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school
D-81586/11-07-17

शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने लागू होगी "एक परिसर-एक स्कूल" की अवधारणा
9 April 2018
अतिशेष शिक्षकों का बेहतर उपयोग करने, विषय वार शिक्षकों की उपयोगिता, शालाओं में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और पढ़ाई-लिखाई पर प्रभावी निगरानी के उद्देश्य से 'एक परिसर-एक स्कूल' अवधारणा लागू की जायेगी। स्कूल शिक्षा विभाग के अगले वर्ष की कार्य-योजना की समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्कूल शिक्षा विभाग की भविष्य की कार्य-योजना की समीक्षा करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए । 'एक परिसर-एक शाला' की अवधारणा को लागू करने के लिये 45 हजार 384 शालाएं और 20 हजार 656 परिसर चिन्हित किए गए हैं। इनमें चालीस से कम नामांकन वाली प्राथमिक शालाएं 40 हजार 102 और मिडिल स्कूल 6221 है। 'एक परिसर- एक शाला' में हायर सेकेंडरी के 1941 स्कूल, 2972 हाई स्कूल, 20 हजार 235 मिडिल स्कूल एवं 20 हजार 233 प्राथमिक शालाएं शामिल होंगी। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा 'सबको शिक्षा-अच्छी शिक्षा' के अंतर्गत नई एकीकृत शिक्षा योजना बनाई गई है। इसमें नर्सरी से 12वीं तक लागू सर्व-शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और शिक्षक शिक्षा शामिल होगी। इसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना, विद्यार्थियों की शिक्षा-अर्जन की क्षमता में वृद्धि करना, स्कूली शिक्षा में सामाजिक असमानता को दूर करना, स्कूली शिक्षा व्यवस्था में न्यूनतम मानक निर्धारित करना, शिक्षा के साथ व्यवसायीकरण परीक्षण को बढ़ावा देना शामिल है। बैठक में बताया गया कि 'एक परिसर-एक शाला' कार्य-योजना से सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि कोई भी शाला बंद नहीं की जाएगी। एक परिसर में स्थित सभी शालाओं का विलय करते हुए 'एक परिसर-एक शाला' के रूप में संचालित की जाएगी। 'एक परिसर-एक शाला' को सर्व-सुविधायुक्त शाला के रूप में विकसित किया जाएगा। शालाओं के संचालन के लिये एकीकृत टाइम टेबल एवं प्रबंधन समिति होगी। प्रारंभिक रूप से पूर्व से पदस्थ शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। शाला प्राचार्य के पद तथा अधिकारों को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बैतूल जिले के बैतूल विकासखंड में शासकीय कृषि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैतूल बाजार को समेकित विद्यालय के रूप में स्थापित किया जाएगा। इस विद्यालय में चार प्राथमिक, पाँच माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शामिल होंगे। दो अप्रैल से प्रारंभ स्कूल चले अभियान को सघन तरीके से लागू किया जायेगा। कक्षा दसवीं के विद्यार्थियों के लिए काउंसलिंग आयोजित की जाएगी। काउंसलिंग तीन चरणों में होगी। इसमें अभिरुचि परीक्षण, एप्टीट्यूड टेस्ट, भाषा दक्षता, गणित की दक्षता और तार्किक क्षमता का आकलन किया जायेगा। इस मौके पर जानकारी दी गई कि स्कूली अधोसंरचना में सुधार होने से बच्चों की स्कूलों तक पहुंच बढ़ी है। पहली से बारहवीं तक शासकीय और निजी तथा शासकीय अनुदान प्राप्त निजी स्कूलों की संख्या एक लाख 59 हजार 434 हो गई है। वर्ष 2018-19 के लिये 582 हायर सेकेण्डरी और 128 हाई स्कूलों के नवीन भवन स्वीकृत किये गये हैं। इनके लिये 459 करोड़ रूपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूलों के लिये 11 हजार 700 पदों की स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा, 629 हाई स्कूल और 329 हायर सेकेण्डरी स्कूलों का उन्नयन किया जा रहा है। दो हजार माध्यमिक शालाओं और 829 हाई स्कूलों और हायर सेकेण्डरी स्कूलों में फर्नीचर और प्रयोगशाला सामग्री खरीदने के लिये 102 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। मदरसों में अधोसंरचना विकस के लिये प्रत्येक मदरसे को पचास हजार रूपये देने के प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है। विद्यार्थियों की सुविधा के लिये आठ विभागों की 30 प्रकार की छात्रवृत्तियों को एक क्लिक में विद्यार्थियों के खाते में पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह, मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा श्रीमती दीप्ति गौड़ मुखर्जी, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री अशोक बर्णवाल एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मध्यप्रदेश निजी विद्यालय फीस विधेयक लागू
27 February 2018
मध्यप्रदेश में निजी विद्यालयों द्वारा प्रति वर्ष ली जाने वाली फीस में अप्रत्याशित वृद्धि को रोकने के लिए मध्यप्रदेश निजी विद्यालय विधेयक-2017 को राज्य शासन द्वारा स्वीकृति प्रदान कर दी गई हैं। यह विधेयक 22 फरवरी से लागू हो गया है। विधेयक के प्रमुख प्रावधान के अनुसार विद्यालय प्रबंधन पूर्ववर्ती वर्ष के लिए नियत फीस के लिए 10 प्रतिशत की सीमा तक फीस में वृद्धि कर सकेगा। स्कूल प्रबंधन द्वारा यदि पिछले वर्ष के तुलना में फीस में वृद्धि 10 से 15 प्रतिशत प्रस्तावित हो तो ऐसे प्रस्ताव को स्वीकृत करने के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला समिति की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। इसी प्रकार यदि पिछले वर्ष के शुल्क के तुलना में फीस में वृद्धि 15 प्रतिशत से अधिक प्रस्तावित की गई हो तो इसके लिये आयुक्त लोक शिक्षण की अध्यक्षता में गठित राज्य समिति इसकी मंजूरी देगी। फीस तथा संबंधित विषयों के लिये गठित जिला समिति निजी विद्यालय के प्रबंधन और अध्ययनरत छात्र के फीस संबंधी नियमों के उल्लंघन और शिकायत प्रकरणों की जाँच कर सकेगी। समिति अपनी जाँच में यह पाती है कि संबंधित स्कूल प्रबंधन द्वारा निर्धारित नियम से अधिक फीस ली गई है तो समिति छात्र के पालक को फीस राशि लौटाने का आदेश दे सकेगी। इसके साथ ही 2 लाख रुपये तक की पेनाल्टी लगाने का अधिकार जिला समिति को होगा। ऐसे प्रकरणों में जहाँ फीस वापसी के आदेश दूसरी बार जारी होंगे, वहाँ पेनाल्टी की राशि 4 लाख रुपये तक लगाई जा सकेगी। दो बार के बाद के प्रकरणों में समिति 6 लाख रुपये तक पेनाल्टी लगा सकेगी। इसके साथ ही निजी विद्यालय की मान्यता निलंबित और रद्द करने की अनुशंसा जिला समिति सक्षम प्राधिकारी को कर सकेगी। स्कूल शिक्षा विभाग के इस निर्णय से निजी विद्यालयों द्वारा किये जा रहे शिक्षा के व्यवसायीकरण तथा फीस के नाम पर विभिन्न मदों में राशि संग्रहित करने की प्रवृत्ति और उसमें अप्रत्याशित वृद्धि करने की प्रवृत्ति पर नियंत्रण किया जा सकेगा।
सरकारी स्कूलों के 3 लाख से अधिक विद्यार्थियों का हुआ अभिरुचि परीक्षण
27 February 2018
मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा-10 के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों और अपने कॅरियर के विकल्पों की जानकारी देने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने 15 फरवरी को 3 लाख 10 हजार विद्यार्थियों का अभिरुचि परीक्षण (इंटरेस्ट टेस्ट) लिया। अभिरुचि परीक्षण 8 हजार 152 सरकारी स्कूलों में हुआ। परीक्षण टेस्ट में 72 हजार 747 मोबाइल सेट्स का उपयोग किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने एम.पी. कॅरियर मित्र एप पर एक-एक करके 140 प्रश्नों के संबंध में अपनी पसंद-नापसंद को जाहिर किया। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने विद्यार्थियों को उनकी अभिरुचि के अनुसार विषय चयन के लिये प्रति वर्ष एक लाख विद्यार्थियों के एप्टीट्यूट टेस्ट और कॅरियर काउंसिलिंग करवाने के निर्देश स्कूल शिक्षा विभाग को दिये थे। एप्टीट्यूट टेस्ट के आधार पर विद्यार्थियों की पसंद के आधार पर उनके भविष्य का रोडमेप एम.पी. कॅरियर मित्र पोर्टल पर प्रदर्शित होगा। एम.पी. कॅरियर मित्र पोर्टल में छात्र अपनी समग्री आई.डी. से अपनी रुचियों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट देख पायेंगे। एम.पी. कॅरियर मित्र पोर्टल छात्रों को विषयों का चयन करने में मदद करेगा। पोर्टल में छात्रों को रुचि के अनुसार शिक्षण संस्थानों में संचालित पाठ्यक्रमों की जानकारी भी प्राप्त होगी। यह सम्पूर्ण कार्यक्रम तीन चरणों में संचालित होगा। अभिरुचि परीक्षण का परिणाम 2 अप्रैल को घोषित होगा। इस वर्ष जून माह में प्रत्येक विद्यार्थी एवं पालक की काउंसिलिंग की व्यवस्था सभी सरकारी स्कूलों में की जायेगी। इसके लिये श्यामची आई फाउण्डेशन, पुणे के साथ एमओयू किया गया है। फाउण्डेशन यह कार्य नि:शुल्क रूप से कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) फण्ड का उपयोग करते हुए करेगा।
शासकीय विद्यालयों में रिक्त पदों के विरुद्ध अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था
26 February 2018
स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष शासकीय विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से प्रारंभ होगा। इस बात को ध्यान में रखते हुए शासकीय विद्यालयों में रिक्त पदों के विरुद्ध अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था एक अप्रैल के बाद की जायेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नवीन शैक्षणिक सत्र की अवधि बदलने के कारण इस शैक्षणिक सत्र में अतिथि शिक्षकों की समयावधि 28 फरवरी नियत की गई है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने आयुक्त लोक शिक्षण, संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र, समस्त कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को आवश्यक निर्देश जारी किये हैं। विभाग ने जानकारी दी कि स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था शिक्षकों के रिक्त पदों, शिक्षकों के अवकाश और प्रशिक्षण पर जाने के कारण अस्थाई रूप से की जाती है।
प्राथमिक शाला के बच्चे कर रहे हैं डिजिटल माध्यम से पढ़ाई
21 February 2018
सागर जिले के देवरी विकासखण्ड में एक गाँव है समनापुर जादो। यहाँ की प्राथमिक शाला के विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से शिक्षा दी जा रही है। शाला में बच्चे एलसीडी और लेपटॉप के जरिये शिक्षा हासिल कर रहे हैं। जिले के इस पहले डिजिटल विद्यालय में बच्चे अंग्रेजी भाषा, कर्सिव हेण्ड-रायटिंग में लिखना सीख रहे हैं। नये और रोचक तरीके से वे गणित के गुणा, भाग, जोड़, घटाना बहुत अच्छे से समझकर सीख रहे हैं। डिजिटल माध्यम की मदद से बच्चे पहाड़ा, गिनती, स्पेलिंग, कविताएँ आदि बड़ी आसानी से याद कर लेते हैं। जिला प्रशासन के अधिकारी जब शाला में पहुँचे तो तीसरी कक्षा के छात्र सत्येन्द्र ने जिस फुर्ती से 19 का पहाड़ा सुनाया, वे दंग रह गये। डिजिटल शिक्षा के माध्यम से गाँव में शिक्षा का स्तर बढ़ा है। इस शाला में कई ऐसे बच्चे हैं, जिन्होंने प्रायवेट स्कूल छोड़कर इस शाला में प्रवेश लिया है। यह शाला जिले में मॉडल के रूप में पहचान स्थापित कर रही है। शाला की सफलता से उत्साहित होकर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग जिले में इस प्रकार की एक और शाला जल्दी ही शुरू करने की कार्यवाही कर रहा है। स्वच्छता में बगदा गाँव बना मिसाल:- दतिया जिले में भाण्डेर विकासखण्ड से 15 किलोमीटर दूर है गाँव बगदा। स्वच्छता अभियान से इस गाँव की तस्वीर ही बदल गई है। सभी गलियों में सी.सी. सड़क है। नाली और सड़कें बिलकुल साफ-सुथरी हैं। पूरे गाँव में शौचालय बने हुए हैं, जिनमें स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। कुछ समय पहले बाहर जाने वाले ग्रामीणों को शौचालय के इस्तेमाल की आदत भी पड़ गई है। गाँव के करन सिंह, भगवत सिंह, मुन्नालाल, अरविंद आदि कहते हैं कि अब हमें हमारा गाँव बहुत अच्छा लगता है। बच्चे भी सफाई से रहना सीख रहे हैं। इससे बीमारियों में भी कमी आयी है। पहले गाँव में घुसते ही गली में कीचड़, घूरा और कूड़ा-कचरा दिखता था। स्वच्छता अभियान के बाद हमारी गलियाँ इतनी साफ हो गई हैं कि ऐसा लगता है मानो हम किसी शहरी कस्बे में घूम रहे हैं।
बोर्ड परीक्षाओं के दौरान व्यवधान रहित विद्युत आपूर्ति के निर्देश
21 February 2018
प्रमुख सचिव ऊर्जा श्री आई.सी.पी. केशरी ने बोर्ड परीक्षाओं के दौरान व्यवधान रहित विद्युत आपूर्ति के निर्देश अधिकारियों को दिये है। उन्होंने कहा है कि गर्मी के मौसम में पेयजल की समस्या के निराकरण के लिए सभी खराब ट्रान्सफार्मरों को तत्काल बदला जाये। स्कूली बच्चों की बोर्ड परीक्षाओं के तारतम्य में सभी रहवासी इलाकों में खराबी या बकाया राशि के कारण नहीं बदले गए वितरण ट्रांसफार्मरों को तत्काल बदला जाए। प्रमुख सचिव ने तीनों विद्युत वितरण कंपनी को निर्देशित किया है कि उपभोक्ता संतोष में सुधार के सभी उपाय किए जाएं। घोषित अवधि में विद्युत आपूर्ति नियमानुसार की जाए। कृषि उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि ट्रांसफार्मर में जहाँ कृषक/ग्रामवासी परिवहन में सहयोग करते हैं, वहाँ दरें निर्धारित करते हुए परिवहन खर्च की प्रतिपूर्ति विद्युत वितरण कंपनी द्वारा की जाएगी। पॉवर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा तीनों विद्युत वितरण कंपनी के समन्वय में परिवहन व्यय की प्रतिपूर्ति की एक-समान दरें सात दिन के भीतर जारी की जाएंगी। जले एवं खराब ट्रांसफार्मर वर्तमान में बकाया राशि का 20 प्रतिशत जमा करने अथवा 50 प्रतिशत उपभोक्ताओं द्वारा भुगतान करने पर गए ट्रांसफार्मर यदि 3 माह के अंदर पुन: जल जाते हैं, तो बकाया की शर्त/पात्रता शिथिल करते हुए ट्रांसफार्मर निर्धारित समय-सीमा में तत्काल बदल दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री स्थाई कृषि पंप कनेक्शन योजना में स्थाई कनेक्शन के लिए निर्धारित अंश राशि जमा करने पर अस्थाई कृषि पम्प कनेक्शन के लिए अलग से एनर्जी चार्जेस जमा कराए बिना ऐसे कनेक्शन पर फ्लैट रेट स्थाई कृषि पम्प कनेक्शन के समान लागू से विद्युत दर से विद्युत प्रदाय एवं बिल सुनिश्चित किया जाएगा।
निजी स्कूलों को मात करती है ग्राम नवादपुरा की आँगनवाड़ी
21 February 2018
धार जिले के ग्राम नवादपुरा में स्वामी विवेकानंद आदर्श आँगनवाड़ी-सह-बालवाड़ी निजी स्कूलों में मौजूद सुख-सुविधाओं को टक्कर दे रही है। प्राथमिक विद्यालय स्थानांतरित होने से शासकीय भवन खाली पड़ा था। गाँव के श्री कमल पटेल ने अपने पूर्वजों की स्मृति में 4 कक्षों का रंग-रोगन और पेंटिंग कर उन्हें सुंदर स्वरूप दिया है। यही नहीं श्री कमल पटेल और ग्रामीणों ने जन-सहयोग से गाँव में हर आधुनिक सुविधा जुटाकर इसे आदर्श बना दिया है। ए.सी. युक्त कक्षों में लगेगी स्मार्ट-क्लॉस : दो कक्षों को स्मार्ट-क्लॉस बनाकर इनमें एयर कंडीशनर भी लगाये गये हैं। बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा देने के लिये सभी आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। बच्चों के लिये छोटा-सा स्वीमिंग-पूल, साफ-सुथरा शौचालय, पीने के लिये आर.ओ. का पानी और खेलने के लिये आधुनिक खिलौनों का इंतजाम किया गया है। पूरे परिसर को सुंदर पेंटिंग और कार्टूनों से सजाया गया है। इस साज-सज्जा पर सांवरिया फाउण्डेशन ने 10 लाख रुपये खर्च किये हैं। परिसर में 2 आँगनवाड़ी संचालित की जा रही हैं, जिनमें मध्यान्ह भोजन और नाश्ता भी दिया जा रहा है। एक स्मार्ट टीचर और बच्चों के आने जाने के लिये ट्रस्ट ने वाहन सुविधा की व्यवस्था की है। आगामी दिनों में पहली से तीसरी तक की कक्षाएँ संचालित की जायेंगी। इसमें गाँव के शिक्षित युवक-युवतियाँ और बुजुर्ग अपनी सेवाएँ देंगे। प्रधानमंत्री के आदर्श ग्राम से ली प्रेरणा, पिंक-विलेज है नवादपुरा : श्री कमल पटेल बताते हैं उन्होंने यह प्रेरणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की आदर्श ग्राम बनाने की पहल से ली है। वर्ष 2017 से यह गाँव खुले में शौच से मुक्त हो चुका है। संभाग का यह पहला आईएसओ सर्टिफाइड ग्राम, पिंक-विलेज है। यहाँ सभी घर गुलाबी रंग से पुते हुए हैं। एटीएम मशीन, पीने के लिये ठंडा आर.ओ. पानी, प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में सुरक्षा की दृष्टि से सी.सी. टी.व्ही. कैमरे लगाये गये हैं। कैशलेस पंचायत, स्वच्छता के लिये डस्टबिन, आरामदायक कुर्सियों के साथ एक छोटा बगीचा भी गाँव में जन-सहयोग से बनाया गया है। रोचक बात यह है कि इन कामों के लिये कोई सरकारी सहायता नहीं ली गई है।
अब गुड़ और दलिया खाकर स्कूल जाता है सहरिया परिवार का छोटू
20 February 2018
कुपोषण से जंग के विरूद्ध प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिहं चौहान द्वारा किये गये ऐलान के बाद सहरिया परिवारों को प्रति माह उचित पोषण के लिए एक हजार रूपये की राशि परिवार की मुखिया महिलाओ के बैंक खातों में जारी होने से इन परिवारों में अब खुशी का आलम है। आदिवासी अंचल कराहल के लहरौनी ग्राम की निवासी सहरिया महिला सीमा पत्नि सगुन आदिवासी का 7 साल का बेटा छोटू अब गुड़ और दलिया का नाश्ता करने के बाद स्कूल जाता है और दोपहर का भोजन स्कूल में संचालित मध्यान्ह भोजन योजना में करता है। इस प्रकार उचित पोषण के लिए दी गई राशि से सहरिया परिवारों के बच्चों को भी तीन समय भोजन की सुविधा उपलब्ध हो गई है। सीमा आदिवासी ने बताया कि उसके 4 बच्चे हैं जिनमें छोटू सबसे बड़ा 7 साल का है और सबसे छोटा बेटा एक साल का है। उसने बताया कि हर महीने एक हजार रूपये की राशि मिलने के बाद घर में बच्चों के खान-पान की सुविधा में इजाफा हुआ है। जनवरी माह में मिली राशि से उसने बच्चों के नाश्ते के लिए गुड़ और दलिया की व्यवस्था की है इससे वह कभी मीठा दलिया बनाती है तो कभी नमकीन दलिया बनाकर बच्चों को खिलाती है। गुड़ और शक्कर की अतिरिक्त व्यवस्था होने से कभी बच्चों को हलवा और लपसी भी बनाकर देती है। उन्हे एक रूपये किलो की दर पर उचित मूल्य दुकान से सार्वजनिक वितरण प्रणाली का गेहूं और चावल भी मिलते है। इसी गांव की धोडा बाई भी अपने बैंक खाते में एक हजार रूपये हर माह आने से खुश है। दो बच्चो़ की माँ धोडा बाई बताती हैं कि उसके पति सरूप आदिवासी के पास 4 बीघा खेती है जिस पर ही परिवार का गुजारा चलता है। अब एक हजार रूपये महिने मिलने से घर को बहुत सहारा हो गया है। उसके बच्चे वर्षा कक्षा 6 में तथा बादल कक्षा 2 में पढ़ता हैं। वह कहती है कि एक हजार रूपये की राशि सरकार ने बच्चों के खान-पान के लिए दी है, तो हम इस पैसे को उनके खाने-पीने पर ही खर्च कर रहे हैं। सीमा और धोडा बाई की तरह ही इस गांव की 112 सहरिया महिलाओं को प्रति माह एक हजार रूपये की राशि मिलना शुरू हो गई है। कराहल विकासखण्ड मुख्यालय पर 25 दिसम्बर 2017 को मुख्यमंत्री द्वारा सहरिया परिवारों की मुखिया महिलाओं को उचित खान-पान एवं पोषण के लिए प्रतिमाह एक हजार रूपये की राशि दिये जाने की शुरूआत की गई थी। श्योपुर जिले में अभी तक 15 हजार से अधिक सहरिया परिवारों के बैंक खाते में राशि जारी कर दी गई है।
छात्रवृत्ति से मलेशिया यूनिवर्सिटी में शोध करेंगे सुमित और अविनाश
16 February 2018
इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी के दौरान सुमित और अविनाश में गहरी दोस्ती हो गई। संयोग देखिए एआईईईई के आधार पर दोनों का दाखिला एसएआईटी (सम्राट अशोक इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) विदिशा में हो गया। यहीं से दोनों ने कम्प्यूटर साइंस में बी-टेक और एम-टेक किया। इसके बाद तय किया कि अब विदेश की किसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से मशीन लर्निंग में साथ-साथ शोध करेंगे इन होनहार छात्रों के सपनों के मार्ग में आर्थिक बाधा आड़े आई तो मध्यप्रदेश सरकार बनी सहयोगी। सरकार की विदेश में अध्ययन हेतु संचालित छात्रवृत्ति योजना ने अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाले इन दोनों विद्यार्थियों की प्रतिभा को पंख लगा दिए हैं। ग्वालियर शहर की नर्मदा कॉलोनी मुरार निवासी सुमित धारीवाल और नेहरू कॉलोनी निवासी अविनाश रायपुरिया मलेशिया की मस्ट यूनिवर्सिटी में यांत्रिकी फैकल्टी में शोध करने जा रहे हैं। इस योजना के तहत दोनों छात्रों को अलग-अलग 13 लाख 20 हजार रूपए से अधिक की आर्थिक सहायता जनजाति कल्याण विभाग ने मंजूर कर दी है। दोनों मौजूदा माह में ही मलेशिया की उड़ान भरेंगे। सुमित और अविनाश कहते हैं कि शुरू में हमें हर तरफ से निराशा ही हाथ लग रही थी। ऐसे में एक दिन अखबार में पढ़ा कि मध्यप्रदेश सरकार हम जैसे महत्वाकांक्षी युवाओं को विदेश में उच्च शिक्षा के लिये वित्तीय मदद देती है। हम दोनों ग्वालियर की शारदा विहार कॉलोनी स्थित जनजाति कल्याण कार्यालय में पहुँच गए और अपने आवेदन प्रस्तुत कर दिए। निर्धारित प्रक्रिया तथा साक्षात्कार के बाद हम दोनों का विदेश अध्ययन की छात्रवृत्ति के लिये चयन हो गया है। स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई हमने साथ की। अब दोनों का विदेश में पढ़ाई का सपना मध्यप्रदेश सरकार पूरा कर रही है
मानव हित को ध्यान में रखकर शिक्षा ग्रहण करें छात्र-छात्रायें
12 February 2018
राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने छात्र-छात्राओं से कहा है कि केवल अच्छा जीवन एवं नौकरी के लिये ही पढ़ाई न करें, अपितु मानव हित को ध्यान में रखकर शिक्षा ग्रहण करें। मन में सदैव यह भाव रखें कि हम गाँव, प्रदेश, देश और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिये क्या बेहतर कर सकते हैं। राज्यपाल सोमवार को ग्वालियर में आईटीएम ग्लोबल स्कूल परिसर में नवनिर्मित कबीर प्रखण्ड के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रही थीं। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने विद्यालय प्रबंधन एवं आईटीएम यूनिवर्सिटी के शिक्षकों का आहवान किया कि बच्चों को ऐसी शिक्षा दें, जिससे वे शुरू से ही राष्ट्रभाव से ओत-प्रोत हों। उन्होंने कहा बच्चों की सोच में बदलाव लाकर ही हम आतंकवाद व नक्सलवाद जैसी समाज विरोधी गतिविधियों से निजात पाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को बताएँ कि विविधता में एकता हमारी संस्कृति है। इसलिये स्कूलों व आंगनबाड़ियों के बच्चों में ऐसे भाव पैदा करे कि उनके मन में अशांति और भेदभाव न पनपे। प्रधानमंत्री का “एक भारत – श्रेष्ठ भारत” का सपना भी तभी पूरा होगा। विश्वविद्यालय गाँव के स्कूलों को गोद लें राज्यपाल श्रीमती पटेल ने विश्वविद्यालय, महाविद्यालय एवं प्रतिष्ठित निजी स्कूलों को समीप के सरकारी स्कूलों को गोद लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि वे गाँव में जाकर ग्रामीणों की बेहतरी के लिये कुछ काम करें। हम अपने देश को तभी ऊँचाईयों तक ले जा पायेंगे, जब अपनी संस्था में अर्जित ज्ञान एवं रचनात्मकता से गाँव के बच्चों को भी पारंगत करेंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्कूलों को बेहतर बनाने के साथ-साथ ग्रामीणों को शौचालयों के उपयोग तथा अन्य रचनात्मक कार्यों के लिये भी प्रेरित करें। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन ने कहा कि वे स्वयं भोपाल में एक स्कूल एवं आंगनबाड़ी केन्द्र को गोद लेने जा रही हैं। राज्यपाल को याद आया शिक्षक जीवन आईटीएम ग्लोबल स्कूल में राज्यपाल श्रीमती पटेल को अपना शिक्षक जीवन याद आ गया। उन्होंने कहा लगभग 30 वर्षों तक मेरा जीवन शिक्षक के रूप में सुबह से शाम तक बच्चों से बतियाते और उन्हें पढ़ाते गुजरा। उन्होंने कहा शैक्षणिक दायित्वों के बेहतर निर्वहन के लिये उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार सहित अन्य पुरस्कार भी मिले। राज्यपाल ने स्कूल में बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखकर दी जा रही शिक्षा की सराहना की। साथ ही बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और स्कूल के बच्चों द्वारा किए गए बेहतर संचालन को सराहा। पुश नहीं पुल मॉडल पर आधारित हों स्कूल पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल दिलबाग सिंह सुहाग ने इस अवसर पर कहा कि स्कूलों में बच्चों के लिये ऐसा माहौल विकसित करें, जिससे बच्चों को स्कूल में जबरन पहुँचाने की जरूरत न पड़े बल्कि बच्चे स्वत: ही स्कूल जाने के लिये लालायित रहें। उन्होंने कहा कि स्कूल पुश मॉडल पर नहीं, पुल मॉडल पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने आईटीएम ग्लोबल स्कूल के एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग कंसेप्ट को सराहा। आईटीएम लेगा अडूपुरा स्कूल को गोद आईटीएम यूनिवर्सिटी के चांसलर श्री रमाशंकर सिंह ने राज्यपाल को भरोसा दिलाया कि वे स्वयं अडूपुरा गाँव के स्कूल को गोद लेंगे। उन्होंने कहा अडूपुरा के स्कूल में बुनियादी सुविधाओं के अलावा वहाँ के बच्चों के व्यक्तित्व विकास में परिवर्तन के लिये भी कारगर प्रयत्न किए जायेंगे। उन्होंने राज्यपाल को न्यौता दिया कि अगले साल 21 नवम्बर को वो अपना जन्मदिन मनाने अडूपुरा आएँ। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने स्कूल परिसर में लॉयन्स क्लब ग्वालियर द्वारा पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम के तहत पौधरोपण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने नीम प्रजाति का पौधा रोपा। इस अवसर पर नीम के लगभग 1100 पौधे रोपे गए।
विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करें : ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन
12 February 2018
ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन ने कहा है कि विद्यार्थियों को विज्ञान से जोड़ने के साथ ही उनमें वैज्ञानिक सोच भी विकसित की जाना चाहिये। श्री जैन आज भेल दशहरा मैदान में मेपकॉस्ट और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सातवें भोपाल विज्ञान मेला का समापन कर रहे थे। कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री ने जेएनयू, नई दिल्ली के वाइस चांसलर प्रो. एम. जगदेश कुमार को विज्ञान प्रतिभा सम्मान प्रदान किया तथा मेले में विज्ञान के श्रेष्ठ मॉडल प्रदर्शित करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। श्री पारस जैन ने कहा कि विज्ञान की नवीन तकनीक का ही परिणाम है कि मध्यप्रदेश में बिजली उत्पादन और सिंचाई के रकबे में आशातीत वृद्धि हुई है। विज्ञान के माध्यम से खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय परम्परा में वैज्ञानिक अवधारणाओं एवं प्रौद्योगिकी नवाचार को विशेष महत्व दिया गया है। नई पीढ़ी में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने के लिये राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। श्री जैन ने कहा कि विज्ञान मेला विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीन शोध कार्यों, आधुनिक तकनीक में उन्नयन से संबंधित सूक्ष्म से सूक्ष्म जानकारी को प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम है। प्रो. एम. जगदेश कुमार ने विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे विस्तार की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र विज्ञान के बिना अधूरा है। नीति आयोग के सदस्य श्री व्ही.के सारस्वत ने कहा कि विज्ञान को संचार से अलग नहीं किया जा सकता। उद्योगों में विज्ञान को बढ़ावा दिये जाने की बात भी उन्होंने कही। कार्यक्रम को मेपकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. नवीन चंद्रा, विज्ञान भारती के अध्यक्ष डॉ. एन.पी. शुक्ला, राष्ट्रीय महासचिव विज्ञान भारती श्री ए. जयकुमार आदि ने संबोधित किया। इस अवसर पर सचिव भोपाल विज्ञान मेला श्री तस्नीम हबीब, श्री राजीव जैन, श्री विजय कुमार सखलेचा सहित अनेक वैज्ञानिक और विद्यार्थी उपस्थित थे
स्कूल शिक्षा विभाग के एजुकेशन पोर्टल को राष्ट्रीय स्वर्ण पुरस्कार
9 February 2018
मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग के एजुकेशन पोर्टल को केन्द्र सरकार का नेशनल ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार प्रदान किया गया है। एजुकेशन पोर्टल को इनोवेशन इन एक्जस्टिंग प्रोजेक्ट ऑफ गवर्मेंट डिपार्टमेंट केटेगरी में यह अवार्ड प्रदान किया गया है। अवार्ड की सूचना केन्द्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय की ओर से राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक श्री लोकेश कुमार जाटव को दी गई है। गोल्ड अवार्ड 26 और 27 फरवरी को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में 21वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस संगोष्ठी में दिया जायेगा। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अकादमिक एवं प्रशासनिक कार्यों के क्रियान्वयन की मॉनीटरिंग और परिणामों की समीक्षा के लिये एजुकेशन पोर्टल तैयार किया गया है। स्कूल शिक्षा से संबंधित विभागों, कार्यालयों, स्कूलों, शिक्षकों और पालकों के लिये बेहतर कार्य सम्पादन और ऑनलाइन सेवाएँ देने के मकसद से वर्ष 2008 में स्कूल शिक्षा विभाग ने नेशनल इनफार्मेशन सेंटर (एनआईसी) के सहयोग से एम.पी. एजुकेशन पोर्टल तैयार किया था। बदलते समय एवं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एजुकेशन पोर्टल में भी नवीन तकनीक का उपयोग कर इसे और अधिक उपयोगी बनाया गया है। एजुकेशन पोर्टल स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में एकीकृत ई-गवर्नेंस प्रणाली का कार्य बखूबी कर रहा है। पोर्टल के माध्यम से प्रदेश की 90 हजार से अधिक बसाहटों के करीब एक करोड़ 50 लाख से अधिक बच्चों और एक लाख 50 हजार से अधिक सरकारी एवं प्रायवेट स्कूलों की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध है। पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के 3 लाख 90 हजार से अधिक शिक्षकों एवं अन्य अमले के वेतन, सर्विस-बुक एवं सेवा कार्यों का प्रभावी प्रबंधन किया जा रहा है। राज्य में एक करोड़ 50 लाख से अधिक स्कूल के विद्यार्थियों की व्यक्तिगत शैक्षिक एवं बैंक खातों की प्रमाणिक जानकारी का पूरा डाटाबेस भी पोर्टल के माध्यम से संधारित किया जा रहा है। विद्यार्थियों को मिलने वाली 9 विभागों की 35 से अधिक छात्रवृत्ति, शिष्यवृत्ति और प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्राप्त होने वाली 500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का लाभ भी समयपरक एवं पारदर्शी रूप से ऑनलाइन व्यवस्था के तहत वन क्लिक के माध्यम से विद्यार्थियों को मिल रहा है। देश में पहली बार जीआईएस एट स्कूल एप के माध्यम से एक लाख 25 हजार शालाओं में उपलब्ध अधोसंरचना के 13 लाख से अधिक जीईओ टैग फोटोज लिये गये हैं। इससे सभी बसाहटों में शाला संसाधनों की सुनिश्चितता में मदद प्राप्त हो रही है। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों की मान्यता भी इस पोर्टल के माध्यम से सरलीकृत एवं पारदर्शी रूप से ऑनलाइन प्रदान की जा रही है। इन स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिये आरक्षित 25 प्रतिशत सीट्स पर प्रवेश भी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन प्राप्त हो रहा है। एजुकेशन पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के लगभग एक लाख 50 हजार विद्यार्थियों का प्रतिभा मूल्यांकन कार्य कर उनकी स्कूलवार एवं शिक्षकों की ग्रेडिंग की गई है।
सैनिक स्कूल रीवा के प्रवेश परीक्षा परिणाम घोषित
8 February 2018
सैनिक स्कूल रीवा में शैक्षिणक सत्र 2018-19 के लिए आयोजित प्रवेश परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिये गए हैं। परीक्षा परिणाम एवं साक्षात्कार तथा स्वास्थ्य परीक्षा की तिथि सैनिक स्कूल रीवा की बेवसाइट www.sainikschoolrewa.ac.in पर उपलब्ध है।
सरकारी स्कूलों में परीक्षा परिणाम सुधार के लिये ठोस प्रयास हों
7 February 2018
स्कूल शिक्षा मंत्री कुँवर विजय शाह ने जिला शिक्षाधिकारियों से सरकारी स्कूलों में परीक्षा परिणाम, विशेषकर बोर्ड परीक्षा परिणाम में सुधार के लिये ठोस प्रयास करने के लिये कहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिये विभाग के 'एम शिक्षा मित्र'' एप का अनिवार्य रूप से उपयोग हो। उन्होंने शाला परिसर में रुचिकर माहौल में विद्यार्थियों को पढ़ाई करवाये जाने पर भी जोर दिया। स्कूल शिक्षा मंत्री कुँवर शाह आज भोपाल के नरोन्हा प्रशासन अकादमी में जिला शिक्षाधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। स्कूल शिक्षा मंत्री कुँवर शाह ने कहा कि अप्रैल-2018 से जिला-स्तर के सभी उत्कृष्ट विद्यालयों में 100-100 सीटर के बालक और कन्या छात्रावास शुरू किये जायेंगे। स्कूल शिक्षा मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये कि रिक्त पड़े शिक्षकों के पदों पर भर्ती की कार्यवाही निश्चित समय-सीमा में की जाये। उन्होंने बताया कि अगले शिक्षण सत्र से विद्यार्थियों के गणवेश तैयार करने का कार्य स्व-सहायता समूह के माध्यम से करवाया जायेगा। इसके लिये प्रत्येक जिले में अभी से तैयारी की जाये। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा श्रीमती दीप्ति गौड़ मुखर्जी ने बताया कि सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक कार्य प्रभावित न हो, इसके लिये अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था की गई है। वर्तमान में करीब 86 हजार अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। उन्होंने स्कूल के बच्चों को दी जाने वाली नि:शुल्क साइकिल वितरण का कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश भी दिये। आयुक्त लोक शिक्षण श्री नीरज दुबे ने बताया कि कलेक्टरों की मदद से स्कूल परिसर में अतिक्रमण हटाने का कार्य प्राथमिकता से किया जा रहा है। प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 2017-18 में करीब 23 लाख विद्यार्थियों को पाठ्य-पुस्तकों का वितरण करवाया गया है। शैक्षणिक गुणवत्ता के लिये सरकारी स्कूलों में दो बार बाह्य मूल्यांकन की व्यवस्था की गई है। कॅरियर काउंसिलिंग बैठक में बताया गया कि कक्षा-10 के विद्यार्थी निर्धारित कॅरियर के अनुसार अध्ययन कर सकें, इसके लिये इस वर्ष फरवरी माह में 6 लाख विद्यार्थियों का अभिरुचि परीक्षण किया जायेगा। बैठक में छात्रवृत्ति वितरण, वार्षिक खेलकूद कैलेण्डर के अनुसार गतिविधियाँ, छात्रावासों की सुरक्षा और बजट संबंधी मुद्दों पर भी चर्चा की गई
भविष्य निमार्ण की परिकल्पना यादे बचपन की
4 February 2018
जयपुर 4 जनवरी। बच्चों के सर्वोतम भविष्य निमार्ण की परिकल्पना को लेकर संचालित किए जा रहे किड्जी -सृजन इंटरनेशनल स्कूल, केसरनगर, मुहाना रोड़, जयपुर का तीसरा वार्षिकोत्सव समारोह यादें बचपन की माथुर मरुधर सामुदायिक केंद्र पर शनिवाार को आयेाजित किया गया। जो कि पूरी तरह से बच्चेां के लिए, बच्चों के द्वारा थीम पर आधारित है। इस अवसर पर बच्चों ने अपनी दिनचर्या को नाटक, गीत संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया। स्कूल की निदेशक डा.रीना माथुर ने बताया कि वर्तमान दौर में सभी व्यस्तम जिंदगी जी रहे है इसी बीच बच्चों से लेागों की जो दूरियंा बनती है वे ना बने इसके लिए पूरी तरह बच्चों को कार्यक्रम बच्चों के लिए और उनके द्वारा ही प्रस्तुत किया गया। इससे बड़ों को उनके बचपन की यादें ताजा करने का एक अवसर भी प्रदान हुआ वंही छोटे बच्चों ने गीत, नाटक से सभी का मन मोह लिया। समाज में बचपन को जिदंा रखने और गर्ल चाइल्ड को बचाने तथा जल बचाव पर भी इस दौरान नाटक के माध्यम से बच्चों ने संदेश दिया। फोटेा कैप्सन 1. किड्जी सृजन के नन्हे मुन्हे पानी की बचत का गीत के माध्यम से संदेश देते हुए। 2. सांस्कृतिक कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति देते हुए बच्चे।
सिर्फ पढाई करें, बाधाओं की चिंता छोड दें, सरकार उठायेगी शिक्षा का खर्च - मुख्यमंत्री श्री चौहान
3 February 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहां स्थानीय माडल स्कूल में प्रेरणा संवाद के बाद विद्यार्थियों द्वारा पूछे गये सवालों के जवाब दिये और उनकी शंकाओं का समाधान किया। विद्यार्थियों ने लक्ष्य तय करने, समय का प्रबंधन करने, पढ़ाई के लिये दिनचर्या तय करने, स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और अच्छे नंबर लाने का तनाव दूर करने के तरीकों से संबंधित सवाल पूछे। मुख्यमंत्री ने एक शिक्षक, पालक और विद्यार्थियों के मामा के रूप में सहजता के साथ विद्यार्थियों के सवालों के जवाब दिये और उनकी शंकाओं का समाधान किया। सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के 11वीं कक्षा के छात्र श्री अंकित पटेल ने पूछा कि क्या मुख्यमंत्री बनने के लिये कोई लक्ष्य तय किया था। इस पर मुख्यमंत्री ने अपने गाँव में बचपन में खेती और मजदूरों का मेहनताना बढ़ाने के लिये किये आंदोलन की चर्चा की। उन्होंने कहा कि अन्याय को किसी भी रूप में सहना सही नहीं है। उन्होने कहा कि किसी भी काम के प्रति लगन और प्रतिबद्धता जरूरी है, यही काम आती है। डी.ए.वी. उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टी.टी.नगर की कॉमर्स संकाय की 12वीं कक्षा की छात्रा सुश्री दिपांशी पांडे ने स्कूलों में विद्यार्थियों की विशेष रूप से बेटियों की सुरक्षा के संबंध में सवाल किये। मुख्यमंत्री ने बताया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा संबंधी सभी उपायों को सुदृढ़ किया गया है। छात्रावासों में प्रवेश द्वार पर सीसीटीव्ही कैमरे लगाये जा रहे हैं। छात्रावास आने-जाने वाले रास्तों में पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जा रही है। उन्होंने बेटियों की गरिमा को धूमिल करने वाले दरिदों को फाँसी की सजा देने के लिये बनाये गये कानूनी प्रावधान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समाज को भी नैतिक आंदोलन चलाने की आवश्यकता है। इससे सुरक्षा के लिये एक स्वस्थ वातावरण बनेगा।
सिर्फ कर्म पर ध्यान दें सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय के 11वीं के छात्र श्री आनंद लोधी ने मुख्यमंत्री से पूछा कि एक दिन में बहुत सारे काम करने के बावजूद उन्हें तनाव क्यों नहीं होता। इस पर मुख्यमंत्री ने गीता का श्लोक पढ़ते हुये बताया कि सिर्फ कर्म करने पर हमारा अधिकार है, परिणाम पर नहीं। इसलिये परिणाम पर ध्यान केन्द्रित करने के बजाय अपने कर्म पर ध्यान दें और यही दृष्टि जीवन में अपनायें तो तनाव नहीं होगा। दसवीं कक्षा की छात्रा सुश्री पूजा कानस ने मुख्यमंत्री से कहा कि हर स्कूल में खेल सुविधा और खेल के मैदान होना चाहिये। इस पर सहमति व्यक्त करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ खेल भी जरूरी है। शासकीय विद्यालयों में खेल सुविधाएँ उपलब्ध कराई जायेंगी। मन को स्वस्थ रखने के लिये खेलों से जुड़े रहना जरूरी है। मॉडल हायर सेकेण्डरी स्कूल के श्री ऋतिक विश्वकर्मा ने मुख्यमंत्री से पूछा कि यदि अच्छे नंबर नहीं आ पाये तो माता-पिता की क्या प्रतिक्रिया होना चाहिये। इस पर मुख्यमंत्री ने सभी अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को किसी भी प्रकार का तनाव नहीं दें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि माता-पिता केवल लाड़-प्यार के कारण बच्चों को डाँटते है ताकि वे सजग और चैतन्य रहें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि केवल मेहनत और अच्छे से अच्छे प्रदर्शन की कोशिश करें, अच्छे नंबर अवश्य आयेंगे। विद्या विहार हायर सेकेण्डरी स्कूल की 11वीं की छात्रा सुश्री प्रियंका ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि ज्यादा से ज्यादा बच्चे इंजीनियरिंग की शिक्षा लें, इसके लिये आईआईटी में सीट बढ़ाई जानी चाहिये। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसदिशा में कोशिश की जायेगी। सुभाष उत्कृष्ट हायर सेकेण्डरी स्कूल के 11वीं के छात्र श्री शिवालाल मंडलोई ने मुख्यमंत्री से पूछा कि शिक्षा व्यवस्था में व्यवहारिक शिक्षा को शामिल करने के लिये कौन से सुधार किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के तीन उद्देश्य है ज्ञान देना, कौशल देना और नागरिक संस्कार देना। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में हम ज्ञान दे रहें हैं। अब कौशल देने पर भी ध्यान केन्द्रित किया गया है। भोपाल में 600 करोड़ रूपये की लागत से ग्लोबल स्किल संस्थान जुलाई से काम करना शुरू कर देगा। इसके अलावा उत्कृष्ट औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान खोले जा रहे हैं। शिक्षा पद्धति को मूल्य आधारित बनाने के लिये कोशिश की जा रही है। स्कूल-कॉलेजों में कॅरियर परामर्श की व्यवस्था भी की जा रही है। डी.ए.वी हायर सेकेण्डरी स्कूल की 12वीं की छात्रा सुश्री मोनिका यादव ने सवाल किया कि शालाओं में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिये सरकार ध्यान दे रही है, लेकिन कोचिंग संस्थाओं के आस-पास सुरक्षा व्यवस्था के लिये कौन से उपाय किये जा रहे हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन शहरों में कोचिंग केन्द्र हैं, उनके आने-जाने वाले रास्तों पर सीसीटीव्ही कैमरे लगाने और वहाँ पर लगातार पुलिस पेट्रोलिंग की व्यवस्था की जायेगी। इसके अलावा डॉयल-100 वाहनों को भी विशेष निर्देश इस संबंध में दिये गये हैं।
जरूरी है समय प्रबंधन मे-फ्लावर स्कूल के 9वीं कक्षा के छात्र श्री अंकित ने पूछा कि व्यवहारिक ज्ञान देने के लिये कौन-कौन से प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार करते हुए पढ़ाई के तरीकों में बदलाव लाने पर विचार किया जा रहा है। मॉडल हायर सेकेण्डरी स्कूल की 12वीं कक्षा की छात्रा सुश्री गुंजन बघेल ने मुख्यमंत्री से समय प्रबंधन के संबंध में सवाल करते हुये कहा कि मुख्यमंत्री के नाते वे स्वयं अपना समय प्रबंधन कैसे करते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने सुबह साढ़े पाँच बजे से लेकर रात साढ़े ग्यारह बजे तक की दिनचर्या और कार्यप्रणाली के संबंध में विस्तार से बताया। इसमें सुबह सैर करना, योग एवं प्राणायाम करना, प्रशासनिक कार्यों की तैयारी-बैठकें करना और प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से संवाद करना, लोगों-प्रतिनिधि मंडलों और विभिन्न संगठनों से मिलना, मंत्रालय में शासकीय कार्य का संपादन करना जैसे कार्यों को विस्तार से बच्चों को बताया। उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार जिलों के दौरों के समय आम लोगों से जिले में सुशासन के स्तर और नये विकास कार्यक्रमों एवं योजनाओं की आवश्यकता के संबंध में जानकारी मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि एक मुख्यमंत्री और अभिभावक के रूप में वे अपने परिवार के लिये कैसे समय निकालते हैं और किस प्रकार सार्वजनिक और निजी जीवन में संतुलन बनाये रखते हैं।

मुख्यमंत्री श्री चौहान का विद्यार्थियों के साथ प्रेरणा संवाद
3 February 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहाँ माडल हायर सेकेण्डरी स्कूल में प्रेरणा संवाद कार्यक्रम में शालेय विद्यार्थियों से प्रेरक संवाद करते हुए उन्हें परीक्षाओं में सफल तथा उज्जवल भविष्य के लिये शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया। माडल स्कूल में अपने छात्र जीवन के अनुभवों को विद्यार्थियों के साथ साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने परीक्षाओं में शानदार सफलता के लिये उन्हें महत्वपूर्ण सूत्र बताये। इस कार्यक्रम को दूरदर्शन और आकाशवाणी के माध्यम से सभी जिलों के विद्यार्थियों ने सुना। मुख्यमंत्री ने सफलता के अमूल्य मंत्र बताते हुये कहा कि सबसे जरूरी है - आत्मविश्वास क्योंकि आत्मविश्वास से शक्ति मिलती है और अपनी क्षमता पहचानने का ज्ञान बढ़ता है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुये कहा कि हर विद्यार्थी में भरपूर क्षमता और प्रतिभा है। सिर्फ इसे पहचानकर आगे लाने की आवश्यकता है। उन्होंने तुलसीदास द्वारा रामायण की रचना करने और महाकवि कालिदास का उदाहरण देते हुये कहा कि इन दो महान व्यक्तियों में भरपूर क्षमता और प्रतिभा थी। जिसे उन्होंने स्वयं पहचाना और आज पूरी दुनिया उनका साहित्य पढ़ती है। मुख्यमंत्री ने अपनी कक्षा ग्यारवीं-डी का स्मरण करते हुए कहा कि 11वीं की परीक्षा के समय वे आपातकाल का विरोध करते हुये जेल चले गये थे, लेकिन आत्मविश्वास के साथ पूरी मेहनत करके परीक्षा दी और भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र तथा जीव विज्ञान में अच्छे नंबरों से उत्तीर्ण हुये। उसके बाद दर्शन शास्त्र में स्नातकोत्तर में भी अच्छे नंबरों से पास हुये। श्री चौहान ने विद्यार्थियों से कहा कि आत्मविश्वास के साथ सबसे जरूरी है लक्ष्य तय करना। उन्होंने कहा कि लक्ष्य तय किये बिना काम करने से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते। लक्ष्य हमेशा ऊँचा होना चाहिये। उन्होंने कहा कि लक्ष्य तय करने के साथ ही उसे प्राप्त करने का एक रोडमैप बनाना भी जरूरी है। अपने बनाये रोडमैप पर बिना किसी भटकाव के चलना आवश्यक शर्त है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई में कभी-कभी मन भटकना स्वाभाविक है। इसलिये सचेत रहते हुए मन की एकाग्रता जरूरी है। उन्होंने अपने पढ़ाई के दिनों को याद करते हुये बताया कि कैसे परीक्षा के समय मन के भटकाव पर उन्होंने दृढ़ निश्चय के साथ काबू किया। श्री चौहान ने कहा कि लक्ष्य पर एकाग्रता से सफलता मिलती है। उन्होंने गुरू द्रोणाचार्य और शिष्य अर्जुन की कथा सुनाते हुये कहा कि अपने लक्ष्य पर एकाग्र होने और अपनी पूरी ऊर्जा का उपयोग करने से सफलता अवश्य मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे हमेशा सकारात्मक सोच और ऊर्जा से भरे रहें। किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचारों से दूर रहें। खूब पढ़ें, आगे बढ़ें और प्रसन्नता के साथ सार्थक जीवन जीने का मार्ग तय करें। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसे सभी उपाय किये हैं जिससे विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने और आगे बढ़ने में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आये। उन्होंने मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना का संदर्भ देते हुये कहा कि 70 प्रतिशत अंकों के साथ राष्ट्रीय स्तर के उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश लेने पर उच्च शिक्षा की पढ़ाई का खर्च सरकार भरेगी। उन्होंने विद्यार्थियों का आव्हान किया कि वे 85 प्रतिशत नंबर लायें और प्रोत्साहन के रूप में सरकार से लेपटॉप भी प्राप्त करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के बच्चों में इतनी क्षमता और प्रतिभा है कि वे बड़े से बड़े पदों पर पहुंच सकते हैं। विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के सपने को पूरा करने के लिये सरकार हर जरूरी कदम उठायेगी। उन्होंने विद्यार्थियों का आव्हान किया कि अपने बुजुर्गों, माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करें। उन्होंने अपने शिक्षक श्री रतनचंद्र जैन का उल्लेख करते हुये बताया कि कैसे उन्होंने पढ़ना, भाषण देने की कला एवं रामायण की चौपाई का व्याख्यान करना सिखाया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उत्साहपूर्वक प्रसन्नता के साथ पढ़ाई करें। इससे पहले मुख्यमंत्री ने मॉडल स्कूल में स्थापित स्मार्ट क्लास रूम और ई-लायब्रेरी का अवलोकन किया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री कुँवर विजय शाह, तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दीपक जोशी, माध्यमिक शिक्षा मंडल के अध्यक्ष श्री एस.आर. मोहंती, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा श्रीमती दीप्ति गौड़ मुखर्जी उपस्थित थे।
एक क्लिक में 50 लाख विद्यार्थियों को मिली 344 करोड़ की राशि प्रेरणा संवाद के पहले मुख्यमंत्री ने शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिये बनाये गये सूचना प्रौद्योगिकी आधारित नवाचारों का शुभारंभ किया। उन्होंने मिशन वन-क्लिक योजना के अंतर्गत 50 लाख विद्यार्थियों को 344 करोड़ रुपये की राशि एक क्लिक में उनके खातों में ट्रांसफर की। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010 से शिक्षा विभाग द्वारा विभागों की 30 प्रकार की छात्रवृत्तियों का वितरण शिक्षा पोर्टल के माध्यम से किया जा रहा है। इससे पहले यह राशि कोषालय से बिल द्वारा विद्यार्थियों को दी जाती थी। अब इन सभी छात्रवृत्तियों का भुगतान मिशन वन-क्लिक के माध्यम से बैंको द्वारा सीधे छात्रों के खाते में किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में एक करोड़ 60 लाख विद्यार्थियों को एक हजार 42 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई हैं।
शाला सिद्धि अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री ने 'शाला सिद्धि अभियान'' कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसमें 46 मानकों पर शालाओं का मूल्यांकन होगा। इनके आधार पर शालाओं का अकादमिक उन्नयन किया जायेगा। अच्छा कार्य कर रही शालाओं का प्रोत्साहन किया जायेगा और उन्हें शाला-सिद्धि पुरस्कार दिया जायेगा। उन्होने एम.पी. कैरियर मोबाइल एप का भी शुभारंभ किया। दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को उनके कैरियर संबंधी मार्गदर्शन के लिये 'एम.पी. कैरियर मोबाइल एप' तैयार किया गया है। इसके माध्यम से सभी विद्यार्थियों का अभिरुचि परीक्षण करके नये सत्र में अप्रैल माह में विद्यार्थियों को रिपोर्ट दी जायेगी तथा रिपोर्ट के आधार पर पालकों एवं विद्यार्थियों की काउंसिलिंग भी की जायेगी। इसी प्रकार विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान 'विमर्श पोर्टल' के माध्यम से किया जायेगा। इस पोर्टल के माध्यम से विद्यार्थी महत्वपूर्ण विषयों पर वीडियो देख पायेंगे और मेरिट में आने वाले विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकायें, पुराने प्रश्नपत्र तथा मॉडल उत्तर आदि जान सकेंगे। इस पोर्टल के माध्यम से विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षक एवं स्कूलों को भी अकादमिक दृष्टि से सुदृढ़ बनाया जायेगा। वर्ष में दो बार स्कूल अपना स्व-मूल्यांकन भी इसके माध्यम से कर सकेंगे। 10वीं-12वीं के परीक्षा परिणामों के विश्लेषण के लिये सी.एम. डेशबोर्ड का शुभारंभ किया गया। इससे शैक्षणिक गुणवत्ता के लिये कदम उठाये जायेंगे। उन्होने विद्यार्थियों के सवालों के जवाब भी दिये। विद्यार्थियों से संवाद के बाद उन्होंने छठवीं और नवीं के विद्यार्थियों को नि:शुल्क सायकिलें प्रदान की। लोक शिक्षण आयुक्त श्री नीरज दुबे ने आभार व्यक्त किया।

राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी द्वारा पवई में पॉलिटेक्निक कॉलेज भवन का लोकार्पण
2 February 2018
तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दीपक जोशी ने शुक्रवार को शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज पवई (जिला पन्ना) में 8 करोड़ रुपये लागत के नवीन भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि युवाओं को रोजगार गतिविधियों से जोड़ने के लिये राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक विकासखण्ड-स्तर पर आईटीआई खोले जाएंगे। श्री जोशी ने पॉलीटेक्निकल कॉलेज में कम्प्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेलीकम्युनिकेशन के 2 नये कोर्स आगामी सत्र से प्रारम्भ करने तथा छात्र-छात्राओं के लिये 50-50 सीटर 2 छात्रावास निर्माण कराने की घोषणा की। पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विमुक्त-घुमक्कड़ एवं अर्द्ध-घुमक्कड़ जनजाति कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती ललिता यादव ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री रविराज सिंह यादव, विधायक श्री मुकेश नायक, एवं श्री महेन्द्र सिंह बागरी, बुंदेलखण्ड विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री महेन्द्र प्रताप सिंह, सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
ऐशबाग माध्यमिक कन्या स्कूल में स्मार्ट क्लास शुरू होगी
2 February 2018
सहकारिता, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री विश्वास सारंग ने शासकीय कन्या माध्यमिक शाला बाग फरहत अफजा के नवीन भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने समारोह में कहा कि शासकीय शालाओं के भवन, खेल मैदान और परिसर को विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विद्यालयों में डिजीटल टेक्नोलॉजी के माध्यम से एडवांस टीचिंग लर्निग के आधार पर स्मार्ट क्लासेस भी शुरू कराई जा रही है। ऐशबाग कन्या स्कूल में जल्दी ही स्मार्ट क्लास शुरू की जाएगी। राज्य मंत्री श्री सारंग ने कहा कि कन्या माध्यमिक शाला बाग फरहत अफजा में 8 कक्ष के नवीन भवन की जरूरत थी। इस हिसाब से 30 लाख रूपये लागत से भवन का निर्माण करवाया गया है। कार्यक्रम में पार्षद और जोन अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी गुप्ता, श्री विमलेश ठाकुर, श्री नितिन पाठक और श्री मुकेश साहू सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, विद्यालय स्टाफ और छात्राएँ मौजूद थीं
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का विद्यार्थियों से प्रेरणा संवाद 3 फरवरी को
2 February 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान 3 फरवरी को सुबह 11 बजे से शासकीय मॉडल स्कूल, टी.टी. नगर भोपाल में विद्यार्थियों से प्रेरणा संवाद करेंगे। श्री चौहान विद्यार्थियों को बेहतर परीक्षा परिणाम देने के लिये प्रेरित करेंगे। प्रेरणा संवाद में कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं के विद्यार्थी शामिल होंगे। इसके पहले 15 से 30 जनवरी तक सभी जिलों के स्कूलों में प्रेरणा संवाद हो चुका है। मुख्यमंत्री श्री चौहान प्रेरणा संवाद में मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना और प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना सहित अन्य योजनाओं के संबंध में विद्यार्थियों से चर्चा करेंगे। श्री चौहान आगामी परीक्षाओं के दौरान तनाव रहित समय प्रबंधन और जीवन में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के टिप्स भी देंगे। प्रेरणा संवाद का दूरदर्शन मध्यप्रदेश और आकाशवाणी पर सीधा प्रसारण किया जायेगा। विमर्श पोर्टल एवं कॅरियर मोबाइल एप का शुभारंभ मुख्यमंत्री श्री चौहान प्रेरणा संवाद में एम.पी. कॅरियर मोबाइल एप और विमर्श पोर्टल सहित अन्य योजनाओं का शुभारंभ करेंगे। एम.पी. कॅरियर मोबाइल एप विद्यार्थियों की अभिरुचि के परीक्षण के लिये तैयार किया गया है। इससे विद्यार्थी आगे की पढ़ाई किस विषय में करें, इस संबंध में जान सकेंगे। विद्यार्थियों की अभिरुचि परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर पालकों एवं विद्यार्थियों की काउंसिलिंग भी की जायेगी। कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों का अभिरुचि परीक्षण फरवरी में होगा। विमर्श पोर्टल विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं स्कूलों को अकादमिक दृष्टि से सुदृढ़ बनाने के लिये विमर्श पोर्टल तैयार किया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से विद्यार्थी अपनी जिज्ञासाओं और समस्याओं को साझा कर समाधान प्राप्त कर सकेंगे। पोर्टल पर विद्यार्थियों के लिये महत्वपूर्ण विषयों के वीडियो, मेरिट में आने वाले विद्यार्थियों की उत्तर-पुस्तिकाएँ, विगत वर्षों के प्रश्न-पत्र और मॉडल उत्तर उपलब्ध रहेंगे। इनसे विद्यार्थी किसी भी विषय-वस्तु को आसानी से समझ सकेंगे। शिक्षकों द्वारा किये जा रहे नवाचारों एवं अध्यापन में आ रही समस्याओं को चिन्हित कर पोर्टल पर विशेषज्ञों से साझा किया जा सकेगा। स्कूल अपना स्व-मूल्यांकन प्रति माह करेंगे। इसमें मूल्यांकन और परि-सम्पत्तियों की तुलना में छात्रों के गुणात्मक विकास को प्राथमिकता दी गई है। वर्ष में दो बार इसका बाह्य मूल्यांकन भी करवाया जायेगा।
एनएसएस शिविर में बच्चे गांव के परिवारों के साथ रहें- राज्यपाल श्रीमती पटेल
1 February 2018
राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने राष्ट्रीय सेवा योजना के विद्यार्थियों से कहा है कि गाँवों में शिविर के दौरान ग्रामीण परिवारों के साथ रहें। एक परिवार के साथ दो-तीन बच्चे रहें, इससे बच्चों को गांवों में रहने वाले परिवारों की स्थिति और कठिनाइयों की सही तरह से जानकारी प्राप्त हो सकेगी। राज्यपाल ने कहा कि एनएसएस के शिविर में सीखी अच्छी बातों का अपने जीवन में पालन भी करें। राज्यपाल ने आज राजभवन में नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड 2018 में भाग लेकर लौटे राष्ट्रीय सेवा योजना के विद्यार्थियों एवं राष्ट्रीय सेवा योजना का सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले स्वयंसेवकों से भेंट के दौरान यह बात कही। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का उद्देश्य युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाना है। एनएसएस के माध्यम से विद्यार्थी शिक्षा के साथ राष्ट्र निर्माण एवं चेतना के लिए सामुदायिक कार्यों में सहभागी बन सकते हैं। अपना व्यक्तित्व विकास सुनिश्चित कर सकते हैं। राज्यपाल ने बच्चों से चर्चा के दौरान शिविर के अनुभवों के बारे में पूछा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यह संकल्प लेकर घर और समाज में जायें कि हम विवाह में व्यर्थ खर्च नहीं करेंगे तथा दहेज ना लेंगे और ना देंगे और गांवों एवं शहरों में 8वीं के बाद शिक्षा छोड़ने वाली छात्राओं को आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित करेंगे। राज्यपाल ने कहा कि अपने शहर और गांव में जाकर एक स्कूल का चयन करें, वहां वृक्षारोपण करें तथा अपने गांवों में कुपोषित बच्चों और प्रसूता महिलाओं की सेवा में अपनी सहभागिता निभायें। उन्होंने कहा कि देश सेवा के साथ अपने माता-पिता के कार्यों में भी हाथ बटायें और बुर्जगों की सेवा करें। सभी बच्चों ने राज्यपाल को अपना परिचय दिया तथा शिविर से प्राप्त अनुभव बताये। राज्यपाल ने बच्चों को स्मृति चिन्ह भेंट किये। राष्ट्रीय सेवा योजना के राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त स्वयंसेवक श्री अजय नारायण पटेल तथा कु. उपासना मिश्रा ने राज्यपाल को उन्हें प्राप्त पुरस्कारों का अवलोकन कराया। कार्यक्रम में राज्य एनएसएस अधिकारी डॉ.आर,के.विजय ने रोसेयो की गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री बी.आर. नायडू और आयुक्त श्री नीरज मंडलोई, भी उपस्थित थे
स्कूलों की 30 प्रकार की छात्रवृत्ति वितरण के लिये मिशन वन क्लिक
29 January 2018
प्रदेश में 8 शासकीय विभाग की 30 प्रकार की छात्रवृत्ति समग्र शिक्षा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन वितरित करने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। इस व्यवस्था में प्रदेश की समस्त सरकारी और प्रायवेट शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत एक करोड़ 48 लाख विद्यार्थियों की प्रोफाइल को ऑनलाइन किया गया है। इसके आधार पर छात्रवृत्ति की गणना कर उसका वितरण सुनिश्चित किया गया है। इसके लिये प्रत्येक स्कूल के विद्यार्थियों का समग्र यूनिक आई.डी. के आधार पर उनके स्कूल के डाइस कोड के साथ मेपिंग कर कक्षावार और स्कूलवार नामांकन ऑनलाइन लेने का सिस्टम 'समग्र शिक्षा पोर्टल'' नेशनल इनफार्मेशन सेंटर (एनआईसी) के माध्यम से तैयार किया गया है। पोर्टल में प्रत्येक छात्र की प्रोफाइल में जाति, माता-पिता का व्यवसाय, परिवार की वार्षिक आय, बीपीएल स्टेटस, छात्रावास स्टेटस और छात्र के गत वर्ष के परीक्षा परिणाम को शामिल किया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ऑनलाइन छात्रवार एवं कक्षावार नामांकन एवं उनका प्रोफाइल डिजिटलाइज्ड होने के कारण सभी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति वितरण के साथ-साथ विभाग की अन्य योजनाओं का क्रियान्वयन भी ऑनलाइन किया गया है। डायरेक्ट बेनिफिट की पहल को आगे बढ़ाते हुए कक्षा-एक से कक्षा-12 तक अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों को 30 प्रकार की छात्रवृत्तियाँ, साइकिल वितरण, गणवेश और लेपटॉप आदि की राशि भी सीधे उनके खाते में भेजी गयी हैं। यह प्रक्रिया प्रभावशील हो जाने से छात्रवृत्ति की राशि विद्यार्थियों को समय पर मिलने लगी है। साथ ही, मध्यस्थों की भूमिका भी समाप्त हो गयी है। मिशन वन क्लिक में प्रत्येक छात्र की यूनिक आई.डी. होने से शिक्षण संस्थाओं में दोहरा प्रवेश और छात्रवृत्ति संबंधी दोहरीकरण की समस्या भी समाप्त हो गई है। पूर्व में एक ही विद्यार्थी के दो अलग-अलग शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश होने और छात्रवृत्ति में गडबड़ी होने की शिकायतें मिला करती थीं। अब छात्रवृत्ति वितरण को आधार से जोड़ा जा रहा है।
राज्य मंत्री श्री पाठक ने हाई स्कूल भवन का लोकार्पण किया
28 January 2018
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्यमंत्री श्री संजय सत्येन्द्र पाठक ने शनिवार को कटनी जिले के कांटी ग्राम में हाईस्कूल भवन का लोकार्पण किया। श्री पाठक यहाँ हायर सेकेण्डरी स्कूल में प्रेरणा संवाद कार्यक्रम में भी शामिल हुए। राज्य मंत्री ने प्रेरणा संवाद में विद्यार्थियों से अपनी बात साझा की। श्री पाठक ने विद्यार्थियों से कहा कि वे दृढ संकल्प के साथ लक्ष्य को पाने की तैयारी करेंगे, तो सफलता जरूर मिलेगी। राज्य मंत्री श्री पाठक ने विजयराघवगढ़ से कारी तलाई तक 23 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाले क्रॉन्क्रीट रोड का भूमिपूजन भी किया
मुख्यमंत्री श्री चौहान सहरिया आवासीय विद्यालय में विद्यार्थियों से मिले
26 January 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान सपत्निक गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर गुरूवार को गुना में एकलव्य सहरिया बालक-बालिका छात्रावास पहुँचे। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में सफलता के टिप्स देते हुए कहा कि सूरज उगने से पहले बिस्तर से उठना चाहिए और रात को जल्दी सोना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छी तरह पढ़ाई करें, पढ़ाई-लिखाई के खर्च की सारी व्यवस्था राज्य सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि जब खूब पढ़ोगे, तभी ज्ञानवान बनोगे। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि आपके हाथों में हुनर होना चाहिये। आपको उत्कृष्ट शिक्षा दिलवाने के लिये ही प्रदेश में एकलव्य आवासीय विद्यालयों की स्थापना की गई है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने विद्यार्थियों से कहा कि मेडीकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलीटेक्निक कॉलेज या फिर विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए जितनी भी फीस की आवश्यकता होगी, उतनी फीस राज्य सरकार द्वारा भरी जाएगी। उन्होंने कहा कि जरूरत इस बात कि है कि इन संस्थानों में आपका एडमिशन हो जाए। इसके लिए आपको सिर्फ खूब मेहनत करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने आगामी परीक्षाओं का स्मरण कराते हुए बालक-बालिकाओं से कहा कि परीक्षाओं के लिए खूब मन लगा कर पढ़ाई करें। इतनी ऊंची उड़ान भरें कि आप पर आपके घरवालों और गांववालों को गर्व हो। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग के बच्चों को पढ़ाई-लिखाई करके ऊंचाईयों पर पहुंचना चाहिए। मुख्यमंत्री ने बालक-बालिकाओं से आवासीय विद्यालय की व्यवस्थाओं की जानकारी लेते हुए पूछा कि छात्रावास में खाना कैसा मिलता है, सभी विषयों की किताबें प्राप्त हुईं हैं अथवा नहीं, अच्छी पढ़ाई क्यों करनी चाहिए ? बालक-बालिकाओं ने मुख्यमंत्री के सहज सवालों का सहज ढंग से जवाब दिया। मुख्यमंत्री एवं उनकी धर्मपत्नी ने छात्रावास में बालिकाओं को रात का भोजन परोसा और अपने हाथों से भी खिलाया। मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टर को एकलव्य आवासीय विद्यालय की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिये। इस मौके पर विधायक श्री पन्नालाल शाक्य और श्रीमती ममता मीणा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अर्चना चौहान, नगर-पालिका अध्यक्ष श्री राजेन्द्र सलूजा, एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे।
एक लाख स्कूली बच्चों ने जंगल में पढ़ा वन-जागरूकता का पाठ
23 January 2018
भावी पीढ़ी को वन और वन्य-प्राणियों के संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा आरंभ अनुभूति कार्यक्रम में इस वर्ष एक लाख से अधिक बच्चों ने ईको कैम्प में भाग लिया। ईको पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा दिसम्बर-जनवरी में चलाये गये अनुभूति कार्यक्रम में बच्चों को प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारण्य और वन क्षेत्रों में शिविर लगाकर पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिकीय तंत्र, जैव-विविधता, पशु-पक्षी, वनौषधि और इनके न रहने से होने वाले नुकसान की जानकारी दी गई। गत वर्ष से आरंभ हुए अनुभूति कार्यक्रम में पिछले साल करीब 54 हजार स्कूली बच्चों ने भाग लिया था। इस वर्ष हुए कार्यक्रमों में मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष, प्रदेश के 4 मंत्री, सांसद और 38 विधायक, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और मध्यप्रदेश बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष ने भी भाग लेकर बच्चों की हौसला अफजाई की। मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव वन, वन बल प्रमुख, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, महालेखाकार मध्यप्रदेश, न्यायाधीश, संभागायुक्त, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक भी शामिल हुए। अनुभूति कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूली बच्चों को जंगल में ही शिविर लगाकर वन और वन्य-प्राणियों के संरक्षण की जानकारी देना है, ताकि इनके संरक्षण के लिये एक संवेदनशील पीढ़ी तैयार हो सके। बच्चों की जागरूकता का असर उनके घर-परिवार और समाज पर पड़ने के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों पर भी पड़ेगा
कक्षा 1 और 2 के बच्चों की अभ्यास पुस्तिका पर प्राप्तांक की जगह अंकित होगी स्माइली 23 January 2018
प्रदेश के सरकारी प्रायमरी और मिडिल स्कूलों में होने वाले वार्षिक मूल्यांकन की तिथियाँ राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा घोषित की गई हैं। कक्षा 3 से 8 तक का वार्षिक मूल्यांकन का कार्य इस वर्ष 7 मार्च से 31 मार्च तक होगा। कक्षा 1 और 2 के विद्यार्थियों का मूल्यांकन उत्तर-पुस्तिका के स्थान पर अभ्यास पुस्तिका के आधार पर किया जायेगा। छोटे बच्चों को भयमुक्त वातावरण में आंनददायी तरीके से मूल्यांकन के लिये उनकी अभ्यास पुस्तिकाओं में प्राप्तांक के स्थान पर स्माइली अंकित किये जायेंगे। इस वर्ष नया शिक्षण सत्र एक अप्रैल से शुरू होगा। वार्षिक मूल्यांकन और नये शिक्षण सत्र की तैयारियों के संबंध में जिला शिक्षाधिकारियों और राज्य शिक्षा केन्द्र के जिला समन्वयकों को निर्देश जारी किये गये हैं। विद्यार्थियों के मूल्यांकन के संबंध में नेशनल केरीकुलम फ्रेम वर्क में अनुशंसा की गई है कि भयमुक्त वातावरण में बच्चों के सीखने-सिखाने की प्रक्रिया एवं मूल्यांकन किया जाये। अनिवार्य शिक्षा अधिनियम (आरटीई-2009) में भी विद्यार्थियों के सतत एवं व्यापक मूल्यांकन किये जाने का प्रावधान किया गया है। स्कूल शिक्षा मंत्री कुँवर विजय शाह द्वारा दिये गये निर्देशों के अनुसार मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। सरकारी स्कूलों की कक्षा 1 एवं 2 में बच्चों का 50 प्रतिशत लिखित एवं 50 प्रतिशत मौखिक रूप से मूल्यांकन किया जायेगा। इसमें हिन्दी, गणित एवं अंग्रेजी की अभ्यास-पुस्तिका में लिखित रूप से कार्य करवाया जायेगा। लर्निंग आउटकम्स की आवश्यकतानुसार बच्चों की उपलब्धि का स्तर मौखिक मूल्यांकन द्वारा किया जायेगा और इन्हीं मूल्यांकन के आधार पर विद्यार्थियों के नवीन प्रगति-पत्रक भरे जायेंगे। सरकारी स्कूलों में हिन्दी, गणित और अंग्रेजी के लिये लर्निंग आउटकम्स आधारित नवीन प्रगति-पत्रक तैयार किये गये हैं। इनमें शिक्षक द्वारा बच्चे की उपलब्धि का स्तर स्माइली चिन्हों द्वारा अंकित किया जायेगा। विद्यार्थी ने दक्षता प्राप्त कर ली है तो उसके लिये 3 स्माइली प्रदान किये जायेंगे। अगर विद्यार्थी किसी दक्षता को सीखने के स्तर पर है तो दो स्माइली चिन्ह और विद्यार्थी के अधिक प्रयास की जरूरत है तो उसके प्रगति-पत्रक पर एक स्माइली चिन्ह अंकित किया जायेगा। कक्षा 1 और 2 के प्रगति-पत्रक में बच्चे के व्यक्तिगत और सामाजिक गुणों में उपलब्धि की स्थिति भी अंकित की जायेगी। सरकारी स्कूलों में कक्षा 3 एवं 4 के मूल्यांकन का समय प्रात: 11.30 से दोपहर 2 बजे तक और कक्षा 6 और 7 का मूल्यांकन प्रात: 11.30 से दोपहर 2.30 बजे तक होगा। कक्षा 5वीं का मूल्यांकन प्रात: 8 बजे से प्रात: 10.30 बजे के बीच और कक्षा-8वीं का मूल्यांकन प्रात: 8 बजे से प्रात: 11 बजे के बीच होगा। राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक श्री लोकेश जाटव ने बताया कि कक्षा 1 से 4 तक और कक्षा 6 और 7 की उत्तर-पुस्तिकाओं का मूल्यांकन, परीक्षाफल और सांख्यिकी निर्माण शाला स्तर पर किया जायेगा। कक्षा 5 और 8 की उत्तर-पुस्तिकाओं का मूल्यांकन निर्धारित मूल्यांकन केन्द्र पर किया जायेगा। इन कक्षाओं का परीक्षाफल एवं सांख्यिकी निर्माण शाला स्तर पर किया जायेगा। सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि कक्षा 1 से 8 का वार्षिक मूल्यांकन परिणाम 30 अप्रैल तक अनिवार्य रूप से किया जाये। शिक्षा का अधिकार अधिनियम का हवाला देते हुए बताया गया है कि शाला में दर्ज बच्चों में से वार्षिक मूल्यांकन में शामिल सभी बच्चों को वर्तमान कक्षा से अगली कक्षा में प्रवेश दिया जाये और एक अप्रैल से इन बच्चों को अगली कक्षा में बैठाकर शिक्षण प्रारंभ करवाया जाये।
क्लास 6 से 12 तक की सभी एनसीईआरटी बुक्स पर आधारित ओपन क्विज
20 January 2018
एनसीईआरटी बुक्स हर विषय के लिए सबसे स्तरीय किताबें मानी जाती हैं । स्कूल स्टूडेंट्स के साथ साथ आईआईटी से लेकर आईएएस तक हर परीक्षा की तैयारी करने वाले भी इन किताबों को जरूर पढ़ते हैं । पर इन किताबों की खास बात ये भी है कि इन किताबों को पढ़ने वाले हर व्यक्ति इन किताबों में अलग अलग तरह की चीजों को महत्वपूर्ण समझता है इसलिए कोई भी कभी इन किताबों को पूरा नहीं पढ़ता । तो आपने एनसीईआरटी किताबों को कितने अच्छे से पढ़ा है यह जाँचने के लिए इस रविवार सेंट्रल लाइब्रेरी में एक विशेष क्विज का आयोजन किया जा रहा है । सिविल सर्विसेज फ़ाउंडेशन कोर्स द्वारा आयोजित इस क्विज में क्लास 6 से क्लास 12 तक की सभी एनसीईआरटी किताबों पर केन्द्रित सवाल पूंछे जाएँगे । स्कूल/कॉलेज तथा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे सभी तरह के लोगों के लिए ओपन इस क्विज में मुख्य रूप से इतिहास,भूगोल,अर्थशास्त्र,राजनीति शास्त्र, विज्ञान व सामाजिक अध्ययन जैसे विषयों से सवाल पूंछे जाएंगे । एक्सीलेंस कॉलेज के शिवम चांडाक व आरजीपीवी के आकाश चौरसिया इस क्विज के क्विज मास्टर होंगे । जबकि नूतन कॉलेज की स्टूडेंट सलोनी राठोर इस क्विज की संयोजक हैं । क्विज में कोई भी व्यक्ति बिना किसी पूर्व रजिस्ट्रेशन के भाग ले सकता है । बस लेने के लिए उसे दो लोगों की टीम बनाकर क्विज के दिन सुबह 9.30 बजे सेंट्रल लाइब्रेरी पहुँचना है । ये प्रतियोगिता पूरी तरह से निःशुल्क है इसलिए इसके लिए कोई रजिस्ट्रेशन शुल्क नहीं लिया जाएगा । प्रतियोगिता के विजेताओं को 6000 रुपये के नगद पुरुसकार व ट्रॉफीज दी जाएंगी । स्थान सीमित होने के कारण सबसे पहले आने वाली केवल 100 टीमें ही इस प्रतियोगिता में भाग ले सकेंगी । कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है :- कार्यक्रम का नाम - एनसीईआरटी क्विज -2018 दिनांक - 21 जनवरी 2018 समय - सुबह 10 बजे स्थान - सेंट्रल लाइब्रेरी भोपाल प्रवेश - निःशुल्क एवं सबके लिए ओपन क्विज मास्टर - शिवम चांडाक व आकाश चौरसिया आयोजक - सिविल सर्विसेज फ़ाउंडेशन कोर्स
निजी स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश के लिये आधार पंजीयन आवश्यक
19 January 2018
शिक्षा का अधिकार कानून के तहत प्रदेश के प्रायवेट स्कूलों की प्रथम कक्षा में नि:शुल्क प्रवेश के लिये वर्ष 2018-19 के शैक्षणिक सत्र की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जायेगी। इस संबंध में केन्द्र सरकार ने आगामी सत्र में नि:शुल्क प्रवेश के लिये अन्य दस्तावेजों के साथ आधार पंजीयन को भी अनिवार्य कर दिया है। मध्यप्रदेश में शिक्षा का अधिकार कानून के तहत प्रायवेट स्कूल की प्रथम कक्षा में नि:शुल्क प्रवेश के लिये ऑनलाइन प्रक्रिया अपनायी जाती है। इसके लिये आवेदक की सुविधा के लिये आर.टी.ई पोर्टल www.educationportal.mp.gov.in/RtePortal पर ऑनलाइन आवेदन-पत्र का प्रारूप उपलब्ध करवाया जाता है। इसके साथ ही प्रदेश के संबंधित जन-शिक्षा केन्द्र, बीआरसी, बीईओ कार्यालय, जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय और जिला शिक्षा केन्द्र कार्यालय से भी आवेदन-पत्र नि:शुल्क उपलब्ध करवाये जाते हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत आवेदक स्वयं पोर्टल पर जाकर निर्धारित फार्म में ऑनलाइन पंजीयन करवा सकते हैं। प्रदेश में शिक्षा के अधिकार कानून के तहत निजी विद्यालयों की प्रथम प्रवेशित कक्षा की न्यूनतम 25 प्रतिशत सीट पर वंचित एवं कमजोर वर्ग के बच्चों के नि:शुल्क प्रवेश का प्रावधान किया गया है। वंचित समूह में अनुसूचित-जाति, अनुसूचित-जनजाति, विमुक्त जाति, वन ग्राम पट्टाधारी परिवार और 40 प्रतिशत से अधिक नि:शक्तता वाले बच्चे शामिल हैं। इसके साथ ही कमजोर वर्ग में गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों के बच्चे निजी विद्यालयों में नि:शुल्क प्रवेश के लिये आवेदन कर सकेंगे। संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र श्री लोकेश कुमार जाटव ने सभी आवेदकों से आग्रह किया है कि वे प्रवेश प्रक्रिया के पूर्व बच्चों के आधार पंजीयन की कार्यवाही निश्चित समय में पूरी कर लें।
कर्मी कल्चर को खत्म कर स्कूल शिक्षा में संविदा शिक्षकों को दिया गया सम्मानजनक पद
19 January 2018
मध्यप्रदेश में राज्य सरकार द्वारा शिक्षण क्षेत्र में कर्मी कल्चर को समाप्त कर अध्यापक संवर्ग का गठन कर शिक्षाकर्मियों और संविदा शाला शिक्षकों को सम्मानजनक पदनाम एवं वेतनमान दिया गया है। प्रदेश में वर्ष 1994 से 1997 तक पंचायत एवं नगरीय निकायों में शिक्षकों के नियमित रिक्त पदों के विरूद्ध शिक्षा-कर्मी वर्ग-1, वर्ग-2 एवं वर्ग-3 के पद पर एक हजार, आठ सौ एव पाँच सौ रूपये के मासिक मानदेय पर नियुक्ति की जाती थी। इसके बाद से वर्ष 1998 में विधिवत नियम बनाते हुए स्थानीय निकायों (ग्रामीण एवं नगरीय निकायों) में वर्ष 2003 तक शिक्षाकर्मी वर्ग-1 को 3600, वर्ग-2 को 2990 और वर्ग-3 को 2350 मासिक वेतन दिया जाता था। वर्तमान सरकार ने 1 अप्रैल 2007 से अध्यापक संवर्ग का गठन किया। सहायक अध्यापक को 9100, अध्यापक को 12000 और वरिष्ठ अध्यापक का मासिक वेतन बढ़ाकर 14 हजार 700 रुपये किया गया। इसके बाद 1 अप्रैल 2013 से अध्यापक संवर्ग को दिये जा रहे वेतनमान में पुन: वृद्धि करते हुए रूपये 4500-25000 का वेतन बैण्ड स्वीकृत किया गया। सहायक अध्यापक, अध्यापक और वरिष्ठ अध्यापक को वेतन बैण्ड पद क्रमश: 1250, 1650 और 1900 संवर्ग वेतन तथा शासकीय कर्मचारियों के बराबर महँगाई भत्ता दिया गया, जिससे अध्यापक संवर्ग के वेतन में 1000 से लेकर 2500 रुपये तक की वृद्धि हुई। यही नहीं अध्यापक संवर्ग को शासकीय कर्मचारियों को देय छठवां वेतनमान, जो 1 सितम्बर 2017 से दिया जाना था, एक वर्ष पूर्व एक जनवरी 2016 से स्वीकृत किया गया। छठवां वेतन मान दिये जाने से नवनियुक्त सहायक अध्यापक, अध्यापक और वरिष्ठ अध्यापक को क्रमश: 23 हजार 500, 29 हजार 500 और 33 हजार रुपये मासिक वेतन प्राप्त हो रहा है। पूर्व से कार्यरत सहायक अध्यापक, अध्यापक एवं वरिष्ठ अध्यापक को क्रमश: 33 हजार 500, 37 हजार और 43 हजार 500 रुपये मासिक वेतन प्राप्त हो रहा है। अध्यापक संवर्ग को 12 और 24 वर्ष की सेवा के बाद क्रमोन्नति का लाभ भी दिया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने छठवें वेतनमान के अनुरूप क्रमोन्नत वेतनमान दिये जाने के आदेश भी जारी कर दिये हैं। संविदा शाला शिक्षक को दो गुना मासिक पारिश्रामिक संविदा शाला शिक्षकों को 1 नवंबर 2011 से संविदा मासिक पारिश्रमिक में 100 प्रतिशत वृद्धि करते हुए दो गुना संविदा मासिक पारिश्रमिक दिया जा रहा है। वर्तमान में संविदा शाला शिक्षक श्रेणी-3 को 5000 रुपये, श्रेणी-2 को 7000 और श्रेणी-1 को 9000 रुपये मासिक संविदा वेतन दिया जा रहा है। साथ ही तीन वर्ष की सेवा अवधि के बाद संविदा शाला शिक्षक को अध्यापक के पद पर नियुक्त किया जाता है और शासकीय कर्मचारियों के समान उन्हें छठवाँ वेतनमान दिया जाता है।
सरकारी स्कूलों के 6 लाख विद्यार्थियों का होगा अभिरुचि परीक्षण
16 January 2018
मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों और अपने कॅरियर के विकल्पों की जानकारी देने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने इस वर्ष 6 लाख विद्यार्थियों का अभिरुचि परीक्षण (इन्टरेस्ट टेस्ट) कराने का निर्णय लिया है। इसके लिये पुणे के श्यामची आई फाउण्डेशन के साथ 3 वर्ष का एमओयू किया गया है। यह एजेंसी अभिरुचि परीक्षण और कॅरियर काउंसिलिंग का कार्य नि:शुल्क रूप से करेगी। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कुछ समय पहले विद्यार्थियों को उनकी अभिरुचि के अनुसार विषय चयन के लिये प्रति वर्ष एक लाख विद्यार्थियों के एप्टीट्यूड टेस्ट और कॅरियर काउंसिलिंग कराने की घोषणा की थी। इसी संदर्भ में स्कूल शिक्षा विभाग ने यह कार्यक्रम तैयार किया है। पुणे की संस्था द्वारा विद्यार्थियों के अभिरुचि परीक्षण और एप्टीट्यूड टेस्ट के लिये मोबाइल एप तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही विभिन्न विभागों से जानकारी प्राप्त कर कॅरियर काउंसिलिंग के लिये संबंधित एजेंसी द्वारा एम.पी. कॅरियर पोर्टल भी तैयार किया जा रहा है। अभिरुचि परीक्षण विद्यार्थियों को अभिरुचि को परिभाषित करने में सहायता करती है। इस टेस्ट के माध्यम से यह पता लगता है कि विद्यार्थी को क्या पसंद है और उनमें मौजूद क्षमता के अनुरूप वह किस दिशा में बढ़ सकते हैं। इनमें कला, विज्ञान, नृत्य, संगीत, खेल और पेंटिंग के विषय हो सकते हैं। एप्टीट्यूड टेस्ट के माध्यम से विद्यार्थी किस विषय का अध्ययन करें, इसके लिये टेस्ट किया जाता है। टेस्ट के बाद उन्हे मार्गदर्शन दिया जाता है। कॅरियर काउंसिलिंग में विद्यार्थियों को यह बताया जाता है कि उनकी रुचि के अनुसार अध्ययन की व्यवस्था किन शिक्षण संस्थानों में मौजूद है और वहाँ किस तरह प्रवेश लिया जा सकता है। इस वर्ष तैयार किये गये कार्यक्रम के अनुसार कक्षा 10वीं में पढ़ने वाले 6 लाख विद्यार्थियों का अभिरुचि परीक्षण फरवरी-2018 में किया जायेगा। परीक्षण का परिणाम 2 अप्रैल, 2018 तक घोषित किया जायेगा। इसी दिन एम.पी. कॅरियर मित्र पोर्टल लांच होगा। दो अप्रैल को ही लगभग एक लाख विद्यार्थियों का एप्टीट्यूड टेस्ट होगा। एप्टीट्यूड टेस्ट का परिणाम जून-2018 में होगा। कॅरियर काउंसिलिंग के लिये शिक्षकों का प्रशिक्षण मई और जून माह में इस वर्ष किया जायेगा। जून माह में ही विद्यार्थियों की कॅरियर काउंसिलिंग और पालकों से चर्चा की जायेगी।
बच्चो की परवरिश के लिये माता-पिता की काउंसलिंग आवश्यक- मंत्री श्रीमती चिटनिस
12 January 2018
महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा है कि बच्चों की परवरिश (पेरेन्टिग) के लिये माता-पिता की काउंसलिंग की आवश्यकता है। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से मॉडयूल विकसित किये जायेंगे। इस संबंध में श्रीमती चिटनिस तथा उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया ने मंत्रालय में विभागीय अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में बताया गया कि मॉडयूल विकसित करने में स्वास्थ्य विभाग, आनंद विभाग, गायत्री परिवार, गुजरात में संचालित बाल विश्वविद्यालय सहित पेरेन्टिग के क्षेत्र में कार्य कर रहे स्वयं सेवी संगठनों तथा विषय विशेषज्ञों का सहयोग लिया जायेगा। बैठक में श्रीमती चिटनिस ने कहा कि परिवार और समाज के बदलते परिवेश तथा प्राथमिकताओं को देखते हुए यह आवश्यक है कि बच्चों के प्रति दायित्व के बेहतर निर्वहन के लिये माता-पिता को मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चो के पोषण, मनोविज्ञानिक आवश्यकताओं, सामाजिक व्यवहार, शारीरिक विकास, सुरक्षा तथा अन्य घटकों पर माता-पिता को आवश्यक तथ्य परक जानकारी उपलब्ध कराते हुए इसे व्यवहार में लाने के लिए प्रेरित किया जायेगा। वातावरण निर्मित करने के लिए कार्यशाला एवं सेमीनार आयोजित किये जाएंगे। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि आँगनवाडी स्तर पर गर्भवती महिलाओं तथा बच्चो की जानकारी उपलब्ध रहती है। इसलिये आँगनवाड़ी के माध्यम से इस प्रकार की काउंसिलंग की व्यवस्था को समाज में व्यापक विस्तार दिया जा सकता है। उच्च शिक्षा मंत्री श्री पवैया ने महाविद्यालीन कक्षाओं के आधारभूत पाठ्यक्रम में इन मॉडयूल्स को शामिल करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि माड्यूल विकसित करने में शहरी, ग्रामीण तथा सामाजिक एवं आर्थिक परिवेश का विशेष ध्यान रखा जाये। बैठक में प्रमुख सचिव महिला बाल विकास श्री जे.एन. कन्सोटिया, उच्च शिक्षा आयुक्त श्री नीरज मंडलोइ, अटल बिहारी बाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रामदेव भारद्धाज, राष्ट्रीय बाल स्वस्थ्य कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. विनय दुबे तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
हर बच्चे की नींव मजबूत करने देवास जिले में लागू हुई शाला सिद्धि योजना
12 January 2018
प्रारंभिक शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिये देवास जिला प्रशासन ने सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में नवाचार के रूप में शाला सिद्धि कार्यक्रम लागू किया है। इसमें बच्चों का गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक स्तर उन्नयन के साथ उनके सर्वांगीण विकास का लक्ष्य भी निर्धारित किया जा रहा है। योजना की विशेषता यह है कि हर बच्चे पर फोकस किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा की नींव अगर मजबूत है तो बच्चे का भविष्य निर्माण बेहतर होगा। पहले योजना में 458 शालाओं का चयन किया गया था, जिसका विस्तार अब सभी 2059 शालाओं में कर दिया गया है। जिले के सभी 59 जन-शिक्षा केन्द्रों तथा प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों के 5500 शिक्षकों को जोड़ कर हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के प्रयास किये जा रहे हैं। शाला में भयमुक्त और आनंददायी वातावरण में अकादमिक और सह-अकादमिक गतिविधियाँ कराने का प्रयास किया जा रहा है ताकि हर विद्यार्थी अपनी आयु के अनुरूप दक्षता एवं कौशल हासिल कर सके। योजना में पहले बच्चे का शैक्षणिक स्तर जाँचा गया, सुधार के क्षेत्र चिन्हित किये गये। अब उन बिन्दुओं पर सुधारने की प्रक्रिया चल रही है। शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। कार्यक्रम का क्रियान्वयन कलेक्टर की सीधी निगरानी में होने के कारण अच्छे परिणाम आने लगे हैं।
15 साल से पुराने स्कूल वाहनों को परमिट देने पर होगी कार्यवाही
9 January 2018
पन्द्रह साल से पुराने स्कूल वाहनों को परमिट देने पर संबंधित आरटीओ के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी। आरटीओ सप्ताह में चार दिन फील्ड में विजिट कर वाहनों की चेकिंग करें। तीस जनवरी तक विशेष चेकिंग अभियान चलायें। गृह एवं परिवहन मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने यह बात परिवहन एवं पुलिस अधिकारियों की बैठक में कही। परिवहन मंत्री श्री सिंह ने कहा कि चेकिंग अभियान के लिये पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध करवाया जायेगा। उन्होंने कहा कि स्पीड गवर्नर और जीपीएस गुणवत्तापूर्ण होने चाहिये। वाहन में बैठने वाले बच्चों की संख्या निर्धारित हो। स्कूल वाहनों की गति 40 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक नहीं होना चाहिये। वाहन चालकों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिलवाया जाये। श्री सिंह ने बताया कि जिला-स्तर पर कलेक्टर, एस.पी. और आरटीओ तथा अनुभाग-स्तर पर एसडीएम और एसडीओपी की कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी पालकों से चर्चा कर बच्चों की सुरक्षा के संबंध में समुचित कदम उठायेगी। उन्होंने कहा कि स्कूल बसों के लिये निर्धारित मापदण्डों का शत-प्रतिशत पालन करवाया जाये। यात्री बसों की टाइमिंग औचित्यपूर्ण हो परिवहन मंत्री ने कहा कि यात्री बसों की टाइमिंग औचित्यपूर्ण हो, जिससे उनके बीच रेस नहीं हो। उन्होंने कहा कि दो बसों के रवानगी के समय में 5 मिनट से कम का गैप नहीं होना चाहिये। इन वाहनों की भी नियमित चेकिंग की जाये। मार्गों का सूत्रीकरण करें परिवहन मंत्री ने कहा कि सभी मार्गों का 30 जनवरी तक सूत्रीकरण करें। उन्होंने कहा कि सूत्रीकरण के बाद आवश्यकतानुसार नये परमिट जारी किये जायें। प्रमुख सचिव परिवहन श्री मलय श्रीवास्तव ने कहा कि इस अभियान में स्कूल शिक्षा विभाग की भी सहभागिता सुनिश्चित की जायेगी। पुलिस महानिदेशक श्री ऋषि कुमार शुक्ला ने कहा कि अभियान में पुलिस पूरा सहयोग करेगी। परिवहन आयुक्त श्री शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि ऑटो और वैन के संबंध में कार्यवाही के लिये पालकों के साथ चर्चा के बाद निर्णय लिया जायेगा। इस दौरान परिवहन एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

परीक्षा में उच्चतम अंक लाने के लिए प्रदेश के स्कूलों में होगा प्रेरणा संवाद
Our Correspondent :8 January 2018

मध्यप्रदेश में कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में उच्चतम अंक लाकर अधिक से अधिक विद्यार्थी मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी और प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना का फायदा उठा सकें। 15 से 30 जनवरी तक प्रेरणा संवाद आयोजित किया जाएगा। संवाद में जन-प्रतिनिधि और अधिकारी स्कूलों में पहुँचकर छात्रों से संवाद करेंगे। प्रेरणा संवाद के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने कलेक्टर्स को पत्र लिखकर सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ किए जाने के निर्देश दिए हैं। प्रेरणा संवाद कक्षा 11 और 12 के विद्यार्थियों के साथ किया जाएगा। संवाद के दौरान विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी और प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना की जानकारी देकर उन्हें बेहतर परीक्षा परिणाम प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। कलेक्टर्स से कहा गया है कि वे जन-प्रतिनिधि और अधिकारियों से चर्चा कर संवाद के लिए चयनित शालाओं के नाम और भ्रमण का दिनांक निश्चित करें। कलेक्टर्स से यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि प्रदेश की प्रत्येक शाला में प्रेरणा संवाद आवश्यक रूप से हो। संवाद को सफल बनाने के लिए 10 और 12 जनवरी को प्रशिक्षण कार्यक्रम भी रखे गए हैं। कक्षा 11 और 12 से जुड़े शिक्षकों का प्रशिक्षण 10 जनवरी को होगा और 12 जनवरी युवा दिवस पर जन-प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों का जिला स्तरीय उन्मुखीकरण प्रशिक्षण होगा। प्रशिक्षण में तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारी को भी सहयोग करने के लिए कहा गया है। संवाद कार्यक्रम में राज्य सरकार के मंत्रीगण, सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक, महापौर, जनपद एवं नगर पंचायत अध्यक्ष और जिला स्तर पर पदस्थ प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के शासकीय अधिकारी शामिल होंगे। कलेक्टर्स को प्रेरणा संवाद की सतत मॉनिटिरिंग किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित की जा रही है। योजना में मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए फीस की प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा की जाती है। कोई भी विद्यार्थी जिसकी जे.ई.ई. मेन्स परीक्षा में 50 हजार तक रैंक आती है तो उसके किसी भी शासकीय अथवा अशासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश लेने पर शासकीय कॉलेज की पूरी फीस राज्य शासन द्वारा वहन की जाएगी। प्रायवेट कॉलेज की फीस 1 से 5 लाख रूपए या वास्तविक शिक्षण शुल्क, जो भी कम हो, राज्य शासन द्वारा वहन किया जाएगा। इसी तरह चिकित्सा, विधि शिक्षा, ग्रेजुएशन प्रोग्राम और स्नातक स्तर तक की शिक्षा में लगने वाली फीस भी राज्य शासन द्वारा वहन की जाएगी। योजना में उन विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा, जो मध्यप्रदेश के निवासी हों और परिवार की वार्षिक आय 6 लाख रूपए से अधिक न हो। विद्यार्थी के माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश की 12वीं परीक्षा में 75 प्रतिशत और सी.बी.एस.ई. की बोर्ड परीक्षा में 85 प्रतिशत से अधिक अंक होना चाहिए। प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना इस योजना में कक्षा 12 वीं की बोर्ड परीक्षा में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को 85 प्रतिशत या उससे अधिक अंक और आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों को 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाने पर लेपटॉप लेने के लिए राज्य शासन द्वारा 25 हजार रूपए की राशि और प्रमाण-पत्र दिए जाते हैं।


स्कूली परिवहन व्यवस्था सुधारी जाये : मुख्यमंत्री श्री चौहान
Our Correspondent :8 January 2018

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्कूली बच्चों की परिवहन व्यवस्था सुधारने के लिये अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा है कि विद्यार्थियों के परिवहन में लगे वाहन निर्धारित मानदण्डों के अनुरूप होना सुनिश्चित किया जाये। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। श्री चौहान ने स्पष्ट कहा कि 15 साल से अधिक पुरानी बसें स्कूलों में नहीं चलेंगी। साथ ही इन वाहनों की जाँच के लिये ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर स्थापित किये जायें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज यहाँ स्टेट हेंगर में संबंधित अधिकारियों की आपात बैठक ली। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों के परिवहन के लिये उपयोग की जाने वाली बसों की अधिकतम आयु सीमा 15 वर्ष निर्धारित करने के निर्देश तत्काल जारी किये जायें। ऑटोमैटिक फिटनेस सेन्टर स्थापित किये जायें, जिनमें बस सीधे अंदर जायेगी और फिटनेस की जांच ऑटोमैटिक तरीके से होगी। स्कूली बसों की स्पीड भी अधिकतम 40 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी। यदि ज्यादा गति पायी जाती है तो बस चालक के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी। इसके अलावा स्पीड गर्वनर और जीपीएस की क्वालिटी में सुधार के लिये एक केन्द्रीयकृत डाटा सेन्टर बनाने का भी निर्णय लिया गया है। इस सेन्टर के माध्यम से बसों की लोकेशन और स्पीड का अनुमान लगाया जा सकेगा कि कौन सी बस स्पीड से ज्यादा चल रही है। इससे बसों की स्पीड कंट्रोल करने में मदद मिलेगी। श्री चौहान ने कहा कि परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ पुलिस विभाग के अधिकारियों के माध्यम से भी नियमित रूप से शैक्षणिक संस्थानों में उपयोग होने वाले वाहनों के मापदण्डों के अनुरूप होने की जांच सुनिश्चित की जाये। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूली बच्चों के परिवहन में उपयोग किये जाने वाले वाहनों को मापदण्डों के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिये पालकों की सहभागिता हेतु उनकी शैक्षणिक संस्था के स्तर पर समिति गठित की जाये। इस व्यवस्था को सुनिश्चित कराने के लिये जिला स्तर पर जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक व क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी तथा अनुभाग स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तथा अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) की भी समिति गठित की जाये। श्री चौहान ने कहा कि ऑटोमेटिक ड्रायविंग टेस्ट ट्रेक्स बनाये जायें। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिये वाहनों की क्षमता के दृष्टिगत अधिकतम बच्चों की संख्या निर्धारित की जाकर उसका पालन सुनिश्चित किया जाये। साथ ही बसों में सीट बेल्ट लगाये जाने की व्यवस्था के लिये समस्त शैक्षणिक संस्थाओं को समझाईश दी जाये। इन निर्देशों का पालन नहीं करने वाली शालाओं की मान्यता तत्काल निरस्त करने हेतु कार्यवाही की जाये। सी.बी.एस.ई/आई.सी.एस.ई. अथवा अन्य बोर्ड से संबंधित शालाओं द्वारा यदि स्कूल बसों की सुरक्षा से संबंधित उपर्युक्त निर्देशों का पालन नहीं करने पर उनकी संबद्धता के लिये राज्य शासन द्वारा जारी किए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र को निरस्त करने की कार्यवाही की जाये। बैठक में प्रमुख सचिव परिवहन श्री मलय श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन श्री विवेक अग्रवाल, प्रमुख सचिव स्कूली शिक्षा श्रीमती दीप्ति गौड़ मुखर्जी आदि अधिकारी उपस्थित थे।


शिक्षकों द्वारा बनाये गए मॉडल अन्य स्कूलों में भी भेजें : मंत्री श्री गुप्ता
8 January 2018
शिक्षकों द्वारा बनाये गये उपयोगी माडल अन्य स्कूलों में भी भेजे जाएं। इससे वहां के शिक्षक और विद्यार्थी नवाचार के लिए प्रेरित होंगे। राजस्व, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने यह बात मेपकास्ट में मध्यप्रदेश विज्ञान प्रतिभा सम्मान समारोह में कही। श्री गुप्ता ने नवाचारी शिक्षिकों द्वारा बनाए गए मॉडल भी देखे। उन्होंने कहा कि भारत के उन वैज्ञानिक तथ्वों को सामने लाएँ, जो छिपे हुए हैं। शिक्षक विद्यार्थियों को नए-नए प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि हमारे हर त्यौहार के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक आधार है। श्री गुप्ता ने 3 नवाचारी शिक्षक, 50 कनिष्ठ विज्ञान ओलंपियड, 50 वरिष्ठ ओलंपियाड, 35 क्षेत्रीय गणित ओलंपियाड, 8 पश्चिम भारत विज्ञान मेला, एक नेहरू विज्ञान केन्द्र मुम्बई में, मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतिभागी, 30 राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतिभागी और 3 इसरो द्वारा आयोजित अंतरिक्ष विज्ञान प्रतियोगिता हैदाराबाद में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रतिभागियों को सम्मानित किया। नवाचारी शिक्षक रतलाम के डॉ. ललित मेहता, छिन्दवाड़ा के मो. शाहिद अंसारी और भोपाल की डॉ. भारती द्विवदी सम्मानित किये गये। विद्यार्थियों में व्यक्तिगत प्रोजेक्ट श्रेणी में सीहोर के श्री पवन बैरागी, उज्जैन के श्री सिद्धार्थ चौहान और देवास के श्री यश शुक्ला को सम्मानित किया गया। विभिन्न श्रेणी में अन्य शिक्षकों और विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। मेपकास्ट के महानिदेशक श्री नवीन चन्द्रा ने संस्था द्वारा विज्ञान के प्रचार-प्रसार के लिए किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी। वैज्ञानिक डॉ. आर.के. आर्य और डॉ. सुनील गर्ग ने भी विचार व्यक्त किये। इस दौरान विभिन्न जिलों से आए शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित थे।
स्कूल-कॉलेजों में निर्वाचन साक्षरता क्लब (ईएलसी) के गठन के निर्देश
8 January 2018
भारत निर्वाचन आयोग ने भावी और नये मतदाताओं की निर्वाचन प्रक्रिया में भागीदारी के लिए सभी स्कूल-कॉलेजों में निर्वाचन साक्षरता क्लब (इलेक्ट्रोरल लिटरेसी क्लब) गठित करने के निर्देश दिया है। इससे विद्यार्थी जहां निर्वाचन साक्षरता की मुख्य धारा में शामिल हो सकेगें वहीं उनकी क्षमता का भी सही उपयोग हो सकेगा। कक्षा 9 से 12 तक छात्र-छात्रा सदस्य के रूप में रहेगें। आयोग ने निर्वाचन साक्षरता क्लब के प्रथम बैच के गठन की प्रक्रिया राष्ट्रीय मतदाता दिवस 25 जनवरी से प्रारंभ करवाने को कहा है। यह क्लब भावी एवं नये मतदाता को सीखने और अनुभव प्राप्त करने का अवसर देगा। निर्वाचन साक्षरता के लिये क्लब एक जीवंत हब के रूप में कार्य करेगा। इससे युवा और भावी मतदाताओं में निर्वाचन प्रक्रिया में भागीदारी की पहल हो सकेगी। मतदाता पंजीयन, निर्वाचन प्रक्रिया और संबंधित विषयों पर लक्षित जनसंख्या को शिक्षित किया जा सकेगा। स्कूल और कॉलेज के नये एवं भावी मतदाताओं को ईवीएम और वीवीपेट से परिचित करवाकर उनकी सत्यता एवं विश्वनीयता से अवगत करवाया जायेगा। विद्यार्थियों में क्षमता विकास के साथ उन्हें निर्वाचन प्रक्रिया के सभी प्रश्नों की जानकारी भी दी जायेगी। इससे 14 वर्ष की आयु से ही विद्यार्थी निर्वाचन प्रक्रिया से भली-भाँति परिचित हो सकेगें। क्लब के गठन से मतदाताओं को यह समझने में सुविधा होगी कि वे वोट की कीमत समझ कर अपने मताधिकार का उपयोग कर सके। क्लब के सदस्यों का उपयोग समुदाय में निर्वाचन साक्षरता बढ़ाने में किया जायेगा। क्लब में कक्षा 9 से 12 वीं तक के विद्यार्थी भावी मतदाता के रूप में शामिल होगे। नये मतदाता महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा जैसे अन्य शैक्षणिक संस्थान से शामिल किये जायेगें। स्कूल के विद्यार्थी साक्षरता क्लब का संचालन एक निर्वाचित कार्यकारी समिति केमाध्यम से कर सकेगें। एक या दो शिक्षक नोडल ऑफिसर और मेंटर के रूप में कार्य करेगे। कार्य में उन शिक्षकों को प्रथामिकता दी जायेगी, जिनके पास निर्वाचन कार्य का अनुभव हो। कॉलेज और विश्वविद्यालय में क्लब के सदस्य विद्यार्थी रहेगें। क्लब का संचालन एक कार्यकारी समिति के माध्यम से किया जायेगा। केम्पस एम्बेस्डर क्लब के सदस्य का भी कार्य करेगें तथा वे नोडल अधिकारी को सहयोग करेगे। राजनीति शास्त्र के एक या दो शिक्षक को नोडल ऑफिसर और मेंटर बनाया जायेगा। चुनाव-पाठशाला मतदान केन्द्र स्तर पर क्लब की स्थापना ऐसे युवाओं के लिए होगी जो औचारिक शिक्षा व्यवस्था से बाहर है। इनके समूह को चुनाव-पाठशाला कहा जायेगा। बीएलओ चुनाव पाठशाला के नोडल अधिकारी होगें। चुनाव पाठशाला पिछले लोकसभा या विधानसभा चुनाव के मतदान केन्द्र अथवा बीएलओ द्वारा निर्धारित स्थान पर की जायेगी। मतदाता जागरूकता फोरम मतदाता जागरूकता फोरम शासकीय विभागों, अशासकीय संगठनों, कार्पोरेट या अन्य संस्थानों में गठित होगी। सभी कर्मचारियों के लिए इसकी सदस्यता खुली रहेगी। संगठन प्रमुख निर्वाचन कार्य में अनुभवी एक व्यक्ति को नोडल अधिकारी नियुक्त कर सकेगें। नोडल ऑफिसर जिला निर्वाचन अधिकारी या मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से समन्वय कर फोरम के लिए संसाधन जुटायेगें। सभी नोडल अधिकारियों की क्षमता का निर्माण किया जायेगा। इसके लिए आयोग मास्टर ट्रेनर को प्रशिक्षण देगा। निर्वाचन साक्षरता के लिए राज्य स्तरीय समिति मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के नेतृत्व में गठित होगी। चुनाव आयोग की योजना पूरे देश में 2 लाख निर्वाचन साक्षरता क्लब गठित करने की है।

इंदौर में स्कूल बस दुर्घटना पर स्कूल शिक्षा मंत्री कुँवर शाह ने जताया दु:ख
Our Correspondent :5 January 2018

स्कूल शिक्षा मंत्री कुँवर विजय शाह ने आज इंदौर में डीपीएस स्कूल बस की दुर्घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। घटना की खबर मिलने के बाद स्कूल शिक्षा मंत्री कुँवर शाह ने स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों और इंदौर में पदस्थ शिक्षा विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर घटना की जानकारी ली। मंत्री कुंवर शाह ने दुर्घटना में मृत बच्चों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की है। स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से घटना की गहन जाँच करवाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी।


हाई स्कूल/हायर सेकेण्डरी स्कूलों के उन्नयन के लिए 335 करोड़ स्वीकृत
Our Correspondent :3 January 2018

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में शिक्षा के लोकव्यापीकरण के तहत माध्यमिक शिक्षा के विस्तार के लिए हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों के उन्नयन के लिए 335 करोड़ 24 लाख रुपये व्यय करने की सहमति प्रदान की गई। इससे 820 हाई स्कूल तथा 540 हायर सेकेण्डरी शालाओं के उन्नयन की योजना का संचालन वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक तीन वर्ष की समयावधि में किया जायेगा। इसी के साथ प्रदेश की 6039 शासकीय माध्यमिक शालाओं में फर्नीचर उपलब्ध कराने के लिए 100 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, प्रदेश के 1736 हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में विद्युत व्यवस्था के लिए तीन वर्षीय कार्य-योजना पर 65 करोड़ 50 लाख रुपए व्यय की सहमति प्रदान की गई। मंत्रि-परिषद ने उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए जिला एवं विकासखंड स्तर पर उत्कृष्ट विद्यालयों में अपेक्षित भौतिक अधोसंरचना एवं सुविधा विकसित करने तथा संचालित करने के लिए वर्ष 2017-18, 2018-19 तथा वर्ष 2019-20 में 40 करोड़ 31 लाख रुपए की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की। मंत्रि-परिषद ने निर्णय लिया कि 'मध्यप्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षण) नियम 1998' के नियम 4-ख में सहरिया आदिम जनजाति को सम्मिलित करने के लिए नियम में आवश्यक संशोधन किया जाएगा। मंत्रि-परिषद द्वारा गृह विभाग के अंतर्गत बेहतर आपदा प्रबंधन के लिए मंत्रालय में आपदा प्रबंधन कक्ष के गठन और इस कक्ष के लिए 7 अस्थाई पदों के सृजन की स्वीकृति भी प्रदान की गई। मंत्रि-परिषद द्वारा अनुसूचित जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित कन्या साक्षरता प्रोत्साहन योजना के तहत अनुसूचित जाति की कन्याओं की शिक्षा निरंतर जारी रखने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिये उपलब्ध कराई जा रही आर्थिक सहायता को वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक निरंतर रखने का निर्णय लिया गया। बैठक में मंत्रि-परिषद ने पुलिस थानों में बाउन्ड्रीवाल निर्माण के लिए वर्ष 2017-18 में 9 करोड़ 92 लाख रुपए का प्रावधान किये जाने की अनुमति प्रदान की। मंत्रि-परिषद ने आईसीसी वर्ल्ड कप 2017 लार्डस (इंग्लैंड) की उपविजेता भारतीय महिला क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों को 50 लाख रुपए का पुरुस्कार प्रदान करने और सम्मान समारोह आयोजित करने की स्वीकृति भी प्रदान की। इसी क्रम में, प्रदेश में प्रतिभावान खिलाड़ियों को एशियन गेम्स 2018 और ओलम्पिक गेम्स 2020 में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खेल प्रशिक्षण एवं खेल अधोसंरचना उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2017-18 से वर्ष 2019-20 की अवधि के लिए 21 करोड़ रुपए व्यय की स्वीकृति प्रदान की गई। खेल और युवा कल्याण विभाग के प्रस्ताव अनुसार खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और प्रशिक्षण के लिए आगामी तीन वर्षों अर्थात वर्ष 2017-18 से वर्ष 2019-20 की अवधि में 90 करोड़ रुपए व्यय की स्वीकृति प्रदान की गई। मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के 82 अस्थाई पदों की मार्च 2020 तक निरंतरता की स्वीकृति प्रदान की। मंत्रि-परिषद ने अमृत योजना का निरंतर क्रियान्वयन करने की स्वीकृति प्रदान की। इससे शहरी क्षेत्रों में स्वीकृत परियोजना के निर्माण कार्यों में पुनरीक्षण के फलस्वरुप बढ़ी हुई लागत की प्रतिपूर्ति एवं योजना में सम्मिलित शहरों की योजना में नवीन कार्यों के लिए उपयोग किया जायेगा। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश के नगरीय निकायों में पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न नगरीय निकायों के घटकों के लिए मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना के अंतर्गत रुपए 363 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई। मंत्रि-परिषद ने सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग द्वारा अंध-मूक बधिर शालाओं को अनुदान योजना की निरंतरता को स्वीकृति प्रदान की। अंध-मूक बधिर वृत्तियों के आगामी तीन वर्षों तक संचालन के लिए 26 करोड़ 50 लाख रुपए के वित्तीय प्रावधान की स्वीकृति भी प्रदान की गई। मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री कन्या अभिभावक पेंशन योजना की निरंतरता को स्वीकृति प्रदान की। इस योजनान्तर्गत वर्ष 2017-18 से वर्ष 2019-20 तक लगभग 1 लाख 47 हजार 304 हितग्राहियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। मंत्रि-परिषद ने पंचम नगर काम्पलेक्स अंतर्गत निर्मित पगरा बांध के डूब क्षेत्र के बाहर स्थित ग्राम बमाना जिला सागर के 182 परिवारों के लिए 6 करोड़ 70 लाख रुपए विशेष अनुदान के रुप में भुगतान करने की स्वीकृति प्रदान की। नवीन जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र भवनों के निर्माण की योजना के लिए वर्ष 2017-18 से वर्ष 2019-20 तक रुपए 10 करोड़ के व्यय की स्वीकृति भी प्रदान की गई। मंत्रि-परिषद ने सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एवं टेक्नालॉजी (सीपेट) को अधोसरंचना अनुदान योजना के क्रियान्वयन के लिए वित्तीय वर्ष 2017-18 से वर्ष 2019-20 तक के लिए 35 करोड़ 13 लाख रुपए के व्यय की स्वीकृति प्रदान की। साथ ही, मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश मोटर स्प्रिट उपकर अध्यादेश 2018 तथा मध्यप्रदेश हाई स्पीड डीजल उपकर अध्यादेश 2018 का अनुमोदन किया गया।


शिक्षकों के पदनाम परिवर्तन आदेश शीघ्र जारी होंगे - मुख्यमंत्री श्री चौहान
Our Correspondent :23 December 2017

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि शिक्षकों के पदनाम परिवर्तन संबंधी आदेश शीघ्र ही जारी किये जायेंगे। किसी भी शिक्षक की वरिष्ठता का उल्लंघन नहीं होने दिया जायेगा। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे विद्यार्थियों के पठन-पाठन की ओर गंभीरता से ध्यान दें ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना का पूरा-पूरा लाभ ले सकें। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज नसरुल्लागंज में समग्र शिक्षक, व्याख्याता एवं प्राचार्य कल्याण संघ द्वारा आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में 30 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले शिक्षकों एवं सहायक शिक्षकों ने प्रवर श्रेणी वेतनमान स्वीकृत करने पर मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए सम्मानित किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गुरुजन नई पीढ़ी का निर्माण करते हैं। प्रदेश के नव-निर्माण में गुरुजनों का यह योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। श्री चौहान ने गुरुजनों से कहा कि अध्यापन के माध्यम से बच्चों के उज्जवल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करें। सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मानित किया। इस अवसर पर सीहोर जिले के प्रभारी मंत्री श्री रामपाल सिंह, मार्कफेड के अध्यक्ष श्री रमाकांत भार्गव, वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री गुरुप्रसाद शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती उर्मिला मरेठा, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में शिक्षकगण उपस्थित थे।


चार उत्कृष्ट विद्यालयों को 6 लाख रुपये से अधिक की मदद
Our Correspondent :23 December 2017

प्रदेश के टीकमगढ़, उज्जैन, उमरिया और विदिशा जिलों के शासकीय उत्कृष्ट विद्यालयों को प्रयोगशाला, पुस्तकालय और खेल-कूद गतिविधियों के लिये 6 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने विद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देश भी जारी किये हैं।


7 जनवरी को सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा
Our Correspondent :21 December 2017

मध्यप्रदेश में रीवा में संचालित अखिल भारतीय सैनिक स्कूल में कक्षा 6 से 9 तक की कक्षाओं में प्रवेश के लिए परीक्षा का आयोजन 7 जनवरी, 2018 को किया जायेगा। प्रवेश परीक्षा के लिए प्राप्त आवेदनों में से नियमानुसार सही पाये गये आवेदनों के प्रवेश-पत्र सैनिक स्कूल रीवा की वेबसाइट www.sainkischoolrewa.ac.in अथवा सैनिक स्कूल एडमीशन की वेबसाइट www.sainikschooladmission.in पर उपलब्ध हैं। आवेदक लॉगिन आई.डी. के माध्यम से अपने प्रवेश-पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। परीक्षार्थियों से कहा गया है कि प्रवेश-पत्र पर अंकित निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। सभी परीक्षार्थियों को प्रवेश-पत्र पर अपनी पासपोर्ट साइज की फोटो लगाकर निर्धारित समय से एक घंटे पूर्व अपने परीक्षा केन्द्र पर उपस्थित होना अनिवार्य है।


प्रतिभाशाली स्कूली बच्चों को सांस्कृतिक प्रस्तुति देने का राष्ट्रीय बालरंग सशक्त मंच
Our Correspondent :19 December 2017

स्कूल शिक्षा मंत्री कुँवर विजय शाह ने कहा है कि पिछले कुछ वर्षों में भोपाल में होने वाले राष्ट्रीय बालरंग के सफल आयोजन से यह समारोह देश भर के प्रतिभाशाली स्कूली बच्चों को सांस्कृतिक प्रस्तुति देने का सशक्त मंच बनकर उभर कर सामने आया है। उन्होंने समारोह में शामिल बच्चों से पूरे उत्साह के साथ सांस्कृतिक एवं साहित्यिक प्रस्तुतियाँ देने की बात कही। स्कूल शिक्षा मंत्री आज भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में तीन दिवसीय राष्ट्रीय बालरंग समारोह को संबोधित कर रहे थे। स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में स्कूल बैण्ड को प्रोत्साहित करने के लिये पहले चरण में 118 सरकारी हाई स्कूलों को मदद दी जाएगी। राष्ट्रीय बालरंग समारोह में 26 राज्यों के 550 स्कूली बच्चे और प्रदेश के स्कूलों के करीब 10 हजार बच्चों की भागीदारी रहेगी। स्कूल शिक्षा मंत्री कुँवर विजय शाह ने उद्घाटन समारोह में कहा कि बालरंग में विभिन्न राज्यों से आये बच्चों से सभी को देश की विविधतापूर्ण संस्कृति को जानने का बेहतर अवसर मिलेगा। उन्होंने जीवन में स्वच्छता के महत्व के बारे में भी बच्चों को बताया। स्कूल शिक्षा मंत्री बाद में स्कूल बैण्ड प्रतियोगिता स्थल पर पहुँचे। उन्होंने कहा कि बैण्ड हमें संगीत के साथ अनुशासन की भी सीख देना है। बालरंग समारोह में पहली बार प्रतियोगिता के रूप में स्कूल बैण्ड को शामिल किया गया है। राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के निदेशक प्रोफेसर सरित के. चौधुरी ने कहा कि मानव संग्रहालय देशभर में मानव जीवन की विरासत को समझने के एक महत्वपूर्ण केन्द्र के रूप में पहचाना जाता है। यहाँ आये बच्चे इस संग्रहालय को देखकर अपने ज्ञान को बढ़ाएंगे। संचालक लोक शिक्षण श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने बालरंग समारोह में होने वाली गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्कूल के विद्यार्थियों को विभिन्न प्रदेशों की संस्कृति, धरोहर एवं राष्ट्रीय एकता से परिचित कराना बालरंग का उद्देश्य है। पिछले 11 वर्षों से हो रहे आयोजन से बच्चों को लाभ पहुँचा है। उन्होंने बताया कि 26 जनवरी, 1996 से समारोह की शुरूआत की गई थी। वर्ष 2005 से इसे राष्ट्रीय समारोह का रूप दिया गया। राष्ट्रीय बालरंग समारोह में 13 राज्यों, 8 पूर्वोत्तर राज्यों और 5 केन्द्र शासित प्रदेशों के स्कूल के बच्चे शामिल हो रहे हैं। समारोह में कनिष्ठ एवं वरिष्ठ वर्ग में साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ होंगी। मदरसों एवं संस्कृत विद्यालयों के साथ दिव्यांग बच्चों के लिये विशेष प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा रही हैं। राष्ट्रीय बालरंग समारोह में मुख्य आकर्षण लोक-नृत्य का रहेगा। लोक-नृत्य के माध्यम से स्कूल के बच्चे अपने राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देंगे। पहले स्थान पर आने वाली प्रतिभागी टीम को 51 हजार, द्वितीय को 31 हजार और तृतीय स्थान पर रहने वाली टीम को 21 हजार इनाम के रूप में दिये जाएंगे


प्रधानमंत्री क्विज सेंट्रल लाइब्रेरी में सबके लिए ओपन क्विज
Our Correspondent :9 November 2017

इस वर्ष भारत की आज़ादी की 70 वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है । आज़ादी के बाद भारत ने कई प्रधानमंत्रियों का शासनकाल देखा है । हर प्रधानमंत्री के साथ कोई कोई ना महत्वपूर्ण घटना जुड़ी हुई है । इन प्रधानमंत्रियों द्वारा समय समय पर लिए गए निर्णयों ने ही आज का भारत बनाया है । तो यदि वर्तमान भारत को समझना है तो आज़ादी के बाद के 70 सालों को विस्तार से समझना जरूरी है । युवाओं को आज़ादी के बाद के भारत से परिचित कराने के उद्देश्य से इस रविवार सेंट्रल लाइब्रेरी में एक ओपन क्विज का आयोजन किया जा रहा है । इस क्विज में भारत के विभिन्न प्रधानमंत्रियों के शासन काल की प्रमुख घटनाओं पर सवाल पूंछे जाएंगे । किसी भी आयु का कोई भी व्यक्ति इस क्विज में भाग ले सकता है । बस भाग लेने के लिए उसे एक और व्यक्ति के साथ मिलकर दो लोगों की टीम बनानी होगी । भाग लेने के लिए पहले से कोई रजिस्ट्रेशन करने की आवश्यकता नहीं है । जो भी व्यक्ति भाग लेना चाहता है वह 12 नवंबर को सुबह ठीक 9.30 बजे अपने टीम मेम्बर के साथ लाइब्रेरी पहुँचकर इस कार्यक्रम में भाग ले सकता है क्विज हिन्दी में होगी और क्विज के विजेता को 6000/- रुपये का नगद पुरुसकार दिया जाएगा । सामान्य ज्ञान के लोकप्रिय कोच अभिषेक दुबे इस क्विज के क्विज मास्टर होंगे
कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है :-
आयोजन का नाम - प्रधानमंत्री क्विज
दिनांक - 12 नवंबर 2017
समय - सुबह 10 बजे
स्थान - सेंट्रल लाइब्रेरी भोपाल
आयोजक - सिविल सर्विसेज क्लब
क्विज आधारित होगी - आज़ादी के बाद के इतिहास पर
क्विज मास्टर होंगे - अभिषेक दुबे
क्विज में पुरुसकार मिलेंगे - 6000/- रुपये नगद

क्विज में भाग लेने के लिए
- 12 नवंबर को दो लोगों की टीम बनाकर सुबह 9.30 बजे सेंट्रल लाइब्रेरी पहुँचें


aaबेटियों की निरंतर पढ़ाई की व्यवस्था के लिये मध्यप्रदेश में कानून बनेगा


12 October 2017

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि लाड़ली लक्ष्मी बेटियों की निरंतर पढ़ाई की व्यवस्था के लिये कानून बनाया जाएगा। बेटियाँ पृथ्वी पर ईश्वर का सबसे बड़ा उपहार हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहाँ मुख्यमंत्री निवास पर लाड़ली शिक्षा पर्व के छात्रवृत्ति वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस उपस्थित थीं। प्रदेशभर में आज 65 हजार लाड़ली लक्ष्मी बेटियों को छात्रवृत्ति वितरित की गई। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में बेटियों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था की जाएगी। बेटियाँ चाहें तो आसमान छू सकती हैं। बेटियाँ ऐसे गुणों का विकास करें जिससे पूरी दुनिया में उनका नाम हो। आज मध्यप्रदेश में 26 लाख 30 हजार लाड़ली लक्ष्मी बेटियाँ हैं। इनके 21 वर्ष के होने पर उनके परिवारों को 31 हजार करोड़ रुपये मिलेंगे। लाड़ली लक्ष्मी योजना में बेटियों के लिये छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गई है। प्रदेश की बेटियों को 12वीं कक्षा में 85 प्रतिशत लाने पर लेपटॉप और कॉलेज में प्रवेश लेने पर स्मार्ट फोन दिया जाता है। कक्षा 12 की परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक लाने के बाद महाविद्यालय में प्रवेश लेने पर उनकी फीस मेधावी विद्यार्थी योजना से भरी जाएगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बेटियों में असीम संभावनाएँ हैं। बेटियाँ चाहें, तो आसमाँ छू सकती हैं। बेटियाँ हमेशा माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करें। बेटियाँ मध्यप्रदेश की ताकत हैं। बेटियों को पुलिस विभाग की भर्ती में 33 प्रतिशत तथा शिक्षकों की भर्ती में 50 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया है। स्थानीय निकायों में बेटियों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग की भर्ती में बेटियों को ऊँचाई में छूट दी जाएगी। बेटियों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था की जाएगी। बेटियों के लिये पाठ्य-पुस्तक, गणवेश और साईकिल प्रदाय की योजना क्रियान्वित की जा रही है। प्रतिभाशाली बेटियों के लिये गाँव की बेटी और प्रतिभा किरण योजना चलायी जा रही है। मुख्यमंत्री ने श्रीमती विजयाराजे सिंधिया का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती चिटनिस ने कहा कि आज 65 हजार से अधिक लाड़ली लक्ष्मी बेटियों ने कक्षा 6वीं में प्रवेश लिया है। इन्हें दो-दो हजार रुपये की छात्रवृत्ति आज वितरित की जा रही है। इन्हें कक्षा नौवीं में 4 हजार तथा कक्षा 11वीं में प्रवेश लेने पर 6 हजार रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी। लाड़ली लक्ष्मी योजना के सफल 11 वर्ष पूरे हो गये हैं। जिस देश और प्रदेश में बेटियों का सम्मान होता है, वह आगे बढ़ता है। मध्यप्रदेश में बेटियों को केन्द्र में रख कर विकास किया गया है। बेटियों को अवसर मिले तो वे दुनिया में प्रदेश का नाम रौशन करने की क्षमता रखती हैं। आज प्रदेश में बेटियों के जन्म पर खुशियाँ मनायी जाती हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कक्षा 6वीं में प्रवेश लेने वाली लाड़ली लक्ष्मी बेटियों को प्रतीक स्वरूप छात्रवृत्ति के प्रमाण-पत्र वितरित किये। स्वागत भाषण आरंभ में महिला-बाल विकास श्री जे.एन. कंसोटिया ने दिया। कार्यक्रम में राज्य बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष श्री राघवेन्द्र शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री मनमोहन नागर और मुख्यमंत्री की पत्नी श्रीमती साधना सिंह चौहान सहित बड़ी संख्या में योजना से लाभान्वित बेटियाँ और उनके माता-पिता उपस्थित थे। आयुक्त महिला सशक्तिकरण श्रीमती जयश्री कियावत ने आभार माना।


शिक्षक सम्मान समारोह 2017
Our Correspondent :1 September 2017

भोपाल। आगामी शिक्षक दिवस के पूर्व ही इसके उपलक्ष्य में हुजूर विधायक-भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष रामेश्वर शर्मा एवं प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन द्वारा संतनगर के संत हिरदाराम गल्र्स आडिटोरियम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में अपने विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के 2800 शिक्षकों का सम्मान किया गया। गुरूवार दोपहर आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद्र गहलोत, म.प्र. की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस, संत हिरदाराम जी के शिष्य सिद्धभाउ, विधायक रामेश्वर शर्मा, कृष्णमोहन सोनी, अपर कलेक्टर जी.पी. माली, जिला शिक्षा अधिकारी धर्मेन्द्र शर्मा, डी.पी.सी. श्री राठौर, बी.आर.सी. रविन्द्र जैन, चंद्रप्रकाश इसरानी, राम बसंल, दीपा वासवानी, भारती खटवानी, हीरो ज्ञानचंदानी, विष्णु गेहानी, मंडल अध्यक्ष पृथ्वीराज त्रिवेदी, रमेश हिंगोरानी, बसंत चेलानी, मनीष चैबे, सौरभ गंगारमानी, योगेश हिंगोरानी, सूरज यादव, हरीश बिनवानी, लविन मनसुखानी, विनोद राय, विवेक शर्मा, योगेश मलानी, सोनू यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि और विभिन्न विद्यालयों से आए 2800 से अधिक शिक्षक शामिल थे। कार्य्रकम के दौरान मंत्री श्री गहलोत, मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस, विधायक रामेश्वर शर्मा, सिद्धभाउ द्वारा संयुक्त रूप से क्रमशरू सभी शिक्षकों को मंच पर आमंत्रित कर शाल-श्रीफल और सम्मान पत्र भेंट कर उनका सम्मान किया गया। गरिमामय समारोह में सार्वजनिक सम्मान पर पाकर अधिकांश शिक्षक अभीभूत नजर आए। शिक्षकों का कहना रहा कि इस तरह से सम्मानित होने पर उनके मन में अपने कार्य के प्रति गर्व की अनुभूति आती है और समाज के प्रति दायित्व बोध जागृत होता है। कार्यक्रम के आयोजक-विधायक रामेश्वर शर्मा ने बताया कि गुरू-शिष्य पंरपरा के परिपालन में पिछले कई वर्षों से उनके द्वारा शिक्षक सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस पर लगभग सभी विद्यालयों में भी कार्यक्रमों का आयोजन होता है और हमें यह कार्यक्रम वृहद् स्तर पद करना होता है इसीलिए शिक्षक दिवस के कुछ दिन पूर्व ही हमारे द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।
शिक्षकों के कारण ही भारत को मिला था विश्वगुरू का सम्मान: थावरचंद्र गहलोत

प्राचीनकाल मे भी भारत की शिक्षा पद्धति काफी वैभवशाली थी। महर्षी सांदिपनी, गुरू वशिष्ठ, गुरू द्रोणाचार्य से लेकर डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन तक ऐसे महान गुरू-शिक्षक हुए हैं जिनकी विद्वता का लोहा सारे विश्व ने माना था। शिक्षकों की विद्वता और त्याग तपस्या के बल पर ही भारत को विश्वगुरू का सम्मान हासिल था। यह सम्मान हमें फिर से पाना है तो इसमें भी शिक्षकों को ही बढ़ी भूमिका निभानी होगी। उक्त उद्गार भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद्र गहलोत ने गुरूवार को संतनगर में हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा के तत्वावधान में आयोजित भव्य शिक्षक सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होने कहा कि देश में आज भी शिक्षाविदों की कमि नहीं है, संपूर्ण विश्व आज भी भारत को उसी दृष्टिकोण से देखता है। इसीलिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने अमेरिकी छात्रों के सामने भारतीय छात्रों की प्रशंसा करते हुए कहा था कि आप भी मेहनत करो, शिक्षा के प्रवीण बनो नहीं तो अमेरिका में सारी नौकरियां भी भारतीय ले जाएंगे। श्री गहलोत ने कहा कि मनुष्य की तीन श्रेणियां होती है। पहली श्रेणी वह है जो देने ही देने का काम कर रहती है। इसे संतो की श्रेणी कहा जाता सकता है, वे समाज से कुछ लेते नहीं अपितु सभी को आर्शीवाद देते हैं। ऐसे संतो को सभी प्रणाम करने जाते हैं, इनका सभी सम्मान करते हैं। दूसरी श्रेणी उन लोगों की होती है जो देते भी है और लेते भी है। इसे व्यवसायिक प्रवृत्ति भी कह सकते हैं इसमें आंशिक सम्मान मिलता है। तीसरी श्रेणी उन लोगों की होती है जो कि समाज से केवल लेने का काम ही काम करते हैं, बदले में कुछ देते नहीं है। ऐसे लोगों का कोई सम्मान नहीं करता है। शिक्षक मनुष्य की पहली और दूसरी श्रेणी के सदस्य हैं इसीलिए सम्मान के पात्र हैं। केंद्रीय मंत्री श्री गहलोत ने अपने उद्बोधन में मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम के शिक्षण की चर्चा करते हुए कहा कि यह श्रीराम द्वारा अर्जित शिक्षा का ही प्रभाव था कि पिता का वचन निभाने के लिए वे राजपाट छोडकर वनवास में चले गए। इसी तरह भरत पर भी उसी शिक्षा का प्रभाव था कि वह राजपाट मिलने पर खुश होने के बजाए भाई को पुनरू राजपाट सौंपने के लिए मनाने वन में पहुंच गए। उन्होने उपस्थित शिक्षकों को आहवान करते हुए कहा कि शिक्षकों को स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों को श्रेष्ठ नागरिक बनाने का प्रयास करना चाहिए।
विद्यार्थियों मे दायित्वबोध जगाएं शिक्षक: सिद्धभाउ जी

शिक्षक ही राष्ट्र का मार्गदर्शन करने का हौसला रखते हैं। सम्मान से अभीभूत शिक्षक विद्यार्थियों के अंदर दायित्वबोध जगांएगे जिससे राष्ट्र का निर्माण होगा। राष्ट्र अधिक सक्षमता के साथ खड़ा होगा। यह विचार शिक्षक सम्मान समारोह की अध्यक्षता कर रहे श्री सिद्धभाउ जी ने समारोह में आशीर्वचन देते हुए व्यक्त किए। उन्होंने स्मरण करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि युवा वह है जो वायुवेग से सोचे और वायुवेग से काम करे। इस राष्ट्र की तरूणाई को फिर से सशक्त बनाना होगा। आज युवा पश्चिम का अंधानुकरण करते हुए इंडोर खेलों की तरफ आकर्षित हो रहा है जिससे किसी प्रकार का स्वास्थ्य लाभ नहीं होता। इसके लिए देशी खेलों की तरफ युवाओं को मोडना होगा। राष्ट्र को पूरे विश्व का फिर से विश्वगुरू बनाने का जिम्मा भी शिक्षकों पर है, इसके लिए शिक्षकों को सारी सुविधाएं भी देनी चाहिए जिससे वे अपने कर्म को पूरी कर्मठता से कर सके। श्री सिद्धभाउजी ने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि हमे ऐसा विधायक मिला है जिसके ह्दय में संवेदनशीलता है, यही संवेदनशीलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज जी के अंदर भी है। उन्होने सम्मानित होने वाले शिक्षकों को और अधिक ज्ञानवान बनने और इस ज्ञान की रोशनी घर घर तक फैलाने का आर्शीवाद भी दिया।
बच्चे को अच्छी शिक्षा-संस्कार देना माता पिता होने के मायने है: श्रीमती अर्चना चिटनिस

बच्चे को जन्म देना ही माता पिता होने के मायने नहीं अपितु बच्चे को अच्छी शिक्षा-अच्छे संस्कार देकर श्रेष्ठ नागरिक बनाना भी माता पिता होने के मायने हैं। यह विचार म.प्र.शासन की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने शिक्षक सम्मान समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए व्यक्त किए। उन्होने कहा कि अनाथ वो नहीं होता जिसके माता पिता ना हो, अपितु अनाथ वह होता है जिसके गलती करने पर उसे डांटने वाला, समझाने वाला ना हो, उसे शिक्षा देने वाला ना हो। इसीलिए बच्चे के माता-पिता और शिक्षकों ने बच्चों को शिक्षा देने के साथ साथ गलतियों पर रोकते हुए सही मार्ग भी दिखलाना चाहिए। शिक्षा केवल सूचना मात्र नहीं है अपितु शिक्षा सोचना सिखाना है, निर्णय करना सिखाना है। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका श्रेष्ठ है। एक चाणक्य रहे तो एक हजार चंद्रगुप्त बना सकते हैं लेकिन एक हजार चंद्रगुप्त मिलकर भी एक चाणक्य नहीं बना सकते। उन्होने कहा कि शिक्षक के लिए सबसे बड़ा सम्मान यह होता है कि शिष्य उसका नाम रोशन करे। श्रीमती चिटनिस ने भारतीय संस्कृति सभ्यता को वैभवशाली बताते हुए कहा कि आज के कुछ समय पहले तक, मात्र 15-20 साल पहले तक जन्म देने वाली एक मॉं होती थी। लेकिन बच्चे के पालन पोषण अकेले माता नहीं करती थी अपितु उसके दादा-दादी, नाना-नानी, चाचा-चाची, बुआ-फूफा, मामा-मामी, मौसा-मौसी सहित आस पड़ोस, मित्र आदि बच्चे के विकास में अपनी भूमिका निभाते थे। इसीलिए प्रकृति को भी हमने रिश्तों के शब्दों से अपना बना लिया था, तभी तो चंदा मामा, बिल्ली मौसी, गाय माता, आदि शब्दों का प्रचलन था। इन रिश्तों से हमे नैसर्गिक शिक्षा मिलती थी। लेकिन आजकल के बच्चों को स्वयं हमने सभी से तोड़ दिया है। श्रीमती चिटनिस ने इस अवसर पर सम्मानित होने वाले सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्जल भविष्य की कामना की।
शिक्षक देश के भविष्य निर्माता: रामेश्वर शर्मा

शिक्षक सम्मान समारोह में स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम के आयोजक-विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि शिक्षक इस देश के भविष्य निर्माता है, जिस प्रकार से शिक्षा का प्रसार बढ़ेगा भारत पुनरू विश्व गुरू की ओर आगे बढ़ेगा। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान अच्छी शिक्षा व्यवस्था की चिंता कर रहे हैं। हमने गुरू-शिष्य परंपरा की सभ्यता और संस्कृति को जीवंत करने के उद्देश्य से, सरकारी और नीजि सभी विद्यालयों के शिक्षकों के सम्मान का कार्यक्रम कुछ वर्ष पूर्व शुरू किया है। सम्मान की पंरपरा को जीवित रखना समाज का काम है। सम्मान खत्म हो जाएगा तो सब कुछ समाप्त हो जाएगा। यह सम्मान का भाव ही है जो व्यक्ति को भी श्रेष्ठ नागरिक बनने के लिए प्रेरित करता है। उन्होने कहा कि हम अपने विधानसभा क्षेत्र के सभी 10600 शिक्षकों का सम्मान करना चाहते हैं। लेकिन एक कार्यक्रम में यह संभव नहीं हो सकता इसीलिए क्रमशरू हम सभी शिक्षकों का सम्मान कर रहे हैं। विधायक श्री शर्मा ने महाभारत काल के एक वृतांत का वर्णन करते हुए कहा कि महाराज धृतराष्ट्र ने गुरू द्रोणाचार्य को अपने महल पर बुलाकर कर कहा था कि यह मेरे 100 पुत्र हैं इन्हें आप अच्छी शिक्षा दें। दूसरी ओर रानी कुंती स्वयं गुरू द्रोणाचार्य के आश्रम पहुंची और कहा कि गुरूदेव आज से ये पांचों पांडव आपके पुत्र हैं, आप इन्हें अपने अनुसार समुचित शिक्षा दें। इसके बाद के परिणाम सबके सामने है महाराज धृतराष्ट्र के 100 कौरव पुत्र समाज में बहुत सम्मान हासिल नहीं कर पाए जबकि गुरू के चरणों में समर्पित हुए 5 पांडवों में सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर भी निकले, धर्मराज भी हुए, महाबलशाली और विद्वान, महाराथी भी निकले। श्री शर्मा ने कहा कि जब किसी शिष्य को सफलता मिलती है तो गुरू का सम्मान तो बढ़ ही जाता है, साथ ही गुरू की जिंदगी भी बढ़ जाती है। हम सब को आज यहां यह संकल्प लेंगे कि आने वाला भारत संपूर्ण शिक्षित होगा। हर घर में शिक्षा का दिया जलेगा ।


हरयाणा के श्रम मंत्री ने मध्यप्रदेश की योजनाओं एवं कार्यक्रमों को सराहा श्रमोदय विद्यालय की अवधारणा से हुए प्रभावित
Our Correspondent :21 Aug 2017

श्रम मंत्री श्री ओमप्रकाश धुर्वे से हरयाणा राज्य के श्रम मंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने आज उनके निवास पर अधिकारियों के साथ भेंट कर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। प्रमुख सचिव श्रम श्री अश्विनी राय और अन्य अधिकारी मौजूद थे। हरयाणा के श्रम मंत्री श्री सैनी ने मध्यप्रदेश में श्रमिकों के कल्याण के लिये लागू मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना सहित अन्य योजनाओं और कार्यक्रमों की सराहना की। उन्होंने पं. दीनदयाल श्रमोदय विद्यालय की अवधारणा में रूचि लेते हुए इस परियोजना की विस्तृत जानकारी हरयाणा सरकार को भेजने का आग्रह किया। श्रमोदय विद्यालय पर दिये गये प्रेजेन्टेशन की कापी हरयाणा के श्रम मंत्री को भेंट की गयी। श्रम मंत्री श्री धुर्वे ने हरयाणा के मंत्री श्री सैनी को बताया कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रदेश में 75 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले बच्चों की उच्च शिक्षा के लिये फीस देने की व्यवस्था के लिये मेधावी छात्र योजना शुरू की गई है। इसके साथ ही, श्रम विभाग द्वारा पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों के लिये कक्षा एक से महाविद्यालयीन शिक्षा प्राप्त करने तक छात्रवृत्ति और अन्य सुविधाएँ दी जा रही हैं। श्रमिकों के बच्चों को नवोदय विद्यालय से बेहतर पब्लिक स्कूल की तरह शैक्षणिक सुविधाएँ और वातावरण देने के लिये इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और भोपाल में पं. दीनदयाल श्रमोदय विद्यालय शुरू किये जा रहे हैं। श्रमिकों के बच्चों को इन विद्यालय में नि:शुल्क आवासीय सुविधा मिलेगी। भोपाल का श्रमोदय विद्यालय शैक्षणिक सत्र 2018-19 से प्रारंभ हो जायेगा। श्री धुर्वे ने बताया कि प्रथम वर्ष में कक्षा 6वीं और 9वीं में छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जायेगा। भोपाल श्रमोदय विद्यालय में भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़ और सीहोर जिलों के पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चे प्रवेश के पात्र होंगे। इनकी प्रवेश प्रक्रिया जल्दी शुरू की जा रही है। श्रम मंत्री ने बताया कि देश में इस प्रकार के श्रमोदय विद्यालय स्थापित करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य है। श्रम मंत्री श्री धुर्वे ने हरयाणा के मंत्री श्री सैनी को मध्यप्रदेश में श्रमिकों के कल्याण के लिये संचालित विभिन्न कार्यक्रमों एवं योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने हरयाणा में श्रमिकों के लिये संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी भी प्राप्त की।


उर्दू अकादमी विद्यार्थियों को पुरस्कृत करेगी
Our Correspondent :3 Aug 2017

मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी कला संकाय में बी.ए. और एम.ए. की वर्ष 2017 की परीक्षा में उत्तीर्ण ऐसे छात्र-छात्राओं को नगद पुरस्कार देगी, जिन्होंने उर्दू विषय में 90 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं। उर्दू अकादमी के सचिव ने बताया है कि प्रथम पुरस्कार 5 हजार रूपये, द्वितीय 4 हजार रुपये एवं तृतीय पुरस्कार 3 हजार रूपये के साथ ही इन विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी दिया जायेगा। छात्र-छात्राओं एवं महाविद्यालय से अपेक्षा की गई है कि पात्रतान्तर्गत विद्यार्थियों की सत्यापित अंक-सूची 31 अगस्त तक म.प्र. उर्दू अकादमी, मुल्ला रमूजी संस्कृति भवन, बाणगंगा को भिजवाएँ। अन्य जानकारी कार्यालयीन दूरभाष क्रमांक 0755-251691 से प्राप्त की जा सकेगी


8 जून को होगी "क्रिएटिव राइटिंग वर्कशॉप"
Our Correspondent :24 May 2017

स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा है कि प्रदेश में बोर्ड परीक्षा परिणाम में सुधार के लिये अब प्रति सप्ताह वीडियों कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समीक्षा की जायेगी। उन्होंने जिला अधिकारियों से स्कूल शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिये सरकारी स्कूलों की निरीक्षण प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिये। स्कूल शिक्षा मंत्री आज प्रशासन अकादमी में जिला अधिकारियों की राज्य-स्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी मौजूद थे। बैठक में कक्षा 10 और कक्षा 12 के बोर्ड परीक्षा परिणामों की जिलेवार समीक्षा की गई। स्कूल मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि प्रदेश भर में जिन शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्य के लिये अटैच किया है, उन्हें हर हाल में 31 मई तक शालाओं में पद-स्थापना के लिये कार्यमुक्त किया जाये। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे जिले में ऐसी व्यवस्था करें, जिससे महत्वपूर्ण काम को छोड़कर शिक्षकों को गैर-शिक्षकीय कार्य में न लगाया जाये। इसके लिये उन्होंने राज्य-स्तर पर कलेक्टर्स को पुन: पत्र लिखे जाने के निर्देश दिये। स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर शाह ने मंडला और रायसेन जिले में लागू 'ज्ञानार्जन' प्रोजेक्ट को पूरे प्रदेश में लागू किये जाने की बात कही। 'ज्ञानार्जन' प्रोजेक्ट में सरकारी स्कूलों में कक्षा 10 और 12 के सिलेबस को प्रतिदिन के हिसाब से बाँटकर सॉफ्टवेयर के जरिये मॉनिटरिंग किये जाने की व्यवस्था है। इस व्यवस्था से कक्षा 10 और 12 के बोर्ड परीक्षा परिणाम में इन जिलों में उल्लेखनीय सुधार आया है। स्कूल शिक्षा मंत्री ने दिव्यांग छात्रों की पढ़ाई और हॉस्टल की व्यवस्था पर और ध्यान दिये जाने की बात कही। स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी ने कहा कि फील्ड अधिकारियों से प्राप्त सुझाव से परीक्षा परिणाम में बेहतर तरीके से सुधार किये जा सकते है। उन्होंने शिक्षकों की नियमित उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिये भी कहा। बैठक में माध्यमिक स्तर पर स्कूल शिक्षा की स्थिति, शिक्षा में गुणवत्ता की कार्य-योजना, नि:शुल्क साइकिल योजना, भवन निर्माण, सी.एम. हेल्पलाइन के प्रकरणों और समेकित छात्रवृत्ति योजना पर भी चर्चा की गयी। स्कूल शिक्षा विभाग की सचिव श्रीमती दीप्ती गौड़ मुखर्जी ने गुणवत्ता सुधार के लिये सरकारी स्कूलों में पेरेन्ट्स मीटिंग को नियमित करने के निर्देश दिये। आयुक्त लोक शिक्षण श्री नीरज दुबे ने बोर्ड परीक्षा परिणामों का विश्लेषण कर आगे सुधार लाने के निर्देश दिये। बैठक में राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक श्री लोकेश जाटव ने स्कूल शिक्षा में सुधार के लिये राज्य, जिला, विकासखंड और संकुल स्तर पर टीम भावना के साथ कार्य किये जाने का सुझाव दिया। बैठक में संयुक्त संचालक स्कूल शिक्षा संभागीय कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी और परियोजना समन्वयक जिला शिक्षा केन्द्र मौजूद थे।
क्रिएटिव राइटिंग वर्कशॉप : एक नज़र में
आयोजन का नाम - क्रिएटिव राइटिंग वर्कशॉप
दिनांक - 8 जून 2017 गुरुवार
समय - दोपहर 12 से 4 बजे तक
स्थान - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी
कौन भाग ले सकता है - 16 साल से ऊपर का कोई भी व्यक्ति
वर्कशॉप के लिए निर्धारित सीटें - 20
वर्कशॉप की फीस - कुछ भी नहीं (निःशुल्क )
रजिस्ट्रेशन करना है - मेल के द्वारा
रजिस्ट्रेशन के लिए ये जानकारी मेल करें
1.-आपका नाम , आयु, व्यवसाय,मोबाइल नंबर
2.-आपके द्वारा लिखी गयी कोई कविता या लेख
'3.-आप इस वर्कशॉप में क्यों भाग लेना चाहते हैं' इस विषय पर अधिकतम 300 शब्दों का एक लेख
किस मेल पर भेजना है - club.ink13@gmail.com.
रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि है - 4 जून 2017
पपोएट्री मेंटर के बारे में ... इंकलेट ऑनलाइन जर्नल की प्रधान संपादिका
ब्लूशिफ्ट जर्नल की पोएट्री रीडर
स्प्राउट मैगज़ीन की सह-प्रबंध संपादिका
ग्लास काइट एंथोलोजी वर्कशॉप की पोएट्री मेंटर
आइयोवा यंग रायटर स्टुडियो की पूर्व छात्रा
ऑक्सफोर्ड व कैंब्रिज राइटिंग वर्कशॉप की पूर्व छात्रा
इस वर्ष AAL रायटर रिट्रीट आइसलैंड में भाग लिया
अगस्त 2017 से न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में क्रिएटिव राइटिंग में अंडर-ग्रेड कोर्स के लिए चयनित
इंडियन लिट्रेचर, वायाव्य और सुवेनियर जैसी कई प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में उनकी कवितायें प्रकाशित हो चुकी हैं


प्रदेश में बोर्ड परीक्षा परिणाम में सुधार के लिये अब प्रति सप्ताह होगी समीक्षा
Our Correspondent :22 May 2017

16 साल से ऊपर का कोई भी व्यक्ति ले सकता है भाग

रोज़मर्रा की भाग दौड़ में हम पोएट्री को लगभग भूल ही गए हैं । कवितायें लिखना तो दूर हमारे पास उन्हें पढ़ने की फुर्सत भी नहीं है । जबकि मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति के इस सबसे प्रभावी माध्यम पर दुनिया भर में बहुत काम हो रहा है । हर दिन पोएट्री के नए नए अवतार सामने आ रहे हैं । कभी हाइकू तो कभी ट्विटर पोएट्री कभी कट पेस्ट तो काबी कॉर्प्स पोएट्री । लाखों लोग नये नए तरीके ईज़ाद कर अपनी भावनाओं को शब्द दे रहे हैं और पूरी दुनिया उनको समझ समझ कर अपनी ज़िंदगी के माने समझ रही है । दुनिया भर में ये पोएट्री का रिवल्यूशन है जिससे हम लगभग अछूते हैं । भोपाल के लोगों को "पोएट्री" की इस नयी दुनिया से जोड़ने व उनके स्वयं पोएट्री लिखने की ताकत देने के उद्देश्य से स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी आगामी 8 जून को एक क्रिएटिव राइटिंग वर्कशॉप का आयोजन कर रही है । दुनिया भर के यंग राइटर्स के बीच लोकप्रिय "इंकलेट" नामक ऑनलाइन लिटरेरी जर्नल इस कार्यक्रम का सह आयोजक है । दुनिया भर के पोएट्री जर्नल्स की एडिटिंग टीम की सदस्य और कई प्रतिष्ठित क्रिएटिव राइटिंग वर्कशॉप में भाग ले चुकी युवा लेखिका "देवांशी खेत्रपाल" इस वर्कशॉप में पोएट्री मेंटर की भूमिका निभाएँगी । 16 साल से ऊपर का कोई भी व्यक्ति इस वर्कशॉप में भाग ले सकता है । वर्कशॉप के लिए 20 सीटें निर्धारित की गईं है , इसलिए भाग लेने के इच्छुक व्यक्तियों को अपने व्यतिगत विवरण के साथ, खुद के द्वारा लिखी गईं कोई कविता या लेख तथा इस वर्कशॉप में क्यों भाग लेने चाहते हैं इस पर एक निबंध लिखकर हमें मेल करना है । हमें मेल करने की अंतिम तिथि -4 जून है । इच्छुक व्यक्ति club.ink13@gmail.com पर अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं । 8 जून को दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक होने वाली यह वर्कशॉप पूरी तरह से निःशुल्क है ।


प्रदेश के 30 हजार से अधिक सरकारी मिडिल स्कूल में विज्ञान मित्र क्लब
Our Correspondent :17 Jan. 2017
स्कूल शिक्षा विभाग ने 30 हजार 341 सरकारी मिडिल स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के मकसद से विज्ञान मित्र क्लब गठन करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में शाला के शिक्षकों को आवश्यक निर्देश दिये गये हैं।
निर्देश में कहा गया है कि सरकारी मिडिल स्कूल में कक्षा 6, 7, 8 में सक्रिय विद्यार्थियों का चयन कर क्लब का गठन करवाया जाये। एक क्लब में अधिकतम 50 विद्यार्थी को रखा जाये। क्लब का गठन होने पर इसका एक दल नायक होगा, जो संचालक सहयोगी की भूमिका में रहेगा। शेष छात्र सहयोगी-पर्यावरण-मित्र कहलायेंगे। क्लब में बाल केबिनेट के एक प्रतिनिधि को भी शामिल किया जायेगा। विज्ञान मित्र क्लब में मार्गदर्शनकर्ता के रूप में एक शिक्षक को भी नामांकित किया जायेगा। स्कूल से कहा गया है कि क्लब का नामकरण भारतीय वैज्ञानिक, आविष्कारक अथवा प्रसिद्ध स्थल आदि के नाम पर किया जा सकता है।
क्लब की गतिविधियाँ जल की स्थिति, प्रदूषण, जल-संरक्षण, जैव-विविधता, ऊर्जा-संरक्षण, अपशिष्ट एवं उसका प्रबंधन, प्राकृतिक आपदाएँ और इससे निपटने के उपाय, रसायनों के प्रयोग से फैलता प्रदूषण और वैज्ञानिक तथ्य पर केन्द्रित होंगी। विज्ञान मित्र क्लब प्रश्न-मंच, संगोष्ठी, चित्रकला, निबंध और विज्ञान खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित करेगा। क्लब अपने सदस्यों के साथ वन्य-जीव उद्यान, संग्रहालयों और प्राकृतिक स्थलों का भी समय-समय पर दौरा करेगा। क्लब मुख्य रूप से शहर में अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों को मिटाने के लिये रैली भी करेगा। साथ ही अपने नजदीक के क्षेत्रों में पॉलिथिन के उपयोग को निरुत्साहित करने के लिये भी काम करेगा। क्लब के गठन के लिये आवश्यक राशि भी उपलब्ध करवायी जा रही है।


श्री सारंग ने अलीराजपुर में छात्रावास का किया औचक निरीक्षण
Our Correspondent :28 November 2016
श्री सारंग ने अलीराजपुर में छात्रावास का किया औचक निरीक्षण, अव्यवस्था पाए जाने पर दिए दो अफसरों को सस्पेंड करने के आदेश-----भोपाल। सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग ने आज 27 नवंबर की शाम को अलीराजपुर स्थित एक आदिवासी छात्रावास का औचक निरीक्षण किया जिसमें छात्राावास में भारी अव्यवस्था पाए जाने के फलस्वरूप उपायुक्त आदिवासी विभाग श्री डामोर तथा छात्रावास अधीक्षक पालसिंह रावत को तत्काल सस्पेंड किए जाने के आदेश दिए। इस मौके पर कलेक्टर तथा एसपी भी मौजूद थे। श्री सारंग अलीराजपुर के प्रभारी मंत्री हैं और वे इस समय अलीराजपुर तथा झाबुआ के दौरे पर हैं। इसी मौके पर उन्होंने ग्राम बड़ी में शासकीय बालक आश्रम का औचक निरीक्षण किया। इसमें भारी अव्यवस्था पाई गई। इसमें खानेे का सामान, साफ सफाई, प्रकाश व्यवस्था आदि सभी में अनियमितता पाई गई। श्री सारंग ने नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए। यह छात्रावास आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित किया जा रहा है।


नई शिक्षा नीति पर 'युवा मंच' का आयोजन
भोपाल. 1 September 2016
सेंभारत सरकार 30 साल बाद भारत की शिक्षा नीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव करने जा रही है । इन बदलावों के लिए सरकार एक नई शिक्षा नीति पर काम कर रही है । सरकार की यह नई नीति 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्थान लेगी । स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा व तकनीक शिक्षा में समयानुकूल परिवर्तन करना इस नई नीति को लाने के पीछे मुख्य कारण है ।
भारत सरकार द्वारा इस आशय से पिछले दिनों एक समिति का गठन किया था । पूर्व कैबिनेट सचिव टी.एस.आर. सुब्रमणियम की अध्यक्षता वाली इस समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है ।
नागरिकों के अवलोकन के लिए यह रिपोर्ट मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय की वैबसाइट पर अपलोड कर दी गयी है
इस रिपोर्ट पर युवाओं के विचार जानने के उद्देश्य से स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी इस रविवार एक विशेष आयोजन कर रही है । युवा मंच नामक इस आयोजन में 30 वर्ष से कम का कोई भी युवा इस प्रस्तावित शिक्षा नीति पर अपने विचार व्यक्त कर सकता है ।
कार्यक्रम में भाग लेने के लिए युवाओं को अपने भाषण का सार 2 सितंबर तक लाइब्रेरी में जमा कराना होगा । भाषण सार के आधार पर 20 युवाओं को इस कार्यक्रम में बोलने का मौका दिया जाएगा
प्रतिभागी अपने विचार हिन्दी या इंग्लिश किसी भी भाषा में व्यक्त कर सकते हैं । हर युवा को अपनी बात रखने के लिए 3 मिनिट का समय दिया जाएगा । जब प्रतिभागी अपनी बात रख चुका होगा तब कोई भी श्रोता उसके द्वारा कही गयी बात पर अपने सवाल पूंछ सकेगा
प्रज्ञा प्रवाह के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में 5 सर्वश्रेष्ठ युवा वक्ताओं को पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया जाएगा
कार्यक्रम में भाग लेने के लिए दो तरीके से रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है
1. स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी के काउंटर पर अपना 'भाषण -सार' जमा करके
2. लाइब्रेरी की मेल आईडी svlbpl@gmail.com पर अपना भाषण सार मेल करके
रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि - 2 सितंबर 2016 है
कार्यक्रम का संक्षिप्त विवरण
कार्यक्रम - युवा मंच
विषय - नई शिक्षा नीति
दिनांक - 4 सितंबर 2016
समय - शाम 5 बजे
स्थान - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी
क्या होगा - 20 युवा वक्ता नई शिक्षा नीति पर अपने विचार व्यक्त करेंगे
कौन भाग ले सकता है - 20 वर्ष से कम का कोई भी युवा
किस भाषा में बोल सकते हैं - हिन्दी या इंग्लिश
भाग लेने के लिए क्या करना है - अपना भाषण सार लिखकर लाइब्रेरी में जमा करना है रजिस्ट्रेशन की आखिरी तिथि - 2 सितंबर 2016


स्कूलों में शिक्षा निर्धारण के मापदंड तय हों
14 April 2016
शिक्षा, जहाँ हर बच्चे का जन्मसिद्ध अधिकार है - वहीं एक पवित्र कार्य भी है। इसलिए समाज में अनेक ऐसे उदाहरण मिल जायेंगे - जहाँ व्यक्तियों ने सरकारी उच्च पद में चयन होने के बावजूद शिक्षा के पवित्र कार्य में योगदान देने और देश की युवाशक्ति को शिक्षित और संस्कारी बनाने के लिए लोगों ने शिक्षक बनना अधिक पसंद किया।
जहाँ सरकार द्वारा प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्ति का अधिकार देना प्रशंसनीय और श्लाघनीय कार्य है - वहीँ शिक्षा उचित फीस पर उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित करना सरकारों का कर्तव्य भी है।
आज जबकि शिक्षा के क्षेत्र में निजी क्षेत्र को राष्ट्र के शैक्षिक विकास में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी दी जा रही है - वहीँ यह भी देखा जाना आवश्यक है कि शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से बच्चों के अभिभावकों को लूटा तो नहीं जा रहा है। आप शिक्षण संस्थानों से सामान्य लाभ तो कमा सकते हैं - किन्तु उसे जनता के शोषण का माध्यम नहीं बना सकते।
इस सम्बन्ध में भारी फीस वृद्धि करने अभिभावकों की जेब पर डाका डालने के प्रश्न पर यह कहना कि यदि आप अधिक फीस नहीं दे सकते, तो सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाएं। यह एक मंत्री का वक्तव्य हो सकता है, जनता के प्रतिनिधि सांसद का नहीं। यदि आप ऐसा कहते हैं - तो प्रकारांतर से शोषण का समर्थन कर रहे हैं।
निश्चित ही निजी स्कूलों में फीस निर्धारण के मापदंड तय होना चाहिए, ताकि बच्चों के अभिभावकों को शोषण से बचाया जा सके। निजी शिक्षा संस्थानों की लॉबी इतनी सशक्त है कि वाजपेयी सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री के फीस कम करने के डॉ. मुरलीमनोहर जोशी के प्रयासों को वह ध्वस्त कर चुकी है।



मदरसा बोर्ड हाई स्कूल, हायर सेकेण्डरी ऑनलाइन परीक्षा फार्म तिथि 15 मार्च हुई
11 March 2016
मदरसा बोर्ड की हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन फार्म भरने की तिथ 29 फरवरी से बढाकर 15 मार्च कर दी गई है। अब 15 मार्च तक आवेदन बिना विलम्ब शुल्क के और 16 से 31 मार्च तक 200 रुपये विलम्ब शुल्क के साथ स्वीकार किए जायेंगे। बोर्ड ने अध्ययन केन्द्रों से कहा है कि वे एम.पी. ऑनलाइन पोर्टल से प्राप्त भरे हुए परीक्षा आवेदन-पत्र -सहपत्रों सहित अतिशीघ्र बोर्ड कार्यालय में जमा करें।


सभी के प्रयास से शिक्षा का स्तर सुधरेगा- मंत्री श्री जैन
Our Correspondent :23 September 2015
राज्य सलाहकार परिषद की बैठक में मंत्री श्री पारस जैन

भोपाल। मप्र के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री पारस जैन ने कहा है कि मध्यप्रदेश में विगत 10 वर्ष में स्कूली शिक्षा के स्तर में सुधार के लिये अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं। इस दिशा में कारगर पहल करते हुए गुणवत्ता वर्ष भी मनाया गया। शैक्षणिक गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में सभी के संयुक्त प्रयास की जरूरत है। श्री जैन आज स्कूल शिक्षा की राज्य सलाहकार परिषद की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में राज्य मंत्री स्कूल शिक्षा श्री दीपक जोशी भी उपस्थित थे।
श्री जैन ने कहा कि परिषद की बैठक प्रत्येक 3 माह में बुलायी जाये। उन्होंने सदस्यों के सुझावों का स्वागत करते हुए उन पर अमल के निर्देश भी दिये। श्री जैन ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा भारत सरकार को जो प्रस्ताव भेजे गये हैं, उनकी स्वीकृति के लिये लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि शालाओं में शिक्षक समय पर उपस्थित रहें तथा पढ़ाई की माकूल व्यवस्था बनी रहे, इसके ठोस इंतजाम किये जायें। श्री जैन ने कहा कि राज्य सरकार ने अध्यापकों और संविदा शाला शिक्षकों के हितों का सदैव ध्यान रखा है। उन्होंने बताया कि 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षा को पुन: शुरू करवाने के प्रयास किये जा रहे हैं। संभव है कि अगले सत्र से यह व्यवस्था लागू हो जाये। उन्होंने प्रतिभा-पर्व जैसे आयोजन में जन-प्रतिनिधियों को भी शामिल होने की समझाइश दी।
बैठक में परिषद की विगत 2 जून को सम्पन्न कार्यवाही के विवरण और लिये गये फैसलों पर चर्चा की गयी। आयुक्त लोक शिक्षण ने सदस्यों के सुझावों के संबंध में किये गये क्रियान्वयन की जानकारी दी। बैठक में राज्य शिक्षा केन्द्र की अपर मिशन संचालक श्रीमती स्वाति मीना, संचालक लोक शिक्षण श्री राजेश जैन, परिषद के सदस्य सर्वश्री ओमप्रकाश जांगलवा, हुकुमचंद भुवन्ता, गुलजारीलाल दुबे, रामकुमार भावसार, त्रिलोचन त्रिपाठी, रूपेश विश्वकर्मा, बालाराम गुप्ता और प्रकाश रोकड़े उपस्थित थे।


अध्यापकों के हित में पिछले 10 वर्ष में हुए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय
Our Correspondent :23 September 2015
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने अध्यापकों के हित में पिछले 10 साल के दौरान अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लेकर उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करवाया है। संविदा शाला शिक्षक और अध्यापक संवर्ग के संविलियन, नियुक्ति, वेतनमान में संशोधन, क्रमोन्नति, अंतरिम राहत और एक सितम्बर, 2017 से नियमित वेतनमान दिये जाने आदि निर्णय उनके पक्ष में लिये गये हैं। राज्य सरकार ने समय-समय पर अध्यापक संवर्ग द्वारा की जाने वाली माँगों को पूरा करने के न सिर्फ हरसंभव प्रयास किये, बल्कि शिक्षकों के कल्याण की दिशा में भी ठोस कदम उठाये।
वस्तुस्थिति यह है कि वर्ष 2001 में संविदा पर नियुक्त शिक्षाकर्मी श्रेणी एक, दो और तीन क्रमश: रुपये 4500, रुपये 3500 और रुपये 2500 प्रतिमाह मानदेय पाते थे1 वर्तमान में अध्यापक संवर्ग में यही शिक्षाकर्मी राज्य सरकार द्वारा पिछले 8 वर्ष में प्रदत्त समस्त लाभों को मिलाकर क्रमश: वरिष्ठ अध्यापक 25000 रुपये, अध्यापक 23,000 रुपये और सहायक अध्यापक रुपये 15000 प्रतिमाह वेतन प्राप्त कर रहे हैं।
प्रदेश में वर्ष 2007 तक शिक्षाकर्मी वर्ग-1 को वेतनमान रु. 1200-40-1600, वर्ग-2 को रु. 1000-30-1600 और वर्ग-3 को 800-20-1200 वेतनमान तथा समय-समय पर महँगाई भत्ता मिलता था। वर्ष 2007 तक संविदा शाला शिक्षक निश्चित मासिक मानदेय पर तैनात थे। श्रेणी-1, 2 एवं 3 को क्रमश: 4500, 3500, 2500 रुपये मासिक पारिश्रमिक प्राप्त होता था। वर्ष 2011 में इनके मासिक पारिश्रमिक को बढ़ाकर दोगुना अर्थात 9000, 7000, 5000 रुपये किया गया।
राज्य सरकार ने शिक्षकों के हित में फैसला लेते हुए विगत एक अप्रैल, 2007 से अध्यापक संवर्ग का गठन कर पृथक-पृथक वेतनमान एवं पदनाम स्वीकृत किया था। सरकार ने विगत एक अप्रैल, 2013 से अध्यापक संवर्ग के लिये ग्रेड-पे के साथ संशोधित वेतनमान स्वीकृत किया। पहले जहाँ वरिष्ठ अध्यापक का वेतनमान 5000-175-8500, अध्यापक का 4000-125-6500 और सहायक अध्यापक का 3000-100-5000 वेतनमान था, उसे बढ़ाकर 4500-25000 रुपये तथा संवर्ग वेतन क्रमश: 1900, 1650 एवं 1250 रुपये किया गया। अध्यापकों को शासकीय कर्मचारियों के समान महँगाई भत्ता भी इसी अवधि से दिया जा रहा है। सरकार ने वर्ष 1998 से 2001 तक नियुक्त सभी शिक्षाकर्मियों का वर्ष 2007 में संविलियन भी किया। साथ ही संविदा शाला शिक्षकों को 3 साल की सेवा के बाद अध्यापक संवर्ग में नियुक्ति देने का प्रावधान भी किया गया।
अध्यापक संवर्ग को वर्ष 2013-14 में 12 एवं 24 वर्ष पूरा होने पर क्रमोन्नत वेतनमान भी दिया गया है। वर्ष 2013 में अध्यापक संघ के प्रतिनिधियों से हुई चर्चा में बनी सहमति के आधार पर राज्य सरकार ने निर्णय लिया था कि एक सितम्बर, 2017 से अध्यापक संवर्ग को नियमित वेतनमान दिया जायेगा। इसके साथ ही हर साल अर्थात 2013 से 2016 तक सालाना अंतरिम राहत दी जायेगी। सरकार द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर अंतरिम राहत की किश्तें भी दी गयीं। विगत 4 सितम्बर, 2013 को जारी आदेश से अध्यापक संवर्ग को नियमित शिक्षकों के समान छठवाँ वेतनमान दिनांक एक सितम्बर, 2017 से मंजूर किया गया। उनके लिये हर साल 4 समान किश्त में अंतरिम राहत स्वीकृत की गयी। अध्यापक संवर्ग को नियमित शिक्षकों के समान जो छठवाँ वेतनमान स्वीकृत हुआ है।
अध्यापक संवर्ग को एक सितम्बर, 2013 एवं एक सितम्बर, 2014 को अंतरिम राहत की पहली एवं दूसरी किश्त दी जा चुकी है। इस साल की तीसरी किश्त स्वीकृति के लिये राज्य शासन के समक्ष प्रचलित है। इस प्रकार जहाँ राज्य सरकार ने 1-9-2017 से अध्यापक संवर्ग को नियमित वेतनमान तथा वर्ष 2013 से 2016 तक हर साल देय वेतनमान के अंतर की राशि को चार किश्त में देने का फैसला लेकर उसका पालन सुनिश्चित किया।
अब अध्यापक संघ अपनी ही सहमति के विपरीत जाकर 1 सितम्बर 2017 से देय नियमित वेतनमान को इसी साल अर्थात वर्ष 2015 से देने की माँग कर रहा है, जो कतई उचित नहीं है। यह भी स्पष्ट है कि अध्यापक संवर्ग स्थानीय निकाय द्वारा नियुक्त कर्मचारी हैं। संविधान के 73 एवं 74वें संशोधन के फलस्वरूप इनकी नियुक्ति एवं नियंत्रण का अधिकार वर्ष 1998 से स्थानीय निकायों को सौंपा गया है। देश के अन्य राज्य ने भी ऐसा ही किया है। अध्यापक संवर्ग राज्य शासन के नियमित शिक्षक के समान अपना संविलियन चाहता है, जो संविधान की मंशा के बिलकुल अनुरूप नहीं है।


प्रस्तावित नई शिक्षा नीति सेन्ट्रल जोन बैठक में शामिल हुए उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्री जोशी
15 September 2015
देश की प्रस्तावित नई शिक्षा नीति पर लखनऊ में आज हुई बैठक में प्रदेश का प्रतिनिधित्व उच्च एवं स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी ने किया। अध्यक्षता मानव संसाधन मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी ने की। मध्यप्रदेश के साथ ही छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश और उत्तराखण्ड के शिक्षा मंत्री शामिल हुए।
बैठक में श्री जोशी ने प्रदेश में बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन के लिये गाँव की बेटी एवं प्रतिभा किरण योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बालिकाओं के लिये बनाये गये 324 छात्रावास, होटलों में काम करने वाले एवं सड़कों पर पन्नी बीनने वाले बच्चों की शिक्षा के लिये खोले गये आवासीय विद्यालय और सभी संभाग में 250 सीटर और जिलों में 100 सीटर छात्रावास विमुक्त एवं घुमक्कड़ जाति के बच्चों के लिये खोले जाने के बारे में बताया। श्री जोशी ने कहा कि राज्य के फण्ड से सभी विकासखण्ड में मॉडल स्कूल खोले गये हैं। उन्होंने बताया ‍िक कॉलेजों में ई-लायब्रेरी खोली जा रही हैं। खेलकूद सुविधाएँ भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

शासकीय स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था, उसका स्तर और गुणवत्ता सुधारने के मामले में इलाहाबाद उच्चत्तम न्यायालय का क्रन्तिकारी फैसला आया है । जोकि अभूतपूर्व और अद्वतीय फैसला है । आजादी के पूर्व की चर्चा करना तो व्यर्थ है क्योंकि वह अंग्रेजो की शिक्षा व्यवस्था थी, जिसमे डेली कालेज, दून स्कूल जैसे दर्जनों स्कूल फले फूले, लेकिन मैं हैरान हूँ कि आजादी के बाद ऎसे स्कूलों की संख्या कुछ दर्जन से बढ़कर हजारों में हो गई । आज देश में दो अलग-अलग शिक्षा व्यवस्थाएं चल रही हैं, एक अमीरों के लिए दूसरी गरीबों के लिए । अमीरों के लिए उपलब्ध इस शिक्षा व्यवस्था में इलाहाबाद उच्चत्तम न्यायालय द्वारा चिन्हित वर्ग जिसमे नेता, मंत्री, अधिकारी, कर्मचारी एवं नव धनाढ्य वर्ग शामिल है, जो अपने बच्चों को महंगी फीस वाले सर्व-सुविधा युक्त तरह तरह के नामो के अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ाता है । इन स्कूलों की फीस इतनी महंगी है कि मध्यम-वर्गीय परिवार के बच्चे और उनके माता-पिता उस तरफ देख भी नहीं सकते, इन मंहगे स्कूलों में से अधिकांश स्कूल उद्योगपतियों और व्यापारियों के ही है जिन्होंने शिक्षा को बड़ा व्यवसाय बना दिया है, जिसमे लोग कालेधन का निवेश करते है और भ्र्ष्टाचार से संपत्ति अर्जित करने वाले लोग अपने बच्चों को पढ़ाते है । इलाहाबाद उच्चत्तम न्यायालय के निर्णय से उत्तर-प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के आम तबके के लोगों में आशा और उम्मीद की आस जगी है । देश को आजादी तो मिली लेकिन आजादी का यह सूरज देश की 90% आबादी को अभी तक उजाला नहीं दे पाया है । नेता, अधिकारी, सट्टेबाज, उद्योगपति और समाज का एक बड़ा वर्ग ही इस प्रकाश से सराबोर होता रहा और नहाता रहा है यह बात स्वयं सिद्ध है । यदि समाज का नेतृत्व करने वाले व्यक्तियों और अधिकारीऒ , कर्मचारियों, उद्योगपतियों, व्यापारियों और इन शासकीय स्कूल को हेय दृष्टि से देखने वाले बड़े अंग्रेजी वर्ग के बच्चे शासकीय स्कूल में प्रवेश लेंगे तो ये समाज का नेतृत्व करने वाला बड़ा वर्ग इन शासकीय स्कूलों के भवन की, फर्नीचर की, पेयजल की, शौचालयों की एवं शिक्षको की उपस्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता की व्यवस्था स्वयं देखेगा । इन शासकीय शालाओं में प्रवेश लेने वाले बच्चों के अभिजात्य मम्मी-पापा आये दिन इन स्कूलों में आकर देखेगें कि उनका दुलारा स्कूल की छत के टपकते पानी के नीचे कीचड़ से सनी गीली टाटपट्टी पर तो नहीं पद रहा, मास्टर साब आये है या नहीं, फिर तो मध्यान्ह भोेजन भी इतना स्वादिष्ट और स्वरुचि पूर्ण मिलने लगेगा कि इन मॉम-डैड के नौनिहालों को घर से टिफ़िन लाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी ।
इलाहाबाद उच्चत्तम न्यायालय के शिक्षा व्यवस्था को लेकर दिए गए इस फैसले की तर्ज पर ही देश के शासकीय अस्पतालों के लिए भी यही नियम और सिद्धांत लागू हो तो शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी सुधार आ सकता है ।
अब तो नेताओं का जन-समस्यायों को लेकर आंदोलन करते हुए जेल जाना काम हो गया है, यदि जाते भी है तो एक दो दिन में पिकनिक जैसी करके बाहर आ जाते है या जमानत करा लेते है । लेकिन पूर्व में मैंने स्वयं ये अनुभव किया है जब - जब हम लोग आंदोलनों के कारण जेल जाते थे उस समय जेल की खान पान, रहन-सहन स्वास्थ्य इत्यादि सेवाएं एक-दम सुधर जाया करती थी । कुल मिलकर समाज के श्रेष्ठ वर्ग ही जहाँ-जहाँ स्वयं के हित लिए सरीक होते है, वहीं - वहीं गुणात्मक सुधार सुनिश्चित हो जाता है, अब देखना यह है कि देश भर की विभिन्न सरकारें इसे किस रूप में लेती है, फैसले को लागू करती भी है या नहीं, मुझे इसका इन्तजार रहेगा ।
" इलाहाबाद उच्चत्तम न्यायालय के इस क्रन्तिकारी फैसले को और फैसला देने वाले न्यायाधीशों को मेरा इंकलाबी सलाम "


शिक्षकों के आंदोलन के समर्थन में
शिक्षा अधिकार मंच, भोपाल और पालक महासंघ, म. प्र. द्वारा जारी संयुक्त प्रेस-विज्ञप्ति

मध्य प्रदेश में स्कूल व्यवस्था में बढ़ते हुए निजीकरण, भेदभावपूर्ण शिक्षा नीति और शिक्षकों की बदहाल स्थिति के खिलाफ़ मध्य प्रदेश शासकीय अध्यापक संघ द्वारा 12 मई को भोपाल में आयोजित धरना व प्रदर्शन का शिक्षा अधिकार मंच, भोपाल और पालक महासंघ, म. प्र. पूरा समर्थन करते हैं।
हमारा मानना है कि विगत दो दशकों से प्रदेश में जिन नीतियों को लागू किया गया है उससे सरकारी स्कूल व्यवस्था बदहाल हुई है और मुनाफा कमाने वाले निजी स्कूलों को बढ़ावा मिला है। इन्हीं नीतियों के चलते सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की हालत भी शोचनीय हो गई है। भेदभावपूर्ण सेवा-शर्तों, असमान वेतनमान, सरकारी स्कूलों में काम के माहौल व मूलभूत आवश्यकताओं की भारी कमी, गैर-शैक्षणिक कार्यों के बढ़ते बोझ आदि चुनौतियों से आज हमारे शिक्षक जूझ रहे हैं जो सीधे-सीधे सरकार की अन्यायपूर्ण शिक्षा नीति का कुपरिणाम है।
यह बड़े अफसोस की बात है कि सरकारी स्कूल व्यवस्था को बेहतर बनाने की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर राज्य सरकार स्कूलों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) की नीति लागू कर इन्हें निजी हाथों में सौंपने की योजना बना रही है। हालांकि अखबारों की रपट के अनुसार मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आश्वासन दिया है कि प्रदेश में सरकारी स्कूलों का निजीकरण नहीं किया जाएगा लेकिन इस मामले में सरकार की प्रतिबद्धता तभी साबित होगी जब वह पिछले दो दशकों से चली आ रही नीतियों को पलटकर शिक्षा में पीपीपी समेत हर प्रकार के निजीकरण को खत्म करेगी और सरकारी स्कूल व्यवस्था की बेहतरी के लिए ठोस नीति बना कर लागू करेगी।
इस संबंध में शिक्षा अधिकार मंच, भोपाल यह मांग करता है कि प्रदेश सरकार सभी सरकारी स्कूलों को शुरुआती तौर पर कम-से-कम केंद्रीय स्कूलों के समकक्ष अधोसंरचनात्मक व अन्य सुविधाएं (जैसे संगीत, नृत्य, ललित कलाओं, शारीरिक शिक्षा व खेल-कूद के शिक्षण की सुविधाएं; शिक्षक:विद्यार्थी अनुपात; विकलांगों के लिए समतामूलक पाठ्यचर्या, माहौल व सुविधाएं; कंप्यूटर शिक्षण) मुहैया कराने की 3-साला योजना आवश्यक वित्तीय प्रबंध समेत लागू करे। इसके साथ-साथ यह भी प्रावधान रहे कि इसी अवधि में हरेक शिक्षक-पद पर नियुक्ति हो जाएगी; सभी श्रेणियों के संविदा/अतिथि शिक्षकों का नियमित शिक्षक कैडर में संविलयन कर दिया जाएगा; यथोचित संख्या में गैर-शैक्षणिक कामों के लिए शिक्षणेतर कर्मचारियों को नियमित कैडर में नियुक्त किया जाएगा; और किसी भी शिक्षक/शिक्षिका से कभी भी, कोई भी गैर-शैक्षणिक काम नहीं करवाया जाएगा। इस तरह की ठोस योजना के अभाव में कोई भी आश्वासन महज एक दिखावा है। हम भोपाल समेत प्रदेश की जनता के हर हिस्से से अपील करते हैं कि हमारे शिक्षकों के आंदोलन का समर्थन करते हुए समतामूलक व बेहतर गुणवत्ता की सरकारी स्कूल व्यवस्था के निर्माण के लिए और शिक्षा में निजीकरण को खत्म करने के लिए जारी इस आंदोलन में शामिल हो।


बच्चों को शिक्षित के साथ संस्कारवान तथा संवेदनशील नागरिक बनाना जरूरी
Our Correspondent :19 December 2014
भोपाल । जनसंपर्क, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा तथा खनिज साधन मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि बच्चों को शिक्षित करने के साथ ही संस्कारवान तथा संवेदनशील नागरिक बनाना आज की जरूरत है। इससे बच्चे अच्छे नागरिक बनकर देश-प्रदेश का नाम रोशन कर सकेंगे। श्री शुक्ल आज यहाँ बोर्डिंग स्कॉलर प्ले-ग्रुप और नर्सरी स्कूल के 10वें वार्षिक समारोह यूपोहरि-2015 को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर विभागाध्यक्ष शिक्षा विभाग सत्य सांईं कॉलेज डॉ. सरोज गुप्ता विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थीं।
श्री शुक्ल ने कहा कि बच्चे गीली मिट्टी के लोंदे के समान होते हैं। उसे जैसा चाहो आकार दे दो। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को संस्कारवान नागरिक बनाने के लिये शुरूआती दौर में बुनियादी शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। जनसंपर्क मंत्री ने कहा कि वर्तमान युग प्रतिस्पर्धा तथा चुनौतियों से भरा है। इसे ध्यान में रखते हुए ही बच्चों को शिक्षा दी जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि बच्चे स्वभाव से ही नटखट होते हैं और ज्यादा देर तक किसी चीज पर केन्द्रित नहीं रह पाते। उनके नटखटपन को बनाये रखते हुए शिक्षित करने के साथ ही संस्कारवान बनाने के लिये बोर्डिंग स्कॉलर प्ले-ग्रुप और नर्सरी स्कूल बखूबी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा है।
जनसंपर्क मंत्री ने नोबल शांति पुरस्कार से विभूषित कैलाश सत्यार्थी का उल्लेख करते हुए कहा है कि हमें उनसे प्रेरणा लेना चाहिये। उन्होंने बचपन बचाओ अभियान में अपने आप को समर्पित कर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
श्री शुक्ल ने इस मौके पर विभिन्न प्रतियोगिता के विजेता नन्हे-मुन्ने बच्चों को पुरस्कृत कर उन्हें दुलार भी किया। जनसंपर्क मंत्री का नन्हे बच्चों ने अपने तरीके से स्वागत किया। संस्थान की संचालक एवं प्राचार्य डॉ. सीमा पचौरी ने गतिविधियों की जानकारी दी।


'मेगा मध्यप्रदेश क्विज'
(मध्यप्रदेश सामान्य ज्ञान पर आधारित ओपन क्विज)


शासकीय मौलाना आज़ाद सेंट्रल लाइब्रेरी इस रविवार 'मध्यप्रदेश' के इतिहास,संस्कृति एवं शासन व्यवस्था पर केंद्रित एक मेगा क्विज आयोजित कर रही है
अगले माह आयोजित होने वाली 'MPPSC प्रारंभिक परीक्षा' को ध्यान में रखकर आयोजित की जा रही क्विज पूरी तरह से निःशुल्क एवं सबके लिए ओपन है
इस अवसर पर MPPSC के पूर्व टॉपर एवं राज्य प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी छात्रों का मार्गदर्शन भी करेंगें

आयोजन के बारे में

क्विज का नाम - मीट द ऑथर
दिनांक - कोई लोकप्रिय लेखक रीडर्स से अपनी पुस्तकों पर चर्चा करता है
स्थान - 01 जुलाई 2014 (मंगलवार )
आयोजक - सायं 6 से 7 बजे तक
सह आयोजक - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी
क्विज के बारे में - राघव चंद्रा
थीम - सेंट ऑफ़ ए गेम
क्विज की भाषा - वाइल्ड लाइफ से जुड़ा एक फिक्शन
क्विज का स्वरुप - रूपा पब्लिकेशन्स दिल्ली
क्विज मास्टर शिवेन्दु जोशी (NLIU भोपाल के पूर्व छात्र, पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ)

क्विज कैसे होगी -

क्विज का पहला राउंड स्क्रीनिंग राउंड होगा
स्क्रीनिंग में अधिकतम 250 टीमें भाग ले सकेंगी
स्क्रीनिंग टेस्ट एक लिखित टेस्ट होगा
स्क्रीनिंग टेस्ट में सबसे अच्छा स्कोर करने वाली 6 टीमें फाइनल क्विज खेलेंगी
फाइनल क्विज एक मौखिक क्विज होगी

फाइनल क्विज के टॉपिक्स

मध्यप्रदेश सरकार की प्रमुख नीतियाँ,योजनाएं एवं प्रशासनिक पहलें
पिछले वर्ष प्रदेश में हुए प्रमुख आयोजन एवं दिए गए पुरूस्कार
मध्यप्रदेश के चर्चित व्यक्ति
मध्यप्रदेश के प्रमुख सांस्कृतिक,धार्मिक एवं औद्योगिक केंद्र
मध्य प्रदेश के बारे में नवीनतम आंकड़े
मध्यप्रदेश के प्रमुख पदाधिकारी एवं संस्थाएं
मध्यप्रदेश में खेल प्रशासन एवं उपलब्धियां
मध्यप्रदेश के प्रमुख एक्टस

भाग कैसे ले सकते हैं

- कोई भी इच्छुक व्यक्ति इस क्विज में भाग ले सकता है
- क्विज में भाग लेने के लिए 02 लोगों की टीम जरुरी होगी
- भाग लेने के लिए शनिवार शाम 5 बजे तक लाइब्रेरी काउंटर पर रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है
- फ़ोन से भी रजिस्ट्रेशन कराये जा सकते हैं (फ़ोन नंबर है -2741317 )
- क्विज में अधिकतम 250 टीमें ही भाग ले सकती हैं

 

मीट द ऑथर कार्यक्रम (लेखक राघव चंद्रा के साथ)


स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी की राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय रही साहित्यिक सीरीज 'मीट द ऑथर' एक बार फिर शहर के पाठकों के लिए शुरू की जा रही है इस मंगलवार (01 जुलाई ) को लाइब्रेरी में एक बार 'मीट द ऑथर' कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा जिसमे 'सेंट ऑफ़ ए गेम' नामक पुस्तक के लेखक 'राघव चंद्रा' रीडर्स से रूबरू होंगें कार्यक्रम शाम को 6 बजे से लाइब्रेरी में आयोजित किया जाएगा जिसमे शहर का कोई भी पाठक भाग ले सकता है

मीट द ऑथर

कार्यक्रम का नाम - मीट द ऑथर
क्या होता है इसमें - कोई लोकप्रिय लेखक रीडर्स से अपनी पुस्तकों पर चर्चा करता है
दिनांक - 01 जुलाई 2014 (मंगलवार )
समय - सायं 6 से 7 बजे तक
स्थान - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी लेखक - राघव चंद्रा
पुस्तक का नाम - सेंट ऑफ़ ए गेम
पुस्तक किस बारे में है - वाइल्ड लाइफ से जुड़ा एक फिक्शन
प्रकाशक - रूपा पब्लिकेशन्स दिल्ली
लेखक के बारे में मीट द ऑथर कार्यक्रम में आ रहे 'राघव चंद्रा' मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं, वर्तमान में दिल्ली में पदस्थ 'राघव चंद्रा' की पहली पुस्तक 'सेंट ऑफ़ ए गेम' के नाम पिछले माह प्रतिष्ठित प्रकाशक रूपा पब्लिकेशन से प्रकाशित हुई है

 

"लेट्स प्ले"- जर्मन थिएटर वर्कशॉप


'भारत में जर्मन भाषा के 100 साल पूरे होने पर जर्मन सरकार का आयोजन'

1914 में पहली बार भारत में 'जर्मन लैंग्वेज' की पढाई शुरू हुई थी, पुणे और बम्बई विश्वविद्यालयों में एक साथ शुरू हुई जर्मन भाषा अब भारत में अपने 100 साल पूरी कर चुकी है. इस महत्वपूर्ण अवसर को यादगार बनाने के लिए जर्मन सरकार देश भर में विशेष आयोजन कर रही है
स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी भी जर्मन सरकार के सहयोग से पिछले 4 वर्षों से 'जर्मन भाषा की ट्रेनिंग' दे रही है इसलिए जर्मन भाषा के 100 वर्ष पूरे होने पर यहाँ भी एक विशेष आयोजन किया जा रहा है
नई दिल्ली स्थित जर्मन सरकार की सांस्कृतिक संस्था 'मैक्स मूलर भवन' (गेटे इंस्टिट्यूट) के सहयोग से स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में आगामी 12 मई (सोमवार) को जर्मन थिएटर वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है
पूरी तरह से निःशुल्क इस वर्कशॉप में केवल 10 से 13 वर्ष की आयु के स्कूली बच्चे ही भाग ले सकते हैं पूरी वर्कशॉप इंग्लिश में होगी इसलिए इसमें भाग लेने के लिए जर्मन भाषा का ज्ञान होना जरुरी नहीं है

कार्यक्रम एक नज़र में

कार्यक्रम का नाम - लेट्स प्ले
क्या है कार्यक्रम - जर्मन थिएटर वर्कशॉप
किसके लिए - 10 से 13 साल के स्कूली बच्चों के लिए (कक्षा 6 से 8)

आयोजन किसका है

कौन आयोजित कर रहा है - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी
किसके सहयोग से - मैक्स मूलर भवन नई दिल्ली (जर्मन सरकार)
किस अवसर पर - भारत में जर्मन भाषा टीचिंग के 100 साल पूरे होने पर

कहाँ और कब होगा आयोजन

कहाँ होगा आयोजन - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी
दिन व दिनांक - सोमवार , 12 मई 2014
समय - सुबह 11 बजे से
समयावधि - एक वर्कशॉप 90 मिनिट की (कुल 02 वर्कशॉप्स)

कैसे भाग ले सकते हैं

कौन भाग ले सकता है - 10 से 13 वर्ष का कोई भी स्कूली छात्र
भाग लेने के लिए क्या जर्मन जानना जरुरी है - बिलकुल भी नहीं
कैसे भाग ले सकते हैं - लाइब्रेरी जाकर या फ़ोन करके रजिस्ट्रेशन कराएं
फ़ोन नंबर है - 2553765 एवं 2553767
कितने लोग भाग ले सकते हैं - 50 (हर वर्कशॉप में अधिकतम 25 छात्र)
रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि - 10 मई 2014

कौन सिखाएगा,क्या सिखाएगा

वर्कशॉप की थीम - जर्मन थिएटर पेडागॉगी
ट्रेनर - जूडिथ मानके (जर्मन थिएटर आर्टिस्ट)
क्या सिखाया जायेगा - अपने आप को स्टेज पर एक्सप्रेस कैसे करें
ट्रेनिंग तकनीक - थिएटर गेम्स एवं इम्प्रो टेक्निक्स
कोर वैल्यू - Follow your first idea, find your moment, be brave, go on stage and start to play

"माया एन्गेलो" पर क्लब इंक का विशेष सत्र
सुप्रसिद्ध अमेरिकी लेखिका 'माया एन्गेलो' पर केंद्रित क्लब इंक का विशेष सत्र आज स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में आयोजित किया गया. इस अवसर पर शहर के रीडर्स ने माया के जीवन और उसकी राइटिंग स्टाइल पर चर्चा की और उनकी कविताएं पढ़ीं।
रीडर्स का मानना था कि हालांकि माया की राइटिंगस थोड़ा एग्रेसिव है पर जिस खूबसूरती के साथ उन्होंने समाज के 'नेग्लेक्टेड' (किनारे कर दिए गए) लोगों की आवाज़ को दुनिया के सामने रखा है वैसा आज तक कोई नहीं कर पाया इसलिए इतिहास में तो उनका नाम दर्ज हो ही चुका है आगे भी उनकी यह विशिष्ठ लेखनी समाज का मार्गदर्शन करती रहेगी

कार्यक्रम एक नज़र में -

कार्यक्रम का नाम - मेमोरेबिलिया : आ रीडर्स डिस्कशन ऑन माया एन्गेलो
कब - रविवार दोपहर 12 बजे
कहाँ - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी भोपाल
आयोजक - क्लब इंक (लाइब्रेरी का रीडर्स क्लब)
कार्यक्रम में क्या हुआ

स्काइप द्धारा दुनिया के कई कोनों से लोग इस कार्यक्रम से जुड़े

भोपाल के बाहर रह रहे कई लोगों ने इस कार्यक्रम से जुड़ने की इच्छा व्यक्त की थी, इसलिए स्काइप के माध्यम से इन लोगों (लेखक एवं पाठक) को लाइब्रेरी में चल रहे कार्यक्रम से जोड़ा गया. ऑनलाइन ऑफलाइन दोनों स्तर पर 2 घंटे तक माया की पोएट्री पर चर्चा होती रही
दिल्ली की स्कूली छात्रा एवं 5 प्रकाशित पुस्तकों की लेखिका 'त्रिवर्णा हरिहरन' ने माया की पोयम्स को सुनाया और माया की लेखनी के फंडामेंटल्स लोगों के साथ शेयर किये

लाइब्रेरी के सीनियर मेंबर्स ने बताया कि "माया क्यों अलग हैं''

माया को पढ़ चुके लाइब्रेरी के सीनियर्स मेंबर्स ने कुछ हद तक महिलावादी एवं मानव स्वभाव में मौजूद सकारात्मकता और नकारात्मकता की गहरी खाई को समझाने वाला बताया
डॉ अमिता सिंह का कहना था कि 'वे जबरदस्त आंतरिक सुंदरता की धनी महिला थीं , उन्होंने अपने बेहद बुरे अतीत से सफलतापूर्वक छुटकारा पाकर विचारणीय मुद्दों को समाज के सामने रखा'

माया एन्गेलो पर केंद्रित विशेष न्यूज़लेटर 'इंकलेट' जारी किया गया

इस अवसर को यादगार बनाने के लिए क्लब इंक ने 'माया एन्गेलो' पर विशेष न्यूज़लेटर भी जारी किया, इस न्यूज़लेटर में माया को विशेष श्रद्धांजलि दी गयी तथा उनपर केंद्रित दुनिया भर के रीडर्स की रचनायें शामिल की गयीं दो अमेरिकी स्कूली छात्रों ने भी इस न्यूज़लेटर के लिए अपनी रचनायें भेजी थीं


स्कूल चलें हम अभियान-2014 चलेगा चार चरण में

भोपाल। मध्यलप्रदेश में 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों का स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए स्कूल चलें हम अभियान-2014 चार चरण में चलेगा। प्रथम चरण 30 अप्रैल को प्रारंभ हो चुका है। दूसरा चरण 10 जून से चलेगा। तृतीय चरण प्रतिभा पर्व के प्रथम चरण के पहले और चतुर्थ चरण प्रतिभा पर्व के द्वितीय चरण के पहले संचालित किया जायेगा। इस संबंध में व्यापक निर्देश अपर मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा और प्रमुख सचिव आदिम जाति कल्याण द्वारा संयुक्त रूप से सभी कलेक्टर और सी.ई.ओ. जिला पंचायत को दिये जा चुके हैं।

प्रथम चरण

इस चरण में 5 मई तक कक्षा एक में प्रवेश योग्य बच्चों की सूची तैयार की जायेगी। इसके साथ ही ग्राम शिक्षा पंजी का अद्यतनीकरण भी होगा। कक्षा 6 में प्रवेश योग्य बच्चों की सूची भी 9 मई तक तैयार की जायेगी। शाला प्रभारी द्वारा 8 वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले बच्चों के पालकों से सम्पर्क कर कक्षा 9 में प्रवेश के लिए समझाइश दी जायेगी। कक्षा एक, 6 एवं 9 में प्रवेश योग्य बच्चों के नाम की सूची एक जून 2014 को पोर्टल में डाल दी जायेगी। अभियान में शिक्षक घर-घर जाकर अभिभावकों से सम्पर्क करेंगे।

द्वितीय चरण

इस चरण में ग्राम प्रभारी 10 से 16 जून तक आँगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की माताओं से सम्पर्क करेंगे। उन्हें 16 जून को 6 वर्ष के बच्चों के साथ स्कूल आने के लिए प्रेरित किया जायेगा। शिक्षकों द्वारा बच्चों के पालकों से 11 एवं 16 जून के मध्य दो बार संपर्क किया जायेगा। स्कूलों में 16 जून को प्रवेशोत्सव मनाया जायेगा।
इसके अतिरिक्त ब्रिज कोर्स का संचालन 25 जून से 20 जुलाई तक किया जायेगा। कक्षा 2 से 5, 7 और 8 मंक 25 जून तक प्रवेश दिया जायेगा। माइग्रेशन वाले बच्चों का प्रवेश 31 जुलाई तक होगा। नामांकन से शेष रहे बच्चों की पहचान एवं उनका नामांकन 30 जून तक करवाया जायेगा।


गणतंत्र दिवस पर हुआ "विकी कॉन्स्टी " का आयोजन


Our Correspondent :28 January 2014
भोपाल। 26 जनवरी को स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में युवाओं के लिए "भारतीय संविधान " पर एक ओपन क्विज आयोजित की गयी। 20 वर्ष तक के छात्रों के लिए आयोजित इस क्विज में 86 टीम्स ने भाग लिया।
पांच राउंड्स में आयोजित इस क्विज में भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था से जुड़े 150 से ज्यादा से ज्यादा प्रश्न पूंछे गए

कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है

कार्यक्रम - विकी कॉन्स्टी

क्या था आयोजन -भारतीय संविधान पर क्विज
किसके लिए - 20 वर्ष तक के युवाओं के लिए
कब हुई - 26 जनवरी को
कहाँ हुई - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी भोपाल
आयोजक - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी एवं लीगल एज टुटोरिअल

क्विज मास्टर - हर्ष गगरानी (प्रसिद्ध लेखक व क्विज मास्टर)
कुल प्रतिभागी - 172 (86 टीम्स )
कुल राउंड्स - 05
पुरूस्कार - 5000 रुपये के पुरूस्कार,ट्रॉफी एवं मेडल्स

विजेताओं के नाम -
प्रथम - जागृति गुप्ता एवं प्रत्युष सिंह (झांसी की टीम)
द्वितीय - हिमांशु गुप्ता एवं मयंक देवांगन (भोपाल)
तृतीय - सत्यम बरोलिया एवं सारांश सैनी (भोपाल )

राउंड्स का विवरण

प्रथम राउंड - स्क्रीनिंग राउंड (इसमें एक निबंध दिया गया था जिसके बीच में मौज़ूद खाली स्थानों को भरना था )
दूसरा राउंड - शब्द को पहचानें (4 चित्रों को जोड़कर एक संवैधानिक शब्द निकालना था )
तीसरा राउंड - केस ऑफ़ मिस्सिंग लिंक (चार शब्द,व्यक्तियों या प्रावधानों में कॉमन चीज़ को ढूंढना था )
चौथा राउंड -टाइम लाइन को सही क्रम में जमाएं
पांचवां राउंड - रैपिड फायर राउंड

प्रमुख प्रश्न

प्रश्न - प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा का भारतीय संविधान से क्या कनेक्शन था
उत्तर - इन्होने संविधान की पहली प्रति अपने हाथों से लिखी थी

प्रश्न - अटल बिहारी बाजपेई ने किस घटना के बाद हमेशा से चले आ रहे लोकप्रिय नारे "जय जवान जय किसान " मैं "जय विज्ञान " को जोड़ा था
उत्तर - पोखरण परीक्षण के बाद

प्रश्न - देश में पहली बार ऑनलाइन वोटिंग कब और कौन से चुनाव में हुई थी
उत्तर - गुजरात नगरीय निकाय चुनाव 2010

प्रश्न - किसे भारतीय संविधान का मैग्नाकार्टा कहा जाता है
उत्तर - मौलिक अधिकार (भाग तीन )

प्रश्न - किस प्रधानमन्त्री ने पहली बार भारत में "अल्पमत सरकार" बनाई थी
उत्तर - चौधरी चरण सिंह


जर्मन स्टूडेंट्स का ' स्टेट यूथ कैंप" कल
25 जनवरी को होटल नूर उस सबाह में होगा मैक्स मूलर भवन का आयोजन

Our Correspondent :25 January 2014
भोपाल। जर्मन सरकार की संस्था "मैक्स मूलर भवन" ने 03 वर्ष पहले भोपाल के 'केंद्रीय विद्यालयों' में जर्मन भाषा पढ़ाना शुरू किया था. अब तक केंद्रीय विद्यालय के सैकड़ों छात्र जर्मन भाषा सीख चुके हैं. वर्त्तमान में भोपाल के अलावा प्रदेश के अन्य केंद्रीय विद्यालयों में भी जर्मन भाषा पढ़ाई जाती है.
मैक्स मूलर भवन द्वारा 24 जनवरी 2014 को प्रदेश में पहली बार जर्मन स्टूडेंट्स के लिए इंटरनेशनल एग्जाम आयोजित की गयी. जिसमे भोपाल शहर के 80 स्कूली छात्रों ने भाग लिया। यह संख्या देश के दुसरे प्रदेशों की तुलना में बहुत ज्यादा है.
प्रदेश भर के छात्रों के लिए "यूथ कैंप"

मध्य प्रदेश के विभिन्न केंद्रीय विद्यालयों में जर्मन भाषा पढ़ रहे छात्रों के लिए शनिवार 25 जनवरी को होटल नूर उस सबाह में एक यूथ कैंप आयोजित किया जा रहा है. मैक्स मूलर भवन नई दिल्ली द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सभी केंद्रीय विद्यालयों के कुछ चुनिंदा छात्र भाग लेंगे तथा दिन भर चलने वाले इस कैंप में अपनी सांस्कृतिक,साहित्यिक एवं भाषायी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे
कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है

कार्यक्रम - जर्मन यूथ कैंप
किनके लिए-प्रदेश के केंद्रीय विद्यालयों में जर्मन भाषा पढ़ रहे छात्रों के लिए
कब है - शनिवार 25 जनवरी 2014

समय- दोपहर 12 बजे से 5 बजे तक

कहाँ - होटल नूर उस सबाह,भोपाल

आयोजक - मैक्स मूलर भवन नई दिल्ली
संयोजक - पुनीत कौर (जर्मन इन 1000 स्कूल प्रोजेक्ट,मैक्स मूलर भवन)
संपर्क सूत्र -लक्ष्मी शरण मिश्रा (मेनेजर,स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी)


गणतंत्र दिवस पर "विकी-कॉन्स्टी"
भारतीय संविधान पर ओपन क्विज

Our Correspondent :24 January 2014
भोपाल। इस गणतंत्र दिवस पर शहर के युवाओं को संविधान से जोड़ने और उनकी समझ बढ़ाने के उद्देश्य से स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी 'भारतीय संविधान' पर केंद्रित एक ओपन क्विज का आयोजन कर रही है 20 वर्ष तक की आयु वाले छात्रों के लिए आयोजित इस क्विज के लिए निःशुल्क रजिस्ट्रेशन 25 जनवरी तक कराये जा सकते हैं. क्विज अंग्रेजी भाषा में आयोजित की जायेगी और विजेताओं को 5000 रुपये कीमत के पुरूस्कार दिये जायेंगे
कार्यक्रम विवरण इस प्रकार है -

कार्यक्रम का नाम - विकी कॉन्स्टी
क्या है कार्यक्रम - भारतीय संविधान पर क्विज
कब - 26 जनवरी 2014 को
अवसर- गणतंत्र दिवस
स्थान - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी (पूर्व ब्रिटिश लाइब्रेरी)

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया

कौन भाग ले सकता है - 20 वर्ष तक की आयु के छात्र
रजिस्ट्रेशन - पूरी तरह से निःशुल्क हैं
कहाँ रजिस्ट्रेशन करना है - लाइब्रेरी हेल्प डेस्क पर 2553765 पर कॉल करके
टीम - 02 मेंबर्स की टीम में
रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि - 25 जनवरी 2014

क्विज के बारे में

राउंड्स

पहला राउंड - लिखित स्क्रीनिंग
दूसरा राउंड - मौखिक राउंड

पुरूस्कार - 5000/ रुपये की कीमत के पुरूस्कार


प्रदेश में " किड्स ऐथलेटिक्स प्रोग्राम की शुरूआत 6 अक्टूबर से
04 October 2013
भोपाल। प्रदेश के बच्चों को ऐथलेटिक्स खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने और खेल के विकास में सहयोग करने के लिए विश्व का सबसे बड़ा ग्रास रूट लेवल स्पोर्टस डेव्हलपमेन्टऔ प्रोग्राम की शुरूआत 6 अक्टूबर से की जा रही है। इसके अन्तर्गत 7 से 12 वर्ष के बच्चों को तीन अलग-अलग आयु समूह में ऐथलेटिक्स गतिविधियाँ सिखाई जायेंगी। इनमें दौड़, कूद और फेंक शामिल है। खेल विभाग के सहयोग से टी.टी.नगर स्टेडियम में इन्सट्रक्टर ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि अन्तर्राष्ट्रीय ऐथलेटिक्स महासंघ (आई.ए.ए.एफ.) का 'किड्स'' ऐथलेटिक्स प्रोग्राम विश्व का सबसे बड़ा ग्रासरूट लेवल प्रोग्राम है। संचालक, खेल एवं युवक कल्याण डॉ. शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि छोटे-छोटे बच्चों को आधारभूत स्तर की ऐथलेटिक्स गतिविधियों से रू-ब-रू करवाने के उद्देश्य से 'किड्स'' प्रोग्राम का प्रदेश में क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। जमीनी स्तर पर खेल विकास को गति देने के लिए इस प्रोग्राम को प्रदेश के सभी स्कूलों से जोड़ा जाएगा ताकि बच्चों को इस खेल के बारे में अधिक से अधिक जानने और सीखने का अवसर मिल सके। प्रोग्राम के पहले चरण में भोपाल के दस स्कूल का चयन कर उन स्कूल के खेल प्रशिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी। टी.टी. नगर स्टेडियम में 6 अक्टूबर को प्रात: 10 से शाम 5 बजे तक इन्सट्रक्टर ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन होगा। 'किड्स'' ऐथलेटिक्स प्रोग्राम के राष्ट्रीय समन्वयक श्री अरूण केसरी तथा राज्य समन्वयक श्री अमित कुमार गौतम द्वारा ट्रेनिंग दी जायेगी।


आदिवासी छात्रावासों में बच्चों को पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करें
04 October 2013
भोपाल। मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की संयुक्त बेंच में आज आयोग की अध्यक्ष श्रीमति ऊषा चतुर्वेदी ने प्रकरणों की सुनवाई की। प्राप्त 18 प्रकरण पर सुनवाई करते हुए श्रीमती चतुर्वेदी ने कहा कि बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिये आयोग सजग प्रहरी की भूमिका का निर्वहन कर रहा है। आयोग द्वारा दिये गये निर्देशों को शासकीय कर्मी गंभीरता से लें। आयोग की संयुक्त बेंच में सदस्य श्रीमती विजया शुक्ला, सुश्री आर.एच. लता, श्रीमती रीता उपमन्यु, सुश्री रीना गुजराल और श्री विभांशु जोशी उपस्थित थे।
श्रीमती चतुर्वेदी ने समाचार-पत्र में प्रकाशित समाचार 'उमरिया जिले में आदिवासी छात्रों को आधा चम्मच नाश्ता' पर संज्ञान लेते हुए कहा कि कमजोर तबके के बच्चों को शासन की विभिन्न योजना द्वारा अच्छे रहन-सहन, खान-पान एवं शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है। श्रीमती चतुर्वेदी ने कहा कि छात्रावासों में निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन मिले। यदि मेन्यू नहीं हो तो पौष्टिक आहार के नाश्ते और भोजन का मेन्यू बनाया जाये और उसी के अनुसार उन्हें आहार प्रदान किया जाये। श्रीमती चतुर्वेदी ने कहा कि इस संबंध में संबंधित शासकीय विभागों के अधिकारी कार्यवाही सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों के संरक्षण संबंधी आयोग के निर्देशों के पालन के प्रति अधिकारी गंभीर रहें। आयोग ने बाल कल्याण समिति मुरैना के समक्ष निराश्रित लावारिस मूक-बघिर बालक वीरेश को प्रस्तुत करवाने के निर्देश दिये।
आयोग ने उज्जैन की श्रीमती अरूणेश्वरी गौतम से आया द्वारा बच्चे को प्रताड़ित करने की शिकायत के आधार पर आया से वस्तुस्थिति की जानकारी ली। शासकीय हाई स्कूल काजी केम्प का आयोग द्वारा निरीक्षण कर वास्तविकता का परीक्षण कर कार्यवाही की जायेगी।।


स्पेक्ट्रम के 4 छात्रों का चयन
27 Spt. 2013
भोपाल। एनसीईआरटी द्वारा आयोजित नेषनल टेलेंट सर्च एक्जाम परीक्षा के द्वितीय चरण में स्पेक्ट्रम के 4 छात्रों निहारिका षषिधर, सम्यक जैन, समर्थ कठल, प्रखर जैन ने सफलता प्राप्त कर संस्था का गौरवान्वित किया है। इस परीक्षा को पास करने के बाद छात्रों का स्नातक, यहां तक की जब तक पीएचडी कम्पलीट नहीं हो जाती तब तक एनसीईआरटी द्वारा स्काॅलरषिप उपलब्ध कराई जाऐगी। स्पेक्ट्रम के डायरेक्टर्स रितेष अग्रवाल, राजेष षर्मा, सुध्ाान्षु कुमार ने सफल छात्रों को हार्दिक शुभकामनाएं दी।


शिक्षा पंचायती राज संस्थाओ के ऐजेंडे मे पहली प्राथमिता हो-श्रीमति गुर्जर
28 Aug. 2013
मंदसौर। भारतीय शिक्षा के तहत सरकार की प्रमुख नीतियों के माध्यम से शिक्षा का विकेंद्रिकरण करते हुए शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ग्राम शिक्षा समितियां, पंचायत शिक्षा समितियां, और अब शाला प्रबंध समितियां, योजना-प्रबंध समितियां, का गठन किया जाता है फिर भी आज शिक्षा लक्ष्य बच्चों के लिए काफी सुलभ नहीं है, उक्त विचार श्रीमति रमादेवी गुर्जर ने विजय वर्धन संस्थान ग्वालियर द्वारा आयोजित ग्रामीण शिक्षा और प्रबंधन विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर लोकमान्य तिलक स्कुल मे उर्पिस्थजजनो को संबोधित करते हुए कहा की इस कार्यशाला के माध्यम से हम यह चाहते है कि हमारा भारत गाॅवों मे बसता है और गामीण क्षैत्र मे शिक्षा को कैसे बढ़ावा दिया जावे इस हेतु सर्व शिक्षा अभियान और सम्बंधित सेवाप्रदाता शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए पंचायती राज संस्थाओ की भुमिका और शाला प्रबंधन के लिए पंचायत ऐजेंडे मे ग्राम शिक्षा को सबसे पहले प्राथमिता दे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डाॅ.अनिल नकुम ने कहा की ग्रामीण स्तर पर किसी भी योजना को लागु करने, प्रबंधन करने, निगरानी करने जैसे कार्यो मे पंचायतो को महत्व पुर्ण भुमिका होगी तभी ग्रामीण शिक्षा मे सुधार होगा। इंजीनियर बीबी गुप्ता के कहा की ऐसे सेमिनार से समुदाय मे जनजाग्रती को बढ़ावा मिलता है। कार्यक्रम मे विशेष अतिथि म.प्र.जन अभियान परिशद् के ब्लाॅक समन्वयक राधाशरण पुरोहित कार्यषाला को सम्बोधित करते हुए कहा की शिक्षा विकेन्द्रकृत के लिए शाला प्रबंध समितियो के अधिकार और कर्तव्यो मे जागरूकता व सुधार की काफी हद तक गुंजाईश है। हम शिक्षा की गुणवता को बढ़ावा देने के लिए जन जागरूकता, सेमिनार करते रहेगे तभी सरकार की योजनाएं सफल होगी।
योजनाओ मे सभी का अपना अपना दायित्व होता है ग्रामीण शिक्षा और प्रबंधन मे पंचायत एवं समुदाय विशेष का अपना अपना महत्व होता है। विजय वर्धन संस्थान के सचिव सोमदत्त शर्मा ने प्रेस को जानकारी मे बताया की कार्यशाला का उद्वेश्य और उस पर अमल दौनो महत्वपुर्ण है। कार्यक्रम का संचालन आरपीस ग्रप के विधिक सलाहकार उमरावसिंह जैन एडवोकेट ने किया। संस्था की और से स्वागत उद्वबोधन कार्यक्रम समन्वयक राधेश्याम मारू ने देते हुए कार्यशाला का उद्वेश बताया। कार्यक्रम को सामजिक समरसता मंच के प्रांतिय उपाध्यक्ष अजीत भण्डारी, एबेनेजर स्कुल के डायरेक्टर प्रभात दिप, सामाजिक कार्यकता क्रांति परिवर्तन, व सुरेश तिवारी ने भी सम्बोधित किया इस अवसर पर स्वैच्छिक संस्थाओ, शाला विकास समितियो के सदस्य व अन्य प्रबुद्वगण उपस्थित थे।


म.प्र. सर्वशिक्षा अभियान मिशन की समितियों में सदस्यों का मनोनयन
28 Aug. 2013
भोपाल। मध्यप्रदेश सर्वशिक्षा अभियान मिशन की साधारण सभा के मनोनीत सदस्यों को मिशन की विभिन्न राज्य-स्तरीय समितियों में मनोनीत किया गया है। यह मनोनयन 2 वर्ष के लिये है। राज्य-स्तरीय कार्यक्रम समिति में श्रीमती नीता शर्मा ग्वालियर और इंदौर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ओमप्रकाश परसवदिया, श्री ओमप्रकाश जांगलवा उज्जैन, राज्य-स्तरीय निर्माण समिति में श्री राधेश्याम पाटीदार, विधायक सुवासरा जिला मंदसौर, अनुदान समिति श्री गिरिराज किशोर पोद्दार, विधायक मुड़ावरा जिला कटनी, श्री ब्रजमोहन आचार्य, खुजनेर जिला राजगढ़, श्रीमती लता वानखेड़े, सरपंच ग्राम पंचायत मकरोनिया जिला सागर और श्री ओमप्रकाश गुप्ता पिछोर जिला शिवपुरी को मनोनीत किया गया है।
राज्य-स्तरीय नियुक्ति समिति में श्री राकेश शर्मा विदिशा, श्री ओमप्रकाश गुप्ता पिछोर, श्री सुरजीत सिंह चौहान भोपाल और श्रीमती सम्पतिया उइके, जिला पंचायत अध्यक्ष मण्डला को मनोनीत किया गया है। राज्य-स्तरीय कम्युनिकेशन समिति में श्रीमती नीता शर्मा ग्वालियर, श्री पुरुषोत्तम जोशी भोपाल, श्री राजकुमार भावसार ग्वालियर और श्री ब्रजमोहन आचार्य खुजनेर, राज्य-स्तरीय वित्त समिति में श्री सुरजीत सिंह चौहान भोपाल, श्री ओमप्रकाश गुप्ता पिछोर, श्री राकेश शर्मा विदिशा और श्रीमती रमा पण्डया उज्जैन को मनोनीत किया गया है।
राज्य-स्तरीय क्रय समिति में श्री ओमप्रकाश गुप्ता पिछोर, श्रीमती लता वानखेड़े मकरोनिया जिला सागर, श्री राकेश शर्मा विदिशा और श्री सुरजीत सिंह चौहान भोपाल का मनोनयन किया गया है।


समन्वय भवन में सिटी के स्टूडेंट्स से रूबरू होकर उन्हें गाइड किया आनंद कुमार ने...
28 Aug. 2013
‘पढ़ाई में अव्वल होने के बावजूद आर्थिक तंगी के चलते कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ने का मौका हाथ से चला गया क्योंकि फुल स्काॅलरशिप वहाॅ पहंचने के बाद ही मिलने वाली थी। बस तभी से सोच लिया था, जो मेरे साथ हुआ उसे किसी और के साथ नहीं होने दूंगा। पापड़ बेचकर घर चलाया लेकिन क्लर्क की नौकरी नहीं की क्योंकि फिर उसी में उलझा रह जाता।’ यह कहना था आनंद कुमार का। वे मंगलवार को समन्वय भवन में आईईएस गु्रप आॅफ इंस्टीट्यूशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शहर के स्कूल स्टूडेंट्स से मुखातिब थे। उनका लेक्चर स्टूडेंट्स को कई मूल मंत्र दे गया। उन्होंने कहा, ‘कोचिंग के बिना आज आईआईटी तक की यात्रा मुश्किल है, लेकिन खुद भी पढ़ने की कोशिश करना चाहिए तभी दिमाग खुलता है।
एक सवाल का एक ही हल न तलाशो, बल्कि कई उत्तर हो सकते हैं उन पर भी काम करो। सुपर-30 में स्टूडेंट्स यही करते हैं। कई बार तो पूरी क्लास एक सवाल को हल करने में ही निकल जाती है, लेकिन सवाल का पीछा नहीं छोड़ते, भले ही हल निकालने में दस दिन लग जाएं। दरअसल, साइंस के विषयों के साथ समस्या यह है कि इन्हें इंटरेस्टिंग तरीके पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आईआईटी का पैटर्न फिर बदल सकता है क्योंकि सरकार के ऊपर काफी दवाब है, लेकिन तब तक बारहवीं पर बहुत ध्यान देकर पढ़ाई करें।
मेल करें जवाब मिलेगा...
mail@super30.org आईडी पर अपने सवालों के साथ-साथ विषय से संबंधित किसी सवाल को भी ई-मेल कर सकते हैं। दो से तीन दिन के भीतर जवाब भेज दूंगा।’
राज्यपाल ने किया सम्मान
इस मौके पर आईईएस ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशन द्वारा आनंद कुमार का सम्मान कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें राज्यपाल रामनरेश यादव ने उन्हें प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर सहित संस्थान के चेयरमैन बीएस यादव और ग्रुप डायरेक्टर सुनीता सिंह सहित ओएसडी फीस कमेटी सुनील कुमार और बड़ी संख्या में विभिन्न स्कूलों से आए स्टूडेंट्स उपस्थित रहे।
Q & A SESSION WITH ANAND KUMAR
स्कूल-कोचिंग के बीच बैलेंस कैसे बनाएं
-लावण्या बांगा, कार्मल काॅन्वेंट स्कूल और आईआईटी सिलेबस के बीच खाई है। इसलिए स्तरीय किताबें चुने। चाहे तो ई-मेल करके पुस्तकों की जानकारी ले सकती हैं। केमेस्ट्री के लिए एनसीई आरटी की बुक पढ़े। मैथ्स मुश्किल लगता है
-सृष्टि त्रिवेदी, महर्षि विधा मंदिर क्लासिकल म्यूजिक टीवी आते ही चैनल बदल देते हैं क्योकि समझ नहीं आता। मैथ्स भी तभी मुश्किल लगता, जब क्यों और कैसे हुआ यह पता न चले। बेसिक को समझ ले, सब आसान होगा। रिवीजन के लिए किस तरह की तैयारी करें
-उत्कर्ष वर्मा, जवाहर लाल नेहरू स्कूल कठिन सवालों पर स्टार रेटिंग करते जाएं। जो कम मुश्किल हो उस पर एक स्टार और कठिन पर स्टार बढ़ाते जाएं। आपको रिवीजन के वक्त पता रहेगा कि किन सवालों पर ज्यादा फोकस करना है।


यूआईडी नंबर बनेगा स्टूडेंट्स की पहचान
28 Aug. 2013
सेंट्रल बोर्ड आॅफ सेकंडरी एजुकेशन ;सीबीएसई ने नए सेशन से स्कूल लेवल पर आयोजित होने वाले काॅम्पिटीशन में भी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आॅनलाइन कर दिया है। बोर्ड ने तय किया है कि अब स्पोट्र्स में भाग लेने वाले स्टूडेंट्स के लिए आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा जिससे उन्हें यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर मिल सके। पहले स्कूल को रजिस्ट्रेशन कराना होगा उसके बाद स्टूडेंन्ट्स आनलाइन रजिस्टर करेंगे। इस प्रक्रिया के तहत न केवल स्टूडेंट्स को फायदा मिलेगा बल्कि स्कूल प्रबंधन के लिए रजिस्ट्रेशन की राह काफी आसान हो जाएगी।
रजिस्ट्रेशन के बाद ये स्टूडेट्स किसी भी खेल में भाग ले सकते हैं। खास बात ये है कि ये रजिस्ट्रेशन तब तक मान्य रहेगा, जब स्टूडेंट सीबीएसई से संबद्ध किसी भी स्कूल में पढ़ता होगा। किसी कारणवश अगर उसे अपना स्कूल बदलना पड़ता है तो दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी।
सीबीएसई ने इन सभी के बारे में जानकारी देने के लिए अलग से अपना नया पेज बनाया है। यहीं पर सभी खिलाडि़यों की डिटेल अपलोड की जाएंगी। ये रजिस्ट्रेशन बोर्ड स्तर पर होगा।सीबीएसई ने स्कूल लेवल पर होने वाले खेल काॅम्पिटीशंस के लिए रजिस्टेशन प्रक्र्रिया को आॅनलाइन कर दिया है। स्टूडेंट्स को मिलेगा यूआईडी नंबर।
ऐसे मिलेगा यूआईडी नंबरछात्र का रजिस्ट्रेशन भी स्पोट्र्स के लिंक पर ही होगा। यहां पर छात्र की एक नई फोटो भी अपलोड करनी होगी। रजिस्ट्रेशन के बाद छात्र के लिए बोर्ड की परफ से एक यूआईडी ;यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर जारी किया जाएगा। इसके आधार पर वह अपने मरचाहे खेल में आसानी के साथ भाग ले सकते हैं।


प्रदेश के बेटे ने रच डाला इतिहास, ऑल इंडिया टॉपर बनकर किया नाम रोशन
भोपाल. 29 May 2013
जबलपुर। जितना भी पढ़ो, पूरे मन से पढ़ो। फिर कोई वजह नहीं है कि आपको मनचाही मंजिल न मिले। अच्छे अंक स्कोर करने का यही एक मात्र मंत्र मानते हैं ऑल इंडिया टॉपर सोपान खोसला। सिटी भास्कर से हुई चर्चा में उन्होंने अपने सपने, मेहनत और मंजिल से जुड़ी बहुत सी बातें साझा कीं।
उम्मीद से बेहतर रहा रिजल्ट मैंने तो सिर्फ अच्छे अंकों के लिए मेहनत की थी, ऑल इंडिया टॉप करूंगा ऐसा सोचा भी नहीं था। उमीद से बेहतर रहा है रिजल्ट। सोपान के पिता आईटीबीपी में कमाण्डेंट हैं।
तो रिकॉर्ड ब्रेक हो जाता सोपान ने बताया कि उन्हें हमेशा से ही जैल पेन यूज़ करने की आदत रही है, जबकि बोर्ड एग्जाम में जैल पेन की सख्त मनाही रहती है। चूंकि प्रैक्टिस जैल पेन से की थी और पेपर बॉल पेन से देना पड़ा इसीलिए इंग्लिश के फर्स्ट पेपर में वो स्पीड नहीं आ पाई। मैथ्स, फिजिस, केमेस्ट्री और कप्यूटर साइंस में 100 में से 100 अंक पाने वाले सोपान को इंग्लिश में 95 अंक प्राप्त हुए हैं। महज़ पांच अंकों से चूके सोपान अगर इंग्लिश में पूरे नंबर पा जाते तो शत-प्रतिशत अंकों वाला रिकॉर्ड ब्रेक हो जाता।
रोज़ पढऩा ज्यादा बेहतर है एग्ज़ाम टाइम में रात-रात भर जागकर पढ़ाई करने से बेहतर है कि रोज़ थोड़ा-थोड़ा पढ़ाई की जाए। अच्छे मार्स के लिए मैंने कोई एस्ट्रा स्ट्रेटजी प्लान नहीं की थी, बल्कि स्कूल और कोचिंग में पढ़ाई गई चीजों को घर आकर दोहराता था। पांच घंटे रोज़ पढ़ता था।
खेल से किया तनाव दूर :पढ़ाई करते हुए जब थक जाता था, तो बैडमिंटन और क्रिकेट खेलकर अपना स्ट्रेस रिलीव करता था। माइंड फ्रेश करने के लिए स्पोटर्स सबसे कारगर तरीका है, मैं भी अपने आपको वैसे ही चार्जअप करता हूं।
अब आईआईटी की तैयारी
एमपीपीईटी की वरीयता सूची में दसवां स्थान प्राप्त करने वाले सोपान अब आईआईटी की तैयारी में जी जान से जुटे हैं। वैसे जेईई मेन में उन्होंने 360 में से 312 अंक प्राप्त किए हैं। आगामी दिनों में होने वाली जेईई एडवांस में भी अच्छा स्कोर हासिल करने की पूरी उम्मीद है।
सोपान खोसला
मार्क्स- 99%
स्ट्रीम- मैथ्स साइंस
पेरेंट्स- रीता, संदीप खोसला
स्कूल- डीपीएस मंडला रोड


CBSE 12th का रिजल्ट घोषित
भोपाल. 29 May 2013
भोपाल। सीबीएसई स्कूलों के कक्षा 12वीं का रिजल्ट आज सुबह घोषित कर दिए गए है। बोर्ड की वेबसाइट पर छात्र अपना रिजल्ट देख सकते हैं। मार्च में हुई 12वीं की परीक्षा में 10 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हुए थे। इस परीक्षा में 80 प्रतिशत छात्रों ने सफलता हासिल की है। इस बार परीक्षा में 87.8 प्रतिशत लड़कियों को कामयाबी हासिल हुई है।
भोपाल के तीन बच्चों ने टॉप किया। नंदिता मसंद ने कॉमर्स संकाय से 97.2 अंक अर्जित किए। इसी संकाय से ऋषभ गुप्ता ने भी 97.2 अंक हासिल किए। कॉर्मल कान्वेंट की एक छात्रा ने भी टॉप किया। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एम.एल. चौहान ने बताया कि बोर्ड के अजमेर रीजन के तहत मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान और दादर नागर हवेली क्षेत्र में 1129 स्कूल हैं। 12वीं क्लास एग्जाम में रीजन के 1,01,738 स्टूडेंट्स शामिल हुए हैं। इनमें करीब 94,279 नियमित और 7,459 प्राइवेट हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है कि सीबीएसई बोर्ड 10 वीं क्लास का रिजल्ट बाद में घोषित कर रहा है।
रिजल्ट देखने के लिए यहां click करें ...
http://cbseresults.nic.in/class12/cbse122013.htm


माशिमं की कक्षा 10 वीं में देवास की छात्रा हर्षा अव्वल
भोपाल. 5 June 2012
माशिमं की कक्षा 10 वीं में देवास की छात्रा हर्षा अव्वल
भोपाल। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने सोमवार को दो घंटे की देरी से कक्षा 10 वीं की बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया. देवास की छात्रा हर्षा मित्तल ने 97.8 % अंक हासिल कर मेरिट में प्रथम स्थान प्राप्त किया. जबकि रतलाम की छात्रा झलक काकानी दूसरे व जबलपुर की छात्रा मनीषा पासी तीसरे स्थान पर रही. नियमित परीक्षार्थियों का रिजल्ट 53.90 फीसदी रहा। इस दफा छात्राएं पीछे रह गई और छात्र निकल आगे गए। 54.04 प्रतिशत नियमित छात्र और 53.72 प्रतिशत नियमित छात्राएं परीक्षा में पास हुई। वहीं 21.79 प्रतिशत स्वाध्यायी परीक्षार्थी पास हुए। मैरिट लिस्ट से भोपाल, इंदौर और ग्वालियर के विद्यार्थी गायब हैं। परीक्षा में लगभग साढ़े नौ लाख विद्यार्थी शामिल हुए थे। हाईस्कूल परीक्षा परिणाम में निजी स्कूलों ने सरकारी स्कूलों को पछाड़ दिया। सरकारी स्कूलों का परीक्षाफल 50.82 प्रतिशत और निजी स्कूलों का 57.71 प्रतिशत रहा। इसी तरह प्रावीण्य सूची में भी निजी स्कूलों के विद्यार्थियों का दबदबा रहा। हालांकि स्कूल शिक्षा विभाग लगातार शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने के दावे करता है।
परीक्षा में व्यक्तिगत नकल प्रकरणों की संख्या 2009 रही। सामूहिक नकल के 3402 मामले रहे। मंडल ने 374 परीक्षार्थियों की परीक्षा पात्रता न होने के कारण निरस्त की। गौरतलब है कि मंडल ने करीब 20 हजार परीक्षार्थियों के परीक्षा परिणाम रोके हैं। इस मामले में स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनीस ने कहा कि पात्रता की जांच की वजह से परिणाम रोके गए थे। अगर इन परिणामों में कोई कमी नहीं पाई गई तो परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। गौरतलब है कि ऎसी संस्थाओं के परीक्षा परिणाम रोके गए थे जहां 500 से ज्यादा विद्यार्थी शामिल हुए थे।
दो घंटे देरी से आया रिजल्ट
स्कूल शिक्षा मंत्री के निर्धारित समय पर नही आने के कारण प्रदेश के लाखों छात्रों और उनके अविभावकों को करीब दो घंटे तक परेशन होना पड़ा. वहीं शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस की देरी से नाराज़ मीडिया ने पत्रकारवार्ता का बहिष्कार कर दिया.
प्रदेश की मेरिट लिस्ट

विद्यार्थी का नाम जिला स्थान
हर्षा मित्तल देवास पहला
झलक काकानी रतलाम दूसरा
मनीषा पासी जबलपुर तीसरा
स्नेहा अग्रवाल बैतूल चौथा
सुमित बारस्कर बैतूल चौथा
पारस गुप्ता दतिया पांचवां
शिवानी सिंह जबलपुर पांचवां
साकेत पटेल मंडला पांचवां
शिवाशीष दुबे दतिया छठवां
विकास मिश्र सतना छठवां
अनिकेत सिंह रीवा सातवां
रुपाली श्रीवास्तव विदिशा सातवां
मृत्युंजय त्रिपाठी सतना आठवां
रोहित दांगी दतिया नौवां
प्रियंका मौर्य सतना नौवां
ऋषिराज ताम्रकार दतिया दसवां
शिखा जायसवाल शहडोल दसवां
अभय जोशी देवास दसवां
पूजा लोधी विदिशा दसवां
आशुतोष मिश्रा कटनी दसवां


 
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