास्त्रार्थ कर अपनी विद्वता स्थापित की। वे सभी रूढ़ियों को समाप्त करने वाले सन्यासी थे। ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के दर्शन के माध्यम से सारी दुनिया को एक ही परिवार के रूप में मानना, प्राणियों को भी अपने समान दर्जा देना उनकी विशेषता थी। आदि शंकराचार्य ने कहा कि धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो। प्राणियों में सद्भावना हो। उन्होंने विश्व कल्याण का आव्हान किया और कहा कि एक ही चेतना सभी में है। कोई भी छोटा-बड़ा नहीं है। पशु, पक्षी, पेड़, पौधों सभी को उन्होंने एक समान माना। मुख्यमंत्री ने कहा कि एकात्म यात्रा में अद्वैत वेदान्त का प्रचार-प्रसार तो होगा ही, माता, बहनों, बेटियों का सम्मान करने की शिक्षा भी दी जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने बच्चियों के साथ दुराचार करने वालों को मृत्युदण्ड देने का प्रावधान किया है। एकात्म यात्रा के माध्यम से पर्यावरण बचाने, भेदभाव मिटाने का सन्देश भी दिया जायेगा। इसके पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, स्वामी परमात्मानन्द सरस्वती, स्वामी विश्वेरानन्द, सन्त रामेश्वरदासजी, स्वामी अतुलेश्वरानन्द सरस्वती एवं अन्य गणमान्य सन्तों द्वारा आदिशंकराचार्य के चित्र के संमुख दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इसके बाद पादुका पूजन किया एवं एकात्म यात्रा का ध्वज यात्रा के लिये सौंपा गया। कार्यक्रम में सभी सन्तों की ओर से स्वामी परमात्मानन्द एवं स्वामी विश्वेरानन्द द्वारा मुख्यमंत्री को रूद्राक्ष की माला पहनाकर आशीर्वाद दिया गया। आचार्य परिषद के सचिव सन्त परमात्मानन्द सरस्वतीजी ने कहा कि भारतीय संस्कृति वेद पर आधारित है और निरन्तर है। विश्व में कई संस्कृतियां खड़ी हुईं और नष्ट हो गईं, लेकिन भारतीय संस्कृति आज भी जीवित है। हमें इस संस्कृति का संवर्धन कर इसकी रक्षा करना होगी। हिन्दू धर्म ऐसा धर्म और संस्कृति है, जो सर्वग्राही है। द्वैत होने पर भी अद्वैत का दर्शन कराने वाली हमारी संस्कृति है। शंकराचार्य ने हमारे पारम्परिक व सामाजिक मूल्य को समृद्ध किया। मातृ देवो भव:, अतिथि देवो भव: के सिद्धान्त का पालन करते हुए शंकराचार्य ने सन्यास लेने के बाद भी परम्पराओं को तोड़ते हुए अपनी मां का अन्तिम संस्कार किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने एकात्म यात्रा के माध्यम से आन्तरिक विकास करने का बीज स्थापित कर दिया है। सन्त विश्वेश्वरानन्दजी ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने अदभुत कार्य किया। वे सैकड़ों वर्ष पूर्व दक्षिण में जन्मे और ओंकारेश्वर में आकर उन्होंने सन्यास ग्रहण किया। तत्कालीन समय में हमारा देश विभक्त हो रहा था, उसको जोड़ने का काम उन्होंने किया। आदिशंकराचार्य की देन हमारे देश के तीर्थ हैं। जब हम बद्रीनाथ और रामेश्वरम जाते हैं तो उन्हें स्मरण करते हैं। सभी तीर्थों की पृष्ठभूमि में कोई है तो वह आचार्य शंकर हैं। उन्होंने देश की तीन बार पदयात्रा की। शास्त्रार्थ करके वैदिक धर्म की पुनर्स्थापना करने में उनका महती योगदान है। वे हमारे धर्म, संस्कृति के आधार स्तंभ हैं। चारों दिशाओं में स्थापित चारों मठों की सुरक्षा करने का दायित्व हमारा है। बत्तीस वर्ष की आयु में उन्होंने शरीर त्याग दिया। शंकराचार्य ने समाज को एक किया और समरसता प्रदान की है। एकात्म यात्रा के उज्जैन प्रखण्ड के प्रभारी श्री राघवेन्द्र गौतम ने बताया कि ओंकारेश्वर में 108 फीट ऊंची शंकराचार्य जी की मूर्ति की स्थापना होगी और इसके लिये धातु संग्रहण करने के लिये एकात्म यात्रा निकाली जा रही है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मौजूद सभी सन्तगणों का पुष्पहारों से नमन कर स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आदिशंकराचार्य के जीवन पर आधारित चित्रकला प्रतियोगिता के विजेता देव परमार, आध्या द्विवेदी एवं सिद्धार्थ वर्मा को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार वितरित किया।
इमली चौराहा अब शंकराचार्य चौराहा
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने घोषणा की कि उज्जैन के इमली चौराहे का नामकरण अब शंकराचार्य चौराहा किया जायेगा। साथ ही यहां शंकराचार्य की आदमकद प्रतिमा भी स्थापित की जायेगी।
मुख्यमंत्री ने ध्वज थामा
कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने एकात्म यात्रा का ध्वज थामा। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह ने मंगल कलश थामा। कार्यक्रम के अध्यक्ष स्वामी विश्वेश्वरानन्दजी ने शंकराचार्यजी की चरण पादुकाएं थामी तथा भगवान आदि शंकराचार्य की एकात्म यात्रा का नेतृत्व किया। कार्यक्रम में सन्त श्री रामेश्वरदास, श्री अतुलेश्वरानन्द सरस्वती, श्री रामेश्वरदास तराना, श्री उमेशनाथजी महाराज, श्री रंगनाथजी महाराज, ब्रह्मकुमारी उषा दीदी, श्री दिग्विजयदास, श्री विष्णुदास, श्री कृष्णदास महाराज, श्री शेषानन्दजी महाराज, श्री राधेबाबा, श्री राघवदास महाराज, नित्यऋषि, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह चौहान, ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन, महापौर श्रीमती मीना जोनवाल, विधायक डॉ.मोहन यादव, श्री दिलीपसिंह शेखावत, श्री बहादुरसिंह चौहान, श्री मुकेश पण्ड्या, मेला प्राधिकरण अध्यक्ष श्री विजय दुबे, यूडीए अध्यक्ष श्री जगदीश अग्रवाल, मप्र पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष श्री तपन भौमिक, एकात्म यात्रा ग्रामीण प्रभारी श्री किशोर मेहता उपस्थित थे


aaउज्जैन से प्रारम्भ हुई आदिशंकराचार्य की एकात्म यात्रा


19 December 2017

आदिशंकराचार्य की प्रतिमा के लिए धातु संग्रहण तथा जन-जागरण के लिये उज्जैन से आरम्भ हुई एकात्म यात्रा अपने भव्यतम स्वरूप में निर्धारित स्थल चारधाम से अपने भ्रमण पर रवाना हुई। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह चौहान ध्वज थामकर हरसिद्धि मंदिर तक यात्रा के साथ चले। उज्जैन की धर्मपरायण जनता ने अपने घर से निकलकर यात्रा का भव्य स्वागत किया। शहर में स्थान-स्थान पर मंच स्थापित किये गये तथा नागरिकों ने पुष्पवर्षा की। यात्रा में सन्त समाज, जनप्रतिनिधि, आम नागरिक, स्त्री-पुरूष, बच्चे बड़ी संख्या में यात्रा के साथ चल रहे थे। यात्रा के आगे-आगे घुड़सवार पुलिस चल रही थी। एकात्म यात्रा उज्जैन में चारधाम मन्दिर से निकलकर हरसिद्धि चौराहा, बड़ा गणेश मन्दिर, महाकाल मन्दिर, चौबीस खंबा माता मन्दिर, पटनी बाजार, गोपाल मन्दिर, छत्रीचौक, सतीगेट, कण्ठाल चौराहा, नईसड़क, दौलतगंज, मालीपुरा, देवासगेट, चामुण्डा माता चौराहा से आगर रोड होती हुई तराना की ओर निकली। इस दौरान यात्रा में शामिल महिलाएं अपने सिर पर कलश थामकर चल रही थीं। कई महिलाओं के समूह बैण्ड की धुन पर नृत्य करते हुए वातावरण में भक्तिरस घोल रहे थे। नर-नारियों का समूह जयघोष करते हुए यात्रा के साथ आगे बढ़ रहा था। सन्तों एवं साधुओं का समूह जयकारे के साथ यात्रा में नेतृत्वकर्ता के रूप में सम्मिलित रहा। यात्रा में सम्मिलित रथ आदिशंकराचार्य के वृहताकार चित्र तथा उनसे जुड़े प्रतीकों से युक्त था। शंकराचार्य के चित्र पर नागरिकों द्वारा स्थान-स्थान पर पुष्प-वर्षा की गई। एकात्म यात्रा उज्जैन से प्रारम्भ होकर नजरपुर, मालीखेड़ी, बिछड़ौद होते हुए शाम को तराना पहुंचेगी। यात्रा 20 दिसम्बर को तराना से इटावा, छड़ावद, तिलावद, नान्देड़, माकड़ोन, रूपाखेड़ी, घोंसला, खेड़ा खजूरिया होते हुए दोपहर 2 बजे महिदपुर पहुंचेगी। महिदपुर से रवाना होकर डेलची, महिदपुर रोड, रूपेटा होते हुए यात्रा सायं 5 बजे नागदा पहुंचेगी। नागदा से चौकी जुनार्दा, उमरना, उमरनी, बुरानाबाद होते हुए यात्रा सायं 7 बजे खाचरौद पहुंचेगी। अगले दिन 21 दिसम्बर को खाचरौद से मड़ावदा, कमठाना, भाटपचलाना, कमेड़, रूनिजा होते हुए यात्रा दोपहर 12 बजे बड़नगर पहुंचेगी। बड़नगर से मौलाना, खरसोदखुर्द, धुरैरी, सरसाना, दंगवाड़ा, बलेड़ी, नरसिंगा होते हुए यात्रा दोपहर 3 बजे इंगोरिया पहुंचेगी। इंगोरिया से कड़ोदा, पितावली, छड़ोदा, तलावती, रलायता, बछोड़ा, गिरोता, ओसारा, पाड़ल्या होते हुए यात्रा सायं 6 बजे इन्दौर जिले के गौतमपुरा पहुंचेगी। यह यात्रा इन्दौर, देवास, राजगढ़, गुना, अशोक नगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, दतिया होते हुए ओंकारेश्वर पहुंचेगी। यह यात्रा 12 जिलों में होकर लगभग 2175 किलो मीटर की दूरी तय करेगी।
एकात्म यात्रा के लिये महाकाल मन्दिर परिसर की मिट्टी एवं घड़ा भेंट
आदिशंकराचार्य की प्रतिमा के लिए धातु संग्रहण एवं जन-जागरण अभियान के लिये एकात्म यात्रा के शुभारम्भ के पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सपत्नीक महाकाल मन्दिर में महाकाल की पूजा-अर्चना की। इस मौके पर स्वामी विश्वेश्वरानन्द महाराज, स्वामी परमात्मानन्द सरस्वती महाराज उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने नन्दी हॉल में सन्तों का भगवान महाकाल के आशीर्वादस्वरूप दुपट्टा ओढ़ाया। मन्दिर प्रबंध समिति की ओर से मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया। एकात्म यात्रा के शुभारम्भ अवसर पर महाकाल मन्दिर में पुजारी पं.प्रदीप गुरू ने तांबे का घड़ा और महाकाल मन्दिर परिसर की मिट्टी मुख्यमंत्री श्री चौहान को भेंट की। मन्दिर के श्री संजय पुरोहित ने तांबे के 11 लोटे भेंट किये। इस अवसर पर बालयोगी श्री उमेशनाथजी महाराज, भृर्तृहरि गुफा के श्री रामनाथजी महाराज, आचार्य श्री शेखर महाराज, ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन, विधायक श्री बहादुरसिंह चौहान, डॉ. मोहन यादव उपस्थित थे।


aaभोपाल हाट में लघु भारत के दर्शन : जनसम्पर्क मंत्री डॉ. मिश्र


19 December 2017

जनसम्‍पर्क, जल-संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज शाम भोपाल हाट में 13 दिवसीय आदि महोत्सव का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री विश्वास सारंग ने की। भारत सरकार के आदिवासी कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत ट्रायफेड के इस कार्यक्रम में देश भर के आदिवासी शिल्पियों द्वारा विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की व्यवस्था की गई है। जनसम्‍पर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि भोपाल हाट में एक लघु भारत का निर्माण देखने को मिला। अलग-अलग प्रदेशों की संस्कृतियों को एक ही स्थान पर देखना विलक्षण अनुभव है। इसके साथ ही यहाँ विशिष्ट भारतीय संस्कृति और भाषाई एकता भी देखने को मिली है। जनसम्‍पर्क मंत्री ने कहा कि आदि महोत्सव जैसे कार्यक्रम शिल्पियों के आर्थिक उन्नयन में भी मददगार हैं। डॉ. मिश्र ने आदि महोत्सव की सराहना करते हुए कहा कि आदिवासी शिल्प की वस्तुओं को खरीदकर हुनरमंद कलाकारों को प्रोत्साहित किया जाए। सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री विश्वास सारंग ने कहा कि आदिवासी शिल्पी आदि महोत्सव के माध्यम से स्वावलम्बन प्राप्त करने के साथ ही परम्पराओं को सहेजने का महत्वपूर्ण कार्य भी कर रहे हैं। ट्रायफेड, नई दिल्ली के एमडी श्री प्रवीर कृष्ण ने संस्था की गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर ट्रायफेड के संचालक मण्डल के सदस्य श्री यशवंत सिंह दरबार और क्षेत्रीय प्रबंधक श्री जे.एस. शेखावत उपस्थित थे। महोत्सव में 100 से भी अधिक स्टॉलों के माध्यम से आदिवासी कलाकृतियों का प्रदर्शन और विक्रय किया गया है। महोत्सव में 25 राज्यों के 100 से अधिक आदिवासी कलाकार भाग ले रहे हैं। महोत्सव का विशेष आकर्षण प्रतिदिन शाम 6.30 बजे से होने वाला आदिवासी गीत-संगीत और नृत्य है। महोत्सव में जम्मू-कश्मीर से लेकर तमिलनाडु और गुजरात से लेकर नागालैण्ड तथा सिक्किम की आदिवासी कलाकृतियाँ एवं कपड़ों का प्रदर्शन-सह-बिक्री की जा रही है। महोत्सव में आदिवासियों में डिजिटल और ई-कॉमर्स को प्रोत्साहित करने के लिये सभी स्टॉलों पर क्रेडिट एवं डेबिट-कार्ड के माध्यम से पेमेंट की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इसके लिये आदिवासी कारीगरों को एसबीआई द्वारा विशेष ट्रेनिंग दी गई है। भारत की जनसंख्या में 8 प्रतिशत से अधिक आदिवासी हैं। इस तरह भारत में 10 करोड़ से भी ज्यादा आदिवासी जनसंख्या है। आदिवासियों की अपनी एक अलग अनूठी, मौलिक संस्कृति और कला मूल्य हैं। इसमें इनकी अनोखी प्राकृतिक सादगी झलकती है। इससे कोई भी प्रभावित हुए बिना नही रह सकता। भारतीय आदिवासियों का हस्तशिल्प विश्व विख्यात है। इसमें सूती, ऊनी और सिल्क की हाथ से बुने हुए वस्त्र, लकड़ी, धातु एवं टेराकोटा की आकर्षक कला-कृतियाँ प्रमुख हैं। बदलते परिवेश में आदिवासी कला को आधुनिक समाज से जोड़ने, आदिवासी कला और संस्कृति से आधुनिक समाज को अवगत कराने के लिये आदिवासी संस्कृति, व्यंजन और व्यवसाय की थीम पर आदि महोत्सव आयोजित किया जा रहा है।


aaअद्वैत वेदांत दर्शन से ही वैश्विक समस्याओं का समाधान सम्भव


19 December 2017

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आदिगुरू शंकराचार्य के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए रीवा में एकात्म यात्रा का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आदिगुरू शंकराचार्य ने देश को सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बांधा, देश के चारों कोनों में चार प्रमुख मठों की स्थापना की। आज भी ये मठ सनातन धर्म की आस्था का केन्द्र हैं। उनके विचारों और अद्वैत दर्शन ने भारतवर्ष के धार्मिक और सांस्कृतिक संकट को दूर किया जिससे सनातन धर्म की पुनः स्थापना हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अद्वेत वेदांत दर्शन से ही वैश्विक समस्याओं का समाधान संभव है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आदिगुरू शंकराचार्य काशी से महेश्वर जाते हुए रीवा के पचमठा आश्रम में कई दिनों तक रूके थे। उनकी ज्ञान ज्योति और आध्यात्मिक शक्ति का आशीर्वाद इस क्षेत्र को मिला था। इसलिये विन्ध्य की धरा वंदनीय है। उन्होंने कहा कि पचमठा आश्रम का सर्वांगीण विकास किया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि अद्वैत वेदांत द्वारा ही भौतिकता की अग्नि का शमन होगा। आदिगुरू शंकराचार्य के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए संतों के नेतृत्व में एकात्म यात्रा निकाली जा रही है। यात्रा के दौरान ओंकारेश्वर में 22 जनवरी को पूरे प्रदेश से एकत्रित मिट्टी एवं धातु से प्रतिमा निर्माण का भूमिपूजन होगा। ओंकारेश्वर में अद्वैत वेदांत का केन्द्र भी बनाया जायेगा। उन्होंने कहा कि सरकार भौतिक संसाधनों तथा अधोसंरचना के विकास के साथ लोगों के जीवन को बेहतर बनाने का भी प्रयास कर रही है। संतों के आशीर्वाद से एकात्म यात्रा अपने उद्देश्य को प्राप्त करेगी। जगतगुरू स्वामी परमानंद जी ने कहा कि आदिगुरू शंकराचार्य के विचारों से जन-जन को मार्गदर्शन मिलेगा। एकात्म यात्रा का नेतृत्व कर रहे संत स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने कहा कि आदिगुरू ने ओंकारेश्वर में दीक्षा ली थी। अपने गुरू से आशीर्वाद लेकर पूरे देश में भ्रमण कर वेद का विरोध करने वालों को परास्त किया था। उनके पावन चरण से रीवा की धरती भी पावन हुई थी जिसे वर्तमान में पचमठा आश्रम कहा जाता है। उद्योग, वाणिज्य तथा खनिज मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि संतों के मार्गदर्शन में एकात्म यात्रा आदिगुरू शंकराचार्य के विचार जन-जन तक ले जायेगी।
चली धर्म ध्वजा
समारोह में आदिगुरू शंकराचार्य की पादुका का प्रतीक पूजन किया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान तथा उद्योग मंत्री श्री शुक्ल ने धर्म ध्वजा एवं पादुका संतों को सौंपकर एकात्म यात्रा का शुभारंभ किया। पचमठा आश्रम में प्रातः 11 बजे उद्योग मंत्री श्री शुक्ल तथा स्वामी अखिलेश्वरानंद ने पादुका पूजन करके एकात्म यात्रा को आरंभ किया। समारोह स्थल मार्तण्ड स्कूल मैदान में समाप्त हुई यात्रा में वेद पाठि बटुक, शंकराचार्य के स्त्रोतों का गायन करने वाले तथा हजारों भक्त शामिल रहे। एकात्म यात्रा के अवसर पर साम्प्रादायिक समुदाय और गंगा जमुनी संस्कृति का अनूठा उदाहरण दिखायी दिया। शोभा यात्रा पचमठा आश्रम से शुरू होकर मुस्लिम बाहुल्य मोहल्ले में पहुंची तो मुस्लिम भाइयों ने बैण्ड बाजे तथा पुष्प वर्षा से यात्रा का स्वागत किया और चुनरी भेंट की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने एकात्म यात्रा में जिले भर में हुई विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये। समारोह में प्रसिद्ध गायक सुरेश वाडकर ने सुमधुर भजनों से समा बांधा। श्रोता देर तक उनके भजनों पर झूमते रहे। समारोह में विश्व के एकमात्र संस्कृत बैंड ध्रुवा ने डाक्टर संजय द्विवेदी के मार्गदर्शन में शानदार प्रस्तुति दी। उन्होंने नर्मदाष्टक तथा शंकराचार्य के विभिन्न स्त्रोंतों का मधुर गायन प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने समारोह में मंचासीन संतों तथा धर्माचार्यों का शाल-श्रीफल से सम्मान कर सपत्नीक आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान कन्या पूजन कर बेटियों का सम्मान किया, पादुका एवं ध्वज पूजन भी किया। समारोह में स्वामी ज्योतिर्मय आनंद, गोपालदास सच्चा बाबा, जगतगुरू रामललाचार्य, राजगुरू प्रपन्नाचार्य, सनकादिक महाराज, विजय शंकर ब्रम्हचारी पचमठा, स्वामी केशवानंद सहित धर्माचार्य, खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री शिव चौबे, पिछड़ा वर्ग अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम के अध्यक्ष श्री प्रदीप पटेल, कर्मकार मंडल के अध्यक्ष श्री सुल्तान सिंह शेखावत, विन्ध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुभाष सिंह, सांसद श्री जनार्दन मिश्र, महापौर सुश्री ममता गुप्ता, पूर्व मंत्री श्री पुष्पराज सिंह, विधायक सिरमौर श्री दिव्यराज सिंह, श्री विद्याप्रकाश श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव संस्कृति श्री मनोज श्रीवास्तव तथा हजारों श्रद्धालु एवं आमजन उपस्थित रहे


aaआदि महोत्सव राष्टीय जनजातीय उत्सव का भोपाल हाट में आयोजन -दिनांक 19 -31 दिसंबर-2017


18 December 2017

जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन कार्येरत संस्था भारतीय जन जातीय सहकारी विपणन विकास संघ (ट्रायफेड) द्रारा भोपालहाट में आदिमहोत्सव के नाम से राष्टीय जनजातीय उत्सव का आयोजन किया जा रहा है | इस उत्सव का उत्घाटन म.प्र.शासन के जल संसाधन विकास व जन संपर्क मंत्री श्री नरोत्तम मिश्रा के द्रारा दिंनाक 19.12.2017 को शाम 5:०० बजे किया जायेगा| इस उत्सव की अध्यक्षता म.प्र. शासन के सहकारिता राज्य मंत्री श्री विश्वास सारंग करेंगे| ट्रायफेड के बोर्ड के डायरेक्टर श्री पटेल व श्री यशवंत सिंह दरबार भी इस मोंके पर उपस्थिक रहेंगे| ये उत्सव दिंनाक 31 दिसंबर तक चलेगा |ये उत्सव आदिवासी हस्तकला,संस्कृति,खान-पान और हस्तशिल्प व्यापार को प्रदर्शित करेगा| यहाँ पर मुख्य रूप से विभिन्न प्रकार की आदिवासी हस्त्कलाओ,पेन्टिंग्स ज्वेलरी व विभिन्न प्रकार की टेक्सटेल आईटस की प्रदशनी व बिक्री की जाएगी | इस उत्सव में 28 राज्यों के 150 आदिवासी कलाकार 65 दुकानों में अपनी उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे |इस मेले का मुख्य आकषर्ण विभिन्न प्रकार के जन जातीय व्यंजन होंगे जो की विभिन्न राज्यों के जनजातिय रसोईयो द्रारा बनाये जायेंगे| उपरोक्त के अलावा इस मेले में जनजातीय नृत्य व संगीत का आयोजन भी प्रतिदिन शाम को 6.00 बजे से 8.00 बजे तक किया जायेगा |राष्टीय महत्व के नगद रहित कारोबार को बढावा देने के लिये इस मेले में पहली बार डेबिट/क्रेडिट कार्ड द्रारा भुगतान स्वीकार किया जायेगा |


aaएकात्म यात्रा सामाजिक सरोकारों से जुड़ा सांस्कृतिक अभियान : मुख्यमंत्री श्री चौहान


14 December 2017

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि एकात्म यात्रा सामाजिक सरोकारों से जुड़ा सांस्कृतिक अभियान है। यात्रा के दौरान आगामी 19 दिसम्बर से 22 जनवरी तक सामाजिक समरसता का संदेश दिया जायेगा। इस अभियान में बेटी बचाओ और महिला सुरक्षा को भी जोड़ा गया है। यात्रा के दौरान बलात्कारी को फांसी की सजा का कानून लागू कराने के लिए हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से एकात्म यात्रा की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी यात्रा को सर्वव्यापी बनाने के लिए समाज के हर वर्ग को इससे जोड़ें। इस अद्वितीय और अदभूत अभियान का नेत्तृव संत गण करेंगे। आदि शंकराचार्य ने भारत को सांस्कृतिक रूप से एक किया था। उन्होंने अद्वेत दर्शन दिया और देश की चारों दिशाओं में चार धामों की स्थापना की। ओंकारेश्वर में उनकी विशाल प्रतिमा स्थापित की जायेगी। एकात्म यात्रा के दौरान प्रदेश की प्रत्येक पंचायत और नगरों के वार्डो से धातु के कलश में मिट्टी एकत्रित की जायेगी जिसका उपयोग प्रतिमा के आधार निर्माण में किया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य समाज को एकात्म करना है। प्रदेश के उज्जैन, ओंकारेश्वर, पचमठा और अमरकंटक से यह यात्रा निकलेगी । यात्रा के दौरान जनसंवाद के कार्यक्रम होंगे। इस दौरान स्थानीय भजन मंडलिया प्रस्तुति देंगी। संकल्प पत्र का वाचन किया जायेगा। हर जिले में दो मुख्य जनसंवाद के कार्यक्रम होंगे। संभाग मुख्यालय पर आदि शंकराचार्य स्त्रोत का समूह गायन होगा। इसके अलावा चित्रकला, निबंध और श्‍लोक गायन प्रतियोगिता भी होगी। जनअभियान परिषद यात्रा का समन्वय करेगी। संत गण, समाजसेवी, बुदिजीवी सहित समाज के हर वर्ग को इससे जोड़ा जायेगा। आगामी 22 जनवरी को ओंकारेश्वर में पूरे प्रदेश की सहभागिता से प्रतिमा स्थापना का कार्यक्रम आयोजित होगा। यह यात्रा प्रदेश में सामाजिक समरसता और एकता का जन-जागरण अभियान है। इसके माध्यम से संस्कार देने की प्राचीन परम्परा को पुनर्जीवित किया जा रहा है। बताया गया है कि यात्रा के साथ युवा बैंड भी रहेगा।
उड़द में भावांतर योजना का लाभ 22 दिसम्बर तक मिलेगा
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये उड़द में भावांतर भुगतान योजना का लाभ 22 दिसम्बर तक देने के निर्देश दिए। उन्होंने कलेक्टरों से कहा कि भावांतर भुगतान योजना में गरीब और कम उत्पादन वाले किसान भी उनकी फसल का विक्रय कर सकें, इसकी सतत् निगरानी की जाये, उनको यथा सम्भव सहयोग दिया जाये। उन्होंने कहा कि कोई भी किसान योजना के लाभ से वंचित नहीं रहे, यह सुनिश्चित किया जाये। श्री चौहान ने बताया कि नवम्बर माह के दौरान इस योजना में उपज का विक्रय करने वाले किसानों की भावांतर की राशि 23 दिसम्बर से उनके बैंक खातों में जमा करने की कारवाई शुरू हो जायेगी। उन्होंने कहा कि भावांतर की सभी भ्रांतियां खत्म हो गई हैं, किसान योजना से प्रसन्न है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि भावांतर की राशि का वितरण समारोहपूर्वक किया जाये।
नर्मदा जयंती 24 जनवरी को मनेगी
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि 24 जनवरी को नर्मदा जयंती दिवस पर नर्मदा सेवा यात्रा के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए समाज और नर्मदा सेवा समितियों को प्रेरित करने के कार्यक्रमों का आयोजन किया जायें। उन्होंने वृक्षारोपण कार्यक्रम की सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा कि 24 जिलों में वृक्षारोपण की जीवितता का प्रतिशत 92 रहा है। यह उल्लेखनीय सफलता है। उन्होंने फलदार वृक्षों का रोपण करने वाले कृषकों को फरवरी माह में राहत राशि 20 हजार रूपये उपलब्ध करवाने के लिए कहा। उन्होंने नर्मदा घाटों के सौंदर्यीकरण और स्वच्छता संबंधी कार्यों पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत बताई। वीडियो कांन्फ्रेंस के दौरान यात्रा के संबध में सुझाव और तैयारियों की जानकारी दी गई। इस अवसर पर राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री शिव चौबे, जन-अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री प्रदीप पाण्डे, मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


aaसंस्कृति राज्य मंत्री श्री पटवा ने नॉलेज कलेण्डर को सराहा


14 December 2017

संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सुरेन्द्र पटवा ने वर्ष 2018 के नॉलेज कलेण्डर की परिकल्पना को सराहा है। कलेण्डर के प्रबंधक श्री राजीव जैन ने श्री पटवा को नॉलेज कलेण्डर की प्रति भेंट की। श्री पटवा ने कहा कि इस अनूठे प्रयोग ने कलेण्डर को देखने का नजरिया बदला है। नॉलेज कलेण्डर का यह दूसरा साल है। वर्ष 2017 के कलेण्डर में हुए प्रयोग की सर्वत्र सराहना हुई है। वर्ष 2018 का कलेण्डर अधिक पठनीय, संग्रहणीय और आकर्षक भी है


aaभारत की संस्कृति अनुपम है : राज्यपाल प्रो. सोलंकी


12 December 2017

हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा है कि किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी संस्कृति में निहित है। भारत की संस्कृति अनुपम है। इस संस्कृति में अन्याय के ऊपर न्याय और अधर्म के ऊपर धर्म के मूल्य संस्थापित हैं। राज्यपाल प्रो. सोलंकी आज यहाँ मानस भवन में वर्ष 2015 एवं 2016 के अखिल भारतीय एवं प्रादेशिक पुरस्कारों से रचनाकारों को अलंकृत कर रहे थे। राज्यपाल श्री सोलंकी ने इस अवसर पर 'समारोह चित्रावली'' का लोकार्पण भी किया। राज्यपाल ने संस्कृति विभाग को इस प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन के लिये बधाई दी। संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सुरेन्द्र पटवा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
वर्ष 2015 के लिये अलंकृत रचनाकार
अखिल भारतीय पुरस्कार से रचनाकार डॉ. लहरी सिंह (सीधी) को पं. माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार (निबंध), सुश्री सुषमा मुनीन्द्र (सतना) गजानन माधव मुक्तिबोध पुरस्कार (कहानी) डॉ. हरि जोशी (भोपाल) वीरसिंह देव पुरस्कार (उपन्यास), डॉ. साधना बलवटे (भोपाल) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल पुरस्कार (आलोचना) एवं डॉ. विद्या बिन्दु सिंह (लखनऊ) पं. भवानी प्रसाद मिश्र पुरस्कार (कविता) से सम्मानित किया गया। प्रादेशिक पुरस्कार से श्री मलय जैन (भोपाल) को पं. बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' पुरस्कार (उपन्यास), श्री चन्द्रभान राही (भोपाल) सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार (कहानी), डॉ. वीणा सिन्हा (भोपाल) श्रीकृष्ण सरल पुरस्कार (कविता), डॉ.कृष्ण गोपाल मिश्र (होशंगाबाद) आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी पुरस्कार (आलोचना), श्री शांतिलाल जैन (भोपाल) राजेन्द्र अनुराग पुरस्कार (व्यंग्य, ललित निबंधन, डायरी, संस्मरण आदि), सुश्री मधु शुक्ला (भोपाल) दुष्यन्त कुमार पुरस्कार (प्रदेश के लेखक की पहली कृति) एवं श्री नरेन्द्र श्रीवास्तव (गाडरवारा) को जहूर बख्श पुरस्कार (बाल साहित्य) अलंकृत किये गये।
वर्ष 2016 के लिये अलंकृत रचनाकार
अखिल भारतीय पुरस्कार से रचनाकार डॉ. सुरेश मिश्र (भोपाल) को पं. माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार (निबंध), डॉ. अमिता दुबे (लखनऊ) गजानन माधव मुक्तिबोध पुरस्कार (कहानी), श्री गुणसागर सत्यार्थी (टीकमगढ़) वीरसिंह देव पुरस्कार (उपन्यास), श्री भगवंतराव दुबे (जयपुर) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल पुरस्कार (आलोचना) एवं श्रीमती अनीता सक्सेना (भोपाल) को पं. भवानी प्रसाद मिश्र पुरस्कार (कविता) से सम्मानित किया गया। वर्ष 2016 के प्रादेशिक पुरस्कार से सम्मानित रचनाकार हैं:- श्री जगदीश जोशीला (खरगौन) को पं. बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' पुरस्कार (उपन्यास), डॉ. अनीता सिंह चौहान, भोपाल सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार (कहानी), श्री संत कुमार मालवीय 'संत' (भोपाल) श्रीकृष्ण सरल पुरस्कार (कविता), डॉ. बहादुर सिंह परमार (छतरपुर) आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी पुरस्कार (आलोचना), डॉ. पुरुषोत्तम चक्रवर्ती (भोपाल) हरिकृष्ण प्रेमी पुरस्कार (नाटक), श्री विजयमोहन तिवारी (भोपाल) राजेन्द्र अनुरागी पुरस्कार (व्यंग्य, ललित निबंध, डायरी, संस्मरण आदि), श्रीमती शीला मिश्रा (भोपाल) दुष्यन्त कुमार पुरस्कार (प्रदेश के लेखक की पहली कृति), श्री देवेन्द्र सिह 'दाऊ' (भिण्ड) ईसुरी पुरस्कार (लोक भाषा विषयक) एवं डॉ. कैलाश गुप्ता 'सुमन' (मुरैना) को जहूर बख्श पुरस्कार (बाल साहित्य) से नवाजा गया।
वर्ष 2017 से पुरस्कार राशि में वृद्धि
संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सुरेन्द्र पटवा ने इस अवसर पर घोषणा की कि वर्ष 2017 से मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के अखिल भारतीय पुरस्कार में दी जाने वाली राशि 51 हजार के स्थान पर एक लाख रुपये और प्रादेशिक पुरस्कार में दी जाने वाली 31 हजार के स्थान पर 51 हजार रुपये होगी। साथ ही संस्कृति विभाग द्वारा लोकभाषा के 6 पुरस्कार स्थापित करने की घोषणा भी की गई। प्रमुख सचिव संस्कृति श्री मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि देश में मध्यप्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ विभिन्न प्रकार के सर्वाधिक 81 पुरस्कार दिये जाते हैं। श्री श्रीवास्तव ने पुरस्कारों की संख्या और कार्यक्षेत्र को और बढ़ाने की आवश्यकता बताई। अलंकरण समारोह के प्रारंभ में म.प्र. साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. उमेश कुमार सिंह ने अकादमी के क्रिया-कलापों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर संस्कृति संचालक श्री अक्षय कुमार सिंह तथा बड़ी संख्या में कला-प्रेमी और साहित्यकार मौजूद थे।


aaश्रेष्ठ कृतियों के रचनाकारों का अलंकरण समारोह 12 दिसम्बर को


7 December 2017

श्रेष्ठ कृतियों के रचनाकारों का अलंकरण समारोह 12 दिसम्बर को शाम 5 बजे मानस भवन श्यामला हिल्स भोपाल में होगा। हरियाणा राज्य के राज्यपाल श्री कप्तान सिंह सोलंकी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सुरेन्द्र पटवा करेंगे। प्रमुख सचिव, संस्कृति श्री मनोज श्रीवास्तव सारस्वत अतिथि होंगे। साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. उमेश कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि अलंकरण समारोह में वर्ष 2015 एवं 2016 के अलंकृत रचनाकारों को अखिल भारतीय पुरस्कार एवं प्रादेशिक पुरस्कार से नवाजा जाएगा।
2015 के अलंकृत रचनाकार
अखिल भारतीय पुरस्कार से सम्मानित होने वाले रचनाकार डॉ. लहरी सिंह (सीधी) को पं. माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार (निबंध), सुश्री सुषमा मुनीन्द्र (सतना) गजानन माधव मुक्तिबोध पुरस्कार (कहानी) डॉ. हरि जोशी (भोपाल) वीरसिंह देव पुरस्कार (उपन्यास), डॉ. साधना बलवटे (भोपाल) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल पुरस्कार (आलोचना) एवं डॉ. विद्या विन्दु सिंह (लखनऊ) पं. भवानी प्रसाद मिश्र पुरस्कार (कविता) से सम्मानित किया जाएगा। प्रादेशिक पुरस्कार श्री मलय जैन (भोपाल) को पं. बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' पुरस्कार (उपन्यास), श्री चन्द्रभान राही (भोपाल) सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार (कहानी), डॉ. वीणा सिन्हा (भोपाल) श्रीकृष्ण सरल पुरस्कार (कविता), डॉ.कृष्ण गोपाल मिश्र (होशंगाबाद) आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी पुरस्कार (आलोचना), श्री शांतिलाल जैन (भोपाल) राजेन्द्र अनुराग पुरस्कार (व्यंग्य, ललित निबंधन, डायरी, संस्मरण आदि), सुश्री मधु शुक्ला (भोपाल) दुष्यन्त कुमार पुरस्कार (प्रदेश के लेखक की पहली कृति) एवं श्री नरेन्द्र श्रीवास्तव (गाडरवारा) को जहूर बख्श पुरस्कार (बाल साहित्य) से सम्मानित किया जाएगा।
2016 के अलंकृत रचनाकार
अखिल भारतीय पुरस्कार से रचनाकार डॉ. सुरेश मिश्र (भोपाल) को पं. माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार (निबंध), डॉ. अमिता दुबे (लखनऊ) गजानन माधव मुक्तिबोध पुरस्कार (कहानी), श्री गुणसागर सत्यार्थी (टीकमगढ़) वीरसिंह देव पुरस्कार (उपन्यास), श्री भगवंतराव दुबे (जयपुर) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल पुरस्कार (आलोचना) एवं श्रीमती अनीता सक्सेना (भोपाल) को पं. भवानी प्रसाद मिश्र पुरस्कार (कविता) से सम्मानित किया जाएगा। वर्ष 2016 के प्रादेशिक पुरस्कार से सम्मानित होने वाले रचनाकार हैं:- श्री जगदीश जोशीला (खरगौन) को पं. बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' पुरस्कार (उपन्यास), डॉ. अनीता सिंह चौहान, भोपाल सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार (कहानी), श्री संत कुमार मालवीय 'संत' (भोपाल) श्रीकृष्ण सरल पुरस्कार (कविता), डॉ. बहादुर सिंह परमार (छतरपुर) आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी पुरस्कार (आलोचना), डॉ. पुरुषोत्तम चक्रवर्ती (भोपाल) हरिकृष्ण प्रेमी पुरस्कार (नाटक), श्री विजयमोहन तिवारी (भोपाल) राजेन्द्र अनुरागी पुरस्कार (व्यंग्य, ललित निबंध, डायरी, संस्मरण आदि), श्रीमती शीला मिश्रा (भोपाल) दुष्यन्त कुमार पुरस्कार (प्रदेश के लेखक की पहली कृति), श्री देवेन्द्र सिह 'दाऊ' (भिण्ड) ईसुरी पुरस्कार (लोक भाषा विषयक) एवं डॉ. कैलाश गुप्ता 'सुमन' (मुरैना) को जहूर बख्श पुरस्कार (बाल साहित्य) से नवाजा जाएगा।


aaइस वर्ष राष्ट्रीय तानसेन सम्मान से अलंकृत होंगे पंडित कशालकर


6 December 2017

शास्त्रीय संगीत के सुप्रतिष्ठित गायक पंडित उल्लास कशालकर को मध्यप्रदेश शासन का वर्ष 2017 का राष्ट्रीय तानसेन सम्मान प्रदान किया जायेगा। हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में स्थापित इस सम्मान के अंतर्गत दो लाख रुपये की आयकर-मुक्त राशि, सम्मान पट्टिका, शॉल-श्रीफल प्रदान किया जाता है। पंडित उल्हास कशालकर को 22 दिसम्बर को ग्वालियर में प्रतिष्ठित तानसेन संगीत समारोह में इस सम्मान से विभूषित किया जायेगा। पंडित उल्हास कशालकर को सम्मान से विभूषित करने का निर्णय हाल में चयन समिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। समिति में शास्त्रीय गायक पंडित सत्यजीत देशपाण्डे, पखावज वादक पंडित डालचन्द शर्मा, गिटार वादिका डॉ. कमला शंकर, संगीत समीक्षक मंजरी सिन्हा एवं रवीन्द्र मिश्र शामिल थे। पंडित उल्हास कशालकर वर्तमान में पुणे में निवास करते हैं। वे घरानेदार संगीत परम्परा के निष्णात गायक हैं। उनका जन्म संगीत को समर्पित घराने में हुआ। उनके पिता पंडित एन.डी. कशालकर जाने-माने संगीतज्ञ थे एवं वकालत उनका पेशा था। उनके ही सान्निध्य में उल्हास कशालकर ने संगीत का संस्कार पाया। इन्हें पंडित राजाभाऊ कोगजे एवं प्रोफेसर प्रभाकर राव खर्डनवडीस का मार्गदर्शन भी मिला। पंडित उल्हास कशालकर ने संगीत के क्षेत्र में अपनी अथक साधना एवं सर्जनात्मक परिश्रम से बड़ी ऊँचाई अर्जित की है। देश-विदेश में इनके गायन की उत्कृष्ट सभाएँ हुई हैं। इनकी सुदीर्घ शिष्य परम्परा है। पंडित कशालकर पद्मश्री, संगीत नाटक अकादमी सम्मान, बसवराज राजगुरु पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं।


aaतीर्थ यात्रियों को प्रमुख तीर्थ के साथ निकटवर्ती तीर्थ के दर्शन भी होंगे


30 November 2017

खेल एवं युवा कल्याण, धर्मस्व एवं धार्मिक न्यास विभाग की परामर्शदात्री समिति की बैठक में सदस्यों ने तीर्थ यात्रियों को प्रमुख तीर्थ के साथ निकटवर्ती तीथों के दर्शन कराने के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि तीर्थ यात्रियों की सूची संबंधित क्षेत्र के विधायक को उपलब्ध करवाना भी सुनिश्चित करें। खेल एवं युवा कल्याण, धर्मस्व एवं धार्मिक न्यास मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ने बैठक की अध्यक्षता की। समिति के सदस्य विधायक श्री दिव्यराज सिंह, श्री दिलीप सिंह परिहार तथा पंडित आशीष गोविन्द शर्मा बैठक में मौजूद थे। श्रीमती सिंधिया ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशानुसार तीर्थ यात्राओं के रूट में प्रमुख तीर्थ के साथ निकटवर्ती तीर्थों को भी संयोजित किया गया है। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना में रामेश्वरम्-मदुरई (सात दिवस), तिरूपति-श्री कालहस्ती (सात दिवस), द्वारका-सोमनाथ (सात दिवस), पुरी-गंगासागर (आठ दिवस), हरिद्धार-ऋषिकेश- अमृतसर- वेष्णोदेवी (सात दिवस) तथा काशी-गया (आठ दिवस) का पैकज बनाकर यात्राओं का आयोजन किया जायेगा। धर्मस्व मंत्री ने बताया कि योजना में प्रारंभिक स्टेशन पर यात्रियों के स्वागत के लिए फूल माला, तिलक एवं स्वागत बैंड की व्यवस्था भी की जा रही है। इसके अतिरिक्त यात्रा के दौरान लूडो, सॉप-सीढी, कैरेम एवं ढोलक मंजिरा आदि भी यात्रियों के मनोरंजन के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। बैठक में सदस्यों ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग के विधायक कप प्रतियोगिता में उस क्षेत्र के प्रचलित खेलों को प्राथमिकता दिए जाने की अनुशंसा की।


aaश्री महाकाल मंदिर में होगा शैव महोत्सव : पूजन एवं परम्पराओं पर होगा वैचारिक मंथन


29 November 2017

द्वादश ज्योतिर्लिंग सम्मेलन शैव महोत्सव के रूप में 5 से 7 जनवरी 2018 तक श्री महाकाल मंदिर उज्जैन में मनाया जावेगा। यह आयोजन भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त तत्वावधान में उज्जैन में होगा। शैव महोत्सव के प्रथम दिन भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। महोत्सव में भारत के वैदिक विद्वान को वैदिक अलंकरण सम्मान दिया जाएगा। सभी मंदिरों के अधिदैविक, अधिभैतिक एवं आध्यात्मिक महात्मय, पूजन एवं परम्पराओं पर चर्चा की जाएगी। इस दौरान विभिन्न सत्रों में कर्मकाण्ड, वेद-वेदांग, सामाजिक समरसता आदि विषयों पर संगोष्ठी आयोजित कर मंथन किया जाएगा। शैव महोत्सव का उद्देश्य एक ऐसा मंच तैयार करना है, जिसके माध्यम से बारह ज्योतिर्लिंगों के विषय में किसी भी स्थान पर कोई चर्चा होती है, तो धार्मिक एवं राष्ट्र उत्थान के महत्व को ध्यान में रखते हुए सभी एक साथ उस विषय पर सहमति दे सकें। महोत्सव में प्राचीन परम्पराओं तथा पद्धतियों एवं सामाजिक समरसता का ध्यान रखते हुए जातिगत भेद दूर करने का संदेश दिया जाएगा। महोत्सव में धर्म, दर्शन, कर्मकाण्ड, प्रबन्धन, पूजा-पद्धति, उपासना, परम्परा आदि का आदान-प्रदान भी होगा। बारह ज्योतिर्लिंग के सम्मेलन में शैव के अतिरिक्त अन्य मंदिरों श्री तिरूपति बालाजी, श्री वैष्णव देवी, पद्मनाभ मंदिर, द्वारका, पुरी आदि के पुजारी एवं प्रबंधन अधिकारियों के अतिरिक्त आध्यात्मिक एवं सामाजिक संगठन के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाएगा। मंदिर प्रबन्ध समिति द्वारा सभी मंदिरों की अनादिकाल से चली आ रही पूजा-पद्धति, उत्सवों, परम्पराओं का संग्रह कर एक पुस्तक का प्रकाशन भी होगा। श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति द्वारा शैव महोत्सव के सफल संचालन के लिए 17 उप-समितियां बनायी गई हैं। देश के बारह ज्योर्तिलिंग देश के बारह ज्योर्तिलिंग में श्री सोमनाथ मंदिर सौराष्ट्र, श्री मल्लिकार्जुन मंदिर, श्री महाकालेश्वर मंदिर, श्री ओंकारेश्वर मंदिर, श्री वैद्यनाथ मंदिर, श्री भीमाशंकर मंदिर, श्री रामेश्वरम् मंदिर, श्री नागेश्वर मंदिर, श्री विश्वनाथ मंदिर, श्री त्रयंम्बकेश्वर मंदिर, श्री केदारनाथ मंदिर और श्री घुश्मेश्वर मंदिर शामिल है।


aaभोपाल में दो दिवसीय राष्ट्रीय ज्योतिष कार्यशाला


28 November 2017

भोपाल में 28 नवम्बर से दो दिवसीय राष्ट्रीय ज्योतिष कार्यशाला शुरू हो रही है। स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह कार्यशाला का शुभारंभ इस दिन प्रात: 11.30 बजे करेंगे। कार्यशाला बागसेवनिया स्थित राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान मानित विश्वविद्यालय में आयोजित की जा रही है। कार्यशाला में ज्योतिष शास्त्र की वैज्ञानिकता एवं वर्तमान समय में प्रासंगिकता विषय पर परिचर्चा में राष्ट्रीय स्तर के संस्कृत एवं ज्योतिष के प्रकाण्ड विद्ववान भाग लेंगे। कार्यशाला में मुख्य रूप से व्यक्ति व समाज पर पड़ने वाले ग्रहों के प्रभाव, आजीविका निर्धारण में ज्योतिष की भूमिका, रोगों के निदान एवं समाधान में ज्योतिष शास्त्र की भूमिका और प्राकृतिक आपदाओं के फलादेश में ज्योतिष की भूमिका पर विशेष रूप से चर्चा होगी। कार्यशाला का समापन 29 नवम्बर को होगा। समापन समारोह में स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह और स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी मौजूद रहेंगे। समापन समारोह शाम 4 बजे होगा। भोपाल का राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान देश के 12 संस्थानों में से एक है, जहां पिछले 7 सालों से भोपाल के अक्षांश एवं देशांतर पर आधारित श्री भोजराज पंचांग तथा ज्योतिष मीमांसा शोध पत्रिका का प्रकाशन, अनुसंधान एवं प्रायोगिक ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए ज्योतिष प्रयोगशाला की स्थापना, ज्योतिष परिचय पाठ्यक्रम एवं वस्तु परिचय पाठ्यक्रम के साथ एक वर्षीय वास्तुशास्त्र डिप्लोमा का संचालन किया जा रहा है। महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान का उद्देश्य संस्कृत भाषा और साहित्य का ज्ञान, ज्योतिष, वास्तु, कर्मकाण्ड आदि के अध्ययन की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ रोजगारोन्मुखि पाठ्यक्रम का संचालन करना है


भोपाल में 28-29 नवम्बर को राष्ट्रीय ज्योतिष कार्यशाला


25 November 2017

महर्षि पतंजलि संस्थान और राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान द्वारा 28 एवं 29 नवम्बर, 2017 को भोपाल में दो दिवसीय राष्ट्रीय ज्योतिष कार्यशाला आयोजित की जा रही है। 'ज्योतिष शास्त्र की वैज्ञानिकता एवं वर्तमान समय में प्रासंगिकता' विषय पर होने वाली इस कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर के संस्कृत एवं ज्योतिष के प्रकाण्ड विद्वान भाग लेंगे। स्कूल शिक्षा मंत्री कुँवर विजय शाह 28 नवम्बर को प्रात: 10.30 बजे बागसेवनिया स्थित राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान मानित विश्वविद्यालय में कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे। महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान का संचालन राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग और राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान का संचालन केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा किया जाता है। भोपाल का राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान देश के 12 संस्थानों में से एक है, जहाँ पिछले 7 सालों से भोपाल के अक्षांश एवं देशांतर पर आधारित श्री भोजराज पंचांग तथा ज्योतिष मीमांसा शोध पत्रिका का प्रकाशन, अनुसंधान एवं प्रायोगिक ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए ज्योतिष प्रयोगशाला की स्थापना, ज्योतिष परिचय पाठ्यक्रम एवं वास्तु परिचय पाठ्यक्रम के साथ एक वर्षीय वास्तुशास्त्र डिप्लोमा का संचालन किया जा रहा है। महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान का उद्देश्य संस्कृत भाषा और साहित्य का ज्ञान, ज्योतिष, वास्तु, कर्मकाण्ड आदि के अध्ययन की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम का संचालन करना है।


aaचीन में मध्यप्रदेश के हस्तशिल्पी ने किया बाग प्रिंट कला का प्रदर्शन


20 November 2017

विश्व भर में अपनी पहचान बना चुकी मध्यप्रदेश की बाग हस्तशिल्प कला ने चीन में भी लोकप्रियता हासिल की है। भारत की ओर से चीन में दूसरी बार बाग प्रिंट का प्रदर्शन किया गया है। हाल ही में मध्यप्रदेश के बाग प्रिंट में राष्ट्रीय एवं पुरस्कार विजेता मोहम्मद बिलाल खत्री ने ‘‘चाइना (गुझाओ) में अन्तर्राष्ट्रीय फॉक कल्चर टूरिज्म प्रोडक्ट एक्सपो-2017 में परम्परागत आदिवासी बाग प्रिन्ट हस्तकला का जीवंत प्रदर्शन किया। चीन के गुझाओ प्रांत के गुयांग शहर में हुई एक्सपो में विश्व के 50 देशों ने हिस्सा लिया। बाग प्रिन्टर्स श्री खत्री ने चीन की भौगोलिक एंव सांस्कृतिक परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए आधुनिक एंव परम्परागत परिधान डिजाइन किए थे। इन परिधानों को चीन वासियो को उनके आधुनिक परिधानों के साथ भारतीय कलेवर की परम्परागत रिमिक्स के साथ प्रस्तुत किया गया था। बाग प्रिन्ट कृतियों को चीन वासियो ने पसंद किया। फॉक एक्सपो की डायरेक्टर सुश्री सन युकि ने बाग प्रिन्ट की सराहना करते हुए बाग प्रिन्ट के कलाकारों को आगे और भी मौके दिए जाने की बात कही। मोहम्मद बिलाल खत्री चीन के दोंगयोंग में वर्ल्ड क्राफ्ट्स काउंसिल की 50 वी गोल्डन जुबली सेलीब्रेशन समिट एंव एक्जीबिशन-2014 मे भी यादगार प्रदर्शन कर चुके हैं। साथ ही रूस के कालुगा गॉव मे तीसरे अर्न्तराष्ट्रीय इथनोमिर एस्पो 2014, रूस की मॉस्को स्टेट युनिवर्सिटी फॉर द हुमनिटीज के फाईन आर्ट के स्टूडेंट्स को बाग प्रिन्ट कला की मास्टर क्लासेस देकर प्रशिक्षण दिया। वर्ष 2014, मॉस्को में इन्डिया शो 2014, रूस की सेन्ट पीटर्सबर्ग स्टेट अकादमी ऑफ आर्ट एंड डिजाईन कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी मे बाग प्रिन्ट हस्तकला की मास्टर क्लासेस 2014, बेहरीन फेस्टीवल ऑफ इंडिया-2012, ईरान के इस्फ़हान मे समुर्घ इंटरनेशनल हैंडीक्राफ्ट्स एक्जीबिशन-2016 सहित देश के कई महानगरो मे भी अपनी कला का जीवंत प्रदर्शन कर चुके हैं।


aaइंदिरा गांधी सौहार्द्र और मिश्रीलाल गंगवाल सद्भावना पुरस्कार घोषित


20 November 2017

राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2012 के इंदिरा गांधी साम्प्रदायिक उपद्रव रोकथाम एवं सौहार्द्र पुरस्कार और भैया श्री मिश्रीलाल गंगवाल सद्भावना पुरस्कार की घोषणा कर दी गयी है। इंदिरा गांधी साम्प्रदायिक उपद्रव रोकथाम एवं सौहार्द्र पुरस्कार के लिए श्री कवीन्द्र कियावत तत्कालीन कलेक्टर खण्डवा और श्री हरिनाराणचारी मिश्रा तत्कालीन पुलिस अधीक्षक खण्डवा का चयन किया गया है। प्रत्येक को 15-15 हजार रुपये और प्रशस्ति-पत्र से सम्मानित किया जाएगा। इसी प्रकार भैया श्री मिश्रीलाल गंगवाल सद्भावना पुरस्कार शुभम विकलांग एवं समाज-सेवा समिति और कादम्बिनी शिक्षा एवं समाज कल्याण सेवा समिति, भोपाल को दिया जाएगा। प्रत्येक को 50-50 हजार रुपये और प्रशस्ति-पत्र दिये जाएंगे। इस संबंध में पूर्व में जारी आदेश को निरस्त कर दिया गया है।


भारत भवन में बुरहानपुर उत्सव 20 से 22 नवम्‍बर को
Our Correspondent :19 November 2017

बुरहानपुर की भाषा, भूषा, भोजन सहित नृत्य, संगीत और लोक-कलाओं से राजधानी भोपाल के लोगों को रू-ब-रू करवाने के लिये संस्कृति विभाग द्वारा भारत भवन में 20 से 22 नवम्बर तक प्रतिदिन शाम 6:30 बजे बुरहानपुर उत्सव किया जा रहा है। उत्सव में नृत्य, संगीत, कवि सम्मेलन, मुशायरा जैसे कार्यक्रम किए जाएंगे। साथ ही बुरहानपुर के प्रसिद्ध व्यंजन भी रसास्वादन के लिये उपलब्ध होंगे। राज्य सरकार द्वारा पहली बार किसी जिले के प्रसिद्ध कलाकारों को एक साथ भारत भवन में कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। बुरहानपुर उत्सव में 20 नवम्बर को शहनाई वादन, शास्त्रीय गायन तथा नृत्य की प्रस्तुति होगी। दूसरे दिन 21 नवम्बर को कत्थक, गुजराती गरबा, ठिलिया पाटी के साथ ही बाँसुरी वादन, कीर्तन, भजन तथा आदिवासी नृत्य होंगे। अंतिम दिन 22 नवम्बर को कवि सम्मेलन तथा मुशायरा होगा। उत्सव में बुरहानपुर का प्रसिद्ध काँच तरंग, बंजारा नृत्य सहित हवेली संगीत, लावणी पर आधारित प्रस्तुतियां भी होंगी। उत्सव में आनंद मेला के अंतर्गत बुरहानपुरी व्यंजनों जैसे दरावा-चुड़वा, मावा जलेबी, देग वाले दाल-चावल, ज़र्दा (मीठे चावल), केला चिप्स, तुरखाटी सेंव, मसाला सेंव, प्याज के पत्ते के चावल, निमाड़ी दाल-बाटी, तली हुई उन्दीयू, वाल की सब्जी, दाल पकवान, कमल ककड़ी की सब्जी ठेसा, ज्वार की रोटी, भरित पूरी, छोटी सूरती, भाखड़ बड़ी आदि के स्टॉल भी लगाए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि बुरहानपुर में निमाड़-महाराष्ट्र की मिली-जुली संस्कृति विकसित हुई जिस पर गुजरात तथा वनवासी परम्पराओं का गहरा प्रभाव पड़ा। साथ ही राजस्थान, सिंध का असर भी यहाँ की जीवन-शैली और कला पर झलकता है। फारूकी और मुगल काल में मुशायरा, कव्वाली तथा अन्य कला अभिव्यक्तियों का चलन यहाँ रहा है जो आज भी बरकरार है। बुरहानपुर में सिखों के प्रथम गुरू नानक देव जी एवं दसवें गुरू श्री गोविन्द सिंह जी आ चुके हैं। गुरू दशमेश ने गुरूवाणी की कई रचनाएँ लिखी, उनके द्वारा कई रागों की उत्पत्ति की गई। यहाँ वैष्णव संप्रदाय के मंदिरों में हवेली संगीत और गुरूद्वारों में राग, जैन संप्रदाय के मंदिरों में भगवान महावीर पर लिखित रचनाएँ गायी जाती हैं। ऐसा शहर जहाँ विभिन्न पंथ समाजजनों द्वारा लोक गीत एवं संगीत और संस्कृति को सहेजा गया। प्रसिद्ध संगीतज्ञ श्री पुंडलिक विठ्ठल और मृदंगाचार्य श्री गोविंदराव बुरहानपुरकर का संबंध इस नगर से रहा। भारत रत्न पंडित श्री भीमसेन जोशी, श्री पुरणादास जी सहित गुलाम अली, अमीर खाँ साहब, अल्लारखा साहब आदि कलाकारों की कला और अदा को इस शहर की आबो-हवा ने सुना, समझा और अपनाया है।


मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना में अब तक सवा पाँच लाख से अधिक तीर्थ-यात्री लाभान्वित
Our Correspondent :3 November 2017

मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना में अब तक 5 लाख 26 हजार बुजुर्ग तीर्थ-यात्रियों को तीर्थ-दर्शन करवाये गये हैं। योजना में अब तक 526 ट्रेन संचालित की गई हैं। यह जानकारी आज यहाँ मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की गई समीक्षा में दी गई। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि गुरू गोविन्दसिंह जी के जन्म-स्थान पटना साहिब तथा श्रवण बेलगोला के लिये योजना की ट्रेन शीघ्र शुरू करें। बैठक में मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि इस वर्ष मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना में 200 ट्रेन संचालित की जायें। तीर्थ-यात्रियों के लिये ऐसे रूट बनाये जायें जिसमें वे एक से अधिक स्थानों का भ्रमण कर सकें। तीर्थ-स्थान के समीप स्थित ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण स्थल का भी भ्रमण करायें। यात्रियों को तीर्थ-स्थान के विषय में संक्षिप्त जानकारी भी दें। बैठक में बताया गया कि जारी वर्ष में योजना का लाभ दो लाख तीर्थ-यात्रियों को दिया जायेगा। योजना में पाँच वर्ष पूर्ण होने के बाद पहले यात्रा कर चुके यात्रियों को तीर्थ-यात्रा का एक अवसर और दिया जायेगा। बैठक में अपर मुख्य सचिव वित्त श्री ए.पी. श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व श्री मनोज श्रीवास्तव और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री एस.के. मिश्रा सहित संबंधित विभाग के अधिकारी उपस्थित थे


aaराष्ट्रीय लता मंगेशकर अलंकरण से गीत-संगीत क्षेत्र की तीन विभूतियाँ विभूषित


26 October 2017

वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया ने आज इंदौर में मध्यप्रदेश शासन के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान अलंकरण से सुप्रसिद्ध गायिका सुश्री ऊषा खन्ना को वर्ष 2012, सुप्रसिद्ध गायक श्री उदित नारायण को वर्ष 2015 और सुप्रसिद्ध संगीतकार श्री अनु मलिक को वर्ष 2016 के लिए सम्मानित किया। अलंकरण समारोह की अध्यक्षता पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सुरेन्द्र पटवा ने की। श्री मलैया ने इस अवसर पर कहा कि गीत-संगीत को बढ़ावा देने के लिए स्थापित इस पुरस्कार से अब तक 28 विभूतियों को सम्मानित किया जा चुका है। सम्मानित हस्तियों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए उन्होंने कहा कि यह अलंकरण समारोह हर वर्ष नियमित रूप से होना चाहिए। पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री श्री पटवा ने कहा कि प्रदेश में प्रतिभाओं को निखरने का अवसर देने के लिए प्रतिभा खोज प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। श्री उदित नारायण ने कहा कि लता मंगेशकर के नाम से सम्मान मिलना माँ सरस्वती का आशीर्वाद मिलने के बराबर है। श्री अनु मलिक ने कहा कि लता मंगेशकर जी के नाम से स्थापित पुरस्कार अपने-आप में सबसे बड़ा सम्मान है। सुश्री ऊषा खन्ना ने कहा कि लता मंगेशकर के नाम से पुरस्कार मिलना मेरे लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद है। महापौर श्रीमती मालिनी गौड़, विधायक श्री सुदर्शन गुप्ता, श्री रमेश मेंदोला और सुश्री ऊषा ठाकुर, इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री शंकर लालवानी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कविता पाटीदार, संभागायुक्त और आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री संजय दुबे और प्रमुख सचिव संस्कृति श्री मनोज श्रीवास्तव, भी मौजूद थे।
ख्यातिलब्ध कलाकार श्री सुदेश भोंसले ने दी रंगारंग प्रस्तुति-
अलंकरण समारोह में देश के जाने-माने गायक श्री सुदेश भोंसले ने अपने दल के साथ गीत-संगीत की सुमधुर प्रस्तुतियाँ देकर समाँ बाँधा। समारोह में बड़ी संख्या में कला एवं संगीत प्रेमी मौजूद थे।


संगीत उत्सव 21-22 अक्टूबर को भोपाल में होगा
Our Correspondent :18 October 2017

राजधानी भोपाल में दो दिवसीय 'हदय-दृश्यम' संगीत उत्सव का आयोजन 21 अक्टूबर से किया जा रहा है। इस संगीत समारोह में पहले दिन 21 अक्टूबर को शाम 5 बजे शौर्य स्मारक पर अमन एण्ड अयान बंगस और शाम 6 बजे गौहर महल में पंडित विश्व मोहन भट्ट का कार्यक्रम होगा। इसी दिन शाम 7 बजे भारत भवन में जोए अल्वेरश और अनुराधा पाल तथा रात 9 बजे इकबाल मैदान पर धारूव संगारी का कार्यक्रम होगा। प्रमुख सचिव संस्कृति श्री मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि संगीत उत्सव के दूसरे दिन 22 अक्टूबर की शाम 5 बजे शौर्य स्मारक पर शैफाली एण्ड परपल स्टूडियो की प्रस्तुति और शाम 6 बजे गौहर महल परिसर में ड्रम्स ऑफ इडिया के तहत उस्ताद फजल कुरैशी की प्रस्तुति होगी। इसी दिन शाम 7 बजे भारत भवन में शबीर खान एण्ड सबरास की प्रस्तुति और रात 9 बजे इकबाल मैदान पर भूपेन्द्रर एण्ड मिताली की प्रस्तुति होगी। संगीत के रसिकों के लिए प्रवेश नि:शुल्क रहेगा।


सामाजिक संस्था 'गांधी विचार मंच' ने अनूठे ढंग से गाँधी जयंती मनाई
Our Correspondent :2 October 2017

मुंबई। सामाजिक संस्था 'गांधी विचार मंच' द्वारा गाँधी जयंती के अवसर पर यानि २ अक्टूबर को एक कार्यक्रम का आयोजन मालाड (वेस्ट) में स्टेशन के सामने स्थित ऑफिस में किया था।संस्था 'गांधी विचार मंच' के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मनमोहन गुप्ता ने गाँधी जी के फोटो पर हारफूल चढाकर व् मिठाई बांटकर गाँधी जयंती मनाई। और इस अवसर पर गाँधी जी के ऊपर लिखी पुस्तक एम् एम् मिठाईवाला के सामने मुफ्त में जनता को वितरित किया गया। मनमोहनजी का मानना है कि इससे लोगों को गाँधीजी के बारे में और उनके विचारों के बारे में लोगों को सही जानकारी मिलेगी और जनता उनके बताये रास्ते पर चलकर देश को प्रगति के रास्ते पर लेकर जाएगी। सचमुच इससे ज्यादा अनूठे ढंग से गाँधी जयंती नहीं मनाई जा सकती है। लोग गाँधी जयंती और गाँधीजी के बारे थोड़ा बहुत जरूर जानते है लेकिन उनके बारे में और उनके विचारों के बारे में पूरी जानकारी बहुत कम लोगों को होगी। लेकिन मुफ्त में पुस्तक मिलने पर लोग उसे पढ़ेंगे और गाँधी जी के विचारों को सही ढंग से जानेंगे। इस अवसर पर सामाजिक संस्था 'गांधी विचार मंच' के सभी लोग व रितेश मेढ़िया, महेशभाई, जयप्रकाश पांडे इत्यादि उपस्थित होकर कार्यक्रम को शोभा को बढ़ाया।


१४ वां अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन राजस्थान में राकेश अचल शामिल होंगे
Our Correspondent :21 September 2017

ग्वालियर/राजस्थान में आगामी १ से १२ अक्टूबर तक आयोजित होने वाले १४ वे अंतर् राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में शामिल होने के लिए ग्वालियर के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यसेवी राकेश अचल ३० सितंबर को राजस्थान के लिए रवाना होंगे .ग्यारह दिन के इस सम्मेलन में देश भर के साहित्यकार शामिल हो रहे हैं. इस सम्मेलन के तहत राजस्थान के जयपुर,अजमेर,बीकानेर,माउन्ट आबू और उदयपुर में विभिन्न सत्रों का आयोजन किया जाएगा इस सम्मेलन में राजस्थान की ९ प्रमुख संस्थाएं भी शामिल होंगीं . सम्मेलन के समन्वयक श्री जयप्रकाश मानस के अनुसार सम्मेलन का उद्घाटन प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ शरद पगारे करेंगे .उन्होंने बताया की सम्मेलन के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार राकेश अचल अजमेर में गीत और गजल के सामर्थ्य तथा सरोकार पर अपना वक्तव्य देंगे .उल्लेखनीय है की इससे पहले ये सम्मेलन यूएई,चीन,कम्बोडिया,वियतनाम,थाईलैंड ,श्रीलंका,नेपाल और अन्य देशों में भी समपन्न हो चुके हैं .


सेंट्रल लाइब्रेरी में "हिन्दी उत्सव -2017"
Our Correspondent :13 September 2017

युवाओं में हिन्दी की समझ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शासकीय मौलाना आज़ाद केन्द्रीय पुस्तकालय भोपाल आगामी शुक्रवार और शनिवार को दो दिवसीय हिन्दी उत्सव का आयोजन करने का जा रहा है । इस उत्सव में शहर के सही लोगों के लिए ओपन तीन प्रतियोगिताओं का आयोजन किता जाएगा । इन प्रतियोगिताओं में बाग लेने के लिए कोई भी व्यक्ति लाइब्रेरी आ सकता है ।
कार्यक्रम का विवरण
आयोजन का नाम - हिन्दी उत्सव -2017
दिनांक - 15 एवं 16 सितंबर 2017
स्थान - सेंट्रल लाइब्रेरी भोपाल
तीन ओपन प्रतियोगिताएं
हिन्दी निबंध प्रतियोगिता
दिनांक - 15 सितंबर (शुक्रवार )
समय - सुबह 10 बजे
पुरुसकार - 6000/ - रुपये नगद
भाग लेने के लिए - सुबह 9.30 बजे लाइब्रेरी पहुँचें
हिन्दी क्विज़
दिनांक - 15 सितंबर 2017 (शुक्रवार )
समय - सुबह 11.30 बजे
पुरुस्कार - 6000/- रुपये नगद
भाग लेने के लिए - दो लोगों की टीम बनाकर सुबह 11 बजे तक सेंट्रल लाइब्रेरी पहुँचें
तात्कालिक भाषण
दिनांक - 16 सितंबर 2017 (शनिवार )
समय - सुबह 11 बजे
कितने लोग भाग ले सकते हैं - केवल 20
पुरुस्कार - 6000/- रुपये नगद
भाग लेने के लिए - सुबह 10 बजे लाइब्रेरी पहुँचकर सबसे पहले अपना नाम नोट करा दें
कुल नगद पुरुस्कार - रुपये 18000/-


छात्र जीवन में व्हाइटअप और फेसबुक से बचना चाहिए
Our Correspondent :1 September 2017


छात्र जीवन में व्हाइटअप और फेसबुक से बचना चाहिए- प्राचार्य छतरपुर -नौगांव (छतरपुर) वर्तमान समय में शिक्षा का कार्यक्षेत्र बहुत अत्यधिक बढ़ गया है प्रत्येक माता पिता अपनी संतान को उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए तन मन धन से मदद कर पुरुष आहत करते हैं लेकिन कुछ विद्यार्थी अपनी संस्कृति और संस्कारों को भूल कर गुमराह हो रहे हैं जिस कारण से विद्यार्थी अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं प्रत्येक विद्यार्थी को शिक्षा के पूर्व अपने लक्ष्य को क्या करना होगा लक्ष्य तय करने के बाद शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थी अपने उच्च शिखर तक पहुंचते हैं उपरोक्त विचार शासकीय पालीटेक्निक नौगांव में आयोजित भारतीय संस्कारों एवं स्वच्छ भारत अभियान आयोजन में नौगांव नगर निरीक्षक श्री विनायक शुक्ला ने कहा उन्होंने कहा कि वर्तमान में शिक्षण संस्थाओं में समाजसेवी संतोष गंगेले द्वारा इस प्रकार के आयोजन कर भारतीय संस्कृति के संस्कार को बचाने के लिए जो अलग जगह जा रही है उसकी सभी को सराहना करना चाहिए इस अवसर पर पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य श्री बृजेश नारायण सक्सेना ने कहा कि बच्चे एक कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं उन्हें संभाल लें और सजाने में अत्यधिक प्रयास करना पड़ता है वर्तमान समय में इंटरनेट के माध्यम से वर्तमान छात्र-छात्राएं इतिहास को अत्यधिक समय देकर शिक्षा के रास्ते से भटक रहे हैं इसलिए प्रत्येक छात्र छात्रा को जीवन में कम से कम अध्ययन करते समय ऐसे सोशल नेटवर्किंग से बचना चाहिए। इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि श्री धीरे से भरे ने बच्चों को प्रसन्न करते हुए कहा कि हमें भारत की संस्कृति और महापुरुषों के जीवन के बारे में ज्ञान होना आवश्यक है जब तक हमें अपने इतिहास का ज्ञान नहीं होगा हम शिक्षा की ओर नहीं भर सकते हैं इसलिए नैतिक शिक्षा और व्यवहारिक शिक्षा दोनों का समावेश जीवन में आवश्यक है कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रुप में पधारी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान लोगों की अध्यक्ष श्रीमती भारती साहू ने बच्चों को प्रेरणा देते हुए अपने से बड़ों का आदर भाव जीवन में समय की पाबंदी और संस्कारों को जीवन में अपनाने पर बल दिया कार्यक्रम के संयोजक संतोष गंगेले ने विचार रखते हुए बताया जब तक व्यक्ति अपनी कमियों का सुधार नहीं करेगा वह विकास नहीं कर सकता है प्रत्येक व्यक्ति को अपने अंदर बुरे विचारों का परित्याग करना होगा क्रोध को स्थान नहीं देना होगा तभी समाज का कार्य संभव है देश विकास के लिए सभी को सामाजिक समरसता के काम करना चाहिए कार्यक्रम का संचालन करते हुए श्री रितेश अग्रवाल ने बच्चों को बौद्धिक ज्ञान पर बल दिया इस अवसर पर संस्था के प्राध्यापक श्री आर के गोस्वामी एसके नागौर जे एस डाबर जी आदि व्याख्याताओं ने भी विचार रखे स्वच्छ भारत जन जागृति अभियान बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान पर विस्तार से विचार-विमर्श किए गए इस अवसर पर नौगांव प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री नन्हें राजा बुंदेला ने बच्चों को संबोधित किया तथा शिक्षा के अध्ययन के बारे में बताया कार्यक्रम के अंत में संस्था प्रमुख द्वारा अतिथियों आपके द्वारा संस्था के 21 छात्र छात्राओं को सम्मानित कर प्रोत्साहन दिया गया


दुष्यंत कुमार पांडुलिपि संग्रहालय में ओपन बुक्स ऑनलाइन की त्रैमासिक साहित्यिक संगोष्ठी
Our Correspondent :31 July 2017

दुष्यंत कुमार पांडुलिपि संग्रहालय के सभागार में वरिष्ठ साहित्यकार रामप्रकाश त्रिपाठी की अध्यक्षता में ओपनबुक्स ऑनलाईन डॉट कॉम की त्रैमासिक साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन संपन्न हुआ. विशिष्ट अतिथि ग़ज़लकार जहीर कुरेशी एवं जयप्रकाश त्रिपाठी उपस्थित रहें। बलराम धाकड़ ने ." आभासी संसार और वास्तविक संसार का साहित्य" विषय पर बीज वक्तव्य देते हुए आभासी और वास्तविक संसार के साहित्य को एक दूसरे का सम्पूरक बताया। जयप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि आभासी संसार मे साहित्य को उचित मार्गदर्शन आवश्यक है। रामप्रकाश त्रिपाठी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि आभासी संसार उत्तर आधुनिकता की देन है। जिन्हें छंद और शब्द की समझ नहीं है वह भी आभासी संसार के खुद को महाकवि मान लेते हैं। ओपन बुक्स ऑनलाइन का परिचय देते हुए कल्पना भट्ट ने कहा कि यह एक ऐसी साहित्यिक वेबसाइट हैं जो साहित्य की पाठशाला भी है और प्रकाशन भी। साहित्यिक पत्रिका कविकुम्भ की संपादिका रंजीता सिंह ने अपनी पत्रिका के विषय मे बताया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवि गीतकार अशोक निर्मल द्वारा किया गया। व्याख्यान के बाद काव्य पाठ हुआ।जहीर कुरेशी ने ग़ज़ल सुनाकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। मिथिलेश वामनकर ने किसान के जीवन पर आधारित ग़ज़ल सुनाई । इसके अतिरिक्त रंजीता सिंह, दिनेश प्रभात, ऋषि श्रृंगारी, ममता बाजपेयी, तिलकराज कपूर, हरिवल्लभ शर्मा, विमल कुमार शर्मा, दिनेश मालवीय, सीमा हरि शर्मा, शशि बंसल, हरिओम श्रीवास्तव, सीमा पाण्डे, अरविंद जैन, रक्षा दुबे, प्रतिभा पांडे, मोतीलाल आलम चन्द्र , अर्पणा शर्मा ने भी काव्य पाठ किया।


"मीट द ऑथर कार्यक्रम" कल
Our Correspondent :21 July 2017

स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी द्वारा क्लब लिटराटी के सहयोग से कल एक "मीट द ऑथर" कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। लखनऊ के प्रसिद्द उपन्यासकार,कवि व मोटिवेशनल स्पीकर चंद्रशेखर वर्मा इस कार्यक्रम में शहर के पाठकों से रूबरू होंगे। चंद्र शेखर वर्मा के दादाजी श्री भगवती चरण वर्मा भी हिंदी के जाने माने साहित्यकार रहे हैं। कार्यक्रम शाम 6 बजे स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में आयोजित होगा। सबके लिए ओपन इस कार्यक्रम में शहर का कोई भी पाठक भाग ले सकता है।
कार्यक्रम विवरण इस प्रकार है :-
कार्यक्रम का नाम - मीट द ऑथर कार्यक्रम
दिनांक - 22 जुलाई 2017 शनिवार
समय - शाम 6 बजे
स्थान - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी
आयोजक - क्लब लिटराटी
आमंत्रित लेखक - चंद्रशेखर वर्मा
लेखक द्वारा लिखी गयी पुस्तकें :-
एक मुट्ठी आसमान
क़दमों के लिए
You only live Once
Parenting the Parents
Corners of a straight line


नर्मदा नदी में खनन संक्रियाएँ निलंबित
Our Correspondent :22 May 2017

राज्य शासन के निर्णय के परिपालन में नर्मदा नदी के प्राकृतिक पर्यावरण के परिरक्षण और नर्मदा नदी से रेत के उत्खनन के वैज्ञानिक अध्ययन आदि कारणों से खनिज साधन विभाग द्वारा नर्मदा नदी पर स्थित रेत खदानों में खनन संक्रियाओं को आगामी आदेश तक तत्कालिक रूप से निलंबित किया गया है। इसमें मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम द्वारा नर्मदा नदी पर संचालित रेत खदाने भी शामिल है। यह आदेश अनूपपुर, डिण्डोरी, सिवनी, मण्डला, जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, हरदा, खण्डवा, देवास, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, धार, सीहोर और रायसेन कुल 16 जिलों पर लागू होगा। खनिज साधन विभाग द्वारा नर्मदा नदी की रेत खदानों के पट्टाधारी/ठेकेदारों को उनके स्वीकृत पट्टों/ठेकों को समय पूर्व समाप्त करने के नोटिस जारी किये गये हैं। राज्य शासन द्वारा रेत खनिज के ठेकेदारों को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिये 15 दिवस का समय दिया गया है।


राष्ट्रीय ख्यााति के अम्बिका प्रसाद दिव्य: पुरस्कार घोषित

22 March 2017
भोपाल। साठ महत्वयपूर्ण ग्रंथों के सर्जक एवं चार सौ चित्रों के चित्रकार स्व. अम्बिका प्रसाद दिव्य की स्मृति में, विगत उन्नीस वर्षो से दिये जा रहे दिव्य पुरस्कारों की घो‍षणा 16 मार्च, 2017 को दिव्य जी की, जन्म-जयन्तीू पर कोलार रोड, सांईनाथ नगर, सी-सेक्टर, भोपाल स्थित 'साहित्य सदन' में संयोजक श्री जगदीश किंजल्क द्वारा की गई ।
इस वर्ष साहित्य की सभी विधाओं में 122 पुस्त कें प्राप्त हुई थीं । उपन्यास विधा का दिव्य् पुरस्कार, श्रीमती राधा जनार्दन (पन्ना) को उनके उपन्यास 'द्वापर की नायिका', कहानी विधा के लिए श्रीमती नीता श्रीवास्ताव (महू) को उनके कहानी संग्रह 'अमृत दा ढाबा', काव्य विधा का दिव्य पुरस्कार श्रीमती श्रीति एवं श्री संदीप राशिनकर (इंदौर) को उनकी काव्य कृति 'कुछ मेरी, कुछ तुम्हारी', निबन्ध विधा का दिव्य पुरस्कार प्रो. वरूण कुमार तिवारी (वैशाली) को उनके निबन्ध संग्रह ''सृजन समीक्षा के अन्त'र्पाठ'',व्यंग्य् विधा का दिव्य पुरस्कार डॉ. रवि शर्मा मधुप (दिल्ली ) को उनकी कृति ''अंगूठा छाप हस्ता‍क्षर'' एवं बाल साहित्यु के लिए श्री घमंडीलाल अग्रवाल (गुडगांव) को उनकी कृति 'सीख सिखाते बाल एकांकी' को प्रदान किये जायेंगे। इसके अतिरिक्त, गुणवत्ता के क्रम में आई कृतियों के लेखक सर्वश्री राम बाबू नीरव (सीतामढ़ी) को (कृति-पश्यन्ती्), श्रीमती सुदर्शन प्रियदर्शनी (यू.एस.ए.) को (कृति- अब के बिछुड़े), श्री देवेन्द्र कुमार मिश्रा (छिन्दवाड़ा) को कृति ''थोड़े से सुख की तलाश में, श्री शिवानंद सिंह सहयोगी (मेरठ) को कृति 'सूरज भी क्यों बंधक, श्री बैकुंठ नाथ (अहमदाबाद) को, कृति 'सरगोशियॉ (गजल संग्रह), श्री मोहन सगोरिया (भोपाल) को उनकी कृति ''दिन में मोमबतियॉ'', श्री आशीष कंधवे (दिल्ली) को उनकी काव्यृ कृति '21वीं सदी का आदमी', श्री शांतिलाल जैन (भोपाल) को उनके व्यंग्य् संग्रह 'न आना इस देश', श्री सुदर्शन सोनी (भोपाल) को उनके व्यंग्य संग्रह ''महंगाई का शुक्ल पक्ष'', श्री राकेश चंद्रा (लखनऊ) को उनके व्यंग्य संग्रह'' बे चहरे वाले लोग '', डॉ. आशारानी (जबलपुर) को उनके निबन्ध संग्रह 'हिन्दी को बोलियों में बोध गम्यता', श्रीमती अनघा जोगलेकर (कृति - वाजीराव वल्लाक), डॉ. अरबिन्द जैन (भोपाल) कृति 'आनन्द कही अनकही', श्री कमल चन्द्र वर्मा (महू) को उनकी कृति 'अमृत कथाऍ', एवं डॉ. अलका अग्रवाल (भरतपुर) को उनकी कृति ''कहानियों की दुनिया'' के लिए दिव्य प्रशस्ति-पत्र प्रदान किये जायेंगे ।
राष्ट्रीय ख्याति के अत्यन्त महत्वपूर्ण अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृाति पुरस्कारों के निर्णायक मण्डल के सदस्यि हैं - श्री मयंक श्रीवास्तिव, श्री राजेन्द्र नागदेव, श्री राग तैलंग, श्रीमती विजयलक्ष्मी विभा, डॉ. मंगला अनुजा, प्रो. परशुराम शुक्ल्,श्री वसन्त निरगुणे, श्री राधेलाल विजघावने, श्री प्रियदर्शी खैरा,श्री अरूण तिवारी, श्री कैलाश नारायण शर्मा, डॉ. श्रीमती विनय राजाराम, डॉ. प्रभुदयाल मिश्र एवं श्री जगदीश किंजल्क । साहित्यत सदन की संचालक श्रीमती राजो किंजल्क ने इस अवसर पर बताया कि बीसवें दिव्य पुरस्कारों हेतु, वर्ष 2015 से 2017 के मध्य प्रकाशित पुस्तकें आमंत्रित.
(जगदीश किंजल्क)
संयोजक : दिव्या पुरस्कार
साहित्य सदन, 145-ए, सांईनाथ नगर,
सी-सेक्टर,कोलार रोड, भोपाल 462042
संपर्क -09977782777
ई-मेल - jagdishkinjalk@gmail.com


खजुराहो नृत्य समारोह का कथक नृत्य से हुआ शुभारंभ

43वें खजुराहो नृत्य समारोह का शुभारंभ खजुराहो में पश्चिम मंदिर समूह के पास मुक्ताकाशी मंच पर अतिथियों ने दीप जला कर किया। समारोह का शुभारंभ नई दिल्ली के कलाकार श्री अनुज मिश्रा के कथक नृत्य से हुआ। इसके बाद कोलकाता की कलाकार संचिता भटटाचार्य द्वारा ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति दी गई। अंत में गुड़गाँव की जयश्री आचार्य द्वारा कथक की समूह प्रस्तुति दी गई। शुभारंभ अवसर पर प्रदेश के 10 कलाकार को 21-21 हजार रूपये के मध्य प्रदेश राज्य रूपंकर कला पुरस्कार प्रदान किये गये।
प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी समारोह का 20 से 26 फरवरी तक होगा। समारोह के दूसरे दिन 21 फरवरी को गुड़गाँव की सगुन भूटानी द्वारा ओडिसी, रायपुर की यास्मीन सिंह द्वारा कथक युगल एवं मुम्बई की दक्षा मशरूवाला द्वारा ओडिसी समूह नृत्य की प्रस्तुति दी जायेगी। कोयम्बटूर की लावण्या शंकर भरतनाट्यम, गुड़गाँव की रचना यादव कथक समूह, भुवनेश्वर के सदाशिव प्रधान मयूरभंज छाऊ एवं नोएडा की शिंजिनी कुलकर्णी 22 फरवरी को कथक नृत्य प्रस्तुत करेंगी। कोलकाता के संदीप मलिक एवं नई दिल्ली की शिखा खरे कथक, त्रिचूर की पल्लवी कृष्णन मोहिनीअट्टम समूह एवं यूएसए के कथा डाँस थियेटर के साथ रीता मित्रा मुस्तफी 23 फरवरी को कथक समूह नृत्य प्रस्तुत करेंगी।

24 फरवरी को जयपुर की मंजिरी किरण महाजनी एवं भोपाल के रासमणि कथक नृत्य, बैंगलुरू की रूक्मिणी विजय कुमार भरतनाट्यम एवं दिल्ली के वनश्री राव कुचिपुड़ी समूह नृत्य प्रस्तुत करेंगे। भुवनेश्वर के सौम्य बोस ओडिसी, नई दिल्ली की नीलाक्षी राय कथक, इम्फाल की मानसी थियाम एवं एन. अनुसना देवी मणिपुरी युगल तथा इंदौर की सुचित्रा हरमलकर 25 फरवरी को कथक समूह नृत्य प्रस्तुत करेंगी।
समारोह के समापन दिवस 26 फरवरी को अमित चौधरी एवं बांग्लादेश के कल्पतरू द्वारा भरतनाट्यम त्रयी, नई दिल्ली की विधा लाल एवं अभिमन्यु लाल द्वारा कथक युगल, गौरी द्विवेदी ओडिसी एवं चेन्नई की ज्योत्सना जगन्नाथ भरतनाट्यम की प्रस्तुति देंगी।
सात दिवसीय नृत्य समारोह में मध्य प्रदेश राज्य रूपंकर कला पुरस्कार एवं प्रदर्शनी (अलंकरण), भारतीय नृत्य शैली छाऊ की कला यात्रा (नेपथ्य), ललित कलाओं का मेला (आर्ट मार्ट), देशज कला परम्परा का मेला (हुनर), कलाकार और कलाविदों का संवाद (कला वार्ता), कला परम्परा और कलाकारों पर केंद्रित फिल्मों का उपक्रम (चलचित्र) एवं बांग्लादेश की कला गाथा (अतिथि देवो भवः) भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
शुभारंभ के दौरान विधायक श्री पुष्पेन्द्रनाथ पाठक एवं श्री आरडी प्रजापति, नगर परिषद खजुराहो अध्यक्ष श्रीमती कविता सिंह और संस्कृति आयुक्त एवं सचिव श्री राजेश मिश्रा उपस्थित थे।


राजस्थानी संस्कृति मंच की कार्यकारिणी गठित

1 December 2016
राजस्थानी मंच की बैठक आईएएस गेस्ट हाउस में मंच के अध्यक्ष एव प्रमुख सचिव । जेएन कसौठीया की अध्यक्षता में हुई। इस मौके पैर कार्यकारिणी सदस्यो का निर्वाचन किया गया। इसमें अनिल ओझा प्रथम उपाध्यक्ष और जयनारायण भाटी द्वितीय उपाध्यक्ष चुने गए मोतारामसुथार सहसचिव बनाए गए है। बैठक में आगामी दिसम्बर में संस्कृतिक संध्या के आयोजन का निर्णय लिया गया। सचिव विणा घाणेकर ने मंच की गतिविधियों पैर प्रकाश डाला। कोषाध्य्क्ष अनिल माथुर ने लेखा जोखा प्रस्तुत किया। इस मौके पर डॉक्टर पुखराज मारू समेत अन्य सदस्य मौजूद थे।
उर्दू अकादमी ने की अखिल भारतीय एवं प्रादेशिक सम्मान की घोषणा

25 November 2016
मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी ने प्रतिवर्ष दिये जाने वाले अखिल भारतीय एवं प्रादेशिक सम्मान घोषित किये हैं। यह सम्मान 2015-16 एवं 2016-17 के लिए होंगे। अखिल भारतीय सम्मान पाने वालों को 51 हजार रुपये एवं प्रादेशिक सम्मान पाने वालों को 31 हजार रुपये की राशि दी जायेगी। वर्ष- 2015-16 के सम्मान अखिल भारतीय स्तर के सम्मान में श्री शाहिद लतीफ को हकीम कमरूल हसन सम्मान, श्री नुसरत जहीर (दिल्ली) को जौहर कुरेशी सम्मान, श्री जावेद अख्तर (मुम्बई) को मीर तकी मीर सम्मान, श्रीमती मलका नसीम (जयपुर) को हामिद सईद खाँ सम्मान एवं श्री जावेद अर्शी (इंदौर) को शादां इंदौरी सम्मान से नवाजा जायेगा। प्रादेशिक सम्मान में श्री इकबाल बेदार (भोपाल) को सिराज मीर खाँ सहर सम्मान, श्रीमती परवीन सबा (भोपाल) को बासित भोपाली सम्मान डॉ. अर्जुमंद बानो (भोपाल) को मोहम्मद अली ताज सम्मान, श्री जिया फारूकी (भोपाल) को नवाब सिद्दीक हसन खाँ सम्मान, श्री अफसर सहबाई (भोपाल) को शैरी भोपाली सम्मान, श्री फरमान जियाई (सिरोंज) को कैफ भोपाली सम्मान, श्रीमती अनीता श्रीवास्तव तमन्ना (जबलपुर) को शम्भू दयाल सुखन सम्मान एवं श्री साजिद प्रेमी (भोपाल) को शिफा ग्वालियरी सम्मान दिया जायेगा। वर्ष-2016-17 के सम्मान उर्दू अकादमी ने 2016-17 के लिए पाँच अखिल भारतीय सम्मान के लिये श्री इनाम उल्लाह लोधी (भोपाल) को हकीम कमरूल हसन सम्मान, श्री असद रजा (दिल्ली) को जौहर कुरैशी सम्मान, श्री गोपीचन्द नारंग (दिल्ली) को मीर तकी मीर सम्मान, डॉ. नरेश (चण्डीगढ़) को हामिद सईद खाँ सम्मान, श्री मकसूद नश्तरी (इंदौर) को शादां इंदौरी सम्मान एवं श्री अख्तर वामिक (भोपाल) को सिराज मीर खाँ सहर सम्मान के लिए चुना है। प्रादेशिक सम्मान के लिये श्री जावेद यजदानी (भोपाल) को बासित भोपाली सम्मान, श्री जिया राना (उज्जैन) को मोहम्मद अली ताज सम्मान, प्रो. अब्दुल मजीद खाँ (भोपाल) को नवाब सिद्दीक हसन खाँ सम्मान, डॉ.मर्जिया आरिफ (भोपाल) को शैरी भोपाली सम्मान, श्रीमती सिकन्दर जहाँ सिकन्दर (जबलपुर) को कैफ भोपाली सम्मान, श्रीमती ऊषा भदौरिया (भोपाल) को शम्भू दयाल सुखन सम्मान, श्री मुशाहिद सईद खां (भोपाल) को शिफा ग्वालियरी सम्मान, रबाब फातमा जैदी (भोपाल) को नवाब शाहजहाँ बेगम ताजवर सम्मान, श्री बाबू अनवर निजामी (जबलपुर) को पन्नालाल नूर सम्मान, श्री इकबाल मसूद (भोपाल) को सूरज कला सहाय सरवर सम्मान, डॉ. मोहम्मद आजम (भोपाल) को निसार अख्तर सम्मान एवं श्री इदरीस मूनिस (भोपाल) को निदा फाजली सम्मान से नवाजा जायेगा।
अभियान का स्वरूप जन-कल्याण की प्रतिबद्धता हो

22 November 2016
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि जन-कल्याण के 11 वर्ष अभियान के दौरान सरकार की जन-कल्याण की प्रतिबद्धता पर आधारित कार्यक्रम किये जायें। सरकार द्वारा किये जा रहे विकास और जन-कल्याण के अलग प्रयासों को एक स्वरूप में प्रस्तुत किया जाये ताकि आमजन को जानकारी मिले और उसे लाभान्वित होने की प्रेरणा भी मिले। श्री चौहान आज मंत्रालय में अभियान के स्वरूप की समीक्षा कर रहे थे। इस अवसर पर मंत्रि-परिषद के सदस्य, मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह सहित संबद्ध विभागों के प्रमुख सचिव एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि अभियान के दौरान होने वाले गरीब कल्याण दिवस कार्यक्रम को नये स्वरूप में आयोजित करें। इसमें सरकार की गरीब कल्याण की प्रतिबद्धता बताने के साथ ही शासकीय योजनाओं से लाभान्वित होने की आवश्यक जानकारियाँ भी प्रसारित की जायें। लाभान्वित हितग्राहियों के साथ सीधे संवाद, योजनाओं की पात्रता और प्रक्रिया की जानकारी आकर्षक और सहज रूप में प्रस्तुत की जाये। प्रयास हो कि प्रतिभागियों के सम्मेलन में ही गरीब कल्याण की योजनाओं से लाभान्वित होने का प्रशिक्षण हो जाये। प्रतिभागी शासन की कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित होने के लिये तत्पर हों। साथ ही दूसरों को भी लाभान्वित होने के लिये प्रेरित करने में सक्षम हो जायें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मुख्य आयोजनों के साथ ही जिला स्तर पर भी व्यापक स्तर पर कार्यक्रम किये जायें। जिनमें लोक कलाओं के माध्यम से शासन की गरीब कल्याण की प्रतिबद्धता और उसके लाभों से जन-मानस को परिचित करवाया जाये। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान विभिन्न योजनाओं के निर्माण कार्यों के शिलान्यास और लोकार्पण के कार्य व्यापक स्तर पर किये जायें। प्रभारी मंत्री सप्ताह में दो से तीन दिन संबंधित जिले का भ्रमण करें। औचक निरीक्षण भी किए जायें। उन्होंने कहा कि संभागवार थीम आधारित होने वाले मुख्य कार्यक्रमों का प्रदेश के अन्य जिलों में सीधे प्रसारण की व्यवस्था भी करवाई जाये।
बैठक में बताया गया कि अभियान के प्रमुख घटक जन-कल्याण की योजनाओं के प्रशिक्षण और विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास के कार्यक्रम होंगे। मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों द्वारा योजनाओं की धरातल पर समीक्षा के लिये औचक निरीक्षण किये जायेंगे। विभिन्न वर्ग समूहों के संभागवार सम्मेलन और नगरोदय अभियान का संचालन भी इस अवधि में किया जायेगा। विभिन्न वर्ग समूहों
100 सबसे ज्यादा लोकप्रिय हिन्दी किताबों का कलेक्शन
Our Correspondent :18 November 2016
स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी अपनी स्थापना के 50 वर्ष बाद अब लाइब्रेरी में हिन्दी की पुस्तकें शामिल करने जा रही है । इस रविवार लाइब्रेरी में 100 किताबों का "मेगा हिन्दी कलेक्शन" शामिल किया जाएगा । हिन्दी की सबसे ज्यादा लोकप्रिय 100 किताबों का यह कलेक्शन 26 नवंबर तक लाइब्रेरी डिस्प्ले पर मौजूद रहेगा । इस दौरान शहर का कोई भी लाइब्रेरी आकर इन किताबों को पढ़ सकता है । लाइब्रेरी के मेंबर्स 26 नवंबर तक इन किताबों को अपने अकाउंट में रिजर्व करा सकेंगे । तथा 27 नवंबर से इन किताबों को पढ़ने के लिए घर ले जा सकेंगे । हिन्दी किताबों को पढ़ने के लिए लाइब्रेरी मेंबर्स को अलग से कोई मैम्बरशिप लेने की जरूरत नहीं है । उनकी वर्तमान सदस्यता में ही वे हिन्दी की किताबें इश्यू करा सकते हैं । लाइब्रेरी के हर तरह के मेंबर्स को हिन्दी किताबें इश्यू कराने की अनुमति होगी । इससे पहले मेंबर्स की राय जानने के लिए लाइब्रेरी द्वारा अक्तूबर माह में हिन्दी के 2 टीज़र कलेक्शन लॉंच किए गए थे जो जबर्दस्त लोकप्रिय हुए थे । इन टीज़र कलेक्शन में मेम्बर्स द्वारा जिस तरह के किताबें ज्यादा पसंद की गईं थी उन्हीं किताबों को इस मेगा कलेक्शन में शामिल किया गया है मेगा कलेक्शन में शामिल किताबों का चयन लाइब्रेरी में अभी हाल में गठित 10 सदस्यीय "क्लब हिन्दी" द्वारा किया गया है । हिन्दी पाठकों की विविध रुचियों को ध्यान में रखते हुए इस कलेक्शन में लगभग हर तरह की हिन्दी किताबों को शामिल किया गया हैं जिसमें हिन्दी की क्लासिक बुक्स से लेकर आज के समय में लोकप्रिय माइथालॉजिकल बुक्स के अनुवाद भी शामिल हैं । हिन्दी कलेक्शन : एक नज़र में कलेक्शन का नाम - मेगा हिन्दी कलेक्शन कलेक्शन में शामिल हैं - हिन्दी की 100 सबसे लोकप्रिय किताबें विशेष - ये लाइब्रेरी का पहला बड़ा हिन्दी कलेक्शन है
कब शामिल किया जाएगा - 20 नवंबर 2016 को डिस्प्ले पर कब तक रहेगा - 26 नवंबर तक किताबें रिजर्व कराईं जा सकती हैं - 26 नवंबर तक किताबें इश्यू कराईं जा सकती हैं - 27 नवंबर से अगला हिन्दी कलेक्शन कब आएगा - हर महीने के आखिरी रविवार को
कलेक्शन में शामिल कुछ पुस्तकों के नाम हिन्दी साहित्य की क्लासिक बुक्स :- रात का रिपोर्टर - निर्मल वर्मा सूरज का सातवाँ घोडा - धर्मवीर भारती गोरा - रवीद्र नाथ टैगोर कैसी लगाई आग - असगर वजाहत शेखर एक जीवनी - अज्ञेय छावा - शिवाजी सावंत चित्रलेखा - भगवती चरण वोहरा काशी का अस्सी - काशीनाथ सिंह नदी के द्वीप - अज्ञेय मंटो की कहानियाँ - सहादत हसन मंटो लोकप्रिय प्रेरणादायी पुस्तकों के हिन्दी अनुवाद रिच डैड पुअर डैड - किओसाकी मेरा चीज़ किसने हटाया - स्पेन्सर जॉनसन अप्रेषित पत्र - रंगरजन शक्ति के 48 नियम - रोबर्ट ग्रीन दौलत और सफलता की राह - मर्फी चिंता छोड़ो सुख से जिओ - डेल करनेगी सकारात्मक सोच - नॉर्मन विनसेट पील अति प्रभावकारी लोगों की सात बातें - स्टीफन कोवी रहस्य - रोंडा बर्न पावर, मैजिक, हीरो - रोंडा बर्न लोकप्रिय पुस्तकों के हिन्दी अनुवाद अलकेमिस्ट - पाउलो कोहलों एडल्ट्री - पाउलो कोहलों काइट रनर - खालिद होसेनी लाइफ ऑफ पाई - यान मरटेल सोफी का संसार - गार्डर चाणक्य मंत्र - अश्विन सांघी कृष्ण कुंजी - क्षविन सांघी चेतन भगत की सभी किताबों के हिन्दी अनुवाद हैरी पॉटर की सभी किताबों के हिन्दी अनुवाद प्रसिद्ध लेखकों की पुस्तकों के हिन्दी अनुवाद राम चन्द्र गुहा अमिताभ घोष खुशवंत सिंह रस्किन बॉन्ड अमर्त्य सेन वी एस नाइपाल रोहिंटन मिस्त्री पवन कुमार वर्मा लोकप्रिय पौराणिक किताबों के हिन्दी अनुवाद काली का उदय - आनंद नीलकंठन दशराजन - अशोक बैंकर ईक्षवाकू के वंशज - आमिश असुर - आनंद नीलकंठन अयोध्या का राजकुमार - बैंकर हिन्दी की नई पुस्तकें कोठगोई - प्रभात रंजन नरक यात्रा - ज्ञान चतुर्वेदी मणिकरणिका - डॉ तुलसीरम अगला यथार्थ - हिमांशु जोशी ढाक के तीन पात - मलय जैन नए लोगों के लिए लाइब्रेरी की सदस्यता के प्लान
व्यक्तिगत सदस्यता (वार्षिक शुल्क - 1200 रुपये ) मूवी मेम्बरशिप (वार्षिक शुल्क - 1600 रुपये) फैमिली मेम्बरशिप (वार्षिक शुल्क - 2500 रुपये )
आकाशवाणी संगीत सम्मेलन 2016 का आयोजन 24 सितम्बर को रवीन्द्र भवन में

23 September 2016
आकाशवाणी महानिदेशालय द्वारा आकाशवाणी संगीत सम्मेलन का आयोजन प्रति वर्ष अलग-अलग केन्द्रों पर किया जाता है। इस बार आकाशवाणी संगीत सम्मेलन- 2016 का आयोजन 24 सितम्बर, 2016 (शनिवार) को स्थानीय रवीन्द्र भवन भोपाल के सभागार में शाम 06.30 बजे से किया जा रहा है। इस संगीत सम्मेलन में दिल्ली के बांसुरी वादक श्री कैलाश शर्मा अपनी मनमोहक प्रस्तुति देंगे। कार्यक्रम में आप मुम्बई के शास्त्रीय संगीत गायक श्री संजीव चिम्मलगी का गायन सुन सकेंगे और दिल्ली के उस्ताद अकरम खान अपने तबला वादन से आपका मनोरंजन करेंगे।
प्रतिभाएं देश का भविष्य हैं : आलोक संजर

12 September 2016
कचेर राजपूत महासभा ने किया छात्र-छात्राओं व बुजुर्गों का सम्मान
भोपाल। प्रतिभाएं देश का भविष्य हैं। आज मुझे खुशी है कि कचेर राजपूत समाज की छात्र-छात्राओं ने मेहनत कर 80 फीसदी से अंक प्राप्त कर समाज ही नहीं वरन प्रदेश का नाम रोशन किया। यह बात अखिल भारतीय कचेर राजपूत महासभा के तत्वावधान में रविवार दोपहर 12 बजे शहीद भवन में आयोजित प्रतिभावान छात्र-छात्राओं व बुजुर्गों का सम्मान समारोह के दौरान सासंद आलोक संजर ने कही। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता बैरसिया विधायक विष्णु खत्री ने की। सांसद आलोक संजर ने समाज की प्रतिभाशाली 35 छात्र-छात्राओं व 20 बुजुर्गों के शॉल, श्रीफल व स्मृति चिंह भेंट कर सम्मानित किया। विधायक विष्णु खत्री ने कहा कि बुजुर्गों की सेवा से जो पुण्य मिलता है वह कई सालों की पूजा-पाठ से भी नहीं मिलेगा, इसलिए सभी लोगों को अपने बुजुर्गों का विशेष ख्याल रखना चाहिए। महासभा के संगठन मंत्री रामवदन वर्मा ने बताया कि कचेर राजपूत समाज अब हर साल यह आयोजन करेगा जिससे समाज में प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को आगे लाया जा सके। कार्यक्रम के अंत में सभी के प्रति आभार प्रकट किया गया।

भोपाल में मना आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्थापक श्री श्री रवि शंकर जीका 60 वा जन्मदिन
प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय गायक श्री गौतम दाबिर ने किया सभी को मंत्रमुग्ध

13 May 2016
भोपाल। आर्ट ऑफ़ लिविंग के तीन सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्धांत साधना, सेवा और सत्संग के माध्यम से आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक स्थापक श्री श्री रवि शंकर जी की 60 वा जन्मदिवस मनाया गया। जन्मदिन गांधी भवन, श्यामला हिल्स और सहकारी संस्थान, त्रिलंगा में समारोहों की श्रृंखला साधना और गुरु पूजा के साथ 6 बजे शुरू हुआ। इसके बाद भक्तों ने वहाँ से सेवा का एक ग्रुप झुग्गी बस्ती के बच्चों के साथ आशिमा मॉल के पास स्लम क्षेत्रों में दिवस मनाने के लिए शामिल हुआ। इसके अलावा, एओएल स्वयंसेवकों और छोटे समूहों और व्यक्तिगत रूप से भी श्रद्धालुओं ने अभियान के तहत शहर में विभिन्न स्थानों पर गतिविधियां की। यह अभियान दिन भर जारी रहा, जिसमे सभी श्रद्धालुओं ने श्री श्री के बताये मार्ग के माध्यम से जीवन जीने की कला बताई। इसी श्रृंखला में शाम 7 बजे से रविन्द्र भवन में 'सुमेरू संध्या' भव्य सत्संग का आयोजन किया गया जिसमे प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय गायक श्री गौतम दाबिर द्वारा सत्संग क्रियाशीलता पर कार्यक्रम पेश किया गया। उनके इस मन मोहक कार्यक्रम ने विशाल सभा को मंत्रमुग्ध कर दिया । श्री श्री द्वारा 1981 में यह संस्था स्थापित की गई थी, जो जीने की कला एक शैक्षिक और मानवीय तनाव प्रबंधन और सेवा पहल करने में लगी हुई है। संस्था विश्व स्तर पर 155 देशों में कार्य कर रही है और अब तक 370 मिलियन से अधिक लोगों ने जीवन के उन अनछुए पलों को छुआ है। व्यक्तियों में तनाव और अनुभव से मन की शांति को पाने में यह तकनीक मदद करती है । आर्ट ऑफ़ लिविंग तनाव-उन्मूलन कार्यक्रमों जो सांस लेने की तकनीक, ध्यान और योग भी शामिल हैं को प्रदान करता है। इनमें से एक 'सुदर्शन क्रिया' के साथ खुशी कार्यक्रम बहुत ही खास है। आर्ट ऑफ़ लिविंग के द्वारा जो प्रोग्राम किये जाते है उससे सीधे तोर पर मानव कल्याण से जुड़े प्रोजेक्ट को पुरे विश्व में शिक्षा, ग्रामीण विकास, महिला सशसक्तिकरण, स्वस्थ, पर्यावरण और संस्कृति पर खर्च होता है। संस्था द्वारा भोपाल के 13 सेंटर्स में भी मानव कल्याण से जुड़े प्रोजेक्ट चलाये जा रहे हैं।

दस दिन तक गणेश उत्सव की रहेगी धूम - गणेश पंडाल और बाजार सजे

5 September 2016
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में १० दिनों मनाया जाने वाला गणेश उत्सव आज गणेश चतुर्थी के साथ शुरू हुआ। पुरे शहर में गणेश पंडाल और बाजार सज धज कर तैयार है। रोज गणेश आरती और प्रसाद के लिए भक्तो की भीड़ पंडालो पैर जमा रहेगी
रोज शाम को विभिन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम की पंडालो में आयोजित किये जायेंगे। १० दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी को गणेश प्रतिमाओ का धूमधाम से विसर्जन किया जायेगा और अगले बरस जल्दी आने के लिए गणेश जी से प्राथना की जाएगी


भोपाल में मना आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्थापक श्री श्री रवि शंकर जीका 60 वा जन्मदिन
प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय गायक श्री गौतम दाबिर ने किया सभी को मंत्रमुग्ध

13 May 2016
भोपाल। आर्ट ऑफ़ लिविंग के तीन सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्धांत साधना, सेवा और सत्संग के माध्यम से आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक स्थापक श्री श्री रवि शंकर जी की 60 वा जन्मदिवस मनाया गया। जन्मदिन गांधी भवन, श्यामला हिल्स और सहकारी संस्थान, त्रिलंगा में समारोहों की श्रृंखला साधना और गुरु पूजा के साथ 6 बजे शुरू हुआ। इसके बाद भक्तों ने वहाँ से सेवा का एक ग्रुप झुग्गी बस्ती के बच्चों के साथ आशिमा मॉल के पास स्लम क्षेत्रों में दिवस मनाने के लिए शामिल हुआ। इसके अलावा, एओएल स्वयंसेवकों और छोटे समूहों और व्यक्तिगत रूप से भी श्रद्धालुओं ने अभियान के तहत शहर में विभिन्न स्थानों पर गतिविधियां की। यह अभियान दिन भर जारी रहा, जिसमे सभी श्रद्धालुओं ने श्री श्री के बताये मार्ग के माध्यम से जीवन जीने की कला बताई। इसी श्रृंखला में शाम 7 बजे से रविन्द्र भवन में 'सुमेरू संध्या' भव्य सत्संग का आयोजन किया गया जिसमे प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय गायक श्री गौतम दाबिर द्वारा सत्संग क्रियाशीलता पर कार्यक्रम पेश किया गया। उनके इस मन मोहक कार्यक्रम ने विशाल सभा को मंत्रमुग्ध कर दिया । श्री श्री द्वारा 1981 में यह संस्था स्थापित की गई थी, जो जीने की कला एक शैक्षिक और मानवीय तनाव प्रबंधन और सेवा पहल करने में लगी हुई है। संस्था विश्व स्तर पर 155 देशों में कार्य कर रही है और अब तक 370 मिलियन से अधिक लोगों ने जीवन के उन अनछुए पलों को छुआ है। व्यक्तियों में तनाव और अनुभव से मन की शांति को पाने में यह तकनीक मदद करती है । आर्ट ऑफ़ लिविंग तनाव-उन्मूलन कार्यक्रमों जो सांस लेने की तकनीक, ध्यान और योग भी शामिल हैं को प्रदान करता है। इनमें से एक 'सुदर्शन क्रिया' के साथ खुशी कार्यक्रम बहुत ही खास है। आर्ट ऑफ़ लिविंग के द्वारा जो प्रोग्राम किये जाते है उससे सीधे तोर पर मानव कल्याण से जुड़े प्रोजेक्ट को पुरे विश्व में शिक्षा, ग्रामीण विकास, महिला सशसक्तिकरण, स्वस्थ, पर्यावरण और संस्कृति पर खर्च होता है। संस्था द्वारा भोपाल के 13 सेंटर्स में भी मानव कल्याण से जुड़े प्रोजेक्ट चलाये जा रहे हैं।

आर्ट ऑफ़ लिविंग का सुमेरु संध्या सत्संग आज
Our Correspondent :12 May 2016
भोपाल। रविन्द्र भवन में आर्ट ऑफ़ लिविंग के सस्थापक श्री श्री रवि शंकर जी के 60 वे जन्मदिन के अवसर पर सुमेरु संध्या सत्संग का आयोजन किया जायेगा। आर्ट ऑफ़ लिविंग फाउंडेशन संस्था द्वारा आयोजित इस सत्संग कार्यक्रम को श्री गौतम दबीर द्वारा आर्ट ऑफ़ लिविंग के टिप्स देंगे। कार्यक्रम 6 . 30 बजे शुरू होगा, जिसमें सभी शामिल हो सकते है। सभी के लिए एंट्री फीस फ्री है।
श्री श्री द्वारा सन् 1981 में स्थापित आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्था एजुकेशनल और ह्यूमेनिटेरियन मूवमेंट में काम करती है। साथ ही स्ट्रेस मैनेजमेंट और सर्विस इनिशिएटिव्स को भी मैनेज करने का काम करती है। संस्था पूरे विश्व में 155 देशों में कार्य करती है और अब तक 370 मिलियन लोग इससे जुड़े हुये हैं। व्यक्तिगत तौर पर स्ट्रेस को दूर करने व मन की शांति को प्राप्त करने में यह टेकनिक मदद करती है। आर्ट ऑफ़ लिविंग द्वारा एक तनाव को दूर भगाने के लिए एक प्रोग्राम भी तैयार किया गया है, जिससे साँस लेने की टेकनिक, मैडिटेशन और योगा को शामिल किया गया है। साथ ही आर्ट ऑफ़ लिविंग का हैपीनेस प्रोग्राम सुदर्शन क्रिया के साथ।
आर्ट ऑफ़ लिविंग के द्वारा जो प्रोग्राम किये जाते है उससे सीधे तोर पर मानव कल्याण से जुड़े प्रोजेक्ट को पुरे विश्व में शिक्षा, ग्रामीण विकास, महिला सशसक्तिकरण, स्वस्थ, पर्यावरण और संस्कृति पर खर्च होता है। संस्था द्वारा भोपाल के 13 सेंटर्स में भी मानव कल्याण से जुड़े प्रोजेक्ट चलाये जा रहे हैं।


खुले मांस एवं मांसाहार विक्रय पर उच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला
विक्रय पर रोक कलेक्ट्रर डा.जटिया ने दिये संबधित अधिकारियों को निर्देश

Our Correspondent :09 May 2016
दमोह/माननीय उच्चन्यायालय द्वारा दिये गये एक ऐतीहासिक फैसले के परिपालन में दमोह कलेक्टर द्वारा जिले के समस्त संबधितों को कार्यवाही के निर्देश जारी कर दिये हैं। जिसके अनुसार अब अवैधानिक रूप से खुले में मांस का विक्रय नहीं किया जा सकेगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार कलेक्ट्रर डा.जगदीश चन्द्र जटिया ने पुलिस अधीक्षक,परियोजना अधिकारी जिला शहरी विकास अभिकरण,अनुविभागीय अधिकारी राजस्व समस्त जिला दमोह,मुख्य नगर पालिका अधिकारी समस्त जिला को कार्यवाही के निर्देश जारी कर दिये हैं। ज्ञात हो कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा डब्लू पी 15800/2012 पर सुनवाई करते हुये दिये गये निर्णय के चलते अब प्रदेश में कहीं भी खुले में मांस विक्रय नहीं किया जा सकता है। ज्ञात हो कि गली-गली में मांस,अंडे,मुर्गे,मुर्गियों के मांस का विक्रय किया जा रहा था । जबकि एैसा किया जाना संबधित विभाग के कानून की मंशा के विपरीत भी बतलाया गया है।

2006 में भी हुआ था आदेश-

प्राप्त जानकारी के अनुसार बर्ष 2006 मेंं मध्यप्रदेश के उच्चन्यायालय के तत्कालीन चीफ जस्टिस ए.के.पटनायक एवं जस्टिस एस.सी.सिन्हा की युगल पीठ ने एक विशेष आदेश पारित करते हुये नगर निगम की सीमा एवं एैसे क्षैत्र जहां लोगों का निवास हो वहां पर मुख्य सडकों पर बिना लाईसेंस के मांस,अंडा,मछली के विक्रय को गैर कानूनी घोषित कर दिया था।

सूचना के अधिकार से हुआ था खुलासा-

पशु चिकित्सा विभाग से समाचार पत्र के इस प्रतिनिधि को सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी के अनुसार बर्ष 2001 से भेड,बकरे,बकरियों,मुर्गे एवं मुर्गियों के परीक्षण की जानकारी निरंक बतलाई गयी है। इनके अनुसार विभाग के पास नगर पालिका द्वारा एक भी पशु मृत्यू पूर्व परिक्षण हेतु नहीं उक्त अवधि में नहीं लाया गया।

क्या है एन्टीमार्टम नियम-

जानकारों की माने तो डाक्टरी भाषा मे इसे 'एन्टीमार्टमÓ कहा जाता है इसके बिना न तो उन पशुओं का वध किया जाता है जो मनुष्यों के खाये जाने योग्य बतलाया गया है एवं न ही मांस का विक्रय किया जाता है। नियमों के जानकारों की माने तो कत्लखाने में ले जाने के पूर्व नगर पालिका का अधिकारी उस पशु को पशु चिकित्सक के पास स्वास्थ्य परीक्षण के लिये ले जाता है उसके परीक्षण प्रमाण पत्र के आधार पर ही उसका वध किया जा सकता है। अगर वह इसकी सिफारिश नहीं करता तो पशु का न तो वध किया जा सकता है न ही उसका मांस विक्रय किया जा सकता है। उलंघन करने वालों के लिये दण्ड के प्रावधान बतलाये गये हैं। परन्तु क्या हो रहा है किसी से छिपा नहीं है देखा जाये तो खुले आम मांसाहारी व्यक्तियों का जीवन खतरे में डाला जा रहा है,दूषित,संक्रामक बीमारियों से ग्रसित जानवरों का मांस धडल्ले से विक्रय हो रहा है। जिले के अनेक होटलों में भी यहीं मांस परोसा जा रहा है।

नहीं है सिलाटर हाऊस-

अब अगर कत्ल खाने के बारे में चर्चा करें तो समाचार पत्र के इस प्रतिनिधि को दी गयी जानकारी के अनुसार जिले में अधिकृत रूप से कोई भी पशु कत्ल खाना नहीं है। फिर भी पशुओं का वध एवं वह भी बिना चिकित्सीय परीक्षण के जिला प्रशासन ,नपा के अधिकारियों की घोर लापरवाही एवं अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीनता नहीं तो क्या है?

सडकों पर अंडे और मुर्गे का विक्रय-

जिले सहित नगर के मुख्य मार्गों में मुर्गे और मांस को पकाकर एवं कच्चा बेचने की दुकाने आपको देखने मिल जायेंगी जबकि अंडो की ढिलियों की संख्या तो अनगिनित है। कानून के जानकारों की माने तो नगर निगम अधिनियम 1956 के सेक्सन 255 एवं 257 तथा खाद्य अपमिश्रण अधिनियम 1955 के रूल 50 में विहित प्रावधान के तहत विधिवत अनुज्ञप्ति हासिल किये बिना उक्त चीजों का निगम सीमा मेें विक्रय नहीं किया जा सकता है यह दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आता है। कितनों को लायसेंस दिया गया है इस प्रकार की जानकारी न तो नपा के पास है और न ही जिला प्रशासन के पास ? परन्तु खुलेआम नियम कानून की धज्जियां उडाई जा रही है?

इनका कहना है-

माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के परिपालन में संबधित अधिकारियों को कार्यवाही करने निर्देश लिखित रूप से पत्र के माध्यम से दे दिये गये हैं।
डा.जगदीश चन्द्र जटिया
कलेक्ट्रर दमोह


योग अनुसंधान परिषद का स्थापना दिवस आज
सिंहस्थ के संत समाज के लिए ब्लड डोनेशन कैंप

29 April 2016
भोपाल। योग अनुसंधान परिषद अपना 25वां स्थापना दिवस आज 30 अप्रैल 2016 को हर्षोल्लास के साथ मनाएगा। इस अवसर पर प्रात: 11 बजे से परिषद प्रांगढ़ में ही विशाल ब्लड डोनेशन शिविर का आयोजन किया जा रहा है। योग अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष श्री सिकंदर अहमद ने बताया कि 25वें स्थापना दिवस 30 अप्रैल से परिषद सालभर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करेगी। कल प्रात: बलड डोनेशन कैंप और सांध्यकालीन आतिशबाजी तथा सजावट की जाएगी। श्री अहमद ने बताया कि 30 अप्रैल 2016 से 30 अप्रैल 2017 तक दर्जनों सांस्कृतिक, सामाजिक, स्वास्थ्य शिविर तथा मनोरंजन के विभिन्न आयोजन होंगे। इस बीच योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के प्रचार-प्रसार के लए संगोष्ठियां, कार्यशाला तथा संवाद के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। श्री अहमद ने बताया कि आज आयोजित ब्लड कैंप से जितने यूनिट ब्लड एकत्रित होगा उसे उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ महाकुंभ में संत समाज की सेवा के लिये भेजने का आग्रह उन्होंने हमीदिया अस्पताल के प्रबंधक से किया है। परिषद सिंहस्थ की सफलता एवं सभी सम्मानीय साधु-संतों के स्वास्थ्य तथा दीर्घायु होने की कामना करती है।



साईं बाबा की पालकी शोभायात्रा
12 February 2016
दिनांक 13 फरवरी 2016, शनिवार को दोपहर 12 बजे साहबानी परिवार द्वारा श्री साईंबाबा का स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में श्री साईं बाबा की पालकी यात्रा का आयोजन शिवशक्ति हनुमान मंदिर, कोटरा सुल्तानाबाद, भोपाल में किया जाएगा। शिवशक्ति हनुमान मंदिर से प्रारंभ होकर कोटरा मार्केट, शीतला माता मंदिर, मेयफ्लावर स्कूल, काली मंदिर होते हुए पालकी यात्रा का समापन श्री शिवशक्ति हनुमान मंदिर (तारा होटल) पर होगा।

कार्यक्रम का विवरणः

दिनांकः 13 फरवरी 2016, शनिवार
श्री साईं बाबा की भव्य पालकी यात्रा, दोपहर 12 बजे
महाआरतीः रात्रि 8.00 बजे

कार्यक्रम को कवर करने के लिए अपने संस्थान से संवाददाता, कैमरामैन एवं फोटोग्राफर भेजें।



सम्मान पाकर मैं बहुत अभिभूत हूं: किशन कालजयी
09 February 2016
पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान समारोह संपन्न संवेद के संपादक कालजयी को दिया गया सम्मान
भोपाल/ पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान 2016 से इस साल ‘संवेद’ पत्रिका के श्री किशन कालजयी को सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें शाल, श्रीफल, प्रतीक चिह्न और 11000 की नगद धनराशि प्रदान की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता संकठा प्रसाद सिंह ने की जबकि मुख्य अतिथि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने की। इस मौके पर डॉ. संजीव गुप्ता की पुस्तक श्रुति बुक्स, गाजियाबाद से प्रकाशित पुस्तक ‘मास कम्युनिकेशन का विमोचन किया। पं. बृजलाल द्विवेदी की स्मृति में यह आठवां सम्मान है। स्वागत भाषण मीडिया विमर्श पत्रिका के कार्यकारी संपादक श्री संजय द्विवेदी ने किया।
संवेद पत्रिका के संपादक किशन कालजयी ने सम्मान से सम्मानित होने के बाद कहा कि संवेद को प्रारंभ करने के समय जो अनुभूति 25 साल पहले हुई थी वही अनुभूति आज सम्मान पाकर हो रही है। उन्होंने कहा कि सम्मान ने मेरी चुनौती को और बढा दिया है। गौरतलब है कि कालजयी पिछले 25 सालों से संवेद पत्रिका का संपादन कर रहे हैं जबकि वे सबलोग नामक पत्रिका के भी संपादक हैं। उन्होंने पत्रकारिता के विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिनको लिखना अच्छा आता है वही पत्रकार बन सकता है।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने श्री किशन कालजयी एवं मीडिया विमर्श पत्रिका के कार्यकारी संपादक संजय द्विवेदी को बधाई देते हुए कहा कि विचारों को उत्पन्न करना बड़ा काम है और वह साहित्य के माध्यम से होता है। भले ही वह जीवनी, नाटक, पत्र-पत्रिका कोई भी माध्यम हो। साहित्य विचारों को जन्म देता है। विचारों की उत्पत्ति प्रसव वेदना की तरह है। साहित्य की पत्रकारिता समुद्र मंथन की तरह है जिसमें विष के छीटे भी पड़ते हैं। और अमृत की बूंदें भी मिलती हैं। आज के समय में सद्भावना से विचार मंथन करने की आवश्यकता है जिससे एक बेहतर समाज की रचना की जा सके। शिक्षा के माध्यम से देश में परिवर्तन आए यह जरूरी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करने हेतु यह बात संकटा प्रसाद सिंह ने कही। उन्होंने मीडिया विमर्श पत्रिका के माध्यम से युवाओं को प्रेरणा देने का जो काम किया जा रहा है उसकी बधाई दी। इस मौके पर श्री लाजपत आहूजा, डॉ. सच्चिदानंद जोशी, श्री गिरीश पंकज, हिमांशु द्विवेदी, श्रीमती इंदिरा दांगी, डॉ. श्रीकांत सिंह, श्री राजन अग्रवाल, डॉ. सुभद्रा राठौर सहित दिल्ली, रायपुर, भोपाल समेत कई शहरों के पत्रकार, साहित्यकार, समाजसेवी, प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

सम्मान पाकर मैं बहुत अभिभूत हूं: किशन कालजयी
08 February 2016
पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान समारोह संपन्न संवेद के संपादक कालजयी को दिया गया सम्मान
भोपाल/ पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान 2016 से इस साल ‘संवेद’ पत्रिका के श्री किशन कालजयी को सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें शाल, श्रीफल, प्रतीक चिह्न और 11000 की नगद धनराशि प्रदान की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता संकठा प्रसाद सिंह ने की जबकि मुख्य अतिथि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने की। इस मौके पर डॉ. संजीव गुप्ता की पुस्तक श्रुति बुक्स, गाजियाबाद से प्रकाशित पुस्तक ‘मास कम्युनिकेशन का विमोचन किया। पं. बृजलाल द्विवेदी की स्मृति में यह आठवां सम्मान है। स्वागत भाषण मीडिया विमर्श पत्रिका के कार्यकारी संपादक श्री संजय द्विवेदी ने किया।
संवेद पत्रिका के संपादक किशन कालजयी ने सम्मान से सम्मानित होने के बाद कहा कि संवेद को प्रारंभ करने के समय जो अनुभूति 25 साल पहले हुई थी वही अनुभूति आज सम्मान पाकर हो रही है। उन्होंने कहा कि सम्मान ने मेरी चुनौती को और बढा दिया है। गौरतलब है कि कालजयी पिछले 25 सालों से संवेद पत्रिका का संपादन कर रहे हैं जबकि वे सबलोग नामक पत्रिका के भी संपादक हैं। उन्होंने पत्रकारिता के विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिनको लिखना अच्छा आता है वही पत्रकार बन सकता है।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने श्री किशन कालजयी एवं मीडिया विमर्श पत्रिका के कार्यकारी संपादक संजय द्विवेदी को बधाई देते हुए कहा कि विचारों को उत्पन्न करना बड़ा काम है और वह साहित्य के माध्यम से होता है। भले ही वह जीवनी, नाटक, पत्र-पत्रिका कोई भी माध्यम हो। साहित्य विचारों को जन्म देता है। विचारों की उत्पत्ति प्रसव वेदना की तरह है। साहित्य की पत्रकारिता समुद्र मंथन की तरह है जिसमें विष के छीटे भी पड़ते हैं। और अमृत की बूंदें भी मिलती हैं। आज के समय में सद्भावना से विचार मंथन करने की आवश्यकता है जिससे एक बेहतर समाज की रचना की जा सके। शिक्षा के माध्यम से देश में परिवर्तन आए यह जरूरी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करने हेतु यह बात संकटा प्रसाद सिंह ने कही। उन्होंने मीडिया विमर्श पत्रिका के माध्यम से युवाओं को प्रेरणा देने का जो काम किया जा रहा है उसकी बधाई दी। इस मौके पर श्री लाजपत आहूजा, डॉ. सच्चिदानंद जोशी, श्री गिरीश पंकज, हिमांशु द्विवेदी, श्रीमती इंदिरा दांगी, डॉ. श्रीकांत सिंह, श्री राजन अग्रवाल, डॉ. सुभद्रा राठौर सहित दिल्ली, रायपुर, भोपाल समेत कई शहरों के पत्रकार, साहित्यकार, समाजसेवी, प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

केरल समाज की सेवा-भावना अनुकरणीय
11 January 2016
ऊर्जा, खनिज साधन एवं जनसंपर्क मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि केरल समाज की सेवा भावना अनुकरणीय है। पूरे देश में केरल की महिलाएँ नर्सिंग सहित विभिन्न चिकित्सा कार्य में संलग्न रहकर समर्पण भाव से पीड़ित मानवता की सेवा करती हैं। श्री शुक्ल आज रीवा में केरल समाज के गोल्डन जुबली समारोह को संबोधित कर रहे थे।
मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि केरल देश का अदभुत राज्य है, जहाँ नैसर्गिक सम्पदा भरी हुई है। शिक्षा के क्षेत्र में भी यह अग्रणी राज्य है। उन्होंने अपने राज्य के प्र‍ति श्रद्धा, सम्मान और गौरव रखने के लिये रीवा के केरल समाज की सराहना की। उन्होंने समाज के लोगों का आव्हान किया कि वे रीवा नगर के विकास में अपनी रचनात्मक भूमिका निभाये। श्री शुक्ल ने विशिष्ट उपलब्धियाँ प्राप्त करने वाले समाज के लोगों को सम्मानित भी किया।ा।

समाज सेवा पुरस्कार हेतु आवेदन आमंत्रित
07 January 2016
रानी अवंतिबाई वीरता एवं राजमाता विजयाराजे सिंधिया समाज सेवा पुरस्कार हेतु आवेदन आमंत्रित

भोपाल। समाज में व्यापक सकारात्मक वातावरण बनाने एवं महिलाओं की व्यक्तिगत सेवा और योगदान को प्रोत्साहित करने, मान्यता देने एवं प्रतिष्ठा बढाने के उद्देश्य से वर्ष 2006 से राज्य स्तरीय पुरस्कार स्थापित किया गया है।
रानी अवंतिबाई वीरता पुरस्कार में साहसिक महिलाओं जिन्होने महिला और बच्चों को उत्पीड़न से बचाने और बाल विवाह, दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीति को रोकने के प्रमाणित कार्य किये हैं। इसी प्रकार राजमाता विजयाराजे सिंधिया समाज सेवा पुरस्कार में ऐसी समाजसेवी महिलाएं जिन्होने महिलाओं के विकास,कल्याण तथा सामाजिक उत्थान के उद्देश्य से प्रतिष्ठा मण्डित करने का प्रमाणिक कार्य किया हो। उक्त दोनों पुरस्कार 8 मार्च 2016को अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रदान किया जायेंगे।

मध्यप्रदेश कला प्रदर्शनी-2016
07 January 2016
भोपाल। उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद्, भोपाल द्वारा मध्यप्रदेश राज्य रूपंकर कला पुरस्कार प्रदर्शनी-2016 लगायी जा रही है। अकादमी द्वारा मध्यप्रदेश के ख्यातिलब्ध कलाकारों के नाम से स्थापित रूपंकर एवं ललित कलाओं के 10 पुरस्कार के लिए कलाकृतियाँ आमंत्रित की जा रही हैं। प्रत्येक पुरस्कार की राशि 21 हजार होगी। कलाकृतियाँ अब 15 जनवरी तक अकादमी कार्यालय में कार्यालयीन समय से प्राप्त की जायेंगी। पहले इसकी अंतिम तिथि 31 दिसम्बर थी। इसके बाद प्राप्त होने वाली कलाकृतियाँ स्वीकार नहीं की जायेगी।
कलाकृतियों के साथ प्रदर्शनी में प्रवेश शुल्क 200 रुपये नगद जमा करना होंगे। प्रदर्शनी में दो कलाकृतियाँ मान्य की जायेगी। प्रदर्शनी में 25 से 50 वर्ष तक की आयु के कलाकार भाग ले सकेंगे। कलाकारों की वर्ष 2013 के बाद सृजित मौलिक कलाकृतियाँ मान्य की जायेगी। कलाकृतियाँ अकादमी कार्यालय में अवकाश के दिनों में भी कार्यालयीन समय में जमा की जा सकेंगी। फेसबुक kalamitrabpl@gmail.com तथां facebook page और अन्य माध्यम से डाउनलोड आवेदन विवरणिका की फोटो प्रतियाँ (ए-4 साइज) भी प्रवेश-पत्र के रूप में स्वीकार की जायेगी।

पाँच तरीके से लिखी गई पाँच पुस्तकें

17 December 2015
उल्‍टे अक्षरों से लिख गई भागवत गीता ( Bhagwat Gita )

आप इस भाषा को देखेंगे तो एकबारगी भौचक्के रह जायेंगे। आपको समझ में नहीं आयेगा कि यह किताब किस भाषा शैली में लिखी हुई है। पर आप जैसे ही दर्पण ( शीशे‌ ) के सामने पहुंचेंगे तो यह किताब खुद-ब-खुद बोलने लगेगी। सारे अक्षर सीधे नजर आयेंगे। इस मिरर इमेज किताब को पीयूष ने लिखा है। मिलनसार पीयूष मिरर इमेज की भाषा शैली में कई किताबें लिख चुके हैं।

सुई से लिखी मधुशाला ( Madhushala )

पीयूष ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है कि देखने वालों आँखें खुली रह जाएगी और न देखने वालों के लिए एक स्पर्श मात्र ही बहुत है। पीयूष ने पूछने पर बताया कि सुई से पुस्तक लिखने का विचार क्यों आया ? अक्सर मुझ से ये पूछा जाता था कि आपकी पुस्तकों को पढ़ने के लिए शीशे की जरूरत पड़ती है। पढ़ना उसके साथ शीशा, आखिर बहुत सोच समझने के बाद एक विचार दिमाग में आया क्यों न सूई से कुछ लिखा जाये सो मैंने सूई से स्वर्गीय श्री हरिवंशराय बच्चन जी की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक 'मधुशाला' को करीब 2 से ढाई महीने में पूरा किया। यह पुस्तक भी मिरर इमेज में लिखी गयी है और इसको पढ़ने लिए शीशे की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि रिवर्स में पेज पर शब्दों के इतने प्यारे मोतियों जैसे पृष्ठों को गुंथा गया है, जिसको पढ़ने में आसानी रहती हैं और यह सूई से लिखी 'मधुशाला' दुनिया की अब तक की पहली ऐसी पुस्तक है जो मिरर इमेज व सूई से लिखी गई है।

मेंहदी कोन से लिखी गई गीतांजलि ( Gitanjali )

पीयूष ने एक और नया कारनामा कर दिखाया है उन्होंने 1913 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार विजेता रविन्द्रनाथ टैगोर की विश्व प्रसिद्ध कृति 'गीतांजलि' को 'मेंहदी के कोन' से लिखा है। उन्होंने 8 जुलाई 2012 को मेंहदी से गीतांजलि लिखनी शुरू की और सभी 103 अध्याय 5 अगस्त 2012 को पूरे कर दिए।इसको लिखने में 17 कोन तथा दो नोट बुक प्रयोग में आई हैं। पीयूष ने श्री दुर्गा सप्त शती, अवधी में सुन्दरकांड, आरती संग्रह, हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में श्री साईं सत्चरित्र भी लिख चुके हैं। 'रामचरितमानस' ( दोहे, सोरठा और चौपाई ) को भी लिख चुके हैं।

कील से लिखी 'पीयूष वाणी'

अब पीयूष ने अपनी ही लिखी पुस्तक 'पीयूष वाणी' को कील से ए-फोर साइज की एल्युमिनियम शीट पर लिखा है। पीयूष ने पूछने पर बताया कि कील से क्यों लिखा है ? तो उन्होंने बताया कि वे इससे पहले दुनिया की पहली सुई से स्वर्गीय श्री हरिवंशराय बच्चन जी की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक 'मधुशाला' को लिख चुके हैं। तो उन्हें विचार आया कि क्यों न कील से भी प्रयास किया जाये सो उन्होंने ए-फोर साइज के एल्युमिनियम शीट पर भी लिख डाला।

कार्बन पेपर की मदद से लिखी 'पंचतंत्र' ( Carbon paper written 'Panchatantra' )

गहन अध्ययन के बाद पीयूष ने कार्बन पेपर की सहायता से आचार्य विष्णुशर्मा द्वारा लिखी 'पंचतंत्र' के सभी ( पाँच तंत्र, 41 कथा ) को लिखा है। पीयूष ने कार्बन पेपर को (जिस पर लिखना है) के नीचे उल्टा करके लिखा जिससे पेपर के दूसरी और शब्द सीधे दिखाई देंगे यानी पेज के एक तरफ शब्द मिरर इमेज में और दूसरी तरफ सीधे।


अर्चना प्रकाशन रजत जयंती पर परिचर्चा, कार्यशाला, साहित्यिक समागम का आयोजन
17 December 2015
साहित्य साधना के गौरवषाली 25 वर्ष पूर्ण करने के उपलक्ष्य में अर्चना प्रकाषन भोपाल (म.प्र.) अर्चना प्रकाषन रजत जयंती वर्ष 2016 का आयोजन करेगा। रजत जयंती के समारोह 9 जनवरी 2016 को प्रदेष के प्रमुख साहित्यकारों, रचनाकारों की परिचर्चा आयोजित की जायेगी। कार्यषाला, परिचर्चा, विष्व संवाद केंद्र, षिवाजी नगर, भोपाल में आयोजित की जायेगी। संध्या समय रविन्द्र भवन में साहित्यिक समागम के आयोजन के साथ साहित्य मनीषियों का सम्मान किया जायेगा।
इस अवसर पर स्मारिका का अर्चना स्मारिका का प्रकाषन भी किया जायेगा। अर्चना प्रकाषन स्मारिका के लिए गठित समिति की बैठक में वर्ष भर चलने वाले कार्यक्रमों पर विचार करते हुए आगामी सिंहस्थ में भी अर्चना प्रकाषन का मंडप आयोजित कर मंडप में आगन्तुक साहित्यकारों की सुविधा के लिए व्यवस्था करने पर विचार हुआ। बैठक में सर्वश्री माधव सिंह दांगी, जयकिषन गौड़, रामभुवन सिंह, अरविंद श्रीवास्तव, सुरेष शर्मा, राघवेन्द्र सिंह, आलोक सिंघई, मयंक चैबे, डाॅ. जीवन शर्मा ने भाग लिया।
स्मारिका के संपादक वरिष्ठ पत्रकार श्री भरतचन्द्र नायक ने बैठक में बताया कि देष संास्कृतिक आक्रमण के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में पुरातन संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन के लिए साहित्य अनुरागियों का दायित्व बढ़ गया है। स्मारिका के प्रकाषन के लिए लेख सामग्री में प्रसंगानुकूल गंभीरता और गरिमा आवष्यक रूप से अपेक्षित है। अरविंद श्रीवास्तव, से सिंहस्थ प्रभारी मंत्री से संपर्क कर सिंहस्थ परिसर में अर्चना प्रकाषन के मंडप के लिए भूमि आरक्षण जैसी आवष्यक व्यवस्था करने का आग्रह किया गया। अरविन्द श्रीवास्तव सिंहस्थ मंत्री भूपेन्द्र ंिसह से संपर्क कर शीघ्र व्यवस्था कर समिति को अवगत करायेंगे।


जन-कल्याण के लिये ऊर्जा मंत्री श्री शुक्ल ने की गोवर्धन पूजा
13 November 2015
ऊर्जा एवं जनसम्पर्क मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने आज रीवा के लक्ष्मण बाग गौशाला में जन-कल्याण के लिये गोवर्धन पूजा की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और गौ-वंश संरक्षण के लिये नागरिकों को प्रेरित किये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति और समाज के संतुलित विकास से सही मायनों में सुख, शांति और समृद्धि आयेगी।
श्री शुक्ल ने कहा कि गौ-सेवा में हर तरह की परेशानी से मुक्ति दिलाने की शक्ति है। लक्ष्मण बाग गौ-शाला में गाय के संरक्षण के साथ भारतीय परम्परा को मजबूती देने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि बेसहारा गाय को कांजी हाउस ले जाने के बजाय गौ-शाला में लाकर सेवा की जाये। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पशु-पालकों को उन्नत नस्ल की गाय प्रदान की जायेगी। यह गाय राजस्थान और गुजरात से बुलवायी जा रही हैं। ऊर्जा मंत्री श्री शुक्ल ने गौमूत्र के महत्व के बारे में बताया। कार्यक्रम को रीवा महापौर श्रीमती ममता गुप्ता ने भी संबोधित किया।


तीन दिवसीय केरला फेस्टिवल का आयोजन भोपाल हाट में
13 November 2015
केरल के पर्यटन विकास विभाग की ओर से तीन दिवसीय केरला फेस्टिवल का आयोजन भोपाल हाट में होने जा रहे है। यह फेस्टिवल दिनांक 13-15 नवम्बर में भोपाल हाट में आयोजित होंगे। दिनांक 13 नवम्बर को सायं 7.00 बजे श्री बाबुलालजी गौर, गृह मंत्री मध्य प्रदेष शासन द्वारा इस कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। केरल राज्य के गठन के 60वीं वर्षगाॅठ के अवसर पर केरल के पर्यटन विकास विभाग द्वारा भारत के 9 स्थानों में नवम्बर माह में केरला फेस्टिवल का आयोजन किये जा रहे है। केरल राज्य का गठन 1 नवम्बर 1956 में मध्य प्रदेष राज्य के गठन के साथ हुआ था। भोपाल में इस फेस्टिवल का आयोजन केरल संगीत नाटक अकादमी के एम.पी.चैप्टर के तत्वाधान में आयोजित किये जा रहे है।
इस तीन दिवसीय टूरिसम फेस्टिवल में मुख्य रूप से केरला आयुर्वेद दवाईयों एवं थेरापी, हैन्डलूम, हैन्डीक्राफ्ट का प्रदर्षन होंगे तथा केरल के रसीले व्यंजन सामग्री जैसे केरल पराथा, टपियोका आईटम, कई तरह के शाकाहारी एवं मांसाहारी व्यंजन भी इस अवसर पर उपलब्ध रहेंगे। केरल के विविध प्रकार के केले भी प्रदर्षन एवं विक्रय हेतु उपलब्ध रहेंगे।
प्रत्येक दिन विविध प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी इस अवसर पर होंगे। प्रथम दिन केरल के एक परंपरागत फाॅक डान्स पडयणी का आयोजन से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रारंभ होंगे। मेजिक शो, कथा प्रसंगम, कविता पारायण, फाॅक गीत, तेय्यम, विविध प्रकार के शास्त्रीय एवं फाॅल्क डान्स, गान आदि का मंचन इस अवसर पर होंगे। इस अवसर पर प्रत्येक दिन केरल से पथार रहे कलाकारों के परंपरागत कला के मंचन के अलावा भोपाल के कलाकारों द्वारा अपने प्रस्तुती देंगे।


ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं विकास की अपार संभावनाएं रखता है रेशम उद्योगः वी. रमेश
भोपाल में सिल्क मार्क वन्या सिल्क एक्सपो 29 अक्टूबर से- 20% तक मिलेगी छूट

Our Correspondent :28 October 2015
रेशम उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं विकास की अपार संभावनाएं रखता है और इसके विस्तार से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सीधे लाभ होगा। यह बात क्षेत्रीय कार्यालय, भारतीय रेशम मार्क संगठन (केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार) के श्री वी. रमेश, उप निदेशक (निरी) एवं वरिष्ठ कार्यपालक ने मंगलवार को पत्र सूचना कार्यालय, 11, वैशाली नगर, भोपाल में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि भारतीय रेशम मार्क संगठन (सिल्क मार्क ऑर्गनाइजेश ऑफ इंडिया) द्वारा जहांनुमा पैलेस होटल, श्यामला हिल्स, भोपाल में 29 अक्टूबर से 02 नवंबर 2015 तक “सिल्क मार्क वन्या सिल्क एक्सपो 2015, भोपाल” का आयोजन किया जा रहा है। इसमें भारत के 11 राज्यों के दूर दराज के बुनाई केंद्र हिस्सा लेंगे।
श्री रमेश ने आगे कहा कि अक्सर ऐसा देखने में आता है कि कुछ बेईमान निर्माता लोगों को धोखा देकर नकली सिल्क असली सिल्क की कीमत में बेच रहे हैं, इसीलिए इस एक्सपो में रेशम की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी उत्पादों पर सिल्क मार्क का लेबल लगाया गया है। उन्होंने कहा कि इस एक्सपो में उपभोक्ताओं को शुद्ध सिल्क की विशाल श्रृंखला देखने को मिलेगी और उन्हें यहां उत्पादों की खरीदारी पर 20 फीसदी तक की छूट मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस एक्सपो में रेशम कीटपालन पर लाइव प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए श्री राजेश कुमार खरे, संयुक्त निदेशक, केंद्रीय रेशम बोर्ड ने अपने विभाग के कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उनका विभाग किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण एवं उन्हें रेशम कीट पालन का मार्गदर्शन देता है।
विदित है कि 29 अक्टूबर से 02 नवंबर 2015 तक चलने वाले इस एक्सपो का उद्घाटन समारोह 29 अक्टूबर 2015 (गुरुवार) को शाम 4.00 बजे जहांनुमा पैलेस होटल, श्यामला हिल्स, भोपाल में आयोजित किया जाएगा। इस एक्सपो का उद्घाटन भोपाल जिले के कलेक्टर और मुख्य अतिथि श्री निशांत वरवड़े करेंगे। उद्घाटन समारोह में भोपाल शहर की पूर्व महापौर श्रीमती कृष्णा गौर भी शिरकत करेंगी।


राष्ट्रीय अभिलेखागार के 125 वां स्थापना वर्ष समारोह भोपाल में संपन्न
Our Correspondent :05 October 2015
राष्ट्रीय अभिलेखागार के 125 वें स्थापना वर्ष (1891-2016) के उपलक्ष में राष्ट्रीय अभिलेखागार, क्षेत्रीय कार्यालय, भोपाल में आयोजित तीन दिवसीय समारोह गुरुवार को संपन्न हो गया। इस मौके पर मशहूर संरक्षणविद् श्री एआर एस.एम. हुसैन ने कहा कि सांस्कृति विरासतों का संरक्षण समय की जरूरत है। उन्होंने बेनजीर महल, ताज महल, जामा मस्जिद, मोती मस्जिद जैसे भोपाल के ऐतिहासिक स्मारकों के बेहतर रख-रखाव पर जोर दिया। इस अवसर पर बोलेते हुए इतिहासविद् श्री अख्तर हुसैन ने भोपाल के ऐतिहासिक आश्चर्यों का विवरण पेश किया और भोपाल में बेगमों द्वारा बनवाए गए मस्जिदों एवं मंदिरों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने विश्व विरासत सूची में शामिल भोपाल के भीमबेटका की महत्ता पर भी प्रकाश डाला। इस मौके पर प्रांजना सिन्हा, सहायक निदेशक, राष्ट्रीय अभिलेखागार, क्षेत्रीय कार्यालय, भोपाल ने भी अपने विचार रखे। भोपाल के स्थानीय विद्यालयों एवं कॉलेजों के छात्रों ने इस अवसर पर आयोजित फोटो प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इस अवसर पर व्याख्यान श्रृंखला का भी आयोजन किया गया। “दरीचा- शाहजहां बेगम के समय की एक झलक मुख्यतः बेनजीर पैलेस पर” शीर्षक एक प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया।


राम चरित मानस से विश्व में ज्ञान का प्रकाश फैल रहा है
Our Correspondent :15 September 2015
भोपाल। मप्र के राज्यपाल श्री राम नरेश यादव ने राजभवन में तुलसी जयंती कार्यक्रम के विदाई समारोह में कहा कि गोस्वामी तुलसी दास जी ने सरल भाषा में राम चरित मानस की रचना कर उसे पूरे विश्व में लोकप्रिय बनाने का काम किया है। राम चरित मानस से ही पूरे विश्व में ज्ञान का प्रकाश फैल रहा है। यह हमें लालच से दूर रहने, चरित्र और नैतिक मूल्यों को आत्म-सात करने की प्रेरणा देता है। राम चरित मानस ने अनुशासन, मर्यादा, संस्कृति की जो सीख दी है, उसका पूरे विश्व में प्रचार-प्रसार करने की जरूरत है। श्री यादव ने कहा कि दीदी मंदाकिनी, रामचरित मानस की जो सरिता बहा रही है वह अनुकरणीय है। राज्यपाल श्री यादव ने दीदी मंदाकिनी का शॉल, श्रीफल भेंट कर सम्मान किया।
दीदी मंदाकिनी ने कहा कि आज के विज्ञान के युग में मनुष्य भौतिक सुख-सुविधा के बावजूद मानसिक और शारीरिक रूप से दुखी है तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस के आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं। रामचरित मानस में सम्पूर्ण जीवन का दर्शन है। तुलसीदास ने राम चरित मानस को हिन्दी में प्रस्तुत कर जन-कल्याण किया है। पूर्व सांसद श्री रघुनंदन शर्मा ने स्वागत भाषण में कहा कि राजभवन में दीदी मंदाकिनी के सम्मान से हम अभिभूत हैं। राज्यपाल के प्रमुख सचिव श्री अजय तिर्की, सेवानिवृत्त मेजर श्री एस.आर. सिंहो और मानस भवन तथा तुलसी अकादमी के पदाधिकारी एवं मानस प्रेमी उपस्थित थे।


कविता संस्कार देती है: मेहरुन्निसा परवेज़ अरुण गीते का कविता संग्रह लोकार्पित
Our Correspondent :21 August 2015
भोपाल। जीवन मंे आप जो कुछ अनुभव करते हैं, उसकी सार्थक अभिव्यक्ति कविता में होती हो तो कविता सशक्त बन जाती है। अरुण गीते ने अपने अनुभव कविता में दर्ज कर दिये हैं।-ये उद्गार थे वरिष्ठ साहित्यकार श्री राजेश जोशी के, जो अरुण गीते की पुस्तक ‘उन्मादी हवाओं का दंश’ के लोकार्पण समारोह में बतौर अतिथि उपस्थित थे। समारोह को सम्बोधित करते हुए पद्मश्री मेहरुन्निसा परवेज़ ने कहा कि कविता हमें संस्कार देती है। अरुण गीते की कविताएं जहाँ मन को छूती हैं, वहीं सामाजिक विदू्रप पर अपनी असहमति भी दर्ज करवाती हैं। अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए सांसद डाॅ. भागीरथ प्रसाद ने कहा कि कविता हृदय की सहज अभिव्यक्ति है। अरुण गीते की कवितायें सहज हैं, जो हर पाठक को अपनी-सी लगती है। उनकी कविताएं निराशा से बाहर निकालती है।
आरम्भ में दुष्यन्त कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय के निदेशक राजुरकर ने स्वागत वक्तव्य देते हुए आयोजन की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। लोकार्पण के बाद कवि श्री अरुण गीते ने अपनी रचनाप्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कुछ कविताओं का पाठ भी किया। कृतज्ञता ज्ञापन श्रीमती जया आर्य ने किया।


मुंबई से दिल्ली की रथ यात्रा का भायंदर, सिलवासा, दमन और वापी में भव्य स्वागत
Our Correspondent :22 April 2015
मुंबई। अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति द्वारा १९ जुलाई २०१५ को सुबह जे बी नगर, अंधेरी (ईस्ट) में स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में एक विशाल हवन और पूजा का आयोजन किया गया था। जहाँ पर अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र बारहठ, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री विजय कुमार जैन, राजस्थानी फिल्म और टी वी अभिनेता अरविंद कुमार- नीलू ( नाच बलिए फेम ) सनी मंडावरा ,अनुपमा दधिची और राजस्थानी समाज के प्रतिष्ठित लोग थे। कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी लोगों ने जोड़ों में बैठकर पूजा और हवन किया। जहाँ पर हज़ारों की संख्या में लोग उपस्थित थे और खासकर स्कूल और कॉलेज के बच्चों ने पूजा और हवन में सहभागी हुए और तरह-तरह के वेश भूषा में लोगों को प्रोत्साहित किया और उसके बाद लक्ष्मी नारायण के आशीर्वाद लेने के बाद यात्रा शुरू हुई।जोकि गुजरात, राजस्थान, हरियाणा इत्यादि होते हुए २७ जुलाई को दिल्ली पहुंचेगी।
मीरा भायंदर में पास शिवजी पुतले के पास नंदू पोद्दार, नगर सेविका सुमन कोठारी, राजेश डालमिया और राजस्थानी समाज के लोगों द्वारा रथ यात्रा का भव्य स्वागत समारोह हुआ। इसके बाद यात्रा सिलवासा, दमन होते हुए और स्वागत समारोह को सम्बोधित करते हुए वापी पहुंची। जहाँ पर आर पी चौधरी, राजेश दुग्गड़ और प्रवासी राजस्थानी द्वारा विशाल और भव्य स्वागत समारोह का आयोजन किया गया था। जहाँ पर यात्रा के संयोजक और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री विजय कुमार जैन ने कहा," जिस तरह देशभर में लोग अपनी भाषा जैसे कि मराठी, तमिल, तेलगु और गुजराती पढ़ते है, उसी तरह हमारे बच्चे स्कूल और कॉलेज में राजस्थानी भाषा पढ़े। मैं उम्मीद करता हूँ कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी हमारी मांगे पूरी करेंगे।"
प्रदेश अध्यक्ष डॉ.राजेंद्र बारहठ ने कहा,"राजस्थानियों ने देश के लिए हर समय अपना योगदान दिया और देते आ रहे है। लेकिन लोगों ने राजस्थानी भाषा को संवैधानिक भाषा का दर्ज़ा मिले इसपर ध्यान नहीं दिया। हम इसके जरिये अपनी तड़प और अपनी इच्छा को लोगों के सामने रख रहे हैं। इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद यह है कि राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता मिले और इसे संविधान के आठवीँ अनुसूची में शामिल किया जाय।"
राजस्थानी फिल्म, टी वी और नाच बलिए फेम अभिनेता अरविंद कुमार कहते है," जिस तरह लोगो ने रास्ते में स्वागत किया है, वह तारीफे काबिल है। इससे हमे लगता कि जो हम लोग चाहते है, वही देश के हर राजस्थानी की इच्छा है। जोकि जल्दी पूरी होगी, ऐसा मुझे लगता है।"

 

 


"एथिक्स इन गवर्नेंस" विषय पर पब्लिक लेक्चर संपन्न
रिटायर्ड IAS अधिकारी श्री पदमवीर सिंह ने रखे अपने विचार

Our Correspondent :20 July 2015
स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी की मासिक पब्लिक लेक्चर सीरीज में आज "एथिक्स इन गवर्नेंस (प्रशासन में नैतिकता) " विषय पर आज रिटायर्ड IAS अधिकारी श्री पदमवीर सिंह ने अपने विचार रखे I
श्री सिंह वर्तमान में अटल बिहारी बाजपेई सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान भोपाल के महानिदेशक हैं तथा पूर्व में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी मसूरी के प्रमुख रह चुके हैं

कार्यक्रम विवरण इस प्रकार था

कार्यक्रम का नाम - पब्लिक लेक्चर
दिनांक - 19 जुलाई रविवार
स्थान - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी

विषय - प्रशासन में नैतिकता
वक्ता - श्री पदमवीर सिंह
पदमवीर सिंह जी ने क्या कहा :-

हम प्रतिदिन - प्रतिक्षण जो भी निर्णय लेते हैं वे सभी निर्णय नैतिक व्यवहार को व्यक्त करते हैं
हमारा नैतिक व्यवहार हमारे मूल्यों से बनता है
हर समय में कुछ मूल्य प्रमुखता प्राप्त कर लेते हैं - जैसे कि वर्तमान में तीन मूल्य सबसे प्रमुख है - पैसा, ताकत और प्रसिद्धि
वर्तमान में हम एक विभाजक समाज में रह रहे हैं जहाँ हर चीज़ हमें बाटनें का काम कर रही है ...हम कई आधार पर बंटते जा रहे हैं जबकि हम सबकी उत्त्पत्ति एक ही जगह से हुई है और हम सब बराबर हैं
आज अधिकांश लोग बोलते हैं कि अच्छे मूल्य क्या हैं उन्हें कहाँ से पढ़ें ....मैं कहता हूँ कि सबसे अच्छे मूल्य हमारे संविधान में हैं
पर संविधान हमारे लिए वह डॉक्यूमेंट है जिसे हम मानते तो हैं पर प्रैक्टिस नहीं करते ...यदि संबैधानिक मूल्यों को हम पूरी तरह अपने व्यवहार में उतार लें तो यह देश जन्नत बन जायेगा
संविधान के अलावा हर समाज की एक " बुक ऑफ़ विजडम" होती है जो उस समाज ने हज़ारों साल के अनुभवों से विकसित किया है ....समाज को चाहिए कि वह इस बुक ऑफ़ विजडम के हिसाब से चले
हममें से कई अच्छे सिद्धांतों को स्वीकार करते हैं और उन्हें मानते भी हैं पर उन्हें अपने व्यवहार में नहीं उतारते क्योंकि हम सब खंडित व्यक्ति हैं ....बोलने के लिए कुछ और और करने के लिए कुछ और
हम सब जानना चाहते हैं कि नैतिक क्या है - में कहता हूँ कि वह इस देश के हर क़ानून को मन्ना नैतिकता है , ऐसा काम करना जिससे आपको गौरव की अनुभूति हो वह नैतिकता है ...और ऐसे काम जिसमें सबकी जीत हो वह नैतिकता है


भोपाल की पहली "यंग ऑथर समिट" संपन्न
Our Correspondent :27 April 2015
क्लब इंक द्वारा आज स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में "यंग ऑथर्स समिट" का आयोजन किया गया जिसमें 25 साल से कम के 5 इंग्लिश ऑथर्स ने भाग लिया

कार्यक्रम में शामिल होने वाले 5 ऑथर्स
अंकिता श्रीवास्तव (बुक - आई होप वी लॉस्ट) I Hope we lost
ओशी ज़ोहरी (बुक - अ बिटर स्वीट सिम्फनी) A bitter sweet symphony
दिव्य कुमार गर्ग (बुक - लाइफ एट दा रेस टू आई आई टी) Life at the race to IIT
रुपेश मेश्राम (बुक - लाइफ कुड वी ईजियर) Life could be easier
देवांशी खेत्रपाल (बुक - कोमा टू से ) Comatose

कार्यक्रम में किसने क्या कहा

इस कार्यक्रम का संचालन क्लब इंक की प्रमुख देवांशी खेत्रपाल ने किया . देवांशी ने सभी ऑथर्स से बारी बारी सवाल पूंछे और उनके अनुभवों को पाठकों के सामने रखा
देवांशी के प्रश्न और यंग ऑथर्स के जवाब

देवांशी - आपके दिमाग में किताब लिखने का विचार कैसे आया
अंकिता - मेरे स्कूल में हर कोई कुछ ना कुछ बड़ा करता था जिसके कारण उन्हें प्रेयर में स्टेज पर बुलाकर सम्मानित किया जाता था . मेरी भी इच्छा थी कि मुझे स्टेज पर बुलाया जाए ...साथ ही बचपन से ही मुझे फेमस होने की इच्छा थी ...बस इसी कारण किताब लिखने का मन बना लिया
ओशी जोहरी - किताबें पढ़ते पढ़ते कई बार लगता था कि ऐसी कहानियाँ तो में भी लिख सकती हूँ ...बन मन बनाया और लिख डाली अपनी कहानी
दिव्य गर्ग - मैं और मेरे दोस्त IIT की तैयारी कर रहे थे , कितनी भी पढ़ा करें लोगों को लगता है मक्कारी करते हैं इसलिए सेलेक्ट नहीं होता ...सोचा लोगों को बताया जाए कि कितना मुश्किल है तैयारी का ये पूरा माजरा
रुपेश - मैने अपने आस पास इंजीनियरिंग के बाद लोगों को तरह तरह के स्ट्रगल करते देखा ...सोचा जिसने यह स्ट्रगल नहीं किया वह कैसे समझेगा कि हम पर क्या बीत रही है ...बस यही बात बताने के लिए किताब लिख दी
देवान्शी - अब जब किताब पब्लिश हो गयी है तो क्या करते हैं
अंकिता - मैंने किताब लिखने के बाद एक प्रकाशन में एडिटर का काम करना शुरू किया है साथ में दूसरी किताब पर काम कर रही हूँ जो अगले साल आपके हाथ में होगी
ओशी - मैं अब गाने लिखती हूँ ...दोस्तों का एक बैंड है - बंदिशें ...उसके लिए आजकल गाने लिख रही हूँ
दिव्य - मुझे आजकल पॉलिटिक्स में बहुत इंटरेस्ट आ रहा है इसलिए आजकल मैं एक पोलिटिकल ब्लॉग चलाता हूँ
रुपेश - दूसरी किताब लिख रहा हूँ जल्दी प्रकाशित होगी
देवांशी - इंडिया में यंग ऑथर्स को किस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है

सभी के उत्तर :-

देश में अच्छी किताबों को पब्लिश करने वाले पब्लिशर्स की बहुत कमी है
पब्लिशर्स आप काम देखने की वजाय आपकी डिग्री देखकर बुक पब्लिश करते हैं
अधिकांश पब्लिशर्स के यहाँ स्क्रिप्ट रिव्यु करने का कोई सिस्टम ही नहीं है
अभी भी बहुत सारे पब्लिशर्स डिजिटल मार्केटिंग नहीं कर पाते

देश में एक भी ढंग की मैन स्ट्रीम लिटरेरी मैगज़ीन पब्लिश नहीं होती हमारे यहाँ किसी ऑथर्स से संपर्क करना बेहद मुश्किल है


अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस
Our Correspondent :22 April 2015
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में आज दिनांक 19 मई 2015, अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रातः 8.30 बजे नगरवासियों के लिये “खजाने की खोज“ नामक प्रतियागिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का उद्देष्य प्रतिभागियों को शहर में स्थित सांस्कृतिक धरोहरों एवं विभिन्न संग्रहालयों की पहचान कराना है। इस प्रतियोगिता को शहर के छः संग्रहालयों ने संयुक्त रूप से आयोजित किया गया, जिसमे लगभग 80 लोगो ने भाग लिया। प्रतियोगिता का उद्घाटन मानव संग्रहालय के निदेशक, प्रोफ सरित कुमार चैधुरी ने हरी झंडी दिखा कर किया। इसमें प्रतिभागीयों ने दो-दो के दल में रहकर संग्रहालय द्वारा दी गयी संकेत-पत्रिका का प्रयोग कर प्रदर्शो की जानकारी देनी थी। विजेताओं को आकर्षक नकद पुरस्कार प्रदान दिये जायेंगें। इस कार्यक्रम के समन्वयक मानव संग्रहालय के प्रकाशन अधिकारी, श्री सुधीर श्रीवास्तव है।

 

 


मानव संग्रहालय में प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में द्वारा वर्तमान संचालित ग्रीष्मकालीन शैक्षणिक कार्यक्रम श्रृंखला ’करो और सीखो’ की पहली कडी के रूप “ओडिशा का पारंपरिक टेराकोटा“ पर प्रदर्शन सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज दिनांक 12 मई 2014 से संग्रहालय स्थित सिरेमिक कार्यशाला में शुरुवात हुई। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में ओडिशा के पारंपरिक टेराकोटा कलाकार श्री लोकनाथ राणा ने पंजीकृत प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान करना शुरू किया। पहले दिन 30 प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया। पहले ही दिन बच्चो ने छोटे-छोटे कलाकृतियाँ जैसे की चूहे, गणेशजी, आदि बनाना सिखा। प्रशिक्षण हेतु पंजीयन शुल्क रू 100/- प्रति व्यक्ति है। प्रशिक्षण का समय प्रातः 11 बजे से 2 बजे तक रहेगा। अधिक जानकारी के लिये दूरभाष नम्बर 0755 2526548 पर संपर्क किया जा सकता है।


"कुछ और है ज़िद अपने मन की" हुई लॉन्च
Our Correspondent :22 April 2015
इंग्लिश की रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ रजनी पाण्डेय का कहानी संग्रह "कुछ और है ज़िद अपने मन की" आज स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में लॉन्च हुआ. भाल्व प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस बुक को श्री सत्य साईं कॉलेज की हिंदी की विभागाध्यक्ष 'बिनय राजाराम' ने लॉन्च किया .

कार्यक्रम में किसने क्या कहा

डॉ रजनी पाण्डेय (लेखिका)
यह पुस्तक मेरी ज़िन्दगी के कुछ अच्छे अनुभव हैं जिन्हें सालों से मेरी अच्छी स्मृतियों के तौर पर मौजूद थे उस ज़माने में लड़कियों का ज़िद करना बहुत बड़ी बात होती थी पर मैंने अपने आस पास कुछ ऐसी लड़कियों को देखा जिन्होंने ना केवल ज़िद की बल्कि तमाम परेशानियों के वाबजूद पानी ज़िद को पूरा भी किया ऐसी लड़कियों के प्रति मेरे मन में हमेशा से सम्मान का भाव रहा है
यह किताब वैसे तो कहानियों का संग्रह है पर असल में ये सब कहानियाँ मेरे आस पास के लोगों की ज़िद और उससे जुड़े अनुभव ही हैं


मेरी अधिकाँश कहानियां गंभीर हैं पर एक कहानी थोडा सा गुदगुदाने वाली भी है कहानी का नाम है "बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना" जो असल में अंतरजातीय विवाह करने वाले एक जोड़े की कहानी है

डॉ बिनय राजाराम

हेड हिंदी डिपार्टमेंट, श्री सत्य साईं कॉलेज

डॉ बिनय राजराम ने इस पुस्तक की सातों कहानियों व्याख्या की और इन्हें हिंदी साहित्य में अलग तरह की कहानियां बताया उनका कहना था कि आजकल हिंदी साहित्य में जिस तरह की कहानियां लिखी जा रहीं हैं उनसे डॉ रजनी पाण्डेय की कहानियां इस कारण अलग हैं क्योंकि ना तो इन कहानियों में कोई अलंकार हैं और ना ही साहित्यिक श्रृंगार सारी कहानियाँ सीधे दिल से निकली हैं और सहज तरीके से कह दी गईं हैं
इन कहानियों को पढ़कर शायद ही कोई विश्वास करे कि इन्हें इंग्लिश की प्रोफेसर ने लिखा है उन्होंने कहा कि हर रोज़ हमारे आस पास पचासों कहानियां जन्म लेतीं हैं पर हम उन्हें कहानी के रूप में प्रस्तुत नहीं कर पाते कहानी लिखने के लिए साहित्यिक क्षमता के अलावा घटनाओं में गहरी रूचि होना भी जरुरी है


बुक लॉन्च: "कुछ और है ज़िद अपने मन की"
Our Correspondent :20 April 2015
मंगलवार 21 अप्रैल को स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में इंग्लिश की रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ रजनी पाण्डेय की किताब "कुछ और है ज़िद अपने मन की" लॉन्च की जायेगी . इस अवसर "मन की ज़िद" नामक एक विशेष प्रतियोगिता भी आयोजित की जा रही है . जिसमें कोई भी व्यक्ति अपनी ज़िद से जुड़े अनुभव सुना सकते हैं .सर्वश्रेष्ठ 5 अनुभवों को इस पुस्तक के अगले संस्करण में प्रकाशित किया जायेगा

कार्यक्रम विवरण :
दिनांक - 21 अप्रैल , मंगलवार
समय - सायं 5 बजे
स्थान - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी

कार्यक्रम क्या है

"कुछ और है ज़िद अपने मन की" नामक पुस्तक की लॉन्चिंग
"मन की ज़िद" प्रतियोगिता

बुक लॉन्च

बुक का नाम : "कुछ और है ज़िद अपने मन की"
लेखक : डॉ रजनी पाण्डेय (रिटायर्ड प्रोफेसर इंग्लिश)
विशेष अतिथि - डॉ बिनय राजराम (प्रोफेसर हिंदी)

पुस्तक के बारे में :

"कुछ और है ज़िद अपने मन की" एक कहानी संग्रह है जिसमें लेखिका ने अपने आस पास देखी घटनाओं को कहानी के रूप में लिखा है . हर कहानी में मुख्य पात्र महिलाएं हैं जिन्होंने अपने मन की ज़िद को सम्मान देते हुए जीवन जिया ....समाज के नियम और मान्यताओं के विपरीत अपनी ज़िद पर टिके रहने की प्रेरणा देती इस किताब में कुल 7 कहानियाँ हैं

लेखिका के बारे में :

डॉ रजनी पाण्डेय रविन्द्र नाथ टैगोर द्वारा स्थापित विश्वभारती शान्तिनिकेतन की स्टूडेंट रहीं हैं वे 25 वर्ष तक भोपाल के श्री सत्य साईं कॉलेज में अंग्रेजी की प्रोफेसर रहीं. तथा उसके बाद से ट्रेनिंग, एग्जामिनेशन एवं अनुवाद के कार्य से जुडी हुईं हैं

मन की ज़िद प्रतियोगिता

क्या है प्रतियोगिता : यह एक ओपन प्रतियोगिता है जिसमें कोई भी व्यक्ति अपनी ज़िद से जुड़े अनुभवों को हमारे साथ साझा कर सकता है
क्या करना है : यदि आपने कभी कोई ज़िद की है तो उस ज़िद से जुड़े अपने अनुभव को 100 शब्दों में लिखकर 21 अप्रैल को शाम 5 बजे से पहले स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में जमा कर दें .
कौन भाग ले सकता है - किसी भी आयु वर्ग का कोई भी व्यक्ति

प्रतियोगिता की भाषा - केवल हिंदी

पुरूस्कार -

सर्वश्रेष्ठ 5 एंट्रीज़ को मंगलवार को लाइब्रेरी में होने वाले कार्यक्रम में अनुभव सुनाने का मौका दिया जायेगा
इन 5 सर्वश्रेष्ठ एंट्रीज़ को "कुछ और है ज़िद अपने मन की" बुक के दूसरे संस्करण में शामिल किया जायेगा
मंगलवार के कार्यक्रम में 3 सर्वश्रेष्ठ अनुभवों को सम्मानित भी किया जायेगा


बुक लॉन्च एवं "मन की ज़िद" प्रतियोगिता
Our Correspondent :20 April 2015
मंगलवार 21 अप्रैल को स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में इंग्लिश की रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ रजनी पाण्डेय की किताब "कुछ और है ज़िद अपने मन की" लॉन्च की जायेगी . इस अवसर "मन की ज़िद" नामक एक विशेष प्रतियोगिता भी आयोजित की जा रही है . जिसमें कोई भी व्यक्ति अपनी ज़िद से जुड़े अनुभव सुना सकते हैं .सर्वश्रेष्ठ 5 अनुभवों को इस पुस्तक के अगले संस्करण में प्रकाशित किया जायेगा

कार्यक्रम विवरण :

दिनांक - 21 अप्रैल , मंगलवार
समय - सायं 5 बजे
स्थान - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी

कार्यक्रम क्या है

"कुछ और है ज़िद अपने मन की" नामक पुस्तक की लॉन्चिंग
"मन की ज़िद" प्रतियोगिता

बुक लॉन्च

बुक का नाम : "कुछ और है ज़िद अपने मन की"
लेखक : डॉ रजनी पाण्डेय (रिटायर्ड प्रोफेसर इंग्लिश)
विशेष अतिथि - डॉ बिनय राजराम (प्रोफेसर हिंदी)

पुस्तक के बारे में :

"कुछ और है ज़िद अपने मन की" एक कहानी संग्रह है जिसमें लेखिका ने अपने आस पास देखी घटनाओं को कहानी के रूप में लिखा है . हर कहानी में मुख्य पात्र महिलाएं हैं जिन्होंने अपने मन की ज़िद को सम्मान देते हुए जीवन जिया ....समाज के नियम और मान्यताओं के विपरीत अपनी ज़िद पर टिके रहने की प्रेरणा देती इस किताब में कुल 7 कहानियाँ हैं

लेखिका के बारे में :

डॉ रजनी पाण्डेय रविन्द्र नाथ टैगोर द्वारा स्थापित विश्वभारती शान्तिनिकेतन की स्टूडेंट रहीं हैं वे 25 वर्ष तक भोपाल के श्री सत्य साईं कॉलेज में अंग्रेजी की प्रोफेसर रहीं. तथा उसके बाद से ट्रेनिंग, एग्जामिनेशन एवं अनुवाद के कार्य से जुडी हुईं हैं

मन की ज़िद प्रतियोगिता

क्या है प्रतियोगिता : यह एक ओपन प्रतियोगिता है जिसमें कोई भी व्यक्ति अपनी ज़िद से जुड़े अनुभवों को हमारे साथ साझा कर सकता है
क्या करना है : यदि आपने कभी कोई ज़िद की है तो उस ज़िद से जुड़े अपने अनुभव को 100 शब्दों में लिखकर 21 अप्रैल को शाम 5 बजे से पहले स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में जमा कर दें .
कौन भाग ले सकता है - किसी भी आयु वर्ग का कोई भी व्यक्ति

प्रतियोगिता की भाषा - केवल हिंदी

पुरूस्कार -

सर्वश्रेष्ठ 5 एंट्रीज़ को मंगलवार को लाइब्रेरी में होने वाले कार्यक्रम में अनुभव सुनाने का मौका दिया जायेगा
इन 5 सर्वश्रेष्ठ एंट्रीज़ को "कुछ और है ज़िद अपने मन की" बुक के दूसरे संस्करण में शामिल किया जायेगा
मंगलवार के कार्यक्रम में 3 सर्वश्रेष्ठ अनुभवों को सम्मानित भी किया जायेगा


मोटिवेशनल स्पीकर ब्रम्हाकुमारी सिस्टर शिवानी १ मार्च को भोपाल में
पर्पल मार्च - इंडो यूरोपियन चैम्बर ऑफ़ कामर्स अंतर्राष्ट्रीय स्वयं सेवी द्वारा संचालित एक सामाजिक फोरम और ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय भोपाल के संयुक्त तत्वाधान में मोटिवेशनल एवं आध्यात्मिक स्पीकर- वक्ता ब्रम्हा कुमारी सिस्टर शिवानी का एक वृहद कार्यक्रम " रिफ्रेशिंग एंड एनलाइटिंग टॉक बाय सिस्टर शिवानी " १ मार्च ,रविवार को सांय ५ बजे भोपाल स्कूल ऑफ़ सोशल साइंस -BSS college में आयोजित किया जा रहा है। सिस्टर शिवानी पिछले २० वर्ष से बेहतर जिंदगी के रहस्यों और ऊर्जावान व्यक्तिव पर केंद्रित कई महत्त्वपूर्ण प्रेरणादायक कार्यक्रम लगातार टीवी पर दे रही हैं जो विश्व प्रसिद्ध हैं एवं उनके फॉलोवर्स पूरे देश विदेश में हैं। यह कार्यक्रम पूर्णतः निशुल्क है। ( Invitation Letter enclosed)
कार्यक्रम के निशुल्क पास निम्न स्थानों से प्राप्त किये जा सकते हैं.

१. इंडो यूरोपियन चैम्बर ऑफ़ कामर्स, f-101 , रक्षा टावर,चुना भट्टी , मेन रोड ,डोमिनो पिज़ा के पास
,भोपाल 0755-4270989,7415707449
२. ब्रम्हा कुमारी राजयोग भवन , ई ५ अरेरा कॉलोनी ,भोपाल-9479319148
३. माय एफ एम स्टूडियो , प्रेस काम्प्लेक्स,भोपाल

कार्यक्रम में पेंटिंग और कविता लेखन प्रतियोगिता के बच्चों को सिस्टर शिवानी द्वारा पुरुस्कृत भी किया जायेगा ,साथ ही आशा निकेतन के मूक बधिर बच्चों द्वारा आकर्षक नृत्य भी प्रस्तुत किया जाएगा. इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लगभग २००० प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे. पर्पल मार्च - इंडो यूरोपियन चैम्बर ऑफ़ कामर्स अंतर्राष्ट्रीय स्वयं सेवी द्वारा संचालित एक सामाजिक फोरम है जो लिंग समानता और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य करता है। इंडो यूरोपियन चैम्बर ऑफ़ कामर्स सामाजिक और आर्थिक विकास के क्षेत्र में भारत एवं अन्य देशों के बीच सेतु का कार्य कर रहा है।

विशेष अनुरोध : कृपया उक्त समाचार को अपने महत्वपूर्ण-प्रतिष्ठित समाचार पत्र में स्थान देने का कष्ट करें और कार्यक्रम में अवश्य पधारें।


मोटिवेशनल स्पीकर ब्रम्हाकुमारी सिस्टर शिवानी १ मार्च को भोपाल में
पर्पल मार्च - इंडो यूरोपियन चैम्बर ऑफ़ कामर्स अंतर्राष्ट्रीय स्वयं सेवी द्वारा संचालित एक सामाजिक फोरम और ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय भोपाल के संयुक्त तत्वाधान में मोटिवेशनल एवं आध्यात्मिक स्पीकर- वक्ता ब्रम्हा कुमारी सिस्टर शिवानी का एक वृहद कार्यक्रम " रिफ्रेशिंग एंड एनलाइटिंग टॉक बाय सिस्टर शिवानी " १ मार्च ,रविवार को सांय ५ बजे भोपाल स्कूल ऑफ़ सोशल साइंस -BSS college में आयोजित किया जा रहा है। सिस्टर शिवानी पिछले २० वर्ष से बेहतर जिंदगी के रहस्यों और ऊर्जावान व्यक्तिव पर केंद्रित कई महत्त्वपूर्ण प्रेरणादायक कार्यक्रम लगातार टीवी पर दे रही हैं जो विश्व प्रसिद्ध हैं एवं उनके फॉलोवर्स पूरे देश विदेश में हैं। यह कार्यक्रम पूर्णतः निशुल्क है। ( Invitation Letter enclosed)
कार्यक्रम के निशुल्क पास निम्न स्थानों से प्राप्त किये जा सकते हैं.

१. इंडो यूरोपियन चैम्बर ऑफ़ कामर्स, f-101 , रक्षा टावर,चुना भट्टी , मेन रोड ,डोमिनो पिज़ा के पास
,भोपाल 0755-4270989,7415707449
२. ब्रम्हा कुमारी राजयोग भवन , ई ५ अरेरा कॉलोनी ,भोपाल-9479319148
३. माय एफ एम स्टूडियो , प्रेस काम्प्लेक्स,भोपाल

कार्यक्रम में पेंटिंग और कविता लेखन प्रतियोगिता के बच्चों को सिस्टर शिवानी द्वारा पुरुस्कृत भी किया जायेगा ,साथ ही आशा निकेतन के मूक बधिर बच्चों द्वारा आकर्षक नृत्य भी प्रस्तुत किया जाएगा. इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लगभग २००० प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे. पर्पल मार्च - इंडो यूरोपियन चैम्बर ऑफ़ कामर्स अंतर्राष्ट्रीय स्वयं सेवी द्वारा संचालित एक सामाजिक फोरम है जो लिंग समानता और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य करता है। इंडो यूरोपियन चैम्बर ऑफ़ कामर्स सामाजिक और आर्थिक विकास के क्षेत्र में भारत एवं अन्य देशों के बीच सेतु का कार्य कर रहा है।

विशेष अनुरोध : कृपया उक्त समाचार को अपने महत्वपूर्ण-प्रतिष्ठित समाचार पत्र में स्थान देने का कष्ट करें और कार्यक्रम में अवश्य पधारें।


दुष्यन्त कुमारसंग्रहालय का स्थापना दिवस आज (मंगलवार को)
राॅक शैली में प्रस्तुत की जायेंगी दुष्यन्त कुमार की ग़ज़लें


भोपाल। दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय मंगलवार (30 दिसम्बर) को अपना स्थापना दिवस मनायेगा। इस अवसर पर दुष्यन्त कुमार की ग़ज़लों की राॅक शैली में प्रस्तुति होगी। समारोह के मुख्य अतिथि माॅरीशस के वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. राज हीरामन होंगे।
यह जानकारी देते हुए दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय के निदेशक राजुरकर राज ने बताया कि 30 दिसम्बर 1997 को स्थापित संग्रहालय के स्थापना दिवस के अवसर पर अभिनव प्रयोग किया जा रहा है। इसके अन्तर्गत ‘साया बैंड’ के विकास सिरमोलिया और उनके साथियों द्वारा दुष्यन्त कुमार की ग़ज़लें राॅक शैली में प्रस्तुत की जायेंगी। इस अवसर पर माॅरीशस के वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. हीरामन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है।


महत्वपूर्ण साहित्यिक सरोकार
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राष्ट्रीय ख्याति के सत्रहवें अम्बिका प्रसाद दिव्य साहित्य पुरस्कार घोषित
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श्री पंकज परिमल, डा शशि वर्धन शर्मा शैलेश, श्री वनाफरचन्द्र, डा राकेश कुमार सिंह एवं
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श्री रवीन्द्र बडगैंया पुरस्कृत, एवं सात लेखकों को दिव्य प्रशस्ति पत्र।
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भोपाल। राष्ट्रीय ख्याति के बहुचर्चित अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कारों की घोषणा, मंगलवार 30 दिसम्बर 2014 को , साहित्य सदन, सांईनाथ नगर, सी-सेक्टर, कोलार, भोपाल में आयोजित एक साहित्यिक समारोह में की गई । पुरस्कारों की घोषणा डा. हरिसिंह गौर वि. वि. सागर के हिन्दी विभाग के प्राध्यापक एवं प्रसिद्ध विद्वान डा. आनन्द त्रिपाठी एवं इलाहाबाद की प्रसिद्ध कवयित्री श्रामती विजयलक्ष्मी विभा ने संयुक्त रूप से की। इक्कीस सौ रुपये राशि के दिव्य पुरस्कार, श्री पंकज परिमल (साहिबाबाद) को उनके खंडकाव्य “उत्तम पुरुष का गीत” डा. शशिवर्धन शर्मा शैलेश, (नागपुर) को उनके उपन्यास “वक्त की आँधयाँ,” श्री वनाफर चन्द्र (भोपाल) को उनके कहानी संग्रह “उसकी डायरी” डा. राकेश कुमार सिंह (आगरा)को उनके निबन्ध संग्रह “धनिया की कामधेनु” एवं श्री रवीन्द्र बडगैंया (बिलासपुर) को उनके व्यंग संग्रह “तो अंग्रेज क्या बुरे थे” , के लिए प्रदान किये जायेंगे। इसके अलावा श्री राघवेन्द्र तिवारी (भोपाल ) को उनके काव्य संग्रह “स्थापित होता है शब्द हर बार” , श्री हातिम जावेद मेहसी (चंपारण) को उनके गजल संग्रह, “वक्त की हथेली में “ ,श्री प्रेमचंद सहजवाला (दिल्ली) को उनके उपन्यास “नौकरीनामा बुद्धू का” ,श्रीमती रंजना फतेपुरकर (इंदौर) को उनके लघु कथा संग्रह “बूंदों का उपहार”श्री कृष्ण नागपाल (नागपुर ) को उनके निबन्ध संग्रह “अजगर और मेमने” श्री सदाशिव कौतुक (इंदौर) को उनके व्यंग संग्रह ”भगवान दिल्ली में’ के लिये तथा “शब्द प्रवाह “पत्रिका को श्रेष्ठ संपादन हेतु श्री संदीप सृजन (उज्जैन) को अम्बिका प्रसाद दिव्य प्रशस्ति पत्र प्रदान किये जायेंगे। दिव्य पुरस्कारों के संयोजक श्री जगदीश किंजल्क ने बताया कि इन पुरस्कारों हेतु देश के कोने-कोने से कुल 147 पुस्तकें प्राप्त हुई थीं ।सत्रहवे दिव्य पुरस्कारों के विद्वान निर्णायक हैं – प्रो. आनन्द त्रिपाठी,श्री माता चरण मिश्र, श्रीमती विजयलक्ष्मी विभा, श्री मयंक श्रीवास्तव, श्री राजेन्द्र नागदेव , श्री प्रियदर्शी खैरा, श्री संतोष खरे, प्रो.रामदेव भारद्वाज, श्री प्रभुदयाल मिश्र,श्री कुमार सुरेश, एवं श्री जगदीश किंजल्क । साहित्य सदन की व्यवस्थापक श्रीमती राजो किंजल्क ने बताया कि ये पुरस्कार शीघ्र ही विद्वानों को उपलब्ध कराये जायेंगे ।अठारहवे दिव्य पुरस्कारों हेतु भी पुस्तकें आमंत्रित कीगई हैं ।


महत्वपूर्ण साहित्यिक सरोकार
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राष्ट्रीय ख्याति के अम्बिका प्रसाद दिव्य पुरस्कारों हेतु पुस्तकें आमंत्रित
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भोपाल। साहित्य सदन भोपाल द्वारा राष्ट्रीय ख्याति के अठारहवें अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कारों हेतु साहित्य की अनेक विधाओं में पुस्तकें आमंत्रित की जाती हैं । उपन्यास, कहानी, कविता, व्यंग एवं निबन्ध विधाओं पर प्रत्येक के लिये इक्कीस सौ रुपये राशि के पुरस्कार प्रदान किया जायेंगे। दिव्य पुरस्कारों हेतु पुस्तकों की दो प्रतियाँ, लेखक के दो छाया चित्र एवं प्रत्येक विधा की प्रविष्टि के साथ दो सौ रुपये प्रवेश शुल्क भेजना होगा ।हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकों की मुद्रण अवधि 1 जनवरी 2013 से लेकर 31दिसम्बर 2014 के मध्य होना चाहिये। राष्ट्रीय ख्याति के इन प्रतिष्ठापूर्ण चर्चित दिव्य पुरस्कारों हेतु प्राप्त पुस्तकों पर गुणवत्ता के क्रम में दूसरे स्थान पर आने वाली पुस्तकों को दिव्य-प्रशस्ति पत्रों से सम्मानित किया जायेगा। अन्य जानकारी हेतु मोबाइल नं. 09977782777, दूरभाष-0755-2494777 एवं ईमेल:jagdishkinjalk@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है। पुस्तकें भेजने का पता है-श्रीमती राजो किंजल्क, साहित्य सदन , 145-ए, सांईनाथ नगर सी-सेक्टर, कोलार रोड, भोपाल-462042 । पुस्तकें प्राप्ति की अंतिम तिथि है 30 अक्टूबर 2015 । कृपया प्रेषित पुस्तकों पर पेन से कोई भी शब्द न लिखें ।


शहरभर में रही क्रिसमस सेलीब्रेशन की धूम

भोपाल। गुरूवार को क्रिसमस का खास मौका था। कोहरे के बीच रंग बिरंगी रोशनी से नहाए हुए चर्च में खुशियां बांटने की होड़ मची थी।
सभी एक-दूसरे को गले लगा गिफ्ट भेंट कर मौके को यादगार बनाने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे थे। शहर के चर्चो में प्रेम और खुंशी बांटने के संदेश दिया गया। चर्चो के अलावा स्कूलों में क्रिसमस फीवर दिखाई दिया और सामाजिक संस्थाओं ने क्रिसमस को सेलीब्रेट किया। बच्चों ने सेंटा क्लॉज के साथ खूब मौज बस्ती की। बच्चों को उपहार भेंट किए गए।
शहर के सभी चर्च में प्रभु यीशु के जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर प्रार्थना सभाएं हुईं और केरोल के माध्यम से प्रभु यीशु की आराधना की गई। इस शुभ अवसर पर गिरजाघरों में विश्व कल्याण के लिए प्रार्थना भी की गई।
आर्चबिशप डॉ. लियो कार्नेलियो ने इस अवसर पर शहरवासियों को रोशनी के इस पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दी। इस दौरान उन्होंने सेंट फ्रांसिस चर्च जहांगीराबाद में समाज के लोगों को सेवा सद्भाव का संकल्प दिलाया। उन्होंने बताया कि असहाय निर्धन, दबे कुचले लोगों की मदद करने के अलावा प्रेम और खुंशियां बांटने का संदेश प्रभु जीसस ने दिया था। बाइबिल में लिखा है ‘जगत की रोशनी मैं हूं, मेरी ओर निहार मैं तुझको शांती दूंगा’। सभी ने शांतिपूर्वक उपदेशों को सुना तथा देश की उन्नति की प्रार्थना की।
यही नहीं, शहर के शॉपिंग मॉल्स के साथ-साथ अनाथालय में भी क्रिसमस का त्योहार मनाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। क्रिसमस कार्निवाल में बच्चों ने काफी लुत्फ उठाया। यहां प्रभु यीशु की झांकी भी सजाई गई , जिनमें मरियम, प्रभु यीशु, गडरिये और स्वर्ग से आए दूत दिखाए गए हैं।
25 दिसंबर को ईसा मसीह का जन्म हुआ था। इस दिन को क्रिसमस डे कहा जाता है और पूरे दिसंबर माह को क्राइस्टमास के नाम से जाना जाता है। क्राइस्टमास के खत्म होने के बाद ही ईसाई नववर्ष की शुरुआत होती है। मार्केट में क्रिसमस गिफ्ट, कार्ड, प्रभु ईशु के पिक्चर्स, सांता क्लॉज की टोपी की भरमार लग जाती है।


जरूरी है घर वापिसी - हरिहर शर्मा कार्यकारी निदेशक विश्व संवाद केंद्र
2 फरवरी 1835 को लार्ड मैकाले ने ब्रिटिश संसद में जो बयान दिया था उसके अनुसार हम उस समय भिखारी या चोर नहीं थे | हमारी नैतिकता, हमारा चरित्र वस्तुतः हमारी आध्यात्मिक चेतना के कारण सर्वोच्च शिखर पर स्थित था | आज के भौतिक वादी या यूँ कहें की बाजारवाद के युग में वह चेतना निष्प्राण होती जा रही है | यह मूल कमी है जिसकी और स्वतंत्र भारत में ध्यान देने की सोचना भी सांप्रदायिक कहलाने और गाली खाने का पर्याप्त कारण है |

मिटटी का जिस्म ले के, पानी के घर मैं हूँ,
मंज़िल है मौत मेरी, हर पल सफ़र मैं हूँ,

ब्रिटिश चेनल 4 स्ट्रिंग ऑपरेशन चलाकर मालूम करता है कि आईएस का ट्विटर एकाउंट भारत से संचालित हो रहा है | यह सामान्य बात हो सकती है, किन्तु चेनल के सम्मुख एकाउंट संचालक मेहदी मसरूर विश्वास ने जो कुछ कहा वह खतरे की घंटी है | मेहदी ने कहाकि उसे फक्र है कि वह इस्लाम परस्त है | साथ ही उसने कहा कि आईएस द्वारा बड़े पैमाने पर सर कलम किये जाना इस्लाम में जायज हैं | इस्लाम काफिरों के सर कलम किये जाने को न केवल मान्यता देता है, वरन उसके लिए फरमान भी सुनाता है |
उसकी इस मान्यता ने मुझे बरबस आपातकाल में एक वरिष्ठ संघ प्रचारक और एक मुस्लिम नेता की भोपाल केन्द्रीय जेल में हुई चर्चा की याद दिला दी | 1975 के आपातकाल में ये दोनों महानुभाव जेल में साथ साथ बंद थे और दोनों में पर्याप्त मित्रता भी हो गई थी | एक शाम जब दोनों साथ साथ टहल रहे थे, संघ प्रचारक ने मुस्लिम नेता से कहा कि जिस प्रकार आप यह मानते हो कि पैगम्बर साहब को खुदा ने इस धरती पर अपना दूत बनाकर भेजा, उसी प्रकार क्या यह नहीं हो सकता कि खुदा शरीफ ने अपने किसी बन्दे को भारत में भी भेजा हो ? आप लोग राम को खुदा का अवतार न सही पैगम्बर तो मान सकते हो ?

इस पर मुस्लिम नेता ने झल्लाकर कहा कि क्या काफिराना बात करते हो ? काफिराना सुनकर संघ प्रचारक अचंभित हो उठे | उन्होंने कहा कि आपको मेरी बात अगर काफिराना लगती है, तब तो आप मेरे साथ भी वही व्यवहार करोगे जो आपकी इस्लामी मान्यता के अनुसार काफिरों के साथ की जाना चाहिए, अर्थात जान लेना | मुस्लिम नेता ने तुर्की बतुर्की जबाब दिया, बेशक अगर हमारा राज होता तो हम यही करते | संघ प्रचारक ने सवाल किया कि तुम अपना राज आने पर हमारे साथ जैसा व्यवहार करना चाहते हो, बैसा ही व्यवहार अगर हम आज अपने राज में करें तो क्या ठीक होगा | मुस्लिम नेता ने पूरी ढिठाई से कहा, नहीं आप नहीं कर सकते, हमें तो बैसा करने को कुरआन शरीफ में आदेश दिया है, किन्तु आपके किस धर्मग्रन्थ में बैसा लिखा है | संघ प्रचारक निरुत्तर हो गए |
भारत की सांस्कृतिक विरासत जिस सर्वधर्म समभाव और सर्वे भवन्तु सुखिनः की बुनियाद पर खडी है, उसमें विरोधियों का सर कलम किया जाना शबाब का नहीं नरक का कारण है | आज आवश्यकता इस बात की है कि सहअस्तित्वपूर्ण आपसी भाईचारे की मानसिकता में वापस आया जाए | जो लोग पूर्व में विरोधियों की ह्त्या को जायज मानने वाली मानसिकता में चले गए हैं, वे पुनः वापस भारत की सहअस्तित्व की मानसिकता में लौटें | यह मतांतरण नहीं घर वापसी होगा |
मुझे स्मरण आ रहा है की अटल जी की सरकार में एक बार जार्ज साहब ने चाइना को भारत का दुश्मन नुम्बर एक करार दिया था | उनके इस बयान पर सदन में बखेड़ा खड़ा हो गया था | बात इतनी बढ़ी कि जार्ज साहब को अपने शब्द वापस लेने पड़े और एक प्रकार से माफ़ी मांगनी पड़ी | हमारे देश में देश हित गौण और दलगत हित प्रमुख हें |भारत की संप्रभुता और स्वतंत्रता गौण और दलों की विचारधारा महत्वपूर्ण है | क्षेत्रवाद, जातिवाद और धर्मनिरपेक्षता (अनीश्वरवाद ) हमारे अस्तित्व पर ही संकट खड़ा कर रहा है | भूषण की जिन कविताओं से युवाओं में देश भक्ति का ज्वार उठ सकता था , पाठ्यक्रम से बाहर हैं | ग से गधा पढाया जा सकता है गणेश नहीं | चारित्रिक और नैतिक शिक्षा बेमानी हैं | देशप्रेम के अभाव में आसन्न संकट और भी विकराल दिखाई दे रहा है | यह वही मानसिकता है, जिसके चलते बख्तियार खिलजी ने ज्ञान के अथाह भण्डार तक्षशिला विश्वविद्यालय के पुस्तकालय को जलाकर राख कर दिया था |
वो जमाने और थे जब युद्ध सेना द्वारा हथियारों से लड़ा जाता था | आज तो लड़ाई के तरीके भी बदल गए हैं और हथियार भी | अमरीका ने रूस को कमजोर करने के लिए तालिबान का सृजन किया था | इसी प्रकार इरान को सबक सिखाने के लिए सद्दाम को मजबूत किया था | यह अलग बात हैकि ये प्रयोग अमरीका के ही गले की हड्डी साबित हुए | इंदिराजी ने भी तो बंगलादेश बनाकर पाकिस्तान की ताकत को आधा कर दिया था | आज वही तरकीब हम पर भी आजमाइ जा रही है | जातियों के नाम पर अथवा दलित या आदिवासियों के नाम पर चीन और पाकिस्तान पोषित तत्व भारत को कमजोर रखने की साजिश कर रहे हें | चीन पोषित नक्सलवाद और पाक पोषित आतंकवाद भी इसी की एक कड़ी है | इस काम के लिए हवाला और एन जी ओ के माध्यम से पेट्रो डॉलर का भी इस्तेमाल व्यापक पैमाने पर होने की खबरें है | इसलिए मानसिकता बदलना आवश्यक है, विचारधारा बदलना आवश्यक है, घर वापिसी आवश्यक है |


ग़ज़लरॉक परफॉरमेंस से सदु ने किया सब को मदहोश और मन्त्रमुग्ध
03 November 2014
लोकप्रिय गायक संगीतकार सदु ने 12वीं राष्ट्रीय कार्डियोलॉजी कांफ्रेंस के पहले दिन की शाम की बैंक्वेट पार्टी में अपनी ग़ज़लरॉक की ख़ास अंदाज़ में अपनी मधुर आवाज़ से सबको मन्त्रमुग्ध कर दिया. म्यूजिकल शाम देर रात तक चलती रही . 8 नवम्बर को आमेर ग्रीन्स में यह पार्टी रखी गई थी. सदु ने अपनी मुख्तलिफ अंदाज़ में दिग्गज गायक. जगजीत सिंह, गुलाम अली, मेहँदी हसन की गाई हुई ग़ज़लों को अपने ग़ज़लरॉक स्टाइल में पेश किया जो भारत के कोने - कोने से आये डॉक्टरों ने खूब पसंद किया और सराहा.
सदु ने कुछ ही दिनों पहले टाइम्स म्यूजिक से रिलीज़ किया गया ग़ज़लरॉक एल्बम "मोहोब्बत में" को भी पेश किया जो लोगों को बहोत पसंद आया. मोहोब्बत में विडियो एक ही महीने में यू-ट्यूब पर लांखो व्यूज पा चूका है.
गौरतलब है की सदु इस तरह का फ्यूज़न जिसमे ग़ज़लों में ड्रम्स, गिटार, बास गिटार और पस्चात्या संगीत वध्यों का प्रयोग इतनी अच्छी तरीके से पेश करने वाले और इजात करने वाले पहले गायक हैं .
सदु के आने वाले दिनों में कई लाइव कॉन्सर्ट्स सारी दुनिया में लाइन्ड अप है.


अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की बैठक में......
परिचय सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा की गई

03 November 2014
भोपाल-03 नवंबर/अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के 9 नवंबर को भोपाल के नेवरी मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले कायस्थ युवक-युवती परिचय सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा बैठकें क्षेत्रवार की गई। शहर के नंदन कानन पैलेस, आर्य समाज मंदिर, गुलमोहर सोसायटी एवं कोलार भोपाल में कार्यक्रम को लेकर बैठकें आयोजित की गई। बैठक में क्षेत्र के विवाह योग्य कायस्थ युवक-युवतियों के परिचय संबंधी तैयारियों साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतिभागियों के नामों पर भी चर्चा हुई। बैठक में अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के प्रदेष अध्यक्ष, मध्यभारत श्री सुनील श्रीवास्तव ने बताया कि समीक्षा बैठक में कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया गया एवं आवष्यक दिषा-निर्देष दिये गये। कार्यालय मंत्री मध्यभारत सुरेष श्रीवास्तव ने 9 नवंबर को आयोजित होने वाले परिचय सम्मेलन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम की रूपरेखा विस्तारपूर्वक बताई गयी। गुलमोहर सोसायटी में हुई बैठक में कायस्थ समाज की महिलाओं ने बड़ी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।


अखिल भारतीय कायस्थ महासभा युवक-युवती परिचय सम्मेलन की तैयारियां प्रारंभ
31 September 2014
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय मंत्री श्री अजय श्रीवास्तव (नीलू) ने बताया कि कायस्थ महासभा युवक-युवती परिचय सम्मेलन की तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं। 9 नवंबर को भोपाल में आयोजित होने वाले युवक-युवती परिचय सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए आवेदन आमंत्रित किये जा रहे हैं। कायस्थ समाज विधवा, विदुर, तलाकषुदा, विकलांग एवं 35 वर्ष से अधिक उम्र के युवक-युवतियों का परिचय सम्मेलन कराने का अभिनव कार्य कर रही है। भोपाल के नेवरी मंदिर में आयोजित होने वाले कार्यक्रम के लिए प्रदेष भर से विवाह हेतु आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए कहा कि प्रातः 10 बजे से 5 बजे तक परिचय सम्मेलन का कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। सायंकाल में 5 बजे से 8 बजे तक सार्वजनिक, सामूहिक भगवान चित्रगुप्त पूजन व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। तद्पश्चात् रात्रि 8.30 से 10 बजे तक रात्रि भोज आयोजित किया जायेगा।
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के भोपाल मध्य भारत कार्यालय मंत्री श्री सुरेष श्रीवास्तव ने बताया कि कायस्थ महासभा ने विधवा, विदुर, तलाकषुदा, विकलांग एवं 35 वर्ष से अधिक उम्र के वर्गो के अपेक्षित युवक युवतियों के विवाह हेतु बायोडाटा एवं परिचय सम्मेलन के दौरान होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए आवेदन आमंत्रित किए है। उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि नृत्य/गायन प्रतियोगिता के साथ बालक-बालिकाओं के लिए आयोजित की जा रही है जिसमें उम्रवार गु्रप 3 से 10 वर्ष, 11 से 20 वर्ष एवं 21-30 वर्ष रहेगा। इस हेतु आॅडिषन उम्रवार किये जायेंगे। चयनित प्रतिभागियों में ग्रुप अनुसार नृत्य एवं गायन में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पाने वालों की प्रस्तुतियां सांस्कृतिक कार्यक्रम में होगी एवं पुरस्कार वितरित किये जायेंगे। बायोडाटा हेतु पंजीयन फार्म कायस्थ महासभा की वेबसाइट ंाीपदइींतंजपलंांलंेचींण्इसवहेचवजण्पद से आॅनलाईन प्राप्त कर सकते है एवं पंजीयन फार्म को 3 नवंबर के पूर्व ांलंेजी20/हउंपसण्बवउएचतंइीनातपचंण्ेीतपअंेजंअं/हउंपसण्बवउ पर भेज सकते है। युवक-युवती अपने बायोडाटा एवं सांस्कृतिक प्रस्तुति हेतु आवेदन पत्र के द्वारा पंजीयन फार्म 90/8 शीष महल, मोती मस्जिद के समक्ष स्थित अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के भोपाल कार्यालय में जमा कराने की व्यवस्था की गयी है। सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए प्रतिभागी डाॅ. रमेष श्रीवास्तव से 9893045598 पर संपर्क कर सकते हैं तंउमेीेीतपअंेजंअ5/हउंपसण्बवउ पर 3 नवंबर के पूर्व अपनी प्रविष्टि दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवक युवती परिचय सम्मेलन के अवसर पर कायस्थ महासभा एक कायस्थ स्मारिका का विमोचन भी करेगी, जिसमें आमंत्रित समस्त विवाह योग्य युवक युवतियों के बायोडाटा का उल्लेख किया जायेगा।


57 पेंटिंग्स 9 स्कल्पचर इन सर्कल
24 September 2014
जहाँ चाहा हैं वहा रहा यह बात आर्टिस्ट चौधरी बालू एन पर सटीक बैठती है । भारत भवन में मंगलवार को सोलो एग्जिविशन की शुरआत हुई । 29 सितम्बर तक चलने वाली इस एग्जिविशन में आर्टिस्ट चौधरी बालू ने एक से बढ़कर एक कलाचित्रों का प्रदर्शन किया हैं । प्रकृति और जीवन की उत्पति या किसी भी चीज़ के होने की सम्भावना को बालू ने सर्कल के माध्यम के बयां किया । बालू ने अपने चित्रों में थ्री डी के माध्यम से व्यक्त किया । एग्जिविशन में कुल 57 चित्रों को एग्जिविट किया गया इसके साथ ही 9 शिल्प एग्जिविट किए गए ।

दिखा जबरदस्त आर्ट

बालू ने भारत भवन पहली बार सोलो एग्जिविशन में पार्टीसिपेट किया । उनके चित्रों में सर्कल को विशेष रूप से जगह दी गई । बालू का कहना है कि सर्कल किसी भी चीज़ के उत्पति और नष्ट होने का प्रतीक है । उत्पति में जिस तरह चीजें जुड़कर एक रूप लेती हैं , उसी तरह टूटने और फूटने पर उसमें बिखराव भी उसी रूप में होता है । उन्हें नेचर और कल्चर से बहुत प्रेम है ।


सतीश चतुर्वेदी की पुस्तक “भोपाल एक ऐतिहासिक दर्पण” का लोकार्पण उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता करेंगे पुस्तक का लोकार्पण
15 September 2014
भोपाल के एक हजार वर्ष के इतिहास पर प्रकाश डालने वाली श्री सतीश चतुर्वेदी की पुस्तक “भोपाल एक ऐतिहासिक दर्पण” का लोकार्पण 16 सितम्बर 2014 को रविन्द्र भवन परिसर में स्थित स्वराज भवन में शाम 6.30 बजे होगा है । कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सांसद कैलाश सारंग करेंगे । कार्यक्रम में मुख्या अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता और विशेष अतिथि विधायक विश्वास सारंग रहेंगे ।
सुदित पब्लिकेशन्स भोपाल द्वारा प्रकाशित सतीश चतुर्वेदी की पुस्तक “भोपाल एक ऐतिहासिक दर्पण”राजधानी भोपाल के इतिहास पर लिखी गई पहली प्रमाणिक पुस्तक है ।यह पुस्तक लेखक के वर्षों के शोध पर आधारित है । लेखक नें समकालीन प्राप्त ग्रंथों, शिलालेखों या ताम्रपत्रों, समय-समय पर हुई खुदाई अथवा प्राप्त मूर्तियों, चित्रों के माध्यम से प्रमाणिक सन्दर्भ इस पुस्तक के माध्यमसे पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया है । इस पुस्तक में लेखक नें जो भी लिखा है उसके प्रमाण प्रस्तुत कियें है और हर प्रमाण यथार्थ सन्दर्भों पर आधारित हैं।
इस पुस्तक की आवश्यकता इसलिए भी थी क्योंकि अब तक भोपाल के इतिहास पर शोध आधारित पुस्तकों का अभाव था । अब तक बाजार में जितनी पुस्तकें है वो लगभग तथ्यहीन और पूर्वाग्रह से ग्रषित है । अभी तक के समस्त लेखक नें रानी कमलापति के शासन की बात स्वीकार करनें के बाद भी भोपाल को बसानें का श्रेय दोस्तमोहम्मद खां को ही दिया । उन्होंने खुद शाहजहाँ बेगम द्वारा लिखित हयात-ऐ-कुदसिया में नामक पुस्तक (पृष्ठ –192,193) में लिखे गए उस तथ्य को भी नकार दिया जिसमें परमार काल में भोपाल को भोजपाल कहा जाता था, नगर के मध्य में भव्य सभामंडल और शिव मंदिर की बात कहते हुए, संस्कृत की एक भव्य पाठशाला होनें और उसमें 500 संस्कृत आचार्य संस्कृत की शिक्षा देतें थें लिखी है । तेरहवीं शताब्दी में सुल्तान इल्तुतमिश द्वारा सभा मंडल के विध्वंश और उन्नीसवीं शताब्दी में कुदसिया बेगम द्वारा इसी स्थान पर सभामंडल के अवशेषों पर जमा मस्जिद का निर्माण करवाया गया । पूर्व के लेखकों नें जो स्वयं को इतिहासकार होनें का दावा करते हैं, शाहजहाँ बेगम द्वारा बताये गए तथ्यों को स्वीकार भी किया तो विकृत करके किया ।
भोपाल की नबाब शाहजहाँ बेगम नें अपनी पुस्तक हयाते कुदसिया में जिस शिलालेख का वर्णन किया है उसके अनुसार भोपाल नगर की नींव राज भोज के उत्तराधिकारी उदयादित्य परमार नें रखी थी और यहाँ दुर्ग का निर्माण किया था । उदयादित्य और उसकी पत्नी श्यामली नें यहाँ संस्कृत विश्वविद्यालय और सभामंडप का निर्माण करवाया था । आज जिसे श्यामला हिल कहतें है संभवतः वहीँ रानी श्यामली निवास करती थीं और उन्हीं के नाम पर इस पहाड़ी का नाम पड़ा था ।
इस पुस्तक में भोपाल के संस्थापक राजा भोज का विस्तृत वर्णन है । उनके ज्ञान, कला एवं साहित्य प्रेम तथा वीरता के साथ-साथ पुरातत्व के क्षेत्र में किये गए महान कार्यों को विस्तार से उकेरा गया है। पुस्तक में विभिन्न प्रमाणों के आधार पर यह भी सिद्ध किया गया है कि भोपाल नगर का निर्माण स्वस्तिक चिन्ह की आकृति पर हुआ था और स्थापना से पूर्व ही विश्व की पहली सबसे विराट बाँध जल संरचना भोजताल (बड़ा तालाब) का निर्माण हो चुका था । नगर भोजपाल तथा तालाब भोजताल कहलाता था ।
श्री सतीश चतुर्वेदी द्वारा लिखित इस पुस्तक का लेखन बहुत सरल भाषा में किया गया है जिससे यह पुस्तक बहुत ही रुचिकर और पठनीय बन गयी है । यह पुस्तक इतिहासकारों एवं शोध छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी ।


मुख्यमंत्री निवास पर मना क्षमावाणी पर्व
15 September 2014
आचार्य विद्यासागर जी महाराज द्वारा लिखित मूक-माटी के अंश पाठयक्रम में शामिल होंगे
पाँच वर्ष में 50 हजार माता-बहनों को एक लाख गाय दी जायेंगी
मुख्यमंत्री श्री चौहान की क्षमावाणी पर्व कार्यक्रम में घोषणा
सर्वधर्म समभाव का प्रतीक है मुख्यमंत्री निवास - श्रीमती स्वराज




सर्वधर्म समभाव की परम्परा को आगे बढ़ाते हुये आज यहाँ मुख्यमंत्री निवास में क्षमावाणी पर्व मनाया गया। मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने इस पर्व पर समाज से बेटियों को बचाने और युवा पीढ़ी को व्यसन मुक्त करने का संकल्प लेने का आव्हान किया। उन्होंने पुन: कहा कि बेटी है तो दुनिया है। इस गरिमामय समारोह में विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज और केन्द्रीय रसायन तथा उर्वरक मंत्री श्री अनंत कुमार विशेष रूप से मौजूद थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि वीर ही क्षमा मांग सकते हैं और दे सकते हैं। क्षमा करने वाला और देने वाला ही जैन है। सबको सच्चा और अच्छा जैन बनने की कोशिश करना चाहिये। श्री चौहान ने अपने संबोधन में आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज का विशेष उल्लेख करते हुये घोषणा की कि उनके द्वारा लिखित ग्रंथ मूक-माटी के प्रमुख अंश हिन्दी विश्वविद्यालय के उच्च शिक्षा पाठयक्रम में शामिल किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी प्रेरणा से मध्यप्रदेश में गौ-संवर्धन के कार्य चल रहे हैं। प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि आगामी पाँच वर्ष में 50 हजार माता-बहनों को एक लाख गाय दी जायेंगी। गाय आजीविका का श्रेष्ठ साधन बन सकती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बच्चों को नशामुक्त करने और व्यसन से बचाने के लिये प्रदेश में तम्बाखू-गुटखा की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। उन्होंने कहा कि अहिंसा परम धर्म है। सबको जीने दो। केवल मनुष्य मात्र नहीं जलचर, थलचर, नभचर, कीट, पतंगे सबको जीने का हक है। उन्होंने कहा कि गाय को बचाने का संकल्प लें।
विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने कहा कि मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री निवास सर्वधर्म समभाव का प्रतीक बन गया है। इस निवास का सभा मंडप वह जगह है, जहाँ सभी धर्मों के त्यौहार मनाये जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिसे सजा देने का अधिकार है, ऐसा बड़ा और क्षमतावान क्षमा माँगे वही उत्तम क्षमा है।
केन्द्रीय उर्वरक एवं रसायन मंत्री श्री अनंत कुमार ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री श्री चौहान की विनम्रता, सरलता, सहजता और कर्मठता का उल्लेख करते हुये कहा कि वे हर दिन प्रदेश सेवा में लगे हैं। विनम्रता से जिस तरह वे क्षमा मांगते हैं, वे जैन हैं। उन्होंने कहा कि जब तक रहूँगा मध्यप्रदेश की सेवा करूँगा।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा कि क्षमावाणी जैन परम्परा का अद्भुत पर्व है। यह पर्व मन को निर्मल करता है। सबके लिये अनुकरणीय है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में श्रीमती सुधा मलैया ने मंगलाचरण प्रस्तुत करते हुये क्षमा पर्व के महत्व का उल्लेख किया। कार्यक्रम में सिख धर्मगुरू ज्ञानी दिलीप सिंह, बौद्ध धर्म गुरू भन्ते जी, पूर्व मुख्यमंत्री द्वय श्री सुन्दरलाल पटवा तथा श्री कैलाश जोशी, मंत्री सर्वश्री जयंत मलैया, डॉ. नरोत्तम मिश्रा, डॉ. गौरीशंकर शेजवार, श्री रामपाल सिंह, राज्य मंत्री सर्वश्री सुरेन्द्र पटवा, शरद जैन, दीपक जोशी, अरविन्द मेनन, बाबूलाल जैन, सांसद श्री आलोक संजर, विधायक सर्व श्री सुरेन्द्र नाथ सिंह, विष्णु खत्री, विश्वास सारंग, अनिल जैन सहित श्री आलोक शर्मा, श्री बृजेश लूणावत तथा बड़ी संख्या में जैन धर्मानुयायी उपस्थित थे।


मध्‍यभारत की आवाज़
10 August 2014
खुशनुमा मौसम के साथ जब सुरमयी संगीत गूंजा तो श्रोता भी खुद को झूमने से रोक नहीं पाए। सदाबहार गीतों से सजी इस शाम को प्रतिभागियों ने अपनु सुरीली आवाज से यादगार बना दिया। मौका था जी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के सिंगिंग कॉम्पटीशन "जी मध्य भारत की आवाज का जादू" ग्रेंड फिनाले का। इसमें बच्चों से लेकर युवाओं तक ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा। कॉम्पटीशन में इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रायपुर और भोपाल से सिलेक्ट १० प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर डीजीपी नंदन दुबे, , Business Head, Regional Channels विनोद दास, Zee Media Corporation Ltd के रीजनल एडीटर एमपी-सीजी राजेंद्र शर्मा, Zee Media Corporation Ltd के AVP सेल्‍स जुबीन ठाकुर, सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।


संघर्ष की प्रतिमूर्ति थे रघुनाथ राव शिरढोणकर: श्री धर्माधिकारी र.वि.शिरढोणकर स्मृति समारोह सम्पन्न
भोपाल। ‘‘श्री रघुनाथ राव शिरढोणकर जुझारू और कर्तव्यनिष्ठ पत्रकार थे। उन्होंने एक मिसाल कायम की। उनके पत्र ‘हितचिंतक’ का ‘पानीपत अंक’ आज भी मील का पत्थर बना हुआ है।’’-ये उद्गार थे श्री वि. गो. धर्माधिकारी के। वे दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय के शिरढोणकर सभागृह में आयोजित र.वि.शिरढोणकर स्मृति समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
समारोह में वरिष्ठ पत्रकार श्री अभिलाष खाण्डेकर को र.वि.शिरढोणकर स्मृति सम्मान प्रदान किया गया। श्री अभिलाष खाण्डेकर ने अपने अभिनन्दन के उत्तर में कहा कि इस सम्मान से जिम्मेदारी और बढ़ गई है। उन्होंने शिरढोणकर की पत्रकारिता का उल्लेख करते हुए पत्रकारिता के मूल उद्देश्यों को भी रेखांकित किया।
इस अवसर पर ‘हितचिंतक’ के ‘पानीपत अंक’ के पुनर्मुद्रित अंक और र.वि.शिरढोणकर की पाण्डुलिपियों के डिजिटल स्वरूप का भी लोकार्पण किया।
समारोह के दूसरे चरण में इन्दौर निवासी वरिष्ठ रंगकर्मी श्री श्रीराम जोग के एकल अभिनय की प्रस्तुति ‘असेच काही तरी’ (ऐसे ही कुछ भी) को खूब सराहा गया।


'माता-पिता की सेवा से बड़ा कोई धर्म नही है'

मानव संस्कृति हमें इस बात की प्रेरणा देती है कि हमें अपने माता-पिता की अच्छाईओं को ग्रहण करना चाहिये तथा उनके बताये सदमार्ग पर चलना चाहिये । कोई भी माता-पिता अपनी संतान केलिए कोई भी गलत रास्ता नही दिखाती है । माता -पिता की सेवा से बड़ा कोई तीर्थ स्थान नही है न ही कोई अन्य धर्म हैं । जब हम अपने माता-पिता की सेवा करेगें तो हमारे अन्दर अपने आप धार्मिक एवं सामाजिक संस्कार जागृत होगें । हम घर-परिवार व समाज में सम्मान जनक स्थान प्राप्त करेगें । जो संतान माता -पता के उचित बचनों जो जीवन को सार्थक बनाने बाले है का पालन नहीं करते है वह अपना भबिष्य ख़राब तो करते है पारिवारिक संकट उठाते है एबं सामाजिक बहिष्कार सहते है। इसलिए माता -पिता ,के उपदेश -वचनो को विना विचार किये ही स्वीकार कर लेना चाहिए।
हमारी संस्कृति में माता-पिता का ऋण कोई संतान अदा नही कर पाती है लेकिन प्रत्येक संतान यही प्रयास करता है कि माता -पिता को हम अच्छी सेवा करें उन्हे सम्मान से जीने केलिए ऐसी व्यवस्था बनायें । जब तक संतान स्वंय माता-पिता नही बनती है जब तक वह माता-पिता के दायित्य को नही समझ पाते हे । इसलिए आप देंखते व सुनते होगें कि प्रत्येक कन्या भगवान के समक्ष यहीं प्रार्थना करती हैं उपवास करती हे कि उसे अच्छा बर (पति-स्वामी ) मिलें । जब कन्या परिवारिक जीवन में प्रवेश करती है तो वह भगवान से दूसरी इच्छा मात्र संतान प्राप्त करने की या कहें कि मॉ होने केलिए प्रार्थना करती है । प्रकृति या ईश्वर का बिधान है कि कोई भी व्यक्ति कितना ही गौरवशाली, स्वाभिमानी, उच्चपद पर पदासीन अधिकारी, राजा-महाराजा, नेता -अभिनेता, मजदूर-किसान सेना का जबान अपराधी होगा वह यदि मानव है या इंसानियत रखता है तो वह संतान से बिमुख नही हो पाता हे । संतान का प्यार व दुलार की तुलना किसी भी प्यार से नही की जा सकती है । संतान का मोह संसार का सबसे बड़ा मोह बताया गया है और बास्तविक रूप से होता ही है । जिस व्यक्ति को अपनी से स्नेह - प्यार नही है हम उसे सामाजिक प्राणी नही कह सकते है । प्रत्येक माता-पिता संतान केलिए कितने ही कष्ट उठाने को तैयार होते है । प्रत्येक दंपत्ति अपनी संतान केलिए दिन-रात उसके पालन पोषण में लगे रहते है ।
संतान के पालन - पोषण में माता का सर्वाधिक कार्य होता है , मॉ संतान के प्रत्येक सुख-दुःख का ध्यान रखती है प्रत्येक गल्तियों को माफ करती है। पिता को परिवार को संचालित करने केलिए आर्थिक बजट की व्यवस्था तथा भविष्य की व्यवस्था केलिए अपने कर्तव्य कार्य मजूदरी मेहनत करना होती है । या हम इस प्रकार से कहें कि कोई परिवार बिना पति-पत्नी के नही चलता है. परिवार की परिभाषा ही पति-पत्नी से बनी है । इसलिए पत्नी का दायित्य है कि वह घर-गृहस्थी का रख-रखाव, परिवारिक मर्यादायें, समाजिक सम्मान, नारी की लज्जा, इन सभी बातों को समझते हुये बाहन की तरह होती हैं. परिवार का मुखिया या पति तो बाहन चलाने बाला या आर्थिक बोझ उठाने बाला होता है । इसलिए प्रत्येक माता-पिता का अपनी संतान को गर्भ धारण से ष्क्षिित करने तक या आत्म निर्भर बनाने तक क्या क्या नही करता हैं यह संतान सोच नही पाती है जब संतान वयस्क हो जाती है और स्वयं परिवारिक बंधन में बंध जाती है तब वह बास्तविक स्वरूप को समझ पाती है । यदि संतान अपने होष सम्भालने के साथ ही माता-पिता के आर्दष पर चलने का प्रयास करें ,अच्छाईओं को ग्रहण करें, सदविचारों को गहण करें, धार्मिक ग्रन्थों का अध्ययन करें, संत महापुरूषों के बताये मार्ग को अपनाये का प्रयास करें तो ऐसे बालक-बालिकायें या संतान समाज में ही नही राष्ट्र के उच्च षिखर तक पहुॅच जाती हैं । हमें माता -पिता के अस्वस्थ्य होने या बृध्द अवस्था होने किस तरह की सेवा करना चाहिये । हर माता-पिता संतान की खुषी केलिए अन्तिम समय तक प्रयास करते रहते है । संतान का दायित्य बनता है कि वह जब तक माता-पिता स्वस्थ्य है उन्हे स्वतंत्र रूप से कार्य करने देना चाहिये उनके कार्यो में बाधा नही करना चायिहे उनके बताये रास्ता पर ही चलना चाहिये । लेकिन जब माता-पिता को किसी भी प्रकार से दुःख हो , कष्ट हो , कोई अचानक संकट आ जावें या प्रकृतिक शारीरिक बीमारी हो तो उनकी सेवा में कोई कसर नही छोड़नी चाहिये ।
माता जी हो या पिता जी उन्हे स्नेह व प्यार दें । उनके पास समय देकर उनकी सेवा करें । भोजन, पानी समय पर दें , दवा आदि की समय पर व्यवस्था करें तथा समय से दवा दें । स्वयं पुत्र को सेवा तो करना चाहिये साथ ही पुत्रबधू को सेवा में पूरी तरह से हाथ बटॉना चाहियें । हमारा तो यदि उद्देष्य है पुत्र से अधिक संस्कारित परिवारों में पुत्रबधू ही अपने सास-ससुर, माता-पिता की सेवा करती है ऐसी ही महिलायें दीर्धआयू व सौभाग्यवती रहती है । जो महिलायें अपने सास-ससुर की सेवा नही करती है या जो पुत्र-पुत्रियॉ अपने माता-पिता के साथ अन्याय या अत्याचार करती है वह हमेषा संकट व कष्ट उठाती है ।
आज आवश्यकता है, प्रत्येक परिवारों में मॉ-बाप की सेवा करने का । क्योकि बदलते समय में माता-पिता सर्वाधिक परेशानी व संकटों से गुजर रहे है । जो संतान माता-पिता की सेवा नही करते है उसका कारण मंदबुध्दि, विवेक की कमी , स्वयं के विवेक से कार्य न करते हुये चरित्रहीन पत्नी के बहकावें में आकर ही अपने माता-पिता को ठुकराते हैं । जब माता-पिता की आत्मा को कष्ट होगा , उन्हे संकट होगा तो हमें कैसें सुखी हो सकते है ? हमें बार बार नही हजार बार इस बात पर ध्यान देना होगा कि यदि हमारी माता जी पिता जी ने हमें बचपन से आज तक लाखों संकट व परेशानियों से मुक्ति दिलाकर इस योग्य बनाया हम उनका ऋण कभी अदा नही कर सकते है ।
जिन परिवारों में सामाजिक संस्कारों की कमी, बदले की भावना , दहेज लालच, अपने पराये की भावनायें, संपत्ति लालच की भावनायें अपना स्थान बना लेतीं वह परिवार बिघटन, निर्धनता , संकटों से घिर जाते हैं । ऐसे ही परिवार की लड़कियॉ जब दूसरे परिवार या ससुराल में जाती है तो जिन संस्कारों में उनका पालन पोषण होता है उसी के कारण वह अपने पति को अपने कामुक जादू के मध्य अपने वश में करने के बाद जैसा वह चाहती है परिवार में बैसा ही होता है । हम उसे दूसरे रूप में जोरू का गुलाम भी संबोधित करते है । आज दूसरे परिवार से जो लड़की आई और वह पुत्र के लिए सब कुछ हो जाती है जो माता-पिता उसे संसार में आने के पूर्व से उसकी प्रत्येक सुरक्षा, संकट से मुक्ति दिलाता रहा वह कुछ नही रह जाता है । जब परिवार में इस प्रकार की महिलायें अपना बर्चस्य स्थापित करती है तो वह परिवार नरक की तरह हो जाता है । ऐसे ही परिवारों में माता-पिता को घर से बाहर कर दिया जाता है या वे स्वयं घर छोड़कर बृध्दाश्रम या अनाथ आश्रम में आश्रय लेकर अपना बुढ़ापा बिताने केलिए मजबूर हो जाते हे । लेकिन हम इस बात को जबानी में भूल जाते है कि आज हम जो अपने माता - पिता के साथ कर रहे है और उन्हे संकट व कष्ट दे रहे हैं आने बाले समय में हमारी संतान भी हमे उसी रास्ता पर जाने केलिए मजबूर करेगीं । आज आवश्यकता है कि प्रत्येक परिवार में मान-सम्मान बने, माता-पिता का सम्मान हो, उनकी सेवा की जावें । माता-पिता को तीर्थ स्थानों पर घुमाने ले जावें या वह जाने योग्य है तो उन्हे तीर्थ स्थान भेजें । रहने केलिए स्वस्थ्य मकान व पहनने केलिए स्वच्छ कपड़े दिये जावें । उनके भोजन की सर्व प्रथम व्यवस्था की जावें । बृध्द माता-पिता को धार्मिक पुस्तके, ग्रन्थ, बेद पुराण या जो वह साहित्य पढ़ सकें उन्हे उपलव्ध्य करायें । समय समय पर उनके स्वास्थ्य की देंख-रेंख कराते रहे । माता-पिता का आर्षीवाद यदि हो सकें संभव हो तो प्रतिदिन प्राप्त करने का प्रयास करें । उनके आशीर्वाद से दीर्धायू होती है और मन को परम सुख प्राप्त होता हैं । संसार के जितने भी महापुरुष हुए उन्होंने माता -पिता को ही पूज्यनीय ,माना। सभी जाति -धर्म व पंथो में भी माँ व पिता को उच्च स्थान दिया गया है।
वृद्ध माता-पिता के मन की शांति केलिए उनका मार्ग दर्शन लेते रहे , कोई भी घर-परिवार व समाज में कार्य हो तो उन्हे सम्मान देकर उनके मार्ग दर्शन में ही कार्य सम्पन्न करायें जावे । उनके अनुभव व उनका मार्ग दर्षन हमेषा परोपकारी, कुशलता परिवार की सुख समृध्दि से भरा होगा । घर व परिवार की खुशियों में परिवार के प्रत्येक सदस्य को अपने अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिये और अपने से बड़ों का सम्मान करना चाहिये । व्यक्ति धन व बल से बड़ा हो सकता है लेकिन समाज से बड़ा नही हो सकता है । इसलिए सामाजिक सम्मान को ध्यान में रख कर ही परिवारिक व सामाजिक कार्य करना चाहिये।


घोटालेबाज़ न होने का ग़म’ लोकार्पित

भोपाल। दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय के शिरढोणकर सभागृह में सुदर्शन कुमार सोनी के व्यंग्य संग्रह ‘घोटालेबाज़ न होने का ग़म’ का लोकार्पण सम्पन्न हुआ। समारोह में अतिथि के रूप में डाॅ. विजयबहादुर सिंह, डाॅ. ज्ञान चतुर्वेदी एवं श्री प्रियदर्शी खैरा उपस्थित थे।
आरम्भ में संग्रहालय निदेशक राजुरकर राज ने पुस्तक भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया। लोकार्पण के बाद लेखक श्री सुदर्शन कुमार सोनी ने अपने संग्रह से व्यंग्यपाठ किया।
डाॅ. ज्ञान चतुर्वेदी ने कहा कि श्री सोनी ने अपनी नज़र से व्यवस्था को देखा और अपनी प्रतिक्रिया व्यंग्य के रूप में अभिव्यक्त की है। डाॅ.विजय बहादुर सिंह ने लेखक को बधाई देते हुए कहा कि लेखक ने सर्वथा सामयिक विषय उठाकर उसे व्यंग्य की शक्ल दी है। श्री प्रियदर्शी खैरा ने भी संग्रह पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का संचालन श्री चन्द्रभान राही ने किया।


टाॅम आल्टर 31 मई को भोपाल में
1 जून को होगा ‘जयद्रथ वध’ का मंचन

भोपाल। सुप्रसिद्ध अभिनेता एवं रंगकर्मी पद्मश्री टाॅम आल्टर 31 मई को दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय के अभिनव समारोह में भाग लेने आ रहे हैं। वे 1 जून के नाटक ‘जयद्रथ वध’ के अवसर पर भी मौजूद रहेंगे, जो चन्दर खन्ना द्वारा निर्देशित और अभिनीत एकपात्रीय नाटक है।
यह जानकारी देते हुए दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय के निदेशक राजुरकर राज ने बताया कि संग्रहालय के आमंत्रण पर ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के निर्माता श्री असित कुमार मोदी और प्रमुख भूमिका निभाने वाले मंदार चांदवरकर भी आ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इनके साथ ही अन्य 25 प्रतिभाओं को भी ‘चर्चित चेहरे’ अलंकरण से सम्मानित किया जायेगा। इसी मंच पर रंगारंग कार्यक्रम और के.के. नायकर की लोटपोट कर देने वाली मिमिक्री और हास्य प्रस्तुतियाँ भी होंगी। कार्यक्रम ठीक साढ़े सात बजे बिगुल और घण्टे की आवाज़ के साथ आरम्भ होगा। यह भोपाल में अब तक का पहला अभिनव आयोजन होगा। 1 जून को शहीद भवन में मैथिलीशरण गुप्त के नाटक ‘जयद्रथ वध’ का मंचन होगा, जो मुम्बई के प्रसिद्ध अभिनेता और रंगकर्मी श्री चन्दर खन्ना की एकल प्रस्तुति है।
दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय के निदेशक राजुरकर राज ने बतया कि इस समारोह में प्रसिद्ध अभिनेता और रंगकर्मी पद्मश्री टाॅम आल्टर के साथ ही अन्य विशिष्ट अतिथि चयनित चर्चित चेहरों को सम्मानित करेंगे। उन्होंने बताया कि अनेक चरणों की बैठकों और उच्च स्तरीय निर्णायक समिति की अनुशंसा पर विविध विधाओं की 26 प्रतिभाओं को ‘चर्चित चेहरे’ से अलंकृत करने का निर्णय किया गया। इसमें अतिथि चर्चित चेहरे’ के लिए ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ को चुना गया है, जिसका सम्मान प्राप्त करने के लिए धारावाहिक के निर्माता श्री असित कुमार मोदी और लोकप्रिय कलाकार आत्माराम तुकाराम भिड़े (मन्दार चान्दवड़कर) भोपाल आ रहे हैं।
समारोह में आजीवन उपलब्धि के लिए ‘उत्कृष्ट चर्चित चेहरे’ से श्री सन्तोष चैबे को अलंकृत किया जायेगा। अन्य विधाओं के ‘चर्चित चेहरे’ श्री प्रहलाद टिपाणिया एवं भारती बन्धु (लोक गायन), श्री बाबूलाल गौर (राजनीति), श्री मदन मोहन जोशी (पत्रकारिता), श्री जयन्त देशमुख, मुम्बई (सिनेमा), पं. उमाकान्त एवं पं. रमाकान्त गुंदेचा, भोपाल (संगीत), श्रीमती मालती जोशी, भोपाल (साहित्य), श्री प्रवीर कृष्ण, प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, भोपाल (प्रशासन), ज्ञानगंगा इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नाॅलाॅजी (शिक्षा संस्थान) के श्री मिनीराज मोदी, श्री सुशील अग्रवाल, मध्या एडवर्टाइजिंग प्रा. लि., भोपाल (युवा उद्यमी), डाॅ. टी.एन. दुबे (न्यूरोलाजिस्ट), भोपाल (चिकित्सा), डाॅ. प्रकाश खातरकर, बैतूल (विज्ञान), जीव सेवा संस्थान, सन्त हिरदाराम नगर, भोपाल (समाजसेवा), श्री कमल चावला (स्नूकर), भोपाल, श्री के. रवीन्द्र, रायपुर (चित्रकला), श्री मनोज सिंह मीक, शुभालय, भोपाल (रियल इस्टेट), डाॅ. विमल कुमार शर्मा (फोरेंसिक विशेषज्ञ), भोपाल (शोध), श्रीमती सीमारानी, भोपाल (पहले पहल) मध्यप्रदेश की पहली महिला फोटोग्राफर, बाल्को, कोरबा (छत्तीसगढ़) सामाजिक सहभागिता, एवं असाधारण प्रतिभा के रूप में श्री वासुदेव सरकार, भोपाल, (लगामार 25 घंटे गाने का रिकाॅर्ड), कु. कनक शर्मा (मेधावी), इन्दौर, कु. सैयदा मासूमा फातिमा, भोपाल (9 वर्ष की उम्र में स्केटिंग में राष्ट्रीय विजेता) एवं, श्री चित्रांश वाघमारे, भोपाल (रचनात्मक क्षेत्र में उपलब्धि) है।
निदेशक राजुरकर राज ने बताया कि संग्रहालय अभी तक सामान्य तौर पर साहित्य और कला से सम्बद्ध विद्वानों को अलंकृत करता रहा है, लेकिन अब अन्य विधाओं के चर्चित व्यक्तित्वों को भी अलंकृत किया जा रहा है। अलंकरण समारोह 31 मई 2014 को आयोजित किया जायेगा। अलंकरण समारोह में ‘चर्चित चेहरे’ पर लघु फिल्म का प्रदर्शन करते हुए अलंकृत किया जायेगा। समारोह के दौरान नृत्य, संगीत, गायन, मिमिक्री आदि की आकर्षक प्रस्तुति भी होगी। इसमें ध्वनि और प्रकाश का विशेष उपयोग किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि संग्रहालय द्वारा आरम्भिक चरण में प्रविष्टियाँ आमंत्रित की गई। उसके बाद दो चरणों में परामर्श समिति की बैठकें हुईं, जिसमें अनेक नामों की अनुशंसा की गई। उसके बाद के चरण में चयन समिति ने अन्तिम रूप से प्रत्येक विधा में पाँच पाँच नामों का चयन किया। 23 मार्च की निर्णायक बैठक में अन्तिम रूप से चयन किया गया। निर्णायक समिति में मुम्बई से चर्चित सिने गीतकार श्री अभिलाष (इतनी शक्ति हमें देना दाता), दिल्ली से आधुनिक साहित्य पत्रिका के सम्पादक श्री आशीष कंधवे और रायपुर से वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार एवं सद्भावना दर्पण के सम्पादक श्री गिरीश पंकज शामिल थे। संग्रहालय की ओर से निदेशक राजुरकर राज, प्रवर परिषद की संयोजक श्रीमती ममता तिवारी और प्रबन्ध परिषद के सदस्य श्री पुरुषोत्तम श्रीवास बैठक में शामिल हुए।


राष्ट्रऋषि नानाजी का कार्य यज्ञ की तरह - संत रमेश भाई ओझा

प्रख्यात रामकथा मर्मज्ञ रमेश भाई ने दीनदयाल शोध संस्थान के कार्यकर्ताओं को समाज में कल्याणकारी परिवर्तन के लिये दिया आशीर्वचन

चित्रकूट 13 मार्च 2014/ जिस व्यक्ति के मूल में विचार नहीं है उसकी प्रवृत्ति चिरंजीव नहीं हो सकती है! जिस व्यक्ति के मूल में विचार है उसकी प्रवृत्ति की निरंतरता हमेशा बनी रहेगी। हमें नित नये-नये अनुसंधान से राष्ट्र के सुदृढ़ीकरण के लिये अपना योगदान सुनिश्चित करना है। इसके लिये दीनदयाल शोध संस्थान के कार्य प्रसंशनीय है। भारत ग्राम में बसता है संस्थान ने 1000 ग्राम में अपना कार्य प्रारंभ किया है। निश्चित तौर पर आप लोग किसी न किसी रूप में व्यक्ति के जीवन को स्पर्श कर रहे हैं। उपरोक्त बातें दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के आरोग्यधाम परिसर के सेमीनार हाॅल में प्रख्यात रामकथा मर्मज्ञ संत श्री रमेश भाई ओझा जी ने अपने आशीर्वचन कार्यक्रम के दौरान दीनदयाल शोध संस्थान के सभी चित्रकूट प्रकल्प प्रमुख की मासिक समीक्षा बैठक में व्यक्त कीं। इस दौरान दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव डाॅ. भरत पाठक ने चित्रकूट प्रकल्प के द्वारा वर्ष 2020 तक 1000 स्वावलम्बी गाॅंव की कार्ययोजना को संत रमेश भाई ओझा जी के समक्ष रखा और कहा कि विराट पुरुष नानाजी देशमुख ने युगानुकूल सामाजिक पुनर्रचना की दिशा में जो उत्कृष्ट पहल कर ऐसे कार्यकर्ताओं को गढ़ा है जिसमें प्रतिष्ठा की प्रवृत्ति नहीं है, निष्ठा की प्रवृत्ति है जो एक क्षण भी कर्म के बिना नहीं रह सकता है। इस अवसर पर आशीर्वचन देते हुए कथा मर्मज्ञ रमेश भाई जी ने कहा कि दो मकारान्त शब्दों का जहां प्रवाह हो प्रेम और रस। दोनों की जहां महिमा हो वो आश्रम जीवन है। कर्म यज्ञ की ऊॅंचाई तक पहंुचना चाहिए। राष्ट्रऋषि नानाजी का कार्य यज्ञ की तरह है हम जातिवाद के रोग से ग्रस्त हो गये जो कि जन्म से है। जबकि कर्म अपने कार्य से है तदनुसार एक व्यवस्था को कायम रखना होगा। स्मृति तो बदलती रहती है लेकिन श्रुति नहीं बदलती। रिसर्च-अनुसंधान, नया सीखना,नया करना, रोज एक नया विचार, नया चिन्तन करते रहना चाहिए। नानाजी भी यही कहते थे हमेशा नया करते रहिये। समय बदलता है तो उस समय के अनुरूप समस्यायंे भी बदलती हैं और एक कल्याणकारी परिवर्तन समाज में आये ऐसी कल्पना ऋषि-मुनियों ने भी की थी। ऐसे ही परिवर्तनशाली परम्परा के वाहक नानाजी थे। उन्होंने गाय-गोशाला की बात पर कहा कि जब तक दान के पैसे से हम गोशाला चलायेंगे तो आगे नहीं बढ़ पायेंगे। गाय पूज्यनीय है इसके लिये हमें तीन दृष्टि लानी पड़ेगी - धर्म दृष्टि, अर्थ दृष्टि, आरोग्य दृष्टि। और हमें समझना होगा कि गाय में तेतीस करोड़ देवताओं का वास है लोग गौदृव्य के उपयोग करने का माध्यम बनें। उन्होंने कहा कि यहां जो कार्यकर्ता है वह पूरी लगन व निष्ठा के साथ कार्य करता है। क्योंकि शिक्षा प्राप्त तो काफी लोग होते हैं लेकिन इच्छा के साथ शिक्षा का वरण किये हुए लोग बहुत कम होते हैं। जिस संस्था की कमान भरत एवं नंदिता के हाथ में हो तो उसके संचालन पर संदेह की कोई गुंजाइस नही है। उन्होंने कहा कि ऐसा गीता का उपदेश है कि कोई न कोई प्रवृत्ति करनी ही होगी लेकिन ज्यादातर जो देश में प्रवृत्तियां होती है सामाजिक संस्थाओं की ओर से परिवारों में धार्मिक संस्थाओं में भी कही-कहीं पीछे प्रतिष्ठा प्राप्ति होती है। आर्थिक प्रवृत्ति में प्रतिष्ठा गौंण हैं। एक व्यक्ति भगवान राम की तपोस्थली में बैठ जाये और वह इतना परिणामदायी कार्य कर सकता है उसी का एक प्रमाण है। नानाजी ने जो काम खड़ा किया उसमें दोनो का एक सुन्दर मिश्रण है। कितनी क्षमता है आपमें आप गांव में गये और सबको उसमें प्रवृत्त किया, कौन आता है ? कौन बैठता है ? किन्तु समर्पित भाव से आप सब कर रहे हैं। विचार सबके भिन्न-भिन्न है लकिन हृदय सबका एक है उससे जो ऊर्जा प्राप्त होती है और उससे तैयार होने वाली शक्ति बहुत बड़ा काम करती है उसी हिसाब से यहां कार्य हो रहा है। जिस यज्ञ में आप लगे हैं उसकी निरन्तरता सदैव बनी रहे। इस कार्यक्रम के पूर्व उद्यमिता विद्यापीठ की निदेशक डाॅ. नंदिता पाठक द्वारा रमेश भाई जी को आरोग्यधाम के औषधीय वनस्पति के गार्डन और विवादमुक्त गांव की परिकल्पना को लेकर प्रभुश्रीराम के जीवन की अलौकिक समरसपूर्ण समाज की कल्पना पर आधारित रामदर्शन की सजीव झांकियों का भी अवलोकन कराया गया।


अखिल भारतीय मलयाली समिति का पहला राज्य स्तरीय सम्मेलन "संगमम् 2014"
भोपाल, 27 जनवरी| अखिल भारतीय मलयाली समिति द्वारा बी.एस.एस.एस. के जुबली सभागार में "संगमम् 2014" आयोजित किया गया| ए. आइ.एम.ए. का यह पहला राज्य स्तरीय सम्मेलन था जिसमें शाम संगीत और हास्य से सजी थी|
इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में गृह मंत्री श्री बाबूलाल गौर उपस्थित थे| आयोजन को और खास बनाने के लिये मैनिट के निदेशक डॉ. अप्पू कुत्टन के.के., जी.ई.आइ. इंडस्ट्रिस् सिस्टम लि. के प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष श्री सी.ई. फर्नांडिस, ए.आइ.एम.ए. के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गोकुलम गोपालन और राष्ट्रीय उप-सचिव श्री आर.एस. पिल्लई भी मौजूद थे|
गृह मंत्री श्री बाबूलाल गौर ने कहा, "मेरा सौभाग्य है की मैं यहाँ आया और अखिल भारतीय मलयाली समिति के एस आयोजन का हिस्सा बन पाया| यह देश की एक बड़ी समिति है और समाज के लिये अच्छा काम कर रही है| मैं इनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ|"
ए.आइ.एम.ए. के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गोकुलम गोपालन ने कहा, "हमें खुशी है की हम अपना पहला राज्य स्तरीय सम्मेलन भोपाल में कर रहें हैं| यह हमारा सौभाग्य है की गृह मंत्री, श्री बाबूलाल गौर अपनी व्यस्तता के बाद भी समय निकल कर यहाँ आए| मैं बहुत खुश हूँ की हमारी समिति के सभी सदस्य अलग-अलग जगहों से इस आयोजन में शामिल होने के लिये आए हैं| मैं भागीदारी और सहयोग के लिये सभी का आभारी हूँ|"
इस अवसर पर सांगीतिक-हास्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसमें केरेला के कलाकारों ने भाग लिया, इसमें कालीकट सीना'स् डिजिटल ओरकेस्ट्रा और अजय कल्लई और उनकी टीम ने हास्य प्रस्तुति दी| इस आयोजन में संगीत और नृत्य प्रस्तुतियाँ भी दी गई|


विवेकानंद क्विज संपन्न
स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी एवं स्वराज संस्थान संचालनालय द्वारा स्वामी विवेकानंद जी की 151 वीं जयंती पर आयोजित "विवेकानंद क्विज" आज स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में संपन्न हुई
शहर के 400 युवाओं ने इस क्विज के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया था. चार चरणों में आयोजित हुई स्क्रीनिंग के द्वारा 4 सर्वश्रेस्ठ टीमों का चयन किया गया जिनके बीच फाइनल क्विज का आयोजन किया गया.


कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है

कार्यक्रम - विवेकानंद क्विज
अवसर - स्वामी विवेकानंद की 151 वीं जयंती
आयोजन दिवस - रविवार 12 जनवरी
स्थान - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी भोपाल

क्विज मास्टर - शिवेन्दु जोशी (नेशनल लॉ स्कूल यूनिवर्सिटी)

आयोजन टीम -

देवेन्द्र सिंह चौहान (IEHE भोपाल)
अनुभव उपमन्यु (MANIT भोपाल)
अभिषेक तिवारी (MANIT भोपाल )
चार्वी गुप्ता (IEHE भोपाल)
प्रकृति शाह (सेंट जोसफ कान्वेंट स्कूल भोपाल)

मुख्य अतिथि - श्री बी आर नायडू (प्रमुख सचिव,महिला एवं बाल विकास,मध्य प्रदेश शासन)

क्विज के विजेता -

प्रथम पुरूस्कार (रुपये 5000 /-) यश वर्मा एवं रोमिल तिवारी (MANIT भोपाल)
द्वितीय पुरूस्कार (रुपये 3000/- अभिषेक भार्गव एवं पल्लवी मालपानी (LNCT भोपाल)
तृतीय पुरूस्कार (रुपये 2000 /- चंद्रशेखर अग्रवाल एवं दीन दयाल (ऑडिटर जनरल ऑफिस)

स्क्रीनिंग राउंड

चार राउंड्स - हर राउंड में 50 टीमों ने भाग लिया
कुल प्रतिभागी - 400


"विवेकानंद क्विज"
स्वामी विवेकानंद की 151 वीं जयंती के अवसर पर इस रविवार 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी, स्वराज संस्थान (संस्कृति विभाग मध्य प्रदेश शासन) के साथ मिलकर एक ओपन क्विज का आयोजन कर रही है
विवेकानंद क्विज के नाम से होने वाली यह क्विज सभी शहरवासियों के लिए ओपन और पूरी तरह से निःशुल्क है. किसी भी आयु वर्ग के 02 लोग अपनी एक टीम बनाकर इस क्विज के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं
लाइब्रेरी की हेल्प डेस्क पर क्विज के रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं. लाइब्रेरी में स्थान सीमित होने के कारण सबसे पहले रजिस्टर करने वालीं केवल 50 टीमें ही इस प्रतियोगिता में भाग ले सकेंगीं
पूरी क्विज हिंदी में आयोजित होगी और सभी प्रश्न स्वामी विवेकानंद के जीवन और दर्शन पर आधारित होंगे। क्विज में भाग लेने वाले हर प्रतियोगी को स्वराज संस्थान द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'युग प्रवर्तक विवेकानंद' उपहार स्वरुप दी जायेगी
क्विज के तीन विजेताओं को कुल 10 हज़ार रुपये के नगद पुरूस्कार दिए जायेंगें तथा पूरी क्विज 'रेडियो आज़ाद हिन्द' पर प्रासारित की जायेगी

कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है

कार्यक्रम का नाम - विवेकानंद क्विज
दिनांक - 12 जनवरी 2014 (स्वामी विवेकानंद जयंती/राष्ट्रीय युवा दिवस)
समय - सुबह 11 बजे
स्थान - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी,न्यू मार्किट भोपाल

क्विज का पैटर्न

थीम - स्वामी विवेकानंद का जीवन एवं दर्शन
स्क्रीनिंग राउंड्स - प्रथम राउंड एक स्क्रीनिंग राउंड होगा,इस लिखित राउंड में सभी 50 टीमें भाग लेंगीं
फाइनल राउंड - एक मौखिक राउंड होगा जिसमे स्क्रीनिंग से चयनित 4 टीमें भाग लेंगीं
क्विज का माध्यम -हिंदी

पुरूस्कार -

प्रथम - नगद पुरूस्कार 5000/- रुपये एवं ट्राफी
द्वतीय - नगद पुरूस्कार 3000/- रुपये एवं ट्राफी
तृतीय - नगद पुरूस्कार 2000/- रुपये एवं ट्राफी

क्विज टीम -

शिवेन्दु जोशी,अनुभव उपमन्यु ,देवेन्द्र सिंह चौहान,अभिषेक तिवारी,प्रकृति शाह
आयोजक - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी एवं स्वराज संस्थान संचालनालय (संस्कृति विभाग,म प्र शासन)

क्विज में भाग लेने के लिए संपर्क करें

लाइब्रेरी हेल्प डेस्क (2553765 या 2553767)
स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी


साहित्यकार और लेखक उदारवादी समाज की रचना में योगदान दें- राज्यपाल
भोपाल। मप्र के राज्यपाल श्री राम नरेश यादव ने कहा है कि हिन्दी हमारी राष्ट्रीय भाषा है। राष्ट्रीय एकता के लिए आज देश को हिन्दी की आवश्यकता है। श्री यादव ने कहा कि सभी देशवासियों को हिन्दी भाषा को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने का संकल्प लेना चाहिए। इसके लिए सरकारी स्तर पर जो प्रयास किय जा रहे हैं वे पूरक हैं,सहयोगी हैं लेकिन गैर सरकारी और स्वैच्छिक हिन्दी संस्थाओं के प्रयास भी जरूरी हैं। हमें हिन्दी के संस्कारों और उसकी समृद्ध परम्परा पर विश्वास रखना होगा इस परिदृश्य से हिन्दी ज्यादा सार्थक, प्रासंगिक एवं मजबूत होकर उभरेगी।
राज्यपाल श्री यादव ने कहा कि विज्ञान,प्रद्यौगिकी,व्यापार और वाणिज्य के क्षेत्र में हिन्दी को सम्पन्न करने की कोशिश करनी होगी तभी हिन्दी को उसका सही सम्मान मिल सकेगा। आज जिन लोगों को यहां सम्मानित किया जा रहा है वे केवल राष्ट्र भाषा का ही सम्मान नहीं कर रहे हैं बल्कि राष्ट्री य एकता में अपना योगदान दे रहे हैं। सम्मान प्राप्त करने वाले सभी प्रबुद्धजन राष्ट्रीय एकता के सांस्कृतिक दूत के समान हैं। उन्होंने साहित्यकारों और लेखकों से कहा कि अंधविश्वास, कुरीतियों, कटटरवाद को समाप्त करने और उदारवादी समाज की रचना में अपना योगदान दें।
राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अध्यक्ष श्री सुखदेव प्रसाद दुबे ने कहा कि हिन्दी के क्षेत्र में आज हम जहां हैं उसकी देन महात्मा गांधी ही थे। गांधी जी ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया। हमारी पहचान ही राष्ट्रभाषा और संसकृति से है। श्री कैलशचंद्र पंत ने समिति की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती रक्षा सिसोदिया ने किया।
राज्यपाल श्री यादव ने हिन्दी सेवी सम्मान समारोह में आज राष्ट्र भाषा हिन्दी को राजकाज,बैकिंग,उद्योग,प्रशासन आदि क्षेत्रों में आगे बढाने और उसके अधिक से अधिक प्रयोग के लिए अहिन्दी भाषियों के अनुकरणीय योगदान के लिए सम्मानित किया।
इस अवसर पर उन्होंने हिन्दी संस्था सम्मान, प्रदेश का समाज सेवी सम्मान, अहिन्दी भाषियों की कृतियों पर पुरस्कार, पत्रकारिता पुरस्कार, महिला लेखन पुरस्कार, वांडमय पुरस्कार और पाठक,शिक्षक, छात्र सम्मान से सम्मानित किया। श्री यादव ने समिति के प्रगति के चरण पुस्तक, श्री शंकरलाल बत्ता की पुस्तक "भावांजलि" और श्रीमती किरण आगाल मौलि की पुस्तक "किरणदीप" का विमोचन भी किया। राज्यपाल ने राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की वेब साइट का लोकार्पण भी किया। राज्यपाल श्री यादव ने इस वेबसाइट के निर्माता श्री प्रखर सक्सेना का सम्मान किया। समारोह में पूर्व मुख्यसचिव श्री आर परशुराम, डा शशिराय, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में हिन्दी प्रेमी उपस्थित थे।


लीलाधर मंडलोई का लोकअभिनन्दन 19 अक्टूबर को
भोपाल। वरिष्ठ साहित्यकार एवं आकाशवाणी के महानिदेशक श्री लीलाधर मंडलोई का लोकअभिनन्दन 19 अक्टूबर को दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय के र.वि.शिरढोणकर सभागृह में किया जायेगा। नगर की साहित्यिक संस्थाओं और साहित्यकारों के सहयोग से यह समारोह दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय द्वारा आयोजित किया जा रहा है। यह निर्णय दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय में सम्पन्न एक बैठक में लिया गया।
दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय के कार्यकारी अध्यक्ष श्री अशोक निर्मल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सर्वश्री राजेश जोशी, मुकेश वर्मा, श्याम मुंशी, रामप्रकाश त्रिपाठी, महेन्द्र गगन, राजुरकर राज, द्विजेन्द्रनाथ सैगल, बटुक चतुर्वेदी, डाॅ. उर्मिला शिरीष, डाॅ. रामवल्लभ आचार्य, अमिताभ अनुरागी, महेश प्रसाद सिंह आदि उपस्थित थे। इस समारोह में श्री मंडलोई के अवदान पर एकाग्र स्मारिका का प्रकाशन किया जायेगा। इसके साथ ही उनके कृतित्व और व्यक्तित्व पर लघुफिल्म भी दिखाई जायेगी, जिसका निर्माण युवा सर्जक श्री अमिताभ अनुरागी द्वारा किया जा रहा है।
यह जानकारी देते हुए दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय के निदेशक राजुरकर राज ने बताया कि छिन्दवाड़ा जिले के छोटे से गाँव से अपनी जीवन यात्रा आरम्भ करने वाले श्री लीलाधर मंडलोई ने साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। लोकप्रसारण विशेषज्ञ के रूप में उनकी विशेष ख्याति है। उल्लेखनीय है कि आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से सेवा आरम्भ करने वाले श्री मंडलोई आकाशवाणी के महानिदेशक पद से आगामी 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होंगे। अनेक देशों की साहित्यिक और प्रशासनिक यात्रायें कर चुके श्री मंडलोई दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय की प्रवर परिषद के अध्यक्ष भी हैं।


दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय में श्री नरेन्द्र दीपक अमृत महोत्सव
भोपाल। ‘‘नरेन्द्र दीपक ने कभी थकना नहीं सीखा। अपनी सरकारी नौकरी के साथ ही सृजन और नौकरी से मुक्त होने के बाद जब लोग अपने को आराम-तलब जि़न्दगी से जोड़ लेते हैं, नरेन्द्र दीपक अपने सृजन को नया आयाम देते हुए साहित्यिक पत्रकारिता आरम्भ कर देते हैं।’’-ये उद्गार थे श्री कैलाशचन्द्र पन्त के, जो दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय में श्री नरेन्द्र दीपक के अमृत महोत्सव की अध्यक्षता कर रहे थे।
दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय में आयोजित इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज उपस्थित थे। ‘साहित्यिक पत्रकारिता: सन्दर्भ नरेन्द्र दीपक’ विषय पर डा. कृष्णगोपाल मिश्र ने महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया।
आरम्भ में दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय के निदेशक राजुरकर राज ने नरेन्द्र दीपक का परिचय देते हुए उनके अमृत पर्व पर बधाई दी। नगर की अनेक साहित्यिक संस्थाओं और गणमान्य नागरिकों ने श्री दीपक का अभिनन्दन किया। इस अवसर पर श्री नरेन्द्र दीपक द्वारा सम्पादित ‘अन्तरा’ के आठवें अंक का लोकार्पण किया गया। स्वागत वक्तव्य श्री राजेन्द्र जोशी ने और आभार श्री अशोक निर्मल ने व्यक्त किया।


10-दिवसीय गणेश उत्सव की धूम शुरु
राजधानी भोपाल सहित देश के सभी प्रमुख शहरों में दस-दिवसीय गणेश-उत्सव की धूम मची हुई है, गणेश जी की प्रतिमाओं से पंडाल सजे हुए है। गणेश चतुर्थी पर हिन्दू और मुस्लिम सभी घरों पर भी पूजा- अर्चना की जाती है।
रोज बच्चों व महिलाओं के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।

 


धूम-धाम से घर पधारे 'गणपति बप्पा'
मुंबई। कई दिनों से जारी तैयारी के बाद सोमवार को वह दिन भी आ गया जब गणपति बप्पा ने अपने भक्तों को दर्शन दिए। गणेश चतुर्थी के मौके पर मुंबई समेत देश भर के सभी पंडालों में 'गणपति बप्पा मोरिया' केजयघोष के साथ गणपति की मूर्ति को स्थापित कर दिया गया। इसके साथ ही दस दिनों तक चलने वाला उत्सव भी देश भर में शुरू हो गया।
पश्चिम का मुंबई हो या पूर्व में कोलकाता या फिर दक्षिण का चेन्नई हा या फिर उत्तर का अमृतसर सभी जगहों पर गणपति के लिए बनाए गए पंडालों में गणपति की मूति स्थापित कर दी गई। मुंबई में इस दौरान कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए सभी जगहों पर सुरक्षा बलों को कड़ी चौकसी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली में भी दस दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के दौरान कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। कई जगहों पर बने पंडालों पर पुलिस की पैनी नजर है। इसके अलावा कई पंडालों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।


आकाशवाणी में हिन्दी दिवस/हिन्दी पखवाड़ा का आयोजन 13 सितम्बर
आकाषवाणी भोपाल राजभाषा कार्यान्वयन समिति द्वारा दिनांक 14 सितम्बर, 2013 (शासकीय अवकाश के कारण) के पूर्व दिवस अर्थात 13 सितम्बर, 2013 (शुक्रवार) को “हिन्दी दिवस समारोह” का आयोजन किया जा रहा है। हिन्दी दिवस के साथ-साथ 13 सितम्बर, 2013 से ही “हिन्दी पखवाड़े” का शुभांरभ होगा।
“हिन्दी दिवस/हिन्दी पखवाड़ा उद्घाटन समारोह” की अध्यक्षता आकाशवाणी भोपाल के केन्द्र प्रमुख श्री सुदर्शन अंसोलिया करेंगे। कार्यक्रम में सहायक निदेशक (कार्यक्रम) श्री राजेन्द्र कुमार तथा आकाशवाणी भोपाल, विज्ञापन प्रसारण सेवा के अधिकरीगण व कार्मिक मौजूद रहंेगे।
हिन्दी पखवाड़े के दौरान हिन्दी काम-काज के प्रति प्रोत्साहन प्रदान करने के उद्देश्य से कार्यालय के अधिकारियांे/कार्मिकों के लिए, विभिन्न्ा ”हिन्दी प्रतियोगिताएं” आयोजित की जाएंगी। इनमें तात्कालिक हिन्दी निबंध लेखन, हिन्दी वर्ग पहेली, हिन्दी मे टिप्पण-आलेखन एवं प्रारूप लेखन, कम्प्यूटर पर हिन्दी टंकण प्रतियोगिता तथा पोस्टर पर आधारित काव्य लेखन प्रतियोगिता के साथ-साथ, हिन्दी कवि गोष्ठी का आयोजन तथा एक दिवसीय पूर्णकालिक हिन्दी कार्यशाला का आयोजन शामिल है।
आकाशवाणी भोपाल, विज्ञापन प्रसारण सेवा आकाशवाणी भोपाल तथा आकाशवाणी के अतिरिक्त महानिदेशक कार्यालय, मध्य क्षेत्र-प्प् के संयुक्त तत्वाध्ाान में आयोजित इस “हिन्दी पखवाड़े” के अंतर्गत इन कार्यालयों के अध्िाकारीगण/कार्मिक इन प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकेंगे। इन प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत होने वाले अधिकारियों/कार्मिकों को 27 सितम्बर, 2013 को “हिन्दी पखवाड़ा समापन व पुरस्कार वितरण समारोह” में नक़द पुरस्कार व प्रमाण पत्र प्रदान किए जायेंगे।


द्वापर में जब कृष्ण जन्मे थे, वैसा ही संयोग इस जन्माष्टमी पर
इस बार ऎसा बरसों बाद होगा, जब बिल्कुल वैसे ही ग्रह-नक्षत्र बन रहे हैं, जैसे द्वापर युग में कृष्ण जन्म के समय थे। 28 अगस्त बुधवार को शेखावाटी में जन्माष्टमी मनाई जाएगी। पं. नरेश जोशी के अनुसार हजारों साल पहले जब कृष्ण का जन्म हुआ था तब माह भाद्रपद, कृष्णपक्ष, तिथि अष्टम, वार बुधवार, नक्षत्र रोहिणी तथा चंद्रमा वृषभ का था। जोशी ने बताया कि इस बार बुधवार को जन्माष्टमी पर ऎसे ही संयोग बनेंगे। ऎसा बरसों बाद होगा।
इस जन्माष्टमी पर भी माह भाद्रपद, कृष्ण पक्ष, तिथि अष्टम, वार बुधवार, नक्षत्र रोहिणी तथा चंद्रमा वृषभ का रहेगा। इस लिहाज से इस बार की जन्माष्टमी विशेष फलदायी रहेगी। जोशी के अनुसार रोहिणी नक्षत्र पूरी रात रहेगा तथा जन्माष्टमी इस बार कृष्ण जयंती के रूप में मनाई जाएगी।
इस मौके पर कृष्ण मंदिरों में दिनभर धार्मिक आयोजन होंगे। मध्यरात्रि के बाद कान्हा के जन्म के साथ ही भक्त एक दूसरे को बधाई देंगे। मंदिरों में जन्माष्टमी महोत्सव की तैयारियां जोरों पर है। ज्योतिषाचार्य रामवतार मिश्र के अनुसार वर्षो बाद बुधवार को रोहिणी नक्षत्र व अष्टमी तिथि का विशेष संयोग है।


रक्षाबंधन : आज रात 8.47 बजे से श्रेष्ठ मुहूर्त, बुधवार को भी मनाएंगे राखी
भोपाल। रक्षाबंधन का त्योहार इस बार मंगलवार और बुधवार दोनों दिन मनेगा। मंगलवार सुबह 10.22 बजे से पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। हालांकि इस दिन सुबह 10.22 से रात 8.46 बजे तक भद्रा भी है। ऐसे में रात 8.47 बजे से श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। 21 अगस्त को उदयकालीन तिथि पूर्णिमा है। सरकारी छुट्टी भी है इसलिए कई लोग बुधवार को भी राखी मनाएंगे। हालांकि पंचांग 20 अगस्त को ही रक्षाबंधन शास्त्र सम्मत बता रहे हैं।


विविध भारती ने करवाई जनजातीय संग्रहालय की सैर
भोपाल। विविध भारती भोपाल पर आज एक घण्टे तक भोपाल के जनजातीय संग्रहालय से प्रसारण होता रहा और श्रोता आवाज़ के माध्यम से जनजातीय संग्रहालय की सैर करते रहे। जनजातीय संग्रहालय से अधिकारियोंए कलाकारों और दर्शकों ने अपने अनुभव टेलीफोन के जरिये साझा किये। जनजातीय संग्रहालय में इस सजीव कार्यक्रम के सूत्रधार थे वरिष्ठ उद्घोषक श्री पुरुषोत्तम श्रीवासए जबकि विविध भारती के स्टूडियों में वरिष्ठ उद्घोषक राजुरकर राज ने कमान सम्भाली और संग्रहालय से की गई फरमाइश पर गीत सुनवाये। इसका संयोजन कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती वर्षा शर्मा ने किया। उल्लेखनीय है कि विविध भारती भोपाल से माह के पहले गुरुवार को ष्विविध भारती आपके बीचष् कार्यक्रम का प्रसारण ग्यारह बजकर दो मिनट से ग्यारह बजकर अट्ठावन मिनट तक होता है। इसके लिए इस बार जनजातीय संग्रहालय का चयन किया थाए जहाँ पुरुषोत्तम श्रीवास ने आवाज़ के जरिये श्रोताओं को जनजातीय संग्रहालय की सैर करवाईए वहीं जनजातीय संग्रहालय से की गई फरमाइश पर स्टूडियो से राजुरकर राज ने फिल्मी गीत सुनवाये। लगभग एक घंटा अवधि का यह कार्यक्रम मोबाइल फोन सम्पर्क के जरिये प्रसारित किया गया। इस सजीव फोन.आउट कार्यक्रम में हसन खान और धर्मेन्द्र वैद्य का तकनीकी सहयोग रहाए वहीं लाइब्रेरी से रवि चतुर्वेदी और मोहन सिंह ने भागीदारी की। स्टूडियो में राजुरकर राज के साथ वरिष्ठ उद्घोषक सावनी राजू ने सहयोग किया। विविध भारती का यह कार्यक्रम अब निरन्तर लोकप्रिय होता जा रहा है। अब तक प्रसारित इस कार्यक्रम श्रृंखला में जवाहर लाल नेहरू कैंसर अस्पताल और सेन्ट्रल जेल से इसका सजीव प्रसारण विशेष उल्लेखनीय रहाए वहीं भोपाल की लो फ्लोर बस में बैठकर सवारियों से बातचीत करते हुए गीत सुनवाने का अभिनव प्रयोग श्रोताओं ने खूब सराहा।
जानिए: क्या है गुरू पूर्णिमा
देशभर में गुरू पूर्णिमा पर्व बड़े ही श्रद्धाभाव से मनाया जाता है. आषाढ़ की पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा कहते हैं. इस दिन गुरू पूजा का विधान है. वैसे तो देशभर में प्राचीन समय में अनेक ज्ञाता और विद्वान हुए हैं लेकिन महर्षि वेद व्यास को भारत में सबसे बड़ा ज्ञाता माना गया है. वेद व्यास चारों वेदों के प्रथम व्याख्याता थे इसलिए उनकी पूजा गुरू पूर्णिमा के दिन की जाती है.
प्राचीन काल में जब छात्र गुरू के आश्रम में नि:शुल्क शिक्षा ग्रहण करते थे तो इसी दिन श्रद्धाभाव से प्रेरित होकर अपने गुरूजनों को पूजते थे और अपने सामर्थ्य के मुताबिक दक्षिणा भी देते थे.
भारतीय समाज को वेदों का ज्ञान देने वाले व्यासजी ही हैं, इस तरह वो हमारे आदिगुरू हैं. इसी वजह से इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है. उनकी स्मृति हमारे मन मंदिर में हमेशा ताजा बनाए रखने के लिए हमें इस दिन अपने गुरूओं को व्यासजी का अंश मानकर उनकी पूजा करनी चाहिए और अपनी उज्ज्वल भविष्य के लिए गुरू का आशीर्वाद ग्रहण करना चाहिए. इस दिन अपने गुरू-शिक्षक का नहीं बल्कि माता-पिता, चाचा-चाची और भाई-बहन आदि की भी पूजा का विधान है.


टीकमगढ़ में तीन दिवसीय मोर पहाड़ी उत्सव शुरू
टीकमगढ़ जिले के पलेरा जनपद के ग्राम मोर पहाड़ी में महाराजा छत्रसाल के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से मोर पहाड़ी उत्सव शनिवार को शुरू हुआ।
आदिम जाति कल्याण राज्य मंत्री श्री हरिशंकर खटीक ने कहा कि यह कार्यक्रम अब प्रतिवर्ष होगा और इस उत्सव में घुड़-दौड़, कब्बडी, घुड़-सवारी जैसी अनेक प्रतियोगिता भी आयोजित करवाई जायेगी। कार्यक्रम में सांसद डॉ. वीरेन्द्र कुमार खटीक और पूर्व संसदीय सचिव श्री सुरेन्द्र प्रताप सिंह बेबीराजा ने भी संबोधित किया।
कलाकारों ने दी रंगारंग नृत्यों की प्रस्तुति
मोर पहाड़ी उत्सव में आये कलाकारों ने प्रथम दिन बुंदेलखण्ड का बधाई, ढिमरयाई एवं नौरता नृत्य, राजस्थान का झूमर नृत्य, मालवा का गननौर नृत्य एवं आदिवासी लोक नृत्यों सहित अन्य नृत्य नाटिकाओं की मनोहारी प्रस्तुति दी।
प्रदर्शनी लगाई
कार्यक्रम स्थल पर जनसंपर्क, कृषि, मत्स्य पालन, आयुष, महिला-बाल विकास सहित अन्य विभागों द्वारा विकास गतिविधियों पर आधारित चित्र प्रदर्शनियाँ लगाई गई हैं। जनसंपर्क विभाग द्वारा विकास रथ के माध्यम से योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया गया और शासन की जन-कल्याणकारी योजनाओं पर आधारित साहित्य का वितरण किया गया।


संस्कृति मंत्री द्वारा उस्ताद जिया फरीदुद्दीन डागर के निधन पर शोक व्यक्त
भोपाल. संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने ध्रुपद गुरु उस्ताद जिया फरीदुद्दीन डागर के निधन पर शोक व्यक्त किया है। श्री शर्मा ने शोक संदेश में कहा है कि श्री डागर का ध्रुपद गायकी को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान है।

श्री शर्मा ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।


रामनवमी

रामनवमी का त्यौहार चैत्र शुक्ल की नवमी मनाया जाता है. इस वर्ष यह त्यौहार 19 अप्रैल 2013 को शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा. रामनवमी के दिन ही चैत्र नवरात्र की समाप्ति भी हो जाती है. हिंदु धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था अत: इस शुभ तिथि को भक्त लोग रामनवमी के रुप में मनाते हैं. यह पर्व भारत में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है. मान्यता के अनुसार इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करके पुण्य के भागीदार होते है.


रामनवमी पूजन


रामनवमी का पूजन शुद्ध और सात्विक रुप से भक्तों के लिए विशष महत्व रखता है इस दिन प्रात:कल स्नान इत्यादि से निवृत हो भगवान राम का स्मरण करते हुए भक्त लोग व्रत एवं उपवास का पालन करते हैं. इस दिन राम जी का भजन एवं पूजन किया जाता है. भक्त लोग मंदिरों इत्यादि में भगवान राम जी की कथा का श्रवण एवं किर्तन किया जाता है. इसके साथ ही साथ भंडारे और प्रसाद को भक्तों के समक्ष वितरित किया जाता है. भगवान राम का संपूर्ण जीवन ही लोक कल्याण को समर्पित रहा. उनकी कथा को सुन भक्तगण भाव विभोर हो जाते हैं व प्रभू के भजनों को भजते हुए रामनवमी का पर्व मनाते हैं

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राम जन्म की कथा


हिन्दु धर्म शास्त्रो के अनुसार त्रेतायुग में रावण के अत्याचारो को समाप्त करने तथा धर्म की पुन: स्थापना के लिये भगवान विष्णु ने मृत्यु लोक में श्री राम के रुप में अवतार लिया था. श्रीराम चन्द्र जी का जन्म चैत्र शुक्ल की नवमी के दिन राजा दशरथ के घर में हुआ था. उनके जन्म पश्चात संपूर्ण सृष्टि उन्हीं के रंग में रंगी दिखाई पड़ती थी.
चारों ओर आनंद का वातावरण छा गया था प्रकृति भी मानो प्रभु श्री राम का स्वागत करने मे ललायित हो रही थी. भगवान श्री राम का जन्म धरती पर राक्षसो के संहार के लिये हुआ था. त्रेता युग मे रावण तथा राक्षसो द्वारा मचाये आतंक को खत्म करने के लिये श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम के रुप में अवतरित हुये. इन्हे रघुकुल नंदन भी कहा जाता है.

रामनवमी का महत्व


रामनवमी के त्यौहार का महत्व हिंदु धर्म सभयता में महत्वपूर्ण रहा है. इस पर्व के साथ ही मा दुर्गा के नवरात्रों का समापन भी जुडा़ है. इस तथ्य से हमें ज्ञात होता है कि भगवान श्री राम जी ने भी देवी दुर्गा की पूज अकी थी और उनके द्वारा कि गई शक्ति पूजा ने उन्हें धर्म युद्ध ने उन्हें विजय प्रदान की. इस प्रकार इन दो महत्वपूर्ण त्यौहारों का एक साथ होना पर्व की महत्ता को और भी अधिक बढा़ देता है. कहा जाता है कि इसी दिन गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस की रचना का आरंभ भी किया था.
रामनवमी का व्रत पापों का क्षय करने वाला और शुभ फल प्रदान करने वाला होता है. राम नवमी के उपलक्ष्य पर देश भर में पूजा पाठ और भजन किर्तनों का आयोजन होता है. देश के कोने कोने में रामनवमी पर्व की गूंज सुनाई पड़ती है. इस दिन लोग उपवास करके भजन कीर्तन से भगवान राम को याद करते है. राम जन्म भूमि अयोध्या में यह पर्व बडे हर्षो उल्लास के साथ मनाया जाता है. वहां सरयु नदी में स्नान करके सभी भक्त भगवान श्री राम जी का आशिर्वाद प्राप्त करते हैं.


नव संवत्सर को अपनाएं - निज गौरव का मान जगाएं

धूम-धाम से मनाएं नया साल - विक्रमी संवत्-2070
भारत व्रत पर्व व त्यौहारों का देश है। यूं तो काल गणना का प्रत्येक पल कोई न कोई महत्व रखता है किन्तु कुछ तिथियों का भारतीय काल गणना (कलैंडर) में विशेष महत्व है। भारतीय नव वर्ष (विक्रमी संवत्) का पहला दिन (यानि वर्ष-प्रतिपदा) अपने आप में अनूठा है। इसे नव संवत्सर भी कहते हैं। इस दिन पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर पूरा करती है तथा‍ दिन-रात बराबर होते हैं। इसके बाद से ही रात्रि की अपेक्षा दिन बड़ा होने लगता है। काली अंधेरी रात के अन्धकार को चीर चन्द्रमां की चांदनी अपनी छटा बिखेरना शुरू कर देती है। वसंत ऋतु का राज होने के कारण प्रकृति का सौंदर्य अपने चरम पर होता है। फाल्गुन के रंग और फूलों की सुगंध से तन-मन प्रफुल्लित और उत्साहित रहता है।
विक्रमी सम्वत्सर की वैज्ञानिकता :
भारत के पराक्रमी सम्राट विक्रमादित्य द्वारा प्रारंभ किये जाने के कारण इसे विक्रमी संवत् के नाम से जाना जाता है। विक्रमी संवत् के बाद ही वर्ष को 12 माह का और सप्ताह को 7 दिन का माना गया। इसके महीनों का हिसाब सूर्य व चंद्रमा की गति के आधार पर रखा गया। विक्रमी संवत का प्रारंभ अंग्रेजी कलैण्डर ईसवीं सन् से 57 वर्ष पूर्व ही हो गया था।
चन्द्रमा के पृथ्वी के चारों ओर एक चक्कर लगाने को एक माह माना जाता है, जबकि यह 29 दिन का होता है। हर मास को दो भागों में बांटा जाता है- कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष। कृष्णपक्ष, में चांद घटता है और शुक्लपक्ष में चांद बढ़ता है। दोनों पक्ष प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी आदि ऐसे ही चलते हैं। कृष्णपक्ष के अन्तिम दिन (यानी अमावस्या को) चन्द्रमा बिल्कुल भी दिखाई नहीं देता है जबकि शुक्लपक्ष के अन्तिम दिन (यानी पूर्णिमा को) चांद अपने पूरे यौवन पर होता है। अर्द्ध-रात्रि के स्थान पर सूर्योदय से दिवस परिवर्तन की व्यवस्था तथा सोमवार के स्थान पर रविवार को सप्ताह का प्रथम दिवस घोषित करने के साथ चैत्र कृष्ण प्रतिपदा के स्थान पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से वर्ष का आरम्भ करने का एक वैज्ञानिक आधार है। वैसे भी इंग्लैण्ड के ग्रीनविच नामक स्थान से दिन परिवर्तन की व्यवस्था में अर्द्ध-रात्रि के 12 बजे को आधार इसलिए बनाया गया है क्योंकि उस समय भारत में भगवान भास्कर की अगवानी करने के लिए प्रात: 5-30 बज रहे होते हैं। वारों के नामकरण की विज्ञान सम्मत प्रक्रिया को देखें तो पता चलता है कि आकाश में ग्रहों की स्थिति सूर्य से प्रारम्भ होकर क्रमश: बुध, शुक्र, चन्द्र, मंगल, गुरु और शनि की है। पृथ्वी के उपग्रह चन्द्रमा सहित इन्हीं अन्य छह ग्रहों पर सप्ताह के सात दिनों का नामकरण किया गया। तिथि घटे या बढ़े किंतु सूर्य ग्रहण सदा अमावस्या को होगा और चन्द्र ग्रहण सदा पूर्णिमा को होगा, इसमें अंतर नहीं आ सकता। तीसरे वर्ष एक मास बढ़ जाने पर भी ऋतुओं का प्रभाव उन्हीं महीनों में दिखाई देता है, जिनमें सामान्य वर्ष में दिखाई पड़ता है। जैसे, वसन्त के फूल चैत्र-वैशाख में ही खिलते हैं और पतझड़ माघ-फाल्गुन में ही होती है। इस प्रकार इस कालगणना में नक्षत्रों, ऋतुओं, मासों व दिवसों आदि का निर्धारण पूरी तरह प्रकृति पर आधारित वैज्ञानिक रूप से किया गया है।
ऎतिहासिक संदर्भ:
वर्ष प्रतिपदा पृथ्वी का प्राकट्य दिवस, ब्रह्मा जी के द्वारा निर्मित सृष्टि का प्रथम दिवस, सतयुग का प्रारम्भ दिवस, त्रेता में भगवान श्री राम के राज्याभिषेक का दिवस (जिस दिन राम राज्य की स्थापना हुई), द्वापर में धर्मराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक दिवस होने के अलावा कलयुग के प्रथम सम्राट परीक्षित के सिंहासनारूढ़ होने का दिन भी है। इसके अतिरिक्त देव पुरुष संत झूलेलाल, महर्षि गौतम व समाज संगठन के सूत्र पुरुष तथा सामाजिक चेतना के प्रेरक डॉ. केशव बलिराम हेड़गेवार का जन्म दिवस भी यही है। इसी दिन समाज सुधार के युग प्रणेता स्वामी दयानन्द सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी। वर्ष भर के लिए शक्ति संचय करने हेतु नौ दिनों की शक्ति साधना (चैत्र नवरात्रि) का प्रथम दिवस भी यही है। इतना ही नहीं, दुनिया के महान गणितज्ञ भास्कराचार्य जी ने इसी दिन से सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन, महीना और वर्ष की गणना करते हुए पंचांग की रचना की। भगवान राम ने बाली के अत्याचारी शासन से दक्षिण की प्रजा को मुक्ति इसी दिन दिलाई। महाराज विक्रमादित्य ने आज से 2068 वर्ष पूर्व राष्ट्र को सुसंगठित कर शकों की शक्ति का उन्मूलन कर यवन, हूण, तुषार, तथा कंबोज देशों पर अपनी विजय ध्वजा फहराई थी। उसी विजय की स्मृति में यह प्रतिपदा संवत्सर के रूप में मनाई जाती है।
अन्य काल गणनाऍँ:
ग्रेगेरियन (अंग्रेजी) कलेण्डर की काल गणना मात्र दो हजार वर्षों के अति अल्प समय को दर्शाती है। जबकि यूनान की काल गणना।


‘मध्यप्रदेश की भूतपूर्व रियासतें’ प्रदर्शनी राज्य संग्रहालय में 19 से 26 मार्च तक
संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा राज्य संग्रहालय, श्यामला हिल्स, भोपाल में ‘मध्यप्रदेश की भूतपूर्व रियासतें’ प्रदर्शनी 19 से 26 मार्च तक लगायी जाएगी। दुर्लभ अभिलेखों एवं छायाचित्रों की इस प्रदर्शनी का उद्घाटन 19 मार्च को शाम 5 बजे संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा करेंगे।
प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश की भूतपूर्व रियासतों की झलक दिखेगी। इसमें तत्कालीन राजनैतिक घटनाओं, प्रशासनिक निर्णयों तथा अन्य विषयों से संबंधित ऐतिहासिक दस्तावेजों को प्रदर्शित किया जायेगा। प्रदर्शनी प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से रात्रि 7 बजे तक खुली रहेगी। प्रदर्शनी में प्रवेश निःशुल्क है।


संस्कृति विभाग के लिए 132 करोड़ से अधिक राशि का प्रावधान
संस्कृति विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2013-14 के लिए 132 करोड़ 19 लाख 24 हजार का बजट प्रावधान किया गया है। बजट में किए गए प्रमुख प्रावधान निम्नानुसार हैं :
स्मारकों एवं संग्रहालयों के अनुरक्षण एवं विकास के लिए 48 करोड़ 75 लाख रुपये।
साँची बौद्ध एवं भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के लिए 10 करोड़ रुपये।
संग्रहालयों के विकास के लिए 8 करोड़ 74 लाख 79 हजार।
स्वामी विवेकानंद के 150वें जन्म-वर्ष समारोह के लिए एक करोड़ रुपये का प्रावधान।
संगीत महाविद्यालय नरसिंहगढ़ के भवन के लिए एक करोड़ 25 लाख 2 हजार रुपये।
भारत भवन में रंग मण्डल की स्थापना होगी।
पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण और संवर्धन के लिए 2 करोड़ 16 लाख 12 हजार।
राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए एक करोड़ 30 लाख।
डॉ. बी.एस. वाकणकर सृजन-पीठ की स्थापना के लिए 50 लाख रुपये।
समारोहों के लिए 3 करोड़ 55 लाख रुपये।
जन-नायक टंट्या भील की समाधि पर स्मारक के लिए 10 लाख 50 हजार का प्रावधान।
स्वाधीनता संग्राम संबंधी गतिविधियों के संकलन, दस्तावेजीकरण और प्रदर्शन के लिए एक करोड़ 81 लाख 90 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है।


चंडालिका नृत्य-नाटिका का मंचन
भोपाल। शहीद भवन में बुधवार को रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखे गए चंडालिका नृत्य-नाटिका का मंचन किया गया। नाटक में सदियों से चली आ रही अस्पृश्यता की प्रथा को एक बार फिर जीवंत किया गया। बिना संवादों के अपने नृत्य और अभिनय से कलाकारों ने बंगाल के गांव की दिनचर्या को मंच पर बखूबी पेश किया।
नाटक के तहत मंच पर भगवान बुद्ध और उनके शिष्य का प्रवेश होता है। गांव की महिलाएं उनके दर्शन करती हैं, लेकिन दूर खड़ी एक दलित युवती दर्शन भी सीमा में रहकर करती है। इसके बाद महिलाएं खुशियां मनाती हुई नृत्य करती हैं, फूल खरीदकर बालों में सजाती हैं पर ज्यों ही दलित महिला फूल खरीदने की कोशिश करती है उसे रोक दिया जाता है।
नायिका प्रकृति रोजमर्रा की चीजें खरीदने को भी मोहताज होती है। फूल-चूडिय़ां, खाने की चीजें खरीदना भी उसके लिए प्रतिबंधित रहता है। हर बार अपमानित होने के बाद वह रोती है और उसकी मां उसे ढांढस बंधाती है। तभी एक दिन फिर गांव से बुद्ध के शिष्य आनंद निकलते हैं और वह प्रकृति से पानी पिलाने का आग्रह करते हैं। प्रकृति बताती है कि वह अछूत है और पानी नहीं पिला सकती। आनंद उसे मानवता का संदेश देकर अछूत होने की बात नकारते हैं। प्रकृति उनकी ये बातें सुन उन पर आसक्त हो जाती है और उनसे प्रेम निवेदन करती है जिसे आनंद अस्वीकार कर देते हैं। बाद में प्रकृति को अपनी गलती का अहसास होता है और वह बौद्ध भिक्षुणी बन जाती है।


ध्रुपद की महक से जीवंत होते सुर
भोपाल। दूरदर्शन केंद्र भोपाल द्वारा बुधवार से चार दिवसीय 'ध्रुपद पर्व' की शुरूआत की गई। महिला कलाकारों पर केन्द्रित इस पर्व की पहली शाम देश की प्रतिष्ठता ध्रुपद गायिकाओं व एवं वादिकाओं ने अपनी प्रस्तुति दी। पर्व की शुरूआत भोपाल की ध्रुपद गायिका आस्था त्रिपाठी के गायन से हुई। दूसरी प्रस्तुति दिल्ली की पखावज वादिका महिमा उपाध्याय तथा तीसरी ध्रुपद जुगलबंदी ग्वालियर की हिना कालगांवकर व पुणे की मेघना सरदार की रही। महिमा उपाध्याय ने 12 मात्रा चौताल में गणेश स्तुति, उठान, उपज, परन, चक्करदार रेला और फरमाइशी चक्करदार तिहाइयां पेश की। वहीं ग्वालियर की हिना कालगांवकर व पुणे की मेघना सरदार ने राग हंसध्वनि में चौताल में निबद्ध रचना 'सकल गुणि जाने माने' एवं कोलकाता की रंजिता मुखर्जी व शर्मिला रॉय चौधरी ने राग रागेश्वरी में निबद्ध बंदिश 'प्रथम सुर साधे, रहे नाम जो लो रहे' पेश कर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। कार्यक्रम के अंत में कोलकाता की रंजिता मुखर्जी व शर्मिला रॉय चौधरी की ध्रुपद जुगलबंदी गायन की रही। इस अवसर पर भोपाल केन्द्र के उप-महानिदेशक शशांक एवं वरिष्ठ ध्रुपद गायक उमाकांत गुंदेचा व रमाकांत गुंदेचा सहित अन्य उपस्थित रहे।


शुभा ने बाँधा मधुर संगीत का सुरीला शमां
भोपाल। भारत भवन में चल रहे गायन पर्व के समापन अवसर पर सुर साम्राज्ञी शुभा मुद्गल ने मधुर संगीत का सुरीला शमां बाँधा। तबले पर अनीश प्रधान और हारमोनियम पर सुनील नायक के साथ उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। श्रृंगार परक राग मिश्र विहाग की बंदिश बोल बनाव की ठुमरी 'मोहे टेर गयो री मुरारी...' से श्रोताओं को रस संसार में भिगोना शुरू किया। शुभा की स्वर माधुरी और गले से निकले तेज नाद ने देर तक श्रोताओं को बांधे रखा। शाम के भक्तिपरक राग भूप में 'ऐरी आज सुखवा भइलवा, मोरे मन को ...' के साथ भारत भवन में चल रहे गायन पर्व के समापन की शुरुआत हुई। शास्त्रीय गायिका सुश्री शाश्वती मंडल पॉल ने सधे हुए गले से विभिन्न रागों में निबद्ध रचनाएं सुनाईं। द्रुत तीन ताल में 'मोरा झांझ मंडलड़ा...', नायिकी कांनड़ा राग में मध्य तीन ताल में निबद्ध 'मोपे रंग डाल गयो...' सुनाया। वहीं अपनी मधुर आवाज और सधे शब्दों के साथ विनय उपाध्याय ने मंच संचालन किया।


भगवान जगन्नाथ की 135 वीं रथयात्रा शुरू
अहमदाबाद। 400 साल पुराने जगन्नाथ मंदिर से गुरुवार सुबह भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हो गई। मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने रथयात्रा की 'पहिंद विधि' संपन्न की जिसके बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलदेव और उनकी बहन देवी सुभदा की सालाना रथयात्रा शुरू हुई। पहिंद विधि में भगवान जगन्नाथ के रथ के लिए रास्ते की प्रतीकात्मक तौर पर सफाई की जाती है।
शहर के जमालपुर इलाके में स्थित जगन्नाथ मंदिर से निकलने वाली रथयात्रा पुरी के बाद देश में और दुनिया भर में आकर्षण का केंद्र है। हजारों संत इस रथयात्रा में भाग लेने के लिए गुजरात आए हैं। रथयात्रा 14 किमी लंबे मार्ग से गुजरेगी। कड़ी सुरक्षा के बीच रथयात्रा शहर के संवेदनशील इलाकों- कालूपुर, प्रेम दरवाजा, दिल्ली चकला, दरियापुर और शाहपुर से हो कर आगे बढ़ेगी। इस 135 वीं रथयात्रा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। होमगार्ड्स, एसआरपी और अर्द्धसैनिक बल सहित पुलिस के करीब 20,000 जवान पूरे यात्रा मार्ग पर तैनात किए गए हैं। सुरक्षा के अन्य इंतजाम भी किए गए हैं। पुलिस पहली बार इस यात्रा में जीपीएस और छिपे हुए कैमरों का उपयोग करेगी।


मणिपुर की मिट्टी से बनीं आपातानी की मूर्तियां
भोपाल। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के वीथि संकुल में मणिपुर की जनजाति आपातानी के लोगों की मूर्तियां देखी जा सकती है. यहाँ यह मूर्तियाँ लगाई गई हैं। इन मूर्तियों को बनाने के लिए खासतौर पर मणिपुर से ही काली मिट्टी और वहां के स्थानीय कलाकार बुलाए गये हैं। धान की घास और जूट सुतली से बनी एन इन मूर्तियों के साथ-साथ खंबा थोइबी, कबुई नुपी, राधा कृष्ण की युगल मूर्ति, पुंग जैबा आदि मूर्तियां को भी अपनी पारंपरिक वेशभूषा में प्रदर्शित किया गया है। मूर्तियों को सुरक्षित रखने के लिए वहां के पारंपरिक कीट नाशक दवा का लेप भी किया गया है। इन मूर्तियों का निर्माण हापोली जिला संग्रहालय अरुणाचल प्रदेश के तागी ताबिन के मार्गदर्शन में पी धोरोनी, एल इंबोमचा, श्याम सिंह इबोतांबी व अन्य कलाकारों ने तैयार किया है।


मानव संग्रहालय में एक और अट्रैक्शन
भोपाल। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल में आने वाले विजिटर्स के लिए एक और अट्रैक्शन जुड़ गया है। संग्रहालय में नागालैंड का जनजातीय आवास 'चाखासांग नागा' बनाया गया है। यह आवास नागालैंड के जनजातीय आवासों की कलात्मकता एवं उनकी विशेषता को प्रस्तुत करता है। यहां विजिट कर देश के एक विशेष क्षेत्र की विविधता को देखा जा सकता है।

इसकी संरचना, बनावट, रंग संयोजन एवं आवास के मुख्य द्वार पर प्रदर्शित जानवरों की खोपडिय़ां हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। 'चाखासांग' का नाम तीन उप नागा समुदायों, चाखरू, खेजा व संगठम से बना है। इन समुदायों के लोग नागालैंड की ठंडी पहाडिय़ों में स्थित चीमा जिले में रहते हैं। चाखासांग नागा के सबसे संपन्न व्यक्ति के निवास की पहचान उस निवास पर लगे सींग 'मां' से की जाती है। मानव संग्रहालय में प्रदर्शित नागालैंड का यह नागा आवास विजिटर्स को नागालैंड के जनसमूहों की संस्कृति व रहन-सहन का परंपरागत अनुभव कराता है।


सितार-सरोद की धुन सुनकर बीती रविवार की शाम
भोपाल. भारत भवन के अंतरंग सभागार में श्रोताओं ने रविवार की शाम एक नये अंदाज में एंजॉय की. संगीत केंद्र अनहद की सप्तक शृंखला के तहत यहां असित और अमित गोस्वामी की सितार-सरोद जुगलबंदी ने लोगों का ख़ासा मनोरंजन किया. संगीत-सभा का संचालन कला समीक्षक विनय उपाध्याय ने किया। इस संगीत-सभा की शुरुआत संध्याकालीन राग हेमंत से हुई। इसमें गोस्वामी बंधुओं ने विलंबित तीन ताल में आलाप, जोड़ व झाला की संगीतमय जुगलबंदी प्रस्तुति दी। इसी शृंखला में मैहर घराने के इन दोनों कलाकारों ने मत ताल (नौ मात्रा) एवं द्रुत तीन ताल की प्रस्तुति दी। सितार पर महारथ रखने वाले असित और सरोद पर लाजवाब पकड़ रखने वाले अमित की अगली प्रस्तुति राग मिश्र पीलू की रही, जिसे उन्होंने दादरा ताल में प्रस्तुत किया। संगीतमय प्रस्तुतियों का असर कुछ ऐसा रहा कि श्रोता सुरों की बारीकियों में प्रकृति से जुड़ी सुरीली जुगलबंदी को साफ महसूस कर रहे थे। इस दौरान तबले पर विनोद लेले ने साथ दिया। असित ने बताया, हमेशा से प्रकृति के करीब माने जाने वाले सितार और सरोद की पहचान पं. रवि शंकर और उस्ताद अली अख्तर खां जैसे वरिष्ठ कलाकारों की वजह से दुनियाभर में अमर हो चुकी है। अमित के मुताबिक 17 तारों वाले साज सितार और 19 तारों वाले सरोद को जुगलबंदी के लिहाज से एक-दूसरे समांतर माना जाता है।


'गबन' का मंचन 5 जून से भारत भवन में
भोपाल. वर्ष 1930 में प्रकाशित हुए मुंशी प्रेमचंद के दूसरे यथार्थवादी उपन्यास 'गबन' के पात्रों को दर्शक एक बार फिर मंच पर जीवंत होते देख सकेंगे। भारत भवन के अंतरंग सभागार में 5 जून (मंगलवार) से शुरू होने वाले 11वें राष्ट्रीय रंग आलाप नाट्य महोत्सव 'स्मरण हबीब' की पहली शाम विभा मिश्रा निर्देशित इस नाटक का पुनर्निर्देशन युवा निर्देशक बालेंद्र सिंह करने जा रहे हैं। यह नाटक जालपा नाम की लड़की की कहानी है, जिसका ख्वाब है कि उसे शादी में चंद्रहार मिले। रमानाथ से शादी के बाद उसे पता चलता है कि उधार के पैसे से उसे चंद्रहार चढ़ाया गया था। दोस्त रमेश की मदद से रमानाथ को कस्टम कलेक्टर की नौकरी मिल तो जाती है लेकिन दिखावे के चलते उस पर गबन का इल्जाम लग जाता है। डायरेक्टर बालेन्द्र सिंह का कहना है की वे अपने नाटकों में लोक नाट्य शैली एवं संगीत का प्रयोग करते हैं. लेकिन गबन के साथ निर्देशन के मामले में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए उम्मीद है कि मंचन के दौरान विभा के निर्देशन के अंदाज को दर्शक साफ महसूस कर सकेंगे। उन्होंने इस नाटक के लगभग 10 मंचन किए थे। वहीं हमारी टीम भी तीन रंग समारोह में इसका एक बार मंचन कर चुकी है।


सूफियाना अंदाज में गाए खुसरो कबीर के कलाम
भोपाल. रवींद्र भवन में चल रहा 22वां इफ्तेखार स्मृति राष्ट्रीय नाट्य एवं सम्मान समारोह 2012 गुरुवार को कव्वाली प्रस्तुति के साथ सम्पन्न हो गया। इस दौरान कव्वाल नासिर व खालिद साबरी ने आमिर खुसरो, कबीर के कलाम को सूफियाना अंदाज में पेश कर श्रोताओं को कव्वाली के अपने एक खास साबरी अंदाज से परिचित करवाया। कार्यक्रम की शुरूआत कव्वाल नासिर व खालिद साबरी के सम्मान से हुई। उन्हें शान ए भोपाल के खिताब से नवाजा गया। इसके बाद शुरू हुआ कव्वाली का सिलसिला, जिसकी शुरुआत अमीर खुसरो के कोल तराना मन कुन तो मौला... से की गई. इसके बाद छाप तिलक सब छीनी मोसे नैना मिलाई के... सुनाकर संगीत-सभा को सूफियाना रंग में रंग दिया। उन्होंने यहां तुम मुझे मुस्कुरा के न देखा करो..., दमादम मस्त कलंदर.., और रोज मिलने मिलाने का वादा करो... जैसे कलाम सुनाए। साथ ही ताजदारे हरम ओ निगाहे करम.... और ख्वाजा की दीवानी से सुनने वालों की खूब तालियां बटोरी। कोरस पर बाबू व हफीज, बैंजो पर आजम, आर्गन पर शाहिद, तबले पर चुन्नू खां और ढोलक पर साबिर व फहमीद ने साथ दिया।


हनीमून' और 'लाला हरदौल' नाटक का मंचन
भोपाल. भारत भवन में गुरुवार को 'हनीमून' और रवींद्र भवन में 'लाला हरदौल' नाटक का मंचन किया गया. 'हनीमून' बताया गया की किस तरह एक झूठ छिपाने के लिए सौ झूठ बोलना पड़ता है। नाटक में यही सच हंसते-हंसाते प्रस्तुत किया गया. भारत भवन में चल रहे मध्यप्रदेश रंगोत्सव की चौथी शाम गुरुवार को मंचित इस हास्य नाटक का निर्देशन अशोक बुलानी ने किया। कहानी के अनुसार कोला कंपनी में पीआरओ शेखर अपने बॉस से नानी के मरने का झूठ बोलकर शादी कर हनीमून के लिए चला जाता है। नैनीताल की वादियों में 5 दिन गुजर जाते हैं और नव विवाहित के वापस लौटने का वक्त हो जाता है। दोनों का मन वापस जाने का नहीं है। तभी शादी की खिलाफत करने वाला बॉस भी नैनीताल में कंपनी के उसी गेस्ट हाउस में पहुंच जाता है जहां शेखर और उसकी पत्नी मीनू ठहरे हुए होते हैं। शेखर बॉस से बचकर भाग निकलता है, लेकिन मीनू बॉस के पास फंस जाती है। यहां बॉस पूछताछ करते हैं वहां शेखर के दोस्त वीनू और नीना मीनू को वहां से निकलने की कोशिश करते हैं। अंत में बॉस शेखर का झूठ पकड़ लेते हैं।
वहीं 22वें इफ्तेखार स्मृति राष्ट्रीय नाट्य एवं सम्मान समारोह-2012 में गुरुवार को बुंदेली नाटक 'लाला हरदौल' का मंचन किया गया। रवींद्र भवन सभागार में मंचित के निर्देशक बालेन्द्र सिंह ने प्रस्तुति में बुंदेलखंड के लोकनायक हरदौल के जीवन वृत्त को मंच पर साकार किया। साथ ही देवर-भाभी के पवित्र संबंध एवं रैयत में उनके यश और मुगलों के खिलाफ कटिबद्धता को दिखाया गया। नाटक की शुरुआत ओरछा में लाला हरदौल के स्वागत-सत्कार से होती है। जहां वे अपनी शिक्षा-दीक्षा पूरी कर दतिया से वापस लौटते हैं। बड़े भाई जुझार सिंह और भाभी चंपावती उनकी आरती उतारते हुए वह दिन याद करते हैं, जब राजमाता ने आखिरी सांसें गिनते हुए लाला को 6 साल की उम्र में उन्हें सौंपा था। छोटे भाई हरदौल की समझ-बूझ को देखकर जुझार सिंह उसे राजा बनाने का फैसला लेते हैं, लेकिन यह बात मंझले भाई पहाड़ सिंह को पसंद नहीं आती। उसका मानना है कि सगे भाई को छोड़कर सौतेले भाई को राजा बनाने का जुझार सिंह का फैसला सही नहीं है। इसी पर आधारित है नाटक।


 
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