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विधान सभा

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राजकीय सम्मान के साथ विधानसभा में प्रवेश करते राज्यपाल रामनरेश यादव।

















बजट सत्र शुरू होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा की आसंदी के पास अभिभाषण पढ़ते राज्यपाल रामनरेश यादव।
















कैबिनेट ने दी राजेंद्र शुक्ल और लाल सिंह आर्य को बधाई

विधानसभा में हुई कैबिनेट की बैठक में मैहर में हुए रविदास महाकुंभ के सफल आयोजन के लिए ऊर्जा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल और नगरीय प्रशासन मंत्री लाल सिंह आर्य को मंत्रिमंंडल के सभी सदस्यों ने बधाई दी और उनकी मेहनत को सराहा। इन दोनों मंत्रियों ने मैहर में रविदास कुंभ की पूरी व्यवस्थाएं संभाली थीं।








विधानसभा परिसर में चर्चा करते विधायक तरुण भनोट, मुकेश नायक निशंक जैन, हर्ष यादव।
मध्‍यप्रदेश विधान सभा का पावस सत्र सोमवार से
16 July 2017
16 जुलाई, 2017। मध्‍यप्रदेश की चतुर्दश विधान सभा का पावस सत्र सोमवार, 17 जुलाई से आरंभ होकर शुक्रवार, 28 जुलाई, 2017 तक चलेगा. इस बारह दिवसीय सत्र में सदन की दस बैठकें होंगी. विधान सभा अध्‍यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा ने सत्र संबंधी तैयारियों का जायजा लिया एवं सुदृढ़ सुरक्षा व्‍यवस्‍था के मद्देनजर सुरक्षा अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की तथा आवश्‍यक निर्देश दिए. विधान सभा के प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह के अनुसार पावस सत्र की अधिसूचना जारी होने से अब तक विधान सभा सचिवालय में कुल 3257 प्रश्‍नों की सूचनाएं प्राप्‍त हुई हैं, जबकि ध्‍यानाकर्षण की 221, स्‍थगन प्रस्‍ताव की 07, अशासकीय संकल्‍प की 37 तथा शून्‍यकाल की 60 सूचनाएं प्राप्‍त हुई हैं. शासकीय विधेयकों की तीन एवं अशासकीय विधेयक की भी एक सूचना विधान सभा सचिवालय में प्राप्‍त हुई है. उल्‍लेखनीय है कि मध्‍यप्रदेश की चतुर्दश विधान सभा का यह चतुर्दश सत्र होगा. राष्‍ट्रपतीय निर्वाचन, 2017 : कल होगा मतदान राष्‍ट्रपतीय निर्वाचन, 2017 के लिए मतदान केन्‍द्र विधान सभा भवन स्थित समिति कक्ष क्रमांक-2 में बनाया गया है. मतदान के मद्देनजर सुरक्षा व्‍यवस्‍था चाक-चौबंद की गई है एवं आवश्‍यक आनुषंगिक निर्देश जारी किये गए हैं. मतदान की प्रक्रिया प्रात: 10:00 बजे से आरंभ होगी एवं सायं 05 बजे सम्‍पन्‍न होगी.

वरिष्ठ पत्रकारों को मिलेगी अब श्रद्धा-निधि 7 हजार रुपये प्रतिमाह
23 March 2017
जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने विधानसभा में जनसंपर्क विभाग की अनुदान मांगों के संबंध में हुई चर्चा का उत्तर देते हुए पत्रकार वर्ग के हित में अनेक कल्याणकारी घोषणाएँ कीं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ पत्रकारों को अब श्रद्धा-निधि के रूप में 7000 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। अभी 6000 रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं। प्रदेश के फोटो जर्नलिस्ट कैमरामेन भी श्रद्धा-निधि के पात्र होंगे। श्रद्धा-निधि के लिए अब तक 62 वर्ष से अधिक आयु के पत्रकार ही पात्र थे। इस आयु को घटाकर 60 वर्ष किया जाएगा।
जनसंपर्क मंत्री ने कहा कि पत्रकार चिकित्सा सहायता योजना में अब पत्रकार के आश्रित माता-पिता को भी इलाज के लिए सहायता दी जाएगी। गंभीर रोगों के इलाज के लिए अब तक दी जाने वाली अधिकतम सहायता राशि 50 हजार को बढ़ाकर एक लाख रुपये किया जाएगा। यह राशि अस्पताल के खाते में दी जायेगी। गैर अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार भी अब बीमा योजना में शामिल होंगे। ऐसे प्रकरणों में 50 प्रतिशत प्रीमियम राशि का भुगतान राज्य सरकार करेगी।
जनसंपर्क मंत्री ने बताया कि प्रदेश के पत्रकार राज्य और राज्य के बाहर अध्ययन यात्रा में जा सकेंगे। इसके लिए योजना लागू की जाएगी। पत्रकार कौशल विकास प्रकोष्ठ भी स्थापित किया जाएगा। जनसंपर्क मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की ब्रांडिंग के लिए जनसंपर्क विभाग निरंतर प्रयास कर रहा है। इस क्रम में फिल्म नीति का निर्माण भी प्रस्तावित है। पत्रकारों की कठिनाईयों के अध्ययन के लिए राज्य स्तर पर समिति का गठन किया जाएगा। पत्रकारों द्वारा राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं से फाउण्डेशन कोर्स प्रशिक्षण प्राप्त करने पर शुल्क का 50 प्रतिशत शासन द्वारा दिया जाएगा।
जनसंपर्क मंत्री ने कहा कि सरकार की अभिनव योजनाओं और अभियानों जैसे-लाड़ली लक्ष्मी योजना, बेटी बचाओ अभियान, मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान/निकाह योजना और नमामि देवि नर्मदे-सेवा योजना सहित अनेक जन-कल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के कारण ही अधिकाधिक लोगों ने इसका लाभ लिया है। यही नहीं देश के अन्य राज्यों ने भी इन योजनाओं को अपनाया है।
जल-संसाधन
जल-संसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने कहा कि शिवपुरी और दतिया जिले की लोअर ओर योजना के लिये 2208 करोड़, मंदसौर जिले की शामगढ़-सुवासरा के लिये 765 करोड़, डिण्डोरी जिले की डिण्डोरी योजना के लिये 384 करोड़, करंजिया के लिये 132 करोड़, सागर जिले की कडान के लिये 386 करोड़, खटौला कॉम्पलेक्स के लिये 49.11 करोड़, ग्वालियर की टिकटोली योजना के लिये 42.34 करोड़, टीकमगढ़ की सतधारा के लिये 19.74 करोड़, खरगौन की रोसिया के लिये 33.18 करोड़, बैतूल की घाट बिरोली के लिये 37.44 करोड़, सीधी की गौंड़ा योजना के लिये 928 करोड़, शहडोल की हिरवार के लिये 115 करोड़ और श्योपुर की चेट्टीखेड़ी सिंचाई योजना के लिये 330 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं। बीना परियोजना के लिये भी राशि स्वीकृत की गयी है।
जल-संसाधन मंत्री ने कहा कि करधना तालाब का जीर्णोद्धार अब जल-संसाधन विभाग करवायेगा। जल उपभोक्ता समिति का कार्य अब अनुविभागीय अधिकारी जल-संसाधन विभाग करेंगे। उन्होंने महाराष्ट्र और कर्नाटक की माइक्रो इरीगेशन परियोजनाओं के अवलोकन के लिये किसानों के दल भेजने की बात कही। विधायकों के प्रस्ताव पर नईगढ़ी की माइक्रो इरीगेशन सिंचाई योजना सहित अन्य योजनाओं की घोषणा जल-संसाधन मंत्री ने की। जल-संसाधन मंत्री ने कहा कि पहले जहाँ 7 लाख 50 हजार लाख हेक्टेयर क्षेत्र मेंसिंचाई होती थी अब वह 40 लाख हेक्टेयर में हो रही है। उन्होंने बताया कि देश में पहली बाहर कृषि केबिनेट और कृषक कल्याण आयोग का प्रावधान मध्यप्रदेश में किया गया है। किसानों के लिये फीडर सेपरेशन गुजरात के बाद केवल मध्यप्रदेश में किया गया है।
सदन में डॉ. मिश्र के जवाब के बाद उनके विभागों से संबंधित 8800 करोड़ 78 लाख 92 हजार रुपये की अनुदान माँगों को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। मध्यप्रदेश विधानसभा में आज जल संसाधन विभाग की अनुदान माँगों पर चर्चा में रिकॉर्ड 39 विधायकों की भागीदारी। सत्ता पक्ष, विपक्ष के सदस्यों सहित मंत्री गोपाल भार्गव जी ने भी मांगी सिंचाई सुविधाएं। अनेक विपक्ष के सदस्यों ने भी जल संसाधन मंत्री और विभाग की किसान हितैषी भूमिका की प्रशंसा। जल संसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने उदारता पूर्वक स्वीकृत कीं नई परियोजनाएं।


प्रदेश में दुग्ध उत्पादन वृद्धि दर देश में सर्वाधिक
22 March 2017
मध्यप्रदेश में वर्ष 2015-16 की दुग्ध उत्पादन वृद्धि दर 12.70 प्रतिशत रही, जो देश में सर्वाधिक होने के साथ राष्ट्रीय वृद्धि दर से लगभग दोगुनी है। राष्ट्रीय दुग्ध उत्पादन वृद्धि दर 6.27 प्रतिशत रही। यह जानकारी पशुपालन, मत्स्य-पालन, कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री श्री अंतर सिंह आर्य ने आज विधानसभा में अनुदान माँगों पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए दी।
श्री आर्य ने बताया कि प्रदेश में प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन 335 लाख लीटर और प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 428 ग्राम है। वर्ष 2015-16 में प्रदेश 12.14 मिलियन टन दुग्ध उत्पादन के साथ देश में चौथे स्थान पर रहा। श्री आर्य ने कहा कि प्रदेश का 80.13 लाख बकरियों के साथ देश में आठवाँ स्थान है। बकरियों की नस्ल सुधार के लिये बकरा प्रदाय योजना संचालित है। प्रदेश में अण्डा उत्पादन वृद्धि दर 22.41 है और 1441 मिलियन अण्डा उत्पादन हो रहा है। देश में कड़कनाथ मुर्गे की बढ़ती माँग को मद्देनजर रखते हुए इंदौर संभाग के 5 जिलों से चूजा बाँटने की योजना शुरू की गयी है, जिससे कड़कनाथ के उत्पादन में काफी वृद्धि की उम्मीद है। हर जिले में दुग्ध संकलन समिति गठन का प्रयास चल रहा है। पशुओं के नस्ल सुधार के लिये भी काफी कार्य किये जा रहे हैं। केन्द्र शासन ने भोपाल के केन्द्रीय वीर्य संस्थान को इसी वर्ष उत्कृष्टता के लिये प्रमाण-पत्र भी दिया है। आगर के सुसनेर में गौ-अभयारण्य का कार्य प्रगति पर है और अगले दो माह में इसके शुरू होने की संभावना है।
पशुओं और पशु-पालकों के लिये 31 अक्टूबर, 2016 से गोकुल महोत्सव का आयोजन शुरू किया गया है। वर्ष में 2 बार यह आयोजन एक-एक माह के लिये होगा, जिसमें पशु-पालकों को समस्त चिकित्सकीय सुविधाओं के अतिरिक्त पशु और चारा प्रबंधन की जानकारी भी दी जा रही है। द्वितीय चरण 14 मार्च, 2017 से आरंभ हुआ है, जो 14 अप्रैल तक चलेगा। श्री आर्य ने बताया कि वर्ष 2016-17 में अब तक का सर्वाधिक मत्स्य-बीज उत्पादन हुआ है। लक्ष्य 95.21 करोड़ की तुलना में (107 करोड़ मत्स्य-बीज) 12 प्रतिशत अधिक बीज उत्पादन हुआ है।
अगले वर्ष 109 करोड़ स्टेण्डर्ड फ्राई मत्स्य-बीज उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। श्री आर्य ने बताया कि राज्य में प्राथमिक मछुआ सहकारी समितियों की संख्या 2266 और सदस्य संख्या 84 हजार 372 हो गयी है। नवीन तकनीकी ज्ञान के लिये मछुओं को अध्ययन भ्रमण पर भी भेजा जा रहा है। अब तक 53 हजार 720 फिशरमेन क्रेडिट-कार्ड बनाये जा चुके हैं। श्री आर्य ने बताया कि शत-प्रतिशत शासकीय प्रीमियम पर दुर्घटना बीमा योजना में वर्ष 2016-17 में एक लाख 84 हजार 933 मछुओं को बीमा सुरक्षा दी गयी, जिसमें 29 प्रतिशत महिलाएँ हैं। बचत-सह- राहत योजना में 16 हजार 118 मछुआरों को राहत राशि दी गयी।
श्री आर्य ने बताया कि कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग ग्रामीण इलाकों में रोजगार की दृष्टि से महत्वपूर्ण विभाग है। वर्ष 2016-17 में एक लाख 50 हजार उद्यमों के लिये रोजगार का सृजन किया गया और अगले वर्ष एक लाख 60 हजार का लक्ष्य निर्धारित है। वर्ष 2016-17 में 11 हजार 952 उद्यमियों को प्रशिक्षण दिया गया। मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना में इस वर्ष अब तक 2600 उद्यमी लाभ ले चुके हैं। मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना में 7000 के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक लगभग 6600 लोग लाभ ले चुके हैं। श्री आर्य के उत्तर के बाद सदन ने पशुपालन विभाग की 967 करोड़ 8 लाख 86 हजार,मछली-पालन की 87 करोड़ 68 लाख 41 हजार और ग्रामोद्योग की 249 करोड़ 26 लाख 37 हजार की अनुदान माँगों को पारित कर दिया।


12 साल में बिजली की उपलब्धता 3 गुना बढ़ी
22 March 2017
ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पिछले 12 वर्ष के दौरान बिजली की उपलब्धता में तीन गुना वृद्धि दर्ज हुई है। वर्ष 2004 में विद्युत उपलब्ध क्षमता 5173 मेगावॉट थी, जो अब बढ़कर 17 हजार 515 मेगावॉट हो गयी है। श्री जैन आज विधानसभा में ऊर्जा तथा नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की अनुदान माँगों पर हुई चर्चा का उत्तर दे रहे थे।
श्री पारस जैन ने सदन को बताया कि पिछले 12 वर्ष में पारेषण एवं वितरण प्रणाली में भी अभूतपूर्व सुधार आया है। अति उच्च-दाब उप-केन्द्रों की संख्या में 94 प्रतिशत तो वहीं अति उच्च-दाब लाइनों में 76 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बिजली की पर्याप्त उपलब्धता के कारण प्रदेश के गैर कृषि उपभोक्ताओं को 24 घंटे और कृषि उपभोक्ताओं को 10 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली सप्लाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 में 33 के.व्ही. उप-केन्द्रों की संख्या मात्र 1802 थी, जो अब 86 प्रतिशत बढ़कर 3344 हो गयी है। वितरण ट्रांसफार्मरों की संख्या 12 साल पहले एक लाख 68 हजार थी, जो 219 प्रतिशत बढ़कर 5 लाख 35 हजार हो गयी। श्री जैन ने बताया ‍िक भविष्य की माँग को देखते हुए उपलब्ध क्षमता में वृद्धि और अधोसंरचना के क्षेत्र में व्यापक कार्य किये जा रहे हैं।
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि वितरण प्रणाली के सुधार के लिये ग्रामीण क्षेत्र में दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना और फीडर सेपरेशन का कार्य प्रगति पर है। सरकार द्वारा 5000 आबादी के नगरीय क्षेत्रों में आईपीडीएस योजना के माध्यम से वितरण प्रणाली का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। तीनों विद्युत वितरण कम्पनी की प्रणाली में सुधार के लिये अगले बजट में 1452 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। कृषि और गरीब तबकों के उपभोक्ताओं के लिये टेरिफ सबसिडी मद में 5549 करोड़ तथा नि:शुल्क विद्युत प्रदाय की प्रतिपूर्ति के लिये 3186 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
श्री जैन ने मुख्यमंत्री स्थायी कृषि पम्प कनेक्शन योजना की जानकारी देते हुए बताया कि अगले वित्तीय वर्ष में लगभग एक लाख कनेक्शन देने की योजना है। अगले साल योजना पर 851 करोड़ का बजट उपलब्ध करवाया गया है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में नये औद्योगिक विद्युत कनेक्शन के लिये आवश्यक दस्तावेज 14 से घटाकर 2 किये गये हैं। ग्रामीण विद्युतीकरण, विभक्तिकरण के लिये चिन्हित नये फीडर और ग्रामीण क्षेत्र में अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण एवं मीटर स्थापित करने के कार्य दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत प्रारंभ होंगे। सभी जिलों में इस योजना के लिये 2865 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गयी है। अगले 3 साल में उप पारेषण एवं वितरण के क्षेत्र में लगभग 7000 करोड़ के कार्य किये जाने का कार्यक्रम है। रबी मौसम में 11 हजार मेगावॉट से अधिक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गयी है। विद्युत कनेक्शनों की नियमित चेकिंग द्वारा विद्युत चोरी रोकने के प्रयास किये जा रहे हैं। नये विद्युत कनेक्शन के लिये ऑनलाइन आवेदन जमा करवाने की सुविधा प्रारंभ की गयी है।
नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा
श्री पारस जैन ने बताया कि भारत सरकार द्वारा सोलर रूफ टॉप परियोजनाओं के लिये 2200 मेगावॉट का लक्ष्य वर्ष 2022 तक पूरा करने का है। इसी परिप्रेक्ष्य पहले चरण में 100 मेगावॉट क्षमता के कार्य अगले वर्ष किये जायेंगे। प्रदेश के 38 जिला कलेक्टर कार्यालय, 9 कमिश्नर कार्यालय, 21 अदालत, बीएसएनएल के 33 टेलीफोन एक्सचेंज सहित तहसील एवं जनपद भवनों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किये जा रहे हैं। सरकार द्वारा प्रारंभ की गयी मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना की नीति बनायी गयी है।
सोलर पम्पों की उपयोगिता को देखते हुए अगले 2 साल में दूरस्थ असिंचित क्षेत्रों एवं डीजल पम्पों के माध्यम से सिंचाई वाले क्षेत्रों में 10 हजार सोलर पम्प स्थापित किये जायेंगे। विश्व की सबसे बड़ी 750 मेगावॉट क्षमता की रीवा सौर परियोजना का निविदा कार्य पूरा कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा स्रोत आधारित क्षमता 3205 मेगावॉट हो गयी है। श्री पारस जैन के उत्तर के बाद सदन ने उनके विभागों से संबंधित 16 हजार 392 करोड़ 36 लाख 77 हजार रुपये की अनुदान माँगों को पारित कर दिया।

सभी जिलों में कैंसर रोगियों के लिये कीमो-थेरेपी और किडनी के लिये हैं डायलिसिस व्यवस्था
9 March 2017
भोपाल। प्रदेश के प्रत्येक जिले में कैंसर रोगियों के लिये नि:शुल्क कीमो-थैरेपी और किडनी रोगियों के लिये डायलिसिस की व्यवस्था है। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर पिछले 13 वर्ष में 379 से घटकर 221 और शिशु मृत्यु दर 50 हो गयी है। मध्यप्रदेश देश में इन दरों में सबसे तेजी से गिरावट वाले राज्यों में शामिल हो गया है। लोगों का शासकीय अस्पतालों में चिकित्सा उपचार में भरोसा बढ़ा है। इसका प्रमाण है प्रति वर्ष 5 करोड़ 13 लाख लोग शासकीय अस्पतालों की ओपीडी का लाभ ले रहे हैं। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, आयुष मंत्री श्री रुस्तम सिंह ने यह जानकारी आज विधानसभा में विभाग की अनुदान माँगों का उत्तर देते हुए दी।

पहली बार प्रदेश में हुआ इतने अस्पतालों का उन्नयन

श्री रुस्तम सिंह ने बताया कि मुरैना जिले में 300 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय का 600 बिस्तर में, बामौर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में 10 बिस्तर का 50 बिस्तर में, उप स्वास्थ्य केन्द्र भर्रा का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन, 30 बिस्तरीय बीमाक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र नूराबाद का सीमाक संस्था में उन्नयन, उप स्वास्थ्य केन्द्र परीछा का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन और कराधाम में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना की जायेगी। शिवपुरी में 300 बिस्तर वाले जिला चिकित्सालय में अब 400 बिस्तर होंगे। जिला चिकित्सालय श्योपुर का 100 से 200 बिस्तर में, उप स्वास्थ्य केन्द्र रघुनाथपुर का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन और उप स्वास्थ्य केन्द्र मानपुर का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन किया जायेगा।

ग्वालियर में जिला चिकित्सालय मुरार का 200 से 300 बिस्तर में, सिविल अस्पताल हजीरा का 48 से 100 बिस्तर में, डबरा में 60 से 100 बिस्तर में, उप स्वास्थ्य केन्द्र बेहट का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में, हस्तीनापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन और ग्वालियर के डी.डी. नगर में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना की जायेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि दतिया जिले में बड़ौनी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, बड़ौनकला उप स्वास्थ्य केन्द्र का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन होगा। भिण्ड जिले में मालनपुर और ददरौआ उप स्वास्थ्य केन्द्र का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन होगा।

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र गोरमी का उन्नयन होगा और मेहगाँव में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन बनाने के लिये राशि दी जायेगी। भिण्ड जिला चिकित्सालय का उन्नयन करते हुए इसे 300 से 400 बिस्तरीय बनाया जायेगा। अशोकनगर जिले में पिपरई के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का उन्नयन होगा। श्री सिंह ने बताया कि इंदौर जिला चिकित्सालय में बिस्तरों की संख्या तीन गुना बढ़कर 300 होगी। शहरी क्षेत्र के मांगीलाल चूरिया अस्पताल में नवीन 30 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और गौरीनगर में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना होगी। खण्डवा जिले के पुनासा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और खरगौन जिले के उप स्वास्थ्य केन्द्र बोरावा और मगरखेड़ी का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के रूप में उन्नयन होगा। धार जिले के कोद उप स्वास्थ्य केन्द्र का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और बड़वानी जिले के अंजड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का उन्नयन किया जायेगा।

भोपाल के जयप्रकाश अस्पताल को 300 से बढ़ाकर 400 बिस्तर और बैरसिया सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को 30 से बढ़ाकर 50 बिस्तरीय किया जायेगा। रायसेन जिले के मण्डीदीप के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में बिस्तर संख्या 30 से बढ़ाकर 50, सिविल अस्पताल इटारसी में 160 से बढ़ाकर 200 बिस्तर की जायेगी। सीहोर जिले में नसरुल्लागंज सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में बिस्तर संख्या 30 से 50, उप स्वास्थ्य केन्द्र अविदाबाद और कांगपुर का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन किया जायेगा।

होशंगाबाद जिला चिकित्सालय में मैटरनिटी विंग का निर्माण कर 100 बिस्तर की व्यवस्था की गयी है। सागर के शहरी क्षेत्र मकरोनिया बुजुर्ग में नवीन 30 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना और गढ़ाकोटा एवं रहली में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का उन्नयन होगा। गढ़ोला जागीर खुरई उप स्वास्थ्य केन्द्र का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में, उजनरेट एवं खटौरा मालथौन उप स्वास्थ्य केन्द्र का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में और पॉली-क्लीनिक चमेली चौक का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन होगा। टीकमगढ़ जिले में उप स्वास्थ्य केन्द्र मवई भी अब प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बन जायेगा।

पन्ना जिले में उप स्वास्थ्य केन्द्र सुनवानी का उन्नयन होगा और ग्राम भबूरी में उप स्वास्थ्य केन्द्र बनेगा और पहाड़ीखेड़ा में उप स्वास्थ्य केन्द्र का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन होगा। रीवा में उप स्वास्थ्य केन्द्र पिपराही का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र अजगरा/भटाला और उप स्वास्थ्य केन्द्र मानिकवार का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन होगा। मऊगंज का 30 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अब 50 बिस्तरों वाला सिविल अस्पताल होगा। सिंगरौली जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र देवसर का भी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन होगा।

सतना जिले में बड़ा इटमा स्वास्थ्य केन्द्र का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में, उप स्वास्थ्य केन्द्र करतहा और जरियारी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र माधोगढ़ का उन्नयन होगा। सीधी जिले में उप स्वास्थ्य केन्द्र बहरी और कर्वजी का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन होगा। अनूपपुर जिले में उप स्वास्थ्य केन्द्र खाड़ा का उन्नयन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के रूप में होगा।

देवास जिले में सतवास प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, अजनास और हरणगाँव उप स्वास्थ्य केन्द्र का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन होगा। शाजापुर का पोचानेर उप स्वास्थ्य केन्द्र भी अब प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में तब्दील होगा। उज्जैन जिले में नागदा सिविल अस्पताल भवन का निर्माण होगा। रतलाम जिले के जावरा में 50 बिस्तर का नवीन मैटरनिटी अस्पताल बनेगा।

बालाघाट जिला चिकित्सालय का 500 बिस्तरीय अस्पताल में उन्नयन होगा और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लालबर्रा का भवन निर्माण होगा। डिण्डोरी जिले के शाहपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सीमाक संस्था का सिविल हॉस्पिटल 50 बिस्तर में उन्नयन होगा। इसके अलावा मण्डला जिले के घुघरी विकासखण्ड, धार जिले के पीथमपुर, जबलपुर जिले के कुण्डम और विदिशा जिले के नटेरन, त्योंदा और लटेरी में 6 नवीन पोषण पुनर्वास केन्द्र की स्थापना होगी। आदिवासी बहुल जिले बड़वानी, बैतूल, धार, झाबुआ, खरगौन, मण्डला, डिण्डोरी, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर के जिला अस्पतालों में मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर की स्थापना होगी। सदन में श्री रुस्तम सिंह के जवाब के बाद लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की 5672 करोड़ 60 लाख 50 हजार की अनुदान माँगों को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

कुल राशन दुकानों का 33 प्रतिशत का संचालन महिलाएँ करेंगी
8 March 2017
भोपाल। खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता संरक्षण एवं श्रम मंत्री श्री ओमप्रकाश धुर्वे ने अपने विभाग की अनुदान माँगों पर हुई चर्चा के जवाब में कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदेश में सभी वर्गों के लिये, खासकर आखिरी छोर के व्यक्ति के कल्याण के लिये महत्वपूर्ण कार्य किये गये हैं। उन्होंने बताया कि कुल राशन दुकानों का 33 प्रतिशत का संचालन महिलाएँ करेंगी।
श्री धुर्वे ने कहा कि श्रम विभाग पहले रेग्यूलेटरी की भूमिका में था, जिसे अब कल्याण के कार्य करने वाले विभाग की भूमिका में बदल दिया है। मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संन्निर्माण कर्मकार मण्डल का गठन कर निर्माण श्रमिकों की समस्याओं और उनके उत्थान के लिये योजनाएँ क्रियान्वित की गयी हैं। श्रमिकों के उपचार, शिक्षा, विवाह और आवास आदि के लिये सहायता दी जा रही है। संन्निर्माण कर्मकार मण्डल में श्रमिकों के पंजीयन और पंजीयन के नवीनीकरण की प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संन्निर्माण कर्मकार मण्डल द्वारा 25 लाख से अधिक निर्माण श्रमिकों का पंजीयन कर 709 करोड़ के हित-लाभ 33 लाख हितग्राहियों को दिये जा चुके हैं।
मंत्री श्री धुर्वे ने कहा कि श्रमिकों के हित में अनेक निर्णय लिये हैं। श्रम विभाग द्वारा विवादों के निराकरण में भी प्रभावी कार्यवाही की गयी है। श्रम न्यायालय द्वारा पारित अधिनिर्णयों के परिपालन कराने में भी तत्परता से कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने कहा कि महिला श्रमिकों के हित में उन्हें रात्रिकालीन शिफ्ट में कार्य करने के लिये सुरक्षा देने की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।
मंत्री श्री धुर्वे ने लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सशक्त बनाने के संबंध में विभाग द्वारा की जा रही कार्यवाही की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पीडीएस की खाद्यान्न सामग्री का परिवहन करने वाले वाहनों का विशेष रंग होगा, जिससे कि परिवहन के दौरान गड़बड़ी नहीं कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि खाद्यान्न परिवहन में गड़बड़ी करने वाले परिवहनकर्ताओं के विरुद्ध कार्यवाही करने के साथ अब परिवहन वाहनों को भी प्रतिबंध के दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है। मंत्री श्री धुर्वे ने कहा कि प्रदेश में 5 करोड़ 36 लाख जनसंख्या को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत शामिल किया गया है। प्रदेश के 16 नगर निगम में आधार आधारित बॉयो मेट्रिक प्रणाली से राशन वितरण किया जा रहा है। राशन वितरण प्रणाली की ऑनलाइन व्यवस्था में किसी प्रकार का अवरोध न रहे, इसके लिये पृथक सर्वर की व्यवस्था की जायेगी।
मंत्री श्री धुर्वे ने कहा कि धान का उपार्जन कर उसे भण्डारण और भण्डारण के बाद मिलिंग के लिये देने से होने वाले अनावश्यक परिवहन व्यय को रोकने के लिये उपार्जन से सीधे मिलिंग को देने की व्यवस्था पर विचार किया जायेगा। मंत्री श्री धुर्वे ने सदन में सदस्यों द्वारा दिये गये सुझावों पर गंभीरता से विचार करने की बात कही।
सदन में श्री धुर्वे के जवाब के बाद श्रम और खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की 1790 करोड़ 36 लाख 67 हजार की माँगें ध्वनि मत से पारित हुई।

विधानसभा की कार्यवाही के डिजिटाइजेशन के लिए 30 करोड़ का अनुमोदन
Our Correspondent :27 Feb. 2017
भोपाल: सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की साधिकार समिति की बैठक मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह की अध्यक्षता में हुई। बैठक में विधानसभा में सदन की कार्यवाही का डिजिटाइजेशन करने के 30 करोड़ के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।
आदिवासी विकास विभाग के कम्प्यूटरीकरण के प्रस्ताव को भी अनुमोदन दिया गया। सूचना प्रौद्योगिकी के ई-साईन, डिजिटल लॉकर, राजस्व केस मेनेजमेंट सिस्टम को भी साधिकार समिति ने स्वीकृति दी। खनिज विभाग के फाइल मेनेजमेंट सिस्टम, नॉलेज सिस्टम तथा टूर मेनेजमेंट सिस्टम को भी समिति ने सहमति प्रदान की।
बैठक में अपर मुख्य सचिव वन, योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी श्री दीपक खाण्डेकर, प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन श्रीमती सीमा शर्मा, प्रमुख सचिव वाणिज्य एवं उद्योग श्री मोहम्मद सुलेमान, प्रमुख सचिव आदिम जाति कल्याण श्री अशोक शाह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।


प्रदेश में एक बार फिर शुरु हुई पट्टे की पॉलिटिक्स
Our Correspondent :22 Feb. 2017
भोपाल: मंगलवार से शुरू होने जा रहे विधानसभा सत्र में प्रदेश सरकार आवास गारंटी विधेयक लाने की तैयारी में है, सरकार के इस कदम को मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर उस पट्टा पॉलिटिक्स की वापसी के तौर देखा जा रहा है जिसकी शुरुआत 1980 में अर्जुन सिंह ने की थी, जब उन्होंने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर मकान बनाने वालों को 50 वर्गफुट के पट्टे देने का नियम बनाया था। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए दिग्विजय सिंह ने अपने दूसरे कार्यकाल में दलित एजेंडे के तहत गांवों में चरनोई की जमीन पट्टे पर देने का फैसला किया।
उम्मीद थी कि ये कदम 2003 के विधानसभा चुनाव में गेमचेंजर साबित होगा, लेकिन मामला उल्टा पड़ गया। चरनोई भूमि पर कब्जे को लेकर गांव-गांव में संघर्ष हुए और नतीजे कांग्रेस के खिलाफ आए। तब से ही पट्टे की राजनीति ठंडे बस्ते में चली गई थी लेकिन शिवराज सरकार ने एक बार फिर इस पर दांव लगाने का मन बनाया है। इधर कांग्रेस ने भी चरनोई और भूदान की जमीन पर दबंगों के कब्जे कोमुद्दा बना कर सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है, जाहिर है आने वाले दिनों में प्रदेश में पट्टे की पॉलिटिक्स केंद्र में आने वाली है।
जमीन पर कब्जा दिलाना सबसे बड़ी चुनौती
आवास गारंटी विधेयक ला रही सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सालों पहले बांटे गए भूदान और चरनोई जमीन के पट्टों पर उनके वास्तविक हकदारों को कब्जा दिलाना है।इस मसले पर मुख्यमंत्री के क्षेत्र बुधनी से भोपाल तक एकता परिषद का पैदल मार्च तो किसी तरह सरकार ने रुकवा लिया, लेकिन अब 23 फरवरी को होने वाले खुले संवाद में मुख्यमंत्री को सवालों के जवाब देने पड़ सकते हैं।
भूदान और चरनोई की जमीनों पर दबंगों का कब्जा व वन भूमि से बेदखली के चलते प्रदेशभर में लगभग 12 लाख परिवार अपनी ही जमीन से वंचित हैं। इनमें सबसे ज्यादा शिकायत भिंड, मुरैना, चंद्रघाट, गुना, शिवपुरी, श्योपुर और टीकमगढ़ इलाके में है।


विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू, दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि के बाद स्थगित
Our Correspondent :5 December 2016
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र सोमवार से प्रारंभ हुआ. हाल ही में दिवंगत हुए दो पूर्व राज्यपालों और नेता प्रतिपक्ष को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई. इसके बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिये स्थगित कर दी गई.
शीतकालीन सत्र के पहले दिन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा ने पूर्व राज्यपाल डॉ. भाई महावीर, रामनरेश यादव और नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे के निधन का उल्लेख किया.
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस विधायक और सदन में नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें जुझारू नेता बताया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि कटारे ने मजदूरों और श्रमिकों के लिए लड़ाई लड़ी. दिवंगतों को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन की कार्रवाई को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया.
विधानसभा में 7 दिसंबर को अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा और 8 दिसंबर को चर्चा के बाद इसे पारित किया जाएगा.
शीतकालीन सत्र में विधायकों ने 2076 लिखित प्रश्न विधानसभा सचिवालय को दिए हैं, जिनमें से 1069 तारांकित हैं और 1007 अतारांकित प्रश्न हैं.


प्रजातंत्र के आकाश में सत्ता और विपक्ष परस्पर सहयोग बिना ऊँचा नहीं उड़ सकते
29 July 2016
मध्यप्रदेश विधानसभा का प्रागंण आज आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के अमृत वचनों से सराबोर हो गया। सत्ता और विपक्ष के प्रतिनिधियों ने संत वाणी का अमृतपान किया।
उल्लेखनीय है कि विधानसभा अध्यक्ष श्री सीताशरण शर्मा और मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के विशेष आमंत्रण पर विद्यासागर जी महाराज अपने 38 मुनि के आध्यात्मिक मंत्रीमंडल के साथ दिव्य देशना कार्यक्रम में विधानसभा पधारे थे। महाराज जी राजधानी भोपाल में चार्तुमास प्रवास पर हैं।
विधानसभा अध्यक्ष श्री सीता शरण शर्मा, विधानसभा उपाध्यक्ष श्री राजेन्द्र सिंह और मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, उपनेता प्रतिपक्ष श्री बाला बच्चन, वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया, लोक निर्माण मंत्री श्री रामपाल सिंह और मंत्रीमंडल के सदस्यों ने मुनिश्री की अगवानी की।
विधानसभा अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री ने संतों का श्रीफल से स्वागत किया और उनसे संत वाणी सुनाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि ज्ञान के प्रकाश से सार्वजनिक जीवन में काम करने वालों को जनता की बेहतर सेवा की प्रेरणा मिलेगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। आचार्य श्री विद्यासागर जी ने लगातार ज्ञान रूपी प्रसाद का वितरण शुरू किया। सत्ता और विपक्ष के प्रतिनिधि ज्ञान वर्षा में गहरे भीगते रहे।

क्या कहा आचार्य श्री ने --

विधानसभा पवित्र स्थान है। यहाँ से विधान बनता है और राष्ट्र निर्माण का मार्ग निकलता है। सत्ता और विपक्ष सिर्फ राष्ट्र हित के संबंध में सोचें। जन कल्याण ही अंतिम लक्ष्य है।
चुनाव के बाद सत्ता और विपक्ष दोनों देश-प्रदेश और जन के विकास के लिये कार्य करें। इससे लोकतंत्र समृद्ध होगा, देश आगे बढ़ेगा। प्रजातंत्र के विशाल आकाश में सत्ता और विपक्ष एक दूसरे के सहयोग के बिना ऊँचा नहीं उड़ सकते। जनता अमूल्य निधि है। इसकी रक्षा और सुरक्षा करना विधायिका का कर्त्तव्य है।
जैसे बीज नीचे और ऊपर एक साथ बढ़ता है, इसी तरह जब जड़ें मजबूत होंगी तो वृक्ष भी मजबूत होगा।
धर्म का प्रवाह स्वचालित नहीं होता। इसे प्रयासपूर्वक आगे बढ़ाना होगा। धन का संग्रह सिर्फ लोक कल्याण में वितरण के लिये है। भारत में वितरण व्यवस्था सुधरना चाहिये।
शिक्षा और चिकित्सा दोनों में सुधार होना चाहिये। दोनों को व्यवसायिकता से दूर रहना चाहिये। विद्यार्थी शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार हो रहे हैं उन्हें बचायें।
इतिहास की अनदेखी हो रही है। इतिहास की ओर लौटने का समय है। अपने गौरव को पहचाने और पुन: जीवित करें। मानस में आत्म-सम्मान जागृत करें।
सिर्फ पश्चिम ही नहीं भारत भी विज्ञान के ज्ञान से समृद्ध रहा है। प्राचीन भारत ज्ञान की सभी शाखाओं से समृद्ध था।
अपनी मातृभाषा में ही शिक्षण व्यवस्था होनी चाहिये। अंग्रेजी में बुराई नहीं है। भाषा के रूप में पढ़ सकते हैं लेकिन शिक्षण और अभिव्यक्ति मातृभाषा में ही होना चाहिये। प्रतिभा का आकलन मातृभाषा में ही हो सकता है।
अटल बिहारी हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिये मुख्यमंत्री श्री चौहान प्रशंसा के पात्र हैं।
पिछले 70 वर्ष में जितनी प्रगति होनी चाहिये वह दिख नहीं रही। जबकि यह संभव था। मध्यप्रदेश संपूर्ण राष्ट्र का मध्य बिन्दु है। यही राष्ट्र का शोधन बिन्दु सिद्ध हो सकता है। विकास और समृद्धि के लिये सत्ता और विपक्ष दोनों को साथ मिलकर चलना होगा।
दुनिया में कई देश हैं लेकिन प्रजातांत्रिक रूप से जितना समृद्ध भारत है उतना समृद्ध दूसरा देश नहीं।
भारत में ही समावेशी संस्कृति और अहिंसा की विरासत समृद्ध रही है। इसके प्रति अज्ञानता के कारण अंधकार की स्थितियाँ बनती हैं। अज्ञान कर्त्तव्य मार्ग से विमुख कर देता है। केवल संस्कृति ही समाज को जोड़ने वाला तत्व है।


हमारे ही विधायक विपक्ष की भूमिका में- नरोत्तम मिश्रा
27 February 2016
सूखा पीड़ित किसानों को मुआवजा राशि नहीं मिलने का ध्यानाकर्षण लगाकर भाजपा के वरिष्ठ विधायकों ने अपनी ही सरकार को घेरने की कोशिश की, लेकिन जब सदन में इस पर चर्चा होने वाली थी तब ये दोनों विधायक सदन में नहीं थे। इसे लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर तीखे कटाक्ष किए। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के महेंद्र सिंह कालूखेड़ा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर आरोप लगाते हुए कहा कि कई जगह किसानों को मुआवजा नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इसे जब भाजपा के ही विधायकों ने ध्यानाकर्षण के जरिए उठाया तो मुख्यमंत्री, संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा और वन मंत्री शेजवार ने उनसे सदन में आने से मना कर दिया। जबकि दस मिनट पहले ही वे सदन में देखे गए। जवाब में संसदीय कार्यमंत्री बोल बैठे कि विपक्षी नहीं, बल्कि हमारी ही पार्टी के विधायक विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। मिश्रा के इतना कहते ही कालूखेड़ा बोले कि थोड़ी देर पहले शेजवार अभी कुछ कांग्रेस विधायकों के अनुपस्थित रहने पर उन्हें प्रताड़ित करने की सलाह दे रहे थे, क्या अब चावला और देवड़ा को सदन में प्रताड़ित कराएंगे। कालूखेड़ा ने इससे पहले मोदी की फसल बीमा योजना को लेकर मप्र में हुए किसान महासम्मेलन में भी राज्य सरकार पर टीका-टिप्पणी की। कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि इस साल को गरीब कल्याण वर्ष घोषित किया गया है। पिछले साल को शैक्षणिक गुणवत्ता वर्ष कहा गया था, लेकिन व्यापमं गड़बड़ी की चर्चा रही। सत्ता पक्ष के शंकरलाल तिवारी, यशपाल सिंह सिसोदिया, बहादुर सिंह, गोपाल परमार समेत कई विधायकों ने सरकार की उपलब्धियां गिनाईं।

भूख हड़ताल पर बैठेंगे डंग
सुवासरा सीट से कांग्रेस विधायक हरदीप सिंह डंग ने कहा कि उनके क्षेत्र के किसी किसान को मुआवजा नहीं मिला। यदि सोमवार तक मुआवजा नहीं मिला तो मंगलवार से विधानसभा के दरवाजे पर भूख हड़ताल करेंगे।

नावलेकर की प्रशंसा
कालूखेड़ा ने कहा कि लोकायुक्त पीपी नावलेकर प्रशंसा के पात्र हैं कि उन्होंने लोगों को रंगे हाथों पकड़ा, लेकिन यह भी सही है कि वे यह बात भी उठा रहे हैं कि अभियोजन की स्वीकृति राज्य सरकार नहीं दे रही।

'मंत्री जी ऐसा कैसा विकास, दस किमी में जमीन बंजर हो गई'
विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल में सरकार अपने ही विधायकों के सवालों से घिर गई। भाजपा विधायक शंकरलाल तिवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में लग रहे उद्योगों में स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है। सतना में जो सीमेंट कॉरिडोर बन रहा है, उससे लगी दस किमी की जमीन बंजर हो गई है। इस सवाल का आवास ए‌वं पर्यावरण राज्य मंत्री लाल सिंह आर्य जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने कहा कि जो उद्योग प्रदूषण फैला रहे हैं उनके खिलाफ कोर्ट में प्रकरण चल रहे हैं। वहीं, भाजपा विधायक बहादुर सिंह चौहान का आरोप था कि महिदपुर में अवैध उत्खनन करने वाले ठेकेदार पर 30 करोड़ रुपए की पेनाल्टी तो ठोक दी, लेकिन उसके खिलाफ एफआईआर नहीं करवाई गई। जवाब में खनिज साधन मंत्री राजेंद्र शुक्ला का कहना था कि एक ही मामले में दो प्रकार के दंड नहीं दिए जा सकते।
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और विष्णु खत्री ने भी अपने क्षेत्र से संबंधित सवाल पूछे। शर्मा का कहना था कि बिजली कंपनियां बनी हुई सड़क पर खंभे लगा रही हैं जिससे सड़कें उखड़ गई हैं। ऊर्जा मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि भविष्य में इसका ध्यान रखा जाएगा।

पायलट के वेतन व मेंटनेंस पर 23 करोड़ रुपए खर्च

राज्य सरकार ने बीते तीन साल में सरकारी विमान व हेलिकॉप्टर पर ही 23 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इसमें पायलेट का वेतन, विमान का ईंधन और मेंटनेंस का खर्च शामिल है। कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी के सवाल पर यह जानकारी दी गई।

मप्र पर 82 हजार करोड़ का कर्ज

कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत के प्रश्न के जवाब में वित्त मंत्री जयंत मलैया ने बताया कि 31 मार्च 2015 की स्थिति में मध्यप्रदेश पर 82 हजार 261 करोड़ रुपए का कर्ज है। वर्ष 2014-15 में सरकार ने ब्याज के रुपए में 7071 करोड़ रुपए का भुगतान किया।

ईओडब्ल्यू ने छह साल में दर्ज किए 308 केस: ईओडब्ल्यू ने वर्ष 2010 से 2015 तक कुल 308 केस दर्ज किए हैं। इनमे महज 48 के खिलाफ ही चार्जशीट पेश हुई है। विधायक मनोज निर्भय पटेल के एक सवाल के जवाब में सरकार ने यह जानकारी दी।

श्री जयंत मलैया, वित्त मंत्री ,मध्य प्रदेश शासन ने मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्ष 2016 -2017 का शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016 को बजट पेश किया।
27 February 2016
श्री जयंत मलैया, वित्त मंत्री ,मध्य प्रदेश शासन

माननीय अध्यक्ष महोदय,

पिछले 12 वर्षों में सड़क, बिजली तथा सिंचाई सुविधाओं के विकास हेतु किये गये निवेश तथा निर्मित सुविधाओं के बेहतर प्रबन्धन का लाभ हमें प्राप्त हो रहा है। राज्य की अर्थव्यवस्था लगभग 10 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर से आगे बढ़ रही है और सभी का ध्यान इसने आकर्षित किया है। अर्थव्यवस्था की इस उच्च विकास दर को बनाये रखने के लिये हमारी सरकार कृतसंकल्प है।

2. केन्द्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी तथा केन्द्र से राज्यों को क्षेत्र अथवा कार्यक्रम विशेष के लिये प्राप्त होने वाली अनुदान राशि की वितरण व्यवस्था के संबंध में केन्द्र सरकार व्दारा वर्ष 2015-16 से महत्वपूर्ण परिवर्तन किये गये हैं। तेरहवें वित्त आयोग की अनुशंसा अनुसार केन्द्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत थी। केन्द्रीय करों की 8 प्रतिशत राशि वित्त आयोग की अनुशंसा पर उद्देश्य विशेष के लिये राज्यों को प्राप्त होती थी। केन्द्रीय करों में लगभग 22 प्रतिशत राशि राज्य आयोजना अंतर्गत शामिल विभिन्न केन्द्र प्रायोजित कार्यक्रमों हेतु राज्यों को अनुदान के रूप में प्राप्त होती थी। इस तरह केन्द्रीय करों में राज्यों की 32 प्रतिशत हिस्सेदारी के अतिरिक्त लगभग 30 प्रतिशत राशि विशिष्ट प्रयोजनों के लिये उन्हें अनुदान के रूप में प्राप्त होती थी। केन्द्र सरकार व्दारा इस व्यवस्था में संघीय भावना के अनुरूप यह परिवर्तन किया है कि केन्द्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दी है तथा विशिष्ट प्रयोजनों के लिये प्राप्त होने वाली अनुदान राशि 30 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दी है। इस परिवर्तन से राज्यों को केन्द्रीय करों के माध्यम से प्राप्त होने वाले वित्तीय संसाधनों में कमी न होते हुए उन्हें उपलब्ध वित्तीय संसाधनो का अपने विकल्प के अनुसार उपयोग करने की अब पहले से अधिक स्वतंत्रता है। हमारी सरकार इस महत्वपूर्ण परिवर्तन का स्वागत करती है।

आर्थिक परिदृश्य

3. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति की तरफ भी ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा, जो उत्साहवर्धक नहीं है। इस संबंध में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई एम एफ) की जनवरी, 2016 की समीक्षा का यह अंश महत्वपूर्ण है:-

’’ विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था में वृद्धि लगातार पांचवें वर्ष कम हुई है, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में नाम मात्र का सुधार हुआ है। चीन की अर्थव्यवस्था में वृद्धि में कमी होने की वजह से अन्य देशों की अर्थव्यवस्था में वृद्धि में कमी आई है। कमोडिटी के दामों में कमी आने से इनका व्यापार कम हुआ है। मैन्यूफैक्चरिंग एवं व्यापार विश्व स्तर पर कमजोर है एवं खनन उद्योग में निवेश कम हो रहा है। कई देशों में आयात कम होने की वजह से विश्व व्यापार पर विपरीत असर पड़ा है।’’

राजकोषीय रणनीति

4. अंतराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की स्थिति में हुये उपर्युक्त परिवर्तनों का प्रभाव हमारे देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। मैन्यूफैक्चरिंग गुड्स का निर्यात प्रभावित हुआ है। निर्यातमुखी उद्योगों में पूंजीनिवेश भी प्रभावित हुये बिना नहीं रहा सका है। अनेक उत्पादों के लिये मांग उनकी स्थापित उत्पादन क्षमता से कम बनी हुई है। फैक्टरी उत्पादों की मांग में वृद्धि अब घरेलू मांग में वृद्धि पर पहले से अधिक निर्भर है। इस दृष्टि से भी प्रदेश की अर्थव्यवस्था में उच्च वृद्धि दर बनाये रखना हमारे लिये और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
5. अधोसंरचना निर्माण की अनेक परियोजनाओं में भू-अर्जन एवं वन भूमि व्यपवर्तन की अनुमति मिलने में विलम्ब के कारण परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी हुई थी। माननीय प्रधानमंत्री जी ने स्वयं महत्वपूर्ण परियोजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा कर उन्हें गति प्रदान की है।
6. विगत कुछ वर्षों में मैन्यूफैक्चरिंग में वृद्धि दर कम होने से सड़क मार्गों पर यातायात में पहले की तरह वृद्धि नहीं हुई है। अधोसंरचना निर्माण की परियोजनाओं में विलम्ब तथा मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में अपेक्षाकृत वृद्धि नहीं होने से निजी निवेशकों को अपनी अपेक्षा के अनुरूप निवेश पर लाभ नहीं मिल सका है। परिणामतः, अधोसंरचना निर्माण में निजी निवेश में वृद्धि उत्साहजनक नहीं है। अनेक औद्योगिक परियोजनाओं हेतु वित्तीय संस्थाओं द्वारा दिये गये ऋण की समय पर वापसी नहीं हुई है, जिससे ये आस्तियां एन.पी.ए. में वर्गीकृत हो रही हैं तथा वित्तीय संस्थाओं की ऋण प्रदाय करने की क्षमता प्रभावित हुई है। अतः राज्य सरकार द्वारा अधोसंरचना विकास में अपने निवेश में वृद्धि करना आवश्यक है।
7. विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में सरकारों की राजस्व प्राप्तियां इतनी नहीं होती हैं कि वे अपने चालू खर्चों को पूरा करने के बाद बचत राशि से त्वरित विकास के लिये पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था कर सके। इसलिये विकास की संभावनाओं के अनुरूप पूंजीनिवेश के लिये उनके द्वारा वित्तीय संस्थाओं से ऋण प्राप्त किया जाता है। यदि इस ऋण का सही उपयोग अर्थव्यवस्था की उत्पादक क्षमता विकसित करने के लिये किया जाये तो विकास की गति में तेजी आने के साथ ही उससे प्राप्त अतिरिक्त राजस्व से ऋण तथा उस पर देय ब्याज का भुगतान भी सरलता से कर लिया जाता है।
8. वर्ष 2004-05 में पहले की सरकार द्वारा छोड़ी गई कुछ देनदारियों के समाधान के लिये भी हमें ऋण लेना पड़ा था। वर्ष 2005-06 से वर्ष 2014-15 तक दस वर्षों में हमारी सरकार ने कुल रूपये 49779.36 करोड़ का ऋण लिया है, परन्तु इसी अवधि में अधोसंरचना विकास के लिये रूपये 63488.18 करोड़ का पूंजीनिवेश भी किया। इस निवेश से प्रदेश की जी. एस. डी. पी. रूपये 1,24,276 करोड़ से बढ़कर रूपये 5,08,006 करोड़ हो गया। परिणामतः जहाॅं 31 मार्च, 2004 की स्थिति में राज्य पर ऋण भार उसके जी. एस. डी. पी. का 36.32 प्रतिशत था वह 31 मार्च, 2015 की स्थिति में घटकर 18.70 प्रतिशत रह गया है। इस तरह लिये गये ऋण के सही उपयोग से राज्य की अर्थव्यवस्था पर ऋण भार लगभग आधा हो गया है।
9. जिन राज्यों ने अनुशासित रहकर बेहतर वित्तीय प्रबंधन किया है उन्हें विकास हेतु अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के उद््देश्य से उनकी राजकोषीय घाटे की सीमा में वृद्धि किये जाने की अनुशंसा चैदहवें वित्त आयोग द्वारा की गई है। वित्त आयोग की अनुशंसा अनुसार मध्य प्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2015 द्वारा राजकोषीय घाटे की उच्चतम सीमा को जी.एस.डी.पी. के 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.5 प्रतिशत की गई है।
10. औद्योगिक वृद्धि दर कम रहने से केन्द्रीय एवं राज्य के करों की प्राप्तियांे में पहले की तरह का उछाल देखने को नहीं मिल रहा है। इस परिप्रेक्ष्य में अधोसंरचना में निवेश को बढ़ाने के लिये राजकोषीय घाटे (उधार) की वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित पूर्ण सीमा 3.5 प्रतिशत का उपयोग करने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है। इसके लिये केन्द्र सरकार से अनुमति मांगी गई है।
11. अपने मानव संसाधन का बेहतर उपयोग करने के लिये राज्य को शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की भी आवश्यकता है, इस तरह के खर्च राजस्व व्यय में वर्गीकृत किये जाते हैं। अतः इन क्षेत्रों की प्राथमिकता वाली योजनाओं में निवेश को बढ़ाने हेतु राजस्व खर्चों में भी वृृद्धि आवश्यक है। इसके अतिरिक्त विगत वर्षों में निर्मित अधोसंरचना का समुचित रख-रखाव भी आवश्यक है, जिस पर किये जाने वाला व्यय भी राजस्व मद में वर्गीकृत किया जाता है। अतः राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि यह सुनिश्चित किया जायेगा कि चैदहवें वित्त आयोग की अनुशंसा अनुसार प्रत्येक वित्तीय वर्ष में राजस्व आधिक्य की स्थिति बनी रहे।

कृषि और सम्बद्ध क्रिया कलाप

12. खरीफ 2015 में अल्प वर्षा, लम्बे ड्राय स्पेल तथा सितम्बर में उच्च तापमान के कारण सोयाबीन, उड़द, मूंग फसलों में व्यापक नुकसान हुआ है परन्तु अरहर, मक्का एवं कपास की फसलें विगत वर्षों से बेहतर रही हैं तथा धान की फसल भी सामान्य रही है। वर्तमान में गेहूं, सरसों, मसूर, चना आदि रबी फसलों की स्थिति संतोषजनक है। राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना अंतर्गत सूक्ष्म माॅनिटरिंग तथा त्वरित निर्णयों से खरीफ, 2015 में प्रदेश में फसल में हुई हानि के विरूद्ध रूपये 4300 करोड़ से अधिक के दावे निर्मित हुए हैं। इन बीमा दावों का भुगतान किसानों के खातों में शीघ्र कर दिया जावेगा। 13. प्रदेश में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का क्रियान्वयन प्रस्तावित है। इस योजना में हर किसान को हर तीसरे साल उसके खेत की मिट्टी की जांच करने के उपरान्त निःशुल्क मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किया जावेगा, जिसमें सूक्ष्म तत्वों की जानकारी भी शामिल होगी, साथ ही हर किसान को उसके खेतों की मिट््टी के नमूनों के परिणाम के आधार पर यह निःशुल्क सलाह भी प्राप्त होगी कि किन फसलों के लिये कौनसी खाद तथा सूक्ष्म तत्व डालने हैं।
14. जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिये ’’परम्परागत कृषि विकास योजना’’ लागू की गई है, जिसके अन्तर्गत गांवों के समूहों में किसानों को जैविक खेती करने के लिये प्रशिक्षण दिया जावेगा एवं उन्हें अनुदान पर जैविक तकनीकों तथा जैविक आदान सामग्रियों को उपलब्ध कराया जावेगा। इसके साथ ही इस योजना में तैयार जैविक कृषि के उत्पादों पर परिवहन, ब्रांडिंग और विपणन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जावेगी।
15. कृषि में यंत्रीकरण को बढ़ावा दिये जाने के लगातार प्रयास किये गये हैं। वर्ष 2005 में फार्म पाॅवर 0.83 किलोवाट प्रति हेक्टेयर थी, जो वर्ष 2014-15 में बढ़कर 1.73 किलोवाट प्रति हेक्टेयर हो गई है। प्रदेश वर्ष 2018 तक 02 किलोवाट प्रति हेक्टेयर फार्म पाॅवर प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है, जो वर्तमान राष्ट्रीय औसत 1.83 किलोवाट प्रति हेक्टेयर से अधिक होगा। कस्टम हायरिंग सेन्टर की स्थापना तथा कृृषि यंत्रों के वितरण पर अनुदान की योजनाओं को 2016-17 में विशेष रूप से क्रियान्वित किया जावेगा।
16. किसानों को उनकी उपज का अधिकतम मूल्य मिल सके, इसके लिये राष्ट्रीय कृषि मण्डी की परिकल्पना के आधार पर पूरे देश की मण्डियों को इलेक्ट्रानिक प्लेटफार्म पर लाने हेतु कम्प्यूटर नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। इससे किसानों की उपज को केवल उसके मण्डी क्षेत्र में ही नहीं अपितु देश भर में विभिन्न व्यापारियों द्वारा बोली लगाकर इलेक्ट्रानिक विपणन के माध्यम से खरीदा जा सकेगा। इससे किसान भाई-बहनों को अपनी फसल का अधिकतम मूल्य मिल सकेगा। प्रथम चरण में इस योजना अंतर्गत प्रदेश की 50 मण्डियों को सम्मिलित करना प्रस्तावित है।
17. सौर ऊर्जा आधारित कृषि पम्प के प्रचलन को प्रोत्साहित करने के लिये एक योजना प्रायोगिक आधार पर लागू कर क्रियान्वित करना प्रस्तावित है। यह योजना प्रायोगिक तौर पर ऐसे क्षेत्रों में ली जाएगी जहां ग्रिड के माध्यम से विद्युत आपूर्ति में व्यवहारिक कठिनाई है अथवा हानि का स्तर अपेक्षाकृत अधिक है।
18. कृृषि अर्थव्यवस्था के विविधीकरण अंतर्गत कृषि वानिकी गतिविधि को प्रोत्साहित करने के लिये राज्य शासन द्वारा मध्य प्रदेश अभिवहन (वनोपज) नियम, 2000 में संशोधन करते हुये अतिरिक्त 37 गैरवानिकी वृक्ष प्रजातियों को परिवहन अनुज्ञा-पत्र की आवश्यकता से मुक्त किया है। कृषि वानिकी फसलों के लिये किसानों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में वृद्धि किये जाने का भी शासन ने निर्णय लिया है।
19. कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान अधोसंरचना के विस्तार हेतु राज्य शासन ने विगत दस वर्षों में दो नये कृृषि महाविद्यालय स्थापित किये हैं। आगामी वर्ष से पवारखेड़ा जिला होशंगाबाद में नवीन कृषि महाविद्यालय स्थापित करना प्रस्तावित है।
20. राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना की एक बड़ी कमजोरी यह रही है कि इस योजना अन्तर्गत कृषि उत्पादन से कृषकों को प्राप्त होने वाली सम्भावित आय का बीमा नहीं होता है। माननीय प्रधानमंत्री ने इस खामी को दूर करते हुये नई फसल बीमा योजना की घोषणा की है।
21. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ, 2016 से प्रारंभ की जा रही है। इस योजना में किसानों की खरीफ फसलों पर मात्र 02 प्रतिशत, रबी फसलों पर मात्र 1.5 प्रतिशत, व्यावसायिक तथा उद्यानिकी फसलों पर मात्र 05 प्रतिशत ही प्रीमियम राशि, कुल ऋण राशि अथवा खेती के रकबे से कुल संभावित आय के मान से देनी होगी। इस योजना में बटाईदारों को भी लाभान्वित किया जाएगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में स्थानीय आपदा यथा ओलावृष्टि में किसानों को होने वाले नुकसान के लिये भी बीमा क्लेम स्वीकृत किया जाएगा। फसल नुकसानी के तुरन्त बाद 25 प्रतिशत बीमित राशि किसानों को तत्काल भुगतान की जाएगी। योजना में फसल कटने के उपरान्त खेतों पर रखी कटी फसल प्राकृतिक आपदा से क्षतिग्रस्त होने पर भी बीमा क्लेम स्वीकृत किया जावेगा।
22. फसल कृषि कर्म, मृदा तथा जल संरक्षण एवं कृषि अनुसंधान तथा शिक्षा के लिये वर्ष 2016-17 के बजट में आयोजना मद में रूपये 2448 करोड़ का प्रावधान है।

उद्यानिकी

23. विगत वर्षों में उद्यानिकी फसल अंतर्गत क्षेत्राच्छादन में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। इन उत्पादों के विपणन की विशिष्ट आवश्यकताओं को देखते हुये क्षेत्र के विस्तार की रणनीति में बदलाव लाते हुये केवल क्लस्टर में क्षेत्र विस्तार को प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे क्लस्टरों की पहचान फ्रूट रूट और वेजीटेबल रूट के रूप में की जाकर सघन क्षेत्र विस्तार की रणनीति अपनाई जायेगी। उद््यानिकी के किसानों को उच्च गुणवत्ता के पौधे मिलें, इस हेतु बीस विभागीय नर्सरियों को आधुनिकीकृत किया जायेगा।
24. उद््यानिकी उत्पादों की बेहतर विपणन व्यवस्था के लिये शीतगृहों की क्षमता का विस्तार किया जायेगा। निजी क्षेत्र में शीतगृहों की क्षमता 9.50 लाख टन से बढ़ाकर 15.00 लाख टन करने हेतु विशेष प्रोत्साहन कार्यक्रम चलाया जायेगा।
25. प्रदेश में कृषकों का रूझान प्याज उत्पादन की तरफ बढ़ा है, जिसके कारण प्रदेश अब प्याज उत्पादन में देश में दूसरे नम्बर पर आ गया है। प्याज की भण्डारण व्यवस्था के विस्तार हेतु विशेष कार्यक्रम चलाया जायेगा, जिससे वर्तमान क्षमता 80 हजार टन को बढ़ा कर 5.00 लाख टन की जायेगी। 26 उद्यानिकी विकास हेतु आयोजना मद में रूपये 578 करोड़ का बजट प्रावधान है।

पशुपालन

27. दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हेतु किए गए विभिन्न प्रयासों के फलस्वरूप प्रदेश, विगत वर्ष, दुग्ध उत्पादन में राष्ट्र में चैथे स्थान पर आ गया है। प्रदेश की जनसंख्या वृद्धि के बावजूद प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है तथा प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दुग्ध उपलब्धता 383 ग्राम प्राप्त की गई ह,ै जो राष्ट्रीय औसत, विश्व के औसत तथा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की अनुशंसा से अधिक है।
28. भारत सरकार व्दारा प्रदेश में नेशनल कामधेनु ब्रीडिंग सेंटर की स्थापना किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। पूरे राष्ट्र में इस तरह के दो ही केन्द्र स्थापित किए जा रहे हंै जिसमें एक केन्द्र मध्यप्रदेश में स्थापित होगा।
29. पशुपालकों को उनके पशुओं के लिये व्यापक स्तर पर पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने हेतु 109 चलित पशु कल्याण सेवा प्रारंभ की जा रही हैं। इसके अंतर्गत पशुपालकों को सुदूरवर्ती ग्रामों में चलित पशु सेवा चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो सकेगी। वर्ष 2016-17 में इसे प्रत्येक जिले में एक विकास खण्ड अर्थात 51 विकास खण्डों में प्रारंभ किया जायेगा।
30. पशुपालन को बढ़ावा देने की दृष्टि से नवीन आचार्य विद्या सागर दुग्ध धारा योजना प्रारंभ की जा रही है जिसमें पशुपालकों को ऋण प्रकरणों में कम से कम पंाॅंच पशु उपलब्ध कराये जायेंगे ताकि आर्थिक रूप से प्रोजेक्ट साध्य ;टपंइसमद्ध हो सके।
31. दुग्ध उत्पादन में हुई इस वृद्धि का मुख्य कारण कृत्रिम गर्भाधान योजना की सफलता है। इसके लिये आवश्यक अधोसंरचना के रूप में भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर एवं सागर में तरल नत्रजन उत्पादन संयंत्र की स्थापना की गई है एवं तरल नत्रजन का उत्पादन एवं वितरण प्रारम्भ किया गया है। पशुपालकों को वर्ष भर हरे चारे की उपलब्धता एवं चारा बीज उत्पादन हेतु प्रेरित करने के लिये नवीन चारा उत्पादन कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है। पशुपालन विभाग हेतु आयोजना मद में रूपये 402 करोड़ का बजट प्रावधान प्रस्तावित है।

मत्स्य पालन

32. प्रदेश के सिंचाई जलाशयों की मत्स्य उत्पादकता राष्ट्रीय मत्स्य उत्पादकता से अधिक है। प्रदेश के सिंचाई जलाशयों की मत्स्य उत्पादकता 96 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर है जबकि राष्ट्रीय मत्स्य उत्पादकता 55 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर है। प्रदेश में उपलब्ध चार लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र में से लगभग समस्त जल क्षेत्र मछली पालन अंतर्गत लाया गया है। मत्स्य कृषकों को प्रशिक्षण एवं फिश-फीड आदि सुविधाएं उपलब्ध कराने के फलस्वरूप प्रदेश में मत्स्य पालन विगत वर्ष की तुलना में 13 प्रतिशत बढ़ा है। मत्स्य पालन के क्षेत्र में मत्स्य पालन की गतिविधियों के विकास के लिये आयोजना मद में रूपये 39 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

सिंचाई सुविधा

33. प्रदेश के कृषि उत्पादन में लगातार दस प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल करने में सिंचाई सुविधा के विस्तार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सिंचाई परियोजनाओं हेतु लगातार पर्याप्त निवेश सुनिश्चित करने के लाभ प्राप्त हुये हैं। प्रदेश में निर्मित बाणसागर, रानी अवंतिबाई सागर, इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, राजघाट तथा मड़ीखेड़ा जैसे विशाल जलाशयों से सिंचाई हेतु जल वितरण प्रणाली के विकास से सिंचित क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। सिंचाई योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन से हमारी दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
34. पुरानी सिंचाई योजनाओं के अंतर्गत निर्मित नहरों का समुचित रख-रखाव न होने से ये अपनी रूपांकित क्षमता के अनुरूप जलप्रवाह सुनिश्चित नहीं कर पाती थीं। सिंचाई योजना के रूपांकन के समय खरीफ फसलों के लिये भी जल संग्रहण का आंकलन किया जाता था, परन्तु प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में फसल चक्र के परिवर्तित हो जाने से इस हेतु आंॅकलित जल का उपयोग नहीं हो पाता था।
35. विश्व बैंक की वित्तीय सहायता से क्रियान्वित ’’वॅाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग’’ प्रोजेक्ट अंतर्गत पुरानी सिंचाई योजनाओं के अंतर्गत निर्मित नहरों के जीर्णोद्धार तथा लाईनिंग कार्य के अपेक्षित परिणाम मिले हैं। इन अनुभवों के आधार पर अन्य पुरानी सिंचाई योजनाओं में भी निर्मित नहरों की लाईनिंग के माध्यम से उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। प्रदेश की सभी मध्यम एवं वृहद परियोजनाओं में नहरों की लाईनिंग कराये जाने का निर्णय लिया गया है और बड़े पैमाने पर लाईनिंग का कार्य पूर्ण किया गया है।
36. प्रदेश की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां से उद्गमित नदियां यहां के जल भंडार से अन्य राज्यों को लाभांवित करती हैं। प्रदेश में जल संग्रहण की दृष्टि से बांध निर्माण हेतु उपयुक्त स्थल तो उपलब्ध हैं, परन्तु सतह के असमतल होने के कारण इन जलाशयों में संग्रहित वर्षा जल के ग्रेविटी फ्लो से पूरे उपयोग के लिये पर्याप्त कृषि भूमि बहुधा उपलब्ध नहीं है।
37. जलाशयों में संग्रहित जल के ग्रेविटी फ्लो से खुली कच्ची नहरों के माध्यम से वितरण की व्यवस्था में इस जल का पूरा सदुपयोग नहीं हो पाता है। संग्रहित जल का पूरा उपयोग सुनिश्चित करने के लिये भूमिगत पाईपों के माध्यम से इसे किसानों के खेतों तक अब पहुंचाया जा रहा है जो ग्रेविटी फ्लो से संभव नहीं था। इससे इन जलाशयों में संग्रहित जल के उपयोग हेतु जहां एक तरफ अतिरिक्त सैंच्य क्षेत्र प्राप्त हुआ है, वहीं दूसरी तरफ जल का वितरण भी अधिक दक्षता के साथ किया जा रहा है। इस अनुभव के आधार पर अब निर्माणाधीन मोहनपुरा, बानसुजारा, कुण्डलिया, पंचमनगर, चंदेरी, पारसडोह तथा गरोठ परियोजनाओं में भूमिगत पाईप के माघ्यम से जल वितरण की व्यवस्था भी की जा रही है।
38. वर्तमान में प्रदेश में 21 वृहद, 30 मध्यम एवं 241 लघु सिंचाई परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इनमें से दो वृहद परियोजनओं, माही एवं बरियारपुर के बांधों का निर्माण पूर्ण हो चुका है एवं नहरों के निर्माण कार्य पूर्णता पर हैं। विगत एक वर्ष में 57 परियोजनाओं के सुदृृढ़ीकरण, पुनरूद्धार एवं क्षमता वृृद्धि के कार्य पूर्ण किये गये हैं।
39. छिन्दवाड़ा जिले में पेंच वृहद परियोजना, टीकमगढ़ जिले में बानसुजारा वृहद परियोजना तथा राजगढ़ जिले में मोहनपुरा वृहद परियोजना का निर्माण द्रुतगति से चल रहा है। राजगढ़ जिले की कुण्डलिया वृहद परियोजना का निर्माण कार्य प्रारंभ किया जा चुका है। केन-बेतवा लिंक परियोजना की वन (संरक्षण) अधिनियम तथा वन्य जीव संरक्षण अधिनियम अन्तर्गत स्वीकृति हेतु राज्य शासन द्वारा अपनी अनुशंसा केन्द्र सरकार को की जा चुकी है।
40. दस से अधिक मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का सर्वेक्षण कार्य प्रगति पर है। वर्ष 2016-17 के बजट अनुमान में नवीन अठारह मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को शामिल किया गया है, जिनमें से चार परियोजनाएं आदिवासी क्षेत्र में हैं। डिंडोरी जिले में तीन मध्यम परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
41. इक्कीस हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता की चंदेरी परियोजना, बीस हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता की पारस डोह परियोजना, अस्सी हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता की औरे परियोजना शिवपुरी, साठ हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता की बीना परियोजना, चालीस हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता की सेवड़ा परियोजना, एक लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता की चिंकी परियोजना, पचास हजार हेक्टयेर सिंचाई क्षमता की अलीराजपुर उद््वहन सिंचाई परियोजना, पच्चीस हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता की कोठाराज तथा पच्चीस हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता की पार्वती रिनसी वृहद परियोजनाओं का निर्माण कार्य प्रस्तावित है।
42. मध्य प्रदेश को आवंटित नर्मदा जल को वर्ष 2024 के पूर्व पूरी तरह से उपयोग करने के लिये राज्य सरकार प्रयासरत है। इंदिरा सागर परियोजना नहर से आदिवासी बाहुल्य बड़वानी तथा ओंकारेश्वर परियोजना नहर से आदिवासी बाहुल्य धार जिले में पहली बार नर्मदा जल पहुंचाने में सफलता प्राप्त की जा चुकी है।
43. इस क्रम में रूपये 432 करोड़ की लागत से नर्मदा क्षिप्रा सिंहस्थ लिंक योजना का कार्य 14 माह की अवधि में पूरा किया गया है। योजना से सिंहस्थ पर्व के लिये क्षिप्रा में भरपूर पानी उपलब्ध होगा। योजना से देवास और उज्जैन की पेयजल समस्या का स्थाई समाधान हो गया हेै। योजना से सैकड़ों उद्योगों और गांवों को भी जल उपलब्ध होगा।
44. अगले चरण में रूपये 2 हजार 187 करोड़ की लागत की नर्मदा मालवा गम्भीर लिंक योजना का कार्य आरम्भ कर दिया गया है, जिसके अंतर्गत वर्ष 2016-17 में रूपये 430 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। जिससे मालवा क्षेत्र में 50 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता निर्मित होगी। कालीसिंध और पार्वती नदियों में नर्मदा जलप्रवाहित करने की योजनाओं के तकनीकी प्रस्ताव तैयार किये जा रहे हैं।
45. वर्ष 2016-17 में रूपये 582 करोड़ लागत की अलीराजपुर उदवहन सिंचाई योजना, रूपये 156 करोड़ लागत की जोबट विस्तार योजना तथा रूपये 1494 करोड़ लागत की चिंकी इरिगेशन योजना अंतर्गत रूपये 30 करोड़ का कार्य प्रारंभ करना प्रस्तावित है। इसके साथ ही रूपये 784 करोड़ की लागत की छैगांवमाखन परियोजना कार्य आरम्भ करने का लक्ष्य है, जिससे 35 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इनके अतिरिक्त सिंहाडा उदवहन सिंचाई योजना, बलवाड़ा माइक्रो इरिगेशन और अपरबेदा दांयी तट नहर का निर्माण कार्य भी वर्ष 2016-17 में प्रारंभ करना प्रस्तावित है।
46. ’’प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’’ के अन्तर्गत प्रदेश के 51 जिलों में जिला सिंचाई प्लान तैयार किया जा रहा है। जिला योजना समिति से अनुमोदन के उपरान्त राज्य स्तरीय समिति द्वारा इस योजना अंतर्गत कार्य स्वीकृत किये जाएंगे। इस योजना से हर खेत में पानी तथा ’’प्रतिबूंद अधिक फसल’’ ;उवतम बतवच चमत कतवचद्ध के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में वृहद, मध्यम तथा लघु सिंचाई तालाबों का निर्माण, पुराने तालाबों का जीर्णोंद्धार, कमाण्ड एरिया का विकास तथा स्प्रिंकलर-ड्रिप सिंचाई यंत्रों पर अनुदान प्रदाय के कार्य आदि कराए जावेंगे।
47. ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई की छोटी-छोटी आधारभूत संरचनाओं के निर्माण के लिये एकीकृत जल ग्रहण क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम में आवश्यक सुधार कर इस प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना- वाटर शेड विकास के नाम से नवीन योजना प्रारंभ की गई है। वर्ष 2016-17 के लिये इस योजना हेतु रूपये 250 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

उद्योग

48. औद्योगिक विकास हेतु म.प्र. उद्योग संवर्धन नीति, 2014 लागू है। इस नीति के अन्तर्गत वृहद श्रेणी की औद्योगिक परियोजनाओं के लिए म.प्र. निवेश प्रोत्साहन योजना, 2014 एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिये म.प्र. एम.एस.एम.ई. प्रोत्साहन योजना 2014 लागू है। प्रदेश में रक्षा उत्पादों में निवेश को बढ़ावा देने की दृष्टि से रक्षा उत्पाद निवेश प्रोत्साहन नीति जारी की गई है।
49. उद्योग और व्यापार स्थापित करने व चलाने के संदर्भ में आवश्यक नियामक अनुमतियां प्राप्त करने संबंधी प्रक्रियाओं को ऑनलाईन उपलब्ध कराया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा किए गए आंकलन में समस्त राज्यों में मध्यप्रदेश को 5 वां स्थान प्राप्त हुआ है।
50. औद्योगिक इकाईयों की स्थापना हेतु 2344 हेक्टेयर भूमि पर 25 नवीन औद्योगिक क्षेत्रों पर राशि रुपये 560 करोड़ के कार्य प्रगति पर हैं, इनमें 295 हेक्टेयर क्षेत्र में 6 औद्योगिक क्षेत्रों तथा क्रिस्टल आई.टी. पार्क इन्दौर, रेडीमेड गारमेंट पार्क, गदईपुरा, ग्वालियर, सीतापुर-पहाड़ी मुरैना, अमकुही कटनी, भूरकलखापा सिवनी तथा उमरिया-डुगरिया जबलपुर का विकास पूर्ण हो गया है।
51. डी.एम.आई.सी. प्रोजेक्ट के अधीन जिला उज्जैन में विक्रम उद्योगपुरी में 450 हेक्टेयर भूमि में अधोसंरचना निर्माण का कार्य प्रारंभ हो गया है। पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र की पेयजल समस्या के निदान हेतु लागत रूपये 300 करोड़ की परियोजना का निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किये जाने का प्रयास है। 52. जन निजी भागीदारी अन्तर्गत औद्योगिक क्षेत्र मुआसा, बाबई जिला होशंगाबाद में 640 हेक्टेयर भूमि का तथा जेम्स एण्ड ज्वेेलरी पार्क इन्दौर, में 105 हेक्टेयर भूमि का विकास प्रक्रियाधीन है। इसके अतिरिक्त 27 स्थानों पर लगभग 7675 हेक्टेयर भूमि पर चरणबद्ध रूप से रुपये 3022 करोड़ की लागत से औद्योगिक क्षेत्रों के विकास की योजना बनाई गई है।
53. प्रदेश में पूंजी निवेश आकर्षित करने के आयोजित ग्लोबल इन्वेस्ट समिट 2014 में रुपये 4.36 लाख करोड़ के 3000 से अधिक निवेश आशय प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। विगत 2 वर्षों में विभिन्न सेक्टर्स में रूपये 1.96 लाख करोड़ का निवेश हुआ है, जिसमें से रुपये 18000 करोड़ से अधिक की 307 परियोजनाओं में उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में रूपये 47503 करोड़ का पूंजी निवेश क्रियाशील हुआ है। इसके अंतर्गत भारत ओमान रिफाइनरी लिमिटेड द्वारा बीना में पेट्रोलियम रिफायनरी का रुपये 2855 करोड़ की लागत से विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश के पश्चिम अंचल में अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड द्वारा रूपये 3000 करोड़ की लागत से जिला धार में सीमेंट संयंत्र की स्थापना की जा रही है। वैकमेट इंडिया लिमिटेड द्वारा जिला धार में प्लास्टिक फिल्म निर्माण हेतु रुपये 1500 करोड़ का निवेश है। जिला खरगौन में इण्डस मेगा फूड पार्क की स्थापना हुई है तथा ट्राईडेंट लिमिटेड द्वारा बुधनी जिला सीहोर में रुपये 1400 करोड़ की लागत से कंपोजिट टेक्सटाईल प्लांट स्थापित किया गया है। राज्य शासन द्वारा ’’घोषित रक्षा उत्पादन निवेश प्रोत्साहन नीति’’ से आकर्षित होकर रिलायंस ग्रुप द्वारा डिफेंस पार्क (प्रस्तावित पूंजी निवेश रूपये 3000 करोड़) व एयरो स्पेस पार्क (प्रस्तावित पूंजी निवेश रुपये 1250 करोड़) परियोजना क्रियान्वित की जा रही है।
54. उद्योगों की स्थापना के लिये अधोसंरचना विकास तथा प्रोत्साहन सहायता हेतु आयोजना मद में रूपये 2462 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
55. मध्यप्रदेष के चार बड़े नगरों इंदौर, भोपाल, ग्वालियर एवं जबलपुर में (इन्दौर को छोड़कर) आई.टी पार्क की स्थापना का कार्य पूर्ण होना संभावित है। इलेक्ट्राॅनिक मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर्स की स्थापना भोपाल एवं जबलपुर में की जा रही है। वर्ष 2016-17 में इन योजनाओं हेतु राशि रूपये 52 करोड़ का प्रावधान है।

खनन

56. अंतराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में खनिज आधारित कमोडिटीस के मूल्य तथा व्यापार में गिरावट का प्रतिकूल प्रभाव प्रदेश में मुख्य खनिजों के विदोहन एवं प्रसंस्करण पर भी पड़ा है। इससे इन खनिजों तथा इनके प्रसंस्करण संबंधी उद्योगों में पूंजीनिवेश भी प्रभावित हुआ है। रेत जैसे गौण खनिजों के उत्खनन में पर्यावरणीय स्वीकृतियों में विलम्ब के कारण ये गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं। पर्यावरणीय स्वीकृतियों में विलम्ब को दूर करने के लिये राज्य शासन द्वारा राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण की एक अतिरिक्त बेंच का गठन किया गया है।

पर्यटन

57. प्रदेश की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर पर्यटकों के लिये आकर्षण का केन्द्र रहे हैं। पर्यटन गतिविधियों से स्थानीय समुदाय को रोजगार के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध होते हैं। वर्ष 2015 को मध्य प्रदेश शासन ने पर्यटन वर्ष के रूप में मनाया है। केन्द्र सरकार द्वारा प्रायोजित ’’पर्यटन अधोसंरचना का निर्माण’’ योजना हेतु वर्ष 2015-16 से वित्तीय सहायता बंद कर दी गई है। इस योजना अंतर्गत निर्माणाधीन कार्यों के लिये राज्य शासन द्वारा अब अपने स्वयं के वित्तीय स्त्रोतों से धनराशि उपलबध कराई जा रही है।
58. पर्यटन सुविधाओं के विकास में मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाती रही है। ऐसे पर्यटन केन्द्र, जहां पर्यटन सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं वहां अग्रणी संस्था के रूप में सुविधाएं विकसित करने का कार्य निगम द्वारा किया जाता है। निगम द्वारा निर्मित एवं संचालित अनेक होटल भवनों का स्वामित्व अभी भी राज्य शासन का है क्योंकि संबंधित भूखण्ड का स्वामित्व निगम को हस्तांतरित नहीं किया गया है। इस कारण से निगम की बैलेंस शीट में निगम की स्वत्व की आस्तियों का मूल्यांकन प्रभावित होता है और उसे बाजार से ऋण प्राप्त करने में भी इन सम्पतियों का लाभ प्राप्त नहीं होता है। राज्य सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है कि निगम में अतिरिक्त धनवेष्ठन किया जाय, जिससे निगम ऐसे भूखण्डों का स्वत्व अर्जित कर सके जिन पर उसके होटल भवन निर्मित हैं और अपनी बैलेस शीट का सुधार कर सके।
59. प्रदेश के वन क्षेत्र अपने नैसर्गिक सौन्दर्य तथा वन्य जीवों की उपस्थिति के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रहे हैं, परन्तु वन्य जीवों के संरक्षण की दृष्टि से प्रदेश के टाईगर रिजर्व में प्रतिदिन सीमित संख्या में ही पर्यटकों को प्रवेश दिया जा सकता है। पर्यटकों की मांग को देखते हुये टाईगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में भी पर्यटन गतिविधियां प्रारंभ की गई है, जिसके उत्साहजनक अनुभव प्राप्त हुए हैं। केन्द्र सरकार द्वारा ’’स्वदेश दर्शन’’ योजना अंतर्गत प्रदेश के टाइगर रिजर्वस क्षेत्रों में पर्यटन विकास के लिये रूपये 93 करोड़ की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है जिसका क्रियान्वयन किया जा रहा है।
60. प्रदेश में राष्ट्रीय उद्यानों एवं अभ्यारण्यों के बाहर आरक्षित वनखण्डों में व्याप्त नैसर्गिक सौन्दर्य तथा वन्य जीवों की उपस्थिति का लाभ लेकर ऐसे वनखण्डों में भी पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने का निर्णय भी राज्य शासन द्वारा लिया गया है। इसे विनियमित करते हुये संचालित करने के लिये प्रदेश में ’’मध्य प्रदेश वन (मनोरंजन एवं वन्यप्राणी अनुभव) नियम, 2016’’ बनाये जा रहे है। इस नियम के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा अधिसूचित आरक्षित वनखण्डों में पर्यटक एक निश्चित प्रवेश शुल्क देकर आमोद-प्रमोद के लिये प्रवेश कर सकेंगे। प्रवेश शुल्क के रूप में प्राप्त धनराशि का उपयोग इन वनखण्डों के संरक्षण के अतिरिक्त पर्यटन सुविधाओं के विकास एवं स्थानीय समुदाय के कल्याण के लिये किया जा सकेगा।
61. प्रदेश में सिंचाई सुविधा के विकास हेतु अनेक वृहद जलाशयों का निर्माण किया गया है। इन वृहद जलाशयों के कारण यद्धपि हमारे वन खंड डूब में आये हैं, परन्तु इन क्षेत्रों में एक नया नैसर्गिक सौन्दर्य भी निर्मित हुआ है। प्रदेश के इन वृहद जलाशयों से निर्मित इस नैसर्गिक सौन्दर्य की ओर पर्यटकों का ध्यान आकृष्ट करने के लिये दिनांक 12 फरवरी से 21 फरवरी, 2016 तक खण्डवा जिले में इंदिरा सागर जलाशय पर ’’जल महोत्सव’’ का आयोजन किया गया था तथा दिनांक 2 फरवरी, 2016 को मंत्रि-परिषद की बैठक का भी आयोजन किया गया था। इन जलाशयों के नैसर्गिक सौन्दर्य की अनुभूति कराने के लिये इनका पर्यटन केन्द्रों के रूप में विकास किया जाना प्रस्तावित है। हमें पूरी आशा है कि प्रदेश के वन क्षेत्रों में मौजूद वन्य जीवों की भांति ही इन जलाशयों के नैसर्गिक सौन्दर्य की ओर भी पर्यटक आकर्षित होंगे। पर्यटन हेतु आयोजना मद में रूपये 251 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

सड़क परिवहन

62. मध्यप्रदेश शासन राज्य में अच्छी सड़कों का विस्तृत एवं सुदृढ़ जाल बनाने के लिये कृतसंकल्प है। राज्य के अधिकांश स्टेट हाइवेस के उन्नयन कार्य पूर्ण हो चुके हंै। शेष सभी मार्गों पर कार्य निश्चित समयावधि में पूरा कर लिया जायेगा।
63. राज्य में लगभग 19000 किलो मीटर मुख्य जिला मार्ग हैं। इनके सुदृढ़ीकरण एवं सुधार का व्यापक कार्य राज्य शासन द्वारा प्रारंभ किया गया है और अगले तीन सालों में इन सड़कों का भी पुनर्निर्माण कर लिया जायेगा। इस हेतु राज्य शासन द्वारा ए.डी.बी. एवं न्यू डेव्हलपमेंट बैंक से भी ऋण लेने का प्रयास किया जा रहा है।
64. पिछले 10 वर्षों में राज्य में लगभग एक लाख किलो मीटर सड़कें बनाई गई हैं। इन सड़कों के वर्गीकरण मेें सुधार प्रस्तावित है। यह प्रयास है कि राष्ट्रीय राजमार्ग की लम्बाई अगले वर्षों में 5 हजार किलो मीटर बढ़ा दी जाये। इसी प्रकार स्टेट हाइवेस एवं मुख्य जिला मार्गों की लम्बाई बढ़ाने के प्रस्ताव विचाराधीन है।
65. प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना अंतर्गत प्रदेश में अभी तक 63 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2016-17 में 5 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण का लक्ष्य है।
66. प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के राष्ट्रीय मापदण्डों के कारण जो गांव छूट रहे थे, उन्हें भी बारहमासी आवागमन सुविधा उपलब्ध कराने के उद््देश्य से प्रारंभ मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत 6 हजार 500 गांवों को कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जा चुकी है। इस योजनान्तर्गत वर्ष 2016-17 में 2 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों के डामरीकरण का लक्ष्य है। सड़कों के लिये आयोजना मद में रूपये 7361 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

बिजली

67. बिजली की पर्याप्त एवं निर्बाध आपूर्ति कृषि तथा औद्योगिक दोनों ही तरह की अर्थव्यवस्थाओं के लिये आवश्यक है। विद्युत उत्पादन, पारेषण तथा वितरण संबंधी अधोसंरचना में सुधार एवं विस्तार के लिये राज्य सरकार ने लगातार पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई है। विद्युत वितरण कंपनियों को समय-समय पर प्रदान की गई कार्यशील पूंजी से भी कंपनियों ने विद्युत वितरण अधोसंरचना में निवेश किया है। इस निवेश के अनुरूप उनको प्रदत्त रूपये 7568 करोड़ की ऋण राशि का परिवर्तन अंशपूंजी में किया जाना प्रस्तावित है, जिससे इन कंपनियों की बैलेंस शीट में सुधार होगा और उन्हें अपनी आवश्यकताओं के लिये बाजार से ऋण प्राप्त करने में सुविधा होगी। विद्युत वितरण में होने वाली हानियों को कम करने की दृष्टि से राज्य शासन द्वारा विद्युत वितरण लेखों का आडिट कराने का निर्णय लिया गया है।
68. सिंचाई के अस्थाई पम्प कनेक्शन को स्थाई पम्प कनेक्शन में परिवर्तित करने की किसानों की मांग रही है। इसके लिये विद्युत वितरण अधोसंरचना में अतिरिक्त निवेश की आवश्यकता है। राज्य सरकार ने इस कार्य को समयबद्ध रूप से करने का निर्णय लिया है।
69. बिजली क्षेत्र के लिये आयोजना मद में रूपये 11065 करोड़ का बजट प्रावधान है, जिसमें से रूपये 7568 करोड़ कार्यशील पूंजी ऋण को अंश पूंजी में परिवर्तित करने के लिये है।

सिंहस्थ, 2016

70. प्रदेश को बारह वर्ष के अंतराल से सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन करने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। सिंहस्थ के सफल आयोजन हेतु आवश्यक अधोसंरचनाओं के निर्माण के लिये वर्ष 2015-16 हेतु वर्तमान में लगभग रूपये 3000 करोड़ के कार्य क्रियान्वित हो पूर्णता की ओर है। सिंहस्थ आयोजन हेतु वर्ष 2016-17 के बजट में रूपये 298 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

नगरीय अधोसंरचना विकास

71. भारत सरकार द्वारा प्रायोजित ‘‘अटल मिशन फाॅर रिजुविनेशन एण्ड अर्बन ट्रान्सफारर्मेशन’’ (।डत्न्ज्) के अंतर्गत स्वच्छ पेयजल, सीवरेज कनेक्शन, वर्षा जल की निकासी, हरित क्षेत्रों का विकास एवं शहरी परिवहन संबंधी अधोसंरचना विकास के कार्य लिये जाने हैं। इस कार्यक्रम के लिये एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले प्रदेश के 34 शहरों का चयन किया गया है। भारत सरकार द्वारा रूपये 8579 करोड के 5 वर्षीय प्रस्तावों को सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है। वर्ष 2016-17 के बजट में रूपये 1712 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
72. सरकार द्वारा स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की योजनाओं हेतु अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से ऋण प्राप्त करने का भी प्रयास किया जा रहा है। विश्व बैंक से 25 शहरों के लिए लगभग रूपये 1000 करोड़, ए.डी.बी. से 128 शहरों हेतु लगभग रूपये 2280 करोड़ एवं के.एफ.डब्ल्यू. से रूपये 550 करोड़ की ऋण सहायता प्राप्त करने का प्रयास है। धार्मिक महत्व के पवित्र शहरों एवं नदियों को स्वच्छ बनाने हेतु 07 शहरों में सीवरेज व्यवस्था हेतु बाह्य वित्तीय सहायता प्राप्त करने के प्रयास है।
73. प्रदेश के ऐसे शहर जहां अमृत एवं बाह्य पोषित योजना अंतर्गत पेयजल योजनाएं प्रस्तावित नहीं है, उन शहरों में राज्य की ’’मुख्यमंत्री पेयजल योजना’’के अंतर्गत रूपये 1889 करोड़ की योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिनके लिये वित्त वर्ष 2016-17 में रूपये 122 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
74. शहरी स्वच्छता मिशन अंतर्गत यह लक्ष्य है कि प्रदेश के नगरीय क्षेत्र में खुले में शौच को पूर्णरूप से समाप्त किया जावे। स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत 1.45 लाख व्यक्तिगत शौचालय तथा सामुदायिक शौचालयों में 5068 सीट्स का निर्माण किया जा चुका है। प्रदेश के निकायों के समूह बनाकर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जन निजी भागीदारी से किया जा रहा है। घर-घर से कचरा एकत्रित करने की कार्यवाही प्रारंभ की जाकर वर्ष 2016-17 में 100 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति का उद्देश्य है। स्वच्छता व्यवहार में परिवर्तन हेतु सूचना शिक्षा संप्रेषण के माध्यम से जन जागरूकता का कार्य भी किया जा रहा है। नगरीय क्षेत्रों में इन कार्यक्रमों के क्रियान्वयन हेतु रूपये 525 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
75. ‘‘प्रधानमंत्री आवास योजना’’ के अंतर्गत भारत सरकार प्रदेश में प्रत्येक ईडब्ल्यूएस आवास के लिए इन-सीटू डेव्लपमेंट हेतु रूपये 1 लाख एवं क्रेडिट लिंक सब्सिडी के लिए 6.5 प्रतिशत ब्याज अनुदान प्रदाय करेगी। स्लम एरिया में ’’अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप’’ के अंतर्गत प्रत्येक आवास हेतु भारत सरकार तथा राज्य सरकार दोनों के ही द्वारा रूपये 56.56 लाख की अनुदान सहायता प्रदान की जायेगी। राज्य शासन बेनिफिशियरी लेड हाउसिंग के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा रूपये 1.50 लाख तथा राज्य सरकार द्वारा रूपये 1 लाख अनुदान राशि प्रदान की जाएगी। प्रथम चरण में प्रदेश के 74 शहरों में सबके लिए आवास वर्ष 2017-18 तक उपलब्ध कराना लक्षित है। भारत सरकार द्वारा प्रदेश के 16 शहरों में 19241 आवासीय ईकाईयों की योजना रूपये 890 करोड स्वीकृत की गई है। इस योजना अंतर्गत वर्ष 2016-17 के लिये इस कार्यक्रम अन्तर्गत रूपये 400 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। 76. मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना के प्रथम चरण में 277 नगरीय निकायों में रूपये 1429 करोड़ की लागत से सड़क, उद्यान, फुटपाथ, नाली निर्माण, स्ट्रीट लाईट इत्यादि के विकास कार्य किये जा रहे हैं। योजना के द्वितीय चरण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। वर्ष 2016-17 के लिये इस योजना अंतर्गत रूपये 275 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
77. प्रथम चरण में भोपाल में 28 कि.मी. लम्बी मेट्रो रेल लाईन जिसकी लागत रूपये 7000 करोड, एवं इंदौर में 31 कि.मी. लम्बी मेट्रो रेल लाइन जिसकी लागत रूपये 8000 करोड़ होगी का विकास प्रस्तावित है। योजना में भारत सरकार द्वारा रूपये 3000 करोड़ की ऋण सहायता दी जायेगी तथा शेष लगभग रूपये 12000 करोड का ऋण श्रप्ब्। (जापान इंटरनेशनल काॅरपोरेशन एजेंसी) से लिया जायेगा। प्रथम चरण को वर्ष 2018-19 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। परियोजना के क्रियान्वयन हेतु म.प्र. मेट्रो रेल कंपनी का गठन किया जा चुका है। योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिये रूपये 452 करोड़ का प्रावधान है।
78. शहरों के नागरिकों को मुख्य बुनियादी सुविधाएं, स्वच्छ और टिकाऊ पर्यावरण, जीने के लिए उच्च स्तरीय गुणवत्ता एवं स्मार्ट समाधान प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा देश में 100 शहरों का चयन किया गया है जिसमें से प्रदेश के 07 शहर हैं। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015-16 के लिये प्रदेश में तीन शहरों (जबलपुर, इंदौर एवं भोपाल) का चयन देश के विभिन्न शहरों के मध्य प्रतिस्पर्धा के आधार पर किया गया। मध्य प्रदेश राज्य देश का एकमात्र प्रदेश है जिसके तीन शहरों को प्रथम चरण में चयनित किया गया है। शेष चार शहरों ग्वालियर, उज्जैन, सतना एवं सागर का चयन शीघ्र संभावित है। 79. अटल आश्रय योजना के अंतर्गत शासन द्वारा समाज के कमजोर वर्गों के लिये अफोर्डेबल हाउस बनाने हेतु एक रूपये में शासकीय भूमि उपलब्ध करायी जाती है। म.प्र. गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल तथा विकास प्राधिकरणों द्वारा तैयार की गई गई 27 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं जिनमें 6478 ईडब्ल्यूएस एवं 6856 एलआईजी कुल 13334 मकान बनाये जा रहे हैं तथा 08 योजनाओं में 1233 एलआईजी एवं 1530 ईडब्ल्यूएस कुल 2763 मकान स्वीकृत किया जाना प्रस्तावित है।

सामान्य शिक्षा

80. निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम अतंर्गत अशासकीय शालाओं में वंचित समूह एवं कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए न्यूनतम् 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई है तथा विद्यार्थियों को कक्षा 1 से 8 तक के षिक्षण शुल्क का व्ययभार की प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा किया जा रहा है। वर्ष 2016-17 में 9 लाख 50 हज़ार प्रवेशित बच्चों को लाभांवित किया जाना अपेक्षित है, जिसके लिए वर्ष 2016-17 में रूपये 300 करोड़ का प्रावधान है।
81. ’’राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान’’ के अंतर्गत रूपये 495 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
82. भारत सरकार ने पिछड़े क्षेत्रों में संचालित कक्षा 9 से कक्षा 12 तक के माॅडल स्कूलों के संचालन एवं निर्माण की योजना को समाप्त कर दिया हैं। इस योजना के तहत 197 माॅडल स्कूलों के भवन निर्माणाधीन थे। हमारी सरकार ने इस योजना को अपने स्वयं के स्त्रोतों से संचालित करने का निर्णय लिया है।
83. वर्ष 2016-17 में 120 हाईस्कूल एवं हायर सेकण्डरी स्कूलों के भवन निर्माण तथा 138 अपूर्ण बालिका छात्रावासों को पूर्ण कराना प्रस्तावित है।

अनुसूचित जनजाति कल्याण

84. आदिम जाति कल्याण विभाग अंतर्गत संचालित 40 कन्या षिक्षा परिसर, 40 बालक एवं कन्या छात्रावास, 40 बालक एवं कन्या आश्रम के भवन का निर्माण वर्ष 2016-17 में कराना प्रस्तावित है।
85. अनुसूचित जनजाति बच्चों को उत्कृष्ट एवं गुणात्मक शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु वर्ष 2016-17 में 4 नवीन आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भोपाल, ग्वालियर, शहडोल एवं होशंगाबाद संभाग स्तर पर स्थापित करना प्रस्तावित है।
86. शिक्षा के विस्तार हेतु विŸाीय वर्ष 2016-17 में 40 हाईस्कूलों का उच्चतर माध्यमिक शाला में उन्नयन, पूर्व से संचालित उच्चतर माध्यमिक शाला में 20 अतिरिक्त संकाय, 20 माध्यमिक शालाओं का हाईस्कूल में उन्नयन, 2 नवीन क्रीड़ा परिसर, जिला उमरिया एवं होशंगाबाद में, 40 प्रीमेट्रिक छात्रावास, 20 नवीन पोस्ट मैट्रिक छात्रावास तथा 10 नवीन आश्रम शालायें प्रारंभ की जा रही हैं।
87. कन्याओं को उपयुक्त एवं सहज शैक्षणिक वातावरण प्रदाय करने के उद्देश्य से न्यून साक्षरता प्रतिशत वाले जिलों में वर्ष 2015-16 में 20 नवीन कन्या शिक्षा परिसर स्वीकृत किये गये हैं। प्रति परिसर में 245 बालिकायें कक्षा 6वीं से 12वीं तक की शिक्षा एवं आवासीय निःशुल्क सुविधा प्राप्त कर रही है। वर्ष 2016-17 में भी 20 नवीन कन्या शिक्षा परिसर खोले जायेंगे।
88. संस्थाओं को भवन की सुविधा देने हेतु वर्ष 2016-17 में 40 कन्या शिक्षा परिसर, 5 क्रीड़ा परिसर, 40 बालक एवं कन्या छात्रावास, 40 बालक एवं कन्या आश्रम के भवन निर्माण प्रस्तावित है।
89. अनुसूचित जनजाति क्षेत्र उपयोजना अंतर्गत वर्ष 2016-17 में रुपये 16,200 करोड़ का प्रावधान है जो वर्ष 2015-16 के बजट प्रावधान से रूपये 3,306 करोड़ अधिक है।

अनुसूचित जाति कल्याण

90. अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिये वर्ष 2016-17 में नवीन 59 प्री. मैट्रिक, 3 पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों की स्थापना की कार्यवाही की जावेगी जिससे 2950 छात्र-छात्रायें लाभान्वित होंगे। साथ ही पूर्व से संचालित छात्रावासों में 1000 नई सीटों की वृद्धि की जावेगी। इसके अतिरिक्त, वर्तमान में 10 आवासीय विद्यालयों में स्वीकृत 2800 सीट के अतिरिक्त 3600 सीट की वृद्धि प्रस्तावित है।
91. राज्य सेवा परीक्षा, बैंक, बीमा आदि अन्य शासकीय परीक्षाओं की तैयारी हेतु परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केन्द्रों का सुदृढ़ीकरण किया जावेगा। जिसके तहत भवन निर्माण व नवीन पदों का सृजन शामिल है। आई.ए.एस. एवं आई.पी.एस. जैसी प्रतिस्पर्धा परीक्षाओं की तैयारी हेतु 1000 विद्यार्थियों को दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थाओं में कोचिंग दिलाई जावेगी। विदेश अध्ययन छात्रवृŸिा योजना के अंतर्गत 50 छात्रों को उच्च अध्ययन हेतु विदेश भेजने का लक्ष्य है।
92. अन्तर्जातीय विवाह प्रोत्साहन की राशि रुपये 50 हजार से बढ़ाकर रुपये 2 लाख कर दी गई है जिससे समाज में समानता का विकास होगा। सावित्री बाई फुले स्व-सहायता समूह-अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं के स्व-सहायता समूह को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार उपलब्ध कराने के लिये बैंकों की सहायता से विŸाीय सहायता एवं मार्केट आदि की सुविधा उपलब्ध कराई जावेगी।

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण

93. राज्य शासन द्वारा पिछड़े वर्ग के कल्याण हेतु कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। विभिन्न छात्रवृत्तियां यथा पिछड़ा वर्ग राज्य छात्रवृत्ति, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृृत्ति, विदेश अध्ययन छात्रवृति के साथ-साथ संघ एवं राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले अभ्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि का प्रावधान बजट में किया गया है। मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग स्वरोजगार योजना अंतर्गत 2,000 हितग्राहियों को ऋण पर अनुदान दिये जाने हेतु वर्ष 2016-17 में राशि रूपये 25 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है। इसी प्रकार पिछड़े वर्ग के बेरोजगार युवक-युवतियों को रोजगार प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में लगभग 12 हजार युवक-युवतियों हेतु रूपये 20 करोड़ का प्रावधान आगामी वर्ष में किया जाना प्रस्तावित किया गया है। पिछड़ा वर्ग के छात्रों के छात्रावास भवनों का निर्माण सरकार की प्राथमिकता है। अतः वर्ष 2016-17 में 4 कन्या छात्रावास भवनों तथा 2 बालक छात्रावास भवनों के लिये कुल रूपये 19 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्ध-घुमक्कड़ जनजाति कल्याण

94. सदियों से उपेक्षित विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्ध-घुमक्कड़ जनजातियों के सामाजिक, आर्थिक एवं शेक्षणिक विकास हेतु विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्ध-घुमक्कड़ जनजाति कल्याण विभाग का गठन दिनांक 26 जून, 2011 को किया गया था। वर्ष 2015-16 में रूपये 34 करोड़ का बजट प्रावधान इस विभाग हेतु किया गया था जिसे बढ़ाकर वर्ष 2016-17 में रूपये 45 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

सामान्य निर्धन वर्ग

95. सामान्य निर्धन वर्ग कल्याण आयोग की अनुशंसाओं पर छात्रवृत्ति योजनाएं यथा सामान्य निर्धन वर्ग छात्रवृत्ति योजना, स्वामी विवेकानंद प्री-मेट्रिक छात्रवृत्ति योजना, स्वामी विवेकानंद पोस्ट मेट्रिक प्रवीण्य छात्रवृत्ति योजना, सुदामा शिष्यवृत्ति योजना, डाॅ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना तथा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में विक्रमादित्य निःशुल्क शिक्षा योजना संचालित है। वर्तमान में उक्त छात्रवृत्ति योजनाओं की पात्रता हेतु निर्धारित वार्षिक आय सीमा 54 हजार है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में लगभग 3,75,745 छात्रों को लाभांवित किया गया है।
96. उक्त छात्रवृत्ति योजनाओं में आय सीमा रूपये 54 हजार से बढ़ाया जाकर रूपये 1.20 लाख किया जाना प्रस्तावित है। इससे लगभग 7.62 लाख छात्र लाभांवित होंगे।

उच्च षिक्षा

97. शिक्षण सत्र 2011-12 में प्रदेश में सकल पंजीयन अनुपात 13 प्रतिशत था, वर्ष 2014-15 में यह अनुपात बढ़कर 20.04 प्रतिशत हो गया। वर्ष 2015-16 में यह अनुपात 21 प्रतिशत होना अनुमानित है, जो राष्ट्रीय सकल पंजीयन अनुपात 21.1 प्रतिशत के लगभग बराबर है। वर्ष 2016-17 में सकल पंजीयन अनुपात का लक्ष्य 25 प्रतिशत निर्धारित किया गया है एवं हमारी सरकार इस लक्ष्य को प्राप्त करने का हर संभव प्रयास करेगी।
98. ’’एम.पी. हायर ऐजुकेशन क्वालिटी इंप्रुव्हमेंट प्रोजेक्ट’’ के लिए विश्व बैंक के साथ (लगभग रूपये 2000 करोड़) ऋण सहायता प्राप्त करना प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत 50 भवन विहीन महाविद्यालयों के भवनों के निर्माण, संभाग स्तर पर 06 उत्कृष्टता संस्थानों की स्थापना, 100 छात्रावासों का निर्माण एवं भोपाल में राष्ट्र स्तरीय प्रषिक्षण संस्थान की स्थापना की जायेगी। इस हेतु वर्ष 2016-17 में राशि रूपये 263 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
99. भारत सरकार से राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान प्रथम चरण के लिये रूपये 269 करोड़ का अनुमोदन प्राप्त हुआ है। इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 5 नवीन आदर्ष महाविद्यालयों की जिला झ्ााबुआ, श्योपुर, हरदा, डिण्डोरी, उमरिया में स्थापना प्रस्तावित है। ग्वालियर, जबलपुर एवं इंदौर जिलों में विष्वविद्यालयों की अधोसंरचना का विकास एवं शासकीय महाविद्यालय षहडोल को विष्वविद्यालय के रूप में उन्नयन करना भी प्रस्तावित है। वर्ष 2016-17 में इस हेतु रूपये 143 करोड़ का प्रावधान है।
100. वर्ष 2016-17 में भी नरेला (भोपाल), मालथौन (सागर), सोंडवा (अलीराजपुर), बरगवां (सीधी) एवं बक्सवाहा (छतरपुर) कुल 5 नवीन महाविद्यालय प्रारंभ करना प्रस्तावित है। उच्च शिक्षा हेतु वर्ष 2016-17 के लिये आयोजना मद में रूपये 616 करोड़ का प्रावधान है।

तकनीकी शिक्षा

101. मध्यप्रदेश में व्यवसायिक प्रशिक्षण के सुदृढ़ीकरण हेतु इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नीकल एजुकेशन, एजुकेशन सर्विसेस ;प्ज्म्म्ैद्ध सिंगापुर के साथ अनुबंध किया गया है, जिसके अंतर्गत भोपाल स्थित 3 आई.टी.आई. समस्या को संविलियित कर एक विश्वस्तरीय संस्थान के रूप में विकसित करना प्रस्तावित है।
102. सत्र अगस्त, 2015 में 26 नई आई.टी.आई प्रारंभ की गईं है। इस वर्ष सेमेस्टर परीक्षा आॅन-लाईन पद्धति से कराने वाला मध्यप्रदेश देश में प्रथम राज्य हैं। वर्ष 2016-17 में 7 नवीन आई.टी.आई. संस्थाएं संचालित करना प्रस्तावित है तथा संभाग स्तर के 10 आई.टी.आई. संस्थाओं का सेंटर आॅफ एक्सीलेंस के रूप में उन्नयन प्रस्तावित हैं। वर्ष 2016-17 में कुल 96 आई.टी.आई. संस्थाओं के भवनों के निर्माण किये जाने हेतु राशि रूपये 168 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
103. राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत धार में शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय को वर्ष 2016-17 में स्थापित करने के लिए राशि रूपये 13 करोड़ का प्रावधान है। झाबुआ एवं षहडोल में इंजीनियरिंग महाविद्यालय प्रांरभ किये गये हैं। हरसूद, लटेरी एवं बरेली में पोलीटेक्नीक एवं नौगांव में इंजीनियरिंग महाविद्यालय के भवन निर्माण एवं योजना के संचालन हेतु राशि रूपये 44 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

कौशल विकास एवं रोजगार

104. वर्ष 2016-17 में ’’मुख्यमंत्री कौशल संवर्धन योजना’’ का संचालन प्रस्तावित है। इस योजना अंतर्गत 50,000 युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जायेगा। इसमें विशेष रूप से 25,000 महिलाओं का कौशल विकास का लक्ष्य है।
105. वर्तमान में प्रदेश में 135 कौशल विकास केन्द्र संचालित है। वर्ष 2016-17 में प्रत्येक जिले में दो नये कौशल विकास केन्द्र का संचालन प्रस्तावित है। इन केन्द्रों में 20,000 युवाओं को प्रतिवर्ष प्रशिक्षित किया जा सकेगा।
106. प्रदेश में कम्प्यूटर प्रवीणता एवं सरकारी नौकरियों में रोजगार की मांग करने वाले व्यक्तियों की टाईपिंग कौशल प्रमाणित करने के उद्देश्य से ’’कम्प्यूटर प्रवीणता टेस्ट प्रमाणन’’ स्ववित्त पोषित योजना प्रांरभ की जा रही है जो भारत में अपनी तरह की प्रथम अभिनव योजना होगी।
107. राज्य शासन द्वारा संचालित विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं यथा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना आदि के अंतर्गत वर्ष 2015-16 हेतु कुल 68,500 हितग्राहियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसमें 46 प्रतिशत की वृद्धि कर वर्ष 2016-17 में 1,00,000 हितग्राहियों को स्वरोजगार में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
108. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों हेतु वर्ष 2015-16 में 15,500 हितग्राहियों का लक्ष्य निर्धारित था जिसे बढ़ाकर वर्ष 2016-17 हेतु 35,000 किया गया है। राज्य शासन का दृृढ़संकल्प है कि प्रदेश में, विशेष रूप से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग को स्वरोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध हों।

स्वास्थ्य

109. लोक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार एवं विस्तार के माध्यम से लोक स्वास्थ्य संबंधी राज्य के महत्वपूर्ण संकेतकों में सुधार के प्रयासों के वांछित परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। चैथे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण अनुसार सकल प्रजनन दर वर्ष 2015 में घटकर 2.3, शिशु मृत्यु दर घटकर 51 व गंभीर कुपोषित बच्चों की प्रतिशत दर 9.2 रह गई है। एस.आर.एस. 2011-13 अनुसार मातृृ मृत्यु दर घटकर 221 रह गई है।
110. लोक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में उप स्वास्थ्य केन्द्रों की अतिमहत्वपूर्ण भूमिका है। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर प्रदेश में लगभग 3500 नये उप स्वास्थ्य केन्द्रों की आवश्यकता आंकलित की गई है। अब तक इसके विरूद्ध राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत 500 नवीन उप स्वास्थ्य केन्द्रों की स्वीकृति प्रदान की गई है तथा 391 केन्द्र प्रारंभ किये जा चुके हैं। वर्ष 2016-17 में 2000 नवीन केन्द्रों की स्वीकृति एवं संचालन का लक्ष्य है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हेतु रूपये 2038 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

चिकित्सा

111. प्रदेश की जनता को चिकित्सा सुविधाएं भौगौलिक रूप से कम दूरी पर ही उपलब्ध हों, इसके लिये प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों का उन्नयन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के रूप में, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों का उन्नयन सिविल अस्पताल के रूप में तथा जिला अस्पतालों की क्षमता विस्तार करने के साथ ही नई चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की ओर शासन प्रयासरत रहा है। इस वर्ष जिला अस्पताल, कटनी, रायसेन एवं दतिया की बिस्तर क्षमता का विस्तार किया गया है। सिविल अस्पताल मैहर, सिहोरा तथा खाचरोद, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र थांदला, लहार, तथा बरेली, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पचैर एवं ओंकारेश्वर की क्षमता का भी विस्तार किया गया है। इस क्रम में जिला अस्पताल खरगौन व शिवपुरी तथा प्राथभिक स्वास्थ्य केन्द्र बड़ौनी जिला दतिया का उन्नयन प्रस्तावित है। चिकित्सकों एवं स्टाफ के लिये आवासीय भवनों के निर्माण हेतु नवीन मद में प्रावधान प्रस्तावित है।
112. प्रदेश में एकीकृत बाल विकास परियोजना के तहत 4305 नवीन आंगनबाड़ी तथा 600 नवीन मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र खोलने का निर्णय लिया गया है। प्रस्तावित आंगनवाड़ी/मिनी आंगनवाड़ी केन्द्रों के प्रारंभ होने के फलस्वरूप प्रदेश में आंगनवाड़ी/ मिनी आंगनवाड़ी केन्द्रों की संख्या क्रमश 80,160 तथा 12,070 से बढ़कर 84,465 तथा 12,670 हो जाएंगे। वित्तीय वर्ष 2016-17 में इन केन्द्रों के संचालन से संबंधित व्यय एकीकृत बाल विकास सेवा योजना एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को अतिरिक्त मानदेय मद से किया जायेगा जिसमें क्रमशः रूपये 844 करोड़ एवं रूपये 303 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
113. जिला अस्पतालों में डायलिसिस, कीमोथैरिपी, सी टी स्कैन, एमआरआई जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराने का प्रयास है जिससे इन सुविधाओं के लिये नागरिकों को जिले के बाहर जाने की जरूरत न रहे। सी टी स्कैन, एम.आर.आई. जैसी जांच सुविधा जन निजी भागीदारी के माध्यम से उपलब्ध कराई जायेगी।
114. शासकीय चिकित्सालयों में चिकित्सकों के पदों में रिक्तियां सरकार के लिये एक चिन्ता का विषय है। चिकित्सालयों की क्षमता विस्तार की दृष्टि से नर्सिंग तथा पैरामेडिकल कर्मचारियों के अतिरिक्त पदों की भी आवश्यकता है। राज्य शासन द्वारा चिकित्सकों की सेवाशर्तों की समीक्षा कर उन्हें अधिक आकर्षक बनाने का निर्णय लिया है जिससे चिकित्सकों के रिक्त पदों की पूर्ति की जा सके तथा आवश्यकतानुसार नये पद भी स्वीकृत किये जा सकें। इस क्रम में चिकित्सकों के लिये समयमान वेतनमान की योजना को पहले से अधिक उदार बनाया गया है।
115. नर्सिंग संवर्ग के लगभग 3034 नवीन पद आगामी वर्ष के लिये स्वीकृत किये गये हैं, नर्सिंग संवर्ग के पदोन्नति के अवसरों में भी सुधार किया जा रहा है। नर्सिंग प्रशिक्षण के विस्तार की दृष्टि से जी.एन.एम. प्रशिक्षण केन्द्र बालाघाट की स्थापना प्रस्तावित है। इसी क्रम में जी.एन.एम. प्रशिक्षण केन्द्र रतलाम, छिन्दवाड़ा एवं खण्डवा में होस्टल बिल्डिंग के निर्माण हेतु प्रावधान प्रस्तावित है।
116. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु के ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत सभी बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था वर्तमान में है। इस व्यवस्था का विस्तार कर इसे प्रदेश के सभी शहरी क्षेत्रों में भी लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस हेतु 160 दलों की नियुक्ति, जिसमें आयुष व दन्त चिकित्सक भी सम्मिलित हैं, की जाएगी।
117. लोक स्वास्थ्य सेवाओं के विकास एवं विस्तार हेतु आयोजना मद में रूपये 2995 करोड का बजट प्रावधान प्रस्तावित है।
118. हमारे चिकित्सा महाविद्यालय न केवल चिकित्सा सेवाओं को प्रदाय करने के लिये शिक्षित चिकित्सक उपलब्ध कराते हैं, अपितु वे स्वयं उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवा भी प्रदाय करते हैं। प्रदेश में चिकित्सकों की मांग के अनुरूप प्रतिवर्ष पर्याप्त संख्या में नये चिकित्सकों की पूर्ति नहीं हो रही थी, क्योंकि लम्बे समय तक प्रदेश में नये चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना नहीं की गई थी। सागर में चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना करने के बाद अब प्रदेश में 7 नये चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना की जा रही है। इसके लिये बजट में आवश्यक प्रावधान किये गये हैं।
119. चिकित्सा महाविद्यालयों से संबद्ध चिकित्सालयों के माध्यम से सेवाओं में विस्तार के लिये प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों में सात सुपरस्पेशलिटी विभाग प्रारंभ किये जाएंगे। भोपाल एवं ग्वालियर में क्रमशः दो एवं एक हजार शैय्या के चिकित्सालय भवन भी निर्मित किए जायेंगे। छः चिकित्सा महाविद्यालयों में माड्यूलर आपरेशन थियेटर बनाये जायेंगे। अमरीकी कंपनी टेनासिटी के द्वारा स्मार्ट मेडीकल सिटी की स्थापना 1000 करोड़ की लागत से सांची के पास की जा रही है।

पेयजल

120. ’’राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम’’ के अंतर्गत केन्द्र सरकार द्वारा निश्चित किये गये मापदण्डों के अनुसार प्रदेश में पेयजल की सुविधा विकसित की जा चुकी है परन्तु कतिपय क्षेत्रों में भूगर्भीय संरचना के कारण से सामान्य वर्षों में भी गर्मी के मौसम में भू-जल स्तर नीचे चले जाने से पेयजल का संकट निर्मित हो जाता है। इस वर्ष अनेक क्षेत्रों में मानसून की वर्षा सामान्य से कम होने के कारण इस संकट के अधिक व्यापक होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में ग्रीष्म ऋतु में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये सभी आवश्यक उपाय किये जायेंगे। 121. राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम अंतर्गत केन्द्र सरकार द्वारा निश्चित किये गये मापदण्डों के अनुसार पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो जाने के कारण केन्द्र सरकार द्वारा इस कार्यक्रम हेतु वित्त पोषण कम कर दिया गया है तथा यह नीतिगत निर्णय लिया गया है कि अब भू-जल आधारित पेयजल के स्थान पर सतही जल स्त्रोत आधारित समूह जल प्रदाय योजनाएं बनाई जायें। इसी के अनुरूप प्रदेश के ऐसे क्षेत्र जहां भू-जल आधारित सिंचाई योजनाओं के लिये ग्रीष्म ऋतु में भू-जल स्तर नीचे चले जाने से कठिनाई उत्पन्न होती है, उनके लिये सतही जल स्त्रोत आधारित समूह जल प्रदाय योजनाएं तैयार की जा रही हैं। ऐसी योजनाओं की लागत भू-जल आधारित योजनाओं की तुलना में अधिक होने के कारण उनके लिये बाह्य वित्त पोषण के भी प्रयास किये जा रहे हैं।
122. आदिवासी बाहुल्य शहडोल, उमरिया, अनूपपुर एवं सिंगरौली जिलों में सतही जल स्त्रोत आधारित समूह जल प्रदाय योजनाओं से वन भूमि प्रभावित होने के कारण इन जिलों में भू-जल स्त्रोत पर आधारित सौर ऊर्जा से चलने वाली नलजल योजनाओं का क्रियान्वयन प्रस्तावित है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल हेतु आयोजना मद में रूपये 709 करोड का प्रावधान प्रस्तावित है।

ग्रामीण विकास

123. प्रत्येक पंचायत के समग्र विकास हेतु आगामी वित्तीय वर्ष के दौरान ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार की जायेगी जिससे प्रदेश की पंचायतों को समग्र विकास संभव हो सकेगा। योजना से अधोसंरचना विकास, सुनिश्चित आजीविका से आय में वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा, सहभागिता एवं उत्तरदायित्व तथा सुशासन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
124. ग्रामीण क्षेत्र में आवास की समस्या को दूर करने के लिये मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास मिशन के माध्यम से अब तक 5,61,000 से अधिक हितग्राहियों को लाभान्वित किया है। वर्ष 2016-17 में इस योजनान्तर्गत 1,50,000 आवासों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया जिसके लिये वर्ष 2016-17 में रूपये 271 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
125. पंचायतों में अधोसंरचना विकास के लिये अधिकाधिक राशि उपलब्ध कराई जाने के हमारे प्रयास निरंतर हैं। वर्ष 2016-17 के दौरान ग्राम पंचायतों को मूलभूत कार्यों के लिये रूपये 841 करोड़ प्रस्तावित हैं वर्ष 2016-17 से पंचायतों को चैदहवें वित्त आयोग की अनुशंसा अनुसार अधिक अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है जिस हेतु रूपये 2292 करोड़ प्रस्तावित है। इस बढ़ी हुई राशि से स्थानीय स्तर पर उपलबध वित्तीय संसाधनों से स्थानीय आवश्यकताों की पूर्ति होगी तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध वित्तीय संसाधनों से कार्य करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा।
126. ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अतिरिक्त अवसर सुनिश्चित कराने के लिये प्रारंभ की गई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, के 10 वर्ष पूर्ण हो गये हैं। इसका वित्त पोषण मुख्य रूप से केन्द्र सरकार द्वारा किया जाता है। योजना के क्रियान्वयन में सुधार हेतु समय-समय पर प्रयास किये गये हैं। इस योजना हेतु केन्द्र सरकार से आगामी वर्ष में प्राप्त होने वाली धनराशि के अनुमान के आधार पर इसके लिये बजट में रूपये 4005 करोड़ प्रस्तावित है। महिला सशक्तिकरण

127. प्रदेश की महिलाएं जो घरेलू हिंसा से पीडि़त हो रही हैं, उन्हें कानूनी एवं आर्थिक सहायता हेतु प्रत्येक जिले में उषा किरण केन्द्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना के अंतर्गत पीडि़त महिलाओं को ’’वन स्टाॅप क्राइसेस सेंटर’’ के तर्ज पर सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। प्रदेश में यह केन्द्र विभिन्न चरणों में प्रारंभ किये जायेंगे। वर्ष 2016-17 में नगर पालिक निगमों में उन अस्पताल परिसरों में ये केन्द्र प्रारंभ किये जायेंगे जहां केन्द्र हेतु स्थान उपलब्ध है तथा बाद के वर्षों में इन केन्द्रों हेतु स्थान उपलब्धता के आधार पर प्रारंभ किये जायेंगे।
128. लाड़ली लक्ष्मी योजना अन्तर्गत 21 लाख से अधिक बालिकाओं को योजना का लाभ दिया गया है। लाड़ली लक्ष्मी योजना में आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने के उद््देश्य से ई-लाड़ली प्रारंभ किया गया है, जिसके तहत आवेदक किसी भी इन्टरनेट कैफे/लोक सेवा केन्द्र अथवा आंगनबाड़ी के माध्यम से आवेदन कर सकेगा। वर्ष 2016-17 में लाड़ली लक्ष्मी योजना हेतु रूपये 903 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
129. प्रदेश की ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को इंटरनेट उपयोग करने में रूचि बढ़ाने के उद्देश्य से ’अभियान ई-शक्ति’’ प्रारंभ किया जाना प्रस्तावित है। अभियान निजी क्षेत्र की गूगल, एयरटेल, आइडिया आदि जैसी कंपनियों के भागीदारी के साथ चलाई जा रही है। प्रदेश में लगभग तीन लाख महिलाओं को इंटरनेट के उपयोग में प्रशिक्षित किये जाने का लक्ष्य है।

जेल प्रशासन

130. जेल में निरूद्ध कैदियों के प्रति हमारी सरकार संवेदनशील है। कैदियों को शिक्षित करने के लिये सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत कार्यवाही की जा रही है। जेल से मुक्त होने के बाद कैदी अपनी जीविका चलाने के लिये सक्षम हो सके इस हेतु कैदियों के स्किल डेव्लेपमेंट पर विशेष ध्यान दिया गया है। कैदियों को टेलरिंग, कारपेंटरिंग, बुनाई, वायरमेन, ट्रेक्टर मैकेनिक, कुक जैसे ट्रेडों में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जेलों के अंतर्गत सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिये विशेष ध्यान रखा गया है, जिससे कैदियोें के स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव न पड़े। जेलों के संचालन एवं उन्नयन हेतु वर्ष 2016-17 में 342 करोड़ रूपये प्रावधान किया गया है।

कानून व्यवस्था

131. प्रदेश में सौहाद्र पूर्ण वातावरण है। इसे बनाये रखने के लिये पुलिस व्यवस्था को सुदृृढ़ एवं चुस्त-दुरूस्त रखा जाये। मैं सदन को अवगत कराना चाहता हूॅं कि वर्ष 2016-17 के आरंभ में ही उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन किया जा रहा है। यह हमारी कानून व्यवस्था की परीक्षा की घड़ी है। हमारा प्रयास है कि यह सिंहस्थ विघ्न रहित संपन्न हो। इस कार्य हेतु पुलिस व्यवस्था में बुलैट प्रूफ वाहन, मोटर साईकल वाहन, बैरीकेट्स उपलब्ध कराये गये हैं ताकि किसी आपदा से शांति पूर्ण तरीके से निपटा जा सके। पुलिस बल के आधुनीकीकरण हेतु पर्याप्त प्रावधान किये गये हैं।

सुशासन

132. प्रदेश में लोक सेवा गारंटी का कानून बनाकर हमारी सरकार ने जवाब देही का उदाहरण प्रस्तुत किया है। अब तक इसके अंतर्गत 161 सेवाएं अधिसूचित की जा चुकी हैं। जिसमें से 107 सेवाएं आॅन-लाईन दी जा रही हैं। इसके अंतर्गत अब तक 3.52 करोड़ आॅन-लाईन आवेदन-पत्र प्राप्त हुये हैं, जिनका निराकरण किया गया है। मुख्यमंत्री हेल्प-लाईन योजना 181 सफलतापूर्व संचालित है जिसके अंतर्गत 30.91 लाख काल्स अब तक प्राप्त हुये हैं, जिनका निराकरण सफलतापूर्वक किया गया है। इस कार्य को निरन्तर रखने के लिये वर्ष 2016-17 के बजट में रूपये 133 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

पुनरीक्षित अनुमान 2015-16

133. पुनरीक्षित अनुमानों के अनुसार कुल राजस्व प्राप्तियां रूपये 1 लाख 11 हजार 130 करोड़ तथा राजस्व व्यय रूपये 1 लाख 10 हजार 693 करोड़ है। आयोजनेतर व्यय का पुनरीक्षित अनुमान रूपये 75 हजार 745 करोड़ तथा आयोजना व्यय का पुनरीक्षित अनुमान रूपये 56 हजार 901 करोड़ है। राजस्व आधिक्य का पुनरीक्षित अनुमान रूपये 437 करोड़ है। राजकोषीय घाटे का पुनरीक्षित अनुमान रूपये 21 हजार 166 करोड़ है, जो कि सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 3.49 प्रतिशत है। राजकोषीय घाटे की (उधार) वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित पूर्ण सीमा 3.5 प्रतिशत का उपयोग करने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है। इसके लिये केन्द्र सरकार से अनुमति मांगी गई है।

बजट अनुमान 2016-17

राजस्व प्राप्तियां

134. वर्ष 2016-17 में कुल राजस्व प्राप्तियांे का बजट अनुमान रूपये 1 लाख 26 हजार 95 करोड़ है। राजस्व प्राप्तियों में राज्य करों से प्राप्तियां रूपये 46 हजार 500 करोड़, केन्द्रीय करों में प्रदेश के हिस्से के अंतर्गत प्राप्तियां रूपये 43 हजार 676 करोड हैं। कर भिन्न राजस्व प्राप्तियां रूपये 11 हजार 481 करोड़ तथा केन्द्र सरकार से सहायक अनुदान अंतर्गत प्राप्तियां रूपये 24 हजार 437 करोड़ अनुमानित है।

आयोजना एवं आयोजनेतर व्यय

135. वर्ष 2016-17 के लिये आयोजना व्यय अनुमान रूपये 74 हजार 401 करोड़ है। अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिये रूपये 15 हजार 821 करोड़ तथा अनुसूचित जाति उपयोजना के लिये रूपये 11 हजार 709 करोड़ के प्रावधान प्रस्तावित हैं। प्रस्तावित आयोजना व्यय कुल व्यय का 43.57 प्रतिशत है। आयोजनेतर व्यय का अनुमान रूपये 84 हजार 311 करोड़ है।

शुद्ध लेन-देन

136. वर्ष 2016-17 की कुल प्राप्तियां रूपये 1 लाख 58 हजार 594 करोड़ तथा कुल व्यय रूपये 1 लाख 58 हजार 713 करोड़ अनुमानित होने से वर्ष का शुद्ध लेन-देन ऋणात्मक रूपये 118 करोड़ का अनुमान है।

राजकोषीय स्थिति

137. कुल राजस्व व्यय रूपये 1 लाख 22 हजार 585 करोड़ एवं कुल राजस्व प्राप्तियां रूपये 1 लाख 26 हजार 95 करोड़ अनुमानित है। वर्ष 2016-17 के लिये राजकोषीय घाटे का अनुमान रूपये 24 हजार 913 करोड़ है। यह राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 3.49 प्रतिशत अनुमानित है। राजकोषीय घाटे की (उधार) वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित पूर्ण सीमा 3.5 प्रतिशत का उपयोग करने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है। इसके लिये केन्द्र सरकार से अनुमति मांगी गई है।

भाग-दो

अध्यक्ष महोदय,

हमारी सरकार कर प्रशासन को पारदर्शी एवं व्यवसाय को अधिक से अधिक सुगम बनाने के लिये लगातार प्रयास कर रही है। इसके उत्साहजनक परिणाम रहे हैं एवं व्यवसाईयों में विश्वास की भावना प्रबल हुई है। आयुक्त, वाणिज्यिक कर द्वारा प्रशासित कर प्रणालियों के उत्साहवर्धक परिणाम प्राप्त हुये हैं। इस वर्ष लगभग 17.65 लाख इलेक्ट्रानिक रिटर्न प्रस्तुत किये गये हैं। विभागीय वेब-पोर्टल से जनवरी, 2016 तक रूपये 9,813 करोड़ जमा हुये हैं। ई-पेमेंट को और सुदृढ़ बनाने हेतु पेमेंट गेटवे को ट्रेजरी के साथ इंटीग्रेट
करना प्रस्तावित है। इस वर्ष जनवरी, 2016 तक पंजीयत व्यवसाइयों द्वारा आॅन-लाईन सुविधा का लाभ लेते हुये विभागीय वेब पोर्टल से 48.50 लाख विभिन्न वैधानिक फार्म डाउनलोड किये गये हैं। माह जनवरी, 2016 तक नये व्यवसाईयों द्वारा 56,532 ई-पंजीयन प्राप्त किये गये हैं। 2. राज्य के व्यवसाईयों को अधिकाधिक स्वकर निर्धारण की सुविधा देना राज्य शासन की मंशा है। इस वर्ष 2,70,050 प्रकरणों का स्वकर निर्धारण किया गया है। इसके अतिरिक्त करदाताओं को सुविधा देने के उद्देश्य से डीम्ड कर निर्धारण योजना लायी गई जिसके अंतर्गत वर्ष 2013-14 की अवधि के 1,82,833 प्रकरणों का डीम्ड कर निर्धारण किया गया।
3. कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था के अंतर्गत कर वापसी की प्रक्रिया का सरलीकरण करते हुये ई-रिफण्ड की व्यवस्था की गई है। जिससे वापसी की राशि सीधे व्यवसाई द्वारा बताये गये बैंक खाते में जमा होती है। इससे गलत भुगतान की गुंजाईश नहीं रहती है।
4. हमारी सरकार व्यवसाईयों पर विश्वास करते हुये उनसे अधिक सहयोग की अपेक्षा करती है। वेट अधिनियम के अंतर्गत अनुसूची-2 में वर्णित समस्त कर योग्य वस्तुओं के अभिवहन पर फार्म-49 की अनिवार्यता की जा रही है। इस हेतु मोबाईल चेकिंग व्यवस्था को और सुदृढ़ एवं संसाधनयुक्त बनाया जायेगा। कतिपय वस्तुओं में कर अपवंचन की प्रवृति को रोकने के उद्देश्य से राज्य के भीतर व्यवसाय में भी अभिवहन पास (ट्रांजिट पास) की व्यवस्था प्रारंभिक तौर पर लोहा, इस्पात, तिलहन एवं खाद्य तेल, पान मसाला तथा चाय पर लागू की जाना प्रस्तावित है।
5. पंजीयन व्यवस्था को और सुगम बनाने के लिये पासवर्ड तथा पंजीयन क्रमांक को व्यवसाई को ईलेक्ट्रोनिकली भी सूचित किया जाना तथा पंजीयन प्रमाण-पत्र को डाउनलोडेबल बनाये जाना प्रस्तावित है। वर्तमान में लगभग 98 प्रतिशत से अधिक ई-पंजीयन जारी किये जाते हैं, इस हेतु कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। मैन्युअल पंजीयन प्राप्त करने पर रूपये 1,000 शुल्क निर्धारित है। ई-पंजीयन की लोकप्रियता को देखते हुये मैन्युअल पंजीयन जारी करने की व्यवस्था पूर्णतः समाप्त की जा रही है। वर्तमान में वेट अधिनियम के अंतर्गत एक ही कार्य दिवस में पंजीयन जारी करने का प्रावधान है। वृत्तिकर अधिनियम एवं मध्यप्रदेश विलासिता, मनोरंजन, आमोद एवं विज्ञापन कर अधिनियम में भी पंजीयन जारी करने हेतु एक कार्य दिवस की सीमा निर्धारित की जा रही है। इसके अतिरिक्त आयुक्त, वाणिज्यिक कर द्वारा प्रशासित समस्त विधानों के तहत पंजीयत व्यवसाईयों के लिये यूनिक आई.डी. (पंजीयन क्रमांक) की व्यवस्था की जा रही है।
6. समस्त पंजीयत व्यवसाईयों की डीलर प्रोफाईल बनाई जायेगी जिससे व्यवसाई स्वयं उनके द्वारा उपयोग में लाये गये विभिन्न फार्म की जानकारी, किये गये भुगतान एवं सूचना पत्र, कर निर्धारण आदेश इत्यादि की जानकारी को देख सकेगा, जो स्वतः प्रोफाईल में अपलोड हो जायेगी। यह व्यवस्था ई-मेल से भी भेजी जाने वाली व्यवस्था के अतिरिक्त होगी।
7. वर्तमान में वार्षिक विवरण प्रस्तुत करने हेतु टर्नओवर की सीमा 20 लाख रूपये है, जिसे बढ़ाकर 40 लाख रूपये किया जा रहा है, इससे छोटे व्यवसाईयों को सुविधा होगी और वे वर्ष मे 4 विवरण पत्र के स्थान पर एक ही विवरण पत्र प्रस्तुत कर सकेंगे।
8. कर विवाद को समाप्त करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सामान्य विक्रय कर अधिनियम, 1958 (निरसित), मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर अधिनियम, 1994 (निरसित), मध्यप्रदेश वेट अधिनियम, 2002 एवं केन्द्रीय विक्रय कर अधिनियम, 1956 एवं मध्यप्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर अधिनियम, 1976 के वर्ष 2011-12 तक के लंबित कर बकाया राशि के मामलों में समाधान हेतु कर समाधान योजना लायी जाना प्रस्तावित है।
9. करदाताओं को सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से श्योपुर एवं पन्ना में वाणिज्यिक कर, वृत्त कार्यालय खोला जाना प्रस्तावित है। पीथमपुर वृत्त को रतलाम संभाग के स्थान पर इंदौर संभाग-1 एवं मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र को भिण्ड वृत्त के स्थान पर ग्वालियर वृत्त-1 में शामिल किया जाना प्रस्तावित है।
कर प्रशासन की दृष्टि से किये जाने वाले सुधार कार्यः-
10. कर प्रणाली की प्रक्रिया को सरल बनाने एवं राज्य के राजस्व में वृद्धि करने के उद्देश्य से 25 करोड़ रूपये या उससे अधिक वार्षिक अथवा 6.25 करोड़ रूपये प्रति त्रैमासिक कर जमा करने वाले व्यवसाईयों के लिये त्रैमास के प्रथम एवं द्वितीय माह का वास्तविक देय कर आगामी माह की 10 तारीख के स्थान पर आगामी माह की 06 तारीख या उसके पूर्व जमा किया जाना प्रस्तावित है। देय राशि का भुगतान एवं विवरण पत्र को व्यवसाई समय पर प्रस्तुत करें, इस हेतु विलंब से भुगतान किये जाने पर ब्याज की दर 3 माह से अधिक विलंब होने पर 1.5 प्रतिशत के स्थान पर 2 प्रतिशत प्रतिमाह किया जाना प्रस्तावित है। 3 माह से कम विलंब होने पर ब्याज की दर 1.5 प्रतिशत प्रतिमाह ही रहेगी।
11. अपंजीयत ठेकेदारों से टी.डी.एस. का कटोत्रा 3 प्रतिशत की दर से किया जाना प्रस्तावित हैं। पंजीयत व्वयसाईयों हेतु यह दर 2 प्रतिशत ही रहेगी। टी.डी.एस. राजस्व प्राप्ति का एक बडा स्रोत है। इस हेतु टी.डी.एस. का कटोत्रा करने के लिये अन्य एजेंसियों को भी अधिकृत किया जाना प्रस्तावित है।
12. ई-कॉमर्स के कारण राज्य के कर राजस्व को हो रहे नुकसान को दृष्टिगत रखते हुये ई-कॉमर्स अंतर्गत क्रय की गई वस्तुओं के स्थानीय क्षेत्र में उपयोग हेतु प्रवेश कराने पर 6 प्रतिशत की दर से प्रवेश कर अधिरोपित करना प्रस्तावित है।
13. अंतर्राज्यीय विक्रय में कर अनुपालन में वृद्धि हेतु ट्रेडर्स द्वारा माल का यथावत अंतर्राज्यीय विक्रय करने पर वेट अधिनियम के अंतर्गत आई.टी.आर. उसी दर से दिये जाने का प्रावधान किया जा रहा है, जिस दर से केन्द्रीय विक्रय कर संगणित होगा। इसी प्रकार अभ्यास पुस्तिका, ग्राफ बुक, ड्राईंग बुक तथा प्रयोगशाला नोटबुक के निर्माताओं की कठिनाईयों को देखते हुये एवं इन उद्यमियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य में कर चुकाकर क्रय किये गये कागज पर उपरोक्त व्यवसाइयों को 2 प्रतिशत राशि रोककर शेष 3 प्रतिशत की आगतकर रिबेट दिये जाने का प्रावधान किया जाना प्रस्तावित है।
14. एक पक्षीय कर निर्धारण आदेश को अपास्त करने संबंधी धारा-34 के आवेदन पत्र प्राप्त होने पर उसके निराकरण हेतु कोई समयावधि नियत नहीं है। अतः इस हेतु 60 दिवस की समयावधि निर्धारित की जा रही है। इसके अतिरिक्त समस्त प्रकार के एक पक्षीय कर निर्धारण होने पर भी यह सुविधा प्रदान की जायेगी।
15. कर अपवंचन एवं अन्य विभागीय कार्यवाही लंबित रहने के दौरान अथवा कार्यवाही के दौरान उक्त की जाने वाली कार्यवाही में राजस्व की संभावित क्षति को रोकने के उद्देश्य से अन्य व्यक्तियों द्वारा देय अथवा भविष्य में देय राशि का प्रावधिक रूप से भुगतान स्थगित रखे जाने का आदेश दिये जाने संबंधी प्रावधान किया जायेगा।<
कराधान

वेट

16. हमारी सरकार का उद्देश्य रहा है कि कृषि को लाभ का धंधा बनाया जाये। इस हेतु पूर्व में 38 कृषि यंत्रों को कर मुक्त किया गया है। इसी क्रम में जैविक कीटनाशक एवं दूध दुहने की मशीन को कर मुक्त किया जाना प्रस्तावित है।
17. कुटीर उद्योग को संरक्षण देने के उद्देश्य से वर्तमान में सूखे बेर एवं बेर चूर्ण पर क्रमशः 5 एवं 14 प्रतिशत देय कर को कर मुक्त किया जा रहा है।
18. पर्यावरणीय प्रदूषण को रोकने के उद्देश्य से समस्त प्रकार की बैटरी चलित कार एवं बैटरी चलित रिक्शा एवं बैटरी चलित वाहनों पर देय वेट 5 प्रतिशत को समाप्त कर इसे कर मुक्त किया जा रहा है। इसी प्रकार बायो डिग्रेडेबल सामग्री से निर्मित बैग तथा लिफाफा पर देय वेट 5 प्रतिशत को समाप्त किया जाकर कर मुक्त किया जा रहा है।
19. तिलहन उद्योग की कठिनाईयों को दृष्टिगत रखते हुये तेल रहित खली जिसमें सोया मील सम्मिलित है, कपास्या खली, सरसों खली तथा मक्का खली पर देय 1 प्रतिशत केन्द्रीय बिक्री कर को जीरो रेटेड किया जाना प्रस्तावित है।
20. देश की सीमा की रक्षा करने में सैनिकों का महत्वपूर्ण स्थान है। सेना में कार्यरत अधिकारियों/जवानों को कैंटीन स्टोर के माध्यम से बेचे जाने वाली कार पर 4 प्रतिशत वेट की दर की जाना प्रस्तावित है।
21. सीमा सुरक्षा बल (बी.एस.एफ.) मे कार्यरत अधिकारियों एवं जवानों को केन्द्रीय पुलिस कैंटीन के माध्यम से बेचे जाने वाले माल पर कैंटीन स्टोर डिपार्टमेंट से बेचे जाने वाले माल की भांति कर की दर की जाना प्रस्तावित है।
22. भारी माल वाहक यान, जिनका सकल यान भार 12,000 किलो ग्राम से अधिक है, पर वेट की दर 15 प्रतिशत से घटाकर 14 प्रतिशत की जाना प्रस्तावित है।
23. वेट की दरों के युक्तियुक्तकरण करते हुये निम्नलिखित वस्तुओं पर वेट की दर 14 प्रतिशत से कम कर 5 प्रतिशत किया जाना प्रस्तावित हैः-

1 सोया मिल्क
2 डायलसिस मशीन एवं कंज्यूमेवल्स
3 बायोफ्यूल आधारित धुंआ रहित चूल्हा, गैस स्टोव तथा इंडक्शन कुक टॉप के पार्टस तथा एसेसरीज
24. प्रदेश के विकास कार्यों हेतु अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों को जुटाने के लिये निम्न उपाय प्रस्तावित हैः-

(अ) पर्यावरण को संरक्षित करने के उद्देश्य से प्लास्टिक थैली, प्लास्टिक से निर्मित कप, गिलास, प्लेट, थाली, कटोरी, कांटा, छुरी, चम्मच, पोलीथिन थैली एवं प्लास्टिक बैग तथा सैक (एच.डी.पी.ई. बैग तथा सैक को छोड़कर) पर वेट की दर 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत किया जाना प्रस्तावित है।
(ब) रूपये 10000 मूल्य से अधिक की साईकिल पर 5 प्रतिशत वेट प्रस्तावित है।
(स) ग्लास मिरर पर वेट की दर 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत किया जाना प्रस्तावित है।
(द) गैस गीजर पर वेट की दर 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत किया जाना प्रस्तावित है।

25. प्रवेश कर

(क) प्रवेशकर अधिनियम के अंतर्गत वर्ष 2015-16 में दी गई रियायतों को वर्ष 2016-17 में भी यथावत रखा जाना प्रस्तावित है।
(ख) पंजीयत व्यवसाईयों द्वारा नेचुरल गैस राज्य के बाहर से आयात कर सी-2/सी-3 मिक्स के निर्माण में उपयोग करने तथा नेचुरल गैस का गैस पाईप लाईन से भिन्न माध्यम से राज्य के बाहर से लाये जाने पर प्रवेश कर अधिनियम की धारा 4-ए के अन्तर्गत अधिसूचित बढ़ी हुई दर से छूट दिया जाना प्रस्तावित है।

केन्द्रीय विक्रय कर

26. केन्द्रीय विक्रय कर अधिनियम के अंतर्गत 2015-16 में दी गई रियायतों को वर्ष 2016-17 में भी यथावत रखा जाना प्रस्तावित है।

मनोरंजन कर

27. वर्तमान में राज्य में नवीन निर्मित होने वाले मल्टीप्लेक्स एवं वर्तमान सिनेमाघरों को नवीन मल्टीप्लेक्स में परिवर्तित करने पर मनोरंजन कर से 05 वर्ष तक छूट दिये जाने का प्रावधान है। यह छूट वर्तमान में सिनेमाघरों के भू-स्वामी को ही प्राप्त होती है। इसका लाभ अब यथास्थिति सिनेमाघरों के भू-स्वामी अथवा सिनेमाघरों को पट्टे पर लेने वाले पट्टाधारी को भी दिया जाना प्रस्तावित है।
28. मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड को संरक्षित पुरातत्वीय स्मारक में ‘‘ध्वनि एवं प्रकाश प्रदर्शन’’ एवं ‘‘पेडल बोट से संचालित जल क्रीड़ा के संबंध में अवधि 31 मार्च, 2016 तक मनोरंजन कर से दी गई छूट को वर्ष 2016-17 में भी यथावत रखा जाना प्रस्तावित है।

पंजीयन एवं मुद्रांक

29. ग्रामीण आवास मिशन अंतर्गत मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना अनुसार ही, मुख्यमंत्री भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार आवास (ग्रामीण) योजना, 2013 अंतर्गत लाभान्वित होने वाले श्रमिक हितग्राहियों को स्टाम्प शुल्क से छूट प्रदाय की जायेगी।
30. ईज ऑफ डूईंग बिजनेस, आम जनता के संपत्ति संबंधी अधिकारों को सुरक्षित रखने तथा कर चोरी रोकने की दृष्टि से सरकार द्वारा निम्नलिखित कदम उठाये जायेंगेः-

1. ऐसे दस्तावेजों को अधिसूचित किया जायेगा, जिनके रजिस्ट्रीकरण हेतु पक्षकारों को सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में जाना आवश्यक नहीं होगा। पहले चरण में मॉर्टगेज के प्रति हस्तांतरण, लीज सरेण्डर तथा अपार्टमेंट एक्ट के तहत बिल्डरों द्वारा किये जाने वाले घोषणा पत्रों जैसे दस्तावेजों को अधिसूचित किया जायेगा।
2. वर्तमान में पक्षकारों को अपने शिनाख्त हेतु दो गवाहों को कार्यालय लाना पडता है, इसलिये ऐसी व्यवस्था लागू की जायेगी कि यदि पक्षकार अपने आधार कार्ड को प्रस्तुत करता है और इसका ऑन-लाईन सत्यापन हो जाता है तो गवाहों की आवश्यकता नहीं होगी।
3. मॉर्टगेज आदि के संबंध में बैंक अधिकारी द्वारा ही संपदा ई-पंजीयन के अंतर्गत ऋण संबंधी प्रविष्टि करने का प्रावधान किया जायेगा, ताकि मॉर्टगेज संपत्ति को धोखे से बेचे जाने पर रोक लगाई जा सके। इन दस्तावेजों के संबंध में फाईल किया जाने वाला डिक्लेरेशन संबंधित बैंक अधिकारी द्वारा ही ई-फाईल किये जाने का प्रावधान भी लाया जायेगा।
4. वर्तमान में कृषि भूमि के रजिस्ट्रीकरण हेतु ऋण पुस्तिका तथा खसरा नकल लिये जाने का प्रावधान है, किंतु गैर कृषि संपत्ति हेतु किसी अभिलेख की आवश्यकता नहीं होती है, अतः ऐसे दस्तावेजों में भी प्रमाणस्वरुप सम्पत्ति कर रसीद, बिजली बिल की प्रति इत्यादि लिये जाने का प्रावधान किया जायेगा, ताकि फ्रॉड दस्तावेजों की आशंका समाप्त की जा सके।
5. भारतीय स्टाम्प अधिनियम में यह प्रावधान किया जायेगा कि यदि पक्षकार द्वारा संपत्ति का बाजार मूल्य कम लिखा जाता है तो उसके कारण हुई कमी को स्टाम्प शुल्क के साथ-साथ 2 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से ब्याज की वसूली भी की जा सकेगी, किंतु ब्याज की राशि स्टाम्प शुल्क की राशि से अधिक नहीं होगी।
6. मध्यप्रदेश उपकर अधिनियम, 1982 के तहत दस्तावेजों पर प्रभार्य स्टाम्प शुल्क पर उपकर को सम्पत्ति के मूल्य पर 0.125 प्रतिशत् से बढ़ाकर 0.50 प्रतिशत् किया जायेगा। इससे प्राप्त अतिरिक्त राशि को ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए उपयोग किया जायेगा।
7. मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 133-क के तहत दस्तावेजों पर प्रभार्य अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत किया जाएगा। इससे प्राप्त अतिरिक्त राशि को प्रदेश के नगरीय निकायों की विभिन्न विकास योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिये उपयोग में लाया जायेगा।
8. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर एवं उज्जैन शहरों में 1 अप्रैल, 2016 से सम्पदा ई-पंजीयन के अंतर्गत सम्पत्ति की सेटेलाईट इमेजरी को दस्तावेज के प्रस्तुतिकरण के समय लगाना अनिवार्य किया जाएगा। इससे संपत्ति से संबंधित फ्राड को रोका जा सकेगा जिससे आम जनता को लाभ होगा। जय भारत - जय मध्यप्रदेश


 
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