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school
D-81586/11-07-17

शिक्षक सम्मान समारोह 2017
Our Correspondent :1 September 2017

भोपाल। आगामी शिक्षक दिवस के पूर्व ही इसके उपलक्ष्य में हुजूर विधायक-भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष रामेश्वर शर्मा एवं प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन द्वारा संतनगर के संत हिरदाराम गल्र्स आडिटोरियम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में अपने विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के 2800 शिक्षकों का सम्मान किया गया। गुरूवार दोपहर आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद्र गहलोत, म.प्र. की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस, संत हिरदाराम जी के शिष्य सिद्धभाउ, विधायक रामेश्वर शर्मा, कृष्णमोहन सोनी, अपर कलेक्टर जी.पी. माली, जिला शिक्षा अधिकारी धर्मेन्द्र शर्मा, डी.पी.सी. श्री राठौर, बी.आर.सी. रविन्द्र जैन, चंद्रप्रकाश इसरानी, राम बसंल, दीपा वासवानी, भारती खटवानी, हीरो ज्ञानचंदानी, विष्णु गेहानी, मंडल अध्यक्ष पृथ्वीराज त्रिवेदी, रमेश हिंगोरानी, बसंत चेलानी, मनीष चैबे, सौरभ गंगारमानी, योगेश हिंगोरानी, सूरज यादव, हरीश बिनवानी, लविन मनसुखानी, विनोद राय, विवेक शर्मा, योगेश मलानी, सोनू यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि और विभिन्न विद्यालयों से आए 2800 से अधिक शिक्षक शामिल थे। कार्य्रकम के दौरान मंत्री श्री गहलोत, मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस, विधायक रामेश्वर शर्मा, सिद्धभाउ द्वारा संयुक्त रूप से क्रमशरू सभी शिक्षकों को मंच पर आमंत्रित कर शाल-श्रीफल और सम्मान पत्र भेंट कर उनका सम्मान किया गया। गरिमामय समारोह में सार्वजनिक सम्मान पर पाकर अधिकांश शिक्षक अभीभूत नजर आए। शिक्षकों का कहना रहा कि इस तरह से सम्मानित होने पर उनके मन में अपने कार्य के प्रति गर्व की अनुभूति आती है और समाज के प्रति दायित्व बोध जागृत होता है। कार्यक्रम के आयोजक-विधायक रामेश्वर शर्मा ने बताया कि गुरू-शिष्य पंरपरा के परिपालन में पिछले कई वर्षों से उनके द्वारा शिक्षक सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस पर लगभग सभी विद्यालयों में भी कार्यक्रमों का आयोजन होता है और हमें यह कार्यक्रम वृहद् स्तर पद करना होता है इसीलिए शिक्षक दिवस के कुछ दिन पूर्व ही हमारे द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।
शिक्षकों के कारण ही भारत को मिला था विश्वगुरू का सम्मान: थावरचंद्र गहलोत

प्राचीनकाल मे भी भारत की शिक्षा पद्धति काफी वैभवशाली थी। महर्षी सांदिपनी, गुरू वशिष्ठ, गुरू द्रोणाचार्य से लेकर डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन तक ऐसे महान गुरू-शिक्षक हुए हैं जिनकी विद्वता का लोहा सारे विश्व ने माना था। शिक्षकों की विद्वता और त्याग तपस्या के बल पर ही भारत को विश्वगुरू का सम्मान हासिल था। यह सम्मान हमें फिर से पाना है तो इसमें भी शिक्षकों को ही बढ़ी भूमिका निभानी होगी। उक्त उद्गार भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद्र गहलोत ने गुरूवार को संतनगर में हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा के तत्वावधान में आयोजित भव्य शिक्षक सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होने कहा कि देश में आज भी शिक्षाविदों की कमि नहीं है, संपूर्ण विश्व आज भी भारत को उसी दृष्टिकोण से देखता है। इसीलिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने अमेरिकी छात्रों के सामने भारतीय छात्रों की प्रशंसा करते हुए कहा था कि आप भी मेहनत करो, शिक्षा के प्रवीण बनो नहीं तो अमेरिका में सारी नौकरियां भी भारतीय ले जाएंगे। श्री गहलोत ने कहा कि मनुष्य की तीन श्रेणियां होती है। पहली श्रेणी वह है जो देने ही देने का काम कर रहती है। इसे संतो की श्रेणी कहा जाता सकता है, वे समाज से कुछ लेते नहीं अपितु सभी को आर्शीवाद देते हैं। ऐसे संतो को सभी प्रणाम करने जाते हैं, इनका सभी सम्मान करते हैं। दूसरी श्रेणी उन लोगों की होती है जो देते भी है और लेते भी है। इसे व्यवसायिक प्रवृत्ति भी कह सकते हैं इसमें आंशिक सम्मान मिलता है। तीसरी श्रेणी उन लोगों की होती है जो कि समाज से केवल लेने का काम ही काम करते हैं, बदले में कुछ देते नहीं है। ऐसे लोगों का कोई सम्मान नहीं करता है। शिक्षक मनुष्य की पहली और दूसरी श्रेणी के सदस्य हैं इसीलिए सम्मान के पात्र हैं। केंद्रीय मंत्री श्री गहलोत ने अपने उद्बोधन में मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम के शिक्षण की चर्चा करते हुए कहा कि यह श्रीराम द्वारा अर्जित शिक्षा का ही प्रभाव था कि पिता का वचन निभाने के लिए वे राजपाट छोडकर वनवास में चले गए। इसी तरह भरत पर भी उसी शिक्षा का प्रभाव था कि वह राजपाट मिलने पर खुश होने के बजाए भाई को पुनरू राजपाट सौंपने के लिए मनाने वन में पहुंच गए। उन्होने उपस्थित शिक्षकों को आहवान करते हुए कहा कि शिक्षकों को स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों को श्रेष्ठ नागरिक बनाने का प्रयास करना चाहिए।
विद्यार्थियों मे दायित्वबोध जगाएं शिक्षक: सिद्धभाउ जी

शिक्षक ही राष्ट्र का मार्गदर्शन करने का हौसला रखते हैं। सम्मान से अभीभूत शिक्षक विद्यार्थियों के अंदर दायित्वबोध जगांएगे जिससे राष्ट्र का निर्माण होगा। राष्ट्र अधिक सक्षमता के साथ खड़ा होगा। यह विचार शिक्षक सम्मान समारोह की अध्यक्षता कर रहे श्री सिद्धभाउ जी ने समारोह में आशीर्वचन देते हुए व्यक्त किए। उन्होंने स्मरण करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि युवा वह है जो वायुवेग से सोचे और वायुवेग से काम करे। इस राष्ट्र की तरूणाई को फिर से सशक्त बनाना होगा। आज युवा पश्चिम का अंधानुकरण करते हुए इंडोर खेलों की तरफ आकर्षित हो रहा है जिससे किसी प्रकार का स्वास्थ्य लाभ नहीं होता। इसके लिए देशी खेलों की तरफ युवाओं को मोडना होगा। राष्ट्र को पूरे विश्व का फिर से विश्वगुरू बनाने का जिम्मा भी शिक्षकों पर है, इसके लिए शिक्षकों को सारी सुविधाएं भी देनी चाहिए जिससे वे अपने कर्म को पूरी कर्मठता से कर सके। श्री सिद्धभाउजी ने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि हमे ऐसा विधायक मिला है जिसके ह्दय में संवेदनशीलता है, यही संवेदनशीलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज जी के अंदर भी है। उन्होने सम्मानित होने वाले शिक्षकों को और अधिक ज्ञानवान बनने और इस ज्ञान की रोशनी घर घर तक फैलाने का आर्शीवाद भी दिया।
बच्चे को अच्छी शिक्षा-संस्कार देना माता पिता होने के मायने है: श्रीमती अर्चना चिटनिस

बच्चे को जन्म देना ही माता पिता होने के मायने नहीं अपितु बच्चे को अच्छी शिक्षा-अच्छे संस्कार देकर श्रेष्ठ नागरिक बनाना भी माता पिता होने के मायने हैं। यह विचार म.प्र.शासन की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने शिक्षक सम्मान समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए व्यक्त किए। उन्होने कहा कि अनाथ वो नहीं होता जिसके माता पिता ना हो, अपितु अनाथ वह होता है जिसके गलती करने पर उसे डांटने वाला, समझाने वाला ना हो, उसे शिक्षा देने वाला ना हो। इसीलिए बच्चे के माता-पिता और शिक्षकों ने बच्चों को शिक्षा देने के साथ साथ गलतियों पर रोकते हुए सही मार्ग भी दिखलाना चाहिए। शिक्षा केवल सूचना मात्र नहीं है अपितु शिक्षा सोचना सिखाना है, निर्णय करना सिखाना है। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका श्रेष्ठ है। एक चाणक्य रहे तो एक हजार चंद्रगुप्त बना सकते हैं लेकिन एक हजार चंद्रगुप्त मिलकर भी एक चाणक्य नहीं बना सकते। उन्होने कहा कि शिक्षक के लिए सबसे बड़ा सम्मान यह होता है कि शिष्य उसका नाम रोशन करे। श्रीमती चिटनिस ने भारतीय संस्कृति सभ्यता को वैभवशाली बताते हुए कहा कि आज के कुछ समय पहले तक, मात्र 15-20 साल पहले तक जन्म देने वाली एक मॉं होती थी। लेकिन बच्चे के पालन पोषण अकेले माता नहीं करती थी अपितु उसके दादा-दादी, नाना-नानी, चाचा-चाची, बुआ-फूफा, मामा-मामी, मौसा-मौसी सहित आस पड़ोस, मित्र आदि बच्चे के विकास में अपनी भूमिका निभाते थे। इसीलिए प्रकृति को भी हमने रिश्तों के शब्दों से अपना बना लिया था, तभी तो चंदा मामा, बिल्ली मौसी, गाय माता, आदि शब्दों का प्रचलन था। इन रिश्तों से हमे नैसर्गिक शिक्षा मिलती थी। लेकिन आजकल के बच्चों को स्वयं हमने सभी से तोड़ दिया है। श्रीमती चिटनिस ने इस अवसर पर सम्मानित होने वाले सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्जल भविष्य की कामना की।
शिक्षक देश के भविष्य निर्माता: रामेश्वर शर्मा

शिक्षक सम्मान समारोह में स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम के आयोजक-विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि शिक्षक इस देश के भविष्य निर्माता है, जिस प्रकार से शिक्षा का प्रसार बढ़ेगा भारत पुनरू विश्व गुरू की ओर आगे बढ़ेगा। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान अच्छी शिक्षा व्यवस्था की चिंता कर रहे हैं। हमने गुरू-शिष्य परंपरा की सभ्यता और संस्कृति को जीवंत करने के उद्देश्य से, सरकारी और नीजि सभी विद्यालयों के शिक्षकों के सम्मान का कार्यक्रम कुछ वर्ष पूर्व शुरू किया है। सम्मान की पंरपरा को जीवित रखना समाज का काम है। सम्मान खत्म हो जाएगा तो सब कुछ समाप्त हो जाएगा। यह सम्मान का भाव ही है जो व्यक्ति को भी श्रेष्ठ नागरिक बनने के लिए प्रेरित करता है। उन्होने कहा कि हम अपने विधानसभा क्षेत्र के सभी 10600 शिक्षकों का सम्मान करना चाहते हैं। लेकिन एक कार्यक्रम में यह संभव नहीं हो सकता इसीलिए क्रमशरू हम सभी शिक्षकों का सम्मान कर रहे हैं। विधायक श्री शर्मा ने महाभारत काल के एक वृतांत का वर्णन करते हुए कहा कि महाराज धृतराष्ट्र ने गुरू द्रोणाचार्य को अपने महल पर बुलाकर कर कहा था कि यह मेरे 100 पुत्र हैं इन्हें आप अच्छी शिक्षा दें। दूसरी ओर रानी कुंती स्वयं गुरू द्रोणाचार्य के आश्रम पहुंची और कहा कि गुरूदेव आज से ये पांचों पांडव आपके पुत्र हैं, आप इन्हें अपने अनुसार समुचित शिक्षा दें। इसके बाद के परिणाम सबके सामने है महाराज धृतराष्ट्र के 100 कौरव पुत्र समाज में बहुत सम्मान हासिल नहीं कर पाए जबकि गुरू के चरणों में समर्पित हुए 5 पांडवों में सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर भी निकले, धर्मराज भी हुए, महाबलशाली और विद्वान, महाराथी भी निकले। श्री शर्मा ने कहा कि जब किसी शिष्य को सफलता मिलती है तो गुरू का सम्मान तो बढ़ ही जाता है, साथ ही गुरू की जिंदगी भी बढ़ जाती है। हम सब को आज यहां यह संकल्प लेंगे कि आने वाला भारत संपूर्ण शिक्षित होगा। हर घर में शिक्षा का दिया जलेगा ।


हरयाणा के श्रम मंत्री ने मध्यप्रदेश की योजनाओं एवं कार्यक्रमों को सराहा श्रमोदय विद्यालय की अवधारणा से हुए प्रभावित
Our Correspondent :21 Aug 2017

श्रम मंत्री श्री ओमप्रकाश धुर्वे से हरयाणा राज्य के श्रम मंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने आज उनके निवास पर अधिकारियों के साथ भेंट कर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। प्रमुख सचिव श्रम श्री अश्विनी राय और अन्य अधिकारी मौजूद थे। हरयाणा के श्रम मंत्री श्री सैनी ने मध्यप्रदेश में श्रमिकों के कल्याण के लिये लागू मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना सहित अन्य योजनाओं और कार्यक्रमों की सराहना की। उन्होंने पं. दीनदयाल श्रमोदय विद्यालय की अवधारणा में रूचि लेते हुए इस परियोजना की विस्तृत जानकारी हरयाणा सरकार को भेजने का आग्रह किया। श्रमोदय विद्यालय पर दिये गये प्रेजेन्टेशन की कापी हरयाणा के श्रम मंत्री को भेंट की गयी। श्रम मंत्री श्री धुर्वे ने हरयाणा के मंत्री श्री सैनी को बताया कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रदेश में 75 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले बच्चों की उच्च शिक्षा के लिये फीस देने की व्यवस्था के लिये मेधावी छात्र योजना शुरू की गई है। इसके साथ ही, श्रम विभाग द्वारा पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों के लिये कक्षा एक से महाविद्यालयीन शिक्षा प्राप्त करने तक छात्रवृत्ति और अन्य सुविधाएँ दी जा रही हैं। श्रमिकों के बच्चों को नवोदय विद्यालय से बेहतर पब्लिक स्कूल की तरह शैक्षणिक सुविधाएँ और वातावरण देने के लिये इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और भोपाल में पं. दीनदयाल श्रमोदय विद्यालय शुरू किये जा रहे हैं। श्रमिकों के बच्चों को इन विद्यालय में नि:शुल्क आवासीय सुविधा मिलेगी। भोपाल का श्रमोदय विद्यालय शैक्षणिक सत्र 2018-19 से प्रारंभ हो जायेगा। श्री धुर्वे ने बताया कि प्रथम वर्ष में कक्षा 6वीं और 9वीं में छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जायेगा। भोपाल श्रमोदय विद्यालय में भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़ और सीहोर जिलों के पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चे प्रवेश के पात्र होंगे। इनकी प्रवेश प्रक्रिया जल्दी शुरू की जा रही है। श्रम मंत्री ने बताया कि देश में इस प्रकार के श्रमोदय विद्यालय स्थापित करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य है। श्रम मंत्री श्री धुर्वे ने हरयाणा के मंत्री श्री सैनी को मध्यप्रदेश में श्रमिकों के कल्याण के लिये संचालित विभिन्न कार्यक्रमों एवं योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने हरयाणा में श्रमिकों के लिये संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी भी प्राप्त की।


उर्दू अकादमी विद्यार्थियों को पुरस्कृत करेगी
Our Correspondent :3 Aug 2017

मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी कला संकाय में बी.ए. और एम.ए. की वर्ष 2017 की परीक्षा में उत्तीर्ण ऐसे छात्र-छात्राओं को नगद पुरस्कार देगी, जिन्होंने उर्दू विषय में 90 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं। उर्दू अकादमी के सचिव ने बताया है कि प्रथम पुरस्कार 5 हजार रूपये, द्वितीय 4 हजार रुपये एवं तृतीय पुरस्कार 3 हजार रूपये के साथ ही इन विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी दिया जायेगा। छात्र-छात्राओं एवं महाविद्यालय से अपेक्षा की गई है कि पात्रतान्तर्गत विद्यार्थियों की सत्यापित अंक-सूची 31 अगस्त तक म.प्र. उर्दू अकादमी, मुल्ला रमूजी संस्कृति भवन, बाणगंगा को भिजवाएँ। अन्य जानकारी कार्यालयीन दूरभाष क्रमांक 0755-251691 से प्राप्त की जा सकेगी


8 जून को होगी "क्रिएटिव राइटिंग वर्कशॉप"
Our Correspondent :24 May 2017

स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा है कि प्रदेश में बोर्ड परीक्षा परिणाम में सुधार के लिये अब प्रति सप्ताह वीडियों कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समीक्षा की जायेगी। उन्होंने जिला अधिकारियों से स्कूल शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिये सरकारी स्कूलों की निरीक्षण प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिये। स्कूल शिक्षा मंत्री आज प्रशासन अकादमी में जिला अधिकारियों की राज्य-स्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी मौजूद थे। बैठक में कक्षा 10 और कक्षा 12 के बोर्ड परीक्षा परिणामों की जिलेवार समीक्षा की गई। स्कूल मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि प्रदेश भर में जिन शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्य के लिये अटैच किया है, उन्हें हर हाल में 31 मई तक शालाओं में पद-स्थापना के लिये कार्यमुक्त किया जाये। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे जिले में ऐसी व्यवस्था करें, जिससे महत्वपूर्ण काम को छोड़कर शिक्षकों को गैर-शिक्षकीय कार्य में न लगाया जाये। इसके लिये उन्होंने राज्य-स्तर पर कलेक्टर्स को पुन: पत्र लिखे जाने के निर्देश दिये। स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर शाह ने मंडला और रायसेन जिले में लागू 'ज्ञानार्जन' प्रोजेक्ट को पूरे प्रदेश में लागू किये जाने की बात कही। 'ज्ञानार्जन' प्रोजेक्ट में सरकारी स्कूलों में कक्षा 10 और 12 के सिलेबस को प्रतिदिन के हिसाब से बाँटकर सॉफ्टवेयर के जरिये मॉनिटरिंग किये जाने की व्यवस्था है। इस व्यवस्था से कक्षा 10 और 12 के बोर्ड परीक्षा परिणाम में इन जिलों में उल्लेखनीय सुधार आया है। स्कूल शिक्षा मंत्री ने दिव्यांग छात्रों की पढ़ाई और हॉस्टल की व्यवस्था पर और ध्यान दिये जाने की बात कही। स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी ने कहा कि फील्ड अधिकारियों से प्राप्त सुझाव से परीक्षा परिणाम में बेहतर तरीके से सुधार किये जा सकते है। उन्होंने शिक्षकों की नियमित उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिये भी कहा। बैठक में माध्यमिक स्तर पर स्कूल शिक्षा की स्थिति, शिक्षा में गुणवत्ता की कार्य-योजना, नि:शुल्क साइकिल योजना, भवन निर्माण, सी.एम. हेल्पलाइन के प्रकरणों और समेकित छात्रवृत्ति योजना पर भी चर्चा की गयी। स्कूल शिक्षा विभाग की सचिव श्रीमती दीप्ती गौड़ मुखर्जी ने गुणवत्ता सुधार के लिये सरकारी स्कूलों में पेरेन्ट्स मीटिंग को नियमित करने के निर्देश दिये। आयुक्त लोक शिक्षण श्री नीरज दुबे ने बोर्ड परीक्षा परिणामों का विश्लेषण कर आगे सुधार लाने के निर्देश दिये। बैठक में राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक श्री लोकेश जाटव ने स्कूल शिक्षा में सुधार के लिये राज्य, जिला, विकासखंड और संकुल स्तर पर टीम भावना के साथ कार्य किये जाने का सुझाव दिया। बैठक में संयुक्त संचालक स्कूल शिक्षा संभागीय कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी और परियोजना समन्वयक जिला शिक्षा केन्द्र मौजूद थे।
क्रिएटिव राइटिंग वर्कशॉप : एक नज़र में
आयोजन का नाम - क्रिएटिव राइटिंग वर्कशॉप
दिनांक - 8 जून 2017 गुरुवार
समय - दोपहर 12 से 4 बजे तक
स्थान - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी
कौन भाग ले सकता है - 16 साल से ऊपर का कोई भी व्यक्ति
वर्कशॉप के लिए निर्धारित सीटें - 20
वर्कशॉप की फीस - कुछ भी नहीं (निःशुल्क )
रजिस्ट्रेशन करना है - मेल के द्वारा
रजिस्ट्रेशन के लिए ये जानकारी मेल करें
1.-आपका नाम , आयु, व्यवसाय,मोबाइल नंबर
2.-आपके द्वारा लिखी गयी कोई कविता या लेख
'3.-आप इस वर्कशॉप में क्यों भाग लेना चाहते हैं' इस विषय पर अधिकतम 300 शब्दों का एक लेख
किस मेल पर भेजना है - club.ink13@gmail.com.
रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि है - 4 जून 2017
पपोएट्री मेंटर के बारे में ... इंकलेट ऑनलाइन जर्नल की प्रधान संपादिका
ब्लूशिफ्ट जर्नल की पोएट्री रीडर
स्प्राउट मैगज़ीन की सह-प्रबंध संपादिका
ग्लास काइट एंथोलोजी वर्कशॉप की पोएट्री मेंटर
आइयोवा यंग रायटर स्टुडियो की पूर्व छात्रा
ऑक्सफोर्ड व कैंब्रिज राइटिंग वर्कशॉप की पूर्व छात्रा
इस वर्ष AAL रायटर रिट्रीट आइसलैंड में भाग लिया
अगस्त 2017 से न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में क्रिएटिव राइटिंग में अंडर-ग्रेड कोर्स के लिए चयनित
इंडियन लिट्रेचर, वायाव्य और सुवेनियर जैसी कई प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में उनकी कवितायें प्रकाशित हो चुकी हैं


प्रदेश में बोर्ड परीक्षा परिणाम में सुधार के लिये अब प्रति सप्ताह होगी समीक्षा
Our Correspondent :22 May 2017

16 साल से ऊपर का कोई भी व्यक्ति ले सकता है भाग

रोज़मर्रा की भाग दौड़ में हम पोएट्री को लगभग भूल ही गए हैं । कवितायें लिखना तो दूर हमारे पास उन्हें पढ़ने की फुर्सत भी नहीं है । जबकि मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति के इस सबसे प्रभावी माध्यम पर दुनिया भर में बहुत काम हो रहा है । हर दिन पोएट्री के नए नए अवतार सामने आ रहे हैं । कभी हाइकू तो कभी ट्विटर पोएट्री कभी कट पेस्ट तो काबी कॉर्प्स पोएट्री । लाखों लोग नये नए तरीके ईज़ाद कर अपनी भावनाओं को शब्द दे रहे हैं और पूरी दुनिया उनको समझ समझ कर अपनी ज़िंदगी के माने समझ रही है । दुनिया भर में ये पोएट्री का रिवल्यूशन है जिससे हम लगभग अछूते हैं । भोपाल के लोगों को "पोएट्री" की इस नयी दुनिया से जोड़ने व उनके स्वयं पोएट्री लिखने की ताकत देने के उद्देश्य से स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी आगामी 8 जून को एक क्रिएटिव राइटिंग वर्कशॉप का आयोजन कर रही है । दुनिया भर के यंग राइटर्स के बीच लोकप्रिय "इंकलेट" नामक ऑनलाइन लिटरेरी जर्नल इस कार्यक्रम का सह आयोजक है । दुनिया भर के पोएट्री जर्नल्स की एडिटिंग टीम की सदस्य और कई प्रतिष्ठित क्रिएटिव राइटिंग वर्कशॉप में भाग ले चुकी युवा लेखिका "देवांशी खेत्रपाल" इस वर्कशॉप में पोएट्री मेंटर की भूमिका निभाएँगी । 16 साल से ऊपर का कोई भी व्यक्ति इस वर्कशॉप में भाग ले सकता है । वर्कशॉप के लिए 20 सीटें निर्धारित की गईं है , इसलिए भाग लेने के इच्छुक व्यक्तियों को अपने व्यतिगत विवरण के साथ, खुद के द्वारा लिखी गईं कोई कविता या लेख तथा इस वर्कशॉप में क्यों भाग लेने चाहते हैं इस पर एक निबंध लिखकर हमें मेल करना है । हमें मेल करने की अंतिम तिथि -4 जून है । इच्छुक व्यक्ति club.ink13@gmail.com पर अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं । 8 जून को दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक होने वाली यह वर्कशॉप पूरी तरह से निःशुल्क है ।


प्रदेश के 30 हजार से अधिक सरकारी मिडिल स्कूल में विज्ञान मित्र क्लब
Our Correspondent :17 Jan. 2017
स्कूल शिक्षा विभाग ने 30 हजार 341 सरकारी मिडिल स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के मकसद से विज्ञान मित्र क्लब गठन करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में शाला के शिक्षकों को आवश्यक निर्देश दिये गये हैं।
निर्देश में कहा गया है कि सरकारी मिडिल स्कूल में कक्षा 6, 7, 8 में सक्रिय विद्यार्थियों का चयन कर क्लब का गठन करवाया जाये। एक क्लब में अधिकतम 50 विद्यार्थी को रखा जाये। क्लब का गठन होने पर इसका एक दल नायक होगा, जो संचालक सहयोगी की भूमिका में रहेगा। शेष छात्र सहयोगी-पर्यावरण-मित्र कहलायेंगे। क्लब में बाल केबिनेट के एक प्रतिनिधि को भी शामिल किया जायेगा। विज्ञान मित्र क्लब में मार्गदर्शनकर्ता के रूप में एक शिक्षक को भी नामांकित किया जायेगा। स्कूल से कहा गया है कि क्लब का नामकरण भारतीय वैज्ञानिक, आविष्कारक अथवा प्रसिद्ध स्थल आदि के नाम पर किया जा सकता है।
क्लब की गतिविधियाँ जल की स्थिति, प्रदूषण, जल-संरक्षण, जैव-विविधता, ऊर्जा-संरक्षण, अपशिष्ट एवं उसका प्रबंधन, प्राकृतिक आपदाएँ और इससे निपटने के उपाय, रसायनों के प्रयोग से फैलता प्रदूषण और वैज्ञानिक तथ्य पर केन्द्रित होंगी। विज्ञान मित्र क्लब प्रश्न-मंच, संगोष्ठी, चित्रकला, निबंध और विज्ञान खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित करेगा। क्लब अपने सदस्यों के साथ वन्य-जीव उद्यान, संग्रहालयों और प्राकृतिक स्थलों का भी समय-समय पर दौरा करेगा। क्लब मुख्य रूप से शहर में अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों को मिटाने के लिये रैली भी करेगा। साथ ही अपने नजदीक के क्षेत्रों में पॉलिथिन के उपयोग को निरुत्साहित करने के लिये भी काम करेगा। क्लब के गठन के लिये आवश्यक राशि भी उपलब्ध करवायी जा रही है।


श्री सारंग ने अलीराजपुर में छात्रावास का किया औचक निरीक्षण
Our Correspondent :28 November 2016
श्री सारंग ने अलीराजपुर में छात्रावास का किया औचक निरीक्षण, अव्यवस्था पाए जाने पर दिए दो अफसरों को सस्पेंड करने के आदेश-----भोपाल। सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग ने आज 27 नवंबर की शाम को अलीराजपुर स्थित एक आदिवासी छात्रावास का औचक निरीक्षण किया जिसमें छात्राावास में भारी अव्यवस्था पाए जाने के फलस्वरूप उपायुक्त आदिवासी विभाग श्री डामोर तथा छात्रावास अधीक्षक पालसिंह रावत को तत्काल सस्पेंड किए जाने के आदेश दिए। इस मौके पर कलेक्टर तथा एसपी भी मौजूद थे। श्री सारंग अलीराजपुर के प्रभारी मंत्री हैं और वे इस समय अलीराजपुर तथा झाबुआ के दौरे पर हैं। इसी मौके पर उन्होंने ग्राम बड़ी में शासकीय बालक आश्रम का औचक निरीक्षण किया। इसमें भारी अव्यवस्था पाई गई। इसमें खानेे का सामान, साफ सफाई, प्रकाश व्यवस्था आदि सभी में अनियमितता पाई गई। श्री सारंग ने नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए। यह छात्रावास आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित किया जा रहा है।


नई शिक्षा नीति पर 'युवा मंच' का आयोजन
भोपाल. 1 September 2016
सेंभारत सरकार 30 साल बाद भारत की शिक्षा नीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव करने जा रही है । इन बदलावों के लिए सरकार एक नई शिक्षा नीति पर काम कर रही है । सरकार की यह नई नीति 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्थान लेगी । स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा व तकनीक शिक्षा में समयानुकूल परिवर्तन करना इस नई नीति को लाने के पीछे मुख्य कारण है ।
भारत सरकार द्वारा इस आशय से पिछले दिनों एक समिति का गठन किया था । पूर्व कैबिनेट सचिव टी.एस.आर. सुब्रमणियम की अध्यक्षता वाली इस समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है ।
नागरिकों के अवलोकन के लिए यह रिपोर्ट मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय की वैबसाइट पर अपलोड कर दी गयी है
इस रिपोर्ट पर युवाओं के विचार जानने के उद्देश्य से स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी इस रविवार एक विशेष आयोजन कर रही है । युवा मंच नामक इस आयोजन में 30 वर्ष से कम का कोई भी युवा इस प्रस्तावित शिक्षा नीति पर अपने विचार व्यक्त कर सकता है ।
कार्यक्रम में भाग लेने के लिए युवाओं को अपने भाषण का सार 2 सितंबर तक लाइब्रेरी में जमा कराना होगा । भाषण सार के आधार पर 20 युवाओं को इस कार्यक्रम में बोलने का मौका दिया जाएगा
प्रतिभागी अपने विचार हिन्दी या इंग्लिश किसी भी भाषा में व्यक्त कर सकते हैं । हर युवा को अपनी बात रखने के लिए 3 मिनिट का समय दिया जाएगा । जब प्रतिभागी अपनी बात रख चुका होगा तब कोई भी श्रोता उसके द्वारा कही गयी बात पर अपने सवाल पूंछ सकेगा
प्रज्ञा प्रवाह के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में 5 सर्वश्रेष्ठ युवा वक्ताओं को पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया जाएगा
कार्यक्रम में भाग लेने के लिए दो तरीके से रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है
1. स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी के काउंटर पर अपना 'भाषण -सार' जमा करके
2. लाइब्रेरी की मेल आईडी svlbpl@gmail.com पर अपना भाषण सार मेल करके
रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि - 2 सितंबर 2016 है
कार्यक्रम का संक्षिप्त विवरण
कार्यक्रम - युवा मंच
विषय - नई शिक्षा नीति
दिनांक - 4 सितंबर 2016
समय - शाम 5 बजे
स्थान - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी
क्या होगा - 20 युवा वक्ता नई शिक्षा नीति पर अपने विचार व्यक्त करेंगे
कौन भाग ले सकता है - 20 वर्ष से कम का कोई भी युवा
किस भाषा में बोल सकते हैं - हिन्दी या इंग्लिश
भाग लेने के लिए क्या करना है - अपना भाषण सार लिखकर लाइब्रेरी में जमा करना है रजिस्ट्रेशन की आखिरी तिथि - 2 सितंबर 2016


स्कूलों में शिक्षा निर्धारण के मापदंड तय हों
14 April 2016
शिक्षा, जहाँ हर बच्चे का जन्मसिद्ध अधिकार है - वहीं एक पवित्र कार्य भी है। इसलिए समाज में अनेक ऐसे उदाहरण मिल जायेंगे - जहाँ व्यक्तियों ने सरकारी उच्च पद में चयन होने के बावजूद शिक्षा के पवित्र कार्य में योगदान देने और देश की युवाशक्ति को शिक्षित और संस्कारी बनाने के लिए लोगों ने शिक्षक बनना अधिक पसंद किया।
जहाँ सरकार द्वारा प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्ति का अधिकार देना प्रशंसनीय और श्लाघनीय कार्य है - वहीँ शिक्षा उचित फीस पर उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित करना सरकारों का कर्तव्य भी है।
आज जबकि शिक्षा के क्षेत्र में निजी क्षेत्र को राष्ट्र के शैक्षिक विकास में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी दी जा रही है - वहीँ यह भी देखा जाना आवश्यक है कि शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से बच्चों के अभिभावकों को लूटा तो नहीं जा रहा है। आप शिक्षण संस्थानों से सामान्य लाभ तो कमा सकते हैं - किन्तु उसे जनता के शोषण का माध्यम नहीं बना सकते।
इस सम्बन्ध में भारी फीस वृद्धि करने अभिभावकों की जेब पर डाका डालने के प्रश्न पर यह कहना कि यदि आप अधिक फीस नहीं दे सकते, तो सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाएं। यह एक मंत्री का वक्तव्य हो सकता है, जनता के प्रतिनिधि सांसद का नहीं। यदि आप ऐसा कहते हैं - तो प्रकारांतर से शोषण का समर्थन कर रहे हैं।
निश्चित ही निजी स्कूलों में फीस निर्धारण के मापदंड तय होना चाहिए, ताकि बच्चों के अभिभावकों को शोषण से बचाया जा सके। निजी शिक्षा संस्थानों की लॉबी इतनी सशक्त है कि वाजपेयी सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री के फीस कम करने के डॉ. मुरलीमनोहर जोशी के प्रयासों को वह ध्वस्त कर चुकी है।



मदरसा बोर्ड हाई स्कूल, हायर सेकेण्डरी ऑनलाइन परीक्षा फार्म तिथि 15 मार्च हुई
11 March 2016
मदरसा बोर्ड की हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन फार्म भरने की तिथ 29 फरवरी से बढाकर 15 मार्च कर दी गई है। अब 15 मार्च तक आवेदन बिना विलम्ब शुल्क के और 16 से 31 मार्च तक 200 रुपये विलम्ब शुल्क के साथ स्वीकार किए जायेंगे। बोर्ड ने अध्ययन केन्द्रों से कहा है कि वे एम.पी. ऑनलाइन पोर्टल से प्राप्त भरे हुए परीक्षा आवेदन-पत्र -सहपत्रों सहित अतिशीघ्र बोर्ड कार्यालय में जमा करें।


सभी के प्रयास से शिक्षा का स्तर सुधरेगा- मंत्री श्री जैन
Our Correspondent :23 September 2015
राज्य सलाहकार परिषद की बैठक में मंत्री श्री पारस जैन

भोपाल। मप्र के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री पारस जैन ने कहा है कि मध्यप्रदेश में विगत 10 वर्ष में स्कूली शिक्षा के स्तर में सुधार के लिये अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं। इस दिशा में कारगर पहल करते हुए गुणवत्ता वर्ष भी मनाया गया। शैक्षणिक गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में सभी के संयुक्त प्रयास की जरूरत है। श्री जैन आज स्कूल शिक्षा की राज्य सलाहकार परिषद की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में राज्य मंत्री स्कूल शिक्षा श्री दीपक जोशी भी उपस्थित थे।
श्री जैन ने कहा कि परिषद की बैठक प्रत्येक 3 माह में बुलायी जाये। उन्होंने सदस्यों के सुझावों का स्वागत करते हुए उन पर अमल के निर्देश भी दिये। श्री जैन ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा भारत सरकार को जो प्रस्ताव भेजे गये हैं, उनकी स्वीकृति के लिये लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि शालाओं में शिक्षक समय पर उपस्थित रहें तथा पढ़ाई की माकूल व्यवस्था बनी रहे, इसके ठोस इंतजाम किये जायें। श्री जैन ने कहा कि राज्य सरकार ने अध्यापकों और संविदा शाला शिक्षकों के हितों का सदैव ध्यान रखा है। उन्होंने बताया कि 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षा को पुन: शुरू करवाने के प्रयास किये जा रहे हैं। संभव है कि अगले सत्र से यह व्यवस्था लागू हो जाये। उन्होंने प्रतिभा-पर्व जैसे आयोजन में जन-प्रतिनिधियों को भी शामिल होने की समझाइश दी।
बैठक में परिषद की विगत 2 जून को सम्पन्न कार्यवाही के विवरण और लिये गये फैसलों पर चर्चा की गयी। आयुक्त लोक शिक्षण ने सदस्यों के सुझावों के संबंध में किये गये क्रियान्वयन की जानकारी दी। बैठक में राज्य शिक्षा केन्द्र की अपर मिशन संचालक श्रीमती स्वाति मीना, संचालक लोक शिक्षण श्री राजेश जैन, परिषद के सदस्य सर्वश्री ओमप्रकाश जांगलवा, हुकुमचंद भुवन्ता, गुलजारीलाल दुबे, रामकुमार भावसार, त्रिलोचन त्रिपाठी, रूपेश विश्वकर्मा, बालाराम गुप्ता और प्रकाश रोकड़े उपस्थित थे।


अध्यापकों के हित में पिछले 10 वर्ष में हुए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय
Our Correspondent :23 September 2015
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने अध्यापकों के हित में पिछले 10 साल के दौरान अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लेकर उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करवाया है। संविदा शाला शिक्षक और अध्यापक संवर्ग के संविलियन, नियुक्ति, वेतनमान में संशोधन, क्रमोन्नति, अंतरिम राहत और एक सितम्बर, 2017 से नियमित वेतनमान दिये जाने आदि निर्णय उनके पक्ष में लिये गये हैं। राज्य सरकार ने समय-समय पर अध्यापक संवर्ग द्वारा की जाने वाली माँगों को पूरा करने के न सिर्फ हरसंभव प्रयास किये, बल्कि शिक्षकों के कल्याण की दिशा में भी ठोस कदम उठाये।
वस्तुस्थिति यह है कि वर्ष 2001 में संविदा पर नियुक्त शिक्षाकर्मी श्रेणी एक, दो और तीन क्रमश: रुपये 4500, रुपये 3500 और रुपये 2500 प्रतिमाह मानदेय पाते थे1 वर्तमान में अध्यापक संवर्ग में यही शिक्षाकर्मी राज्य सरकार द्वारा पिछले 8 वर्ष में प्रदत्त समस्त लाभों को मिलाकर क्रमश: वरिष्ठ अध्यापक 25000 रुपये, अध्यापक 23,000 रुपये और सहायक अध्यापक रुपये 15000 प्रतिमाह वेतन प्राप्त कर रहे हैं।
प्रदेश में वर्ष 2007 तक शिक्षाकर्मी वर्ग-1 को वेतनमान रु. 1200-40-1600, वर्ग-2 को रु. 1000-30-1600 और वर्ग-3 को 800-20-1200 वेतनमान तथा समय-समय पर महँगाई भत्ता मिलता था। वर्ष 2007 तक संविदा शाला शिक्षक निश्चित मासिक मानदेय पर तैनात थे। श्रेणी-1, 2 एवं 3 को क्रमश: 4500, 3500, 2500 रुपये मासिक पारिश्रमिक प्राप्त होता था। वर्ष 2011 में इनके मासिक पारिश्रमिक को बढ़ाकर दोगुना अर्थात 9000, 7000, 5000 रुपये किया गया।
राज्य सरकार ने शिक्षकों के हित में फैसला लेते हुए विगत एक अप्रैल, 2007 से अध्यापक संवर्ग का गठन कर पृथक-पृथक वेतनमान एवं पदनाम स्वीकृत किया था। सरकार ने विगत एक अप्रैल, 2013 से अध्यापक संवर्ग के लिये ग्रेड-पे के साथ संशोधित वेतनमान स्वीकृत किया। पहले जहाँ वरिष्ठ अध्यापक का वेतनमान 5000-175-8500, अध्यापक का 4000-125-6500 और सहायक अध्यापक का 3000-100-5000 वेतनमान था, उसे बढ़ाकर 4500-25000 रुपये तथा संवर्ग वेतन क्रमश: 1900, 1650 एवं 1250 रुपये किया गया। अध्यापकों को शासकीय कर्मचारियों के समान महँगाई भत्ता भी इसी अवधि से दिया जा रहा है। सरकार ने वर्ष 1998 से 2001 तक नियुक्त सभी शिक्षाकर्मियों का वर्ष 2007 में संविलियन भी किया। साथ ही संविदा शाला शिक्षकों को 3 साल की सेवा के बाद अध्यापक संवर्ग में नियुक्ति देने का प्रावधान भी किया गया।
अध्यापक संवर्ग को वर्ष 2013-14 में 12 एवं 24 वर्ष पूरा होने पर क्रमोन्नत वेतनमान भी दिया गया है। वर्ष 2013 में अध्यापक संघ के प्रतिनिधियों से हुई चर्चा में बनी सहमति के आधार पर राज्य सरकार ने निर्णय लिया था कि एक सितम्बर, 2017 से अध्यापक संवर्ग को नियमित वेतनमान दिया जायेगा। इसके साथ ही हर साल अर्थात 2013 से 2016 तक सालाना अंतरिम राहत दी जायेगी। सरकार द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर अंतरिम राहत की किश्तें भी दी गयीं। विगत 4 सितम्बर, 2013 को जारी आदेश से अध्यापक संवर्ग को नियमित शिक्षकों के समान छठवाँ वेतनमान दिनांक एक सितम्बर, 2017 से मंजूर किया गया। उनके लिये हर साल 4 समान किश्त में अंतरिम राहत स्वीकृत की गयी। अध्यापक संवर्ग को नियमित शिक्षकों के समान जो छठवाँ वेतनमान स्वीकृत हुआ है।
अध्यापक संवर्ग को एक सितम्बर, 2013 एवं एक सितम्बर, 2014 को अंतरिम राहत की पहली एवं दूसरी किश्त दी जा चुकी है। इस साल की तीसरी किश्त स्वीकृति के लिये राज्य शासन के समक्ष प्रचलित है। इस प्रकार जहाँ राज्य सरकार ने 1-9-2017 से अध्यापक संवर्ग को नियमित वेतनमान तथा वर्ष 2013 से 2016 तक हर साल देय वेतनमान के अंतर की राशि को चार किश्त में देने का फैसला लेकर उसका पालन सुनिश्चित किया।
अब अध्यापक संघ अपनी ही सहमति के विपरीत जाकर 1 सितम्बर 2017 से देय नियमित वेतनमान को इसी साल अर्थात वर्ष 2015 से देने की माँग कर रहा है, जो कतई उचित नहीं है। यह भी स्पष्ट है कि अध्यापक संवर्ग स्थानीय निकाय द्वारा नियुक्त कर्मचारी हैं। संविधान के 73 एवं 74वें संशोधन के फलस्वरूप इनकी नियुक्ति एवं नियंत्रण का अधिकार वर्ष 1998 से स्थानीय निकायों को सौंपा गया है। देश के अन्य राज्य ने भी ऐसा ही किया है। अध्यापक संवर्ग राज्य शासन के नियमित शिक्षक के समान अपना संविलियन चाहता है, जो संविधान की मंशा के बिलकुल अनुरूप नहीं है।


प्रस्तावित नई शिक्षा नीति सेन्ट्रल जोन बैठक में शामिल हुए उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्री जोशी
15 September 2015
देश की प्रस्तावित नई शिक्षा नीति पर लखनऊ में आज हुई बैठक में प्रदेश का प्रतिनिधित्व उच्च एवं स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी ने किया। अध्यक्षता मानव संसाधन मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी ने की। मध्यप्रदेश के साथ ही छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश और उत्तराखण्ड के शिक्षा मंत्री शामिल हुए।
बैठक में श्री जोशी ने प्रदेश में बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन के लिये गाँव की बेटी एवं प्रतिभा किरण योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बालिकाओं के लिये बनाये गये 324 छात्रावास, होटलों में काम करने वाले एवं सड़कों पर पन्नी बीनने वाले बच्चों की शिक्षा के लिये खोले गये आवासीय विद्यालय और सभी संभाग में 250 सीटर और जिलों में 100 सीटर छात्रावास विमुक्त एवं घुमक्कड़ जाति के बच्चों के लिये खोले जाने के बारे में बताया। श्री जोशी ने कहा कि राज्य के फण्ड से सभी विकासखण्ड में मॉडल स्कूल खोले गये हैं। उन्होंने बताया ‍िक कॉलेजों में ई-लायब्रेरी खोली जा रही हैं। खेलकूद सुविधाएँ भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

शासकीय स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था, उसका स्तर और गुणवत्ता सुधारने के मामले में इलाहाबाद उच्चत्तम न्यायालय का क्रन्तिकारी फैसला आया है । जोकि अभूतपूर्व और अद्वतीय फैसला है । आजादी के पूर्व की चर्चा करना तो व्यर्थ है क्योंकि वह अंग्रेजो की शिक्षा व्यवस्था थी, जिसमे डेली कालेज, दून स्कूल जैसे दर्जनों स्कूल फले फूले, लेकिन मैं हैरान हूँ कि आजादी के बाद ऎसे स्कूलों की संख्या कुछ दर्जन से बढ़कर हजारों में हो गई । आज देश में दो अलग-अलग शिक्षा व्यवस्थाएं चल रही हैं, एक अमीरों के लिए दूसरी गरीबों के लिए । अमीरों के लिए उपलब्ध इस शिक्षा व्यवस्था में इलाहाबाद उच्चत्तम न्यायालय द्वारा चिन्हित वर्ग जिसमे नेता, मंत्री, अधिकारी, कर्मचारी एवं नव धनाढ्य वर्ग शामिल है, जो अपने बच्चों को महंगी फीस वाले सर्व-सुविधा युक्त तरह तरह के नामो के अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ाता है । इन स्कूलों की फीस इतनी महंगी है कि मध्यम-वर्गीय परिवार के बच्चे और उनके माता-पिता उस तरफ देख भी नहीं सकते, इन मंहगे स्कूलों में से अधिकांश स्कूल उद्योगपतियों और व्यापारियों के ही है जिन्होंने शिक्षा को बड़ा व्यवसाय बना दिया है, जिसमे लोग कालेधन का निवेश करते है और भ्र्ष्टाचार से संपत्ति अर्जित करने वाले लोग अपने बच्चों को पढ़ाते है । इलाहाबाद उच्चत्तम न्यायालय के निर्णय से उत्तर-प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के आम तबके के लोगों में आशा और उम्मीद की आस जगी है । देश को आजादी तो मिली लेकिन आजादी का यह सूरज देश की 90% आबादी को अभी तक उजाला नहीं दे पाया है । नेता, अधिकारी, सट्टेबाज, उद्योगपति और समाज का एक बड़ा वर्ग ही इस प्रकाश से सराबोर होता रहा और नहाता रहा है यह बात स्वयं सिद्ध है । यदि समाज का नेतृत्व करने वाले व्यक्तियों और अधिकारीऒ , कर्मचारियों, उद्योगपतियों, व्यापारियों और इन शासकीय स्कूल को हेय दृष्टि से देखने वाले बड़े अंग्रेजी वर्ग के बच्चे शासकीय स्कूल में प्रवेश लेंगे तो ये समाज का नेतृत्व करने वाला बड़ा वर्ग इन शासकीय स्कूलों के भवन की, फर्नीचर की, पेयजल की, शौचालयों की एवं शिक्षको की उपस्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता की व्यवस्था स्वयं देखेगा । इन शासकीय शालाओं में प्रवेश लेने वाले बच्चों के अभिजात्य मम्मी-पापा आये दिन इन स्कूलों में आकर देखेगें कि उनका दुलारा स्कूल की छत के टपकते पानी के नीचे कीचड़ से सनी गीली टाटपट्टी पर तो नहीं पद रहा, मास्टर साब आये है या नहीं, फिर तो मध्यान्ह भोेजन भी इतना स्वादिष्ट और स्वरुचि पूर्ण मिलने लगेगा कि इन मॉम-डैड के नौनिहालों को घर से टिफ़िन लाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी ।
इलाहाबाद उच्चत्तम न्यायालय के शिक्षा व्यवस्था को लेकर दिए गए इस फैसले की तर्ज पर ही देश के शासकीय अस्पतालों के लिए भी यही नियम और सिद्धांत लागू हो तो शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी सुधार आ सकता है ।
अब तो नेताओं का जन-समस्यायों को लेकर आंदोलन करते हुए जेल जाना काम हो गया है, यदि जाते भी है तो एक दो दिन में पिकनिक जैसी करके बाहर आ जाते है या जमानत करा लेते है । लेकिन पूर्व में मैंने स्वयं ये अनुभव किया है जब - जब हम लोग आंदोलनों के कारण जेल जाते थे उस समय जेल की खान पान, रहन-सहन स्वास्थ्य इत्यादि सेवाएं एक-दम सुधर जाया करती थी । कुल मिलकर समाज के श्रेष्ठ वर्ग ही जहाँ-जहाँ स्वयं के हित लिए सरीक होते है, वहीं - वहीं गुणात्मक सुधार सुनिश्चित हो जाता है, अब देखना यह है कि देश भर की विभिन्न सरकारें इसे किस रूप में लेती है, फैसले को लागू करती भी है या नहीं, मुझे इसका इन्तजार रहेगा ।
" इलाहाबाद उच्चत्तम न्यायालय के इस क्रन्तिकारी फैसले को और फैसला देने वाले न्यायाधीशों को मेरा इंकलाबी सलाम "


शिक्षकों के आंदोलन के समर्थन में
शिक्षा अधिकार मंच, भोपाल और पालक महासंघ, म. प्र. द्वारा जारी संयुक्त प्रेस-विज्ञप्ति

मध्य प्रदेश में स्कूल व्यवस्था में बढ़ते हुए निजीकरण, भेदभावपूर्ण शिक्षा नीति और शिक्षकों की बदहाल स्थिति के खिलाफ़ मध्य प्रदेश शासकीय अध्यापक संघ द्वारा 12 मई को भोपाल में आयोजित धरना व प्रदर्शन का शिक्षा अधिकार मंच, भोपाल और पालक महासंघ, म. प्र. पूरा समर्थन करते हैं।
हमारा मानना है कि विगत दो दशकों से प्रदेश में जिन नीतियों को लागू किया गया है उससे सरकारी स्कूल व्यवस्था बदहाल हुई है और मुनाफा कमाने वाले निजी स्कूलों को बढ़ावा मिला है। इन्हीं नीतियों के चलते सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की हालत भी शोचनीय हो गई है। भेदभावपूर्ण सेवा-शर्तों, असमान वेतनमान, सरकारी स्कूलों में काम के माहौल व मूलभूत आवश्यकताओं की भारी कमी, गैर-शैक्षणिक कार्यों के बढ़ते बोझ आदि चुनौतियों से आज हमारे शिक्षक जूझ रहे हैं जो सीधे-सीधे सरकार की अन्यायपूर्ण शिक्षा नीति का कुपरिणाम है।
यह बड़े अफसोस की बात है कि सरकारी स्कूल व्यवस्था को बेहतर बनाने की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर राज्य सरकार स्कूलों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) की नीति लागू कर इन्हें निजी हाथों में सौंपने की योजना बना रही है। हालांकि अखबारों की रपट के अनुसार मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आश्वासन दिया है कि प्रदेश में सरकारी स्कूलों का निजीकरण नहीं किया जाएगा लेकिन इस मामले में सरकार की प्रतिबद्धता तभी साबित होगी जब वह पिछले दो दशकों से चली आ रही नीतियों को पलटकर शिक्षा में पीपीपी समेत हर प्रकार के निजीकरण को खत्म करेगी और सरकारी स्कूल व्यवस्था की बेहतरी के लिए ठोस नीति बना कर लागू करेगी।
इस संबंध में शिक्षा अधिकार मंच, भोपाल यह मांग करता है कि प्रदेश सरकार सभी सरकारी स्कूलों को शुरुआती तौर पर कम-से-कम केंद्रीय स्कूलों के समकक्ष अधोसंरचनात्मक व अन्य सुविधाएं (जैसे संगीत, नृत्य, ललित कलाओं, शारीरिक शिक्षा व खेल-कूद के शिक्षण की सुविधाएं; शिक्षक:विद्यार्थी अनुपात; विकलांगों के लिए समतामूलक पाठ्यचर्या, माहौल व सुविधाएं; कंप्यूटर शिक्षण) मुहैया कराने की 3-साला योजना आवश्यक वित्तीय प्रबंध समेत लागू करे। इसके साथ-साथ यह भी प्रावधान रहे कि इसी अवधि में हरेक शिक्षक-पद पर नियुक्ति हो जाएगी; सभी श्रेणियों के संविदा/अतिथि शिक्षकों का नियमित शिक्षक कैडर में संविलयन कर दिया जाएगा; यथोचित संख्या में गैर-शैक्षणिक कामों के लिए शिक्षणेतर कर्मचारियों को नियमित कैडर में नियुक्त किया जाएगा; और किसी भी शिक्षक/शिक्षिका से कभी भी, कोई भी गैर-शैक्षणिक काम नहीं करवाया जाएगा। इस तरह की ठोस योजना के अभाव में कोई भी आश्वासन महज एक दिखावा है। हम भोपाल समेत प्रदेश की जनता के हर हिस्से से अपील करते हैं कि हमारे शिक्षकों के आंदोलन का समर्थन करते हुए समतामूलक व बेहतर गुणवत्ता की सरकारी स्कूल व्यवस्था के निर्माण के लिए और शिक्षा में निजीकरण को खत्म करने के लिए जारी इस आंदोलन में शामिल हो।


बच्चों को शिक्षित के साथ संस्कारवान तथा संवेदनशील नागरिक बनाना जरूरी
Our Correspondent :19 December 2014
भोपाल । जनसंपर्क, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा तथा खनिज साधन मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि बच्चों को शिक्षित करने के साथ ही संस्कारवान तथा संवेदनशील नागरिक बनाना आज की जरूरत है। इससे बच्चे अच्छे नागरिक बनकर देश-प्रदेश का नाम रोशन कर सकेंगे। श्री शुक्ल आज यहाँ बोर्डिंग स्कॉलर प्ले-ग्रुप और नर्सरी स्कूल के 10वें वार्षिक समारोह यूपोहरि-2015 को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर विभागाध्यक्ष शिक्षा विभाग सत्य सांईं कॉलेज डॉ. सरोज गुप्ता विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थीं।
श्री शुक्ल ने कहा कि बच्चे गीली मिट्टी के लोंदे के समान होते हैं। उसे जैसा चाहो आकार दे दो। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को संस्कारवान नागरिक बनाने के लिये शुरूआती दौर में बुनियादी शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। जनसंपर्क मंत्री ने कहा कि वर्तमान युग प्रतिस्पर्धा तथा चुनौतियों से भरा है। इसे ध्यान में रखते हुए ही बच्चों को शिक्षा दी जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि बच्चे स्वभाव से ही नटखट होते हैं और ज्यादा देर तक किसी चीज पर केन्द्रित नहीं रह पाते। उनके नटखटपन को बनाये रखते हुए शिक्षित करने के साथ ही संस्कारवान बनाने के लिये बोर्डिंग स्कॉलर प्ले-ग्रुप और नर्सरी स्कूल बखूबी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा है।
जनसंपर्क मंत्री ने नोबल शांति पुरस्कार से विभूषित कैलाश सत्यार्थी का उल्लेख करते हुए कहा है कि हमें उनसे प्रेरणा लेना चाहिये। उन्होंने बचपन बचाओ अभियान में अपने आप को समर्पित कर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
श्री शुक्ल ने इस मौके पर विभिन्न प्रतियोगिता के विजेता नन्हे-मुन्ने बच्चों को पुरस्कृत कर उन्हें दुलार भी किया। जनसंपर्क मंत्री का नन्हे बच्चों ने अपने तरीके से स्वागत किया। संस्थान की संचालक एवं प्राचार्य डॉ. सीमा पचौरी ने गतिविधियों की जानकारी दी।


'मेगा मध्यप्रदेश क्विज'
(मध्यप्रदेश सामान्य ज्ञान पर आधारित ओपन क्विज)


शासकीय मौलाना आज़ाद सेंट्रल लाइब्रेरी इस रविवार 'मध्यप्रदेश' के इतिहास,संस्कृति एवं शासन व्यवस्था पर केंद्रित एक मेगा क्विज आयोजित कर रही है
अगले माह आयोजित होने वाली 'MPPSC प्रारंभिक परीक्षा' को ध्यान में रखकर आयोजित की जा रही क्विज पूरी तरह से निःशुल्क एवं सबके लिए ओपन है
इस अवसर पर MPPSC के पूर्व टॉपर एवं राज्य प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी छात्रों का मार्गदर्शन भी करेंगें

आयोजन के बारे में

क्विज का नाम - मीट द ऑथर
दिनांक - कोई लोकप्रिय लेखक रीडर्स से अपनी पुस्तकों पर चर्चा करता है
स्थान - 01 जुलाई 2014 (मंगलवार )
आयोजक - सायं 6 से 7 बजे तक
सह आयोजक - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी
क्विज के बारे में - राघव चंद्रा
थीम - सेंट ऑफ़ ए गेम
क्विज की भाषा - वाइल्ड लाइफ से जुड़ा एक फिक्शन
क्विज का स्वरुप - रूपा पब्लिकेशन्स दिल्ली
क्विज मास्टर शिवेन्दु जोशी (NLIU भोपाल के पूर्व छात्र, पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ)

क्विज कैसे होगी -

क्विज का पहला राउंड स्क्रीनिंग राउंड होगा
स्क्रीनिंग में अधिकतम 250 टीमें भाग ले सकेंगी
स्क्रीनिंग टेस्ट एक लिखित टेस्ट होगा
स्क्रीनिंग टेस्ट में सबसे अच्छा स्कोर करने वाली 6 टीमें फाइनल क्विज खेलेंगी
फाइनल क्विज एक मौखिक क्विज होगी

फाइनल क्विज के टॉपिक्स

मध्यप्रदेश सरकार की प्रमुख नीतियाँ,योजनाएं एवं प्रशासनिक पहलें
पिछले वर्ष प्रदेश में हुए प्रमुख आयोजन एवं दिए गए पुरूस्कार
मध्यप्रदेश के चर्चित व्यक्ति
मध्यप्रदेश के प्रमुख सांस्कृतिक,धार्मिक एवं औद्योगिक केंद्र
मध्य प्रदेश के बारे में नवीनतम आंकड़े
मध्यप्रदेश के प्रमुख पदाधिकारी एवं संस्थाएं
मध्यप्रदेश में खेल प्रशासन एवं उपलब्धियां
मध्यप्रदेश के प्रमुख एक्टस

भाग कैसे ले सकते हैं

- कोई भी इच्छुक व्यक्ति इस क्विज में भाग ले सकता है
- क्विज में भाग लेने के लिए 02 लोगों की टीम जरुरी होगी
- भाग लेने के लिए शनिवार शाम 5 बजे तक लाइब्रेरी काउंटर पर रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है
- फ़ोन से भी रजिस्ट्रेशन कराये जा सकते हैं (फ़ोन नंबर है -2741317 )
- क्विज में अधिकतम 250 टीमें ही भाग ले सकती हैं

 

मीट द ऑथर कार्यक्रम (लेखक राघव चंद्रा के साथ)


स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी की राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय रही साहित्यिक सीरीज 'मीट द ऑथर' एक बार फिर शहर के पाठकों के लिए शुरू की जा रही है इस मंगलवार (01 जुलाई ) को लाइब्रेरी में एक बार 'मीट द ऑथर' कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा जिसमे 'सेंट ऑफ़ ए गेम' नामक पुस्तक के लेखक 'राघव चंद्रा' रीडर्स से रूबरू होंगें कार्यक्रम शाम को 6 बजे से लाइब्रेरी में आयोजित किया जाएगा जिसमे शहर का कोई भी पाठक भाग ले सकता है

मीट द ऑथर

कार्यक्रम का नाम - मीट द ऑथर
क्या होता है इसमें - कोई लोकप्रिय लेखक रीडर्स से अपनी पुस्तकों पर चर्चा करता है
दिनांक - 01 जुलाई 2014 (मंगलवार )
समय - सायं 6 से 7 बजे तक
स्थान - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी लेखक - राघव चंद्रा
पुस्तक का नाम - सेंट ऑफ़ ए गेम
पुस्तक किस बारे में है - वाइल्ड लाइफ से जुड़ा एक फिक्शन
प्रकाशक - रूपा पब्लिकेशन्स दिल्ली
लेखक के बारे में मीट द ऑथर कार्यक्रम में आ रहे 'राघव चंद्रा' मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं, वर्तमान में दिल्ली में पदस्थ 'राघव चंद्रा' की पहली पुस्तक 'सेंट ऑफ़ ए गेम' के नाम पिछले माह प्रतिष्ठित प्रकाशक रूपा पब्लिकेशन से प्रकाशित हुई है

 

"लेट्स प्ले"- जर्मन थिएटर वर्कशॉप


'भारत में जर्मन भाषा के 100 साल पूरे होने पर जर्मन सरकार का आयोजन'

1914 में पहली बार भारत में 'जर्मन लैंग्वेज' की पढाई शुरू हुई थी, पुणे और बम्बई विश्वविद्यालयों में एक साथ शुरू हुई जर्मन भाषा अब भारत में अपने 100 साल पूरी कर चुकी है. इस महत्वपूर्ण अवसर को यादगार बनाने के लिए जर्मन सरकार देश भर में विशेष आयोजन कर रही है
स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी भी जर्मन सरकार के सहयोग से पिछले 4 वर्षों से 'जर्मन भाषा की ट्रेनिंग' दे रही है इसलिए जर्मन भाषा के 100 वर्ष पूरे होने पर यहाँ भी एक विशेष आयोजन किया जा रहा है
नई दिल्ली स्थित जर्मन सरकार की सांस्कृतिक संस्था 'मैक्स मूलर भवन' (गेटे इंस्टिट्यूट) के सहयोग से स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में आगामी 12 मई (सोमवार) को जर्मन थिएटर वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है
पूरी तरह से निःशुल्क इस वर्कशॉप में केवल 10 से 13 वर्ष की आयु के स्कूली बच्चे ही भाग ले सकते हैं पूरी वर्कशॉप इंग्लिश में होगी इसलिए इसमें भाग लेने के लिए जर्मन भाषा का ज्ञान होना जरुरी नहीं है

कार्यक्रम एक नज़र में

कार्यक्रम का नाम - लेट्स प्ले
क्या है कार्यक्रम - जर्मन थिएटर वर्कशॉप
किसके लिए - 10 से 13 साल के स्कूली बच्चों के लिए (कक्षा 6 से 8)

आयोजन किसका है

कौन आयोजित कर रहा है - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी
किसके सहयोग से - मैक्स मूलर भवन नई दिल्ली (जर्मन सरकार)
किस अवसर पर - भारत में जर्मन भाषा टीचिंग के 100 साल पूरे होने पर

कहाँ और कब होगा आयोजन

कहाँ होगा आयोजन - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी
दिन व दिनांक - सोमवार , 12 मई 2014
समय - सुबह 11 बजे से
समयावधि - एक वर्कशॉप 90 मिनिट की (कुल 02 वर्कशॉप्स)

कैसे भाग ले सकते हैं

कौन भाग ले सकता है - 10 से 13 वर्ष का कोई भी स्कूली छात्र
भाग लेने के लिए क्या जर्मन जानना जरुरी है - बिलकुल भी नहीं
कैसे भाग ले सकते हैं - लाइब्रेरी जाकर या फ़ोन करके रजिस्ट्रेशन कराएं
फ़ोन नंबर है - 2553765 एवं 2553767
कितने लोग भाग ले सकते हैं - 50 (हर वर्कशॉप में अधिकतम 25 छात्र)
रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि - 10 मई 2014

कौन सिखाएगा,क्या सिखाएगा

वर्कशॉप की थीम - जर्मन थिएटर पेडागॉगी
ट्रेनर - जूडिथ मानके (जर्मन थिएटर आर्टिस्ट)
क्या सिखाया जायेगा - अपने आप को स्टेज पर एक्सप्रेस कैसे करें
ट्रेनिंग तकनीक - थिएटर गेम्स एवं इम्प्रो टेक्निक्स
कोर वैल्यू - Follow your first idea, find your moment, be brave, go on stage and start to play

"माया एन्गेलो" पर क्लब इंक का विशेष सत्र
सुप्रसिद्ध अमेरिकी लेखिका 'माया एन्गेलो' पर केंद्रित क्लब इंक का विशेष सत्र आज स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में आयोजित किया गया. इस अवसर पर शहर के रीडर्स ने माया के जीवन और उसकी राइटिंग स्टाइल पर चर्चा की और उनकी कविताएं पढ़ीं।
रीडर्स का मानना था कि हालांकि माया की राइटिंगस थोड़ा एग्रेसिव है पर जिस खूबसूरती के साथ उन्होंने समाज के 'नेग्लेक्टेड' (किनारे कर दिए गए) लोगों की आवाज़ को दुनिया के सामने रखा है वैसा आज तक कोई नहीं कर पाया इसलिए इतिहास में तो उनका नाम दर्ज हो ही चुका है आगे भी उनकी यह विशिष्ठ लेखनी समाज का मार्गदर्शन करती रहेगी

कार्यक्रम एक नज़र में -

कार्यक्रम का नाम - मेमोरेबिलिया : आ रीडर्स डिस्कशन ऑन माया एन्गेलो
कब - रविवार दोपहर 12 बजे
कहाँ - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी भोपाल
आयोजक - क्लब इंक (लाइब्रेरी का रीडर्स क्लब)
कार्यक्रम में क्या हुआ

स्काइप द्धारा दुनिया के कई कोनों से लोग इस कार्यक्रम से जुड़े

भोपाल के बाहर रह रहे कई लोगों ने इस कार्यक्रम से जुड़ने की इच्छा व्यक्त की थी, इसलिए स्काइप के माध्यम से इन लोगों (लेखक एवं पाठक) को लाइब्रेरी में चल रहे कार्यक्रम से जोड़ा गया. ऑनलाइन ऑफलाइन दोनों स्तर पर 2 घंटे तक माया की पोएट्री पर चर्चा होती रही
दिल्ली की स्कूली छात्रा एवं 5 प्रकाशित पुस्तकों की लेखिका 'त्रिवर्णा हरिहरन' ने माया की पोयम्स को सुनाया और माया की लेखनी के फंडामेंटल्स लोगों के साथ शेयर किये

लाइब्रेरी के सीनियर मेंबर्स ने बताया कि "माया क्यों अलग हैं''

माया को पढ़ चुके लाइब्रेरी के सीनियर्स मेंबर्स ने कुछ हद तक महिलावादी एवं मानव स्वभाव में मौजूद सकारात्मकता और नकारात्मकता की गहरी खाई को समझाने वाला बताया
डॉ अमिता सिंह का कहना था कि 'वे जबरदस्त आंतरिक सुंदरता की धनी महिला थीं , उन्होंने अपने बेहद बुरे अतीत से सफलतापूर्वक छुटकारा पाकर विचारणीय मुद्दों को समाज के सामने रखा'

माया एन्गेलो पर केंद्रित विशेष न्यूज़लेटर 'इंकलेट' जारी किया गया

इस अवसर को यादगार बनाने के लिए क्लब इंक ने 'माया एन्गेलो' पर विशेष न्यूज़लेटर भी जारी किया, इस न्यूज़लेटर में माया को विशेष श्रद्धांजलि दी गयी तथा उनपर केंद्रित दुनिया भर के रीडर्स की रचनायें शामिल की गयीं दो अमेरिकी स्कूली छात्रों ने भी इस न्यूज़लेटर के लिए अपनी रचनायें भेजी थीं


स्कूल चलें हम अभियान-2014 चलेगा चार चरण में

भोपाल। मध्यलप्रदेश में 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों का स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए स्कूल चलें हम अभियान-2014 चार चरण में चलेगा। प्रथम चरण 30 अप्रैल को प्रारंभ हो चुका है। दूसरा चरण 10 जून से चलेगा। तृतीय चरण प्रतिभा पर्व के प्रथम चरण के पहले और चतुर्थ चरण प्रतिभा पर्व के द्वितीय चरण के पहले संचालित किया जायेगा। इस संबंध में व्यापक निर्देश अपर मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा और प्रमुख सचिव आदिम जाति कल्याण द्वारा संयुक्त रूप से सभी कलेक्टर और सी.ई.ओ. जिला पंचायत को दिये जा चुके हैं।

प्रथम चरण

इस चरण में 5 मई तक कक्षा एक में प्रवेश योग्य बच्चों की सूची तैयार की जायेगी। इसके साथ ही ग्राम शिक्षा पंजी का अद्यतनीकरण भी होगा। कक्षा 6 में प्रवेश योग्य बच्चों की सूची भी 9 मई तक तैयार की जायेगी। शाला प्रभारी द्वारा 8 वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले बच्चों के पालकों से सम्पर्क कर कक्षा 9 में प्रवेश के लिए समझाइश दी जायेगी। कक्षा एक, 6 एवं 9 में प्रवेश योग्य बच्चों के नाम की सूची एक जून 2014 को पोर्टल में डाल दी जायेगी। अभियान में शिक्षक घर-घर जाकर अभिभावकों से सम्पर्क करेंगे।

द्वितीय चरण

इस चरण में ग्राम प्रभारी 10 से 16 जून तक आँगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की माताओं से सम्पर्क करेंगे। उन्हें 16 जून को 6 वर्ष के बच्चों के साथ स्कूल आने के लिए प्रेरित किया जायेगा। शिक्षकों द्वारा बच्चों के पालकों से 11 एवं 16 जून के मध्य दो बार संपर्क किया जायेगा। स्कूलों में 16 जून को प्रवेशोत्सव मनाया जायेगा।
इसके अतिरिक्त ब्रिज कोर्स का संचालन 25 जून से 20 जुलाई तक किया जायेगा। कक्षा 2 से 5, 7 और 8 मंक 25 जून तक प्रवेश दिया जायेगा। माइग्रेशन वाले बच्चों का प्रवेश 31 जुलाई तक होगा। नामांकन से शेष रहे बच्चों की पहचान एवं उनका नामांकन 30 जून तक करवाया जायेगा।


गणतंत्र दिवस पर हुआ "विकी कॉन्स्टी " का आयोजन


Our Correspondent :28 January 2014
भोपाल। 26 जनवरी को स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में युवाओं के लिए "भारतीय संविधान " पर एक ओपन क्विज आयोजित की गयी। 20 वर्ष तक के छात्रों के लिए आयोजित इस क्विज में 86 टीम्स ने भाग लिया।
पांच राउंड्स में आयोजित इस क्विज में भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था से जुड़े 150 से ज्यादा से ज्यादा प्रश्न पूंछे गए

कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है

कार्यक्रम - विकी कॉन्स्टी

क्या था आयोजन -भारतीय संविधान पर क्विज
किसके लिए - 20 वर्ष तक के युवाओं के लिए
कब हुई - 26 जनवरी को
कहाँ हुई - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी भोपाल
आयोजक - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी एवं लीगल एज टुटोरिअल

क्विज मास्टर - हर्ष गगरानी (प्रसिद्ध लेखक व क्विज मास्टर)
कुल प्रतिभागी - 172 (86 टीम्स )
कुल राउंड्स - 05
पुरूस्कार - 5000 रुपये के पुरूस्कार,ट्रॉफी एवं मेडल्स

विजेताओं के नाम -
प्रथम - जागृति गुप्ता एवं प्रत्युष सिंह (झांसी की टीम)
द्वितीय - हिमांशु गुप्ता एवं मयंक देवांगन (भोपाल)
तृतीय - सत्यम बरोलिया एवं सारांश सैनी (भोपाल )

राउंड्स का विवरण

प्रथम राउंड - स्क्रीनिंग राउंड (इसमें एक निबंध दिया गया था जिसके बीच में मौज़ूद खाली स्थानों को भरना था )
दूसरा राउंड - शब्द को पहचानें (4 चित्रों को जोड़कर एक संवैधानिक शब्द निकालना था )
तीसरा राउंड - केस ऑफ़ मिस्सिंग लिंक (चार शब्द,व्यक्तियों या प्रावधानों में कॉमन चीज़ को ढूंढना था )
चौथा राउंड -टाइम लाइन को सही क्रम में जमाएं
पांचवां राउंड - रैपिड फायर राउंड

प्रमुख प्रश्न

प्रश्न - प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा का भारतीय संविधान से क्या कनेक्शन था
उत्तर - इन्होने संविधान की पहली प्रति अपने हाथों से लिखी थी

प्रश्न - अटल बिहारी बाजपेई ने किस घटना के बाद हमेशा से चले आ रहे लोकप्रिय नारे "जय जवान जय किसान " मैं "जय विज्ञान " को जोड़ा था
उत्तर - पोखरण परीक्षण के बाद

प्रश्न - देश में पहली बार ऑनलाइन वोटिंग कब और कौन से चुनाव में हुई थी
उत्तर - गुजरात नगरीय निकाय चुनाव 2010

प्रश्न - किसे भारतीय संविधान का मैग्नाकार्टा कहा जाता है
उत्तर - मौलिक अधिकार (भाग तीन )

प्रश्न - किस प्रधानमन्त्री ने पहली बार भारत में "अल्पमत सरकार" बनाई थी
उत्तर - चौधरी चरण सिंह


जर्मन स्टूडेंट्स का ' स्टेट यूथ कैंप" कल
25 जनवरी को होटल नूर उस सबाह में होगा मैक्स मूलर भवन का आयोजन

Our Correspondent :25 January 2014
भोपाल। जर्मन सरकार की संस्था "मैक्स मूलर भवन" ने 03 वर्ष पहले भोपाल के 'केंद्रीय विद्यालयों' में जर्मन भाषा पढ़ाना शुरू किया था. अब तक केंद्रीय विद्यालय के सैकड़ों छात्र जर्मन भाषा सीख चुके हैं. वर्त्तमान में भोपाल के अलावा प्रदेश के अन्य केंद्रीय विद्यालयों में भी जर्मन भाषा पढ़ाई जाती है.
मैक्स मूलर भवन द्वारा 24 जनवरी 2014 को प्रदेश में पहली बार जर्मन स्टूडेंट्स के लिए इंटरनेशनल एग्जाम आयोजित की गयी. जिसमे भोपाल शहर के 80 स्कूली छात्रों ने भाग लिया। यह संख्या देश के दुसरे प्रदेशों की तुलना में बहुत ज्यादा है.
प्रदेश भर के छात्रों के लिए "यूथ कैंप"

मध्य प्रदेश के विभिन्न केंद्रीय विद्यालयों में जर्मन भाषा पढ़ रहे छात्रों के लिए शनिवार 25 जनवरी को होटल नूर उस सबाह में एक यूथ कैंप आयोजित किया जा रहा है. मैक्स मूलर भवन नई दिल्ली द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सभी केंद्रीय विद्यालयों के कुछ चुनिंदा छात्र भाग लेंगे तथा दिन भर चलने वाले इस कैंप में अपनी सांस्कृतिक,साहित्यिक एवं भाषायी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे
कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है

कार्यक्रम - जर्मन यूथ कैंप
किनके लिए-प्रदेश के केंद्रीय विद्यालयों में जर्मन भाषा पढ़ रहे छात्रों के लिए
कब है - शनिवार 25 जनवरी 2014

समय- दोपहर 12 बजे से 5 बजे तक

कहाँ - होटल नूर उस सबाह,भोपाल

आयोजक - मैक्स मूलर भवन नई दिल्ली
संयोजक - पुनीत कौर (जर्मन इन 1000 स्कूल प्रोजेक्ट,मैक्स मूलर भवन)
संपर्क सूत्र -लक्ष्मी शरण मिश्रा (मेनेजर,स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी)


गणतंत्र दिवस पर "विकी-कॉन्स्टी"
भारतीय संविधान पर ओपन क्विज

Our Correspondent :24 January 2014
भोपाल। इस गणतंत्र दिवस पर शहर के युवाओं को संविधान से जोड़ने और उनकी समझ बढ़ाने के उद्देश्य से स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी 'भारतीय संविधान' पर केंद्रित एक ओपन क्विज का आयोजन कर रही है 20 वर्ष तक की आयु वाले छात्रों के लिए आयोजित इस क्विज के लिए निःशुल्क रजिस्ट्रेशन 25 जनवरी तक कराये जा सकते हैं. क्विज अंग्रेजी भाषा में आयोजित की जायेगी और विजेताओं को 5000 रुपये कीमत के पुरूस्कार दिये जायेंगे
कार्यक्रम विवरण इस प्रकार है -

कार्यक्रम का नाम - विकी कॉन्स्टी
क्या है कार्यक्रम - भारतीय संविधान पर क्विज
कब - 26 जनवरी 2014 को
अवसर- गणतंत्र दिवस
स्थान - स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी (पूर्व ब्रिटिश लाइब्रेरी)

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया

कौन भाग ले सकता है - 20 वर्ष तक की आयु के छात्र
रजिस्ट्रेशन - पूरी तरह से निःशुल्क हैं
कहाँ रजिस्ट्रेशन करना है - लाइब्रेरी हेल्प डेस्क पर 2553765 पर कॉल करके
टीम - 02 मेंबर्स की टीम में
रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि - 25 जनवरी 2014

क्विज के बारे में

राउंड्स

पहला राउंड - लिखित स्क्रीनिंग
दूसरा राउंड - मौखिक राउंड

पुरूस्कार - 5000/ रुपये की कीमत के पुरूस्कार


प्रदेश में " किड्स ऐथलेटिक्स प्रोग्राम की शुरूआत 6 अक्टूबर से
04 October 2013
भोपाल। प्रदेश के बच्चों को ऐथलेटिक्स खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने और खेल के विकास में सहयोग करने के लिए विश्व का सबसे बड़ा ग्रास रूट लेवल स्पोर्टस डेव्हलपमेन्टऔ प्रोग्राम की शुरूआत 6 अक्टूबर से की जा रही है। इसके अन्तर्गत 7 से 12 वर्ष के बच्चों को तीन अलग-अलग आयु समूह में ऐथलेटिक्स गतिविधियाँ सिखाई जायेंगी। इनमें दौड़, कूद और फेंक शामिल है। खेल विभाग के सहयोग से टी.टी.नगर स्टेडियम में इन्सट्रक्टर ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि अन्तर्राष्ट्रीय ऐथलेटिक्स महासंघ (आई.ए.ए.एफ.) का 'किड्स'' ऐथलेटिक्स प्रोग्राम विश्व का सबसे बड़ा ग्रासरूट लेवल प्रोग्राम है। संचालक, खेल एवं युवक कल्याण डॉ. शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि छोटे-छोटे बच्चों को आधारभूत स्तर की ऐथलेटिक्स गतिविधियों से रू-ब-रू करवाने के उद्देश्य से 'किड्स'' प्रोग्राम का प्रदेश में क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। जमीनी स्तर पर खेल विकास को गति देने के लिए इस प्रोग्राम को प्रदेश के सभी स्कूलों से जोड़ा जाएगा ताकि बच्चों को इस खेल के बारे में अधिक से अधिक जानने और सीखने का अवसर मिल सके। प्रोग्राम के पहले चरण में भोपाल के दस स्कूल का चयन कर उन स्कूल के खेल प्रशिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी। टी.टी. नगर स्टेडियम में 6 अक्टूबर को प्रात: 10 से शाम 5 बजे तक इन्सट्रक्टर ट्रेनिंग कोर्स का आयोजन होगा। 'किड्स'' ऐथलेटिक्स प्रोग्राम के राष्ट्रीय समन्वयक श्री अरूण केसरी तथा राज्य समन्वयक श्री अमित कुमार गौतम द्वारा ट्रेनिंग दी जायेगी।


आदिवासी छात्रावासों में बच्चों को पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करें
04 October 2013
भोपाल। मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की संयुक्त बेंच में आज आयोग की अध्यक्ष श्रीमति ऊषा चतुर्वेदी ने प्रकरणों की सुनवाई की। प्राप्त 18 प्रकरण पर सुनवाई करते हुए श्रीमती चतुर्वेदी ने कहा कि बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिये आयोग सजग प्रहरी की भूमिका का निर्वहन कर रहा है। आयोग द्वारा दिये गये निर्देशों को शासकीय कर्मी गंभीरता से लें। आयोग की संयुक्त बेंच में सदस्य श्रीमती विजया शुक्ला, सुश्री आर.एच. लता, श्रीमती रीता उपमन्यु, सुश्री रीना गुजराल और श्री विभांशु जोशी उपस्थित थे।
श्रीमती चतुर्वेदी ने समाचार-पत्र में प्रकाशित समाचार 'उमरिया जिले में आदिवासी छात्रों को आधा चम्मच नाश्ता' पर संज्ञान लेते हुए कहा कि कमजोर तबके के बच्चों को शासन की विभिन्न योजना द्वारा अच्छे रहन-सहन, खान-पान एवं शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है। श्रीमती चतुर्वेदी ने कहा कि छात्रावासों में निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन मिले। यदि मेन्यू नहीं हो तो पौष्टिक आहार के नाश्ते और भोजन का मेन्यू बनाया जाये और उसी के अनुसार उन्हें आहार प्रदान किया जाये। श्रीमती चतुर्वेदी ने कहा कि इस संबंध में संबंधित शासकीय विभागों के अधिकारी कार्यवाही सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों के संरक्षण संबंधी आयोग के निर्देशों के पालन के प्रति अधिकारी गंभीर रहें। आयोग ने बाल कल्याण समिति मुरैना के समक्ष निराश्रित लावारिस मूक-बघिर बालक वीरेश को प्रस्तुत करवाने के निर्देश दिये।
आयोग ने उज्जैन की श्रीमती अरूणेश्वरी गौतम से आया द्वारा बच्चे को प्रताड़ित करने की शिकायत के आधार पर आया से वस्तुस्थिति की जानकारी ली। शासकीय हाई स्कूल काजी केम्प का आयोग द्वारा निरीक्षण कर वास्तविकता का परीक्षण कर कार्यवाही की जायेगी।।


स्पेक्ट्रम के 4 छात्रों का चयन
27 Spt. 2013
भोपाल। एनसीईआरटी द्वारा आयोजित नेषनल टेलेंट सर्च एक्जाम परीक्षा के द्वितीय चरण में स्पेक्ट्रम के 4 छात्रों निहारिका षषिधर, सम्यक जैन, समर्थ कठल, प्रखर जैन ने सफलता प्राप्त कर संस्था का गौरवान्वित किया है। इस परीक्षा को पास करने के बाद छात्रों का स्नातक, यहां तक की जब तक पीएचडी कम्पलीट नहीं हो जाती तब तक एनसीईआरटी द्वारा स्काॅलरषिप उपलब्ध कराई जाऐगी। स्पेक्ट्रम के डायरेक्टर्स रितेष अग्रवाल, राजेष षर्मा, सुध्ाान्षु कुमार ने सफल छात्रों को हार्दिक शुभकामनाएं दी।


शिक्षा पंचायती राज संस्थाओ के ऐजेंडे मे पहली प्राथमिता हो-श्रीमति गुर्जर
28 Aug. 2013
मंदसौर। भारतीय शिक्षा के तहत सरकार की प्रमुख नीतियों के माध्यम से शिक्षा का विकेंद्रिकरण करते हुए शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ग्राम शिक्षा समितियां, पंचायत शिक्षा समितियां, और अब शाला प्रबंध समितियां, योजना-प्रबंध समितियां, का गठन किया जाता है फिर भी आज शिक्षा लक्ष्य बच्चों के लिए काफी सुलभ नहीं है, उक्त विचार श्रीमति रमादेवी गुर्जर ने विजय वर्धन संस्थान ग्वालियर द्वारा आयोजित ग्रामीण शिक्षा और प्रबंधन विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर लोकमान्य तिलक स्कुल मे उर्पिस्थजजनो को संबोधित करते हुए कहा की इस कार्यशाला के माध्यम से हम यह चाहते है कि हमारा भारत गाॅवों मे बसता है और गामीण क्षैत्र मे शिक्षा को कैसे बढ़ावा दिया जावे इस हेतु सर्व शिक्षा अभियान और सम्बंधित सेवाप्रदाता शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए पंचायती राज संस्थाओ की भुमिका और शाला प्रबंधन के लिए पंचायत ऐजेंडे मे ग्राम शिक्षा को सबसे पहले प्राथमिता दे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डाॅ.अनिल नकुम ने कहा की ग्रामीण स्तर पर किसी भी योजना को लागु करने, प्रबंधन करने, निगरानी करने जैसे कार्यो मे पंचायतो को महत्व पुर्ण भुमिका होगी तभी ग्रामीण शिक्षा मे सुधार होगा। इंजीनियर बीबी गुप्ता के कहा की ऐसे सेमिनार से समुदाय मे जनजाग्रती को बढ़ावा मिलता है। कार्यक्रम मे विशेष अतिथि म.प्र.जन अभियान परिशद् के ब्लाॅक समन्वयक राधाशरण पुरोहित कार्यषाला को सम्बोधित करते हुए कहा की शिक्षा विकेन्द्रकृत के लिए शाला प्रबंध समितियो के अधिकार और कर्तव्यो मे जागरूकता व सुधार की काफी हद तक गुंजाईश है। हम शिक्षा की गुणवता को बढ़ावा देने के लिए जन जागरूकता, सेमिनार करते रहेगे तभी सरकार की योजनाएं सफल होगी।
योजनाओ मे सभी का अपना अपना दायित्व होता है ग्रामीण शिक्षा और प्रबंधन मे पंचायत एवं समुदाय विशेष का अपना अपना महत्व होता है। विजय वर्धन संस्थान के सचिव सोमदत्त शर्मा ने प्रेस को जानकारी मे बताया की कार्यशाला का उद्वेश्य और उस पर अमल दौनो महत्वपुर्ण है। कार्यक्रम का संचालन आरपीस ग्रप के विधिक सलाहकार उमरावसिंह जैन एडवोकेट ने किया। संस्था की और से स्वागत उद्वबोधन कार्यक्रम समन्वयक राधेश्याम मारू ने देते हुए कार्यशाला का उद्वेश बताया। कार्यक्रम को सामजिक समरसता मंच के प्रांतिय उपाध्यक्ष अजीत भण्डारी, एबेनेजर स्कुल के डायरेक्टर प्रभात दिप, सामाजिक कार्यकता क्रांति परिवर्तन, व सुरेश तिवारी ने भी सम्बोधित किया इस अवसर पर स्वैच्छिक संस्थाओ, शाला विकास समितियो के सदस्य व अन्य प्रबुद्वगण उपस्थित थे।


म.प्र. सर्वशिक्षा अभियान मिशन की समितियों में सदस्यों का मनोनयन
28 Aug. 2013
भोपाल। मध्यप्रदेश सर्वशिक्षा अभियान मिशन की साधारण सभा के मनोनीत सदस्यों को मिशन की विभिन्न राज्य-स्तरीय समितियों में मनोनीत किया गया है। यह मनोनयन 2 वर्ष के लिये है। राज्य-स्तरीय कार्यक्रम समिति में श्रीमती नीता शर्मा ग्वालियर और इंदौर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ओमप्रकाश परसवदिया, श्री ओमप्रकाश जांगलवा उज्जैन, राज्य-स्तरीय निर्माण समिति में श्री राधेश्याम पाटीदार, विधायक सुवासरा जिला मंदसौर, अनुदान समिति श्री गिरिराज किशोर पोद्दार, विधायक मुड़ावरा जिला कटनी, श्री ब्रजमोहन आचार्य, खुजनेर जिला राजगढ़, श्रीमती लता वानखेड़े, सरपंच ग्राम पंचायत मकरोनिया जिला सागर और श्री ओमप्रकाश गुप्ता पिछोर जिला शिवपुरी को मनोनीत किया गया है।
राज्य-स्तरीय नियुक्ति समिति में श्री राकेश शर्मा विदिशा, श्री ओमप्रकाश गुप्ता पिछोर, श्री सुरजीत सिंह चौहान भोपाल और श्रीमती सम्पतिया उइके, जिला पंचायत अध्यक्ष मण्डला को मनोनीत किया गया है। राज्य-स्तरीय कम्युनिकेशन समिति में श्रीमती नीता शर्मा ग्वालियर, श्री पुरुषोत्तम जोशी भोपाल, श्री राजकुमार भावसार ग्वालियर और श्री ब्रजमोहन आचार्य खुजनेर, राज्य-स्तरीय वित्त समिति में श्री सुरजीत सिंह चौहान भोपाल, श्री ओमप्रकाश गुप्ता पिछोर, श्री राकेश शर्मा विदिशा और श्रीमती रमा पण्डया उज्जैन को मनोनीत किया गया है।
राज्य-स्तरीय क्रय समिति में श्री ओमप्रकाश गुप्ता पिछोर, श्रीमती लता वानखेड़े मकरोनिया जिला सागर, श्री राकेश शर्मा विदिशा और श्री सुरजीत सिंह चौहान भोपाल का मनोनयन किया गया है।


समन्वय भवन में सिटी के स्टूडेंट्स से रूबरू होकर उन्हें गाइड किया आनंद कुमार ने...
28 Aug. 2013
‘पढ़ाई में अव्वल होने के बावजूद आर्थिक तंगी के चलते कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ने का मौका हाथ से चला गया क्योंकि फुल स्काॅलरशिप वहाॅ पहंचने के बाद ही मिलने वाली थी। बस तभी से सोच लिया था, जो मेरे साथ हुआ उसे किसी और के साथ नहीं होने दूंगा। पापड़ बेचकर घर चलाया लेकिन क्लर्क की नौकरी नहीं की क्योंकि फिर उसी में उलझा रह जाता।’ यह कहना था आनंद कुमार का। वे मंगलवार को समन्वय भवन में आईईएस गु्रप आॅफ इंस्टीट्यूशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शहर के स्कूल स्टूडेंट्स से मुखातिब थे। उनका लेक्चर स्टूडेंट्स को कई मूल मंत्र दे गया। उन्होंने कहा, ‘कोचिंग के बिना आज आईआईटी तक की यात्रा मुश्किल है, लेकिन खुद भी पढ़ने की कोशिश करना चाहिए तभी दिमाग खुलता है।
एक सवाल का एक ही हल न तलाशो, बल्कि कई उत्तर हो सकते हैं उन पर भी काम करो। सुपर-30 में स्टूडेंट्स यही करते हैं। कई बार तो पूरी क्लास एक सवाल को हल करने में ही निकल जाती है, लेकिन सवाल का पीछा नहीं छोड़ते, भले ही हल निकालने में दस दिन लग जाएं। दरअसल, साइंस के विषयों के साथ समस्या यह है कि इन्हें इंटरेस्टिंग तरीके पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आईआईटी का पैटर्न फिर बदल सकता है क्योंकि सरकार के ऊपर काफी दवाब है, लेकिन तब तक बारहवीं पर बहुत ध्यान देकर पढ़ाई करें।
मेल करें जवाब मिलेगा...
mail@super30.org आईडी पर अपने सवालों के साथ-साथ विषय से संबंधित किसी सवाल को भी ई-मेल कर सकते हैं। दो से तीन दिन के भीतर जवाब भेज दूंगा।’
राज्यपाल ने किया सम्मान
इस मौके पर आईईएस ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशन द्वारा आनंद कुमार का सम्मान कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें राज्यपाल रामनरेश यादव ने उन्हें प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर सहित संस्थान के चेयरमैन बीएस यादव और ग्रुप डायरेक्टर सुनीता सिंह सहित ओएसडी फीस कमेटी सुनील कुमार और बड़ी संख्या में विभिन्न स्कूलों से आए स्टूडेंट्स उपस्थित रहे।
Q & A SESSION WITH ANAND KUMAR
स्कूल-कोचिंग के बीच बैलेंस कैसे बनाएं
-लावण्या बांगा, कार्मल काॅन्वेंट स्कूल और आईआईटी सिलेबस के बीच खाई है। इसलिए स्तरीय किताबें चुने। चाहे तो ई-मेल करके पुस्तकों की जानकारी ले सकती हैं। केमेस्ट्री के लिए एनसीई आरटी की बुक पढ़े। मैथ्स मुश्किल लगता है
-सृष्टि त्रिवेदी, महर्षि विधा मंदिर क्लासिकल म्यूजिक टीवी आते ही चैनल बदल देते हैं क्योकि समझ नहीं आता। मैथ्स भी तभी मुश्किल लगता, जब क्यों और कैसे हुआ यह पता न चले। बेसिक को समझ ले, सब आसान होगा। रिवीजन के लिए किस तरह की तैयारी करें
-उत्कर्ष वर्मा, जवाहर लाल नेहरू स्कूल कठिन सवालों पर स्टार रेटिंग करते जाएं। जो कम मुश्किल हो उस पर एक स्टार और कठिन पर स्टार बढ़ाते जाएं। आपको रिवीजन के वक्त पता रहेगा कि किन सवालों पर ज्यादा फोकस करना है।


यूआईडी नंबर बनेगा स्टूडेंट्स की पहचान
28 Aug. 2013
सेंट्रल बोर्ड आॅफ सेकंडरी एजुकेशन ;सीबीएसई ने नए सेशन से स्कूल लेवल पर आयोजित होने वाले काॅम्पिटीशन में भी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आॅनलाइन कर दिया है। बोर्ड ने तय किया है कि अब स्पोट्र्स में भाग लेने वाले स्टूडेंट्स के लिए आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा जिससे उन्हें यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर मिल सके। पहले स्कूल को रजिस्ट्रेशन कराना होगा उसके बाद स्टूडेंन्ट्स आनलाइन रजिस्टर करेंगे। इस प्रक्रिया के तहत न केवल स्टूडेंट्स को फायदा मिलेगा बल्कि स्कूल प्रबंधन के लिए रजिस्ट्रेशन की राह काफी आसान हो जाएगी।
रजिस्ट्रेशन के बाद ये स्टूडेट्स किसी भी खेल में भाग ले सकते हैं। खास बात ये है कि ये रजिस्ट्रेशन तब तक मान्य रहेगा, जब स्टूडेंट सीबीएसई से संबद्ध किसी भी स्कूल में पढ़ता होगा। किसी कारणवश अगर उसे अपना स्कूल बदलना पड़ता है तो दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी।
सीबीएसई ने इन सभी के बारे में जानकारी देने के लिए अलग से अपना नया पेज बनाया है। यहीं पर सभी खिलाडि़यों की डिटेल अपलोड की जाएंगी। ये रजिस्ट्रेशन बोर्ड स्तर पर होगा।सीबीएसई ने स्कूल लेवल पर होने वाले खेल काॅम्पिटीशंस के लिए रजिस्टेशन प्रक्र्रिया को आॅनलाइन कर दिया है। स्टूडेंट्स को मिलेगा यूआईडी नंबर।
ऐसे मिलेगा यूआईडी नंबरछात्र का रजिस्ट्रेशन भी स्पोट्र्स के लिंक पर ही होगा। यहां पर छात्र की एक नई फोटो भी अपलोड करनी होगी। रजिस्ट्रेशन के बाद छात्र के लिए बोर्ड की परफ से एक यूआईडी ;यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर जारी किया जाएगा। इसके आधार पर वह अपने मरचाहे खेल में आसानी के साथ भाग ले सकते हैं।


प्रदेश के बेटे ने रच डाला इतिहास, ऑल इंडिया टॉपर बनकर किया नाम रोशन
भोपाल. 29 May 2013
जबलपुर। जितना भी पढ़ो, पूरे मन से पढ़ो। फिर कोई वजह नहीं है कि आपको मनचाही मंजिल न मिले। अच्छे अंक स्कोर करने का यही एक मात्र मंत्र मानते हैं ऑल इंडिया टॉपर सोपान खोसला। सिटी भास्कर से हुई चर्चा में उन्होंने अपने सपने, मेहनत और मंजिल से जुड़ी बहुत सी बातें साझा कीं।
उम्मीद से बेहतर रहा रिजल्ट मैंने तो सिर्फ अच्छे अंकों के लिए मेहनत की थी, ऑल इंडिया टॉप करूंगा ऐसा सोचा भी नहीं था। उमीद से बेहतर रहा है रिजल्ट। सोपान के पिता आईटीबीपी में कमाण्डेंट हैं।
तो रिकॉर्ड ब्रेक हो जाता सोपान ने बताया कि उन्हें हमेशा से ही जैल पेन यूज़ करने की आदत रही है, जबकि बोर्ड एग्जाम में जैल पेन की सख्त मनाही रहती है। चूंकि प्रैक्टिस जैल पेन से की थी और पेपर बॉल पेन से देना पड़ा इसीलिए इंग्लिश के फर्स्ट पेपर में वो स्पीड नहीं आ पाई। मैथ्स, फिजिस, केमेस्ट्री और कप्यूटर साइंस में 100 में से 100 अंक पाने वाले सोपान को इंग्लिश में 95 अंक प्राप्त हुए हैं। महज़ पांच अंकों से चूके सोपान अगर इंग्लिश में पूरे नंबर पा जाते तो शत-प्रतिशत अंकों वाला रिकॉर्ड ब्रेक हो जाता।
रोज़ पढऩा ज्यादा बेहतर है एग्ज़ाम टाइम में रात-रात भर जागकर पढ़ाई करने से बेहतर है कि रोज़ थोड़ा-थोड़ा पढ़ाई की जाए। अच्छे मार्स के लिए मैंने कोई एस्ट्रा स्ट्रेटजी प्लान नहीं की थी, बल्कि स्कूल और कोचिंग में पढ़ाई गई चीजों को घर आकर दोहराता था। पांच घंटे रोज़ पढ़ता था।
खेल से किया तनाव दूर :पढ़ाई करते हुए जब थक जाता था, तो बैडमिंटन और क्रिकेट खेलकर अपना स्ट्रेस रिलीव करता था। माइंड फ्रेश करने के लिए स्पोटर्स सबसे कारगर तरीका है, मैं भी अपने आपको वैसे ही चार्जअप करता हूं।
अब आईआईटी की तैयारी
एमपीपीईटी की वरीयता सूची में दसवां स्थान प्राप्त करने वाले सोपान अब आईआईटी की तैयारी में जी जान से जुटे हैं। वैसे जेईई मेन में उन्होंने 360 में से 312 अंक प्राप्त किए हैं। आगामी दिनों में होने वाली जेईई एडवांस में भी अच्छा स्कोर हासिल करने की पूरी उम्मीद है।
सोपान खोसला
मार्क्स- 99%
स्ट्रीम- मैथ्स साइंस
पेरेंट्स- रीता, संदीप खोसला
स्कूल- डीपीएस मंडला रोड


CBSE 12th का रिजल्ट घोषित
भोपाल. 29 May 2013
भोपाल। सीबीएसई स्कूलों के कक्षा 12वीं का रिजल्ट आज सुबह घोषित कर दिए गए है। बोर्ड की वेबसाइट पर छात्र अपना रिजल्ट देख सकते हैं। मार्च में हुई 12वीं की परीक्षा में 10 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हुए थे। इस परीक्षा में 80 प्रतिशत छात्रों ने सफलता हासिल की है। इस बार परीक्षा में 87.8 प्रतिशत लड़कियों को कामयाबी हासिल हुई है।
भोपाल के तीन बच्चों ने टॉप किया। नंदिता मसंद ने कॉमर्स संकाय से 97.2 अंक अर्जित किए। इसी संकाय से ऋषभ गुप्ता ने भी 97.2 अंक हासिल किए। कॉर्मल कान्वेंट की एक छात्रा ने भी टॉप किया। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एम.एल. चौहान ने बताया कि बोर्ड के अजमेर रीजन के तहत मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान और दादर नागर हवेली क्षेत्र में 1129 स्कूल हैं। 12वीं क्लास एग्जाम में रीजन के 1,01,738 स्टूडेंट्स शामिल हुए हैं। इनमें करीब 94,279 नियमित और 7,459 प्राइवेट हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है कि सीबीएसई बोर्ड 10 वीं क्लास का रिजल्ट बाद में घोषित कर रहा है।
रिजल्ट देखने के लिए यहां click करें ...
http://cbseresults.nic.in/class12/cbse122013.htm


माशिमं की कक्षा 10 वीं में देवास की छात्रा हर्षा अव्वल
भोपाल. 5 June 2012
माशिमं की कक्षा 10 वीं में देवास की छात्रा हर्षा अव्वल
भोपाल। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने सोमवार को दो घंटे की देरी से कक्षा 10 वीं की बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया. देवास की छात्रा हर्षा मित्तल ने 97.8 % अंक हासिल कर मेरिट में प्रथम स्थान प्राप्त किया. जबकि रतलाम की छात्रा झलक काकानी दूसरे व जबलपुर की छात्रा मनीषा पासी तीसरे स्थान पर रही. नियमित परीक्षार्थियों का रिजल्ट 53.90 फीसदी रहा। इस दफा छात्राएं पीछे रह गई और छात्र निकल आगे गए। 54.04 प्रतिशत नियमित छात्र और 53.72 प्रतिशत नियमित छात्राएं परीक्षा में पास हुई। वहीं 21.79 प्रतिशत स्वाध्यायी परीक्षार्थी पास हुए। मैरिट लिस्ट से भोपाल, इंदौर और ग्वालियर के विद्यार्थी गायब हैं। परीक्षा में लगभग साढ़े नौ लाख विद्यार्थी शामिल हुए थे। हाईस्कूल परीक्षा परिणाम में निजी स्कूलों ने सरकारी स्कूलों को पछाड़ दिया। सरकारी स्कूलों का परीक्षाफल 50.82 प्रतिशत और निजी स्कूलों का 57.71 प्रतिशत रहा। इसी तरह प्रावीण्य सूची में भी निजी स्कूलों के विद्यार्थियों का दबदबा रहा। हालांकि स्कूल शिक्षा विभाग लगातार शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने के दावे करता है।
परीक्षा में व्यक्तिगत नकल प्रकरणों की संख्या 2009 रही। सामूहिक नकल के 3402 मामले रहे। मंडल ने 374 परीक्षार्थियों की परीक्षा पात्रता न होने के कारण निरस्त की। गौरतलब है कि मंडल ने करीब 20 हजार परीक्षार्थियों के परीक्षा परिणाम रोके हैं। इस मामले में स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनीस ने कहा कि पात्रता की जांच की वजह से परिणाम रोके गए थे। अगर इन परिणामों में कोई कमी नहीं पाई गई तो परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। गौरतलब है कि ऎसी संस्थाओं के परीक्षा परिणाम रोके गए थे जहां 500 से ज्यादा विद्यार्थी शामिल हुए थे।
दो घंटे देरी से आया रिजल्ट
स्कूल शिक्षा मंत्री के निर्धारित समय पर नही आने के कारण प्रदेश के लाखों छात्रों और उनके अविभावकों को करीब दो घंटे तक परेशन होना पड़ा. वहीं शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस की देरी से नाराज़ मीडिया ने पत्रकारवार्ता का बहिष्कार कर दिया.
प्रदेश की मेरिट लिस्ट

विद्यार्थी का नाम जिला स्थान
हर्षा मित्तल देवास पहला
झलक काकानी रतलाम दूसरा
मनीषा पासी जबलपुर तीसरा
स्नेहा अग्रवाल बैतूल चौथा
सुमित बारस्कर बैतूल चौथा
पारस गुप्ता दतिया पांचवां
शिवानी सिंह जबलपुर पांचवां
साकेत पटेल मंडला पांचवां
शिवाशीष दुबे दतिया छठवां
विकास मिश्र सतना छठवां
अनिकेत सिंह रीवा सातवां
रुपाली श्रीवास्तव विदिशा सातवां
मृत्युंजय त्रिपाठी सतना आठवां
रोहित दांगी दतिया नौवां
प्रियंका मौर्य सतना नौवां
ऋषिराज ताम्रकार दतिया दसवां
शिखा जायसवाल शहडोल दसवां
अभय जोशी देवास दसवां
पूजा लोधी विदिशा दसवां
आशुतोष मिश्रा कटनी दसवां


 
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